Lok Sabha Debates
Discussion On The Demand For Grant No. 82 Under The Control Of The Ministry Of ... on 11 July, 2019
Seventeenth Loksabha > Title: Discussion on the Demand for Grant no. 82 under the control of the Ministry of Railways (Cut motions were moved) .Discussions not concluded.
माननीय अध्यक्ष : अधीर रंजन जी, एक मिनट ।
अब सभा रेल मंत्रालय से संबंधित अनुदान की मांग संख्या 82 को चर्चा तथा मतदान के लिए लिया जाएगा । सभा में उपस्थित जिन माननीय सदस्यों के रेल मंत्रालय से संबंधित अनुदान की मांग पर कटौती प्रस्ताव पारिचालित किए गए हैं, यदि वे अपने कटौती प्रस्ताव प्रस्तुत करना चाहते हैं तो 15 मिनट के भीतर सभा पटल पर पर्चियाँ भेज दें,जिसमें उन कटौती प्रस्तावों की संख्याएं लिखी हों, जिन्हें वे प्रस्तुत करना चाहते हैं ।
इसी प्रकार प्रस्तुत किए गए कटौती प्रस्ताव की क्रम संख्याओं को दर्शाने वाली सूची कुछ समय पश्चात् सूचना पट्ट पर लगा दी जाएगी । यदि सदस्यों को उस सूची में कोई विसंगति मिले तो वह इसकी सूचना तत्काल सभा पटल पर मौजूद अधिकारी को दें ।
“कि अनुदानों की मांगों की सूची के स्तम्भ 2 में रेल मंत्रालय से संबंधित मांग संख्या 82 के सामने दर्शाये गए मांग शीर्ष के संबंध में 31 मार्च, 2020 को समाप्त होने वाले वर्ष में संदाय के दौरान होने वाले खर्चों की अदायगी करने हेतु अनुदानों की मांगों की सूची के स्तम्भ 4 में दर्शाई गई राजस्व लेखा तथा पूंजी लेखा संबंधी राशियों से अनधिक संबंधित राशियां भारत की संचित निधि में से राष्ट्रपति को दी जाएं ।” …(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : श्री अधीर रंजन चौधरी जी की ही बात रिकॉर्ड होगी ।
…(व्यवधान) * माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्य, प्लीज । माननीय सदस्य बैठे-बैठे मत बोलिए ।
…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : मैंने अधीर रंजन चौधरी जी को आज्ञा दी है, आपको आज्ञा नहीं दी है । प्लीज बैठ जाइए । माननीय सदस्य, प्लीज बैठ जाइए ।
SHRI ADHIR RANJAN CHOWDHURY (BAHARAMPUR): Sir, I rise to dwell on the Demands for Grants for 2019-20 under the control of the Ministry of Railways.
सर, हिन्दुस्तान की रेल हम सब के लिए बड़े गर्व का एक प्रतिष्ठान है । पिछले तीन सालों से रेल और जनरल बजट को कम्बाइन्ड तरीके से पेश किया जा रहा है । इसमें मुझे कभी-कभी यह महसूस होता है- the scene and glamour which was visible in the Railway Budget has been lost because insofar as Railways is concerned, we used to get a little nostalgic.
क्योंकि रेलवे के साथ हमारा सम्पर्क आज से नहीं है, बल्कि आजादी से पहले वर्ष 1832 से रेल के साथ हमारा सम्पर्क जुड़ा हुआ है । Sir, Indian Railways has multi-gauge, multi-traction system covering 67,368 km of route lane as on March, 2017. Out of 67,368 km, 22,021 km has double and multiple tracks, 25,367 km route lane is electrified i.e. 38 per cent. India’s track density at 45.74 per sq.km is comparable to the track density in the United States but much lower than that of Germany, Russia, China and Canada.
Railways runs about 13,300 passenger trains and 9,200 freight trains covering around 7,200 stations daily. These trains carry 23 million passengers and around 3 million tonnes of freight every day. Each kilometre of track caters to 19,133 people in India. इस संदर्भ में मैं यह कहना चाहता हूँ ।
माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्य अधीर रंजन जी, आप एक मिनट बैठिए ।
माननीय सदस्यगण, अब मैं नाम लेकर पुकारूँगा । माननीय सदस्य बोल रहे हैं और माननीय वरिष्ठ सदस्य उनके सामने से क्रॉस कर रहे हैं । जब एक बार इस संबंध में व्यवस्था दे दी गई है तो हम सभी माननीय सदस्य उसकी अनुपालना करें । अगर अब किसी माननीय सदस्य ने बोलने वाले वक्ता को क्रॉस किया तो मैं उनका नाम लेकर सदन में पुकारूँगा ।
माननीय अधीर रंजन जी,अब आप बोलिए ।
श्री अधीर रंजनचौधरी: महोदय, मैं कह रहा था कि सालाना हिन्दुस्तान की ट्रेन में हमारे देश के जितने लोग सफर करते हैं, अगर उन्हें जोड़ा जाए तो सारी दुनिया में जितनी आबादी है,यह संख्या उससे लगभग ज्यादा होगी । मेरे कहने का मतलब यह है कि जितनी सारी दुनिया की आबादी है, उससे ज्यादा पैसेंजर्स हर साल हमारी रेल में सफर करते हैं ।…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्य, अब्दुल जी, सदन चल रहा है । आप खड़े-खड़े 1 सेकेंड बात कर लें, आप लगातार खड़े होकर बात कर रहे हैं । निशिकांत दुबे जी,आप वरिष्ठ सदस्य हैं । आप गैलरी में आकर बात न किया करें । सभी माननीय सदस्य मेरे लिए समान हैं ।
श्री अधीर रंजनचौधरी:महोदय, एकदम ठीक बात है ।
माननीय अध्यक्ष : अगर कोई माननीय वरिष्ठ मंत्री भी इस तरह से करेंगे, तो हम उनको भी आग्रहपूर्वक कहेंगे ।
SHRI ADHIR RANJAN CHOWDHURY : Sir, there is no denying the fact that Indian Railways still has been suffering from capacity constraints which was also often alluded to by our hon. Railways Minister inside the House. We would not disagree with it that the traffic flow on the rail network is highly uneven and imbalanced. For example, passenger trains utilise 65 per cent of the network capacity but contribute to less than 30 per cent of the revenue. The Golden Quadrilateral and Diagonals connecting the four major metros together constitute 16 per cent of the network but account for around 50 per cent of the freight and passenger traffic.
Line capacity is severely constrained due to introduction of more trains over the year. Since Independence, while railways’ Route Kilometres have increased by 23 per cent, freight loading has increased by 1,344 per cent and passenger travel in terms of kilometres has increased by 1,642 per cent. Capacity constraints and oversaturation in the network also affect railway’s ability to meet customer expectation. For example, speeds of freight trains have continued to remain between 25 to 30 kmph over the last three decades. Indian Railways also does not operate heavy haul freight trains on the network as the network is common to both freight and passenger trains.
Indian trains carry a maximum gross load of 5400 tonnes as compared to 20,000 to 37,000 tonnes carried by trains in China, South Africa, Brazil and Australia.
सर, हमारा जो रेलवे नेटवर्क है, वह सारे दुनिया में हमें चतुर्थ स्थान पर देखने को मिलता है । हमारी कैपेसिटी कन्स्ट्रैन्ट है, इसलिए यूपीए के जमाने में डेडिकेटेट फ्रेट कॉरिडोर की भावना हुई थी । हमारी कैपेसिटी कन्स्ट्रैन्ट है, इसलिए सारे ब्रॉडगेज को पहले दौर में इलेक्ट्रिफिकेशन करने की कवायद हमने शुरू की ।
सर, हमने जो किया है, उसे तो कहना ही पड़ेगा, लेकिन बातों-बातों में सपने दिखाना हमें पसंद नहीं और हम नहीं चाहते हैं कि हमारी सरकार बात-बात में हिन्दुस्तान के आम नागरिकों को सपने दिखाए । इस सरकार की रवैया बदल चुकी है । सरकार कह रही है कि रेलवे को बचाने के लिए पीपीपी मॉडल होना चाहिए, प्राइवेटाइजे़शन करना चाहिए । निजीकरण और निगमीकरण,इन दोनों मुद्दों को सामने रखकर आप रेलवे को बचाना चाहते हैं । हमारे रेल मंत्री जी बड़े दिलवाले हैं,वह कह रहे हैं कि हम 50 लाख करोड़ रुपये खर्च करेंगे । यह अच्छा है और अगर हथिया बरसेगी तो अलग बात है । आज जो रेल की स्थिति है, अगर ऐसी बात कही जाए कि हम 50 लाख करोड़ रुपये मोबिलाइज़ करेंगे, तो मुझे लगता है,जैसे कोई कहे कि रात में सोने की चटाई नहीं है और तंबू की फ़रमाइश हो रही है, आपकी बातों से मुझे वैसा ही लगता है । मैं भरोसा रखता हूं कि आप जरूर इसमें कामयाब हो,लेकिन cut your coat according to your cloth.
गोयल साहब,आपके पूर्व प्रभु जी रेल मंत्री थे । प्रभु जी से पहले सदानंद गौडा साहब थे । सदानंद गौडा साहब के बाद सुरेश प्रभु जी आए थे । सुरेश प्रभु जी ने जब बजट रखा,तब उन्होंने 65 हजार करोड़ रुपये के आसपास अपना एक्सपेंडीचर दिखाया था । सुरेश प्रभु जी ने आकर कहा कि हम 8.5 लाख करोड़ रुपये खर्च करेंगे । अभी सुरेश प्रभु जी नहीं हैं, आप हैं, आप दोनों मुम्बई वाले हैं । आप बताइए कि सुरेश प्रभु जी ने जो 8.5 लाख करोड़ रुपये खर्च करने का वादा किया था और जो खर्चा किया, उसका नतीज़ा क्या निकला?इसके साथ-साथ आपने और 50 लाख करोड़ रुपये लगा दिए । इसे कहते हैं कि शायद आपके ऊपर हथिया बरस रही होगी । आप इतना पैसा कहां से लाइएगा?इस बजट में इसका कोई प्रावधान नहीं है । आपको इसमें भरोसा है कि हम सारी चीजें बेच देंगे, सारी चीजों को बेचकर हम पैसा कमाएंगे और उसके चलते हम काम करेंगे ।
आपका रवैया साफ है कि सारी चीजों को बेच दो, प्राइवेटाइजेशन कर दो, निजीकरण और निगमीकरण करो । आप कहेंगे कि आपकी सरकार ने भी इसे किया था । हमने जरूर ऐसा सोचा था । आपको जानकारी होगी कि हमारी सरकार ने कमेटी बनाई थी,पित्रोदा कमेटी बनाई थी, केलकर कमेटी बनाई थी,रेल की सेफ्टी व सिक्योरिटी तथा रेल के नेटवर्क के लिए कमेटी बनाई थी, तब हमने यह प्रोग्राम बनाने की कोशिश की थी । आप उसी को उधार में लेकर चल रहे हैं । हमने एक लाख करोड़ रुपये खर्च करने का वादा किया था, जो हर साल 20 हजार करोड़ रुपये था । आप वह भी खर्च नहीं कर पा रहे हैं । आपकी पूरी तरह से माली हालत है । आप कहते हैं कि हम रेल को प्राइवेटाइज करेंगे । वर्ष 2014 में आप और हम सभी के आदरणीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने खुद वाराणसी में खड़े होकर कहा था कि जो भी होना चाहिए,होने दो, लेकिन रेलवे को कभी प्राइवेटाइज नहीं किया जाएगा । यह मैं नहीं,बल्कि आदरणीय प्रधान मंत्री जी का वादा है और यह उन्होंने पुण्य तीर्थ वाराणसी में कहा था । कम से कम आप उनके वादे पर तो काम कीजिए,नहीं तो आपकी भी छुट्टी हो सकती है, क्योंकि रेलवे बड़ा म्यूजिकल चेयर की तरह है,कभी कोई रहेगा या नहीं रहेगा,यह पता नहीं ।
सर, मैं दो-तीन मुद्दें उठाना चाहता हूं । अगर हम रेलवे की एफिसिएंसी को देखें तो इसे देखने के लिए हमें कोई पैरामीटर भी ढूंढना पड़ेगा ।
इसका एक पैरामीटर आपरेटिंग रेश्यो है । आप बताइए कि हमारा आपरेटिंग रेश्यो जहां अब है, क्या यह सस्टेनेबल है, क्या यह रेम्युनरेटिव है? आपका बजट यह स्पष्ट दर्शाता है कि हमारा आपरेटिंग रेश्यो सस्टेनेबल नहीं है । आपके जमाने में, वर्ष 2017-18 में आपरेशनल रेश्यो 98.4 पर्सेंट पर चला गया । मतलब 100 रुपये कमाने के लिए आपको 98.40 रुपये खर्च करने पड़ते हैं । गोयल साहब, आप चार्टेड एकाउंटेंट हैं । आप खुद बताइए । उसके बाद वर्ष 2018-19 में 96.2 पर्सेंट रिवाइज्ड किया । मतलब 2017-18 के एक्चुअल्स में 98.4 पर्सेंट था,बजट एस्टीमेट में 92.8 पर्सेंट था । आप कामयाब नहीं हो पाए । रिवाइज्ड एस्टीमेट में यह 96.2 पर्सेंट आ गया । यह आपका दिया हुआ ब्यौरा मैं पेश कर रहा हूं । आप कह रहे हैं कि हम फिर इसे 92 पर्सेंट पर लाएंगे । इसका भरोसा क्या है,कहां भरोसा करें?जब कभी आपने टार्गेट फिक्स किए हैं, आप उनको फुलफिल नहीं कर पाए ।
टोटल इंटरनल रेवेन्यू में देखिए, आपने वर्ष 2018-19 में बजट एस्टीमेट 2,01,090 करोड़ किया था, जबकि आपके रिवाइज्ड एस्टीमेट में 1,97,214 करोड़ हो गया । इसका मतलब वहां भी घाटा हुआ है । आप एक्सपेंडीचर साइड में नेट सरप्लस को देखिए । जहां बजट में 12,999 करोड़ थे, वह रिवाइज्ड में 6,014 करोड़ आ गया, मतलब 54 पर्सेंट निगेटिव आ गए । इस तरह की हालत आपने रेल की बना कर रखी है,लेकिन सपना दिखाना आप नहीं छोड़ते हैं । अच्छा है,सपना दिखाइए । हम लोग चाहते हैं कि सपने को जमीनी हकीकत में तब्दील करने की जरूरत है ।
मैं रेल की नाकामी के दो-तीन मुद्दे उठा रहा हूं । रेल को पैसे की जरूरत है, यह सब जानते हैं । Over the years, Railways has been in need of massive funds for developing its core operational sector. “Highest-ever funding of Rs. 1.5 lakh crore for Railways – MoU signed with LIC. A big step forward to make Indian economy more robust: Suresh Prabhu, announced the Government on March 11, 2015.” गोयल साहब,आपने लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के साथ एमओयू साइन किया था । The next information we found was on October 27, 2015, wherein the Railway Minister acknowledged receiving one instalment from LIC of Rs. 2,000 crore. No further information is available on any further instalments released by LIC till March 2018. I do not know whether any information is available with you.
As per, another Press Release from the Railway Ministry, “The Ministry of Finance has approved Government guarantee of Rs. 5,000 crore in the current financial year for Indian Railway Finance Corporation bonds to be subscribed by LIC”. Even if we consider that this amount has been released to IRFC, still the net assistance till February 2019 is only Rs. 7,000 crore. Where is the rest of Rs. 1.5 lakh crore promised in the March 2015 headline?
आप फॉरेन कोलैबरेशन की बात करते हैं, वहां भी देखिए । Several foreign MoUs have been signed, but we are yet to see any impact on Railways, except one rake of Telgo coaches being test run in some sectors. During Modi-ji’s visit to France in April 2015, a protocol was signed to seek cooperation for semi-high-speed rail and station renovation. There has been no further news on this. Again, during Modi ji’s trip to China in May 2015, an MoU was signed for specific cooperative initiatives within the financial year 2015-16. There was no action. The latest one is a Memorandum of Cooperation, signed with Russia in October, 2018. Other than development of Multi-Modal Terminals, higher education for Railways’ employees was also mentioned in the MoC. The Government release said that this MoC was to carry forward the activities taken up under MoU signed between the two countries in December, 2015.
From Memorandum of Understanding to Memorandum of Cooperation, the Modi Government took almost three years. There is no news of any execution on this. यह सरकार एमओयू की सरकार बन गई है और आम लोगों को सपने दिखाती है कि हमको वोट दो, बहुमत दो,तुम्हारी जिन्दगी के सारे मकसद पूरा कर देंगे । आप क्यों सात प्रोडक्शन यूनिट्स को प्राइवेटाइजेशन और कारपोरेशन बनाने जा रहे हैं? उसमें रायबरेली मॉर्डन रेल कोच फैक्टरी और चितरंजन लोकोमोटिव है । ये सातों प्रोडक्शन यूनिट्स प्रोफिट अर्निंग हैं । प्रोफिट अर्निंग्स यूनिट को आप क्यों इस तरीके से फास्ट कॉरपोराइजेशन कर रहे हैं । जिस दिन से रेलवे और जनरल बजट को कम्बाइन्ड किया गया है,उसी दिन दिन से प्राइवेटाइजेशन का रास्ता शुरू हुआ । कॉरपोराइजेशन के बाद आप प्राइवेटजाइजेशन करेंगे । अभी आप मीठी-मीठी बातें करते हैं कि किसी की नौकरी नहीं जाएगी, आप बेफिक्र रहो, यह मोदी जी की सरकार है । लेकिन आप पर कौन भरोसा करेगा,कोई गारंटी है,कोई मैकेनिज्म है? आम लोगों में खलबली मच गई है, जो वर्कर्स हैं, उसके अंदर खलबली मच गई । आप कहेंगे कि हमारी सरकार ने तय किया था, हमारी सरकार का स्ट्रेटेजिक व्यू पाइंट था । आप खुल्लेआम और घड़ल्ले से सारी संपत्ति को बेचने की कोशिश कर रहे हैं । फर्क किससे है, मेरा स्ट्रेटेजिक परस्पेक्टिव है,आपका कुछ नहीं है । आपका सिर्फ बेचना परस्पेकिटव है । सिविल एविएशन मिनिस्टर कह रहे थे, हम एयर इंडिया बेच देंगे ।… * हम लोग कहां जाएंगे? …(व्यवधान) वे अच्छी-अच्छी बात करते हैं । सेवन प्रोडक्शन यूनिट्स को इंडियन रेलवे रॉलिंग स्टॉक में बदल देंगे,यह सुनने में अच्छा लगता है । लेकिन किस पर भरोसा करें? वर्ष 2014 में हिन्दुस्तान के प्रधान मंत्री बनारस जाकर कहते हैं कि रेलवे कभी प्राइवेटाइज नहीं होगा और बजट में दिखाते हैं कि पब्लिक प्राइवेट पाटर्नशिप डिसइन्वेस्टमेंट और कॉरपोरेशन करने जा रहे है तो आपके ऊपर कौन भरोसा रखेगा? आप खुद बताइए । The profitability of Railways decreased by 7.8 per cent. Indian Railways reported the worst ever operating ratio of 98.4 per cent in 2017-18. I have already mentioned it. In reply to an RTI query in 2018, the Ministry of Railways said that while 3,591 trains were cancelled during 2014-15, the number was up six times during during 2017-18, that is, 21,053. These figures support what Minister of State for Railways Shri Rajen Gohain told Parliament that while Railways carried 8.317 billion passengers in 2013-14, the number came down to 8.116 billion in 2016-17. Also, some 30 trains were running late in 2017-18.
Track renewal is the most vital part of railway safety. In reply to an RTI query in February 2019, it was said that only in 2017-18 did the Railways cross the track renewal figure that the UPA-II had achieved in its first year of 2009-10. Indian Railways have a network of more than 1.17 lakh kilometres; some of it is aged and some over-burdened. Only 4,000 kilometres of track, that is 3.5 per cent of the total rail lines has been renewed.
As for electrification, the first three years of the Modi Government were wasted. In 2017-18, only 4,087 kilometres of railway tracks were electrified. These are the achievements of the Government during the tenure that is called Modi-I and Modi-II. Now, they have forgotten to call themselves the NDA. Now everything is to be named after Modi ji, like Modi-I, Modi-II, and lastly, Modi-0.
मैं दो-तीन कम्परेटिव स्टेटमेंट गोयल साहब को समझाना चाहता हूं । गोयल साहब जानते हैं,लेकिन नहीं बोलेंगे । अब ट्रैक रिनुअल की बात पर आते हैं गोयल जी । यूपीए-2में हमने वर्ष 2009-2014 में, ट्रैक रिनुअल 3357 किलोमीटर प्रति वर्ष किए । वर्ष 2014-2018 तक आपने 3027 किलोमीटर प्रति वर्ष किए हैं । आप हम लोगों को छू भी नहीं पाए । As of April, 2013, 35.98 per cent, that is 23,541 km. out of 65,436 km. of track was electrified. As of December, 2018, 44.85 per cent, that is 30,212 km. of track was electrified.
आपने यह फैसला किया है कि वर्ष 2020 तक सारी इलैक्ट्रिफिकेशन करवा देंगे, अच्छा है, आप करवाओ । लेकिन आप जो कहते हैं,आपके सब मैम्बर्स कहते हैं कि कांग्रेस के 50 सालों में कुछ नहीं हुआ,आपके पांच सालों में बहुत कुछ हो गया । मैं कहना चाहता हूं कि अगर हमने इलैक्ट्रिफिकेशन नहीं किया होता,हमने ट्रैक नहीं बिछाया होता तो आप कैसे अब रेल में चढ़ते हैं?आप कैसे अब बुलेट ट्रेन का सपना देखते हैं? आप कैसे इलैक्ट्रिफिकेशन का सपना देखते हैं? इस तरह की सारी बातों पर अपनी सराहना और प्रचार करने को ढिंढोरा पीटना कहते हैं, यह अजीब लगता है ।
आपको पहले भी कहा है, स्टैडी इन्क्रीज 3591, ट्रेन कैंसल बर्थ हैं । अब मैं मेनिफेस्टो पर आता हूं, Railways have performed poorly under the BJP Government. You had said that the freight corridors and the attendant industrial corridors will be expedited. आपने मेनिफेस्टो में कहा था कि फ्रेट कोरिडोर और अटैंडेट इंडस्ट्रियल कोरिडोर एक्सपीडाइट करेंगे । The Railways, under BJP, have failed several times to meet the deadline of constructing 334 km. of dedicated freight corridor along trunk routes and have set April, 2020 as the new target. The Scheme was originally started by the INC. क्या आप आईएनसी का मतलब जानते हैं, इसका इंडियन नेशनल कांग्रेस । The BJP has rebranded it and is selling it as their brainchild. यही तो आपका करिश्मा है, हम सब करेंगे,आप कहेंगे कि आपने किया है जबकि हमने सारी चीजें बढ़ाई हैं । उस दिन कोई कह रहा था कि कांग्रेस ने कुछ नहीं किया, जिन्होंने कहा,वह यशवंत सिन्हा जी के बेटे जयंत सिन्हा जी हैं । मैं उनको पूछता हूं कि अगर कांग्रेस न होती तो आप अमेरिका जाकर कैसे एजुकेटिड बनते, यह जरा हाउस में बताना?
Under the Diamond Quadrilateral Project of high-speed train network, जिसे बुलेट ट्रेन कहते हैं, proposed high-speed projects between Delhi-Chandigarh, Delhi-Bhopal, Delhi-Kolkata, and Delhi-Mumbai are yet to take off.
The Vande Bharat Express has the capacity to run at 160 km. per hour but is running at the maximum speed of 110-130 km. per hour. Due to absence of high-speed track, the upgradation project has been stuck despite completion of all survey and project reports. आप खुद यह जानते हैं ।
आपने वादा किया था कि एग्रीकल्चर रेलवे नैटवर्क बनाएंगे । चुनाव था, बोलना पड़ा, बोल दिया, लेकिन अब क्या करेंगे? अभी तो फंस गए हैं । Among the top 21 commodities moved by rail and road, fruits and vegetables have the lowest share of transportation via railways; 1.9 per cent of perishable fruits and vegetables are transported through rail and 97.4 per cent by road. 97.4 परसेंट बाए रोड जाता है, इसका मतलब कि मॉडल शेयर यानी जो रोड के साथ रेल का शेयर है किस तरह से दिन प्रति दिन घटता जा रहा है । मॉडल शेयर में रेलवे फेल है इसका मतलब है कि आपकी एफिशिएंसी नहीं है । आपको तो बढ़ानी चाहिए थी, हम तो कुछ नहीं कर पाए, लेकिन फिर भी हमारे जमाने में 89 परसेंट रेलवे में शेयर था । हां,हम चाहते हैं कि रेलवे का शेयर कम हो, रोड का शेयर बढ़े, लेकिन फिर भी एक संतुलन तो होना चाहिए । क्यों लोग रोड पर चले जाते हैं?आपका शेयर घटता जा रहा है ।
क्या यह आपकी नाकामयाबी नहीं है, आप खुद बताइए? रेलवे की बात इसलिए करते हैं क्योंकि हम सब गांव से आते हैं । The Railways are capable of covering longer distance in short duration, thereby expanding the market reach of farmers. आप फार्मर्स की बात करते हैं, हम भी फार्मर्स की बात करते हैं । This will enable farmers to transfer surplus to areas where the demand is higher, thereby rationalising prices and ensuring that farmers do not make losses despite high yields. The BJP has made no progress in this area in their five years of power, but that is in consonance with their over all policy to do nothing for farmers.आप दोगुनीकरण की बात करते हैं, दोगुनीकरण कहां से होगा? अगर हम रेल में सुविधाएं मुहैया नहीं कराएंगे तो किसानों की आय का दोगुनीकरण कैसे होगा? क्या किसान वॉल्वो गाड़ी में अपना पैडी, सामान,फल और सब्जी लेकर जाएगा? इसलिए ट्रेन की जरूरत है, इसको आप नहीं कर रहे हैं । अभी आप तेजस की बात कर रहे हैं, जिसमें बैठने के लिए प्लेन फेयर से ज्यादा पैसा देना पड़ेगा, इसको भी प्राइवेटाइज़ करते जा रहे हैं । वर्ष 2017-18 के बजट स्पीच में, you had said that a new Metro Rail Act will be enacted by rationalising the existing Act. In 2017-18, in your Budget Speech, it was promised that a new Metro Rail Act will be enacted by rationalising the existing laws. The status is that it was not delivered.
In 2017-18 Budget Speech, it was said that by 2019, all coaches of the Indian Railways will be fitted with bio-toilets. Have you done that? The National Green Tribunal changed the deadline for installation of bio-toilets in all trains to December 31, 2019 and asked the Union Railway Ministry to do the job on war-footing. Only 1.8 lakh toilets were installed, out of over 2.2 lakh planned toilets.
It was promised that 500 stations will be made differently-abled friendly by providing lifts and escalators. Only 199 stations had escalators and 179 stations had lifts as on January, 2019. You assured that in the next five years, your priority will be to significantly improve capacity on the existing high density. In 2018-19, the punctuality rate reduced to 68.91 as against 70.55 per cent in 2017-18 and 76.67 per cent in 2016-17 according to Railways’ data. इसका मतलब पंक्चुअलिटी नहीं है, ट्रेनें कैंसिल चल रही हैं, रफ्तार कम हो गयी है और फिर आप कहते हैं कि ये बेच दो, वो बेच दो । You promised that network average speed will increase. Trains will become more punctual. Even though Rs.100 crore Vande Bharat Train has a capacity to run at 160 kilometres per hour, it is running at a maximum speed of 110-130 kilometres per hour between Delhi and Varanasi in the absence of semi-high speed track. अब क्या हो रहा है? 23 हजार से ज्यादा गायों को आपने ट्रेन के नीचे कुचल कर मार दिया । गाय और गंगा आपके बड़ा अभिशाप बनते जा रहे हैं । आपकी ट्रेन्स हिन्दुस्तान में 23 हजार गायों को कुचल देती है,क्योंकि रेलवे के आस पास कोई प्रोटेक्शन नहीं है, कोई फेन्सिंग नहीं है। …(व्यवधान)सर, यह रेलवे का डाटा है । राजनाथ सिंह जी, यह रेल का डाटा बोलता है । क्या आप जानते हैं, जिस दिन ये उद्घाटन करने जा रहे थे, उस दिन भी ट्रेन के सामने एक गाय के आने और कुचले जाने के कारण, वह उद्धाटन कार्यक्रम भी बंद हो गया था । मैं क्या गलत बोल रहा हूं । …(व्यवधान) क्या यह डाटा रेलवे के दफ्तर से चोरी करके लाए हैं? आप रेलवे को कितना तवज्जो देते हैं, इसकी सबसे बड़ी पहचान है- इकोनॉमिक सर्वे के वॉल्यूम-2में 278 पन्ने हैं, इन 278 पन्नों में से सिर्फ 2 पन्ने रेलवे के लिए एलॉट किये गये हैं । आप खुद देख लीजिए । सिर्फ दो पन्ने हैं, इसमें कोई विज़न नहीं है, कोई मिशन नहीं है ।
वे बोलते हैं कि “ हम प्लास्टिक का इस्तेमाल बंद कर रहे हैं । हम वहां लिफ्ट को बिठा रहे हैं,वगैरह-वगैरह ।” आप इसमें रेलवे को कितनी तवज्जो देते हैं यह इससे साफ-साफ पता चलता है । यह सरकार बड़ी-बड़ी बातें करती है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है इसलिए मैं इस सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं । आपका बजट,माइक्रो इकोनॉमी का जो चेहरा है,उससे सब कुछ पता लगता है । आप डी.आर.एफ को देखिए । डी.आर.एफ रेलवे सिक्योरिटी के लिए एक बड़ा हिस्सा होता है । आपने डेप्रिसियेशन रिजर्व फंड में पैसा देना कम कर दिया है । क्या मैं गलत बोल रहा हूं? गोयल साहब आप खुद विचार करें । आपने रेलवे सेफ्टी के लिए रेल संरक्षण कोष बनाया था ।With Railways struggling to meet the expenditure and declining internal revenues, it is unclear how the Railways will continue to fund the Railways Sanrakshan Kosh.रेलवे की समस्या यह है कि उसमें इंटरनल जनरेशन नहीं होती है । यह बोरोअर्स पर और एक्स्ट्रा बजटरी रिसोर्स पर भरोसा करती है । जब तक आप अपनी कमाई नहीं बढ़ा सकेंगे तब तक रेलवे को चुस्त-दुरुस्त करना मुश्किल होगा । आप बड़े-बड़े वादे करते थे,लेकिन अगर जेब में पैसा नहीं होता है तो आप साहूकार के पास या बोरोअर्स के पास जाते हैं । बोरोअर्स आपके ऊपर सूद लगाते हैं । आप संरक्षण कोष में पैसा नहीं दे सकते, इसलिए डी.आर.एफ जो सिक्योरिटी के लिए बहुत महत्वपूर्ण फंड है, उसमें कटौती क्यों की जा रही है? The growth rate in Railways earnings from its core business of running freight and passenger trains has been declining. यह जो बजट पेश किया गया है, उससे यह साबित है । This is due to general decline in the growth of both freight and passenger traffic.
सर, आप मुझे दो मिनिट दीजिए । आप कहेंगे तो मैं तुरंत बैठ जाऊंगा । However, in 2017-18 there was an increase in the growth of both freight and passenger traffic. मतलब यह है कि जब आप अच्छा काम करते हैं तो हम आपकी सराहना करते हैं, हम लोग आप जैसे छोटे दिल के नही है । आप जब अच्छा काम करेंगे तो हम सराहना करेंगे,लेकिन आप जब फेल होंगे तो हमें बोलना ही पड़ेगा…(व्यवधान) Indian Railways does not have an institutional arrangement to attract aggregate traffic of smaller parcel size. Therefore, it has been losing out on high potential market such as FMCG, hazardous materials, automobiles and containerised cargo. Most of this traffic is transported by roads. इसका मतलब जो छोटा सामान होता है, एफ.एम.सी.जी., जिसे छोटा सामान कहते हैं कंज्यूमर गुड्स…(व्यवधान)
रेल मंत्री तथावाणिज्य और उद्योगमंत्री (श्री पीयूष गोयल): सर, इन्हें बता दूं कि एफ.एम.सी.जी. क्या होता है । एफ.एम.सी.जी. होता है – फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स …(व्यवधान)
श्री अधीर रंजनचौधरी:मैंने भी तो वही कहा है, मैं तो कंज्यूमर गुड्स ही कह रहा हूं । The freight basket is also limited to a few commodities. मैं आपको इसलिए सुझाव दे रहा हूं, क्योंकि आप भी अच्छा काम करें । हिन्दुस्तान की रेलवे की भलाई के लिए अच्छा काम करें । एफ.एम.सी.जी. की बात इसलिए कह रहा हूं, क्योंकि ये शेयर चले जाते हैं । अगर आप बुलेट ट्रेन का सपना देखते हैं तो फ्रेट ट्रेन का सपना क्यों नहीं देखते? वह सपना हमने देखा था इसलिए हमने डेटिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का सपना साकार करने की कोशिश की थी । क्या यह गलत है? आप बताइए । आप यह काम नहीं कर पाते हैं । The freight basket is also limited to a few commodities, most of which are bulk in nature. For example, coal contributes about 44 per cent of freight revenue, 25 per cent of the total internal revenue. Therefore, any shifting transport pattern of any of these bulk commodities could affect Railways’ finances significantly. मैं आपको सचेत करता हूं । यह रेलवे के सामने चैलेंज है । आप यह मत भूलिए । रेल हमारी सोशल कमिटमेंट है और सोशल सर्विस भी हम रेल के जरिए ही करते हैं । सिर्फ कॉमर्शियल अण्डरटेकिंग्स नहीं है । हां कॉमर्शियल अण्डरटेकिंग्स जरूर है, लेकिन साथ-साथ हमारा सोशल आब्लिगेशन भी है ।
That is why, it is said that:
“The Committee on Restructuring Railways, 2015 had noted that the methods of calculating the cost of running passenger business are not scientific and accurate. Therefore, it is difficult to compute the accuracy levels of under-recoveries.” The NTDPC Report, 2014, had noted that in India, the average freight revenue per NTKM is one of the highest in the world, second only to Germany. In comparison, the average realisation per PKM is one of the lowest in the world.
Railways should bear social obligations when it works as a commercial Department under the Government, नीति आयोग चाहता है कि सारी चीजें आम जनता के ऊपर छोड़ दी जाएं । अगर सफर करने के लिए किराए-भाड़े में इजाफा करने की जरूरत हो तो उसे आम लोगों के ऊपर छोड़ दें, लेकिन हमारे कुछ सोशल ऑब्लिगेशन्स हैं । इन सोशल ऑब्लिगेशन्स की हमें रक्षा करनी चाहिए । मैं यह बात जरूर कहना चाहता हूं ।
इसके साथ ही, गोयल साहब, आप बंगाल में पैसे नहीं दे रहे हैं, आप बंगाल को भी कुछ पैसे दिया कीजिए । बंगाल भी आपका हिस्सा है और बंगाल में अगर बीजेपी चाह रही है कि कुछ करके दिखाए तो ऐसा करके दिखाने के पहले वहां रेल को ले जाने का इंतजाम कीजिए । जब रेल वहां चली जाएगी तो आप भी दिल्ली से रेल में बैठकर वहां जा सकेंगे । अभी आप बंगाल में पैसा नहीं दे रहे हैं । मेरे जिले मुर्शिदाबाद में एक कासिम बाजार स्टेशन है, वहां इंजीनियर की फॉल्ट के लिए लोगों को जिस तरह की हैरानी सहनी पड़ती है, वह मैं आपको सामने बयान नहीं कर सकता हूं । इसलिए मैं आपको यह कहता हूं कि हमारी तरफ से,हमारे देश की रेलवे की तरक्की के लिए सहयोगिता का कोई अभाव नहीं होगा, लेकिन आपको नीयत और नीति साफ करनी चाहिए । अगर नीति और नीयत आप साफ-सुथरा कर लें तो हमारी तरफ से सहयोग की कोई कमी नहीं होगी,क्योंकि हिन्दुस्तान की रेल आपकी है,मेरी है, हम सबकी है । नमस्कार ।…(व्यवधान)
CUT MOTIONS श्री सुनील कुमार सिंह (चतरा): अध्यक्ष जी, मैं रेलवे की अनुदान मांगों के समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं ।
भारतीय रेल, हम यह कह सकते हैं कि पूरे देश को एक सूत्र के पिरोने वाले धागे के समान है, जो देश की अखण्डता, देश की विशिष्टता और इसका अखिल भारतीय स्वरूप प्रदर्शित करती है । यह विश्व का दूसरा सबसे बड़ा नेटवर्क है । लगभग दो करोड़ तीस लाख लोग प्रतिदिन भारतीय रेल से यात्रा करते हैं,जो आस्ट्रेलिया की जनसंख्या के बराबर है । लगभग 13 लाख कर्मचारियों के भरोसे भारतीय रेल अपनी नित नई उंचाइयों को प्राप्त करने में सक्षम रही है । भारतीय रेल एक ओर जहां भारत की परिवहन की मूलभूत आवश्यकताओं को पूर्ण करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करती है, वहीं दूसरी ओर देश के विभिन्न भागों को एक साथ जोड़ने का काम भी करती है । चाहे वह कटरा स्थित माता वैष्णो देवी का स्थान कटरा हो या कन्याकुमारी हो, सोमनाथ से जगन्नाथ पुरी हो, दिल्ली से ईटानगर हो,दिल्ली से अगरतला हो, भारतीय रेल पूरे देश को एक सूत्र में पिरोने का काम करती है ।
12.53 hrs (Shri N.K. Premachandran in the Chair) हम यह कह सकते हैं कि भारतीय रेल की एक अन्य खासियत,जो हमारी सरकार से पूर्व प्रदर्शित नहीं की गई थी, वह भारतीय रेल का भारतीय अखण्डता के स्वरूप के संवर्धन का रूप है । हमारी सरकार आने के बाद हमने जिस तरह से रेलवे स्टेशनों पर और रेलवे कार्यालयों में भारत की संस्कृति,भारत की सभ्यता और भारत की खासियतों को उकेरने का काम किया है, हम कह सकते हैं कि हमने पुरानी नींव के आधार पर नया निर्माण किया है । जब हम पुरानी नींव की बात करते हैं, अधीर जी,ध्यान रखिए कि आप 1832 की रेल को 1885 की कांग्रेस से तुलना करना चाहते हैं और इसे उतना ही पुराना बनाना चाहते हैं,लेकिन हम पुरानी नींव से, हमारी एथिक्स, हमारा एजुकेशन का सिस्टम,हमारी संस्कृति और हमारे काम करने के तरीके के आधार पर हम आने वाली सदी में नई ‘न्यू इंडिया’के रेलवे की रचना करने में सक्षम हुए हैं ।
इसलिए हम रेल को कह सकते हैं कि यह हमारी सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की अभिव्यक्ति है । मुझे पता नहीं है कि आपको सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का क्या अर्थ लगता है, लेकिन सच कहें तो यह उसकी अभिव्यक्ति है । साथ ही साथ, राष्ट्रीय आपदा के समय रेलवे ने लगातार अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है,जिसके लिए हम सभी रेलवे के शुक्रगुजार हैं ।
माननीय अध्यक्ष जी, मैं माननीय प्रधान मंत्री, मोदी जी को बधाई देना चाहूंगा कि उन्होंने भारत की विकास यात्रा को शिखर तक पहुंचाने के लिए, जिन सपनों की बात कह कर, अभी अधीर रंजन जी मजाक उड़ा रहे थे, उन सपनों को साकार करने के लिए और देश को आगे बढ़ाने के लिए हमने महती और महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है ।…(व्यवधान)
श्री अधीर रंजनचौधरी:हमने मजाक नहीं उड़ाया है । हम लोग चाहते हैं कि सपना हम देखें ।…(व्यवधान)
श्री सुनील कुमार सिंह: हमसपना पूरा करेंगे । हम खुली आंखों से सपना देखते हैं ।…(व्यवधान)अधीर जी, आपने जो म्यूजिकल चेयर की बात की है, मैं वह भी बताता हूं । हमने एक महत्वपूर्ण दायित्व, भारत की जो विकासगाथा है, हमारे प्रधान मंत्री जी ने न्यू इंडिया के निर्माण में रेलवे को एक महत्वपूर्ण भूमिका दी है । न्यू इंडिया के रेलवे के निर्माण को रेखांकित करने के साथ-साथ,मैं प्रधान मंत्री जी का अभिनंदन करना चाहता हूं कि उन्होंने 13 लाख से अधिक रेलकर्मियों की क्षमता, कुशलता और प्रबंधकीय कौशल को पहचान कर, उन पर पहली बार किसी सरकार ने भरोसा और विश्वास किया है । जिस रेलवे ने आपके 55 साल के पूरे शासन काल में काम नहीं किया,वह रेलवे नित-प्रतिदिन नए-नए कीर्तिमान और नए-नए प्रतिमान स्थापित कर रही है ।
मैं रेल मंत्री आदरणीय पीयूष गोयल जी और सुरेश जी को बधाई देता हूं कि उन्होंने टीम इंडिया फॉर रेलवे बनाया है, जिसने असंभव को संभव कर दिखाने का काम किया है । माननीय प्रधान मंत्री जी का रेलवे के बारे में बहुत स्पष्ट विजन रहा है । उन्होंने कहा है कि भारतीय रेल राष्ट्र के विकास यात्रा का ग्रोथ इंजन है । माननीय प्रधान मंत्री मोदी जी ने कहा है कि देश को गति रेल से मिलेगी और प्रगति भी रेल से मिलेगी । मैं यहां माननीय प्रधान मंत्री जी की बातों को कोट करना चाहूंगा,जो उन्होंने रेलवे के लिए कहा है - रेलवे और संभवत: डाकघर,दो ऐसे संस्थान हैं, जिनका तंत्र बेहद विशाल है और अगर इनका इस्तेमाल बुद्धिमतापूर्वक किया जाए तो ग्रामीण इलाकों में महत्वपूर्ण सुधार किया जा सकता है । हमारे देश में रेलवे को हमेशा से एक परिवहन के रूप में देखा गया है । हम रेलवे को देश की आर्थिक विकास की रीढ़ की हड्डी के रूप में देखना चाहते हैं । इसी कथन को साकार करने के लिए, हम कह सकते हैं कि पीयूष गोयल जी के नेतृत्व में टीम इंडिया फॉर रेलवे लगातार अपने काम को अंजाम दे रही है । हम लोग लगातार उस पर आगे बढ़ रहे हैं । आज रेलवे पहले से ज्यादा सुव्यवस्थित है, ज्यादा सुपोषित है, रेलवे में बेहतर रूप में फंडिंग हो रही है । आज रेल की यात्रा सुरक्षित,स्वच्छ, सुविधाजनक,सुगम और फास्टर है । कोई भी तुलना करके बता सकता है कि आज रेलवे स्टेशन ज्यादा साफ-सुथरे हैं । नई और लैटेस्ट टेक्नोलॉजी का उपयोग हो रहा है । हम ने रेल यात्रियों को डिजिटल सुविधा भी मुहैया कराया है और साथ ही साथ रेलवे ने देश के हर भाग को जोड़ने का काम किया है ।
अधीर जी कोई यह नहीं कहता है कि आपकी सरकार ने काम नहीं किया है, लेकिन आपकी गति जो रही है, आपने पूरे देश को एक यूनिट के रूप में देखने का काम नहीं किया है । आपने 55 साल के अपने शासन में अनेकों ऐसे हिस्से छोड़ दिए, जो आपके कारण उपेक्षा का दंश झेल रहे हैं, जैसे – नॉर्थ-ईस्ट और मेरा संसदीय क्षेत्र चतरा है ।
13.00 hrs मैं आपको उदाहरण के साथ बताऊंगा ।…(व्यवधान)
श्री गौरव गोगोई (कलियाबोर): डॉ.मनमोहन सिंह जी ने वहां सारे प्रोजेक्ट्स को नेशनल प्रोजेक्ट्स घोषित किया था । …(व्यवधान)
श्री सुनील कुमार सिंह: मैं जानता हूं गौरव जी ।…(व्यवधान)आप ही बोल लीजिए ।
HON. CHAIRPERSON: He is yielding. You can speak.
डॉ. निशिकांत दुबे (गोड्डा): सभापति जी, ये बार-बार डिस्टर्ब कर रहे हैं । यह अच्छी बात नहीं है ।
HON. CHAIRPERSON: No, he is yielding to him. That is why I am allowing.
श्री सुनील कुमार सिंह: अधीर जी, आप बार-बार टोक रहे हैं और आपके मित्र भी टोक रहे हैं । मुझे आश्चर्य होता है कि आपकी जब अपनी बारी आती है, तो आप सुनने को तैयार नहीं होते हैं । मैं जानता हूं कि आप अधीर हैं । अधीरता कभी-कभी आगे बढ़ जाती है और आपके भाषण से ही प्रतीत हो रहा था कि आप अपनी 55 साल की सरकारों की विफलता की गाथा का उल्लेख कर रहे हैं । पिछले 5 वर्षों में हमारी सरकार ने जो किया और माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार ने जो किया, वह आपके ध्यान में नहीं है । आपने म्यूजिकल चेयर की बात कही ।…(व्यवधान) यूपीए सरकार के समय रेलवे के पास पूंजी का अभाव था, जिसके कारण अधूरी पड़ी योजनाएं आप पूरी न कर सके । आपके दस वर्षों में दस रेल बजट आए । अगर उनका हम सच्चाई से आकलन करें, तो स्पष्ट हो जाता है कि यूपीए सरकार ने भारत की जनता से जो वायदे किए, उसका मात्र 10 प्रतिशत से भी कम आपने पूरा करने का काम किया है । इसका कारण स्पष्ट रूप से राजनीतिक इच्छा शक्ति का अभाव और आपकी प्रशासनिक अक्षमता रही है । जनता से किए वायदों के प्रति आपकी प्रतिबद्धता में कमी भी इसका कारण रहा है । इसके साथ ही साथ हम यह कह सकते हैं कि पूर्व के जितने भी रेल बजट आए, वे वोट बैंक पॉलिटिक्स और प्रेशर ग्रुप (दबाव समूह)घटक दलों की शक्ति के अनुरूप आए । सच्चाई यह है कि रेलवे ने आपके दस वर्षों के कार्यकाल में सरकार और भारत की अर्थव्यवस्था से मिल-जुलकर काम करने के बजाय अपनी एक स्वतंत्र ईकाई बनाई और हम उसे कह सकते हैं कि एक उपनिवेश की भांति रेलवे को चलाया, क्योंकि आपके लिए पार्टी और वोट बैंक तथा वोट बैंक के हिसाब से एरिया प्रमुख होता था । इसके साथ लीडर प्रमुख होता था । आपने रेलवे की रेवड़ियाँ लीडर और अपने नेताओं की इच्छाओं के अनुरूप बांटने का काम किया । आपने राष्ट्रीय हित को नेशन फर्स्ट की प्राइयोरिटी पर कभी नहीं रखा । हम लोग आए हैं,जो ‘सदा वत्सले मातृभूमि’ गाने वाले लोग हैं । हमने नेशन फर्स्ट का सिद्धांत रखा है और हम राष्ट्रीय हित में काम करते हैं, किसी नेता या किसी दबाव समूह के रूप में काम नहीं करते हैं । स्वामी विवेकानंद जी ने भी कहा है कि आसक्ति तभी होती है, जब हम प्रतिदान की आशा करते हैं । आपने वोट के लालच में लगातार रेलवे बजट का मखौल बना दिया । आपके वित्त मंत्री पवन कुमार बंसल के समय एक सवाल उठा था और देश में चर्चा शुरू हुई थी कि अगर इसी प्रकार रेल बजटों का दुरुपयोग होता रहे, तो एक दिन आएगा कि रेल बजट समाप्त कर दिया जाएगा और हमने रेल बजट को इसलिए समाप्त किया है कि रेल को मुख्यधारा में लाएं । आप तो ब्रिटिश हुकूमत के औपनिवेशिक विचार और सोच से प्रेरित थे । अंग्रेजों के समय रेलवे आय का एक साधन था और रेलवे के पास कोई सामाजिक दायित्व नहीं था । आप तो उसी रूप में उसे चलाते रहे और उसी रूप में आपने लगातर काम किया । आपने म्यूजिकल चेयर की बात कही है,आपके दस साल के शासनकाल में वर्ष 2004-05 में लालू प्रसाद जी, 2005-06 में लालू प्रसाद जी, 2006-07 में लालू प्रसाद जी, 2009-10 में ममता जी, 2010 से 2011-12 तक दिनेश त्रिवेदी जी,श्री पवन बंसल जी, श्री मल्लिकार्जुन खड़गे जी रेल मंत्री रहे ।
सच्चाई यह है कि आपके दस वर्षों के कार्यकाल को अगर कोई टर्मिनोलॉजी दी जाए, तो हम कह सकते हैं कि वह रेलवे की दृष्टि से ‘a decade of black dilemma’ था । वह काले सुरंग के समान एक दुविधा का क्षेत्र था,जिसमें आपको पता नहीं था । …(व्यवधान) मुकुल राय जी भी रेल मंत्री रहे हैं, इतने नाम हैं कि नाम छूट जाते हैं ।…(व्यवधान)आपके समय में लगातार माल भाड़े में, रेलवे राजस्व के हिस्से में लगातार गिरावट आयी । …(व्यवधान)वे फुल-फ्लेज्ड मंत्री नहीं थे…(व्यवधान) राज्य मंत्री थे, लेकिन उन्हीं की पार्टी उनको अभी तक फ्लोर लीडर के रूप में नहीं समझती है…(व्यवधान)जब वे बोलते हैं, तब भी ये लोग खड़े हो जाते हैं ।…(व्यवधान)इनके लिए तो नेता स्वाभाविक होता ही नहीं है ।…(व्यवधान)
HON. CHAIRPERSON: Hon. Member, please address the Chair.
श्री सुनील कुमार सिंह: सच्चाई यह है कि 1987 में जो राशि रेलवे को माल भाड़े से प्राप्त होती थी,आपके कार्यकाल में उसमें भी कमी आ गई । आपके समय में जिन परियोजनाओं को आपने शुरू किया था, अगर उन आप उन परियोजनाओं को ही समय पर पूरा करते, तो आज आप जो हमारे 50 लाख करोड़ रुपये के लक्ष्य पर शंका प्रकट कर रहे हैं,यदि आपने उस समय पाँच लाख करोड़ रुपये की व्यवस्था भी की होती, तो वे परियोजनाएँ पूरी हो जातीं,लेकिन आपकी इच्छा-शक्ति के अभाव में आपने उन परियोजनाओं को पूर्ण नहीं किया ।
सच्चाई यह है कि आपने परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के बजाय राजनीतिक कारणों से अधिक-से-अधिक प्रोजेक्ट्स की घोषणाएँ कीं । अगर आपके रेल मंत्रियों की घोषणाओं को देखें, तो यूपीए सरकार के सभी रेल मंत्रियों को हम घोषणा-वीर रेल मंत्री की संज्ञा दे सकते हैं ।
पिछले 30 वर्षों में 2014 के पूर्व 676 में से मात्र 317 प्रोजेक्ट्स ही पूरे किये और बाकी 359 प्रोजेक्ट्स को पूरा करने के लिए आपको 1,82,000 करोड़ रुपये की जरूरत थी, लेकिन आपके पास न क्षमता थी, न आपके पास बुद्धि थी ।
इसी सदन में, मैं आदरणीय गडकरी जी को क्वोट करना चाहूँगा । जब उन्होंने सड़क परिवहन मंत्रालय पर डिमांड फॉर ग्रांट्स रखा था,तो आपने सवाल उठाया था कि इतनी पूँजी कहाँ से लाएँगे । हमारी सरकार में माननीय गडकरी जी ने वह पूँजी दुनिया के बाजारों से लाकर काम को पूरा करने का कीर्तिमान स्थापित किया । आपके मुँह से सवाल निकलते हैं, लेकिन उसकी पूर्ति होने पर उसके लिए कोई धन्यवाद नहीं निकलता है ।
वाजपेयी जी के फोर लेन प्रोजेक्ट के बारे में भी आपने कहा था कि पैसे का अभाव है,लेकिन हमने उसको कर दिखाया । इसलिए हम जो वायदे करते हैं, लोगों के बीच जो घोषणाएँ करते हैं, वह हमारी संस्कृति में Planning in advance; planning in detail के रूप में रची-बसी हैं । हम जिस प्रक्रिया से आते हैं, हमने जिस संगठन शास्त्र का अध्ययन किया है, उसमें एक-एक चीज की प्लानिंग करते समय उसकी बारीकियों को देखते हैं । इसके साथ-साथ, उसके क्रियान्वयन में कौन-कौन सी बाधाएँ आ सकती हैं, उसमें क्या मैटीरियल इस्तेमाल होगा,उसमें लागत कितनी आएगी, इसकी चिन्ता करते हैं । इसलिए हम मैनेजमेंट के उस सूत्र पर चलते हैं, जिसको Planning in advance; planning in detail कहा जाता है । उसी के अनुरूप बिना किसी लाग-लपेट के, बिना किसी प्रेशर-पॉलिटिक्स के हमारी सरकार ने काम करके भारत की जनता की आशाओं और आकांक्षाओं को पूर्ण किया है । अगर हमने सपने दिखाए हैं, तो हम सपनों को पूरा करने का हौसला भी रखते हैं । इसलिए आपकी सरकार का कार्य पूरा करने की दर 50 प्रतिशत से भी कम रही है । आपने म्यूज़िकल चेयर की बात की । मैं आपकी सरकार में बजट के दौरान की गई घोषणाओं को गिनाना चाहूँगा । वर्ष 2004-05 में लालू जी ने नौ रेलवे लाइंस, 67 सर्वे और 32 नई रेलगाड़ियों की घोषणा की ।
वर्ष 2005-06 में 58 सर्वे और 46 रेलगाड़ियों की घोषणा की, वर्ष 2007 में पांच नई रेल लाइन्स, 28 सर्वे और 40 रेलगाड़ियों की घोषणा की, वर्ष 2008-09 में चार नई रेल लाइन्स, 27 सर्वे और 63 रेलगाड़ियों की घोषणा की । इसके बाद वर्ष 2009-10 के बारे में बताता हूं । अब सौगत दा यहां नहीं हैं,नहीं तो वे गुस्सा हो जाते कि हम पश्चिम बंगाल का नाम क्यों लेते हैं । …(व्यवधान) पश्चिम बंगाल को आपने टेरिटोरियल आर्मी की तरह स्वतंत्र करा लिया है, वहां आप ही का राज रहेगा, बाकी कोई नाम भी नहीं ले सकता है । …(व्यवधान)यह लोकतंत्र का दुर्भाग्य है । …(व्यवधान)
सुदीप दा, जब ममता जी रेल मंत्री थीं तो उन्होंने सात नई रेल लाइन्स,17गेज कनवर्ज़न, 68 सर्वे और 69 नई ट्रेन्स की घोषणा की । …(व्यवधान) वर्ष 2010-11 में 42 नई रेल लाइन्स, 64 सर्वे और 97 रेलगाड़ियों की घोषणा की । …(व्यवधान) वर्ष 2011-12 में 40 नई रेल लाइन्स, 20 गेज कनवर्ज़न, 35 डबल गेज करवर्ज़न और 251 सर्वे की घोषणा की । …(व्यवधान) 251 शुभ माना जाता है, शायद इसीलिए उन्होंने किया हो । …(व्यवधान)हालांकि, जय श्री राम से तो चिढ़ है । …(व्यवधान) और 99 नई रेलगाड़ियों की घोषणा की । …(व्यवधान)
श्री सुदीप बन्दोपाध्याय (कोलकाता उत्तर) : जो हमने किया था, क्या आप उसके खिलाफ हैं? …(व्यवधान)
श्री सुनील कुमार सिंह: दादा, अभी तो हमारा काम शुरू हुआ है । …(व्यवधान)आप देखते जाइये हम क्या-क्या पूरा कर रहे हैं ।
मैं सदन को बताना चाहूंगा कि कुल तीन बजट में ममता जी ने 265 नई रेलगाड़ियों की घोषणा की, लेकिन उनमें आधे से अधिक चलीं ही नहीं । …(व्यवधान)यह सच्चाई है । …(व्यवधान)मैं माननीय रेल मंत्री जी से भी कहूंगा कि इन घोषणाओं के बारे में भी जब वे बोलें, तो ज़रा स्पष्टीकरण दे दें, ताकि रिकॉर्ड साफ हो जाए । …(व्यवधान)
श्री सुदीप बन्दोपाध्याय:251रेलगाड़ियां दी थीं, इसीलिए 211 सीटें भी मिली थीं । …(व्यवधान)यह भी आपको ध्यान में रखना चाहिए । …(व्यवधान)
श्री सुनील कुमार सिंह: दादा ठीक कह रहे हैं । …(व्यवधान) सुदीप दा वरिष्ठ सदस्य हैं,हम सुदीप दा से बहस नहीं कर सकते हैं । …(व्यवधान) 211 सीटें तब मिली थीं, जब आपके झूठ का आडंबर पूरे जग में व्याप्त था ।…(व्यवधान)आज जब सच्चाई सूरज की किरणों को छेदकर बंगाल की धरती पर आ रही है तो इस लोक सभा में क्या हुआ,यह देश और पूरी दुनिया देख रही है । …(व्यवधान)विधान सभा के उप-चुनाव में भी क्या हुआ? …(व्यवधान)
श्री सुशील कुमारसिंह: अगली बार जय श्री राम हो जाएगा । …(व्यवधान)
श्री सुनील कुमार सिंह: दादा, चिंता मत कीजिये,जिससे आप राय ले रहे हैं, गाइडैंस ले रहे हैं, वे भी हम ही लोगों के आदमी हैं । …(व्यवधान)हम लोगों ने उसी हिसाब से उन्हें भेजा है । …(व्यवधान)वर्ष 2012-13 में दिनेश त्रिवेदी जी, जो हालांकि इस बार अर्जुन सिंह जी के पराक्रम के सामने धूल-धूसरित हो गए । …(व्यवधान)उन्होंने 45 नई रेल लाइन्स की घोषणा की, 111 सर्वे और 113 नई ट्रेन्स चलाने की घोषणा की । …(व्यवधान) वर्ष 2013-14 में पवन बंसल जी ने 22 नई रेल लाइन्स,दस डबलिंग,पांच इलैक्ट्रिफिकेशन की घोषणा की, 59 डबल लाइन और 25सिंगल लाइन के सर्वे की घोषणा की और 106 ट्रेन्स चलाने की घोषणा की । …(व्यवधान)वर्ष 2014-15 में मल्लिकार्जुन जी ने भी 56 नई रेलगाड़ियां चलाने की घोषणा की, लगभग 24 से ज़्यादा सर्वे की घोषणा की, सात नई रेल लाइन्स, आठ डबलिंग और पांच गेज कनवर्ज़न की घोषणा की । …(व्यवधान) कहने का अर्थ यह है कि लगातार आपने इस रूप में देश को आगे बढ़ाने के बजाय पीछे ले जाने का काम किया । …(व्यवधान)
सभापति महोदय, मेरा टाइम बचा हुआ है । …(व्यवधान)
HON. CHAIRPERSON: Time is there but there are so many members from your party to speak.
… (Interruptions)
SHRI SUNIL KUMAR SINGH : Yes, Sir. I have very well noted it down. My Party has allowed me to speak. …(Interruptions)
श्री सुनील कुमार सिंह: अभी अधीर रंजन जी पीपीपी मॉडल पर चर्चा कर रहे थे और विरोध कर रहे थे कि हमारी सरकार निगमीकरण और निजीकरण कर रही है । …(व्यवधान)वर्ष 2006-07 में उनकी यूपीए सरकार के रेल मंत्री लालू जी ने पीपीपी के समर्थन में जो शेर पढ़ा था,मैं वह शेर बताना चाहता हूं ।
उन्होंने कहा था कि -
“एक कदम हम बढ़ें और एक कदम तुम, आओ मिलकर नाप लें, फासले चांद तक ।” यानी जमीन पर संतोष नहीं था,चांद को भी खरीदने की योजना थी, क्योंकि बंगाल बी.एन.आर.रेलवे की पूरी और रांची का होटल तो बिक ही चुका है । उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था, मैं उसका अंग्रेजी वर्जन पढ़ रहा हूं । मैं बताता हूं कि कैसे उन्होंने पीपीपी मॉडल के बारे में कहा था: “Today, when Indian Railways are scaling historic heights in freight and passenger business, we will not allow resource constraints to hamper expansion of rail network. We will encourage public partnerships and public-private partnership schemes for effecting significant improvements in rail services and development and expansion of rail network. To this end, a level playing field under a transparent policy will be provided to investors by further simplifying the policy of public-private partnership. This is the need of the hour.” निजीकरण के लिए ट्रांसपेरेंट पॉलिसी और सरकार की पॉलिसी के लिए अण्डरटेबल पॉलिसी । यह दुविधा है । इसलिए मैंने कहा वह ब्लैक डिलेमा का डीकेड था ।
तब उन्होंने शेर कहा कि “एक कदम हम बढ़ें और एक कदम तुम, आओ मिलकर नाप लें, फासले चांद तक ।” उन्होंने कहा कि we invite state governments, local bodies, ports and private sector to invest in rail projects.
HON. CHAIRPERSON: Sunil Kumar Singh ji, how much more time will you take?
… (Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: I have no objection in allowing time but the question is, other Members have to be accommodated from BJP.
… (Interruptions)
श्री सुनील कुमार सिंह: माननीय अध्यक्ष जी, अभी तो शुरू हुआ है । सर, मुझे मेरी पार्टी ने 30 मिनट से ऊपर का टाइम दिया है । उस हिसाब से 40 मिनट का टाइम दिया है ।
HON. CHAIRPERSON: Please try to wind up.
श्री सुनील कुमार सिंह: सर,मैं वाइण्ड अप कर रहा हूं,लेकिन मेरी पार्टी ने मुझे टाइम दिया है ।
HON. CHAIRPERSON: How much time do you require further?
श्री सुनील कुमार सिंह:सर, बीस मिनट का समय और चाहिए । इस बहस में और टाइम बर्बाद हो रहा है । मल्लिकार्जुन खड़गे जी ने कौन सा शेर सुनाया यह भी सुन लीजिए ।
“सादिक हूं अपने कौल में गालिब खुदा गवाह, लिखता हूं सच, के झूठ की आदत नहीं मुझे ।” यह जो विरोधाभास है,इसीलिए मैंने डीकेड ऑफ ब्लैक डिलेमा कहा है । बजट में की गई घोषणाओं को पूरा नहीं करना और सच की कसम खाना, यह अंतर्विरोध रहा है । माननीय सभापति महोदय,मैं प्रयास करूंगा कि जल्द से जल्द अपना भाषण पूरा करूं । मोदी सरकार के समय हमारी सरकार ने मैसिव कैपिटल इन्वेस्टमेंट के माध्यम से रेलवे की समस्याओं के निदान में मदद पहुंचाने में उत्प्रेरक की भूमिका निभाई है । वहीं समय पर योजनाओं को पूर्ण करने का अवसर भी रेलवे को प्रदान किया है । यह इसलिए सम्भव हुआ, क्योंकि हमारी सरकार ने आरणीय मोदी जी के नेतृत्व में निर्णायक नेतृत्व,स्पष्ट लक्ष्य और सुशासन का वातावरण दिया है । नतीजा सबके सामने स्पष्ट है कि हमारी सरकार में कैपिटल एक्सपैण्डिचर दोगुने से भी अधिक हो गया है । वर्ष 2009-14 में जहां मात्र 2.3 लाख करोड़ रुपये था, वह कैपिटल एक्सपैण्डिचर वर्ष 2014-19 में बढ़कर 4.97 लाख करोड़ रुपये हो गया है ।
इस वर्ष की कैपिटल एक्सपेंडिचर का टारगेट 1.6 लाख करोड़ रुपये है,जो यू.पी.ए. के पहले कार्यकाल में था,यानी यह यूपीए1के पूरे 5 साल के कार्यकाल (2004 से 2009 तक)में खर्च किए गए 1.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक है । इसके साथ ही हमारी सरकार ने इस बजट में प्रावधान किया है कि 2019-20 के बजट में 65 हजार 838 करोड़ रुपये का बजटीय आबंटन प्राप्त हुआ है और पूंजीगत व्यय के लिए सर्वाधिक 1.60 लाख करोड़ रुपये दिए गए हैं । इसमें हमने यात्री सुविधाओं हेतु धन में लगभग 200 प्रतिशत वृद्धि की है । यह अपनेआप में ऐतिहासिक है कि यात्री सुविधाओं की दृष्टि से 200 परसेंट का इन्क्रीज किया गया है । पिछले साल रेलवे का परिव्यय 1.48 लाख करोड़ रुपये था, जबकि बजट आबंटन 55 हजार 88 करोड़ रुपये था, यानी हमने लगातार रेलवे के कैपिटल एक्सपेंडिचर में वृद्धि की है ।
महोदय, वित्तीय वर्ष 2019-20 के बजट में नई रेल लाइनों के निर्माण के लिए 7 हजार 255 करोड़ रुपये,गेज परिवर्तन के लिए 2 हजार 200 करोड़ रुपये,दोहरीकरण के लिए 700 करोड़ रुपये,रोलिंग स्टॉक के लिए 6 हजार 114 .82 करोड़ रुपये और सिंगलिंग और दूरसंचार के लिए 1750 करोड़ रुपये आबंटन किए हैं । रेल यात्रियों की सुविधा की दृष्टि से 1657 करोड़ रुपये से बढ़ाकर इस बार धनराशि 3 हजार 422.57 करोड़ रुपये की गई है, इसलिए इस वित्तीय वर्ष 2019-20 में सकल यातायात प्राप्तियों के लिए हमने जो लक्ष्य रखा है वह अनुमानत: 2 लाख 16 हजार 675 करोड़ रुपये का है, जो 2018-19 के संशोधित अनुमान से 19 हजार 961 करोड़ रुपये अधिक है । महोदय, इसी कारण हम यह कह सकते हैं कि हमारी सरकार ने लगातार विस्तार करने का काम किया है ।
सभापति महोदय, बार-बार कम समय लेने का आग्रह कर रहे हैं, अत: इसको ध्यान में रखते हुए सिर्फ मुख्य बिंदुओं को बताना चाहूंगा । अगर हम अपने रेलवे के लक्ष्यों को कहें कि मिशन ऑफ रेलवे क्या है,रेलवे का ध्येय क्या है, तो हम नट शेल में कह सकते हैं कि हमारी प्राथमिकता सेफ्टी और सुरक्षा में सुधार है । परियोजनाओं को सही समय पर पूरा करना और रेल यात्रा को सुखद यात्रा का आभास देना और इस दृष्टि से साफ-सफाई, बिस्तर,हेल्प लाइन,टिकट, खान-पान, मनोरंजन,गाड़ी की क्षमता में वृद्धि, आरामदायक यात्रा,रेलवे स्टेशनों का पुनर्विकास,इसी के साथ-साथ साफ-सफाई के लिए हम लोगों ने पिछले बजट से अधिक व्यवस्था की है । खान-पान के बारे में खासतौर से उल्लेख करना चाहूंगा कि माननीय मंत्री श्री पीयूष गोयल जी के इनीशिएटिव पर हमने एक अनूठी प्रक्रिया प्रारम्भ की है । जो खाना रेलवे के डिब्बों में सौंपा जाता है, उस खाने में जो QR का कोड होता है, आप कहीं भी अपने मोबाइल से QR कोड का फोटो लें और डायरेक्ट रेलवे का किचन आपके मोबाइल के नेटवर्क पर खुला होगा और आपको यह देखने को मिलेगा कि आज रेलवे के किचन किस रूप में काम कर रहे हैं । यह इसलिए भी उल्लेखनीय है कि…(व्यवधान) । मैडम, माथा ठोंकने की बजाय देखने का प्रयास कीजिए ।
श्रीमती अपरूपापोद्दार (आरामबाग):रेलवे किस तरह का खाना परोस रहा है …(व्यवधान)
HON. CHAIRPERSON: Nothing will go on record except the speech of Shri Sunil Kumar Singh.
… (Interruptions)* श्री सुनील कुमार सिंह:मैं खाना परोसने की बात नहीं, बल्कि रेलवे किचन की बात कर रहा हूं । रेलवे बोर्ड ने इसके लिए सहमति भी दी थी, लेकिन माननीय मंत्री जी के इनीशिएटिव पर QR प्रणाली के माध्यम से रेलवे के किचन को पैसेंजर के नेटवर्क से सीधे जोड़ने का काम हमारी सरकार ने किया है । साथ ही साथ हमारा लक्ष्य,हमारा मिशन है रेलवे में वित्तीय अनुशासन लाना,संसाधन जुटाना,विकास हेतु साझेदारी करना, मानव संसाधन को कुशल बनाना, उनको ट्रेनिंग देना,सूचना और प्रौद्योगिकी को बढ़ावा देना । ट्रांसपेरेंसी के माध्यम से रेलवे के कार्यकलाप में सुधार लाना और कृषि उपज और उपभोक्ता वस्तुओं के परिवहन व भंडारण को सुगम बनाना ।
साथ ही साथ मैं कहना चाहूंगा कि हम सभी जानते हैं कि रेलवे एक सामाजिक दायित्व के तहत काम करता है । लेकिन हमारी सरकार ने यह तय किया है कि सामाजिक दायित्व को पूरा करते हुए आने वाले समय में हम मुनाफा भी करके दिखाएंगे । आश्चर्य इसलिए मत कीजिए क्योंकि वर्ष 2024 के बाद हम लोग ही फिर से आने वाले हैं, यह भी तय है और पूरा करके दिखाएंगे ।
HON. CHAIRPERSON: Now, you may please conclude.
श्री सुनील कुमार सिंह: महोदय, मोदी सरकार ने रेलवे के इतिहास में कुछ ऐसे काम किए हैं, जो पहली बार हुए हैं । हम यह कह सकते हैं कि in the history of Railways, this is Government’s first. मैं सिर्फ उसका उल्लेख करना चाहूंगा कि best ever safety record in 2018-19 के तहत रेल दुर्घटना में 76 प्रतिशत की कमी आई है । वर्ष 2013-14 में रेल दुर्घटनाओं में 152 मृत्यु हुई थीं, वहीं वर्ष 2018-19 में सिर्फ 37 जानें रेल दुर्घटना में गई हैं । वंदे भारत एक्सप्रेस पहली भारतीय ट्रेन है जो स्वदेशी तकनीक से बनकर सेमी हाईस्पीड पर दिल्ली – वाराणसी के बीच चल रही है । वंदे भारत पर कमेंट किए जा रहे थे,लेकिन सच्चाई यही है कि वर्ष 1968-69 में जब राजधानी ट्रेन इंट्रोड्यूस की गयी थी, उसके बाद से यह पहली ट्रेन सेवा है जो पूर्ण रूप से स्वदेशी है और जो सेमी हाईस्पीड पर चल रही है । इसे वंदे भारत एक्सप्रेस के नाम से देश को हमने समर्पित किया है ।
डीज़ल लोको से इलेक्ट्रिक लोको में परिवर्तित करना, दुनिया का पहला उदाहरण है । डीएलडब्ल्यू,वाराणसी का यह फर्स्ट लोको है,जिसको हमारे रेलवे के कर्मचारियों ने, हमारे मंत्री जी की टीम ने पहली बार एक डीज़ल लोको को इलेक्ट्रिक लोको में परिवर्तित करने का काम किया है । इस परिवर्तन से आने वाले समय में एनवायरमेंट में लाभ होगा,वहीं जो फ्यूल पर हम सरचार्ज देते हैं, उसमें बचत होगी और उसको हम देश के अन्य हिस्सों में,जो आज भी उपेक्षा का दंश झेल रहे हैं, उनमें उनको खर्च करने का काम करेंगे ।
HON. CHAIRPERSON: Please conclude.
श्री सुनील कुमार सिंह: महोदय, मैं पांच-सात मिनट में कनक्लूड कर रहा हूं ।
ब्रॉड गेज रेल लाइन पर हम काफी तेजी से काम कर रहे हैं । अभी कुछ चीजें चर्चा में आई थीं । अभी रायबरेली की मॉडर्न कोच फैक्ट्री की चर्चा हो रही थी । यह देश का दुर्भाग्य है और आश्चर्य की बात है कि रायबरेली मॉडर्न कोच फैक्ट्री का शिलान्यास वर्ष2007 में किया गया था । यह फैक्ट्री वर्ष 2010 से 2014 तक कपूरथला की कोच फैक्ट्री से कोच लाती थी और उसको पेंट करके, उसके पैंच वगैरह कसकर कहा जाता था कि रायबरेली से है । चूंकि रायबरेली यूपीए सरकार के लिए प्राइम कांस्टीट्यूएंसी थी, उसी रूप से उन्होंने काम किया और देश हित को बलि देकर उन्होंने काम किया,क्योंकि अटकाना,लटकाना और भटकाना उनकी कार्य संस्कृति का हिस्सा रहा है । हमारी सरकार आने के बाद उसी रायबरेली की मॉडर्न कोच फैक्ट्री ने उत्पादन शुरू कर दिया और वर्ष 2014 के बाद से एक महीने की अवधि में ही इस फैक्ट्री का उत्पादन हमने अगस्त महीने से शुरू कर दिया है । जो फैक्ट्री चार-पांच डिब्बे बनाया करती थी, वर्ष 2018-19 में उसने 1425 कोच का उत्पादन किया है और इस साल, उसी मॉडर्न कोच फैक्ट्री, रायबरेली, का लक्ष्य हमने 2158 कोच का रखा है । इसलिए यह तुलना करनी होगी कि आपने अपने नेता की कांस्टीट्यूएंसी को नहीं बख्शा तो भारत को किस तरह से बख्शेंगे । मुझे बरुआ जी के सेंटेंस याद दिलाने की जरूरत नहीं है ।
इसी के साथ ही साथ मैं झारखंड राज्य पर आना चाहूंगा,लेकिन उसके पहले बोगीबील ब्रिज की बड़ी चर्चा कर रहे थे ।
माननीय सभापति : आप झारखंड के साथ कन्क्लूड कीजिए ।
…(व्यवधान)
श्री सुनील कुमार सिंह: महोदय, अटल जी की सरकार में नार्थ ईस्ट का बोगीबील ब्रिज शुरू हुआ था, जो लॉन्गेस्ट रेल ब्रिज है ।…(व्यवधान) हमारी सरकार के आने के बाद हमने तत्परता के साथ काम करके अरुणाचल के उस हिस्से को जो आज तक आज़ादी के बाद से जुड़ा नहीं था, उसको शुरू करने का काम किया है । आज नार्थ ईस्ट के उस भाग - अरुणाचल को जहां डिब्रूगढ़ और गुवाहाटी से जोड़ा है, वहीं दिल्ली से भी जोड़ने का महत्वपूर्ण काम किया है ।…(व्यवधान)
श्री गौरव गोगोई: आपने सिर्फ फीता काटा है ।…(व्यवधान)
श्री सुनील कुमार सिंह: गौरव जी, आप वह भी नहीं कर पाए हैं ।…(व्यवधान)इसी के साथ-साथ हमारी सरकार ने आने वाले समय में, माननीय प्रधान मंत्री जी ने 116 एस्पिरेशनल जिलों की सूची दी है, जो आकांक्षी जिले हैं, जिनके अंदर आगे बढ़ने की आकांक्षा है, लालसा है, चाहत है । ऐसे पिछड़े जिलों को भी रेलवे नेटवर्क से जोड़ने का काम शुरू किया है और आने वाले समय में हम उसको पूरा करने वाले हैं ।
इसलिए मैं निश्चित रूप से झारखंड की चर्चा करते हुए यह कह सकता हूं कि हमारी सरकार के आने के बाद जो झारखंड पिछले 55 सालों से लगातार निग्लेक्टेड रहा था, हमारी सरकार के आने के पूर्व यूपीए के शासन काल में वर्ष 2009 से 2014 के बीच झारखंड को मात्र 2,286 करोड़ रुपये रेलवे ने दिए थे, उसके बनिस्बत हमारी सरकार के आने के बाद वर्ष2014-19 में झारखंड के लिए जो इन्क्रीज हुआ है, वह 357प्रतिशत है । हमारी सरकार ने उसे बढ़ाकर 10,443 करोड़ रुपये झारखंड में रेल सुविधाओं के लिए उपबल्ध कराया है । हमने वहां पर अनेक रेल योजनाओं को पूरा करने का काम किया है । चूंकि समय का अभाव है, इसलिए मैं सिर्फ यह बताना चाहूंगा कि हमारे झारखंड के साथ किस तरह का सौतेला व्यवहार किया गया है । माननीय अर्जुन मुंडा जी,जब राज्य के मुख्य मंत्री होते थे ।…(व्यवधान)
HON. CHAIRPERSON: Hon. Member, please conclude your speech. Otherwise, I have to call the next Member to speak. You have already taken 40 minutes time.
…(व्यवधान)
श्री सुनील कुमार सिंह: सभापति महोदय, झारखंड के मुख्य मंत्री और रेल मंत्री श्री दिनेश त्रिवेदी जी के बीच एक समझौता हुआ था । उसमें झारखंड की सरकार 50 प्रतिशत खर्चा उठाने के लिए तैयार थी । यह आश्वासन दिया गया था कि रेलवे द्वारा कोडरमा-तिल्लैया को छोड़कर सभी परियोजनाओं को वर्ष 2013 तक पूरा कर दिया जाएगा । लेकिन सच्चाई यह है कि तत्कालीन सरकार के किए गए अधूरे कामों को आज हमारी सरकार पूरा कर रही है ।…(व्यवधान)
माननीय सभापति : अब समाप्त कीजिए ।
…(व्यवधान)
माननीय सभापति : आप चेयर को सहयोग दीजिए ।
…(व्यवधान)
HON. CHAIRPERSON: Hon. Member, we are very liberal in allotting time. But the time is very limited. We have to accommodate other Members also. Please conclude.
…(व्यवधान)
श्री सुनील कुमार सिंह: सभापति महोदय, मैं झारखंड की मांगों को आपके सामने रखकर समाप्त कर रहा हूं ।…(व्यवधान)हमारे माननीय मुख्य मंत्री जी ने राज्य के हित में, क्योंकि आज हम माल भाड़े का लगभग 40 प्रतिशत योगदान देते हैं । हमारे मुख्यमंत्री ने 27.07.19 को पत्र लिखकर…(व्यवधान)महोदय, बस दो मिनट में समाप्त कर रहा हूं ।…(व्यवधान)
माननीय सभापति : एक मिनट में समाप्त कीजिए ।
…(व्यवधान)
श्री सुनील कुमार सिंह: सभापति महोदय, दो मिनट और दे दीजिए ।…(व्यवधान)
माननीय सभापति : ठीक है, दो मिनट में समाप्त कीजिए ।
…(व्यवधान)
श्री सुनील कुमार सिंह: सभापति महोदय, उस दृष्टि से झारखंड में रेलवे जोन देना तथा झारखंड के लिए हमारी सरकार ने भारत सरकार को जो चिट्टी लिखी है, उन योजनाओं का पूरा करना । मैं यहां माननीय मंत्री जी से अपने क्षेत्र के लिए कहना चाहूंगा कि बरवाडीह चिरमिरी लाइन जो यूपीए सरकार के … * का सबसे बड़ा उदाहरण है, वर्ष 1941 से जो बन रही थी,वह बंद पड़ी है,जिसकी जमीन अधिग्रहीत है, जिसमें कंस्ट्रक्शन का काम हुआ है ।
सभापति जी, यह देश का इकलौता केस है । यह योजना 85 सालों से अधूरी पड़ी है । मैं माननीय पीयूष गोयल जी से आग्रह करूंगा कि बरवाडीह चिरमिरी लाइन को पूरा करें । इसको पूरा करने से कोलकाता से मुंबई के बीच की दूरी 300 किलोमीटर कम हो जाएगी । अगर यह योजना देश के हित में नहीं होगी,तो हम खुद स्वीकार करेंगे कि इस योजना को छोड़ दिया जाए । लेकिन इसी के साथ-साथ चतरा-कोटोरी रेल लाइन जो मेरे संसदीय क्षेत्र का महत्वपूर्ण क्षेत्र है, मैं उसको भी पूरा करने का अनुरोध करूंगा ।…(व्यवधान)
श्री गौरव गोगोई : सभापति महोदय, यह अनपार्लियामेन्ट्री वर्ड है ।…(व्यवधान)
HON. CHAIRPERSON: We will examine it. If there is anything unparliamentary, we will definitely look at it and get it expunged.
…(व्यवधान)
श्री सुनील कुमार सिंह: सभापति महोदय, मैं अंत में अपने क्षेत्र की समस्याओं के साथ आपके प्रति आभार प्रकट करता हूं कि आपने रेल की अनुदान मांगों पर मुझे बोलने का अवसर प्रदान किया है । मैं इसका समर्थन करते हुए आपके सामने यह कहना चाहूंगा कि हमारी सरकार ने देश के हौसलों को उड़ान दी है ।
हमारे पंखों को विस्तार दिया है और हमको आकाश छूने का साहस दिया है ।
महोदय, मैं सिर्फ एक शेयर बोल कर अपनी वाणी को विराम दूंगा ।
“ कौन कहता है कि आसमान में सुराख नहीं हो सकता कोई पत्थर तो तबियत से उछालो लोगों, कोई पत्थर तो तबियत से उछालो ” हमारी सरकार ने आकांक्षाओं के पत्थर उछाले हैं । आने वाले समय में हम इन सभी योजनाओं को पूरा कर दिखाएंगे । धन्यवाद ।
SHRIMATIKANIMOZHI (THOOTHUKKUDI): Mr. Chairman, Sir, thank you. The Indian Railways is the fourth largest railway network in the world carrying nearly 23 million travellers every day. It is also the eighth largest employer and it has more than 13 lakh employees as of March 2017. While the revenue of the Railways for 2019-20 is estimated to increase by 10 per cent, the total expenditure for 2019-20 is also projected to increase by nine per cent. The major expenditure under the Railways are salaries, pensions, fuel, and leases. The Budget allocated for construction of new lines is only Rs. 7,255 crore.
It was proposed, as part of the Budget speech that the Railway infrastructure would need an investment of Rs. 50 lakh crore between 2018 and 2030. Public Private Partnership has been proposed to unleash faster development and delivery of passenger and freight services.
To this Government, the solution for everything is privatisation. We have to remember that the Railways is also one of the largest networks and till today it has been managed by the Government single-handedly and successfully. Now, they have brought this proposal to allow PPP and private investment into the Railways.
I would like to bring to the notice of the Ministry, through you, that in 2015, the Committee on Restructuring Railways has observed that in the Railways, accounting is neither scientific nor accurate. So, when there is so much confusion when it comes to accounting, why would any private company want to invest when they want a clear road-map about where their investment is going, what would be their profit, etc. They want clarity over all these things. When there is no clarity and the accounting is not very clear, why would any private investor want to come and take up this partnership?
According to you, the Railways has to become a profit-making organisation, but now it is making losses. What is the incentive for any private player to come and become part of this loss-making enterprise? I would like to ask who is going to compensate them. I want to know whether the Central Government would be compensating the cost incurred by the private player or the passengers would bear this burden.
PPP model is seen as a vehicle for development. Even during the last Budget, a grand announcement was made that the PPP will generate Rs. 6 lakh crore investment. But ultimately there was no offer from any private player or multi-nationals. Our own Government PSU, the LIC was finally approached for Rs. 1.2 lakh crore as loan. But unfortunately, the Railways has not been able to utilise even Rs. 30,000 crore loan which the LIC had given to them.
The allocation of funds towards Depreciation Reserve Fund, allows the Ministry to finance cost of new assets replacing old ones. But the appropriation for the same has decreased significantly over the years.
Further, the Railway’s contribution towards the new safety fund known as the National Railway Safety Fund, Rashtriya Rail Sanraksha Kosh was entirely taken from the DRF fund; therefore, disallowing the replacement and repair of depreciating assets which would only lead to compromise in quality of performance of the assets. I do not know whether in this House we can quote from The Economic Survey anymore …(Interruptions) because the Government has distanced itself clearly from The Economic Survey. Still I would like to quote from it. The Economic Survey has observed that there has been an increase in fire accidents. That being the case, I think we will have to really look at replacing depreciating assets and we cannot take it very lightly.
One more point which I would like to strike in digress from what I was trying to say is regarding the name of the scheme Rashtriya Rail Sanraksha Kosh. I had to do a lot of homework to understand the meaning of it. This Government has taken that every scheme and every programme will be named only in Hindi. I would like to ask you, how will a villager even in my district, Thoothukkudi understand what this is? I have seen the signboard in Thoothukkudi saying Pradhan Mantri Sadak Yojana. I do not understand the meaning of it. There is no translation in English or in the regional language. This is your attitude towards everything. It also includes the railway boards. You have to understand that you are here to serve the people. You have to make sure that the schemes or the nameboards are easy for the people to understand and decipher them. So, it is very important that the names, signboards and station details are in regional languages and understandable to the people of the particular State.
This Government has decided to combine the Budgets to do away with the Railway Budget. People always eagerly wait for the Railway Budget as much as the General Budget to understand what their State is getting, what is coming to their district, what trains are available for them, regarding the extension work, about the new projects, etc. All these have been done away with. Now, the common man and woman are struggling to understand and find out the details of announcements of new projects.
In Tamil Nadu, we have a proverb, “Pon vaikkira idathile poo vaikkanum”, which means, when you cannot afford to keep gold then you can keep a flower in its place. I think this Government has taken this literally and especially when it comes to the Southern Railways. The Southern Railway projected its demand under various plan heads, seeking an allocation of Rs.5,312 crore. Unfortunately, only Rs.4020 crore have been granted which shows that there is a wide gap of over Rs.1291 crore, which will totally disrupt the execution of the projects.
A very important new line between Sirerumbudur and Guduvancheri which was sanctioned in the last Budget at a cost of Rs.839 crore has been given only a token amount of Rs.10 crore. Sir, this is not even a flower. There is a huge difference between Rs. 839 crore and Rs.10 crore. How can you even start a project with this amount?
Southern Railway’s proposal for gauge conversion has also been ignored as only Rs.245 crore has been sanctioned against the demand for Rs.424 crore.
Railway, the most affordable means of transport for the economically underprivileged section even today, is losing its patronage. In the non-suburban section, the second-class passengers’ number has fallen by about 61 million in 2018-19 when compared with 2017-18.
The railways are getting stiff competition from the buses, road transport, and airways. But the railways are not acting to do anything in this regard. Most of its freight depends on coal. More than 40 per cent of its freight comes from coal. They have not looked into other kind of things for the railways.
Transporting smaller packages and containers, etc. has not been explored, and they think that private investment is the only answer for everything.
The experience of the PSU banks, BSNL and other PSUs should be a case study for the Government of India, but unfortunately it is giving a 100-days plan to corporatize Modern Coach Factory in Raebareli and production units like ICF, Chennai and RCF, Kapurthala.
The Integral Coach Factory founded in Chennai has generated direct employment for 10,000-12,000 people in and around Chennai city and indirect employment for 30,000 people who are engaged in small-scale industries since its inception. In 2019, the production of ICF exceeded double its capacity.
I think that the hon. Member of BJP also mentioned that the Train18 was claimed by the same Railway Minister as a success story of Make in India. It was produced by ICF at a cost of Rs. 100 crore whereas multinationals globally produce it at a cost of Rs. 250 crore. So, this is a real success story by the ICF. But does the Government really want to pay Rs. 250 crore to a foreign company or foreign national whereas we can do it for Rs. 100 crore within India? Is this what you mean by Make in India?
I would like to tell the Government that any attempt to corporatize or privatize ICF, Indian Railways or the Salem Steel Plant will be resisted by the people of Tamil Nadu, the DMK and my Leader, Thiru M. K. Stalin.
There is a long-standing demand for the creation of a new Division in the Southern Railways, which at present consists of six Divisions, namely, Chennai, Trichy, Salem, Madurai, Palakkad and Thiruvanthapuram. …(Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: Please do not cross the Member whenever a Member speaks.
… (Interruptions)
SHRIMATI KANIMOZHI: There is no development after the Division in Salem has been created, and the MP from there has categorically asked me to mention it to you here.
A new Division comprising of Thoothukkudi, Tirunelveli, Kanniyakumari and some parts of Thiruvananthapuram Division, which falls in Tamil Nadu, must be created in Tirunelveli. During the Budget of 2008-09, the Railway Ministry had sanctioned survey for construction of a new Broad-Gauge line between Karaikudi and Kanniyakumari via Ramanathapuram, Tuticorin and Tiruchendur along the Eastern coast. Subsequently, a survey was conducted for the length of 462.47 kms. and the Report has been submitted to the Railway Board in the year 2011, but the issue is still under examination. I would urge the Ministry to revive this project. Similarly, there are 12 more projects, which are stalled and which have to be revived in Tamil Nadu. I would also request the Ministry to rename the Erode Railway Station as Thanthai Periyar Railway Station.
HON. CHAIRPERSON: Please conclude now.
SHRIMATI KANIMOZHI : I would like to talk about my Constituency, namely, Thoothukkudi.
At present, there is only one Express running between the State Capital Chennai and Thoothukkudi. Introducing a new daily express train between Chennai and Thoothukkudi via Thanjavur, Kumbakonam, Mayiladuthurai will ease passenger traffic on this route. Extension of the Intercity weekly Madurai-Mumbai Lokmanya Tilak Terminus Express till Thoothukkudi, and also Intercity Palaruvi Express, which currently runs between Palakkad and Tirunelveli to Thoothukkudi will help the people.
As regards the issue of apprenticeship, the Union Minister for Finance while delivering the Budget speech on 5 July, 2019, mentioned about giving importance to schemes like the National Apprentice Promotion Scheme. Currently, around 25,000 young people who have completed this apprenticeship course have not been provided employment. Sadly, they have joined the crores of young people who are unemployed in this country waiting for the ‘Achhe Din’ to come.
About accessible railway stations, in 2016, this Government had announced that stations would be made accessible to all. Half way into 2019, there are neither ramps in all junctions nor battery cars to approach coaches that are reserved for the differently-abled. Reserved coaches are often used by others to obstruct the entry and exit of the specially-abled. We have to understand that it is their right. We are not doing charity to the differently-abled people.
HON. CHAIRPERSON: Please wind up your speech by making last point.
SHRI T. R. BAALU (SRIPERUMBUDUR): Ruling party has taken ample time.
HON. CHAIRPERSON: No. They have ample time.
SHRIMATI KANIMOZHI: They always have ample time. It is we who have been suppressed. At least you should understand that.
HON. CHAIRPERSON: You please conclude.
SHRIMATI KANIMOZHI: It is not important whether the Railways are modernised, whether we have wi-fi in the trains or railway stations or we have bullet trains. I think, that is immaterial. What every Member here – I am not blaming anybody – has to be ashamed of is that the Railways still employs manual scavengers. We have to be ashamed of it. They might deny it. They have denied it before; they have said that the Railways do not directly employ manual scavengers but it is done through contractual labour. Just though you want them to be invisible, they are not invisible. More than 95,000 people are employed as cleaners and they work as manual scavengers. It is a shame to this nation to continue this. There are no rights to protect them; they are not given gears which protect them.
My last point is this. We are talking about railway safety, which is a concern to all of us here. The safety of the passengers inside the trains are also becoming a concern. Sir, on 28th June, 2019, 17 year old Hafeez Mohamed Niyazi, a student, was abused, assaulted and stripped inside a passenger train in Sambhal district by some youngsters. He was thrown out of the train.
HON. CHAIRPERSON: Please don’t go to the examples.
SHRIMATI KANIMOZHI : On 24th June 2019, Hafeez Haldar, a 26 year old was going to Hubli. A group of people were chanting Jai Shri Ram. He was forced to chant the same. When he refused, he was beaten up, and they threw him out of the train.
On 22nd June, 2017, Junaid Khan, a 15 year old was harassed, lynched and fatally stabbed when he was returning from Delhi. One more thing is that this Government is very keen on protecting Muslim women, Muslim sisters. So, I would like to mention that on 26 June, 2016, two Muslim women were thrashed and abused by Hindu activists in Madhya Pradesh because it was rumoured that they were carrying beef. Women were slapped and kicked by a group of men and women at a crowded railway station.
HON. CHAIRPERSON: Please conclude. Don’t go into all those examples. You are stressing that safety has to be maintained.
SHRIMATI KANIMOZHI: Yes, Sir. It is important not just for the train but also for the people inside the train.
I would really like to reiterate that the railway safety is not the only concern, I think, everybody in this country should also feel – the disabled, the unemployed and the minority people should feel safe, and that they belong to this country.
SHRI SUDIP BANDYOPADHYAY (KOLKATA UTTAR): Sir, I request you not to use bell to stop my speech. I will take short time to complete my speech.
HON. CHAIRPERSON: Thank you.
SHRI SUDIP BANDYOPADHYAY: Sir, this year’s Budget allocation of Indian Railways is Rs.65,837 crore and the capital expenditure is Rs.1.60 lakh crore.
Sir, Mrs. Sitharaman ji, in her Budget Speech, has given a dream of investment of Rs. 50 lakh crore between 2018 and 2030, and proposed that PPP model be used to unleash faster development and delivery of passenger freight services for railway projects to boost connectivity. Railways are moving towards privatisation. This is the indication of this Budget.
As now I am the Chairman of the Railway Standing Committee, I feel that it is not a proper etiquette that I speak on the Budget because I know many inside information. The Railway Board members come and meet me. Many members are there to speak but a few issues are certainly to be raised and to be answered by the hon. Minister which we placed in the Standing Committee Reports. The Reports are never responded to and never replied.
Sir, among the budgetary plan outlay and the non-plan outlay, estimated salary expenditure of the Railways’ employees goes up to Rs. 86,554.31 core. So, non-plan takes the major portion out of the plan outlay of the Railway Budget. We have proposed world-class railway stations. How many railway stations are being constructed under world-class railway stations project? It is maximum four to five throughout the country. Of course, in Surat of Gujarat, it is moving ahead. World-class railway stations have gained enough publicity, enough is being told about it but in reality, in actual sense, world-class railway stations are not progressing in a very fast mode.
In a report that I submitted, there is a mention of tourism promotion and pilgrim circuit. The Railways can make one circuit with places of interest of tourism. But no response is yet appearing from the Railways except one or two circuits which have been accepted. A detailed report has been placed.
Similarly, the Indian Railway Catering and Tourism Corporation (IRCTC), has also been advised to take care of the food in the railway. Many people like to go on train journey. They say that they will travel by train, they will get good quality of food, they will enjoy the trip. But, sometimes, such type of food which is delivered and supplied to the passengers is not acceptable at all.
One of my colleagues, Shrimati Aparupa Poddar, told us that the food is prepared on the previous night and is delivered the next day. That becomes a stale food. So, the IRCTC has announced that their base kitchens are to be kept very neat and clean, and food will be properly cooked but actually it is not being maintained.
Sir, you know a few royal trains are operated in our country. These are for the foreigners. The names of the trains are: Palace on Wheels, Maharaja Express, Golden Chariot, Royal Rajasthan on Wheels, Deccan Odyssey. These are the trains with above 5-star hotel arrangements. The payment for the tickets is to be made in dollars. But the occupancy rate has come down to less than 30 per cent.
14.00 hrs All these trains are moving with vacant seats. It was submitted in the report of the Committee as to how many railway officials had complimentarily availed of travel and other facilities in these super quality trains. Their names have been categorically mentioned in the report. If the Railway Minister asks for the report, I will submit it before the House.
Sir, these super quality trains in the country offer travel packages of seven to eight days. I would submit for the consideration of the Railway Minister that the package duration should be reduced to three to four days. अगर ट्रेन सात-आठ दिन चले तो लोग बोर हो जाते हैं, इसलिए नहीं जाना चाहते हैं । इसको तीन-चार दिन का कीजिए, इससे उसका अक्युपेंसी रेट बहुत अच्छा और ज्यादा होगा ।
There are 8,495 A1 category railway stations in the country. How many of them have retiring rooms? Only 559. There are 1,47,523 railway bridges in the country.
14.01 hrs (Shri A. Raja in the Chair) Among them are the bridges which have crossed the age of 100 years. How many such bridges are still safe and secure for train travel? There are three types of bridges - important, major and minor. There are 700 important bridges, 12,085 major bridges and 1,32,738 minor bridges which are small road bridges. The number of railway bridges which have crossed 100 years of age being so high, the question of safety and security of passengers assumes importance.
There was a Safety Review Committee under the Chairmanship of Shri Anil Kakodkar set up in 2012. I mentioned it in our Committee report also. Shri Kakodkar made many recommendations but they have not been accepted to the desired level. I want to know how many recommendations of the Kakodkar Committee of 2012 have been accepted by the Government.
Sir, we hope that the Indian Railways will achieve zero accidents rate. That should be the motto of Indian Railways.
Sir, there is the issue of vacancies in Indian Railways. The number of vacancies in the Railways is huge. There is a group called Gangmen among railway employees. These people look after the railway lines day and night. They are the most important people for regular running of the trains. Their name may be Gangmen and they may be Grade-IV employees, but it is they who actually maintain the railway line. The number of vacancies in this grade has reached more than two lakhs.
There is a shortage of Drivers in Indian Railways. Drivers are overburdened with work. They do get tired. You will find that most railway accidents occur in the early hours between 3 AM and 5 AM. That is because the train drivers feel sleepy at that time. They fall asleep at the wheel as a result of which the railway accidents take place.
I want to know from the Government whether you are now well-capable with the strength of railway drivers which is directly connected and associated with the safety and security of the common passengers. When are you going to fill the vacancies which are persisting now in Indian Railways including the Gangmen, which is very directly associated with people’s life?
The progress relating to railway facilities in North-East is equally slow. A few minutes back, Gaurav Gogoi, who was a Member of the Railway Standing Committee also, was mentioning that they have discussed about North-Eastern railway projects but no such progress is being seen. I want to know the operating ratio of Indian Railways. It is very important. I think, the Minister in his statement has said that his motto is that the passengers should get world-class experience with speed, safety and service, which are not at all being visible in the present railway system.
Sir, more attention and priority are to be given to complete Dedicated Freight Corridors. I would also like to tell you that the proposal of bullet train is not possible in India. It is bogus. In the Indian soil, bullet trains cannot move, cannot run. These can be called as high-speed trains only. Bullet trains totally have a separate structure. We are aware of bullet trains of Japan. Here, it is being told that bullet train is going to be inaugurated on Ahmedabad to Mumbai route. This is not correct. High-speed trains are possible to operate, to run in the country, but never bullet trains. It is a hoax; it is a false assurance being given to the common people.
Sir, regarding passengers’ amenities, huge allegations have come up. There are no pantry cars in the railway compartments of trains which have a journey time of 12 to 16 hours. These are available only in those trains which have more than 24-hour journey time or in big trains like, Rajdhani Express and Shatabdi Express, which are running on long routes. But trains completing its journey within 12 to 16 hours are not having pantry cars. The Government should take care of this.
Sir, I propose that base kitchens should remain clean. Safety, security, passengers’ amenities, well-organised railway stations, cleanliness, food quality, condition of the railway compartments, and quality of coaches in trains are to be maintained and provided for, including, Wi-Fi facilities and CCTV facilities.
The success of railway service depends upon the work culture of the employees. So, this side is also to be looked after because it has a huge number of employees – one of the largest in the world. Their work culture is more important so that, Indian Railways can run and operate smoothly.
Sir, 23 million passengers travel every day, which Kanimozhi was also mentioning in the House. Railways operates 13,330 passenger trains and handles 1,000 million tonnes of freight traffic by 9,212 freight trains over 67,368 route kilometres. It is a very serious subject and it should be taken care of.
Railways has 8,500 railway stations with category A, B, C, D, E, and F, considering its passengers traffic at the stations. Without proper and effective work culture, it cannot run smoothly and to the satisfaction of the people.
Let train journey be a journey of joy, not a journey of fear. We should not forget to declare Railways as the lifeline of our country and it is economical as well.
This is the reason why we wanted the Railway Budget to be discussed separately. But it is now joined with the General Budget and it did not help the Railways.
Ms. Mamata Banerjee’s name was raised here. So long as Ms. Mamata Banerjee was the Railway Minister, not a single rupee was increased in railway fares at any stage. A monthly railway ticket called ‘Izzat’ at the price of Rs. 15 was given to the BPL sections and they used to travel in railway trains keeping their heads high. They were not afraid of Ticket Examiner entering their compartments. Members of Parliament were authorised to certify a BPL person for issuance of this ticket, whoever he or she may be. In Kolkata, there is East-West metro train. It is not being completed. In the Budget, an amount of only Rs. 30 lakh has been allocated for Kanchrapara Rail Coach Factory which is a joke. It is a proposed project of Rs. 760 crore. Shrimati Kanimozhi was telling, 800 करोड़ रुपये के प्राजेक्ट्स पर केवल 10 लाख रुपये दिये । The same thing is here. They have allotted only Rs. 30 lakh for a project of Rs. 760 crore. Similarly, expertise training centres were proposed at Dankuni, Malda and Beliaghata. All of them have been allotted Rs. 5 lakh only. So, I feel that a very step-motherly attitude has been reflected in the Budget. The Eastern region, especially West Bengal, has always been the sufferer of the regional imbalances. Here, it is reflected in the same way. Now, South India is going to be added to this list. I hope that the Ministry of Railways will take all positive steps to see that funds are allocated to the whole country treating everyone as equal and the proposals which we table from the Standing Committee for the consideration of the Railway Ministry will be implemented. Thank you.
SHRI BALLI DURGA PRASAD RAO (TIRUPATI): Hon. Chairperson, Sir, the hon. Minister in her maiden Budget said that Indian Railways’ infrastructure will need an investment of Rs. 56 lakh crore till 2030. As per the details shared by the Railway Ministry, in the Financial Year 2018-19 the Gross Traffic Receipts stood at Rs. 1,96,714 crore and the total working expenses were Rs. 1,88,800 crore. In the financial year 2018-19, the earnings from passenger trains were Rs. 52,000 crore and the earnings from freight trains were Rs. 1,29,750 crore. In 2019-20, the earnings from passenger trains are expected to be Rs. 56,000 crore and the earnings from freight trains are likely to be Rs 1,43,000 crore.
Meanwhile, the Railway Budget 2019 also claimed to complete the electrification of Railways’ broad-gauge network by 2021-22. For 2019-20, electrification of 7,000 route kilometre has been targeted. Moreover, the target of new railway lines, gauge conversion, doubling and tripling for this year is 3,750 kilometres against 3,596 kilometres previously. Allocations of Rs. 20,000 crore has been made for the Railway Safety Fund for 2019-20. Elimination of all unmanned level crossings is an appreciable action of the Railway Ministry.
In the Budget, funds of Rs.7,255 crore have been allotted for construction of new railway lines, Rs.2,200 crore for gauge conversion, Rs.700 crore for doubling, Rs.6114.82 crore for rolling stock, and Rs.1,750 crore for signalling and telecom.
With regard to my new State, Andhra Pradesh, the total cost of Obulavaripalle-Krishnapatman project is Rs.733 crore. So far, 20 km. has been completed and the target is to complete the remaining 93 km. in the current financial year. No timeframe has been mentioned for the completion of this project.
Sir, Rs. 5 crore has been allotted for Guntur-Tenali doubling and electrification project. Is this money sufficient? The Minister may explain the distance that has to be covered and the timeframe for completion of this project.
For Nadikudi-Srikalahasti new line project, Rs.700 crore has been allotted. The original cost of this project, which was sanctioned in 2011-12, was Rs.2,450 crore. So far, we have spent Rs.309 crore only. When will the remaining amount be spent? This project will connect four districts of Chittoor, Nellore, Ongole and Guntur. What is the timeframe for completion of this project?
Cuddapah-Bengaluru new line project, with a distance of 255 km., costs about Rs.2,030 crore. Under the South Central Railway, this project was planned in four phases; three phases in Andhra Pradesh and one phase in Karnataka. Only 21 km. route has been commissioned. For the last four years, Rs.165 crore has been spent on this project. I would like to know when will this project be completed. This year, the allocation made for this project is only Rs.210 crore. How is it possible to complete the work? People of that area have been asking me about this from time to time.
Kotipalli-Narsapur new line project, with a distance of 57 km., costs Rs.2120 crore. The expenditure incurred on this project so far is only Rs.323 crore. This is a PPP project in which the contribution of the Central Government is 75 per cent and the State Government’s contribution is 25 per cent. So far, this project is going at slow pace. I would request the Government to speed up the project. I would like to know the details regarding time schedule between the State and the Centre. This has to be informed properly.
Gooty-Dharamavaram double line project in Anantapur district, with a distance of 90 km., is estimated to cost Rs.636 crore. So far, 33 km has been completed. There is a need to complete the remaining 57 km. within two years. The Government should fix the time schedule for completing this project which covers the interior and backward areas of Anantapur. The Government has released only Rs.126 crore for this project in this financial year. How is it possible to complete it?
Vijayawada-Kazipet junction is known to everybody. This will connect two States. The purpose of this line is to run majority of the trains without disturbing cargo transport. This has been given top priority. It will provide good connectivity between Andhra Pradesh and Telangana. The amount allotted for this project is Rs.110 crore. The original cost of this project was Rs.1,857 crore. We would like to know the fate of this programme.
Another point is regarding Vijayawada Junction to Guntur Junction connectivity. This is a very important and good traffic line for going towards Chennai, Bengaluru and Kerala. I think some formation of earth road is going on for rail connectivity. This work has to be completed on a stretch of 287 kilometres at an estimated cost of Rs.1857 crore. So far, an expenditure of only Rs.284 crore has been incurred on this project. No time-line has been informed for this project. This has to be informed in an appropriate manner.
Our State is a new State. The development of railway work is going on at a very slow pace. A line between Obulavaripalli and Krishnapatnam was recently inaugurated by His Excellency, the President of India and His Excellency, Vice President of India together. Only 20 per cent work has so far been completed. Therefore, the balance work has to be completed as early as possible.
When they are constructing railway station in a particular area, they do not give it the name of proper village. They give the name of some other village. With the result, a lot of complaints have come. Recently, I had informed the Minister about this.
As regards our State, our hon. Chief Minister, Shri Jagan Mohan Reddy, has come to power only 42 days ago. It is a new State. Our State is having a deficit of Rs.2000 crore. Is the hon. Minister doing justice to us? I would request the Minister to sanction another Rs.1000 crore for completing all these projects.
Regarding my Constituency, Tirupati, as you know, Lord Balaji Venkateswara Swami temple is situated there. For the beautification of railway station there, they have spent some amount. For the development of second entry at Tirupati railway station, they are giving Rs.12 crore only.
HON. CHAIRPERSON: Please wind up. One more Member from your Party is going to speak.
SHRI BALLI DURGA PRASAD: Sir, I will conclude in another three minutes.
Sir, a wagon workshop was to be set up in Tiruchanur but so far no action has been taken. Besides, in Nellore district, more than 1800 acres of Railway property is there. There is a very big junction. Mr. Lalu Prasad Yadav laid foundation for a sleeper factory there. Now 1800 acres of Railway land is lying vacant. People are expecting that a factory will certainly come up in Nellore district.
Another point is regarding Kovvur to Bhadrachalam line. It will connect Telangana, Andhra Pradesh and other places. It is also pending. You have to give special priority to Bitragunta. It is because so far people are protecting 1800 acres of land. The hon. Minister was saying that they are purchasing private land for the construction of some factory.
Thank you.
श्री राजन बाबूराव विचारे (ठाणे): अध्यक्ष जी, मैं आपको धन्यवाद देता हूं कि आपने मुझे बोलने का अवसर दिया है । मैं माननीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण जी, माननीय रेल मंत्री, श्री पीयूष गोयल जी और माननीय रेल राज्य मंत्री,श्री सुरेश अंगाड़ी जी का अभिनंदन करता हूं कि उन्होंने एक ऐसा अच्छा बजट पेश किया है, जिसका समाज के हर वर्ग ने स्वागत किया है । यह बजट वाकई दूरगामी परिणामों वाला है, जिसके बेहतर नतीजे जल्दी ही आने वाले सालों में नजर आएंगे । वैसे तो रेल बजट में समाज के हर वर्ग के लोगों एवं उनकी जरूरतों को पूरा करने का ध्यान रखा गया है । इस बार के बजट में भी यात्री किराए में कोई बढ़ोतरी नहीं करके रेल यात्रियों को राहत देने का काम किया है, जिसके लिए मैं माननीय वित्त मंत्री जी एवं रेल मंत्री जी को धन्यवाद देता हूं । इस बार के रेल बजट में भी यात्री सुविधाओं और आधुनिकीकरण के साथ-साथ रेलवे के ढांचागत विकास पर विशेष जोर दिया गया है । मैं महाराष्ट्र के ठाणे से दूसरी बार चुना हुआ जनप्रतिनिधि हूं । मैंने वहां की रेल से संबंधित समस्या समय-समय पर माननीय रेल मंत्री जी के सामने रखी हैं ।
इस बार के रेल बजट में स्टेशनों का सौंदर्यीकरण करने की भी योजना शामिल है एवं देश के 22 प्रमुख रेलवे स्टेशनों का विश्व स्तरीय पुनर्विकास इंडियन रेलवे स्टेशन डेवेलपमेंट कॉरपोरेशन द्वारा कराने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके बाद आने वाले समय में इन स्टेशनों को अंतर्राष्ट्रीय स्तर का बनाकर,वहां एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं मुहैया कराई जाएगी । ऐसा पहली बार होने जा रहा है । मैं आपके माध्यम से माननीय रेल मंत्री जी से मांग करता हूं कि मेरे संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ठाणे रेलवे स्टेशन को भी इसमें शामिल किया जाए ।
वित्त मंत्री जी ने अपने बजट भाषण में बताया है कि भारतीय रेल और मेट्रो प्रोजैक्ट में भी पीपीपी मॉडल के जरिए निजी भागीदारी को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे निश्चित रूप से रेलवे के विकास में तेजी आएगी । बजट में रेलवे में पीपीपी मॉडल रेलवे स्टेशन आधुनिकीकरण प्रोग्राम लॉन्च होने की बात बताई गई है । मेरे संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला ठाणे रेलवे स्टेशन जो एक ऐतिहासिक रेलवे स्टेशन है, वहां से पहली ट्रेन दिनांक 16 अप्रैल, 1853 को बोरीबंदर से ठाणे के बीच चली थी । इसे लगभग 164 साल बीत चुके हैं । इस स्टेशन से करीब 7-8 लाख यात्री प्रतिदिन आवागमन करते है एवं मध्य रेलवे के अंतर्गत मुंबई के बाद ठाणे स्टेशन से सरकार को प्रतिदिन 50 लाख रुपये की आमदनी होती है । मैं आपके माध्यम से माननीय रेल मंत्री जी से मांग करता हूं कि ठाणे रेलवे स्टेशन को वर्ल्ड क्लास स्टेशन का दर्जा दिया जाए एवं यहां यात्रियों के लिए और भी अतिरिक्त सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं ।
साथ ही ठाणे रेलवे स्टेशन पर बनाई गई पुरानी इमारत, जो कि काफी जर्जर अवस्था में पहुंच चुकी है, वह कभी भी गिर सकती है । मैं आपके माध्यम से माननीय रेल मंत्री जी से मांग करता हूं कि जर्जर इमारत की जगह एक नई इमारत की निर्माण कराने की कृपा करें । इसके लिए वे इस बजट में प्रावधान करने की कृपा करें ।
वित्त मंत्री जी ने बजट में बताया है कि रेल ढांचे के मॉडर्नाइजेशन और स्वीकृत योजनाओं को पूरा करने के लिए वर्ष 2030 तक का लक्ष्य रखा है । अध्यक्ष जी,मैं आपके माध्यम से माननीय रेल मंत्री जी का ध्यान अपने संसदीय क्षेत्र ठाणे के अंतर्गत आने वाले मध्य रेलवे के दो किलोमीटर लंबे ऐरोली-कलवा लिंक के काम की तरफ दिलाना चाहता हूं, जिसका भूमिपूजन आदरणीय प्रधान मंत्री जी श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा हो चुका है । लेकिन तीन सालों से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी अभी तक दूसरे चरण का काम शुरु नहीं हुआ है । मैं आपके माध्यम से माननीय रेल मंत्री जी से इसे जल्दी से जल्दी शुरू कराने की मांग करता हूं ।
साथ ही,ठाणे तथा मुलुंड के बीच मेंटल अस्पताल की जगह पर प्रस्तावित नया ठाणे स्टेशन बनाने की मंजूरी मिल चुकी है और उसकी लागत राशि भी जमा हो चुकी है, जिसके काम को भी जल्दी से जल्दी पूरा करने की मांग, मैं आपके माध्यम से माननीय रेल मंत्री जी से करता हूं ।
महोदय,मेरे संसदीय क्षेत्र ठाणे नवी मुम्बई (सैंट्रल और हार्बर) एवं मीरा रोड एवं भायंदर (वेस्टर्न रेलवे)से जुड़ी रेल परियोजनाओं पर ध्यान देते हुए ज्यादा से ज्यादा 15 डिब्बों वाली लोकल सेवा, एसी लोकल शुरू करने एवं लम्बी दूरी की रेलगाड़ियों का ठहराव भायंदर स्टेशन पर देने की मांग,मैं आपके माध्यम से माननीय रेल मंत्री जी से करता हूं । साथ ही साथ नवी मुम्बई के सभी रेलवे स्टेशनों पर एक्सेलेटर,लिफ्ट, फुट ओवर ब्रिज एवं महिला शौचालयों की सुविधा देने की मांग भी मैं आपके माध्यम से माननीय रेल मंत्री जी से करता हूं ।
महोदय,अंत में मैं अपनी बात खत्म करते हुए कहना चाहता हूं कि सरकार द्वारा बजट में महाराष्ट्र राज्य में रेलवे के विकास के लिए जो भी घोषणाएं होती हैं या कोई निधि दी जाती है,उसका काम कम से कम 1 वर्ष में शुरू होना चाहिए, ताकि समय से हर परियोजना पूरी हो सकें ।
मैं इस बजट का समर्थन करता हूं और देश के माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी, माननीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण जी, माननीय रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल जी एवं माननीय रेल राज्य मंत्री श्री सुरेश अंगाड़ी जी का आभार प्रकट करते हुए उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं देता हूं ।
श्री दिनेश चन्द्रयादव (मधेपुरा):अध्यक्ष महोदय, आपने मुझे वर्ष2019-20 के लिए रेलवे की अनुदान मांगों पर बोलने का अवसर दिया, इसके लिए बहुत-बहुत धन्यवाद ।
महोदय, सबसे पहले मैं रेल मंत्री के प्रति आभार प्रकट करना चाहता हूं कि स्वतंत्रता के बाद बिहार के सुपौल से अररिया तथा अररिया से गलगलिया रेल परियोजना की स्वीकृति कर कोसी के अति पिछड़े क्षेत्र को अन्य क्षेत्र की तरह इसे भी विकास से जोड़ने का काम किया है । यह एक सीमावर्ती क्षेत्र है एवं सुरक्षा की दृष्टि से यह परियोजना बहुत ही महत्व रखती है ।
महोदय, आवश्यकतानुसार राशि उपलब्ध नहीं कराए जाने से इन परियोजनाओं का काम लंबित है । जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है, किंतु धनाभाव के चलते अधिग्रहण का काम भी बाधित है । अत:सरकार से मांग है कि इस महत्वपूर्ण परियोजना को जल्द से जल्द पूरा कराने की दिशा में आवश्यक पहल कर धनराशि उपलब्ध कराई जाए ।
महोदय, वर्ष 2008 में कोसी के प्रलयकारी बाढ़ से सरायगढ़, भपटियाही से फारबिसगंज तक रेल लाइन ध्वस्त हो गई थी । अभी तक इस रेल लाइन पर रेल यातायात चालू नहीं हो सका है । वर्ष 2016 से ही सहरसा से फारबिसगंज आमान परिवर्तन के लिए छोटी लाइन पर परिचालन बंद कर दिया गया था । आमान परिवर्तन का कार्य पूरा नहीं होने से रेल यातायात ठप्प है तथा आमान परिवर्तन का काम धीमी गति से चल रहा है । फलस्वरूप कोसी क्षेत्र का विकास अवरुद्ध है । सदन के माध्यम से मैं आग्रह करता हूं कि इन परियोजनाओं के काम में तेजी लाकर जल्द से जल्द पूरा कराया जाए ताकि इन पर रेल परिचालन शुरू हो सके ।
महोदय, उसी तरह सकरी से निर्मली होते हुए सरायगढ़-भपटियाही रेल परियोजना धनाभाव के चलते लंबित है, जबकि कोसी नदी पर पुल कई वर्ष पहले से तैयार है । अत:मैं सदन के माध्यम से माननीय रेल मंत्री जी का ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूं कि जल्द से जल्द उक्त लंबित रेल परियोजनाओं के मद में आवश्यकतानुसार धनराशि उपलब्ध कराकर इस क्षेत्र को भारत के अन्य शहरों से जोड़ने की कृपा करें । इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं ।
SHRI CHANDRA SEKHAR SAHU (BEHRAMPUR): Hon. Chairman Sir, on behalf of Biju Janata Dal, I thank you for giving me this chance to participate in this discussion on the Demands for Grants of Indian Railways. I also thank my leader, Shri Naveen Patnaik, for giving me this opportunity to be here as a Member of Parliament from Biju Janata Dal.
I also congratulate the first woman Finance Minister for presenting the Union Budget. The young, energetic Minister of Railways, Shri Piyush Goyal, for the wonderful performance of the Ministry of Railways.
You know that railways is the heartline of our country which has a great role in the socio-economic development of our country. It has been connecting all parts of our country and is helping in the national integration. It has united us cutting across regional, linguistic, caste, creed and religious identities, carrying them together and penetrating to different parts of the country.
Traditionally, the Railway Budget was presented separately and thus, there was a focus on railway development. It was so important for the Members to raise issues relating to their constituencies while participating in the debate on the Railway Budget in this august House but after merging the Railway Budget with the General Budget, it has not been given any focus.
Since we are a developing country, the infrastructure development through railways has a great importance.
In this Budget of 2019-20, the hon. Finance Minister has given Rs. 68,000 crore for the railways. Our Chief Minister, Shri Naveen Patnaikji and the people of Odisha were surprised when they got to know that the Central Government Budget allotment for Odisha in respect of Railways is not up to their expectations. Considering the bucket of on-going projects like Khurda-Bolangir, Jeypore-Nabarangpur, Jeypore-Malkangiri, Talcher-Bimlagarh etc., my State, Odisha requires increase of capital allotment to complete the on-going projects early.
Sir, no new line project has been sanctioned in this year’s Budget for Odisha. This is disappointing for our Chief Minister, Shri Naveen Patnaikji and also for the people of Odisha as the rail density in Odisha is hardly hovering around 15 per 1000 square kilometres which is much less than the national average of about 20, and even much lesser compared to adjoining States like West Bengal and Bihar. Odisha needs new projects, and all railway projects are economically beneficial to Railways as well. The Gopalpur-Rayagada project alone has 17.5 per cent rate of return, and combining it with Gunupur-Therubali, the rate of return would be 24 per cent. After all, Railways earn about Rs. 20,000 crore a year from Odisha alone.
Sir, new projects such as Puri-Konark, Brahmapur-Sambalpur via Kandhamal, Bargarh-Nuapada, Jajpur-Dhamra, Bangiriposi-Gorumahisani and Buramara-Chakulia have been proposed by our dynamic Chief Minister, Shri Naveen Patnaikji to the Ministry of Railways. Our State Government has also offered financial participation for many of these projects. These projects need early sanctioning by the Ministry of Railways as these will connect the mineral-rich areas with existing and upcoming ports as well as tribal areas of the State.
Sir, some of the earlier sanctioned important projects have been given very meagre allotments which points to no real progress. The Gunupur-Therubali new line sanctioned in 2017-18 Budget is yet to even receive CCEA approval. Similarly, for the Jaleswar-Digha project, even land acquisition has not been done since last five years. Our Chief Minister, Shri Naveen Patnaikji has already requested for a change of alignment to make the project take-off in Odisha to the Ministry of Railways.
To ensure seamless flow of traffic and easier access between industrial and mining areas and ports, the following short links need to be sanctioned at the earliest:
1. Puri-Konark
2. Paradip-Dhamra
3. Champua-Anandpur-Jajpur
4. Baripada-Jajpur Keonjhar Road
5. Talcher-Angul
6. Talcher-Gopalpur Additionally, Jajpur Keonjhar Road-Jajpur via Aradi link is equally important for pilgrims visiting the religious destination at Biraja Kshetra which can be comparable to Dwarka and Kashi.
Now, I come to the point of introduction of new trains. The following new trains may be introduced:
1. One train from Berhampur to Ahmedabad and Surat. As 30 lakh people from Odisha are working in Surat, a daily train from Berhampur to Surat may be started.
2. One more daily train from Bhubaneswar to Mumbai via Vishakhapatnam, Vijayawada, Secunderabad (apart from Konark). This is the only train in which lakhs and lakhs of people travel every week.
3. Daily train from Rourkela to Bangalore via Bhubaneswar and Berhampur.
4. Jamshedpur to Hyderabad via Rourkela, Bhubaneswar and Berhampur.
5. Bhubaneswar to Sambalpur via Berhampur and Bolangir.
6. Gunupur to Howrah via Berhampur.
7. Jamshedpur to Vishakhapatnam via Dhanbad, Bhubaneswar and Berhampur
8. One passenger train from Bhadrak to Dhamra port and Akhandalamani, a famous Shiva Peeth.
The next point is regarding increase in frequency of trains. The frequency of Vishakhapatnam-Amritsar (Hirakund Express) may be increased from three days in a week to daily. Since more than 10 years, this train is running three days a week. So, I request that it should run daily.
I also request that Samata Express which runs from Vishakhapatnam to H. Nizamuddin should run daily.
The next point is regarding extension of trains.
1. Odisha-Sampark Kranti Express and Delhi-Bhubaneswar Duronto may be extended up to Berhampur.
2. Dhanbad-Bhubaneswar Tapaswini Express may be extended to Berhampur.
3. The train from Mumbai to Vishakhapatnam may be extended up to Bhubaneswar.
To meet the travelling needs of daily commuters, there is a need to introduce DEMU/MEMU services in Sambalpur-Jharsuguda-Rourkela, Cuttack-Paradip, Brahmapur-Balasore and Rourkela-Keonjhar corridors.
Cuttack and Bhubaneshwar together are developing as a twin city and as per the Comprehensive Development Plan prepared by IIT, Kharagpur, the combined population shall be 2.7 million by the year 2021 which shall necessitate a Mass Rapid Transit System (MRTS). Considering the growth of this area, this would be an appropriate time to commence detailed planning for rail-based city transport system in greater Bhubaneswar region.
It may be mentioned here that Bhubaneswar has not only been ranked `No. 1 Smart City’ in India, but also has bagged honours as the only city from India in the Smart City Expo World Congress, held recently in Barcelona with rank three across the globe. Therefore, urgent planning for land and other technical requirements for a MRTS system is imperative to keep pace with the development and aspirations of the capital city. …(Interruptions). Sir, I am the only speaker. Please give me two minutes.
HON. CHAIRPERSON: Please conclude.
SHRI CHANDRA SEKHAR SAHU : Bhubaneswar to Puri may also be considered under Mass Rapid Transit System (MRTS).
Development of Railway Stations : Sir, as far as development of railway stations is concerned, the Railways has earlier shortlisted 12 stations in 2016-17, but no work has started so far. However, our Chief Minister, Shri Naveen Patnaik Ji has committed to re-develop Bhubaneswar station into a world class one with State Government funds. Railways need to expedite railway station re-development in Odisha. The work for re-development of stations at Cuttack, Berhampur, Baleswar, Sambalpur, Rayagada, Jeypore need to be taken up expeditiously.
The cyclone `Fani’ has totally devastated the holy city of Puri and the railway station has also been devastated. It has a pilgrimage importance. There is an urgent need to re-develop the Puri railway station. It has completely gone. Nothing has been done till now. As you know, cyclone `Fani’ has occurred mainly in Puri. I request the Government to look into the matter.
As you are aware that cyclone `Fani’ has damaged infrastructure set up by State and various Central Government agencies. Indian Railways is one of them. It has suffered a loss of Rs. 400 crore in the form of damages and Rs. 200 crore in the form of loss in earning capacity due to damage caused by cycle `Fani’. …(Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: Please conclude.
SHRI CHANDRA SEKHAR SAHU: Yes Sir, I am just concluding. The East Coast Railway Zone, where railway infrastructure is damaged, is one of the highest loading Railway zones of Indian Railways. There is a need for separate allocation for restoring the damaged Railway infrastructure in my State.
It is a very important issue. Our Chief Minister has also raised this issue many times. In Sitallapalli, a wagon factory was sanctioned in 2011 and 100 acres of land has been given by our dynamic Chief Minister, Shri Naveen Patnaik Ji to the Ministry of Railways, but the people of Odisha were surprised when they came to know that this factory does not figure in the Budget for 2019-20.
HON. CHAIRPERSON: Please conclude.
SHRI CHANDRA SEKHAR SAHU: Similarly, the Kalahandi Locomotive workshop also sees a reduced token allotment of Rs. 1 crore in the Budget. Considering the employment opportunities and migration of labour, there will be a great impact on the people of Odisha if operationalization of these projects will be delayed.
I have one more small suggestion to make. Earlier, in DRUCC’s meetings, Chamber of Commerce of the concerned area was given representation. This has been stopped now. I request again that the Chamber of Commerce representation may be given in DRUCC.
Lastly, for development of India, it is imperative for Government of India to give focus to our State of Odisha which has historically faced discrimination in allotment of funds for Railways. Our Chief Minister, Shri Naveen Patnaik Ji has a very positive approach.
He has provided free land for railway projects and contributed up to 50 per cent of construction cost. He has also exempted stamp duty as registration fees on land procurement for all railway projects in our State.
Therefore, this is the time for the Union Government to help our State as a big brother with great heart and review the railways proposals including some of the long standing new line projects concerning our State, and also enhance real capital allotment in this sector to expedite the ongoing projects.
With these words, I once again thank you, and hope that the hon. Minister of Railways will look into the concerns of our State Odisha.
Thank you very much.
HON. CHAIRPERSON: Hon. Members, those of you who want to lay their written speeches on the Table of the House, y may do so. It will be treated as part of the proceedings of the House.
श्री हाजी फजलुर रहमान (सहारनपुर): माननीय सभापति महोदय, आपका बहुत-बहुत शुक्रिया कि आपने मुझे रेलवे पर चर्चा करने के लिए आमंत्रित किया । मैं इसके साथ-साथ सहारनपुर लोक सभा क्षेत्र के लोगों का भी धन्यवाद देना चाहूंगा,जिन्होंने मुझे संसद में भेजने का मौका दिया । मैं आपके माध्यम से सरकार के संज्ञान में लाना चाहूंगा कि सहारनपुर जनपद,जहां से मैं निर्वाचित होकर आया हूं, वह शहर न केवल अपने देश, बल्कि देश के बाहर भी वुड कार्विंग के रूप में जाना जाता है । यहां से वुड कार्विंग का किया गया कार्य पूरे देश में जाता है । इसके अलावा सहारनपुर से पर्यटक रेल यात्रा कर उत्तराखण्ड में प्रवेश करते हैं । कहने का तात्पर्य यह है कि औद्योगिक क्षेत्र के साथ-साथ पर्यटकों के लिए भी सहारनपुर रेलवे स्टेशन महत्वपूर्ण स्टेशन है । मैं चाहूंगा कि कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर रेल मंत्रालय का ध्यान न केवल रेल राजस्व की वृद्धि करेगा,बल्कि यात्रियों को भी अधिक से अधिक सुविधा प्रदान करेगा ।
पहला बिंदु है, सहारनपुर टपरी स्टेशन से मुजफ्फरनगर तक रेलवे लाईन के दोहरीकरण का कार्य बहुत दिनों से चल रहा है, लेकिन इसकी गति इतनी धीमी है कि यह नहीं कहा जा सकता कि यह कार्य कब पूरा होगा । मैं चाहूंगा कि संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया जाए, जिससे रेलवे लाइन दोहरीकरण का कार्य यथाशीघ्र पूरा किया जा सके ।
दूसरा महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि सहारनपुर से दिल्ली के लिए सुबह 9 बजकर 15 मिनट और शाम 4 बजकर 30 मिनट के बीच कोई भी एक्सप्रेस ट्रेन नहीं है,एकमात्र पैसेंजर ट्रेन है । मैं मंत्री जी से गुजारिश करता हूं कि बताए हुए समय के बीच एक एक्सप्रेस ट्रेन अनिवार्य रूप से देने का कार्य करें, जिससे व्यावसायिक लोगों के साथ-साथ आम जनमानस को भी रेलवे की सुविधा प्राप्त हो सके । सहारनपुर रेलवे स्टेशन के नजदीक देवबंद है, जहां पर विश्व प्रसिद्ध मदरसा दारुल उलूम व सिद्ध पीठ संस्कृत विश्वविद्यालय है, जहां शिक्षा के लिए देश से ही नहीं बल्कि विदेशों से भी लोग आते हैं । यहां पर मुख्य रूप से दो गाड़ियां हैं । इन दो गाड़ियों गोल्डन टैम्पल मेल 12904 और उधम एक्सप्रेस 22432 का ठहराव सुनिश्चित किया जाए । माननीय मंत्री जी को मैंने इससे पूर्व इस बावत् एक पत्र लिखा है । सहारनपुर रेलवे स्टेशन एक बहुत बड़ा जंक्शन है । यहां पर सफाई का कार्य उचित नहीं है, इस पर ध्यान दिया जाए । साथ ही साथ औद्योगिक क्षेत्र, जिसमें वुड कार्विंग व हौजरी मशहूर है,इनका डिस्प्ले भी रेलवे स्टेशन पर लगाया जाए,ताकि इस प्लेटाफॉर्म से गुजरने वाला प्रत्येक व्यावसायिक व्यक्ति यहां के औद्योगिक महत्व को समझ सके ।
माननीय अध्यक्ष जी, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यहां पर कॉमन प्लेटफॉर्म की संख्या केवल दो है- चार और पांच । प्लेटफॉर्म चार को किसी तरह से बढ़ाकर तीन और चार में बांट दिया गया है । मेरा आपसे यह निवेदन है कि सहारनपुर जंक्शन का सौंदर्यीकरण करते हुए कॉमन प्लेटफॉर्म की संख्या बढ़ाई जाए,ताकि ट्रेन सही समय पर आकर भी सिग्नल से बाहर न रूकी रहे और यात्रियों को परेशानी न हो सके । इसके अलावा माननीय मंत्री जी से अनुरोध है कि जो बुलेट ट्रेन चलाने की तैयारी है, जिस पर बेइंतहां पैसा खर्च किया जा रहा है और जिसका फायदा एक खास इलाके के लोगों को ही होगा, कृपया करके उसका 50 परसेंट छोटे शहरों पर भी खर्च कर दिया जाए तो पूरे भारत के छोटे शहरों की रेल व्यवस्था भी बेहतर हो जाएगी । धन्यवाद ।
*SHRI BHARTRUHARI MAHTAB (CUTTACK): Indian Railways has the fourth largest rail network in the world after United States, China and Russia. It has monopoly in providing rail services in India.
The Railway’s Revenue for 2019-20 is estimated at Rs.2,16,935 crore which is a 10% increase from the revised estimates of 2018-19. Total revenue from traffic for 2019-20 is estimated at Rs.2,16,675 crore, which is 10% increase from RE of 2018-19. In 2019-20 revenue from freight and passenger traffic is expected to grow by 10% and 8% respectively. In 2018-19 (RE) the revenue from freight traffic increased by 6% while revenue from passenger traffic did not see any change. The total expenditure by Railways for 2019-20 is projected at Rs.2,07,900 crore which is a 9% increase from the RE of 2018-19. In 2018-19 (RE) total expenditure increased by 2%.
In the last few years, Railways has been struggling to generate its own revenue. Railway’s operating ratio has consistently been higher that is 90% in the past several years, which indicates that its capability to generate operational surplus is low. The growth rate of Railways earnings from its core business of running freight and passenger trains has been declining. This is due to a decline in the growth of both freight and passenger traffic. Railways is slowly losing traffic share to other modes of transport. The share of Railways in total freight traffic has declines from 89% in 1950-51 to 30% in 2011-12. On the other hand, Railways’ expenditure on salaries has been gradually increasing with a significant jump every few years due to pay commission revisions. There is an increasing expenditure on pension too, which is unproductive, as this does not generate any revenue for the Railways. The pension bill may increase further in the next few years, as about 40% of the Railways staff was above the age of 50 years in 2016-17.
The Union Government supports Railways in order to expand its network and invest in capital expenditure. A decline in the growth of internal revenue generation has meant that Railways has been funding its capital expenditure through budgetary support from the Central Government and borrowings. While the support from Central Government has mostly remained consistent. Railways’ borrowings have been increasing. In 2019-20 the gross budgetary support from Central Government is proposed at Rs.66,105 crore. This is a 25% increase from the revised estimates of 2018-19 which was Rs.53,060 crore.
Railways earns its internal revenue primarily from passenger and freight traffic. In 2017-18 freight traffic was 65% and passenger traffic was 27% of the internal revenue. In 2019-20 Railways expects to earn 66% of its internal revenue from freight and 26% from passenger traffic. The remaining 8% will be earned from other miscellaneous sources such as parcel service, coaching receipts, sale of platform tickets and advertisements.
In 2019-20 Railways expects to earn Rs.1,43,000 crore from goods traffic which is in an increase of 10% over the revised estimates of 2018-19. In 2019-20 Railways expects to earn Rs.56,000 crore from passenger traffic, an increase of 8% over the revised estimates of 2018-19. However, the Government expects a growth in passenger traffic from 2019-20 to be 2.7%. In 2018-19 (RE) there was a 2% increase in passenger traffic.
One major issue regarding Railways is Extra Budgetary Resources which include market borrowings such as financing from banks, institutional financing and external investments. External investments in Indian Railways seen in the form of public private partnerships, joint ventures and market financing by attracting private investors to potentially buy bonds or equity shares in Railways. Indian Railways Finance Corporation (IRFC) borrows funds from the market and then follows a leading model to finance the rolling stock assets and project assets of Indian Railways. In the past few years, borrowings have increased sharply to bridge the gap between the available resources and expenditure. In 2019-20 Rs.83,571 crore is estimated to be raised through EBR which is an increase of 5 % over revised estimates of 2018-19 (Rs..79,298 crore) Indian Railways does not have an institutional arrangement to attract and aggregate traffic of smaller parcel size. Therefore, it has been losing out on high potential markets such as FMCGs, hazardous materials or automobiles and containerized cargo. Most of this traffic is transported by roads. It is an accepted fact that freight cross-subsidies passenger traffic. In 2014-15, while Railway freight business made a profit of about Rs.44,000 crore, its passenger business incurred a net loss of about Rs.33,000 crore. The total passenger revenue during this period was Rs.49,000 crore. Therefore, in 2014-15 for every one rupee earned in its passenger business, Indian Railways ended up spending Rs.1.67. Various experts have recommended rationalizing both freight and passenger fares. Passenger business losses is being classified as the social service obligations. But three issues arises from such classification. First, it is not clear whether this figure hides any operational ineffectiveness. The Committee on Restructuring Railways had noted that the methods of calculating the cost of running passenger business are not scientific and accurate.
Second, inefficiency in Railways’ fare structure also is a factor contributing to the losses in the passenger service business. Niti Aayog has suggested that Railways can price passenger fares as per the prevalent market rates in corresponding transport modes. The CAG has noted in 2018 that there is no justification for the Railways for not fully recovering the loss of passenger services in case of AC and First Class Travel. Third, this raises the question whether Railways should bear these social obligations, when it works as a commercial department under the Government.
The Standing Committee on Railways in 2017 had recommended that the Ministry of Finance should reimburse the Ministry of Railways on losses made on all strategically important lines. Till 2016-17 the Ministry of Finance was reimbursing Railways for operational losses on fixed strategic lines. Now talking about expenditure one can say staff wages and pension together comprise more than half of the Railways’ expenditure. In 2019-20, the total expenditure by Railways is estimated at Rs.207,900 crore which is 9% increase over the revised estimates of 2018-19. For 2019-20 the expenditure on staff is estimated at Rs.86,554 crore, which is 11% higher than the revised estimates of 2018-19. Allocation to the Pension Fund is estimated at Rs.50100 crore which is 6% higher than the Revised Estimates of 2018-19. Together these constitute about 66% of the Railways’ estimated expenditure in 2019-20. Such expenditure on staff is extremely high and unmanageable. This expense is not under the control of Railways and keeps increasing with each Pay Commission revision. Therefore it is urgent that Railways streamline the recruitment process, rationalize manpower and make the organization more business oriented.
Coming to the Railway network in Odisha, it has been told repeatedly that more funds be provided for speedy implementation of the ongoing projects be it Haridaspur-Paradeep line or Khurdha Road-Bolangir Line, its work is getting delayed year after year. This year of course a new survey is mentioned in the Demands for Grants for Railways which is from Raja Athagarh to Kaipadar Road avoiding Bhubaneswar and Khurda Road. I welcome it. Earlier another survey was done from Talcher to Gopalpur via Narasingpur, Khandapada to Rambha and Gopalpur which would not only connect the coalfields to the Port but will serve the hinterland and bring in more revenue to the Railways.
Lastly I would say, Odisha would oppose any division of East Coast Railway. It would be a mistake if Waltair Division is taken away from East Coast Railway Zone. Rather those rail lines of Odisha which are now under different zones, such as South East and Sought East Central Zones be amalgamated in East Coast for smooth running of freight and passenger trains in the region. No attempt should be made to bifurcate East Coast Zone at all.
SHRI MANNE SRINIVAS REDDY (MAHBUBNAGAR): Hon. Chairperson, thank you very much for giving me an opportunity to speak in the House today on the Demands for Grants under the control of the Ministry of Railways.
I want to take up the railway projects pertaining to my Mahbubnagar Parliamentary Constituency and Telangana State. Our Chief Minister, K. Chandrashekar Rao, Sir, is also grateful to the Government.
There is a need to complete Mahabubnagar-Munirabad new railway line project in Telangana which was sanctioned in the year 1997-98 having distance of 246 kilometres with an estimated cost of Rs. 645 crores. It is a long-pending demand. The project needs to be expedited. There is need to speed up doubling of Secunderabad-Mahabubnagar railway line and electrification works which were sanctioned in the year 2015-16, having 85 kilometres of length, with an estimated cost of Rs. 728 crores. We would also like to request the Government to speed up the works on a priority basis as about 3,000 people are travelling between Mahabubnagar and Secunderabad on a daily basis.
We would also like to bring to your kind notice that modernization and expansion of existing Mahabubnagar Raillway Station as well as Divitipalli Railway Station, which is adjacent to Government Medical College and proposed IT corridors and a large 2 BHK residential complex, is very much essential. Electrification work on many railway lines with an estimated budget was also sanctioned in the year 2018-19 but there is no progress. The railway line work from Gadwal to Raichur, having a distance of 57 kilometres, covering Telangana and Karnataka States with an estimated cost of about Rs. 46.10 crore, has not made much progress. We request the Government to complete it on a priority basis.
There is a need to expedite the work on Lingampet-Jagityal and Nizamabad railway lines in Telangana State, which is covering a distance of 95 kilometres with a cost of Rs. 80.29 crores. The work on the new railway lines, which were sanctioned in the year 2018-19, is yet to be started or initiated.
The railway line from Patancheru-Sangareddy-Jogipet-Medak in Telangana State, having a distance of 95 kilometres, should be given priority as it covers the prominent industrial area and SEZ. This project is pending for the last two years. I would also like to state that the work of a new railway line between Gadwal to Macherla, having a distance of 151 kilometres, should be fast-tracked. It is falling under the Kannur Lok Sabha constituency. The work on Vikarabad Wadi-Krishna railway line, which is covering 87 kilometres of distance – a more economically and socially backward area of Makthal and Narayanpet Assembly constituencies – need to be expedited.
The work on the lines from Peddapalli to Kazipet, Pagidipalli to Bhongir, Bhongir to Shankarpally, Vishnupuram to Janpahad, Manakondur-Huzurabad- Elkaturthi, Nizamabad-Mudkhed-Parbhani, Nizamabad-Nirmal-Adilabad, having a distance of 125 kilometres, are yet to be started. We request the Government to initiate the work on above-mentioned lines on a priority basis.
The important railway line to Singareni Colleries from Bhadrachalam - Sattupalli - Kovur covers a distance of 133 kms., and the acquisition of land for the Bhadrachalam road to Sattupalli railway line has been cleared by the Railway Board. For its commencement, 500 acres are required for the 36 km. railway line in Bhadradri-Kothagudem district and 17.3 km. railway line in Khammam district. This 53.2 km. section will cost about Rs. 704 crore.
Please note that this prime project would be funded by Singareni Collieries and the land acquisition cost is to be borne by Indian Railways. This project is to be taken up on top priority as this line will cater to the needs of the local people in and around Singareni Collieries in Khammam district in Telangana.
Kazipet Junction is located in Secunderabad Division of South Central Railway having its headquarters at Secunderabad. Kazipet junction is the gateway to north and south India and is an epicenter of north Telangana Districts. It is 225 kms. away from Balharshah and Vijayawada and 135 kms from Secunderabad. As such, Kazipet is administratively and economically viable and it is the best option to carve it out as a separate Division. Kazipet has an electrical loco shed and a diesel loco shed to supply locomotives and a crew control cell to book guard and drivers for the trains. Further, it has maintenance facilities for maintenance of goods and passenger trains and to cater to the needs of the local people.
Establishing a coach factory in Kazipet, for which an assurance was given in the Andhra Pradesh State Reorganisation Act, 2014, is the need of the hour. Our Telangana State Government has already allotted land and other related infrastructural facilities to set up the coach factory which is long pending demand of the State Government.
It is to bring to your kind notice that 60 per cent of the revenue of South Central Railway is coming from South Central Division out of which 80 per cent of the revenue is coming from four north Telangana districts. It is evident that approximately 48 per cent of the revenue is coming from this region.
It is to bring to the kind notice of the House, through the Chair, that all these railway projects pertaining to Telangana State have earlier been submitted to the hon. Prime Minister and also to the hon. Railway Minister with a request to complete all the above said projects on top priority with the allocation of sufficient funds to realise the dream of the Telangana people whose hopes and aspirations need to be fulfilled.
With these few words, I conclude my speech. Thank you, Sir.
*श्री राकेश सिंह (जबलपुर): वर्ष 2014 के पूर्व की सरकारों द्वारा अपने राजनैतिक फायदों के लिए झूठी घोषणाओं का एक बड़ा पहाड़ खड़ा किया जाता रहा है और बाद में उन घोषणाओं और परियोजनाओं की फ़ाइल अटकती थी..... फिर लटकती थी और बाद में भटक कर किसी कबाड़ में धूल फांकती थी किन्तु, जैसे ही 2014 में जनता के आशीर्वाद से केन्द्र में माननीय मोदी जी के नेतृत्व में देश में सरकार बनी और धूल फांक रही उन महत्वपूर्ण परियोजनाओं को पुन: शुरू किया, और उन परियोजनाओं को उनके अंतिम लक्ष्य तक पहुंचाया भी गया है ।
कांग्रेस की सरकारों द्वारा घोषित सभी परियोजनाएं हमारी सरकार द्वारा बिना किसी पक्षपात और पूर्वाग्रह के पूरी की गईं ।
मेरा संसदीय क्षेत्र जबलपुर पश्चिम मध्य रेल का मुख्यालय भी है । जबलपुर में रक्षा मंत्रालय की कई बड़ी इकाईयां हैं, इसके साथ मध्य प्रदेश का उच्च न्यायालय भी जबलपुर में ही है । मेरी पार्टी का मेरे प्रति विश्वास और जबलपुर की जनता के आशीर्वाद के फलस्वरूप मैं वर्ष 2004 से लगातार जबलपुर का लोकसभा में प्रतिनिधित्व कर रहा हूं । जबलपुर पश्चिम मध्य रेल का मुख्यालय होने के बावजूद भी जबलपुर अधोसंरचना का विकास, कनेक्टिविटी के साथ ही अपनी मूलभूत आवश्यकताओं की बाट जोह रहा था । जनता की मांगों को पूरी करवाने हेतु कई बार मैंने रेलवे के खिलाफ आंदोलन किये, जबलपुर को उसका वास्तविक हक दिलाने पद यात्रायें कर विरोध जताया ।
वैसे तो कई उदाहरण हैं, किन्तु कांग्रेस के शासनकाल में किसी महत्वपूर्ण परियोजना के साथ भी कितना उदासीन रवैया अपनाया जाता था, उसका एक उदाहरण बताना चाहूंगा । जबलपुर-गोंदिया ब्रॉडगेज परियोजना को वर्ष 2001 में तत्कालीन प्रधानमंत्री एवं हम सबके श्रद्धा के केन्द्र आदरणीय स्व. अटल बिहारी वाजपेयी जी के द्वारा इस परियोजना का शिलान्यास किया गया और उस समय इस परियोजना के महत्व को समझते हुए अटल जी की सरकार के द्वारा 100 करोड़ का प्रारंभिक बजट भी स्वीकृत किया गया । बाद में 2004 में सरकार कांग्रेस की बनी और मैं पहली बार जबलपुर से निर्वाचित हुआ । सांसद बनने के बाद मेरी भी प्राथमिकता में जबलपुर-गोंदिया आमान परिवर्तन सबसे ऊपर रहा । इस परियोजना को पर्याप्त बजट मिले, इसके लिये कई प्रयास किये, आंदोलन किये, धरना प्रदर्शन किया, पद यात्रायें की..... लेकिन कांग्रेस सरकार की उदासीन रवैया का नतीजा देखिये कुल 511 करोड़ की परियोजना बढ़कर 1700 करोड़ के आसपास हो गई है ।
2014 में केन्द्र में जैसे ही माननीय मोदी जी के नेतृत्व में हमारी सरकार बनी, उक्त परियोजना को जैसे पंख लग गये हो, और आपको बताते हुए मुझे हर्ष है और गर्व भी होता है कि मात्र 5 वर्षों में ही पूरी परियोजना पूर्णता की ओर है आखिरी फेज का कार्य गति पर है, उस वर्ष के पूरा होने से पहले ही परियोजना पूर्ण हो जायेगी । अध्यक्ष जी, इसे कहते हैं सरकार में रह कर कार्य करने और करवाने की इच्छा शक्ति ।
मेरे कई पुराने साथी वर्तमान में भी लोक सभा के सदस्य हैं, उन्हें पुरानी सरकार के साथ कार्य करने का अनुभव अवश्य होगा । पूर्व में कांग्रेस की सरकारों द्वारा न तो परियोजनाओं की चिंता की जाती थी, न रेलवे के अधोसंरचना विकास के लिये और न ही यात्री सुविधाओं की । आज हम सभी इस बात को हृदय से स्वीकार करेंगे कि पहली बार यदि किसी यात्री की चलती ट्रेन में किसी भी समस्याओं के निवारण हेतु कोई कदम उठाया गया है तो वो हमारी सरकार में चिंता की गई है । आज यात्री ट्रेन में बैठकर, चाहे वो देश के किसी भी कोने में हो एक ट्वीट के माध्यम से अपनी परेशानी और समस्याओं को दूर कर सकता है । यह भी सरकार की जनता के प्रति संवेदनशीलता का एक छोटा नमूना है ।
वर्ष 2014 से रेलवे की दृष्टि से मेरे संसदीय क्षेत्र जबलपुर में अनेकों कार्य हुए हैं और उसके लिये मैं माननीय प्रधानमंत्री जी का एवं रेल मंत्री जी के प्रति अपनी कृतज्ञता जाहिर करता हूं । क्षेत्रीय मांगों के आधार पर माननीय रेल मंत्री जी के द्वारा मेरे आग्रह पर कई मांगों को पूरा किया गया है । कुछ महत्वपूर्ण समस्याओं पर माननीय रेल मंत्री जी का ध्यान आकृष्ट कराना चाहूंगा, जो अति आवश्यक है ।
• जबलपुर-गोंदिया ब्रॉडगेज परियोजना का अंतिम फेज में कार्य चल रहा है, सरकार से आग्रह है कि इस वर्ष मार्च में पूरा होने का लक्ष्य था, किंतु कुछ तकनीकी समस्याओं के कारण विलंब हो गया है, सरकार से आग्रह है कि परियोजना शीघ्र पूरी हो, इस हेतु आवश्यक कार्यवाही करने का कष्ट करें ।
• इटारसी-इलाहाबाद विद्युतीकरण परियोजना के अंतर्गत इटारसी से कटनी का कार्य पूरा हो चुका है, और ऑपरेशनालाईज भी हो गया है, जानकारी के अनुसार कटनी-सतना का कार्य भी हो गया है और कमीशन होने वाला है । सरकार से आग्रह है कि इस परियोजना को भी पूरा होने में तय समयसीमा से अधिक समय लग चुका है, अत: इसे भी यथाशीघ्र पूरा किये जाने हेतु आवश्यक कार्यवाही करने का कष्ट करें ।
• मेरी मांग पर मदन महल स्टेशन को टर्मिनल स्टेशन के रूप में विकसित करने हेतु माननीय रेल मंत्री जी के द्वारा एकमुश्त 125 करोड़ रूपए की राशि दी गई थी । मेरा सरकार से आग्रह है कि शीघ्र कार्य प्रारंभ हो, उचित दिशा-निर्देश देने का कष्ट करें ।
• जबलपुर एवं संसदीय क्षेत्रांतर्गत रेलवे स्टेशन के महत्वपूर्ण मांगों को सरकार द्वारा पिछले 5 वर्षों में पूरा किया गया है, किंतु कुछ विकास कार्य शेष है । जबलपुर मुख्य रेलवे स्टेशन पर भी पिछले 5 वर्षों में अधोसंरचना विकास के साथ ही यात्री सुविधाओं के मद्देनजर कई बड़े कार्य हुए हैं । मेरा सुझाव है कि शेष प्लेटफॉर्मों पर एस्केलेटर सुविधा मुहैया कराई जाये । जबलपुर अंतर्गत सिहोरा, गोसलपुर, देवरी, अधारताल, मदन महल, कछपुरा, भिटौनी रेलवे स्टेशन पर मानक स्तर के प्लेटफॉर्म निर्माण की आवश्यकता है । इसके साथ ही अन्य अधोसंरचना के कार्य भी शेष है । सरकार से मेरा आग्रह है कि उपरोक्त मांगों पर आवश्यक कार्यवाही करने का कष्ट करें।
• मेरे द्वारा माननीय रेल मंत्री जी से जबलपुर-इंदौर वाया मिसरौद नई रेल लाइन के संबंध में पत्र भी लिखा गया था, और चर्चा भी की थी, अतः माननीय रेल मंत्री से आग्रह है कि उक्त मांग पर विचार किया जाना चाहिए ।
क्षेत्रीय लोगों द्वारा लगातार कई वर्षों से जबलपुर से हरिद्वार ट्रेन की मांग की जाती रही है । मैंने भी इस संबंध में माननीय मंत्री से मिलकर चर्चा की थी । मेरा आग्रह है कि जबलपुर से हरिद्धार के लिये नई ट्रेन हेतु आवश्यक कार्यवाही करने का कष्ट करें ।
जबलपुर में बिहार एवं उत्तर प्रदेश के लोग बहुतायत में हैं । उनके द्वारा जबलपुर से पटना वा पाटलिपुत्र, हाजीपुर होते हुए मुजफ्फरपुर के लिये नई ट्रेन की मांग की जा रही है । अत: नई ट्रेन हेतु आवश्यक कार्यवाही करने का कष्ट करें ।
जबलपुर से वर्तमान में आधे दर्जन से अधिक विशेष ट्रेन चलाकर देश के महत्वपूर्ण शहरों से जबलपुर सीधा जुड़ा हुआ है और यह बताते हुए खुशी है कि सभी ट्रेनों की ऑक्यूपेंसी भी बहुत बेहतर है, किंतु कुछ ट्रेनों को विशेष से नियमित में परिवर्तित किया जाना आवश्यक है । क्षेत्रीय मांगों के आधार पर कुछ ट्रनों को नियमित करने का आग्रह करता हूं ।
व्यावसायिक शिक्षा, व्यवसाय और नौकरी हेतु जबलपुर एवं आसपास से बहुतायत संख्या में लोगों का जबलपुर से पुणे आना जाना है । विशेष ट्रेन होने के बावजूद भी यात्रियों ने इस ट्रेन के प्रति रूचि ली है, अत: सरकार से आग्रह है कि यथाशीघ्र इस ट्रेन को नियमित किया जाना आवश्यक है ।
सिक्ख समुदाय की मांग पर मेरे द्वारा जबलपुर-अटारी-जबलपुर स्पेशल ट्रेन को शुरू किया गया था । इस ट्रेन के प्रति भी लोगों ने रूचि दिखाई है, ऑक्यूपेंसी बेहतर है अत: इसे भी नियमित किया जाना आवश्यक है ।
जबलपुर से जम्मूतवी एकमात्र सीधी साप्ताहिक ट्रेन है, किन्तु जो यात्री जबलपुर से जम्मू की यात्रा करते हैं, वे वापसी में वाया दिल्ली होते हुए ही जबलपुर पहुंच पाते हैं । परिवार के साथ होने पर कई बार ट्रेन बदलने की एक समस्या उनके पास होती है । अत: आपसे आग्रह है कि उक्त ट्रेन को कम से कम सप्ताह में दो दिन चलाये जाने हेतु आवश्यक कार्यवाही करने का कष्ट करें ।
जबलपुर-हजरत निजामुद्दीन-जबलपुर म.प्र. संपर्क क्रांति एक्सप्रेस वर्तमान में सप्ताह में मात्र तीन दिन चल रही है । क्षेत्रीय लोगों की मांग है कि उक्त ट्रेन को सप्ताह में सातों दिन चलाये जाने हेतु आवश्यक कार्यवाही करने का कष्ट करें ।
जबलपुर से मुम्बई के लिये गरीब रथ एकमात्र सीधी ट्रेन है । एक ट्रेन होने के कारण यात्रियों में इस ट्रेन को लेकर रूचि भी अधिक है, और परिणामस्वरूप हमेशा ही ट्रेन में लम्बी प्रतीक्षा सूची लगी रहती है, किन्तु प्राप्त जानकारी के अनुसार गरीब रथ कोचों की निर्माण प्रक्रिया बंद हो गई है, अत: सरकार से आग्रह है कि उक्त ट्रेन को दुरंतो एक्सप्रेस में परिवर्तित कर सप्ताह में सातों दिन चलाने हेतु आवश्यक कार्यवाही करने का कष्ट करें ।
जबलपुर पश्चिम मध्य रेल का मुख्यालय है और मुख्यालय होने के नाते वहां मांग भी अधिक है, अपने क्षेत्र की मांगों के आधार पर मैं समय-समय पर माननीय रेल मंत्री जी को मांग पत्र देता रहता हूं । कुछ महत्वपूर्ण मांगों को मैंने अपने इस बजट भाषण में भी उल्लेख किया । सरकार से आग्रह करता हूं कि उक्त मांगों को पूरा किये जाने हेतु आवश्यक कार्यवाही करने का कष्ट करें ।
*SHRI ANNASAHEB SHANKAR JOLLE (CHIKKODI):This year’s budget has few of the well thought and well planned allocations for the Railways.
In the interest of the development of the nation infrastructure development of the railway system needs to be still focused upon. All the pending projects and surveys to be carried out has to be done and preferably using the expertise of professionals or experts from the private companies also.
The time period of sanction of a project in the Indian Railways till the successful completion needs to be reduced and this is possible by focusing on increased funds for speedy implementation.
There should be focus on Private Public Partnership in the future for the overall improvement of the system and future budgets to focus upon the same.
*SHRI P.R. NATARAJAN (COIMBATORE): Coimbatore to Pollachi rail track gauge conversion work was conducted by the railway more than eight years before. Even after completion of the work the southern railway is not operating the trains. The below mentioned trains were operated by the Railway department before gauge conversion:-
1. Coimbatore to Rameswaram Express
2. Coimbatore to Kollam Express
3. Coimbatore to Madurai Passenger I request the Hon. Minister of Railways to take action for an immediate restoration of the trains as this is the long pending demand of the Coimbatore and Pollachi people.
Kindly note that Coimbatore to Bangalore night express was announced during the budget in the year 2007 but still no steps have been taken to start the trains.
Tragically unresolved and burning issue of deaths of wild elephants due to train hits is nowadays increasing especially in the States of Tamilnadu, Assam and Uttaranchal.
In Pollachi Constituency, Tamilnadu, the area surrounding Coimbatore, with its mountains and forests has become death trap for wild elephants with around 25 elephants killed by speeding trains in the past 10 years.
This is because of the rail stretch between Madukarai and Walayar of Coimbatore – Palghat trunk route passes through this traditional elephant corridor. The Sollakarai beat in the Navakarai section is part of Madukarai forest where Twin Single Railway Lines A andB cut through this Reserve forest.
Many measures to keep Jumbo’s off the tracks have failed. Electric fences erected on sides of tracks have been ineffective as elephants pulled them down.
Wildlife activists meanwhile pointed out that the accidents happened despite Tamil Nadu forest department deploying anti-poaching watcher to monitor elephant movements along tracks. The Railways should issue strict warnings to loco-pilots to adhere to the speed limit especially during night hours, but the trains often ply at 80-100 kmph in this elephant corridors.
The Ministry of Railways should initiate action to bring the two lines together and built fences along tracks using old discarded rails.
There has to be better co-ordination between The Ministry of Railways, the Ministry of Environment and Forests, respective State Governments and wildlife NGOs to tackle the problems. If the activities initiated to prevent elephant deaths succeed, this could be the hope for the coming years.
*SHRI K. SHANMUGA SUNDARAM (POLLACHI): Coimbatore to Pollachi rail track gauge conversion work was conducted by the railway more than eight years before. Even after completion of the work the southern railway is not operating the trains. The below mentioned trains were operated by the Railway department before gauge conversion:-
1. Coimbatore to Rameswaram Express
2. Coimbatore to Kollam Express
3. Coimbatore to Madurai Passenger I request the Hon’be Minister of Railways to take action for an immediate restoration of the trains as this is the long pending demand of the Coimbatore and Pollachi people.
Kindly note that Coimbatore to Bangalore night express was announced during the budget in the year 2007 but still no steps have been taken to start the trains.
Tragically unresolved and burning issue of deaths of wild elephants due to train hits is nowadays increasing especially in the States of Tamilnadu, Assam and Uttaranchal.
In Pollachi Constituency, Tamilnadu, the area surrounding Coimbatore, with its mountains and forests has become death trap for wild elephants with around 25 elephants killed by speeding trains in the past 10 years.
This is because of the rail stretch between Madukarai and Walayar of Coimbatore – Palghat trunk route passes through this traditional elephant corridor. The Sollakarai beat in the Navakarai section is part of Madukarai forest where Twin Single Railway Lines A &B cut through this Reserve forest.
Many measures to keep Jumbo’s off the tracks have failed. Electric fences erected on sides of tracks have been in effective as elephants pulled them down.
Wildlife activists meanwhile pointed out that the accidents happened despite Tamil Nadu forest department deploying anti-poaching watcher to monitor elephant movements along tracks. The Railways should issue strict warnings to loco-pilots to adhere to the speed limit especially during night hours, but the trains often ply at 80-100 kmph in this elephant corridors.
The Ministry of Railways should initiate action to bring the two lines together and built fences along tracks using old discarded rails.
There has to be better co-ordination between The Ministry of Railways, the Ministry of Environment and Forests, respective State Governments and wildlife NGOs to tackle the problems. If the activities initiated to prevent elephant deaths succeed, this could be the hope for the coming years.
श्री गोपाल शेट्टी (मुम्बई उत्तर): सभापति जी, मैं सबसे पहले रेलवे बजट पर अपनी भावनाओं को व्यक्त करने से पहले देश के सम्माननीय प्रधान मंत्री मोदी जी का अभिनंदन करना चाहूंगा, फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण का अभिनंदन करना चाहूंगा और साथ ही रेल को एक नई दिशा दिलाने में कामयाब होने वाले हमारे मुम्बई के ही रेल मंत्री सम्माननीय पीयूष गोयल जी को भी अभिनंदन और धन्यवाद देना चाहूंगा ।
महोदय, इस बजट में टैक्सेशन बहुत कम है, भाड़ा वृद्धि का कोई नामोनिशान दिखाई नहीं दे रहा है । लेकिन देश भर के लोगों को सुविधा देने की बात हो रही है तो वर्ष 2014 से, जब से हमने रेल यात्रा प्रारम्भ की, आज वर्ष 2019 आते-आते देश में एक बहुत बड़ा बदलाव आया है ।
14.59 hrs ( Shrimati Rama Devi in the Chair) बदलाव लोगों के मन में आया है, पॉलिटिकल सिस्टम में आया है, ब्यूरोक्रेसी में आया है और साथ ही साथ रेल में सफर करने वाले यात्रियों में भी विश्वास के वातावरण का निर्माण हो रहा है । इन सब बातों का कारण अगर हमें ढूंढ़े तो देश के प्रधान मंत्री जी ने जिस प्रमाणिकता और परिश्रम से पिछले पांच साल काम किया है, उससे लोगों के मन में विश्वास जगा है । यह विश्वास का ही प्रतीक है कि 303 सीट्स भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में आयी हैं और एनडीए के 350 से भी ज्यादा सांसदों को चुनकर जनता ने पार्लियामेंट में भेजा है ।
15.00 hrs मैं यहां पर सरकार के अच्छे कामों का उल्लेख जरूर करना चाहूंगा, लेकिन साथ ही साथ रेल प्रवासियों की कुछ समस्याएं भी हैं । अगर मैं उन समस्याओं को यहां पर उजागर करूंगा, तो हमारी ब्यूरोक्रेसी उसको संज्ञान में लेंगी और मेरा मानना है कि आने वाले दिनों में उनका समाधान निकालने में बहुत मदद मिलेगी ।
सभापति महोदया जी, यह जो लोक सभा का मंदिर है, यह न्याय का मंदिर है । यहां पर लोगों की आशा और अपेक्षाएं पूरी होती हैं और वे किस तरह से पूरी होती हैं । मुझे जब वर्ष 2014 के रेल बजट पर कुछ ही मिनट बोलने का मौका मिला था, तो मेरा जब लोक सभा का चुनाव लड़ने के लिए तय हुआ, तब मेरा सबसे बड़ा यह एजेंडा था कि मुंबई शहर में हर साल तीन हजार लोग रेल से गिरकर और कटकर मर जाते हैं । उतनी ही संख्या में लोग घायल हो जाते हैं, इंजर्ड हो जाते हैं । अगर हम पूरे देश में मरने वाले लोगों की संख्या इकट्ठा करें, लेकिन मैं सिर्फ मुंबई की बात करूं, तो मंबई इसमें बहुत आगे है । यह हमारे लिए कोई गौरव की बात नहीं है, बल्कि यह दुख और शर्म की बात है । लेकिन मैं देश के प्रधान मंत्री और सभी रेल मंत्रियों का अभिनंदन करना चाहूंगा । श्री सदानंद गौड़ा जी ने वर्ष 2014 के बाद काम संभाला था । उसके बाद सुरेश प्रभु जी आए थे, उन्होंने बहुत बड़ा बदलाव किया था । उन दिनों सभी छोटे-छोटे कामों की फाइल दिल्ली आया करती थी, वह सारा अधिकार रेल अधिकारियों को देकर सिस्टम में एक बहुत बड़ा बदलाव लाए थे । उसमें अधिकारियों का भी विश्वास बढ़ने लगा था, क्योंकि उनको काम करने का मौका मिला, उनको अपनी कुशलता, अपनी क्षमता दिखाने का मौका दिया गया था । मैं यह मानता हूं कि रेल अधिकारियों ने पांच सालों में बहुत अच्छा काम किया है । हमारी अपेक्षा बहुत ज्यादा है । उसकी तुलना में व्यवस्थाएं कम हैं, इसलिए वे नहीं कर पाते हैं, वह अलग बात है । लेकिन व्यवस्थाओं के निर्माण करने का भी स्रोत हमारे देश के प्रधान मंत्री जी ने ढूंढ़ निकाला है, उसे खोजा है । मैं यह भी मानता हूं कि आने वाले पांच सालों में देश बहुत तेजी से आगे बढ़ेगा । हमको साथ ही साथ रेलवे को भी उतनी तेजी से आगे बढ़ाना पड़ेगा ।
मैंने वर्ष 2014 में यह मांग की थी कि हमें मुंबई में डोर क्लोजर ट्रेन का इंट्रोड्यूज करना पड़ेगा । जब मैंने यह बात की थी, तो मुंबई शहर के लोग भी हंसने लगे थे । जहां ट्रेनों में जितने लोग अंदर होते हैं, उससे आधे लोग बाहर लटककर सफर करते हैं । डोर कैसे खुलेगा, कैसे बंद होगा, यह सबसे बड़ा चिंता का विषय था । लेकिन हमारे रेल मंत्री जी ने उसको सफलतापूर्वक कार्यान्वित किया है । अभी मुंबई शहर में कुछ डोर क्लोजर रेलवे की गाड़ियां चल रही हैं और आने वाले दिनों में बहुत बड़ी संख्या में डोर क्लोजर ट्रेनें आने वाली हैं ।
मैं अपनी बात को आगे बढ़ाऊ, उसके पहले मैं एक बात का और उल्लेख करना चाहूंगा । मैं कहना चाहता हूं कि सभापति महोदया जी, अभी आप चेयर पर एक नारी के रूप में बैठी हुई हैं । महोदया, आपके नाम में भी देवी है और सब नारियां भी देवी का रूप होती हैं । हमारे मुंबई शहर में जिस प्रकार से महिलाएं ट्रेन पकड़ती हैं, अगर हम उसकी क्लिपिंग देश के लोगों और यहां पर बैठे माननीय सांसदों को बताने का प्रयास करेंगे, तो मैं निश्चित ही इस बात को दावे के साथ कह सकता हूं कि अगर किसी को गोल्ड मेडल मिलेगा, तो हमारी मुंबई शहर की बहनों को मिलेगा । वे जिस प्रकार से चलती हुई ट्रेन को पकडती हैं और चलती हुई ट्रेन से उतरती हैं । अपनी जान का को हाथ में लेकर ट्रेन में सफर करने का काम हमारी मुंबई शहर की बहनें करती हैं ।
मैं अनेक मांगों के साथ में एक छोटी-सी मांग यह रखूंगा कि आने वाले दिनों में जो डोर क्लोजर ट्रेने आने वाली हैं, इसी सभागृह में उत्तर-मुंबई के सांसद राम नाईक जी हुआ करते थे । उन्होंने बहुत सारी नई-नई अभिनव कल्पनाओं को देश के सामने रखा था । उन अनेक कल्पनाओं में से एक कल्पना लेडीज स्पेशल ट्रेन को चालू करने का था, जो मुंबई शहर में बहुत ही सफलता के साथ चल रही है । उनके सपनों को आगे बढ़ाने के लिए मैं मानता हूं कि आने वाले दिनों में जो नए कोचेस एसी और डोर क्लोजर के आने वाले हैं, उसमें से एक ट्रेन लेडीज स्पेशल को देने का काम हमारे माननीय मंत्री श्री पीयूष गोयल जी करेंगे, तो हम इस साल में बजट के माध्यम से बहुत बड़ा गिफ्ट उन बहनों को दे सकते हैं । यह मेरी एक बहुत बड़ी मांग रहेगी ।
सभापति महोदया जी, इस बजट में मुंबई और महाराष्ट्र को बहुत कुछ दिया है । अगर मैं उसे गिनाना चाहूंगा, तो मैं संक्षेप में कुछ बातों को सामने लाने का प्रयास करूंगा । इसमें बहुत सारी उपलब्धियां हैं और मैं मानता हूं कि इन सारी उपलब्धियों में से मुंबई शहर को इस साल में और अगल-बगल के परिसर को जो दिया गया है, अगर आप देखेंगे, तो मुंबई में एमयूटीपी के माध्यम मुंबई शहर को 33,690 करोड़ रुपये का काम मिलने वाला है, जिसमें 191 air conditioned rakes are going to come with state of the art with door closing, vestibule coaches with CCTVs; and 19 suburban stations will be modernised.
Extension of Harbour line between Goregaon and Borivali is proposed. Direct connectivity between Chhatrapati Shivaji Maharaj Terminus and Panvel and Borivali provides direction connection. यह मुंबई शहर के लोगों के लिए बहुत बड़ा काम होगा । Fifth and sixth lines between Borivali to Virar will increase services. Fourth line between Kalyan and Asangaon, and third and fourth lines between Kalyan and Badlapur will benefit the upcoming residential area.
सभापति महोदया, यह जो बदलापुर है, यह मुंबई की तरह ही बहुत तेज़ी से विकसित होते जा रहा है । हमारे ज्यादा से ज्यादा जो महानगरपालिका के अधिकारी हैं, राज्य सरकार में काम करने वाले अधिकारी हैं या अन्य व्यापारी वर्ग के लोग हों, ये सारे बदलापुर में शिफ्ट हो गए हैं क्योंकि वहां पर मकान बहुत ही रीज़नेबल रेट्स पर मिलता है । लेकिन वहां से आने के लिए ट्रेन का जो सफर, उन दिनों जब वे शिफ्ट हुए थे, तब बहुत आसानी से होता था, लेकिन आज वहां की भी परिस्थिति मुंबई जैसी ही है । यह सारा करने से मुझे लगता है कि यहां के लोगों बहुत बड़ा लाभ होगा । मुंबई को और विकसित कर के आगे ले जाने का जो सपना हमारे देश के प्रधान मंत्री का है, क्योंकि कन्जैस्टिड एरिया में से लोगों को अगर बाहर निकालना है तो आजू-बाजू के परिसर को हमको विकसित करना पड़ेगा । हमको वहां पर सुविधाएं पहुंचानी पड़ेंगी । यह सारा काम हमको आने वाले दिनों में करना है । यह जो एडिशनल 126 किलोमीटर ऑफ ट्रैक है, इन सारे कामों में से निर्माण होने वाला है । Job creation is 60 lakh man-days during implementation. यानी इतने बड़े पैमाने पर लोगों को रोजगार उपलब्ध होने का काम भी आने वाले दिनों में होने वाला है । कल्याण-कसारा के बीच में रेलवे लाइन के लिए 160 करोड़ रुपये की व्यवस्था इस बजट में की गई है । इसलिए मैं फिर एक बार रेलवे मंत्री और फाइनेंस मिनिस्टर को बहुत-बहुत धन्यवाद देना चाहूंगा । धानू में यह जो एक्सटेंशन होने वाला है, उसमें दो लाइन डालने के लिए 284 करोड़ रुपये की भी यहां पर व्यवस्था की है । कुल-मिला कर 14301 करोड़ रुपये से अधिक का यह काम इन सारे परिसरों में होने वाला है । इसलिए मैं फिर एक बार पीयूष जी का अभिनंदन यहां पर करना चाहूंगा ।
महोदया, यह सारा काम जो इन दिनों में हो रहा है, यह पहले जैसा नहीं है कि बजट में घोषणा हो गई और फिर बाद में अगली बार भी उसी को हम दोहराते हैं । जैसे ही बजट पास होगा, काम-काज प्रारंभ होगा, टेंडर, प्रोसैस यह सारा हो कर आपको देश के लोगों को काम शुरू हुआ दिखाई देने लगता है । देश के लोगों का एक बहुत बड़ा विश्वास रेलवे और सरकार के प्रति इन दिनों में बढ़ता जा रहा है । यह बहुत ही खुशी की बात है । मैं चाहूंगा कि यह जो मुंबई की वैस्टर्न रेलवे हो, सैन्ट्रल रेलवे हो, हार्बर लाइन हो, इन सारी जगहों पर जो मृत्यु का जाल बिछा हुआ है, इस पर हमको बहुत तेज़ी से काम करने की आवश्यकता है । मैं इस बात से भी वाकिफ हॅूं कि हमारी सरकार का इसमें दोष कम है, क्योंकि गर्दी बहुत ज्यादा होती है । लोग सफर करते हैं, लोग नियमों को ताक पर रख कर सफर करते हैं, लोग रेलवे लाइन क्रॉस करते हैं और बार-बार समझाने के बावजूद भी उसमें वह व्यवस्था होती नहीं है, क्योंकि लोगों की भी अपनी परेशानी है कि समय पर उनको काम पर पहुंचना होता है । इसलिए जान को जोखिम में डाल कर भी वे यह सारा करते हैं, लेकिन मुंबई में मैट्रो काम भी बहुत तेज़ी से चल रहा है । मैं महाराष्ट्र सरकार के मुख्य मंत्री को धन्यवाद देना चाहूंगा कि मैट्रो का काम बहुत तेज़ी से चल रहा है और मोनो रेल का भी काम तेज़ी से चल रहा है । सन् 2020 तक जब यह प्रकल्प पूरा होगा तो 50 प्रतिशत लोड मैट्रो पर शिफ्ट होने के बाद एक बहुत बड़ी राहत मिलेगी । यह जो डोरक्लोजर की हम बात करते हैं, मैं फिर से इस बात को मानता हॅूं कि गर्दी कम होने के बाद में डोर क्लोजर को बड़े पैमाने पर इम्प्लिमेंट करने में भी हमको एक बहुत बड़ी राहत मिलेगी । मैं रेलवे में सफर किया हुआ व्यक्ति हॅूं । जब मैं पार्षद के रूप में काम करता था तो बोरीवली से चर्चगेट जब उतरता था, तब मेरी शर्ट के दो-तीन बटन निकल जाते थे, यानी इतनी भीड़ में से हम लोगों को उतरना पड़ता था । इसलिए मैं अपने मन की बात बताते हुए चाहूंगा कि हमारे जो रेल के अधिकारी हैं, पुलिसकर्मी हैं, वे अगर थोड़ा सा प्रयास करते हैं तो सरकार कुछ किए बगैर भी बहुत सारी मौंतें हम कम कर सकते हैं । इसके लिए बहुत तेज़ी से काम करने की आवश्यता है । इसलिए मैं अपनी भावनाओं को यहां पर बताना चाहता हॅूं, क्योंकि मेरे पास जब जो चार्ट आया, उसको भी मैं पढ़ कर बताने का प्रयास करूंगा । बाकी पूरे देश में 2014 तक कितनी मौंतें होती थीं और सन् 2019 तक इसमें बहुत बड़े पैमाने पर गिरावट वाई है । सरकार का ध्यान इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर है । इसलिए यह दिखाई देता है । मैं चाहूंगा कि इसके ऊपर हमको गंभीरता से काम करने की आवश्यकता है ।
महोदया, मुंबई शहर में जितने भी काम चलने वाले हैं, मैं जब पार्षद था, मैं फिर एक बार इस बात का उल्लेख करना चाहूंगा कि यह जो एमयूटीपी-1 प्रोजैक्ट पहला आया, एमएटीपी-1 में वर्ल्ड बैंक के लोगों ने हमें लोन दिया । मैं कॉर्पोरेशन में था तो तीन सालों तक प्रस्ताव पास नहीं हुआ । वर्ल्ड बैंक के लोगों की एक कंडीशन थी कि आप हमारे पास से पैसे ले कर जो लाइनें डालेंगे, उस रेलवे लाइन के बगल में बसी हुई झोपड़पट्टियों को आप बेघर नहीं करेंगे । इनको आप घर दे कर यह सारा काम शुरू करेंगे ।
सरकार और कारपोरेशन का कुछ तालमेल बैठता नहीं था । तीन साल हो गए, लोन भी नहीं मिल रहा था । बाद में इस कंडीशन को मानते हुए वर्ल्ड बैंक का लोन बड़े पैमाने पर आया और सारे लोगों को पर्याप्त जगह देकर इस रेलवे लाइन का काम किया । लेकिन आगे जैसा सरकार के अधिकारियों की मानसिकता है, इसकी गाइडलाइन्स बनाने की आवश्यकता थी, इसका कायदा बनाने की आवश्यकता थी, लेकिन अधिकारियों ने इसकी पहल नहीं की । आज भी यह प्रश्न जैसा का तैसा पड़ा है । देश के प्रधान मंत्री कहते हैं कि वर्ष 2022 में हम सारे लोगों को…(व्यवधान)
सभापति जी, मेरा आधा घंटा है । मुझे आधा घंटे बोलने के लिए कहा है । घंटी बजाने के दो मिनट के बाद मैं बैठ जाऊँगा । आपको दूसरी बार घंटी बजाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी ।
सभापति जी, देश के प्रधान मंत्री सारे लोगों को घर देने की बात करते हैं । हमारे महाराष्ट्र के मुख्य मंत्री ने 2011 तक के लोगों को घर देने का तय किया । इसी सभा गृह में मुझे लगता है कि अरविंद सांवत या किसी ने मुद्दा उठाया था कि बी.पी.टी. की लैंड पर बसे हुए लोगों को घर मिलना चाहिए । हमारी नितिन गडकरी जी ने यहाँ पर फ्लोर ऑफ द हाउस इस बात का ऐलान किया था कि सरकारी ज़मीन पर बसे हुए लोगों को हम पर्याप्त जगह देंगे । Whatever the hon. Prime Minister or the hon. Ministers speak in this House is the voice of the Government and is the voice of the people. हमारे सरकार के अधिकारियों को इसे उठाते हुए इसके लिए गाइडलाइन्स बनाकर सरकार के पास भेजनी चाहिए, लेकिन ऐसा होता नहीं है । यह मैं बहुत दु:ख के साथ कहना चाहता हूं कि तीन महीने के पहले, छ: महीने के पहले दहिसर में बसे हुए 250 लोगों का घर बारिश के समय में तोड़ा गया । मैं इस बात को ध्यान में लाया । मंत्री जी को मैंने कहा । मंत्री जी ने तुरंत … * रेल के एक ऑफिसर को फोन किया । उन्होंने दो-तीन बार फोन किए । हमारे रेलवे के अधिकारियों को कहा । हमारे रेलवे के जनरल मैनेजर … * साहब कहते हैं कि हमने रेलवे बोर्ड को प्रपोजल भेजा है, लेकिन वहाँ से अभी तक कुछ जवाब आया नहीं है ।
सभापति जी, इस प्रकार के जो प्रपोजल्स होते हैं, इसमें हैंड टू हैंड काम करने की आवश्यकता है । पहले के दिन चले गए, अभी ऑनलाइन सिस्टम देश में आ गया है और यह काम करने की जो स्पीड है, उसे बढ़ाने की आवश्यकता है । अगर रेल बोर्ड के अध्यक्ष मेरी बात को सुनते होंगे तो मैं उनसे निवदेन करूँगा । एक बहुत बड़ी बात बताना चाहूँगा कि यह 250 घर टूटने के बाद महाराष्ट्र के मुख्य मंत्री ने तुरंत फोन करके महापालिका के कमिश्नर को कहा कि इनको तुरंत आप घर दे दीजिए । महापालिका के कमिश्नर ने रेलवे के मैनेजर को कहा कि आप इनको घर दे दीजिए, लेकिन घर देने का जो नियम होता है, उस प्रकार से उन्होंने एक चिट्ठी लिखी कि इसका आपको भाड़ा देने पड़ेगा वगैरह-वगैरह । अब रेलवे का मैनेजर कहता है कि हमारे पास ऐसा कोई नियम नहीं है, सिस्टम नहीं है । पन्द्रह दिन के बाद मैं फिर मुख्य मंत्री से मिला और कमिश्नर को मिला । कमिश्नर और मुख्य मंत्री ने कहा कि लोगों को एक बार घर दिला दो । पैसा सरकार से सरकार को ट्रांसफर करना है, वह हम बाद में देखेंगे । लेकिन बड़े दु:ख के साथ कहना पड़ता है कि आज तक वह 250 लोग बेघर हैं, बारिश में भीग रहे हैं । रेलवे बोर्ड के जो अधिकारी हैं, वे निर्णय लेते नहीं हैं । मैं इस बजट के माध्यम से मतदार संघ और सामान्य लोगों की बात को यहाँ पर पहुंचाना चाहता हूं । यह सारे देश का मामला है । मैं चाहता हूं कि इसका निपटारा एट वन टाइम होना चाहिए । सरकारी अधिकारी को समझना चाहिए कि जब देश के प्रधान मंत्री, मुख्य मंत्री और सारे मंत्री कहते हैं कि हमें लोगों को वर्ष 2022 तक घर देना है तो घर देने के सॉल्यूशन को they should solve this problem without wasting any time. ये बात करते हैं, इसका नियम नहीं है । अगर नियम नहीं है तो नियम बनाइए । सरकार ने आपको एक डायरेक्शन दे दी । आप प्रपोजल भेजिए, फिर ऊपर अगर कोई करता नहीं होगा तो उसके लिए हम लोग बैठे हैं । हम लोग उसका फॉलो-अप करके कर लेंगे । लेकिन आप प्रपोजल भेजोगे नहीं, तो इसका कैसे निपटारा होगा, यह मुझे समझ में नहीं आता है । इनकी मेन्टिलिटी देखिए, बजट में सारा पैसा पास होने के बाद में एमयूटीपी-3 वहां पर इम्प्लिमेंट होने वाला है । यानी एमयूटीपी-3 एक बार इम्प्लिमेंट होने के बाद उसमें रूल में है कि सभी लोगों को घर देना है । इसीलिए कुछ लोग इस प्रकार का एक षड्यंत्र चलाते हैं ताकि एमयूटीपी इम्प्लिमेंट होने के पहले इनको बेघर कर दो ताकि उनका लोड इस प्रजोक्ट पर नहीं आएगा । यह मानसिकता कैसे चलेगी? यह देश के कान्ट्रेक्टर को कमाने के लिए है, यह देश के बड़े पूंजीपति को कमाने के लिए, पैसा बनाने के लिए है । क्या यह देश, यह लोकशाही लोगों की जान-माल की रक्षा करते हुए विदिन द रूल, विदिन द गाइडलाइन्स लोगों को न्याय देने के लिए है । इस बात को मैं यहां पर उजागर करने का प्रयास करता हूं । इसलिए मैं चाहूंगा कि इसका तुरंत निपटारा हो । सरकार के ऊपर किसी भी प्रकार का बोझा न आते हुए यह प्रोजेक्ट के ऊपर सारी की सारी कॉस्ट जाती है । नॉट ओनली इन मुम्बई सिटी, जितने भी रेलवे लाइन के पास में बसे हुए लोग हैं, राज्य की गाइडलाइन्स के हिसाब से उनको घर मिलने चाहिए ।
सभापति जी, मैं झोपड़-पट्टी से यहां तक पहुंचा हूं । इसलिए रेलवे लाइन के बगल की झोपड़-पट्टियां कैसे बसीं? कभी-कभी हमारे अधिकारियों को लगता है कि यह तो पॉलिटीशियन लोगों को वोट चाहिए, इसलिए सारी बातें करते हैं, डिमांड करते हैं । जब भी यह रेलवे लाइन का काम शुरू हुआ था, उस समय पर रेलवे लाइन के कान्ट्रेक्टरों ने कामगारों को अन्य-अन्य राज्यों से लाकर यहां पर बसाया था । उन दिनों जगह खाली पड़ी थी । दो लाइन का काम शुरू हुआ । उसके बाद में चार हुआ, अभी छ: हो रहा है तो बहुत लम्बे समय से बसे हुए थे । जैसे-जैसे लाइन बढ़ती गई, यह झोपड़-पट्टी बगल में आती गई । ज़रा सोचिए, पहले के ऑफिसर को क्या कोई शौक था किसी को रेलवे लाइन के पास झोपड़-पट्टी बसने देने के लिए?
अपना ही रेलवे लाइन का काम चलता है, तो अपने लोगों को यहाँ पर बिठाओ । मुंबई शहर में सारा इसी प्रकार से हुआ । वहाँ सीवरेज लाइन सिस्टम का काम चालू हुआ । एशिया का सबसे बड़ा सीवरेज सिस्टम का काम हमारी मुंबई महानगर पालिका में हो रहा है । वहाँ पर लोगों को लाकर बसाया गया । वहाँ झोपड़पट्टी बढ़ती गईं । देश में रेलवे का इतना बड़ा नेटवर्क आ गया । रेलवे लाइन का काम करने के लिए उत्तर प्रदेश, बिहार से लोग आ गए और मुंबई में लोग बढ़ते गए । अब सरकार ने इसके लिए नियम बनाया है, तो अधिकारी वर्ग को इसका निबटारा बहुत जल्दी करना चाहिए । मैं इस बात को मानता हूँ । मैं अपने भाषण को बहुत लंबा नहीं करता हूँ ।…(व्यवधान)
माननीय सभापति: माननीय सांसद श्री सुनील तटकरे जी ।
श्री गोपाल शेट्टी: सभापति महोदया, अभी मेरे बोलने का समय समाप्त नहीं हुआ है । मुझे मेरी पार्टी ने आधा घंटा बोलने के लिए कहा है । अभी मुझे बोलते हुए 10 मिनट ही हुए हैं ।
माननीय सभापति : आपको बोलते हुए 15 मिनट हो गए हैं ।
श्री गोपाल शेट्टी: महोदया, 15 मिनट हो गए हैं, तो मेरे 15मिनट और बाकी हैं । आप मेरी पार्टी के नेता से पूछ लीजिए । मैं बैठ जाऊँगा ।…(व्यवधान)
महोदया, यह जो देश में पीपीपी मॉडल आ रहा है, मैं कभी-कभी हैरान होता हूँ, देश में लोकशाही के माध्यम से चुनाव होते हैं, लोग जिताकर एक सरकार को बनाते हैं, तो उस सरकार का दायित्व बनता है कि वह लोगों की सारी आशाओं और अपेक्षाओं को पूरा करे । PPP model is the only solution which can lead the country. इससे हम प्रोग्रेस की तरफ जा सकते हैं और लोगों को सुविधा दे सकते हैं ।…(व्यवधान) जायसवाल जी, बताइए मैं क्या करूँ?…(व्यवधान) मैं कह रहा हूँ कि मुझे आधा घंटे का समय दिया गया है ।…(व्यवधान)
डॉ. संजय जायसवाल (पश्चिम चम्पारण): महोदया, इन्हें कम से कम 5 मिनट और बोलने दीजिए ।…(व्यवधान)
माननीय सभापति : 15 मिनट से 3 मिनट ज्यादा, 18 मिनट हो गए हैं । क्या ये आधा घंटा बोलेंगे? अन्य लोगों का क्या होगा? ऐसे तो इन्हें बोलते हुए 4 बज जाएंगे ।
…(व्यवधान)
श्री गोपाल शेट्टी: महोदया, मुझे जितना समय पार्टी की तरफ से दिया गया है, मैं उतनी देर बोलूँगा, क्योंकि मुझे पार्टी के आदेश का भी पालन करना है ।…(व्यवधान) मैं आपका भी सम्मान करूँगा ।
महोदया, मैं चाहूँगा कि पूरे देश में पीपीपी मॉडल लागू होना चाहिए । मैं चाहूँगा कि सारे राजनीतिक दलों के नेता बैठकर इसका रास्ता निकालें । इससे देश के लोगों को सुविधा मिलेगी ।…(व्यवधान) हम तो जीतेंगे, सरकारें बनती जाएंगी, लेकिन अगर हम लोगों को सुविधा नहीं देंगे तो इस लोकशाही के क्या मायने होते हैं?…(व्यवधान) पीपीपी मॉडल इसका एकमात्र हल है ।…(व्यवधान) अगर हमारे कांग्रेस के मित्रों को लगता है कि हमारी सरकार पीपीपी मॉडल कुछ पूंजीपतियों का भला करने के लिए लाती है, तो मैं चाहूँगा कि पीपीपी मॉडल के माध्यम से जितने भी काम मिलेंगे, उन्हें कांग्रेस के लोग ले लें ।…(व्यवधान)
माननीय सभापति : सुरेश जी, आप बैठ जाइए ।
श्री गोपाल शेट्टी: आप लोगों के पास तो इन दिनों में कुछ काम भी नहीं है ।…(व्यवधान) पीपीपी मॉडल के माध्यम से ये सारे कांट्रेक्ट आप ले लो और देश का भला कर दो ।…(व्यवधान) जितने भी काम हैं, उन्हें आप लोग कीजिए ।…(व्यवधान) इसमें क्या दिक्कत है? …(व्यवधान)
माननीय सभापति : सुरेश जी, आप इनकी बात सुनिए । आप अपना मौका आने पर अपनी बात कीजिएगा ।
…(व्यवधान)
श्री गोपाल शेट्टी: महोदया, मैं मानता हूँ कि पीपीपी मॉडल ही इसका एकमात्र हल है ।…(व्यवधान) मैं कहना चाहूँगा कि पीपीपी मॉडल के माध्यम से देश भर के रेलवे स्टेशंस को डेवलप करने का एक प्लान सरकार के अधिकारियों ने बनाया है ।…(व्यवधान) खासकर के मुंबई शहर में महाराष्ट्र की सरकार ने इस पर अधिक जोर देने का निर्णय ले लिया है ।…(व्यवधान) इसमें नो कॉस्ट है । सरकार का एक रुपया भी खर्च न करते हुए सारे रेलवे स्टेशंस मल्टी स्टोरी डेवलप होंगे । इनमें बहुत सारे लोगों को कमर्शियल ऑफिसेज खोलने के लिए जगह मिलेगी । इससे रेलवे के पास बहुत बड़े पैमाने पर पैसा आएगा । उस पैसे से हम लोगों को और ज्यादा सुविधा आने वाले दिनों में दे सकते हैं । हमें इस दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता है ।
महोदया, मोदी जी ने 5 साल में रेलवे को एक नई दिशा दिला दी है । पीयूष गोयल जी प्रमाणिकता और परिश्रम से काम करते हुए हर एम.पी. की समस्या को सुनते हैं और उसका रास्ता निकालते हैं । मैं इसके लिए उनका अभिनन्दन करना चाहूँगा । कुछ प्राइवेट जगहों पर रेलवे की डिमांड लोग करते हैं, मैं चाहूँगा कि आने वाले दिनों में इस पर ध्यान दिया जाए । उनका कहना है कि आप हमारे से किराया ज्यादा ले लो । उदाहरण के तौर पर मैं आपको बताता हूँ कि मुंबई से कर्नाटक जाने के लिए ट्रेन की माँग बहुत दिनों से हो रही है, यह ट्रैक महाराष्ट्र से होकर जाता है । इससे महाराष्ट्र के लोगों को भी सुविधा मिलेगी, कर्नाटक के लोगों को भी सुविधा मिलेगी । वे बस से सफर करते हैं, तो इसमें 4 हजार रुपये लगते हैं । वे कहते हैं कि हम रेलवे को 2 हजार रुपये देने को तैयार हैं । वे अभी के रेलवे के किराये से दो गुना ज्यादा किराया देने के लिए तैयार हैं । रेलवे बोर्ड के लोग कहते हैं कि अगर हम मुंबई का इस प्रकार का एक नया सिस्टम बनाएंगे, तो यह हमें पूरे देश में लागू करना पड़ेगा । मैं कहता हूँ कि ऐसा क्यों नहीं करना चाहिए? अगर लोग डिमांड करते हैं कि हमें यह सुविधा दीजिए, जब लोग किराया देने के लिए तैयार हैं तो सरकार निर्णय क्यों नहीं लेती है? हमें इस प्रकार के नए सिस्टम को इंट्रोड्यूस करके लोगों को अधिक सुविधा देने का काम आने वाले दिनों में करना चाहिए । कहने को तो बहुत सारी बातें हैं, लेकिन आप मुझे ज्यादा बोलने की इजाजत नहीं दे रही हैं । मैं अपनी बात समाप्त करने से पहले फिर एक बार कहता हूँ, आप आज सभापति के रूप में यहाँ पर बैठी हैं, तो मैं चाहूँगा कि अनेक मुद्दों पर सरकार ने बहुत काम किया है, सरकार ने बहुत सारे पैसे दिए हैं, लेकिन एक काम, जिसमें कोई पैसा लगने वाला नहीं है, लेडीज स्पेशल डोर क्लोजर का काम तुरन्त मुंबई शहर में इम्प्लिमेंट हो । मैं इस बात की माँग करता हूँ । आपने मुझे बोलने का मौका दिया, इसके लिए मैं आपका धन्यवाद अदा करता हूँ । बहुत-बहुत धन्यवाद । भारत माता की जय ।
*SHRI SAPTAGIRI SANKAR ULAKA (KORAPUT): Welcome highest ever allocation of Rs.159908 crore for 2019-2020. However, what has been observed is that the budgetary support of central government continues to be the primary source of funds for Capital expenditure for railways. Also the Central Government continues to rely on extra budgetary support to finance railway infrastructure. Key focus area should be around railway safety which continues to be in a poor state given the recent train accident of Samaleswari express at Rayagada (Odisha) wherein three staff from railways died.
Especially, the Rail budget of 2019 provisioned for Odisha is disappointing.
No new lines have been declared. The allocation for construction of new lines have been declining in the last few years due to the missed targets there is huge spill-over of new line construction.
Only 0.10 crores have been allocated to Gunupur-Thervubali Railway line which is a meager amount. Previously Rs.935 crores had been allocated but no visible progress has been made so far.
Request for new lines: Gopalpur-Singapur Road broad gauge line (via Padmapur, Ramanaguda, Bankili) has been ignored.
Request for dedicated East coast freight corridor from Kharagpur to Vijayawada and east-west dedicated freight corridor from Jharsuguda to Bilaspur has been ignored.
New Train (inter-city) from Jeypore to Bhubaneswar via (Rayagada) has not been honoured after requests from the state of Odisha.
Stoppages of Express Trains at “Ambadola” Station of Rayagada District has not been done.
New train Intercity/Fast train from Gunupur to Bhubneswar/Bhadrak has not been done.
Odisha and its rail infrastructure needs a lot of support from the Central Government. Kindly consider the just demand of the people of Odisha.
Hope Government will certainly consider the request of Odisha on priority.
SHRI SUNIL DATTATRAY TATKARE (RAIGAD): Madam Chairperson, thank you. Konkan Railway was the dream of Konkan people since long. It came to fruition in the form of Konkan Railway Corporation. For that the credit goes to Barrister Nath Pai, the late Madhu Dandavate ji, who was the Finance Minister, the late George Fernandes ji, who was the Railway Minister and to the then Chief Minister, hon. Sharad Pawar ji, who highly contributed towards the formation of Konkan Railway Corporation.
Konkan Railway, constructed, owned and operated by the Konkan Railway Corporation Limited, KRCL, is the only operating railway system, owned and administered as a PSU, seamlessly integrated with the Indian Railway system.
KRCL carries 34 million passengers approximately through its system with 54 pairs of passenger trains. Its route length is 740 kilometres which is approximately one per cent of the Indian Railways. There are various Central funds set up by the Government of India where the Ministry of Railways gets annual allocation of funds for a specific purpose. These funds are for all citizens of India. These funds are for activities, not directly related with train operations, but are given as Indian Railways is not able to generate enough internal resources.
Indian Railways has been spending these funds for the benefit of the people along the railway system across the country except on the Konkan Railway territory. As such, the people of the Konkan, Goa and coastal Karnataka regions are deprived of the benefits of these funds because the Konkan Railway is administered as a PSU where only Rs.17.64 crore has been approved in the Budget.
KRCL is required to incur expenditure on Railway user’s safety and comfort on the same lines. There is a need for additional funds for improvement in passenger amenities at stations, other passenger safety works like high level platform, foot over bridge etc., construction of ROBs, and replacement of tracks.
It is understood that Konkan Railway is carrying a huge debt which is the legacy of the money borrowed for its construction. The annual interest burden which is approximately Rs,150 crore, because of which it does not have any surplus for improving passenger amenities and augmenting its capacity to carry the things.
Konkan Railway was first railway started from Apta to Roha which is in Central Railway and from Roha onwards it is in Konkan Railway. From Apta to Roha, the land was acquired in the name of Konkan Railway but the project affected persons are not getting the benefit.
Last time, when Shri Suresh Prabhu was the Minister, the work relating to doubling and electrification was started from my native place Kolad upto Veer. I am asking the hon. Minister that the doubling work should be completed upto Ratanagiri with electrification also. Veer Station is there. Mahad is a highly industrial town. DPR should be formed for the new railway line between Veer and Mahad.
There are several problems in Pen, Mangaon, Khed and Chiplun where Jana Satabdi Express, Mangala Express, Veeravalli Express, Nagercoil Gandhidham Express, Hapa Nizamuddin Express, Matsyagandha Express are needed to be stopped.
I would like to urge the Minister that in my district, there is an RCF plant at Thal. The distance from Pen to Thal is 27 kilometres. Thirty years before, it was a goods carrying track, not used for the passengers. I would like to ask the hon. Minister of State for Railways whether MMRDA will make funds available for that. At least the DPR should be made from Pen to Alibaug. Last time, it was announced also. Unfortunately, it was not done. Express trains are running between Panvel and Karjat, but not the local trains. I am requesting the Minister of State to look into the matter and the new railway station, Chowk should be established. There is a single track between Karjat and Khopoli which requires double track. There is heavy traffic between Karjat and Kalyan and there are only two tracks. So, the third track should also be made available there. There was a bunker for going from Pune to Karjat. Now, the system has been improved. So, the long route trains going to the Southern should have a stop at Karjat. There are some issues relating to railway overbridge. Karjat station should be upgraded.
I would like to urge for some new railway stations especially in Pen taluka, Kharpada and Devgad. New railway line should be there in Mahad. There was a railway line project considered between Chiplun and Kannad. Kakkanad with Western Maharashtra was to be connected. The budgetary provision was also made in the State Budget. I would like to ask that at least the DPR should be made for connectivity from Kakkanad.
I would like to mention about Konkan Railways, which is not self-sustained. It is being given only Rs. 17 crore as Government’s share to a PSU. It should either be taken over by the Central Government or it should be strengthened. Another point that I would like to mention here is that up to Roha it is in the possession of the Central Railways, which should be given to the Konkan Railways so that Konkan Railways can become self-sustained.
I would also request that new DPRs should be prepared for Pen to Alibaug, Veer to Mahad, Chiplun to Karad, and the long-distance express trains should get halt at least at Mangaon, Khed and Chiplun. Thank you very much, Madam.
श्री सुधीर गुप्ता (मन्दसौर): महोदया, आपने रेलवे की डिमांड फॉर ग्रांट्स पर मुझे बोलने का अवसर प्रदान किया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं । इस अवसर पर मैं कवि आशीष की लिखी रेलवे पर कुछ पंक्तियां सुनाना चाहता हूं – “खुशबू माटी की लेकर जब रेल चले, जब रेल चले कसबा चले, गांव चले, शहर चले और देश चले ।
पूरब, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण चहुं दिशा में मेल बढ़े खुशबू माटी की लेकर जब रेल चले, जब रेल चले ।
उगता सूरज चढ़ता है और सांझ ढले सो जाता है पर रेल का पहिया चलता है, चलता है, चलता जाता है ।
गति रेल के पहिए की, नव प्रगति की पहचान बने, खुशबू माटी की लेकर के जब रेल चले, जब रेल चले ।” माननीय सभापति जी, रेलों का सुख-दु:ख से बड़ा नाता-रिश्ता रहा है । वर्ष 1893 में नस्लभेदी अफ्रीका में फर्स्ट क्लास में बैठे गांधी जी को गोरों ने बाहर निकलने को कहा, लेकिन उन्होंने निकलने से इनकार कर दिया । पीटरमेरिट्जबर्ग में उन्हें डिब्बे से धकेल दिया गया । आजाद भारत में हमने कभी किसी गोरी चमड़ी वालों को नहीं धकेला, फिर भी हम असहिष्णु हैं । गांधी जी उसके बाद कभी फर्स्ट क्लास में नहीं बैठे, थर्ड क्लास में ही गए । कालान्तर में गांधी ने लौटकर अंग्रेजों को भारत से धकेलने का बड़ा प्रयास किया ।
इयान केर ने अपनी किताब में लिखा है, कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश आशुतोष मुखर्जी प्रथम श्रेणी कोच में यात्रा कर रहे थे । ऊपर की बर्थ पर बैठे अंग्रेज ने सोए हुए मुखर्जी की चप्पल बाहर फेंक दी । बाद में मुखर्जी ने अंग्रेज का कोट बाहर फेंक दिया । उठने पर अंग्रेज ने पूछा कि मेरा कोट कहां है? आशुतोष मुखर्जी जी ने कहा कि कोट चप्पल ढूंढने गया है । कालान्तर में आशुतोष मुखर्जी के पुत्र डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारतीय जनसंघ के संस्थापक बने । 17 दिसम्बर, 1928 की रात भगत सिंह, दुर्गा भाभी, चन्द्र शेखर आजाद, राजगुरु लाहौर से कलकत्ता रेल से ही पहुंचे थे, दो फर्स्ट क्लास के टिकट, दो थर्ड क्लास के टिकट । ट्रेनों का सफर यह देश कैसे भूल सकता है?
वर्ष 1947 का भारत विभाजन हुआ, तब पलायन का सबसे बड़ा जरिया तो रेल ही बना था । लाशों का ढेर ट्रेनों में ही तो आया था । दुर्भाग्य भारतीय रेलों का कि 40 प्रतिशत हिस्सा पाकिस्तान को मिला, 20 प्रतिशत आबादी, 30 प्रतिशत जमीन और 40 प्रतिशत रेल ले गए । नेता मौन थे । आसिफ अली रेल मंत्री थे । खैर छोड़िए ।
वर्ष 1881 में इण्डियन टी एसोसिएशन ने भारत में चाय प्रचलित करने में रेलों का ही सहारा लिया । वर्ष 1900 तक भारत में चाय पीने वालों की संख्या लगभग नगण्य थी । आज उत्पादन की 70 प्रतिशत चाय हम ही पी जाते हैं ।
माननीय सभापति जी, रेलों का फिल्मों पर भी बहुत प्रभाव रहा है । द बर्निंग ट्रेन, शोले, दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे, फिल्म आशीर्वाद का गाना अशोक कुमार ने फिल्माया । भारतीय मानस पर, विशेषकर बच्चों पर उसका बड़ा सकारात्मक प्रभाव रेलों को लेकर पड़ा । अशोक कुमार ने गीत गाया । छोटे-छोटे बच्चे एक-दूसरे की शर्ट पकड़ कर जब रेलगाड़ी बनाते हैं, तो “रेलगाड़ी, रेलगाड़ी, रेलगाड़ी छुक-छुक, छुक-छुक, बीच वाले स्टेशन बोले रुक-रुक, रुक-रुक ।” आज हम भी अपने मंत्री जी से कहते हैं कि बीच वाले स्टेशन पर रुक-रुक, रुक-रुक । लोहे की सड़क यहां से वहां, वहां से यहां ।
माननीय सभापति जी, रेलों का बड़ा पुराना इतिहास है । वर्ष 1843 में इसकी कल्पना हुई । असीम प्राकृतिक संसाधन भारत के थे, जिनका ब्रिटेन को दोहन करना था । ब्रिटेन समृद्ध होने के लिए अनाज, बहुमूल्य लकड़ियां, मसाले, फल, कोयला, लोहा आदि तमाम बहुमूल्य सामग्रियां ब्रिटिश निर्यात के लिए शीघ्रता चाहता था ।
वर्ष 1844 में प्रस्ताव आया, वर्ष 1850 में कोलकाता-मुंबई में योजना बनी । पहली यात्री ट्रेन वर्ष 1853 में मुंबई से ठाणे चली । वर्ष 1854 में हावड़ा से हुबली और वर्ष 1856 में चेन्नई से वेयसरपुड़ी से वलजाह रोड, वर्ष 1881 में पहली रेल पहाड़ों में दार्जलिंग की दिशा में बढ़ी । वर्ष 1925 में पहली बार इलेक्ट्रिक ट्रेन चली । वर्ष 1943 में कोलकाता-हावड़ा ब्रिज बना और 1945 में पहली बार डीजल इंजन आया, उसके बाद देश आजाद हो गया । वर्ष 1947 से 1951 तक क्षेत्रीय रेलों का गठन हुआ, जैसा अंग्रेज कह गए थे, वैसा कर दिया गया । मगर अंग्रेजों के जाने के बाद भारतीय रेलवे में जोन और डिविजन बन गए । सरकारें भूल चुकी थीं । उत्तर पूर्वी रेलवे या पूर्वोत्तर रेलवे, दक्षिण मध्य रेलवे, दक्षिण पश्चिम रेलवे, उत्तर पश्चिम रेलवे, पश्चिम मध्य रेलवे, उत्तर मध्य रेलवे, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे, पूर्व तटीय रेलवे, पूर्व और मध्य रेलवे अटल जी के नेतृत्व में सन 2000-2003 के दौरान बनीं, यह देश को मिलने वाली बहुत बड़ी उपलब्धि है । इसे भारतीय रेल के बड़े कदम के रूप में कौन नकार सकता है? सन 2000 में आईआरसीटीसी प्रणाली के माध्यम से आनलॉइन ट्रेन आरक्षण टिकट लेना शुभारंभ हुआ ।
मैंने कुछ वर्षों के बजट भाषण पढ़े । उसमें विकास, विस्तार, विश्वास, उत्साह, ऊर्जा, संकल्प, निर्णय, आशा, साहस, सूझबूझ, भविष्य, खुशियां, लगन, प्रेरणा, कामना, विकल्प, विचार, प्रक्रिया, पद्धति, वादे, इरादे, योजना, सुविधा, क्षमता, बदलाव, सुधार प्रगति, सेवा तैयारियां, अमल, कायाकल्प ढूंढने की कोशिश की । मगर 14 मार्च, 2012 के बजट भाषण पढ़ने पर निराशा हाथ लगी । बजट भाषण में माननीय मंत्री श्री दिनेश त्रिवेदी जी कहते हैं, “कंधे झुक गये कमर लचक गई बोझ उठा-उठा कर बेचारी रेल थक गई रेल को नई दवा और नया असर चाहिए ।” मैडम, यह देश कितनी निराशा में था, जब मंत्री जी ने ऐसा कहा तो अगले वर्ष मंत्री जी बदल दिए गए और नया असर देने के लिए नए रेल मंत्री लाए गए । श्री पवन बंसल जी ने 26 फरवरी, 2013 को नया बजट पेश किया । मैं सोच रहा था कि निराशा से आशा की ओर शायद इनके नेतृत्व में रेलवे चला जाए, मगर दुर्भाग्य सहयोगी दल समाजवादी पार्टी के प्रमुख श्री मुलायम सिंह जी ने कहा, आज जो बजट पेश किया गया है वह जनविरोधी है । यूपीए सरकार जिस तरह जनता की कमर तोड़ रही है उसका जवाब जनता जरूर देगी । थोड़े दिनों बाद माननीय मंत्री जी सीबीआई सिंगला 3 मई, चंडीगढ़, खैर छोड़ो । हाय निराशा ही हाथ लगी । घोर निराशा, ट्रेनें समय पर नहीं चलती है, समुचित सफाई नहीं होती, लोग घर जाने की जल्दी में गुनगुनाते हैं “घर जाने की बहुत बेकरारी है पर हो रही देरी क्योंकि ट्रेन सरकारी है” मैडम, देश निराशा से निकला । साल 2014 में सदानंद गौड़ा जी आए, सुरेश प्रभु जी आए और पीयूष गोयल जी इस संदेश के साथ आए, “सफर में धूप तो होगी जो चल सके तो चलो सभी हैं भीड़ में तुम भी निकल सको तो चलो” यह चलने का इरादा भारत की रेल को नया रूप दे गया । मेरे संसदीय क्षेत्र को विशेष दर्जा दे गया । मध्य प्रदेश ने अपने इतिहास में पहली बार माननीय नरेन्द्र मोदी जी का प्यार और पीयूष गोयल जी का दुलार देखा । सन 2009 से 2014 में 632 करोड़ रुपये की तुलना में 2014 से 2019 में 4205 करोड़ रुपये यानी 565 प्रतिशत की वृद्धि हुई, कमाल है । आज हम गर्व से कह सकते हैं कि इस देश में 50 प्रतिशत पदों पर महिला कांस्टेबलों को आरक्षण के तहत भर्ती का निर्णय लिया, पहले आरपीएीफ में 2.25 परसेंट महिलाएं थीं ।
भर्तियों के निर्णय, जैव शौचालय, देश के सभी रेलवे स्टेशनों पर 100 प्रतिशत एलईडी, दिव्यांगजनों हेतु 30 प्रतिशत रेलवे स्टेशनों पर रैम्प व अवरोध मुक्त प्रवेश, निर्भया फंड, पर्यावरण की चिंता, पूर्वोत्तर का विकास, सिग्नल प्रणाली में सुधार, डीजल की बचत, गेज़ परिवर्तन, स्वच्छता पर ध्यान, रेल दुर्घटनाओं में कमी, कर्मचारियों की संख्या में वृद्धि, ट्रेनों की संख्या में वृद्धि, राजस्व में वृद्धि और माल ढुलाई में वृद्धि ।
माननीय सभापति जी, हम देखते हैं विश्वास और विकास कैसे होता है । जब सुरक्षा के रेकॉर्ड को देखते हैं तो रेलवे को वर्ष 2018-19 में अब तक के सर्वश्रेष्ठ सुरक्षा रेकॉर्ड से नवाजा जाना चाहिए । वर्ष 2013-14 में जहां दुर्घटनाओं में 152 की मृत्यु होती थी, वहीं वर्ष 2018-19 में यह आंकड़ा 29 पर आकर ठहर गया है । हम इनोवेट इंडिया के दर्शन वाराणसी में कर सकते हैं, जहां डीजल लोको का परिवर्तन बिजली के लोको में हुआ है । चितरंजन लोको की जो पश्चिम बंगाल में स्थिति है, 402 इंजनों का निर्माण करके विश्व में इंजनों का सबसे बड़ा निर्माता बनकर खड़ा है । साहस ऐसा कि बोगीबील का सबसे लम्बा पुल निर्धारित समय से पहले रेल सड़क पुल अरुणाचल प्रदेश को शेष भारत से जोड़ रहा है । संकल्प ऐसा कि ब्राड ग्रेज नेटवर्क सभी मानव रहित रेल फाटक समाप्त करने का निर्णय, कार्य की प्रक्रिया कैसी वर्ष 2014 में बनने वाले कुल आरओबी और आरयूबी, मैंने जब प्रश्न के उत्तर में देखे थे तो लगभग 26 हजार से अधिक बनने बाकी थे । वर्ष 2009 से 2014 तक मानव रहित 1137 फाटक बंद हुए, परन्तु वर्ष 2018-19 में अकेले एक वर्ष 3479 फाटक समाप्त हुए हैं । माननीय मंत्रियों के प्रयास से 1220 रोड ओवर ब्रिज और रोड अंडर ब्रिज वर्ष 2014 से वर्ष 2019 के वर्षों में निर्मित हुए हैं । अकेले मेरे संसदीय क्षेत्र मन्दसौर, नीमच, जावरा में 45 से अधिक रोड ओवर ब्रिज और रोड अंडर ब्रिज स्वीकृत हुए हैं और निर्माण पूर्ण हुआ है ।
माननीय सभापति जी, वर्ष 2009 से 2014 में कुल पूंजीगत व्यय 2.3 लाख करोड़ रुपये की तुलना वर्ष 2014 से वर्ष 2019 में पूंजीगत व्यय में उत्साहजनक वृद्धि थी । लगभग 5.1 लाख करोड़ क्षमता वृद्धि को बल एवं रेल लाइनों की कमीशनिंग तेज हुई । वर्ष 2009 से वर्ष 2014 की तुलना में वर्ष 2014 से वर्ष 2018 में 6.53 कि.मी. नई लाइन और दोहरीकरण में वृद्धि हुई है । वर्ष 2019-20 में 15 कि.मी. प्रतिदिन का लक्ष्य रखा गया है । वर्ष 1895 में पहला लोकोमोटिव अजमेर में राजपूताना मालवा रेलवे के लिए बनवाया गया, मगर मेरे क्षेत्र में कांग्रेस शासन में विकास नहीं आया । विकास या तो अंग्रेजों ने किया या भारतीय जनता पार्टी ने किया । ये लोग कृषकों के बीच आंदोलन करके, उनको भड़काने के लिए जरूर उधर आए थे, मगर दोहरीकरण की पटरी लेकर नहीं आए । माननीय मंत्री जी आपने नीमच से बड़ी सादडी नई लाइन के लिए लगभग 500 करोड़ रुपये की घोषणा की है । चितौड़गढ़ से नीमच की रेल लाइन के दोहरीकरण के लिए 260 करोड़ रुपये, नीमच से रतलाम के लिए लगभग 960 करोड़ रुपये आपने मेरे संसदीय क्षेत्र के लिए घोषित किए हैं ।
माननीय सभापति जी, कैसा विकास देश में भारत की जिन्दगियों को जोड़ता हुआ हम पूर्वोत्तर में भी और तेजी से रेलवे का विकास देख रहे हैं । न्यू इंडिया बनने की गति हम महसूस कर रहे हैं । दिल्ली से वाराणसी के मध्य पहली स्वदेशी सेमी हाई स्पीड ट्रेन तैयार होकर आ गई है । भारत में दिल्ली से वाराणसी के बीच चलने वाली सबसे तेज ट्रेन अन्य ट्रेन से चलने में 35-40 प्रतिशत तेज है । 130 ट्रेनों का और नया सेट तैयार हो रहा है ।
माननीय सभापति जी, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री से आग्रह करूंगा कि मेरे संसदीय क्षेत्र का और पश्चिम रेलवे के रतलाम से चितौड़गढ़ का ट्रैक सेमी हाई स्पीड के लिए टेस्टेड हो चुका है । माननीय मंत्री जी और मेरे क्षेत्र में मुम्बई से दिल्ली वाया शामगढ़ के बीच अगर हाई स्पीड ट्रेन देंगे, तो मेरे क्षेत्र में राजस्व की वृद्धि होगी । हम जानते हैं कि अभी कुछ दिनों पहले रायबरेली की चर्चा चली थी, लेकिन जब मैं देखता हूं कि रायबरेली में 2014 तक कपूरथला से लाए डिब्बों पर मामूली फिनिशिंग का काम होता था, आज अगस्त 2014 में पहला पूर्ण कोच निर्मित हो रहा है । हम जानते हैं कि “हम बचाते रहे, दीमक से घर अपना, पर कुर्सियों के चंद कीड़े सारा मुल्क खा गये ।” माननीय सभापति जी, आज देश कैसी ऊर्जाओं से भरा हुआ काम कर रहा है । 1925 में विद्युतीकरण होना प्रारम्भ हुआ था । पहली ट्रेन मुम्बई से कुर्ला के बीच चली थी, मगर दुर्भाग्य है कि इस बीच ज्यादा तेजी नहीं आई । आज हम देख रहे है कि यह जो संकल्प है, भारतीय रेलवे वर्ष 2021-22 तक ब्रॉडगेज रूटों पर 100 प्रतिशत विद्युतीकृत होगा और उसका सबसे बड़ा फायदा मेरे संसदीय क्षेत्र के पश्चिम रेलवे ट्रैक पर होगा । जहां लगभग 300 करोड़ की लागत से रतनाम-चित्तौड विद्युतीकरण पूर्ण होने के लगभग खड़ा है । मैं माननीय मंत्री जी से चाहूंगा कि प्रधान मंत्री जी के हाथों इसका शुभारम्भ हो । हम जानते हैं कि आधुनिक सिग्नल पद्धति का विकास हुआ है । रेलों की क्षमता और गति भी बढ़ी है, रूट में भी इज़ाफ़ा हुआ है ।
माननीय सभापति जी, हम इस बात को जानते हैं कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और सम्पूर्ण डी.एफ.सी के वर्ष 2020-21 तक पूर्ण होने की आशा है । हमने फ्रेट को बढ़ावा देने के लिए भी देश में काम किया है । मैं माननीय मंत्रियों की इस पहल का स्वागत करता हूं । स्टेशनों के विकास के लिए बहुत तेजी से देश में नए स्वरूप में काम हो रहा है । मध्य प्रदेश में भोपाल का रेलवे स्टेशन हबीबगंज उस श्रृंखला में सम्मिलित है । यात्री सेवाओं की बढ़ोतरी के लिए हम देख रहे हैं कि लिफ्ट और एस्केलेटर 2014 तक 199 थे, आज 603 एस्केलेटर देश में काम कर रहे हैं । वर्ष 2014 में जहां 97 लिफ्ट्स थी, आज 445 लिफ्ट्स रेलवे में काम कर रही है । अविस्मरणीय यात्राओं का दौर है । यात्री कोचों का अपग्रेडेशन हो रहा है । अन्त्योदय ट्रेन आधुनिक सुविधाओं के साथ और लंबी दूरी की अनारक्षित ट्रेनों को चलाने की योजनाओं पर देश काम कर रहा है ।
आज डिजिटल इंडिया है । डिजिटल क्षेत्र में रेलवे भी बहुत तेजी से काम कर रही हैं । हाई स्पीड, वाई-फाई सेवाएं पूरे देश के अधिकांश स्टेशनों पर और तेज गति से पहुंचाने का काम हो रहा है । लंबी कतारों से राहत मिल रही है । कागज रहित अनारक्षित टिकटिंग प्रक्रिया आ रही है । हम उस दौर में देखते थे …(व्यवधान)
“हम प्रवासियों के लिए खुशी का सबसे बड़ा पैगाम होता है, जब गांव की रेल की रिजर्वेशन लिस्ट में अपना नाम होता है ।” माननीय सभापति जी, मैं एक स्वच्छता की बात करके समापन कर रहा हूं, क्योंकि रेलों ने स्वच्छता को तेजी से सबसे आगे बढ़ाया है । 2004 से 2014 के 10 वर्षों के दौरान 9587 बॉयो टॉयलेट्स की तुलना में, देश ने 2014 से इन पांच वर्षों में 1 लाख 80 हजार से अधिक बॉयो टॉयलेट्स स्थापित किए हैं । आज वेटिंग रूम 97 प्रतिशत तक, मेन एन्ट्री 93 प्रतिशत तक, फूट ऑवर ब्रिज 97 प्रतिशत तक, वेन्डर एरिया 84 प्रतिशत तक, ओपन सिटिंग एरिया 89 प्रतिशत तक, ड्रिंकिग वाटर का एरिया 82 प्रतिशत तक …(व्यवधान)
माननीय सभापति : माननीय सदस्य आपका समय पूरा हो गया है ।
…(व्यवधान)
श्री सुधीर गुप्ता: मैं एक शेर सुनाना चाहता हूं, जो मोदी जी के परिश्रम लिए समर्पित है । राही मासूम रजा ने कहा है:
“हमसफर में नींद ऐसी खो गई, हम न सोए रात थक कर सो गई,” *SHRI A. GANESHAMURTHI (ERODE): There is long pending demand for a new railway line between Erode and Palani. Initially this Railway line was proposed between Samnagar of Karnataka and Palani. As the Forest Department refused to issue clearance certificate, it was changed to Sathiamangalam-Erode-Palani railway line and then as Erode-Palani railway line. Funds were allocated for carrying out initial work and a survey of the railway line. Without any reason, this is kept pending. Even after initial fund allocation and carrying out the survey work, the process of starting a new railway line between Erode and Palani has been kept pending. I urge upon the Union Government to immediately start the work relating to the construction of new railway line between Erode and Palani without any further delay. The Railway Gate L.C. No.16 near Pasur Railway station on the Erode-Karur-Tiruchy railway line always remain closed. The Goods trains that are halted at the Pasur railway station is the reason for the permanent closure of thus Railway Gate L.C. no.16. this is State Highway connecting Namakkal and Coimbatore. Moreover there is heavy traffic in this area. I therefore urge upon the Union Government to construct a Road Over Bridge (ROB) at L.C. No.16 near Pasur railway station on Erode-Karur-Tiruchy railway line. I also urge upon the Union Government to construct bridges at L.C.No.211 and L.C.No. 122. Thank You.
*डॉ. अरविन्द कुमार शर्मा (रोहतक): मेरा संसदीय क्षेत्र रोहतक जोकि एनसीआर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के साथ लगता है । मेरे संसदीय क्षेत्र के मुख्य शहर - रोहतक, झज्जर और बहादुरगढ़ रेलवे के बहुत बड़ी आमदनी के स्रोत हैं क्योंकि हजारो की संख्या में मेरे संसदीय क्षेत्र के लोग अपनी आजीविका के लिए सरकारी एवं गैर-सरकारी क्षेत्रों में काम करने के लिए दिल्ली, गुरूग्राम,नोएडा एवं फरीदाबाद में हर दिन आना जाना होता है । इसलिए जनहित में निम्न मांगों को पूरा करने की कृपा करें ।
झज्जर से फरूकनगर तक रेलवे लाइन का निर्माण जिसकी लम्बाई लगभग 20 से 25 किमी है ।
झज्जर से बहादुरगढ़ तक रेलवे लाइन का निर्माण जिसकी लम्बाई लगभग 35 से 40 किमी है ।
नोट:- झज्जर से फरूकनगर और झज्जर से बहादुरगढ़ रेलवे लाइन के निर्माण से रोहतक संसदीय क्षेत्र की आम-जनता को बहुत ही लाभ मिलेगा और रेलवे की आमदनी में भी इजाफा होगा और जनता को गुरूग्राम और दिल्ली आने-जाने में सुविधा होगी ।
बीकानेर से हरिद्वार (वाया भिवानी, रोहतक,पानीपत, अम्बाला,सहारनपुर एवं हरिद्वार) जाने वाली ट्रेन संख्या 14717/14718 (अप/डाऊन) जोकि सप्ताह में 3 दिन चलती है । उसका ठहराव कलानौर में अति आवश्यक है क्योंकि कलानौर एक धार्मिक नगरी है और अक्सर लोग हरिद्वार, कुरूक्षेत्र एवं अमृतसर जाते हैं ।
हिसार और भिवानी से दिल्ली वाया कोसली के लिए एक्सप्रैस या पैसेंजर ट्रेन चलाने की भी कृपा करें ।
हिसार से गोरखपुर चलने वाली गोरखधाम एक्सप्रेस (12555/12556) का ठहराव कलानौर में किया जाए ।
अजमेर से चण्डीगढ़ से जाने वाली चण्डीगढ़ गरीब रथ (12983/12984) का ठहराव कलानौर में किया जाए ।
नोट:- इन गाड़ियों का ठहराव कलानौर में अति आवश्यक है क्योंकि कलानौर एक धार्मिक नगरी है और अक्सर लोग हरिद्वार, कुरूक्षेत्र एवं अमृतसर जाते हैं ।
सांपला रेलवे स्टेशन के पास बनी रेलवे क्रोसिंग पर अन्डर पास/फ्लाई ओवर ब्रिज का निर्माण ।
रोहतक रेलवे स्टेशन से रेलवे गुडस यार्ड को लाहली रेलवे स्टेशन के पास विस्थापित किया जाए ।
ग्राम गुरावड़ा, जिला रेवाड़ी में रेलवे हॉल्ट (स्टेशन) बनवाने के बारे में एवं ग्राम हासावास फाटक तथा ग्राम गादला रोड फाटक के बीच में कहीं भी जैसी सुविधा हो रेलवे हॉल्ट का निर्माण करवाने की कृपा करें ।
ग्राम ओलांत, जिला रेवाड़ी में रेलवे हॉल्ट (स्टेशन) को पुन: चालू करवाने के दिशा निर्देश देने की कृपा करें ।
जनहित में उपरोक्त कार्यों को अति शीघ्र कराया जाए, आदर सहित ।
श्री राम चन्द्र पासवान (समस्तीपुर): माननीय सभापति जी, आपने मुझे रेल बजट पर बोलने का अवसर दिया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं । अपनी पार्टी की तरफ से माननीय रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल जी को भी धन्यवाद देता हूं । आज आपने पूरे देश में रेल का जाल बिछाने का जो काम किया है उसके लिए माननीय प्रधान मंत्री जी को भी हम धन्यवाद देना चाहते हैं । माननीय प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में यह देश विकसित हो रहा है, उसमें रेलवे भी बहुत बड़ा अंग है । आज मैं माननीय रेल मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि इनका कार्य बहुत ही सराहनीय है और जहां-जहां अपेक्षित था, आज वहां की सभी जगह विकसित हो रही हैं, चाहे वह रेल के माध्यम से हो, चाहे वह जिस भी डिपार्टमेंट के माध्यम से हों । आज हर डिपार्टमेंट पर और खासकर रेल बजट के ऊपर डिबेट चल रही है । हम यह कहना चाहते हैं कि हम तो बिहार से आते हैं ।
मेरा लोक सभा क्षेत्र समस्तीपुर है, जो मिथिलांचल का एरिया है । 1997 में हसनपुर सकरी रेल लाइन, कुशेसर स्थान-खगरिया नई रेल लाइन एवं अन्य बहुत-सी ऐसी परियोजनाएं हैं, जो उस समय स्वीकृत हुई थीं और अभी माननीय रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल जी के नेतृत्व में उनमें काफी तेजी से काम हो रहा है । बहुत-सी ऐसी जगहें हैं, जहां हम लोगों की कांस्टीटुएंसी और घर हैं, वहां अभी तक अर्थ फिलिंग का काम भी नहीं हुआ है । वहां थोड़ी धीमी गति से काम चल रहा है । वह बाढ़ प्रभावित एरिया है और बाढ़ आने की वजह से बहुत जगहों पर काम में रुकावटें आती हैं । मैं रेल मंत्री जी से आग्रह करना चाहूंगा कि इस परियोजना को जल्द से जल्द और फर्स्ट प्रायरिटी में रखते हुए पूरा कराएं, जिसे उस समय पिंक बुक में दर्ज किया गया था, उस समय रेल मंत्री माननीय राम विलास पासवान जी थे । उनके समय में इसको मंजूरी दी गई थी और जो बहुत से काम सर्वे में डाले गए थे, उनमें सर्वे हो चुका है । उनमें भोला टॉकीज़ का भी मामला था, जहां ओवरब्रिज बनना है । यह समस्तीपुर में है । हम जानते हैं, वहां जाते हैं, वहां बहुत से पेशेंट्स भी आते हैं और वह फाटक बन्द रहने के चलते काफी पेशेंट्स रास्ते में ही कोलैप्स कर जाते हैं, मर जाते हैं । गाड़ियों के आवागमन से वह फाटक काफी लम्बे समय तक बन्द रहता है । उसका विषय मैंने पहले भी कई बार उठाया था, लेकिन अभी तक उसका टेंडर नहीं हुआ है, टेंडर की प्रक्रिया में है । मैं चाहूंगा कि उसका टेंडर हो ।
मुक्तापुर में भी ओवरब्रिज बनना है । रोसरा में महात्मा गांधी चौक है, वहां पर ओवरब्रिज की डिमाण्ड काफी समय से चलती आई है । वहां भी जब हम लोगों की मीटिंग होती है, उसमें भी हम लोग चर्चा करते रहते हैं । मैं रेल मंत्री जी से आग्रह करूंगा कि ये सारे काम हैं तो छोटे, लेकिन अपनी-अपनी जगह पर इनका बहुत बड़ा महत्व है । मैं चाहूंगा कि ये सारे काम हों ।
मैं आपके माध्यम से मांग करता हूं कि मुक्तापुर से लोहना रोड का सर्वे माननीय रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल जी के समय में ही हुआ था, अभी भी यह विषय चल रहा है, लेकिन अभी इसकी क्या स्थिति है, यह पता नहीं चल पा रहा है । वर्ष 2016-17 में सर्वे हो चुका है । इसलिए मैं चाहूंगा कि इस योजना में फण्ड दिया जाए, पैसा दिया जाए । समस्तीपुर-कर्पूरीग्राम-ताज़पुर-महुआ होते हुए हाज़ीपुर-सुगरौली लाइन का जो काम है, इसमें भी सर्वे हो चुका है, लेकिन अभी तक फण्ड का अभाव है । इसके लिए फण्ड दिया जाए । बहेरी-शिवाजीनगर-करियन-रोसरा-बेगुसराय लाइन का सर्वे 2017-18 में हुआ है । इसमें भी धन की कमी है ।
इसलिए मैं आपसे मांग करता हूं कि हम लोगों का यह क्षेत्र कोसी, कमलाबालान आदि सभी नदियों में समाहित है और इसके बारे में काफी समय से लोग सोच रहे थे । मैं आदरणीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी, रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल जी और श्री राम विलास पासवान जी, जो उस समय रेल मंत्री थे, को धन्यवाद देता हूं कि उनके नेतृत्व में यह सरकार काम कर रही है । इस काम को जल्द से जल्द पूरा कराया जाए । बहुत-सी ट्रेन्स से संबंधित बातें हैं, जिनको मैं बाद में लिखकर माननीय रेल मंत्री जी को दूंगा ।
मैं, आपके माध्यम से, इस बजट का समर्थन करते हुए, अपनी बात समाप्त करता हूं । मुझे उम्मीद है कि इस बजट के माध्यम से, खासकर मेरी कांस्टीटुएंसी की जो छोटी-छोटी समस्याएं हैं, छोटे-छोटे काम हैं, उनको रेल मंत्री जी जरूर पूरा करने का काम करेंगे । धन्यवाद ।
*SHRI KOMATI REDDY VENKAT REDDY (BHONGIR): Let me convey my views to Hon’ble Finance Minister for allocating funds to the ongoing railway works in Telangana for the current financial in the General Budget.
I am happy that Rs.20 crore allotted for Ghatkesar-Yadadri Extension MMTS Phase-II. This project was sanctioned during 2016-17 with an estimated cost of Rs. 412 crore. This is a joint project between Indian Railways and Govt. of Telangana. This comes under my constituency Bhongir.
I request the Hon’ble Minister to increase funds for this project as Yadadri is considered to be a Telangana’s “Balaji” temple. Thousands of passengers do visit this temple every day to seek the blessings of Lord Sri Lakshinarasimha Swamy. In the absence of proper rail connectivity, they mostly use road ways. Journey on roadways is burden sum on poor people. If the work is fast completed, it will benefit the poor in particular surrounding areas of Yadadri in general.
One more important line between Bibinagar Nadikudi is getting heavy traffic because single line. I request the Government to kindly sanction for doubling the above said section.
Another important project is development of Satellite Terminal at Cherlapalli Station. This project is sanctioned with an intention to down size the burden on Hyderabad and Secunderabad Stations. Once this station is commenced, lot of time will be saved to the passengers who take other means of transport to reach their destinations. Therefore, I would request the Hon’ble Minister to increase the fund allocation to this project in the revised budget estimates.
In addition to this more funds have been allocated for various projects in the state of Telangana in general.
· Rs. 200 crore allotted for Manoharabad-Kothapalli new line. This project was originally sanctioned during 2006-07 with an estimated cost of Rs. 1,160 crores. First phase of the project from Manoharabad-Gajwel section is nearing completion. I humbly request the Hon’ble Finance Minister to allocate more funds in this budget for the long pending project so as to enable the railways to complete it at the earliest.
· Rs.20 crore allotted for Akannapet-Medak new railway line. This project was originally sanctioned in the year 2012-13 with a total estimated cost of Rs. 118 crores. 50% of the project cost to be shared by the state Govt. in addition to providing land on free of cost.
· Rs.275 crores allotted for Munirabad-Mahabubnagar new line. This project was sanction in the year 1997-98 with an estimated cost of Rs.645 crores. Some of the land acquisition is under process. Around 29 km to new line between Devarakadra-Jaklair section is already completed and ready for commissioning.
· Rs. 405 crore allotted for Bhadrachallam-Sattupalli new line. This project was sanction during 2010-11 with an estimated cost of Rs.705 crores. This is a joint project of Indian Railways and Singareni Collieries Limited. Works are in fast progress.
· Rs.265 crore allotted for Kazipet-Balharsha 3rd line. This 3rd line project was sanctioned during 2015-16 with an estimated cost of Rs.2,063 crore. Sections between Raghavapuram-Potkapalli, Bisugir Sharif-Uppal and Wirur-Manikgarh are nearing completion.
· Rs.200 crore allotted for Secunderabad-Mahbubnagar doubling project. This project was sanction during the year 2015-16 with an estimated cost of Rs. 728 crore. Works are in fast progress including 9 major and 92 minor bridges.
· Rs.110 crore allotted for Kazipete-Vijayawada 3rd line project. This project was sanctioned during the year 2013-14 with an estimated cost of Rs. 1,857 crore.
· Rs.10 crore allotted for periodic overhauling workshop at Kazipet.
श्रीमती रंजनबेन भट्ट (वडोदरा): सभापति महोदया, सर्वप्रथम तो मैं आपश्री का विशेष धन्यवाद करती हूं कि रेलवे मंत्रालय के लिए हुई घोषणा पर आपने मुझे अपने विचार व्यक्त करने का अवसर दिया है । मैं यशस्वी प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी, वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला जी, रेलवे मंत्री श्री पीयूष गोयल जी और रेल राज्य मंत्री श्री सुरेश अंगड़ी जी के प्रति इस अवसर प्राप्ति पर आभार प्रकट करती हूं ।
भारतीय रेल देश के विकास के इंजन के रूप में सेवारत है । भारतीय रेलवे को राष्ट्र की जीवन रेखा भी कहा जाता है । हमारी भारतीय रेलवे पूरे देश को जोड़ती है और यह एक अतिविश्वसनीय और सरल संपर्क व्यवस्था है ।
इस बजट में रेलवे ट्रैक के लिए पीपीपी मॉडल को मंजूरी प्रदान की गई है । इस बजट में साफ, सुरक्षित और समयबद्ध रेल यात्रा पर जोर दिया गया है । 300 किलोमीटर मेट्रो रेल परियोजना को मंजूरी प्रदान की गई है । इस वर्ष 657 किलोमीटर नई मेट्रो नेटवर्क पर संचालन शुरू किया जाएगा । साथ ही, रेलवे किराये में सुधार के लिए आदर्श किराया कानून बनाने का भी प्रस्ताव पेश किया है । रेलवे में निजी भागीदारी के साथ सरकार देश में पहली बार प्राइवेट ट्रेनों का संचालन शुरू करने जा रही है । भारतीय रेलवे प्रदूषण मुक्त अभियान के तहत ग्रीन एनर्जी पर फोकस कर रही है । सौर ऊर्जा से रेलवे इंजन चलाने के लिए प्रकल्प भी तैयार किया गया है ।
माननीय सभापति महोदया, मुझे यह बताते हुए गर्व हो रहा है कि मेरे संसदीय क्षेत्र वड़ोदरा के मुख्य रेलव स्टेशन के प्लेटफार्म क्रमांक – 01 को सौर ऊर्जा से संचालित किया गया है । रेलवे स्टेशन को मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब बनाया जाएगा, ऐसा भी इस बजट में प्रावधान किया गया है । मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी को यह भी बताना चाहती हूं कि स्मार्ट सिटी विकास के अंतर्गत वड़ोदरा महानगर निगम द्वारा वड़ोदरा में मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब भी निर्माणधीन है । देश के 500 रेलवे स्टेशनों को मॉडल स्टेशन बनाने का कार्य प्रगति पर है ।
मैं देश के रेलवे मंत्री श्री पीयूष गोयल जी का आभारी हूं कि मेरा वड़ोदरा, लोक सभा क्षेत्र भी इस मॉडल रेलवे स्टेशन की सूची में शामिल किया गया है और 17.50 करोड़ रुपये की आबंटित धन राशि से हमारे वड़ोदरा का मुख्य रेलवे स्टेशन का निर्माण कार्य आदर्श रेलवे स्टेशन के रूप में हो रहा है । वड़ोदरा देश का 48वां ऐसा रेलवे स्टेशन है, जहां फ्री वाई-फाई सेवा प्रदान की गई है ।
वड़ोदरा गुजरात राज्य की शिक्षा, कला, संस्कृति और खेल-कूद की नगरी के रूप में जानी जाती है । वड़ोदरा का महाराजा सयाजीराव गायकवाड़ विश्वविद्यालय एशिया का सबसे बड़ा आवासीय विश्विविद्यालय है । देश का दूसरा और गुजरात का सर्वप्रथम एक समर्पित स्पोर्ट्स विश्वविद्यालय वड़ोदरा के डेसर तालुका में निर्माणाधीन है ।
मैं देश के आदरणीय प्रधान मंत्री, श्री नरेन्द्र मोदी जी के प्रति कोटि-कोटि आभार प्रकट करती हूं कि आपने देश की सर्वप्रथम रेलवे यूनिवर्सिटी को हमारे वड़ोदरा लोक सभा क्षेत्र में स्थापित और विकसित करने का निर्णय लिया है । रेलवे यूनिवर्सिटी के निर्माण और संपूर्ण विकास हेतु 25 करोड़ रुपये की धन राशि का आबंटन हो गया है । देश की सर्वप्रथम रेलवे यूनिवर्सिटी के आने से वड़ोदरा नगरी के परिचय मे प्रचुर वृद्धि हुई है ।
सभापति महोदया, वड़ोदरा में करीब पिछले 69 वर्षों से नेशनल अकादमी ऑफ इंडियन रेलवे कार्यरत है । देश भर से नवनियुक्त रेलवे अधिकारी को अपने परिवीक्षा काल में प्रशिक्षण और तालीम हेतु नेशनल अकादमी ऑफ इंडियन रेलवे में आना पड़ता है । इसी भव्य संकुल में दो वर्ष पूर्व ही देश का सर्वप्रथम नेशनल रेलवे ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट प्रारंभ हुआ । इस एनआरटीआई शिक्षा भवन का उद्घाटन आदरणीय रेलवे मंत्री श्री पीयूष गोयल जी और हमारे गुजरात राज्य के माननीय मुख्य मंत्री विजयभाई रूपाणि जी के कर कमलों से हुआ थ ।
इसी एनआरटीआई में देशभर से आए विद्यार्थी वड़ोदरा की अतिप्रतिष्ठित महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय के साथ संयुक्त रूप से, बीबीए इन ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट और बी.टेक इन ट्रांसपोर्ट टेक्नोलॉजी की शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं और देश के लिए भविष्य के ट्रांसपोर्ट प्रोफेशनल्स का निर्माण हो रहा है ।
महोदया, मैंने कांग्रेस के नेता अधीर रंजन जी की बात भी सुनी । उन्होंने प्रधान मंत्री जी की सोच और बुलेट ट्रेन का भी जिक्र किया था । मैं उन्हें बताना चाहती हूं कि वड़ोदरा वासी और वहां के जनप्रतिनिधि के तौर मैं गर्व से कह सकती हूं कि देश का सर्वप्रथम पीपीपी मॉडल से निर्माण हुआ आदर्श बस स्टेशन वड़ोदरा में सेवारत है । इस आदर्श बस स्टेशन का निर्माण, लोकार्पण और शिलान्यास गुजरात के तत्कालीन मुख्य मंत्री और देश के वर्तमान प्रधान मंत्री नरेन्द्र भाई मोदी जी के द्वारा हुआ था । यह आदर्श बस स्टेशन के रूप में इसका ढांचा और सुविधा, किसी एयरपोर्ट से कम नहीं है । मैं अधीर रंजन जी को वड़ोदरा का हमारा बस स्टेशन देखने के लिए निमंत्रित करती हूं । मैं आदरणीय प्रधान मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहती हूं कि वड़ोदरा लोक सभा के सांसद के तौर पर मुझे सदन को बताते हुए गर्व हो रहा है कि देश की पहली बुलेट ट्रेन जो अहमदाबाद-मुम्बई के बीच सेवारत होने वाली है, जिसका प्रमुख स्टॉपेज वड़ोदरा भी है, बुलेट ट्रेन परिचालन के लिए वड़ोदरा को देश का एकमात्र ‘हाई स्पीड ट्रेन का तालीम केंद्र’ प्राप्त हुआ है, जहां तीन हजार से भी अधिक कर्मयोगी, तकनीकी प्रशिक्षण लेने हेतु वड़ोदरा आएंगे ।
महोदया, वड़ोदरा की भव्य भूमि, हमारे जनप्रिय प्रधान मंत्री श्री मोदी जी की कर्मभूमि है । लगभग एक दशक से भी अधिक समय के बाद वड़ोदरा को दूसरे राज्य के लिए एक नई ट्रेन प्राप्त हुई है । सुसंयोग है कि यह नई ट्रेन आदरणीय प्रधान मंत्री जी की कर्मभूमि को उनकी सेवा क्षेत्र वाराणसी से जोड़ती देश की दूसरी ‘महामना ट्रेन’ वड़ोदरा से वाराणसी तक की शुरुआत हुई है और इस ट्रेन का लोकार्पण प्रधान मंत्री जी के वरदहस्त से हुआ और आदरणीय रेल मंत्री पीयूष गोयल जी और गुजरात राज्य के उपमुख्य मंत्री श्री नितिनभाई पटेल की गरिमामय उपस्थिति में हुआ था । करीब 9 वर्ष के बाद वड़ोदरा से अहमदाबाद तक की दैनिक ‘संकल्प ट्रेन’ वड़ोदरा को प्राप्त हुई है । इसके अलावा वड़ोदरा से भारतीय उपमहाद्वीप की पांचवी सबसे लम्बी नदी रेवा, जो नर्मदा के नाम से भी प्रसिद्ध है, ऐसे वड़ोदरा से मध्य प्रदेश के रेवा तक की साप्ताहिक ‘महामना ट्रेन’ सेवा का प्रारंभ भी वड़ोदरा से हुआ है । इन सभी यात्री सुविधाओं के लिए मैं रेलवे मंत्री श्री पीयूष गोयल जी और तत्कालीन रेल राज्य मंत्री श्री मनोज सिन्हा जी के प्रति आभार प्रकट करती हूं । इस प्रगतिशील बजट में भारतीय रेलवे के लिए लाइन डबलिंग, गेज रूपांतरण, लाइन सेग्रीगेशन, रेलवे क्रासिंग को समाप्त करना, रेलवे स्टेशनों पर फ्री वाई-फाई इंटरनेट सेवा, सीसीटीवी से नियंत्रण और रेलवे यार्ड का विकास जैसी अतिमहत्वपूर्ण योजनाएं शामिल हैं । माननीय सभापति महोदया, आप मुझे दो मिनट समय और दें ।
16.00 hrs मैं पुन: आदरणीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला जी और रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल जी का आभार और धन्यवाद प्रकट करना चाहती हूँ क्योंकि इस बजट में उन्होंने मेरे संसदीय क्षेत्र बड़ोदरा लोक सभा क्षेत्र में अनेक योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए 887 करोड़ रुपये की धनराशि का आवंटन किया है, जिसमें प्रमुख रूप से आणंद-गोधरा लाइन डबलिंग, अहमदाबाद-गोधरा लाइन सग्रीगेशन, समलाया-टिम्बा-करजण गेज़ रूपांतरण, डभोई-चाणोद-केवड़िया गेज़ रूपांतरण, बड़ोदरा-छोटाउदयपुर-धार रेल लाइन, बड़ोदरा-छोटाउदयपुर रेल लाइन का विद्युतीकरण, बड़ोदरा-गेरतपुर लूपलाइन, बड़ोदरा आरआरआई और केबिन सिग्नलिंग, मियागाम करजन-डभोई सब-वे, समलाया-टिम्बा लाइन सामविष्ट हैं । ये सभी विकास कार्य बड़ोदरा रेलवे के सर्वांगीण विकास और बहुक्षमता सुधार में अतिमूल्य योगदान देने का कार्यक्षम रखते हैं ।
वडोदरा रेलवे के इतिहास में पहली बार छायापुरी रेलवे स्टेशन के रूप में एक सैटेलाइट रेलवे स्टेशन प्राप्त हुआ है, जो निकट भविष्य में कार्यरत हो जाएगा । गुजरात में अहमदाबाद और सूरत के बाद बड़ोदरा को सैटेलाइट रेलवे स्टेशन मिला है ।
16.01 hrs (Shri P.V. Midhun Reddy in the Chair) इसके साथ ही मैं यहाँ एक और माँग रखना चाहती हूँ । आदरणीय राज्य मंत्री जी भी यहाँ उपस्थित हैं । मैं यह माँग रखना चाहती हूँ कि प्रतापनगर रेलवे स्टेशन को सैटेलाइट रेलवे स्टेशन बनाया जाए, क्योंकि गत् वर्ष, गत् बजट में बड़ोदरा से छोटा उदयपुर, छोटा उदयपुर से धार-इंदौर रेलवे लाइन का वृत्तीय प्रावधान किया गया है । इसके अलावा, पूरे देश और विश्व के आकर्षण का केन्द्र स्टैच्यू ऑफ यूनिटी तक बड़ोदरा से डभोई और डभोई से केवड़िया तक ब्रॉडगेज़ रेलवे लाइन स्थापित करने का कार्य प्रगति पर है ।
देश और विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए बड़ोदरा से स्टैच्यू ऑफ यूनिटी तक रेल मार्ग से जाने के लिए प्रतापनगर रेलवे स्टेशन से जाना पड़ेगा । इसलिए मैं मंत्रीश्री से माँग करना चाहती हूँ कि प्रतापनगर रेलवे स्टेशन को सैटेलाइट रेलवे स्टेशन बनाया जाए । इसके साथ ही, मैं दो रेलगाड़ियों की माँग भी करना चाहती हूँ । बड़ोदरा से गायत्री परिवार के बहुत-से भक्तजन शांतिकुंज, हरिद्वार जाते हैं । इसलिए मैं बड़ोदरा से हरिद्वार के लिए एक ट्रेन की माँग करना चाहती हूँ । बड़ोदरा में सिख समुदाय के बहुत-से परिवार रहते हैं । इसलिए बड़ोदरा से अमृतसर के लिए भी एक ट्रेन चलायी जाए ।
माननीय सभापति जी, आपने मुझे बोलने का समय दिया, मैं आपकी आभारी हूँ । इसके साथ ही, मैं मंत्रीश्री और राज्य मंत्रीश्री की भी आभारी हूँ तथा इस रेलवे बजट का समर्थन करती हूँ ।
धन्यवाद ।
SHRI Su. THIRUNAVUKKARASAR (TIRUCHIRAPPALLI): Hon. Chairperson, Sir, at the outset I would like to thank the voters of Tiruchirappalli constituency who have voted for me and made me win with a margin of 4.60 lakh votes. I am grateful to them and I salute them.
The ruling Party MPs and even sometimes Ministers repeatedly ask the question as to what Congress has done in the last 50 years when it was in power and in every sector, in every department and in every walk of life, what the Congress has achieved/delivered. That is the question repeatedly being asked by some of the ruling Party MPs. I just want to bring one or two vocal points to their knowledge so that they could know what Congress has done. They know that but they are pretending as if they do not know it.
Sir, I would like to bring some facts to their knowledge. I will give a few examples in this regard. The total investment in the Railways during 1950-51 was to the tune of Rs. 855 crore and in 2013-14, at the time when the BJP Government came to power and Shri Narendra Modi took over as the Prime Minister of this country, the investment in Railways was to the tune of Rs. 32,662 crore. Number of employees in Railways in 1950-51 was around 9 lakhs and now it is 12,71,000 and there are vacancies of one lakh in the Railways which have not yet been filled by this Government, though they promised to fill those vacancies in the Railways. The wage Bill in 1950-51 was Rs. 113 crore and in 2013-14, it increased to Rs. 75,893 crore. Passenger earnings were Rs. 98 crore in 1950-51 and in 2013-14, when this Government came to power, it was Rs. 36,532 crore. Gross Revenue Receipts of the Railways in 1950-51 were Rs. 263 crore and in 2013-14 it was Rs. 1,43,213 crore.
Sir, why am I referring to these figures? Which Government was responsible for this increased investments and receipts in the Railways in these many years? Which Government delivered the results? Which Government made it possible? Is it not the Congress Government? Was it not the outcome of the efforts of Pandit Jawahar Lal Nehru? Was it not because of the efforts of the late Indira Gandhi and Rajiv Gandhi and other Congress Prime Ministers until the BJP Government took over in 2014-15? The progress, the achievements and the growth that we have been seeing in the Railways is not because of the efforts of this BJP Government in the last five years of their rule under the Prime Ministership of Shri Narendra Modi.
Sir, some of the hon. Members mentioned here about Public Private Partnership (PPP). The Government attempted to get some Rs. 6 lakhs from PPP last year but they were not able to get it. This year the Government has announced so many programmes and proposals on doubling, gauge conversion, improvement of stations, modern facilities, safety measures. I do not want to repeat them. Everybody has mentioned, in detail, about the funds that have been allocated for these purposes. The Government has announced that in PPP they are going to have Rs. 50 lakh crore …(Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: I am going by your party time. I am ready to give you another two minutes. But I just wanted to remind you.
SHRI Su. THIRUNAVUKKARASAR: Sir, I will finish my speech. If you restrict me, then I will mention two to three points about my constituency and finish it. I will not mention about other things.
HON. CHAIRPERSON: I am not trying to restrict you but reminding you of the time.
SHRI Su. THIRUNAVUKKARASAR : So, the amount of Rs. 50 lakh crore means it is for a period of ten years and 2030 is the limit. Within that ten years, they are planning to have private investment of Rs. 50 lakh crore in railways. It means that every year, in the coming ten years, they have to allocate Rs. 5 lakh crore. From where are they going to get this Rs. 5 lakh crore every year and who is going to come and invest? As Shrimati Kanimozhi has asked, “Who is going to invest this much money in loss-making organisations?” This is a clear attempt to privatise railways in which you are not going to succeed.
A mass transport system in our country is the railways. There are 13 lakh employees in the railways and 82 crores of people are using railway transport system. Definitely all the 13 lakh employees and the entire population of the country will oppose privatisation and you are not going to get Rs. 50 lakh crore in future.
There is a decline in passenger earnings. When you compare the figure of 2019-20 with the figure of 2016-17, you will find that it has decreased. The hon. Minister may kindly explain as to why it has come down.
Sir, I would like to mention one or two points about my constituency. Out of five kilometres of work to be done under the Mass Rapid Transit System (Phase II), only three kilometres of work has been completed. Work is still not completed on a stretch of two kilometres. I would like to bring to the notice of the hon. Minister about Tiruchy-Thanjavur doubling project. Work on two bridges near Tiruchirappalli Junction on the way from Pudukottai to Tiruchy has not been completed. It is because defence land has not been handed over to the State Government. Alternative land has already been given by the State Government to the Ministry of Defence of the Central Government. Even then the required order has not been issued. It is still pending with the Government. I request the hon. Minister to clear it and complete the work on the two over-bridges.
There are about 4000 apprentices in Tiruchy alone - and throughout India, there are 25,000 apprentices - who have passed the first level and second level examinations after training. They are not being given proper regular employment. I would request the hon. Minister to consider this aspect also.
The timings of train Nos. 16339 and 16351, which are reaching Nagercoil via Madurai, should be changed. A representation was given by the Tamilians living in Mumbai. With great difficulty, they are getting down at 3 o’clock or 4 o’clock in the night. Change of time will help them. So, I request you to consider that.…(Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: Thank you. Now, Shri Ramesh Chander Kaushik.
… (Interruptions)
SHRI Su. THIRUNAVUKKARASAR : Sir, please give me one minute.…(Interruptions) The trains going through Keeranur and Pettavaithalai should stop at these two places for two minutes.…(Interruptions) This is another request of my Constituency. I request the hon. Minister to consider all these things. Thank you very much.
*श्री गिरीश भालचन्द्र बापट (पुणे): पुणे-नासिक रेलवे होना बहुत जरूरी है । इस मार्ग पर प्रवासी चौकी की बहुत बड़ी पैमाने पर मांग है । पुणे नासिक की क्या स्थिति है? डीपीआर या सर्वे हो गया है क्या?
*श्री मनसुखभाई धनजीभाई वसावा (भरूच): जैसा कि हम सभी जानते हैं कि रेल भारत की जीवन रेखा है। भारत में रेल परिवहन का इतिहास सन् 1832 से शुरू होकर वर्तमान कालखण्ड तक निरंतर अपनी विकास यात्रा पर अग्रसर है। भारत माता के महान सपूत तथा देश के दृष्टिवंत प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र भाई मोदी जी की दूर दृष्टि से भारतीय रेलवे निरंतर नई ऊंचाइयों को छू रहा है तथा 130 करोड़ भारतीयों के आवागमन की सुविधा को र्आर सरल बनाए जाने के लिए प्रयत्नशील है। भारतीय रेलवे ने यात्रियों को सुरक्षित और आरामदायक यात्रा की सुविधा प्रदान करने के लिए स्टेशनों पर मशीनीकृत सफाई तथा हाउस कीपिंग इत्यादि का प्रावधान किया है। वित्त वर्ष 2019-20 के बजट में रेलवे को 65,837 करोड़ का आवंटन प्राप्त हुआ है। देश में नई रेल लाइनों के निर्माण के लिए 7,255 करोड़ रूपए की धनराशि, गेज परिवर्तन के लिए 2,200 करोड़ रूपये,दोहरीकरण के लिए 700 करोड़ रूपये रोलिंग स्ट्राक के लिए 6114.82 करोड़ रूपये और सिग्नलिंग और दूरसंचार के लिए 1,750 करोड़ रूपये आवंटित किए गए हैं। उपरोक्त प्रावधान स्वागतयोग्य तथा इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं कि इन प्रावधानों में देश में नए उद्योग, नए काम और रोजगार के नए अवसरों का सृजन होगा। इस बजट में भारत के चतुर्मुखी विकास की माननीय प्रधान मंत्री जी की परिकल्पना स्पष्ट रूप से परिलक्षित होती।
गुजरात में मेरे संसदीय क्षेत्र भरूच के अंतर्गत आने वाला भरूच रेलवे स्टेशन इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट एवं डेवलपमेंट की दृष्टि से देश के विकास में सहयोग करने वाला बहुत ही महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन है।
• यहां पर दहेज के रूप में देश का सबसे बड़ा इंडस्ट्रियल पीसीपीआईआर (पेट्रोकेमिकल्स एंड पैट्रोलियम इन्वेस्टमेंट रिजन) विस्तारित हो रहा है। यहां पर देश की बड़ी से बड़ी औद्योगिक इकाइयां जैसे कि ओएनजीसी,रिलायंस, जीएनएफसी, बिरला, बीएएसएफ,पेट्रोनेट एलएनजी,वेल्सपन वर्षों से कार्यरत है। जिनमें बड़ी संख्या में देश के विभिन्न प्रांतों से बड़ी संख्या में कर्मचारी,मजदूर इत्यादि कार्य करने आते हैं। परंतु भरूच रेलवे स्टेशन पर देश के विभिन्न भागों में जाने के लिए स्टॉपेज न होने की वजह से उन्हें काफी तकलीफों का सामना करना पड़ता है। तदुपरांत उन्हें सूरत एवं बड़ौदा तक लम्बा सफर करना पड़ता है। अत: भरूच रेलवे स्टेशन पर निम्नलिखित ट्रेनों के स्टॉपेज देने से मेरे संसदीय क्षेत्र में रहने वाले लोगों एवं यात्रियों को काफी सुविधा एवं आसानी होगी।
• 19053 / 19054 - सूरत-मुजफ्फरपुर एक्सप्रेस • 19037 / 19038 - बान्द्रा-गोरखपुर अवध एक्सप्रेस • 12979 - बान्द्रा-जयपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस • 22474 - बान्द्रा-बीकानेर सुपरफास्ट एक्सप्रेस • 12909 - बान्द्रा टर्मिनल से हजरत निजामुद्दीन गरीब रथ एक्सप्रेस • 20903 / 20904 - बड़ौदा-वाराणसी महामना एक्सप्रेस जो फिलहाल सप्ताह में एक बार चलती है, उसकी फ्रिक्वेंसी सप्ताह में कम से कम 3 बार बढ़ायी जाये, जिससे भरूच-अंकलेश्वर में रहने वाले उत्तर भारतीय लोगों के लिए काफी सुविधा एवं आसानी होगी। • तदुपरांत भरूच के आसपास वडोदरा एवं सूरत भी इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट एवं डेवलपमेंट की दृष्टि से विकसित शहर है, जहां समग्र भारत देश से आकर लोग आजीविका की तलाश में रह रहे हैं। अत: प्राय: वडोदरा-भरूच-सूरत के बीच सतत नौकरी एवं व्यापार के लिए लोगों का आवागमन सतत बना रहता है। अत: वडोदरा और सूरत के बीच दौड़ने वाली कुछ नियमित गाड़ियों में निम्न अनुसार परिवर्तन करने की एवं यात्रियों की सुविधा बढ़ाने की आवश्यकता है। • गाड़ी संख्या 129291/12030 वलसाड दाहोद इंटरसिटी में बड़ी संख्या में कर्मचारी एवं अधिकारीगण नियमित रूप से अप-डाउन करते हैं। परन्तु पिछले कुछ दिनों से इन गाड़ियों में एसी चेयर कार कोच की जगहों पर एलएचबी कोच लगा दिये गये हैं, जिनकी वजह से सामान्य किराये से चार गुना किराया भर कर भी कर्मचारियों एवं अधिकारियों को एलएचबी को जो कि सामान्य स्लीपर कोच हैं, उनमें यात्रा करते हुए तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है। अत: गाड़ी संख्या 12929/12930 वलसाड दहोद इंटरसिटी में फिर से पूववर्ती स्थिति कायम करते हुए दो एसी चेयर कार कोच लगाये जायें। • गाड़ी संख्या 22930/22929 वडोदरा भिलाड एक्सप्रेस,22959/22960 सूरत जामनगर इंटरसिटी एक्प्रेस,22954 गुजरात सुपरफास्ट एक्सप्रेस में बड़ी संख्या में कर्मचारी एवम् अधिकारीगण नियमित रूप से अप डाउन करते हैं। परंतु पिछले कुछ दिनों से अनॉथराईज्ड पैसेंजर्स एवम् अनाधिकृत यात्रियों के आ जाने से नियमित रूप से यात्रा करने वाले फर्स्ट क्लास एमएसटी पास होल्डर्स को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। अतः उपरोक्त गाड़ियों में उचित संख्या में रिजर्वड फॉर ओनली फर्स्ट क्लास एमएसटी पास होल्डर्स चिन्हित करते हुए डिब्बे लगाए जाने की आवश्यकता है। तदुरपरांत अनॉथराईज्ड पैसेंजर्स पर लगाम लगाने के लिए नियमित रूप से चेकिंग करने की आवश्यकता है। • गाड़ी संख्या 22930/22929 वडोदरा भिलाड एक्सप्रेस में लेडीज कोच की डिब्बों की डिजाइन कुछ समय पहले बदली गई है जिसकी वजह से नियमित रूप से यात्रा करने वाली महिला यात्रियों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। अत: इस ट्रेन में पहले की भांति पूर्ववर्ती डिब्बों को फिर से लगाया जाए । • तदुपरांत मेरे संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पालेज रेलवे स्टेशन पर 12989 दादर अजमेर सुपरफास्ट एक्सप्रेस ट्रेन का स्टोपेज दिया जाये क्योंकि यहां से अजमेर जाने वाले मुस्लिम दर्शनार्थियों की भी काफी बड़ी तादाद है । फिलहाल उन्हें अजमेर जाने के लिए बड़ौदा एवं सूरत का रूख करना पड़ता है । अत: पालेज रेलवे स्टेशन पर उपरोक्त ट्रेन का स्टोपेज देने से पालेज एवं करजन में रहने वाले मुस्लिम दर्शनार्थियों के लिए सुविधा एवं आसानी होगी । • भरूच रेलवे स्टेशन के पश्चिम ओर के सरक्यूलेटिंग एरिया को यात्रियों की भीड़ को देखते हुए और अधिक बड़ा एवं सुविधा युक्त करने की जरूरत है । साथ ही साथ पार्किंग इत्यादि को गोदी की दिशा में स्थानांतरित कर स्टेशन मुख्यद्वार के सामने छोटा बगीचा एवं फाउंटेन बनाने की आवश्यकता है । • भरूच से बड़ौदा के बीच बहुत ही महत्वपूर्ण व्यापारिक भूमिका निभाने वाले करजण रेलवे स्टेशन पर रात्रि 12 से सुबह 6 के बीच कोई गाड़ी नहीं रुकती है । अत: एक या दो गाड़ियों को बीच इस समय के दरमियान स्टोपेज देने की आवश्यकता है । • भरूच रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर चार एवं पांच पर एक्सेलेटर (लिफ्ट) की सुविधा त्वरित रूप से शुरू करने की आवश्यकता है । • गाड़ी संख्या 59168 राजपीपला से अंकलेश्वर रेलमार्ग से करीबन 2 घंटे 45 मिनट का समय लेती है जबकि सड़क मार्ग से यात्री 1 घंटे में पहुंच जाते हैं । अत: उसकी समय मर्यादा घटाया जाए एवं यात्रियों के सुविधा अनुसार समय निश्चित किया जाये । • गाड़ी संख्या 52024 करजन-मालसर ट्रेन का स्टोपेज साधली स्टेशन पर करना चाहिए। आबादी की दृष्टि एवं उपयोगिता की दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण गांव हैं। पहले यहां स्टोपेज हुआ करता था, पुन: साधली स्टोपेज दिया जाए । • भरूच से बड़ौदा के बीच बहुत ही महत्वपूर्ण व्यापारिक भूमिका निभाने वाले अंकलेश्वर रेलवे स्टेशन पर प्लेटफार्म नं. 1 पर सूरत की तरफ शेड की व्यवस्था न होने से यात्रियों को धूप एवं बरसात में काफी तकलीफों का सामना करना पड़ता है। अत: अतिशीघ्र वहां शेड लगाने की व्यवस्था की जाए । • मेरे संसदीय क्षेत्र में बड़ी संख्या में केरल एवम् दक्षिण भारत के लोग निवास करते हैं । उन्हें अपने गांव जाने के लिये बड़ौदा या सूरत तक जाना पड़ता है । अत: भरूच रेलवे स्टेशन पर निम्नलिखित ट्रेनों को स्टोपेज दिया जाए । ट्रेन नं. 22660/22659 - देहरादून कोचूवेली एस.एफ. ट्रेन नं. 19332/19331 – इन्दौर कोचूवेली एक्सप्रेस ट्रेन नं. 12484/12483 - अमृतसर कोचूवेली एक्सप्रेस ट्रेन नं. 22634/22633 - निजामुद्दीन त्रिवेन्द्रम एस.एफ. ट्रेन नं. 12978/12977 - मरूसागर एस.एफ. इसी के साथ मैं रेलवे के इस प्रगतिशील बजट का समर्थन करता हूं।
श्री रमेश चन्द्र कौशिक (सोनीपत): सभापति महोदय, मैं सबसे पहले आपका आभार व्यक्त करता हूँ कि आपने मुझे रेल मंत्रालय की अनुदान की मांगों पर बोलने का अवसर प्रदान किया है । हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी से पहले भारतीय रेल जिन गंभीर चुनौतियों से जूझ रही थी,उसे दूर करने के लिए वर्ष 2030 तक 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश को हरी झंडी देकर उन चुनौतियों को खत्म करने की दिशा में एक सकारात्मक प्रयास किया जा रहा है । भारतीय रेल इस विशाल देश की एक लाइफ लाइन है । अपने 18 क्षेत्रीय रेलों और 67,368 किलोमीटर रेल लाइन नेटवर्क से यह देश का सबसे बड़ा नियोजक और परिवहन का मुख्य आधार स्तंभ है । माल ढुलाई में भी यह अमेरिका,चीन व रूस के साथ एक बिलियन टन के क्लब में शामिल हुआ है । पी.पी.पी. मॉडल शुरू करने के प्रस्ताव से सेक्टर का तेजी से विकास होगा,कनेक्टिविटी बढ़ेगी और रेलवे सेक्टर और अधिक कुशल बनेगा । इससे रेलवे के बुनियादी ढांचे में तेजी से विकास आएगा । दिल्ली-मेरठ मार्ग पर रैपिड रीजनल ट्रांसपोर्ट सिस्टम के माध्यम से उपनगरीय रेलवे प्रणालियों में अधिक निवेश करने का प्रस्ताव मेट्रो शहरों के साथ उपनगरीय क्षेत्रों की कनेक्टिविटी को बढ़ावा देगा और सड़क मार्ग को भी कम करेगा ।
महोदय, मैं निवेदन करता हूँ कि आगामी वर्षों में हमारे क्षेत्र पानीपत सहित सभी उपनगरों, जो नैशनल कैपिटल रेंज का हिस्सा हैं,को भी दिल्ली से जोड़ा जाए । भारतीय रेलवे के ब्रॉड गेज नेटवर्क के 7000 किमी के विद्युतीकरण को वर्ष 2019-20 के लिए लक्षित किया गया है, जिसका उददेश्य वर्ष 2021-22 तक इसके सार्वभौमिक विद्युतीकरण को प्राप्त करना है । यह भारतीय रेलवे को दुनिया का पहला 100 प्रतिशत इलेक्ट्रिकल रेलवे नेटवर्क बना देगा । सुरक्षा बढ़ाने के अतिरिक्त क्षमता बढ़ाने और ट्रेन की दक्षता बढ़ाने के लिए,बजट में यूरोपीय ट्रेन नियंत्रण प्रणाली के मिश्रण के साथ-साथ स्वदेशी रूप से विकसित प्रणाली का उपयोग करते हुए एक स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली शुरू करने का भी प्रस्ताव किया गया, जिससे यात्रियों के लिए सुरक्षित यात्रा को प्राथमिकता मिलेगी । इसके अलावा,यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने और सुरक्षा उपायों को सुविधाजनक बनाने के लिए सभी स्टेशनों और ट्रेनों में सीसीटीवी कैमरे,अंडर पास और ओवर ब्रिज काफी बड़ी संख्या में उपलब्ध कराए गए हैं । यह प्रस्ताव भी किया गया है कि रेल यात्रा को बेहतर बनाने के लिए सभी रेलवे स्टेशनों पर मुफ्त वाईफाई प्रदान किया जाएगा । इसे पूरी तरह से अंतर्राष्ट्रीय स्तर का रेलवे स्टेशन बनाने का सरकार का प्रयास है । इसके लिए मैं माननीय रेलवे मिनिस्टर श्री गोयल साहब को और फाइनेंस मिनिस्टर को भी धन्यवाद देता हूं,जो इसके लिए बजट का प्रावधान कर रहे हैं । आज मैं अपने पार्लियामेंट क्षेत्र के बारे में भी बताना चाहूंगा । पिछले 5 साल में हरियाणा में अगर कोई पहला रेलवे का प्रोजेक्ट लगा है तो वह रेल रिपेयरिंग कोच फैक्ट्री है । वह हमारे क्षेत्र में लगी है । इसका शिलान्यास माननीय प्रधान मंत्री जी ने पिछले दिनों किया था । यह उम्मीद है कि उसमें अगले साल से 250 कोचेज़ प्रति वर्ष तैयार होंगे । उसके 4 साल के बाद 1000 कोचेज़ तैयार करने का जो लक्ष्य रखा है, उस काम को यही सरकार कर सकती है, वर्ना हरियाणा में कोई रेलवे का प्रोजेक्ट अब तक नहीं था । इसके साथ-साथ कंटेनर डिपो के रूप में हमारे क्षेत्र में जो कंटेनर डिपो है,जिसका माल ढुलाई में विशेष योगदान होगा, वह भी अगले 6 महीने में बनकर कम्प्लीट हो जाएगा । इसके लिए भी मैं माननीय प्रधान मंत्री जी का और रेलवे मिनिस्टर का बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं कि इस सरकार के आने के बाद काम हुए हैं । इसी के साथ-साथ रेलवे विद्युतीकरण का काम हमारे क्षेत्र में भी रोहतक-गुहाना-जींद जो रेलवे लाइन थी, उसका विद्युतीकरण करने का काम पूरा हुआ । इसके साथ-साथ मेरे क्षेत्र में ही जींद से पानीपत की बहुत पुरानी रेलवे लाइन थी,जो पिछले 50 सालों से अधूरी थी, वह भी कम्प्लीट हुई । जींद से गुहाना-सोनीपत नई रेलवे लाइन को कम्प्लीट कराया गया और उसमें एक साल में तीन ट्रेनें चलाने का काम हुआ है । इस प्रकार से विकास के रास्ते पर आगे बढ़ने का काम हुआ है ।
दिल्ली से चंडीगढ़ की रेल लाइन पर भी हाईस्पीड ट्रेन चलाने का प्रस्ताव रखा गया है । मेरे क्षेत्र के दो रेलवे स्टेशन सोनीपत और जींद को शामिल किया गया है । इसके साथ-साथ स्टेशनों पर अच्छे खाने-पीने की और सारी सुविधाएं दी जा रही हैं । मैं एक सुझाव रेलवे सुरक्षा के लिए देना चाहता हूं कि आज जो सुरक्षा प्रदान की जाती है, उसमें 50 परसेंट हमारी रेलवे फोर्स है और बाकी 50 परसेंट राज्य सरकार हमें प्रोवाइड करती है । कई बार कोऑर्डिनेशन नहीं हो पाता है, जबकि उसका पूरा खर्च रेलवे विभाग और केन्द्र सरकार वहन करती है । मेरा निवेदन है कि अगर हम इसको एक कर दें तो सिक्योरिटी के मामले में हम आगे बढ़ सकते हैं । दूसरे स्टेशनों को जहां तक अपग्रेड करने का काम है,यह कोशिश है कि लगभग 500 स्टेशनों को मॉडल स्टेशंस में बदलने, बी वालों को ए में बदलने और सी वालों को बी में बदलने का काम होगा । हर स्टेशन पर हर सुविधा देने का काम हमारे रेलवे मिनिस्टर और माननीय प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में किया जा रहा है । हमारा केएमपी एक्सप्रैस-वे बनकर तैयार है । पलवल से कुंडली तक रेलवे का एक प्रोजेक्ट हमने दिया है,जिसका सारा खर्च हरियाणा सरकार उठाने के लिए तैयार है । इसका काम भी जल्दी से जल्दी शुरू होने से इस इलाके में बड़ा भारी सुधार होगा । माल ढोने पर रेलवे में कम खर्च पड़ता है और रोड पर ट्रैफिक भी कम होता है । ये सब विकास के काम हैं । मैं माननीय मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि मथुरा से कुरुक्षेत्र तक जो एक नई ट्रेन चलायी गयी है,उसका स्टॉपेज गल्लोर में दिया जाए । नई रेलवे लाइन सोनीपत-गुहाना-जींद-हिसार तक का काम जल्दी से जल्दी पूरा किया जाए । हमने विकास का काम पिछले पांच सालों में किया है । पहले4 किलोमीटर रेल बनती थी और अब 15 किलोमीटर का टारगेट इस सरकार में रखा गया है । इससे यह पता चलता है कि काम करने वाली सरकार क्या नहीं कर सकती है और यह प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में ही संभव हो सकता है । इसी के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं । धन्यवाद ।
*SHRI NALIN KUMAR KATEEL (DAKSHINA KANNADA): I would like to place my view on the demands for grants for the ministry of Railways 2019-20.
The union budget has allocated Rs. 65,837 crore for the Railways. It is the highest ever outlay for capital expenditure amounting to Rs. 1.60 lakh crore in the Budget.
It includes the funds allocated for the passenger amenities, which has increased by 200 per cent from the previous year. Last year, the outlay for the railways was Rs. 1.48 lakh crore while the Budget allocation was Rs. 55,088 crore. In the interim Budget, the allocation was Rs. 1.58 lakh crore.
The Union government has given significant importance for the Railway Infrastructure. It proposes for an investment of 50 lakh crores between 2018-2030. The intention of the government is very clear that it will emphasis on completing all sanctioned projects at the earliest. It is a welcome step.
The union government has proposed for construction of New Metro Rail Projects for a total route length of 300 kilometers during 2019-20. It is also a bold step taken by the government for increasing the Metro Rail network in the country.
I would like to point out that though the Indian Railways is constantly making its efforts to induct new technologies and modernize its existing operating system, there is still a lot needs to be done as far as increasing the speed, signaling systems, ensuring the safety of train passengers, removing the bottlenecks of level crossings, maintenance of cleanliness in the trains and outside the railway stations etc. are concerned.
As far as railway freight services are concerned there is also need to take more effective steps to reduce energy conservation, higher capacity wagons, new design wagons for new commodities like automobile, bulk fly ash, cement, steel products etc. Indian Railways is the oldest railway network in the world. There are hundreds of railway stations built more than a century ago. There is a need for reconstruction of those old railway stations. In this connection, I would like to mention that Mangaluru Central Railway Station of my Dakshina Kannada Lok Sabha constituency was built hundred years ago. Now it is in a dilapidated condition as there is no effective maintenance of the station. Therefore, I would like to request the hon’ble Railway minister to take steps for construction of New Building for Mangaluru Central Railway Station.
Apart from this some other important demands for my Parliamentary constituency are:
· Speeding up the Construction work of Platform No. 4 & 5 at Mangaluru Central Railway Station (MAQ) to enable it to accommodate more trains · Creation of Mangaluru Railway Division by merging South Western Railway Zone or Konkan railway with Divisional headquarters at Mangaluru.
1) Tri weekly Gomateshwara Express (16575/16576) to be run daily. 2) Train No. 16586 running between Mangalore (MAQ) – Bangalore (MAQ – YPR Express) should run daily. There is huge demand from the commuters and several organizations for this train. So take steps in this regard at the earliest. 3) Introduction of new Train between MAQ and Pune to provide connectivity for coastal regions. 4) Reintroduction of Mangalore-Miraj Mahalaxmi Express Train with an Extension upto Mumbai (MCST) (Old No: 6203/04). 5) Restart Kasaragodu Mookambika Road Train (56665/66) with extension upto Guruvayur. 6) Increase the speed of all the trains run between Mangalore Central and Yashwantpur (via Hassan – Kunigal). So that the travel time could be reduced (8.30 to 9 hrs.) for convenience of train passengers. 7) Merger of HMRDC with SW Railway – Mysore Division. 8) Extension of (16515/16) Yeshwanthpur to Karwar day train (via MAJN) upto Tirupathi (via) Bangalore / Yeshwanthpur with revised timing (Tri weekly). 9) Request for New Train between Mangalore – Tirupati:
There is huge demand from the general public for a new train between Mangalore and Tirupati Via – Hasan – Bengaluru-Thirupathi and/or via Shornur – Palakkad –Erode – Salem – Katapadi. So if it is introduced, it will benefit thousands of pilgrims from costal Karnataka and Kerala.
10) Request for New Train between Mangalore – Varanasi / Pragyaraj / Gorakhpur:
If a new train introduced between Mangalore –Varansi / Pragya / Gorakhpur will benefit thousands of workers & students from North India are staying in coastal Karnataka. It will also benefit pilgrims visiting holy places like Varanasi / Prayagraj / Gorakhpur.
11) DEMU Train running between Madgaon – MAQ should run daily. 12) Request for stoppage of Mangalore – Coimbatore Inter City Express (22609/10) at Kuttipuram.
If the stoppage is provided to Mangalore – Coimbatore Inter City Express (22609/10) at Kuttipuram it will be very convenient for commuters to travel to Guruvayur, which is a famous pilgrimage centre of Kerala.
13) Regularising Coimbatore – Mangalore Junction – Jabalpur Express Train The special train runs between Coimbatore – Mangalore Junction and Jabalpur is one of the popular trains in the region. However the train fare is very expensive and has caused inconvenience to the general public. So, if this train runs as regular train with reduced fare, it will benefit thousands of railway commuters.
14) Train No. 56642/43/44/45 – Subramanya – Puttur – Mangalore Passenger Subramanya Road (Night train) Earlier, the Broad gauge train was halting at Subramanya, should start at 6.30 AM and reach Mangalore by 8.45 AM. So that, students, officer goers, traders and all other people could be benefitted from this train.
15) SBC – Karwar Express 16513 / (Night Train) should start at 5.20 AM at Mangalore Central, instead of 6.00 AM. Now this train takes 1.45 hrs reach Puttur from MAQ (Dist 49 Km).
डॉ. एस. टी.हसन (मुरादाबाद):सभापति महोदय, मैं मुरादाबाद के सिलसिले में कहना चाहता हूं । मुरादाबाद शहर पूरी दुनिया में पीतल की नगरी के नाम से जाना जाता है । यूरोप से लेकर अमेरिका और जापान तक कोई ड्रॉइंग रूम शायद ही ऐसा हो, जहां मुरादाबाद के बने हुए बर्तन या डेकोरेटिव आइटम्स न रखे हों । तकरीबन 20 हजार करोड़ रुपये का कारोबार मुरादाबाद से होता है । यहां के एक्सपोर्टर्स को बार-बार मुम्बई जाना पड़ता है । लेकिन मुरादाबाद से मुम्बई के लिए आज तक कोई डायरेक्ट ट्रेन नहीं है । मेरी आपके माध्यम से मंत्री जी से रिक्वैस्ट है कि मुरादाबाद से मुम्बई के लिए डायरेक्ट ट्रेन का प्रोविज़न किया जाए ताकि एक्सपोर्टर्स को आसानी हो ।
महोदय,मुरादाबाद जंक्शन से दिल्ली-लखनऊ रेलवे ट्रैक के ऊपर मुरादाबाद से रामगंगा ब्रिज के ऊपर एक शार्प कर्व है । उसके दूसरी तरफ गोविंद नगर की बहुत बड़ी आबादी है । फास्ट ट्रेन्स आती हैं,जिनको लोग दूर से नहीं देख पाते हैं । हर महीने तकरीबन दो-तीन हादसे हो जाते हैं । यह बहुत पुरानी डिमांड है कि गोविंद नगर में अंडर पास बने या ओवर ब्रिज बनाया जाए ताकि इंसानी जानों को बचाया जा सके । मेरी आपके माध्यम से मंत्री जी से रिक्वैस्ट है कि इस ओर पूरा ध्यान दें ताकि आगे इंसानी जानों का नुकसान न हो सके ।
महोदय,कांठ का इलाका मुरादाबाद में है, जहां से सर्जिकल कॉटन और सर्जिकल बैंडेज की सप्लायी पूरे नॉर्दन इंडिया में होती है । लेकिन बदकिस्मती से कांठ स्टेशन पर फास्ट ट्रेन्स का कोई स्टॉपेज नहीं है ।
सभापति जी, मेरी आपके माध्यम से यह दर्ख्वास्त है कि कांठ स्टेशन के ऊपर कांठ-गोदाम डेली एक्सप्रेसवे का एक स्टॉपेज दिया जाए । कांठ में कोई भी रिज़र्वेशन विंडो नहीं है । मैं मंत्री जी से आग्रह करता हूं कि कांठ रेलवे स्टेशन पर एक रिज़र्वेशन विंडो बनाई जाए । मुरादाबाद में दुनिया भर से लोग आते हैं,अमेरिका से भी आते हैं, इंग्लैंड से भी आते हैं,रूस से भी आते हैं और मिडिल ईस्ट से भी आते हैं । मुरादाबाद में दो रोड ओवर ब्रिज हैं, लोको शेड का ओवर ब्रिज है और दससराय से संभल चौराहे तक का एक ओवर ब्रिज है । यह बहुत संकरे हो गए हैं । यहां पर जाम लगता है । जब हमारे बॉयर्स जाम में फंसते हैं, तब हमें बड़ी शर्म महसूस होती है । 21वीं सदी में भी हम ऐसी जगहों पर रहते हैं । जब पूरी दुनिया के लोग आते हैं, वे हमारे ऊपर कटाक्ष करते हैं । इसलिए मेरी आपसे दर्ख्वास्त है कि जो लोको शेड का पुल है, वहां पीडब्ल्यूडी ने अपना काम पूरा कर दिया है, लेकिन रेलवे ने पिछले एक साल से इसे लटका रखा है । इस काम को जल्द से जल्द पूरा कराया जाए,ताकि हम लोगों की परेशानी दूर हो सके । दससराय से लेकर संभल चौराहे तक जो ओवर ब्रिज है,उसका जल्द से जल्द चौड़ीकरण किया जाए, ताकि लोगों को आसानी हो और हमारे जो बॉयर्स बाहर से आते हैं,बाहरी मुल्कों से आते हैं, उनके सामने हमें शर्मिन्दगी का सामना न करना पड़े ।
महोदय, मुरादाबाद रेलवे स्टेशन में दुनिया भर से लोग आते हैं । अतः मेरी आपके माध्यम से मंत्री जी से यह दर्ख्वास्त है कि इसका अपग्रेडेशन और सौन्दर्यीकरण होना चाहिए, ताकि पूरी दुनिया में एक इंप्रेशन जाए कि हमारी रेलवे कितनी सक्षम है और रेलवे में लोगों को कितनी सहूलियतें दी जाती हैं । हम हिन्दुस्तानी होने के नाते,हर चीज को बर्दाश्त कर लेते हैं । लेकिन हमें जब विदेशियों के सामने इन हालातों से गुजरना पड़ता है, तो हमें कहीं न कहीं शर्मिन्दगी का एहसास होता है । मेरी आपके माध्यम से मंत्री जी से दर्ख्वास्त है कि इन तमाम मांगों को प्रॉयोरिटी पर कराने की कृपा करें ।
डॉ. वीरेन्द्र कुमार (टीकमगढ़) : सभापति महोदय, आपका धन्यवाद । हमारे साथियों ने रेल बजट पर अपने-अपने क्षेत्रों की सुरक्षा और परिचालन से जुड़ी हुई बातें रखी हैं । पक्ष और विपक्ष के सदस्यों की तरफ से काफी अच्छे ढंग से बातें रखी जा रही हैं । रेल बजट ऐसा बजट होता है,जिसमें हर सदस्य की यह भावना होती है कि वह अपने संसदीय क्षेत्र से जुड़ी हुई जो रेल समस्याएं हैं, रेल की जो आवश्यकताएं हैं, उन बातों को प्रमुख रूप से यहां पर रखें । मैं देख रहा था कि हमारे कुछ साथियों ने रेलवे के इतिहास के बारे में जहां प्रारंभ से लेकर अभी तक बताया है,वहीं पर हमारे कुछ संसद सदस्य जो पहली बार आए हैं, लेकिन पहली बार आने के बाद भी उन्होंने जिस स्वाभाविक ढंग से, अभिव्यक्ति के माध्यम से अपनी बातें रखी हैं,वे वास्तव में काफी सराहनीय हैं ।
मैं अपनी बात प्रारंभ करने से पूर्व यह बताना चाहता हूं कि हम इस वर्ष महात्मा गांधी जी की 150वीं जयंती मनाने जा रहे हैं । हमारे रेल राज्य मंत्री श्री सुरेश सी. अंगड़ी जी यहां पर बैठे हैं । मैं आदरणीय प्रधान मंत्री जी, आदरणीय पीयूष गोयल जी और सुरेश जी का धन्यवाद करना चाहता हूं । मैं उनसे यह अनुरोध करना चाहता हूं कि हम इस वर्ष महात्मा गांधी जी की 150वीं जयंती मनाने जा रहे हैं । महात्मा गांधी जी के बारे में हम सब जानते हैं कि वे शांति,दया, प्रेम और अहिंसा के प्रतीक माने जाते थे । इसके लिए उनका पूरा जीवन समर्पित रहा है । हम उनकी इस 150वीं जयंती वर्ष पर एक राष्ट्रीय एकात्मा ट्रेन निकालें, जो उनके जन्म स्थान से प्रारंभ हो और पूरे देश में जाए । उसमें महात्मा गांधी जी के जीवन से जुड़े हुए जो घटनाक्रम हैं, उन सभी घटनाक्रमों का चित्र उसमें लगाया जाएं, उनकी पिक्चर्स भी उस ट्रेन में लगाई जाए । वह जिस शहर में जाए,वहां पर विशेष रूप से हमारी जो नई पीढ़ी है, जो बच्चे हैं,आने वाले कल का जो नागरिक है,उनको उसमें विशेष रूप से बुलाया जाए ।
अभी हमारे मुरादाबाद के एक साथी यहां पर बोल रहे थे । जब वह ट्रेन किसी शहर में जाती है,तो हर शहर की अपनी-अपनी विशेषताएं होती हैं, राज्यों की अपनी-अपनी विशेषताएं होती हैं । मुरादाबाद में पीतल का बहुत अच्छा काम होता है । हमारे कर्नाटक के साथी हैं, बेंगलुरु के पास में लकड़ी के खिलौने बहुत उच्च श्रेणी के बनते हैं । ऐसे ही राजस्थान में कठपुतली का बहुत अच्छा काम होता है । महात्मा गांधी जी ने लघु और कुटीर उद्योगों को बहुत बढ़ावा दिया था । यह राष्ट्रीय एकात्मा ट्रेन जब विभिन्न राज्यों के उन शहरों से निकलेगी, तो हम लघु और कुटीर उद्योगों को भी प्रोत्साहित करने के लिए उस ट्रेन के पास इस तरह के स्टॉल्स लगाने के लिए स्थान और अन्य सुविधाएं भी उपलब्ध कराएं ।
साथ ही साथ अन्य सारी सुविधाएं उपलब्ध कराएं, ताकि लोग जो वहां आते हैं तो वे महात्मा गांधी जी के जीवन के बारे में जानने के साथ-साथ इस ट्रेन के माध्यम से लघु और कुटीर उद्योगों को प्रोत्साहित करने का एक अभिनव प्रयोग वहां पर प्रारंभ किया जा सकता है ।
महोदय,मैं पीयूष गोयल जी को धन्यवाद देना चाहता हॅूं । हमारा इस वर्ष का जो रेल बजट है, वह रेल बजट काफी मायने में सराहनीय और प्रशंसनीय है । इस रेल बजट में सुरक्षा को काफी प्राथमिकता दी गई है और उसी का परिणाम है कि पूर्व में जो रेल दुर्घटनाएं हुआ करती थीं, उनमें 62 प्रतिशत की कमी आई है । सन् 2013-14 में जहां ऐसी 118 रेल दुर्घटनाएं हुई थीं, वहीं 2017-18 में इनकी संख्या घट कर सिर्फ 73 रह गई है । यह इच्छाशक्ति का परिणाम हैं । जब हमारे रेल मंत्रालय ने और रेलवे में काम करने वाले कर्मचारियों ने अपनी इच्छा शक्ति के बल पर कि हमको रेल दुर्घटनाओं को रोकना है, दुर्घटनाओं की संख्या में कमी लानी है, उसी के परिणामस्वरूप इनमें इतनी बड़ी मात्रा में कमी हुई है । हमारे देश के जो दूरस्थ क्षेत्र हैं, जैसे त्रिपुरा के हमारे साथी बोल रहे थे कि इसमें काफी पहले से प्रयास हो रहा था, लेकिन अगरतला तक ट्रेन पहुंची है, 31 जुलाई, 2016 को नई दिल्ली-त्रिपुर सुंदरी एक्सप्रेस ट्रेन पहुंची है । वर्ष 2014 में आदरणीय नरेन्द्र मोदी जी प्रधान मंत्री बने और 2016 में यह त्रिपुर सुंदरी एक्सप्रेस ट्रेन प्रारंभ हुई । अगर यह ट्रेन दो वर्ष में प्रारंभ हो सकती है, जो लोग कहते हैं कि ये सारे काम पहले से चल रहे थे, तो पहले भी उसको चालू किया जा सकता था, लेकिन वह नहीं हुआ । मोदी जी के आने के बाद जब हमारे रेल मंत्री जी ने उसके लिए प्रयास किए, दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय दिया,तब हम देख रहे हैं कि त्रिपुरा में त्रिपुर सुंदरी एक्सप्रेस के साथ ही साथ वहां पर राजधानी एक्सप्रेस,नई दिल्ली से अगरतला तक 28 अक्टूबर, 2017 में पहुंची हुई है । यह भारतीय जनता पार्टी और जो सहयोगी दल हैं,उनकी सरकार की इच्छाशक्ति का परिणाम है । केवल पूर्वोत्तर में ही नहीं, हमारे जम्मू-कश्मीर के साथी भी यहां पर हैं,तो जम्मू-कश्मीर के दूरस्थ क्षेत्रों में भी, जहां पर ट्रेन की सुविधाएं पूर्व में नहीं पहुंची थीं, वहां पर भी ट्रेन की सुविधाएं पहुंचाने का काम आदरणीय नरेन्द्र मोदी जी की सरकार के द्वारा किया गया है । प्रत्येक रेल इंजन में जीपीएस सिस्टम लगाने की दिशा में रेल मंत्रालय ने जो कदम आगे बढ़ाए हैं, यह वास्तव में एक बहुत ही सराहनीय कदम हैं । इस तरह का जीपीएस सिस्टम लगाए जाने से हम ट्रेन की वस्तुस्थिति को जान सकेंगे कि ट्रेन कहां और किस स्थिति में है । यह एक बहुत अच्छा कदम रेल मंत्रालय के द्वारा उठाया जा रहा है ।
महोदय,मैं एक बात आदरणीय रेल राज्य मंत्री जी से कहना चाहता हॅूं कि हमारे रेलवे स्टेशनों के पास सभी स्थानों पर सैकड़ों एकड़ की मात्रा में रेलवे की अतिरिक्त जमीन पड़ी हुई है । उस जमीन का कोई उपयोग नहीं हो रहा है, बल्कि देखने में यह आता है कि बहुत सारे जो मसल्स पॉवर वाले बाहुबली लोग हैं, वे ऐसी जमीनों पर कब्ज़ा कर लेते हैं । क्यों नहीं हम रेल विभाग के द्वारा इस तरह की पहल करें और उस अतिरिक्त भूमि का व्यावसायिक उपयोग करते हुए,उसमें हम अपने नौजवानों को नई पीढ़ी को रोज़गार देने की दिशा में कार्य-योजना बनाएं ताकि वह जमीन अतिक्रमित होने से भी बचे । हम अपनी नई पीढ़ी को रोजगार देने के लिए भी ऐसे स्थानों का उपयोग कर सकते हैं ।
महोदय,मैं अपने क्षेत्र की कुछ बातें यहां पर रखना चाहता हॅूं । हमारे यहां से खजुराहो से नई दिल्ली के लिए एक ट्रेन चलती है । आधी ट्रेन मानिकपुर से आती है और आधी ट्रेन खजुराहो से आती है । उसको उत्तर प्रदेश संपर्क क्रांति कहा जाता है । महोबा में यह लिंक होती है । हमारे बुंदेलखण्ड की जनता छत्तरपुर-टीकमगढ़ से नई दिल्ली तक के लिए ट्रेन चलाए जाने की मांग कर रही है, लेकिन हम लोगों को ट्रेन नहीं मिल रही है । हमारे यहां ट्रेन थी भी नहीं । बुंदेलखंड के लिए ट्रेन की सुविधा तब मिली जब आदरणीय नरेन्द्र मोदी जी की सरकार आई । उसके पहले मात्र एक पैसेंजर ट्रेन चलनी प्रारंभ हुई थी । लेकिन मोदी जी की सरकार के पिछले कार्यकाल में खजुराहो से भोपाल तक महामना एक्सप्रेस ट्रेन चली । फिर दूसरी ट्रेन के लिए अभी चुनाव से पहले प्रयास किया । मैं माननीय पीयूष गोयल जी को धन्यवाद देना चाहता हॅूं कि उन्होंने खजुराहो से इंदौर के लिए दूसरी ट्रेन चला कर बुंदेलखंड के लिए यह दूसरी ट्रेन की सुविधा उपलब्ध कराई है ।
महोदय,मैं आपसे अनुरोध करना चाहता हॅूं कि यह जो उत्तर प्रदेश संपर्क क्रांति ट्रेन चलती है, जो आधी मानिकपुर से आती है और आधी खजुराहो से जा कर महोबा में लिंक होती है । इसके लिए आपको कोई अतिरिक्त ट्रेन नहीं चलानी पड़ेगी । यह जो आप आधी खजुराहो से महोबा में लिंक कर देते हैं तो अगला ही स्टेशन पड़ता है, उसको महोबा में लिंक करने की बजाय आप खजुराहो से उसको छतरपुर लाइए,छतरपुर से टीकमगढ़ लाइए । यदि ट्रेंनें झांसी में लिंक होंगीं तो बुंदेलखण्ड का यह क्षेत्र जो रेल सुविधाओं से वंचित है, उसको सुविधाएं भी मिलेंगी । यहां के मजदूर बहुत बड़ी संख्या में रोजगार की तलाश में छतरपुर टीकमगढ़ जो मेरा संसदीय क्षेत्र है, तथा पन्ना से भी सैंकड़ों की संख्या में मज़दूर दिल्ली आते हैं ।
आप कभी झांसी के चार नम्बर, पाँच नम्बर प्लेटफार्म पर जाइए । शाम को छ: बजे के बाद वहां जो मजदूर दिखेंगे, वह सारे के सारे बुंदेलखंड के दिखेंगे । मैं आपसे अनुरोध करना चाहता हूँ कि इस यूपी सम्पर्क क्रांति ट्रेन को खजुराहो से छतरपुर, टीकमगढ़, ललितपुर लाकर इसे झांसी में लिंक करें तो आपको नई ट्रेन नहीं चलानी पड़ेगी और बुंदेलखंड को भी एक बड़ी ट्रेन की सुविधा मिल जाएगी ।
एक चीज़ और मैं कहना चाहता हूं कि हमारे यहां खजुराहो से जो महामना एक्सप्रेस चलती है, वह शाम को जाती है और शाम को जाकर भोपाल लगभग साढ़े 11 बजे पहुंचती है । वहां पर भी लगभग 45 मिनट आउटर पर खड़ी रहती है । मैं इस ट्रेन की लम्बे समय से मांग कर रहा हूं कि इस महामना ट्रेन को खजुराहो से सुबह चलाया जाए । यह सुबह चल कर 11 बजे के आस-पास भोपाल पहुंच जाएगी । यह प्रदेश की राजधानी है, जो लोग भोपाल काम से जाते हैं, वे दिन में अपना काम कराएंगे और शाम को जब वह ट्रेन वापस चले तो टीकमगढ़, छतरपुर होते हुए रात्रि में 12बजे तक खजुराहो पहुंच जाएगी । इसमें आपको केवल टाइमिंग चेंज करना है ।
एक ट्रेन और है ।…(व्यवधान) सभापति जी, मैं थोड़ा समय लेना चाहूँगा । दूसरी ट्रेन आपने खजुराहो से इंदौर के लिए चलाई है । खजुराहो से इंदौर जो ट्रेन चल रही है, वह ट्रेन खाली जा रही है । जब यह ट्रेन चलाई गई थी तो इसका टाइमिंग गलत रखा गया । इसमें यात्रियों को सुविधा भी नहीं मिल रही है और रेलवे को भी राजस्व की हानि हो रही है । मैं आपसे अनुरोध करना चाहता हूं कि महामना के टाइमिंग पर इस भोपाल-इंदौर ट्रेन को चलाया जाए । महामना एक्सप्रेस को सुबह चला कर शाम को भोपाल से वापस लाया जाए ताकि इस ट्रेन का विधिवत रूप से लोगों को लाभ मिल सके । हमारे यहां ईशानगर स्टेशन पर महामना एक्सप्रेस का ठहराव नहीं है । ईशानगर स्टेशन पर इस महामना एक्सप्रेस का स्टॉपेज कराया जाए ।
ओरछा हमारा बहुत बड़ा धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थल है । लेकिन इस ओरछा स्टेशन पर जहाँ पर देश ही नहीं, बल्कि विदेश से भी पर्यटक बहुत बड़ी मात्रा में आते हैं, इस ओरछा स्टेशन पर पैसेंजर ट्रेन को छोड़कर कोई और ट्रेन नहीं रुकती है । आदरणीय प्रधान मंत्री जी ने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में ओरछा के महत्व को उल्लेखित किया था । ओरछा स्टेशन पर अगर सभी ट्रेनों का स्टॉपेज कर दिया जाएगा तो झांसी से जो पर्यटक ओरछा आते हैं, वे ओरछा से अगला पर्यटन केन्द्र वाराणसी सीधे जा सकेंगे । इसके साथ ही साथ जो टहरका है, टहरका में बुंदेलखंड एक्सप्रेस के ठहराव की मांग लम्बे समय से हो रही है । मैं चाहता हूं कि टहरका स्टेशन पर बुंदेलखंड एक्सप्रेस के स्टॉपेज की मांग को पूरा कर दिया जाए । अगर खजुराहो से मुम्बई के लिए एक ट्रेन चल जाती है तो हमारे क्षेत्र के लोग जो इलाज कराने के लिए मुम्बई जाते हैं, जिनको दो-तीन स्थानों पर ट्रेन बदल कर जाना पड़ता है, उनको सीधी ट्रेन की सुविधा उपलब्ध होने से इस बुंदेलखंड का विकास हो सकेगा । टीकमगढ़, सागर होते हुए जबलपुर ट्रेन चलाई जाती है तो लगभग 150 किलोमीटर का चक्कर बचेगा । बुंदेलखंड के विकास में इस ट्रेन के चलाये जाने से काफी सुविधा होगी ।
आदरणीय सभापति महोदय, इसी के साथ मैं रेल बजट का समर्थन करते हुए अपनी वाणी को यही पर विराम देना चाहता हूं ।
*SHRIMATI POONAMBEN MAADAM (JAMNAGAR): First and foremost, I would like to thank and congratulate our Hon’ble PM Shri Narendra Modi ji and Hon’ble FM, Smt. Nirmala Sitharaman ji for presenting a balanced and a visionary budget. This is the first ever budget that has been presented to the country with a long term vision and for improving the lives of the common man. Ease of living, as it has been emphasized time and again in the budget speech of the Hon’ble FM, is not just about individual growth but about improving every sector in the economy so that they benefit every individual of the country. This Government has always been holistic about development intertwined with ‘Maximum Governance and minimum Government and development of India is dependent on development of its infrastructure, ideologies and individuals.
As it has been talked through in the Budget about various sectors, railways hold an important position; not just for its standpoint in the economy but for its wide range of services to the common man and in this regard, I support the DFG no. 82 under Ministry of Railways for FY 2019-2020.
Railway is considered to be the soul of public transport in India and this Budget reflects the aspirations of each and every member of the Indian family; a Budget that reflects the aspirations of the common citizens of India who have waiting to see tangible changes in the Indian Railways.
A lot has been done in the Railway sector in the last 5 years; right from merging the Railway budget with the General budget to help enhance capital expenditure and boost economic growth of the sector to electrification and doubling of tracks to redevelopment of stations of focusing on passenger safety-much reforms have been initiated in the Railway sector in the last 5 years. These reforms were primary agendas of the present Government under the leadership of our Hon’ble Prime Minister, Shri Narendra Modi ji.
The Hon’ble Prime Minister Shri Narendra Modi ji and once said, “My vision is to be make railways the backbone of India’s progress and economic development.” All the above mentioned efforts are being made to translate his vision into reality and the core objective is to improve the quality of customer experience, become an engine of employment generation and boost economic growth at the national level and convert India’s largest institution into a template for transformation.
Railway are the backbone of the Indian public transport system and without furthering investment and technological interventions; the Indian Railways will not go any further. I would like to extend my sincere thanks to our Hon’ble Finance Minister, Smt. Nirmala Sitharaman ji for acknowledging the need of the hour and the Railways has got a budgetary allocation of Rs.65,837 crore and the highest ever outlay for capital expenditure amounting to Rs. 1.60 lakh crore in the Union Budget 2019-20.
Moving on, to one the many takeaways from the Railway Budget is that, there has been a switch from mere Railway announcements of new lines and projects in favour of execution. This is extremely important step to improving the financial health of the railways in India. As mentioned in the Budget 2019-2020 railway infrastructure would need an investment of Rs.50 lakh crore between 2018 and 2030; this has been conceptualized keeping in mind a 10 year vision to improve the sector exponentially. Rs. 50 lakh core investment as mentioned by the finance minister will be needed to modernise stations and build passenger amenities. Some of the old projects like 100 percent electrification, advanced signaling and station development were already being accounted for. Now, with new investment it can be considered so as to how to create additional capacities so that model share of freight can go up, cost of logistics can come down and passengers along with good amenities get more avenue to travel by trains to reach their destinations. Better services for the passengers have always been the goal of the Government and opportunities and viability of attracting more investments can go a long way in ensuring this. Electrification has been carried out at a faster pace in the last 5 years; and railways are carrying almost half of its freight and passengers on electrified routes now. The electrification of Indian Railways’ broad gauge network will be done by 2021-22. In 2019-20, 7000 route kilometers has been targeted for electrification.
Secondly, another important shift is focus on passenger comfort in Railways. I thank our Hon’ble Finance Minister, Shri Sitharamanji for allocating more than Rs. 3,000 crore for rail passenger amenities in the 2019-2020 Budget, an around 200 per cent rise from the last fiscal. The allocation for rail passenger comfort this fiscal has gone up to Rs. 3,422.57 crore from Rs. 1,657 crore in the Budget presented last year.
Improving the quality of travel and services has always been the focus of the government and in this regard the Government intends to build world-class modern train sets. Redevelopment of 6000 major railway stations has also been taken up which will improve passenger amenities at stations and turn them into world-class facilities with Wi-Fi, drinking water facilities, upgraded waiting rooms, television sets, passenger information kiosks and other such facilities. Providing Wi-Fi at all stations is also on the agenda to improve train travel experience and bridge the digital divide between the rural and urban citizens; courtesy the Government’s flagship ‘Digital India,’ program.
Thirdly, besides station development and comfort; safety has been a top priority of the Government. Railways has also planned to provide CCTV Surveillance System at all stations (excluding halt stations) and in trains by using state-of-the art video surveillance technology to enhance safety of passengers. CCTV surveillance systems at 455 railway stations have been provided and rests of the stations are targeted by 2020-21. Similarly, 1,203 coaches were equipped with CCTV surveillance system and rest passenger coaches are targeted by 2021-22. For passenger safety complete elimination of unmanned level crossings of Broad Gauge network has been achieved in 2018-19. Now, the national transporter is aiming to eliminate all 2,568 manned level crossings.
These reforms are much needed to develop and sustain the Railways sector. This budget will have long-term positive impact on the national economy by effective execution, enhanced capital investment and infusion of technology along with IT, in the Railways. Appropriate steps have been taken towards fulfilling the Government’s promise to enhance connectivity in the backward areas of the country.
Infrastructure has always been a non-negotiable with this Government; and to augment Railway infrastructure; Indian Railways has launched a massive programme for modernization of railway stations, making railway travel a pleasant and satisfying experience for passengers. The railways has also introduced fully indigenous semi high-speed Train 18 under ‘Make in India’.
With this, I would like to draw your attention to issues pertaining to my constituency, Jamnagar. The induction of Shatabdi Express between Ahmedabad and Dwarka by the then Hon’ble Railway Minister Shri Suresh Prabhu ji was a long-standing demand of people of my constituency. If a fast train like Shatabdi Express is introduced, the journey period can be reduced to half. The intended high speed train service (Ahmedabad – Dwarka) will ba a major boost in connectivity between the Industrial hubs in Gujarat (Jamnagar and Rajkot) to the state capital of Ahmedabad. Also, these towns are the hubs for the casting/forging and brass component industries. I also sincerely thank our Hon’ble Prime Minister for dedicating the Okha-Kanalus and Porbandar-Wansjaliya Sections in Gujarat of Western Railways as Green Corridor Sections. Indian Railways, being the biggest commercial organization of the country, is continuously in practice to adopt environmentally sustainable practices so that environment is not degraded. Since the existence of Indian Railways, it has been a problem to make the railway-lines free from human waste discharge. But now, bio-toilets will be fitted in all new and existing trains and all railway lines in due course will be made completely free from human excreta. Further, due to the strategic location of Jamnagar city, all three wings of the Armed Forces i.e. Indian Army, Indian Air Force and Indian Navy have units/establishments in Jamnagar will be benefitted. A high speed train line with Ahmedabad would provide a major respite to the men in uniform. Secondly, conversion of Rajkot- New Delhi weekly train no. 19579-19580 to bi-weekly will make travel easier for the people who have to travel to New Delhi regularly for work and business purposes.
Lastly, electrification and doubling of tracks are crucial for the expansion of rail network. Railways will embark on large scale electrification through tenders given on engineering, procurement and construction mode. A similar plan is afoot for upgrading the signaling system. As we are all aware of the focus of the Government towards the development and modernisation of facilities in railways especially with regard to electrification and doubling of tracks, I align my demands with the Government’s agenda of electrification of 7000 route Kms for 2019-2020. It would be good if electrification and doubling of tracks is prioritised for all the existing routes of my constituency. Therefore, I would request higher allocation to demand for grants and speeding up pending issues under Railways concerning the execution of infrastructure projects pertaining to my constituency.
Moderisation of Jamnagar railway station must be prioritised. Jamnagar being the district headquarters of all the three defence forces and hosting close to 3500 brass and small scale industrial units has an ever increasing footfall of travellers. Additionally, biggest oil refineries of Reliance and Essar are situated near Jamnagar. Even though many long distance trains originates and passes through Jamnagar, passenger amenities provided at the station is inadequate. Therefore, I request the Hon’ble Minister to take necessary steps to modernize Jamnagar railway station. This would also facilitate most long distance trains that originate or terminate at Hapa Railway station to be extended to Jamnagar Railway station. Next, I request the Minister to construct a railway over-bridge near the entrance of Hapa Railway station. Also cleaning facilities must be upgraded at the stations. Finally, I would request the Ministry to expedite the work of second platform at Khambaliya station.
With this, I would like to specially mention that this budget will be an important tool towards the renovation of the nation. Along with that an effort has been made to seek the co-operation of passengers and the Railway Employees, as well. For the first time the Railway Budget 2019 has said to launch a scheme of Integrated Skill Development, where all 13 lakh railway employees will be given a foundational training. The programme will focus on 3Cs- Customer, Cost, and (work) Culture. Cost optimization, efficiency in management and accountability to the consumer is focus of our Government, which is reflected in this budget. The government has accorded the highest priority to safety along with infrastructure in line with its philosophy that every life is precious.
यह Budget एक नए भारत का Budget है । इस सरकार ने इस देश को एक नयी दिशा दी है, Railways को एक नयी पहचान दी है । देश की उन्नति हर क्षेत्र की उन्नति से जुड़ा हुआ है और Railway एक महत्वपूर्ण service है जो देश के जन-जन की सेवा में निमित है । इस सेवा को और भी आगे बढ़ने के लिए और मज़बूत करने के लिए Railway Ministry के DFG (no. 83) का समर्थन करती हूँ ।
The Budget perfectly encapsulates the Hon’ble PM’s vision of ‘New India’ and once again I congratulations the Hon’ble FM, Smt. Nirmala Sitharaman ji for presenting a budget for the ‘New India.’ As I talk about new India, I conclude by saying that the journey has already begun and very soon in the words of Shri Narendra Modi ji “The Indian Railways will become the growth engine of the nation’s Vikas Yatra.” Thank you.
SHRI P.K. KUNHALIKUTTY (MALAPPURAM): Sir, while we are discussing the Demands for Grants pertaining to the Ministry of Railways, one can very well see that a lot of Members, especially the Ruling Party Members, are thinking with a lot of hope and are saying that so many things, so many wonders are going to happen under the leadership of the hon. Prime Minister and the Railway Minister and so many things are going to take place for the first time and so on and so forth. But when one goes through the documents, nobody can see the required allocation for any of these things. There is no required allocation generally and there is not much allocation even to take forward the usual things like line extension, maintenance, electrification and things like that.
I do not know what is the wonder that is going to happen in this country. Without allocation of funds, will you be able to do anything? The fact is that in this Government, they do not have much focus on Railways. Like any other public sector undertaking, like Air India, like BSNL, like all other public sector undertakings, the general feeling and impression is that the Railways is also losing its focus. Railways has become a losing proposition. It is waiting for its mercy killing like any other public sector undertaking.
In the morning, we were hearing from the Civil Aviation Minister. He was saying about the pathetic condition of Air India. One can very well understand as to what has happened to Air India within a couple of years. When we travel by Air India, we all think as to how many days our Air India will be there. In this way, a general impression is there. The Railways also is going to be privatised. It is waiting for its mercy killing. It is very well seen from the fact that the Railways had a separate Budget. At that time, what was the condition? Everybody from all the States used to wait for the Railway Budget. With many hopes, all the States used to wait at that time. Now, it is a part of the General Budget and there is no focus on the Railway Budget. One can very well see, when we go through the documents, there is not much allocation even for the usual works. Southern States are being neglected in general and Kerala in particular. Kerala may not be there on your political map but it should be there in your Railway map. It does not have provisions for many projects. There is no fund allocation for Kerala. I will not go into the examples. Perhaps I will write about this to the hon. Minister of Railways later on. There are many extension works, doubling of tracks, electrification of tracks, maintenance of tracks, track renewals and so on for which no funds have been allocated.
There was a proposal for a new coach factory at Kanjikode. There is no talk about that nowadays. The Government had given a lot of land to this particular coach factory and it was the priority of the then UPA Government. During the last five years, there is no talk about that coach factory. Nothing has been heard about this Kanjikode coach factory. Are you waiting for any special purpose vehicle? Land is lying vacant. It is not a good thing. We all know that States like Kerala get their income from tourism and all that. Many tourists come from abroad. During rainy season, one should have to carry one umbrella too to prevent themselves from getting wet even in coaches. Such is the condition. Otherwise, they will become wet because of the leakage in the coaches. Such is the condition of train coaches that run through Kerala.
Like that, there were proposals for new lines. There was a proposal for a line between Nilambur and Nanjangud. It is a very good line and it has tourism importance. It connects Kerala with Mysore, and from there it can go everywhere. There is not even a DPR done on this line. At least, some survey can be done on that line. That is what I wanted to bring to the notice of the Government.
HON. CHAIRPERSON : Hon. Member, kindly conclude.
SHRI P.K. KUNHALIKUTTY: Yes, I am going to conclude.
I am leaving all other points because of paucity of time. But I want to bring one thing to their notice. In a thickly populated and dense State like Kerala, there is one problem. It will be there in other States also. It is very difficult for the people, who are residing near the railways, to get NoC for doing their construction activities. That 30-metre law is very much harsher compared to the old one. So, the Government should take some initiatives to have some change in that. This law has to be scrapped and a new law has to be brought.
The southern States in general, and Kerala in particular is looking for a little more generous allocation of funds about which I mentioned. I wanted to bring this to their notice.
With these words, I conclude.
SHRIMATI SANGEETA KUMARI SINGH DEO (BOLANGIR): Mr. Chairman, Sir, thank you for giving me the opportunity to participate in the discussion on the Demands for Grants of the Ministry of Railways.
At the very outset, I would like to extend my heartiest congratulations to the hon. Finance Minister, Smt. Nirmala Sitharaman Ji, who has indeed done the women of our country proud by creating history as India’s first full time lady Finance Minister. The hon. Minister has presented a futuristic, progressive, benevolent and inclusive Budget. She has succeeded in translating the thought and vision of our esteemed Prime Minister who has established firmly his position on the world stage as a global leader and statesman.
The spirit of this outstanding Budget conforms to the principles of Jeremy Bentham’s Theory of Utilitarianism, which advocates for the greatest happiness of the greatest number, and this thought has clearly been reflected in the Prime Minister’s slogan of “Sabka Saath, Sabka Vikaas, Sabka Vishwas”, in order to create a new India.
It is only in the Modi era, post-2014, that the Government has actually started fulfilling its role as was envisaged in the Preamble of our Constitution as a “Sovereign Socialist Secular Democratic Republic”. It is also in the Modi era that the Government has started seriously fulfilling its obligations as a welfare state by protecting and promoting the socio-economic well-being of our citizens, based on the principles of equality and social justice, at the same time continuing to be the world’s fastest growing economy.
After this, I would like to come down to the Demands for Grants. Our country is in a period of transition and is experiencing a paradigm shift. The Railway Budget is totally in sync with the new India vision. It is estimated that the railway infrastructure would need an investment of Rs.50 lakh crore between 2018 and 2030. Given that, the capital expenditure outlays of Railways are around Rs.1.5 to 1.6 lakh crore per annum. It is, therefore, proposed to use public-private partnership to unleash faster development and completion of the railway works.
Sir, as there is a paucity of time, I will mention just a few highlights of the Rail Budget because then it would be remiss of me if I do not convey the demands and sentiments of my own constituency.
Firstly, the Government focuses on manufacturing world-class trains with the help of transfer of technology through Make in India.
Secondly, Indian Railways is to be a big growth driver and is going to contribute majorly towards making $5 trillion economy a reality.
Indian Railways has tied up with France to set up world-class stations.
Public Private Partnership (PPP) is being encouraged to develop railway infrastructure.
Then, no railway fare hike has been announced.
The state-of-the-art stations will be set up under station redevelopment programme.
Investment in suburban railways has been encouraged through Special Purpose Vehicle (SPV) structures like Rapid Regional Transport System (RRTS).
Public Private Partnership (PPP) in Metro rail initiative is being encouraged.
Focus on green energy by Indian Railways is the new engine of growth.
There is a great emphasis on safe railway travel. When we are talking about high speed trains, simultaneously we are worried about safe travel. To avoid accidents and untoward incidents, CCTVs on stations and trains have been set up so that sabotage can be controlled.
As far as new signalling is concerned, India is looking to adopt European signalling infrastructure for safer yet faster movement of passenger trains.
Swachh Rail, Swachh Bharat Abhiyan is going to take place on getting a green rating.
Elimination of unmanned level crossings is a big step aiming to prevent railway accidents due to trespassing on railway tracks. This Government has taken it seriously.
Vande Bharat Express, which is a flagship project, is also doing well and is a big success story of ‘Make in India’.
Dedicated Freight Corridors are going to be set up. This will mitigate the congestion within the railway network, which is going to benefit the common man.
Indian Railways carries lakhs of passengers. There has been a further increase of 2.09 per cent in the number of passengers carried by the Indian Railways in the Financial Year 2018. This is a very encouraging, a very optimistic and a promising figure, which just helps us to work harder to excel in our work in this Ministry.
Last but not the least, the thing which really struck a chord within me is that there are 86,500 woman employees in Railways and it is heartening to note that they are very well looked after and granted maternity leave, childcare leave and special leave for promoting family welfare. The Railways stresses greatly on the welfare, development and empowerment of women. I think we should take a leaf out of the book of the Railways. A unique feature of women empowerment in Railways is the Women Welfare Organisation.
HON. CHAIRPERSON: Please conclude.
SHRIMATI SANGEETA KUMARI SINGH DEO : Sir, you have been most patient. I have just finished with the preliminary points. Let me just come down to my constituency.
Coming to Odisha, I would like to whole-heartedly thank our dynamic, tenacious, committed hon. Minister of Railways, Shri Piyush Goyal who is a man with tremendous foresight. He works relentlessly to spearhead the Ministry of Railways into the New India era. He has been benevolent to the State of Odisha and I want to thank him from the bottom of my heart. I just want to elucidate a few points here.
Since 2014, a total of Rs.20,213 crore has been earmarked in the railway budgetary allocation for Odisha. This is a whopping five-fold increase over the budgetary allocation of Rs.4190 crore during the UPA Government.
The current Railway Budget has provided for a 13 per cent increase in the allotment of funds for the East-Coast Railways to the tune of Rs. 7,010 crore, which includes a 63 per cent allotment for new lines, which comes to Rs. 2,630 crore. There is 118 per cent increase in the allotment for passenger amenities to the tune of Rs. 182 crore. New railway lines are being constructed in Odisha at 29 km. per year from 2014 to 2018 as opposed to the construction of 10 km per year which was being done during the tenure from 2004 to 2014, before the Modi era. Doubling work has gone up to 83 km. per year during 2014-2018. …(Interruptions)
HON. CHAIRPERSON : Hon. Member, please conclude your speech.
SHRIMATI SANGEETA KUMARI SINGH DEO: I just want a few more minutes. It is my maiden speech. So, please be kind to me. …(Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: Please address the Chair.
SHRIMATI SANGEETA KUMARI SINGH DEO: Doubling work has gone up to 83 km. per year during 2014-2018 in comparison to 16 km. which was being done during the UPA tenure.
Electrification of lines in Odisha has increased by 110 kms. per year in comparison to 35 km. which was being done during 2014-18 period. This comparison is self-explanatory that which Government has the inclination and the will to work for the people.
As far as my constituency is concerned, I thank the hon. Minister for the Budgetary allocation of Rs. 350 crore for the Khurda-Balangir railway line; Rs. 170 crore for doubling of the Sambalpur-Titlagarh railway line, Titlagarh-Muribahal overbridge; doubling of the Titlagarh-Raipur railway line and the Vizianagram-Titlagarh third line.
It would be really negligent of me if I do not elucidate some of the important demands. We want an early and time-bound completion of the Khurda-Balangir railway line which has been going on for the last 20 years.
I want to raise a very important point. There is a place called Kantabanji in my constituency where 750 acres of land has been lying idle for the last 75 years. No ancillary unit or wagon maintenance workshop has been set up there. …(Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: Shri Rampreet Mandal ji.
SHRIMATI SANGEETA KUMARI SINGH DEO: It is a no-industry district. We would request the hon. Minister to be benevolent and set up something here. A MEMU rake maintenance facility could be established there. The most important point is that there should be some Budgetary allocation for the proposed new railway line from Balangir to Nuapada via Patnagarh. This is a very old request. The survey has been completed. It is pending before the Railway Board since 2014. The DPR of this project has also been submitted in 2016.
HON. CHAIRPERSON: Thank you.
श्री रामप्रीतमंडल (झंझारपुर): सभापति महोदय,आपने मुझे वर्ष 2019-20 के रेलवे की अनुदान मांगों पर बोलने का मौका दिया । मैं इसके लिए आपका आभार प्रकट करता हूं । इसके साथ ही मैं माननीय प्रधान मंत्री जी, माननीय रेल मंत्री जी और माननीय नीतीश कुमार जी का आभार प्रकट करना चाहता हूं । मैं एक मुखिया से इस हाऊस में आया हूं ।
मैं संसद में सारे सांसदों का हृदय से आभार व्यक्त करना चाहता हूं । पिछले वर्षों में देश के प्रमुख यातायात साधन रेलवे में क्रांतिकारी सुधार लाने के लिए एनडीए सरकार ने व्यापक और कारगर कदम उठाया है । गत वर्षों में रेल बजट और आम बजट को अलग-अलग रखा जाता था । किन्तु एनडीए सरकार ने रेल बजट को आम बजट से जोड़ दिया, उसका मैं दिल से स्वागत करता हूं । पहले रेलवे आर्थिक संकट से जूझा करती थी,उसे उबारने के लिए आम बजट में उसे आर्थिक सहयोग दे सकें, एनडीए सरकार की रेलवे सुधार की जो यह नीयत है उसका भी मैं हृदय से स्वागत करता हूं ।
17.00 hrs मेरा मत है कि जहां नीयत स्वच्छ और लोक कल्याण की हो, वहां भले ही नीति के आकलन में भूल हो सकती है किन्तु कालांतर में वह नीति भी लोक कल्याण और स्वच्छ वातावरण पैदा करने में सक्षम हो जाती है ।
17.01 hrs (Shri N.K. Premachandran in the Chair) जैसा कि वित्त मंत्री जी ने वर्ष 2019-20 का बजट संसद में पेश करते समय जो भारतीय रेलवे को विकसित करने के लिए और उसे लोक हितकारी बनाने के लिए जो उपहारों की बौछार की है,वह प्रशंसनीय है और आवश्यक भी है । मैं सरकार के इस कदम का हार्दिक स्वागत करता हूं । समय की सीमा को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2019-20 के बजट में रेलवे के विकास और समाज के लोक कल्याण के लिए जो परियोजनाएं घोषित की गई हैं,वे बहुत प्रशंसनीय है ।
भारतीय रेलवे देश की ही नहीं अपितु विश्व की विशालकाय संस्थाओं में से एक है । लगभग 150 करोड़ यात्री भारतीय रेलवे की आय के स्रोत हैं । इतना ही नहीं, यह संस्था गत एक शताब्दी से अधिक समय से कार्यशील है । यह बात सही है कि जिन लोगों ने देश में रेल व्यवस्था कायम की थी उनका उद्देश्य देश का विकास नहीं बल्कि देश पर अंकुश रखने का एक सफल साधन बनाना था । किन्तु आज देश स्वतंत्र है और हम भारतीय अपने भाग्य के निर्माता स्वयं हैं । अब हमें रेलवे के प्रति अपनी सोच बदलनी होगी और रेलवे को एक विकास के प्रमुख साधन के रूप में विकसित करना होगा । मुझे आश्चर्य है कि इतना विशालकाय और इतने स्रोतों की धनी भारतीय रेलवे आर्थिक हानि से क्यों जूझती है? गत वर्षों के अनेक अध्ययनों एवं सर्वेक्षणों पर दृष्टि डालने के बाद रेलवे द्वारा आर्थिक हानि उठाने के कुछ कारण मेरे सामने आए हैं ।
आज देश के यातायात का प्रमुख साधन होने के बावजूद रेलवे यातायात व्यवस्था में सड़क यातायात से पिछड़ा हुआ है और इसका प्रमुख कारण यह है कि रेलवे यात्रियों को ढोने में आर्थिक हानि उठा रही है । सरकारें आर्थिक हानि से बचने के लिए मालभाड़े की दरें बढ़ाकर आर्थिक हानि से बचने की कोशिश करती रही हैं किन्तु यात्रियों द्वारा यात्राओं पर होने वाली आर्थिक हानि को पूरा करने में असफल रही है । मेरा मत है कि यात्री गाड़ियों में भी दो श्रेणी की यात्राएं हैं । पहला- दूरी की यात्राएं और दूसरा- निकट दूरी वाली यात्राएं ।
देखने में आया है कि दूरी वाली यात्री गाड़ियों से संबंधित वाली गाड़ियां घाटे में नहीं चल रही हैं,परन्तु निकट दूरी की गाड़ियां निश्चित रूप से घाटे में चल रही हैं । क्योंकि देश का आम यात्री इन निकट दूरी की यात्राएं विवश होकर ही रेल से यात्रा करता है । सामान्यत:वह सड़क यातायात साधनों का उपयोग करना पसंद करता है । कारण जानने के लिए मैं माननीय रेल मंत्री से प्रार्थना करूंगा कि वे इन छोटी दूरी की गाड़ियों की यात्रा में यात्रा का अनुभव प्राप्त करना चाहिए । रात में इन गाड़ियों में बिजली नहीं रहती है, सुबह पंखे नहीं होते हैं,शौचालय मल-मूत्र से भरे होते हैं और गंतव्य स्थान पर गाड़ी कब पहुंचेगी इसकी भी अनिश्चितता बनी रहती है ।
मैं इस संदर्भ में अपने क्षेत्र झंझारपुर,बिहार की जमीनी हकीकत को लेकर कुछ उदाहरण सदन में सरकार के समक्ष रखना चाहता हूं । सुरसंड से सीतामढ़ी होते हुए निर्मली तक 188 कि.मी. की योजना है जिसका उद्घाटन 2008 में तत्कालीन रेल मंत्री ने किया था, किन्तु उसका निर्माण शून्य है । जयनगर से जनकपुर जाने वाली परियोजनाएं पूर्ण निर्माण होने के बावजूद उद्घाटन के अभाव में आज भी चालू नहीं हो सकी हैं । जरूरी इसलिए है क्योंकि यह दो देशों के यातायात का प्रमुख साधन है । खजौली से गंगासागर और जानकी एक्सप्रेस दो गाड़ियां चलती हैं किन्तु वहां ठहराव नहीं है । यद्यपि इस क्षेत्र में भारी जनसंख्या रहती है जो इस असुविधा से पीड़ित है । सरकार को तुरन्त इन गाड़ियों के ठहराव का आदेश देना चाहिए ।
कोसी पर 2001 में एक पुल का निर्माण हुआ था, जिसका शिलान्यास तत्कालीन रेल मंत्री नीतीश कुमार जी ने किया था और इस कार्यक्रम में श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी जी भी उपस्थित थे । आज यह पुल बनकर तैयार है किन्तु इसकी सहायक रेल लाइन सकरी से असम की ओर वाया झंझारपुर बड़ी लाइन बिछाई जा रही है किन्तु उसका निर्माण कार्य इतने विलम्ब से हो रहा है कि मुझे लगता है कि जब तक ये रेल लाइन पूरी होगी, तब तक इसका लाभ समाप्त हो चुका होगा । मैं चाहता हूं कि इसके निर्माण को एक समय-सीमा के अंदर अविलंब पूरा किया जाए ताकि झंझारपुर के निवासियों को भराव से, जल संकट से निजात मिले, साथ ही यह रेल लाइन देश की उत्तरी सीमा को सुरक्षित बनाने में भी कारगर साबित होगी ।
मान्यवर, बूढ़ी गंडक एक्सप्रेस जो जयनगर से नरकटियागंज होते हुए गोरखपुर जाती है, 2008 से बंद पड़ी है, इस रेल से मिथिलांचल और सीमावर्ती नेपाल के लाखों परिवार रोजी-रोटी अर्जित करते थे, जो आज रोजगार के लिए भटक रहे हैं । झंझारपुर से लौकहा-लौकही का रेल लाइन निर्माण बहुत धीमी गति से चल रहा है । अत: मेरा आग्रह है कि इन परियोजनाओं को अविलम्ब पुन:शुरू किया जाए,धन्यवाद । मैं माननीय रेल मंत्री जी,माननीय रेल राज्य मंत्री जी, प्रधान मंत्री जी और संसद में बैठे हुए सभी सांसदों को धन्यवाद देना चाहता हूं ।
*SHRI ASHOK MAHADEORAO NETE (GADCHIROLI-CHIMUR): Thank you Chairman Sir, Hon. Finance Minister has presented an all-inclusive General Budget 2019-20 which has touched upon all the walks of our life and hence I would like to thank and congratulate her on behalf of my constituency and myself. Hon. Chairman Sir, I rise to speak on the demands for grants 2019-20 for the Ministry of Railways.
First of all, I would like to thank Hon. Railway Minister Piyush Goyal ji for doing justice to my constituency Gadchiroli-Chimur which is the largest tribal dominated and mostly backward and Naxal-affected forest region. All the important rail-line projects like Wadsa-Gadchiroli, Nagbhid-Nagpur; Gadchiroli-Mancherial upto Adilabad connecting to Telangana alongwith Nagbhid-Kampatempa-Chimur-Warora have been sanctioned. These rail lines would boost the development activities in my Constituency.
I would also like to thank Hon. Union Minister Nitin Gadhari ji, Hon. Chief Minister of Maharashtra Devendra Fadnavis ji, Forest and Finance Minister of Maharashtra Sudhir Bhau Mungantiwarji and the then Railway Minister Shri Suresh Prabhu ji for playing an important role in sanctioning these rail projects.
Hon. Chairman Sir, Wadsa-Gadchiroli Railine project was sanctioned 3-4 years ago. This is a 52.36 km long railway line project worth Rs.734 crore but the pace of progress is very slow. Land acquition was delayed due to forest objections. But Hon. Nitin Gadkari ji, Devendra Fadnavis ji and Sudhir Mungantiwarji took initiative to settle the issue and arranged a meeting between Railway Ministry and Forest Department six month ago. But this is yet to be completed due to delay in land acquisition. * HON. CHAIRPERSON: Are you speaking in Marathi language?
SHRI ASHOK MAHADEORAO NETE: Yes, Sir.
HON. CHAIRPERSON: There is no interpretation available.
SHRI ASHOK MAHADEORAO NETE: Sir, I gave it in writing stating that I would like to speak in Marathi.
HON. CHAIRPERSON: I have no hesitation in you speaking in Marathi. But you have to give prior notice in advance. There is no interpretation available as of now.
श्री अशोक महादेवराव नेते: मैंने चिट्ठी में लिखकर दिया था कि मुझे मराठी में बोलना है ।
HON. CHAIRPERSON: I think, you can also speak in Hindi because there is no Marathi interpretation. आप हिन्दी में भाषण कर सकते हैं, क्योंकि मराठी का ट्रांसलेशन नहीं हो रहा है ।
श्री अशोक महादेवराव नेते: ठीक है, सर । इसके आगे मैं हिन्दी में बोलता हूं । वडसा-गडचिरोली मार्ग के बारे में मैं कहना चाहता हूं कि फॉरेस्ट विभाग की वजह से इसमें एक अड़चन निर्मित हुई है । इसके बारे में आदरणीय नितिन गडकरी,महाराष्ट्र के मुख्य मंत्री देवेन्द्र फडणवीस और वित्त मंत्री-वनमंत्री आदरणीय सुधीर मुनगंटीवार ने एक बैठक की थी,उस बैठक में इस अड़चन को सॉल्व किया गया । मेरे ख्याल से नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी और वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, इन एजेंसीज की कम्बाइण्ड बैठक करके, इनके द्वारा एक एनओसी देना जरूरी है । मैं मंत्री महोदय से अनुरोध करूंगा कि इसके बारे में तुरंत ध्यान देकर, वहां लैण्ड एक्विजिशन का काम पूरा करके, वडसा-गडचिरोली मार्ग रेल मार्ग जल्दी शुरू करें, ताकि वहां के लोगों को राहत मिले ।
दूसरा महत्वपूर्ण रेल मार्ग नागभिड से नागपुर रेलमार्ग है । यह पहले नैरोगेज रेल लाइन थी, फिर इसका रूपांतरण ब्रॉडगेज में हो गया । 922 करोड़ रुपये का यह रेल मार्ग है । यह रेल मार्ग भी जल्दी से जल्दी शुरू होना चाहिए । मेरे ख्याल से रेलवे बोर्ड और वित्त विभाग ने इसे मंजूरी दी है । नीति विभाग की मंजूरी बाकी है । रेल मंत्री जी से मेरा अनुरोध है कि इस बारे में भी ध्यान दें और इस रेल मार्ग को जल्दी से जल्दी पूरा करें, ताकि वहां के यात्रियों को का समाधान मिले । इतना ही नहीं, यदि यह रेल लाइन पूरी हो गई तो वहां के लोगों को कम पैसे में नागपुर जाने की सुविधा मिलेगी । इससे रेलवे को फायदा होगा और ग्राहकों को भी फायदा होगा । इसके बारे में ध्यान देना बहुत जरूरी है ।
17.12 hrs (Dr. (Prof.) Kirit Premjibhai Solanki in the Chair) सर, दो नए रेल मार्ग सर्वे के लिए मंजूर किए गए हैं, इनके बारे में भी ध्यान देना जरूरी है । मेरे संसदीय क्षेत्र के गोंदिया जिले में देवरी-आमगाव विधान सभा क्षेत्र आता है, वहां के लोगों की मांग है कि गोंदिया से आमगाव-सालेकसा-डोंगरगड होते हुए दुर्ग तक डेमो ट्रेन होनी चाहिए,क्योंकि वहां 12 बजे के बाद कोई भी ट्रेन नहीं है । वहां के लोगों ने कई बार निवेदन किया,मैंने खुद सांसद होने के नाते मंत्री महोदय से कई बार पत्राचार किया,बैठक भी की,लेकिन अभी भी यह शुरू नहीं हुई है । अगर वहां 12 बजे के बाद एक-दो नई ट्रेन्स दे दी जाएं तो वहां के लोगों को राहत मिलेगी और उनको फायदा मिलेगा,यही मेरा अनुरोध है ।
सर, उसी विधान सभा क्षेत्र में एक धानोली रास्ता है, जो काफी दिनों से रुका हुआ है । वह डेढ़ किलोमीटर का रास्ता है,केवल 1190 मीटर का रास्ता है । यह बहुत दिनों से रूका हुआ है । रेलवे को लगता है कि यह मेरा नहीं है और स्टेट गवर्नमेंट को लगता है कि यह मेरा नहीं है । जब हमने उनके साथ बैठक की तो बैठक में ऐसा पता चला कि रेल विभाग की सिर्फ सहमति होनी चाहिए,इनकी सिर्फ एनओसी चाहिए और स्टेट गवर्नमेंट इसे बनाने के लिए तैयार है । अगर उस रास्ते का निर्माण हुआ तो 25 किलोमीटर का फेरा कम हो जाएगा । इसलिए रेल मंत्री जी से मेरा अनुरोध है कि इस ओर भी ध्यान देना चाहिए । इतना ही अनुरोध करता हूं । धन्यवाद । जय हिन्द,जय भारत ।
*श्री रतनसिंह मगनसिंह राठौड़ (पंचमहल):मैं केन्द्रीय बजट - वर्ष 2019-2020 के लिए रेल मंत्रालय के नियंत्रणाधीन की अनुदानों की मांगों पर अपने विचार व्यक्त करता हूं । इस वर्ष की बजट में होने वाले रेलवे के अनुदानों को देखते हुए लगता है कि ऐसे बजट से रेलवे विभाग से हमारे देश के लोगों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा जिस तरह सरकार ने रेल यात्रियों का ख्याल रखते हुए उनके सुरक्षा को प्राथमिकता दिया गया है । इससे आए दिन होने वाली दुर्घटनाओं पर पूर्ण विराम लगेगा तथा इसके साथ-साथ जिस तरह अन्य सुविधाएं प्रदान किया है इस प्रभावशाली बजट के लिए माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जी की सरकार एवं रेल मंत्री जी को बधाई देता हूं । मैं सरकार का ध्यान अपने संसदीय क्षेत्र पंचमहल (गुजरात), के अन्तर्गत स्थित लूनावाड़ा से गोधरा रेल लाइन पर दिलाना चाहता हूं जो वर्तमान समय में बन्द हैं । लूनावाड़ा से गोधरा रेलवे लाइन स्थानीय व्यापारियों एवं आम जनता के लिए चलाई गई थी जो कि कुछ वर्षों से बन्द है एवं उसकी पटरियों को भी उखाड़ दिया गया है । जिससे यहां पर रहने वाले स्थानीक व्यापारियों एवं आम जनता को काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है । मैं सरकार एवं रेलमंत्री जी से अनुरोध करता हूं कि जनहित में लूनावाड़ा से गोधरा लाइन का पुन: निर्माण कराकर रेल सेवा शुरू किया जाये ।
SHRIMATI MALA ROY (KOLKATA DAKSHIN): Hon. Chairman, Sir, as the whole country listened in anticipation, they were highly disappointed with the negligence shown towards the Indian Railways by the hon. Minister.
One should not forget that the railways is the lifeline of India. It is the fourth largest network carrying over eight billion passengers a year; the second in capacity after China. It is going through its most critical phase as the operating ratio has been quite high in the last few years. Today, India spends Rs. 97.3 in order to earn Rs. 100 from the railways. Now, the hon. Minister wishes to lower this ratio by increasing the gross budgetary support. In 2018-19, the gross budgetary support from the Central Government was proposed at Rs. 55,088 crore. This is a 38 per cent increase compared to the Revised Estimates of 2017-18 which was Rs. 41,813 crore. This year, the Central Government has again increased the budgetary support to Rs. 66,105 crore. This means that in the last two years, the Central Government has increased 61 per cent of its budgetary support.
The earnings from the internal sources, mainly, the freight and the passenger traffic, has gone from 31 per cent in 2010 to just a meagre eight per cent in 2019. With declining internal revenue, the major source of earning of the Railways is budgetary support and borrowings. The Indian Railways Finance Corporation has taken a loan of US$ 750 million from Asian Development Bank in order to finance the electrification of railway tracks as proposed by the hon. Minister. The percentage of revenue from borrowings has increased from 20 per cent in 2010 to 55 per cent in 2019 and this will be an extra burden on the common people of India. The financial condition of the Indian Railways is shattered but there is no roadmap for increasing earnings in the Budget. The Budget talks about raising Rs. 50 lakh crore for the railways sector till 2030. The hon. Minister said in the Budget Speech that this money would be raised through the PPP route as finishing the sanctioned projects through budgetary support of Rs. 1.5 lakh crore to Rs. 1.6 lakh crore per year would take decades. The PPP model has not been a success in Railways in the past, as admitted in the first Railway Budget Speech of NDA Government in 2014. The Budget does not elaborate any plan to raise this capital. It is believed that this is a way to bring in capital through loans, which will increase the debt burden on the Indian Railways. Even LIC has refused to give the promised loan of Rs. 1.5 lakh crore that was decided in the MoU a few years ago. The unions believe that this is sowing the seeds of privatisation in future, like Air India.
Six railway stations were identified for redevelopment which was to be executed by the contractors. Even the adjacent lands owned by the Railways were supposed to be given to these private players on 45 years’ lease for building malls and plazas for their commercial use. It is nothing but filling of private coffers at the cost of national assets at the instance of the Government.
At present, 491 railway projects including 189 new lines, 55 gauge conversions and 247 doubling projects are in different stages of execution, planning and sanction. The total length of these projects is 48,860.64 km amounting to Rs. 6,476 lakh crore. During the last three years and in the current year, Railways have taken up surveys of 272 railway projects like new line, gauge conversion and doubling works for a total length of 26,954 kilometre. The expenditure on 491 projects up to March, 2019 has been Rs. 1.43 lakh crore. The projects that get less money and are on slow lane are low on priority like the projects in Bengal.
The bullet train project has missed its internal deadline for land acquisition. The Government first wanted to advance the deadline to August 2022 from 2023.
Now it says that only one small stretch will be opened by August, 2022. Going by the progress on the ground, it looks unlikely.
There is no announcement for replacing and modernising the old tracks and non-functional level crossing barriers which will eventually decrease the number of train accidents and increase speed for passenger convenience.
The Budget of the Government should not aim at privatisation of Railways and to increase earnings through plugging the loopholes in the system. The Government should keep in mind that the Government-owned Railways provide nationwide connectivity for the common people. It appears that the Government is more and more taking the path of PPP by furthering complete privatisation in the garb of modernisation and efficiency.
If the Government does not make the Budget more friendly for common people, we will be reminded of the famous saying, “If a train does not stop at your station, then it is not your train.” Thank you.
सुश्री प्रतिमाभौमिक (त्रिपुरा पश्चिम): सभापति महोदय, मुझे अवसर प्रदान करने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद । साथ ही साथ मैं पार्टी नेतृत्व की भी आभारी हूं जिन्होंने मुझ नवनिर्वाचित लोक सभा में इस अहम मुद्दे पर चर्चा में भाग लेने के लिए विश्वास जताया है ।
महोदय, रेलवे के विकास की बात करें, तो माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में रेलवे मंत्रालय ने हार्टलैंड और पूर्वोत्तर भारत के बीच की दूरी को कम करने के लिए लक्ष्य बनाकर कार्य प्रारंभ किया । 5,158 किलोमीटर अतिरिक्त रेल नेटवर्क का विस्तार कर वर्ष 2020 तक पूर्वोत्तर भारत के सभी राज्यों की राजधानियों को रेल नेटवर्क से जोड़ने का कार्य तेजी से शुरू किया । त्रिपुरा में हमने कभी सपने में भी ट्रेन की कल्पना नहीं की । त्रिपुरा के लोग ट्रेन देखने के लिए तरसते थे कि रेल क्या होती है । वर्ष2016, जून महीने की 21 तारीख को ‘त्रिपुरा सुंदरी एक्सप्रेस’ डायरेक्ट ट्रेन से अगरतला से दिल्ली आने का हमें मौका मिला । वर्ष 2017 में मोदी जी ने हमें ‘राजधानी’ ट्रेन दी । हम सोचते थे कि हमने ट्रेन नहीं देखी है और शायद अगली पीढ़ी भी नहीं देख पाएगी । स्वतंत्रता के 70 साल बाद हमारे राज्य में मोदी जी के कारण रेल आई । हम पूर्वोत्तर की तरफ से मोदी जी का धन्यवाद करते हैं । पूर्वोत्तर के सभी राज्य असम, त्रिपुरा, अरुणाचल और मणिपुर रेल नेटवर्क से जुड़ चुके हैं । मिजोरम और नागालैंड भी जल्द ही रेल नेटवर्क से जुड़ जाएंगे । मुझे यह कहने में गर्व महसूस हो रहा है कि माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की वजह से ही मेरे संसदीय क्षेत्र में अगरतला से सबरूम तक 3451 करोड़ रुपये की लागत से 112 किलोमीटर की बनी रेल लाइन का कार्य पूरा हो गया है । इस पथ पर ट्रेन चलाने का ट्रायल रन पूरा हो चुका है । हमारे पूर्वोत्तर में समय से पहले ट्रेनों का काम हो रहा है ।
महोदय, पूर्वोत्तर भारत में रेल नेटवर्क के विस्तार ने न सिर्फ दिल्ली की दूरी कम की है, बल्कि पड़ोसी देशों के साथ भी हमारी नजदीकियां बढ़ी हैं । सबरूम से बांग्लादेश के चिटगांव की दूरी महज 90 किलोमीटर रह जाएगी । आपको यह बताते हुए खुशी हो रही है कि फेनी नदी पर बन रहे भारत-बांग्लादेश मैत्री पुल का कार्य भी तेजी पर है । इस पुल के शुरू होने से पूर्वोत्तर भारत की अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव होगा । माननीय प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी की दूरगामी सोच से दिल्ली तो ठीक, हमारे पड़ोसी देशों के बीच भी हमारी दूरी कम हुई है । अगरतला-सबरूम रेल लाइन के अलावा मेरे संसदीय क्षेत्र से ही भारत-बांग्लादेश के बीच 968 करोड़ रुपये की लागत से रेल नेटवर्क विस्तार का कार्य तेजी से जारी है । हमारी स्टेट से कोलकाता आने में हमें आसानी होगी और 2500 किलोमीटर हल्दिया से अगरतला तक रोड से जाने में समय लगता है, उस डिस्टेंस तक जाने में कम समय लगेगा ।
महोदय, जो पूर्वात्तर पहले रेल देखने को तरसता था, वहां प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की सफल नीतियों की वजह से कारखाने शुरू हो रहे हैं । राष्ट्रीय ट्रांसपोर्ट असम में एलएसबी कोच की फैक्टरी लगा रहे हैं । इससे पूर्वोत्तर क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे । मुझे रेल मंत्री जी के जरिए कल ही बताया गया है कि समूचे पूर्वोत्तर में वर्ष 2022 तक समूची रेल सेवाएं विद्युत चालित हो जाएंगी । इस दिशा में तेजी से कार्य चल रहा है । यह विषय पूरे पूर्वोत्तर को प्रसन्नता प्रदान करने वाला है । सही मायनों में कहें तो पूर्वोत्तर भारत के विकास के असली हितैषी प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी ही हैं,वरना पूर्वोत्तर से अपने यहां एक प्रधान मंत्री अपर हाउस में आए थे, लेकिन उस कार्यकाल में पूर्वोत्तर भारत में विकास मौन ही रहा था ।
महोदय,किसी भी राज्य या क्षेत्र के विकास के लिए व्यक्ति के दिल में श्रद्धा होनी चाहिए । यदि आप अपने दिल से किसी भी सद्कार्य को करने के लिए सोच लें,तो संसाधनों की कमी उसके आड़े नहीं आती है । यह प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी हम लोगों को करके दिखाया है । उनके ओजस्वी और दूरदर्शी नेतृत्व की वजह से देश के मुख्य भूमि यानी हिन्दी हार्ट लैंड और पूर्वोत्तर भारत के बीच की दूरी कम हुई है । यह दूरी किन्हीं भौगोलिक कारणों की वजह से नहीं, बल्कि विकास कार्यों की दृष्टि से दूर हुई है और हम बहुत नज़दीक आ गये हैं । मोदी जी ने पूर्वोत्तर के विकास के लिए एक नया मॉडल अपनाया है, जिसे ‘हीरा’ मॉडल कहा है । ‘हीरा’ मॉडल को उन्होंने करके दिखाया है ।
पूर्वोत्तर भारत के समग्र विकास की उनकी कल्पना को मैं प्रणाम करती हूँ । पूर्वोत्तर भारत को देश की अष्ट-लक्ष्मी कहने वाले प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का मैं धन्यवाद करना चाहती हूँ कि उनके नेतृत्व में ही आजादी के बाद पूर्वोत्तर भारत के आम बजट से लेकर सरकार के 2019-20 के बजट में पूर्वोत्तर भारत के विकास के लिए 60,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो इतिहास में सर्वाधिक बजट है । इसके लिए मैं पूर्वोत्तर भारत और त्रिपुरा की जनता की ओर से माननीय प्रधान मंत्री जी और वित्त मंत्री जी का अभिनन्दन करती हूँ और विश्वास दिलाती हूँ कि आपके प्रयासों को सार्थक बनाने में हम आपके साथ डटे रहेंगे । …(व्यवधान)
मैं एक डिमांड करना चाहती हूँ । सिल्चर से अगरतला तक एक ओवर नाइट एक्सप्रेस ट्रेन शुरू की जाए, गुवाहाटी से सिलचर तक एक शताब्दी रेल का प्रावधान करने के लिए मैं निवेदन रखती हूँ । लम्डिंग से अगरतला तक रेल देकर सरकार ने सबसे कठिन काम किया है, अब इसमें एक काम इसे डबल लाइन बनाने का करना है । …(व्यवधान)आप गौहाटी के सिवा नॉर्थ-ईस्ट को जानते ही नहीं हैं ।…(व्यवधान) आप लोग साहेबज़ादे हैं । …(व्यवधान)
माननीय सभापति: आप चेयर को अड्रेस कीजिए ।
…(व्यवधान)
सुश्री प्रतिमाभौमिक: मैं आपके माध्यम से मंत्री महोदय से अगरतला में एक रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड की स्थापना करने की माँग करती हूँ । रेलवे की सुरक्षा के लिए आरपीएफ बोर्ड का उद्घाटन करना है । लम्डिंग से चन्द्रपुर और चन्द्रनाथपुर से लंका तक एक लाइन बनाने का मैं प्रस्ताव करती हूँ । असम के माकुम से अरुणाचल प्रदेश के परशुराम कुंड, जो एक पवित्र स्थान है,तक एक रेल परियोजना शुरू करने की माँग करती हूँ ।
श्री राहुल रमेश शेवाले (मुम्बई दक्षिण-मध्य): माननीय सभापति महोदय, आपने मुझे रेलवे के डिमांड फॉर ग्रांट्स पर बोलने का मौका दिया,इसके मैं आपका धन्यवाद करता हूँ ।
मुम्बई लोकल रेल मुम्बई की लाइफ लाइन है । माननीय मंत्री श्री पीयूष जी जो मुम्बई से आते हैं और रेल राज्य मंत्री श्री सुरेश जी का भी मुम्बई से लगाव है । मैं इन दोनों का धन्यवाद करता हूँ कि उन्होंने इस बजट के माध्यम से मुम्बई की लाइफ लाइन को सुधारने का प्रयास किया है । मुम्बई लोकल को सुधारने के लिए स्टेपवाइज़ प्रोग्राम लिये थे, जिनमें एमयूटीपी फ़ेज-टू और एमयूटीपी फ़ेज-थ्री थे । अभी हाल ही में एमयूटीपी फ़ेज- थ्री ए अनाउंस हुआ है,जिसकी वजह से मुम्बई लोकल रेलवे में बहुत-से सुधार हो सकते हैं । एमयूटीपी फ़ेज- थ्री ए में सीबीटीसी सिस्टम,एलिवेटेड कॉरीडोर आदि बहुत-से प्रस्ताव हैं,जिनकी वजह से मुम्बई लोकल के पैसेंजर्स को बहुत राहत मिल सकती है ।
मैं रेल मंत्री जी से विनती करता हूँ कि जैसे एमयूटीपी फ़ेज-थ्री ए में सीएसटी टू पनवेल तक एलिवेटेड कॉरीडोर अनाउंस हुआ है, वैसे ही सीएसटी टू कल्याण तक और चर्च गेट टू विरार तक एलिवेटेड कॉरीडोर करते हैं, तो मुम्बई के पैसेंजर्स को एक फैसिलिटी मिलेगी और मेट्रो के निर्माण में जितना खर्च आ रहा है, उससे आधे खर्च में यह एलिवेटेड कॉरीडोर बन सकता है । इस प्रस्ताव के के बारे में माननय मंत्री जी को विचार करना चाहिए ।
मुम्बई लोकल रेल की जो महिला पैसेंजर्स हैं, उनको बहुत-सी दिक्कतें आती हैं । पिछले दो महीने से जो बारिश हो रही थी, उसके कारण महिलाओं की सुरक्षा और सुविधाओं के बारे में प्रश्न खड़ा हुआ था ।
महिलाओं की डिमांड थी कि मुंबई लोकल में टॉयलेट न होने की वजह से उनको असुविधा हो रही है । मुंबई लोकल पहले ठाणे तक जाती थी, लेकिन अब मुंबई लोकल सीएसटी टू कल्याण तक जा रही है, कल्याण से आगे खोपोली तक जा रही है, सीएसटी टू पनवेल तक जा रही है, चर्चगेट टू डहाणू तक जा रही है । इसका टाइम पीरियड दो-ढाई घंटे का रहता है । दो-ढाई घंटे के सफर में मुंबई लोकल में टॉयलेट न होने की वजह से महिलाओं को असुविधा होती है । अगर मुंबई लोकल में ट्वॉयलेट की व्यवस्था की जाएगी तो महिलाओं को उससे फैसिलिटी मिलेगी ।
सभापति महोदय, महिलाओं की दूसरी मांग थी कि जो प्रैग्नैंट महिलाएं हैं,उनको यदि हैडिकैप्ड कंपार्टमेंट्स में सफर के लिए अलाऊ करेंगे तो उनको भी सुविधा मिलेगी । अगर आप मुंबई लोकल की व्यवस्था देखें तो महिलाओं को ट्रेन में घुसने को भी नहीं मिलता है । इसलिए महिला पैसेंजर्स की उनकी सुविधा और सुरक्षा की जो-जो डिमांड्स हैं, उनके ऊपर माननीय मंत्री जी को ध्यान देना चाहिए । मैं आपके माध्यम से मंत्री जी से दादर रेलवे स्टेशन के बारे में भी डिमांड करना चाहता हूं । वहां सैंट्रल रेलवे और वैस्टर्न रेलवे की बहुत सारी जगह है । हमने उस जगह के रीडेवलपमेंट का प्रस्ताव रेलवे बोर्ड के पास दिया हुआ है । उस जगह का कमर्शियल यूटिलाइज़ेशन होना चाहिए ।
महोदय,मुंबई में हॉकर्स और पार्किंग की भी समस्या है । रेलवे स्टेशन को अगर हम वर्टिकल डेवलप करेंगे तो उसमें हॉकर्स एकोमोडेट होंगे, इससे पार्किंग की भी व्यवस्था होगी । रेलवे बोर्ड ने भी इस प्रस्ताव के बारे में विचार किया है । वहां के लिए पांच एफएसआई अनाउंस किए गए हैं । रेलवे बोर्ड द्वारा एक प्लानिंग अथॉरिटी क्रिएट कर के रेलवे स्टेशन को डेवलप करने का प्रस्ताव विचाराधीन है । मैं माननीय मंत्री जी को बताना चाहता हूं कि साउथ कोरिया गवर्नमेंट यह प्रोजैक्ट करने के लिए तैयार है । अगर हम “जी टू जी’’यह प्रोजैक्ट करेंगे तो हम दादर रेलवे स्टेशन को वर्टिकल डेवलप कर पाएंगे । ऐसा करने से हम हॉकर्स,पार्किंग और कमर्शियल के लिए व्यवस्था कर पाएंगे,जिससे रेवेन्यु जेनरेट हो सकता है । मानखुर्द रेलवे स्टेशन,जो साउथ-सैंट्रल कांस्टिट्यूएंसी में एक बहुत ही महत्वपूर्ण स्टेशन है, मुंबई और नवी मुंबई को जोड़ता है । इस स्टेशन को भी टर्मिनस बनाना चाहिए,क्योंकि यहां पर भी रेलवे की बहुत सारी जगह है । धारावी विश्व का सबसे बड़ा स्लम है । साइन स्टेशन और माटुंगा स्टेशन को अगर धारावी स्टेशन से जोड़ेंगे तो धारावी के लोगों को नए रेलवे स्टेशन के रूप में एक फैसिलिटी मिलेगी । रेलवे विभाग ने वैस्टर्न रेलवे के लिए एसी ट्रेन्स स्टार्ट की हैं । अगर हम सैंट्रल रेलवे लाइन और हार्बर रेलवे लाइन पर भी एसी ट्रेन्स स्टार्ट करेंगे वहां के पैसेंजर्स को भी पूरी फैसिलिटी मिलेगी ।
सभापति महोदय, एमयूटीपी-3ए के अंतर्गत जितने भी प्रोजेक्ट्स हैं, वे टाइम पीरियड में पूरे होने चाहिए । आप एमयूटीपी-2और एमयूटीपी-3को देखिए । मैं आपको इसमें एक एग्ज़ाम्पल बताता हूं । दिवा टू ठाणे का 12 किलोमीटर्स का जो प्रोजेक्ट था,उसे पूरे होने में 11 साल लग गए । 11 सालों की वजह से यह प्रोजेक्ट भी बहुत डिले हुआ और इसकी कॉस्ट भी बढ़ी, लेकिन फिर भी लोगों को फैसिलिटी नहीं मिली । मुंबई लोकल की जो समस्या है, उस समस्या को सुलझाने के लिए रेलवे मंत्रालय के माध्यम से बहुत से प्रयास किए जाते हैं ।
मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी को बताना चाहता हूं कि मध्य रेलवे का मुख्यालय मुंबई में है । वहां महाप्रबंधक,यानी जनरल मैनेजर की पोस्ट तीन महीने से रिक्त है, वहां जिम्मेदार व्यक्ति न होने की वजह से पिछले तीन महीनों से मुंबई लोकल की जो हालत खराब हुई है, उसका टैक्निकल कारण भी हो सकता है, लेकिन एक कारण यह भी है कि वहां जीएम की पोस्ट ही खाली है । वहां जीएम न होने की वजह से बहुत दिक्कत होती है । बारिश में मुंबई लोकल का हाल बहुत ही खराब हो जाता है । इसलिए एक वाइट-पेपर लोगों के सामने आना चाहिए कि इसके क्या टैक्निकल रीज़न्स हैं, इन सबकी जानकारी लोगों को मिलनी चाहिए ।
सभापति महोदय, सीनियर सिटिज़न्स की भी डिमांड है कि उनके लिए एक अलग रेल डिब्बा होना चाहिए । अगर आप मुंबई लोकल की स्थिति देखेंगे तो सामान्य आदमी को भी उसके अंदर जाने में मुश्किल होती है और सीनियर सिटिज़न्स को भी दिक्कत होती है । इसलिए उनके लिए एक अलग रेल डिब्बे की फैसिलिटी दी जाए । मेरा आखिरी प्वाइंट है कि पिछले दस सालों से रेल यात्रियों की मांग है कि रेलवे के काम को और असरदार करने के लिए एक ही मुंबई ज़ोन होना चाहिए । इससे मुंबई में रेलवे का विकास सुचारू रूप से होगा । इस वक्त सैंट्रल रेलवे और वैस्टर्न रेलवे दो ज़ोन्स हैं,इन दोनों ज़ोन्स के जनरल मैनेजर और डीआरएम हैं । इस वजह से वहां एक ही नियम लागू करना मुश्किल होता है ।
उदाहरण के तौर पर वसई-दिवा-पनवेल लाइन की कई समस्याएं एक ही ज़ोन न होने की वजह से जल्द हल नहीं हो पातीं । सैंट्रल-वैस्टर्न डिवीज़न की तरह हार्बर लाइन की भी अलग डिवीजन बनाई जाए । इस डिवीजन में हार्बर लाइन भी अलग डिवीज़न बनाई जाए । इस डिवीज़न में हार्बर लाइन,ट्रांस हार्बर लाइन और बेलापूर-उलवा हार्बर लाइन को शामिल किया जाए । बारिश के वक्त होने वाली फ्लडिंग को रोकने के लिए रेल ट्रैक की हाइट बढ़ाई गई थी । इस वजह से फिर एक बार प्लेटफॉर्म और रेल के फुटबोर्ड के बीच का डिस्टेंस बढ़ा है । इस कारण सभी प्लेटफॉर्म की उंचाई की एक स्टडी की जानी ज़रूरी है ।
पिछले कुछ सालों से रेलगाड़ियां टाइमटेबल के अनुसार चल रही हैं, पर इसे और भी सुचारू रूप से चलाने के लिए सभी जगह के रेल क्रॉसिंग की जगह फाटक लगाने ज़रूरी हैं । रेलवे स्टेशंस पर फ्री वाई-फाई दिया जा रहा है, लेकिन हम रेलवे स्टेशंस पर टॉयलेट यूटिलाइज़ करने के लिए पांच रुपये चार्ज करते हैं । अत:जिस प्रकार रेलवे विभाग फ्री वाई-फाई की सुविधा देता है, वैसे ही फ्री टॉयलेट की सुविधा भी सभी पैसेंजर्स को देनी चाहिए ।
रेल मंत्रालयमें राज्य मंत्री (श्री सुरेश सी. अंगड़ी): सर,हम सभी स्टेशंस के लिए फ्री वाई-फाई कर रहे हैं ।
श्री राहुल रमेश शेवाले: सर, फ्री वाई-फाई तो है, लेकिन फ्री टॉयलेट की व्यवस्था हो । महोदय,मेरी एक मांग है जो माननीय भारी उद्योग मंत्री अरविंद सावंत जी पिछले 5 साल से उसको फॉलो-अप कर रहे थे । एशिया में पहली रेल मुंबई से ठाणे, जिस मार्ग से चली और यह रेल शुरू करने में जिनका सबसे बड़ा योगदान था,जो विजनरी थे,जिन्होंने मुम्बई शहर के विकास के लिए नींव डाली,ऐसे आदरणीय नाना शंकरशेठ जी का नाम मुंबई सेंट्रल को देना चाहिए । वंदनीय शिवसेना प्रमुख बाला साहेब ठाकरे जी का भी सपना था और उनकी वजह से रेलवे की शुरूआत हमारे पूरे देश में हुई है । उनके कार्य का सम्मान मुम्बई सेंट्रल को नाम देकर करना चाहिए । मैं यह रेलवे मंत्रालय से कहना चाहता हूं । धन्यवाद ।
SHRI M. SELVARAJ (NAGAPATTINAM): Mr. Chairman, I am thankful to you for giving me an opportunity to participate in the discussion on Demands for Grants, under the control of the Ministry of Railways, for 2019-20. I do not want to speak on the Budget document. I would restrict myself to the demands of my constituency. I would demand more grants to clear many long pending projects of my constituency.
A new line from Velankanni to Thiruthuraipoondi was proposed in 2012. This 33 km. long project is still pending. It should be completed at the earliest.
The gauge conversion of Thiruthuraipoondi to Agastiampalli line should be speeded up. The Ministry should allocate more funds to complete this project at the earliest. Underground passages are being constructed in this line. Since the line is passing through coastal area, heavy rain lashes frequently. So, the rainwater fills the underground passages and this causes a lot of hardship to the local people. The residents of this area are more agitated. I would suggest that unmanned level crossings are the better choice for this.
Tiruvarur-Karaikudi line has 72 crossings. Since there is no gatekeeper, the trains take nearly seven hours to cover 140 km. distance. I would request the Government to appoint 72 gatekeepers immediately to avoid delay in travel time.
Mannargudi-Tirupati Express is running twice a week. It should run on daily basis and it should also stop at Peralam station.
Ernakulam Express and Mannai Express should stop at Koradacheri. This is my birth place and my residence is also there. No train stops there. This station is in main panchayat town. Earlier, all trains used to stop at this station.
Though there are two passenger services between Thiruvarur and Tiruchrapalli, it is not sufficient to clear the rush of passengers. More passenger train services should be introduced from Thiruvarur to Tiruchirapalli to clear the rush of passengers.
Muthupettai is a Grade-I station. No train stops at this station. A computer booking centre, which used to be there earlier, was also withdrawn from this station. All express trains should stop at this station and a computer booking centre should also be opened there.
After gauge conversion, services of the Boat Mail, which was earlier called Kamban Express, have been stopped. I would request the Government to start its service immediately.
As there are a lot of railway lines around Thiruvarur, I would request the Government to establish a primary maintenance centre for all trains which come up to Thiruvarur. Thiruvarur is a main junction. An ATM centre should also be opened at this junction.
There should be a computerised booking centre in Tiruthuraipoondi as it is the taluk headquarters and it is surrounded by many populated towns.
Needamangalam is a major junction as many trains pass through this junction. Most of the times, the crossing is closed. The crossing is on the National Highway 69. It creates a lot problems for road users. Sometimes, the buses and trucks have to wait for hours at the crossing. So, an overbridge is urgently needed to avoid traffic congestion.
The Vasco da Gama Express on Velankanni-Goa line is twice a week. Velankanni is a very important place. It is a Christian tourist place. Lokmanya Bal Gangadhar Tilak Express on Velankanni-Mumbai line is once a week. Both these trains should be started on daily basis. Here I would like to mention once again that Velankanni is a holy place for the Christians. A lot of tourists visit this place.
I would request the Minister to kindly consider my above demands.
श्री देवेन्द्रसिंह भोले (अकबरपुर): माननीय सभापति महोदय, सर्वप्रथम मैं आपको धन्यवाद देना चाहूंगा कि आम बजट के साथ सम्मिलित भारतीय रेल 2019-20 के बहुआयामी बजट पर चर्चा करने हेतु आपने मुझे अवसर दिया । आपके माध्यम से मैं श्री पीयूष गोयल जी को भी इस बात के लिए बधाई देना चाहूंगा कि माननीय प्रधान मंत्री जी की प्रेरणा से उनके नेतृत्व में भारतीय रेल ने बदलाव की जो यात्रा प्रारम्भ की वह सही दिशा में उचित गति के साथ मंजिल की ओर बढ़ रही है ।
मान्यवर, जहां पिछली सरकारों में वर्ष2014 के पहले रेल लाइन बिछाने का काम 4.3 किमी प्रतिदिन था, वहीं वर्ष2014 से 2019 तक 7 किमी प्रतिदिन रेल लाइन बिछाने का काम हमारी सरकार ने किया । आदरणीय पीयूष गोयल जी ने माननीय प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में वर्ष 2019-20 में 15 किलोमीटर प्रतिदिन रेल लाइन बिछाने के लक्ष्य के साथ देश को आगे ले जाने हेतु यह रेल बजट रखा है, इसके लिए मैं उन्हें बधाई देता हूं । वर्ष2019-20 में 12 करोड़ श्रम दिवस और वर्ष 2020 से 2022 तक 15 करोड़ श्रम दिवस का लक्ष्य रखा गया है, इसके लिए भी मैं बधाई देना चाहता हूं ।
मान्यवर, अपने क्षेत्र की कुछ प्रमुख मांगों के लिए आपके माध्यम से माननीय रेल मंत्री जी से आग्रह करना चाहता हूं । हमारे लोक सभा क्षेत्र में पनकी रेलवे स्टेशन है, जिसको हमारी सरकार ने माननीय श्री मनोज सिन्हा जी और पीयूष गोयल जी के नेतृत्व में पनकी धाम का स्थान दिया है । कानपुर की बढ़ती हुई आबादी का रेल पर अत्यधिक भार होने के कारण पनकी स्टेशन पर बहुत सारी रेलगाड़ियों का ठहराव होता है, लेकिन वहां पुरानी व्यवस्था होने के कारण अभी तक अंडर पास नहीं है, ओवर ब्रिज नहीं है,लिफ्ट नहीं है,चौड़ीकरण नहीं है,स्वचालित सीढ़ियां नहीं हैं । इस कारण बुजुर्गों और आम आदमी को कठिनाई का सामना करना पड़ता है । दूसरा,पूरे देश में रेलवे मानव रहित फाटक खत्म करना चाहती है । उसके कारण भी हमारे क्षेत्र में तमाम जगह जाम लगता है । यात्रियों के बढ़ते दबाव और आवागमन के कारण सरसौल, भाऊपुर, रूरा, झींझक और कंचौसी में ओवर ब्रिज बनाने की महती आवश्यकता है । बुन्देलखण्ड से लेकर लखनऊ तक का ट्रैफिक, आगरा से लेकर इलाहाबाद तक का ट्रैफिक हमारे यहां से गुजरता है । तीसरा है अनवरगंज-मंधना-बिठूर लाइन । वर्ष 2017-18 में कानपुर की लगभग 60 लाख की आबादी थी । कानपुर जी.टी.रोड के दो हिस्सों में बंटा हुआ है । उस आबादी के कारण इतना जाम रहता है कि हमारी सरकार ने वर्ष2017-18 के बजट में1789 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था और उसके संबंध में सर्वे भी हुआ था, लेकिन अभी तक वह काम नहीं हुआ है । मेरा अनुरोध है कि उसको टेक अप कर लिया जाए । मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से आग्रह करना चाहता हूं कि हमारे यहां बिठूर एक ऐतिहासिक स्थल है । बिठूर से लेकर मंधना और पनकी तक अगर नई रेलवे लाइन बिछा दी जाए, जो कि उत्तराखण्ड को भी जोड़ने में सहायक होगी, तो कम से कम कानपुर का ट्रैफिक काफी कम हो जाएगा । अगर आप यह भी नहीं कर सकते हैं तो जरीब चौकी, गुमटी, रावतपुर क्रासिंग एवं कल्याणपुर क्रासिंग पर रेलवे ओवर ब्रिज बनने से वहां जाम की समस्या से निजात मिलेगी । हमारे यहां बिठूर आस्था का केन्द्र है । वर्ष 1857 में जो गदर हुआ था, उसकी पृष्ठभूमि में हमारा क्षेत्र ब्रह्म नगर और बिठूर है । बिठूर में बहुत पहले अंग्रेजों के समय रेलवे लाइन जाती थी,जो नष्ट हो गई थी । हमारी सरकार ने वहां तक रेलवे की पूरी लाइन बना दी है ।
हमारी सरकार ने पूरी लाइन बना दी है, केवल इलेक्ट्रिफिकेशन का काम बाकी है,वह जल्दी हो जाए और छोटे-मोटे काम हो जाएंगे तो विठूर और कानपुर की समस्या दूर हो जाएगी । तीसरा,इटावा-ग्वालियर रेल मार्ग पर उदी से ओरैय्या, सिकंदरा, मूसा नगर, घाटमपुर, जहानाबाद और विन्दकी के प्रस्ताव पर भी रेल विभाग की तरफ से जल्दी काम हो जाएगा तो लोड कम होगा । चूंकि कानपुर में आबादी का घनत्व बहुत अधिक है,पूरे देश में कहीं भी अगर राजनीतिक परिवर्तन होता है तो उत्तर प्रदेश से होता है और उत्तर प्रदेश में परिवर्तन की असली जड़ कानपुर है । वर्ष 2014 में हमारी सरकार बनी थी, मैं माननीय प्रधान मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहूंगा कि 19 अक्टूबर, 2013को वहां जाकर उन्होंने सभा की । उसके बाद पूरे देश में एक ऐसा परचम फहराया कि हमारी वर्ष 2014 में सरकार बनी । 8 मार्च को प्रधान मंत्री जी पुन: कानपुर गए थे, जिसके कारण पूरे देश में कानपुर का ऐतिहासिक महत्व है । इन कारणों को देखा जाएगा तो वहां की समस्या दूर होगी ।
मैं आपसे एक और अनुरोध करना चाहता हूं कि हमारे यहां घाटमपुर बुंदेलखंड को भी जोड़ता है । वहां शम्भुआ रेलवे स्टेशन है । उस रेलवे स्टेशन को वहां के अधिकारियों की उदासीनता के कारण बंद कर दिया गया । मेरा रेल मंत्री जी से अनुरोध है कि उस शम्भुआ स्टेशन को चलाया जाए और घाटमपुर स्टेशन को आदर्श स्टेशन घोषित करते हुए कठारा, पतारा,डोहरु को विकसित किया जाए । भीमसेन स्टेशन पर औद्योगिक ईकाइयां हैं,तमाम इंस्टीट्यूट हैं, मंडी और व्यापारिक केन्द्र हैं । इस स्टेशन पर कोई ओवर ब्रिज नहीं है, जिसके कारण कठिनाई होती है । कानपुर देहात में खाद और रासायनिक इत्यादि सामान पूरे देश से आता है, उसका कोई रेक पॉइंट नहीं है, इसलिए आपके माध्यम से सरकार से अनुरोध करना चाहता हूं कि वहां रेक पॉइंट बनाए जाने की आवश्यकता है । आपने मुझे बोलने का समय दिया, बहुत-बहुत धन्यवाद ।
*श्रीमती केशरी देवी पटेल (फूलपुर): सुबेदारगंज रेलवे स्टेशन, उत्तर मध्य रेलवे,प्रयागराज (इलाहाबाद) का विस्तार किए जाने की आवश्यकता है । इस स्टेशन का विकास किया जाए, यात्री सुविधाएं बढ़ाई जाएं और ट्रेनों के ठहराव करवाने हेतु आवश्यक दिशानिर्देश दिया जाए ।
नई दिल्ली इलाहाबाद दूरन्तो एक्सप्रेस (12275) जो सप्ताह में तीन दिन चलती थी, सितम्बर, 2019 से बंद होने जा रही है । दूरन्तो जैसी महत्वपूर्ण ट्रेन को बंद करने के फैसले से क्षेत्रवासियों व आसपास के कई जिलों के यात्रियों को बड़ी असुविधा होगी,अब इसकी जगह पर हमसफपर एक्सप्रेस (22437 / 22438) ट्रेन पूरे सप्ताह चलाई जाएगी । हमसफर एक्सप्रेस में फ्लैक्सी फेयर है, जिसमें यात्रियों को सामान्य ट्रेन से ज्यादा किराया देना पड़ेगा । हमसफर एक्सप्रेस में प्रथम और द्वितीय एसी कोच नहीं है,जिससे प्रयागराज एक्सप्रेस पर दबाव बढ़ जाएगा । हमसफर एक्सप्रेस इलाहाबाद जंक्शन से न चलकर सूबेदारगंज रेलवे स्टेशन से चलायी जाएगी जो इलाहाबाद जंक्शन से 5 कि.मी. से ज्यादा दूरी पर है एवं वहां पहुंचने का रास्ता अभी सुगम नहीं है । हमसफर एक्सप्रेस नई दिल्ली जंक्शन न आकर आनंद विहार रेलवे स्टेशन तक ही आयेगी ।
प्रयागराज में प्रदेश एवं केन्द्र सरकार के दर्जनों कार्यालय एवं मुख्यालय है । दूरान्तो एक्सप्रेस को बंद हो जाने से भारी असुविधा होगी ।
अत: दूरान्तो एक्सप्रेस 12275 / 12276 को बंद न करके सप्ताह में सातों दिन चलाया जाए ।
आदर सहित ।
श्री श्याम सिंहयादव (जौनपुर):सभापति जी, मैं आपका बहुत शुक्रगुजार हूं कि आपने मुझे रेल बजट पर बोलने का मौका दिया । वैसे मेरे दिल में एक दर्द भी है कि मैंने बहुत सप्लीमेंटरी लगाए, बहुत रिक्वैस्ट किए,लेकिन फर्स्ट टाइम एमपी होते हुए भी मुझे कभी बोलने का मौका नहीं मिला । मैं समझता हूं कि मेरे जैसे कई लोग इस सदन में होंगे । लेकिन फिर भी मुझे खुशी है कि आपने मुझे पहली बार बोलने का मौका दिया । मैंने एक बार बोला था,जब माननीय अध्यक्ष जी का चुनाव हुआ था । उस समय मैंने उनको मुबारकबाद दी थी और उनसे आशीर्वाद भी लिया था । पता नहीं,उस स्पीच को मैडेन स्पीच में गिनेंगे या आज की स्पीच को । बहरहाल,आपके माध्यम से मैं अपने दर्द को अध्यक्ष जी तक पहुंचाना चाहता हूं ।
माननीय सभापति: आप अपनी बात रखिए ।
श्री श्याम सिंहयादव: महोदय, मैं अपनी बात की शुरुआत इस तरह से करता हूं कि रेलवे से मेरा बहुत पुराना नाता है । ऐसा नाता है कि शायद इस सदन के किसी सदस्य का वैसा नाता नहीं होगा । जब मैंने वर्ष 1971 में इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में बीएससी पार्ट-1में एडमिशन लिया था तो इलाहाबाद से जौनपुर एजे नाम की एक ट्रेन चलती थी । उससे मैं अपने घर के रेलवे स्टेशन मढ़ियाहों से प्रयाग जाता था । ढाई-ढाई रुपये दोनों तरफ का किराया होता था । सन् 1971 में पांच रुपये बहुत होते थे । ढेर सारे लोग टिकट नहीं लेते थे । मैं पांच रुपये रोज खर्च करता था । जब स्टेशन पर ट्रेन पकड़ने के लिए आता था तो 50 पैसे में वे डोसा खाते थे और मैं भूखा ही रहता था, क्योंकि पांच रुपये मैंने ट्रेन के किराये पर खर्च कर दिए थे । उसके बाद धीरे-धीरे धड़का खुला । आधे रास्ते का टिकट लेने लगा,फिर चौथाई रास्ते का टिकट लेने लगा और फिर एक समय ऐसा आया कि मैं बिना टिकट सफर करने लगा । उससे भी ज्यादा यह हुआ कि मैं अपनी मोटरसाइकिल होस्टल पर रखता था और जब 10-15 दिन की छुट्टी हो जाती थी तो गांव जाने के लिए मैं उस पर अपनी मोटरसाइकिल भी लाद लेता था ।
माननीय सभापति : आप अपना विषय रखिए ।
श्री श्याम सिंहयादव: आज मैं इस सभा के माध्यम से ट्रेन माता से बहुत-बहुत माफी मांगते हुए अपनी बात की शुरुआत करता हूं । खुदा-न-ख्वास्ता अगर मैं कभी भारत का रेल मंत्री हो गया तो इस रेल माता की बढ़ोतरी और बेहतरी के लिए बहुत अच्छा-अच्छा काम करके उनका पूरा कर्ज उतार दूंगा ।
मैं अपने पुराने गुरुजन ज्योतिबा फुले, नारायण गुरु,छत्रपति साहूजी महाराज सबको बहुत नमन करते हुए,मान्यवर कांशीराम जी और बाबासाहेब अंबेडकर जी को श्रद्धाजंली अर्पित करते हुए, हमारी बहन मायावती जी का बहुत-बहुत शुक्रिया करते हुए, मैं कम शब्दों में अपनी बात को रखने की कोशिश करता हूं । मुझे केवल दो चीजें माननीय रेल मंत्री जी से कहनी हैं कि रेल की सुरक्षा को बढ़ाया जाए । बहुत-से माननीय सदस्यों की डिमांड है कि यहां से वहां पर रेल चलाई जाए । अगर हो सके,तो एक-दो साल में कोई नई रेल न चलाकर, सुरक्षा पर ध्यान दिया जाए, ताकि दुर्घटनाएं कम हों, एक बात मुझे यह कहनी है ।
जैसे अभी एक माननीय सदस्य जी कह रहे थे कि रेल एक्सीडेंट में 62 प्रतिशत कमी आई है । मैं कहना चाहता हूं कि 62 प्रतिशत, 92 प्रतिशत, 102 प्रतिशत, इसको रेलवे डिपार्टमेंट एक्सीडेंटप्रूफ बना दे, ताकि एक्सीडेंट न हों । हम सभी मामलों,रेल के मामलों और अन्य ढेर सारे मामलों में विदेशी नकल कर रहे हैं । हम सिग्नल के मामले में बाहर से टेक्नोलॉजी लाते हैं । हम कंपार्टमेंट,इंजन, पटरियों और अन्य कई मामलों में बाहर से टेक्नोलॉजी ले रहे हैं । हमको बाहर से यह भी एक चीज सीखनी चाहिए कि रेलवे में समय का पालन हो । हम कभी विदेश जाते हैं, वहां डिस्पले होता है कि 1243 पर ट्रेन आएगी, तो ट्रेन 1243 के पहले नहीं दिखती है, यह लगता है कि ट्रेन नहीं आएगी, लेकिन जैसे ही 1243 टाइम आता है,वैसे ही ट्रेन प्लेटफार्म पर आ जाती है । मैं माननीय रेल मंत्री जी से गुजारिश करूंगा कि वह रेलवे में समयबद्धता लाने की कोशिश करें ।
हमने लैंडलॉक्ड सुना है, हमने वाटरलॉक्ड सुना है, लेकिन जो जौनपुर जनपद है, इस जनपद के शहर के लोगों को हमारे रेलवे डिपार्टमेंट ने चारों तरफ से कैद कर रखा है । अगर जौनपुर से बनारस जाएं,जौनपुर से गाजीपुर जाएं, जौनपुर से आजमगढ़ जाएं,जौनपुर से इलाहाबाद जाएं, जौनपुर से लखनऊ जाएं,सभी रोडों पर,कोई भी ऐसा रोड बाहर निकलने के लिए नहीं है, जिस पर कोई फ्लाईओवर बना हो । आधे-आधे घंटे तक बड़ी-बड़ी कतारें लग जाती हैं और बहुत बड़ा ट्रैफिक जाम होता है ।…(व्यवधान)
माननीय सभापति: अब समाप्त कीजिए ।
श्री श्याम सिंहयादव: माननीय सभापति जी, मैं कन्क्लूड करता हूं । सभी ने 10-10मिनट बोला है,लेकिन मुझे तो अभी पांच मिनट भी नहीं हुए हैं ।…(व्यवधान)
माननीय सभापति : सबको पांच ही मिनट दे रहे हैं ।
…(व्यवधान)
माननीय सभापति : आपकी पार्टी के अभी और भी मेंबर हैं ।
…(व्यवधान)
माननीय सभापति : आप अपनी बात रखिए और समाप्त कीजिए ।
…(व्यवधान)
श्री श्याम सिंहयादव: माननीय सभापति जी, मैं एक-दो मिनट में अपनी बात समाप्त करता हूं । आज कई राजधानी ट्रेनें देश में चल रही हैं । मेरी यह मांग है कि एक राजधानी ट्रेन, अगर नई न भी चला सकें,तो जो मुंबई जा रही है,अगरतला जा रही है या कहीं और जा रही है, उनको भी जौनपुर शहर से होते हुए एक दो दिन के लिए चला दिया जाए । पटना-मथुरा-कोटा एक्सप्रेस, जौनपुर शहर में नहीं रुकती है, उसको जौनपुर सिटी में भी रोका जाए । हमारे यहां पर जितने रेलवे क्रासिंग हैं, उन पर फ्लाईओवर बनाया जाए । मरिहाऊ रोड पर एक फ्लाईओवर रेलवे क्रासिंग पर पिछले छः सालों से बन रहा है, उसको भी बनायाजाए ।…(व्यवधान)
माननीय सभापति : अब समाप्त कीजिए । मैं दूसरे नाम की घोषणा करता हूं । आप अभी समाप्त कीजिए ।
…(व्यवधान)
श्री श्याम सिंहयादव: सभापति जी, जौनपुर रेलवे स्टेशन की कुछ और मांगे थीं, इसलिए केवल एक मिनट और दे दीजिए । जौनपुर रेलवे स्टेशन पर प्लेटफार्म नंबर 5 की हालत बहुत खराब है, उस पर शेड नहीं है,लाइट नहीं है ।…(व्यवधान)स्पेस की कमी है । इन्हीं शब्दों के साथ मैं जय भारत, जय अंबेडकर, जय भीम और जय समाजवाद के साथ अपनी बात को समाप्त करता हूं ।
श्री रविन्दरकुशवाहा (सलेमपुर) : माननीय सभापति जी, आपने मुझे रेल मंत्रालय की अनुदानों की मांगों पर बोलने का मौका दिया है,इसके लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद । वर्ष 2014 के पहले जो रेल की हालत थी और हम लोग जब यात्रा करते थे,देश के तमाम लोग रेलों में चलते थे, उस समय रेलों में जिस तरीके से गंदगी का अंबार रहता था,वर्ष 2014 में हमारी सरकार बनने के बाद माननीय प्रधान मंत्री जी ने जब स्वच्छता का अभियान पूरे देश के अंदर चलाया, तो मैं समझता हूं कि उसका सबसे अधिक लाभ रेलवे को मिला है । आज चाहे रेलगाड़ियां हों, उसके डिब्बे हों, प्लेटफॉर्म्स हों, रेलवे स्टेशन्स हों, हर जगह गंदगी से छुटकारा मिला है । हमारी रेलें साफ-सुथरी हुई हैं । उसकी वजह से हमारे जितने यात्री आज यात्रा करते हैं,उनको आनंद की अनुभूति होती है ।
सभापति महोदय, हम लोग जब देखते थे कि सन् 2014 के पहले जो परिस्थितियां थीं और सन् 2014 से 2019 तक के बीच में रेल के अंदर काफी बड़ा बदलाव आया है । जो छोटी लाइनें थीं, मीटर गेज की लाइनें थीं,उनको बड़ी लाइन में, जो हमारे दोहरीकरण, विद्युतीकरण का काम था, तमाम रेल खण्ड छूटे हुए थे, उस पर बहुत तेज़ी से काम किया गया है । जहां पर आरओबी की जरूरत थी, जहां पर अण्डरपास की जरूरत थी, वे वहीं पर बड़ी तेजी से बनाए जा रहे हैं । हम आपको बताना चाहते हैंकि हमारे संसदीय क्षेत्र के अंदर,जो कि सलेमपुर है, जो उत्तर प्रदेश और बिहार के बॉर्डर पर पड़ता है, हमारे यहां भटनी से लेकर यह वाराणसी रेल खण्ड का हिस्सा पड़ता है, जो विद्युतीकरण और दोहरीकरण से अधूरा था । सन् 2014 में चुनाव जीतने के बाद मैं उस समय के अपने रेल मंत्री जी से मिला, उनको पत्र भी लिखा । हमें खुशी है, इसके लिए हम प्रधान मंत्री और रेल मंत्री जी को बधाई भी देना चाहते हैं कि हमारा औंढिहार से लेकर भटनी तक दोहरीकरण और विद्युतीकरण का काम बहुत तेज़ी से चल रहा है । इसके लिए मैं अपने रेल मंत्री और अपनी सरकार का अभिनंदन और वंदन करता हॅूं ।
महोदय,मैं एक बात कहना चाहता हूँ कि हम लगभग 12-14सांसद ऐसे हैं,जो कि कुछ बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश से आते हैं । हम लोग जब सदन की कार्यवाही में भाग लेने के लिए आते हैं तो हमारे लिए एकमात्र ट्रेन वैशाली ट्रेन है । उस ट्रेन को जब हम लोग पकड़ते हैं तो यहां आते-आते कभी नौ, तो कभी दस बज जाते हैं । शुक्रवार को यहां से जब अपने संसदीय क्षेत्र में जाते हैं तो वहां शनिवार को पहुंचने में आधा दिन चला जाता है । यह रिज़र्वेशन की बात नहीं है । इसलिए हम आपसे कहना चाहते हैं कि यह वैशाली ट्रेन, जिससे लगभग 12 से 14 सांसद लगातार यात्रा करते हैं,सत्र में आते-जाते हैं, उसको नियमित तरीके से चलाया जाए । यही हमारी मांग है । प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में हमारा देश रेल के मामले में निश्चित रूप से आगे जा रहा है । इन्हीं शब्दों के साथ आपका बहुत-बहुत धन्यवाद ।
ADV. A. M. ARIFF (ALAPPUZHA): Thank you, hon. Chairperson Sir, for giving me this opportunity.
I would like to express my views on the Railway Budget for the year 2019-20, presented by Shrimati Nirmala Sitharamanji. This Budget 2019-20 is an obvious evidence of regional discrimination by the Central Government to the State of Kerala. I am sorry to say that Kerala has been a vehemently neglected region for railways.
The long pending demand of Railway Zone for Kerala is neglected in this Budget also. The State of Kerala occupies a significant position on the Indian Railway Map with 1050 route kilometres and 1588 kilometres of total track. The Thiruvananthapuram and Palakkad divisions of the Southern Railway Zone make up the divisions of the State for the railways. The railway development in Kerala is not as desired and is reflected in terms of railway development and fund allocation. Currently, the State is at the mercy of the Southern Railway Authorities in Chennai to receive a share of funds and diversion of money to other projects outside the State. The only way to speed up railway development in Kerala is to have a separate zone. The creation of such a railway zone will ensure that the funds allocated in the Budget are directly received by the State to be utilised for the developmental work.
I would also like to say some points regarding my Constituency. The doubling of Ernakulam-Kayamkulam coastal line is a major issue. The line was opened for railway traffic on 16th October, 1989. The required land could not be acquired for doubling because of lack of proper fund allocation. Till now, the Railways has not given the compensation amount for many those who have given the land for track doubling in Kerala. As an elected representative from that area, I will take personal initiative for acquisition of the required land for the completion of Ernakulam-Kayamkulam line doubling. But the railway authorities should also take necessary steps in this regard.
18.00 hrs The other main issue is that after the departure of Intercity Express from Alappuzha to Trivandrum at 6:25 AM, there is no train till 4 PM to that side. I request you to extend some trains to that end at Ernakulam station. It can be done by extension of some trains. The extension of Ernakulam Intercity Express Train (16306) and Mangala Express Train (12618) from Delhi to Ernakulam and Trivandrum will be a relief to people of Alappuzha.
The development of Adarsh stations at Alappuzha, Cherthala, Mararikulam has not been made. No funds have been received for these stations for several years. The demand for Railway overbridge at Thuravoor, Cherthala, Chittumoola, Malikamakku, Vavvakavu Road under Thiruvananthapuram division are neglected because of non-completion of ROBs at Kuthirapanthi and Malikamakku. The Alappuzha bypass road work has been delayed.
HON. CHAIRPERSON: Please wait a minute. Hon. Members, I have a long list of speakers to speak on the Demands for Grants of Railways. If the House agrees, the time for the discussion may be extended by another four hours.
SEVERAL HON. MEMBERS: Yes Sir.
HON. CHAIRPERSON: Thank you. We extend the time.
ADV. A.M. ARIFF : This bypass road project is a big budget project. The State Government had deposited Rs. 7.13 crore to the Railways for the construction of Kuthirapanthi and Malimukku ROBs. For the construction of these ROBs, rail traffic needs to be controlled and electric lines need to be shifted.
A proposal of under-passage in Chandiroor, Kazhividamoola in Aroor Panchayat, EAK-63 is pending before the Railways for long time, this neds to be cleared at the earliest.
Karungappally railway station has 6000 passengers daily. There is a major problem here which is not seen in any other railway station in India. The only way to get to the station is to cross the railway track. This is legally punishable in Railways. So, a flyover needs to be constructed in Karungappally railway station. The biggest obstacle in the development of Karungappally railway station is the loop track in platform No. 1.
HON. CHAIRPERSON: Please conclude.
ADV. A.M. ARIFF: Sir, give me two more minutes. Autokast Ltd. in Cherthala is a Kerala PSU. They have the technology and skills for the production of rail coaches and goods wagons. They have approached the Railways for getting the contract. The Railways told them to take part in the financial bidding. Considering Autokast as a State PSU, necessary steps needed for giving the contract to this Government PSU. Unfortunately, that has not happened.
Rail coach factory at Kanjikode is a dream project of Kerala State. The other Members have also stated this fact. Kerala has acquired 235 acres of land for the Kanjikode factory. Even after laying the foundation stone seven years ago, nothing has been done on that land.
While talking tall on security and safety, the Budget Speech on Railways is silent on the shortage of human resources. Around 3 lakh vacancies, majority of which are related to management and maintenance of safety standards in Railway operations, remained unfilled with Indian Railways. Going on the way of every PSU, Railways is also going through privatization. All of us know that Railways is the largest public sector in the world. I request this Government not to put India’s national railway system in the hands of corporates.
I conclude my speech with the hope that the Budget 2019-20 will consider the demands of Kerala and the demands of my Constituency.
*श्री आर.के. सिंह पटेल (बांदा): रेल बजट पर मैं भी अपने क्षेत्र सहित बुंदेल खण्ड की पिछड़ी, बिगड़ी रेल व्यवस्था को ठीक करने हेतु कुछ बिन्दुवार मांग रख रहा हूं । जैसे रेलवे लाइनों का दोहरीकरण करना,विद्युतीकरण करना तथा बरसों पूर्व से चली आ रही गाड़ियों के फेरे बढ़ाना तथा बुंदेलखण्ड के मानिकपुर-झांसी से होकर गुजरने वाली सभी ट्रेनों में जनरल बोगियों को बढ़ाने जैसे निम्नवत बिन्दुओं की मांग करना चाहता हूं:-
मानिकपुर से बांदा के रास्ते चलने वाली सभी गाड़ियों में जनरल बोगियों की संख्या बढ़ाई जाए ।
रीवा दिल्ली एक्सप्रेस ट्रेन नं0 12427 जो सतना, मानिकपुर, प्रयागराज,कानपुर के रास्ते,आनन्द विहार (दिल्ली) तक चलती है । इस ट्रेन का मार्ग परिवर्तित करके रीवा सतना मानिकपुर के रास्ते चित्रकूट धाम-कर्वी-बांदा होकर कानपुर के रास्ते आनन्द विहार तक चलाई जाए ।
ग्वालियर व मथुरा से चलने वाली गाड़ी संख्या 12176 एवं 12178 जो सप्ताह में चार दिन चलती है । इसे प्रतिदिन चलाया जाए ।
गाड़ी संख्या 18204 व 18203 बेतवा एक्सप्रेस जो कानपुर से दुर्ग सप्ताह में दो दिन चलती है, इसे प्रतिदिन चलाया जाए ।
गाड़ी संख्या 22130 तुलसी एक्सप्रेस जो (प्रयागराज) इलाहाबाद से कुर्ला मुम्बई तक सप्ताह में दो दिन चलती है, उसे प्रतिदिन चलाया जाए ।
गाड़ी संख्या 12535 गरीब रथ जो लखनऊ से रायपुर तक सप्ताह में दो दिन चलती है, प्रतिदिन चलाया जाए ।
उपरोक्त सभी ट्रेनों के अलावा बुंदेलखण्ड के चित्रकुट धाम-कर्वी-बांदा रेलवे स्टेशनों को सुसज्जित करने हेतु स्पेशल पैकेज दिया जाए ।
झांसी से मानिकपुर एवं खैराड़ा से कानपुर रेल लाइनों का दोहरीकरण एवं विद्युतीकरण का काम जल्द शुरू कराकर पूरा कराया जाए । ताकि बुंदेलखण्ड क्षेत्र देश के विकसित क्षेत्रों के साथ प्रगति के पथ पर आगे बढ़ सके ।
अत: सरकार से निवेदन है कि माननीय रेल मंत्री जी उपरोक्त बातों को ध्यान में रखकर मेरी मांगों को चालू बजट में शामिल कर रेल सुविधा प्रदान करने का कष्ट करें ।
सादर ।
श्री बिद्युत बरन महतो (जमशेदपुर): सभापति महोदय, सबसे पहले मैं माननीय वित्त मंत्री निर्मला सीतरमण जी, रेलवे मंत्री पीयूष गोयल जी और रेलवे राज्य मंत्री सुरेश अंगड़ी जी को इस रेल बजट पर बोलने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद देना चाहता हूँ । रेलवे के इतिहास की शुरुआत सन् 1832 में हुई थी और आज माननीय प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारतीय रेल आमूलचूल परिवर्तन की ओर है । भारतीय रेल दुनिया के तीसरे सबसे बड़े रेलवे नेटवर्क में आती है ।
आज कुल 63 हजार किलोमीटर लंबे भारतीय रेलवे के विशाल नेटवर्क के तहत 22 हजार ट्रेन्स चलती हैं और इसमें प्रतिदिन 15 लाख लोगों का आना-जाना है । हमारे माननीय प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार ने रेलवे में निवेश को जोरदार तरीके से बढ़ाया है और उसे प्रोत्साहन भी दिया है, ताकि मौजूदा सुविधाओं को बनाए रखने के साथ-साथ बढ़ती आवश्यकताओं को भी पूरा किया जाए ।
महोदय,पूरब, पश्चिम,उत्तर और दक्षिण सभी तरफ भारतीय रेल का नेटवर्क फैल रहा है । अभी-अभी त्रिपुरा से मेरी बहन इस बारे में कह रही थीं । हमारे डिब्रूगढ़ के पास ब्रह्मपुत्र नदी पर 4.94 किलोमीटर लंबा, देश की सबसे लंबी बोगीबील रेल और सड़क पुल चालू हो जाने से असम और अरूणाचल प्रदेश के बीच एक और सम्पर्क स्थापित हो गया है । 25 दिसंबर, 2018 को प्रधान मंत्री जी ने इसे राष्ट्र को समर्पित किया है ।
महोदय,आज हमारा रेल का बजट लगभग 65, 837 करोड़ रुपये के आसपास है । वित्त वर्ष 2019-20 के बजट में 65,837 करोड़ रुपये का बजटीय आबंटन प्राप्त हुआ और पूंजीगत व्यय के लिए सर्वाधिक 1.60 लाख करोड़ रुपये दिये गए हैं । इसमें यात्री सुविधाओं के लिए धन में 200 प्रतिशत की वृद्धि शामिल है । पिछले साल रेलवे का परिव्यय 1.48 लाख करोड़ रुपये था, जबकि बजट आवंटन 55,088 करोड़ रुपये था । अंतरिम बजट में आबंटन 1.58 लाख करोड़ रुपये था ।
वित्त वर्ष 2019-20 के बजट में नई लाइनों के निर्माण के लिए 7,255 करोड़ रुपये की धनराशि, गेज परिवर्तन के लिए 2,200 करोड़ रुपये, दोहरीकरण के लिए 700 करोड़ रुपये, रोलिंग स्टॉक के लिए 6,114.82 करोड़ रुपये दिए गए हैं । इसी तरह रेलवे के तीव्र विकास एवं यात्री माल ढुलाई सेवा के लिए सरकारी निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल का उपयोग करने का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि कनेक्टिविटी बढ़ाई जा सके ।
महोदय,अब मैं अपने क्षेत्र की तरफ आता हूँ । मैं पीयूष गोयल जी को हृदय से धन्यवाद देना चाहता हूँ कि उन्होंने हमारी बहुत पुरानी माँग,जो चाकूलिया से बहरागोड़ा होते हुए ओडिशा को जोड़ता है, उसे उन्होंने स्वीकृति प्रदान की है । वहीं पर टाटा-कांड्रा-नामकुम रेलवे लाइन को भी स्वीकृति मिली है, लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं हो पाया है । चांडिल-बोडाम-पटमदा-काटिन-बंदवान होते हुए झाडग्राम के लिए नई रेलवे लाइन की प्राक्कलित लागत 1,844 करोड़ रुपये आंकी गई है । इसमें रांची, जमशेदपुर और झाडग्राम तीन लोक सभा क्षेत्र आते हैं । वर्षों से लोगों की इसके लिए माँग है कि यह रेल लाइन बननी चाहिए । स्वाधीनता के बाद से ही लोगों की उम्मीद है कि इस रेल लाइन पर रेल दौड़ेगी । इसी तरह से चाकूलिया-वुडा मारा, टाटा-कांड्रा जो है, यह लगभग हो चुका है और इसकी शुरूआत करने की जरूरत है ।
महोदय,आरओबी के मामले में मैं माननीय मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहता हूँ कि आजादी के बाद से जुगसलाय ओवरब्रिज के लिए लोगों की माँग थी । वहाँ पर बहुत ज्यादा ट्रैफिक रहता था और वहाँ पर हर साल दुर्घटना में 20 से 30 आदमी कट जाते थे । मंत्री जी के आशीर्वाद से वह आरओबी पुन:शुरू हुआ । दूसरी ओर टाटानगर-खड़गपुर रेल खण्ड पर गोविन्दपुर में एक आरओबी ऑलरेडी पास है, लेकिन उसकी शुरुआत नहीं हुई है । टाटा बादाम पहाड़ रेल खण्ड पर परसुडीह मकदमपुर में ओवरब्रिज का निर्माण चालू करना है । करीब-करीब दो हॉल्ट को इन्होंने स्वीकृति प्रदान की है । धालभूमगढ़ एवं कोकापाड़ा के बीच में बड़कोला में हॉल्ट निर्माण की माँग वर्षों से हो रही है । मैं माननीय मंत्री जी से माँग कर रहा हूँ कि इसे भी ध्यान में रखा जाए और इन्हें जल्द से जल्द पूरा किया जाए ।
अब हम अपने क्षेत्र पर आते हैं । ये हमारी वर्षों पुरानी माँग है । मेरा जमशेदपुर लोक सभा क्षेत्र मिनी भारत है । टाटा स्टील और विटलिटी स्टील,विभिन्न और बड़े उद्योग होने के कारण इसकी कनेक्टिविटी पूरे भारत में फैली हुई है । यहाँ ट्रेन की सुविधा नगण्य है । बिहार से अलग होकर झारखंड बना है । यहाँ की बहुत बड़ी आबादी बिहार में रहती है, खासकर जयनगर, जो राजस्थान में है । पुरूषोत्तम एक्सप्रेस ट्रेन, जो नई दिल्ली से पुरी जाती है, वह ट्रेन दिल्ली में 20 घंटे रूकती है, हम चाहते हैं कि इसे जयपुर तक बढ़ाया जाए । टाटा से बक्सर के बीच सीधी रेल सेवा शुरू की जाए, क्योंकि बहुत सारे लोग यहाँ आते-जाते हैं । टाटा छपरा गाड़ी संख्या 18181 ट्रेन में लगने वाली कटिहार लिंक को अलग कर कटिहार होते हुए न्यू जलपाईगुडी (एनजेपी) तक चलायी जाए । टाटानगर से भागलपुर तक रेल सेवा का परिचालन पुन: प्रारंभ किया जाए । यह यहाँ से यह ट्रेन रात को बारह बजे चलती थी और वहाँ से डेढ़ बजे चलती थी ।
इसका समय निर्धारित नहीं होने के कारण काफी दिक्कत होती है । हम चाहते हैं कि उसका टाइम दोबारा फिक्स करके चालू किया जाए । टाटा नगर से जयनगर तक एक स्पेशल ट्रेन चलायी जाए, क्योंकि वहां पर एक बहुत बड़ी आबादी बसी हुई है ।
माननीय सभापति: अब आप अपनी बात समाप्त कीजिए ।
श्री बिद्युत बरन महतो: महोदय, टाटा से काठपाडी होते हुए बेंगलुरु तक नई रेल सेवा की शुरुआत की जाए । हमारे यहां से काफी लोग चिकित्सा और पढ़ाई के लिए बेंगलुरु जाते हैं । इस ट्रेन को कम-से-कम समय से चलाया जाए । टाटा तथा पटना के बीच में एक शताब्दी ट्रेन प्रारंभ की जाए । टाटा-राउरकेला के बीच में मेमू ट्रेन दी जाए ।
महोदय,कुछ ऐसी ट्रेनें हैं, जो सिर्फ एक दिन चलती हैं । उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन का राखामाईन्स स्टेशन पर ठहराव वर्षों पुरानी मांग है ।
माननीय सभापति: आप कनक्लूड कीजिए ।
श्री बिद्युत बरन महतो: महोदय, मैं एक मिनट में अपनी बात समाप्त कर दूंगा । जालियाँवाला बाग एक्सप्रेस ट्रेन को सप्ताह में कम से कम चार दिन चलाया जाए । टाटा-यशवंतपुर ट्रेन को सप्ताह में कम से कम तीन दिन चलाया जाए, क्योंकि यह ट्रेन काफी बीमार लोगों को लेकर आती है । शालीमार-गोरखपुर ट्रेन को सप्ताह में दो दिन चलाया जाए । टाटा-जम्मूतवी ट्रेन का कटरा तक विस्तार किया जाए और कम से कम दो दिन चलाया जाए । ट्रेन नं. 18103 एवं 18104 एक्सप्रेस ट्रेन का ठहराव जौनपुर एवं शाहगंज जंक्शन पर किया जाए । टाटानगर-वैयप्पनहली एक्सप्रेस ट्रेन को सप्ताह में दो बार चलाया जाए । शिरडी-सांई एक्सप्रेस को सप्ताह में तीन बार चलाया जाए । पुरी-जयनगर-पुरी ट्रेन को खड़गपुर के बजाय हिजली-टाटानगर से होकर चलाया जाए । टाटानगर से आसनसोल इंटरसिटी एक्सप्रेस जो सप्ताह में तीन दिन संचालित होती है, उसको बढ़ाकर टाटानगर से भागलपुर भाया किउल, जमालपुर,सुल्तानगंज होते हुए भागलपुर इंटरसिटी एक्सप्रेस किया जाए ।
माननीय सभापति: आपने अपनी सारी बातें रख दी है । अब आप समाप्त कीजिए ।
श्री बिद्युत बरन महतो: महोदय, वहां रेलवे का काफी बड़ा नेटवर्क है । काफी लोग वहां काम करने के लिए आए हैं और रेल पटरी के किनारे झोपड़ी बनाकर रह रहे हैं । कम से कम दो हजार लोगों की झोपड़ियों को तोड़ने के लिए नोटिस दिए गए हैं । मैं आपके माध्यम से सरकार से आश्वासन चाहता हूं कि कम से कम वर्षा के समय उनकी झोपड़ियों को न तोड़ा जाए । वर्षा के समय पंक्षियों के घोसलों को भी नहीं तोड़ा जाता है ।
SHRI N. REDDEPPA (CHITTOOR): Respected Chairman, Sir, thank you for giving me an opportunity to participate in the discussion on the Demands for Grants under the control of the Ministry of Railways in 2019-20 Budget.
Worldwide, the railway sector has attracted private capital. The private sector investors seek to earn a return on investments that is consummated with the risk of the investment. As per the estimation of the Railway Ministry, an investment of Rs. 50 lakh crore required for Railway infrastructure between 2018 and 2030 and almost Rs. 1.6 lakh crore required annually.
As far as public-private partnership in Railways is concerned, if investment comes for doubling and tripling of dedicated freight corridors and for regional connectivity, it will be good for the country. The private sector can play a key role in the country to take national transporters to another level.
If the capital expenditure outlays of Indian Railways stand at approximately Rs. 1.5 lakh crore to Rs. 1.6 lakh crore per annum, then the sanctioned projects will take decades to complete.
I do not have any doubt about PPP Model. It will help the national transportation system. It will help in enhancing its technology along with upgradation of its infrastructure.
18.13 hrs (Shri Rajendra Agrawal in the Chair) The dedicated freight corridors will play a key role in order to decongest the Indian Railways network. It will ensure faster movement of, both, goods and passenger trains. The development of inland waterways will help in reducing the pressure on the Indian Railways. I urge the Government to think over establishing one dedicated freight corridor from North to South on the lines of the Western Front and the Eastern Front.
Sir, the private investment in railways may be good but we should not forget that our Railways is the single largest employer in the country and eighth largest in the world. I request the Government to protect the existing jobs and create more jobs.
Regarding Andhra Pradesh, I would like to say that our role model, Chief Minister Shri Y. S. Jaganmohan Reddy is seeking financial assistance from the Union Government to establish new railway lines in our State. Required funds are not at all sanctioned by the Central Government.
A railway line from Kadapa to Bengaluru was sanctioned in 2008-09, but adequate funds were not at all released till now. Another railway line from Chittoor to Bengaluru via Kolar was also proposed long back. It is also pending for a long time. We would request the Central Government to release funds to establish another new railway line from Chittoor to Bengaluru.
There is a place in my district which is called Mango Nagar or Damalcheruvu. It supplies mangoes through thousands of lorries to Kolkata, Bengaluru, Chennai etc. Worldwide, it is a famous centre. There is no railway station to give boost to this business and to provide more facilities in the district. Chittoor is a backward district which is adjacent to Tamil Nadu and Bengaluru but no facilities have been provided till date. Particularly, Chittoor is the district headquarters but the Chittoor Railway Station has not at all been improved by the Railway Department. Therefore, I would urge upon the Central Government to sanction adequate funds to improve the Chittoor Railway Station.
Everybody knows that Tirupati, Tiruchanur and Kanipakam are the pilgrim centres but adequate facilities are not there for the passengers. Passengers visit Tiruptai from all over the country to have darshan of Lord Venkateswara. I would request the Central Government to release adequate funds in this Budget as early as possible. We are thankful to the hon. Speaker and also to Modi ji’s Government.
Thank you very much.
*SHRI B.Y. RAGHAVENDRA (SHIMOGA): I express my views on the demands for grants for the Ministry of Railway 2019-20.
At the outset I would like to congratulate the Hon'ble Prime Minister for his sincere and continuous efforts for the alround development of the country, hon'ble Ministers for Railways Shri Piyush Goyal ji and Shri Suresh Angadi ji for making all efforts to provide better railway services to the people of country.
We are all aware that the India railways is the lifeline of the country and it has the 3rd largest rail network in the world. Our NDA Government has focused on the service of the people of the country. All facilities of the government, whether it is transportation, education, social security should be available to the very one including the person who lives in a hut in a remote village of the country.
The union budget has allocated Rs 65,837 crore for the Railways in the 2019-20 Budget. Funds of Rs 7,255 crore have been allocated for construction of new lines, Rs 2,200 crore for gauge conversion, Rs 700 crore for doubling, Rs 6,114.82 crore for rolling stock and Rs 1,750 crore for signaling and telecommunications.
The Government has taken a very good initiative by launching National Common Mobility Card (NCMC) to enable people to pay multiple kinds of transport charges, including bus travel, metro services and toll tax, parking charges across the country. This will be very much useful for the people of the country.
Indian Railways is the oldest railway network in the world. There are hundreds of railway stations built more than a century ago. There is a need for reconstruction of all those old railway stations in the country including Karnataka.
I would like to point out that though the India Railway is constantly making its efforts to induct new technologies and modernize its existing operating system, there is still a lot needs to be done as far as increasing the speed, signaling systems, ensuring the safety of train passengers, removing the bottlenecks of level crossings, maintenance of cleanliness in the trains and outside the railway stations etc. are concerned.
I would like to point out that the provisions of separate rest rooms, cloak rooms for women should be made in all the railway stations of two tier and three tier cities and towns also.
As far as the safety of train journey is concerned, since the last budget was announced, nearly 78 people were died in railway accidents across the country. While the railway ministry has repeatedly promised heavy investments into ensuring greater safety, continued accidents point to loopholes in the existing infrastructure plugging which could result in fewer tragedies. The Government is yet to come close to its target of eliminating 4,267 unmanned railway crossings by 2020.
I would like to request the Government to consider the following demands of my state and also my Parliamentary Constituency Shivamoga.
Mookambika Road Byndoor to Kasargod passenger train was introduced about three years ago to facilitate the pilgrims visiting Mookambika temple. Later, the train service was withdrawn. As a result the passengers and the devotees are facing inconvenient to commute on these places. Hence I would like to request the authorities concerned to ensure that the said train service is re-introduced with a convenient time schedule to cater to the needs of passengers.
Further, I would also like to request the authorities of Railway to take steps to extend the train service up-to Guruvayur, so that the devotees of both Kerala and Karnataka states would be benefitted. And this service could be considered as an overnight fast passenger train (with sleeper coaches) from Guruvayur to Mookambika Road, Byndoor.
There is another demand pertaining to this train is that the people of the region are demanding to re-name the train as 'Murali Mookambika Fast Passenger'.
Some other major demands of my people are a new Train should be introduced between Shivamoga to Tirupati facilitate the devotees of Shivamogga and adjoining districts to visit the holy place and have darshan of Lord Venkateswara Swami in Tirupati. Extension of Shivamoga and Bengalore train upto Chennai. Establish Satellite Railway station to Shivamogga.
Hence, I would like to request the Hon'ble minister of Railway to kindly consider the genuine demand of people of my Parliamentary constituency and take all necessary steps to address them at the earliest.
*श्रीमती दर्शना विक्रम जरदोश: वर्तमान सरकार ने शासन संभालने के साथ रेल बजट और आम बजट एक साथ करने से संसदीय समय में बचत होने के साथ रेलवे की विकास प्रक्रिया की गति बढ़ी है।
जब हम सरकार में आये तब भूतपूर्व प्रगतिशील रेल मंत्रियों के कार्यों के चर्चे यूपीए द्वारा विरासत में देश में कई ब्रिज ऐसे मिले थे जो कि दोनों बाजु एप्रोच रोड कम्प्लीट होने पर भी सिर्फ रेल पटरी के ऊपर का पान रेलवे की परमीशन न मिलने के कारण बाकी रहने से सालों तक ब्रिज पूरे नहीं हुये थे। यह कार्य करीब करीब शून्य पर वर्तमान सरकार ने लाया है। हमारा देश इतना बड़ा है कि शायद उसे एक कोने से दूसरे कोने तक जोड़ना इतना ही नहीं तो देश के कोने-कोने तक नेटवर्क बनाना ऐसी दुनियां की एकमात्र भारतीय रेल होगी। जिसको सबसे बड़ी समस्या अपना नेटवर्क बढ़ाने की आ रही है । वर्तमान सरकार द्वारा पीपीपी के तर्ज पर ट्रेक बिछाने की मंजूरी का निर्णय करके इस समस्या के निराकरण की ओर कदम बढ़ाया है। इस निर्णय से ट्रेक बिछाने के कार्य में गति आने के साथ गुणवत्ता में भी सुधार आयेगा और रेलवे की रेवन्यू भी बढ़ेगी ।
माननीय मंत्री जी द्वारा 50 हजार की आवश्यकता के बारे में देश को अवगत कराया। रेल विभाग को मोर्डनाइज करने में पिछली सरकारों द्वारा किये गये कार्यों का यह उत्तम उदाहरण है । आजादी के इतने सालों बाद भी हमें इतनी बड़ी रकम की आवश्यकता रेल तंत्र और यंत्र को सुधारने में है। परंतु लोगों का विश्वास है कि माननीय नरेन्द्र भाई मोदी जी के नेतृत्व में बनी हुई सरकार इस दिक्कत को रेलवे के विकास में आड़े नहीं आने देगी।
मेरी माननीय रेल मंत्री जी से मांग है कि सूरत जैसा रेलवे स्टेशन जहां से रोजाना लाखों यात्री आवागमन करते हैं। उसे वर्ल्डक्लास रेलवे स्टेशन बनाने की दिशा में शुरू हुये प्रयत्न को गति दी जाये एवं वर्तमान सरकार के समय में यह कार्य पूर्ण हो ऐसा आयोजन किया जाये।
भारतीय रेलवे स्टेशनों में सूरत (गुजरात) स्टेशन का नाम रेलवे मंत्रालय द्वारा वर्ल्ड क्लास स्टेशनों में घोषित किया गया है । पश्चिम रेलवे में सबसे अधिक रेवन्यू देने वाले पहले पांच स्टेशनों में सूरत का समावेश होता है। साल की तकरीबन 200 करोड़ से ज्यादा की आमदनी रेलवे को सूरत स्टेशन से प्राप्त होती है । सूरत शहर की जनसंख्या 60 लाख से ज्यादा है। यहां भारत देश की सबसे ज्यादा कपड़े की 200 से ज्यादा टेक्सटाइल मार्केट है। जिस मार्केट में व्यापार हेतु देश एवं दुनियां के सैकड़ों व्यापारी आते-जाते हैं ।
कपड़ा उद्योग के अलावा सूरत में 5000 से ज्यादा छोटी एवं सबसे बड़ी मात्रा में डायमंड की फैक्ट्रियां हैं, इस कारण लाखों व्यापारियों का सूरत आना-जाना रहता है एवं सूरत में हजीरा विस्तार में कृभको, एस्सार, रीलायंस, एनटीपीसी, अदाणी, ओएनजीसी जैसे भारत की महाकाय औद्योगिक कंपनियां कार्यरत हैं। इसके कारण इस कंपनी में आने-जाने वाले हजारों की संख्या में यात्री रेलवे में यात्रा करके रेलवे तंत्र को आमदनी दे रहे हैं। इसके अलावा यह कंपनियों के लिए रेलवे तंत्र हर रोज की कई गुड्स एवं पार्सल ट्रेनें भी दौड़ती हैं। इसके द्वारा भी बहुत सी आमदनी सूरत स्टेशन के द्वारा रेलवे तंत्र को मिलती है।
सूरत की रेवन्यू, जनसंख्या एवं विकास तथा रेलवे तंत्र द्वारा घोषित क्लास स्टेशन को नजर में रखते हुए सूरत स्टेशन को डीविजन ऑफिस (डीआरएम ऑफिस) जल्द दी जाए, ऐसी अभ्यर्थना है ।
सूरत ऐसा शहर है जहां दुनियां भर से लोग नौकरी एवं रोजगार हेतु आते जाते रहते हैं। भारत के हर जिले से एवं जिले एवं तहसील से लोग सूरत में बस रहे हैं। इसमें बड़ी संख्या भावनगर के निवासियों की है । मेरी आपसे मांग है कि भावनगर महुवा ट्रेन (12945-46) को रोजाना चलाया जाये एवं समय में परिवर्तन किया जाये एवं उसके समय में परिवर्तन करके सूरत से रात्रि को चलाये जाने के लिए मेरी आपसे विनती है।
सूरत रेलवे स्टेशन पर प्रधानमंत्री जैनरिक दवाइयों के स्टोर्स शुरू किये जायें ।
देश की सबसे महत्वपूर्ण ट्रेन 12951, 12952 राजधानी एवं अगस्तक्रांति सूरत में रुकती है। तो मेरी आपसे विनती है कि 8 संपर्कक्रांति ट्रेन (12431-32, 12907-08, 12217-18) एवं 12 दुरन्तो एक्सप्रेस (12264-63, 12297-98, 12268-67, 12240-39, 12228-27, 12284-83) ट्रेनों को भी पुराने नियमों में बदलाव करके वर्ल्ड क्लास बनने जा रहा सूरत जैसे स्टेशन पर तुरंत ही स्टोपेज देकर यात्रियों को हो रही असुविधा दूर करके रेलवे की अर्निंग बढ़ाने की ओर कदम उठाना चाहिए ।
पूरे साल की 4 करोड़ से ज्यादा अर्निंग देने वाला बड़ौदा डिवीजन के कीम स्टेशन पर निम्नलिखित सुविधा उपलब्ध कराई जाये, ऐसी विनती है। कीम स्टेशन पर 28 ट्रेनों के स्टोपेज हैं लेकिन ट्रेनों में चढ़ने वाले यात्रियों को प्लेटफार्म के ऊपर कोच डीस्पले एवं इंडीकेटर न होने की वजह से वयस्क यात्री, महिलायें एवं बीमार यात्रियों को अपना कोच खोजने में भारी परेशानी होती है। तो कृपया यहां जल्द से जल्द कोची इंडीकेटर एवं डीस्पले लगाया जाये ।
कीम स्टेशन की अर्निंग, जनसंख्या एवं विकास को देखते हुये 22927-28, 19017-20, 18402, 18406, 12844, 12993, 19453, 19037, 19037 को कीम स्टेशन पर स्टोपेज दिया जाये ।
बड़ौदा डिवीजन समाविष्ट उत्राण स्टेशन पर 19024, 19216-19060 का स्टोपेज दिया जाये एवं स्टेशन पर एफओबी न होने की वजह से बार-बार अकस्मात हो रहे हैं एवं कई यात्री अपनी जान गंवा चुके हैं/पड़ती है। अत: तुरंत एफओबी बनाया जाये एवं दोनों प्लेटफार्म पर पतरेवाला शेड की लंबाई बढ़ाई जाये ।
16733-34 जोधपुर चेन्नई/16125-26 ओखा रामेश्वरम को हर रोज चलाई जाये ।
श्री अजय भट्ट (नैनीताल-ऊधमसिंह नगर): महोदय, मैं आपका आभारी हूं कि आपने मुझे रेल बजट पर बोलने का मौका दिया । मान्यवर,सुबह हमारे मित्रों ने बात कही थी कि कहीं पर भी कोई फायदा नहीं हुआ,बजट बढ़ाकर नहीं रखा, ट्रेनें बढ़ाई नहीं गईं और ऐसा कहा कि जैसे कुछ हुआ ही नहीं । उन्होंने स्वयं पूरा श्रेय लेने की कोशिश की । अगर यूपीए सरकार के पूर्ववर्ती सिर्फ दस सालों को हम देखें तो दस सालों में उन्होंने अपना एक भी कमिटमेंट पूरा नहीं किया । जो वादे किए थे, उन वादों में से दस प्रतिशत पर भी पूर्णता नहीं पाई गई । यह रिकार्ड बताते हैं । उनकी न तो राजनैतिक इच्छाशक्ति थी और न ही कोई एडमिनिस्ट्रेटिव कैपेसिटी थी । मोदी जी की सरकार आई, माननीय प्रधान मंत्री जी ने जैसे ही कार्य भार ग्रहण किया, रेल समेत तमाम विभागों की गति इस कदर बढ़ी कि आज हम विश्व की ताकत बनने जा रहे हैं ।
मान्यवर,जो रेल का बजट यहां पर पेश हुआ है, उसमें वे सब चीजें हैं,जो इसमें होनी चाहिए । हम माडर्न रेलवे बनाना चाह रहे हैं, रेल को विश्व स्तरीय बनाना चाह रहे हैं, वे सारी चीजें इसमें हैं । हम लोग विश्व स्तरीय रेल बनाने के लिए आगे बढ़ रहे हैं । हमारा स्थान भी विश्व की रेलवेज में आने वाला है । इसको इस स्थान पर लाने के लिए माननीय प्रधान मंत्री जी ने भरसक प्रयास किया है । माननीय रेल मंत्री जी ने इसको अपने जे़हन में उतारा है । हम लोग इस समय विश्व में यात्रियों को लाने,ले जाने के लिहाज से नंबर वन पर है और मालवाहक के रूप में चौथे नंबर पर आते हैं । रेलवे के बजट का कुल 67 प्रतिशत भाग हम लोग माल ढुलाई से और 23 प्रतिशत भाग यात्रियों को इधर-उधर ले जाने से प्राप्त करते हैं । हम इसमें 17 से 18 लाख लोगों को रोजगार देते हैं । इससे भी ज्यादा लोगों को चाय, बीड़ी,पान, सिगरेट,भोजन, इत्यादि में हम रोजगार देते हैं । अगर हम रेलवे को लाइफ लाइन कहें,तो इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी । मैं कुछ चीजें इस बजट में देख पाया हूं,जो सरकार की,माननीय रेल मंत्री जी की और माननीय प्रधान मंत्री जी की मंशा रही है ।
हमें विश्वस्तरीय रेल बनाने के लिए क्या करना चाहिए? उन्होंने सबसे पहले कैपेसिटी इन्हान्समेंट को लिया है, इलेक्ट्रिफिकेशन है, थर्ड लाइन बनाना है, कन्सट्रक्शन और ट्रैक को रिन्युअल करना है ताकि हम दुनिया की रेलों में स्थान बना सकें । डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर बहुत ही बड़ी चीज है । भारत में यह पहली बार हो रहा है । ईस्ट से वेस्ट दिल्ली से हावड़ा और दिल्ली से मुंबई डेडिकेटेड फ्रेट कॉरीडोर बनाया जा रहा है । यह अपने आप में यूनिक है और भारत में यह पहला प्रयोग है । अभी कोई भी मालवाहक ट्रेन जिस पटरी पर चल रही है, उस पटरी पर कभी नहीं चलेगी इसके लिए अलग से पटरी होगी और वह सिर्फ मालवाहक ट्रेनों के लिए ही होगी । यह अपने आप में अभिनव प्रयोग है । इससे पैसेजर्स ट्रेन अधिक लगेंगी,समय बचेगा और ट्रेनें जल्दी पहुंचेगी ।
सेफ्टी ऑफ पैसेंजर्स में सबसे पहला बिन्दु को लिया है कि पैंसजर्स की सेफ्टी कैसे हो, चाहे यह ट्रेनों के अंदर हो या बाहर हो । चाहे एक्सिडेंट कम करना हो, अगर हम एक्सिडेंट का प्रतिशत देखें तो यह पहले से काफी कम हो गया है । एक समय एक्सिडेंट इतना ज्यादा हो गये थे कि नैतिकता के आधार पर रेल मंत्री या कोई मंत्री जी खुद तो कुछ करते नहीं है, लेकिन नैतिकता के आधार पर पूर्व रेल मंत्री जी ने इस्तीफा तक दे दिया था, पहले यह स्थिति थी । इस पर हम लोगों ने अच्छी तरह से संयम किया है और एक्सिडेंट को काफी मात्रा में रोक दिया है । री-डेवलपमेंट ऑफ इम्पॉर्टेंट स्टेशनस, हम लोगों ने हर स्टेशन का नवीनीकरण और आधुनिकीकरण किया है । इस पर बहुत तेजी से कार्य चल रहा है । सीसीटीवी,बेहतर शौचालय,वाईफाई और एक्सलेरेटरर्स,ये सारी चीजें हैं । पेयजल की अच्छी व्यवस्था है । पहले बदबूदार ट्रेनें होती थीं, अब उनका कायाकल्प कर दिया गया है । अगर आप फर्स्ट क्लास के डिब्बे में बैठे हैं तो ऐसा लगता है कि किसी विदेश की ट्रेन में बैठे हैं । इसके बाद ट्रेन सेट्स,जिसमें टी-18और टी-20 का कार्य प्रारंभ किया है । उसके अंतर्गत हम लोगों ने स्पीड बढ़ाने के लिए ट्रेनों का निर्माण प्रारंभ कर दिया है । चेन्नई में इसके लिए कोचेज बन भी रहे हैं । पहला अभिनव प्रयोग अभी हुआ है ।
आपने देखा है, माननीय प्रधान मंत्री जी ने वाराणसी से दिल्ली की ट्रेन का उद्घाटन किया । ऐसे ही कम से कम पन्द्रह से बीस ट्रेनें आने वाली हैं । कभी किसी ने नहीं सोचा होगा, 16 अप्रैल, 1893 को जब बम्बई में पहली बार पैसेंजर्स ट्रेन दौड़ी थी,कि वह पर्वतीय क्षेत्रों में चढ़ जाएगी । किसी ने आज तक खबर नहीं ली, किसी ने जरूरत भी नहीं समझता कि दूरदराज के सामरिक महत्व के क्षेत्रों तक ट्रेन जानी चाहिए ।
भगत सिंह कोशियारी जी के नेतृत्व में एक टीम बनाई गई । पुंछ, जम्मू, मनाली,लेह, लद्दाख,अरूणाचल प्रदेश,त्रिपुरा और नार्थ ईस्ट के क्षेत्र में पहली बार ट्रेन गई । इससे पहले कभी किसी ने इस बारे में नहीं सोचा । प्रारंभिक काम हो गया है और कुछ जगहों पर काम चल रहा है । इस कमेटी ने सिफारिश की थी, लेकिन उसमें एक रेल लाइन टनकरपुर से बागेश्वर छूट गई है । यह भी सामरिक महत्व की लाइन है और नेपाल-चीन के बार्डर से मिलती है । इसके अलावा अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं से लगे हुए जितने भी क्षेत्र हैं, वहां ट्रेन ले जाने का काम सरकार कर रही है । उत्तराखंड की राजधानी गैरसैंण क्षेत्र में बनने वाली है । रामनगर चौखुटिया खंसर होते हुए गैरसैंण और कर्णप्रयाग जाएगी । ऋषिकेश-कर्णप्रयाग चार धाम यात्रा की रोड एक सर्किट बन जाएगी । इसका निर्माण करना बहुत आवश्यक है । काशीपुर-जसपुर-धामपुर रेल लाइन की स्वीकृति भी अति आवश्यक है, इसके बनने से काशीपुर से सीधे धामपुर से मिलने के बाद मुरादाबाद से घूम कर नहीं आना पड़ेगा ।
इससे लोगों का समय और धन दोनों बचेगा । हल्द्वानी से प्रसिद्ध गुरुद्वारा रीठा साहिब को भी ट्रेन लाइन बनाने की योजना है । देहरादून एवं ऋषिकेश के बीच भी एक लाइन बननी चाहिए, क्योंकि राजधानी ऋषिकेश की धर्म नगरी से जुड़ी हुई नहीं है ।
मैं इस सदन को बताते हुए बहुत हर्षित महसूस कर रहा हूं कि माननीय मोदी जी ने चारधाम रेल लाइन के लिए जो धनराशि दी थी,उस पर काम प्रारंभ हो गया है । कुछ दिनों में पूरा देश चार घंटे में चारधाम की यात्रा करके हरिद्वार लौट सकता है ।
माननीय सभापति: अजय भट्ट जी, अब आप समाप्त कीजिए ।
श्री अजय भट्ट: माननीय सभापति जी, मैं इतना निवेदन और करना चाहता हूं कि वर्ष 2022 में हरिद्वार में कुंभ का आयोजन हो रहा है । हरिद्वार स्टेशन, ज्वालापुर स्टेशन की कैपेसिटी बढ़ाई जानी अति आवश्यक है और इसको मोतीचूर तक बढ़ाया जाना चाहिए । ऋषिकेश स्टेशन का सौंदर्यीकरण किया जाना चाहिए । मेरा लोक सभा क्षेत्र नैनीताल है । वहां एच.एम.टी.का कारखाना बंद हो चुका है । विभाग रेलवे के कोचेज़ बनाने के लिए उसको ले सकता है । इससे रोजगार भी मिलेगा और बंद हुई फैक्ट्री भी चालू रहेगी । हल्द्वानी,काठगोदाम, काशीपुर एवं राम नगर क्षेत्रों के रेल स्टेशनों का भी सौंदर्यीकरण एवं विस्तारीकरण किया जाना चाहिए । नैनीताल एवं विश्व प्रसिद्ध जिम कार्बेट पार्क के लिए साल भर पर्यटक देश-विदेश से आते हैं, इसलिए एक नई ट्रेन राम नगर, कार्बेट से चलकर देहरादून तक चलायी जा सकती है । काठगोदाम-हल्द्वानी एवं राम नगर एवं देश के मुख्य शहरों के लिए ट्रेनें चलायी जाएं । हफ्ते में एक दिन चलने वाली ट्रेनों काठगोदाम से जम्मूतवी और राम नगर से मुम्बई तक जाती हैं, उनको सातों दिन चलाया जाए ।
माननीय सभापति जी, अगर आप आज्ञा दें तो क्या मैं इसे ले कर दूं?
माननीय सभापति: नहीं, अब ले नहीं हो सकता है ।
श्री अजय भट्ट: माननीय सभापति जी, मुझे एक मिनट और दे दीजिए ।
माननीय सभापति: आप तुरंत अपनी बात समाप्त कीजिए, मैं नाम बोल चुका हूं ।
श्री अजय भट्ट: जिम कार्बेट पार्क एक विश्व स्तरीय पार्क है, वहां से दिल्ली जाने वाली ट्रेन में ए.सी. कोच नहीं है,जबकि उसमें विदेशी पर्यटक आते हैं,इसलिए उन ट्रेनों में ए.सी. कोच लगाई जाए ।
*SHRI S.C. UDASI (HAVERI): I have some suggestions to improve the railway network in my Parliamentary Constituency, Haveri. Gadag is one of the backward districts in Karnataka. People of my Constituency are dreaming for better railway services. I urge the Hon’ble Minister to give due consideration to be following pending railway projects, concerning of my Parliamentary Constituency:
Inclusion of Survey of Gadag-Mundargi-Hadagali-Harpanhalli, new line in the current budget 2019-20.
One of the ambitious railway projects of North Karnataka Gadag-Haveri new line expedite. Both Gadag and Haveri are district head quarters.
Speed up new 98 kms line between Shimoga-shikaripur-Ranebennur on sharing basis between Union and State Governments at a cost of Rs. 1700 crore.
Inclusion of Survey of Shimoga-Shikaripura-Hanagal-Tads-Hubli.
Gadag-Bijapur Passenger Train: There is lot of time gap between the two trains, travelling from Gadag to Bijapur (i.e., first train in morning 6 AM and the next at 2.30 PM, in the afternoon). Passengers commuting between these two Cities are demanding additional passenger trains in between these two timings. They also demanded that the officials introduce additional train between BIjapur-Gadag to help passengers catch the trains going to Bangalore, Mumbai and Pune. The demand is in the interests of the people and that the officials should consider this request seriously.
To improve passenger amenities and up gradation/modernization of Infrastructures facilities at Haveri, Ranebennur, Byadgi, Yalavagi, Devaragudda Stations. (All these stations are in my Parliamentary Constituency).
Expansion of Goodshed at Byadagi Station: Byadagi is known to be a world renowned market for chilly. To facilitate traders to directly supply chilly to major cities. If the existing Goodshed is expanded it would be of greater help to the traders of this town.
Provision of Trains stoppage at Halligudi station: Earlier trains were stopping at this station. After Gauge conversion, passengers of this station are demanding restoration of stoppage of trains for their convenience and cost saving. Halligudi was the only Railway Station in entire Mundaragi Taluk, Dt. Gadag, Karnataka.
Enhancement in the Reservation Quota from Gadag, Haveri Renebennur and Byadagi, for trains running via these Stations. I sincerely urge you to get the quota increased for the trains for the above Stations in my Parliamentary Constituency and earmark at least 10 per cent quota for the above Stations, so that the people of this section will be benefited.
At present, there is no Government Railway Police (GRP) outpost at Haveri Railway Station. There are repeated complaints of scuffles between commuters and railway staff at Haveri railway station. To enhance safety of railway commuters in the wake of increased traffic at Haveri railway station, the GRP should create an outpost at Haveri railway station.
Request for stoppage of all express trains at Haveri I request to arrange a stoppage of one minute of all the trains mentioned below at Haveri Station.
1) Karnataka Sampark Kranti Express 22685-86 (weekly twice) Chandigar – Yeshwantpur – Chandigarh vai Hubli 2) Yeshwantpur – Barmer – Yeshwantpur Ac Express, Train No. 14805-06 (Weekly Once). 3) TPJ Humsafar superfast Train No. 22497-98 (Weekly Once) Shri Ganganagar – Tiruchchirpalli-Shri Ganganagar. 4) Yeshwantpur – Bikaner-Yeshwantpur Train No. 16587-88 5) Yeshwantpur-Pandharpur-Yeshwantpur Train No. 06541-42 (Weekly once) 6) There has been a long standing demand of the people of Harlapur, Tq.Gadag, Dt.Gadag, to stop Hubli Tirupati Intercity Train passing via this Railway Station. Hubli-Tirupati-Hubli intercity, all days of the week (57273 / 57274). 7) Recently New Special Train has started from Belgaum to Bangalore to Belgaum (Everyday) request you to arrange a stoppage for one minute at Haveri and Ranebennur.
Speeding up the actions to initiate the construction of the following two Railway bridge.
1. New RUB at old LC:22:371 Kakola Village.
2. RUB at LC 223 balance approach work kakkola village.
3. New RUB near Haveri station toward Hubli side, Nagedramatti area.
4. New RUB Shirabadagi-Kadakola Road.
5. RUB 221 Devargudda Station, construction of drainage.
6. Construction of ROB Near RUB Near 221 (Kajjari village road).
7. LC no. 222 near Hanumanatti Asundi Road Construction of RUB.
8. LC no. 217 Ranebennur Medleri Road ROB Construction.
9. LC no. 218 Ranebennur Gangaur Road ROB Construction.
10. LC No. 2019 RUB Ranebennur Guttal Road, RUB Construction under process and local people demanded ROB.
11. LC No. 224 Byadgi Kakol Road, RUB is under process and local people demanded for ROB.
12. Near Byadgi Station 54 A Bridge, demanded for drainage facilities.
13. RUB 48A near Nelogical village people demanded drainage and C.C. Road. Please do the needful in this regard at the earliest.
*श्री सुखबीर सिंह जौनापुरिया (टोंक-सवाई माधोपुर):माननीय मंत्री जी ने रेलवे बजट में रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर में और सुधार का प्रावधान किया है यह बहुत ही खास बात है । रेलवे के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए साल 2018 से 2030 के बीच 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश की आवश्यकता बताई गई है और अनुमान बताया गया है कि 2018 से 2030 के बीच रेल अवसंरचना के लिए 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश की आवश्यकता है । इसे देखते हुए रेलवे का पूंजी परिव्यय प्रति वर्ष 1.5 से 1.6 लाख करोड़ रुपये है । सभी मंजूर परियोजनाओं को पूरा करने में अक्सर कई दशकों का समय लग जाता है । अत: माननीय मंत्री जी द्वारा यह प्रस्ताव किया गया है कि तीव्र विकास और पटरियां बिछाने, रेलिंग स्टॉक विनिर्माण तथा यात्री मालभाड़ा सेवाओं की सुपुर्दगी के लिए सरकारी निजी भागीदारी (पीपीपी) का इस्तेमाल किया जाएगा, जो कि अत्यन्त सराहनीय कार्य है ।
मुंबई और दिल्ली जैसे महानगरों में सब अर्बन रेलवे बेहद सफल रहा है । रेल मंत्रालय द्वारा सब अर्बन रेलवे का विस्तार स्पेशल परपज व्हीकल के जरिए किया जाएगा । इसके लिए भी पीपीपी मॉडल के जरिए निवेश किया जाएगा । मंत्री जी द्वारा बताया गया कि भारतीय रेलवे की उपशहरी तथा लंबी दूरी वाली सेवाएं मुंबई जैसे शहर तथा छोटे शहरों में चमत्कारी कार्य कर रही हैं । रेलवे को दिल्ली मेरठ मार्ग पर प्रस्तावित रैपिड रीजनल ट्रांसपोर्ट सिस्टम (आरआरटीएस) जैसी विशेष प्रयोजन साधन (एसपीवी) संस्थाओं के जरिए उपशहरी रेलवे में अधिक निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा । ट्रांजिट हब के इर्द गिर्द वाणिज्यिक गतिविधि सुनिश्चित करने के लिए ट्रांजिट उन्मुखी विकास (टी ओ डी) का समर्थन करते हुए मंत्री जी द्वारा अधिक पीपीपी पहलों को बढ़ावा देकर तथा स्वीकृत कार्य के समापन को सुनिश्चित करके मेट्रो रेलवे पहलों को बढ़ावा देने का प्रस्ताव किया गया जो कि अत्यन्त महत्वपूर्ण कार्य है ।
मैं 873.70 करोड़ रू. लागत की स्वीकृत नई रेल लाइन जो नसीराबाद रेलवे स्टेशन से प्रारम्भ होकर मौजूदा चौथ का बरवाडा रेलवे स्टेशन को वाया टोंक से जोड़ेगी, की ओर सरकार का ध्यान आकृष्ट करना चाहूंगा । इस परियोजना की कुल लम्बाई 165 कि.मी. है और यह कार्य रेलवे बजट 2015-16 में स्वीकृत किया था । इस परियोजना का विस्तृत सर्वे अप्रैल, 2016 में शुरू हुआ था साथ ही वर्तमान में यह सर्वे कार्य व अलाईनमेंट कार्य पूरा हो चुका है । इस परियोजना के कार्य की अंतिम समापन राशि का बंटवारा रेल मंत्रालय एवं राजस्थान सरकार द्वारा बराबर-बराबर वहन किया जाना है, हालांकि इसमें भूमि आवाप्ति की राशि शामिल नहीं है । राज्य सरकार ने उक्त परियोजना लागत की आधी राशि वहन करने में असमर्थता जाहिर की है ।
अत: मेरा आग्रह है कि उक्त स्वीकृत रेल परियोजना का कार्य जल्द से जल्द प्रारम्भ करवाकर मुझे और मेरे संसदीय क्षेत्र की जनता को लाभांवित करने की कृपा करें ।
*श्री गणेश सिंह (सतना):मेरे लोक सभा क्षेत्र सतना में रेलवे संबंधी कुछ महत्वपूर्ण कार्य हैं जिनकी लम्बे समय से मांग है और मैं लगातार माननीय मंत्री जी से पत्राचार कर मुलाकात करता रहा हूं जो बिन्दुवार निम्नलिखित हैं -
सतना जिले में कैमा के पास मेमू कार शेड की स्थापना की जाये । सतना जिला रेलवे को सबसे अधिक आय देने वाला स्टेशन है । सतना में इण्डस्ट्रियल एरिया तथा कई सीमेंट कम्पनियां हैं । लेकिन यहां रेलवे का कोई कारखाना नहीं है । मेमू कार शेड की बड़ी आवश्यकता है । यात्री गाड़ी नं0 12185/12186 महाकौशल एक्सप्रेस, 12189/12190 रेवांचल एक्सप्रे एवं गाड़ी नं0 12321/12322 हावड़ा मुम्बई मेल में एलएचबी कोच लगया जाये । यात्री गाड़ी नं0 12427 / 12428 रेवांचल एक्सप्रेस में पुराना एलएचबी कोच लगाया गया है जिसकी सफाई भी नहीं हो पाती है उसे परिवर्तित कर नया एलएचबी कोच लगाया जाये । सतना एवं मैहर रेलवे स्टेशन में चौथे प्लेटफार्म का निर्माण किया जाये एवं सतना के चौथे प्लेटफार्म की तरफ से निकासी भी शुरू किया जाये । पश्चिम मध्य रेलवे के उचेहरा रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म में शेड की लम्बाई बढ़ाई जाये एवं प्रवेश द्वार का सौन्दर्यीकरण भी किया जाये । यात्री गाड़ी नं0 22161/22162 राजरानी एक्सप्रेस जो भोपाल से दमोह चलती है उसे रीवा-सतना तक चलाया जाये ।
सतना कटनी रेल मार्ग में उचेहरा रेलवे फाटक पर रेलवे अण्डर ब्रिज बनाया जाये ।
रीवा सतना रेल मार्ग के बिरहुली तथा बम्हौरी में अण्डर ब्रिज का निर्माण किया जाये ।
सतना से मझगवां रेल मार्ग में खुटहा रेलवे फाटक पर अण्डर ब्रिज का निर्माण किया जाये ।
सतना में टर्मिनल एवं अनुरक्षण की सुविधा हेतु ।
मझगवां रेलवे स्टेशन में रीवा आनंद विहार गाड़ी नं0 12427/12428 ; मझगवां रेलवे स्टेशन में कामायनी एक्सप्रेस गाड़ी नं0 11071/11072 और मानिकपुर कटनी डी.एम.यू. का घुनवारा में हाल्ट स्टॉपेज दिया जाये ।
रीवा इन्दौर एक्सप्रेस गाड़ी नं0 11703 / 11704 को नियमित कराये जाने हेतु । रीवा नागपुर एक्सप्रेस गाड़ी नं0 22135 / 22136 को नियमित कराये जाने हेतु । इलाहाबाद मुम्बई दुरन्तो एक्सप्रेस को नियमित किया जाये । सतना रीवा से मुम्बई के लिए नई यात्री गाड़ी दी जाये ।
सादर ।
श्री राम मोहननायडू किंजरापु (श्रीकाकुलम):सभापति महोदय, आपने हमें इस महत्वपूर्ण विषय पर बोलने का मौका दिया, बहुत-बहुत धन्यवाद । हमारा सौभाग्य है कि जब आप सदन चलाते हैं, उसी समय हमें मौका मिलता है । आज हम आपको ज्यादा तकलीफ़ नहीं देंगे । अपनी बात को समय-सीमा के अंदर ही खत्म करेंगे ।
सबसे पहले, पिछले पांच वर्षों से हम अपने राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण विषय को आगे रख रहे थे, वह विषय रेलवे जोन का है । लगभग 20 सालों से आंध्र प्रदेश के लोगों के मन में है कि एक रेलवे जोन स्पेशिएली आंध्र प्रदेश के लिए बनना चाहिए । इसी विषय की गंभीरता को लेकर जब आंध्र प्रदेश और तेलंगना का विभाजन हुआ था, उसी एक्ट में यह लिखा गया था कि आंध्र प्रदेश को एक नया जोन मिलेगा । इसी बात को लेकर हम बार-बार सरकार के पास गये, उनको याद दिलाया कि यह जोन जल्दी बनना चाहिए । पांच साल तक उनके यहां से मामला आगे नहीं बढ़ा,बल्कि चुनाव से पहले एक चुनावी घोषणा की तरह एक नए रेलवे जोन बनाने का एनाउंसमेंट 27 फरवरी को किया गया था । हम इसके लिए सरकार को धन्यवाद भी देते हैं । जैसे मैंने कहा कि वह सिर्फ चुनावी घोषणा की तरह ही रह गया । इसके काफी कारण हैं कि हम क्यों रेलवे जोन के प्रति सहमत नहीं हैं । जब रेलवे जोन की बात आती है तो आंध्र प्रदेश की डिमांड थी कि आंध्र प्रदेश राज्य में जो चार डिवीजन हैं- वाल्टेयर डिवीजन, गुंटूर,गुन्तकल और विजयवाड़ा,इन चारों डिवीजन को मिलाकर एक नया जोन बनाना चाहिए और वाल्टेयर डिवीजन का डिवीजनल हेड क्वार्टर जो विशाखापत्तनम में है, उसको जोनल हेड क्वार्टर बनाना चाहिए । इसको हमने एक उदाहरण की तरह समझा है कि हमने क्या मांगा था और उन्होंने क्या दिया? हमने सरकार से एक गाय मांगी थी, सरकार ने हमें भैंस दे दिया । जब हमने पूछा कि गाय मांगी तो हमें भैंस कैसे दी?तो सरकार कहती है आपने जानवर मांगा, हमने जानवर दिया । हम इससे सहमत नहीं है । जो सेंटिमेंट है, इसकी जो समय-सीमा है,इसका जो बजट है, इन सब को समझकर केंद्र सरकार को हमारे लिए रेलव जोन का प्रकटन जल्दी से जल्दी करना चाहिए । इसके अलावा रेलवे जोन की जो छोटी-छोटी समस्याएं हैं, उनके बारे में भी मैं बताना चाहता हूं । सबसे पहले जो वाल्टेयर डिवीजन है, जिसका 125 साल का इतिहास है ।
उसको खत्म करने की कोशिश की जा रही है । वोल्टेयर डिवीजन को नॉन एक्सिस्टेंट कराया जा रहा है, जिससे हम बिल्कुल भी सहमत नहीं हैं । वोल्टेयर डिवीजन एक प्राइड ऑफ इंडियन रेलवेज़ है, वह आजादी के पहले से बना है, तब से लेकर आज तक वह एक प्रोफिटेबल डिवीजन रहा है । आज तक वह इंडियन रेलवेज़ को एक अनोखा वर्क कल्चर को दिखाकर गरिमा का प्रतीक बना रहा है तो उसे नॉन एक्सिस्टेंट करना बहुत दुख की बात है । हम वोल्टेयर डिवीजन को आगे बढ़ाना चाहते हैं । आप उसे रोकने के बजाय कन्टीन्यू करे । इस जोन की जो सीमा होनी चाहिए, उसके अन्दर श्रीकाकुलम आंध्र प्रदेश के एक कोने में आता है । श्रीकाकुलम में जो सात स्टेशन है- पलासा से लेकर इचापुरम तक,ये सात स्टेशन खुरदा रोड़ में आते हैं । हमने इनको नए जोन में मिलाने की डिमाण्ड भी सरकार के सामने रखी है । एक और हमारी डिमाण्ड आर.आर.बी.और आर.आर.सी. की है । यह जो नया जोन बना है इसके लिए एक नया आर.आर.बी. और आर.आर.सी. ग्रांट होना चाहिए । चुनावी घोषणा इसलिए है, क्योंकि वह घोषणा तक ही रह गई । आज जो बजट आया है,उसके अन्दर कुछ भी राशि इस नए जोन के लिए नहीं दी गई है । हम फिर से केन्द्र सरकार से आग्रह करते हैं कि नए रेलवे जोन के लिए जो इन्फ्रास्ट्रक्चर बनना चाहिए, उसके लिए जितना भी बजट होना चाहिए,उसे इनक्लूड कराया जाए ।
मेट्रो रेल की भी बात करनी चाहिए, जो आंध्र प्रदेश रीओर्गेनाइजेशन एक्ट में दिया हुआ है । विशाखापत्तनम और विजयवाड़ा में दो मेट्रो रेल प्रोजेक्ट्स बनाने की जरुरत है । उसके लिए भी हमने काफी बार केन्द्र सरकार से चर्चा की है,लेकिन आज तक उसके बारे में एक भी बजट नहीं आया है, न ही कोई प्रपोजल आगे बढ़ा है । उसके लिए फिर आज हम केन्द्र सरकार से आग्रह करते हैं कि इन दोनों मेट्रो रेल प्रोजेक्ट्स के लिए, क्योंकि निर्मला सीतारमण जी ने जब बजट पेश किया था, उसमें भी मेट्रो रेल के ऊपर काफी ध्यान दिया था । हम आग्रह करते है कि मेट्रो रेल प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाया जाए । ए.पी.एक्सप्रेस जो नई दिल्ली से अमरावती हमारी नई राजधानी विजयवाड़ा के पास से शुरू हो रही है, उसमें बार बार काफी दिक्कतें आ रही हैं । ट्रेन तीन से चार घंटे लेट चलती है, ए.सी. ठीक से काम नहीं करता है, ट्रेन में चूहे दिखाए देते हैं आदि ये समस्याएं आती हैं । हम केन्द्र सरकार और रेलवे मंत्री जी से यही आग्रह करेंगे कि ये जो समस्याएं है उन्हें सुधारें । जो विशाखापट्टनम स्टेशन है वहां से वाराणसी जाने वाले करीब एक करोड़ यात्रियों की सुविधा के लिए एक ट्रेन विशाखापट्टनम से वाराणसी तक होनी चाहिए । यह डिमाण्ड भी काफी सालों से है । आपको पता होगा वाराणसी एक धार्मिक जगह है, लोग धार्मिक यात्रा पर जाते हैं । जब कोई आदमी स्वर्गस्त हो जाता है तो उसके परिवार वाले उसका अंतिम संस्कार करने के लिए वहां जाते हैं । लगभग चार जिले गोदावरी,विशाखपत्तनम,विजयनगरम और श्रीकाकुलम से लगभग 1 करोड़ लोगों को आशा है कि एक नई ट्रेन विशाखापत्तनम से वाराणसी चले । उसके लिए काफी बार रिक्वेस्ट की है । इसके बारे में केन्द्र सरकार विचार करे और अच्छा निर्णय ले । …(व्यवधान) सर, आप मुझे दो मिनट दे दीजिए आज तो अच्छी तरह बात कर रहा हूं,सर दो मिनट दे दीजिए । मैं अपनी बात खत्म कर दूंगा । मेरे क्षेत्र में जो मेन स्टेशन श्रीकाकुलम है,उसके लिए भी एफ.ओ.बी.की रिक्वेस्ट हमने बार-बार आगे बढ़ाई है,उसको भी आज जल्दी से जल्दी आगे बढ़ाए । यह भी हम केन्द्र सरकार के सामने रखते हैं । प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप की भी बात हुई है । सुरेश प्रभु जी जब मंत्री थे,उस समय भी इस मॉडल को आगे बढ़ाया और कहा गया कि पी.पी.पी. मॉडल बड़े तौर पर चल रहा है उसमें कहा गया कि नए ट्रैक बनेंगे, नए-नए स्टेशन बनेंगे । …(व्यवधान)
माननीय सभापति: अब आप खत्म कीजिए ।
श्री राम मोहननायडू किंजरापु: सर, बस एक मिनट में खत्म कर रहा हूं । जो छोटे स्टेशन हैं उसके लिए एक रूल बनाया जाए कि प्राईवेट पब्लिक पार्टनरशिप इसको भी आगे बढ़ाए तो अच्छा रहेगा,क्योंकि मेरे क्षेत्र में हरिशचन्द्रपुरम स्टेशन है, वहां पर हम एक पार्किंग लॉट बनाना चाहते हैं, लेकिन उसके लिए रेलवे के पास उतना पैसा नहीं है । हमने सोचा कि पब्लिक प्राइवेट आदमी को लेकर आते हैं, उससे एक तरह की पार्टनरशिप बनाएंगे, लेकिन जब हम यही डिमाण्ड लेकर डी.आर.एम के पास या जी.एम. के पास गए तो वे बोले कि रूल्स अभी नहीं बने हैं । हम यही आग्रह करेंगे कि ये छोटे-छोटे काम रोजगार को बढ़ाने के लिए हो सकते हैं, इनको भी पी.पी.पी. का मॉडल की तरह आगे बढ़ाए तो और भी अच्छा होगा । आंध्र प्रदेश के विषय में 18 न्यू लाइंस और 15 डबलिंग प्रोजेक्ट्स बनाने की जरूरत है । उसके ऊपर काम होने के लिए भी रिक्वेस्ट रखेंगे ।
एक नया शहर अमरावती, जो हमारी नई राजधानी है, वहां से लेकर हैदराबाद तक और तेलंगाना में अन्य कई ऐसी जगहें हैं, जिनसे कनेक्टिविटी के लिए आन्ध्र प्रदेश रिआर्गनाइजेशन एक्ट में लिखा हुआ है । उसके ऊपर एक कमेटी भी बनाई गई है,उस कमेटी का स्टेटस क्या है,अगर इसके बारे में रेल मंत्री जी अपने उत्तर में बताएंगे तो अच्छा रहेगा । …(व्यवधान)
माननीय सभापति: अगर कोई बात रह गई हो आप सीधे मंत्री जी को लिखकर दे दीजिए ।
…(व्यवधान)
*कुमारी शोभा कारान्दलाजे (उदुपी चिकमगलूर):मेरे लोक सभा क्षेत्र उडुपी-चिकमगलूर के रेलवे विकास की मांगे निम्नवत हैं । कोंकण रेलवे समुद्र के तटीय क्षेत्र के ट्रांसपोर्ट की लाइफ लाइन है, वो कर्नाटक,गोवा और महाराष्ट्र को जोड़ती है कोंकण रेलवे माननीय जॉर्ज फर्नांडीज के सपनों की परियोजना थी । कर्नाटक के समुद्र तटीय जिले से लाखों लोग मुंबई में रहते हैं, व्यापार,उद्योग और मजदूरी करते हैं । इन सबके ट्रांसपोर्ट का एक ही माध्यम है वो है कोंकण रेलवे । कर्नाटक और मुंबई में रहने वाले कर्नाटका के लोगों की मांग है कि कोंकण रेलवे को जल्दी से जल्दी आधुनीकीकरण, दोहरीकरण और विद्युतीकरण करवाने की कृपा करें ताकि रेलों के संचारण की संख्या बढ़ा सकें और ट्रेनों की स्पीड बढ़ा सकें । मैं माननीय रेलवे मंत्री जी से मांग करती हूं कि कोंकण रेलवे को आधुनीकीकरण,औद्योगिकीकरण और विद्युतीकरण करने का कष्ट करें । मेरे क्षेत्र का चिकमगलूर जिला टूरिस्ट स्पॉट है हजारों लोग हर दिन चिकमगलूर को आते-जाते हैं मगर चिकमगलूर से बैंगलूरू को एक ही ट्रेन जाती है मगर चिकमगलूर से बैंगलूरू को एक ही ट्रेन जाती है । (पैसेंजर ट्रेन नं. 65277) यह पैसेंजर ट्रेन भी चिकमगलूर से बैंगलूरू पहुंचने के लिए 6 घंटे से ज्यादा का समय लेती है । इस ट्रेन की स्पीड को बढ़ाने का कष्ट करें । ट्रेन नं. 12089/12090 जनशताब्दी एक्सप्रेस चिकमगलूर जिले से गुजरती है मगर चिकमगलूर जिले के तरीकेरे रेलवे स्टेशन पर रूकती नहीं है कृपा करके वहां जनशताब्दी एक्सप्रेस अप-डाउन गाड़ियों को रूकवाने की व्यवस्था करें । मेरे क्षेत्र का बेलनाहैल्ली रेलवे, स्टेशन बैंगलूरू रेलवे स्टेशन और शिवनी रेलवे स्टेशन पर स्टापिज दिलवाने की मांग करती हूं । मेरे क्षेत्र में बहुत सारे जगह पर मैनलेवल क्रासिंग है । बेलनाहल्ली,कोड़ीकैम्प-कैराईभोसाड़ी,अजामपुरा वसादुर्गा रोड और शिवपुरा गांव में आरयुवी (रेलवे अंडर ब्रिज) जल्दी निर्माण करने की मांग करती हूं । मेरे क्षेत्र में दो नए रेलवे लाइन बिछाने की मांग करती हूं ।
(क) हसन-बलूर-चिकमगलूर-श्रींगेरी-कोप्फा-शिवमोग्गा (ख) श्रींगेरी-कारकड़ा-मंगलौर उड़पी-चिकमगलूर क्षेत्र टूरिस्ट क्षेत्र है । व्यापार और घूमने के लिए बहुत सारे लोग आते-जाते हैं इसलिए मेरे क्षेत्र में रेलवे का आधुनिकीकरण करने के लिए इस साल के बजट में शामिल करने का कष्ट करें जिससे जिले के विकास को गति मिल सके ऐसी मैं प्रार्थना करती हूं ।
श्री राजवीर सिंह (राजू भैय्या) (एटा): माननीय सभापति जी, मुझे पूरा विश्वास था कि आप आएंगे तो मैं बोल पाऊंगा । …(व्यवधान)आपने मुझे रेल बजट पर बोलने का अवसर दिया है,इसके लिए मैं आपके प्रति आभारी हूं । …(व्यवधान)
मान्यवर,एटा और कासगंज,ये दो जिले मेरे लोक सभा क्षेत्र में आते हैं और जब से देश आज़ाद हुआ, 1947 के बाद से आज तक ये दोनों जिले रेलवे लाइन से नहीं जुड़े हैं । पिछली बार जब खड़गे साहब थे,तब सर्वे भी हुआ था । *…(व्यवधान) मान्यवर, इसी तरह से जब कांग्रेस की सरकार थी तो जब पैसा होता था, तब योजना नहीं होती थी और जब योजना होती थी, तब पैसा नहीं होता था,इसलिए … *(व्यवधान)
सभापति जी, आज हमारी सरकार के पास पैसा भी है और योजनाएं भी हैं । मेरे लोक सभा क्षेत्र एटा में…(व्यवधान)मैडम, आप मेरे बाद बोलिएगा ।…(व्यवधान)
माननीय सभापति : आप बैठ जाइए । अगर कोई बात गलत होगी तो निकाल देंगे । आप लोग बैठ जाइए ।
…(व्यवधान)
श्री राजवीर सिंह (राजू भैय्या): माननीय सभापति जी, अगर यह केवल29किलोमीटर रेल मार्ग जुड़ जाएगा तो यह मानकर चलिए कि इससे कई लोक सभा क्षेत्रों को लाभ मिलेगा । …(व्यवधान) हमारे यहां की तरह ही कुछ अन्य रेलवे कार्यों को भी स्वीकृति मिली है । …(व्यवधान)बिहार में मिली है, …(व्यवधान)उत्तर प्रदेश में ग़ाजीपुर को मिली है, उसी स्वीकृत लाइन में मेरी भी लाइन है ।…(व्यवधान) मैं पूरे पेज़ लेकर आया हूं । …(व्यवधान)वर्ष 2018-19 में भी है, 2017-18 में भी है । …(व्यवधान)केवल 29 किलोमीटर की रेलवे लाइन है, यह स्वीकृत भी हो गई है । …(व्यवधान) मैं आपके माध्यम से यह निवेदन करना चाहता हूंकि मेरी कैटेगरी की जितनी अन्य रेल लाइनें हैं, …(व्यवधान) मेरी रेल लाइन के लिए भी पैसे जारी कराने का कष्ट करेंगे,ऐसा निवेदन मैं आपके बीच में करने आया हूं । बहुत-बहुत धन्यवाद ।…(व्यवधान)
माननीय सभापति: आप लोग बैठ जाइए । अगर कोई बात आपत्तिजनक होगी तो उसे हटा दिया जाएगा ।
…(व्यवधान)
माननीय सभापति: यह कह दिया गया है । आप बैठिए ।
…(व्यवधान)
माननीय सभापति: मैंने कह दिया है । चेयर ने निर्देश दे दिया है । आप बैठिए ।
…(व्यवधान)
माननीय सभापति: चेयर से निर्देश जा चुका है । आप बैठ जाइए ।
…(व्यवधान)
*श्री जसवंत सिंह सुमनभाई भाभोर (दाहोद): माननीय प्रधानमंत्री जी और रेल मंत्री जी के नेतृत्व में आज रेलवे विभाग निरंतर प्रगति की दिशा में अग्रसर है । जब हम लोग 2014 में सरकार में आए तो भारतीय रेल के नाम पर हमारे पास आई.सी.यू. में भर्ती हांफता हुआ तंत्र था परन्तु इस चुनौती को माननीय मोदी जी के नेतृत्व में हमारी सरकार ने स्वीकार किया तथा रेलवे को पुनर्जीवित करने का प्रयास करते हुए कार्य शुरू किया जिसके फलस्वरूप आज रेलवे अपने उपभोक्ताओं को सुविधा युक्त सफ़र देने के लिए अग्रसर है । मैं माननीय रेल मंत्री जी को बधाई देना चाहता हूँ जिन्होंने रेलवे को एक स्वस्थ तंत्र में विकसित करने का निरंतर प्रयास किया है ।
हम मेक इन इंडिया के माध्यम से स्वदेशी को बढ़ावा देते हुए एक नए भारत के निर्माण का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहे हैं । एक ऐसा भारत जो पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर और मजबूत हो, इसके अतिरिक्त हमारी सरकार देश को आधुनिक बनाने की दिशा में भी कार्य कर रही है ।
हमारी सरकार ने इस बजट में रेलवे सेक्टर को पीपीपी मॉडल के आधार पर विकास की घोषणा की है हम जानते हैं कि रेलवे की सभी मंजूर परियोजनाओं को पूरी करने में कई दशक लग जाते हैं, इसलिए हमारी सरकार निर्धारित समय में रेलवे परियोजना के तीव्र विकास और पटरियां बिछाने, रेलिंग स्टाक विनिर्माण तथा यात्री मालभाड़ा सेवाओं की सुपुर्दगी के लिए सरकारी निजी भागीदारी (पी.पी.पी.) का इस्तेमाल करने की योजना बनाई है ताकि निर्धारित समय में लक्ष्य को पूरा कर सकें ।
सरकारी निजी भागीदारी से देश में रोजगार की भारी वृद्धि होगी और रेलवे को अच्छे राजस्व का मुनाफा मिलेगा ।
हमारी सरकार ने रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार लाने और रेलवे के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए साल 2018 से 2030 के बीच 50 लाख करोड़ रुपए के निवेश का लक्ष्य रखा है । इसे देखते हुए रेलवे का पूंजी परिव्यय प्रति वर्ष 1.5 से 1.6 लाख करोड़ रुपए तक होगी ।
मैं अपने संसदीय क्षेत्र की कुछ मांग सरकार के समक्ष रखना चाहता हूँ - मेरी लोक सभा दाहोद को इंदौर से जोड़ने के लिए इंदौर-दाहोद रेल परियोजना के ऊपर बहुत जोर शोर से कार्य चल रहा है । मैं माननीय प्रधानमंत्री जी एवं माननीय रेल मंत्री जी द्वारा इस वित्तीय वर्ष के बहीखाते में इस परियोजना के लिए धन उपलब्ध करवाने के लिए दाहोद लोक सभा की जनता की ओर से बहुत-बहुत धन्यवाद करता हूँ । इसमें कोई दो राय नहीं है कि इस परियोजना के पूरा हो जाने पर न सिर्फ गुजरात बल्कि मध्य प्रदेश के बहुत सारे लोक सभा क्षेत्रों के मतदाताओं को इसका लाभ मिलेगा व क्षेत्र में सर्वांगीण विकास होगा । मैं गुजरात राज्य के दाहोद लोक सभा का प्रतिनिधित्व करता हूँ और यह एक आदिवासी बहुल क्षेत्र है और यह क्षेत्र आर्थिक दृष्टि से अति पिछड़ा इलाका है और यहॉं के ज्यादातर निवासी मेहनत मजदूरी करके अपनी गुजर बसर करते हैं । क्षेत्र के विकास एवं इसके निवासियों के उत्थान में भारतीय रेलवे एक बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है इसलिए मैं माननीय रेल मंत्री जी से इस क्षेत्र के विकास के लिए जरूरी रेलवे आधारभूत ढांचा तैयार करने के लिए दाहोद क्षेत्र को प्राथमिकता प्रदान करने का कष्ट करें ।
दाहोद क्षेत्र के निवासियों की एक महत्वपूर्ण मांग जिसमें दाहोद को राजस्थान के बांसवाड़ा तक एक नई रेलवे लाइन बिछाने का कार्य है, मैं माननीय रेल मंत्री जी से क्षेत्र की जनता की मांग को ध्यान में रखते हुए दाहोद गुजरात से बांसवाडा राजस्थान तक नई रेल परियोजना हेतु कार्य को वर्तमान वित्तीय वर्ष के बहीखाता में संशोधन प्रस्ताव पारित करवाकर इस कार्य की शुरूआत करवाने का कष्ट करें ।
मैं माननीय रेल मंत्री जी से दाहोद से मोडासा तक नई रेल परियोजना को भी वर्तमान वित्तीय वर्ष के बहीखाते में शामिल करने की प्रार्थना करता हूँ ।
जिस तरह इंसानी शरीर में धमनियॉं कार्य करती हैं, शरीर के हर हिस्से में महत्वपूर्ण अवयवों का संचालन करती है उसी प्रकार भारतीय रेल इस देश के विकास के लिए निरंतर कार्य करते हुए सेवा के उत्कृष्ट कीर्तिमान स्थापित कर रही है, अंत में, मैं भारतीय रेल के समस्त कर्मचारियों का धन्यवाद करता हूँ तथा रेलवे के विकास की गति को बरकरार रखते हुए माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए दिन-रात मेहनत करने वाले श्री पीयूष गोयल का भी हृदय से अभिनन्दन करता हूँ । इस महत्वपूर्ण विषय पर मुझे अपने विचार रखने का अवसर दिया उसके लिए आभारी हूँ ।
SHRI N. K. PREMACHANDRAN (KOLLAM): Thank you very much, Mr. Chairman, Sir, for giving me this opportunity to take part in the discussion on the Demand for Grants of the Railway Ministry, that is Demand no.82.
Sir, Indian railways is the lifeline of the nation and is the unique integrator of modern India which meets the road of its socio-economic development. Indian Railways play an important pivotal role in maintaining the unity and integrity of our country. It is the third largest railway network in the world. It maintains a gigantic network of 63,000 kilometres and 22 thousand trains run per day to transport 15 million passengers. Sir, in order to maintain this infrastructure of this railway network, which is the third largest in the world, we have to keep the infrastructure like railway track, bridges, signalling and telecommunication etc. in a proper and fit condition.
Let us analyse the past performance of the Indian Railways. I would like to appreciate the performance made of the Railways during the last few years especially in respect of freight traffic in which there is a marginal or incremental increase. During 2016-17, freight traffic registered an incremental growth of 4.83 per cent. In 2017-18, It had an increase of 5.33 per cent.
Sir, regarding passenger traffic, in 2017-18, there was a marginal increase of 2.09 per cent in the number of passengers. In 2018-19, it had a marginal increase of 0.64 per cent in the number of passengers. That means, the passenger traffic, as we expected, has not increased according to the estimate which we made in the last year’s Budget.
Sir, 65 per cent of the railway revenue comes from the freight traffic. In the Demand for Grants also, it is stated that by completing the dedicated freight corridors by 2020, the freight earnings will also be increased. That is a positive and welcome suggestion. It is also a welcome move on the part of the Government for which I place my appreciation on record.
Sir, if you see the Demand for Grants of the Ministry of Railways for 2019-20, the total budget outlay is Rs.65,837 crore which is the highest outlay since Independence. Out of which, the capital expenditure is Rs.1,60,176 crore. It is 20 per cent higher than that of the previous year and I do appreciate that.
Mr. Chairman, Sir, you may please see that the hon. Finance Minister, Madam, Nirmala Sitharaman Ji, in presenting the Budget, has announced that Indian Railways require fifty lakh crores of rupees as investment infrastructure for the year from 2018 to 2030; 2018 is already over. Now the financial year, 2019-20 is running. An infrastructure investment of fifty lakh crores of rupees is required to have better infrastructure condition of international standard. That means, Railways require fifty lakh crore of rupees in eleven years. It further means that at least five lakh crore of rupees per year is required to achieve the goal to have international standard of the infrastructure. But the capital outlay given in the Demand for Grants is only Rs.1,60176 crore.
So, my question to the hon. Railway Minister is: how will you be able to achieve the target of fifty lakh crore of rupees by 2030, that is, within 10 year or 11 years? If at least five lakh crore of rupees per year is invested, then only you will be able to achieve the target by 2030. How is the Government and the Railway Ministry going to achieve this target?
Sir, the only solution or the only proposal which is suggested in the Budget is Public Private Partnership(PPP). The Government is totally depending on the PPP. I would like to cite an example of the NDA Government led by Narendra Modi Ji in which Shri Suresh Prabhu was the Minister. That was the Budget of 2015-16. There was also a big announcement. At that time, Railways had a separate Budget.
What was the announcement made at that time? A five-year development plan was enunciated in the Railway Budget of 2015-16 by which Rs. 8.5 lakh crore was to be invested in the Railway infrastructure. During that Budget discussion, I myself had raised a question : “How are you going to mobilise the Extra Budgetary Resources? What are the ways and means to achieve it?”. The then Railway Minister -- an efficient and dynamic Minister who had initiated development in such a way -- is none other than Mr. Suresh Prabhu. I have no hesitation in accepting his wonderful contribution to the Indian Railways. The immediate reply given by him was that : “It is by means of Joint Venture, Foreign Direct Investment, Private-Public Participation and Special Purpose Vehicle.”.
How much have you achieved from it? According to my information, it is nothing even at this juncture as no Public-Private Participation has come into the picture. How is the Railways going to achieve this goal by 2030? This is the main question that I would like to pose here.
I have some suggestions. The first suggestion is that you have to depend on the profit-making Public Sector Undertakings. We are having Navratna companies. Why are you always depending on the Joint Venture, Foreign Direct Investment, Private-Public Participation and Special Purpose Vehicle? We are having the Navratna PSUs. Why do we not utilize the resources of the PSUs so as to have capacity augmentation by the Indian Railways? This is an important suggestion that I would like to make here.
Coming to the Operating Ratio of the Indian Railways, the Operating Ratio is an important parameter to gauge the health of the Railway finances. It is a measure of expenditure against revenue. In the 2015-16 Budget, there was also a proposal to enhance the efficiency of the Indian Railways by reducing the Operating Ratio from 93.6 per cent to 88.5 per cent. What is the latest position in this regard? If you examine, the Operating Ratio in 2017-18 was 98.4 per cent; in 2018-2019, it was 96.2 per cent; and in 2019-20, it was 95 per cent. Of course, it is declining, but what happened to 88.5 per cent? This was the Budget of 2015-16 of the same Government led by Shri Narendra Modi and the Railway Minister. What was the impact of the announcement made in the year 2015-16? I would like to suggest improving efficiency and thereby reducing the Operating Ratio.
In order to achieve the capacity augmentation and thereby reduce the Operating Ratio, my suggestion is that major thrust should be given to the electrification of the Indian Railways. Since time is not there, I am not going into the details of the issue. Electrification will reduce the use of imported fuels and thereby improve the energy security.
I would also like to make another very important suggestion. More thrust should be given to promote sub-urban railway transport system through the Regional Rapid Transport System. We had a plan in our State of Kerala to have this Regional Rapid Transport System from Trivandrum to Chengannur, but huge investment was required for it. So, that issue should be given much thrust.
I would like to make four more suggestions. Firstly, we should enhance the efficiency of the Indian Railways by reducing the Operating Ratio. Secondly, the resources of the profit-making PSUs may be utilised for capacity augmentation of the Indian Railways instead of depending on the Joint Venture, Foreign Direct Investment, Private-Public Participation and Special Purpose Vehicle. Thirdly, there should be commercial utilisation of the surplus land of the Indian Railways. So far, we were not able to utilise the surplus land of the Indian Railways. Fourthly, we should improve other sources of revenue using innovative marketing technology, and other sources of revenue may also be found out so as to meet the infrastructure investment and maintenance of the Indian Railways.
I am now coming to issues relating to my Constituency and my State. There is a long pending demand from the State of Kerala to have an exclusive Railway Zone for the State of Kerala. We are finding it very difficult to have a good scenario in our State because even from the Southern Railway Headquarters we are facing discrimination.
As regards my Constituency and bullet train, Kollam-Shenkottai gauge conversion is already completed. My suggestion here is that all the trains, which were there before the gauge conversion may be re-introduced. Secondly, the electrification of Kollam to Punalur and Punalur to Shenkottai sections may be taken into account and completed in a timebound manner.
Vellankanni weekly train from Ernakulam may be declared as a regular train on all days. Vistadome coaches may be introduced in the Kottayam section. Punalur railway station is the nearest to the Sabarimala temple. The same may be declared and developed as a pilgrimage railway station. Kollam railway station should be developed to a level of international standard. With these proposals, I conclude my speech. Thank you very much, Sir.
*SHRI P.C. MOHAN (BANGALORE CENTRAL): Railways as a mode of transportation is a great unifier of the country. With over 67000 route kilometers and 7200 stations Indian Railway carries passengers the size of the population of Australia in a single day of the 12000 odd train run every day. This is a matter of immense pride for every Indian. Indian Railways has long been the driving force for the development on country. The increasing density of railway networks in various States have helped the speedy development of the States.
Karnataka State is on the threshold of immense growth in the areas of infrastructure, education, healthcare, transportation and inclusive development. It is one on the preferred investment destination among the States of India due to the conducive ecosystem, educational excellence and favourable weather conditions.
Some of the key parameters for furthering the growth and all-round development of Karnataka is highlighted here for necessary action.
Government of Karnataka and Indian Railways has planned for the implementation of the suburban Railway system in Bengaluru for resolving the urban/suburban transportation owes of Bengaluru and its inhabitants. RITES a subsidiary of Indian Railways was engaged to prepare the Detailed Project Report (DPR). RITES submitted the DPR. State Government raised some issues connected with the DPR which was solved with the intervention of the Hon’ble Minister of Railways. Further the DPR was forwarded to the Central Government for obtaining the approval of the Cabinet. Prior to the DPR being placed before the Cabinet, PMO raised certain issues which are very relevant for the holistic development of the suburban railway system which would serve the needs of Greater Bengaluru for the next 30-40 years. Observations raised by PMO are valid for the long term and holistic development Bengaluru and its suburban areas. Hence immediate action should be taken by the State Government and the Railways to sort out the issues raised by PMO and prepare a revised DPR for the approval of Union Cabinet. Bengaluru being a hub of knowledge, IT/ITES services, manufacturing centre with a huge flow of migrant population. This growth will increase in the coming years. This required the increasing of capacity of the city which is possible by increasing the footprint of the city through faster mode of transportation to cover distance of 50-60 kilometers around the city. As it stands there is an urgent need for expansion of Bengaluru beyond the present boundaries for decongesting the core area of the Bengaluru CBD. This is possible by moving the economic activities beyond Bengaluru city to form a greater Bengaluru which connects the suburban corridors of Bengaluru viz.
· Malur-Bangarapete, · Whitefield-Hosakote, · Ramanagaram-Channapatna-Mandya · Yesvantapur-Nelamangala-Kunigal · Bengaluru-Tumakuru · Yelahanka-Doddaballapur-Gauribidanur · Yelahanka-Devahanalli-Chikkaballapura-Kolar-Bangarapete · Bengaluru-KIAL (Bengaluru Airport) · Banaswadi-Baiyyappanahalli-Hosur
The development of suburban transportation infrastructure would spread the city beyond its present boundaries. This will ensure demographic spread of population. State Government should ensure development of necessary infrastructure for development of residential localities like water, electricity, educational institutions, hospitals and market places.
To decongest railway capacity at KSR Bengaluru and Yeshvantpur railway stations a new coaching terminal is coming up at Baiyyappanahalli. The location being centrally located will help citizen of Bengaluru to commence their rail journey to various parts of the country. Here the main requirement is the seamless connectivity to the Metro Rail (BMRCL) system which will integrate the entire transportation network in the Bengaluru. A well-planned sheltered skywalk/travellator of international standards should be provided to connect Baiyyappanahalli BMRCL station to the new coaching terminal at Baiyyappanahalli.
During the last five years of NDA Government led by Shri Narendra Modi Ji, the entire railway network in Karnataka has immense great development. It has changed the very face of railway network in the State which activities like new lines connecting important cities providing rail transport to smaller cities, doubling and electrification of existing lines and modernization of trains and improved amenities to passengers at stations and onboard. Citizen of Karnataka has great hope from the present Central Government to further push the railway infrastructure in the State. Some of the major railway infrastructural developments delivered in the last five years are doubling and electrification between Bengaluru – Mysuru, Bengaluru – Dharmavaram, doubling between Bengaluru and Miraj (in patches beyond Tumakuru). Further, work of doubling is in progress between Hosapete to Vasco. In short the entire span of railway trunk routes in Karnataka is in the process of being doubled and electrified. This will increase the train handling capacity and faster movement of trains. The development of a new Coaching Terminal at Baiyyappanahalli will greatly increase the train handling capacity at Bengaluru and thus facilitate connectivity to all part of the country. New train services can be started from Baiyyappanahalli to Jammu/Uddampur, cities in Rajasthan like, Udaipur, Jaiselmer, Marwar, Indore, Nagpur, Vishakapatnam, Howrah, Guwahathi, etc. To tide over the transportation bottleneck in the Bengaluru Metropolitan area, consequent to shifting of trains presently being dealt at KSR Bengaluru and Yeshwanthpur railway stations, suburban trains will be started from Yeshwantpur railway station till the commencement of Suburban Railway Stem in Bengaluru.
Further, to augment the railways capacity to handle more passenger services, there is an urgent need for development of mini-coaching terminals around Bengaluru, viz. Yelahanka/Rajankunte, Hejjala, Bengarapete. These terminals should be equipped to taken up maintenance of rolling stock so that the major railway stations can handle more passenger services. This will also increase the job opportunities in the railways in Karnataka.
Mahadevapura in Bengaluru, which is part of my constituency has developed into a major IT/ITES hub. Many large, medium and small IT companies (MNC & Indian) have set up their development centres and employs thousands of skilled, semi-skilled and service labourers. The railway Satellite Goods Terminal and CONCOR managed Inland Container Depot are functioning in this area. These facilities were established on the outskirts of Bengaluru when it was a small city. Now, Bengaluru has grown beyond this by great distances. Heavy trucks ply in and around Whitfield area during the morning and evening hours which creates huge traffic jams.
In the present scenario the railway goods shed and Inland Container Depot facilities should be shifted to Malur or beyond so that the area occupied by these terminals can be utilized as maintenance yard for passenger trains. In times to come all terminal activities should be concentrated at this yard and the major stations like KSR Bengaluru, yeswanthpur and Baiyyappanahalli should be utilized only for running train only. This will help in construction of more platforms and passenger related amenities which will help in running more and more passenger trains and it will also benefit running of suburban trains.
Apart from Bengaluru, Mysuru is also an important travel destination, particularly for education and tourism. In recent times many long-distance trains have been extended to Mysuru. Since Mysuru station does not have the adequate facilities for maintenance for trains, a new coaching terminal is being planned at Naganahalli. Railway Ministry should earmark funds in the Budget and fast track the work of this new coaching terminal so that more number of trains can be operated from Mysuru to various parts of the country. This will improve tourism related travel to Mysuru and beyond. Additional platforms should be planned at Mysuru station to cater to this increased demand.
The existing railway line between Mysuru and Arsikere via Hassan should be doubled to increase line capacity and aide running more number of trains. This will improve direct connectivity from Mysuru to various parts of Karnataka and outside the State. Some of the long-distance trains can be directly runs to Mysuru instead of running via Bengaluru city.
The existing connectivity between Mangaluru and Bengaluru is poor due to the limitations of ghat section. Limited number of trains are being operated. Ministry of Railways should conduct feasibility study for doubling this line to improve the connectivity between Mangaluru Port and other cities like Bengaluru, Mysuru and other cities. This will increase line capacity and help running of more passenger and freight trains to the Mangaluru port. HMRDC which developed theHassan-Mangaluru railway line, is now running in profit. This agency can be entrusted the work of feasibility study for doubling the line between Hassan and Mangaluru.
Chitradurga while being a historic district of great economic activity during the early ages have fallen due to its backwardness and lack of proper connectivity. Ministry of Railways should increase the rail penetration in Chitradurga District and operate more train services from Chitradurga to various parts of the State to develop one of the most backward Districts of Karnataka. More trains services should be provided from Chitradurga to Hosapete, Bellary, Shivamogga and Mangaluru.
There is a huge passenger traffic between Bengaluru and Hosapete. However, there is only one direct overnight train from Bengaluru to Hosapete via Bellary. Travelers have to depend on buses for travelling to Hosapete. Hence, it is urged to immediately start a daytime Intercity Superfast train between Hosepete and Bengaluru via Kottur and Harihara.
After the completion of doubling between Bengaluru-Dharmavaram-Guntakal an exclusive Intercity Superfast train should be run between Bengaluru and Bellary to connect the business hubs. Intercity trains serve the purpose of fast movement for business needs and facilitate return of public to their homes after completion of business transactions.
Work should be started on the rail connectivity from Shivamogga – Mangaluru Port. This will help the speedier movement of industrial and manufactured goods from the industrial areas of Bhadravati and Shivamogga to the port to boost international trade.
As told earlier, Karnataka is one the threshold of entering a new era of development both economically, industrially and as a knowledge and healthcare hub. Railways plays a catalytic role in the speedy development of the State. Presently, Railways in Karntaka is under the administrative control of three Zones (SWR, southern Railways & Central Railways). To bring uniformity in development of rail infrastructure in Karnataka it is imperative to bring the entire state under the administrative control ofa single Zonal Railway. In this direction , it is urged to create Gulbarga and Mangaluru Divisions under the administrative control of South Western Railway. Gulbarga Division should have the area of northern Karnataka which are under the administrative control of Central Railway (Gulbarga, Wadi) South Central Railway (Bidar, Raichur, Yadgir) to be transferred to the administrative control of Gulbarga Division. Similarly Mangaluru Division should cover the areas of southern parts of Karnataka now under the control of Southern Railway and Konkan Railway. This will give a big push to the dreams of the people of Karnataka for rail infrastructure development.
Vijnayapura, Bidar, Bagalkote and Gulbarga needs to be higher rail infrastructure penetration and more trains to be operated to connect major cities in Karnataka and outside the State. The Golbumbaz Express connecting Mysuru to Solapur via Bengaluru, Hubballi, Gadag,Bagalkote, Vijayapura is a slow runner. Consequent to doubling of lines in these areas this train is running with old timings. This train needs to be speeded up to ensure shorter journey time for passengers for people of northern Karnataka to reach Bengaluru and Mysuru.
More number of commuter train services should be planned between Hubballi – Ballari, Gadag – Solapur, Hubballi – Miraj. Local trains should be operated once in an hour or two in these sections, this will help faster movement of the working-class people and daily wage labourers and aide in the development of industries and manufacturing houses in these areas.
*श्री पी.पी. चौधरी (पाली): यह दूसरा संगठित बजट है, जिसमें रेल और आम बजट को एक साथ रखा गया है । यह बजट एक विकास परक बजट है, जिसमें लुभावने वादे नहीं किए गए है, बल्कि बुनियादी संरचना के विकास की बात कही गई है । यह बजट वास्तविकता वाला बजट है । रेलवे लाईने बिछाने व नई रेलों को चलाए जाने जैसे कार्य पूरे वर्ष सतत रूप से चलते रहने चाहिए । धरातल पर जो परियोजनाएं आवश्यक हैं, उनका रेल बजट में घोषणा किया जाना उपयुक्त नहीं है ।
आजादी से तकरीबन 150 साल पहले जब अंग्रेजी हुकूमत हमसे हमारी आजादी छीन चुका था और बिना रहम के हम पर कोड़े बरसा रहा था उस वक्त जिस वक्त आजादी महज एक सपना था और एक आम इंसान का रेल की सवारी कर पाना एक ख्वाब । आज मुझे इस बात की तसल्ली है कि हम एक बुरे दौर से बाहर निकल आए और आज कम से कम इस आजाद देश के हर तबके, हर धर्म, हर जाति के लोगों के पास ये अधिकार भी है,ये सुविधा भी और ये आजादी भी की वो रेलयात्रा कर सकते हैं ।
आजादी से पहले जब रेल गाड़ियां चलती थी तब उनमें चार श्रेणियाँ होती थी फर्स्ट क्लास, सेकंड क्लास, थर्ड क्लास और फोर्थ क्लास । पहली 2 श्रेणियों पे तो हमेशा अंग्रेजों का सर्वाधिकार रहा और बाकी बची 2 श्रेणियों को छोड़ दिया गया,ये बोल कर कि इसमें इस देश का कैटल क्लास सफर करेगा । आज इसके लिए भी उन तमाम सरकारों को मैं दाद देना चाहता हूँ जिनके प्रयास से आज हम अंग्रेजों द्वारा स्थापित उस गुलाम मानसिकता से बाहर निकल पाए । आज न ही सिर्फ गरीब रथ जैसी ट्रेनों के कारण देश का हर तबका रेल में सफर कर पा रहा है अपितु वातानुकूलित कोच में सुविधापूर्ण सफर कर पा रहा है । वातानुकूलित कोच जो आम लोगों के लिए एक सपना भर हुआ करता था,आज सरकार के प्रयास से ही हकीकत बन पाया है ।
मैं बजट में दिए गए आंकड़ों की बौछार नहीं करना चाहता, मेरे योग्य साथियों के द्वारा बड़े विस्तार से चर्चा की जा चुकी है । बजट पढ़ने के बाद स्पष्ट धारणा बनेगी कि ये एक और विकास परक और निरन्तरता का बजट है ।
मैं माननीय रेल मंत्री जी को बधाई देना चाहता हूँ कि वे अपने प्रोफेशन का पूरा उपयोग कर रेलवे को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का काम कर रहे हैं । पीपीपी मोड पर कई वर्षों से रेलवे की विभिन्न परियोजनाएं चलती आ रही हैं, लेकिन जब से रेल मंत्री के रूप में श्री पीयूष गोयल साहब आए हैं तब से रेलवे को विकास की नई गति प्रदान की गई है,जिसमें सुरक्षा को महत्वपूर्ण मानते हुए विकास कार्य किए जा रहे हैं ।
पूरा विश्व प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की मार झेल रहा है । ऐसे में विश्व के सबसे बड़े रेल नेटवर्क भारतीय रेल का ग्रीन एनर्जी इस्तेमाल किया जाना अपने-आप में अभूतपूर्व कदम है । रेलवे विद्युतीकरण, 2013 के मुकाबले 6 गुणा कार्य सम्पन्न हो गया है । 2021-22 तक रेलवे शत-प्रतिशत विद्युतीकृत हो चुकेगा । रेलों में विद्युत ऊर्जा पैदा करने के लिए आज रेलों के छतों पर सौर ऊर्जा पैनल लगाए जा रहे हैं ।
स्टेशनों का सौन्दर्यीकरण को लेकर रेलवे में पिछले पांच वर्षों में अभूतपूर्व कार्य हुए हैं । यह कहना गलत नहीं होगा कि स्वच्छ भारत अभियान का प्रभाव सबसे ज्यादा रेल और रेलवे स्टेशनों पर देखने को मिला है । आज स्टेशन एलईडी लाइटों से जगमगाते दिख रहे हैं, स्टेशनों पर स्थानीय कलाकृतियों से सजी दीवारें पर्यटकों और यात्रियों का मन मोह रही हैं । अभी हाल ही में फ्रांस के साथ स्टेशनों के सौन्दर्यीकरण को लेकर करार किया गया है जिसमें हबीबगंज (मध्य प्रदेश) गांधीनगर (गुजरात) दोनों स्टेशनों को विश्वस्तरीय स्टेशन बनाने का कार्य किया जा रहा है । जयपुर शहर को यूनेस्को वर्ल्ड हैरिटेज का दर्जा अभी हाल ही में दिया गया है । मैं माननीय रेल मंत्री जी से अनुरोध करना चाहूंगा कि जयपुर के रेलवे स्टेशन को भी विश्व स्तरीय रेलवे स्टेशन बनाने का कार्य किया जाए ।
माननीय रेल मंत्री जी के कार्य संभालने से पूर्व रेल दुर्घटनाओं की मानो झड़ी सी लगी हो, इनके कार्यकाल से रेल दुर्घटनाओं के साथ-साथ दुर्घटना में होने वाली मृत्युदरों में भारी गिरावट आई है । पिछले पांच साल में रेल दुर्घटना में मृत्युदर में 81 प्रतिशत की कमी देखने को मिली है । देशभर में रेलवे क्रॉसिंग पर होने वाली दुर्घटनाओं पर कमी तो शून्य के बराबर हो गई है, क्योंकि सम्पूर्ण भारत में लेवल रेलवे क्रॉसिंग पर या तो ओवर ब्रिज बना दिए गए हैं या अंडर ब्रिज । यह कार्य केवल हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र भाई मोदी जी के कुशल नेतृत्व के कारण ही मुमकिन हो सका ।
रेल मंत्री जी की नए भारत को लेकर नई सोच को लेकर राष्ट्रीय रेल संरक्षा कोष की स्थापना गई है, जिससे दुर्घटना होने पर पीड़ित परिवार को त्वरित आर्थिक सहायता मिल सकेगी । नई सोच को आगे बढ़ाने के क्रम में देश में पहली बार रेल कम रोड ब्रिज की शुरूआत की गई, जिसके अंतर्गत सबसे लम्बा 4.94 कि.मी. ब्रह्मपुत्र नदी पर रेल रोड ब्रिज की शुरूआत हो सकी । इसी कड़ी में भारत को तेज रफ्तार प्रदान करने के लिए वन्दे भारत जैसी ट्रेनों की शुरूआत की गई । मैं माननीय प्रधानमंत्री जी और रेल मंत्री जी को धन्यवाद देना चाहूंगा कि उनके नेतृत्व में भारत ऐसा तीसरा देश है जिसमें नेशनल रेल ट्रांसपोर्ट विश्वविद्यालय की शुरूआत की गई है, आज इस विश्वविद्यालय में 103 विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं । मुझे आशा है जल्द ही भारत में बुलेट ट्रेन का सपना भी साकार हो सकेगा ।
मालगाड़ी का देश के विकास में भागीदारी है इसमें रेलवे और इन्वेस्ट करने की योजना बना रहा है, इसके लिए 1.43 लाख करोड़ और निवेश करने की योजना बनाई जा रही है,इसके लिए मैं माननीय रेल मंत्री जी की दूरदृष्टि का अभिनन्दन करता हूं । मालगाड़ियों के निर्बाध आवागमन के लिए मुम्बई से दिल्ली के बीच दिल्ली-मुम्बई इंडस्ट्रीयल कोरिडोर की स्थापना की जा रही है । मुझे खुशी है इस महत्वपूर्ण परियोजना का एक चरण पूर्ण कर लिया गया है और दूसरा चरण जल्द ही पूर्ण कर लिया जाएगा । दूसरे चरण का मुख्य भाग मेरे संसदीय क्षेत्र पाली से होकर लगभग 100 कि.मी. गुजरता है । इससे पाली लोक सभा क्षेत्र में विकास अवश्य होगा ।
ट्रेन में रेलवे केटरिंग व्यवस्था को जिस हिसाब से सुदृढ़ और नियोजित किया गया है, वो सराहनीय है । ट्रेन के अंदर बेचे जाने वाले हर खाद्य सामग्री पर एमआरपी के प्रिंट को अनिवार्य करके सरकार ने अपनी पारदर्शिता का उत्तम उदाहरण पेश किया है । ऑनलाइन केटरिंग सिस्टम की पहल ने यात्रियों के सफर को और आसान कर दिया है । कृत्रिम बुद्धिमता अर्थात् आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करके ट्रेनों के अंदर बने किचन में तैयार किए जाने वाले खाद्य व्यंजनों की गुणवत्ता और साफ-सफाई की निगरानी कर सकना,ना ही सिर्फ हमारे माननीय प्रधानमंत्री और रेल मंत्री की दूरदर्शिता का परिणाम है अपितु विज्ञान और उसके सफल उपयोग से मुमकिन हो सकने वाले चमत्कार का एक उदाहरण भी है ।
डिजिटल इंडिया के अंतर्गत रेल दृष्टि जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का प्रक्षेपण सूचनाओं के बेहतर आदान-प्रदान हेतु शुरू किया गया एक सराहनीय कदम है ।
पुरानी पड़ी बोगियों का इस्तेमाल उन लोगों के लिए भी किया जाना चाहिए जो बेघर हैं या फिर रैन-बसेरों में गुजर बसर करके मौसम की मार सहने के लिए मजबूर हैं इसके अतिरिक्त गांवों में छोटी नदी व नालों पर पुलों के रूप में इस्तेमाल एक प्रशंसनीय कदम है । रेल मंत्रालय द्वारा पुरानी बोगियों का इस्तेमाल करने की पहल ना ही सिर्फ प्रशंसनीय है अपितु इसके मामध्य से सरकार नए बोगियों में निवेश के लिए धनराशि भी एकत्रित कर सकती है ।
टूरिस्ट को बढ़ावा देने के लिए रामायण एक्सप्रेस, पंज तख्त एक्सप्रेस और बुद्धिस्ट सर्किट ट्रेन चालू हुई है । मेरा अनुरोध है कि जैन धर्म के प्रमुख तीर्थ स्थल के रणकपुर के लिए भी देश के अन्य हिस्सों से ट्रेन का संचालन प्रारम्भ किया जाए ।
मैं अपने लोक सभा क्षेत्र की सबसे पुरानी और आवश्यक मांग के बारे में बताना चाहूंगा कि 1997 में तत्कालीन रेल मंत्री श्री रामविलास पासवान जी द्वारा जोधपुर जिले की बिलाड़ा से बर नई रेल लाइन की घोषणा की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा कि उक्त योजना का शिलान्यास किया जा चुका है, लेकिन कार्य अभी तक प्रारम्भ नहीं हो सका । बिलाड़ा से बर की दूरी केवल 40 कि.मी. मात्र है, यदि इन दोनों को रेलवे लाइन से जोड़ दिया जाता है तो हजारों की संख्या में लोगों को रेल सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा व जोधपुर-जयपुर-दिल्ली की दूरी भी बहुत कम होगी तथा जोधपुर से अजमेर को बेहतर कनेक्टिविटी मिल सकेगी । इस संबंध में रेल मंत्रालय द्वारा सर्वे भी कराया जा चुका है । रेलवे बोर्ड द्वारा इसे सहमति के साथ प्लानिंग कमीशन में भेज दिया गया था, लेकिन प्लानिंग कमीशन द्वारा इस योजना को "कॉमर्शियली नॉट वायबल " बताकर छोड़ दिया गया । वहां लाईम स्टोन और सीमेंट के उद्योग विकसित हो चुके हैं । यदि पुनः सर्वे करवाया जाएगा तो मुझे पूरा विश्वास है कि बिलाड़ा-बर रेल लाईन कॉमर्शियली वायबल भी होगी और सोशली वायबल भी । माननीय रेल मंत्री जी से अनुरोध है कि वर्ष 1997 में की गई घोषणा का क्रियान्वयन करने की कृपा करें,ताकि इस छोटे रेल लिंक के माध्यम से मेरे लोक सभा क्षेत्र पाली के हजारों लोगों को फायदा पहुंचाया जा सकें ।
मेरे लोक सभा क्षेत्र पाली (राजस्थान) से होकर गुजर रहे डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए बताना चाहूंगा कि पाली स्थित बगडी नगर स्टेशन के पास गेल संख्या 50-सी पर उत्तर पश्चिमी रेलवे ट्रैक हेतु अंडरब्रिज बनना प्रस्तावित है, जिसकी चौड़ाई व ऊंचाई 2 x 4.5 x 5 है ।
बगडी नगर पाली जिले का सबसे बड़ा राजस्व व कृषि आधारित क्षेत्र है, यहां उप-तहसील कार्यालय, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, पटवारी ट्रेनिंग सेंटर,अनेक शैक्षणिक संस्थान, सामुदायिक चिकित्सालय, पशु चिकित्सालय,पुलिस थाना,डाकघर, बैंक आदि है ।
इस क्षेत्र में मुख्यतः मेंहदी, गेहूं, मक्का,बाजरा व सनाय पत्ती की खेती की जाती है । किसान व काश्तकार कृषि उपज को बड़े-बड़े ट्रकों के माध्यम से पाली जिले में स्थित सोजत कृषि मंडी तक ले जाते हैं, जो रास्ता इसी प्रस्तावित अंडर ब्रिज से होकर निकलता है,इसके अतिरिक्त इस मार्ग से लगभग 800-1000 वाहन प्रतिदिन आते-जाते हैं । बड़े वाहनों का प्रस्तावित अंडर ब्रिज के नीचे से निकलना मुश्किल होगा तथा जाम की स्थिति भी बनी रहेगी ।
अतः इस संबंध में पुनः सर्वे करवाकर अंडरब्रिज के स्थान पर ओवरब्रिज निर्माण करने संबंधी कदम उठाने की कृपा करें, ताकि स्थानीय लोगों विशेषकर किसानों को समस्या का सामना न करना पड़े ।
रेल यात्रियों की सुविधाओं के लिए सुझाव इस प्रकार हैं:-
(1) दूरसंचार के क्षेत्र में क्रान्तिकारी परिवर्तन के कारण मोबाईल का प्रयोग प्रायः प्रत्येक रेलवे यात्री द्वारा किया जाने लगा है । अतः मैं यह मांग करता हूं कि प्रत्येक रेलगाड़ी में एवं प्रत्येक कोच में मोबाईल चार्ज करने की सुविधा उपलब्ध की जाए ।
(2) प्रत्येक रेलगाड़ी के दो कोच के बीच में पानी का स्टैंड स्थापित हो, जिसमें कम से कम चार नल लगे हों । क्योंकि प्रायः स्टेशनों पर देखा गया है कि जो पैक पानी की बोतल बेचते हैं उनकी मिलीभगत से अधिकांशतः रेलवे के पानी पीने के नल बंद करा दिए जाते हैं ।
(3) प्रत्येक रेलगाड़ी के प्रत्येक कोच में पीपीपी मोड के अंतर्गत वाटर कूलर लगाया जाए ताकि यात्रियों को ठण्डा पानी पीने के लिए मिल सके ।
(4) जहां पर रेलवे का जंक्शन होता है, वहां पर चार-पांच रेलगाड़ियां खड़ी करने के कारण चालक जो हॉर्न बजाता है उसमें दुविधा रहती है कि किस ट्रेन का हार्न बजा । अतः मेरा यह सुझाव है कि प्रत्येक रेलगाड़ी में एक से अधिक हॉर्न लगे होने चाहिए जिससे यात्री तुरन्त सतर्क हो सके ।
(5) रेलगाड़ी में स्टेशन के आने से पहले यात्रियों को स्टेशन की सूचना अनाउंसमोट के माध्यम से दिल्ली मेट्रो के तर्ज पर दी जानी चाहिए ।
(6) प्रत्येक रेलगाड़ी के प्रत्येक कोच में एक हिस्सा क्लोक रूम के रूप में विकसित किया जाए, जिससे यात्रियों के सामान की सुरक्षा की जाए । यात्रियों का सामान सुरक्षित रखने के एवज में यात्रियों से चार्जेज वसूल किया जाए, जिससे सामान की सुरक्षा करने वाले कर्मी तथा केबिन किराया रेल विभाग को प्राप्त हो सके ।
(7) एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म पर जाने-आने के लिए लगी सीढ़ियों पर दोनों ओर रैम्प बनाए जाएं ताकि यात्री अपनी ट्रोली को उस पर चलाकर आसानी से ले जा सके ।
सीमित संसाधन को ध्यान में रखते हुए रेल मंत्रालय एवं इसकी कार्यप्रणाली में सुधार लाकर एक तरफ धनराशि जुटाई जाएगी और दूसरी तरफ पीपीपी मॉडल के अंतर्गत निजी निवेश के द्वार खोले गए हैं । ये स्पष्ट करते हुए रेलवे का निजीकरण नहीं किया जाएगा, लेकिन रेल सेवाओं में विस्तार एवं गुणवत्ता में सुधार करने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी करना एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है । मैं इसके लिए भी माननीय रेल मंत्री जी को बधाई देता हूं । मुझे पूरी उम्मीद है कि रेल सुविधाओं के साथ-साथ निजी क्षेत्र के माध्यम से पुराने रेलवे स्टेशनों का विकास,नई लाइनों का विस्तार एवं माल यातायात के क्षेत्र में भी निजी क्षेत्र की भागीदारी यदि सुनिश्चित की जाती है, तो इन क्षेत्रों में हो रही धीमी गति में तेज रफ्तार लाई जा सकती है ।
रेल बजट से पूर्व मैंने स्वयं माननीय रेल मंत्री जी से मिलकर मेरे लोक सभा क्षेत्र संबंधी निम्नलिखित सुझाव दिए थे, मुझे पूरी उम्मीद थी कि रेल मंत्रालय द्वारा पाली जैसे दूर-दराज के क्षेत्रों में रेल सुविधाओं का ध्यान रखा जाएगा,लेकिन उन पर कार्यवाही नहीं की जा सकी, जो निम्न प्रकार हैः-
1. जोधपुर से मारवाड़ जंक्शन के बीच वाया लूणी व पाली मेमू/डेमू ट्रेन का संचालन किया जाए ।
2. जोधपुर/मारवाड़ जंक्शन से बैंगलोर व चैन्नई (साउथ) जाने वाली साप्ताहिक ट्रेनों को डेली किया जाए ।
3. पाली जिले का अधिकांश क्षेत्र रेलवे सुविधाओं से वंचित है, जिसमें बिलाड़ा,जैतारण एवं बर ऐसे क्षेत्र है,जिन्हें रेल सुविधा का पिछले कई सालों से आश्वासन मिलता रहा है । बिलाड़ा से बर की दूरी केवल 40 कि.मी. है, यदि इन दोनों को रेलवे लाईन से जोड़ दिया जाता है तो हजारों की संख्या में लोगों को रेल सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा व जोधपुर-जयपुर-दिल्ली की दूरी भी बहुत कम हो जाएगी । इस संबंध में रेल मंत्रालय द्वारा सर्वे भी कराया जा चुका है । अतः आपसे अनुरोध है कि बजट सत्र के दौरान बिलाड़ा से बर रेलवे लाईन को जोड़ने के प्रस्ताव को स्वीकृत करते हुए बजट घोषणा में सम्मिलित करने की कृपा करें । बिलाड़ा से बर नई रेल लाईन बिछाई जाए, जिसका सर्वे पूर्व में भाजपा सरकार द्वारा कराया जा चुका है ।
अन्त में, मैं माननीय वित्तमंत्री जी को इस क्रान्तिकारी बजट को प्रस्तुत करने के लिए बधाई देता हूं और उम्मीद करता हूं कि मेरे द्वारा दिए गए सुझावों पर शीघ्रता से ध्यान देते हुए कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी और मैं वर्ष 2019-20 के लिए रेल मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदान की मांगों का पुरजोर समर्थन करता हूं ।
श्री मनोज कोटक (मुम्बई उत्तर-पूर्व): माननीय सभापति महोदय, आपने मुझे इस रेलवे की अनुदानों की माँगों पर बोलने का मौका दिया,मैं आपका आभारी हूँ ।
मैं उस क्षेत्र से आता हूँ, जहाँ पर रेलवे के इतिहास में हिन्दुस्तान की पहली ट्रेन दौड़ी थी । मैं उस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता हूँ । वह ट्रेन मुम्बई से थाने तक दौड़ी थी । सेन्ट्रल रेलवे जिस क्षेत्र में आता है, मैं उसी क्षेत्र का सांसद हूँ । जो बातें विभिन्न सदस्य बता रहे थे कि मुम्बई सब-अर्बन रेलवे द्वारा प्रतिदिन 80 लाख पैसेंजर्स का आवागमन होता है, जो संख्या में सबसे ज्यादा है । इस बजट में पिछले कई सालों में अलग-अलग रेल मंत्रियों ने मुम्बई के सब-अर्बन रेलवे के बारे में, जब-जब केन्द्र में एनडीए और भारतीय जनता पार्टी की सरकार आई, चाहे माननीय मधु दण्डवते जी, माननीय रामभाऊ नाइक जी,सुरेश प्रभु जी या पीयूष गोयल जी हों, उन्होंने मुम्बई सब-अर्बन रेलवे के बारे में अच्छा रुख रखा । अच्छी तरह से मुम्बई सब-अर्बन रेलवे चला, क्योंकि उनको विषय की जानकारी थी, वे मुम्बई के लोगों की समस्याओं को समझते थे ।
इस देश में एमयूटीपी फ़ेज-थ्री ए के अंतर्गत 33 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान पहली बार हुआ । माननीय मोदी जी के नेतृत्व में जो सरकार बनी है, जो आम आदमी की सरकार है, उन्होंने मुम्बईकरों की बात को भी सुना और उसे महत्व दिया । 33 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान हुआ,जिसके कारण सारे प्रोजेक्ट्स अपने समय पर पूरे होने जा रहे हैं । रेलवे स्टेशनों पर तो सुविधाएँ मिलीं, लेकिन सब-अर्बन रेलवे की जो सबसे बड़ी माँग थी कि 12 डिब्बे के रेक्स को 15 डिब्बे का किया जाए और उसके बाद सभी प्लेटफार्म्स की लम्बाई बढ़ाई जाए ताकि 15 डिब्बे की रेलगाड़ियाँ हर स्टेशन पर रुकें ।
इस क्षेत्र में लम्बे-से-लम्बा रूट 121 किलोमीटर का है, जो छत्रपति शिवाजी टर्मिनस से कसारा की ओर जाता है । यह सबसे लम्बा रूट है । मैं समझता हूँ कि जब इंसान अपने घर से सबेरे निकलता है और रात को अपने घर पहुँचता है,तो वह घर पर चार-पाँच घंटे रुक सकता है । अगर कोई मुम्बई शहर में नौकरी करता है या अपने व्यवसाय के लिए आता है, लेकिन उसका सबसे ज्यादा समय लोकल ट्रेन में ही बीतता है,जिसमें उसे कम-से-कम छह घंटे ट्रैवल करना पड़ता है, तीन घंटे जाने में और तीन घंटे आने में । जिन सुविधाओं का अभाव पिछले कई सालों से था,वह माननीय मोदी जी की सरकार आने के बाद सुरेश प्रभु जी और माननीय पीयूष गोयल जी ने सब-अर्बन रेलवे के लिए भारी-भरकम छूट की,लेकिन कुछ और छोटे-छोटे विषय हैं, जिनसे मुम्बई के सब-अर्बन रेलवे को और गतिमान किया जा सकता है, इसकी समस्याओं को सुलझाया जा सकता है ।
तीन स्थानों पर आरओबी बनाना बाकी है, जिसके कारण ट्रेन्स की गति रुकती है । ये तीनों स्थान- कलबा,आम्बीवली और दीवा हैं । इन तीनों जगहों पर लेवल क्रॉसिंग का काम खत्म कर दिया जाए,तो सब-अर्बन रेलवे अपनी पूरी गति से दौड़ेगी ।
माननीय मंत्री जी ने कैब सिग्नलिंग सिस्टम शुरू की है । इस प्रणाली के कारण दो ट्रेन्स के बीच की दूरी कम होगी । इससे ट्रेन्स बढ़ाई जा सकती हैं । इस धारणा के कारण सब-अर्बन रेलवे की गति और बढ़ेगी,वहाँ के लोगों को और सुविधाएँ मिलेंगी और ज्यादा-से-ज्यादा ट्रेन्स प्रोवाइड किये जा सकेंगे ।
18.54 hrs (Dr. Kakoli Ghosh Dastidar in the Chair) जहाँ पर इस तरह के काम लिये गये, पूरे मुम्बई-एमएमआर रीजन में मेट्रो रेल का एक जाल अलग-अलग जगहों पर बिछ रहा है । मुम्बई शहर में सात मेट्रो रेल के काम शुरू हैं, एमएमआर रीजन में अन्य लाइनों के काम भी शुरू हैं । इन सारी लाइनों की इंटिग्रेटेड टिकट सुविधा,जैसे रेलवे,मेट्रो रेल और बसेस में लोगों को एक टिकट के द्वारा ही चलने की सुविधा मिले ।
पैसेंजर को एक टिकट या एक पास के द्वारा इन सारी लाइनों का उपयोग करने को मिले, ऐसी रेलवे योजना है । मैं रेलवे विभाग को इसके लिए बधाई देता हूं कि रेलवे ने इस तरह की योजना सोची है । मुझे लगता है कि लंबी दूरी की जो गुड्स ट्रेन्स हैं, जो नॉर्थ से साउथ बाउंड हैं, ये ट्रेन्स कहीं-कहीं सब-अर्बन रेलवे को क्रॉस कर के जाती हैं । मेरी इस मांग के साथ यह गुज़ारिश भी है कि ये जो लंबे रूट्स की गुड्स ट्रेन्स हैं, ये मुंबई-पुणे रेल लाइन से पास होती हैं । बरसात में कभी-कभी घाट के अंदर ट्रेनों के डिब्बे उतर जाने या लैंड स्लाइड की घटनाएं होती हैं । इस कारण पूरे सब-अर्बन रेलवे का ट्रेन टाइमटेबल चरमरा जाता है । इससे पूरे सब-अर्बन रेलवे को तकलीफ होती है । इसलिए इसको वाया डहाणू-नासिक या नंदना धुले से निकाला जाये । इस तरह मुंबई सैक्शन के ऊपर से इसके लिए बाइपास बनाया जाए, जिससे मुंबई सब-अर्बन रेलवे के ऊपर जो लोड आता है, वह लोड न आए ।
मैडम,मुंबई देश की आर्थिक राजधानी है । सैंट्रल रेलवे और वेस्टर्न रेलवे में इस तरह की जो ट्रेनें चलती हैं, उनके अंदर हम सुविधाएं देते हैं । इसके अंदर रेलवे स्टेशनों का एक पूरा नैटवर्क है । रेलवे ने पीपीपी मॉडल पर रेलवे स्टेशनों का विकास करने का तय किया है,इसके लिए मैं सरकार का अभिनंदन करता हूं । इसके साथ-साथ रेलवे ने,मुंबई शहर में जितने रेलवे स्टेशंस हैं, उनका एक ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी द्वारा सर्वे करना चाहिए, जिसके कारण पता चल सके कि हम इनके ऐसेट्स को किस तरह से कमर्शियली यूटिलाइज़ कर सकते हैं । इस कमर्शियल यूटिलाइज़ेशन से रेवेन्यू तो मिलेगा ही, इसके साथ पैसेंजरों को भी वहां ज़्यादा सुविधाएं प्रदान हो पाएंगी । मुंबई के लोगों को इससे आसानी होगी । मुंबई शहर सब-अर्बन रेलवे का नेटवर्क है ।
मैडम,मैं अपनी बात एक मिनट में कनक्लूड कर रहा हूं । हमारे यहां से कोंकण में जाने वाले भी काफी लोग हैं । कोंकण में जाने वाले लोगों की सुविधा के लिए डाउनसाइड में भांडुप एक ऐसा रेलवे स्टेशन है, जहां सुबह के वक्त सब-अर्बन रेलवे का ट्रैफिक लोड कम होता है, इसलिए डाउनसाइड में ट्रेन को वहां स्टॉपेज मिले,यह मैं आपके माध्यम से मांग करता हूं । आपने मुझे ये सारी बातें सदन में रखने की अनुमति दी, इसके लिए आपका धन्यवाद ।
*श्री ओम पवन राजेनिंबालकर (उस्मानाबाद): रेल बजट की अनुदानों की मांगों वर्ष 2019-2020 के लिए मैं रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल जी को धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने रेलवे को और रेल यात्रा को अधिक सुचारू और सुगम बनाने के लिए बहुत अधिक प्रयास किए हैं और यात्रियों की सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया है ।
बजट 2019 में सोलापुर-तुलजापुर-उस्मानाबाद के बीच 84.44 किलोमीटर की नई लाईन परियोजना को 904.92 करोड़ रुपए की लागत पर स्वीकृति दी गई थी । हमारे देश के प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेन्द्र मोदी जी ने सोलापुर में हुई चुनाव रैली में इस रेल मार्ग के निर्माण के लिए आश्वस्त किया था और उन्हीं के कर-कमलों से इस योजना का शुभारंभ हुआ था । इस मार्ग पर आई तुलजाभवानी मंदिर तीर्थ स्थल है और भक्तगण यहां पर हमेशा आते हैं । दशहरे के दौरान लगभग 17 से 18 लाख भक्तगणों का आवागमन यहां पर होता है ।
मैं सरकार से मांग करता हूं कि सोलापुर और उस्मानाबाद के बीच रेल लाइन बिछाने का काम जल्द से जल्द शुरू करने हेतु इस पर आवश्यक कार्रवाई करें और बजट में भी इस मार्ग के पूरा होने हेतु ज्यादा से ज्यादा धनराशि का प्रावधान करें ।
मैं सरकार से और एक महत्वपूर्ण मांग करता हूं कि लातूर और नांदेड़ के बीच में एक नई लाइन बिछाया जाना अति आवश्यक है । इस लाइन को बिछाने से मुम्बई से विदर्भ तक एक अंतर बहुत कम हो जाएगा । साथ ही कनैक्टिविटी भी बढ़ जाएगी । इसका फायदा रेलवे के राजस्व को बढ़ाने में होगा ।
मेरा रेल मंत्री जी से एक और अनुरोध है कि पुणे और लातूर के बीच में एक नई इंटरसिटी ट्रेन की भी आवश्यकता है । इसे ध्यान में रखते हुए इस नई ट्रेन को जल्द से जल्द शुरू करवाया जाए ।
लातूर और मुम्बई के बीच में चलने वाली लातूर एक्सप्रेस ट्रेन में उस्मानाबाद स्टेशन से चढ़ने वाले यात्रियों को बिल्कुल भी जगह नहीं मिलती और भीड़ होने के कारण उनका आवागमन काफी परेशानी भरा हो जाता है । अतः मेरा अनुरोध है कि इस ट्रेन में अतिरिक्त सामान्य डिब्बे जोड़े जाने की भी आवश्यकता है ताकि यात्रियों को सुविधा प्रदान हो सके ।
मेरे संसदीय क्षेत्र उस्मानाबाद के अंतर्गत कलंब रोड़ और ढोकी रेलवे स्टेशन आते हैं । इन स्टेशनों से लगभग हजारों यात्री प्रतिदिन मुम्बई तथा बाकी जगहों के लिए ट्रेन से आवागमन करते हैं जबकि मुम्बई से लातुर के बीच गाड़ी संख्या 22144, 22143,17613, 17614, 11012,11011, 11415, 11416 चलती है और इन गाड़ियों को कलंब और उस्मानाबाद (ढोकी तालुका के अंतर्गत आने वाले स्टेशन पर ठहराव (स्टापेज नहीं होने के कारण स्थानीय यात्रियों को अनेक परेशानियों का सामाना करना पड़ता है । मैं माननीय रेल मंत्री जी से लातुर से मुम्बई के बीच चलने वाली उपरोक्त गाड़ियों को उपरोक्त स्टेशनों में से एक स्टेशन पर ठहराव दिए जाने की मांग करता हूं ।
मेरे संसदीय क्षेत्र में कोल्हापुर से बिदर गाड़ी संख्या 11415 उस्मानाबाद, लातूर होते हुए कर्नाटक के बिदर जिले तक चलती है । यह रेलगाड़ी इस मार्ग से बंद होने की खबरें बीच में आई थी । इससे जनमानस,व्यापारी, भक्तगण, युवाओं छात्र-छात्राओं को काफी परेशानी होगी । यह कोल्हापुर-बिदर गाड़ी बंद करने की जगह यदि वहीं ट्रेन बिदर से आगे हैदराबाद तक चलाने से यात्रियों में बढ़ोतरी होगी । इससे ज्यादा लोग इस गाड़ी से यातायात कर सकते हैं और रेलवे के राजस्व में भी इजाफा होगा ।
उस्मानाबाद रेलवे स्टेशन पर मानसून के दिनों में खाद और अनाज का आवागमन होता है और बरसात के दिनों में शेड न होने के कारण खाद एवं अनाज का काफी नुकसान होता है । इसलिए रैक प्वाइंट पर शेड और फ्लोरिंग की व्यवस्था होना नितांत आवश्यक है ।
अतः मेरा आग्रह है कि रैक प्वाइंट के स्थान पर शेड और फ्लोरिंग की व्यवस्था शीघ्रातिशीघ्र होनी चाहिए, यह महत्वपूर्ण मांग रखता हूं और मैं रेल बजट की अनुदानों की मांगों का वर्ष 2019-20 का समर्थन करता हूं ।
SHRI SYED IMTIAZ JALEEL (AURANGABAD): Madam, undoubtedly, Railways is the lifeline of lakhs and lakhs of passengers who travel the length and breadth of this country every day.
For the past so many Budgets now, what we have been witnessing is that new announcements of new projects are made involving crores of rupees whereas what we see are the pending projects which need to be completed. There are ‘n’ number of projects that have been languishing for years together because of lack of funds. We feel that those incomplete projects need to be taken up on priority.
I have a perfect case for this. There is a 165 km railway line from Jalna to Khamgaon which has been pending for over twenty-five years due to lack of funds. This route is of great importance for improving the connectivity of the entire region of Marathwada. We also need funds for completion of the three-phased model railway station project at Aurangabad. So far, only one phase of the project has been completed and this is running over ten years late; it is running ten years late of its set deadline because of lack of funds.
We have always demanded a pit line at Aurangabad which is a must for connecting the city to all important cities across the country. Due to absence of pit line, long route trains are not being given to Aurangabad which is home to the historical monuments of Ajanta and Ellora Caves besides being a major industrial city.
Hon. Minister, I would like to draw your attention to the long pending demand for shifting the Nanded Division from the South-Central Railway to the Central Railway Division in Mumbai. We feel that we are being subjected to injustice because our long pending demands are not being fulfilled by our South-Central Railway. The railways in Marathwada, particularly, in Aurangabad has changed little in the past few decades. Apart from converting the meter gauge into broad gauge and renovating some of the railway stations, nothing much has happened. My concern is that the city is losing a lot of revenue from the tourism and industrial point of view because we do not have proper connectivity as far as the railways is concerned.
19.00 hrs मैं रेल मंत्री साहब से अनुरोध करूंगा कि मेरी 4-5 मांगे हैं, उनके ऊपर गौर किया जाए । मैं रेल मंत्री साहब से कहना चाहूंगा कि महाराष्ट्र का मराठवाड़ा वह हिस्सा है, जिसे हम पिछड़ा कहते हैं । यदि सरकार इसकी तरफ ध्यान नहीं देगी और हम पिछले 70 सालों से देखते आ रहे हैं कि इस इलाके की अनदेखी की गई है । यहां के लोग उम्मीद लगाए बैठे हैं कि जो आपका नारा है, ‘सबका साथ विकास’, से इस बार आप मराठवाड़ा के साथ इंसाफ करेंगे । हमारी यह मांग है कि मनमाड से परभणी के बीच रेलवे मार्ग की दोहरी लाईन का काम शीघ्र ही प्रारम्भ करें । साथ ही साथ इलैक्ट्रिफिकेशन का काम मंजूर किया जा चुका है, उसका काम जल्द से जल्द प्रारम्भ किया जाए । दौलताबाद से चालीसगांव नई लाईन बिछाने का प्रस्ताव मंजूर किया गया है । नई लाईन का सर्वेक्षण पूरा हो गया है । दौलताबाद से चालीसगांव महज80 किलोमीटर का नया रेलवे मार्ग जल्द से जल्द बनाया जाए, ताकि पूरे क्षेत्र को इसका फायदा पहुंच सके । अगर औरंगाबाद रेलवे स्टेशन,देखा जाए तो पर्यटन की दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण है । यहां एक भी रेल औरंगाबाद से शुरू नहीं की गई है, जो रेल गुजरती हैं, वे गुजरती ही हैं । हमारी यह मांग है कि औरंगाबाद रेलवे स्टेशन से औरंगाबाद-अजमेर-जयपुर,औरंगाबाद-बैंगलौर,औरंगाबाद-उदयपुर के अलावा, औरंगाबाद-गोवा,औरंगाबाद-दिल्ली,औरंगाबाद–पुणे के मार्गों पर रेल शुरू की जाए । जहां पर लाईन नहीं है,वहां पर नई लाइनें डाली जाएं, ताकि पर्यटकों और उद्योगों को इसका भरपूर फायदा मिल सके ।
एक आखिरी मुद्दा औरंगाबाद शहर से ताल्लुक रखता है । औरंगाबाद के करीब एक मुकुंदवाड़ी रेलवे स्टेशन है । यह स्टेशन शहर के बीचों-बीच है । यह स्टेशन डी क्लास रेलवे स्टेशन में समावेश किया गया है । यहां से बड़ी संख्या में प्रवासियों का आना-जाना होता रहता है । मुम्बई, सिकन्दराबाद के अलावा कई महत्वपूर्ण शहरों में सबर्बन रेलवे स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेन को रुकवाने का प्रावधान किया गया है । हम चाहते हैं कि मुकुंदवाड़ी रेलवे स्टेशन, जो औरंगाबाद का है,वहां पर एक स्पेशल केस के रूप में विचार किया जाए और वहां भी तपोवन एक्सप्रेस, जनशताब्दी एक्सप्रेस और अन्य दूसरी ट्रेंस रुकवाई जाएं तो यकीनन वहां पर रहने वाले लोगों को फायदा होगा । हम उम्मीद करते हैं कि इस बार आप महाराष्ट्र के इस पिछड़े इलाके के साथ इंसाफ करेंगे । आपका बहुत-बहुत धन्यवाद ।
*श्री मितेश पटेल (बकाभाई) (आनंद): मेरे संसदीय क्षेत्र में मुम्बई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का कार्य प्रगति पर है । इस बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की सौगात क्षेत्र की जनता को देने के लिए माननीय प्रधानमंत्री जी एवं रेल मंत्री जी का हृदय से आभार । ऐसे प्रोजेक्ट न्यू इंडिया का सपना पूरा करने की दिशा में एक मजबूत कदम है ।
मेरे क्षेत्र के दो उद्योग इस प्रोजेक्ट से प्रभावित हो रहे हैं । उद्योगों के मालिक पूरे उद्योग के अधिग्रहण हेतु सहर्ष तैयार हैं । लेकिन अधिग्रहण नियमानुसार नहीं हो रहा है । यदि मालिक तैयार है तो पूरा उद्योग अधिग्रहित कर मुआवजा मिलना चाहिए, लेकिन इस प्रोजेक्ट में उद्योग तो पूरा बर्बाद हो रहा है लेकिन आधे उद्योग को अधिग्रहित कर मुआवजा आधे उद्योग का दिया जा रहा है जो न्यायोचित नहीं है ।
मैं माननीय रेल मंत्री जी से अनुरोध करता हूं कि नियमानुसार पूरी इंडस्ट्री का अधिग्रहण कर पूरे नुकसान का मुआवजा नियमानुसार देने हेतु संबंधित को आदेशित करें ।
धन्यवाद ।
श्री कमलेश पासवान (बासगाँव): सभापति जी, धन्यवाद । मैं आपके प्रति आभार प्रकट करता हूं, जो मुझे इस महत्वपूर्ण बजट पर बोलने का अवसर मिला है । इससे पहले भी सन् 2009 में रेल बजट पेश हुआ था । उस समय इस सदन के बहुत सारे साथी थे । माननीय रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल जी द्वारा सदन के पटल पर रखे गए रेल बजट पर के समर्थन में आपने मुझे अपनी बात रखने का मौका दिया है । वर्ष 2014 से यशस्वी माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में लोक कल्याणकारी सरकार का गठन हुआ । हिन्दुस्तान की जनमानस की लाइफलाइन मानी जाने वाली ट्रेन चरमराकर दम तोड़ने के लिए विवश होती जा रही थी, उस रेल व्यवस्था को नया जीवन मिला है । माननीय मोदी जी के नेतृत्व में आज माननीय रेल मंत्री जी ने रेलवे की दशा और दिशा को जनहित में सुधारने के लिए जो कदम उठाया है,उससे आने वाले वक्त में रेलवे अपने शीर्ष स्थान पर होगी ।
माननीय सभापति जी, रेल बजट पेश करते समय माननीय मंत्री जी के उद्बोधन में यह स्पष्ट है कि आगामी 10 वर्षों में सरकार रेलवे को सुलभ,सुगम और विश्वसनीय बनाने के लिए 50लाख करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है । जो अपने आप में सरकार द्वारा रेल यात्रियों और रेलकर्मियों के हित में दी जाने वाली योजनाओं के प्रति कटिबद्धता दर्शाती है । हमें लगता है कि आजादी के बाद पहली बार इतने बड़े स्तर पर रेलवे की व्यवस्था में सुधार करने के लिए कोई सरकार तत्पर दिख रही है । दुनिया में हमारा हिन्दुस्तान रेलवे से सफर करने वालों में सबसे अग्रणी स्थान रखता है । अमीर से लेकर मध्यम वर्ग तथा गरीबी में जीवनयापन करने वाला हर तबका रेल से यात्रा करता है । उसमें भी गरीब तबका और मध्यम वर्ग ट्रेन से अधिक सफर करता है । ट्रेनों की सुविधा बढ़ाने,उनका संचालन सही रखने और उनकी सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने से यह तय है कि सरकार मध्यम वर्ग और गरीब तबके के लोगों की यात्रा की सुविधा,सुरक्षा और समय का ख्याल रख रही है । मैं इसके लिए मोदी सरकार के प्रति आभार प्रकट करता हूं ।
माननीय सभापति जी, रेलवे जहां यात्रियों के आगमन के लिए उपयोगी है, वहीं व्यापार जगत के लिए भी रीढ़ का काम करती है । ट्रेनों के जरिए पूरे देश में सामानों की ढुलाई में भी व्यापारियों को सुविधाएं मिल सकें, इस पर हमारी सरकार अपना ध्यान केंद्रित किए हुए है । हम आपके माध्यम से माननीय रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल जी को धन्यवाद देना चाहते हैं कि मंत्री जी ने वर्ष 2019-20 के लिए रेल बजट में 65 हजार 837करोड़ रुपये का बजटीय आबंटन किया है जिससे यात्री सुविधाओं में 200प्रतिशत की वृद्धि हो गई है । इसमें नई लाइनों के लिए 7 हजार 255 करोड़ रुपये,गेज परिवर्तन के लिए 2 हजार200 करोड़ रुपये,दोहरीकरण के लिए 700 करोड़ रुपये दिए गए हैं ।
माननीय सभापति जी, मैं आपके माध्यम से माननीय रेल मंत्री जी का ध्यान अपने संसदीय क्षेत्र बांसगांव की ओर ले जाना चाहता हूं । मुझे याद है कि वर्ष2009 में जब आदरणीय ममता बनर्जी रेल मंत्री थीं, तो उस समय भी उन्होंने बांसगांव संसदीय क्षेत्र को रेल लाइन से जोड़ने की घोषणा की थी । मैं ऐसे क्षेत्र से आता हूं कि मुझे लगता है कि यदि 545 लोक सभाओं का चयन किया जाए, तो मेरा लोक सभा क्षेत्र ही ऐसा होगा जहां पर रेल लाइन नहीं है । सन्2000 से लेकर अभी तक मैं यह कह सकता हूं कि हर रेल बजट में मैंने अपनी बात को उठाने का काम किया है । मैं आदरणीय प्रधान मंत्री जी और आदरणीय पीयूष गोयल जी के प्रति आभार प्रकट करना चाहता हूं कि उन्होंने घोषणा ही नहीं की बल्कि सर्वे भी कराया । सर्वे कराने के बाद सन् 2019 के लोक सभा चुनाव में शिलान्यास करने के लिए समय भी दिया । इसी सदन में उन्होंने यह भी आश्वासन दिया था कि बांसगांव संसदीय क्षेत्र को रेलवे लाइन से जोड़ा जाएगा । उस समय आदरणीय श्री मनोज सिन्हा जी भी थे । वे गोरखपुर के चुनाव में भी गए थे । उन्होंने अपना कीमती वक्त भी दिया था और कहा था कि चुनाव से पहले इस रेल लाइन का शिलान्यास किया जाएगा । मैं आदरणीय मंत्री जी से यह निवेदन करना चाहता हूं कि मेरे संसदीय क्षेत्र को, जिसे पहले से700 करोड़ रुपये स्वीकृत हैं,उसे इस वित्तीय वर्ष के बजट में देने का काम करें । बहुत-बहुत धन्यवाद ।
SHRI RAMULU POTHUGANTI (NAGARKURNOOL): Respected Chairperson, Madam, thank you very much for giving me this opportunity to speak on the discussion on the Demands for Grants under the control of the Ministry of Railways for 2019-20 in the House today. For the first time, I am speaking with the blessings of our Nagarkurnool parliamentary constituency people and our hon. Chief Minister of Telangana, Shri K. Chandrashekar Rao.
I would like to draw the kind attention of the House regarding the need to sanction a new railway line from Gadwal to Macherla which belongs to my Nagarkurnool parliamentary constituency for which a survey was conducted in the year 2007-08. In this regard, I would like to request the Railway Ministry to put this new rail line project between Gadwal and Macherla having 151 kms. on the fast track and complete it as early as possible as a joint venture with adequate financial support of an estimated amount of Rs. 1160.47 crore.
This new railway line will take off from Gadwal and run via Wanaparthy, Nagarkurnool, Kalwakurthy, Achampet, Vanguru, Devarakonda Assembly segments and joins Thirumalagiri on the already sanctioned Nalgonda-Macherla line. This railway line is important as it is the dream of about 20 lakh people to travel on this route. This railway line will have a huge floating of passengers and will also help in generating considerable revenue. But this is pending for more than three decades.
During recent Lok Sabha elections, Shri Amit Shah, who is now the Union Home Minister, promised to get a new rail line between Gadwala to Macherla sanctioned in a public meeting at Mahabubnagar in Telangana. The Bhadrachalam-Sattupally-Kuruvi rail line project should be completed at the earliest by providing sufficient funds as this rail line connects both Telangana and Andhra Pradesh and the backward tribal area of Khammam district of Telangana.
I request the hon. Minister of Railways to sanction a new rail line from Gadwal to Macherla for which the people of my constituency will be grateful to him. I request him to sanction all the projects of Telangana. Thank you.
*SHRI ASIT KUMAR MAL (BOLPUR): Indian Railways is our pride. But Government of India has planned to privatise Railways step by step. The Finance Minister announced that within 2030 – Rs.50 lakh crore will be invested from outsourcing. The safety and security of the passengers have not been ensured. The Railways tracks are not maintained properly. Our State is totally deprived by the Central Government. No new projects, no new train and no new Railway line extension are declared in this Budget. Metro Rail of Kolkata is the oldest in India. The functioning of Metro Rail has reached the bottom level. There is no replacement of old coaches. No new coach as are added properly. Everyday there is apprehension in the minds of the passengers of the Kolkata Metro, whether the Metro Rail will operate or not. This Government is in a mood to sale out the entire Railway to the private sector.
श्री हनुमान बेनीवाल (नागौर): सभापति महोदया,सबसे पहले,आपने मुझे रेलवे की डिमांड पर बोलने का मौका दिया,इसके लिए आपका धन्यवाद ।
महोदया,मेरे से पूर्व वक्तताओं ने भी एक से एक विचार रखे और रेल के इतिहास के बारे में बताया है । निश्चित रूप से रेल अमीर से लेकर गरीब व्यक्ति तक के लिए यातायात का साधन है । हिन्दुस्तान की रेलवे विश्व की अनोखी रेल सेवा है । रेलवे का एक एम्पायर है । विश्व के पांच देश हैं,जिनकी रेल सेवा अच्छी मानी जाती है, उनमें हिन्दुस्तान की रेल सेवा को भी अच्छा माना गया है । निश्चित रूप से समय-समय पर रेल सेवाओं में सुधार के प्रयत्न भी किए गए हैं । हम देखते थे कि वर्ष 2000 से लेकर 2013 तक आपस में रेलों की भिड़ंत हो जाती थी, पटरियों में क्रैक होने से गाड़ियां उतर जाती थीं और बहुत दुर्घटनाएं हो जाती थीं । मैं यह नहीं कह रहा हूं कि वर्ष 2019 में दुर्घटनाएं नहीं हुई हैं,लेकिन दुर्घटनाओं में बहुत कमी आई है । इसके लिए मैं एनडीए की सरकार और प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी को धन्यवाद देना चाहूंगा ।
आप किसी भी रेलवे स्टेशन पर चले जाएं, आज जितनी साफ-सफाई मिलती है, जिस तरह की व्यवस्था है, उसको देखने से लगता है कि निश्चित रूप से बहुत बड़ा बदलाव और सुधार हुआ है । रेलवे के कर्मचारियों,रेलवे के खाली पदों को भरने,रेलवे मजदूरों और कुलियों के जितने भी काम थे,उन सबकी सरकार ने सुध ली है, मैं इसके लिए सरकार को बधाई देता हूं । मैं रेल मंत्री पीयूष गोयल साहब को भी बधाई देता हूं, पूर्व रेल मंत्री सुरेश प्रभु जी, जिन्होंने बहुत चुनौतियों के साथ रेल को आगे बढ़ाने का प्रयास किया और सुरेश सी. अंगड़ी जी, जो हमारे नौजवान मंत्री हैं, इनको भी धन्यवाद । आज मजबूती से बैठे हैं और इन्होंने कई लोगों को झेला भी है,इसके लिए भी इनको धन्यवाद ।
महोदया, 16 अप्रैल, 1857 को देश की पहली ट्रेन चलायी गयी थी । जेम्स वॉट ने भाप का इंजन बनाया था । पहली ट्रेन मुम्बई से ठाणे के बीच चली थी । उसके बाद से देश में रेल सेवा शुरू हुई और धीरे-धीरे रेल नेटवर्क बढ़ता गया । लेकिन दुर्भाग्य इस बात का है कि आजादी के 70 साल बाद भी, मैं किसी पर दोषारोपण नहीं करना चाहता हूं, लेकिन आज भी कई जिला मुख्यालय ऐसे हैं, कई ऐसे घनी आबादी वाले क्षेत्र हैं जो रेल से जुड़े हुए नहीं हैं । इसकी जिम्मेदारी निश्चित रूप से इस तरफ के लोगों को लेनी होगी,जिन्होंने 55-60साल तक इस देश पर राज किया ।
मैं प्रधान मंत्री जी को इस बात के लिए भी धन्यवाद देना चाहूंगा कि पहले एक दिन आम बजट आता था और बाद में रेल बजट आता था, लेकिन अब दोनों एक साथ कर दिए गए हैं । यह बहुत बड़ा कदम है, जिससे एक अच्छा मैसेज गया है । पहले आम बजट और रेल बजट को अलग बांट दिया गया था ।
महोदया, 22 हजार ट्रेन्स रोज चलती हैं और 15 लाख लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाती हैं । भारतीय रेल ने ऐतिहासिक रूप से देश के सामाजिक आर्थिक विकास में बहुत बड़ी भूमिका निभाई है । भारतीय रेल गम्भीर चुनौतियों से जूझ रही थी । ज्यादातर समय तक कांग्रेस की सरकार रही और जो गड्ढे खोदे थे, मोदी जी की सरकार ने उन गड्ढों को भरने का प्रयास किया है और विकास की एक बुलंद इमारत का निर्माण इस देश में शुरू किया । रेलवे को विकास के नए आयाम दिए ।
आज रेल सेवा पर आम आदमी का विश्वास बढ़ा है । आज आपको वह भीड़ नजर नहीं आएगी, जहां पर बहुत बड़ी लाइन में लगकर लोग धक्के खा रहे हैं । टिकट के लिए भी किसी लंबी कतार में नहीं लगना पड़ता है । आज हम किसी भी जगह पर बैठकर यह पता कर सकते हैं कि हमारी रेलगाड़ी कितने बजे आएगी,कहां से चलेगी और अभी कहां पर पहुंची है । रेलवे के अंदर जीपीएस सिस्टम भी इसी सरकार ने चालू किया है । आज 130 करोड़ देशवासियों के लिए रेलवे के अंदर बहुत बड़ा बजट दिया गया है,इसके लिए मैं मंत्री जी को धन्यवाद देता हूं । इस बजट में7,255 करोड़ रुपये की राशि नई रेलवे लाइनों के विस्तार के लिए दी गई है,गेज परिवर्तन के लिए 2,200 करोड़ रुपये दिए गए हैं,दोहरीकरण के लिए 700 करोड़ रुपये और रोलिंग स्टॉक के लिए 6,114 करोड़ रुपये की राशि दी गई है । इसके साथ ही1,750 करोड़ रुपये की राशि दूर संचार के लिए आबंटित की गई है, जो निश्चित रूप से देशवासियों के लिए रेलवे से जुड़े सपनों को सच करने में मददगार साबित होगा । पहली बार रेलवे में तीव्र विकास और यात्री-माल परिवहन सेवा के लिए पीपीपी मॉडल प्राइवेट सेक्टर के अंदर उपयोग करने का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि कनेक्टिविटी बढ़ सके । यह रेलवे सेवा में बहुत बड़ा बदलाव लाएगा । इस बजट में एकीकृत कौशल विकास की एक योजना शुरू करने की बात हुई है, जिसमें13 लाख रेलवे कर्मियों को एक मूलभूत प्रशिक्षण दिया जाएगा ।
पिछली सरकारों की तुलना में विगत पांच वर्षों में 59 प्रतिशत बढ़ोतरी रेलवे लाइनें के विस्तार में हुई है । जहां वर्ष 2009 से 2014के मध्य यूपीए सरकार के कार्यकाल में औसतन रोजाना4.1 किलोमीटर नई रेलवे लाइन बिछाई गई थी, वहीं वर्ष 2014 से 2019 के कार्यकाल में आदरणीय प्रधान मंत्री मोदी जी के नेतृत्व में6.53 किलोमीटर नई रेलवे लाइन दैनिक औसत की दर से बिछाई गई है । यह इंगित करता है कि एनडीए की सरकार किस तरह की इच्छाशक्ति के साथ कार्य कर रही है । बुलेट ट्रेन,जिसके बारे में कोई सोच नहीं सकता था, वर्ल्ड के अंदर जो बड़े से बड़े देश हैं,बुलेट ट्रेन के बारे में सोचते हैं । उन्होंने कह दिया कि वर्ष 2022-23 तक हम बुलेट ट्रेन चलाएंगे । अहमदाबाद-मुंबई से पहली बुलेट ट्रेन की शुरुआत होगी । वह किस तरह का होता है, उसे पहले मॉडल के रूप में देखा जाएगा कि बुलेट ट्रेन चलने के बाद क्या होता है । फिर देश में और आवश्यकता हुई, तो और भी बुलेट ट्रेन चलाई जाएंगी ।
मुझे आज यह बताते हुए खुशी हो रही है कि प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में रेलवे निवेश को जिस तरह प्रोत्साहन देकर बढ़ाया है, उसमें निश्चित तौर पर मौजूदा सुविधाओं में बढ़ोतरी होगी ।…(व्यवधान) वित्तीय वर्ष 2018-19के अंदर 5,276 किलोमीटर रेल लाइन का विद्युतीकरण किया गया है, जो कि वर्ष 2013-14 से आठ गुना है । कैपिटल एक्सपेंडिचर वर्ष2014-19 में बढ़कर डबल हो गया है । वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन लाकर देश को एक नई रफ्तार दी गई है । इस ट्रेन की अधिकतम स्पीड 180 किलोमीटर प्रति घंटा है । इसका ट्रायल सक्सेसफुल हो गया है । विश्व का प्रथम डीजल लोकोमोटिव वर्क वाराणसी में प्रारंभ किया जा रहा है,जिसे विद्युतीकरण मिशन के तहत डीजल इंजन को इलेक्ट्रिक इंजन में बदला जाएगा, जिससे कि ट्रेनों की रफ्तार बढ़ेगी,पर्यावरण को नुकसान भी नहीं होगा और डीजल की खपत भी कम हो जाएगी ।
माननीय वित्त मंत्री जी ने बजट में दावा किया है कि मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल परियोजना, जो बुलेट ट्रेन की बात है, उसके पूरा होने का समय2023 तक है । रेल सुरक्षा के लिए निश्चित रूप से हम सब चिंतित हैं । प्रमुख रेल दुर्घटनाएं – 26 मई, 2014 को25 लोग, गोरखधाम एक्सप्रेस 10 जुलाई, 2011 को70 लोग, दिल्ली-कोलकाता28 मई, 2010, 20 अक्टूबर, 1 अगस्त, 2008, 7 अगस्त, 2007, 18 फरवरी के अंदर टैरेरिस्ट अटैक हुआ था, जब समझौता एक्सप्रेस जा रही थी । इनसे कैसे बचा जाए और आम आदमी की सुरक्षा कैसे की जा सके, इसके अंदर रेलवे सुरक्षा के लिए रेल सुरक्षा संरक्षण कोष बनाया जाए । मैं एक मांग यह भी करूंगा कि फर्स्ट क्लॉस एसी, सेकेंड क्लॉस और थ्री टियर एसी के अंदर लोगों की प्राइवेसी को सुरक्षित किया जाए ।…(व्यवधान) उन कैबिनों के बाहर कैमरे लगाए जाएं । महिलाओं की सुरक्षा के लिए, जैसे राजस्थान के अंदर जीआरपी है, वैसे आपका रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स है, उसमें नई भर्तियां निकालकर लोगों को भर्ती किया जाए । रेलवे की सुरक्षा ज्यादा से ज्यादा कैसे हो, ताकि लोगों का विश्वास रेलवे पर बढ़े ।…(व्यवधान) भीड़-भाड़ वाली जगहों पर रेल लाइनों के दोनों तरफ दीवार बनाई जाए, जिससे दुर्घटना और अतिक्रमण को रोका जा सके । डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के काम को पूरा करने में तेजी लाए, जिससे यात्री गाड़ियां समय पर चल सकें । राजस्थान में आधुनिक रेलवे कोच फैक्ट्री लगाई जाए ।…(व्यवधान)
मैडम,बस एक मिनट । आप तो उधर बैठे हैं,इसलिए आप हमारा थोड़ा ध्यान भी रखिए ।…(व्यवधान) राजस्थान में आधुनिक रेलवे कोच फैक्ट्री लगाई जाए । राजस्थान में पिछले बजट में जिन नई रेल लाइनों की घोषणा हुई थी, उन्हें प्रारंभ किया जाए,जैसे जैसलमेर-कांडला रेल परियोजना । आरयूबी की जगह आरओबी अधिक बनाए जाएं, क्योंकि आरयूबी बनाते हैं, तो बरसात के समय आरयूबी पूरी तरह से भर जाते हैं ।
वह पानी निकलता नहीं है । 6-6 महीने लग जाते हैं । पम्प लगा कर या किसी तरह का बोर वहां पर किया जाए, जिससे लोगों को असुविधा नहीं हो । मैडम,राजस्थान से जुड़ी ही मेरे संसदीय क्षेत्र की कुछ मांगे हैं । महोदय,मेड़ता-पुष्कर जो मेरे संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आता है । नागौर रेलवे लाइन परियोजना को मूर्त रूप देने के लिए त्वरित कदम उठाए जाए । वैसे प्रयास सरकार में चल रहे हैं । पूर्व में उत्तर पश्चिम रेलवे जोन में जोधपुर जिले के पीपाड़ से ले कर भोपालगढ़-संखवास होते हुए मुंडवा तक नई रेलवे लाइन की स्वीकृति प्रदान की जाए, जिसका सर्वे भी पूरा हो चुका है । इससे बीकानेर-नागौर की जोधपुर से सीधी कनैक्टिविटी हो जाएगी और पानी,जोधपुर, नागौर संसदीय क्षेत्र के लोगों को फायदा होगा ।
राजस्थान अभी रेलवे की दृष्टि से रेलवे सेवाओं की दृष्टि से काफी पीछे है, इसलिए मैं मांग करूंगा कि बीकानेर से नागौर होते हुए पुणे की तरफ तथा दक्षित भारत में मद्रास, जहां राजस्थान के सबसे ज्यादा प्रवासी हैं, पूरे देश के कोने-कोने के अंदर राजस्थान का मान बढ़ा रहे हैं और देश की आय को भी आगे बढ़ा रहे हैं, आर्थिक व्यवस्था मज़बूत कर रहे हैं । उनको दक्षिण भारत में मद्रास,हैदराबाद की तरफ नई ट्रेन चलाई जाए और साप्ताहिक ट्रेने जैसे 22475/76, 16587/88, 12495/96, 12789/90 व 17037/38 नागौर से हो कर गुजरती है, उनके फेरे बढाए जाएं या फिर उन्हें रेल मंत्री जी नियमित कर देंगे तो जनता को लाभ होगा ।
नागौर रेलवे स्टेशन और नागौर जिले के ही मुंडवा, गोटन तथा मेड़ता रोड स्टेशन का आधुनिकीकरण किया जाए ।
रेलवे स्टेशनों पर खाद्य सामग्री सहित अन्य सामान पर तय कीमतों से अधिक वसूली पर लगाम लगाना तथा बिना क्वालिटी का खाद्य सामान बेचने पर सख्ती लगाई जाए, जिससे ज़हरखुरानी की घटनाएं जो कि रेलवे स्टेशनों पर ज्यादातर होती है, इनको रोका जाए ।
नागौर संसदीय क्षेत्र में डीडवाना से कुचामन तक नई रेलवे लाइन की घोषणा की जाए । जाइल को रेल लाइन से जोड़ा जाए । बीकानेर से नागौर होते हुए राजधानी दिल्ली तक नियमित ट्रेन तथा बीकानेर से जोधपुर तक नई इंटर सिटी ट्रेन शुरू की जाए ।
राजस्थान संपर्क क्रांति एक्सप्रेस 12463/64व 22464/65 को नियमित किया जाए, ताकि बीकानेर-नागौर के लोगों के लिए राजधानी से प्रत्येक दिन जुड़ाव हो सके ।
महोदया,आरपीएफ के अंदर जो भी पद खाली हैं,उन पदों को भी भरा जाए । एक चीज़ का धन्यवाद मैं रेल मंत्री जी और राज्य मंत्री जी को दूंगा कि नॉर्थ-ईस्ट से ले कर जम्मू-कश्मीर तक, जहां केवल बातें होती थीं,काम नहीं होता था, प्रधान मंत्री जी को धन्यवाद दूंगा कि इस बार देश के प्रत्येक कोने के अंदर राष्ट्रवाद की भावना से काम हुआ है । भारतीय जनता पार्टी और एनडीए के सहयोगी दल इसी को ले कर जनता के बीच गए । जैसे अन्य क्षेत्रों में विकास का पहिया घूमा, वैसे ही रेल के विकास का भी पहिया घूमा है ।
श्री अर्जुन सिंह (बैरकपुर): सभापति महोदया, मैं आपको धन्यवाद देता हॅूं कि जो आपने मुझे बजट के रेलवे जैसे विषय पर बोलने का मौका दिया है । सबसे पहले मैं माननीय प्रधान मंत्री जी को धन्यवाद देता हॅूं, जिनके मार्गदर्शन में देश की सवा करोड़ जनता के हित में यह बजट पहली बार नारी शक्ति द्वारा विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक मंदिर में प्रस्तुत किया गया है । जिस पर मुझे संस्कृत का एक श्लोक याद आ रहा है – जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी । इसका मतलब है कि जननी और जन्मभूमि का स्थान स्वर्ग से भी ऊंचा है और इसका तात्पर्य है कि आज एक जननी माँ के हाथ में इस मातृभूमि का पालन-पोषण करने की जो जिम्मेदारी सौंपी गई, इससे स्पष्ट है कि इस मातृभूमि का हर वह नागरिक माननीय निर्मला जी के लालन-पालन से पलेगा और फूलेगा । जैसे एक शिशु अपने वात्सल्य अवस्था से वृद्धा अवस्था तक बढ़ता है, जिस तरह जननी बन कर अपने पूर्व के कार्यकाल में देश को सुरक्षित रख कर पाकिस्तान को नाकों चने चबाने पर मजबूर कर दिया,उसी तरह आज धन कुबेर की सुरक्षा की जिम्मेदारी ले कर देश को यह बता दिया कि देश के हर तबके का ख्याल उसी तरह रखा जाएगा,जिस तरह से एक माँ अपने बच्चे का रखती है ।
मैं नमन करता हॅूं माननीय प्रधान मंत्री जी को, मैं नमन करता हॅूं माननीय अमित शाह जी को जिनके मार्गदर्शन से आज देश के गरीब,किसान, छोटे और मंझोले व्यापारी जैसे तमाम जनता के हितों को ध्यान में रख कर इस बजट को प्रस्तुत किया गया है ।
महोदय,रेलवे के इस वित्त वर्ष 2019-20की मांगों में65,837 करोड़ रुपये का बजटीय आबंटन प्राप्त हुआ । इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सन् 2018 से और 30 के बीच पचास लाख करोड़ रुपये के निवेश की जो आवश्यकता होगी, उन्होंने तीव्र विकास और यात्री माल ढुलाईसेवा के लिए सरकारी निजी भागीदारी यानी पीपीपी मॉडल का उपयोग करने का प्रस्ताव रखा ताकि कनैक्टिविटी बढ़ाई जा सके । गोयल जी ने स्टेशनों के आधुनिकीकरण और शौचालय तथा वेटिंग रूम और बेहतर स्टेशन जैसी यात्री सुविधाओं के निर्माण के लिए भी बहुत ज्यादा आवश्यकता पर बल दिया है ।
माननीय सभापति महोदया, मैं रेलवे के पिछले पाँच सालों में जनहित में हुए सुधारों पर देश की जनता के साथ, यहां बैठे हमारे सभी साथियों को यह बताना चाहता हूं कि रेलवे देश की सबसे पुरानी आय की स्रोत है,जिसका हमेशा से दुरुपयोग किया गया । अगर मैं माननीय प्रधान मंत्री जी के मार्गदर्शन में रेलवे में हुए सुधारों के लिए बनाए गए उन सभी परियोजनाओं का विवरण देने बैठूँ, तो पूरा हफ्ता लग जाएगा । इसलिए संक्षिप्त में कुछ महत्वपूर्ण कार्यों में हुए सुधारों का विवरण आपके समक्ष रखता हूँ ।
पूंजीगत व्यय वर्ष 2009-14 में 2.3 लाख करोड़ था, जबकि वर्ष 2014-18 में5.29 लाख करोड़ यानी130 परसेंट ग्रोथ हुई । बड़ी लाइन बिछाने में 25 परसेंट ग्रोथ हुई थी । ट्रैक नवीनीकरण में वृद्धि 51 परसेंट ग्रोथ हुई थी । नई लाइन, दोहरीकरण,तीसरी और चौथी पंक्ति परियोजनाओं के चालू होने की औसत गति 59 परसेंट थी । विद्युतीकरण में वर्ष 2019-14 में 608 आरकेएम पर ईयर था, जबकि2014-18 में 2103 आरकेएम पर ईयर यानी 246 परसेंट की ग्रोथ हुई थी । फुट ओवर ब्रिज (सुरक्षा मदों के रूप में माना जाता है) में वर्ष2009-14 में 23 और वर्ष 2014-18 में74 करीब 222 परसेंट की ग्रोथ हुई थी । सबसे तेज गति से प्रतिवर्ष रोड ओवर ब्रिज,अंडर ब्रिज,सब-वे बनाया गया, जिसमें 194 परसेंट की ग्रोथ हुई थी । अब तक का सर्वोच्च माल ढुलाई, जो 2009-14 में 1052मीट्रिक टन था,यहां वर्ष 2014-18में 1162 मीट्रिक टन यानी 10.50 परसेंट की बढ़ोतरी हुई थी । स्टेशनों के सौंदर्यीकरण में वर्ष 2009-14 में ज़ीरो था और वर्ष 2014-18 में 60, ऐसा सौंदर्यीकरण किया गया । सम्पूर्ण रेलवे स्टेशनों को एलईडी लाइट्स से सुसज्जित वर्ष2009-14 में ज़ीरो और वर्ष 2014-18 में100 परसेंट । एक वर्ष में सर्वाधिक विद्युतीकरण किया गया था, 85 परसेंट ग्रोथ हुआ था । पिछले चार वर्षों में सर्वाधिक मानव रहित रेलवे क्रॉसिंग का निर्माण किया गया, जिसमें करीब 18 परसेंट ग्रोथ हुआ । पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तर्ज पर पश्चिमी और पूर्वी के समर्पित फ्रेट कॉरिडोर प्रथम चरण के वर्ष2019-20 में 2822 किलोमीटर बन कर तैयार हो जाएगा । डीएफसी की वजह से हजारों की संख्या में युवाओं को रोज़गार मिलेगा । यात्री डिब्बों का अपग्रेडेशन,इस वर्ष मेल पैसेंजर ट्रेन सहित 5000 कोच बनाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है । पिछले चार वर्षों में कुल407 नई ट्रेनों की सेवाएं शुरू की गईं । पिछले चार वर्षों में त्यौहारों की मांग को पूरा करने के लिए 1.37 लाख सेवाएं लोगों को दी गईं ।
रेल सुरक्षा कर्मचारियों की भर्ती लगभग एक लाख से भी अधिक की गई । राष्ट्रीय रेल संरक्षण कोष…(व्यवधान) मैडम, बहुत सारी बातें हैं । जितने भी डेवलपमेंट हुए इन पाँच सालों में हुए । एक समय था जब यूपीए की गवर्नमेंट में माननीय ममता बनर्जी जी यहां रेल मंत्री हुआ करती थीं और रेल मंत्री होने के बाद बंगाल में उन्होंने कितने प्रोजेक्ट्स की घोषणा की थी, उसका आज तक कुछ नहीं हुआ । सिंगुर रेल कारखाना,सिलीगुड़ी रेल कारखाना, पुरुलिया रेल यूनिवर्सिटी,नंदीग्राम में नई रेल लाइन बिछाने का काम, फिजरगंज में नई रेल लाइन बिछाने का काम,कवी सुभाष से एयरपोर्ट तक मेट्रो रेल लाइन बनाने का काम, जोका से बीविडी बाग़ नई मेट्रो रेल लाइन बनाने का काम, डाकुनि लोको पार्ट्स फैक्टरी,हल्दिया ईएमयू200 करोड़ से भी अधिक लागत, वहां अभी तक काम शुरू नहीं हुआ है । आरामबाग लाइन, बैरकपुर मेट्रो रेलवे,ऐसे अनगिनत प्रोजेक्ट्स की घोषणा करते हुए उन्होंने बजटेड और शिलान्यास भी किया था । जिसको सिर्फ और सिर्फ राजनीतिक और व्यक्तिगत आर्थिक फ़ायदा लेने के लिए किया गया था, किन्तु उपर्युक्त परियोजनाओं पर जमीनी स्तर पर कोई काम हुआ । यहाँ तक कि दूसरे उनके जो मंत्री थे,दिनेश त्रिवेदी जी ने इसी सदन में कहा था कि रेल आईसीयू में चला गया है । यह मैं नहीं बोल रहा हूँ, दिनेश त्रिवेदी जी ने कहा था कि रेल आईसीयू में चला गया ।
माननीय सभापति महोदया, मेरा कहना है कि कचरापारा में रेल फैक्टरी वर्ष2010 में कैबिनेट की मंजूरी के बाद नींव तक नहीं रखी गई । वहाँ मिट्टी भरने में 30 करोड़ रुपये से ज़्यादा घपला हुआ । माननीय मंत्री जी से कहूँगा कि उसकी इनक्वायरी भी कराई जाए । रेलवे की खाली जगहों पर पीपीपी मॉडल में वहां इंतजाम किया जाए । वहां के जो सारे बाहुबली है, तालाबों पर दखल करके, जमीनों पर दखल कर रहे हैं । पीपीपी मॉडल के तहत वेयरहाउस बनाया जाए तो बहुत सारे लोगों को रोज़गार मिलेगा ।
महोदया, मुझे केवल एक सेकेंड का समय दीजिए । नैहाटी स्टेशन,जो हमारे क्षेत्र में पड़ता है, उसका नाम ऋषि बंकिम चंद्र,जिन्होंने वंदे मातरम की रचना की थी, के नाम पर किया जाए । श्यामनगर स्टेशन, जहाँ नेताजी सुभाष चंद्र बोस एक दिन जेल में रहे थे, का नाम उनके नाम पर किया जाए । कांचरापाड़ा रेलवे स्टेशन,जहाँ महात्मा गाँधी जी ने मीटिंग की थी, उस जगह का नाम गाँधी धाम के नाम पर किया जाए । पलता रेलवे स्टेशन का नाम मतुआ समाज के भगवान हरिचंद,गुरूचंद के नाम पर किया जाए ।
महोदया, मैं माननीय प्रधान मंत्री जी को एक बार पुन: धन्यवाद देते हुए रेल मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदानों की माँगों का समर्थन करता हूँ । धन्यवाद ।
SHRI H. VASANTHAKUMAR (KANNIYAKUMARI): Respected Madam, I represent Kanniyakumari. Millions of people are visiting Kanniyakumari but in Nagercoil and Kanniyakumari railway stations, basic amenities are not there. Even toilets are not there. People are visiting Kanniyakumari from all over India but there are no toilets at railway stations. There are no street lights. In such a situation, how can people visit Kanniyakumari and see that beautiful place?
My brothers and sisters are working in railways. Nearly 13 lakh people are working in the railways. But they are living in fear due to foreign investment and privatisation of railway routes. Out of 13 lakh people, every tenth family is depending upon the employees working in the railways. People are living in fear on whether the Government intends to privatise the railways. The hon. Railway Minister may please clarify this point. Our hon. Prime Minister should give an assurance to those 13 lakh people, who are our brothers and sisters, that the Government will not privatise railways without consultation and that they will safeguard the interests of those 13 lakh people. This is more important in India as there are no job opportunities nowadays. Families are living in fear and feeling insecure about their survival. So, the Government should give an assurance in this regard to our people.
People visit Kanniyakumari from all over the world. Even the railway stations do not have any infrastructure. Basic amenities are not there. In this condition, we want to develop tourism in India. It may be that all the 543 MPs would like to visit Kanniyakumari and enjoy its beauty but infrastructure is not there. How can they come there? They may come there, enjoy the sun rise and leave. But if we want to develop tourism there, we should make them stay there for four to five days. Only then the Government will earn revenue through tourism sector.
We need more trains for Kanniyakumari. Train No. 22657/58 TBM-NCJ SF Express runs weekly thrice. People are facing a lot of difficulties to travel on weekends, Fridays and Saturdays from Chennai to Southern districts like Madurai, Tirunelveli, Nagercoil due to the unavailability of 2265/58 TBM-NCJ SF Express. Kanniyakumari Express and Ananthapuri Express always run with full capacity and it is not easy to get the tickets during the entire year. So, I would request the hon. Minister to consider this weekend additional service with five days per week as previously proposed.
In addition, I would also request you to operate a single trip from Nagercoil to Velankanni - to worship Velankanni Matha - using the incoming rake from Chennai on Friday to serve our long pending demand. There should be a change in the terminal to Egmore for Train No. 22657. It is in Tambaram which is far away from the town.
We also need separate coaches for women so that women can safely reach their destination. Keeping the safety of women in view, the Government must give separate coaches for women.
It is safe for women, their family members and also for the entire people. Kanyakumari should be created as a new railway division. Late night train should run from Chennai-Egmore via Nagercoil to Trivandrum. Basic amenities should be provided. Level crossing at 15-B in Vilavancode via Marthandam Railway Overbridge is required. We also want you to speed up the doubling of railway track between Madurai to Kanyakumari and from Tuticorin to Kanyakumari. The Madurai Sampark Kranti Express may be extended up to Nagercoil and Tejas Express train may be extended up to Nagercoil. Unreserved women coaches, as I told, must be provided in all the trains. The world’s largest form of mass religious tourism takes place in India at Kanyakumari, which attracts over 100 million pilgrims every year. It is most important to connect all religious places through railways.
HON. CHAIRPERSON: Okay, please conclude now.
SHRI H. VASANTHAKUMAR: Madam, please give me one minute.
The increase in frequency of trains from Mumbai-Nagercoil, Kanyakumari-Tirunelveli and Thoothukudi should be done.…(Interruptions)
माननीय सभापति: माननीय सदस्य - श्रीमती अनुप्रिया पटेल ।
…(व्यवधान)
SHRI H. VASANTHAKUMAR: Madam, please give me one minute.…(Interruptions) The frequency of train from Mumbai-Nagercoil should be increased to seven days and also the frequency of trains running from Nagercoil to Velankanni, Nagercoil to Thiruchendur, Nagercoil to Puducherry and Puducherry to Chennai should also be increased.…(Interruptions)
*श्रीमती रमा देवी (शिवहर): भारतीय रेलवे दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा रेलवे नेटवर्क है । कुल 63 हजार किलोमीटर लम्बे भारतीय रेलवे के विशाल नेटवर्क के तहत 22 हजार ट्रेनें चलाई जाती हैं, जो रोजाना 15 लाख लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाती है । इसके लिए रेल पटरियों, पुलों,सिग्नलिंग और दूर-संचार जैसी विभिन्न प्रणालियों को चुस्त-दुरुस्त रखने की आवश्यकता होती है । माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार ने रेलवे में निवेश को जोरदार तरीके से बढ़ाया है ताकि,मौजूदा सुविधाओं को बनाए रखने के साथ उनकी बढ़ती आवश्यकताओं को भी पूरा किया जा सके । पिछले 5 वर्षों में रेलवे का आवंटन बढ़ाकर 5.30 लाख करोड़ रुपए किया जा चुका है । यह मोदी सरकार की प्रतिबद्धता की ही देन है कि जहां वर्ष 2009-14 के दौरान रोजना औसतन 4.1 किलोमीटर नई रेल लाइनें बिछाई गई थी तो वहीं 2014-18 के दौरान 6.53 किलोमीटर दैनिक औसतन दर से रेल लाईनें बनी हैं ।
माननीय मंत्री जी का ध्यान लम्बित रेल परियोजनाओं के प्रति आकृष्ट कराना चाहती हूं कि बिहार की 34 नई रेल लाइन परियोजनाएं वर्षों से लम्बित हैं । जिसमें मेरे क्षेत्र अंतर्गत सीतामढ़ी से वाया शिवहर होते हुए बापूधाम मोतिहारी रेल लाइन परियोजना भी शामिल है । एक तरफ मां जानकी की जन्म स्थली सीतामढ़ी तो दूसरी तरफ बापू की कर्मभूमि मोतिहारी जिनका देश 150वीं जयंती मनाने जा रहा है । ऐसे ऐतिहासिक दोनों स्टेशन को वाया शिवहर से जोड़ने वाली 77 किलोमीटर रेल लाइन का नहीं बनना दुर्भाग्यपूर्ण है । जबकि, शिवहर जिला रेल लाइन से अछूता है तथा सीतामढ़ी जिला नक्सल प्रभावित है । भारतीय रेलवे के लिए अपनी क्षमता में बढ़ोतरी करना बहुत जरूरी हो गया था और इसके लिए रेलवे ने दो डेडिकेटेड फ्रेट कॉरीडोर परियोजनाएं शुरू की है जो काफी तेजी से आगे बढ़ रही हैं । इन परियोजनाओं के चालू हो जाने से माल ढुलाई के कारोबार में रेलवे को काफी मुनाफा होगा । रेलवे द्वारा 29,486 करोड़ की लागत से 33,658 कि.मी. रेल लाइनों के विद्युतीकरण का कार्य जारी है । जिसमें मेरे संसदीय क्षेत्र से होकर गुजरने वाले नरकटियागंज-सीतामढ़ी रेलखंड भी शामिल हैं । इसके लिए मैं माननीय रेल मंत्री जी के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करती हूं ।
सरकार द्वारा रेलवे यात्री सुविधा के क्षेत्र में बजट में 200 प्रतिशत की वृद्धि की गई है जो स्वागतयोग्य है । मेरी माननीय रेल मंत्री जी से मांग है कि मेरे संसदीय क्षेत्र अंतर्गत नरकटियागंज-सीतामढ़ी रेलखंड पर अवस्थित गुरहनवा, कुंडवा चैनपुर, ढेंग,रीगा, घोड़ासहन एवं बैरगनिया रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधा के तहत प्रतीक्षालय,शौचालय, पेयजल,ऊपरी पैदल पुल,स्टेशन प्रवेश के लिए रैम्प आदि की व्यवस्था विकसित की जाए । घोड़ासहन आदर्श रेलवे स्टेशन के पूर्वी समपार फाटक 12 सी. जो कि मुख्य बाजार पर स्थित है जनहित में वहां उपरीगामी पुल या अंडरपास का निर्माण कराया जाए । जिसके लिए मैं पूर्व में भी मांग कर चुकी हूं । यात्रियों की संख्या को देखते हुए दैनिक पैसेंजर ट्रेनों में डिब्बों की संख्या बढ़ायी जाए । रीगा एवं ढेंग स्टेशन पर सुगौली-पाटलीपुत्र इंटरसिटी (75215/75216 ट्रेन का ठहराव सुनिश्चत किया जाए । रीगा रेलवे स्टेशन एक औद्योगिक क्षेत्र है जहां चीनी मिल भी अवस्थित है । जनता की व्यापक मांग पर रीगा स्टेशन पर एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव सुनिश्चित कराया जाए ।
माननीय सभापति: माननीय सदस्य - श्रीमती अनुप्रिया पटेल ।
श्रीमती अनुप्रिया पटेल (मिर्जापुर): सभापति महोदया, धन्यवाद । मैं डिमांड फॉर ग्रांट्स फॉर रेलवे 2019-20 की इस चर्चा के तहत अपने संसदीय क्षेत्र मिर्जापुर की रेलवे से संबंधित कुछ प्रमुख मांगों को उठाना चाहती हूं । मेरा संसदीय क्षेत्र मिर्जापुर जिला उत्तर प्रदेश का एक अत्यंत पिछड़ा हुआ जिला है जो दो अत्यंत विकसित जिलों के बीच स्थित है । इसके एक ओर वाराणसी है, जो हमारे माननीय प्रधान मंत्री जी का संसदीय क्षेत्र है और दूसरी ओर, प्रयागराज (इलाहाबाद) है । इन दोनों विकसित जिलों के बीच में मिर्जापुर हमेशा से ही उपेक्षा का शिकार रहा है,लेकिन वहां रेलवे की दृष्टि से विकास की अपार संभावनाएं हैं ।
मैं सबसे पहले अपने संसदीय क्षेत्र के लोगों की एक बहुत बड़ी पीड़ा को आपके समक्ष रखना चाहती हूं । माननीय मंत्री जी बैठे हुए हैं, मैं उनके संज्ञान में लाना चाहती हूं । मैं उत्तर प्रदेश से आती हूं । मिर्ज़ापुर जनपद वासियों के पास उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ जाने के लिए कोई भी एक ट्रेन की सुविधा उपलब्ध नहीं है । मैंने इसके लिए पहले भी बहुत प्रयास किया है । आज मेरे पास अवसर है और आप भी उपस्थित हैं । मैं आपसे मांग कर रही हूं कि मिर्ज़ापुर के लोगों को लखनऊ के लिए, राजधानी से जोड़ने के लिए एक ट्रेन देने का काम आप ज़रूर करेंगे । अगर हम अपनी राजधानी से जुड़े हुए नहीं होते हैं, तो हमारे जनपद का विकास बाधित होता है ।
मैं एक और रेलवे लाइन का जिक्र करना चाहूंगी, जिसकी मांग वर्षों से मिर्जापुर के लोग कर रहे हैं । यह लाइन राबर्ट्सगंज से मधुपुर वाया अहरौरा स्वीकृत है, जो आज पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन बन चुका था, पहले मुगलसराय स्टेशन कहलाता था । वहां तक जो रेलवे लाइन बनेगी, वह माँ भंडारी देवी धाम,माँ विन्धयाचल धाम और माँ मैहर देवी धाम को जोड़ने का काम करेगी । ये वे धार्मिक स्थल हैं, जहां लाखों की संख्या में श्रद्वालु वर्ष भर आते रहते हैं ।
मैं माननीय मंत्री जी को बताना चाहती हूं कि वर्ष2017-18 में 1,260 करोड़ रुपये इस रेलवे लाइन के निर्माण के लिए स्वीकृत भी हुए, लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि अभी तक इस रेलवे लाइन का निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं हो सका है । मैं आपसे आग्रह करना चाहती हूं कि इस रेलवे लाइन का निर्माण कार्य तुरंत प्रारंभ हो । एक और रेलवे लाइन है,जो बहुत ही महत्वपूर्ण है, वह मिर्जापुर से लालगंज होते हुए रीवा मध्य प्रदेश तक जाती है । हमारे जनपद तथा रीवा की जो सीमाएं हैं,वे एक-दूसरे को छूती हैं, यानी उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश एक-दूसरे से जुड़ता है । मैं इस रेलवे लाइन के लिए भी आपसे मांग करना चाहती हूं, क्योंकि उसको बिछाने की भी नितांत आवश्यकता है । पिछली बार इसका सर्वे कार्य स्वीकृत हुआ था । इसका सर्वे कार्य पूर्ण हो चुका है । अब इसके निर्माण कार्य की स्वीकृति मिलने की जनपद वासियों को प्रतीक्षा है ।
आपसे मेरा आग्रह है कि इसके निर्माण कार्य की आप जल्द से जल्द स्वीकृति प्रदान करें ।
मेरे जनपद में मिर्ज़ापुर और विंध्याचल जैसे दो प्रमुख रेलवे स्टेशन्स हैं । मिर्ज़ापुर पर्यटन और धार्मिक दृष्टि से एक बहुत ही महत्वपूर्ण जिला है । एक ओर यहां सांस्कृतिक धरोहर के रूप में चुनार का ऐतिहासिक किला है, तो दूसरी ओर मां विंध्यवासिनी देवी का धाम है । पूरे जनपद में पहाड़ और झरनों की भरमार है । ऐसे खूबसूरत जिले को देखने के लिए देश भर के कोने-कोने से लोग आते हैं, इसलिए मैं आपसे आग्रह करना चाहती हूं कि मिर्ज़ापुर और विंध्याचल रेलवे स्टेशन्स को मॉडल स्टेशन्स के रूप में विकसित किया जाए ।
पिछले पांच वर्षों में मिर्ज़ापुर और विंध्याचल रेलवे स्टेशन्स पर कई सारी यात्री सुविधाओं का विकास कार्य हुआ है,लेकिन अभी और भी बहुत कुछ करने की आवश्यकता है । इन्हें मॉडल स्टेशन बनाने की जरूरत है । कई छोटे-छोटे स्टेशन्स मेरे संसदीय क्षेत्र में मौजूद हैं,जिनमें चुनार,गैपुरा, जिगना,अहरौरा रोड और लूसा जैसे अनेक स्टेशन्स हैं । इन पर भी यात्री सुविधाओं का पूर्णतया अभाव है । कहीं-कहीं तो ठीक से प्लेटफार्म भी विकसित नहीं हुए हैं । इसके लिए भी मैं आपसे आग्रह करूंगी कि इनका विकास कराया जाए ।
मैं आपसे ज़िक्र करना चाहूंगी कि अमृतसर से दिल्ली होते हुए कोलकाता तक इंडस्ट्रियल कोरीडोर बन रहा है । यह बीस शहरों से होता हुआ, पंजाब,हरियाणा, उत्तर प्रदेश,उत्तराखण्ड,बिहार, झारखण्ड और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में विकास की धुरी बनने जा रहा है । उत्तर प्रदेश के आठ जिलों को इस इंडस्ट्रियल कोरीडोर में शामिल किया गया है । यहां तक कि मिर्ज़ापुर के दोनों तरफ इलाहाबाद यानी प्रयागराज और वाराणसी के जनपदों को भी इन आठ जिलों में इस इंडस्ट्रियल कोरीडोर से लाभान्वित किया जा रहा है,लेकिन एक बार फिर मिर्ज़ापुर उपेक्षा का शिकार हो गया है ।
मैं माननीय मंत्री जी से आग्रह करूंगी कि मिर्ज़ापुर एक उद्योग शून्य जिला है । यहां के जितने भी पारम्परिक उद्योग थे, वे सभी नष्ट हो चुके हैं । रोजगार के कोई भी साधन वहां उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए इस इंडस्ट्रियल कोरीडोर में आप इलाहाबाद,वाराणसी की तरह मिर्ज़ापुर को भी शामिल करें ।
अंत में, सिर्फ तीन ट्रेनों की मांग करते हुए मैं अपनी बात समाप्त करूंगी । हमारे जनपद में किसी भी राजधानी ट्रेन का ठहराव नहीं है । मैं पिछली बार भी माननीय मंत्री जी से राजधानी ट्रेन के ठहराव की मांग कर रही थी । एक बार फिर मैं आपसे मांग कर रही हूं कि पटना-नई दिल्ली राजधानी ट्रेन का ठहराव मिर्ज़ापुर में सुनिश्चित किया जाए । इसके साथ, गुवाहाटी-नई दिल्ली, नार्थ-ईस्ट एक्सप्रेस और हावड़ा-नई दिल्ली, पूर्वा एक्सप्रेस, इन दोनों ट्रेनों का ठहराव मिर्ज़ापुर जनपद को दिया जाए । इतना ही कहते हुए, मैं अपनी बात को समाप्त करती हूं ।
*SHRI ABU TAHER KHAN (MURSHIDABAD): I would like to put forth the following demands which should be taken care of:
(i) From Sealdah to Lalgola distance is 250 km (approx.) and takes 5 hours to reach. There is no toilet facility in Sealdah-Lalgola local train service. This is a long pending demand for toilet facility and it should be taken care of.
(ii) Nasipur Rail bridge which falls under Murshidabad District has already been constructed more than 10 years ago but it is unfortunate to say that it has not started functioning yet. Your immediate intervention is required to make it functional.
(iii) To take initiative for construction of a new railway line from Krishnanagar to Baharampur via Karimpur.
(iv) Murshidabad is known as a historical place and my earnest request is to take appropriate action for making Murshidabad railway station as a modern station with all available facilities.
SHRIMATI SUPRIYA SADANAND SULE (BARAMATI): Thank you for giving me this opportunity to speak on the Railway Budget. There are just a few questions. I will not repeat any point which was taken up earlier.
19.43 hrs (Hon. Speaker in the Chair) SHRIMATI SUPRIYA SADANAND SULE: I would like to actually thank the Railway Ministry and especially all the DRMs, the GMs and the Chairman of Railway Board, who have been exceptionally helpful whenever we have reached out to them. A lot of new Members have spoken today. So, I just like to make one intervention to all my fellow Members. Several of our senior Members, all of us who have been re-elected for the second or third term, every quarter, we take a review of all our works which are done in the Railway with the help of DRMs and GMs. So, I take this opportunity and I would request the hon. Minister if he could kindly send a circular to all our new colleagues, because a lot of questions which came across here today are related to what our DRMs and GMs are very helpful at local level. We actually sometimes do not even need to come up to the Ministry. They are so helpful there. So, I would like to start by thanking the Railway Ministry, which is one of the finest Ministries. It does not matter whether you are sitting on that side or this side. This is one Ministry, which is exceptionally helpful to most of us. So, I would like to start with gratitude.
We are today discussing the Demands for Grants. Now, there is a whole idea of making the General Budget and merging the Railway Budget. After all, it is the spendings and the earnings. I want to know by merging both these Budgets, what is the increase that you have got or what is the benefit of merging this. Some one year, you have done 2 per cent, 5 per cent, 10 per cent. So, what was the logic? If there was a logic, is it really implemented, because in the budgetary allocations over the last 4-5 years that you have been in power, I do not see any drastic improvement or I do not see drastic change in great improvement of infrastructure of pending projects like most of my earlier colleagues have spoken about. Could you clarify to us what exactly is the plan and what the roadmap would be?
I have three-four pointed questions. One is about the rate of return. What exactly is the rate of return of 2018-19? What is the basis on which they calculated it? They may kindly explain to the House what it is. What we understand from this Budget is that freight is in profit. But even today, I think, on passenger side, there still seem to be a challenge. So, how are they going to balance this Budget if they are taking from one side and giving it to the other side? This morning, we were talking about privatisation of ‘Air India’. There was a huge uproar in the House. So, there is always some miscommunication if something comes up.
This Government has talked about Rs. 50 lakh crore. Please correct the number, if I am wrong. The budgetary provisions required to improve the railways, is Rs. 50 lakh crore. The Budget allocation is Rs. 1,00,060 crore. So, this will take 30 years to do it. At one level, they are saying that they are going to bring the bullet train. On one side, they say that they are increasing infrastructure. Then, they are talking about SPV matters. They have also talked about PPP model. So, people like me get very confused. I remember, when Suresh Prabhuji was the Minister of Railways, he had committed to the nation that they were not going to privatise Railways, which hon. Piyush Goyalji has also said. But I want a reassurance on it.
Then, there is a PPP model. What is this PPP model? It is a Public-Private Partnership. So, there is a word of ‘private’ in it. Then, there is a SPV model with the States, which they have done. But it has also failed. No State, unfortunately or fortunately, has been able to complete their project because of issues like land acquisition. For example, the bullet train. The bullet train was something we were all very excited about. हम लोगों को लग रहा था कि मुंबई में बैठकर डेढ़ दो घंटे में गुजरात पहुंच जाएंगे । हमने बुलेट का स्वागत किया था । उन्होंने कहा था कि 2020-22 तक बुलेट ट्रेन चालू हो जाएगी । अभी मंत्री जी कह रहे हैं कि बुलेट ट्रेन में डिले हो रहा है । महाराष्ट्र में शिव सेना सरकार में है । उसने भी लैंड एक्विजेशन का विरोध किया है । ऐसा नहीं हो कि अच्छे दिन की तरह बुलेट ट्रेन भी न हो,एलोकेशन भी न हो, पीपीपी मॉडल भी न हो । जैसे हमको एयर इंडिया का डर लग रहा है कि आप लोग उसे बेचेंगे,ऐसा न हो कि मिसक्यूनिकेशन के कारण रेलवे भी बेच दी जाए । एसपीवी का जो मॉडल है The difference is the Finance Ministry’s statement vis-a-vis the Ministry of Railways’ statement. इसको थोड़ा समझने में दिक्कत है । We are not Accountants. The hon. Railway Minister knows this better since he is a Chartered Accountant. So, if he could clarify that there will be no privatisation at any cost, it would be appreciated. But at the same time, what is this PPP model and SPV model, which seem to have failed in several States? This is what the essence of the House is.
Sir, one very big problem is of land. Today, there is a lot of land. I would like to bring it to the notice of the House that in my own Constituency, a lot of poor people for decades have been staying on railway lines. This Government has committed to give free houses for poor people. Is there some project whereby we can bring some land for these people? गरीब लोग पचास सालों से वहां रह रहे हैं । कभी छह महीने या दो साल में कहते हैं कि बुलडोजर चला देंगे । जब हम बात करते हैं तो रेलवे मंत्रालय भी अच्छे से बताती है । वे लोग बेचारे गरीब लोग हैं । आज नहीं तो कल हमको लैंड लगेगा । ऐसे ही पचास साल से चल रहा है । So, can we have one policy under which small section of land गरीबों के घरों के लिए2020-22 का टारगेट है । मेरे क्षेत्र के भी कई लोग गरीब हैं । उनको भी घर मिले और नोटिस न भेजें और घर दे दें तो बहुत अच्छा होगा । So, what is the plan of this optimal land that this Government is doing?
Second thing is about the advertising revenue. पीएसयू की एक रिपोर्ट थी,एडर्वटाइजिंग का क्या करें, Are they going to increase it? How are they going to balance this whole thing? मुझे लास्ट पाइंट पता है । सुरक्षितता महिलाओं की हो या ट्रेन की, It should be for every passenger. Why should we only talk about security of women? It is security of every passenger. It is something basic. मैं पांच सालों से देख रही हूं जब सेफ्टी का विषय आता है तो सौ प्रतिशत बजट का यूटिलाइजेशन नहीं हो पाता । बहुत बार पांच हजार करोड़ रुपये रखे जाते हैं लेकिन तीन,चार या साढ़े चार हजार करोड़ ही यूज होता हैSo, why is safety not being put as a priority? मेरे क्षेत्र से काफी सवाल हैं,लेकिन वक्त कम है So, I would put them ahead with the Ministry of Railways. I thank the officials of the Ministry of Railways. They do exceptionally good work. They are very helpful.
Sir, even though we are sitting on this side, your support for all our constituencies, is admirable. आज आपने बहुत सारे नए लोगों को एन्करेज किया है । मुझे बाहर एक लड़का मिला था, गैलरी से वह कार्यवाही देख रहा था । उसने पूछा कि आप सभी आरयूबी और आरओबी के बारे में बात कर रहे थे, क्या क्षेत्र के लिए मिल जाएगा? I hope that all the speeches are welcome. It should just not be in thin air. I hope that the Ministry of Railways convert all our dreams and aspirations into a reality to make life more comfortable for the common man, who genuinely uses the railway.
With these words, I conclude. Thank you, Sir माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्यगण, मैं आपसे आग्रह करूंगा,कई माननीय सदस्य रेल बजट पर अपनी बात कहकर चले गए । मैं यहां पर सब देख रहा हूं । अगली चार और डिमांड पर चर्चा होनी है । जो माननीय सदस्य सदन मैं बैठेंगे, उन्हीं को मौका मिलेगा ।
माननीय सदस्य, श्रीमती माला राज्यलक्ष्मी शाह जी । शायद इस सदन में इस सत्र में पहली बार बोल रही हैं?
श्रीमती माला राज्यलक्ष्मी शाह (टिहरी गढ़वाल):जी, सर ।
महोदय, आपने मुझे बोलने का मौका दिया इसके लिए धन्यवाद । मैं रेलवे की अनुदान की मांगों के समर्थन में खड़ी हूं । मैं सरकार को बजट के लिए बधाई देती हूं । आदरणीय प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में रेलवे के क्षेत्र में सरकार ने बहुत अच्छे कार्य किए हैं । सरकार ने बहुत सारी नई ट्रेनें चलाई हैं । जैसे बुलेट ट्रेन, वंदे भारत और तेजस चलने वाली हैं और वंदे भारत चल चुके हैं । अपने देश में रेल के कारखाने लगाए गए हैं, जिसमें रेल की कोचें तैयार हो रही हैं । मैं यह जरूर कहना चाहती हूँ,मैं मंत्री से प्रार्थना करती हूं कि सीनियर सिटिजन्स के लिए और जिन लोगों को चढ़ने-उतरने में प्रोब्लम होती है, उनकी ओर भी ध्यान दिया जाना चाहिए । पूरे हिन्दुस्तान की ट्रेनों में एक ऐसी जगह स्टेप्स होने चाहिए, जिससे उन लोगों को चढ़ने और उतरने में सुविधा हो । उत्तराखंड में हमारे प्रधान मंत्री जी का विशेष ध्यान है । मैं उनको भी धन्यवाद देना चाहती हूं, जिन्होंने हमारे चारधाम रेलवे शुरू करवाए हैं । हमारे पूर्व रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभु जी ने इसका आरंभ किया था और ये अब शुरू हो गये हैं । मैं आदरणीय मंत्री से कुछ प्रार्थना करना चाहती हूं, जो मेरे संसदीय क्षेत्र टिहरी गढ़वाल में है,जो एक टूरिज्म का हब भी है । अगर देहरादून से मसूरी तक एक टॉय ट्रेन चल सके,तो बहुत ही बढ़िया होगा क्योंकि जो पर्यटन का रास्ता है, वहां इतना ज्यादा ट्रैफिक हो गया है कि चलने में लोगों को घंटों रुकना पड़ता है,तो एक टॉय ट्रेन जैस दार्जिलिंग,हिमाचल और जगहों पर है, हमारे उत्तराखंड में देहरादून से मसूरी के लिए भी एक टॉय ट्रेन होगी तो बढ़िया होगा । आदरणीय मंत्री जी से मैं यह भी कहना चाहती हूं कि जो ट्रेनें दिल्ली से देहरादून तक जाती हैं, उनका समय काफी लम्बा होता है । अगर हम ट्रेन को देहरादून वाया बिहारीगढ़, छुटमलपुर से ले जाएं तो दूरी करीब 80 से 90 कि.मी. कम हो जाएगी और इससे दो घंटे समय की बचत होगी और चलने में भी सुविधा होगी ।
मैंने लास्ट टाइम भी प्रपोज किया था एवं सुरेश प्रभु से कहा था । मैं पूर्व रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभु जी को भी धन्यवाद देना चाहती हूं जिन्होंने चारधाम रेल की शुरुआत की थी । मैं एक छोटी-सी मांग रखूंगी कि सीनियर सिटिजन्स और जिनके पैर में प्रोब्लम हो, उनके चढ़ने-उतरने के लिए जैसे बसेज़ में होता है, उसी प्रकार की व्यवस्था यदि रेलवे कोचेज़ में लग जाए तो इन लोगों के लिए अच्छा रहेगा ।
मुझे पूरा विश्वास है आप इसके लिए सहयोग करेंगे और यह काम पूरा करेंगे । मैं हमारी आदरणीय फाइनेंस मिनिस्टर निर्मला सीतारमण जी को धन्यवाद देना चाहती हूं । साथ ही पीयूष गोयल जी को और सुरेश जी को भी धन्यवाद देना चाहती हूं । धन्यवाद ।
…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्य श्री थोल तिरुमावलवन जी, आप थोड़ा इंतजार कीजिए । मैं आपको 5 मिनट में या 10 मिनट में वापस मौका देता हूं ।
*SHRI KHALILUR RAHAMAN (JANGIPUR): I would like to request the Government to kindly consider the following proposals:
(i) To take action for construction of railway underpass at Dhulian Pakur Road under Samsherganj Block for the greater interest of the patient, aged person and children.
(ii) To increase coach in Intercity Express running between Malda Town to Howrah via Katowa Junction which will help local people a lot.
(iii) Modernisation of Jangipur Road Station. (iv) To provide security facility in all the trains specially at night times to stop illegal activities.
श्रीमती अपरूपा पोद्दार (आरामबाग): अध्यक्ष जी, शुक्रिया । मुझे आप सिर्फ पांच मिनट ठीक से बोलने दीजिएगा,उससे पहले घंटी मत बजाइएगा ।
माननीय अध्यक्ष: मैं आपके लिए कभी घंटी नहीं बजाता ।
श्रीमती अपरूपा पोद्दार: आपने मुझे यहां बोलने के लिए मौका दिया उसके लिए धन्यवाद । I thank the Leader of my Party who has given me an opportunity to speak in this august House. Indian Railways play a significant role in development and growth of industry. In Indian Railways, we have faced many problems about which I would like to speak here.
The frequency of train accidents is increasing very fast. This has raised serious doubts in public mind about safety in railways. The reason for increasing number of railway accidents is this. There are overaged tracks, wagons, coaches, and an overaged signalling system. The Khanna Railway Safety Review Committee reports that nearly 32 per cent of the total railway track in India is overaged and is due for replacement. The Khanna Committee has further reported that 76 per cent of the railway accidents are due to derailments, seven per cent due to collisions, and 16 per cent take place at level crossings. Many social commitments are also there in the Railways which are to be noticed in this august House.
अध्यक्ष महोदय, पश्चिम बंगाल से जो भी सुपरफास्ट ट्रेन्स जाती हैं, चाहे हावड़ा से जाती हो या सियालदाह से जाती हो । ये ट्रेन्स यू.पी. बिहार होते हुए दिल्ली पहुंचती हैं । इन सुपर फास्ट ट्रेनों में 30 साल पहले भी एक आगे और एक पीछे लेडी के लिए जनरल कोच हुआ करते थे । उन ट्रेनों में वे लोग किस तरह से इतनी दूर सफर करते हैं । हम दोनों माननीय रेल मंत्री कैबिनेट मिनिस्टर व एम.ओ.एस. जो यहां पर है, मैं उनको आपके माध्यम से अवगत करना चाहती हूं कि वे ध्यान रखें कि किस तरह वे लोग जानवरों से भी ज्यादा बद्तर तरीके से इतनी दूर ट्रेवल करते हैं । जब यह सरकार सबका साथ सबका विकास और सबका विश्वास लेकर आई है । मेनडेट लेकर क्या यह सरकार इन साधारण लोगों के लिए एक बीस रुपये मील का इंतजाम करना चाहेगी । मैं माननीय मंत्री जी से आग्रह करूंगी कि इस बात को नोटिस में ले ।
There are many other problems like lack of passenger facilities including cleanliness at the railway stations, lack of security arrangement in all the railway stations and late running of trains. The food served by IRCTC is the main problem which common people are facing. The quality is also very low.
There are many problems in West Bengal regarding the Metro Rail which is maintained by the Railways. So, new coaches need to be added up and basic amenities for the common passengers need to be included. क्योंकि माननीय अध्यक्ष जी अभी इंडिया में अनइम्प्लॉयमेंट सबसे बड़ा इश्यू है । आप भी इस चीज को एक्सेप्ट कर लेंगे ।
20.00 hrs At present, there are 16,464 loco pilot posts which are vacant. In the safety category, there are 1,22,736 vacancies. The Railways are functioning with the 16 per cent vacant posts. So, kindly take a serious note of it. यह भी बहुत बड़े कंसर्न का विषय है । दोनों मंत्रीगण यहां पर हैं । मैं जानती हूं, मैंने एक बार श्री पीयूष गोयल जी को कहा था कि हमारे बोलोरनी रेलवे स्टेशन के बारे में आप थोड़ा ध्यान दीजिए । उन्होंने2018 में रेल मंत्रालय को इस बारे में कहा, उसके बाद भी वह काम नहीं हुआ । एक अन्य मेन प्राब्लम यह है कि आरपीएफ में 7,000 पोस्ट्स वैकेंट हैं, इस पर भी आप ध्यान दीजिए । …(व्यवधान)मैं दो मिनट और लूंगी । पश्चिम बंगाल में मेरे संसदीय क्षेत्र आरामबाग में,वहां की अभी की मुख्य मंत्री उस समय रेल मंत्री थीं, उन्होंने रेलवे को वहां की आम जनता तक पहुंचाया । बंगाल से जो नए सांसद चुनकर आए हैं, इससे पहले वह सदन को गलत इन्फार्मेशन दे रहे थे कि आरामबाग में रेल अभी तक शुरू नहीं हुई । उनको मैं बता देना चाहती हूं कि सिर्फ आरामबाग ही नहीं, वह गोघाट तक पहुंच गयी है और हम उनको आमन्त्रण देंगे कि वे गोघाट आएं और कामरपुकुर में रामकृष्ण परमहंस जी के जन्मस्थान तक पहुंचें और वहां कितना डेवलपमेंट हुआ है, उसे अपनी आंखों से देखें । मैं चाहूंगी कि तारकेश्वर और कामरकुण्डु को मॉडर्न रेलवे स्टेशन बनाया जाए । Please allocate funds for the halt at Bolondi station. There is a need for construction of new railway line between Arambag-Baichandi in Burdwan which is already a sanctioned project.
I want that speedy work has to be done in Tarakeshwar-Bishnupur project. There is a need to have a halt in Purshua station. जो लोग हमारे पास आ रहे हैं,जो बीपीएल फैमिलीज़ से हैं, उनको हम इज्जत मंथली पास नहीं दे पा रहे हैं । मैं फिर से नई सरकार से आग्रह करूंगी कि इज्जत मंथली पास उनको देकर, वापस उनको इज्जत दे दीजिए । There is a need to construct railway line from Bargechia to Chapadanga which is a long pending demand. There is a holy place namely Tarakeshwar. There is a need to construct a level crossing or underpass at Chandanpur Railway station in my Constituency. There is a need for extra coaches for all incoming and outgoing trains in West Bengal. For Joka and BBD Bag metro rail project, fund has not been allocated. I want to know from the hon. Minister as to why this kind of discrimination has been done.
There is a need to have a special recruitment drive for filling up of the vacancies for SCs, STs and OBCs. I urge the Minister to act proactively and take all possible measures to ensure that financial and fiscal targets are achieved.
With these words, I conclude my speech.
*श्रीमती अन्नपूर्णादेवी (कोडरमा): रेलवे के अनुदान की मांग पर मैं अपने विचार व्यक्त करती हूं । वर्ष 2019-20 के सामान्य बजट में रेलवे के अवसंरचना आदि के निर्माण का पूरा ख्याल रखा गया है । सामान्य बजट में रेलवे के लिये 65,837 करोड़ रुपये आबंटित किये गये है, जो रेल के विकास में सहायक सिद्ध होंगे । पूरे देश में रेलवे का लगातार विकास किया जा रहा है और कोने-कोने को रेलवे से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है । आम लोगों के लिए रेलवे की पहुंच होने के चलते बहुत ही सुविधाजनक हो गई है । मेरे संसदीय क्षेत्र कोडरमा (झारखंड) में रेलवे के दो जोन से संबंधित रेल गाड़ियों का परिचालन होता है । कई स्थान ऐसे हैं जहां पर सड़क रेलवे लाइन को पार करती हैा वहां पर आर.ओ.बी. का निर्माण आवश्यक है । पूर्व मध्य रेल के हजारीबाग रोड गेट न. 20बी/3जे सरिया में आर.ओ.बी का निर्माण अति आवश्यक है । राजधनवार रेलवे स्टेशन से पहले पचरुखी में आर.ओ.बी. की निर्माण की आवश्यकता है साथ चिचाकी गेट न. 18 पर आर.ओ.बी. की निर्माण की मांग की जाती रही है । उन सभी स्थानों पर आर.ओ.बी के निर्माण की मांग मैंने माननीय रेल मंत्री जी से मिलकर भी की थी । उम्मीद है माननीय रेल मंत्री जी इस मांग को पूरा करने का कार्य करेंगे ।
कई स्थानों पर खासकर कोडरमा स्टेशन पर राजधानी एक्सप्रेस के ठहराव की मांग बहुत पूरानी है । इस स्टेशन पर प्रतिदिन राजधानी एक्सप्रेस का ठहराव सुनिश्चित किया जाए । सियालदाह राजधानी एक्सप्रेस 12313/12322 तथा शर्माटांड स्टेशन पर 12351/12352 एवं परसाबाद स्टेशन पर 12801/ 12802 का ठहराव सुनिश्चित किये जाने की कृपा करेंगे ।
कई ग्रामीण क्षेत्र ऐसे हैं जिनका रेलवे स्टेशन से सीधा सम्पर्क नहीं है । पैसेन्जर गाड़ियां पकड़ने के लिए कई किलोमीटर पैदल जाना पड़ता है, उन स्थानों पर रेलवे हॉल्ट का निर्माण कराये जाने की आवश्यकता है । कोडरमा से गिरिडीह रेल खण्ड पर स्थित,रेम्बा सिजुआ एवं झारखण्ड धाम के आसपास में लोगों को रेल की सुविधा हेतु हॉल्ट का निर्माण कराया जाए । कोडरमा से महेश मुण्डा रेल लाइन में कई स्थान ऐसे हैं,जहां रेलवे हॉल्ट का निर्माण आवश्यक है । कोडरमा के मोरियामा में एक आर.यू.बी. (रेल अण्डर ब्रिज) का निर्माण कराया जाए ।
कोडरमा रेलवे स्टेशन को आधुनिक स्टेशन बनाया जाए तथा स्टेशन का विशेष रूप से सौन्दर्यीकरण कार्य कराया जाए । झारखण्ड राज्य में नये रेल लाइन के निर्माण हेतु सर्वेक्षण कराये जाने की आवश्यकता है । कई स्टेशन ऐसे हैं जहां पर पहुंचने के लिए अत्यंत स्थानों से होकर रेल यात्रा करनी पड़ती है, उन सभी स्थानों को मुख्य नगरों के स्टेशन से सीधा सम्पर्क करने के लिए नई रेल लाइन का निर्माण कराया जाए । मधुपुर-गिरिडीह कोडरमा रेल लाइन जो मात्र एकल रेल लाइन है उसे दोहरीकरण कराये जाने की आवश्यकता है ।
एकल रेलवे लाइन के निर्माण होने के चलते रेल परिचालन में काफी असुविधा हो रही है, ससमय गाड़ियों को चलाये जाने के लिए मधुपुर-गिरिडीह कोडरमा रेल खण्ड का दोहरीकरण कार्य की मंजूरी देने की मेरी मांगे हैं जो कि जनहित में है ।
झारखण्ड राज्य से रेलवे को करीब प्रतिवर्ष 25 हजार करोड़ का राजस्व की प्राप्ति होती है ऐसे में दक्षिण पूर्व रेलवे के क्षेत्रीय कार्यालय को कलकत्ता से स्थानांतरित कर रांची में स्थापित किया जाए ।
मैं रेलवे के अनुदान की मांग का समर्थन करते हुये अपनी बात समाप्त करती हूं । धन्यवाद ।
*SHRIMATI LOCKET CHATTERJEE (HOOGHLY): I would like to express my views on demand for grants on Railways for 2019-20.
Railway is the backbone for social and economic life of the Indians.
In the diverse country like India railways have very crucial role in uniting our nation.
In budget 2019, a lot of provisions have been made for the development of railways.
For this I would like to thank honourable Finance Minister.
Railways received a budgetary allocation of Rs. 65,837 crore and highest ever outlay for capital expenditure amounting to Rs. 1.60 lakh core in the Budget for the year 2019-20.
There is 200 per cent increase in funds for passenger amenities.
In the 2019-20 Budget, funds of Rs. 7,255 crore have been allocated for construction of new lines.
Rs. 2,200 crore for gauge conversion.
Rs. 700 crore for doubling railways lines.
Rs. 6,114.82 crore for rolling stock and Rs. 1,750 crore for signaling and telecom.
The allocation for rail passenger comfort this fiscal has gone up to Rs. 3,422.57 crore from Rs. 1,657 crore in the Budget presented last year.
Finance Minister, while presenting the Budget, said the railway infrastructure would need an investment of Rs. 50 lakh crores between 2018 and 2030 and proposed that a pubic private partnership (PPP) be used to unleash faster development and delivery of passenger freight services for railway projects to boost connectivity.
Railways will be encouraged to invest in suburban railways through special purpose vehicles (SPVs) and enhance metro rail network through PPPs. The Budget estimates also allocated Rs. 267.64 crore for Nirbhaya Fund, including provision of Rs. 250 crore for Integrated Emergency Response Management System (IERM) (Video Surveillance System).
I am also very thankful to honourable Prime Minister Shri Narendra Modi ji who make many promises to strengthen the Indian Railways.
Works on all of these have already started and you can expect them to be completed by 2022.
The Govt. will complete conversion of all viable tracks to broad guage by 2022.
Government will ensure electricification of all the railway tracks by 2022. Government start developing smart railway stations across the country.
Wi-Fi facility to be made available at all Railway stations. The Indian Railways has already made Wi-Fi services available at many stations.
The Rail Wire Wi-Fi service has been rolled out at 831 railway stations, which is one of the world’s largest public Wi-Fi networks.
Railway Minister Shri Piyush Goyal earlier said that the national transporter has plans to make free Wi-Fi available at 4,000 more railway stations across the country.
The national transporter will complete the freight corridor project by 2022.
The project will make the movement of goods much easier and cheaper.
The Vision of our Prime Minister to strengthen railways and efforts made by minister of railways will surely develop Indian railways at par with international standards.
KUMARI AGATHA K. SANGMA (TURA): Thank you Speaker Sir for giving me an opportunity to speak on the Demands for Grants of the Ministry of Railway.
Sir, I understand that in India one of the main ways of connecting people is through the Railways and I would like to congratulate the Railway Department for doing such a wonderful job in ensuring the mobility of the people of our country.
Sir, in the whole process of development, there has been one thing that really disturbs me. Since 1987 to July, 2019, it has been reported that over 370 elephants have been killed in train accidents. Apparently, there are about 18 elephant corridors through which railway track passes and there are six new proposals in these elephant corridors. In some of the places, the proposals are going on. In some places, the work has already been started.
Sir, elephants are nomads. They cannot live in one area because they are very large animals. It is very important for them to have mobility and move from one ecosystem to another. If they stick to one ecosystem, they end up by over-consuming the resources of that ecosystem. Therefore, elephant corridors have been established. My request to the hon. Minister through you is that, first of all, these elephant corridors have to be protected and no new railway line should be put up in areas wherever elephant corridors are there. In case, there are areas where elephant corridors exist and proposals have been made, I request the Government to ensure that under and overpass are constructed so that there is a safe passage for these animals.
Last year, there was a directive by the Ministry of Environment, Forest and Climate Change asking that in all projects where there is linear infrastructure and wildlife habitats exist, there must be an inbuilt process of doing mitigations. One of the suggestions of the MoEF&CC was that these safe passages be made. So, I urge the hon. Minister, through you, Sir, to ensure that these safe passages be created and a budget allocation be made for these passages.
Secondly, Swachh Bharat Abhiyan is one of the most important and the flagship programmes of our Government under the leadership of our Prime Minister, Shri Narendra Modi, and this programme has been extremely successful. Sir, 9.6 crore toilets have been built in this country since 2014 and 5.6 lakh villages have been declared open defecation free. But my concern is that most of the railway tracks are passing through the rural areas. There, they have trains where the toilets are still in a very sorry state because most of these trains have open sewage toilets and the sewage goes straight to the tracks. I feel that all the progress that has been made under the Swachh Bharat Abhiyan--all the reports say that the quality of water, the hygiene, the health of people, has drastically improved because of Swachh Bharat Abhiyan-- will be derailed if all these tracks that go through the rural areas have to bear the brunt of the very, very sorry state of toilets in our railway bogies. So, I request our hon. Minister, through you, that when we are talking about upgrading and modernising our railway stations and our railways in general, kindly consider improving the toilets and making sure that the disposal is not done on the railway tracks.
Thirdly, since it is a discussion on the Demands for Grants, my constituency also has a railway station. I request the hon. Minister to kindly consider upgrading the railway station in North Garo Hills which comes within my constituency.
My State of Meghalaya is also going to host the National Games in 2022, and the means of communication to my State is, thankfully to our hon. Prime Minister, through the UDAAN Scheme. Through this scheme, we are getting our new airport functional in this short span of time. We use the Guwahati airport and we use the Guwahati railway station. Since it is extremely a short time for the new tracks to be set in my State and it would not be possible in a short span of two years, I request you to ensure that the facilities are provided in Guwahati airport, which will also be beneficial to my neighbouring friends. Also, upgrade the railway station in Guwahati and improve connectivity so that it becomes possible for us to host the National Games successfully in Meghalaya in 2022.
Thank you so much for giving me this opportunity. I congratulate the Minister for this wonderful Budget.
SHRI THOL THIRUMAAVALAVAN (CHIDAMBARAM): Hon. Speaker, Sir, before I speak on the Demands for Grants, I would like to express my sincere thanks to your goodself for sending us the circular on Swachhta Abhiyan in English. Really, I got shocked in the early morning when I received the circulars only in Hindi. After our demand, you have directed your subordinates to issue the circulars in English also. Thank you very much for that.
I have a request. I am single Member of my Party. When I rise up to speak, I am always in tension because you are always giving me only two or three minutes’ time. Really, I am very sorry for this. How can I express the demands of my constituency and my people within this short time? I need five minutes’ time. Now, I will speak in Tamil.
*Hon. Speaker Sir, I thank you wholeheartedly for this opportunity. Indian Railways is the third largest employer of the world. I wish to bring to your notice some of the issues pertaining to Southern Railway. Apprenticeship Act says 80 percent of the job appointments as well Apprenticeship selection should from Tamil Nadu as in the case of Southern Railway or the States concerned in case of other Railways. During the last 14 years approximately 15000 persons after being trained under Apprenticeship training programme are waiting for employment. Recently in Golden Rock Railway Workshop, an exam was conducted for selection of candidates for Apprenticeship training. As many as 1765 persons were selected to undergo that training. Out of which 1600 persons belonged to North Indian States. Only 165 persons thus selected were from Tamil Nadu. Why there is such a discrimination?. Hon. Minister for Railways should look into this matter and order for an enquiry. In this connection the members of the Union concerned have filed a case in the Hon. High Court and the case is pending. They have demanded for a CBI enquiry into the irregularities. They have proved that there were irregularities and corrupt practices followed even in the examination conducted by RRB. I wish to bring to the notice of Hon. Speaker some information released in this regard. Justice Dhandapani has observed about the case that is pending in the Hon. High Court. I quote:
“There is something serious in this. Such type of discrimination cannot be done against a particular State alone. If such things are done by authorities from Tamil Nadu, it would have been made a national issue. They would have been called anti-national.” Justice Dhandapani observed. Why he is making such a statement. Justice Dhandapani after adjourning the hearing of the case has quoted the views mentioned in the case. Postal Recruitment Scam in which candidates from Punjab, Haryana and Maharashtra have scored higher marks in Tamil when compared to Tamil candidates. Hon. Speaker should understand how shocking it is to know that the candidates from other States who don’t know Tamil have scored good marks in Tamil paper than the Tamil knowing candidates from Tamil Nadu. ... *. Those who belong to Tamil Nadu are deprived of such employment opportunities. I wish to register in this august House that this is grave injustice. Hon. Minister of Railways should take note of this issue. Not only for Tamil Nadu, persons belonging to every State concerned should be given importance and priority in the employment opportunities available in that particular State. Such irregularities take place particularly in Group D posts like peon, trackman, gang man and sanitary workers, I want to share one recent news item with you. Recently in Chennai Railway station, a circular was issued stating that the Station Officials should converse with the Higher Officials only in Hindi. As per law, it has been made mandatory one that only the locals and the people knowing the local language should be appointed. Since persons from Other States who do not know the local or regional language or English are appointed in place of persons knowing the local language, accidents occur frequently Sir, I therefore request the Hon. Minister through you that as per the Apprenticeship Act, the locals concerned should be given priority and importance at the time of selection for Apprenticeship training as well as for job appointments. My Chidambaram constituency is a tourist centre. It is a place where the world famous Shiva temple is located. Tourists in large number visit this place very often. In my Chidambaram constituency, Rameswaram is also a famous pilgrim centre. Tirupati is another pilgrim centre. At present the train service between Rameswaram and Tirupati is operated thrice in a week. I request Hon. Railway Minister through you Speaker Sir, that this train service between Rameswaran and Tirupati should be operated on a daily basis. Thank you for this opportunity. Vanakkam.
डॉ. निशिकांत दुबे (गोड्डा): स्पीकर सर, इन्होंने अपनी स्पीच में नॉर्थ इंडियन आदि जैसे शब्दों का उपयोग किया है, मेरा कहना है कि उसे एक्सपंज करा दिया जाए ।
माननीय अध्यक्ष: मैं चेक करा लूँगा । सारा देश एक है ।
*SHRIMATI PRATIMA MONDAL (JAYANAGAR): Railways have played a significant role not only by providing a mode of transportation for the people of India but also promoted development and growth of industries. 16th April 1853 witnessed the first passenger train in our country, 166 years have passed by but the progress and development is not at all up to the desired level. Whereas countries like Japan that had introduction of railway systems after India have surpassed us long back. Our system is still plagued with innumerable problems.
The year 1925 marked the first railway budget and witnessed merger in 2016, today we stand in a position where just a small paragraph was dedicated to the sector which stands at 8th position in the world for providing employment. The system is incapable of functioning in extreme conditions, evident in the current situation of Mumbai which has become a yearly phenomenon. This recurrent problem did not attract the respected Finance Minister’s attention, why?
Year after year of promises are not reflected on the ground. It is common to hear from our people that after all its Indian railway, how can it be punctual? It will obviously be delayed. Whereas in other countries a delay of mere 10 seconds is apologized upon.
Coming to cleanliness, everyone present here are well aware of the actual condition. The Government cannot claim falsely that each and every platform across the country is provided with safe drinking water. Neither are the trains as clean as they should be. Cleanliness standards set for railway employees to follow are very low. People should be more aware and responsible as well. Bio toilets installed in the trains do not function properly. Again this issue did not seem as important as to be addressed. Simple allocation of funds does not reflect efficiency of a budget and for that matter the government as well. Proper system to discharge functions is required.
The much talked about Vande Bharat express cannot be declared as successful. Very recently it has been found violative of certain specifications. Investigation is also on into allegations that one company was favored in making of Rs. 97 crore trains set. Nothing new in this thought, it is the most common trait of the government, promoting favoritism. It also reflected the efficiency of Make in India programme by a break down caused in the train just after a day of its launch. My question here is what are the steps that the government intends to take in these matters? Because the actions speak that everything is running smoothly.
The list is endless; we cannot claim that Indian railway is the safest form of transport. The train travel became riskier as the crime rate jumped by 34% in 2017. Incidence of IPC crimes committed in railways includes murder, rape, rioting, kidnapping, robbery, theft etc. Did the government indicate any proposed solution for these trivial matters? A big no.
The proposed bullet train will be made functional in the coming years at the cost of 53,467 mangrove trees in the state of Maharashtra. I will not deny the importance of a bullet train, yes it will benefit a small group of people but thousands and thousands of others are deprived of basic infrastructural progress.
Instead the most important matter for the government reflected in the budget is an aggressive pace to rapid corporatization and privatization of railways. The NFIR has directed all its affiliates for a massive protest from 10th to 13th July of all over Indian Railway. Does the government have any intention to address the issue? Or will it just play the role of a silent viewer and display its obdurate behavior.
The motive of a budget is to bring relief to people’s life instead it caused unrest. It has provided nothing for the betterment of the sector. Technologies in today’s time are capable enough to connect the rugged and high mountains to other parts. When will Indian achieve that? Where are the proposed plans to achieve that?
I would like to end by putting forth certain requirements of my constituency because even after innumerable pleas and letters demands have not been fulfilled:
To complete long pending work of one side platform of Chandkhali Halt Station on Sealdah Canning Line at the earliest as opposite side platform has already been completed more than 8 years ago which falls under my Parliamentary constituency Joynagar and I had raised this issue in 16th Lok Sabha several times.
To take initiative for construction of new Railway Line from Joynagar to Moipith via. Jamtala under Joynagar Parliamentary constituency and I had raised the matter in 16th Lok Sabha several times.
To take action for operating local train service from Sealdah to Joynagar at the earliest for the greater interest of the local people.
Various Stations across India and even in my constituency, either the level of platforms are low or the gap between the platform and the train is very wide. This causes problem and accidents specially relating to children and senior citizens while boarding the train. Reconstruction of platform is also an essential task that is to be looked into.
*SHRI HASMUKHBHAI SOMABHAI PATEL (AHMEDABAD EAST): In my constituency Ahmedabad-East, Railway Under-pass work is under progress near Dahegam since last two years.
It is requested that this under-pass work may kindly be completed at the earliest, so that people could move in a short way between Dahegam and Gandhinagar. Presently people have to travel by a very long route.
In my constituency Ahmedabad-East, Vatva Railway Station (the suburban Railway Station of Ahmedabad City), there is no proper building and shed, No foot over Bridge across the platforms, so the Passengers are forced to cross the Railway Tracks putting their life at risk.
I request the Hon’ble Railway Minister to give instructions to construct the Building of the Railway Station and shed and also to build foot over Bridge between the platforms.
*DR. AMAR SINGH (FATEHGARH SAHIB): The current railway budget sets some very tall goals. What I worry is that these goals may remain on paper only. eg : Finance Minister has mentioned that the railways needs about 50 lakh crores investment from 2018 to 2030. And said that it would be done through PPP model. I have serious doubts. Indian Banks are reeling under NPAs. Save few corporate, everyone else is busy selling off unprofitable divisons and assets while the economy may be heading to a systemic slowdown as evident in the falling investment rate. In this scenario who will be willing to invest in a long term capital intensive sector like railways remains to be seen.
At the same time railways is a sensitive national asset. Can we afford to have disputes with investors including foreign investors over payments and charges. What happens if the disputes are not settled in a time bound pattern and start affecting the operations of railways.
Special purpose vehicles are proposed for sub urban railways. My mind goes to UK where the entire rail network was privatized and now 3 decades later there is a national movement for renationalization because noting has improved on infrastructure and service quality, only the fares have gone up generating resentment in travelers. As a poor country we must guard against this as the railways are the main source of transport for majority of our citizens.
60-70% of fruits and vegetables are getting wasted between farm and the customer. Railway can provide special rail carriages to transport them across the country which will benefit millions of farmers and consumers.
With respect to my home state Punjab sir I want to make a demand. Sikh community all over the world has immense faith and intend to visit Shri Darbar Sahib Gurudwara in Kartarpur, Pakistan. Governments of both countries have agreed for creation of border corridor between the neighboring nations of India and Pakistan, connecting the Sikh Shrines of Dera Baba Nanak Sahib (located in Punjab, India) and Gurudwara Darbar Sahib Kartarpur (in Punjab, Pakistan) for the facilitation of visitors during upcoming 550th birth anniversary of 1st Sikh Guru Shri Guru Nanak Dev ji.
I want to request that in addition to road network a railway facility may also be provided to all devotees visiting Shri Darbar Sahib Gurudwara in Kartarpur. It will be really nice if railway minister could announce the creation of rail network in his reply tomorrow.
Another critical issue is that while Rajpura Bhatinda line has been electrified it’s not been doubled hence congestion hasn’t reduced neither has travel times. I demand that double lines along with electrification on this road may be taken up on priority.
All the food godowns in Punjab are overflowing and about 100 lacs tones of wheat is lying the open ie: CAP (Cover and Plinth) which is very vulnerable for damage causing national loss. Punjab state is not getting adequate number of rakes for evacuation of food grains. If it continues then it may be difficult for procuring paddy and rice in next upcoming months hence I request that the number of rakes may be increased many times for evacuation of food grains.
Now I am making a demand for my parliamentary constituency Raikot sub division is the last sub division of Ludhiana district towards Sangrur. It has great historical importance with Tenth Guru, Guru Gobind Singh ji having come here from Machiwara Sahib. I have spoken during Zero Hour about the martyrdom of Guru Gobind Singh ji’s two younger Sahibzadas, Santa Baba Zorawar Singh and Sant Baba Fateh Singh ji. Two young children aged 7 and 9 were bricked alive by Aurangzeb and his Governor Wazir Khan and need to commemorate their sacrifice by developing Shri Fatehgarh Sahib as an international pilgrimage circuit.
It was at Raikot that Guru Gobind Singh ji got information about the martyrdom of his sons as they had refused to embarace Islam. On hearing the news, Guru Gobind Singh dug out the root of Kaahi’s plant with the help of his arrow and declared that Mughal rule roots have been dug. Within 5 years of this proclamation of the Tenth Guru, Mughals had been defeated in Punjab, Sikh Raj was established and their Governor Wazir Khan killed by Band Singh Bahadur at the battle of Chappar Chirri.
Gurudwara Shri Tahliana Sahib Raikot along with Shri Machiwara Sahib and Shri Fatehgarh Sahib are all connected historically and part of Shri Fatehgarh Sahib Lok Sabha. Raikot has remained backward till date simply because rail lines cross the sub division’s boundaries but have never connected Raikot town to the main rail network. Industry cannot flourish without freight services and the lack of railway connectivity has meant that no substantial industry could be set up till now. It’s even sadder that passengers from poor families end up paying more than their eventual rail fare sometimes simply to get to the nearby stations.
Luckily, Raikot lies between major rail lines, its roughly 20 Kms from the Mullanpur station and less than 30 Kms from the Barnala station. I have already mentioned the historical and economic reasons why it should be connected to the railway network. I had raised the same issue in my meeting with the Honourable Railway Minister on 3rd July. The Indian railways are the lifeline of our nation. It’s the preferred mode of transport for the poorest and weakest citizens of this country. Wherever and whenever a poor person can find a train he chooses to travel by it because of the safety and affordability offered by the Indian railways. Hence I would like to requestthe Government to sanction the laying of rail track form Mullanpur to Barnala via Raikot sub division.
*श्री गिरीश चन्द्र (नगीना): मैं रेल बजट पर अपने विचार रखता हूं । मैं नगीना लोक सभा क्षेत्र की सम्मानित जनता का भी शुक्रिया अदा करता हूं । मुख्य रूप से मेरे संसदीय क्षेत्र से होकर गुजरने वाली कुछ गाड़ियों का ठहराव पहले सुनिश्चित था, लेकिन अब उन गाड़ियों का ठहराव नहीं है । जैसे-
हावड़ा-अमृतसर एक्सप्रेस डुप्लीकेट जो गाड़ी नम्बर13049/13050का धामपुर नगीना में पहले ठहराव था, लेकिन अब नहीं है, इससे न केवल रेल राजस्व में कमी आयी बल्कि जनता भी परेशान रहती है । इसी प्रकार हरिद्वार से रामनगर गाड़ी नम्बर 15033/15034का भी पहले धामपुर नगीना में ठहराव था, लेकिन अब इस गाड़ी का भी ठहराव नहीं है । जनसेवा गाड़ी नं. 14617/14618 जो मुरादाबाद से पंजाब की तरफ जाती है, जो सुबह 5 बजे व रात 10 बजे की ट्रेन है । इस गाड़ी का ठहराव भी पूर्व की भांति नगीना और धामपुर स्टेशन पर ठहराव सुनिश्चित किया जाए । धामपुर रेलवे स्टेशन पर सफाई कर्मचारी की व्यवस्था की जाए । इस स्टेशन पर विशिष्ट लोगों के लिए वीआईपी रूम नहीं है । नगीना धामपुर-श्योहारा स्टेशन पर सुबह8 बजे से 3 बजे तक आरक्षण केन्द्र खोला जाता है । यदि उसको प्रातः 8 बजे से सायं 8 बजे तक खोला जाए तो जनता की परेशानियों को दूर करने के साथ-साथ इससे रेलवे राजस्व में भी बढ़ोत्तरी होगी । दिल्ली से बिजनौर को सीधी रेलगाड़ी चलाई जाए । बिजनौर रेलवे स्टेशन पर सफाई आदि की व्यवस्था कराई जाए ।
श्री लल्लू सिंह (फैजाबाद): विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र की अर्थव्यवस्था भी उसकी गरिमा के अनुरूप हो, इससे बेहतर और कुछ नहीं हो सकता है । माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केन्द्रीय वित्त मंत्री जी ने आम बजट प्रस्तुत करते हुए रेलवे के लिए किये गये एक लाख साठ हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया है । इसका एहसास देश की 135 करोड़ जनता को कराया गया है । इसके साथ ही रेलवे के लिए65 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान ग्रॉस बजटरी सपोर्ट के रूप में भी किया गया है । सरकार ने रेलवे के लिए जिस प्रकार का खाका खींचा है और जो लक्ष्य निर्धारित किये हैं, उससे स्वाभाविक है कि इन आयामों से होकर गुजरने से निश्चित रूप से लक्ष्य की प्राप्ति होगी ।
मान्यवर, सरकार ने बजट में स्वच्छ, सुरक्षित और समयबद्ध रेल यात्रा की जो चर्चा की है, वह देश के नागरिकों के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है । सरकार ने बजट में तीन सौ किलोमीटर की नई मेट्रो रेल लाइन परियोजना को मंज़ूरी दी है, जो एक सराहनीय कदम है । साथ ही रेलवे किराये के लिए आदर्श किराया कानून बनाने का जो प्रस्ताव दिया है, वह भी अच्छा कदम है । सरकार ने रेलवे ट्रैक के लिए पीपीपी मॉडल की मंज़ूरी दी है, इससे रेलवे के विकास में तेजी आएगी । बजट में ट्रैक और सिग्नलिंग के आधुनिकीकरण पर भी विशेष ध्यान दिया गया है । सरकार ने इस बार के बजट में यूरोपियन सिग्नल इंफ्रास्ट्रक्चर अपनाने का जो विचार किया है,इससे रेल यात्रा में न केवल तेजी आएगी, बल्कि रेल यात्रा भी सुरक्षित होगी ।
मान्यवर, जिस प्रकार से रेलवे में तेजी से सुधार लाने के लिए बजट दिया गया है और जिस प्रकार से माननीय कैबिनेट मंत्री और माननीय राज्य मंत्री रेलवे में तेजी से विकास करने के लिए काम कर रहे हैं, इससे मुझे विश्वास है कि आने वाले समय में दुनिया के देशों में सबसे तेज चलने वाली रेलों में भारतीय रेल भी शामिल होगा ।
फ़ैजाबाद लोक सभा क्षेत्र, जो मेरा संसदीय क्षेत्र है, जिसमें अयोध्या आता है, वहाँ माननीय मोदी जी ने अयोध्या रेलवे स्टेशन, जो इस देश का सबसे सुन्दर रेलवे स्टेशन बनने जा रहा है, वह बन रहा है, उसकी मंज़ूरी दे दी गई है, उसके लिए मैं अपने लोक सभा क्षेत्र की जनता की ओर से उनको धन्यवाद देता हूँ ।
बाराबंकी से अकबरपुर, अकबरपुर से ज़फराबाद रेल लाइन के दोहरीकरण की मंज़ूरी हो चुकी है और रेलवे लाइन के इलैक्ट्रिफिकेशन की भी मंज़ूरी हो चुकी है । प्रयाग से फैज़ाबाद,अयोध्या से मनकापुर रेलवे इलैक्ट्रिफिकेशन की मंज़ूरी हो चुकी है ।
माननीय मंत्री जी से मेरा आग्रह है कि तेजी के साथ इस काम को कराने की कृपा करें । अयोध्या और चित्रकूट का बहुत ही आत्मिक संबंध है । अयोध्या की पहचान चित्रकूट से है, चित्रकूट की पहचान अयोध्या से है । जो अयोध्या आता है,वह चित्रकूट जाना चाहता है और जो चित्रकूट आता है, वह अयोध्या जाना चाहता है । इस रूट पर सीधे रेल लाइन का कनेक्शन न होने के कारण यात्रियों को बहुत ही असुविधा होती है । इसलिए माननीय मंत्री जी से मैं निवेदन करूंगा कि अयोध्या से चित्रकूट तक इंटरसिटी ट्रेन चलाई जाए । अयोध्या से जनकपुर, सीतामढ़ी तक जो रेलवे लाइन है, उस पर एक नई ट्रेन चलाई जाए । साकेत एक्सप्रेस, जो फैजाबाद से मुंबई जाती है,उसे दैनिक किया जाए । फैजाबाद मालगोदाम का सलारपुर स्टेशन के लिए ट्रांसफर होना है, उसका शिलान्यास हो गया है । अयोध्या कोल डिपो का भी दूसरे स्थान पर ट्रांसफर होना है । इन दोनों मालगोदामों और कोल डिपो को जल्दी से जल्दी ट्रांसफर करने की कृपा की जाए ।
इसके साथ ही मैं माननीय मंत्री जी से एक और आग्रह करूंगा । फैजाबाद रेलवे स्टेशन चूंकि एक जंक्शन है,इसलिए सारी ट्रेनें फैजाबाद से होकर गुज़रती हैं । इसलिए फैजाबाद रेलवे स्टेशन का एक मॉडल रेलवे स्टेशन के रूप में निर्माण किया जाए और अयोध्या से गुज़रने वाली सारी ट्रेनों को वहां स्टॉपेज देने की व्यवस्था की जाए । फैजाबाद से बस्ती और फैजाबाद से रायबरेली,अकबरगंज रेलवे लाइन का सर्वे हो गया है । मैं माननीय मंत्री जी से आग्रह करूंगा कि इन रेलवे लाइनों को मंजूरी देकर इनका निर्माण कराने का कष्ट किया जाए । धन्यवाद ।
*श्री मलूक नागर (बिजनौर): रेल बजट पर मुख्य-मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं ।
दिल्ली से गढ़वाल जाने वाली ट्रेन, जो बिजनौर होकर जाती है, उसमें केवल एक एसी डिब्बा है, उसमें दो डिब्बे एसी के जोड़े जाएं । मेरे लोक सभा क्षेत्र बिजनौर से दिल्ली के लिए सीधी ट्रेन चलाई जाए । बिजनौर रेलवे स्टेशन पर वाशरूम आदि की सफाई नहीं होती है । कृपा करके वहां सफाई कर्मियों की व्यवस्था कराई जाए ।
देश के चारों मेट्रो शहर दिल्ली, मुम्बई, चेन्नई और कोलकाता व बी ग्रेड शहरों के सभी स्टेशन्स के पास बगैर प्रयोग की भूमि की बिक्री की जाए या उसे लीज़ पर चढ़ाया जाए । सभी स्टेशन्स का सौन्दर्यीकरण कराया जाए । भूमि की बिक्री या लीज़ पर देने से जो रकम प्राप्त हो, उससे पूरे देश में नई ट्रेन्स चलाई जाएं । इससे रेलवे को ज्यादा कमाई होगी । रेलवे लाइनों का नवीनीकरण कराया जाए । इससे आने वाले समय में देश में रेल दुर्घटनाओं बहुत कमी आएगी । ऐसा करने से रेलवे को कमाई भी होगी और आने वाले समय में रेलवे का हजारों करोड़ रुपये का फायदा भी होगा । इस फायदे से देश की सम्पत्ति देश के पास ही रहेगी । अगर रेलवे को फायदा नहीं होता है,तो हमें यह लगता है कि सरकार रेलवे का भी प्राइवेटाइजेशन न कर दे । सरकार दूसरे उपक्रमों, जैसे कि उड्डयन मंत्रालय में आजकल प्राइवेटाइजेशन के बारे में सोच रही है । ऐसा करने से रेल मंत्रालय का विश्व में नाम होगा ।
SHRI P. RAVEENDRANATH KUMAR (THENI): Hon. Speaker, Sir, thank you for the opportunity. Sir, today is Guru Purnima. I am really blessed and happy to speak before you and hon. Home Minister, Shri Amit Shah Ji.
Sir, I support the Demand for Grants under the Ministry of Railways for the year 2019-20 on behalf of my AIADMK party, our hon. Chief Minister and Deputy Chief Minister of Tamil Nadu.
First of all, I would like to express my heart-felt thanks to our hon. Prime Minister Shri Narendra Modi Ji for honouring our party founder and former Chief Minister of Tamil Nadu by renaming the century-old Chennai Central Railway Station as ‘Puratchi Thalaivar Dr. M.G. Ramachandran Railway Station’.
I also congratulate our hon. Railway Minister Shri Piyush Goel Ji for having assumed the office of India’s largest passenger and cargo transport network. I am very much impressed and excited on his speedy dedication towards his work. I thank him for timely approval of transportation of water through rail from Jolarpettai to Chennai to address the water scarcity immediately.
During the last few decades, there was a sense of disorder experienced in Indian Railways and planning was done in bits and pieces manner as far as railway projects are concerned. Now, our Indian Railways have done extremely well over the last five years effectively in all the sectors whether it is speed, cleanliness, security, modernisation, comfort and expansion.
Sir, our hon. Prime Minister Shri Narendra Modi Ji has already tweeted that our Indian railways is not just a mode of transport but a growth engine. Accordingly, I am confident that this year Railway Budget will prove that it is meant for the common people as it aspires for better service, speed and safety with focus on development of the country.
I also welcome the announcement of the Government to enhance the gross budgetary support of Rs.66,105 crore which is 25 per cent increase from the revised estimates of 2018-19. I appreciate the hon. Minister of Railways for estimated income of Rs.2,16,935 crore and this is also 10 per cent increase from the revised budget.
However, I am concerned about the investment to be increased in the Indian Railways to expand its network across the country.
It is estimated that an amount of Rs. 50 Iakh crore is required for development of Railway infrastructure by the end of the year 2030. I hope that the strong leadership of our hon. Prime Minster and deep knowledge of our hon. Railway Minister would be playing a major role to achieve this target.
As far as my State of Tamil Nadu is concerned, it is one of the main States in the country providing bounty of income to the Indian Railways. The Government has decided to electrify 7,000 km. across the country with an outlay of Rs. 6,960 crore. Out of this, 1,166 km. is going to be electrified in Tamil Nadu alone. I express my special thanks to hon. Finance Minister and hon. Railway Minister, and I request the Government to expedite the process and to complete the same within the prescribed time.
I would also like to bring to your kind notice about Dhanushkodi. Dhanushkodi is one of the Rama Bhoomi, which is the ancient pilgrim town in the South-eastern tip of Tamil Nadu having strong Hindu mythological connection with the epic Ramayana as Lord Rama lived at this place; worshipped ‘thelinga’ at this place; and built the Rama-Sethu Bridge with the help of Hanuman from Dhanushkodi to Sri Lanka. The pilgrims around the world usually bathe in the ocean here before completing the pilgrimage to Rameshwaram. The spot is considered a sacred confluence of the Bay of Bengal and the Indian Ocean. The Railway line between Rameshwaram and Dhanushkodi got vanished during the 1964 cyclone. Our hon. Prime Minister had laid the foundation stone for this Railway line. So, I would request the Government to take necessary steps to complete the project.
Now, I would like to mention about my Constituency issues. There is a need for expediting the gauge conversion project of 90.41 km. from Madurai to Bodinayakkanur, which comes under the Theni Parliamentary Constituency. I would urge the Government to expedite this gauge conversion project.
There is need for another new line from Dindigal to Sabarimala via Bodinayakkanur. The survey, which was done, covers 201 km. This line would cater to a large number of people from both Tamil Nadu and Kerala States who will be very much benefitted from it. This project will also boost the revenues for the Railways. This project is still at its initial stage. I would request the Government to take necessary action to start work on this line.
I understand that the Government has established the National Rail and Transportation Institute recently with the aim of creating a resource pool of best-in-class professionals for the Railway and transportation sector. I would request the Government to open a new campus in Tamil Nadu. I am sure that it will produce very talented professionals from my State of Tamil Nadu.
With this, I conclude and support the Demand for Grants of the Ministry of Railways. I once again convey my best wishes to the Government for the successful completion of all projects and accomplish the challenge of accruing adequate investment for expanding the network of the Indian Railways. Thank you, Sir.
*श्री निहाल चन्द चौहान (गंगानगर): रेलवे नेटवर्क किसी भी देश की रीढ़ की तरह है, क्योंकि यह देश के वाणिज्यिक,औद्योगिक और आर्थिक विकास में एक प्रमुख भूमिका निभाता है । वर्तमान में हमारी सरकार उच्च गति वाले रेल नेटवर्क को स्थापित करने के लिए काम कर रही है । साथ ही रेलवे के सभी क्षेत्रों में समग्र विकास ही हमारी प्रतिबद्धता है । माननीया वित्त मंत्री ने रेलवे सेक्टर को पी.पी.पी. (पब्लिक प्राईवेट पार्टनर्शिप) मॉडल के आधार पर विकास की घोषणा की है ।
हमारी सरकार ने देश में रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार कर इसके बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए साल 2018 से 2030 के बीच 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश की आवश्यकता बतायी है और इसे देखते हुए रेलवे का पूंजी परिव्यय प्रति वर्ष 1.5 से 1.6 लाख करोड़ रुपये है । सब अर्बन रेलवे में बड़ा निवेश किया जाएगा । मुंबई और दिल्ली जैसे महानगरों में सब अर्बन रेलवे बेहद सफल रहा है ।
वर्ष 2019-20 के बजट में 300 किलोमीटर मेट्रो रेल परियोजना को मंजूरी प्रदान की गई है और इस वर्ष 657 किलोमीटर नए मेट्रो रेल नेटवर्क पर संचालन शुरू कर दिया जाएगा । रेलवे किराए में सुधार के लिए आदर्श किराया कानून बनाने का भी प्रस्ताव पेश किया है । इसके जरिए रेलवे यात्रियों की जरूरत, सुविधाओं और विभाग की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए किराया तय किया जाएगा ।
हम न केवल तेज रफ्तार ट्रेन चलाने की दिशा में काम कर रहे हैं, बल्कि ट्रैक और सिग्नलिंग के आधुनिकीकरण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है । भारतीय रेलवे द्वारा जल्द यूरोपियन सिग्नलिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर को अपनाने पर भी विचार किया जा रहा है । इससे रेल यात्रा को आरामदायक और सुखद अनुभव बनाने के लिए हम इस वर्ष बड़े पैमाने पर रेलवे स्टेशनों को आधुनिक करने का कार्यक्रम शुरू करेंगे ।
स्टेशनों को विश्वस्तरीय बनाने के लिए रेलवे ने फ्रांस के साथ समझौता किया है । फ्रांस के साथ हुए इस समझौते के तहत ढांचागत विकास पर सरकार सात लाख यूरो खर्च करेगी । हमारी सरकार पहले से ही स्टेशनों को विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में काम शुरू कर चुकी है और इसके तहत अब रेलवे स्टेशनों को मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब बनाया जाएगा । इसके अंतर्गत अब लोगों को रेलवे स्टेशन से ही कई तरह के परिवहन साधन उपलब्ध होंगे । इंडियन रेलवे स्टेशन डेवेलपमेंट कॉरपोरेशन (आईआरएसडीसी) वर्तमान में मध्य प्रदेश के हबीबगंज स्टेशन और गुजरात के गांधी नगर स्टेशन को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विकसित कर रहा है ।
रेलवे नेटवर्क में बढ़ते बोझ को खत्म करने के लिए जलमार्ग को तेजी से विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है । इसके अलावा मालगाड़ियों के लिए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसीज़) का निर्माण भी तेजी से किया जा रहा है । इस बार भी हमारा फोकस सुरक्षित रेल यात्रा पर होगा । यात्रियों की सुरक्षा के लिए स्टेशनों और ट्रेनों के अंदर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे ।
मेक इन इंडिया प्रोजेक्ट के तहत 100 करोड़ रुपये से भी कम लागत में देश में बनाई गई वंदे भारत एक्सप्रेस भारतीय रेलवे की फ्लैगशिप ट्रेन में शामिल है और आगे भी इस दिशा में हम कार्यरत हैं।
रेल यात्रियों को सबसे बड़ी राहत देते हुए यात्री किराए में किसी तरह की बढ़ोत्तरी की घोषणा नहीं की गई है । रेलवे स्टेशनों के जीर्णोद्धार के लिए रेलवे द्वारा इस वर्ष एक विशेष अभियान चलाया जाएगा । हमारी सरकार भारतीय रेलवे प्रदूषण मुक्त अभियान के तहत ग्रीन एनर्जी पर फोकस कर रही है । इसके तहत पुराने डीजल इंजनों का आधुनिकीकरण कर उन्हें इलेक्ट्रिक इंजन बनाया जा रहा है । मेक इन इंडिया अभियान के तहत इंजनों के आधुनिकीकरण का काम देश में ही किया जा रहा है और हाल ही में डीजल इंजन को इसी अभियान के तहत इलेक्ट्रिक इंजन में बदला गया है ।
देश को प्रगति के पथ पर अग्रसर करने के लिए भारतीय रेल का विकास भी बहुत जरूरी है, जिसमें आधुनिकीकरण के साथ-साथ सुरक्षा व्यवस्था को भी सुचारू रूप से व्यवस्थित करने की आवश्यकता है और इस दिशा में हमारी सरकार ने सराहनीय कार्य किया है और इसी दिशा में आगे भी प्रयासरत है । यात्रियों पर किराये का बोझ न डालते हुये भी हम भारतीय रेल को विकास की ओर अग्रसर कर रहे हैं, इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए आदरणीय प्रधानमंत्री व रेल मंत्री जी बधाई के पात्र हैं ।
रेलवे सुविधाओं हेतु संसदीय क्षेत्र श्रीगंगानगर (राजस्थान) की प्रमुख मांग:-
• श्रीगंगानगर जंक्शन से वाया बठिंडा, धुरी,लुधियाना, जालंधर, ब्यास होते हुए अमृतसर के लिए इंटरसिटी रेल की शुरुआत की जाए ताकि सिख बाहुल्य इस क्षेत्र को स्वर्ण मंदिर और डेरा ब्यास जैसे पवित्र स्थानों के लिए सीधी रेल सेवा मिल सके ।
• गाड़ी संख्या 14520 किसान एक्सप्रेस जो कि बठिंडा से दिल्ली के मध्य संचालित होती है । इस गाड़ी का विस्तार बठिंडा के बाद वाया मंडी डबवाली, संगरिया,हनुमानगढ़ जंक्शन,सादुलशहर होते हुए श्रीगंगानगर तक किया जाये ।
• उत्तर-पश्चिम रेलवे के अंतर्गत सूरतगढ़ से कैनाल लूप पर पड़ने वाले जैतसर, रायसिंहनगर,गजसिंहपुर,श्रीकरणपुर व केसरीसिंहपुर क्षेत्र की जनता लंबे समय से जयपुर के लिए रेल सेवा की मांग और इंतजार कर रही है । जल्द ही इस मार्ग से जयपुर के लिए रेल सेवा की शुरूआत की जाए ।
• गाड़ी संख्या 14085/14086 (हरियाणा एक्सप्रेस) पैसेंजर गाड़ी तिलक ब्रिज (दिल्ली) से हिसार के मध्य संचालित होती है । इस गाड़ी का विस्तार सिरसा के बाद वाया बठिंडा,मंडी डबवाली,हनुमानगढ़ जंक्शन,संगरिया, सूरतगढ़, स्वरूपसर, रायसिंहनगर व श्रीकरणपुर होते हुए श्रीगंगानगर तक किया जाए ।
• जिला हनुमानगढ़ में एक वाशिंग लाइन का निर्माण किया जाना बहुत ही आवश्यक है, बठिंडा जंक्शन जोकि हनुमानगढ़ जंक्शन से लगभग 80 कि.मी. की दूरी पर स्थित है, में भी वाशिंग लाइन हेतु साध्य नहीं है और न ही पर्याप्त जगह उपलब्ध है,परन्तु हनुमानगढ़ में वाशिंग लाइन हेतु पर्याप्त स्थान भी उपलब्ध है और इसकी साध्यता भी है ।
• गजसिंहपुर-पदमपुर-बींझवायला-गोलूवाला-हनुमानगढ़-रावतसर-नोहर रेलवे लाइन की घोषणा वर्ष 1998 में पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी के द्वारा की गई थी,परन्तु अभी तक इस विषय में कोई भी प्रगति नहीं हो पाई है । इस पर विशेष ध्यान दिया जाए ।
• उत्तर-पश्चिम रेलवे के बीकानेर मंडल (राजस्थान) के श्रीरामसिंहपुर-श्रीविजयनगर स्टेशनों के मध्य स्थित केशवनगर हाल्ट स्टेशन को पुनः खोला जाए,जो पिछले लगभग 20 वर्षों से बंद पड़ा है ।
*श्री भागीरथ चौधरी (अज़मेर): भारतीय रेल का देश के विभिन्न भागों की संस्कृति एवं सभ्यता को जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान है ।
जिस प्रकार हमारे मानव शरीर में रक्त, धमनियों के द्वारा प्रत्येक भाग को जोड़ने का काम करता है उसी तरह रेल, रेलमार्ग के माध्यम से पूरे देश की सभ्यता,संस्कृति, धरोहर विरासत को जोड़ने का काम करती है ।
रेलें जो देश के हृदय को जोड़ने का काम कर रही हैं उसका देश के आर्थिक-सामाजिक विकास में अद्वितीय योगदान है ।
हमारी सरकार आने के बाद रेलवे में विद्युतीकरण, दोहरीकरण, सुरक्षा, संरक्षा एवं स्वच्छता के क्षेत्र में बहुत अधिक विकास हुआ है ।
साथ ही, बेहतरी के प्रयास लगातार जारी हैं जो हमारे देश में रेलवे के नए कीर्तिमान स्थापित करेंगे ।
इस बजट में देश के सिद्वपुरुष प्रधानमंत्री जी, वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण जी, माननीय रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल जी एवं सुरेश अगड़ी जी को धन्यवाद देना चाहूंगा जिन्होंने हमारे प्रधानमंत्री जी के प्रमुख नारे”देश को गति भी रेल से मिलेगी और प्रगति भी”को अमली जामा पहनाने के लिए महत्वपूर्ण योजनाओं की घोषणा की है.. जिनमें स्मार्ट रेलवे स्टेशन बनाना,वाई-फाई की सुविधा,रैपिड रीजनल ट्रांसपोर्ट सिस्टम आदि प्रमुख हैं... सभ्यता, संस्कृति और विकास को दर्शाने वाली वंदे भारत और रैपिड रेल मुख्य है...हमारी सरकार पिछली सरकार की तुलना में सुरक्षा एवं विकास के क्षेत्र में बहुत अधिक विकास की ओर अग्रसर है ।
रेल मंत्री जी से मेरा निवेदन है कि मेरे संसदीय क्षेत्र की कुछ निम्न प्रमुख मांगे हैं जिनका इस बजट के माध्यम से पूरा करने का प्रयास करेंगे ।
अजमेर-जयपुर रेल मार्ग पर विश्व प्रसिद्ध मार्बल नगरी एवं औद्योगिक क्षेत्र ”किशनगढ़” विद्यमान है जहां पर अन्तर्राज्यीय हवाई अड्डा भी संचालित है, लेकिन किशनगढ़ (अजमेर) रेलवे स्टेशन पर निम्नांकित द्रुतगामी एवं एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव नहीं होने से विदेशी सैलानियों, व्यापारियों,श्रमिकों, छात्र-छात्राओं एवं दैनिक रेल यात्रियों को मजबूरीवश अजमेर या जयपुर रेलवे स्टेशन पर ही उतरना पड़ता है जिससे किशनगढ़ आने-जाने में अनावश्यक समय, श्रम एवं धन की हानि होती है ।
01 . ट्रेन संख्या 12915-12916 आश्रम एक्सप्रेस (नई दिल्ली-अहमदाबाद)-प्रतिदिन
02. ट्रेन संख्या 12547-12548 (आगरा फोर्ट-अहमदाबाद)-प्रतिदिन
03. ट्रेन संख्या 12215-12216 गरीब रथ (नई दिल्ली-बान्द्रा)-सप्ताह में 04 दिन
04. ट्रेन संख्या 12715-12716 गरीब नवाज एक्सप्रेस (अजमेर-किशनगंज)-सप्ताह में 03 दिन
05. ट्रेन संख्या 12451-12452 (चण्डीगढ़-बान्द्रा)-सप्ताह में 03 दिन
06. ट्रेन संख्या 19269- 19270 मोतीहारी एक्सप्रेस (पोरबन्दर-मुजफ्फरपुर)- सप्ताह में 03 दिन
07. ट्रेन संख्या 12395-12396 (अजमेर-राजेन्द्र नगर-पटना एक्सप्रेस)- साप्ताहिक
08. ट्रेन संख्या 19403-19404 (अहमदाबाद-सुल्तानपुर)- साप्ताहिक
09. ट्रेन संख्या 12315-12316 अनन्या एक्सप्रेस (उदयपुर-सियालदह)- साप्ताहिक
10. ट्रेन संख्या 22987-22988 अजमेर-आगरा फोर्ट सुपरफास्ट-प्रतिदिन
11. ट्रेन संख्या 12719-12720 जयपुर-हैदराबाद एक्सप्रेस सप्ताह में 02 दिन
12. ट्रेन संख्या 18214-18215 अजमेर-जयपुर-दुर्ग एक्सप्रेस-साप्ताहिक
13. ट्रेन संख्या 19709-19710 कवि गुरू एक्सप्रेस (उदयपुर-जयपुर-कामाख्या) साप्ताहिक अतः माननीय रेल मंत्री महोदय से मेरा करबद्ध निवेदन है कि अजमेर-जयपुर रेल मार्ग पर स्थित किशनगढ़ रेलवे स्टेशन पर उक्त सभी द्रुतगामी एवं एक्सप्रेस ट्रेनों में से कुछ ट्रेनों का ठहराव सुनिश्चित कराकर आवश्यक विभागीय स्वीकृति की घोषणा करायें ।
वर्तमान में उदयपुर अजमेर हरिद्वार द्रुतगामी ट्रेन संख्या 19609-19610 का प्रतिदिन संचालन किया जाए । वर्तमान में यह ट्रेन उदयपुर से सोमवार, गुरुवार एवं शनिवार को हरिद्वार जा रही है एवं मंगलवार,शुक्रवार एवं रविवार को हरिद्वार से उदयपुर आती है जिससे अजमेर एवं उदयपुर संभाग के हजारों तीर्थ यात्रियों, श्रद्धालुओं एवं अपने परिजनों की मृत्यु उपरान्त अस्थि विसर्जन हेतु गंगाजी ले जाने के धार्मिक रिति-रिवाज हेतु आम जन को सप्ताह में तीन दिन आवागमन का लाभ मिल रहा है शेष चार दिनों में हरिद्वार जाने हेतु असुविधा हो रही है । अतः इस ट्रेन को प्रतिदिन संचालन की कार्यवाही करायें ।
अजमेर से कोटा वाया नसीराबाद केकडी देवली होते नवीन रेल मार्ग लगभग 180 कि. मी. की मांग गत 20-25 वर्षों से की जा रही है लेकिन उक्त मार्ग का सर्वे तो हो चुका है लेकिन रेल मार्ग की स्थापना की अधिकृत घोषणा आज तक नहीं होने से विधान सभा क्षेत्र नसीराबाद, केकडी, देवली,बुन्दी, हिन्डोली आदि के बासिन्दों एवं व्यापारियों एवं उद्यमियों में असन्तोष है । अतः अजमेर से कोटा नवीन रेल मार्ग की स्थापना की स्वीकृति की घोषणा को मूर्त रूप प्रदान करें ।
रेल बजट 2016-17 में किशनगढ़ अजमेर से परबतनगर नागौर तक 45 कि. मी. के प्रस्तावित नवीन रेल मार्ग की स्वीकृति की घोषणा की गई थी लेकिन उक्त घोषणा को तीन वर्ष निकलने के पश्चात आज की तिथि तक विभागीय अधिकारियों की उदासीनता के कारण इसे भी मूर्तरूप नहीं मिला है । अतः उक्त घोषणा पर सक्षम विभागीय कार्यवाही करने के आदेश प्रदान कर बजट स्वीकृत करायें ।
मेरे संसदीय क्षेत्र अजमेर के अधीन पुष्कर एक बहुत ही महत्वपूर्ण, विश्व प्रसिद्ध धार्मिक एवं तीर्थ नगरी है, जहां पर प्रतिदिन देश-विदेश से हजारों की संख्या में लोगों का आना-जाना बना रहता है, गत तीन-चार वर्ष पूर्व रेल बजट में केंद्र सरकार ने पुष्कर (अजमेर) से मेड़ता (नागौर) तक रेल लाइन द्वारा जोड़ने के लिए आवश्यक प्रोजेक्ट को रेल परियोजनाओं में सम्मिलित किया गया था । लेकिन उक्त रेल लाइन प्रोजेक्ट कार्य में आज तक कोई विशेष प्रगति नहीं हुई है ।
अतः पुष्कर (अजमेर) से मेड़ता (नागौर) रेल लाइन प्रोजेक्ट के लिए चालू वित्तीय वर्ष 2019-20 में ”कैबिनेट कमेटी ऑफ इकोनोमिक अफेयर्स (CCEA)” में आवश्यक बजट स्वीकृत कर उक्त रेल लाइन कार्य को शीघ्रताशीघ्र पूर्ण कराने का श्रम करावें ।
किशनगढ़ अजमेर स्थित पुराने रेलवे स्टेशन पर एक नवीन अंडरपास की स्वीकृति करायें ताकि सावंतसर गांधीनगर क्षेत्र के लोगों को आवाजाही हेतु एक सुगम मार्ग उपलब्ध हो सके ।
विजयनगर अजमेर स्थित रेलवे स्टेशन के पास गुलाबपुरा रोड की तरफ स्थित फाटक पर एक नवीन अंडरपास की स्वीकृति भी जारी करायें ताकि स्थानीय बासिन्दों को रेलवे फाटक बंद के दौरान एवं आए दिन लगने वाले जाम से स्थायी राहत मिल सके ।
किशनगढ़ अजमेर रेलवे स्टेशन पर एस्कलेटर एवं लिफ्ट का प्रावधान रेल मंत्रालय द्वारा रखा गया है लेकिन आज तक उक्त कार्य प्रारंभ नहीं हुए हैं जिससे प्लेटफार्म संख्या 1 से 2 पर आने-जाने हेतु स्टेशन पर स्थित फुट ओवर ब्रिज की भारी-भरकम एवं ऊंची सीड़ियों से बुजुर्ग, बीमार, महिला रेल यात्रियों के साथ-साथ आम सामान्य रेल यात्रियों को भी आवाजाही में अत्यन्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है । अतः अविलंब एस्कलेटर एवं लिफ्ट लगवाने की कार्यवाही करायें ।
किशनगढ़ अजमेर रेलवे स्टेशन पर रेल आरक्षण बुकिंग का समय प्रातः 8 बजे से दोपहर 3 बजे तक है एवं रविवार को अवकाश रहता है जिसके चलते स्थानीय नागरिकों को रेल आरक्षण की सुविधा का पूर्ण लाभ नहीं मिल पा रहा है और इन्हें मजबूरीवश निजी दलालों से अपनी यात्रा हेतु टिकट आरक्षण करवाना पड़ रहा है । अतः किशनगढ़ अजमेर रेलवे स्टेशन पर सप्ताह के सातों दिन रेल आरक्षण बुकिंग सुविधा प्रारंभ कराते हुए इसका समय भी प्रातः 8 बजे से सांय 8 बजे तक कराने का श्रम करायें ।
किशनगढ़ नसीराबाद एवं विजयनगर रेलवे स्टेशनों पर वाई-फाई की सुविधा प्रारंभ की जाए ताकि यात्रियों को नेट की सुविधा का अधिकाधिक लाभ मिल सके ।
अजमेर संसदीय क्षेत्र के अधीन फ्रेट कोरिडोर योजना के तहत निर्मित एवं निर्माणाधीन होने वाले समस्त अंडरपासों को रेलवे लाइन के दोनों तरफ से कवर कर इनमें वर्षा के पानी के निकास का स्थायी समाधान भी सुनिश्चित किया जाए ।
रेलवे लोको कारखाना अजमेर देश के सबसे पुराने कारखानों में से एक है जिसकी स्थापना सन् 1886 में हुई थी । यहीं पर हिन्दुस्तान का प्रथम भाप इंजन सन् 1886 में बनाया गया था । इसके पहले जमालपुर बिहार के वर्कशॉप में इंजन के पार्टस आते थे और उनको जोड़कर इंजन बनाया जाता था । सबसे पहले हिन्दुस्तान की ”स्टील फाउन्ड्री” भी इसी लोको कारखाना अजमेर में सन् 1906 में प्रारंभ हुई थी । आजादी के पूर्व एवं बाद तक, जब तक चितरंजन में लोको कारखाना स्थापित नहीं हुआ तब तक अजमेर के ही लोको कारखाने में मीटर गेज के भाप इंजन का निर्माण होता था । उसके बाद समय के साथ-साथ यहां पर रेल के डिब्बे एवं वैगन भी बनने प्रारंभ हुए । फिर वहां इनकी मरम्मत का कार्य भी शुरू हुआ । वर्तमान में यहां पर सभी प्रकार के कार्य जैसे ब्राडगेज के कोच की मरम्मत,वैगन की मरम्मत,डीजल इंजन की मरम्मत, डेमू ट्रेन की मरम्मत आदि भी किए जा रहे हैं । आज यहां पर लगभग 5000 कर्मचारी कार्य कर रहे हैं । संपूर्ण पश्चिम भारत में इस लोको कारखाने की गुणवत्ता आज भी सर्वोपरि है । वहीं गत 2 वर्षों से उक्त कारखाने में नवीनतम एलएचबी कोच की मरम्मत का कार्य भी यहां किया जा रहा है ।
अजमेर लोको कारखाने को 10-11 वर्ष पहले सन् 2008 में लगभग 130 करोड़ रुपये का बजट आधुनिकीकरण के कार्य हेतु स्वीकृत हुए थे जो कि पूर्ण हो चुके हैं । लेकिन भविष्य के लिए नित नई तकनीकों के आने से वर्तमान परिप्रेक्ष्य में उक्त कारखाने में नवीन तकनीक के इंजन, वैगन एवं कोच आदि के लिए अधिक धन की आवश्यकता रहेगी । अतः लगभग 100 करोड़ रुपये का बजट अजमेर रेलवे कारखाने को चालू वित्तीय वर्ष 2019-20 में स्वीकृत करायें और हिन्दुस्तान के इस प्राचीनतम लोको कारखाने को विकसित कर रायबरेली रेल कारखाने की तरह आधुनिकतम बनाने की विभागीय कार्यवाही करायें । साथ ही, उक्त कारखाने में वर्तमान में लगभग 35 प्रतिशत पद रिक्त चल रहे जिसे शीघ्र भरने हेतु सक्षम विभागीय कार्यवाही करायें । आपकी बड़ी महती कृपा होगी । धन्यवाद ।
*SHRIMATI RAKSHA NIKHIL KHADSE (RAVER): I would like to express my views on important issue of infrastructure, the life line of the country, Demands of Grants related to Railways.
I congratulate the Hon'ble Finance Minister Smt Nirmala Sitaraman Ji for the historic budget presented under the dynamic and visionary Prime Minister of our country respected Shri. Narendra Ji Modi and also congratulate Railway Minister Shri Piyush Ji Goyal and his colleague Minister of State in the Ministry Shri Suresh Ji Angadi under whom the country's life line is taking significant improvement in achievements of the physical targets. A safety First Policy, we the people of the country must forward their sincere thanks to Honourable Finance Minister for providing adequate funds through Rashtriya Rail Sanraksha Kosh. As proposed to strengthen this safety first policy the total 4267 unmanned level crossings proposed and eliminated. Redevelopment of 600 major stations in the country has been taken up by India Railway Station Development Co. Limited, all of these railways stations are provided with Wi-Fi. CCTVs installations work on stations has started and the allocations have been provided to further extend this facility on some trains in first stage. Under the Safety First Policy, my Government has increasing the use of technology for fog safe and train protection and warning systems to avoid delays in the fog affected northern region of the country to avoid major accidents. To augment this safety first policy and for the women safety my Government has taken up a drive to recruit more RPF Women force for deputation on board for safety of women on board trains travelling alone.
Railway authority has proposed to set up POH workshop for LHB Coaches on Central Railway and proposed this to be set up at Nagpur through Indian Railways Projects Sanctions and Management (IRPSM) with an estimated cost of Rs 507.64 crore which has been approved by the General Manager. I request the Hon'ble Railway Minister Shri Piyush Ji Goyal to establish this POH workshop for LHB.
Coaches at Bhusawal as at Nagpur where it has been proposed required the land to be procured which might cost more and the project let delayed further thereby escalating the other prices/values of the project. As at Bhusawal the Railway's own land is available where the project work can be immediately started so that there will not be any delay in project implementations, hence saving of the country's money and the precise time and the project cost will also be reduced from 507.64 Crore, the proposed budgetary cost project at Nagpur, to 472.14 crore. The proposal has already been forwarded to the Railway Board by the zonal authority at Central Railway, Mumbai for their consideration and shifting the project from Nagpur to Bhusawal in Central Railway.
As there are large funds needed to be inducted for infrastructural development of railway in the coming years upto 2030 to the tune of Rs. 50 lakh crore and the railway own network can only spend around Rs. 1.5 to 1.6 lakh crore to develop the infrastructure needed will take years together, hence to speed up the work at the early years the Government welcome the Public Private Partnership mode for carrying out this developmental work. I think these steps of Government should be welcome by all for the faster development and to move higher in the world's ranking for country's economy for which our respected Prime Minister has thought of taking the country's economy to 5 trillion dollars in the coming years as we are approaching to 3 trillion dollar very soon.
Track renewal the important steps taken by Honourable Railway Minister Shri Piyush Ji Goyal and has achieved 3600 kms of track renewal in last year. Honourable Railway Minister Shri Piyush ji Goyal has also targeted the conversion and 100% electrification of broad gauge line by 2022 for which most of the work has been completed. In my Raver Constituency under Central Railway Bhusawal Division in Maharashtra State, one very old and ancient Pachora-Jamner NG line presently in working condition and preferred by the local communities had been started since long by British Government in the 1918 required immediate attention for getting conversion from NG to Board gauge with extension up to Bodwad. This conversion and extension up to Bodwad will save 18kms (Pachora-Bhusawal-Bodwad having 102 kms while Pachora-Bhusawal-Bodwad through NG conversion route is 84 kms) operational cost especially the goods traffic coming from Mumbai to Nagpur/Howrah can be diverted through this route which not only save the cost of running but also by-pass the heavily congested Goods shed yard at Bhusawal on route of Central Railway and even some passenger trains can be diverted from this route avoiding conjunctions at Bhusawal stations. I also request Hon'ble Minister to sanction the branch connection at Pahur railway station which can directly connect the world famous Ajanta caves and this heavily observing tourist place can further develop after getting direct train approach. Also this conversion with a small portion additional branch extension up to Ajanta will adding to the tourism development in this region. The survey for all work of conversion and extension up Bodwad has completed. I once again request Hon'ble Railway Minister to review the RoR for this project proposal as acquisition of land is not required as it is available for this conversion throughout the route. Thus not only save the operational cost but also time saving and can lead to socio-economic advancement of this underdeveloped region. If the conversion of this railway is not viable, I prospose to develop this route by keeping it as the narrow gauge route with extension to Bodwad and a branch connection to Ajanta Caves and upgrade this as a "Heritage Ajanta Line". And also to provide and maintain the Coaches and the locomotive of this rack.
There is a long standing demand of the people of my constituency for having separate train from Bhusawal to Mumbai, I and the citizen of my Constituency are thankful to Hon'ble Railway Minister Shri Piyush Ji Goyal for starting a train suggested to run from Bhusawal to Mumbai Khandesh Express (19003/19004) via Amalner-Nandurbar-Surat and the premium train Rajdhani Express (22221/22222) from Central Mumbai to Delhi via Bhusawal running twice in a week. I request the Hon'ble Railway Minister to accord the permission for running this Rajdhani Express on daily basis with providing a stoppage at Bhusawal as the staff joining at Jalgaon has all the way travel from Bhusawal to Jalgaon and vice versa thereby incurring cost for the Railways so also more of the travellers are the Banana growing farmers and for them joining the train at Bhusawal is preferable & cost saving on many issues. As lot of trains are moving in the direction towards Central Mumbai but all are long distance trains and getting reservations is a big issue. I request the Hon'ble Railway Minister to operate a special train from Bhusawal to Mumbai. Similarly many private buses are running from Jalgaon/Bhusawal to Pune, hence I also request for providing a train from Bhusawal to Pune via Manmad. As there are no premium train operation on the route from Mumbai to Delhi via Bhusawal like Rajdhani or Shatabdi, I request the Hon'ble Railway Minister to sanction at least one premium train on this route from Bhusawal going towards New Delhi.
As Honourable Railway Minister is looking for generation of the non-revenue earnings of railways by utilizing the surplus land which is not immediately required for any expansion of railways such lands to be given on Built operate and transfer basis by constructing restaurants, hotels and commercial complexes to earn and make use of such land which is lying idle since long with Raiways. There are many lands in Bhusawal Division which can generate the amount to Railways without any investments I have forwarded the proposal for consideration of such land from Bhusawal Division which has certified by the concerned authority for surplus lands can be immediately converted for this season.
I once again congratulate the Hon'ble Railway Minister working under the vision and guidance of respected Prime Minister Shri Narendra Modi Ji and the Finance Minister Smt Nirmala Sitaraman ji and the Minister of State Shri Anurag Ji Thakur for strengthening the railway network and infrastructure with enhancing railways carrying capacity both for goods as well as passenger trains with developing Rapid Regional Transport Systems (RRTS), Safety First Policy enhancing Women Safety and proposing all railway stations to be develop with multi-storied commercial buildings on PPP mode thereby fetching more revenue generation for railways and utilization of land. I support the Demands for Grants for railways .
श्रीमती रंजीता कोली (भरतपुर): माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपको धन्यवाद ज्ञापित करना चाहूंगी कि आपने मुझे सदन में बोलने का मौका दिया । मैं माननीय रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल जी एवं वित्त मंत्री जी का आभार व्यक्त करना चाहती हूं, जिन्होंने माननीय प्रधानमंत्री जी के विज़न को प्रदर्शित करने वाले देश के स्वर्णिम विकास का बजट पेश किया । मैं आपके माध्यम से सरकार का ध्यान मेरे लोकसभा क्षेत्र भरतपुर के रेल यातायात की समस्याओं की ओर आकर्षित करना चाहती हूं ।
महोदय, भरतपुर विश्व प्रसिद्ध स्थान है जहां कैला देवी राष्ट्रीय उद्यान है तथा बृज क्षेत्र के प्रमुख तीर्थ स्थल भी हैं । यहां पर्यटकों का बहुत आगमन रहता है । मेरा अनुरोध है कि जम्मूतवी-मुंबई ट्रेन का ठहराव भरतपुर जंक्शन पर किया जाए तथा अलवर से मथुरा रेलवे लाइन पर सुबह से शाम एक पैसेंजर ट्रेन का संचालन किया जाए । इसके अतिरिक्त आगरा से बांदीकुई लाइन पर खेड़ली कस्बे के हिन्नोन फाटक पर एक ओवरब्रिज, जिसको बनवाने की मांग काफी समय से चल रही है, को पूरा किया जाए । पूर्व में कोसीकलां से कामाडेक तथा एक धार्मिक पर्यटन की दृष्टि से रेलवे लाइन का सर्वे भारत सरकार ने करवाया था । यह प्लान बहुत महत्वपूर्ण है । अत: निवेदन है कि सर्वे के आधार पर उस प्रोजेक्ट को स्वीकृत किया जाए जिससे आमजन को काफी सुविधा होगी । धन्यवाद ।
माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्यगण, जो माननीय सदस्य अपना भाषण ले करना चाहते हैं, वह ले कर सकते हैं । वह भाषण भी इस सदन की कार्रवाई का हिस्सा होता है । इसलिए आपका लिखित भाषण,जिसको आप ले करते हैं, वह सदन की कार्रवाई का उतना ही हिस्सा बनता है, जितना कि बोलने वाला ।
0*DR. D. RAVIKUMAR (VILUPPURAM): I would like to place my following views:
1. The Government should take steps to revive the 13 Railway projects shelved by the Board of Railways in 2017.
2. The Railway Ministry has conducted field survey for Chennai-Cuddalore rail link project. Railway Board has spent Rs. 25 crore in 2007 for the preliminary work. Due to some hitch in deciding the alignment, now the project has been dropped. I earnestly request the Railway Ministry to revive the project.
3. Tejas, the superfast train which runs between Chennai and Madurai stops at Tiruchirappalli only. Viluppuram is a junction and an important connecting point to Puducherry. I request a stoppage at Viluppuram.
4. All express trains run between Chennai and Madurai via Vilupuram should be stopped at Ulundurpet an important town.
5. Centre has renamed Central Station at Chennai as Puratchi Thalaivar M.G. Ramachandran railway station. I request the Government to rename Erode Railway station as “Thanthai Periyar E.V.R. Railway Station.
माननीय अध्यक्ष : श्रीमती रेखा वर्मा ।
1श्रीमती रेखा अरुणवर्मा (धौरहरा):अध्यक्ष महोदय, आपने मुझे वर्ष 2019-20 के लिए रेल मंत्रालय की अनुदान की मांगों पर बोलने का मौका दिया,इसके लिए मैं आपको बहुत-बहुत धन्यवाद देती हूं । हमारे माननीय प्रधान मंत्री जी, हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष जी और हमारे माननीय मंत्री जी को भी मैं अच्छा बजट लाने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद देती हूं ।
महोदय,वर्ष 2019-20 के लिए यातायात से कुल राजस्व 2,16,675 करोड़ रुपये अनुमानित है,जो वर्ष 2018-19 के संशोधित अनुमानों से दस प्रतिशत अधिक है, जो वर्ष 2019-20 में माल और यात्री यातायात से क्रमश:आठ और दस परसेंट बढ़ने की उम्मीद है । अनुदानों की मांगों में बताया गया है कि रेल संरचना को वर्ष 2018-2030 के बीच में 50 लाख करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश की आवश्यकता है । पीपीपी मॉडल का उपयोग तेजी से विकास और पटरियों के पूरा होने, स्टॉक विनिर्माण और यात्री माल सेवाओं के वितरण में मदद करने के लिए किया जाएगा । रेलवे अपने खर्चों को पूरा करने और आंतरिक राजस्व में गिरावट के कारण संघर्ष कर रहा है । यह स्पष्ट नहीं है कि रेलवे किस तरह रेल संरक्षा कोष को जारी रखेगा । रेलवे की स्थायी समिति ने वर्ष 2018 में नोट किया कि जनवरी, 2018 के अंत तक रेल संरक्षा कोष का व्यय 10709 करोड़ रुपये आवंटन का लगभग 50 परसेंट था । यह देखा गया है कि यदि कोष में धन का उपयोग अच्छी तरह से नहीं किया जा सकता है तो एक समर्पित सुरक्षा निधि का उद्देश्य निरर्थक हो जाता है । पिछले दशक में रेलवे उच्च अधिशेष उत्पन्न करने के लिए संघर्ष कर रहा है । ऑपरेटिंग अनुपात एक दशक से अधिक समय तक लगातार 90 परसेंट से अधिक रहा है । वर्ष 2019-20 में रेलवे को 9035 करोड़ रुपये का अधिशेष प्राप्त करने की उम्मीद है ।
माननीय अध्यक्ष : आपने आधा पढ़ लिया है, आधा ले कर लें,हम पूरा मान लेंगे ।
श्रीमती रेखा वर्मा: सर, एक मिनट में मैं अपने क्षेत्र की समस्या रख कर समाप्त कर दूंगी ।
महोदय,मैं आपके माध्यम से बताना चाहूंगी कि लखीमपुर खीरी,धौरहरा लोक सभा क्षेत्र से आती हूं । हमारे यहां सीतापुर और लखीमपुर दो जनपदों की विधान सभाएं आती हैं । मेरा अनुरोध है कि सीतापुर में दरी का काम बहुत अच्छी तरह से हो रहा है, जो दिल्ली के लिए सप्लाई किया जाता है । लेकिन अभी तक सीतापुर से दिल्ली के लिए कोई ट्रेन नहीं चलायी जा रही है जिससे वहां से लोग डायरेक्ट दिल्ली आने-जाने की सुविधा का लाभ उठा सकें । मेरा अनुरोध है कि काफी समय से गोला, महजपुर,मोहम्मदी, मछेचा, मोहम्मदपुर-ताजपुर, सहजानपुर कटरा होते हुए फर्रुखाबाद नई रेलवे लाइन मंजूर थी । इसका सर्वे हो चुका है, लेकिन सरकार बदलने के कारण यह काम रुक गया था । अत:जल्द से जल्द इसे पूरा करवाया जाए । अगर फर्रुखाबाद के लिए रेल लाइन बन जाती है तो दो-ढाई सौ किलोमीटर का मार्ग हमारी जनता आसानी से तय कर पाएगी । इन अनुदानों की मांगों में ही मोहली, उत्तर प्रदेश में गाड़ी संख्या 12491 जो मोहराबाद एक्सप्रेस है, बरौनी से जम्मू तवी तक जाती है ।
एक गाड़ी14517 है, जो सरहसा से अमृतसर जाती है । एक ट्रेन 15655 है, जो कामाख्या से कटरा तक जाती है । एक ट्रेन 14521 है, जो कामाख्या से आनंद विहार,दिल्ली के लिए आती है । ऐसी बहुत सारी ट्रेनें हैं । हमारा मौली विधान सभा या सीतापुर में इनको रोकने के लिए अगर सरकार की तरफ से कोई कोशिश की जाती है, तो इसका भी समाधान हो जाएगा । हमारे यहां के लोगों को आने-जाने में सुविधा हो जाएगी ।
2*SHRI DILIP SAIKIA (MANGALDOI): I would like to express my views on Demands for Grants on Railway Budget.
My Constituency Mangaldoi (Assam) HQ. Mangaldoi till date is not connected with Railway Map. People of my constituency repeatedly requested Ministry of Railway to give a sincere look into the urgent need of the hour. 18 lakhs of voter of my Constituency facing trouble due to poor Road connectivity. My Constituency is producing a sizable number of products on Agriculture. Transportation of Agricultural products to the nearby State HQ and other parts of the State is a big question for the farmers.
We need a Railway Line from Rangia (Railway Division) via Sipajhar, Mangaldoi, Dalgaon to Rowta Railway Station. Approximately 100 km. of my Constituency are out of this Railway network. So, this is my kind request to you to Hon’ble Railway Minister, through you, that necessary steps to be undertaken immediately to connect my Constituency, Mangaldoi on Railway network of the country.
I like to draw the kind attention to give proper recognition to the man who put the train on ‘brake’. He was no other than “GURU PRASAD DAS” of Barpeta, Assam.
During the training period, ‘Guruprasad’ made significant improvement in his technical skill when he was taking training in Institute of Mechanical Engineering, England. He, after that, invented “Vacuum Brake” for trains.
This later had the nomenclature as “Seamless Coil Brake”. His two other important inventions are “Cut off control gauge and Boiler Safety Valve”. So, I earnestly request the Government to kindly give recognition to Guruprasad Das by giving his contribution to Railways by naming a Building or a Railway Station in his good name.
3*श्री सुशील कुमार सिंह (औरंगाबाद): माननीय रेल मंत्री जी से राष्ट्र के विकास में भारतीय रेल की सराहनीय भूमिका और देशवासियों को अच्छी रेल सेवा उपलब्ध कराने हेतु लोक सभा में प्रस्तुत विकासोन्मुखी बजट का समर्थन करते हुए अनुरोध करता हूं कि पूर्व मध्य रेल, हाजीपुर,बिहार अन्तर्गत बिहटा-औरंगाबाद प्रस्तावित रेल लाइन का निर्माण शीघ्र पूरा कराने की कृपा करें ।
पण्डित दीनदयाल उपाध्याय मंडल के अनुग्रह नारायण रोड स्टेशन भवन का पुनर्निर्माण,जो सैंकड़ों वर्ष पुराना और जर्जर स्थिति में है,मेरी मांग है कि ए.एन. रोड स्टेशन भवन को देव सूर्य मन्दिर,जो उत्तर भारत के करोड़ों लोगों की आस्था का स्थल है, इस देव सूर्य मन्दिर, औरंगाबाद,बिहार के नक्शे डिजाइन के आधार पर उसकी प्रतिकृति के रूप में स्टेशन भवन का निर्माण कराया जाए ।
4श्री दुलाल चंद्रगोस्वामी (कटिहार) : अध्यक्ष महोदय, मुझे आपने वर्ष 2019-20 के रेलवे बजट की अनुदान मांगों पर बोलने का अवसर दिया, इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं । मैं अपने लोक सभा क्षेत्र कटिहार,जो बिहार में अवस्थित है, कटिहार में रेलवे डिवीजन भी है । रेल डिवीजन से नार्थ ईस्ट की ट्रेनें जो दिल्ली से नार्थ ईस्ट को जोड़ती हैं, इस डिवीजन में कुल 106रेलवे क्रासिंग हैं । रेलवे क्रासिंग पर जो फाटक है,वह कटिहार संसदीय क्षेत्र में है ।
माननीय मंत्री जी, आप इधर थोड़ा ध्यान दीजिए । इसमें 11 अंडरपास बनाए गए हैं । इन 11 में से 10में चार फीट से लेकर तीन फीट तक पानी और कीचड़ है, क्योंकि यह बाढ़ प्रभावित एरिया है । वर्षा वाला क्षेत्र है । सभी अंडरपास पथ फ्लड आने से पहले ही बंद हैं । वहां पर लोग मुश्किल में हैं, वहां पर लोग आंदोलन कर रहे हैं । जैसे कटिहार, मनिहारी, तेजनायारनपुर रेल खंड में, बथना,रोहनी चौक, मनसाही, कजरा,लालबाग, महियारपुर है, इसी तरह से कटिहार-राधिकापुर रेल खंड में धचना के पास है ।
तीसरे, कटिहार-कुमैदपुर रेल खंड में शाहजहां और कुरेठा में पानी और कीचड़ भरा हुआ है । आप अपने रेल अधिकारियों से इसका पता लगा सकते हैं । इसमें मेरा केवल इतना आग्रह है कि यह बाढ़ प्रभावित एरिया है,फ्लड इफेक्टेड एरिया है,इसमें अगर कुछ कारगर होगा, तो फ्लाईओवर ही कारगर होगा । यह मेरा एक आग्रह था ।
अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से एक महत्वपूर्ण विषय को रखना चाहता हूं कि जो कटिहार है, वह नार्थ ईस्ट रेल का बहुत बड़ा जोन है । कटिहार-मनिहारी रेल खंड है, जिसे तेजनारायनपुर-भालुका तक जोड़ना था । यह पूर्व प्रधान मंत्री आदरणीय अटल बिहारी वाजपेयी जी के समय और उस समय के रेल मंत्री आदरणीय नीतिश कुमार जी, जो अभी बिहार के मुख्य मंत्री हैं और हमारे पार्टी के नेता हैं, उनके समय में हुआ था । लेकिन खुशी की बात है कि कटिहार-मनिहारी-तेजनारायनपुर तक रेल लाइन चालू हो गई है । अगर केवल 13 किलोमीटर की और रेल लाईन बनेगी, तो हम लोग भालुका से पश्चिम बंगाल से तक जुड़ जाएंगे और कोलकाता नजदीक हो जाएगा । इसलिए केवल भालुका से 13 किलोमीटर और जोड़ा,इसको प्रॉयोरिटी में लिया जाए ।
अध्यक्ष महोदय, कुर्सेला से बिहारीगंज तक रेल लाइन का प्रस्ताव था, इस पर भी विचार किया जाए । मेरी एक और मांग है कि कटिहार जिले का कटिहार, भगवान चौक, बारसोई, रघुनाथपुर, झौआ और मीनापुर में रेलवे फ्लाईओवर बनाया जाए । मेरी अंत में केवल दो और मांगें हैं, एक बारसोई रेलवे जंक्शन है, जो कोलकाता से नार्थ ईस्ट को जोड़ता है और दिल्ली से नार्थ ईस्ट को जोड़ता है । वर्ष1947 में जो स्टेशन बना हुआ था, वह आज भी उसी स्थिति में है । इसलिए मेरा यह निवेदन है कि आप जो मॉडल स्टेशन और सौन्दर्यीकरण का काम कर रहे हैं, अगर इसको आप करा देंगे, तो बड़ा उपकार होगा और सरकार का भी बड़ा नाम होगा ।
अध्यक्ष महोदय, मैं एक और महत्वूर्ण बात कहना चाहता हूं कि भारत सरकार और बिहार सरकार सामरिक महत्व और धार्मिक स्थलों का बहुत सम्मान करती है । कटिहार जिले में एक काढ़ागोला रेलवे स्टेशन है, जो 9वें गुरु तेग बहादुर जी का कर्मस्थली भी रही है और वह सिख पर्यटक स्थल भी है । देश-विदेश के सिखों की श्रद्धा वहां से जुड़ी हुई है । काढ़ागोला रेलवे स्टेशन है, उसमें केवल साहेब शब्द जोड़ दिया जाए, तो उसका महत्व बढ़ जाएगा । अगर आप यह कर देंगे, तो सरकार की भी वाह-वाह होगी और कटिहार में मेरा भी सम्मान बढ़ेगा ।
अध्यक्ष महोदय, आपने मुझे समय दिया,इसके लिए मैं आपको हृदय से बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं । सरकार अच्छा काम कर रही है और मैं इस बजट में भारत सरकार की माननीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण जी को धन्यवाद देता हूं । श्री पीयूष गोयल जी,जो केन्द्रीय मंत्री हैं और श्री सुरेश सी. अंगड़ी, जो रेल राज्य मंत्री हैं, इन्होंने रेल में जो काम किया है,उसके लिए आज विपक्ष को भी आपकी प्रशंसा करनी पड़ी है । इसलिए आपको बहुत-बहुत धन्यवाद । अध्यक्ष जी, मैं आपको पुनः धन्यवाद देते हुए अपनी बात को समाप्त करता हूं ।
5श्री संजय सेठ (राँची): अध्यक्ष महोदय, सबसे पहले मैं बहन निर्मला सीतारमण जी को धन्यवाद देना चाहूंगा कि उन्होंने ब्रीफकेस की संस्कृति को तोड़ कर अपने भारत की संस्कृति लाल कपड़े में मौली बांध कर, बजट पेश किया । यह पूरे भारतवर्ष के लिए सम्मान की बात है । महोदय,मैं इस रेल बजट में सबसे पहले मैं इस बात का स्वागत करना चाहता हॅूं कि राँची रेलवे स्टेशन को राष्ट्रीय स्तर पर बनाया गया है । मैं रेल मंत्री जी का अभिनंदन करना चाहता हॅूं । परसों आप राँची आ रहे हैं,मैं आपका अभिनंदन करता हॅूं । तीसरा,इस वर्ष देश बापू की 150वीं जयंती मना रहा है । बापू ने थर्ड क्लास में हमेशा सफर किया,लेकिन कांग्रेस पार्टी ने तीसरा दर्जा ही खत्म कर दिया । इसलिए मेरा प्रस्ताव है कि इस 150वीं जयंती वर्ष में एक बापू बोगी भी लगाई जाए,ताकि 150वीं जयंती में हम उनका सम्मान कर पाएं ।
महोदय,मैं पीयूष गोयल और सुरेश प्रभु जी का अभिनंदन करना चाहता हॅूं । उन्होंने यह व्यवस्था की है कि अक्टूबर से ट्रेन में आसानी से सीट मिलेगी । यह योजना इन्होंने तैयार की है कि ट्रेनों में जो सीटों का आरक्षण होता है,उनमें चार लाख अतिरिक्त सीटें बढाई जाएंगीं,जिससे सभी को कनफर्म आरक्षण मिलेगा । यह सब नई तकनीक अपनाने से हो सकेगा । इस नई तकनीक के जरिए ट्रेन में ओवरहेड तार से बिजली सप्लाई की जाएगी और जनरल कोच की जगह स्लीपर कोच लगेगा, यह अभूतर्पू काम है । रेल विभाग को एवं रेल मंत्री को बहत-बहुत साधुवाद ।
महोदय,लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि चौकीदार होता है और जनता मालिक होती है । उस चौकीदार की हैसियत से झारखंड की जनता ने जब चौकीदार बनाया तो उनके चेहरे पर हंसी आए, उनके होंठ हंस पड़ें,उनकी परेशानियों का निदान हो, उनको और सुविधा मिले । उस मालिक के लिए मैं यह मांगना चाहता हॅूं । 25 हज़ार करोड़ रुपये का राजस्व हर साल झारखण्ड देता है । लेकिन हमारे यहां जोनल ऑफिस नहीं है । हम कोलकाता,गार्डन रिच के सहारे रहते हैं । अध्यक्ष जी, मेरा आपके माध्यम से सरकार से पहला आग्रह है, जो हमारी बहुत वर्षों से मांग रही है । अटल जी के आशीर्वाद से अलग प्रांत बना, अलग प्रांत बनने के बाद दोनों प्रांतों में जोनल ऑफिस बन गया, हमारे यहां नहीं बना तो जल्दी से जल्दी जोनल ऑफिस बने ।
अध्यक्ष जी, मैं बताना चाहता हॅूं कि अटल जी ने सन् 2000 में लोहरदगा टोरी, राँची-लोहरदगा टोरी होते हुए एक रेलवे लाइन का शिलान्यास किया था । उस पर काम बढ़ा,लेकिन उसके बाद जब यूपीए की सरकार आई तो दस साल एक इंच भी काम नहीं हुआ । लेकिन मोदी जी की सरकार में लोहरदगा-टोरी लाइन का काम पूरा हो गया,विद्युतीकरण हो गया, राजधानी चल पड़ी । अब जरूरत इस बात की है कि उधर से, राँची-लोहरदगरा टोरी होते हुए दिल्ली के लिए राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन चले तो कम से कम तीन से चार घंटों की बचत सफर में होगी । मेरी मांग है कि जल्दी से जल्दी राजधानी एक्सप्रेस उधर से चलाई जाए ।
महोदय,मैं एक बात और आपको बताना चाहता हॅूं कि इन्होंने एक काम किया है । जो कोल इंडिया की माइनिंग होती है, उस माइनिंग से वहां जो गड्ढा हो जाता है, जिससे बरसात का पानी उसमें जमा हो जाता है,उस बरसात के पानी से 2036 लाख क्यूसेक मिनरल वॉटर वह पैदा करेंगे । वह काम जल्दी से जल्दी शुरू हो जाए ताकि आदरणीय प्रधान मंत्री जी की जो चाह थी कि वर्षा का जो का पानी सिर्फ आठ प्रतिशत ही संचय कर पाते हैं । अगर उसका उपयोग कर लें तो इतना बड़े पानी का स्टॉक, मिनरल वाटर हम देश की जनता को दे सकते हैं । मैं बताना चाहता हूँ कि अटल जी की एक और देन रांची से नामकुम, टाटीसिलवे होते हुए साखी तक ट्रेन थी । वहां एक इंजीनियर कॉलेज है । अगर वह ट्रेन रांची से टाटीसिलवे चले तो इंजीनियर कॉलेज के छात्र और जो रूरल जनता है, रांची से बहुत जल्दी जुड़ जाएगी । ट्रेन लाइन बन कर तैयार है । उस पर टेस्टिंग भी हो गई है । इसे जल्दी से जल्दी चलाया जाए ।
अध्यक्ष जी, मेरी एक और डिमांड है कि रांची राजधानी,औद्योगिक नगरी जमशेदपुर इन दोनों के बीच में एक शटल ट्रेन चलाई जाए । उस शटल ट्रेन का नाम जोहार एक्सप्रेस रखा जाए । हजारों-हजार लोग रोज़ाना रांची से जमशेदपुर और जमशेदपुर से रांची आते हैं ।
अध्यक्ष जी, मेरा एक और आग्रह है कि रांची और हटिया शहर में दो स्टेशन्स हैं, लेकिन उसमें कुलियों की संख्या सिर्फ 28 है । हम रोज़गार देना चाहते हैं, लेकिन कुलियों की संख्या 28 है, हम चाहते हैं कि वहां कुलियों की संख्या ज्यादा से ज्यादा बढ़ाई जाए और जैसे एयरपोर्ट्स में ट्रॉली रखी जाती है, रेलवे डिपार्टमेंट भी उन लोगों को ट्रॉली दे, ताकि उनको रोज़गार भी मिले और यात्रियों को परेशानी भी नहीं हो ।
अध्यक्ष जी, रघुवर दास जी की सरकार ने रेलवे डिपार्टमेंट में बहुत सी डिमांड्स रखी हैं । मेरी मांग है कि पुरी से नई दिल्ली पुरुषोत्तम एक्सप्रेस को जोधपुर तक विस्तारित किया जाए । रांची से लखनऊ होते हुए देहरादून तक यह ट्रेन चलाई जाए । पूर्वी उत्तर प्रदेश से देवघर के लिए सीधे रेल सेवा प्रारम्भ हो । संथाल परगना, जो हमारा सुदूर आदिवासी संथाली लोग हैं,वहां रेलवे स्टेशन पर आम सूचना की उद्घोषणा हिन्दी के साथ संथाली भाषा एवं ओल चिकी लिपि में रेलवे स्टेशन का नाम और सूचना कराई जाए । इससे वहां जो स्थाली लोग हैं, उनको किसी प्रकार की परेशानी न हो ।
अध्यक्ष जी, मैं बोलना चाहता हूं कि रांची से मुम्बई जो एलटीटी सुपर एक्सप्रेस है, उसको रोज़ाना चलाया जाए, ताकि जो मुम्बई के यात्री हैं उनको सुविधा हो । रांची में एक मेट्रो ट्रेन भी चलाई जाए ताकि जो झारखंड एक अलग प्रदेश अटल जी के आशीर्वाद से बना, उस प्रदेश में आधुनिकीकरण हो जाए ।
माननीय अध्यक्ष : श्री कनकमल कटारा । माननीय सदस्य, आप संक्षिप्त में बोलिए ।
6श्री कनकमल कटारा (बांसवाड़ा): अध्यक्ष महोदय,बहुत-बहुत धन्यवाद कि आपने मुझे बोलने का अवसर दिया । माननीय वित्त मंत्री जी ने सर्वस्पर्शी,सर्वव्यापी बजट प्रस्तुत किया,इसके लिए मैं इनको बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूँ ।
20.48 hrs (Shri Kodikunnil Suresh in the Chair) मैं आदरणीय रेल मंत्री जी को भी बहुत-बहुत धन्यवाद ज्ञापित करता हूँ । हमारे देश के प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में देश में चहुँमुखी विकास हो रहा है । नए भारत का निर्माण हो रहा है । समय-सीमा को ध्यान में रखते हुए, मैं अपने क्षेत्र बांसवाड़ा निर्वाचन क्षेत्र की ओर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ कि इस क्षेत्र में डूंगरपुर,बांसवाड़ा, रतलाम रेल लाइन की बहुत लम्बे समय से प्रयास किए जा रहे हैं । देश के कई राज्य रेल लाइन से जुड़ गए, परन्तु यह हमारा टीएसपी क्षेत्र अभी तक रेल से जुड़ा हुआ नहीं है ।
सभापति महोदय, मेरी मांग बांसवाड़ा,रतलाम, डूंगरपुर रेल परियोजना के संबंध में, जिसके संदर्भ में मैंने माननीय रेल मंत्री जी से प्रश्न भी किया था कि अभी तक इस रेल लाइन का प्रारम्भ नहीं हुआ है । इस योजना में बांसवाड़ा के रास्ते रतलाम,डूंगरपुर नई लाइन परियोजना 188.85 किलोमीटर को वर्ष 2011-12 में इस प्रावधान के साथ स्वीकृत किया गया था । इस परियोजना के अंतिम निर्माण की लागत 50 प्रतिशत राजस्थान सरकार द्वारा वहन की जाएगी और भूमि नि:शुल्क मुहैया कराई जाएगी । वर्ष 2015-16 के मूल्य स्तर पर इस परियोजना की प्रत्याशित लागत 2,562 करोड़ रुपये हैं, जो आगे और बढ़ जाएगा,दिनांक 31.03.2019 तक 184.28 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं ।
इस परियोजना के लिए कुल 1,736 हैक्टेयर भूमि की आवश्यकता है, जिसमें से 646 हैक्टेयर भूमि सौंपी गई है । भू-स्वामियों को भूमि के मुआवजे के रूप में राजस्थान सरकार द्वारा 62.5 करोड़ रुपये का भुगतान भी किया गया । रेलवे और राजस्थान सरकार के बीच समझौता ज्ञापन के अनुसार राजस्थान सरकार द्वारा अभी तक इस परियोजना के लिए अपेक्षित भूमि और राशि उपलब्ध नहीं कराई गई है,जिसके कारण यह कार्य बहुत ही लंबित हो रहा है । क्षेत्रवासियों को इस विषय के ऊपर बहुत दुख हो रहा है । दुनिया में सभी राज्य,सभी क्षेत्रों से जुड़ गए हैं,परन्तु डूँगरपुर,बांसवाड़ा और रतलाम की यह रेल लाइन अभी तक नहीं जुड़ी है । इसके लिए मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री महोदय से निवेदन करता हूँ कि यह शेड्यूल एरिया है । इस शेड्यूल एरिया के अंदर हमारे राज्य की राजस्थान सरकार और केंद्र सरकार का यह बेमेल स्तर है, जिसके कारण से हम उस कार्य को पूरा नहीं कर पा रहे हैं । यह हमारे लिए बहुत दुख की बात है । मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूँ कि हम दोनों तरफ से दुखी हो रहे हैं । इधर रतलाम, डूँगरपुर में और इधर उदयपुर से हम अहमदाबाद की ओर जुड़ना चाहते हैं, वहाँ पर भी यह काम बहुत कछुए की गति से चल रहा है । जावरमाइन्स में 2.5 किलोमीटर की जो सुरंग है,वह भी बहुत लंबित हो रही है और वहाँ काम प्रारंभ नहीं किया जा रहा है । वहाँ काम बहुत तेज गति से नहीं किया जा रहा है । दोनों तरफ से इस रेल लाइन को जोड़ने के लिए मैं माननीय मंत्री जी से निवेदन करूँगा कि इतना पैसा खर्च होने के बाद भी उस रेल लाइन को प्रारंभ नहीं किया जाता है तो यह इस क्षेत्र के लिए बहुत दुख की बात है ।
महोदय,मैं इस समय यह निवेदन करना चाहता हूँ कि बांसवाड़ा नई रेल परियोजना से हमारे संसदीय क्षेत्र डूँगरपुर,बांसवाड़ा का देश के अन्य सभी क्षेत्रों में आवाजाही के लिए सीधा जुड़ाव हो जाएगा । इसका सीधा लाभ यहाँ के गरीबों,श्रमिकों, व्यापारियों,उद्यमियों और पर्यटकों को मिलेगा । राजस्थान की भूमि शूरवीरों की भूमि है । यह भूमि त्याग, तपस्या और बलिदान के लिए प्रसिद्ध है ।
महोदय,मैं राजस्थान के पिछड़े क्षेत्रों के लिए बहुत प्रयासरत हूँ । बांसवाड़ा व डूँगरपुर राजस्थान के आर्थिक दृष्टि से पिछड़े क्षेत्र माने जाते हैं । बांसवाड़ा में माँ त्रिपुरा सुन्दरी, घोटिया आम्बा, मानगढ़ धाम धार्मिक श्रद्धा के केन्द्र हैं । डूँगरपुर में बेणेश्वर धाम,गलियाकोट की दरगाह, शीतला माता का मंदिर जैसे पवित्र स्थान हैं । यहाँ पर हजारों लोगों का आना-जाना बना रहता है । रेल की सुविधा होने से लोगों को सुविधा प्राप्त होगी । रेल से आम गरीब व्यक्ति,श्रमिक, व्यापारी,उद्यमी एवं पर्यटकों को आने-जाने का बहुत लाभ होगा । मैं इसके लिए आपसे प्रार्थना करता हूँ । मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय दर्जा दिलाने की भी हमारी माँग चल रही है । हजारों श्रृद्धालु लोग इन धार्मिक स्थलों पर आना-जाना करते हैं । रेल से सभी को आने-जाने की सुविधा प्राप्त होगी । मैं माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूँ कि हम आपके पड़ोस में ही हैं । हम उस क्षेत्र से जुड़े हुए हैं । यहाँ का श्रमिक बॉम्बे,महाराष्ट्र और गुजरात से जुड़ा हआ है । श्रमिक लोग भी वहाँ जाते हैं । वहाँ की जनता बहुत तकलीफ में है । मैं केंद्र सरकार से माँग करता हूँ कि किसी भी स्थिति में, नो प्रोफिट नो लॉस की स्थिति में भी इस डूँगरपुर-रतलाम-बांसवाड़ा रेल परियोजना को प्रारम्भ किया जाए । मैं यही माँग इस क्षेत्र के लिए रखना चाहता हूँ । बहुत-बहुत धन्यवाद ।
7*श्री पंकज चौधरी (महाराजगंज):पिछले पांच वर्षों में एनडीए की सरकार में जो सुधार रेलवे में हुए हैं, वह काबिले तारीफ हैंI इसके लिए मैं रेल मंत्री आदरणीय श्री पीयूष गोयल जी एवं राज्य मंत्री माननीय सुरेश अगड़ी जी को निश्चित तौर से धन्यवाद और बधाई देना चाहता हूं । रेलवे क्रासिंग को सुरक्षित बनाने, स्टेशनों को स्वच्छ बनाने,रेल में एडवांस टेक्नोलॉजी और प्राइवेट निवेश लाने, रेलों को समय से चलाने और बेहतर सुविधाएं प्राप्त करने के लिए विगत पांच वर्षों में अभूतपूर्व काम किया गया है । मैं माननीय वित्त मंत्री और माननीय रेल मंत्री जी का अभिनंदन करता हूं कि उन्होंने सब कुछ सरकार के ऊपर लेते हुए इस साल भी यात्री किराये में बढ़ोत्तरी नहीं की । सरकार ने रेल विकास के लिए सुविधाएं एवं ज्यादा सुरक्षा और ट्रैकों के सुधार और दोहरीकरण के लिए 1.60 लाख करोड़ रुपये रेलवे मंत्रालय को प्रदान किए हैं जो कि रेल बजट में मोटा मोटी 20 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी है । 20 प्रतिशत बजट बढ़ने का मतलब है कि निश्चित रूप से रेल के विकास पर जोर है । रेल से यात्रा करे तो जमीनी स्तर पर परिवर्तन दिखता है । इसी क्रम में यात्री सुविधाओं के विकास के लिए 3423 करोड़ रुपये दिए गए हैं जो पिछले बजट से एक हजार करोड़ रुपये ज्यादा हैं जिसकी मैं तारीफ करना चाहता हूं । नई लाइनों को बिछाने और ट्रैकों का दोहरीकरण रेलवे के लिए बड़ी चुनौती है जिससे निपटने के लिए सरकार ने विगत पांच वर्षों में ट्रैकों को सुधारा है, अनावश्यक नई ट्रेनों की घोषणा नहीं की है ।
वर्तमान बजट में वित्त मंत्री जी ने इस चुनौती से निपटने के लिए नई लाइने बिछाने के लिए 7255 करोड़ रुपये दिए हैं । 700 करोड़ रुपये की बड़ी राशि ट्रैकों के दोहरीकरण के लिए दिये हैं । सिग्नल सुधारने ओर टेलीकाम को बेहतर बनाने के लिए 1750 करोड़ रुपये दिए हैं जिसके लिए मैं वित्त मंत्री जी और रेल मंत्री जी को धन्यवाद देता हूं । रेलवे में जहरखुरानी और महिलाओं की सुरक्षा की समस्या किसी से छुपी नहीं है । एक महिला होने के नाते वित्त मंत्री जी ने संवेदनशीलता दिखाते हुए महिलाओं की सुरक्षा के मद्देनजर बजट में निर्भया फंड के तहत के लगभग 270 करोड़ रुपया दिया है । इसमें से 250 करोड़ रुपए विडियो निगरानी से जुड़े हुए इमरजेन्सी रिस्पांस सिस्टम के लिए दिया गया है जिसकी जितनी तारीफ की जाए कम होगी । जब मातृशक्ति सुरक्षित होगी तो भारत माता सुरक्षित होगी और राष्ट्र सुरक्षित होगा । निजी भागीदारी का सहारा लेने की आलोचना मेरे विचार से बेबुनियाद है । रेलवे के विस्तार, विकास और आधुनिकीकरण की चुनौती बड़ी गंभीर है उसके लिए सालाना 5 लाख करोड़ रुपये की जरूरत है । जबकि हम केवल अभी 1.5 लाख करोड़ रुपये खर्च कर पा रहे हैं । ये साढ़े तीन लाख करोड़ रुपये सालाना कहां से आएंगे । निजी क्षेत्र की भागीदारी का सहारा लेना ही श्रेयस्कर है वरना मंजूर की गई परियोजनाओं को पूरा करने में कई दशक लग जाएंगे । हमारी सरकार ने रेलवे के आधुनिकीकरण के लिए भी एक हजार करोड़ रुपये दिए हैं । सुविधाओं और सफाई में विकसित देशों के स्टेशनों को टक्कर दे रहे हैं ये प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत स्वस्थ भारत मिशन की ही देन है । मेरे संसदीय क्षेत्र में आनन्दनगर-महाराजगंज-घुघुली (50 कि.मी.) नई रेल मार्ग परियोजना को 2013-14 के बजट में शामिल किया गया था । पूर्वोत्तर रेलवे गोरखपुर रेलवे स्टेशन अति व्यस्त स्टेशन है । जहां से बड़ी संख्या में मालगाड़ी तथा यात्री गाड़ियों का आवागमन प्रतिदिन होता है जिसके कारण गोरखपुर स्टेशन पर अत्यधिक दबाव है । गाड़ियां घंटों लेट हो जाती हैं । इस रेल मार्ग के निर्माण से घुघुली से आनन्दनगर होते हुए एक पैरलल मार्ग मिल जाएगा जिससे गोरखपुर-लखनऊ रेल मार्ग पर यातायात का दबाव कम होगा । विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के साथ-साथ पूर्वोत्तर रेलवे से विस्तृत अनुमान प्राप्त हो गया है । डीपीआर के मुताबिक परियोजना की लागत 1339.09 करोड़ रुपये है । यह परियोजना नीति आयोग से स्वीकृत होकर रेल मंत्रालय में कैबिनेट की स्वीकृति हेतु आ गई है । गोरखपुर-गोमतीनगर एक्सप्रेस का ठहराव बृजमनगंज रेलवे स्टेशन पर किया जाए । नवतनवां रेलवे स्टेशन (पूर्वोत्तर रेलवे) से मुम्बई तथा दिल्ली के लिए सीधी ट्रेन चलाई जाए । गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर गाड़ियों के खड़ा करने का स्थान कम है जिससे प्लेटफार्म खाली नहीं रहता है और गाड़ियां घंटों लेट हो जाती हें । अतः नवतनवां रेलवे स्टेशन पर वाशिंग पिट बनाया जाए जिससे कुछ गाड़ियों को वहां से चलाया जा सके । पूर्वांचल में गोरखपुर बहुत पुराना पूर्वोत्तर रेलवे जोन है । राजधानी शताब्दी नहीं दी गई । आसाम और नार्थ ईस्ट तथा नेपाल की राजधानी काठमाण्डू जाने का सबसे छोटा सुविधाजनक रास्ता गोरखपुर से ही जाता है । अतः माननीय रेल मंत्री जी से निवेदन है कि इस कार्य को जल्द से जल्द उच्चतम स्तर पर हस्तक्षेप करके कराया जाए । इस रेल मार्ग पर राजधानी व शताब्दी देने की विशेष आवश्यकता है । पूरब की ओर आने-जाने वाले यात्रियों व टूरिस्टों को सुविधा मिलेगी । एक आखिरी महत्वपूर्ण बात भारत नेपाल रेल संपर्क के बारे में कहना चाहूंगा । हम लोग नेपाल के इंटरनेशनल बार्डर से सटे हुए हैंI सीमा पार रोटी-बेटी संपर्क अनन्त काल से रहा है । परन्तु भारत नेपाल रेल लाइन की सुविधा नहीं है । पूर्वोत्तर रेलवे के नौतनवा स्टेशन को नेपाल के भैरहवा तक जोड़ने की परियोजना पर गंभीरता से विचार किया जाए । जिस तरह से चीन द्वारा नेपाल पर अपना प्रभाव बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है वह भारत के लिए चिन्ताजनक है । पड़ोसियों से अच्छे संबंध माननीय प्रधानमंत्री जी की प्राथमिकता है । इसलिए मैं फिर से कहना चाहूंगा कि सरकार नेपाल से रेल संपर्क मार्ग को पूरा किया जाए । अंत में मैं इस जनहितकारी रेल बजट का एक बार पुनः समर्थन करते हुए माननीय वित्त मंत्री और माननीय रेल मंत्री जी का अभिनंदन करते हुए अपनी बात को समाप्त करता हूं ।
धन्यवादI 8 श्री एम. बदरुद्दीन अजमल (धुबरी):महोदय, मैं बहुत आभारी हूँ कि आपने मुझे इस महत्वपूर्ण विषय पर बोलने का मौका दिया । मैं देख रहा हूँ कि वक्त की बहुत कमी है ।…(व्यवधान)बहुत अच्छा,वक्त की कमी नहीं है तो मैं अपनी स्पीच को बढ़ा देता हूँ । जब महोदय टाइम कम करेंगे,तो आप रोक लेना ।
मैं नॉर्थ-ईस्ट के असम क्षेत्र से आता हूँ । मैं शायद अपने नॉर्थ-ईस्ट की बात करूँ तो इसी में भलाई है । मैं बहुत अफसोस के साथ कहना चाहता हूँ कि आजादी के 70 साल गुजर जाने के बाद भी इस मुल्क का नॉर्थ-ईस्ट का इलाका आज भी पूरे तौर से रेलवे से कनेक्टिड नहीं हो पाया है ।
सर, वहां जो भी प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं,सालों गुज़र जाने के बाद भी वे मुकम्मल नहीं हो पाए हैं । उनकी कितनी ही डेडलाइन गुज़र चुकी हैं । इन प्रोजेक्ट्स की कॉस्ट भी कई गुणा बढ़ गयी है,मगर बहुत से प्रोजेक्ट्स अभी भी मुकम्मल नहीं हुए हैं । इसका साफ मतलब है कि रेलवे ने उस तरफ इतना ध्यान नहीं दिया, जितना ध्यान देना चाहिए था ।
सर, असम तथा नॉर्थ-ईस्ट के लोग लाखों की तादाद में मुल्क के मुख्त़लिफ शहरों में खासकर दिल्ली,मुम्बई, कोलकाता और बेंगलुरु वगैरह में रोजी-रोटी के लिए जाते रहते हैं । जब ये लोग त्योहारों के मौके पर अपने घर आते हैं, तो उनको जो परेशानी का सामना करना पड़ता है, वह अफ़सोसनाक है । उन शहरों से गुवहाटी के लिए सिर्फ कुछ ट्रेन्स हैं,जिनसे नॉर्थ-ईस्ट के लोग जाते हैं । मिसाल के तौर पर दिल्ली से गुवहाटी सिर्फ चार ट्रेन्स है और कोलकता से गुवहाटी सिर्फ तीन ट्रेन हैं, जो डेली चलती हैं, इससे भला लोगों का मसला कैसे हल होगा?यह हमारा प्रश्न है ।
सर, हमने हर बजट के मौके पर मंत्री जी का ध्यान इस तरफ दिलाया है,मगर अभी तक उस सिलसिले में कोई ख़ास तवज्ज़ो नहीं दी गई । मैं एक बार फिर अपील करूंगा कि बड़े-बड़े शहरों से गुवहाटी के लिए नई-नई ट्रेन शुरू की जाए, ताकि वहां के लोगों को आराम मिले और वे आराम से अपने-अपने डेस्टिनेशन पर पहुंच सकें ।
सर, मेरा क्षेत्र धुबरी आज़ादी से पहले इंटरनेशनल ट्रेड का सेंटर हुआ करता था, मगर आज़ादी के बाद से वह बिल्कुल कट कर रह गया है । हम बार-बार अपील करते रहे हैं, पहली सरकार से भी अपील की और इस सरकार से भी अपील की कि वहां नई रेलवे लाइन बनाई जाए,नए ट्रेन शुरू की जाए, ताकि उस इलाके तरक्की हो सके, मगर अभी तक सरकार की तरफ से ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया, जिससे वहां के लोगों को राहत मिल सके ।
सर, आखिर में मैं असम तथा नॉर्थ-ईस्ट के लोगों की कुछ माँगें रखकर अपनी बात खत्म करूंगा । We have the following demands:
1. New survey for construction of rail line from Jogighopa to Silchar via Mankachar and Mahendragarh International port.
2. Construction of new railway line from Bongaigaon to Guwahati via Langting, Kalgachia, and Barpeta.
3. Introduction of new train between Dhubri to Guwahati, including intercity and Jan Shatabdi Express.
4. Introduction of a daily intercity chair car train between Dhubri and Guwahati.
5. Introduction of new express trains from Dhubri to Delhi, Kolkata and Mumbai.
6. Introduction of train service, both passenger and goods, between Golakganj station of Dhubri district in Assam and Kolkata in West Bengal.
सर,मैं रेल मंत्री जी से भी इस बारे में कहूंगा । रेलवे के लिए एक बहुत अच्छा शेर लिखा गया था । दोनों तरफ से लोग शेर मारते हैं, मैं जानवर तो नहीं मारूंगा,लेकिन शेर मारना चाहता हूं-
‘सफ़र हो रेलगाड़ी का तो छक्के छूट जाते हैं, पसीने के घड़े गोया सरों पर फूट जाते हैं ।’ सर, रेलगाड़ी का सफर जैसे ही शुरू होता है, आदमी को इतनी परेशानी होती है ।
‘टिकट लेना जो पहला काम है और सख्त मुश्किल है, समझ लीजिए कि अपनी सफर की पहली मंजिल है ।
रिजर्वेशन कराना है तो पहले एक कुली पकड़े, खु़शामद से मना लीजिए, पुलिस साहब अगर अकड़े ।
बुकिंग ऑफिस का बाबू, आपकी आसान कर देगा, वह मुश्किल हल करेगा और अपनी फीस ले लेगा ।
रिजर्वेशन करा देगा और वह दस रुपये ले लेगा, किसी की सीट हो, वह आपको दिलवाकर दम लेगा ।’ इन्हीं बातों के साथ मैं अपनी बात खत्म करता हूं । बहुत-बहुत शुक्रिया ।
9डॉ. भारतीबेन डी.श्याल (भावनगर): सर, आपने मुझे रेलवे बजट पर बोलने का अवसर दिया, इसके लिए मैं आपको थैंक्यू बोलना चाहती हूं । । सबसे पहले मैं अपने यशस्वी प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र भाई मोदी जी, वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण जी, रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल जी और सुरेश अंगड़ी जी का बहुत-बहुत अभिनंदन करती हूं ।
सर, भारत की पहली महिला वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जी बनी हैं । महिलाओं में क्या ताकत होती है! अब से पहले पूरा देश यह सोच रहा था कि महिला सिर्फ घर का बजट बनाती है,लेकिन आज निर्मला जी ने साबित कर दिया है कि वह घर का बजट तो बनाती ही है, लेकिन पूरे देश का बजट भी वह बना सकती है । इसलिए,मैं एक महिला होने के नाते बहुत गर्व महसूस कर रही हूं ।
21.00 hrs महोदय, वर्ष 1832 में शुरू हुई भारतीय रेल बहुत पुरानी रेल है । 63 हजार किलोमीटर लंबी और 22 हजार ट्रेनों से चलने वाली, रोजाना15 लाख लोगों को आवागमन की सुविधा देने वाली विश्व की तीसरे नंबर की हमारी भारतीय रेल है । हमारी बॉडी में जैसे आर्टरीज और वेन्स होती हैं,जो पूरी बॉडी के एक-एक शेल को पोषित करती हैं और उनकी वजह से हमारा शरीर चलता है, इसी तरह हमारे भारत में पूरा रेल का जो नेटवर्क है, वह एक-एक कोने तक पहुंचता है । यह भारत को जोड़ कर रखता है और इसी वजह से हमारा भारत चलता है । कश्मीर से कन्याकुमारी और अंजार से अरुणाचल तक हमारे माननीय प्रधान मंत्री जी और रेल मंत्री जी ने रेल का काम किया है । वर्ष 2014 के बाद इसमें बहुत अच्छा काम हुआ है । पूरा देश जानता है कि घाटा करने वाली रेलवे हमारे प्रधान मंत्री जी और रेल मंत्री जी को विरासत में मिली थी । आज मुझे कहना है कि कुछ ही समय में रेल का राजस्व बढ़ने से हमारी तिजोरी भर जाएगी, ऐसी व्यवस्था हमारे रेल मंत्री जी ने की है ।
महोदय, हमारे देश में लंबी दूरी का किफायती ट्रांसपोर्टेशन अगर कोई है, तो वह रेलवे है । मैं वर्ष2014 में जब लोक सभा चुनाव के कैंपेन के लिए जाती थी,तो मेरे क्षेत्र के लोग मुझे बोलते थे कि भारतीबेन अगर आप वर्षों से लम्बित बोटाद-साबरमती और ढस्सा-जैतलसर ब्रॉडगेज मंजूर करवा कर लाओगी,क्योंकि हम सालों से मांग कर रहे थे, तो अगर आप पांच साल में कोई दूसरा काम न भी करो, तो भी हम आपको वोट देंगे । मुझे बहुत हर्ष होता है कि ब्रॉड गेज और नेशनल हाईवे की डिमांड के लिए हम सालों से चक्का जाम और आंदोलन करते आ रहे थे, लेकिन वर्ष 2014 के तुरन्त बाद वर्ष 2015 से बोटाद-साबरमती और ढस्सा-जैतलसेर,दो बड़ी ब्रॉडगेज परियोजनाओं का काम पूरी तीव्रता से चालू है और इस साल के अंत में यह काम पूरा होने की सम्भावना है ।
मुझे लगता है कि बजट पर हमारे साथियों ने बहुत कुछ बोल दिया है । इसलिए मैं अपने क्षेत्र की ही बात रखती हूं । मैंने आपको बताया कि ब्रॉडगेज का काम चालू है । मेरे क्षेत्र के लोगों को बताते हुए मुझे आनन्द महसूस हो रहा है कि इस साल के बजट में भी 390 करोड़ रुपये का आबंटन इन दो परियोजनाओं के लिए किया है । पिछले पांच साल में 8 नई ट्रेनें भावनगर लोक सभा क्षेत्र को मिली हैं । रेलवे स्टेशन का माडर्नाइजेशन और नवीनीकरण हो रहा है । भावनगर में जो वर्कशॉप है, उनको भी अपग्रेड कर दिया है । अब वहां एसी कोचेज़ की भी रिपेयरिंग होनी लगी है ।
इस बजट में माननीय रेल मंत्री जी ने हमें एक और भेंट दी है । भावनगर से भरूच तक 100किलोमीटर न्यू रेलवे लाइन के सर्वे के लिए भी पूरा फण्ड हमें एलोकेट किया है । सर, मुझे लगता है कि अभी भी बहुत सारी डिमांड्स बाकी हैं । भावनगर-सूरत ट्विन सिटी जैसा व्यवहार रखते हैं । हमारे लोग चाहते हैं कि भावनगर-सूरत की एक इंटरसिटी ट्रेन चलाई जाए । भावनगर-हरिद्वार ट्रेन की सालों से हमारी डिमांड है, वह ट्रेन चलाई जाए । भावनगर-शिरडी ट्रेन चलाई जाए । अहमदाबाद राजधानी ट्रेन को भावनगर तक एक्सटेंड किया जाए । …(व्यवधान)
हमारे यहां तीन ओवर ब्रिज हैं, इसकी वजह से लोगों को इतनी दिक्कत होती है और वहां हैवी ट्रैफिक जाम हो जाता है । हमारे यहां सिहोर के धांगली में ओवरब्रिज के पास आधे-आधे घंटे में सिंग्नल बंद होने की वजह से रेलवे क्रासिंग बंद हो जाती है,इससे लोगों को बहुत मुश्किल होती है । बड़तेज ओवरब्रिज इतना ही जरूरी ओवर ब्रिज है और धोला ओवर ब्रिज जरूरी ओवर ब्रिज है ।
मैं माननीय रेल मंत्री जी से आग्रह करती हूं कि तीनों ओवर ब्रिज को मंजूर किया जाए । भावनगर-महुआ ट्रेन राजाशाही के वक्त से चल रही थी । जनभागीदारी से राजा ने एक पटरी दी थी और एक पटरी गवर्नमेंट ने दी थी, आज वह रेल लाइन बंद हो गई है । मैं पुन: उस लाइन को शुरू करने की मांग करती हूं । भावनगर के डेवलपमेंट करने के लिए भी माल परिवहन की सुविधा मिले ।
HON. CHAIRPERSON : You have covered all the important points.
डॉ. भारतीबेन डी.श्याल: महोदय, हमारा रेलवे स्टेशन वाई-फाई हो । वहां बहुत सारा लैंड एन्क्रोचमेंट हो गया है उस लैंड को कॉरपोरेशन को दिया जाए इससे हम ब्यूटिफिकेशन का काम कर सकते हैं ।
डॉ. संजय जायसवाल (पश्चिम चम्पारण): माननीय रेल मंत्री पीयूष गोयल जी और माननीय रेल राज्य मंत्री सुरेश अंगड़ी की तरफ से सभी सांसदों और लोक सभा के सभी स्टाफ के लिए रात्रि भोजन की व्यवस्था है । मैं सांसदों से अनुरोध करता हूं कि आठ या दस के ग्रुप में रात्रिभोजन कर लें और सभी स्टाफ भी भोजन कर लें ।
HON. CHAIRPERSON: What is the menu? Is it vegetarian or non-vegetarian?
डॉ. संजय जायसवाल : सेंट्रल हॉल में व्यवस्था है ।
0*श्री नरेन्द्र कुमार (झुन्झुनू): मैं शेखावटी झुंझुनूं जिले की ओर से अपने विचार रखना चाहता हूं ।
"शूरा निपजे झुंझुनूं,लिए कफन का साथ, इण भूमि रा लाडला, तेरा प्राण हथेली हाथ" ।
मैं उस जिले का प्रतिनिधित्व करता हूं जिस जिले को लक्ष्मी, सरस्वती और दुर्गा का अवतार माना गया है मुझे फक्र है हमारा जिला शहादत देने वाला है । हमारे जिले में 20 से 25 वर्ष की हमारी बहिन, बेटियों ने अपनी मांग के सिंदूर को मां भारती को वंदन किया है ।
"तब आंसू की एक बूंद से, सातों सागर हारे होंगे, जब मेंहदी वाले हाथों ने, मंगल सूत्र उतारे होंगे" ।
जिसका जीता जागता उदाहरण हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री जी ने दिनांक 08 मार्च, 2018 को "बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ"कार्यक्रम में जब झुंझुनूं आए तब कहा था "मैं झुंझुनूं की मिट्टी को माथे से लगाता हूं । यहां के लोग झुकते नहीं है" ।
वित्त मंत्री महोदया द्वारा प्रस्तुत इस बजट के लिए धन्यवाद प्रेषित करता हूं कि उन्होंने इस प्रकार पारदर्शी एवं दिशा संचक बजट प्रस्तुत किया ।
राजस्थान राज्य की शेखावटी क्षेत्र में जिला झुंझुनू आता है । सैनिक बाहुल्य क्षेत्र होने के साथ-साथ शिक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण जिला है । साथ ही व्यापारी एवं पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण जिला है । जिले में सैनिक एक्सप्रेस 14021/14022 जो कि दिल्ली से रिगस के लिए वर्तमान में बुधवार, शुक्रवार व रविवार को तीन दिवस चलती है । अत: उक्त ट्रेन को प्रतिदिन चलाने की व्यवस्था करे साथ ही झुंझुनू से बिसाऊ रेलवे ट्रैक का सर्वे करवाने की व्यवस्था की जाए । लुहारू से जयपुर के लिए मीटरगेज के समय प्रतिदिन ट्रेन का संचालन होता था लेकिन अब बी.जी. कन्वर्जन के बाद लुहारू की तरफ से अब केवल एक ही ट्रेन का संचालन हो रहा है ।
अत: लुहारू और सीकर की तरफ से दिन के समय भी ट्रेनों का संचालन बढ़ाने का श्रम करावें । झुंझुनू जिले के स्लायू कलां तहसील सूरजगढ़ में लुहारू सूरजगढ़ के मध्य रेलवे लाइन मार्ग पर अंडरपास बनवाने का श्रम करावें ।
बिसाऊ में आरक्षण खिड़की शुरू करने की भी कृपा करें ।1
SHRI V. K. SREEKANDAN (PALAKKAD): Respected hon. Chairperson, I thank you very much for allowing me to participate in an important discussion relating to the Demands for Grants in respect of the Ministry of Railways.
I was surprised and grieved that the State of Kerala was not given its due share as far as the Railway Budget is concerned. A coach factory was sanctioned for the State of Kerala at Kanjikode in Palakkad district in the Railway Budget of 2008-09. The foundation stone for the same was laid way back in 2012. The then Kerala Government acquired 439 acres of land for this purpose. Later, a compound wall was built around the acquired land. But thereafter nothing has moved beyond that. However, production has commenced in coach factories which were sanctioned or announced much later. This is total discrimination to the people of Kerala who were expecting much from this project by way of employment to the youths of the State and also other economic development. However, no mention of this much anticipated project at Kanjikode has been made in the Budget. Therefore, the same may please be included in the current year’s Budget.
Sir, secondly, the gauge conversion of Palakkad – Pollachi railway route was completed in 2016 involving a sum of Rs. 450 crore. Prior to this line becoming a broad gauge line, six pairs of trains were running between Palakkad and Pollachi. Now, in this route only one passenger train and two express trains are running. It was assured that all the trains which were running on this route will be restored after the broad-gauge conversion. But nothing has happened so far. It was also assured that new trains will be introduced between Mangaluru and Tuticorin. The main aim of making this Palakkad – Pollachi a broad gauge line was to facilitate port connectivity between Mangaluru and Tuticorin for faster freight movement as well as for transportation of goods from Tamil Nadu to Kerala and vice versa and also to increase the volume of passenger traffic as it is an inter-State connectivity route involving the States of Kerala, Tamil Nadu and Karnataka. This section is also very important from the religious point of view as it connects many pilgrim places such as Mookambika, Ervadi, Rameshwaram, Madurai, Palani etc. Again, I regret to mention here that about this also, nothing has been found in this Budget.
Therefore, I urge upon the hon. Minister through you Sir to establish the Coach Factory at Kanjikode and provide funds for the same to commence the work as well as to restore all the trains which were running between Palakkad and Pollachi prior to gauge conversion and also introduce new trains passing through this route at the earliest, in the current Budget itself.2
श्री रामचरण बोहरा (जयपुर): माननीय सभापति महोदय, आपने मुझे रेलवे की अनुदान मांगों पर बोलने का अवसर दिया, इसके लिए मैं आपका आभार व्यक्त करता हूं । मैं आपकी अनुमति से माननीय प्रधान मंत्री आदरणीय नरेन्द्र मोदी जी,वित्त मंत्री आदरणीय निर्मला सीतारमण जी का, रेल मंत्री पीयूष गोयल जी का और राज्य मंत्री सुरेश जी का बहुत-बहुत आभार व्यक्त करना चाहता हूं जिस तरह से वर्ष 2014 से अब तक रेलवे में जयपुर का जो विकास हुआ है वह पीछे के 50 साल एक तरफ हैं और 6 साल एक तरफ । इसलिए मैं माननीय प्रधान मंत्री जी का और पूर्व रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभु जी का बहुत-बहुत आभार व्यक्त करता हूं ।
अभी इसी बजट में माननीय वित्त मंत्री जी ने रेल बजट में घोषणा की है- जयपुर से सवाई माधोपुर के दोहरीकरण का काम और खातीपुरा में कोच मेंटेनेंस के लिए कारखाना लगाने की जो घोषणा की है इसके लिए भी मैं माननीय प्रधान मंत्री जी को एवं रेल मंत्री जी को बधाई देना चाहता हूं । साथ ही, हमारे पार्लियामेंट में रेलवे की जो-जो समस्याएं हैं, माननीय रेल राज्य मंत्री श्री सुरेश अंगड़ी जी यहां बैठे हैं । मैं इनसे निवेदन करना चाहता हूं कि दिल्ली से पुरी तक पुरषोत्तम एक्सप्रेस चल रही है । दिल्ली में आकर 22 घंटे तक उसका ठहराव रहता है, अगर इसको जयपुर तक बढ़ा दिया जाए तो जयपुर से पुरी जाने के लिए एक बहुत अच्छी सुगम व्यवस्था हो जाएगी । इसके लिए मैंने वर्ष 2014 से लगातार जब सुरेश प्रभु जी थे, उनसे भी आग्रह किया था,पीयूष गोयल जी से भी आग्रह किया और अब मैं आपसे भी आग्रह कर रहा हूं । हमारे टाटा के जो सांसद हैं, उन्होंने भी आपसे आग्रह किया है ।
जयपुर से सवाई माधोपुर शटल ट्रेन चलाई जानी चाहिए । जो लोग जयपुर से सवाई माधोपुर मजदूरी के लिए, दूध वाले, सब्जी वाले आते हैं,उन लोगों के लिए यह एक बहुत अच्छी सुविधा हो जाएगी । मैं माननीय मंत्री जी का धन्यवाद देना चाहता हूं कि जयपुर से अजमेर के लिए शटल एक्सप्रेस डेमू ट्रेन चली है, यह डेमू ट्रेन हर स्टेशन पर ठहरती है । इससे यात्रियों को एक बहुत अच्छी सुविधा मिली है । इसी तरह जयपुर से सवाई माधोपुर तक एक ट्रेन चले तो यात्रियों को एक सुविधा हो जाएगी । मैं जबसे एम.पी बना हूं, तबसे लगतार जयपुर की जनता की एक जबर्दस्त डिमांड है कि जयपुर से शिरडी तक ट्रेन चलनी चाहिए । हजारो की संख्या में लोग शिरडी यात्रा के लिए जाते हैं । मैं माननीय प्रधान मंत्री जी और माननीय मंत्री महोदय से विशेष आग्रह करना चाहूंगा कि जयपुर से शिरडी की ट्रेन का शुभारंभ करें ताकि यात्री जो बीच-बीच में बदलकर शिरडी जाते हैं उनको सीधे शिरडी जाने का अवसर मिले । इसी प्रकार जयपुर से हावड़ा सप्ताह में दो बार चलती थी, उसको अभी बंद कर दिया गया है, पुन:उसको चालू कराया जाए ताकि लोगों को जयपुर से कोलकाता तक जाने की सुविधा मिल सके ।
माननीय मंत्री जी ने स्वच्छता की दृष्टि से जयपुर के लिए और पूरे हिन्दुस्तान में ट्रेनों में सफाई की व्यवस्था की है ।
मैं आग्रह करना चाहूंगा कि जिस तरह से ट्रेनों में बेडशीट्स और पिलो कवर आते हैं, उनकी पूरी तरह से सफाई नहीं होती है, अगर इस पर थोड़ा और ध्यान दिया जाए तो मैं समझता हूं कि यात्रियों के लिए अच्छा होगा । ट्रेन में जो लोग रिजर्वेशन नहीं करवा पाते हैं, जो लोग जनरल कोच में जाना चाहते हैं, उन लोगों के लिए ट्रेनों में जनरल कोच के डिब्बे जोड़े जाएं । ट्रेन आम आदमियों के लिए है । जो लोग रिजर्वेशन नहीं करवाते हैं, उनको भी आने-जाने में अच्छी सुविधा होगी । मैं इस अवसर पर माननीय प्रधान मंत्री जी, माननीय वित्त मंत्री जी और माननीय रेल मंत्री जी का बहुत बहुत आभार व्यक्त करता हूं । जिस तरह से रेलवे में काम हुआ है । वह अपने आप में बहुत ही अद्भूत काम हुआ है । मैं एक आग्रह करना चाहूंगा कि जयपुर से दिल्ली तक एक फास्ट ट्रेन चलाई जाए, ताकि जयपुर से रोजाना जो यात्री दिल्ली आते हैं और शाम को वापस अपना काम करके चले जाते हैं, उनके लिए सुविधा हो सके । इस पर पीयूष गोयल जी ने एक स्टेटमेंट भी दिया था । मैं आपसे आग्रह करना चाहूंगा कि जल्दी ही जयपुर से एक फास्ट ट्रेन चलाने का काम करे । यह बहुत अच्छा होगा । मुझे आपने बोलने का अवसर दिया, मैं आपको धन्यवाद देते हुए और रेल बजट का समर्थन करते हुए अपनी वाणी को विराम देता हूं । बहुत-बहुत धन्यवाद । जय हिन्द,जय भारत ।
श्री विनायक भाऊराव राऊत (रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग): सभापति महोदय,मैं जब रेलवे के विषय पर बात करता हूं…(व्यवधान)
HON. CHAIRPERSON: Hon. Member, please conclude only in three minutes.
श्री विनायक भाऊराव राऊत: मैं कोंकण रेलवे के विषय पर बात करने वाला हूं ।
HON. CHAIRPERSON: You have to speak only about your constituency developments.
… (Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: You have to speak only about your constituency developments within three minutes.
SHRI VINAYAK BHAURAO RAUT: Okay, Sir.
मैं सबसे पहले रेल के राज्य मंत्री सुरेश जी अंगडी जी का अभिनन्दन करूंगा ।…(व्यवधान)
HON. CHAIRPERSON: My name is also Suresh.3
श्री विनायक भाऊराव राऊत: जब से यह डिबेट शुरू हुई है, तब से आज तक एक सीट पर बैठकर सभी सदस्यों के विचार सुनना और गंभीरता से नोटिस करना यह कोई साधारण काम नहीं है । सभापति महोदय,मेरे क्षेत्र में कोंकण रेलवे है, आप भी जानते हैं जैसे कई बड़े-बड़े पहाड़, बड़ी-बड़ी नदियां और उसमें से गुजरती हुई कोंकण रेल देश का एक अभिमान है ।
HON. CHAIRPERSON: Konkan Railways was constructed for Kerala.
… (Interruptions)
श्री विनायक भाऊराव राऊत: जम्मू से विशाखापत्तनम और दिल्ली से गोवा तक जाने वाली यह रेल देश के लिए अभिमान की बात है । मेरी एक ही विनती है कि देश में सबसे बिजी ट्रेक कोंकण रेलवे का है उस पर ज्यादा से ज्यादा रेलगाड़ियां चलाने के लिए कोंकण रेलवे की डबलिंग करने की आवश्यकता है । कोंकण रेलवे की डबलिंग करने के लिए इंडियन रेलवे या वित्त विभाग को ज्यादा से ज्यादा आर्थिक सहायता प्रदान करने की आवश्यकता है । खासकर के कोंकण रेलवे के ऊपर कोंकणकन्या, मंडोवी और तेजस है । एक विस्टाडोम जैसा आइडियल कोच पूरे देश में एक ही जगह पर चलती है तो ऐसी ट्रेन को बढ़ावा दिया जाए । यहां ज्यादा से ज्यादा टूरिस्ट आना पंसद करते हैं । ऐसी ट्रेन को प्रोजेक्ट करने के लिए मुझे आप पर भरोसा है । आप उसे न्याय देंगे । आपकी मेहरबानी से कोंकण रेलवे की डबलिंग के लिए इलैक्ट्रिफिकेशन तो हो रहा है, लेकिन उसकी डबलिंग के लिए जयादा धनराशि की आवश्यकता है । मेरी एक विनती है कि पूर्व रेल मंत्री के कार्यकाल में करड से चिपलून और कोल्हापुर से वैभववाडी ये दो नए ट्रेक के निमार्ण करने का प्रावधान रखा था,उसका भूमिपूजन भी हो गया था । मेरी विनती है कि पश्चिम वेस्टर्न महाराष्ट्र और कोंकण पहाड़ी इलाका को कोस्टल लाइन से लिंक करके ज्यादा से ज्यादा गुड्स ट्रांसपोर्ट करने के लिए भारतीय रेल के माध्यम से उसे आर्थिक सहायता देने की जरूरत है । वैभववाडी के पास ओवरब्रिज बनाने की भी जरूरत है, मैं उसके लिए भी 5-6 करोड़ की धनराशि की मांग करता हूं, जहां दिन में कम से कम 65 बार गेट शट डाउन होता है और कई गाड़ियां रुकती है । वहां अगर एक ओवरब्रिज बनता है तो कोंकण रेलवे का यातायात अच्छी तरह से चल सकता है । मुझे इस बात की खुशी है । क्या रेल बजट मुख्य बजट में शामिल होने के बाद में रेल विषय को न्याय मिलेगा या नहीं मिलेगा यह शंका अनेक सदस्यों के दिल में थी । लेकिन माननीय स्पीकर महोदय ने आज असलियत में दिखा दिया कि रेलवे एक महत्वपूर्ण विषय है, इसलिए सभी सदस्यों को अपने-अपने विचार यहां रखने के लिए मौका देने का काम उन्होंने किया है । इसके लिए मैं स्पीकर महोदय का अभिनन्दन करता हूं और अपनी बात समाप्त करता हूं । धन्यवाद ।4
श्री अक्षयवरलाल (बहराइच):सभापति महोदय, आपने मुझे इस विषय पर बोलने का अवसर दिया, इसके लिए मैं आपके प्रति आभार व्यक्त करता हूं ।
मान्यवर, देश के लोकप्रिय यशस्वी प्रधान मंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी जी ने जिस प्रकार से देश का चतुर्मुखी विकास किया, उसी प्रकार रेलवे के जीर्णोद्धार और आमूल-चूल परिवर्तन का कार्य माननीय रेल मंत्री गोयल जी और सुरेश जी कर रहे हैं । इसके लिए देश की जनता बहुत-बहुत आभारी है ।
विपक्ष के लोग इस बात की तारीफ नहीं कर रहे हैं कि किराया एक रुपया भी नहीं बढ़ाया गया है । रेलवे का आमान परिवर्तन करना, रेलवे लाइन को बढ़ाना,नए-नए कामों को शुरू करने का काम सरकार ने काम किया है, उसके लिए देश की जनता उनके प्रति आभारी है । मैं अपनी बात को अपने संसदीय क्षेत्र बहराइच तक ही सीमित रखूंगा, जो नेपाल की सीमा पर स्थित है । वहां से नेपाल के लोग, जनपद श्रावस्ती के लोग और बहराइच के लोगों को लखनऊ या उससे आगे आने के लिए रेल की सेवा नहीं है, उनको वहां तक बसों से आना पड़ता है । माननीय प्रधान मंत्री जी तीन बार बहराइच गए, माननीय गृह मंत्री जी और माननीय रक्षा मंत्री जी भी गए हैं । वहां की जनता की एक बड़ी मांग यह है कि बहराइच को सीधी रेल सेवा से जोड़ा जाए । इसके लिए मैं माननीय मंत्री जी से निवेदन करूंगा कि चूंकि माननीय प्रधान मंत्री जी ने भी वहां कहा, गृह मंत्री जी ने भी कहा है । बहराइच से जरवल रोड 60 किलोमीटर दूरी पर है । जरवल बहराइच जनपद में ही आता है, लेकिन असम से दिल्ली तक जो रेल लाइन गई है, वहां से जरवल 60 किलोमीटर अंदर पड़ता है । अगर बहराइच को जरवल से जोड़ दिया जाए तो नेपाल, जनपद श्रावस्ती और बहराइच के लोगों को बड़ी सुविधा होगी । इसके साथ ही, गोण्डा से मैलानी तक आमान परिवर्तन छोटी लाइन से बड़ी लाइन करने का काम शुरू हुआ था । वह काम गोण्डा से बहराइच के बीच मात्र 60 किलोमीटर हुआ है । बहराइच से लेकर मैलानी तक इसका आमान परिवर्तन बड़ी लाइन में कराया जाए । इसके साथ ही, बहराइच से जो छोटी लाइन की ट्रेन मैलानी तक जाती है, उसमें एक बजे के बाद कोई ट्रेन मैलानी की तरफ नहीं जाती है । जो जनता दूर से आती है, उसे शाम पांच-छ: बजे कचहरी से अपने काम से फुर्सत मिलती है, इसलिए मेरा निवेदन है कि बहराइच से मैलानी के लिए पांच बजे एक ट्रेन चलाई जाए । इसी प्रकार बिछिया से बहराइच के लिए एक ट्रेन चलाई जाए । बहराइच से गोण्डा तक बड़ी लाइन पर डेमो ट्रेन चलती है, उस पर भी शाम को ट्रेन चलाई जाए । इसी तरह नेपालगंज को भी बड़ी लाइन से जोड़ा जाए । बहराइच के अंदर जो जाम की स्थिति है, गोण्डा, बलरामपुर और गोरखपुर से आनी वाली बसों एवं वाहनों को बहराइच के अंदर से जाने के लिए कोई ओवरब्रिज नहीं है । वहां जनता की मांग है कि गोण्डा-बहराइच मार्ग से लखनऊ की तरफ जाने वाले जेल रोड पर एक ओवरब्रिज बनाकर जनता को सुविधा दी जाए । इसी प्रकार से बहराइच के अंदर चुंगी नाका के पास अंडरपास बनवाने का काम किया जाए, जिससे जनता को आने-जाने में सुविधा हो । लखनऊ से आने-जाने वाले लोगों के लिए माननीय मंत्री जी से मैं करबद्ध प्रार्थना करता हूं, माननीय प्रधान मंत्री जी भी वहां गए थे, उन्होंने भी वहां कहा है, इसलिए जरवल से बहराइच को बड़ी लाइन से जोड़ने की कृपा करें । धन्यवाद I 5 *श्री जगदम्बिका पाल (डुमरियागंज): मैं वर्ष 2019-20 के लिए रेल मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदानों की मांगों पर अपने विचार रखता हूं । भारतीय रेल राष्ट्र की जीवनरेखा है । प्रतिदिन लगभग तीन करोड़ यात्रियों को 12335 ट्रेनें प्रतिदिन कन्याकुमारी से कश्मीर के बीच गन्तव्य स्थानों पर पहुंचाने का कार्य कर रही हैं । इस तरह तीन करोड़ रेल यात्रियों का घर रेल की बोगी होती है, जिनमें रेल मंत्रालय उनके लिए खाना, दूध,नास्ता एवं बिस्तर आदि की व्यवस्था करती है । हमारी सरकार ने इस बजट में रेल के विकास के लिए चार महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर ध्यान केन्द्रित किया है । पहला यात्री सुरक्षा,दूसरी स्वच्छता और तीसरा Capital and Development Works और चौथा Financial and Accountancy Reforms. इस दिशा में सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय रेल सुरक्षा कोष-एक लाख करोड़ रुपये पांच वर्षों के लिए निर्धारित किया है । जापान से रेल दुर्घटना रोकने के लिए MOU पर हस्ताक्षर करने का काम किया गया है । वर्ष 2020 तक मानव रहित रेल क्रॉसिंग को बंद करने का निर्णय लिया गया है । आज कई सदस्यों ने कहा कि पहले रेल का बजट अलग प्रस्तुत किया जाता था,लेकिन अब इसे सामान्य बजट का हिस्सा बना दिया गया है । इसके पीछे स्पष्ट कारण है कि देश की आजादी के बाद पूरे रेलवे में सुधार के लिए बिबेक देबरॉय कमेटी का गठन किया गया है । बिबेक देबरॉय कमेटी ने वर्ष 2015 में काफी संस्तुतियां की हैं जिसमें सामान्य बजट के साथ रेल बजट का मर्जर भी शामिल किया । मर्जर का मकसद रेलवे को Multi Model Transport Planning होगी,जिसके अंतर्गत (1) रेलवे (2) हाईवेज़ (3) इनलैंड वाटरवेज का संयुक्त रूप से विकास होगा । भविष्य में रेलवे को आर्थिक रूप से फायदा होगा,पहले रेलवे को 5 परसेन्ट डिविडेंड देना पड़ता था । वर्ष 2016-17 में सरकार को 9,731 करोड़ रुपये रेलवे ने दिया था । ब्रिटिश काल में East India Company रेलवे को ऑपरेट करती थी, इसलिए क्राउन को डिविडेंड देना पड़ता था । आजादी के बाद रेल मंत्रालय भारत सरकार के अधीन होने के बाद भी डिविडेंड की प्रथा चली आ रही है, जिसे हमारी सरकार ने समाप्त किया है । आज हमारी रेल दुनिया की दूसरे नंबर पर है । भारतीय रेल एक नया प्रयोग करने जा रही है,जिसमें उपभोक्ता को कुछ उत्पाद के लिए End to End transport मुहैया करने का निर्णय लिया है । वर्ष 2020 तक सभी रेलवे कोच Bio Toilets से युक्त कर दिया जायेगा । हमारे रेल मंत्री ने यात्रियों की सुरक्षा एवं सुविधा को सर्वोच्च प्राथमिकता के आधार पर रेखांकित करके सुरक्षा कोष बनाने का निर्णय किया गया है । भारत सरकार द्वारा वर्तमान रेलवे परिव्यय में वृद्धि की गई है । सरकार ने नई मेट्रो रेल पॉलिसी बनाने का निर्णय लिया है,क्योंकि देश के सभी राज्यों में मेट्रो रेल का बहुत तेजी से विकास हो रहा है । रेल मंत्रालय ने विश्व की प्रतिस्पर्धा में भारतीय रेल बुलेट ट्रेन मुम्बई-अहमदाबाद के बीच तेजी से कार्य कर रही है, जिस पर लागत लगभग 75,000 करोड़ रुपये आयेगा । रेल मंत्रालय के लिए इस वर्ष का परिव्यय एक लाख 60 हजार करोड़ रुपये निर्धारित किया है । पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष Gross Budgetary Support में 5,000 करोड़ रुपये बढ़ा कर के 60,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे आने वाले समय में रेल का तीव्रतर विकास होगा । हमारी सरकार ने भारतीय रेल को आर्थिक रूप से सहयोग करके अगले दस वर्षों में 50 लाख करोड़ रुपये खर्च किया जाएगा । भारतीय रेल ने इस वर्ष व्यय पिछले वर्ष की तुलना में 9 प्रतिशत अधिक खर्च करने का निर्णय लिया गया है । वर्ष 2019-20 में अनुमानित व्यय 2,07,900 करोड़ रुपये खर्च करेगी । इस बार राजस्व अनुमानित 2,16,935 करोड़ पिछले वर्ष की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक प्राप्ति होगी । ट्रैफिक राजस्व 2019-20 में 2,16,675 करोड़ रुपये की प्राप्ति होगी,जो पिछले वर्ष की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक मिलने का अनुमान है । रेल पीपीपी मॉडल में ट्रैक, रोलिंग स्टॉक उत्पादन में वर्ष 2018 से वर्ष 2030 तक लगभग 50 लाख करोड़ रुपये बुनियादी ढाँचों में खर्च करेगी । रेल मंत्रालय ने बड़े पैमाने पर स्टेशनों का आधुनिकीकरण करने की योजना का निर्णय लिया है । मैं माननीय मंत्री जी को बधाई देना चाहता हूं कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा सत्तारूढ़ होने के बाद क्षेत्रीय असंतुलन को समाप्त करने के लिए नीति आयोग द्वारा देश के 115 जनपदों को चिह्नित करके आकांक्षा जनपद रेखांकित कराया । सरकार ने केवल पिछड़े जनपदों को केवल चिह्नित करने का काम नहीं किया, बल्कि उन जनपदों को देश की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए रेल मंत्रालय ने ऐतिहासिक कार्य किया है । विगत दिनों माननीय मंत्री श्री गोयल जी ने खलीलाबाद-नन्दौर वासी, डुमरियागंज,उतरौला, बलरामपुर,बहराइच एवं श्रावस्ती को नई रेल लाइन से जोड़ने के लिए लगभग 4970 करोड़ रुपये स्वीकृत करके 240 किलोमीटर नई रेल लाइन दी है । हमारी सरकार का सबसे ज्यादा जोर रेल लाइन के विद्य़तीकरण करने पर है । हमारे रेल मंत्री जी गोरखपुर आनन्द नगर, नौगढ़, शोहरतगढ़,बढ़नी, बलरामपुर,गोण्डा की वर्तमान रेल लाइन को विद्य़तीकरण कराने के लिए प्राथमिकता देने की कृपा करे । सरकार का संकल्प है कि देश में सभी रेल लाइनों का दोहरीकरण एवं विद्य़तीकरण करने का निर्णय लिया है । मैं प्रस्तुत अनुदान का समर्थन करता हूं ।6
*श्रीमती रीती पाठक (सीधी):हमारी भारतीय जनता पार्टी की पूर्ण बहुमत की सरकार केंद्र में 2014 से नरेंद्र भाई मोदी जी के नेतृत्व में बनी तब से लेकर रेलवे में बड़े बदलाव हुए हैं । एक समय था जब रेलवे की स्थिति अत्यंत दयनीय थी, परंतु आज का समय है जब रेलवे मजबूत स्थिति में है,वंदे मातरम जैसी ट्रेन का परिचालन इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है, इस बजट में रेलवे को पर्याप्त बजट उपलब्ध कराया गया है । चाहे नई लाइनों के निर्माण के लिए हो या आमान परिवर्तन, दोहरीकरण,यातायात सुविधाएं,चल सटाक, रेलपथ का नवीकरण,कर्मचारियों के लिए सुविधाएं,यात्रियों के लिए सुविधाएं फिर चाहे विद्युतीकरण जैसे अनेकानेक कार्य हो, इस बजट में माननीय प्रधानमंत्री जी के नए भारत का सपना पूर्ण होगा,ऐसा हमारा विश्वास है ।
रेल किसी क्षेत्र के विकास की महत्वपूर्ण कड़ी है । हर क्षेत्र से रेल जुड़ना अति आवश्यक है । इस बजट में की गई व्यवस्थाओं के अनुसार हमारे भारत का यह सपना भी पूर्ण होगा तथा सभी क्षेत्र रेलमार्ग से जुड़ेंगे । जो अब तक रेल सुविधा से विहीन हैं, जहां रेल सुविधा है वहां की व्यवस्था को और सुदृढ़ व सुव्यवस्थित करने की व्यवस्था भी इस बजट में की गई है, इस बजट में आदरणीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र भाई मोदी जी, पूर्व रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभु जी व वर्तमान रेलमंत्री श्री पीयूष गोयल जी के देश भर में रेल के विकास को लेकर देखा गया सपना व किए गए कार्य साकार होंगे । ऐसा प्रतीत होता है, इस बजट में यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था का ध्यान रखना भी भारतीय जनता पार्टी की केंद्र सरकार, माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी एवं वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण जी के सकारात्मक सोच को दर्शाता है ।
देश में सभी स्थानों में रेल सेवा पहुंचाने, रेल सेवा को सुव्यवस्थित करने तथा सरल करने के लिए हमारी सरकार कार्य कर रही है और किया भी है और हमारी सरकार की संवेदनशीलता का ही परिणाम है कि ट्रेन में भूखे नवजात शिशु के लिए दूध एक ट्वीट से पहुँच जाता है, बीमार यात्री के लिए चिकित्सक पहुँच जाते हैं,एक समय था जब सबसे ज्यादा अपराध ट्रेनों में ही होते थे । इस बजट में नई लाईनों के लिए 7677.77 करोड़ रुपये तथा रेलमार्गों के दोहरीकरण हेतु 17601.76 करोड़ रुपए,रेलपथ के नवीकरण हेतु 10120.00 करोड़ रुपये तथा विद्युतीकरण हेतु 6960.26 करोड़ रुपए करना हमारे केंद्र सरकार की अभिनंदनीय पहल है ।
देश भर के छोटे बड़े शहरों को रेलमार्ग से जोड़ने का काम हमारी सरकार द्वारा किया जा रहा है, क्योंकि जो क्षेत्र रेल सेवा से वंचित हो, उस क्षेत्र का सर्वांगीण विकास संभव नहीं है और इस बात की उदाहरण मैं हूँ ।
मेरे संसदीय क्षेत्र सीधी जिला आज भी रेल सुविधा से अछूता है और इसका मुख्य कारण है वर्षों से लंबित पड़ी ललितपुर-सिंगरौली रेल परियोजना ।
किसी क्षेत्र के रेल विहीन होने का दर्द क्या होता है ये बखूबी पता है । मेरा संसदीय क्षेत्र अति पिछड़ा मात्र इसीलिए है क्योंकि वहॉं रेल नहीं है । मुझे यह साझा करते हुए बहुत गर्व होता है कि हमारे जिले सीधी ने प्रदेश में मुख्यमंत्री भी दिया है । किसी राज्य का राज्यपाल भी और केंद्र में मानव संसाधन विकास मंत्रालय जैसा अहम दायित्व दिया है परंतु इसके साथ ही यह साझा करते हुए अत्यंत दु:ख भी होता है कि बावजूद हमारा क्षेत्र सीधी रेल से नहीं जुड़ पाया ।
2014 में केंद्र में नरेंद्र भाई मोदी जी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी और मैं 16वीं लोक सभा की सांसद । मेरा सपना था कि भारतीय जनता पार्टी के व केंद्र सरकार के सहयोग से मैं सीधी जिले में रेल लाकर ही मानूंगी और मेरे प्रयास का सफर शुरू हुआ, मैंने तत्कालीन रेलमंत्री श्री डी वी सदानंद गौड़ा जी के साथ प्रधानमंत्री जी से भेंट कर समस्या से अवगत कराया । प्रधानमंत्री जी व रेल मंत्री जी का पूर्ण सहयोग व आशीर्वाद प्राप्त कर लग गई रेल को लक्ष्य बनाकर विरोधियों ने तंज़ भी कसा,शब्दों का प्रहार भी किया परंतु मैंने अपना मार्ग नहीं बदला और न ही विचलित हुई,लगी रही । बजट मिला,भू अधिग्रहण प्रारंभ हुआ इस बीच तत्कालीन रेल मंत्री श्री सुरश प्रभु जी और वर्तमान रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल जी से भी पूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ ।
आज मुझे यह साझा करते हुए अत्यंत प्रसन्नता हो रही है कि 2014 से अब तक ललितपुर-सिंगरौली रेल परियोजना को लगभग 1790 करोड़ का बजट प्राप्त हो चुका है । रीवा से सीधी तक लगभग भू अर्जन हो चुका है । बीच में पड़ने वाली सन नदी पर पुल भी निर्माणाधीन है, सीधी में रेलवे स्टेशन भी निर्माणाधीन है और जमीन पर निर्माण कार्य दिख रहा है । मुझे ऐसा प्रतीत होता है कि यदि तीव्रता से निर्माण कार्य चलता रहा और पर्याप्त बजट इस परियोजना को प्राप्त होती रही तो 17वीं लोक सभा में सीधी में रेल आकर खड़ी हो जाएगी । इस हेतु मैं केंद्र सरकार का आभार ज्ञापित करना चाहती हूँ ।
मेरे संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत एक जिला है सिंगरौली, जो औद्योगिक जिला है, सर्वाधिक मात्रा में कोयला सिंगरौली में पाया जाता है । मैं बताना चाहती हूँ कि सिंगरौली में रेल लाइन तो थी, परंतु वहां से दिल्ली व भोपाल जाने के लिए रेल नहीं थी । जनवरी, 2016 में तत्कालीन रेलमंत्री श्री सुरेश प्रभु जी से मेरे द्वारा नई ट्रेन संचालित करने हेतु आग्रह किया गया और 12 अगस्त,2017 को दो साप्ताहिक ट्रेनों सिंगरौली से भोपाल व दिल्ली के लिए जाने के लिए सौगात प्राप्त हुई । इस हेतु भी मैं केंद्र सरकार का धन्यवाद ज्ञापित करना चाहती हूं ।
मेरे संसदीय क्षेत्र की अति महत्वपूर्ण रेल परियोजना कटनी-सिंगरौली-रमना रेल लाइन जो वर्षों से लंबित थी यह परियोजना भी हमारे केंद्र सरकार द्वारा प्रारंभ की गई ।
मेरे संसदीय क्षेत्र सीधी के विभिन्न महत्वपूर्ण स्टेशनों में 10 ठहराव, 3 रेल टिकट आरक्षण केंद्र,सिंगरौली रेलवे स्टेशन को आदर्श रेलवे स्टेशन की सूची में शामिल करने सहित अनेकों ऐतिहासिक सौगातें प्राप्त हुई हैं । इस हेतु भी मैं केंद्र सरकार व भारतीय जनता पार्टी का आभार ज्ञापित करना चाहती हूं ।
भारतीय जनता पार्टी के आशीर्वाद व संसदीय क्षेत्र वासियों के विश्वास से मैं पुन: 17वीं लोकसभा के लिए सदन की सदस्य निर्वाचित हुई हूं और केंद्र में पुन: नरेंद्र भाई मोदी जी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनी है । मेरा संसदीय क्षेत्र में रेल लाने का स्वपन अभी पूर्णत: फलित नहीं हुआ जिस कारण मेरा प्रयास रहेगा कि इस कार्यकाल में सीधी में रेल आकर खड़ी हो सके । मैं अंत में कुछ अपने क्षेत्र की रेल संबंधी मांगों से सरकार को अवगत कराते हुए अपनी बात समाप्त अवगत कराते हुए अपनी बात समाप्त करना चाहूंगी-
1. ललितपुर-सिंगरौली रेल परियोजना की तीव्रता हेतु पर्याप्त बजट उपलब्ध कराने के साथ ही संबंधित अधिकारियों को निर्देशित करने की कृपा करें।
2. कटनी-सिंगरौली-रमना रेलमार्ग दोहरीकरण हेतु पर्याप्त बजट उपलब्ध कराने के साथ ही संबंधित अधिकारियों व निर्माण एजेंसी को निर्माण कार्य में तीव्रता लाने हेतु निर्देशित करने की कृपा करें।
3. सिंगरौली-भोपाल (22165/66) व सिंगरौली निज़ामुद्दीन एक्सप्रेस (22167/68) को नियमित करने की कृपा करें ।
4. सिंगरौली से जबलपुर के लिए नई सांयकालीन इंटरसिटी का परिचालन कराया जाए ।
5. सिंगरौली-निज़ामुद्दीन एक्सप्रेस (22167/68) का ठहराव सिंगरौली जिले के सरई रेलवे स्टेशन में कराया जाए ।7
श्री रितेश पाण्डेय (अम्बेडकर नगर): सभापति महोदय, इस रेल बजट को देख कर एक मुहावरा याद आता है कि खोदा पहाड़ निकली चुहिया । माननीय वित्त मंत्री जी ने अपने भाषण में बीजेपी के स्वाभाविक स्टाइल एक बहुत बड़ा आंकड़ा उछाल दिया । उन्होंने कहा कि हम 50लाख करोड़ रुपये वर्ष 2030 तक भारतीय रेल में इन्वेस्ट करेंगे । 50 लाख करोड़ रुपये का जो भारी-भरकम आंकड़ा है, इसके नीचे सच्चाई को दबाने की कोशिश की जाती है और बीजेपी इसको अपने स्वाभाविक रूप में करने का काम करती है । भारतीय रेल की सच्चाई यह है कि यह सरकार का एक व्यवसायिक उपक्रम है और इसको उसी तरह से देखने की जरूरत है । भारतीय रेल को अपना मुनाफा कमाने की जरूरत है । भारतीय रेल को मुनाफा कमा कर अपने-आप को विस्तार करने की जरूरत है । क्या भारतीय रेल यह सुचारू रूप से कर पा रही है? इस पर विचार करना जरूरी है । क्या भारतीय रेल अपनी क्षमतानुसार प्रॉफिट बना रही है? क्या भारतीय रेल कर्जे में डूब तो नहीं रही है? क्या भारतीय रेल निष्क्रिय और जो आलसी ऑर्गनाइजेशन कल्चर है, उसकी वजह से पीछे तो नहीं हो रही है? मेरा मानना है कि भारतीय रेल इन सभी चीजों से ग्रस्त है और अगर देखा जाए तो भारतीय रेल का जो पिछले सालों का प्रॉफिट है, वह गिरता चला आ रहा है ।
मान्यवर, अभी जो आंकड़े रेल मंत्रालय ने दिए हैं,वर्ष 2015-16 में 19,228 करोड़ रुपये का नेट रेवेन्यू था । उसके बाद वह वर्ष 2016-17 में गिर कर4,913 करोड़ रुपये हो गया । वर्ष 2017-18 में यह 1,666 करोड़ रुपये पर आ गया और यहां पर 50 लाख करोड़ रुपये का सपना दिखाया जाता है । मैं माननीय वित्त मंत्री जी से यह जानना चाहता हूं कि आखिर आप ये सब निवेश करेंगे तो हमारे करदाताओं का जो पैसा इसमें लगेगा, क्या वह सार्थक रहेगा? इस के बारे में भी माननीय रेल मंत्री जरूर बताएंगे ।
मान्यवर, अगर हम रेल की रीढ़ को देखें तो रेल अपनी पूंजीगत खर्चों के लिए भारत सरकार के सामने कटोरा लेकर खड़ा रहता है । रेल अपने खर्चे खुद नहीं निकाल पा रहा है, वह भारत सरकार के सामने कटोरा लेकर खड़ा रहता है और भारत सरकार66,105 करोड़ रुपये देने की बात कर रही है । मैं बहुत लंबा भाषण नहीं करना चाहूंगा,मुझे अपने क्षेत्र की भी बातें करनी है । मार्केट और बैंकों से बॉरोइंग लगभग 83 हजार करोड़ रुपये के आस-पास है । रेलवे अपने रेवेन्यू का केवल छ: प्रतिशत पूंजीगत खर्चों पर खर्च करती है,यह एक चिंता का विषय है कि रेलवे के पास खुद का पैसा नहीं है ।
अंत में, मैं भी अपने क्षेत्र के बारे में रेल मंत्री जी से निवेदन करना चाहूंगा कि हमारे यहां एक ट्रेन चलती थी,वह बंद हो गई है,उसके बारे में उन्होंने कोई जिक्र नहीं किया । 54110 डाउन एंड 54109 अप, ये मुगलसराय, जौनपुर, शाहगंज, अकबरपुर, फैजाबाद, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़ और इलाहाबाद तक जाती थी,वहां के जितने भी विद्यार्थी हैं, उनके लिए यह बहुत जरूरी है । अभी फैजाबाद के माननीय सांसद जी ने फैजाबाद से अकबरपुर के ट्रैक के दोहरीकरण के लिए कहा था, मैं उस पर भी बल देता हूं और उसके लिए निवेदन करता हूं । अम्बेडकर नगर में एक अंडरपास बनाने की जरूरत है । गोसाईंगंज और अकबरपुर, अम्बेडकर नगर जिले के अंदर आता है, यहां पर दोनों स्टेशनों की मरम्मत होनी है,उसको अच्छी तरह से स्थापित करना है । इसके लिए माननीय रेल मंत्री जी से निवेदन है कि वे इस पर जरूर ध्यान देंगे ।8
*श्री सुमेधानन्दसरस्वती (सीकर): माननीय रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल जी प्रस्तुत रेल बजट का समर्थन करते हुए मैं उन्हें बधाई देता हूँ । साथ ही श्री सुरेश अंगडी जी रेल राज्य मंत्री जी का आभार व्यक्त करता हूँ । मैं माननीय यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र भाई मोदी का भी हार्दिक आभार व्यक्त करता हूं, जिनके नेतृत्व में भारतीय रेल प्रगति के पथ पर है । माननीय पीयूष जी के मंत्री काल में रेलवे ने जिस प्रकार से विकास किया है वह उल्लेखनीय है ।
मैं इस बजट का समर्थन करते हुए मेरे लोक सभा क्षेत्र सीकर तथा राजस्थान प्रदेश के संदर्भ में कुछ सुझाव प्रस्तुत कर रहा हूँ । आशा करता हूँ कि माननीय मंत्री जी इस ओर ध्यान देंगें तथा मेरी मांगों पर क्रियान्विति करने का श्रम करेंगें । मेरी मांगे इस प्रकार हैं ।
सीकर लोक सभा के साथ-साथ झुंझूनू लोक सभा व चुरू लोक सभा इस क्षेत्र के महत्वूपर्ण स्थान हैं तथा इसी ट्रैक से जुड़ हुए हैं । इस क्षेत्र में कुछ महत्वपूर्ण धार्मिक स्थान हैं यथा 1. श्री खाटु श्याम जी 2. श्री सालासर बाला जी 3. जीण माता जी, 4. शाकांभरी माता तथा लोहागर्ल धाम,इन स्थानों पर न केवल भारत के अपितु सम्पूर्ण विश्व भर से श्रद्धालु आते हैं।
इस क्षेत्र के व्यापारी श्रेष्ठी जन संपूर्ण भारत में फैले हुए हैं । जो समय-समय पर अपनी मातृभूमि आते रहते हैं ।
इन तीनों क्षेत्रों से देश की सेना में लगभग एक लाख सैनिक देश की सीमाओं की रखवाली करते हैं इन सैनिकों को मात्र रेलवे का पास , वारंट ही मिलता है । इस दृष्टि से भी यहां रेलवे का नेटवर्क आवश्यक है । सीकर शिक्षा नगरी के नाम से भी जानी जाती है । यहां पर प्रदेश व विभिन्न स्थानों से लगभग डेढ़ लाख,एक लाख पचास हजार छात्र छात्रायें अध्ययन कर रहे हैं । अत: छात्र हित में भी यहां रेलों की विकास की आवश्यकता है ।
मेरे क्षेत्र में आमान परिवर्तन का कार्य चल रहा है । अब तक दिल्ली से लोहारू- लोहारू से सीकर तथा चुरू से सीकर रींगस का कार्य पूरा हो चुका है । रींगस से जयपुर का कार्य अधूरा है । इस कार्य को शीघ्र पूरा किया जाये । इस आमान परिवर्तन के कार्य को शीघ्र पूरा किया जाए ।
1. दिल्ली-सीकर-जयपुर दैनिक ट्रेन चलाई जाए ।
2. सीकर से मुम्बई, सीकर से अहमदाबाद,सीकर से कोलकाता,सीकर से जम्मू उपरोक्त ट्रेने चलाई जाए ।
3. इस क्षेत्र के महत्वपूर्ण स्थान श्री खाटु श्याम को रेलवे से जोड़ा जाए । इस हेतु रींगस-खाटू-दातारामगढ़ होते हुए डीडवाना तक नई रेलवे लाईन का कार्य किया जाए ।
4. सीकर में झुंझुनू बाई-पास फाटक के स्थान ओवर ब्रिज बनाया जाए । जयपुर में गाड़ियों की संख्या की अधिकता को देखते हुए सीकर में सर्विस स्टेशन का निर्माण किया जाए ताकि भविष्य में जयपुर में गाड़ियों को खड़ा करने का स्थानाभाव न हो। इस हेतु स्थान भी पर्याप्त है तथा पानी की उपलब्धता भी है ।
5. श्रीगंगानगर-जयपुर एक्सप्रेस को दैनिक करके जयपुर तक चलाया जाए ।
6. इन्दौर-बीकानेर ट्रेन को दैनिक किया जाए ।
7. श्री गंगानगर-जयपुर एक्सप्रेस इन्दौर-बीकानेर एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव पहले यहां पर था ।
आशा है मेरी मांगों पर अवश्य ध्यान दिया जायेगा ।9
श्री विजय कुमारदूबे (कुशीनगर):सभापति महोदय, माननीय प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने रेलवे में निवेश और प्रोत्साहन से बढ़ाने का कार्य किया है,ताकि आने वाले समय में बढ़ती हुई आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके । 63 हजार किलोमीटर लम्बा रेलवे नेटवर्क, 22 हजार गाड़ियों द्वारा संचालित और 15 लाख यात्रियों का सफर, दुनिया के तीसरे रेलवे नेटवर्क में भारत के रेलवे में बदलाव स्पष्ट तौर पर नजर आता है । हमें याद है कि 60 साल के नेतृत्व वालों के समय में यात्रा करते समय हम लोग ईश्वर से अराधना करते थे कि शौचालय में जाने की नौबत न आए । रेल के डिब्बों में चाहे शौचालय की हालत हो या रेल के डिब्बों की सफाई की हालत हो या रेलवे स्टेशन की गंदगी का आलम हो, रेलवे का वास्तव में बदलता हुआ यह स्वरूप, जो हम सबके सामने है,यह स्थिति को स्पष्ट करता है । इलेक्ट्रिक ट्रेनों की देश के कोने-कोने में बिछती हुई लाइनें हैं । साफ सफाई न केवल रेलगाड़ियों में बल्कि विश्रामालय में, स्टेशनों पर और इसके साथ सबसे प्रमुख जो मानव रहित फाटकों के बदलाव में अंडर पास का निर्माण युद्धस्तर पर शुरू हुआ, मैं कह सकता हूं कि उससे बहुत-सी दुर्घटनाओं पर पूर्ण विराम लगा है । बदलाव का यह समय हमारे प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में आया है । मैं इस अवसर पर माननीय रेल मंत्री जी को निवेदन करने के साथ उनका ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूं कि इस देश का आखिरी छोर नेपाल की सीमा से लगा कुशीनगर लोक सभा क्षेत्र है । मैंने तारांकित प्रश्न के माध्यम से और जीरो ऑवर के अवसर पर यह बात उठाने का कार्य किया था कि छितौनी से तमकोही की रेल लाइन का निर्माण पांच वर्ष की अवधि में दस किलोमीटर का भी कार्य न हो सके, उसे तेजी से गति देते हुए बिहार और देश की जनता को सुविधा देने का कार्य किया जाए । जिस तरह स्टेशनों के अपग्रेडेशन का कार्य हो रहा है, मैं निवेदन करना चाहता हूं कि पनिहवा, खड्डाह, कप्तानगंज, रामकोला, पटरौना के स्टेशन जीर्ण-शीर्ण हालत में हैं । उनके सौंदर्यीकरण और आधुनिकीकरण करने का कार्य किया जाए । पटरौना से जो डेमो ट्रेन चलती थी,वह भी आज बंद है । एक नई ट्रेन लखनऊ तक चलाने का कार्य किया जाए । सबसे अनिवार्य बौद्ध सर्किट कुशीनगर को कपिलवस्तु के बौद्ध सर्किट से जोड़ने का कार्य किया जाएगा, तो निश्चित ही विदेशी सैलानियों के आने का मार्ग प्रशस्त होगा और कुशीनगर को देवरिया से जोड़ने का कार्य होना चाहिए । सबसे आवश्यक है कि थावे से लेकर गोरखपुर तक के अंडरपास के जो निर्माण हुए हैं, वे सारे के सारे अंडरपास बरसात के दिनों में पानी में डूबे रहते हैं । कहीं न कहीं ये इंजीनियरिंग मिस्टेक है । इस पर विशेष ध्यान माननीय रेल मंत्री जी दें । गोपालगढ़, जो कास्यां नगरपालिका के अधीन है, गोपालगढ़ जिसमें तीन रास्ते आकर मिलते हैं, दोनों तरफ विद्यालय होने की वजह से बच्चे दुर्घटनाग्रस्त होते हैं । एक अंडरपास का वहां निर्माण कराने का कृपा करेंगे । मैं आपको धन्यवाद देता हूं ।0
SHRIMATI VANGA GEETHA VISWANATH (KAKINADA): Thank you, Sir, for giving me an opportunity to express my views and my concerns relating to the Demands for Grants.
First of all, I would like to congratulate the hon. Finance Minister Nirmala Sitharaman ji, who is the first full-time female Finance Minister, for presenting a full-fledged Budget in Lok Sabha. You have given me three minutes to speak. I would like to confine myself to the problems concerning my Parliamentary constituency.
First of all, I think, Pithapuram-Kakinada railway main line was sanctioned in 1960, but the execution of the project is yet to be started. Till 2019, its status has not changed. Pithapuram-Kakinada railway main line has been a long-pending demand of the people of Kakinada. During 2014-19, the Railway Ministry sanctioned nearly Rs. 450 crore for its development.
We do not know what has happened to that. A few months back, the Railway Board has frozen this project. It is very unfortunate.
After completion of 60 years, the problem is still there. We are not finding what the problem is. That project is the dream of the people of Kakinada. This is a long pending demand of the Kakinada people. Land is available with us. Our Chief Minister Shri Jagan Mohan Reddy Garu is also ready to extend every kind of cooperation.
I want to explain the whole scenario. Kakinada city has now become a corporation. Kakinada corporation has more than seven lakh people. A big port is there. Two fertilizer factories are also there. It is very important. I would request the hon. Minister to commence this project at the earliest.
I want to mention two points. In spite of Kakinada town becoming a corporation in 2005, the name of the Railway station still has remained as Kakinada town. Many other towns in Andhra Pradesh which have become corporations have changed their Railway station names. I request the hon. Minister to kindly change the name of Kakinada Town as Kakinada Smart City Railway station.
From my East Godavari district, many devotees go to Varanasi. We are requesting for a train from Kakinada to Varanasi.
I have a last point. Kakinada ROB LC13, Pithapuram ROB LC431 and Pithapuram RUB LC430 are also pending for a very long time. The hon. Finance Minister has stated that infrastructure is the backbone of any nation’s development and quality of life, whether it is highways or railways or airways or even digi-ways. We have gone beyond incremental growth to attain transformative achievements.
So, I request the hon. Minister that the Kakinada-Pithapuram project may be commenced at the earliest.1
डॉ. संजय जायसवाल (पश्चिम चम्पारण): माननीय सभापति महोदय, मैं माननीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण जी द्वारा प्रस्तुत किये गये यूनियन बजट 2019-20 के डिमांड फॉर ग्रांट्स ऑन रेलवेज पर बोलने के लिए खड़ा हुआ हूँ ।
मेरा भी आप ही की तरह सौभाग्य है कि मैंने भी यूपीए और एनडीए, दोनों की सरकारों को देखा है । यूपीए की सरकार में जहाँ केवल घोषणाएँ होती थीं, श्री लालू प्रसाद जी से लेकर सुश्री ममता बनर्जी तक एक हजार से ज्यादा सर्वे की घोषणाएँ हो गईं, पाँच सौ से अधिक ट्रेन सेवा की घोषणाएँ हुईं, केवल घोषणाएँ ही हुईं,कोई कार्य नहीं हुआ । यदि मेरे क्षेत्र की बात की जाए, तो माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने दरभंगा-रक्सौल-नरकटियागंज का मीटर गेज से ब्रॉड गेज कंवर्ज़न का काम शुरू कराया था । तत्कालीन रेल मंत्री श्री रामविलास पासवान जी ने सुगौली-हाजीपुर नई रेल लाइन की शुरुआत कराई थी । लेकिन,वर्ष 2004 से 2014 तक के दस वर्षों में हम लोगों ने कोई कार्य होता नहीं देखा । जब एनडीए की सरकार आई, तो हमने कार्यों का एक्जीक्यूशन देखा । तेजी से भूमि अधिग्रहण भी शुरू हो गया और हमारी रेल लाइन भी तैयार हो गई । आज रक्सौल-हाजीपुर रेल लाइन के अंतर्गत बहुत कुछ बनने के कगार पर है ।
हमारी सरकार के काम करने का जो तरीका है, उसका उदाहरण हमारा क्षेत्र ही है । श्री मनोज सिन्हा जी ने अप्रैल, 2017 में मुजफ्फ़रपुर-बेतिया-गोरखपुर लाइन के विद्युतीकरण का शिलान्यास किया और उन्होंने ही उसका उद्घाटन वर्ष2018 में कर दिया ।
हमारे माननीय प्रधानमंत्री जी ने आते ही डबलिंग की घोषणा की और सारे पुलों पर कार्य शुरू हो गया, सारा डबलिंग शुरू हो गया । मैं आपका ज्यादा समय नहीं लूंगा, लेकिन जो हमारे बसपा के सांसद बोल रहे थे कि 50 लाख लाएंगे तो यह व्यावसायिक क्यों नहीं है?रेल हमारे लिए जनता की सेवा का माध्यम है कमाने का माध्यम नहीं है, लेकिन बसपा के नेताओं को कमाने की आदत है । वह रेल से और हर गरीब से कमाने की ही सोचते हैं ।
अध्यक्ष महोदय, मेरे दो प्रश्न हैं,वरना मैं बोलने के लिए उठता भी नहीं, लेकिन 52 से ज्यादा सांसद बोले और उन दो प्रश्नों को किसी ने नहीं पूछा, आपका भी वह प्रॉब्लम होगा । सबसे बड़ा हमारा प्रॉब्लम है प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना । वे गांवों के लिए बन जाती हैं, रेलवे लाइन को वे क्रॉस कर जाती हैं । उस समय कोई भी नहीं बोलता है और बाद में जब उस पर एक्सीडेंट होने शुरू हो जाते हैं तो रेलवे कहता है मैं इसका जिम्मेदार नहीं हूं, यह रोड अपने आप बन गई । अगर यह रोड आपकी नहीं है, वह लीगल नहीं थी तो आपने बनने क्यों दी?और जब पी.एम.जी.एस.वाई. के तहत सड़क बन गई है तो एक सॉल्यूशन या तो ग्रामीण विकास मंत्री द्वारा देना चाहिए कि ग्रामीण सड़क योजनाओं के तहत बनी सड़कों पर रेलवे क्रॉसिंग हो या फिर रेल मंत्री को इसका सॉल्यूशन निकालना चाहिए । जब आम आदमी का एक्सीडेंट होता है और वह मरता है तो रेलवे कहता है कि मैं नहीं जानता कि कैसे सड़क बन गई? यह हमारी जिम्मेदारी नहीं है क्योंकि यहां अनमैन्ड क्रॉसिंग भी नहीं है ।
महोदय, दूसरी एक बहुत बड़ी प्रॉब्लम आर.ओ.बी.की है जो बिहार में ज्यादा है । मैं 10 साल तक बेतिया और रक्सौल, दो ओवर ब्रिज बनवाने की मांग करता रह गया, लेकिन एक भी सैंक्शन नहीं हुआ । मैं मनोज सिन्हा जी का आभारी हूं कि जब वे मंत्री बने तो वर्ष 2014 में मुझे एक साथ 8 आर.ओ.बीज़ सैंक्शन कर दिए । सेंट्रल गवर्नमेंट ने तो शेयर दे दिए,लेकिन स्टेट गवर्नमेंट अपनी शेयर एक आर.ओ.बी. के बाद नहीं देती है । मैं कहना चाहता हूं कि रेलवे को भी कोई मैकेनिज्म बनाना चाहिए । आप अनाउंस कर दीजिए कि मैं अपना शेयर दूंगा और अगर रेलवे ओवरब्रिज नहीं बनता है तो पब्लिक को फायदा नहीं हो रहा है । इसलिए कोई एक मैकेनिज्म होना चाहिए कि जितने आर.ओ.बीज़ रेलवे के द्वारा अनाउंस्ड है, उन पर स्टेट से अलग से सहायता मिले । Raxaul is the gateway of Kathmandu. If you have to go to Kathmandu, you have to cross that road. वहां पर 16 आवर्स की शेल्टरिंग होती है । कोई काठमांडू नहीं जा पाता है । 16 घंटे तक रास्ता बंद होता है और मैं कुछ कर नहीं पाता हूं क्योंकि केन्द्र सरकार और रेलवे ने तो पैसा दे दिया है । So, there should be a mechanism, जिसमें रेलवे और स्टेट गवर्नमेंट मिलकर यह तय करें कि जो आर.ओ.बीज़ उन्होंने बनने के लिए दिए हैं वह कैसे पूरे होंगे? इसका भी जवाब में माननीय मंत्री जी से सुनना चाहूंगा । आपने मुझे इतना बोलने का मौका दिया । बहुत-बहुत धन्यवाद ।2
SHRI RAJMOHAN UNNITHAN (KASARAGOD): Sir, I would like to express my views on the Budget for the year 2019-20 presented by the hon. Finance Minister, Smt. Nirmala Sitharaman in this august House.
The Budget 2019-20 is an evidence of the obvious discrimination of the Central Government towards the State of Kerala, especially towards my constituency, Kasaragod. I am sorry to say that Kerala has been vehemently neglected by the Central Government. The long-pending demand for a Railway Zone in Kerala is neglected in this Budget. Also, it is quite unfortunate that there is no fund allocation for the Kanjikode Railway Coach Factory in this Budget, which is a long-pending demand of Kerala.
The Kerala Rail Development Corporation Limited is a joint venture between Kerala and the Indian Railways for executing rail projects on a 51:49 cost-sharing basis. The former Chairman of the Railway Board, Shri Ashwani Lohani had agreed in principle to a proposal for two additional lines between Thiruvananthapuram and Kasaragod, parallel to the existing double line. The two cities are located 575 kilometres apart, and the new line will ease the burden on the current track, which is currently overloaded. Also, the State had suggested constructing a high-speed line but the Railways pointed out technical issues. However, it is said that a semi-high-speed line could be considered.
I am raising three different issues relating to the railways. If these issues are addressed, it will contribute to the comprehensive development of my constituency, Kasaragod.
Every day, there are 92 trains passing through Kasaragod, the northern tip of Kerala. The constituency has three model stations which are under the category of ADARSH stations, namely, Kasaragod, Kanhangad and Payyanur. It is very unfortunate to say that no fund allocation happened for the development of these stations yet. The train connecting Kasaragod and other important cities in North and South India, namely Thiruvananthapuram Central-Hazrat Nizamuddin Superfast Express does not have a stop in the district.
Similarly, the Coimbatore-Bikaner Express and Tirunelveli-Dadar Superfast Express do not have even one stop in the district. The Netravati Express connecting the capital cities of Kerala and Maharashtra has no stop in Nileshwaram, a commercial hub of the district. The station has traffic of around 12 lakh passengers and generates Rs. 4.53 crore in revenue annually. I request the hon. Minister to provide a halt to morning train Parasuram Express in Cheruvathur. I also request him to provide a halt to Ernad Express at Pazhayangadi for the benefit of students and office-goers. Antyodaya Express requires halts at Kanhangad and Payyannur and a stop for Chennai-Egmore Express at Trikaripur.
Sir, my second point is, the Jan Shatabdi Express connecting Thiruvananthapuram and Kannur, and Executive Express connecting Alappuzha and Kanui should be extended to Kasaragod, as Kerala does not end at Kannur but at Kasaragod. The major hurdle to extend the train is the lack of a rail yard in the district. The railways have 37 acres of land in Kumbla station near Kasaragod. This land can be developed for this purpose.
Also, two trains leave for Bengaluru from Kannur – one via Coimbatore and the other via Shravanabelagola in Karnataka. The train via Coimbatore can be extended to Kasaragod. If the Railways can start a Mainline Electric Multiple Unit (MEMU) service connecting Kozhikode and Mangaluru for morning and evening trips, it can benefit students, officer-goers and people seeking health care.
The third aspect is about the proposed 90-kilometre Kanhangad-Kaniyoor line, which will halve the travel time from Kanhangad to Bengaluru to 6 hours. Around 41 kilometres of the proposed line is in Kerala and around 49 kilometres is in Karnataka. The feasibility study for the project is over. The Kerala Government has expressed their willingness to acquire the required land at free of cost and bear the construction cost as per the norms. Now, the consent from Karnataka Government is required to fulfil the project. Once completed, it will be a great boon for the entire development and welfare of all poor farmers, tribals, employees, senior citizens, students, businessmen, patients, and all classes of people dwelling in this hilly area. It will also be a great boon for all endosulfan affected patients of both States. Further, this line can also be utilized as an alternative to Konkan when it is blocked especially during monsoon season.
So, I would request the Government to do the needful to fulfil this project at the earliest. With these words, I conclude my speech with the hope that the Railway Budget 2019-20 will consider the demands of Kerala as well as my constituency, Kasaragod.
HON. CHAIRPERSON : The hon. Minister of State in the Ministry of Railways wants to intervene in the Debate.
… (Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: Hon. Members, please sit down. The hon. Minister is just intervening. It is not his final reply. Final reply will be given tomorrow.
Now, the hon. Minister of State.3
THE MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF RAILWAYS (SHRI SURESH C. ANGADI): Hon. Speaker, Sir, it is a great pleasure for me to participate in the Railway Budget today. Since morning, the hon. Members of all parties across the House are sitting here and taking interest in the debate.
I am very proud that I come from the State of Karnataka from where, as you know, Basaveshwara has given the concept of democracy to the world. In the 12th Century, Basaveshwara established an academy called Anubhava Mantapa where different people from different societies came together and formed a casteless society. The norm of the society, as he said, was ‘work is worship’, on which our hon. Prime Minister is also working day and night for the betterment of 130-crore people of our country. After elections, the hon. Prime Minister has again devoted himself for the development of this country. He wants to make our country a Vishwaguru in all aspects.
भारत विश्व गुरु बने, हम उस पर अभी काम कर रहे हैं । भारत को कैसे विश्व गुरू बनाना है, कैसे उस दिशा में कदम उठाना है, हम उसके बारे में सोच रहे हैं । महोदय,आपको मालूम है । मुझे बहुत गर्व होता है कि सुबह से श्री अधीर रंजन चौधरी, श्री सुनील कुमार सिंह, श्री सुदीप बन्दोपाध्याय,श्रीमती कनिमोझी करुणानिधि, श्री दुर्गा प्रसाद, श्री राजन बाबूराव विचारे,श्री चन्द्रशेखर जी…(व्यवधान)
HON. CHAIRPERSON: Hon. Minister need not read out the names of all the Members. More than 60 Members took part in the discussion.
SHRI SURESH C. ANGADI: About 60 Members took part in the discussion.
When the hon. Prime Minister entrusted me with the responsibility of Railway portfolio and when I started attending to the work, I started feeling that this Ministry is like a family. It looks like a parivar. The Railway employees are working day and night. They are working like a parivar. In Basavanna’s vachan, it is called:
Ivanarava ivanarava iva nammava iva nammava Kudalasangamadeva nimma maneya maganemdenisayya 21.52 hrs (Hon. Speaker in the Chair) It is a great pleasure for me to say that when I go to the office in the morning, I find all the officials and staff already working there very hard. I went to attend many inaugurations. There also they have made good preparations. On the other day I went to Anupgarh, Bikaner and Bhatinda along with Shri Arjun Meghwal ji, which are there on the border of Pakistan. Shri Arjun Meghwal took me there. It was a great pleasure for me to inaugurate a new train there. So, the staff of the Railway Ministry, consisting of 13 lakh employees, are working day and night for the betterment of the country. The same staff was working earlier also. But there was no vision. It is a great pleasure for me to say to you that Shri Narendra Modi has given a vision to us. For that I must congratulate him. The hon. Prime Minister has given a vision that Indian Railways is the growth engine of the nation’s vikas yatra. देश को रेल से गति भी मिलेगी और प्रगति भी मिलेगी । Railways today is better funded. The trains are safer, cleaner, and faster. The stations are cleaner. The latest technologies are being inducted and passengers are getting the digital experience. Every part of the country is being connected with rail line. As I stated hon. Speaker, Sir, in Basavanna’s vachan it is said:
Ivanarava ivanarava iva nammava iva nammava हम रेलवे से सफर करते रहते हैं । उस समय में कन्याकुमारी से कश्मीर तक,कश्मीर से कन्याकुमारी तक, गुजरात से अरुणाचल प्रदेश,कौन-से प्रदेश से हैं, कौन-सी भाषा से है,किस जाति का है, किसी को भी मालूम नहीं होता है । जब हम ट्रेन में चलते हैं,तो ऊपर की सीट पर किसी प्रदेश का होता है, नीचे किसी प्रदेश का होता है, हमारे बगल में दूसरी भाषा बोलने वाला होता है,लेकिन हम सब मिल-जुलकर जाते हैं । मगर वहां कुछ भी नहीं होता है । अभी जैसे माननीय नरेन्द्र मोदी जी ने योगा दिवस के माध्यम से 197 देशों को जोड़ दिया है ।
वैसे ही हमारी रेल ने पूरे देश को जोड़ दिया है । यह बहुत एक भावनात्मक भी हो जाता है । कभी-कभी रेल में सफर करने के दौरान, the responsibility lies in the Members of the Parliament also. बहुत दफा इमरजेंस इंडिकेट नहीं मिला है,डब्बे क्लीन नहीं हैं और स्टेशन क्लीन नहीं है । शिकायत करना बहुत आसान होता है । शिकायत करने से, what is our responsibility? The hon. Members must understand that it is also their responsibility. During the last 55 or 60 years, before Shri Narendra Modi came to power, they were made as political issues. In a single day, there used to be two Budgets as the Britishers were doing. Earlier Budgets were only political budgets. रेलवे में पांच रुपये घटेगा, क्या घटाएगा, यही टीवी में दिखा कर लोगों को गुमराह करते थे, लेकिन विकास नहीं होता था । Railway is also one of the साधन है । यह भी कैसे हमारा रोड ट्रांस्पोर्टेशन है, शिपिंग ट्रांस्पोर्टेशन है । यह रेलवे भी एक साधन है,बोल कर नरेन्द्र मोदी जी आने के बाद विज़न देख कर रेलवे का सैपरेट बजट हटा कर यह भी मर्ज कर के रेलवे के लिए जो गति देनी थी, आज मैं नरेन्द्र मोदी जी का अभिनन्दन कर सकता हॅूं,इसको एक बजट में ला कर, देश को पैसा दे कर आज इतना ही लोग इतना काम कर रहे हैं । पहले यही लोग थे, तब क्यों अवरुद्ध नहीं हुआ?हमें खुद आत्मावलोकन करना होगा । किसी को दोष देना नहीं है । देश में अवरुद्धी होने के लिए, If 130 crore people work for minimum eight hours sincerely for the country तो दुनिया में भारत महाशक्ति बनेगा ।
Sir, we can show our power to the entire world. Today, under the leadership of the hon. Prime Minister, there has been massive capital expenditure by the Railways to help in resolving the railway problems. The UPA Government kept the Railways under dearth of funds. For so long, pending projects could not be completed. If you look at the Railway Budget of ten years during UPA Government, you will realise that they could not complete even ten per cent of their promises. This was because, neither they had the political will, nor they had the administrative capacity. There was no political leadership also.
Modi Ji provided decisive leadership, clear vision, good administration. The results are for all to see. Capital expenditure has been more than double under the leadership of the hon. Prime Minister, Shri Narendra Modi Ji. Between 2009 and 2014, it was Rs.2.30 lakh crore. But it was Rs.4.97 lakh crore between 2014 and 2019. सर, डबल हो गया है । This year also, the capital expenditure is targeted to be Rs.1.6 lakh crore. UPA spent Rs. 1.25 lakh crore from 2004 to 2009. This is meant for higher focus on safety, completion of projects, improved capacity, connecting for plunged areas, North-East aspirational districts etc., modern technology, cleanliness of stations and trains, better passenger amenities. प्रधान मंत्री जी कh क्या सोच है कि First priority for train is safety. Second, it should be on time. समय से जाना चाहिए । Third is the cleanliness. चौथा, वाइ-फाई देना, पैसेन्जर एमिनिटीज़ देना, कैमरा बिठाना, महिलाओं के लिए अलग डब्बे देना] यह सभी हम सोच रहे हैं । जब मैं मंत्री बनने के बाद रेलवे स्टेशन पर गया तो मैंने पहला इंस्पैक्शन जनरल डब्बे में किया । जनरल डब्बे में हालत इतनी खराब है कि मैं अपने सभी कर्मचारियों और अधिकारियों से विनती करता हॅूं कि जो गरीब,किसान हैं । …(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : आप विनती मत किया करो । आदेश दिया करो । मंत्री कभी विनती नहीं करेगा । नो विनती, केवल आदेश ।
…(व्यवधान)
श्री सुरेश सी. अंगड़ी : सर,आदेश भी करूंगा और विनती भी करूंगा ।
22.00 hrs मैंने उधर आदेश तो किया है । उनको आदेश भी करेंगे, लोगों को इंट्रोस्पेक्ट करना चाहिए । बगल के देश में I would request all the countrymen also जापान, चाइना और जर्मनी में 400 किलोमीटर प्रति घंटे से ट्रेन जाती है । मेरे देश में क्यों नहीं जाती है, यह मै बहुत दिनों से सोच रहा हूँ । I come from the State of Visvesvaraya -- the great engineer of the world, but आज का इंजीनियर why they are failing in the Railways रेलवे में यह भी 400 किलोमीटर प्रति घंटा जाने के लिए why have we failed to achieve it? It is because of failure of the leadership of the previous Governments. Now, Shri Narendra Modi has thought about the bullet train because he has dreamt ahead of time.
माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्यगणों, आप सभी की सहमति हो तो समय बढ़ा दिया जाए?
…(व्यवधान)
संसदीय कार्य मंत्रालयमें राज्य मंत्रीतथा भारी उद्योगऔर लोक उद्यममंत्रालय मेंराज्य मंत्री (श्री अर्जुन राममेघवाल): अध्यक्ष महोदय,अभी समय दो घंटे और बढ़ा दिए जाएं ।
माननीय अध्यक्ष : आप सभी की सहमति हो तो समय दो घंटे और बढ़ा दिए जाएं ।
अनेक माननीय सदस्य : हाँ-हाँ ।
माननीय अध्यक्ष : अभी तीस माननीय सदस्य और बोलने वाले हैं । मंत्री जी ने बेहतरीन जवाब दिया है और स्वयं रेल के डिब्बों को देखकर अनुभव किया है ।
…(व्यवधान)
श्री एन. के. प्रेमचन्द्रन: अध्यक्ष महोदय, एक सजेशन है । सभी सदस्यों को चर्चा में पार्टिसिपेट करना हैं,इसलिए सभी सदस्यों का मिनिस्टर की रिप्लाई के साथ, रिटन रिप्लाई भी देना चाहिए ।
माननीय अध्यक्ष : माननीय मंत्री जी इसको अपने स्तर पर देख लेंगे । माननीय मंत्री जी अच्छा जवाब दे रहे हैं । अपना अनुभव बता रहे हैं मतलब स्वयं जो देखा है, वह जवाब दे रहे हैं । हमें यह कोशिश करनी चाहिए ।
…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : इस बेंच से भी और उस बेंच से भी आग्रह करूँगा कि दोबारा सभी दलों के सचेतक अपने-अपने सभी माननीय सदस्यों को पुन: आग्रह कर दें कि रेल बजट पर चर्चा चल रही है । पूरा देश देख रहा है ।
SHRI SURESH C. ANGADI: Sir, it is a great pleasure to note that Railways is like a family. मैं इधर काम करने वाले कर्मचारियों को देखता हूँ, सुबह से शाम तक बहुत प्रामाणिकता से काम कर रहे हैं । अगर उनको प्रोत्साहन नहीं दिया तो वे कैसे करेंगे । Therefore, it is the responsibility एक के ऊपर एक ठोकना बहुत ईज़ी है । इतने सालों से रूलिंग में रहने वाली पार्टी काम करना छोड़ कर खाली पॉलिटिक्स करके इस देश को,रेलवे को भी बदनाम करके गई,आज रेलवे में इतना अच्छा काम हो रहा है । We have provided wifi facility. बायो-टॉयलेट का कर रहे हैं ।
आपको मालूम है कि नरेन्द्र मोदी जी के हाथ में झाड़ू पकड़ने से देश में स्वच्छता अभियान चालू हो गया । आपने भी 13 और 14 तारीख को झाड़ू लगाने के लिए अभियान चालू किया है । नोटिस अभी आ गया है । अगर आदरणीय नरेन्द्र मोदी जी झाड़ू लगाकर स्वच्छता अभियान नहीं चलाते तो आज हमारी हालत कैसे रहती, आप ही सोच लीजिए । It needs introspection of the entire House and the respective State Governments also to ensure that India should be neat and clean रहने के लिए हमें सुविधा करनी चाहिए । हम पहले रेलवे में देखते थे, रेलवे स्टेशन में गए तो नाक बंद करनी पड़ती थी,इतनी स्मेल आती थी, इतनी गंदगी रहती थी । Today, all the Railway stations are neat and clean. बहुत स्वच्छता है । इसके लिए आदरणीय प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी को श्रेय जाना चाहिए । मेरे रेलवे मंत्री होने से पहले सदानंद गौड़ा जी, सुरेश प्रभु जी, पीयूष गोयल जी, मनीष सिन्हा जी हुए । इस क्लीनिंग में सभी मंत्रियों का योगदान बहुत बड़ा है । मैं उनका भी अभिनन्दन कर सकता हूँ । Today, when you sit in the Railway coaches, you get the feeling like how we are sitting in the Parliament now. रेलवे में भी पार्लियामेंट जैसा रहता है । So, it is like a family. इसके लिए आने वाले दिनों में रेलवे की क्लीनिंग,रेलवे की अभिवृद्धि करने के लिए all the Members have to take interest in it. सभी माननीय सदस्यों को अपने-अपने प्रदेशों में समयबद्ध तरीके से स्वच्छता की ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए ।
All the Members of Parliament also should take interest. हम केवल अधिकारियों के ऊपर जिम्मेदारी देकर बैठ गए होते तो यह सब नहीं होता । We can see the highest ever commissioning of double lines. We can see consistent improvement in safety year by year. We can also see that the train accidents have reduced from 118 in 2013-14 to 59 in 2018-19. Sir, we have removed 3,479 UMLCs during 2018-19. We are going to switchover completely to production of safer LHB coaches. अभी हम नए कोच बना रहे हैं । For safety, it is more important. We are filling about 4 lakh safety posts. The Rashtriya Rail Sanraksha Kosh fund of Rs.1 lakh crore is created for spending on ensuring safety of Railways.
We have the highest ever commissioning of doubling, three-line and four-line. We have the highest ever electrification of 5,276 route km. in the financial year 2018-19, which is eight times in comparison to 610 km. achieved in 2013-14. हमने उससे भी 8 गुना ज्यादा काम इलेक्ट्रिफिकेशन में किया है । We have the highest ever freight loading to the tune of 1,221 million tonnes in 2018-19. कोई-कोई हार्वर्ड में जाकर सर्टिफिकेट भी लेकर आये हैं,ऐसा बोलकर कि हमने बहुत अच्छा काम किया है । Without waiting for any appreciation certificate from anyone, under the leadership of Narendra Modi ji, even in freight loading, we have achieved 62 million tonnes compared to the earlier years. Sir, CAPEX between 2014 and 2019 is more than double if we compare it with the figures between 2009 and 2014. When it comes to CAPEX, it is Rs.1.6 lakh crore, which is the highest ever.
We have inducted 12,649 wagons – which is 50 per cent higher – against 8,015 wagons in the financial year 2017-18. Sir, LHB coach production has increased significantly, from 2,480 in 2017-18 to 4,429 in 2018-19. When it comes to electric loco production at DLW, we can see an increase from 25 in 2017-18 to 145 in 2018-19.
Under Vande Bharat - Make in India, India stands first in high-tech, energy-efficient and self-propelled train. We could see that trains are running 35-40 per cent faster than the fastest train between Delhi and Varanasi. We could also see substantial reduction in travel time due to faster acceleration and deceleration. We have also introduced world class features for the sake of convenience of passengers.
Under `Make in India’ initiative, we have enabled world’s first ever conversion of diesel locomotive into electric locomotive in Diesel Locomotive Works (DLW) in Varanasi, Uttar Pradesh. These are some of the achievements we have made.
I would like to thank all the Members, including the new Members, who have participated in the debate. I would also thank you for your support for giving me an opportunity to speak. It is the duty of all the Members of Parliament to take care of the Railways as your personal property. Most people think that it is their right to untidy the Railways. It should not happen in the coming days. Many foreigners visit our country. India is one of the important tourist destinations in the world. Due to inconvenience of railway network, many tourists are not visiting our country.
We have to develop many more tourist places in India. By doing so, we can create maximum employment opportunities for youths, engineers, etc. The only thing is that we have to change our vision. We all have to work hard. We also have the direction of our Prime Minister to go for cashless transactions. In the railway canteens in Parliament House, the Central Hall, whatever food we are providing from the IRCTC, everyone should go for cashless transactions or App for making payment. No cash transactions should be made. Only then, we could see a lot of improvement in the Railways. With your blessings, and the blessings of the hon. Speaker, I have made intervention. Hon. Railway Minister would reply to the debate tomorrow. I thank all the Members for patiently participating in the debate. I once again thank all the hon. Members.
4*श्री परबतभाई सवाभाई पटेल (बनासकांठा):माननीय प्रधानमंत्री जी और रेल मंत्री जी के नेतृत्व में आज भारतीय रेल निरंतर प्रगति की दिशा में बढ़ रही है । जब 2014 में पहली बार हमारी सरकार बनी तो भारतीय रेल के नाम पर हमारे पास आईसीयू में पड़ा हांफता हुआ तंत्र था, इस चुनौती को माननीय मोदी जी के नेतृत्व में हमारी सरकार ने स्वीकार किया तथा रेलवे को पुनर्जीवित करने का प्रयास करते हुए कार्य शुरू किया जिसके फलस्वरूप आज रेलवे अपने उपभोक्ताओं को सुविधायुक्त सफर देने में सक्षम हो पाई है । मैं माननीय रेल मंत्री जी को बधाई देना चाहता हूं जिन्होंने रेलवे को एक स्वस्थ तंत्र में विकसित करने का अथक प्रयास किया है । हम मेक इन इंडिया के माध्यम से स्वदेशी को बढ़ावा देते हुए एक नए भारत का निर्माण का संकल्प लेकर आगे बढ़ रहे हैं । एक ऐसा भारत जो पूर्ण रूप से आत्मनिर्भर और मजबूत होगा, इसके अतिरिक्त हमारी सरकार देश को आधुनिक बनाने की दिशा में भी कार्य कर रही है । हमारी सरकार ने इस बजट में रेलवे सेक्टर को पीपीपी मॉडल के आधार पर विकास करने की घोषणा की है । हम जानते हें कि रेलवे के सभी मंजूर परियोजनाओं को पूरी करने में कई दशक लग जाते हैं । इसलिए हमारी सरकार निर्धारित समय में रेलवे परियोजना के तीव्र विकास और पटरियां बिछाने, रेलिंग स्टाक विनिर्माण तथा यात्र मालभाड़ा सेवाओं की सुपुर्दगी के लिए सरकारी निजी भागीदारी (पी.पी.पी.) का इस्तेमाल करने की योजना बनाई है ताकि निर्धारित समय में लक्ष्य को पूरा किया जा सके । सरकारी निजी भागीदारी से देश में रोजगार की भारी वृद्धि होगी और रेलवे को भी अच्छे राजस्व का मुनाफा मिलेगा । हमारी सरकार ने रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार लाने और रेलवे के बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए साल 2018 से 2030 के बीच 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य रखा गया है । इसे देखते हुए रेलवे का पूंजी परिव्यय प्रतिवर्ष 1.5 से 1.6 लाख करोड़ रुपये तक होगी । मैं अपने संसदीय क्षेत्र की कुछ मांग रखना चाहता हूं । उत्तर गुजरात जैसे मेहसाना,पाटन, बनास कांठ, सावर कांठा, अरवल्ली बड़े जिले बने हैं, उत्तर गुजरात, मुम्बई,पूना या दक्षिण राज्यों में बहुत धार्मिक स्थल हैं,यहां कोई रेलवे सुविधा नहीं हे,जो भी ट्रेन आनी है वो बाहर के राज्य से आती है और सारे जिले के शहरवासी काम धंधा और सरकारी-प्राइवेट नौकरी के किए लिए रह रहे हैं । हर रोज 50 से ज्यादा लग्जरी बसें दक्षिण राज्यों की ओर परिचालन कर रही हैं, अगर दोनों तरफ एक नई ट्रेन शुरू की जाए तो रेलवे को बड़ी आमदनी होगी और मुसाफिरों को भी अच्छी सुविधा मिलेगी । पाटन गुजरात की पुरानी राजधानी है, हाल ही में पाटन के राण की बाव ने वर्ल्ड हेरिटेज में स्थान लिया है । विदेशी पर्यटकों को भी आना-जाना लगा रहता है । यहां मुढो सूर्य मंदिर भी है । मेहसाना,बनासकांठा मिल्क सिटी, एक आर्यन सिटी के नाम से प्रसिद्ध है और उन्जा एशिया में सबसे बड़ा अनाज का गोदाम है ।
1. 19107/19108 भावनगर-उधमपुर-भावनगर
2. 19269/19270 मुजफ्फरपुर-पोरबंदर-मोतिहारी-मुजफ्फरपुर
3. 19565/19566 ओखा-देहरादून-ओखा
4. 19573/19574 जयपुर-ओखा-जयपुर
5. 19579/19580 दिल्ली-राजकोट-दिल्ली
6. 16501-16502 अहमदाबाद-यशवंतपुर-अहमदाबाद मैं नीचे की ट्रेन प्रतिदिन चलाने की मांग करता हूं:- 16501-16502 अहमदाबाद-यशवंतपुर-अहमदाबाद- महोदय यह ट्रेन हर मंगलवार 3.45 प्रातः काल समय आकर यह ट्रेन मंगलवार 18.40 को वापस जाती है, तकरीबन 13 घंटे अहमदाबाद में खड़ी रहती है । इस ट्रेन को मेहसाणा-पाटन-पालनपुर तक बढ़ाया जाए तो साईं बाबा (शिर्डी) (कोपरगांव के नजदीक) धार्मिक यात्रियों को अति सुविधा मिल सकती है एवं दक्षिण भारत जाने के लिए बड़ी लाभदायक सिद्ध होगी । हर रोज 50 से ज्यादा लग्जरी बसें दक्षिण राज्यों के लिए परिचालन करती है अगर दोनों तरफ एक नई ट्रेन शुरुआत की जाए तो रेलवे को अच्छी राजस्व की प्राप्ति होगी और मुसाफिरों को भी अति सुविधा होगी । गाड़ी नम्बर 22451-22452 चंडीगढ़-बांद्रा हर हफ्ते में दो बार आती जाती है । इसे ऊना,इंदौर से बढ़ाकर हिमाचल प्रदेश तक ले जाया जाए इससे यात्रियों को अति सुविधा होगी क्योंकि वहां श्री गुरु गोविंद सिंह सिखों के दसवें गुरु की कर्म भूमि है और आनंदपुर साहिब,माता नैना देवी,माता ज्वालामुखी जैसे-जैस धार्मिक स्थल स्थापित है । गाड़ी नम्बर 09564-09565 ओखा शिरडी नगर स्पेशल होलीडे ट्रेन 2017 में शुरू की गई थी पर वह नए टाइम टेबल के मुताबिक होलीडे ट्रेन में शामिल नहीं पाई है । इस ट्रेन को अगर ओखा शिरडी नगर वाया नासिक,मेहसाना पाटन पालनपुर अहमदाबाद तक यदि रेगुलर किया जाए तो यात्रियों बहुत आरामदायक रहेगा । गाड़ी नम्बर 12267-12268 अहमदाबाद मुंबई दुरंतो राजकोट तक बढ़ाई गई है । अगर ऐसी दूसरी ट्रेन मेहसाना पाटन पालनपुर तक चालू किया जाए तो जनता की वर्षों पुरानी मांग पूरी होगी । जिस तरह इंसानी शरीर में धमनियां कार्य करती हैं शरीर के हर हिस्से में महत्वपूर्ण अवयवों का संचालन करती है । उसी प्रकार भारतीय रेल इस देश के विकास के लिए निरंतर कार्य करते हुए सेवा के उत्कृष्ट कीर्तिमान स्थापित कर रही है । अतं में मैं भारतीय रेल के समस्त कर्मचारियों का धन्यवाद करता हूं तथा रेलवे के विकास का गति को बढ़ाकर रखते हुए माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए दिन-रात मेहनत करने वाले श्री पीयूष गोयल जी का भी हृदय से अभिनन्दन करता हूं । इस महत्वपूर्ण विषय पर मुझे अपने विचार रखने का अवसर दिया उसके लिए मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं ।
धन्यवाद ।
5*श्री अजय मिश्र टेनी (खीरी): मैं रेल मंत्रालय के अधीन प्रस्तुत अनुदानों की मांगों पर समर्थन करते हुए अपने क्षेत्र में निम्नलिखित कार्यो को क्षेत्र के लिए आवश्यक है ।
1. उत्तर पूर्व रेलवे के मैलानी -लखनऊ प्रखण्ड पर शीघ्र रेल संचाल शुरू किया जाए ।
2. लखीमपुर रेलवे स्टेशन को मॉडल रेलवे स्टेशन व खीरी रेलवे स्टेशन को रैक पेंट बनाया जाये
3. ओमल रेलवे स्टेशन को पूर्व रेलवे स्टेशन का दर्जा दिया जाए ।
4. लखीमपुर-गोला मार्ग पर रेलवे ओवर ब्रिज व पूर्व निमित सिमित ओवर ब्रिज के नीचे पैदल आवागमन का रास्ता बनाया जाये ।
5. दुधवा नेशनल पार्क में हैरिटेज ट्रेन को चलाया जाये ।
6. पालिया-निधासन-बेलरामा के प्रस्तावित मार्ग का शीघ्र सर्वेक्षण पूरा करके निर्माण कार्य प्रारंभ किया जाए ।
7. बहराईच-मैलानी रेल मार्ग शीघ्र शुरू किया जाए ।
6*श्री जनार्दन मिश्र (रीवा): भारतीय रेल की जितनी व्यापकता और विस्तार है, देश की कड़ियों को जोड़ने की जो ताकत है उसे जितना जन सामान्य देखता और अनुभव करता है उससे कहीं अधिक है उसकी ताकत । परन्तु भारतीय रेल का दुर्भाग्य रहा है कि उसका मार्गदर्शन करने वाले, उसे चलाने वाले वे लोग मिले जिनकी सोच का दायरा बहुत ही संकुचित व संकीर्ण रहा है । उसे वोट का एक साधन मात्र माना गया । उसके संसाधनों का शोषण अपने निजी हितों के लिए किया गया । जिसके कारण उसकी स्थिति लकवा ग्रस्त व्यक्ति जैसी हो गई । परन्तु देश की जनता ने 2014 में जब नरेन्द्र मोदी जी को इस देश को चलाने की जिम्मेवारी सौपी तब से बेदम रेल क्षेत्र में भी संभावनाएं दिखने लगी । रेल विभाग को संभालने वाले सभी मंत्रियों ने मोदी जी की सोच के अनुसार उसे राष्ट्रीय संदर्भ में देखा और वह दृष्टि निरंतर जारी है । चाहे वह रेल की पटरियां बिछाने का काम हो या रेल के क्षेत्र में अनुसंधान हेतु रेलवे विश्वविद्यालय की स्थापना हो या ओवर या अंडर ब्रिज का निर्माण अथवा समय की पाबंदी का मामला हो । स्वच्छता की दृष्टि से तो रेलवे ने बढ़-चढ़कर अपना योगदान दिया है । उसका यह योगदान देश के कोने-कोने तक स्वच्छता के संदेश का वाहक रहा है । रेल विभाग ने अपनी प्राथमिकताएं बदली ।
मेरा निर्वाचन क्षेत्र रेल की सुविधाओं से वंचित रहा परन्तु 2014 से 2019 के इन 5 वर्षों में मेरे निर्वाचन क्षेत्र में रेल की सुविधाओं को पंख लगे । रीवा से सतना रेलवे के दोहरीकरण के कार्य की स्वीकृति दी गई जिसका कार्य प्रगति पर है । रीवा रेलवे स्टेशन से नेशनल हाईवे की सड़क को चार लेन में परिवर्तित किया गया । रीवा में राष्ट्रीय राजमार्ग 7 व रीवा से गोविंदगढ़ मार्ग पर ओवर ब्रिजों की स्वीकृति दी गयी जिनका भी कार्य प्रगति पर है । रीवा से सीधी मार्ग के निर्माण की स्वीकृति जिसका कार्य प्रगति पर है । रीवा रेलवे स्टेशन में 3 अतिरिक्त प्लेटफार्मों की स्वीकृति, रीवा में ए.सी. कोच मेंटेनंस शेड की स्वीकृति,रीवा रेलवे स्टेशन का सौन्दर्यीकरण व आधुनिक प्रतीक्षालय का निर्माण व अन्य सुविधाओं का विस्तार, रीवा से इन्दौर चेयरकार सवारी को स्लीपर सवारी गाड़ी में परिवर्तन, रीवा से नागपुर, रीवा से राजकोट,रीवा से बड़ौदा सवारी गाड़ियों का चलाया जाना और मऊगंज,सिरमौर तथा रीवा पोस्ट ऑफिस कार्यालय में यात्री टिकट घरों की स्थापना ।
डभौरा रेलवे स्टेशन को झांसी मंडल से परिवर्तित कर इलाहाबाद मंडल से जोड़ना, चित्रकूट-इलाहाबाद इंटरसिटी व क्षिप्रा एक्सप्रेस का ठहराव के साथ ही रीवा मिर्जापुर वाया हनुमना नए रेल मार्ग के सर्वे का कार्य पूर्ण करना । इन सभी कार्यों की स्वीकृति के लिए मैं आदरणीय प्रधानमंत्री जी व इस अवधि में रेल विभाग का समय-समय पर मार्ग दर्शन करने वाले सभी आदरणीय रेल मंत्रियों का रीवा के 25 लाख लोगों की ओर से हृदय के अंतःकरण से आभार व्यक्त करता हूं ।
जैसा कि मैंने पूर्व में ही कहा है कि मेरे संसदीय क्षेत्र रीवा में रेल की सुविधाओं के विस्तार हेतु 2014 के पूर्व की सरकारों ने ध्यान नहीं दिया, इसलिए अभी बहुत कुछ शेष है तथा मेरा माननीय रेल मंत्री महोदय से अनुरोध है कि (1) रीवा से सिंगरौली रेल मार्ग का कार्य शीघ्रता से पूर्ण कराया जाए ।
(2) रीवा से मिर्जापुर वाया हनुमना रेल मार्ग निर्माण का डीपीआर तैयार कराकर नए रेल पथ की स्वीकृति दी जाए ।
(3) रीवा से इंदौर चलने वाली सवारी गाड़ी को 4 दिन रीवा से इटारसी-हबीबगंज भोपाल के रास्ते तथा 3 दिन वर्तमान रास्ते से चलाए जाने की स्वीकृति दी जाए ।
(4) रीवा से मुम्बई हेतु नई सवारी गाड़ी चलाई जाए ।
(5) रीवा से नागपुर सवारी गाड़ी को नियमित रूप से प्रतिदिन चलाया जाए ।
(6) रीवा से सूरत व रीवा से बड़ौदा सवारी गाड़ियों को सप्ताह में 3 दिन चलाया जाए ।
(7) रीवा से पूना व रीवा से कोटा हेतु नई सवारी गाड़ियां चलाई जाएं ।
(8) डभौरा में ताप्ती गंगा यात्री गाड़ी का ठहराव किया जाए ।
अंत में, मैं माननीय रेल मंत्री जी द्वारा प्रस्तुत रेल बजट का समर्थन करता हूँ ।
धन्यवाद ।
7
*प्रो. रीता बहुगुणा जोशी (इलाहाबाद): मैं, श्रीमती निर्मला सीतारमण जी को हार्दिक बधाई देती हूं कि भारत की प्रथम महिला पूर्णकालिक वित्त मंत्री के रूप में उन्होंने एक लोकहित में सर्वस्पर्शी एवं विकास उन्मुख बजट राष्ट्र को दिया है । उनका बजट हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नव भारत के निर्माण का प्रतिबिम्ब है । भारतीय रेल विश्व की सबसे बड़ी रेल है तथा प्रतिदिन 2 करोड़ से अधिक लोग इसे यातायात के रूप में इसका उपयोग करते हैं । विगत 5 वर्षों में मोदी सरकार ने जिस प्रकार मूलभूत सुविधाओं को बढ़ाते हुए रेलवे को विश्व स्तरीय मापदण्डों पर नियोजित किया है वह अभूतपूर्व है । श्री पीयूष गोयल ने एक अत्यंत विद्वान,कर्मशील एवं सुयोग्य सहयोगी के रूप में माननीय प्रधानमंत्री के लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है । आज जब हम रेलवे स्टेशन जाते हैं तो यकीन नहीं होता कि कैसे 5 वर्षों के अल्पकाल में भारतीय रेल की सूरत बदल गई है । साफ-सुथरे प्लेटफार्म सुसज्जीत डिब्बे, साफ शौचालय, प्लेटफार्म पर एक्सलेटर्स,विकलांगों के लिए सुविधाएं,सुरक्षा अच्छे प्रबंध आदि तथा मालगाड़ियों की सेवाओं को चुस्त-दुरुस्त करने तथा अधिकाधिक ट्रेनें समय पर चलाने का सफल प्रयास सराहनीय है । रेल सुविधाओं को और बेहतर करने के लिए यदि प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप (पी.पी.पी.) की ओर रेलवे बढ़ रही है तो यह सही कदम होगा क्योंकि सरकार का लक्ष्य 2030 तक 50 लाख करोड़ रुपये के खर्च से रेल सुविधाओं को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचाने का है । रेल बजट में कर्मचारियों की भी चिंता की गई है तथा उनके प्रशिक्षण व सुविधाओं के लिए भी प्रावधान किया गया है । श्रम कानूनों में जो परिवर्तन किए जा रहे हैं उसमें कर्मचारियों को उनके मेहनत का हक दिलाने के विभिन्न प्रयोजन प्रस्तावित करने की तैयारी चल रही है । इसका लाभ सभी रेलवे कर्मचारियों के साथ संगठित एवं असंगठित क्षेत्रों के कर्मचारियों को मिलेगा । महिलाओं कर्मचारियों की सुविधाओं का भी विशेष ध्यान इस बजट में रखा गया है ।
भारतीय रेलवे ने ऐतिहासिक रूप से देश के सामाजिक-आर्थिक विकास में एक महत्वपूर्ण एकीकृत भूमिका निभाई है । भारतीय रेलवे दिल्ली-मेरठ मार्ग पर प्रस्तावित आरआरटीएस (रैपिड रीजनल ट्रांसपोर्ट सिस्टम) जैसे विशेष प्रयोजन वाहन संरचनाओं के माध्यम से उपनगरीय रेलवे प्रणालियों में अधिक निवेश करेगा । भारतीय रेलवे के ब्रॉड गेज नेटवर्क का विद्युतीकरण 2021-2022 तक किया जाएगा । 2019-2020 में विद्युतीकरण के लिए 7000 रूट किलोमीटर का लक्ष्य रखा गया है । इसके अलावा, 2019-2020 के लिए नई लाइनों,दोहरीकरण/ट्रिपलिंग गेज परिवर्तन आदि का लक्ष्य 3750 किलोमीटर है, जबकि पिछले वित्तीय वर्ष में यह 3596 किलो मीटर था । वित्त मंत्री ने दावा किया कि मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना अच्छी तरह से आगे बढ़ रही है और वर्ष 2023 तक पूरा होने के लिए निर्धारित है । रेलवे बजट 2019 में एकीकृत कौशल विकास की योजना शुरू करने के लिए कहा, जहां सभी 13 लाख रेलवे कर्मचारियों को एक मूलभूत प्रशिक्षण दिया जाएगा । 2019-2020 के बजट में नई लाइनों के निर्माण के लिए 7,255 करोड़ रुपये की धनराशि, गेज परिवर्तन के लिए 2,200 करोड़ रुपये,दोहरीकरण के लिए 700 करोड़ रुपये,रोलिंग स्टॉक के लिए 6,114.82 करोड़ रुपये और सिग्निलिंग और दूरसंचार के लिए 1,750 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं । माननीय वित्त मंत्री जी ने बजट में रेलवे के लिए 66,105 करोड़ रूपये का प्रावधान किया है । रेलवे के आधारभूत ढांचे को विकसित करने के लिए 2018 से 2030 तक 50 लाख करोड़ रूपए की आवश्यकता पड़ेगी । सरकार इसके लिए पीपीपी मॉडल पर विचार कर रही है । रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण पर भी सरकार का जोर है । साथ ही, बड़े शहरों में रेल व्यवस्था के सुधार हेतु सब अर्बन रेलवे के विकास की योजना है । रेल सुरक्षा के लिए 2017-18 में रेल सुरक्षा संरक्षण कोष बनाया गया । इस वर्ष रेलवे ने इस कोष में 5000 करोड़ वहीं केंद्र सरकार ने 20000 करोड़ रुपये जमा किए । हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री जी ने सन् 2022 तक रेलवे में व्यवहारिक बदलाव के लिए बहुत-सी योजनाएं बना रखी हैं । 2022 तक सभी व्यवहार्य पटरियों को व्यापक मार्ग में परिवर्तित किया जाएगा । 2022 तक सभी रेलवे पटरियों का विद्युतीकरण सुनिश्चित किया जाएगा । आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने पिछले साल रेलवे पटरियों के शेष 13,675 मार्ग किमी के विद्युतीकरण के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी । पूरे रेलवे नेटवर्क को बदलने में लगभग 12,134 करोड़ रुपये खर्च होंगे । देश भर में स्मार्ट रेलवे स्टेशन को विकसित करने का कार्य शुरू होगा । सभी रेलवे स्टेशनों पर वाईफाई की सुविधा उपलब्ध कराई जाए । भारतीय रेलवे ने पहले ही कई स्टेशनों पर वाईफाई सेवाएं उपलब्ध करा दी हैं । रेलवायर वाई-फाई सेवा 831 रेलवे स्टेशनों पर शुरू की गई है, जो दुनिया के सबसे बड़े सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क में से एक है । रेल मंत्री पीयूष गोयल ने पहले कहा था कि राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर की देश भर के 4,000 रेलवे स्टेशनों पर मुफ्त वाई-फाई उपलब्ध कराने की योजना है । राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर 2022 तक माल ढुलाई गलियारा परियोजना को पूरा करेगा । यह परियोजना माल की आवाजाही को बहुत आसान और सस्ता बना देगी ।
8श्रीमती संगीता आजाद (लालगंज): अध्यक्ष जी, आपने मुझे रेल बजट पर चर्चा करने के लिए अनुमति प्रदान की, इसके लिए मैं आपका बहुत-बहुत आभार व्यक्त करती हूं ।
माननीय अध्यक्ष: अगर मंत्री जी को सभी ने बधाई दी है, तो मैं भी मंत्री जी को बधाई दे देता हूं ।
श्रीमती संगीता आजाद: अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी के संज्ञान में लाना चाहती हूं कि हमारे क्षेत्र की बहुत वर्षों से मांग रही है कि वाराणसी से लालगंज होते हुए,आज़मगढ़ से गोरखपुर तक नई रेल पटरी बिछाने एवं नई रेलगाड़ी चलाने के लिए सर्वे कराने का प्रबंध कराया जाए ।
मैं मांग करती हूं कि आजमगढ़ रेलवे स्टेशन से दिल्ली, मुम्बई,कोलकाता, चेन्नै एवं अन्य महानगरों के लिए नई रेलगाड़ी चलाने का प्रबंध किया जाए, जिससे कि यहां की जनता को आवागमन में राहत मिल सके ।
मैं माननीय रेल मंत्री जी से मांग करती हूं कि आजमगढ़ रेलवे स्टेशन से जाने वाली महुआ एक्सप्रेस,ताप्ती गंगा,गरीब नवाज़,मऊ एक्सप्रेस ट्रेनों को सरायमीर स्टेशन पर भी रोका जाए, जिससे वहां की जनता को इन ट्रेनों का लाभ मिल सके ।
महोदय,पूरे देश के स्टेशनों के साथ-साथ आज़मगढ़ के रेलवे स्टेशन के निकट काफी ज़मीन खाली पड़ी है, उन खाली जमीनों पर विश्रामालय,हाट व मार्केट बनाया जाए, जिससे यात्री अपनी जरूरी वस्तुएं वहां से खरीद सकें । इससे सरकार की आय व रोज़गार भी बढ़ेगी ।
माननीय अध्यक्ष: माननीय मंत्री जी, क्या आप कुछ बोलना चाहते हैं?
श्री सुरेश सी. अंगड़ी: अध्यक्ष महोदय, मैंने अपने स्टेट के बारे में नहीं बोला है ।
माननीय अध्यक्ष: आप साढ़े ग्यारह बजे बोल लेना ।
श्रीमती संगीता आजाद: महोदय, रेलवे दुनिया का सातवां सबसे बड़ा रोज़गार देने वाला संस्थान है । इसमें 13 लाख कर्मचारियों से भी ज्यादा काम करने वाले लोग हैं एवं 2 करोड़ 30 लाख से भी ज्यादा यात्री रोज सफर करते हैं । रेल विभाग के समस्त कर्मचारियों के समूह ‘क’, ‘ख’, ‘ग’ और ‘घ’ के सापेक्ष एससी, एसटी और ओबीसी के आरक्षण के रिक्त पदों के बैकलॉग को भरने के लिए विशेष अभियान चलाकर रिक्त पदों को तत्काल भरा जाए, जो भारी संख्या में विगत वर्षों से खाली पड़े हैं ।
22.12 hrs (Dr. (Prof.) Kirit Premjibhai Solanki in the Chair) महोदय, मैं मांग करती हूं कि 100 डेज़ एक्शन प्लान के माध्यम से 7 इकाइयों का इंडियन रेलवे रोलिंग स्टाक कंपनी बनाने का जो प्रस्ताव जारी किया गया है, उसे रोका जाए । दुख की बात यह है कि माननीय वित्त मंत्री द्वारा अभी हाल में पेश आम बजट में इसका उल्लेख किया गया है । साथ ही दो ट्रेनों को आईआरसीटीसी के माध्यम से निजी क्षेत्रों को देने और अनेक कार्यों में ठेकेदारी प्रथा लागू की गई है और आउटसोर्सिंग करने के मामले भी सामने आ चुके हैं, जो बहुत ही दुखद है । माननीय रेल मंत्री जी का ध्यान प्रधान मंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की ओर दिलाना चाहती हूं, जहां के रेल कर्मचारी निजीकरण के विरोध में धरना तथा प्रदर्शन कर रहे हैं । मैं चाहूंगी कि उनके सभी मांगों को मानकर धरना प्रदर्शन को तत्काल समाप्त किया जाए ।
बहुत-बहुत धन्यवाद ।
9श्री अरूण साव (बिलासपुर): सभापति महोदय, पिछले पांच वर्षों में नरेन्द्र भाई मोदी जी के नेतृत्व में भारतीय रेल ने चहुंमुखी विकास किया है । आज भारतीय रेल अपने स्वर्णिम काल से गुजर रही है । मुझे विश्वास है कि एक योग्य, सक्षम और युवा नेतृत्व के मार्गदर्शन में, आदरणीय पीयूष गोयल जी के मार्गदर्शन में और सुरेश अंगड़ी जी के मार्गदर्शन में भारतीय रेल उत्तरोतर प्रगति करेगा और आने वाले समय में जनता की अपेक्षाओं को पूरा करेगा ।
माननीय सभापति महोदय, बिलासपुर रेलवे जोन देश में सबसे अधिक आय देने वाला रेलवे जोन है,लेकिन फिर भी वर्षों से बिलासपुर क्षेत्र उपेक्षित रहा है । वहां की जनता को उसका समुचित लाभ अभी तक नहीं मिल पा रहा है । बिलासपुर में भर्ती मण्डल का कार्यालय तो खुल गया है, लेकिन भर्ती की प्रक्रिया इतनी धीमी है कि वहां के नौजवानों को उसका समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है ।
महोदय,कांग्रेस की सरकारों के कारण मुंगेली और कवर्धा अब तक रेलवे लाइन की सुविधा से वंचित हैं । माननीय नरेन्द्र मोदी जी की सरकार के प्रयासों से रेलवे लाइन की स्वीकृति तो मिली है, लेकिन उसके काम की गति अत्यन्त धीमी है । मैं माननीय मंत्री जी से कहना चाहूंगा कि कटघोरा,मुंगेली, कवर्धा, डोंगरगढ़ रेलवे लाइन के काम में गति लाएं,ताकि उस क्षेत्र की जनता को रेलवे लाइन का शीघ्र लाभ मिल सके ।
माननीय सभापति महोदय,बिलासपुर में अब तक रेलवे का ट्रिब्युनल स्थापित नहीं हो पाया है । पूरे प्रदेश की जनता को आज भी भोपाल जाना पड़ता है । इससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है । मैं सरकार से आग्रह करता हूं कि बिलासपुर में शीघ्र ही रेलवे का ट्रिब्यूनल स्थापित किया जाए ।
महोदय,बिलासपुर एक महत्वपूर्ण स्थान है । यह छत्तीसगढ़ राज्य का दूसरा बड़ा शहर है और रेलवे जोन का मुख्यालय है । रायपुर छत्तीसगढ़ की राजधानी है । दोनों शहरों के स्टेशन को वर्ल्ड क्लास स्टेशन बनाने के लिए भारत सरकार प्रयास करे । स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार दिलाने के लिए बिलासपुर में वैगन और कोच की फैक्ट्री प्रारम्भ किया जाना अत्यन्त आवश्यक है । पूर्व में बिलासपुर में रेलवे द्वारा मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा की गई थी,लेकिन उस दिशा में अब तक कोई कार्य नहीं हुआ है । बिलासपुर में मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए शीघ्र कार्रवाई की जाए । वर्तमान में जो हॉस्पिटल है, वह अभी सुविधापूर्ण नहीं है । उस हॉस्पिटल की सुविधाएं बढ़ाई जाएं ।
बिलासपुर में हॉकी का इंटरनेशनल स्टेडियम स्वीकृत हुआ था । उसकी राशि वापस ले ली गई है । वह राशि देकर शीघ्र ही उसका निर्माण कराया जाए । उसलापुर रेलवे स्टेशन से कई गाड़ियों का परिचालन होता है,लेकिन वहां यात्री सुविधाओं का अभाव है ।
इसी प्रकार करगी रोड, कोटा,बेलगहना, पेंड्रा रोड,बिल्हा एवं जयरामनगर स्टेशन में भी यात्री सुविधाओं का अभाव है और इस दिशा में सरकार को ध्यान देने की आवश्यकता है । इन स्टेशन्स पर अनेक गाड़ियों के स्टापेज़ की मांग की गई है,इस ओर भी सरकार को ध्यान देना चाहिए ।
0DR. BEESETTI VENKATA SATYAVATHI (ANAKAPALLE): Respected Sabhapati Ji, thank you very much for giving me this opportunity.
Indian Railways is the largest public sector employer. People demand responsible, timely and user-friendly service from it as its operations affect the entire country.
In this august House, let us remember Gandhi Ji. Before embarking on the freedom struggle, Gandhi Ji travelled throughout the country in trains to study the people’s attitudes, emotions and their feelings towards their country. The Indian Railways has history of such great importance.
Sir, I would like to urge upon the hon. Railway Minister, through you, that Indian Railways should maintain its autonomy. The Railway Board is the final authority on taking decisions about expansion and improvement of the railway network within the country and catering to the needs of the masses. This has to be preserved.
Sir, the time is very precious at this hour. I, therefore, come straight to the demands of my State Andhra Pradesh.
I belong to Anakapalle parliamentary constituency in Andhra Pradesh. Recently, it has been announced that the new railway zone – Southern Coast Railway – will be headquartered in Vishakhapatnam. I want to bring to your kind notice and through you, to the hon. Minister of Railways that it has never happened in the history of Indian Railways that a Railway Zone is running without a Railway Recruitment Board. But it is so in Vishakhapatnam.
So, Sir, through you, my humble request to the hon. Minister of Railways is to consider the people’s ambition to have a Railway Recruitment Board of South-Coast Railway Zone at Vishakhapatnam.
As was told yesterday, the capital expenditure for the financial year 2019-20 is Rs. 1,60,176 crore. We have a long pending demand for a direct train from Vishakhapatnam to Varanasi, from Vishakhapatnam to Bengaluru and one more train from Vishakhapatnam to Tirupati. So, these are all the main demands from our State.
We have also a demand for stoppage of a few express trains at Anakapalle station because it is an A-I category station. These trains are – Lokmanya Tilak Express, Falaknuma Express, Amaravati Express, Nanded-Vishakhapatnam Express, and also, stoppage of Janmabhoomi Express and Ratnachal Express trains at Narsipatnam Road Station. To enlighten Narsipatnam Road, we have to remember the great freedom fighter, Alluri Sitarama Raju, who fought for the freedom of our country from this place. It is the demand of the people of two assembly constituencies Narsipatnam and Partakellopeta that stoppage of these express trains should be provided at Narsipatnam Road as they are facing lot of transport problems to reach either Visakhapattinam or Amaravati our capital city.
I thank you very much, Chairperson Sir, for giving me this opportunity at the last hour to speak about my Constituency.
Jai Hind! 1 *SHRI S.MUNISWAMY ( KOLAR): Hon’ble Chairman sir, Thank you for giving me the opportunity to take part in the discussion on the demands for grants of the Ministry of Railways for the year 2019-20.
At the outset I would like to express my thanks to Hon’ble Minister for Railways Shri Piyush Goyal ji and Hon’ble Minister of State for Railways Shri Suresh Angadi ji as they are entrusted the responsibilities of the ministry by Hon’ble Prime Minister Shri Narendra Modi ji.
Sir, I am representing Kolar district in Lok Sabha. After independence for the first time a member of Bharatiya Janata Party is elected from Kolar Parliamentary constituency in Karnataka. Once my district was a prosperous one, but now it is drought hit poverty ridden district. Earlier, the person representing my district was a Railway minister during the UPA regime, now they are sitting in the opposition bench. No work is possible if there is no will-power to work for the country and for the district. Kolar is the best example for this. During UPA only annoucement of new projects were made in every Railway Budget, bill boards were installed all over the country including my state Karnataka. Railway lines were announced for various states and foudations stones were laid. However, no railway project was implemented on the ground.
HON. CHAIRPERSON: We have many speakers. so, please conclude.
SHRI S. MUNISWAMY: During UPA regime the assurance was given for new railway line between Whitefield and Kolar, Kolar–to Kadapa via Mulabagilu, Srinivasapur, also announced a coach factory at Kolar. However, no project was implemnted by the UPA government. All these promises have never seen the light of the day. All the promises still remains on paper.
HON. CHAIRPERSON: Conclude kindly.
SHRI S. MUNISWAMY: In the previous tenure of Shri Narendra Modi ji’s government Shri Suresh Prabhu ji and now Shri Piyush Goyal ji and Shri Suresh Angadi ji, all the Railway ministers have been working hard for progress of the railways. This government has taken steps for Signal free crossings, Rail Under Bridges are replacing the Over Bridge. The government has addresed the issue of train accidents. Earlier there used to be a large number of railway accidents, now the number of accidents have come down; trians were not running as per scheduled, now-a-days they are running as per the time schedule. Top priority is given for cleanlinsess. Railway lines are electrified. Therefore I congratulate the hon’ble Prime minister shri Narendra Modi ji.
2*श्री अजय टम्टा (अल्मोड़ा):इस ऐतिहासिक रेल बजट के लिए मैं माननीय प्रधानमंत्री व माननीय मंत्री जी को धन्यवाद देता हूं । रेलवे के लिए अब तक की सर्वाधिक 1.60 लाख करोड़ रुपये की राशि का प्रावधान किया गया है, जिसमें नई पटरियों के निर्माण, गेज परिवर्तन दोहरीकरण रोलिंग स्टॉक,सिग्नल एवं दूरसंचार को विशेष प्राथमिकता दी गई है ।
जहां पूर्व की सरकारें बुलेट ट्रेन लाने में असफल साबित हुई और पूर्व सरकार में रेलवे का इस्तेमाल राजनीतिक कारणों के लिए किया गया । इसलिए अनेक परियोजनाओं की घोषणा नहीं हो पाई और सभी परियोजनाओं पर कार्य के लिए बजट का अभाव बना रहा । इसके विपरीत माननीय मोदी जी की सरकार में जो कहा वो किया की तर्ज पर प्राथमिकता के आधार पर कार्य पूरे किये जा रहे हैं । देशभर के स्टेशनों पर पानी की सुविधा, प्रतीक्षालयों को उन्नत बनाना और अन्य सुविधाएं मुहैया कराना सरकार की प्राथमिकता में शामिल है । माननीय प्रधानमंत्री जी का सपना है कि भारत प्रौद्योगिकी की शक्ति बने ताकि लोगों को विश्व स्तरीय सुविधाएं प्राप्त हों ।
मेरा राज्य उत्तराखंड अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन के साथ बड़े तीर्थ स्थलों को समेटे हुए हैं । प्रति वर्ष लाखों पर्यटक यहां पर्यटन एवं तीर्थाटन हेतु आते हैं,रेल मार्ग का विकल्प रेल यातायात बढ़ाने में सहायक होगा । जैसा कि हम जानते हैं कि पड़ोसी देश चीन सीमाओं तक रेल नेटवर्क बढ़ाने के दिशा में काफी आगे बढ़ चुका है ।
उत्तराखंड के चारों धामों को रेल नेटवर्क से जोड़ने के लिए ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक स्वीकृत रेल ट्रैक का निर्माण कार्य तेजी से शुभारंभ होता है तो देश के लाखों तीर्थयात्रियों एवं पर्यटकों एवं स्थानीय जनता को इसका बहुत बड़ा लाभ मिलेगा ।
मेरा राज्य उत्तराखंड नेपाल और चीन की सीमा से लगा हुआ है । जहां पर सामरिक दृष्टि से रेल परिचालन की अत्यंत आवश्यकता है । मेरे संसदीय क्षेत्र 03-अल्मोड़ा में आजादी के बाद पहली बार मोदी सरकार में भोजीपुरा-टनकपुर रेल लाईन का गेज रूपांतरण 101 कि.मी. पूर्ण किया गया है और आज उस ट्रैक से त्रिवेणी एक्सप्रेस, दिल्ली-बरेली एक्सप्रेस ट्रेनों का चलना शुभारंभ है । सीमांत एवं सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण एवं सैन्य बाहुल्य क्षेत्र होने के कारण टनकपुर रेलवे स्टेशन से लखनऊ,देहरादून, मुंबई एवं दिल्ली को तीव्र गति से चलने वाली ट्रेनों की आवश्यकता है । धार्मिक एवं सैन्य बाहुल्य क्षेत्र की महत्ता को देखते हुए पूर्णागिरी और पिथौरागढ़ नाम से नई ट्रेन चलाई जाए जिससे विश्व मानचित्र पर यह क्षेत्र अंकित हो सके । पूर्णागिरी उत्तर भारत का प्रमुख तीर्थस्थल माना जाता है तथा पिथौरागढ़ छोटा कश्मीर के नाम से विख्यात है ।
रामनगर चौखुटिया गैरसैण नई लाइन हेतु सर्वेक्षण कार्य 2015-16 में स्वीकृत हुआ था जिसके लिए नवम्बर, 2016 में एजेंसी फिक्स कर दी गई थी । अत: अनुरोध करता हूं कि उक्त नई रेल लाइन की स्वीकृति प्रदान करें ।
टनकपुर-बागेश्वर-जौलजीवी रेल लाइन जो कि सामरिक महत्व की योजना में है, जिसकी पूर्वोत्तर रेलवे द्वारा सर्वेक्षण रिपोर्ट वर्ष स्वीकृति हेतु रेलवे बोर्ड को भेजी जा चुकी है । इस परियोजना निर्माण के लिए धनराशि का अनुमोदन किया जाए ।
चौखुटिया से गरूड़ होते हुए बागेश्वर तक जिसकी लंबाई सुरंग मार्ग से 19 कि.मी. लगभग है, के सर्वेक्षण करवाने की मंजूरी दी जाये ।
जिससे पर्वतीय क्षेत्र दुर्गम स्थानों में टनल के माध्यम से दूरी कम व समय की बचत होगी । अंत में, मुझे यह कहने में संकोच नहीं है कि माननीय मोदी जी व माननीय मंत्री जी ने भारतीय रेल को विश्वस्तरीय बनाने के लिए सफल प्रयास किया है । इसकी जितनी प्रशंसा की जाए उतनी कम है ।
3ADV. ADOOR PRAKASH (ATTINGAL): Hon. Chairperson, thank you for giving me this opportunity to participate in the discussion on the Demands for Grants of the Ministry of Railways for 2019-20. Going through the Budget, we can see that the hon. Minister is banking totally on the public-private participation for development of rail projects. It is estimated that railway infrastructure would need an investment of Rs. 50 lakh crore for the next decade. The report published by the Ministry of Statistics and Programme Implementation in December 2018 showed that the cost overrun of 205 delayed railway projects is Rs. 2.21 lakh crore. But there is no mention in the Economic Survey and the Budget Speech about cost escalation due to project delays. The Government is generalizing this issue by proposing the PPP mode for completion of the sanctioned projects.
Safety is a major issue which Railways has been facing in the recent past. For passenger safety, the Government had announced the creation of Rashtriya Rail Sanraksha Kosh with a corpus of one lakh crore of rupees over a period of five years. The present status of the same is not known and there is no mention about this in the Budget.
The decision of the Union Government to share the cost of the development projects with the States on 50:50 basis will definitely impede the development of railway.
The State of Kerala which witnessed the worst flood in the century is struggling for reconstruction. The State is in deep financial crisis and unable to bear the 50 per cent cost of all the projects. As a result of this cost sharing condition, the State is in such a position that it cannot utilize the allocation earmarked in the Budget.
The allocation for doubling of railway lines in Kerala is not sufficient. Requests from the State for higher allocation for other developmental works were also ignored. The Angamali-Sabarimala new railway line was sanctioned in the year 1997-98 at a cost of Rs. 550 crore. The project is presently held up and the project cost has increased to Rs. 2815 crore.
There are regular complaints from passengers of Kerala-bound long- distance trains about poor maintenance and old coaches. Recently, four passengers travelling on Kerala Express train from Agra to Coimbatore died of heat stroke. Railways should take necessary steps so that such unfortunate incidents are not repeated. Theft incidents are also reported, especially in long-distance trains.
The Government had proposed development of railway stations across the country and some stations were selected. Indian Railway Stations Development Corporation had proposed Varkala Sivagiri railway station in my constituency to develop it as a world-class station. A master plan of Rs. 600 crore has been prepared by RITES for the same. I request the Government to consider the development of this station on top priority.
There are ten level crossings in my parliamentary constituency. We need to construct rail overbridges over there. Passengers are facing acute difficulties at the level crossing at Chrirayinkil. Construction of a rail overbridge is of very urgent need. …(Interruptions)
HON. CHAIRPERSON: Kindly sum up by mentioning important points only.
ADV. ADOOR PRAKASH : I am concluding, Sir.
Land has already been acquired but the work has not started. Work on these level crossings should start without delay. Construction of a railway overbridge at Edava in Varkala is also a long pending demand. I would request the Government to consider these demands on priority.…(Interruptions)
4श्री अर्जुन लालमीणा (उदयपुर): सभापति महोदय,मैं सबसे पहले आपको धन्यवाद ज्ञापित करता हूं साथ ही देश के यशस्वी प्रधान मंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी जी, देश के रेल मंत्री आदरणीय पीयूष गोयल जी, राज्य मंत्री जी और सरकार को भी धन्यवाद ज्ञापित करता हूं । मैं मेरे लोकसभा क्षेत्र उदयपुर राजस्थान से आता हूं । उदयपुर पर्यटन की दृष्टि से, ऐतिहासिक दृष्टि से और मैरिज डेस्टिनेशन की दृष्टि से भी एक महत्पूर्ण स्थान है । मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी का ध्यान इस ओर आकर्षित करना चाहता हूं । वर्ष 2009 में यू.पी.ए. सरकार थी,तब उदयपुर से हिम्मत नगर वाया अहमदाबाद तक आमान परिर्वतन की घोषणा हुई थी, लेकिन पिछले पांच सालों में उस पर मात्र 109 करोड रुपये ही खर्च हुए थे । मेरे क्षेत्रवासियों की तरफ से मैं माननीय प्रधान मंत्री जी को और मोदी सरकार को बहुत शुभकामनाएं देता हूं । वर्ष 2014 में जब मोदी जी की सरकार आई और हमारे माननीय रेल मंत्री जी आए तो 1250 करोड रुपये उन आमान परिवर्तन योजनाओं में दिए, जिनकी वजह से उदयपुर से उमरड़ा, जावर माइन्स, जयसमन्द रोड, सेमारी,रिखबदेव रोड,डूंगरपुर और गुजरात राज्य में शामलाजी और हिम्मत नगर तक 211 किलोमीटर की जो आमान परिवर्तन की रेल लाइन हैं,उसका काम तेजी गति से प्रारंभ हो गया । इस बीच में आर.ओ.बी. और आर.यू.बी.का काम भी चल रहा है, लेकिन जारव माइंस के पहले जो सुरंग का काम चल रहा है,जो दिसम्बर तक पूरा होने वाला था, वह धीमी गति से चल रहा है ।
मैं माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहता हूं कि उस काम को थोड़ी गति प्रदान करें । मैं आपके माध्यम से यह भी निवेदन करना चाहता हूं कि एक सुरखंडखेडा रेलवे स्टेशन है, उस रेलवे स्टेशन के दोनों ओर आबादी है । वहां पहले पाइपलाइन के माध्यम से पेयजल और सिंचाई का पानी जाता था । एम.पी.लैड्स से मैंने पहले पांच लाख रुपये दिए हुए हैं । मेरी माननीय मंत्री जी से गुजारिश है कि उसको पूरा किया जाए और अंत में मैं कहना चाहता हूं कि उदयपुर से गोगुंदा होते हुए पिण्डवाडा और माउंट आबू से जाने वाली जो रेलवे लाइन है, वहां नई रेल लाइन के सर्वे के लिए स्वीकृति प्रदान की जाए ताकि माउंट आबू को जाने वाले लोगों को और जोधपुर जाने वाले लोगों को भी सुविधा प्रदान हो सके, धन्यवाद ।
5SHRI SURESH PUJARI (BARGARH): I am thankful to you, Mr. Chairman, Sir, for giving me this opportunity to speak on the Demands for Grants of the Ministry of Railways. I will be more grateful if I am given a little more time.
HON. CHAIRPERSON: No extra time will be given. Kindly confine to three minutes only.
SHRI SURESH PUJARI: I am saying this because of three reasons. Firstly, this is my maiden speech in this august House. Secondly, I would like to bring to the kind attention of the House that my State of Odisha has got the highest allocation my State has ever got after Independence. When you get more, you develop the habit of appreciating more and also demanding more. I will be laying major part of my speech on the Table. Through you, Mr. Chairman, I would be apprising the Hon. Minister about certain problems concerning my constituency as well as the State.
During UPA regimes from 2004 to 2014, Odisha got an allocation of Rs.4190 crore only and against that in this year alone, Odisha got more than double of what we got in long nine years of UPA Raj. The allocation between this period from 2014-2019 has gone up to Rs20,000 crore in Odisha. The current Railway Budget has 13 per cent more allocation of funds for East Coast Railway which is the Railway Zone of my State. Apart from other areas of South Eastern Railway, there has been 60 per cent hike in the allocation for new lines in Odisha amounting to around Rs.2630 crore. There has been 118 per cent enhancement in allocation for passenger amenities which is put at Rs.182 crore.
It is pertinent to mention here that the railway lines are being constructed in my State at the rate of 29 kilometres per year as compared to 10 kilometres per year between 2004 and 2014. But there is still higher scope for acceleration of work in Odisha provided there is better cooperation and coordination between the State Government and the Department of Railways.
I am thankful to the Department of Railways for sanctioning Rs.1400 crore through EBR for Jharsugda-Barpali via Bargarh new rail line. It is part of my constituency. Having said that, I will just raise two demands of my constituency.
HON. CHAIRPERSON: Please conclude now.
SHRI SURESH PUJARI: Odisha is a State which was formed in 1936 on language basis by carrying out parts of West Bengal and Madhya Pradesh.
HON. CHAIRPERSON: You put your demand.
SHRI SURESH PUJARI: The entire State of Odisha needs to be put in one Railway Zone, i.e., East Coast. Part of my constituency is in the East Coast Zone and other part is in Bilaspur Division of South East Central Railway and another part in Chauradhar division of South Eastern Railway whose survey has already been completed. My submission is that the entire railway network in Odisha should be put under one zone for the better functioning of the Railway network in Odisha. Jharsugda is a place that deserves a railway division. In the district from which I hail from, the district of Bargarh, there is a genuine demand for a new rail line from Bargarh to Nuapada via Bijapur and Padampur. I will lay rest of my speech.
* I express my gratitude to the Hon’ble Prime Minister, the Hon’ble Finance Minister and the Hon’ble Railway Minister for giving special attention to Odisha by way of record allocation for overall improvement of Railway network in Odisha which has been the target of discrimination since independence for a long time in the last century. Odisha, which has been getting 600 to 700 cr annually during the last UPA government, which put together which comes around Rs.4,190 crore from 2004 to 2013, got five fold more this time between 2014 to 2019. The allocation between this period is more than Rs.20 thousand crores. The current Railways budget has 13% in allocation of funds for East Coast Railway, the main Railway Zone of my State which comes around Rs.7,010 crores apart from allocation made to other zones, that covers part of my State’s Railway network. There has been 63% hike in allocation for New Lines in Odisha, amounting to around Rs.2,630 crores and 118% enhancement in allocation for passenger’s amenities, which is put at Rs.182 crores. It is pertinent to mention here that railway lines are being constructed in Odisha @29 km per year since 2014-18 as compared to 10 km per year between 2004-2014. There is still higher scope of acceleration in the event of closer coordination between the Railway and State Government. Similarly the doubling work has gone up from 16 km per year in 2004-14 to 83 kms per year 2014-18.
Similarly, electrification of lines in Odisha has gone up from 35 km per year from 2004-14 to 110 km per year during 2014-18. The Budget grant for 2019-20 for Railway in Odisha is almost same as provided in the interim budget – Rs.5993 Cr. this year against 5940 Cr. in the interim budget – against last year’s allocation of Rs.5252 crores. Gratitude to Hon’ble Prime Minister/Finance Minister/Railway Minister for record allocation in the history of Rail Budget for Odisha. The Budget provided five surveys of new rail lines, 2 automatic coach washing plant, road over bridges and road under bridges across Odisha. Estimated investment of Rs.1,400 crore through EBR for Jharsuguda-Barpali via Bargarh New Line of my Parliamentary Constituency has been provided. The Doubling of rail line includes Jharsuguda-Rengali, part of my Parliamentary Constituency and Sambalpur-Titagarh via Bargarh covering a distance of 182.11 km for which Rs.170 crore has been earmarked + 170 Cr. in the Interim Budget. Sambalpur Telchar (174.11 km) has got a grant of Rs. 249 crores apart from another Rs.249 granted in the Interim Budget. The Khurda Road – Bolangir New line, which has got Rs.350 + Rs.350 crores in both interim and this budget needs acceleration for early completion.
Amongst Flyovers, my Parliamentary Constituency and the Railway Division has got Brundamal – Jharsuguda Fly over costing 86 Crore and fly over in Sambalpur, Sarla, Sambalpur City were allocated sufficient funds which were long standing demand of the people of the area.Demand of Odisha in general and Question related to Orissa in particular:
Odisha is a State formed on the basis of language way back in 1936. Prior to that some part of Odisha was in Bengal and some part of Odisha was in Madhya Pradesh. Though the portion of Odisha in West Bengal and Madhya Pradesh were carved out, the railway installation of Odisha still continues to be on the other side of fence even after almost a century.
East Coast Railway was established on 8th August 1996. Even after the lapse of almost twenty years railway offices across the state of Odisha have not yet been brought within the ambit of East Coast Railway from either South Eastern Railway, South East Central Railway or other railway zone of the country.
It is pertinent to mention here that the district of Jharsuguda, which is a district within my Parliamentary Constituency, has railway offices under the administrative control of South Eastern Railway, South East Central Railway as well as under East Coast Railway in Odisha.
Jharsuguda railway office is under Chakradharpur Railway Division of South Eastern Railway Zone and Brajrajnagar and Belpahar are within the ambit of in Bilaspur Division of South East Central Railway zone. Similarly in the costal Odisha, Balasore, Bhadrak and Mayurbhag are in the South Eastern Railway. For the greater interest of the state of Odisha and of the railway as a whole, all the railway offices as well as it’s rail lines should be brought within the administrative control of East Coast Railway, Khurda in Odisha. The railway office of Sundargarh District which is a scheduled area should also be put under administrative control of East Coast Railway.
Bargarh is a district on other side of Sambalpur, fortunately within the administrative control of Sambalpur Railway Division of East Coast Railway. Bargarh is a district which produces one-fourth of Odisha's annual peddy production, for which it is said to be Bhatahandi, Rice Bowl, Mata Annapurna of Odisha but this station has neither been electrified yet nor has the facility of watering the train as a results of which not a single train originates from Bargarh of Odisha which once upon a time was a epi-centre of India’s revolutionary freedom movements.
Surendra Sai was a freedom fighter and warrior who waged an armed struggle against the Britishers, twenty eight years before the first war of independence that took place in the year 1857.
Many such revolutionaries of that moment went to gallows, many were to sentenced to deportation for life and sent to the Cellular jail of Andaman and they never returned and many were shot dead.
Surendra Sai was sent to the prison and he spent in prison for long thirty seven years till his death which will longest in the history of the world.
Ghens is a place in district of Bargarh where three generations sacrificed their life along with hundred others for the liberation of the motherland. Madho Singh, the zamindar of Ghens was hanged in 1858 during the sepoy mutiny and out of his three sons, Khate Singh was sentenced to deportation for life and sent to Andaman and his other two sons Kunjel Singh and Barri Singh were hanged to death.
Today we are all set to celebrate the 75th year of the India’s Independence and 150th year of Mahatma Gandhi’s birth anniversary.
Can we take this occasion as an opportunity to pay rich tribute to all those unsung National Heroes by developing the Indian Railway network in the district Barger by:
1. Laying of new rail lines from Bargarh to Nuapada via Bijepur and Padampur and name those railway station in name of those National Heroes.
2. To go for modernization of Bargarh Railway Station with electrification, watering facility and second platform with adequate lighting facility.
3. Running of local train from Titlagarh to Sambalpur early morning via Bargarh to enable the commuters to reach Sambalpur by 6 AM in the morning to avail 18303-Sambalpuri Intercity Express and 22839-Rourkela Bhubaneswar Intercity Super Fast Express.
4. Simultaneously it needs Vishakhapatnam Amritsar Hirakud Express to run three days in a week through Titlagarh-Bolagir to enable the people of the area to go to the National capita, Delhi.
5. It also requires many over bridges including one at village Tora. Both the district of Bargarh, Jharsuguda as well as Sambalpur require of upgraded Coach Display System for the convenience of passengers, particularly the elder ones as the coaches remain far away from the platform.
6. Barpalli the birth place of one of the finest poets of Odisha and mother India Prakruti Kabi Gangadhar Meher, which is hub centre of Sambalpuri textiles, the largest Khadi and Cottage Industries of the entire state. Barpalli also deserves to go for second platform, railway overbridge and stoppage of Nagawali Express and name either a train or the Over Bridge or the Railway Station in name of Gangadhar Meher.
The escalator inaugurated few month back in Jharsuguda Railway Station be made operational.
Trains going through Attabira of bargarh district and Bagdihi, Belpahar and Brajrajnagar of Jharsuguda district be made to stop for the passengers of those areas to board train which passes through those platforms without stoppages.
Last but not the least, there are many districts in the state of Odisha which don’t have an inch of railway track in the district like Kandhamal, Boud Deogarh and many other districts have symbolic presence of Railways in the districts. They need to be included within the large railways network in the country.
The Sambalpur- Berhampur rail line survey work covering a distance of 240 KM has already been completed since 2015-16 and it need allocation of funds for laying new rail lines.
7. Balangir Khurda Rail lines needs acceleration in speed for early completion.
8. The third Railway line which received one hundred fifty Cr. in the years 2015-16 from Rourkela to Jharsuguda needs special attention for early completion.
9. In this connection the district of Deogarh as well as the sub division of Kuchinda in Sambalpur also deserves special attention of the railways so that be it can get connected by existing proposal of the railway department in and around those areas so that in the 75th year India Independent the people of this area can see a railway track and locomotive running over the track.* 6 *SHRI KHAGEN MURMU (MALDAHA UTTAR): I am putting some important demands of my 7 Malda Uttar Parliamentary Constituency in West Bengal to Railway Minister to incorporate in Demand Draft of Railways Budget which would be fulfilled immediately. These demands have not been fulfilled since long time and the people of my constituency are facing a long of difficulties. The details of the demands are as under:-
The common man and traders in my constituency have to face the problems of Traffic Jam because of railway crossing, such as Mangalbari and Samsi and there are some shortage of basic facilities like Shades, Chairs, Waiting Hall and Drinking Water etc. at the railway station in my constituency. These facilities would be providing at the earliest.
1. New One pair of Super Fast Trains like Tejas and Humsafar from Maldah Town to New Delhi via Samsi and Katihar should run immediately.
2. Addition of new coaches (LSB Coaches) of Train No. 13153/54 Gaur Express which runs from Sealdah to Malda Town and Malda Town to Sealdah.
3. Stoppage of Train no. 15941 UP/15952 DN Jhajah – Dibrugarh Express at Samsi Railway Station (A large number of passengers/pilgrims to get opportunity to go to Deoghar/Babadham, Asansol and Durgapur etc.)
4. Stoppage of Train No.12377/12378 Padatik Express at Samsi Station.
5. Extension of Platform along with its shed at Samsi Railway Station.
6. A well furnished Bio-Public Toilet of platforms at Harishchandrapur and Samsi Railway Station.
7. One Flyover Bridge has been sanctioned by the Ministry of Railways to construct over spl. L.C. Gate no. NC-101, of Samsi in 2007-08 but no progress has been made to start its work, as a result road traffic users facing tremendous trouble waiting at L.C. Gate for more than 30 minutes.
8. Stoppage of South Bound Train 15227/15228 Muzaffarpur-Yashwantpur Express at Samsi Railway Station.
Thanking you.
7*SHRI GURJEET SINGH AUJLA (AMRITSAR) : I thank you Hon. Speaker Sir, for giving me the opportunity to speak on the Demands for Grants (Railways) 2019-20. The time at present is 10.40 in the night and I thank you for giving all of us the opportunity to speak on this subject.
Sir, Amritsar is an old city, a historic city. Railway lines had been laid from Lahore to Kolkata. G.T. Road was also there between these two cities. At that time, trade went on in unified India. However, after the division of India in 1947, Amritsar because the last station. The freight corridor comprised of Ludhiana-Kolkata route. I would urge upon the Hon. Minister to extend the freight corridor to Amritsar. Inclusion of Amritsar is the need of the hour.
Sir, the Punjab Government is going to celebrate the 550th Birth Anniversary of Shri Guru Nanak Dev ji. I would urge upon the Hon. Railway Minister to start a special train from Dera Baba Nanak to Amritsar. Also, special trains from all states to Amritsar should be started so that the devotees are able to pay their obeisance at Amritsar on the occasion of 550th Birth Anniversary of Shri Guru Nanak Dev ji.
Sir, the platforms of Majitha, Ramdass and Dera Baba Nanak need to be renovated and these stations too should be upgraded. During the time of UPA government, Patti-Mahu link stretch of 24 kms. was inaugurated. It will help the security forces as their vehicles ply to Jammu & Kashmir, Himachal Pradesh, Pathankot etc. Journey to Mumbai is curtailed by 240 kms. This is a project of three more states including Punjab. They are Rajasthan, J&K and Himachal Pradesh. So, I urge upon the Hon. Railway Minister that it should provide financial grant so that land could be acquired for this purpose.
The lines that need further extension and renewal are railway lines from Batala to Tanda, Garhshankar to Una, Chandigrah to Rajpura via Mohali, Phillaur to Nawanshahar and Mor Mandi to Talwandi Sabo. 121 kms of railway lines need to be laid. Also, sir, the doubling of Pathankot-Amritsar railway line should be done at the earliest.
HON. CHAIRPERSON: Kindly conclude. Only list your important demands.
SHRI GURJEET SINGH AUJLA : Sir, trains from Amritsar to Southern states should be started. New railway rakes should be provided. Sir, the food provided in Shatabdi and other trains is very sub-standard. Kindly improve the quality of food.
HON. CHAIRPERSON: Kindly conclude. Thank you.
SHRI GURJEET SINGH AUJLA : Just one more minute, Sir.
Sir, the train to Hazoor Sahib runs only once a week. It should be converted to a daily train and it should ply via Tarn Taran and Beas, so that the people of the area gain out it.
HON. CHAIRPERSON: Shri Mahendra Solanki ji SHRI GURJEET SINGH AUJLA: Sir, I would like to draw the attention of all Hon. Members towards one important point. Trains are named after religious gurus etc. We have Golden Temple express, Jallianwala Bagh Express, Haridwar Express, Hazoor Sahib Express. However, the condition of those trains is so bad that it leaves much to be desired. So, I urge upon the Hon. Minister to take special cognizance of the trains and improve their condition at the earliest.
Thank you.
8श्री महेंद्र सिंह सोलंकी (देवास): सभापति महोदय, मैं आपको धन्यवाद ज्ञापित करता हूं कि आपने मुझे इस विषय पर बोलने के लिए मौका दिया है । मैं पार्टी का भी धन्यवाद करता हूं कि मुझे बोलने के लिए मौका दिया है । भारत में रेलगाड़ी यात्री परिवहन और माल परिवहन का एक प्रमुख साधन है । भारत की रेल देश की जनता को कोने-कोने से जोड़ती है और हमारे देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करती है । समय की कमी है । मैं अपने भाषण को थोड़ा कम करूंगा । माननीय प्रधान मंत्री जी के पिछले पांच वर्षों के कार्यकाल को देखें तो इस बात से स्पष्ट हो जाता है कि हमारे देश का जो सर्वांगीण विकास हुआ है,उस विकास के साथ-साथ हमारे देश की रेल का भी विस्तार और विकास हुआ है । मैं अपनी बात को इस शेर के साथ आगे बढ़ाना चाहूंगा कि न हम-सफ़र न किसी हम-नशीं से निकलेगा हमारे पांव का कांटा हमीं से निकलेगा ।
हमारे पैर में जो कांटा लगा है, वह हम ही से निकलने वाला है । इसलिए उन्होंने अपने पैर के कांटे को स्वयं निकालते हुए, इसी तारतम्य में उन्होंने रेल बजट जो पृथक पेश किया जाता था,आजादी के पूर्व की इस परंपरा को उन्होंने समाप्त किया और एक सकारात्मक पहल करते हुए,हमारे रेल बजट को उन्होंने आम बजट के साथ समावेषित कर दिया ।
महोदय,मैं अपने क्षेत्र की समस्या आपके माध्यम से रेल मंत्री जी तक पहुंचाना चाहूंगा । मेरे क्षेत्र में आगर माल्वा नाम का जिला है । जहां आजादी के 70 साल बाद भी ट्रेन की कोई कनेक्टिविटी नहीं है । इसी प्रकार से आष्टा जिले में भी ट्रेन की कोई कनेक्टिविटी नहीं है । इस क्षेत्र की समस्या के निराकरण के लिए जरूरी है कि उज्जैन से झालावाड़ तक की रेल लाइन आगर से होते हुए बिछाई जाए, जिससे कि वहां के क्षेत्र की समस्या का निराकरण हो सके । इसी प्रकार इंदौर से आष्टा होते हुए एक रेल लाइन भोपाल के लिए बिछाई जाए, ताकि वहां के क्षेत्र की जो जनता रेल की कमी के कारण परेशान हो रही है, उसे सुविधा मिल सके । इसी प्रकार से हमारे सुजानपुर में कई व्यापारियों का आना-जाना मुम्बई लगा रहता है । वहां देश के सभी प्रमुख महानगरों से आने-जाने वाली ट्रेनों का स्टापेज है,परन्तु मुम्बई को आने-जाने वाली ट्रेन का स्टापेज नहीं है ।
मैं माननीय रेल मंत्री जी से निवेदन करता हूं कि वहां स्टापेज देने की कृपा करें । साथ ही देवास लोक सभा का जो प्रमुख रेलवे स्टेशन है,वह इंदौर, उज्जैन और भोपाल के बीच में देवास रेलवे स्टेशन है, परन्तु इस स्टेशन का विकास नहीं हुआ है । मैं रेल मंत्री जी से निवेदन करता हूं कि देवास रेलवे स्टेशन का आधुनिकीकरण करवाएं और उसे मॉडल रेलवे स्टेशन की तरह स्थापित करने की कृपा करें ।
9*श्री प्रदीप कुमार चौधरी (कैराना): मैं रेल के विषय में अपनी बात रखता हूँ ।
उत्तर प्रदेश के कैराना लोक सभा क्षेत्र में ट्रेन के आवागमन की पर्याप्त सुविधा नहीं है । दिल्ली से वाया शामली, सहारनपुर जाने वाली जनता एक्सप्रेस ट्रेन चलती है,जिसके ठहराव हेतु क्षेत्र के लोग बार-बार मांग करते हैं । मेरी सरकार से मांग है कि जनता एक्सप्रेस ट्रेन का दो मिनट का स्टॉपेज एलम में व दो मिनट का स्टॉपेज नानौता, सहारनपुर में दिया जाए । साथ ही, दिल्ली-शामली-सहारनपुर रेल मार्ग पर लम्बी दूरी की कोई ट्रेन नहीं चलती है । कृपया इस रेल मार्ग पर लम्बी दूरी की ट्रेन्स का संचालन शुरू कराया जाए, जिससे क्षेत्र के लोगों को दूरस्थ स्थानों पर जाने का अवसर ठीक प्रकार से मिल सके । इसके साथ-साथ लखनऊ से मुरादाबाद, सहारनपुर से चण्डीगढ़ को जाने वाली एक्सप्रेस ट्रेन के कोच बहुत पुराने हो रहे हैं और उसके अंदर कम्बल व चादर भी साफ-सुथरी नहीं मिल पा रही हैं । कृपया चण्डीगढ़ एक्सप्रेस ट्रेन के सुधार की तरफ भी ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है ।
इसके साथ-साथ जम्मू से, वाया अम्बाला-सहारनपुर-मुरादाबाद-लखनऊ, वाराणसी जाने वाली ट्रेन बेगमपुरा एक्सप्रेस चलती है और इसी रूट से वापस आती है । इस ट्रेन के चलते समय व रुकते समय ए.सी. कोच में झटके लगते हैं, जिससे यात्रियों में एकदम भय का वातावरण बनता है और रात्रि में असुविधा का सामना करना पड़ता है । अत: इस ट्रेन में होने वाली इस दिक्कत को दूर किया जाए । इसके साथ ही बेगमपुरा ट्रेन में ए.सी.-1 कोच की सुविधा को बढ़ाया जाए । इस ट्रेन से बड़ी संख्या में लोग प्रतिदिन यात्रा करते हैं ।
इसके साथ ही, एक सुपरफास्ट ट्रेन सहारनपुर से दिल्ली मार्ग पर चलाई जाए, जिसे वाया मेरठ भी चलाया जा सकता है । इसके साथ-साथ नानौता रेलवे स्टेशन प्लेटफार्म ठीक प्रकार से नहीं बना हुआ है । कृपया नानौता रेलवे स्टेशन पर ठीक प्रकार से प्लेटफार्म की स्थापना की जाए ।
0*DR. UMESH G. JADHAV (GULBARGA): I request the Hon'ble Minister of Railways for the development of my Parliametary Constituency i.e, Kalaburagi/Gulbarga in Karnataka State.
I would like to bring it to kind notice of the Government of India that the Divisional Headquarter at Gulbarga was sanctioned under the jurisdiction of South western Railways (SWR) in the 2014 Budget. But since then there is no progress on the sanctioned work.
Gulbarga region accounts near to 50% of the revenue contribution to Solapur Railway Division so speeding up of the sanctioned Division work is very much important and need of the hour.
I would like to demand the below mentioned work on priority basis, for the Development of Kalaburagi Railway Station and for the complete development of Railways in Parliamentary Constituency, the details are as follows
1. Air Condition Waiting Room required, as Kalaburagi District called as the 'Kutch of Karnataka" due to its extreme temperature in summer season. During the summer the temperature goes as high as 46 Degree which makes a complete sour experience to the passengers to wait for their train in such extreme hot condition at Railway Station.
2. Installation of Escalator on all platforms should be completed at the earliest.
3. Ramp required on all platforms for disabled people and old aged people.
4. GRP Police Residential Quarters to be constructed in Kalaburagi.
5. New Building to be constructed for the GRP Outpost in Kalaburagi.
6. GRP Staff to be hiked.
My Request for New Trains are as follows:
1. New Train from Kalaburagi to Mysore via, Bangaluru as there is huge movement of commuters between Kalaburagi and Mysore via Bangaluru. This new train will also help those who travel to Bangaluru for their regular work.
2. New Train from Kalaburagi to Mumbai, being one the most backward district in Karnataka my Parliamentary Constituency consist of huge SC/ST population which completely depend on daily wages work for their livelihood, for which they prefer to go the Economic Capital of the Country which is known as Mumbai. So frequent commute to Mumbai from this area is very high.
3. New Train from Kalaburagi to Shirdi, as there is huge demands for the pilgrimage to Shirdi. It is a long pending demand by the people of this area.
4. New Train from Kalaburagi to Patna, as Kalaburagi is called as the 'Dall Bowl of India" because it consist more than 400 Dall Mill in the City, where huge number of workers from Bihar and Eastern Uttar Pradesh comes to Kalaburagi in search of job.
5. New Train Bangalore to New Delhi Via Kalaburagi, Bidar as there is no direct train from Bidar to its National Capital. This train will help the people of both the district.
Extension and Halting/Stoppage of current ongoing trains in my Parliamentary Constituency are as follows
1. Request for Stopping/Halting at SHABAD RAILWAY STATION OF Train No 18519/18520 (VSKP –LTT-VSKP). This is long pending request by the people of Shahbad who run to Wadi or Kalaburagi to catch this train though many trains stop at this station.
2. Train No 11307 & 11308 Kalaburagi – Hyderabad – Kalaburagi (Intercity Passenger) and Train No 18519 & 18520 Vishakhapatnam-Lokmanya Tilak Terminal – Vishakhapatnam run via Chittapur and Shahbad but there is no halt. So this train may be given halt at Chittapur and Shahbad which will help the workers who work in Various Cement Factory in this area.
3. BIDAR – KALABURAGI Demu/77655 to be extended till Wadi Station.
4. Train No 01408 SUR KOP Special and Train No 11051 SUR KOP Express which originate from Solapur (SUR) to be extended till Kalaburagi (KLBG) as there are huge number of pilgrims who preach and regularly visit Kolhapur Mahalaxmi Devi Temple from my Parliamentary Constituency.
5. Train No. 16571/16572 Bidar to Yeshwantpur to go via Kalaburagi Railway Station.
6. Train No 19420/19419 Chennai – Ahmadabad – Chennai to Halt at Kalaburagi, it will help the passenger who wish to travel to Chennai and Ahmadabad.
7. Train No 11011/11012 Solapur to Hassan train to be started from Kalaburagi.
8. Train No 12219/12220 Duranto Express should be given halt at Kalaburagi.
9. Train No 22601/22602 train Halt required at Shahbad.
10. As you may know that there is train facility from Gulbarga to Hubli i.e., Hubli – Secunderabad express train number 17320 and 17319 and we are very thankful for providing us with the facility… But there is one request to start a train from Gulbarga to Hubli via Guntkal…there are no train facilities towards Bellary and Hospet from Gulbarga…People from Gulbarga region working in Bellary and Hospet industries are facing problems to travel
11. My last but not the least demand is Pitline at Kalaburagi Solapur Yard.
With this I conclude with quote of Mehmet Murat ildan for my Beloved Hon'ble Minister for Railways Shri Piyush Goyal ji and Hon'ble Minister of State for Railways Shri Suresh Angadi ji "Be like a train; go in the rain, go in the sun, go in the storm, go in the dark tunnels! Be like a train; concentrate on your road and go with no hesitation! 1 DR. JAYANTA KUMAR ROY (JALPAIGURI): Sir, I thank you for giving me this opportunity to speak.
I am from Jalpaiguri Lok Sabha parliamentary constituency of West Bengal. It is in the northern part of West Bengal. This area has long been neglected in different aspects. However, this Government under Shri Narendra Modi is trying to do good to our people.
I want to make only three points as I do not want to take much time. My first point is regarding Padatik Express. Padatik Express is the main lifeline of Jalpaiguri town. This halt is going to be ceased from September, as they are not giving tickets from September onwards. So, I would request the hon. Minister through you for the Padatik Express to continue as before as it is the lifeline of the people of Jalpaiguri.
Secondly, there is a Superfast Express train which goes from Haldibari to Kolkata. Kolkata is about 700 kilometres from Jalpaiguri town. This train comprises of Chair Car and sitting seats only. I would request the hon. Minister for more AC III tier coaches alongwith sleeper coaches also so that patients can travel to Kolkata. As there are no super speciality facilities in our town, more often, patients are referred to places nearby Kolkata or Kolkata itself.
Thirdly, there is an upgradation of railway line from Sealdah to NJP railway station and electrification is going to be completed very soon on that line. If Vande Bharat Express could be provided on that line, then it will cut our time and the time of travel will be reduced.
Lastly, there are many underpasses which have been constructed in our area. They are flooded with water. I would request the hon. Minister to look into this matter so that passengers or vehicles can travel through those underpasses.
2श्री नायब सिंह सैनी (कुरूक्षेत्र): माननीय सभापति जी, आपने मुझे रेल बजट पर बोलने का अवसर दिया,मैं आपका धन्यवाद करना चाहता हूँ ।
मैं आपके माध्यम से सरकार का ध्यान अपने लोक सभा क्षेत्र कुरूक्षेत्र की ओर दिलाना चाहता हूँ । सबसे पहले मैं हरियाणा के मुख्यमंत्री आदरणीय मनोहर लाल और हरियाणा की जनता की तरफ से आदरणीय प्रधान मंत्री जी और आदरणीय रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल जी का धन्यवाद करना चाहूँगा । उन्होंने हरियाणा में पिछले पाँच वर्षों में 81 किलोमीटर की नई रेलवे लाइन चालू की, 51 किलोमीटर रेलवे लाइन का दोहरीकरण किया गया, लगभग 561 किलोमीटर के लिए आठ सर्वेक्षण पूरे किये गये । मैं आपको बताना चाहता हूँ कि वर्ष 2009 से 2014 के दौरान पूर्व की सरकारों के कार्यकाल में छह आरओबी और 26 यूआरबी का निर्माण हुआ । परन्तु वर्ष 2014 से 2019 के दौरान 19आरओबी और 125 यूआरबी का निर्माण किया गया । वर्ष 2009 से 2014 के दौरान 46 मानव रहित समपार क्रॉसिंग गेट हटाए गए और वर्ष 2014 से 2019 के बीच में 121 मानव रहित समपार क्रॉसिंग गेट बदले गए । आदरणीय प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में हरियाणा में यह पिछले पाँच वर्षों में हुए हैं । इसके लिए मैं उनका धन्यवाद करना चाहता हूँ ।
मैं आपके माध्यम से सरकार का ध्यान अपने क्षेत्र की कुछ और प्रमुख माँगों की ओर दिलाना चाहता हूँ । हमारे कुरूक्षेत्र में पेहवा महाभारत कालीन विश्व प्रसिद्ध सरस्वती तीर्थ नगरी है । इस तीर्थ नगरी पेहवा में भगवान श्रीकृष्ण के कथन पर महाराजा युधिष्ठिर ने महाभारत के युद्ध में अपने परिजनों के मारे गये वीरों की आत्मिक शांति के लिए यहीं पर क्रिया-कर्म,गति-पिण्ड दान किया था । सरस्वती घाट पेहवा में है, जहाँ पर स्थान करने का अति महत्व है । महाभारत सहित कई पौराणिक ग्रंथों में पेहवा को…(व्यवधान)
माननीय सभापति: आप विषय पर आएँ । आप इतिहास में न जाएँ ।
श्री नायब सिंह सैनी: कुरूक्षेत्र को हरिद्वार, पुष्कर और गया से भी अधिक महत्व दिया गया है । कुरूक्षेत्र के पेहवा में हर वर्ष लाखों की संख्या में तीर्थ यात्री और पर्यटक आते हैं । कुरूक्षेत्र और पेहवा के बीच में 20 किलोमीटर की दूरी है । इसे रेल लाइन से जोड़ा जाए । गुलाचिका एक कस्बा है, जहाँ हरियाणा की सबसे बड़ी मार्बल मार्केट है, जिसके कारण वहाँ पर व्यापारी लोग आते हैं ।
माननीय सभापति: अब आप बैठ जाइए ।
श्री नायब सिंह सैनी: सभापति जी, मेरे क्षेत्र की दो-तीन समस्याएँ हैं, उनके बारे में मुझे बोलने का समय दें । बड़ी मुश्किल से बोलने का समय मिला है ।
माननीय सभापति: आप इतिहास में बहुत जाते हैं, आप मुद्दे पर आइए ।
श्री नायब सिंह सैनी: मैं मुद्दे पर आ रहा हूँ ।
गुलाचिका रेल लाइन का विस्तार पटियाला तक किया जाए ताकि व्यापारियों और ग्राहकों को इसका लाभ मिल सके । कुरूक्षेत्र से यमुनानगर तक एक नई रेल लाइन बनाई जाए । इसे मैं आपके माध्यम से सरकार के ध्यान में लाना चाहता हूँ । कुरूक्षेत्र से हरिद्वार तक एक नई रेल चलाई जाए, जो कुरूक्षेत्र के लोगों की एक बड़ी माँग है । अम्बाला खुडाकलां से एनएच-वन हाइवे तक रोड पर एक आरओबी बनाया जाए ताकि वहाँ के लोगों को इसका लाभ मिल सके । …(व्यवधान)
माननीय सभापति: आप केवल दो वाक्यों में कनक्लूड कीजिए ।
श्री नायब सिंह सैनी: अम्बाला खुडाकलां से एनएच-वन हाइवे तक रोड की रेल लाइन पर एक आरओबी बनाया जाए । यमुनानगर से चंडीगढ़ रेल लाइन का सर्वे हुआ है, इस काम को शुरू कराया जाए ।
आपने मुझे बोलने का समय दिया, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद ।
HON. CHAIRPERSON: Now, Dr. Shashi Tharoor.
3DR. SHASHI THAROOR (THIRUVANANTHAPURAM): Thank you, Mr. Chairman. If you like, in the interest of time, I can just speak the main points and leave the full text on the Table.
HON. CHAIRPERSON: No. You can either speak or lay your written speech. You cannot do both the things.
DR. SHASHI THAROOR: Then, I will speak, Sir.
HON. CHAIRPERSON: But you should conclude your speech within two and a half minutes. Your party’s time is already over.
DR. SHASHI THAROOR: Since most of the larger national issues of the Indian Railways have largely been highlighted by my esteemed colleagues, with your permission, Sir, I would like to quickly bring to the attention of the hon. Minister of Railways, certain critical and long pending issues related to my Constituency of Thiruvananthapuram, which is the Capital of the State of Kerala and one of its largest economic hubs. It attracts a lot of commuters from neighbouring districts but connectivity has become particularly problematic.
We have been waiting for a long time for a suburban train service on the Thiruvananthapuram-Chengannur route, which will increase connectivity with the neighbouring districts. The land acquisition, which is the usual answer given, is already complete. So, it should not be delayed. The Minister would certainly also see the utility in instituting the promised second MEMU service between Thiruvananthapuram and Kollam on the one hand and Nagercoil and Kanyakumari on the other.
Another issue is the frequent delays in popular trains, particularly those that cater to the peak hour commute -- such as the Nagercoil-Kochuveli passenger or the Vanchinad Express – as well as the very short stops at various stations. I can tell you that we have a very famous Technopark in Kazhakoottam station where major trains like Vanchinad Express stop for one minute. It is a safety hazard. There are literally thousands of people to get on and get off in that one minute. This kind of thing has to be fixed. There are major institutions like the Vikram Sarabhai Space Centre that are dependent on this train, and I think, the Minister must be reasonable about these things.
Many of our stations like Neyattinkara, Nemon, Parassala, Balaramapuram and Kazhakootam need urgent overhaul and modernisation of infrastructure including the provision of basic drinking water facilities, toilets, parking facility, re-roofing of platforms.
Leaky trains have happened in Kerala. There was a passenger, who complained that water was flowing into the train during the rain. So, this has to be improved.
I would make just two more points and conclude. A prominent request from my Constituency has been the need to establish a dedicated train on the Thiruvananthapuram-Velankanni-Madurai route, a famous pilgrimage route. It will cater to a lot of devotees in Kerala, who frequently travel to both these spiritual centres. At the same time, there is also an immense need for additional train service and connectivity between Thiruvananthapuram and the major cities of South India.
Finally, Sir, on infrastructure development, there is an urgent need for timebound completion of the long standing proposal to double the tracks between Thiruvananthapuram and Kanyakumari and to double the works between Thiruvananthapuram and Kottayam/Alappuzha.
Sir, the automatic signalling system had been announced a long time ago but has not been finished yet. So, it has to be taken care of.
Finally, Sir, we do need a lot more basic facilities. Recently, on the floor of the House, I had drawn the attention of the Minister on the need to provide internet and WiFi facilites in all long distance trains that either pass through or stop at Thiruvananthapuram, such as the Nizamuddin Rajdhani, the Mumbai Jayanti Janatha or Kerala Express, for the convenience of passengers. I am sure that everybody would agree with me that such improvement will allow passengers to attend to emails and work, or even access entertainment options. All this may attract more commuters to consider travelling by railways over other options.
In the end, I must stress that while the majority of these concerns relate to Thiruvananthapuram, if the Minister were to act on these issues, it will be beneficial for the State of Kerala as a whole in terms of the convenience of regular commuters, increased frequency of trains and improved infrastructure.
I do hope that the hon. Minister will take my suggestions in a constructive manner. With these words, I conclude.
4श्री सुभाष चन्द्र बहेड़िया (भीलवाड़ा): धन्यवादसभापति महोदय,मेरे लोकसभा क्षेत्र में वर्ष2013 में जब यूपीए सरकार थी,तब एक मेमू कोच कारखाने का शिलान्यास रखा गया था, पर उसमें कोई काम नहीं हुआ । मैंने पिछले सत्र में यह मालूम किया तो बताया गया कि मेमू कोच की अभी आवश्यकता नहीं है । अत: आपके माध्यम से मेरा माननीय रेलवे मंत्री जी से आग्रह है कि अगर वहां मेमू कोच कारखाना नहीं लगे तो कोई दूसरा कारखाना लग जाए, क्योंकि रेलवे की काफी जमीन पड़ी हुई है और वहां सारी फैसिलिटी भी हैं । अत: दूसरा कारखाना लगाने के लिए काम किया जाए । दूसरा यह कि आजादी से पहले रेलवे लाइन का सर्वे हुआ था और जयपुर, टोडारायसिंह, सापुरा, लांबिया तक काम भी शुरू हो गया था । टोडारायसिंह तक मीटर गेज रेलवे लाइन बनी और आगे की कच्ची रोड का वर्क हो गया था तथा कुछ पटरियां भी डल गई थीं, लेकिन गेज कन्वर्जन में अभी टोडारायसिंह का गेज कन्वर्ट नहीं किया गया और जो रेलवे लाइन थी, उसे भी उखाड़ लिया गया ।
महोदय, मेरा आग्रह है कि नई रेलवे लाइन भले ही न बनाएं, लेकिन जिसका कन्वर्जन करें उसको आगे शाहपुरा होते हुए लांबिया तक ले जाया जाए । तीसरी जो सबसे बड़ी समस्या आ रही है,वह यह है कि जो रेलवे नए अंडरपासेज़ बना रही है, उन सारी जगहों पर अंडरपास छोटे बन रहे हैं । उसमें से बस नहीं निकल सकती और उनमें पानी भरने की समस्या बहुत ज्यादा आ रही है । जहां सिंचित क्षेत्र हैं, वहां पर नहरों के कारण पानी भर जाता है और आवागमन में बहुत दिक्कत होती है । इसका कोई परमानेंट इलाज किया जाना चाहिए । चौथी यह कि अजमेर से भीलवाड़ा-चित्तौड़ होते हुए जाने वाली लाइन पर काफी हैवी ट्रैफिक है, इसलिए इसका दोहरीकरण किया जाना चाहिए । बाकी हमारे यहां बहुत अच्छा काम हुआ है । उसके लिए धन्यवाद ।
23.00 hrs 5 श्री सुब्रत पाठक (कन्नौज): सभापति जी, सबसे पहले मैं भारत की पहली वित्त मंत्री जी को शानदार बजट पेश करने के लिए धन्यवाद देना चाहता हूं । मैं भारत के प्रधान मंत्री जी को भी धन्यवाद देना चाहता हूं, जिन्होंने मुझे प्रथम बार इस सदन में आने का अवसर दिया और मुझे भारत के इतिहास का हिस्सा बनने बनने का मौका दिया,जिसमें भारत की पहली वित्त मंत्री ने बजट प्रस्तुत किया है ।
महोदय,मैं कन्नौज संसदीय क्षेत्र से आता हूं और मैंने बचपन से अब तक जितना सफर किया है, उसमें से सर्वाधिक रोड और हवाई जहाज से किया है । रेलवे से सफर नहीं करने का सबसे बड़ा कारण यह है कि हमारे क्षेत्र में खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में रेलवे का विकास नहीं हो पाया है । वहां रेलवे की लाइन्स नहीं हैं । साथ ही रेलवे स्टेशनों पर गंदगी भी एक बड़ा कारण है जिसकी वजह से रेलवे स्टेशन पर जाने की इच्छा ही नहीं होती थी । मैं भारत के रेल मंत्री पीयूष गोयल जी का धन्यवाद देना चाहता हूं और पूर्व रेल मंत्री सुरेश प्रभु जी का भी,जिन्होंने रेलवे का इस प्रकार से विकास किया है कि देश के प्रमुख स्टेशनों पर लिफ्ट,एस्कलेटर, प्लास्टिक बोतल क्रशर मशीनें,मशीनीकृत सफाई और हाउसकीपिंग इत्यादि का प्रावधान हमारे देश भर के स्टेशनों पर किया जा रहा है । इसके लिए मैं उनको धन्यवाद देना चाहता हूं । साथ ही मैं कहना चाहता हूं कि हमारे देश में बुलेट ट्रेन के साथ-साथ वंदे भारत जैसी तमाम हाईस्पीड ट्रेन्स पिछले पांच वर्ष में चलाई गई हैं । हमारे देश के तमाम स्टेशन एयरपोर्ट के जैसे विकसित हो रहे हैं । इसके लिए मैं प्रधान मंत्री सहित उनकी पूरी टीम को धन्यवाद देना चाहता हूं ।
अध्यक्ष जी, मैं कन्नौज संसदीय क्षेत्र से आता हूं । कन्नौज का गौरवशाली इतिहास रहा है । कन्नौज सम्राट हषवर्द्धन की राजधानी हुआ करता था ।
माननीय सभापति: आप विषय पर आइए, इतिहास में मत जाइए ।
श्री सुब्रत पाठक: महोदय, मैं विषय पर आ रहा हूं । कन्नौज उनके समय पूरे भारत की राजधानी हुआ करती थी और एक समृद्धशाली नगरी थी । लेकिन कन्नौज का जिस प्रकार से इतिहास है,उस प्रकार से उसका विकास नहीं हुआ है । कन्नौज को इत्र और अरोमा के लिए भी जाना जाता है ।
महोदय,कन्नौज में ट्रेनों का सुगम यातायात न होने के कारण से समुचित विकास नहीं हो सका है । इसलिए मैं भारत सरकार से आपके माध्यम से मांग करना चाहता हूं कि हमारे क्षेत्र में कन्नौज रेलवे स्टेशन को सम्राट हर्षवर्द्धन के नाम से जोड़ा जाए । कन्नौज स्टेशन को बड़ी लाइन से जोड़ा जाए । कन्नौज से लखनऊ और दिल्ली के लिए सीधी लाइन बिछाई जाए । इसी प्रकार हमारे संसदीय क्षेत्र कन्नौज को रेलवे नेटवर्क से जोड़ते हुए, कन्नौज से तिर्वा, विधुना होते हुए इटावा तक,कन्नौज से ठठिया रसूलाबाद होते हुए झींझक तक,गुरसहायगंज से छिबरामऊ सौरिख होते हुए मैनपुरी तक और इसी प्रकार कन्नौज से हरदोई जिले को भी आपसे जोड़ने की मांग करता हूं ।
6*श्री सी. पी. जोशी (चित्तौड़गढ़): देश के वर्ष 2019-20 के बजट के पर अपने विचार व्यक्त करता हूं । देश के प्रधानमंत्री जी व देश के वित्त मंत्री महोदया को भी धन्यवाद देना चाहूंगा जिन्होंने देश के हर वर्ग के हितों को ध्यान में रखकर इस बजट को देश के समक्ष प्रस्तुत किया है । इस चुनाव में देश की जनता ने बहुत ही स्पष्ट जनादेश दिया है । सरकार के पहले कार्यकाल के मूल्यांकन के बाद, देशवासियों ने दूसरी बार और भी मजबूत समर्थन दिया है । ऐसा करके देशवासियों ने वर्ष 2014 से चल रही विकास यात्रा को अबाधित और तेज गति से आगे बढ़ाने का जनादेश दिया है । पिछले 5 वर्षों में रेलवे ने अनेकों नए आयाम स्थापित किए हैं तथा कई नए नवाचारों के माध्यम से विश्वस्तरीय सुविधाओं को रेलवे ने देश के नागरिकों के समक्ष प्रस्तुत किया । राजस्वः 2019-20 के लिए रेलवे का राजस्व 2,16,935 करोड़ रुपये अनुमानित है जो 2018-19 में, माल यातायात से राजस्व में 6 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि यात्री यातायात से राजस्व में कोई परिवर्तन नहीं देखा गया । 2019-20 के लिए रेलवे द्वारा कुल व्यय 2,07,900 करोड़ रुपये अनुमानित है, जो 2018-19 के संशोधित अनुमानों से 9 प्रतिशत की वृद्धि है ।
रेल अवसंरचना को 2018-2030 के बीच 50 लाख करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश की आवश्यकता होगी । पीपीपी का उपयोग तेजी से विकास और पटरियों के पूरा होने, स्टॉक विनिर्माण और यात्री माल सेवाओं के वितरण में मदद करने के लिए किया जाएगा ।
भारतीय रेलवे को दिल्ली-मेरठ मार्ग पर प्रस्तावित रैपिड रीजनल ट्रांसपोर्ट सिस्टम जैसे विशेष प्रयोजन वाहन संरचनाओं के माध्यम से उपनगरीय रेलवे में अधिक निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा । पारगमन केंद्रों के आसपास व्यावसायिक गतिविधि सुनिश्चित करने के लिए पारगमन उन्मुख विकास को प्रोत्साहित किया जाएगा ।
रेलवे यात्रा को आम नागरिक के लिए सुखद और संतोषजनक अनुभव प्रदान करने के लिए, इस वर्ष एक बड़े पैमाने पर रेलवे स्टेशन को आधुनिकीकरण कार्यक्रम शुरू किया जाएगा ।
सुरक्षा पर खर्च में राजस्व व्यय शामिल हैं जैसे कि पटरियों और वैगनों की मरम्मत और रखरखाव, आदि । इसमें पूंजीगत व्यय शामिल हैं जैसे ट्रैक नवीकरण, पुल कार्य, लेवल क्रॉसिंग बनाना, और अंडर ब्रिज एवं ओवर ब्रिज । केंद्रीय बजट 2017-18 में, रेलवे में यात्री सुरक्षा प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय रेल सुरक्षा कोष बनाया गया था । आमतौर पर, सुरक्षा निधि का उपयोग मानव रहित स्तर के क्रॉसिंग को खत्म करने और सिग्नलिंग सिस्टम को सुधारने और आधुनिकीकरण करने के लिए किया जाता है । पांच साल की अवधि में यह एक लाख करोड़ रुपये का कोष था यानि प्रति वर्ष 20,000 करोड़ रुपये ।
इंटीग्रल कोच फैक्ट्री द्वारा 97 करोड़ रुपये की लागत से बनाई गई सबसे तीव्र गति वाली ट्रेन 18 ने 180 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम गति हासिल की भारत की सबसे तेज गति वाली शताब्दी ट्रेनों की जगह ले रही है । टी 18 दिल्ली से वाराणसी तक सफलतापूर्वक चल रही है । भारत ने वंदे भारत एक्सप्रेस के साथ गतिशीलता के एक नए युग में प्रवेश किया-भारत की पहली उच्च तकनीक, उर्जा-कुशल, स्व-चालित ट्रेन । यह मेक इन इंडिया आंदोलन की सफलता का एक प्रमुख उदाहरण है । प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने क्रिसमस पर असम में एशिया का दूसरा सबसे लंबा पुल खोला । पुल के उद्घाटन के 16 साल बाद इसे खोला गया है । पुल के चालू होने से असम में तिनसुकिया और अरुणाचल प्रदेश में नाहरलगुन के बीच यात्रा समय करीब 10 घंटे तक कम हो गया है । रेलवे ने दुनिया में पहली बार डीजल से चलने वाले ईंजन को इलेक्ट्रिक इंजन में बदला । वाराणसी, उत्तर प्रदेश में भारतीय रेलवे, डीजल लोकोमोटिव वर्क्स के लिए रिकॉर्ड स्थापित करते हुए, मिशन विद्युतीकरण को सक्षम करने के लिए डीजल लोको को इलेक्ट्रिक लोको में परिवर्तित करने का दुनिया में सफलतापूर्वक क्रियान्वित किया गया है । रेलवे ने अपना पहला परिवहन विश्वविद्यालय राष्ट्रीय रेल एवं परिवहन संस्थान (एनआरटीआई) स्थापित किया । यह संसथान गुजरात के वडोदरा में खोला गया । रूस और चीन के बाद यह दुनिया का तीसरा ऐसा विश्वविद्यालय है । मुंबई उपनगरीय रेलवे के लिए पहली बार कंडीशंश लोकल ट्रेन के साथ रेलवे के खाते में एक और उपलब्धि जुड़ गई । ऐसी और ट्रेनें लाने की तैयारी रेलवे ने की है । पिछले पांच वर्षों में, सरकार ने भारतीय रेलवे की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है । भारतीय रेलवे ने 2018-19 में अपना सर्वश्रेष्ठ सुरक्षा रिकॉर्ड हासिल किया है । यह समग्र प्रयासों का परिणाम है । ब्रॉड गेज नेटवर्क पर सभी मानव रहित लेवल क्रॉसिंग (यूएमएलसीएस) को समाप्त कर दिया गया है । नई लाइन/दोहरीकरण/तीसरी और चौथी लाइन परियोजनाओं को चालू करने की औसत गति में 59 प्रतिशत वृद्धि की गई है । मेरे संसदीय क्षेत्र में बड़ीसादडी से नीमच के मध्य नई लाइन की स्वीकृति हुई है । इसके साथ चित्तोड़गढ़ से नीमच के मध्य दोहरीकरण का कार्य पूर्ण होने को आया है तथा नीमच से रतलाम दोहरीकरण की स्वीकृति भी हुई है । अहमदाबाद-मुंबई हाई-स्पीड रेल (एचएसआर) गति, सुरक्षा और सेवा के माध्यम से भारत में परिवहन क्षेत्र में क्रांति लाएगा । भारतीय रेलवे के ब्रॉडगेज रूट्स का 100 प्रतिशत विद्युतीकरण 2021-22 तक लक्षित है । अजमेर-चित्तोड़गढ़-उदयपुर विद्युतीकरण पूर्ण हो गया है तथा रतलाम-चित्तोड़-कोटा विद्युतीकरण का कार्य प्रगति पर है यह कार्य होते ही चित्तोड़गढ़ चारों दिशाओं से विद्युतीकरण से जुड़ जाएगा । रेलवे ने देश की अर्थव्यवस्था को 2018-19 में सबसे अधिक माल ढुलाई के साथ तेजी से आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है । फ्रेट की कमाई उनके उच्चतम स्तर को छू गई है । डेडिकेटेट फ्रेट (डीएफसी) भारत के सुपरफास्ट वृद्धि ओर विकास के द्वार हैं । पूर्वी डीएफसी (भदान से खुर्जा, 200 किलोमीटर) और पश्चिमी डीएफसी (रेवाड़ी से मदार, 200 किलोमीटर) के प्रथम खंड पूरे हो चुके हैं । संसदीय क्षेत्र के खेमली में कॉनकोर का कन्टेनर डिपो स्थापित हुआ जिससे सीधे व्यापारियों का माल बंदरगाह तक पहुंचाया जा सकेगा । रेलवे एस्केलेटर, लिफ्ट, मुफ्त वाईफाई, टिकिट एवं वाटर वेंडिग मशीन आदि सहित आधुनिक सुविधाओं को स्थापित करके और डिजाइन में स्थानीय कला का उपयोग करके स्टेशनों के पूर्ण बदलाव सहित यात्री सेवाओं में सुधार कर रहा है । रेलवे ने तेजस, अत्योदय और हमसफर ट्रेनों को शुरू करने और दीन दयाल और अनुभूति कोच सहित ट्रेनों और कोचों में सुधार किया है । यात्रियों को डिजिटल दुनिया से जोड़ने के लिए स्टेशनों पर उच्च गति वाईफाई सेवा प्रदान की गई है । मेरे संसदीय क्षेत्र में भी मैसुर, रामेश्वरम्, दिल्ली, पाटलिपुत्र के लिए हमसफर व एक महामना एक्सप्रेस की शुरुआत हुई । टिकटिंग को सुविधाजनक और परेशानी मुक्त बनाने के लिए पेपरलेस अनारक्षित टिकटिंग (यूटीएस) की मोबाईल एप को चालू किया गया । इस बार रेलवे पहली बार टिकटिंग, शिकायतों का समाधान, फूड मेन्यू, ट्रेनों का पता लगाने के लिए कई ऐप लेकर आया । खानपान और गुणवत्ता में सुधार के लिए रसोई में खाद्य उत्पादन की निगरानी के लिए सभी खाद्य पदार्थों पर एमआरपी की अनिवार्य छपाई और आर्टीफिशल इन्टेलिजेंसी के उपयोग के साथ खानपान भी एक फोकस क्षेत्र रहा है । महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत अभियान में योगदान के लिए, रेलवे ने जैव-शौचालय, थर्ड पार्टी स्वतंत्र सर्वेक्षण, एकीकृत सफाई व्यवस्था और बोर्ड हाउसकीपिंग सर्विसेज के रिकॉर्ड स्थापना जैसे प्रयासों के साथ स्वच्छता पर ध्यान दिया है । भारतीय रेलवे भी पर्यटन को बढ़ावा देने और पर्यटकों को एक अद्भुत अनुभव प्रदान करने में अपनी भूमिका निभा रहा है । यह रामायण एक्सप्रेस, पंजतख्त एक्सप्रेस और बोद्ध सर्किट ट्रेन की शुरुआत जो देश में पर्यटन को बढ़ावा दे रही है । भारतीय रेलवे में डिजिटलीकरण के सभी प्रयासों को शामिल करते हुए और पादर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने के लिए रेल दृष्टि डैशबोर्ड लॉन्च किया गया है । जहां रेल से संबंधी सभी जानकारी उपलब्ध है । रेलवे परिवार को सशक्त और सशक्त बनाने के महत्व को समझते हुए, शक्तियों के प्रत्यायोजन सहित विभिन्न कदम उठाए गए हैं । 1.5 लाख रिक्त पदों को भरने के लिए ऐतिहासिक भर्ती अभियान चलाया जा रहा है । अगले दो वर्षों में लाखों व्यक्तियों की भर्ती की जाएगी । मेरे संसदीय क्षेत्र में भी रेलवे ने इतने आयाम स्थापित किए जितने आजादी के बाद से अब तक नहीं हुए चाहे वो नई रेल लाइन हो, आमान परिवर्तन हो, विद्युतीकरण हो या दोहरीकरण हो, नए सर्वे कार्य हो, नई ट्रेनों का प्रारंभ होना हो सभी क्षेत्रों में कार्य हुआ है । लेकिन इनके साथ में रेल मंत्री से मेरे संसदीय क्षेत्र में रेलवे से संबंधित कुछ समस्याओं का ध्यानाकर्षण करना चाहूंगा ।
• प्रतापगढ़ जिला जहां मन्दसौर से प्रतापगढ़ एंव प्रतापगढ़ बासंवाडा नई रेल लाइन का सर्वे हो चुका है । वहां नई रेल लाइन स्थापित की जाए ।
• नीमच-सिंगोली-रावतभाटा-कोटा मार्ग का सर्वे हो गया है यहां पर रेल लाइन की स्वीकृति की आवश्यकता है ।
• चित्तौड़गढ़ से अजमेर तथा कोटा को दोहरीकरण किया जाए वर्तमान में दोनों विद्युतीकरण से जुड़ रहे हैं । चित्तौड़गढ़ से रतलाम दोहरीकरण का कार्य प्रगति पर है इनका दोहरीकरण रेलवे की हाईस्पीड रेलों को मेवाड़ में दस्तक देगा ।
• मावली-मारवाड़ आमान परिवर्तन के कार्य को शीघ्र प्रारंभ करने की आवश्यकता है ।
• उदयपुर-हिम्मतनगर के आमान परिवर्तन कार्य में शिथिलता की वजह से उदयपुर को जो रेलवे से सौगातें मिलनी चाहिए नहीं मिल पा रही हैं ।
• मावली-बड़ीसादड़ी का आमान परिवर्तन अन्तिम पड़ाव में है । यदि इसके साथ-साथ बड़ीसादड़ी नीमच का कार्य भी द्रुत गति से प्रारंभ हो जाए तो इसका अत्यधिक लाभ मिलेगा ।
• अजमेर से चित्तौड़गढ़ तक रूट अब विद्युतीकृत हो गया है । अतः दिल्ली से अजमेर आने वाली शताब्दी को चित्तौड़गढ़ तक बढ़ाया जा सकता है ।
बजट वर्ष 2019-20 के लिए रेल मंत्रालय की अनुदान की मांगों का मैं समर्थन करता हूं । धन्यवाद ।
7श्री विनोद लखमशीचवाड़ा (कच्छ): सभापति महोदय, आपने मुझे रेल बजट पर बोलने का अवसर दिया, आपका धन्यवाद ।
महोदय,मैं विशेष धन्यवाद प्रधान मंत्री जी, वित्त मंत्री जी और रेल मंत्री जी का भी करना चाहता हूं । आज का बजट रेल को ऊंचाइयाँ और श्रेष्ठतम सेवा देने के लिए लाया गया है । मैं उनको बधाई देता हूं । खास कर के रेल बजट में मेट्रो,रेपिड रेल,पीपीपी मॉडल के तहत प्राइवेट ट्रेन और सिग्नल का आधुनिकीकरण,रेलवे स्टेशन पर मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब इत्यादि ।
माननीय सभापति: आप अपने क्षेत्र का विषय रखें ।
श्री विनोद लखमशीचवाड़ा:ऐसे 22 स्टेशनों का विस्तृतीकरण,पुनर्निमाण,रेलवे इंजनों का आधुनिकीकरण जैसे बहुत सारे प्रावधान इस बजट में किए गए हैं ।
सभापति महोदय, अगर पिछले पांच सालों की बात करें, तो मेरे कच्छ लोक सभा क्षेत्र के रेलवे स्टेशन और बाकी रेलवे स्टेशन्स, जैसे हर रेलवे स्टेशन को कला-कृति,संस्कृति और ग्राम्य जीवन से जोड़ा गया है, वहां स्वच्छता अभियान के तहत टॉयलेट, सफाई का काम, वाई-फाई, डिजिटलीकरण का काम तथा अलग-अलग प्रकार के छोटे-छोटे काम हुए हैं । हर रेलवे स्टेशन पर इंडीकेटर लगा दिया जाए, ताकि वह प्लेटफॉर्म पर दिखे, वहां पर एक्सीलेरेटर लगाया जाए, वहां पर लिफ्ट लगाई जाए, प्लेटफार्मों का विस्तारीकरण हो, कवर शेड लगाया जाए, अलग-अलग तरह के पिछले पांच सालों में देश के बहुत सारे रेलवे स्टेशनों में डेवलेपमेंट का काम हुआ है ।
सभापति महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय रेल मंत्री जी के सामने अपने क्षेत्र की कुछ बातें रखना चाहता हूं । पिछले पांच सालों में काफी चेन्जेस हुए हैं, कई नई ट्रेनें चलाई गई हैं और मेरे यहां पर रेलवे स्टेशन का अपग्रेडेशन और डेवलेपमेंट का काम हुआ है । लेकिन मैं यह कहना चाहता हूं कि मेरे यहां पर जो भुज से नलिया के ब्रॉडगेज का काम पिछले कई सालों से अटका पड़ा था,उसे जल्द से जल्द चालू किया जाए । इसके अलावा मेरी एक और मांग है कि भुज से दिल्ली के लिए एक ही ट्रेन चलती है, इसलिए एक और ट्रेन चलाई जाए । भुज-मुंबई एक सुपरफास्ट ट्रेन चलाई जाए । कच्छ-सौराष्ट्र से हमारा एक सामाजिक लगाव है, वहां पर भी एक ट्रेन चलाई जाए । इसके अलावा मेरा कच्छ एक लघु भारत है, क्योंकि वहां पर कई राज्यों के लोग निवास करते हैं । वहां पर अलग-अलग राज्यों के लोगों की मांग रहती है कि गांधीधाम से दरभंगा, गांधीधाम से गोरखपुर, भुज से हरिद्वार,ग्वालियर, अहमदाबाद,…(व्यवधान) ऐसे अलग-अलग राज्यों के लिए भी ट्रेनें चलाई जाएं ।…(व्यवधान)मैं आपके माध्यम से माननीय रेल मंत्री जी से यह मांग करता हूं ।
8श्री नारणभाई काछड़िया (अमरेली) :सभापति महोदय, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद । मैं पहले हमारे प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र भाई मोदी जी, हमारी वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण जी…(व्यवधान)
माननीय सभापति: नारणभाई, आप विषय पर आइए, क्योंकि समय बहुत कम है ।
श्री नारणभाईकाछड़िया : महोदय, मैं श्री अनुराग सिंह ठाकुर जी और माननीय रेल मंत्री जी को बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं । आपने मुझे रेल मंत्रालय की अनुदानों की मांगों पर चर्चा में भाग लेने का मौका दिया है, इसलिए मैं आपको भी बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं । आज हम गांधी जी की 150वीं जयंती मनाने जा रहे हैं और आने वाले 2022 में हम आज़ादी की 75वीं वर्षगांठ मनाएंगे । पिछली सरकारों ने इस देश में 55 सालों से भी ज्यादा समय तक शासन किया है, लेकिन जो देश की दुर्दशा हुई है, खासकर रेलवे में, हमें आज तक उसके बारे में सोचना पड़ता है । इसलिए मैं यह कहना चाहता हूं कि मेरे डिस्ट्रिक्ट अमरेली (गुजरात)में…(व्यवधान)
माननीय सभापति : आप अमरेली की बात कीजिए ।
श्री नारणभाईकाछड़िया: महोदय, अंग्रेजों ने 1912 में रेल लाइन बिछाई थी । आज 2019 चल रहा है, 100 साल से भी ज्यादा समय हो गया, लेकिन रेल खंड का एक भी पुर्जा नहीं बदला गया था । लेकिन श्री नरेन्द्र भाई मोदी जी की सरकार आने के बाद और वर्ष 2014 के बाद मेरे क्षेत्र में अभी जो ब्रॉडगेज के माध्यम से काम हुआ है, वह आज 72 सालों की आज़ादी के बाद हुआ है । मैं सीधे अपनी डिमांड पर आता हूं ।
सभापति महोदय, मेरे क्षेत्र ढासा से खिजडिया, लुनिधार और लुनिधार से जैतलसर लाइन के ब्रॉडगेज का काम चल रहा है । वह काम पिछले दो सालों से चल रहा है, वह बहुत ही धीमी गति से चल रहा है । अगर वह इसी तरीके से चलता रहेगा, तो उसको और दो साल लगेंगे, इसलिए उस काम को गति दी जानी चाहिए । दूसरे, खिजड़िया, अमरेली, चलाला, धारी, विसावदर, तलाला, जूनागढ़, प्राची और कोडीनार के ब्रॉडगेज में परिवर्तन करना चाहिए । रेल विकास निगम की ओर से उसका डीपीआर और एस्टीमेट भी बनकर आ गया है और उसे रेल विभाग को दे दिया गया है । गरियाधार से पालिताना, जो विश्व का सबसे बड़ा जैन धर्म का धर्मस्थल है ।…(व्यवधान)
माननीय सभापति : कन्क्लूड कीजिए ।
श्री नारणभाईकाछड़िया: सभापति महोदय, बस एक मिनट और दे दीजिए । वहां जैन धर्म का धर्मस्थल है । उसके लिए वर्ष 2015 में 369 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया था ।
उसका भी काम रुका हुआ है । आखिर में मैं यह कहूंगा कि जो सूरत-मुंबई और अहमदाबाद जो बांद्रा-महुआ ट्रेन चलती है, आज मेरे क्षेत्र से 10-12 लाख लोग सूरत-मुंबई और अहमदाबाद में बसर कर रहें,अपने काम-धंधों के लिए हैं, लेकिन मेरे क्षेत्र से 300 से ज्यादा प्राइवेट लग्ज़री बस चलती हैं । लेकिन इस ट्रेन को जल्द से जल्द चलाया जाए, मैंने बार-बार उसकी मांग की है । …(व्यवधान)
*हमारी सरकार ने इस बजट में रेलवे सेक्टर को पीपीपी मॉडल के आधार पर विकास करने की घोषणा की है । हम जानते है की रेलवे की सभी मंजूर परियोजनाओं को पूरा करने में कई दशक लग जाते है और 2014 से पहले यू.पी.ए. सरकार की भ्रष्टाचारपूर्ण नीतियों के चलते रेलवे के संसाधनों का उनके कार्यकाल में अनैतिक दोहन हआ है, जिस कारण भारतीय रेल के आधारभूत ढांचे के विकास की प्रक्रिया को बनाए रखने के लिए धन एवं अन्य संसाधनों की आवश्यकता है । इसलिए हमारी सरकार निर्धारित समय में रेलवे परियोजनाओं के तीव्र विकास और पटरियां बिछाने, रेलिंग स्टाक विनिर्माण तथा यात्री मालभाड़ा सेवाओं की सुपुर्दगी के लिए सरकारी निजी भागीदारी(पी.पी.पी.) का इस्तेमाल करने की योजना बनाई है ताकि निर्धारित समय में लक्ष्य को पूरा कर सके । मैं सरकार के इस कदम का स्वागत करता हूँ क्योंकि सरकारी निजी भागीदारी से देश में रोजगार की भारी वृद्धि होगी और रेलवे को अच्छे राजस्व का मुनाफा मिलेगा ।
मैं अपने संसदीय क्षेत्र की कुछ माँगें रखना चाहता हूँ - भावनगर डिवीज़न के खिजडीया-विसावदर सेक्शन में हो रहे गेज परिवर्तन के कार्य की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ । हमारे संसदीय क्षेत्र में पश्चिमी रेलवे द्वारा भावनगर डिवीज़न के अंतर्गत (1) विसावदर-जूनागढ़, (2) बेरावाल, तलाला, विसावदर की लाइने जिनका गेज परिवर्तन का कार्य आर.वी.एन.एल. के माध्यम से किया जा रहा है । उक्त कार्य के संबंध में रेलवे बोर्ड द्वारा प्राप्त निर्देश के अनुसार (इलेक्ट्रिकल सब-एस्टीमेट) में संसोधित डी.पी.आर. पश्चिमी रेलवे को दिनांक 12/04/2019 को भेज दिया गया है । लेकिन अभी तक पश्चिमी रेलवे की तरफ से कोई भी अनुमोदन प्राप्त नहीं हुआ है, जिसकी वजह से सारा प्रोसेस अभी तक लंबित है ।
मेरे संसदीय क्षेत्र में रेलवे लाइन के दोहरीकरण हेतु ढासा,खिजडिया,लुनिधार, जैतलसर लाइन के दोहरीकरण के लिए 402 करोड़ रूपये का बजट मंजूर हुआ है,जिसके कार्य संचालन हेतु दो हिस्सों में निविदाएँ प्राप्त हुई हैं । पहला- ढसा से लुनिधार जो 49.50 कि.मी. है, के लिए191 करोड़ रूपये का आबंटन हुआ तथा दूसरा- लुनिधार जैतलसर जो 55 कि.मी. का है, के लिए181 करोड़ रूपये का आबंटन हुआ है । इन दोनों कार्यों को शुरू करने के लिए 15 जून 2016 को टेंडर हुआ था और इनका कार्य दो कंपनियों के माध्यम से किया जा रहा है । कार्य को पूर्ण करने का समय साढ़े तीन साल निर्धारित किया गया है ।
यह कार्य अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण अत्यंत ही धीमी गति से चल रहा है । मेरा माननीय मंत्री जी से निवेदन है की इस परियोजना को पूर्ण करने के लिए पर्याप्त कोष का आवंटन किया जाये ।
भावनगर डिवीज़न के अंतर्गत तीसरी परियोजना जो हमारे संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत चार नयी लाइने1)विसावदर-जूनागढ़, 2) विसावदर-तलाला-बेरावाल, 3) तलालाडेल्वाडा, 4) कोडीनार-प्राची की लाइने अमरेली से होकर गुजरती हैं और इन चारों लाइनों के अंतिम सर्वे हेतु पहले एक-एक करोड़ रूपये की स्वीकृति हुई थी परन्तु अभी तक कोष आबंटन नहीं होने के कारण इस कार्य में कोई भी प्रगति नहीं हो पा रही है ।
खिजडिया-अमरेली-चलाला-धारी-विसावदर परियोजना के साथ यदि इन चारों योजनाओं के लिए भी यदि कोष आबंटित कर दिया जाये तो सभी परियोजनाएं एक साथ पूर्ण हो जाएंगी जिसका पूर्ण लाभ अमरेली की जनता को वृहद् रूप से मिलेगा और अमरेली का विकास एक रेलवे जंक्शन के तौर पर हो पायेगा ।
भावनगर डिवीज़न के अंतर्गत (1)विसावदर-जूनागढ़, (2) बेरावाल,तलाला, विसावदर की लाइने का गेज परिवर्तन का कार्य का अनुमोदन दिया जाये ताकि जल्द से जल्द इस प्रोजेक्ट को पूरा किया जा सके, जिसका पूर्ण लाभ अमरेली की जनता को वृहद् रूप से मिलेगा और अमरेली का विकास एक रेलवे जंक्शन के तौर पर हो पायेगा और रेलवे मंत्रालय को भी इससे बहुत लाभ होगा ।
वर्ष2015के बजट मे हमारे संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत गरियाधार से पालिताना तक नई रेलवे लाईन बिछाने हेतु ट्रैफिक सर्वे के कार्य के लिए मंजूरी मिली थी, जिसे पूर्ण कर अक्टूबर2015 में ही पश्चिम रेलवे के प्रबंधक महोदय द्वारा सर्वे की रिपोर्ट केंद्रीय रेलवे बोर्ड को भेज दी गयी है,इसका अनुमानित बजट 369 करोड़ रुपए है ।
यहाँ की आबादी लगभग2 लाख है और इन्हें अबतक रेलवे की सुविधा में वंचित रखा गया है । पालिताना में जैन समाज के प्राचीन तीर्थ स्थल स्थित है जो बहुत प्रसिद्ध है, वहां की कलाकृति अति सुन्दर होने की वजह से दुसरे समुदाय के लोग भी देश-विदेश से पर्यटन की दृष्टि से आते है । यहाँ की इतनी प्रसिद्धी होने बावजूद भी आजादी के समय से अब तक यहाँ रेलवे लाइन तक नहीं बिछाई गई है । यहाँ रेलवे की सुविधा प्राप्त हो जाने से यह स्थल एक पर्यटन की दृष्टि से उभरेगा और यहाँ दर्शन हेतु आने वाले सैलानियों को अति सुविधा प्राप्त होगी और इससे रेलवे को राजस्व की भी प्राप्ति होगी ।
महवा- सूरत ट्रेन नंबर12945-46 को सूरत महवा के बीच प्रतिदिन चलाने एवं समय में परिवर्तन के संबंध में जनता का पुरजोर मांग है , सूरत में सौराष्ट्र (गुजरात) विस्तार के गीर-सोमनाथ,अमरेली, भावनगर और बोटाद जिलों के अनुमानित 20 लाख से भी अधिक लोग रहते हैं,इनमें से हजारों लोग प्रतिदिन सूरत से सौराष्ट्र के बीच आवागमन करते है | सूरत से सौराष्ट्र के इन जिलों में जाने के लिए यह ट्रेन हर बुधवार को सुबह सूरत 05:30 बजे सिर्फ एक ही दिन चलती है, जिस वजह से यात्रियों को बहुत ही असुविधा का सामना करना पड़ता है । सूरत से सौराष्ट्र के इन जिलों में जाने के लिए हर दिन करीब2000 से ज्यादा प्राइवेट और सरकारी बसों एवं अपनी निजी वाहन के माध्यम से सफ़र करते है । इन जिलों में जाने के लिए सूरत से ट्रेन की सुविधा ना होने की वजह से लोगों को मजबूरन रेलवे से अधिक किराया देकर प्राइवेट बसों में जाना पड़ता है , इसके अतिरिक्त मेरे मत क्षेत्र अमरेली के महआ में प्याज का उत्पादन बहूत होता है मेरा आग्रह है की प्याज के किसानो की भलाई के लिए रेलवे के द्वारा प्याज की ढुलाई की व्यवस्था की जाये जिससे वहां के व्यापारियों को और अधिक लाभ मिल सके ।
हमारी सरकार का ध्येय है सबका साथ-सबका विकास । भेदभाव रहित विकास और उसी दिशा में यह सरकार आगे बढ़ रही है, रेल मंत्री जी ने रेलवे को निरंतर प्रगति की दिशा में बढ़ाने का कार्य किया है । एक बार फिर मैं माननीय प्रधानमंत्री जी को तथा रेल मंत्री जी को इस ऐतिहासिक बजट को पेश करने के लिए बहुत बहुत बधाई देता हूँ तथा इसका समर्थन करता है ।* 9 श्री अब्दुल खालेक (बारपेटा): सभापति महोदय, मैं असम के बरपेटा संसदीय क्षेत्र से आता हॅूं । बरपेटा जिला मुख्यालय भी है । कर्नल गुरूप्रसाद दास बारपेटा शहर की संतान हैं । जिन्होंने1930 में रेल वैक्युम ब्रेक का आविष्कार किया था । लेकिन दुख की बात है कि अभी तक बारपेटा शहर जो कर्नल गुरूप्रसाद दास की जन्मभूमि है, अभी तक उस शहर के साथ रेलवे का कनैक्शन नहीं हुआ है । महोदय, दो नई रेलवे लाइनों का सर्वेक्षण हुआ, लेकिन अभी तक उनका कुछ नहीं हुआ है । एक जोगीगोपा से बारपेटा हो कर अमीनगांव तक । दूसरा न्यूबंगाइगांव से बारपेटा हो कर कलगसिया हो कर है ।
सभापति महोदय, बारपेटा शहर एक वैष्णव गुरू महापुरूष श्रीमंत शंकर देव और महापुरूष माधव देव की कर्मभूमि है । वहां बहुत सारे सत्र हैं । इसे सत्रो नगर भी बोला जाता है । यह रेलवे के साथ पर्यटन का भी संपर्क है । टूरिज्म का भी संपर्क है । हादोएसा एक भूमि है हादो में तीन मजहब का, तीन धर्म की पुण्यभूमि है – हिंदुओं की भी है, मुसलमान की भी है, बुद्धिस्ट की भी है । रेलवे के साथ जुड़ने से अच्छा होगा । महोदय, रेलवे में पंक्चुएलिटी एक बहुत बड़ी बात है । रेलवे के अपने तथ्य दिखा रहे हैं कि हम लोगों का जो सन् 2016-17 में पंक्चुएलिटी रेट 76 प्रतिशत था, सन् 2017-18 में वह घट कर कर 71 प्रतिशत पर आ गया और सन् 2018-19 में वह 68 प्रतिशत हो गया ।
सभापति महोदय, ट्रेन कैंसलेशन भी बढ़ गया है । सन् 2014-15 में 3591 ट्रेन्स कैंसल हुई थीं । सन् 2017-18 में 21053 तक ट्रेन्स कैंसल हो गई थी ।
सभापति महोदय, इस हाऊस में राष्ट्रवाद का भी जिक्र हुआ । लेकिन जब लोग ट्रेन में यात्रा करें तब उनकी सुरक्षा होनी चाहिए । अगर मॉब लिंचिंग होता रहेगा, अगर रेल यात्रा में कोई लोग सोचेंगे कि हमें डर है, तब राष्ट्र मजबत नहीं होगा । राष्ट्रवाद के लिए, राष्ट्र की मजबूती के लिए लोगों को सुरक्षा महसूस होनी चाहिए ।
0श्री अनिल फिरोजिया (उज्जैन): सभापति महोदय, आपने मुझे बोलने का अवसर दिया, उसके लिए आपको धन्यवाद करता हॅूं । मैं मननीय प्रधान मंत्री जी और माननीय वित्त मंत्री जी का भी बहुत-बहुत धन्यवाद करता हॅूं । माननीय प्रधान मंत्री जी का विशेष अभिनंदन करता हॅूं कि जिन्होंने एक महिला, जो कि आधी आबादी का प्रतिनिधित्व कर रही हैं, उनको वित्त मंत्री का जिम्मा सौंपा । चूंकि समय का आभाव है, इसलिए मैं सीधे अपने विषय पर आ रहा हॅूं ।
महोदय,माननीय रेल राज्य मंत्री श्री मनोज सिन्हा जी, जो पहले रेल राज्य मंत्री हुआ करते थे, 26 जून 2016 को उज्जैन प्रवास पर आए थे और उन्होंने घोषणा की थी कि अमृतसर एक्सप्रेस को सप्ताह में एक दिन उज्जैन से हो चलाया जाएगा । लेकिन आज तक वह ट्रेन प्रारंभ नहीं हुई है । हमारी जनता उसका इंतजार कर रही है ।
महोदय,मैं आपके माध्यम से माननीय रेल मंत्री जी से एक मांग करता हॅूं कि हमारे उज्जैन से, इंदौर से सन् 1932 से 1975 तक इंदौर से आगर होते हुए झालावाड़ तक की रेलवे लाइन थी, जो सन् 1975 मीसा में उसको बंद कर दिया गया,उसको पुन: प्रारंभ किया जाए । तात्कालिक सांसद और मौजूदा केन्द्रीय मंत्री माननीय थावर चंद गहलोत जी, माननीय सत्यनारायण जटिया जी, माननीय प्रेमचन्द गुड्डू जी ने भी इसकी मांग की थी । इसका सर्वे दो-तीन बार हो चुका है । मैं आपके माध्यम से रेल मंत्री जी से मांग करता हूँ कि यह रेल प्रारम्भ की जाए । इससे जनता को काफी फायदा होने वाला है ।
माननीय सभापति महोदय,मैं आपके माध्यम से रेल मंत्री जी से मांग करता हूँ कि हमारे उज्जैन में, चूंकि बाबा महाकाल की नगरी है, काफी धार्मिक लोग आते रहते हैं, इंदौर से भोपाल वाया उज्जैन होते हुए इंटरसिटी ट्रेन जाती थी, जिसको बायपास कर दिया है, कृपया उसको प्रारम्भ किया जाए । जयपुर-भोपाल एक्सप्रेस तराना रोड स्टेशन पर उसका ठहराव किया जाए । इंदौर-मुम्बई सेंट्रल दुरंतो एक्सप्रेस को दोनों दिशाओं पर ठहराव दिया जाए ।
HON. CHAIRPERSON: Please conclude.
श्री अनिल फिरोजिया: माननीय सभापति महोदय, दिन भर से उपवास करके बैठा हूँ और सदन का सबसे दुबला-पतला आदमी हूँ । आपका संरक्षण चाहिए ।
माननीय सभापति : आप समाप्त कीजिए ।
श्री अनिल फिरोजिया: सिर्फ दो मिनट में अपनी बात समाप्त कर रहा हूँ ।
माननीय सभापति : दो मिनट नहीं ।
श्री अनिल फिरोजिया: मैं सिर्फ माँग रख रहा हूँ । माननीय रेल मंत्री जी उज्जैन आए थे । उन्होंने उज्जैन,इंदौर के कार्यक्रम में घोषणा की थी कि उज्जैन श्री महाकालेश्वर से काशी विश्वनाथ और वाराणसी महाकालेश्वर एक्सप्रेस प्रारम्भ की जाएगी,जो आज तक नहीं हुई । सर, एक मिनट । उज्जैन में पश्चिमी रेलवे में प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना, हमारे यहां काम चालू हो गया था, किसी कारण से वह काम बंद हो गया है ।…(व्यवधान)
1DR. K.C. PATEL (VALSAD): Hon. Chairperson, Sir, thank you very much for giving me the opportunity to speak on the Railway Budget.
Sir, I am very much thankful to our Prime Minister, hon. Narendrabhai Modi Ji. जिनकी प्रेरणा से मैं दूसरी दफा इस ऑगस्ट हाउस में आ सका हूँ और मुझे रेल बजट पर बोलने का मौका मिला है । मेरा निर्वाचन क्षेत्र वलसाड,डांग गुजरात का महाराष्ट्र से जुड़ा हुआ क्षेत्र है । डांग डिस्ट्रिक्ट 100 परसेंट ट्राइबल क्षेत्र है । डांग में जो लोग रहते हैं,उसमें से 50 परसेंट लोग ट्रेन में बैठे भी नहीं है और ट्रेन देखी भी नहीं है । ऐसे लोग डांग डिस्ट्रिक्ट में रहते हैं । आपसे और रेल मंत्री आदरणीय पीयूष गोयल जी और सुरेश जी से मेरी प्रार्थना है कि हमारे बिलीमोरा से वघई तक की जो रेल लाइन है, वह नैरो गेज रेल लाइन है । वह लाइन बिलीमोरा से वघई, आहवा होकर जो सापुतारा हिल स्टेशन है,वहाँ से नासिक तक के लिए जो सर्वे हुआ है, उसे जोड़ दिया जाए । उसका बजट में एलोकेशन कर दिया जाए । यह मेरी आपसे और रेल मंत्री जी से विनम्र प्रार्थना है ।
सर, वापी जो औद्योगिक नगरी है, वह एशिया की सबसे बड़ी औद्योगिक नगरी है । वहाँ देश के सब लोग,चाहे उत्तर भारत हो, झारखंड या असम हो, वहां से लोग वापी में आकर रहते हैं । मेरी एक प्रार्थना है कि वापी में जो अहमदाबाद से वलसाड तक गुजरात ट्रेन चलती है,उसको वापी तक एक्सटैंड किया जाए ।
महोदय, मैं एक अंतिम बात कहकर अपनी बात समाप्त करता हूँ । बॉम्बे से दिल्ली की जो राजधानी ट्रेन चलती है, वह सीधे बॉम्बे से चलकर सूरत पहुँचकर वहाँ खड़ी रहती है । मेरी माँग है कि उसका स्टॉपेज वापी में दिया जाए । यह मेरी नम्र प्रार्थना है । धन्यवाद ।
2श्री गजेंद्र उमराव सिंह पटेल (खरगौन): महोदय, आपने मुझे रेल मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदानों की मांगों पर हो रही चर्चा में भाग लेने का मौका दिया, इसके लिए आपका धन्यवाद ।
महोदय, मैं सर्वप्रथम देश के यशस्वी प्रधान मंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी जी, रेल मंत्री माननीय पीयूष गोयल जी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ कि उन्होंने इस नाते यह बजट बनाया है कि देश भर में रेल के माध्यम से विकास के काम शुरू हों । मैं मध्य प्रदेश की खरगोन बड़वानी जनजातीय लोक सभा सीट से चुनकर आया हूँ । यह लोक सभा देश की आजादी के72 साल बाद आज भी ट्रेन मार्गों से मुक्त है । इस लोक सभा में कई बार चुनाव हुए और हमारे देश पर आजादी के 70 साल में से 55 साल जिस पार्टी ने राज किया, लोक सभा चुनाव के समय उन्होंने वहाँ ट्रेन की पटरियाँ डाल दीं,वे चुनाव जीत गए, परन्तु उन्होंने न तो वहाँ रेल मार्ग बनाया और न ही रेल की उपलब्धता की । मुझे विश्वास था कि सबका साथ और सबका विश्वास के साथ देश के यशस्वी प्रधान मंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी जी के पिछले5 सालों के कार्यकाल में इन्दौर से मनमाड़ रेल मार्ग की स्वीकृति प्रदान की । इस बात का सभी जनता को विश्वास था ।
महोदय,मैं आपके माध्यम से माननीय रेल मंत्री जी को अवगत कराना चाहता हूँ कि देश की आजादी के बाद निर्माण होने वाला यह पहला इन्दौर-मनमाड़ रेलमार्ग रहेगा । इन्दौर-मनमाड़ रेलमार्ग का अलाइनमेंट फाइनल हुआ है । इस पर शीघ्र काम होना चाहिए, मैं आपके माध्यम से ऐसी माँग करता हूँ । इस रेल मार्ग में मध्य प्रदेश व महाराष्ट्र को जोड़ने का मार्ग है । इसे कितने सैक्शन में बाँटा गया है?मेरी माँग है कि इस काम को जल्दी पूरा किया जाए । अभी इसका काम इन्दौर से शुरू नहीं हुआ है । अभी इसका भूमि अधिग्रहण का काम भी बाकी है । मैं माननीय रेल मंत्री जी से आग्रह और निवेदन करता हूँ कि हमारे क्षेत्र की जनता ने न तो रेल की पटरी देखी है और न ही रेल देखी है । खरगोन और बड़वानी, ये दोनों जिले ट्राइबल हैं । इन दोनों ट्राइबल जिलों में रेल का मार्ग नहीं बना है । मैं आपके माध्यम से सरकार से आग्रह करना चाहता हूँ कि इस रेल मार्ग के लिए जल्दी ही भूमि का अधिग्रहण किया जाए और इस काम को जल्दी प्रारम्भ किया जाए, ताकि लोगों को इसका फायदा मिल पाए । मैं आप सभी का हृदय से आभार प्रकट करता हूँ । धन्यवाद ।
3SHRI BENNY BEHANAN (CHALAKUDY): Sir, I wish to highlight some points unique to Kerala with respect to development of Railways in the State.
Kerala though is a State where the population distribution and development is such that there is no urban-rural divide. Observing the seamless development one can just suggest that it is a big city rather than a small State.
So far as railway infrastructure is concerned, the line utilization is more than 100 per cent and it is impossible to operate anymore new trains with the existing infrastructure. We need alternative lines for which adequate land is needed. We have proposed to make a South-North High-Speed Corridor from Trivandrum to Kasaragod, that is, 575 kilometres.
HON. CHAIRPERSON: Please conclude.
SHRI BENNY BEHANAN: Sir, I need just one minute to finish my speech.
Sir, getting land for development anywhere is difficult, but in our State it is impossible. The total area of the State itself is less. There is only 38,863 square kilometre land available of which 9000-odd square kilometres have to be left alone as it includes Western Ghats, forests, 47 rivers and lakes, and even ecologically fragile regions. Thus, almost one-third of all the available land could not be put to any developmental use. All these factors push density of population so high that the State, as I said earlier, is a big city. I explain it all just to drive the point that State of Kerala is unique and it needs same considered uniqueness in dealing the issues as well.
The issues pertaining to accession of land for development of railways and national highways could, therefore, not be solved applying the present one-formula-fit-for-all approach. The State thus deserves to get special treatment. While deciding payment for compensation on acquired land for the development of railways, the component of the State Government has to be reduced from the present level of 50 per cent to at least 20 per cent and the component of the Central Government has to be increased as a special case as far as Kerala is concerned. Thank you.
4श्री प्रदीप कुमारसिंह (अररिया): सभापति महोदय, मैं आपका आभार व्यक्त करता हूं कि आपने मुझे बोलने के लिए समय दिया ।
महोदय, मैं उस क्षेत्र से आता हूं, जो अति पिछड़ा इलाका है । हमारे यहां से फणीश्वर नाथ ‘रेणु’ जी बहुत बड़े साहित्यकार थे और यह स्वर्गीय रामलाल सिंह ‘स्नेही’ जी तथा द्विज देवी जी की धरती है । मैं अररिया लोक सभा क्षेत्र से आता हूं । पिछली बार भी वर्ष 2009 से 2014 में मैं इस सदन का मेम्बर था और उस समय यूपीए की सरकार थी । उस वक्त भी मैंने कई बार सदन के पटल पर अपनी बातों को रखा था । विकास की बात करने वाले यूपीए के बारे में मैं सिर्फ दो मिनट बोलना चाहूंगा,क्योंकि मैं बहुत ही पिछड़ा क्षेत्र तथा नेपाल की सीमा से आता हूं और मेरे क्षेत्र के साथ ही बंगाल है ।
महोदय, हमारे यहां से मात्र एक ट्रेन सीमांचल एक्सप्रेस चलती है,नेपाल बॉर्डर के पास जोगबनी एक जगह है, वह ट्रेन जोगबनी सीमा से लेकर दिल्ली तक आती है । उस ट्रेन में न तो पैंट्री कार है और न ही उसमें खाने-पीने की कोई व्यवस्था रहती है । उस ट्रेन में एक ही ए.सी.डिब्बा है, जो थर्ड टीयर का है, चाहे आप उसे थ्री टीयर का कहिए या टू टीयर का कहिए, लेकिन उस ट्रेन में एक ही डिब्बा है । उस ट्रेन से लोग तीस-तीस घंटों तक भूखे आते हैं ।
महोदय, मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी का ध्यान आकृष्ट कराना चाहूंगा कि उस ट्रेन में पेंट्री कार लगाने की व्यवस्था की जाए । उस ट्रेन के डिब्बे की हालत बहुत ही खराब है,वह बहुत ही गंदा रहता है, इसलिए उसके डिब्बे को भी चेंज किया जाए । मेरी एक दूसरी मांग है कि यह ट्रेन सीधे नेपाल की सीमा से चलकर आती है और नेपाल से हमारा रोटी-बेटी का अच्छा संबंध है । वहां से अनेक सैलानी दिल्ली तक आते हैं । मैं उस संबंध में दो-चार मांगे रखना चाहता हूं । हम लोग अनेक कामों से प्रदेश की राजधानी पटना जाते हैं,लेकिन पटना के लिए कोई भी ट्रेन नहीं है । वहां से कटिहार स्टेशन मात्र 115 किलोमीटर है, जहां से सुबह छह बजे राजधानी पटना के लिए इंटरसिटी एक्सप्रेस खुलती है । मेरा आग्रह होगा कि उस ट्रेन को पीछे कर दिया जाए, जो हमारे जोगबनी क्षेत्र अररिया से चले, उस ट्रेन का मात्र एक्सटेंशन करना है । इससे वहां के लोग भी पटना आ-जा सकेंगे ।
महोदय, आम्रपाली एक्सप्रेस कटिहार से सीधे अमृतसर तक चलती है । मैं आपके माध्यम से मांग करना चाहता हूं कि आम्रपाली एक्सप्रेस को भी कटिहार के बजाय जोगबनी से चलाया जाए । हमारे यहां से कोलकाता के लिए सिर्फ एक ट्रेन सप्ताह में तीन दिन चलती है । मैं मांग करता हूं कि उस ट्रेन को नियमित रूप से सभी दिन संचालित किया जाए । बनारस भारत का सांस्कृतिक राजधानी है, जहां नेपाल तथा हमारे यहां से भी सैलानी अनेक संस्कारों और घुमने-फिरने की दृष्टि से आते हैं । मैं मांग करना चाहता हूं कि वहां से एक सीधी ट्रेन बनारस के लिए चलाया जाए । मेरी एक और मांग है कि हमारे यहां फारबिसगंज से सहरसा तक एक छोटी लाइन थी, उस लाइन को दस सालों से बड़ी लाइन में परिवर्तित किया जा रहा है, लेकिन आज तक उसका काम अधर में लटका हुआ है । मैं मांग करूंगा कि उस लाइन को भी शीघ्र ही चालू किया जाए ।
23.29 hrs (Hon. Speaker in the Chair) माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्यगण, नई व्यवस्था दे दी गई है और हमें 12 बजे से पहले समाप्त करना है,इसलिए आप सब दो-दो मिनट में बोल लीजिए ।
5डॉ. निशिकांत दुबे (गोड्डा): अध्यक्ष महोदय, सबसे पहले मैं आपको धन्यवाद देना चाहता हूं कि आपने मुझे इस विषय पर बोलने का मौका दिया । मैं वर्ष 2009 से इस सदन का सांसद हूं । मैंने पहली बार देखा है कि कोई स्पीकर इनिशिएटिव लेकर सारे नए लोगों को बोलने के लिए मौका दे रहे हैं,उसके लिए समय दे रहे हैं और खुद भी उतना ही इन्वॉल्व हैं, नहीं तो आप भी उसकी चर्चा करके आगे बढ़ सकते थे,इसके लिए मैं सारे सदन की ओर से आपको व्यक्तिगत तौर से धन्यवाद देना चाहता हूं ।
मैं प्रधान मंत्री जी को, रेल मंत्री जी को और पूरी सरकार को धन्यवाद देना चाहता हूं । अरविंद सावंत जी इधर देख रहे हैं । जब पूरा देश सो रहा है, तो चौकीदार और पहरेदार कैसे जागता है, उसका यह सबसे बड़ा उदाहरण है कि हम रेल बजट पर चर्चा कर रहे हैं ।
माननीय अध्यक्ष : चर्चा12 बजे तक करनी चाहिए, ताकि लोग यह कहें कि संसद के सांसद देश के लिए काम करते हैं ।
डॉ. निशिकांत दुबे : महोदय, इसीलिए मैंने आपको धन्यवाद दिया । आज आप समझिए कि जिन्होंने भारतीय जनता पार्टी को, मोदी जी को और हमारे जैसे लोगों को सांसद बनाया है, मैं जिस क्षेत्र से आता हूं, वह काफी पिछड़ा इलाका है, वहां शायद 90-95 पर्सेंट लोग सो गए होंगे, लेकिन उनको यह एहसास हो रहा होगा कि उन्होंने जिस जनप्रतिनिधि को चुना है, उन्होंने जिस सरकार को चुना है, उन्होंने जिस प्रधान मंत्री को चुना है और जो स्पीकर, प्रधान मंत्री और पूरी संसद ने बनाया है, वे सभी मिल कर गांव, गरीब, किसान की चिंता कर रहे हैं और जाग कर आपकी चर्चा कर रहे हैं । उसका कारण यह है कि रेलगाड़ी की छुक-छुक में ही आम आदमी की धक-धक है । रेलगाड़ी की बरकत में ही देश की बरकत है ।
आज रेल बड़ी समस्याओं से ग्रसित है । रेल को रोड, पानी और एविएशन, तीन जगहों से खतरा आ रहा है । माननीय प्रधान मंत्री जी चप्पल पहनने वाले को हवाई जहाज पर बैठा रहे हैं । …(व्यवधान) चप्पल, हवाई चप्पल दोनों एक ही हैं । हमारे यहां बिहार,झारखण्ड में एक ही चीज बोली जाती है । दूसरा, जो मोड ऑफ ट्रांसपोर्टेशन है, उसमें जो पानी है, वह सबसे सस्ता साधन है । जो फ्रेट है, उसमें रोड का बड़ा रोल हो गया है । स्पीकर साहब, मैं यहां बोलना चाहता था,संयोग से आप आ यहां गए, पूरे सदन को और पूरे देश को जानना चाहिए कि वर्ष 2008 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद जी ने यहां फ्रेट की एक घोषणा की । उस वक्त आयरन ओर का बूम था । आयरन ओर में जो डोमेस्टिक आयरन ओर कंज्यूम करेंगे, उसका एक अलग फ्रेट होगा और जो एक्सपोर्ट करेंगे, चूंकि चाइना में खेल होने वाला था,उसका एक अलग फ्रेट होगा । रेल के पास कोई मैकेनिज्म नहीं है । इसके कारण यह हुआ कि जो कंपनियां एक्सपोर्ट कर रही थीं, जैसे रश्मि मैटेलिक एक बड़ी कंपनी थी, उसने30 हजार करोड़ रुपये का गबन किया । सीएजी की रिपोर्ट आई । उस वक्त की तत्कालीन सरकार ने, मनमोहन सिंह जी के नेतृत्व में और ममता बनर्जी जी जब वहां की रेल मंत्री थीं, वह 30 हजार करोड़ का स्कैम सीएजी में दबा का दबा रह गया । हमारी सरकार आई । अभी सीबीआई की जांच चल रही है । मेरा आपके माध्यम से सरकार से आग्रह है कि उस 30 हजार करोड़ के स्कैम में जितनी भी कंपनियां फंसी हुई हैं,उनके ऊपर तुरन्त कार्रवाई करके उनको जेल भेजना चाहिए ।
सुनील सिंह साहब ने काफी बातें कही हैं । स्पीकर साहब, मैं दो मिनट में अपनी बात खत्म करूंगा, वैसे भी आपको 12 बजे तक चलाना है । …(व्यवधान)सुनील सिंह साहब ने कई बातें कहीं । इन्होंने लॉलीपाप दिखाया । इनके पास पैसा नहीं था । पूरी दुनिया में जहां कहीं भी रेल है, वहां सरकार रेल लाइन को बनाती है । कई लोग कहते हैं कि बजट को मिला दिया, रेल बजट खत्म हो गया । इसका कारण यह है कि कहीं रेल पैसे पैदा नहीं करती और कहीं नई रेल लाइन नहीं बनती । इसीलिए पूरी दुनिया के मुकाबले भारत में रेल लाइन नहीं बनीं और खासकर हमारे जैसे पिछड़े राज्य में तो एकदम ही नहीं बनीं ।
यहां कई सांसद होंगे, जो यूरोप जाते हैं । उनको लगता है कि स्विटजरलैंड और इंग्लैंड में गाड़ी सही समय पर आती है । मैं सारे सांसदों को बता देना चाहता हूं कि 73 बिलियन यूएस डॉलर, लगभग पांच लाख करोड़, पूरे यूरोप की सरकारें मिलकर रेलवे में पैसेंजर्स के लिए सब्सिडी देती हैं,तब यूरो रेल चलती है । यहां कांग्रेस की नीतियों के कारण, इतना पैसा कांग्रेस सरकार ने नहीं दिया जिससे कि कहीं रेल बन पाए । हमारे जैसे पिछड़े राज्य के साथ, मैं जो दूसरी बात कह रहा हूं, जितनी घोषणाएं हुई हैं,राज्यों के साथ जितने एमओयू हुए हैं, जैसे हमारे झारखंड राज्य के साथ एमओयू हुआ और वे योजनाएं 10-15 साल तक डिले हो गईं, इसके लिए एक व्हाइट पेपर जारी करना चाहिए कि किसलिए घोषणा की, कितना पैसा दिया और जनता को कितना मूर्ख बनाया । मैं भारत सरकार से मांग करता हूं कि यह सारा व्हाइट पेपर में उनको देना चाहिए ।
इसके अलावा,झारखंड एक ऐसा राज्य है, जो रेलवे को 40 पर्सेंट रेवेन्यू देता है । मैं बराबर यह बोलता हूं कि यदि मेरा राज्य यह कह दे कि मैं रेल को कोई फ्रेट नहीं दूंगा,तो रेल बंद हो जाएगी ।
इसके बावजूद हमारे जैसे इलाके से भेदभाव होता रहा है । हमरा बिहार और बंगाल के साथ कम्पिटिशन है, न बिहार सरकार और न बंगाल सरकार रेलवे को एक पैसा देती है । संजय सेठ और सुनील जी ने भी कहा, जो हैडक्वार्टर या जीएम हैं, कोई कोलकाता में बैठते हैं और कोई हाजीपुर बैठते हैं । झारखंड हमेशा नैगलेक्ट होता है । हमारा सारा पैसा इस्टर्न रेलवे,ईसीआर और एससीआर बंगाल या बिहार में चला जाता है ।
मेरा आपके माध्यम से आग्रह है कि हमारे जैसे राज्य के ऊपर रेलवे विशेष कृपा करे । बरवाडीह चिरमिरी, गया-बोधगया, हंसडीहा-गोड्डा, पीरपैंती-जसीडीह, चितरा-बासुंकीनाथ,गोड्डा-पांकुड़,विक्रमशीला-कटेहरिया में रेल लाइन बनाएं । वर्ष 2008 में लालू प्रसाद जी ने घोषणा की थी कि भागलपुर में डिवीजनल कार्यालय खुलेगा, वह भागलपुर में जमीन के कारण नहीं खुल पा रहा है । मेरा आपसे आग्रह है कि जसीडीह और देवघर में हम पूरी जमीन देने को तैयार हैं । यदि हेडक्वार्टर भागलपुर में जमीन के कारण नहीं खुल पा रहा है तो हमारे यहां हेडक्वार्टर खोलिए ।
स्पीकर महोदय, दुनिया में कहीं भी रोजगार और पैसे का सवाल है, वह केवल टूरिज्म से आता है । इसी कारण से सिंगापुर,पेरिस और लंदन टूरिज्म के कारण आगे बढ़े हैं । हमारे इलाके में पारसनाथ है,देवघर है, मंदारहिल है । हमारे यहां दुनिया का सबसे पुराना फॉसिल जो सभ्यता की बात करता है, उन्नीस – बीस लाख करोड़ साल पुराना राजमहल की पहाड़ी में है । वह पूरा अंग क्षेत्र कर्ण की राजधानी हुआ करती थी । उसमें से रेल किस तरह से आम गरीबों के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर क्रिएट करेगा,उसके बारे में सोचें क्योंकि वह सोशियो इकोनॉमिक एस्पेरिशनल डिस्ट्रिक्ट है ।
मैं आपके माध्यम से भारत सरकार से आग्रह करता हूं कि वह झारखंड के ऊपर फोकस करे, हमारे जैसे गरीब राज्य पर फोकस करे । स्थांल परगना में फोकस करके पचास-साठ सालों में इन लोगों ने जो पाप किया है, उस करप्शन को जनता को दिखाते हुए इस क्षेत्र का कैसे विकास हो सकता है, उस रास्ते पर भारत सरकार जाए । इन्ही शब्दों के साथ जय हिन्द,जय भारत ।
6साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर (भोपाल): अध्यक्ष महोदय, आपका बहुत-बहुत आभार । भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी है । मैं रेल बजट का समर्थन करती हूं क्योंकि इसमें सभी क्षेत्रों के कल्याण के लिए इसमें सम्मिलित करने का प्रयास किया गया है । इसमें आप अच्छी योजनाएं लेकर आए हैं, जिससे रेल की समस्याओं का समाधान होकर उत्कृष्ट मार्ग प्रशस्त हुआ है, मैं इसका समर्थन करती हूं । भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी है, लेकिन वहां रेल की काफी समस्याएं हैं । मुंबई औद्योगिक क्षेत्र है, उद्योग की राजधानी भी कहा जाता है । भोपाल से डायरेक्ट मुंबई जाने वाली कोई भी ट्रेन नहीं है ।
मेरा आग्रह है कि मेरी यह मांग जोड़ी जाए,हबीबगंज एक रेलवे स्टेशन है, उसका प्राइवेटाइजेशन कर दिया गया है । इससे गरीब लोगों को इतनी समस्याएं आ रही हैं, उन्होंने लूट मचा रखी है, उस पर अंकुश लगे और उसका निरीक्षण हो, यह हमारी मांग है, जिससे वह जनता को लूट न सकें । उन्होंने गाड़ियां रखने के लिए जो व्यवस्थाएं की हैं, उसको इतना हाई रेट कर दिया है, उससे सामान्य लोग भी परेशान हैं ।
सिहोर से कई स्थानों की ट्रेनें जाती हैं,लेकिन वहां रुकती नहीं है । संत हृदाराम नगर में भी स्टॉपेज बहुत कम है, उस स्टॉपेज को बढ़ाया जाए । जितनी ट्रेनें सिहोर संत हृदाराम नगर से आती है उसका वहां स्टॉपेज दिया जाए । धन्यवाद ।
7डॉ. (प्रो.) किरिट प्रेमजीभाईसोलंकी (अहमदाबाद पश्चिम): अध्यक्ष महोदय, मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं कि आपने मुझे रेलवे के डिमांड फॉर ग्रांट्स पर बोलने की अनुमति दी । मैं प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र भाई मोदी जी, रेल मंत्री और भारत सरकार का आभारी हूं । देश की सबसे पहली बुलेट ट्रेन अहमदाबाद से मुंबई जाएगी, इसके लिए कार्य भी शुरू हो चुका है । मैं खासकर प्रधान मंत्री जी को भारत को एक नये इरा में ले जाने के लिए बहुत-बहुत आभारी हूं ।
मैं गुजरात से आता हूं । जो नार्थ गुजरात है, वहां रेलवे नेटवर्क की कमी रहती है । It’s a neglected area. एक जमाने में पाटण गुजरात की राजधानी हुआ करती थी और पाटण से भीलड़ी जो बनासकांठा में आ गया था,उस समय51 किलोमीटर का अंतर था । 70 साल से, वर्ष 1954 में जब लाल बहादुर शास्त्री जी रेल मंत्री थे, तब वहां के लोगों ने और पॉलिटिकल लीडरों ने वहां रेल लाइन बिछाने की बात कही थी क्योंकि भीलड़ी से आगे उत्तर भारत और जम्मू तक रेल लाइन ऑलरेडी प्रस्तावित थी । मगर 70 सालों में कांग्रेस के समय में इस रेल लाइन का विकास नहीं हुआ । माननीय प्रधान मंत्री जी के मागदर्शन से वहां रेल की पटरी बिछाई गई और अभी प्रधान मंत्री जी जब अहमदाबाद आए थे, तब उन्होंने हरी झंडी दिखाकर पाटण-भीलड़ी रेल लाइन के निर्माण की शुरुआत की है । मैं इसके लिए सरकार और खासकर प्रधान मंत्री जी और रेल मंत्री जी का बहुत-बहुत आभारी हूं । मेरा नेटिव चाणस्मा है और चाणस्मा से राधनपुर की दूरी 65 किलोमीटर है । राधनपुर से आगे कांडला तक रेलमार्ग है और वह पाकिस्तान का सेंसिटिव बार्डर भी है । कभी-कभी जब सेंसिटिव समय आता है, उसके लिए वहां एक नई रेल लाइन होनी चाहिए । रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल जी यहां मौजूद हैं, मैं उनसे विनम्र प्रार्थना करता हूं कि अगर चाणस्मा से राधनपुर तक65 किलोमीटर की दूरी को रेल लाइन से जोड़ा जाता है तो हमें कांडला और पाकिस्तान बार्डर तक एक नया रेलमार्ग मिलेगा ।
महोदय, कलोल, कड़ी,कटोसण और बहुचारा जी माता जी शक्तिपीठ हैं । चाणस्मा और रनुच की रेल लाइन का गेज़ कंवर्जन हो रहा है । कुछ कारणों से जो कार्य की गति होनी चाहिए, वह नहीं है । मेरी प्रार्थना है कि इस कार्य को जल्दी से जल्दी से सम्पन्न किया जाए ।
मैं अहमदाबाद की दो बात करके अपनी बात समाप्त करूंगा । अहमदाबाद का कालुपुर रेलवे स्टेशन बहुत हैविली लोडेड है । मेरी मांग है कि साबरमती और मणिनगर रेलवे स्टेशन को अगर टर्मिनल स्टेशन के तौर पर विकसित करते हैं तो साबरमती से उत्तर भारत की ओर और मणिनगर से दक्षिण भारत और मुम्बई की ओर जाने वाली ट्रेन चला सकते हैं । अहमदाबाद भारत का पहला वर्ल्ड हैरिटेज सिटी बना है । मैं माननीय मंत्री जी निवेदन करता हूं कि अहमदाबाद स्टेशन का विकास एवं नवीनीकरण हैरिटेज की थीम पर किया जाए । आपने मुझे बोलने की अनुमति दी, मैं आपका बहुत-बहुत आभार एवं धन्यवाद व्यक्त करता हूं ।
माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्यगण । मैं आप सबसे आग्रह करूंगा कि मुझे घंटी बजाने की आवश्यकता न पड़े, क्योंकि कुछ टेक्निकल कारण हैं । आप अपनी बात को दो-दो मिनट में समाप्त करें ।
8श्री उन्मेश भैय्यासाहेब पाटिल (जलगाँव):माननीय अध्यक्ष जी, मैं अपनी लोकल लैंग्वेज मराठी में रेलवे की अनुदान मांगों पर बोलना चाहता हूं ।
* Hon. Speaker Sir, we have been discussing the Railway Budget and we have already touched upon so many issues. So, I would not reiterate those issues. I would like to raise some new issues before Hon. Railway Minister. Hon. Chairman Sir, I belong to North Maharashtra and the world famous Ajanta Ellora Caves are situated in this area. Hence I would like to request Hon. Railway Minister to connect these cave-sites with rail network. It would be very convenient for foreign tourists visiting these sites. Chalisgaon- Dhule rail line was laid during British Era and no further development was done. I must mention that gauge conversion and electrification work is done by this Government only. So, I am very thankful that funds have been allocated for Jamner - Pachora rail line. Ajanta Caves are just 20 kms. away from Jamner and it would be very beneficial if it is connected with railway line.* फारेन से जो टूरिस्ट्स आते हैं, उनके लिए बहुत अच्छी सुविधा हो जाएगी । हालांकि आज मैं यह कहना चाहता हूं कि ब्रिटिश काल से चालीसगांव-धुले लाइन थी, this Government has changed the scenario. 70 साल तक किसी सरकार ने ध्यान नहीं दिया । जो रेल लाइनें थीं,वे वैसी की वैसी रहीं, न उनका इलेक्ट्रिफिकेशन किया गया और न उनको ब्रॉडगेज में कन्वर्ट में किया गया ।
*Hon. Speaker Sir, we have been demanding for Auragabad-Chalisgaon railway line for the last 30 years. We have a lot of expectations from you and Hon. Prime Minister Modi ji. Only you can connect Marathwada and North Maharashtra region through rail network. I have total faith in you that a son of Maharashtra would definitely do justice.Tripling of Manmad -Jalgaon rail line has been done by this Government and four lines have been laid between Jalgaon and Bhusawal. Our government is focusing on railway connectivity which will lead to employment generation. You are running this House for the last 13 hours and I am also very thankful for giving me an opportunity to speak on the Railway Budget. Rail travellers of Khandesh are also waiting for Pune-Dhule, Pune-Mumbai rail connectivity and for some more stoppages on existing network. I am sure you will fulfill our demands.* 9 *डॉ. संघमित्रा मौर्या (बदायूं) : सर्वविदित है कि, आजादी के 72 वर्ष पूरे होने के बाद भी जनपद बदायूं सीधे-सीधे देश की राजधानी दिल्ली व उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से पूरी तरह अछूता है । कोई भी ऐसी रेलगाड़ी नहीं है,जो बदायूं से संचालित होकर दिल्ली अथवा लखनऊ को जाती हो । यह एक विडंबना के अतिरिक्त कुछ भी नहीं ।
मुझे विश्वास है कि निश्चित ही यह जानकारी अपने माननीय प्रधान मंत्री जी व माननीय रेल मंत्री जी के पास नहीं होगी, क्योंकि मुझसे पहले अन्य राजनीतिक पार्टी के प्रतिनिधि बदायूं में होते रहे और इस महत्वपूर्ण मुद्दे को उठाने से बचते रहे । लेकिन,ऐसा मेरा विश्वास है कि अब इस मामले को संज्ञान में लिया जाएगा, क्योंकि हमारे प्रधान मंत्री जी दूरदृष्टता एक वाक्य में समाहित है और वह है – सबका साथ, सबका विकास,सबका विश्वास ।
माननीय प्रधान मंत्री जी देश के कोने-कोने को रेलमार्ग से जोड़ना चाहते हैं, क्योंकि जो व्यक्ति देश में बुलेट ट्रेन चलाने की सोच रखते हैं, वह निश्चित ही बदायूं को ऐसी ट्रेन की सौगात देंगे, जो बदायूं को दिल्ली और लखनऊ से जरूर जोड़ेगा । उक्त ट्रेन बदायूं को दिल्ली व लखनऊ से जरूर जोड़ेगा, लेकिन बदायूं की सम्मानित जनता का दिल हमारे प्रधान मंत्री जी से सीधे-सीधे जुड़ेगा । यह बदायूं का विकास मात्र ही नहीं बल्कि बदायूं के युवा,छात्र, व्यापारी,नौकरी पेशा,महिलाओं, बुजुर्गों के हित को ध्यान में रखेगा और उनकी तरक्की को नई दिशा प्रदान करेगा ।
स्पष्ट है कि तरक्की ही हमारे लोक प्रिय प्रधान मंत्री का वृहद नज़रिया है । यह वो नज़रिया है जो 72 सालों के बाद आज जाकर भारत को मिली है । इसलिए, मैं निश्चिंत हूं कि मुझे कई बार स्मरण दिलाने की आवश्यकता नहीं है । इसी के साथ-साथ मैं इस बात पर भी ध्यान आकृष्ट कराना चाहती हूं कि मेरे ही लोक सभा क्षेत्र के गुन्नौर विधान सभा स्थित बबराला स्टेशन पर गुजरने वाली “महाकाल एक्सप्रेस” का ठहराव हो,जिससे स्थानीय जनता के अतिरिक्त दो-चार अन्य जनपद भी लाभान्वित होंगे ।
इसी गुन्नौर विधान सभा क्षेत्र के धनारी स्टेशन पर वर्ष में विशेष रूप से एक मेले के आयोजन के दौरान रुकने वाली ट्रेन संख्या 54461 व 54462 का नियमित रूप से ठहराव, वहां की जनता के अतिरिक्त अन्य बगल के जनबद बरेली, हाथरस,मुरादाबाद,दिल्ली, आगरा व फिरोजाबाद आदि स्थानों को व्यावसायिक दृष्टिकोण से लाभान्वित होगी ।
अपनी शुभेच्छाओं के साथ मैं पुनः माननीय प्रधान मंत्री जी व माननीय रेल मंत्री जी के रेल बजट का समर्थन करते हुए धन्यवाद ज्ञापित करती हूं ।
0*श्री राजकुमार चाहर (फतेहपुर सीकरी): पिछले 5 वर्षों में रेलवे के क्षेत्र में बहुत ही अच्छे कार्य हुए हैं । माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में स्टेशनों पर स्वच्छता देखने को मिल रही है । रेल समय पर चल रही है । विभिन्न ट्रेनों में सफाई व स्वच्छता है । भोजन की गुणवत्ता अच्छी हुई है । स्टेशनों पर स्वचालित सीढ़ियाँ भी लगी हैं । पीने के पानी की मशीनें,जिनमें मिनरल वॉटर है, लगाई गई हैं । यात्रियों की संख्या ज्यादा हुई है और सभी सुरक्षित महसूस करते हैं ।
मेरा सरकार से आग्रह व मांग है कि फतेहपुर सीकरी (आगरा)दुनिया का बड़ा पर्यटन स्थल है । यहां बड़ी संख्या में देशी-विदेशी सैलानी आते हैं । कृपया आगरा व फतेहपुर सीकरी के मध्य एक मेट्रो ट्रेन चलाने की कृपा करें । आगरा में मेट्रो को मंजूरी मिल गई है ।
मेरा सरकार से जनहित में विनम्र अनुरोध है कि आगरा जनपद के रेलवे फाटकों के नीचे अंडरपास बने हैं । बरसात के दौरान भारी जलभराव हो रहा है । इससे जनजीवन प्रभावित हो रहा है । आम जन का निकलना दूभर हो रहा है । मेरी सरकार से मांग है कि आगरा जनपद के रेलवे अंडरपास सहित देश के सभी रेलवे अंडरपास को जलभराव से रोकने हेतु रेन हार्वेस्टिंग द्वारा एवं अन्य प्रभावी उपाय कर जलभराव को रोकने की कृपा करें, जिससे कि आम जनता को राहत मिल सके ।
मैं रेल की अनुदान की मांगों का समर्थन करते हुए अपनी बात समाप्त करता हूं ।
1श्री गौरव गोगोई (कलियाबोर): अध्यक्ष महोदय, धन्यवाद । मैं अपनी बात सिर्फ आठ पॉइंट में खत्म करूंगा । मेरा पहला पॉइंट यह है कि बार-बार सत्ता पक्ष कहता है कि उत्तर पूर्वांचल में कुछ नहीं किया । क्या रेलवे विभाग यह क्लेरिफाई करेगा कि अगर आदरणीय मनमोहन सिंह जी बोगीबील ब्रिज सिलचर लमडिंग ब्राडगेज कंवर्जन को नेशनल प्रोजेक्ट का दर्जा नहीं देते तो उसको जितने रिसोर्सेज चाहिए थे वे कभी नहीं मिलते । इसलिए मैं आपसे जानना चाहता हूं कि क्या आप उत्तर पूर्वांचल में कोई नया नेशनल प्रोजेक्ट लाने वाले हैं । मेरा दूसरा पॉइंट यह है कि काजीरंगा में वाइल्डलाइफ और टूरिज्म के लिए बहुत अच्छा पोटेंशियल है । क्या वहां पर कोई रेलवे प्रोजेक्ट लाया जाएगा? तीसरी बात यह है कि हमारे समय में उत्तर पूर्वांचल को साउथ ईस्ट एशिया के साथ कनेक्ट करने के लिए कालादन मल्टीमॉडल प्रोजेक्ट की शुरूआत की गई थी, एशियन ट्राइलेटरल रेलवे की शुरूआत की गई थी । आज क्या वे बता पाएंगे कि एशियन ट्राइलेटरल रेलवे की जो बात है, यह यूनेस्को का प्रोजेक्ट है वह कितना आगे बढ़ा है? चौथी बात है कि उत्तर पूर्वांचल की इकोनॉमी उस दिन गिर गई थी,जब बांग्लादेश की स्थापना हुई थी, क्योंकि जो हमारा कॉरिडोर था बैनलोन इंडिया के साथ जो बांग्लादेश के द्वारा हम आ सकते थे, बांग्लादेश की स्थापना होने के बाद हमें बांग्लादेश को बायपास करके सिलिगुडी से आना पड़ा तो क्या बांग्लादेश के साथ कोई रेल कॉरिडोर बनेगा?मेरी पांचवी बात यह है कि कोल्ड स्टोरेज की यहां बात करते हैं,क्या रेलवे में कोई कॉल्ड स्टोरेज होगा ताकि उत्तर पूर्वांचल से जो फल हैं, जो सब्जियां हैं, जो स्पाइसेज हैं वे कोल्डस्टोरेज से आ पाएंगे? मेरी दो बातें और हैं, इसके लिए आप मुझे अनुमति दें । मेरी पहली बात यह है कि आदरणीय मंत्री जी पहले कोल के मंत्रालय में थे,तब आपको पता था कि जो भी रेल का कोयला रेल में आता था, फ्रेट पर आता था, आदरणीय मंत्री जी कोयला मंत्री की जिम्मेदारी लेने के बाद पूरा कोयला रेल से रोड़ पर आ गया । जब देखा गया कि रेलवे का फ्रेट रेवेन्यू घट रहा है और आपने रेल मंत्री की जिम्मेदारी ली है तो आपने उस पॉलिसी को चेंज करके कोयला को वापस रेल पर लाकर फ्रेट रेवेन्यू बढ़ाया, लेकिन हमेशा हम कोयला के फ्रेट पर निर्भर नहीं रह पाएंगे । कोयला के अलावा वे कौन सी कोमोडिटीज हैं जिससे हमारी फ्रेट रेवेन्यू बढ़ सकता है । मेरी आखिरी बात यह है कि उन्होंने रेल बजट को जनरल बजट के साथ मर्ज किया है, उन्होंने कहा कि आपको अगर दिलचस्पी है तो आप बजट पढ़ लीजिए,फिर जनरल बजट में जो आँकड़े हैं उसके लिए उन्होंने बोला कि आप बजट का एनक्सर पढ़ लीजिए तो सब कुछ पढ़ना ही है तो आपको भाषण देने की क्या जरूरत है । आप ले कर दीजिए । हम सब पढ़ लेंगे …(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: रमेश बिन्द जी सदन में पहली बार बोल रहे हैं ।
श्री रमेश बिन्द (भदोही): अध्यक्ष जी, धन्यवाद आपने मुझे बोलने का अवसर दिया उसके लिए मैं आपका आभारी हूं ।
माननीय अध्यक्ष: आप पहली बार में ही अनुशासन दिखाएं । आपको दो मिनट में अपना भाषण पूरा करना है ।
श्री रमेश बिन्द : रेल बजट के समर्थन में मैं आदरणीय प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी व रेल मंत्री पीयूष गोयल जी को बधाई देता हूं । मैं पूर्वांचल से भदोही लोक सभा से चुनकर आया हूं । वहां कालीन क्षेत्र की नगरी है और वहां भदोही रेलवे स्टेशन व ज्ञानपुर रेलवे स्टेशन है । माननीय अध्यक्ष जी, भदोही स्टेशन कालीन की नगरी है और वहां पर एक इलाहबाद-जयपुर ट्रेन चलती है ।
वह ट्रेन इलाहाबाद में लगभग दस घण्टे रुकी रहती है । मेरे क्षेत्र की जनता और मैं चाहता हूं कि वह ट्रेन वाया भदोही होते हुए वाराणसी तक चले तो वहां के लोगों को काफी लाभ मिलेगा । ज्ञानपुर स्टेशन से दिल्ली आने-जाने में काफी असुविधा होती है । उधर से पूर्वा एक्सप्रेस आती है, मैं सदन के माध्यम से माननीय मंत्री जी से कहना चाहता हूं कि पूर्वा एक्सप्रेस का ज्ञानपुर स्टेशन पर ठहराव हो । भदोही स्टेशन एवं ज्ञानपुर स्टेशन पर स्वचालित सीढ़ी लगाई जाए और वहां रेलवे प्लेटफार्म की बढ़ोतरी हो जाए । धन्यवाद ।
2श्री गोपाल जी ठाकुर (दरभंगा): अध्यक्ष महोदय, आपने मुझे रेल बजट पर बोलने के लिए समय दिया, इसके लिए मैं आपके प्रति आभार व्यक्त करता हूं और धन्यवाद भी देता हूं ।
अध्यक्ष महोदय, जिस क्षेत्र से मैं आता हूं, वह उत्तर बिहार-मिथिला का क्षेत्र है,जहां पर 22 फरवरी, 1974 को सकरी हसनपुर रेल लाइन का शिलान्यास तत्कालीन रेल मंत्री स्वर्गीय ललित नारायण मिश्रा जी के द्वारा किया था । फिर उसी लाइन का शिलान्यास1996 में हुआ और पुन: वर्ष 2008 में उसका शिलान्यास हुआ, लेकिन आज तक सकरी हसनपुर रेल लाइन पूर्ण नहीं हो सकी । मैं आपके माध्यम से माननीय मंत्री जी से आग्रह करना चाहूंगा कि इस रेल लाइन को अगलाम बिरउल से हरिनगर के बीच रिमोट द्वारा कुछ अंश में चालू किया गया है, इसे आगे बढ़ाकर कुसेश्वर से हसनपुर रेल लाइन परियोजना को चालू किया जाए । मैं माननीय मंत्री जी से यह भी आग्रह करना चाहूंगा कि वर्ष2008 में तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद जी द्वारा लहरिया सराय से सहरसा तक रेल लाइन बनाने की जो घोषणा की गई थी, उसे भी जनहित को देखते हुए अपनी कार्ययोजना में जोड़ा जाए ।
अध्यक्ष महोदय, मैं माननीय मंत्री जी से निवेदन करना चाहूंगा कि दरभंगा से देश के अन्य महानगरों के लिए प्रीमियम ट्रेन्स,दूरन्तो ट्रेन्स एवं हमसफर ट्रेन्स का भी परिचालन शुरू किया जाए । आनन्द विहार से नई दिल्ली गरीब रथ एक्सप्रेस अभी सप्ताह में दो दिन ही चलती है,जिससे आम लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है । अत: जयनगर से आनन्द विहार गरीब रथ एक्सप्रेस का परिचालन प्रतिदिन किया जाए । मेरा निवेदन है कि मिथिला की हृदयस्थली दरभंगा से देश की राजधानी के लिए कोई भी अच्छी ट्रेन नहीं है,इसलिए डिब्रूगढ़ राजधानी एक्सप्रेस का परिचालन वाया बरौनी, समस्तीपुर,दरभंगा, सीतामढ़ी,गोरखपुर होते हुए दिल्ली तक चलाया जाए । दरभंगा शहर में जितनी भी गुमटियां हैं,वहां जाम के कारण कई घण्टों तक लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है । इन सभी गुमटियों पर ओवर ब्रिज बनाकर दरभंगावासियों को जाम से छुटकारा दिलाया जाए । धन्यवाद ।
माननीय अध्यक्ष : श्री निसिथ प्रामाणिक जी ।
माननीय सदस्य कूचबिहार से आते हैं । नए सदस्य हैं और पहली बार पश्चिम बंगाल से निर्वाचित होकर आए हैं ।
3श्री निशीथ प्रामाणिक (कूचबिहार): अध्यक्ष महोदय, मोदी सरकार के पहले चरण में इंडियन रेलवे का जितना डेवलपमेंट हुआ है, वह भारत का कोना-कोना जानता है । मोदी सरकार के दूसरे चरण में आदरणीय वित्त मंत्री जी ने भारतीय रेल के लिए जो बजट पेश किया है, वह भारतीय रेल को एक नई दिशा देगा । सिर्फ रोड ओवरब्रिज एवं अंडरब्रिज के लिए 6050 करोड़ रुपये दिए गए हैं,जो रेल के साथ-साथ रोडवेज़ को भी सुरक्षित गति प्रदान करेंगे । 1750 करोड़ रुपये 300 स्टेशनों पर अत्याधुनिक सिग्नलिंग सिस्टम एवं 250 लेवल क्रॉसिंग्स पर इंटरलॉकिंग गेट सिस्टम लगाने के लिए मंजूर किए गए हैं ।
800 किलोमीटर नई रेलवे ट्रैक, 800 किलोमीटर रेलवे गेज चेंज और 4000 किलोमीटर ट्रैक डबलिंग के लिए, 47,997 करोड़ रुपये दिए गए हैं । इससे हम अंदाजा लगा सकते हैं कि आगे पांच सालों में भारतीय रेल कितनी तेज भागेगी । 6,900 करोड़ रुपये सिर्फ रेलवे नेटवर्क इलेक्ट्रिफिकेशन के लिए दिया गया है । इसको मद्देनजर रखते हुए, रेलवे डीजल पर दो प्रतिशत कम निर्भर करेगी । अगले पांच सालों में हम प्रदूषण की मात्रा कम करेंगे, जो हमारे देश के लिए गंभीर मुद्दा है ।
आदरणीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण जी का बजट 2019-2020 भारतीय रेल को सिर्फ गति नहीं बल्कि मजबूत सुरक्षा के साथ गति देगा । इसलिए हम उनके बहुत आभारी हैं । हम लोग कूचबिहार से हैं । कूचबिहार से कोलकाता जाने के लिए 15-16 घंटे लग जाते हैं । पहले रूट हुआ करता था, जिससे ट्रेन कूचबिहार, बांग्लादेश के लालमुनी हाट, रंगपुर और बालुरघाट होकर कोलकाता आती थी, उसमें हमें सात-आठ घंटे कम समय लगता था । मैं आपके माध्यम से माननीय रेल मंत्री जी से अनुरोध करना चाहूंगा कि अगर वे ट्रैक फिर से चालू कर पाएं तो कूचबिहार एवं सभी उत्तर बंगवासियों के लिए कोलकाता के लिए बहुत आसान यात्रा हो जाएगी ।
सिर्फ दो ही ट्रेन कूचबिहार से कोलकाता के लिए हैं । मैं आपके माध्यम से माननीय रेल मंत्री को यह बताना चाहता हूं कि महाराजा नृपेन्द्र नारायण के नाम से एक ट्रेन चालू की जाए, जो कूचबिहार से कोलकाता के लिए सुपरफास्ट ट्रेन होगी । जो पेशेन्ट्स कोलकाता लाए जाते हैं, उन सभी के लिए सुविधा होगी । आपको बहुत-बहुत धन्यवाद ज्ञापन करके और संसद के सभी साथियों को नमन करते हुए, मैं अपनी बात समाप्त करता हूं ।
माननीय अध्यक्ष : श्री रमेश बिधूड़ी,आप अपनी बात को 30 सेंकेंड में समाप्त करें ।
4श्री रमेश बिधूड़ी (दक्षिण दिल्ली): अध्यक्ष महोदय, 1256 और 58 ट्रेन, पंजाब मेल अमृतसर से मथुरा की तरफ जाती है । उसकी स्टॉपेज तुगलकाबाद में चाहिए । मैं तीन पत्र माननीय मंत्री जी को लिख चुका हूं । मैं उनको धन्यवाद दूंगा कि उन्होंने तीन फूट ओवर ब्रिज बनाए । तुगलकाबाद, ओखला और पालम स्टेशन बहुत स्वच्छ बन गए हैं,जो पहले बहुत गंदे थे ।
पालम और दिल्ली से एक ट्रेन खाटूश्याम जाती है । वहां बहुत भक्त जाते हैं । उस ट्रेन की एक मिनट के लिए स्टॉपेज पालम स्टेशन पर हो जाए । मैंने आपके माध्यम से अपनी डिमांड रख दी है । दो-दो मंत्री जी यहां बैठे हुए हैं । मेरा निवेदन है कि वे दोनों ट्रेनों की स्टॉपेज की सुविधा प्रदान कर दें । लोगों को पुरानी दिल्ली और नई दिल्ली जाना पड़ता है और वहां से वापस टैक्सी पकड़ कर आना पड़ता है । तुगलकाबाद रेलवे स्टेशन को जंक्शन बना दें, क्योंकि मुंबई से आने वाली ट्रेन तुगलकाबाद रुक जाएगी तो लोगों को बहुत सुविधा होगी । लोगों को नई दिल्ली आने में एक घंटे का समय लगता है और फिर नई दिल्ली से तुलगकाबाद आने में एक घंटे का समय लगता है ।
5*श्री जनार्दनसिंह सिग्रीवाल (महाराजगंज): मैं रेल बजट का समर्थन करता हूं । साथ ही देश के माननीय प्रधान मंत्री जी एवं रेल मंत्री का अपनी तरफ से धन्यवाद करता हूं-
मैं माननीय रेल मंत्री जी का ध्यान अपने क्षेत्र महाराजगंज, बिहार से संबंधित रेल योजनाओं के तरफ दिलाना चाहता हूं:-
1. जय प्रकाश नारायण जी के जन्म स्थली से पूज्य गांधी जी के कर्म स्थलों तक नई रेल लाइन, छपरा-जलालपुर बाजार, बनियापुर, भगवानपुर होते हुए चम्पारण तक बनाई जाए ।
2. छपरा से मथरक, महाराजगंज, धुरौधा सीवान तक प्रात: एवं सीवान धुरौधा-महाराजगंज, मथरक-छपरा तक फेरी लगवाई जाए ।
माननीय अध्यक्ष : सभी माननीय सदस्य अपनी स्पीच ले कर सकते हैं ।
माननीय जोशी जी सभी माननीय सदस्यों को धन्यवाद देंगे, जो इतनी देर रात तक रुके हैं ।
6संसदीय कार्य मंत्री; कोयला मंत्री तथाखान मंत्री (श्री प्रहलादजोशी): सर,मैं सदन और सभी माननीय सदस्यों की ओर से आपको धन्यवाद अर्पित करता हूं, अभिनंदन करता हूं । यह नए इतिहास में, in recent history, it is a record. यह आपके इनिशिएशन से हुआ है । इसलिए मैं आपको एक और बार धन्यवाद समर्पित करता हूं ।
हमारे रेल मंत्री, पीयूष गोयल, एमओएस सुरेश अंगड़ी जी,हमारे सभी कैबिनेट कुलिग्स और सभी कैबिनेट मिनस्टिर्स, जो यहां बैठै हैं, …(व्यवधान) सभी माननीय सदस्यों को, मैं धन्यवाद देता हूं । सभी स्टाफ,यहां सेक्रेट्री जनरल बैठी हुई हैं एवं स्टाफ जो बाहर बैठे हुए हैं, मैं सभी को धन्यवाद अर्पित करता हूं । 1996, 2000, 2001 के बाद यह21st सेन्चुरी में नया इतिहास है । मैं माननीय अध्यक्ष एवं सभी को एक बार और धन्यवाद अर्पित करता हूं । मैं सभी मीडिया वालों को धन्यवाद अर्पित करता हूं ।
माननीय अध्यक्ष: लोक सभा की कार्यवाही शुक्रवार दिनांक12 जुलाई, 2019 को सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित की जाती है ।
23.59 hrs The Lok Sabha then adjourned till Eleven of the Clock on Friday, July 12, 2019/Ashadha 21, 1941 (Saka).
* The sign + marked above the name of a Member indicates that the Question was actually asked on the floor of the House by that Member.
* Not recorded.
* Laid on the Table and also placed in Library, See No. LT 229/17/19.
* Treated as laid on the Table.
* Not recorded.
* Not recorded.
* Not recorded.
* Not recorded.
* Not recorded.
* Not recorded.
* Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Tabe.
* Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table * Not recorded.
* Speech was laid on the Table * English translation of the speech originally laid in Tamil.
* Speech was laid on the Table.
* Speech was laid on the Table.
* Speech was laid on the Table.
* Speech was laid on the Table.
* Speech was laid on the Table.
* Speech was laid on the Table.
* …* English Translation of the Speech originally delivered in Marathi.
* Speech was laid on the Table.
* Speech was laid on the Table.
* Speech was laid on the Table.
* Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table.
* Speech was laid on the Table.
* Speech was laid on the Table.
* Speech was laid on the Table.
* Speech was laid on the Table.
* Not recorded.
* Speech was laid on the Table.
* Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table.
* Speech was laid on the Table.
* Speech was laid on the Table.
* Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table.
* Speech was laid on the Table.
* Speech was laid on the Table.
* Speech was laid on the Table.
* Speech was laid on the Table.
* English translation of the speech originally delivered in Tamil.
* Expunged as ordered by the Chair.
* Speech was laid on the Table.
Speech was laid on the Table.
* Speech was laid on the Table.
* Speech was laid on the Table.
* Speech was laid on the Table.
* Speech was laid on the Table.
* Speech was laid on the Table.
* Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table.
* Speech was laid on the Table.
* Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table.
*Speech was laid on the Table.
* Speech was laid on the Table.
* Speech was laid on the Table.
* Speech was laid on the Table.
* Speech was laid on the Table.
* English translation of the speech originally delivered in Kannada.
* Speech was laid on the Table.
* ...*This part of the speech was laid on the Table.
* Speech was laid on the Table *English translation of the speech originally delivered in Punjabi.
* Speech was laid on the Table.
* Speech was laid on the Table * Speech was laid on the Table.
* ...* This part of the speech was laid on the Table.
*...* English translation of this part of the speech originally delivered in Marathi.
*...* English translation of this part of the speech originally delivered in Marathi.
* Speech was laid on the Table.
* Speech was laid on the Table.
* Speech was laid on the Table.