Lok Sabha Debates
Resolution Regarding Approval Of Proclamation Issued By The President On The 7 Th ... on 19 March, 2005
an> Title: Resolution regarding Approval of Proclamation issued by the President on the 7th March in relation to the State of Bihar. (Discussion concluded and Resolution adopted).
11.20 [p6] hrs. STATUTORY RESOLUTION RE : APPROVAL OF PROCLAMATION BY PRESIDENT IN RELATION TO THE STATE OF BIHAR MR. SPEAKER: Now, we will take up item number 4. Shri Shivraj V. Patil.
THE MINISTER OF HOME AFFAIRS (SHRI SHIVRAJ V. PATIL): I beg to move:
“That this House approves the Proclamation issued by the President on the 7th March, 2005 under article 356 of the Constitution in relation to the State of Bihar.” Sir, before I explain the circumstances in which the Government has had to bring this Resolution to this august House, may I state that the Constitution framers had recognised that the provisions of article 356, amongst others, were necessary to meet the exceptional situation where a breakdown of the constitutional machinery occurs in a State.
Now, may I take this opportunity to narrate briefly the circumstances prevailing in Bihar which led to the imposition of President’s Rule in the State. Elections to the Legislative Assembly of Bihar were held on the 3rd, 15th and 23rd of February, 2005. The number of seats won by different political parties, as emerged after counting on 27th February, are as follows: Rashtriya Janata Dal – 75; Janata Dal (United) – 55; Bhartiya Janata Party – 37; The Indian National Congress – 10; Bahujan Samaj Party – 02; Lok Janashakti Party – 29; Communist Party of India – 03; Communist Party of India (Marxist) – 01; Communist Party of India (ML) – 07; Nationalist Congress Party –03; Samajwadi Party – 04 and Independents – 17. Total – 243.
Shrimati Rabri Devi tendered her resignation as the Chief Minister on 28th February, 2005. She was asked to continue by the Governor till alternative arrangements were made. The Governor of Bihar kept a watch on the political situation. He assessed the claims made for formation of a popular Government by two major coalitions and finally sent a report to the President on 6th March, 2005. As per the Governor’s report, the RJP and its alliance had the support of 92 MLAs, whereas the NDA also had the support of 92 MLAs.
A delegation of members of the Lok Janashakti Party met the Governor on 28th February, 2005 and submitted a letter stating that they would neither support the RJD nor the BJP in the formation of the Government in Bihar. In a subsequent meeting with the Governor, they reiterated their stand. The Governor in his report, already tabled in this august House along with the President’s Proclamation, gave a detailed account of his meeting with representatives of various political parties, alliances and Independent MLAs and an analysis of how no combination of political parties or a coalition was able to form a Government which will have the confidence of the majority of the Members in the newly constituted Assembly.
Briefly, due to claims and counter claims of various parties and alliances without any supporting evidence, the Governor, in his report, stated that he explored all the possibilities and he was fully satisfied that no political party or coalition of parties or groups was able to substantiate a claim of majority in the Legislative Assembly[snb7] .
According to the Governor, it was a case of complete inability of any political party to form a stable Government, commanding the confidence of the majority of the Members. Therefore, the Governor recommended that the newly constituted Assembly be kept under suspended animation for the present, and requested the President of India to take appropriate action as required. The Budget of the State of Bihar for the year 2005-06 was yet to be passed. It would not have been appropriate for the Caretaker Government to take action regarding the passing of Vote on Account. There would have been serious financial and Constitutional crises, if the Budget or the Vote on Account was not passed before the 31st March, 2005. The Union Government, therefore, in its meeting held on 7th March, 2005, considered the Report of the Governor, and the situation prevailing in Bihar. It decided to recommend to the President to issue a Proclamation under article 356 of the Constitution for imposition of the President’s Rule in the State, and keeping the State Legislative Assembly under suspended animation. On 7th March, 2005, the President was pleased to issue a Proclamation under article 356(1) of the Constitution, imposing President’s Rule in relation to the State of Bihar, and keeping the State Legislative Assembly under suspended animation.
With these words, I commend that the Proclamation issued on the 7th March, 2005 under article 356 of the Constitution in relation to the State of Bihar be approved by this august House.
A copy of the Proclamation as stipulated under the Constitution along with the consequential Order, is also placed on the Table of the House. In keeping with the convention, a copy of the Governor’s Report, recommending issuance of Proclamation, is placed on the Table of the House.
MR. SPEAKER : Motion moved :
“That this House approves the Proclamation issued by the President on the 7th March, 2005 under article 356 of the Constitution in relation to the State of Bihar.” श्रीप्रभुनाथ सिंह (महाराजगंज, बिहार) : अध्यक्ष महोदय, श्री पासवान जी को हाउस में बुलाना चाहिये क्योंकि जैसा गृह मंत्री जी ने बताया है कि उनकी पार्टी के २९ विधायक हैं। वे भाजपा और आर.जे.डी में सेकिसी का समर्थन नहीं करेंगे। वह इस समय लोक सभा में उपस्थित नहीं हैं । इसलिये सदन और सरकार को उन्हें यह सूचना देनी चाहिये कि यहां आकर बिहार की जनता को अपने विचार बताते। हम लोग भी अपना विचार रखते। इसलिये मेरा आग्रह है कि श्री पासवान जी को बुलाने के लिये सुनिश्चित करना चाहिये।
प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा (दक्षिण दिल्ली) : अध्यक्ष जी, श्री लालू प्रसाद जी को इस बहस में इटरवीन करना चाहिये।
MR. SPEAKER: Now, very helpful suggestions are coming. It is entirely for the hon. Members to respond. I cannot say directly.
… (Interruptions)
श्री रघुनाथ झा (बेतिया) : अध्यक्ष महोदय, इसके पहले क माननीय नीतीश जी बोलें, मैं उनसे एक सवाल पूछना चाहता हूं…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : क्या पूछना चाहते हैं?
श्री रघुनाथ झा : अध्यक्ष महोदय, सरकारिया कमीशन की रिपोर्ट के मुताबिक फ्लोर ऑफ दि हाउस पर मेजौरिटी टैस्ट होती है और इस तरह की घटना अभी हुई है लेकिन बिहार में ऐसा मौका नहीं दिया गया। माननीय गृह मंत्री जी ने अपने प्रतिवेदन में यह बात नहीं कही जब कि किसी दल ने अपनी सरकार बनाने में रुचि नहीं दिखाई…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : क्या आप इस विषय पर बोलना चाहते हैं?
श्री रघुनाथ झा : हम बाद में बोलेंगे लेकिन एक पाइंट कहना चाहूंगा।प्रेजीडेंट रूल में श्रींमती राबड़ी देवी ने सरकार बनाने के लिये कहा…( व्यवधान) मैं जानना चाहता हूं क किस कारण से यह मौका नहीं दिया गया क्योंकि कई बार यह बात टैस्ट हो चुकी है। माननीय वाजपेयी जी को बुलाया गया, श्री नीतीश कुमार जी को फ्लोर ऑफ दि हाउस में मैजौरिटी टैस्ट करने के लिये बुलाया गया, श्री शिबू सोरेन को बुलाया गया और उन्हें मौका दिया गया। मैं जानना चाहता हूं क क्या नीचे से ऊपर तक कोई साजिश थी?
MR. SPEAKER: Raghunathji, please sit down. I will give you an opportunity to speak.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: I cannot direct Nitishji. He has heard your statement. It is entirely for him. You please start.
श्री नीतीश कुमार ( नालन्दा) अध्यक्ष महोदय, आज एक तरह से इस सदन में बिहार दिवस है। आज सब प्रेजीडेंट प्रोक्लेमेशन की बात कर रहे हैं। इसके बाद बिहार के बजट पर चर्चा करेंगे।
MR. SPEAKER: No, please. After all, this is not a normal matter. The Presidential Proclamation under article 356 is not normal matter. It has been done because of the circumstances as explained by the hon. Minister. Let other hon. Members express their views[t8] .
श्री नीतीश कुमार : अध्यक्ष महोदय, संविधान की व्यवस्था के अनुरूप सरकार ने यह प्रस्ताव, स्टेचुटरी रिजोल्यूशन सदन में पेश किया है और उन्हें किन परिस्थितियों में राष्ट्रपति शासन लागू करना पड़ा, धारा ३५६ का उपयोग करना पड़ा, इसका विवरण इसमें दिया है। उन बातों से कोई मतभेद नहीं हो सकता है जिसका उन्होंने उल्लेख किया है। यह बात सही है कि जो चुनाव हुए, उसके परिणाम इस प्रकार के थे कि हम उसे कह सकते थे कि यह एक खंडित जनादेश था। पार्टी की बात छोड़िये, चुनाव पूर्व किसी गठबंधन को भी पूर्ण बहुमत प्राप्त नहीं हुआ। अब चुनाव पूर्व गठबंधन को पूर्ण बहुमत प्राप्त नहीं हुआ, वैसी परिस्थिति में चुनाव के पश्चात भी अगर कुछ आपसी सहमति बनती, नये समीकरण बनते, तब कोई लोकप्रिय सरकार गठित हो सकती थी। लेकिन ऐसी परिस्थिति थी कि अलग-अलग दलों ने एक ऐसी पोजीशन ले ली, जिसके कारण किसी भी गठबंधन की सरकार नहीं बनी। सबसे घोर आश्चर्य तब हुआ कि राष्ट्रपति शासन लागू हो रहा है, राष्ट्रपति शासन का मतलब केन्द्र सरकार का शासन होता है। केन्द्र सरकार में जो पार्टियां एक साथ हैं, वे भी वहां एकजुट नहीं हो सकीं। सोनिया जी, यहां बैठी हुई है, मेरी बात सुन रही हैं। वह यू.पी.ए. की चेयरपर्सन हैं, उन्होंने क्या दायित्व निभाया। जो दल केन्द्र सरकार में शामिल हैं, वे आपस में एक नहीं हो सके। हमें बहुमत नहीं मिला। जनता दल (यू.) और भाजपा गठबंधन को पूर्ण बहुमत नहीं मिला। लेकिन चुनाव पूर्व गठबंधन के तौर पर सबसे अधिक सीटें हमें मिलीं और चुनाव के बाद कुछ नये समीकरण बने। आर.जे.डी. के साथ जो चुनाव में नहीं थे, वैसे लोगों ने उन्हें समर्थन का पत्र दिया और कुल मिलाकर ९१ लोगों के पत्र के साथ उन्होंने दावा पेश किया। हम लोगों ने अपना कोई दावा पेश नहीं किया था। हम लोगों ने राज्यपाल महोदय के यहां एक केविएट जरूर दायर किया था औऱ कहा था कि अगर उस पर सरकार बनाने की प्रक्रिया प्रारम्भ करें तो चुनाव पूर्व सबसे बड़े गठबंधन के रूप में हमारा गठबंधन उभरा है, इसलिए आप हमारी बात जरूर सुनेंगे और इसके लिए उनसे समय मांगकर दोनों दलों के प्रतनधियों ने अपनी बात रखी थी। उसका उल्लेख अभी गृह मंत्री जी ने यहां नहीं किया है। लेकिन जो राज्यपाल का पत्र धारा ३५६ को इनवोक करने के लिए, अनुशंसा करते हुए आया है, उसमें उसका जिक्र है। जब एक बार सरकार बनाने का प्रयत्न आर.जे.डी. की तरफ से हुआ और तर्क दिये गये, जिसका उल्लेख मेरे बोलने के पहले श्री रघुनाथ झा जी कर रहे थे, उस आधार पर उन्होंने अपना दावा पेश किया। हर किसी को अपना दावा पेश करने का अधिकार है। लेकिन उसी क्षण हम लोगों ने भी अपना प्रतिदावा पेश किया और राज्यपाल महोदय को कहा कि आर.जे.डी. के नेतृत्व में जिस गठबंधन ने दावा पेश किया है, उनके पास जितनी संख्या है, चुनाव पूर्व गठबंधन के तौर पर सबसे बड़ा गठबंधन जनता दल (यू.) और भाजपा का उभरा है। इसलिए अगर बिना बहुमत के आप सरकार बनाने के लिए अगर किसी को आमंत्रित करते हैं तो सबसे पहला दावा हम लोगों का बनता है। यह बात हम लोगों ने उनसे कही। यह कहा गया कि किसी ने दावा नहीं किया, एक पक्ष ने ही दावा किया, उन्हें मौका मिलना चाहिए। नजीर के तौर पर कुछ बातें कही जाती हैं, जिसमें केन्द्र में अटल जी की सरकार के बारे में और किसी न किसी प्रकार इन दिनों जो विवाद हुए, उनमें वर्ष २००० की एक नजीर बिहार की दी जाती है, जिसमें सरकार बनाने के लिए राज्यपाल महोदय ने मुझे न्यौता दिया था और बार-बार कहा जाता है कि बगैर बहुमत के मौका दिया गया। लेकिन इस अवसर पर श्री रघुनाथ झा जी ने मेरे बोलने के पूर्व उसे रखा है। इसलिए इससे पहले कि मैं अपनी बात कहूं, उससे पहले उसके बारे में तथ्यों को सदन में रख देना आवश्यक है। उस समय भी कुछ चर्चा हुई थी, सरकार बनाने के लिए वहां उस समय भी वर्ष २००० में बिहार विधान सभा का जो चुनाव परिणाम निकला था, उसमें किसी को बहुमत नहीं मिला था। आर.जे.डी. और एन.डी.ए. को लगभग बराबर सीटें मिली थीं। कांग्रेस पार्टी ने अलग चुनाव लङा था और वह इस वायदे के साथ बिहार की जनता के सामने गई थी कि वह किसी कीमत पर आर.जे.डी. से हाथ नहीं मिलाय्ोंगे[R9] ।
जब चुनाव के बाद एनडीए और आरजेडी की तरफ से भी दावा किया गया, तो हम लोगों की सदस्य संख्या ज्यादा थी और उस समय झारखंड मुक्ति मोर्चा ने भी हमें समर्थन दिया था। उसके अलावा कई निर्दलीय लोगों ने समर्थन दिया। कुल मिलाकर जब हम लोगों की संख्या १४७ के ऊपर हुई, तब हमने दावा किया। उस समय आरजेडी के पास १३० के आस-पास का समर्थन था। जिस दिन गवर्नर साहब ने मुझे आमंत्रित किया था, उस दिन १५० के ऊपर हमारा समर्थन था और उस समय आरजेडी ने जो दावा किया था, उनको १३० के आस-पास समर्थन था। वैसी परिस्थिति में न्यौता मिला था। कांग्रेस पार्टी ने उस समय तक फैसला नहीं किया था। जब निमंत्रण मिला, उसके बाद कांग्रेस पार्टी ने फैसला किया कि वह आरजेडी का समर्थन करेंगे। जिस समय गवर्नर साहब ने आमंत्रित किया था, उस समय बहुमत के बहुत करीब हमारी संख्या थी जिसको स्ट्राइकिंग डिसटैन्स कह सकते हैं। कई दिनों तक यह स्थिति कायम रही। तब गवर्नर साहब ने अपने विस्डम में हमें आमंत्रित किया। लेकिन बार बार एक ही बात कही जाती है। ऐसा नहीं हुआ था कि हम लोगों का समर्थन कम था, आरजेडी का समर्थन ज्यादा था, और तब मुझे बुलाया गया था। जिस समय बुलाया गया था, उस समय हमारे पास आरजेडी के दावे की तुलना में समर्थन बहुत ज्यादा था, लगभग २० का फासला था। उस स्थिति में आमंत्रित किया गया था। लेकिन उसको दूसरे संदर्भों में पेश किया जाता है। आज भी उन्होंने जिक्र किया। इसलिए इस तथ्य को यहां रखने का हमने अवसर मिला। वहां विधान सभा का रिकार्ड है, सब कुछ है। गवर्नर हाउस में वे रिकाड्र्ज़ होंगे, लेकिन आसानी से दो स्थितियों की तुलना नहीं की जानी चाहिए। वहां की स्थिति भिन्न थी। अगर कांग्रेस पार्टी ने २००० में आरजेडी को समर्थन देने का निर्णय ले लिया होता तो शायद किसी भी राज्यपाल को मुझको निमंत्रित करने की नौबत नहीं आती, उनकी संख्या ज्यादा बढ़ जाती। उनका दावा बनता तो उनको निमंत्रण मिलता। अगर पिछली बार भी पहले हमें निमंत्रण मिला, तो वह कांग्रेस पार्टी के अनिर्णय के कारण मिला। कांग्रेस पार्टी अनिर्णय का शिकार थी कि क्या करें, क्या न करें, इस दुविधा में थी। आज भी वह डायलैमा उनके सामने है या नहीं, मैं नहीं जानता हूँ। आज सबके सामने मजबूरी है, कोई उपाय नहीं है। हम नहीं कह सकते हैं कि हम लोगों के गठबंधन के पास वहां बहुमत है कि हम वहां दावा पेश करें और वहां एक लोकप्रिय सरकार बनाएं। इसलिए अगर ३५६ को लागू करके वहां राष्ट्रपति शासन लागू किया गया है, तो इससे अलग कोई इंतज़ाम हो नहीं सकता है, मुझको भी ऐसा लगता है। इसलिए उस विषय पर मैं कुछ नहीं कहना चाहता हूँ, लेकिन इतना तय है कि आखिर राष्ट्रपति शासन कितने दिनों तक रहेगा? क्या इसके लिए कोई राजनीतिक पहल नहीं होनी चाहिए? राष्ट्रपति शासन कुछ दिनों के लिए तो ठीक है, लेकिन चुनाव राष्ट्रपति शासन लागू कराने के लिए नहीं होते हैं, लोकप्रिय सरकार गठित करने के लिए होते हैं। लेकिन बिहार में एक दल है जिसे कुछ सीटें मिल गई हैं, उसने कहा कि राष्ट्रपति शासन ही लगना चाहिए। चुनाव के पहले कहा कि राष्ट्रपति शासन लगना चाहिए और चुनाव के बाद भी कह रहे हैं कि राष्ट्रपति शासन लगना चाहिए। हम लोग नहीं चाहते हैं कि अनंत काल तक कोई राष्ट्रपति शासन लागू रहे। राष्ट्रपति शासन कभी लोकप्रिय सरकार का विकल्प नहीं हो सकती है।
अध्यक्ष महोदय, उऩ दिनों राज्यपालों की भूमिका को लेकर भी विवाद चल रहे थे। वैसी स्थिति में हमने एक वक्तव्य दिया था। यहां सदन के नेता बैठे हुए हैं, गृह मंत्री बैठे हुए हैं और यूपीए की चेयरपरसन भी बैठी हुई हैं। केन्द्र के एक मंत्री श्री राम विलास पासवान का एक बयान है। उन्होंने कहा कि :--
“ यह दुर्भाग्य की बात है कि जनता दल यूनाइटेड के नेता नीतीश कुमार राज्यपाल के पद को ही समाप्त करने की बात कहे रहे हैं जब बिहार में एक दलित व्यक्ति राज्यपाल के पद पर बैठा है। ” यह केन्द्र के एक मंत्री का बयान है। उन्होंने एक और बयान दिया था। यूएऩआई की हिन्दी शाखा ‘वार्ता’ ने इसको जारीकिया था। उसकी यह प्रति है। उनका एक वक्तव्य १६ मार्च को पटना के दैनिक जागरण में छपा है जिसमें उन्होंने कहा है कि :--
“ राष्ट्रपति शासन लगे सात दिन भी नहीं हुए हैं कि बदलाव दिखने लगा है। प्रशासन अब पूरी तरह सतर्क है। लोग सुरक्षित महसूस कर रहे हैं। विकास कार्य शुरू हो गए हैं। राशि की कोई कमी नहीं रहेगी। ” “ मैं इस संबंध में वित्त मंत्री श्री पी.चिदंबरम से मिला हूँ । “ यह वक्तव्य उन्हीं केन्द्रीय मंत्री श्री राम विलास पासवान जी का है[h10] ।
श्री पासवान जी ने कहा है कि एक दलित का बेटा राज्यपाल बन कर सत्ता की बागडोर संभाल रहा है । सत्ता की बागडोर संभाल रहा है, गृह मंत्री जी इस बात को नोट करें, दलित का बेटा राज्यपाल बन कर सत्ता की बागडोर संभाल रहा है इसलिए कुछ लोग राष्ट्रपति शासन का विरोध कर रहे हैं । यह वक्तव्य केंद्रीय मंत्री का है । यानि राज्यपाल दलित है इसलिए मैं राज्यपाल के पद को समाप्त करने की बात कर रहा हूं और राष्ट्रपति शासन का विरोध इसलिए हो रहा है क्योंकि राज्यपाल के पद पर दलित बैठा है । यह किस प्रकार का वक्तव्य है? मैंने एक वक्तव्य दिया था । जिसको पीटीआई ने जारी किया था । आपकी इजाजत से मैं उस वक्तव्य को उद्धृत करना चाहता हूं और तब मैं अपनी बात रखना चाहूंगा ।
“Referring to controversial actions of Goa and Jharkhand Governors, senior JD (U) leader and former Railway Minister, Mr. Nitish Kumar on 13th March, 2005 suggested abolition of institution of Governor for smooth functioning of democracy. The institution of Governor has become a roadblock to proper functioning of democratically elected Governments. It will be better if we do away with the post. There should be a national debate on the issue, which has created unnecessary controversy, he said. Governors have become tools in the hands of the Centre to settle scores with the State Governments of its adversary. Besides, placing an unelected person in such an important constitutional post has no rationale, he said. Selection of Governor of a particular State is done keeping in mind the political interest of the ruling party. This institution of Governor has, of late, become a tool of the Centre to make the State dance to its tune, he said, making a strong case for ending the post of Governor. He said, functioning of Governors has been discussed a number of times in Parliament and other platforms, but of little use. Mr. Kumar said, a national debate was required to have an alternative arrangement to the institution of Governor, which was doing more harm to the smooth running of democracy than serving any positive purpose.” मैंने व्यापक संदर्भ में कहा था कि राज्यपाल का पद नहीं रहना चाहिए । मेरा अपना विचार है कि राज्यपाल का पद नहीं होना चाहिए । इसके आलटरनेटिव अरेंजमैंट पर राष्ट्रीय बहस होनी चाहिए । यह बात सिर्फ मैंने ही नहीं कही है । मैंने इस बात का उल्लेख इसलिए किया था कि केंद्र के एक मंत्री हैं, लोकतंत्र में सब को अपनी बात रखने का अधिकार है लेकिन वे किस प्रकार से उसका जबाव देते हैं । मैंने बिहार के संदर्भ में यह बात नहीं कही है । लेकिन मुझ पर यह आरोप लगाया गया कि दलित का बेटा राज्यपाल के पद पर बैठा है, इसलिए मैं राज्यपाल के पद को समाप्त करने की बात कर रहा हूं । यह किस प्रकार का वक्तव्य है । क्या केंद्र का मंत्री इस तरह की बात करता रहेगा । मैंने जो बात कही है उसे सिर्फ मैंने ही पहली बार नहीं कहा है । डॉ. राम मनोहर लोहिया ने भी यह बात कही है । मेरे पास समाजवादी दर्शन और डा. लोहिया नामक किताब है । यह किताब श्री लक्ष्मीकांत वर्मा जी द्वारा लखित है । उसके पेज १७५ पर लिखा है - किस प्रकार राज्यों और प्रदेशों में राज्यपाल को वे, यानि डॉ. लोहिया एक निरर्थक संस्था मानते थे । उनका मत था कि केंद्र और प्रदेशों के संबंध स्पष्ट होने चाहिए ताकि ज्यादा से ज्यादा झंझट इन मामलों में न हो । मैं जिक्र करना चाहता हूं कि १९९६ के अक्तूबर में इंटर स्टेट काउंसिल की मीटिंग हुई थी । उस मीटिंग की रिपोर्ट छपी थी । उसके अनुसार केरल के तत्कालीन मुख्यमंत्री श्री ई.के. नयनार ने कहा था “Kerala Chief Minister, Mr. E.K. Nayanar suggested a thorough review of the Sarkaria Commission recommendations and abolition of the post of Governors. He said that the office of Governor was unnecessary and be abolished.” यह कोई पहली बार हमने नहीं कहा है । श्री ई.के. नयनार ने भी कहा है । राज्यपाल के रोल को ले कर हमेशा चर्चा होती रही है । पिपुल्स डेमोक्रेसी, अध्यक्ष महोदय, आप भी जानते हैं, सीपीआईएम का मुख पत्र है । उसमें श्री प्रकाश कारथ ने लिखा है । श्री प्रकाश कारत जो पोलिट ब्यूरो के सदस्य हैं । मेरी जानकारी है कि अप्रैल महीने में श्री सुरजीत साहब की जगह लेने वाले हैं, इसके बारे में ज्यादा तो श्री वासुदेव आचार्य जी को मालूम होगा, उन्होंने नवम्बर, २००१ में वाल्यूम २५ संख्या ४७ पर पिपुल्स डेमोक्रेसी में लिखा है[i11] “The Governor has been used as an agent of the Centre and repeatedly, Governors have acted against elected State Governments and the Legislature throwing democratic norms to the wind.” यह प्रकाश कारत जी लिख रहे हैं, यह सी.पी.आई.एम. के मुखपत्र में छपा है, सी.पी.आई.एम. का यह विचार है। श्री ई.के. नयनार यह कह रहे हैं, पुराने समाजवादियों की यह मांग है। लालू जी वहां से बोल रहे हैं कि कर्पूरी जी को क्यों भूल रहे हैं। जननायक कर्पूरी ठाकुर जी ने यह बात कही थी। उनके उद्धरण शायद वह पेश करेंगे। अब जो राजभवन की भूमिका होती है, उसके बारे में संविधान विशेषज्ञ डॉ. सुभाष कश्यप ने एक लेख लिखा है जो इंडियन एक्सप्रैस, दैनिक समाचार पत्र के दिनांक ७ मार्च, २००५ के अंक में छपा है। उसमें वे लिखते हैं -
“Governorship becomes a reward for the past loyalty and a tacit assurance of protecting party interests in the future. The Sarkaria Commission and the National Commission on the Constitution have both suggested norms to govern the selection of Governors only from among eminent persons not too intimately connected with politics, at least, in recent years.” …( व्यवधान)
श्री शिवराज वि. पाटील : अध्यक्ष जी, यहां पर जो चर्चा हो रही है, वह प्रोक्लेमेशन पर हो रही है। गवर्नर होना चाहिए या नहीं, इस पर यह सदन चर्चा कर सकता है। मगर आज जो चर्चा हो रही है वह गवर्नर्स के रोल पर हो रही है और कल भी जो चर्चा हुई वह भी गवर्नर्स के रोल पर हुई। …( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Please, at least, give some respect.
श्री शिवराज वि. पाटील : महोदय, कल भी चर्चा गवर्नर्स के रोल पर हुई और आज भी उसी पर चर्चा हो रही है। जो प्रोक्लेमेशन इश्यू किया गया है, वह सही तरीके से किया गया है या नहीं, यह विषय हमारे सामने है। अगर माननीय सदस्य चाहें, तो बोल सकते हैं। मगर विषय यही है।
MR. SPEAKER: That is true. I agree. As I understand from Nitishji, he says that there was no alternative to the President’s Rule. But, he is raising certain basic issues. I am sure, he will not… … (Interruptions)
MR. SPEAKER: You have touched the point very ably using your efficiency.
श्री नीतीश कुमार : अध्यक्ष महोदय, अगर केन्द्रीय मंत्री महोदय ने इस प्रकार का वक्तव्य नहीं दिया होता, तो मैं इसकी चर्चा भी नहीं करता और शायद मैं डिबेट में पार्टीसिपेट भी नहीं करता। गवर्नमेंट की यह कलैक्टिव रेस्पांसबलिटी है। ऐसा नहीं होगा कि गृह मंत्री यहां एक बात कहें और आपके मंत्रिमंडल के सदस्य, रसायन, उर्वरक तथा लोहा मंत्री कुछ और कहें और वे चार्ज करें। क्या एक विचार रखने के लिए आप किसी पर आरोप लगाएंगे ? यह कोई मामूली आरोप नहीं है। …( व्यवधान)
MR. SPEAKER: It is entirely for them to decide. It is the collective responsibility.
श्री नीतीश कुमार अध्यक्ष महोदय, कौनसी छड़ी का इस्तेमाल कर रहे हैं, क्या लोकतंत्र में हम अपने विचार नहीं रख सकते। जब हमने अपने इस विचार को रखा, हमारे वक्तव्य को पी.टी.आई. ने जारी किया, वह मैंने सदन में पढ़कर सुना दिया, मैने सदन में उसे उद्धृत कर दिया। उसमें बिहार का रैफरेंस था ही नहीं, तब भी मुझ पर आरोप लगाया गया कि मैं राज्यपाल के पद को समाप्त करना चाहता हूं क्योंकि एक दलित बिहार का राज्यपाल बना हुआ है।
महोदय, राज्यपाल के पद को विवाद में कौन ला रहा है ? मैं नहीं ला रहा हूं, आपके केन्द्रीय मंत्री ला रहे हैं, आपके कलीग ला रहे हैं। जाइंट रेस्पांसीबलिटी है, कलैक्टिव रेस्पांसबलिटी है। …( व्यवधान)
MR. SPEAKER: You have made your point very clear.
श्री नीतीश कुमार : अध्यक्ष महोदय, इसीलिए मैं इस सवाल को उठा रहा हूं। बाकी अध्यक्ष महोदय, जो निर्देश देंगे, मैं उसका पालन करूंगा।
अध्यक्ष महोदय : ठीक है। You have made your point on the Proclamation .… (Interruptions)
MR. SPEAKER: But, he was not discharging his function.
… (Interruptions)
श्री नीतीश कुमार : अध्यक्ष महोदय, उनकी तरफ से दो प्रश्न छेड़े गए हैं। एक तो यह कहा गया है कि वह दलित का बेटा है, यानी वे खुद ही स्वीकार कर रहे हैं। यह तो कहा जाता है कि कोई सरकार में है, फलां को मंत्री बनाया, देखो रिप्रजेंटेशन दिया। जिसे कांस्टीटयूशनल पोस्ट कहते हैं, उसे भी इस प्रकार से बांट रहे हैं। …( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Just a minute! I do not think he has made such an observation. He happens to be a Minister. But, that has nothing to do with the Central Government’s functioning.
… (Interruptions)
श्री नीतीश कुमार : ठीक है, लेकिन …( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Yes, I have said that.
… (Interruptions)
प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा (दक्षिण दिल्ली) : अध्यक्ष महोदय, यह तो नहीं हो सकता कि लालू जी कुछ कहें और पासवान जी कुछ और बात कहें। आखिर दोनों ही मंत्रिमंडल के सदस्य हैं। …( व्यवधान)
MR. SPEAKER: I have said that these are the matters.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: I have never been a Minister. These matters, I am sure, will not come before the Cabinet.
श्री नीतीश कुमार अध्यक्ष महोदय, हम अगर …( व्यवधान)
THE MINISTER OF DEFENCE (SHRI PRANAB MUKHERJEE): Just one second. Collective responsibility is extended to the decision of the Government. If somebody contradicts the decision of the Government, then the collective responsibility comes but not in an individual’s opinion about the comment or an action of an individual.
श्री नीतीश कुमार : अध्यक्ष जी, श्री प्रणव बाबू ने तो मेरा काम और भी आसान कर दिया, यानी वे जो बोल रहे हैं, वे आपके डिसीजन को कंट्राडिक्ट नहीं कर रहे हैं। लेकिन जो राज्यपाल हैं, वे दलित हैं, यानी आपने दलित होने के कारण उन्हें राज्यपाल बनाया[rpm12] ।
आपने उन्हें दलित एवं पोलटशियन होने के कारण राज्यपाल बनाया।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Nitish ji, we are travelling much beyond the scope.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Nitishi ji, I will take just a minute. You are very ably presenting your case. Let us not bring in the Governors.
श्री नीतीश कुमार : अध्यक्ष महोदय, हम नहीं लाना चाहते।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: That is true. You have made your point. It need not be elaborated.
श्री नीतीश कुमार : अध्यक्ष महोदय, गवर्नर के पद पर कोई भी व्यक्ति बैठा हो, मैं उन्हें विवाद में नहीं घसीटना चाहता, केन्द्र के एक मंत्री उन्हें विवाद में घसीट रहे हैं।…( व्यवधान) उन्हें दलित बता रहे हैं।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: You have made your point. I think that is not the point of discussion now.
श्री नीतीश कुमार : अध्यक्ष महोदय, मैं इस बात से आगे बढ़ना चाहता हूं। अगर हम इस बात को माल लें कि वे दलित हैं, इसलिए कोई विरोध कर रहा है तो यह बेबुनियाद है, उनकी मानसिकता का द्योतक है। मुझे खुशी होती, अगर श्री पासवान जी स्वयं यहां मौजूद होते, लेकिन वे यहां इस समय उपस्थित नहीं हैं। वे यहां उपस्थित होते तो मैं उनसे सवाल पूछता कि अगर यह उनकी मानसिकता का परिचायक है,…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Let us not, I think, go into his conduct.
श्री नीतीश कुमार : अध्यक्ष महोदय, हम किसी के कंडक्ट पर नहीं जा रहे हैं, हम उसके पोलटिकल आसपेक्ट पर आ रहे हैं। अगर वे किसी पर नाहक चार्ज करते हैं कि वह दलित है, इसलिए विरोधी हैं तो क्या मैं पूछ सकता हूं कि वे श्री लालू जी का विरोध इसलिए करते हैं कि वे एक यादव हैं। वे मेरा विरोध इसलिए करते हैं कि मैं ओबीसी का हूं।…( व्यवधान) पिछड़े वर्ग से हूं।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: We are travelling much beyond the scope of its application.
SHRI NITISH KUMAR : I am not travelling beyond the limits.
महोदय, क्या एक व्यक्ति को इतनी आजादी है कि वह अपनी सारी लमिटेशन तोड़ कर जहां चाहे वहां ट्रेवल करता रहे?
MR. SPEAKER: This is a matter which is outside the scope of this.
श्री नीतीश कुमार : अध्यक्ष महोदय, संसद सबसे ऊपर है, मंत्रियों को बोलने से पहले कुछ सोचना चाहिए कि वे क्या बोल रहे हैं। दो प्रकार की भूमिका होती है। हम भी एक पार्टी में हैं और कोई मंत्री है, वह भी एक पार्टी में है, लेकिन दोनों प्रकार की भूमिका में थोड़ा फर्क करना चाहिए। आप जब दूसरों पर आरोप लगाते हैं तो आपको खुद भी आरोप झेलने के लिए तैयार रहना चाहिए। मेरी व्यक्तिगत रूप से किसी से कोई शिकायत नहीं है, न श्री बूटा सिंह जी से है और न ही श्री पासवान जी से है, लेकिन यह तरीका गलत है, मैं इस बात को यहां कहना चाहता हूं।…( व्यवधान) यह तरीका गलत है कि किसी भी मामले को ये तूल दें और उसको ऐसा रूख देते रहें। केन्द्र के मंत्री हैं, इस बात को तो आप डिनाई नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि अभी सात दिन भी नहीं हुए हैं और बदलाव दिखने लगे हैं। प्रशासन अब पूरी तरह सतर्क है।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: You are talking about post-Proclamation.
SHRI NITISH KUMAR : Yes, I am talking about post-Proclamation. होम मनिस्टर मालिक हैं, सर्वेसर्वा हैं, इसलिए मैं पूछ रहा हूं। इनके एक मंत्री बोल रहे हैं, बगल में श्री लालू जी बैठे हैं। इस बात का भी ख्याल रखिए कि हर चीज की कोई सीमा होती है।…( व्यवधान)
श्री शिवराज वि. पाटील : मैं मालिक नहीं हूं और वे मेरे मंत्री नहीं हैं, सरकार के मंत्री हैं।
श्री नीतीश कुमार : मैंने कहा कि आपके साथी हैं, मंत्री तो सब सरकार के ही होते हैं।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: I appreciate your views. The House has appreciated your point of view.
SHRI NITISH KUMAR : You have always appreciated me! MR. SPEAKER: That is the trouble. I always do that. You have to take it.
श्री नीतीश कुमार : अध्यक्ष महोदय, विकास कार्य शुरू हो गए हैं, यानी पहले विकास कार्य अवरूद्ध थे और केन्द्र के मंत्री कह रहे हैं कि राशि की कोई कमी नहीं है।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: It is becoming a debate on one individual. That is not right.
श्री नीतीश कुमार : हम वित्त मंत्री जी से बजट के समय पूछेंगे, मैं अभी उसमें नहीं जाऊंगा, जब उस पर चर्चा होगी तब मैं उनसे पूछूंगा।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : आप बजट के समय बोलिए।
श्री नीतीश कुमार : अध्यक्ष महोदय, आप बजट के समय बोलने का समय देंगे, आपकी इजाजत होगी तो उस समय मैं बोलूंगा। मैं इस समय एक बात का उल्लेख करना चाहता हूं कि जो राष्ट्रपति शासन लागू करने की मजबूरी में परिस्थितिवश या लाचारीवश कदम उठाए गए हैं, उनकी इतनी प्रशंसा करना इस बात की ओर इंगित करता है कि आप लम्बे काल तक इसे चलाना चाहते हैं।
MR. SPEAKER: You have spared Shivraj ji. The Home Minister has nothing to reply! SHRI NITISH KUMAR : He will have to give the reply. I am coming to the point. आप अपने मंत्री जी को याद करा दीजिए, वे राष्ट्रपति शासन की इतनी प्रशंसा के पूल बांध रहे हैं, इससे ऐसा लग रहा है कि जैसे इनका ही शासन हो। ऐसालग रहा है कि श्री बूटा सिंह जी राज्यपाल नहीं हैं, वही राजभवन में बैठ गए हैं, इस प्रकार की बात हो रही है[R13] ।
आप एक बात याद कराइयेगा, मैं और कुछ नहीं कहना चाहता, याद कराना चाहता हूं, जब इटली में मुसोलिनी डिक्टेटर थे, उस समय भी मुसोलिनी के पक्ष में कहा जाता था कि ट्रेनें समय पर चल रही हैं। वल्र्ड वार वन के बाद वहां पर ट्रेन के परिचालन की व्यवस्था ठप्प हो गयी थी तो मुसोलिनी साहब ने जो सत्ता हथिया ली, उसके बाद कहा गया कि ट्रेनें समय पर चलनी शुरू हो गईं। इमरजेंसी में भी यही कहा गया था, जब इस देश पर इमरजेंसी थोपी गई थी तो इमरजेंसी की प्रशंसा में पुल बांधे जाते थे और कहा जाता था कि ट्रेनें समय पर चल रही हैं। वैसे ही राष्ट्रपति शासन लागू हो गया तो सब कुछ वहां पर ठीक हो गया। मैं एक दिन पटना में था, मैं जब पटना पहुंचा, जिस इलाके में मैं रहता हूं, वहां बिजली गुल थी। मुझे तो राष्ट्रपति शासन का पहला तजुर्बा वही मिला। अगले दिन सुबह मैं घूम रहा था तो मैंने सड़कों पर देखा कि दर्जनों की संख्या में गाय और भैंस को पुलिस वाले निकाल लिए जा रहे हैं। मैंने कहा, क्या हो रहा है तो कहा गया कि खटाल उखाड़ा जा रहा है। राष्ट्रपति शासन का असर दिख रहा है, सब कुछ ठीक हो गया। केन्द्र के एक मंत्री कहते हैं कि सब कुछ ठीक हो गया। शहर में बिजली गायब हो रही है, खटाल उखाड़े जा रहे हैं, सब कुछ ठीक हो गया। सारा विकास का काम शुरू हो गया।
मैं गृह मंत्री जी से पूछना चाहता हूं…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : अब आप ठीक आ रहे हैं।
श्री नीतीश कुमार : अब मैं पूछना चाहता हूं कि यह जो एक प्रचार चल रहा है, राष्ट्रपति शासन न हुआ, मानो धरती पर स्वर्ग उतर आया है, उनके केन्द्रीय मंत्री ने कहा है कि अभी कुछ दिन यह चलेगा, जरा कचरा साफ करना है। किसने कचरा पैदा किया था? गृह मंत्री जी, मैं जानना चाहता हूं, आपके सहयोगी ने कहा कि राष्ट्रपति शासन चलेगा, कूड़ा कचरा साफ करना है…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: I will call both of you to my residence.
श्री नीतीश कुमार : किसने कचरा पैदा किया था? यह आपके एक मंत्री बोल रहे हैं कि कचरा साफ करना है।
MR. SPEAKER: You ask the Home Minister about his Ministry. I have given you more than half an hour. Instead of four minutes, I have given you half an hour.
श्री नीतीश कुमार : एक मिनट।
ग्रामीण विकास मंत्री (डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह) : रामविलास पासवान जी यहां नहीं हैं, नीतीश जी एकतरफा गोल किये जा रहे हैं। एक सवाल-अभी हाल का इनका बयान है, ५५ विधायकों को लेकर मैं तैयार हूं, रामविलास पासवान जी ६७ विधायकों का इन्तजाम करके ले आयें तो दोनों आदमियों का छोर मिल जायेगा, राज बना लेंगे, इस पर भी मैं इनकी राय जानना चाहता हूं कि फिलहाल इनकी ६७ और ५५ वाले हिसाब में क्या राय है?
श्री नीतीश कुमार : मैं रघुवंश बाबू को ओब्लाइज करूंगा, मैं उनकी बात का जवाब दूंगा। मैंने शुरू में ही कहा, रघुवंश बाबू, आज आप उनको डिफेंड करने की मुद्रा में खड़े हुए हैं, पता नहीं डिफेंड कर रहे थे…( व्यवधान)
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह : मैंने ६७ और ५५ का हिसाब याद कराया कि छोर नहीं मिल रहा है, इतना बोल रहा हूं, तुरन्त छोर मिल जायेगा तो फिर क्या बोलेंगे।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: So, you agree with him.
श्री नीतीश कुमार : वह तो चुनाव के पहले उन पर क्या बोले थे, आज चुनाव के बाद क्या बोलेंगे, यह अब कहें…( व्यवधान)
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह : अब पूंजी पद है ही नहीं, अब बनाने की बात कीजिए।
अध्यक्ष महोदय : बोलिये, खत्म करिये। I have given you enough time.
श्री नीतीश कुमार : आखिर राष्ट्रपति शासन कब तक जारी रखना चाहते हैं?
अध्यक्ष महोदय : यह आपने सही बात पूछी।
श्री नीतीश कुमार : ऐसा कितने दिन तक जारी रहेगा? लोकतंत्र की व्यवस्थाएं अपने अनुरूप चलेंगी या जो व्यवस्था संविधान ने दी है कि बिल्कुल उसके मुताबिक काम न हो, संवैधानिक व्यवस्था जब चरमरा जाये, तो इसका इस्तेमाल किया जाये। एक बात का उत्तर गृह मंत्री जी को देना होगा, यह बात इनकी पार्टी से भी सम्बन्धित है, आप बात कर लें, सोनिया जी बगल में हैं, उनसे पूछ लीजिए, पूछकर ही बताइये, लेकिन जरूर बताइये कि कांग्रेस पार्टी का इस मामले में क्या रुख है? कांग्रेस पार्टी वहां क्या चाहती है? बीच में आप जो दुविधा में रहे, उसी का नतीजा है कि १० पर पहुंच गये। क्या आगे भी आप दुविधा में रहना चाहते हैं? आप रास्ता तय कर लीजिए। अगर बिहार में राष्ट्रपति शासन लागू है तो इसके लिए जिम्मेदार आप हैं। आपके पास संख्या नहीं आई है तो आप परोक्ष रूप से राज करना चाहते हैं - वरना आप तय करिये, आपके हाथ में है, आप सरकार बना सकते हैं। हम दावा नहीं कर सकते, हमारे पास ९२ लोग हैं, १२२ नहीं हैं, उसमें ३० की कमी है, हो सकता है कि कुछ निर्दलीय समर्थन दे दें, तो भी हमारे पास १२२ का आंकड़ा नहीं है। लेकिन आप यहां एकसाथ सरकार में बैठे हैं, आप रास्ता निकालिये या फिर इसी स्थिति में आप बीच में तराजू लेकर, एक पलड़े पर पासवान जी को बैठाकर और दूसरे पर लालू जी को बैठाकर, कब तक बेलेंसिंग एक्ट करना चाहते हैं?[i14]
12.00 hrs. [MSOffice15] बिहार की जो समस्या है यह आपकी वजह से है और बहुत अच्छी बात है कि सोनिया जी इस बात को सुन रही हैं। इन्हीं को निर्णय लेना है। आप क्या चाहते हैं? बिहार में अनिश्चितकाल तक राष्ट्रपति शासन लागू रखना चाहते हैं या लोकतांत्रिक व्यवस्था को स्थापित करना चाहते हैं? फैसला आपको करना होगा।
अध्यक्ष महोदय : अनिश्चितकाल तक नहीं हो सकता।
श्री नीतीश कुमार : अध्यक्ष महोदय, मैं इस बात का उल्लेख करना चाहता हूँ कि आज तो हम लोगों की मजबूरी है कि बिहार में राष्ट्रपति शासन लग गया लेकिन अगर आपकी योजना है इसे सालभर लगाने की या और आगे थोड़ा खींचने की, तो इसका पुरज़ोर विरोध होगा। छ: महीने के बाद आप इसको आगे जारी रखना चाहते होंगे, मगर हम चाहते हैं कि तत्काल समस्या का समाधान निकले। किस प्रकार से शासन चल रहा है? आज कितने दिन हो गए, दो सप्ताह होने को आए, लेकिन एडवाइज़र की बहाली नहीं हुई। जो राष्ठ्रपति शासन में रूल ऑफ बिज़नस में परिवर्तन होता है, गवर्नर इन काउंसिल का आपने गठन नहीं किया। सलाहकारों की नियुक्ति नहीं हुई। राष्ट्रपति शासन लागू करते ही कुछ नाम आए। रोज़ नाम तैर रहे हैं। कभी एक्स का नाम कभी वाई का नाम, लेकिन आप सलाहकार की नियुक्ति नहीं कर पा रहे हैं। आपकी कैसी सरकार है? राज करना चाहते हैं। “दलित का बेटा बैठा है।” कोई जरूरत नहीं है। क्या राजनीति करना चाहते हैं? परोक्ष रूप से राजनीति करना बंद कीजिए।
श्री प्रणब मुखर्जी : इन्होंने गरीब का बेटा बोला है। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : इन्होंने दलित का बेटा बोला है। I will look into this.
… (Interruptions)
श्री प्रणब मुखर्जी : नहीं, इन्होंने कहा कि गरीब का बेटा बैठा है।…( व्यवधान)
श्री नीतीश कुमार : हम पर नाराज क्यों हो रहे हैं? हमने नहीं कहा। आपका गुस्सा हम पर नहीं होना चाहिए। …( व्यवधान)
MR. SPEAKER: I shall look into it.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Please conclude now.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: You have yourself said that the Governor’s position is very high.
… (Interruptions)
श्री नीतीश कुमार : प्रणब बाबू, मैं नहीं कहता हूँ।…( व्यवधान)
श्री प्रणब मुखर्जी : आपने अभी कहा है। …( व्यवधान)
श्री नीतीश कुमार : नहीं, हमने अपने बारे में नहीं कहा है।…( व्यवधान)
श्री प्रणब मुखर्जी : आपने कहा है, रिकार्ड देख लीजिए।…( व्यवधान)
श्री नीतीश कुमार : रिकार्ड देखने की बात नहीं है। भाषा को समझिए।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: It is an important matter. I will not allow this. I will look into this.
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय : आप लोग बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
श्री हरिन पाठक (अहमदाबाद) : बूटा सिंह जी के बारे में कहा है। यह तो गौरव की बात है MR. SPEAKER: He does not need your support. Please take your seat.
श्री नीतीश कुमार : ठीक है। मैं आगे रिपीट नहीं करूंगा। लेकिन हमने नहीं कहा।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Nitish ji, you have mentioned it, but repeating it again and again will become derogatory. Repetition becomes derogatory.
SHRI PRANAB MUKHERJEE: You go through the sentence. The whole sentence is derogatory.
MR. SPEAKER: I will look into this myself. Please bring it to me.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: It sounds derogatory if you repeat it.
श्री नीतीश कुमार : मैं नहीं कह रहा हूँ। मैं प्रणब बाबू को स्पष्ट करना चाहता हूँ कि मैं अपने भाव को व्यक्त नहीं कर रहा हूँ। क्षमा करेंगे, मैंने पहले जिन महानुभाव का उद्धृण दिया है, उन्हीं के बारे में कह रहा हूँ। मेरे ऐसे विचार नहीं हैं। मेरे मन में इज्जत है। श्री बूटा सिंह जी राज्यपाल के पद पर बैठे हैं, उनके बारे में मेरे मन में इज्जत है। मैं उनके साथ काम कर चुका हूँ। वे सिर्फ आपकी पार्टी में नहीं रहे हैं। १९९८ में श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार में भी मंत्री रहे हैं। उनके साथ मंत्रिमण्डल में बैठने का मुझे भी अवसर मिला है। संसद में बैठने का मौका मिला है। मैं उनकी इज्जत करता हूँ। मैं उनके बारे में यह बात नहीं कह रहा हूँ।
MR. SPEAKER: You want to know how long the President’s Rule will continue.
श्री नीतीश कुमार : मैं कह रहा हूँ कि इसके पीछे कोई राजनीतिक योजना तो नहीं है, कोई गेम प्लान तो नहीं है? आप उन्हें बैठाकर परोक्ष रूप से राज करते रहें। अगर परोक्ष शासन चलाने की कोशिश होगी, तो उसका विरोध होगा। तात्कालिक आधार पर कुछ दिनों पहले अगर ऐसी स्थिति आती है और उसके सिवा कोई विकल्प नहीं, तो दूसरी बात है। लेकिन इसकी आड़ में राजनीति नहीं होनी चाहिए और राजनीति करने से दूसरों को भी रोका जाना चाहिए। अगर राज्यपाल के पद पर बैठे हुए व्यक्ति का उल्लेख होने लगेगा, इस प्रकार से सदन के बाहर राज्यपाल के पद पर जो व्यक्ति बैठा हुआ है उनके इर्द-गिर्द विवाद मंडराने लगेगा - ऐसी बात नहीं होनी चाहिए। इसलिए मैंने शुरू में ही कह दिया था कि हम पर यह आरोप न लगाएं। यदि हम पर आरोप लगाएंगे, तो उन पर भी आरोप लगेगा। जब कोई राजनीति विरोधी के ऊपर बोलेंगे तो यही आरोप लगेगा कि वह पिछड़ा है। इसलिए इस बात को बंद करें। मैं इस सदन के माध्यम से उनको सलाह दे रहा हूँ।
अध्यक्ष महोदय, सरकार बननी चाहिए। सरकार कैसे बनेगी? सरकार तो बनेगी अगर सचमुच कांग्रेस चाहे[k16] ।
लालू जी के साथ मिलकर बना लीजिए, आरजेडी के साथ मिलकर बना लीजिए।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: That is a different matter.
श्री नीतीश कुमार : डिफरैंट मैटर नहीं है, सरकार बनाने की बात है।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: How will they conduct themselves? Are you giving them friendly suggestion?
श्री नीतीश कुमार : अगर ऐसी बातें नहीं होंगी तो नीरस हो जाएगा। आज आप भी अच्छे मूड में हैं।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: You know, how well you have been speaking.
श्री नीतीश कुमार : गृह मंत्री जी बोल रहे हैं कि हमने समर्थन दे दिया है।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : आप जाकर उनको बता दीजिए।
...( व्यवधान)
श्री नीतीश कुमार : वह पक्का है ना, क्योंकि आपके दूसरे मंत्री भी इस्तेमाल कर रहे हैं।…( व्यवधान)
श्री शिवराज वि. पाटील : आप हाउस में आकर एक-दूसरे को झगड़ा करने के लिए इन्सटीगेट कर रहे हैं।
श्री नीतीश कुमार : हम इन्सटीगेट नहीं कर रहे हैं। अगर इन्सटीगेट करना होगा तो बाहर करेंगे, यहां क्यों करेंगे। …( व्यवधान) हम चाहते हैं कि आप सरकार बना लीजिए। अगर हम इन्सटीगेट करना भी चाहें, तो आप मत होइए।…( व्यवधान) आप आपस में मिल जाएं, बिहार को सरकार मिल जाएगी - एक रास्ता यह है। गृह मंत्री जी बोल रहे हैं कि आप इन्सटीगेट कर रहे हैं। मैं इन्सटीगेट नहीं करता और उसकी जरूरत भी नहीं है। पहले से ही इतना मसाला मौजूद है।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: It has become a debate on the conduct of the leaders.
… (Interruptions)
SHRI PRANAB MUKHERJEE : It has become a debate between two leaders… (Interruptions)
MR. SPEAKER: I did not want to stop you. Very well, please go ahead.
श्री नीतीश कुमार : अध्यक्ष महोदय, आज प्रणब बाबू पता नहीं क्यों गुस्से में आ रहे हैं।
श्री प्रणब मुखर्जी : मैं गुस्से में नहीं आ रहा हूं।
श्री नीतीश कुमार : आपकी स्थिति तो एक साल बाद बंगाल में आने वाली है, अभी क्यों गुस्सा हो रहे हैं।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: You have made all the points so early. Please conclude now.
श्री नीतीश कुमार : कुछ प्वाइंट्स बचे हुए हैं।
अध्यक्ष महोदय : अभी भी कुछ प्वाइंट्स बचे हुए हैं।
श्री नीतीश कुमार : अभी रघुवंश बाबू ने एक बात कही। दो ही रास्ते हैं। तीसरे रास्ते की बात कही जाती है कि जेडीयू कुछ नहीं करता, गैर-आरजेडी, गैर बीजेपी सरकार बन सकती है। उसके जवाब में हमने कहा कि जेडीयू के पास ५५ एमएलएज हैं। १२२ का आंकड़ा प्राप्त करने के लिए ६७ एमएलएज की जरूरत है। आप ६७ एमएलएज़ का इंतजाम कर लें और ५५ का समर्थन ले जाएं। अब ६७ एमएलएज़ कहां से पूरे होंगे, बगैर कांग्रेस के ६७ एमएलएज़ पूरे नहीं होते। इसलिए पाटील साहब से विशेष तौर पर आग्रह है कि आपने यहां घोषणा कर दी तो कम से कम वह चर्चा बाहर बंद हो जाए। आपके बगैर ६७ एमएलएज पूरे नहीं होते।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: You are going too fast on this.
श्री नीतीश कुमार : अब बात समाप्त हो रही है।…( व्यवधान) आप उनको ज्यादा क्यों बचा रहे हैं।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : हम उनको नहीं बचा रहे हैं। If you go through this, I should not have allowed even half of it. But I have allowed it. Please do not say that.
श्री नीतीश कुमार : आपकी विशेष कृपा है। इसके लिए मैं आपका ग्रेटफुल हूं।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : यह सही नहीं है हम किसी को नहीं बचा रहे हैं। अगर हम किसी को बचाने की कोशिश करते हैं तो वह पार्लियामैंट्री डैमोक्रेसी है।
श्री नीतीश कुमार : थोड़ा-बहुत चलता है।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: I said to the hon. Members to observe this point. It is not a normal thing. It is a painful thing that in India any State should be under President’s Rule. But certain things have to be done. Let us see how we can resolve this matter. Therefore, discuss it on that plain, not on ‘A’ or ‘B’.
श्री नीतीश कुमार : आपके जो विचार हैं, हमारी पूरी थीम उसी पर आधारित है। इसीलिए हमने सीपीआई (एम) के मुख्य पत्र को कोट किया।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : कभी-कभी सीखना भी चाहिए।
श्री नीतीश कुमार : हम वैचारिक रूप से कोट करते हैं, लेकिन बसुदेव आचार्य जी लालू जी से मिले रहते हैं।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : ठीक है, आप बोलिए।
श्री नीतीश कुमार : मैं एक चीज का उल्लेख करना चाहूंगा। आपने राष्ट्रपति शासन लागू किया, तो जो अधिसूचना जारी की, उसमें आपने धारा १९५ को भी निलंबित कर दिया। जहां तक बिहार विधान सभा के नवनिर्वाचित सदस्यों के वेतन, भत्ते और अन्य सुविधाओं का प्रश्न है, मैं आग्रह करूंगा कि जो विधायक चुनकर आए हैं, उनका कोई कसूर नहीं है। उन्हे कुछ नहीं मिल रहा है। उन्हें पक्र्स मिलने चाहिए। एक बार जो चुनकर आ जाता है, उससे लोगों की अपेक्षाएं भी होती हैं। महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में भी ऐसी स्थिति आई थी। जो सदस्य चुनकर आए थे, उनको वे सुविधाएं दी गई थीं। जो बिहार विधान सभा से पारित कानून है, उसमें भी कुछ बाधाएं हैं कि शपथ लेने के बाद ही पक्र्स आदि मिल सकते हैं। उसमें वहां संशोधन हो सकता है, लेकिन अनुच्छेद १९५ आपके इस प्रोक्लेमेशन के साथ ही निलंबित है[R17] । इसलिए हम एक आग्रह करना चाहेंगे कि वहां के नव-निर्वाचित विधायकों को so much of article 195 as relates to salaries and allowances of Members of Legislative Assembly. आर्टिकल १९५ का यह पक्ष निलंबित है, सस्पेंडेड है। मैं आपसे करबद्ध प्रार्थना करूंगा कि नव-निर्वाचित विधायकों को वेतन मिले, कुछ सुविधायें मिलें ताकि वे काम कर सकें। ऐसा पूर्वोदाहरण उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में है। …( व्यवधान)
SHRI BALASAHEB VIKHE PATIL (KOPERGAON): Even the House is yet to assemble. How can the Members take Oath? … (Interruptions)
श्री नीतीश कुमार : ओथ वाला आप वहां से अमेंडमैंट कर सकते हैं लेकिन मूल धारा १९५ निलंबित है। वहां के कानून में जो कमी है। …( व्यवधान)
MR. SPEAKER: This is not permitted. You kindly address the Chair. You need not respond to every hon. Member.
श्री नीतीश कुमार : अध्यक्ष महोदय, यह विशेष परिस्थिति में विशेष इंतजाम है। मैं आपसे आग्रह करूंगा कि वहां के सदस्यों के लिए विशेष परिस्थिति में विशेष इंतजाम किया जाये। एक बार फिर हम आपके माध्यम से और इस सदन के माध्यम से रूलिंग पार्टी, रूलिंग काम्बीनेशन से दरख्वास्त करेंगे कि राष्ट्रपति शासन तात्कालिक आधार पर कुछ समय के लिए लागू किया जाये, तो ठीक है, लेकिन इसे अनन्त काल तक जारी रखने की अगर कोई योजना है, तो उस योजना को अमली जामा पहनाने से पहले आप सौ बार सोचिये। उसका डटकर विरोध होगा और जब-जब लोकतंत्र को इस प्रकार से तोड़ने-मरोड़ने की कोशिश हुई है, तब-तब विरोध हुआ है। कचड़ा साफ कर देने से आपको राष्ट्रपति शासन का समर्थन नहीं मिल जायेगा। इमर्जेंसी के बाद चुनाव हुए, तो उस समय जनता ने क्या फैसला दिया, वह आपको मालूम है।…( व्यवधान) ट्रेनें समय पर चल रही थीं। …( व्यवधान) इसलिए इस विचार धारा को मानने वाले आपके जो भी सहयोगीं हों, उन्हें रोकिये। मुझे खुशी होती कि पासवान जी पहले आ जाते । वह कुछ देर से आये हैं। …( व्यवधान)
रसायन और उर्वरक मंत्री तथा इस्पात मंत्री (श्री रामविलास पासवान) : मैं पीछे बैठकर आपकी बात सुन रहा था। …( व्यवधान)
श्री नीतीश कुमार : जब आप सुन रहे थे, तो अपनी बात जरूर कहेंगे।
अध्यक्ष महोदय, इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं। आपने मुझे बोलने के लिए समय दिया, उसके लिए धन्यवाद।
MR. SPEAKER: Thank you very much for your kind co-operation.
Now, Shri Nikhil Kumar.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Let us have a high level debate. This is not a normal thing. Let us put it in a proper way.
Now you have found him.
SHRI NITISH KUMAR : Yes, Sir.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Nothing will go on record except what Shri Nikhil Kumar says.
(Interruptions) … * * Not Recorded.
श्री नखिल कुमार (औरंगाबाद, बिहार) :अध्यक्ष महोदय, माननीय नीतीश कुमार जी ने बड़ा जोरदार भाषण दिया लेकिन उन्होंने प्रोक्लेमेशन पर कम और बिहार की स्थिति पर ज्यादा भाषण दिया। मैं समझता हूं कि मुझे भी बिहार के बारे में बोलने की अनुमति मिलेगी। बिहार के बारे में ही नहीं, बल्कि ऐसे कई विषय हैं जिनका प्रोक्लेमेशन से कोई संबंध नहीं है। …( व्यवधान)
MR. SPEAKER: We should be respectful to each other. We should not bring down anybody’s prestige. All are hon. Members. There are different viewpoints, different policies and different parties. I am appealing to everyone. I have not pointed out anybody. Therefore, I am saying that we should not refer to each other in a manner which brings down the prestige of this House also. All are hon. Members. They are representing the people.
SHRI NIKHIL KUMAR : Sir, I rise to support the President’s Rule in Bihar and the Proclamation regarding the President’s Rule made by the hon. President through the Government of India.
I had hoped to justify the imposition of the President’s Rule in Bihar. Part of this has already been extremely well explained by the hon. Home Minister but, I think, it will bear repetition. After the general elections in last February, the situation in Bihar was such that no single party or a combination of parties had as many seats as is necessary to have a majority and, therefore, form a stable Government. It is in these conditions that a huge responsibility devolves on the Governor. The Governor has then to see as to whom to invite to form the government, and in doing so, the Governor has to take a decision on certain criteria. The first criterion is that the person who is going to form the Government is in command of as many seats in the Assembly that can go to form a stable Government[lh18] .
The [e19] hon. Minister of Home Affairs has already explained the seat-wise break-up of the different parties and the position was clear that none of them, individually or as a combination of political parties, had a majority of seats.
In normal circumstances under article 75 and article 164 of the Constitution, the Governor need have no doubt as to who is the proper person to be so appointed. It should be the leader of the majority party in the Legislative Assembly but circumstances could arise where it might be doubtful as to who that leader should be. It is here that the Governor has to exercise his personal judgement in selecting the Chief Minister.
The Constitutional scheme of things envisages that a person who enjoys the confidence of the Legislator alone should be appointed as the Chief Minister. It is therefore very important that the Governor should exercise his judgement in a manner which leads to the formation of a stable Government. I cannot but go back to the position in February, 2000 about which a reference was made by hon. Member Shri Nitish Kumar and say that it is being referred to out of context.
The question is not as to whether any claim was laid, which the Governor accepted. The question is as to what kind of a judgement did the Governor exercise in February, 2000. He had then before him a choice to be made as to whether the person who is leading the largest number of seats would be in a position to form a stable Government. The question is not whether a single party like the Congress party had extended support to this party or that party. The question is whether the Governor had exercised his discretion and his judgement in inviting the person to form the Government. What actually happened subsequently showed that he did invite someone to form the Government; and that gentleman and that Government was not able to survive more than I think ten or twelve days. So, it is the Governor’s discretion, it is the judgement of the Governor which is very important. It was this which was referred to by the Supreme Court in the now celebrated Bommai case and I quote from that judgement:
“After general elections are held, if no political party or coalition of political parties is able to secure absolute majority in the Legislative Assembly and despite the Governor exploring the alternatives the situation has arisen in which no political party is able to form a stable government it would then be a case of completely demonstrable inability of any party to form a stable government commanding the confidence of the majority Members of the Legislature. It would be a case of failure of constitutional machinery.” So, now, we have to see whether this Governor has explored all possibilities and after having explored all possibilities he has come to the conclusion that it is not possible for any political party singly or otherwise to form a stable government.
MR. SPEAKER: Shri Nitish Kumar has not really questioned that.
SHRI NIKHIL KUMAR : Sir, I am not going into that. After your admonition, I am refraining from making any comments on him but the fact is that he did mention about the position in February, 2000. The issue there is the Governor’s decision and the Governor’s judgement. It is this judgement which is being commented upon. He took a decision to invite someone who was not in a position to command the majority in the Assembly and had to quit even before ten or twelve days were over.
The question is not whether a single party extended support to this or that party. It is in this context that we have to see the present Bihar Governor’s decision. He could have well fallen for that. He could have well taken a partisan approach. He could have well taken a partisan decision. He has done nothing of that kind. He has given a chance to every party and every combination of parties to come forward and explain to him that they are in a position to form a government and to satisfy him. Unfortunately, this was not the position. He could have well even gone ahead and recommended dissolution of the Assembly. It would have been extraordinary because immediately after holding of general elections, you do not go about dissolving the Assembly.
So, he has decided to keep the Assembly in suspended animation and has given a chance to the political parties to form a Government. Indeed, I am confident that given the chance, some way will be found out to form a Government and this Government will have to be a stable Government which has secular credentials.
After February, 2000 when a Government was formed, the Government that came to be had impeccable secular credentials. It is also going to be a Government with similar impeccable secular credentials that we are hoping to form in Bihar immediately after we are able to strike some kind of an understanding or we find a way out of forming a Government.
I would like to refer here to our Party’s approach in this whole matter. We have been scrupulous in seeing that we do not appear to be partisan to anyone. It is not only a question of appearing, but it is also a fact. We have gone out of the way to be very correct and uphold the principles of rectitude. We did write a letter of support and extend support to the Rashtriya Janata Dal because RJD is part of our combination. Our Party is at the Central Government and it is a member of the UPA. So, it was not extraordinary. But in spite of having done that, it was just not possible to form a Government. So, the process of forming a Government will continue and when it continues, we will be able to explore all possibilities. We hope that a stable Government will be formed very quickly. It is not the intention to keep the President’s Rule in Bihar for an indefinite period of time. It is not going to be a holding operation. It is not going to be a Caretaker Government of the kind that people are hoping that it will become. It is our genuine desire that Bihar should get a good Government and till that happens, the President’s Rule is inevitable. It is in the process of being explored and when this process is over, I am definite that a secular and a stable Government will be formed.
Now, I would like to say a word about Bihar. We are going to discuss the Budget later, this afternoon, and I shall seek your permission to allow me to speak on that also. But just in case that does not happen, I will make a few points about the Budget. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: Why do you not hold on? First, let us get over this item.
… (Interruptions)
SHRI NIKHIL KUMAR : In that case, I only want to come up with the fact that the Governor of Bihar deserves to be commended for being extremely patient for following the constitutional path of forming a Government. We must compliment him for not deviating from the constitutional path and allowing the political parties full opportunity to explore possibilities of forming a good Government and till then the President’s Rule will remain in force.
Sir, with these few words, I support the Proclamation of the imposition of President’s Rule in Bihar.
श्री बसुदेव आचार्य (बांकुरा) : अध्यक्ष जी, बिहार में जो राष्ट्रपति शासन लगाया है, हमें बहुत मजबूरी में इसका समर्थन करना पड़ रहा है, क्योंकि हमारी पार्टी की हमेशा यही राय रही है कि राज्यों में संविधान के अनुच्छेद ३५६ के अन्र्तगत राष्ट्रपति शासन नहीं लगाया जाना चाहिए। हम नहीं चाहते कि किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किया जाए और कोई सरकार बर्खास्त हो। बिहार में चुनाव राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए नहीं हुए थे , बल्कि एक लोकप्रिय सरकार बनाने के लिए चुनाव हुए थे। लेकिन चुनाव में जो नतीजा आया, वह खण्डित नतीजा cè*[cmc20] बिहार में फ्रैक्चर्ड मैनडेट है। लेकिन बिहार के विधान सभा चुनावों में जो यह जनता की राय आई है, मैनडेट आया है, यह धर्मनिरपेक्ष दलों के पक्ष में आया है। बिहार की जनता चाहती है कि वहां धर्मनिरपेक्ष सरकार बने। पिछले लोक सभा चुनावों में और इस बार के विधान सभा चुनावों में कोई ज्यादा अंतर नहीं है। अगर तमाम धर्मनिरपेक्ष दलों का पर्सेंटेज आफ वोटिंग देखें तो जितने प्रत्याशी लोक सभा के चुनाव में जीते थे, उतने ही अब जीते हैं। इसलिए बिहार की जनता की राय यही है कि वहां एक धर्मनिरपेक्ष सरकार बनाई जाए। वहां तत्काल सरकार नहीं बन सकी। इसके लिए कौन जिम्मेदार है, क्यों नहीं सरकार बन पाई, इस पर हम चर्चा कर रहे हैं। हमारी पार्टी का मत यही है और हम अब भी अपील कर रहे हैं कि तमाम धर्मनिरपेक्ष दल सरकार बनाएं। हम नहीं चाहते कि बिहार में राष्ट्रपति शासन ज्यादा दिन तक चले। हम चाहते हैं कि वहां जल्द से जल्द एक लोकप्रिय सरकार बने और धर्मनिरपेक्ष सरकार बने। इसलिए वहां जो धर्मनिरपेक्ष दल हैं, जो आज सरकार बना सकते हैं, उनको आगे आना चाहिए। बिहार की जनता की भी यही राय है। हम चाहते हैं कि वहां जल्द से जल्द एक धर्मनिरपेक्ष सरकार बनाकर राष्ट्रपति शासन को खत्म किया जाए। अगर ऐसा नहीं होता है तो फिर से ऩए चुनावों का सवाल खड़ा होगा। हम चाहते हैं कि जनता का जो मैनडेट है, जो राय है, उसके प्रति सम्मान दिखाना चाहिए। अगर आप सम्मान दिखाना चाहते हैं तो जल्द से जल्द वहां धर्मनिरपेक्ष सरकार बनाई जाए। यही हम लोगों की इच्छा है और यही हम मांग करते हैं।
हम क्यों राष्ट्रपति शासन के खिलाफ हैं, अध्यक्ष महोदय, यह आप भी जानते हैं। हमने केवल एक बार १९९२-१९९३ में राष्ट्रपति शासन का समर्थन किया था। उस समय बाबरी मस्जिद गिराई गई थी। जिन चार राज्यों में जिस दल की सरकारें थीं, उसका सक्रिय ढंग से बाबरी मस्जिद गिराने में हाथ था।…( व्यवधान) इसीलिए हमने उस समय इन चार राज्यों में जब राष्ट्रपति शासन लगाया गया था, उसका समर्थन किया था। उस समय उन चार राज्यों में, हमारे देश के संविधान का जो आधार है धर्मनिरपेक्षता का, उसका उल्लंघन किया था। अगर कोई राज्य सरकार संघीय विधान का उल्लंघन करती है, तो हम आंख बंद करके नहीं बैठ सकते। इसीलिए हमने पहली बार राष्ट्रपति शासन का १९९२ में समर्थन किया था।
आपको मालूम होगा देश में केरल प्रांत में सबसे पहले एक कम्युनिस्ट सरकार चुन कर सत्ता में आई थी। पहली बार वहां सरकार के खिलाफ धारा ३५६ लगा कर उस सरकार को सत्ता से हटाया गया था। आपको यह भी मालूम होगा कि दूसरी बार जब संयुक्त मोर्चा की बहुमत वाली सरकार पश्चिम बंगाल में थी, उस समय १९६८ में उस बहुमत वाली सरकार को भी धारा ३५६ के द्वारा हटाकर पश्चिम बंगाल में दूसरी सरकार को बिठाया गया था[R21] ।वह सरकार भी चली नहीं और फिर चुनाव हुआ और ६ महीने के अंदर फिर संयुक्त मोर्चे की सरकार दो-तिहाई बहुमत से सत्ता में आ गयी। इसलिए हम तो विक्टिम हैं, बार-बार धारा ३५६ लगाकर सरकार को हटाने के। इसलिए हमारी स्पष्ट राय है कि जिसका बहुमत है, उसका निर्णय विधान सभा में होना चाहिए और जिसकी मैजोरिटी हो, उसको सरकार बनाने की इजाजत देनी चाहिए।
भारतीय जनता पार्टी सदन के बाहर जो सवाल उठा रही है, उनको तो बोलने का भी अधिकार नहीं है। उसने १३ दिन के लिए सन् १९९६ में सरकार बनाई। उनका बहुमत नहीं था, उनके पक्ष में कोई मैनडेट नहीं था।
श्री प्रभुनाथ सिंह (महाराजगंज, बिहार) :झारखंड में क्या हुआ?…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : प्रभुनाथ सिंह आपको डिस्ट्रेक्ट कर रहे हैं, आप चेयर को एड्रेस कीजिए।
श्री बसुदेव आचार्य : प्रभुनाथ सिंह जी, हमको बोलने दीजिए। जब बहुमत हासिल करने का समय आया…( व्यवधान) तो वोट ऑफ कॉनफिडेंस भी फेस नहीं कर सके और १३ दिन के बाद उनको इस्तीफा देना पड़ा। आपको याद होगा कि वर्ष १९९६ में कांग्रेस सिंगल मैजोरिटी पार्टी थी, लेकिन राजीव गांधी जी ने उस समय सरकार बनाने से इंकार कर दिया। नीतीश जी बोल रहे थे कि सन् २००० में क्या हुआ? नीतीश जी कह रहे थे कि वे करीब-करीब मैजोरिटी में थे, तो क्या मुख्यमंत्री बनकर आप मैजोरिटी हासिल करना चाहते थे। सात दिन मुख्यमंत्री रहे, फिर इस्तीफा देना पड़ा। उनको मालूम था कि उनका बहुमत नहीं है लेकिन दिल्ली में एनडीए की सरकार ने गवर्नर का दुरुपयोग किया, गलत तरीके से जिसका बहुमत नहीं था, उसको मुख्यमंत्री बनाया। आप बहुमत हासिल क्यों नहीं कर सके थे?…( व्यवधान) आप तो कम्युनल पार्टी के साथ घर बना रहे थे। अगर आप उस पार्टी से यहां आकर, गंगाजल से नहाकर भी प्रामाणिक करना चाहें कि आप धर्म-निरपेक्ष हैं, तो भी कोई आप पर विश्वास नहीं करेगा। …( व्यवधान)
जब आरजेडी की सरकार थी, हमने तब विरोध किया था, मैजोरिटी थी। विधान सभा में उस सरकार को हटाया गया और राष्ट्रपति शासन लागू हुआ। यह प्रोक्लेमेशन हो गया था[r22] ।
लोक सभा में सभी विरोधी पक्षों ने उसका विरोध किया। राज्यसभा में इनका बहुमत नहीं था। यदि इनका वहां बहुमत होता तो वह प्रोक्लमेशन राज्य सभा में पारित हो जाता और बिहार में आरजेडी सरकार की मैजोरटी के रहते हुए भी, सरकार को सत्ता से हटा कर राष्ट्रपति शासन लागू करने के लिए कदम उठाने पड़ते। आज आप लोकतंत्र के लिए आवाज उठा रहे हैं। आप आज राष्ट्रपति शासन के खिलाफ बोल रहे हैं। खुद सत्ता में रह कर आपने यह काम किया इसलिए आपको यह बोलने का कोई अधिकार नहीं है। हम बोल सकते हैं। हमने बराबर इसका विरोध किया। इंटर स्टेट काउंसिल में हमने सुझाव दिए। हमने सबसे पहले वहां सुझाव दिया जिसे हम जानते हैं। हम चाहते हैं कि गवर्नर के पद और ऑफिस का जो दुरुपयोग होता है. वह बंद होना चाहिए। हम नहीं चाहते कि बिहार में ज्यादा दिन राष्ट्रपति शासन रहे। हम चाहते हैं कि वहां जल्दी से जल्दी एक लोकप्रिय और धर्मनिरपेक्ष सरकार बने। …( व्यवधान) ऐसी सरकार बनेगी। राम विलास जी हैं, लालू जी हैं, वामपंथी दल हैं, कांग्रेस है, तमाम लोग हैं, अगर नीतीश जी इधर आ जाएंगे तो सरकार बनेगी …( व्यवधान) वह अगर नहीं आएंगे तब भी बन जाएगी। हम चाहते हैं कि वहां लोकप्रिय सरकार बने। हमारी अपील है और मैं बार-बार अपील करता हूं कि वहां जल्दी से जल्दी एक धर्मनिरपेक्ष सरकार बने।
श्री नीतीश कुमार : हमें आज बसुदेव जी से एक बात पता चली कि यह गंगा जल को पवित्र मानते हैं।
MR. SPEAKER: It is a part of our National Anthem.
श्री बसुदेव आचार्य : हम चाहते हैं कि वहां जल्दी सरकार बने। अगर वह नहीं बनती है तो चुनाव कराने पड़ेंगे। जनादेश धर्मनिरपेक्ष दलों के पक्ष में है। उनको सम्मान देना तमाम धर्मनिरपेक्ष दलों का कर्तव्य है। हम चाहेंगे कि जल्दी से जल्दी वहां सरकार बने वरना नए चुनाव कराने पड़ेंगे।
झारखंड के बारे में ये लोग बोल रहे हैं। हमने झारखंड के बारे में साफ-साफ कहा कि हमने उसका कभी समर्थन नहीं किया। वहां जो घटना घटी, हमने उसका समर्थन नहीं किया। इन लोगों को बोलने का अधिकार नहीं है क्योंकि इन्होंने खुद ६ साल सत्ता में रह कर राज्यपाल के पद का दुरुपयोग किया।…( व्यवधान) ..* * Not Recorded.
MR. SPEAKER: Nothing will be recorded.
(Interruptions)
MR. SPEAKER: I have already called the name of Shri Devendra Prasad Yadav, and only his speech will be recorded.
(Interruptions) …* MR. SPEAKER: Shri Basu Deb Acharia, please sit down.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: No cross talks, please. Nothing is being recorded. Only Shri Devendra Prasad Yadav’s speech should be recorded.
(Interruptions) … * MR. SPEAKER: No cross talks, please. Shri Acharia, please sit down. I have already called the name of Shri Devendra Prasad Yadav.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: It is a very important discussion, which is going on in the House. We are also having an opportunity to hear good speeches on this issue.
* Not Recorded.
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव (झंझारपुर) : अध्यक्ष महोदय, माननीय गृह मंत्री जो प्रस्ताव राष्ट्रपति शासन लागू करने का लाए हैं, मैं बड़े दुख के साथ उसके ऊपर अपनी बात रखना चाहता हूं। हरेक प्रोक्लमेशन की स्थिति राज्यवार अलग-अलग होती है। हरेक राज्य में अलग-अलग प्रकार की परिस्थितियां निर्माण होती हैं, जिसके कारण राष्ट्रपति शासन लागू करने की परिस्थिति पैदा होती cè[R23] । बिहार में, देश के इतिहास में राष्ट्रपति शासन की परिस्थिति का जिस तरह निर्माण हुआ है, वह अद्भुत है, अजूबा है और अभूतपूर्व है । मैं इसीलिए कहना चाहता हूं कि पहली बार आम चुनाव के बाद, सबसे बड़ी पार्टी के रूप में आरजेडी उभर कर आई । सबसे बड़ी पार्टी के रूप मे उभरने के बाद वह अकेली क्लेंमेंट हुई। राज्यपाल महोदय के पास आरजेडी के नेतृत्व में अकेले सरकार बनाने का दावा पेश किया गया। सरकार बनाने के लिए किसी दूसरे दल ने क्लेम नहीं किया, इसलिए यह अद्भुत स्थिति है । इस अद्भुत स्थिति के निर्माण में अकेला दल है आरजेडी, जिसने सरकार बनाने का दावा पेश किया । इतना ही नहीं दावा ही नहीं किया, आरजेडी की लाईक माइन्डेडपार्टियों के पत्र भी इसी प्रस्ताव के समर्थन के साथ, जो इसमें अंकित हैं, प्रस्तुत किये गये। माननीय गृह मंत्री जी ने कहा है, मैं उसकी डिटेल में चर्चा नहीं करना चाहता हूं। जो समर्थक दल था उनके समर्थन पत्र वहां प्रस्तुत किये गये और यह भी कहा गया कि जो लोग हमारी लाईक माइन्डेड पार्टी, सैक्युलर कम्पार्टमेंट के दल हैं, उनसे वार्ता हो रही है । उसका भी संकेत दिया है और पोजीटिव संकेत दिया है। इसके बावजूद भी न्यौता नहीं मिला । मैं दु:ख के साथ इसी बात को कहना चाहता हूं कि क्या ऐसी परंपरा नहीं रही है? क्या ये दल हैं, जो इसके लिए जिम्मेदार हैं, सरकार का गठन नहीं करने वाले हैं । …( व्यवधान) श्री नीतीश कुमार क्लेंमेंट नहीं है । मैं अपनी बात …( व्यवधान)
MR. SPEAKER: You address the Chair. You cannot go on responding to every hon. Member.
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव : श्री नीतीश कुमार और अन्य, चाहे एनडीए पार्टी के नेता हैं या किसी भी सैक्यूलर कम्पार्टमेंट के नेता हैं, सिर्फ यही बात कहने गए कि सरकार का गठन नहीं होना चाहिए । मैंने इसी अद्भुत परिस्थिति की चर्चा की कि यह लोकतंत्र में एक अजीब उदारहण पेश हुआ है । हम सब लोग सर्वोच्च सदन मे बहस कर रहे हैं । इस बहस को सदन किस परिणति तक ले जाएगा, किस अंत तक ले जाएगा। परिस्थिति का निर्माण करने में सैक्यूलर कम्पार्टमेंट की दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है । सैक्यूलर कम्पार्टमेंट के दल भी रोकने में शामिल हैं । एनडीए का …( व्यवधान) आपको तो रोकना ही था, आपकी परवाह हम नहीं करते हैं ।
MR. SPEAKER: Please do not reply to any of the questions. You address the Chair. ठीक है आप बोलिए ।
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव : बिहार में एक वचित्र स्थिति, पिक्यूलियर सिचुएशन पैदा हुई …( व्यवधान)
श्री उदय सिंह (पूर्णिया) : सैक्यूलर और नान-सैक्यूलर की बात …( व्यवधान)
MR. SPEAKER: There should be no prompting.
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव : मैं अपनी बात कह रहा हूं …( व्यवधान)
MR. SPEAKER: You cannot do like that. This is not way to conduct in the House. This is an important debate going on. The hon. Member who is speaking is a very eminent Member. Let us not disturb him. मैंने सबको डांटा है । आपके बोलने से पहले डांटा है।
श्री हरिन पाठक (अहमदाबाद) : आपने नहीं डांटा है । वे प्रॉम्पटिंग कर रहे हैं ।
MR. SPEAKER: I have already said that there should be no prompting.
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव : चाहे एनडीए दल हो या सैक्यूलर कम्पार्टमेंट का दल हो, सिर्फ सरकार बनाने का प्रयास नहीं, सरकार के गठन को रोका गया है। …( व्यवधान) उन्होंने कभी नहीं कहा कि हम क्लेंम कर रहे हैं । …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : आपके नेता बहुत अच्छे ढंग से बोल रहे हैं । आपके नेता को काफी टाइम दिया गया है। You address the Chair and nobody else.
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव : अध्यक्ष महोदय, मैं सिर्फ पढ़ दूंगा ।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: He is not yielding. Nothing will be recorded. Why are you speaking?
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव : इसमें लिखा है कि …( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Nobody should prompt the hon. Member.
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव : राज्यपाल महोदय को जो पत्र लिखा गया कि परिस्थिति का निर्माण कैसे हुआ । मैं परिस्थिति निर्माण के बारे में बोल रहा हूं । सरकार का गठन न हो, इस परिस्थिति को निर्माण करने मे कौन-कौन लोग जिम्मेदार हैं, मैं आपको बताना चाहता हूं । इसके लिए जिम्मेदार हैं - पार्टियां- सर्वश्री वीजेंद्र प्रसाद यादव, प्रदेश अध्यक्ष (जनता दल यूनाइटेड), गोपाल नारायण सिंह (भारतीय जनता पार्टी), नंद किशोर यादव, संयोजक राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन, लिखते हैं, मैं सारा पोरशन नहीं पढ़ना चाहता हूं सिर्फ आपरेटिव पोरशन प्ाढ़ूंगा [p24] ।
‘कि बी.जे.पी. और जे.डी.यू. का चुनाव पूर्व गठबंधन है, जिसने मिलकर चुनाव लड़ा, उसके ९२ विधायक हैं।’ और अंत में कहते हैं…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: What is this going on?
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव : ‘राजग की संख्या बहुमत से ज्यादा है, इसलिये राजग ने, किसी भी अन्य दल द्वारा सरकार गठित न हो, इसके लिये अपने विचार प्रकट किये हैं।’ अब मैं दूसरी पार्टी का पढ़ देता हूं। समाजवादी पार्टी के चार विधायक हैं। उनका भी यही हाल है।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: I request the hon. Members not to interrupt. This is a serious matter.
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव : समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष श्री ददन सिंह कहते हैं - ‘ महामहिम राज्यपाल महोदय, समाजवादी पार्टी के सभी विधायकों ने, जो चुनकर आये हैं, सरकार के गठन में राजद और राजग - दोनों का समर्थन न करने का निर्णय लिया है। ’ मुझे इस पत्र की अंतिम दो लाइनें पढ़ते हुये कष्ट हो रहा है।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: You are speaking from there without permission. He has not yielded and you have not taken my permission. Everybody goes on speaking. What is this? Please, nobody should interrupt.
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव : अध्यक्ष महोदय, परिस्थिति किस प्रकार से निर्मित हुई, मैं इस पर बोलना चाहता हूं। मैं सदन को बताना चाहता हूं कि महामहिम राज्यपाल महोदय, के पास राजभवन, पटना में एल.जे.पी. के सभी विधायक जाते हैं…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Everything is quoted in the Report of the Governor.
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव : अध्यक्ष महोदय, मैं केवल औपरेटिव पोर्शन ही पढ़ देता हूं कि एल.जे.पी. के विधायकों की एक बैठक हुईजिसमें प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि एल.जे.पी. बिहार में राजद और बे.जे.पी. को सत्ता से दूर रखने के लिये निर्णय लेती है और गठबंधन कोई दूसरा विकल्प तलाश करे। मतलब यह है कि उसका विकल्प कहां है, जो अभी तक तैयार नहीं हुआ है। इसके बाद राजद को कांग्रेस पार्टी का समर्थन प्राप्त है।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: What is all this going on? You are not entitled to do like this. This is not your drawing room. There are methods of seeking clarification.
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव : आर.जे.डी. ने सरकार गठन के लिये दावा किया है। राज्यपाल महोदय से श्रींमती राबड़ी देवी के नेतृत्व मे एक डेलीगेशन मिलने गया और राज्यपाल महोदय से अनुरोध किया गया कि उन्हें सरकार गठन करने का अवसर दिया जाये। आर.जे.डी. को जिन दलों का समर्थन प्राप्त है, उनके पत्र भी हैं। इसके अलावा जिनका समर्थन मिला हुआ है, उनके पत्र भी हैं। जब ऐसी परिस्थिति निर्मित हुई, तो एन.सी.पी. ने आर.जे.डी. को अपना समर्थन देने की घोषणा की। अध्यक्ष महोदय, मैं यह जानना चाहता हूं कि जब सरकार बनाने के लिये परिस्थिति निर्मित हुई तो उसे रोकने का काम किया गया।
अध्यक्ष महोदय, मैं कोई आक्षेप नही करना चाहता…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: No interruptions please.
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव : क्योकि यह ऐतिहासिक अवसर है, इसलिये मैं उस बात का जिक्र करना चाहूंगा। कमीशन ऑन सैंट्रल एंड स्टेट रिलेशन्स क्या कह रहा है। ऐस परिस्थिति में सब से बड़े दल को चांस मिलना चाहिये या कुछ और होना चाहिये। इसके पेज ११९ पर जो लिखा है, वह मैं दो लाइनें पढ़कर सुनाता हूं:-
“… in recommending President’s Rule in a number of situations … situation of political instability in the State, the Governor recommended President’s Rule under article 356.” जब अस्थिरता की स्थिति बनती है, उसका विकल्प तलाशने की बात की जाती है। एक एक्सरसाइज होती है, जिससे सरकार बनाने में मदद मिले। सरकारिया कमीशन ने साफ साफ कहा है क यदबड़ा दल सरकार बनाने में विफल हो जाता है, तो चुनाव पूर्व गठित सब से बड़े गठबंधन की बात की जाती है[RB25] ।
नम्बर दो, चुनाव पूर्व गठबंधन यदि विफल हो जाता है, तब चुनाव के बाद जो सबसे बड़ा गठबंधन होगा, उसे सरकार बनाने का मौका मिलेगा। यदि वह भी विफल हो जाये, फिर अन्य दलों को मौका मिलेगा, जो अन्य दल मोर्चा बनाकर कोशिश करेंगे, तो सरकार बनाने की संभावना तलाशने का पूरा-पूरा प्रयास होगा। लेकिन इसमें कहां अन्य की भूमिका आती है। मैं इस पर चर्चा नहीं करना चाहता। महोदय, चूंकि आपका भी नियमन होगा कि जो प्रयास में कमी रही है, कोताही की गई है, क्या सरकार बनाने की एक्सरसाइज बिहार में नहीं हो सकती थी - यह बात एक यक्ष प्रश्न के रूप में आज हमारे सामने खड़ी है। इसलिए मैं दुख के साथ कहना चाहता हूं कि वहां प्रयास नहीं किया गया। हमें फ्लोर पर बहुमत साबित करने का मौका नहीं दिया गया। हमारा सबसे बड़ा दल था, हमारे ७५ एम.एल.ए. निर्वाचित हुए थे। बोम्मई केस में इस बारे में सुप्रीम कोर्ट का वर्डिक्ट है। वहां आर.जे.डी. को सबसे ज्यादा २५ प्रतिशत मत मिले हैं, अन्य किसी भी दल को २५ प्रतिशत मत नहीं मिले हैं। चाहे कैसे भी इसे मापा जाए, जो भी परम्परा लगानी हो, लगाई जाए, लेकिन एक्सरसाइज तो इस देश में होती रही है। बड़े दलों को इससे पूर्व सरकार बनाने का मौका दिया गया है, ऐसे उदाहरण पूर्व में हैं, कितनी बार बड़े दलों को मौका दिया गया है। श्री अटल बिहारी वाजपेयी को भी बुलाया गया है। ऐसे कई उदाहरण हैं। संसदीय लोकतंत्र में ऐसा पहले हुआ है।…( व्यवधान) सबसे बड़ी पार्टी को भी बुलाया गया है।
अध्यक्ष महोदय, नीतीश जी ने बड़ी बुद्धिमत्ता से जवाब दिया है, मैं उसका जिक्र नहीं करना चाहता हूं। कितनी बुद्धिमत्ता और चतुराई से उनका जवाब आया है। नीतीश जी, आपने प्रयास किया - क्या यही कहकर आपकी जिम्मेदारी खत्म हो गई कि ६७ लाओ और ५५ ले जाओ। कोई रास्ता तो निकाल दीजिए। पहले आपने एक दिन कहा था, मैं सदन में उसकी चर्चा नहीं करना चाहता हूं, आपने कहा था कि मैं हाथ नहीं डालूंगा और आप हाथ डालने का प्रयास भी कर रहे हैं - आप यह क्या कर रहे हैं। सरकार बनाने के लिए आप कौन सी भूमिका अदा करना चाहते हैं, यह भी आपको स्पष्ट करना होगा। आपने बहुत स्पष्टीकरण मांगे हैं, आपसे भी देश की जनता यह जानना चाहेगी कि ६७ लाओ और ५५ ले जाओ आपने क्यों कहा।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: You need not reply to anybody else.
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव : बी.जे.पी. को छोड़ने की बात इन्होंने नहीं कही। आपने बड़ी बुद्धि का खेल खेला है। बी.जे.पी. का नाम नहीं लिया…( व्यवधान) इन्होंने बी.जे.पी. का जिक्र ही नहीं किया।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: He has not yielded.
… (Interruptions)
श्री नीतीश कुमार : यह काम लाठी का थोड़े ही है।
MR. SPEAKER: I want to learn from you.
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव : अध्यक्ष महोदय, मैं सोचता था कि नीतीश जी कोई फार्मूला निकालेंगे। हम लोग इतने उदार हैं, लेकिन राष्ट्रपति शासन के हक में नहीं है।
MR. SPEAKER: He has tried what he wanted.
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव : हम लोग वहां राष्ट्रपति शासन के पक्ष में नहीं हैं। आर.जे.डी. नैतिक, सैद्धांतिक और राजनीतिक द्ृष्टिकोण से बिहार में राष्ट्रपति शासन के पक्ष में नहीं है। वहां घोर अन्याय हुआ है। इसलिए मैं नीतीश भाई से कहा रहा था कि यदि आप भी राज्यपाल महोदय को संभावना तलाशने में मदद करते, तो उनका समाधान हो जाता और आज बिहार में राष्ट्रपति शासन की नौबत नहीं आती। आपने थोड़ी कटौती करके प्रयास किया है। आपने पूरी बुद्धि से काम नहीं लिया है।…( व्यवधान) मैं खुलेआम कह रहा हूं कि हम इसके पक्ष में नहीं हैं।
MR. SPEAKER: Do not reply to them. They are derailing you.
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव : अध्यक्ष महोदय, जब भी यह बहस होगी, यह प्रश्न एक यक्ष प्रश्न के रूप में सामने खड़ा रहेगा। बिहार एक नमूना है, बिहार एक नई एक्सरसाइज करने की प्रयोगशाला बन गया है।…( व्यवधान) मैं अपने सुप्रीमों को धन्यवाद देना चाहूंगा, क्योंकि उन्होंने मुझे याद दिलाया है कि हम लोग देहातों से आते हैं। नीतीश भाई ने भी कहा कि लाठी नहीं चलेगी। गांव, गरीब, किसान के बीच में एक कहावत है - ‘तोको न मोको और चूल्हे में झोंको’ वहां सरकार को चूल्हें में झोंकने का काम किया गया है और इसके लिए भी हमारे देहातों में एक कहावत है - ‘ न हम बनने देंगे और न ब्ानेंगे’[R26] ।
पहले सरकार बनने की संभावना थी और अभी भी है, लेकिन इन लोगों का उद्देश्य है कि किसी प्रकार वहां सरकार न बने। इसके लिए वे सब लोग जिम्मेदार हैं जिन्होंने बिहार में लोकप्रिय सरकार और जनतांत्रिक सरकार का गठन नहीं होने दिया। उन लोगों ने ‘तोको न मोको, चूल्हे में झोंको’ वाला काम किया है। …( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Nothing will go on record except the speech of Shri Devendra Prasad Yadav.
(Interruptions) …* श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव : अध्यक्ष महोदय, मैं आपको ही ऐड्रेस कर रहा हूँ। मुझे नियम के बारे में मालूम है कि आपको ऐड्रैस करके ही बोलना है।
* Not Recorded.
अध्यक्ष महोदय, आज दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि धर्मनिरपेक्ष और सामाजिक न्याय का जो स्तंभ था, जो धर्मनिरपेक्ष और सामाजिक न्याय का कंपार्टमैंट था, उसे कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। बिहार की करोड़ों जनता उन लोगों को कभी माफ नहीं करेगी, जो लोग इस तरह से जनादेश का अपमान करते हैं। मैं इस बात को प्रोसीडिंग्स के माध्यम से इतिहास में दर्ज कराना चाहता हूँ। चुनावों के बाद जनता की आकांक्षा होती है कि सरकार का गठन हो, लोकप्रिय सरकार बने, जनतांत्रिक सरकार बने। आज वहां एमएलए की स्थिति ऐसी हो गई है और वे इतने घबराए हुए हैं कि चुनाव जीतने के बाद भी उनको पता नहीं चल रहा है कि एमएलए हुए या नहीं। वहां पिछली विधान सभा तो भंग हो गई, मगर नई विधान सभा का गठन नहीं हुआ, केवल इलैक्शन कमीशन का नोटफिकेशन हुआ। …( व्यवधान)
MR. SPEAKER: It should not be recorded.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: No prompting please.
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव : अध्यक्ष महोदय, जो भूतपूर्व विधायक हैं, उन्हें तो सुविधाएं मिलती है, पैंशन मिलती है, लेकिन जो वर्तमान विधायक हैं, उनको कुछ नहीं मिल रहा है।
अध्यक्ष महोदय : आप अपनी बात खत्म करें।
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव : अध्यक्ष महोदय, मैं उस बात का ज़िक्र नहीं करना चाहता, जो नीतीश जी ने कही कि सन् २००० में क्या हुआ था। जब इन लोगों को सरकारिया कमेटी सूट करती है, तो अपने पक्ष में दलील दे देते हैं और जब-जब सूट करता है, उस तर्क को सदन में रख देते हैं। उस समय नीतीश जी कह रहे थे कि वे बहुमत के करीब थे और एक प्रयोग के तौर पर ही उन्हें बहुमत साबित करने का मौका दिया गया था। अपने लिए नए सिद्धांत गढ़ लिये जाते हैं। अलग-अलग समय पर अलग-अलग तरीके के दोहरे मापदंड अपनाए जा रहे हैं। मैं उसमें कुछ नहीं कहना चाहता हूँ।
MR. SPEAKER: No newspaper to be read in the House.
श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव : अध्यक्ष महोदय, मैं कहना चाहता हूँ कि वहां लोकतांत्रिक प्रक्रिया बहाल होगी। हमारा यही निवेदन है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया बहाल की जाए। हम किसी भी तरह से आम जनता की आकांक्षा पर कुठाराघात नहीं होने देंगे। आम जनता की आकांक्षा है कि लोकप्रिय सरकार बने, जनतांत्रिक सरकार बने। मैं सभी दलों के नेताओं से कहता हूं कि इस पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। सरकार नहीं बनना करोड़ों जनता का अपमान है, जिन्होंने जनादेश दिया है। सरकार नहीं बनने देना उनकी आकांक्षाओं पर कुठाराघात करना है। इसलिए हम लोग राष्ट्रपति शासन के घोर विरोधी हैं। आरजेडी किसी भी हालत में न राजनैतिक तौर पर, न सैद्धांतिक तौर पर और न नैतिक रूप से राष्ट्रपति शासन की हिमायत करती है। हम इसके पक्ष में कतई नहीं हो सकते। हम इस पर अपनी असहमति जाहिर करते हैं और उम्मीद करते हैं कि बिहार में लोकतांत्रिक प्रक्रिया बहाल होगी और जन आकांक्षा के अनुरूप लोकप्रिय सरकार के गठन की संभावना को तलाश कर उसे अंजाम देने का प्रयत्न किया जाएगा। इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूँ।
MR. SPEAKER: Hon. Members, I have got two more names of the members, who wish to participate in the debate. I think, we need not go through the timing. We can sit through the lunch hour so that we can conclude early. Then, anybody, who wants to go, may go and catch a train or plane. I think, all hon. Members agree.
Thank you. Now, Shri Ramji Lal Suman.
श्री प्रभुनाथ सिंह : अध्यक्ष महोदय, हम लोगों को नहीं बुलाएंगे? बिहार का मामला है। …( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Nitish-ji has already spoken for his party and also for the main Opposition party.
श्री प्रभुनाथ सिंह : हमारी पार्टी से अभी कहां बोले हैं?
श्री रामजीलाल सुमन (फ़िरोज़ाबाद) :प्रभुनाथ जी, हमें तो बोलने दें।
अध्यक्ष महोदय : अभी उसके बारे में तय करेंगे। आप बोलिये।
...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : रामजीलाल सुमन की स्पीच के अलावा और कुछ रिकार्ड पर नहीं जाएगा।
(Interruptions) …* * Not Recorded.
13.00 hrs. श्री रामजीलाल सुमन (फ़िरोज़ाबाद) : अध्यक्ष महोदय, बिहार में राष्ट्रपति शासन के अनुमोदन पर यह सदन चर्चा कर रहा है । एक लोकप्रिय सरकार बनाने के लिए बिहार में चुनाव हुए । दुभार्गयपूर्ण स्थिति यह रही कि जो घटक थे, जो सहयोगी दल थे, वे आपस में मिलने के बाद भी कोई सरकार नहीं बना सके और मैं समझता हूं कि वर्तमान परिस्थिति में राष्ट्रपति शासन के अलावा अन्य कोई विकल्प बिहार में नहीं था । हम लोग इस पक्ष में हैं कि एक लोकप्रिय सरकार का गठन हो और राष्ट्रपति शासन की उम्र ज्यादा न हो । ऐसा सभी लोग चाहते हैं ।
अध्यक्ष महोदय, मैं लंबी बात नहीं कहना चाहता हूं । मैं एक ही निवेदन करना चाहता हूं कि मेरे साथी श्री डी.पी. यादव जी ने जो सवाल उठाए, खास तौर से किन-किन राजनीतिक पार्टियों ने अपना समर्थन दिया, किन राजनीतिक पार्टियों ने यह कहा कि हम न ही एनडीए को और न ही आरजेडी को समर्थन देंगे । समाजवादी पार्टी ने एक पत्र लिखा था कि वह इस हक में हैं कि न आरजेडी और न ही एनडीए की सरकार बने । मैं पूछना चाहता हूं कि जो दूसरे राजनीतक दल हैं उन पर आरोप लगा रहे हैं, मेहरबानी करके आप अपने आपको देख सकते हैं । आरजेडी और श्री पासवान जी की एलजेपी यूपीए के घटक दल हैं । दिल्ली में सरकार बनाने के लिए कांग्रेस पार्टी के लोग और श्री लालू प्रसाद तथा श्री पासवान जी साथ-साथ बैठे हैं और मंत्री बने हैं । बिहार में यूपीए की शक्ल दूसरी हो जाएगी । श्री देवेन्द्र जी आप किस पर आरोप लगा रहे हैं “गैर तकलीफ अब न फरमाएं, दोस्त काफी हैं दुश्मनी के लिए” । अगर आप लोगों में कोई तालमेल होता श्री लालू प्रसाद व श्री पासवान कांग्रेस पार्टी के साथ बिहार में एका कर लेते तो बिहार में सरकार बनने से कौन रोक सकता था । इसलिए मेहरबानी करके दूसरों पर दोषारोपण करने से बेहतर है कि अपने आप से पूछें । दिल्ली में यूपीए की शक्ल अलग है और बिहार में यूपीए की शक्ल दूसरी है । दोहरा आचरण न अपनाएं ।
अध्यक्ष महोदय, मैं नम्रता के साथ कहना चाहूंगा कि बिहार में कोई लोकप्रिय सरकार नहीं बन पाई है तो उसकी सारी जिम्मेदारी कांग्रेस पार्टी की है, श्री लालू प्रसाद और श्री पासवान की है । इसलिए मेहरबानी करके इन सब बातों के कहने का कोई अर्थ नहीं है । किसने आपकी सरकार बनने से रोका है । यह गलत सवाल है और मुझे इतना ही निवेदन करना था कि बिहार का हित इसमें है कि जो सैक्यूलर लोग है जो यूपीए के घटक दल दिल्ली की सरकार चला रहे हैं वह मेहबानी करके बैठ जाएं तो बिहार में कल सरकार बन सकती है । मैं अपने दल की तरफ से स्पष्ट करना चाहूंगा कि बिहार में जल्द से जल्द राष्ट्रपति शासन खत्म किया जाए, ऐसा हम चाहते हैं ।
श्री इलियास आज़मी (शाहाबाद) : अध्यक्ष महोदय, बिहार में जो कुछ हो रहा है वह काबिले अफसोसनाक है । बिहार की आवाम पर राष्ट्रपति शासन लगना अफ़सोसनाक बात है । पहले हमें इस पर सोचना चाहिए कि ऐसा क्यों हुआ है । इसकी जड़ें ९ महीने पहले लोकसभा के चुनावों में छिपी हुई हैं । लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मात्र ५ सीटें ज्यादा मिल गईं । लेकिन कांग्रेस के लोगों के दिमाग में आ गया कि जैसे श्री नेहरू और श्रीमती इंदिरा गांधी का जमाना वापिस आ गया है । इन्होंने एकदम अधिनायकवादी रास्ता अपना लिया । खुद अपने घटकों को संतुष्ट नहीं रख सके और यह समझ लिया कि जैसे पूरी लहर उनकी है[i27] ।
महोदय, उन्होंने बिहार और झारखंड को अपनी करतूतों से, अपने लालच के वश होकर, एन.डी.ए. के हवाले किया। बहुजन समाजवादी पार्टी का जहां तक ताल्लुक है, भले ही हमारे थोड़े से ही मैम्बर जीते हों, हमने वहां सरकार बनाने के लिए पहल की और हमने आर.जे.डी. को खुला समर्थन दिया। जैसे हम केन्द्र में यू.पी.ए. सरकार को बिना कुछ मांगे, बिना यह देखे समर्थन दे रहे हैं कि कांग्रेस के नेता हमारे जायज काम भी कर रहे हैं या नहीं, उसी तरह हमने आर.जे.डी. को खुला समर्थन दिया, लेकिन अफसोस की बात है कि वहां राष्ट्रपति शासन नागुजीर हो गया। अब मेरी सभी लोगों से और खासतौर से यू.पी.ए. सरकार से दख्र्वास्त है कि बिहार की जनता को नौकरशाही के शासन से मुक्त करा कर, लोकतांत्रिक व्यवस्था बहाल करानी चाहिए।
महोदय, इसके लिए मै एकमात्र जिम्मेदार कांग्रेस लीडरशिप को, सोनिया गांधी जी को और मनमोहन सिंह जी को मानता हूं। मैं उनसे दख्र्वास्त करना चाहता हूं कि वे अपने घटकों को बैठाएं और अपना यह रवैया छोड़ दें और अपने दिमाग से यह बात निकाल दें कि इंदिरा जी और नेहरू जी का जमाना वापस आ गया है। न लैफ्ट फ्रंट कोई चीज है, न बहुजन समाजवादी पार्टी कोई चीज है और न आर.जे.डी. कोई चीज है, अकेले कांग्रेस वह पार्टी है जो अपने घटक दलों के साथ मिलकर वहां सरकार बना सकती है। उत्तर प्रदेश में जितने लोग सपोर्ट कर रहे हैं, आधे से कम, ७० मैम्बर यू.पी.ए. को सपोर्ट कर रहे हैं, लेकिन यहां सिर्फ १० को मानते हैं। १० मैम्बर हैं, जो कांग्रेस के हैं। बाकी कोई कुछ नहीं है। यह रवैया यदि नहीं छोड़ा, तो न लोक सभा का भविष्य सुरक्षित रहेगा और न इस सरकार का भविष्य सुरक्षित रहेगा।
13.07 hrs. (Mr. Deputy Speaker in the Chair) उपाध्यक्ष महोदय, इन्हीं शब्दों के साथ मैं यह दख्र्वास्त करूंगा कि कांग्रेस पार्टी अपने रवैये में तब्दीली लाए। आज बदकिस्मती से यहां सोनिया जी और मनमोहन सिंह जी मौजूद नहीं हैं, लेकिन मेरी आवाज अगर उनके कानों तक पहुंच सके, तो मैं कहूंगा कि वक्त की रफ्तार और नब्ज को पहचानिए। यह मत समझिए कि कोई तबका हमेशा बेवकूफ बनता रहेगा। बिहार के मुसलमानों को मैं मुबारकवाद देता हूं कि उन्होंने दिन-रात सैकुलरिज्म का नारा लगाने वालों के चेहरे को पहचाना और उनकी औकात बता दी कि तुम्हारी औकात सिर्फ इतनी सी है।
महोदय, इन्हीं शब्दों के साथ, मैं अपनी इस इच्छा को व्यक्त करते हुए, अपनी बात समाप्त करूंगा कि अभी वक्त हाथ से नहीं निकला है। सोनिया जी और मनमोहन सिंह जी, अभी वक्त आपके हाथ में है। आप फौरन हरकत में आइए, पहले तो अपनी पार्टी को दुरुस्त कीजिए और नेहरू और इंदिरा के जमाने को भूल जाइए और मौजूदा जमाने में लौटकर आइए तथा अपने सहयोगियों को आप संभालिए, उनको एकजुट कीजिए। आप पांच साल पहले के एन.डी.ए. से ही सबक ले लीजिए। एन.डी.ए. से सबक लेना कोई बुरी बात नहीं है। एन.डी.ए. के नक्शे कदम पर चलना, मेरे नजदीक, गलत हो सकता है, लेकिन उसकी अच्छाइयों से सबक लेना कोई बुरी बात नहीं है। उसने कैसे छोटी-छोटी पार्टियों को, दो-दो सदस्यों की पार्टियों को पांच साल तक अपने साथ रखकर किस प्रकार से संसद चलाई, उससे ही सबक ले लीजिए। तानाशाही का रवैया छोड़िए और तानाशाही के रवैये को छोड़कर बिहार और झारखंड में जनता ने जो जनादेश दिया है, उसका अहतराम करते हुए, बिहार में लोकतांत्रिक व्यवस्था को पुन: बहाल कीजिए।
श्री रामविलास पासवान : उपाध्यक्ष जी, मैं इस डिबेट में भाग नहीं लेना चाहता था क्योंकि मेरी राय सबको मालूम है। जो कोई काम मैं करता हूं, किसी का विरोध या सपोर्ट करता हूं, तो मैं किसी की पीठ में छुरा नहीं भोंकता, मैं उन लोगों में से हूं। मैं सीधा चलता हूं और सीधा बोलता हूं, किसी को पसन्द आए या न आए, वह अलग बात है।
महोदय, मैं आज सरकार की तरफ से खड़ा हुआ हूं और सरकार की ओर से बिहार में राष्ट्रपति शासन लागू करने के संबंध में जो प्रस्ताव लाया गया है, उसके समर्थन में खड़ा हुआ हूं। मैं राज्यपाल महोदय के कदम का समर्थन करने के लिए ही खड़ा हुआ हूं। अत: मैं कहना चाहता हूं कि राज्यपाल के सामने दूसरा कोई चारा नहीं था। आप यदि वहां की पॉलीटिकल पार्टियों की स्थिति को देखें, तो पाएंगे कि एन.डी.ए., जिसमें जनता दल और भारतीय जनता पार्टी है, दोनों के मिलाकर ९२ सदस्य cé[rpm28] । राष्ट्रीय जनता दल के ७५ सदस्य हैं, लोक जनशक्ति पार्टी के २९ सदस्य हैं, सीपीएमएल के सात, सीपीआई के तीन, समाजवादी पार्टी के चार, एनसीपी के तीन, बहुजन समाज पार्टी के दो, सीपीआई एम का एक सदस्य और १७ इन्डिपेंडेंट हैं। इन्हें आप किसी भी हिसाब से देख लीजिए। जब तक दो मेज़र पार्टी एक साथ नहीं आती हैं तो चाहे इन्डिपेंडेंट या कोई भी हो, उससे समाधान नहीं होता। इसलिए या तो एनडीए, आरजेडी और लोक जनशक्ति पार्टी में से कोई दो पार्टियां एक साथ मिलें तो सरकार बनने की संभावना होती है। यह बात साफ है, इसमें हमें कुछ छिपाने की जरूरत नहीं है। मैंने चुनाव के दरम्यान ही साफ तौर पर कहा था, जब कि बहुत कम नेता चुनाव के दरम्यान इस तरह बोलते हैं। मैंने उस समय कहा था कि बिहार का वरडिक्ट राष्ट्रपति शासन की तरफ जा रहा है। मैंने चुनाव के दरम्यान ही तीन बातें कही थी, पहला यह कि बिहार में राष्ट्रपति शासन प्रथम फेस में होगा और यह होना भी जरूरी है। दूसरा, मैंने कहा था कि हमारी पार्टी आरजेडी या बीजेपी के साथ नहीं जाएगी, तीसरा मैंने कहा था कि मैं मुख्य मंत्री नहीं बनूंगा, मुख्य मंत्री कोई मुसलमान बनना चाहिए।…( व्यवधान) मैंने चुनाव के दरम्यान ही ये बातें कही थीं। नीतीश जी ने कहा कि पासवान जी मैदान छोड़ कर भाग गए, यह हो गया, वह हो गया। मैंने उसके ऊपर कोई रिएक्ट नहीं किया। चुनाव का जब रिजल्ट निकला, उसके बाद जो परिस्थित हुई, उस परिस्थिति में राज्यपाल महोदय को दोष देना या केन्द्र सरकार को दोष देना, मैं समझता हूं कि सही चीज नहीं है। आज भी कोई बता दे क किस हिसाब से वहां सरकार बनने वाली है। भविष्य में क्या होगा, मैं नहीं जानता हूं, लेकिन आज की परिस्थिति में किस हिसाब के जरिए आप कहते हैं कि वहां सरकार बनने वाली है और राज्यपाल महोदय सरकार नहीं बनने देते। जब तक तीनों धूरी में से दो धूरी एक साथ नहीं मिलती है तब तक सरकार बनने की कोई संभावना नहीं है। अब कैसे नई सरकार बने? नीतीश जी ने नाम लिया कि ५५ आदमी तैयार हैं, पासवान जी ६७ आदमियों को लेकर आते हैं। नीतीश जी, अगर ५५ आदमी तैयार हैं तो क्या आप ९२ में से ५५ अलग हो रहे हैं, आप क्या कहना चाहते हैं? आप हमें इस प्रकार जनता के सामने खड़ा करते हैं और लोगों को कहते हैं कि हम तैयार हैं, लेकिन पासवान जी तैयार नहीं हैं। हम आपको निमंत्रण देते हैं, आप वहां से छोड़ कर यहां आ जाइए, हम कल सरकार बना देंगे।
मैं दावे के साथ कहता हूं, आप ६७ कहते हैं, मैं आपको ७५ लाकर दे दूंगा, आप आइए। क्या आपछोड़ने को तैयार हैं? आप हमें क्यों कह रहे हैं, अगर आप छोड़ने को तैयार नहीं हैं। मैं इस पर बोलना नहीं चाहता था, लेकिन हमारी पार्टी का जो स्टैंड है उसे अगर मैं साफ न करूं तो यह हमारे लिए भी ठीक नहीं है। इसलिए मैंने कहा कि अकेला राम विलास पासवान राष्ट्रपति शासन के फेवर में है। उसका जो खामियाज़ा होगा, माइनस प्वाइंट होगा, उसे भी हम झेलने को तैयार हैं और राष्ट्रपति शासन के दौरान जो अच्छा काम होगा उसे भी हम बोर्न करने को तैयार हैं। बिहार के लोगों को भी इतने दिनों में पता चलने लगा है कि राष्ट्रपति शासन अच्छा है या बुरा है। ठीक है कि कुछ एमएलएज़ और लीडर्स को दिक्कत हो रही होगी, लेकिन बिहार की जनता को अभी खुशी है, बाद में क्या होगा, मैं कहना नहीं चाहता हूं।
महोदय, हम राष्ट्रपति शासन के परमानेंट पक्ष में नहीं हैं, हम चाहते हैं कि वहां सरकार बने, लेकिन हमारी पार्टी की जो राय है, वह हमारी पार्टी की निश्चित राय है और उस राय को हमने छिपा कर नहीं रखा है। उसके बाद कोई रास्ता निकले और वह रास्ता निकलना चाहिए। मैं सिर्फ इतना ही कहना चाहूंगा कि इन सारे मामलों में किसी भी तरीके से राज्यपाल महोदय का कोई आचरण ऐसा नहीं है, जो असंवैधानिक आचरण है। उनकी कोई गलती नहीं है और केन्द्र सरकार की भी कोई गलती नहीं है, परिस्थिति ऐसी है कि आज की परिस्थिति में राष्ट्रपति शासन के अलावा दूसरा कोई चारा नहीं है।
श्री सुशील कुमार मोदी (भागलपुर) : उपाध्यक्ष महोदय, मैं बिहार में राष्ट्रपति शासन के प्रस्ताव पर बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं। आज से सात साल पहले भी बिहार में एक बार राष्ट्रपति शासन लग चुका है। तब यह २५ दिनों के लिए लगा था, जब बिहार में २२ दलितों की हत्या हुई थी, लेकिन उस समय के राष्ट्रपति शासन में और आज के राष्ट्रपति शासन में दो-तीन अन्तर हैं।
पहला अन्तर तो यह है कि उस समय केन्द्र की सरकार ने वहां की सरकार को बर्खास्त कर दिया था और इस बार बिहार की जनता ने वहां की सरकार को बर्खास्त करने का काम किया है। दूसरा अन्तर यह है कि उस समय एन.डी.ए. की सरकार ने राष्ट्रपति शासन लगाया था और राजद के लोगों ने विरोध किया था, कांग्रेस के लोगों ने विरोध किया था, इसलिए राष्ट्रपति शासन वापस लेना पड़ा था, लेकिन आज कैसी विडम्बना है कि वही कांग्रेस, जो उस समय राष्ट्रपति शासन का विरोध कर रही थी, जो राजद विरोध कर रहा था, रेल मंत्री के यू.पी.ए. में रहने के बावजूद उनकी ही सरकार ने बिहार में राष्ट्रपति शासन लागू किया है।
बिहार में राष्ट्रपति शासन किन परिस्थितियों में लगा, वह आपके सामने है, लेकिन मुझे तो लग रहा है कि जिस तरह से इराक में लोगों ने सद्दाम हुसैन के पतन के बाद खुशियां मनाईं, उसी प्रकार से आज लोग बिहार के अन्दर राष्ट्रपति शासन के कारण खुशियां नहीं मना रहे हैं, राजद सरकार के पतन के कारण बिहार में लोग इराक जैसी खुशियां मना रहे हैं। अगर बिहार में सद्दाम हुसैन जैसी कोई मूर्ति होती…( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing would go on record.
(Interruptions) …* MR. DEPUTY-SPEAKER: झा साहब, आप बैठ जाइये। Please sit down.
श्री सुशील कुमार मोदी : उपाध्यक्ष महोदय, अगर बिहार में भी कोई इराक जैसी मूर्ति होती तो लोग वही हश्र करते, जो इराक में हुआ है। इसलिए मैंने कहा कि लोग राष्ट्रपति शासन लगने पर खुश नहीं हैं, बल्कि खुश इसलिए हैं कि वहां पर १५ साल से जो एक सरकार थी, उस सरकार का पतन हुआ। आपात काल के बाद जैसे लोगों को दूसरी आजादी मिली और जैसा जश्न लोगों ने मनाया था, आज बिहार की जनता १५ वर्षों के बाद उसी प्रकार की आजादी का अनुभव कर रही है। उसी प्रकार का जश्न बिहार के अन्दर लोगों ने मनाया है।…( व्यवधान)
* Not Recorded.
मैं एक बात इस सदन में साफ करना चाहूंगा, हमारे भाई देवेन्द्र जी भाषण कर रहे थे, जनादेश किसी को नहीं मिला है, खंडित जनादेश मिला है, लेकिन अगर किसी को जनादेश नहीं मिला है तो एक बात भी सदन के अन्दर साफ होनी चाहिए कि यह जनादेश राष्ट्रीय जनता दल के खिलाफ है। इनके ७५ लोग जीतकर आये हैं और २४३ में से जो बाकी १५० लोग हैं, उनको राष्ट्रीय जनता दल के खिलाफ जनादेश प्राप्त हुआ है। बिहार में जनादेश भले ही खंडित जनादेश होगा, खंडित जनादेश का मतलब किसी एक दल को समर्थन नहीं मिला होगा…( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing would go on record.
(Interruptions) …* श्री सुशील कुमार मोदी : उपाध्यक्ष महोदय, जनादेश खंडित इस अर्थ में है कि किसी एक दल को बहुमत नहीं मिला, परन्तु परिवर्तन इस मामले में है कि बिहार का जनादेश राष्ट्रीय जनता दल के १५ साल के शासन के खिलाफ है और इसलिए सैकुलरिज्म के नाम पर जो लोग कहते हैं कि सैकुलरिज्म को जनादेश मिला है, उनसे मैं पूछना चाहता हूं कि २००० के चुनाव में आप १६५ से घटकर ११५ पर पहुंच गये हैं और २००५ में आप ११५ से घटकर ७५ पर पहुंच गये। मैं यह भी कहना चाहूँगा कि सन् २००० के चुनाव में जहाँ आपको ३२ प्रतिशत वोट मिला था अब वहां घटकर २५ प्रतिशत वोट पर चले गए। फिर भी आप कहते हैं कि जनादेश हमको मिला है। सरकार हम बनाएंगे। सरकार बनाने का निमन्त्रण हमको मिलना चाहिए। बिहार के अंदर जनादेश केवल आरजेडी के खिलाफ ही नहीं है, कांग्रेस के खिलाफ भी जनादेश है। कांग्रेस १२ से घटकर १० प्रतिशत पर पहुँच गई।…( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKR: No running commentary please. You can not speak without the permission of the Chair.
श्री सुशील कुमार मोदी : कांग्रेस का भी वोट प्रतिशत आठ-साढ़े आठ प्रतिशत से घटकर पांच प्रतिशत पर पहुँच गया।
उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से इस सदन को बताना चाहूँगा कि बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष श्री रामजतन सिन्हा ५१ हजार वोट से हार गए, उनकी जमानत जब्त हो गई।
* Not Recorded.
उपाध्यक्ष महोदय, बक्सर की सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार को ३७७४ वोट मिले और वहां पर कांग्रेस सातवें स्थान पर चली गई । मधुबनी की सीट पर कांग्रेस को दस हजार वोट मिले और कांग्रेस चौथे स्थान पर चली गई । भागलपुर में कांग्रेस २२००० वोटों से चुनाव हार गई । इन चार सीटों के नाम मैंने इसलिए लिए क्योंकि यहां पर श्रीमती सोनिया गांधी भाषण देने गई थीं और श्रीमती सोनिया गांधी पटना, बक्सर, मधुबनी, भागलपुर इन पांच जगहों पर भाषण देने गई थीं और चार जगह इनकी पार्टी के उम्मीदवार की जमानत जब्त हो गई ।…( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing, except the speech of Shri Sushil Kumar Modi, will go on record.
(Interruptions) … * श्री सुशील कुमार मोदी : उपाध्यक्ष महोदय, बिहार के विधायक दल के नेता श्री विजयशंकर दूबे तीसरे स्थान पर चले गए । मैं यह कहना चाहता हूं कि जब कांग्रेस्-आरजेडी का शासन था । कांग्रेस को जनता ने मैनडेट दिया है It is not in favour of the RJD and Congress. वह एंटी आरजेडी मैनडेट है । इस बात को श्री लालू जी सुन लीजिए और समझ लीजिए । अगर हमको और श्री नीतीश कुमार जी को जनादेश नहीं मिला, लेकिन जनादेश आपके खिलाफ है ।
उपाध्यक्ष महोदय, गोधरा का भूत खड़ा किया गया । बिहार के अंदर गोधरा की चाल चली गई । गोधरा की रिपोर्ट ठीक विधानसभा चुनाव के समय पेश की गई ।सीडी बांटी गईं, पोस्टर लगाए गए और गोधरा का भूत उठाने, जगाने के बाद भी ७५ सीटें ही इन्हें मिल पाई । मुझे इस बात पर गर्व है कि श्री रामविलास पासवान जी की पार्टी का एक मुसलमान भी जीत कर नहीं आया लेकिन भारतीय जनता पार्टी और जेडीयू गठबंधन के चार अल्पसंख्यक समुदाय के लोग चुनाव जीत कर आए हैं । वे कोई साधारण वोट से चुनाव जीतकर नहीं आए हैं। …( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : श्री रघुनाथ जी जब भी आप बोले हैं, आपकी स्पीच के अंदर किसी को बीच में बोलने नहीं दिया गया है।
…(Interruptions)…* श्री सुशील कुमार मोदी : उपाध्यक्ष महोदय, तस्लीमुद्दीन साहब के जो लड़के चुनाव लड़ रहे थे ५१ हजार वोट से चुनाव हार गए और एनडीए गठबंधन का उम्मीदवार श्री मंज़रआलम २४ हजार वोट से चुनाव जीत * Not Recorded गए । आप कहते हैं कि बिहार के चुनाव में कोई सांप्रदायिकता का मुद्दा था । मुंगेर के चुनाव में एनडीए के उम्मीदवार मुनाजिर हसन ४० हजार वोटों से जीत कर आए हैं । सैय्यद अली खां ४ हजार वोट से जीते हैं । श्री अब्दुल्ला ६ हजार वोट से जीत कर आए हैं । अगर भाजपा के साथ रहने से मुसलमान वोट नहीं देते तो एनडीए के गठबंधन के एक उम्मीदवार को जीत कर नहीं आना था लेकिन बिहार के अक्लियत के लोगों में गोधरा मुद्दा नहीं था । वहां पानी, बिजली, सड़क का मुद्दा था और इसलिए बिहार के अंदर भारतीय जनता पार्टी को भी वोट दिया। …( व्यवधान)
श्री राम कृपाल यादव (पटना) : अब्दुल्ला कौन था? एनडीटीवी वाला था क्या…( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Please address the Chair.
...( व्यवधान)
प्रो. रासा सिंह रावत (अजमेर) : सच्चाई को स्वीकार करें, बीच में क्यों बोलते हैं।…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : श्री राम कृपाल यादव, आप बैठिए।
...( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : यह बात ठीक नहीं है कि जब औपोजीशन पार्टी की तरफ से कोई सदस्य बोलता है तो आप शोर करना शुरू कर देते हैं।
...( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : क्या आपको बीच में जरूर बोलना है? आप मेरी बात सुनिए। जब आपके किसी लीडर की बोलने की बारी आएगी, उस समय आप करैक्ट कर दीजिए।
...( व्यवधान)
श्री सुशील कुमार मोदी : उपाध्यक्ष महोदय, राष्ट्रीय जनता दल के लोग कहते हैं कि हम सबसे बड़ा दल थे, इसलिए हमें आमंत्रित करना चाहिए। ये जिस सरकारिया कमीशन की रिपोर्ट का हवाला दे रहे हैं, राज्यपाल महोदय ने अपनी रिपोर्ट में सरकारिया कमीशन का हवाला देते हुए कहा है--
“The Sarkaria Commission, in its Report, has said that the Governor, while going through the process of selection, should select a leader, who, in his judgement, is most likely to command a majority in the Assembly.” सरकारिया कमीशन कहती है कि वैसे व्यक्ति को सरकार बनाने के लिए बुलाया जाएगा जो उनके निर्णय में most likely to command a majority in the Assembly होगा। The Book, Constitution of India, written by Shri V.N. Shukla, while dealing with article 75 and article 164 of the Constitution of India, has said:
“In normal circumstances, the Governor need have no doubt as to who is the proper person to be appointed; it is the leader of majority party in Legislative Assembly, but circumstances can arise when it may be doubtful who that leader is and the Governor may have to exercise his personal judgement in selecting the CM. Under the Constitutional scheme which envisages that a person who enjoys the confidence of the Legislature should alone be appointed as the Chief Minister.” उपाध्यक्ष महोदय, ये राज्यपाल महोदय से मिलने गए। इनके पास कम्युनिस्ट पार्टी के समर्थन का पत्र नहीं था। इनके पास केवल ९१ विधायकों के समर्थन का पत्र था और डेढ़ सौ विधायकों से जुड़े दलों ने मिलकर राज्यपाल महोदय से कहा कि चूंकि मैनडेट आरजेडी के खिलाफ है, इसलिए किसी भी हालत में आरजेडी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित नहीं किया जाना चाहिए। जब सदन के डेढ़ सौ विधायक कह रहे हैं क हम आरजेडी को समर्थन नहीं करेंगे, वैसी स्थिति में राज्यपाल महोदय ने अगर इनको सरकार बनाने के लिए आमंत्रित नहीं किया तो कौन सा असंवैधानिक काम किया।…( व्यवधान)
श्री रघुनाथ झा : झारखंड में…( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: This is not to be recorded.
(Interruptions) … * श्री सुशील कुमार मोदी : हमने राज्यपाल महोदय से कहा कि अगर आप ९१ संख्या वाले आरजेडी गठबंधन को आमंत्रित करेंगे तो ९२ की संख्या हमारे पास है।…( व्यवधान) अगर ये हल्ला करेंगे तो लालू जी, जब आप बोलने के लिए खड़े होंगे तो मैं आपको एक शब्द भी नहीं बोलने दूंगा।…( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: This is not to be recorded.
(Interruptions) … * श्री सुशील कुमार मोदी : उपाध्यक्ष महोदय, आप इनको नियंत्रित कीजिए।…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : अब आप कनक्लूड कीजिए।
* Not Recorded श्री सुशील कुमार मोदी : आप उकसाइए नहीं।…( व्यवधान) अभी तो बिहार की जनता ने आपको कूड़े में फेंका है, अगले चुनाव में आप कहां चले जाएंगे, पता नहीं चलेगा।…( व्यवधान) बाहर भाषण देंगे, बाहर बहुत भाषण दिया।…( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: The remarks of the Minister are not to be recorded.
(Interruptions) …* श्री सुशील कुमार मोदी : हम राज्यपाल महोदय से मिलने गए थे और उन्हें कहा कि अगर आपने ९१ संख्या वाले आरजेडी गठबंधन को आमंत्रित किया तो हमारे गठबंधन के पास ९२ की संख्या है। आपको ९२ संख्या वाले गठबंधन को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करना चाहिए।…( व्यवधान)
लालू जी, आपको जितना बोलना हो, बोलिए। हम आपका वाक-आउट नहीं करेंगे, आज आपको बोलने के लिए छोड़ nåMÉä[R29] ।
उपाध्यक्ष महोदय, मैं कह रहा था कि हम लोगों ने राज्यपाल से कहा कि अगर ९१ की संख्या वाले गठबंधन को आप आमंत्रित करते हैं तो हमारे पास ९२ की संख्या है। हमारे पास बहुमत नहीं है लेकिन संख्या आपसे ज्यादा है। इसके अलावा निर्दलीय विधायक भी हमें समर्थन देने के लिए तैयार हैं इसलिए आपको हमें आमंत्रित करने का मौका देना चाहिए। लेकिन बिहार में जो परिस्थितियां पैदा हुईं, उन परिस्थितियों में …( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : आप कन्कलूड कीजिए।
...( व्यवधान)
श्री सुशील कुमार मोदी : उपाध्यक्ष महोदय, उन्होंने मुझे टोका, क्या वह टाइम आप मुझे नहीं देंगे? …( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : आप कन्कलूड कीजिए।
श्री सुशील कुमार मोदी : इसलिए बिहार के राज्यपाल ने राष्ट्रपति शासन लगाने का जो निर्णय किया है, वह तात्कालिक परिस्थिति में उचित है, लेकिन जैसा नीतीश जी ने कहा कि यह कोई अनन्त काल तक चलने वाली व्यवस्था नहीं है। मुझे इस बात का दुख है, मैंने जीरो ऑवर में भी इस मामले को उठाया था कि आज बिहार में राष्ट्रपति शासन लगे हुए १० दिन से ज्यादा हो गये हैं, बिहार में सलाहकार नाम की कोई चीज नहीं है। वहां एक भी सलाहकार नहीं है। क्या अकेले राज्यपाल बिहार का शासन चला पायेंगे ? प्रणव बाबू, क्या केन्द्र की सरकार इतनी कमजोर और अक्षम हो गयी है कि वह दो मंत्रियों के वर्चस्व की लड़ाई में, तीन दलों के वर्चस्व की लड़ाई में एक भी सलाहकार नियुक्त नहीं कर पायी है। …( व्यवधान)
रेल मंत्री (श्री लालू प्रसाद) : उपाध्यक्ष महोदय, मेरा प्वाइंट ऑफ ऑर्डर यह है कि मोदी जी कह रहे हैं कि दो केन्द्रीय मंत्रियों के झगड़े की वजह से एडवाइजर नहीं बन पा रहे हैं। …( व्यवधान) यह बात बिल्कुल बेबुनियाद है। वहां एडवाइजर बने या न बने, बूटा सिंह जी को एडवाइजर की जरूरत नहीं है। …( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: This is no point of order.
श्री सुशील कुमार मोदी : उपाध्यक्ष महोदय़, ये लोग खैनी बनाकर खिलाने वाले, पीकदान उठाने वाले लोगों को सलाहकार बनाना चाहते हैं। उसी का परिणाम है कि आज १० दिन बीत गये…( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Shriprakash Jaiswal, please sit down.
गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री (श्री श्रीप्रकाश जायसवाल) : इस तरह का बयान यहां नहीं होना चाहिए।
...( व्यवधान)... * MR. DEPUTY-SPEAKER: This is no point of order. This is not to be recorded.
श्री सुशील कुमार मोदी : उपाध्यक्ष महोदय, मैंने कहा कि राष्ट्रपति शासन लोकप्रिय सरकार का विकल्प है। मैं उनको बताना चाहूंगा कि सात दिनों में उनकी खुशी क्यों काफूर हो गयी। आज बिहार केअखबारों में समाचार आया है कि सूबे में सात की हत्या, एक ट्रेन पर हमला और दूसरी लूटी गयी। …( व्यवधान) पटना में ताबड़-तोड़ लूट की तीन वारदातें और मोकामा में गोलीबारी, दो की हत्या की आशंका। रिमांड होम से पांच बालक फरार। राजद और लोजपा में दुश्मनी बढ़ी, संघर्ष में अनेक घायल। ये समाचार वहां के ‘हिन्दुस्तान’ अखबार की सुर्खियां हैं। मै कहना चाहता हूं कि कांग्रेस के लोग सपने में मत रहिये कि आप वहां प्रॉक्सी रूल चलायेंगे। आप राष्ट्रपति शासन के माध्यम से अपना राज वहां चलायेंगे। अगर वहां लोकप्रिय सरकार न बनी तो लॉ एंड आर्डर, विकास की स्थिति को कोई भी राष्ट्रपति या राज्यपाल सुधार नहीं सकता। हम चाहते हैं कि वहां पर एक लोकप्रिय सरकार बने। …( व्यवधान)
लेकिन एक बात आप समझ लीजिए कि लॉकर की एक चाबी श्री राम विलास पासवान जी के हाथ में है और लॉकर की दूसरी चाबी भारतीय जनता पार्टी के हाथ में है और कोई लॉकर दोनो चाबी के बिना नहीं खुलता। श्री राम विलास पासवान जी, अगर आप बिहार में सरकार बनाना चाहते हैं तो एक चाबी आपको लगानी पड़ेगी और दूसरी चाबी जब तक भाजपा के ३७ विधायकों की नहीं लगेगी तब तक बिहार में कोई सरकार नहीं बन सकती। …( व्यवधान) .. * * Not Recorded.
MR. DEPUTY-SPEAKER: This is not to be recorded.
श्री सुशील कुमार मोदी : उपाध्यक्ष महोदय, हम चाहते हैं कि बिहार में जल्द से जल्द लोकप्रिय सरकार बने। सीपीएम के लोग चाहते हैं कि चुनाव हो जाये। लालू जी भी चाहते हैं कि वहां चुनाव हो जाये। यह उनकी मांग भी है लेकिन हम बिहार में चुनाव नहीं चाहते[r30] ।लेकिन मैं अपने बड़े भाई राम विलास पासवान जी से कहना चाहूंगा कि आपको जो यह वोट मिला है, आपके जो २९ विधायक चुनाव जीतकर आए हैं, उसमें २४ लोग एंटी आरजेडी मेनडेट पर चुनाव जीतकर आये हैं और २९ में से २४ लोगों ने आरजेडी को चुनाव में हराने का काम किया है। आपका एक भी मुसलिम समुदाय का व्यक्ति चुनाव जीतकर नहीं आ पाया है। मैं आपसे कहना चाहूंगा कि अगर बिहार मेंसरकार बनाना चाहते हैं तो आप भाजपा-जदयू गठबंधन के साथ लोजपा को लाइए और बीजेपी-जदयू कोई भी कुर्बानी करने के लिए तैयार है और अगर आप बाहर से समर्थन देने के लिए कहेंगे तो हम बिहार के व्यापक हित में बाहर से समर्थन देने के लिए भी विचार कर सकते हैं। कौन मुख्य मंत्री होगा, यह कोई महत्व का विषय नहीं है। यह बात हम दो मिनट में बैठकर सुलझा लेंगे लेकिन नीतीश कुमार जी से बेहतर आज बिहार में और कोई दूसरा मुख्य मंत्री नहीं हो सकता है। जिस प्रकार से उन्होंने नेतृत्व प्रदान किया है,…( व्यवधान) लेकिन अगर आवश्यकता पड़ेगी तो हम इसका भी हल निकाल सकते हैं। उसमें मैं राम विलास जी से कहना चाहूंगा कि आप एलजेपी और बीजेपी-जदयू के साथ मिलकर सरकार बनाइए नहीं तो आपके विधायकों को तोड़ने में लालू जी लगे हुए हैं। …( व्यवधान) आपके दल को तोड़कर वह कुछ भी कर सकते हैं।
मैं आपके माध्यम से कहना चाहूंगा कि बिहार में एक लोकप्रिय सरकार चाहिए और भाजपा-जदयू गठबंधन राष्ट्रपति शासन बिल्कुल नहीं चाहता है। हम चाहते हैं कि दो महीने के भीतर राष्ट्रपति शासन समाप्त हो और बिहार में भाजपा-जदयू-लोजपा की लोकप्रिय सरकार बने। मैं यह भी कहना चाहूंगा कि अगर लालू जी इस धोखे में हैं,…( व्यवधान) बिहार में अगर लालू जी चुनाव चाहते हैं तो इस धोखे में मत रहिए। अगर बिहार में चुनाव होगा तो आप ७५ से घटकर २० पर पहुंच जाएंगे। आपको वहां पर कोई पूछने वाला नहीं है। राम विलास पासवान जी, आप भी धोखे में मत रहिए। आपके २९ से घटकर १० पर विधायक पहुंच जाएंगे। लेकिन मैं आपसे फिर कहूंगा कि बिहार का मेनडेट राजद गठबंधन के खिलाफ है और बिहार के अंदर एंटी-आरजेडी पर जीतने वाले लोगों को सरकार बनाने का मौका मिलना चाहिए।
श्री लालू प्रसाद :माननीय मोदी जी का सुझाव मुझे स्वीकार है। हमारा दल चुनाव नहीं चाहता है। हमको मेनडेट मिला है, हम विपक्ष में बैठेंगे। ये जल्दी दोनों चाबी लगाकर तीनों आदमी बैठकर सरकार बनाने का काम करें। …( व्यवधान) लेकिन हमारा केवल इतना ही कहना है कि इतने ज्यादा दिन तक बिहार की जनता को कंफ्यूजन में मत रखिए।…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : मेरी एक और भी रिक्वेस्ट है, …( व्यवधान)
श्री रामविलास पासवान : उपाध्यक्ष जी, इन्होंने बार-बार मेरे नाम का उल्लेख किया है। हमें बड़ा अफसोस लगता है और हम जानना चाहते हैं कि मोदी जी आप चाहते क्या हैं ? एक तरफ तो आप राष्ट्रपति शासन का समर्थन कर रहे हैं और दूसरी तरफ उसकी बार-बार बुराई भी निकाल रहे हैं। तीसरी तरफ आप बार-बार चाबी का जिक्र कर रहे हैं। हम तो शुरू से ही वही बात कह रहे हैं जो अभी लालू जी ने कहा कि हम २९ विधायक से मुंगेर लाल का जो सपना होता है, वह सपना हम नहीं देख रहे हैं। मैंने चुनाव के बीच में ही कहा था कि मुझको अपोजीशन में बैठने का मैनडेट मिलेगा तो मैं अपोजीशन में बैठूंगा। राष्ट्रपति शासन ही एक विकल्प है। राष्ट्रपति शासन कितने दिन तक रहेगा, मैं नहीं जानता हूं। मैं फिर कहना चाहता हूं कि सीपीआईएमएल के ७ एमएलए ने साफ तौर पर लिखकर दे दिया है कि न हम आरजेडी के साथ में हैं और न बीजेपी के साथ में हैं। समाजवादी पार्टी के ४ विधायकों ने लिखकर दे दिया है। अभी सीपीआई के लोगों ने किसी को लिखकर नहीं दिया है। २९ हम हैं। इस प्रकार से २९ और ७ मिलकर ३६ और ४ मिलकर ४० होते हैं तथा ३ और जोड़कर ४३ इस मत के पक्के हैं, जो यह कहते हैं कि न हम आरजेडी के साथ जाएंगे औऱ न बीजेपी के साथ जाएंगे। इसलिए बार-बार इस बात को कहने से कोई फायदा नहीं है। सरकार बनेगी। जो सरकार बनेगी तो वह सरकार के तरीके से सरकार चलेगी। वह सरकार इस तरीके से नहीं चलेगी कि हम कहते हैं कि कीचड़ से कीचड़ कभी साफ नहीं होता है। एक बात को हमेशा याद रखना चाहिए कि बिहार में राष्ट्रपति शासन का आपको समर्थन करना है तो समर्थन करिए और विरोध करना है तो विरोध करिए। अभी सीधी सी बात है, जो मैंने शुरू में ही कही थी कि राष्ट्रपति जी के सामने कोई दूसरा रास्ता नहीं था सिवाए बिहार में राष्ट्रपति शासन लगाने के और इसीलिए राष्ट्रपति जी ने, केन्द्र सरकार ने बिहार में राष्ट्रपति शासन लगाने का काम किया है जिसका खुले दिल से समर्थन कीजिए।…( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Please sit down. Nothing will go on record.
श्री सुशील कुमार मोदी : उपाध्यक्ष महोदय, मैं एक मिनट में अपनी बात कहूंगा।…( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Please sit down.
श्री सुशील कुमार मोदी : उपाध्यक्ष महोदय, अभी प्रणव बाबू ने नीतीश जी के भाषण के बाद हस्तक्षेप करते हुए कहा कि कैबिनेट की सामूहिक जिम्मेदारी होती है[R31] । लालू प्रसाद जी ने कैबिनेट के निर्णय का विरोध किया है, कैबिनेट के निर्णय का वॉयलेशन किया है …( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: It is not to be recorded. There is no point of order.
(Interruptions) … * उपाध्यक्ष महोदय : मुझे इस बात की बड़ी हैरानी है और मैं कहना चाहता हूँ कि कम से कम मंत्री साहिबान सदन को डिस्टर्ब न करें। अगर मंत्रीगण ही हाउस में ऐसा करेंगे तो काम कैसे चलेगा। मैं चाहता हूँ कि सदन व्यवस्थित रूप से चले।
* Not Recorded SHRI GIRIDHAR GAMANG (KORAPUT): Mr. Deputy-Speaker, Sir, this is a very interesting development which has taken place in the country. Since 1950, till today, there were more than 100 times when President’s rule was imposed in various States. In Bihar, this is the second time that the Presidential Proclamation has been issued for keeping the Assembly in suspended animation. First, it was issued in the year 1999. After the election, this time also, we have a Proclamation there.
The important point is that both the claimants have got 92 : 92 Members. Nobody has got even one Member more with him by which he could have formed the Government. Therefore, the decision taken by the Governor is justified. But before constituting the House, those MLAs, who have been elected, they are representatives of their constituencies but they are not Members of the House now. Therefore, the dissolution of the House is not there. It is a different type of Government which should have been formed. But the party position is such that it was very difficult to form the Government.
It is high time for the country to think of one thing. Nowadays, in the States and at the national level, we have got a multi-party Government, multi-party Opposition. The days of an absolute majority Government or a two-thirds majority Government or a single largest party Government where all these Governments could provide a stable Government in the country, have gone. It is so whether in the States or at the Centre. Therefore, we have got today either an allies’ Government or a supported Government or a dependent Government. Coalition Government has not yet come. Minority Government or a majority party Government is not there now. Therefore, it is very difficult for the Governor to take a decision on the basis of the fractured mandate.
At the national level also, today, we have got a very nice Government. In the past, except the Congress Government where we could complete the five-year term in office, the non-Congress Governments could not complete the five-year term in office. Therefore, we have to face elections not on completion of the five-year term but during the mid-term or quarter-term. The days are coming, maybe in the States, when there will be no full-term Government at all and we will have to face the elections very frequently. Therefore, it is high time that we would have to see that whether there will be a Government or not, the MLAs in the States or the Members in the House as Members of Parliament remain as Members. I say this because the dissolution of the House will not be there. The Government will be formed, the Government will be defeated and, when the same Government recommends dissolution of the House, the House will be dissolved. Therefore, we have to see that whether in the case of the Lok Sabha or the Assembly, it should remain for a five-year term after the election or not. If not, due to the situations which are developing today in the States or at the national level, there will be uncertainty of the Government and there will be destabilisation of the democratic process[R32] .
Definitely, Sir, in Bihar, election was held to form the Government. But they could not able to form the Government on the basis of whatever numbers they were required to form the Government. There will be a Government definitely because without any Government, there will be election again. I do not think that it is good for the State or for the nation. Therefore, whichever political parties are there, they will be able to form the Government definitely. Only the time will tell whether the State Government is able, stable or capable or not. But, there should be a Government in Bihar. It should be decided by the parties in which way they want to form the Government.
Sir, what will be the role of the independent Members and what about the Anti-Defection Law? Is it a very important issue today? Sir, according to the Tenth Schedule of the Constitution, defection is there just only on the basis of whatever decision is being taken by the independent Members as well as those Members who have been elected by the Party.
Sir, I will take one more minute. I was a Member of this House in the year 1990. At that time, I had voted. It was not against the Government; it was for the Party. Sir, it was a Confidence Motion. At that time, the Party in power should have proved the majority in the House when they lost the support of the alliance parties those who had supported the then Government. They could not mobilise one person with them by which they were defeated in the House. They could not show one Member. It was not that Giridhar Gamang, who was the Chief Minister, who just entered the House and voted. It was on the basis of constitutionality. It was because I was a Member at that time and I did not resign from the membership of the House. I was also the Chief Minister of Orissa at that time.
Sir, if it would have been a No-Confidence Motion, then I would have voted against the Government but it was a Confidence Motion. At that time, the Party in power should have maintained the strength to show that they were capable to remain in the Government. But they could not get one Member with them, therefore, they lost; and they put the blame on me because of one vote of mine. Then, there was an election in the country. The Party in power assumed as if they would have completed five years. … (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: No interruptions, please.
… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing will be recorded.
(Interruptions) …* MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Bikram Keshari Deo, please, sit down.
SHRI GIRIDHAR GAMANG : Sir, I am not yielding.… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Bikram Keshari Deo. Please, sit down.
SHRI GIRIDHAR GAMANG : Sir, I am not yielding. I will answer. When the Anti-Defection Act was there after amending the Constitution, what was the intention? After the completion of election and a Member is elected and if he changes the Party, then it attracts the anti-defection. I would say “No”. There are * Not Recorded.
two provisions – abstaining from voting or not voting according to the Party’s directions. This would attract the defection.
Sir, I would humbly submit that I have been elected to this House for the 9th consecutive term. This is my 9th term in this House. Therefore, I know my own conscience. The conscience of a Member is not judged by the Anti-Defection Act. An elected Member of the Party is not free to take his own independent decision. I am not a defector of the Party. How could I take an independent decision when the Party gave the direction to come and vote in the House? Sir, I had voted for my Party. It was not against the Government. I want to clear this point. …… (Interruptions)
SHRI B. MAHTAB (CUTTACK): The Party has not rewarded you as yet.
MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing will go on record, except the speech of the hon. Member.
(Interruptions) … * SHRI GIRIDHAR GAMANG : Sir, I am not yielding. You could not arrange one Member to remain in power, and then why are you blaming me? Sir, I had voted as a Member of Lok Sabha from Koraput. If I had abstained from voting, then it would have attracted defection. I had not voted for the BJP Government at that time, as I was the Member of the Congress Party. … (Interruptions) What does the Tenth Schedule of the Constitution say? The Tenth Schedule of the Constitution says that if a Member votes or abstains from voting in such House contrary to any direction issued by the political party to which he belongs, then the Member attracts the defection. Sir, at that time, I was a Member of the Lower House and I had voted for my Party and not for the Government[c33] .
* Not Recorded.
Therefore, blaming me by saying that I defeated the Government due to which the Lok Sabha was dissolved is not correct. Dissolution of the Lok Sabha was recommended by the party in power at that time. The President of India cannot dissolve the House on his own.
In Bihar also, we have a situation where two biggest alliances have both got the support of almost equal number of MLAs, but nobody could form the Government there as they do not have the required majority. This is a precarious situation prevailing in Bihar today. Therefore, it is high time to ponder over the formation of the Government on the basis of the required support of MLAs by one alliance or the other.
With these words, I would like to express my thanks that, at least, I got an opportunity to explain my position that I was not responsible for the defeat of the Government and the subsequent dissolution of the Lok Sabha and election in the country at that time. I have done my duty as a member of the Congress Party. I was not a defector. Therefore, I voted for my party, not against the Government.
श्री बृज किशोर त्रिपाठी (पुरी) : उपाध्यक्ष जी, बिहार में राष्ट्रपति शासन लगाने के अलावा केन्द्र सरकार के पास और कोई चारा नहीं था। बिहार के चुनाव के रिजल्ट से साफ है कि वहां सरकार बनाने की जिम्मेदारी सभी राजनैतिक दलों की है और यह उनका कर्तव्य है कि वहां सरकार बने। हमारे देश में जनतंत्र चल रहा है और हमें उस जनतंत्र से सबक लेना चाहिए। यूपीए इधर सरकार में है और उसमें आरजेडी, रामविलास जी और कांग्रेस शामिल हैं। बिहार में उनको सरकार बनाने में क्या तकलीफ है? राममनोहर लोहिया जी ने बताया था कि देश में सामाजिक स्तर में अनटचेबिल्टी को लेकर जैसेअंतर है वह राजनैतिक स्तर में भी अब संक्रमित हुआ है। कोई सेक्यूलर है, कोई नॉन-सेक्यूलर है। पार्लियामेंटरी डेमोक्रेसी में जो पार्टी का कर्तव्य होता है, यूपीए बिहार में उसके खिलाफ जा रहा है। लोगों ने आपको चुना है तो सरकार क्यों नहीं बना रहे हैं। आपको सरकार में रहने का नैतिक अधिकार है। राष्ट्रपति शासन जब कैबिनेट में रिक्मेंड हुआ तब लालू जी और पासवान जी अनुपस्थित थे।
श्री लालू प्रसाद : हमारी तबियत खराब थी।
श्री बृज किशोर त्रिपाठी : यूपीए बिहार में सरकार नहीं बनाता है तो ऐसा लगता है कि वह संसदीय व्यवस्था का विरोध कर रहे हैं। यूरोप के जिन देशों में बहुदलीय संसदीय जनतंत्र चल रहा है उनसे भी हमें शिक्षा लेनी चाहिए। हम मानते हैं कि कॉलिशन-ईरा देश में आ गया है और वर्ष १९९० से यह हमारे देश में शुरू हो गया है। इसलिए हमें इस पर ज्यादा ध्यान देने की जरुरत है। बिहार में राष्ट्रपति शासन है और इसके लिए कोई भी दल जिम्मेदारी लेना नहीं चाहता है। राष्ट्रपति शासन में क्या होगा? अगर यह राष्ट्रीय स्तर पर होता है तो क्या होगा, उसका प्रबंध अभी राष्ट्रीय स्तर पर नहीं है। इसके बारे में हम सभी को सोचना पड़äMÉÉ[r34] । आने वाले दिनों में पार्लियामैंटरी सिस्टम कैसे चलेगा? कॉएलिशन एरा जो देश में आ गया है, भविष्य में कैसे होगा, हमें इसके बारे में सोचना पड़ेगा। यदि बिहार जैसी स्थिति किसी प्रदेश में आ जाएगी, कोई सरकार बन नहीं पाएगी, पॉलटिकल अनटचेबिल्टी आएगी, कोई किसी के साथ मिलना नहीं चाहेंगे, सरकार बनाना नहीं चाहेंगे ऐसे समय में सरकार कैसे बनेगी? मैं यह प्रश्न सरकार से पूछना चाहता हूं। जो यूपीए के पार्टनर है मैं उनसे भी यह प्रश्न पूछना चाहता हूं। हमें इसके लिए संविधान में संशोधन करना पड़ेगा। भविष्य में ऐसी स्थिति राष्ट्रीय स्तर पर पैदा होने पर हम उसका कैसे मुकाबला करेंगे? देश में राष्ट्रीय स्तर पर यह स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसी स्थित पैदा नहीं होगी, ऐसी बात नहीं है। यह स्थिति १९९० से शुरू हुई है। वाजपेयी जी, जो एनडीए के नेता थे, उन्होंने ६ साल तक कॉएलिशन गवर्नमैंट चलायी। यूपीए की सरकार कितने दिन चलेगी, मुझे पता नहीं। वह अगर पांच साल तक सत्ता में रहेगी तो अच्छी बात है। वह ५ साल तक नहीं रहेगी तो आपको सोचना पड़ेगा। …( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Not to be recorded.
(Interruptions) …* श्री बृज किशोर त्रिपाठी : संविधान में संशोधन करने की जो जरूरत है, ऐसा तर्कदेश में अब शुरू हो गया है। इस पर संसद में चर्चा करने की जरूरत है। हम भविष्य में ऐसी परिस्थिति का कैसे समाधान करेंगे? आपको बिहार में सरकार बनाने में क्या तकलीफ है? आप पासवान जी के सुझाव को स्वीकार कर लीजिए। माइनॉरिटी कम्युनिटी का मुख्यमंत्री बना दीजिए। इससे समस्या का समाधान हो जाएगा। आप सैकुलर है इसलिए पासवान जी के सुझाव को मान लीजिए। माइनॉरिटी को बता दीजिए आप कैसे सैकुलर हैं?…( व्यवधान) आप माइनॉरिटी के किसी आदमी को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नहीं बिठाएंगे। आप पासवान जी के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करेंगे। इस समस्या का समाधान करने की जरूरत है। …( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: No running commentary please. Nothing will be recorded. Please sit down.
(Interruptions) …* श्री बृज किशोर त्रिपाठी :सैकुलर कहने से सैकुलर नहीं होते हैं। सैकुलरिज्म की प्रैक्टिस करनी चाहिए। …( व्यवधान) आपकी पार्टी में एमएलएज माइनॉरिटी कम्युनिटी के हैं। उनको मुख्यमंत्री बना दीजिए। इसमें राम विलास जी का समर्थन लीजिए और समस्या का समाधान कीजिए। राष्ट्रपति शासन देश के लिए कभी ठीक नहीं है। लोकतंत्र में सरकार रहनी चाहिए। …( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Please address the Chair and not the individual Members.
… (Interruptions)
श्री बृज किशोर त्रिपाठी : मैं खत्म कर रहा हूं। हम चाहते हैं कि बिहार में सरकार बननी चाहिए। अगर ये सरकार बना नहीं पाते हैं तो एनडीए को सरकार बनाने का मौका देना चाहिए। …( व्यवधान) आप सरकार बना पाएंगे तो बनाइए। कोई मना नहीं कर रहा है। आप कह रहे हैं कि हमें मैंडेट प्राप्त हुआ है। आपको सैकुलर वोट मिले हैं। आप सरकार बना लीजिए। कौन मना कर रहा है? राम विलास जी के सुझाव के अनुसार काम करिए। माइनॉरिटी का चीफ मनिस्टर बना दीजिए। इसमें राम विलास जी का समर्थन लीजिए। आप सैकुलरिज्म का जो नारा दते हैं, वह भी इससे पूरा हो जाएगा।
* Not Recorded.
राष्ट्रपति शासन देश के लिए कभी ठीक नहीं है। यह शासन ज्यादा दिन तक चलना उचित नहीं है। बिहार से आदरणीय लालू जी हैं। उन्हें कांग्रस का समर्थन प्राप्त है। उन्हें बैठ कर इस पर सोचना चाहिए कि कैसे बिहार में लोकप्रिय सरकार बनेगी?
[R35] श्री मोहन रावले (मुम्बई दक्षिण-मध्य) : उपाध्यक्ष महोदय, बिहार में अभी राष्ट्रपति शासन लागू हुआ है। कांग्रेस की अब तक नीति रही है कि जहां उनकी सरकार बन नहीं पायी वहां उसने राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया।
श्री लालू प्रसाद बिहार के बारे में आप क्यों हस्तक्षेप कर रहे हैं।
श्री मोहन रावले : मैं आपके बारे में ज्यादा बोलने वाला नहीं हूं। राज्य़पाल ने बोल दिया है। मैं इससे ज्यादा बोलना नहीं चाहता हूं। कांग्रेस ने आपका साथ नहीं दिया है। आदरणीय लालू जी, मैं आपका सम्मान करता हूं। लेकिन ध्यान रखिए, कांग्रेस को ऐसा लग रहा था कि हम लालू के दबाव में हैं और आपको दबाव में लाने के लिए चाल चली और इलैक्शन लड़ाया। उनका षडयंत्र था लेकिन वह हार गए। यह काम हमने नहीं किया। ऐसा काम आपके दोस्त लोगों ने किया है[m36] ।[R37]
14.00 hrs. MR. DEPUTY SPEAKER: Shri Mohan Rawale, please address the Chair and not to any individual Member.
श्री मोहन रावले : बिहार में जब इलैक्शन होता है तो श्री लालू जी, आपके नाम पर इलैक्शन होता है, चाहे आपकी तरफ से होना हो या आपके विरोध में होना हो । दगा तो उन लोगों ने दिया, उसके बारे में आप सोचिए । उनको लगा था कि हम सत्ता में आएंगे तो लालू जी को दबाव में रख सकते हैं । लेकिन वे कामयाब नहीं हुए । उनकी हालत तो पता है । कांग्रेस जहां नहीं होती वहां वह सरकार बरखास्त करती है । इसलिए सरकार बरखास्त करती है कि कहीं दबाव में लेकर राष्ट्रपति शासन लगाए । अभी राष्ट्रपति शासन के दौरान कांग्रेस राज चलाना चाहती है । अभी श्री शिवराज पाटिल जी यहां नहीं हैं…( व्यवधान)
MR. DEPUTY SPEAKER: Nothing will go on record except what Shri Mohan Rawale says.
(Interruptions) …* श्री मोहन रावले : उन्होंने सुझाव दिया था कि श्री नरिसंहराव जी के समय कि राष्ट्रीय सरकार होनी चाहिए । उनकी पार्टी की तरफ से क्रटिसाइज हुआ । श्री जार्ज फर्नाडिंस ने भी सुझाव दिया था कि क्या राष्ट्रीय सरकार बनाएंगे या क्या आप कांग्रेस के दबाव में रहेंगे ? तो आप सोच लीजिए, मैं आपसे यह विनती करता हूं । श्री वसुदेव आचार्य जी यहां नहीं हैं, उन्होंने धर्मनिरपेक्ष की बात की …( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय: श्री आजमी जी, आप सीनियर मैम्बर हैं ।
* Not Recorded.
श्री मोहन रावले :यहां सीपीएम का कोई नहीं है । उन्होंने कहा है अनुच्छेद ३५६ का समर्थन नहीं हुआ । राजस्थान, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश में एक साथ चार सरकारों को गिराने के लिए बाबरी मस्जिद के कारण उनके द्वारा समर्थन किया । मैं इसका एक उदाहरण देना चाहता हूं- कहां राजस्थान और कहां उत्तर प्रदेश । बाबरी मस्जिद का ढांचा उत्तर प्रदेश में गिरा । उसका क्या संबंध था राजस्थान से, उसका क्या संबंध था मध्य प्रदेश सरकार से, उसका क्या संबंध था हिमाचल प्रदेश से? लेकिन सरकार गिराई तो लोगों को बहुत खुशी हुई । मैं आपको अकबर और बीरबल का एक उदाहरण देना चाहता हूं । एक बार अकबर बादशाह ने ऐलान किया कि मेरे यहां तालाब में बहुत ठंडा पानी रहता है, अगर कोई रात भर उसमें रहेगा तो मैं उसे सौ स्वर्ण मुद्राएं दूंगा । एक बेचारा था, वह चला गया और रात भर ठंडे पानी में खड़ा रहा । जैसे ही वह बाहर आया, एक सिपाही ने अकबर बादशाह के कान भरे और कहा कि बाजू में खिचड़ी पक रही थी, उससे ऊर्जा मिली होगी । उसके बादे वह आदमी बीरबल के पास चला गया। बीरबल ने खिचड़ी पकाने के लिए दो हांडियां ली । एक को उसने अंगार के पास रखा और दूसरी अंगार से बहुत ऊपर रखी । जैसे ही अकबर ने सुना वह वहां चला गया । अकबर ने कहा कि यह क्या पागलपन है । बीरबल ने कहा अगर यहां नीचे से ऊर्जा नहीं मिल सकती तो वह बेचार जो ठंडे पानी में खड़ा था उसे ऊर्जा कैसे मिलेगी । इसलिए मैं बताना चाहता हूं कि बाबरी मस्जिद ढांचा उत्तर प्रदेश में गिरा था लेकिन उसकी सजा चार राज्यों में क्यों दी गई ? कांग्रेस की यही नीति है कि अनुच्छेद ३५६ का समर्थन करे । मैं पार्लियामेंट में पांच बार चुनकर आया हूं । मैंने सुना है उन्होंने अनुच्छेद ३५६ का विरोध किया है । अपनी सरकार बचाने के लिए …( व्यवधान) महाराष्ट्र में दंगा हुआ, ३३८ लोग मारे गए । उस वक्त गुजरात में दंगा हुआ, ३०० के आसपास लोग मारे गए ।बंगाल में दंगा हुआ और ७८ लोग मारे गए। उनको पता था कि हमारी सरकार बरखास्त होगी…( व्यवधान)
श्री लक्ष्मण सिंह (राजगढ़) : दंगा नहीं हुआ ।…( व्यवधान)
श्री मोहन रावले : मैं आपको आंकड़े बताता हूं…( व्यवधान)
MR. DEPUTY SPEAKER: Shri Mohan Rawale, please address the Chair.
श्री मोहन रावले : अगर दंगा नहीं हुआ होगा, लोग नहीं मरे होंगे तो मैं इस्तीफा दे दूंगा । आप इस्तीफा देंगे? मैंने आंकड़े पढ़कर बताएं हैं । आंकड़े थोड़ा आगे पीछे हो सकते हैं लेकिन लोग मारे गए थे । उनको डर लगा कि उनकी सरकार बरखास्त होगी इसलिए उन्होंने कांग्रेस का समर्थन किया। धर्मनिरपेक्षता के बारे में समय आएगा, तो मैं ब्ाोलूंगा [p38] ।
मैं राज्यपाल महोदय के बारे में क्या कहूं? अभी गृह मंत्री जी यहां नहीं बैठे हुये हैं। उन्होंने चार राज्यपालों को हटाया। उसका कारण यह था कि वे उनकी विचारधारा के नहीं थे, इसलिये उन्हें हटा दिया गया। क्या झारखंड का राज्यपाल उनकी विचारधारा का नहीं था लेकिन उन्हें वहां जबरन रखा हुआ है। झारखंड में क्या हुआ, गोवा में क्या हुआ, यह सब को पता है। जब इस देश में राजग की सरकार थी और श्री अटल बिहारी वाजपेयी प्रधान मंत्री थे तो राज्यपालों की नियुक्ति के समय सब को विश्वास में लेते थे। उन राज्यपालों में अकाली भी थे, समता पार्टी के भी थे। सब को विश्वास में लेने का काम किया करते थे लेकिन यहां लालू जी बैठे हुये हैं, एन.सी.पी. के लोग बैठे हुये हैं, वे उन्हें कभी विश्वास में नहीं लेते हैं…( व्यवधान) अभी पता नहीं इन लोगों का गठबंधन कहां है? इनका किसी पर विश्वास नहीं है।
उपाध्यक्ष जी, दो दिन पहले लोक सभा के सभी सासंदों का फोटोग्राफ हुआ । यह कार्य लोक सभा की अवधि समाप्त होने के समय होता रहा है। यह आज तक की परम्परा रही है लेकिन लगता है कि सरकार का विश्वास नहीं रह गया है, इसलिये यह फोटो सेशन पहले करा लिया गया है। इनका अपनीसहयोगी पार्टियों पर विश्वास नहीं है।…( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: This is not to be recorded.
(Interruptions) …* श्री मोहन रावले : उपाध्यक्ष जी, जब एक पार्टी को जनादेश नहीं मिला तो वह कैसे सरकार बनाने का दावा कर रही है। लोकतांत्रिक भावनाओं के द्वारा सरकार चलनी चाहिये। इसलिये मैं चाहता हूं कि वह सरकार जल्दी से जल्दी बने। आपने मुझे बोलने के लिये समय दिया, धन्यवाद।
* Not Recorded.
SHRI C.K. CHANDRAPPAN (TRICHUR): We are discussing the Presidential Proclamation of Bihar. It is a very unfortunate situation that has emerged in Bihar. One has to take the lessons from Bihar. In the last General Elections, it was the State where the secular forces stood united, and swept the poll. But again, when the Assembly elections took place now, it was a scene of acrimonious debates and fights among the secular forces. Today, we have got a result where all the secular parties got defeated there. Again, I must salute the people of Bihar. Even in a situation, which was very favourable otherwise for the BJP and their allies to come to power, the people did not vote that way also. They rejected the BJP and their allies. At the same time, we have to take the lessons from this. If, in the country, the secular forces - which could stand united and win the elections - stand divided on non-issues, then probably this kind of a situation will emerge. If that lesson is taken, then probably Bihar will have a great future in the days to come. Probably, the Governor of Bihar had no other choice because no party was in a position to form the Government. He has given a Report, recommending the President’s Rule. Normally, we would not have supported the Governor’s recommendation for the President’s Rule, but in the given situation in that State, there was no way out.
In this context, I would like to say one thing. The President’s Rule is again not a solution. If the secular forces come together and form a Government, it may be possible. But, as things stand today in Bihar, I do not think, there is any possibility like that. If that is not possible, then the President’s Rule should not prolong for a long time. The only course is to go to the people and get the verdict of the people[t39] .
Unless[e40] that is done, probably, things would become very restive there. So, I would request that the secular forces in Bihar should make up amongst themselves during this time and come together, if they could, to form a government or otherwise go to polls, where they would be able to come back successfully. This is the only possibility that we see about the situation in Bihar. In the current circumstances, as there is no way out, I extend my support to President’s rule in that State.
श्री प्रभुनाथ सिंह (महाराजगंज, बिहार) : उपाध्यक्ष महोदय, बिहार विधान सभा के चुनाव के बाद बिहार में राष्ट्रपति शासन लगा है और उसी के फलस्वरूप यह प्रस्ताव गवर्नर साहब ने यहां भेजा है, जिस पर हम लोग चर्चा कर रहे हैं। महोदय, जहां कहीं भी चुनाव होता है, वह राष्ट्रपति शासन लगाने के लिए नहीं होता है। लेकिन बिहार में चुनाव के समय जो एक माहौल था, जनता का सत्ता के प्रति जो गुस्सा था, उसके कारण मत भी खंडित हुआ और जनादेश भी खंडित मिला। खंडित जनादेश मिलने के बाद महामहिम राज्यपाल महोदय को गठबंधन का विकल्प ढूंढना था। यह बात सही है कि सत्ता के विपक्ष में जो प्रमुख गठबंधन था, उसे बहुमत नहीं मिला। गठबंधन को ९२ स्थानों पर विजय हासिल हुई थी। जबकि सरकार बनाने के लिए १२२ विधायकों की आवश्यकता थी। हम सरकार बनाने की स्थिति में नहीं रहे। लेकिन महामहिम राज्यपाल को वहां विकल्प ढूंढना चाहिए था। राष्ट्रीय जनता दल ने सरकार के लिए दावा किया था, लेकिन उनकी भी संख्या पर्याप्त नहीं थी। आर.जे.डी पार्टी तथा अन्य पार्टियों के लोग राज्यपाल महोदय से मिलकर अपनी भावनाएं व्यक्त करते रहे। लेकिन मैं यह महसूस करता हूं कि राष्ट्रपति शासन की अनुशंसा करने से पहले विधान सभा का सत्र बुलाकर विधान सभा में बहुमत दल के नेता का चुनाव कराना चाहिए था। यह विकल्प खुला हुआ था। लेकिन इसकी अनदेखी की गई और राष्ट्रपति शासन के लिए अनुशंसा की गई। हम जानना चाहते हैं कि ऐसी कौन सी परिस्थिति आई कि वहां इस विकल्प की अनदेखी कर दी गई।
लालू जी लगता है आप कमजोर हो गये हैं। आप कमजोर नहीं थे। आप कोई बात नहीं समझते, ऐसा भी नहीं है, आप सब बात समझते हैं। आपका यह इंतजाम कांग्रेस पार्टी कर रही है। मैं टी.वी. पर आपका एक कार्यक्रम देख रहा था जिसमें आप हाथ में घड़ी लिये हुए थे और एक दल के नेताओं के बीच में टिप्पणी करते हुए आप लोक जनशक्ति पार्टी के नेता के विषय में बता रहे थे कि वह एक पेंडुलम है। यह दोनों तरफ झूल रहा है। बहुत देर तक आप पेंडुलम को दिखाते रहे। लेकिन हम एक बात बताते हैं कि वह पेंडुलम नहीं है, वह कांग्रेस की कठपुतली है। हम लोग बचपन में मेले में कठपुतली का नाच देखते थे, जिसमें एक छोटी सी मूर्ति होती थी, उसे पीछे से डोर खींचकर नचाया जाता था। कांग्रेस के हाथ में भी वह डोर है और उस कठपुतली को इसलिए नचाया जा रहा है कि आपका भी इंतजाम हो और आपके साथ-स्थ हम लोगों को भी इंतजाम हो। आप इस बात को समझते हुए भी क्यों कमजोर पड़ गये हैं। आप बड़े दल के रूप में तो उभरे हैं। लालू जी हम यह चाहेंगे कि बिहार में राष्ट्रपति शासन बहुत दिनों तक नहीं रहना चाहिए।
उपाध्यक्ष महोदय, रामविलास पासवान जी कह रहे थे कि हम जो बोलते हैं, बड़ा साफ बोलते हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव के समय हमने कहा था कि एक मुसलमान को वहां मुख्य मंत्री होना चाहिए। उनकी पार्टी में मात्र २९ विधायक हैं। किसी मुस्लिम का खाता भी नहीं खुला है, वह कहां से और कैसे किसी मुस्लिम को मुख्य मंत्री बनायेंगे? यह बात हमें समझ में नहीं आती है। लेकिन वह एक बात भूल गये कि जिस समय वह कह रहे थे कि हमारे गठबंधन को बहुमत ÉÊàÉãÉäMÉÉ[R41] ।
यह बात उन्होंने नहीं कही और जब तीसरे चरण का चुनाव करीब आ गया, जब उन्होंने जनादेश का अंदाज़ा कर लिया कि बाहर की जनता ने उनको रिजैक्ट कर दिया है तो उन्होंने कहा कि बिहार राष्ट्रपति सासन की तरफ बढ़ रहा है। आज वे बिहार में राष्ट्रपति शासन की बड़ी प्रशंसा कर रहे हैं। कोई भी चुनाव जनता के शासन के लिए होता है। राष्ट्रपति का शासन कभी भी जनता का शासन नहीं होता है, वह नौकरशाही का शासन होता है। हालांकि बिहार में जो राज्यपाल हैं, आदरणीय श्री बूटा सिंह जी, मैं उनकी व्यक्तिगत तौर पर प्रशंसा करता हूँ। वे कांग्रेस में रहे हैं और हमारी सराकर में भी कुछ दिनों के लिए मंत्री रहे थे। कभी-कभी आमना-सामने भी लोक सभा में हो जाया करता था, लेकिन उनसे हमारे व्यक्तिगत रिश्ते उन दिनों में अच्छे रहे हैं। मैं जानता हूँ कि वे बहुत अच्छे आदमी हैं। लालू जी ने ठीक कहा कि चूंकि वे राजनीतिक व्यक्ति हैं, इसलिए उन्हें कभी सलाहकार की जरूरत नहीं है। हम आपकी इस बात से सहमत हैं। लेकिन सलाहकार की नियुक्ति जान-बूझकर नहीं की जा रही है। उसमें भी लालू जी और राम विलास जी दोनों का इंतज़ाम किया जा रहा है। हमें जो जानकारी मिली है, पता नहीं वह कितनी सही है, मैं उस पर दावा नहीं करता हूँ।
MR. DEPUTY-SPEAKER: Please listen to him. Do not disturb him.
… (Interruptions)
श्री प्रभुनाथ सिंह : हमें जानकारी मिली है कि जिस नाम का सुझाव लालू जी की तरफ से दिया गया, वह राम विलास जी को बुलाकर दिखाया गया कि यह नाम कैसा है, लालू जी ने दिया है। राम विलास जी ने कहा कि यह गड़बड़ है, ठीक नहीं है। फिर राम विलास जी से नाम लिया गया और आपको भी दिखाया गया होगा।
श्री लालू प्रसाद : नहीं दिखाया।
श्री प्रभुनाथ सिंह : आपको और इनको दिखाते-दिखाते कोई तीसरा आ जाएगा। इसलिए हम कह रहे हैं कि आप दोनों का इंतज़ाम किया जा रहा है। राम विलास जी चले गए। उन्होंने कहा था कि ६७ के बदले ७५ देंगे और मुस्लिम नेता का चुनाव वह करना चाहते हैं और उनके दल में कोई मुस्लिम नेता नहीं है। मुस्लिम नेता तो फिर जनता दल यूनाइटेड का ही होगा।
श्री लालू प्रसाद : शाहनवाज़ हैं।
श्री प्रभुनाथ सिंह : हम बताते हैं। अगर वह नेता जनता दल यूनाइटेड का होगा तो आप दूसरे दल के नेता का चुनाव कैसे कर सकते हैं? पहले अपनी पार्टी का जनता दल यूनाइटेड में विलय कर लें। वह सम्मानित नेता हैं। उनको नेता का चुनाव करने का अधिकार होगा। आप जिस मुसलमान को कहेंगे, उसको जनता दल यूनाइटेड मुख्य मंत्री के रूप में मान लेगा। उनको अधिकृत कर दिया जाएगा। आप अपनी पार्टी का विलय करें। जहां तक ६७ और ५५ का सवाल है, उन्होंने कहा कि ७५ की संख्या हम पूरी कर देंगे। …( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Please sit down. It is not to be recorded.
(Interruptions) …* श्री प्रभुनाथ सिंह : वह कहते हैं कि ७५ की संख्या पूरी कर देंगे। तो आज कांग्रेस पार्टी ने सदन में घोषणा कर दी कि उनके जो दस विधायक हैं, उनका समर्थन जदयू को है। वह कहते हैं कि पहले हम भारतीय जनता पार्टी का साथ छोड़ दें। जब हम कहते हैं कि आप ७५ का शपथ-पत्र राज्यपाल को दे दें, हम राम विलास जी को दावे से कहते हैं कि हमारी पार्टी जब कह रही है कि ५५ का समर्थन देंगे तो इसमें तय है कि हम भारतीय जनता पार्टी का साथ छोड़ देंगे और आपको समर्थन देंगे। लेकिन आप ७५ का शपथ-पत्र तो दीजिए। आप ७५ का शपथ-पत्र नहीं दे पाएंगे क्योंकि संख्या नहीं है। बाज़ार में इतना सौदा नहीं है कि ग्राहक जहां-तहां खरीदने जाए। …( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: No running commentary please.
Shri Lalu Prasad’s remarks will not go in the record.
(Interruptions) …* श्री प्रभुनाथ सिंह : उपाध्यक्ष महोदय, चुनाव के बाद जो मत मिला है, वह बिल्कुल साफ-सुथरा मत है। सारे लोग सत्ता के विरोध में लड़ रहे थे। वहां लालू यादव जी की सत्ता थी और कांग्रेस भी सत्ता के विरोध * Not Recorded.
में लड़ रही थी। चुनाव के समय सोनिया गांधी जी के कई भाषण बिहार की सत्ता के खिलाफ आए, … * के खिलाफ आए। …( व्यवधान)* … जैसी बात करते हैं। हम कहना चाहते हैं कि राम विलास जी के भाषण भी सत्ता के विरोध में होते थे. हमने भी जो भाषण दिये, उनमें सत्ता की कमियों को उजागर करने का काम किया।
श्री लालू प्रसाद :उपाध्यक्ष महोदय, इस टिप्पणी को रिकार्ड से निकलवा दीजिए।
श्री प्रभुनाथ सिंह : वह हम मुंह इधर करके बोल रहे थे।
उपाध्यक्ष महोदय : वह डिलीट कर दें। जो लालू जी ने कहा है, वह हम मान लेते हैं।
श्री प्रभुनाथ सिंह : उपाध्यक्ष महोदय, हम कहते हैं कि राष्ट्रपति शासन कभी भी जनता का शासन नहीं होता। राम विलास जी बड़े ज़ोर-शोर से कह रहे थे कि यह ठीक हो रहा है, वह ठीक हो रहा है[h42] ।
चुनाव जिस समय चल रहा था उस समय आचार संहिता लागू थी और भारत सरकार की बहुत-सी योजनाएं परियोजनाएं शुरू होने वाली थीं । राज्य सरकार की भी योजनाएं-परियोजनाएं थीं जो स्वीकृत थीं और राशि का आवंटन हो गया था । आचार संहिता की वजह से वह काम रूका हुआ था । आचार संहिता समाप्त हो गयी, तो वह काम अपने आप शुरू हो जाएगा। उस काम को लेकर राष्ट्रपति शासन की दुहाई दी जाती है कि बड़ा काम हो रहा है। राष्ट्रपति शासनकाल में वधि व्यवस्था की स्थिति श्री लालू प्रसाद के शासनकाल से भी बदतर हो गयी है। आज की तारीख में पटना के अंदर डाक्टर से पचास लाख रूपए की फिरौती मांगी गयी है। छपरा में नीरज नाम के व्यक्ति को सुबह पांच बजे एएसपी आवास के करीब मार दिया गया ।थोक भाव में हत्या और अपहरण की घटनाएं घट रही हैं। मैं यह निवेदन करूंगा, खास तौर से कांग्रेस के लोगों से कि आप महसूस करते हैं कि इधर की पार्टी के लोग अछूत हैं तो श्री पासवान जी की पार्टी के लोगों को मिला लिया जाए और एक सरकार, जनता की सरकार बनाई जाए । यहां जनता की सरकार पसन्द करने वाले लोग हैंहम आपको बताते हैं कि हमें हर दल के विधायकों के टेलीफोन आ रहे हैं कोई दल बचा नहीं है। टेलीफोन पर वे लोग रो रहे हैं। वे कहते हैं कि हम विधायक हो गए हैं हमें क्या काम करना चाहिए। उनको कोई सुविधा साधन नहीं है।विधायक की भूमिका करने से रह गए हें। विधायक की भूमिका सदन में होती है। विधायकों के अंदर पासवान जी के लिए गुस्सा और रोष है। इसलिए पासवानी जी उनके लिए भारत दर्शन का एक कार्यक्रम बनाए हुए हैं। भारत भ्रमण और भारत दर्शन की बात मत कहिए। पहले विधायकों को विधानसभा का दर्शन तो करा दीजिए। भारत दर्शन तो अपने आप हो जाएगा। कमेटी के माध्यम से वे भारत दर्शन कर लेंगे।…( व्यवधान)
* Not Recorded.
MR. DEPUTY-SPEAKER : No running commentaries to be recorded.
(Interruptions) …* श्री प्रभुनाथ सिंह : हम पासवान जी से अनुरोध करते हैं कि विधायकों को भारत दर्शन मत कराइए नहीं तो ऐसी स्थिति बनने वाली है कि उनके विधायक कूद कर इधर या उधर जाने वाले हें। सिर्फ लालू जी ही उनके पीछे नहीं लगे हुए हैं हम भी उनके पीछे लगे हुए हैं। विधायक हमारे सम्पर्क में हैं। विधायक परेशान हैं, बेचैन हैं। कुछ खर्चें का इंतजाम भी पासवान जी ने भी कराया है, लेकिन वे विधायक की भूमिका चाहते हैं। इसलिए मैं कांग्रेस के लोगों से अनुरोध करता हूँ कि बिहार में जनता की सरकार बनवाएं और विधायकों को भारत दर्शन मत कराएं उन्हें विधानसभा का दर्शन करवाएं।
* Not Recorded.
SHRI KINJARAPU YERRANNAIDU (SRIKAKULAM): Sir, I rise to support this Statutory Resolution approving the Proclamation imposed by the President of India under Article 356 relating to the State of Bihar even though my Party is against the imposition of President’s Rule under Article 356.
In the Bihar elections, there is no clear mandate. No single Party or group of Parties has got more than half of the seats. That is why they did not form the Government. The Governor had no option but to recommend President’s rule in this present scenario.
The NDA was in power in the last six years. After the dissolution of the Lok Sabha, the NDA contested the elections throughout the country unanimously, in every State. There was no conflict and there was no difference of opinion. Here, the UPA Government, a Congress-led coalition, is ruling the country. In this Congress-led coalition, both the RJD and the Lok Janshakti parties are partners. Even in Bihar the people’s mandate is in favour of the UPA – Congress, RJD and Lok Janshakti[krr43] .
Even then, they did not form the Government. It shows that there are differences and conflicts among the UPA partners. How can they give good administration to the country while even when the mandate is in their favour, they did not form the Government? So, a popular Government should be established there. The elections were held in Bihar not for President's Rule but for a popular Government.
In the whole world, multi-party system is there. So many parties are unitedly ruling the Governments in so many countries. Even in our country, the Government of India is a coalition Government. Previously also, there have been coalition Governments of the NDA and the United Front. Even in some States also, there are coalition Governments. That is why, I would like that the President's Rule should not extend and as early as possible, a popular Government should be established in Bihar. Since there was no other option with the Governor, he has recommended that President's Rule should be imposed. So, my party is supporting this Resolution.
SHRI LAKSHMAN SETH (TAMLUK): Sir, our party's stand is very clear. We are severely opposed to the President's Rule in any State, but I think, in Bihar, really no party was in a position to form the Government. Under that critical situation, President's Rule has been proclaimed there, but we are not supporting that. In spite of that, since the President's Rule has been imposed and proclaimed there under that critical situation, we want expeditiously the end of the President's Rule.
Sir, democracy has no alternative in our country. Our country has the largest democracy in the world. The main task of parliamentary democracy is to form a popular Government. So, the popular form of Government does not have any alternative. That is why, we want that all the secular parties should unite so that the popular form of Government can be set up there. Before elections, there was a difference among some secular political parties. If all these secular political parties had united, this situation would not have arisen. However, after the elections, there is ample opportunity for the unification of secular political parties, but it is very unfortunate that all these secular political parties are into bickerings and at loggerheads with each other. That is why, the people of Bihar are suffering from lack of popular Government there.
Sir, Bihar is a place of glory. Since ancient times, Bihar is having an eventful history. Though Bihar is a historical place, we must remember that Bihar is inheriting rich cultural heritage and eventful history and because of the negligence on the part of Government of India, Bihar is lagging behind economically. Not only Bihar but also the Eastern India - Orissa, West Bengal and Bihar - has lagged behind economically. Once we were on the top of the country economically, but I think it is really due to the policy pursued by the Government of India that Eastern India has lagged behind.
While we are supporting the President's Rule at this critical juncture, I would request the Government of India to provide a special package for Bihar for the upliftment of Bihar. Since long the Bihar Government had been demanding a special package to the tune of rupees one lakh crore because there was no ground for bifurcation of Bihar. The rich natural resources have been divided and bifurcated. That is why, Bihar is suffering a lot. We want that the Government of India should support Bihar for its upliftment. If Bihar develops, the whole Eastern India will also develop because Orissa, Bihar and West Bengal need more support from the Government of India. The North-Eastern States, Himachal Pradesh and Uttaranchal are getting some special packages. Not only that, they are also getting some tax holidays in the form of excise duty exemption etc[reporter44] .
It is also necessary for those States, but Eastern India including West Bengal, Orissa, and Bihar should not be deprived of getting excise benefits, which would induce industrial development in these States also.
I would urge upon the Government of India to take appropriate steps, so that all the investors get some excise benefits, tax-holidays, etc. This would assist in promoting industries, and induce economic growth of Eastern India. If it happens, and if the Government of India really lends full support to Eastern India, then the question of law and order, insurgency, etc. will not arise.
14.31 hrs. (Shri Varkala Radhakrishnan in the Chair) Why is insurgency taking place in our country? Why is communal violence taking place in various parts of our country? It is because of poverty, backwardness, etc. Therefore, the Government of India should take necessary steps to remove regional and economic imbalance. This would help us in combating insurgency, rioting, etc. In West Bengal, in spite of so many bottlenecks, we have never witnessed any communal violence during the Left Front Government because our culture is very rich. We never support any communal riot, communal violence, and communal fanaticism. Hence, West Bengal did not witness any communal violence after the demolition of the Babri Masjid.
MR. CHAIRMAN : Please conclude your speech.
SHRI LAKSHMAN SETH : Bihar and Orissa are having rich cultural heritage, but due to negligence on the part of the Government, Eastern India is lagging behind economically. Therefore, we request, and urge upon the Government of India to end the Proclamation of the President’s Rule in Bihar.
At the same time, I would request the Government of India to provide adequate financial assistance, so that Bihar really develops. If Bihar develops, then Orissa will develop; Jharkhand will develop; and West Bengal will also develop. Therefore, this demand should be taken into consideration.
I think, all the secular parties should try to form a popular Government there. There is enough opportunity for it, and everybody should try to achieve this objective. If it is not possible to do so, then I would request to end the Proclamation of the President’s Rule in Bihar and announce the elections, so that a popular Government can be formed there at the earliest possible time.
Sir, with these words, I thank you for giving me this opportunity.
श्री सुकदेव पासवान (अररिया) : सभापति महोदय, बिहार में जो राष्ट्रपति शासन लगाया गया है, यह बिहार में कोई पहली बार नहीं लगा है, इससे पहले भी कई बार कांग्रेस शासन काल में बिहार में ऐसा हुआ है। मुझे पूर्ण रूप से याद है कि १९७४-७५ में तत्कालीन प्रधानमंत्री, स्व. श्रीमती इंदिरा गांधी जी ने बिहार में राष्ट्रपति शासन लगाया था। इस समय जो बिहार में किसी भी पार्टी की सरकार नहीं बन रही है, उसके लिए मुख्य दोषी कांग्रेस पार्टी है। कांग्रेस पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल हो या लोक जनशक्ति पार्टी हो, निश्चित रूप से उनके मन में यह है कि मैं बिहार में राष्ट्रीय जनता दल, लोक जनशक्ति पार्टी का सफाया करूं और वहां अपना वर्चस्व बनाऊं।
सभापति महोदय, अगर आज बिहार में कांग्रेस की चाल से राष्ट्रपति शासन लग गया है, लेकिन निश्चित रूप से कल बिहार में जनता द्वारा चुनी हुई सरकार ब्ÉxÉäMÉÉÒ[R45] । लेकिन श्रीमति सोनिया गांधी जी और कांग्रेस के वरिष्ठ लोग नहीं चाहते कि वहां कभी सरकार बने… ( व्यवधान)
संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में राज्य मंत्री (डॉ. शकील अहमद) : आप क्या कह रहे हैं, कौन नहीं चाहता?
श्री सुकदेव पासवान : शकील साहब, मैंने यही कहा है कि कांग्रेस कभी नहीं चाहती कि राष्ट्रीय जनता दल की या लोक जनशक्ति पार्टी की सरकार बने…( व्यवधान)
डॉ. शकील अहमद : आप गलत बोल रहे हैं।
श्री सुकदेव पासवान : मैं बिल्कुल सही बता रहा हूं। शकील साहब, हम लोगों का तो अनुभव है कि जब इमरजेंसी काल में राष्ट्रपति शासन लगा था, इनमें से जितने लोग लोक जनशक्ति पार्टी हैं, राष्ट्रीय जनता दल में हैं, जनता दल (यू) में हैं और बी.जे.पी. में हैं, हम लोग १७-१८ महीने जेल में रहे हैं, इसलिए वह बिहार में चाहती है कि वह किसी तरह सरकार बनाये…( व्यवधान)
डॉ. शकील अहमद : आप तो इधर भी थे।…( व्यवधान)
श्री सुकदेव पासवान : हम उधर थे, लेकिन हम राष्ट्रीय जनता दल के साथ थे, हम जनता दल (यू) के साथ थे, लेकिन मैं कभी कांग्रेस में नहीं गया हूं। शकील साहब, मैं शुरू से कांग्रेस के खिलाफ रहा हूं। मैं आपसे कहना चाहता हूं कि सही मायने में बिहार की जो दुर्दशा है, जो स्थिति बनी हुई है, उसकी सबसे प्रमुख दोषी कांग्रेस है, उसके लिए कोई दूसरा दल दोषी है।
बिहार में अभी कोई गारण्टी नहीं है कि राष्ट्रपति शासन दो महीने रहता है या ६ महीने रहता है या कितने दिन रहता है। इसीलिए हम आपके माध्यम से यू.पी.ए. सरकार को बताना चाहते हैं कि बिहार में जो स्थिति बनी हुई है, मुझे स्मरण है कि २५-३० साल से वहां एक भी नया प्राथमिक विद्यालय सैंक्शन नहीं हुआ है, २५-३० साल पहले जो प्राथमिक विद्यालय थे, वही अभी भी हैं, जबकि जनसंख्या वृद्धि में दिन दोगुनी रात चोगुनी वृद्धि हो रही है। बच्चों को स्कूल में बैठने के लिए जगह नहीं है। राष्ट्रपति शासन के अन्तर्गत हम चाहते हैं कि अविलम्ब प्रत्येक ब्लाक पंचायत के प्रत्येक बोर्ड पर एक प्राथमिक विद्यालय सैंक्शन किया जाये और अविलम्ब प्रत्येक पंचायत एवं बोर्ड में प्राथमिक विद्यालय का निर्माण किया जाये।
दूसरे, बिहार में शिक्षकों की कमी है। चुनाव से पूर्व निकाला गया था कि ७५ हजार शिक्षकों की बहाली करेंगे। अब आप स्वयं सक्षम हैं, बिहार में राष्ट्रपति शासन लगा हुई है, आप अविलम्ब ७५ हजार शिक्षकों की अविलम्ब नियुक्ति कीजिए। ग्रामीण इलाकों में सही मायने में स्कूल की कमी रहने से, शिक्षकों की कमी रहने से छात्र स्कूल में नहीं जा पाते हैं। जो छात्र स्कूल में जाते हैं, उन्हें बैठने की जगह नहीं मिलती है। हम चाहेंगे कि इस बजट के माध्यम से भवन निर्माण का काम हो, स्कूल निर्माण का काम हो ताकि यह काम आगे बढ़ सके।
अभी कुछ दिन पहले गेहूं की बुवाई हुई, बिहार में उस वक्त खाद की कीमत ५०० रुपये थी, लेकिन खाद बिहार में ७००-८०० रुपये में नहीं मिलता था, ऐसी स्थिति बिहार में बनी हुई थी। वहां डाक्टरों की कमी है, स्वास्थ्य उप-केन्द्रों की कमी है। मैं यह भी कहना चाहूंगा कहम लोग शुरू से आवाज उठाते रहे हैं कि बिहार की बदहाली का कारण जो नेपाल से नदियां आती हैं, वे नदियां उत्तरी बिहार के १८ जिले पूर्ण रूप से प्रभावित करती हैं। हम चाहेंगे कि राष्ट्रपति शासन के अन्तर्गत जो नेपाल से नदियां बाढ़ लाती हैं, उसके नियंत्रण के लिए ऐसी कोई योजना बनायें कि बाहर में बाढ़ से कम से कम बचाव हो सके, उसका निदान हो सके।
मैं आपसे कहना चाहता हूं कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अक्लियत और पिछड़े वर्ग के लोगों को लिए निश्चित रूप से ऐसी कोई योजना बने, जिससे वहां के लोग पलायन न करें। रघुवंश बाबू यहां पर हैं, मैं आपके माध्यम से कहना चाहूंगा कि हमारे ग्रामीण विकास मंत्री बैठे हुए हैं, इन्होंने कहा था कि दो अक्टूबर को बिहार के प्रत्येक जिले में, प्रत्येक प्रखंड मुख्यालय में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का काम प्रारम्भ करवाएंगे, लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि केन्द्र सरकार की पांच एजेंसियों को नियुक्त किया गया तो बिहार में इंजीनियरों को किडनैप कर लिया गया। सारे देश में विकास का काम प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में सरकार के द्वारा किया जायेगा, इसलिए बिहार में भी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना का काम शुरू किया जाये ताकि यातायात की कमी दूर की जा सके।
SHRIMATI TEJASWINI SEERAMESH (KANAKPURA): Mr. Chairman, Sir, I rise to support the Statutory Resolution on proclamation of President Rule in Bihar.
Sir, even though the people of Bihar ensured a clear-cut victory to the secular parties like Congress Party, RJD, SP, NCP and LJP, BSP- due to our disagreement to agree, we came to a position where there was no other option left but to impose President’s Rule on Bihar.
Bihar is the land of Ashoka. After seeing the horror of the Kalinga war, Ashoka transformed into a preacher of peace and Buddhism. We are proud of that land. Bihar is the land of knowledge which produced highest number of IAS and IPS officers. Bihar is the land of oldest democracy. Bihar is the land of oldest university at Nalanda. Bihar is the land of Ganga, which divides the State into two portions causing lot of land erosion. Even though Bihar is the richest State in the country with huge deposits of minerals like steel and coal, but still its people are suffering from poverty. Why is it so? I do not mind saying that it is so because of the politics of hatred; it is because we have been unable to give an equal social opportunity and social justice to the downtrodden people, people of backward classes and the dalits. We are not in a position to do that so far. Without taking Bihar on to the path of progress, we cannot call Bharat Mahan. बिहार को पीछे छोड़कर मेरा भारत महान कैसे हो सकता है ?
Bihar is just ten kilometres away from the land of Sita. Even though Ram knew that Sita was the purest of the women, she had to undergo the test of fire in the epic Ramayana. Why does this always happen to women? Today, it happens to our leader Soniaji. Even though the nation knows about her commitment, her honesty, her patriotism, she was firetested in the elections of 2004, even NDA made an issue of her foreign origin. महिलाओं का अपमान करना भारत की संस्कृति नहीं है। मेरी संस्कृति नहीं है। NDA made Soniaji’s foreign origin issue an election issue. I salute the people of India for ensuring her clear-cut victory through the ballot box. I say that we should not repeat such mistakes.
Recently I received an invitation for the function that is going to be organised in a couple of days to confer the Best Parliamentarian Awards. The award is going to be conferred on hon. L.K. Advaniji, hon. Leader of Opposition in the Upper House Jaswant Singhji, hon. Prime Minister Dr. Manmohan Singhji and hon. Arjun Singhji. I am glad that they are going to be honoured with this award. They are all stalwarts in Parliament. I came here to learn from them. They should be role models to us. However, during the debate on Motion of Thanks on President’s Address, I was stunned to hear the words ‘invisible Prime Minister’ being used for our hon. Prime Minister. Their intention was not to target our Prime Minister. Their target was clearly our very visible Sonia Gandhi who is the Chairperson of UPA. They attacked … (Interruptions) Let me speak my dear brother! It is my opportunity to speak. You should listen to me. I appeal to you to listen to me.
How long can we continue with this politics of hatred? I do agree that we were unable to ensure coordination in Bihar. To defeat the Kauravas, to defeat Adharma, Pandavas were always together. I do agree that Laluji and Paswanji are having differences today. I am hopeful we will resolve this issue soon.
MR. CHAIRMAN : Hon. Member, you are speaking very well on Bihar, but you have not come to the point of President’s Rule.
SHRIMATI TEJASWINI SEERAMESH : I am coming to that. Sir[KMR46] . To defeat the Kauravas, to defeat the anti-secular forces, our Laluji like Bheema and Paswanji like Arjuna will join together. यह गर्व की बात है।
When the NDA and the UPA can join together to fight against the external enemies, then it is not a crime to fight against each other in the democratic elections domestically. But, in spite of that, I have got the fullest confidence in UPA and my brothers in the UPA will understand this. I am having the highest respect for the leaders like Laluji, Paswanji and our Left leaders. They are the role-models to us… (Interruptions)
प्रो. रासा सिंह रावत : सभापति महोदय, माननीय सदस्या से कहें कि वे बिहार के ईशू पर बोलें।…( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN : Please conclude.
SHRIMATI TEJASWINI SEERAMESH : Sir, I am like your grand daughter. You should encourage me. Even though they tried to stop, it is the Soniaji who supported Shrimati Rabri Devi. Forget that Shrimati Rabri Devi is the wife of Laluji. She is an ordinary woman of this country. For that, we are very proud of her. The ordinary people also should get the opportunity to rule this country. When the Court went against Laluji, when the CBI was against him, we too fought against him. Our friendly parties also fought against Laluji. But the people of Bihar ensured a clear cut victory to RJD and Laluji and Shrimati Rabri Devi’s party emerged as the single largest party. We should respect the verdict, we should respect the people of Bihar. Today, we do not believe in making Mahila ‘sati’, we believe in making Mahila ‘Shakti’. We were saddened to hear what one of the hon. sisters from that side said about our leader. I will not compromise with her ideology. I will not support her ideology. She was thrown out of the Chief Ministership. She belongs to the backward class. But still my leader showed sympathy to that Mahila Chief Minister. Just because she is a women CM also belongs to backward class particularly. That is why, Laluji is the first leader who supported Soniaji to become the Prime Minister of India. That is why I greatly respect him. Whether she becomes or not, that is not important. He supported women, he always supported Mahila. There is no point in arguing about it without giving the opportunity to Dalits and other backward classes.
As far as Ram Vilas Paswanji is concerned, look at his brilliance, look at his intelligence. During the UF Government, he was assisting and guiding the then Prime Minister Shri H.D. Deve Gowda. We must give an opportunity to the Dalit leaders. There is no meaning in giving speeches without giving them an opportunity, without giving social justice to the backward people. We hate the NDA brothers for their Hindutva policy. Why are you not allowing Dalits? Are they not part of the Hindus? They are very much part of the Hindus. … (Interruptions) We are against untouchability. Though Soniaji belongs to Italy, a civilised country, she became ‘Gandhi’ by her work. Soniaji became ‘Gandhi’ by her commitment to this country. नाम से गांधी नहीं होता, काम से गांधी होता है। Please respect each other’s feelings. Let us ensure democracy in this country. I thank you for giving me this opportunity to speak.
श्री शैलेन्द्र कुमार (चायल) : माननीय सभापति महोदय, आपने मुझे बिहार में राष्ट्रपति शासन की घोषणा पर अनुमोदन चर्चा में भाग लेने का मौका दिया, मैं आपका आभारी हूं। बिहार और उत्तर प्रदेश बिल्कुल मिले हुए हैं, पड़ोसी राज्य हैं। इसलिए चाहे यूपी की बयार बहे, चाहे बिहार की बयार बहे, उससे थोड़ा-बहुत फर्क पड़ता cè[R47] । हमने इस विषय पर पड़ोसी राज्य होने के नाते बोलना जरूरी समझा।
माननीय सभापति महोदय, १५ वर्ष तक वहां राष्ट्रीय जनता दल की सरकार थी। आठ बार वहां शेष परिस्थितियों में वहां राष्ट्रपति शासन लगाया गया। अभी दोनों तरफ के तमाम सम्मानित सदस्यों द्वारा एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगे। कैबिनेट की बैठक में जब इस पर विचार किया जा रहा था कि वहां राष्ट्रपति शासन लगे या न लगे, उस वक्त श्री लालू प्रसाद यादव उस कैबिनेट की मीटिंग में नहीं गये। उन्होंने बिहार में राष्ट्रपति शासन न लगे, इसका भरपूर विरोध किया। उन्होंने श्रीमती सोनिया गांधी जी तथा शिवराज पाटिल जी से मिलकर व्यक्तिगत तौर पर विरोध जताया कि वहां राष्ट्रपति शासन न लगे और सबसे बड़ा दल होने के नाते हमें सरकार बनाने के लिए मौका दिया जाये। लेकिन सोनिया जी और पाटिल जी ने कहा कि वहां के हालात ऐसे नहीं हैं, वहां बहुमत की स्थिति नहीं बन पा रही है इसलिए वहां राष्ट्रपति शासन लगाना जरूरी हो गया है। दूसरी तरफ श्री रघुवंश प्रसाद जी, जो यहां बैठे है, आप विरोध स्वरूप कैबिनेट मीटिंग में नहीं गये, यह सबको पता है। अभी पासवान जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि हम कैबिनेट में नहीं गये, वह दूसरी बात है। लेकिन वह कहते है कि हमने चुनाव के वक्त भी कहा था कि वहां पर राष्ट्रपति शासन की स्थिति आ रही है। उन्होंने भी अपनी स्थिति स्पष्ट की।
मैं कहना चाहूंगा कि बिहार के इतिहास के बारे में बीजेपी के कई सम्मानित सदस्यों ने अपनी बात यहां रखी। वर्ष १९९८-९९ में, १२वीं लोकसभा में मैं चुनकर आया था। मुझे याद है कि उस समय वहांश्री सुन्दर सिंह भंडारी जी राज्यपाल थे। उन्होंने वहां कानून व्यवस्था के नाम पर राष्ट्रपति शासन लगाया। लेकिन राज्य सभा में बहुमत न होने के कारण राबड़ी सरकार वहां पुन: बहाल हुई और उन्होंने वहां पर शासन किया। मैं कहना चाहूंगा कि हमारे दल के उप नेता आदरणीय श्री रामजी लाल सुमन ने एक बात कही, यह बात सत्य है कि आज यहां केन्द्र में गठबंधन की सरकार है। लेकिन गठबंधन का धर्म कोई भी पार्टी नहीं निभा पा रहा है। एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने से पहले चूंकि महामहिम राज्यपाल जी को जो चिट्ठी प्रस्तुत की गयी है, तमाम दल वहां से चुनकर आये हैं चाहे वे छोटे दल हों या बड़े दल हों, सबने अपनी स्थिति महामहिम राज्यपाल को लखित रूप में स्पष्ट की है। मैं कहना चाहूंगा कि १२२ विधायकों का गठजोड़ बने चाहे एक पार्टी उसको पूरा करे, दो, तीन या चार पार्टीज मिलकर उसे पूरा करें तभी वहां पर सरकार बन सकती है।
प्रजातंत्र और लोकतंत्र में जैसा सम्मानित सदस्यों ने कहा, जो चुनाव हुआ है, वह राष्ट्रपति शासन के लिए चुनाव नहीं हुआ है। वहां पर जो भी चुनाव हुआ है, वह एक लोकप्रिय सरकार बनाने के लिए हुआ है। प्रजातंत्र और लोकतंत्र में राष्ट्रपति शासन अच्छी बात नहीं है, हम इसका विरोध करते हैं लेकिन वहीं पर भारतीय जनता पार्टी के कुछ सम्मानित नेताओं के भी कई बयान आये हैं कि जिस प्रकार से बिहार की राजनीति की अनिश्चितता बनती जा रही है और यूपीए गठबंधन में वरिष्ठ मंत्री माननीय लालू प्रसाद यादव या श्री राम विलास पासवान जी में आपस में झगड़ा चल रहा है, उससे यूपीए के गठबंधन पर बहुत बड़ा फर्क पड़ने वाला है। इसलिए मैं कहना चाहूंगा कि वहां पर एक लोकप्रिय सरकार का गठबंधन होना चाहिए।
भारतीय जनता पार्टी इस सोच में है कि जिस प्रकार से बिहार में राजनीति की अनिश्चितता बन रही है, उसी प्रकार से लोक सभा के साथ-साथ बिहार में भी मध्यावधि चुनाव के आसार नजदीक हैं। अभी जो फोटो की बात की गयी है, वह मजाक है या सही है, लेकिन १२वीं लोक सभा में हम लोग चुनकर आये थे, उस समय ग्रुपिंग फोटो नहीं हो पायी थी। इसलिए आज जरूरत इस बात की है कि चाहे केन्द्र सरकार हो या सम्मानित दल हो, वे गठबंधन का धर्म समझते हुए एक लोकप्रिय सरकार बनाने में बिहार में पहल करें। अभी श्री सुकदेव पासवान जी ने चिन्ता व्यक्त की है कि बिहार बहुत पिछड़ा हुआ है। वहां कानून व्यवस्था की स्थिति ठीक नहीं है। यह चिन्ता सबमें है। राज्यपाल के सलाहकार के रूप में वहां पर अभी तक कई विभेद हैं[r48] ।राज्यपाल जी के सलाहकार के रूप में वहां बनाने की बात चल रही है। रोज पेपर में पढ़ने में आ रहा है, जैसे अभी प्रभुनाथ सिंह जी ने कहा कि कभी राम विलास पासवान जी से सरकार बनाने के लिए पूछा जाता है और कभी लालू जी से पूछा जाता है। मेरे ख्याल से जो घमासान है, वह राज्यपाल जी के सलाहकार को लेकर है। उससे भी अनिश्चितता है जिससे कानून और व्यवस्था की स्थिति वहां बहुत जर्जर और दयनीय है तथा विकास में भी वह बात आड़े आ रही है। तमाम नव-निर्वाचित सदस्य जो विधान सभा में चुनकर आये हैं, उनकी चिंता जायज है। जनता ने उन्हें चुनकर भेजा है और वे भी चाहते हैं कि सदन में बैठकर हम लोकप्रिय सरकार के अंग बनकर या विपक्ष में बैठकर अपने धर्म का पालन करें। लेकिन यह भी नहीं हो पा रहा है। इसलिए मैं आपके माध्यम से यह अनुरोध करना चाहूंगा कि चाहे जो भी संविधान में परिवर्तन करना पड़े, वहां नव-निर्वाचित सदस्य जो चुनाव जीतकर आये हैं, उनको सुविधाएं मिलनी चाहिए जिससे सदन में बैठकर वे लोकप्रिय सरकार या विपक्ष में बैठकर अपने धर्म को निभा सकें।
हमारे साथी माननीय श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव जी चिट्ठी पलट-पलटकर पढ़ रहे थे कि स.पा. ने क्या किया और लो.ज.पा. ने क्या किया। तमाम पत्रों का उन्होंने उल्लेख किया कि लोजपा ने क्या किया। उसमें राज्यपाल के पास इन लोगों ने कैसे समर्थन दिया या कैसे समर्थन न देने की बात कही। वह वरिष्ठ सदस्य हैं। मैं उनका बहुत सम्मान करता हूं लेकिन आज बसपा के चाहे दो विधायक हों या सपा के ४ विधायक हों या कम्युनिस्ट पार्टी के लोग हों, ये उस वक्त जीतकर आए हैं जब राष्ट्रीय जनता दल का जो मैनडेट है, उसका विरोध हो रहा है, तब ये लोग जीतकर आए हैं और उन्होंने राज्यपाल से चिट्ठी लिखकर अपनी अभिव्यक्ति व्यक्त की है। इसलिए मैं मांग करता हूं कि यूपीए के गठबंधन के जो भी लोग बैठे हैं, वे इस पर गंभीरता से विचार करें कि राष्ट्रपति शासन वहां नहीं रहना चाहिए। लोकप्रिय सरकार वहां रहनी चाहिए। इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।
श्री विजय कृष्ण (बाढ़) : सभापति महोदय, बिहार में जिन परिस्थितियों में राष्ट्रपति शासन लगाया गया है, उससे पूरे बिहार की जनता हतप्रभ है। पूरे बिहार में जो गरीब, दलित या सोशल जस्टिस में विश्वास रखने वाले या अकलियत के लोग या राजनीति करने वाले हैं, उन सब पर सबकी नजर है और पूरे बिहार में एक ऐसा वातावरण है जिसमें गरीब जनता बहुत दुखी है कि बिहार में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया है। कई अवसर ऐसे आए हैं जब राष्ट्रपति शासन विशेष परिस्थितियों में लगाया जाता है या जब सरकार बनाने की स्थिति नहीं होती है तब एक विकल्प की तलाश के लिए ऐसे कदम उठाए जाते हैं। लेकिन बिहार में जब सिंगल लार्जेस्ट पार्टी राष्ट्रीय जनता दल जिसे सबसे अधिक मत मिले हैं, एक बड़े दल के रूप में उसके ७५ विधायक चुनकर आये हैं और प्री पौल एलाएंस ९२ तथा २ बसपा के भी विधायकों का समर्थन उनको प्राप्त है और ऐसे में कोई सरकार बनाने के लिए दावा नहीं करें या किसी ने सरकार बनाने का दावा नहीं किया बल्कि सरकार रोकने की बात करें और जिसने दावा किया, उसे सरकार बनाने का मौका नहीं मिले तो यह स्थिति बहुत गंभीर है। इस दल के माननीय सदस्यों को ज्ञात होगा कि १९८९ में इसी तरह की स्थिति संसद में उपस्थित हुई थी जब आदरणीय राजीव गांधी जी को एक बड़ी पार्टी के नेता होने के नाते उस वक्त निमंत्रण दिया गया था और जब उन्होंने इंकार किया तब श्री वी.पी.सिंह जी की सरकार बनी थी।
MR. CHAIRMAN : Please address the Chair.
श्री सुशील कुमार मोदी : कोई नयी बात हो तो वह बताइए।…( व्यवधान)
श्री विजय कृष्ण : जो परिस्थिति पैदा हुई थी, अटल जी को भी मौका मिला और उनको अवसर दिया गया। जो लम्बी-चौड़ी बातें नीतीश कुमार जी कर रहे थे, ७ दिन के लिए उनको सरकार बनाने का मौका दिया गया। नामी-नामी लोगों को अटल जी ने अपनी पीठ के पीछे खड़ा किया lÉÉ[R49] ।
15.00 [cmc50] hrs. महोदय, इन्होंने बेइमानी से सरकार बनाई थी और आप कुख्यात और नामी अपराधियों के साथ् फोटो खिंचवा रहे थे। सात दिनों का समय दिए जाने पर भी सात सदस्यों तक का समर्थन नहीं जुटा सके और सरकार चली गयी।
MR. CHAIRMAN : Please address the Chair and do not address others.
श्री विजय कृष्ण : महोदय, आपने उनको सरकार बनाने का मौका दिया था। जब लालू प्रसाद यादव जी ने सरकार चलाई तो उन्होंने किसी अपराधी के साथ फोटो नहीं खिंचवायी थी। …( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN: I am sorry. Nothing will go on record, except the speech of Shri Vijoy Krishna.
(Interruptions) …* श्री विजय कृष्ण : इन लोगों ने नामी-नामी अपराधिक तत्वों के साथ फोटो खिंचवाई, अपराधियों को पैरोल पर छोड़ा गया और सात दिन तक मेहनत की, फिर भी अपनी सरकार को बचा नहीं सके। सभापति महोदय, यह सब बातें की गयीं और आज वही लोग सिद्धान्त की बातें कर रहे हैं।उन्होंने राज्यपाल के माध्यम से मेम्बर नॉमिनेट करवाना चाहा और जब झारखण्ड में वही बात आई तो नॉमिनेशन रोक दिया गया। राजनीति में यह जो दोहरा चरित्र चलता रहता है, इसको भी समाप्त किया जाना चाहिए। जिस व्यक्ति ने सरकार बनाने का दावा किया, उसको सरकार बनाने का मौका नहीं दिया गया।
सभापति महोदय, भाजपा के लोगों ने बार-बार सरकारिया आयोग की सिफारिशों का जिक्र किया है। इस आयोग की रिपोर्ट के केन्द्र-राज्य सम्बंध भाग-एक में कहा गया है :
“The leader of the party which has an absolute majority in the legislative assembly should be invariably be called upon by the Governor to form the Government. This is the time-honoured convention of the Cabinet form of Government. There is no controversy in this regard. However, where no party has a clear majority, there are two views as to the procedure to be adopted for identifying the person who can form a Government.” महोदय, यह अवसर दिया जाना चाहिए, लेकिन नहीं दिया गया।
दूसरी बात जिसकी चर्चा माननीय प्रभुनाथ सिंह जी ने की कि विधानसभा को मौका दिया जाए कि वह अपने नेता का चुनाव करे, लेकिन यह मौका भी नहीं दिया गया। ये सारी बातें आप लोगों ने की और आज भाजपा जिसका बिहार में वोट प्रतिशत घट रहा है, जिसके एमएलए घट रहे हैं, उसको इस तरह की बातें करने का अधिकार नहीं है। मैंने अभी श्री नीतिश कुमार और श्री राम विलास पासवान, दोनों लोगों की राजनीति में ५५ और ६७ के अवैध सम्बन्ध वाली बात को सुना।वह रहेंगे यूपीए में और काम करेंगे उधर, वह रहेंगे एनडीए में और काम करेंगे इधर। मैं आपसे यह कहना चाहता हूँ कि राजनीति में इस तरह के बेमेल सम्बन्धों को कब तक चलाया जाएगा। जिन लोगों के साथ आपने फोटो खिंचवाई …( व्यवधान)
* Not Recorded.
MR. CHAIRMAN: Nothing will go on record, except the speech of Shri Vijoy Krishna.
(Interruptions) …* श्री विजय कृष्ण : सभापति महोदय, लालू प्रसाद जी ने स्पष्ट कहा था कि हम एक भी अपराधी को टिकट नहीं देंगे और ऐसा ही किया। इसके साथ ही मैं कांग्रेस के अपने मित्रों को भी ध्यान दिलाना चाहता हूँ कि जब मोरार जी भाई देसाई प्रधानमंत्री बने थे। …( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN: Nothing will go on record. Please conclude now.
श्री विजय कृष्ण : उन्होंने समझ लिया था कि श्रीमती इन्दिरा गांधी जी की तरह से उनका राज आ गया है। उन्होंने मनमानीपूर्वक राजदूतों और राज्यपालों को बर्खास्त करके नई नियुक्तियाँ कीं। [cmc51] राम नरेश यादव जी को मुख्य मंत्री बनाया गया और हटाया गया। इसी तरह से उस समय कर्पूरी ठाकुर जी की सरकार को भी हटाया गया। इस तरह से श्री मोरारजी देसाई के जाने का दिन तय हो गया।…( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN : Nothing, except the speech of Shri Ravinder Naik, will go on record.
(Interruptions) … श्री विजय कृष्ण : मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि अगर आगे के लिए आप दलित और गरीब विरोधी नीतियां जारी रखना चाहते हैं तो यह सही नहीं होगा। आपके साथ कम्युनिस्ट पार्टी वाले साथी बैठे हैं, वे इस बारे में क्या सोचेंगे, यह आप समझ सकते हैं। मैं कांग्रेस पार्टी से भी कहना चाहता हूं कि अगर वह यह समझती है कि उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह जी को हटाकर खुद वहां आए और बिहार में राम विलास पासवान जी की मार्फत लालू प्रसाद जी को हटा देगी तो यह सम्भव नहीं है।…( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN: Nothing will go on record. Shri Naik, you can speak. Your speech alone will go on record.
(Interruptions) … * * Not Recorded.
श्री रविन्दर नाइक धारावत (वांरगल) : सभापति जी, मैं आपको धन्यवाद देता हूं कि आपने मुझे बिहार में राष्ट्रपति शासन लागू करने वाले प्रस्ताव पर मुझे बोलने का मौका दिया।
MR. CHAIRMAN: Please confine to the Proclamation of the President's Rule in Bihar.
श्री रविन्दर नाइक धारावत : मैं अपने को बिहार में राष्ट्रपति शासन लागू करने के प्रस्ताव तक ही सीमित रखूंगा। मैं अपनी तेलंगाना राष्ट्र समति पार्टी की ओर से बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं। दुनिया में हिन्दुस्तान सबसे बड़ा प्रजातांत्रिक देश है। हमें आजाद हुए करीब ५७ साल हो गए हैं। इस अवधि में हमने देखा है कि कई बार इस लार्जेस्ट डैमोक्रेसी की खिल्ली उड़ाई गई, जिसे हमने कई राज्यों में राष्ट्रपति शासन लागू करने के रूप में भी देखा है। राज्यपाल की व्यवस्था आज हमारे संविधान के तहत, हमारे कानून के तहत और लोकतंत्र के तहत बनी है। दुर्भाग्य की बात है कि उसी व्यवस्था की हम खिल्ली उड़ाते रहे हैं। जब हम विधायक थे, तो हमने देखा है कि गांवों में सरपंच चुनकर आते थे, तो वार्ड मेम्बर्स उठाकर ले जाते थे और कई बार हमने वहां विधायकों को उठाकर ले जाते भी देखा है। मेरी अपनी राय है कि यह हमारे लिए बहुत शर्मनाक बात है।
बिहार में जो स्थिति है, उसे सब जानते हैं। केन्द्र में आज सोनिया जी नेतृत्व में यूपीए की सरकार चल रही है। बिहार में यूपीए के पार्टनर्स के बीच भले ही मनमुटाव रहा हो, लेकिन वहां जो मेनडेट मिला, वह एनडीए के खिलाफ है और यूपीए के हक में जाता है। इसलिए यूपीए के पार्टनर्स आपस में बैठकर अगर चुनावों से पहले कोई समझौता कर लेते तो शायद यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती। मैं पिछड़े हुए क्षेत्र तेलंगाना से आता हूं। वहां पर हमने, तेलंगाना राष्ट्र समति पार्टी ने, पहले विधान सभा चुनाव और फिर लोक सभा चुनावों में कांग्रेस के साथ समझौता किया। इससे हमें अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी चन्द्र बाबू नायडू की पार्टी को हराने में सफलता मिली। वही परिस्थति लोक सभा के चुनावों के समय हमें झारखंड और बिहार में भी देखने को मिली थी। लेकिन जब हम कुछ सांसद और विधायक इन दोनों राज्यों के विधान सभा चुनावों के दौरान गए तो हमने देखा कि वहां की जनता कम्युनल फोर्सेज को हराने के लिए सेक्युलर फोर्सेज का साथ देने का मन बना चुकी है। लेकिन वहां यूपीए के पार्टनर्स में समझौता नहीं हुआ और यह गलती हो गई, जिसे हम सब जानते हैं।
हमारे संविधान में जो अनुच्छेद ३५६ की, राज्यपालों की जो व्यवस्था है और सरकारिया कमीशन की जो रिपोर्ट है, उसके ऊपर बिहार को मद्देनजर रखते हुए हमें कुछ करना चाहिए। जब तक आप व्यवस्था पर टोका-टाकी करते रहेंगे, उसको नजरअंदाज करेंगे, तो उसका फायदा नहीं होगा। राज्यपाल का रोल महज यह नहीं है कि वह किसी मुख्य मंत्री को शपथ दिलाए या किसी मुख्य मंत्री को हटाए। संविधान में राज्यपाल का काम, अनुसूचित जाति, जनजाति और जो पिछड़े वर्ग हैं, उन्हें प्रोटेक्शन देने का भी है। इस पर भी हमें ध्यान देना होगा। मैं यह बात इसलिए कह रहा हूं कि राज्यपाल की व्यवस्था को हर बार कई लोग एबॉलिश करने की बात करतेcé[R52] । अबोलिश करने के टाइम पर आप उसे कीजिएगा। लेकिन आज देश में जो अशांति बनी हुई है, यह अशांति, पहाड़ों और जंगलों में, जहां आदिवासी रहते हैं, जिन्हें दबाया और कुचला गया, वहां से शुरु हुई है। वहां हम ध्यान नहीं दे रहे हैं। उसको हम लॉ एंड आर्डर की समस्या समझ लेते हैं। …( व्यवधान) राज्यपालों के ऊपर जो टीका-टिप्पणी होती है, जो सरकार के करने के लिए सही काम हैं, जो शैडयूल्ड कास्ट और शैडयूल्ड ट्राइव्ज के प्रोटैक्शन के काम, संविधान के द्वारा उनको दिये हुए हैं, जब वे उनको नजर-अंदाज़ करती हैं, वहां राज्यपाल संविधान के पांचवें और छठे शैडयूल्ड के अंदर जाकर एक्शन ले सकते हैं। लेकिन आज कोई भी राज्यपाल उस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।
मैं माननीय राष्ट्रपति जी को भी धन्यवाद करता हूं क्योंकि पिछले राष्ट्रपति माननीय नारायणन जी ने पूरे राज्यपालों को बुलाकर एक कमेटी बनाई और कई चीजों के बारे में कहा। उनको अमल में लाने और गवर्नर की प्रतिष्ठा बनाने की कोशिश कीजिए। केवल बनाने या हटाने के लिए ऐसा मत कीजिए क्योंकि आज भी पीने के पानी के लिए लोग अपने बच्चों को बेच रहे हैं, किसान आत्महत्याएं कर रहे हैं। इन समस्याओं पर भी आप ध्यान दे सकते हैं। इस संदर्भ में मैं इस प्रस्ताव का और गवर्नर व्यवस्था को प्रतिष्ठित करने के लिए, अपनी पार्टी की ओर से इसका समर्थन करता हूं।
श्री नखिल कुमार चौधरी (कटिहार) : सभापति महोदय, चुनाव के उपरांत, बिहार में जो विषम परिस्थितियां उत्पन्न हुईं और राष्ट्रपति शासन लगा, उसके अनुमोदन के लिए आज सदन में यह प्रस्ताव आया है और उस पर मैं अपने विचार प्रकट करने के लिए यहां खड़ा हूं। बिहार उपेक्षा का शिकार रहा है। लेकिन बिहार का अपना गौरवमयी इतिहास रहा है। बिहार की समृद्धि और वैभवशाली संस्कृति को दुनिया इज्जत की नजर से देखती है और हम बिहारियों को भी गर्व है कि हमारा इतिहास स्वर्णिम रहा है, सुखद रहा है। बीते दिन बिहार में चुनाव हुए और जनादेश आया। यह जनादेश वहां की आरजेडी सरकार के खिलाफ था। आप चाहे इसे सेक्युलर ग्रुप कहें या कोई और गठबंधन कहें, यह सब लोगों की जानकारी में है कि बीते १५ वर्षों से वहां जो आरजेडी की सरकार थी, सब लोग उससे ऊब गये थे और लोग सरकार बदलना चाहते थे, लेकिन जनता ने जनादेश किसी एक पार्टी को नहीं दिया। हमारा प्री-पोल एलाइंस का गठबंधन सबसे बड़े गठबंधन के रूप में उभरा, लेकिन हम लोगों ने भी सरकार बनाने की मांग नहीं की। आरजेडी बड़ा दल जरुर है लेकिन उसने सरकार बनाने की मांग कर दी। आखिर आप सरकार कैसे बना सकते हैं? आपके कौन समर्थक हैं। अलबत्ता राम विलास पासवान जी बहुत दिन तक हमारे साथ रहे हैं और अभी भी हम आशा करते हैं कि वे हमारा साथ देंगे। उनके हाथ में कुंजी है। चाहे इधर की सरकार बना दें या उधर की सरकार बना दें। लेकिन हम चाहेंगे कि हम लोगों की सरकार बना दें तो पांच साल के लिए बिहार का भला हो जाएगा। …( व्यवधान) मैं निवेदन कर रहा था कि बिहार की दुर्दशा क्यों हुई? माननीय लालू जी यहां बैठे हुए हैं, ये हमारे मुख्यमंत्री भी रहे हैं। कुछ दिन पूर्व राबड़ी जी भी हमारी माननीय मुख्यमंत्री थीं, लेकिन फिर भी बिहार इतना पीछे क्यों चला गय्ÉÉ[r53] ? यहां बैठे तमाम बिहार के सांसदों को इस पर विचार करना चाहिए कि क्या वजह है कि वहां के नौजवान और मजदूर पलायन कर रहे हैं? वहां किसानों की हालत बदत्तर है। …( व्यवधान) १५ साल पहले बिहार से इतने लोगों ने पलायन नहीं किया था। वहां इंडस्ट्री थी, बिजली ठीक थी। मैं जानता हूं कि बिहार के बगल में बंगाल है लेकिन बंगाल में २४ घंटे बिजली देखने को मिलती है। बिहार में बिजली नहीं है, सड़क नहीं है, शिक्षा की हालत ठीक नहीं है, व्यापार की हालत ठीक नहीं है। …( व्यवधान) रघुनाथ बाबू, आप हमारे साथ थे। अभी पाला बदला है। …( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN : Let him conclude..
श्री नखिल कुमार चौधरी : आप उस समय एनडीए की सरकार की प्रशंसा करते चूकते नहीं थे। आज आप खिलाफ में खड़े होकर बात कर रहे हैं। यह शोभा नहीं देता। …( व्यवधान) शाहबुद्दीन जी, दिल खोल कर बात होनी चाहिए। मैं यहां लालू जी को अपमानित करने के लिए बातें नहीं कर रहा हूं। वह रेल मंत्री बने। इन्होंने वहां के किसानों की साग सब्जी ले जाने के लिए एअरकंडिशन्ड डिब्बे का इंतजाम किया। आज उनकी क्या हालत है? क्या आज इस पर विचार करने की जरूरत नहीं है? …( व्यवधान) वहां सड़क बन नहीं रही है। प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना का पैसा पड़ा है। जो एनडीए के समय खर्च हुआ, …( व्यवधान) रघुवंश बाबू ग्रामीण विकास मंत्री हैं। वहां अभी तक एक ईंच भी प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़क नहीं बनी है। यह दोष किस का है? वहां कैसे किसान सम्पन्न होगा? वह कैसे अपनी सब्जी गांव से लाकर स्टैंड और स्टेशन तक पहुंचा सकेगा।…( व्यवधान) महोदय, मैं कभी-कभी बोलता हूं। मैं बिहार को अपमानित करने के लिए खड़ा नहीं हुआ हूं। मैं कहना चाहता हूं कि राष्ट्रपति शासन लोकतंत्र का विकल्प नहीं हो सकता है। वहां जनता द्वारा चुनी सरकार बननी चाहिए चाहे आप उसे बनाएं। आप ७५ की संख्या लेकर ९१ तक के गठबंधन पर पहुंचे हैं। हम राम विलास जी को अपनी तरफ लाना चाहते हैं लेकिन आप उन्हें अपनी तरफ खींचना चाहते हैं और कहते हैं कि कुछ लोग बांटने में लगे हैं। …( व्यवधान)
श्री लालू प्रसाद :आप उन्हें ले जाएं।
श्री नखिल कुमार चौधरी : हम राम विलास जी से बात करेंगे। हमारे राम विलास जी के साथ अच्छे रिश्ते थे और लालू जी आपसे भी रिश्ते खराब नहीं हैं। मैं आपसे कह रहा था कि वहां शिक्षा की स्थिति ठीक नहीं है, सर्व शिक्षा अभियान की स्थिति ठीक नहीं है, अस्पतालों की स्थिति ठीक नहीं है, लोगों को पीने का पानी नहीं मिल रहा है। बिहार को बनाने के लिए राष्ट्रपति शासन विकल्प नहीं हो सकता। यहां गृह मंत्री बैठे हैं। राष्ट्रपति शासन क्षणिक काल के लिए लगा है। आप गृह मंत्री भी हैं। आपकी पार्टी वहां सत्ता में शामिल है। भले ही चुनाव में उनके खिलाफ लड़े थे। आज वहां गठबंधन में शामिल हो गए हैं। राजद को साथ लेना चाहते हैं लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि विकल्प ढूंढिए। वहां प्रजातांत्रिक सरकार का गठन कीजिए। बिहार को चुनाव नहीं चाहिए चाहे आप सरकार बना लीजिए, चाहे हमारी तरफ की सरकार बनने दें, चाहे उसमें हमारे मुख्यमंत्री नीतीश जी हों या राम विलास जी हों कोई हर्ज नहीं है। …( व्यवधान)
MR. CHAIRMAN: Please conclude now. I have called the name of the next speaker.
… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: Nothing will go on record.
(Interruptions) … * * Not Recorded.
MR. CHAIRMAN: Please conclude now. We have to finish this debate on time.
SHRI NIKHIL KUMAR CHOUDHARY : Sir, I have not taken much time… (Interruptions)
MR. CHAIRMAN: I have given you more than your allotted time. Please conclude now.
श्री नखिल कुमार चौधरी : बिहार को बनाने की आवश्यकता है। …( व्यवधान) बिहार में एम्स की तरह का जो अस्पताल खुलना था, उसका क्या हुआ? आपकी सरकार वहां क्यों नहीं बन रही है? आज सारे बिहार के मरीज लोग एमपीज के दरवाजे खटखटा रहे हैं। उन्हें रहने की जगह नहीं मिल रही है। वे किस दुर्दशा में हैं? हम बिहार को बनाना चाहते हैं। हम सब बिहार को बनाने के लिए मिल कर राष्ट्रपति शासन को अल्पकाल के लिए जारी रखते हुए फिर प्रजातांत्रिक सरकार बनाने की दिशा में आगे ब्ाढ़े[R54] ।
श्री राम कृपाल यादव जी की आवाज़ के सामने मेरी आवाज़ दब जाएगी, लेकिन मैं आपके साथ हूं । आप और हम मिलकर बिहार की खुशहाली के लिए काम करें ।
MR. CHAIRMAN: Shri B. Mahtab. It would be very good if you please confine yourself to the President’s rule in Bihar which is before the House for discussion. The primary object is to discuss about the President’s rule there and not extraneous matters.
* Not Recorded.
SHRI B. MAHTAB (CUTTACK): Sir, the hon. Minister of Home Affairs is to give his reply by 3.30 p.m. So, I will stick to the time given to me. I am told that I am the last speaker to speak on the subject.
Bihar is not only the concern of the people who live in Bihar alone. Today, cutting across party lines and different States, many Members are participating in this debate on the Proclamation issued by the hon. President on 7th March under article 356. In the last 57 years, a lot of discussion has taken place as to whether article 356 should be retained or not. Retaining of article 356 was a point of discussion in 1977, and even in 1980, again it was discussed because it was misused. During the last six years of NDA Government’s rule, retention of article 356 was also being debated. Certain political parties who are representing themselves here in this House have strong exception to it. They say that it should be removed. Our Party does not hold that view though our Party is a regional Party. Orissa had been a victim of article 356 a number of times. I need not name the DMK or the RJD or Akali Dal or even the Telugu Desam. A number of regional parties and national parties, to a certain extent, have expressed their reservation regarding imposition of article 356. But I hold the view that it is necessary to keep it in the Constitution and it should be the last resort to be utilised.
The letter of hon. Governor of Bihar which was sent to the hon. President has given certain instances and some figures also. I am sure that Mr. Nitish Kumar will agree with me that, in the first page, the alliance of RJD has been given. Here, it is mentioned that the Congress has ten Members and CPI is also included there though it is bracketed as ‘support letter not received’. The total comes to 92. In the second page of this letter, the NDA alliance has been given, alongwith JD(U) and BJP, as 92. Why has this figure been given? It is not correct. We would like to get a reply on this point. Of course, this is a letter which has been given by the hon. Governor. The Congress has won nine seats and one Member who has been elected as an independent candidate was unable to get the symbol. That is the explanation that has been given by the Congress Party. He was unable to get the symbol during the election. So, technically, he is not a Member of the Congress Party. But here, it is mentioned that Congress has ten Members even when he is not a Member of the Congress Party technically. And CPI has not given a letter of support in writing[bru55] . But still the position of RJD and its alliance has been given as 92.
Let me now come to my second point. I am part of the NDA. The NDA is happy that President's rule has been imposed in Bihar. The NDA is happy because the RJD's rule has ended. I think that is the most proper way of explaining it. But the NDA is also displeased with this position because indirectly it is the UPA's rule which is there today in Bihar. The RJD is also displeased with this position. I need not explain it because a lot of Members have already explained it in detail. I am sure that the RJD will call the shots as long as the President's rule is there.
Here, I would like to quote the opinion of Dr. Prahlad P. Ghosh who is the Director of the Patna-based Asian Development Research Institute. He said:
"If President's rule is imposed for a short while, it is good for Bihar in the sense that it will allow the political process to stabilise.” But will anyone allow the political process to stabilise in Bihar?" He has also expressed the fear that the process will be prolonged. I listened to several hon. Members very attentively. Most of the hon. Members have expressed this fear. How long will this President's rule continue? Will it continue for six weeks, two months or six months? Will it be imposed again after six months and then go for fresh election, as it happened in the case of many other States earlier? Here my apprehension is about the intention of the UPA Government.
The Governor has repeatedly mentioned as to why he has taken this decision to recommend the President's rule.
15.28 hrs. (Shri Devendra Prasad Yadav in the Chair) My suggestion is that, in this country and in many other countries where democratic system functions, where multi-party system is in existence, minority parties or groups also should be allowed to form the Government when there is a fractured mandate. Of course, we should always strive to have popular Government. We should strive to have a majority Government. As has been mentioned by one of the Members here, in 1989, when no political party or alliance had the majority, a minority Government was formed at Centre.
In Bihar, the election was held to form a Government. Election was not held to impose the President's rule. If no party or group is able to form a Government, then an attempt should have been made to form a minority Government. According to Sarkaria Commission recommendations, first priority should be given to the largest pre-poll alliance. Second preference should be given to the largest political party. This is there already. During the last ten or fifteen years, this is how the political process has evolved in this country[r56] . Therefore, I am of the opinion that those who are trying to fill the political void must know that their authority cannot indefinitely surrogate for elected Government. I know that President’s Rule will not be non-partisan. I would always prefer an elected Government no matter how short it may be.
श्री असादूद्दीन ओवेसी (हैदराबाद) : मोहतरम शुक्रिया, कि आपने मुझे बोलने का मौका दिया। एक जम्हूरियत में, रियासत में इलैक्शन हो जाने के बाद, अवाम अपना फैसला जम्हूरी अंदाज में जब दे चुकी, उसके बाद आज इस ऐवान की रियासत के सदरराज को नाफिज करने की करादाद को पेश करना जम्हूरियत के लिए मैं समझता हूं कि निहायत ही तशवीशनाक बात है। खास तौर पर तमाम को मुहासबा करना पड़ेगा कि क्या हम वाकई में बिहार की अवाम के फैसले के पाबंद हैं, उसे ऑनर कर रहे हैं। मुझे अफसोस के साथ कहना पड़ता है, मैं अभी हमारे फाजिल दोस्तों की तकारिर को सुन रहा था, जितना ज्यादा बिहार को बदनाम एन.डी.ए. के लोगों ने किया और किसी ने नहीं किया है। क्योंकि बिहार के इलैक्शन में हमें जाने का मौका मिला है। लालू प्रसाद जी या आर.जे.डी के बुलावे पर हम नहीं गये, बल्कि हिंदुस्तान के १४ करोड़ मुसलमानों की तङप थी, एक आवाज थी कि बिहार में एक सेक्युलर गवर्नमैन्ट बने और उस सेक्युलर गवर्नमैन्ट की कयादत आर.जे.डी. करे। आज जिस करादाद को पेश किया है, मैं आपके सामने इस बात को रखना चाहूंगा कि हिंदुस्तान के हजारों-करोड़ों मुसलमानों में गुस्सा है, गम है कि एक जमात को, जो ७५ सीटें जीत कर आई है, उसे मदु नहीं किया, दावत नहीं दी गयी। इसकी कई नजीरें हैं, कई मिसालें हैं कि सबसे बड़ी जमात हो, उसे मौका दिया जाना चाहिए था और फ्लोर ऑफ दि असैम्बली के बीच मौका दिया जाना चाहिए। जिस तरह से जे.डी.यू. के काईद को मौका दिया गया था, लेकिन वह अपनी मैज्योरिटी प्रूव नहीं कर सके। आज वही मौका आर.जे.डी को मिलना चाहिए था।
मगर मोहतरम एक बात खुलकर सामने आ गई कि बिहार का जो इलैक्शन था, इसमें हमें मुहासबा करना पड़ेगा। खास तौर से मैं चाहूंगा कि हमारे वजीरे दाखिला जब जवाब दें तो वह हमें इन तमाम बातों पर एनलाइटन करे कि जिस तरीके से बिहार में इलैक्शन हुआ, खास तौर से मुस्लिम अक्लियतों के इलाकों में, हजारों की तादाद में बॉर्डर सिक्युरिटी फोर्स और रैपिड एक्शन फोर्स को रख दिया गया, एक मुनज्जम के तहत, एक साजिश के तहत अक्लियतों के वोटिंग तनासुब को गिराया गया, यह बात मैं इसलिए कह रहा हूं क्योंकि मैं बिहार जाकर आया हूं। मैंने देखा है कि पोलिंग के वक्त तो नहीं था, लेकिन पोलिंग से पहले जो खौफ का माहौल बनाया गया, इस ऐवान को सोचना पड़ेगा कि अगर इस ऐवान का एक मुंतखिबशुदा नुमाइंदा अगर अपने इलाके में नहीं जा सकता तो क्या यह जम्हूरियत है? जो लोक सभा का इलैक्शन जीत कर आता है, उसे कहते हैं कि आप इस इलाके में नहीं जा सकते। मैं चाहूंगा कि हमारे वजीरे दाखिला इस पर भी नजर सानी करें, अपने जवाब में बतलायें।
मोहतरम, आखिर में एक बात कहना चाहूंगा कि यहां पर सवाल यह नहीं है कि बिहार में कोई मुस्लिम चीफ मनिस्टर बनाया जाए। मुस्लिम क्या चाहते हैं कि उनके जान और माल का ताहफुज हो, मसाजिद का तहाफुज हो। मैं कहना चाहता हूं कि बिहार एक वाहिद रियासत है, उत्तर प्रदेश भी एक रियासत है, जहां मुसलमानों का बैकवर्ड क्लास और दलितों से इत्तेहाद कायम हुआ। दिलों को जोड़ने का काम लालू प्रसाद ने नहीं किया। पचास साल की तारीख में हमें बताइये कि हजारों की तादाद में कत्लेआम हुआ, किसका नुकसान हुआ, किसका घर जला, किसकी मस्जिद शहीद की गई। इस शख्स में बुराइयां होंगी, गलतियां होंगी, मगर इस शख्स ने कही भी कम्युनलिज्म पर या इसकी जमात से कम्प्रोमाइज हरगिज नहीं किया।
मोहतरम, ९० की दहाई में जब एक फिरकापरस्ती की लहर सारे मुल्क में दौड़ रही थी, तब कौन था, जिसने रथ यात्रा को रोका - यही शख्स था। उसमें बुराइयां होंगी, कमजोरियां होगीं, मगर सेक्युलरिज्म को मजबूत किसने किया, वह काम आर.जे.डी. ने किया। मैं यह भी कहना चाहूंगा कि किसी मुसलमान के चीफ मनिस्टर बन जाने से मुसलमानों के बुनियादी मसाइल हल नहीं होते। आज हम क्या चाहते हैं, हम चाहते हैं कि रोजगार हमें सही तरीके से मिले, वह काम बिहार में हुआ है कि वहां मुसलमानों को बाअख्तियार किया गया, उन्हें ताकत दी गई। सियासी तौर पर वे जीत कर आये, उसकी मिसाल हमारे सामने है। आज अगर हम चाहते हैं कि बिहार की सही तरक्की हो तो मैं उम्मीद करता हूं कि अब जो गलती हो गई है, वह हो गई है। माजी में आर.जे.डी को अक्सरियत साबित करने का मौका ÉÊàÉãÉäMÉÉ[R57] ।
आखिर में इस बात को भी कहना चाहूंगा कि आज हमने बड़ी-बड़ी बातें यहां पर सुनी हैं। आज की तमाम तकारीर सुनकर और बिहार का इलैक्शन देखकर एक बात सामने आई कि हरेक की कोशिश थी कि आरजेडी और लालू को नीचा दिखाया जाए। मुझे वह बात याद आती है जब १९९६ और १९९८ में भी हमने ऐसी गलती बीजेपी को दबाने के लिए की थी। उसका नतीजा क्या हुआ? मैं समझता हूँ कि जिस तरीके से लालू प्रसाद यादव और आरजेडी को दबाया जा रहा है, इंशाअल्लाह-ओ-ताला, जब छ: महीने बाद इलैक्शन होंगे तो यह शख्स १२२ की मेजॉरिटी लेकर आएगा। यूपीए को भी मुहासबा करना पड़ेगा। कहीं ऐसा न हो कि यह चमन जो हजारों लाखों लोगों ने मिलकर जोड़ा है, खास तौर से हमारी यूपीए की चेयरमैन सोनिया गांधी का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं कि यूपीए के चमन में तमाम फूलों को लगाकर एक जगह किया गया। हमें मुहासबा करना पड़ेगा। कायद तो वही है जो दूरंदेश हो, मुदब्बराना सलाइयत हो और वह माज़ी को देखे, मुस्तकबिल को देखे। अगर हम यहां पर गलती करेंगे तो जैसे एक शायर ने कहा है, लमहों ने खता की है, सदियों ने सज़ा पाई है।
मोहतरम, मैं आखिर में शुक्रिया अदा करना चाहता हूं और यह भी कहना चाहता हूँ कि इन लोगों को सामने आना चाहिए। ये चिलमन के पास बैठकर पर्दा करने का वक्त नहीं है। हमें आगे बढ़कर सैक्यूलर जमात को बढ़ाना पड़ेगा। यहां पर सवाल अनानियत का आ चुका है कि मुझे यह शख्स पसंद नहीं है, इस शख्स का चेहरा मुझे पसंद नहीं है, इसलिए मैं इसके साथ हुकूमत नहीं बनाना चाहता हूँ। यहां पर शख्सियत का सवाल नहीं है, अनानियत का सवाल नहीं है। यहां पर सवाल यह है कि बिहार की अवाम को हुकूमत मिले। गवर्नर साहब छ: महीने में अवाम का काम नहीं कर सकते। सियासतदान अवाम की नब्ज़ से वाकिफ़ होते हैं। यही कहते हुए मैं आपको शुक्रिया अदा करता हूँ।
MR. CHAIRMAN : Now, I am calling the last speaker – Prof. Ramadass.
PROF. M. RAMADASS (PONDICHERRY): Sir, I thank you for giving me the opportunity to speak on this occasion.
On behalf of the Pattali Makkal Katchi, I endorse the Proclamation of the President’s Rule in Bihar as a practical and inevitable measure. But, in principle, we do not agree to the imposition of President’s Rule and the use of article 356 anywhere in India because we have seen the horrors of the use of discretion by the Governors which goes along with the use of article 356. We have our major partner in Tamil Nadu, the Dravida Munnetra Kazhagam which has suffered humiliating experiences by the invocation of article 356.
Our Hon. Shri Ram Vilas Paswan very gloriously said that what he said prior to the election has come true. We appreciate and congratulate that he is really a man with political astuteness and political acumen to predict what will come after the election. To that extent, we give great credit to him. But, at the same time, I would like to remind him that the President’s Rule is not a substitute for democracy. President’s Rule is not in our kettle of fish. President’s Rule is not what was contemplated by Dr. B.R. Ambedkar with whose memory we are all existing as politicians here. Therefore, I would feel that the imposition of the President’s Rule must be revoked as early as possible and we should go the democratic way in which the people have voted for it.
We all know that the people of Bihar have given a vote for secularism. It is not against the RJD, it is not against anybody but it is a positive vote for secularism. Therefore, I would appeal to the Hon. Shri Ram Vilas Paswan and Shri Lalu ji to forget all the differences that they have and they must come together and form a Government at the earliest in Bihar so that those who are hankering after power will be shown the door at the earliest.
I would also urge the Government of India to end the President’s Rule as early as possible and go by the time-tested criterion of forming the Government. You know that the leader of the single largest party must be invited and only when it is not possible, we should go by the Sarkaria formula of inviting the parties in the pre-poll alliance[R58] .
Sir, it is clear to everyone that RJD is the single largest Party in Bihar. It should be invited; it should be given a chance to prove the majority on the floor of the Assembly. If it is not possible, then we should find out the other ways. This has been the constitutional practice. There has not been any deviation from this, although the Constitution of India has not said specifically so. The Government of India Act, 1935 provides for it and requires the Governor that he should invite the leader of single largest party to form a Government. Britain has followed it, and we have been following their precedents. The former President of India, Shri R. Venkataraman, in his book, ‘My Presidential Years’, has clearly and categorically stated that inviting the leader of the single largest party is the most objective criterion. The M.N. Venkatachaliah Commission, which has gone into the Review of the Indian Constitution, has also stated that there should be no discretion or any kind of judgement given to the Governor in the formation of a Government.
Therefore, Sir, I would urge that this matter must be discussed in the Inter-State Council in due course of time, and the Government should revoke this proclamation as early as possible and give an opportunity to form a popular Government.
Sir, I would like to tell one more point. Some Members in the opposition have said that Shri Lalu Prasad Yadav has been voted out of Bihar. They can look into the statistics of the voting pattern in Bihar. Everybody should realise it. The people have realised that Shri Lalu Prasad Yadav is the greatest force in Bihar to be reckoned with apart from others. Even today, he has secured 25.1 per cent of the voting shares. Am I right or wrong? Out of the total 46.5 per cent of votes, which were cast, his Party has secured 25.1 per cent. The voting percentage in Bihar was 46.5 per cent, and he has secured 25.1 per cent. In 2000, out of the total voting percentage 64.9, his party had secured 33 per cent votes. … (Interruptions) I am talking on the basis of facts. If you have the facts, you are free to tell. But you can talk only in terms of communalism, in terms of Ram Rajya, and all that. … (Interruptions)
MR. CHAIRMAN : Please do not disturb.
PROF. M. RAMADASS : I may tell you that democratically Shri Lalu Prasad Yadav is the force to be reckoned with.
MR. CHAIRMAN : Please do not make running commentary.
PROF. M. RAMADASS : Sir, Shri Laluji has given recognition to the downtrodden people in the country. He has given security to the Muslims. He has given dignity to the poor people in Bihar. Therefore, Sir, he and Shri Ram Vilas Paswanji must join hands. They should make workable arrangements. The Chairperson of UPA, Shrimati Sonia Gandhi should guide them and form a Government in Bihar as quickly as possible.
श्री राम कृपाल यादव : महोदय, हम बिहार में राष्ट्रपति शासन के विरोध में सदन का बहिष्कार करते हैं ।
15.43 hrs. (Shri Ram Kripal Yadav and some other hon. Members then left the House.) गृह मंत्री (श्री शिवराज वि. पाटील) : महोदय, बिहार में चुनाव हुए और मैं समझता हूं कि सदन में बैठे हुए सारे सदस्य कहेंगे कि बिहार के चुनाव शांतिपूर्ण रूप से हुए हैं । अगर ऐसा नहीं कहते हैं तो यह उनका अपना मत है । बिहार के चुनाव के लिए पहले एक सवाल पूछा गया, और गृह मंत्री से पूछा गया कि इतनी पुलिस वहां पर क्यों गई । बिहार की सरकार से चुनाव आयोग की तरफ से पूछा गया कि चुनावों के लिए बिहार सरकार क्या इंतजाम कर सकती है । बिहार सरकार ने चुनाव आयोग को बताया और चुनाव आयोग ने गृह मंत्रालय को बताया कि उनको ज्यादा पुलिसकी जरूरत है और ज्यादा पुलिस दी गई । पुलिस को कहां तैनात करना है, वह चुनाव आयोग तय करता है [c59] ।
वह होम मनिस्ट्री नहीं करती है, यह बात ध्यान में रखनी जरूरी है। चुनाव हुए और बदकिस्मती से वहां किसी भी पक्ष को बहुमत नहीं मिला।
15.45 hrs. (Mr. Deputy Speaker in the Chair) उपाघ्यक्ष महोदय, वहां ऐसी परिस्थिति निर्मित हुई कि कोई एक पक्ष, दो पक्ष या तीन पक्ष, एक जगह आकर, मिलकर सरकार नहीं बना सके। इसके लिए हमें खेद है। चुनाव होने के बाद सरकार बननी चाहिए और चुने हुए प्रतनधियों द्वारा, उस सरकार को, अपना दायित्व निभाना चाहिए। मगर वहां ऐसी परिस्थिति बनी कि कोई भी सरकार, नहीं बन सकी। इस संबंध में राज्यपाल महोदय ने अपना निवेदन और अपनी रिपोर्ट यहां भेज दी।
उपाध्यक्ष महोदय, मैं कहना चाहूंगा कि वहां राष्ट्रपति शासन लागू करने का एक हेतु और भी था और वह था कि ३१ मार्च, २००५ तक उस राज्य की आर्थिक व्यवस्था करना जरूरी है। यदि वह व्यवस्था वहां नहीं हुई, तो उसकी व्यवस्था यहां से करना जरूरी होता है। यदि वहां नहीं हुई और यहां से भी हम नहीं कर पाए, तो वहां आर्थिक कठिनाई पैदा हो सकती थी और सांवैधानिक संकट पैदा हो सकता था। इसीलिए राष्ट्रपति शासन लागू किया गया। मगर हम आश्वस्त हैं कि इसके बाद जो समय मिला और आगे मिलेगा, उस समय का, चुनकर आए हुए सारे प्रतनधि, उपयोग करेंगे और सब मिलकर वहां सरकार बनाने में मदद करेंगे। अगर ऐसा हो गया, तो हमें बड़ी खुशी होगी और राष्ट्रपति शासन वहां ज्यादा दिन तक चलाने की जरूरत महसूस नहीं होगी।
SHRI KHARABELA SWAIN (BALASORE): Did your colleague Shri Lalu Prasad stage a walk-out?
MR. DEPUTY-SPEAKER: No; he has not walked out.
… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: This is not to be recorded.
(Interruptions) …* श्री शिवराज वि. पाटील : उपाध्यक्ष महोदय, हमें बड़ी खुशी होगी कि चुने हुए सदस्य और सारे लोग वहां मिलें और जितनी जल्दी हो सके, सरकार बनाएं। जितनी जल्दी वहां सरकार बनेगी, हमें उतनी ज्यादा खुशी होगी। हम यहां खड़े होकर, वहां के चुने हुए सारे सदस्यों से अनुरोध करेंगे कि चुनाव होने के बाद, अगर उनके द्वारा सरकार बन सके, वे मिलकर सरकार बना सकें, तो उससे अच्छी बात कोई नहीं हो सकती और वैसा करने का वे वहां प्रयास करें।
महोदय, यहां एक सवाल उठाया गया कि क्या वहां मायनॉरिटी गवर्नमेंट नहीं बनाई जा सकती। यह बात सही है कि मायनॉरिटी गवर्नमेंट बनी है और कुछ दिन तक चली भी है। कभी-कभी मैजौरिटी के साथ बनी गवर्नमेंट भी मैजौरिटी में नहीं रहतीं, मायनॉरिटी में आ जाती हैं, लेकन तब भी सरकारें चली हैं।
महोदय, बिहार में क्या परिस्थिति है, उसे हम आंकड़ों से देख सकते हैं। उसे अगर ध्यान में रखें, तो हम पाएंगे कि वहां राष्ट्रपति शासन लगाने से बेहतर कोई दूसरी स्थिति नहीं हो सकती थी। वहां की राजनीतिक स्थिति को देखकर राज्यपाल महोदय को आभास हुआ कि वहां संख्या में बहुत अन्तर है और उस अन्तर की वजह से सरकार नहीं बन सकेगी और यदि बनेगी, तो चल नहीं सकेगी। इसलिए वह रास्ता नहीं अपनाया गया और राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर दी गई। अगर यह अन्तर कम हो जाए, तो शायद सरकार बन जाए। इसलिए अन्तर कम होना जरूरी है। अगर अन्तर बहुत बड़ा रहे, तो वहां सरकार बनाने में सुविधा होगी या नहीं, इस पर हमें विचार करना पड़ेगा। मगर अन्तर कम नहीं हो रहा है। अगर अन्तर उतना ही बना रहता है, तो उस पर हमें गहराई में जाकर सोचना जरूरी है[rpm60] ।
वहां अब राष्ट्रपति शासन लगाया गया है। यहां बार-बार पूछा गया कि यह कितने दिन चलेगा। हम चाहते हैं कि वहां जितने कम दिन राष्ट्रपति शासन रहे, उतना अच्छा है। राष्ट्रपति शासन और कितने दिन वहां रहना है, इसका निर्णय बिहार में होना जरूरी है और चुन कर आए हुए लोगों के द्वारा होना जरूरी है। वही यह निर्णय दे सकते हैं कि कितनी जल्दी खत्म होगा या कितनी देर तक चलेगा। हम आशा, अपेक्षा और प्रार्थना करेंगे कि जल्दी से जल्दी वहां से राष्ट्रपति शासन चला जाए, इस प्रकार की परिस्थिति वे वहां निर्मित करें। गवर्नर या राज्यपाल के दायित्व के बारे में भी यहां अलग-अलग ढंग से चर्चा हुई। इस पर कल * Not Recorded.
भी काफी चर्चा हुई थी और आज भी हुई है। गवर्नर या राज्यपाल जो होते हैं, उन्हें यह देखना जरूरी होता है कि चुनाव के बाद कौन स्थाई सरकार बना सकता है। उसे उन्हें आमंत्रित करना होता है और उसके बाद जो भी मुख्य मंत्री बन जाता है, उनके कहने पर वहां मंत्री बनाने पड़ते हैं। ये काम वे करते हैं, मगर किसे आमंत्रित करना है, इसके लिए उन्हें ही निर्णय लेना पड़ता है और उन्होंने निर्णय लिए। दूसरा काम राज्यपाल महोदय को यह देखना पड़ता है कि संवैधानिक पद्धति से राज्य का कार्य चल रहा है या नहीं। अगर संवैधानिक पद्धति से नहीं चल रहा है, ऐसा उन्हें महसूस हुआ तो उसके लिए क्या कदम उठाने चाहिए, इसके लिए वे खुद भी निर्णय कर सकते हैं और यहां की सरकार से भी चर्चा कर सकते हैं। इसलिए हमारे संविधान के आर्टीकल ३५६ में व्याख्या है।
गवर्नर और राज्यपाल का पद होना चाहिए या नहीं होना चाहिए, इस पर बहुत चर्चा हुई है। सबसे पहले कांस्टीटयूएंट असेम्बली में, संविधान बनाने वाली सभा में चर्चा हुई है और उसके बाद बार-बार यहां चर्चा हुई है कि जो गवर्नर है, ये केन्द्र की सरकार और प्रांत की सरकार को जोड़ने वाला लिंक है। अगर परिस्थिति बिगड़ने के बाद, उसे सुधारने के लिए कोई व्यवस्था करनी है तो उसकी दवा आर्टीकल ३५६ के अंडर की जा सकती है। खुशी की बात यह है कि इसके बारे में अलग-अलग समय पर अलग-अलग विचार लोगों ने प्रकट किए हैं, मगर इस सबके बावजूद, अंत में वे एक ही तथ्य एवं विचार तक पहुंचे हैं गवर्नर का पद और आर्टीकल ३५६ रहना चाहिए। इसमें कुछ लोग कह सकते हैं कि दूसरा कोई विकल्प हो सकता है। जो यह कहेगा कि यह नहीं होना चाहिए, मगर इस तथ्य तक वे पहुंचे हैं।…( व्यवधान)
SHRI B. MAHTAB : Sir, does the hon. Minister intend to issue a guideline to respective Governors, from the Centre, that under such and such circumstances, when there is no clear majority in the House, when there is a fractured mandate, these are the guidelines under which the Governor can function? Can the Centre issue a guideline in this manner?
The Hon. Minister can arrive at a consensus with the leaders of all the political parties. With a wider discussion, the consensus can be built to find out a guideline because for the last 57 years this country has been going on discussing, and that is one of the main reason why the post of Governor is being looked down upon.
SHRI SHIVRAJ V. PATIL: Well, I think, on this point the Constitution is clear and many cases were taken to the courts and the courts also have given their decisions. Then, commissions were also appointed and the commissions have also expressed their views. All these things can be taken into account.
One thing is that there should be a law. But the law cannot provide the remedies to all the ills or all the difficulties. The codification is not always helpful, giving direction is not always helpful. There are different situations[r61] .
Human beings have different features and different faces. In the same fashion, different situations develop, and it is not possible to have a law or a direction or a code which can really help in these matters. So, we would be rather very careful in asking the Governors to do or not to do a particular thing in a particular situation because we do not know what kind of situations are going to develop in the future and what kind of interpretation can be put on the directions that would be given by the Government of India. The Constitution is there. The rules are there. The decisions have been given. The Reports of the Commissions are there. Probably they will keep all these things in mind and if necessary, they will, on occasions, discuss these matters with the legal luminaries, jurists and those who know these things, and then they will take the decision. But we would rather be very careful in saying do these things or do not do these things.
Sir, it is not necessary for me to make a long speech in replying to this debate. Fortunately, almost all Members have come to one conclusion and that conclusion is that in the circumstances this was necessary and this was done. They have also said that the President’s Rule be not continued there for a long time. May I make it very clear on the floor of this House that we would not like to have it for a very long time or a long time. We would like to see that the President’s Rule comes to an end and the elected Government is formed there.
The sooner it is done, the better it is. But we do not want to say as to what can be done if it does not happen. We will wait and see what happens in the future.
Almost all the hon. Members have supported … (Interruptions)
श्री सुशील कुमार मोदी : संविधान की धारा १९५ के अन्तर्गत विधायकों को जो सुविधाएं मिलती हैं, लेकिन संविधान की धारा 195 has also been suspended इसलिए मेरा आग्रह है कि आप उसे विथड्रा करने के बारे में कोई निर्णय कीजिए ताकि विधायकों को वेतन और अन्य सुविधाएं मिल सकें। यू.पी. में आपने सस्पेंड नहीं किया था, आपको इस बारे में भी कुछ कहना चाहिए और सलाहकारों की नियुक्ति के बारे में भी बोलना चाहिए कि आप कब तक सलाहकार नियुक्त करेंगे?
श्री शिवराज वि. पाटील : ये दो मुद्दे हैं, जिनके ऊपर अगर आप चाहते हैं तो मैं जरूर अपनी राय यहां पर प्रकट करूंगा। पहला मुद्दा यह है कि आपके बिहार में जो रूल्स हैं और आपने जो कानून बनाया है, उस कानून में और दूसरे प्रान्तों में जो कानून बनाये गये हैं, उनमें अन्तर है। कुछ प्रान्तों में जो कानून बना है, उसके अंतर्गत जब सदस्य चुनकर आते हैं तो उसी दिन से उनको सदस्य माना जाता है और उसी दिन से उनकी तनख्वाह और दूसरी जो सुविधाएं हैं, वे उनको दी जाती हैं। शपथ लेने का जो काम है, जैसे संसद में आकर काम करने के लिए शपथ लेने का प्रावधान है, वैसा ही दूसरे राज्यों में है, मगर बिहार में ऐसा हुआ है क्योंकि आपके बनाये हुए नियम और कानून के मुताबिक, वहां शपथ लेने के बाद ही विधायकों को उनकी तनख्वाह और दूसरी सुविधाएं मिलती हैं। इस कानून के होते हुए हम क्या कर सकते हैं, हम यह देखने का प्रयास कर रहे हैं।…( व्यवधान)
श्री प्रभुनाथ सिंह : आप अध्यादेश जारी करवा दीजिए।…( व्यवधान)
श्री शिवराज वि. पाटील : जैसा आप बोल रहे हैं कि आर्डिनेंस जारी करवा सकते हैं या नहीं, मगर दूसरी मुश्किल यह है कि जब सदन बैठा हुआ है तो हम आर्डिनेंस जारी नहीं कर सकते।…( व्यवधान)
श्री नीतीश कुमार : धारा १९५ को जब आपने गजट नोटफिकेशन से सस्पेंड किया है, उसी तरह आप आर्डिनेंस भी जारी नहीं कर सकते, इसलिए आपको दो कदम उठाने होंगे - एक तो अपने प्रोक्लेमेशन से धारा १९५ को आपने सस्पेंड किया है, एम.एल.एज़. के लिए, उसे विथड्रा करना पड़ेगा और तब आपको वहां के कानून में परिवर्तन के लिए आर्डिनेंस के रूट को फॉलो करना पड़ेगा।
श्री शिवराज वि. पाटील : जितनी भी उसकी लेजिस्लेटिव एथॉरिटी है, उसके बारे में इस सदन को जो एथॉरिटी है या एथॉरिटी है या नहीं है, यह तो हम देखेंगे। जैसा आपने कहा है, उसको भी हम देखेंगे, मगर इसमें कानूनी मुश्किल है। हमारी कोशिश यह है कि जितनी भी इसके अन्दर मदद कर सकें, वह हम जरूर करेंगे।
जहां तक एडवाइजर्स का सवाल है, मैं आपसे कहना चाहता हूं कि एडवाइजर्स कितने होने चाहिए, होने चाहिए कि नहीं होने चाहिए, कौन होने चाहिए, उस प्रान्त के होने चाहिए या बाहर के होने चाहिए, ये सारी चीजें ऐसी हैं, जिनका सन्दर्भ ध्यान में रखना बहुत जरूरी है। आज वहां जो सरकार चलती है, वहां की जो परमानेंट एडमनिस्ट्रेटिव मशीनरी है, उनकी मदद से सरकार चलती है और गवर्नर उसके ऊपर नियंत्रण रखते हैं।[i62] 16.00 hrs. अगर हमने वहाँ किसी एक अधिकारी को आफिसर बना दिया तो आप कहेंगे यहाँ के हैं, वहाँ के हैं। अगर वहाँ का नहीं बनाया, तो बाहर से आने के बाद ५-६ महीने उनको समझने में लग जाता है और राज्यपाल ऐसे हों, जिनको एडमनिस्ट्रेशन का तजुर्बा हो और वे चला सकते हैं और उनको लगता है कि हम चला सकेंगे। यह जरूरी भी नहीं है कि सभी केसों में एडवाइज़र दें। जरूरी हुआ तो दे भी दें लेकिन यह एक कारण नहीं बनना चाहिए।…( व्यवधान)
प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा (दक्षिण दिल्ली) : क्या कोई झगड़ा लालू जी और पासवान जी के बीच में है जिसकी वजह से एडवाइजर नहीं बना रहे है या आप सचमुच में इसकी जरूरत नहीं समझते हैं? अगर जरूरी नहीं समझते हैं तो तय कर दीजिए कि नहीं बनाना है१ श्री शिवराज वि. पाटील : हमारा हित यह है कि किसी की तरफ से भी झगड़ा पैदा न हो और जो भी जरूरी है उसके बारे में जरूर करेंगे। …( व्यवधान)
श्री नीतीश कुमार : यह आपको भी सूट नहीं करता है कि एडवाइज़र मत रखिए।
श्री शिवराज वि. पाटील : हमको वह परिस्थिति सूट करती है जिसमें आप झगड़ा न करें। आप झगड़ा करते हैं, वह परिस्थिति हमको सूट नहीं करती है।
श्री नीतीश कुमार : वह टोटल कांग्रेस रूल हो जाएगा ।
श्री शिवराज वि. पाटील : नहीं-नहीं, पूरा कांग्रेस रूल क्या है ? यहां अगर हम लोग बैठे हुए हैं और एक महीने के अंदर यह घटना हुई है । एक महीने के अंदर आपको ध्यान में होगा । आप जैसे सदस्यों के ध्यान में जरूर आएगा कांग्रेस या विपक्ष को ध्यान में रख कर कोई निर्णय नहीं लिया गया है हमारी कोशिश क्या सही है, यह करने की रही है । धन्यवाद।
SHRI KHARABELA SWAIN : Not only the Members but also the Ministers have staged walk out.… (Interruptions)
श्री संतोष गंगवार (बरेली) : आरजेडी ने अपने सदस्यों सहित वाकआऊट किया है । यह रिकार्ड में जाना चाहिए । …( व्यवधान)
श्री शिवराज वि. पाटील : यह सदन झगड़ा करने के लिए नहीं है । यह झगड़ा समाप्त करने के लिए है।…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : मुझे सुनने दीजिए।…( व्यवधान)
श्री नीतीश कुमार : उपाध्यक्ष महोदय, हम इसे दर्ज कराना चाहते हैं कि यह संयुक्त जबावदेही की जो प्रणाली है वह यूपीए में कोलेप्स कर चुकी है । कलैक्टिव रिसपांसिबीलिटी नाम की कोई चीज नहीं है । यह दर्ज होना चाहिए । यह सरकार कितनी रिस्पोंसिबल है।…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : नहीं मंत्रियों ने वाकआऊट नहीं किया है ।…( व्यवधान)
श्री लाल कृष्ण आडवाणी (गांधीनगर) : अगर गृह मंत्री जी को इस बारे में कोई स्पष्टीकरण देना हो तो सदन को दे दें, अन्यथा ऐसा आज तक कभी नहीं हुआ कि संयुक्त सरकार में एक प्रिंसिपल पार्टनर जो रहे हैं, वे सदन में नहीं रहें,जिस समय इतना महत्वपूर्ण मुद्दा चल रहा है और उस प्रांत में राष्ट्रपति शासन लागू किया जा रहा है । इसका मतलब यह है कि वह दल कम से कम इस राष्ट्रपति शासन की व्यवस्था के खिलाफ है । आप कोई स्पष्टीकरण देना चाहें तो दीजिए । लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ है । I do not recall a single incident in the entire Parliamentary history, where this kind of a situation exists.
श्री शिवराज वि. पाटील : मैं यह अपेक्षा कर रहा था कि हमारी उम्र के लोग इस बात को समझेंगे । …( व्यवधान)
श्री नीतीश कुमार : अगर ऐसा नहीं कि कलैक्टिव रिस्पोंसबिलटी का नियम कोलेप्स कर गया है, तो एक भी आरजेडी के कैबिनेट मंत्री को ले आइए तब हम समझेंगे कि ऐसा नहीं है ।…( व्यवधान)
श्री खारबेल स्वाईं : पहले सदस्य बोले कि हम विरोध करते हैं और यह कह कर वाकआऊट करके चले गए। Here, the situation is like this. The leader is following the followers.… (Interruptions)
उपाध्यक्ष महोदय : श्री आडवाणी जी बोल चुके हैं ।…( व्यवधान)
श्री नीतीश कुमार : गृह मंत्री जी मूल प्रश्न से हट रहे हैं, कलैक्टिव रिस्पोंसबिल्टी के बारे में बताइए ।
SHRI SHIVRAJ V. PATIL: Let me reply to this very briefly. My reply is … (Interruptions) My reply is that our partners have made it very clear that there should be a Government by the elected people in Bihar. If the Government was not formed in Bihar by the elected people, it is but natural for them to feel that it should have happened. But at the same time, they know what is being done, and what is being said about this. If some people are trying to see that a cleavage appears between the partners of this Government, they are mistaken[t63] .
If [e64] they are trying to say or insinuate or create this kind of a difficulty, it is not in keeping with the dignity of the elected Members of this House. It should not be done. This is a House to create consensus rather than divisions. … (Interruptions)
श्री नीतीश कुमार : मंत्री जी मूल प्रश्न से हट रहे हैं। यहां जो कलैक्टिव रिस्पौंसीबलिटी कोलैप्स कर गई है, उसके बारे में बताएं।…( व्यवधान)
SHRI L.K. ADVANI : The hon. Member is from Bihar. I think, he was very right when he was pointing this out. This is an important matter. This should not be taken as being unbecoming of any elected Member because there is no other way of recording it.
In this entire House, no one has dissented. If there were any dissent, if our party were opposed to the President’s rule we would have called for a division. That would have meant that this would have been established that all those RJD Members were not in favour of the decision taken by the Government but we are not asking for a division. It would be passed by a voice vote and it would be unanimous. There is no objection. Therefore, it was very right on the part of Shri Nitish Kumar to point this out. I stood up only to give you an opportunity to explain, if there is any explanation, but there is no explanation.
Their Ministers stayed away from the Cabinet meeting which decided on President’s rule and today when Parliament is adopting the Resolution moved by you, they are all absent from the House. What does it indicate? It indicates nothing else but what Shri Nitish Kumar has said. It is a collapse of collective responsibility.… (Interruptions)
SHRI SHIVRAJ V. PATIL: We would have to understand what is collective responsibility. If a decision were taken by the Government and if it were not opposed by others, it is collective responsibility. … (Interruptions)
SHRI KHARABELA SWAIN : But they are absent. … (Interruptions)
SHRI BRAJA KISHORE TRIPATHY : They have protested and boycotted. … (Interruptions)
श्री लाल कृष्ण आडवाणी : उनकी स्थिति यह है कि अपोज़ करते हुए भी सरकार नहीं छोड़ना चाहते, सरकार में बने रहना चाहते हैं। यह बहुत अच्छी बात है। Let this go on record. There is nothing wrong about it.
श्री शिवराज वि. पाटील : उनका प्रयास यह है कि कुछ लोग हमारी सरकार को धक्का देना चाहते हैं और वे उन्हें मदद नहीं करना चाहते। लेकिन उनके मन का जो दुख है, वह दुख प्रकट हो सकता है। साथ ही वे कलैक्टिव रिस्पौंसीबलिटी के मायने अच्छी तरह से जानते हैं और उसका पालन कर रहे हैं। हम उनकी भावनाओं को समझते हैं और आपकी भावनाओं को भी समझ सकते हैं।…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : नीतीश जी, आपका प्वाइंट आ गया।
श्री नीतीश कुमार : कपिल सिब्बल जी वकालत के लिए क्यों खड़े हो रहे हैं।…( व्यवधान)
THE MINISTER OF STATE OF THE MINISTRY OF SCIENCE & TECHNOLOGY AND MINISTER OF STATE OF THE DEPARTMENT OF OCEAN DEVELOPMENT (SHRI KAPIL SIBAL): I have been called by the Chair. The Chair has allowed me to speak. … (Interruptions)
Mr. Deputy-Speaker, Sir, I am a little disappointed with what the hon. Leader of the Opposition has said. I know that memories are very short but the hon. Leader of the Opposition would remember that while they were in Government, many a Cabinet Minister stayed away from many a Cabinet meeting. In fact, it is the evidence of the beauty of Parliamentary democracy that when President’s rule is imposed, the Opposition supports the Government; and in our genuine democracy there are some people who have certain feelings and who do not openly express those feelings. … (Interruptions) You should be lauding the beauty of Parliamentary democracy instead of standing up and resenting. I am sorry to say that this kind of a disregard should not be seen in this House. … (Interruptions)
PROF. VIJAY KUMAR MALHOTRA : Let two or three more Ministers come and explain.
श्री नीतीश कुमार : ये कमाल के वकील हैं। …( व्यवधान) इनके कानूनी ज्ञान से हम इनलाइटन हुए, लेकिन ये कलैक्टिव रिस्पौंसीबलिटी की परिभाषा बता दें। कपिल सिब्बल जी को मना किया गया कि मत खड़े होइए। कैबिनेट मीटिंग से स्टे अवे करना अलग बात है, लेकिन यहां कलैक्टिव रिस्पौंसीबलिटी का जो नमूना दिखाई पड़ा है, उसे सारा देश देख रहा है।…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : आप बैठ जाएं।
...( व्यवधान)
SHRI SHIVRAJ V. PATIL: Sir, for the last time, I would like to respond and I would like to say that this is the beauty of democracy. Even when you do not fully agree with a proposition, if the majority wants it, it is done. … (Interruptions[e65] ) MR. DEPUTY-SPEAKER: The question is:
“That this House approves the Proclamation issued by the President on the 7th March, 2005 under article 356 of the Constitution in relation to the State of Bihar.” ” The motion was adopted. ----------------