Lok Sabha Debates
Regarding Criteria For Defining Poverty Line By Planning Commission. on 21 March, 2012
> Title: Regarding criteria for defining poverty line by Planning Commission.
श्री शरद यादव (मधेपुरा): अध्यक्षा जी, देश का जो प्लानिंग कमीशन है, कल की जो उनकी घोषणा है, वह एक तरह से इस देश की गरीबी का एक क्रूर मजाक है। इसके बावजूद कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछली बार, इन्होंने जो आंकड़े दिये थे, इन्होंने उससे भी घटाकर कहा कि 22 और 26 रूपए। 22 रूपए ग्रामीण भारत में और 28 रूपए शहरी भारत में ...( व्यवधान) कई जगह 26 छपा है और कई जगह 28 छपा है। ...( व्यवधान) मेरा आपसे निवेदन है कि यह मजाक हुआ है और देश में जिस तरह से गरीबी रोज बढ़ती है और मैं देखता हूं कि प्लानिंग कमीशन एक बार भी अच्छी बात नहीं बोलता है। यह अजीब हालत है। क्यों, किस बात से और क्या इनकी, यह देश के एक आदमी को ठीक से नहीं मिलते हैं, इन्हें पता नहीं है कि देश कहां है और प्लानिंग कमीशन का उपाध्यक्ष इनको बना रखा है। हम लोगों के यहां एक कहावत है कि *तो वह कभी अच्छा नहीं बोलता है। *।
MADAM SPEAKER: This will not go on record.
… (Interruptions)
श्री शरद यादव : मैं सरकार से निवेदन करना चाहता हूं कि ये जब भी बोलते हैं, इनके बोलने के बाद देश भर में हाहाकार होता है, बैचेनी होती है। ये जब भी बोलेंगे, महंगाई बढ़ेगी। कल इन्होंने जो बात कही, वह एक आदमी की आमदनी है या दो की है या परिवार की है, कुछ पता नहीं है। कहते हैं कि तेंदुलकर कमेटी और एनएसएसओ, मैं एनएसएसओ के बारे में कहना चाहता हूं, हमने कहा था कि आप कास्ट सेंसस कराईये। आम सहमति से बात हो गयी थी। आपने उसके कई टुकड़े कर दिये। एनएसएसओ ने यह रिपोर्ट दी है, आज से चार साल पहले कि हिन्दुस्तान में पिछड़ी जाति के लोग, जिनकी दो तिहाई आबादी है, वे हिन्दुस्तान में 38 फीसदी हैं। यह एनएसएसओ और यह तेंदुलकर कमेटी, इन कमेटियों को बिठाकर आप इस देश के, ...( व्यवधान) सक्सेना कमेटी, इन कमेटियों से देश नहीं चलेगा। ये कमेटियां आप के बाजू में बैठकर आंकड़े बनाती हैं। आप गरीबों की संख्या क्यों घटाना चाहते हैं?...( व्यवधान) ये पालतू कमेटियां आप क्यों बनाते हो और किस बात के लिए बनाते हो? ...( व्यवधान) मैं आपसे कहना चाहता हूं कि इससे बेहतर होगा, बाजार बहुत फले-फूलेगा, हिन्दुस्तान में गरीब लोगों को खड़ा करके गोली से मारो, तभी निदान होगा। ...( व्यवधान) यह अपमान भी नहीं है। एक तरह से गरीब आदमी को गोली मार दो, उनको जहर दे दो, तो हम देश में कहेंगे कि दुनिया में हम सब आगे हो गए हैं। कोई सुनने वाला नहीं है। ये जो ट्रेजरी बेंचेज पर लोग बैठे हैं ...( व्यवधान)
श्री उदय सिंह (पूर्णिया): ...( व्यवधान) को बंद करो। ...( व्यवधान)Dismiss the Planning Commission. … (Interruptions)
अध्यक्ष महोदया : अब आप बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: Nothing will go on record.
(Interruptions)* अध्यक्ष महोदया : शरद जी, अब आप समाप्त करिए।
(Interruptions)* अध्यक्ष महोदया : आप बैठ जाइए।
(Interruptions)* अध्यक्ष महोदया : वह बोल रहे हैं। आप बीच में क्यों खड़े हो गए?
(Interruptions) * अध्यक्ष महोदया : आप बैठ जाइए।
(Interruptions) * MADAM SPEAKER: Nothing else will go on record except what Shri Sharad Yadav is saying.
(Interruptions) * अध्यक्ष महोदया : अब आप संक्षेप में करिए।
…( व्यवधान)
श्री शरद यादव: अध्यक्ष जी, जगदंबिका पाल जी वह ओथ लेकर यहां बता दें कि मैं जो बात बोल रहा हूं, गलत बोल रहा हूं। ओथ लेकर बोल दें। ...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप इधर संबोधित करिए।
…( व्यवधान)
श्री शरद यादव: ये गरीबों के इलाके में रहते हैं। उनका वोट पाते हैं। ...( व्यवधान) मैं यह नहीं कहना चाहता हूं ...( व्यवधान) आप मेरी बात सुन लीजिए, इसके बाद आप जो बोलना चाहें, बोलिए। ...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप इधर कहिए।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप बैठ जाइए। आप इधर बोलिए।
श्री शरद यादव: जब आपको मौका मिलेगा तब आप बोलिए। मैं यह कहना चाहता हूं कि जो सरकारी ट्रेजरी बेन्चेज के लोग हैं, मैं एक से नहीं मिला हूं। हर आदमी दुखी है। यहां उनकी जुबान बंद है। देश में इस सदन का एक एमपी नहीं है जो प्लानिंग कमीशन की बातचीत है, जो उनका एनाउंसमेंट है-22 रूपये, 26 रूपये या 28 रूपये का, इससे कौन सहमत है?...( व्यवधान) आप खुद सासाराम से हैं। आप अपने दिल से पूछ लीजिए कि यह बात सही है या नहीं है। इस तरह की बात कहना और प्लानिंग कमीशन में उस आदमी को बैठाना चाहिए जो इस देश की जमीन को जाने। इस देश के गरीब-गुरबा के तकलीफ और दर्द को जाने। ऐसे आदमी को बैठाया है जिसका इनसे आज तक कोई वास्ता नहीं है। जो इस देश के कोई चीज में नहीं है। मैं आप से यह कहना चाहता हूं कि यह इतना बड़ा अपराध है, इतना बड़ा गलत काम इन्होंने किया है कि इस देश में आप फूड सिक्योरिटी बिल लाना चाहते हैं। ऐसा फूड सिक्योरिटी बिल लाना चाहते है। यानी ये सारी गरीबी रेखा के नीचे घटा कर, सोनिया जी आप चाहते है कि यह फूड सिक्योरिटी लाई जाए। सरकार का कोई आदमी या प्रधानमंत्री उनका क्या फर्ज था? उनको बुला कर बोलते कि क्या जरूरत है, दो आदमी की कमेटी पर बोलने का। एनएसएसओ और तेन्दुलकर कमेटी पर आप क्यों बयान दे रहे हैं? आप इन पर क्यों बोल रहे हैं? आप प्लानिंग कमीशन के उपाध्यक्ष हैं। आपको क्या हक है? आप ऐसी बात क्यों बोल रहे हैं? जिस देश में सुप्रीम कोर्ट तक तकलीफ में हो कर जो आदेश दिया उस तकलीफ को आपने बढ़ा दिया और उस तकलीफ को इजाफा कर के आपने कह दिया कि इससे भी कम में लोग गरीबी रेखा के नीचे रहते हैं।...( व्यवधान) यानी एक तरह से आप आग में घी डालने का काम कर रहे हैं। . ..( व्यवधान) अध्यक्ष जी, मैं आप से विनती करना चाहता हूं कि प्लानिंग कमीशन को चलाना है तो उसे जवाहरलाल जी ने चलाया था। एक से एक प्लानिंग कमीशन के उपाध्यक्ष रहे हैं। मैं उनको जानता हूं। बहुत लोगों को जानता हूं। मेरी आप से विनती है।..( व्यवधान) सब तरफ से हाथ जोड़ कर विनती है कि हिन्दुस्तान से इस आदमी का छुटकारा करिए। ..( व्यवधान) आप प्लानिंग कमीशन वाइंड-अप कर दीजिए लेकिन ऐसे लोगों को बैठा कर* MADAM SPEAKER: This will not go in record.
(Interruptions) * श्री शरद यादव : गरीबों के साथ ऐसा जूल्म करते हैं कि मैं अपने जुबान और बोली से व्यक्त नहीं कर सकता हूं। इसलिए मेरी विनती है, आप सब लोग बैठे हैं यह आदमी जो है वह प्लानिंग कमीशन के किसी काम का नहीं है। यह कोई काम का नही है। इसे देश की कोई समझ नहीं है। ...( व्यवधान) यह जब बोलता है* इसे वाइंड अप करिए।...( व्यवधान) आप अच्छा प्लानिंग कमीशन बनाइए। यही मेरी आप से विनती है और ये आंकड़े वापस होने चाहिए। जब बिहार में तीन-तीन लोगों ने बैठ कर कहा कि इनको गरीबी रेखा मापने का तरीका मालूम नहीं है। ये गरीबी फुट, टेप, थर्मामीटर या कैलोरी से नापते हैं। कैलोरी को इस देश में कौन जानता है? आप कैलोरी कहां से ड्राइव करते हो? ..( व्यवधान) इस देश में क्यों मजाक कर रहे हो? 63 वर्षों में देश में गरीब कौन है उनकी गिनती नहीं कर पाए, गरीब की संख्या का पता नहीं लगा पाए, देश की जातियों की संख्या पता लगाने में दायें- बायें करते हैं। मैं आप से विनती करूंगा कि यह प्लानिंग कमीशन देश के हर चीज के खिलाफ है। इसे वाइंड अप करो या इसे अच्छा बनाओ। जो जानने वाला है, जो आदमी हिन्दुस्तान की धरती को जानने वाला है। आप सब लोगों में बहुत लोग हैं जो देश को जानते हैं। उनको बैठाने का काम करो। देश के साथ यह मजाक मत करो। गरीब के साथ गरीबी मजाक कर रही है। उसके साथ उसकी लाचारी मजाक कर रही है। उसकी बेबसी, अपमान और उसके ऊपर से आप धक्का मार कर उसको कहते हैं कि तुम हो ही नहीं। तुम्हारी संख्या ही नहीं है। तुम दुनिया में ही कहीं नहीं हो। जिन्दा लोगों को तुम मरा मानते हो। जो गरीब लोग हैं, जो आपके और हमारे जैसे हैं उनको आप इस तरह से देखते हो इसलिए मैं बहुत वेदना और तकलीफ के साथ आप से कहना चाहता हूं और सरकार से विनती करना चाहता हूं कि इस मामले का निपटारा करें। प्रधानमंत्री या कोई जिम्मेदार मंत्री इस पर जवाब देने का काम करे कि यह आंकड़ा झूठ है।
पूरा देश इसे गलत मानता है। इस गलती को वापिस लीजिए और हिन्दुस्तान के गरीब की नए सिरे से पहचान करने का काम कीजिए, तभी यह देश आगे बढ़ेगा, तभी यह मुल्क आगे बढ़ेगा।
इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं। आपने मुझे बोलने की इजाजत दी, इसके लिए मैं आपका बहुत-बहुत आभार और शुक्रिया अदा करता हूं।
श्रीमती सुषमा स्वराज (विदिशा): अध्यक्षा जी, आज जिस विषय पर शरद भाई ने नोटिस दिया है, वह विषय गरीबों के प्रति इस सरकार की संवेदनहीनता को बहुत मुखरता से उजागर करता है। आपको याद होगा कि कुछ दिन पहले इसी सरकार ने एक हलफनामा देकर सुप्रीम कोर्ट में यह कहा था कि शहर में 32 रुपये कमाने वाला और देहात में 26 रुपये कमाने वाला व्यक्ति गरीबी रेखा को पार कर जाता है। उसका अर्थ था कि यदि शहर में रहने वाले एक नवयुवा को पांच हजार रुपये की नौकरी मिल जाए और उसके कंधों पर दो बूढ़े मां-बाप, एक पत्नी, एक बच्चा और एक अपना, कुल मिलाकर पांच लोगों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी हो, तो वह व्यक्ति इस सरकार की आंख में अमीर हो जाता है।
आपको शायद याद हो, जब मैं महंगाई पर चर्चा कर रही थी...( व्यवधान) जब मैं इस सदन में महंगाई पर चर्चा कर रही थी, तो मैंने इस आंकड़े को और ज्यादा ब्रेक-अप करके आपके सामने रखा था और यह कहा था कि इससे 100 ग्राम चावल, 20 ग्राम दाल, एक चुटकी नमक और 10 दाने चीनी किसी भी व्यक्ति को मुहैया होती है। अगर सरकार समझती है कि इतना मिलने वाला व्यक्ति अमीर है तो सरकार की बुद्धि पर मुझे तरस आता है। हम लोग सोचते थे कि मेरी उस बात को सरकार गंभीरता से लेगी और उसे संदर्भ बनाते हुए उस आंकड़े को सुधारेगी। लेकिन हुआ है जले पर नमक छिड़कने का काम। हिन्दी की एक कहावत है - चौबे जी छब्बे बनने गए थे दूबे बनकर रह गए। जो गरीब इनके द्वार पर रोने गया था और कहने गया था कि 32 और 26 का आंकड़ा मेरे लिए बहुत कम आंकड़ा है। इसे सुधारकर थोड़ा बढ़ाओ। उसे चार-चार रुपये घटाने का काम इस सरकार ने किया। 32 से 28 कर दिया, 26 से 22 कर दिया।...( व्यवधान)
अभी शरद भाई प्लानिंग कमीशन को दोष दे रहे थे। मैं कहना चाहती हूं, प्लानिंग कमीशन को दोष क्यों देना? दोषी तो यह सरकार है। कमीशन तो रिपोर्ट देते हैं, कमेटियां भी रिपोर्ट देती हैं। स्वीकार कौन करता है? जो स्वीकार करता है, असली दोषी वह है। इसीलिए मैंने तब भी यह बात कही थी कि प्लानिंग कमीशन अपना काम करेगा। प्लानिंग कमीशन हमारे समय में भी था, लेकिन उसके चेयरमैन प्राइम मिनिस्टर होते हैं। आप जिसका नाम ले रहे हैं, वह डिप्टी चेयरमैन है, अध्यक्ष प्राइम मिनिस्टर हैं। आप प्लानिंग कमीशन की तरफ चीजें मोड़कर सच्चाई से मुंह मोड़ रहे हैं, असली दोषी को बरी कर रहे हैं। अध्यक्षा जी, असली दोषी यह सरकार है जिसने इस आंकड़े को स्वीकार किया है कि शहर में रहने वाला, 28 रुपये कमाने वाला और देहात में रहकर 22 रुपये कमाने वाला व्यक्ति इस सरकार की निगाह में अमीर है। उसके कारण यह आंकड़े देते हैं और अपनी पीठ थपथपाते हैं कि गरीबी कम हो गई। जब आपने आंकड़ा कम कर दिया तो गरीबी कम होनी ही है। लेकिन मैं कहना चाहती हूं कि एक तरफ यह सरकार महंगाई बढ़ाती जा रही है, दूसरी तरफ गरीबी के मानक घटाती जा रही है। इस द्वन्द के बीच गरीबी खत्म नहीं हो रही, गरीब खत्म हो रहे हैं।...( व्यवधान) अगर इस तरह से गरीब को खत्म करके आप आंकड़ा देना चाहते हैं, तो आप किसी की आंख में धूल झोंक सकते हैं, लेकिन जब चुनाव का सामना करना पड़ता है तो गरीब सामने आकर खड़ा होता है और पूछता है कि बताओ मेरे लिए क्या किया। यहां यूपीए की चेयरपर्सन बैठी हैं, प्रधान मंत्री जी नहीं बैठे हैं। लेकिन उनका अपना एक रुतबा है, उनका एक अपना दबदबा है। अगर वह सरकार को यह कहें कि इस आंकड़े को आप रिजैक्ट कर दीजिए तो प्लानिंग कमीशन भी कुछ नहीं कर सकेगा। वह आंकड़ा रिजैक्ट होगा। इस देश में सही आंकड़ा आना चाहिए। जिस आंकड़े के आधार पर गरीबी को नापा जाए, उसी के आधार पर गरीब को नापा जाए और फिर उस गरीब के लिए स्वास्थ्य, पढ़ाई, खाने, रहने, पहनने की व्यवस्था की जाए। इस 28 और 22 रुपये में खाना, पहनना, रहना, दवाई, पढ़ाई सब शामिल है। आप स्वयं उस वर्ग की पीड़ा जानती हैं। आप बताइए कि क्या शहर में 28 रुपये कमाने वाला और 22 रुपये देहात में कमाने वाला व्यक्ति पढ़ाई, दवाई, रहने, खाने, पहनने की व्यवस्था कर सकता है?
अगर आपका जवाब है कि हां, कर सकता है, तो मुझे कुछ नहीं कहना, वर्ना मैं चाहूंगी कि आप भी सदन के स्वर मे स्वर मिलाते हुए इस सरकार को आदेश दीजिए कि इस आंकड़े को रिजैक्ट करे और सही आंकड़ा लाकर गरीबों की गणना करे। इतना ही मुझे कहना है।
श्री मुलायम सिंह यादव (मैनपुरी): अध्यक्ष महोदया, आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। माननीय शरद यादव और नेता प्रतिपक्ष ने यहां बहुत सारी बातें कहीं। मैं उन बातों को दोहराना नहीं चाहता, लेकिन ये आंकड़े किस आधार पर देश के सामने रखे गये, इसे मैं नहीं समझ पाता हूं। एक आंकड़ा ऐसा भी था, जो आज का नहीं, बल्कि दो- तीन साल पुराना है। वह अभी तक ठीक हुआ नहीं, जो आज करेंगे। आम तौर पर माना जाता है कि आज 65‑70 फीसदी लोग गरीबी रेखा से नीचे हैं। आप 27 कहिये या 28 कहिए। आज 65 फीसदी ऐसे लोग हैं जिन्हें दोनों समय साग-सब्जी के साथ भरपेट खाना नहीं मिलता। वे फल नहीं खा सकते, दाल नहीं खा सकते, दूध नहीं पी सकते, मट्ठा-दही नहीं ले सकते। ऐसे 65 फीसदी लोग हैं। हम 65 फीसदी लोगों को गरीबी रेखा से नीचे मानते हैं, तो इसे सब मानेंगे, यहां बैठे लोगों में से बहुत सारे लोग मानेंगे। यह लिखा-पढ़ी एवं कागजी आंकड़ों से नहीं होगा। अगर ऐसा है, तो क्या आपको पता है कि आपके ही इलाके के बगल में, ओड़िशा के कुछ इलाकों में लोग पत्ता खाकर जिंदा रह रहे हैं, घास खाकर जिंदा रह रहे हैं। किसको पता है? इस बारे में ओड़िशा के लोग बता सकते हैं, मध्य प्रदेश के लोग भी बता सकते हैं। ...( व्यवधान)
श्री गणेश सिंह (सतना): बांस की जड़ खाकर लोग जिंदा हैं। ...( व्यवधान)
श्री मुलायम सिंह यादव : हम बता रहे हैं। क्या आपको यह पता है? प्लानिंग कमीशन में जो लोग बैठे हैं, क्या उनको पता है? उनको बस इतना ही पता है कि एयरकंडीशन में बैठे हैं और बातचीत करके, खाना‑पूर्ति करके चल देना है।...( व्यवधान) एयरकंडीशन में बैठकर गरीबों की संख्या पर बहस करनी है। अभी जो दिखाई दे रहा है, क्या यह सीन पूरे देश का है? पूरे देश में अभी तक, आपको पता होना चाहिए कि कितने लोगों के पास कच्चे मकान हैं? अभी तक बहुत से लोगों को बिजली तक नहीं मिली। ...( व्यवधान) खाना तो दूर रहा, शुद्ध पीने के पानी का भी इंतजाम नहीं है। 70 फीसदी लोगों के लिए शुद्ध पानी का इंतजाम नहीं है। शुद्ध पानी मुश्किल से 15-20 परसेंट लोग पी रहे हैं। ...( व्यवधान) 17 परसेंट लोग शुद्ध पानी पीते हैं। हम वही बता रहे हैं कि 15-20 परसेंट लोग शुद्ध पानी पीते हैं और सब गंदा पानी पी रहे हैं। हम भी लोक सभा में गंदा पानी पीते हैं। आप अभी टैस्ट करा लो, यह पानी गंदा है। ...( व्यवधान) आप टैस्ट कर लीजिए। बोतल में भर कर टैस्ट कर लीजिए, तो आपको पता चल जायेगा। बहुत से घरों मे लोगों ने शुद्ध पानी का इंतजाम किया हुआ है, लेकिन गरीब कहां से इंतजाम करेगा। आज शुद्ध पानी नहीं मिल रहा है। आपकी यह हालत है। आप 22, 26 या 28 जो भी रुपया पैमाना रखते हैं, उससे गुजारा कैसे होगा। आप नाश्ता करके देख लीजिए। आप किसी दुकान पर नाश्ता करने चले जाइये, तो आपको 32 रुपये में नाश्ता नहीं मिलेगा। ...( व्यवधान) नहीं मिलेगा। सौ रुपये से ऊपर का तुंत बिल आ जायेगा। आप 22, 26, 28 या 32 रुपया पैमाना तय कर रहे हैं। हम शरद यादव जी की इस बात से बिल्कुल सहमत हैं कि प्लानिंग कमीशन में जो लोग बैठे हैं, वे देश के साथ विश्वासघात कर रहे हैं, देश को धोखा दे रहे हैं। ये आंकड़े देकर, देश में वर्तमान सरकार में अपनी स्थिति अच्छी कर रहे हैं। दुनिया के लोगों के सामने यह अपना प्रमाण पत्र दे रहे हैं। उन लोगों को यह यानी विदेशियों को दिल्ली दिखा देते हैं। आप उन्हें किसी तरह से गांव दिखा दीजिए। आप अपने इलाके के गांव दिखा दीजिए और हम अपने इलाके के भी गांव दिखा देंगे। जो लोग विदेश से आते हैं, उन्हें बढ़िया-बढ़िया से कार्पेट बिछाकर, लाल कार्पेट बिछाकर चारों तरफ दिखा दिया जाता है। इस तरह के भवनों में ठहरा दिया, होटल मे ठहरा दिया, खाना खिला दिया, बस हिन्दुस्तान की यही तस्वीर हो गयै। हिन्दुस्तान की असली तस्वीर यह है कि 65‑70 फीसदी लोग गरीब हैं। मैं दावे के साथ कह रहा हूं कि यहां पूर्व में जो सर्वे कराये गये, वह सर्वे अभी भी हो रहा है, उससे पहले ही आपने कैसे निर्णय ले लिया? अभी तो सर्वे पूरा हुआ ही नहीं है। ...( व्यवधान) जब सर्वे चल रहा है और उस सर्वे की रिपोर्ट नहीं आयी, तो उससे पहले आपने कैसे और किस आधार पर यह निर्णय कर दिया? इसकी जरूरत क्या थी और क्यों कर दिया? ...( व्यवधान) आप इसे वापस लीजिए। यह मामला केवल आपका ही नहीं है। बल्कि इस सबका है, पूरे देश का है, हम सत्ता पक्ष के खिलाफ नहीं हैं। सत्ता पक्ष के जो गलत काम हो रहे हैं, हम उसके खिलाफ हैं।
गरीबों को धोखा दिया जा रहा है। आज बीमारियां क्यों ज्यादा बढ़ रही है? लोगों को खाना पूरा नहीं मिल रहा है, क्या सबको दूध मिल रहा है, क्या सब अण्डा खा रहे हैं, क्या सभी को अरहर की दाल मिल रही है? दाल भी नहीं मिल रही है। आज कम से कम 65 फीसदी लोग ऐसे हैं जिनको अरहर की दाल के साथ खाना नहीं मिलता है। अरहर की दाल का नाम मैंने इसलिए लिया है कि गरीब का सबसे अच्छा भोजन हो जाएगा, अगर अरहर की दाल मिल जाए। अरहर की दाल में ऐसे गुण हैं कि अगर वह उसे मिल जाए, तो वह स्वस्थ रह सकता है, काम कर सकता है। जो लोग फावड़ा चलाते हैं, मजदूरी करते हैं, सड़क पर काम करते हैं, नहरों की सफाई करते हैं, आप बताइए कि इतनी मेहनत करने के बाद उनको आप कितनी मजदूरी देते हैं और उनके परिवार में कितने लोग होते हैं? आप यही मानकर चलिए कि हर परिवार में पांच लोग हैं, तो कैसे गुजारा हो सकता है। यह बात समझ में नहीं आ रही है कि किस आधार पर सरकार ने इसे स्वीकार किया। फिर ऐसे लोगों के खिलाफ कुछ न कुछ कारवाई करना चाहिए जिन्होंने यह रिपोर्ट दी है, जिन्होंने धोखा सरकार को दिया है, जिन्होंने धोखा गरीबों को दिया है, जिन्होंने धोखा देश को दिया है। सरकार में बैठे जो लोग हैं, इनको तब पता चलेगा जब यह चर्चा घर-घर, गांव-गांव होगी, शहरों में चर्चा होगी। शहरों में भी गरीब हैं। शहर में गंदी नालियों के पास रहते हैं लोग, क्या है इनको पता? इसी दिल्ली के अंदर नालियों के किनारे बदबू में बैठे हुए हैं, कोई मकान नहीं, कोई झोपड़ी नहीं, कहीं से कुछ फटा-पुराना कपड़ा लाकर बना लेते हैं, कुछ कागज रख लेते हैं, रात को कागज पर सोते हैं। यह स्थिति हमने देखी है। कागज पर सोते हैं और उनके लिए अगर यह किया जाएगा, तो यह गरीबों का बड़ा उपहास होगा, अतः आपको इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए। यह कोई राजनैतिक सवाल नहीं है, यह मानवता का सवाल है, देश के साथ धोखा है। दुनिया के सामने गलत आंकड़े पेश करके ये लोग अपनी छवि बनाना चाहते हैं, कर्जा लेना चाहते हैं। क्या कर्ज से देश चलेगा? कब तक चलेगा? अगर हमारे गांव वालों, जो गरीब और किसान लोग हैं, उनको सुविधा दे दी जाए, तो जितना विदेशी कर्जा है, वह माफ हो जाएगा, अगर किसानों को सुविधा दी जाए तो? और आप उन्हीं गरीबों पर हमला करें, चाहे वे खेतिहर मजदूर हों, चाहे खेती वाले हों, इसलिए आपसे अपील है, आपसे विनम्र प्रार्थना है कि इसको पास नहीं किया जाए और प्लानिंग कमीशन में जितने लोग बैठे हैं, उनको निकाल बाहर किया जाए।
डॉ. बलीराम (लालगंज): धन्यवाद अध्यक्ष जी, आपने मुझे इस मुद्दे पर बोलने का मौका दिया।
आज हम लोग जो चर्चा कर रहे हैं कि बीपीएल का मानक क्या है जिसको योजना आयोग ने दिया है। मैं आपसे कहना चाहता हूं कि यहां हमारे जितने भी माननीय सांसद चुनकर आए हैं, सब के क्षेत्र में आप जाकर देखें, तो गरीबों के वोट से ही जीत करके आते हैं और वे अच्छी तरह से गरीबी को जानते हैं। योजना आयोग ने जो मानक बताया है कि देहातों में 22 रुपये और शहरों में 28 रुपये पर कोई अपना गुजर-बसर कर सकता है, चाहे देहात हो, चाहे शहर हो, इस मानक के आधार पर आपको एक भी गरीब नहीं मिलेगा। इस मतलब यह है कि किसी को भी बीपीएल कार्ड नहीं दिया जाना चाहिए, न कोई बीपीएल की सूची में आएगा और हम दुनिया के देशों में यह कहेंगे कि भारत ही ऐसा देश है, जहां पर कोई भी बीपीएल व्यक्ति नहीं है, कोई गरीब नहीं है। इसलिए हम आपके माध्यम से सरकार से मांग करना चाहते हैं कि यह गरीबों के ही साथ नहीं, बल्कि इस देश के साथ एक क्रूर मजाक है, इसलिए योजना आयोग ने ऐसी जो रिपोर्ट दी है, उसको तत्काल वापस करना चाहिए। गरीबी तो इस सदन में बैठे हुए लोग जानते हैं। क्या इस रिपोर्ट को ये लोग नहीं दे सकते हैं? सदन में इस पर चर्चा कराइए, इस पर बहस कराइए कि वास्तविक रूप से गरीबी आज किस हद तक बढ़ रही है, गरीबों की संख्या कितनी है। सही आंकड़ा ये लोग दे सकते हैं।
योजना आयोग के सदस्य अपने बड़े-बड़े बंगलों में बैठकर आपको रिपोर्ट देते हैं और सरकार उसे सही मानकर लागू भी कर रही है। हम कहना चाहते हैं कि बीपीएल की भी गणना होनी चाहिए। इसी सदन में तमाम सदस्यों ने सवाल उठाया था कि जाति आधारित गणना होनी चाहिए, जो कि अभी तक लम्बित है। हमारा इसमें यह कहना है कि बीपीएल की भी इसके साथ गणना होनी चाहिए। इसलिए हम सरकार से मांग करते हैं कि वह तत्काल इसे कराए।
SHRI BASU DEB ACHARIA (BANKURA): Madam, I condemn the effort of the Planning Commission to use* method to under-estimate poverty in our country. There was national outrage when the Planning Commission filed an Affidavit in the Supreme Court. It was stated that if the income of a person is Rs.32 per day in urban area and Rs.26 per day in rural area then he will not be treated as poor. If his earning is one paisa more than Rs.32 or Rs.26, he is not considered as poor. This was discussed in this House and the Leader of the Opposition elaborately stated how a person, I am not talking of a family, can subsist with this income. शरद यादव जी ने कहा कि एक आदमी का या पूरे परिवार का है, यह साफ नहीं बताया है।
श्रीमती सुषमा स्वराज : एक आदमी का है।
श्री बसुदेव आचार्य: यह एक आदमी का है।...( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: Nothing except what Shri Basudeb Acharia says will go on record.
(Interruptions)* SHRI BASU DEB ACHARIA : How can a person subsist with this income which has now been reduced further? In spite of national outrage same methodology, which was adopted by Tendulkar, has been adopted by the Planning Commission. The basis of this methodology is intake of calorie. I would say that it is not a scientific basis. In order to show there has been substantial reduction of poverty in our country, the Planning Commission has deliberately adopted Tendulkar method and has now further reduced the poverty line in both urban and rural areas.
Madam, today when prices of almost all the commodities are rising, inflation is more than 8 per cent. In the last week of February the inflation touched 8 per cent mark. कैसे एक आदमी 22 रुपए में ज़िंदा रह सकता है, कोई बताए? क्या सरकार बता सकती है?
MADAM SPEAKER: Please conclude now.
SHRI BASU DEB ACHARIA: Dr. Arjun Sengupta Committee in its last Report stated that even after 63 years of Independence 77 per cent of the population of our country is to depend on Rs.20 per day. 20 रुपए रोज में हमारे देश में 77 फीसदी आबादी को जीवनयापन करना पड़ रहा है। देश में गरीबी बढ़ रही है।
MADAM SPEAKER: Basudeb Acharia ji, please conclude now.
SHRI BASU DEB ACHARIA: Poverty has been increasing substantially during the two decades of neo liberal economic policy which is being pursued by the Planning Commission. प्लानिंग कमीशन किस तरह से इस नतीजे पर आ रहा है और जस्टिफाई कर रहा है? I saw yesterday that Deputy Chairman of the Planning Commission was justifying to what has been stated by the Planning Commission with regard to the poverty in our country. If, a Deputy Chairman has been brought from the World Bank and he was made the Deputy Chairman of the Planning Commission, then what information and knowledge he has about the poverty in rural areas, which is existing today. उनको हमारे देश के बारे में क्या मालूम है? हमारी मांग है कि इस सदन में इस पर चर्चा होनी चाहिए। यह जो उन्होंने बताया है कि 26 और 22 रुपये, यह हमारे देश के गरीबों का अपमान है। हम चाहते हैं कि सरकार इस पर तत्काल बयान दे और बयान देकर इसे वापस ले। The Government should make a statement on the floor of the House and should withdraw that what has been stated by the Planning Commission with regard to the poverty in our country. हमारी मांग है कि डिप्टी चेयरमैन प्लानिंग कमीशन से उस समय भी हमने आपत्ति जताई थी जब उन्होंने इसे बनाया था। ऐसी रिपोर्ट होनी चाहिए कि हमारे देश में जो 77 प्रतिशत गरीबी है और उसे 20 रुपये में गुजारा करना पड़ रहा है तो 77 प्रतिशत गरीबी का विभाजन हो रहा है। Now, the Government is dividing the poor of our country. फूड-सिक्योरिटी बिल लाकर फिर गरीबों का विभाजन प्रीओरिटी और नॉन-प्रीओरिटी बताकर किया जा रहा है। हम इसकी निंदा करते हैं। इसे आप वापस लें। अभी सोशिओ-इकोनॉमिक सर्वे चल रहा है, उसका क्या नतीजा हुआ। ...( व्यवधान)इसकी हम निंदा करते हैं और सरकार इसे तत्काल वापस ले।
MADAM SPEAKER: It is not going on record.
SHRI BHARTRUHARI MAHTAB (CUTTACK): Thank you, Madam Speaker. I quote which Shri Montek Singh Ahulwalia, Deputy Chairman has stated.
“Poverty data is faulty but we have not fudged numbers.” The Planning Commission’s Deputy Chairman is on record stating that the poverty data is faulty but we have not fudged numbers. While explaining it, he comes out with the statement that the discrepancy between the consumer survey on whose basis the poverty numbers were derived and national accounts was a serious statistical problem.
So, what I have heard from my lawyer friends – many of them are present here – is that when you do not have a case, you shout in a very hoarse manner before the court, and you thud the desk in a very harsh manner; and still if the court does not respond to your case, then you try to confuse.
I am really astonished to see how the Planning Commission is confusing the whole country. In another newspaper a statement has come regarding an argument about which Shri Basudeb Acharia has just now said.
“The poverty line was meant to reflect conditions of ‘absolute poverty’ in the country. This poverty line is not the line that we think a person can comfortably survive. The poverty line has been identified as a rock-bottom, bare subsistence kind of line. ” How the Planning Commission has arrived at this decision?
MADAM SPEAKER: Please conclude. We have a long list of speakers. Do not repeat yourself too much.
श्री भर्तृहरि महताब: 26 रुपए रोजाना पर 35 करोड़ आबादी अपना गुजारा कर रही है और 28 रुपए प्रतिदिन कमाने वालों को सरकार गरीब नहीं समझती है। We need a statement from this Government. Do they believe in this?
MADAM SPEAKER: All right. Thank you so much. Now Shri Prabodh Panda to speak.
… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: This is not a proper debate. You could just associate yourself. We have to take up the debate on Railway Budget.
श्री भर्तृहरि महताब: पहले 26 रुपया और 32 रुपया पैमाना था, अब आयोग कह रहा है कि गांवों में 23 रुपए और शहरों में 29 रुपए रोज खर्च करने वाले लोग गरीब नहीं हैं। यह गरीब के साथ मजाक नहीं है, तो और क्या है? These are destitution lines and it is* ... that an Institution chaired by the Prime Minister should produce such absurd figures. What is more shocking is that even with these gross under-estimates, large proportions of our population are shown to live in destitution.
Dr. Ahluwalia has said:
“The discrepancy between the consumer survey on whose basis the poverty numbers are derived and national accounts were a serious statistical problem.” The Planning Commission has tried to obfuscate data so as to justify the exclusion of a large number of poor and deny them the benefits of anti-poverty and welfare measures.
MADAM SPEAKER: Please conclude now. We cannot have such a long speeches.
SHRI BHARTRUHARI MAHTAB: Therefore, I demand that the Government should come out with a statement as quickly as possible and let us know what is the actual fact and where the Government stand.
SHRI PRABODH PANDA (MIDNAPORE): Madam, I have given a notice today for suspension of the Question Hour because the entire country is very much concerned about the statement made by the Deputy-Chairperson of the Planning Commission.
It is very shocking that despite widespread protests from all corners across the country, he has made such a statement. I am not going to name him. But he thinks himself to be above Parliament. I do not know whether we are in a parliamentary democracy or we are running in a State which is ruled by the Deputy-Chairperson of the Planning Commission. So, it is very deplorable and it is very condemnable.
Madam, everybody knows that our hon. Prime Minister is the Chairman of the Planning Commission. So I demand that no other person but the Prime Minister himself should make a statement in the House in this regard. Why is the Deputy-Chairperson of the Planning Commission allowed to make such statements? These statements are made for reducing the entitlement of the poor people who are in crores.
MADAM SPEAKER: Please conclude now.
SHRI PRABODH PANDA: The National Advisory Council Chairperson is here. They are thinking over it. The Tendulkar Committee Report is there. Dr. Arjun Sengupta Report is there. Saxena Report is there. So far as the Food Security Bill is there, it is under the scrutiny of the Standing Committee. In such a situation, why is he making such a statement? He should be withdrawn from the Planning Commission and the Prime Minister should make a statement in this House in this regard.
SHRI T.R. BAALU (SRIPERUMBUDUR): Madam, the decision of criteria for BPL is the kingpin of our planning. It is the most important criteria for all the planning which we are going to have. The 12th Plan is in the offing and it is going to start shortly.
For the past so many years BPL list has not been decided. Even the State Governments are suffering because of this. Whenever they go for any scheme or any plan, they fail because of the indecision in the BPL criteria. It has to be decided. At the same time, the bureaucrats, the economists and the Planning Commission, they are all theorists. They think and do something taking into account so many criteria in the field of economics. The real thing will come out only from the elected representatives, especially from the Members of the Lok Sabha. What I suggest is that let the Planning Commission come forward with their data, their inputs whatever they have received. Probably the inputs that they have received to decide the criteria would have been drawn. I am very glad that the hon. Chairperson of the UPA is present here when this discussion is being held, it is better to see that the Planning Commission will come forward to have a presentation before some of the economists or some of the senior most MPs of all the parties… (Interruptions)
SHRI UDAY SINGH: The whole of Lok Sabha should be involved… (Interruptions)
SHRI T.R. BAALU : It is not possible… (Interruptions)
SHRI UDAY SINGH: Let us a find a way… (Interruptions)
SHRI T.R. BAALU: Whatever it is. I am only bringing the things before the Government. Let the Government react to that. What I suggest is that let it be open and it should not be secretly held with the Planning Commission alone. Let us also understand as to what all inputs they have received and finally let there be a Parliamentary Committee so that it can decide together. It can help the Government which would help to propose proper criteria for BPL.
श्री अनंत गंगाराम गीते (रायगढ़): अध्यक्ष महोदया, जो गरीबी रेखा के मापदंड प्लानिंग कमीशन ने तय किये हैं और जो खबरें अखबारों में आई हैं, उससे यह पूरा सदन नाराज है। पूरा सदन इन आंकड़ों से सहमत नहीं है। ग्रामीण क्षेत्र में जो रहने वाला है, यदि वह 22 रुपये कमाता है तो वह गरीबी रेखा के ऊपर है या शहरों मे रहने वाला यदि 28 रुपये रोजाना कमाता है तो वह गरीबी रेखा के ऊपर है। वास्तव में इस प्रकार से गरीबी का आकलन करना मैं नहीं समझता कि सरकार सचमुच चाहती है कि देश का जो गरीब व्यक्ति है, वह गरीबी रेखा के ऊपर आए। यदि सचमुच देश की गरीबी को कम करना है या गरीब को गरीबी रेखा के ऊपर लाना है तो सबसे पहले उसका सही आकलन होने की आवश्यकता है और जो आकलन नियोजन आयोग ने किया है, यदि सरकार इस बात को स्वीकार करती है तो यह गरीब का सरासर मजाक है बल्कि मैं कहूंगा कि गरीबी का मजाक है और यह कहना कि अब गरीबी कम हो गई, हम गरीबी रेखा के ऊपर आए हैं और सरकार यदि इसी में अपने आप को खुश मानती है और अपनी पीठ थपथपाती है तो यह देश के गरीबों के साथ नाइंसाफी होगी।
अध्यक्ष महोदया: धन्यवाद। अब बैठ जाइए। देखिए, 100 से भी ज्यादा लोग रेलवे बजट पर बोलना चाहते हैं।
श्री अनंत गंगाराम गीते:अध्यक्ष जी, मैं केवल एक सुझाव देना चाहता हूं।
अध्यक्ष महोदया : अच्छा ठीक है, जल्दी से सुझाव दीजिए। अब तक सुझाव क्यों नहीं दिया?
श्री अनंत गंगाराम गीते:अध्यक्ष महोदया, केवल एक सुझाव देकर मैं अपनी बात समाप्त कर रहा हूं। यदि यह पूरा सदन जो नियोजन आयोग ने गरीबी रेखा के मापदंड 22 रुपये और 28 रुपये तय किये हैं, यदि यह सदन उससे सहमत नहीं है तो मैं यह आपके माध्यम से सुझाव देना चाहूंगा कि आपकी अध्यक्षता में आज एक रिजोल्यूशन यहां पास किया जाए कि यह जो मापदंड नियोजन आयोग ने 22 रुपये और 28 रुपये के तय किये हैं, यह सदन उससे सहमत नहीं है, इस प्रकार का रिजोल्यूशन यदि हम सदन से करें तो सचमुच सरकार यही मानसिकता मानती है।
DR. M. THAMBIDURAI (KARUR): Madam Speaker, we are all elected Members. We are all elected by the common man and poor people. We are regularly meeting them in our constituencies. Whenever we go to our constituencies, they are expecting certain benefits out of the welfare schemes of the Government. When they are approaching the Government, they are asked whether, as per the criteria, their names are in the BPL list or not. Most of the people are saying that their names are not included in the BPL list. This is what other Members have also said. This controversy is going on. The people are feeling that we, their elected representatives, are not fulfilling their demands. When this is the condition, the Planning Commission, the highest body of the country, is giving a statement that Rs. 28 is the figure to fix the poverty line in urban areas and Rs. 22 in rural areas. Is it a practical thing? What is the ground reality? We know the real position as elected representatives. If we go to any canteen or any other place, what is the price of any food item? We have to pay Rs. 40 even for a single dosa. What is happening in Parliament canteen is something different. We are getting all food items at subsidized rates. This has to be changed first. It is because not only Members but many others are enjoying and availing such facilities at the cost of common man. So, the subsidized rates of food items supplied by the Railway canteen should be stopped first of all and the real cost should be paid in the Parliament canteen also. When the common man is suffering outside, the elected people here are enjoying food articles at subsidized rates. Is it fair? This has to be thought over.
That is why, I am saying that the statistics given by the Planning Commission is not correct. It is misleading the country. Therefore, the Government should come forward with a statement that such statistics is not correct. The statistics which is already available is not reflecting the real situation. The Economic Survey and other documents are giving statistics but they are not real ones. The reality is that prices of all items are increasing. There is price rise in all areas. Inflation is just galloping. Therefore, I request the Government to come forward and give the real statistics to the House.
SHRI KALYAN BANERJEE (SREERAMPUR): Madam Speaker, the issue which has been raised is a longstanding debatable issue both in the field of Legislature and even in the field of Judiciary. Now, we are discussing the recommendation or the reflection of the assessment of the Planning Commission which has come up in respect of poverty line. I do not know the factors which have really been considered by the Planning Commission to reach the figure of Rs. 28 or Rs. 22. If all reasonable factors are being considered by the Planning Commission, no prudent person can arrive at a conclusion that Rs. 22 is the index of poverty line. Therefore, we request that the whole issue should be reconsidered by the Planning Commission with all relevant factors. It should not be done on imagination. They should consider the relevant data and decide on that basis.
Let them clarify one point. If a family consists of five persons and one person earns only Rs. 22, then will the other four persons be counted as BPL or not? That point has to be clarified.
I would request that the opinion of the Chief Ministers of all States should be called for, for the purpose of formulating the price level index. A relevant consideration is needed and a discussion at length is required for this purpose.
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह (वैशाली): अध्यक्ष महोदया, हाल ही में प्लानिंग कमीशन की गरीबों के आकलन के संबंध में रिपोर्ट आई है, इस पर लोगों का गुस्सा जाहिर है। मैं देख रहा हूं कि क्या हिसाब-किताब चल रहा है। गरीबी के आकलन की शुरुआत छठी योजना से है। लकड़ावाला कमेटी ने कैलोरी के बारे में बताया कि एक गरीब आदमी कम से कम कितनी कैलोरी खाता है और इस पर गरीब आदमी का आकलन हुआ। प्रति दिन आमदनी क्या होगी, इस आधार पर आकलन हुआ। वर्ष 2002 में 13 पैरामीटर पर अनुमान लगाया गया कि गरीबी का अनुमान क्या होगा। हाल ही में कुछ वर्षों से मैं देख रहा हूं कि पांच-छः कमेटियां बैठी।
इस तरह का विवाद पूर्व में कभी नहीं हुआ। हिंदुस्तान हमेशा गरीबी से जूझता रहा है और गरीबी हटाने की तरफ लोग जोर लगाए हुए हैं। लेकिन इस तरह का विवाद कभी नहीं हुआ। तेंदुलकर कमेटी, सक्सैना कमेटी, अर्जुनसेन गुप्ता कमेटी और प्लानिंग कमीशन अलग मंत्र पढ़ रहा है, इनका एनएसएसओ अलग मंत्र पढ़ रहा है। हम जानना चाहते हैं कि सरकार ने कौन सी रिपोर्ट को मान्यता दी है।
महोदया, अभी हाल ही में श्री मोंटेक सिंह अहलूवालिया का बयान आया है। इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट हुआ था ,िजसके कारण देश भर में बड़ा हंगामा मचा था कि यह क्या रिपोर्ट दे रहा है और गरीबी का कैसे आकलन कर रहा है। लेकिन उसके बाद फिर से अभी जो दो-तीन रोज पहले रिपोर्ट आई है, हमें ऐसा लगता है कि ये लोग.*.*. हैं, गरीब के साथ मजाक कर रहे हैं, अन्याय हो रहा है। जिस व्यवस्था में गरीबी का आकलन नहीं होगा, वहां गरीबी कैसे हटेगी। इससे तमाम गरीबी उन्मूलन की योजनाओं पर प्रश्नचिह्न लगता है। जो गरीबी का आकलन नहीं कर सके...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : अब आप समाप्त करिये।
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह : गरीबों के बारे में सही जानकारी दे सके, वह गरीबी कैसे हटायेगा,, आखिर गरीबी कैसे हटेगी? यह देश भर के गरीबों का सवाल है, इस मखौल को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। सरकार तुंत इस पर स्टैंड ले कि कौन रिपोर्ट के साथ है। योजना आयोग गरीबों के साथ क्यों इस तरह से मजाक कर रहा है। इस पर फैसला होना चाहिए और इस पर निर्णायक फैसला हो, अन्यथा इसमें युद्ध की संभावना है, गरीबों के लिए भीषण संग्राम होगा।
श्री अरुण कुमार वुंडावल्ली (राजामुन्दरी):मैडम, प्लानिंग कमीशन ने जो एफिडेविट सुप्रीम कोर्ट में फाइल किया था, उस एफिडेविट के बारे में चर्चा हो रही है और उस पर बहुत नाराजगी भी देखी गई है। मगर प्लानिंग कमीशन हमसे बड़ा नहीं है...( व्यवधान) आप मेरी बात सुनें। आप गरीबों के बहुत नजदीक हैं, लेकिन गरीबी से दूर हैं। अगर भारत में किसी ने गरीबी हटाने के लिए कुछ किया है तो इंदिरा गांधी जी और सोनियां गांधी जी ने किया है। ...( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: Nothing else will go on record.
(Interruptions)* श्री अरुण कुमार वुंडावल्ली (राजामुन्दरी):हम आंकड़ों के साथ अभी किसी भी डिस्कशन के लिए तैयार हैं। आप चाहेंगे तो डिस्कशन हो जायेगा। मैं कहना चाहता हूं कि हमें प्लानिंग कमीशन के द्वारा जो रिपोर्ट दी गई है, हमें उस रिपोर्ट पर डिफर होने का पूरा हक है, उस पर कोई ऐतराज नहीं है। लेकिन आप गुमराह करने की कोशिश मत करो। प्लानिंग कमीशन ने क्यों एफिडेविट दिया और क्या दिया। उसमें 32 रुपये और 26 रुपये का जो एफिडेविट दिया है, वह पर कैपिटा का दिया है। परंतु जब वह पर फैमिली का बन जाता है तो एक महीने में अर्बन का 4824 रुपये होगा और रुरल एरिया में 3905 रुपये होगा। ...( व्यवधान) उसी वक्त सुप्रीम कोर्ट में यह दिया गया ...( व्यवधान) This is what is given in the Supreme Court. If we want to differ with this, we have every right to do it. … (Interruptions)
MADAM SPEAKER: Nothing else will go on record.
(Interruptions) * श्री अरुण कुमार वुंडावल्ली: लेकिन आप ऐसी बात मत बोलिये कि प्लानिंग कमीशन को कुछ मालूम नहीं है, वह सिर्फ आंकड़ों से चलता है, फैमिली क्या होती है, फैमिली प्लानिंग कमीशन के मुताबिक होती है। हम लोक सभा के मैम्बर हैं, हम ग्राउंड लैवल के लोग हैं, हम उस पर बात करेंगे और कितना तय करना है। 40 करोड़ 75 लाख लोग बिलो पावर्टी लाइन हैं, ऐसा सुप्रीम कोर्ट ने कहा है। अगर 40 करोड़ नहीं बल्कि साठ करोड़ हैं, ऐसा कहकर हम क्या बहस करेंगे। उनका कोई पैरामीटर होगा, उस पैरामीटर से उन्होंने इसे बनाया है। वह भी क्लियर कट आया है कि पैरामीटर कहां से आया...( व्यवधान) आप मेरी बात सुन लीजिए। ...( व्यवधान) आपमें सुनने का दम होना चाहिए।
अध्यक्ष महोदया : आपकी बात आ गई।
श्री अरुण कुमार वुंडावल्ली: आप बोलते रहे और हम सुनते रहे। अब आप हमारी बात सुनो, क्या आप एक मिनट के लिए मेरी बात नहीं सुन सकते? यह एफिडेविट किसने दिया है। आप सच सुन नहीं पाओगे, सच को बर्दाश्त करना बहुत मुश्किल है। हम सच बोलते हैं तो आप सच को बर्दाश्त नहीं कर पाओगे, सच को सुन नहीं पाओगे। मगर एक बात मत भूलो ‘सत्यमेव जयते’, सच ही जीतेगा। अगर यहां बदलना है तो बदलेंगे, इसमें हमें कोई ऐतराज नहीं है।
13.00 hrs ....( व्यवधान) चर्चा हो जाएगी। ...( व्यवधान)मगर एक बात मत भूलो कि यह सुप्रीम कोट में क्यों लगा है? ...( व्यवधान) सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि यह कंडीशन तेंदुलकर कमेटी ने रिकंमेंड की है कि 20 रूपये में अर्बन और 15 रूपयें में रूरल में ...( व्यवधान) 2100 कैलोरी खाना खाने के लिए एक आदमी होगा कि नहीं। ...( व्यवधान)सुप्रीम कोर्ट ने यह पूछा है। ...( व्यवधान) योजना आयोग ने बोला कि यह काफी नहीं होगा। ...( व्यवधान) अभी का रेट 32 और 26 रूपये है। ...( व्यवधान)
श्री हंसराज गं. अहीर (चन्द्रपुर): आप गरीबों का मजाक क्यों बना रहे हैं? ...( व्यवधान) आप इसे जस्टीफाई क्यों कर रहे हैं। ...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप खड़े क्यों हो गए हैं, बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
श्री अरुण कुमार वुंडावल्ली: यह सच है। ...( व्यवधान) आप सच सुनना नहीं चाहते हैं। ...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप बैठ जाइए। आपकी बात पूरी हो चुकी है।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप आपस में यह क्या कर रहे हैं? आसन की ओर संबोधित कीजिए। आपकी बात पूरी हो गई है।
...( व्यवधान)
श्री अरुण कुमार वुंडावल्ली: आप ऐसा एक्ट मत कीजिए। ...( व्यवधान) आप ऐसा एक्शन मत कीजिए। ...( व्यवधान) हम गरीबों के साथ हैं। ...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आप आपस में क्यों बोल रहे हैं, आसन की ओर संबोधित कीजिए।
…( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: Please address the Chair.
… (Interruptions)
श्री अरुण कुमार वुंडावल्ली: मैं आंकड़े दे रहा हूँ। Do not try to give the impression that you are for the poor and we are anti-poor. It is not true. The entire country knows that we are always for the poverty elimination. … (Interruptions)
श्री अनंत गंगाराम गीते:आप योजना आयोग को जस्टीफाई कर रहे हैं। ...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : यह क्या हो रहा है? आप लोग आपस में संवाद क्यों कर रहे हैं? आप बैठ जाइए।
..( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: You have made your submission. All it is here what you are saying. Please take your seat.
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदया : कृपया बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदया : आपकी बात पूरी हो चुकी है, अब आप बैठ जाइए। वे भी बैठ गए हैं आप भी बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
MADAM SPEAKER: Will you take your seat? Will you sit down?
… (Interruptions)
MADAM SPEAKER: Please just take your seat.
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदया : गरीबी का जो मानक है, सदन में इसे ले कर गहरी चिंता है। मैं यह समझती हूँ, जो सभी ने कहा और जो हमारे सदन का स्वरूप है, हमें विशुद्ध रूप से गरीबों का पक्षपात करना है। जो भी चिंता हैं, मैं उसे समझ रही हूँ। मैंने शुरू में भी कहा था जब प्रश्न-काल स्थगन का नोटिस आया था। उसे तो मैं स्वीकार नहीं कर सकती हूँ। अगर आप नोटिस देंगे तो इस पर एक विस्तृत चर्चा अवश्य करवाएंगे।