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Lok Sabha Debates

Regarding Approval Of The Proclamation Issued By The President Under Article 356 ... on 25 February, 1999

NT> Title: Regarding approval of the proclamation issued by the President under article 356 of the Constitution in Relation to the State of Bihar. (Not Concluded) 14.48 hrs MR. DEPUTY-SPEAKER: The next item is the Statutory Resolution.

THE MINISTER OF POWER, MINISTER OF PARLIAMENTARY AFFAIRS AND MINISTER OF NON-CONVENTIONAL ENERGY SOURCES (SHRI P.R. KUMARAMANGALAM):

Mr. Deputy-Speaker, with your kind permission, before you call the Minister of Home Affairs to move the Resolution, I wish to state that originally, as decided in the Business Advisory Committee, as per the Report now adopted by the House, we were supposed to have the reply and voting tomorrow before taking up the Private Members' Business. But we have allotted only five hours.
Actually, we have taken a decision that we would try and complete the debate today and have the reply and the voting tomorrow before the Private Members' Business starts. But the calculation, after looking at the number of speakers and the allotted time shows that it does not seem to be possible, even if we sat late.
So, I have a proposal which I have put to the leaders of all parties and the Members, which I would like to submit, that tomorrow's Private Members' Business time may be shifted to -- it has been done in the past -- or postponed to the 4th March, in the next week.
SHRI NADENDLA BHASKARA RAO (KHAMMAM): Fourth March is a holiday in Andhra Pradesh and Karnataka.
MR. DEPUTY-SPEAKER: Let him speak.
SHRI P.R. KUMARAMANGALAM: That being the position, if that alone can happen, it would go on.
Otherwise the disadvantage is that the next week is the Holi week, in the sense that 1st, 2nd and 3rd of March are holidays. 5th is also a Private Members' day and attendance would be a difficulty for all of us put together because of various problems. Therefore, if I may suggest that either my proposal be accepted or we go on in the normal way whereupon we would not be able to close the debate tomorrow, and, we will close the debate the week after, maybe, 8th or 9th.
SHRI SHARAD PAWAR (BARAMATI): We can sit late tonight.
SHRI P.R. KUMARAMANGALAM: No. SHRI SHARAD PAWAR : We can sit tomorrow also. Tomorrow, the reply can be roundabout 4 o' clock or 4.30 or 5 o' clock.
SHRI P.R. KUMARAMANGALAM: Private Members' Business starts at 3.30 p.m. Statutorily, we do not postpone it.
SHRI SHARAD PAWAR : You can shift it to the next Friday.
SHRI P.R. KUMARAMANGALAM: That is what I suggested.
SHRI SHARAD PAWAR : Agreed.
SHRI P.R. KUMARAMANGALAM: It is shifted to 4th of March. I cannot shift to the next Friday. You cannot do anything with the Private Members' Business except shift it to a day which is a full working day.
SOME HON. MEMBERS: Let it be on 4th of March.
SHRI SHARAD PAWAR : All right.
SHRI P.R. KUMARAMANGALAM: That is what I proposed.
SOME HON. MEMBERS: Agreed.
MR. DEPUTY-SPEAKER: Now it seems the consensus is that the Private Members' Business will be shifted to 4th of March and then this matter will be finished tomorrow itself.
ग्ृाह मंत्री (श्री लाल कृष्ण आडवाणी): माननीय उपाध्यक्ष जी, मैं संकल्प पेश करता हूं: "यह सभा बिहार राज्य के संबंध में संविधान के अनुच्छेद ३५६ के अन्तर्गत राष्ट्रपति द्वारा १२ फरवरी, १९९९ को जारी की गई उदघोषणा का अनुमोदन करती है।" मान्यवर, कल मैंने इस बात का उल्लेख किया कि यह सरकार इस बात से सहमत है कि धारा ३५६ का उपयोग जब अनिवार्य लगे तभी करना चाहिए, सामान्य रूप से इसका उपयोग नहीं होना चाहिए और उपयोग भी हो तो संविधान निर्माताओं की मंशा को ध्यान में रखकर ही किया जाना चाहिए, किसी प्रकार की राजनीति से प्रेरित होकर नहीं किया जाना चाहिए। कल गोवा के संबंध में जो अध्यादेश था उसकी बहस के दौरान ही यह बात स्पष्ट हुई कि गोवा के विषय में कोई मतभेद नहीं था, कोई विवाद नहीं था और गोवा के संदर्भ में जो उदघोषणा राष्ट्रपति जी ने जारी की, उसके बारे में दलों के बीच विवाद नहीं था और आम जनता के बीच में भी गोवा या अन्यत्र कहीं विवाद नहीं था। मैं मानता हूं कि कल की उदघोषणा और आज जिस उदघोषणा पर बहस मैं आरम्भ कर रहा हूं उसमें बड़ा अंतर है। अंतर यह है कि इस उदघोषणा के संदर्भ में दलों में बहुत विवाद है लेकिन जनता में अधिक विवाद नहीं है।
... (व्यवधान)कल की उदघोषणा के संदर्भ में दलों में भी विवाद नहीं था और जनता में भी विवाद नहीं था, लेकिन आज की उदघोषणा के संबंध में मैं स्वीकार करता हूं कि दलों में मतभेद है, दलों में विवाद है, लेकिन जनता में अधिक विवाद नहीं है। मैं नहीं कहूंगा कि विवाद नहीं है। श्री मोहन सिंह (देवरिया): कया आपने सर्वे करा लिया है। श्री लाल कृष्ण आडवाणी: हां।
... (व्यवधान) श्री मोहन सिंह : आप इलेकशन हार गये हैं।
MR. DEPUTY-SPEAKER: No running commentary please. Let him speak, then, you can have your own chance. श्री लाल कृष्ण आडवाणी: मैंने कल ही कुछ हिंदी पेपरों में और कुछ अंग्रेजी पेपरों में एक सर्वे देखा, जिसको ऑपनियन पोल कहते हैं। उनसे यह सवाल पूछा गया कि कया बिहार में राष्ट्रपति शासन लागू करना उचित है या अनुचित है? तब ६७ प्रतिशत लोगों ने, जिनसे यह राय मांगी गई थी, कहा कि उचित है और शायद २४-२५ प्रतिशत लोगों ने कहा कि यह अनुचित है। मैं कोई अंतिम सत्य कहकर इस बात को प्रस्तुत नहीं कर रहा लेकिन किसी ने पूछा कि कया सर्वे किया गया तो मुझे लगता है और मैं मानता हूं कि बिहार में यह स्िथति होगी। यदि बिहार में हम इस प्रकार का सर्वे करेंगे तो शायद बहुत बड़ी संख्या में लोग कहेंगे कि यह उचित कदम था, इसके अलावा कोई दूसरा कदम संभव नहीं था ... (व्यवधान).. मैं अपने लोगों से अनुरोध करूंगा कि आप उनको सुनें, वे भी हमें सुनें। यह दो दिन की बहस एक प्रकार से तर्क-वितर्क होगी। सब अपनी अपनी बात रखें। इसलिये मेरा आप सबसे अनुरोध है कि शान्ितपूर्वक इस बहस को चलने दें। उपाध्यक्ष महोदय, बिहार की परस्िथति कोई अभी पैदा हुई, ऐसा मैं नहीं मानता। बिहार के बारे में काफी समय से लोगों में चिन्ता रही है। बिहार प्रदेश जनसंख्या की दृष्िट से हिन्दुस्तान का दूसरे नम्बर का राज्य है। इतना ही नहीं, जितने संसाधन इस प्रदेश में उपलब्ध हैं या मानव संसाधन या मैटीरियल संसाधन मिलते हैं, उतने सबसे बड़े प्रदेश में नहीं होंगे। जितने पुराने प्रशासक रहे हैं, वे कहते हैं कि १९५३ में श्री पौल ऐपल की अध्यक्षता में एक कमेटी बनी थी जिसने हिन्दुस्तान के सारे प्रदेशों में शासन कैसा है, इस बारे में अपना एक प्रतिवेदन कैबिनट सैक़ेटि्रएट को प्रस्तुत किया था। प्रस्तुत प्रतिवेदन में हिन्दुस्तान के राज्यों के प्रशासन की प्रशंसा की गई लेकिन बिहार ही एक ऐसा राज्य था जिसकी सबसे ज्यादा प्रशंसा की गई थी। अभी श्रीमती सुषमा स्वराज ने कहा कि रिपोर्ट में कहा गया है क Bihar is the best administered state in the country. मैं इस बात को खोज नहीं पाया। मैंने ढूंढने की कोशिश की लेकिन मुझे कहीं मिला नहीं।इसलिये इस बात की पुष्िट नहीं करूंगा लेकिन जानकारी यह मिलती है कि बिहार को एक अच्छा प्रशासनिक प्रदेश माना जाता रहा है। यह १९५३ की बात है लेकिन वहां से चलते चलते हम कहां आ पहुंचे हैं। उपाध्यक्ष जी, उपरोकत संदर्भ में हाई कोर्ट के एक जस्िटस महोदय थे जो बिहार के केस पर अपनी टिप्पणी दे रहे थे। शायद उनका नाम श्री बी.पी. सिंह था। जो भारत के ग्ृाह सचिव हैं, वे नहीं.. श्री सोमनाथ चटर्जी (बोलपुर) : उनका नाम श्री बी.पी. सिन्हा था। श्री लाल कृष्ण आडवाणी: जज के बारे में आप ज्यादा जानते हैं।
I stand corrected. उन्होने केस के समय यह कहा कि बिहार की जो दशा है, उसे देखकर कोई विचारवान् व्यकित या तो आत्महत्या करेगा या बिहार छोड़कर चला जायेगा।
These are observations from the Bench in an open court reported in the Press. इतना तो मैं उद्धरण दे सकता हूं। आप १९९८ का जजमेंट देख सकते हैं जिसे मैंने अखबारों में पढ़ा। बाकायदा यह जजमेंट में लिखा हुआ है कि इस प्रदेश में अब यह स्िथति पैदा हो गई है कि ऐसा लगता है कि यहां जानवर रहते हों।
as if animals are living there. That is the language that has been used in that particular judgement. माननीय न्यायधीश की ओर से औपचारिक निर्णयों के दौरान कही गई यह टिप्पणी कितनी गंभीरहै। बिहार की इस अवस्था पर हम सब लोग विचार करें।

15.00 hrs. यह स्िथति या यह सारी बहस या जो निर्णय है वह निर्णय किसी पार्टी के पक्ष में या किसी पार्टी के खिलाफ नहीं है। मैं मानता हूं कि यह निर्णय इस सरकार ने विशुद्ध बिहार की जनता के हित को ध्यान में रखकर लिया है। विशुद्ध बिहार के विकास की कल्पना को ध्यान में रखकर लिया है। विशुद्ध बिहार में कानून और व्यवस्था की स्िथति ठीक होने के लिए इस हिसाब से लिया है और कोई इसमें कंसिडरेशन मोटिवेशन सिवाय बिहार के हित के नहीं है। मैंने कहा कि यह स्िथति अचानक नहीं पैदा हुई है, १९९८ में ही पैदा नहीं हुई। सचमुच में तो पहला-पहला जो नरसंहार हुआ वह १९९७ में हुआ। हुए तो बहुत हैं मगर १९९७ में जो हुआ वह भयंकर था जिसमें ५८ या ६० दलित मारे गए। उसके बाद में और इसमें हमारे उस समय के मनिस्टर ऑफ स्टेट वहां पर गए। हमारे उस समय के ग्ृाह सचिव वहां पर गए। जितनी बात हुई या मेरे जो पूर्व अधिकारी ग्ृाह मंत्रालय के मंत्री रहे हैं, उन्होंने वहां की सरकार से वार्तालाप किया , मैंने वह सब देखा है। उस समय जो हमारे राज्यपाल थे, उन्होंने जो रिपोर्टस भेजीं उनको भी मैंने देखा है और उन सबमें इस बात की गंभीर चिन्ता प्रकट की गई है कि इसको रोका जाए और इसको रोकने के लिए जितनी सहायता केन्द्र से चाहिए, हम देने को तैयार हैं और सहायता दी भी गई, लेकिन स्िथति बिगड़ती गई, लगातार बिगड़ती गई। एक के बाद एक हत्याकांड होते रहे और कयोंकि इस सारी अराजकता की तह में जो एक प्रमुख समस्या है जिस समस्या को हमको पहचानना चाहिए, वह है बिहार राज्य में भूमि सुधार संबंधी कानूनों का ठीक प्रकार से कार्यान्वयन न होना। यह चूंकि प्रमुख कारण है और इस पर सब लोग सहमत हैं, मेरे से पूर्व जो सरकार थी, उनकी रिपोर्टस मैंने देखी हैं, उनकी सारी चर्चाएं देखी हैं। अगर वहां का खेतिहर मज़दूर है, उसके लिए मनिमम वेज तय किया गया कि उसको ३९.८० रुपये मिलने चाहिए या ४० रुपये मिलने चाहिए तो अधिकांश भूस्वामी उनको एक कौड़ी नहीं देते, पैसा नहीं देते और तीन किलो चावल देते हैं जिसकी कीमत जो मनिमम वेज नश्िचत है, उसके आधे से भी कम है। तो कैसी स्िथति होगी, इसकी कल्पना कोई भी कर सकता है। और कयोंकि खेतिहर मज़दूर अधिकांश दलित हैं, इसीलिए जितने सारे नरसंहार के कांड होते हैं, उसमें भुकतभोगी प्रायः दलित होते हैं, अधिक से अधिक दलित होते हैं। इन तथ्यों को समझकर इस समस्या को देखना चाहिए। कयों नहीं क़ियान्वयन हुआ? कयों कार्रवाई नहीं हुई? कल दूसरे सदन में जब इसकी चर्चा हुई प्रश्नकाल में तो रणबीर सेना का नाम आया। रणबीर सेना का नाम आते ही कहा गया कि रणबीर सेना ऐसी है, इस पोलटिकल पार्टी से संबंधित है। मैं तो सुनकर हैरान हुआ कयोंकि मेरी पार्टी का नाम लिया गया था, लेकिन मैंने कहा कि मैंने जानकारी की है और रणबीर सेना एक बैन्ड ऑर्गनाइज़ेशन है, इसको इल्लीगल घोषित किया गया है और इल्लीगल घोषित करने के बाद पहले भी आरोप लगे थे कि इस संस्था या संगठन का इसके साथ संबंध है। तो १९९७ में बिहार की सरकार ने रिटायर्ड हाई कोर्ट के जज जस्िटस अमीरदास की अध्यक्षता में एक आयोग गठित किया। उनको कहा गया कि छः महीने के अंदर आप इस बात की जानकारी करिये कि कौन राजनैतिक तत्व इसके साथ जुड़े हुए हैं। इस संस्था की ऐफलिएशन्स कया हैं, जिसके कारण इतने सारे हत्याकांड हो रहे हैं और दलितों को मारा जा रहा है। ये कौन लोग हैं? जानकारी करते हैं तो पता लगता है कि उसकी इस डेढ़ साल में एक मीटिंग भी नहीं हुई है, कयोंकि उनका काम ही शुरू नहीं हुआ। उनको दफतर नहीं दिया गया, उनको कुछ भी नहीं दिया गया। यह अकेले अमीरदास कमीशन की बात नहीं है। एक और कमीशन बनाया गया था, जब एक एम.एल.ए.मारा गया था। उनकी पत्नी इस सदन की सम्मानित सदस्या हैं और जब दो एम.एल.ए. मारे गये थे तो उनकी हत्या के बारे में भी एक कमीशन बनाया गया था। उसमें भी हाई कोर्ट का जज रखा गया, लेकिन उसकी भी वही दुर्दशा हुई, कोई प्रगति नहीं हुई, कोई मामला आगे नहीं बढ़ा। उसको कोई दफतर, कोई सुविधाएं, कोई स्टाफ नहीं दिया गया, हर एक मामले में वैसा का वैसा ही रहा। यहां तक कि ट्राइबल वैलफेयर काउंसिल का गठन करना आवश्यक है। वह संविधान के अधीन बनाया, उसको तीन साल हो गये,लेकिन उसकी कोई मीटिंग नहीं हुई, कोई कार्रवाई नहीं हुई। हर एक मामले में यही हुआ। कल बिहार की चर्चा के समय इस बात का उल्लेख कई माननीय सदस्यों ने किया, उनके द्वारा दो बातें कही गई, चर्चा तो गोवा की हो रही थी, लेकिन अनिवार्य रूप से बिहार का उल्लेख इधर से भी होता था और हमारी ओर से भी होता था। उसमें कहा गया कि गोवा में जो किया वह ठीक किया, वहां सरकार के पास बहुमत नहीं रहा, इसीलिए वहां राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया। लेकिन बिहार में जो सरकार थी, उसके पास बहुमत था, उसको कयों हटाया, बहुमत वाली सरकार को कयों बर्खास्त किया? दूसरी बात यह कही गई कि अगर किसी प्रदेश की कानून-व्यवस्था की स्िथति बिगड़ जाए, अपराधों की संख्या बढ़ जाए, अपराधी बढ़ जाएं, हत्याएं होने लगें, हिंसा होने लगे, कया धारा ३५६ लगाने का यह आधार है और अगर यह आधार है तो एक सदस्य ने कहा कि हिंदुस्तान में कितने प्रदेश बचेंगे जिनमें धारा ३५६ न लगानी पड़े। हर एक में धारा ३५६ लगानी पड़ेगी।

... (व्यवधान)

I am not yielding.

MR. DEPUTY-SPEAKER: Please do not interrupt him. Please take your seat. श्री लाल कृष्ण आडवाणी: किसी ने आसाम के बारे में कहा, किसी ने महाराष्ट्र का उल्लेख किया ... (व्यवधान)मैं तो आपके तर्क दे रहा हूं, जो तर्क कल बिहार के संदर्भ में उठाये गये थे कि धारा ३५६ लगाते हुए आपने यह बात भी ख्याल में नहीं रखी कि वहां पर सरकार को बहुमत प्राप्त है। गोवा में बहुमत नहीं था, लेकिन बिहार में तो बहुमत है, आपने इस बात को ध्यान में रखा कि यह अकेला बिहार नही है कि जहां तक कानून-व्यवस्था की स्िथति बिगड़ती जा रही है, हत्याओं और हिंसा की संख्या बढ़ती जा रही है और प्रदेश भी तो हैं। मैं इस बात से इंकार नहीं कर रहा हूं कि ऐसे और प्रदेश भी हैं। मैं इस बात से इंकार नहीं कर रहा हूं कि इस समय जो सरकार बिहार में थी, उसके बहुमत के बारे में किसी को संदेह नहीं था। लेकिन मैं इतना जरूर निवेदन करूंगा कि यह बात जो कभी-कभी धारा ३५६ के संदर्भ में कही जाती है कि इस सरकार को बहुमत प्राप्त है, अगर उस सरकार को बहुमत नहीं होता तो धारा ३५६ की कया जरूरत पड़ती। अगर बहुमत नहीं है तो धारा ३५६ की जरूरत पड़ने का सवाल ही नहीं है, वह सरकार ऐसे ही चली जाती। इसीलिए कभी-कभी जो बहुमत वाली बात कही जाती है, वह उचित नहीं है, कयोंकि धारा ३५६ में यह नहीं कहा गया है कि धारा ३५६ का उपयोग वहां किया जाए जहां पर सरकार अपना बहुमत खो दे, यह इसमें नहीं कहा गया है। इसमें यह कहा गया है कि जहां पर सरकार संविधान के अनुसार काम न कर रही हो, संविधान के प्रावधानों के अनुसार काम न कर रही हो ... (व्यवधान)उसी प्रकार से मैं कहता हूं कि मैं यह नहीं मानता हूं कि कहीं पर कानून-व्यवस्था की स्िथति खराब हो जाए तो एकमात्र कारण हो सकता है कहीं पर धारा ३५६ लगाने का, मैं इस बात से सहमत हूं -

"That deterioration in the law and order condition or increasing crime or increasing violence cannot be by itself any justification for invoking Article 356."

We are clear in our mind, absolutely clear. इसमें दो मत नहीं हैं, अलबत्ता जो बात मैं कहना चाहता हूं, मैंने कुछ बातों का उल्लेख किया है, मैं और कहना चाहता हूं कि धारा ३५६ बनाने के बाद वे सिर्फ धारा ३५६ तक ही सीमित नहीं रहे, बल्िक संविधान निर्माताओं ने उसके साथ-साथ धारा ३५५ भी बनाई और उसमें उन्होंने किसी को अधिकार नहीं दिया है, हमको अधिकार नहीं दिया है, ३५६ में हमें अधिकार दिया है, लेकिन ३५५ में जवाबदारी दी है। धारा ३५५ कहती है- "कि संघ का यह कर्तव्य है कि वह प्रत्येक राज्य की सरकार का इस संविधान के उपबंधों के अनुसार चलाया जाना सुनश्िचत करे"

"It shall be the duty of the Union to ensure that the Government of every State is carried on in accordance with the provisions of the Constitution." हमको लगता था कि यह जो दायित्व या जवाबदारी सरकार पर डाली गई है उसका निर्वाह करने के लिए जो स्िथति हम बिहार में देख रहे हैं, उसे हमें चुपचाप बैठकर नहीं देखना चाहिए, बल्िक हमको कुछ करना चाहिए।
... (व्यवधान) श्री मोहन सिंह (देवरिया): आपने उल्टा भाषण कर दिया।
... (व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: No running commentary please. श्री लाल कृष्ण आडवाणी: और यह टिप्पणी केवल सरकार नहीं कर रही है, इस टिप्पणी को दो-तीन बार पटना हाई कोर्ट ने किया है।
... (व्यवधान) श्री मोहन सिंह (देवरिया): उत्तर प्रदेश की हाइकोर्ट का भी एक जजमेंट है। ... (व्यवधान) श्री लाल कृष्ण आडवाणी: मुझे एक निर्णय ऐसा दिखा दीजिए कि कहीं किसी प्रकार का निर्णय हो, तो हम उसका नोटिस जरूर लेंगे।
... (व्यवधान) श्री मुलायम सिंह यादव (सम्भल): उत्तर प्रदेश हाइकोर्ट ने कहा है कि जंगल राज है।
MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Mohan Singh, you are a senior Member. Do not interrupt like this. श्री लाल कृष्ण आडवाणी: पिछले दिनों जब अजीत सरकार और ब्ृाज बिहारी जी की हत्या हुई थी, उसके बाद सेंट्रल ऑफीसर्स की एक टीम गई थी। उसकी रिपोर्ट में इस बात का उल्लेख किया गया है कि चिन्ता इस बात की है कि -
In Bihar, it is the State that harbours and patronises criminals instead of protecting people from them. चिन्ता की बात यह नहीं है कि अपराध बढ़ गए हैं या अपराधी बढ़ गए हैं, बल्िक चिन्ता की बात यह है कि अपराधियों को राज्य शासन का संरक्षण मिलता है। यह स्िथति संविधान के अनुरूप नहीं है। इसी कारण यह निष्कर्ष निकालना पड़ा। कोर्ट ने यह कहा कि हम शासन कैसे करें, हम तो शासन कर नहीं सकते।
... (व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Please stop these commentaries. श्री लाल कृष्ण आडवाणी: उपाध्यक्ष जी, एनक़ोचमेंट की चर्चा थी। उस संबंध में पटना हाईकोर्ट ने कहा कि-
15.14 hrs. (Mr. Speaker in the Chair) We have passed orders from time to time regarding the removal of encroachments, apart from the capital city of Patna in other cities, as there is large scale encroachment of public land, public roads, etc. Apart from impeding free flow of traffic, such encroachments generate a very large quantity of filth which makes life unhygienic and the people living in the localities, who are also respected citizens of the State, are compelled to lead a life of animals. If the authorities who are required to implement the orders of this court refuse or fail to implement the same, it would certainly amount to failure of the Constitutional scheme and to breakdown of the administration. इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी कहा कि-
"There is a designed effort on the part of the State authorities..." यह चार्ज है। जब इन्होंने देखा कि ३,३०० कन्टैम्पट केसेस से अधिक सरकार या सरकारी अधिकारी के खिलाफ पेंडिंग है तब उन्होंने कहा क "There is a designed effort on the part of the State authorities to defy the orders of the Court." डिजाइन ऐफर्टस, योजनाबद्ध रूप से शासन न्यायपालिका की अवमानना कर रहा है। न्यायपालिका की अवहेलना कर रहा है। उन्होंने कहा कि हमारे पास सरकार चलाने के लिए साधन नहीं हैं।
They said:
"We are not equipped for that. We are not expected to do that. The Constitution does not expect us to do that." ऐसी स्िथति में यह सरकार इस नतीजे पर पहुंची कि वास्तव में केन्द्र को इस स्िथति में हस्तक्षेप करना चाहिए। कल मैंने सरकारिया कमीशन ने पोलटिकल क़ाइसिस किसको कहा है, वह गोवा के संदर्भ में पढ़कर सुनाया था। इस स्िथति के बारे में आज सरकारिया कमीशन ने कया कहा है, मैं उसका थोड़ा उल्लेख करूंगा कयोंकि वह इसको इंटरनल सबवर्शन की संज्ञा देते हैं। कांस्टीटयूशनल ब्रेकडाउन ऑफ मशीनरी लेकिन इंटरनल सबवर्शन और उसका जो एकसप्लेन सरकारिया कमीशन ने किया है:
"where the Government of a State, although carried on by a Ministry, enjoys majority support in the Assembly, has been deliberately conducted for a period of time in disregard of the Constitution and the Law." इसकी पुष्िट मैंने अभी जो जजमैंट आपको पढ़कर सुनाया जिसमें कहा है कि अगर यह कन्टैम्पट केसिस आज तक पेंडिंग हैं तो "This is a deliberate design by the State Government to see that we are disregarded, the courts are disregarded, the Constitution is disregarded and the law is disregarded."

This is a judgment on the case of Arun Kumar Mukherjee Vs. State of Bihar.

SHRI SOMNATH CHATTERJEE : Which portion does it contain?

SHRI L.K. ADVANI: Contempt cases are not mentioned here. They are of a separate knowledge.

SHRI SOMNATH CHATTERJEE : Have they not referred to it?

SHRI L.K. ADVANI: No. श्री मोहन सिंह : गवर्नर की चिट्ठी में है। श्री लाल कृष्ण आडवाणी: है, वह केस तो पेंडिंग है।

But otherwise, he would not say `design'. Normally encroachments have not been removed but because he is fully aware of the whole position, therefore, he used the word `design'. And, I regard this an important judgment.

SHRI SOMNATH CHATTERJEE : It is a hopeless judgment. श्री लाल कृष्ण आडवाणी: राज्यपाल की रिपोर्ट के अनुसार १९९८ में कुल मिलाकर एकसट्रीन्यूअस वायलेंस की ५०० घटनायें हुई हैं जिसमें ६०० लोग मारे गये हैं। उसमें ५० पुलिस कर्मी थी और उसमें ज्यादातर दलित हैं। उसका कारण भूमि सुधार, भूस्वामी और एग्रीकल्चर लेबर हैं। उनके सारे संघषर्ों में दलित ही शिकार होते हैं। इस तथ्य को समझकर भारत सरकार ने कुछ महीने पहले भी हस्तक्षेप करने की कोशिश की लेकिन उस समय राष्ट्रपति जी ने हमको कहा कि आप पुनर्िवचार करिये और उस पुनर्िवचार करने में उन्होंने एक बात यह भी कही कि सरकार को एक आध बार एडवाईज या वार्िनंग देनी चाहिए। हम उस हिसाब से चलते रहे। यद्यपि हमने राष्ट्रपति जी को उस समय भी अवगत किया कि हम समझते हैं कि हमारा निर्णय सुविचारित है। बिहार का केस ऐसा है, which deserves intervention by the Centre. It is a fit case for article 356. लेकिन आपके विचारों का आदर करते हुए, समादर करते हुए इस समय हम इस पर पुन आग्रह नहीं कर रहे हैं, यह कहकर हमने वापिस भेजा था। इस बार हमने उसकी पुनराव्ृात्ित की। कुछ लोग कहते हैं कि आपने पुनराव्ृात्ित कयों की कयोंकि मैंने कहा कि उस समय हमने कहा था कि हमारी राय यह है कि वहां पर संविधान के अनुसार कार्य नहीं चल रहा है इसलिए हम इस बात को दोहराते हैं। आपके विचार का आदर करते हुए हम इस समय नहीं कर रहे हैं। दोबारा जब हमने किया तो हमने सोचा कि शायद राष्ट्रपति केवल मात्र दोबारा मंत्रिमंडल जब सिफारिश करता है तो उसको स्वीकार कर लेते हैं कयोंकि सविधान की अपेक्षा है, वह हस्ताक्षर ही करेंगे। उन्होंने केवल हस्ताक्षर ही नहीं किये बल्िक उन्होंने अपनी राय भी उसके साथ जोड़ी कि मैं इस बात से सहमत हूं और उसमें इस बात का भी नोटिस दिया कि भारत सरकार ने उनको एडवाईज भी दी, चेतावनी भी दी, उनको बताया भी कि ऐसा मत करो, ऐसा करो, उसके बावजूद भी वे लगातार उसी दिशा में चलते रहे। इसलिए उन्होंने कहा कि मैं इस बात से सहमत हूं कि ऐसी स्िथति आ गयी है जब वहां पर संविधान के उपबंधों के अनुसार शासन नहीं चल रहा है औ वहां पर राष्ट्रपति शासन लागू किया जाना चाहिए।

SHRI SOMNATH CHATTERJEE : Can we have that endorsement? You are referring to something which we do not know.

SHRI L.K. ADVANI: I am not quoting from it.

SHRI SOMNATH CHATTERJEE : You are referring to what the hon. Rashtrapathiji has said in a file. Either you are mentioning it or quoting it. But we do not know the facts. Not that I am questioning it, but if you are relying on the hon. Rashtrapathiji's endorsement, then we should have it. Otherwise, don't refer to that thing.

SHRI L.K. ADVANI: I have no difficulty. I knew that if I were to quote anything, then I would have an obligation. I have not quoted anything. I have simply given the substance. I am paraphrasing because I am conscious that the rules bind me, the moment I quote. But as it is, the rules do not bind me.

SHRI SOMNATH CHATTERJEE : Please do not bring Rashtrapathiji.

SHRI L.K. ADVANI : All right. But there is a background. Here is a case.

SHRI SOMNATH CHATTERJEE : Has he returned it?

SHRI L.K. ADVANI : Yes. He returned it.

SHRI E. AHAMED (MANJERI): The Home Minister wanted to convey what Rashtrapathiji has said. That is also not acceptable. श्री लाल मुनी चौबे (बकसर) : २६ जनवरी को राष्ट्रपति ने बयान दिया है। उन्होंने ऐसा ही कहा है। अखबार में यह बात आई है।

... (व्यवधान) श्री लाल कृष्ण आडवाणी: जिस समय हमने निर्णय लिया, उस समय हम इस बात से परचित थे कि लोक सभा में इस सरकार का बहुमत है, राज्य सभा में बहुमत नहीं है और संविधान के अनुसार इस प्रस्ताव को दोनों सदनों में पारित कराना आवश्यक है। हमने सोचा कि हम धारा ३५५ के अधीन अपने कर्तव्य की पूर्ित करें और हम अपेक्षा करते हैं कि जो शेष दल हैं, जो बिहार के बारे में चिंतित हैं, वे भी हमारा समर्थन करेंगे। मैं आर.जे.डी. की बात समझ सकता हूं, बाकी की नहीं समझ सकता कयोंकि उनकी सरकार थी और वह सरकार बरख्वास्त की गई है तो पोलीटिकली उनकी पार्टी की प्रतक़िया होना स्वाभाविक है और वह मेरी समझ में आता है। इसलिए पहले-पहले जब कांग्रेस पार्टी के महामंत्री ने तुरंत हमारे निर्णय के बाद उसका स्वागत किया तो हमको बहुत खुशी हुई। ये यहां बैठे हुए हैं।

... (व्यवधान) श्री सुशील कुमार शिंदे (शोलापुर): हमने स्वागत कभी नहीं किया, हमने दलितों की बात की।

... (व्यवधान)महोदय, मेरा प्वाइंट ऑफ आर्डर है। इतना ही नहीं, मैंने आपके ग्ृाह मंत्री जी को उस रात उनके ऑफिस में जाकर साढ़े सात बजे, जिस तरह दलितों पर अत्याचार हुआ, यह बात भी की लेकिन जब आप उसका पोलीटिकल व्यू लेते हैं फिर उसका अर्थ अलग हो जाता है।

... (व्यवधान) श्री लाल कृष्ण आडवाणी: ग्ृाह मंत्री जी से मिलकर आपने कया-कया कहा, मैं उसका जिक़ नहीं करूंगा लेकिन मैं आपको धन्यवाद देता हूं कि आपने भारत सरकार के इस निर्णय के बारे में तुरंत जो पहली प्रतक़िया प्रकट की, वह उचित थी। मैं उसके शब्दों में नहीं जाता। उसमें भी हमको इस बारे में आश्वस्त किया कि हमको विश्वास है कि जिस समय सदन में हम इसकी चर्चा करेंगे तो कोई पार्टी ऐंगल से नहीं देखेगा, वह कुल मिलाकर बिहार के हित में देखेगा। कुल मिलाकर लगातार इस प्रकार से दलितों की हत्या होती रहे, उसको रोकने की इच्छा से देखेगा। उसके साथ-साथ संसद में विपक्ष की प्रमुख पार्टी के अध्यक्ष का जो बयान आया, मुझे लगा कि स्वाभाविक रूप से एक गैर-राजनैतिक स्तर पर इस मामले पर विचार होगा। अगर नहीं होगा तो उसका नुकसान, मैं अगर पार्टी ऐंगल से सोचूं तो हमको फायदा है, कोई नुकसान नहीं है।

... (व्यवधान)मैं मानता हूं कि कांग्रेस पार्टी के सारे इतिहास में, अगर उन्होंने शाहबानो का निर्णय न किया होता तो शायद इतिहास दूसरा होता। मुझे लगता है कि एक बार पुन: हिन्दुस्तान के राजनैतिक इतिहास में जिस स्थान पर कांग्रेस पार्टी आज पहुंची है और जिस स्थान पर पहुंचते-पहुंचते ... (व्यवधान)

MR. SPEAKER: Shri Fatmi, please do not give any running commentary.

... (Interruptions)

MR. SPEAKER: He is not yielding. Please take your seats.

... (Interruptions)

SHRI L.K. ADVANI: I am not yielding.

... (व्यवधान) डा. शकील अहमद (मधुबनी) : कांग्रेस ने बिल्कुल ठीक काम किया था, शाहबानो के मामले में बहुत सही काम किया था। कांग्रेस ने शाहबानो के केस में अच्छा काम किया था।

... (व्यवधान) श्री लाल कृष्ण आडवाणी : आप छोड़ो। मैंने कहा कि हर एक पार्टी अपने पूरे इतिहास को ध्यान में रखकर उस हिसाब से निर्णय करती है और मेरे मित्र अभी स्मरण दिला रहे हैं कि हिन्दुस्तान के इस ५० साल के इतिहास में पहली बार अगर कांग्रेस पार्टी धारा ३५६ के प्रोकलेमेशन का विरोध करेगी तो बिहार का विरोध करेगी, इसके अपने इम्प्लीकेशंस हैं। इसका विरोध करेगी, कयोंकि इस प्रोकलेमेशन को जहानाबाद में इतने दलितों की हत्या के बाद लाया गया। इसीलिए इस समय मैं इस प्रोकलेमेशन को संसद के अनुमोदन के लिए प्रस्तुत कर रहा हूं, मैं समझता हूं कि देश में ऐसे इश्यूज़ हैं, जिन इश्यूज़ पर नॉन पार्टीजन लेविल पर हमको विचार करना चाहिए और उन नॉन पार्टीजन लेविल पर विचार करने के लिए यह एक स्पेसफिक इश्यू है।

... (व्यवधान)

MR. SPEAKER: Shri E. Ahamed, please take your seat.

... (Interruptions)

MR. SPEAKER: Dr. Shakeel Ahmad, please sit down.

... (Interruptions) श्री लाल कृष्ण आडवाणी : अध्यक्ष जी, मैं जानता हूं।

... (व्यवधान) श्री शान्ितलाल चपलोत (उदयपुर) : आप गलत कोट मत करो।

SHRI SOMNATH CHATTERJEE : Is that to be done with your RSS Governor?

SHRI L.K. ADVANI: The question of RSS Governor has come up only now. That way, most of us are RSS-men. (Interruptions)

SHRI AJIT JOGI (RAIGARH): We opposed the use of Article 356 in 1977 also. This is not the first time.

SHRI L.K. ADVANI: That was when it was used against you.

SHRI AJIT JOGI : Naturally. We would oppose it only when we are in the Opposition.

SHRI L.K. ADVANI: I stand corrected to that extent. (Interruptions)

MR. SPEAKER: Hon. Members, please take your seats.

SHRI L.K. ADVANI: I stand corrected on this. मैं तो इतना ही कहूंगा कि इस प्रश्न पर अगर हम दलों से ऊपर होकर, दलगत दृष्िटकोण को छोड़कर, कयोंकि अगर दलगत दृष्िटकोण को देखकर कांग्रेस यह काम करेगी तो हमको कोई नुकसान नहीं होगा, हमको तो फायदा ही फायदा होगा, हमारा तो भला होगा, लेकिन उससे कुल मिलाकर बिहार को नुकसान होगा। बिहार में, वषर्ों से विकास अवरुद्ध हो गया है, बिहार में वषर्ों से लगातार इस प्रकार के हत्याकाण्ड हो रहे हैं और लगातार कमजोर वगर्ों पर इस प्रकार के प्रहार होते रहे हैं, इसके कारण सामाजिक समरसता को संकट पैदा हुआ है। इन्हीं शब्दों के साथ मैं सदन से अनुरोध करता हूं कि इस प्रस्ताव का समर्थन करें।

> श्री शरद पवार (बारामती) : माननीय अध्यक्ष जी, सदन के सामने अनुच्छेद ३५६ के बारे में जो बिहार का प्रस्ताव आया है, इसका विरोध करने के लिए मैं खड़ा हुआ हूं। कल सदन के सामने गोवा का सवाल था, तब मेरी पार्टी ने और हमारे सभी विपक्ष के साथियों ने उसका समर्थन किया, कयोंकि वहां की परस्िथति अलग थी। एक तो मेरी पार्टी की ही सरकार थी, वह बहुमत खो चुकी थी। उनका बहुमत खत्म करने के लिए जो जिम्मेदार थे और विपक्ष के नेता थे, उन्होंने सरकार बनाने की तैयारी नहीं दिखाई। दूसरी पार्टी भारतीय जनता पार्टी थी, जिनके चार सदस्य थे। उन्होंने मांग की कि बर्खास्त करेंगे तो ही ठीक होगा। तब गोवा के सभी लोग बर्खास्तगी की मांग कर रहे थे। भारत सरकार ने जो निर्णय लिया, यह कोई गलत बात नहीं थी इसलिए हम सभी साथियों ने उसका समर्थन किया था। मगर बिहार की परस्िथति अलग है।

... (व्यवधान)जहां तक दलितों के हित की बात होती तो शायद हम अलग निर्णय लेते। मुझे मालूम है कि जो कदम हमने उठाने की तैयारी की है, उसकी कीमत शायद बिहार में बैठे हुए मेरे साथियों को देनी पड़ेगी। वह देने को तैयारी करके मैं यहां विरोध करने के लिए खड़ा हुआ हूं। बिहार में चुनी हुई सरकार थी, बहुमत था। जब चार या पांच महीने पहले सरकार को बर्खास्त करने की बात थी, तब उस सरकार ने वहां अपना बहुमत साबित किया था। विधान सभा में स्पष्ट बहुमत है, पूरे देशवासियों के सामने यह बात थी। फिर भी यह सरकार बर्खास्त करने का काम महामहिम राज्यपाल की रिपोर्ट के अनुसार किया। सच बताऊं तो वहां स्पष्ट बहुमत होने के बाद सरकार बर्खास्त करने की कोई आवश्यकता नहीं थी। जरूरी था तो धारा ३५५ का इस्तेमाल करके सरकार को सूचना दे सकते थे, मगर धारा ३५६ का इस्तेमाल करने की बात सरकार ने की। यह बात एक दिन, दो दिन में या एक महीने में हुई, ऐसा मैं मानने के लिए तैयार नहीं हूं। जब इस लोक सभा के चुनाव हुए, तब भारतीय जनता पार्टी के एक सहयोगी दल, जो आज सरकार में है, उसके नेताओं ने चुनाव के समय अपने मैनिफैस्टो में बिहार की जनता से कहा था कि दिल्ली में हमारा बहुमत आने के बाद हम राबड़ी देवी सरकार को बर्खास्त कर देंगे। श्री प्रभुनाथ सिंह (महाराजगंज): मैनिफैस्टो में नहीं कहा था, बात कही थी। श्री शरद पवार : आपने कहा था, ठीक है आपने बात कही थी, यह तो मान लिया। एक माननीय सदस्य: चुनाव सभा में कहा था। श्री शरद पवार : चुनाव सभा में कहा था, तो यहां हुकूमत आने के पहले दिन से ही आप वहां की सरकार बर्खास्त करने की साजिश में लग गए थे। बिहार के बारे में बहुत बातें की गईं, कानून और व्यवस्था के बारे में भी कहा गया। संविधान संकट में पड़ गया, इस बारे में भी कहा गया। कई जगह पर सरकारिया कमीशन का भी जिक़ किया गया। मैं इससे सहमत हूं कि किसी भी राज्य को प्रगति के रास्ते पर जाना है तो वहां कानून और व्यवस्था एक स्तर तक होने की आवश्यकता है। सरकार में बैठने वाले कोई भी हों, उनकी यह जिम्मेदारी है कि आम जनता को इस तरह से विश्वास कराएं कि उनकी जान की रक्षा करने के लिए वे सरकार में बैठे हैं। मगर खाली कानून-व्यवस्था का मामला लेकर धारा ३५६ लगाकर वहां की सरकार बर्खास्त करनी पड़े, यह मैं नहीं मानना चाहता। मैंने आदरणीय राज्यपाल महोदय की रिपोर्ट भी देखी है। इसमें कई बातें कही हैं, वॉयलेंस, पुलिस ऑफशियल्स की कलिंग, आई.एस.आई. एकिटविटीज, फाइनेंशियल लॉसैज, पंचायत इंस्टीटयूशंस की जो सिटी है, वहां से कांस्टीटयूशनल ब्रेक-डाउन कैसे हुआ है, इन सबके बारे में भी इसमें कहा है। मैंने भारत सरकार की जो रिपोर्टस हैं, जो हर स्टेट में क़ाइम के बारे में इंफार्मेशन देती है, वह जमा की है और देखने की कोशिश की है कि बिहार कहां है और बाकी अन्य राज्य कहां जाकर बैठे हैं। मैं सभी स्टेटस की फिगर्स नहीं देना चाहता और सदन का ज्यादा समय नहीं लेना चाहता हूं लेकिन मंथली क़ाइम स्टेटस्िटकस गवर्नमेंट ऑफ इंडिया, जो पार्िलयामेंट की लाइब्रेरी है, इसमें उसकी कॉपी मिल सकती है।

Monthly crime statistics of Government of India. Incidents of crimes in States during 1997: Maharashtra -- 1,85,000 and above; Rajasthan -1,65,469; Uttar Pradesh -- 1,48,917; Gujarat -- 1,00,990; and Bihar -- 94,752. श्री प्रभुनाथ सिंह : बिहार में जो क़ाइम होता है, वह दर्ज ही नहीं होता है।

... (व्यवधान) प्रो. रीता वर्मा (धनबाद): बिहार में सिर्फ क़ाइम होते हैं, वे रजिस्टर नहीं होते।

... (व्यवधान) श्री शरद पवार : १९९८ के मैंने फिगर्स देखे हैं। यहां बिहार का डॉटा नहीं है, इसलिए मैं नहीं देना चाहता हूं।

Incidents of crimes against children: Bihar -- 459; Uttar Pradesh -- 590; and Maharashtra -- 1002. ... (Interruptions) महिलाओं के खिलाफ बिहार में १९९५ में ... (व्यवधान) प्रो. रीता वर्मा : वहां क़ाइम होता है लेकिन दर्ज नहीं होता।... (व्यवधान)

MR. SPEAKER: Please take your seats.

... (Interruptions)

MR. SPEAKER: This is not good. What is this?

... (Interruptions)

PROF. P.J. KURIEN (MAVELIKARA): Sir, there is a convention in the House that whenever the Leader of the House or the Leader of the Opposition speaks, nobody interrupts them. ... (Interruptions) We can also interrupt the speech of the Leader of the House. Pleade do not interrupt. We never obstruct when the Prime Minister speaks. ... (Interruptions)

SHRI SHARAD PAWAR : Incidents of crime against women: Bihar -- 2172 ; Rajasthan -- 6422; Uttar Pradesh -- 11,975; Maharashtra -- 16,300.

The Crime Bureau Report 1995, incidents of crime against the Scheduled Tribes: Bihar - 232, Gujarat - 486, Maharashtra - 505, Rajasthan 1,784.

The Crime Bureau Report 1995, incidents of crime against the Scheduled Castes during 1995: Bihar - 747, Gujarat - 1724, Maharashtra - 1,622, Rajasthan - 5,197, Uttar Pradesh - 14,205. यह भारतीय जनता पार्टी, उनके सहयोगी और लां-एंड-आर्डर की स्िथति के बारे में भारत सरकार की रिपोर्टस के आंकड़े दिए हैं और मुझे नहीं लगता है कि इससे ज्यादा कुछ कहने की आवश्यकता है। सदन में धारा ३५६ का गैर इस्तेमाल करके राज्यों की सरकारों को बर्खास्त न करने की बात कही गई और यह बताया गया कि परस्िथति अनिवार्य हो, तो अमल करने की आवश्यकता है। लेकिन लगता है कि पूरे देश में इसका विश्वास नहीं रहेगा। जैसा मैंने शुरू में कहा कि हुकूमत में बैठने वाली पार्टी, समता पार्टी और बाकी सहयोगियों ने पहले ही दिन से मांग की थी कि राबड़ी देवी की सरकार बर्खास्त करनी चाहिए, कयोंकि चुनाव में हम लोगों ने वायदा किया है और वह वायदा पूरा करना चाहिए। इस काम को करने के लिए भले ही उनके पास बहुमत न हो, भले ही जन-साधारण न हो, लेकिन उस सरकार को बर्खास्त करने के लिए कदम उठाना चाहिए। मैं कहना चाहता हूं कि राज्य और यूनियन्स के संबंध ठीक रहने की आवश्यकता है। भारत सरकार में कोई भी बैठा हो, उनका फर्ज है कि वह देखे कि राज्यों को किस तरह से ट्रीटमेंट दिया जाए, उनके सवालों पर किस तरह से ध्यान दिया जाए और पब्िलक में किस तरह से बात की जाए। मैंने एक अखबार में पढ़ा है, बड़ी जिम्मेदारी से कहा गया, जो भारत सरकार की हुकूमत में है, कि बिहार में जंगल राज है। मुझे नहीं लगता है कि यह शोभाजनक बात है। भारत सरकार में बैठे हुए लोग राज्यों के बारे में इस तरह से बातें कहने लगें तो राज्यों और यूनियन्स में और अंतर बढ़ेगा तथा उससे देश की एकता के लिए खतरा पैदा होगा। इसलिए जिम्मेदारी से बोलने की मुझे आवश्यकता लगती है। महोदय, भारतीय जनता पार्टी के चुनाव घोषणा पत्र में लिखा है - संविधान के अनुच्छेद ३५६ जैसे प्रावधान का दुरुपयोग और राजभवनों को केन्द्र में सत्तारूढ़ उपभवन मानकर उनका दुरुपयोग होने से, देश के संविधान की पवित्रता नष्ट हो गई है। भाजपा ईमानदारी से सुधार और पुनरुद्धार कार्यक़मों के माध्यम से गणराज्य के इस संस्धान को सुदृढ़ करने का कार्य करेगी। इसको पढ़ने से इनकी कथनी और करनी में कितना अंतर है, यह नतीजा हम सब के सामने आया है। इससे पहले भी, जैसा कि जिक़ आदरणीय ग्ृाह मंत्री जी ने किया, कुछ दिल पहले बिहार के राज्यपाल महोदय ने राष्ट्रपति शासन लगाने के बारे में केन्द्रीय सरकार के पास प्रस्ताव भेजा था और केन्द्रीय सरकार ने सिफारिश की थी, लेकिन उस समय आदरणीय राष्ट्रपति जी ने अपनी सहमति देने के इन्कार कर दिया और वह मामला वहीं पर थम गया। इतना होने पर भी प्रैशर कायम रहा, तनाव कायम रहा कि बिहार की सरकार को बर्खास्त करना होगा, कयोंकि हमने जनता से वायदा किया है। हमारे राजनैतिक हित में यह करने की आवश्यकता है। जब तक वहां लालू प्रसाद जी के नेत्ृात्व की सरकार रहेगी तब तक राजनैतिक शकित बढ़ाने के जो काम हमने अपने हाथ में लिए हैं, उसमें हम कामयाब नहीं होंगे इसलिए यह सरकार बर्खास्त करने की आवश्यकता है। यह बात जिनके मन में थी उन्होंने इस पर ध्यान दिया। मैं इस बारे में सिर्फ एक ही स्टेटमेंट दिखाना चाहता हूं और यह टाइम्स ऑफ इंडिया, नई दिल्ली के चार जुलाई के संस्करण में है। मैं सदन का ध्यान आकर्िषत करना चाहता हूं कि बिहार के राज्यपाल, श्री सुंदर सिंह भंडारी ने तब कया वकतव्य किया था, मैं उनका स्टेटमेंट पढ़ रहा हूं।

... (व्यवधान)जब उनसे पूछा गया कि कया आपके ऊपर समता पार्टी या उनका कुछ प्रेशर है तो उन्होंने जवाब दिया-

"On pressure from the Bihar Units of the Samata Party and Bharatiya Janata Party for the President's rule, Mr. Bhandari says: `pressure is not on me, it is on the Centre'." उन्होंने जो टाइम्स ऑफ इंडिया में इंटरव्यू दिया था उसमें ऐसा कहा। इसलिए पहले दिन से प्रेशर था। यहां की परस्िथति कितनी खराब है, इस बारे में बोलने की आवश्यकता नहीं है। पिछले दो दिन से सब की नजर हैदराबाद पर है कि चन्द्र बाबू नायडू का कया रुख रहेगा।(व्यवधान) सरकार की परस्िथति ऐसी है तो कया करे। समता पार्टी के छ: या सात साथियों ने कुछ प्रेशर डाला तो वह नजरअंदाज करने की ताकत इस सरकार की नहीं है, भले ही वाजपेयी जी उस रास्ते से जाना चाहते हों या न जाना चाहते हों मगर परस्िथतियों से मजबूर हो गए होंगे और इसलिए शायद उन्हें ऐसा कदम उठाना पड़ा होगा। राज्यपाल जी ने संविधान की धारा ३५६ लगाए जाने के पक्ष में कुछ कारण बताए। मैंने लॉ एंड आर्डर की बात, अन्य स्टेटों की बात, फाइनेंशियल मिस-मैनेजमेंट की बात सदन के सामने रखी। राज्यपाल जी का जो स्टेटमेंट हमें सरकुलेट किया गया है उसे देख कर मुझे ताज्जुब हुआ। उन्होंने कई इश्यूज़ पर जो अपनी राय दी है वह किस तरह से दी है।
... (व्यवधान) लेटेस्ट रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की रिपोर्ट आई है, इसमें स्टेटस की फाइनेंशियल परस्िथति के बारे में लिखा है। इसमें लिखा है कि उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र से बिहार की आर्िथक स्िथति ठीक है, यह रिजर्व बैंक के गवर्नर की लेटेस्ट रिपोर्ट है। मुझे मालूम नहीं इसकी कॉपी आदरणीय गवर्नर के पास गई है या नहीं, इसलिए इस बारे में उनके द्वारा कुछ और कहा गया। हाईकोर्ट के स्ट्रीकचर्स के बारे में भी कहा गया। मैं ग्ृाह मंत्री जी से इतना अनुरोध करना चाहता हूं कि आप सिर्फ मुम्बई हाईकोर्ट की औरंगाबाद बैंच, नागपुर बैंच और बाम्बे बैंच, इन तीनों बैंचों के सामने सरकार के खिलाफ कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट के कितने केसेज़ चालू हैं इसकी एक रिपोर्ट मांगी।
... (व्यवधान)उसे देखने के बाद बिहार के बारे में यहां जो परस्िथति थी इससे खराब परस्िथति आपको वहां दिखाई नहीं पड़ेगी। कंटेम्प्ट पिटीशन के बारे में यहां कहा गया। मैंने जिस स्टेट का नाम लिया वहां की तीनों बैंचों में स्टेट गवर्नमेंट के खिलाफ कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट की कितनी पिटीशन पड़ी है इसकी इन्फोर्मेशन ग्ृाह मंत्री जी ने मांगी थी। वहां के राज्यपाल जी ने इस बारे में जो सिफारिश की है, वह इस बारे में शायद अलग तरह से सोचते थे। ऑफशियल मिस-मैनेजमेंट और कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट की बात मैंने कही। इसमें एक बड़ी रोचक रिपोर्ट है कि कॉस्टीटयूशनल ब्रेक-डाउन कैसे हुआ। फरवरी ११, १९९९ को भंडारी जी ने आडवाणी जी को लिखा है, इसमें आइटम ११ में पंचायती राज इंस्टीटयूशन के बारे में है।
"Panchayat Institution: The last election of the Gram Panchayats took place in the year 1978 under the Panchayati Raj Act, 1947. In the year 1992, by the 73rd amendment of the Constitution, the three-tier Gram Panchayat system at the panchayat, block and district levels had to be made functional. To my information, in this country, in all other States, the 73rd amendment of the Constitution has been made effective by constituting the three-tier system of panchayat."

This is also not correct. There are some States even today where it is not there. You may find it if you go to Assam and some other places. श्री मोहन सिंह (देवरिया): इसी लोक सभा में उत्तर दिया गया है।

SHRI SHARAD PAWAR : It means that the Governor himself is ill-informed. That is the reason why he is making this observation. He further says:

"In Bihar, there is no panchayat at all, what to talk of three-tier system. The BDOs are discharging the development functions of the panchayats without any aid or constitutional consultation with the villagers. The entire amount given by the Government of India for different projects are being spent by officers according to their own sweet will and decision. Thus, on this account also, there has been complete constitutional breakdown."

This is the statement of the Governor. I cannot understand as to how can the Governor give this type of a statement. मैंने देखा, जांच की कि कया स्िथति है। इस बारे में ७३ अमेंडमेंट के बाद बिहार की सरकार ने अपने कानून में परिवर्तन करके आरक्षण की नीति को स्वीकार करके अपने स्टेट के लिए अलग पंचायती राज का कानून लागू किया। उसमें जो रिजर्वेशन की बात थी उसे लेकर कुछ लोग वहां के हाई-कोर्ट में गये और वहां के हाई-कोर्ट ने रिजर्वेशन के खिलाफ डिसीजन दे दिया। मैं कोई लॉ का स्टूडेंट तो नहीं हूं लेकिन मुझे लग रहा है कि जिस तरह से पटना हाई-कोर्ट के डिसीजन आते हैं उसमें दिलचस्पी लेने की आवश्यकता है। बहुत सी बातें हैं जिन पर मैं बोलना नहीं चाहता हूं। हाई-कोर्ट का डिसीजन आने के बाद बिहार सरकार सुप्रीम-कोर्ट के सामने गयी। उसके सामने उन्होंने दो मांगें की। एक यह कि आरक्षण कायम रखिये और जब तक आरक्षण कायम नहीं रखते तब तक इलेकिटड मुखिया के हाथ में गांव का कारोबार रहना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने आर्डर किया जो २४ फरवरी १९९७ का है।

The last operational part is this.

"Considering the facts and circumstances and submissions of the learned counsel for the parties, we direct that with immediate effect, the administration of all Gram Panchayats, Zila Parishads and Block Panchayat Samitis in the State of Bihar will be under the overall charge of the District Collector. Such authority will administer the duties and functions of the said bodies in the district under jurisdiction through Block Development Officer under his control as he may deem expedient and proper. The elected members of all such bodies will cease to function and be held to have vacated their respective office as early as possible. Liberty is given to take further directions from the court, if necessary." यह कया बिहार सरकार ने किया है। आदरणीय गवर्नर साहब ने यह रिपोर्ट दी कि कांस्टीटयूशनल ब्रेक-डाउन हो गया और ब्रेक-डाउन इसलिए हुआ कि वहां बी.डी.ओ. के हाथ में गांव की हुकूमत दी गयी है। दिल्ली की केन्द्र सरकार से आने वाला सब पैसा उनके हाथ में दे दिया और वे अपनी मर्जी से खर्च करते हैं। यह जो शिकायत उन्होने की कया उनको इतना मालूम नहीं था कि इस सरकार ने यह कानून बनाया है, इस कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में मैटर पैंडिंग है। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को डायरेकशन्स दी हैं कि बी.डी.ओ. गवर्नर के अंडर पूरी पंचायत दी जाये। यह देखने के बाद गवर्नर साहब एक इलैकटेड सरकार के खिलाफ भारत सरकार से इस तरह की गंभीर शिकायत करते हैं जो सत्य से परे है। इसका कोई आधार नहीं है। मुझे लगता है कि सुप्रीम कोर्ट के डिसीजन के बाद यह मुद्दा गवर्नर साहब को वापस बुलाने के लिये पर्याप्त है। इससे ज्यादा इस बारे में मुझे कहने की आवश्यकता नहीं। यह बिलकुल असत्य पर आधारित है। इसमें जो और मुद्दे लिखे हुये हैं, मैंने उन्हें गहराई से नहीं देखा लेकिन एक मुद्दा देखा बल्िक मैं कहता हूं कि उसे असत्य के आधार पर स्वीकार करके यह कार्य किया है।
SHRI SOMNATH CHATTERJEE : That is why, he wanted to recall him... (Interruptions) श्री शरद पवार : मैं ग्ृाह मंत्री जी से जवाब चाहता हूं कि इस बारे में कया स्िथति है। उन्हें गलत रिपोर्ट दी गई होगी और यह गलत रिपोर्ट देने वाले व्यकित के बारे में भारत सरकार किस प्रकार का कदम उठाना चाहती है, यह भी बताना चाहिये कयोंकि पूरा सदन और यह देश जानना चाहता है। अध्यक्ष जी, ग्ृाह मंत्री जी ने कुछ राज्यों की प्रशासन व्यवस्था के बारे में कुछ बातें कही हैं। यह बात सच है। उस जमाने में मैंने भी सुना था कि अच्छे प्रशासन के बारे में तीन-चार राज्यों का नाम लेते थे जिनमें मद्रास, मुम्बई और बिहार स्टेट प्रमुख थे। इस बारे में कोई दो राय नहीं हैं। मगर प्रशासन में कुछ ढील हो गई है, कुछ खराबी हो गई है तो कया धारा ३५६ इस्तेमाल करने की आवश्यकता है? इस बारे में पहले भी कांस्टीटुअंट असेम्बली में बहस हुई थी। कांस्टीटुअंट असैम्बली में पं. हृदय नाथ कुंजरू ने युनाइटेड प्रोविंस में सवाल उठाया था जिसे बाबा साहेब अम्बेडकर प्रीसाइड कर रहे थे।
"PANDIT HRIDAY NATH KANJRU: May I ask my hon. friend to make one point clear? Is it the purpose of the article 278 and 278 (A) -- in those days instead of 356, that was a draft -- to enable the Central Government to intervene in provincial affairs for the sake of good government of the Provinces?
DR. B.R. AMBEDKAR: No, no. Centre is not given that authority.
PANDIT HRIDAY NATH KANJRU: Or only when there is such mis-government in the Province as to endanger the public peace?
DR. B.R. AMBEDKAR: Only when the Government is not carried on consonance with the provisions laid down for the Constitution at Government of the Provinces, Whether there is good government or not in the Province, is not for the Centre to determine. I am quite clear on the point." इसलिये संविधान की रक्षा की बात हमेशा होती है। संविधान के बारे में बार बार कहा जाता है। इस संविधान में जो कुछ बताया गया है, इसको स्वीकार करने की तैयारी आज की सरकार द्वारा दिखाई नहीं देता कयोंकि यह मामला अलग है। यह सरकार समता का साथ लिये बिना चल नहीं सकती। इस लिये भले ही डा. अम्बेडकर ने सलाह दी होगी। भले परस्िथति कुछ भी रही होगी। मैं आज जिस जगह से खड़ा होकर बोल रहा हूं, हमसे पहले धारा ३५६ के बारे में कांग्रेस के खिलाफ कई बार बात कही गई होगी और यह विचार किया होगा लेकिन आज भारत सरकार ने मजबूरी में यह कदम उठाने की तैयारी की होगी। इससे ज्यादा मैं और कुछ नहीं कह सकता। मगर एक बात मुझे कहने की आवश्यकता है। ग्ृाह मंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने कुछ ऐसे कदम उठाये थे। हमारे जनरल सैक़ेट्री ने बयान दिया था और कुछ बातें कही थीं। मैं कहता हूं कि जरूर कही थीं। दलितों की हत्या एक बार नही, दो बार हो गई। १९७७ में भी ऐसी परस्िथति पैदा हुई थी जब बेलच्छी में दलितों की हत्या की गई थी। उस समय श्रीमती इन्िदरा गांधी वहां गई थीं। उन्होंने उस परिवार के आंसू पोंछने का काम किया था।

16.00 hrs. इस समय नारायणपुर में कांग्रेस की अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी खुद गईं। वहां के परिवार से मिलीं और वहां की परस्िथति देखी और परस्िथति देखने के बाद उन्होंने कहा कि परस्िथति ठीक नहीं है। उनकी रक्षा की जिम्मेदारी कोई भी सरकार नहीं छोड़ सकती। मोरल राइट की बात भी कांग्रेस पार्टी की तरफ से कही गई। कांस्टीटयूशन के राइट की बात हमने नहीं कही, मोरल राइट की बात हमने की। ऐसी परस्िथति उड़ीसा में हुई, वहां भी मोरल राइट की बात हम लोगों ने की और वहां हमने परिवर्तन किया। जब हम बोलते हैं और हमारे हाथ में अधिकार हैं तो हमने वहां परिवर्तन करने की तैयारी की और वहां हम लोगों ने परिवर्तन किया। मैं नहीं समझता कि हम लोगों ने कुछ बयान दे दिये और उन बयानों का आधार लेकर इस तरह का एकसट्रीम कदम उठाने की कया आवश्यकता थी। श्री मोहन सिंह : उसी में फंस गये। श्री शरद पवार : फंस गये, कयोंकि मामला यह है कि उनको जार्ज साहब ने सलाह दी कि कांग्रेस ने ऐसा बयान दिया है This is a golden opportunity. अभी एकट करो, अभी कांग्रेस कहीं नहीं जा सकती। उनको जार्ज साहब का कम अनुभव है, इन लोगों को ज्यादा है, बेचारे फंस गये। आज के अखबार में आया है कि भाजपा के सीनियर मनिस्टर साहब ने कहा था कि यह मत करिये। लेकिन यह करने की जिम्मेदारी जार्ज साहब और उनके साथियों ने ली होगी और इसमें आप लोग फंस गये। हम कैसे मदद करेंगे। किसी कारण से पूरी स्टेट की जिम्मेदारी हाथ में रहेगी। आज जो वहां के राज्यपाल हैं वह कहते हैं -

I am proud that I am RSS; I am RSS and I will be RSS. ठीक है, इससे पहले भी आर.एस.एस. में रहने का उनका अधिकार है, उनके विचार स्वीकार करने का उन्हें अधिकार है, इस बारे में मेरे मन में कोई दो राय नहीं है, वह जरूर उस रास्ते से जा सकते हैं, उनकी विचारधारा का समर्थन कर सकते हैं, उनके साथ रह सकते हैं। मगर बिहार के राज्यपाल पद की शपथ लेने के बाद "मैं आर.एस.एस. हूं, आर.एस.एस. का समर्थक हूं", यह कहने का उन्हें अधिकार नहीं है ... (व्यवधान)जो व्यकित इतने बड़े महत्व के पद पर बैठने के बाद यह फर्ज निभाने की तैयार नहीं रखता है, उसके हाथ में पूरी स्टेट की जिम्मेदारी देना, पूरी स्टेट के समाज के गरीब वगर्ों के लिए अल्पसंख्यकों के लिए बड़ी धोखादायक परस्िथति होगी। हम इसका कभी समर्थन नहीं कर सकते। मामला रणवीरसेना से नारायणपुर और बाद में शंकर बिगहा का आया। लेकिन दलितों पर जो हमले हो रहे हैं, यह एक बड़ी निंदनीय बात है। मैं समझता हूं कि शोषितों और दलितों पर बिहार में और दूसरी जगहों पर जो हमले हो रहे हैं, यह एक राष्ट्रीय मुद्दा है और सभी राजनीतिक पार्िटयों को अपने दलों के हितों को दूर रखकर इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है। इस पर एक माहौल तैयार करने की आवश्यकता है जिससे कि समाज के गरीब वगर्ों को एक तरह का विश्वास मिलेगा। माननीय ग्ृाह मंत्री जी ने जो कहा कि भूमि सुधार प्रक़िया जो कुछ वहां शुरू हुई, उसके कारण ये मामले बिहार में बार-बार आ रहे हैं, मैं उनसे सहमत हूं। कई सालों से यह बातें वहां हो रही हैं। मेरी पार्टी भी वहां हुकूमत में थी, किसी की कोई जिम्मेदारी नहीं है, यह मैं नहीं मानता, इसमें हम भी जिम्मेदार होंगे। जिस तरह से बाकी स्टेटस में कदम उठाये गये, वहां भी कदम उठाने की आवश्यकता है। लेकिन वहां जो कदम उठाये गये और जिस तरह से रिकार्ड रखा गया, उसमें और बाकी स्टेटस में फर्क है। इससे जमींदारों का एक वर्ग यह मानने के लिए तैयार नहीं है कि समाज का गरीब वर्ग आज जाग उठा है। वह अपने अधिकारों के लिए मांग कर रहा है, संघर्ष करने की तैयारी कर रहा है और जिनको यह पसंद नहीं है उन्होंने रणवीर सेना जैसी शकितयों को मदद करके उनके आधार पर इस तरह से हमले करने का काम वहां कई सालों से शुरू किया है। ऐसे हत्याकांड हमने वहां कई बार देखे हैं और नारायणपुर में जहां दलितों की हत्याएं हुईं, जहां ११ फरवरी को कांग्रेस अध्यक्ष गई थीं, वह मामला भी इसी का एक हिस्सा है। अध्यक्ष महोदय, रणवीर सेना की बात आई है कि किस की है, किसको इसने समर्थन दिया, किसकी मदद की, इसमें मैं ज्यादा नहीं जाना चाहता हूं, मगर इस डिटेल मे जाने की आवश्यकता है और इस सरकार में बैठने वालों को इसके विस्तार में जाना जरूरी है ताकि इसका सही रूप लोगों के सामने आ सके। वहां की जो परस्िथति है, उसको देखने के बाद, दलितों की वहां जो हत्या हुई, उसे देखने के बाद और वहां की सरकार उनकी रक्षा करने में सक्षम नहीं रही या कम पड़ी और रणवीर सेना के भी कुछ रिश्ते आर.जे.डी. के साथ हैं, इस प्रकार की कुछ बातें उस समय कही गईं, इस प्रकार के इल्जाम लगाए गए, यह मुझे नाइंसाफी की बात लगती है और खाली मुझे लगती है, ऐसी बात नहीं है बल्िक इस पार्टी को समर्थन देने वाले जो नेता लोग हैं, उनके भाषणों को पढ़ने के बाद मुझे ऐसा लगा। मैं वह पढ़ रहा हूं-

"President of Sikh Gurudwara Prabandhak Committee (SGPC) Gurcharan Singh Tohra and the SAD chief whip in Lok Sabha, Prem Singh Chandumajra, while vehemently opposing the imposition of President's Rule in Bihar, have said that the killings done by the Ranvir Sena was an "unjustified and baseless" excuse to take such a drastic action.
In a rather paradoxical situation prevailing in Bihar, where the Ranvir Sena, the private army of landlords, which opposes land reforms and the ousted Rashtriya Janata Dal being a strong supporter of the Dalits and Backward Classes, the dismissal of the Rabri Devi Government on the Dalit killings did not sound convincing, Mr. Tohra said."

This has come in the Hindustan Times dated 16th February, 1999. ये वे नेता हैं जिनका इस सरकार को समर्थन प्राप्त है। यह बात आपके साथियों ने भी मानी है कि दलितों के लिए, उनके सवालों को हल करने के लिए सरकार कुछ करना चाहती है, लेकिन यह जिन लोगों को पसन्द नहीं है, उन लोगों ने इस सरकार को संकट में डालने के लिए और जो दलित जाग उठा है, उसकी आवाज को बन्द करने के लिए, ये हमले किए हैं और इसके कारण आपका उस सरकार को बर्खास्त करने का प्रस्ताव मुझे ठीक नहीं लगाता। राजनीति अपनी-अपनी होती है, मगर अपनी राजनीति के लिए दलितों का इस्तेमाल करना हम लोगों को बन्द करना चाहिए। सवाल यह है कि यहां की परस्िथति कया होगी, यह जो मोशन इस सदन में आएगा, उसका कया होगा। मेरे पास कोई पककी मालूमात नहीं है कयोंकि हैदराबाद से मेरे पास कोई इन्फर्मेशन नहीं आई है और हैदराबाद की स्पेश्यलिटी यह है कि आखिरी मूवमेंट तक वे पता नहीं लगने देते कि वे कया करेंगे। श्री प्रभुदयाल कठेरिया (फिरोजाबाद) : पेट्रोल बम बनाकर हम अपनी सरकार को नहीं बचाएंगे।

... (व्यवधान) श्री शरद पवार: दो-तीन दिन के बाद, राज्य सभा में मोशन जाने के बाद, जैसा ग्ृाह मंत्री जी ने कहा, वहां की परस्िथति उनको भी मालूम है और पूरे देश को मालूम है, वहां यह मोशन नामंजूर होने वाला है। वहां मोशन के नामंजूर होने के बाद, कया होने वाला है, वहां रा.ज.द. की सरकार आएगी, इस सरकार में कैबीनेट को प्रिजाइड ओवर जिस मंत्री ने किया कया उनके ऊपर जिम्मेदारी आएगी कयोंकि हमने पढ़ा था और हमें मालूम है कि प्रधान मंत्री जी तो बाहर थे।

... (व्यवधान) जब-जब बाहर जाते हैं तब-तब ऐसा होता है।

... (व्यवधान)आप जरा यहां ज्यादा रहिये।

... (व्यवधान)इनके ऊपर जिम्मेदारी जाती है, यह मुझे मालूम नहीं। जिन माननीय गवर्नर साहब ने असत्य का आधार लेकर यहां सिफारिश की, उनकी स्िथति कया होने वाली है, मुझे मालूम नहीं मगर एक बात पककी है कि राज्य सभा में यह मोशन रिजैकट होने के बाद वहां असेम्बली बुलानी पड़ेगी। जिसकी मैजोरिटी है, उसको वहां बुलाना पड़ेगा और वह व्यकित वहां औथ लेकर चीफ मनिस्टर की जिम्मेदारी संभालने के लिए आगे आयेगा, इसमें कोई दो राय नहीं है। जिनके पास यह जिम्मेदारी आने वाली है, उनको मैं कहना चाहता हूं कि आज जिस तरह से अपने राजनीतिक स्वार्थ के लिए धारा ३५६ का आधार लेकर वहां आर.एस.एस. का राज्य बनाने की साजिश थी, उसके खिलाफ कांग्रेस ने आपको समर्थन देने की बात की। मगर हम आपसे यह अपेक्षा करते हैं कि सरकार आने के बाद वहां दलितों की रक्षा करने की जिम्मेदारी आपको करनी पड़ेगी। यह जो भूमि सुधार की बात है, जमीन के पट्टे हैं, उसके विभाजन के लिए, उसके डिस्ट्रीब्यूशन के लिए जो प्रोग्राम पीछे रहा, उस पर आपको अमल करना होगा। मैं इनसे इतना ही कहना चाहता हूं कि खाली हम पिछड़े हुए लोगों के या दलितों के हितों के रक्षक हैं, इस तरह की बात नहीं चलेगी। वहां सच्ची तरह से रक्षा करनी पड़ेगी और वह करने के लिए आप ध्यान देंगे। मुझे विश्वास है कि पिछड़े हुए समाज की रक्षा की बात करने वाले इस पर ध्यान देकर बिहार में एक प्रभावशाली और कर्ततव्यनिष्ठ प्रशासन प्रदान करेंगे। बिहार में जो आम गरीब लोगों के मन में विश्वास पैदा करने में सफल होगा, उसको हम लोगों की सहायता मिलेगी। आप आज जो मोशन लाये हैं, उसका विरोध करके मैं आपसे इजाजत चाहता हूं।

> प्रो. रीता वर्मा (धनबाद): आदरणीय अध्यक्ष जी, अभी हम लोग माननीय शरद पवार जी का भाषण बड़े ध्यान से सुन रहे थे। श्री शरद पवार जैसे बड़े नेता, जिनके बारे में हम समझते थे कि अगर कांग्रेस की सरकार बनती तो शरद जी प्रधान मंत्री होते, इतने बड़े नेता ने ऐसी बातें कीं। इतने बड़े नेता कहते हैं कि सरकार की मैजोरिटी थी और तब धारा ३५६ लगायी। अरे भाई, सरकार की मैजोरिटी नहीं होती तब तो वह सरकार ऐसे ही चली जाती। आप यह बार-बार कह रहे हैं। हमारा तो यही कहना है कि वहां संवैधानिक व्यवस्था ध्वस्त हो गई थी और यह हमारा अकेले का ही कहना नहीं है। मैं माननीय शरद पवार जी से अपील करूंगी कि वे जरा ध्यान दें।

... (व्यवधान) माननीय अध्यक्ष जी, आप हाउस को जरा ऑर्डर में लाइये।

... (व्यवधान) अभी शरद पवार जी का बार-बार यही कहना था कि बिहार में जब सत्ता दल के पास मैजोरिटी थी तब सरकार को भंग करने का कोई औचित्य नहीं था। इनके जैसे विद्वान आदमी जब बार-बार यह कहते हैं कि जब सरकार अपनी मैजोरिटी प्रूव कर दे, उसके बाद धारा ३५६ लगाने का औचित्य नहीं है तो मेरे जैसे एक छोटे मैम्बर को यह याद दिलाने में ज़रा तकलीफ होती है कि धारा ३५६ का इस्तेमाल तो तभी होता है जब संवैधानिक व्यवस्था ध्वस्त होती हो, उसका मैजोरिटी से कुछ लेना-देना नहीं है। जब मैं कहती हूं कि संवैधानिक व्यवस्था ध्वस्त हो गई, आपकी ही पसंद की एक पत्रिका है, मैं पांचजन्य को कोट नहीं कर रही हूं, आपकी विचारधारी की एक पत्रिका "आउटलुक" है। उसमें दो-तीन महीने पहले एक सर्वेक्षण कराया गया था। मैं आपके सामने उस सर्वेक्षण को रखना चाहती हूं। उसमें प्रश्न पूछा गया - कया राबड़ी देवी की सरकार को बरख्वास्त किया जाना चाहिए? ७४ प्रतिशत बिहारवासियों ने कहा, हां। कया बिहार में कानून-व्यवस्था खराब है? ८२ प्रतिशत लोगों ने कहा, हां। कया बिहार में कानून-व्यवस्था की स्िथति ऐसी है जिसमें राष्ट्रपति शासन लगाया जाना चाहिए? ७२ प्रतिशत लोगों ने कहा, हां। कया आप समझते हैं कि श्री लालू यादव व्यकितगत रूप से भ्रष्ट हैं? ७० प्रतिशत लोगों ने कहा, हां। यह मैं नहीं कह रही और हमारा मुखफा पांचजन्य भी नहीं कह रहा है, यह आपकी पसंद की पत्रिका का जनमत सर्वेक्षण है। इसलिए इसमें हेराफेरी नहीं हो सकती।

... (व्यवधान)

16.16 hrs. (Shri P.M. Sayeed in the Chair) कया आप समझते हैं कि राज्य में वित्तीय संकट के कारण आपात स्िथति लागू होनी चाहिए? ७६ प्रतिशत लोगों ने कहा, हां। कया राष्ट्रपति शासन अथवा वैकल्िपक सरकार से बिहार की स्िथति सुधरेगी? ६४ प्रतिशत लोगों ने कहा, हां। आज बिहारवासी चैन की नींद सो रहे हैं और वहां शान्ित है जबकि इनकी जो अपराधियों की सरकार थी वह गई । राष्ट्रपति शासन लागू हुआ, उन अपराधियों की सरकार से लोगों को जब मुकित मिली, तब लोग आज वहां चैन की सांस ले रहे हैं। इन लोगों ने बड़ी-बड़ी डींगें मारी थीं कि बिहार में खून की नदियां बह जाएंगी। लालू जी का स्टेटमैंट आया था कि अगर हिंसा हुई तो हम अहिंसा से नहीं रहेंगे। लेकिन इनको बहुत अफसोस हुआ होगा। इनके कायकर्ता लोग, जिस दिन राष्ट्रपति शासन लगा, उसी दिन उन्होंने डर के मारे रातों-रात अपने खद्दर के कुरते-पजामे उतारकर फुल पैंट-शर्ट पहन ली कि हमें राजनीति से कुछ लेना-देना नहीं है।

... (व्यवधान)उन्होंने डर के मारे अपना चोला बदल लिया और कहा राज्य से कि हमको कुछ मतलब ही नहीं है। जब ये खून की नदियां बहाने की बात करते हैं, इतनी खून की नदियां बहाने के बाद, अभी शरद जी बहुत सारे आंकड़े सुना रहे थे, मुझे तो हंसी आती है, शरद जी, आप जो आंकड़े सुना रहे थे, उसमें शायद एक अपराधी के रूप में मेरा भी नाम होगा, मुझ पर भी एक आरोप लगाया गया था, इस तरह आप समझिए कि बिहार में किस तरह केस रजिस्टर होते हैं। जो असली अपराधी हैं, वे तो सत्ता में हैं और जो भले लोग हैं, उन पर कैसे-कैसे केस लगाए जाते हैं। मुझ पर यह आरोप लगाया गया कि मैंने अपने एस.डी.ओ. को किडनैप किया। मैं सदन से पूछना चाहती हूं कि कया सदन इस बात पर विश्वास करता है कि मैंने एक एस.डी.ओ. को किडनेप किया। ... (व्यवधान) मुझ पर यह आरोप लगाया गया कि मैंने गाली दी "साला आदिवासी"। मैं इनकी प्ृाष्ठभूमि नहीं जानती, मेरी पारिवारिक प्ृाष्ठभूमि ऐसी है कि मैं ऐसी गालियां नहीं बक सकती लेकिन मैं यह भी कहूंगी कि मंद से मंद बुद्धि राजनैतिक व्यकित, जो आदिवासी, वनवासी क्षेत्र में राजनीति करता है, चाहे वह बिल्कुल डल हो, कया वह कभी यह गलती कर सकता है कि खुलेआम गाली दे "साला आदिवासी"। हमारे आदिवासी, वनवासी भाइयों ने, इनका केस अपनी जगह पर है, इनकी जेल अपनी जगह पर है, उन्होंने अपना सिर्फ यह विश्वास व्यकत किया और पहले से हजारों गुना ज्यादा वोटों से मुझे जिताकर भेजा। बिल्कुल। १९९६ में मैं २२ हजार वोट से जीतकर आई थी, इस बार १.८० लाख वोटों से जीतकर आई हूं, इसलिए कह सकती हूं कि जिनको आप भड़का रहे थे, रीता जी ने गाली दी, साला आदिवासी, उन्होंने सेंट परसेंट वोट मुझे दिया। इसी से पता चलता है कि आपकी क़ेडबलिटी आपके राज्य में कया है। शरद जी ने जो आंकड़े पढ़े हैं, आप बिहार में आकर कभी नहीं रहे, आप एक बार बिहार में आकर वहां के थाने को देखिये। मैं आपको एक बात बताती हूं, मेरे पति वहां एक पुलिस आफिसर थे और वहां के बहुत ही नामी-गिरामी, बड़े यशस्वी पुलिस आफिसर थे, जिन्होंने भारत माता की सेवा में आतंकवादियों से लड़ते हुए अपने प्राण दिये। भारत सरकार ने मरणोपरान्त उन्हें अशोक चक़ प्रदान किया। मेरे पति जहां जाते थे, वहां अपराध का ग्राफ बढ़ जाता था, कयोंकि वहां रिपोर्िटंग बढ़ती थी। बाकी जगह रिपोर्िटंग नहीं होती है। बिहार में जाकर आप पुलिस थाने में देखिये। मेरे जैसी महिला की जो बात नहीं सुनते, उस पर गलत आरोप लगाते हैं, वहां कौन गरीब, कौन असहाय, कौन महिला जाकर अपना केस रजिस्टर करा सकती है? अभी दशहरे पर एक १६ साल की मासूम लड़की को इनके लोगों ने किडनैप किया। वह अपने माता-पिता, दादी के साथ दशहरे का मेला देखने जा रही थी, उस लड़की को उठाकर दिन-दहाड़े ले गये। दिन-दहाड़े अपने घर में उसके साथ बलात्कार किया। हल्ला होता रहा, लेकिन उसका केस रजिस्टर नहीं हुआ।

... (व्यवधान)बिल्कुल। केस रजिस्टर नहीं हुआ। आप कौन से आंकड़ों की बात करते हैं, शरद जी? मैं अध्यक्ष जी को कह रही हूं, बिहार के बारे में ये आंकड़े मत गिनाइये। हम बिहार में रहते हैं, हम जानते हैं कि बिहार में अपराध रजिस्टर नहीं होते। वहां झूठे अपराध फ्रेम किये जाते हैं, जो आप लिस्ट पढ़ रहे हैं, वह फ्रेम किये हुए अपराधों की होगी, उसमें वास्तविक अपराध बहुत कम होंगे। फिर भी जितनी भी आंकड़ों में हेराफेरी करें, अगर मैं भी आंकड़े दूं तो पिछले एक साल में ८,९९२ हत्याएं, १,८४० बलात्कार और करीब-करीब २,५०० अपहरण की वारदातें हुई हैं। इसमें मैं यह खुला आरोप लगाती हूं कि इसमें अपराधी कई बार, बल्िक ज्यादातर बार मुख्य मंत्री निवास में संरक्षण पाते हैं, यह मैं डंके की चोट पर कहती हूं। मैं इनके सामने ही कह रही हूं। दो-तीन साल पहले विजया बैंक में डकैती हुई थी। हम लोग डरते हैं, मनुष्य डरता है, लेकिन कुत्ता नहीं डरता है। पुलिस का कुत्ता बुलाया गया, विजया बैंक में कुत्ता गया और विजया बैंक से वह सूंघने वाला कुत्ता निकलकर सीधे मुख्य मंत्री निवास में गया। सत्ता में अपराधी बैठे हैं, इसकी इससे बड़ी मिसाल आप चाहते हैं कया? आप मेरा मुंह बन्द कर सकते हैं, आप लोगों को डरा सकते हैं, आप लोगों को जेल में बन्द कर सकते हैं, लेकिन कया पुलिस के खोजी कुत्ते को भी आप डरा सकते हैं? यह इस बात का प्रूफ है। जो भूतपूर्व मुख्य मंत्री जी थीं, मैं उनका नाम नहीं लेना चाहती, उनके दोनों भाई अपराधियों के सरगना हैं। वे किडनैपिंग में हिस्सा लेते थे और यह उनको पता है।

... (व्यवधान)

16.23 hrs. (Dr. Raghuvansh Prasad Singh in the Chair) श्री दरोगा प्रसाद सरोज (लालगंज): जो व्यकित सदन में नहीं है, आप उनका नाम नहीं ले सकतीं। प्रो. रीता वर्मा (धनबाद): नहीं-नहीं, मैंने किसी का नाम नहीं लिया, कया पाइंट ऑफ ऑर्डर है? इनके दल के एक यशस्वी सदस्य ... (अध्यक्षपीठ के आदेशानुसार कार्यवाही-व्ृात्तान्त से निकाल दिया गया।) हैं, उनको कौन नहीं जानता, वे सदन में हमारे साथी हैं, यहां पर नहीं हैं। पुलिस सुपरिन्टेंडेंट पर उन्होंने गोली चलाई थी, जब पुलिस सुपरिन्टेंडेंट ने स्मगलिंग के सिलसिले में उनका पीछा किया था तो उन्होंने पुलिस सुपरिन्टेंडेंट पर गोली चलाई थी, चूंकि पुलिस सुपरिन्टेंडेंट ने ... (व्यवधान) डा. शकील अहमद (मधुबनी) : यह परम्परा है कि जो सदन में उपस्िथत नहीं है, उसका नाम नहीं लिया जाता। प्रो. रीता वर्मा (धनबाद): कोई परम्परा नहीं है। मैं जो कुछ बोल रही हूं, रिकार्ड पर बोल रही हूं। आप मुझ पर मुकदमा चलाइये। मैं डंके की चोट पर कह रही हूं। पुलिस अधीक्षक ने जब केस दर्ज किया तो उन्होंने पुलिस अधीक्षक को भगा दिया। हमारे मार्कसवादी मित्र बड़े चुप हैं, आपके कार्यकर्ता चन्द्रशेखर की भी वहां हत्या की गई थी, आप जानते हैं कि किसने उनको मारा था, ... (व्यवधान) ...। अगर मैं गलत कह रही हूं तो आप इनसे पूछ लें। सभापति महोदय (श्री रघुवंश प्रसाद सिंह): किसी माननीय सदस्य के खिलाफ आरोप नहीं लगाया जा सकता।

________________________________________________________________________ *Expunged as ordered by the Chair. प्रो. रीता वर्मा : मैं जो बोल रही हूं, सच्चाई के साथ बोल रही हूं। अब सच्चाई बोलने का वकत आ गया है। सभापति महोदय: उसके लिए नियम बने हुए हैं। सबूत के साथ, आसन से सहमति लेनी होती है। बिना आसन की सहमति से किसी माननीय सदस्य के विरूद्ध आक्षेप नहीं किया जा सकता। प्रो. रीता वर्मा : मैं आपको सबूत लाकर दूंगी। आपकी बात मानते हुए मैं दूसरी तरह से अपनी बात कहना चाहती हूं। इनके एक यशस्वी सदस्य, जो अभी भी इस सदन के माननीय सदस्य हैं, चुनाव के कुछ दिनों के बाद स्मग्िलंग के सिलसिले में जब पुलिस अधीक्षक ने इनका पीछा किया तो इन्होंने उस पर गोलियां चलाईं। पुलिस अधीक्षक ने केस किया। मोहम्मद शहाबुद्दीन (सिवान): वह मुकदमा कोर्ट में विचाराधीन है। प्रो. रीता वर्मा : मैंने किसी का नाम नहीं लिया। इससे ये बाज नहीं आए। हाल में इन्होंने अपने सशस्त्र बल के साथ अपने कलेकटर के आफिस में एक विधायक पर हमला किया और डयूटी पर काम कर रहे हैड कांस्टेबल की राइफल छीन ली। शरद जी, आप मेरी बात सुनिए, तभी आपको पता चलेगा कि बिहार में संवैधानिक व्यवस्था ध्वस्त हुई या नहीं। ये जो माननीय सदस्य हैं, ये कलेकटर के आफिस में घुसकर विधायक के साथ मारपीट की और हैड कांस्टेबल की राइफल छीन ली और केस दर्ज नहीं हुआ, कयोंकि सत्ताधारी दल के सदस्य हैं, उनको बाकायदा सर्िवस विमान से बिहार से जाने की इजाजत मिल गई। मोहम्मद शहाबुद्दीन : हमने जमानत कराई थी ... (व्यवधान) प्रो. रीता वर्मा : शरद जी, आपको मेरी तरफ तवज्जो देनी चाहिए। अभी आप कह रहे थे कि बिहार में केस बहुत कम हैं। यह केस जो हुआ कलेकटर के आफिस में, इसकी भी रिपोर्ट नहीं की गई। जब पूरे बिहार की कांस्टेबल्स यूनियन ने भारी दबाव डाला तब जाकर केस दर्ज हुआ। वहां केस दर्ज होना भी बड़ी टेढ़ी खीर है, यूं ही सत्ताधारी दल के लोगों के खिलाफ केस दर्ज नहीं हो जाते। इनके एक और यशस्वी सदस्य हैं। इनका नाम दाऊद इब्राहिम के साथियों की लिस्ट में और आई.एस.आई. की लिस्ट में है। एक दिन वहां पर पुलिस अधीक्षक को सूचना मिली कि इनके घर में दाऊद इब्राहिम के गिरोह के आदमी छिपे हुए हैं, वह पुलिस अधीक्षक महिला थीं और मेरी तरह से ही एक बहादुर महिला थीं। वह जब इनके घर रेड करने गईं तो उनको रेड करने से रोका गया। न सिर्फ सांसद महोदय ने रोका, बल्िक उनकी हत्या करने की साजिश भी की गई। वह पुलिस अधीक्षक अपनी जान बचाने के लिए दिल्ली आईं। जिस बिहार में एक पुलिस अधीक्षक की जान सुरक्षित नहीं है, वहां एक गरीब आदमी की, दलित की जान कैसे सुरक्षित रहेगी, कया शरद जी आप इस विश्वास करते हैं? मैं कांग्रेस के मित्रों से पूछती हूं कि एक भूमिहीन दलित पर अत्याचार हो, वह ऐसी अव्यवस्था में अपनी रिपोर्ट दर्ज करा सकता है? इनके एक और यशस्वी सदस्य हैं, वे भी माननीय सदस्य हैं। एक जमाने में उनके डर से उनके क्षेत्र की लड़कियों ने कालेज जाना छोड़ दिया था, इतने बदनाम थे। पांच-छः साल पहले की बात है, सदन के बहुत से लोगों को बहुत सी बातें पता नहीं होंगी। पांच-छ: साल पहले की बात है। मैंने न्यूज में सुना कि औरंगाबाद से एक रशियन डिप्लोमैट की कार चोरी हो गई। मैंने सोचा कि यह आपका औरंगाबाद है या हमारा औरंगाबाद है तो बाद में पता चला कि अपना ही बिहार का औरंगाबाद है। श्री शरद पवार : यह कब की बात है? प्रो. रीता वर्मा : यह पांच साल पहले की बात है। श्री शरद पवार : फिर हमारा औरंगाबाद नहीं होगा।

... (व्यवधान) प्रो. रीता वर्मा : नहीं, नहीं, हमारा ही औरंगाबाद था। मैंने कहा कि फलां-फलां व्यकित जो उस समय विधायक था, उसी का हाथ होगा। दो-तीन दिन के बाद चोरी हुई गाड़ी फिर से वहीं एबैंडन्ड मिल गई कयोंकि यह बात उनको समझाई गई कि अरे बेवकूफ, बाकी गाड़ियां तो तुम चोरी करते हो, फिर इसे कयों चोरी करते हो, यह रशियन डिप्लोमैट की गाड़ी है।

... (व्यवधान)यह उनको समझाया गया कि बाकी गाड़ियां आप उठाकर ले जाते हो लेकिन डिप्लोमैटस की गाड़ियां कयों ले जाते हो? इसमें बड़ा झमेला हो जाएगा। फिर दो-तीन दिन बाद वही गाड़ी उसी स्पॉट पर लाकर दे दी गई। वह भी सत्ताधारी दल का विधायक था।

... (व्यवधान)संवैधानिक व्यवस्था किसको कहते हैं?

...(व्यवधान)जब रक्षक ही भक्षक हो जाएं, भक्षक ही रक्षक हो जाएं, दोनों ही हो गए हैं, ... (व्यवधान)जो भक्षक थे, जो अपराधी और गुंडा तत्व थे, वे सत्ता में चले गये और जो सत्ताधारी थे, वे उन तत्वों के साथ मिल गये। जब रक्षक ही भक्षक हो गये तो जनता कहां जाए? जनता किससे फरियाद मांगने जाएगी? ... (व्यवधान) हाँ मैं बहुत भारी गुंडा तत्व हूं। आप बिहार में जाकर पूछ लीजिए। ... (व्यवधान) आप जो बिहार से चुनाव लड़ते हैं, बिहार की चुनाव व्यवस्था के बारे में मैं कया कहूं? आज सब लोग रोना-पीटना कर रहे हैं कि आर.एस.एस. के लोगों को डिस्टि्रकट में भेजा जा रहा है। ऐसे पुलिस अफसर पर जिसे सुप्रीम कोर्ट ने बिल्कुल निदर्ोष करार दिया है, उसे जिले में पोस्ट कर रहे हैं, तो आर.एस.एस. का एजेंडा लागू हो रहा है वगैरह-वगैरह। आप भी जानते होंगे कि हमारे यहां बिहार में लालू प्रसाद यादव जी और उनकी धर्म पत्नी जी, दोनों के राज्य में अफसरों की पोस्िटंग किस तरह होती थी। श्री लालू प्रसाद (मधेपुरा) : जब हम सड़क पर हैं, राबड़ी देवी सड़क पर हैं तो हम लोगों का नाम, हमसे आपको कया चिड़ है? बार-बार हम लोगों का नाम आप लोग कयों लेते हैं? अगर कोई चिड़ हो तो बताइए, उस चिड़ को हम दूर कर दें।

... (व्यवधान) प्रो. रीता वर्मा : चिढ़ की कया बात है?

... (व्यवधान)इन लोगों को यह जानकर आश्चर्य होगा कि उस जमाने में अफसरों की पोस्िटंग उन्हें एक डैफनिट ब्रीफ देकर होती थी कि आपको यहां फलां-फलां व्यकित को हराने के लिए पोस्ट किया जाता है। मैं कहती हूं कि मैंने किसी प्रतिद्वंदी के खिलाफ १९९६ में चुनाव नहीं लड़ा बल्िक मैंने अपने डिस्टि्रकट कलैकटर के खिलाफ चुनाव लड़ा और उस डिस्टि्रकट कलैकटर ने हर तरह की धांधली की। मेरा पूरा विश्वास है कि एक-सवा लाख बोगस वोट मेरे खिलाफ डलवाये गये लेकिन जिसको जनता का विश्वास हासिल है, जिसके पास जन समर्थन है, उसका कौन कया कर सकता है? फिर भी मैं २२००० वोटों से किसी तरह निकलकर आ गई। अपने डिस्टि्रकट कलैकटर से जो चुनाव लड़े, वह किसी तरह ही निकल सकता है, उसका निकलना ही एक क़ैडिट की बात है। आज यशवंत जी के चुनाव क्षेत्र में ऐसे ही एक व्यकित को पोस्ट किया गया है कि अगले चुनाव में आपको यशवंत जी को हराना है। अरे कौन हराएगा? आपको हमारे वनांचल क्षेत्र में पूछता कौन है? आप कुछ करते रहिए। अगर इतनी आपकी चलती तो आप कब का हम लोगों को हरा चुके होते। आप जितना हमारे पीछे लगते हैं, उतना ही हमारी संख्या और ताकत बढ़ती जाती है। अगर हराना होता तो १९९६ में ही आप हरा चुके होते जब एक-सवा लाख बोगस वोट हमारे खिलाफ डलवाये गये थे। पूछ-पूछ कर आफिसर्स की पोस्िटंग करते थे। मैं पूछना चाहती हूं, कया एक मुख्यमंभी का स्टैंडर्ड इतना गिर गया है कि वह थानेदार की पोस्िटंग करता है। बिहार में पुलिस सुप्रींटेंडेंट अपनी मर्जी से थानेदार की भी पोस्िटंग नहीं कर सकता, उसकी भी लिस्ट मुख्यमंत्री के निवास पर आती थी और कहा जाता था कि फलाने आदमी का यहां और फलाने आदमी की वहां पोस्िटंग कर दो। लेकिन ये लोग कम्पलेंट कर रहे हैं कि आरएसएस का शासन चल रहा है और आरएसएस के लोगों को फील्ड में भेजा जा रहा है। आप बिहार के लोगों से जाकर पूछिए, जो कह रहे हैं कि लालू जी और इनकी धर्मपत्नी के शासन में ईमानदार और योग्य व्यकितयों को कभी भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं मिल सकती थी और घोटाला करने वालों की पोस्िटंग हुआ करती थी। जिसने घोटाले को उजागर किया, उन सब की शंटिंग कर दी जाती थी, चाहे वह ।... जिन लोगों ने चारा घोटाले को बेनकाब किया, उन सब की शंटिंग कर दी। हमारे यहां योग्यता और कर्मठता को यहीं पुरस्कार मिलता है। दलितों के बारे में बात कही गई। मैं सदन को बताना चाहती हूं, आपही के विधायक ने पांच साल पहले दलित महिला के साथ बलात्कार किया। वे शायद कटिहार या पूर्िणया के विधायक थे। आप ही के विधायक ने खुले आम एक दलित महिला के साथ बलात्कार किया और आप भूल रहे हैं। उनका नाम शायद ... ....था। जब वह लपेटे में आ गया, तो आपने निकाल दिया, लेकिन वह आप ही का विधायक था। शुरू में तो उसका अपराध भी दर्ज नहीं हुआ था।

FIR लौज नहीं हुई थी। लड़की पूरा ब्लीड कर रही थी, उसको हास्िपटल ले जाना पड़ा, फिर भी उसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। जब दलितों के बारे में बात हो रही है, तो इनके दलित प्रेम के बारे में कहना जरूरी हो जाता है। मैं आपको लालू जी और राबड़ी देवी जी से दलित प्रेम के बारे में बतालाना चाहती हूं। एक संस्था अनुसूचित सहाकारिता विकास निगम नाम से है, जिसमें केन्द्र ने अनुसूचित जाति के विकास के लिए १०० करोड़ रुपया दिया। दलितों से बहुत प्रेंम है और आप तसल्ली दे रहे हैं कि हम दलितों के प्रेम करेंगे और आप कह रहे हैं कि "नहीं-नहीं राबड़ी जी ऐसा मत करिए, इतने लोगों को एक साथ मत मरने दीजिए। थोड़ा बहुत तो होता रहता है, लेकिन इतने लोगों का संहार नहीं होना चाहिए। "इस निगम को केन्द्रीय सरकार ने जो पैसा दिया था, उसमें से ४० करोड़ रुपए के तो शेयर खरीद लिए गए और कहा गया कि अनुसूचित जाति के विकास का कार्यक़म हो रहा है और बाकी ६० करोड़ रुपया केन्द्र को वापिस नहीं किया गया, उस राशि से सैलरी बांटी गई। कारण यह कि इतना घोटना होने के बाद राज्य को कोषागार में पैसा नहीं था और जब पैसा नहीं होता है, तो इसी तरह से पैसे मारे जाते हैं। यह C&AG की रिपोर्ट है कि राज्य ने १०० करोड़ रुपए दलितों के विकास के नाम पर लिए, और इतना विकास उन्होंने किया है। दलितों की बात पर मैं एक बात और कहना चाहती हूं। दलित जो सिर पर मैला ढोहते हैं, उनसे भी ज्यादा दलित और कोई हो सकता है। आजादी के पचास सालों के बाद भी सिर पर मैला ढोहया जाता है। भंगी-मुकित योजना भारत सरकार ने चलाई थी और इस योजना में चार करोड़ रुपया मिला था, लेकिन एक पैसा भी भंगी मुकित कार्यक़म पर खर्च नहीं हुआ।

... (व्यवधान)यह फैकट है। मैं झूठ नहीं बोलती हूं और अपनी ईमानदारी के बल पर टिकी हुई हूं।

... (व्यवधान)सारे के सारे पैसे इधर-उधर सैलरी और घोटालों में खर्च कर दिए गए। इसी तरह से विशेष अंगीभूत योजना इन लोगों के कल्याण के लिए बनाई गई है, जो पिछले पांच वषर्ों से ठप्प है। विशेष अंगीभूत में पिछले पांच वषर्ों से एक भी कार्यक़म नहीं किया गया। दलितों की बात चलती है, अनाथ बच्चों के लिए एक दीन बंधु योजना बनी थी वह भी केन्द्र की योजना थी उसमें भी इनका काम एकदम जीरो था। जब ये अल्पसंख्यकों के हित रक्षक हैं, इतने भारी सेकयूलर हैं, उनकी इतनी बात करते हैं, अल्पसंख्यक वित्त निगम और पिछड़ा वर्ग वित्त निगम जैसी संस्थाओं का बिहार में कया रिकार्ड है। मैं नहीं कहूंगी, आप अपने कांग्रेसी जनों से पूछ लीजिए कि ये कितना अल्पसंख्यकों और पिछड़े वर्ग का कल्याण कर रहे हैं। इन्होंने यह घोषणा की थी- "धोती, साड़ी योजना।" सभी को धोती और साड़ी मिलेगी, जो गरीबी रेखा से नीचे रहते हैं। महोदय, आपको मालूम है कि इस धोती, साड़ी योजना में भी २०० करोड़ का घोटाला हो गया। ये अपने सेकयूलर क़िडेंशियल्स कहते हैं, आरएसएस से मुकाबला करने के नाम पर, साम्प्रदायिकता के विरोध के नाम पर, आप भी इसलिए इनका समर्थन कर रहे हैं। उनके वोटों पर शायद आपकी नजर है। उनसे थोड़ा रिकार्ड भी पूछ लीजिए। मैं आपको एक घटना सुनाती हूं।

... (व्यवधान)आप मेरी बात को ध्यान से सुनिए। मैं अल्पसंख्यक भाईयों को भी अपनी बात सुनाना चाहती हूं।

... (व्यवधान)कहते हैं कि हम अल्पसंख्यकों को बड़ा प्यार करते हैं। मैं एक जिलाधिकारी की बात सुना रही हूं, यह तीन-चार साल पहले की बात है। उसके जिले में कोई घटना हुई थी, दंगा होने की आशंका थी। इस जिलाधिकारी की कुशलता और मुस्तैदी के कारण दंगा नहीं हुआ। जब वह पटना गया।

... (व्यवधान)मैं जिनकी बात कह रही हूं वह अभी भी जिलाधिकारी हैं। वह जब गए तो उन्हें मुख्य मंत्री जी से डांट पड़ी और उन्होंने डांट कर कहा कि आप तो हमारी सारी राजनीति खराब कर देंगे। उन्होंने जो शब्द इस्तेमाल किए वह मैं नहीं बोलना चाहती। दस-बारह मुसलमान के लिए एक डेरोगेटरी शब्द था वह मैं इस्तेमाल नहीं करूंगी- "मारा जाता, दंगा होता तभी तो हमारी शरण में आते, आप जैसे जिलाधिकारी रहेंगे तब तो हमारी सारी राजनीति खराब हो जाएगी।"

... (व्यवधान)ये अल्पसंख्यकों के प्रेमी हैं। आप इनकी वकालत कर रहे हैं।
... (व्यवधान)अब समय आ गया है, अल्पसंख्यकों को भी पता लगे कि कौन उनके सच्चे मित्र हैं और कौन उनको डरा-धमका कर अपने साथ रखना चाहते हैं। महोदय, ये अल्पसंख्यकों का रोना रोते हैं और उनको तसल्ली देते हैं। ... (व्यवधान) एक जमाने में अल्पसंख्यकों को डराने के लिए ही भागलपुर दंगा आयोजित किया गया था और आज भी वही राजनीति बिहार में चल रही है कि कैसे इनको डरा कर अपने साथ बांधा जाए। इन्होंने आपको भरोसा दिया है।
आप इतने कयों घबरा गए, हमने आप लोगों की बातों को बहुत देर तक सुना है। इन्होंने भरोसा दिया है कि दलितों की रक्षा करेंगे। हम भूमि सुधार कार्यक़म लागू करेंगे। आज मैंने पेपर में पढ़ा, यह आश्वासन दिया गया है कि भूमि सुधार कार्यक़म लागू करेंगे। बिहार सरकार जानबूझ कर कोर्ट की अवमानना कर रही है। कोर्ट की बातें बहुत लोग कर चुके हैं लेकिन मैं आपको याद दिलाऊं कि वह कोर्ट का कितना सम्मान करते हैं। लालू जी को जब जेल जाना पड़ा था, याद कीजिए वह दिन। जिस बेचारे जज ने फैसला दिया, उसी अदालत में घुस कर जो हंगामा किया गया, उनको जो धमकियां दी गईं, वहां कया न्याय का शासन रहेगा? उसी अदालत में असामाजिक तत्व घुस कर न्यायाधीश को धमकाते हैं, वहां कौन से न्याय का सम्मान हो सकता है ? शरद जी, आप एक बार बिहार को नजदीक से आकर देखिए तब बोलिए।
... (व्यवधान)मध्य प्रदेश में १९९७ में एक केस दर्ज किया गया था कि कई बिहार के मंत्री और सांसद हथियारों की खरीद-फरोख्त के धंधे में लिप्त थे। ... (व्यवधान) मध्य प्रदेश में यह केस पकड़ा गया था। इसमें पुलिस अफसर का नाम है। इसमें तीन लोग गिरफतार भी हुए। वे बिहार के हथियारों के सौदागर ... थे। इसमें ... के अलावा इनके एक मंत्री का भी नाम था। मैं उनका नाम नहीं लेना ____________________________________________________________________ *Expunged as ordered by the Chair. चाहती इनके मंत्रिमंडल के कई मंत्री थे। यह कहा गया कि बोगस कागजों के आधार पर इन्होंने हथियारों की खरीद-फरोख्त की है। उसमें एक डी.आई.जी. का भी नाम था। मैं उनका नाम नहीं लूंगी। उन्होंने बताया कि विगत ढ़ाई वषर्ों के दौरान ग्वालियर से ८५ राइफलें और ६५ हजार बोगस कारतूसों की अवैध बिक़ी की गई।
... (व्यवधान)वह इनकी सरकार थी, हमारी नहीं थी। आप पूछ लीजिए कि ऐसा केस है या नहीं?
... (व्यवधान) श्री लालू प्रसाद (मधेपुरा) : प्रधान मंत्री जी के घर ग्वालियर से अवैध हथियार बिक रहे थे जो खत्म हो गए।
... (व्यवधान) प्रो. रीता वर्मा (धनबाद): खरीद-फरोख्त वाले कौन लोग थे, यह आप जानिए। ... (व्यवधान) मैं अंत में एक ही बात कहना चाहती हूं। अभी राजनैतिक मजबूरियों के चलते इतनी भ्रष्ट और अपराधी शासन को यह लोग समर्थन दे रहे हैं लेकिन याद रखिए "मरी खाल की स्वास सों लौह भस्म हो जाए," आप चाहे कितने ताकतवर हों, दलित की हाय में इतनी बड़ी आग होती है कि वह बड़े से बड़े मनसूबों को भी भस्म कर देती है। यह बात कबीर दास ने कही थी। आज भले ही आप लोग अपने-अपने अहंकार में सत्ता की जोड़-तोड़ में दलित की हाय को भूल रहे हैं, उनके खून को भूल रहे हैं लेकिन समय आपका दिखा देगा कि इसका कया अंजाम होता है? मैं कांग्रेस को किन शब्दों में, मैं तो खुश हूं कि उन्होंने बिहार से अपना तम्बू उखाड़ लिया है। आप जाकर देखिए। आज के पेपर में आया है कि कांग्रेस के ४० पदाधिकारियों ने त्यागपत्र दे दिया है। डा. शकील अहमद (मधुबनी) : किसी ने नहीं दिया। प्रो. रीता वर्मा (धनबाद): आप वहां जाकर उनकी भावनाएं सुन लीजिए। वहां ५० साल तक कांग्रेस को पानी देने वाला कोई नहीं रहेगा। आपने ऐसा काम किया है। सभापति महोदय (श्री ऱगुवंश प्रसाद सिंह): अब आप समाप्त करिए। आपका समय समाप्त हो गया है। आप अपना आसन ग्रहण करिए।
______________________________________________________________________ *Expunged as ordered by the Chair. प्रो. रीता वर्मा (धनबाद): मैं आपकी बात का आदर करते हुए दो लाइनों में अपनी बात समाप्त करती हूं। कांग्रेस सारी गलती इसलिए कर रही है कि हमारे प्रधान मंत्री जी अभी लाहौर यात्रा पर गए थे। उसका बहुत अच्छा परिणाम हुआ है। इससे अल्पसंख्यक बहुत खुश हैं। इसलिए इन्हें चिंता हो गई है। दूसरी बात यह है कि जब आपकी नेता कह सकती है कि वह नेहरू गांधी परिवार की बड़ी प्राउड मैम्बर हैं तो भंडारी जी कहें कि वह आर.एस.एस. के प्राउड मैम्बर हैं तो इसमें कया है। जब वह कह सकती हैं तो यह भी कह सकते हैं। इसमें कया बात है?
... (व्यवधान)उन्होंने आर.एस.एस. कहा है, बी.जे.पी. नहीं कहा।
... (व्यवधान) सभापति महोदय : अब समाप्त कीजिये। प्रो. रीता वर्मा (धनबाद): सभापति महोदय, उधर के लोग डिस्टर्ब कर रहे हैं। रामदास जी आप हमारे मित्र हैं, आप दलितों के लिये खड़े हैं। मुझे अपनी बात पूरी करने दीजिये। सभापति जी, मैं राष्ट्रकवि श्री दिनकर जी की कविता की कुछ पंकितयां अपने कांग्रेसी साथियों और आप के लिये बोलकर जा रही हूं: समर शेष है नहीं पाप का भागी केवल व्याध, जो तटस्थ है, समय लिखेगा उनका भी इतिहास।
>SHRI SOMNATH CHATTERJEE (BOLPUR): Mr. Chairman, Sir, we expected that realising the fate of this Proclamation, the Government will in good grace would have admitted the impropriety committed by them and would have withdrawn the Proclamation. Since that good sense has not prevailed in them, I have to stand up to oppose this Proclamation. The hon. Home Minister spoke of the popular support that this decision of the Government supposed to have got. He referred to some newspaper reports and Prof. Rita Verma also referred to some opinion poll. Four years of the life of the Assembly have gone by and elections are to be held in March, 2000.
I thought the hon. Home Minister is a strong votary of the Parliamentary democracy because in this House and outside he had been championing against the imposition of President's rule. The Prime Minister, Shri Vajpayee, came with us to meet the then President of India when the NTR's Government was dismissed.
How does one determine the extent of popular support or the popular opinion in a Parliamentary democracy, exccept through the exercise of the franchise? After the fiasco of October, 1998 to impose the President's rule, the BJP and its cohorts have lost the elections. There is some expression of public opinion there. How this Government is functioning can be seen from the fate of my dear sister, Smt. Sushma Swaraj. Where is their Government in Delhi? Even in the by-elections they have lost.
I appreciate the sentiments expressed by Prof. Rita Verma. I respect her sentiments. But I was wondering whether I was sitting in the Bihar Assembly or in Lok Sabha. Which is the place where these matters should be brought up? Four or five years ago, somebody tried to kidnap somebody and somebody tried to rape somebldy else; so today the Home Minister, Shri L.K. Advani, recommended to the President of India to impose President's rule. What is happening in this country? I would like to make it very clear at the inception itself that we are greatly concerned with what has happened in Bihar.

17.00 hrs. We had earlier condemned, in no certain terms, the merciless killings that had taken place and we still reiterate our condemnation. Nothing like this should happen anywhere in India. But today, we are getting into a competitive exercise to find out which State is more crime infested. Today, the position is, statistics have become more important than good governance because one has to justify or not justify the action taken under the name of the Constitution. I am saying it with a great sense of feeling because 97 plus 4, that is 101 times or perhaps 102 times, probably this is 103rd occasion when Article 356 has been applied in this country. It is not me alone, Justice Sarkaria has also said that it has more been misused than it has been properly used. It has been misused 90 times. We have seen yesterday the response of the House when the case of Goa came up for discussion. We have seen the attitude of the Members. Comrade Kurup, our Party Member, had taken part in that debate and he had said that we are against it on principle and, therefore, we do not support it.

Certainly no Government would have been happy. I would have been happy if in Goa the Governor had dissolved the Assembly and directed for elections. Mr. Prime Minister, the President's Rule was not necessary. I am sure you would have advised that or probably that was done in your absence. Unfortunately, again we find - in a sense we are not surprised - this rickety Government, which has to keep motley crowd satisfied, doing this. If somebody frowns in Chennai, two Ministers at the Centre go. If somebody says something in Calcutta, another three Ministers go. Shri Atal Bihari Vajpayee is more concerned with the frowns of his allies and not with the tears of the common man of this country. That is why he is more concerned to save his Government. It seems to me that if any Government in this country has to be dismissed for non-performance or mis-performance, it is the Central Government. But I do not ask for it. Not because we do not have the power but because I do not believe in that procedure. In a year's time the people of Bihar would have given their verdict and then it would have been made known. On the basis of the Outlook opinion poll or on the basis of the opinion of some un-disclosed person, today the Home Minister of India, Shri L.K. Advani is justifying his action. Mr. Chairman, Sir, I feel that it is another grotesrue example of the most mala fide use of a draconian provision of this Constitution and sooner it is obliterated from our Constitution the better it is.

Mr. Chairman, Sir, the people are wondering about the credibility of this Government to have taken such a decision. As I said, it is a motley combination masquerading as a Government in this country. What is its credibility and what is its ethics? Sir, it is a Government of give and take which says, `give me seven votes, I will give you 20 railway projects or give me five votes, I will give you three other projects'. Can a Government run in this fashion? Therefore, I thought Shri Vajpayee would have said, `enough is enough'. Today, we all appreciate his efforts to improve relations with our neighbour Pakistan. But what is happening in this country? Where is the Government? What is the economic situation of this country? What is happening in the industrial sector? What is its performance? It is the lowest.

SHRI TAPAN SIKDAR (DUMDUM): What is happening in West Bengal?... (Interruptions)

SHRI SOMNATH CHATTERJEE : Sir, I do not envy Shri Atal Bihari Vajpayee. I think, he knows my personal regard for him. I have had the privilege of working with him in so many committees, etc. and I am seeing his performance here. He is suffering and groaning under the weight of packages of his allies. He is concerned with packages. What can he do? As has been already pointed out by Shri Sharad Pawar, he has deferred to the demand for President's Rule in Bihar. During the elections -- Shri Digvijay Singh was here and he had admitted it -- his two stalwarts - the great troubleshooter, Shri George Fernandes and Shri Nitish Kumar have throughout their campaign said: "Within seven days we shall get rid of Lalu-Rabri. Put BJP into power at the Centre". Now nearly one year has gone by. They thought before the anniversary let us do it. There is a demand -- including from Dr. Subramanian Swamy -- for imposition of President's Rule in Tamil Nadu also. Even a ludicrous demand is made of imposition of President's Rule in West Bengal. He has to carry on with these allies.

Sir, why do we oppose this? Kindly allow me a little time, not much, because they stand self-condemned. What was the genesis of Article 356? The genesis was the infamous Government of India Act, 1930 as Justice Sarkaria himself has noted. He said that from the very first time when it was used in 1951, I believe, it had been misused. Everybody knows Dr. Ambedkar's news He was the architect of the Constitution. Lest I make a mistake, may I quote him? He said:

"I hope such Articles will never be called into operation and they would remain a dead-letter."

Why? No other federal Constitution contains any such provision. One could understand if some sort of armed-rebellion or armed-insurrection would take place. This provision was made as it was a new fledgling republic of ours. On both sides Pakistan was there which was not very friendly at that time and something may happen to the State. They may be unable to look after or protect themselves. Therefore, that was thought with a great hope and expression of desire that it will never be used and will remain a dead-letter. It was specifically said that maladministration, lawlessness or law and order question can never be the subject matter of Article 356. Justice Sawant in Bommai case said:

"A proclamation cannot be issued under Article 356 unless the internal disturbance give rise to a situation in which the Government of the State cannot be carried on in accordance with the provisions of the Constitution. Mere internal disturbance short of armed-rebellion cannot justify a proclamation or emergency under Article 352 nor such disturbance can justify issuance of proclamation under Article 356(1) unless there is a break down of the Constitutional machinery."

Now, nobody had indicated which Constitutional machinery had broken down.

How could this provision be taken recourse to?

SHRI KHARABELA SWAIN (BALASORE): What sort of armed rebellion was there in Gujarat? You should explain that also here. When Suresh Mehta Government was dismissed, you supported it; your party supported it. Kindly explain it if you are a senior leader. Why did you support the dismissal of the Suresh Mehta Government? What sort of armed rebellion was there in Gujarat? You yourself insisted on it.

SHRI SOMNATH CHATTERJEE : Sir, I do not wish to take up the time of the House.

SHRI KHARABELA SWAIN : You will not do it because you may not have a reply to this question...(Interruptions)

SHRI SOMNATH CHATTERJEE : We have a very knowledgeable Mover of the Motion, a very well known student of history and constitutional law. I need not trouble him with quotations. He knows them very well. Therefore, there are well established provisions and well established observations of the judiciary, by Justice Sarkaria and by Dr. Ambedkar that this cannot be utilised for mere breakdown of law and order machinery or even for misgovernance. I would like to ask the hon. Prime Minister and the hon. Home Minister one question. Even after the imposition of President's rule, there were some few more killings which had taken place and supposing there is what is being called another narsanhar under Mr. Bhandari's dispensation, then what would you do? What would you do? How can that be a test? डा. विजय सोनकर शास्त्री (सैदपुर): वह तो करवाया गया।

... (व्यवधान)

SHRI SOMNATH CHATTERJEE : Sir, very rightly, some references have been made by the Leader of the Opposition regarding the Governor's Report. I thought that at least Advaniji would not rely much on that. He has justified the action of the Governor because a court of law had said that the Government could not carry on according to the Constitution or administration. Why? This is a judgement which has been annexed and which we have got. It is in a matter of removal of encroachments from the roads. It is a matter of removal of khatals. It is with regard to use of red lights on the cars and regarding traffic lights or cleaning the drains in the city of Patna. प्रो. रीता वर्मा : जब ट्रैफिक लाइट वाला काम भी कोर्ट को करना पड़े तो सरकार कया करती है?

SHRI SOMNATH CHATTERJEE : I have said that you have spoken very well but you should go and become a Member in the Bihar Assembly, if you can.

With all respect to the learned judges, it is unthinkable that the judiciary will make such observations in a case of removal of encroachments and cleaning of drains and a Government can be directed to be removed saying that there is failure of constitutional machinery. Is there any city or town in this country where there are no encroachments? I do not know if you are going beyond Lutyens Delhi these days. You may find what is happening everywhere. What are you doing? In that case, how can this Government remain? It is a misfortune in this country that people are staying in jhuggis and jhonpris . In Delhi also, there are so many places. We should feel ashamed as a nation. Recently, I had been to Mumbai, Bangalore and Pune. Are there no jhuggis and jhonpris there? We are not happy about it. Are we happy as a nation? Are we proud if it is happening in some other State and not in my State? Shall I be happy, enjoying and appreciating it?

Now, will that be taken as a ground for dismissal of Governments in those States? The respected Governor utilises this, annexes this and Shri Lal Krishna Advani falls into the trap. I am very sorry about it.

Sir, this Proclamation is mala fide in its intent, in its content and in the procedure that has been adopted. Of course, it is a legal mala fide so far as the last part is concerned.

The hon. Governor's first Report was of 18th September, 1998. The Rashtrapathiji rejected it. No case had been made out. Then, the next Report is dated the 11th of February, 1999 - four or five months later. Under the Constitution of India, if an advice is sent back upon reconsideration, then the President is obliged to accept it. I do not know what is the note given to the respected Rashtrapathiji. What was the advice tendered? Was it sent to him as a reconsidered view of the Cabinet? If it was so, then, he is bound to accept it.

I have all respect for the President. We are proud of the fact that we have a President of such a calibre. If he was given that advice, he was misled. He was mis-advised because it cannot be the reconsidered opinion. It cannot so after five months. There must be some proximity, some nexus to time. After five months, something is sent.

I was going through the latest Report of the Governor. He says that it should be supplementary to the earlier Report. From that I guess, I apprehend that, as stated, the same Report was being sent. It is not a fresh Report. If you go through the subsequent Report of February, 1999, you will come to know that except one issue, though very serious issue of law and order, no new material was mentioned, as Shri Sharad Pawar had disclosed about the wrong Report given to the President about the panchayati institutions.

This is the danger of appointing active politicians as Governors. What was intended to have, through this Proclamation, in Bihar was to substitute an opposition Government by their own hatchet man. He was proud to say to the world through the television like this: "I am an RSS man. I am proud to be an RSS man."

Mr. Chairman, the Sarkaria Commission has said one thing. There is an elaborate description about the role of Governor, about the appointment of Governor. I believe Shri Advani has one in front of him. Pandit Jawaharlal Nehru's speech in the Constituent Assembly has been quoted at page 121. He said:

"But on the whole it probably would be desirable to have people from outside--eminent people, sometimes people who have not taken too great a part in politics. Politicians would probably like a more active domain for their activities."

Then, what Justice Sarkaria says? In his clearest recommendation, he says:

The Governor should be eminent in some walk of life. He should be a person from outside State. He should be a detached figure and not too intimately connected with the local politics of the State; and he should be a person who has not taken too great a part in politics generally and particularly in the recent past. It is desirable that a politician from the ruling party at the Union is not appointed as a Governor of a State which is run by some other party or a combination of other parties."
He was appointed exactly in violation of this recommendation. Then, the Home Minister, in his wisdom and vast experience, decides that at least our objective has been achieved now, the Government of Bihar has been dismissed, let somebody else come, otherwise these types of comments will be made. So, he wanted an apolitical person to become the Governor of Bihar. Therefore, he has admitted that he is an active politician belonging to the Ruling Party at the Centre and also belonging to a particular set up which is even not allowing the Prime Minister to function. But he could not achieve that. Shri Advani has to swallow many of his pride and judgment. He is no longer a free man also. Probably, he is now thinking that the Presidentship of the Bharatiya Janata Party was a much better proposition than sitting on that side.
Therefore, on the basis of the report of the Governor of these credentials, the Government of India posthaste decides to impose President's Rule in Bihar. The Cabinet sat in the night for that purpose. That is what we read in the newspapers. We used to criticise that the Congress people could think only during the midnight. Now they are following all the vices of the Congress Party, while in Government, faithfully with greater zealousness, but with much lesser capacity.
Sir, I humbly congratulate the President for having returned the earlier recommendation of the Cabinet. He had also returned the recommendation in regard to Uttar Pradesh when Shri Indrajit Gupta was the Home Minister; again he had exercised his judgment in regard to Bihar and I am sure, that on the basis of the legal advice given, if they are bound to send it under Article 74 of the Constitution, he had no choice, but to sign it. I do not know whether something was added again or not. If it was a new report, there was nothing new in it and if it was the old report, then there is no case at all, whatsoever, for imposing President's Rule in Bihar.
Sir, kindly see the partisan views. They wanted to impose President's Rule in Bihar quickly, because there is going to be an election within a year. But they cannot annoy the Government of our friend Shri Sirpotdar's party. What has happened to Sri Krishna Commission's Report? If something like that had happened in Bihar, what would Shri Advani have done? In Maharashtra, that report was not only rejected unceremoniously, even the judge has not been spared. He has been abused filthily by the then Chief Minister there. श्री मोहन रावले (मुम्बई दक्षिण-मध्य) : ये गलतफहमी फैला रहे हैं। चीफ मनिस्टर ने श्रीकृष्ण आयोग को क़िटीसाइज़ किया है, श्रीकृष्ण जी को इंडीवीजुअली क़िटीसाइज नहीं किया है।
... (व्यवधान)
SHRI SOMNATH CHATTERJEE : Sir, probably he is talking about the new Chief Minister there. श्री मोहन रावले : नहीं, मैं वही बोल रहा हूं।
SHRI SOMNATH CHATTERJEE : Sir, I would not have supported the imposition of President's Rule even in Maharashtra. But did they consider that? Did they consider that in regard to Gujarat? (Interruptions)
SHRI MADHUKAR SIRPOTDAR : Mr. Chairman, Sir, on a point of information, I would like to humbly request Shri Somnath Chatterjee to point out as to in which State, any Commission's report was implemented. Even the Report of the Jain Commission was not implemented and because of that the Government supported by his party was thrown out of power.
SHRI SOMNATH CHATTERJEE : They were thrown out of power because they have not implemented that report and that will happen to his party also. He himself had said that they were thrown out because of that. It will happen to them also.
Sir, as far as Gujarat is concerned, if lawlessness and acting contrary to the Constitution will amount to not implementing the provisions of the Constitution or breakdown of the constitutional machinery, is there any other State which is more grotesque and more unseemly than Gujarat?
Sir, secularism, is the basic feature of our Constitution now. It has been said repeatedly. Here how did they deal with that State? The hon. Prime Minister goes and only expresses about the desirability of a fresh debate. In Orissa, one Ministers' team went. In Bihar another team went. Of course, the Ministers who went there were all Cabinet Ministers. Within half an hour they found out everything and came back. Here, in the case of Bihar, they had stated that there was a failure of the Constitutional machinery. All these things have been done within half an hour or one hour. I think Shri Jathiya also went to Bihar only to keep their company. This shows how a provision of the Constitution which has to be used in rarest of rare occasions and which has to be used very sparingly, is being used selectively, in a discriminatory manner for their partisan purposes.
Therefore, Sir, from all points of view, this is one of the cases of gross misuse of this Constitutional provision. I am sorry to say that this Prime Minister is in bondage. He is not a free man with his 18 desparate allies who are supporting him. ... (Interruptions)
SHRI TAPAN SIKDAR : That is not your headache.
SHRI SOMNATH CHATTERJEE : Certainly, it is your headache. You are trembling, you are shivering.
SHRI TAPAN SIKDAR : You need not advise us again and again.
SHRI SOMNATH CHATTERJEE : I am not advising you. I do not want to waste my energy in advising you. You are beyond redemption. People will decide about you. They have made one mistake. They will not make this mistake every time. I am just saying that he is in bondage. How can they decide about a functioning Government here? It appears there is probably a hotline which is operating between Delhi and Hyderabad.
A trouble is brewing in Kashmir. Already three Members have said this. Shri Chautala's friends have already deserted. Akalis are uncertain. The fate of this matter is known very much in Rajya Sabha Sir, when I started my speech, I have said why this matter is being pressed by the Government knowing its fate at least in Rajya Sabha. They are only trying to utilise this opportunity for propaganda purposes. Our very good friend, Shri Pramod Mahajan is utilising the TV and the AIR very well although he washes his hands from any so-called interference with Prasar Bharati. He gives his sermons about the editorial policy etc. Therefore, all along the country, the people know that he is utilising the media for publicity purposes. Unfortunately a section of the media also feels that. He somehow goes on abusing somebody. I am not holding any brief for Shri Lalu Prasad Yadav. I am only holding a brief for the Constitution of India.
Therefore, I thought, realising the fate of this Resolution,the Govt. will not try to divide this House and the Government. I would have accepted in good grace the inevitability of this Proclamation, and at least we would have tried to dispose of or dealt with some of the important issues before us.
So, Sir, it seems not only this Government is doomed but our misfortune is that along with this Government, this country is doomed. Therefore, to save this country, to save the Constitution, sooner they go out, it would be better, and as I said earlier not a tear will be shed.
> श्री कृष्ण लाल शर्मा (बाहरी दिल्ली ): सभापति महोदय, अभी मैंने विपक्ष के नेता का भाषण सुना है और सी.पी.एम. के नेता श्री सोमनाथ चटर्जी जी का भी भाषण सुना है। मुझे ऐसा लगा कि शायद उनकी कुछ राजनैतिक मजबूरियां होंगी जिनके कारण वह बिहार में राष्ट्रपति शासन का विरोध कर रहे हैं लेकिन जो तर्क दिये जा रहे हैं, वे तर्क ऐसे हैं कि उन तकर्ों के आधार पर शायद वह स्वयं एक भी बात सत्य सिद्ध नहीं कर पाये हैं। जैसा कि आप सब जानते हैं कि सौ से अधिक बार देश में राष्ट्रपति शासन लगाए गए हैं और मैं आज यहां यह कहना चाहता हूं कि अगर सौ बार जो राष्ट्रपति शासन लगाये गये हैं, उनमें से अगर कोई एक राष्ट्रपति शासन जिसको कि युकितयुकत कहा जा सकता है, आधार युकत कहा जा सकता है, अगर कोई है तो वह बिहार में लगाया गया राष्ट्रपति शासन है। अगर हम उन लोगों की सारी बातें सुनें, अभी सोमनाथ जी ३५६ का विरोध कर रहे हैं, मुझे बड़ा अजीब लगता है। १५ दिसम्बर १९९२ को भारतीय जनता पार्टी के चार प्रदेशों पर राष्ट्रपति शासन लगाया गया और यह कांग्रेस ने लगाया और उनके सब साथी दलों ने इसका समर्थन किया। कया वह ३५६ नहीं था? कया हमारे पास मैजोरिटी नहीं थी? कया वहां पर दो तिहाई से ज्यादा मैजोरिटी नहीं थी? ३५६ का समर्थन आपने कयों किया और आज इसका विरोध कयों कर रहे हैं? इसका उत्तर आपको देना पड़ेगा।
...(व्यवधान)
SHRI SOMNATH CHATTERJEE (BOLPUR): You have read my speech that day.
SHRI KRISHAN LAL SHARMA (OUTER DELHI): Yes, I know that. लेकिन इसके साथ मैं दूसरी बात भी कहना चाहता हूं कि अभी एक वर्ष हमारे शासन का हुआ है और एक वर्ष में केवल एक प्रदेश है जहां ३५६ लगाया गया है। हम एलाइज के दबे हुए हैं तो बहुत से प्रदेशों में हैं, और भी प्रदेशों में हैं लेकिन एक प्रदेश के बारे में यह एकशन केन्द्र ने लिया है। इस एकशन में जब एक बार राष्टपति जी ने वह प्रस्ताव वापस कर दिया तो उसे काफी देर तक दोबारा नहीं भेजा। वह तब भेजा जब लगातार दो बार दलितों की हत्याएं हो गईं और एक ऐसा नरसंहार हो गया और प्रदेश में इतनी ज्यादा हत्याएं हो गईं तब जाकर यह लगा कि अब इसे न भेजना हमारे लिए और अपनी सरकार के लिये कर्तव्य से पीछे रखना होगा। तब लगा कि अब सरकार का यह आवश्यक कर्तव्य है कि इसे भेजा जाए। बिहार में भी पहले छ: बार राष्टपति शासन लग चुका है और उसमें किसी ने कोई आपत्ित नहीं की है लेकिन इस बार आपत्ित की जा रही है। मैं कहना चाहता हूं कि कैसी-कैसी अजीब घटनाएं हुई हैं। १९८४ में जब आन्ध्र प्रदेश में राष्ट्रपति जी ने और कांग्रेस की काउंसिल ऑफ मनिस्टर्स के कहने पर कांग्रेस की तरफ से वहां पर राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया तब एक महीने तक कैम्पेन हुआ और आखिर में उसे सदन में बहुमत साबित करने के लिए कहा गया और फिर से वह गवर्नमेंट रैस्टोर हुई, ऐसा उदाहरण आप हमारा प्रस्तुत करके बताइए। इसी तरह से मैं कह सकता हूं कि गुजरात और उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लागू हुए हैं। गुजरात में तो बहुमत सिद्ध करने के बाद राष्ट्रपति शासन लागू हुआ और किसी ने उसका विरोध नहीं किया। किसी ने उसके बारे में नहीं कहा। उत्तर प्रदेश में तो विधान सभा के चुनाव होने के बाद एक दिन के लिए एसेम्बली नहीं बुलाई गई और राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया। राष्ट्रपति शासन लगाना कांग्रेस के काल का चरित्र है और आज कांग्रेस के लोग सिद्धान्त का मुखौटा पहनकर, गुजरात, उत्तर प्रदेश, आन्ध्र प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान आदि राज्यों में राष्ट्रपति शासन का समर्थन करने वाले आज सिद्धान्त की बात करने लग जायें, तो कौन विश्वास करेगा। आप लोग कह रहे हैं कि हमने बिहार में राष्ट्रपति शासन लगाकर गलती की है। आप हमें यह भी समझा रहे हैं कि इसके बारे में पोपुलर ओपनियन नहीं है। मैं लालू जी से कहना चाहता हूं, आप घबराते कयों हैं, अच्छा यह होगा कि इस राष्ट्रपति शासन के विषय को लेकर बिहार में चुनाव करा लीजिए, दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा तथा पता लग जाएगा कि वहां जनता किसके साथ है। मैं कांग्रेस के लोगों से कहना चाहता हूं, आज कांग्रेस ने बिहार में राष्ट्रपति शासन का विरोध किया है, उस स्िथति में जबकि वहां पर भ्रष्टाचार हुआ। इसके अलावा दो और कारण हैं - एक दलितों पर अत्याचार और दूसरे महिलाओं पर अत्याचार। बिहार में महिलाओं पर अत्याचार और बलात्कार हुए हैं। इसके बावजूद भी कांग्रेस ने बिहार में राष्ट्रपति शासन का विरोध किया है। यहां सदन में कांग्रेस के जनरल सैक़ेटरी और स्पोकसमैंन बैठे हुए हैं। उन्होंने ११ तारीख को कहा - इस सरकार को बने रहने को कोई नैतिक अधिकार नहीं है। अब उनको एक दम लगता है कि उनको अधिकार तो नहीं है, लेकिन कान्स्टीच्युशनल राइट है। मैं कांग्रेस से पूछना चाहता हूं, यह दोहरा मापदंड कयों है। उड़ीसा में दो तीन लोगों की हत्या हो गई और आपने नेता बदल दिया। आपने कह दिया कि मोरल रिसपांसबलिटी ले ली, लेकिन बिहार में इतनी बढ़ी घटनायें हो गई और आप राष्ट्रपति शासन का विरोध कर रहे हैं। मैं कांग्रेस और बाकी दलों को चेतावनी देना चाहता हूं कि बिहार का विषय साधारण विषय नहीं रहेगा, यह विषय जनता तक जाएगा और इसी विषय पर भारतीय जनता पार्टी और उसके एलायेंस दो-तिहाई बहुमत के साथ आगे आयेंगे। आप इसको अजमाकर देख लें। आप गलतफहमी में न रहें, आप इस तरह से गलत सिद्धान्तों का समर्थन करके ... (व्यवधान) श्री कांतिलाल भूरिया (झाबुआ) : गुजरात में ईसाइयों पर हमले हुए हैं। ... (व्यवधान) श्री कृष्ण लाल शर्मा : आप मुझे एक भी उदाहरण दे दीजिए कि वहां किसी एक आदमी की हत्या हुई है, तो मैं आपकी बात मान लूंगा।
... (व्यवधान) श्री कांतिलाल भूरिया : वहां ईसाइयों पर हमले हुए हैं।
... (व्यवधान) श्री हरिन पाठक (अहमदाबाद) : किसी को चोट तक नहीं लगी। कोई इंजर नहीं हुआ। ... (व्यवधान) श्री कृष्ण लाल शर्मा : आपने गुजरात के बारे में शोर मचाया है। मुझे आपको यह बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि गुजरात में शान्ित है। वहां ईसाइयों और गैर ईसाइयों ने मिल एक पीस कमेटी बनाई है और वह पीस कमेटी काम कर रही है। गुजरात में एक भी नई घटना नहीं है।
... (व्यवधान)आप उड़ीसा और मध्य प्रदेश की चिन्ता करिए।
... (व्यवधान) श्री कांतिलाल भूरिया (झाबुआ) : बिहार में तो शान्ित है। वहां तो चुनी हुई सरकार है। श्री कृष्ण लाल शर्मा : आपके सामने हम लोग जो बात कह रहे हैं, बिहार के बारे में लालू जी और आप चिंताएं व्यकत कर रहे हैं उससे यह लगता है-जैसे कहते हैं कि मुद्दई सुस्त, गवाह चुस्त। शरद जी कह रहे हैं कि ७३वां अमेंडमेंट हुआ और पंचायत राज अगर वहां लागू नहीं हुआ, तो हमें समझ रहे हैं, वे कोर्ट के उदाहरण दे रहे हैं। इस देश में बिहार के अलावा कोई अन्य प्रदेश नहीं है जहां ७३वें अमेंडमेंट के हिसाब से पंचायत शासन नहीं चल रहा, केवल बिहार ही कयों रह गया।
Why is this exception? कया कोर्ट ने कोई स्टे दिया, रोका? कया कोर्ट की इन बातों से आप लाभ उठा कर वहां पंचायत शासन खत्म कर रहे हैं। वहां फाइनेंशियल क़ाइसेज़ हैं, हिंसा है, हत्याएं है, बलात्कार हुए हैं और दलितों के साथ अन्याय हुआ है। कितनी बार राष्ट्रपति शासन के विषय आएंगे, आगे भी आएंगे। मैं आपको एक सुझाव देना चाहता हूं, सोमनाथ बाबू और शरद पवार जी से भी कहना चाहता हूं कि इस लोकसभा में यह अमेंडमेंट लाएं कि संविधान में यह अमेंडमेंट लाया जाए कि धारा ३५६ का उपयोग केवल भारतीय जनता पार्टी के शासन वाले प्रदेशों पर ही किया जा सकता है बाकी प्रदेशों पर नहीं किया जा सकता है।
... (व्यवधान) श्री सोमनाथ चटर्जी : आप रिपील के लिए ले आइए।
... (व्यवधान) श्री कृष्ण लाल शर्मा : आप रिपील के लिए कहिए। आज तक इतिहात में ऐसा उदाहरण नहीं मिलेगा कि एक स्टेट में एक घटना के कारण चार प्रदेशों में ३५६ लगा दिया गया। लालू जी के दस साल के शासन का लेखा-जोखा आपके सामने है। हमने तो आंकड़ों से कहा है और आंकड़ों से यह कह रहा हूं कि इन दस सालों में बिहार में ५८,५६५ हत्याएं हुई हैं, १८,४८५ अपहरण हुए हैं, ८,३७७ बलात्कार की घटनाएं हुई हैं, ४९५ राजनैतिक हत्याए हुई हैं, ३९० बड़े-बड़े नरसंहार हुए हैं, बड़ी-बड़ी वारदातें ४८ हुई हैं। केवल जहानाबाद में २० वारदातें हुई हैं जिन पर यह सरकार नियंत्रण और अंकुश लगाने में विफल रही है। इतना ही नहीं बल्िक बड़े-बड़े घोटाले भी हुए हैं। आप जानते हैं कि पशुपालन घोटाला एक हजार करोड़ रुपए का हुआ है, और भी इस तरह के घोटाले हुए हैं। मैं कह सकता हूं कि मस्टर रोल का घोटाला २५०० करोड़ रुपए का हुआ, ऐसे घोटालों की जांच कराने के लिए आप मांग करते तो हम मानते कि आप कोई जनहित की मांग कर रहे हैं। आप जहानाबाद घटना के बारे में कहते तो हम सोचते कि आप जनहित की बात कर रहे हैं, जनहित की एक भी बात कांग्रेस की तरफ से या सोमनाथ बाबू की तरफ से बिहार के बारे में नहीं आई। इस सरकार ने कौन सा जनहित का कदम पिछले दस सालों में उठाया, सिवाय इसके कि अपने और अपने परिवार के लिए काम किया। मुझे इस बात की खुशी है कि लालू जी सोनिया जी से मिले और उन्होंने कहा कि आपने हमें बिहार सौंप दिया है और हमने आपको सारा देश सौंप दिया है। यह इनका आपसे में समझौता हुआ। श्री लालू प्रसाद : शर्मा जी, आप सीनियर आदमी हैं, हम लोग आपकी प्रशंसा करते हैं कयोंकि नाराज होकर आप अन्न-जल छोड़ देते हैं। कहां से आप यह बात ला रहे हैं कि मैंने कहा कि सोनिया जी, आप हमें बिहार सौंप दीजिए, हम आपको सारा देश सौंप देंगे। यह पककी बात है कि अब आपकी सरकार के दिन गिने-चुने हैं कयोंकि उस दिन बिल्ली ने रास्ता काट दिया है। श्री कृष्ण लाल शर्मा : मैंने टी.वी. में सुना। आपने कहा कि यह स्वागत योग्य है। श्री लालू प्रसाद : कांग्रेस के फैसले का हमने एकदम वैलकम किया है, अब भी कर रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे। श्री कृष्ण लाल शर्मा : मुलायम सिंह जी के लिए उत्तर प्रदेश को तो छोड़ देते। कह देते कि उत्तर प्रदेश छोड़कर देश सौंपा है। श्री लालू प्रसाद : कया यह मुलायम सिंह और हममें फूट डालो और राज करो की नीति है? श्री कृष्ण लाल शर्मा : मुलायम सिंह को अपने साथ ले जाने में आपको कया संकोच था।
... (व्यवधान) श्री अब्दुल गफ़ूर (गोपालगंज): लालू प्रसाद यादव को सारी दुनिया और हिंदुस्तान के लोग जानते हैं कि ये किंग मेकर हैं ... (व्यवधान)हमारे डिस्टि्रकट के हैं। अगर सोनिया जी से बातचीत की है तो कोई बुरा काम तो नहीं किया। ये तो आपकी पार्टी के शेखावत जी से भी बातचीत करते हैं। ये तो किसी के यहां भी जाकर बातचीत कर सकते हैं। श्री कृष्ण लाल शर्मा : आपने बता दिया कि ये सबसे बात कर सकते हैं, अच्छा है। मैं इस नयी बात को थोड़ा उदाहरण देकर समझाना चाहता हूं। बिहार के साथ जो किस्से जुड़े हुए हैं कि वहां कैसा विकास हो रहा है, उसके बारे में कहना चाहता हूं। जापान का एक डैलीगेशन बिहार में गया तो वहां के अधिकारियों से बात की और वहां के मुख्यमंत्री से भी बात की कि यहां इतने प्राकृतिक साधन हैं, खनिज हैं फिर बिहार पिछड़ा कयों हैं। अगर आप तीन महीने के लिए बिहार हमें सौप दें तो हम उसको जापान की तरह खुशहाल बना देंगे। उत्तर में कहा गया कि आपका काम तो बड़ा स्लो है। आप जापान हम पर छोड़ दें तो हम तीन दिन में उसको बिहार बनाकर दिखा देंगे। मुझे लगता है कि सोनिया जी से मिलकर वे यह कहना चाहते हैं कि हमें बिहार को ऐसा बनाए रखने दीजिए, हम आपका समर्थन करेंगे ताकि आप सारे देश को भी बिहार बना दें, इसमें हम आपकी पूरी सहायता करेंगे। जो इनके बीच में समझौता हुआ है उसके बारे में तो देश के लोग फैसला करेंगे। लालू जी को एक बात का जवाब तो अवश्य देना होगा कि वहां विकास के काम कयों ठप्प हैं, जो न्यायिक कमीशन बना वह कयों नहीं चला, ट्राइबल-कौंसिल ने काम कयों नहीं किया, रिपोर्ट कयों नहीं दी और फाइनेंशियल लेप्िसज कयों हो रहे हैं? एक हजार करोड़ रुपया जो सेंट्रल ऐड का था उसको कर्टेल करके कहां खर्च किया? पच्चीस सौ करोड़ रुपया प्लॉन एकसपेंडीचर का आपने कहां खर्च किया? इसके बारे में तो लोगों को आपको जवाब देना पड़ेगा। आपको जवाब देना पड़ेगा कि आप किस तरह का शासन वहां चला रहे हैं और किस तरह की बातें वहां सामने आ रही हैं। इसलिए अगर कांग्रेस को लगता है कि उन्होंने कोई बहुत अच्छा काम किया है और ऐसा-वैसा कोई रोल प्ले नहीं कर रहे हैं और उस आधार पर बिहार पर समर्थन आज उन्होंने किया और लालू जी से हाथ मिलाया है तो अब सारी वस्तुस्िथति स्पष्ट हो गयी है। केन्द्र में एक साल का शासन भारतीय जनता पार्टी का चला। एक साल के शासन में इतनी अच्छी एचिवमैंटस हुईं। मैं यह बात दावे से कह सकता हूं कि आज तक के इतिहास में कोई भी सरकार इस देश में रही हो, उसका एक साल का इतना अच्छा शासन नहीं रहा। आप अगर हमें कम्युनल कहते हैं तो आप बताएं कि एक साल में कौन सा बड़ा दंगा हुआ। एक साल में एक भी भ्रष्टाचार और स्कैम का मामला नहीं हुआ। आप कोट करिए। एक साल में हमने अपने देश को दुनिया की महाशकित बना कर खड़ा कर दिया। उसकी आप निन्दा कर रहे हैं। आप उसे हजम नहीं कर पा रहे हैं। आपको अच्छा लगता अगर आडवाणी जी बाला साहेब ठाकरे जी से मिलने न जाते। अगर वह उनसे मिलने न जाते तो टैंशन बनी रहती, क़िकेट का मैच नहीं होता और टैंशन हो जाती। इस बात की किसी ने प्रशंसा नहीं की। आडवाणी जी ने वहां जाकर बाला साहेब ठाकरे जी से बात की। मैं आज सदन में बाला साहेब ठाकरे को बधाई देना चाहता हूं कि उन्होंने आडवाणी जी के जाने के बाद अपना प्रोटैस्ट विदड़ा कर लिया। उन्होंने देश के हित में इतना बड़ा कदम उठाया लेकिन इसकी कोई प्रशंसा करने के लिए तैयार नहीं है। क़िकेट और हाकी के मैच शांति से हो गए तो आपके पेट में मरोड़ उठ रहा है। प्रधानमंत्री जी की पाकिस्तान यात्रा हो गई तो आपके पेट में मरोड़ उठ रहा है कि कहीं ऐसा न हो कि यह सरकार एक साल में इतने काम करके बता दे। आपने देखा कि अमेरिका और बाकी देश भारत के बारे में सम्मान से सोचने लगे हैं। ऐसी स्िथति दूर नहीं जब सैंकशन्स हट जाएंगे और हम आर्िथक स्िथति को सुधार कर देश को फिर से खड़ा करेंगे लेकिन जो नैगेटिव रोल इस समय कुछ दलों ने अपने सिर पर ले लिया है, वह अच्छी तरह समझ लें कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार वाजपेयी जी के नेत्ृात्व में चल रही है, उनके साथ सारे सहयोगी मित्र एकजुट हैं, यह सरकार पूरे पांच साल चलेगी चाहे आप कितना विरोध करें। आपके पास कोई विकल्प नहीं है। आप पहले से विश्वासघात करके अलग-अलग हो चुके हैं। अटल जी और आडवाणी जी ने इतना अच्छा शासन दिया है कि आप उसकी तारीफ करिए। जम्मू-कश्मीर की स्िथति पहले से सुधरी है। सारे देश में लॉ ऐंड ऑर्डर की स्िथति पहले से सुधरी है। बिहार को छोड़ दिया जाए लेकिन बाकी जगह कुछ न कुछ सुधार हुए हैं। बिहार में राष्ट्रपति शासन के बाद काफी सुधार होने की गुंजाइश है। आज समय है जब सब लोग अपने गिरेबान में मुंह डाल कर देखें। अगर हम पहले छोटी-छोटी बातों पर राष्ट्रपति शासन का समर्थन करते रहे हैं तो इस समय इतनी बड़ी घटनाएं होने के बाद अगर हमने राष्ट्रपति शासन का विरोध किया तो इतिहास हमें कभी माफ नहीं करेगा। इनको एंटी दलित और एंटी महिला कह कर कटघरे में खड़ा किया जाएगा। अखिर में फैसला लोग करेंगे और आपको उसका पता चल जाएगा। जहां तक वाजपेयी जी के नेत्ृात्व का सवाल है, हमारी सरकार का सवाल है, हमने आपको एक साल में ऐसा शासन दिया जिस की तुलना किसी पिछले शासन से नहीं की जा सकती। वाजपेयी जी ने आपके सामने अपना दिल खोल कर रख दिया। वह सब को साथ लेकर चलना चाहते हैं। वह सब के सहयोग से चलना चाहते हैं और देश का नाम और सम्मान सारे विश्व में ऊंचा करना चाहते हैं। आपका सहयोग होगा तो भी अच्छा, नहीं होगा तो उसके बिना हम और हमारे सभी मित्र दल मिल कर शासन चलाएंगे और आगे बढ़ेंगे। बिहार के अंदर जितनी घटनायें हुई हैं, आपके सामने उनका दोबारा जिक़ करने की जरूरत नहीं है। मैं इतना ही कहना चाहता हूं कि मैं बिहार में राष्ट्रपति शासन लागू किये जाने का समर्थन कर रहा हूं और आप सब लोगों से अपील करता हूं कि आप भी इसका समर्थन करें कयोंकि बिहार में राष्ट्रपति शासन लागू किये जाने का समर्थन नहीं किया गया तो इसका मतलब यह होगा कि भविष्य में शायद ही किसी प्रदेश में आप लोगों को कोई सीट मिलेगी। न इस बात का कोई संकेत मिलेगा कि लॉ एंड ऑर्डर खत्म नहीं होने देना चाहिये, महिलाओं और दलिंतों के खिलाफ कोई अपराध नहीं होने देना चाहिये। सभापति जी, मैं एक बात कहकर अपना भाषण समाप्त कर दूंगा। माननीय वाजपेयी जी का जहां तक सवाल है, उन्होंने हमारे सामने कई ऐसे उदाहरण रखे ... (व्यवधान).. श्री लालू जी ने ऐसी बातें कही हैं और कहा कि रणवीर सेना से समता और बीजेपी का साथ है। अगर उनका कहना सही है तो मैं समझता हूं कि उनका और राबड़ी देवी की सरकार का हटना और भी जरूरी है कयोंकि अगर उन्हें पता है कि समता और बीजेपी का साथ है, उनके खिलाफ कोई एकशन नहीं ले रहे हैं, न गिरफतार कर रहे हैं और न आइडैंटिफाई कर रहे हैं तो इसका मतलब है कि सरकार का फेल्योर है और सरकार की असमर्थता और अयोग्यता इस बात से सिद्ध हो गई। अब लालू जी को बिना किसी आधार के दूसरों पर आरोप नहीं लगाना चाहिये। श्री सोमनाथ चटर्जी : कया अयोग्यता पर सरकार चली जायेगी? श्री कृष्ण लाल शर्मा : रणवीर सेना को कौन संरक्षण दे रहा है, यह किसी से छिपी हुई बात नहीं है। वे एंटी दलित नीति अपनाये हुये हैं। शंकरपुर बाथे में दलितों की हत्या के बाद कमीशन बनाया गया लेकिन उसकी रिपोर्ट तो दूर, उसको अभी तक आफिस तक नहीं दिया गया है यदि उसकी रिपोर्ट आती तो पता चल जाता कि कौन दोषी है। मैं यह समझ सकता हूं कि अगर सिद्धांत का सवाल बनाया तो भी यह सवाल है कि अगर धारा ३५६ संविधान में दी हुई है तो बिहार में वह लागू करने के लिये है, और यह धारा बिहार में ही लागू की जा सकती है। बिहार में जितने बड़े कांड हुये हैं, यदि आपने जरा सा भी एकशन दिखाया होता तो यह स्िथति न बनती। पहले ६० दलित मारे गये, उसके बाद २१ मारे गये और फिर ११ दलितों की हत्या की गई। आप मुझे कोई भी दूसरा उदाहरण बताइये जिस राज्य में तीन सटिंग एम.एल.ए. मारे गये हों। एक एम.एल.ए. तो पुलिस कस्टडी में अस्पताल में कत्ल किया गया और हत्यारे आज तक नहीं पकड़े गये।
... (व्यवधान).. कया आप इन तीन हत्याओं को गंभीर मानते हैं या नहीं? यदि मानते हैं तो कया एकशन हुआ? किसके खिलाफ कौन सी कार्यवाही हुई? श्री सोमनाथ बाबू यहां बैठे हुये हैं, एक एम.एल.ए. श्री अजीत सरकार तो उनकी पार्टी के थे। उनके एम.एल.ए. की हत्या हो गई और आज इस सरकार का समर्थन कर रहे हैं। हमें इससे कोई मतलब नहीं लेकिन उनकी कौन-सी ऐसी मजबूरी है। कया उनको इस तरह से करना चाहिये?

18.00 hrs. मैं एक बात ज़रूर कहना चाहता हूं (व्यवधान) एक छोटी सी बात और मैं कहूंगा कि जहां तक सुन्दर सिंह भंडारी जी का सवाल है, उनके बारे में बहुत सारे अपशब्द वहां विधान सभा में बोले गए। बिहार में भी बोले गए और यहां भी बोले गए। मैं उसकी निन्दा करता हूं। राज्यपाल के बारे में इस तरह के शब्द बोलना और उनके प्रति अपमान की भाषा इस्तेमाल करना मैं ठीक नहीं समझता, लेकिन कांग्रेस के मित्रों से मैं कहना चाहता हूं कि अगर भंडारी जी ने कहा कि "

I am proud of being an RSS man." इस पर आपको बहुत आपत्ित है, लेकिन आप जवाहरलाल नेहरू जी के बारे में कया कहेंगे जिन्होंने १९६३ में आर.एस.एस. के लोगों को २६ जनवरी की परेड में राजपथ पर शामिल किया था। यह इतिहास में केवल एक घटना है जिसमें, हम लोग जानते हैं कि आर.एस.एस. के लोगों को बुलाया गया और इसलिए उनकी देशभकित पर कोई अंगुली नहीं उठा सकता। उन्होंने देश के हर आंदोलन में भाग लिया है। यहां चंद्रशेखर जी बैठे हैं। वे जानते हैं कि जयप्रकाश जी के आंदोलन में हजारों लोग जेल गए थे। उन्होंने कभी किसी प्रकार से देश के अंदर ऐसा कोई काम नहीं किया जिस पर अंगुली उठाई जा सके। ... (व्यवधान) सभापति महोदय : अब शाम के छः बज चुके हैं। अगर सभा की सहमति हो तो सदन की कार्यवाही का समय आगे बढ़ाया जाए। कुछ माननीय सदस्य : एक घंटा बढ़ा दीजिए।
THE MINISTER OF POWER, MINISTER OF PARLIAMENTARY AFFAIRS AND MINISTER OF NON-CONVENTIONAL ENERGY SOURCES (SHRI P.R. KUMARAMANGALAM): Sir, since we are attempting to complete voting tomorrow and we have taken a very, if I may say so, strong step in the sense that all of us have collectively agreed to postpone Private Members' Business, I think we should try and achieve that target. So, I request the House and make a proposal for consideration of the House that we may sit till about 8.00 p.m. and if not up to 8.00 p.m., at least up to 7.30 p.m. because the number of speakers is very large. Only then, we can complete it. With your permission, it may be put to the House. सभापति महोदय : कया सभा की सहमति है कि सदन की कार्यवाही आठ बजे तक बढ़ाई जाए?
PROF. P.J. KURIEN (MAVELIKARA): We agree to extend the House up to 8.00 p.m. कई माननीय सदस्य : ठीक है, ठीक है। सभापति महोदय : सभा की सहमति है इसलिए सदन की कार्यवाही आठ बजे तक चलेगी। श्री कृष्ण लाल शर्मा अपना भाषण जारी रखें। श्री कृष्ण लाल शर्मा : सभापति जी, अभी तक मैंने बिहार में राष्ट्रपति शासन के समर्थन में सारे तर्क रखे हैं। मैं समझता हूं कि इस पर सदन में गंभीरता से विचार होगा। जो काम एक साल में वाजपेयी जी की सरकार ने करके दिखाए हैं, उनका भी ज़िक़ मैंने किया। मैं आखिर में इतनी बात कहूंगा कि एक तरफ तो आर.एल.एम. अपना कैम्पेन चलाए हुए है, पता नहीं इन्होंने आर.एल.एम. नाम कयों रखा? राष्ट्रीय लोकतांत्रिक मोर्चा नाम रखा है या मेरे हिसाब से कयोंकि तीन शब्द बड़ी सावधानी से चुने हैं -- आर शायद राबड़ी देवी जी के लिए है, एल शायद लालू जी के लिए है और एम शायद मुलायम सिंह के लिए है। वह आर.एल.एम. राबड़ी देवी, लालू जी और मुलायम सिंह का दल बनकर रह गया है और इसकी कोई मान्यता किसी जगह नहीं है। वह इस देश में पहले ही शासन चलाकर अपनी साख खो चुके हैं। मैं सिर्फ इतना ही कहना चाहता हूं कि वाजपेयी जी ने जो उदाहरण और आदर्श हमारे सामने रखे हैं, हमारी सरकार ने और सहयोगी दलों ने जो उदाहरण रखे हैं, उसके बारे मैं अपनी बात एक शेर के साथ खत्म कर रहा हूं --
  "अब जिसके जी में आए वो ही पाए रोशनी। हमने तो दिल जलाकर सरे-आम रख दिया।"

> श्री लालू प्रसाद : सभापति महोदय, माननीय नेता विरोधी दल, माननीय सोमनाथ बाबू और भारतीय जनता पार्टी के सम्मानित बुजुर्ग नेताओं के भाषण मैंने सुने। माननीय सदस्य रीता वर्मा जी के भाषण को भी मैंने सुना, आगे भी सुनते रहेंगे। हम कोई आपके दुश्मन नहीं हैं। आपको याद होगा जब आप कुछ नहीं थीं तो मेरे कमरे में आई थीं, तकलीफ में थीं। आपके स्वर्गीय पति हमारे बड़े समर्थक थे, पटना यूनिवर्िसटी के स्पोर्टसमैन थे, मैं जनरल सैक़ेटरी था और उनकी बहुत इज्जत करता था। उनके दाह-संस्कार में मैं हाजिर हुआ था। उन बातों को गिनाने और याद कराने की जरूरत नहीं है। आप बिहार की महिला हैं, संभ्रांत घर से आती हैं, आप तकलीफ में हैं। आप जिस पार्टी में बैठी हैं, उसका कया सम्मान हुआ है, आपको पता है। अब आगे कया सम्मान होना है, उस पचड़े में मैं पड़ना नहीं चाहता। सभापति महोदय, माननीय नेता विरोधी दल और सोमनाथ बाबू ने उन मूल बिंदुओं की विस्तार से चर्चा की, जिनको आधार बनाकर बिहार में धारा ३५६ का इस्तेमाल किया गया और १८ महीने पुरानी राबड़ी देवी सरकार को बर्खास्त किया गया। मेरे ऊपर एलीगेशंस आये, मुकदमे थे, मैंने इस्तीफा दिया। वही दफा मेरे ऊपर है जो दफा माननीय आडवाणी जी ऊपर थी। आप देखें कि कांस्िपरेसी कया है, सी.आर.पी.सी.एकट या जो भी है। हम न्यायपालिका को मानने वाले लोग हैं। हम गरीबों, दलितों और पिछड़ों की बात करते हैं। हमें विरासत में जन नायक कर्पूरी ठाकुर, लोकनायक जयप्रकाश नारायण और लोहिया जी के विचार मिले और उनसे प्रभावित होकर हम लोग राजनीति में आये । हमारे बाप-दादा राजनीति में नहीं थे। हमने बिहार में पहचान बनाई। लोग बोलते हैं लालू नाटकिया है। हमने पूरे देश में कहा कि हम भैंस चराये, गाय चराये, बकरी चराये, मजदूरी किये, जूता नहीं, चप्पल नहीं, खाना नहीं, नाश्ता नहीं - लोगों ने यह कहा कि ललुआ चरवाहा कहां से आ गया। हमने बिहार में गराबों को एकसट्रीमिस्टस बनने से रोकने का काम किया है। बड़े पैमाने पर १९७० से, बंगाल के नकसलवादी आंदोलन के बाद, बिहार को चुना गया। आडवाणी जी आपको मालूम होगा कि बिहार फयूडल स्टेट था, वहां मैन्टेलिटी है, फयूडलिज्म भरा हुआ है। सिर्फ भूमि का सवाल नहीं है, हमारी इज्जत का सवाल है, प्रतिष्ठा का प्रश्न है। चाहे होली हो या कोई त्यौहार रहा हो। जातियों और फयूडलों के विषय में अंग्रेज जो गजेटीयर छोड़कर गये हैं, आप जरूर उसका अध्ययन करिये। सभापति महोदय, बिहार के विषय में जो वर्णन उन्होंने किया है और जो रायबहादुर, लालबहादुर, सरबहादुर, खानबाहदुर, मैं सभी के लिए नहीं कहता, यह पदवी किसने दी थी, किस काम के लिए दी थी और ये लोग आज कहां खड़े हैं, यह सबको मालूम है। मैं अल्पमत में आया था और मेरे शासन के पहले आपको मालूम होगा कि १९९० के पहले तक, ईद हो, बकरीद हो, दशहरा हो, कोई भी त्यौहार हो, जो त्यौहार सारे देश में खुशियां लाते, वहां बिहार में चारों तरफ दंगे ही दंगे होते, राइट ही राइट। हमारा बिहार देवताओं की भूमि, बिहार ऋषियों की भूमि, बिहार महर्िषयों की भूमि, बापू की कर्मभूमि, लोक नायक जयप्रकाश नारायण की पवित्र भूमि, लेकिन हम दुनिया में चेहरा दिखाने लायक नहीं थे। हमने जयप्रकाश नारायण की मूर्ित के सामने मजबूती के साथ वायदा किया था कि खबरदार, कोई भी बड़े से बड़ा आदमी कयों न हो, कोई भी बड़ी से बड़ी पार्टी कयों न हो, अगर मेरे राज्य में दंगा करेगी, तो हम छोड़ेंगे नहीं। हमने छोटी-छोटी जातियों के लोगों को बुलाया, गरीबों की रैली की। सभापति महोदय, उस समय आडवाणी जी, आप पूरे भारत में रथ पर निकले थे। मेरे लिए बड़ी परेशानी थी। मैंने आपके घर पर आपसे बात की थी और आग्रह किया था कि बिहार को छोड़ दीजिए। बिहार में बड़ी मुश्िकल से सदभावना हमने कायम की है, लेकिन आप नहीं माने, मैं भी नहीं माना। मैं चाहता तो आपको बिहार में घुसने भी नहीं देता। रीता वर्मा जी के पति और अमानुल्ला जो अब एम्बैसेडर हैं। धनबाद तक आपको जाना था और धनबाद से नार्थ बिहार में आना था। मैंने कहा था कि आडवाणी जी को यहीं रोको। एक कारण और भी था। उसको मैं आपको बताना नहीं चाहता, नहीं, तो मैं आपको घुसने भी नहीं देता। वही फाइल, वही संचिका हमारे साथ है लालू यादव को कितना नीचे ले जाएंगे। चवन्नी नहीं, अठन्नी नहीं, खाना नहीं, नाश्ता नहीं, आप हमें और कितना नीचे ले जाएंगे? हमने और मुलायम सिंह ने बैक बैंचर की बात को उठाया। जय प्रकाश नारायण ने टोटल रिवोल्यूशन का नारा दिया। किस के लिए यह आन्दोलन किया। उन वगर्ों और तबकों के लिए जो सबसे पीछे थे, जो विकास की अंतिम सीढ़ी पर थे, उनको उठाने के लिए था। कल हमने इसी बात की चर्चा की थी, लेकिन आपके साथी समझ नहीं पाए। त्रिपाठी जी समझ नहीं पाए। जे.पी.के आन्दोलन में ऊंची जाति के लोग, नीची जाति के लोग, सभी लोग थे, उन्होंने आहवान किया कि नया देश बनाना है, नया बिहार बनाना है, नया समाज बनाना है, तो तो बेटो जनेऊ को फेंक दो इससे जातिवाद की बू आती है और लोगों ने फेंकना शुरू कर दिया। उस आन्दोलन में हम भी थे आप भी थे। इमर्जेंसी बाद में आई। हम सब लोग थे, लेगिन जय प्रकाश बाबू के इस कार्यक़म में ऊंची जाति के लोगों ने झगड़ा किया और रोकने का काम किया। सभापति महोदय, जहां तक पिछड़े वगर्ों की बात करनी है, तो मैं मानता हूं कि मथिला की ब्राहमण और राजपूत जातियों में आज भी ऐसे लोग हैं जिनकी गरीबी का बखान किया जाए, तो वह कम है। हमने सोश्यल जस्िटस की बात कही। हमने दबे, कुचले लोगों को ऊपर उठाने की बात कही। अगर नरसंहार का सिलसिला मैं पढ़कर बताऊं, तो उसका कोई अंत नहीं है। मैं उसको पढ़कर सदन का समय नहीं लेना चाहता हूं। आज रावड़ी देवी और लालू यादव को बुरा कह रहे हो और उनको जिम्मेदार बता रहे हो कि हमने जाति-पांति की भावना पैदा कर दी, मुलायम सिंह ने जाति-पांति पैदा कर दी। याद होगा भागलपुर रायट के मामले में आप भी इंडिकटेड थे। जब हमने कार्रवाई शुरू की थी। जब हमने कार्रवाई शुरू की थी तब आप हाई कोर्ट से के.एस.द्विदेदी को, उन पदाधिकारियों की पहचान करने में हमसे भूल हो गई। श्री के.एस.द्विवेदी, जहां एक हजार लोग मारे गये थे।

... (व्यवधान) प्रो. रीता वर्मा : सभापति जी, मेरा प्वाइंट ऑफ ऑर्डर है। यह गलत बोल रहे हैं।

... (व्यवधान)आडवाणी जी का नाम ही नहीं है। श्री के.एस. द्विवेदी को भी सुप्रीम कोर्ट से एग्जोनरेट किया गया है।

... (व्यवधान)यह गलत बयानी कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट का जजमैंट है कि वे लोग दोषी नहीं हैं।

... (व्यवधान) यह गलत बयानी है।

... (व्यवधान) श्री लालू प्रसाद : बहन रीता जी, आडवाणी जी को कोर्ट ने रोका कि आप कार्यवाही अभी नहीं कर सकते हैं। पोलटिकल पार्टी आडवाणी जी नहीं हैं। वे और लोग हैं। आप कमीशन की रिपोर्ट पढ़ लीजिए। श्री के.एस.द्विवेदी को पटना हाईकोर्ट ने कहा कि आप बिना नोटिस दिये कार्यवाही नहीं कर सकते। माफ नहीं किया गया। हमारे पदाधिकारी जिन्होंने विलंब किया है।

... (व्यवधान) प्रो. रीता वर्मा : मैंने पढ़ा है। सुप्रीम कोर्ट से वे एग्जोनरेट हुए हैं।

... (व्यवधान)मैंने अच्छी तरह से पढ़ा है।

... (व्यवधान)मैं कैसे नहीं मानूंगी?

... (व्यवधान)सुप्रीम कोर्ट का जजमैंट आप मानते हैं या नहीं मानते? श्री लालू प्रसाद : मैं एक भी शब्द नहीं बोला था। आप बैठिये। ... (व्यवधान) कया आप अपने बिहार की और आगे पहचान बनाना चाहती हो? लालू जी, रीता वर्मा जैसे लोग बिहार में पैदा हुए हैं।

... (व्यवधान)आप बैठिये। कम से कम आप बिहारी होने के नाते कुछ अंडरस्टैंडिंग करिये। मैं यह बताना चाहता था कि १९९० में जब अल्पमत में थे, नरसंहार की सूची और घोटालों की सूची, भूमि घोटाला, दवा घोटाला, पशुपालन घोटाला आदि कौन सा घोटाला कैसे हुआ, वह सब मैं आपको और सदन के माननीय सदस्यों को पढ़कर सुनाना चाहता हूं जो हमने राष्ट्रपति जी को भी दिया है। बिहार में नरसंहार कब-कब हुए, वह मैं आपको बताना चाहता हूं। स्वर्गीय इंदिरा गांधी जी उन दिनों गई थी। यह जाति की बात नहीं है, इज्जत और मान सम्मान की बात है। गरीब का बेटा अगर बस के आगे केश झाड़कर निकलता है, वह दलित है, पिछड़ा है तो उसके कान ऐंठो और थप्पड़ मारो--साले तुम्हारी हिम्मत बस में बैठने की कैसे हुई, तुम पीछे बैठो। लालू यादव आये, बोले जागो। बाबा साहेब अम्बेडकर ने हमें जीने का ... (व्यवधान) श्री प्रभुनाथ सिंह (महाराजगंज): यह बयान सही नहीं दे रहे हैं।

... (व्यवधान) श्री लालू प्रसाद : आपको बोलना है? श्री प्रभुनाथ सिंह : हां, बोलना है। श्री लालू प्रसाद : हम भुकतभोगी हैं। फुलवरिया गांव में कया हुआ, वह आपको मालूम नहीं है।

... (व्यवधान)आप बैठिये। बिहार के गरीबों को जगाया। नौ साल मेरा और राबड़ी देवी का मिला-जुला शासन रहा। जिसके बारे में आपने कहा कि लालू जी जेल नहीं गये हैं, वे जेल से ही शासन चला रहे हैं, रिमोट से शासन चला रहे हैं। ललुआ हो गया, कमाल हो गया, बड़ा खराब हो गया कयोंकि हम सभ्रांत घर के लोग नहीं हैं। दस बाई दस वाले रूम में नहीं रहते हैं। वेटरिनेटरी कालेज में हमने जीवन बिताया और बच्चों को भी उसी में रखा। वहीं से हम चार महीने के बाद मुख्यमंत्री बने। २१ नवम्बर, १९७१ को पूर्िणयां, रूपकपुर, चंदवा में १४ आदिवासी मारे गये। १९७७ में भोजपुर, धर्मपुरा में चार दलित मारे गये। १९७७ में पटना के बेलच्छी, भूमि सेना, नीतीश जी यहां नहीं बैठे हैं, उन्हें जवाब देना पड़ेगा। उनकी समता पार्टी के एम.एल.ए. श्री अरूण चौधरी भले ही कोर्ट से बाद में छूट गये हों। श्रीमती इंदिरा गांधी और अन्य लोग वहां गये थे। बेलच्छी में १४ दलित बूचड़ किये गये थे। भोजपुर धर्मपुरा में चार दलित मारे गये। ९१७९ में रोहतास के समझौता में चार दलित, पटना पिपरा में भूमि सेना ने ११, पिपरा में १४ दलित मारे गये, १९८१ में जहानाबाद परसबीघा मे ११ दलित मारे गये। १९८४ में रोहतास जिले के परसबीघा में ५ दलित मारे गए, १९८५ में मुंगेर लक्षमीपुर में १२ अत्यन्त पिछड़े वर्ग के लोग मारे गए, १९८६ में औरंगाबाद ... (व्यवधान)जो बात है मैं बता रहा हूं।

... (व्यवधान)१७ अत्यन्त पिछड़े लोग मारे गए। औरंगाबाद दरमिया में ११ सवर्ण जाति के लोग मारे गए, १९८७ में औरंगाबाद के छेछानी में ७ अत्यन्त पिछड़े वगर्ों के लोग मारे गए, १९८७ में औरंगाबाद के दलहईचक, बघौरा में ५६ राजपूतों को बूचड़ किया गया।

... (व्यवधान)कौन मारा है, आपको समझना पड़ेगा।

... (व्यवधान)जहानाबाद के नौनीह नगवा में १९८८ में १९ दलित मारे गए, जहानाबाद के दमहुआ, खगड़ी में ११ दलित मारे गए, १९८८ में जहानाबाद के गोलकपुर में ४ दलित मारे गए, १९८८ में जहानाबाद, नरही में ४ अत्यन्त पिछड़े वर्ग के लोग मारे गए, १९८८ में जहानाबाद, कोडरिया में ७ दलित मारे गए, १९८९ में रोहतास के तिजोरपुर में ६ सवर्ण जाति के लोग मारे गए, १९८९ में जहानाबाद मालीबीघा में ५ अत्यन्त पिछड़े वर्ग के लोग मारे गए, १९९० में रोहतास के केसरी में १० दलित लोग मारे गए, जहानाबाद लखवार में ५ दलित मारे गए १९९० में पटना के दरियापुर में ४ दलित मारे गए, पटना की ठोरा में १४ दलित मारे गए, पलामू में जबरिया में ११ दलित मारे गए, भोजपुर देवसिया में १४ दलित मारे गए, जहानाबाद सावनबीघा में जिस राह में गांव नारायणपुर है, वहां पहले भी ३ आदमी मारे गए, जहानाबाद, मेन बरसीमा में ९ दलित मारे गए, पटना, कगरबीघा में ४ दलित मारे गए, ... (व्यवधान) श्री अनंत गंगाराम गीते (रत्नागरि): सभापति जी, यह सुनने के लिए यदि सदन में श्री पवार होते तो अच्छा होता।

... (व्यवधान) श्री लालू प्रसाद : मैं सदन को बताना चाहता हूं कि हजारों वषर्ों... (व्यवधान) मैं सबके शासन की बात करता हूं।

... (व्यवधान)एक तरफ गरीबों की इज्जत और सम्मान, भूमि का सवाल है। लोगों ने मेरे शासन में ही नहीं, पैरलल कोड बना लिया है। अहिंसा के रास्ते को बिहार ही नहीं, जिस बाबू को आप तलाश रहे हैं, आंध्रा पीपल्स ग्रुप, पूरा लिंक है, वहां से ट्रेनर्स आते हैं। जब मैं मुख्य मंत्री था तो होम मनिस्टर ने बुलाया था। बात हुई थी कि भारत सरकार गतवधियों की मौनीटरिंग करे, ऐकसट्रीमिस्टस के मूवमैंट को देखने के लिए। हजारों वर्ष हो गए, जिनको इंसाफ नहीं मिला, इज्जत नहीं, प्रतिष्ठा नहीं, खेत नहीं, खलिहान नहीं, उन्हें राज्य सरकार ने लाखों एकड़ जमीन बांटी है। लालू यादव ने ऐलान किया था कि खबरदार, अगर एक भी गरीब बेदखल हुआ तो मैं मानूंगा कि गरीब बेदखल नहीं हुआ, लालू यादव की सरकार बेदखल हो गई। एक तरफ ऐकसट्रीमिस्टस बोलते हैं कि लालू यादव यादव है, पिछड़ा मास उसके साथ है। ऐकसट्रीमिस्टस लोग अभी बढ़ नहीं पा रहे हैं। मैं सभी जातियों की बात नहीं कहता, लालू यादव नहीं, एक किताब है। कया हुआ है बिहार में, एक षडयंत्र कौन्सपीरेसी के तहत हुआ है। जो नेता विरोधी दल ने कहा, सारा देश जानता है। आपने कह दिया कि लालू यादव के शासन से मुकित दिलाएंगे समता, बी.जे.पी.। अकेले समता पार्टी नहीं है, कांग्रेस का वोट गया, बी.जे.पी. का वोट पहले शहरों तक सीमित था, कांग्रेस के जो वोट थे, वे आपके पास शिफट कर गये। जिसको आपने खुद कहा, हमारे पडरौना के एम.पी. साहब राम नगीना मिश्र जी नहीं हैं, इन्होंने कल कहा था कि लालू यादव ने कहा था कि भूराबाल साफ करो। हमने कहीं कहा था, कैसे-कैसे हमारे साथ अन्याय होता रहा। सवर्ण जाति के लोगों से कैसे हमको अलग-थलग करके घ्ृाणा का वातावरण पैदा किया गया। यह नरसंहार और भूमि का सवाल है, आडवाणी जी यहां बैठे हैं। यह लड़ाई, क़ोनिक डिसीज़ है। आन्ध्र प्रदेश में आप देखें, चारों तरफ देखें। इसीलिए मैंने एन.डी.सी. की मीटिंग में कहा था कि जब तक इस देश में आप ईमानदारी से तय नहीं करेंगे, आपकी पार्टी आये या नहीं। मैंने कहा कि आप लैंड टू दि टिलर कर दीजिए, जो जमीन को जोते-बोये, वह जमीन का मालिक हो तो जाति टूटेगी और लैंडलोर्ड हटेगा। आप इसको ले लीजिए, आज आप पूरी मजबूती से इस कानून को बनाइये। हमारे सारे दल इस कानून को बनाने में आपका साथ देंगे। कितने लोग गरीब, दबे-कुचले लोगों के पीछे खड़े होते हैं, यह पर्दा खुल जायेगा। हमारा रिकार्ड है, हमारा अभिलेख है, हमने एन.डी.सी. की मीटिंग में कहा था कि भू-स्वामियों को लैंड के मामले में राज्य हैल्पलैस हो जाता है, पंगु हो जाता है। इसमें रिट का जूरस्िडकशन नहीं रहना चाहिए। कोर्ट कया कर रहा है, हर्ड स्टे, हर्ड स्टे, इसमें समय लगता है। आज कितनी जमीन इसके कारण लटिगेशन में है। हजारों एकड़ जमीन है, जो रुकी हुई है, इसलिए आप लैंड के मामले को नाइंथ शैडयूल में डालिये, लैंड टू दि टिलर करिये। कहां हम अमेरिका के पास घूम रहे हैं, बाहर घूम रहे हैं, इकोनोमिक सैंकशन के लिए। जसवन्त बाबू ने अमेरिका से बात की, आपने उनको भेजा कि बात करो, निगोसिएशन करो, कार्िडयल रिलेशंस बनाओ। लेकिन हमने यह भी सुना है कि विकास के लिए जो वर्लड बैंक से पैसा मिलता था, वह भी बन्द कर दिया गया। यह षड़यंत्र हमारे साथ हो रहा है। लालू यादव जेल जाने से भी जनता में नहीं मर रहा है, राबड़ी देवी नहीं मर रही है। हम गये थे, हम दोबारा जेल गये थे, लेकिन फिर भी चारों सीट वहां जीतीं। वहां अजीत सरकार जी थे, सी.पी.एम. का हम लोगों ने समर्थन किया। हमारे कैबिनेट मनिस्टर ब्रज बिहारी जी की हत्या हुई, उनका भाई जीता, मैं जेल में था। रघुनाथ झा समता पार्टी के अध्यक्ष थे, शिवहर में कौन हारा था? आप वनांचल की बात कर रही हैं, यहां जसवन्त बाबू नहीं हैं, आपने साउथ बिहार में, कोडरमा में ललकारा, यही परीक्षा है, कहा कि बिहार बंटेगा, बी.जे.पी. को जिता दो, और कोडरमा की जनता ने, वनांचल की जनता ने आपको पराजित करके आर.जे.डी. को, लालू यादव की अनुपस्िथति में जिताने का काम किया। वहां हम २२ हजार वोटों से जीते। श्री शंकर प्रसाद जायसवाल (वाराणसी): फिर ब्रज बिहारी जी की हत्या की जांच की मांग आपने कयों ठुकरा दी? श्री लालू प्रसाद : आप बैठिये। यह आपकी षड़यंत्र की किताब है, जो वाटर गेट काण्ड हुआ था, उससे भी भयानक आपने काम किया, उससे आप बच नहीं सकते। समता पार्टी बोली कि डिसमिस करिये, नहीं तो समर्थन वापस ले लेंगे। बी.जे.पी. का मेमोरेण्डम का जितना पुलिन्दा था, एक मिशन के तहत महामहिम राज्यपाल महोदय को आपने वहां भेजा। राबड़ी देवी से इस बारे में राय नहीं ली। मैं आपसे बात नहीं कर सकता था, मैं बगल में बैठा था, मैंने कहा कि आप आडवाणी जी को फोन करो। आज भी भंडारी साहब वही हैं, जिन्होंने कर्पूरी ठाकुर जी को तबाह किया था। भंडारी जी नहीं, पैनल में नाम मांगो, पूछो, कहो कि ४-५ नाम भेजिये, हम उसमें अपनी राय देंगे। वाजपेयी जी से भी बात हुई, उन्होंने बताया कि बहुत भले आदमी हैं, अच्छे आदमी हैं, कोई नुकसान करने वाले नहीं हैं। इस तरह मीठा-मीठा बोलकर गर्दन काटने का आपने काम किया। यह यहां पर सुप्रीम कोर्ट का वैल सैटल्ड जजमेंट है। मैं नहीं पढ़ूंगा, आप पढ़ लेना। आपने मस्िजद तोड़ी, तब बी.जे.पी. की सरकार बर्खास्त हुई, वह उचित था। श्री कृष्ण लाल शर्मा (बाहरी दिल्ली ): लालू जी एक मिनट, मैं आपको एक बात कहना चाहता हूं। अगर आप यह साबित कर दें कि अयोध्या में जो ढांचा गिरा, वह मस्िजद था तो मैं राजनीति छोड़ दूंगा, वरना आप छोड़ देना। पहले आप यह साबित करें कि वहां मस्िजद थी। सारी दुनिया में अपने देश को बदनाम करने के लिए यह शब्द इस्तेमाल करते हैं। मंदिर गिरे होंगे, लेकिन मस्िजद कभी नहीं गिरी ... (व्यवधान) श्री कांति लाल भूरिया (झाबुआ): आपके शब्दों में ढांचा था तो कयों गिराया? श्री कृष्ण लाल शर्मा : हमने नहीं गिराया।

... (Interruptions)

MR. CHAIRMAN : Shri Sharma, you are a senior Member. Please sit down.

... (Interruptions) श्री कृष्ण लाल शर्मा : पहले यह साबित करें कि वह मस्िजद थी। श्री इन्द्रजीत गुप्त (मिदनापुर): शर्मा जी जरा सुनिए, मस्िजद नहीं थी, धर्म स्थान नहीं था, खुदा का घर नहीं था तो कयों आपने तोड़ा? श्री कृष्ण लाल शर्मा : हमने नहीं तोड़ा। श्री लालू प्रसाद : मैं यह बता रहा था कि आपने चुनाव घोषणा पत्र में उन मतदाताओं को कहा जो बराबर फलोट करते रहते हैं, कभी इधर तो कभी उधर, कि लालू यादव से मुकित दिला देंगे। हमारा कसूर कया था, यही कि हमने कहा था कि पोलो टेकनीक में, इंजीनियरिंग में, मेडिकल में और पंचायत में आरक्षण लागू करेंगे। जैसा विरोधी दल के नेता ने भी कहा, तो मेरा कसूर यही था कि आन दि बेसिज आफ पापुलेशन कास्ट, जब ७३वां संशोधन हुआ, ९९ प्रतिशत पंचायत, बैकवर्ड कलासेज, अनुसूचित जाति, जनजाति, ओ.बी.सी. को लीगल आरक्षण होगा। दिल्ली में डीलमिटेशन हो गया। न्यायिक कार्िमक प्रशासन को अधिकार दिया गया, पावर का विकेन्द्रीकरण किया गया। मजदूर, टीचर अगर डयूटी पर नहीं आता है तो पंचायत सभा को अधिकार है कि उसको डिसमिस कर दे। ऊपर तक जाने की जरूरत नहीं है। आप कानून मंगाकर देख सकते हैं, हमने ब्लाक स्तर पर जो ब्लाक प्रमुख होगा, बी.डी.ओ. तक को सस्पेंड करने का, डिसमिस करने का अधिकार दिया था। डा. विजय सोनकर शास्त्री : इन्होंने तो चुनाव ही नहीं कराए।

MR. CHAIRMAN: Hon. Members, please hear what he has to say. I will give you a chance to speak. You please say whatever you want to say when you get the opportunity.

... (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: Shri Lalu, please address the Chair.

... (Interruptions)

SHRI LALU PRASAD : Sir, I am watching as to how you are controlling the House. ... (Interruptions) यह हाई कोर्ट में डीलमिटेशन हुआ। बैलेट बकसा खरीदा गया, पर्चा छप गया, पेपर छप गया और बी.जे.पी. के लोग हाई कोर्ट में चले गए कि लालू यादव ने पिछड़े, गरीब और दलितों को पंचायत से भी भगा दिया। हाई कोर्ट ने हमारे उस एकट को रोक दिया। अब हम सुप्रीम कोर्ट के पास आए हैं। पूरे देश को सामाजिक न्याय का नारा देने वाली सरकार को उसने नोटिस देकर पूछा है। हम प्रार्थना करते रहे कि काम करने के लिए पुराने मुखिया को ही रिस्टोर कर दें। सुप्रीम कोर्ट ने कहा या नहीं कि कलैकटर और बी.डी.ओ. ही रहेंगे। इस तरह की गलत अनुशंसा, प्रिजुडिस्ड, बदले की भावना से, बिना डैप्थ में गए हुए आपने राष्टपति जी को भेज दी कि यह कांस्टीटयूशनल ब्रेक-डाउन है। बाबू वी.पी.सिंह जी बिहार में जज हैं, अच्छे ईमानदार आदमी हैं और वी.पी.सिंह जी के यहां वषर्ों से एक पब्िलक लटिगेशन पैटीशन पैंडिंग है जो किन्हीं मुखर्जी साहब ने दी है। मुखर्जी साहब को आशा है कि पटना को सिंगापुर बना दिया जाए।

Patna is not a city, it is a village. बिहार मैट्रोपोलिटन सिटी नहीं है। वहां गली में गली और झोंपड़ी में झोंपड़ी हैं। थोड़ा सा जिस एरिया में हम लोग रहते हैं, वही नया कंस्ट्रकशन है जहां राज्यपाल वगैरह रहते हैं, बाकी तो गांव है। उन्होंने कहा कि यहां गाय का गोबर महक रहा है, महकने से मतलब बैड स्मैल है। ऐसा उन्होंने पैटीशन में कहा और यहां पर हमारा सी.पी.ठाकुर जी से बड़ा झगड़ा हुआ, वह इसी कारण हारते रहे। उन्होंने कह दिया कि गोबर से डेंगू मच्छर पैदा होता है। आप जिस हिन्दू धर्म को मजबूत करना चाहते हैं, हमने कहा कि आपको गोबर से महक आती है, अरे यह गोबर तो शादी-ब्याह में हिन्दू लोगों के लिए "गाय के गोबर से महादेव ने चौका लीपा" महादेव अर्थात् शंकर जी गौरी गनै- गोबर का ढ़ेर उस पर रखा जाता है कयोंकि वजन ज्यादा होता है। ये संभ्रांत लोग गोबर का मर्म नहीं जानते हैं। गोबर हमारा ओढ़ना-बिछौना है। गाय का मूत पीने से बहुत सी बीमारियां दूर होती हैं। आजकल तो अपना मूत लोग पी रहे हैं और ये लोग बोलते हैं कि यहां से गाय और भैंस को हटाओ।

... (व्यवधान) आपके आन्ध्र से मछली, अंडा जाता है। आन्ध्र से हमारे मार्केट में पचासौ ट्रक जाते हैं। मुखर्जी साहब ने कहा कि यहां ट्रक नहीं लगने चाहिए। मैं उस समय जेल में था। फिर ट्रक कहां लगेंगे, दानापुर में लगेंगे। बाई-पास में चारों तरफ इतने ट्रक लगने लगे कि पूरा ट्रैफिक जाम हो गया। फिर जज साहब ने कहा कि इतने बजे से इतने बजे तक ट्रक लगेंगे और आपने बोल दिया कि वहां जंगल राज है। वहां जंगल राज नहीं है, वहां मंगल राज है। वह बिहार है और बिहार को जिसने भी छेड़ा है, दिल्ली में परिवर्तन हुआ है और वह परिवर्तन बहुत जल्दी आपके सामने आ जाएगा। बिहार में जाकर आप लोग कया-कया बोलते हैं। वहीं जैन संत हुए हैं, वहीं भगवान बुद्ध भी हुए हैं जिनको कहीं जगह नहीं मिली तो उन्हें हमारे यहां पेड़ के नीचे जगह मिली। उस बिहार को आप जंगल राज बोलते हैं। शर्मा जी, आप इतने सीनियर लीडर हैं, आपने भी कहा कि बिहार के विषय में लोग बोलते हैं कि वह इतना साधन-सम्पन्न है।

Bihar is rich but Biharis are poor. यह हमारा अपमान है। कया आपने इस चीज को समझा? वहां लोहा, कोयला, लिग्नाइट, आइरन दक्षिण बिहार में हैं तो हम बिहार के मालिक हैं। यशवंत बाबू जी कहां हैं? आपने कह दिया कि वहां मिसमैनेजमेंट है, पॉवर्टी है। हमारे समता पार्टी के छोटे भाई दग्िवजय जी बोल रहे है कि बिहार से चार करोड़ मजदूर बाहर भाग गए। जहां माइन्स एंड मिनरल्स रेगुलेशन एकट है, जहां हमारी पूरी बैल्ट है, उसका मालिक दिल्ली बन गया। अब कोयला डिपार्टमेंट ने रायल्टी ८०० रुपए तय कर दिया है। इसके लिए हम लड़ रहे हैं और लड़ते रहे हैं और कहते रहे हैं कि इसके एड़बलोरम करो। आपने बिहार को कन्ज्यूमर बना दिया है। आजादी के पचास साल के बाद भी बिहार में इन्फ्रास्ट्रकचर के लिए आपने एक पैसा भी खर्च किया हो, तो बता दीजिए। नहीं तो जो देश सजा देना चाहे, वह मैं भोगने के लिए तैयार हूं। हमारा कोयला, हमारा लोहा और हम बाल्टी कन्ज्यूम कर रहे हैं, कपड़ा कन्ज्यूम कर रहे हैं, मैडसिन कन्ज्यूम कर रहे हैं। बिहार की नौ करोड़ जनता बाजार बनी हुई है और दोष लालू-राबड़ी देवी को दे रहे है। हम दोषी नहीं हैं। पीवी नरसिंह राव जी के समय हमने कहा था, फ्रैट इकिवलाइजेशन पालिसी आन स्टील को एबालिश करो। हम को गाली देते हैं कि महुवा चलो, नोएडा चलो। हमारे लोहे से साइकिल चंडीगढ़ में बनती है, लेकिन अकाली दल के बादल जी कह रहे हैं, मैं उनको बताना चाहता हूं कि गुरुगोबिन्द जी की जन्मस्थली है बिहार। हम साइकिल कन्ज्यूम कर रहे हैं, लालटेन कन्ज्यूम कर रहे हैं। हम बाजार बने हुए हैं और कुदरत ने हमको माइन्स दी हैं। हमारा उत्तर बिहार बैस्ट फर्टाइल लैंड है। गंगा मैया हमारी राष्ट्रीय नदी है। बिहार को दो भागों में करती है। हर साल इरोजन और वाटरलोगिंग देखिए। बिहार में अंतरराष्ट्रीय नदिया हैं। नेपाल से बूढ़ी गंडक के रूप में बागमती हर साल वाटरलोगिंग कर हमारी रेलों, पुलियों और अन्य चीजों को ध्वस्त करती हैं। हम चिल्लाते रहे, कया राबड़ी देवी ने कभी आपसे प्रार्थना नहीं की - प्रधान मंत्री जी। हमारी मदद करिए, हमारा उत्तर बिहार बाढ़ से ग्रस्त है। आप जाकर उत्तर प्रदेश में इतने करोड़ और फलाना जगह इतने करोड़ तथा बंगाल और बिहार में ६०-७० करोड़ रुपए देने की बात कहते हैं, लेकिन पैसा एक भी नहीं मिला। ... (व्यवधान) गुजरात को भी नहीं मिला। आप भारी चले हैं, हमसे हिसाब लेने के लिए। बिहार में कोई इंसीडेंट नहीं है, रोपनी, कोरनी, धनकटनी और पिटनी, मध्य बिहार में हम लोग एलर्ट रहे। कहीं झगड़ा नहीं था। पूंछ में आग लगाकर जला डालते हैं, धान काटिए और जमा करिए। एकसट्रीमिस्ट जलाकर राख कर देंगे। हमने जाकर डिस्प्यूट को सैटल किया। तीन पोलिटकल मर्डर करें, लेकिन लालू जेल में था। हमारे दो-तीन-पांच साल के बच्चे और हमारी बहनें, लेकिन वहां पर कोई लैंड डिस्प्यूट नहीं। लेकिन पूरे बिहार को डिसलॉग करने की कोशिश हो रही है और लालू प्रसाद जेल में। हमने कार्यवाही की थी, हमने जो कार्यवाही करनी है, वह करेंगे छोड़ेंगे नहीं। यह वर्चस्व की लड़ाई है। इस विषय पर सभी पार्िटयों के लीडर को बुलाकर बात करने के लिए आपको कुछ लेना-देना नहीं है। मेरे हाथ में राज्यपाल महोदय की यह डाकट्रेट रिपोर्ट है, अनुशंसा है। यह भारतीय जनता पार्टी की किताब दिल्ली से रिलीज हुई, जिसमें कहा गया कि भूराबाल साफ करो। मैं नाम नहीं लेना चाहता हूं, मैं उनका आदर करता हूं। आन्दोलन के दिनों में मेरे साथ रहे, जिन्होंने यह रिलीज किया है। मैं कहता हूं, इसकी जांच होनी चाहिए। एक-एक बिन्दू को होम मनिस्टर साहब आपने पढ़ा है। मैं विस्तार से क़ाइम मेटर में नहीं जाना चाहता हूं। विरोधी दल नेता ने कहा कि मेरे पास दस्तावेज हैं। यह किताब २०.१०.९८ को रिलीज हुई और मूल्य पांच रुपए है। भारतीय जनता पार्टी प्रकाशन संख्या एच-१०९८, केन्द्रीय कार्यालय, नई दिल्ली और दूरभाष तीनों आपको पता है। मुद्रक पता नहीं इसमें कया लिखा है। इसमें लिखा है - लालू-राबड़ी राज खत्म करो। कया बोली बोल रहे हैं। एकस्ट्रीमिस्ट बोलता है, नौ इंच, छ: इंच खत्म करो और आप बोलते हैं, लालू-राबड़ी खत्म करो। इसमें विस्तार से लिखा है और लिखते-लिखते एक अखबार का भी हवाला दिया है। वही अनुशंसा है, आप देख लीजिए। धरातल की बात नहीं, जो आपके मन की विकृति है, बदले की भावना है, सोशल जस्िटस पर हमला है, माइनोरिटी पर हमला है और बिहार जो दुर्ग बना हुआ है उसे अपना लक्षय बना कर रखा है। इसमें उसने आगे जाकर कया कहा, उस पत्रकार को बोलिए, उनको बुला लीजिए, बाकी बात को सभी माननीय सदस्यों को मैं फोटो कॉपी करा कर कल दे दूंगा। इसमें इन्होंने कहा और उद्धरण किया। ग्ृाह मंत्री जी, न्यूज टाइम का सम्पादकीय केन्द्रीय शासन लागू हो, इन्होंने अंग्रेजी में लिखा था, उसका हिन्दी अनुवाद है। उन्होंने इतना पोरशन अंग्रेजी में नहीं लिखा था। जिन्होंने लिखा है उन्होंने यह जोड़ दिया- भूमिहारों ने भूमिहीनों की गर्दन दबोच रखी है, जागीर बना कर बांट दिया गया और वे नकसलपंथी बन गए हैं। भूस्वामियों की कुख्यात रणवीर सेना जैसी निजी सेनाएं भूमिहीनों का नरसंहार करती हैं। भूमिहार भाइयों के प्रति बहुत आदर है। बिहार में हमारे कल्पनाथ भाई भूमिहार हैं। सी.पी. ठाकुर जी, आपके होम सैक़ेट्री साहब, पांडेय जी, उनकी पत्नी, हम भूमिहार बोल रहे हैं, न ब्राहमण, न ठाकुर, भूमिहार लोग ऊंची जाति में आते हैं। यह किताब है। चौबे जी यहां बैठे हैं, जनार्दन यादव जी राज्यसभा के मेम्बर हैं। श्री ताराखंड झा, जो पहले अध्यक्ष थे, यशोदा नंद सिंह जी, कामेश्वर पासवान जी दलित की बात करते हैं वह आपके मजबूत आदमी थे। चार-पांच लोगों ने कहा कि तुमने कयों लिख दिया, अब तो हम लोग साफ हो गए। कैलाशपति मिश्रा जी को वहां बैठा दिया ताकि भूमिहार भाई नाराज न हो जाएं। दो-तीन आदमियों को निकाल कर बाहर कर दिया और यह घटना बड़ी सोच-समझ कर कराई गई, तीनों जगह पोलिटीकर मर्डर हुआ। प्रमोद महाजन जी ने कया कहा, जब राष्ट्रपति जी ने लौटा दिया, तो उन्होंने कहा कि लोग बड़ी जल्दी बदल जाते हैं। फिर जब दबाव पड़ेगा तो बोलेंगे कि हम पासिंग रेफरेंस में बोलते हैं। उन्होंने जो बोला वह हम पढ़ कर सुनाते हैं- पित्ृा पक्ष के बाद हम लोग उपाय कर देंगे। पित्ृा पक्ष में वही है, सारे हिन्दुओं के दैवी-देवता, पुरखा, हम लोगों के माता-पिता की आत्मा विष्णुपद में, गया में रहती है। पित्ृा पक्ष में जाकर पिंडा डाला जाता है, जो लोग नहीं समझ पाते उनको बता रहा हूं। राष्ट्रपति जी ने जब उसे लौटा दिया तो प्रमोद महाजन जी कया बोले।

"The BJP has been involved in this for the last six months. Once the pitrupaksha is over, we will begin the sacred task for sacking the Rabri Government - Mahajan said cheerfully at a meeting." सैक़ेड टास्क कया है कि लालू-राबड़ी राज को खत्म करो। रहने वाले हम ही हैं वहां। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति जी ने आपकी चोरी पकड़ी। आप रणवीर सेना की बात सुन लीजिए। उन्होंने हमारे लिए कहा कि किसान विरोधी सरकार के जुल्म, जातिवादी अफसरान के खिलाफ, क़ांति के स्वर को तेज करो। हमने उसको बैन किया था लेकिन फिर उन्होंने संगठन बनाया और हमको और सरकार को गालियां दीं। हमारे विषय में बोलते हैं कि सामंतों को खत्म करो। कहते हैं कि लालू भाषण देते होते मस्त, हत्या लूट ऐसी मचाओ कि शासन हो जाए पस्त। ये है किसानों का भाई रणवीर सेना। हमने असैम्बली में बोला है, अमीर दास का कमीशन नैतिक है, सर्कूलर दिया है। इन लोगों ने चैलेंज किया, अमीर दास जी जांच करें। ठीक है, उसमें विलम्ब हुआ, लेकिन जिन्होंने विलम्ब किया, उनपर कार्यवाही होगी, यह हमने कहा, लेकिन तब तक आपने हमें डिसमिस कर दिया। डा. मदन प्रसाद जायसवाल (बेतिया): आपके समय में छोड़ा गया है। उनका लीडर पकड़ा गया और आपने छोड़ दिया।
MR. CHAIRMAN : Please do not intervene. श्री लालू प्रसाद : जायसवाल जी, किडनेपिंग का गुरू आप ही बेतिया से हैं। बेतिया से शुरू हुआ, उसका लीडर आप ही हैं। डा. मदन प्रसाद जायसवाल (बेतिया): आपने तो एक दिन मुझे भी कहा था कि आपको उठवा लेंगे। श्री लालू प्रसाद : हमने कहा था कि किस दल में फंसे हो, यहां आ जाओ, नहीं आओगे तो आपको उठा लेंगे। अब तो आप उठाने के लायक भी नहीं रह गये हैं। मैं पढ़कर बता रहा हूं, बाद में किसी को चाहिएगा तो दे दूंगा। रणवीर सेना का जो बरमेश्वर है। सेना में अगर आदमी है तो सेना से भी हथियार जा रहा है, बिजनैस में है तो बिजनैस से जा रहा है, किसी सेवा में है तो रणवीर सेना को फंडिग और हर तरह की मदद जा रही है। उन्होंने १६ फरवरी १९९८ को होने वाले आम चुनाव के बारे में सारे मित्रों को लिखा है कि अपने संगठन राष्ट्रवादी किसान महासभा और देश को ध्यान में रखते हुए आरा संसदीय क्षेत्र से भाजपा-समता के पक्ष में मतदान करने का निर्णय लिया गया है। इस चुनाव में आपसे अनुरोध है कि आप सभी बंधुगण सभी प्रकार की वैमनस्यता को भुलाकर कल दिनांक १६ फरवरी १९९८ को होने वाले मतदान में अधिक से अधिक मतदान करने का कष्ट करेंगे। आपसे करबद्ध प्रार्थना है कि अपने मत का प्रयोग सोच-समझकर अनिवार्य रूप से करें। भाजपा-समता को वोट दें। यह इनके विचार हैं। सब इन कागजों में लिखा है। श्री राजेन्द्र अग्िनहोत्री (झांसी): इन कागजों को सदन के पटल पर रखा जाए। माननीय सांसद गलत बात कह रहे हैं। ऐसा कहां लिखा है? यह इसे खुद बना कर लाए हैं। श्री लालू प्रसाद : राज्यपाल महोदय ने तथ्य से परे की बातें लिखी हैं। यह असत्य का पुलिंदा है।
... (व्यवधान)आप इसकी जांच करा लीजिए।
... (व्यवधान) इसमें दस्तखत हैं।
... (व्यवधान)सरकार की स्पैशल ब्रांच ने बिहार में जिसे जब्त किया है, मैं वह कागज दे रहा हूं। जाली लोगों को सब बात जाली समझ आती है। ... (व्यवधान) यह कहना कि वित्तीय प्रबन्धन पूर्णत: घोटालाग्रस्त हो गया है, बिल्कुल असत्य है तथा दुर्भावना से प्रेरित है। वस्तु स्िथति इसके ठीक विपरीत है। वित्तीय प्रबन्धन को काफी चुस्त-दुरुस्त किया गया है। कोषागारों का कम्प्यूरीकरण किया जा रहा है। लगभग आधे कोषागारों का कम्प्यूटरीकरण कर दिया गया है। वेतन निकासी भी आवंटन पर आधारित कर दी गई है ताकि अधिक निकासी को कवर-अप करने का स्कोप न रहे। सरकार ने लेखा-जोखा पर प्रभावकारी नियंत्रण की दृष्िट से एकाउन्टस सर्िवस गठित करने का वित्त विभाग ने निर्णय लिया था। लेखा-जोखा रखने में कीर्ितमान स्थापित किया गया है। सारे कोषागारों द्वारा हर माह का लेखा-जोखा अगले माह महालेखाकार को भेजा गया। मुख्य महालेखाकार ने जनवरी १९९९ में वित्त मंत्री से भेंट कर राज्य सरकार की इसके लिए मुकत कंठ से सराहना की। धन के दुरुपयोग होने की बात निराधार है। कहीं कोई शिकायत मिलने पर सख्ती से कार्रवाई की जाती है। चालू वर्ष में योजना आवंटन में काट-छांट करने के लिए पूर्णत: केन्द्र दोषी है। योजना आयोग ने स्पष्ट रूप से कहा है कि केन्द्रीय सहायता में ८०० करोड़ रुपए की कमी होगी। इसके अतरिकत १८३ करोड़ रुपरए की राशि कोयले पर रायल्टी में व्ृाद्धि के फलस्वरूप प्राप्त होने वाली थी। प्रति तीन वर्ष पर रायल्टी का पुनरीक्षण किया जाता है। कोयले की रायल्टी के पुनरीक्षण के पूर्व इसके लिए केन्द्र ने एक अध्ययन दल गठित किया था जिस का प्रतिवेदन वर्ष १९९७ में ही कोयला मंत्रालय को प्राप्त हो गया था लेकिन केन्द्र द्वारा आज तक कोयले की रायल्टी का पुनरीक्षण नहीं किया गया जिसके चलते राज्य सरकार को अब तक लगभग ५०० करोड़ रुपए का घाटा हो चुका है। इसके अतरिकत इस वित्तीय वर्ष की अप्रत्याशित बाढ़ के कारण राज्य सरकार को इसका प्रभावकारी ढंग से मुकाबला करने के लिए १०९ करोड़ रुपए आकस्िमक नधि से अग्रिम रूप से लेने पड़े। केन्द्र ने इस मद में कोई विशेष अनुदान नहीं दिया। राज्य सरकार को अपने ही साधन स्रोत से अभूतपूर्व बाढ़ का सामना करना पड़ा। इसके अतरिकत कर्मचारियों को लगभग २५० करोड़ रुपए अंतरिम राहत के रूप में भुगतान करना पड़ा कयोंकि फिटमैंट कमेटी की रिपोर्ट आने में विलम्ब हुआ। इन सब कारणों से राज्य योजना के आकार में कमी होना स्वाभाविक है। तनख्वाह बढने से राज्यों के ऊपर कहर पड़ रहा है। कर्मचारी हड़ताल कर रहे हैं। सब जगह हड़ताल हो रही है। रिटायरमैंट की उम्र दो साल बढ़ा दी। ऐसा करके बेरोजगारों के पेट में लात मारी। इतना होने पर भी बिहार सरकार ओवर-ड़ाफट में नहीं है। हम अन्न और खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर हैं। हम अनाज किसी से नहीं मांगते। कहा जाता है कि मजदूर पंजाब जा रहे हैं। पंजाब के किसान जब बिजनस में चले गए तो हमने बिहार के मजदूरों को कहा कि पंजाब में जाओ और वहां मजदूरी करो, सारे खेत अपने नाम लिखवा लो। हम पंजाब तक पहुंचे हैं। यह कहते हैं कि मजदूर पंजाब चले गए। बिहार के लोगों ने मारिशस और सूरीनाम में अपना देश बना लिया। ... (व्यवधान) श्री दग्िवजय सिंह (बांका): हमने बहुत गम्भीरता से इस बात को उठाया है। वे लोग गरीबी में मारिशस गए थे और आज गरीबी में पंजाब और हरियाणा जा रहे हैं। ... (व्यवधान) श्री लालू प्रसाद : आप इस बारे में नहीं जानते। वह अमेरिका जा रहे हैं। आज चारों तरफ बिहार है। महाराष्ट्र सरकार बिहार के मजदूरों को वहां से भगाना चाहती है।
... (व्यवधान)महाराष्ट्र में ठाकरे जी की पार्टी बिहार वासियों को और मुसलमानों को वहां से भगाना चाहती है।
... (व्यवधान)
SHRI MADHUKAR SIRPOTDAR : Sir, he should not make statements without proof. He should come out with proof.

19.00 hrs. ... (व्यवधान) श्री अनंत गंगाराम गीते : सभापति महोदय, जिनको अपने राज्य में खाने को नहीं मिलेगा, भूखे होंगे, वे गांव छोड़कर जायेंगे। मजदूर भूखा है तो खाने की तलाश में बाहर जायेगा। बिहार में यही स्िथति है। वह खाने की तलाश में बाहर जाता है, आप उसको खाना दो, भाषण मत दो।

SHRI KHARABELA SWAIN : Sir, he has already taken an hour.

MR. CHAIRMAN : I am asking him to conclude. Shri Laloo Prasad Yadav, you have already taken one hour. Please conclude. श्री लालू प्रसाद : सभापति जी, मैं बता रहा था... श्री प्रभाष चन्द्र तिवारी : सभापति जी, मेरा पांइट ऑफ आर्डर है। १९९० तक जब बिहार में कांग्रेस का शासन था तो ४२ प्रतिशत गरीबी थी और जब ये सत्ता में आये तो ५६ प्रतिशत गरीबी हो गई।

MR. CHAIRMAN: No point of order. I will hear you later. He is concluding. There is no point of order. I will give you a chance later. You can clarify later. श्री लालू प्रसाद : गरीब, दलितों और पिछड़ों का एकसट्रमिज्म खत्म हो। हमने दलितों को बड़े पैमाने पर २०-२० हजार रुपया और गांव में पकका मकान दिया है। इम्युनाइजेशन, सैनिटेशन,एजुकेशन के लिये काम किया है। हमने सकवैंजर्स के बच्चों को, जो गोली खेला करते थे या मुसहर या डोम जाति के लोग कागज चुनने का काम करते थे, उनको एक रुपया रोज का दिया कि स्कूल जाओ। जब राबड़ी देवी आई तो सभी जाति के गरीब बच्चों को एक रूपया देने का ऐलान किया और कहा कि स्कूल जाओ, पढ़ो और कलम चलाओ। तलवार छोड़ो, हिंसा छोड़ो, पढ़ो या मरो। यह हमारा संकल्प है। हम गांधीवादी लोग हैं जबकि आप फासिस्टस हैं, कम्युनल हैं। आपके जहन में ये बातें भरी पड़ी हैं। आप पूरे देश को तहस-नहस करना चाहते हैं। देश की एकता को खंडित करना चाहते हैं। आपने गरीब की सरकार पर हमला किया है और हमला ऐसी जगह किया है, आपने बिल्ली के खोता में उंगली डालने का काम किया है। आप कहते हैं बिहार को बांट दिया जाये, खंडित कर दो, इस सरकार को हटाइये। बिहार को नीचा दिखाने का आपने काम किया है। माननीय आडवाणी जी, आपसे हमें यह उम्मीद नहीं थी। एलीगेशन लगाने से कोई आदमी भ्रष्ट नहीं हो जाता। आप तो जम्मू कश्मीर के प्रभारी मंत्री हैं। वहां नर-संहार हो रहा है, आपने इस्तीफा नहीं दिया। ये लोग कहते हैं कि कौर्िडयल एटमास्फेयर हो गया है। वाजपेयी जी पाकिस्तान गये, उनको नहीं जाना चाहिये था, आपको पहले जाना चाहिये था। यदि आप जाते तो देश और प्रदेश में एक और बात होती। ऐसी बात नहीं कि बी.जे.पी. में बहादुर लोग नहीं हैं। यहां खुराना जी जैसे लोग हैं। पता नहीं उनको कहां रख दिया है? जिस इन्सान ने दिल्ली को बनाया, जिस इन्सान ने अकालियों से आप लोगों का मेल करवाया, अब वह इन्सान दर-दर की ठोकर खा रहा है। आपसे कया उम्मीद की जा सकती है? यहां श्री के.एल. शर्मा बैठे हुये हैं। कभी कभी अन्न-जल छोड़ देते हैं और अनशन पर बैठ जाते हैं। पता नहीं, भीतर-भीतर इनकी कया डिमांडस हैं? ये कया चाहते हैं? इसलिए मेरा सुझाव है कि कि देश में तानाशाही को मत पनपने दीजिए। आज आप उधर हैं तो कल इधर आएँगे। हम लोग जल्दी उधर जाएंगे। सोनिया जी से मिल लिये ... (व्यवधान) श्री कृष्ण लाल शर्मा : आप अभी इधर आ जाइए। श्री लालू प्रसाद : १९७७ में हम साथ थे, लेकिन आपसे बिछड़े थे दोहरी सदस्यता पर, कि आर.एस.एस. और जनता पार्टी दोनों साथ मेम्बर नहीं रह सकते हैं। हम लोगों ने छोड़ दिया। राजनारायण जी के साथ गए, चौधरी साहब के साथ गए और आप लोगों ने गवर्नर भेजा? हम कुछ नहीं बोलना चाहते। हम उनका आदर करते हैं।

... (व्यवधान)कया बोला है हमने? कुछ नहीं बोलते। मैंने यह कहा कि बिहार की सीढ़ियां बहुत तंग हैं सरकार चलाने में। हमने यही कहा कि अगर वह गोल घर पर चढ़ जाएँ गवर्नर साहब, तो राष्ट्रपति शासन का हम विरोध नहीं करेंगे। यह कोई गाली है कया? यह गोल घर है जो ईस्ट इंडिया कंपनी ने बनाया था। जवान आदमी भी नहीं च्रढ़ सकता। आपने ठीक किया था कि आपका काम बिहार में पूरा हो गया, अब आप इधर चले आइए। लेकिन जो मज़बूत परिवार है -- संघ परिवार, वह आपकी नाक में दम करता है यह हमें मालूम है। फिर आपकी मजबूरी हुई। आपने कहा कि उनको तो जाना नहीं चाहिए था। बोरिया, बिस्तर, लोटा, गिलास, किसी आदमी ने जो कागज़ दिया था लपेटे हुए सामान में, हमने कहा कि आखिर जा रहे हैं तो हम लोगों को भी इनफॉर्म करते, हम लोग भी उनको प्रणाम करते, सी ऑफ कर देते। आप बड़े अच्छे लोग हैं, सिद्धांतवादी लोग हैं लेकिन लोभ कितना मन में है, लालच कितना है? फिर उनका सारा अपमान खत्म हो गया कि नहीं आप ही वहां रहिये। आप रखे हैं और बोल रहे हैं कि आर.एस.एस. के हम हैं। आप रहिये, आर.एस.एस. के आप हैं तो रहिये। हम लोग तो जानते हैं कि आर.एस.एस. के ... (व्यवधान) प्रो. रीता वर्मा : कितना समय लेंगे?

... (व्यवधान) श्री खारबेल स्वाईं : दस मिनट पहले बोल रहे थे कि अभी-अभी खत्म करेंगे। कल तक बोलेंगे कया? ... ( Interruptions) MR. DEPUTY-SPEAKER: Laluji, will you please wind up? आपने एक घंटा ले लिया है। अब खत्म कीजिए। श्री लालू प्रसाद : मैं जानता हूं कि जब आप आसन पर आ जाते हैं तो हम लोग ऐलर्ट हो जाते हैं। हम लोग कम बोलेंगे, ज्यादा काम आप ही कर दीजिएगा। उपाध्यक्ष महोदय, सुन्दर सिंह भंडारी जी ने गलत तथ्य राष्ट्र को दिये। राष्ट्रपति जी को वे कागज़ फॉरवॉर्ड किये आडवाणी जी ने, जार्ज फर्नान्डीज़ और नीतीश जी ने। नीतीश जी को अभी आप नहीं जानते हैं। हम नीतीश जी का रत्ती-रत्ती जानते हैं। नयी दोस्ती आपकी अभी हुई है। श्री सोमनाथ चटर्जी : रत्ती-रत्ती? श्री लालू प्रसाद : रत्ती-रत्ती का मतलब हुआ भोजपुरी में गतार-गतार हम जानते हैं। समता टूट के कगार पर खड़ी है। आज मंत्रिमंडल का विस्तार कर दीजिए। कल समता रमता हुई नज़र आएगी। अभी तक इंतज़ार में बैठे हुए हैं।

... (व्यवधान)कम्यूनल रॉयटस से लोकप्रिय सरकार का, गरीब, दबे, कुचले, पिछड़ों की सरकार का गला रेता गया है। हम सदन से विशेषकर सेकयूलर पार्टीज़ से अपील करते हैं कि इनके धारा ३५६ लगाने के प्रस्ताव को ऐसा धकका दिया जाए कि इनका कहीं अता-पता न रहे। इसको रिजेकट किया जाए यही मैं सदन से कहना चाहता हूं।

... (व्यवधान)

MR. DEPUTY-SPEAKER: Those Members who want to go to the Lobby may go quietly. They should not create any noise here, please.

... (Interruptions)> श्री प्रभुनाथ सिंह (महाराजगंज): उपाध्यक्ष जी, बिहार में धारा ३५६ के तहत विधान सभा को निलम्िबत किया गया है।

... (व्यवधान)

MR. DEPUTY-SPEAKER: Those Members who want to go the Lobby may please go out quietly. Please do not create any noise here.

श्री प्रभुनाथ सिंह (महाराजगंज): उपाध्यक्ष महोदय, बिहार में धारा ३५६ के तहत बिहार विधान सभा को निलम्िबत किया गया है, जिसके अनुमोदन के लिए माननीय ग्ृाह मंत्री जी द्वारा आज सदन में प्रस्ताव लाया गया है, मैं उस प्रस्ताव के समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं। विरोधी दल के नेता श्री शरद पवार जी जब बोल रहे थे तो मैं ब्रड़े गौर से उनके भाषण को सुन रहा था। मेरे मन में यह विश्वास था कि शरद पवार जी मराठा सरदार हैं और उनके दिल में कहीं न कहीं शिवाजी की आत्मा जरूर होगी और शिवाजी की आत्मा के अनुरूप वह बिहार की भावना को समझेंगे, बिहार की पीड़ा को समझेंगे, बिहार के कष्टों को महसूस करेंगे। लेकिन शायद उन्होंने बिहार के कष्ट और पीड़ा को महसूस करने का काम नहीं किया, बल्िक उन्होंने राजनीतिक भाषण देने का काम किया है। जब सोमनाथ जी बोल रहे थे तो मुझे कोई आश्चर्य नहीं हुआ, चूंकि १७६४ में बकसर युद्ध के बाद जिस समय बिहार, उड़ीसा और बंगाल को मिलाकर एक राज्य का दर्जा दिया गया था, उस समय भी बंगाल के लोगों ने बिहार और उड़ीसा के लोगों का शोषण किया था। उस समय शिक्षा में भी गिरावट इसीलिए आई थी चूंकि शिक्षा के बड़े पदों पर बंगाल के लोग मौजूद थे। प्रशासन में गिरावट इसलिए आई थी चूंकि बड़े..। और बिहार की पीड़ा को बिना महसूस किये हुए आज जो वकालत सोमनाथ बाबू कर रहे हैं ... (व्यवधान)

__________________________________________________________________ *Expunged as ordered by the chair.

SHRI SOMNATH CHATTERJEE : Sir, I strongly refute it. This should not go on record...* यह कया बात कर रहे हैं। हाउस में यह कया बात हो रही है? श्री प्रभुनाथ सिंह (महाराजगंज): इसका इतिहास साक्षी है ... (व्यवधान)

SHRI BASU DEB ACHARIA (BANKURA): Sir, this should not go on record. ... (Interruptions)

SHRI SOMNATH CHATTERJEE : Sir, we believe in Indian unity. I am sure that Shri Advaniji will not approve of these things. ... (Interruptions)

SHRIMATI GEETA MUKHERJEE (PANSKURA): Sir, so many Biharis are living in Bengal in peace. ...(Interruptions)

SHRI MOHAMMAD ALI ASHRAF FATMI (DARBHANGA): Sir, we do not have any problem. There are so many Bengalis in Bihar. We are having very good relations with them. What is he talking about? ... (Interruptions)

SHRI SOMNATH CHATTERJEE : Sir, we do not decide people by their language or by their religion. ...(Interruptions) श्री प्रभुनाथ सिंह : उपाध्यक्ष महोदय, १८९३ में बंगाल से उड़ीसा और बिहार अलग हुए थे और डा.सच्िचदानंद सिंह की मांग पर बिहार अलग राज्य बना। मै बताना चाहता हूं कि बिहार का एक गौरवमय इतिहास रहा है। लालू जी ठीक ही बता रहे थे कि हजारों वषर्ों तक बिहार आसमान में दैदीप्यमान रहा है। एक हजार वर्ष तक बिहार शकितपीठ रहा है। बिहार के देवघर में महादेव निवास करते हैं, वहीं पर आमी में जगदम्बा निवास करती है। गज और ग्राह की लड़ाई में स्वयं भगवान विष्णु सोनपुर में आये थे। वहीं भगवान राम गौतम ऋषि के आश्रम में अहिल्या का उद्धार करने के लिए आये थे। बिंबसार, चंद्रगुप्त और अशोक जैसे महाराजाओं ने बिहार में शासन किया है। भगवान महावीर, भगवान बुद्ध ने वहीं से प्रबुद्ध होने का काम किया है। राजनीति, कूटनीति और अर्थशास्त्र के जनक चाणकय, महान विद्वान मंडन मिश्रा, चरक विद्यापति उसी बिहार के हैं। परिकल्पना के जनक शेरशाह, गुरू गोविंद सिंह उसी बिहार के हैं। महात्मा गांधी का पहला सत्याग्रह उसी बिहार से शुरू हुआ। बिरसा मुंडा की कहानी आज भी आदिवासियों की जबान पर है। उपाध्यक्ष महोदय, हम आपको बताना चाहते हैं कि आजादी की लड़ाई में सबसे पहले आरा के बाबू कुंवर सिंह की ८० वर्ष के बुढ़ापे की कहानी देश का कोई व्यकित भूल नहीं सकता है कि किस प्रकार से उन्होंने तलवार की टंकार से अंग्रेजों से लड़ाई लड़ी और अंग्रेजों के छकके छुड़ाने का काम किया। जयप्रकाश नारायण, डा. राजेन्द्र प्रसाद सिंह, अनुग्रह नारायण सिंह, बाबू जगजीवन राम, स्वतंत्रता की लड़ाई में अग्रणी रहे। बिहार के खुदी राम बोस ने फांसी के फंदे को खुशी से चूमने का काम किया। बिहार से ही वैशाली की आम्रपाली थीं जनके कारण और जहां से प्रजातंत्र की सीख मिली। जहां उत्तर बिहार की भूमि सम्ृाद्धिशाली तथा उपजाऊ है वहां दक्षिण बिहार खनिज सम्पदा से भरपूर है, यह कल का बिहार था, लेकिन आज का बिहार? उपाध्यक्ष महोदय, जब हम आज के बिहार की चर्चा करते हैं, तो हम कहना चाहते हैं कि आजादी के बाद से कांग्रेस का शासन रहा और लगभग १० वर्ष तक, लालू जी और रावड़ी देवी जी का शासन रहा। इस दौर में बिहार की जो स्िथति हुई, वह शर्मनाक है। जैसा सोम नाथ बाबू कह रहे थे कि जब संविधान का उल्लंघन होता है, जब संविधान काम नहीं करता है, तो वहां राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है। कैसा संविधान? बिहार में रहने वाले लोगों के दिलों की पीड़ा को तो जानिए? कोई व्यवस्था नहीं, कैसा बिहार, बिहार के बारे में उच्च न्यायालय ने कया कहा था, जंगल-राज चल रहा है, यह कहा था। उपाध्यक्ष महोदय, लालू जी भाषण दे रहे थे, तो मैं सुन रहा था। बिहार में कांग्रेस के जमाने का नरसंहार का ये चिट्ठा बता रहे थे, लेकिन अपने राज्य का लालू जी ने नहीं बताया। सिर्फ कांग्रेस के जमाने का इतिहास और भूगोल बताया। ... (व्यवधान) वह भी बता देंगे और यह भी बता देंगे कि ये नरसंहार कयों हो रहे हैं।

... (व्यवधान) उपाध्यक्ष महोदय : प्रभु नाथ सिंह जी, आप मुझे एड़ेस करके बोलिए। उधर मत देखिए, इससे कन्फ्रंटेशन कम होगा। श्री प्रभुनाथ सिंह: उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपको बताना चाहता हूं कि इन १० वषर्ों में जो बिहार की स्िथति बनी है, चाहे वह विकास के मामले में हो, चाहे राज्य के मामले में हो, चाहे बिहार के खजाने के मामले में हो, प्रशासन के मामले में हो, वधि-व्यवस्था के मामले में हो, उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन के मामले में हो, चाहे चकित्सा की व्यवस्था के मामले को ले लीजिए, विद्युत के मामले को ले लीजिए, किसी भी मामले को ले लीजिए, सब मामलों में पूरी तरह फेल हुई है। वधि व्यवस्था नाम की तो बात ही छोड़ दीजिए, हम तो बिहार में भगवान के भरोसे चलते हैं। जब भी हम बस या ट्रेन में चलते हैं और बिहार में प्रवेश कर जाते हैं, तो हनुमान चालीसा का पाठ करना शुरू कर देते हैं कयोंकि पता नहीं कब कौनसी जगह कहां कया हो जाने वाला है। यह स्िथति लालू जी ने बिहार की बना दी है। उपाध्यक्ष महोदय, लालू जी ने लोक सभा में कहा था कि मैं लोक सभा में कृष्ण बनकर आया हूं। मैं थोड़ी देर तक तो सोचता रहा, लेकिन फिर मैंने सोचा कि ठीक ही कहा है। लालू जी नश्िचत तौर पर कृष्ण बनकर आए हैं, लेकिन द्वापर के नहीं, कलियुग के। द्वापर के कृष्ण जब मकखन चुरा कर खाते थे और उनकी माता पूछती थी, तो वे कहते थे कि "मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो" अब कलियुग के कृष्ण लालू जी ने सोचा कि मकखन तो तभी होगा जब गाय दूध देगी, फिर दही बनेगा, तभी मकखन बनेगा। इन्होंने चारा ही चट कर दिया, न चारा होगा, न गाय खाएगी, न गाय दूध देगी और न मकखन बनेगा। जब लालू जी से सी.आई.बी. वालों ने और कोर्ट वालों ने पूछा, तो इन्होंने कह दिया कि "सी.बी.आई. वालो मैं नहीं चारा खायो"। इस प्रकार लालू जी सच्चे मायने में कलियुगी कृष्ण हैं। उपाध्यक्ष महोदय, अगर आप बिहार में प्रवेश करेंगे, तो आप राज्य में सड़कों की स्िथति को देखेंगे, आपको मालूम हो जाएगा, कितनी खराब स्िथति है। लालू जी जब मुख्य मंत्री बने थे, तो कहते थे कि मैं बिहार की सड़कों को हेमामालिनी के गालों की तरह बना दूंगा, लेकिन बिहार की सड़कों की स्िथति को जाकर देखें, तो आप पाएंगे वे हेमामालिनी के गालों की तरह तो नहीं बल्िक ओम पुरी के गालों की तरह हो गई हैं। सड़कों पर मत्स्य पालन जैसी स्िथति हो रही है। पूरा पानी ही पानी है, यह है बिहार का विकास। केन्द्र से भी बिहार के विकास के लिए जो धन जाता है, उसकी भी लूट ऊपर से नीचे तक किस तरह से हो रही है, इसके बारे में मैं पहले भी इसी सदन में कई बार निवेदन कर चुका हूं और मामला उठा चुका हूं। माननीय मंत्री श्री राम नाईक जी बिहार गये थे। उनकी बैठक में हमने इस बात को उठाया था कि केन्द्र से जो पैसा आता है, उसकी समीक्षा होनी चाहिए। बिहार में केन्द्र के पैसे का उपयोग नहीं होता है। इंदिरा आवास की चर्चा करते थे कि हम हरिजनों के आवास बना रहे हैं। आप जरा बिहार में जाकर हरिजनों का आवास देख लीजिए। जो भी पैसा जाता है, उसका ३० प्रतिशत राजद के विधायक, राजद के एजेंट, राजद के दमदार उसको पहले काट लेते हैं और हरिजनों से जबरदस्ती ठप्पा लिया जाता है। यह हरिजनों के बड़े शुभचिंतक बने हुए हैं। हरिजनों की जो दुर्दशा हुई है, वह इनके कारण हुई है। यह नरसंहार की बात करते हैं। यह बात ठीक है कि किसी जमाने में इन्होंने रणबीर सेना पर प्रतिबंध लगाया था लेकिन रणबीर सेना से इनकी दोस्ती उस समय हो गई जब श्री राम विलास पासवान से इनकी तनातनी हो गई। बिहार के सारे हरिजन श्री राम विलास पासवान की तरफ झुक गये। इनका एक पुराना हथियार है कि जो लोग उनसे अलग होते हैं, वे उन्हें दबाकर शासन करते हैं या उन्हें मुकदमे में फंसाकर शासन करते हैं या उन्हें मरवा देते हैं। श्री राम विलास पासवान की लड़ाई का कारण यह हुआ कि रणबीर सेना और लालू प्रसाद की दोस्ती हुई और बिहार में हरिजनों का नरसंहार शुरू हो गया। यह बिहार की स्िथति है और यहां पर यह बिहार का रोना रोते हैं। ... (व्यवधान) श्री मोहम्मद अली अशरफ फातमी (दरभंगा): श्री राम विलास पासवान को कितने हरिजन चाहते हैं?

... (व्यवधान) श्री प्रभुनाथ सिंह (महाराजगंज): फातमी साहब बड़ा गला फाड़कर चिल्ला रहे हैं। मैं आपको बताना चाहता हूं कि कांग्रेस की हुकूमत में भागलपुर में हजारों मुसलमानों का कत्ले-आम हुआ। उसका मुख्य अभियुकत कौन था -- । कामेश्वर यादव, जो लालू प्रसाद जी के साथ बैठता रहा। उसका कया हुआ आप ज़रा बताइए। आप मुसलमानों का बड़ा रोना रोते हैं। सीतामढ़ी में लालू प्रसाद जी के जमाने में दंगा हुआ। उसमें कौन अभियुकत था -- लालू जी का एम.एल.ए., लालू जी का एम.पी.। उसका कया हुआ आप ज़रा बताइए? हम आपसे जानना चाहते हैं। आप मुसलमानों का रोना रो रहे हैं। पटना सिटी में जो दंगा हुआ, वहां पर कया हुआ?

... (व्यवधान)हम आपसे जानना चाहते हैं आप कुछ तो बताइए। इसलिए फातमी साहब, इसमें बहस करने की ज़रूरत नहीं है। ... (व्यवधान) उपाध्यक्ष महोदय : आप इस तरह उनसे बात करते रहेंगे तो मुझे हाउस चलाना मुश्िकल हो जाएगा। श्री प्रभुनाथ सिंह (महाराजगंज) : हम आपसे ही कह रहे हैं। हम आपको बताना चाहते हैं कि राज्य का कोई उद्योग बिजली की बदौलत ही फलता-फूलता है लेकिन बिहार राज्य में आप चलकर देख लीजिए कि कया हालत है। गांवों की बात तो छोड़ दीजिए, जो छोटे-छोटे शहर हैं, वहां भी महीनों तक बिजली देखना मुश्िकल है। गांवों की स्िथति का तो कहना ही कया? अगर किसी गांव में एक पोल गढ भी गया तो तार का पता नहीं है। केन्द्र से पैसा जाता है लेकिन जो परसेंटेज राज्य सरकार को देना है, वह परसेंटेज राज्य सरकार नहीं दे पाती है जिसके चलते केन्द्र का पैसा भी वापस हो जाता है। बिजली के मामले में इन्होंने बिहार को बिल्कुल बर्बाद कर दिया है। अभी अखबारों में आपने पढ़ा होगा कि कोयले के दाम का भुगतान नहीं हो रहा है जिसके चलते एक झमेला खड़ा हुआ है। बिहार को इन्होंने विनाश के कगार पर पहुंचाने का काम किया है। जब बिहार में रेलगाड़ियां चलती हैं तो उसमें कहीं के भी पैसेन्जर हो, वे सीधे भगवान का नाम लेने लगते हैं। दिल्ली पुलिस का एक सब इंस्पेकटर रेलगाड़ी में जा रहा था, ट्रेन में डकैती हो गई, उसने अकेले चार डकैतों से मुठभेड़ की, लेकिन वह ______________________________________________________________ *Expunged as ordered by the chair. बेचारा कुछ नहीं कर सका। वहां उसकी जान चली गई। आये दिन ट्रेनों में डकैती आम बात हो गई है।

... (व्यवधान)कृषि के मामले में किसानों की स्िथति कंगाल जैसी हो गई है। यह बोलचाल के बड़े धनी हैं। ये कभी किसी पार्टी को कह देते हैं कि कुकुर की पार्टी है। जिस समय समता पार्टी का निर्माण हुआ, उन्होंने कहा कि यह कुकुर की पार्टी है। कोई भी पूर्वी लोग और राजपूत जाति को मिलाकर कुकर शब्द कहा था। कभी इन्होंने कहा था कि भूरे बाल साफ कर दो। यह तो बात के बड़े धनी व्यकित हैं। इनके बोलने पर कोई लगाम नहीं है। ये किसी को भी गाली दे सकते हैं। आपने कल ही देखा होगा यहां पर एक सदस्य को गाली दे रहे थे। इसी तरह ये राजनीति चलाते हैं। श्री लालू प्रसाद (मधेपुरा) : तेल का विक़ेता है, ठेकेदार है। इसकी जांच करा दीजिए। दर्जनों बेटियां विडो होकर दर-दर मार खा रही हैं।

... (व्यवधान)यह कया बोल रहा है?

... (व्यवधान)कया यह डिबेट है? कया मैं सुनता रहूं? ... (व्यवधान) श्री प्रभुनाथ सिंह : क़मिनल हम हैं या आप, हम इस बात पर आ जाते हैं। आप सुन लीजिए। उपाध्यक्ष महोदय, १९८५ में हम बिहार विधान सभा में निर्दलीय विधायक हुए, उस समय हमारे ऊपर एक भी मुकदमा नहीं था। १९९० में हम जनता दल से जीतकर आए। जिस समय लालू जी मुख्य मंत्री हुए, उस समय हम पर एक भी मुकदमा नहीं था। १९९१ में श्री लालू यादव के गलत कारनामों का हमने विधान सभा से लेकर सड़क तक विरोध करना शुरु किया। एक वर्ष के बाद श्री लालू यादव ने हमको दल से निकाल दिया। हमने बिहार पीपल्स पार्टी बनाई। कुछ दिनों तक चंद्रशेखर जी की अगुवाई में काम किया। जब हम लालू प्रसाद का विरोध करने लगे तो हम राज के अपराधी हो गए लेकिन उसके पहले हम अपराधी नहीं थे। शहाबुद्दीन जी, आप न्यायालय का जजमैंट देख लीजिए, हम आप पर टीका-टिप्पणी नहीं करना चाहते। उसके बाद हमपर मुकदमे हुए।

... (व्यवधान)

MR. DEPUTY-SPEAKER: All those objectionable things will be expunged by me. It will be done by me. Do not worry. श्री प्रभुनाथ सिंह (महाराजगंज): लालू जी, आपका ईमान हो तो बताइए। पन्द्रह दिन पहले पटना से हम और आप एक ही प्लेन में आ रहे थे। आपने प्लेन में कहा था कि मुझसे गलती हो गई, मेरा फलाना मंत्री, किसी व्यकित का नाम लेकर कहा, गलती करके आपको ____________________________________________________________________________ *Expunged as ordered by the chair. मुकदमे में फसवा दिया। आप राज में चले आइए, हम सारा मुकदमा ठीक-ठाक कर देंगे। लालू जी, हम राज में चले जाएं।

... (व्यवधान)पन्द्रह दिन पहले की बात है, आपने कहा था।

... (व्यवधान)लालू जी, आपका यही धंधा है।

... (व्यवधान) श्री लालू प्रसाद : आपको राज में लेकर कया हमको राज खत्म करना है? श्री प्रभुनाथ सिंह : लालू जी, आपका राज तो अब खत्म हो चुका है। चुनाव आने दीजिए, पता लगेगा, काहे भ्रम में पड़े हुए हैं।

... (व्यवधान)

MR. DEPUTY-SPEAKER: What is this? आप जनरल बात कर रहे हैं या स्पीच बना रहे हैं।

... (व्यवधान) श्री प्रभुनाथ सिंह : आप उधर नहीं बोलते।

... (व्यवधान) उपाध्यक्ष महोदय : मैं बोल रहा हूं।

... (व्यवधान) उपाध्यक्ष महोदय : अभी तक आपने जो कहा, वहां बोलने से आप बोल रहे हैं। ... (व्यवधान) श्री प्रभुनाथ सिंह : जहां तक वधि और व्यवस्था की बात है ... (व्यवधान) श्री लालू प्रसाद : यदि श्री प्रभुनाथ वधि और व्यवस्था की बात करेंगे तो देश का नाश हो जाएगा।

... (व्यवधान) श्री प्रभुनाथ सिंह : लालू जी, बैठकर सुनिए।

... (व्यवधान) उपाध्यक्ष महोदय : आप इधर देखकर कन्सरन्ड बात कीजिए, आधा घंटा हो गया है। ... (व्यवधान) श्री लालू प्रसाद : आप बोलिए, हम नहीं बोलेंगे।

... (व्यवधान) श्री प्रभुनाथ सिंह : आप कम से कम सुनिए तो।

... (व्यवधान)हम बताना चाहते हैं कि राज्य में हत्या, लूट, बलात्कार की घटनाएं हो रही हैं। आप प्रतदिन के किसी भी अखबार का पन्ना देख लीजिए, बिहार के अखबारों में सबसे पहले यही घटना मिलती है और घटना के पीछे राजसत्ता का हाथ रहा है। उदाहरण के तौर पर हम एक-दो घटनाओं का जिक़ करना चाहते हैं। जिस समय श्रीमती राबड़ी देवी मुख्य मंत्री बनी थीं, पटना में दशहरे के मेले में एक सोलह साल की बच्ची अपनी मां के साथ घूमने गई थी।

... (व्यवधान) श्री लालू प्रसाद (मधेपुरा) : आठ साल की बच्ची सुधार लो,...।

________________________________________________________________ *Expunged as ordered by the chair. प्रो. रीता वर्मा : ये बिल्कुल गलत बात बोल रहे हैं, इनकी पार्टी आर.जे.डी. का मैम्बर था, इन्हीं के घर आना-जाना है।

... (व्यवधान) श्री प्रभुनाथ सिंह : जहां पूरा शहर पुलिस के घेरे में था, वैसी स्िथति में उस लड़की के साथ दस लोगों ने बलात्कार किया लेकिन उसका मुकदमा दर्ज नहीं हुआ। जब पुलिस को जानकारी हुई और वह मुख्य मंत्री के निवास पर गई तो बलात्कारी मुख्य मंत्री के निवास पर बैठे हुए थे। यह बिहार की घटना है। बिहार में इस तरह अपराधियों को संरक्षण दिया जाता है। जहां तक अपहरण का सवाल है, पटना में एक डाकटर की गाड़ी छीन ली गई। वह लालू जी का निजी डाकटर था। जब उसकी गाड़ी छीन ली गई तो उसने सोचा कि लालू जी मुख्य मंत्री हैं, जरा इनसे मदद लें, हमारी गाड़ी मिल जाए। जब वे वहां पर गये तो देखा कि गाड़ी छीनने वाले और गाड़ी वहीं लगी हुई थी। जब उसने लालू यादव जी से जाकर कहा तो लालू यादव जी ने कहा कि सब लड़के बेकार हैं, कुछ पैसा दे दो, तुम्हारी गाड़ी छोड़कर लौटा देंगे। ये राज्य के मुख्य मंत्री हैं। श्री मोहम्मद अली अशरफ फातमी : अलिफ लैला की कहानी सुनी है, वही कहानी यहां पर सुना रहे हैं। श्री लालू प्रसाद : आप देखिये, आपके यहां कैसे-कैसे लोग हैं। श्री प्रभुनाथ सिंह : ये लोग चिढ़ाते हैं तो मुझे हैरानी नहीं होती। अब मुझे एक कहानी याद आ गई है। फातमी साहब, आप सुन लीजिए। श्री लालू प्रसाद : इन्होंने भागकर एक जज की नौकरी ले ली। ये भागे हुए थे और छपरा में एक जज के घर में ये छिपे हुए थे, उस बेचारे जज की नौकरी भी चली गई। आप पता कर लो, सच्ची बात बताओ। श्री प्रभुनाथ सिंह : आप सह ही नहीं पाते हैं। उपाध्यक्ष महोदय, सबसे पहले जो लालू जी चाहते हैं, मैं पहले वही कहानी सुना देता हूं। हम एक दूसरे के जानने वाले हैं। शिंदे साहब, आप ठीक कहते हैं। मैं लालू यादव जी को उस दिन से जानता हूं,...। मैं इन्हें उस दिन से जानता हूं। मैं इन्हें बहुत पहले से जानता हूं। श्री विलास मुत्तेमवार (नागपुर) : उपाध्यक्ष जी, ये डिबेट में कहां जा रहे हैं? उपाध्यक्ष महोदय : जो ऑब्जैकशनेबल होगा, वह एकसपंज कर दिया जायेगा।

____________________________________________________________________ *Expunged as ordered by the chair श्री चन्द्रशेखर (बलिया) (उ.प्र.) : उपाध्यक्ष जी, मैं आपसे एक निवेदन करूंगा कि अब तक जो बहस चल रही थी, चल रही थी। अब इस स्तर पर लोक सभा में बहस होगी। दोनों लोगों से मैं यह अनुरोध करूंगा और आपसे निवेदन करूंगा कि यह सब रिकार्ड से निकाला जाये। उपाध्यक्ष महोदय : जो भी ऑब्जैकशनेबल होगा, वह सारा रिकार्ड से निकाल दिया जायेगा।

MR. DEPUTY-SPEAKER: Dr. Kusmaria, I have not even finished. डा. रामकृष्ण कुसमरिया : वह अपना स्पष्टीकरण दे रहे हैं। आरोप तो उन्होंने लगाया है।

... (व्यवधान)वह स्पष्टीकरण दे रहे हैं।

... (व्यवधान) मेजर जनरल भुवन चन्द्र खण्डूरी, एवीएसएम : उनको कहने दीजिए। ... (व्यवधान) उपाध्यक्ष महोदय : जब मैंने कह दिया कि आरोप-प्रत्यारोप दोनों तरफ से हैं।

... (व्यवधान)

MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Agnihotri, please take your seat.

... (Interruptions)

MR. DEPUTY-SPEAKER: Please resume your seat.

... (Interruptions) श्री प्रभुनाथ सिंह : आपको बोलने का अधिकार है।

... (व्यवधान)

SHRI AJIT JOGI : Sir, under Rule 353, whatever they are saying is not permissible.

MR. DEPUTY-SPEAKER: What is it?

... (Interruptions) उपाध्यक्ष महोदय : कुसमरिया जी, आप शांत रहिए। आर आराम से बैठिए।

... (व्यवधान)

THE MINISTER OF POWER, MINISTER OF PARLIAMENTARY AFFAIRS AND MINISTER OF NON-CONVENTIONAL ENERGY SOURCES (SHRI P.R. KUMARAMANGALAM): Sir, it does not apply only to Shri Prabhunath Singh. This is too bad. Please do not do it. Otherwise, we will have to reopen the whole debate. This is too much. (Interruptions)

SHRI AJIT JOGI : Rules are meant to be observed. ... (Interruptions)

SHRI P.R. KUMARAMANGALAM: Sir, I am on a point of order. ... (Interruptions)

MR. DEPUTY-SPEAKER: I am on my legs.

... (Interruptions)

MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing will go on record.

(Interruptions)* MR. DEPUTY-SPEAKER: From the very beginning, I think, arguments of this kind have gone on record.

______________________________________________________________________________ *Not Recorded.

My ruling is, whatever the Member says, unless and until it is unparliamentary, will go on record. If it is a privilege matter, it can be raised. श्री प्रभुनाथ सिंह : उपाध्यक्ष महोदय, हम सदन को बिहार की वधि-व्यवस्था की स्िथति के बारे में बता रहे थे। बिहार में अपहरण मुख्य उद्योग-धन्धा हो गया है। आप इसकी जांच किसी एजेंसी से करा सकते हैं। शरद पवार जी जब बोल रहे थे, तो वे बिहार की तुलना अन्य राज्यों से कर रहे थे और आंकड़े दे रहे थे। मैं कहता हूं, किस प्रकार का आंकड़ा, बिहार में तो एफ.आई.आर. दर्ज ही नहीं होती है। जब एफ.आई.आर. दर्ज हो तो वह सरकार की सूची में आये। बिहार में एफ.आई.आर. . होती ही नहीं है। एफ.आई.आर. तो पटना के इशारे पर दर्ज होती है। एस.पी. के यहां टेलीफोन जाता है कि फलां पर मुकदमा कर दो और फलां को जेल में ठूंस दो या फलां पर मुकदमा नहीं करना है। अपहरण के २५ प्रतिशत मामले तो दर्ज ही नहीं होते हैं। मैं आपको बताना चाहता हूं कि अपहरण को उद्योग-धंधा समझकर वहां अपहरण का धंधा किया जाता है और अपहरणकर्ताओं को राज्य सरकार का संरक्षण बराबर मिलता रहा है। राष्ट्रपति शासन लगने के बाद बिहार के लोग राहत की सांस ले रहे हैं। आप बिहार की जनता की भावना को जानिये। मैं फिर कहता हूं कि आप बिहार की स्िथति की किसी एजेन्सी से समीक्षा कराइये। आज बिहार की जनता अमन-चैन से सो रही है। लेकिन पहले उसकी स्िथति जीने और मरने की थी। आज अखबारों में और टी.वी. के माध्यम से सूचना जा रही है कि सरकार जो प्रस्ताव लाई है, वह लोक सभा में पास होगा और राज्य सभा में फेल होगा। जब हम डेरे पर जाते हैं तो टेलीफोन आते हैं और लोग पूछते हैं कि बिहार का कया होगा? लोग बिहार से चिंतित हैं, लोगों के मन में चिंता है कि अगर कहीं यह दोबारा आ गये तो बदले की भावना से कत्लेआम का धंधा शुरू करेंगे और इसकी जिम्मेदारी कांग्रेस पर सबसे अधिक जायेगी। यह मैं इसलिए कह रहा हूं, कयोंकि वहां से ४० विधायकों ने अपने पदों से इस्तीफे दे दिये हैं। वे बिहार की भावना को जानते हैं, बिहार की पीड़ा को जानते हैं। आप भले ही उनके इस्तीफे स्वीकार न करें, लेकिन आप उनसे अलग नहीं है। लेकिन उन्होंने अपनी इस भावना को केन्द्रीय नेत्ृात्व तक पहुंचाने का काम किया है। श्री अजीत जोगी : किसी ने इस्तीफा नहीं दिया है। श्री प्रभुनाथ सिंह : मैं आपसे अनुरोध कर रहा हूं कि आप इनकी भावना को गंभीरता से लीजिए।

MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Prabhunath Singh is capable of defending himself. श्री प्रभुनाथ सिंह : मैं आपको बताना चाहता हूं कि इससे हमारा या बी.जे.पी. का कुछ जाने वाला नहीं है। लालू यादव को प्राप्त होने वाला है, लेकिन आपका तो समापन होने वाला है। कम से कम इससे सबक लीजिए और आप अपने ही लोगों में यह तय कीजिए कि आपको कया करना है। वोटिंग के समय सोच-समझकर वोटिंग कीजिए, यही मैं आपसे निवेदन कर रहा हूं, आग्रह और विनती कर रहा हूं। बिहार को विनाश के कगार से बचाइये। बिहार की पीड़ा को महसूस कीजिए। बिहार को राक्षसों के हाथों में न जाने दीजिए। मैं आपसे यही निवेदन कह रहा हूं कि आप बिहार की पीड़ा को समझिये। उपाध्यक्ष महोदय, मुझे यहां एक कहानी याद आ रही है। उपाध्यक्ष महोदय : कहानी से हमें बहुत परेशानी है। श्री प्रभुनाथ सिंह : हम आपको बताना चाहते हैं कि एक राजा के दरबार में उसकी बेटी की शादी होने वाली थी और उन्होंने पहलवान, युद्ध करने वाले और सभी को निमंत्रण दिया। सभी लोग आये, लेकिन एक पंडित जी एक लड़के के सिर पर अपना पोथी-पत्रा रखकर ले गये। हाथी की सूंड में वरमाला दी गई कि वर को चुनकर माला डालो। हाथी घूमता-घूमता आया और जो किताब लिये हुआ लड़का बैठा हुआ था, उसी के गले में माला डाल दी। इससे राजा को गुस्सा आया और कहने लगा कि कल फिर वरमाला होगी। फिर दूसरे दिन वरमाला हुई, लेकिन पंडित जी ने उस लड़के को बाहर की छोड़ दिया। दूसरी बार भी हाथी ने उसी लड़के के गले में वरमाला डाल दी। फिर इससे राजा को गुस्सा आया और उसने कहा कि मैं तुम्हें भट्टी में झोंकवा दूंगा। अगले दिन फिर जब वरमाला हुई तो वह लड़का बाहर बगीचे में बैठा हुआ था लेकिन हाथी ने फिर बगीचे में जाकर उसी लड़के के गले में माला डाल दी। इस पर राजकुमारी ने कहा कि मैं उसी लड़के से शादी करूंगी। शादी के बाद जब वह लड़का राजसिंहासन पर बैठा तो वह अत्याचार, अनाचर, जुल्म और व्यभिचार करने लगा।

  वहां के कुछ लोग दौड़ कर गए और पंडित जी से कहा कि आपका शिष्य था आप चल कर समझाइए कि कहीं जनता के राहत की बात करे, जब पंडित जी गए तो पंडित जी की बात सुन कर उन्होंने कपड़ा और ५०० रुपया विदाई दिया। जाने के बाद उसने फिर उस पर थोड़ा जुल्म बढ़ा दिया। फिर थोड़े दिन के बाद पंडित जी के यहां वहां की जनता गई, जब पंडित जी वहां गए तो फिर पंडित जी की बात सुनी और उन्होंने फिर १००० रुपए विदाई दिया और वस्त्र दिए। फिर पंडित जी चले आए और उसका जुल्म बढ़ता ही गया। पंडित जी को लोगों ने कहा कि आप उसको डांटिए, वह ठीक हो जाए तो पंडित जी ने कहा कि तुम मूर्ख हो, तुम समझते नहीं हो कि राज कैसे चलता है, कयों ऐसा राज चला रहा है तो उसने कहा कि पंडित जी, आप होश में है या नहीं, राजा मैं हूं आप पंडित हैं, आप ठीक से रहिए। यदि इस राज का किस्मत अच्छा होता तो कया हाथी मेरे ही गले में जयमाला डालता? मैं जानता हूं कि अगर बिहार का किस्मत दुरूस्त होता तो यही स्िथति बिहार में न होती, उस व्यकित के हाथ में जयमाला न पड़ती जो बिहार का सत्यानाश कर रहा है। बिहार का दुर्भाग्य है यह जो धारा ३५६ के तहत बिहार की किस्मत लिखने का इस सदन में सवाल उठा है, हम चाहेंगे कि सदन और हर दल के लोग बिहार की किस्मत को नये सिरे से लिखें। बिहार की किस्मत जिस तरह चरमराई गई है, बिखेरी गई है, जात-पांत के नाम पर जिस तरह समाज को तोड़ा गया है, भाईचारे को समाप्त किया गया है इसको बहाल करने के लिए धारा ३५६ का इस्तेमाल करते हुए अब निलम्बन नहीं बल्िक बिहार सरकार को बर्खास्त करने में समर्थन करें जिससे बिहार की किस्मत नये सिरे से लिखी जा सके। लालू जी समता पार्टी, नीतीश कुमार जी और जार्ज जी पर कह रहे थे कि उन लोगों के दबाव की वजह से और चुनाव में उन लोगों की घोषणा की वजह से धारा ३५६ का इस्तेमाल किया गया है। १९९० में हम भी उसी दल में थे, जार्ज जी और नीतीश जी भी उसी दल में थे लेकिन जब बिहार में भ्रष्टाचार सीमा तोड़ने लगा, वधि-व्यवस्था की स्िथति खराब होने लगी तो समता पार्टी में जो लोग आज मौजूद हैं उन लोगों ने लालू जी का साथ छोड़ दिया। समता पार्टी इसलिए बनाई थी कि इस भ्रष्ट सरकार को उखाड़ फेंकेंगे। उन्होंने चुनाव में जनता के साथ वायदा किया था तो कोई गलत नहीं किया था। समता पार्टी ने यह निर्णय किया है कि बिहार में समता मूलक समाज बना कर ही हम दम लेंगे। बिहार नया बिहार बनेगा, यह समता पार्टी का संकल्प है। इस संकल्प के तहत नश्िचत तौर पर हम लोगों ने कहा है कि बिहार को कंगाली की हालत से बचाने के लिए बिहार को नयी राह दिखाने के लिए, वहां वधि-व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए, बिहार के खजाने लूटने वालों पर अंकुश लगाने के लिए, चकित्सा व्यवस्था दुरुस्त करने के लिए, बिजली, पानी मुहैया कराने के लिए, सड़कों को दुरुस्त करने के लिए, बिहार के लोगों की किस्मत लिखने के लिए धारा ३५६ आवश्यक है और निलम्बन नहीं बल्िक बर्खास्त करना आवश्यक है। इसलिए हम सदन से निवेदन करेंगे कि धारा ३५६ का समर्थन करते हुए बिहार सरकार को बर्खास्त करने में आप अपना योगदान दें।

> डा. शकील अहमद (मधुबनी) : उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपका आभारी हूं कि आपने मुझे बोलने का अवसर दिया। बिहार में राष्ट्रपति शासन लागू होने की संपुष्िट के लिए ग्ृाह मंत्री जी जो प्रस्ताव लाए हैं उस पर चर्चा के लिए हम खड़े हुए हैं। मैंने चर्चा सुनी, ग्ृाह मंत्री जी को छोड़ कर सत्ता पक्ष के किसी भी सदस्य ने राष्ट्रपति शासन लगाने का जो तर्क होता है वह एक भी युकितसंगत तर्क नहीं दिया। ग्ृाह मंत्री जी ने जो तर्क दिए हैं उनका भरपूर जवाब और पाइंट वाइज़ जवाब हमारे विपक्ष के नेता शरद पवार जी ने दिया है। उनका एक बयान काफी था। आपको समझ होती तो आप प्रस्ताव वापिस ले लेते। आपके एक-एक तर्क का जवाब उन्होंने दिया है। उपाध्यक्ष जी, बिहार में दो जगह दलितों की हत्याएं हुई है। किसी भी सभ्य समाज में अगर ऐसा होता है तो उसकी निंदा होनी चाहिए। यह कोई पहला अवसर नहीं है जब दलितों की हत्याएं हुई है। कभी-कभी बिहार में फारवर्ड कलास के लोगों की भी जो गरीब हैं और अपने हक की लड़ाई लड़ते हैं हत्याएं हुई हैं। कांग्रेस पार्टी से शासन में भी हत्याएं हुई हैं। जब १९७७ में आपकी पार्टी की सरकार थीं तो हमारी नेता स्वर्गीय इंदिरा जी बेलछी गयी थीं। उस समय आपने अपना चोला बदल लिया था, नाम बदल लिया था, लेकिन हत्याएं तब भी हुई थीं। जनता पार्टी में आप भी शामिल थे। हत्याएं होना कोई अच्छी बात नहीं है और हम सभी को उसकी निंदा करनी चाहिए। लेकिन उसकी आड़ में राजनीति का खेल नहीं होना चाहिए। आज दलितों की हत्या और मान-सम्मान की बात वे ही लोग कर रहे हैं। उपाध्यक्ष जी, हमारे कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बाबू जगजीवन राम जी ने जब सम्पूर्णानंद जी की मूर्ित का अनावरण किया था तो उसे गंगा जल से धुलवाने वाले लोग आज दलितों के लिए हाय-हाय कर रहे हैं। इनको शर्म आनी चाहिए कि ये दलितों के नाम पर राजनीति कर रहे हैं। उपाध्यक्ष महोदय, यह सही है और रणवीर सेना ने इसे स्वीकार भी किया है कि उन्होंने दलितों की हत्याएं की हैं। वहां खेत का झगड़ा है, डिस्ट्रीब्यूशन ठीक से नहीं हुआ है। रणवीर सेना, एम.सी.सी. तथा और लोगों के बीच में यह हो रहा है। उपाध्यक्ष जी, गौर करने की बात है कि खेत के झगड़े के समय में वह रणवीर सेना हो जाती है लेकिन वोट वे किसको देते हैं, यह बात किसी से छिपी नहीं है। रणवीर सेना के लोग भाजपा और उसके सहयोगियों को वोट देते हैं। मैं बिहार से आता हूं। वहां एक षडयंत्र हुआ है। रणवीर सेना का नाम लेकर दलितों की प्लान्ड-वे में हत्याएं करके राबड़ी देवी सरकार को डिसमिस करने का षडयंत्र किया गया है। यह एक राजनीतिक षडयंत्र है। मैं आपके माध्यम से मांग करता हूं कि ग्ृाहमंत्री जी में अगर राजनीतिक ईमानदारी है तो यह जो नारायणपुर में दो नरसंहार हुए हैं और जिन पर राबड़ी देवी सरकार डिसमिस की गयी है उसकी ठीक से इंकवायरी कराएं। पूर्व में भी ऐसी घटनाएं हुई हैं। वहां जमीन का झगड़ा है, मान-सम्मान का झगड़ा है। मैं सदन में पूरी ईमानदारी से कहता हूं कि ये दोनों घटनाएं राबड़ी देवी सरकार को डिसमिस करने के लिए की गयी हैं और इसकी जांच देश की सबसे बड़ी संस्था से करानी चाहिए। जिससे भी सदन सहमत हो, नश्िचत रूप से उससे जांच करानी चाहिए। अभी माननीय ग्ृाह मंत्री जी भाषण दे रहे थे और कह रहे थे कि अपराधियों की पकड़-धकड़ नहीं होती है, कमीशन को कुछ नहीं दिया गया है, उसकी रिपोर्ट लागू नहीं की गयी है, उसको स्टॉफ नहीं दिया गया है। मगर उपाध्यक्ष महोदय, मुम्बई दंगों से संबंधित श्रीकृष्ण आयोग की रिपोर्ट का इनकी सरकार ने कया हाल किया है, यह किसी से छिपी हुई बात नहीं है। ग्ृाह मंत्री जी को कमीशनों की बड़ी फिक़ है। लेकिन जो इनकी सरकार है और जिसको यह सहयोग दे रहे हैं उसकी फिक़ नहीं है। उसने श्रीकृष्ण आयोग की रिपोर्ट का कया किया है।

... (व्यवधान)

MR. DEPUTY-SPEAKER: Why are you disturbing now? I will take the pleasure of the House when the time is over.

... (Interruptions)

SHRI MADHUKAR SIRPOTDAR : My simple request is that if he wants to discuss anything about Sri Krishna Commission, he should come out with the facts. We are prepared to discuss it. डा. शकील अहमद : मैं यील्ड नहीं कर रहा हूं। उपाध्यक्ष महोदय : आप कितने मिनट और लेंगे। डा. शकील अहमद : १०-१५ मिनट और लूंगा या कल में कान्टीन्यू करूंगा। उपाध्यक्ष महोदय : ठीक है।

The House is now adjourned to meet tomorrow at 11 a.m. 20.00 hrs The Lok Sabha then adjourned till Eleven of the Clock on Friday, February 26, 1999/Phalguna 7, 1920 (Saka)