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Lok Sabha Debates

Discussion On The Motion For Adjournment On The Issue Of Failure Of The Government ... on 18 November, 2002

NT> 12.06 hrs. Title: Discussion on the Motion for Adjournment on the issue of failure of the Government in curbing the communal elements in the country, specially in Gujarat.

SHRI SUBODH ROY (BHAGALPUR): I beg to move:

"That the House do now adjourn."
 

 अध्यक्ष महोदय, मैं आपके प्रति आभार व्यक्त करता हूं कि आपने मुझे इस महत्वपूर्ण विषय पर, जिसके बारे में पूरा राष्ट्र इस सदन की ओर देख रहा है, पर बोलने का अवसर प्रदान किया है। आपने इस विषय पर कार्य स्थगन प्रस्ताव स्वीकार करके बहुत बड़ा काम किया है। जैसा कि हम इधर कई दिनों से देखते आ रहे हैं और गुजरात में लगातार जो घटनायें घट रही हैं, उनके बारे में एक बार माननीय प्रधान मंत्री जी ने कहा था कि इन घटनाओं के कारण पूरे राष्ट्र के माथे पर बड़ा भारी कलंक लगा है। उन्होंने यह भी कहा था कि मैं किस मुंह को लेकर देश से बाहर जाऊंगा। उसके बाद वहां की सरकार चलाने वाले श्री मोदी, विश्व हिन्दू परिषद् के लोग, संघ परिवार के लोग, जिनका पूरा धर्म और आस्था साम्प्रदायिक हिंसा , तनाव में है और भाईचारा खत्म करने में उन लोगों ने माननीय प्रधान मंत्री जी की बातों की भी कोई परवाह नहीं की। उसके बाद भी जिस तरह से लगातार घटनायें हुईं, बड़े पैमाने पर महिलाओं, बच्चों और अल्पसंख्यक वर्ग के लोगों के साथ बर्बरतापूर्ण और क्रूरतापूर्ण व्यवहार इतिहास का सबसे बड़ा और खतरनाक पहलू है जिसकी किसी भी तरह से निन्दा की जाये, वह कम है।

अध्यक्ष महोदय, जब वहां संवैधानिक व्यवस्था की बात आई, जब चुनाव का सवाल आया तो देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था कायम रहे, संवैधानिक व्यवस्था कायम रहे, लोग निष्पक्ष होकर , स्वतंत्र होकर , निर्भय होकर अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें, इसके लिये ऐसा वातावरण तैयार किया जाये जिससे कि लोकतांत्रिक अधिकार और मर्यादा, उसकी गरिमा और ज्यादा मजबूत हो ताकि भारतीय लोकतंत्र की जड़ें मजबूत हों लेकिन वहां की सरकार ने चुनाव टालने और उसे और आगे बढ़ाने की बात कही थी। इसके लिये राज्य के मुख्यमंत्री, भारतीय जनता पार्टी, संघ परिवार ने चुनाव आयोग पर जितना हमला किया, जितनी उसकी तौहीन करने और उसे लांछित करने का प्रयास किया, उससे ज़ाहिर हो गया कि इनके राज में संवैधानिक व्यवस्था, संविधान और उसकी मर्यादा जैसे सारी चीजें दांव पर लगी हुई हैं और देश में लोकतंत्र की जगह फासीवाद और बर्बरता जगह लेने के लिये पूरी तरह से एक साजिश चल रही है, एक कार्यवाही हो रही है।

अध्यक्ष महोदय, अभी हाल ही में गौरव यात्रा की बात की गई या जिस तरह की बातें की गईं, उसके लिये वहां की सरकार ने जो परिस्थति पैदा की, उससे दंगाइयों को पूरा मौका मिल गया और उनका मनोबल ऊंचा हुआ। उससे कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ाई गईं और कानून-व्यवस्था जंगल राज में परिणीत हो गई। आज तक भारत के इतिहास में, दुनिया के इतिहास में इस तरह की पाशविकता, बर्बरता और हैवानियत देखने को नहीं मिली। इसलिये, आज जब चुनाव का मौका आया, भारतीय जनता पार्टी को लगा कि वह अपना असर खोती जा रही है।

चूंकि हर मोर्चे पर यह सरकार विफल रही है। हमारे किसान बर्बाद हो रहे हैं। हमारे नौजवानों का भविष्य अंधकारपूर्ण है। देश में जिस तरह से वनिवेश की प्रक्रिया चलाई जा रही है, वह घोटाले, भ्रष्टाचार, लूट और देश की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से जर्जर बनाने का काम कर रही है। इसलिए ऐसी हालत में जब चुनाव हो रहे हैं और जहां भी चुनाव हुए हैं, वहां भाजपा के हाथ से शासन निकलता गया है। आम जनता ने बहुत आशा और उम्मीद से प्रधान मंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व पर भरोसा रखते हुए बड़े पैमाने पर वोट देने का काम किया था। जिन लोगों ने राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन बनाने और सरकार चलाने का काम किया था, आज वे सभी लोग निराश हैं, घोर हताशा के शिकार हैं और अंधकार में जीने के लिए मजबूर हैं। ऐसे तमाम लोगों को जब अपने मताधिकार का प्रयोग करने का मौका मिल रहा है तो वे भाजपा के खिलाफ अपने मतों का प्रयोग कर रहे हैं और सारे देश के एक-एक राज्य में चाहे म्युनसिपैलिटी हो, नगर निगम हो और चाहे राज्य की विधान सभा हो, लोगों को जहां भी मौका मिल रहा है, वहां से भाजपा का नामो-निशान खत्म होता जा रहा है। ऐसी हालत में जब उन्होंने देखा के गुजरात के चुनाव में भी उनकी डूबती नैया का आज कोई भविष्य नहीं है तो उन्होंने आज फिर से एक यात्रा का नाटक शुरू किया। श्री प्रवीण तोगड़िया, आचार्य धर्मेन्द्र जैसे लोगों ने जिस तरह से हिंसक भाषण दिये, वे बहुत शर्मनाक हैं। हमारा देश जिन परम्पराओं का देश है, गौरवशाली परम्पराओं और संत-महात्माओं का देश है, जिन्होंने अपने आशीर्वचनों, अपनी संत वाणी से हमारे भारत की प्रतिष्ठा और गरिमा को बढ़ाने का काम किया है। लेकिन क्या प्रवीण तोगड़िया, आचार्य धर्मेन्द्र और महंत गरिराज किशोर की बातों को सुनकर क्या कोई कह सकता है कि ये उसी भारतीय संस्कृति की परम्पराओं की श्रृंखला के लोग हैं। स्वामी विवेकानंद, स्वामी रामकृष्ण और अनेकों संत-महात्माओं, जिनके ऊपर भारत को गर्व है, क्या उनकी श्रेणी में ऐसे लोग आ सकते हैं। रात-दिन सम्प्रदाय विशेष के खिलाफ, संविधान के खिलाफ और संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ जिस तरह से हिंसक भाषण दिये गये, उन्होंने जाहिर कर दिया कि इनकी संविधान में कोई आस्था नहीं है, इनकी देश की परम्पराओं में कोई आस्था नहीं है। इन्हें देश की गरिमा और मर्यादा का जरा भी ख्याल नहीं है। इंसानियत के खिलाफ, नग्नता के साथ, क्रूरता के साथ बड़े पैमाने पर गुजरात में हिंसा भड़के, सारे देश में हिंसा भड़के और सम्प्रदायों के आधार पर लोग आपस में बंट जाएं, इसके लिए इन्होंने साजिश रचने का काम किया है। आज भी उनके भाषण बंद नहीं है। उनके भाषणों के कारण उन्हें गिरफ्तार किया गया और चार घंटे के बाद छोड़ दिया गया। प्रधान मंत्री जी ने बयान दिया, अपील की, उसके बाद भी कोई असर नहीं है। प्रधान मंत्री जी आज भाजपा के नेताओं के साथ पूरी मिलीभगत के चलते ये सारी बातें हुई हैं। पाखंडता की भी कोई हद होती है। पाखंडता और पाशविकता आज लोगों को सामने दिखाई पड़ रही है। देश की करोड़ों जनता जिस तरह से देख रही है और प्रधान मंत्री जी बोल रहे हैं। जो जेटली जी ने कहा और जो दूसरे लोगों ने कहा और मैंने जो कहा, घुमा-फिराकर बात वही है। इसका क्या मतलब है। हम प्रधान मंत्री जी से इस तरह की बातों की उम्मीद नहीं करते हैं।

प्रधान मंत्री जी के बारे में हमारी यह धारणा थी कि प्रधान मंत्री जी कम से कम इस बार जबकि पूरा राष्ट्र एक ऐसे मोड़ पर पहुँच गया है कि जहां देश की धर्मनिरपेक्षता, देश का जनतंत्र, देश में भाईचारा, देश में इंसानियत दाँव पर लगी हुई है तो प्रधान मंत्री जी दूरदर्शिता और द्ृढ़-संकल्प का परिचय देंगे, लेकिन अफसोस है कि प्रधान मंत्री ने मज़ाक किया और चुटकी लेते हुए जिस तरह से बातें कहीं, उससे ज़ाहिर हो गया कि प्रवीण तोगड़िया और आचार्य धर्मेन्द्र जैसे लोगों के हिंसक भाषणों और बयानों पर उनको ज़रा भी अफसोस नहीं है। उसकी निन्दा प्रधान मंत्री जी को करनी चाहिए थी जो नहीं हुई।

आज पूरा देश इनकी हरकतों से, कारनामों से ऐसे मुकाम पर पहुँच गया है जहां हम किसानों की समस्या के बारे में, बेकारी की समस्या के बारे में, देश की अर्थव्यवस्था के बारे में, देश की और तमाम जो ज्वलंत समस्याएं हैं उनके बारे में गंभीर नहीं हैं। हमारे लाखों बुनकर देश में जहां-तहां भटक रहे हैं, उनकी समस्याओं के बारे में आज हम बहस नहीं कर सकते। इसलिए सदन के अंदर और सदन के बाहर हमारा अधिकांश समय इन बातों में निकल जाता है कि सांप्रदायिक तनाव को कैसे रोका जाए, भाई-चारे को कैसे कायम किया जाए, किस तरह से जनतंत्र को कायम रखा जाए या फासीवाद ताकतों की साजिश को कैसे नाकाम किया जाए और पूरे राष्ट्र में इंसानियत का माहौल कैसे कायम रखा जाए, अपने देश की परंपराओं और मर्यादा को कैसे कायम रखा जाए।

आज हम आपसे निवेदन करना चाहेंगे कि सदन में ऐसी परिस्थिति लानी चाहिए जिससे कि सभी लोग खुलकर अपनी बात कह सकें। देश में कहीं भी सांप्रदायिक ताकतों को बढ़ावा नहीं मिलना चाहिए। जिस तरह से विश्व हिन्दू परिषद् कर रही है, बजरंग दल के लोग कर रहे हैं, उन सारी बातों को रोकने की एक कड़ी से कड़ी कार्रवाई के बारे में सरकार को द्ृढ़-संकल्प होना चाहिए। हमारे गृह मंत्री जी आडवाणी जी यहां मौजूद हैं। आज देखा जाए कि किस तरह से बजरंग दल वालों ने क्या किया एक सिनेमा को रोकने के नाम पर। मध्य प्रदेश में क्यों वैसी हरकतें हो रही हैं? चुनाव जैसे-जैसे नज़दीक आ रहा है, आपका असर आम जनता से उतरता जा रहा है। उसके लिए आप सांप्रदायिक तनाव का वातावरण तैयार करने के लिए अपने संघ परिवार के लोगों को उकसाने की बात कर रहे हैं, उनको ऐसा निर्देश देने का काम कर रहे हैं कि जिससे देश में ऐसा वातावरण फैले जिससे हिन्दुत्व के नाम पर आपके पक्ष में वातावरण हो जाए। लेकिन इस बात को याद रखिये कि अब जनता आपकी सारी करतूतों को समझ चुकी है। मौका आ रहा है और गुजरात में भी आपको पता चल जाएगा कि जो धर्मनिरपेक्षता को मानने वाली जनता है जिसका विश्वास मानवतावादी मूल्यों में है, वह आपके झांसे में आने वाली नहीं है। धर्मनिरपेक्षता का झंडा, जनतंत्र का झंडा वहां लहराता रहेगा। किसी भी हालत में आप उसको गलत दिशा देने में कामयाब नहीं होंगे। देश में जो वातावरण बन रहा है, आज हमने देखा है कि किस तरह से आज भी हज़ारों लोग जिनको कैम्पों में शरण लेनी पड़ी थी, हमारी माँ-बहनों को आज भी अपने घरों की ओर लौटने की हिम्मत नहीं हो रही है।

उनको भरोसा नहीं हो रहा क्योंकि आपने वहां प्रशासन, जिला प्रशासन, सविल प्रशासन और पुलिस को इतना ज्यादा जहर पिला दिया है। वहां आज भी कई इलाकों में क्रमिनल्स जिन पर साम्प्रदायिक दंगा भड़काने, आग लगाने या हत्या करने का आरोप हैं, उनके ऊपर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

आज आप कैम्पों को उठाने की बात कर रहे हैं, बंद करने की बात कर रहे हैं। यह बात बहुत ही गलत है। मेरा कहना है कि जब तक उनके पुनर्वास की पूरी गारंटी नहीं हो जाती, जब तक लोगों को आतंक से मुक्त होकर जीने की गारंटी नहीं हो जाती तब तक किसी को भी कैम्पों से नहीं जाने देना चाहिए। वहां इस बात की गारंटी होनी चाहिए कि जो भी व्यक्ति दंगाई केस में इन्वाल्व है, उनको गिरफ्तार किया जायेगा और उनके ऊपर मुकदमा चलेगा।

मैं यह भी कहना चाहता हूं कि जिन लोगों के परिवार में लोग मारे गये हैं या जिनकी सम्पत्ति नष्ट हुई है, उनको पूरा मुआवजा मिले। गोधरा के लोगों को आपने मुआवजा दिया, बहुत अच्छा काम किया लेकिन गोधरा के लोगों को आप यदि उनके परिवार वालों के लिए मुआवजा दे सकते हैं तो जिस भी इलाके में चाहे अहमदाबाद में हो या गुजरात के अन्य हिस्सों में लोग मारे गये हैं, उनको वही मुआवजा देने में आपको हिचक क्यों है ? मैं जिस क्षेत्र भागलपुर से आता हूं वहां के नाथ नगर, चम्पानगर के हमारे मुस्लिम भाइयों ने हैंडलूम कार्पोरेशन के निर्देश पर एक एग्जीबिशन लगाने का काम किया था। २७ फरवरी को गोधरा की घटना के बाद २८ तारीख को जब भारत बंद हुआ, तो हमारे नौजवान जो उस एग्जीबिशन में दुकानें लगाते थे, वे मोहम्मद हाजी सज्जाद के लड़के थे, उन्होंने जब देखा कि उनकी कोई सुरक्षा नहीं है तो जब वे गाड़ी पकड़ने के लिए स्टेशन जा रहे थे तो उनकी हत्या कर दी गयी। वहां तीन नौजवानों की हत्या की गयी। मैं वहां खुद गया था। मैंने वहां की परिस्थिति को देखा कि किस तरह से पुलिस ने उस घटना को दबाने की कोशिश की। उनको आज तक मुआवजा नहीं दिया गया जबकि देश में पूरी तरह से जाहिर हो चुका है।

इन सब बातों को मैं कहने के लिए आज मजबूर हूं। कई बार मैंने आपको पत्र लिखकर बताने का काम किया लेकिन अभी तक इस पर कोई स्पष्ट कार्रवाई सरकार की ओर से नहीं हो सकी। इसलिए मैं चाहूंगा कि ऐसे कई लोग जो गुजरात कांड में हिंसा के शिकार हुए हैं, उनको पूरा मुआवजा दिया जाये और उनके पुनर्वास की पूरी व्यवस्था हो। इसके साथ-साथ वहां जितने जान-माल का नुकसान हुआ है, उसकी पूरी भरपाई की जाये। गुजरात में ऐसा वातावरण तैयार किया जाये ताकि गुजरात का जो आगमी चुनाव है, वह शांत और पूरी तरह से भाईचारे और सद्भाव के वातावरण में हो। इसके साथ-साथ किसी भी क्रमिनल को किसी तरह की छूट या आजादी नहीं मिलनी चाहिए। मेरा यह भी कहना है कि श्री प्रवीण तोगड़िया और आचार्य धर्मेन्द्र जैसे लोगों को तब तक जेल में बंद रखना चाहिए जब तक गुजरात का चुनाव सम्पन्न नहीं हो जाता।

इन्हीं शब्दों के साथ आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

MR. SPEAKER : Motion moved :

That the House do now adjourned.
   
डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा (दक्षिण दिल्ली): अध्यक्ष महोदय, आज इस सदन में गुजरात के विषय में ऐडजर्नमैंट मोशन पेश किया गया। इस सदन को गुजरात की सरकार को बधाई देनी चाहिए कि वहां इस समय शांतिपूर्ण माहौल है, वहां शान्ति व्याप्त है, वहां ऐसी एक भी घटना नहीं हो रही है। गुजरात में विश्व हिन्दू परिषद द्वारा सांकेतिक तौर पर यात्रा निकालने के बाद कोई घटना नहीं हुई। कांग्रेस, समाजवादी दल और दूसरे लोग जो इंतजार कर रहे थे कि वहां कोई खूनखराबा हो जाए, कोई हत्याकांड हो जाए, कोई साम्प्रदायिक दंगा हो जाए, उस सबको नाकाम करते हुए वहां शान्ति स्थापित की। इसके लिए गुजरात सरकार और विश्व हिन्दू परिषद को बधाई देनी चाहिए।…( व्यवधान)गुजरात पर बहुत बार बहस हुई।…( व्यवधान)जिस तरह कहा गया कि गुजरात में हत्याएं हुईं, यह हुआ इत्यादि, मैं उन सारी बातों को दोहराना नहीं चाहता था परन्तु क्योंकि आरोप लगाए गए, इसलिए मैं दुबारा कुछ बातों का उल्लेख जरूर करना चाहता हूं। मैं फिर पूरी तत्परता और जिम्मेदारी से इस बात को कहना चाहता हूं कि गुजरात में जितनी तेजी से सेना को तैनात किया गया, जितनी तेजी से वहां सेना को भेजा गया, २४ घंटे के अंदर वहां सेना लगा दी गई और दो सौ आदमी पुलिस और सेना की गोली से मारे गए। गुजरात और पूरे हिन्दुस्तान में दंगों को फैलने से रोका गया। इसके बावजूद गुजरात पर आरोप लगाना कहां तक ठीक है।…( व्यवधान)इसलिए कि आरोप लगाया जा रहा है।…( व्यवधान)यह बात जो इन्होंने बार-बार की, इससे पहले कि दंगों का जिक्र छोड़ दें, ये कह रहे हैं कि गड़े मुर्दे उखाड़े जा रहे हैं तो यहां क्या नए मुर्दे लाए जा रहे हैं। गुजरात की पुरानी बातों को ही दोहराया जा रहा है। वही फासीवाद, वही जीनोसाइड, वही सब बातें। क्या यह सच्चाई नहीं है?…( व्यवधान)सच्चाई यह है कि जब दिल्ली में दंगा हुआ, चार हजार सिख मारे गए, एक लाठी चार्ज नहीं हुआ, एक गोली नहीं चली, किसी ने किसी को गिरफ्तार नहीं किया। चार हजार लोग मारे जाएं, एक गोली नहीं चले, एक लाठी चार्ज नहीं हो, एक आदमी गिरफ्तार नहीं हो। सारी जांच दलों ने कहा कि कांग्रेस के लीडर्स के हाथ खून से रंगे हुए थे।…( व्यवधान)
श्री जे.एस.बराड़ (फरीदकोट) : यह गलत बात है। स्वर्गीय राजीव गांधी सड़कों पर घूमे हैं।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : जब आप भाषण देंगे, तब बोलिए।
…( व्यवधान)
 
 SHRI J.S. BRAR : Hon. Speaker Sir, I just want to correct him. … (Interruptions) श्री राजीव गांधी ने खुद सारे दंगा पीड़ित इलाकों का दौरा किया था। इस देश के प्रधान मंत्री के नाते वे खुद गए थे।…( व्यवधान) I think, there were at least 400 people arrested. … (Interruptions)यह बिल्कुल गलत बात है जो बयान की गई है। यह भी गलत बात है कि कोई अरैस्ट नहीं की गई। लोग अरैस्ट किए गए थे और आपको याद होगा कि उन्होंने खुद सारी दिल्ली का दौरा किया था।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : आपका मुद्दा हो गया, आप बैठ जाइए।
डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा: चाहे वह नानावती कमीशन हो या उससे पहले की कमीशन हो, सबने साबित किया कि कांग्रेस के जिन नेताओं…( व्यवधान)
SARDAR SIMRANJIT SINGH MANN (SANGRUR): Sir, I just want to interject.
MR. SPEAKER: He has not yielded. Please sit down.
Are you on a point of order?
SARDAR SIMRANJIT SINGH MANN : Yes. He has yielded.
अध्यक्ष महोदय : आप प्वाइंट ऑफ आर्डर में हैं तो रूल बताइए कि कौन से रूल के अंतर्गत बोल रहे हैं।
…( व्यवधान)अध्यक्ष महोदय : आप बैठ जाइए। ऐसे प्वाइंट ऑफ आर्डर नहीं हो सकता।
SARDAR SIMRANJIT SINGH MANN : Sir, he has yielded.
अध्यक्ष महोदय : मल्होत्रा जी, आप बोलिए। इनके पास प्वाइंट ऑफ आर्डर के लिए कोई रूल नहीं है।
डॉ.विजय कुमार मल्होत्रा: मैं कह रहा था कि गुजरात में जो इतनी कड़ी कार्यवाही की गई, उसकी सराहना करने के बजाए, जिनका अपना रिकार्ड इतना टेन्टेड है, यहां इन्हीं के नेता ने, जो उस समय प्रधान मंत्री बन गए थे।
उन्होंने कहा था कि जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है। इस तरह तब जो कुछ भी हुआ, उन्होंने उसको जस्टिफाई करने का काम किया।…( व्यवधान)
श्री पवन कुमार बंसल (चंडीगढ़) : राजीव गांधी जी ने यह कहा था,"This madness must end."
डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा: जो कुछ हुआ, वह खराब बात है। गोधरा की घटना थी, वह भी खराब बात थी और उसके बाद की घटनाएं भी खराब हैं। परंतु उस पर जो सरकार ने कार्रवाई की, उस पर इस तरह का लांछन लगाना, इस प्रकार के आरोप लगाना, यह कहां तक उचित है ?मैं एक बात पूछना चाहता हूं कि ये कह रहे हैं कि आपने गांधी के गुजरात को गोडसे का गुजरात बना दिया। आप कांग्रेस का एक लीडर बताएं या एक कांग्रेसी म्यूनसिपल काउंसलर बताएं, जिस समय यह सारा कांड हो रहा था, जिसको तथाकथित जेनोसाइड कहा जा रहा है, नृशंसता कहा जा रहा है, फासीवाद कहा जा रहा है, एक भी कांग्रेसी वहां सीना तानकर खड़ा हुआ हो, उसको कोई चोट लगी हो।…( व्यवधान)
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI (RAIGANJ): Sir, I rise to submit that when entire Ahmedabad was in flames, it was the Congress leader of Ahmedabad who was giving aid and support to the people of the City and not anybody else. He should congratulate the Congress here because our leaders, day and night, risked their lives to help the victims one after another. … (Interruptions)
SHRIMATI RENUKA CHOWDHURY (KHAMMAM): Sir, he suffers from a selective amnesia. … (Interruptions) आप एक भी आदमी का नाम लें जो इन घटनाओं में शामिल था।
डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा: आपके यहां से दस आदमी बोलेंगे तो मैं अपनी बात नहीं कह पाऊंगा। अध्यक्ष महोदय, यह बड़ी मुश्किल है, ये मुझे बोलने नहीं दे रहे।
श्री सुंदर लाल तिवारी (रीवा) : आप कह रहे हैं कि कांग्रेस के लोगों ने कुछ नहीं किया। हमारे सांसद के एक रिश्तेदार को इन दंगों में मार दिया गया था। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : विजय कुमार जी आप बोलिए।
श्री जे.एस. बराड़ : गृह मंत्री जी का वहां निर्वाचन क्षेत्र है, ये क्यों नहीं उस वक्त गए, सिर्फ एक भूतपूर्व सांसद गए थे। आप इतना अच्छा बोल रहे थे, ऐसे क्यों बोलने लगे।
अध्यक्ष महोदय : कृपया सदन में शांति बनाए रखें।
डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा: इन्होंने कहा कि पचास हजार की भीड़ ने हमला कर दिया और इनके किसी व्यक्ति के घर को जला दिया, यह बहुत बुरी बात है। लेकिन क्या उस पचास हजार की भीड़ में कोई कांग्रेसी नहीं था, मैंने पूछा तो बताया गया कि इनके एक भी आदमी को चोट नहीं लगी, लाठी नहीं लगी, गोली नहीं मारी गई। कांग्रेस में क्यों नहीं कोई गणेश शंकर विद्यार्थी पैदा हुआ। जब दंगे हो रहे थे कांग्रेस के लोग क्या कर रहे थे, ये सब उस भीड़ में शामिल थे।…( व्यवधान)
SHRI PAWAN KUMAR BANSAL : This is a highly irresponsible allegation, and this is not in good taste. … (Interruptions)
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : Sir, a responsible leader of the BJP, Dr. Malhotra, made this accusation and he will have to prove before the Home Minister that Congressmen were involved. Otherwise, please ask him to withdraw this allegation. … (Interruptions)
SHRI PAWAN KUMAR BANSAL : It is a highly contentious and irresponsible allegation.
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : Let them disclose the names of all those who were arrested and against whom FIRs were lodged. Was any Congressman named in any of the FIRs? What is he talking? He is a responsible leader, but he is making all false statements. … (Interruptions)
SHRIMATI RENUKA CHOWDHURY : He has made a false allegation.
SHRI BASU DEB ACHARIA (BANKURA): They organised the genocide, and they are blaming others.
SHRI PAWAN KUMAR BANSAL : The perpetrators of genocide are abusing others.
डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा: इनके शब्दों पर लगाम लगाइए…( व्यवधान) मेरे पर आरोप लगाए गए हैं…( व्यवधान)मैं भी ऐसी भाषा का प्रयोग कर सकता हूं। I can also use such words.
MR. SPEAKER: I will remove the unparliamentary words from the record.
 
…( व्यवधान)
 
अध्यक्ष महोदय : देखिए, जो आप यहां अनपार्लियामेंट्री वड्र्स बोलते हैं, मैं उनको रिमूव करूंगा। मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि यहां पर चर्चा अच्छी तरह से हो। महत्वपूर्ण विषय पर इस हाउस में चर्चा हो रही है और जो चर्चा हो रही है, उसको गुजरात के लोग भी सुनेंगे। मैं चाहता हूं कि यहां चर्चा करते समय एक डिगनिटी बनाए रखें और चर्चा डिगनिटी से हो जाएगी तो उसका असर अच्छा होगा। मैं आप सभी को कह रहा हूं। जो चुनाव हो रहे हैं, चुनाव के बारे में....,   …( व्यवधान)
 
अध्यक्ष महोदय : मल्होत्रा जी, आपने आरोप लगाया है तो....
 
…( व्यवधान)
 
डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा: मैंने कोई आरोप नहीं लगाया है।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : मैं समझता हूं कि आपका जो आरोप है, उसको अगर आप सब्सटेनशिएट कर सकते हैं तो करिए - इतना मेरा कहना है। आप सब्सटेनशिएट करिए नहीं तो आरोप नहीं लगाना चाहिए।
SHRI PAWAN KUMAR BANSAL : Sir, the perpetrators of genocide are accusing us… (Interruptions)
डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा: अध्यक्ष जी, इनको यहां कहने का अधिकार है कि ये जेनोसाइड करने वाले हैं, इनको यह कहने का अधिकार है कि ये फासीवादी हैं, इनको यह कहने का अधिकार है कि ये नाजीवादी हैं और इनको यह कहने का अधिकार है कि ये हत्यारे हैं। लेकिन जब हम जवाब देते हैं तो इनको सहन भी नहीं होता।…( व्यवधान)ऐसी कलुषित भाषा का प्रयोग ये कर रहे हैं।…( व्यवधान)
SHRI BASU DEB ACHARIA : Sir, they organised the genocide… (Interruptions)
श्री सुन्दर लाल तिवारी: वे आरएसएस के मैम्बर रहे हैं तो यह तो इतिहास बता रहा है।…( व्यवधान)
डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा: इतिहास हम भी आपको बता रहे हैं। आप इतिहास सुनें तब न। आप इतिहास सुनने के लिए तैयार नहीं हैं।…( व्यवधान)
श्री सुन्दर लाल तिवारी: किसने गांधी को मारा? …( व्यवधान)
डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा: आप लोगों ने। कांग्रेस वालों ने गांधी की आत्मा की हत्या कर दी।…( व्यवधान)
MR.SPEAKER: Please keep silence. Shri Malhotra, please go ahead with your speech.
 
… (Interruptions)
 
डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा: मैं यह कह रहा था कि वहां पर सब लोगों ने उसकी आलोचना की। जो घटना हुई या उसके बाद की जो घटनाएं हुईं, उनके बारे में सबने आलोचना की और गोधरा का विषय चुनाव का विषय न बनाया जाए, यह बात बार-बार कही गई। माननीय प्रधान मंत्री जी ने भी इस बात का उल्लेख किया था।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Please keep quiet now.
 
… (Interruptions)
 
डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा: अध्यक्ष जी, ऐसे बोलना तो बहुत मुश्किल है। ये लोग बीच में बोल रहे हैं। जब ये बोल रहे थे, तो हमने बीच में टोकाटोकी नहीं की।
अध्यक्ष महोदय : आप अब इस पर अपना भाषण मत करिए। आप अपनी बात कहिए।
डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा: मैं कह रहा हूं कि माननीय प्रधान मंत्री जी ने एक बात कही थी कि गोधरा को चुनाव का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए। परंतु जैसे कि प्रधान मंत्री जी ने यह बात कही तो कांग्रेस के गुजरात के अध्यक्ष का उसी दिन बयान छपा कि गोधरा में विश्व हिन्दू परिषद वालों ने खुद ही आग लगाकर सबको मार डाला और यह बात यहां नहीं कही बल्कि विदेशों में जाकर कही।…( व्यवधान)अब इतनी घृणित बातें अगर वे कहेंगे तो क्या गोधरा का सच लोगों को नहीं बताया जाएगा? क्या लोगों को यह नहीं बताया जाए कि गोधरा में क्या हुआ था? क्या लोगों को यह नहीं बताया जाए कि गोधरा में लोगों को कैसे मारा गया था?…( व्यवधान)
श्री सुन्दर लाल तिवारी: जो इस बारे में रिपोर्ट है, वह भी लोगों को बताएं।…( व्यवधान)
डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा: वह भी बता रहा हूं।…( व्यवधान)
श्रीमती रेणुका चौधरी: वह नहीं बता रहे हैं क्योंकि यह जानते हैं कि यह कैसे हुआ?…( व्यवधान)
डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा: अगर ये यह चाहते हैं कि केवल ये बोलेंगे और कोई नहीं बोलेगा तो आप कहिए। यह कोई तरीका नहीं है। मैं इस तरह से नहीं बोल सकता।…( व्यवधान)
श्री सुन्दर लाल तिवारी: आप बोलें तो सच बोलें।…( व्यवधान)
डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा: मैं सच बोल रहा हूं। आपकी अध्यक्षा से पूछ रहा हूं कि जो गोधरा में पकड़े गये और साबित भी हो गए, क्या वे कांग्रेस के काउंसिलर नहीं हैं?…( व्यवधान)आपने उन पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की?वे कांग्रेस के लीडर थे और कांग्रेस के लीडर जो आग में शामिल हुए, लेकिन आज तक उन पर कार्रवाई नहीं की गई।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : ऐसे कैसे चलेगा?हमें सदन चलाना है।
SHRIMATI RENUKA CHOWDHURY : Sir, how are you allowing these things to go on record?… (Interruptions) Whatever he is saying here should be right… (Interruptions)
SHRI SHIVRAJ V. PATIL (LATUR): What is being said here is not correct. The hon. Member is saying many things which cannot be substantiated by him. … (Interruptions) If those things are taken up by us and privilege motions are moved, he shall have to substantiate them. He says that the Congress President went and said that this is Goa. … (Interruptions) It has not been said. It has been explained many times on the floor of the House. The hon. Member has given some facts and figures, which are totally wrong. He says that Congress Councillors are involved. That is also wrong. … (Interruptions) There are photographs showing that they were with them. All the facts are presented in this House in this fashion and then we are expected not to contradict them! What is important in Gujarat is not spreading fear psychosis. If these things are said here and outside also, people will be scared. If the hon. Member is speaking, we do not want to interrupt him every now and then. However, if all the facts he is giving are incorrect, we cannot accept it and sit quietly here.
DR. VIJAY KUMAR MALHOTRA : You have a right to answer.आपके माननीय सदस्य जब बोलेंगे, वे जवाब दे देंगे।
SHRI SHIVRAJ V. PATIL : We have a right to answer and we have a right to move a motion against you for giving wrong information in this House, which we do not want to do. But then you should not continue giving wrong information.
DR. VIJAY KUMAR MALHOTRA : I stand by every word I have said. मैं आपको वघेला साहब की टीवी रिपोर्ट दिखा सकता हूं, वघेला साहब के भाषण की कटिंग्स आपके सामने पेश कर सकता हूं और वघेला साहब द्वारा न्यूयार्क में दिया हुआ भाषण दिखा सकता हूं, जिसमें कहा गया है कि विश्व हिन्दू परिष्द ने गोधरा कांड किया है। अगर आप यह कहेंगे कि वीएचपी ने किया है, तो क्या हम सच्चाई नहीं बतायेंगे। वहां पर नहीं बतायेंगे कि गोधरा में क्या हुआ था और ६५ आदमी कैसे जलाए गए। आप कुछ भी चार्ज लगा दें, लेकिन जब हम उसका जवाब देना चाहें, तो जवाब नहीं दे सकते हैं।
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : Sir, I only want to know whether the hon. Member is speaking from BJP’s side or the Vishwa Hindu Parishad’s side.
DR. VIJAY KUMAR MALHOTRA : I know I am BJP Chief Whip. I am speaking on behalf of BJP. कहा गया कि गोधरा में क्या हुआ, लेकिन सवाल यह है कि आग क्यों लगाई जाती है और कोशिश की जाती है कि इसको चुनाव में भुनाया जाए। यहां पर चुनाव आयोग के बारे में कहा गया कि चुनाव आयोग ने गुजरात के बारे में कुछ आदेश निकाले हैं । चुनाव आयोग ने जो आदेश निकाले हैं, वे हमारी राय में ठीक नहीं है, अनुचित थे। उन्होंने वहां के चीफ सैक्रेटरी और अन्य लोगों को बुलाकर कहा है कि ये जोकर हैं। चुनाव आयोग ने सबको जोकर कहा और कहा कि जो चुनाव जल्दी जल्दी चाहते है वे पागल हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि चुनाव जल्दी होने चाहिए और चुनाव जल्दी कराने के लिए कोशिश करनी चाहिए। क्या सुप्रीम कोर्ट के जजेज पागल हैं? चुनाव आयोग ने फारुख अब्दुल्ला पर भी इल्जाम लगा दिया…( व्यवधान)
SHRI PAWAN KUMAR BANSAL : Sir, I am on a point of order. The rule specifically says that a person who is not a member of the House cannot be referred to the way the hon. Member is doing. He is levelling an allegation on the Election Commissioner of India, which he cannot do. He is drawing inferences from the speech of the Chief Election Commissioner and saying that he is even accusing the judges of the Supreme Court. He never meant that. Rather, it is the Supreme Court which has vindicated his stand.
डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा: विश्व हिन्दू परिषद् और संघ परिवार का कोई भी यहां नहीं है, लेकिन उनके ऊपर भी चार्ज लगाए जा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि चुनाव जल्दी होने चाहिए।
श्री पवन कुमार बंसल: आप सुप्रीम कोर्ट का आर्डर पढि़ए।
डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा: मैंने पढ़ा है। कहा गया कि विश्व हिन्दू परिषद् को यात्रा समाप्त कर देनी चाहिए, नहीं निकालनी चाहिए। प्रधान मंत्री जी ने कहा है कि उसको मान लेना चाहिए। विश्व हिन्दू परिषद् ने सांकेतिक यात्रा निकाली, मामला खत्म हो गया। मैं यह कहता हूं, क्या उनको यह नहीं कहना चाहिए था कि कोई धार्मिक यात्रा नहीं निकलेगी या मज़हबी यात्रा नहीं निकालनी चाहिए। शुक्रवार की नमाज़ के बाद पोलटिकल भाषण दिए गए । उनमें ज़हर नहीं उगलना चाहिए था। यहां पर जो यात्रा निकली और उन्होने जो यात्रा निकाली, वे सब यात्रायें ठीक हैं, परन्तु इस यात्रा पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया। आपके कृष्णा साहब ने सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट के खिलाफ पदयात्रा निकाली। उन्होने भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश को नहीं माना।
सुप्रीम कोर्ट का कोई आदेश नहीं मानता। सारी जगह यात्रा निकाल दी।…( व्यवधान)
श्री पवन कुमार बंसल: महोदय, यह फिर गलत बोलते जा रहे हैं।…( व्यवधान)
श्री जे.एस.बराड़: सुप्रीम कोर्ट ने क्या बयान दिया, उसका भी जिक्र करिए।…( व्यवधान)
SHRI PAWAN KUMAR BANSAL : This is not fair.… (Interruptions)…Shri S.M. Krishna, the hon. Chief Minister of Karnataka never said that… (Interruptions)
SHRI KOLUR BASAVANAGOUD (BELLARY): This is not correct. He has never criticised the Supreme Court. … (Interruptions)
SHRIMATI MARGARET ALVA (CANARA): This is incorrect.… (Interruptions)
डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा: कृष्णा साहब की यात्रा निकली, सुप्रीम कोर्ट के पास जाकर माफी मांगी। ग्लोरीफाई करने के लिए पद यात्रा निकाल दी, कि मैं सुप्रीम कोर्ट का आदेश नहीं मान रहा।…( व्यवधान)मुझे कह रहे हैं कि आप इलैक्शन कमीशन को क्यों क्रटिसाइस कर रहे हैं और वे सुप्रीम कोर्ट को क्रटिसाइस करते हुए सारे कर्नाटक में पद यात्रा निकाल रहे हैं।…( व्यवधान)
SHRI J.S. BRAR : This is not based on facts. We have never criticised the Supreme Court… (Interruptions)
डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा: अध्यक्ष महोदय, कांग्रेस पार्टी इस समय जो खेल खेल रही है, जिस तरीके से वहां हो रहा है, वह उनके कारण नहीं हो रहा कि कांग्रेस पार्टी वहां पोलोराइजेशन कर रही है।…( व्यवधान)यह हंसने की बात नहीं है।…( व्यवधान)
SHRI PAWAN KUMAR BANSAL : Not a single word of his was objectionable… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय : इसमें क्या गलत बात है। इन्हें बोलने दीजिए।…( व्यवधान)
डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा: अध्यक्ष जी, गुजरात के अंदर इस समय जो परिस्थिति है, शांतिपूर्वक चुनाव में इनकी हार निश्चित है। वहां के सारे सर्वे इसी तरह के आ गए हैं।…( व्यवधान)
SHRI J.S. BRAR : People have to come. Who is he to say it?… (Interruptions)
इनका फतवा आना है, उस पर पहले टिप्पणी करनी है।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : वह सर्वे की बात कर रहे हैं, क्या गलत बोल रहे हैं। पेपर में जो सर्वे आया है, वही बोल रहे हैं। इसमें क्या गलत बातें बोल रहे हैं?
श्री जे.एस.बराड़: ये पहले ही हार चुके हैं।…( व्यवधान)
श्री किरीट सोमैया (मुम्बई उत्तर पूर्व) : इनकी कौन सी बात आपत्तिजनक थी?…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : मैंने यही कहा है।
श्री किरीट सोमैया: वहां से कांग्रेस के माननीय सदस्य बार-बार खड़े हो जाते हैं। महोदय, मैं आपसे कहना चाहूंगा कि विजय जी जो बोल रहे थे, उसमें क्या आपत्तिजनक बात थी, जो ये इस तरह बोलने के लिए खड़े हो जाते हैं।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : मैंने इन्हें रोका है, आप बैठिए।
श्री जे.एस.बराड़: क्या गुजरात का फैसला आप कर रहे हैं?…( व्यवधान)
डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा: अध्यक्ष जी, अब क्या हो रहा है कि कोई न कोई ऐसा विषय बनाया जाए, जिससे चुनाव न हों। साम्प्रदायिक हिंसा एवं बाकी चीजें हो जाएं। उसके लिए कई बार मुझे बड़ा आश्चर्य होता है कि कांग्रेस के कई नेता वही भाषा बोलते हैं, जो मुशर्रफ बोलते हैं। जिस प्रकार से मुशर्रफ वहां गुजरात के बारे में जिन घटनाओं का जिक्र करते हैं, अक्षरधाम और दूसरों के बारे में करता है, वही सारी बातें कांग्रेस के लीडर बोलते हैं। क्या वहां जो मुशर्रफ चाहता है और जो यहां स्थिति पैदा करना चाहते हैं, पाकिस्तान की जो योजना है,…( व्यवधान)
श्री पवन कुमार बंसल: मुशर्रफ का दूसरा चेहरा मोदी है।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: May I request you to keep silence? Let him speak.
श्री सुन्दर लाल तिवारी: मल्होत्रा जी, जब कहते हैं कि मुशर्रफ की तरफ चलिए, तब तो आप अमेरिका की तरफ चल देते हैं।…( व्यवधान)
डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा: मुशर्रफ की तरफ क्या जाना है, ये कह रहे हैं कि हम अपने किसी राज्य में पोटो नहीं लगाएंगे। ईश्वर न करे, जिसकी गलती से भी संभावना नहीं है कि गुजरात में इनकी सरकार बन जाए तो वहां भी ये पोटो नहीं लगाएंगे और जो सारे लोग पकड़े हुए हैं - जैसे काश्मीर में सब आतंकवादियों को छोड़ दिया, ये गोधरा कांड वालों को भी छोड़ देंगे और बाकियों को भी छोड़ देंगे। महोदय, देश की जनता को इस पर विचार करना चाहिए कि अगर ये पोटो नहीं लगाएंगे,…( व्यवधान)
श्री पवन कुमार बंसल: पंजाब में सिचुएशन पोटो के बिना ही सुधरी थी।…( व्यवधान)
कुंवर अखिलेश सिंह (महाराजगंज, उ.प्र.) : हम लोग वैको की जेल से रिहाई चाहते हैं।
अध्यक्ष महोदय : विजय जी, आप बोलिए।
डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा: अध्यक्ष जी, इनका जो गेम प्लान गुजरात के अंदर है, उसे देश की जनता समझे। मुझे आश्चर्य होता है कि ये कैसे-कैसे आरोप लगाते हैं। यह जिन्होंने प्रपोज़ किया, मोशन रखा, वे कह रहे हैं कि मध्य प्रदेश में एक आदमी ने, शिवसेना के किसी व्यक्ति ने सिनेमा को रोक दिया, यह कैसा फासीवाद है जिन्होने प्रदर्शन किया ।
उन तीनों ने मान लिया कि कांग्रेस के लीडर्स को बुलाकर, पैसे देकर प्रदर्शन कराया है। करने वालों ने मान लिया कि हम कांग्रेसी हैं और हमको यहां पर लाया गया था। बुंदेला ने भी मान लिया कि मैंने ही यह सब प्लॉन किया था और ये आरोप लगा रहे हैं कि बीजेपी वाले फासीवादी हैं जबकि ये ही वहां पर प्रदर्शन कर रहे हैं। कैसी-कैसी बातें यहां की जा रही हैं। ये कहते हैं कि गुजरात में गोधरा को विषय न बनाओ। मेरा कहना है कि अगर गोधरा विषय नहीं है तो अहमदाबाद के दंगे भी विषय नहीं होने चाहिए। अगर गोधरा की जली हुई बोगी के अंदर जले हुए शव दिखाने पर बैन लगाया जाता है तो अहमदाबाद के दंगों की झूठी और मनगढ़ंत तस्वीरें, पेट-चीरकर बच्चा निकालने की घटना की जो तस्वीरें और किताबें बांटी जा रही हैं उन पर भी रोक लगानी चाहिए। यह नहीं हो सकता है कि आप हिंदुओं के खिलाफ एक तरफा झूठा और जहरीला प्रचार करते चले जाएं और पांच करोड़ गुजरात के लोगों को कातिल कहते रहें और दूसरी तरफ कहें की गोधरा की बोगी को मत दिखलाओ। वहां पर किसी भी प्रकार का सांप्रदायिक प्रचार न हो इस बात का निर्णय होना चाहिए। वहां पर गलत प्रचार किया जा रहा है, झूठी तस्वीरें दिखाई जा रही हैं, किताबें बांटी जा रही हैं, मनगढ़ंत किताबें और चीजें वहां बांटी जा रही हैं और दूसरी तरफ कहा जा रहा है कि गोधरा की तस्वीर को रोक दो। ऐसा भी उन्होंने कहा है कि जब तक चुनाव है इन सबको जेल में डाल दो।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय, मुझे लगता है कि कांग्रेस पार्टी एक ही मांग करे कि वहां पर कोई भी बीजेपी का आदमी प्रचार नहीं करेगा। ये चुनाव आयोग से सिफारिश करें कि केवल कांग्रेसी और मुस्लिम लीग ही प्रचार करेंगी। इसके अतरिक्त तो इनकी कोई इच्छा नहीं लगती है। अध्यक्ष महोदय, मैं कहना चाहता हूं कि गुजरात के गौरव के साथ मत खेलिये, गुजरात के लोगों की भावनाओं को ठेस मत पहुंचाइये। गुजरात के नतीजे सामने आयेंगे तो सच्चाई बता देंगे। इसलिए यह जो एडजर्नमेंट मोशन रखा गया है मैं इसका विरोध करता हूं।
SHRI PRAVIN RASHTRAPAL (PATAN): Mr. Speaker, Sir, I am extremely sad to participate in the discussion on Gujarat again. My heart is full of sorrow and agony, not because I am from Gujarat and not because I am from the Congress Party, but basically I am an Indian, born in Gujarat and elected from Gujarat.
What happened in Gujarat? There was a personal loss in my family too. A young boy of 20 years was killed immediately after his marriage during the violence in Gujarat. He was the son of my nephew. My family was also disturbed because I stay at a place called Shahpur in the Constituency from where the hon. Deputy Prime Minister of the country was elected. We had the experience of curfews of months together. I am very much concerned about what happened in Gujarat, but I do not want to go into the details. To explain what happened in Gujarat, I would only cite a couplet of Azmi Saheb.
" हमीं पे जुल्म ढाया जाता है, हमीं को मुजरिम बनाया जाता है, जिनको मरकर भी नहीं जलना था, उनको जिंदा जलाया जाता है, हम घर बनाने के लिए पूरी जिंदगी लगा देते हैं ये लोग चंद घंटों में बस्तियां उजाड़ देते हैं, अरे उनसे तो परिंदे अच्छे हैं जो कभी मंदिर पे, कभी मस्जिद पे, कभी गिरजाघर पे और कभी गुरूद्वारे पर बैठ लेते हैं।"

गुजरात में इंसानियत की हार हुई है। यह केवल हिंदू-मुसलमान का मसला नहीं है बल्कि देश के संविधान का वहां पर उन्मूलन हुआ है, उसको उखाड़कर फैंक दिया है।

We are taught and we know that there is rule of law in this country. We are taught and we know that there is an elected, welfare, and democratic Government at the Centre as well as at the respective States. But what happened in Gujarat? Everything happened there with the connivance of police. That is very serious. We had seen many communal riots in Gujarat right from 1947 onwards. We had riots in 1980, then in 1985, and in 1992 also. But what happened subsequently? I do not want to talk about Godhra. But the subsequent events were with the connivance of the State and the police. They happened in the presence of Police Administration. That is very serious and hence our faith is shaken. I do not want to refer to the agony of a woman who was raped by 11 people in the birth place of Sardar Patel whose name is now being adopted by the present Chief Minister as Chhota Sardar. I am extremely sorry. Whenever, it is convenient to them, they are hijacking the Congress leaders. Sardar Patel was a Congress Leader, rather, he was a national leader. They take the name of Sardar Patel. These people are talking about the rivalry between Nehru family and the Sardar family. The Chief Minister of Gujarat goes to a small village where the great man Sardar was born and falls in the feet of grand daughter-in-law of Sardar Patel.

श्री किरीट सोमैया: उन्होंने आदरणीय सरदार पटेल और उनके परिवार का सम्मान किया…( व्यवधान)क्या इसमें भी आपको आपत्ति है? माननीय मुख्यमंत्री सम्मान के रूप में उन्हें नमस्कार करते हैं।…( व्यवधान)सरदार पटेल राष्ट्र के नेता थे। वह ऐसा करके उनकी पूजा करते हैं। क्या इसमें भी आपको आपत्ति है? …( व्यवधान)

श्री पवन कुमार बंसल: वह सम्मान नहीं, उनका अपमान कर रहे हैं। …( व्यवधान)

SHRI PRAVIN RASHTRAPAL : I have not completed what I was saying. It proves that the Chief Minister has honour for a woman. Otherwise, she is a very young girl. The grand daughter-in-law of Sardar is a young lady and the Chief Minister is an aged person. But it proves he has got honour for the woman. It looks better. But I want you, Shri Kirit Somaiya to read an article by Shabnam Hashmi which appeared in one of the most leading newspapers of the country, namely, the Hindustan Times. Where was the Chief Minister when a daughter of the same Taluka was raped by 11 people. That is my question. If you have got respect for `A’ woman, you must have respect for `B’ woman who is suffering due to the connivance of you people. That is what I want to point out to you.

Sir, I do not want to go into the details as to what abusive language is used by Praveen Togadia and the Chief Minister himself. The Chief Minister is not able to forget the Leader of the Opposition. It means he is afraid. There is not a single lecture by the Chief Minister where he has not referred to Italy.

12.59 hrs (Shri Basu Deb Acharia in the Chair) He is the Chief Minister of Gujarat but I do not know what connection Gujarat has got with Italy. Every time he goes on record and he wants to know whether for shouting Shri Ram, he should go to Italy. He asks such questions. I do not want to go into the details. But my main concern is about the development of Gujarat. My main concern is about the problem of electricity supply in Gujarat.

13.00 hrs. My main concern is the problem of drinking water in Gujarat. My main concern is the problem of unemployment in Gujarat. My main concern is the problem of drought in various districts of Gujarat. In Gujarat, it was announced only before fifteen days whereas the Government of India could announce drought in Uttar Pradesh in the month of July. These are my concerns.

MR. CHAIRMAN : As this is a grave and serious issue that we are discussing, and a large number of Members also want to speak on the subject, we can skip lunch.

SHRI PRAVIN RASHTRAPAL : We are concerned about it. But the Government of Gujarat and the Chief Minister of Gujarat are not concerned about it. Let me put the records straight. Election in Gujarat was due in the month of January of 2003. There was no necessity of early elections. Somehow, after the ‘polarisation’, the word Shri Vijay Kumar Malhotra mentioned in relation to Congress, the Chief Minister thought of early elections in the State.

In fact, it is BJP which is right now busy in polarising the votes on the lines of religion. Congress cannot afford to do it and Congress is not doing it. Congress is ruling in fifteen States. It is only the BJP which is ruling in Gujarat and in one other small State of Himachal Pradesh. They are ruling in one and a half States. We are ruling in fifteen States, including Jammu and Kashmir. Mind you, Shri Syed Shahnawaz Hussain, Jammu and Kashmir is ruled by Congress and allies; and not by BJP and allies.

नागर विमानन मंत्री (श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन) : इसलिये ये उग्रवादियों को छोड़ रहे हैं।

SHRI PRAVIN RASHTRAPAL : You cannot blame us for ugravadbecause it was Shri Jaswant Singh who went by a flight along with terrorists to Kandahar where the mother of Kauravas was born. The Kaurvavas’ mother was from Kandahar. It was Shri Jaswant Singh who went to Kandahar along with terrorists and not a Congressman. So, do not blame Congress. Congress has not let off any terrorist. When we come to power after two years in this House, Congress will not let off any terrorist and Congress will not let off those who are more dangerous than terrorists, that is, people who are dividing the nation in the name of religion. Some of you will be behind bars when we come to power.

But my main concern is the elections in Gujarat. What was the hurry when we allowed you to rule for five years? But, immediately after the polarisation, the Chief Minister thought that it was the right time to dissolve the Assembly and the Assembly was dissolved. Not just that, it was the Chief Minister who wrote to the Election Commission. As we all know, there is no Election Commissioner in our country. There is an Election Commission where there are three Members. At present the three Members are; Shri J.M. Lyngdoh, Shri Tandon and Shri Krishnamurthy. Shri Krishnamurthy is from my own Department where I served for 37 years. All the decisions are taken by the Election Commission. Out of the three Members, two are Hindus – I am very sorry to say this. In the Election Commission, two Members are Hindus and one is excellently a Christian. I am extremely sorry that the Chief Minister of the State and another leader from the State say that the Chief Election Commissioner Shri. Lyngdoh is working under orders from Vatican.

You are insulting a sovereign State. … (Interruptions) I do not know why the hon. Home Minister has not taken action on it. The Chief Minister of an Indian State says that the Chief Election Commissioner of this country receives and works under instructions from Vatican. You must have regard for another foreign country. Basically, Vatican is not only a religious Head but Vatican is also a religious State. The Pope is the Head of crores of Christians all over the world. It is an accident that the Chief Election Commissioner belongs to the Christian community and he was appointed by your Government..… (Interruptions) But on another side, sometimes the Chief Minister says that the Chief Election Commission is working under instructions from Shrimati Sonia Gandhi. It means the Prime Minister is not functioning, the Home Minister is not functioning. Why has the poor Chief Election Commissioner to come to 10, Janpath to receive instructions and what are your sources of information? The Parliament may be informed as to what instructions were given to the Chief Election Commissioner of this country either from the Vatican or from 10, Janpath. This House has the right to know it from the BJP because these allegations are made by them. In any case, the Chief Minister wanted election and he wanted it on a particular date. It should be on 5th September. Why he wanted to have it on 5th September? It is because he was afraid that the election should be held within six months from the date of last session. That was his understanding.

Now, the same BJP had made a different argument in the Supreme Court in the case of Shri Rajnath Singh when Shri Rajnath Singh made a submission to the Supreme Court. The Supreme Court made it very clear at the time of preliminary hearing that the dates will be decided only by the Election Commission. Once the election is announced and once the House is dissolved, it is only the Election Commission in this country which will decide the dates.

You may mind well that the Constitution has created certain authorities. Parliament is an institution. President of the country is an honourable institution. Even the Vice-President is another institution. The Chief Election Commission er the Commission for elections is an institution. The Comptroller and Auditor-General is an institution. The Commission for Scheduled Castes and Scheduled Tribes is an institution. The National Human Rights Commission is an institution. These are institutions and if you do not have respect for these constitutional institutions, you have no right to continue on a prestigious or an important post of Government in this country. But he wanted election. The Cabinet referred the matter through the President of the country. The highest authority of the country was involved about Gujarat elections. The President sent it back. That shows that he never approved it. But again it was sent and according to the constitutional mechanism, when a request is made for the second time, the President has no go but to act upon it. The matter was referred to the Supreme Court and now, the Supreme Court has given judgement. I am sure that in this House, we should not discuss what the Supreme Court has said. We have respect for the Supreme Court. We are law-abiding citizens and we believe in the rule of law. We do not believe in the rule of Shivaji or Ravana or Kauravas or even Lord Rama. We have respect for Lord Rama and we have respect for all Gods that way. Partly, we have got respect for Shivaji also.

Now, what right have you got to take out the Hindu Pad-padshahi? There is a dispute. I would advise you to tell your friends in Gujarat that they should find out the original meaning of the word ‘Hindu’. I do not want to tell this in this House that Hindu is not a Sanskrit word, Hindu is not a Hindi word. Hindu is a Persian word. I personally tell you and I can privately inform you the meaning of the word ‘Hindu’ and you may inform your people in Gujarat that the real meaning of the word ‘Hindu’ is this. And the moment they know the meaning of it, they will stop using that word.

So, let us not discuss that. This is the problem. The Notification for election has already been issued. The election process has already started. What we want is total peace. Prof. V.K. Malhotra referred to the word `gaurav’. The Chief Minister talks of gaurav of five crore Gujaratis. I want to know from the hon. Deputy Prime Minister whether the census of Gujarat is complete. I tell you, as a responsible Member of Parliament, that census of Gujarat is not complete. Due to earthquake, there was no census in Kutch, and Bhuj. There was no census in parts of Surendra Nagar and Ahmedabad districts. Buildings were demolished totally. We do not have the final figure of census. Even now, we are now working on the basis of provisional census figure, according to which the population of Gujarat is approximately four crore and fifty lakhs. In the name of five crore Gujaratis’ gaurav, he took out an yatra. He started the yatra from a religious place. We have no objection to it. You can select any venue. In Gujarat everybody respects Ambaji. Everybody respects religious places. There are places of worship in Gujarat where both Muslims and Hindus worship. Shri Shah Nawaz Husain must be knowing about Mira Datar Dargah. It is not worshipped only by Muslims. It is worshipped by Hindus as well. There are half a dozen dargahs in Gujarat which are worshipped by all Muslims and Hindus. There is one dargah in Ahmedabad district, Kaka Sahib, where the entire management is with the Hindu Pandit. We have one dargah in Baroda where the in-charge is a Hindu. Why are you breaking this tradition? Are you not interested in communal harmony? Why are you abusing a particular section?

Pakistan is our neighbouring country and an enemy country. We have got diplomatic relationship with Pakistan. Even now I am sure our diplomatic relations are not snapped. I would like to draw the kind attention of the Deputy Prime Minister. Many times, when the Deputy Prime Minister should talk, he does not talk, he asks the Prime Minister to talk. In fact, on Gujarat issue, I want the Deputy Prime Minister to talk. Whenever the Gujarat Chief Minister refers to the President of Pakistan, he uses the word `Miyan Musharraf’. I say that this is objectionable. By calling him Miyan Musharraf, he is blaming the entire Muslims of Gujarat. He is comparing Indian Muslims with the dictatorial head of another Government. Many times instructions are sent that he should not talk like that. Once Shri Venkaiah Naidu also sent instructions to the Gujarat Chief Minister that he should not talk like that.

श्री चन्द्रकांत खैरे (औरंगाबाद, महाराष्ट्र) : वह तो मियां हैं ही, इसलिए बोलेंगे।

श्री प्रवीण राष्ट्रपाल : अगर मैं आपका नाम लूंगा तो उसके बाद मैं हिन्दू नहीं बोलूँगा। अगर हम बाल ठाकरे बोलते हैं तो हम ‘हिन्दू बाल ठाकरे’ नहीं बोलते हैं। वह गाली हो जाएगी।

सभापति महोदय : खैरे जी, आप बैठिये।

श्री प्रवीण राष्ट्रपाल : टाइगर का फोटो पीछे रखने से कोई आदमी टाइगर नहीं बन जाता। उसके लिए टाइगर बनना पड़ता है। …( व्यवधान)बकरी का शरीर लेकर पीछे शेर का फोटो रखने से कोई शेर नहीं बन जाता। …( व्यवधान)

श्री चन्द्रकांत खैरे : हिन्दू शक्ति जागृत हो रही है, इसलिए इऩको दुख हो रहा है। …( व्यवधान)

सभापति महोदय : रामदास जी, आप बैठिये।

प्रो. रासा सिंह रावत (अजमेर): जो महानुभाव सदन के सदस्य नहीं हैं उनके नाम न लिये जाएं। जिस तरह से नाम लिये जा रहे हैं, वह आपत्तिजनक है। इस बहस में जिस गंभीरता का परिचय दिया जाना चाहिए, वह नहीं दिया जा रहा है। कुछ लोग तो हँस रहे हैं। …( व्यवधान)

सभापति महोदय : रामदास जी, आप बैठिये।खैरे जी, जब आप बोलेंगे तब इन सब बातों को कहिये। अभी आप बैठ जाइये।

 

...( व्यवधान)

 

SHRI PRAVIN RASHTRAPAL : We are concerned with the situation there. The Chief Minister has started the Gaurav Yatra. Another wing of the party has started the Hindu Pad-padshahi Yatra.

श्री रामदास आठवले (पंढरपुर) : आपने इन चार सालों में क्या किया है ?…( व्यवधान)

प्रो. रासा सिंह रावत :आप लोगों ने कौन सी यात्रा निकाली थी ? …( व्यवधान)

श्री प्रवीण राष्ट्रपाल : हमने कोई यात्रा नहीं निकाली थी। …( व्यवधान)

MR. CHAIRMAN: Shri Rashtrapal, please continue.

SHRI PRAVIN RASHTRAPAL : He is asking me how many yatras we have taken out. I would like to say that we have not taken out any yatra. We had only one function at Fagveel. That was the constituency of Shri Shankersinh Vaghela where he had only one function. The Congress Party has not taken out any yatra. The Congress Party will take out theantim yatra of the BJP on 1st December and we will see to it that it is concluded on 12th December. The result will be announced on 15th December. That is why, the right hon. Prime Minister is very correctly telling the truth to the VHP and the BJP for the last two days. But you are in disagreement with your Prime Minister! I partly agree with him that we should talk about development. Do not talk about riot. Do not divide the country on religious lines. Do not talk even of Godhra. That is why, I do not want to talk about Godhra. But subsequently elections are there.

My friends, you have got all the right to criticise the Congress Party. Like that, the Congress Party has all the right to criticise the policy of the BJP which is known to everyone. What is the policy of the BJP? It is first demolishing the structure. Then, they convert the structure into a disputed place. After that, they would say that what was demolished was a disputed structure. Sometimes, they convert the human beings into disputed ones and then they finish such people. It is ethnic cleansing. We should remove this because it is not required in the society.

Finally, coming to the conclusion part of it, I would say that elections have been announced. We want that everybody in Gujarat should be allowed to vote freely. Dr. Vijay Kumar Malhotra indirectly referred to the fact that there is shanti in Gujarat. But there is shanti in Kabristan. You go to any Kabristan and you will find that there is total peace. You go to any funeral ground. There is always peace. We do not want that shanti. We want real shanti.

डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा: सभापति महोदय, इन्होंने गुजरात को कब्रिस्तान बना दिया है। …( व्यवधान)

सभापति महोदय : आप बैठिये। खैरे जी, आपको अभी बोलना है इसलिए आप बैठ जाइये।

 

...( व्यवधान)

 

प्रो. रासा सिंह रावत : सभापति महोदय, इनको कब्रिस्तान ही नजर आता है। …( व्यवधान)

सभापति महोदय : रासा सिंह जी, आप बैठिये।

 

...( व्यवधान)

 

SHRI PRAVIN RASHTRAPAL : I want real peace. … (Interruptions) I want only peace where all the people can live together as we have been living all these days.

The Chief Minister of Gujarat says that the Congress Party has not done anything in the last 45 years. I put this question. What is ONGC? What is IPCL? What is IFFCO? What is the Koyali Refinery? What is the Sagar Dairy? What are these Universities? I am talking only of Gujarat. I do not want to talk about the country. Everything in Gujarat was done by the Congress. Who gave permission, environmental clearance to the Sardar Sarovar Dam? Who laid the foundation-stone of it? It started from Pandit Jawaharlal Nehru’s time. Environmental clearance was given by the late Shri Rajiv Gandhi only. It was done during our regime. … (Interruptions) Right now, Dr. Kathiria is a Minister. You must know that the dam’s height is only 93 metres today. That is the official figure. Out of the 93 metres, 80 metres were constructed during our regime. You are responsible for the construction of only 13 metres. I want to inform you about that aspect.

What happens now? The other day, there was a celebration in Ahmedabad for receiving the Narmada Water. There was a function. In fact, it was the rain water which came from Madhya Pradesh. The water came to Sabarmati through a State ruled by the Congress Party! Because of the heavy rains in Madhya Pradesh, the water came.… (Interruptions) DR. Malhotra is laughing. It means that he agrees with me.

Due to heavy rains in Madhya Pradesh, which is a Congress-ruled State, the dam was full of water. But because the present Government has not constructed canals, if the water was not released up to Gandhi Nagar, the dam would have been in danger of breaking up. As a result, the engineers advised that water should be released immediately.

Sir, they have failed in constructing canals because they were busy in pocketing money. So, they have released water up to Gandhi Nagar. From Gandhi Nagar there is a sub-canal in the Sabarmati River. So, the water of the Narmada River was thrown into the Sabarmati River. But a function was arranged by the present Chief Minister of Gujarat for worshipping the Narmada River. He claimed that he brought Narmada water to Gujarat and Shri Keshubhai Patel also claimed that he brought Narmada water to Gujarat. They should not cheat the people. In Gujarat, 65 to 70 per cent of the people are living below the poverty line. They are all waiting for Narmada water both for drinking and irrigation purposes. The maximum benefit out of Narmada Canal will go to Surendranagar district and Patan, which is my area. So, I am concerned about it. But this is not a project of one party. In the morning, the hon. Minister of Water Resources was replying to a question that it would be treated like a national project. If that is so, then why is this regionalism? It is not the present Chief Minister who brought Narmada project. Certain development works that are taking place in the country are a continuous process and we all should take credit for that. If credit should go to any person, it should go to Shri H.M. Patel and his leader Sardar Patel. Actually, Pandit Nehru was the man who went there and laid the foundation stone for this project. But the present Government of Gujarat has held a function for water tap inauguration and when they opened the tap there was no water. … (Interruptions) I am concerned about it.

Let us talk on issues. What Gujarat wants right now is food for work. The districts of Surendranagar, Rajkot and Banaskantha are passing through the worst drought. In those districts, there is not even drinking water, not to talk of irrigation. These are the issues which the Congress Party is addressing and will address during the election. We cannot afford to divide the people on the lines of religion, caste, creed, region and district. I would request my friends on the other side not to do that. My serious objection to them is for their abusing of Shrimati Sonia Gandhi. If they have got respect for the grand daughter of Sardar Patel, then they must have respect for the daughter-in-law of Shrimati Indira Gandhi and widow of the former Prime Minister Shri Rajiv Gandhi. I would request them from this House to tell their friend Shri Praveen Togadia that he should mind his words. Otherwise, something will happen in Gujarat for which the BJP will be responsible and the silent NDA partners will be responsible. They have no right to abuse and insult the Leader of the Opposition of Indian Parliament. She is holding an official position which is of Cabinet Minister’s rank. I do not want to use those words here. I cannot use those words because I am an educated man. I am a Member of Parliament and I know the meaning of those words. If those words are uttered by any person for my mother, I will kill that man. I am sorry to say that. So, let us behave ourselves. We, politicians, can fight for election. One can try to win the election. We have no objection to that. But we are sorry to say that the highest authority of the State of Gujarat, the Chief Minister, and the highest authority of another sister organisation of the BJP family are abusing and insulting Shrimati Sonia Gandhi. All the sister organisations of the BJP are on the pay roll of the BJP.

You are responsible for the behaviour of the VHP and the Bajrang Dal because they get salary from the BJP. They are your servants. You are giving them salary. We have got evidence that they are paid servants of the BJP. But you are not able to control those people.

What was done yesterday or day before yesterday in Ahmedabad? The Press has written about it. Why was that meeting allowed in Ahmedabad? I want to know from the Deputy Prime Minister. The Election Commission has banned the dharma yatra. Somebody said, "Why are dharamyatras not allowed in Gujarat?" Day before yesterday, the Sikhs in Ahmedabad took out a yatra from a Gurudwara at Shahpur which went up to Bapunagar. The man who inaugurated it was the Commissioner of Police of the city. No yatras are banned. You can take out a religiousyatra. But it was on the eve of Guru Nanak’s birthday. They take it out every year. It was started yesterday. Tomorrow, it would reach another Gurudwara in Ahmedabad.

The Jains take out yatra on their utsav in Ahmedabad. Nobody has banned it. The Scheduled Castes took out such a yatra. Nobody has banned it. What is banned is a yatra in the name of religion but, directly or indirectly, canvassing for a particular party in Gujarat. In yesterday’s meeting also, an appeal was made that everyone who is a Hindu should vote for the BJP. It meant that it was political. Then, what about the expenditure? That is why the Election Commission has taken a right step. Now, there should not be a discussion because the highest authority of the land, the hon. Prime Minister, has approved the action of the Election Commission.

With these words, I want to tell here that this House should also see that the elections in Gujarat are held peacefully. Any party may win. We won in Jammu and Kashmir, but our man is not the Chief Minister there. This is the culture of the Congress Party. In fact, we were in majority, but we agreed for Mufti Sahib and told him: "Come on. You can take a lead." We have allowed it even when we are in a majority.

Now, you know how your Cabinet has been made. Let us not talk about who will become this thing and that thing. We are concerned about communal harmony. Congress never represented any particular community or religion. Congress always maintains that they are for the entire country. It is one of the oldest parties in the country. It has been in existence for the last 118 years. बी.जी.पी. को तो अभी १३-१४ साल ही हुए हैं। So, nobody can teach us a lesson in politics and for fighting elections. With these words, I thank my party, the hon. Speaker and the hon. Chairman for permitting me to participate in this discussion.

श्री चन्द्रकांत खैरे (औरंगाबाद, महाराष्ट्र) : सभापति महोदय, गुजरात का मतलब देश का है। पिछले साल गुजरात में जो लॉ एण्ड ऑर्डर की सिचुएशन खराब हुई, उसके लिए विपक्ष जो यहां स्थगन प्रस्ताव लाया है, उसका विरोध करने के लिए मैं खड़ा हुआ हूं।

यहां बहुत कुछ कहा गया। गुजरात की शान्त भूमि में, सरदार वल्लभभाई पटेल जी की, महात्मा जी की भूमि में पूरी तरह से जो भी हो रहा है, वह कहां से चालू हुआ, अभी तक किसी ने इसके बारे में नहीं कहा। मैं आपके माध्यम से सभी विपक्ष के सांसदों को यह बोलने वाला हूं कि २७ फरवरी को जो गोधरा में ७.४५ बजे हत्याकाण्ड किया गया। जब साबरमती एक्सप्रैस ७.४३ बजे गोधरा में आई, उसके पांच मिनट के बाद जब वहां से मूव हुई तो एक किलोमीटर के बाद रास्ते में उसकी चैन खींची गई।

वहां पांच हजार लोगों की भीड़ ने उस गाड़ी के दो डिब्बों को जला दिया।…( व्यवधान)

सभापति महोदय : आप उनको डिस्टर्ब न करें। उन्हें अपनी बात कहने दें।

श्री चन्द्रकांत खैरे : वहां का इंचार्ज कौन था और कौन अधिकारी थे, यह सब जानते हैं, मैं किसी जाति की बात नहीं करूंगा। पांच हजार की भीड़ के वे समर्थक थे, उन्होंने यह किया। जो राम सेवक अयोध्या में आहूति डालकर आ रहे थसौभाग्य से काफी लोग बच गए, क्योंकि उनकी ट्रेन का समय सवेरे ढाई बजे था। यह सारी घटना पूर्व नियोजित थी कि कैसे पेट्रोल डालकर व्यक्तियों को जलाना है। ट्रेन लेट आई इसलिए दो बोगियों में आग लगी और ५८ लोगों को मारा गया। मैं यहां इस बात को कहने के लिए शर्मिंदा हूं कि २७ फरवरी को जब यह कांड हुआ, २८ फरवरी को यहां बजट पेश होना था तो हमने, शिव सेना में १२ मिनट तक सदन की कार्यवाही को रोका था, लेकिन विपक्ष की नेता सोनिया जी और दूसरे सांसद जो यहां थे, किसी ने एक भी शब्द गोधरा की घटना के बारे में नहीं कहा। उस घटना में बच्चे और महिलाओं को भी जिंदा जला दिया गया था। लेकिन यहां एक भी शब्द उनके प्रति नहीं कहा गया।…( व्यवधान)गुजरात में इस प्रकार की घटना हुई और ये लोग चुप रहे। दुर्भाग्य से अगले दिन कुछ अल्पसंख्यक मारे गए तो इन्होंने सदन में बहुत शोरगुल किया।…( व्यवधान) मैं यह बताना चाहता हूं कि जब किसी हिन्दू पर अत्याचार होता है, तो विपक्ष के लोग क्यों नहीं आगे आते…( व्यवधान)

श्री प्रियरंजन दासमुंशी: ये असत्य कह रहे हैं। उस वक्त हमने भी कहा था और हमारी नेता ने भी बोला था।…( व्यवधान)

कुंवर अखिलेश सिंह: ये असत्य कह रहे हैं कि हमने कुछ नहीं कहा। आप लोक सभा की कार्यवाही का अध्ययन कर लें, उस दिन गोधरा की घटना पर मैंने और रामजी लाल सुमन ने स्थगन प्रस्ताव दिया था।

श्री चन्द्रकांत खैरे : उससे क्या होता है।

प्रो. रासा सिंह रावत : विपक्ष ने कोई प्रतक्रिया व्यक्त नहीं की थी।

सभापति महोदय : रासा सिंह जी आप बैठिए और अखिलेश जी आप भी बैठिए।

SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : Sir, he is speaking on behalf of Shiv Sena Party, which is a part of NDA in the House. He is saying that the Congress President, Shrimati Sonia Gandhi did not condemn it at the first instance. Do they accept all these allegations? If not, then he should withdraw his allegations… (Interruptions)

प्रो. रासा सिंह रावत :आप क्यों बोल रहे हैं ?

SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : He has taken the name of Shrimati Sonia Gandhi, that is why I have to say it. He is misleading the House… (Interruptions)

श्री चन्द्रकांत खैरे : आपने एक भी शब्द नहीं कहा था। उस घटना में कई बच्चे और महिलाओं को भी जलाया गया था। …( व्यवधान) मेरे भाषण को डिस्टर्ब न किया जाए। उस समय मैं यहां वैल तक आया था और सोनिया जी तथा आप लोग कुछ नहीं बोले थे। आप कैसेट देख लें। उसके बाद प्रमोद महाजन जी हमारे पास आए थे और उन्होंने कहा था कि आज बजट पेश होना है इसलिए व्यवधान न डालें।

सभापति महोदय : आप विषय पर बोलें।

श्री चन्द्रकांत खैरे : दूसरे दिन जब दुर्भाग्य से मुस्लिम समुदाय के लोगों की हत्या हुई तब इन्होंने यहां शोर किया।…( व्यवधान)

कुंवर अखिलेश सिंह: चाहे हिन्दू हो, मुसलमान हो, बौद्ध हो, सिख हो या ईसाई हो, कोई भी हो। अगर किसी की भी हत्या हो, उसकी हम निंदा करते हैं। गोधरा में जो घटना घटित हुई मैंने रामजी लाल सुमन ने यहां स्थगन प्रस्ताव दिया था। आप कार्यवाही को निकालकर देख लें, सब स्पष्ट हो जाएगा। चन्द्रकांत जी असत्य बात कह रहे हैं। इसलिए वे अपनी बात को वापस लें।

सभापति महोदय : आप बैठिए। खरे जी, आप विषय पर बोलिए।

 

…( व्यवधान)

 

कुंवर अखिलेश सिंह: क्या हिन्दू का खून है, वह अलग तरह का दिखाई देता है ? क्या मुसलमान का जो खून है, वह अलग तरह का दिखाई देता है और ईसाई का खून है, वह अलग तरह का दिखाई देता है?…( व्यवधान)आप गलत बयानी यहां न करें।…( व्यवधान)

श्री चन्द्रकांत खैरे : जो यह घटना हुई, गुजरात में लॉ एंड ऑर्डर क्यों बिगड़ गया जिसके लिए इनको स्थगन प्रस्ताव लाना पड़ा?इसका मूल कारण यह रहा है कि जो गोधरा हत्याकांड हुआ, उसके बारे में मैंने कहा तो आपको दुख हुआ। दूसरे दिन एक पूर्व सांसद की हत्या हुई तो इन्होंने हंगामा किया। मैं यह कहूंगा कि जिस वक्त महिलाएं या राम भक्तों को जलाया गया तो इन्होंने कुछ नहीं किया। मैं यह कहूंगा कि जो गुजरात शांति पूर्वक चल रहा था, तो उसके बाद क्या हुआ? जब अयोध्या में बाबरी का विवादित ढांचा गिर गया तो उसके बाद मुम्बई में बारह बम विस्फोट हुए तो वे क्यों हुए ? क्या मुम्बई के लोगों ने कुछ किया था?बाबरी का विवादित ढ़ांचा गिरने के बाद पूरे देश में इन्होंने बहुत कुछ किया।…( व्यवधान)इस समय चूंकि मोदी जी वहां के मुख्य मंत्री हैं, तो वहां के हिन्दू बच गये। मैं वहां गया था। मैं जमालपुरा के पुराने गांव में गया था तो वहां ही पत्थरबाजी शुरू हो गई थी। हमें पुलिस ने रोक लिया था कि आगे मत जाइए। मगर हम भी बालासाहेब ठाकरे जी के शिव सैनिक हैं, हम जाएंगे वहां हम गए तो वहां के हिन्दू बोले कि हमें मार रहे हैं और यहां कोई कुछ नहीं कहता। मैं सोनिया जी की बहुत इज्जत करता हूं। जब सोनिया जी ने गुजरात मे दौरा किया तो जमालपुरा जनतापुरा में ये लोग क्यों नहीं गए? वहां जनतापुरा में पूरे पांचाल परिवार में सिर्फ दो लड़कियां बची थीं। उनके मां-बाप सब गुजर गये। अगर वे आहुति पूजा के लिए गए थे तो उसमें उनका क्या कुसूर था? लेकिन उनको मार दिया गया, जलाया गया। जनतापुरा में इतनी दहशत थी। वहां ये लोग और सोनियाजी भी वजिट करने नहीं गये। जहां गुजरात सरकार ने ५००० मुस्लिम फैमिलीज को बचाया और जो एरियाज हैं, वहां एक पुरानी मस्जिद थी, वहां चार-पांच हजार लोगों को बचाया। बल्कि मैं तो कहूंगा कि रिफ्यूजीज की व्यवस्था बहुत अच्छी की गई। लेकिन जहां-जहां हिन्दू मारे गए, वहां के लिए ये नहीं बोलेंगे। मैं प्रवीण तोगड़िया जी का यहां समर्थन नहीं करूंगा लेकिन यह कहूंगा कि वह और बाकी विश्व हिन्दू परिषद जो कर रही है, वह हिन्दुओं के लिए कर रही है, वह ठीक है। हम लोग भी कहेंगे कि हिन्दुओं का पक्ष कोई रखने वाला नहीं है। हिन्दुओं की भूमिका रखने के लिए शिव सेना और वी एच पी के सिवाय कोई नहीं है। ७५ प्रतिशत हिन्दुओं की भूमिका आप नहीं रखते लेकिन जो २५ प्रतिशत अल्पसंख्यक हैं, उनके लिए बोलते हैं। आप वोट के लालच के लिए करते हैं।…( व्यवधान)

गुजरात में इलेक्शन के लिए यह हो रहा है। गुजरात के बारे में कह रहे हैं। महाराष्ट्र में आपका राज है और उसके बाद कांग्रेस का राज है। वहां महाराष्ट्र में इनका राज आने के बाद अभी तक ५८ रायट्स हुए।…( व्यवधान)५८ रायट्स होने के बाद कई लोग मारे गये लेकिन उसके बारे में ये नहीं कहते। मैंने पहले भी ज़ीरो ऑवर में प्रश्न उठाया था। हमारे सांगली जिले में जो गन्ने की खेती करने वाले किसान हैं, उन लोगों ने चूंकि गन्ने के दाम कम हैं, इसके लिए उन्होंने एजीटेशन किया था तो वहां की सरकार ने एजीटेशन दबाने के लिए पुलिस को भेजा। पुलिस ने लाठी चार्ज किया, बहुत मारा ।

गुजरात के बारे में कहा जा रहा है, लेकिन महाराष्ट्र के बारे में कुछ नहीं बोल रहे हैं। पूरे देश के बारे में कहा जा रहा है कि पूरे देश में ला-एंड-आर्डर की स्थिति खराब है। मैं कहूंगा कि वहां मोदी सरकार ने गुजरात में सहायता की है। मैं यह किताब दिखाना चाहता हूं, इसमें पूरा लिखा हुआ है। …( व्यवधान)

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री (श्री राम नाईक) : इनके अध्यक्ष की हत्या भी की गई है।

श्री चन्द्रकांत खैरे - महाराष्ट्र में आर पी आई के अध्यक्ष की हत्या क्यों हुई, कुछ नहीं बोल रहे हैं कि क्यों हत्या हुई। मैं तो कहूंगा कि महाराष्ट्र के बारे में भी ला-एंड-आर्डर की स्थिति के बारे में इस सदन में चर्चा होनी चाहिए। महाराष्ट्र के बारे में चर्चा नहीं करते हैं, तो गुजरात के बारे में क्यों करनी चाहिए। मुझसे पहले गुजरात के माननीय सदस्य बोल रहे थे । उन्होंने कहा कि देश के १४ राज्यों में उनकी सरकार है। मैं पूछना चाहता हूं, इन १४ राज्यों में ला-एंड-आर्डर की क्या स्थिति है? वहां की स्थिति अच्छी नहीं है। कांग्रेस शासित राज्यों में तो स्थिति का समर्थन करते हैं, लेकिन गुजरात में मोदी सरकार ने कन्ट्रोल किया है। गुजरात में शांति का माहौल होने के बाद चुनाव घोषित हो गए हैं । वहां चुनाव का माहौल तैयार हो गया है। विधान सभा वहां पहले से ही बर्खास्त है। मुझे एक बात का दुख होता है। विपक्ष में हिन्दुओं की भूमिका रखने के लिए कई लीडर्स हैं, लेकिन वे बोलते नहीं है । हिन्दुओं की रखेंगे, तो मुसलमानों के वोट का क्या होगा। चुनाव आयोग ने हिन्दुओं की भूमिका की यात्रा पर प्रतिबन्ध लगा दिया, यह बहुत दुख की बात है। हमारे हिन्दुओं की भूमिका कौन रखेगा?हमारे नेता श्री बालासाहिब ठाकरे जी के बोलने के बाद श्री राष्ट्रपाल जी कह रहे हैं कि जो हिन्दुओं की भूमिका रखने के लिए आगे आएगा, उसको क्रमिनल कह रहे हैं। आपको ऐसा नहीं कहना चाहिए। मैं आपको यह बताना चाहता हूं कि अक्षरधाम में तीन आतंकवादी कैसे आ गए। जो मंदिर में भक्तगण थे, उनका कोई दोष नहीं था। पाकिस्तान पूरे देश में अराजकता का निर्माण करने की कोशिश कर रहा है। आप उसके खिलाफ क्यों नहीं बोलते हैं …( व्यवधान)

श्री रामजीलाल सुमन (फिरोजाबाद): ये आतंकवादी कैसे आए…( व्यवधान)

श्री चन्द्रकांत खैरे : कश्मीर में आतंकवादियों का समर्थन किया जा रहा है और कहा जा रहा है कश्मीर में आतंकवादी आते हैं। …( व्यवधान)

सभापति महोदय : आप अपना भाषण समाप्त कीजिए।

श्री चन्द्रकांत खैरे : सभापति महोदय, माननीय प्रधान मंत्री जी ने कहा है कि गुजरात में चुनाव शांतिपूर्ण ढंग से होने चाहिए। लेकिन भारतयी जनता पार्टी की सरकार और एनडीए की सरकार को विपक्ष दोष न होते हुए भी, हमारी सरकार को दोष देना चाहते हैं। इसका कड़े शब्दों में विरोध करता हूं। मैं कहूंगा कि इलैकट्रोनिक मीडिया में यह कहा गया है कि मोदी सरकार ही जीतेगी, इसलिए इन लोगों के पेट में दर्द हो गया है और इसीलिए यहां पर यह प्रश्न उठाया गया है। मैं इस स्थगन प्रस्ताव का विरोध करता हूं और अपनी बात समाप्त करता हूं।

   

SHRI RUPCHAND PAL (HOOGLY): Mr. Chairman, Sir, the conspiracy throughout the country to divide the people of this country on communal lines has been a matter of grave concern to our countrymen. But the happening in Gujarat for the past several months has not only been a matter of grave concern to our countrymen but also a grave danger is being posed to our democratic institution.

The way the statutory and constitutional bodies are being denigrated and attacked cannot but be a matter of concern to every right-thinking citizen of this country.

I remember, at the time we were celebrating the fiftieth anniversary of our Republic, there was a discussion on what has been the achievement of this nation that could be mentioned in the Resolution. We mentioned that while democracies in many other countries including some of our neighbours have miserably failed, we have been able to uphold democratic values, uphold democratic institutions and promote democracy. But we find today that the elected Chief Minister of a State, patronised by Ministers of the Union Government and a President of the Ruling Party, and the frontal organisations of the RSS are publicly denigrating the Election Commission in the worst possible abusive language. We cannot but be concerned that this Government is out to destroy the democratic values, democratic institutions and statutory bodies of this country, which have been built brick by brick.

I am not going into whether what happened yesterday was match fixing or a sort of a drama but one lesson is there. Had the Prime Minister acted in a similar fashion earlier, the carnage would not have taken place. Had the Prime Minister visited Gujarat, which he did not do for several weeks, and had sent the message that the Prime Minister of this country and the Government are declaring that it would not be tolerated, the carnage would not have taken place. It was never done. Rather, important Ministers including the Deputy Prime Minister have shamelessly patronised the carnage organised and sponsored by the State Government. This is the lesson. Had the important leaders of the BJP and some of their allies not acted in the fashion they did at that time, the carnage would not have taken place. The Prime Minister, at that time, had said: "How would I face the outside world? This is something shameless that has taken place. Our heads are bowed down in shame." But still in another voice he patronised and supported the actions of the Chief Minister Narendra Modi.

When the NDA Government was formed, the BJP had said that they would keep aside their agenda of a Hindu rashtra, the construction of the Ram temple, the removal of Article 370 and their views on a Uniform Civil Code but we find that they are very surreptitiously speaking in different voices. This is the tactical position they have taken. The Prime Minister would, at one time, say a certain thing but the RSS would assign the task of laying down the programme of Hindutva to the VHP in Gujarat. They are all frontal organisations of the RSS. The RSS has the agenda of setting up a Hindu rashtra. The Prime Minister had made a pronouncement in some other country that he is first a Pracharak of the RSS and then the Prime Minister. When another wing of the RSS is attacking the constitutional bodies and defying the Election Commission, has he condemned it? My first question is whether the Prime Minister has condemned the utterances of the VHP leadership. Has the Prime Minister condemned the actions of Shri Narendra Modi in the name of the Gaurav Yatra and in the name of the Vijay Yatra?

When the demolition of the Babri Masjid had taken place on the 6th December, 1992 the Prime Minister was, at that time, sitting on this side of the House.

What did he say? He was speaking in a language of anguish. But that grief is done and that anguish is done. The shamelessness with which the VHP and some other frontal organisations of RSS are trying to go ahead with the Hindutva agenda everywhere, in education, attacking every institution, is the hidden agenda in a very tactical way they are promoting. While the hon. Prime Minister has been given the task of rebuking them, telling them `no, no, thus far and no further.’ Otherwise, how can the VHP leaders say हम संघर्ष जारी रखेंगे। किसके लिए संघर्ष जारी रखेंगे - हिंदु राष्ट्र बनाने के लिए।Publicly he has stated that if necessary we shall go against all Chief Ministers, remove all Chief Ministers and all elected Prime Ministers. We do not consider that Constitution is above religion and above our faith. If that be the situation, we have taken an oath in the name of the Indian Constitution. The corner stone of this Constitution is secular democracy. Some people, who belong to RSS, to which the Prime Minister also belongs, are publicly saying that we do not have any faith in the Indian Constitution. The Prime Minister is not condemning it, the Deputy Prime Minister is not condemning it. Rather they are patronising the same people who are saying all these things. … (Interruptions) How can this be tolerated? The nation is not going to tolerate.

The people are giving their verdicts. They have given their verdict in most of the States where elections have taken place. They have given their verdict even in Jammu and Kashmir. Now, the things are developing in a way in the backdrop of the elections. The hon. Prime Minister and his Government owe a responsibility to this House, and through this House to the nation to see that such things will not be tolerated. Now, the sort of drama unfurls, arresting these people who have been provocating the people on communal lines. They should be arrested as it happens in the case of any criminal, as it happens in the case of anyone who defies the Constitution. The same law should be applied to anyone who is defying the law, who is defying the Constitution and who is defying the directives of the Election Commission.

Sir, we have been given this opportunity today in the form of this Adjournment Motion to discuss it. But the matter of concern is that in Gujarat, before the election, a continuous systematic attack is being made by the BJP, by the other frontal organisations of RSS to communalise the whole situation. Otherwise, how can it be that they are taking the replica of one train for a programme of yatra for 200 kms?

Sir, the Chief Minister has already begun what goes by the name of Gaurav Yatra. Now, they want that 6th December should be celebrated as Vijay Diwas. How can in a secular democracy such things be allowed? I charge this Government, this Prime Minister, this Deputy Prime Minister and others who are encouraging—not only tolerating—this way or that way, sometimes to confuse the people, by saying that we are different, we abide by the law and we abide by the instructions of the Election Commission and others.

But on the other hand, if we read between the lines, we find that they are encouraging these people, they are patronising these people and this philosophy of tokenism has come. It happened in the case of shiladaan. We have seen that in violation of the Supreme Court’s directives, one officer of the Government had taken the shila. How can it be in a secular democracy that one Government official was assigned such a job? Can it be done? But they are doing all these things. This country cannot allow these things to happen. This Government owes it to the Parliament and owes it to the nation. I am reiterating my question. Have you condemned it or not? If not, why? We are seeing that if the message goes strongly, the peaceful atmosphere will be maintained. The minorities are at the receiving end. If anyone from the majority community had been killed wrongly, it should also be condemned. We were the first among those parties who came out to strongly condemn the Godhra incident, but still we do not know what had happened. It is till now a mystery. Some people say that it was the conspiracy of Pakistan, cross-border terrorism, and some people say that it was engineered by the local people. Some particular parties and their representatives are accused in spite of the explanations they are repeatedly giving.

What had happened in Godhra? The forensic report and all these things are indicating something different and the Government is sitting and thinking that let it be exploited for the election purposes. This will never happen because already the BJP leadership is panicky and no one is sure whether changing their seats will help. Even the Chief Minister, in spite of Gaurav Yatra, in spite of the certificate from the Deputy Prime Minister and others that he is the ideal Chief Minister, is thinking of changing his constituency to contest election to where there are more Hindu votes. Even the Hindu people are not accepting the position because no Hindu can accept as they are distorted. The type of political Hinduism they try to promote has never been tolerated even by the best of the Hindus. So, what has happened in Gujarat and what is happening in different parts of the country is only a part of the game of this BJP Government.

I do not know why their partners are with them. There are secular partners in the Government who do not believe the communal agenda, who do not accept the communal agenda of the BJP, the RSS and the VHP, but how come they are with them? Are they with them only to have some share of power, only to have one car, one office, one Ministry? What for are they with them? This is a strange spectacle. We find that even some of the partners, who have a history of having secular heritage, secular legacy, are also unfortunately till now aligning with the BJP and its hiddenHindutva agenda, but the people will not tolerate it, people will not approve it and they will not approve it even in Gujarat.

14.00 hrs. (Shrimati Margaret Alva in the Chair) Sir, I am not going to take much of your time. It is not proper the way constitutional bodies are attacked and also the language in which the Chief Election Commissioner, taking his religious identity, and the Leader of the Opposition are attacked. It is also in bad taste that this Government, the leaders who are respected by all sections of this House, by our countrymen, are not condemning it. I fail to understand why they are not condemning it.

The Prime Minister is trying to present a moderate face by saying that he does not approve all these things, and someone else is presenting a different face. They are always speaking in two voices and trying to create confusion. At the same time, they are furthering and promoting their hidden Hindutva agenda for electoral interest and to divide the people on communal lines. The worst thing is that wherever they are there, they are trying to communalise the education system, the syllabus, and the institutions like the Indian Council of Historical Research. They are blatantly targeting the Muslims and the Christians.

In such a situation, the least that this Parliament can do is to demand that the Prime Minister should condemn the way the VHP and some of its allies are behaving, and to condemn the language that they are using against a constitutional body and also against some important leaders. They are attacking the democratic institutions and they are trying to pollute the atmosphere prior to the election. In such a situation, we think that the Election Commission has rightly taken certain steps so that people who are living outside are allowed to participate in the election. The people, particularly the minorities, who have been the targets of attack, have suffered a heavy loss in terms of property and human lives. Therefore, a proper environment should be created, and the Election Commission should be properly, rightly and adequately supported by the Union Government and the State Government. The Deputy Prime Minister is here. He owes it to the House to assure the nation that they will do everything to ensure peaceful, free and fair election and will not allow anyone, who is out to pollute the situation on communal lines.

With these words, I support the Adjournment Motion.

       

श्रीमती भावनाबेन देवराजभाई चिखलिया (जूनागढ़) :सभापति महोदया, यह बड़े दुख की बात है कि इस हाउस में लगभग चौथी या पांचवीं बार गुजरात ईश्यू पर चर्चा हो रही है। यह सदन हिन्दुस्तान की सर्वोच्च संस्था है और यहां और भी इतने महत्व के विषय ह जिन पर चर्चा करने के लिये हम लोग इस सदन में आये हैं।

यह कार्य स्थगन प्रस्ताव श्री सुबोध रॉय द्वारा लाया गया है। मैं इस प्रस्ताव का विरोध न केवल गुजरात की सदस्या के रूप में कर रही हूं बल्कि इस देश की एक जागरूक नारी के रूप में कर रही हूं। गुजरात की ५ करोड़ जनता हमेशा शान्तिप्रिय रही है। गुजरात का यही गौरव है जिसे पूरे विश्व के लोग मानते हैं। मुझे अभी हाल ही में भारत सरकार के प्रतनधि के रूप में यू.एन.ओ. जाने का मौका मिला था। मुझे यह कहते हुये खेद हो रहा है कि गुजरात प्रदेश के कांग्रेस अध्यक्ष श्री शंकर सिंह वाघेला समाचार-पत्रों में बड़े-बड़े शीर्षक में कहते हैं कि बी.जे.पी. सरकार गुजरात में फेल हो गई है। सैकुलरिज्म को लेकर श्री वाघेला ने विश्व में गुजरात की बड़ी बदनामी की है। वहां के लोगों ने बताया कि अध्यक्ष के रूप में एक संयम की भाषा होनी चाहिये, गुजराती के रूप में सौहार्दपूर्णर् रवैया होना चाहिये लेकिन वह नहीं किया।

मैं कहना चाहती हूं कि गौरव यात्रा का विरोध करने वाले वहां डालर यात्रा को समर्थन दे रहे हैं। शंकर सिंह जी को वहां किसने बुलाया था और वहां श्री मुशर्रफ जी की मीटिंग में जाने वाले लोग शंकर सिंह जी की मीटिंग में हाजिर थे। ये लोग क्या कहना चाहते हैं, क्या करना चाहते हैं। ये गुजरात को किस दिशा में ले जाना चाहते हैं। मुझे बड़े अफसोस के साथ कहना पड़ता है कि गुजरात को पूरे विश्व में बदनाम करने के लिए कांग्रेस के लोग साजिश कर रहे हैं। इसके कारण गुजरात की पांच करोड़ जनता के ह्ृदय में बहुत दुख है। हमेशा से गुजरात को बदनाम करने की निरंतर साजिश हो रही है, निरंतर षडयंत्र हो रहे हैं। गुजरात महात्मा गांधी जी का गुजरात है, लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल का गुजरात है। गुजराती में एक कहावत है - जहां-जहां एक गुजराती, सदाकाल गुजरात।

आपको पता होगा न्यूजर्सी में अल्बर्ट नाम का एक बहुत बड़ा बिजनेसमैन है। उसने हाल ही में सरदार वल्ल्भभाई पटेल की विश्व की सबसे बड़ी प्रतिमा की वहां स्थापना की है। मुझे वहां जाने का सौभाग्य मिला और मैं वहां अपने श्रद्धासुमन अर्पित करके आई हूं। देश को गौरव बढ़ाने में गुजरात ने सदैव एक दिशा दी है और इस देश के महापुरुषों का जन्मस्थान गुजरात है। लेकिन इस सदन में हमेशा गुजरात को बदनाम करने की साजिश हो रही है। मुझे लगता है कि यह गुजरात की पांच करोड़ जनता के साथ अन्याय हो रहा है।

सभापति महोदया, अभी रमजान का पवित्र महीना चल रहा है। वहां हर सुबह-शाम को एक साथ नमाज पढ़ी जा रही है, लेकिन वहां कहीं कोई दंगा नहीं हो रहा है, कहीं कुछ नहीं हो रहा है। गुजरात शांतिपूर्ण है। लोग वहां शांति चाहते हैं और हमेशा वहां लोगों ने शांति को महत्व दिया है।

अभी जब वैस्ट इंडीज के साथ भारत के क्रिकेट मैच की बात हो रही थी तो ये लोग हंगामा कर रहे थे। वैस्ट इंडीज के क्रिकेटरों से कहा गया कि आप गुजरात में कैसे जायेंगे, वहां दंगा हो रहा है, वहां अशांति है। आप लोग वहां जायेंगे तो परेशान हो जायेंगे। इस क्रिकेट मैच को रोकने के लिए वहां साजिश हो रही थी। लेकिन आपको पता है कि इसी मैच में भारत ने एक महत्वपूर्ण विजय हासिल की है।…( व्यवधान)

SHRI PRAVIN RASHTRAPAL : Madam, I am on a point of information. Shri Narahari Amin is a congress man and he is the President of the Gujarat Cricket Association.

श्रीमती भावनाबेन देवराजभाई चिखलिया: वैस्ट इंडीज के साथ खेले गये इस मैच में भारत ने शानदार विजय हासिल की और इस मैच में गुजरात की शांतप्रिय जनता इतनी बड़ी संख्या में वहां के मोटेरा स्टेडियम में हाजिर रही। इससे यह साबित होता है कि गुजरात शांतप्रिय है और गुजरात में शांति है। इस क्रिकेट मैच के दौरान वहां पूरे दिन ऐसा कोई हादसा नहीं हुआ कि जिसके कारण कोई कह सके कि गुजरात में अशांति है, गुजरात में कोई दंगा है।

सभापति महोदया, यह बहुत दुख की बात है कि गोधरा कांड हुआ, जिसमें निर्दोष लोगों की हत्याएं हुई। महिलाएं, बच्चे, युवा तथा बुजुर्ग लोग उसमें जिंदा जलाये गये। जिसके कारण स्वाभाविक रूप से उसकी प्रतक्रियास्वरूप जो दंगा हुआ, वह गलत था, वह हम मान रहे हैं। लेकिन आपको पता होगा विश्व प्रसिद्ध अक्षरधाम मंदिर में दर्शनार्थियों को जब दो टैरेरिस्ट्स ने मारा तो उसके बाद गुजरात में कुछ भी नहीं हुआ। यह साबित करता है कि गुजरात की जनता शांतप्रिय है। यदि कोई कहता है कि नरेन्द्र मोदी ने गौरव यात्रा क्यों निकाली और कोई गौरव यात्रा का विरोध करता है तो हम उससे कहना चाहते हैं कि भाजपा ने जो काम किये थे, उन्हें गली-गली में ले जाने की हमारी बात थी और हम लोगों ने २२५ तहसीलों में गौरव यात्रा निकाली, जहां कोई दंगा नहीं हुआ, बल्कि शांतिपूर्ण ढंग से लोगों ने गौरव यात्रा का स्वागत किया।

आपको पता होगा कि जो गौरव यात्रा सात बजे आने वाली थी वह रात को एक बजे पहुँची। उस गांव में रात को एक बजे भी लोग उसके स्वागत के लिए खड़े थे। यह क्या साबित करता है? यह साबित करता है कि गुजरात में भारतीय जनता पार्टी का शासन है और वह शांतिपूर्ण ढंग से लोगों को सुरक्षा प्रदान कर रहा है। विपक्ष इसे सरकार की विफलता मानता है। अभी हमारे राष्ट्रपाल जी कह रहे थे कि मैं भी भुक्तभोगी हूँ क्योंकि गोधरा कांड के बाद जो दंगे हुए उसमें मेरे भतीजे की भी मृत्यु हो गई। मैं राष्ट्रपाल जी से पूछना चाहती हूँ कि जिसने आपके भतीजे को मारा, वे कौन थे?

श्री प्रवीण राष्ट्रपाल : पुलिस को पूछिये।

श्रीमती भावनाबेन देवराजभाई चिखलिया: जब एक बहुत बड़ा मानव समूह निकलता है तो पता नहीं चलता है कि वह हिन्दू है या मुसलमान है, लेकिन आपको पता होना चाहिए कि वह जो मानव समूह था वह कौन था। मैं आपसे पूछना चाहती हूँ मगर आप नहीं कहेंगे क्योंकि वह जो मानव समूह निकला था, वे हिन्दू नहीं थे।

श्री प्रवीण राष्ट्रपाल : एक को मारने वाला मुसलमान था तो जो ८०० को मारा, वे कौन थे?…( व्यवधान)

श्रीमती भावनाबेन देवराजभाई चिखलिया: अभी वे लोग अरैस्ट हुए हैं जो कांग्रेस के कार्यकर्ता हैं। उन्हीं लोगों ने गोधरा कांड में हत्याएं की हैं। यह साबित हुआ है और मैं यह कहना चाहूँगी कि इस गोधरा कांड के बाद जगन्नाथ यात्रा निकली जो हमारे यहां बहुत सौहार्दपूर्ण तरीके से निकलती है। उस समय भी यही हुआ था कि जगन्नाथ यात्रा नहीं निकलनी चाहिए। लेकिन आपको पता होगा कि आषाढ़ दूज के दिन वह यात्रा निकलती है और वह एक जगह नहीं, ७८ जगह निकली और कोई भी दंगा नहीं हुआ और शांतिपूर्ण ढंग से यात्रा निकली। उसी तरीके से जो गणेश उत्सव हुआ, उसमें भी सार्वजनिक उत्सव एक लाख जगहों पर मनाया गया। गुजरात में कभी कुछ नहीं हुआ। आपको पता है कि उसी समय के बाद जब हज यात्री निकले, ७००० हाजी जो यात्रा करके आए थे, उनका सम्मान १००० गांवों में हुआ। कहीं कोई दंगा नहीं हुआ। सिर्फ राजनीति करने और भारतीय जनता पार्टी का शासन गुजरात में जब अच्छी तरह से चल रहा है तो उसको बदनाम करने की कांग्रेस के लोगों ने ठान रखी है कि हम लोग गुजरात में फिर से भारतीय जनता पार्टी का शासन नहीं आने देंगे और इसी आधार पर ये लोग साजिश कर रहे हैं।

मैं कहना चाहती हूँ कि गुजरात की प्रजा १२ दिसंबर की राह देख रही है और १५ दिसंबर को जब रिज़ल्ट निकलेंगे तो पता चलेगा कि गुजरात में भारतीय जनता पार्टी संपूर्ण बहुमत के साथ आएगी और शासन करेगी। गुजरात की प्रजा कभी भी अशांति को नहीं मानती। ऋग्वेद का अंतिम श्लोक है :

" समान् मंत्र: समति समानी, समान् आकूति सह चित्तमेषाम्।"
 
 "One mind, one imploration and one community." हम मानकर चलते हैं और पूरे हिन्दुस्तान के लोग मानकर चलते हैं कि हम लोग एक कम्यूनिटी के हैं, हम लोग भारतीय हैं, हम हिन्दुस्तानी हैं और हिन्दुस्तानी होने के नाते हमें गौरव करना है हम हिन्दू हैं और मुझे इसका गौरव है तो क्या गलत बात है?
हमें हिन्दू होने का गौरव है तो इसमें क्या गलत बात है ? मैं कहना चाहती हूं कि गौरव यात्रा में हमारा गौरव है। इस देश के ५५ साल के शासन में ४७ साल तक कांग्रेस ने शासन किया। मेरा कहना है कि इतना काम उस शासन में नहीं हुआ जितना हमने इन पांच सालों में गुजरात में करके दिखाया है। इसलिए मैं कहना चाहती हूं कि गुजरात को बदनाम करने, गुजरात की पांच करोड़ जनता को गोडसे कहना कांग्रेस की साजिश है। मैं दावे के साथ कहती हूं कि जब भी इस देश में आतंकवादियों ने हमला किया है, जहां तक मुझे याद है कि पहला जो हादसा हुआ, वह श्री मुफ्ती मोहम्मद सईद जो अभी कश्मीर के मुख्यमंत्री बने हैं, उनकी बेटी रूबिया को आतंकवादियों ने किडनैप किया था। उसको छुडाने के लिए सबसे पहले पांच आतंकवादियों को छोड़ा गया था। वे कांग्रेस के नहीं थे तो और कौन थे? उन्होंने अपनी बेटी को छुड़ाने के लिए पांच आतंकवादियों को छोड़ दिया। हमको भी दुख है कि जब नेपाल में हमारा विमान हाईजैक किया गया तो हमारे ऊपर विश्व भर से एक प्रैशर था, मानवाधिकार आयोग का प्रैशर था जिसके कारण आतंकवादियों के छोड़ना पड़ा।…( व्यवधान)
SHRI PRAVIN RASHTRAPAL : They have been released on parole.
श्रीमती भावनाबेन देवराजभाई चिखलिया: आप जब बोल रहे थे तब मैंने आपको बीच में कभी नहीं टोका था। अब आप क्यों बोल रहे हैं ? …( व्यवधान)उस समय नौ आतंकवादियों को छोड़ दिया गया जिसके कारण आतंकवादियों ने फिर से हमारे देश में आतंकवाद को पनाह दी। हमारे यहां जब कांग्रेस का शासन था और श्री नरसिंह राव जी प्रधानमंत्री थे तब उनको सोने की थाली में खाना परोसकर दिया गया। ३५ दिन तक उनको रखा गया और सेफ रास्ते से बाहर निकाला गया। हमको इस देश का क्या करना है ? कांग्रेस ने हमेशा इस साजिश को बढ़ावा दिया है तथा इस देश में आतंकवाद को कभी भी रोकने की चिन्ता नहीं की।
आज क्रॉस बार्डर टैरोरिज्म इतना बढ़ गया है कि जिसके कारण आज गुजरात भी कश्मीर की तरफ जा रहा है, ऐसा हमें अनुभव हो रहा है। हमको जब चुनाव आयोग ने कहा कि गुजरात में अच्छी परिस्थिति नहीं है इसलिए हम वहां इलैक्शन बाद में करायेंगे तो मेरा कहना है कि कश्मीर में इलैक्शन हो सकता है लेकिन गुजरात में नहीं हो सकता। हम इसे क्या मानकर चलते हैं ? गुजरात के बारे जब भी इस हाउस में चर्चा हुई है, हमारे विपक्षी भाइयों ने जो भी बातें कहीं हैं, वे गलत कहीं हैं। उसके कारण हम गुजराती लोगों को बहुत ही दुख होता है कि सच्ची बात कहने के लिए कोई तैयार नहीं है। आप सच्ची बात तो कहिये जिसके कारण गुजराती होने का आप लोगों को भी गौरव हो। इस हाउस में कांग्रेस के गुजराती एम.पीज. ने कभी भी गुजरात के लोगों को गौरव देने की कोशिश नहीं की। हमेशा अपनी पार्टी पोलटिक्स करते रहे। लगता है कि राष्ट्रपाल जी को चिन्ता थी कि शायद उनको कांग्रेस से टिकट नहीं मिलेगी। आप यह चिन्ता मत कीजिए। आपको गुजरात की प्रजा को जवाब देना होगा। …( व्यवधान)
श्री प्रवीण राष्ट्रपाल : लोक सभा का चुनाव नहीं आया है।
श्रीमती भावनाबेन देवराजभाई चिखलिया: गुजरात में जो भी इलैक्शन है, वह हमारा इलैक्शन है। …( व्यवधान)इसका मतलब यह है कि आप स्वार्थी राजनीति कर रहे हैं। गुजरात में जो गौरव यात्रा निकली, वह शांति पूर्ण ढंग से निकली। गुजरात में जो जगन्नाथ यात्रा निकली, वह भी शांतिपूर्ण ढंग से निकली। अभी रमजान का महीना चल रहा है, वह भी शांति पूर्ण ढंग से चल रहा है। मेरा कहना है कि गुजरात को इस तरह से चर्चा में लाकर फिर से उसको डिस्टर्ब करने का क्या मतलब है ? मैं गुजराती होने के नाते, गुजरात की संसद सदस्या होने के नाते यह जरूर कहना चाहूंगी कि इस तरह से गुजरात के किसी भी विषय पर चर्चा नहीं होनी चाहिए ताकि गुजराती ऐसा फील न करें कि संसद में सिर्फ गुजरात इश्यू के अलावा और कोई काम नहीं है।
इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करती हूं। मैं इस एडजर्नमैंट मोशन का पुरजोर विरोध करके अपनी गुजरात की जनता को न्याय देने की कोशिश कर रही हूं।
                           
श्री रामजीलाल सुमन (फिरोजाबाद): सभापति महोदया, इस सम्मानित सदन में एक बार नहीं, अनेक बार गुजरात के संबंध में चर्चा हुई है। अगर सरकार का रवैया ठीक हो, जो साम्प्रदायिक तत्व हैं, सरकार उनसे सख्ती के साथ निपटे तो मैं नहीं समझता कि बार-बार इस सवाल पर सदन में चर्चा कराए जाने की आवश्यकता है। लेकिन बार-बार चर्चा होने के बावजूद साम्प्रदायिक ताकतों को हवा देने का काम, गुजरात में दहशत पैदा करने का काम, लगातार सरकारी साइड से किया जा रहा है। साम्प्रदायिक शक्तियों को खुली छूट है और सबसे गंभीर सवाल यह है कि कुछ ताकतें ऐसा समझने लगी हैं कि उनकी हैसियत संविधान, कानून और अदालत से भी ज्यादा है। यही एक बड़ा सवाल है।
चुनाव आयोग ने धर्म यात्रा पर पाबंदी लगाने का आदेश दिया। उस संवैधानिक संस्था के बारे में क्या-क्या नहीं कहा गया। भारतीय जनता पार्टी ने उसका विरोध किया। ये लोग ऐसे हैं जिनकी कानून में कोई आस्था नहीं है। बहुत अफसोस तब होता है, जब कभी भी इस पक्ष के लोग गुजरात पर चर्चा करते हैं तो उनका रोना एक ही होता है कि गोधरा की घटना को कन्डैम नहीं किया, उसकी निन्दा नहीं की। मैं नहीं समझता कि इससे ज्यादा असत्य बात कोई दूसरी हो सकती है। इस देश में चाहे हिन्दू हो, चाहे मुसलमान हो, चाहे दलित हो, चाहे ईसाई हो, कोई भी बेगुनाह मारा जाता है तो उसके लिए बराबर की तकलीफ होती है।
बड़ा जिक्र होता है गौरव यात्रा का। एक बार गौरव यात्रा स्थगित हो गई थी। माननीय उपप्रधान मंत्री जी उसको हरी झंडी दिखाने वाले थे। किस बात का गौरव - गुजरात में अल्पसंख्यकों का कत्लेआम - इस बात का गौरव, दहशत पैदा की - इस बात का गौरव, कानून में विश्वास नहीं किया - इस बात का गौरव। किस बात का गौरव? मैं आपके माध्यम से बड़ी विनम्रता के साथ कहना चाहूंगा कि यह सरकार और उसके सहयोगी लोग जानते हैं कि भूख, प्यास, बेबसी, लाचारी, जो आम जनता की जिंदगी से जुड़े हुए सवाल हैं, वे सब सवाल इस सरकार के काबू से बाहर के सवाल हैं। अब इस देश में धार्मिक भावनाओं को भड़का कर ही जिन्दा रहा जा सकता है, ऐसा मन इन लोगों ने बना लिया। प्रधान मंत्री जी और आडवाणी जी जब बाहर जाते हैं तो कहते हैं कि गुजरात में जो कुछ हुआ, वह शर्मनाक है और यही उपप्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी को शाबाशी देते हैं। आप लोग गुजरात में चुनाव की बात कर रहे हैं। आडवाणी जी, मैं आपको बड़ी विनम्रता के साथ कहना चाहूंगा, गुजरात में किसकी सरकार है, महाराष्ट्र में किसकी सरकार है, दिल्ली में किसकी सरकार है, यह महत्वपूर्ण सवाल नहीं है, उससे ज्यादा महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या इस देश में एकता कायम रह पाएगी या नहीं। ऐसा लगने लगा है कि जो तांडव नृत्य साम्प्रदायिक शक्तियां कर रही हैं, उनसे इस देश की एकता को खतरा है। समाजवादी के लोग आन्दोलन हिन्दुस्तान के बंटवारे के खिलाफ थे। मैं बड़ी विनम्रता के साथ कहना चाहता हूं कि आप जब गौरव यात्रा निकालते हैं, दहशत पैदा करने का काम करते हैं, मुझे माफ करें, दुनिया में ऐसी कोई तोप और तलवार नहीं बनी जो हिन्दुस्तान की एकता को तोड़ दे। जब आप लोगों की नीयत पर बार-बार शक करेंगे, उनको दूसरे दर्जे का नागरिक बताएंगे, उनको यह कहेंगे कि देश में रहना है तो हमारे रहमो-कर्म पर रह सकते हैं, अगर आप नीयत पर शक करना बंद नहीं करेंगे तो माफ करना, दुनिया की कोई ताकत इस देश में एकता कायम नहीं रख सकती और इसके लिए आप जिम्मेदार होगें ।
यह काम आज हमारे देश में हो रहा है। मैं पूछना चाहता हूं कि इन ताकतों पर आप पाबन्दी क्यों नहीं लगाते?आपने पोटा किसलिए बनाया था?यह प्रवीण तोगड़िया कौन है, यह क्या ह? बार-बार एक आदमी पूरे देश में घूमकर पूरे वातावरण को विषाक्त बना रहा है। आडवाणी जी, इस तोगड़िया के खिलाफ पोटा इस्तेमाल करिये। जो देश को तोड़ने वाले लोग हैं, उनके खिलाफ अगर आप पोटा इस्तेमाल नहीं करेंगे तो किसलिए यह कानून बनाया गया था? इन साम्प्रदायिक शक्तियों पर आप पाबन्दी लगाइये, बंदिश लगाइये और पोटा का इस्तेमाल करिये।
जैसा मैंने आपसे बड़ी विनम्रता से कहा कि गुजरात की धर्मयात्रा को रोकने के साथ-साथ इनकी जो बात होती है, ये अयोध्या के सवाल पर क्या कहते हैं, अयोध्या के सवाल पर ये कहते हैं कि भावनाओं के सामने, आस्था के सामने हम अदालत के फैसले को नहीं मानेंगे। इनके सामने अदालत के फैसले का कोई अर्थ नहीं है। इनके सामने कोर्ट-कचहरी, अदालत, संविधान, कानून से अधिक हैसियत आर.एस.एस., विश्व हिन्दू परिषद और शिव सेना की हो गई। जो आज पूरे देश में हो रहा है, चन्द्रकान्त खैरे जी कहां चले गये, अयोध्या के सवाल पर, गुजरात के सवाल पर इनके लीडर बाल ठाकरे क्या कहते हैं, हिन्दुओं को आत्मघाती दस्ते बनाने चाहिए। दुनिया के इतिहास में कहीं सुना है कि जो बहुमत के लोग हैं, वे आत्मघाती दस्ते बनाने की बात कर रहे हैं। आप लोग क्या कहना चाहते हैं? हर द्ृष्टि से हिन्दुस्तान की अक्लियत में दहशत पैदा करने का काम, उन्हें डराने का काम, उन्हें दूसरे दर्जे का नागरिक बताने का काम, ये सारे काम हमारे देश में आज हो रहे हैं। इसलिए मैं यह कहना चाहता हूं कि चुनाव एक अलग सवाल है। आज सबसे पहला सवाल देश की एकता का है।
हिन्दुस्तान की आजादी की लड़ाई में तिरंगे झंडे के नीचे यह कौम बनी थी, जिसमें हिन्दू, मुस्लिम, सिख और ईसाई, सब लोगों ने इस देश की आजादी के लिए अपना लहू बहाया था। यह किसी की बपौती नहीं है, यह किसी की ठेकेदारी नहीं है। शिव सेना की वजह से हम आजाद नहीं हुए, विश्व हिन्दू परिषद की वजह से हम आजाद नहीं हुए, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की वजह से हम आजाद नहीं हुए। हिन्दुस्तान के हर वर्ग, हर जाति और हर धर्म के लोगों ने महात्मा गांधी के नेतृत्व में तिरंगे झंडे के नीचे अपना बलिदान किया। आप जो ठेकेदार बनते हैं, इस देश की सरजमीं पर सब लोगों का बराबर का अधिकार है और आप अक्लियत के लोगों को यह संदेश देना चाहते हैं कि आप दूसरे दर्जे के नागरिक हैं, यह सबसे अहम और बुनियादी सवाल है।
यह सरकार जानबूझकर उन तत्वों को हवा देने का काम कर रही है। कभी कोई भी बात होती है तो प्रधान मंत्री जी आर.एस.एस. के प्रमुख को बुलाकर उनसे पंचायत करते हैं। इन तत्वों के खिलाफ कभी सख्ती से कार्रवाई करने की बात इन लोगों ने नहीं कही। आज जो गुजरात में हो रहा है, वह नरेन्द्र मोदी करा रहे हैं, मैं ऐसा नहीं मानता। नरेन्द्र मोदी वही कर रहे हैं, जो आडवाणी जी और वाजपेयी जी गुजरात में करा रहे हैं।
सभापति महोदया, यह जो कार्य स्थगन प्रस्ताव आया है, उसका मैं समर्थन करता हूं और चाहता हूं कि पूरे हिन्दुस्तान में ये लोग, जो अपने को संविधान से और कानून से ज्यादा हैसियत रखने वाले बताते हैं, इन तत्वों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई हो, ये पोटा के तहत बन्द हों और साम्प्रदायिक संगठनों पर बैन लगाया जाये। मुझे यही निवेदन करना था।
DR. B.B. RAMAIAH (ELURU): Madam Chairman, we are now discussing the Gujarat incident. Gujarat is a State for which we all have sympathy. The people of Gujarat require a lot of support from all parts of the country. I happen to visit Gujarat after the earthquake and I know how much they have suffered. It is very unfortunate that they have faced such a severe problem. Consequently, we are trying to see how we could be able to establish and help the people of the State and normalise the situation.
Later on, the Godhra incident has created another big problem. Now, again we are trying to see how they should be established with the proper support from all directions. I think some external forces are also responsible for the incident that has happened in Gujarat. We could see what happened in Akshardham Temple and how the terrorists attacked there. The President of India, Shri A.P.J. Abdul Kalam also visited Gujarat for showing sympathy for the people of the State. Whatever may be the circumstances, now the Election Commission have decided that they should have peaceful elections. All the three members of the Election Commission visited that place.
They had also reviewed the whole position and finally decided that now it is not the right time to conduct the Yatra. This is what has happened also. For this, I really congratulate the hon. Prime Minister and the Deputy Prime Minister. They have taken a correct decision to see that the constitutional requirements of the country are fulfilled. They showed that it is more important for them than anything else. They insisted that we should follow and oblige the Election Commission’s orders. That is the reason why they were able to stand very firm. They ensured that necessary action is taken against so many people who have violated the orders by conducting the Yatra. This is how today the Government of India and the State Government have made a correct decision to see that the constitutional requirements are followed and obliged.
I feel, seeing the way they are able to act in the last couple of days by taking the right steps, we need not have to create any more controversy in that State when things are going smoothly in the right direction. What we need is that a peaceful and very systematic election is conducted which gives an opportunity to everyone to vote his or her own way. That is why I feel this decision of the hon. Prime Minister is the correct decision and I congratulate and thank him on that.
   
श्री प्रियरंजन दासमुंशी (रायगंज) : आदरणीय सभापति महोदया, आज सुबह स्पीकर साहब ने इस कार्य स्थगन प्रस्ताव को चर्चा के लिए स्वीकृत किया, मैं इस पर कांग्रेस पार्टी की ओर से भाग लेने के लिए खड़ा हुआ हूं। इसमें कोई दो राय नहीं हैं कि गुजरात की स्थिति के लिए जितनी भी पार्टियां हैं, सभी जिम्मेदार हैं। गुजरात में शांति बरकरार रखने के लिए, चुनाव में माहौल ठीक रहे और चुनाव जनता के सहयोग से हों, इसमें सभी पार्टियों का योगदान जरूरी है। चुनाव को मद्देनजर रखते हुए गैरजिम्मेदारी की बातें करके वोटों के बक्सों पर नजर रखकर हम एक-दो चुनाव तो जीत सकते हैं, लेकिन देश के सामने जो स्थिति आ रही है, शायद उसको हम बचा नहीं पाएंगे। इसलिए मैं जो कुछ कहूंगा, कांग्रेस पार्टी के राजनीतिक द्ृष्टिकोण से कहूंगा, एक सांसद की हैसियत से कहूंगा और सदन की गरिमा को बरकरार रखते हुए कहूंगा।
गुजरात का गौरव सिर्फ गुजरात का ही नहीं है, पूरे भारत का है। यही गुजरात हमारे पौराणिक इतिहास महाभारत पर खोज करें तो भगवान श्रीकृष्ण की द्वारका नगरी की कहानी भी इसके साथ जुड़ी हुई है। यही वह गुजरात है, जहां सोमनाथ मंदिर है, जो हिन्दू सभ्यता का ही नहीं, भारत की प्राचीन सभ्यता का भी परिचायक है। हमारे भूतपूर्व राष्ट्रपति महामहिम राजेन्द्र बाबू जी ने उसका पुनर्निर्माण कराया था। उस समय न कोई लड़ाई हुई और न कोई विवाद हुआ। इसी गुजरात में पोबंदर नामक स्थान ने बापू जी को जन्म दिया। उन्हीं बापू जी ने पूरे हिन्दुस्तान को ही नहीं, दक्षिण अफ्रीका को भी मुक्ति की दीक्षा दी। बापू जी किसी पार्टी के नहीं थे। हम नहीं चाहते कि महात्मा गांधी कांग्रेस की पूंजी बने, वे तो पूरी दुनिया की पूंजी हैं। जहां भी शांति का नाम लिया जाता है, वहां बापू जी का भी नाम लिया जाता है। यह सबसे बड़े गौरव की बात है। पोरबंदर सिर्फ गुजरात की ही मां नहीं, भारत की मां है।
मैं थोड़ा गुजरातियों से छीनकर हिन्दुस्तानी होने के नाते बहन चिखलिया जी से कहना चाहता हूं कि यह गौरव पूरे भारतवासियों के लिए है। सरदार वल्लभ भाई पटेल, भोला भाई देसाई, महादेव देसाई जी से लेकर आधुनिक भारत के वैज्ञानिक विक्रम साराभाई और हमारे सबसे गरिमामई स्पीकर मावलंकर जी, जिनको हम सब संसदीय परम्परा के लिए याद करते हैं, सभी गुजरात के गौरव हैं।
इस गौरव से पूरी दुनिया पर विजय प्राप्त करिए। भगवान श्रीकृष्ण की कहानी केवल गुजरात की कहानी नहीं है। पूरी दुनिया में जब हम लोग जाते हैं, भगवान कृष्ण को अंग्रेज लोग भी गीता पाठन के द्वारा याद करते हैं इसीलिए भारतीय होने के नाते मुझे गौरव होता है। श्रीकृष्ण की कहानी गुजरात के द्वारिका में छिपी हुई है। इसीलिए गुजरात का गौरव किस ढंग से होना चाहिए, यह एक प्रकार है और राजनीतिक फायदा उठाने के लिए अगर कोई यात्रा करे तो वह दूसरा प्रकार है। हमें सोचना चाहिए कि गुजरात के गौरव में कौन लोग भागीदार थे और वे कहां गए? आडवाणी जी ने ठीक कहा कि सरदार पटेल के साथ मेरा नाम जोड़कर आप सरदार पटेल को नीचा कर रहे हैं और हमें भी नीचा कर रहे हैं। ऐसा मत करिए। मैं इसलिए उनका आदर करता हूं। हमारे देश को आज क्या हो गया है? कभी मेघा पाटेकर नहीं कहती कि मेरी तुलना कस्तूरबा से करो। कभी सम्पूर्ण बहुगुणा जी भी नहीं कहते हैं कि मेरी तुलना गांधी जी से करो। कभी विनोबा जी ने नहीं कहा कि मैं महात्मा गांधी के समतुल्य हूं। लेकिन राजनीति को इतना नीचे पहुंचा दिया गया है। इस देश की गरिमा को इस तरह से मलीन करना शोभा नहीं देता।
अटल जी सदन के नेता हैं। राजनीति में लड़ाई होती है। मैं लड़ाई लडूंगा। लेकिन अटल जी सदन के नेता हैं। अगर वह देश के बारे में कुछ कहते हैं तो उस पर कुछ टिप्पणी करने के लिए मैं सदन में तैयार हूं लेकिन उसको धुलीमलिन करने के लिए कोई कुछ कह दें तो क्या यह देश की राजनीति के गौरव को, हमारी संसदीय परम्परा के गौरव को बढ़ाएगा?एक भी आप ऐसा उदाहरण दे दीजिए कि विपक्ष की तरफ से चाहे सोनिया जी हो, चाहे हम लोग कोई सांसद हो, आज तक कभी ऐसी बात कही कि जब सरकार की तरफ से कोई कदम उठा हो और वह चाहे आतंकवाद को रोकने के लिए हो, चाहे दंगा रोकने के लिए हो और चाहे किसी मामले पर नियंत्रण करने के लिए हो, हम लोगों ने आडवाणी जी का नाम लेकर या अटल जी का नाम लेकर, उनके बयान के लिए उन पर इस ढंग से अटैक किया हो ताकि परम्परा या मर्यादा टूट जाए? अगर इस सरकार के ऊपर कोई चोट आज आई है तो इसके लिए आडवाणी जी खुद जिम्मेदार हैं। आज माधवराज सिंधिया जी स्वर्गवासी हो गए। मुझे मालूम हुआ कि जब सचेतक होने के नाते मैंने अयोध्या में मस्जिद गिरने पर हुई चर्चा में भाग लेने के लिए मोशन मूव किया था और सोचा था कि मैं किस-किस का नाम लूं, चार्ज शीट में है तो उन्होंने हमें बुलाकर, दुखी होकर कहा कि इसमें हमें भाग लेने के लिए मत बोलो। मैं डिप्टी लीडर हूं। मैं राजनीति की प्रतिष्ठा के साथ संकल्पबद्ध हूं, मैं कांग्रेस के साथ संकल्पबद्ध हूं। मैंने पूरा चार्ट पढ़ा है और पढ़कर देखा कि उसमें मेरी पूज्य माताजी, जिन्होंने मुझे जन्म दिया, उनका भी नाम है, तो मुझे इन परेशानियों से बचाओ। मैंने कहा कि आपको भाग नहीं लेना होगा। मैं बड़े आदर के साथ कहना चाहता हूं कि आडवाणी जी सोमनाथ से जो यात्रा निकली और चाहे जिस भावना से निकली, वह दूसरी बात है। जो सोमनाथ से यात्रा निकालकर अयोध्या तक पहुंचने का इरादा बीजेपी के अध्यक्ष होने के नाते बनाया गया, वह आपका राजनीतिक कंविक्शन था और उसके परिणामस्वरूप जो हो रहा था, इसलिए आपको खुद अटल जी को कहना चाहिए था कि मुझे और कोई सरकार की जिम्मेदारी दीजिए, मैं संभाल लूंगा लेकिन इसकी जिम्मेदारी मत दीजिए जिससे मैं इन लोगों पर कंट्रोल करूं क्योंकि मैंने यही भावना जागृत करने के लिए इन लोगों को सिखाया। This is called temperament. This is called the factual understanding of the situation. You could not do it. Perhaps, it could have been done by somebody else. कांस्टीटयूशन असेम्बली में अम्बेडकर जी का नाम लेकर पंडित जी महात्मा गांधी जी के पास पहुंचे और उनसे कहा कि अम्बेडकर जी का नाम लेकर बहुत सवालात किये गए, क्या इस पर आप सहमत हैं तो उन्होंने कहा कि सवालात कुछ भी करें, अगर पिछड़े, गरीब लोगों के लिए कोई सोच सकता है तो अम्बेडकर जी सोचते हैं और उनका काम सम्पन्न हो।This is called the standard, this is called the quality. You could have been the best Defence Minister of India. I have no doubt about it. You could have been the best Finance Minister of India. But Shri Advani, to tackle the Ministry of Home Affairs in such a complex situation, and that too where religious fundamentalism both from the Muslim front and the Hindu front is raising head, is difficult. The chair you are occupying is possibly giving you a bad dream in the night.
हम अनुशासन की कार्रवाई करते हैं, तो संविधान बच जाएगा और अगर हम अपने दिल की कार्यवाही करते हैं, तो हमें सोमनाथ की यात्रा याद आती है और मैं इसको रोक नहीं पाऊंगा।You are in double mind. Therefore, sincerely I felt – I am not accusing you – that emotionally and politically, possibly, the Chair that you are occupying is not suiting you to deal with the situation like this at the given hour. It does not mean that you are not competent. I have the highest respect for you. मैं यह बात इसलिए कह रहा हूं, क्योंकि गुजरात में घटना गोधरा से शुरु हुई। उस घटना को देखकर अटल जी ने कहा कि यह देश के लिए कलंक है। आडवाणी जी ने कहा कि जो कुछ हो रहा है, इसमें पाकिस्तान की मदद मिल रही है। आपने सही कहा है। The Prime Minister’s comment and your comment shall be quoted by all Parliamentarians in the years to come in Parliament. It is because you have said right thing at the right moment. You felt that we are facing cross border terrorism. You felt, sincerely felt, that Pakistan is conspiring against us. At this juncture, if things continue like this the international opinion would be built against India which is known for its secular credentials, constitutional commitment and the legacy of Mahatma Gandhi, which you accept at least now. You said so. हम लोगों ने क्या कहा कि इस कलंक के लिए जिम्मेदार कौन हैं? हम यह नहीं कहेंगे कि इसके लिए जिम्मेदार अकेले श्री नरेन्द्र मोदी, गुजरात के चीफ मनिस्टर हैं। मैं यह कहूंगा, उस दिन गोधरा की ट्रेन में जो आग लगाई, उससे कलंक जब शुरु हुआ, तो उसमें पूर्ण आहूति मोदी साहब ने दी। इसलिए यात्रा में गौरव नहीं है। इसमें श्रीकृष्ण की याद नहीं आती है। सोमनाथ मंदिर में भभूति नहीं गिरती है। यह बात गांधी जी के शरण में भी नहीं जाती है। इसमें गौरव नहीं होता है, कलंक होता है। राजनीतिक द्ृष्टिकोण से भी यह गौरव यात्रा ठीक नहीं है। इसलिए अटल जी ने कहा कि यह यात्रा बन्द करो। अटल जी ने कहा कि यह कलंक की बात है और आडवाणी जी ने कहा कि पाकिस्तान से मदद मिल रही है - ये दोनों जस्टिफाई नहीं करेंगे कि यह यात्रा कैसे गौरव यात्रा है । लेकिन मुश्किल यह हो गई किif you ride on the tiger, you might have crossed one or two or three forests. But you fell from the tiger. You started riding on the tiger from Somnath Temple. Now, it is not in your control. He is beating you. But you cannot tell the truth. That is your problem. We understand that. It is not a problem created by the Opposition in Parliament against the Government. It is not a problem created by the Opposition against the Constitution. The problem of raising questions about the credential of the Prime Minister when he visits abroad, is not created by Opposition. It is created within yourself. Why is it so? You know better. I do not like to quote much.
आदरणीय महोदया, मैं आपके सामने दो-तीन खास बातें रखना चाहता हूं। गुजरात में ये कहते हैं कि दंगे नहीं हुए, लेकिन अपोजीशन कहती है कि गुजरात में दंगे हुए हैं । हम लोगों ने इस देश में राज किया, हम कैसे इन्कार करेंगे कि कांग्रेस के राज में रायट्स नहीं हुए। हम कैसे इन्कार करेंगे कि हमारे समय में दंगे नहीं हुए - दंगे हुए हैं। मुसलमानों के घर जलाए गए और हिन्दुओं के घर जलाए गए। मैं बहुत छोटा था, जब कलक्ता में मैंने खुद देखा है कि रायट्स क्या चीज होती है। उस समय नेहरु जी प्रधान मंत्री थे, उसके बाद इंदिरा जी प्रधान मंत्री थीं, फिर कुछ समय के लिए लाल बहादुर शास्त्री जी प्रधान मंत्री थे और उनके बाद राजीव गांधी जी प्रधान बनें। भागलपुर में दंगे हुए, हम क्यों नहीं कहेंगे कि दंगे हुए हैं। Fixing accountability is one thing. Adjusting to it and defending it is a different thing. माधवसिंह सोलंकी जी के पास पूरा बहुमत था। हमारी कांग्रेसी पार्टी ने पूरा विरोध किया कि माधवसिंह सोलंकी जी को नहीं हटाया जाए, लेकिन कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने निर्णय लिया कि माधवसिंह सोलंकी जी रायट्स को कन्ट्रोल नहीं कर पाए, इसलिए उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।
The same thing has happened in the case of Andhra Pradesh. Can you deny the fact? Can the Telugu Desam friends deny the fact?हमारी मेजोरिटी थी। हम चीफ मनिस्टर को बदलें - किस लिए। It is not that the Chief Minister is guilty. The essence of democracy is that you should address the people saying that the accountability and the oath taken under the Constitution by a man could not be upheld in the darkest hour and, therefore, he does not deserve to rule. This is the message that should go. The Congress Party has been providing this message right from day one in this country. चाहे डिफेंस का मसला हो, डा. कृष्णा मेनन, के.डी. मालवीय जी, ललित नारायण मिश्रा जी या हमारे चीफ मनिस्टर के त्याग-पत्र का मामला हो - This is accountability. डेमोक्रेसी में गलती हो सकती है। हमारे शासन में गलती नहीं हुई, सब कुछ ठीक हुआ, हम यह कहने के लिए खड़े नहीं हुए हैं। मैं कह रहा हूं कि एकाउंटेबिल्टी करके कुछ चीजें डेमोक्रेसी में होती हैं। सदन में उसके बारे में जिक्र करते हैं।
आज हम लोग साम्प्रदायिक भावना की बात करते हैं। यह सही है कि पाकिस्तान लगातार आईएसआई, टेरेरिस्ट और अल कायदा के द्वारा, अफगानिस्तान के खेल की तरह, हिन्दुस्तान को खेल खिलाने के लिए उनकी साजिश शुरू हुई थी। इसलिए हम लोगों को कभी कोई भ्रम नहीं होना चाहिए, चाहे गुजरात में हम जीते या हारें - हमारा संकल्प आतंकवाद के खिलाफ इतना तेज होना चाहिए, चाहे कांग्रेस, बीजेपी, सीपीएम या कोई अन्य हो। हमारी दुश्मन को पहचानने में कोई गलती न हो, इसमें कोई दो राय नहीं हैं। That is why, whenever you come forward with a Resolution to fight the terrorist menace, you never find any division in this House. It is a question of India’s unity. It is a question of India’s patriotic unity in the hour of crisis. This shall continue. It does not matter whether we win or lose the elections in Gujarat. This trend will continue because our target is to preserve India’s unity against the conspiracy hatched by Pakistan. I agree with you. But please tell me how it was fomented. I am not accusing any individual.
मुझे मालूम है कि इमर्जेंसी के समय कुछ लोग जेल में थे। आडवाणी जी, आप सब लोग मिल गए। आपने सही मायनों में सोचा कि लोकतंत्र का उद्धार करना है। आपने ठीक कहा। जनता ने हम लोगों को वोट नहीं दिया। उस समय इंदिरा गांधी जी हार गईं। उस समय एक प्रोग्राम शुरू हुआ था, उसका जिक्र सब लोग करते हैं। उस प्रोग्राम का नाम फैमिली प्लानिंग था। संजय जी ने कहा था कि पांच सूत्री कार्यक्रम में फैमिली प्लानिंग भी होना चाहिए। हो सकता है कि उस समय ४० ऑपरेशन के अंदर चार ऑपरेशन गलत हो गए हों। डाक्टर कभी गारंटी नहीं देता कि हर ऑपरेशन सफल होगा। उस समय नसबंदी का कार्यक्रम चला था। चार या पांच केस शायद गलत निकले। उस गलत केस को उठा कर क्या उस दिन आप लोग एक ही मंच पर बैठ कर जामा मस्ज़िद को, शाही इमाम द्वारा जनता को यह बताया कि मुसलमानों के धर्म के ऊपर इंदिरा गांधी ने हाथ लगाया और नसबंदी का प्रोग्राम करके मुसलमानों को बर्बाद किया, इसलिए मुसलमानों वोट मत दो। उस दिन आप लोग एक थे। उस दिन कितनी तालियां बज रही थीं। सब वामपंथी साथियों ने देखा। उस दिन देश के कुछ लोगों ने इशारा किया। अगर शाही इमाम के एक भाषण से, मुसलमान की तालियों से तख्ता पलट जाता है तो शायद सोमनाथ यात्रा के कार्यक्रम से, एक दफा हिन्दुओं की तालियों से दोबारा तख्ता पलट सकता है। This is how the fundamentalists found their root in this country. When you want to criticise a programme, you criticise it politically, economically. Please do not bring religion into it. The Congress Party never brought religion into this issue. You could have fought the Emergency saying that it was bad for the country. You could have fought it straight on the plain card saying that Shrimati Indira Gandhi detained you and the constitutional authority was suppressed. I do not mind it. But that was not the issue. I checked it up from my diary. When more number of people were waiting, the Shahi Imam was speaking. मुसलमानों, कांग्रेस को वोट मत दो। नसबंदी करके इंदिरा गांधी ने सत्यानाश कर दिया। It was about Family Planning. In how many cases, did it go wrong? I cannot give the details to the hon. Home Minister. Mr. Minister, you could get the record because you are the Home Minister. How many cases were wrong? There might be thirty or forty cases. The entire Family Planning Programme was given a colour saying as if there was a religious invasion by the Congress Party into the Muslim bastion. That was how things started. This is how things reached this stage. Now, at this hour, we are repenting. The Muslims in this country are not the monopoly of any political party. We are having 543 Members in this House, excepting the two nominated Members.
सभापति महोदय, १०-१२ केस निकाल दीजिए, इनके अलावा क्या कोई ऐसा क्षेत्र हैं जहां हिंदुओं के वोट के बिना कोई पार्लियामेंट में पहुंच सकता है। अगर कोई हिंदू धर्म का सबसे बड़ा गौरव है तो वह उसका भाईचारा और सहिष्णुता की भावना है। दुनिया को एक मानने और अपनाने की भावना के साथ हिंदू धर्म जुड़ा हुआ है और जब तक वह इस ढंग से जुड़ा रहेगा, तब तक उसका गौरव रहेगा। हिंदू के नाम पर उग्रवाद, हिंदू के नाम पर संघर्ष करने के लिए क्या कोई संत कहता है। कोई संत कहता है कि मेरा काम संघर्ष करना है। Then, why is that for the last 52 years, the majority of MPs of Lok Sabha who got elected with the support of Hindus, not by the Muslims alone, do not represent the philosophy propounded by Guru Golwalkar or do not represent the culture and legacy which is now being propagated by VHP? Why is it so? Should they not search their heart? Are we not Hindus? Am I not a Hindu? हिंदू का सबसे पहला मंत्र जिससे वे सारी दुनिया की समस्याओं का समाधान करते हैं "ओम भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि, धियो योन: प्रचोदयात् " । उसमें गुजरात, बंगाल की बात नहीं है वे दुनिया के साथ देव को प्रणाम करते हैं। अंजलि के समय उनका अंतिम मंत्र क्या है? " ओउम निर्मला, निषकलंक पूर्ण देव बुद्धि विमर्दकम"। आखिर में सारे अहंकार को नष्ट करने की बात मंत्र मे वे करते हैं।
वे कहते हैं कि " सर्वा महामिकम तता:"। क्या यह बात आचार्च धर्मेन्द्र जी कह रहे हैं या गरिराज किशोर जी कर रहे हैं। आडवाणी जी, मैंने आपके नाम एक पत्र ५ सितम्बर को लिखा था। बड़े दु:ख के साथ उस खत का जिक्र करना चाहता हूं। आपने पोटा का कानून पास किया और बताया कि पोटा आपको क्यों चाहिए। आपने ५ सितम्बर के पत्र में लिखा:
"Dear Advani Ji, I enclose herewith the Press clipping of The Indian Express dated September 3, 2002 pertaining to the speech of VHP President Shri Ashok Singhal who said in Amritsar: "Godhra happened on February 27 and the next day 50 lakh Hindus were on the streets. We were successful in our experiment of raising Hindu consciousness which will be repeated all over the country now.´Singhal also spoke glowingly of how whole villages have been emptied of Islam and how whole communities of Muslims had been despatched to Refugee Camps. This was a victory for Hindu society, he added, a first for the religion. People say, I praise Gujarat. Yes, I do."
 

 I think this very expression of Shri Ashok Singhal itself invites the application of POTA. Clause 3 (1) (a) of POTA says:

"with intent to threaten the unity, integrity, security or sovereignty of India or to strike terror in the people or any section of the people does any act…. "
 

 Clause 3 of POTA says:

"whoever conspires or attempts to commit or advocates, abets advises or incites or knowingly facilitates the commission…"
 

 In such cases, POTA should apply. The Home Minister is talking on the strength of POTA every day to fight terrorism and stop the country from division. Now, the VHP President had made this statement in public. One speech of Shri Vaiko made Selvi Jayalalitha to arrest him under POTA, but speeches of this kind are going on day in, day out. Despite that, he is not acting. Of course, I understand as to why he cannot act. I understand his position. He should bear with me. If I am wrong, he can accuse me. He cannot act against them. When he thinks of taking action, there are Shri Ashok Singhal and Shri Acharya Giriraj Kishore, but when he goes back home, he will remember his Rath Yatra in which he raised the slogan of Hindu jagran from Somnath to Ayodhya. So, how can he act now? This dilemma of to be or not to be can be accepted in Shakespeare’s Hamlet, but not in the Union Council of Ministers or the Constitution of India under which Shri Advani has taken oath as the Home Minister.

You cannot do so. That is why you not only could not act but you also could not even acknowledge my letter indicating what you are thinking in this matter. My letter is dated 5th September. This is how, Shri Advani, the Government is facing. You cannot govern. You can act but every time there is confusion on your part. When there was a Government led by Shri Morarji Desai, you had to quit on the issue of dual membership. Now the people say: "You might face another music not of dual membership but of dual leadership." I am not saying it. The media is writing like that. Do not think that criticism is from the Congress Party. I am talking of the media. If the Prime Minister can condemn, rightly or wrongly - I am not questioning that – do you not think that your accountability is more because you represent Gujarat in the Parliament from Gandhinagar? Do you not think that it is you who is the Deputy Prime Minister in charge of internal security of the country? Did you comply with your obligations? There is not a sentence. But, yes, you have said: "I am watching the developments in Jammu and Kashmir." You should continue. We are definitely with you. But you did not say a single word about the kinds of yatras. On the eve of Session of the Parliament, the Prime Minister had to intervene. Your conspicuous silence in this matter always give us this impression: "You fear that Shri Atal Bihari Vajpayee may lose his Chair tomorrow or the day after. I do not bother. But to keep my Chair and, in future, the throne of Prime Ministership, if Hindutva disowns me, I will be in difficulty." Therefore, Acharya Dharmendra has rightly said: "We have deleted the name of Shri Atal Bihari Vajpayee from our computer after having heard his statement." He did not say that he had deleted your name.

Today, these are very important issues in the country. You are to function not only in a collective manner, but your accountability as the Minister of Home Affairs is also more important than even that of the Prime Minister, Shri Atal Bihari Vajpayee, because you represent Gujarat. Therefore, I feel that as we fight collectively against terrorists, why do you not say: "I, Lal Krishna Advani, Deputy Prime Minister, who was sworn in the name of the Constitution by the President of India, say this in the Parliament. As you will fight the Islamic fundamentalist terrorists in all possible manners, with the help of the entire Opposition in the Parliament, we shall equally fight the Hindu religious fundamentalists who are trying to question the very bona fides of the Constitution and the legacy of Mahatma Gandhi and the pronouncement of the Leader of the House." Why can you not say so? Why can you not say in clear terms - "We disassociate ourselves totally from the VHP?" If any Member belongs to the NDA Government and that too BJP, he has to give a declaration that he has no relationship with the VHP?" Can you have that strength? You do not have that strength. Because you do not have that strength, here lies the doubt and the shadow. That is why this Motion for Adjournment is before the House today.

Therefore, Mr. Deputy Prime Minister, with all the emphasis at my command, I would like to say that you, on your own, do not dilute your own authority and the Chair. On the one hand, you said: "The entire Gujarat incident shall be probed by a Judicial Inquiry Committee." You are right. I thank you for that. You said that the Judicial Inquiry Committee would do it. Then, I quote what you said in your speech. It is not my speech:

गोधरा में क्या हुआ? गोधरा के बाद सरकार ने कदम उठाए या नहीं - गोधरा के संदर्भ में मैं उन सब बातों को फिर से दोहराना नहीं चाहूंगा क्योंकि अभी-अभी श्री बनातवाला और पहले कुछ सदस्यों ने फॉरेंसिक रिपोर्ट की चर्चा की। मैं उससे अलग कहूंगा। वैसे मैंने फॉरेंसिक रिपोर्ट पूरी नहीं देखी। उसके कुछ अंश देखे हैं जो कुछ अखबारों में छपे हैं। गुजरात सरकार ने हम को जानकारी दी और गुजरात सरकार का कहना है कि फॉरेंसिक रिपोर्ट जांच आयोग को दी गई है जो उस मामले में पूरी छानबीन करके जुडशियल कमीशन के नाते रिपोर्ट देने वाली है। वह ठीक था।
बाद में आपने कहा कि उनके कहने से शायद उसमें से ब्रेक-थ्रू भी हो सकता है। आपने भी एडमिट किया कि जुडशियल कमेटी की फाइडिंग्स ऐंड फॉरेंसिक रिपोर्ट से ब्रेक-थ्रू भी आ सकता है।Then again, you come back to your own mind: "I am moving in the chariot from Somnath Temple."

15.00hrs.

लेकिन में आप से पूछूंगा कि आप में से कुछ लोग गोधरा गये हैं, मैं भी गया हूं जिन्होंने कम्पार्टमेंट देखा है जिसे जलाया गया था, उसके फोरनैसिक रिपोर्ट की जरूरत है। He is the Home Minister. His emotions shall not comply with his obligations. यह हम कह सकते हैं, बी.जे.पी. के सदस्य कह सकते हैं। मैं मानने के लिये तेयार हूं कि आप नहीं कहेंगे क्योकि आप कह चुके हैं कि फोरेन्सिक रिपोर्ट ज्युडशियल कमीशन को दी गई है, उससे शायद कुछ ब्रेक थ्रू आ सकता है। हम रिपोर्ट की इंतजार में हैं, रिपोर्ट हमें फांसी देगी, जेल जायेंगे लेकिन फिर उनकी बात कह रहा हूं।

That is what Shri Advani’s working is. When Shri Advani is working as Home Minister (Internal Security) and Deputy Prime Minister, he is a strait-jacket line, dictated by North Block. When he feels that he is the architect of Somnath Rath Yatra, then he changes. These two are creating a problem of to be or not to be and therefore, the confusion arises. I think, Mr. Home Minister, the problem is from you more than the problem as such has been pronounced. Now, I just tell you. आपने यह भी कहा है Which is very shocking to me. मैंने सोचा भी नहीं था कि आप ऐसे कहेंगे कि बाहर का ठेका नहीं, इसके लिये लेबोरेट्री की फौरनैसिक रिपोर्ट की जरूरत नहीं है।He is the Home Minister and he is telling फोरैन्सिक रिपोर्ट की जरूरत नहीं है।Which is the Forensic Department? The Department created by the same institution. The Forensic Department of Gujarat, the Forensic Department of Delhi, the Forensic Department of Hyderabad are the institutional wings where the Home Ministry has its clear observation. Who are the people who are there? They are the scientists, the police officers.

On the one hand he demolishes and on the other he defends. That is how the whole trouble started. I am not saying that those who did it should get scot free. I said it earlier and I repeat जिन लोगों ने गोधरा कांड शुरु किया, उनकी न केवल निन्दा करनी चाहिये बल्कि जब तक उन्हें मौत की सजा ज्युडशियल डिपार्टमेंट नहीं सुनायेगा, तब तक हिन्दुस्तान का हर एक वह नागरिक जिसे इस देश से प्यार है, मोहब्बत है, वह चैन की नींद नहीं सो सकता है, इसमें कोई शक नहीं है।

अक्षरधाम मदिर में एन.एस.गाड्र्स ने जो काम किया, वह बधाई का नहीं बल्कि हमें इस बात का संकेत देता है कि पाकिस्तान देश में कुछ नहीं कर सकता, हमारी फौज तैयार है लेकिन आप लोगों ने हमें गाली दी। शिव सेना के लोगों ने कहा कि अक्षरधाम पर टैरेरिस्ट अटेक हुआ, पार्लियामेंट पर टैरेरिस्ट अटैक हुआ। हम हिन्दू-मुस्लिम की बात नहीं कहेंगे लेकिन आडवाणी जी चैन की नींद में रहेंगे। आज गुजरात में छोटा सा बच्चा आडवाणी जी से सवाल करेगा कि वह गांधीनगर से सदस्य हैं। जब सोमनाथ यात्रा हुई, उस समय अपने पिता के साथ था, आज भी है लेकिन आज इन्दिरा गांधी नहीं, राजीव गांधी नहीं, श्री पी.वी.नरसिंह राव नहीं है लेकिन जिस दिन से आडवाणी जी होम मनिस्टर हुये हैं, तब से अमरनाथ यात्रा, डोडा, अक्षरधाम, पार्लियामेंट पर हमला हुआ है। एक के बाद एक- कश्मीर में,जम्मू में सबसे ज्यादा हिन्दुओं का नाश होता रहा है और आडवाणी जी का हर रोज यह बयान आता है कि मैं कुछ करूंगा, कुछ करूंगा जबकि सबसे ज्यादा नाश इनके नेतृत्व में हुआ है। जब इन से सवाल पूछा जायेगा तो ये क्या जवाब देंगें? ये कहेंगे कि होम मनिस्ट्री छोड़ रहा हूं। हमारा जवाब देने के लिये एक ही रास्ता है, यह पद छोड़ दें। This is why he cannot just play with both. Who has been killed ? मैं नाम नहीं लूंगा। हमारे बी.जे.पी. के सदस्य हैं जिन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ हम बोलते हैं, अगर इंन्दिरा जी आज होती तो सबक सिखा देती। यह कोई लौजिक नहीं, ये भावना की बात करते हैं। आपके साथी लोग ४-५ नहीं, एक दर्जन से ज्यादा लोग कहते हैं कि यदि इन्दिरा गांधी होती लेकिन उन्हें समझाइये कि इन्दिरा जी नहीं हैं, उस समय न्युक्लीयर डाइमेंशन नहीं था लेकिन आज नेयुक्लीयर डाइमेंशन है, कहने और करने में एक से नहीं हो सकते। हम लोग सरकार की मजबूरी समझते हैं, इसलिये सरकार के साथ कभी लड़ाई नहीं की। हम लोग भी कहते हैं कि क्यों नहीं पाकिस्तान पर अटैक किया?This has been the impression. The impression is that Mr. Home Minister, you have failed to combat the terrorists and your Intelligence could not prove one clue.

एक क्लू आपको मिल गया है, ठीक है आप सक्सेसफुल हो गये हैं। लेकिन मैं आपको मिसाल दे सकता हूं कि दस क्लूज हैं, जिसमें एक क्लू में आप सक्सेसफुल हैं और बाकी में फेल हैं। इसके लिए मैं आपको इसलिए जिम्मेदार ठहरा रहा हूं because you are the Home Minister. Whom do I hold responsible? Can I hold the Commissioner of Police, Delhi or Inspector General of Police, Gujarat responsible for that? No. You are looking after the internal security and you have not been able to do this.

A lot of things are said about Kashmir. Who had released the first terrorist without the Court Order? It was Azhar Masood. What is happening now in Kashmir? I am told – Shri Advani ji, if I am wrong, you can correct me and I will bow down to you – that many of them who have been released for the last few days in Kashmir are based on the Court Order and in a few cases, the Central Intelligence Agency was consulted. This Screening Committee was appointed by the Government of Shri Farooq Abdullah and it screened all these. यह इल्जाम की बात नहीं है। यह सोचने का सवाल है।

सभापति महोदया, मैं आपके माध्यम से गुजरात की जनता से, आडवाणी जी और सदन से कहना चाहता हूं कि हमारी कांग्रेस पार्टी की कोई मंशा नहीं है कि गुजरात में चुनाव के मसले को लेकर सामाजिक भेदभाव या विभाजन की नीति चालू हो। हम लोग ऐसा नहीं चाहते हैं। लेकिन प्रधान मंत्री जी ने जो बात कही है कि चाहे गोधरा हो, चाहे नाडिया हो, चाहे मेहसाणा हो, किसी इश्यु को लेकर हम ऐसा मुद्दा नहीं बनाना चाहते हैं। हम शांतिपूर्ण चुनाव चाहते हैं। लेकिन कोई पदाधिकारी चाहे वह इलैक्शऩ कमीशऩ में हो, चाहे सरकार में हो, उनका नाम लेकर जाति या धर्म का जो माहौल बनाया जा रहा है, उन लोगों को कड़ी सजा देने की जिम्मेदारी आडवाणी जी आपकी है। अगर आप विफल होते हैं तो संविधान की भाषा कमजोर हो जायेगी। महात्मा गांधी जी को हम लोग याद करते रहेंगे। लेकिन तब तक इतनी देर हो जायेगी कि हम लोग कुछ नहीं कर पायेंगे।

The gaurav of Gujarat and the gaurav of India lie with the legacy of Mahatma Gandhi for public life and the legacy of Lord Krishna for just rule. Please do not destroy that gaurav in the name of Modi’s Yatra.

नागर विमानन मंत्री (श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन) :सभापति महोदया, मैं आपका धन्यवाद करता हूं कि आपने मुझे बोलने का अवसर दिया।…( व्यवधान)हम लोग वहां से चुनकर आये हैं, जहां आठ लाख मुस्लिम रहते हैं। हम वहां से कांग्रेस की जमानत जब्त कराकर आये हैं।

१५.०८ hrs. (Shri Devendra Prasad Yadav in ther Chair) सभापति महोदय, रमजान का पवित्र महीना चल रहा है और मैं रोजे से हूं। रोजे में हमें यह बताया जाता है कि सब कुछ सच बोलना है। इसलिए मैं यहां पर …( व्यवधान)इसलिए आपको कभी मौका नहीं देते हैं। जब भी अक्लियतों का इश्यु होता है तो अक्लियत के किसी सांसद को बोलने का मौका नहीं देते हैं, सारा टाइम प्रियदा ले जाते हैं। यह एक बहुत बड़ा अन्याय कांग्रेस पार्टी अक्लियतों के साथ करती है।

सभापति महोदय, यह हमारी बदकिस्मती हैं कि आजादी के बाद से जब से इस मुल्क का वजूद खड़ा हुआ है, दंगे हमने आज से नहीं देखे हैं। दंगे १५ अगस्त, १९४७ से हमने इस मुल्क में देखे हैं और आज जिस तरह की स्पीचेज की गई हैं, उनसे ऐसा लगता है कि अगर प्रियदा की स्पीच का कांटैक्स्ट किसी मुस्लिम समाज के व्यक्ति को पढ़ा दिया जाए तो उसे लगेगा कि उनका हिंदुस्तान में रहना बहुत मुश्किल हो गया है। यह सही है कि पिछले चार साल से हमारी सरकार है और अभी ऐसी स्पीचेज दी गई हैं कि जैसे पिछले चार सालों से ही दंगे हो रहे हैं। आपने यह भी कहा है कि कांग्रेस के राज में भी दंगे हुए हैं। मैं कुछ मिसाल देकर फिर अपनी बात शुरू करना चाहता हूं। कांग्रेस की जो पिछली सरकार थी और जिस तरह से आप इधर से उधर गये हैं। जब श्री नरसिंहराव जी की सरकार थी, उस जमाने के कुछ आंकड़े मैं प्रियदा और सभापति महोदय के सामने रखना चाहता हूं। १९९१ से १९९५ तक कांग्रेस के राज में ६०४० दंगे हुए, जिनमें ४६६५ लोग मारे गये। मैं गुजरात का घटना पर बाद में आऊंगा। अगर मैं अपनी सरकार का १९९८ से अभी तक का हिसाब दूं तो अब तक हुए दंगों में कुल ८०६ लोग मारे गये। आंकड़ों के हिसाब से आजादी के बाद यदि किसी सरकार को सबसे अधिक सेक्युलर और किसी प्रधान मंत्री और गृह मंत्री को सबसे अधिक सेक्युलर कहा जायेगा तो वह मेरे नेता उप-प्रधान मंत्री श्री लालकृष्ण आडवाणी जी और प्रधान मंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी हैं। यह मैं आंकड़ों के हिसाब से कहना चाहता हूं।

मैं इसे सभापटल पर रखने के लिए भी पूरी तरह से तैयार हूँ क्योंकि आपके नरसिंह राव और यशवंत राव चव्हाण जी का ज़माना मैंने देखा है। उस समय मैं बहुत छोटा था। मैं कहता हूँ कि गुजरात की घटना से आप पूरे हिन्दुस्तान के मुसलमानों को डरा नहीं सकते। आप इल्ज़ाम लगा रहे हैं कि गुजरात में हम हिन्दू समाज का वोट लेना चाहते हैं। हम आप पर इल्ज़ाम लगाते हैं कि आप गुजरात की आड़ में भारत के मुसलमानों को डराकर उनसे वोट लेना चाहते हैं। आप फिर से वोट बैंक की राजनीति करना चाहते हैं। आपने गुजरात के दंगों को मिसाल बनाया है। आपने गोवा में भी इस बात की चर्चा की थी। …( व्यवधान)

सभापति जी, यह मेरा तीसरा भाषण है। मैं जानता हूँ कि जब जब मैं बोलता हूँ तो मेरी ऊर्जा तभी बढ़ती है जब उधर से लोग मुझे टोकते हैं। मुझे कोई एतराज़ नहीं है। जब आप टोकते हैं तो मेरी ऊर्जा बढ़ती है और मुझे बहुत ज्यादा प्रोत्साहन मिलता है।

गुजरात के दंगे हुए। ८ महीने से बैठकर मैं यह चर्चा सुन रहा हूँ। जब मैं खड़ा हुआ तो ये कहते है कि ये शोपीस है। मैं जहां से चुनकर आया हूँ, वहां देश में सर्वाधिक मुस्लिम आबाद मेरे चुनाव क्षेत्र किशनगंज में रहती है। वहां कांग्रेस का नामोनिशान नहीं है। वहां से भारतीय जनता पार्टी का एक आदमी जीतकर आ गया है तो आपकी नज़र में मैं खटकता रहता हूँ। जब राष्ट्रपाल जी बोल रहे थे तो मैं चुपचाप मुसकराकर उनको देख रहा था। उन्होंने बार-बार मेरा नाम लिया। मैं उस समय भी खड़ा होकर कुछ कह सकता था। प्रवीण राष्ट्रपाल जी ने कुछ बातें कही हैं कि धर्म की राजनीति हम लोगों ने शुरू की है। कांग्रेस के लोगों ने वहां बहुत दिनों तक हुकूमत की है। सत्ता में रहने के बाद आपकी याददाश्त कमज़ोर नहीं होनी चाहिए। आपको याद होगा आप मनिस्टर थे, गाड़ी थी, कोठी थी, बंगला था, आपने भी हूकूमत की। आपने यह किया, वह किया, आपको सब याद होगा। जब आप सब बातें याद रकते हैं तो एक बात कैसे भूल गए? आपने नरेन्द्र मोदी जी की यात्रा की बात शुरू की कि उन्होंने एक धर्म स्थान से यात्रा शुरू की, क्या आप भूल गए कि भारत की राजनीति में स्वर्गीय राजीव गांधी जी पहले व्यक्ति थे, कांग्रेस के पहले नेता थे जिन्होंने अपने चुनाव अभियान की शुरूआत ६ दिसंबर, १९८९ को अयोध्या से शुरू की थी। क्या उसको भूल गए? अगर नरेन्द्र मोदी जी किसी मंदिर से आशीर्वाद लेकर यात्रा शुरू करते हैं तो वह बहुत बुरी बात हो गई? यह मैं पूरी तरह से रिकार्ड पर बोल रहा हूँ। अगर आपको एतराज़ है तो खड़े होकर बोलें।…( व्यवधान)क्या आप भूल गए कि जब आप चुनाव अभियान में जाते हैं तो मंदिर में पूजा करके या घर में किसी बड़े के आगे माथा टेककर जाते हैं?मैं भारतीय जनता पार्टी के टिकट से चुनाव लड़ा, लेकिन जब चुनाव अभियान में नॉमिनेशन करने गया तो बड़े बुजुर्ग की मज़ार पर जाकर फातिया पढ़कर मैंने अगर यात्रा की शुरूआत की तो यह बहुत बड़ा गुनाह हो गया आप इस तरह के जो सवाल उठा रहे हैं यह सवाल उठाने का अधिकार आपको तब है जब यह काम आपने नहीं किया होता।

अभी प्रियरंजन दा कह रहे थे कि १०-१२ सीटों को छोड़कर सब लोग हिन्दू वोट से जीतकर आते हैं और ज्यादातर हिन्दू वोट हैं। यही सलाह आप जैसे लोगों ने राजीव गांधी जी को दी थी, इसलिए आपने अपनी नीति १९८९ में बदली थी और वहां अयोध्या आंदोलन के समय हिन्दू कार्ड खेलना चाहा था। आपने शिलान्यास करवाया था। गृह मंत्री बूटा सिंह जी थे। उस वक्त आपने पूरा सहयोग किया था। लेकिन आपका वह हिन्दू कार्ड नहीं चला। अब आपका खसियानी बिल्ली खंभा नोचे वाला हाल है। आप हिन्दुओं में अनपॉपुलर हो गए और मुस्लिम समाज में अनपॉपुलर क्यों हुए? बिहार में आप पूरी ५० सीटों से जीतकर आते थे, बिहार में आज आपके कितने एम.पी. हैं? वहां मुस्लिम आबादी बहुत बड़ी तादाद में रहती है। ५४ लोक सभा के सदस्य दोनों बिहार को मिलाकर थे। अभी वहां से तीन मुस्लिम सदस्य चुने गए। उसमें एक आर.जे.डी. के हैं, एक और आर.जे.डी. के चुने गए थे लेकिन वह हमारे साथ आ गए और एक मैं चुना गया हूँ। आपकी पार्टी का तो खाता भी मुसलमानों ने बिहार में नहीं खुलने दिया है और आप हमें शोपीस कहते हैं।

मैं कहना चाहता हूँ कि दंगे फसाद आज से नहीं हुए हैं, ये बहुत पहले से हुए हैं। दंगों के बारे में बोलने का कोई नैतिक अधिकार आपको नहीं है। आप आडवाणी जी को ब्लेम कर रहे हैं। आप कहते हैं कि उनको हैंग कर दीजिए जो गोधरा कांड में दोषी पाए जाते हैं। जरूर हैंग कीजिए लेकिन क्या यह परंपरा आपने खड़ी की? क्या आप जवाब दे सकते हैं कि अब तक आपने कितने लोगों को दंगों के इल्ज़ाम में हैंग किया है? फसाद में हिन्दू हों या मुसलमान, अगर किसी मुस्लिम आदमी का कोई खून करते हुए पकड़ा गया और आपने ४० सालों की हुकूमत में एक भी आदमी को फांसी पर चढ़ाया होता तो आज दंगों की बात करने की हिम्मत किसी में नहीं होती। सारी गलतियां आपने की हैं। मैं आज भी कह सकता हूँ कि अगर मुल्क में शांति और अमन है तो क्या इसलिए है कि १४ स्टेट्स में आपकी हुकूमत है? मैंने आंकड़े दिये कि अगर आप सब सरकारों के आंकड़े एक कंप्यूटर में डालेंगे और हमारी सरकार के डालेंगे और पूछा जाए कि सबसे सैक्यूलर प्रधान मंत्री कौन है तो जवाब निकलेगा - अटल बिहारी वाजपेयी।

सबसे सेक्युलर गृह मंत्री कौन है तो श्री चव्हाण साहब का नाम नहीं निकलेगा। हम आंकड़ों के हिसाब से कह रहे हैं। आपको इल्जामों के हिसाब से कहने का पूरा अधिकार है और आप कुछ भी कह सकते हैं। आंकड़ों के हिसाब से आदरणीय गृह मंत्री श्री लाल कृष्ण आडवाणी जी का नाम निकलेगा।

आपको मैं बहुत विनम्रता से कहना चाहता हूं कि जब हम यहां से सुनते हैं, हमारे साथी भी बोलते हैं और आप भी बोलते हैं, तो मुझे लगता है, अब समाजवादी पार्टी की भी आदत है कि मुस्लिम इश्यू पर कभी किसी मुसलमान को बोलने नही देते। आप यहां पर भी उनके अधिकार का शोषण करते हैं। कांग्रेस पार्टी में भी हम देखते हैं चाहे अयोध्या का आंदोलन हो या कोई और कांड हो, यहां मुजफ्फरपुर के पूर्व गृह मंत्री बैठे हैं. ये एक काबिल सासंद हैं। इतनी अच्छी अच्छी शेरवानी पहनकर बैठे हैं। आप शो-पीस भी दिखाना भूल गये हैं क्योंकि आपको डर लगता है। अभी कल मैंने देखा अखबार में पढ़ा कि आपने इफ्तार की दावत भी कैंसिल कर दी। यह आपने गुजरात के चुनावों की वजह से की है। माउंट आबू में इतना खर्चा हुआ तब कुछ नहीं हुआ। उस वक्त क्या आपको सूखा याद नहीं आया?

श्रीमती मार्ग्रेट आल्वा (कनारा) : हमने प्रधान मंत्री जी को फालो किया है।

श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन : मैं बता रहा हूं कि प्रधान मंत्री जी ने क्या कहा। यदि आप हमें फालो करते रहिये तो आप अच्छे विपक्ष के तौर पर स्थापित हो जायेंगे। आपने हमें कभी फालो नहीं किया। अब आपने कहा कि प्रधान मंत्री जी नहीं दे रहे। मैं उनकी सरकार में मंत्री हूं लेकिन मैं इफ्तार की दावत २२ तारीख को दे रहा हूं। प्रधान मंत्री जी उस दावत में शामिल होने वाले हैं। मैंने आपको भी आने की दावत दी है। आप खुद ही डर रहे हैं क्योंकि आपको अब यह लगता है कि यदि इफ्तार की दावत दे दी और थोड़े से मुलमानों को बुलाकर चना और कचौड़ी खिला दी तो उससे आपका गुजरात का वोट चला जाता। इसलिए आपने उसे कैंसिल किया है और नाम आप सूखे का दे रहे हैं। अभी आप कह रहे हैं कि हम प्रधान मंत्री जी को फालो कर रहे हैं। मैं इस सरकार में हूं। यह सब परम्परा आपने ही शुरू की है। इफ्तार की दावत की जो बात है, यह परम्परा भी आपने ही शुरू की।

अब मैं प्रिय दा की बात पर आऊंगा। उन्होंने जो कहा, मैं उसका जवाब देना चाहता हूं कि आपने जो परम्परा शुरू की है, यदि उसे हम नहीं करें तब भी आप इल्जाम लगाते हैं कि आप यह परम्परा तोड़ रहे हैं। आपने दावत दी, कोई बात नहीं। मैं तो दावत दे रहा हूं। उसमें प्रधान मंत्री जी आयेंगे। आपकी अध्यक्ष नहीं दे रही तो श्री संतोष मोहन देव जी दे सकते हैं या कोई और दे सकता है। मेरा कहना है कि यह होड़ किसने शुरू की ? यह इफ्तार की दावत देना, जामा मस्जिद का राजनीतिकरण करना आदि किसने किया ? यहां प्रिय दा बोल रहे थे कि हम लोग गये थे और हमने इमाम बुखारी को नसबंदी के संबंध में यह कहा कि यह मुसलमान विरोधी कदम है। क्या आपको याद है कि इमाम बुखारी वक्फ बोर्ड के इम्प्लाईज थे। मैं दिल्ली वक्फ बोर्ड का पांच साल तक सदस्य रहा हूं। वक्फ बोर्ड के सदस्य के नाते मैं ही तन्ख्वाह पर साइन करता था। उस समय ७५ रुपये तन्ख्वाह मिलती थी। उसका भाव किसने बढ़ाया, आपने ही बढ़ाया। श्री हेमवंती नंदन बहुगुणा आपके ही नेता थे। आप उनके पास गये। वे नमाज पढ़ा रहे थे, आप उनको उठाकर राजनीति में ले आये। जामा मस्जिद का राजनीतिकरण किसने किया, वह भी आपने ही किया। जब आप आग से खेलते हैं यानी जिस तरह आप इमाम बुखारी से खेले उसी तरह पंजाब के अंदर आप भिंडरवाले से खेले। आप जब उसको बढ़ा नहीं पाते और जब वे आपके हाथ से निकल गया तो फिर आप कहते हैं कि यह इनकी वजह से है। आपने ही जामा मस्जिद का राजनीतिकरण किया, यह मैं आपको कहना चाहता हूं।

अभी प्रिय दा यहां से बोलकर चले गये हैं। मैं उनकी इस बात का जवाब जरूर देना चाहता था। आप एकाउंटेबलिटी की बात करते हैं। आपने आडवाणी जी पर तरह-तरह के इल्जाम लगाये थे कि आप तो गृह मंत्री हैं इसलिए आप यह नहीं कर सकते थे या आप वह नहीं कर सकते थे। दो तरह की बातें कांग्रेस के लोग हरदम करते हैं। जब अच्छी बातें होती हैं तो कहते हैं कि इनकी वजह से हुईं और जब खराब बातें होती हैं तो कहते हैं कि इनकी वजह से हुई हैं। आप हम पर इल्जाम लगाते हैं तो मेरा कहना है कि पूरी सरकार पर इल्जाम लगाइये। मैं आपको बताना चाहता हूं कि एकाउंटेबलिटी क्या होती है ? आपने कहा कि गोधरा कांड के बाद, मैं गुजरात पर बाद में बात में आता हूं, सबसे पहले मैं छोटी-छोटी बातों का जबाव आपको दे रहे हैं। आप क्या भूल गये कि हमारे प्रधान मंत्री या गृह मंत्री ने गुजरात के दंगों के बाद ऐसा कोई बयान नहीं दिया। आपने १९८४ के दंगों के बाद बयान दिया था कि जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है। इसके बारे में कभी किसी ने माफी मांगी? क्या यह कहा कि इस बात से कितना नुकसान हुआ और कैसी यह परम्परा शुरू हुई ?

आपको अच्छी तरह से याद है कि हिन्दुस्तान में जिंदा जलाने की परम्परा कब शुरू हुई? अभी प्रवीण राष्ट्रपाल जी यहां से चले गये हैं। वे कह रहे थे कि मरने के बाद भी जो नहीं जलते, उनको आपने जिंदा जला दिया। दंगों में जिंदा जलाने के ज्यादा रिकार्ड नहीं हैं। मेरी उम्र कम जरूर है लेकिन मैं पूरी तरह से पढ़कर आया हूं। मैं आपको बताना चाहता हूं कि जिंदा जलाने की परम्परा १९८४ में आपकी हुकूमत में शुरू हुई थी। आपकी हुकूमत में यहां सरदारों को जिंदा जलाया गया। बच्चों के गले में टायर रखकर नये-नये प्रयोग आपकी हुकूमत में शुरू किये गये। आज तक १९८४ के दंगाइयों को सजा नहीं हुई।

मैं बिहार से आता हूं। यहां पर श्री रघुवंश बाबू जी बैठे हैं। श्री रघुवंश सिंह जी को अच्छी तरह से याद होगा, वे कांग्रेस में थे लेकिन गुस्से में कांग्रेस को छोड़कर हम लोगों के साथ आ गए।

वहां जिस तरह मुसलमानों पर अन्याय हुआ, आप कहते हैं कि हम भेदभाव नहीं करते, आप आडवाणी जी पर इल्ज़ाम लगाते हैं कि वे गांधीनगर के हैं, गुजरात के हैं और उनकी वजह से सब कुछ हो रहा है। क्या आप भूल गए कि भागलपुर के दंगे के वक्त १९८४ में भारत के प्रधान मंत्री राजीव गांधी जी भागलपुर गए थे? १९८४ में राजीव गांधी जी के एक एस.पी.का ट्रांसफर हुआ। मुसलमानों ने कहा कि इस एस.पी. की वजह से, श्री दूबे का ट्रांसफर करवा दिया गया, उस एस.पी. ने दंगा करवाया था। वह हिन्दू-मुसलमान का दंगा नहीं था, पुलिस की शह पर दंगा था। राजीव गांधी जी को वहां लोगों ने बड़ी तादाद में घेर लिया और राजीव गांधी जी ने उस एस.पी. का तबादला रोक दिया। उसका तबादला रोकने के बाद हजारों मुसलमान वहां मारे गए और उसी कांग्रेस की हुकूमत में बिहार में मुसलमानों को मार कर गोभी का फूल पैदा करने वाली कांग्रेस आज कमल के फूल की पार्टी पर साम्प्रदायिकता का इल्ज़ाम लगा रही है। आप भूल गए, अपने गोभी के फूल की रिपोर्ट आपने देखी थी या नहीं जिसके अंदर यह था कि मुसलमानों को मार कर उस पर गोभी की खेती कर दी गई थी। क्या उस बात को भूल गए? उसकी सजा आपको वहां के मुसलमानों ने दी है। बी.जे.पी. के लोगों को तो दरवाजे पर बुला कर कह भी देते हैं कि हम वोट देंगे या नहीं देंगे लेकिन बिहार में कांग्रेस की स्थिति ऐसी है कि अगर कांग्रेस का कोई आदमी बिहार में मुसलमानों के दरवाजे में चला जाए तो उसे डर लगता है कि कहीं मेरे घर में झगड़ा न करवा दे। इसलिए आज लालू जी वहां हुकुमत में हैं क्योंकि आपने जो गलतियां की हैं, इसलिए मुसलमानों ने आप पर भरोसा करना बंद कर दिया है।

में बहुत दंगों की बात नहीं करना चाहता, मैं सिर्फ यह बताना चाहता हूं कि १९५६ में जबलपुर का दंगा, १९६३-६४ का राउरकेला, भिलाई का दंगा, १९६७ में रांची का दंगा, १९६९ में अहमदाबाद का दंगा, १९७३ में जमशेदपुर का दंगा, १९८९ में बिहार शरीफ का दंगा, १९८० में मुरादाबाद का दंगा, मुरादाबाद में क्या कसूर था। मुरादाबाद में भी उस वक्त कांग्रेस के मुख्य मंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह जी थे जो बाद में विपक्ष में चले गए।…( व्यवधान)

डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह (वैशाली): गुजरात के दंगे ने सब दंगों को फेल कर दिया।

श्री सैयद शाहनवाज़ हुसैन : में गुजरात के दंगों पर आऊंगा। आपके हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हूं। मैं कहना चाहता हूं कि क्या आप भूल गए कि मुरादाबाद की ईदगाह में लोग नमाज पढ़ने गए थे, छोटे-छोटे मासूम बच्चे, एक रूमाल और जेब में टोपी के अलावा कुछ नहीं होता, इत्र लगा कर जाते हैं जिस तरह आप लोग सफेद कपड़े में जाते हैं। आपने आज कहा कि पूरा गुजरात कब्रिस्तान हो गया है। कांग्रेस पार्टी ने मुरादाबाद की ईदगाह को कब्रिस्तान बना दिया था। जिस तरह जनरल डायर ने जलियांवाला बाग से गोली चलवाई थी, आपने ईदगाह के गेट पर गोलियां चलवाई थीं और छोटे-छोटे मासूम बच्चे मारे गए थे। आपको इस पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। इसी तरह मैं आपसे पूछना चाहता हूं, १९८७ में, रघुवंश बाबू बहुत सैकुलर आदमी हैं, हम इनकी बहुत इज्जत करते हैं, हमारी बात की ताईद करेंगे क्योंकि ये उस वक्त विपक्ष में थे, हम लोगों का ऐलायंस रहा है, भले ही आजकल ये बी.जे.पी. से रूठे हुए हैं लेकिन हम लोगों की भी सांठ-गांठ रही है, हम लोग १९८९ का चुनाव साथ लड़े हैं, १९८७ में हम एक ही मुद्दे पर लड़े थे। १९८७ में मेरठ में मलियाना में हिडन नदी के किनारे २५, ३०, ३२ साल के मुस्लिम नौजवानों को खड़ा करके गोली मारने वाली कौन सी सरकार थी - क्या भारतीय जनता पार्टी की सरकार थी। आप इस तरह का इम्प्रैशन दे रहे हैं जैसे भारत का मुसलमान गरीब है, पिछड़ा है, बेरोजगार है, उसके पास कोठी नहीं है, गाड़ी नहीं है, नौकरी नहीं है, वह डिफैंस में नहीं है, रोजगार में नहीं है। क्या वह अटल जी, आडवाणी जी की वजह से नहीं है? वह आपकी वजह से नहीं है क्योंकि चालीस साल में आपने उसकी कोई फिक्र नहीं की, मुसलमानों को डराते रहे। मैं मदरसे में पढ़ा। मुझे मेरे टीचर ने बताया कि किसी से नहीं डरना, खुदा से डरना है। इस्लाम में यह सिखाया जाता है कि खुदा के अलावा और किसी से नहीं डरना है और आप भारत के मुसलमानों को उसके धर्म के खिलाफ भड़का रहे हैं, आप भारत के मुसलमानों को बी.जे.पी., आर.एस.एस. से डरा रहे हैं, जिन मुसलमानों को कहा गया कि खुदा से डरें। मैं आपकी धमकी में नहीं आया, आपके डराने में नहीं आया, मैं निडर मुसलमान था इसलिए मैंने भारतीय जनता पार्टी ज्वाइन कर ली, जो डरपोक लोग थे…( व्यवधान)मैं आपसे कहना चाहता हूं कि आज मुसलमानों का दर्द यह है कि उनको ऐसे दोस्त मिल गए हैं। आपने सुना होगा कि नादान दोस्त से दाना दुश्मन अच्छा। आप पार्लियामैंट में इतना बोलते हैं जहां दंगे का सवाल ही नहीं है। आपने इस पर इतना हल्ला किया। आप रिलीफ कैम्प में गए। मैं दंगे में गया था, मेरी कहीं फोटो नहीं छपी, मैं तो कैबिनेट मनिस्टर था, मेरी फोटो छपनी चाहिए थी लेकिन मेरी फोटो नहीं छपी। मैं आडवाणी जी के साथ दूसरे दिन आग की लपटों में गया था, मैं अस्पताल भी गया था, मैंने खुद अपनी आंखों से दंगे देखे, मैंने धुंए देखे। आप धुंआ देखने नहीं गए थे, आप प्रैस कान्फ्रैंस करने गए थे। आपको वहां की सरकार ने इजाजत नहीं दी थी। आप वहां गए, फोटो खिंचवाई, बयान दिया। क्या आपने रिलीफ कैम्प चलाया? क्या कांग्रेस के दफ्तर में आपने कोई रिलीफ कैम्प शुरू किया, आपने कोई बस्ती बसाई है? क्या आपने कोई ऐसा काम किया है जिसकी वजह से कह सकें कि पचास मुसलमानों के घर कांग्रेस पार्टी ने बनवा दिए? अर्थक्वेक आया, उसमें काम किया, दंगे की वजह से आपने काम क्यों नहीं किया।

आपने कौन सा काम किया, उसका रिकार्ड बताइये। आपने कब काम किया है? कुछ नहीं किया, आपने सिर्फ बयानबाजी की है। आप भारत के मुसलमानों के आंसू नहीं पोंछना चाहते। आप भारत के मुसलमानों पर…( व्यवधान)

सभापति महोदय : कृपया स्थान ग्रहण करिये। आप बिना अनुमति के खड़े हो जाते हैं।

श्री सैयद शाहनवाज हुसैन: आपने कितने मुसलमानों के घर बनाये, एक भी नहीं बनाया। आपने कुछ नहीं किया। मुझे पूरी जानकारी है, मैं उस कम्युनिटी से आता हूं, मैं अपना दर्द रख रहा हूं। मुझे आपसे ज्यादा जानकारी है। मैं आपसे कहना चाहता हूं कि आपने कुछ नहीं किया। जब अर्थक्वेक आया, साहिब सिंह वर्मा जी लेबर मनिस्टर यहां बैठे हैं, इन्होंने वहां एक मुस्लिम बस्ती बनाई, ये मुझे वहां ले जाने वाले हैं। वहां पर इन्होंने १०० मुसलमानों के घर बनवाये और वहां एक मस्जिद भी बनवाई है, जिसका नाम जाकिर नगर रखा है। आप भी ऐसा काम करते कि आप एक बस्ती को एडॉप्ट कर लेते। आपने वैसा नहीं किया, लेकिन पार्लियामेंट के अन्दर हंगामा किया। पार्लियामेंट के हंगामे की वजह से आप यह सोचते हैं कि आप हंगामा करेंगे तो मुसलमान यकीन कर लेगा।

आप यहां पर गुजरात के दंगे की बात करते हैं, मैं अभी गुजरात के दंगे पर आ रहा हूं, आप तब मुझे टोकिये। अभी मैं गुजरात के दंगे पर नहीं आया। अभी तो मैं सिर्फ आपके बारे में बोल रहा हूं। मैं आपसे कहना चाहता हूं कि आपने कोई ऐसा काम नहीं किया, जिसकी वजह से आप यह कहते कि आपने मुसलमानों के लिए कोई बड़ा काम किया है, आपने कोई ऐसा काम नहीं किया।

कांग्रेस पार्टी ने तो छ: दिसम्बर के लिए माफी मांगी थी, फिर आपने कहा कि नहीं मांगी है। जितने दंगे आपकी हुकूमत में हुए, उसकी आपकी कोई एकाउण्टेबलिटी है? आप एकाउण्टेबलिटी की बात कर रहे हैं। अगर है तो आप लाइये, मैं सरकार में मंत्री हूं। आप रिपोर्ट लाइये कि आपने मुरादाबाद के दंगे के लिए क्या किया, भागलपुर के दंगे के लिए क्या किया। आपने जो काम किया, मैं आपसे वायदा करता हूं कि इस सरकार से वही काम कांग्रेस के नक्शेकदम पर हम इम्प्लीमेंट करा देंगे, जो आपने मुसलमानों के लिए भला किया होगा। आपको याद है कि कभी दंगा हुआ और आपने कोई पैकेज दिया, आपने कोई पैकेज नहीं दिया। यह हमारी सरकार है, जिसने आजादी के बाद पहली बार पैकेज दिया। इससे पहले गुजरात में जब दंगा हुआ, कभी पैकेज नहीं दिया। यह हमारी सरकार है, जिसमें १५० रोड़ रुपये का पैकेज जाकर प्रधानमंत्री जी ने गुजरात में एनाउंस किया, लेकिन आपने ऐसा कभी नहीं किया। आपने १९८४ में कोई पैकेज दिया, आपने मुरादाबाद के दंगे का पैकेज दिया, आपने मलियाना के दंगे का पैकेज दिया? आपकी हुकूमत में १९८४ के दंगे हुए, उसमें कितनी गोलियां चलाई थीं, कितनी लाठियां चलाई थीं? गुजरात के दंगे में हम रिकार्ड आपके सामने रखना चाहते हैं।

मुलायम सिंह यादव जी की उत्तर प्रदेश में सरकार थी, जब अयोध्या में सरयू नदी के ऊपर पुल पर गोली चली थी, उसके अन्दर लोग मारे गये थे जिससे पूरे हिन्दुस्तान में हिन्दू समाज में गुस्सा आया था, क्योंकि उसमें कारसेवक मारे गये थे, क्या आपको याद है कि गोधरा काण्ड के बाद जो पुलिस की फायरिंग में इतने लोग कभी मरे, उसमें आपको मालूम है कि हिन्दू मरे कि मुसलमान मरे। उसमें ज्यादातर हिन्दू समाज के लोग मारे गये। फिर भी आप कह रहे हैं कि आपने कोई कदम नहीं उठाया। मैं आपसे कहना चाहता हूं आज इस दंगे पर चर्चा करने की जगह अगर आप यह सोच रहे हैं कि दंगे की चर्चा करके आप मुसलमानों से अपनी गलती की माफी मांग सकते हैं, तो यह सही हो सकता है। अगर हमारी हुकूमत में दंगे हो गये, तब आप सरकार में थे, तब तो आप बोल नहीं पाये थे, क्योंकि दंगा आपकी सरकार के जमाने में हुआ, उसकी भड़ास आप निकाल सकते हैं। लेकिन मैं आज कह सकता हूं कि गुजरात के अन्दर जो कुछ हुआ, मैं सैयद शाहनवाज हुसैन उसकी घोर निन्दा करता हूं। मैं मानता हूं कि गुजरात के अन्दर जो कुछ हुआ, पहली बार किसी देश के प्रधानमंत्री ने, गृहमंत्री ने अपनी सरकार के विरोध में बोलने का काम किया और यह कहा कि गुजरात के अन्दर जो कुछ हुआ, उससे हमारे यहां कोई खुश नहीं हुआ। हम खुद दंगामुक्त शासन की बात कहा करते थे, आप क्या बात करते हैं कि गुजरात के दंगे हमारे लिए कोई हर्ष का विषय हैं। भारतीय जनता पार्टी गुजरात के दंगे को कभी अपने लिए हर्ष का विषय नहीं मानती। भारतीय जनता पार्टी में हमें इस बात का अफसोस रहता है कि हम और ज्यादा प्रो-एक्टिव हो सकते थे। हमें इतना पता नहीं था कि इतना ज्यादा बवंडर होगा। हम आपसे कहना चाहते हैं कि गुजरात में जो लोग भी मारे गये, मजहब के आधार पर उसे भारतीय जनता पार्टी ने नहीं देखा है।

हमने बहुत सारे अच्छे काम किये हैं। आपको तो अच्छे काम याद ही नहीं आते हैं। हमारी कोई छोटी सी बात होती है, उसकी ही आप चर्चा करते रहते हैं। यह सही है क:

हम आह भी भरते हैं तो हो जाते हैं बदनाम, वे कत्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता।
क्योंकि आपको करने की जरूरत नहीं है। आपके ऊपर तो सैकुलर पार्टी का ठप्पा लगा हुआ है, क्योंकि १५ अगस्त, १९४७ को आपकी इमेज ऐसी थी, क्या आपने अपनी इमेज के बारे में पढ़ा है, आप कहेंगे कि जितनी मेरी उम्र है, उससे ज्यादा पढ़ा है। आपने पढ़ा होगा तो आपको याद होगा कि आजादी के पहले मुस्लिम लीग और कांग्रेस पार्टी थीं और ज्यादातर मुसलमान मुस्लिम लीग के साथ थे। बहुत कम लोग कांग्रेस के साथ थे और आपकी पार्टी की इमेज भी हिन्दू पार्टी की थी, लेकिन जब आप सरकार में आये तो मुसलमानों को लगा कि जो सरकार में होगा, वही उसकी रक्षा कर पायेगा, क्योंकि जो माइनोरिटी में होता है, उसे सबसे पहले रोजगार नहीं चाहिए, कुछ नहीं चाहिए, सुरक्षा चाहिए।
आपने बढि़या फार्मूला निकाल लिया कि जब भी कुछ होता तो कहते थे कि बी.जे.पी. या आर.एस.एस. ने किया है, बाद में सब ठीक हो जाएगा। अभी कुछ दिन पहले मौलाना अबुल कलाम आजाद जी की जयंती थी। उसके एक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए मैं भी गया और नजमा हेपतुल्ला जी भी थीं। वे कांग्रेस के अध्यक्ष रहे हैं। उनका जन्म दिन कांग्रेस पार्टी के दफ्तर में नहीं मनाया गया। आप कहते हैं कि हम सरदार पटेल से अपने को जोड़ रहे हैं या किसी और से जोड़ रहे हैं। मैंने तो अपने आफिस में, जब से मैं मंत्री बना हूं, तब से मौलाना आजाद की तस्वीर लगा रखी है। यह तस्वीर गोधरा कांड के बाद नहीं, बल्कि पहले से लगी हुई है। यह सही है कि उस वक्त भारतीय जनता पार्टी नहीं थी, कांग्रेस पार्टी थी। लेकिन कांग्रेस पार्टी के नेता को आप अपनी जागीर नहीं मान सकते। आप कहते हैं कि बड़े सरदार से इस सरदार को नहीं जोड़ना चाहिए। हम किसी को भी आइडियल मान सकते हैं। मैं मौलाना आजाद को अपना आइडियल मानता हूं तो इसमें आपको क्या एतराज हो सकता है और आपको क्यों प्राब्लम हो रही है कि उनसे अपने को जोड़ रहा हूं। लेकिन आप मौलाना आजाद को भूल गए।
आज हिन्दुस्तान में इस पर बहुत चर्चा की जरूरत नहीं है। यहां हम लोग संसद में बैठे हुए हैं। हम लोगों में बहुत काबलियत है। आप चाहे तो उसको शोपीस मानें या कुछ और मानें। लेकिन मेरा मानना है कि जो भी यहां चुनकर आता है, उसको डाक्टर, प्रोफेसर, हिन्दू, मुसलमान, सिख, ईसाई सब वोट देते हैं। वह १२-१४ लाख लोगों में से चुनकर आता है इसलिए वह सबसे काबिल आदमी है। हर आदमी लम्बी बहस कर सकता हैं। मैं कोई बहुत लम्बी बहस नहीं करने नहीं आया। आपको इत्तेमाद है जितना पार्लियामेंट में चीख लें, आप हिन्दुस्तान के मुसलमानों को डरा नहीं सकते, क्योंकि दंगों की लपटों में हमने तय किया था कि हमारा मुल्क, हमारा मादरे वतन यह है। १५ अगस्त, १९४७ को हमने तय किया था। जिनको हिन्दुस्तान से मोहब्बत नहीं थी, वे लोग हिन्दुस्तान को बॉय-बॉय, टाटा करके चले गए। १५ अगस्त, १९४७ के समय जो गुजरात में दंगे हुए, उस समय माहौल आज से भी ज्यादा खराब था। आपको याद होगा कि १५ अगस्त, १९४७ को मुसलमान जत्थे के जत्थे नबाकर जा रहे थे। तब मौलाना आजाद ने कहा था कि यह तुम्हारा मादरे वतन है, तुम चले जाओगे तो इन कब्रिस्तानों में तुम्हारे बाप-दादाओं की मजारें हैं, वहां कौन आएगा और जामा मस्जिद की मीनारें रो-रोकर तुम्हें बुला रही हैं कि तुम मत जाओ, इस मुल्क को अपना मादरे वतन मानो। मेरे बाप-दादा ने तय किया कि यह हमारा मादरे वतन है। हमें देशभक्ति का कोई प्रमाण पत्र नहीं चाहिए। हम इस मुल्क से मोहब्बत करते हैं तो एक बात कह दूं कि जितनी आडवाणी जी इस मुल्क से मोहब्बत करते हैं, सैयद शाहनवाज भी उससे कम नहीं करता। यह हमारा मुल्क है। भारत के मुसलमानों को आप दंगों से नहीं डरा सकते और न ही वे डरने वाले हैं। गुजरात का नाम लेकर आपने यहां के मुसलमानों को और हिन्दुस्तान को पूरी दुनिया में बदनाम किया है।
गुजरात के चार जिलों में दंगे हुए। पूरी दुनिया में इसकी चर्चा हुई। मैं अरब कंट्रीज में गया था। उन्होंने कहा कि आपके मुल्क में क्या हालत है। मुझे प्रधान मंत्री जी ने एक डेलीगेशन में भेजा था। मेरे साथ कांग्रेस के नेता छगन भुजबल जी भी थे और कई राज्यों के पर्यटन मंत्री भी थे। हमने उनको पूरे इत्तेमाद से कहा था कि मैं भारत से आया हूं, जहां इंडोनेशिया के बाद सबसे ज्यादा मुसलमान दुनिया में रहते हैं। मैं इस पार्लियामेंट के फ्लोर से कहना चाहता हूं कि दुनिया में सबसे सुरक्षित जगह मुसलमानों के लिए कहीं है तो वह मेरे देश हिन्दुस्तान में है। यह संदेश पूरी दुनिया को जाना चाहिए कि हिन्दुस्तान के मुसलमान दूसरे समुदायों के साथ कैसे रह सकते हैं, यह सबक दुनिया के मुसलमानों को यहां के मुसलमानों से सीखना चाहिए। यहां ज्यू भी हैं, क्रिश्चियन भी हैं। आप देखें कि दुनिया के अन्य देशों में मुसलमानों की क्या हालता है। फिलीस्तीन में क्या हालत है, यह सबको पता है। यहां इसलिए मुसलमान सुरक्षित हैं, क्योंकि वे सेक्यूलर हैं। यह सरकार की वजह से नहीं, पुलिस की वजह से नहीं, सेना की वजह से नहीं, यह हमारी गंगा-जमुनी तहजीब की वजह से है। हम सब मिलजुलकर यहां रहते आए हैं। जिस प्रकार से गांव में एक आदमी अपने पुराने मकान में रहता है और उसके चार बेटे हैं, वे सब शहरों में जाकर अलग-अलग अपना मकान बना लेते हैं तो इससे गांव के मकान से उनका रिश्ता टूटता नहीं है। मैं जहाज मंत्री हूं, लेकिन उस समय फ्लाइट नहीं चलती थी। मुसलमान उस वक्त यहां आए थे, जब वास्को-डी-गामा भी नहीं आया था। सबसे पहले यहां ख्वाजा गरीब नवाज भी चार मुसलमानों के साथ आए थे, अब १४ करोड़ हो गए हैं। यह कोई इम्पोर्टेड नहीं हैं, सब यहीं के हैं। इसलिए मैं कह सकता हूं पूरी दुनिया के मुसलमानों को कि हिन्दुस्तान से अच्छा दोस्त और हिन्दुओं से अच्छा पड़ौसी नहीं मिल सकता, आप इस बात को मानकर चलें। हमारी मिलीजुली संस्कृति है। हम मिलजुलकर काम करते हैं।
सभापति जी, मैं इस डिबेट को बहुत लम्बा नहीं ले जाना चाहता और तल्खी पैदा नहीं करना चाहता। मेरी इस पर जबर्दस्त तैयारी थी। आज सुबह प्रश्न काल से पहले हमारे व्हिप मल्होत्रा जी ने और आडवाणी जी ने मुझे आदेश दिया था कि मैं भी इस पर बोलूं।
इसलिए मैं आप लोगों से विनम्रता से अनुरोध करना चाहता हूं कि मैं कैबिनेट के अंदर हूं, मुस्लिम समाज में पैदा हुआ हूं और मॉइनोरिटी का हूं। कई बार हमने मॉइनोरिटी की समस्याओं को हल किया है। गुजरात में दंगों के वक्त मेरे घर मुस्लिमों के सारे डेलीगेशंस आए थे। इमाम बुखारी जी भी मेरे घर आए थे। मैंने गुजरात के एसडीएम को फोन किया था, गुजरात के मुख्य मंत्री जी को भी मैंने फोन किया था, मैंने आडवाणी जी को और माननीय प्रधान मंत्री जी को मैंने फोन किया था। जहां-जहां मेरे सम्पर्क थे, मैंने वहां फोन किया और हमारी सरकार के मंत्रियों की तरफ से जो कुछ हो सकता था, वह हमने किया है। मैं हाथ जोड़कर विनती करना चाहता हूं कि आपको हमारा वोट चाहिए, आपको वोट मिलेगा लेकिन हमारा नाम मिसयूज मत करिए। हमारे कंधे पर हथियार रखकर मत चलाइए। आप कोई और तरीका अपनाइए। विकास की आपने बात कही। आप बताइए कि आप मुस्लिमों के लिए क्या करना चाहते हैं, इसको इश्यू बनाइए। कांग्रेस पार्टी की आइडियोलॉजी बनाइए।
जब जब आप सत्ता से बाहर हो जाते हैं, आप असम में भी कह रहे हैं, अभी दादा को देखकर मुझे याद आ रहा है, वह कह रहे है कि कुछ रिजर्वेशन देने वाले हैं। पचास सालों में जब आपने कुछ नहीं किया तो अब क्या खाक करेंगे?इतने दिनों से आप मुसलमानों का कुछ भला नहीं कर पाए जब आपकी हुकूमत थी। अटल जी और आडवाणी जी ने आपको कब रोक लिया था? उस समय दो ही सांसद थे। १९८४ में आपका पूरा बहुमत था। आप मुसलमानों के लिए सब कुछ कर देते। उनको नौकरी, रोजगार जो देना था, सब कुछ दे देते। उस समय तो कोई बोलने वाला ही नहीं था। एडजर्नमेंट भी नहीं होता, ज्यादा लोग हल्ला नहीं करते थे, वैल में भी लोग नहीं आते थे। जब आपको मौका मिला तो आपने कुछ नहीं किया और जब बाहर आ गये तो आपको अफसोस हो रहा है और अब कह रहे हैं कि हम यह कर देंगे, वह कर देंगे। आज आपकी बात पर कोई यकीन करने वाला नहीं है। गुजरात के अंदर मुस्लिम समाज के लोग खुलकर वोट करने के लिए नहीं आने वाले हैं क्योंकि उनको मालूम है कि आप सिर्फ उनका वोट लेना चाहते हैं।
आपने हमारी ही पार्टी से निकले हुए व्यक्ति को आज कांग्रेस का अध्यक्ष बना दिया है और जब वह पहले खराब थे तो आज अच्छे कैसे हो गए? पता नहीं, आपकी नजर बदलती रहती है। अपनी नजर की जांच कराइए क्योंकि दो साल पहले जो व्यक्ति आपको खराब लगता था, आज दो साल बाद वह आपको अच्छा लगने लगता है। इसलिए मैं हाथ जोड़कर विनती करना चाहता हूं कि औऱ कोई मुद्दा उठाइए। अभी कांग्रेस पार्टी ने सूखे का मुद्दा लिया था। ऐसे मुद्दों पर चर्चा करिए। लेकिन मैं आपको बता दूं कि अब मुसलमान का घड़ा उलटा हो चुका है। आज आपकी इस चर्चा से एक बूंद पानी भी उसके मटके में जाने वाला नहीं है क्योंकि आज आप पर यकीन कोई नहीं करता है। मैं आपसे कहना चाहता हूं कि, आपको खुश करने के लिए नहीं, सरकार के लिए नहीं, हिन्दुस्तान की सरकार को यह यकीन है कि जब तक हम सरकार में हैं, हम हर व्यक्ति की अकलियत की जान और माल की हिफ़ाजत करने की अपनी जिम्मेदारी समझते हैं और इसी जिम्मेदारी के साथ मैं कहना चाहता हूं कि इस तरह की राजनीति बंद होनी चाहिए।
                                           
SHRI PURNO A. SANGMA (TURA): Mr. Chairman, Sir, thank you very much for giving me this opportunity to speak on this Motion. I rise to support the Adjournment Motion.
Sir, I was trying to go through the proceedings of the House for the last few years and I found that this Parliament, rather this tenure of the NDA Government is a period where this House has discussed the communal situation in the country for the maximum number of times. Never before has this House discussed the communal situation in the country, on the floor of the House, as frequently as we are doing now. I think, the House will remember as to how many times we have discussed the situation in Gujarat. We discussed this during the last Budget Session as well as during the Monsoon Session. We should apply our mind to the fact as to why this is happening. The hon. Home Minister, in particular, should find out, why is it that the House has to spend so much time on discussing the communal situation in the country again and again without any results?
Sir, in fact, I was reluctant to participate in this debate because I find that we are wasting time by accusing each other and things are going on unabated in Gujarat. I think, the hon. Prime Minister and the hon. Home Minister should take a serious note of this.
It is not a fact that there has not been any communal riot situation or a communal problem before. Of course, there has been. But what happened in Gujarat has no parallel in the history. That is the most worrying factor. In the words of Justice Verma, Chairman of the National Human Rights Commission, "the communal carnage in Gujarat is nothing short of a war in terms of suffering and misery undergone by the affected." So, it is a very serious situation. Therefore, what I am personally worried is the manner in which it all happened. The shape the communal riots had taken in Gujarat is really a very worrying factor.
I do not want to waste the time of the House. I am concerned in three areas. Watching what is happening in Gujarat, I find that a communal divide appears to be the sole strategy to return to power by the BJP. That is a very dangerous thing. It is true that in spite of so many solemn assurances by various political parties on communal harmony that communalism will never be used during the time of elections - we all make promises - every political party does indulge in some sort of a religious sentiment. That we cannot deny. But what is happening in Gujarat today is that the election strategy of the BJP itself seems to be completely hinged on the communal divide. I think this is not good. Not only for Gujarat, this is very very dangerous for the future of India, for the unity and integrity of India, and more so for secularism in this country.
The second point that I would like to make is with regard to the kind of disrespect being shown for the institutions. The manner in which the Chief Minister of Gujarat is defying and castigating a Constitutional authority like the Election Commission is a very dangerous sign. Even the Supreme Court is being challenged by some Chief Ministers. I am not blaming a, b or c but the tendency to attack, to defy and to denigrate the Constitutional institutions is a very dangerous trend. After all, if a nation has to survive - I have spoken on the floor of this House on this issue once elaborately - we have to ensure that we uphold the systems that we have created in this country. Once you try to dilute a system, the question of good governance does not arise. So, for the purpose of good governance, we have to preserve, we have to strengthen our systems, and follow the systems that we have set. We cannot afford to deviate from that. We do have to uphold, respect and strengthen our institutions. So, I would appeal to all Constitutional authorities - whether it is Governors, whether it is Chief Ministers, whether it is Members of Parliament, whether it is bureaucracy – that the first duty of a responsible citizen of this country should be to respect our institutions.
The way Mr. Modi has gone out of the way to attack the Chief Election Commissioner, pains me very much. Mr. Lyngdoh comes from my State. I know him very well. It is very difficult to get an upright person like Mr. Lyngdoh who believes in sincerity and commitment. We from Meghalaya feel very very proud of this gentleman. He is so impartial; he is so committed to the Constitution and to his duties. To say that Mr. Lyngdoh is having a nexus with the Opposition leaders and with the Congress Party - I am sorry - is nothing but making wild, wild, wild allegations against the gentleman.
This is unfair. This is very very unfair. In fact, I personally feel and the people of Meghalaya feel that it is an insult to us, it is an insult to the tribal people, it is an insult to the people of Meghalaya; and it is an insult to the people of North-Eastern region. Please for God’s sake, do not do like that. It is not good, and I do not like it. I want to make it very very clear.
Besides upholding the institutions, to attack an individual who is a responsible citizen of this country is unfortunate. Please stop it.
After all, who is Mr. Modi? Constitutionally, he has no moral right to continue there. He has no moral right to continue as the Chief Minister. I do not know why the Home Minister has not imposed the President’s Rule; and why the Article 356 has not been invoked?
Again, I come to my first point that the communal divide is the main election strategy of the BJP in Gujarat, and to do that they find that Mr. Modi is the right person. Therefore, he is not being removed, and he is being allowed to continue.
Sir, with all my due respect, please do not think about winning one election. You may win five elections; you may lose two elections. Winning and getting defeated in elections does not matter. It does not matter at all. What is important is the future of India; what is important is the future of generations; what is important is the Constitution of India; what is important is the systems that we have established; what is more important is the Constitutional institutions that we have developed. We have the right to preserve all this. I appeal to the Government to keep all this in mind.
With these few words, I conclude.
श्रीमती रेनु कुमारी (खगड़िया) :महोदय, भगवान श्रीकृष्ण, महात्मा गांधी और सरदार पटेल जैसी महान हस्तियों वाले गुजरात को पता नहीं लोग क्यों बदनाम करने पर तुले हुए हैं। हम यह क्यों भूल जाते हैं कि गुजरात, द्वारका का श्रीकृष्ण, जिन्होंने कुरूक्षेत्र आकर कौरवों का संहार किया और पांडवों का राज स्थापित किया, सत्य, न्याय और अहिंसा का राज स्थापित किया, उन्हीं का यह देश गुजरात है। कंस जैसे आतताई को मारा। मैं कम ही शब्दों में कहना चाहूंगी कि महात्मा गांधी को पूरे विश्व में कौन नहीं जानता। बापू जी ने ऐसे अंग्रेजों से लोहा लिया, जिनका पूरे विश्व में कभी सूरज नहीं डूबता था और अपनी सत्ता को हासिल किया। ऐसे ही बापू का देश गुजरात है। सरदार पटेल ऐसे ही महापुरुष गुजरात के हुए, जिन्होंने भारत के छोटे-छोटे खंडों को जोड़ने का काम किया।
महोदय, गुजरात के मुख्य मंत्री, श्री नरेन्द्र मोदी जीरो थे, उन्हें विपक्ष और मीडिया वालों ने हीरो बनाने का काम किया। उन्होंने इतना नरेन्द्र मोदी-नरेन्द्र मोदी रटा है, इतनी हाय-तौबा मचाई कि पूरे विश्व के लोग उन्हें जानने लगे हैं और वे हीरो बन गए हैं। हमारे लिए यह सोचने का विषय है, हम हमेशा कहते हैं कि नरेन्द्र मोदी जी ने दंगे करवाए, लेकिन क्या हम लोगों ने कभी लोकसभा में यह चिंतन करने का काम किया है कि गोधरा की घटना क्यों घटी। वहां निर्दोष लोगों को आग में क्यों जलाया गया?अगर गोधरा की घटना न होती तो गुजरात में दंगे भी न होते, क्या यह किसी ने सोचने का काम किया है। लोग सिर्फ यह कहते हैं कि दंगे हुए, लेकिन गोधरा की घटना को अंजाम किस ने दिया, यह चर्चा नहीं होती। इस सदन में गुजरात पर कई बार चर्चा हो चुकी है और आज भी जो चर्चा का विषय रखा है, वह ऐसे ही है। इससे कुछ भी निकलने वाला नहीं है, इस चर्चा से किसी भी समस्या का समाधान नहीं होने वाला है।
सभापति महोदय, हमें यह भी सोचना पड़ेगा कि संसद पर हमला करने वाले कौन थे। लोकतंत्र के इस पवित्र मंदिर पर किसने हमला किया, जम्मू-कश्मीर विधान सभा पर किसने हमला किया, सोमनाथ को लूटने का काम किसने किया, अक्षरधाम पर हमला किसने किया, बाली जैसे द्वीप पर हमला किसने किया? इस संबंध में मैं तो यही कहना चाहूंगी कि हमलावर न तो हिंदू थे, न मुसलमान थे बल्कि ये आतंकवादी इंसानियत के दुश्मन थे जो हिंदू और मुसलमानों के बीच लड़ाई करवाना चाहते हैं। लेकिन विपक्ष के लोग इस बात को समझने के लिए तैयार नहीं है। वह तो गुजरात में कुछ होता है तो कह देते हैं कि नरेन्द्र मोदी का हाथ है। लेकिन मेरा कहना है कि आतंकवादी कार्यवाही जो भी हुई हैं वे देश के दुश्मनों ने की हैं। लेकिन हम लोक सभा में इस पर चर्चा नहीं करते हैं। जम्मू-कश्मीर के हिंदू जो आज दर-दर की ठोकरें खाने के लिए मजबूर हैं, जो रोजगार के लिए तरस रहे हैं उनके लिए रोजगार की कोई व्यवस्था नहीं है पुनर्वास की कोई सुचारू व्यवस्था नहीं है। लोक सभा में इस पर भी चर्चा होनी चाहिए थी। कांग्रेस ने जो स्थगन प्रस्ताव रखा है क्या उन्हें यह नहीं सोचना चाहिए था कि लोक सभा में इस पर चर्चा हो कि हिंदू-मुस्लिम-सिख-ईसाई सब मिलकर रहें, सब में भाई-चारा रहे। सारे मानव एक हैं और उनका हाड़-मांस-खून एक हैं। किसी का खून सफेद नहीं है, सबका लाल खून है। क्या इस पर चर्चा नहीं होनी चाहिए कि सभी धर्मों के बीच रोटी-बेटी का संबंध कैसे बनाकर रखें।
सभापति महोदय, ये लोग आग में घी डालने का काम करते हैं सद्भावना बनाने का काम नहीं करते हैं। हमें तो शक होता है कि बार-बार मुस्लिमों की तरफदारी करके ये क्या दिखाना चाहते हैं। क्या इन्हें अपने वोट बैंक के खिसकने का डर तो नहीं है। भाई शाहनवाज हुसैन ने ठीक ही कहा था कि इनका मुस्लिम वोट खिसकता जा रहा है। मेरा कहना है कि आज जो मुस्लिम भाई अशक्षित हैं, गरीब हैं उनके वोट बटोरने का काम ये करना चाहते हैं इसलिए उनका एक-तरफा पक्ष लेते हैं। एनडीए की सरकार ने मुस्लिम भाइयों के लिए जितना किया है पहले की किसी सरकार ने नहीं किया। हज-यात्रा के लिए मुस्लिम भाइयों के लिए जितनी सुविधाएं इस सरकार ने दी हैं किसी सरकार ने पहले नहीं दीं। एनडीए सरकार ने ही सबसे ज्यादा उनके लिए सुविधाएं और व्यवस्था की है। कांग्रेस वाले साम्प्रदायिकता का हौवा इसलिए खड़ा करते हैं क्योंकि अब ये सत्ता में नहीं हैं और वे सत्ता प्राप्ति के लिए ऐसा कर रहे हैं। केन्द्र में वे सत्ता में नहीं है इसलिए मुसलमानों को तोड़ने का काम कर रहे हैं जोड़ने का काम नहीं कर रहे हैं। मुसलमानों को न्याय दिलवाने के लिए नहीं बल्कि उनको विनाश के कगार पर खड़ा करने के लिए वे ऐसा कर रहे हैं। इसलिए मुसलमान भाइयों को इनसे सावधान रहना होगा।
लोक सभा में हम लोग आये थे कि यहां देश के विकास के लिए अच्छी-अच्छी बातें होती होंगी। चालीस साल से तो कांग्रेस का शासन था। बड़े-बड़े नीति-नियम देश के विकास के लिए उन्हें निर्धारित करने चाहिए थे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। आज हमारे देश में बेरोजगारी है, गरीबी है, इस पर चर्चा होनी चाहिए थी, महिलाओं के विकास के लिए चर्चा यहां क्यों नहीं होती है। चर्चा यहां होती है कि किस तरह से जाति-धर्म को लडाया जाए।
आज हमें सोचना होगा कि आतंकवाद कहां से आता है। यह पापी पेट के कारण होता है। तो भूख को मिटाने के लिए लोक सभा में चर्चा होनी चाहिए। यहां पर बड़े-बड़े दिग्गज नेता बैठे हुए हैं। वे इस पर क्यों नहीं सोचते हैं। वे सोचते हैं कि यह तो सरकार का काम है। वे यह नहीं सोचते हैं कि १०-१२ लाख लोग जो उन्हें चुनकर भेजते हैं उनके अच्छे भविष्य के लिए यहां चर्चा की जाए। उनकी समस्याओं बारे में, उनके सही निदान के बारे में, ये नहीं सोचते हैं।
लोक सभा में सार्थक बातों पर, सिद्धांतों पर, मूल्यों पर, विकास पर, जनसंख्या नियंत्रण पर, बाढ़ सुखाड़ और किसानों तथा नौजवानों के विकास पर चर्चा होनी चाहिए। इसके अलावा देश की एकता और अखंडता पर चर्चा होनी चाहिए। सत्ता के लिए, कुर्सी के लिए और वोट बैंक के लिए चर्चा नहीं होनी चाहिए। प्रधान मंत्री और मुख्यमंत्री बनने के लिए भी चर्चा नहीं होनी चाहिए। यदि केवल सत्ता छोड़ने से, कुर्सी छोड़ने से अमन, चैन बहाल हो जाए, उद्योग-धंधों को बढ़ावा मिले, बेरोजगारी दूर हो जाए और देश प्रदेश आर्थिक रूप से उन्नत हो जाए, लोगों को भूखा न मरना पड़े और बाप-भाई के सामने बहन-बेटी का बलात्कार न हो, भाई-भाई की हत्या न हो तो मैं कहना चाहूंगी कि सबसे पहले कांग्रेसियों को बिहार सरकार को समर्थन देना बंद करना चाहिए। वह बिहार में ऐसे लोगों को समर्थन दे रहे हैं जहां रोज व्यवसायी लोगों का अपहरण और हत्या होती है। घर के सामने, भाई और बाप के सामने बेटी, बहन का बलात्कार होता है, भाई की हत्या होती है। क्या आपको ऐसी खबरें नहीं मिलती हैं? क्या इनकी आंख नहीं खुलती है? शाहनवाज जी ने ठीक कहा कि इनकी नजर खराब हो गई है और इन्हें नजर की जांच करानी चाहिए। शाहनवाज जी ने भागलपुर के दंगों की बात उठायी। वह एक बात कहना भूल गए। भागलपुर के दंगाइयों को लाल बत्ती वाली गाड़ी देकर सम्मानित किया गया था। क्या आप ऐसे लोगों को समर्थन देना चाहेंगे? क्या ये लोग मुसलमानों की रक्षा की बात करेंगे? आज बिहार में सत्ता के लिए जो कुछ हो रहा है, क्या इन को उस पर ध्यान नहीं देना चाहिए? इन सब बातों पर ध्यान देना चाहिए। वोट बैंक की खातिर, कुर्सी की खातिर ये सब करना पसन्द नहीं करते हैं।
लोक सभा में हिन्दू, मुसलमान, सिख और क्रिश्चियन लोगों के कल्याण की बातों पर चर्चा होनी चाहिए। यहां आपस में बेटी रोटी करने के लिए, नाते रिश्तेदारी करने के लिए चर्चा होनी चाहिए। यह तभी होगा जब धर्म और मजहब से ऊपर उठ कर विकास की बात होगी, सब के लिए समान कानून बनेंगे, सब के लिए समान शिक्षा होगी। आज अमेरिका और दूसरे देश इसलिए विकसित हैं क्योंकि वहां कोई धर्म नहीं, कोई जाति नहीं है। सभी लोग जाति और मजहब से ऊपर उठ कर बात करते हैं और आर्थिक विकास तथा कल्याण की बात सोचते हैं। चुनावों का मुद्दा, गौरव का मुद्दा देश के विकास के लिए होना चाहिए, न कि जाति, धर्म के विकास के लिए होना चाहिए। प्रजातंत्र में किसी पर छींटाकशी नहीं होनी चाहिए। राम, कृष्ण, बुद्ध और गांधी की पवित्र धरती पर नैतिकता और मर्यादा का पालन होना चाहिए। यहां महिलाओं को सम्मान मिलना चाहिए। महिलाओं पर किसी की छींटाकशी नहीं होनी चाहिए। जातपात और धर्म से ऊपर उठ कर सब लोगों को एक ऐसे राष्ट्र का निर्माण करना चाहिए जहां न कोई हिन्दू बनेगा, न मुसलमान बनेगा, इंसान की औलाद है, इंसान बनेगा। इन्सान बन कर भारत के स्वर्ण युग को लौटाया जा सकता है। भारत कभी सोने की चड़िया था, उस सोने की चड़िया को लौटाया जा सकता है। जिन्होंने यह स्थगन प्रस्ताव दिया है, वे नरेन्द्र मोदी जी को विश्व प्रसिद्ध नेता न बना दें, उन्हें हीरो न बना दें, उन्हें अपनी औकात में रहने दें। आप लोग इतनी हाय तोबा न मचाएं। जो कोई अच्छा काम करेगा वह सत्ता में आएगा। वह सत्ता से क्यों हटे? यदि आपने अच्छा काम नहीं किया तो आप अवश्य सत्ता से हटेंगे। जो भी अच्छा काम नहीं करेगा वह निश्चित रूप से सत्ता से हटेगा। जाति और धर्म की आड़ लेकर खून खराबा न फैले, इस बात को ध्यान में रखा जाए। अंत में मैं इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए अपनी बात समाप्त करती हूं।
डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह (वैशाली): सभापति महोदय, आज काम रोको प्रस्ताव पर बहस हो रही है। जब सरकार जवाबदेह होते हुए घोर विफल हो तो उस पर बहस करने के लिए आसन से मंजूरी मिलती है। आज प्रश्न काल से हम सब लोगों में यह भावना थी कि आज शोर-शराबा होगा और सदन नहीं चलेगा। हम बार-बार यह कहते हैं कि सदन चलाना सरकार की जिम्मेदारी है। सरकार चाहेगी तो सदन ठीक चलेगा और सरकार नहीं चाहेगी तो सदन नहीं चलेगा। आज इसका प्रमाण मिल गया। हम लोगों ने एडजर्नमैंट मोशन दिया। सरकार ने उस पर बहस स्वीकार कर ली। इसलिए सदन शांतिपूर्वक चल रहा है।

16.00 hrs. आज भांडा फूट गया और यह मिथक समाप्त हो गया कि विपक्ष के लोग हाउस नहीं चलने देते। जब गुजरात में आर.एस..एस. शाखा लगाने की बात को इस सदन में उठाया गया कि गुजरात सरकार ने इसकी इजाजत क्यों दी, तब आठ दिन सदन की कार्यवाही बाधित हुई लेकिन जब सरकार ने आदेश वापस ले लिया तो सदन की कार्यवाही ठीक से चलने लगी। इसलिये सरकार ठीक चले, देश भी ठीक से चले और सदन की कार्यवाही भी ठीक से चले, यह सरकार पर निर्भर करता है। हम लोग तो जनता के सवाल उठाते हैं। आज सरकार की विफलता पर बहस हो रही है। जब कश्मीर में चुनाव की बात आई तो दुनिया की नजरे हिन्दुस्तान पर लगी हुई थी कि बाहर से कोई पर्यवेक्षक आयेगा। वे लोग यह दुष्प्रचार कर रहे थे कि भारत के लिये लोकतंत्र ठीक नहीं क्योंकि आतंकवादी भारत की इम्मेज खराब करने पर तुले हुये हैं। इसलिये हम लोग दावा कर रहे थे कि चुनाव आयोग ठीक से चुनाव कराते हैं और वे करा रहे हैं। उस समय स्वार्थ में आकार भाजपा, उनके नेताओं और मंत्रियों ने चुनाव आयोग पर हमला करके अवैधानिक, असंवैधानिक और अमर्यादित टिप्पणी की। लगभग उसी समय विश्व की नजरें कश्मीर के अलावा गुजरात पर लगी हुई थीं। मैं देख रहा हूं कि इन लोगों का आचरण दोहरा हो रहा है। जिस समय गुजरात की घटनाओं के लिये लोग निन्दा कर रहे थे, उस समय प्रधानमंत्री और श्री आडवाणी ब्रिटेन में गुजरात की घटनाओं के लिये माफी मांग रहे हैं और गुजरात के मुख्यमंत्री श्री मोदी को सर्टफिकेट देते हैं। यहां श्रीमती भावना चीखलिया भीषण देते हुये कहती हैं कि बड़े अफसोस की बात है कि इस विषय पर एक बार फिर से चर्चा हो रही है। मैंने उनके भाषण को ध्यान से सुना। हालांकि मैं फिल्में कम देखता हूं लेकिन फिल्म की एक पंक्ति मुझे याद है: ‘मुझको बरबादी का कोई गम नहीं, गम है बरबादी पे क्यों चर्चा हुआ।’ सभापति जी, गुजरात में जो कलंकित घटनायें हुई, हिंसा हुई, लोग मारे गये, उससे विश्व की नजरों में भीरत की छवि खराब हुई है। हमारा देश अमन-चैन और शान्तिप्रिय देश है जिसका हम लोग दावा करते हैं लेकिन उस घटित घटना के लिये हिन्दुस्तान के माथे पर लगे कलंक के टीका को खुद प्रधान मंत्री जी और श्री आडवाणी जी ने स्वीकार किया। ये श्री नरेन्द्र मोदी को सर्टफिकेट देते चले जा रहे हैं । एक तरफ घटना की निन्दा करते हैं कि अगर गोधरा कांड नहीं होता तो गुजरात में और मार-पीट नहीं होती। यह सबसे बड़ी कम्युनल भाषा है। लेकिन मैं इस बात को दावे के साथ कहूंगा कि अगर राज्य में श्री मोदी और केन्द्र में श्री आडवाणी नहीं होते तो यह घटना नहीं होती, गुजरात में दंगा नहीं होता। यह किसकी विफलता है? पाकिस्तान, आतंकवाद और अक्षरधाम की विफलता है जो सरकार पर आती है। इस सरकार में केन्द्र में होम मनिस्टर कौन है, गुजरात में काम चलाऊ मुख्यमंत्री कौन है और केन्द्र में प्रधानमंत्री श्री वाजपेयी हैं फिर भी अक्षरधाम हो गय़ा। क्या अक्षरधाम के नाम पर इन लोगों को वोट डाल दिये जायेंगे? यह एक खतरनाक साजिश हो रही है। इसमें सरकार की विफलता है। इनके खुफिया विभाग, इनका प्रशासन और सीमा पर आतंकवाद रोकने में विफलता है जिससे घर में दुश्मन घुस गया। इसके लिये कौन जिम्मेदार है? आई.एस.आई. को रोकने की जिम्मेदारी किस पर है, आडवाणी जी पर है। मैं नहीं जानता श्री आडवाणी का क्या मापदंड है कि कितने लोग मारे जायेंगे, कितना आतंकवाद होगा, कितने देश में घुसेंगे, यह देखना चाहिये। हां, उनका प्रमोशन हो रहा है, वे उप प्रधान मंत्री जरूर हो गये हैं, उनका तो डिमोशन होना चाहिये। यदि कोई अफसर इनकी जगह होता जिसके राज्य में इतनी हिंसा हुई होती, इतनी साम्प्रदायिक घटनायें हुई होती या इतनी आतंकवादी कार्यवाहियां हुई होती तो उस अफसर को बर्खास्त कर देते लेकिन इनका तो प्रमोशन हो रहा है।

इसलिए हम सारी जिम्मेदारी केन्द्र सरकार पर डालते हैं, क्योंकि यह दंगाइयों को पाल-पोसकर कायम रखे हुए हैं। विश्व हिन्दू परिषद क्या वोटों से चुना गया है। विश्व हिन्दू परिषद कौन है। इसने अपना नाम हिन्दुओं की परिषद रख लिया और वह तरह-तरह के बयान करती रहती है। यह चुनाव आयोग पर अनाप-शनाप, अनर्गल टीका-टिप्पणी करती है। आयोग एक कांस्टीटयूशनल बॉडी है, इन्हें मर्यादा में रहना चाहिए। आप पोटो कानून बना रहे थे, उस वक्त हम लोगों ने उसकी खिलाफत की थी। आपने पोटो कानून किसलिए बनाया। उसमें आपने कौन से आतंकवादियों को गिरफ्तार किया है। दंगा फैलाने वाले आतंकवादियों से कम खतरनाक नहीं है। आप इन्हें क्यों गिरफ्तार नहीं करते हैं। तोगड़िया, धर्मेन्द्र आदि वभिन्न नाम इन लोगों ने रखे हुए हैं। इन लोगों को आप एक तरफ तरजीह दे देते हैं और दूसरी तरफ नकली कार्रवाई हुई, उनकी गिरफ्तारी हुई और फिर उन्हें तुरंत छोड़ दिया गया। इस तरह से दंगें रोकने में सरकार की विफलता रही है। क्या आज भी वहां पर दंगे नहीं हो रहे हैं। गुजरात में बराबर दो-चार दिन में कुछ हत्याएं हो जाती हैं, दंगों की घटनाएं अब भी वहां हो रही है।

सभापति महोदय, वहां लोग मारे जा रहे हैं और दूसरी तरफ गौरव यात्रा हो रही है। गुजरात की हिंसक घटनाओं से हिंदुस्तान के माथे पर कलंक लगा और इनका गौरव बढ़ गया। ये गौरव यात्रा निकाल रहे हैं। यहां से बयान दे देते हैं कि गौरव यात्रा रोकी जाए और वहां यात्रा निकाली जा रही है। इनका दोहरा चरित्र, दोहरा चेहरा, और दोहरा मापदंड है। एक तरफ उन्हें उकसा देते हैं कि करो और दूसरी तरफ रोकने का बयान दे देते हैं। ये सहयोगी दलों से समर्थन लेने के लिए और राज में बने रहने के लिए कहते हैं कि हम उनके बयान से असहमत हैं और हम उनके व्यू को समर्थन नहीं देते हैं। गुजरात को ये लोग प्रयोगशाला कहते हैं। वहां ये दंगा कार्ड, कम्युनल कार्ड खेलकर देश भर में दंगे फैलाने वाले हैं।

सभापति महोदय, ज्यादा दिनों की बात नहीं है, उत्तर प्रदेश में भी ऐसा ही चुनाव होने वाला था। चुनाव के तीन-चार दिन पहले इन्होंने वहां रख दिया कि शिलादान होगा, मंदिर बनेगा। उसमें सारे दंगाई वभिन्न नामों से लग गये। लगे-लगे वहां क्या हाल हुआ, यह देख रहे हैं। हिंदुस्तान इन दंगाइयों को बर्दाश्त करने वाला नहीं है। किसी खास कारण से आप राज में बने हुए हैं और वहां भी राज में बने हुए हैं। यह आपको भी समझ में आता है कि आप सारी बातों में विफल हो गये हैं। अब आपका कोई सहारा नहीं है। आप वहां दंगा कार्ड चला रहे हैं और असली ताश आप अंत में खोलेंगे। गुजरात में साजिश करके आप कम्युनल लाइन चला रहे हैं। गुजरात में त्यागपत्र करके विधान सभा भंग करने की क्या जरूरत पड़ गई थी। क्या इसका कोई जवाब दे सकता है। इसका कोई जवाब नहीं है। सिवाय इसके कि अभी लोगों में खलबली है, अभी वहां कम्युनल लाइन पर लोगों को विभाजित करके वोट ले लिये जाएं। इसके अलावा आपका दूसरा क्या स्वार्थ हो सकता है। क्या आपके पास इस बात का कोई जवाब है। गुजरात में विधान सभा भंग करके केयरटेकर बने रहकर समय से पहले चुनाव कराने की आपकी क्या मजबूरी थी। सिवाय इसके कि कहीं वहां दंगों का वातावरण शांत न हो जाए। कहीं वहां सेक्युलरिज्म का वातावरण न बन जाए और हम वोटों से वंचित हो जाएं। इसलिए कम्युनल लाइन पर दंगाइयों को आगे बढ़ाकर वहां वोट ले लिये जाएं और वहां से चुनाव जीतकर फिर से अपना राज बना लिया जाए। इसका आपके पास यदि कोई जवाब है तो बताइये।

सभापति महोदय, वहां आतंकवादी कार्रवाइयां हो रही हैं। पाकिस्तान आई.एस.आई. के द्वारा वहां आतंकवादी कारर्वाइयां करा रहा है। इन सबको कौऩ ठीक करेगा। इन्हें आप ठीक करेंगे। यहां जो गृह मंत्री जी बैठे हैं इन्हें आपको ही ठीक करना है। देश में आतंकवादी न आयें, आई.एस.आई. की गतवधियां न चलें। सीमा के अंदर दुश्मन कैसे प्रवेश कर जाते हैं।

आतंकवादी कैसे अक्षरधाम में प्रवेश कर गए? गोधरा कांड हो गया तो गुजरात में दंगा हो गया। एक बार लोग कह देते हैं कि अक्षरधाम हो गया तो वोट इनको दे दो। बार-बार एक छल और प्रपंच नहीं चलने वाला है। लोग जानते हैं और गुजरात की महिमा का लोगों ने गान किया है। महात्मा गांधी का संदेश - साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल, यह गौरव है गुजरात का। सरदार वल्लभभाई पटेल और वहां के महान लोग जो आज़ादी की लड़ाई से लेकर अभी तक, जो पौराणिक काल से अभी तक आदर्श थे, अब इनके आदर्श कौन हो रहे हैं जो मार-काट कराने वाले लोग हैं। इसलिए आप विफल हो रहे हैं, लेकिन यह विफल नहीं, खराब काम करने में सहयोगी हैं। इन्होंने सर्टफिकेट दे दिया। एक तरफ माफी मांग रहे हैं, माथे पर कलंक कह रहे हैं और दूसरी तरफ सर्टफिकेट दे दिया कि नरेन्द्र मोदी बड़ा ठीक चीफ मनिस्टर है और आगे भी यही रहेगा। क्या दोहरा चरित्र है? क्या छल है क्या धोखा है? कहीं पर निगाहें, कहीं पर निशाना। सहयोगी दलों को ठगने के लिए कलंक कह रहे हैं और दूसरी तरफ मुख्य मंत्री को तरजीह दे रहे हैं, सर्टफिकेट दे रहे हैं कि वे सही हैं। इसलिए जो एडजर्नमेंट मोशन है यह निन्दा प्रस्ताव के बराबर है इसको स्वीकार किया गया है चर्चा के लिए और इस पर वोट भी होगा। इसलिए ऐसे मौके पर जो सही मायने में सैक्यूलर लोग हैं वरना चाटुकारिता के लिए तो लोग हैं ही कि विकल्प नहीं है इसलिए लाल बत्ती और सत्ता के धोखे में सहयोगी लोग पड़े हुए हैं। सैक्यूलर भी रहना चाहते हैं और चाटुकारिता भी करना चाहते हैं, इसलिए सारी गड़बड़ हो रही है। देश को बचाने के लिए इस एडजर्नमेंट मोशन को पास करना चाहिए। सदन से मेरी प्रार्थना है कि निन्दा प्रस्ताव पास हो और गृह मंत्री आडवाणी जी त्यागपत्र दें क्योंकि यह सभी जगह विफल रहे हैं, उल्टे इनकी प्रमोशन हो रही है, यह ठीक नहीं है। प्रधान मंत्री जी भी दिखाना चाहते हैं कि उदारवादी हैं, लेकिन भीतर से वह मुख्य मंत्री को तरजीह दे रहे हैं, सब भेद खुल गया है, जनता के सामने ये बातें आ रही हैं। इसीलिए दंगाइयों को सत्ता से भगाना है, देश को बचाना है, इसी आहवान के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूँ।

श्री नवल किशोर राय (सीतामढ़ी): सभापति महोदय, मैं आपका धन्यवाद करता हूँ कि आपने मुझे इस कार्य-स्थगन प्रस्ताव पर बोलने का अवसर दिया।

अभी माननीय सदस्य आदरणीय रघुवंश बाबू बोल रहे थे। कार्य स्थगन प्रस्ताव के बारे में उन्होंने प्रारंभ किया। लोक सभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमावली की पुस्तक हमारे हाथ में है। यह कार्य स्थगन प्रस्ताव नियम ५६ के तहत आया है और नियम ५६ के बाद नियम ५८ में जो निबर्ंधन है, व्याख्या की गई है, उसके तीसरे नंबर में लिखा है कि ‘प्रस्ताव हाल ही में घटित किसी वशिष्ट विषय जिसकी जिम्मेदारी भारत सरकार की हो, तक सीमित रहेगा।’ मैं इसको उद्धृत करते हुए आपके समक्ष यह कहना चाहता हूँ कि जो अभी वहां पर विश्व हिन्दू परिषद् के द्वारा धर्म यात्रा की व्यवस्था की गई थी, उस धर्म यात्रा के बारे में संवैधानिक संस्था चुनाव आयोग ने कहा कि उसको रोका जाए और देश के माननीय प्रधान मंत्री, माननीय उप प्रधान मंत्री जी को मैं धन्यवाद देना चाहता हूँ कि संवैधानिक संस्था की रक्षा के लिए, संविधान की रक्षा के लिए, कानून का पालन करने के लिए उन्होंने निर्देशित किया और गुजरात की सरकार ने उस यात्रा पर प्रतिबंध लगाया और यात्रा पर निकलने वाले जो यात्री थे, उन्हें गिरफ्तार करके उसको रोकने का काम किया। इसलिए इस नियम पुस्तक को उद्धृत करते हुए मैं इस प्रस्ताव के बारे में कहना चाहता हूँ कि यह प्रस्ताव पास नहीं होना चाहिए। इस प्रस्ताव का मैं विरोध करता हूँ। यह कार्य संचालन नियमावली के नियम ५६ और ५८ के विपरीत है, यह मैं आपके सामने रखना चाहता हूँ।

SHRI RASHID ALVI (AMROHA): Mr. Chairman, Sir, I am on a point of order. There is no quorum in the House.

MR. CHAIRMAN : The bell is being rung— Now there is a quorum. The hon. Member, Shri Nawal Kishore Rai may continue.

श्री नवल किशोर राय: सभापति महोदय, मैं अर्ज कर रहा था कि नियम ५६ के मुताबिक कार्य स्थगन के प्रस्ताव आते हैं और नियम ५८ में उसकी व्याख्या है कि कार्य स्थगन प्रस्ताव कैसे जायज होगा। जिसकी चर्चा हमने की है कि प्रस्ताव हाल ही में घटित हो।

सभापति महोदय : आपको इस विषय पर जो बोलना है, वह बोलिये क्योंकि स्पीकर साहब की तरफ से यह नियम ५६ के अन्तर्गत नियमन हो चुका है इसलिए सदन में कार्य स्थगन का प्रस्ताव नियमित माना गया है। आप इसे री-ओपन न करके अपनी बात करें।

श्री नवल किशोर राय: नियमों के हवाले से माननीय सदस्य ने चर्चा की थी, उसी आधार पर हमने इसे यहां मैंशन करना उचित समझा। मैंने सरकार को धन्यवाद देने के लिए इसे यहां उद्धृत किया है। इस चर्चा में भाग लेते हुए सरकार ने जो तत्काल घटित घटना है, उस घटना को रोका और नियमों का पालन कराया इसलिए मैं प्रधान मंत्री जी और उप प्रधान मंत्री जी को धन्यवाद देता हूं। मैं आपके माध्यम से इस विषय पर यह मैंशन करना चाहता हूं कि जो भी संस्था या संगठन देश में संवैधानिक संस्थाओं पर हमला करती हो, चाहे विश्व हिन्दू परिषद हो, जमाते इस्लाम हो या सिमी हो, उनकी जितनी भी निंदा की जाये, वह कम होगी। आज के दिन जो चर्चा यहां हुई है या बाहर भी हुई है कि संवैधानिक संस्थाओं पर कोई कुछ भी बोल दे तो इससे संवैधानिक संस्थाओं का महत्व गिरता जा रहा है, डेमोक्रेटिक संस्थाओं का ह्रस होता जा रहा है। यहां पर उप प्रधान मंत्री जी बैठे हैं, मैं उनसे अनुरोध करना चाहता हूं कि इसके लिए चाहे कोई भी पक्ष जिम्मेदार हो, चाहे कितनी भी हस्ती हो, चाहे संवैधानिक संस्थाएं यह कहती हों कि चुनाव आयोग के आदेशों के बारे में तरह-तरह के गलत आरोप लगते हों, चाहे सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बारे में कोई भी संस्था यह कहती हो कि यह भावना का सवाल है इसलिए हम इसे नहीं मानते हैं तो यह बात ठीक नहीं है।

उधर से प्रिय दा तथा अन्य लोग भी बोल रहे थे । हम इसे भी जायज नहीं ठहरा सकते कि जब सिमी पर प्रतिबंध लगाने की बात होती है तो कुछ नेता सिमी के पक्ष में खड़े होते हैं जो कि उग्रवाद को बढ़ाने की कार्यवाही होती है। जब पोखरण का प्रयोग देश की ओर से होता है तो कुछ नेता, मैं किसी का नाम लेकर आरोप नहीं लगाना चाहता, पाकिस्तान को डालर में मुआवजा देने के बयान दे देते हैं।

हम यह भी कहना चाहते हैं कि संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाना और संविधान को न मानने की कार्यवाही - चाहे कोई भी पक्ष करता हो, चाहे विश्व हिन्दू परिषद के बयानात से यहां उद्धृत हो रहे हों, चाहे उत्तर प्रदेश के महामहिम गवर्नर पर कोई आदमी खुलेआम आरोप लगाते हो या बिहार से बैठे हुए गुजरात के राज्यपाल सुंदर सिंह भंडारी जी पर कोई लांछन लगाते हों, सब एक समान हैं। चाहे इस प्रकार के लोग संवैधानिक संस्थाओं पर चोट करे, चाहे उस पक्ष के लोग संवैधानिक संस्थाओं पर चोट करें, यदि इस सदन में हम बोलने के लिए खड़े होते हैं, इस पक्ष से कोई बात है तो उसे उद्धृत करते हैं और दूसरी तरफ की बात को हम ढकने का काम करते हैं तो यहीं पर परिस्थितियां बिगड़ती हैं। भूख, भ्रष्टाचार और इन सवालों पर यहां चर्चा नहीं हो पाती या एकपक्षीय चर्चा होकर रह जाती है। हम इसकी आलोचना करते हैं। सभापति महोदय, आपके माध्यम से गृह मंत्री जी से हम कहना चाहते हैं, चाहे वह कोई भी ताकत हो, जो गवर्नर पर हमला करे, जो चुनाव आयोग के मुख्य आयुक्त पर हमला करे, जो सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को मानने से इंकार करे, चाहे कितनी भी बड़ी ताकत हो, चाहे किसी से जुड़ा हुआ वह संगठन हो, उस पर निश्चित कार्यवाही होनी चाहिए, सामयिक होनी चाहिए, सब पर समान कार्यवाही होनी चाहिए।

हमारे वरिष्ठ नेता, आंदोलन के नेता, वंशवाद के खिलाफ जब हम लोग आंदोलन में थे तो बिहार में डा. रघुवंश प्रसाद सिंह अगुवाई कर रहे थे। हमने अभी उनका भाषण भी सुना। तीन-चार दिन पहले अखबारों में भी उनका भाषण आया है। उनका अखबार में भाषण आया, इस सदन के भाषण के कभी मेल नहीं खाता। आडवाणी साहब के बारे में इनका कहना था, मैं कहना चाहता हूं कि आडवाणी जी पर हवाला का आरोप लगा था तो उन्होंने सदस्यता भी छोड़ दी थी। जब न्यायालय ने उनको बरी कर दिया तब वे चुनाव जीत कर आए और अब उप-प्रधान मंत्री हैं। रघुवंश बाबू इस सदन में जिस पार्टी के नेता हैं, मैं उनका बहुत सम्मान करता हूं। उनकी पार्टी के अध्यक्ष को जब चार्जशीट हो गई थी तो उन्होंने लोकतंत्र की पद्धति को नहीं अपनाया, अपनी पत्नी को मुख्य मंत्री बनाया। सभापति महोदय, आप नजदीक से जानते हैं। मैं कहना चाहता हूं कि उन्हें भी अपने नेता को उसी प्रकार सलाह देनी चाहिए, दोमुखी बात नहीं करनी चाहिए। वे केवल एक तरफ आरोप लगाते हैं तो उसे जायज नहीं ठहराया जा सकता, दोनों पक्ष पर आरोप लगाना चाहिए। जहां तक दंगों का प्रश्न है, कांग्रेस पार्टी के नेता आदरणीय प्रियरंजन दास मुंशी बहुत गंभीरता से बोल रहे थे। उन्होंने हमें समझाने की चेष्ठा की है। कांग्रेस के राज में भागलपुर में दंगे हुए। उन्होंने उद्धृत किया, इसलिए मैं कहना चाहता हूं। राजीव जी वहां गए थे, मैं उनका भी सम्मान करता हूं। उसके बाद एस.पी. के तबादले को रोका गया और तीन महीने तक दंगा जारी रहा। उस समय के बिहार के मुख्य मंत्री भागलपुर जाने की हिम्मत छ: महीने तक नहीं कर सके। उसके बाद वहां सरकार बदल गई। आज बिहार में जो सरकार चल रही है, वह श्री दासमुंशी जी के सहयोग से चल रही है। मैं आपके माध्यम से दासमुंशी जी से पूछना चाहता हूं कि क्या भागलपुर के दंगों की जांच रिपोर्ट प्रकाशित हुई। क्या उस दंगे में शामिल लोगों का दस साल की अवधि में कुछ हुआ? मैं उनको याद दिलाना चाहता हूं कि पहले अपने गिरहबान में झांकना चाहिए तब आगे बात करनी चाहिए।

मैंने श्री राष्ट्रपाल का भाषण भी बड़े गौर से सुना। वे नर्मदा और सरदार सरोवर बांध की चर्चा कर रहे थे। उन्होंने नर्मदा बांध की ९३ फीट की लंबाई में से ८० फीट की लंबाई को कांग्रेस के खाते में रख लिया और १३ फीट भाजपा के खाते में दी। मैं कांग्रेस पार्टी और राष्ट्रपाल जी को सलाह देना चाहता हूं कि ५५ साल में से ४७ साल उन्होंने शासन किया। गुजरात के दंगों को भी वे उसी प्रकार बांट लें, विकास को भी बांट लें, वहां हुए कत्लेआम को भी बांट लें, तब आप न्याय कर पाएंगे, केवल एक बार ९३ फीट की लंबाई को यदि दो भागों में बांटते हैं तो वह उचित नहीं है। अपनी कविता में उनका यह इशारा था कि एक मुसलमान को जला दिया गया। मैं आपको याद दिलाना चाहता हूं कि उनके सहयोग से बिहार में जो सरकार चल रही है, १९९८ में पुलिस की गोली से पांच लोग वहां मारे गए थे। मुनीस बगास पुलिस की गोली से मारी गई थी और उसे सरेआम डंके की चोट पर जला दिया गया।

उस पर आज तक कोई बोलने वाला नहीं है। आपको स्मरण होगा, आपने भी उस पर आन्दोलन किया था, आपने भी उस पर यात्रा की थी। मैं सिर्फ उनकी जानकारी के लिए कहना चाहता हूं कि इस सदन से, विजय चौक से और टी.वी. से गुजरात का चुनाव न भारतीय जनता पार्टी लड़े और न कांग्रेस पार्टी लड़े तो गुजरात की जनता के साथ बड़ा भारी न्याय होगा।

इस सदन में पांचवीं बार गुजरात के बारे में चर्चा हो रही है। बिहार, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और उड़ीसा, पांच राज्यों में भूख से मौतें हुई हैं, उसे आप नजरअंदाज करते हैं तो यह जनता के साथ न्याय नहीं है। मैं आपके माध्यम से कहना चाहता हूं और महसूस करता हूं कि चाहे यह पक्ष हो या वह पक्ष हो, गुजरात का चुनाव कोई भी संसद के माध्यम से, विजय चौक से या टी.वी. से लड़ना चाहेगा तो यह अच्छी बात नहीं होगी और इतिहास इसके लिए हमें कभी माफ नहीं करेगा।

इसलिए इस एडजर्नमेंट मोशन का मैं विरोध करता हूं और अपनी बात समाप्त करता हूं।

SHRI E. AHAMED (MANJERI): Thank you very much, Mr. Chairman. I stand here to express deep sense of anguish and anger on the lethargic, casual and insensitive attitude of the Government of India on what happened in Gujarat in all these days.

May I say that after Independence, there were a number of communal violence and the minority community has to suffer a lot? That is all on record. But I do not think that what happened in Gujarat in recent times will have any parallel not only in the annals of India but even in the history of other countries that how a minority community has been persecuted and made their life very difficult in a State which is being run under the Constitution of this country. I say that minorities in Gujarat have been attacked physically, mentally and emotionally. The minorities feel it was all with the connivance of the Government of India. The Government of India has not done justice to the minorities as it ought to have done under the Constitution.

Sir, there is a Chief Minister. That Chief Minister is ruling the State without a Legislative Assembly. Is it not a new phenomenon in the Indian democracy? Even following the letter of the Constitution, the spirit of the Constitution has been trampled with in Gujarat. The Chief Minister has accused, abused and insulted a particular section of the people, a community. हम पांच, हमारे पच्चीस।What is that? Who is saying that? A Chief Minister in a State about the people who are being ruled over there, by him. But there is not a single word from the Government of India, not even words of sympathy from the Government. Are the minorities not the citizens of this country? Have they not been entitled to have constitutional protection? Have they not been given the assurance as well as the support of the Government of India? It was not there. What happened?

I would just like to mention this. After the attack on our Parliament by the terrorists, the Atal Bihari Vajpayee Government has waged a diplomatic war. Even without fighting a war, Indian diplomacy has won a war. But after the Gujarat incidents, the Indian diplomacy has fought a war to save the fair image of India. But they have miserably failed and defeated. In the international community what is the name of India? How much our image has been tarnished, particularly among the Islamic world? It is because a particular community has been targeted? Its religion has been insulted. Its holy book has not only been desecrated, but has been subjected to foul words.

Not even a single man belonging to Vishwa Hindu Parishad or Bajrang Dal or parties like that has been punished. When they abused the Holy Prophet of Islam, the Islamic holy book of Quran and the Muslim community, not even a single person has been apprehended. On the other hand, I am not supporting the ideologies of SIMI, not only I am opposing them but also all extremism. Why have they been banned? They have been banned for only shouting a slogan. When the people, who have the support from the Government of India and the ruling party, publicly denigrated, insulted and abused the Muslim community, their religion, their holy book and their Holy Prophet, did the Government take any action? This is where I express my anguish and anger.

Sir, I met Shri Narendra Modi on the 5th March night. I said to him: "Mr. Chief Minister, in the Civil Hospital, there are 226 dead bodies. Out of which, only 100 dead bodies have been identified and the rest 126 dead bodies have not been identified so far." What did he say to me? He said: "Do you think all these are Muslims?" I said: "Mr. Chief Minister, I did not mention Muslim or Hindu, I mentioned dead bodies." I also said: "Mr. Chief Minister, you gave a sum of Rs. two lakhs to the families of those who were killed in the Godhra incident but you gave Rs. one lakh to the families of those who were killed in the communal riots in Gujarat." He said: "That is a terrorist attack and this is a communal riot." Why do you divide the people on the basis of religion? Is it not against our Constitution? Once you divide the people, you are creating a divide in the very heart of the people. It is very much against the spirit of this country.

Sir, Gujarat is a part of India. They have a history of peaceful life, dignified life but Shri Narendra Modi wanted the entire India to be a part of Gujarat. That is the philosophy he is following with the support of the Government of India, with the benign support of the Government of India.

Mr. Chairman, Sir, I do not want to take much time of the House. I know that there is a paucity of time. So, I cannot express all my sentiments and all my feelings but I would like to tell you one thing. Even after the Independence, the people belonging to Jan Sangh and the people of that thinking tried everything to communalise but the people of this country defeated them. Therefore, whatever happened in Gujarat, the people of Gujarat will rise as the people, who will champion the cause of democracy, communal harmony and peace in this country. I hope, they will show it in their polls.

Whatever that is said about Shri Lyngdoh and the Election Commission is really an insult not only to the people of India but also to the people in the Government itself. Speaking against the constitutional authority goes against the Constitution. Shri Narendra Modi is ruling Gujarat without the Legislative Assembly and he is criticising the Election Commission. This is very sorry. Please stop this.

डा. वल्लभभाई कथीरिया (राजकोट) : सभापति महोदय, मैं आज इस स्थगन प्रस्ताव के विरोध में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं। विडम्बना यह है कि आज ही गुजरात में चुनाव के लिए सही मायने में प्रक्रिया शुरू हुई है और फार्म भरने का पहला दिन है, उसी समय यहां पर पांचवी बार गुजरात पर चर्चा हो रही है। मुझे पता नहीं चलता कि बार-बार क्यों गुजरात और गुजरात पर ही चर्चा होती है। श्री दासमुंशी जी ने भी कहा और अन्य साथियों ने भी कहा कि गुजरात कृष्ण का गुजरात है, महात्मा गांधी का गुजरात है, सरदार पटेल का गुजरात है। गुजरात की जनता शांति चाहती है, क्योंकि वह शांति प्रिय है। पूरे विश्व में जहां भी आप देखें, आपको गुजरात के लोग मिल जाएंगे, चाहे व्यापार में हों या अन्य किसी रोजगार में हों। अमेरिका में होटल और मोटल अधिकतर गुजरातियों के हैं। पूरी दुनिया में गुजराती प्रजा शांति से रहती है।

16.35 hrs (Shri P.H. Pandian in the Chair) लेकिन गुजरात पर आज बार-बार आरोप लगाया जा रहा है। मैं कहूंगा कि गुजरात के बारे में जो कहा गया है, यहां जो बोला जा रहा है, वह वास्तव में सच नहीं है। गोधरा कांड हुआ, इसके बारे में हम भी निंदा करते हैं। बाद में जो हुआ, उसकी भी हम निंदा करते हैं। गुजरात की फिलासफी के खिलाफ यह कैसे हुआ, यह आज तक किसी को पता नहीं है। कभी-कभी ऐसा कहा जाता है कि जैसे मेडिकल प्रैक्टिशनर, डॉक्टर कोई खराब काम करे तो पूरी मेडिकल कम्युनिटी की निंदा की जाती है और उन पर आरोप लगाया जाता है। यदि कोई व्यवसाय कुछ ऐसा वैसा करता है तो उसकी निंदा की जाती है। इसी प्रकार से कोई अच्छा काम होता है तो पूरी कम्युनिटी को अच्छे काम के लिए बधाई दी जाती है। मेरे पुराने बुजुर्ग मित्र हैं, वह पहले कांग्रेस में रह चुके हैं। उन्होंने कहा कि गुजरात में यदि कोई भी सरकार होती चाहे कांग्रेस की होती या किसी की होती, गोधरा के बाद जो हुआ, वह होना ही था। उन्होंने कहा कि भाजपा ने जो आंदोलन किया, वह चाहे मियां मुशर्रफ के खिलाफ हो, चाहे वीएचपी के हुए हों, वहां १५०-२०० से ज्यादा आदमी कभी इकट्ठा नहीं होते थे लेकिन गोधरा की घटना के बाद मैंने देखा कि अहमदाबाद और बड़ोदरा का पौश से पौश इलाका हो, पढ़े-लिखे लोगों की वेदना साफ दिखाई पड़ती थी और लगता था कि पूरे गुजरात को क्या हो गया?उन्होंने कहा क वहां किसी भी दल की सरकार होती लेकिन गोधरा के बाद जो हुआ, वह कम नहीं कर पाती और इसलिए मुझे कहना है कि जो हुआ, सो हुआ। अभी मास्को में क्या हुआ? सिनेमाघर में क्या हुआ?लेकिन प्रैस में आया कि १३० लोगों को बचाया गया। जबकि कितने लोग मर गये थे और जो सिनेमा देखने आए थे, वे भी मर गये लेकिन हम क्या करते हैं कि, इतने-इतने लोग मर गये। केवल नैगेटिव साइड ही दिखाते हैं। पूरे देश को बदनाम करने का षडयंत्र विश्व भर में हो रहा है। गुजरात में भी जो नहीं हुआ है, उसके बारे में बताया जाता है। जो सच नहीं है, उसे रिपीट करने का कोई मतलब नही है। गोधरा के बाद जब यहां डिसकशन हुआ था और मैं कहने जा रहा हूं कि पहले चार साल में भाजपा की सरकार जब गुजरात में थी तो उन्होंने मुस्लिमों के लिए कितना काम किया था, वह मैं आपको बताता हूं। पूरे देश में हज करने जाने के लिए कोटा सिस्टम है कि हमारी स्टेट से १०००, या दो २००० या ५०० लोग जाएंगे। लेकिन गुजरात में बीजेपी की जो सरकार बनी तो उसने इस कोटा को खत्म किया और कहा कि जितने लोग हज करने के लिए जाना चाहते हैं, उन पर कोई पाबंदी नहीं है। मुझे गौरव है कि सबसे बड़ा यू.पी. स्टेट है जहां मुस्लिमों की संख्या ज्यादा है और यू.पी. के बाद गुजरात से हज करने के लिए सबसे ज्यादा लोग जाते हैं, यह गुजरात का गौरव है और यहां कहते हैं कि गुजरात में मुस्लिमों का हम ध्यान नहीं रखते। पहले वहां मॉइनोरिटी बोर्ड था जब कांग्रेस की सरकार थी लेकिन भाजपा की सरकार के आने के बाद इस बोर्ड को हमने कॉरपोरेशन में बदल दिया और पहले केवल पचास लाख रुपया का बजट था लेकिन हमारी सरकार ने पचास करोड़ रुपये से ज्यादा कर दिया। मुझे याद है कि मेरे इलाके में मैंने खुद ४-५ करोड़ रुपये मुस्लिम बंधुओं को अलग-अलग रोजगार के साधन देने के लिए खुद दिये और हम पर आरोप लगता है कि हम मुस्लिमों के लिए कुछ नही करते। जब ईदगाह का त्यौहार, ताजिया और मोहर्रम का समय होता है तो सब लोग हिन्दू-मुस्लिम साथ मिलकर मनाते हैं।

कहा जा रहा है कि गुजरात में शान्ति नहीं है और गुजरात में इलैक्शन के लिए अच्छा माहौल नहीं है। गुजरात में अभी नया साल शुरु हुआ है और दीपावली के अवसर पर गुजरात में लोग रात को दो बजे तक, चार बजे तक घूमते रहे हैं। उस समय दूसरे राज्यों के लोग जो गुजरात में घूम रहे थे, उनको आश्यर्य होता था और अचरज होता था। आप अहमदाबाद में आइए, राजकोट में आइए, रात को दो बजे तक बहनें, लड़कियां और कपल्स आइस क्रीम खाने के लिए बैठे हुए पाए जाते हैं। वहां कोई अप्रिय घटना नहीं होती है। अक्षरधाम की घटना के बाद नवरात्री के महोत्सव पर हाईकोर्ट ने प्रतिबन्ध लगाया कि रात दस बजे के बाद नवरात्री महोत्सव नहीं मनाया जाएगा, लेकिन लोगों की भावनाओं को देखते हुए, गुजरात में शांति है, वहां ऐसा कुछ नहीं होने वाला है, हाईकोर्ट को भी मानना पड़ा कि दस बजे के बजाए रात एक बजे तक गुजरात में दांडिया रास करने के लिए छूट दी गई। फिर भी यह कार्यक्रम रात दो-तीन बजे तक चला और कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। हमारे मित्र कहते हैं कि गुजरात में शांति नहीं है, इलैक्शन के लिये अच्छा समय नहीं है और यह भी कहा गया कि श्री मोदी को रिजाइन कर देना चाहिए। इस मुद्दे पर यह सदन भी नहीं चलने दिया गया। मोदी साहब ने रिजाइन कर दिया, लेकिन फिर कहने लगे कि वहां इलैक्शन का माहौल नहीं है। मोदी जी ने रिजाइन करके कहा कि हम जनता की अदालत में चलते हैं। लोगों के बीच जाते हैं, ताकि लोकशाही में प्रजा अपनी लोकप्रिय सरकार को चुन सके। गौरव यात्रा निकालने की बात आई, तो कहा गया कि गौरव यात्रा कैसी? हमने कहा कि गौरव यात्रा इसलिए कि गुजरात में हमने जो पिछले चार सालों में काम किये हैं, उनकी जानकारी लोगों तक पहुंचा सके। मैं यहां एक और बात कहना चाहता हूं, गुजरात में जो पिछले चार सालों में काम हुए हैं, वे पिछले पचास सालों में भी नहीं हुए हैं। कोई गांव ऐसा नहीं है, कोई शहर ऐसा नहीं है, जहां विकास नही हुआ हो।

यहां पर सर्वशिक्षा अभियान की बात कही गई। पहले स्कूलों में दो, तीन या चार टीचर ही हुआ करते थे, लेकिन हमारी सरकार ने विद्या सहायक योजना के अन्तर्गत दो हजार रुपए में दो साल के लिए टीचर्स को रखा, जिनको दो साल के बाद फुल पेमेंट दिया जाएगा। इस प्रकार ६२ हजार टीचर्स इन पिछले दो-तीन सालों में नियुक्त किए गए हैं। आज एक भी ऐसा प्राइमरी स्कूल नहीं है, जहां टीचर्स न हो। यह अभूतपूर्व काम हमारी सरकार ने किया है। सदन में यहां पानी की समस्या के बारे में भी कहा गया है। हमारी सरकार पीपल्स पार्टसिपेशन की बात कहती है। हमारी सरकार ने पीपल्स पार्टसिपेशन के आधार पर वाटर को कन्जर्व करने का काम किया है। लोगों को समझाया गया, पानी की समस्या के समाधान के बिना हमारी कोई समस्या हल नहीं हो सकती है। मुझे प्रसन्नता है कि पिछले पचास सालों से नदियों पर जो छोटे-छोटे डैम्स बनाने की बात चली आ रही थी, हमने डेढ़ साल में २२ हजार से भी ज्यादा छोटे डैम्स बनाकर पानी को संग्रह करने का काम किया है। इतना ही नहीं, मैं काग्रेस के मित्रों से कहना चाहूंगा, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री तक यह देखने के लिए आए कि यह काम किस प्रकार किया गया है और गुजरात के लोगों ने कैसे मेहनत की है। मेरे जिला क्षेत्र में उन्होंने आकर देखा और कहा कि हमें भी अपने यहां इस प्रकार पानी को संग्रह करने की आवश्यकता है। यह स्थिति जो गुजरात ने पैदा की है, यह गुजरात का गौरव है।

महोदय, इससे आगे नर्मदा के बारे में भी सदन में कहा गया है। कोई व्यक्ति मंत्री होता है, प्रधान मंत्री होता है और जब नींव डाली जाती है, तो उनको यश मिलता है।

नर्मदा के प्रश्न को सौल्व करने के लिए पिछले चार सालों में भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने प्रयत्न किया। इससे पहले किसी भी कांग्रेस की सरकार ने ऐसा नहीं किया। चार-पांच साल से सुप्रीम कोर्ट में केस पड़ा हुआ था, लेकिन आगे चलता नहीं था। भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने कहा कि केस लगातार चले। एक बार चले, फिर तारीख पड़ जाए, ऐसा नहीं हो, लगातार केस चले और जो भी जजमेंट आना हो, वह आए। गुजरात के फेवर में जजमेंट आया और सबसे अच्छा रिहेबलिटेशन का काम आज गुजरात में हो रहा है। गुजरात में ३५ से ४० लाख रुपए एक-एक परिवार को मिलते हैं, उससे पहले कभी नहीं मिले थे। इसी तरह रिहेबलिटेशन का ध्यान रखते हुए वहां नर्मदा का पानी मिला। हमारे एक मित्र ने कहा कि साबरमती में एक्स्ट्रा पानी डाल दिया। ऐसा नहीं है, पानी एक्स्ट्रा नहीं था। पानी जब आता है और ऊपर से बाढ़ आई तो पानी नर्मदा से ओवरफ्लो होकर आगे चला जाता है, लेकिन जब कैनाल चालू है, उसका काम पूरा हो गया है, दूसरे इलाकों में वर्षा नहीं हुई थी, वहां अकाल था, वहां पानी आए तो वह पानी कहीं नदियों में, तालाबों में जाए ताकि जलस्तर ऊपर आ जाए, इसलिए हमने साबरमती में बहाया। इतना अच्छा काम कैनाल का हुआ है कि जहां-जहां नदियां आती हैं वहां-वहां हमने गेटस किया। जो रीवर कनेक्टीविटी की बात करते हैं, सचमुच में नर्मदा सरोवर है, कैनाल है और इसके कारण आज गुजरात के करीब-करीब दो हजार से ज्यादा गांवों में पाइप लाईन द्वारा पानी जा रहा है। वहां ७०० किलोमीटर की पाइप लाईन डाली। जहां-जहां अकालग्रस्त इलाके हैं, पीने का पानी नहीं था, सभी डेम एवं नदियां खाली थीं वहां पानी लाकर हमने एक-एक गांव में पहुंचाया।

महोदय, हमारे मित्र कह रहे थे कि गुजरात में पानी नहीं मिलता है। पहले भी कुछ नहीं मिलता था, लेकिन अब कम से कम दो-तीन हजार गांवों में पानी आने लगा है। वहां आज भी पानी की अच्छी व्यवस्था है। यह वहां का गौरव है। गुजरात के लोग कहते हैं, गुजरात डेवलपड स्टेट है, यह अव्वल नम्बर पर है। इंडस्ट्री एवं व्यापार आदि में भी अव्वल नम्बर पर है। इसकी अस्मिता को बनाए रखने के लिए, गुजरात को सुरक्षित रखने के लिए गौरव यात्रा का आयोजन किया था। हमारे एक मित्र जो आजकल कांग्रेस में चले गए, वे अभी अमेरिका गए थे। वहां उन्होंने डॉलर यात्रा की। हमें भी वहां से मैसेज आया, क्योंकि इलैक्शन आ रहा है और हमें डालर की बहुत आवश्यकता है, इसलिए वहां डालर इकट्ठा करने गए थे। हम गुजरात का गौरव बनाए रखने की बात कहते हैं और वह डालर यात्रा की बात करते हैं।

अक्षरधाम की जो घटना हुई, वह पूरे देश और समाज के लिए एक बहुत दुखद घटना है। आतंकवाद काश्मीर से लेकर यहां तक आ गया है। फिर भी हम आतंकवाद की बात करते हैं, अपने देश के दुश्मन की बात करते हैं। रेणु जी ने सही कहा कि आज हमारे सामने जो प्रोब्लम है, उसे देखने की बजाए हम केवल वोट बैंक की राजनीति की बात करते हैं। हमारे मित्र ने गलत इन्फोर्मेशन दी कि गुजरात में बिलो पावर्टी लाईन लोग ज्यादा हैं। वे कहते हैं कि लगभग ६०-७० प्रतिशत बिलो पावर्टी लाईन लोग हैं। पूरे देश मेंBPL 26% लोग है, वो गुजरात में उनसे भी कम होगें । पहली बार हमारी सरकार ने ट्राइबल ऐरिया में लोगों को जमीन दी, उन्हें उनके हक मिले हैं। यही कारण है कि आज हमें गुजरात में इतनी सीटें मिली हैं।

हम विकास और डैवलेपमेंट की बात करते हैं, इंडस्टि्रयल डैवलेपमेंट की बात करते हैं। गुजरात में हमारे द्वारा पोर्ट डैवलेप हुआ है। ये कहते हैं कि गुजरात में दंगे हो रहे हैं हत्याएं हो रही हैं। यह कहकर ये देश को नुकसान पहुंचा रहे हैं। सोचने की बात है कि हमें देश का नुकसान तो नहीं करना चाहिए। हमें देश का विकास करना है, देश को सुरक्षित रखना है और अगर हम छोटे-छोटे मामलों में इस तरह की बातों में फिसल जाएंगे तो हम अपने देश के लोगों को क्या सुख दे पाएंगे। क्या हम अपने मुस्लिम भाइयों का सुख नहीं चाहते हैं, क्या उन्हें अपने साथ रखना नहीं चाहते हैं। अगर चाहते हैं तो छोटी-छोटी बातों से हमें देश का नुकसान नहीं करना चाहिए।

यहां पर माननीय डा. प्रवीण तोगड़िया जी की बात किसी बंधु ने की। मैं उनको व्यक्तिगत रूप से, अच्छी तरह से जानता हूं। वह बहुत ही इंटलैक्चुअल आदमी हैं और उनके दो परम-मित्र मुस्लिम हैं और वे उनसे मिलने जाते हैं। हम चाहते हैं कि इस देश के हमारे मुस्लिम बंधु देश-प्रेमी हों। भाई शाहनवाजी जी ने बिल्कुल ठीक कहा है कि वे मादरे-वतन के लिए हैं, उनको राष्ट्र की परवाह है। हमारे जो मुस्लिम भाई हैं उन्हें भी राष्ट्र के प्रवाह में शामिल करने की आज बहुत आवश्यकता है। लेकिन जो लोग देशद्रोही हैं उन्हें अलग-थलग करने की व्यवस्था हमें करनी चाहिए। मुस्लिम बंधु राष्ट्र के साथ रहेंगे तो हिंदू-मुस्लिम का कोई झगड़ा होने वाला नहीं है।

आज गुजरात में आप देखेंगे तो पायेंगे कि गुजरात में हिंदू-मुस्लिम एक-साथ रहते हैं, एक साथ बिजनैस करते हैं, साथ काम करते हैं, होटलों में साथ-साथ खाना खाते हैं लेकिन हम यहां गुजरात पर डिस्कस कर रहे हैं लेकिन वहां लोगों में जो भाई-चारा है उसे कोई नहीं देखता है। हम तो वहां रहते हैं, इसलिए आपसे विनती करते हैं कि आप वहां आइये और बाद में गुजरात के बारे में बोलिये। गुजरात के बारे में जो बातें हो रही हैं कि गुजरात सरकार वाइलेंस के कारण फेल हो गयी है वह बोलने से पहले लोगों को गुजरात जाना चाहिए। अभी वहां गौरव यात्रा चली लेकिन एक भी घटना वाइलेंस की नहीं हुई। जहां-जहां जुलूस होते हैं वहां एक भी घटना वाइलेंस की नहीं हुई। वहां एसएससी की परीक्षाएं शांतिपूर्ण ढंग से हुई हैं लेकिन कांग्रेस के हमारे मित्रों ने वहां लोगों को बहकाने के लिए कहा कि आप परीक्षाएं मत दीजिए। मैं पूछना चाहता हूं कि वहां लोगों को बहकाने का काम किसने किया?।

सभापति जी, आज जो यह प्रस्ताव रखा है उसके बारे में मेरे कहना है कि आज गुजरात शांति की राह पर है। गोधरा के बाद गुजरात में जो कुछ हुआ वह हमारे सबके लिए कलंक है लेकिन अब शांति की बात नहीं करेंगे तो गुजरात तरक्की कैसे करेगा। शांति का रास्ता बनाने के लिए हम लोगों को वहां अच्छी शिक्षा, अच्छा व्यवसाय दिलवाना चाहते हैं और इसके लिए हम वहां कटिबद्ध हैं। इन्हीं बातों के साथ में इस प्रस्ताव का विरोध करता हूं और गुजरात में हम जो नया वर्ष मनाते हैं उसकी शुभकामनाएं सभी को देते हुए मैं सभी से अनुरोध करूंगा कि हम कम्युनल बातें करना बंद करके हिंदू-मुस्लिम एकता की बात करें और इस देश को महान बनाने का संकल्प करें। यही बात कहकर मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।

SHRI MADHUSUDAN MISTRY (SABARKANTHA): Sir, I rise to speak on the Adjournment Motion. I have heard the speeches and the feelings which have been expressed from the other side. The Gujarat Government has been praised a lot. I am putting the other side of the situation today in Gujarat for their own knowledge. I have never understood as to why violence occurs whenever VHP or any sister organisation linked with the BJP takes out anyYatra. Why did the violence occur when they started the Yatrafrom Somnath to Ayodhya? Why is it that no violence occurs in yatras taken out by the Jains, the Swaminarayans and others? Why does it happen in your case and not in the case of others? Is it that there are some elements who are trying to inculcate a negative attitude against the minorities living in this country? I have found a kind of complete dual attitude. They say something in the House and completely the opposite when they go out. I saw the Chief Minister saying one thing in the media, on the television, and saying completely the other thing in reality. Why did he say in a public rally "हम एक, हमारे पांच"? Why did he say that he did not want to release water from the Narmada during Ramzan and so he released it now? Why has this kind of instigating attitude been adopted by the Party which is in power in Gujarat? There is only one reason: They want to come to power. That is the only strategy. They are not left with any other things with which they can go before the people. What did you do over the last four-and-a-half years? If you have done so much of work, which you have been narrating here, why do you not raise those kinds of things in your campaign? Why do you not talk about development in your Gaurav Yatras? Why do you simply concentrate on the issues relating to the minority alone?

Do not say that riots did not occur during your rule. When you came to power, within the first week itself, there were riots in Vihara, Bardoli, Valsad, Bhavnagar, Randhirpur, Sanjoli and in others parts of the State. Therefore, do not say that riots did not occur in your rule. If you take the history of total number of riots, from 1992 to 1995, the maximum riots that occurred in Gujarat was during that period. The strategy was that you create a riot situation and then you deride the community to come to power. That strategy was adopted and, that is why, the present Chief Minister was sent from here to see that your Party wins the election. He could see that your Party could win the election only by creating a kind of communal divide and not on the basis of any developmental issues.

What has happened during Mr. Modi’s rule in Gujarat? Twenty-six thousand people were killed in natural and other man-made calamities. Forget about the natural disasters. They could have saved a lot of lives by taking appropriate steps. Your own Government, over the last four-and-a-half years, did not take any steps to save their lives. You have just now referred to a package. When a thousand people were killed, the Prime Minister announced a package of Rs. 150 crore. Even after seven months, you have not paid any compensation to the 17-18 people who were killed in that Godhra incident. Forget about it. You could spend only Rs. 80 crore; there is still some more money lying with the Government of Gujarat. Why is the Gujarat Government not spending that money? The Gujarat Government, in fact, in all these four-and-a-half years, faced one calamity or another, and they asked the Central Government to help them out. You have demanded Rs. 28,000 crore, but only Rs. 2,600 crore has been given to Gujarat. What did you do in the case of starvation deaths in 1998? Fifteen people died due to hunger in Khedbrahma in Saurashtra. What steps did the Government take when water riots occurred in Phalla, Bhavnagar and at other places? Whatever data I am giving, I may remind you that I am simply quoting the official version. I have just finished a draft on, "Four-and-a-half years of BJP (Misrule in Gujarat)". I have taken into account the C&AG report, your own Government’s data and also the announcements. You made 1,863 announcements; the present Chief Minister made 413 announcements of which 48 per cent remain unfulfilled. Whatever were fulfilled half-heartedly, that comes to only 15-17 per cent.

   

17.00 hrs. So, a large number of the announcements made by the Gujarat Government have remained mere announcements and the Government of Gujarat has been rendered to being a Government of Announcements! The Government of Gujarat, in the last four and a half years, has done nothing except making announcements to the people.

What has happened on the industrial front? Under the regime of this Government, around 44,000 factories have got closed down. About 10,44,000 people have been rendered jobless. I am giving you these figures and you may check it. These figures are not based on hearsay; these are figures available from the records of the Gujarat Government. There has been an increase of 30 per cent in unemployment in the State during this period. The former Chief Minister of Gujarat had promised to provide around a hundred thousand jobs to people every year. It was promised to the people that the scar of unemployment would be removed from the forehead of the people of Gujarat within a period of two to three years. The Government promised to provide one lakh jobs. What has been its achievement? Only 25,000 people have been provided with jobs in the last four and a half years of rule of this Government in the State.

What has happened to the water problem? The Government said that water was available. But the fact is that only one-third of the villages in the States get only ten litres of water per day. But the maximum limit for making water available is 14 litres. Why has water not been provided to the extent desirable? There was another blatant untruth told by this Government. Now only they have said that water has been released from Narmada to Sabarmati. What happened last year? In fact, the Government pumped water out of the Mahi river and channelised that water through a canal and declared that water to be from the Narmada. That was what was said officially and the Government went on with that campaign… (Interruptions) I am not yielding… (Interruptions) This is from the official records and I am just putting the facts before the House.

Sir, what has happened to generation of electricity? The Government promised for generation of 10,000 MW of electricity in their election manifesto. But did they generate a single megawatt of electricity in their four and a half years of rule? The villages in Gujarat are now getting only four and half hours of electricity per day. This has been the record of the Government in the State of Gujarat.

Sir, what has been the financial situation of the State in this regime? There is a debt to the tune of Rs. 47,000 crore in these four and a half years. The Government has to pay Rs. 5,000 crore as interest on the total debt and it consumes 18 per cent of the revenue. We have to take an overdraft for 22 times to meet this debt. You have to borrow from outside as well as from the open market. The Government has not been able to pay the salaries to their staff. I know it is a hard fact for them to digest. About 28,000 posts meant to be filled up by the candidates belonging to the Scheduled Casts and Scheduled Tribes are lying vacant in spite of the High Court directing the Government of Gujarat to fill up these vacancies. About 46,000 rooms for schools are still to be built. It has not been done so far. There are even vacancies for teachers.

The Government talks about tribal and forest land. The land of those tribals who were cultivating there before 1980 have been taken over and there was a huge uproar in the entire country on the issue because of a petition filed by somebody in the Supreme Court in this regard. This Government talks of the interests of the dalits. More than 6,000 dalits have been murdered in the four and a half years rule of this Government in Gujarat. I have given the figures of what has happened under the misrule of this BJP Government in the last four and a half years in the State of Gujarat. The State ranks fourth in crimes committed against the dalits and it ranks seventh in crimes committed against the tribals. If you search the records of the National Crime Bureau, then you would find as to what has happened in the State during these four and a half years rule of this Government.

Next, I come to corruption. According to the report of the Vigilance Commission, corruption rate in the State has increased to 45 per cent. In one case it was mentioned in the report of the C&AG that tarpaulin that was bought was of a low quality. This Government could not even submit proper accounts to Japan for foreign aid that was given to the State by them. They did not submit accounts as to how the aid was distributed. I am just reminding them of the facts.

Sir, let us take any sector and we are ready to sit on a debate with them on development issues. The Government declared distribution of nine kilos of rice for Rs. 2/- per kg. Now, that allocation has not only been reduced to seven kilos but has still not been distributed in the tribal areas.

You talk of the tribals. You say that you took out a manifesto for the tribals. After working for 20 years in tribal areas, at that time I said what you should be doing. What is happening to it? You did not distribute even land. During the Congress rule, Gujarat Government released 50 thousand hectares of forest land to the tribals. You did not distribute land even to 32 thousand people. Not even 30 thousand hectares of land is distributed to them. There is mass exodus from the tribal areas because you have not been able to generate employment in those areas.

The Government of Gujarat did not declare many areas suffering from drought as drought-hit areas thinking that if they do so it will hamper their chances of holding early elections. If you go through the answers given today, you will find that the Government of Gujarat has not asked for a single pie from the Government of India. It is simply because they fear that if they declare drought in Gujarat they will not have elections. As a result of that, no drought relief work has started in the tribal areas. … (Interruptions) I know, it is very difficult to hear these things. If you are that confident, why do you not raise development issues in Gujarat? Why are you simply going on spreading hatred and communal violence? Why has your Chief Minister not visited a single camp of minorities till today? Why has none of your MLAs visited those camps? In the spirit that has been expressed in Parliament, why do you not go and meet them, and try to spread the message of brotherhood? Why do you not do any of this? That is whyGaurav Yatra has been opposed. You did not take into account the interests of the people of Gujarat who are keeping the situation calm. The people of Gujarat want peace and calm. It is you who want to keep the hatred alive simply because you want to come to power by drawing those masses. None of them has been able to go to those areas because they know that they will not be welcomed there. That is the situation. That is why the Chief Minister of Gujarat is not interested in going to those areas. Do you find him resolving a single development issue except supply of drinking water from Narmada? It is not you who brought Narmada water. As somebody was saying, the dam’s height was only raised by you by about eight metres. It was all really done by the Congress. In the last four years the project was delayed because your Government could not rehabilitate the oustees of the Sardar Sarovar Dam. … (Interruptions) Hold on for heaven’s sake! Hang on for a while.

MR. CHAIRMAN : Mr. Madhusudan Mistry, your time is over. You have to conclude now.

SHRI MADHUSUDAN MISTRY : That is what I want to do, Sir.

Go to the houses of the affected people. The people of Gujarat have never ever seen such a Government ever since Gujarat came into existence. As a result, the people will totally reject these people in the forthcoming elections. None of their efforts will make them survive in the coming elections.

I conclude by expressing my support for the Motion, which has been tabled by our party.

   

डॉ. सुशील कुमार इन्दौरा (सिरसा) : सभापति महोदय, आज जिस विषय पर सदन में चर्चा चल रही है, वह विषय कई बार इस सदन में दोहराया जा चुका है। पक्ष और प्रतिपक्ष ने अपनी-अपनी बातें कही हैं, लेकिन नतीजा आज तक कुछ भी नहीं निकला है। गुजरात राज्य इन दिनों लगता है कि भंवर में फंसा हुआ है। वहां कुछ ऐसी परिस्थितियां बनी हैं कि पिछले दो-तीन वर्ष पहले वहां तूफान आया, फिर भूकम्प आया और उसके बाद वहां साम्प्रदायिक दंगे हुए। तूफान का आना, भूकम्प का आना मैं मान सकता हूं कि वह प्राकृतिक या दैवी शक्तियों के कारण हो सकता है, लेकिन साम्प्रदायिक दंगे मानव निर्मित हैं।

स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि लोगों की भावनाएं भड़काकर राजनीतिक स्वार्थ के लिए या सत्ता हथियाने के लए ऐसे कदम उठाकर कि जिनसे लोगों का आकर्षण अपनी तरफ बढ़े, ऐसी बातें करके जो गुजरात में घटा है, किसी भी कट्टरपंथी को या धार्मिक उन्माद में मस्त आदमी को इस बात की कोई परवाह नहीं कि प्रदेश प्रगति के पथ पर नहीं जाएगा, देश की छवि न केवल देश में बल्कि विदेशों तक में बिगड़ेगी। उनको अपना उल्लू सीधा करना होता है और वोट बटोरने होते हैं।

महोदय, मैं इस बात से सहमत हूँ माननीय प्रधान मंत्री जी ने स्वयं कहा कि चुनाव लड़े जाने चाहिए और मुद्दों के आधार पर वोट मांगे जाने चाहिए। समाज की समस्याओं का समाधान हो, उसके आधार पर चुनाव लड़े जाने चाहिए। देश या प्रदेश प्रगति के पथ पर बढ़ेगा, यह संकल्प लेकर चुनाव में जाना चाहिए और वोट मांगे जाने चाहिए लेकिन आज की परिस्थिति भिन्न है। गत कई वर्षों से इस देश में जात-पांत की राजनीति को आधार बनाकर चुनाव लड़े जाते हैं, राजनीति की जाती है लेकिन जब यह महसूस किया गया कि जात-पांत की राजनीति अब काम नहीं आ रही है तो जात-पांत की राजनीति के शस्त्र को धर्म की राजनीति के ब्रहमास्त्र में बदलकर अपनाया गया और इसे चुनावी मुद्दा बनाकर कभी मुसलमानों की भावनाओं को तरजीह देकर और कभी हिन्दुत्व का नारा देकर जो आज राजनीति का कुचक्र चल रहा है, मैं समझता हूँ कि गुजरात उसी का शिकार है। गुजरात में आज भी लोग प्रेम, प्यार और भाईचारे से रहना चाहते हैं। गुजरात के लोग चाहते हैं कि न केवल गुजरात हिन्दुस्तान में बल्कि विश्व में ख्याति प्राप्त करे। लेकिन जो राजनीतिक कुचक्र चल रहा है, उसका शिकार होकर जहां भूकंप के बाद लोगों के सिर पर मकान नहीं थे, सरपरस्ती नहीं थी, रोटी के लिए रोज़ी नहीं थी, विकास को आगे बढ़ाने के लिए जो शिक्षा का तंत्र है, वह अव्यवस्थित था, ऐसे माहौल में यह चाहिए था कि वहां मजबूत हाथों में प्रशासन हो और वह मजबूती से इन विकास कार्यों को आगे बढ़ा सके। लेकिन मुझे खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि जो काम होना चाहिए था, विकास की विफलता ने, राहत कार्यों की असफलता ने जो बदलाव किया, सोचकर तो यह किया गया था कि बदली हुई परिस्थितियों में बदलाव राहत को गति प्रदान करेगा, प्रदेश को विकास देगा।

लेकिन जो नये चेहरों से आशा थी, वे चेहरे उसे नहीं कर पाये। पुरानी विफलताओं और अकर्मण्यता को काबू में न करके, प्रदेश के विकास को आगे न बढ़ाकर उन्होंने राजनीति में बने रहने के लिए नयी चालें चलनी शुरू कर दीं। हमने उधर के बोलने वाले माननीय सदस्यों को भी सुना है और यहां के बोलने वाले माननीय सदस्यों को भी सुना है। हमें अक्सर चौधरी देवी लाल जी ने सिखाया है कि मौके पर सही और हक की बात कहनी चाहिए। आज हम भी उस हक की बात को कहेंगे कि गुजरात राजनीति के कुचक्र के भंवर में फंसा है, उसे हमें निकालना है। हमें उसी तभी निकाल सकते हैं जब हम सब मिलजुल कर प्रयास करेंगे। हमें अपनी राजनीति के स्वार्थ से ऊपर उठना है। हमें यह नहीं देखना कि यह हथियार चाहे वह जात-पात का हो या धर्म का हो, उसे हम इस्तेमाल करके वोट प्राप्त करें। हमें यह देखना है कि वाकई वहां के लोगों की क्या भावना है तभी वहां के लोगों के दुख-दर्द पर मरहम लगाया जा सकता है। जिस त्रासदी से वे गुजरे हैं, जिस नरसंहार से वे गुजरे हैं, उस नरसंहार को भुलाकर उनको कैसे अपना बनाया जा सकता है। जो छवि हमारे देश की धूमिल हुई है चाहे वह देश में हुई है या विदेश में हुई है, मुझे यह कहने में कोई गुरेज नहीं कि माननीय प्रधान मंत्री जी और उप प्रधान मंत्री जी से जब विदेशों की धरती पर यह सवाल किया गया तो इस मुद्दे पर उन्हें भी अपना सिर शर्म से झुकाना पड़ा। उनके पास भी इसके बारे में कहने के लिए कुछ नहीं था।

मान्यवर, ५० वर्षों में देश ने किस पार्टी के शासन में, किस प्रदेश ने किस पार्टी के शासन में प्रगति की, यह हम सभी जानते हैं। यह हमसे छिपा हुआ नहीं है। गुजरात की घटनाओं पर आयें तो न केवल इस देश के बल्कि दूसरे देशों में रहने वाले भारतीय लोग जब इसके बारे में हमसे पूछते हैं कि वहां ऐसा क्यों हो रहा है तो हम जवाब नहीं दे पाते। जो कलंक हमारे माथे पर है, उसको हम धो नहीं पाते। जिन घटनाओं को देश और विदेशों में गलत ठहराया जा रहा है और जिसने हमारे देश की प्रतिष्ठा को कम किया है, हैरानी की बात है कि उन्हीं को हम लोग अपने स्वार्थ के लिए कई बार न्यायोचित ठहराते हैं। जिस नेतृत्व की सरकार में गुजरात में यह साम्प्रदायिक घटनायें घटी हैं, ५० साल के इतिहास के मुख्यमंत्रियों में उन्हें ही सबसे ज्यादा तरजीह दी जाती है। उन्हें ही सबसे ज्यादा युग पुरूष कहा जाता है और सबसे ज्यादा अग्रणी नेता कहकर चुनाव लड़ने की बात कही जाती है। जबकि होना यह चाहिए था कि चाहे वह किसी भी दल का नेता हो, अगर उससे गलती हुई है तो उसे स्वीकार करना चाहिए था और उस गलती को स्वीकार करते हुए उसमें सुधार किया जाना चाहिए था। पुनर्वास की जो कमियां वहां रही हैं, उन्हें पूरा किया जाना चाहिए था।

मान्यवर, देश के बड़े-बड़े नेताओं ने यह बात खुलेआम कही कि गुजरात में संविधान को अपनाने की और मानने की बात है। बड़े-बड़े राष्ट्रीय स्तर के नेताओं ने जब खुलेआम कहा कि वहां के नेता निर्वाचन आयोग के संवैधानिक नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं तो यह हम सबके लिए शर्म की बात है। आज हमारे देश के स्वरूप को कट्टरपंथी लोग बिगाड़ने में लगे हुए हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि गुजरात में प्रशासन ने बड़ी ढिलाई बरती है, प्रशासन मूकदर्शक बन कर देखता रहा। इस बात की झलक मिलती है कि प्रशासन और शासन में शायद मिलीगत न हो और यह खेल मिल कर न खेला जा रहा हो। हमें इन बातों से सजग रहना है कि किसी प्रदेश में प्रशासन और शासन मिल कर कहीं समाज के अहित की बात न कर रहे हों। जो लोग समाज में कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने की बात कर रहे हैं, उनमें कैसे सुधार लाया जा सकता है।…( व्यवधान)

MR. CHAIRMAN : You are very slow in your submissions. You should be fast. Even though there is no interruption, you are speaking very slowly. When there is no interruption, you can go fast.

डॉ. सुशील कुमार इन्दौरा: कुछ लोग समाज के स्वरूप को बिगाड़ने पर उतर आए हैं और प्रशासन मूकदर्शक बन कर देख रहा है। कट्टरपंथी खासकर गुजरात में बहुतक खुलकर घोषणा करते हैं। पिछले दिनों की बात ले लीजिए। कोई उसे गौरव यात्रा कहता है, कोई कुछ और यात्रा का नाम लेता है लेकिन उससे एक बात साफ पता लगती है कि समाज के कुछ लोग भावनाएं भड़काते हैं जिससे तनाव पैदा होता है। प्रधान मंत्री जी ने भी यह महसूस किया और कहा कि राष्ट्रीय धर्म निभाने की बात है। राष्ट्रीय धर्म निभाने की बात है लेकिन फिर भी कट्टरपंथी लोग बहुत खुल कर घोषणा कर रहे थे कि हमारे दिल में जो है, वह हम करेंगे। यह बहुत अफसोस की बात है। ऐसी अफसोसनाक बातें इस देश के हर प्रदेश के कोने में न हों, सी मैं सरकार और सारे सदन से गुजारिश करूंगा। चाहे किसी भी प्रदेश में ऐसा हो, हम सब मिल कर ऐसे हालात पर काबू पाएं।…( व्यवधान)

MR. CHAIRMAN: The time allotted to you was five minutes; but you have already taken 18 minutes.

डॉ. सुशील कुमार इन्दौरा: आखिर में यह कहते हुए अपनी बात समनाप्त करूंगा कि हमें महाभारत के इतिहास को याद रखना चाहिए कि हम कहीं भीष्म पितामह की तरह अपने देश को बर्बाद होते न देखें। इसलिए हम मिल कर अपनी ताकत झोंक दें ताकि लोगों में भाईचारा बढ़ा सकें।

           

श्री जोवाकिम बखला (अलीपुरद्वारस): सभापति महोदय, आपने मुझे एक बहुत महत्वपूर्ण विषय पर बोलने का समय दिया, इसके लिए मैं धन्यवाद देता हूं। जो कार्य स्थगन प्रस्ताव आया है, मैं उसके पक्ष में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं। सत्ता पक्ष के माननीय सदस्यों ने बार-बार यह साबित करने की कोशिश की कि गुजरात में अमन-चैन है, शान्ति है।

लेकिन माननीय सदस्यों को यह मालूम होना चाहिए कि जिस विषय पर बहस चल रही है, इस विषय पर चर्चा इसके पहले भी हुई है, एक बार नहीं, बल्कि बहुत बार हो चुकी है। बड़े खेद के साथ कहना पड़ता है कि आज फिर उसी बहस में मुझे हिस्सा लेना पड़ रहा है। मेरे कहने का मतलब यह है कि गुजरात जैसे प्रदेश में, जो सरदार पटेल का प्रदेश कहा जाता है, जिसे हम महात्मा गांधी जी का प्रदेश कहते हैं और जिस प्रदेश का प्रतनधित्व हमारे उप-प्रधानमंत्री, गृह मंत्री माननीय लालकृष्ण आडवाणी जी करते हैं। ऐसे प्रदेश में अगर शान्ति बनी रहती तो आज इस बहस की आवश्यकता थी, ऐसा मुझे नहीं लगता।

इसका मतलब है कि आप भी वहां की स्थिति सामान्य नहीं मानते और इसीलिए हम आज सदन में इस महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा कर रहे हैं। मैं चाहता हूं कि हमारे देश के लोकतंत्र पर किसी तरह का कलंक न लगे। लेकिन जिस तरह की घटनाएं गुजरात में हुई हैं, उन घटनाओं के कारण सिर्फ गुजरात प्रदेश ही कलंकित नहीं हुआ है, बल्कि पूरा देश कलंकित हुआ है। लोकतंत्र पर खतरा आने वाला है, ऐसा मुझे एहसास होने लगा है। यह शुभ संकेत नहीं है, यह अशुभ संकेत सिर्फ एक प्रदेश के लिए नहीं है, बल्कि पूरे देश के लिए यह अशुभ संकेत के रूप में हमारे सामने दिखाई दे रहा है। इसीलिए मैं माननीय सदस्यों से यह आग्रह करूंगा कि आइये, हम सब मिलकर पूरे देश में साम्प्रदायिक सद्भावना की वाणी को फिर से आगे बढ़ायें।

आज गुजरात में जिस तरह की घटनाएं हुई हैं, इस तरह की घटनाओं की निन्दा करने के बजाय आज भी भारतीय जनता पार्टी के कुछ नेता, वहां की प्रदेश सरकार के जो मुखिया हैं, उन्हें शाबासी देने का काम कर रहे हैं। इतना ही नहीं, केन्द्र में जो सरकार है, इस सरकार के मंत्रिमंडल के सीनियर सदस्यों ने भी यह बात कही है कि इस तरह की घटनाएं, इस तरह के दंगे तो होते ही रहते हैं। यह तो हमारे देश में आम बात है। यह कैसी अशुभ बात है, कैसी चिन्ता की बात है। माननीय प्रधानमंत्री जी ने भी कहा है कि यह हमारे देश के लिए एक कलंक है। अगर हम देश के बाहर जाते हैं तो किस तरह से अपना मुख दिखाएंगे। मुझे तो अखबारों में पढ़ने से लगता है कि प्रधानमंत्री जी की इच्छा थी कि वहां के प्रदेश के मुखिया को, मुख्यमंत्री को हटाने की बात हुई थी, लेकिन किसी अशुभ शक्ति का आशीर्वाद उन्हें प्राप्त है, इसीलिए उन्हें वहां से हटाया नहीं जा सका। यह भी हमारे देश के लिए कम खतरे की बात नहीं है। इस तरह से अगर हमारे प्रतनधि, हमारे प्रदेश के मुखिया का व्यवहार रहेगा, वे अगर अपनी मानसिकता में परिवर्तन नहीं लाएंगे तो कोई संदेह नहीं है कि हमारा देश और भी कलंकित हो जायेगा।

मैं निवेदन करना चाहता हूं कि इस तरह की साम्प्रदायिक जो हत्याएं हुई हैं और अल्पसंख्यक लोगों के ऊपर जिस तरह से अत्याचार किये गये हैं, जिस तरह से वहां के गरीब लोगों को, अल्पसंख्यक लोगों को मौत के घाट उतारा गया, इसकी चर्चा भविष्य में बार-बार न हो, ऐसी स्थिति पैदा करने के लिए हम लोगों को संकल्प करना चाहिए, ऐसा मेरा विचार है। हमारे देश में विकास की बातें होनी चाहिए। इस सभा में विकास की बातें होती हैं। हमारे देश के गरीब लोगों को रहने को घर चाहिए। हमारी आम जनता को, किसान, मजदूर को, खेत में काम करने वाले किसानों को, कारखानों में काम करने वाले श्रमिकों को चकित्सा की सुविधा मिलनी चाहिए, उन्हें रहने को अच्छे घर मिलने चाहिए, उनके बच्चों को पढ़ाई की सुविधा मिलनी चाहिए।

17.30 hrs. (MR. SPEAKER in the Chair) लेकिन इन विकास के कामों को छोड़कर हम लोग जिस तरह की वाणी गौरव यात्रा के माध्यम से बोलने का प्रयास कर रहे हैं, वह सही नहीं है। मुझे आश्चर्य होता है कि किस बात के लिए गौरव और गौरव यात्रा। क्या गौरव यात्रा के माध्यम से उन्होंने उन्नति की बात कहने की कोशिश की है ? क्या गौरव यात्रा इसलिए करेंगे कि गुजरात में हत्याएं हुई हैं ? क्या गौरव यात्रा इसलिए होनी चाहिए कि गुजरात के लोगों को जिंदा जला दिया गया? क्या गौरव यात्रा इसलिए होनी चाहिए कि वहां के अल्पसंख्यकों को घर छोड़कर बाहर जाना पड़ा, शविरों में रहना पड़ा? यह कैसी गौरव यात्रा और कैसे समय का चयन ! मैं इसकी निंदा करता हूं। संवैधानिक संस्था पर आक्रमण किये जाने का काम किया जा रहा है। यह व्यक्ति के ऊपर आक्रमण नहीं, बल्कि संवैधानिक संस्था के ऊपर, चुनाव आयोग के ऊपर आक्रमण हुआ है। वहां लिंग्दोह साहब ही नहीं हैं, चुनाव आयोग में दो और सदस्य भी हैं। इसलिए बड़े खेद की बात है कि चुनकर एक आयुक्त पर आक्रमण किया जा रहा है। यह भी कोई शुभ संकेत नहीं है, बल्कि अशुभ संकेत हमारे सामने दिखाई दे रहा है। ऐसे कारनामों से हमें अलग हटना चाहिए। इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति भविष्य में न हो इसके लिए मैं प्रार्थना करूंगा।

मैं ज्यादा नहीं बोलूंगा। अध्यक्ष महोदय, आपने मुझे बोलने का समय दिया इसके लिए मैं आपको धन्यवाद देता हूं और अपना वक्तव्य समाप्त करता हूं।

रक्षा मंत्रालय के रक्षा उत्पाद और पूर्ति विभाग में राज्य मंत्री (श्री हरिन पाठक) : आदरणीय अध्यक्ष महोदय, अंग्रेजी में कहते हैं, anything in excess is dangerous. अति सर्वत्र वर्जयते। हर चीज की जब अति हो जाती है तो वह विनाश की ओर ले जाती है। मैं दोपहर को आया। मुझे लगता था कि आज जिस तरह से समाचार पत्रों में, प्रचार-प्रसार के माध्यमों में, आपके सुझाव से आदरणीय प्रति पक्ष की नेता एवम् हमारी पार्टियों के नेताओं की तरफ से यह तय हुआ था कि सदन ठीक ढंग से चलेगा। अलग विषयों पर चर्चा होगी। मगर फिर वही बात। उस वक्त भी, जब मैंने ११ मार्च को पहली बार चर्चा में भाग लिया था, मुझे तब कहा गया था कि आपको बोलना है तो मैंने कहा कि क्या बोलूंगा। बार-बार क्यों इस मुद्दे को लेकर हम सदन में चर्चा करके इसका समाधान निकालने के बजाय इसको और जटिल बनाए रखना चाहते हैं। हम पर आरोप लगाया जाता है कि भारतीय जनता पार्टी इस मुद्दे को जीवित रखना चाहती है। आज क्या हो रहा है। यह विंटर सैशन का आज पहला दिन है। मुझे लगता था कि हमारे सामने बहुत सारी समस्याएं हैं, उन पर चर्चा होनी चाहिए। मैं अभी राजस्थान गया था। राजस्थान में लोग भूख से मर रहे हैं। दीपावली के दूसरे दिन मैं वहां गया था। इसलिए मैंने कहा था कि इस चर्चा को मत छेड़ो।…( व्यवधान) You are playing with fire.

अध्यक्ष महोदय : कृपया हाउस में शांति बनाए रखें।

श्री हरिन पाठक : आइए देखते हैं कि चुनाव में क्या होता है।…( व्यवधान)मैं दीपावली के दूसरे दिन राजस्थान गया था।

SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : Mr. Speaker, Sir, I think I have to correct the position. When the Adjournment Motion was placed before you, you did want to know whether there would be any objection to this in the House. From the Treasury Benches side, they said that they have no objection to it. Therefore, the question does not arise that we imposed the discussion.

SHRI HARIN PATHAK: I do not take any objection to it. But I am just reminding the House. मुझे इसकी चिंता नहीं है। …( व्यवधान)

श्री बसुदेव आचार्य (बांकुरा): आप बार-बार यात्रा निकालेंगे, दंगा करोगे,…( व्यवधान)

श्री हरिन पाठक : आप सच्चाई को सुनना नहीं चाहते हैं तो सदन में क्यों उठाते हैं?आपकी इच्छा के अनुसार अब चुनाव १२ दिसम्बर को घोषित हो गया है। जो कुछ बात करनी है, चुनाव के मैदान में करो। लोगों से क्यों डरते हो?वहां कहने की हिम्मत नहीं है। अब आपको पता चल गया है कि वहां क्या परिणाम आने वाला है। "इंडिया टूडे" का परिणाम आ गया है। १२५ से भी ज्यादा सीटें लेकर भाजपा वहां जीतने वाली है।…( व्यवधान)अब आप संसद को हथियार बनाना चाहते हैं। हम नहीं चाहते हैं कि आप हमें छेड़ो। आप हमें छेड़ोगे तो हम आपको छेड़ेंगे।…( व्यवधान)मैं नहीं बोलना चाहता था लेकिन विषय आपने ऐसा रखा है।…( व्यवधान)

श्री संतोष मोहन देव (सिल्चर): जम्मू-कश्मीर में क्या हुआ?…( व्यवधान)आप बहुत बोलते थे।

श्री हरिन पाठक : सच्चाई बहुत कड़वी होती है। मैं पहले भी कहता था कि कोई ऐसा संदेश जाना चाहिए जिससे गुजरात में शांति हो। लेकिन जब आप राजनीतिक बातें कर रहे हैं तो मुझे कहना पड़ता है। हमारे सामने बहुत सारी समस्याएं इस शीतकालीन अधिवेशन में हैं। चुनाव की घोषणा हो चुकी है। आज से हमारे यहां नामांकन पत्र भरना शुरू हो जाएगा। जो मिस्त्री जी कहते हैं, मैं उनकी बात का समर्थन करता हूं। मैं उनके विचार से सहमत नही हूं, वह अलग बात है। इसीलिए मैं कहता हूं कि वहां जाकर कोई नई बात करिए। एक ही बात को बार-बार दोहराया जाता है। आपको अपील करनी चाहिए थी, ३० तारीख की रात को भी मैंने यही कहा था। मधुसूदन जी मेरे मित्र हैं। वह कह रहे थे कि १९९५ के बाद इस तरह की यह घटना हुई। मैंने ११ मार्च के अपने भाषण की शुरूआत में ही कहा था और मैं आज भी कहता हूं तथा मैं किसी पार्टी पर आरोप नहीं लगाना चाहता। लेकिन कम से कम मेरी बात तो सुन लीजिए। अभी १२ दिसम्बर को फैसला हो जाएगा। अभी २४ दिन बाकी हैं। सब पता चल जाएगा। दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।…( व्यवधान)

श्री सत्यव्रत चतुर्वेदी (खजुराहो): यह बात आपने सही कही कि १२ तारीख को सब पता चल जाएगा।…( व्यवधान)

श्री हरिन पाठक : आप शंकर सिंह जी के साथ मत चलिए। आपकी इतनी अच्छी पार्टी है और कम से कम उनके कहने के इशारे से यहां पर कामकाज मत करिए। तीस साल वह हमारे साथ में रहे हैं और तीस साल रहने के बाद हमसे इतना विश्वासघात किया है। अब तीस महीने में आपके साथ कितना बड़ा विश्वासघात होगा, वह बाद में आप देखिएगा। इसीलिए मैं तो आपको आगाह करना चाहता हूं कि उनके कहने के अनुसार गुजरात में राजनीति मत शुरू करिए। वह आपको वहां ले डूबेंगे।…( व्यवधान)

श्री सत्यव्रत चतुर्वेदी :सकारात्मक सोच वाला कोई व्यक्ति वहां बहुत दिन नहीं रह सकता।

…( व्यवधान)

श्री हरिन पाठक : वह हमारे साथतीस साल रहे हैं। अभी तीस महीने में आप भी देख लीजिएगा और चुनाव के बाद आपको भी पता चल जाएगा। हम पर आरोप लगाया गया था कि हमने साम्प्रदायिक दंगे करवाए हैं। महोदय, मैंने उस वक्त भी कहा था कि यह गिनाने की चीज नहीं है कि किस साल में क्या हुआ?

जब श्री मधुसूदन मिस्त्री जी ने कहा कि पांच साल में इतने दंगे हुए, तो मुझे भी हकीकत सदन में रखनी चाहिए। मेरे पास एक सर्वे हैं - Politics of Communalism – Hindu-Muslim Riots: A Survey by Ms Janeb Banoo, Appendix-II, page nos. 174-193, Historical Survey of some major communal riots. श्री मधुसूदन जी बोलकर चले गए हैं। मैं उनकी बात से सहमत हूं, लेकिन उनके विचारों से सहमत नहीं हूं। दंगों की शुरूआत अहमदाबाद में १७१३AD में हुई थी। तब से लेकर आजादी तक करीब १२० बार दंगे हुए। आप यह कहेंगे कि १९९५ के बाद जो दंगे हुए, उसका कारण भारतीय जनता पार्टी है। १७१३ ई.में जब दंगे हुए, तो क्या भारतीय जनता पार्टी थी?१७१९ई. से १७२०ई. कश्मीर में जब दंग हुए, तो क्या भारतीय जनता पार्टी थी?उसके बाद सितम्बर, १९२७ में अहमदाबाद में जब दंगे हुए, तो क्या भारतीय जनता पार्टी शासन में थी? इसी प्रकार १९२९ में बम्बई में और १९३० में बनारस मे हुए …( व्यवधान)हमारे ऊपर आरोप लगाया जाता है। मेरे कहने का तात्पर्य यह है कि ३५० बार दंगे देश में हुए और आजादी के बाद १२० बार दंगे हुए तथा गुजरात में गुजरात की स्थापना के बाद कुल सात बड़े दंगे हुए, जिनमें से ६ दंगे कांग्रेस के शासन मे हुए थे। उन दंगों के कारण मैं दे चुका हूं, मैं उनको अब दोहराना नहीं चाहता हूं।

एक माननीय सदस्य : आरएसएस के कारण दंगे हुए।

श्री हरिन पाठक : उस समय गुजरात में आरएसएस नहीं थी। ११ तारीख को जो मैंने भाषण दिया था, …( व्यवधान)आप हम पर आरोप लगायेंगे, एक उंगली उठायेंगे, तो तीन उंगली आपकी तरफ भी उठेंगी। आप हम पर दबाव डालते हैं कि क्या बोलना चाहिए, क्या नहीं बोलना चाहिए। १९८४ के बाद, जब दिल्ली में हत्याकांड हो गया, एक व्यक्ति की हत्या हो गई, उस हत्या की हर प्रकार से निन्दा करनी चाहिए, लेकिन उस हत्या के बाद चुनाव कराए गए …( व्यवधान)चुनावों में बड़े-बड़े पोस्टर्स लगाए गए और एक सिक्ख को दिखाया गया, एक स्त्री पर छुरे से हमला करते हुए। लोगों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया गया।

श्रीमती मार्ग्रेट आल्वा: एलजी को बदला गया।…( व्यवधान)

श्री हरिन पाठक: चेज करके उसका उपयोग किया गया और ४०५ सीट्स लेकर कांग्रेस आई थी। हम ऐसी राजनीति नहीं करना चाहते हैं। आपको आरोप लगाने का अधिकार नहीं है। मैं कहना चाहता हूं कि ११ अगस्त, २००२ को"द वीक"पत्रिका के श्री गंगाधरन लेखक ने लिखा है, मैं उसका एक पैरा कोट करना चाहता हूं -

"What applies to Hindus and Sikhs obviously does not apply to Muslims. We can conveniently forget the atrocities against them. The worst ever communal riots in India since Independence were not the 1986 riots, but those, which rocked Ahmedabad and Gujarat in 1969."
 

 उस समय हमारी सरकार नहीं थी। हमारी पार्टी नहीं थी, पंचायत हमारी नहीं थी। बजरंग दल नहीं था, विश्व हिन्दू परिषद् नहीं था। …( व्यवधान)आफशियल रिपोर्ट है, १९६९ में हितेन्द्र देसाई की सरकार थी। गुजरात की पंचायतों में कांग्रेस का कब्जा था। अहमदाबाद कार्पोरेशन में कांग्रेस थी, म्युनसिपैलिटी में कांग्रेस के लोग थे - Official report fixed the death toll at round 5,000.

"But there was fire two or three times."… (Interruptions)
श्री पवन कुमार बंसल: मोदी वाला रूप किस ने अपनाया था?…( व्यवधान)
श्री हरिन पाठक : इसके आगे हिन्दुस्तान टाइम्स में लिखते हैं -
"Remember the Ahmedabad riots. The people are willing to resurrect the centuries old Mogul invasion or the 1984 anti-Sikh riots. How can we forget the Ahmedabad bloodbath of 1969? In one particular case, around 120 Muslims were trapped inside a small room and were savagely killed by the riotous mob."
 

 मैं इस पर कुछ कहना नहीं चाहता, मैंने पहले भी कहा।

श्री बसुदेव आचार्य : वह आरएसएस का था।

श्री हरिन पाठक : वहां, आरएसएस कहां था।

श्री प्रियरंजन दासमुंशी: हमारे गुरु और ऋषि कहते थे कि जब तक हिन्दू राष्ट्र की सीमा पर हम लोग नहीं पहुंचेंगे तो देश के हिस्से होते रहेंगे। This was the Parvachan of Guru Golwalkar pertaining to the activism of RSS:

"So long as the Hindu Rashtra is not achieved, this kind of things will continue."
 

 And you are for that.

श्री हरिन पाठक : महोदय, मैं इतना मान सकता हूं, जो सच्चाई है कि शंकर सिंह जी आरएसएस के हैं।…( व्यवधान)कांग्रेस के बहुत से नेता आरएसएस के थे।…( व्यवधान)मैं इस बात को छेड़ना नहीं चाहता था, मगर मधुसूदन भाई ने इस बात को छेड़ने की कोशिश की। आप बार-बार इस सदन में क्यों चर्चा करते हैं। अब चुनाव की घोषणा हो गई है। आज मुझे आक्रोष के साथ कहना है, उस समय मेरे में इतना आक्रोष नहीं था, करूणा थी। मैं चाहता था कि हम सब मिल कर कोई प्रस्ताव पारित करें और गुजरात में शांति स्थापित हो। गुजरात में शांति हो गई। मेरे पूर्वक्ता कठेरिया जी ने इस बात का जिक्र किया, नवरात्रि के त्यौहार मनाए गए। पहले कहा गया कि दस बजे के बाद नवरात्रि नहीं मनाई जाएगी, फिर सुप्रीम कोर्ट और गृह मंत्रालय ने तय किया। रात को चार-चार, छ:-छ: बजे तक पूरे अहमदाबाद, गुजरात में लड़कियां नाच-गाने के साथ नवरात्रि का त्यौहार मनाती रहीं। There was not a single incident of teasing anybody. किसी के साथ दुव्र्यवहार नहीं हुआ। रायट्स के दरम्यान दीवाली मनाई गई। मुझे आशंका होती है जब बार-बार इस मुद्दे को सदन में लाया जाता है कि आपकी नीयत ठीक नहीं है। …( व्यवधान)आप इसका लाभ उठाना चाहते हैं।…( व्यवधान)उस समय अखबार में आया था।…( व्यवधान)

SHRI SHIVRAJ V. PATIL : Will you yield for a minute please?

SHRI HARIN PATHAK: Why should I?

SHRI SHIVRAJ V. PATIL : I am requesting you for that.

SHRI HARIN PATHAK : No, not at all. You can speak later on. You are playing with the feelings of the people of Gujarat for the last seven months. We are hurt. What do you think about Gujaratis? … (Interruptions) You want to establish that we are murderers and killers. Every time you are thinking that the people of Gujarat are murderers and killers. … (Interruptions)

श्री शिवराज वि.पाटील: महोदय, अगर कोई मुख्य मंत्री गालियां देता है, धमकाता है और हिन्दू एवं मुसलमानों के अंदर झगड़ा कराता है,…( व्यवधान)

MR. SPEAKER: He has not yielded.

SHRI SHIVRAJ V. PATIL : I do not know what kind of procedure we are following here. … (Interruptions) I am not abusing him. I am asking him to reply to my question. … (Interruptions) I am telling him why did he raise this question? Let him reply, if he can. … (Interruptions) You have asked many times why you raised this issue. I am telling you why we raised this issue.

SHRI HARIN PATHAK: When your turn comes, you tell this. … (Interruptions) I am not yielding. … (Interruptions)

SHRI SHIVRAJ V. PATIL : Your Chief Minister is abusing everybody.… (Interruptions)

SHRI HARIN PATHAK : No, not at all. … (Interruptions)

SHRI SHIVRAJ V. PATIL : Are we not entitled to raise this issue on the floor of the House?

SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : Sir, the Prime Minister of this Government and the Leader of this House has been abused by his counterfeit, the VHP and other leaders… (Interruptions) रोकने का आग्रह हमने नहीं किया…( व्यवधान)किसी रिपोर्टर ने नहीं किया…( व्यवधान)आपके प्रधान मंत्री ने किया, कांग्रेस पार्टी ने नहीं किया।…( व्यवधान)

श्री हरिन पाठक: इनकी मंशा ठीक नहीं है। हमें इसलिए बोलना पड़ता है क्योंकि पिछले ७ महीनों से आरोप हम सहते आ रहे हैं। हमारा आरोप किसी पार्टी पर नहीं है।

MR. SPEAKER: You have to conclude in five minutes.

SHRI HARIN PATHAK: I will conclude within two minutes… (Interruptions)

SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : Who publicly insulted the Prime Minister? It is not the Congress, but the VHP. Let them answer! … (Interruptions) Sir, it is a fact that Shri Modi accused Shri J.M. Lyngdoh in terms of his religion. It is a fact that VHP accused the Prime Minister and the entire secular forces as its enemy. What is all this? Do they not know all these things… (Interruptions)

MR. SPEAKER: You have already spoken.

SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : Sir, it has been shown on TV… (Interruptions)

MR. SPEAKER: Shri Pathak is addressing the House, let him speak.

DR. VIJAY KUMAR MALHOTRA : He has spoken for 45 minutes, we did not interrupt him. Whenever we speak, they always go on interrupting… (Interruptions)

MR. SPEAKER: Shri Pathak, please conclude now.

श्री हरिन पाठक: महोदय, हम पर इतना बड़ा आरोप लगे, विदेशों में जाकर हम पर आरोप लगें, सदन में ऐसा माहौल बनाया जाए कि गुजरात के लोग इसमें इन्वोल्व हैं…( व्यवधान) एक घटना का उल्लेख मैं सदन में करना चाहता हूं। मेरे मित्र अहसान जाफरी साहब लोक सभा के सदस्य थे। उनकी निर्मम हत्या हुई और सभी ने उसकी निंदा की। देश के एक बड़े अखबार में एक आर्टिकल छपा जिसको लेकर यहां वहां उदाहरण दिये गये।In that article it was written कि अहसान जाफरी की बेटी पर लोगों ने मिलकर बलात्कार किया। सब जगह में इसकी चर्चा हुई। दुनिया भर में गुजरात की बेइज्जती हुई। चार-पांच दिन बाद उसकी बेटी ने लंदन से कहा कि मैं नहीं थी, मैं तो अहमदाबाद में रहती ही नहीं हूं। …( व्यवधान)

SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : We never said that. This is on record. We challenge it. If he can produce that any Congress MP has said this, we will withdraw from the House… (Interruptions) Let us check the proceedings. None of the Congress Members has said this. Let him produce this… (Interruptions)

श्री सत्यव्रत चतुर्वेदी :यह आरोप कांग्रेस की तरफ से किसी ने नहीं लगाया। ये इनकी मनगढ़ंत बात है। अहसान जाफरी जी की हत्या की बात हमने की है लेकिन उनकी बेटी के साथ बलात्कार की किसी भी कांग्रेसी ने बात नहीं की।

SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : I again demand that let the records be checked. If any Congress MP has said this, we will now express our apologies and if it is not so then he will have to express his apologies… (Interruptions)

श्री हरिन पाठक : आप अपने ऊपर क्यों ले रहे हैं। मैंने किसी कांग्रेसी का नाम नहीं लिया है। यह तो "चोर की दाढ़ी में तिनका" वाली कहावत हुई।

SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : Sir, this is a very serious charge, it should be verified. You ask him which party has said, which Member has said this… (Interruptions) Who said that Ehasan Jaffery’s daughter was raped?… (Interruptions)

MR. SPEAKER: For your information, the hon. Minister has not made a statement that it is said by the Congress Party or by any Member.

 

… (Interruptions)

 

MR. SPEAKER: He has never taken the name of the Congress Party. He has only mentioned about it.

SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : Which hon. Member has said this?… (Interruptions) He is a member of the Council of Ministers. He has said that the hon. Members discussed this issue. We would like to know which hon. Member has said this?… (Interruptions)

श्री किरीट सोमैया: माननीय सदस्य ने कहा कि मीडिया में आर्टिकल छपा था जिस में इस प्रकार कहा गया। आप यह बात अपने ऊपर क्यों ले रहे हैं? …( व्यवधान)

श्री सत्यव्रत चतुर्वेदी :अध्यक्ष महोदय, हम पर एलिगेशन लगाया गया है। …( व्यवधान)

MR. SPEAKER: Please take your seats.

 

… (Interruptions)

 

MR. SPEAKER: I am asking Shri Harin Pathak, whether he wants to refer to any particular Member of the House.

 

… (Interruptions)

 

MR. SPEAKER: Please let him reply.

श्री हरिन पाठक: अध्यक्ष महोदय, आप मेरे भाषण को देखिए। मैंने यह कहा कि मुझे यह बात इसलिए कहनी पड़ती है क्योंकि इस चर्चा के दरम्यान कई ऐसी घटनाएं देश में बनती हैं जो हुई नहीं थीं जिन का जिक्र बार-बार अखबारों में हुआ और इसे लेकर हमें बदनाम किया जाता है। मैंने किसी पार्टी का नाम नहीं लिया। …( व्यवधान)

SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI : Sir, let him accuse the media and not the House. … (Interruptions)

MR. SPEAKER: Shri Harin Pathak, you please continue your speech.

…( व्यवधान)

SHRI PAWAN KUMAR BANSAL : Sir, he is committing a breach of privilege. Leaving aside everything, he is committing a breach of privilege. … (Interruptions)

MR. SPEAKER: Shri Harin Pathak, your time is over. Please conclude.

 

…( व्यवधान)

 

अध्यक्ष महोदय: मैं आपको बोलने की इजाजत नहीं दे रहा हूं। पाठक जी, आप मेरी तरफ देखिए और भाषण करिए।

श्री हरिन पाठक: अध्यक्ष महोदय, यह मनगढ़ंत आरोप क्या लगा रहे हैं? मेरी यह इच्छा और प्रार्थना है जैसा कि मैंने अपने ११ मार्च के वक्तव्य में और ३० अप्रैल की रात को ११ बज कर ४० मिनट पर कहा था कि इसको मुद्दा मत बनाइए। अब शांति और साम्प्रदायिक सौहार्द्र बना है। साम्प्रदायिक तनाव जिस से बढ़े, ऐसा कोई इशू हम यहां डिसकस करके बात न करें, यही मेरी प्रार्थना है लेकिन जब सुबह से हमारे ऊपर आरोप लगाए गए तब मुझे कुछ बातें कहनी पड़ीं।

अंत में मैं इतना कहना चाहता हूं कि गुजरात में जो कुछ घटनाएं हुई, हमने पिछले सात महीनों में कई बार उनकी निन्दा की। हम सब मिल कर सोचें कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। चुनावों में भी हम इसको मुद्दा न बनाएं। हम अपने गवर्नेंन्स पर, अपनी कार्य पद्धति के आधार पर मत मांगे। मैं चाहूंगा कि सदन आखिरी बार इस चर्चा को समाप्त करे। एक प्रश्न को बार-बार जीवित रखने से हम किसी का कल्याण नहीं करते हैं।

उदाहरण के तौर पर मैं इतना ही कहूंगा कि मेरे पिताजी का १० महीने पहले देहान्त हो गया। बचपन में मेरी माताजी का देहान्त हुआ था। ८० साल के बाद मेरे पिताजी का देहान्त हो गया। वह मुझे बड़े प्यारे थे। उन्होंने मुझे पाल कर बढ़ा किया। समय बीतता गया। इन १० महीनों के बीच मैं कभी-कभी अपने कार्य में व्यस्त होकर इस बात को भूल भी जाता था लेकिन अगर कोई मुझे अपने पिताजी के गुणों के बारे में बताता था तो मेरी आंखें भर जाती थी। उन्होंने मेरे लिए और हम सब भाइयों के लिए जो कुछ किया उसे मैं भूल नहीं सकता। उन्हें याद करके मेरे घाव आंसू से उभर जाते हैं। कुछ बातें ऐसी हैं जो भावनाओं से जुड़ी होती हैं।

गुजरात में २७ तारीख को जो कुछ हुआ और उसके बाद २८ तारीख को जो कुछ हुआ, ऐसी घटनाओं को भूलना पड़ेगा। बार-बार राजनीतिक लाभ लेने के लिए, वोटों की राजनीति करने के लिए कभी एक नियम के अन्तर्गत और कभी दूसरे नियम के अन्तर्गत संसद इस चर्चा को जीवित रखना चाहेगी तो उन गरीबों और निर्दोषों, जिन की हत्या हुई उनके घावों पर मरहम नहीं लगेगी, उनके घाव ताजा होंगे जो सब के लिए अच्छी बात नहीं होगी। इनको सब लोग भूल जाएं। आज इस बात को यहां पूरा कर लीजिए और चुनाव के मैदान में आइए। गुजरात में १२ तारीख को चुनाव हैं। चुनावों में जिन विषयों को लेकर जो कहना है, कहिए। आखिरी बार इस चर्चा को समाप्त करके साम्प्रदायिक सौहार्द्र का वातावरण बनाइए। इसी विनती के साथ मैं अपनी बात को समाप्त करता हूं।

MR. SPEAKER: Shri Ajoy Chakraborty, you have been given only three minutes to speak.

18.00 hrs SHRI AJOY CHAKRABORTY (BASIRHAT): Hon. Speaker, Sir, I would conclude my speech within a very short time so that, I think, you need not use the bell.

Firstly, I convey my heartiest gratitude to you, and I thank you for allowing the Adjournment Motion on Gujarat issue.

MR. SPEAKER: Shri Ajoy Chakraborty, I stop you for a minute. The time given to this Motion was up to six o’ clock. I am extending the time till the reply from the hon. Minister comes. The Member, who raised the issue, will also reply. Thereafter the debate on this issue will be over.

SHRI AJOY CHAKRABORTY : Just now Shri Harin Pathak told the House that ‘मालूम नहीं, गुजरात के लिये बार-बार चर्चा क्यों होती है?’ I remind him that you are responsible for this discussion. The situation in Gujarat compelled us to discuss the Gujarat issue times without number. The hon. Speaker rightly allowed the Adjournment Motion considering the gravity and the necessity of the situation in Gujarat.

Both Mahatma Gandhiji, our Father of the Nation, and Sardar Vallabhbhai Patel took birth in Gujarat. Mahatma Gandhi is respected throughout the world as champion of peace, national integrity and communal harmony. That is why, he sacrificed his life and he was killed by Nathuram Godse. Everybody knows who was Godse. Sardar Patel dedicated his entire life for the unity and integrity of the country. As an Indian I am very much proud that we are living in such a country. We are proud of our secular fabrics, secular spirit of the Constitution, the heritage and the culture of the country. But I am sorry to say that in Gujarat, in the regime of the Bharatiya Janata Party, BJP, in the regime of the Party with which our Prime Minister and Deputy Prime Minister belong, our secular fabrics, our secular spirit, culture and heritage have been destroyed repeatedly.

One Member on behalf of the Treasury Benches accused the Opposition Parties that we never condemned the Godhra incident. It is not a fact. It is untrue. The entire Opposition had condemned the Godhra incident. As soon as it took place, the CPI, my Party’s Central Secretariat Member issued a statement condemning the Godhra incident. The hon. Deputy Prime Minister told in this House that after the Godhra incident that‘ प्रतक्रिया होगी, क्या प्रतक्रिया होगी, कितनी हुई, यह आपने देख लिया’।After Godhra incident, thousands and thousands of people were killed. Thousands and thousands of people were rendered homeless and shelterless. They were compelled to take shelter in the refugee camps without any food or without any relief material. Taking that tragic situation, at the instance of the Chief Minister of Gujarat, the Assembly was dissolved and the Government of Shri Narendra Modi tried to hold election in the first part of September. We, the Opposition, told that this is not the right situation for holding election. In this situation, free and fair election cannot take place. The entire Election Commission visited Gujarat. They met with different people from different parts of Gujarat. They also met different sections of the people in Gujarat. They opined that this is not the right or proper situation for holding free and fair election in Gujarat. After this decision, the BJP Chief Minister of Gujarat along with other organisations like theSangh Parivar and VHP started attacking. They targeted Shri Lyngdoh, the Chief Election Commissioner. Even the Chief Minister of Gujarat abused him that he had taken this decision after getting directive from Vatican.

They have attacked and insulted our constitutional institutions. They have shattered the prestige and dignity of the constitutional institutions.

They decided to go on a gaurav yatra. What gaurav yatra or glorious yatra did they want to go on the dead bodies of thousands and thousands of people? Just two days ago, the Vishwa Hindu Parishad had taken a decision that they would start a vijay yatra from Godhra. Shri Pravin Togadia, Shri Ashok Singhal and all the VHP leaders decided to start the vijay yatra for the communalisation of the country and to divide the country on the basis of religion. I would say now in this august House that we do not have to learn about Hindutva or Hinduism from Shri Ashok Singhal, Acharya Giriraj Kishore or Shri Pravin Togadia. We have learnt Hinduism and Hindutva from Swami Vivekananda and Shri Ramakrishna Paramahansa and we are proud of that.

The elections in Gujarat are to take place on the 12th December. I urge the hon. Deputy Prime Minister to ensure that the elections take place in a free and fair manner so that people can exercise their franchise without any fear. Any party may win the elections but our country would remain united. I urge the hon. Deputy Prime Minister to direct his partymen and the Sangh parivar not to split the country and not to divide the country on the basis of religion. Do not communalise the country. We are proud of our secular fabric. We are united. We would be united. So, I urge the Deputy Prime Minister not to do polemics for the sake of grabbing power. I urge that he directs his party not to do polemics but do politics. Please do not communalise the country; do not divide the country on the basis of religion for winning elections.

SHRI BIR SINGH MAHATO (PURULIA): Mr. Speaker, Sir, I rise to support this Motion on Gujarat.

We are proud of Gujarat. It is the State which gave us Gandhiji and Vallabhbhai Patel. It is the place of Lord Krishna; and the Somnath temple is also situated there.

The disturbances began in the month of February this year on the occasion of the Godhra incident. It has been stated that disturbance has been created and the people have been divided in a planned manner.

After the announcement of the elections in Gujarat, constitutional bodies are attacked in the name of religion. The hon. Leader of the Opposition is also being castigated in the name of religion and minorities. Muslims are also being targeted. It has been stated that the Election Commission has been guided by and is working under the guidance of the hon. Leader of the Opposition. These types of statements are coming from the Constitutional Head of the State.

Elections have already been announced and the notification is being issued. We hope the elections would be held in a peaceful manner. All the political parties should take up the responsibility. I would especially request the BJP to restrict its sister organisations so that further violence would not occur.

श्री हरीभाऊ शंकर महाले (मालेगांव): अध्यक्ष महोदय, आपने मुझे बोलने के लिए समय दिया, इसके लिए मैं आपका आभारी हूँ। महोदय, सरकारी पक्ष का यही काम है कि भारत की एकात्मता और अखंडता बनी रहे और विरोधी पक्ष का यह काम है कि वह देखे कि सरकारी पक्ष ठीक से काम करे।

महोदय, यह सच है कि यह सरकार देश की एकात्मता और अखंडता को बनाए रखने के लिए ठीक ढंग से काम नहीं करती है। आडवाणी साहब के प्रति मेरा बहुत आदर है, वे बुज़ुर्ग आदमी हैं। अक्षरधाम मंदिर में ४० लोगों को मार दिया गया, तो उसके प्रति हमारा रोष है लेकिन जहां हजारों लोग मर जाते हैं, बरबाद हो जाते हैं, उसकी चिन्ता उन्हें नहीं है। ये लोग हमेशा मंदिर की बात करते हैं। क्या है मंदिर में? यह पार्टी अध्यक्ष थे तो इन्होंने सोमनाथ से यात्रा निकाली। वह ठीक है लेकिन अभी आप पार्टी अध्यक्ष नहीं हैं, देश के गृह मंत्री हैं, उप प्रधान मंत्री हैं यह समझना चाहिए। यह इस बात को नहीं समझते, जो ठीक नहीं है। सांप्रदायिकता की बात देश में नहीं होनी चाहिए। गुजरात में कितनी बार हमारे पंथ प्रधान को हिन्दू लोगों को बोलना पड़ा।वे सभ्य आदमी हैं, वरना कहीं बजरंग दल है, शिवसेना है, अन्य लोग हैं, वे ऐसा बोलते हैं, वैसा बोलते हैं और मंदिर की ही बात करते हैं - यह ठीक नहीं है। हमारे पंथ प्रधान ने इस वक्त ठीक से काम किया, उसके लिए मैं उनको धन्यवाद देता हूँ और देश को ठीक से चलाना उनकी जिम्मेदारी है, यही मेरी उनसे प्रार्थना है।

उपप्रधान मंत्री तथा गृह मंत्रालय के प्रभारी (श्री लालकृष्ण आडवाणी) : अध्यक्ष महोदय, मैंने जो बात प्रियरंजन दास मुंशी जी से अलग कही, अगर उनको आपत्ति न हो तो मैं सार्वजनिक रूप से कहूँ क्योंकि अभी-अभी एक चुनाव जम्मू-कश्मीर में हुआ जिसके बारे में सारा देश चिन्तित था। हम लोग सरकार में भी चिन्तित थे कि वह चुनाव शांति के वातावरण में होना चाहिए। यह ठीक है कि जम्मू-कश्मीर में हमारी चिन्ता का एक कारण यह भी था कि पिछले वर्षों में, पिछले दशकों में जो चुनाव वहां पर हुए, उनकी प्रामाणिकता के बारे में कभी-कभी संदेह उटाया जाता था और इसीलिए पूरा ध्यान इस बात पर केन्द्रित था कि वहां पर चुनाव शांति के वातावरण में हों और वहां चुनाव निष्पक्ष हों, मुक्त हों। जब ऐसा हो गया, तब सबको संतोष हुआ। सरकार में हमको तो हुआ ही, देश को भी संतोष हुआ, विश्व में भी उसकी साख बनी और सबसे बढ़कर जम्मू-कश्मीर की जनता को इस बात की खुशी हुई कि जो आशंकाएं उनमें से भी कुछ लोगों के मन में थीं, वे भी निर्मूल साबित हुईं और चुनाव हो गए।

आज का सत्र जब आरंभ हो रहा था तो हमारे मन में था कि आज ही के दिन एक महत्वपूर्ण चुनाव का नोटफिकेशन निकलेगा।

गुजरात का नोटीफिकेशन आज निकलेगा, शायद निकल भी गया हो - वह निकल गया है। १२ दिसम्बर, २००२ को सत्र के चलते हुए मतदान हो जायेगा और १५ दिसम्बर, २००२ को सत्र के चलते हुए परिणाम भी आ जायेंगे। २० तारीख को जब सत्र समाप्त होगा, उससे पहले शायद वहां नयी सरकार भी बन जायेगी।

मैं स्वीकार करूंगा और मेरे मन में था कि आज की चर्चा ऐसी न हो जिसके कारण वहां के वातावरण में किसी भी प्रकार का तनाव बढ़े। इसलिए जब विपक्ष के नेता की ओर से प्रस्ताव रखा गया या उनकी तरफ से जो प्रस्ताव दिया गया, वह सूखे के बारे में था। मैं तो सोचता था कि सूखे की चर्चा को ही स्वीकार कर लेंगे क्योंकि यह बात सही है कि आज जो चर्चा यहां हुई है, उस विषय पर हम पहले भी चर्चा कर चुके हैं। हमने उस पर आखिरी बार जुलाई में चर्चा की थी। जुलाई के बाद से देखा जाये तो वहां कोई साम्प्रदायिकता या साम्प्रदायिक हिंसा बढ़ी है, ऐसी कोई स्थिति नहीं है। वहां पर कुल मिलाकर शांति रही है लेकिन कुछ घटनायें हुई हैं। ऐसा नहीं है कि घटनाएं नहीं हुई हैं लेकिन कुल मिलाकर जिस प्रकार की घटनायें २७ और २८ फरवरी या उसके बाद के तीन महीनों में हुई वैसी घटनायें कोई नहीं हुईं। उऩ घटनाओं पर हमने बहुत विस्तार से इस सदन में चर्चा की है। उन तीन महीनों की घटनाओं की चर्चा अनेक बार की है। बहुत सारी बातें आज जो कही गयीं चाहे वे उधर से कहीं गयीं या इधर से कहीं गयी, वे उनकी पुनरावृत्ति थीं। मैं उनको कुछ नहीं कहूंगा, दोषारोपण नहीं करूंगा क्योंकि उससे मुझे लगता है कि हम गुजरात की स्थिति को लाभ नहीं पहुंचायेंगे। अगर प्रधान मंत्री जी ने भी कह दिया कि अच्छा होगा, इस बार हम वहां पर चर्चा करें, बाकी चर्चाएं तो होंगी लेकिन अच्छा शासन कैसे देंगे, यह बताओ। हमारे लोगों को एक प्रकार से कहा गया था कि आप अच्छे शासक की बात करो। हम तो यह भूल ही नहीं सकते क्योंकि वर्षों तक, मैंने १९५२ से लेकर आज तक लोक सभा का हर चुनाव देखा है, प्राय: कोई न कोई एक राजनीतिक मुद्दा प्रमुख बन जाता था, जिसके आधार पर हम चुनाव लड़ते थे। अब हारते थे या जीतते थे, वह अलग है। १९९९ का पहला चुनाव हुए था जिसमें नेगेटविज्म भी नहीं थी। १९९८ में भी कुछ मात्रा में था लेकिन १९९८-९९ के जो दोनों चुनाव थे, उनमें वाजपेयी जी, भारतीय जनता पार्टी और सहयोगी दल कहते थे कि हम स्वराज्य को सुराज्य में बदलेंगे। यह हमारा कथन था। स्वराज्य की भी व्याख्या करते थे कि स्वराज्य का अर्थ यह है या स्वराज्य का अर्थ वह है। मैं समझता हूं कि इस बार, प्रधान मंत्री जी ने अभी-अभी कहा कि गोधरा की चर्चा न हो, उसकी चर्चा न हो। स्वराज्य की चर्चा हो तो बहुत अच्छा होगा। मैं समझता हूं कि उन्होंने ठीक कहा।

आज सुबह-सुबह यहां आते हुए जिनकी गुजरात के संदर्भ में सबसे अधिक व्यक्तिगत रूप से चर्चा होती है--श्री नरेन्द्र मोदी, उनका मैं बयान पढ़ रहा था। मेरे पास आज का इकॉनोमिक्स टाइम्स है, उसमें उन्होंने क्या कहा है ? किसी माननीय सदस्य ने यहां पर कहा कि तन्ख्वाह देने के लिए भी उनके पास पैसे नहीं है, ऐसी स्थिति है। उन्होंने कहा कि --

"We have not taken a single penny of debt to pay salaries to our employees. We had to take debt to meet the challenges arising out of natural calamities, be it cyclones, floods or earthquake."
 

 यह इसलिए मैंने जिक्र किया है क्योंकि इस संदर्भ में माननीय सदस्य ने जिक्र किया था। फिर कहा कि उनकी कल्पना क्या है ?

"The Gujarat of future would have three basic traits: it would be educated, irrigated and completely electrified. We want to have human resources for the Twenty-first Century. I want Gujarat to have more institutions, like National Institute of Design and Indian Institute of Management."
 

 दोनों की हिन्दुस्तान भर में बड़ी रेपुटेशन है। वे प्रैस्टीजियस इंस्टीटयूशन माने जाते हैं।

       
"We would strive to irrigate all our fields in the State so that not a single farm is without water. We are going to re-charge all the underground water wells in the next 45 months. All this would not only conserve water but would also help us conserve a large amount of electricity. It would also provide necessary boost to agro-industry."मैंने इस बात का जिक्र इसलिए किया क्योंकि पहले जो दो चर्चाएं हुई थीं, उनमें मुझे सहमति प्रकट करने का अवसर मिला। मैंने कहा, मैं आपकी वेदना से सहमत हूं कि किसी भी प्रदेश में अगर इस प्रकार बेगुनाहों की हत्या हो, वह चाहे गोधरा में हो, चाहे नरोरा में हो, चाहे बड़ोदा में हो, यह हमारे लिए शर्म की बात है। यह बात मैंने लंदन जाकर कही जिसे बहुत लोगों ने लिखा। सच बात यह है कि मेरा ३ तारीख का भाषण - It is a blot on us, particularly on my Government क्योंकि हम जब सरकार में आए थे, तब हमारे बारे में आशंकाएं प्रकट की गई थीं कि इनके शासन में अल्पसंख्यक सुरक्षित नहीं होंगे और ४-५ साल का हमारा जो ट्रैक रिकार्ड रहा, गोधरा की घटना से पहले, वह ऐसा था जिसके आधार पर हम तुलना करके कह सकते थे। आज हमारे शाहनवाज़ जी ने पुराना-पुराना रिकार्ड खोजकर उन सबका जिक्र किया कि किस-किस दंगे में कितने लोग मरे थे और तब किस-किसका शासन था। मैं समझता हूं कि आज के अवसर पर अगर आज वाली चर्चा न होती तो शायद ज्यादा अच्छा होता और हम गुजरात के प्रति अधिक न्याय कर पाते। जब मेरे गुजरात के सदस्यों की प्रतक्रिया होती, मेरी समझ में आती थी। हरिन पाठक जी के पहले के दो भाषण सुनिए और आज का भाषण सुनिए, उसमें जो अंतर था, उनको लगता था कि बार-बार केवल मात्र भारतीय जनता पार्टी की आलोचना नहीं हो रही है, विश्वभर में यह इम्प्रैशन पैदा किया जाता है कि जैसे गुजरात में जो हिन्दू हैं, उनके रहते हुए मुसलमान वहां सुरक्षित नहीं हैं। यह जो धारणा पैदा की जाती है, वह गुजरात के प्रति भारी अन्याय है और हमारे देश के प्रति भी अन्याय है।…( व्यवधान)
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI: It is again a loaded statement.
SHRI L.K. ADVANI: It is not a loaded statement. आप चतुराई कर सकते हैं कि वाजपेयी जी ने यह कहा, आडवाणी दी ने वह कहा। यहां जो चतुराई चली है, वह हमारे विरोधियों ने पिछले पांच सालों में चली है। उसका कोई असर नहीं होता। हम दोनों मिल कर चले हैं और दोनों मिल कर चलेंगे। मैं आपको कहना चाहता हूं कि हिन्दुस्तान अगर आज सैकुलर है तो वह किसी पार्टी के कारण नहीं है, हिन्दुस्तान १९४७ में सैकुलर बना, यह एक असाधारण इतिहास में माना जाएगा। जिस समय भारत का विभाजन हुआ इस आधार पर कि हिन्दुओं का बहुमत कहां है, मुसलमानों का बहुमत कहां है और पाकिस्तान ने यह कहा कि जितने मुसलमान हैं, उनका अलग राष्ट्र है, उन्हें अलग राज्य चाहिए तभी पाकिस्तान बना। शाहनवाज जी ने सही कहा कि जिनको जाना था, वे वहां चले गए लेकिन जो लोग यहां पर रहे, वे भारत माता के पुत्र बन कर रहे और भारत माता के पुत्र हैं, यह मान कर चले। किसी संविधान सभा का सारा इतिहास आप पढ़ लीजिए। किसी ने नहीं कहा कि हिन्दुस्तान को हिन्दू स्टेट डिक्लेयर करना चाहिए। हिन्दुस्तान को अगर सैकुलर राज्य माना गया…( व्यवधान)
श्री सत्यव्रत चतुर्वेदी :हिन्दू परिषद, आर.एस.एस., नरेंद्र मोदी रोज कह रहे हैं।…( व्यवधान)
श्री लाल कृष्ण आडवाणी : मैं १९४७ की बात कर रहा हूं। मैं उसका भी जिक्र करता हूं। मैं उस पर भी आ जाऊंगा कि आज १९४७ से लेकर १९५० तक भारत का संविधान बना। पाकिस्तान ने उस समय अपने को इस्लामिक राज्य घोषित किया। भारत ने अगर यह संविधान स्वीकार किया जिसमें सैकुलर शब्द न होते हुए भी सैकुलर का कनसैप्ट हो सकता है कि सब मजहबों का आदर हरेक नागरिक - चाहे वह हिन्दू हो, मुसलमान हो, ईसाई हो या पारसी हो, सबको समान अधिकार, सबको बराबरी, यह जो कल्पनाएं हैं जिनको सैकुलरवाद माना जा सकता है, वह स्वीकार इसलिए हुई, सर्वसम्मति से हुई क्योंकि हिन्दुस्तान के इथोज़, हिन्दुस्तान की संस्कृति में मजहबी राज्य की कल्पना कभी स्वीकार नहीं हुई। इसलिए मैं आपको कह सकता हूं कि जब बहुत सारे लोग कभी-कभी हिन्दुइज़्म के बारे में, हिन्दुत्व के बारे में इस प्रकार का शब्द प्रयोग करते हैं, जैसे मानो यह कोई साम्प्रदायिक बात है, यह कोई गलत बात है। मैं उनसे कहूंगा, हमारे मित्र ने, जिसने आखिर में बोला कि हमारी हिन्दुत्व की कल्पना, हमारी हिन्दुइज्म की कल्पना स्वामी विवेकानन्द जी की कल्पना है, रामकृष्ण परमहंस की कल्पना है, स्वामी दयानन्द जी की कल्पना है, यह तो हमारे पूर्व संत हुए, लेकिन अगर मैं आधुनिक काल की बात कहूं तो मैं कहूंगा कि हमारी कल्पना वही है, जो सुप्रीम कोर्ट ने लिखी है। जस्टिस वर्मा के जजमेंट में उन्होंने कहा है कि:
"The words Hinduism or Hindutva are not confined only to the strict Hindu religious practices unrelated to the culture and ethos of the people of India depicting the way of life of the Indian people. These terms are indicative more of a way of life of the Indian people, and are not confined merely to describe persons practising the Hindu religion as a faith."
 

 हम इस सरकार में मानते हैं कि हिन्दुत्व का अर्थ वही है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार किया है और जिसे स्वामी विवेकानन्द जी आदि ने माना है। लेकिन यहां जिस प्रकार से बोला जाता है, आप आज के सारे भाषण उठाकर देखिये, कोई माननीय सदस्य अभी-अभी बता रहे थे कि हिन्दू कभी संस्कृत में प्रयोग नहीं हुआ और हिन्दू का अगर मैं अर्थ बताऊंगा तो आपको शर्म आयेगी कि हिन्दू का अर्थ कितना गलत है। ये जो बातें कही जाती हैं, यह वहां से कहा गया, राष्ट्रपाल जी ने कहा या किसी और ने कहा। इस प्रकार की भाषा के कारण हमें फिर से समझना चाहिए कि हिन्दुस्तान और हिन्दुस्तान की जनता साम्प्रदायिक हिंसा को कभी कण्डोन नहीं करेगी, चाहे कोई करे, हिन्दू करे कि मुसलमान करे, लेकिन सामूहिक साम्प्रदायिक हिंसा को कण्डोन नहीं किया जायेगा। लेकिन हिन्दुस्तान की जनता शूडो सैकुलरिज्म को भी स्वीकार नहीं करेगी। अगर यह न होता तो…( व्यवधान) क्योंकि आपने मेरी रथयात्रा का जिक्र किया तो इस सरकार के सारे कार्यक्रम में, जो एग्रीड प्रोग्राम है, उसमें कहीं राम मंदिर का निर्माण करना नहीं है। इसीलिए मैंने संसद में उसके बारे में कभी नहीं बोला। लेकिन आपने जिक्र किया है तो मैं इतना ही कहूंगा कि मैंने पिछले दिनों लिब्रहान कमीशन में जाकर उस रथयात्रा के बारे में, अयोध्या आन्दोलन के बारे में विस्तार से अपने विचार रखे और अगर मैं उन्हें संक्षेप में कहूं तो मैं कहूंगा कि अयोध्या का आन्दोलन एक श्रेष्ठ आदन्दोलन था। अयोध्या में जो ६ दिसम्बर, १९९२ को हुआ, वह सर्वथा गलत था, वह नहीं होना चाहिए था और उसके लिए मैंने उसी समय कहा था कि मेरे जीवन का आज का दिन सबसे दुखद रहा है।

मैं इन बातों को कहकर इतना ही और कहना चाहूंगा कि हमारा उद्देश्य होगा कि गुजरात के चुनाव निष्पक्ष रूप से हों और हमारी अपनी पार्टी भी और हमारे सारे साथी भी लोगों को यह विश्वास दिलायें कि हम न केवल अच्छा शासन वहां पर देंगे, बल्कि ऐसी व्यवस्था वहां पर करेंगे, जिससे सारी जनता, चाहे वे अल्पसंख्यक हों, चाहे बहुसंख्यक हों, वे सुरक्षा के साथ रह सकें, यह हमें उनको आश्वासन देना होगा। मुझे इतना ही कहना है, बाकी अच्छा होता कि आज इस मुद्दे पर चर्चा न करके वास्तव में किसी ज्यादा सार्थक इश्यू के ऊपर हम चर्चा करते। टैक्नीकली तो जो बात मेरे मित्र नवल किशोर राय जी ने कही, वह बिल्कुल सही है कि यह कोई रीसेण्ट बात नहीं है, क्योंकि इसमें कहा है: An Adjournment Motion has to be on a recent event. In case of Adjournment Motion, it cannot be moved on the continuing event of communalism. पर यह बात भी सही है…( व्यवधान)

श्री रूपचन्द पाल (हुगली): बहुत रीसेण्ट बात है। कमीशन के बारे में जो कुछ कहा…( व्यवधान)

श्री लाल कृष्ण आडवाणी: प्रियरंजन दासमुंशी जी ने जो कहा, सही कहा कि सरकार ने स्वीकार किया। हां, स्वीकार किया। सरकार ने इसलिए स्वीकार किया, बिना यह कहे हुए कि जो इसके पक्ष में हों खड़े हो जायें, क्योंकि हम समझते हैं कि आज देश भर में संदेश यह जाना चाहिए कि सब लोग मिलकर विषयों पर चर्चा करना चाहते हैं और कोई हाउस एडजर्न नहीं करना चाहता, यह प्रमुख कंसीडरेशन था, जिसके आधार पर हमने इसे स्वीकार किया।

मुझे और कुछ नहीं कहना है।

MR. SPEAKER: Shri Subodh Roy, the Mover of the Motion, has the right to reply now.

श्री सुबोध राय : अध्यक्ष महोदय, मैंने अपना स्थगन प्रस्ताव रखते हुए यह बात कही थी कि सरकार साम्प्रदायिक तत्वों पर लगाम लगाने में और उनकी कारगुजारियों से जो देश का वातावरण, खासकर गुजरात का वातावरण खराब हो रहा है, पूरी तरह से विफल रही है। इसलिए मैं नहीं चाहता था कि पूरा इतिहास इस पर हो और इस पर विस्तृत चर्चा की भी जरूरत नहीं है। आप अच्छी तरह से जानते हैं कि गुजरात के चुनाव के संदर्भ में अभी जो घटनाएं हुई हैं, उसके सम्बन्ध में प्रधान मंत्री जी से, गृह मंत्री जी से मैं पूछना चाहता हूं कि क्या यह बात सही नहीं है कि गुजरात के गृह सचिव ने यह रिपोर्ट चुनाव आयोग को दी थी कि विश्व हिन्दू परिषद की तरफ से जो यात्रा निकालने का काम हो रहा है, उससे उत्तेजना का वातावरण बढ़ेगा, साम्प्रदायिक तनाव बढ़ेगा। उसको रोकना चाहिए और उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। चुनाव आयोग ने इसी के आधार पर अपनी बात कही थी। फिर इनके खिलाफ नरेन्द्र मोदी का या और किसी को वक्तव्य देने का कहां से अधिकार बनता है। यह घोर निंदनीय और आपत्तिजनक काम है या नहीं? इसके खिलाफ कठोर कार्रवाई करने का अधिकार भारत का संविधान, भारत का विधान देता है या नहीं? यह सरकार की विफलता है या नहीं ? मैं जानना चाहता हूं कि किस तरह से वी.एच.पी. के लोग जो वातावरण फैला रहे हैं, उससे पूरा वातावरण विषाक्त हो रहा है ? इसलिए मैंने तोगड़िया जी का नाम, धर्मेन्द्र जी का नाम और दूसरों का नाम लिया था। उनके रोज भाषण हो रहे हैं। क्या उनसे शांति और सद्भाव की बातें हो रही हैं ? क्या उस पर लगाम लगाने के लिए आप कोई जरूरी कदम उठाएंगे ? क्या उनके खिलाफ पोटा के तहत कार्रवाई करना जरूरी नहीं है ? अगर यह बात नहीं है तो फिर क्या सरकार, भारतीय जनता पार्टी, हमारे प्रधान मंत्री जी, हमारे गृह मंत्री जी इस संगठन से अपने को अलग रखने की बात कहेंगे ?मैं जानना चाहता हूं कि वी.एच.पी. के लोगों ने जिस तरह से चुनाव आयोग के खिलाफ बयानबाजी की है, हमारे कई मित्रों ने भी कहा है, संगमा जी ने भी कहा है कि उनके बयानों से संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ बातें हुए हैं, उसको क्यों नहीं रोका गया ? उसकी इजाजत नहीं देना, उसको रोकने का काम करना हमारे देश में जनतंत्र की नींव मजबूत रहे, सारे लोगों को निष्पक्ष होकर चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग करने का वातावरण तैयार करने के लिए सरकार को कारगर कदम उठाने चाहिए।

गुजरात के बारे में जिस तरह से सत्ता पक्ष के लोगों ने कहा, भारतीय जनता पार्टी के लोगों को छोड़कर उनके सहयोगी दलों को भी इसके बारे में बोलने की हिम्मत नहीं हुई है। भारतीय जनता पार्टी ने भी जिस तरह से बातें कही हैं, लगता है सरकार दंगों का इतिहास बताकर गुजरात के इन दंगों को जो उनका बर्बर अपराध है, जस्टिफाई करना चाहती है। इस बात को हम बर्दाश्त करने के लिए तैयार नहीं हैं। उसको स्वीकार करने के लिए भी हम तैयार नहीं हैं। सरदार सरोवर का निर्माण और अन्य विकास के काम वहां इस कारण नहीं हो पा रहे हैं। इस तरह से मगरमच्छ की तरह आंसू बहाने की आदत भारतीय जनता पार्टी और सत्ता पक्ष के लोगों की बन गई है इसलिए सरकार के जवाब से हम पूरी तरह से असंतुष्ट हैं।

सरकार ने जो जवाब दिया है, वह पूरी तरह से धोखाधड़ी का जवाब है, जो पूरी तरह से माइनॉरिटी के खिलाफ है। अपने अपराधों को पूरी तरह से उचित ठहराने का काम हुआ है और जो हत्यारे हैं, जो नर-संहार के दोषी हैं, उनको संरक्षण प्रदान करने का काम है। हम इस तरह के जवाब को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं हैं।

श्री चिन्मयानन्द स्वामी (जौनपुर): मैं आपकी अनुमति से कहना चाहता हूं कि जैसे माननीय उप-प्रधान मंत्री जी ने कहा है कि ये जितनी घटनाएं हुई है, जिनकी चर्चा यहां हुई है, ये जुलाई के पहले की हैं, जुलाई के बाद की जो एक घटना महत्वपूर्ण घटना है। क्या उस घटना में जिसमें आतंकवादियों ने अक्षरधाम मंदिर की पवित्रता को नष्ट करने की कोशिश की थी और अपने एक कमांडो ने उस पवित्रता की रक्षा करने के लिए शहादत दी, उसकी श्रद्धांजलि को क्या ये शामिल करना चाहेंगे कि इस तरह की श्रद्धांजलि यहां होनी चाहिए?…( व्यवधान)

MR. SPEAKER: The question is:

"That the House do now adjourn."
 

The motion was negatived.

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