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Showing contexts for: SIS RAM OLA in Shri Sis Ram Ola Called The Attention Of The Minister Of Rural Development And ... on 21 May, 2012Matching Fragments
> Title: Shri Sis Ram Ola called the attention of the Minister of Rural Development and Minister of Drinking Water and Sanitation to the situation arising out of shortage of Drinking Water in Jhunjunu and Churu Districts of Rajasthan and steps taken by the Government in this regard. श्री शीश राम ओला (झुंझुनू) : अध्यक्ष महोदया, मैं पेयजल और स्वच्छता मंत्री का ध्यान अविलम्बनीय लोक महत्व के निम्न विषय की ओर दिलाता हूं और प्रार्थना करता हूं कि वह इस संबंध में वक्तव्य दें “ देश में विशेषकर राजस्थान के झुंझुनू और चुरु जिलों में पेयजल के अभाव से उत्पन्न स्थिति तथा इस संबंध में सरकार द्वारा उठाए गए कदम।” ग्रामीण विकास मंत्री तथा पेयजल और स्वच्छता मंत्री (श्री जयराम रमेश): महोदया, मेरा एक लंबा वक्तव्य है, जो मैंने सदन के पटल पर रख दिया है। अध्यक्ष महोदया : शीश राम ओला जी, क्या आपने इसे पढ़ लिया है? *श्री जयराम रमेशः माननीय संसद सदस्य ने करोड़ों लोगों के जीवन पर असर डालने वाला अहम मुद्दा उठाया है। पेयजल की आपूर्ति जीवन की सबसे बड़ी जरूरत है। भारत में सिंचाई, बढ़ते औद्योगिकीकरण, शहरीकरण और जनसंख्या के कारण हर गुजरते साल के साथ जल संसाधनों पर विभिन्न मांगों का दबाव बढ़ता जा रहा है। यह दबाव तब और बढ़ जाता है, जब जलवायु में परिवर्तन के कारण वर्षा पर पड़ने वाले प्रभाव से पानी की उपलब्धता कम हो जाती है। हालांकि जल राज्य का विषय है, फिर भी भारत सरकार पेयजल उपलब्ध कराने के राज्यों के प्रयासों को बढ़ावा देने के लिए हर संभव वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान कर रही है। गर्मी के महीनों में मानव आबादी और पशुओं को पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने की चुनौती और बढ़ जाती है। इसके अलावा, 80औ पेयजल आपूर्ति जमीन के नीचे से पानी निकालकर की जाती है। जमीन से नीचे का पानी का स्तर हर वर्ष गर्मी के महीनों में और नीचे चला जाता है। इस चुनौती का मुकाबला करने के लिए सरकार ने पुनर्भरण संरचनाओं के स्रोतों और खानों की पहचान करने के लिए भूजल संभावना मानचित्र तैयार करने, भविष्य में पर्याप्त जल उपलब्ध कराने के लिए भूमिगत एक्विफरों की मैपिंग और देश भर में ग्राम जल सुरक्षा योजनाएं तैयार करने जैसे कई उपाय किये हैं। इन योजनाओं को तैयार करने का उद्देश्य आम लोंगों को पानी की मांग और उपयोग की निगरानी और नियमन करके उपलब्ध जल के उपयोग की योजना बनाने और प्रबंधन करने के लिए प्रेरित करना है। राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, गुजरात, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक नामक 10 राज्यों में अति दोहित जल स्रोतों वाले 15 ब्लॉकों में प्रायोगिक योजनाएं शुरू की गई हैं। 1.4.2012 तक प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, देश भर में 16.64 लाख ग्रामीण बसावटों में से 12.72 लाख बसावटों में प्रतिदिन प्रति व्यक्ति कम से कम 40 लीटर सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है। लेकिन अब भी लगभग 2.92 लाख बसावटों में प्रतिदिन प्रति व्यक्ति 40 लीटर से कम पेयजल उपलबध कराया जा रहा है और लगभग 99,000 बसावटों में पेयजल स्रोत जल गुणवत्ता की समस्याओं से ग्रस्त है। देश के पश्चिमी और दक्षिणी भू‑भाग अधिकतर रेगिस्तानी हैं और वहां सूखे की आशंका भी अधिक होती है, इसलिए ये क्षेत्र पेयजल की कमी से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम (एनआरडीडब्ल्यूडी) के अंतर्गत राज्यों को वर्ष की शुरूआत में वार्षिक कार्य‑योजनाएं तैयार करनी होती हैं, जिनमें कवर की जाने वाली उन बसावटों और क्षेत्रों की प्राथमिकता तय की जाती है, जहां जलापूर्ति अपर्याप्त है। सरकार ने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि राज्यों को दीर्घावधिक उपायों तथा आवश्यक अल्पकालिक उपायों एवं तात्कालिक कार्रवाई के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हो। भारत निर्माण के प्रारंभ होने से लेकर अब तक ग्रामीण पेयजल क्षेत्र के लिए किए गए आवंटन में काफी अधिक वृद्धि हुई है। इस क्षेत्र के लिए आवंटन 2004‑05 में 2900 करोड़ रूपये से बढ़कर 2012‑13 में 10,500 करोड़ हो गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में जल आपूर्ति उपलब्ध कराने के लिए राज्यों को 11वीं पंचवर्षीय योजना में 37,277 करोड़ रूपये रिलीज किए गए। इसी दौरान राज्य सरकारों ने भी अपने संसाधनों में लगभग समान राशि खर्च की। यह संभावना है कि 12वीं पंचवर्षीय योजना में ग्रामीण पेयजल क्षेत्र के परिव्यय में और अधिक वृद्धि देखने को मिल सकती है। सरकार न केवल पेयजल आपूति के लिए बल्कि मध्यम तथा दीर्घावधिक समाधानों की योजना बनाने के लिए राज्यों को तत्काल सहायता प्रदान कर रही है जिनमें स्पॉट स्कीम्स, एकल तथा बहु‑ग्रामीण योजनाएं शुरू करना, जलशोधन संयंत्रों की स्थापना करना तथा जल संरक्षण उपाय शुरू करना शामिल है जिससे भू‑जल का पुनर्भरण किया जा सकता है तथा वर्षा जल एकत्रीकरण जैसे जल एकत्रीकरण व्यवस्था शुरू की जा सकती है। मैं, माननीय संसद सदस्य का ध्यान इस ओर आकृष्ट करना चाहूंगा कि एनआरडीडब्ल्यूपी निधियों के आवंटन के मानदंड में मरुभूमि क्षेत्रों तथा सूखा‑प्रवण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इसके अलावा, एनआरडीडब्ल्यूपी निधियों के आवंटन में मरुभूमि क्षेत्रों तथा सूखा‑प्रवण क्षेत्रों आदि के तहत आने वाले क्षेत्रों को 40औ वेटेज दी जाती है। 10औ एनआरडीडब्ल्यूपी निधियां 233 मरुभूमि विकास कार्यक्रम ब्लॉकों के लिए निर्धारित की गई हैं जिनमें से राजस्थान में 85 ब्लॉक हैं और इनमें से 8 ब्लॉक झुंझूनु में और 6 ब्लॉक चूरू जिले में हैं। राजस्थान को 2012‑13 में एनआरडीडब्ल्यूपी के अंतर्गत 1346 करोड़ रूपये का अनंतिम आवंटन किया गया है जो कि राष्ट्रीय आवंटन का 12.82औ है। मंत्रालय ने नागौर जिले में पेयजल आपूर्ति परियोजनाओं के लिए जापान इंटरनेशनल को‑ऑपरेशन एजेंसी (जेआईसीए) सहायता तथा भीलवाडा जिले में पेयजल आपूर्ति परियोजनाओं के लिए विश्व बैंक सहायता की सिफारिश भी की है। माननीय सदस्य द्वारा राजस्थान के झुंझूनु और चुरू जिलों में स्थिति के संबंध में उठाए गए मामलों पर राजस्थान सरकार से जानकारी एकत्र की गई है। झुंझूनु जिले में 12 शहर और 856 गांव हैं। हालांकि, सभी शहरों में पाईप के जरिए जल की आपूर्ति की जाती है लेकिन गांवों में आपूर्ति के अलग‑अलग स्रोत हैं। खेतड़ी के अलावा, सभी शाहरों में अब प्रतिदिन जल की आपूर्ति की जा रही है। खेतड़ी शहर में प्रत्येक 48 घंटे में एक बार जल की आपूर्ति की जाती है। खेतड़ी में जल आपूर्ति को बेहतर बनाने के लिए 47 लाख रूपए की लागत वाली एक परियोजना मंजूर की गई है जिसके तहत नए टयूबवेल तथा ऊंचाई पर जलाशय बनाने का प्रस्ताव किया गया है। अब तक, जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में सभी आबाद गांवों में जल आपूर्ति की काम‑चलाऊ व्यवस्था है और कहीं भी टैंकर के जरिए जल की आपूर्ति नहीं की जा रही है। झुंझूनु तहसील की अलसीशर पंचायत समिति में 14 गांव हैं जहां जल गुणवत्ता की समस्या है, जिसके लिए चुरू‑बिसाऊ नहर परियोजना से जल की आपूर्ति की जा रही है। चुरू जिले में 10 शहर और 854 गांव हैं। यहां भी सभी शहरों में पाईप के जरिए जल की आपूर्ति की जाती है जबकि गांवों में आपूर्ति के अलग‑अलग स्रोत हैं। सुजानगढ़ और राजगढ़ के अलावा, सभी शहरों में अब प्रतिदिन जल की आपूर्ति की जा रही है। सुजानगढ़ में प्रत्येक 48 घंटे में तथा राजगढ़ में प्रत्येक 72 घंटे में एक बार जल की आपूर्ति की जाती है। सभी आबाद गांवों में जल आपूर्ति की काम‑चलाऊ व्यवस्था है। 2012‑13 में "आपनी योजना" के दूसरे चरण के अंतर्गत, रतनगढ़‑सुजानगढ़ परियोजना के लिए 325 करोड़ रूपए आवंटित किए गए हैं जबकि, राजगढ़‑बूंगी परियोजना के लिए 248 करोड़ रूपए आवंटित किए गए हैं। ऐसी संभावना है कि 2014‑15 तक पूरे चुरू जिले में "आपनी योजना" के अंतर्गत पर्याप्त रूप से स्वच्छ पेयजल की आपूर्ति कर दी जाएगी। मेरा मंत्रालय, ग्रामीण क्षेत्रों में सभी लोगों को पर्याप्त रूप से स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए प्रयत्नशील है। मैं, इस प्रयास में माननीय सदस्यों के सहयोग की अपेक्षा करता हूं। विवरण‑1 दिनांक 1.4.2012 की स्थिति के अनुसार पेयजल आपूर्ति के बारे में ग्रामीण बसावटों की स्थिति विवरण‑2 2012‑13 में बसावटों के कवरेज के लिए राज्यवार लक्ष्य विवरण‑3 11वीं योजनावधि में ग्रामीण जल आपूर्ति के लिए निधियों का आवंटन, रिलीज और व्यय विवरण‑4 एनआरडीडब्ल्यूपी के अंतर्गत 2012‑13 के लिए राज्य‑वार अनंतिम आवंटन विवरण‑ I दिनांक 1.4.2012 की स्थिति के अनुसार पेयजल आपूर्ति के बारे में ग्रामीण बसावटों की स्थिति क्र.स.