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... (व्यवधान) श्री लालू प्रसाद : जो बैक बैंचर है, जो छूटा हुआ है, उनको मेनस्ट्रीम में, मुख्य धारा में हम कैसे लायें? नोर्थ ईस्ट को अगर हम अंगूठी की तरह, रिंग की तरह संभाल कर, लेकर नहीं चलेंगे, वहां के ग्रामीणों को, अगर वहां की जनता की शिक्षा में, बेरोजगारी के सवाल या जो भी कम्युनिकेशन और गरीबी के सवाल पर हमने ध्यान नहीं दिया तो हमारे देश की एकता और अखंडता पर खतरे पैदा हो सकते हैं। अरुणाचल प्रदेश में हमारी और चीन की सीमा आमने-सामने है, इधर दुकान है, उधर भी दुकान है, इसलिए मेरा मानना है, मैं नहीं जानता कि जो बुद्धिजीवी लोग हैं, जो बुद्धि से जीते हैं, उनकी बहस में मैं जाना नहीं चाहता, लेकिन कोई माई का लाल, कोई बेटा नहीं चाहता कि हम आतंकवादी बनें, कोई नहीं चाहता कि हिंसावादी बनें। इस राष्ट्र में ही नहीं, दुनिया में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जो रास्ता था, अहिंसा का रास्ता, दुनिया ने अहिंसा के रास्ते को ही अख्ितयार किया। यह आतंकवाद, ट्राइबल्स की हत्या, कोकराझार, आज उस इलाके में यह हालत है कि कोई भी ब्यूरोक़ेसी में रहने वाला आदमी डैपुटेशन पर वहां नहीं रहना चाहता। कोई भी आफिसर हो, कलैकटर हो, एस.पी. हो या वरिष्ठ पदाधिकारी हो, वह वहां जाना नहीं चाहता। इस हालत को हमें समझना चाहिए कि हमने गरीबों को सम्मान नहीं दिया, इज्जत नहीं दी, प्रतिष्ठा नहीं दी। १५ अगस्त और २६ जनवरी का नाम है, वहां से नागा लोग आ रहे हैं, यहां आप उनका प्रदर्शन कराते हैं, नागा लोगों के कौशल को देखते हैं। लेकिन हमने वहां के लोगों को कया दिया है, वहां के लोगों की पर कैपिटा इन्कम और वहां का इन्वैस्टमेंट लोएस्ट है। आजादी मिलने के बाद केन्द्र सरकार के द्वारा पूरे नोर्थ ईस्ट में, पूर्वांचल से भेदभाव हुआ है। चाहे जो भी केन्द्र में रहा हो, इसीलिए हम लोग, पूरे नोर्थ ईस्ट के मुख्य मंत्री लोग भी राष्ट्रीय विकास परिषद में इस सवाल को उठाते रहे हैं कि गाडगिल फार्मूले से इलाज नहीं होगा। जो कुछ हम पीछे छोड़ आए हैं, उस पर विशेष ध्यान देना होगा और उन गरीब लोगों को मुख्य धारा में लाना होगा। देश में चंद लोगों ने शिक्षा को काबू कर रखा है, जो गरीब हैं, ट्राइबल हैं, उनको अशक्षित रखा हुआ है। लेकिन अब समय बदल रहा है और उसी में से लोग शक्षित होकर निकल रहे हैं। जब सचिवालय से न्याय नहीं मिलेगा, न्यायालय से न्याय नहीं मिलेगा तो इनसान अपना रास्ता बदलता है। वही हालत आज हमारे राज में कई प्रदेशों में हो रही है और तथाकथित नकसलवादी पैदा हो रहे हैं। वे लोगों को बोलते हैं कि न्यायपालिका में न्याय नहीं मिलेगा, ब्यूरोक़ेसी से न्याय नहीं मिलेगा, जिन सरकारों का सामंतवादी चरित्र है, उनसे न्याय नहीं मिलेगा। इसलिए देश में पेरेलल कोर्ट बन रही हैं, लोगों के नाक, कान और हाथ काटे जाते हैं। जो भी गरीब के साथ अत्याचार या जुल्म करता है, वे लोग अपने हिसाब से न्याय करते हैं। किसी ने ठीक ही कहा है- जाके पैर न फटे बिवाई, सो का जाने पीर पराई। हमारी बहनें यहां बैठी हैं, इनको कया मालूम कि हमारी आदिवासी बेटियों और बहनों के साथ कया-कया होता है। वे पत्ितयां चुन-चुनकर पत्तल बनाने का काम करती हैं, बोझा उठाती हैं, लकड़ी बीनने का काम करती हैं, गोद में बच्चे को न उठाकर पीठ पर बांध कर मजदूरी करने जाती हैं। मैंने शुरू में ही कहा कि आडवाणी जी आप या आपकी सरकार इसके लिए दोषी नहीं है, लेकिन हमारे देश की एकता और अखंडता पर तथा पूर्वांचल पर विशेषरूप से ध्यान नहीं दिया तो यह समस्या और ज्यादा बिगड़ेगी। पिछली लोक सभा में स्वैल साहब थे। आपकी पार्टी ने फैसला किया, मैं इस बहस में नहीं जाना चाहता, कि गोहत्या बंद की जाए, यह आपकी आइडॉलोजी हो सकती है, लेकिन स्वैल साहब ने कहा कि नार्थ ईस्ट में लोग गाय-भैंस आदि जानवरों का स्लॉटर करते हैं और उनका मांस खाते हैं। इसलिए हमें देखना पड़ेगा, समझना पड़ेगा कि यह देश अनेकता में एकता वाला देश है। यहां के लोगों का भिन्न-भिन्न रहन-सहन है, भिन्न-भिन्न भाषा है और खानपान है। अगर हमें सबको राष्ट्र की मुख्य धारा में लाना है तो सबसे पहले वहां के जो गरीब लोग हैं, उनको मुख्य धारा में लाएं। असम में बिहार पुलिस भेजी थी, कश्मीर में भी भेजी थी। महंत जी ने कहा था इसलिए हमने बिहार की पुलिस भेजी, लेकिन वह भी वहां नहीं टिक सकी, कयोंकि मलेरिया हो जाता है, वहां का पानी ठीक नहीं है। आपकी सरकार ने कहा है कि देश के हर आदमी को पीने का शुद्ध पानी देंगे। आपको इस पर अमल करना चाहिए और इसी के साथ शिक्षा तथा चकित्सा भी विशेषरूप से नार्थ ईस्ट के लोगों को मुहैया कराई जाए। इसके अलावा सब दलों का डेलीगेशन वहां जाए, वहां के लोगों से मिले और वहां के लोगों को विकास के काम में लगा। इसके साथ-साथ जो गुजराल साहब ने घोषणा की थी, देवेगौड़ा साहब जब वहां गए थे तो उन्होंने भी घोषणा की थी और मरहूम राजीव गांधी ने जो पैकेज तैयार किया था, उसके इम्प्लीमेंटेशन में कया दिककत है, वह लागू होना चाहिए। जब तक देश के गरीबों को मुख्य धारा में नहीं लाएंगे, धन और धरती को नहीं बांटेंगे, तब तक यह समस्या हल नहीं होगी। हम बुद्धिजीवी बनकर और उन्हें नकलवादी कहकर ही इस समस्या का समाधान नहीं कर सकते और लोगों की हत्याएं जो हो रही हैं, उन पर काबू नहीं पा सकते। इसलिए बुद्धिजीवियों को बुद्धि छोड़ देनी चाहिए और गरीब लोगों को गले लगाने का काम करना चाहिए। उनको अपने बेटे-बेटी की तरह मानना चाहिए तभी हम आतंकवाद पर काबू पा सकते हैं। चूंकि आपने समाप्त करने के लिए कहा है, इसलिए मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।"> ">SHRI TH. CHAOBA SINGH (INNER MANIPUR): Mr. Chairman, Sir, thank you very much for giving me this opportunity.