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Showing contexts for: K.A..SANGTAM in Discussion Regarding Issue Of National Security And Rise Of Militancy In Various ... on 15 December, 1999Matching Fragments
मैंने बताया कि अगर कोई विवाद है तो वह इस बात पर है कि इसको सिकयुरिटी रिलेटेड एकसपैंडीचर माना जाए या नहीं और उसे हम सॉट आउट कर लेते हैं। हमने इसी साल सिकयुरिटी रिलेटेड एकसपैंडीचर के नाते १८ करोड़ रुपये दिए हैं। वैद्य विष्णु बोले थे और उन्होंने कहा था, सही कहा था कि हमारी सेना, हमारे अर्धसैनिक बल के अलावा आज आतंकवादियों का मुकाबला करने के लिए जो विलेज डिफैंस कोर बनी है, वह बहुत इफैकिटव है। उनको और बढ़ाने की उन्होंने जरूरत महसूस की। मैं इस बात को स्वीकार करता हूं और उनको जानकारी देना चाहूंगा कि कयोंकि खर्च उस समय प्रदेश की सरकार करती है, सैण्ट्रल गवर्नमेंट उसको रीअम्बर्स करती है। जब इन वी.बी.सीज़. को बनाने का निर्णय हुआ था तो १२८८५ वी.बी.सीज़. की संख्या थी, लेकिन हमने उनको कनवे किया है कि हम १८,००० वी.बी.सीज़. का खर्च भी रीअम्बर्स करेंगे। मुझे बहुत खुशी है कि नोर्थ ईस्ट से अनेक सदस्यों ने अपनी-अपनी राय रखी है। नोर्थ ईस्ट ही नहीं, पश्िचम बंगाल के भी चार सदस्य बोले थे। कृष्णा जी जब बोली थीं कि हमारे यहां पर भी आई.एस.आई. का संकट है और उसकी चिन्ता करनी चाहिए। मैं उनको कह सकता हूं कि यह जो चिन्ता उन्होंने प्रकट की, वैसी ही चिन्ता उनके प्रदेश के ग्ृाह मंत्री ने आकर मुझसे प्रकट की। वे कुछ ही दिन पहले मेरे पास आये थे और कहा कि आप जब आई.एस.आई. की चर्चा कर रहे थे, आंतरिक सुरक्षा के लिए आई.एस.आई. ने जो संकट पैदा किये हैं, उनका जिक़ कहीं करते हैं तो आपके सार्वजनिक वकतव्यों में जम्मू-कश्मीर का उल्लेख होता है, पंजाब का उल्लेख होता है, नोर्थ ईस्ट का उल्लेख होता है, लेकिन पश्िचम बंगाल का उल्लेख नहीं होता है। मैं आपको यह कहने आया हूं कि पश्िचम बंगाल में भी यह समस्या गम्भीर है और उसमें केन्द्र की सरकार और पश्िचम बंगाल की सरकार दोनों सहकार करके, मिलकर उसका मुकाबला करें, यह बल देने आये थे। मैंने उनको कहा कि मैं तो आपके कथन का स्वागत करता हूं। मैं इतना जानता हूं कि आई.एस.आई. की गतवधियों के बारे में इस सरकार ने देश भर में और विदेश में भी एक वातावरण पैदा करने की एक प्रामाणिक कोशिश की है और यह कहा है कि यह समस्या केवल किसी राज्य की नहीं है। क़ास बोर्डर टैरेरिज्म का अगर हम सामूहिक रूप से विश्व भर के सभी देश मुकाबला करने के लिए मन नहीं बनाएंगे और सोचेंगे कि ठीक है, यह भारत की समस्या होगी, इसमें समस्या का कारण कश्मीर है, इसके कारण पाकिस्तान कुछ कर रहा है, उसकी ओर उदासीन होंगे तो उसका खमियाजा विश्व भर को भुगतना पड़ेगा, सारी दुनिया को भुगतना पड़ेंगा, यह हमने विश्व भर में बोलने की कोशिश की है। मैं कह सकता हूं कि देश में भी इसी प्रकार की जाग्ृाति पैदा करने की कोशिश होनी चाहिए। मैं तो देख रहा था कि इन पिछले दो सालों में इतने सवाल माननीय सदस्यों की ओर से आई.एस.आई. की गतवधियों के बारे में जानने के लिए आये हैं। उसके पहले की लिस्ट निकालो तो १९९१ से लेकर १९९७ तक मैंने देखा कि बहुत कम सवाल हैं और यह अच्छी बात है और इसी कारण जब एक बार ग्ृाह मंत्रालय की कन्सलटेटिव कमेटी की मीटिंग हुई थी तो उस कन्सलटेटिव कमेटी की मीटिंग में दो घंटे का पूरा प्रजेण्टेशन हमारे विभाग ने, ग्ृाह मंत्रालय ने किया था कि आई.एस.आई. ने किस प्रकार अपनी गतवधियां बढ़ाई हैं। उसको देखने के बाद सभी सदस्य जितने वहां पर उपस्िथत थे, सोमनाथ बाबू वहां पर उपस्िथत थे, बनातवाला जी उपस्िथत थे, सब ने उसी समय कहा, यह कल्पना आई कि इस प्रकार की चीज देश के सामने रखनी चाहिए और वहां पर मांग थी, शायद बनातवाला जी ने मांग की कि इस पर व्हाइट पेपर प्रकाशित होना चाहिए। वह व्हाइट पेपर प्रकाशित करने का विचार सरकार का है। उसमें कुछ कारणों से कुछ विलम्ब हुआ है, लेकिन वह शीघ्र प्रकाशित किया जायेगा और आपके सामने रखा जायेगा। इतना मैं कह सकता हूं। उत्तर पूर्व में वैसे तो सात राज्य माने जाते हैं... (व्यवधान) श्री श्यामाचरण शुकल : मैं एक बात आपसे पूछना चाहता हूं कि पाकिस्तान को हम टैरेरिस्ट स्टेट घोषित करने में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर कयों सफल नहीं हो पा रहे हैं? श्री लाल कृष्ण आडवाणी : पाकिस्तान को टैरेरिस्ट स्टेट घोषित करें तो उसकी टैरेरिस्ट स्टेट की घोषणा का असर अमेरिका पर होगा, कयोंकि उनके अपने कानून हैं। इसकी मांग तो बहुत समय से होती रही है, लेकिन पाकिस्तान में क़ास बोर्डर टैरेरिज्म के बारे में पहली-पहली बार अमेरिका की तरफ से अगर कोई टिप्पणियां हुई हैं तो इसी १९९९ में हुई हैं। इससे पहले तो कोई उसको रिकगनाइज़ करने को तैयार नहीं था। उसको यह मानते थे कि ठीक है, यह तो चलता है, आपकी तरफ से भी होता होगा, उनकी तरफ से भी होता है,they never took notice of it. इस बार मुझे याद है कि कारगिल के बाद जो घटना हुई। उसमें पहली बार सार्वजनिक रूप से अमेरिका की ओर से भी उस पर टिप्पणी की गई। उसकी आलोजना की गई, निन्दा की गई। इस दिशा में हमारा प्रयत्न जारी है, लेकिन मैं मानता हूं, कुल मिलाकर अगर आतंकवाद को समाप्त करना है, तो अपने बलबूते पर करेंगे, जनता के समर्थन से करेंगे। विदेशी ताकतों और अन्तरराष्ट्रीय जनमत सहायक जरूर होगा और सहायक करने के लिए हमारी तरफ से कोई कसर हम उठाकर नहीं रखेंगे, लेकिन कोई दूसरा देश उस देश को टैरेरिस्ट स्टेट घोषित करता है या नहीं करता है, इसके ऊपर हमारी सफलता या विफलता निर्भर नहीं। इस बारे में मैं इतना ही कहना चाहता हूं। जहां तक पूवर्ोत्तर राज्यों का प्रश्न है, सात राज्यों की नार्थ-ईस्ट काउन्िसल बनी हुई है, लेकिन सरकार का विचार है कि सकिकम को भी इसमें जोड़े। कुल मिलाकर नार्थ-ईस्ट में आठ राज्य हैं। इन आठ राज्यों में चार राज्य ऐसे हैं, जहां पर अपेक्षाकृत शान्ित है। वहां पर उग्रवाद, आतंकवाद इस रूप में नहीं है, जैसा कि बाकी चार राज्यों में है। ये चार राज्य हैं - मिजोराम, अरुणाचल प्रदेश, सकिकम और मेघालय। इन चार राज्यों में, मैं मानता हूं, अपेक्षाकृत शान्ित है। लेकिन बाकी चार राज्यों अर्थात् असम, त्रिपुरा, मणिपुर और नागालैंड में स्िथति दूसरी है। नागालैंड में आज सीज-फायर नाम से समझौता हुआ है,NSCM(I.M.) और भारत सरकार के बीच। हम आए, उससे पहले हुआ था। वह सीज फायर जारी है और यह थोड़े-थोड़े काल के लिए होता है, लेकिन अब साल भर के लिए चला है। कल नागालैंड के माननीय सदस्य ने कुछ बातें कहीं, उनमें वजन है। मैं इतना ही कह सकता हूं कि सीज फायर के जो ग्राउन्ड रूल्स बने हैं, उन ग्राउन्ड रूल्स का उल्लंघन होता रहा है। उनका उल्लंघन न हो और इस बात की व्यवस्था हमारे सुरक्षा कर्मी करें, यह उनको निर्देश दिया गया है। उस दिशा में हम चन्ितत हैं और गम्भीर हैं। पिछले दिनों हमारे नागालैंड के मुख्यमंत्री को एम्बुश करके जिस प्रकार की घटना हुई, वह अत्यन्त गम्भीर घटना है, जिसका हमने नोटिस लिया है। स्वयं माननीय सदस्य ने अपनी सुरक्षा केबारे में कहा है। सुरक्षा की बात मैंने ग्ृाह मंत्रालय के बताई है और उसका उपयुकत प्रबन्ध हो जाएगा।SHRI K.A. SANGTAM (NAGALAND): Mr. Speaker, Sir, could I just seek a clarification from the hon. Home Minister? Since this is directly related to the State of Nagaland, which I represent, I would like to seek a clarification.
MR. SPEAKER: You have already participated in the debate. You can only ask a specific question. Otherwise, it becomes a debate.
SHRI L.K. ADVANI: You can put your question. ... (Interruptions)
MR. SPEAKER: I understand, this is an important matter. If you have any questions, you can put them. श्री सत्यव्रत चतुर्वेदी : माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं एक ही बात, एक ही कवेश्चन पूछ रहा हूं कि जहां तक टैरेरिज्म का सवाल है, भारत ही अकेला ऐसा देश नहीं है जो इससे परेशान है। अमरीका में और इज्राइल में टैरेरिज्म है। मैं सवाल यह पूछना चाहता हूं कि जिस तरह से इज्राइल ने अपने आसपास के देशों में टैरेरिज्म कीkindergarten of terrorism डील करने की नीति अपनाई है, कया भारत सरकार इस बात पर विचार करेगी? हमारे बार्डर पर टैरेरिस्टस को तैयार किया गया है या जो प्रशिक्षण शविर तैयार किये गये हैं, उन शविरों को नष्ट किया जाये, उनको खत्म किया जाये, इस बारे में हमें सोचना होगा, कया सरकार इन बातों पर विचार करेगी?SHRI K.A. SANGTAM (NAGALAND): I put one question on the floor and the reply which I got was that the hon. Minister is not inclined to accept that question. This is very serious because after the attempt on the Chief Minister"s life, an intelligence report has been sent to all the important newspapers saying that 14 numbers of AK-47 ammunition empty cases, 11 numbers of 7.62 empty cases and a lot of other items were found found when the search of the spot and area was made. Today, why are they declining to give the reply to us? I want to have a reply because it is the privilege of this august House to know.