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1300 hrs. The Lok Sabha then adjourned for Lunch till Fourteen of the Clock.

14.01 hrs. The Lok Sabha re-assembled after Lunch at two minutes past Fourteen of the Clock.

(Shri Basu Deb Acharia in the Chair) MR. CHAIRMAN : Shri L.K. Advani to continue his speech. ग्ृाह मंत्री (श्री लाल कृष्ण आडवाणी): माननीय सभापति जी, मैंने धन्यवाद प्रस्ताव का समर्थन करते हुए, विगत वषर्ों में हुए चुनावों का उल्लेख करते हुए अपनी बात आरम्भ की थी। यद्यपि १९७७ और १९९८ के बीच में २१ साल ही बीते हैं, इन २१ सालों में लोकसभा के छ: आम चुनाव हुए। इनमें मैंने जैसे बताया कि बाकी सब चुनावों में कोई न कोई निर्णायक मुद्दा, कोई नकारात्मक मुद्दा रहा, कोई नेगेटिव इश्यू रहा, जिसके आधार पर सत्ता परिवर्तन हुआ, लेकिन इस बार कोई भी यदि विश्लेषण करेगा तो पाएगा कि हां, कुछ नाराजगियां थीं। पिछली सरकार जिस प्रकार से दो बार १८ महीनों में बदली, देश पर चुनाव अनावश्यक रूप से लादा गया, उसके कारण नाराजगी थी। लेकिन प्रमुख रूप से जो वातावरण था, वह यह था कि पिछली बार वाजपेयी जी की सरकार केवल १३ दिनों के लिए बनी और बाकी सब पार्िटयों ने, जिन्होंने यद्यपि कांग्रेस के विरोध के आधार पर चुनाव लड़ा और जीता था, उन सब ने कांग्रेस से मिल कर १३ दिन की सरकार गिरा दी, यह उचित नहीं हुआ। इसीलिए वाजपेयी जी की सरकार को, भारतीय जनता पार्टी को एक अवसर देना चाहिए। यह सम्भवत: एक स्िथर सरकार दे सकें। मैं मानता हूं कि इस बार का वोट मुख्यत: एक सकारात्मक वोट था, सुशासन के लिए वोट था, कयोंकि स्िथर सरकार स्वयं में कोई बहुत बड़ा गुण नहीं है। पांच साल सरकार चले, यह कोई गुण नहीं है। गुण अगर कोई है तो तब है जब स्िथरता से सुशासन मिलता है, अच्छा राज्य मिलता है, जनता की सेवा और कल्याण होता है।

Though the growth of the Bharatiya Janata Party has been phenomenal, our growth rate has not been able to match the decline rate of the Congress.

SHRI DATTA MEGHE : It is a temporary phase.

SHRI L.K. ADVANI: Maybe. Whatever it may be I have to say. I am talking today. मैं आज की बात कर रहा हूं, आज का विश्लेषण कर रहा हं और उसमें मैं मानता हूं कि भारतीय जनता पार्टी ने चाहे असाधारण प्रगति की है इस दशक में, लेकिन हमारी इस प्रगति की गति आपके पराभव की गति का मुकाबला नहीं कर पा रही है। इसीलिए आपको कहना पड़ा, संगमा साहब ने कहा कि पिछली लोक सभा में अगर इतने दल थे तो आज चालीस दल हो गए कयोंक like nature politics also abhors the vacuum. वह वैकयूम हमेशा भर जाता है। कोई राष्ट्रीय पार्टी नहीं भरेगी तो कोई क्षेत्रीय पार्टी भरेगी, लेकिन इसमें भी मैं जो गुण देख रहा हं वह यह कि यद्यपि दो पार्टी सिस्टम नहीं है लेकिन दो स्िथर ध्रुव ज़रूर हैं। मैं मार्कसवादी पार्िटयों को वषर्ों से एक वैचारिक ध्रुव मानता हूं -- छोटा हो या बड़ा हो, लेकिन है, लेकिन पार्टी के रूप में कांग्रेस पार्टी एक ध्रुव है और भारतीय जनता पार्टी दूसरा ध्रुव है। यह जो लगभग बराबर का विभाजन आज हुआ है वैसा पहले कभी नहीं हुआ। इसलिए जैसा हमारे चिदम्बरम् जी कह रहे थे, संगमा जी कह रहे थे, बिल्कुल सही है कि यह विभाजन कबिल्कुल right down the middle है, ऐसा विभाजन इससे पहले नहीं हुआ। हमेशा स्िवंग होता था कि इस तरफ चले गए या उस तरफ चले गए। तमिलनाडु में आज भी स्िवंग होता है जो पुरानी प्रव्ृात्ित है। एक तरफ हो जाता है या दूसरी तरफ हो जाता है। इस बार मैं सोचता था कि शायद वहां पर भी आधा-आधा विभाजन हो जाएगा, लेकिन अपनी प्रकृति के अनुसार बिल्कुल दूसरी तरफ स्िवंग हो गया। इन दृष्िटयों से भी हमारे ऊपर दायित्व आता है। लेकिन इन दिनों में जब भी कभी हमारी सकार की ओर से सहमति की राजनीति की चर्चा होती है तो बहुत सारे लोग समझते हैं कि चूंकि इस लोक सभा का स्वरूप ऐसा है, इसीलिए ये ऐसी बात कहते हैं, कयोंकि इनको स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, इसीलिए वे सहमति की बात करते हैं। लेकिन मैं समझता हूं कि वाजपेयी जी ने विश्वास प्रस्ताव पर बोलते हुए जो बात कही थी वह बहुत महत्वपूर्ण थी कि देश में कोई भी सरकार अगर सुशासन देना चाहती है, सुशासन से हमारा अभिप्राय यह है कि देश के आम नागरिक को, देश की सीमाओं को सुरक्षा देना, प्रशासन में शुचिता लाना, समाज में समरसता लाना और आर्िथक क्षेत्र में स्वावलंबन और स्वदेशी का भाव बलवान करना, ये जो सुशासन के लक्षण हैं, वे तब तब तक नहीं आ सकते, चाहे उसको दो-तिहाई बहुमत मिल जाए, जब तक वह इन महत्वपूर्ण विषयों पर आम सहमति पैदा नहीं करते। इसलिए उन्होंने यह शब्द सही कहा कि दो-तिहाई बहुमत भी सरकार के पास हो, तब भी हिन्दुस्तान में सुशासन तब तक संभव नहीं होगा जब तक आज की परस्िथति में देश आम सहमति की ओर न बढ़े। मैं इस चीज़ का उल्लेख इसलिए कर रहा हूं कि जिस समय पार्िटयों के घोषणापत्र बनते हैं, उस समय अपेक्षा यह होती है और हमारी यहां पर भी अपेक्षा थी कि हम तो स्पष्ट बहुमत प्राप्त करेंगे, ३०० से आगे जाएंगे, ३५० या ४०० तक पहुंचेंगे और कुछ राज्यों में अगर हमें धकका न पहुंचता तो हम ३०० से पर भी आ सकते थे। कुल मिलाकर देश का जो वातावरण है, उसके बाद भी हमने अपने घोषणापत्र में एक अलग चैप्टर इस बात पर रखा जिसमें हमने स्पष्ट रूप से कहा कि "

... (व्यवधान)आप मेरी बात सुनिये।

SHRI L.K.ADVANI: I am not yielding.

MR. CHAIRMAN : Shri Topdar and Shri Baalu, he is not yielding.

... (Interruptions)

SHRI L.K.ADVANI: Sir, I am not yielding (Interruptions)

MR. CHAIRMAN: He is not yielding. Please take your seat.

... (Interruptions) श्री आरिफ मौहम्मद खान (बहराइच): महात्मा गांधी और महात्मा गांधी के हत्यारे दोनों बराबर हो गये। (व्यवधान) श्री लाल कृष्ण आडवाणी: सभापति महोदय, हमें खुद सरकार में रहने का मौका मिला। यह आज दूसरा मौका है। लेकिन केन्द्रीय सरकार में हम उस समय भी आये थे जब मोरार जी भाई हमारे प्रधान मंत्री थे। चौधरी चरण सिंह ग्ृाह मंत्री थे। वाजपेयी जी विदेश मंत्री थे। मैं सरकार में था। मुझे ऐसे अनेक अवसर याद हैं कि जब हम पटना जाकर जय प्रकाश जी से सलाह करते थे कि इस मामले में कया होना चाहिए। लेकिन उसका अर्थ यह नहीं होता कि जय प्रकाश जी हमें रिमोट से कंट्रोल करते थे। जय प्रकाश जी कभी कंट्रोल नहीं करते थे। महात्मा गांधी (व्यवधान)

SHRI L.K.ADVANI: I am not yielding. I will complete my statement...(Interruptions)

MR. CHAIRMAN: He is not yielding. Please sit down.

SHRI S. JAIPAL REDDY (MAHBUBNAGAR): I will take a minute, if you could yield...(Interruptions)

SHRI LAL KRISHNA ADVANI: I am not yielding...(Interruptions)

MR. CHAIRMAN: He is not yielding. Please sit down.

SHRI LAL KRISHNA ADVANI: I am not equating anyone to anyone. I am merely stating the facts. I am not yielding...(Interruptions) I have heard all the comments. I can understand them. Are the various comments that have been made fair? You talk of the assassination of Mahatma Gandhi. Is this the way in which you are going to have a debate?...(Interruptions) मैं आपसे कहता हूं जिस समय कोई महात्मा गांधी के असेसिनेशन की बात करता है तो मुझे लगता है That is the end of our argument. आपके पास मैंने देखा है, पूरी बहस कोई भी कर ले, बड़े से बड़ा हथियार अगर कोई है या तो महात्मा गांधी की हत्या ... (व्यवधान)