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I met the hon. Minister of Home Affairs, Shri L.K. Advani yesterday. He assured me that he would tell the Ministry of Law to expedite this so that nothing harm would be done. I hope the hon. Minister will pursue this matter and get the report from the Attorney General of India and ensure that the order of 1955 continues and Scheduled Tribes are eligible to have this quota in the Delhi Administration.

   

श्री सोहन पोटाई (कांकेर): सभापति महोदय, आज अनुसूचित जातियां और अनुसूचित जनजातियां आदेश (दूसरा संशोधन) विधेयक, २००२ के ऊपर बोलने के लिए मैं खड़ा हुआ हूं। देश के प्रधान मंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी और आदिवासी मामले के मंत्री जी को मैं धन्यवाद देना चाहूंगा, उनको बधाई देना चाहूंगा। एसटीएससी का यह संशोधन विधेयक पूर्व में ही आ जाना चाहिए था क्योंकि इसकी आवश्यकता थी। मैं कहना चाहूंगा कि आदिवासी एवं अनुसूचित जाति समाज की हमेशा उपेक्षा हुई है, उनका शोषण होता रहा है और आज तक भी यह शोषण होता चला जा रहा है। आज आवश्यकता थी और सही समय में इस सरकार ने एक विधेयक लाकर जो ऐसे आदिवासी, हरिजन समाज के हित में कार्य किया है, जो आज कई ऐसे राज्यों में हैं जिनको ये सुविधा प्राप्त हैं और कई ऐसे राज्य भी हैं जहां पर उनको सुविधा नहीं मिल रही है। यह असमानता क्यों है? हमारे मित्र अखिलेश जी कह रहे थे कि उत्तर प्रदेश में आदिवासी गौंड समाज को एस सी का दर्जा दिया गया है लेकिन विधेयक में एसटी का दर्जा दिया गया है। इसलिए उनके साथ इंसाफ नहीं होगा। यदि कहीं एक जगह कोई व्यक्ति ब्राहमण जाति का है तो किसी अन्य प्रदेश में जाकर वह ठाकुर तो नहीं बन सकता। इसी तरह से किसी एक जगह पर कोई सामान्य में है तो दूसरी जगह जाकर वह पिछड़ा-वर्ग में तो नहीं आ सकता लेकिन यह असमानता क्यों है ? पूरे देश में जहां गौंड समाज को एसटी में दिया गया है तो उत्तर प्रदेश में एससी का क्यों दिया गया है? निश्चित रूप से इसमें कानूनी बाधा आ सकती है। इसलिए जब एसटी में लिया जाएगा तो ऐसा नियम बनाए कि पूर्व में भी जो एससी में हैं, उनको भी कानूनी व्यवधान न हो। …( व्यवधान)