Lok Sabha Debates
Discussion On The Motion Of Thanks On The President’S Address Moved By Shri ... on 1 March, 2007
Title: Discussion on the motion of thanks on the President’s Address moved by Shri Madhusudhan Mistry and seconded by Shri Sandeep Dixit.
श्री मधुसूदन मिस्त्री (साबरकंठा) : सर, राष्ट्रपति जी ने हमारे दोनों सदनों के सदस्यों को जो संबोधित किया है, उसके ऊपर आभार के प्रस्ताव का मोशन मूव करने के लिए मैं खड़ा हुआ हूं और मैं मोशन मूव करता हूं:
“That an Address be presented to the President in the following terms:-
‘That the Members of the Lok Sabha assembled in this Session are deeply grateful to the President for the Address which he has been pleased to deliver to both Houses of Parliament assembled together on February 23, 2007’.” मुझे थोड़ा खेद भी है क्योंकि राष्ट्रपति जी ने बहुत अच्छे वातावरण में अपने अभिभाषण के अंदर इस देश को यह सरकार कौन सी दिशा देना चाहती है, उसका उस दिन निर्देश किया था।...( व्यवधान)
श्री राजीव रंजन सिंह ‘ललन’ (बेगुसराय) : अभीपता लग गया।... (व्यवधान)
श्री मधुसूदन मिस्त्री (साबरकंठा) : अभीआएंगे। आप चिंता मत करिए, आपको भी अभी पता लगेगा।
MR. SPEAKER: Let us discuss it in a proper manner.
… (Interruptions)
श्री मधुसूदन मिस्त्री : सर, मुझे बहुत खेद है कि राष्ट्रपति जी को उनके भाषण के दरम्यान हमारे कितने सदस्यों ने खड़े होकर उनको डिस्टर्ब करने का प्रयत्न किया। लेकिन मैं राष्ट्रपति जी का अभिनंदन करना चाहूंगा कि शिव सेना के जो तीन-चार सदस्य थे, उनके व्यवधान के बावजूद भी उन्होंने बिना डिस्टर्ब हुए अपना भाषण पूरा किया।...( व्यवधान) It is a shame on your part. Please Sit down.
श्री मोहन रावले (मुम्बई दक्षिण-मध्य) : अध्यक्ष महोदय, अफजल को फांसी नहीं दे रहे हैं। पूरा देश चाहता है कि उसको फांसी दी जाए। ... ( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय :अरे, आपकी तबियत कुछ ठीक नहीं है।
श्री मोहन रावले : सर,मेरी तबियत ठीक है। ...(व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय :हो गया। अब बैठिए। रिकार्ड हो गया। He is my very close, young and a very affectionate brother. I do not want him to suffer.
SHRI PRAKASH PARANJPE (THANE): Sir, I am not your enemy! MR. SPEAKER: You are not my greater friend. He is the greater friend.
…(Interruptions)… श्री रामदास आठवले (पंढरपुर): अध्यक्ष महोदय, हम भी... ( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय :आप बैठ जाइए।एकदम अनऑथोराइज्ड। यहां आकर शोर करते हैं।
SHRI PRAKASH PARANJPE : Shri Athawale is not a Minister. He is only sitting in the Treasury benches. He will never become a Minister…(Interruptions)
MR. SPEAKER: The discussion has just started. Please sit down.[r4] श्री मधुसूदन मिस्त्री : यह बड़े ही खेद की बात है कि हमारे माननीय राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर सामने बैठे हुये लोग बीच में बोलते हैं.....(व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : वह बात हो गई है, आप दूसरे पांइट पर आइये।
श्री मधुसूदन मिस्त्री : मैं यह इसलिये कह रहा हूं कि जैसे इन लोगों ने कोई बड़ा गौरव हासिल कर लिया हो। माननीय राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण के पहले पैरा में कहा है कि “This is a very special year for our country….These are occasions for us to renew our commitment to building a strong, modern, inclusive, secular and dynamic India.” … (Interruptions)
MR. SPEAKER: You will get full opportunity to reply.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: We have to develop an attitude of listening to each other. How can you reply properly unless you listen to him? You are such a good speaker, you should hear him and then reply.
श्री मधुसूदन मिस्त्री : अध्यक्ष महोदय, मैं उन्हें कोट कर रहा हूं ...(व्यवधान).. आप लोग अपनी बारी पर बोलियेगा...(व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : छोड़िये, क्या बात है?
श्री मधुसूदन मिस्त्री : अध्यक्ष महोदय, डायनॉमिक और सैकुलर इंडिया बिल्ड करने के लिये स्ट्रांग डैमोक्रेसी की फाऊंडेशन हमारे फोर फादर्स ने इस कांस्टीटयुशन के अंदर दी है। इस कांस्टीटयुशन में हमारे देश के नागरिकों के लिये फंडामेंटल राइट्स दिये गये हैं। उसमें ऐसे बहुत सारे राइट्स का समावेश होता है जिसमें एक राइट यह भी है कि “All the citizens have the right to freedom of speech and expression and assemble peacefully and without arms and to form associations or unions.” अध्यक्ष महोदय, मैं यहां अपनी बात कहने के लिये खड़ा हुआ हूं। मुझे यह कहते हुये खेद हो रहा है कि हमारे देश के कई ऐसे राज्य हैं जो फंडामेंटल राइट्स का वायलेशन करने का काम कर रहे हैं। खासकर वहां माइनौरटीज के राइट्स को दबाया जाता है। उदाहरण के लिये मैं आपको २-३ राज्यों के बारे में बताना चाहता हूं। सब से पहले मैं अपने राज्य गुजरात के बारे में शुरु करूंगा जहां फंडामेंटल राइट्स का वायलेशन होता है। वहां हमारे राइट्स का हनन किया गया है। गुजरात में २००२ के दंगों में एक पारसी बॉय की रीयल लाइफ स्टोरी का जिक्र है जहां वह गुम हो गया है। उसकी फैमिली को यह सब सहन करना पड़ा है। इस रीयल लाइफ पर एक परजॉनिया नाम की फिल्म बनाई गई है लेकिन इस फिल्म को पूरे गुजरात में कहीं भी रिलीज़ नहीं होने दिया गया। इतना ही नहीं, सरकार की ओर से मल्टीप्लैक्स एसोसिएशन को धमकी दी गई है...(व्यवधान).. Your Party’s Government in Gujarat is violating the freedom of expression. मैं उसकी ओर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं। ये लोग जो बात कर रहे हैं...(व्यवधान)
MR. SPEAKER: Mr. Mistry, you address the Chair.
श्री मधुसूदन मिस्त्री : मैं यह बताना चाहता हूं कि उस बारे में उस फिल्म के प्रोडयूसर ने मल्टीप्लैक्स के सैक्रेटरी से बातचीत की है जिन्होंने कहा है कि वह तो फिल्म को रिलीज़ करना चाहते हैं लेकिन सरकार की ओर से सिक्यूरिटी नहीं है। इस तरह यह वायलेशन होगा। बजरंग दल के लोगों को एक्सट्रा कांस्टीटयुशनल पॉवर है जो उन लोगों के अंदर वेस्ट की गई है जिससे गुजरात में ऐसी चीजें नहीं आ सकी हैं। इसी तरह फना फिल्म के लिये किया गया है। मैं इसलिये यह कहना चाहता हूं कि लगातार एक्सट्रा कांस्टीटयुशनल पॉवर का ...(व्यवधान)
MR. SPEAKER: You come to the debate. You come to the President’s Address.
SHRI MADHUSUDAN MISTRY : Sir, I am coming to the debate. The President wants us to build a strong, modern, inclusive, secular and dynamic India. How can we build an inclusive and secular India if our country is divided on communal lines. This is what I am saying. We can build a strong and dynamic nation only by taking all the communities together.
Sir, what had happened in Madhya Pradesh? मध्य प्रदेश में वैलंनटाइन डे पर पुलिस के सामने सलिब्रेट करने वालों को मारा गया और पुलिस देखती रही लेकिन उन लोगों को अरैस्ट नहीं किया गया।[s5] मध्य प्रदेश की सरकार ने उनको छूट दे रखी है। यही राजस्थान में हुआ।
MR. SPEAKER: Mr. Mistry, you do not refer to State matters per se. Do not refer to the State Police, but make your statement.
SHRI MADHUSUDAN MISTRY : Sir, they are part of it. This country and this Parliament has to see that the democratic rights and freedom of expression of citizens of this country are being adhered to. ...( व्यवधान) यही स्थिति राजस्थान में हुई। राजस्थान में किसानों की रैली की गई। उनको जयपुर तक नहीं आने दिया। यही स्थिति कोटा में हुई जहां ािश्चियनों पर हमला किया गया। उनकी जो मीटिंग थी, वहां हमला किया गया लेकिन वहां वे जो मनिस्टर्स और दूसरे लोग हैं, उनवे ऊपर कोई एक्शन नहीं लिया। मैं आपसे कहना चाहता हूं कि Very foundation of democracy is threatened by the Government of this Party, which is in a number of States. उसको रोकना चाहिए। इसवे अलावा आप यहां मॉडर्न और सेक्यूलर इंडिया बिल्ड नहीं कर सकते, इसकी ओर मैं आपका ध्यान दिलाना चाहता हूं। इस हिसाब से ऐसा लगता है As if there is a sinister design… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Please do not record any interruptions without my permission.
(Interruptions) …* * Not recorded.
SHRI MADHUSUDAN MISTRY: As if there is a sinister design to come to power at any cost and that too by dividing the people on the communal lines vertically so that the minorities in this country do not exist as if they are not citizens of this country. ऐसा एक वातावरण पैदा करवे ये सत्ता हासिल करना चाहते हैं। मैं कहना चाहता हूं कि इससे न तो आप सेक्यूलर इंडिया बिल्ड कर सवेंगे और न ही मॉडर्न इंडिया बिल्ड कर सवेंगे और इसवे ऊपर मैं अपनी चिन्ता जताता हूँ। ...( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Do not reply to that. You address the Chair.
श्री मधुसूदन मिस्त्री : पंजाब पर भी आ रहा हूँ, आप चिन्ता मत करिये।
MR. SPEAKER: Do not get derailed.
SHRI MADHUSUDAN MISTRY : Sir, I am addressing the Chair. They are simply commenting… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Do not take notice of that.
SHRI MADHUSUDAN MISTRY : We will also do that. If they want, we will reply the same way… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Please proceed. You have been given the honour of moving the Motion of Thanks. Do it.
श्री मधुसूदन मिस्त्री : प्रैज़ीडैन्ट ने अपने भाषण में कहा है… (Interruptions)
I do not yield… (Interruptions)
The President has said:
“I would like to begin by expressing my sincere condolences for the innocent victims of the dastardly and cynical terrorist attack on Samjhauta Express. Our hearts go out to the families of these innocent people. We should not allow this tragic event to affect our common quest for normalization of relations between India and Pakistan.” राष्ट्रपति जी वे साथ साथ मैं खुद भी इस पर अपनी सिम्पैथी प्रकट करता हूं। I express my condolences to the families of those who were killed in the Samjhauta Express. मैं उस इंसीडैन्ट को वंडैम करता हूं। पूरी दुनिया वे लोगों ने इस इंसीडैन्ट को वंडैम किया। ...( व्यवधान)
MR. SPEAKER: What is happening? When you speak and if they are to disturb you, what will you do? Please have the habit of listening to each other. You are a good speaker, you reply properly when you get a chance.
श्री मधुसूदन मिस्त्री : इसमें पाकिस्तानी नागरिक भी थे। हमारे विदेश मंत्री और यूपीए ने भी उसको वंडैम किया। यूरोपीय यूनियन ने वंडैम किया, ब्रटिश फॉरैन ऑफिस मनिस्टर किम होवेस ने भी उसको वंडैम किया। बंग्लादेश और जापान ने भी वंडैम किया और पाकिस्तान वे विदेश मंत्री ने भी वंडैम किया। इस देश वे दूसरे नेताअों ने भी किया। मुझे जानकर बड़ी हैरानी होती है कि इनवे जो प्रैजीडैन्ट हैं, उनका जो स्टेटमैंट छपा, जो हमेशा स्टीरियोटाइप होता है, उसमें ऐसा कहा गया है जिसमें सबसे पहले तो ये सब बोलते हैं क Internal security at stake ताकि ऐसे इंसीडेन्ट्स हों। उन्होंने कहा क ‘We hear from the Prime Minister that even today the culprit would be punished, but nothing happened’. पार्िलयामैंट का जो अटैक वेस हुआ, उसमें आदमियों को बचाने का काम कर रहे हैं और उनको ऐसा भी कहा कि एक नया कानून इसवे लिए लाना चाहिए। मैं आपका ध्यान आकर्िषत करना चाहता हूं। क्या हुआ जब वे लोग यहां पर थे।
MR. SPEAKER: I cannot say what he will speak.
श्री प्रभुनाथ सिंह : आप समझ रहे हैं कि ये क्या बोल रहे हैं। हम नहीं समझ रहे हैं कि क्या बोल रहे हैं। आप समझ रहे हैं या नहीं, हम जानना चाहते हैं।
श्री मधुसूदन मिस्त्री : वे क्या बोलने वाले हैं हम भी समझने वाले हैं।
अध्यक्ष महोदय : आप छोड़िये।
श्री मधुसूदन मिस्त्री : उनकी आदत है प्रोवोक करने की और हमेशा करते रहते हैं। यह ठीक नहीं है।
MR. SPEAKER: Do not get provo[r6] ked.
...( व्यवधान)
श्री मधुसूदन मिस्त्री : अगर ये बोलेंगे तो हम इन्हें भी नहीं बोलने देंगे।...( व्यवधान)
MR. SPEAKER: You are disturbing him. He is also a human being.
… (Interruptions)
SHRI MADHUSUDAN MISTRY : Will you not listen to me?
मैं जो बता रहा हूं, उसे आप सुन नहीं सकते, क्योंकि आप में टोलरेंस नहीं है।...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय:मिस्त्री जी, आप बोलिए। आपके बहुत अच्छे-अच्छे प्वाइंट्स हैं, आप इधर देख कर बोलिए।
SHRI MADHUSUDAN MISTRY :On 10th February, 2000 there was a blast on board the train at Satwal and five persons were killed. The case was closed untraced. जब ये सत्ता में थे। The second incident took place at Jammu Railway Station on 7th August, 2001 where three militants opened fire killing 12 people and leaving 29 people hurt. One militant was killed and was identified. The case remained untraced.मार्च, २००० को जब ये सत्ता में थे, हमारे सामने ये जो बैठे हुए हैं मैं इन्हें याद दिलाना चाहता हूं कि तब छत्तीसगढ़ और जम्मू-काश्मीर में नरसंहार हुआ। दस अक्तूबर को जम्मू और काश्मीर में लेजिस्लेटिव असेम्बली श्रीनगर के अंदर अटेक हुआ, जब ये सत्ता में थे। १३ दिसम्बर, २००१ को इस पार्लियामेंट के ऊपर हमला हुआ, जब ये लोग सत्ता में थे। २२ जनवरी, २००२ को कोलकात्ता में अमेरिकन कल्चरल सेंटर के ऊपर हमला हुआ, जब ये लोग सत्ता में थे। २४ सितम्बर, २००२ को अक्षरधाम मंदिर के ऊपर अटेक हुआ, जब ये लोग सत्ता में थे। २१ मई, २००२ को हुर्रियत मीटिंग के अंदर हुआ। On 14th May, 2000 there was a massacre of family members of Army personnel at Kaluchak.
अध्यक्ष महोदय: ललन जी, यह ठीक नहीं है। Just see how your leader is behaving; he is keeping quiet.
श्री मधुसूदन मिस्त्री : इन्हें क्या मोरल राइट है?
अध्यक्ष महोदय: आप इन्हें छोड़िए, आप हमें देख कर बोलिए। You must have a very handsome Speaker.
श्री मधुसूदन मिस्त्री : इन्हें क्या अधिकार है, ये लोग कौन से मुंह से बात करते हैं, सरकार की इंटरनल सिक्योरिटी भी वही है, सरकार ने कुछ नहीं किया। इनके ज़माने में कितने ही केस हुए, जब ये यहां खुद होम मनिस्टर थे, आज तक अनट्रेस्ड हुए। हम इनसे पूछना चाहते हैं कि आपकी सरकार ने उस वक्त क्या किया, कहां गए थे आपके वे लोग?...( व्यवधान) उन लोगों को अरेस्ट क्यों नहीं किया?...( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Those who are interrupting will not be allowed to speak in the debate.
… (Interruptions)
श्री मधुसूदन मिस्त्री : महोदय, हमेशा एक चीज कही जाती है कि पोटा लाओ, जैसे यह लाने से सब कुछ ठीक हो जाएगा। हमारे यहां गुजरात के अंदर, सन् २००२ के राइट्स के अन्दर जितने लोग भी पोटा के अंदर अरेस्ट हुए, उनमें से ९८ परसैंट सिर्फ एक ही कम्युनिटी, मुस्लिम कम्युनिटी के थे। मैं इन्हें कहना चाहता हूं कि पोटा का मिसयूस ये कभी रोक नहीं सकेंगे। पोटा के अंदर जिन्होंने इन्हें सपोर्ट किया था, वे ही आदमी तमिलनाडु के अंदर अरेस्ट होकर महीनों, सालों तक जेल में रहे, इनकी कोई गारंटी नहीं है। ये हमेशा कहते हैं कि पोटा लाओ, जैसे पोटा लाने से पूरे टेरेरिस्ट का जो ऑपरेशन या एक्टीविटीस हैं, इसके आने से जैसे ये सब कम हो जाएंगी। ये लोग जो बात करते हैं, उसके अंदर हमेशा एक चीज ऐसी कही जाती है कि इसके अंदर माइनोरिटी और खास कर मुसलमान लोग इन्वाल्वड हैं या नहीं और अगर हैं, इस इश्यु को लेकर रेज़ करना, जिसकी वजह से यह पूरा देश दो हिस्सों में बंट जाए और ये सत्ता में आ सकें। इंटरनल सिक्योरिटी की बात की गई, मेरे पास जो आंकड़ें हैं, उसके अनुसार सभी जगह से यह है कि यह घट रही है। सिक्योरिटी पर्सनल जो है, सवलियंस और टेरेरिस्ट की जो फीगर है, वह इसके अंदर कम होती जा रही है। जब ये लोग सत्ता में थे, उस वक्त जो परिस्थिति थी, उससे कहीं बेहतर परिस्थिति आज है। मैं आपका ध्यान इस तरफ दिलाना चाहता हूं, कल इन्होंने कहा कि आम आदमी के बारे में क्या हुआ। मैं इनसे पूछना चाहता हूं, आप बताएं कि आम आदमी के लिए इस बजट में क्या नहीं है, जहां तक नेशनल रूरल एम्प्लायमेंट गारंटी की बात है, उसमें बढ़ोत्तरी हुई है।[rep7] अध्यक्ष महोदय, जब वे लोग सत्ता में थे, तब डिपार्टमेंट ऑफ रूरल डैवलपमेंट के अन्तर्गत, डिमांड नंबर ७८ में आपकी सरकार ने दो वर्षों १०१२ करोड़, ११२९ करोड़ रुपए रखे थे, वे इस सरकार बढ़ाकर १३३२ करोड़ कर दिए। यानी ३१. ५० प्रतिशत इन्क्रीज हुआ। इसी प्रकार यदि हम रूरल रोड डैवलपमेंट का कंपैरीजन करें, तो ६२ परसेंट का इन्क्रीज हुआ है। इसी प्रकार स्पेशल प्रोग्राम फॉर रूरल डैवलपमेंट में हुआ है।...(व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : आप इसे छोड़िए। यह सही नहीं है। Any issue can be discussed lawfully in this debate. Please do not do this.
श्री मधुसूदन मिस्त्री : अध्यक्ष महोदय, अगर मेरी इस बात को ये लोग नहीं समझते तो मैं इसमें क्या करूं। यह आपकी अक्ल के ऊपर है कि आप मेरी बात को नहीं समझ रहे हैं। … (Interruptions)
MR. SPEAKER: Please do not make these comments. आपको ऐसा बोलना शोभा नहीं देता। ऐसा बोलने से क्या लाभ मिलेगा।
श्री मधुसूदन मिस्त्री:मैं सदन का ध्यान दिलाना चाहता हूं कि मैं केवल फिगर ही नहीं दे रहा हूं, बल्कि एलोकेशन भी बता रहा हूं। What I am saying is that every time the Budget was never centred around the poor people of this country. It is this Government which kept the poor people at the centre and, in fact, designed the entire Budget and made a number of allocations in this Budget.स्पेशल प्रोग्राम फॉर रूरल डैवलपमेंट के अन्तर्गत वर्ष २००२-०३ और वर्ष २००३-०४ में १०३ प्रतिशत इन्क्रीज हुआ और वाटर सप्लाई एंड दि सैनीटेशन के अन्तर्गत ८५ प्रतिशत इन्क्रीज हुआ।
अध्यक्ष महोदय, वे बोल रहे थे कि आम आदमी के लिए राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में क्या लिखा है। मैं बताना चाहता हूं कि आम आदमी के लिए इसमें क्या है। हमारी गवर्नमेंट ने सिर्फ एलोकेशन ही नहीं बढ़ाया बल्कि वह पैसा कहां और कैसे खर्च किया गया और उससे कितना परिवर्तन हुआ, उसका स्टेटमेंट भी इस हाउस को दिया है।
महोदय, मैं अब जनरल एजूकेशन के बारे बताना चाहता हूं। जहां तक आम आदमी का सवाल है। जिनके पास पैसे हैं, वे तो अपने बच्चों को महंगे प्राइवेट स्कूलों में ऊंची फीस देकर पढ़ाते हैं, लेकिन जिनके पास पैसे नहीं हैं, जो आम आदमी हैं, वे सरकारी स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ाते हैं। मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि यहां कोई भी ऐसा नहीं है जो अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाता हो। सभी लोग प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाते हैं। वर्ष २००३-०४ में एलीमेंट्री एजूकेशन में यू.पी.ए. सरकार ने २३६ करोड़ रुपए का अधिक प्रावधान किया है जो इनकी सरकार के समय में किए गए प्रावधान से ५४ प्रतिशत अधिक है। अभी हाल ही में आम जनता की उन्नति के अनेक प्रोग्राम चलाए गए हैं जिनकी चर्चा सरकार ने की थी। राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में भी इन प्रोग्रामों का जिक्र किया है और सरकार ने धन आबंटित किया है और उन पर काम कर रही है। इनमें मुख्य प्रोग्राम हैं- Bharat Nirman, the National Rural Employment Guarantee Act, the National Rural Health Mission, the strengthened and expanded Sarva Shiksha Abhiyan, the universalisation of the Mid-day Meal and ICDS Programmes and the Jawaharlal Nehru National Urban Renewal Mission. ये सभी प्रोग्राम आम आदमी को दिमाग में रखगकर बनाए गए हैं। हमने देखा है कि जहां-जहां भारत निर्माण के कार्यक्रम rural road, rural electrification, rural telephony, rural housing and rural drinking water supply, जिनकी मैंने अभी बात कही, उन सब के ऊपर राष्ट्रपति जी ने जोर दिया है और उन्होंने एक दिशा-निर्देश दिया है। इनके लिए मैं उनका आभार मानता हूं।
महोदय, मैं बताना चाहता हूं कि राष्ट्रपति जी ने तो अपने अभिभाषण में जिक्र किया और सरकार ने धन आबंटित किया है, लेकिन जिन प्रदेशों में इनकी सरकारें हैं वहां इन स्कीमों का इम्पलीमेंटेशन नहीं होता है या हाफ हार्टेडली होता है। रूरल एम्पलायमेंट गारंटी एक्ट के अन्तर्गत सेंट्रल गवर्नमेंट की ओर से पैसा दिया जाता है, लेकिन इनकी पार्टी के द्वारा शासित राज्यों में मिनीमम वेज ही नहीं बढ़ाया गया है। मैं अपने राज्य की बात बताना चाहता हूं कि हमारे यहां पिछले पांच वर्षों से एक बार भी मिनीमम वेज नहीं बढ़ाया गया है जिसके कारण नैशनल रूरल एम्पलायमेंट गारंटी एक्ट के अन्तर्गत काम करने वाले आदमी को ५० रुपए से भी कम वेतन मिलता है, क्योंकि वहां की सरकार इसे बढ़ाना नहीं चाहती। न वेज बढ़ाना चाहती है और न कोई एलाउंस देना चाहती है। केन्द्र सरकार पैसा देने के लिए तैयार है, उसका ध्यान आम आदमी की तरफ है, लेकिन आप लोगों की सरकारें जहां-जहां हैं, वहां आप आम आदमी को पैसा पहुंचाना नहीं चाहते हैं। मैं इस तरफ इस हाउस का ध्यान दिलाना चाहता हूं। [r8] मैं हाउस का इस बात की ओर ध्यान दिलाना चाहता हूं।...( व्यवधान) You are directly responsible for not allowing the people of this country to get all the benefits of the Central Government under various schemes simply because you feel कि हमारी सरकार यदि इस स्कीम को इम्पलीमेंट करेगी तो केन्द्र सरकार का इससे ज्यादा नाम होगा। इसी वजह से आपकी सरकारें केन्द्र की स्कीमों को आधे-अधूरे मन से अथवा उसको इम्पलीमेंट ही नहीं करना चाहती हैं। यह मेरा चार्ज है क्योंकि यह मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में दिख रहा है और यह सही भी है। इसीलिए आप आम आदमी के विरोधी हैं, आप आम आदमी को नहीं देना चाहते हैं। आपकी सरकार के समय में भी आम आदमी को कुछ नहीं दिया गया था।
अध्यक्ष महोदय, हम सब ने मिलकर फॉरेस्ट राइट का विधेयक पास किया था। २३.१२.२००५ तक इस देश में जितने भी आदिवासी और ट्रैडिशनल फॉरेस्ट डवेलर्स जंगल में रहते हैं, यदि वे कोई जमीन जोतते हैं, तो वह जमीन उनको दी जाएगी। उनको माइनर फॉरेस्ट राइट के तहत जंगल से महूआ और शहद इत्यादि इकट्ठा करने की अनुमति दी होगी। लेकिन आज भी इनकी राज्य सरकारें और वहां का फॉरेस्ट विभाग जिस जमीन पर वहां के आदिवासी वर्षों से फसल बोते आ रहे हैं, उन जमीनों के ऊपर फेंसिंग कर रहा है या कब्जा कर रहा है या उनको अरेस्ट कर रहा है अथवा उन पर फॉरेस्ट एक्ट लगाकर उनके ऊपर फाइन कर रहा है। मानवाधिकारों का वहां पर उल्लंघन हो रहा है। वहां पर केन्द्र सरकार के प्रोग्रामों को इम्पलीमेंट नहीं किया जा रहा है, यदि किया भी जा रहा है, तो आधे अधूरे मन से किया जा रहा है।
अध्यक्ष महोदय, राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में इस बारे में बिलकुल साफ कहा है, इसके बावजूद भी एक ऐसा एटीटयूड इनकी ओर से अपनाया जा रहा है कि केन्द्र सरकार इनके ऊपर अन्याय कर रही है अथवा उनकी समस्याओं को हल नहीं कर रही है। इस संबंध में कई उदाहरण मौजूद हैं। यदि उनको राशन दिया जाता है, योजना आयोग की तरफ से पैसा दिया जाता है, किसी और प्रोग्राम के माध्यम से दिया जाता है तो उसको हाइड करना और लोगों को उसके बारे में नहीं बताना, केवल यही बताना कि केन्द्र सरकार उनके साथ अन्याय कर रही है, क्योंकि इन्हें आने वाले चुनाव जीतने हैं। केन्द्र सरकार की छवि लोगों को अच्छी न दिखाई दे, इसी वजह से यह सब किया जा रहा है। मैं इसकी भत्र्सना करता हूं। मेरा इनके ऊपर फिर से चार्ज है कि इस देश के आम आदमी के लिए केन्द्र सरकार की ओर से जितना पैसा दिया जाता है, उस पैसे को डाइवर्ट किया जाता है और उन तक नहीं पहुंचने दिया जात है।
अध्यक्ष महोदय, यहां पर प्राइस राइज़ और इन्फलेशन के बारे में बातें कही गई हैं। कल बजट पेश हुआ, उसके अंदर यह बताया गया कि प्राइसिज़ ने एक हफ्ते पहले से नीचे आना शुरू कर दिया है और हमें आशा है कि ये और भी नीचे आएंगे। लेकिन इसको एक चुनाव का मुद्दा बनाया जा रहा है क्योंकि इसी के बल पर यह जीत सकते हैं। इसके अलावा वायलेशन का मुद्दा अथवा कम्यूनल डिवाइड का मुद्दा बनाया जाता है, जिससे ये लोग चुनाव जीत सकते हैं। इनका इसी तरह का एटीटयूड रहा है। इन्फलेशन के बारे में बार-बार कहा गया। इसमें न तो आम आदमी है और न ही इन्फलेशन बढ़ रहा है। कितने लोगों ने कहा कि मार्किट क्रेश हो रहा है। मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि आप अभी तक तो कह रहे थे कि यदि सेंसेक्स ऊपर जाता है तो वह हेल्दी इकॉनामी का साइन नहीं होता है, वह इंडीकेटर नहीं है। अब यदि वह बजट के बाद नीचे आया है तो इससे आप लोगों को समस्या क्यों हो रही है। इससे आम आदमी को कोई परेशानी नहीं हो रही है। लेकिन इन्होंने एक-दो जगह पर चुनाव जीत लिए हैं तो ये कह रहे हैं क we are analyzing. जैसा आप कहते थे ऐसी हमारी परफार्मेंस नहीं है। We have done better in Punjab; we have also done better in Uttrakhand. उससे भी अच्छा हम आने वाले चुनावों में परफार्म करके दिखाएंगे। चुनाव आयोग की मैं आलोचना नहीं करना चाहता हूं लेकिन हमें सोचना होगा कि चुनाव के जो मैथेड्स हैं, उनके बारे में क्या-क्या किया जा सकता है[r9] । कितनी जगहों पर जो इलेक्शन होते हैं और उसमें जो टेकनीक अपनायी जाती है, उसके बारे में भी इस हाउस को सोचना पड़ेगा। दो हजार या पांच हजार वोट डलवाना कोई बड़ी बात नहीं है, मशीन दबायी जा सकती है, बटन दबाए जा सकते हैं, एक कंडीडेट को जिताया जा सकता है, यह सब हकीकत है। इसलिए एक ही इश्यू के द्वारा कि प्राइस राइस की वजह से यह हो गया, लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि लोकल इलेक्शन और इसका कोई ज्यादा रिलेशनशिप नहीं है, क्योंकि आप इसको बनाना चाहते हैं। जैसे इन सब चीजों की वजह से प्राइज राइज हुए हैं और इसकी वजह से ...( व्यवधान)
श्री धर्मेन्द्र प्रधान (देवगढ़) : ये सदन को गुमराह कर रहे हैं। ...( व्यवधान) इन्होंने खुद माना है ...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : क्या हो रहा है? No, I would not allow this.
...( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Nobody has a right to interrupt without my permission.
श्री मधुसूदन मिस्त्री : मैं कहना चाहता हूं कि इस वजह से कीमतें नीचे आएंगी, कीमतें इनके वक्त में भी बढ़ी थी, इनके वक्त में भी इन्फ्लेशन हुआ था, इनके वक्त भी चीजों के दाम बढ़े थे, इसलिए एक चीज को लेकर इनका जो नजरिया डेवलप करने का रहा है, मैं उसकी निंदा करता हूं और इनसे कहता हूं कि आप भी बहुत ज्यादा दिनों तक खुशी में नहीं रहेंगे।
महोदय, राष्ट्रपति जी ने अपने भाषण के अंदर और भी विषय लिये हैं, वीमेन एंड चाइल्ड डवेलपमेंट के बारे में और नेशनल एग्रीकल्चर के बारे में कहा है। एग्रीकल्चर के लिए इस सरकार ने ज्यादा से ज्यादा प्रावधान किए हैं, उसको ज्यादा से ज्यादा इंपोर्टेंस देकर इसका इनहैंसमेंट किया है, इतना ही नहीं इसकी स्पेशल केयर रखी गयी है। खासकर जो आयल सीड्स हैं और जो दूसरे क्राप्स हैं, उनका अच्छी से अच्छी तरह से डवेलपमेंट हो, इसके लिए कहा गया है। मैं यह भी कहना चाहता हूं कि इनकी जो खुद की पालिसी है, वह नीति और स्ट्रेटजी खासकर जो माइनोरिटी कम्युनिटी है, उसको डिवाइड करके, उसके ऊपर लोगों की फीलिंग्स को जागरूक करके, ये इस देश को डिवाइड करना चाहते हैं। मैं कहना चाहता हूं इस वजह से न तो ये मार्डर्न इंडिया बना सकेंगे और न ही सैक्युलर इंडिया बना सकेंगे। मैं जानता हूं कि इनमें से किसी ने फ्रीडम स्ट्रगल में हिस्सा नहीं लिया, न ही इनकी पार्टी ने लिया और न ही इनके नेताओं हिस्सा ने लिया, इस वजह से इस देश की जो डेमोक्रसी है और जो तानाबाना है, इससे इनको ज्यादा लगाव नहीं हो, यह मैं समझ सकता हूं। लेकिन मैं यह भी कहना चाहता हूं कि यह जो चीज है उसे इस देश के नागरिक सहन नहीं करेंगे।
इन्हीं शब्दों के साथ मैं प्रेसीडेंट के माशन आफ थैंक्स को मूव करता हूं।
14.58 hrs. (Shri Varkala Radhakrishnan in the Chair) श्री सन्दीप दीक्षित (पूर्वी दिल्ली) : महोदय, महामहिम राष्ट्रपति जी द्वारा दोनों सदनों के समक्ष अभिभाषण हुआ, उसके लिए मधूसूदन मिस्त्री जी ने जो धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया है, मैं उसके समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं। मेरे मित्र मिस्त्री जी ने पहले जो राजनीतिक भाषण किए, उन पर उन्होंने काफी व्यापक रूप में प्रकाश डाला। एक बात के लिए विशेषकर महामहिम जी का धन्यवाद करता हूं जो उन्होंने बड़े विस्तार से, बड़ी सुंदरता से और बड़े गहन रूप से जिस तरह से उनकी सरकार ने पिछले तीन वर्षों में काम किया है, गरीबों और आम-आदमी के प्रति जो तानाबाना बुना है और सरकार ने अपनी नीतियों और कार्यक्रमों को जिस रूप से इस देश में चलाया है, उसको व्यापक रूप से जिस तरीके से इन्होंने प्रस्तुत किया है, मैं थोड़ा-बहुत इस सदन का ध्यान उस तरफ आकर्षित करूंगा।
महामहिम राष्ट्रपति जी ने कहा है कि देश में नौ प्रतिशत की दर से प्रगति हो रही है, उसके बाद उन्होंने जो तानाबाना दिखाया, उसकी बात करना आवश्यक है। महामहिम राष्ट्रपति जी ने अपने शब्दों में कहा कि केवल ग्रोथ अपने में परिपूर्ण नहीं होता है, ग्रोथ का मजा तब आता है, जब वह व्यापक हो, समतामयी हो, हर जगह, हर क्षेत्र में, हर व्यक्ति के पास पहुंचे। [v10] 15.00 hrs. उसी के साथ महामहिम राष्ट्रपति जी ने बताया कि किस तरह उनकी सरकार ने पिछले तीन-चार सालों में अलग-अलग नीतियों द्वारा इस समग्रता, समता को अपने अंदर लाने की कोशिश की है। उन्होंने नेशनल रूरल इम्प्लॉयमैंट गारंटी एक्ट की बात की। यह एक्ट क्या करता है। उन्होंने बताया कि केवल एक-डेढ़ साल के अंदर-अंदर तकरीबन पचास लाख ऐसे परिवार हैं जिन्होंने इसका फायदा उठाया। उन्होंने भारत निर्माण की बात की। स्वास्थ्य में आज गांवों में राज्य सरकारों और भारत सरकार द्वारा पंचायती राज संस्थाओं के साथ जो कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, उसके बारे में उन्होंने बात की। उन्होंने नवीनीकृत शिक्षा अभियान की बात की। मिड डे मील की बात की, हायर एजूकेशन की बात की। यह सब कार्यक्रम एक साथ क्या करते हैं। आज आप इस देश के किसी राज्य में चले जाएं, चाहे वहां यूपीए के समर्थित या यूपीए घटक दलों की सरकारें हों, चाहे एनडीए के घटक दलों की सरकारें हों, अगर वे अपने प्रथम कार्यक्रमों की बात करते हैं तो या एनआरईजीए का बात करते हैं या भारत निर्माण की बात करते हैं। मैं महामहिम राष्ट्रपति जी का धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने देश का ध्यान इन दोनों स्कीमों की तरफ केन्द्रित किया और यूपीए सरकार का भी धन्यवाद करता हूं कि जिस तरह की स्कीम वह लाई है, आज यही स्कीमें हर राज्य को उनकी सबसे महत्वपूर्ण स्कीमें दिख रही हैं। यह इस सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि है। आज कोई भी राज्य सरकार अपनी स्कीमों की बात नहीं करती। जब भी गरीबी के खिलाफ किसी एक्शन की बात की जाती है, चाहे वह उत्तर प्रदेश में हो, बिहार में हो, झारखंड में हो, केरल में हो या पंजाब और उत्तराखंड में जो नई सरकारें बनेंगी, वे भी अन्तत: भारत निर्माण की बात करेंगी, मिड डे मील स्कीम की बात करेंगी और एनआरईजीए की बात करेंगी। जब आम आदमी पर प्रहार की बात आएगी तो तीन साल से चलाई जा रही यूपीए सरकार की नीतियों की बात की जाएगी, उन नीतियों की बात की जाएगी, उन नीतियों की ही बात की जाएगी। यही सबसे बड़ी बात है कि हमने इस देश से गरीबी हटाने का किस तरह ताना-बुना बुना है।...(व्यवधान) यही नहीं, महामहिम राष्ट्रपति जी ने एक और बात बहुत सुंदर रूप में बताई है कि हम न केवल स्कीम लाए हैं बल्कि गरीबी पर प्रहार करने की आवश्यकता होती है, उसके पीछे के वहशी कार्य किस परिपूर्णता से सरकार ने किए हैं, उन्होंने इस बारे में भी उल्लेख किया है। उन्होंने ट्राइबल बिल की बात की। हमने सदियों से अपने हकों से वंचित आदिवासियों को उनके हक देने का बहुत महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उसी तरह उन्होंने डोमैस्टिक वायलैंस बिल द्वारा महिलाओं को उनके अधिकार देने की बात की। इस सरकार को मालूम है कि डोमैस्टिक वॉयलैंस बिल हो, ट्राइबल बिल हो या कोई ऐसा बिल हो, उनमें बहुत सी ऐसी शक्तियां हैं जिनसे इस समय का पावर स्ट्रक्चर कहीं न कहीं अफैक्ट होगा। लेकिन यह इस सरकार की उपलब्धि है, आदरणीय मनमोहन सिंह जी की उपलब्धि है, सोनिया जी से बार-बार जो दिशा-निर्देश मिलता है, उसकी उपलब्धि है। इस सबके बावजूद भी इन सरकारों ने विधायिकी फ्रेमवर्क बनाया और उस पर महामहिम राष्ट्रपति जी की सरकार आगे बढ़ी है।
यह नहीं, इससे आगे भी राष्ट्रपति जी ने बहुत सी उपलब्धियों के बारे में बताया। एक तरफ पंचायती राज संस्थाओं के गहरीकरण की बात की गई। शैडयूल्ड कास्ट्स और शैडयूल्ड ट्राइब्स के भाई किसी तरह अच्छी शिक्षा, ऊंची शिक्षा पा सकें, उनके स्कॉलरशिप की बात बताई गई। आज हर जगह ऊर्जा का संकट देखा जा रहा है। राष्ट्रपति जी के भाषण में अल्ट्रा माडर्न पावर प्रोजैक्ट का उल्लेख किया गया है। जिस तरह गोल्डन क्वाडि्रलेटरल की बात हो रही है, महामहिम राष्ट्रपति जी ने इस बात का संतोष जताया है कि गोल्डन क्वाडि्रलेटरल कुछ ही समय में पूर्ण हो जाएगा और नार्थ, साउथ, ईस्ट, वैस्ट कॉरीडोर के बारे में कार्य पूरी तरह चलने लगेगा। रेल में अभूतपूर्व प्रगति हुई है और रेल मंत्री लालू जी ने दिखा दिया कि शायद साठ सालों में इतना प्रगतिशील, संवेदनशील और सक्षम रेलवे मंत्री कोई नहीं हुआ, महामहिम राष्ट्रपति जी ने इस बारे में भी उल्लेख किया है। कई सालों से हवाई जहाज और एयरपोट्र्स में दिक्कत हो रही थी। यूपीए सरकार ने जिस तरह रेल में कार्य किया, उसी तरह एयरपोर्ट में पोट्र्स के नवीनीकरण की बात की। इस बारे में भी महामहिम राष्ट्रपति जी ने उल्लेख किया। प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप की बात की गई। एनडीए सरकार ने कई वर्षों तक प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप की बात की। उन्होंने कहा कि हम प्राइवेट सैक्टर्स को बुलाते हैं लेकिन हमारे सामने उसका एक भी बड़ा उदाहरण नहीं आया। प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप वह थी कि अपनी हर चीज उठाकर उनके हवाले कर दें। हमने वह नहीं किया। हमने उन्हें अपने साथ जोड़ा और उनके और हमारे बीच में प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप का यही बहुत बड़ा अंतर है।[N11] सभापति जी, उस तरफ से मेरे एक मित्र ने समाजवाद की बात की थी। जब कभी पूंजीवादी लोग स्वयं समाजवाद की दुहाई देते हैं, तो मन में कहीं न कहीं मजे की बात जरूर आती है। महामहिम राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण को आगे बढ़ाते हुए टेक्नोलॉजी की बात की है। महामहिम राष्ट्रपति जी स्वयं इस देश के सबसे बड़े वैज्ञानिक हैं। हिन्दुस्तान में जिस तरीके से साइंस एंड टेक्नोलॉजी में, हमको लग रहा है कि आज का युवा वर्ग उस तरफ आकर्षित नहीं हो रहा है, उस आकर्षण को वापस लाने के लिए उनकी सरकार आज जिन नीतियों पर काम कर रही है, उस बारे में महामहिम राष्ट्रपति जी ने सदन का ध्यान आकर्षित किया है। मैं महामहिम राष्ट्रपति जी को विशेष कर इस बारे में धन्यवाद देना चाहूंगा।
यही नहीं, महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में पुलिस के माडर्नाइजेशन की बात भी कही गयी है। हम मानते हैं कि पुलिस ज्यादातर राज्यों का विषय होता है। आज जिस तरीके से जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर राज्यों और नक्सली प्रभावित जिलों में आतंकवाद की बात चल रही है, उसके लिए हमें पुलिस पर ध्यान देना पड़ता है। हमारी आम्र्ड फोर्सेज को आज और सशक्त करना पड़ेगा चाहे उसमें आर्मी हो, नेवी हो या एयरफोर्स हो। इन सबके बारे में महामहिम राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में बहुत ही साफ तरीके से कहा है और इन पर अपनी चिन्ताएं व्यक्त की हैं।
महामहिम राष्ट्रपति जी ने ज्यूडशियल रिफार्म की बात भी की है। आज हमें आजाद हुए ६० वर्ष के करीब हो गये हैं। हर क्षेत्र में हमने कहीं न कहीं रिफार्म पाया है। ज्यूडशियरी एक ऐसा क्षेत्र है जिसमें शायद लोगों को लगता है, मैं बड़ी विनम्रता से कह रहा हूं क्योंकि मैं कोट्र्स का बहुत आदर करता हूं, लेकिन एक बात कहीं दिखाई दे रही है कि आज हमारी जो ज्यूडशियरी व्यवस्था है, वह उस तरीके से आगे नहीं बढ़ी जिस तरीके से इस देश की जरूरतें आगे बढ़ती गयी हैं। महामहिम राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में ज्यूडशियल रिफार्म बिल के बारे में भी कहा है। उन्होंने नैशनल ज्यूडशियल काउंसिल के बारे में भी अपने अभिभाषण में कहा है। जो ग्रामीण न्यायालय की हम बात कर रहे हैं, उसका भी उल्लेख बहुत साफ तरीके से किया गया है। महामहिम राष्ट्रपति जी ने हमारी विदेश नीति का भी उल्लेख किया है। आज के वातावरण में यह मानते और जानते हुए कि जगह-जगह आतंकवाद की हरकतें बढ़ती जा रही हैं, कहीं न कहीं हमारे पड़ोसी राज्य भीशायद उसमें लिप्त हैं, उसके बावजूद भी उनकी सरकार ने काफी कोशिशें की हैं। जहां भूटान के साथ हमने एक नयी नीति पर हस्ताक्षर किये हैं, उसी के साथ-साथ बंगलादेश, श्रीलंका और पाकिस्तान, इन तीनों देशों के साथ हमारी दोस्ती थोड़ी बहुत हर वर्ष एक न एक कदम आगे बढ़ती जा रही है।
महामहिम राष्ट्रपति जी ने इस बात का भी स्वागत किया है कि अफगानिस्तान भी सार्क गुट में शामिल हो। मेरे ख्याल से हम सबको अफगानिस्तान का सार्क में शामिल होने के लिए स्वागत करना चाहिए। लुक ईस्ट पालिसी यूपीए सरकार द्वारा बनायी गयी जिसके कारण साउथ ईस्ट एशिया के तमाम देशों के साथ हमारी दोस्ती और बेहतर हुई है। उसमें नालंदा प्रौजेक्ट का विशेष उल्लेख किया गया है क्योंकि उसमें कई देश ऐसे हैं जो बुद्धिज्म से प्रभावित हैं। बौद्ध के ज्यादा से ज्यादा सैंटर्स हिन्दुस्तान में हैं। महामहिम राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में नालंदा प्रौजेक्ट का भी उल्लेख किया है। इन सब बातों को मैं इसलिए बताना चाह रहा था क्योंकि बार-बार यह बात आती है कि जब कोई सरकार अपने सामने आती हुई मुसीबतों या दिक्कतों को देखती है, तो अपनी रणनीति में वे किन चीजों को लेती है, इस बारे में महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण से बड़े साफ रूप में उल्लेख होता है। यूपीए सरकार के सामने तीन साल पहले जो चुनौतियां आई थीं, जिन परिस्थितियां में यूपीए सरकार बनायी गयी थीं, जिन परिस्थितियों में तमाम घटक दल यूपीए सरकार के अंदर आये थे, जिन चीजों के बारे में हमने सोचा और समझा था कि वे हमें जनता से मिली हैं, उन तमाम दिक्कतों को सामने रखते हुए, इस देश की परिस्थितियों को सामने रखते हुए, नीतियों, कार्यक्रमों और विधायकी का जो एक जामा हमारी सरकार ने बुना है, उस बारे में राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में उल्लेख किया है और रणनीति के बारे में बहुत साफ तरीके से कहा गया है।
मुझे आज कोई संशय नहीं है कि आने वाले दो साल में जब इस सरकार का और समय बीत जायेगा तथा कार्यक्रम सही रूप से जमीनी स्तर पर आगे कार्यान्वित होने लगेंगे, तो इस देश को सही में उस तरह का विकास मिलने लगेगा जिस तरह का विकास पिछले आठ-दस सालों में वंचित रहा है।
अंत में, मैं छोटी सी बात जरूर कहना चाहूंगा कि पिछले दो-तीन दिन से पंजाब औऱ उत्तराखंड के चुनाव का उल्लेख किया जा रहा है। चुनाव में किस राजनीतिक दल को फायदा हुआ है, यह अलग विषय है क्योंकि यह हर राजनीतिक दल की अंदर की समस्या है। लेकिन एक चीज मुझे मजे की लगती है कि एक तरफ पंजाब और उत्तराखंड की जनता ने अपनी राज्य सरकारों को बदला वहीं इन दोनों राज्यों में लोक सभा के जो बाय इलैक्शन हो रहे थे, उसमें कुछ दूसरा संदेश वहां की जनता ने दिया। अमृतसर से सिद्धू जी वापस इस सदन में आने वाले हैं। जब वे सदन में आयेंगे, मेरे ख्याल से हम सब उनका स्वागत करेंगे। आज से दो-तीन साल पहले जब उनको वोट मिले थे तब वे तकरीबन एक लाख १० हजार वोटों से जीत कर आये थे। आज जब हमारी सरकार दो ढाई साल तक भारत सरकार में रह चुकी है है तब संभवत: यह माना जाता है कि एंटी-इनकमबैंसी भारत सरकार के प्रति भी लागू होनी चाहिए, तो उनकी लीड एक लाख १० हजार से घटकर केवल ७० हजार रह गयी।[MSOffice12] यही नहीं टिहरी-गढ़वाल में हमारे बहुत आदरणीय माननीय सदस्य मानवेंद्र शाह जी की मृत्यु वे बाद वहां उपचुनाव हुए। वे वहां वे बहुत ही सम्मानित व्यत्ति थे, शायद वे वहां वे राजा भी रह चुवे हैं। जनता वे बीच में उनका अपना स्थान रहा है। वे वहां से कई बार से जीतते रहे। वहां भी यह माना जा रहा था कि तीन-चार साल वे बाद भारत सरकार वे प्रति वहां पर एन्टी-इनकम्बेंसी पैक्टर होगा। लेकिन वहां राज्य सरकार वे बारे में जनता ने एक आदेश, एक निदर्ेश दिया और जब वहां संसद का उपचुनाव हुआ तो जनता ने बिल्कुल अलग निदर्ेश दिया और कांग्रेस वे एक नुमाइन्दे को वहां से चुनकर भेजा। अगर आप लोग राज्यों की सरकारों का लेखा-जोखा लेना चाहते हैं और इन चुनावों वे जनादेश को पढ़ना चाहते हैं कि जनता ने क्या निदर्ेश दिया, क्या आदेश दिया, क्या संदेश दिया है, क्या संवेत दिया है तो आपको यह भी देखना पड़ेगा कि इन्हीं दो राज्यों में हुए संसद वे उपचुनावों में जनता से क्या संवेत आ रहा है। वह संवेत यही है कि जहां हम हारे, हमारी बढ़त पहले से कम हुई है, वहीं कई जगहों पर हम धीरे-धीरे लीड लेते चले जा रहे हैं। इन्हीं दो इलेक्शन्स को अगर आप आगे बढ़ाते चले जाएंगे तो मुझे उम्मीद है कि एनडीए को सौहार्द्रपूर्ण तरीवे से इन चुनाव परिणामों को भी पढ़ना पड़ेगा। मुझे नहीं लगता है कि इन बातों का राष्ट्रपति जी वे अभिभाषण से कोई सम्बन्ध है। मैं कहना चाहूंगा कि राष्ट्रपति जी ने बहुत सुन्दर तरीवे से सरकार की नीतियों का उल्लेख किया है और साफ रूप में इस देश की जनता को बताया है कि कहां-कहां उनकी सरकार किस-किस समस्या में उसवे साथ जुड़ी है। उसवे हर पहलू में कहीं न कहीं यूपीए सरकार यह कोशिश कर रही है कि लोगों वे बीच जाकर उनवे जीवन पर एक सकारात्मक असर कर सवे। इन चीजों वे लिए मैं राष्ट्रपति जी को धन्यवाद देता हूं और माननीय मधुसूदन मिस्त्री जी ने जो मोशन मूव किया है, उसका समर्थन करते हुए अपनी बात समाप्त करता हूं।
MR. CHAIRMAN : Hon. Members whose amendments to the Motion of Thanks have been circulated, may, if they desire to move their amendments, send slips to the Table within 15 minutes indicating the serial numbers of the amendments they would like to move. Those amendments only will be treated as moved.
A list showing the serial numbers of amendments treated as moved will be put up on the Notice Board shortly thereafter. In case any Member finds any discrepancy in the list, he may kindly bring it to the notice of the officer at the Table immediately.
This is for the information of the Members whose amendments have already been circulated and who wanted to move their amendments.
“That an Address be presented to the President in the following terms:-
That the Members of the Lok Sabha assembled in this Session are deeply grateful to the President for the Address which he has been pleased to deliver to both Houses of Parliament assembled together on February 23, 2007.” Now, Shri L.K. Advani.
श्री लाल कृष्ण आडवाणी (गांधीनगर) : सभापति महोदय, मैं आरंभ में कहना चाहूंगा कि राष्ट्रपति जी का अभिभाषण शासन का नीति वत्तव्य है और उसमें राष्ट्रपति जी वे अपने विचार नहीं होते हैं। इसलिए उनवे प्रति आभार का जो प्रस्ताव है - मोशन ऑफ थैंक्स - मैं उसका स्वागत करता हँू, लेकिन इस नीति वत्तव्य वे बारे में अपनी निराशा व्यत्त करता हँू। यह निराशा वेवल विपक्ष की है या वेवल मेरी पाटर्ी की है, ऐसा नहीं है। मैं शासन का ध्यान इस बात की ओर दिलाना चाहूंगा कि अभी-अभी जिस प्रकार से दीक्षित जी कह रहे थे कि इन दो राज्यों वे चुनाव परिणामों का यह अर्थ नहीं निकालना चाहिए कि इस सरकार की नीतियों से लोग असहमत हैं, बल्कि वह एक प्रादेशिक मामला है। मैंने कल ही सरकार के सहयोगी दलों का एक बयान देखा। भले ही उन सहयोगी दलों से मेरा काफी मतभेद हो, लेकिन मैंने उनके वक्तव्य में देखा, जिसमें सरकार को चेतावनी दी गई थी कि आपने दो राज्य गंवाए हैं, इस पराजय से जो शिक्षा मिलनी चाहिए, उसे मत गंवाएं।
'इकोनॉमिक टाइम्स' में यह लिखना, you have lost two States; do not lose the lessons of the setback. मैं उनके वक्तव्य को कोट करना चाहता हूं, जिसमें उन्होंने कहा है -
“These electoral setbacks have relevance for the UPA Government at the Centre. The Congress leadership and the UPA Government should draw proper lessons from this defeat. The policies pursued have failed to curb price rise, tackle agrarian crisis or provide relief to the people.” इस सरकार को केन्द्र में बैठे हुए करीब तीन साल हुए हैं। मैं इस बात को कोट करने के बाद भी कहूंगा कि इन दोनों प्रदेशों में जो परिणाम आए हैं, संसद के बजट सत्र आरम्भ होने के बाद आए हैं। इन प्रदेशों में वहां की सरकारों के प्रति जो असंतोष था, वह सामने आया है। इसे कई बार लोग एंटी-इंकम्बैंसी फैक्टर भी कहते हैं। लेकिन विगत तीन साल में बिहार में यूपीए की पराजय, फिर केरल में कांग्रेस पार्टी की पराजय, भले ही उसके सहयोगियों के द्वारा ही हो, ये जितने काम है, वे इस बात को प्रमाणित करते हैं कि जिस जनादेश के आदेश पर यह सरकार बनी थी अर्थात् अगर हम शासन में आएंगे तो आम आदमी के जितने कष्ट हैं, उन्हें दूर करेंगे, उनके हितों को आगे बढ़ायेंगे और उनके हितों का संवर्द्धन करेंगे, इस मामले में यह सरकार पूरी तरह से विफल हुई है।
15.17 hrs. (Mr. Deputy Speaker in the Chair) आम आदमी के मन में इस सरकार की कार्य प्रणाली के खिलाफ न केवल असाधारण असंतोष है, बल्कि यह भावना भी है कि इस सरकार ने हमारे साथ विश्वासघात किया है। वह इस तरह से किया है कि लोक सभा के चुनावों से पहले कांग्रेस पार्टी ने देश की जनता के सामने यह नारा दिया था कि "कांग्रेस का हाथ, आम आदमी के साथ।" यह नारा उस समय जनादेश प्राप्त करने के लिए था। आज यह नारा इस तरह से हो गया कि "कांग्रेस पार्टी का हाथ आम आदमी के साथ विश्वासघात।"...(व्यवधान) आप इसे इस रूप में लें कि आम आदमी क्या चाहता है वह चाहता है कि उसके दैनंदिन जीवन का बजट रोज न बदला जाए।
मैं अपने अनुभव की एक बात आपको बताना चाहता हूं। जब मैं उत्तराखंड में एक छोटे से गांव गंगोली घाट में चुनाव अभियान के लिए गया तो वहां पर मेरी एक सभा थी। वहां हमारी पार्टी की ओर से कुछ बैनर लगे हुए थे, जिसमें रोजमर्रा की चीजों जैसे दाल, आटा, सब्जियों आदि के भाव लिखे हुए थे। इन दिनों सबसे ज्यादा चर्चा दाल की हुई है, क्योंकि गरीब आदमी के लिए प्रोटीन का जरिया सिर्फ दाल ही है। यह बात ठीक है कि हिन्दुस्तान में न्यूटि्रशसियस सिक्योरिटी होनी चाहिए, तो उसके लिए दाल है और वह सस्ती मिलनी चाहिए। वहां लगे उन बैनरों पर दाल का दाम ४४ रुपए प्रति किलोग्राम लिखा हुआ था। मैं उसे देखकर थोड़ा हैरान हुआ कि कहीं कोई गलती हुई है, क्योंकि हमने सब जगहों पर देखा था कि कुछ दालों की कीमत तो ६० रुपए प्रति किलोग्राम है। मैंने वहां अपनी पार्टी के लोगों से पूछा कि यह ४४ रुपए प्रति किलोग्राम लिखा है, क्या यह ठीक है, तो इस पर उन्होंने कहा कि एक महीना पहले चुनाव अभियान शुरू हुआ था, उस समय यह होर्डिंग लगे थे। आपका कहना ठीक है कि आज दालों की कीमत ६० रुपए प्रति किलोग्राम के करीब हो गई है।
हो सकता है दीक्षित जी या अन्य को या मुझे पता न हो और न कोई तकलीफ होती हो, लेकिन कल्पना कीजिए जिसे हम आम आदमी कहते हैं, वह आम आदमी कौन है?या तो गांवों में बसा हुआ किसान हो सकता है या फिर शहर में जो गरीब या मडिल-क्लास का आदमी रहता है वह आम आदमी है, जिसकी आबादी बहुत अधिक है। उसकी चिंता यह है कि रोजमर्रा काम आने वाली चीजों की कीमतें ठीक रहनी चाहिए, संतुलित रहनी चाहिए। दूसरी चिंता की बात यह है कि हमारा किसान जो है, वह किसान इस स्थिति में पहुंच जाए कि हजारों किसान आत्महत्याएं करें। यह स्थिति ऐसी है जिसके बारे में इसमें मैंने सब देखा है। पहला प्राइस, दूसरा किसान का कष्ट - आप पूरा पैराग्राफ पढ़ें। प्राइस के बारे में कहा गया है लेकिन उसमें ऑपरेटिव पार्ट नहीं है कि हम कीमतों के बारे में क्या करेंगे? पैराग्राफ ४ में कहा गया है कि :
“My Government recognizes that keeping a check on inflation is an essential element of any strategy for inclusive growth. ” This is the beginning. बीच में उन्होंने कीमतें बढ़ने के कारण बताए हैं। उसका मैं फिर उल्लेख करुंगा। फिर कहा गया है कि :
“My Government will continue to take all necessary steps to ensure that the poor are not adversely affected by inflation. This is our solemn commitment.” इसको क्या नीति-वक्तव्य कह सकते हैं। इसमें कोई कंटेंट नहीं है केवल एक्सप्लेनेशन है कि क्यों बढ़ती है, क्या करें, यह नहीं है।
“The fall out of the steep increase in global oil price and resurgence in global commodity price…. ” जबकि यह सच नहीं है। ऑयल की ग्लोबल प्राइस पिछले साल बहुत ऊंची थी, ७२ डालर प्रति-बैरल थी लेकिन अब ५०-५५ डालर प्रति-बैरल हो गयी है। There is a fall, and, therefore, even in the statement made by the President, उसमें ऐसा भाषण है, वाक्य हो, एक्सप्लेनेशन हो। आगे एक्सप्लेनेशन दी गयी है कि “As growth and investment accelerate rapidly and incomes rise, there is bound to be a rising demand for the products, particularly products of day-to-day consumption.” सर्वे हुई हैं जिनमें कहा गया है कि गरीबों में खाद्य-पदार्थों का कंजम्पशन पिछले दो दशकों में कम हो गया है और माननीय राष्ट्रपति जी से इस प्रकार का भाषण करवाना क्या सरकार के लिए उचित है? उसके बाद भी अगर कोई द्ृष्टिकोण होता कि यह हमारा द्ृष्टिकोण है और कहते कि हम मानते है कि इस मामले में हमें सफलता नहीं मिली है और कारण सही नहीं हैं, और मानकर कहते कि हम यह-यह करने वाले हैं। बजट पर मेरी तुरंत टिप्पणी हुई तो उसी संदर्भ में हुई। कल हमारे माननीय वित्त मंत्री जी ने कहा “Here is a good news for the lovers of cats and dogs.” मैं हैरान हो गया। कभी-कभी कोई चुटकला कहा जाता है, ठीक है। आज क्या मेनका जी यहां नहीं हैं। आज की स्थिति में जब लोगों को कष्ट हो और ऐसी स्थिति में ऐसी बात कही जाए तो यह सेंसटविटी का अभाव दिखाता है। हिंदुस्तान में सब प्रकार के लोग हैं और सब प्रकार की उनकी इच्छाएं हैं। माननीय राष्ट्रपति जी तो यह कारण नहीं बताते कि ऑयल की प्राइसेज बढ़ गयीं, लोगों में खाद्य-पदार्थों की डिमांड बढ़ गयी। मैं मानता हूं कि पिछले सालों में जिस प्रकार से किसानों की आत्महत्याओं के कांड हो रहे हैं उसकी भूमिका अभी नहीं बनी है, आपकी सरकार ने नहीं बनाई है। यह सिलसिला चला है खेती की ओर जितना ध्यान देना चाहिए था उतना नहीं दिया गया और कल हमारे वित्त मंत्री जी ने माननीय नेहरु जी को कोट किया कि खेती की ओर कितना ध्यान होना चाहिए, खेती की उपेक्षा करना यानी इकोनोमी की उपेक्षा करना।[r13] यह बात नेहरू जी ने कब कही, उन्होंने तारीख नहीं बताई, लेकिन इसका मतलब तो यही है क this is a shortcoming that we have had to suffer for several decades now. ४० साल या ५० साल हुए होंगे तब ऐसी बात कही है। इसलिए कम से कम दूसरों को दोष मत दीजिए। मैं कह सकता हूं कि हमारे समय में एसेंशियल कोमोडिटीज में इंफ्लेशन नहीं बढ़ पाई, उसे रोके रखा। It is a question of management. यह कोई बहुत बड़ा चमत्कार नहीं है, यह मैनेजमेंट का सवाल है और दूसरे फैक्टर का जिक्र मैं बाद में करूंगा, लेकिन यह देखना जरूरी है कि कुल मिलाकर शासन में भ्रष्टाचार कितना है। भ्रष्टाचार का बहुत असर शासन पर पड़ता है।
PROF. M. RAMADASS (PONDICHERRY): We would be grateful if the hon. Leader of the Opposition can enlighten us on the process of rise in prices in the country. If demand cannot influence the prices and if supply cannot increase the price, let us be enlightened by his lecture on inflation here… (Interruptions)
उपाध्यक्ष महोदय : स्वाईं जी, आप बैठ जाइए।
...(व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Please sit down.
… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Athawaleji, if you want to say anything, first of all, you should go to your seat. Nothing is going on record.
(Interruptions) …* * Not recorded.
श्री लाल कृष्ण आडवाणी : महोदय, मेरा कहना यह है कि राष्ट्रपति द्वारा सरकार का जो नीति वक्तव्य सदन में प्रस्तुत किया जाए, उसमें परस्पेक्टिवस चाहिए, दिशा चाहिए, सुझाव चाहिए। मैं किसानों की आत्महत्या का मामला कई वर्षों से देख रहा हूं। प्रधानमंत्री जी स्वयं विदर्भ गए थे, जिस दिन गए उस दिन भी आत्महत्याएं हुईं और बाद में भी होती रहीं। पिछले साल मैं विदर्भ गया था, तेलेंगाना भी गया और भी बहुत से प्रदेशों में गया था, जहां भी किसानों द्वारा आत्महत्याएं की गईं। आज इतने समय के बाद अगर हमें आज सरकार से सुनना पड़ता है कि -
“That an expert group is looking into the problem of agricultural indebtedness and will suggest measures to provide relief to farmers in distress.” हमें यह सोचना चाहिए कि जब कोई किसान आत्महत्या करता है, तो इसका मतलब है कि वह उस स्थिति को बर्दाश्त नहीं कर सकता है, इनडेब्टनेस के कारण, लेकिन उसी स्थिति में हजारों और किसान भी हैं, जो बहुत तकलीफ में हैं और इस स्थिति को सहन कर रहे हैं, इस उम्मीद में कि कुछ न कुछ होगा, जिसके कारण वे इस स्थिति से मुक्त हो पाएंगे। अगर कहीं २०० किसान किसी क्षेत्र में आत्महत्या करते हैं, तो इसका मतलब यह है कि distress is very widespread. कोई साधारणत: आत्महत्या नहीं करता है।
SHRI KINJARAPU YERRANNAIDU (SRIKAKULAM): In Andhra Pradesh, there are 3540 cases.
SHRI L.K. ADVANI : I know that. When your Government was there, the Opposition – the Congress Party – made that a real issue. … (Interruptions)
उपाध्यक्ष महोदय: मिस्त्री जी, आपने अपनी बात कह ली है। आप कृपया इनकी बात सुनें।
...(व्यवधान)
श्री लाल कृष्ण आडवाणी : महोदय, केवल मिस्त्री जी ऐसे हैं, जिनसे मैं कभी-कभी गुजरात की आलोचना सुनता हूं। मुझे गर्व है कि मैं गुजरात का प्रतनधि हूं। मैं जहां भी जाता हूं, वहां मुझे सब कहते हैं कि कमाल का आपका मुख्यमंत्री है और कमाल की आपकी सरकार है। यह प्रमाणपत्र तो सबसे पहले राजीव गांधी फाउंडेशन ने दिया है। मिस्त्री जी, मुझे आप पर तरस आता है।
श्री मधुसूदन मिस्त्री : मैं आपके संसदीय क्षेत्र में रहता हूं, इसलिए सब जानता हूं कि क्या हो रहा है?
श्री लाल कृष्ण आडवाणी : आपकी सरकार ने सच्चर कमेटी बनाई है और उस कमेटी को इसलिए बनाया है क्योंकि यह पता चले कि देश में मुस्लिम समाज की आर्थिक और सामाजिक स्थिति कैसी है। उसने भी कहा है कि गुजरात में मुसलमानों की स्थिति अच्छी है और गुजरात की तुलना में पश्चिम बंगाल में लोग पिछड़े हैं। … (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing, except the speech of Shri Advani, will go on record.
(Interruptions) … * श्री लाल कृष्ण आडवाणी : प्रधान मंत्री या दूसरा कोई मंत्री जवाब देगा और अगर कृषि मंत्री इसके बारे में कहते हैं कि एक्सपर्ट ग्रुप बनेगा तो वह कब तक रिपोर्ट देगा। हमने उनके लिए गाइडलाइन्स और टारगेट्स दिए हैं। सचमुच इस प्रकार की स्थिति किसी देश में हो तो हमारे सामने लक्ष्य होना चाहिए कि जीरो फार्मर स्यूसाइड होने चाहिए। जिस समय आन्ध्रा प्रदेश में चन्द्रबाबू नायडू का शासन था, इस इशू को उठा कर विपक्ष ने चुनाव लड़ा था और चुनाव के बाद चन्द्र बाबू की सरकार नहीं रही, हमने उसका एग्जामिनेशन करवाया तो देखा कि थोड़ी देर में ६-८ महीने में संख्या इतनी बढ़ गई। आगे इनकी संख्या क्या है, उसके बारे में यह बताएंगे लेकिन कुल मिला कर हम सब के लिए यह एक चुनौती है, गम्भीर मामला है। इसे पार्टी इशू न बना कर किस प्रकार से देश भर में फार्मर स्य़ूसाइड जीरो में ले आएं, यह कोशिश होनी चाहिए। अगर पोलियो को दूर करने के लिए काम करते हैं या दूसरा कोई प्रोग्राम चलाते हैं तो इसके लिए भी एक एप्रोच होनी चाहिए। There should be a constructive approach which totally brings down the rate of suicide. There should be no suicide by farmers.उसके लिए समय लगेगा क्योंकि बहुत समय से कृषि के क्षेत्र में पूंजी निवेश कम होता रहा है, उद्योग के क्षेत्र में होता है, बाकी क्षेत्रों में होता है लेकिन कृषि के क्षेत्र में इनवैस्टमैंट बहुत कम होता है, इरिगेशन में इनवैस्टमैंट बहुत कम होता है। ये सारे फैक्टर्स हैं। उन सब फैक्टर्स पर होलिस्टिक रूप में एप्रोच करके जीरो फार्मर स्यूसाइड लाने की कोशिश होनी चाहिए।
जब मैं सरकार में था और जिस क्षेत्र से मेरा सम्बन्ध रहा है, अब मैं उस पर आता हूं और वह सुरक्षा है, सिक्योरिटी है। मैं मानता हूं कि आम आदमी को दैनिक उपयोग में लाने वाली चीजों की कीमत * Not recorded ठीक दाम पर चाहिए। आम आदमी का मतलब है जो ग्रामीण इलाके में रहते हैं, किसान हैं। उसे रोज जो कष्ट होता है, वह इस प्रकार से दूर हो जाए कि उसे आत्महत्या न करनी पड़े। लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति ऐसी हो कि आम आदमी सुरक्षित महसूस करे। जितने भी मामले उसकी सुरक्षा से संबंधित हैं, उसके लिए ऐसी सरकार का शासन होना चाहिए कि वह उनको भरोसा दे सके कि इन सब का निवारण होगा।
यहां पर एक पैराग्राफ है। उसमें सिक्योरिटी की जितनी प्रॉबलम्स हैं, सचमुच एक-एक प्रॉबलम का अलग-अलग से जिक्र होना चाहिए था। हम अगर क्रॉस बॉर्डर टैरारिज्म से डील करेंगे उसमें आईएसआई का जो रोल है, उससे कैसे निपटेंगे, वह आना चाहिए था। मैं जानता हूं कि जिस समय एनडीए की सरकार थी हमने इनीशिएटिव लेकर वहां के राष्ट्रपति को कारगिल युद्ध के बावजूद यहां आगरा में निमंत्रण देकर बुलाया। जब हमने कहा कि हिन्दुस्तान में पाकिस्तान से प्रेरित आतंकवाद है, तो उन्होंने बहुत फॉर्मली कहा कि there is no terrorism in India, at least sponsored by us. यहां जो कुछ भी हो रहा है आजादी की एक जंग है, उसमें बेगुनाह भी मारे जाते हैं, मैं उसके बारे में कुछ नहीं कहूंगा।
When he declined to say anything about terrorism, हमने कहा कि समझौता नहीं होगा। समझौता नहीं हुआ। समझौता अगर हुआ तो जनवरी २००४ में हुआ। हमारी जब सरकार थी और हमारे प्रधान मंत्री जब इस्लामाबाद सार्क सम्मेलन के लिए गए तो समझौता हुआ। जब उन्होंने संयुक्त वक्तव्य में स्वीकार किया। मैं या हमारी सरकार आतंकवाद को पाकिस्तान के किसी भी इलाके से, जो हमारे कब्जे में हो या हमारा हिस्सा हो, वहां किसी भी प्रकार से होने नहीं देंगे” जब उन्होंने सार्वजनिक वक्तव्य दिया तब समझौता हुआ और बातचीत शुरू हुई और वह बातचीत चल रही है। हम उम्मीद करते हैं कि उसमें से कुछ निकलेगा लेकिन आज भी मैं मानता हूं कि आईएसआई ने अपनी गतवधियां नहीं छोड़ी हैं, आईएसआई बांग्लादेश से भी ऑपरेट करता है, नेपाल से भी आपरेट करता है, कई जगह से ऑपरेट करता है, उसके लिए सावधानी बरतते रहें, यह जरूरी है। लेकिन महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में पैरा ४२ में सब बातों को साथ जोड़ दिया गया है और एक शब्द कहकर बात खत्म कर दी गई है।
“My Government is paying special attention to the modernisation of police forces, security forces and intelligence agencies..” पूरी बात हो गई।
“A focussed and holistic attempt to deal with the challenges of internal security in the North-Eastern Region ..” वह वाक्य भी पूरा हो गया।
“…in Jammu and Kashmir and in regions affected by naxalite activity… ” वह भी इसका हिस्सा हो गया।
“…is yielding dividends. My Government recognizes the challenge posed by terrorism and extremism and has been resolute in dealing with it. While our security and intelligence agencies have successfully foiled many attempts by terrorists groups to strike terror, there have been tragic, dastardly and cowardly acts of terrorism, as in Mumbai and Assam and, most recently, in the attack on Samjhauta Express. My Government is dealing firmly with the challenge posed. ” Does it give us any idea? So much so, इसमें असम का नाम लिया गया, उल्फा का नाम नहीं ले सकते, कान्सियसली ओमटिड है। Everyone knows that ULFA is at the back of all the incidents that have taken place in Assam recently. उसमें सबसे दुर्भाग्य की बात है कि जो भी नॉन-असामीज़, हिंदी भाषी, बिहार के लोग वहां बसे हैं, वर्षों से काम कर रहे हैं, उनको पब्लिकली कहते हैं कि ये फार्नर्स हैं, इन्हें यहां से चले जाना चाहिए। ७० लोग एक साथ मारे गए, प्रणव जी जानते होंगे, सदन के नेता हैं, प्रधानमंत्री जी जानते होंगे, प्रधानमंत्री जी असम से इलैक्टिड हैं, विगत दिनों यह सारा प्रकरण हुआ है और जिसमें सार्वजनिक रूप से आरोप लगाए गए हैं कि वहां पर जब गेम्स हो रही थीं तो गेम्स को करने के लिए उल्फा को कीमत देनी पड़ी।...(व्यवधान)
THE MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF CHEMICALS AND FERTILIZERS AND MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF PARLIAMENTARY AFFAIRS (SHRI B.K. HANDIQUE): This is absolutely baseless and a blatant lie. … (Interruptions)
THE MINISTER OF HEAVY INDUSTRIES AND PUBLIC ENTERPRISES (SHRI SONTOSH MOHAN DEV): It is absolutely false.… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing should be recorded except what Shri Advani says.
(Interruptions) … * श्री लाल कृष्ण आडवाणी : आप समझें कि जब उल्फा उस चैनल को धमकी देता है जिस चैनल ने उसे ब्रॉडकास्ट किया तब उस चैनल को प्रोटेक्शन देने के बजाय, उसे बचाने के बजाय सरकार उसका एक्रेडिटेशन कैंसल कर देती है और सुप्रीम कोर्ट को इन्टरवीन करके एक्रेडिटेशन वापस दिलाना पड़ता है। How do I understand this? कम से कम सरकार में इतनी बुद्धिमत्ता तो होनी चाहिए। उन्होंने सार्वजनिक रूप से कहा है, मैंने कहा है कि मुझे खुशी होती अगर यह बात बिल्कुल बेबुनियाद होती। मेरे पास सारे कागजात हैं, उन्होंने भी मुझे पत्र लिखा है लेकिन मैं उसमें नहीं जाना चाहता हूं। लेकिन मैं केवल हिंदू, इंडियन एक्सप्रेस जो प्रमुख अखबार वहां के हैं उनको पढ़कर बात कही है, ऐसे नहीं कही है। यह बात सही है कि उस एजेंसी ने आरोप लगाया है और मैं जब देखता हूं.... (व्यवधान)
SHRI B.K. HANDIQUE: This is alleged reporting… (Interruptions)
SHRI L.K. ADVANI : Understand one thing. If you have not done anything in respect of accreditation of that journal, nothing would have happened. He went to the court and the Supreme Court intervened. Why do you invite the intervention of the Supreme Court on matters of this kind?
THE MINISTER OF HEAVY INDUSTRIES AND PUBLIC ENTERPRISES (SHRI SONTOSH MOHAN DEV): What about High Court judgement? … (Interruptions)
SHRI L.K. ADVANI : I am coming to another Supreme Court judgement which deals with the political leadership directly. But this particular matter is related to the Press. I have known the Emergency from in and out. Even at that time I used to say that if during the Emergency, only politicians had been arrested, if during the Emergency only the authority of the judiciary had been undermined, it would not have been so disastrous for democracy as the attacks that were made on the media at that time. The curbs that were imposed on the media were the most shameful. I find that, after so many years, instead of learning lessons from the * Not recorded Emergency, here is a Government which takes away the accreditation card of a TV channel for covering National Games there. Similarly, I find that a very highly respected journalist of Andhra Pradesh, Shri Ramoji Rao, is under attack because he is exposing the corruption of that Government.
These two incidents have made even the International Federation of Journalists to protest against it. The International Federation of Journalists, the IFJ, had condemned the threats from an outlawed group in India. This channel has been told to quit Assam. They threatened that if they do not go away from Assam, they will be destroyed. This was the threat given to it. One would expect that the Government of the State would protect that channel rather than dis-accrediting it or taking away its accreditation.
Shri Sontosh Mohan Dev ji, I tell you, I know in this country, when you have that mentality, you can even find a person like Shri Jayaprakash Narayan, even a person like Shri Chandra Shekhar, even a person like Shri Atal Bihari Vajpayee become threats to national security, so put them behind the bars for nineteen months. This has happened in this country. I cannot forget it.
Now, when the same mentality comes out, whether it is in Andhra Pradesh or in Assam, I feel it is my duty to stand up against it and condemn the Government. … (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing should be recorded.
(Interruptions) …* उपाध्यक्ष महोदय : मिस्त्री जी, आप बोल चुके हैं, कृपया बैठ जाइये।
श्री लाल कृष्ण आडवाणी : इसलिए संतोष मोहन जी मैंने शुरू में ही कहा कि इस राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में उल्फा का उल्लेख भी न हो, इसे मैं महत्वपूर्ण मानता हूं। मैं इसे एक संकेत मानता हूं कि उल्फा के साथ हमारी कोई मिलीभगत है, जिसके कारण एक समय में उन्होंने पार्टी का समर्थन किया था।
* Not recorded इसमें शक नहीं है कि एक समय आंध्रा में भी हमने नक्सलवादियों का समर्थन लेकर अपनी सरकार बनाने की कोशिश की थी। मुझे खुशी है कि प्रधान मंत्री जी स्वयं यहां आये हुए हैं, वह आसाम के प्रतनधि हैं, इसीलिए मैं उनसे अपेक्षा करूंगा कि इस पूरे कांड के बारे में जो कुछ हुआ है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट को भी इंटरवीन करना पड़ा और जिस पर विश्व भर के लोगों ने टिप्पणी की, उसके बारे में वह स्पष्टीकरण दें। आसाम से ही संबंधित मैंने संतोष मोहन जी को कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने एक सर्वाधिक महत्वपूर्ण निर्णय दिया, उस निर्णय के बारे में आपने क्या किया। आई.एम.डी.टी. एक्ट, जिसके बारे में मैं समझता हूं कि वहां पर इल्लीगल इमिग्रेशन चलता रहे और वहां की सारी डेमोग्राफी बदल जाए। हमारी सुरक्षा उस प्रदेश की ही नहीं लेकिन सारे देश की सुरक्षा संकटग्रस्त हो जाए, इसमें आईएमडीटी एक्ट का बहुत बड़ा रोल है और इसीलिए जब सुप्रीम कोर्ट ने उसे स्ट्रैक-डाउन किया और कहा कि अनकांस्टीटयूशनल है तो हमें लगा कि इससे सबक सीखकर उसके अनुसार काम होगा। लेकिन उसके बजाए तुरंत उसके बाद जिसके कारण उसे अनकांस्टीटयूशनल किया, वे सारे जो एक्ट के फीचर्स थे, वे सब इनकॉरपोरेट करके एक नया ऑर्डर इश्यू किया जिसका नाम था Foreigners Tribunals for Assam Order, 2006. अभी जिन्होंने एक्ट के खिलाफ याचिका दी थी, वे फिर से कोर्ट में गये और सुप्रीम कोर्ट ने इस २००६ के एक्ट को पिछले साल के अंत में फिर से स्ट्रैक-डाउन किया और कहा क “It appears that the 2006 order issued after the Illegal Migrants (Determination by Tribunals) Act was declared unconstitutional has been issued just as a cover-up for non-implementation of the directions of this court.” A Bench consisting of Justices S.B. Sinha and P.K. Balasubramanyan said:
“The earlier decision on IMDT referred to the relevant material showing that such uncontrolled immigration into North Eastern States posed a threat to the integrity of the nation. What is therefore called for is a strict implementation of the directions of this court issued (in the earlier judgment), so as to ensure that illegal immigrants are sent out of this country.” It applies not only to Assam, but it applies to the whole country. I hope that when the hon. Prime Minister replies to this debate, he would apprise the country and this House as to what steps are being taken to see that illegal immigrants from Bangladesh, who have come over here and crossed first into Assam or States of the North East but then spread over the entire country, are sent back to Bangladesh where they belong. We have to once again lament that there is a lack of will in the matter of ensuring that illegal immigrants are sent out. Now this is directly against the Government of India.
I further quote:
“Instead of obeying the mandamus issued essentially in the interests of national security and to preserve the demographic balance of a part of India, that is Bharat, and implementing the 1964 order in Assam in letter and in spirit, the authorities that be have chosen to make the order itself inapplicable to Assam.” Then the final indictment is very serious from the Supreme Court. I read it out very carefully.
“Though we would normally desist from commenting, when the security of the nation is the issue, we have to say that the bona fides of the action leave something to be desired.” Now this is questioning the bona fides of the Government. I am not merely referring to the dispute about that dis-accreditation. The Supreme Court in a way has rectified that. I am referring to this particular matter, that is, the IMDT and the order issued thereafter and the directions given to the Government that illegally migrating Bangladeshis must be sent back to Bangladesh.
Sir just before the President’s Address was delivered in the House, I have received a copy of the report of the Second Reforms Commission headed by Shri Veerappa Moily. I have cursorily gone through it. I hope that this House would have an occasion of discussing it fully and then I would give my comments. Even though many of those recommendations made by them have been picked from earlier Committees’ recommendations etc., but on the whole, the stress and emphasis on ethical governance, and the stress and emphasis on having corruption-free governance is welcome.[a14] Therefore, I was surprised to find that the President’s Address does not even mention it. Once again, it is an omission which surprised me. Just as a reference to the ULFA is not being there, this one also surprised me.
Why has the Moily Commission not referred to in it? At least, we could have some idea as to what the Government thinks about it. I, for one, thought that for the first time, there is something.
In the last paragraph of the President’s Address, there is a reference to corruption. At least, the word “corruption” is there. So, let me read that out. This is paragraph 58.
“The reform of Government, making it more transparent and responsive, and the elimination of the cancer of corruption are necessary elements of any strategy of inclusive growth. The Right to Information Act is one means of empowering our citizens. The more powerful instrument in their hands is their right to have their voice heard…” How can they have their voice heard when vital information is suppressed from their knowledge for 17 days? I referred to it this morning. Till now, despite the Statement that has been laid on the Table of the House by Shri Pachouri in which the news came saying that this happened and that happened, why was there total deafening silence from the Government side till the 23rd? There is no explanation.
SHRI B. MAHTAB (CUTTACK): He was released on bail.
SHRI L.K. ADVANI : There is no explanation till he was released on bail. That is true. It is because the lower court said: “No bail. We will not give it.” Then, he went to a superior court. Until he was released on bail, there was no explanation. Then the news came up. Now, Mr. Prime Minister, you say that this right to information is there, the people should know of it, Parliament should know of it. After all, the most important thing is the voice of the Parliament, their right to have their voice heard. It has been said:
“The more powerful instrument in their hands is their right to have their voice heard and their grievances redressed in these august premises of our Parliament. Eternal vigilance, as it has been said, is the price of democracy.” It is this that makes me wonder and it seems somewhat spurious. It does not seem very convincing. Why would anyone think that if the news came out, it would influence Punjab election, Uttarakhand election? I do not know about it. But, maybe, there are some people in the Government who think that even smaller matters of this kind, the very mention of Bofors, the very mention of Quattrocchi evoke a public response which would contribute even more to the set back that this party has suffered in those two States. Maybe, there may be that kind of a judgment. But, I think, that this is also something which the hon. Prime Minister must explain as to why up to the 23rd – a fact that was known to the Government from 6th and formally on the 8th – it was suppressed.
So far as the Moily Commission is concerned, I would only quote this. The Moily Commission has said this thing towards the end.
“This report must end on a note of optimism. Indians have always valued a world beyond the material and have embraced spiritualism as a way of life.” I have quoted this because unfortunately in India, very often, secularism is equated to something that has nothing to do with religion or spiritualism.
SHRI PRAKASH PARANJPE : Correct?
SHRI L.K. ADVANI : What is correct? So, an official report of this kind mentions that they are optimistic because Indians have always valued a world beyond the material and have embraced spiritualism as a way of life.[R15] “Instances abound in our epics of good behaviour, of the triumph of good over evil, of wisdom of sages. Stories of honesty, generosity and piety of legendary kings such as Vikramaditya, are told to our children even today.” Not only that, but what pleases me more was the next sentence which said:
“There is no reason why Ram Rajya cannot be attempted.” It further says:
“The Commission believes that this report on Ethics in Governance is among the most important that this Commission has been called upon to write, because increased honesty in governance would have a major impact on the everyday lives of the people of India. When the recommendations of this report are implemented, greater efficiency in Government work and accountability would be achieved, because more public servants would work not with private agenda but for larger public good. Equally importantly, a more corruption-free regime would lead to a higher rate of growth for our GDP, bring an overall improvement in the economy and lead to greater transparency in Government actions serving its people. All this, in turn, will lead to greater empowerment of people – the core need of a vibrant democracy.” Sir, I totally endorse what has been said here and on the basis of experience, I would like to tell the House and Shri Madhusudan Mistry in particular that if today Gujarat is being praised throughout the country and even abroad for the development and the welfare of the people of that State, one major factor contributing to it is the kind of transparency and incorruptibility that the Government of Gujarat has brought in there. So, corruption-free governance certainly bring about all these good attributes and that is all.
With these words, I would, once again, say that while I support the Motion of Thanks, I am disappointed with the contents that have been included there through the President in the form of a policy statement.
श्री संतोष गंगवार (बरेली): I beg to move:
कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाषण में देश की आंतरिक सुरक्षा के बारे में सरकार की विफलता के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । "(43) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाषण में देश के वभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं में धर्म के आधार पर आरक्षण रोकने हेतु उपायों के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । "(४४) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाषण में लोकपालों की नियुक्ति द्वारा भ्रष्टाचार रोकने एवं लोकपाल विधेयक को अधनियमित करने हेतु किसी प्रस्ताव के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । "(४५) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाषण में लोकपालों की नियुक्ति द्वारा भ्रष्टाचार रोकने एवं लोकपाल विधेयक को अधनियमित करने हेतु किसी प्रस्ताव के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । (४६)"
कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाषण में देश की सभी नदियों को परस्पर जोड़ ने हेतु किसी परियोजना के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । "(४७) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाषण में भविष्य नधि सहित छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दर में वृद्धि के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । "(४८) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाषण में देश में बंधुआ मजदूरी विशेषकर बालश्रम प्रथा के उन्मूलन के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । "(४९) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाषण में देश के सभी नागरिकों को राष्ट्रीय पहचान पत्र जारी करने संबंधी किसी भी योजना के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । "(५०) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाषण में किसानों को दिए गए ऋण के ब्याज में कमी करने के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । "(५१) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाषण में सरकारिया आयोग की सिफारिशों को लागू करने के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । "(५२) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाषण में घाटे में चल रहे सरकारी क्षेत्र के उपक्रमों के पुनरूद्धार के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । "(५३) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाषण में कृषि उत्पादन में वृद्धि तथा किसानों को अधिक सिंचाई सुविधा संबंधी किसी योजना के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । "(५४) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाषण में बांग्लादेशी घुसपैठियों को वापस भेजने हेतु उनकी पहचान में तेजी लाने की प्रक्रिया के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । "(५५) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाषण में देश में खाद्यान्नों के मूल्यों में अत्यधिक वृद्धि को कम करने हेतु सरकार के प्रस्ताव के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । "(५६) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाषण में देश के वभिन्न राज्यों में कतिपय संगठनों द्वारा प्रलोभन के माध्यम से धर्मपरिवर्तन की घटनाओं के रोके जाने के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । "(५७) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाषण में भू-जल स्तर में कमी को रोकने की आवश्यकता के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । "(५८) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाषण में देश में बेरोजगारी की समस्या के निदान के लिए किसी समयबद्ध योजना का कोई उल्लेख नहीं है । "(५९) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाषण में आतंकवाद प्रभावित परिवारों विशेषकर विधवाओं और अनाथ बच्चों को पुर्नवास पैकेज के तहत राहत पहुंचाने की आवश्यकता के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । "(६०) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाषण में विशेष आर्थिक जोन नीति जिसके तहत वभिन्न राज्य सरकारों द्वारा विशेष आर्थिक जोन के लिए किसानों को पर्याप्त मुआवजा दिए बिना उपजाऊ भूमि अधिग्रहित की जा रही है, की समीक्षा किए जाने की आवश्यकता के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । "(६१) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाषण में कतिपय राज्यों में जनसंख्या असंतुलन को ध्यान में रखते हुए जनसंख्या नीति लागू करने के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । "(६२) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाषण में देश की अतरिक्त विद्युत उत्पादन संबंधी वार्षिक लक्ष्यों की प्राप्ति के संबंध में सरकार की असफलता के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । "(६३) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाषण में देश में किसानों की दयनीय स्थिति सुधारने हेतु ठोस समयबद्ध कार्यक्रम के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । "(६४) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाषण में नशाखोरी को रोकने हेतु किसी ठोस कार्यक्रम के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । "(६५) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाषण में देश में आईएसआई की गतवधियों को रोकने हेतु किसी ठोस कार्य योजना के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । "(६६) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाषण में पूर्वोत्तर राज्यों में बढ़ते हुए पृथकतावाद तथा आतंकवादी गतवधियों को रोकने हेतु किसी योजना के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । "(६७) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाषण में जम्मू-कश्मीर से विस्थापित लोगों के पुर्नवास हेतु किसी कार्यक्रम के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । "(६८) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाषण में देश में बच्चों के विरूद्ध बढ़ते अपराधों को रोकने के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । "(६९) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाषण में देश में गो-हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । "(७०) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाषण में बच्चों के विरूद्ध अपराधों को रोकने जैसाकि निठारी कांड घटना में देखने में आया है तथा देश के वभिन्न राज्यों में बच्चों पर हो रहे यौन शोषण को रोकने हेतु कोई ठोस कदम उठाने के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । "(७१) SHRI B. MAHTAB (CUTTACK): I beg to move:
74.
That at the end of the motion, the following be added, namely:-
“but regret that there is no mention in the Address about inclusion of all the districts of Orissa in the National Rural Employment Guarantee Programme.”
75.
That at the end of the motion, the following be added, namely:-
“but regret that there is no mention in the Address about establishing an IIT in Orissa.”
76.
That at the end of the motion, the following be added, namely:-
“but regret that there is no mention in the Address abut increasing the Coal Royalty which is due since 2002.”
77.
That at the end of the motion, the following be added, namely:-
“but regret that there is no mention in the Address to impose a levy on generation of electricity and pass on the benefit to the electricity producing States.”
78.
That at the end of the motion, the following be added, namely:-
“but regret that thee is no mention in the Address abut a Special Industrial Incentive Package for KBK region which is amongst the most backward regions in the country with a very high concentration f SC and ST population and people below poverty line.”
79.
That at the end of the motion, the following be added, namely:-
“but regret that there is no mention in the Address about inclusion of Cuttack City in the Jawahar Lal Nehru Urban Renewal Mission.”
80.
That at the end of the motion, the following be added, namely:-
“but regret that there is no mention in the Address about raising the royalties on coal and other major minerals on Ad Valorem basis.”
81.
That at the end of the motion, the following be added, namely:-
“but regret that there is no mention in the Address about opening of at least one Ekalavya Model Residential School in each Block in the Scheduled areas of the country.”
82.
That at the end of the motion, the following be added, namely:-
“but regret that there is no mention in the Address about construction of roads under the Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana in tribal villages having population of 250 and above in schedule areas of the country.”
83.
That at the end of the motion, the following be added, namely:-
“but regret that there is no mention in the Address about establishing a Regional headquarter of Inland Waterways Authority of India at Cuttack.”
84.
That at the end of the motion, the following be added, namely:-
“but regret that there is no mention in the Address about imposing any quantitative restriction on export of iron ore.”
85.
That at the end of the motion, the following be added, namely:-
“but regret that there is no mention in the Address about alround and balanced development of tribal dominated Orissa to bring it at part with other industrially developed States.”
86.
That at the end of the motion, the following be added, namely:-
“but regret that there is no mention in the Address about declaring Orissa as a Special Category State.”
980.
That at the end of the motion, the following be added, namely:-
“but regret that there is no mention in the Address about developing the tourist destinations of Orissa upto international standard.”
981.
That at the end of the motion, the following be added, namely:-
“but regret that there is no mention in the Address about providing special Central assistance to Orissa for development of flood affected areas.”
982.
That at the end of the motion, the following be added, namely:-
“but regret that there is no mention in the Address about waiving the loan outstanding against the State Government of Orissa.”
983.
That at the end of the motion, the following be added, namely:-
“but regret that there is no mention in the Address about establishing a Central University in Orissa.”
984.
That at the end of the motion, the following be added, namely:-
“but regret that there is no mention in the Address about establishing an IIM in Orissa.”
985.
That at the end of the motion, the following be added, namely:-
“but regret that there is no mention in the Address about declaring Orissa College of Engineering at Burla as IIT.”
986.
That at the end of the motion, the following be added, namely:-
“but regret that there is no mention in the Address about opening Indian Institute of Information Technology (IIT) in Orissa.”
987.
That at the end of the motion, the following be added, namely:-
“but regret that there is no mention in the Address about the need to take urgent steps to curb price-rise.” SHRI KIREN RIJIJU (ARUNACHAL WEST): I beg to move:
92.
That at the end of the motion, the following be added, namely:-
“but regret that there is no mention in the Address about the 2550th anniversary of Mahaparinirvana which is being celebrated this year throughout the world to commemorate the Buddha Jayanti, Parinirvana and Attainment of Englightment of Lord Buddha.”
93.
That at the end of the motion, the following be added, namely:-
“but regret that there is no mention in the Address about providing Special Economic Package to and fro improving road infrastructure in the remote and border areas of Arunachal Pradesh particularly along the McMohan Line.”
94.
That at the end of the motion, the following be added, namely:-
“but regret that there is no mention in the Address about increasing the border trade with China, Bhuttan and Myanmar through various traditional trade routes in Arunachal Pradesh.”
95.
That at the end of the motion, the following be added, namely:-
“but regret that there is no mention in the Address about the inclusion of all the districts of Arunachal Pradesh under the National Rural Employment Guarantee Act in the current year.”
96.
That at the end of the motion, the following be added, namely:-
“but regret that there is no mention in the Address about starting of “Garib Viman”, a lower cost airlines service to and from the North-Eastern states on the line of Garib Rath trains.” SHRI BIKRAM KESHARI DEO (KALAHANDI): I beg to move:
233.
That at the end of the motion, the following be added, namely:-
“but regret that there is no mention in the Address about measure to curb the extremist and fundamentalist violence on soft targets in the country like train bomb blasts and internal insurgency.”
234.
That at the end of the motion, the following be added, namely:-
“but regret that there is no mention in the Address about early implementation of the interlinking of rivers to combat drought and flood situation in the country.”
235.
That at the end of the motion, the following be added, namely:-
“but regret that there is no mention in the Address about any financial assistance to financially backward States like Orissa to implement the inter-linking of rivers in the State.”
236.
That at the end of the motion, the following be added, namely:-
“but regret that there is no mention in the Address about developing Orissa as a tourist destination by providing basic infrastructure for international tourists, like declaring Bhubaneswar airport as an international airport, and by developing the existing airports at Jeypore, Rourkela and Sambalpur.”
237.
That at the end of the motion, the following be added, namely:-
“but regret that there is no mention in the Address about providing small aircraft services in the State of Orissa.”
238.
That at the end of the motion, the following be added, namely:-
“but regret that there is no mention in the Address about the inprecedented rise in prices of essential commodities in the country.”
239.
That at the end of the motion, the following be added, namely:-
“but regret that there is no mention in the Address about making the Rural Health Mission effective by providing doctors and by aiding the backward States.”
240.
That at the end of the motion, the following be added, namely:-
“but regret that there is no mention in the Address about giving basic medical training to women social health activists in the backward States of the country.”
241.
That at the end of the motion, the following be added, namely:-
“but regret that there is no mention in the Address about implementation of PURA Programme in the rural areas in the country and Orissa in particular.”
242.
That at the end of the motion, the following be added, namely:-
“but regret that there is no mention in the Address about setting up of an IIT in Orissa and establishment of a Central university in the Kalahandi-Bolangir-Koraput Region of Orissa.”
243.
That at the end of the motion, the following be added, namely:-
“but regret that there is no mention in the Address about enacting a proper legislation for rehabilitation of the evacuees due to building of Mega Irrigation and Industrial projects.”
244.
That at the end of the motion, the following be added, namely:-
“but regret that there is no mention in the Address about formulation of a policy to rehabilitate small traders and hawkers affected by the governments decision to allow retail marketing by big Industrial Houses.”
245.
That at the end of the motion, the following be added, namely:-
“but regret that there is no mention in the Address about providing altrnative drinking water to areas affected by chemical contamination and non-availability of ground water in the Kalahandi-Bolangir-Koraput region of Orissa.”
246.
That at the end of the motion, the following be added, namely:-
“but regret that there is no mention in the Address about out payment of Minimum support price to the rice producers in Orissa, particularly the Kalahandi and Bolangir districts of Orissa.”
247.
That at the end of the motion, the following be added, namely:-
“but regret that there is no mention in the Address about increasing the procurement price of Levy Rice for the millers of Orissa in order to prevent closure of rice mills in the State of Orissa.”
248.
That at the end of the motion, the following be added, namely:-
“but regret that there is no mention in the Address about providing adequate storage facilities at the FCI godowns in the KBK region of Orissa.”
249.
That at the end of the motion, the following be added, namely:-
“but regret that there is no mention in the Address about increasing the production of wheat in the country.”
250.
That at the end of the motion, the following be added, namely:-
“but regret that there is no mention in the Address about spotting young talent for promotion of sports in the country.” डा० लक्ष्मी नारायण पाण्डेय (मंदसौर): I beg to move:
कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाषण में गरीब और अमीर के बीच के अंतर को दूर करने के संबंध में उठाए जाने वाले प्रस्तावित कदमों के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । " (९९१) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाषण में प्रतिभावान व्यक्तियों तथा ग्रामीण क्षेत्रों से श्रमशक्ति के शहरी क्षेत्रों में प्रवर्जन को रोकने संबंधी प्रस्तावित कदमों के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । " (९९२) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाषण में देश में उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति को बढ़ाने के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । " (९९३) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाषण में कृषि उत्पादन को बढ़ाने तथा सिंचाई क्षेत्र में और अधिक भूमि को लाने हेतु किसी योजना के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । " (९९४) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाषण में देश में सभी के लिए एक निर्धारित समय-सीमा के अंदर स्वच्छ पेय-जल उपलब्ध कराने संबंधी ठोस योजना के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । " (९९५) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाषण में चकित्सा क्षेत्र में अबाध तरीके से हो रहे व्यावसायिकरण को नियंत्रित करने के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । " (९९६) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाषण में जनसंख्या वृद्धि को रोकने के संबंध में किसी ठोस कार्य योजना के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । " (९९७) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाषण में लोकपाल विधेयक को पारित करके तथा उसके अधीन लोकपाल की नियुक्ति द्वारा भ्रष्टाचार को समाप्त करने के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । " (९९८) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाषण में सरकारिया आयोग की सिफारिशों के कार्यान्वयन के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । " (९९९) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाषण में सरकार के साथ बहुराष्ट्रीय कंपनियों द्वारा पत्र-व्यवहार करने के लिए हिन्दी को अनिवार्य बनाए जाने के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । " (१०००) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाषण में सेना में समान रैंक, समान पेंशन योजना को लागू करने के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । " (१००१) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाषण देश में किसानों द्वारा की जा रही आत्महत्या की निरन्तर बढ़ रही घटनाओं को रोकने संबंधी किसी योजना के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । " (१००२) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाष्षण में देश में नदियों को आपस में जोड़ने संबंधी किसी योजना के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । " (१००३) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाष्षण में भविष्य नधि योजना और छोटी बचत योजनाओं के लिए ९.५% की दर पर ब्याज के प्रावधान के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । " (१००४) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाष्षण में घाटे में चल रहे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को पुन:जीवित करने के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । " (१००५) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाष्षण में बंधुआ मजदूरी प्रणाली विशेषकर बाल श्रम प्रणाली को समाप्त किए जाने के लिए समयबद्ध कार्यक्रम शुरू किए जाने के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । " (१००६) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाष्षण में उन किसानों के संरक्षण के बारे में, जो कि ऋण के बोझ के कारण प्रतदिन आत्महत्या कर रहे हैं कोई उल्लेख नहीं है । " (१००७) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाष्षण में बाढ़ और प्राकृतिक आपदाओं के कारण किसानों को हो रही अत्यधिक क्षति तथा ऐसी आपदाओं से निपटने संबंधी किसी योजना और उन्हें सहायता दिए जाने के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । " (१००८) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाष्षण में किसानों को ९% की दर के स्थान पर ६% की कम दर पर ऋण दिए जाने के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । " (१००९) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाष्षण में देश में स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना का कार्य शीघ्र निपटाने के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । " (१०१०) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाष्षण में सैन्य बलों में मुस्लिमों की गिनती करने को रोकने के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । " (१०११) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाष्षण में घर्म के आधार पर वभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण को अस्वीकार करने के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । " (१०१२) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाष्षण में पड़ोसी देशों में खेल प्रतियोगितओं और अन्य अवसरों के दौरान भारत के राष्ट्रीय घ्वज को अनुचित तरीके से फहराने के विरूद्ध विरोध प्रकट करने के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । " (१०१३) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाष्षण में छोटे व्यापारियों के हितों को संरक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से खुदरा क्षेत्र में ५१ प्रतिशत विदेशी प्रत्यक्ष निवेश की अनुमति देने के निर्णय को स्थगित करने के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । " (१०१४) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाष्षण में देश में ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना के कड़े और प्रभावी कार्यान्वयन के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । " (१०१५) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाष्षण में देश में साम्प्रदायिक सद्भाव बनाए रखने के लिए अयोध्या में श्री राम जन्म भूमि मन्दिर के निर्माण के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । " (१०१६) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाष्षण में गाय और इसकी प्रजाति की हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए कड़े कानून बनाने के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । "(१०१७)
कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाष्षण में समान सविल संहिता लाने के लिए संवैधानिक संशोधन करने के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । " (१०१८) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाष्षण में प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन पर पूर्ण रोक लगाए जाने के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । " (१०१९) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाष्षण में विशेष आर्थिक ज़ोनों (एसईज़ेड़) और कृषकों को अधिग्रहित भूमि की उचित प्रतिपूर्ति देने के लिए वभिन्न राज्य सरकारों द्वारा भूमि के अधिग्रहण को रोकने के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । " (१०२०) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाष्षण में देश भर में आतंकवाद को प्रभावी तरीके से नियंत्रित किए जाने के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । " (१०२१) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाष्षण में देश में हमेशा से बढ़ रहे माओवादी और नक्सलवादी गतवधियों को नियंत्रित किए जाने के बारे में कोई उल्लेख नहीं है। " (१०२२) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाष्षण में पड़ोसी देशों के साथ परम्परागत सांस्कृतिक संबंध सुधारने के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । " (१०२३) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाष्षण में आवश्यक वस्तुओं की मूल्य वृद्धि पर रोक लगाने के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । " (१०२४) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाष्षण में पड़ोसी देशों से आ रही जाली मुद्रा के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । " (१०२५) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाष्षण में नकली कम्पनियों के माध्यम से देश के शेयर बाजार में आतंकवादियों के प्रवेश के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । " (१०२६) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाष्षण में चूककर्ता अधिकारियों जिन्होंने वभिन्न सैन्य कार्रवाई के दौरान मारे गए सैनिकों के परिवारों को आबंटित पैट्रोल और डीजल के आउटलेट आबंटित करवाने में माफिया की सहायता की और माफिया को सजा देने के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । " (१०२७) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाष्षण में रेलवे द्वारा बिक्री मूल्याकंन किए बिना लाइसेंस फीस में अप्रत्याशित वृद्धि के कारण देश में वभिन्न रेलवे स्टेशनों से छोटे-छोटे विक्रेताओं के पलायन के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । " (१०२८) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाष्षण में देश में मानव अंगों के अवैध व्यापार पर रोक लगाने की किसी योजना के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । " (१०२९) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाष्षण में वभिन्न राज्यों विशेषकर राष्ट्रीय राजधनी क्षेत्र दिल्ली और उससे जुड़े क्षेत्रों में बच्चों के अपहरण , शोषण और हत्या पर रोक लगाने के लिए किसी योजना के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । " (१०३०) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाष्षण में निठारी जैसी घटनाओं की पुनरावृति पर रोक लगाने के लिए किसी योजना के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । " (१०३१) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाष्षण में कृषि क्षेत्र में सुधार के लिए स्थगित राष्ट्रीय किसान आयोग द्वारा की गई सिफारिशों के कार्यान्वयन के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । " (१०३२) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाष्षण में कृषि उपज के समर्थन मूल्य में वृद्धि के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । " (१०३३) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाष्षण में मध्य प्रदेश के कृषकों और गांवों को बिजली की पर्याप्त आपूर्ति किए जाने के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । " (१०३४) कि प्रस्ताव के अंत में निम्नलखित जोड़ा जाए, अर्थात्् :-
" किन्तु खेद है कि अभिभाष्षण में मध्य प्रदेश की लम्बित परियोजनाओं को शीघ्र स्वीकृति दिए जाने के बारे में कोई उल्लेख नहीं है । " (१०३५) SHRI BASU DEB ACHARIA (BANKURA): Mr. Deputy-Speaker, Sir, 2 ½ years ago, the UPA Government came to power on two planks. One is to have a secular Government. In the last Lok Sabha Elections, the mandate of the people was not in favour of any political formation, but the mandate of the people was clear. It was against communal forces, the communal incidents and the communal violence that had taken place during the NDA regime. The people of our country voted against the communal regime that was there in our country. But I am surprised that nowhere in the President’s Address has it been mentioned about the communal incidents that are taking place today in our country. Here, I would like to quote the Hindi translation of the President’s Address. It says:
“एक सशत्त, आधुनिक, सर्वसमावेशी, पंथनिरपेक्ष और गतिशील भारत बनाने की हमारी प्रतिबद्धता को दोहराने का यह अवसर है।” The Hindi translation of the word ‘secularism’ is dharam nirpeksh, it is not pant nirpeksh. Somebody from RSS might have translated it from English. … (Interruptions) I am not yielding. … (Interruptions)[R16] ाो. विजय कुमार मल्होत्रा (दक्षिण दिल्ली) : संविधान में यह हिन्दी में छपा है जिसकी इन्होंने कसम खाई है। उसमें यही शब्द लिखे हुए हैं। संविधान में यही शब्द लिखे हुए हैं और इसकी कसम खाकर ये यहां सदस्य बने हैं। इस े बाद भी ये कह रहे हैं कि ट्रांसलेशन गलत किया गया है। यह ठीक नहीं है। १७ट
16.00 hrs. आज ये कह रहे हैं कि ये ट्रांसलेशन गलत किया गया है। मैं इन्हें पढ़ कर सुना देता हूं … (Interruptions)
SHRI BASU DEB ACHARIA : Sir, in his Address… (Interruptions) Sir, I am not yielding. Why are you allowing him?… (Interruptions)
PROF. VIJAY KUMAR MALHOTRA : Sir, how can he criticize the Constitution?… (Interruptions) This is written in the Constitution… (Interruptions)
SHRI BASU DEB ACHARIA : I am not yielding… (Interruptions)
डा. विजय कुमार मल्होत्रा : कांस्टीटयूशन में यही लिखा है।...( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय: आप बैठ जाइए।
श्री बसुदेव आचार्य :आपको जब बोलने का मौका मिलेगा, तब आप बोलना।
PROF. VIJAY KUMAR MALHOTRA : It is written there in the Constitution. It is published by the Government. He took oath according to the Constitution. Can he criticize the Constitution?… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: No. Please sit down.
PROF. VIJAY KUMAR MALHOTRA : Then he should withdraw his statement… (Interruptions)
उपाध्यक्ष महोदय: जो ऑब्जेक्शनेबल होगा, उसे हम निकाल देंगे, एक्सपंज कर देंगे।
SHRI BASU DEB ACHARIA : There was communal violence in a number of places ranging from Bangalore in the South, Gorakhpur and Jabalpur in the North. In Gorakhpur, under the leadership of a Member of this House, Swami Adityanath, who is not present here, his followers have gone on rampage in entire Gorakhpur… (Interruptions)
Two people were killed… (Interruptions) The first major violence was in Shri Anant Kumar’s area, Mangalore… (Interruptions)
SHRI ANANTH KUMAR (BANGALORE SOUTH): Sir, you should allow me. He has taken my name… (Interruptions)
उपाध्यक्ष महोदय: आपकी जब बारी आएगी, तब आप बोलना।
SHRI ANANTH KUMAR : Sir, he has taken my name and the name of my constituency… (Interruptions)
MD. SALIM (CALCUTTA – NORTH EAST): He has said two people were killed. He did not say that he killed them… (Interruptions)
SHRI ANANTH KUMAR : Sir, law and order was maintained very well when the BJP Government was there. It was immediately controlled… (Interruptions)
SHRI BASU DEB ACHARIA : Sir, in Madhya Pradesh, the minorities belonging to the Christian community are not safe today. They are being attacked. They are being assaulted. I was at Raipur only one month back. I found that their religious places were also not spared in the States where BJP is ruling. Such is the situation in our country where people of our country in the last elections gave a mandate against the communal forces.
What is happening in Gujarat? Rashtrapatiji has not mentioned anything about the situation in Gujarat. We had been to Gujarat. About eight to nine Members of this House and the other House went to Gujarat in the month of December. Md. Salim was there, Shri Mistry, who is not here right now, was there. Shri Ramjilal Suman was also there and he will also speak about it. We have seen ghettoism is prevailing in the State of Gujarat.
I was surprised when Advaniji, the Leader of Opposition, was referring to Gujarat and said that Muslims are in a better position in comparison to other States… (Interruptions)
Around 2,000 people were burnt alive. They should be ashamed of it… (Interruptions)
श्री मोहन रावले (मुम्बई दक्षिण-मध्य): गोधरा में कितने लोग मारे गए?
SHRI BASU DEB ACHARIA : Around two lakh people were uprooted… (Interruptions)
SHRI ANANTH KUMAR : What happened in Godhara? What happened after the assassination of Shrimati Indira Gandhi in New Delhi?… (Interruptions)
SHRI BASU DEB ACHARIA : Sir, what is the response of the State Government? How much has the State Government spent on the rehabilitation and resettlement of people? We have visited a number of co[r18] lonies.
The Government of Gujarat did not spend even a single paisa. Moreover, they returned the fund which was sent by the Central Government. The Government of Gujarat did not utilize that fund. Such is the situation. You will be surprised to know that there is no water supply, no sanitation, no educational facility, and no health care centre. They are talking of comparing Gujarat with other States. But, Rashtrapatiji has not mentioned anything about the communal situation in our country. Rashtrapatiji has referred to our growth. Yesterday, while presenting the Budget for the year 2007-08, the Finance Minister also referred to the growth that during the next Five year Plan our growth rate will reach to the extent of 10 per cent. Today, our growth rate is 8.5 per cent; now it has touched 9 per cent. On the one hand there is GDP growth but, on the other hand, there is increase in inflation to the extent of 6.58 per cent. He has referred to the inflationary situation in the economy, to the condition of the people, the common man, the middle class. On the one hand there is growth of 9 per cent, but on the other hand there is a wide gap between the rich and the poor. On the one hand, there is GDP growth but on the other hand there is growth on unemployment situation. Today, we are not talking about growth in employment but we are talking about growth in unemployment. Unemployment is growing both in urban as well as in rural areas. It is growing particularly in the rural areas as there is crisis in the agrarian sector. As a result of this, more and more agricultural labourers are losing their jobs today. This growth is resulting in the rich becoming super-rich. It has no impact on employment generation and poverty alleviation. Today, 300 million people are poverty stricken. Their earning is less than one dollar a day.
The Consumer Price Index is rising both in the case of industrial workers as well as agricultural workers. As far as the budget of working class family is concerned, it is estimated that it will require at least Rs. 800 to Rs. 1000 more to maintain the same standard of consumption as they did a year ago.
There is increase in inflation. It is not a recent feature. What we have been seeing for the last 10 to 11 months? We have discussed it in this House a number of times. On 23rd May, while replying to the debate on price rise, while concluding his reply, the Finance Minister said that UPA Government would not only try to make the essential commodities available to the people but also at an affordable pric[r19] e.
Sir, what is happening today? What has been stated by the Rashtrapati ji is this. It is simplification of the problem. It is not the fact that the purchasing power of people has increased and as a result of that there is an increase in the demand. There is a shortage in supply, and because of that, the prices of almost all the essential commodities have been increased.
Sir, there has been a deceleration in the production of agricultural commodities. In the year 2004-05 and then again in 2005-06, our projection was four per cent but the actual growth in the agricultural production was only two per cent. As a result of this, there has been a shortage in supply of agricultural commodities and the Government decided to import to the extent of 50 lakh tonnes by giving higher price to the farmers of the foreign countries, the farmers of Australia. The price that our farmers got was only Rs.650 per quintal plus Rs. 50 as bonus but the farmers of the foreign countries got Rs. 1,000 per quintal.
Sir, forward trading or future trading was introduced in April 2003 when the NDA Government was in power, and because of that there was speculation in the agricultural market and there was hoarding and black marketing. There was a demand to withdraw it, to recede it. The Standing Committee on Food, Consumer Affairs and Public Distribution recommended for complete withdrawal of forward trading and futures trading. Yesterday, the Finance Minister told the House that in the case of wheat and paddy, forward trading or futures trading has been rescinded.
Why can he not do for the entire commodities in which speculation has been taking place and manipulation has also been taking place? He has appointed an expert Committee. There is no need for the appointment of a Committee. Due to the system which was introduced by the NDA Government in 2003, there has been speculation in the market, and the Government should have much earlier taken steps to withdraw futures trading and forward trading.
16.14 hrs. (Shri Devendra Prasad Yadav in the Chair) In the case of petrol and diesel, when the UPA Government, in the month of June, increased the prices when the international price of petrol was increased to the extent of 74 dollar per barrel, we were opposed to that. The Petroleum Minister had called a meeting. We attended that meeting and gave a number of suggestions, and one suggestion was that ad valeorem rate of tax, excise duty should be withdrawn. Sir, because of ad valeorem duty, whenever there is increase in the international price of crude, automatically the price of our petroleum products also have to be increased.[R20] Sir, that system was introduced during the regime of the NDA Government. Although the Finance Minister yesterday while presenting the General Budget has said that he has reduced the duty from eight per cent to six per cent, it would not serve the purpose. The Standing Committee on Petroleum and Natural Gas had also recommended unanimously that the duty structure in case of petroleum products should be reorganized but that has not been accepted.
Sir, during the last two years of the UPA Government, on seven occasions, there has been an increase in the price of petrol and diesel. Whenever there has been an increase in the price of petrol and diesel, it has given a cascading effect; it has resulted in the increase in inflation.
Therefore, today there is a need to rethink on cess and duty on petroleum products. In his Address, Rashtrapati-ji has mentioned about the problem. But how this can be resolved. The prices of almost all the essential commodities have risen. Prices of wheat, edible oil, daal, pulses and almost all the vegetables have increased. You will be surprised to know that the consumption of pulses has come down to the level of 1942. Pulses are called the poor man’s protein. People particularly the poor, middle-class and lower middle-class people are in great distress. Their conditions are deteriorating. But there is no attempt to resolve this crisis.
Sir, in his Address, Rashtrapati-ji has referred to the strengthening of the Public Distribution System; and the Finance Minister also, while presenting the Budget, has mentioned about computerizing the Public Distribution System. But I fail to understand how by computerizing, the Public Distribution System can be strengthened.
In the National Common Minimum Programme of the UPA, it has been stated that the UPA Government has committed that the Public Distribution System should not only be strengthened but also to be universalized. But in the Budget proposals for the year 2007-08, what is the increase in the food subsidy? It is only 6.05 per cent. When the inflation is more than six per cent, the increase in the subsidy by just 6.05 per cent is nothing. It is not an increase.
Mr. Chairman, Sir, you are also the Chairman of the Standing Committee on Food, Civil Supplies and Public Distribution; and your Committee had recommended for strengthening and universalization of the Public Distribution System. During the period when you were the Union Minister of Food and Civil Supplies, the Targeted Public Distribution System was introduced.[r21] By introducing the Targeted Public Distribution System, a substantial percentage of the population was brought under below the poverty line population who were otherwise outside this Public Distribution System. There is a need for universalisation, and also there is a need to add more items under the Public Distribution System. By strengthening, by universalizing our Public Distribution System, as it has been committed by the UPA Government, we will be able to address the rising prices of essential commodities. Today, there is an urgent need to help the people who are not only living below the poverty line but the people belonging to the middle-class and to the lower middle-class. So, there is a need for strengthening the Public Distribution System.
What is the problem with the Public Distribution System? In 2002-03, our production was 696.8 lakh tonnes. The procurement was 206 lakh tonnes. In 2005-06, there was same level of production. The procurement has been slashed to 91 lakh tonnes. Then, the wheat allocation for PDS had been slashed from around 25.4 lakh tonnes in November to 8.4 lakh tonnes. In case of Sampoorna Rozgar Yojana, the percentage of wheat supply has also been reduced.
Another problem is about the procurement price, the remunerative price which the farmers are not getting. As a result of that, procurement is not taking place. Last year, the procurement was only 30 per cent. Unless there is more procurement, unless PDS is strengthened, we will not be able to tackle or address the problem of food security.
There has been some mention about the crisis that is prevailing in the agrarian sector. Rashtrapati ji has expressed his concern about the condition of the farmers. But this crisis is not the crisis of today. Advani ji was referring to the suicide being committed by the farmers but the farmers are not committing suicide today. For the last seven to eight years, the farmers have been committing suicide in four or five States of our country. I had been to Maharashtra in the last Assembly elections, and I passed through a number of villages and towns. I did not find any village or any town where no farmer had committed suicide.
Why are the farmers committing suicide? During the NDA regime, the capital formation in agriculture was reduced. There had not been any expansion of irrigated areas.[MSOffice22] We have 400 irrigation projects pending. Increase in the price of fertiliser by Rs. 100, increase in the rate of electricity, increase in expenditure on seeds, increase in prices of other essential agricultural inputs, all these factors forced the farmer into an unending debt trap. Sixty-nine per cent of the farmers in the State of Maharashtra are indebted. I can give an example of cotton because cotton-growers are committing suicides. The reduction in the customs duty on agricultural products like cotton has also affected the viability of farmers growing the crop domestically. MSP for cotton in 2005-06 was Rs. 1,760 whereas the production cost was Rs. 2,585 a quintal.
When this Government was formed, it was formed on the basis of National Common Minimum Programme.
सभापति महोदय : आचार्य जी, अभी आपकी पार्टी से दो और माननीय सदस्य बोलने वाले हैं इसलिए आप समय का ख्याल रखिये।
श्री बसुदेव आचार्य : ठीक है, मैं समय का ख्याल रख रहा हूं। आप हमें बोलने के लिए थोड़ा ज्यादा समय दीजिए। I will finish within ten to twelve minutes.
सभापति महोदय : आपको बोलते हुए आधा घंटा हो गया है। अभी आपकी पार्टी से दो और माननीय सदस्य बोलने वाले हैं।
श्री बसुदेव आचार्य : अभी यह डिसकशन दो दिन और चलेगी।
In respect of cotton, I have already mentioned that cost of production is more than the MSP. So, there is a need to help the farmers. That is why, in the National Common Minimum Programme, it has been committed that lending to the farmers should be made double. In this Budget, it has been increased to Rs. 2,25,000 crore. That will be the loan given to the farmers.
A Commission was appointed under the chairmanship of Dr. Swaminathan. It had made several recommendations, but the main recommendations of the Commission were to constitute a fund to assist farmers affected by crop losses and reduction of interest rates for farm loans to four per cent. Last year, it was reduced from nine per cent to seven per cent, but the recommendation of the Commission is to reduce it to four per cent. The Commission also recommended undertaking an all India debt survey and taking appropriate measures to provide debt relief, including waiver for those farmers who are in distress. It had also recommended creation of a Price Stabilisation Fund, which is very important, for agricultural commodities. One of its recommendations was revamping of agriculture extension services through establishment of farm schools and village knowledge centres across the country and extension of crop insurance to the entire country, and to cover all crops, with greater flexibility to respond to the local needs of the farmers.[s23] Sir, this is very important.
The allocation for agriculture has been increased, but it is not to the extent that is required to address the real problems faced by the farmers. The Finance Minister has admitted that our extension services have collapsed. He has stated this, but the measures needed and required to revive and revamp it has not been done even in the Budget.
The coverage for the National Rural Employment Programme is being increased to 330 districts. Last year, the allocation for it was Rs. 11,300 crore. Although the number of villages covered has been increased from 200 to 330, the allocation for the same is increased to only Rs. 12,000 crore from Rs. 11,300 crore. A review has been done of the places where this programme is being implemented. What is the ground reality? On an average, 36 days of employment is being provided to the unemployed people in the rural areas.
Secondly, it is mandated that if the Government fails to provide employment to the people in rural areas, then unemployment compensation has to be given. The unemployment compensation is to be given as per the Act, which is also not being provided.
The hon. President has drawn our attention towards a very vital and important problem that we are facing today, namely, about the rehabilitation and resettlement of land oustees. The Prime Minister has also announced that the UPA Government will soon announce a new rehabilitation and resettlement policy. Today, we have an age-old Act of 1894 when land is being acquired. The hon. President has referred to that Act, and he has stated that the Government would amend this Act. This Act does not mention about the rehabilitation of the people or the farmers whose land is being acquired. The people are affected because of the acquisition of land, and there is no national rehabilitation policy. Although there is a policy -- which was formulated after12 years -- but that policy also is not sufficient with regard to rehabilitation of the affected people. We have seen that the tribals are affected. Thousands and thousands of tribals have been uprooted, and their rehabilitation has not yet been done.[r24] Rashtrapathi ji has correctly stated that on the one hand there are genuine concerns of the farmers regarding acquisition of agricultural land, and on the other hand there is a need to use that land to generate employment through industry-related activities. Therefore, issues of human rehabilitation and the need for fair pricing of agricultural land have to be addressed both in policy and in law. My Government is committed to bringing in a new rehabilitation policy which can be backed by amendments in the Land Acquisition Act wherever necessary.
When SEZ Act was brought before this House, our concern was concentrated on the labour because there was a provision in that Act that the labour laws of our country would not be applicable in the industries within SEZ. When we objected to that, the Government agreed and deleted that provision. Then, we supported the SEZ Bill; it was passed and it became an Act. What is happening today? I will thank the hon. Prime Minister because he has kept on hold the entire process. There is an empowered Group of Ministers who is looking into this.
What is happening in the name of SEZ? Thousands of hectares of land are being acquired or purchased. Industries are not being set up, but real estate is being done there. The Left Front Government of West Bengal made one proposal that 50 per cent of the land in SEZ should be utilized for industrialization, for employment generation; 25 per cent of the land should be utilized for the infrastructure related with the industry that would be set up, and 25 per cent can be utilized as per their choice. There should not be any concession. If any concession in regard to taxes, cess and duty are allowed, then there will be an uneven competition. There is a need to amend the SEZ Act now so that such uneven things that are happening do not happen. There is a need to amend the SEZ Act without further delay.
Rashtrapathi ji also referred to the Centre-State relations. Almost all the States are now asking for more percentage of share in case of taxes. Most of the States are facing financial crunch or crisis. There is a need to address the problems being faced by various States.[r25] Rashtrapatiji has mentioned about social security for unorganized workers. There are 37.5 crore unorganized workers in the country. Out of those 37.5 crore unorganized workers, 22 crore are agricultural labourers. There is no law to provide social security to workers who are in the unorganized sector. It has been committed in the National Common Minimum Programme that the Government will bring a legislation to provide social security to the workers in unorganized sector.
The Commission under the Chairmanship of Dr. Arjun Sengupta was referred to. However, that Committee had submitted its report in March, 2006. Almost one year has passed after submission of the report and the Government is yet to take any action on that report. This should not be delayed. The Government should immediately bring in legislation. It was said that the Government is actively considering it. How long will the Government consider bringing in legislation to provide social security to the workers in the unorganized sector? Two and a half years have already passed since this Government took over. This Government is half way through its term. The Government should not miss its opportunity of implementing the pro-people programmes of the National Common Minimum Programme for empowerment of people, empowerment of the poor and empowerment of women.
Last year, Rashtrapatiji in his address mentioned about women’s reservation. I am surprised that this has not been mentioned in this year’s Rashtrapatiji’s address. Government has made a commitment on this. The Bill was introduced in 1996. In the last session again the Bill was to be introduced, but it was neither introduced nor passed, in order to empower women. We have seen how effectively Panchayati Raj institutions are functioning after empowering women. We have lakhs of self-help groups. Women want to be self-sufficient and stand on their feet. There is a need to help and assist them in marketing their products.
Rashtrapatiji referred to setting up of a Marine University. I am not against Chennai being given, Chennai may have a Marine University. However, why should Kolkata be deprived of it? The Marine Engineering College of Kolkata is the oldest Marine Engineering College in the country. It has a huge campus and infrastructure. I am not against Chennai, but Kolkata should not be deprived of a University. If one Marine University is to be set up, that should be set up in Kolkata.[KMR26] When the Government has decided to set up at Chennai a university, Kolkata should not be deprived of giving only the Campus. Campus or a Regional Centre will not be sufficient. Hence, there should be a separate marine university for Kolkata or a Marine Engineering College.
We are supporting this Government from outside. Our support is for the National Common Minimum Programme. What we find today is the mandate of the people of our country for a change; change not for the political formation but change in the policy, outlook and the attitude of the Government. People of our country wanted an alternate path, an alternate policy which would solve the burning problems they are facing today. Even after 60years of Independence, there are thousands and thousands of people who go to bed with empty stomach.
Unemployment is growing. There is a gap between the rich and the poor. India will not shine if one industrialist purchases a steel plant in some other country; India will shine if the conditions of crores and crores of poor people and middleclass people are improved and their sufferings come to an end. Only then, India can shine. The UPA Government is committed for the first time to certain programmes. This is the Government that is formed on the basis of the Common Minimum Programme; the programme for the amelioration of poverty, the programme to improve the conditions of the people, the programme to empower the poor people, the agricultural labourers, labourers in the unorganized sections and middleclass people. So, there is a need to rethink.
The Prime Minister is here. After two and a half years, I hope there will be some introspection. If there is introspection, then, definitely the Government would think to change its policy. Its basic policy will have to see the impact of economic reforms which we have been repeating for the past 15 years. After 15 years, what has happened to the poor people, the peasants and the farmers? Only then, the Government would be able to have an alternate policy. Unless an alternate policy is adopted, the same fate will be there. The NDA Government had followed anti-people. The people of this country had thrown that Government away. Even at this stage, there is time. The Government will realize and try to adopt an alternate policy to address and resolve the problems of the people of our country.
श्री रामजीलाल सुमन (फ़िरोज़ाबाद) माननीय सभापति महोदय, यह परम्परा रही है कि दोनों सदनों को मिला कर राष्ट्रपति जी का अभिभाषण होता है। एक औपचारिकता का राष्ट्रपति जी निर्वहन करते हैं। सही मायने में राष्ट्रपति का अभिभाषण होता है कि सरकार की क्या सोच है, सरकार आगे आने वाले एक वर्ष में क्या करना चाहती है, उसकी प्राथमिकताएं और प्रतिबद्धताएं क्या हैं? एक तरह से यह सरकार का नीति वक्तव्य होता है कि एक वर्ष में राज कैसे चलेगा और वह जन कल्याण के लिए क्या-क्या कार्य करेंगे? मई में सरकार के तीन वर्ष पूरे हो जाएंगे। सरकार कितने दिन रहेगी यह बात महत्वपूर्ण नहीं है। किसी भी पार्टी की सरकार कितने दिन रही और उस बीच में उस सरकार ने जन कल्याण और गरीबों के लिए क्या काम किया, यह बात ज्यादा महत्वपूर्ण है। मैं कह सकता हूं कि जिस तरह से श्री मनमोहन सिंह की सरकार अब तक चली है, वह दिशा भ्रमित है, सरकार की दिशा ठीक नहीं है। मुझे नहीं लगता है कि आम आदमी यह एहसास करता है कि सरकार उसके कल्याण के लिए काम कर रही है। … (Interruptions)
MR. CHAIRMAN : No cross-talks please. I am not allowing you. Please sit down. Nothing will go on record. Please take your seat.
(Interruptions) …* श्री रामजीलाल सुमन : राष्ट्रपति जी ने अपने भाषण की शुरुआत महंगाई और आर्थिक मुद्दे जैसे सवालों को लेकर की। समझौता एक्सप्रेस में आतंकवादियों का जो हमला हुआ, वह एक दुखद घटना थी। साथ-साथ कहा गया कि शांति वार्ता पर इस घटना से कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। हम यह स्वीकार करते हैं कि आतंकवाद सीमा पार से आ रहा है। हम वार्ता बंद करने के पक्षधर नहीं हैं। हम सब चाहते हैं कि अगर बातचीत के जरिए इस समस्या का हल निकल आए तो बहुत अच्छी बात है लेकिन बातचीत जारी रहेगी और सीमा पार से आतंकवाद भी जारी रहेगा यह काम साथ-साथ चल नहीं सकता। इसलिए सरकार को इस दिशा में गम्भीर प्रयास करने होंगे। हिन्दुस्तान के गृह मंत्री कहते हैं कि देश के बड़े-बड़े शहरों में आतंकवादियों ने अपने अड्डे जमा लिए हैं। उनसे निपटने के लिए सरकार ने क्या रण नीति बनाई है? आतंकवाद को समूल नष्ट करने के लिए सरकार क्या सार्थक प्रयास कर रही है? मैं समझता हूं कि इस सिलसिले में सरकार को जल्द एक नीति का ऐलान करना चाहिए था। यह सरकार सबसे अधिक अपनी पीठ इस बात पर थपथपा रही है कि आर्थिक विकास की दर ९ परसेंट तक पहुंच * Not recorded गई है और ११वीं योजना में ९ परसेंट का लक्ष्य रखा है। मैं उनसे पूछना चाहूंगा कि अगर आर्थिक विकास की दर बढ़ रही है तो उससे आम आदमी को क्या मिल रहा है, क्या उसमें आम आदमी शामिल है? उसके ऊपर और ज्यादा भार पड़ रहा है, उसकी क्रय शक्ति कमजोर हो रही है, गरीब आदमी बोझ से दबा जा रहा है। देश का श्रम मंत्री यह कहता है कि देश में बेरोजगारी बराबर बढ़ रही है। एक तरफ बेतहाशा बेरोजगारी बढ़ रही है, दूसरी तरफ सरकार के मुताबिक आर्थिक विकास की दर बढ़ रही है, मुझे लगता है कि आर्थिक विकास की दर चंद लोगों तक सीमित है। आम आदमी को उससे जो लाभ होना चाहिए, वह नहीं हो रहा है। गरीब की परेशानी निरन्तर बढ़ रही है। उस पर महंगाई की मार अत्यधिक है। देश में दौलत बढ़ती है और उस दौलत का समान वितरण नहीं होता है, गरीब शामिल नहीं होता है तो बढ़ी हुई विकास दर का कोई अर्थ नहीं है। हमारे देश में चंद सरमायदारों की बेशुमार दौलत बढ़ जाए और हम उसी को देश की दौलत मान लें, अपनी दौलत मान लें, लेकिन देश की दौलत में और चंद सरमायदारों की दौलत में फर्क है। इसलिए आर्थिक विकास का मतलब है कि जब तक देश का आम आदमी लाभान्वित नहीं होता, उसे लाभ नहीं मिलता तो मैं नहीं समझता हूं कि देश में गरीब आदमी के पक्ष में न्याय होने का यह कोई शुभ संकेत हो सकता है।
२००६-०७ में महंगाई चरम सीमा तक पहुंच गई और जुलाई में महंगाई ५ प्रतिशत की लपेट में थी। उस समय सरकार ने महंगाई के संबंध में जो औचित्य दिया और कारण बताए वह दो थे, एक था कि हमारे देश में खाद्यान्न का कम होना और दूसरा था अंतर्राष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल का दाम बढ़ना। जनवरी, २००७ तक महंगाई की दर बढ़कर ६.७३ परसेंट हो गई जो पिछले दो वर्षों में सबसे ज्यादा थी। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल का दाम नीचे आ गया और ४९ प्रतिशत हो गया। हमने ५५ लाख टन गेहूं का आयात सरकार के स्तर पर किया और ७ लाख टन गेहूं निजी क्षेत्र से खरीदा गया इसके बावजूद हमारे देश में महंगाई में कोई कमी नहीं आई। जब कभी क्रूड ऑयल का दाम बढ़ जाता है तब हम अपने देश में क्रूड ऑयल का दाम बढ़ा देते हैं। मैं जरूर जानना चाहूंगा कि क्रूड ऑयल पर हमारी निर्भरता कब तक रहेगी? क्या हिंदुस्तान की सरकार और पेट्रोलियम मंत्री अहसास करते हैं कि हम तेल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर कैसे बनें, हम अपने पैरों पर खड़ा कैसे हों तो इसके लिए दीर्घकालीन योजना बने लेकिन इस तरफ हमारा कोई ध्यान नहीं है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल का दाम बढ़ जाता है तो हम दाम बढ़ा देते हैं लेकिन जब अंतर्राष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल का दाम कम होता है तब हम दाम कम नहीं करते हैं। महोदय, यह सबसे गंभीर सवाल है कि अंतर्राष्ट्रीय बाजार पर हमारी निर्भरता न रहे, इसके लिए तेल के क्षेत्र में दीर्घकालीन नीति बननी चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात है कि हम तेल या पेट्रोलियम उत्पादों के दाम तय करते हैं लेकिन इसके लिए कोई नीति नहीं है। हमने कोई नीति, मानक या आधार नहीं बनाया है। सरकार ने पेट्रोलियम दाम तय करने की कोई नीति नहीं बनायी है।
महामहिम राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में जिक्र किया है कि किसानों द्वारा आत्महत्या के अधिक घटनाओं वाले ३१ जिलों के लिए १६००० करोड़ की राशि का विशेष पैकेज कार्यान्वित किया जाएगा। मैं बहुत विनम्रता से कहना चाहूंगा कि किसानों द्वारा आत्महत्या करने का दौर जारी है, रोज आत्महत्याएं हो रही हैं। श्री बसुदेव आचार्य यहां से चले गए। वे कह रहे थे कि पांच वर्षों से हुआ या सात वर्षों से हुआ लेकिन मैं समझता हूं कि अगर इस देश में एक भी किसान आत्महत्या करता है, इससे ज्यादा शर्म की बात नहीं हो सकती है, यह महत्वपूर्ण नहीं है कि यह दौर कब से शुरू हुआ। माननीय प्रधानमंत्री जी ने विशेष पैकेज की घोषणा की लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ। मैं बहुत विनम्रता के साथ सरकार से कहना चाहता हूं कि यह समस्या सिर्फ ३१ जिलों की नहीं है। खेती का काम करने वाला, जिसे हम किसान कहते हैं, यह पूरे देश की समस्या है, उसे चंद जिलों तक कैद नहीं किया जा सकता है। पूरे देश में खेती का कल्याण कैसे हो, पूरे देश की खेती के हालात में सुधार कैसे हो, मैं समझता हूं इस पर ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। आज सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हमारे देश में खेती अलाभकारी हो गई है लेकिन इसे लाभकारी कैसे बनाएं, इस तरफ ध्यान देना पड़ेगा। उत्पादन लागत रोज बढ़ रही है, हमें इसे कम करना पड़ेगा। मैं कहना चाहता हूं कि इस देश में किसानों के नाम पर सब्सिडी दी जा रही है, इससे बड़ा कोई दूसरा धोखा नहीं है। उर्वरक उत्पादकों की अकुशलता आला अफसरों के करप्शन तक सीमित रह जाती है और इसका कोई मकसद किसानों के हालात या स्थिति में सुधार के लिए नहीं होता है। मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं, खास तौर से हिंदुस्तान जैसा देश, जिसकी आबादी ११० करोड़ है, अगर शुरू से देखें तो आजाद हिंदुस्तान में सकल घरेलू उत्पाद में कृषि का कितना योगदान था और आज घटकर कृषि का योगदान कितना रह गया है।[r27] 17.00 hrs. आज कृषि की दुर्दशा हो रही है। मैं कहना चाहूंगा कि अगर इस देश को बचाना है तो जब तक हिन्दुस्तान का बजट कृषि पर आधारित नहीं होगा, श्रम पर आधारित उद्योग हमारे देश में नहीं लगेंगे, इस देश की हालत कोई नहीं सुधार सकता।
सभापति महोदय, मैं निवेदन करना चाहता हूं कि एक ही चारा है, आज देश में जो स्थिति है, उसमें पूरे हिंदुस्तान के किसानों के कर्ज माफ होने चाहिए, वरना हिंदुस्तान के किसानों की खुदकुशी का दौर नहीं रुकेगा। इस देश का बजट कृषि पर आधारित होना चाहिए या जिस तरह से रेल का बजट बनता है, उस तरह से होना चाहिए। पिछली बार भी जब इस सदन में चर्चा हुई थी, तब माननीय सदस्यों ने कहा था कि जिस तरह अलग से रेल का बजट बनता है, ठीक उसी तरह से खेती का बजट भी अलग से होना चाहिए, तब कहीं इस देश का कल्याण होगा।
मैंने राष्ट्रपति जी के अभिभाषण को पढ़ा। राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में कुटीर उद्योगों के संरक्षण के लिए एक भी शब्द नहीं है। हमारा इतना बड़ा देश है। दुनिया के तमाम देश जहां श्रम शक्ति कम है, वहां समझ में आता है कि मशीनें काम करें, नई तकनीकी का इस्तेमाल करें। लेकिन गांधी का यह देश, जहां ११० करोड़ की आबादी है। १८वीं शताब्दी में हमारे देश के हर घर में चरखा चलता था और हम कपड़े की अपनी जरूरत ही पूरी नहीं करते थे, बल्कि हम यूरोप के देशों को भी गर्म कपड़े भेजते थे। आज कुटीर उद्योग हमारे देश में चौपट हो गये हैं। लेकिन एक शब्द भी कुटीर उद्योगों के संरक्षण के लिए नहीं कहा गया है। यह निश्चित रूप से एक चिंता का विषय है।
यहां राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना की बात की जाती है। इसे सरकार ने शुरू किया, सरकार ने एक कोशिश की। लेकिन यह सही है कि इस योजना के तहत वहां १०० दिन आदमी को काम मिलेगा, लेकिन २६५ दिन उसके पास कोई काम नहीं होगा, तब गांव के लोग कहां जायेंगे। मैं कहना चाहूंगा कि हमारे देश में जो बेरोजगारी की समस्या है, यह समस्या हिंदुस्तान में एक तनाव पैदा कर रही है। यही नक्सलवादी पैदा कर रही है। यदि हमने बेरोजगारी की समस्या पर ध्यान नहीं दिया तो मुझे माफ करना, देश में एक गृह युद्ध जैसी स्थिति पैदा हो जायेगी। १३ राज्यों में आज नक्सलवाद का असर है और यह असर आहिस्ता-आहिस्ता बढ़ रहा है। आदमी के पास डिग्री है, लेकिन उसके पास रोजगार नहीं है। कुल मिलाकर दर-दर की ठोकरें खाने के बाद कोई नौजवान सोचता है तो उसका इस व्यवस्थ्ही तथा कानून और संविधान से विश्वास उठ जाता है। इसलिए बेरोजगारी की समस्या का हल होना बहुत जरूरी है। यदि हमारे परम्परागत कुटीर उद्योगों के संरक्षण का काम नहीं होगा तो मैं नहीं समझता कि हिंदुस्तान जैसे देश, जिसकी विशाल आबादी है, इस विशाल आबादी वाले देश में जो तनाव पैदा हुआ है, उस तनाव में कोई कमी नहीं की जा सकती है।
सभापति महोदय, एक अजीब तमाशा है, हर बार नई योजनाओं की घोषणाएं की जाती हैं। खेती के लिए पानी की बहुत आवश्यकता है और जो सिंचित और असिंचित खेती है, यदि उसके उत्पादन का हम अध्ययन करें तो उसमें तीन गुणा फर्क है। सिंचाई की परियोजनाओं के बारे में हर बार जिक्र किया जाता है, लेकिन क्या मैं सरकार से पूछ सकता हूं कि सिंचाई की जो परियोजनाएं आपने घोषित की थी, क्या वे परियोजनाएं पूरी हुई? उन्हें पूरा करने का हमारे सामने कोई लक्ष्य नहीं होता। नई परियोजनाओं की हम घोषणाएं कर देते हैं, लेकिन पुरानी परियोजनाएं इतने समय में पूरी हो जायेंगी, उसका कोई लक्ष्य हम घोषित नहीं करते। इसका परिणाम यह होता है कि उत्पादन लागत बढ़ती है और लाभ नहीं मिलता है। इसलिए मैं समझता हूं कि इसका लक्ष्य घोषित होना चाहिए।
इससे पहले जो पंचवर्षीय योजनाएं थीं, उन पंचवर्षीय योजनाओं में सिंचाई की जिन परियोजनाओं का ऐलान किया गया था, वे परियोजनाएं आज तक पूरी नहीं हुई। हमारे देश की कृषि पूरी तरह से इंद्र भगवान के भरोसे है। पानी का कोई इंतजाम नहीं है। मैं कहना चाहता हूं कि सरकार को युद्ध स्तर पर सिंचाई का इंतजाम करना चाहिए और जब तक सिंचाई का उचित बंदोबस्त नहीं होगा, हमारे सामने अच्छे परिणाम आने की कोई संभावना नहीं है।
मैं इस अवसर पर यह भी कहना चाहूंगा कि हमारे देश में प्राकृतिक आपदाएं होती हैं। कहीं बारिश ज्यादा होती है, कहीं सूखा पड़ता है, कहीं ओला पड़ता है। लेकिन इसमें किसानों की मदद करने का जो हमारा मापदंड है, वह बहुत पुराना है। मुझे पश्चिम के बारे में इतना मालूम नहीं है, लेकिन उत्तर भारत में बेमौसम ओला पड़ा, बहुत तेजी से साथ बरसात आई और उसका परिणाम यह हुआ कि आलू और सरसों के किसान बुरी तरह से पिट गये। जो किसान एक वर्ष का बजट बनाकर आशा लगाये बैठा था कि उसे साहूकार का ऋण अदा करना है, उसके ऊपर जो देनदारियां हैं, उन्हें देना है, उसे अपनी बेटी के हाथ पीले करने हैं, उसका पूरा बजट बिगड़ गया। मैं आपकी मार्फत सरकार से कहना चाहता हूं कि प्राकृतिक आपदाओं के लिए जो पुराने मापदंड तय हैं कि अगर किसान का एक लाख रुपये का नुकसान होता है तो उसे पांच सौ रुपये या एक हजार रुपये का चैक मिलता है। मैं नहीं समझता कि इससे ज्यादा उनके साथ कोई मजाक हो सकता है[MSOffice28] ।
इसलिए बदलते परिवेश में, बदलते संदर्भ में यह बहुत आवश्यक है कि हमारे जो इमदाद करने के मापदंड हैं, वे बदलने चाहिए और किसान को जो खामियाजा, नुकसान होता है, उसकी भरपाई के लिए और ज्यादा धनराशि दिये जाने की आवश्यकता है।
मैं कुछ ज्यादा निवेदन नहीं करना चाहता। मैं एक निवेदन जरूर करना चाहूंगा कि काग्रेस पार्टी के लोगों ने सच्चर कमेटी का बड़ा प्रचार किया कि अल्पसंख्यकों के लिए एक कार्यक्रम बनेगा। बनना भी चाहिए, हम लोग भी इसी पक्ष में हैं लेकिन क्या इसी तरह से होगा? राष्ट्रपति जी ने भी जिक्र किया। इन लोगों ने एक अल्पसंख्यक मंत्रालय बना दिया। पता नहीं उसका कोई स्टॉफ और बजट है कि नहीं? मिस्त्री साहब, सच्चर कमेटी की रिपोर्ट के बाद जो लोग अल्पसंख्यकों के लिए रोना रो रहे हैं, मेहरबानी करके यह करिए कि वह जो मंत्रालय है, वह ठीक चले। इसके लिए तो उसका कोई बंदोबस्त कराइए। इस मंत्रालय का कोई अर्थ नहीं है। ...(व्यवधान)
श्री मधुसूदन मिस्त्री : सभापति महोदय,अगर इन्हें पता नहीं है, तो कोई क्या करे?
सभापति महोदय : मिस्त्री जी, आप कृपया बैठ जाइए।
श्री रामजीलाल सुमन :सभापति जी, अंत में मुझे यही निवेदन करना है कि राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर जो धन्यवाद प्रस्ताव श्री मधुसूदन मिस्त्री जी की तरफ से रखा गया है, मैं समाजवादी पार्टी की तरफ से उसका विरोध करता हूं।
श्री इलियास आजमी (शाहाबाद) : सभापति जी, सदन को मालूम है कि मैं इधर बीमार चल रहा हूं और मैं अस्पताल में था। मैं कल ही अस्पताल से डिस्चार्ज हुआ हूं। मैं कुछ बातें धीरे-धीरे रखना चाहता हूं, शायद इसमें एकाध मिनट ज्यादा लग जाए।
राष्ट्रपति जी का अभिभाषण सरकार की नीतियों का आइना होता है और उसमें अगले एक साल के अंदर सरकार क्या करना चाहती है, उसका भी जिक्र होता है। मेरी पार्टी और मैं खुद शुरु से ही यूपीए सरकार का समर्थन कर रहे हैं। वोटिंग होगी तो समर्थन में वोट तो हम देंगे ही लेकिन मैं सदन को और पूरे देश को यह बताना चाहता हूं कि इस साल का अभिभाषण और इस साल के बजट ने, दोनों ने मुझे काफी निराश किया है। अभिभाषण में कुछ है ही नहीं और खास तौर से जैसा कि मैंने बताया कि सरकार को न महंगाई की चिंता है और न ही सरकार जनता को विश्वास में लेना चाह रही है और न सरकार का ऐसा कोई इरादा है। ठीक इसी तरह से इंटरनल सिक्योरिटी के बारे में भी मेरी समझ मे नहीं आता कि सरकार क्या कर रही है। सिर्फ यही नहीं कि समझौता एक्सप्रैस में धमाका हुआ, सिर्फ यही नहीं कि मुम्बई की लोकल ट्रेन में धमाका हुआ। महाराष्ट्र में ८-१० बड़े-बड़े बारूद और असले के भंडार पकड़े गये। इत्तिफाक से इनमें कोई मुसलमान नहीं था वर्ना यदि कोई मुसलमान रहा होता तो सब लश्कर-ए-तैइबा और जैश-ए-मोहम्मद के दादा, चचा, बाबा, नाना, पोते और बेटे बना दिये गये होते लेकिन शर्मनाक बात है कि महाराष्ट्र की सरकार जो अपने को सेकुलर पार्टी कहती है, वह हर भंडार के पकड़े जाने पर पहला बयान यह देती है कि इसका आतंकवाद से कोई ताल्लुक नहीं है और वह इसलिए कि उसमें कोई मुसलमान नहीं पकड़ा गया। आखिर यह सरकार देश को कहां ले जाना चाहती है? खास तौर से कांग्रेस पार्टी कहां ले जाना चाहती है, इसका कोई जिक्र इसमें नहीं है।
भ्रष्टाचार के बारे में सरकार को कोई चिंता नहीं है। मेरे जैसा आदमी तीन साल से चीख रहा है कि तकरीबन ५०-६० हजार करोड़ रुपया यहां के भ्रष्ट अधिकारी, कर्मचारी और भ्रष्ट नेता और रामजीलाल सुमन जी मुझे माफ करेंगे, मैं सिर्फ यू.पी. के बारे में नहीं कह रहा हूं, राज्य सरकारों के अधिकारी, कर्मचारी और नेता मिलकर पूरा बजट लूट ले रहे हैं लेकिन सरकार को चिंता नहीं हो रही है।
श्री रामजीलाल सुमन : इन्होंने यू.पी. को छोड़कर कहा है।
श्री इलियास आजमी : मैंने यू.पी. को छोड़कर नहीं कहा है बल्कि यू.पी. में सबसे ज्यादा है।...(व्यवधान) सबसे ज्यादा लूट यू.पी. में हो रही है लेकिन सिर्फ यू.पी. में नहीं हो रही है, यह मैंने कहा है। सबसे ज्यादा तो मैं अपने क्षेत्र का शिकार हूं। दो जिले मेरे क्षेत्र में हैं। एक जिले में एक डकैत बैठा है और दूसरे जिले में एक डकैत बैठा है और मेरी मेहनत से आप इसके गवाह हैं कि काम के बदले अनाज योजना लखीमपुरखीरी जिले में गइÇ*[r29] मेरा एक भी प्रस्ताव नहीं, ३-४ चोरों का पैसे का प्रस्ताव बनाकर एस.डी.ओ. ने लूट लिया। यह केवल उत्तर प्रदेश की बात नहीं है लेकिन भ्रष्टाचार को रोकने के लिये इस अभिभाषण में कुछ नहीं है। केन्द्र सरकार की एमपीलैड्स की एक योजना है। मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि यह पैसा जिस मकसद के लिये दिया जाता है, उसमें भी ६५ से ७० प्रतिशत पैसा खर्च होता है, बाकी ३०-३५ प्रतिशत पैसा लुट जाता है। सरकार की कोई ऐसी योजना नहीं है जिसमें १५-२० प्रतिशत से ज्यादा खर्च होता हो, उसमें ८५-९० प्रतिशत पैसा लूट लिया जाता है। जब एम.पीज़ लोग इस योजना के लिये पैसा चाहते हैं तो सरकार कहती है कि उसके पास पैसा नहीं है। उसमें भी ३०-३५ प्रतिशत भ्रष्टाचार है। इनमें भी सब से कम खर्च भारत निर्माण कार्य पर हो रहा है। इस प्रकार सब में लूट हो रही है लेकिन एम.पीलैड्स के लिये पैसा नहीं है। जिसमें सब से कम लूट है।
सभापति जी, राष्ट्रपति जी के अभिभाषण के पैरा १० में राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना का जिक्र किया गया है। यूं तो सरकार सीना तानकर कहती है कि इस योजना के लिये १२ हजार करोड़ रुपये बढ़ाये जा रहे हैं लेकिन अगर यहां ग्रामीण विकास मंत्री बैठे होते तो जोर से चिल्लाते जिनकी आवाज सदन के बाहर तक जाती। काम के बदले अनाज योजना में सरकार ने हज़ारों करोड़ रुपये खर्च किये हैं लेकिन मैं सरकार को चुनौती देता हूं कि वह बताये कि क्या पूरे देश में १०० हजार करोड़ रुपये भी खर्च किये गये हैं। रोज़गार गांरटी योजना के तहत सारा पैसा लूटा जा रहा है। मेरा सुझाव है कि इस योजना को खत्म किया जाये। इसलिये नहीं कि आप पैसा बढ़ाय़ें, ग्रामीण विकास मंत्री जोर से चिल्लाते रहें और यह सारा पैसा लुटता रहे। इसके अलावा और कोई काम नहीं है। क्या सरकार ने यह तय कर रखा है कि कुछ अधिकारी इतना सब लूट लें, बाकी हमारे पास पहुंचा दो। इसका मतलब यह है कि कहीं कुछ न कुछ बात जरूर है। हर बार यह बात कही जाती है लेकिन किया कुछ नहीं जाता है।
सभापति जी, राष्ट्रपति जी के अभिभाषण के पैरा १४ में हायर एजुकेशन की बात कही गई है। देश में नये आई.आई.टीज़. खोलने की बात कही गई है। यह अच्छी बात है और मैं इसकी भरपूर ताईद करता हूं। इस क्षेत्र में हम देश के नौजवानों को रोज़ी से जोड़ सकते हैं। अगर सरकार की सच्चर कमीशन बनाये जाने में नीयत साफ थी, सही थी और उस कमीशन ने यह सही साबित कर दिया कि देश में मुसलमान शिक्षा के क्षेत्र में सब से ज्यादा पिछड़े हुये हैं, जो दोनों तरफ बैठने वाले सदस्यों को मालूम है। अगर ऐसा है तो सरकार नये आई.आई.टीज. खोलने की जो योजना बना रही है, उनमें मुस्लिमों को कम से कम ५० प्रतिशत आरक्षण दिया जाये ताकि वे शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ सकें।
सभापति जी, राष्ट्रपति जी के अभिभाषण के १५वें पैरा में कहा गया है कि हम गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों को खाद्य संरक्षण दे रहे हैं। मैं आपको याद दिलाना चाहता हूं कि जब आप खाद्य मंत्री थे तो यह आपकी बनायी हुई योजना थी और उस समय इस सदन में आपने शानदार तकरीर करते हुये कहा था लेकिन उसके बाद क्या हुआ और आज क्या हालत है। आज बीपीएल के लोगों को सस्ते दर पर अनाज देने के लिये सरकार द्वारा २६-२७ हजार करोड़ रुपये सब्सिडी के रूप में दिये जा रहे हैं। मैं दावे और गारंटी के साथ कह सकता हूं कि अगर सरकार सी.बी.आई. और रॉ या जितनी जांच एजैंसियां हैं, उन सब को भी लगा दे तो मालूम हो जायेगा कि गरीबों तक २-३ हजार करोड़ रुपये से ज्यादा सब्सिडी नहीं पहुंची है, अगर यह सही न हो तो मैं वह सजा भुगतने के लिये तैयार हूं। सब तरफ लूट चल रही है।
सभापति जी, चंद रोज़ पहले मैंने वित्त मंत्री जी से बात की थी और उन्होंने भी माना कि सब लुट रहा है। मैंने कहा कि आप क्यों लुटा रहे हैं, उनका कहना था कि मैं क्या करूं, व्यवस्था ही ऐसी है। लेकिन मेरा सुझाव है कि आप ऐसी व्यवस्था कर सकते हैं कि जितने भी बीपीएल लाभार्थी हैं या अन्त्योदय कार्डधारक हैं, उन्हें यहां से उतना पैसा भेज दिय़ा जाये ताकि वे सीधे बाजार से महंगे भाव पर अनाज खरीद लेंगे। कम से कम बीच में कोई खाएगा तो नहीं। यह एक सामाजिक समस्या है। लाखों करोड़पति आज इस भ्रष्टाचार वे ज़रिये देश में पैदा हो गए हैं। हर गांव में एक दो करोड़पति बन गए हैं। उनको देखकर गरीबों वे लड़वे भी बिगड़ रहे हैं और वे रिवाल्वर और असला तलाश कर रहे हैं कि वैसे इनवे बराबर पहुंचे। काम वे बदले अनाज योजना पांच-सात हजार करोड़पति देश में बनाएगी और देश को लूटेगी। इसवे अलावा कुछ नहीं दिख रहा है। मैं कहता हूं कि सारी योजनाएं खत्म कीजिए और जो बीपीएल और अंत्योदय परिवार हैं, उनको सीधे भारत सरकार नकद सहायता दे। बीच में राज्य सरकार को भी मत डालिए। वंप्यूटर का ज़माना है। पूरे देश को वंप्यूटराइज़ कीजिए। कुछ दिन वे लिए रोक दीजिए। जब व्यवस्था हो जाए तो सबको सीधे पैसा दीजिए। उसमें कोई एक पैसा नहीं खाएगा। न तो नेता खाएंगे और न कर्मचारी और अधिकारी खाएंगे।
दफा २६ में सच्चर कमेटी का ज़िा है और इसमें मुसलमानों में जो पिछड़े और दलित हैं, उनका ज़िा किया गया है। मैं कहता हूं कि यह हमारे लिए शर्मनाक बात है कि हम धर्मनिरपेक्षता की शपथ लेते हैं। धर्मनिरपेक्षता की शपथ लेकर आप भी यहां पहुंचे हैं और में भी यहां पहुंचा हूं। लेकिन क्या हमारा संविधान वाकयी धर्मनिरपेक्ष है? जब यह शर्त रखी गई थी कि शैडयूल्ड कास्ट्स में अगर धोबी है तो जब तक वह धोबी हिन्दू नहीं है, तब तक शैडयूल्ड कास्ट की पैसलिटी नहीं पाएगा। यह हमारे संविधान वे लिए शर्मनाक बात है। यह सदन वे लिए, हमारे लिए, आपवे लिए, सरकार वे लिए, सबवे लिए शर्मनाक बात है। यह भाजपा वे दोस्तों वे लिए और ज्यादा शर्मनाक है कि जो चिल्ला चिल्लाकर कहते हैं कि धर्म का आधार नहीं होना चाहिए लेकिन धर्म वे आधार पर सन १९५१ से शैडयूल्ड कास्ट्स का आरक्षण चल रहा है। उसको खत्म करने की बात ये नहीं करते। आज ज़माना बदल रहा है। ...(व्यवधान)
श्री प्रकाश परांजपे : पॉइंट ऑफ ऑर्डर है।ये संविधान की अवहेलना कर रहे हैं। उन्होंने ऐसा कहा है कि यह शर्मनाक बात है।
श्री इलियास आज़मी : संविधान की अवहेलना नहीं कर रहे हैं।
सभापति महोदय : पॉइंट ऑफ ऑर्डर जब भी होगा, किसी रूल वे अडर होगा। आज़मी जी, आप अपनी सेहत का ख्याल रखिये। आप बीमार हैं।
श्री इलियास आज़मी : मैं कह रहा हूं कि आप जब कहते हैं कि धर्म वे आधार पर आरक्षण नहीं होना चाहिए। तो यह धर्म वे आधार की वजह से ही आज संविधान सैक्यूलर नहीं रह गया है और गलत सैक्यूलर होने की शपथ हम ले रहे हैं। उसको आप खत्म कराइए। दफा १४३ का सहारा लेकर शैडयूल्ड कास्ट्स वे आरक्षण में जो धर्म का आधार है, उसको खत्म कीजिए। जो धोबी है वह शैडयूल्ड कास्ट होना चाहिए चाहे वह हिन्दू हो, मुसलमान हो, सिख हो या ईसाई हो। जो पासवान है वह शैडयूल्ड कास्ट है या नहीं। अभी पासवान जी अपना मज़हब बदल दें तो पासवान ही रहेंगे। वह शेख और सैयद नहीं हो जाएंगे और न ही पंडित जी हो जाएंगे। इसलिए धर्म का आधार खत्म किया जाए। १५ सूत्री कार्याम का ज़िा हर बार ही होता है। मैं कहता हूं कि कितने ज़माने तक आप मुसलमानों को खास तौर से बेवकूफ बनाएंगे? २५ सालों से मैं सुन रहा हूं, १५ सूत्री कार्याम और आज तक वह चड़िया किस पिंजरे में बंद है, किस जंगल में है, किस किले में है, आज तक खुलकर सामने नहीं आई। पिछले साल भी राष्ट्रपति जी वे अभिभाषण में १५ सूत्री कार्याम का ज़िा था और चिदम्बरम जी वे बजट में भी था। इस साल भी है और मैं इंदिरा जी वे ज़माने से सुनता रहा हूं। एक आदमी पूरे देश में नहीं तलाश किया जा सकता जिसको १५ सूत्री कार्याम वे ज़रिये फायदा पहुंचा हो। इन लोगों ने हिन्दू भाइयों को महापुरुष राम वे नाम पर बेवकूफ बनाया है लेकिन ये संभल गए। अब ये कम बना रहे हैं, नहीं बना रहे हैं और आपने ५० सालों से मुसलमानों को बेवकूफ समझ लिया है और बनाते चले जा रहे हैं। भाजपा ने हिन्दुअों को बेवकूफ बनाया लेकिन संभल गए। एक बार बनाकर संभल गए इसीलिए फर्व हो गया और पंजाब और उत्तराखंड में आ गए। लेकिन मालूम होता है कि सत्ता पक्ष वे लोगों ने समझ लिया है कि मुसलमानों को बेवकूफ ही बनाकर अल्ला मियां ने पैदा किया है, इसलिए बनाते चले जाओ। ...(व्यवधान)
सभापति महोदय : अब कनक्लूड करें। पूरे सदन को आपकी सेहत की चिन्ता है।
श्री इलियास आज़मी : होनी भी चाहिए। जिस दिन मैं दुनिया से जाऊंगा मुझे मालूम है कि हर हिन्दू-मुसलमान को भाजपा और कांग्रेस समेत, सबको इस बात की तकलीफ होगी कि एक सही बात कहने वाला दुनिया से गया। जाना तो सबको है। ३०ट श्री मोहन रावले : आज़मी जी, हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।
श्री इलियास आज़मी : महोदय, ४७वें प्वाइंट पर राष्ट्रपति जी ने विदेश नीति की बात कही है, मेरी इस पर इसलिए हंसी छूट गई कि क्या हमारी कोई विदेश नीति भी है, क्या दासता को कोई नीति कहते हैं?यह अफसोसजनक बात है कि अमेरिका की दासता करने का काम एनडीए ने शुरु किया था और यूपीए ने उसे चरम सीमा तक पहुंचा दिया। यह कोई नीति है, हम जिस नीति की बात करते हैं। अमेरिका जो कह दे, वह सब सही है। अमेरिका अफगानिस्तान पर दिन-दहाड़े हमला करे, उस वक्त एनडीए की सरकार कहे कि हुजूर, हमारे हवाई-अड्डे ले लो, हमारी जमीन एवं सेना ले लो। हम खुद रिकवेस्ट करें, इराक के बारे में हम कहें कि हम अपनी सेना भेजने के लिए तैयार हैं और वह कहे कि हमें आपकी जरूरत नहीं है। आज ये उससे दो कदम आगे बढ़ कर अमेरिका की दासता में, हमारी सरकार जिसे विदेश नीति कहती है, मुझे अफसोस होता है कि हम कितने ढीठ हो गए हैं कि गुटनिरपेक्षता की बात आज भी राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में कहते हैं और दीगर मंचों पर भी कहते हैं। यह कैसी गुटनिरपेक्षता है, हम खुद एक गुट के दास बन चुके हैं और गुटनिरपेक्षता की बात करते हैं। इस बात से मेरे जैसे व्यक्ति को शर्म महसूस होती है।
सभापति महोदय, मुझे डाक्टरों ने जितना कहा था, उतना ही मैं बोला हूं। अब मुझे महसूस होने लगा है कि अब नहीं बोलना चाहिए। बहुत सी बातें हैं, मैं एक बात आखिर में आपके माध्यम से कहूंगा कि यह पूरा सदन मिल कर इस सरकार को राज़ी करे कि जिन योजनाओं का ५० परसैंट से ज्यादा पैसा लूट रहा है, उसका पैसा इकट्ठा करके, बीपीएल और अन्त्योदय परिवार जो चिन्हित हैं, उन्हें पैसा सीधे-सीधे चैक, ड्राफ्ट या मनी आर्डर के जरिए दे दें ताकि बीच में कोई लुटेरा या अन्य कोई न आए, बीच में गांव में बड़े-बड़े धन्नासेठ न आएं और गरीबों के बच्चे रिवाल्वर की तालाश में न घूमें कि हमें भी कोई मिल जाए।
श्री सीताराम सिंह (शिवहर): सभापति महोदय, महामहीम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के पक्ष में मैं बोल रहा हूं। राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में सरकार की नीति और कार्यक्रमों को रखा गया है।इसके अंदर बहुत अच्छी बातें हैं, एक वर्ष के लिए, फिर आने वाली ११वीं पंचवर्षीय योजना के लिए और जो कुछ भी है, इसमें काफी महत्वपूर्ण बातों का जिक्र है।
महोदय, सभी अपने-अपने नज़रियों से इसे देखते हैं। सरकार जो कर रही है, इसमें दो राय नहीं कि काफी महत्वपूर्ण कार्य को कर रही है और विकास की गति को तेज करना भी चाहती है और यह कर भी रही है, लेकिन उसका बहुत सा अंश, जिसके लिए सरकार करना चाहती है, वह नहीं हो पा रहा है। हम सराहना करते हैं कि सरकार ने जिन योजनाओं को लागू किया, अभी माननीय सदस्य बोल रहे थे कि राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना महत्वपूर्ण है। इसे पूरे देश के अंदर दो सौ जिलों में लागू किया गया, लेकिन कई राज्यों में यह बिल्कुल शुरु ही नहीं हो सकी, इसका थोड़ा-बहुत अंश शुरु हो रहा है तो उसके जो तौर-तरीके हैं, नियम एवं कायदे हैं, उसे अच्छे तरीके से नहीं किया जा रहा है। मैं इसकी स्थायी समति में हूं, मैंने देखा है कि इसे आंध्रा प्रदेश में बखूबी लागू करने का प्रयास हो रहा है और कर्नाटक में भी हो रहा है, लेकिन मैं जिस राज्य, बिहार से आता हूं वहां यह सरज़मीन पर अभी तक नहीं उतरा है।[rep31] महोदय, लगातार प्रयास हो रहा है, लेकिन जमीन पर दिखाई नहीं दे रहा है। जब सरकार ने इस योजना को लागू किया था, तब बड़ी अच्छी सोच थी। यह बात भी सही है कि ३६५ दिनों के लिए काम नहीं मिले, तो कम से कम १०० दिनों के लिए तो मिले। यह अच्छी बात है और इसके लिए और प्रयास होना चाहिए, लेकिन इस कार्यक्रम को सही ढंग से लागू करने की दिशा में सोच बननी चाहिए और इसे पुरजोर तरीके से लागू करना चाहिए।
महोदय, सरकार ने और अनेक कार्यक्रम जनता के कल्याण के लिए तैयार किए हैं। उनमें से एक कार्यक्रम ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन है। यह बड़ी अच्छी बात है। इन्होंने ग्रामीण विद्युतीकरण का काम शुरू किया है, यह भी ठीक है, लेकिन ग्रामीण विद्युतीकरण के कार्यक्रम के बारे में मैं कहना चाहता हूं कि यह जमीन पर कहीं भी बिहार में दिखाई नहीं दे रहा है। इसका टेंडर भी हो गया। ठेकेदार भी बहाल हो गया। भारत सरकार ने इसे गवर्नमेंट की एजेंसी एन.एच.पी.सी. के माध्यम से कराने का निर्णय लिया है और ठेकेदार के रूप में यह कार्य उसी को सौंपा गया है। हमने मंत्री महोदय से मिलकर व्यक्तिगत तौर पर भी कहा था कि एन.एच.पी.सी. इस काम को नहीं कर पा रही है। मैं राष्ट्रपति महोदय के अभिभाषण पर धन्यवाद के प्रस्ताव पर बोलते हुए आग्रह कहना चाहता हूं कि सरकार इसे देखे कि यह जमीन पर उतरने वाला है कि नहीं। आपने नीति बनाई, कार्यक्रम बनाया, लेकिन यह कार्यक्रम जमीन पर नहीं उतरा है और इसका जनता को लाभ नहीं मिल रहा है। तीन वर्ष बीत चुके हैं और दो वर्ष बाकी हैं। आपने वर्ष २००९ तक गांव-गांव तक बिजली पहुंचाने की समय- सीमा भी तय की है। इसलिए सरकार को इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए और गांवों को बिजली देने का काम पूरा करना चाहिए।
महोदय, सरकार ने एक बहुत अच्छा कार्यक्रम ग्रामीण पेयजल की आपूर्ति का शुरू किया है। आपने निर्मल ग्रामीण योजना को ग्रामीण विकास कार्यक्रम के माध्यम से शुरू किया है, लेकिन यह योजना भी बिलकुल विफल हो रही है। आपने इसके लिए पहले जो निर्धारित राशि थी, उसे बढ़ाया है, यह अच्छी बात है, क्योंकि पहले तो बहुत कम राशि थी। जो राशि बढ़ाई है, वह भी कम है। इसलिए हम सरकार से आग्रह करेंगे कि इसे और भी बढ़ाया जाए और निर्मल ग्राम योजना को पूरा करने के लिए आपको काम करना चाहिए और इसे पूरा करना चाहिए।
महोदय, सर्वशिक्षा अभियान नामक एक बहुत अच्छी योजना चल रही है। मुझे पता नहीं दिल्ली में बैठे हुए अधिकारी और पदाधिकारियों को यह बात मालूम है कि नहीं कि जो पैसा सरकार ने भवन बनाने के लिए दिया है, उसमें केवल कमरा निर्माण किया जा रहा है। भवन के साथ शौचालय, चापाकल और बाउंड्री वॉल की कोई व्यवस्था नहीं की गई है। इसका परिणाम यह हो रहा है कि जब हम गावों में जाते हैं, तो जनता हमसे कहती है कि इस भवन में शौचालय, चापाकल और बाउंड्री वॉल का निर्माण आप अपनी सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के अन्तर्गत कराएं। इसलिए मैं सरकार को सलाह देना चाहता हूं कि जब आप सर्वशिक्षा अभियान के अन्तर्गत भवन निर्माण हेतु धनराशि की व्यवस्था कर रहे हैं, तब आप भवन के साथ-साथ शौचालय, चापाकल और बाऊंड्री वॉल का भी निर्माण करने की व्यवस्था करें ताकि देश के ग्रामीण क्षेत्र के लोगों और किसानों के बच्चों को शिक्षा का ठीक प्रकार से लाभ मिल सके।
महोदय, सरकार ने मिड डे मील की व्यवस्था की है। कई माननीय सदस्यों ने इसका यहां जिक्र भी किया है। मैं बताना चाहता हूं कि आपका यह कार्यक्रम बिलकुल विफल हो रहा है। यह काम कहीं भी सही ढंग से नहीं चल रहा है और विद्यालय के बच्चों को मिड डे मील नहीं मिल रहा है। आपने इसके लिए जो सिस्टम एडॉप्ट किया है उसकी निगरानी नहीं होती है। आपने केन्द्रीय स्तर पर कमेटी बनाई है, लेकिन उस पर भी काम नहीं चल रहा है। जो हम लोग व्यावहारिक रूप से देख रहे हैं उसको देखते हुए हम सरकार से कहना चाहते हैं कि इस व्यवस्था की निगरानी थोड़ी और कठोर तथा चुस्त करनी चाहिए। [r32] [r33] ताकि जिस पर पैसा खर्च करना चाहते हैं, जिस मिशन को लेकर आप गांवों में लोगों को सुविधा देना चाहते हैं, वह सुविधा बेहतर तरीके से आप दे सकें।
महोदय, आप दूसरी योजनाओं को भी चला रहे हैं। माननीय सदस्य चर्चा कर रहे थे और वे ठीक कह रहे थे कि बीपीएल का अनाज गावों में नहीं जा रहा है। अंत्योदय योजना, अन्नपूर्णा योजना और मिड डे मील का अनाज गांवों में नहीं पहुंच रहा है। इसमें गड़बड़ी हो रही है। यह सही है कि आप यहां से जितना धन उपलब्ध करा दें, लेकिन आपके जो देखने वाले लोग हैं, वे सही तरीके से अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा रहे हैं। भारत सरकार जबाव देती है कि राज्य सरकारों के जिम्मे यह दिया हुआ है। आप राज्य सरकारों को जो पैसा देते हैं, क्या उस पर आपकी निगरानी की आवश्यकता नहीं है। क्या आप पैसा इसलिए देते हैं कि वह गड्डे में चला जाए, जिसके लिए आप भेज रहे हैं, उसको न मिले। आज़मी साहब ठीक कह रहे थे कि वृद्धावस्था पेंशन और सामाजिक सुरक्षा पेंशन की तरह इस धन को भी अनाज के रूप में आप सीधे पोस्ट आफिस के द्वारा गरीबों के पास भेजें। यह ज्यादा अच्छी व्यवस्था होगी क्योंकि इसमें लगातार लूट हो रही है। यह बात शत-प्रतिशत सही है। इसका हम भी समर्थन करते हैं। इसमें व्यावहारिक रूप से कठिनाई आ रही है।
महोदय, सर्व शिक्षा अभियान का कार्यक्रम चला रहे हैं, उसमें मैं आपको सुझाव देना चाहता हूं कि मडिल स्कूल और प्राथमिक स्कूलों को इसमें रखा गया है, लेकिन माध्यमिक विद्यालयों को इसमें नहीं रखा गया है। इनका कोई माई-बाप नहीं है। इन स्कूलों के लिए भवन की कमी है। उसके लिए भवन का पैसा नहीं है। राज्य सरकार थोड़ा बहुत पैसा भी मुहैया नहीं करा पाती है। इसलिए हम सरकार से आग्रह करना चाहेंगे कि माध्यमिक विद्यालयों को भी सरकार की ओर से भवन के लिए और उनमें शौचालय की व्यवस्था के लिए सर्व शिक्षा अभियान के अंदर व्यवस्था करें। आपने सम विकास योजना में इसको रखा है, लेकिन सम विकास की योजनाओं को चयनित करने के जो तौर तरीके बनाए हैं, वे बहुत डिफेक्टिव हैं, क्योंकि राज्यों के अंदर मनमाने तरीके से जिला पदाधिकारी चयनित करते हैं। गाइडलाइंस और आवश्यकतानुसार के अनुसार इसको समाहित नहीं करते हैं और अपने तौर तरीकों से काम करते हैं। उसका समावेश भी नहीं करते हैं और अपने तौर-तरीके से काम करते हैं। यह दोषपूर्ण कार्यक्रम है। पैसा रहते हुए भी पैसे का सदुपयोग नहीं हो रहा है। सरकार जो धन राज्यों को देती है, गांवों के विकास के लिए वह पैसा अच्छे तरीके से खर्च हो, उस पर सरकार को पुन: सोचना होगा।
महोदय, राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में आपने साफ-सुथरे शब्दों में कही है और उसे अपनी प्राथमिकता में रखा है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बजट में कृषि को प्रथम एजेंडे के रूप में रखा है। वित्त मंत्री जी ने अपने बजट भाषण में कृषि पर शुरूआत की है। यह कृषि प्रधान देश है, इस बात को सभी जानते हैं। इस लोक सभा में जीतकर आने वाले लोग चाहे किसी क्षेत्र से आते हों, लेकिन किसान का वोट पा कर ही आते हैं और यहां किसानों के सवालों को उठाते भी हैं और सरकार नीति भी बनाती है। राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में कृषि की गतिशीलता को प्राथमिकता दी गई है। सरकार किसानों को जो ऋण दे रही थी, उसे दुगुना करने की बात कही गई है। उसके लिए आपने राशि भी बढ़ाई है, लेकिन उस राशि को मैं अभी भी कम मानता हूं क्योंकि इस देश में सबसे अधिक आबादी किसानों की है। आप उसे पैसा देने के लिए बजट में व्यवस्था कर रहे हैं, दूसरी तरफ आप उद्योगपतियों को बैंकों से ऋण दे रहे हैं, यदि इन दोनों की तुलना की जाए तो आप मुट्ठीभर लोगों के लिए अरबों रुपयों की व्यवस्था कर रहे हैं। इतनी बड़ी जनसंख्या, जिस पर सारा देश निर्भर करता है, उसके ऋण के लिए आप कम पैसा दे रहे हैं, अगर आप इसे दोगुना भी करते हैं तो भी यह कम है। यह ठीक बात है कि आपने सूद की दर पिछले वित्त वर्ष में थोड़ी कम की, लेकिन अभी भी आप जो कृषि ऋण दे रहे हैं, वह कम है। मैं कहना चाहता हूं कि ऋण मिलने में जितनी कठिनाई गांव के गरीब किसानों को है, उतनी ही कठिनाई आपकी रीति और बैंकिंग नियम काफी दोषपूर्ण होने से है। मैं कहना चाहता हूं कि किसानों को ऋण देने के लिए आपको और सुविधा देनी चाहिए। एक बात साफ होनी चाहिए कि अगर आप ऋण दे रहे हैं तो आप लाभकारी मूल्य की भी बात करिये, सिर्फ ऋण दे देने से, उसके वसूलने से और वारंट काट देने भर से काम नहीं होगा, आप उसका लाभकारी मूल्य दीजिए।
एक बात तो बहुत दुखद है कि जो चीजें कल-कारखानों में बनती हैं, उनकी कीमतें कल-कारखानों के द्वारा तय हो जाती हैं, उसके मालिकों के द्वारा तय हो जाती हैं और जो चीजें किसानों के खेत में पैदा होती हैं, उसकी कीमत किसान को तय करने का अधिकारी नहीं है, वह सप्लाई और डिमांड पर चलती है, वह किसान तय नहीं कर सकता। किसान को जब कोई चीज खरीदनी है तो उसकी चीजों की कीमत ज्यादा देनी पड़ती है। उसके बीच के बिचालियों के बारे में अच्छी बात है कि चलिये, आपने कह दिया कि यह वायदा कारोबार हम बन्द कर देंगे, जो कारोबार आप कर रहे थे, फारवर्ड ट्रेडिंग और क्या-क्या शब्द लिखकर, वायदा कारोबार और क्या-क्या कारोबार आपने कहा, लेकिन आपने जो कहा है, उसमें सिर्फ चावल और गेहूं है, बाकी चीजों का क्या होगा? इस पर तो आप एक शब्द नहीं बोल सके। बोलना चाहिए, क्योंकि एक बात का तो ख्याल रखना होगा कि किसानों के खेत में उपजी हुई चीज अगर महंगी हो गई तो हाय-तौबा मच जाती है, इसलिए कि दैनिक जीवन में उसको काम आना है, वह प्रतदिन चाहिए और सीमेण्ट, लोहा या छड़, ये छोटे-बड़े सामान या पेस्ट, जो तमाम चीजें कम्पनियों में बनती हैं, उसका रेट कम्पनी के मालिक तय करके खुले बाजार में बेच रहे हैं, सरकार को इससे कोई मतलब नहीं है और जनता को भी शायद इससे कोई मतलब नहीं, उसकी नींद नहीं खुलती। मेरा साफ कहना है कि किसान के सवाल पर आप उसको जो सुविधा देना चाहते हैं, आप सिंचाई की सुविधा नहीं दे पा रहे हैं, उसको लाभकारी मूल्य नहीं दे पा रहे हैं, इसलिए जो लागत है, आपने कभी सोचा कि किसान जो इतनी मेहनत करके खाद खरीदता है, उसको सब्सिडी देकर कितना कम से कम हम खर्च करें, तब जाकर उसकी लागत कम होगी, तब उसकी दर कम होगी। कभी सरकार इस पर नहीं सोचती। मुझे समझ में नहीं आता कि ६० वर्ष आजादी को पूरे होने जा रहे हैं, नीतियां हर साल बनती हैं, महामहिम राष्ट्रपति जी का अभिभाषण हर वर्ष होता है, मगर जब इतना लम्बा समय इस लोकतंत्र में चल रहा है तो क्यों नहीं सरकार बहुत लम्बे समय के लिए प्रोजैक्ट तैयार करती और क्यों नहीं इसका मास्टर प्लान बनाकर किसान ओर गरीबों के सवालों को ...(व्यवधान)
सभापति महोदय : अब आप कन्क्लूड कीजिए।
श्री सीताराम सिंह :महोदय, हम दो-तीन मिनट में कन्क्लूड कर देंगे। हम लोगों को तो बोलने का मौका ही बहुत कम मिलता है।
इसलिए मैं कहना चाहता हूं और सरकार से आग्रह और अपील करना चाहता हूं कि किसान को आपको प्राथमिकता देनी पड़ेगी। यही किसान है, जो आज सारे देश को अनाज दे रहा है। आप बाहर से सामान मंगा रहे हैं तो स्वाभाविक रूप से आपको महंगा पड़ेगा, इसमें दो राय नहीं हैं, लेकिन जो बाहर से सामान मंगाकर आप इस देश के लिए महंगा कर रहे हैं, एक बार के लिए यह ठीक है, लेकिन दूसरी बार का प्रोग्राम आप क्यों तैयार नहीं करते कि यही लागत और खर्च अपने देश के किसान को देंगे और इससे उन्नत किस्म का बीज तैयार करेंगे और अनाज पैदा कर लेंगे, सामान पैदा कर लेंगे, ऐसी योजना आपकी क्यों नहीं है, आपकी ऐसी सोच क्यों नहीं बनती है? यहां एक से एक अर्थशास्त्री बैठे हैं, एक से एक कृषक बैठे हैं, एक से एक किसान के शुभचिन्तक नेता बैठे हैं, लेकिन सिर्फ जुबान से इस देश के किसानों का कल्याण नहीं होगा। मैं साफ कहना चाहता हूं कि किसानों के सवाल पर सरकार को फिर सोचना चाहिए। किसानों को लाभकारी मूल्य देने के लिए और उनके जो समान है, फारवर्ड मार्केटिंग और दूसरी तरह का व्यापार जिसे सारा देश जान गया और महंगाई का सवाल उठ गया, इसको रोकना पड़ेगा। जो होल्िंडग करने वाले लोग हैं, इन लोगों पर रेड करना होगा। माननीय प्रधानमंत्री जी ने भी कहा कि राज्य सरकारों को हमने पत्र लिखा। पत्र लिख देने मात्र से क्या होता है? क्या राज्य सरकार ने एक्शन नहीं लिया? क्या भारत सरकार उनसे उनके एक्शन के बारे में पूछ नहीं सकती है? उनसे पूछना चाहिए और उस कार्यवाही के लिए आगे कदम उठाना चाहिए। पहले के जमाने में सुना था और स्वर्गीय इंदिरा गांधी के जमाने में भी सुना था कि एक बार जब राज्य सरकारों को हुक्म दिया जाता था, तो जो राज्य सरकार उसका पालन नहीं करती थी, तो दूसरे शो कॉज में राज्य सरकारें थर्रा जाती थीं। आज यह प्रयास यूपीए गवर्नमेंट को करना चाहिए। यह कोशिश करनी चाहिए कि राज्य सरकार में जो होल्िंडग करने वाले लोग हैं, उन पर रेड करे और उन्हें पकड़े, तभी उसका असर महंगाई कम करने पर होगा। मैं महंगाई के बारे में कहना चाहता हूं कि महंगाई कैसे कम होगी, यह सरकार जाने, जनता को सिर्फ इतना लेना-देना है कि महंगाई नहीं बढ़नी चाहिए, महंगाई कम होनी चाहिए।
महोदय, मैं स्पष्ट शब्दों में अपने नेताओं और सरकार में बैठे लोगों से कहना चाहता हूं कि महंगाई कैसे कम होगी, इसके बारे में आप सोचिए, जनता को महंगाई कम करके दीजिए, ताकि जनता यह जाने कि यूपीए की गवर्नमेंट ने महंगाई कम कर दिया। मैं कहना चाहता हूं कि इस सवाल पर सरकार को मजबूत मन बनाना होगा और इरादा मजबूत करना होगा। केवल बातों से ये काम नहीं हो सकता, जब तक संकल्प नहीं होगा, द्ृढ़निश्चय नहीं होगा और केवल कागजों में लिखने से कि हम आपको इतना रूपया दे देंगे, इससे कुछ होने वाला नहीं है।
आज रोज किसानों के आत्महत्या की चर्चा हो रही है। एक किसान आत्महत्या करता है, कोई पूंजीपति आत्महत्या नहीं करता है। वह अरबों रूपया लेता है, फैक्ट्री खोलकर उस पर दिवालिया का साइन-बोर्ड लगा देता है, लेकिन वह आत्महत्या नहीं करता है। मामूली एक या दो लाख रूपए लोन के लिए किसान आत्महत्या करता है, आखिर क्या बात है? उस पक्ष में बैठे हुए लोगों के समय में भी यही हुआ और हमारे जमाने में भी यही हो रहा है। उस पक्ष के समय में हुआ, इसलिए हमारे जमाने में भी हो, यह कहकर काम नहीं चलेगा। हमें इसमें सुधार करना पड़ेगा। आज मैं यह कहना चाहता हूं कि हमारे देश में सबसे बड़ी आबादी किसान की है, उसके लिए हमें विचार करना होगा। बजट में आपने बहुत अच्छी बात कही है, पर इस बात को आपको सरजमीं पर लागू करना होगा।
महोदय, सिंचाई का सवाल है, यह बात ठीक है कि आपने योजना बना दी। आप की योजना समय-सीमा के अंदर पूरी नहीं हुई, इसके लिए आप क्या कर रहे हैं? प्रतिवर्ष इसकी लागत बढ़ती जा रही है, खर्च बढ़ता जा रहा है, आप उसके लिए क्या कर रहे हैं? हमारी जो योजना बने, वह समय-सीमा के अंदर पूरी हो, इसके लिए सरकार को निश्चय करना पड़ेगा। समय-सीमा निर्धारित करनी पड़ेगी।
महोदय, जहां तक बेरोजगारी का सवाल है, यह लगातार उठ रहा है। सरकार ने बहुत अच्छा काम किया है। गारंटी रोजगार लागू करके अकुशल मजदूरों के लिए गांव में कम से कम सौ दिनों का काम दिया। यह देश के इतिहास में ही नहीं, दुनिया में जहां भी लोकतंत्र है, ऐसे तमाम दुनिया के देशों के इतिहास में बेहतर काम सरकार ने किया है। लेकिन बेरोजगारी का सवाल केवल अकुशल मजदूरों के साथ नहीं है। देश के तमाम नौजवान चाहे वे पढ़े-लिखे हों या अनपढ़ हों या जो रैंक एंड फाइल है, इसीलिए बेरोजगारी के सवाल का जिक्र हुआ है। इन्होंने कहा कि दो लाख लोगों को नौकरी देंगे, एक सौ दस करोड़ की आबादी में दो लाख लोगों को रोजगार देने से दूसरा, तीसरा और चौथा पुश्त बीत जाएगा, लेकिन किसी को नौकरी नहीं मिलेगी। बेरोजगरी भत्ता देने से ही इस देश के नौजवानों का काम नहीं चलेगा। मैं स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं और महामहिम राष्ट्रपति जी के भाषण में जिक्र है, इसलिए सरकार को इस बारे में निश्चय करना पड़ेगा। बेरोजगारी के सवाल पर इस देश की सरकार को तय करना पड़ेगा कि जो लड़का पढ़-लिख कर तैयार हो जाएगा, उसको सर्टीफिकेट के साथ नौकरी मिले, इस तरह की लांग टर्म योजना बनानी पड़ेगी। असंगठित मजदूरों का सवाल इन्होंने कामन मनिमम प्रोग्राम में रखा है, आज ढाई साल हो चुके हैं और तीसरा वर्ष बीत रहा है। असंगठित मजदूरों के लिए महामहिम राष्ट्रपति जी ने कहा कि इनको सुरक्षा कवच के प्रस्ताव विचाराधीन है। [v34] उनके साथ अन्याय हो रहा है। असंगठित मजदूरों को कॉमन मनिमम प्रोग्राम में रखा गया है और उनके सुरक्षा कवच की बात विचाराधीन है जिस बारे में राष्ट्रपति जी के पिछले अभिभाषण में कहा गया है। इस तरह उनके ऊपर जुल्म होगा। असंगठित मजदूरों के बारे में तुरंत निर्णय लिया जाना चाहिए और कानून बनाकर उन्हें सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए।
आप मुझे अपनी बात समाप्त करने के लिए कह रहे हैं, इसलिए अंत में एक बात कहकर मैं अपनी बात समाप्त करूंगा। अगर आप बेरोजगारों, असंगठित मजदूरों और गांवों के गरीब किसानों के लिए कुछ करना चाहते हैं तो उसे मजबूत इरादे से कीजिए। इन्हीं सुझावों के साथ मैं राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का समर्थन करता हूं।
SHRI B. MAHTAB (CUTTACK): Mr. Chairman, Sir, I thank you for allowing me to raise certain points.
The hon. President has drawn our attention towards the speciality of this year when we are celebrating the 60th anniversary of our Independence. We are to observe the 150th anniversary of the first war of Indian Independence and the centenary of Satyagraha. This is also the year of the beginning of the Eleventh Five Year Plan.
17.47 hrs. (Shri Varkala Radhakrishnan in the Chair) A Motion has been moved by a hon. Member from the Treasury Benches. Ultimately, this House would pass the Motion of Thanks on the President’s Address but before doing so, our attempt would be to deliberate on the issues that were raised in the Address.
The fourth Budget of the UPA Government has been placed before us and one could witness the tremendous pressure under which the Finance Minister is. The current rainbow coalition in which crimson red looms large over all the other colours does not augur well for the nation.
The quarter century since 1980 has been a period of unprecedented opening and growth for India. The process has transformed the lives of millions of people in our country. The next 25 years will be the most exciting but also the most challenging. One gets a feeling that the “India Shining” slogan of 2004 is back in currency today in new words like “Resurgent India”, “India Rising”, “India Poised”, etc. These expressive phrases are intended to make the people bask in the belief that India is well on the way to becoming a global super power.
The latest Report of Goldman Sachs on the growth potential of the Indian economy has provided another opportunity for a new spate of self approbation. Goldman Sachs 2006 Report has given India a more optimistic progression chart, in comparison to its 2003 Report, predicting that its economy will grow fast enough to become the second largest in the world by 2050, next only to China’s.
But sharing the top two slots in the world economy along with China is not a new experience for India because in the 18th Century, India and China together had accounted for half of the world GDP. But that was lost for variety of reasons and slipped down to a share of 10 per cent of the world GDP by the middle of the 20th Century.[R35] After two centuries of being down, we will naturally feel exultant at the prospects of growing to be the Number Two in the world economy in a short span of four and a half decades.
But are we aware about the warnings -- the political risk, rise in protectionism, lack of labour reforms, business climate and environmental degradation, which could frustrate the prospects of growth?
The most disturbing quote, I read in The Economist recently, which states:
“Somebody can own a mobile phone, yet has to waste hours queuing for drinking water.” How incongruous it is! Is there any attempt to change the situation? The benefits of growth have, so far, been confined to the top and upper middle class sections, leaving the lower middle classes and the poor practically untouched.
The GDP growth by itself may not mean development for all sections of the population. There is a wide gap; it is getting wider; and millions of poor people continue to languish without having the basic necessities of life like food, drinking water, clothing and shelter.
Apart from the growing disparities between the affluent and the poor, certain other serious problems vital for transition to the level of a developed nation are persisting in India. Unless effective solutions are found for them, hopes may end up as hype.
One is the danger of political instability, and the other is lack of will for comprehensive reforms in the country’s educational system.
The last time we saw a single party Government was in the year 1989. Coalition Governments are not necessarily weak or unstable, but the texture of Coalition Government has its impact. When the Governments are formed through post-election alliances without having presented to the electorate a common manifesto for its endorsement, such Coalition Governments will naturally lack the credibility of a mandate to bring about reforms. And, that is the problem, which this country is facing today. The problems get aggravated when a Coalition of even a large number of parties needs the support of another half a dozen parties from outside in order to survive in power. This does not augur well for political stability. What to speak of rapid growth?
We have the potentials to outstrip the most advanced economies of the world but we have to educate our children and our young people. We need radical changes in the educational system. But sadly, I would say, the Government is only tinkering with the system in the name of reforms.
In this season for heady predictions about India’s economic prospects in [r36] various timeframes, the mention of unfinished tasks would make many people think of the remaining agenda of reforms.
In simple terms, Sir, while both China and India are poor developing countries by accepted criteria, China has made far greater strides in elimination of poverty compared to India. Poverty is no longer a visible feature in China the way it continues to be in our country. And, in the imagination of the wide world, China has virtually ceased to be a poor country. The pathos of the Indian story is that 220 to 230 million of our people, that is 22 per cent of the total population, are poor according to the latest findings of the National Sample Survey.[r37] That makes India home to the world’s largest proportion of the poor, even if the percentage of people living below the poverty line reduced from 36 per cent in 1993-94 to 22 per cent in 2004-05.
There are other dismal statistics about poverty in this fourth largest economy of the world. One is, India ranks 126th out of 177 in the World Human Development Index. The rate of child malnutrition is double that of Sub-Saharan Africa.
With such factual and visible evidence reinforcing existing bias, the defining element of our economy would remain identified with our poor millions, much as you would like to be otherwise. The painful paradox of such poverty in the midst of consistently high rates of economic growth over the last few years and the sustained development effort pursued through economic planning since 1950 is the measure of the pathos in the Indian story.
What is more disquieting is that there is no dearth of recognition in political rhetoric or official thinking of the need for elimination of poverty as the primary objective but what has been done and accomplished has fallen so tragically short of proclaimed intentions.
Garibi Hatao of 1971 apart, the Planning Commission itself had said about elimination of abject poverty in its Approach Paper to the Fifth Plan. Thirty-four years since that urgent call was made, it is interesting to see the way in which this Government is dealing with poverty.
Dr. Amartya Sen is being very often quoted. I would like to quote him. I would like to give certain instances which he said. He is the friend, philosopher and guide of the informal Kolkata Group. Dr. Sen is one of the rare economists who does not ask how the economy is doing. He would rather ask how the poor are faring and the children and women are taken care of. Small wonders that he is not overtly impressed by the nine-plus growth rate of the economy. He does not care whether India will catch up with China or whether India will become a developed nation in a couple of decades. This is not just because he knows, as an economist, how shady such predictions are.
Let us not minimize the progress the country has achieved in various fields. But let us not be over-influenced by events such as Tatas acquiring Corus and Laxmi Mittal buying Arcelor to emerge as the world’s largest steel producer.
My worry is whether the nation has been meeting the nutritional and educational needs of our children. Our foreign exchange reserves are overflowing. The income of the Government has increased. We do not hear anymore about resource crunch. But what is lacking is “the visionary use of public money”.
Investment in infrastructure is necessary but investing in human resource is a must for growth. I do not believe that economic development itself will take care of all the needs of the country like education and public health. India produces 30,000 doctors a year but has not been able to achieve higher rates of child survival than any of our neighbours with the exception of Pakistan. Infant and child mortality rates are significantly lower in Bangladesh.
MR. CHAIRMAN : Are you concluding today? Or, will you continue tomorrow?
SHRI B. MAHTAB : Yes, I will continue tomorrow.[MSOffice38] _________
18.00 hrs. MR. CHAIRMAN : Now, we take up ‘Zero Hour’ mentions.