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16.10 hrs. Title: Discussion on the Imperial Library (Indentures validation) Repeal Bill, 2002. (Bill passed.) THE MINISTER OF TOURISM AND CULTURE (SHRI JAG MOHAN): Sir, I beg to move:

"That the Bill to repeal the Imperial Library (Indentures Validation) Act, 1902, be taken into consideration."  

 MR. DEPUTY-SPEAKER: Motion moved:

"That the Bill to repeal the Imperial Library (Indentures Validation) Act, 1902, be taken into consideration."  

 Shri Samik Lahiri to speak.

श्री समीक लाहिड़ी (डायमंड हार्बर) : उपाध्यक्ष जी, यह जो इम्पीरियल लाइब्रेरी रिपील बिल है, जहां तक इसके एम्स एण्ड ऑब्जैक्ट्स का सवाल है, यह कानून उस समय जरूरी थी, अब इतना जरूरी महसूस नहीं हो रहा है, इसीलिए सरकार इस कानून को वापस करना चाहती है। इसमें तो कोई एतराज नहीं है, लेकिन अभी नेशनल लाइब्रेरी की जो स्थिति है, यह एक ऐसी लाइब्रेरी है, जिसे लेकर पूरा हिन्दुस्तान गर्व कर सकता है, लेकिन अभी नेशनल लाइब्रेरी में बहुत सारी पोस्टें खाली हैं, जो पोस्टें अभी तक भरी नहीं जा रही है और उसके चलते जिस नेशनल लाइब्रेरी को देश के जाने माने सारे स्कालर्स इस्तेमाल करते हैं, बहुत सा रिसर्च का काम भी वहां हो रहा है, बहुत सी पोस्टें खाली होने के कारण नेशनल लाइब्रेरी का अपना काम-काज ठीक तरह से नहीं हो पा रहा है।

MR. CHAIRMAN : This is a Repeal Bill and not a new Bill. Please be brief.

SHRI SAMIK LAHIRI : It is a very important Bill. नेशनल लाइब्रेरी के अन्दर इसे ठीक तरीके से चलाने के लिए अभी भी बहुत पैसे की जरूरत है, लेकिन यह पैसा उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। अगर इसका ऑटोनोमस स्टेटस हो गया तो इसका क्या स्ट्रक्चर होगा, इसके बारे में अब तक सरकार ने कुछ भी ठीक तरीके से सूचना हम लोगों को नहीं दी है। बहुत सारे बड़े-बड़े अखबारों में यह न्यूज आई, जिसके चलते आपके माध्यम से मैं मंत्री महोदय से यह दरख्वास्त करूंगा, मैंने पहले मंत्री महोदय को इसी के बारे में चिट्ठी भी लिखी कि आप नेशनल लाइब्रेरी को जो ऑटोनोमस स्टेटस देना चाहते हैं, उसके चलते सरकार की क्या योजना है?वह हम लोगों को मालूम होनी चाहिए, लेकिन पार्लियामेंट के अन्दर सरकार की तरफ से नहीं बताया जा रहा है। ऑटोनोमस स्टेटस देने से क्या उपलब्ध होगा, नेशनल लाइब्रेरी के अन्दर क्या स्थिति बनेगी, पता नहीं।

कुछ एडमनिस्ट्रेशन की भी प्राब्लम है।

MR. CHAIRMAN : Shri Samik Lahiri, you are repeating what has already been stated in the Statement of Objects and Reasons of the Bill. Please conclude now.

SHRI SAMIK LAHIRI : Sir, I am winding up. मेरा इतना ही निवेदन है कि इन सारी बातों को ध्यान में रखते हुए मंत्री जी अपनी राय सदन के सामने रखेंगे। यही उम्मीद करते हुए मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।

डा. रघुवंश प्रसाद सिंह (वैशाली): सभापति महोदय, सरकार ने दावा किया है कि सन १९९८ में पी.सी. जैन ने जो अनुशंसा की, उसके आधार पर यह निरसन बिल लाकर इम्पीरियल लाइब्रेरी एक्ट को खत्म कर रहे हैं। चार वर्ष विलम्ब क्यों किया गया ?

SHRI SAMIK LAHIRI : Many important books are etting destroyed in the National Library.

SHRI JAG MOHAN: I do not have to go into this. There was a report in the Press. An enquiry has been held and only one or two persons have been found to be guilty. No book has been destroyed as a result of this; only some covers were burnt by some disgruntled elements… (Interruptions) I will send him a copy of that.

I request that the Bill be passed.

MR. CHAIRMAN : The question is:

"That the Bill to repeal the Imperial Library (Indentures Validation) Act, 1902, be taken into consideration."