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Lok Sabha Debates

Discussion On The Motion Of Thanks On The President’S Address, Moved By Smt. ... on 8 February, 2021

Seventeenth Loksabha an> Title: Discussion on the Motion of Thanks on the President’s Address, moved by Smt. Locket Chatterjee and seconded by Dr. Virendra Kumar. Amendments were moved and negatived (Discussion not concluded).

 

HON. SPEAKER : Shrimati Locket Chatterjee.

SHRIMATI LOCKET CHATTERJEE (HOOGHLY): Hon. Speaker Sir, I rise to move that the Members of the Lok Sabha assembled in this Session are deeply grateful to the President for the Address which he has been pleased to deliver to both Houses of Parliament assembled together on January 29, 2021. …(Interruptions)

प्रो. सौगत राय (दमदम): सर, यह बात तो माननीय सदस्या पहले भी बोल चुकी हैं ।

माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्यगण, आप वरिष्ठ सदस्य हैं, उनका भाषण शुरू हुआ था और कंटिन्यू चल रहा था, बीच में अवरोध आया था और उस समय मैंने कहा था कि इनका भाषण आगे कॉन्टिन्यू रहेगा । मैंने यह व्यवस्था दे रखी है ।

श्रीमती लॉकेट चटर्जी : सर, मैंने चर्चा शुरू की थी, लेकिन हाउस एडजर्न हो गया था ।

मैं राष्ट्रपति जी को प्रणाम करती हूं, प्रधान मंत्री जी को प्रणाम करती हूं और मैं उनको हृदय से धन्यवाद करना चाहूंगी कि उन्होंने हमारी सरकार के सभी अच्छे कामों का उल्लेख किया है । उन्हीं के दिखाए पथ पर चल कर, हमारा यह सदन, इस नए दशक में प्रवेश कर रहा है । Prime Minister Modi Ji, on Netaji’s 125th birth anniversary, has decided to celebrate this birthday on 23rd January as Parakram Diwas every year. वर्ष-2021 एक बहुत ही ऐतिहासिक साल है, क्योंकि इस साल में हम आज़ादी की 75वीं वर्षगांठ में प्रवेश कर रहे हैं । मैं उस आजादी के लिए, अपनी जिंदगी देने वाले उन लोगों को इस सदन के माध्यम से प्रणाम करती हॅूं । हमारा देश ही एक ऐसा देश है, जो इतनी भाषाओं से, इतने राज्यों से, इतने धर्मों से, इतनी विचारधाराओं से, इतने समुदायों से विभक्त है, लेकिन हमारे संविधान और हमारे सदन से जुड़ा हुआ है ।

*“Different languages, different opinions, different attire see the unity in diversity. ”* कश्मीर से धारा-370 हटाना, नोटबंदी का बड़ा फैसला लेना, जीएसटी लागू करना, किसान के हित में बड़ा फैसला लेना, कोरोना के समय मुश्किलों में बड़ा फैसला लेना, यह हमारी सरकार ने किया है ।

*We have just witnessed the natural calamity of Uttarakhand.  Central Government is continuously trying to help the affected people of the state and I thank the Government for that.* इस कोविड-19 से जंग लड़नी सिखाने वाले उन डॉक्टर्स और नर्सों को, जिन्होंने हमारे लिए अपने परिवार को छोड़ कर भगवान के रूप में देशवासियों की जान बचाई है, हम लोग इस सदन के माध्यम से उनको प्रणाम करते हैं । लेकिन बहुत से लोग हमारे बीच में नहीं हैं । कोरोना ने उनकी जान ले ली है । इसलिए हम उनके परिवार के लिए विनम्र संवेदना रखते हैं । हमारे छह आदरणीय सांसद, जिन्होंने काम करते-करते, कोरोना के समय प्राण दे दिए हैं, हम उनके परिवारों के साथ खड़े हुए हैं ।

*Firstly, I must mention the name of Shri Pranab Mukherjee.  The Corona pandemic took away his life; we have lost the pride of Bengal and the nation.  Whatever he has done, his achievements will be written in golden letters in history.  We have lost our guardian of Bengal.  As a President, he has always guided Bharatiya Janata Party,  just like a guardian and BJP has conferred the highest civilian award Bharat Ratna on him and there was no political interest involved.  Pranab Mukherjee ji has always talked about Hon. Prime Minister Modi ji and also appreciated his work and said that he has earned and achieved the Prime Ministership.* अपने से विपरीत विचारधारा के इंसान के दिखाए हुए पथ पर चल कर, उन्हें सम्मान दे कर देश के लिए सेवा करना ही डेमोक्रेसी है । …(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्य, एक मिनट रुकिए ।

…(व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्यगण, कांग्रेस के सदन के नेता, आप अपने माननीय सदस्यों को समझाएं और यह गरिमा बनाए रखें कि जब भी कभी बोलें एक दूसरे को टोका-टाकी नहीं करें । जिसको बोलना है, यहां बोलने की स्वतंत्रता है ।

SHRI HIBI EDEN (ERNAKULAM): Sir, it is my right. …(Interruptions) She is misleading the Parliament.…(व्यवधान)

HON. SPEAKER: No. … (Interruptions)

माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्य, बोलिए ।

…(व्यवधान)

         

श्रीमती लॉकेट चटर्जी : यह हम मोदी जी से दिन-रात सीखते हैं । हम सब बहुत ही भाग्यशाली हैं कि इस नए भारत की नींव, इस नए दशक में हम सब आदरणीय प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में इस सदन के माध्यम से रख रहे हैं । … * को डैमोक्रेसी का लेसन सीखने की बहुत जरूरत है ।  …(व्यवधान)

महोदय, एक लीडर वही होता है, जो कठिन परिस्थिति में सही निर्णय ले कर अपने लोगों को सही दिशा दिखाता है । मोदी जी के नेतृत्व में हमारी इकोनॉमी अच्छी गति से चल रही थी । लेकिन लॉकडाउन जैसा कठिन फैसला लेना इतना सरल नहीं था । परंतु देश के अभिभावक होते हुए, देश के हित में, उन्होंने देशवासियों की जान बचाई । उन्होंने बार-बार कहा कि जान है तो जहान है । जान है तो जहान है ।

          Vivekananda said, “In a conflict between the heart and brain, follow your heart.” मोदी जी अपनी जिन्दगी में विवेकानन्द को जीते हैं, इसलिए प्रगतिशील पुरुष होने के बावजूद एक दौड़ती हुई इकोनॉमी को रोक कर करोड़ों-करोड़ देशवासियों की जान बचाई । उन्होंने ऐसी मुश्किल परिस्थिति में दिमाग की नहीं, दिल की बात सुनी, हृदय की बात सुनी । यह मोदी जी की दूर दृष्टि है, जिसने ‘जनता कर्फ्यू’ लाकर पूरे देश को घर में रहने के लिए तैयार किया था । स्वास्थ्यकर्मी, जो आगे आने वाले दिनों में योद्धा बनने वाले थे, उन्हें सम्मान देना भी हम लोगों को सिखाया है । जब कोरोना वायरस हमारे देश में प्रवेश किया था, उसके कुछ दिनों बाद ही हमारे प्रधान मंत्री जी ने मिनिस्टर्स की एक हाई प्रोफाइल टीम बनाकर कोरोना के खिलाफ लड़ने के लिए लगा दिया था ।

**I am reminded of Kolkata when there was plague in the city, hundreds of people were dying.  Vivekananda and sister Nivedita jumped into that fight against plague.  He said, “now don’t think of any other religion, now is the time for only one religion, i.e. service to humanity – no religion, no politics, only one motto – humanity”.  They had to save the people as people are Gods.  Similarly during Corona pandemic, lakhs of Vivekanandas and Niveditas devoted themselves to the service of the people in hospitals and streets.   I pay my respect to them.** 130 करोड़ आबादी वाले देश में डेथ रेट केवल 1.44 पर्सेंट है, यानी कि इस सरकार का सक्सेस रेट है - 98.56 पर्सेंट । क्या इसे भी आप नाकामी का आँकड़ा कहेंगे?

          आप भूटान, नेपाल जाइए, श्रीलंका जाइए, बांग्लादेश जाइए । उन सब देशों ने हमारे प्रधान मंत्री जी को, केन्द्र सरकार को धन्यवाद दिया है । सिर्फ पड़ोसी देश ही नहीं, बल्कि मोरक्को, मॉरिशस, बहरीन, ब्राजील, इन देशों को 55 लाख से ज्यादा वैक्सीन भारत भेज चुका है । ब्राजील के राष्ट्रपति जी ने तो मोदी जी की तारीफ की । उन्होंने कहा कि लक्ष्मण के लिए संजीवनी बूटी जैसा वरदान लेकर मोदी जी पहुँच गए । इन सभी देशों ने भारत के प्रधान मंत्री को इस ‘वैक्सीन मैत्री’ और जीवन के अनमोल तोहफे के लिए धन्यवाद किया है । किसी ने भविष्यवाणी की थी कि कोरोना के टाइम में इंडिया में रोज लाखों-करोड़ों लोगों की मृत्यु होगी, लेकिन वास्तविकता यह है कि इंडिया में सबसे बड़े टीकाकरण की प्रक्रिया ऑलरेडी शुरू हो चुकी है और वह भी टीका ‘मेड-इन-इंडिया’ है । जो कोवैक्सीन कोविशील्ड है, वह भी ‘मेड-इन-इंडिया’ है, ‘आत्मनिर्भर भारत’ है । वास्तविकता यह है कि 40 लाख से ज्यादा लोगों को हम लोग वैक्सीन दे चुके हैं । इस वैक्सीनेशन प्रोग्राम को देखते हुए मुझे शुरुआत के वे दिन याद आते हैं ज‍ब कोरोना शुरू हुआ था, उस समय मास्क, पी.पी.ई. किट्स बनाने वाले कोई नहीं थे । लेकिन, मोदी जी ने उस समय नारा लगाया था, आपदा को अवसर में बदल देने की प्रेरणा दी थी और ‘आत्मनिर्भर विजन’ का नारा दिया था । सिर्फ दो ही महीने में हमारे यहां रिकॉर्ड पी.पी.ई. किट्स, मास्क्स, वेंटिलेटर्स, लैबोरेट्रीज़ बनाकर देशवासियों को कोरोना के खिलाफ लड़ने के लिए ताकत दी । शुरुआत में तो पी.पी.ई. किट बनाने वाली कोई कम्पनी नहीं थी, लेकिन अभी भारत में पी.पी.ई. किट्स बनाने की 600 से ज्यादा कंपनीज़ हैं । शुरुआत में मास्क की सिर्फ तीन कम्पनीज़ थीं, लेकिन अभी तीन हजार से ज्यादा कंपनियां हैं । हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन का उत्पादन भारत में सबसे ज्यादा होता है । अभी भी कई देशों में हम ये टैबलेट्स भेजते हैं । होम कमेटी के चेयरमैन ने भारत सरकार के कोविड-19 की मुकाबला की तारीफ करते हुए कहा है, and, I quote:

“The Committee appreciates the efforts made by the Government for the management of COVID-19 Pandemic and understands that the primary effect of nationwide lockdown was to have a uniform set of regulations, to delay peak infections and provide time to the health system to mop up adequate health care infrastructure  …..”             हमने 80 करोड़ लोगों को लॉकडाउन के दौरान फ्री में राशन दिया है, इसलिए मैं मोदी जी को धन्यवाद देती हूँ और मैं देश के किसान लोगों को धन्यवाद देती हूँ । वन नेशन – वन कार्ड से सम्मानित करने की प्रक्रिया अभी शुरू की गई है । बंगाल में 6.5 करोड़ से ज्यादा लोगों के लिए राशन केन्द्रीय सरकार ने भेजा था, लेकिन बंगाल जाकर उसके नाम का भी परिवर्तन हो गया । वह खाद्य-साथी हो गया । सेन्ट्रल गवर्नमेंट की तरफ से जो स्कीम जाती है, प्रधानमंत्री आवास योजना बंगाल जाते-जाते वह बांग्ला आवास योजना हो जाती है । केन्द्र सरकार की स्वच्छ भारत योजना राज्य सरकार के पास जाते-जाते निर्मल बंगाल हो जाती है । अभी खाद्य-साथी हो गया । अभी केन्द्रीय सरकार ने जो अच्छे क्वालिटी का चावल भेजा था, हमारे बंगाल में आते-आते उसकी क्वालिटी चेंज हो गई । वहाँ चावल की क्वालिटी चेंज हो जाती है, स्कीम चेंज हो जाती है और सब कुछ चेंज हो जाता है । वहाँ केन्द्रीय सरकार ने जो चावल भेजा था, वह चावल … * में चला गया । …(व्यवधान) सब लोग बोलते हैं । बंगाल की जनता ने स्लोगन दिया है । इस टाइम में नया स्लोगन है । …(व्यवधान) आप सब लोग सुनिए । यह बहुत अच्छा स्लोगन है और सुनने में बहुत अच्छा लगेगा ।…(व्यवधान) *... is no longer required.
31 हजार करोड़ रुपये 21 करोड़ गरीब महिलाओं के जनधन खातों में गई है । 14 करोड़ गैस सिलेंडर देने का काम हमारी सरकार ने पैनडेमिक के समय किया है । यह हमारे लिए गर्व की बात है ।…(व्यवधान)

**The way in which at the time of Corona, the Central Government has helped the people I am reminded of the poem of Rabindra Nath Tagore.  He says:-

“Come to me in forms varied and various In fragrances, colours and songs Come in my joy and sorrow Come in all my daily chores Even when all the activities end”**                    अगर आप राजनीति करते हैं तो आप हमारे साथ कीजिए, लेकिन किसान के साथ नहीं कीजिए । किसान को सब कुछ ठीक से दे दीजिए ।
          **Had there been no COVID-19, we would have not known that 50 lakh labourers have gone out of Bengal in search of work.  There is no industry in Bengal; in the last ten years, not a single industry has been inaugurated by Didi.**   माननीय अध्यक्ष: दादा, जब आप भी बोलेंगे तो ये सब टोका-टाकी करेंगे, फिर मैं किसी को नहीं रोकूँगा । जब आप बोलेंगे तो मैं किसी को भी टोका-टाकी नहीं करने दूँगा ।
…( व्यवधान)
प्रो. सौगत राय: क्या आप इनको उत्साह दे रहे हैं? …(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: जब आप बोलेंगे तो उस समय किसी को भी टोकने नहीं देंगे ।
          माननीय सदस्य, आप बोलिए ।
…( व्यवधान)
श्रीमती लॉकेट चटर्जी: *I condemn this Government.*           हमारी सरकार  ने देश को 22 नए एम्स दिए हैं और 100 से ज्यादा मेडिकल कॉलेज दिए हैं । इससे 50 हजार नए शिष्य मेडिकल एजुकेशन में बढ़े हैं । अगर यह महामारी नहीं होती तो हम लोगों की समझ नहीं आता कि डॉक्टर्स व नर्सों की कितनी जरुरत है । आजादी के बाद किसी ने डॉक्टर्स के लिए नहीं सोचा था, लेकिन मोदी जी ने डॉक्टर्स के लिए सोचा है । बंगाल के कल्याणी में भी एक एम्स केन्द्रीय सरकार ने दिया है । इसके लिए मैं बंगाल की तरफ से मोदी जी को धन्यवाद देना चाहती हूँ । बजट में भी 25 हजार करोड़ रुपये बंगाल के विकास के लिए दिए गए हैं । हमारे नॉर्थ बंगाल के चाय बगान है । टी गार्डेन में हमारी जो महिला श्रमिक हैं, वे ज्यादा काम करती हैं । उनके विकास के लिए भी 1000 करोड़ रुपये दिए गए हैं । मुझे लगता है कि नॉर्थ बंगाल में जो वूमन ट्रैफिकिंग होती है, वह थोड़ा-सी कम होगी ।
          प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के माध्यम से 70,000 करोड़ रुपये डीबीटी के माध्यम से 42 करोड़ बेनिफिशरिज़ के खाते में पहुँच गए हैं । आज पैसे गरीबों तक पहुँचने से पहले घूमते नहीं है, बल्कि सीधे उनके पॉकेट में पहुँच जाता है । यह हमारी सरकार का फर्क है । 2,800 करोड़ रुपये नेशनल सोशल असिस्टेन्स के माध्यम से वृद्धा, विकलांग और विधवा तक पहुँचा है । जिसका संसार में कोई नहीं है, उसका संसार में मोदी जी की सरकार है । हमारे श्रमिकों को 5,000 करोड़ रुपये दिए गए हैं । उन्हें जॉब कार्ड देने की सोच हमारी सरकार ने की है । श्रमिक स्पेशल ट्रेन में करोड़ से ज्यादा लोगों को घर वापस भेजने का काम हमारी सरकार ने किया है ।
          *So, I think, we should forget all disgrace and move towards a self-reliant India.  In the words of Rabindranath, “Cremate the rubbish of futile soul Ignite the fire, ignite the fire Traversing dark alleys at night, all I need is light”* केन्द्र सरकार ने जो श्रमिक स्पेशल ट्रेन भेजी थी, उस ट्रेन का नाम …**  ने “कोरोना एक्सप्रेस” बोल दिया था । जिनके वोट से सरकार बनाते हैं, उनका अपमान भी करते हैं । धिक्कार जाए ऐसी सरकार पर ।
ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस में हम लोग अभी 65 से 34 पर वर्ल्ड टूरिज्म में हैं । मैं मंत्री जी को धन्यवाद देती हूं । पहले हमारे देश में केवल दो मोबाइल फैक्ट्रीज़ थीं । अभी हमारा देश मोबाइल के क्षेत्र में सेकेंड लार्जेस्ट प्रोड्यूसर हो गया है । 21 करोड़ गरीबों को प्रधान मंत्री सुरक्षा बीमा योजना से जोड़ने का काम हमारे मोदी जी ने किया है । 9.5 करोड़ लोगों को प्रधान मंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना देने का काम हमारी सरकार ने किया है । मोदी जी ने देश के छोटे-छोटे बच्चों को एक नये तरीके से उड़ना भी सिखाया है । न्यू एजुकेशन पॉलिसी में बच्चे अपनी पसंद के सब्जेक्ट ले सकते हैं । अगर सैशन के बीच में उनको कोई प्रॉब्लम हो तो वे उसे चेंज भी कर सकते हैं । यह दु:ख की बात है  कि पश्चिम बंगाल ने इस एजुकेशन पॉलिसी को रोक दिया है । प्रधान मंत्री श्रम योगी मानधन योजना के माध्यम से हमारे घर की काम करने वाली, ड्राइवर और इस्त्री वाला भी पेंशन पाए, इसकी चिंता भी मोदी जी ने की है । अगर टॉयलेट बनाना इतना छोटा काम होता तो आजादी के 75 साल बाद क्यों सरकार को 10 करोड़ से ज्यादा टॉयलेट बनाने पड़ते? बताइए, अगर बैंक एकाउंट खोलना छोटा काम होता तो आजादी के 75 साल बाद क्यों 41 करोड़ से ज्यादा बैंक एकाउंट्स इस सरकार को खोलने पड़ते? आज हमारे अगले प्रजन्म के विद्यासागर को लैंप पोस्ट के नीचे बैठकर पढ़ना नहीं होगा, क्योंकि आज हमारी सरकार ने 2.5 करोड़ फ्री इलेक्ट्रिसिटी कनेक्शंस गरीबों को दिए हैं । उनके घरों में 36 करोड़ एलईडी बल्ब देने का काम मोदी जी ने किया है । आज लोगों को कनेक्टिविटी चाहिए । उसके लिए देश को ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ने का काम भी इस सरकार ने किया है ।
‘वोकल फॉर लोकल’ हमारे आत्मनिर्भर भारत का स्लोगन है । अगर लोकल के लिए हम लोग वोकल नहीं होंगे, तो आत्मनिर्भर भारत नहीं बना पाएंगे ।
 
*Modiji has given lots of respect to the farmers.  In the words of Jatindranath Sengupta:
“Now I have understood without the farmers,  Nation building will not be possible,  Listen labourers, farmers listen  All the love and affection we have in our hearts We shall spread unsparingly at your doorsteps” Modiji has always taken along the farmers with him.  If food growers are not happy, the country cannot prosper.  He has always given priority to the farmers.  Similarly, he has given priority to the fishermen as well.  He has done a lot for the fishermen.  I am mentioning this because we all know that Bengalis relish fish and rice.  Fish is their staple diet.  So we shall be grateful to Hon. Prime Minister for his gesture. * आज देश की महिला को टॉयलेट देकर सम्मान देने का काम मोदी जी ने किया है । उनको एकाउंट्स में पैसा देकर, उनका सशक्‍तीकरण करके उन्हें सम्मान देना, यह काम मोदी जी ने किया है । उज्ज्वला योजना के माध्यम से गैस सिलेण्डर देना, उसको सम्मान देना, यह मोदी जी ने किया है । रक्षा के क्षेत्र में आज महिला नये-नये दायित्व पा रही है । यह भी मोदी जी की सरकार ने किया है । हमारे राज्य की गुरू मां कमली सोरेन को पद्मश्री से सम्मानित किया गया है । इसमें कोई राजनैतिक स्वार्थ नहीं है । इस टाइम में, पश्चिम बंगाल में सात लोगों को पद्मश्री पुरस्कार मिले हैं । इसमें कोई भी राजनैतिक स्वार्थ नहीं है । यह भी हमारे मोदी जी ने किया है । प्रैगनेंट महिला के पास खड़ा होना, महिला को फास्ट ट्रैक कोर्ट में उचित विचार देना, यह भी हमारे मोदी जी ने किया है । तीन तलाक के खिलाफ कानून लाकर हमारी मुसलमान बहनों को सम्मान देना, यह भी हमारे मोदी जी ने किया है । बंगाल में एक के बाद एक रेप, अत्याचार होता है ।…(व्यवधान)    इसलिए जब उत्तर प्रदेश में होता है तब …* सांसद लोगों को भेज देती हैं, जब मध्य प्रदेश में होता है तो सांसद लोग उधर चले जाते हैं । लेकिन बंगाल में हर दिन एक के बाद एक महिला लोगों के ऊपर अत्याचार होता है । … *  एकदम साइलेंट मोड में हैं, सांसद लोग एकदम साइलेंट मोड में हैं । आप देखिए, कुछ दिन पहले, तीन दिन हो गए हैं । सेंट्रल कोलकाता में नौ साल की लड़की का रेप करके हत्या कर दी गई, ऐसा हमारे बंगाल में होता है । … *  एकदम साइलेंट मोड में है । बंगाल में माँ दुर्गा, माँ सरस्वती और माँ लक्ष्मी है और पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं के वे साथ हैं ।
          प्रधानमंत्री ने ‘आयुष्मान भारत’ में पांच लाख रुपये तक फ्री में गरीब लोगों का इलाज करने के लिए दिया है । पश्चिम बंगाल में चौबीस हजार हॉस्पीटलों में सुविधा मिलती है, लेकिन ‘आयुष्मान भारत’ बंगाल में रोक दिया गया है क्योंकि आयुष्मान भारत से दीदी सरकार को कट मनी नहीं मिलती है, इसलिए रोक दिया है । उन्होंने एक ‘स्वास्थ साथी’ कार्ड बनाया है । ‘स्वास्थ साथी’ नाम दिया है, न है पैसा, न है इलाज । ‘स्वास्थ साथी’ कार्ड लेकर बहुत सारे पेशेंट्स टीवी में भी आता है, बहुत पेशेंट्स एक-एक हॉस्पीटल में जाते हैं लेकिन हॉस्पीटल के लोग बोलते हैं कि इसमें इलाज नहीं होगा, इसमें पैसा नहीं है, कुछ भी नहीं है । बंगाल की जनता ने इसको नाम दिया है, बैर्थो साथी इसका नाम है । वोट आ गया है, इसलिए एक-एक चालाकी, एक-एक वोट के लिए मानुस को बोका बनाने की एक स्ट्रेटजी है ।
          मोदी जी की सरकार ने किसानों के लिए ऐतिहासिक फैसला लिया है । आत्मनिर्भर भारत मतलब आत्मनिर्भर किसान, स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिश को फॉलो करके एमएसपी में वृद्धि हमारी सरकार ने की है । प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के जरिए किसानों तक एक लाख चौदह हजार रुपये डॉयरेक्ट ट्रांसफर हुआ है लेकिन बहुत दुख की बात है कि पश्चिम बंगाल में चौहतर लाख किसान हैं, लेकिन स्टेट गवर्नमेंट ने उनका नाम केन्द्र सरकार को नहीं भेजा है इसलिए किसानों के पास वह पैसा नहीं पहुंचा है ।
प्रधानमंत्री ने बोल दिया है कि अगर भारतीय जनता पार्टी की सरकार मई महीने में आ जाएगी तो पुराना पैसा चौदह हजार करोड़ रुपये भी दे देंगे । अभी किसान लोग अपेक्षा कर रहे हैं । अगर आपको राजनीति करनी है तो हमारे साथ कीजिए । लेकिन ‘आयुष्मान भारत’ और ‘किसान सम्मान निधि’, किसान के साथ बंगाल की जनता के साथ राजनीति मत कीजिए, अगर आपको नाम चेंज करके देना है तो दे दीजिए, हवाई चोटी स्टैम्प लगाकर भी दे दीजिए । उनका अधिकार उनको दीजिए, आपको देना पड़ेगा । एक सौ से अधिक ‘किसान रेल’ के माध्यम से सब्जी, फल और मछली देश के कई जगहों तक पहुंचाया जा रहा है । 
*Without the farmers, the country can never progress.  In the words of Bankim Chandra, “Are you and I the country? Are we all?  And what about these few farmers?  If you make an estimate, they constitute the nation.  Majority of the countrymen are agriculturists.  Of what use are we?  If the farmers are annoyed, where shall we go?  What will happen?  If no good happens to them, no good will happen to the country.”  …**has done no welfare for the farmers.  … ** had … ** the cultivators.  They are now shedding tears in Bengal due to the … ** of the Government.When at the Singhu border * जब आंदोलन होता है, तब …** जी की सरकार सब सांसदों को गाजीपुर भेज देती है, लेकिन दस साल हो गए किसान लोग बंगाल में रो रहे हैं, उनके लिए कुछ भी नहीं है । उनके लिए एकदम साइलेंट मोड में हैं । अभी भी बंगाल में 40 दिन हो गए हैं, कोलकाता में विकास भवन के सामने पेरा टीचर्स लोग आंदोलन कर रहे हैं । उनके माथे पर छत भी नहीं है । … *की सरकार साइलेंट मोड में है, क्यों? …* की सिंडीकेट जो कंपनी है, उसको वहां सैलरी से … * नहीं मिल रही है ।
**Farmers of Singur are crying, farmers of Nandigram are crying. There are no agricultural activities in Bengal, no industrial activities in Bengal; and the Government is making tall claims about farmers.  At least, the Trinamool Government of Bengal should not say anything about farmers.  Prime Minister Narendra Modiji has always taken care of the farmers.** अम्फान साइक्लोन के लिए मोदी जी ने पैसा भेजा था । लेकिन वह पैसा भी … * में चला गया । आप लोग सोचिए, क्या किसी राज्य में ऐसा होता है कि बड़ा फार्म छपा था, उसमें क्या लिखा था – जिसके पास पैसा चला गया है वह वापस दे दीजिए । जो प्रभावित हैं, उनके पास तो पैसा नहीं गया था । बांग्ला की जनता को मालूम हो गया था कि यह पैसा … * में चला गया है, इसलिए तो इतना फार्म छपा था कि पैसा सब लोग वापस दे दो ।
**People said, ‘… *, no longer required’; for Amphan cyclone, people said, ‘… *, no longer required’; people said, ‘… *, no longer required’. ‘… *, no longer required’. now its like ‘… *, no longer required.’ ** वैक्सीन को लेकर भी राजनीति हो रही है । आप सोचिए, घर-घर में इतनी बड़ी चिट्ठी भेजी है कि राज्य सरकार फ्री में वैक्सीन दे रही है । ऐसा लगता है कि कालीघाट में वैक्सीन उनके घर में हो रही है और पाइप से पूरे देश में जाती है । ऐसा लग रहा है, इन्होंने चिट्ठी दी कि राज्य सरकार फ्री में वैक्सीन दे रही है । इसे लेकर भी राजनीति है । केंद्रीय सरकार ने गाड़ी भेजी थी, उनके … * ने वैक्सीन की गाड़ी को बर्धमान में रोक दिया था ।
 
माननीय अध्यक्ष :  किसी भी सदन के नेता जो यहां सदस्य नहीं हैं, उनके नाम मत लीजिए ।
…(व्यवधान)
श्रीमती लॉकेट चटर्जी: जी, सर ।
          *I am proud that I belong to the land of Bengal, land of Dr. Shyama Prasad Mukherjee.  He dreamt of doing away with Article 370.* सरकार का बांग्ला को सिलिकॉन वैली बनाने का प्लान था । **From D.Litt. degree of …** to MBA of … **, all these are proof of the lesson of … ** they learnt.  Cattle graze in the Silicon Valley of Bengal today.
हमने अंडरवर्ल्ड की कहानी बॉलीवुड फिल्मों में देखी है, बहुत सी फिल्मों में दाऊद, छोटे शकील का नाम सुना है । हमने देखा है- तोलाबाज़ी, स्मगलिंग, खूनखराबा । अभी तो बंगाल में … ** खिदिरपुर, मटियाबुर्ज में है । कालीघाट के आसपास भी है । सब लोगों को मालूम हो गया है कि तोलाबाज़ कौन है, … ** है, … ** कौन है, …** है, … ** कौन है, … ** है । हम लोग जानते हैं कि कोयला स्कैंडल में जो आदमी अभी सीबीआई के पास है, वहां से भी पैसा… ** के परिवार के एकाउंट में चला गया है । यह एकाउंट कहां है? यह एकाउंट थाईलैण्ड में है । मीडिया के पास रिसीट आ गई है, आप देख सकते हैं । थाईलैण्ड, जिधर से गोल्ड स्मगलिंग हुई थी, वह भी है ।
          हमारी पार्टी के 140 कार्यकर्त्ताओं का खूनी कौन है, … ** है । तुष्टिकरण की राजनीति कौन करता है, … ** करती है । 30 परसेंट की राजनीति कौन करता है, वह भी तृणमूल सरकार करती है । राम-सीता को लेकर राजनीति कौन करता है, वह भी … ** करती है । राम-सीता को लेकर राजनीति कौन करता है, वह भी … ** करती है । इधर के सांसद लोग राम-सीता का अपमान करते हैं । हम जानते हैं कि राम मंदिर बन रहा है, इसमें पूरे देश ने खुद को सौंप दिया है, लेकिन बंगाल में राम-सीता का अपमान करते हैं । 2021 में जनता इसका जवाब देगी ही देगी ।
जय श्री राम को लेकर राजनीति हो रही है । जय श्री राम क्या गाली है? जब कोई जय श्री राम बोलता है, तो गाली समझकर उसको गिरफ्तार कर लेते हैं । …(व्यवधान) जब बंगाल की जनता जय श्री राम बोलती है, उसको गिरफ्तार कर लेते हैं । जय श्री राम सिर्फ बीजेपी का नारा नहीं है, पूरे देश का नारा है । सभी लोगों ने रामायण पढ़ी है । सभी लोगों ने महाभारत पढ़ी है । …(व्यवधान) राम नवमी में जब हमने जय श्री राम बोला था, तो उसके लिए अभी तक हमारे ऊपर केस चल रहा है । दुर्गा पूजा विसर्जन करने के लिए कोर्ट से परमिशन लेनी पड़ती है । अभी सरस्वती पूजा होने वाली है । बंगाल में कहीं-कहीं तो सरस्वती पूजा को बंद कर दिया गया है ।
When people of other political parties are not allowed to stand for Panchayat elections in Bengal and elections are rigged by the … *in broad daylight, it is called erosion of electoral democracy, and when helicopters of India’s Home Minister, Shri Amit Shah ji, are not allowed to land in Bengal, it is erosion of electoral democracy.
मैं एक छोटी-सी शायरी बोलने की कोशिश कर रही हूं:
          “औरों के ख्‍यालात की लेते हैं तलाशी, और अपने गिरेबान में झाँका नहीं जाता, बड़े से बड़ा तानाशाह भी शर्मिदा है जिनकी हरकतों से, वे लोग हमको यह नसीहत दे रहे हैं ।”   श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कहा था कि एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे । लेकिन, वहीं बंगाल की मुख्य मंत्री ने चार-चार राजधानी की डिमांड की है । पता नहीं देश को क्या बनाना चाहती हैं । जिस बंगाल को सुहरावर्दी से, जिन्ना से डॉ.श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने बचाया था, उसी बंगाल से बांग्लादेश का ‘जय बांग्ला, जय बांग्ला’ का स्लोगन उठता है । यह तृणमूल का स्लोगन है । हम लोग पश्चिम बंगाल को … * नहीं बनने देंगे । जहां जन्म लिए मुखर्जी, वह बंगाल हमारा है ।
**I am proud that I am a daughter of Bengal, land of Rabindranath Tagore, Ishwarchandra Vidyasargar, Rishi Aurobindo, Subhas Chandra Bose, Dr. Shyama Prasad Mukherjee, Matangini Hajra, Khudiraim Bose, and Maa Sarada, Maa Durga, Maa Kali, Maa Lakshmi, Maa Saraswati.  We want to create and build that golden Bengal by overcoming all atrocities, all corruption.**  किन्तु, प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने भारत का मुकुट कश्मीर से अनुच्छेद-370 को हटाकार श्यामा प्रसाद मुखर्जी का सपना पूरा किया है । **I will again say, I reiterate for the nation, will keep on saying till my last breath.** जय श्री राम, जय श्री राम, जोर से बोलो जय श्री राम । धन्यवाद । …(व्यवधान)
 
डॉ. वीरेन्द्र कुमार (टीकमगढ़): माननीय अध्यक्ष महोदय, श्रीमती लॉकेट चटर्जी के द्वारा राष्ट्रपति के अभिभाषण पर जो धन्यवाद प्रस्ताव रखा गया है । …(व्यवधान)
SHRI HIBI EDEN (ERNAKULAM): Sir, I have a Point of Order. …(Interruptions)
माननीय अध्यक्ष : राष्ट्रपति के अभिभाषण पर प्वांइट ऑफ आर्डर नहीं होता है ।
…( व्यवधान)
SHRI M. K. RAGHAVAN (KOZHIKODE): Sir, please allow him to speak. …(Interruptions)
ADV. DEAN KURIAKOSE (IDUKKI): Sir, he has raised a Point of Order. …(Interruptions)
माननीय अध्यक्ष : क्या सब्जेक्ट है?
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : क्या विषय है? अभी भाषण शुरू हो गया है ।
…( व्यवधान)
डॉ. वीरेन्द्र कुमार : मैं आदरणीय राष्ट्रपति जी द्वारा 29 जनवरी, 2021 को दिए गए अभिभाषण के लिए हृदय से आभार व्यक्त करता हूं । …(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : बैठ जाइए?
…( व्यवधान)
SHRI HIBI EDEN : Sir, it is a Member’s right. …(Interruptions) Sir, it is a right of a Member. …(Interruptions) Kindly allow me. …(Interruptions)
ADV. DEAN KURIAKOSE : Sir, it is a right of a Member. …(Interruptions)
 
डॉ. वीरेन्द्र कुमार : महामहिम राष्ट्रपति ने अपने अभिभाषण में भारत की सुरक्षा, प्रगति, भारत व भारतीयों के विकास के लिए व्यक्तिगत समाज के प्रत्येक अंग को समर्पित आदरणीय प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी की सरकार के द्वारा जो कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, योजनाएं बनाई जा रही हैं, उन सबका विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया है । …(व्यवधान) यह हमारे आदरणीय प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी के ‘सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास’ के मत को प्रदर्शित करता है ।
स्वस्तिः प्रजाभ्यः परिपालयंतां, न्यायेन मार्गेण महीं महीशा:
गो ब्राह्मणेभ्य: शुभमस्तु नित्यं, लोकाः समस्ताः सुखिनोभवंतु ।
 
अर्थात् शासन द्वारा सभी लोगों की भलाई न्यायपूर्वक हो, ईश्वर सभी विद्वानों का…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : ऐसा नहीं होता है ।
…( व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्य, आप वरिष्ठ सदस्य हैं । भाषण के बीच में पाइंट ऑफ आर्डर नहीं होता है ।
…( व्यवधान)
डॉ. वीरेन्द्र कुमार : महोदय, इसी अवधारणा को पूर्ण रूप से मानकर…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : आप किस नियम के तहत बोल रहे हैं?
…( व्यवधान)
डॉ. वीरेन्द्र कुमार  : आदरणीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में सरकार काम कर रही है ।…(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष : वीरेन्द्र कुमार जी, एक मिनट के लिए रुक जाइए ।
…( व्यवधान)
 
माननीय अध्यक्ष : आप बताइए ।
…( व्यवधान)
SHRI HIBI EDEN : Sir, as per Rule 352 of the Rules of Procedure and Conduct of Business in Lok Sabha, a Member while speaking shall not reflect upon the conduct of persons in high authority unless the discussion is based on a substantive motion raised in proper terms.
          Sir, the hon. Member from West Bengal has used the name of the former President, late Pranab Mukherjee saying that he is an advisor to the Bharatiya Janata Party, which should be withdrawn with immediate effect. It is misleading the House. …(Interruptions)
माननीय अध्यक्ष : माननीय सदस्यगण, मैंने माननीय सदस्या का भाषण सुना है । उन्होंने भूतपूर्व महामहिम राष्ट्रपति जी के बारे में कोई भी आपत्तिजनक बात नहीं कही है । लेकिन मैं फिर भी रिकॉर्ड देख लूंगा ।
…( व्यवधान)
डॉ. वीरेन्द्र कुमार : महोदय, आज समाज का प्रत्येक वर्ग और प्रत्येक व्यक्ति प्रधान मंत्री जी की सरकार के किसी न किसी कार्यक्रम से अपने आपको जुड़ा हुआ पाता है । समाज के जो वंचित, पिछड़े और अशक्तजन हैं, उनके उत्थान और विकास के लिए सरकार के द्वारा जो काम किए जा रहे हैं, वे अद्वितीय हैं । आज हम भारत की सुरक्षा की बात करें, चाहे वह बाह्य सुरक्षा हो, आंतरिक सुरक्षा हो, खाद्यान्न सुरक्षा हो, सामाजिक सुरक्षा हो, आर्थिक सुरक्षा हो या अन्य किसी भी प्रकार की   सुरक्षा हो, आदरणीय प्रधान मंत्री जी की सरकार सबको सुरक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है । भारत ने अभी हाल में कोरोना की वैश्विक महामारी के संकट का सामना किया है । इस संकट से निपटने में हमारे केन्द्रीय नेतृत्व व नीतियों का जो प्रभाव है, जो हमारे कोरोना वॉरियर्स हैं, जो हमारी वैज्ञानिक प्रतिभाएं हैं, हमारे देशवासियों का जो मनोबल है, उन्होंने हमें इस संकट से मुक्ति दिलाने में सहायता की है ।
17.52 hrs                           (Shri Rajendra Agrawal in the Chair)           माननीय अध्यक्ष जी, यह संकट अभी पूर्ण रूप से समाप्त नहीं हुआ है । लेकिन मुझे यह विश्वास है कि हम जल्दी ही इस संकट पर विजय प्राप्त कर लेंगे । भारत ने या यूं कहें कि विश्व ने कोविड महामारी जैसी आपदा का सामना कभी नहीं किया था । इस बीमारी ने विकसित और विकासशील जैसे सभी देशों को अपनी चपेट में लिया है । जब इस तरह की आपदा पहले कभी नहीं आई थी, तो उससे निपटने के बारे में कभी भी विचार नहीं किया गया था । लेकिन भारत ने इस आपदा से निपटने के लिए न सिर्फ सुविधाओं और व्यवस्थाओं के प्रबंध जैसा कठिन काम किया है, बल्कि हम भारतीयों की जीवनशैली में बहुत कुछ बदलाव आवश्यक थे ।

          महोदय, शुरुआत में हमारे देश में मात्र चार जांच केन्द्र थे । लेकिन आज देश में कोरोना के लगभग 2,350 कोरोना जांच केन्द्र काम कर रहे हैं । उस समय लगभग 2,500 की दर से प्रतिदिन कोरोना की जांच हो रही थी, लेकिन आज लगभग 12 लाख से भी अधिक टेस्ट प्रतिदिन हो रहे हैं । कोविड से निपटने की व्यवस्थाओं का तेजी से प्रबंधन किया गया है । फिर चाहे वह पीपीई किट्स की बात हो, वेंटिलेटर्स की बात हो, अस्पतालों में बेडों की व्यवस्था करनी हो, दवाइयों की व्यवस्था करनी हो, मास्कों का वितरण करना हो या उन्हें लगाने के लिए लोगों के अंदर जागरूकता पैदा करनी हो, इन सभी चीजों पर बहुत ही तेजी से काम किया गया है । आज हम पीपीई किट खुद बना रहे हैं, वेंटिलेटर्स बना रहे हैं । उस समय देश में एन-95 जैसे मास्कों की कमी थी और हम उनका आयात कर रहे थे, लेकिन आज यह सब कुछ हम भारत में ही बना रहे हैं । भारत में मास्क बनाने की क्षमता में भी कोरोना काल में बड़ी तेजी से विस्तार हुआ है । इस कोरोना काल में घरों में कुटीर उद्योगों में लगे हुए जो सेल्फ हेल्प ग्रुप्स हैं, उनके द्वारा भी कई नागरिकों ने कपड़ों से बने मास्क बनवाए और उनको जरूरतमंदों तक पहुंचाया है । घरों में बैठे हुए कई लोगों को इस काम से रोज़गार भी मिला है । प्रारंभ में कोरोना वॉरियर्स को इस महामारी से निपटने के लिए कैसे तैयार किया जाए, उनका इलाज कैसे किया जाए, इन सभी बिन्दुओं पर स्वास्थ्य मंत्रालय ने बहुत ही अच्छा काम किया है ।    

जहां लगभग पूरा विश्व और उसकी व्यवस्थाएं छिन्न-भिन्न हो रही थीं, सभी का मनोबल टूटा हुआ था, सर्वत्र भय व्याप्त था । ऐसे समय पर हमारे माननीय प्रधान मंत्री जी ने दृढ़ निश्चय लिया और कोरोना की चेन को तोड़ने के लिए संपूर्ण भारतवर्ष में लॉकडाउन का निर्णय लिया था । विश्व के कुछ विकसित देशों जिनमें अमेरिका भी शामिल था, उन्होंने आर्थिक नुकसान को बचाने के लिए अपने यहां लॉकडाउन नहीं लगाया था । आज हम सभी के सामने यह स्पष्ट है, यदि उस समय यह निर्णय नहीं लिया जाता, तो आज भारत की स्थिति क्या होती? यह माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की दूरदर्शिता व कड़े निर्णय लेने की क्षमता को प्रदर्शित करता है कि जिन देशों ने इकोनॉमी  बचाने का प्रयास किया था, उन स्थितियों में उन्होंने बड़ी जनहानि का नुकसान उठाया है । वहीं भारत जैसे देश जिन्होंने जनहानि नहीं होने देने की प्राथमिकता दी और पूर्ण लॉकडाउन जैसे कड़े निर्णय लिए थे, जो कोरोना से लड़ने से सफल सिद्ध हुए हैं ।   

          कई लोगों ने सम्पूर्ण भारत में लॉकडाउन के निर्णय को गलत बताया और आर्थिक प्रगति का भी रोना रोया । माननीय प्रधान मंत्री जी ने स्पष्ट कर दिया था कि सरकार ‘जान है तो जहान है’ के मंत्र के साथ आगे बढ़ेगी । लोगों ने ताली, थाली, दीपक और मोबाइल लाइट जैसे उत्साहजनक कार्यक्रमों का मजाक उड़ाया । ये सभी कार्य भारत की जनता का उत्साह और मनोबल बढ़ाने वाले सिद्ध हुए । महामारी के बीच में सभी ने इन कामों को करके इस बात को प्रदर्शित किया कि आदरणीय प्रधान मंत्री जी के कुशल नेतृत्व में पूरा देश एकजुटता के साथ कोरोना के विरुद्ध खड़ा हुआ है । जो देश प्रगति के पायदान पर खड़े थे, जहाँ पर उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं थीं, वहाँ भी हाहाकार मचा हुआ था । हमारा भारत दुनिया में दूसरा सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश, जहाँ जनसंख्या घनत्व अधिक है, इस बीमारी से निपटने के लिए कुशल नेतृत्व के साथ खड़ा था । लोगों को हाइजीन, सोशल डिस्टेसिंग और मास्क जैसे कार्यों के लिए न सिर्फ प्रेरित किया गया, बल्कि दंड़ात्मक प्रावधानों से भी इन कार्यों को कराया गया ।

          माननीय प्रधान मंत्री जी ने न सिर्फ अपने नागरिकों की चिंता की, बल्कि ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की अवधारणा को पूरा करते हुए अन्य देशों की भी सहायता की और 100 से अधिक देशों को दवाइयां और अन्य सामान उपलब्ध करवाया गया । भारत में इतनी बड़ी जनसंख्या होने के बावजूद भी सही आँकड़े दुनिया के सामने रखे गए और यह दिखा दिया कि यदि नेतृत्व दूरदर्शी और दृढ़ संकल्पित हो तो कठिन से कठिन काम भी किया जा सकता है । समाचार पत्रों में कई जगह ऐसी तस्वीरें आईं, जहाँ पर कई देशों में मृतक सड़क पर पड़े थे, लेकिन उन्हें उठाने वाला कोई नहीं था । मुझे गर्व है कि 135 करोड़ की जनसंख्या वाले देश में एक भी ऐसी घटना घटित नहीं हुई, जबकि कई देशों में नए कब्रिस्तान बनाए गए । भारत ने मृतकों के संस्कार की व्यवस्था पर ही ध्यान नहीं दिया, बल्कि जीवन को कैसे बचाना है, उस पर भी विशेषकर ध्यान दिया । कई देशों में 12 वर्ष से कम उम्र और 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को दवा देना ही बंद कर दिया था । हमने प्रत्येक जीवन की अहमियत समझी और उसको बचाने की पूरी कोशिश की । हमने पूरे भारत में गाँव, गरीब और मजदूर की चिंता की । भारत में ‘गरीब कल्याण योजना’ के माध्यम से सरकार ने पिछले आठ महीनों में 80 करोड़ गरीबों को निशुल्क राशन उपलब्ध करवाया । ‘वन नेशन वन राशन कार्ड’ को भी लागू किया, जिसमें मजदूर जहाँ पर है, वहाँ से वह अपने हिस्से का राशन ले सकेगा और जहाँ पर उसका परिवार है, वहाँ पर उसका परिवार भी राशन ले सकेगा । माननीय प्रधान मंत्री जी ने यह सुनिश्चित किया कि एक भी घर ऐसा न बचे, जहाँ पर चूल्हा न जले और एक भी व्यक्ति भूखा पेट न सोए । इस कार्य में भारत की जनता ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और गरीब, पिछड़े, वंचित और महामारी के कारण बेरोजगार मजदूरों तक भोजन की व्यवस्था पहुंचाई ।

          माननीय सभापति महोदय, माननीय प्रधान मंत्री जी के आह्वान पर देश के कोने-कोने से जो लोग थोड़े सक्षम थे, उन्होंने भी गरीबों, श्रमिकों और कर्मकारों के कल्याण के लिए बीड़ा उठाया । हमने कई स्थानों पर देखा कि छोटे-छोटे बच्चे भी गुल्लक तोड़कर महामारी के विरुद्ध जरूरतमंदों की मदद करने के लिए पीएम केयर्स फंड में पैसा देने से पीछे नहीं रहे । अनेक स्थानों पर बुजुर्ग भी अपनी जमा राशि बैंकों से निकालकर, अपनी एफडी तुड़वाकर पीएम केयर्स फंड में पैसा देने में पीछे नहीं रहे । ऐसी कई कहानियां आज मानव संवेदना के उदाहरण में ही नहीं है, बल्कि सोशल मीडिया पर भी देखने को मिली । इस संबंध में मैं केवल कुछ नाम लेना चाहूँगा, जिन्होंने इस कोरोना काल में कुछ ऐसा किया, जो हमारा साधन सम्पन्न राजनीतिक बुद्धिजीवी वर्ग नहीं कर पाया । आज किसको हैदाराबाद के वैंकटा मुरली के बारे में नहीं पता, आज किसको चैन्नई के श्री पांडा के बारे में नहीं पता, आज किसको गोरेगाँव रेजीडेंट वेलफेयर ऐसोसिएशन के लोगों के बारे में नहीं पता, जिन्होंने इस कोरोना के महामारी के काल में अपने सीमित साधनों से भी गरीबों, श्रमिकों और कर्मकारों की मदद की । इसी संदर्भ में मैं गोवा के ‘दृष्टि लाइफ सेविंग’ की मिस दिव्या शर्मा का भी उल्लेख करना चाहूँगा, जिन्होंने इस विषम काल में मूक जानवरों की मदद करने का बीड़ा उठाया । उस समय मध्य प्रदेश की सीमा पर इन्दौर में एनएच द्वारा महाराष्ट्र से जो मजदूर आ रहे थे, उन मजदूरों के लिए हमने देखा कि वहाँ प्रशासन के साथ-साथ एनजीओ के लोगों ने, वहाँ के नागरिकों ने, वहाँ के व्यापारियों ने वहाँ पर बड़े-बड़े पंड़ाल लगाए थे और उन पंड़ालों में जो लोग महाराष्ट्र से आ रहे थे, उनके ठहरने की, उनके स्नान की, उनको जूते-चप्पल देने की और उनको भोजन करवाने की व्यवस्था की । इन्दौर के नागरिकों ने उनको इतने तरह का भोजन करवाया कि वहाँ से जो लोग होकर जा रहे थे, वे कह रहे थे कि मध्य प्रदेश के लोगों और प्रशासन द्वारा जैसी चिंता की गई उस तरह का दृश्य कहीं पर भी देखने को नहीं मिला । हम मध्य प्रदेश की सीमा, चाहे रीवा की बात करें या छतरपुर में खामा की बात करें, चाहे पन्ना की सीमा की बात करें, चाहे बालाघाट की बात करें या चाहे छिंडवाड़ा की बात करें तो हमने सभी स्थानों पर देखा कि प्रशासन के साथ-साथ नागरिक भी वहाँ से निकलने वाले मजदूरों की मदद करने के लिए आगे आ रहे थे । मैंने देखा कि टीकमगढ़ में हमारे नौजवान, चाहे वह अमित नूना हो, चाहे वह ज्ञानेश सिंह हो, चाहे पूनम अग्रवाल हो, चाहे प्रफुल्ल द्विवेद्वी हो, चाहे मुन्ना साहू हो । ये सभी लोग छतरपुर जिले में दूसरे राज्यों के जितने मजदूर आ रहे थे, उनकी सेवा करने में कहीं भी पीछे नहीं थे । मैंने छतरपुर में देखा कि पुष्पेन्द्र प्रताप सिंह अपने युवा साथियों के साथ गरीब लोग जिनके काम धंधे बंद हो गए थे, उनके घरों में राशन की किट, सूखा आटा, दाल, चावल, सूखा मिर्च मसाला और तेल की किट बनाकर घरों में पहुंचाने की व्यवस्था की गई । छतरपुर से निकले मजदूरों से जानकारी मिली कि उन सभी तक भोजन के पैकट पहुँचाने की व्यवस्था की गई ।   

18.00 hrs मैंने टीकमगढ़ में देखा कि नौजवान एक खुले आपे वैन में चले जा रहे थे, उसमें चारा भरा हुआ था, जहां पर उन्होंने देखा कि जानवर खड़े थे, वहां पर आपे वैन को रोककर, उन बेजुबान जानवरों को चारा देने का काम कर रहे थे । ऐसे दृश्य केवल टीकमगढ़ या छतरपुर या अकेले इंदौर की बात नहीं है, यहां पर हम सभी अपने-अपने  संसदीय क्षेत्रों से आते हैं और मैंने देखा है कि सभी राज्यों में जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ इस काम में बड़ी संख्या में नागरिकों ने आगे आकर मदद करने और कोरोना से लड़ाई लड़ने में सबने अपनी एकजुटता का परिचय दिया । मैं सदन के माध्यम से उन सभी नागरिकों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करना चाहता हूं जिन्होंने पूरे देश में कोरोना से लड़ाई में एकजुटता के साथ इस काम को किया ।

सरकार ने मनरेगा श्रमिकों, विधवाओं, दिव्यांगों, महिलाओं, स्व-सहायता समूहों और अन्य श्रमिकों को डीबीटी के माध्यम से राहत धन पहुंचाया । मैं उल्लेख करना चाहता हूं कि संसद की गृह संबंधी स्थायी समिति ने कोविड-19 महामारी के प्रबंधन पर जो अपनी 229वीं रिपोर्ट पेश की है, मैं कहना चाहता हूं कि इस स्थायी समिति के चेयरमैन भारतीय जनता पार्टी के सदस्य नहीं हैं, वे कांग्रेस के हैं और उन्होंने भी जो रिपोर्ट पेश की है, उसमें सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों एवं कार्यों से समिति संतुष्ट है और कार्यों की प्रशंसा भी उस समिति ने की है । इसी प्रकार, संसद की स्वास्थ्य संबंधी समिति के चेयरमैन भी भारतीय जनता पार्टी के सदस्य नहीं हैं, लेकिन सरकार द्वारा जो काम किए गए हैं और सरकार द्वारा जो निर्णय लिए गए हैं, उनसे समिति संतुष्ट है और कार्यों की प्रशंसा भी स्वास्थ्य संबंधी स्थायी समिति ने की है । यह इस बात को बताता है कि लोगों ने राजनीतिक पूर्वाग्रह से ऊपर उठकर काम किया है । ऐसे लोगों को मैं हृदय से धन्यवाद  देना चाहता हूं, जिन्होंने आदरणीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व में काम किया । जब कोरोना से पूरा विश्व बहुत प्रभावित हुआ था, आदरणीय प्रधानमंत्री जी, स्वास्थ्य मंत्री सम्मानित डॉ. हर्षवर्धन जी, गृह मंत्री अमित शाह जी एवं मंत्रिमंडल के सभी वरिष्ठ सदस्यों की प्रभावशाली नीतियों व कार्यों से हम संकट से लगभग उबर चुके हैं । भारतीय वैज्ञानिकों ने अपनी प्रतिभा का परिचय देकर कोरोना की वैक्सीन बनाई, एक अन्य वैक्सीन का उत्पादन भी भारत में किया जा रहा है । भारत में अन्य वैक्सीनों पर भी तेजी से काम हो रहा है और निकट भविष्य में भी हम अन्य वैक्सीन्स भी बना सकेंगे । हमने ‘सर्वे भवन्तु सुखिन:, सर्वे सन्तु निरामया:, सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चित् दु:ख भाग्भवेत्’ की अवधारणा को सिद्ध करते हुए अपने पड़ोसी देशों एवं कई अन्य देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराई । देश में कुछ लोगों ने इस वैक्सीन पर सवाल उठाकर हमारे वैज्ञानिकों का अपमान किया । वैक्सीन का भी राजनीतिकरण किया गया कि भाजपा की वैक्सीन है, हम इसको नहीं लगाएंगे । इस तरह की हल्की बातें करना वास्तव में इस देश की जनभावना का अपमान है ।

कोरोना काल में भारत में बहुत बड़े पैमाने पर मजदूरों का पलायन हुआ और कोरोना महामारी से व्याप्त भय के कारण देश के हर कोने से श्रमिक अपने घर जाना चाहते थे । कुछ राज्य सरकारों ने ऐसा माहौल बनाया कि मजदूरों को जबरन उनके घर जाना पड़े । कोरोना काल में लॉकडाउन के कारण हमने देखा कि सभी व्यापार और उद्योग बन्द हो गए थे, जिससे मजदूरों की आय के साधन बन्द हो गए थे, उस समय केन्द्र सरकार सभी से अनुरोध कर रही थी कि जो जहां पर है, वहीं पर रहे और उनके राशन-भोजन की व्यवस्था राज्य सरकारों और जिला प्रशासन के माध्यम से सरकार करेगी । लेकिन व्याप्त भय के कारण और आय का साधन न होने के कारण सभी मजदूर अपने घरों को पहुंचना चाहते थे । केन्द्र सरकार के द्वारा 11092 करोड़ रुपये राज्य तथा केन्द्र शासित प्रदेशों को एनडीआरएफ के अंतर्गत जारी किए गए, जिससे प्रवासी मजदूरों के लिए भोजन तथा आश्रय की व्यवस्था की जा सके । सरकार ने प्रवासी मजदूरों के लिए लगभग 38,000 रिलीफ कैम्पों का प्रबंध किया, जिनमें लाखों लोग रुके । इसके अलावा करीबी 26,000 फूड कैम्प खोले गए, जिनमें 1.4 करोड़ लोगों ने खाना खाया । कई मजदूरों के लिए उनके नियोजकों-मालिकों ने भी राशन व खाने का इंतजाम कराया । उस समय देश में जो माहौल बना था, जो डर पैदा हुआ था, उसके चलते कई मजदूर अपने साधनों जैसे साइकिल, ऑटोरिक्शा, पैदल चलकर अपने घर पहुंचना चाहते थे । सरकार एवं अन्य स्वयं-सेवी संस्थाओं, समर्थ लोगों ने उन मजदूरों की यथासंभव मदद की और प्रारम्भिक लॉकडाउन के बाद, कोरोना से बचाव के सभी नियमों का पालन करते हुए सरकार ने श्रमिक स्पेशल ट्रेनों को चलाया । एक अनुमान के मुताबिक 60 लाख से ज्यादा प्रवासी मजदूर लगभग 4500 श्रमिक स्पेशल ट्रेनों के माध्यम से अपने गंतव्य स्थल तक पहुंचे ।

महोदय, मैं बुंदेलखण्ड से आता हूं, बुंदेलखण्ड से बहुत बड़ी संख्या में मजदूर दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, बेंगलुरू, आन्ध्र प्रदेश आदि सभी स्थानों पर जाते हैं । जब वे वहां से लौटकर आए, उनके लौटने के लिए भी मध्य प्रदेश सरकार और उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने-अपने राज्यों के मजदूरों के लिए बसों की व्यवस्था करके, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में लाने की व्यवस्था की । केन्द्र सरकार ने राज्य सरकारों को बसें चलाने की अनुमति दी ताकि प्रवासी मजदूर वापस आ सकें, इस बात के लिए मैं आदरणीय प्रधानमंत्री जी और गृह मंत्री जी को हृदय से धन्यवाद देना चाहता हूं कि उन्होंने इस तरह की अनुमति देकर मजदूरों को उनके घर तक पहुंचाने की व्यवस्था में सहयोग किया । मेरे संसदीय क्षेत्र टीकमगढ़ में जो प्रवासी मजदूर लौटकर आए, कोरोना प्रोटोकाल का पालन करते हुए, उनको अलग से रखा गया और उनके भोजन-पानी की व्यवस्थाएं राज्य सरकार द्वारा की गई । राज्य सरकारों के साथ ही, वहां के जन-मन ने भी बढ़-चढ़कर इस काम में भाग लिया ।

श्रम के क्षेत्र में भी हमारी सरकार ने बहुत बढ़-चढ़कर काम किया है । महात्मा गांधी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी, राम मनोहर लोहिया जी की गरीब, पिछड़े, शोषित वर्ग के उत्थान एवं अंत्योदय की जो अवधारणा है, वह श्रमिकों के उत्थान के साथ भी जुड़ी है । श्रमिक जब आर्थिक, सामाजिक और शैक्षणिक रूप से मजबूत होता है तो भारत स्वयं मजबूत हो जाएगा और प्रगति के नए-नए सोपानों को प्राप्त कर सकेगा ।

 

माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में हमारी सरकार ने अति आवश्यक श्रम सुधार लाने का अभूतपूर्व कार्य किया । लेबर कोड के माध्यम से श्रमिकों के लिए अभूतपूर्व कदम उठाए गए । जो द्वितीय राष्ट्रीय श्रम आयोग है, उसके द्वारा वर्ष 2002 में संस्तुति की गई थी कि श्रम कानूनों को चार या पांच लेबर कोड में परिवर्तित किया जाए । 44 श्रम कानूनों में से 12 कानून निरस्त हो गए थे, शेष 32 कानूनों में से 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को कम करके चार लेबर कोड बनाए गए - मजदूरी संहिता, 2019, उपजीविका जन्य सुरक्षा स्वास्थ्य और कार्य दशा संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता विधेयक, औद्योगिक संबंध संहिता विधेयक ।

हमारी सरकार ने बाबा साहेब अम्बेडकर के सपनों को आगे बढ़ाते हुए वर्ष 2014 में ही श्रमेव जयते को सत्यमेव जयते के जैसे ही महत्व देते हुए, श्रमिक भाई-बहनों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता स्पष्ट कर दी थी । ऐसा नहीं है कि पूर्व की कांग्रेस की सरकारों ने श्रम कानूनों को बदलने का कोई प्रयास नहीं किया, लेकिन वास्तविकता यह है कि पूर्व की कांग्रेस की सरकारों ने समय-समय पर इसमें परिवर्तन तो किए, लेकिन ये परिवर्तन ठीक उसी प्रकार थे, जैसे ग्रामीण क्षेत्रों में चलने वाली जुगाड़ । अब इस जुगाड़ में डीजल इंजन और बैलगाड़ी को जोड़कर उसमें गेयर आदि लगाकर उसको चलने लायक बना दिया जाता है । उससे काम तो होता रहता है, लेकिन वह गाड़ी जैसी बिल्कुल नहीं होती । ऐसी दशा हमारे सभी केंद्रीय श्रमिक अधिनियमों की भी हुई । इन सभी अधिनियमों में विगत वर्षों में इतने ज्यादा पैबंद लगाए गए कि ये न तो श्रमिकों के लिए कोई लाभ पहुंचा रहे थे और न ही नियोक्ताओं को कोई प्रेरणा दे पा रहे थे कि वे देश में काम करने के लिए देश की तरक्की का मार्ग प्रशस्त कर सकें । इन केंद्रीय श्रम अधिनियमों से देश में लिटिगेशन या विवादों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि देखने को मिली, जिससे किसी को लाभ तो नहीं हो पाया, बल्कि इससे जुड़े सभी वर्गों को हानि उठानी पड़ी । इन केंद्रीय श्रम अधिनियमों में समय के साथ मूलभूत परिवर्तन न करने की इच्छाशक्ति के अभाव के कारण ही देश को अभूतपूर्व क्षति उठानी पड़ी, क्योंकि कई केंद्रीय श्रम अधिनियम तो आपस में इतने विरोधाभासी हो गए थे कि इन विरोधाभासों के कारण जहां एक ओर एम्प्लॉई में भारी असंतोष था, वहीं दूसरी ओर एम्प्लॉयर में भी भारी निराशा थी । एम्प्लॉयर व एम्प्लॉई में लगातार टकराव की स्थिति बनी रहती थी और स्पष्ट कानून के अभाव में दोनों को नुकसान उठाना पड़ता था ।

प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना के माध्यम से छोटा काम करने वाले जैसे, जूता सिलने वाले, प्रेस करने वाले, खेतिहर मजदूर, गाड़ी चलाने वाले, ईंट भट्टा मजदूर, मिट्टी के दीपक व खिलौने बनाने वाले, अगरबत्ती बनाने वाले और ऐसे जो छोटे-छोटे मजदूर हैं, उन सब को पेंशन देने का अभूतपूर्व काम किया गया । उपजीविका जन्य सुरक्षा स्वास्थ्य और कार्य दशा संहिता के प्रावधान, जो वर्तमान में केवल फैक्ट्री, खान निर्माण, बागान, बीड़ी, सिगार और मोटर ट्रांसपोर्ट में लगे श्रमिकों पर ही लागू होते थे, अब वह आईटी और सर्विस सेक्टर सहित सभी सेक्टरों के संस्थानों पर समान रूप से लागू होंगे ।

हमने श्रम कानूनों के दायरे में सभी प्रकार के मनोरंजन के माध्यम के श्रमिकों को लाने के लिए ऑडियो-विजुअल वर्कर की परिभाषा का प्रावधान किया । इसी प्रकार से पत्रकारिता के क्षेत्र में भी डिजिटल मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया इत्यादि में काम करने वाले पत्रकारों को भी वर्किंग जर्नलिस्ट की परिभाषा में शामिल किया । पहले श्रम कानूनों की परिभाषा में, प्रवासी मजदूर की परिभाषा में केवल वही श्रमिक आते थे, जो श्रमिक एक राज्य से दूसरे राज्य में लाए जाते थे । ओएसएच कोड में प्रवासी मजदूरों की परिभाषा को सुदृढ़ और व्यापक बनाया गया । अभी ऐसा मजदूर, जिसका वेतन 18 हजार रुपये से कम है, वह प्रवासी श्रमिक की परिभाषा में आ जाएगा और उसे सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल सकेगा । प्रवासी मजदूरों का एक डेटाबेस बनाने का प्रावधान पहली बार कानून में किया गया और अब सरकार को अनिवार्य रूप से प्रवासी श्रमिकों के संपूर्ण डेटाबेस को तैयार करना होगा ।

प्रवासी मजदूरों को अपने मूल स्थान से निवास तक जाने के लिए साल में एक बार उनके एम्प्लॉयर द्वारा यात्रा भत्ता देने का भी प्रावधान है । समस्याओं के निराकरण के लिए भी कानून में हेल्पलाइन की व्यवस्था की गई । श्रमिकों को उनके अधिकार दिलाने के लिए ट्रेड यूनियनों के महत्व को हमने स्वीकार किया और समझा । पहली बार उनकी सहभागिता को व्यवस्थित करने के उद्देश्य से उनको संस्थान स्तर, राज्य स्तर और केंद्र स्तर यानी, तीनों स्तरों पर कानून में मान्यता दी गई । सरकार का उद्देश्य है कि सामाजिक सुरक्षा के दायरे में 50 करोड़ श्रमिकों को लाया जाए । सामाजिक सुरक्षा कोड द्वारा प्रयास है कि ईएसआईसी के अंतर्गत मिलने वाली जो सामाजिक सुरक्षा है, असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को भी उसका लाभ दिया जाए । इसलिए ईएसआईसी के विस्तार के लिए सुविधाओं को देश के सभी जिलों में देने का निर्णय हुआ ।

18.09 hrs.                                (Hon. Speaker in the Chair)  जोखिम वाले क्षेत्रों में काम कर रहे संस्थानों को ईएसआईसी की सुविधा अपने श्रमिकों को अनिवार्य रूप से प्रदान करनी होगी । यदि उनके संस्थान में एक भी श्रमिक काम करता है तो अनुपालन व्यवस्था को ज्यादा पारदर्शी, जवाबदेश और सरल बनाने के लिए चारों लेबर कोड में एक समान प्रावधान है । अभी तक की व्यवस्था में एक प्रतिष्ठान को कई प्रकार के पंजीकरण की दरकार होती थी, जिसमें कई प्रकार की व्यावहारिक समस्याएं उत्पन्न होती थी ।    

विदेशी निवेशकर्ता भी अपनी पूंजी हमारे देश में लगाने से पहले सौ बार सोचते थे । अब चूंकि केवल एक ही पंजीकरण से काम पूरा हो जाएगा । अत: देश में न केवल पूंजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि हमारे प्रधान मंत्री जी का भारत को पांच ट्रिलियन इकोनॉमी बनाने का जो सपना है, वह सपना जल्द पूरा होगा । कम से कम 10 कर्मचारियों वाली कंपनी फैक्ट्री या अन्य व्यवसायिक प्रतिष्ठान को अपने प्रत्येक कर्मचारी को नियुक्ति पत्र देना अनिवार्य होगा । वे बिना नियुक्ति पत्र दिए अपने कर्मचारियों से काम नहीं ले सकेंगे । इससे कर्मचारी भविष्य निधि व राज्य जीवन बीमा निगम को भी बढ़ावा मिलेगा । जब किसी उपक्रम में दुर्घटनावश किसी श्रमिक की मृत्यु हो जाए या जख्मी हो जाए, तो न्यायालय द्वारा नियोक्ता पर जो जुर्माना लगाया जाएगा, उसका 50 प्रतिशत भाग दुर्घटना के शिकार व्यक्ति या आश्रित को दिया जा सकेगा ।

          महिला श्रमिकों को पहली बार शाम सात बजे के बाद और प्रात:काल छ: बजे के पहले, अंतराल में किसी भी प्रतिष्ठान में काम करने की अनुमति दी गई, जिससे अब सही मायने में महिलाओं और पुरुषों में बराबरी के सिद्धांत को देखा जा सकेगा और इसके साथ ही साथ महिलाओं और पुरुषों के वेतन में जो असमानता थी, उसे दूर करते हुए समान वेतन मिलने के प्रावधान इस बिल के माध्यम से किए गए हैं ।

मानव संसाधनों की आपूर्ति करने वाले जो ठेकेदार हैं, उनको भी केवल एक ही लाइसेंस जो अखिल भारतीय होगा, यानि पूरे देश में काम करने की सुविधा दी गई है । ऐसी व्यवस्थाएं की गई हैं । इससे यह लाभ होगा कि प्रत्येक बात पर सरकारी मशीनरी का हस्तक्षेप कम होगा, भ्रष्टाचार में कमी आएगी और कागजी काम भी कम होगा । जुर्माने की राशि को भी प्रभावी रूप से बढ़ाया गया है, ताकि नियमों का पालन यथोचित प्रकार से नियोक्ताओं द्वारा किया जाए ।

          इंस्पेक्टर   राज के प्रभाव को भी कम करने के लिए पूरी संहिता में स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं । जिसमें यह विशेष है कि इंस्पेक्टर के कार्य क्षेत्र का विस्तार किया गया है । उस संहिता में इंस्पेक्टर कम फैसिलेटर का प्रावधान किया गया है, जोकि एनडीए सरकार इंस्पेक्टर राज को समाप्त कर फैसिलेटर की भूमिका सरकार बढ़ाना चाहती है, जो उद्योग की उन्नति के लिए आवश्यक है ।

          माननीय अध्यक्ष महोदय, वर्तमान में जो 13 श्रम अधिनियम हैं, इनमें से सात के अंतर्गत अलग-अलग विवरणी फाइल की जाती थी, जिसके अंतर्गत एक विवरणी फाइल योजना प्रस्तावित की जाएगी, जिससे रजिस्टरों की संख्या भी न्यूनतम हो जाएगी और ई-गवर्नेंस को भी बढ़ावा मिलेगा । इन‍ श्रम कानूनों में बदलाव के पश्चात् ही विश्व की कई नामी कंपनियों ने भारत में उद्योग लगाने की अपनी इच्छा जाहिर की है, जिससे माननीय प्रधान मंत्री जी के ‘मेक इन इंडिया’ की घोषणा को बल मिला है । प्रधानमंत्री रोजगार प्रोत्साहन योजना, पहली बार एम्प्लॉयर्स को नए एम्प्लॉयमेंट विकसित करने हेतु प्रोत्साहन की अभिनव योजना श्रम मंत्रालय द्वारा प्रारंभ की गई है । इस योजना से दोहरा लाभ हुआ है । एक तरफ इम्प्लॉयर्स को रोजगार का आधार बनाने के लिए प्रोत्साहन दिया गया, वहीं दूसरी ओर श्रमिकों को संगठित क्षेत्र के सोशल सिक्योरिटी का लाभ मिला । हमारी सरकार ने विभिन्न मंत्रालय के समन्वय द्वारा और एक समस्या का समाधान निकाला है । महिलाओं को पहले ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ के कोयला खदानों में काम करना वर्जित था । हमारी सरकार ने समन्वय द्वारा इसका समाधान निकाला और ओपेन कास्ट खदानों में उनको काम करने की छूट मिली । जमीन के नीचे खदानों में भी टेक्निकल सुपरवाइजरी और मैनेजेरियल कार्य जिनमें लगातार वहां रहने की आवश्यता नहीं पड़ती है, पर्याप्त सुविधाओं और सुरक्षा के साथ उनको वहां पर काम करने के लिए छूट दी गई है । आज भारत की बेटियां शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र होगा, जहां वे काम न करती हों । आज भारत की बेटियां लड़ाकू हवाई जहाज चलाती हैं, ट्रक चलाती हैं, बस चलाती हैं और ऐसे कई कार्य जो कल तक केवल पुरुष प्रधान माने जाते थे, वे सभी काम आज बेटियां कर रही हैं । माननीय प्रधान मंत्री जी के ‘बेटी बचाओ - बेटी पढ़ाओ’ अभियान ने भारतीय जनमानस की मानसिकता पर गहरा असर डाला है । भारत की बेटी उन क्षेत्रों में भी काम कर पा रही हैं, जहां उनका काम कर पाना पहले असंभव-सा लगता था । खान में काम करने वाले मजदूरों के लिए समय-समय पर जागरूकता शिविर भी लगाए जाते हैं और उन्हें बीमारी से बचने के लिए जागरूक किया जाता है । कुछ खतरनाक एयरबॉर्न डस्ट से पैदा होने वाली बीमारियों और उनसे बचाव के लिए सरकार ने डस्‍ट मास्क व अन्य व्यक्गित सुरक्षा उपकरणों को बढ़ावा देने का काम किया है । यह कार्य जहां एक ओर मजदूरों के स्वास्थ्य में सुधार करेगा, वहीं उनके द्वारा जो उपचार में खर्च होता था, उसमें कटौती आएगी, जिससे मजदूर दो पैसे बचा सकेगा । सरकार ने पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ाने के लिए श्रम कानूनों के प्रावधानों को समुचित रूप से लागू करने के लिए और उनके अनुपालन को सहज बनाने के लिए श्रम सुविधा पोर्टल की भी स्थापना की है । सरकार ने मजदूरों के विवादों को सुलझाने के लिए समाधान पोर्टल की भी व्यवस्था की है, जिसमें विवाद को सुलझाने में भूमिका निभाने वाले सभी लोग एक स्थान पर तकनीक के माध्यम से एकीकृत हो जाते हैं । यह पोर्टल पारदर्शिता, त्वरित न्याय व मजदूरों के लिए सरकार के भरोसे को बढ़ावा देता है ।

          दीनदयाल अंत्योदय योजना के माध्यम से शहरी गरीब परिवारों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए लाभकारी स्वरोजगार व कुशल रोजगार के अवसर प्रदान किए गए हैं, जिससे उनके लिए स्थायी आजीविका का प्रबंध हो सके । दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में कौशल विकास और रोजगार के साधन नियमित रूप से मजदूरी के माध्यम से सक्षम हो पा रही हैं ।

प्रधानमंत्री आवास योजना ने वास्तव में गांव के गरीब मजदूरों के जीवन में सराहनीय काम किया है । जो राजमिस्त्री और मजदूर कल तक दूसरों का मकान बनाते थे, उनका अपना कच्चा मकान, खपरैल या घास-फूस का मकान होता था, लेकिन प्रधानमंत्री जी की इस अभिनव योजना से आज वे मजदूर अपना स्वयं का मकान बना पा रहे हैं ।

          मेरे संसदीय क्षेत्र जतारा के पास एक गांव खरगापुर है । मैं जा रहा था, मैंने देखा कि वहां पर एक बहुत अच्छा मकान है । मैंने पूछा कि यह मकान किसका है, तो मालूम पड़ा कि वह मकान हीरा लाल हैवान नाम के एक मिस्त्री का था, जो दूसरों के मकान बनाता था । उसने बहुत ही कम पैसों में इतना सुन्दर मकान बनाया । उसने और उसकी पत्नी ने मिलकर ईंटें बनाईं । उन दोनों पति-पत्नी ने मिलकर मजदूरी की और कोई मजदूर नहीं लगाया । दोनों ने मिलकर एक सुन्दर, बड़ा और आकर्षक मकान बनाया । उनसे प्रेरणा लेकर वहां खरगापुर इलाके के बाकी मजदूरों ने भी मजदूरी करके, इस योजना के माध्यम से एक बड़ा स्वयं का मकान बनाया । उनके द्वारा इतने सुन्दर-सुन्दर मकान बन रहे हैं कि देखते ही मन प्रसन्न हो जाता है । अब तक 1 करोड़ से अधिक घरों के लिए स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है । वर्ष 2022 तक हर परिवार के लिए छत का पवित्र उद्देश्य का सपना आदरणीय प्रधानमंत्री जी का पूरा हो सकेगा । मुझे यह विश्वास है ।

          सरकार ने रेहड़ी-पटरी और ठेलेवालों के लिए स्वनिधि योजना की शुरुआत की है । यह योजना छोटे-छोटे काम करने वाले सभी लोगों के लिए कोरोना महामारी के बाद उबरने में सहायक सिद्ध हो रही है । इस योजना का लाभ लेकर लोग अपने कार्य को पुनः प्रारंभ कर रहे हैं और जीवन को एक नई गति प्रदान कर रहे हैं । जब मज़दूर शारीरिक, मानसिक रूप से सुरक्षित होता है, तब वह अपना सर्वोत्तम काम प्रदान कर पाता है । यही सर्वोत्तम काम श्रम के क्षेत्र में कुशलता को बढ़ाता है और उत्पादन बढ़ाने में सहायक सिद्ध होता है । भवन निर्माण, कालीन निर्माण, वस्त्र उद्योग, हथकरघा, पीतल उद्योग, कांच उद्योग, लघु उद्योग, कुटीर उद्योग सभी निर्माण कार्य में लगे हुए श्रमिकों का महत्व है । श्रमिकों का समाज के निर्माण में योगदान भी है । भारत की आर्थिक प्रगति में जितना योगदान उद्योगों का है, उतना ही योगदान श्रमिकों का भी है । बिना श्रमिकों के औद्योगिक कार्य और निर्माण कार्य का सोच पाना मुश्किल होता है । हमारी सरकार ने भारत को विकास के नए सोपान पर पहुंचाने के लिए कि जहां भारत सिर्फ विकसित ही न हो, बल्कि आत्मनिर्भर भी हो और इसी मंत्र के साथ आत्मनिर्भर भारत को प्रारंभ किया है । भारत को आत्मनिर्भर बनाने में श्रमिकों का बहुत बड़ा योगदान होगा । हमें अपने श्रमिकों की कार्यकुशलता को बढ़ाना होगा । उनका कौशल विकास करना होगा । हमें जो डेमोग्राफिक डिविडेंट प्राप्त हुआ है, उसका समुचित विकास करते हुए, माननीय प्रधान मंत्री जी ने कौशल विकास व स्वरोज़गार हेतु अनेक कार्यक्रमों को प्रारंभ किया है । भारत में एक बड़ा अजीब सा महौल था । पढ़ाई के बाद लोग-बाग नौकरियों के पीछे भागते थे । कुछ अच्छे एन्टरप्रेन्योर्स बन सकते थे, लेकिन वे पारिवारिक, सामाजिक और आर्थिक स्थितियों के कारण अपने सपने को साकार नहीं कर पाते थे । हम भारतीयों की मानसिकता नौकरी प्रधान बन कर रह गई थी । माननीय प्रधान मंत्री जी ने पहली बार भारत में उद्यमिता, एन्टरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देने का कार्य किया, जिससे वह व्यक्ति जो अपने दिमाग व कार्यकुशलता से न सिर्फ स्वरोज़गार बल्कि उसके माध्यम से अनेक लोगों को रोज़गार प्रदान कर सकता है । वह व्यक्ति जो कल तक खुद नौकरी करता था, करने की सोच रखता था, आज वह दूसरों को रोज़गार प्रदान कर रहा है । यह सब माननीय प्रधान मंत्री जी की दूरदर्शिता, उनकी सोच और भारत तथा भारतीयों के किसी भी प्रकार के कार्य को सफलतापूर्वक करने की क्षमता पर विश्वास के कारण संभव हुआ है । मुद्रा योजना, स्टार्ट-अप योजना, स्टैंड अप इंडिया, स्किल इंडिया, मेक इन इंडिया, इन सब योजनाओं से ये कार्य सिद्ध हुआ है । 

          भारत हमेशा से ही उद्यमिता का देश रहा है, किन्तु आजादी के बाद उद्यमिता को बढ़ावा देने   के स्थान पर उन क्षेत्रों को नियंत्रित किया गया, जहां पर हम अपनी उद्यमिता को बढ़ा सकते थे । हमें यह समझाया गया कि बड़े कल-कारखानों से ही रोज़गार की उत्पत्ति होगी । लेकिन हमारी जो पारंपरिक कार्यक्षमता थी, उसको प्रोत्साहन नहीं दिया गया । छोटे उद्योग, लघु उद्योग, कुटीर उद्योग तथा घर में चलने वाले उद्योगों को प्रोत्साहन नहीं दिया गया । इन सभी नीतियों से भारत में उद्यमिता में कमी आई और श्रमिकों की कार्यकुशलता में भी कमी आई ।

          मैं अपने संसदीय क्षेत्र छतरपुर का उल्लेख करना चाहता हूं । छतरपुर में तांबा, पीतल और कांसा का बहुत सुन्दर काम होता है । हमारे बी.डी. शर्मा जी खजुराहो से आते हैं । खजुराहो में बहुत अच्छे एक्रिलिक आइटम बनते हैं । ये हमारे देश के लोगों के साथ ही साथ बाहर से आने वाले विदेशी पर्यटक, जो खजुराहो आते हैं, वे उन सारी चीजों को अपने देश लेकर जाते हैं । भारत हमेशा से ही कई क्षेत्रों में अपने पारंपरिक ज्ञान के माध्यम से आगे बढ़ता था । टीकमगढ़ में पीतल की बहुत ही सुन्दर मूर्तियां बनती हैं । मैं एक माननीय मंत्री जी के घर गया था । मैंने वहां देखा की भगवान कृष्ण की बहुत ही आर्कषक प्रतिमा वहां पर रखी हुई थी । मैंने देखा कि यह तो हमारे टीकमगढ़ की बनी हुई है । टीकमगढ़ में पीतल का बहुत ही सुन्दर काम होता है । यह हमारे देश के कोने-कोने में अपनी पहचान को बढ़ा रहा है । पारंपरिक ज्ञान पीढ़ी दर पीढ़ी किया जाता था । आधुनिक काल में हमें ऐसी व्यवस्था करनी होगी कि हम अपने पारंपरिक ज्ञान को वर्तमान परिवेश से जोड़ते हुए एक नया कौशल विकास कार्यक्रम प्रारंभ करें, जिससे पारंपरिक ज्ञान भी बचे और रोज़गार को भी बढ़ावा मिले । आज माननीय प्रधान मंत्री मोदी जी इसी परिकल्पना के साथ आगे बढ़ रहे हैं, जिसमें पारंपरिक ज्ञान को व्यावहारिकता में उतारते हुए, आधुनिक ज्ञान के साथ समावेश करते हुए प्रगति के नए-नए आयामों को प्राप्त कर सकें । अब इसमें मुरादाबाद के एक्रिलिक आइटम की बात हो, चाहे श्रीनगर के कलात्मक शॉल की बात हो, चाहे मिर्जापुर की कालीनों की बात हो, चाहे चंदेरी साड़ियों की बात हो, चाहे महेश्वरी साड़ियों की बात हो, चाहे कांजीवरम साड़ियों की बात हो, चाहे मैसूर सिल्क की बात हो, चाहे राजकोट के चांदी के सामान की बात हो, हम देखते हैं कि हमारे देश के हर क्षेत्र की अलग से पहचान बनी हुई है ।

अब विकास की दृष्टि से हमारी केन्द्र सरकार के द्वारा नीति आयोग के द्वारा 112 आकांक्षी  जिलों को चिह्नित किया गया, जहां पोषण-आहार, शिक्षा-स्वास्थ्य और कृषि के क्षेत्र में काम करने की दृष्टि से विशेष योजनाएं बनाई गई हैं । मेरे संसदीय क्षेत्र टीकमगढ़ में भी छतरपुर जिला जो कि आकांक्षी जिले में आता है, वहां पर झांसी से लेकर खजुराहो तक फोरलेन एक्सप्रेस हाइवे का काम तेजी से चल रहा है ।

          वहाँ पर एक नया मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा केन्द्र सरकार के द्वारा की गई है । वहाँ पर एनटीपीसी का जो प्लांट लगाया जाना था, उसके लिए जो स्थान निर्धारित किया गया है, वहाँ पर सौर ऊर्जा प्लांट लगाए जाने की दिशा में भी ऊर्जा मंत्रालय के द्वारा योजना बनाई जा रही है । नेवाड़ी-ओरछा से टीकमगढ़-शाहगढ़ एनएच की स्वीकृति दी गई है । मैं आदरणीय श्री नितिन गडकरी जी को इसके लिए धन्यवाद देना चाहता हूँ ।

          अभी पिछले दिनों, टीकमगढ़ से दिल्ली और प्रयागराज के लिए दो ट्रेन्स प्रारम्भ हुई हैं । कोविड के दौरान  दिल्ली से खजुराहो के लिए ट्रेन प्रारम्भ हुई । हमारे यहाँ के मजदूर, जो दिल्ली-हरियाणा-पंजाब जाने के लिए झांसी आते थे, वे अपने सामान और अपनी बड़ी-बड़ी पोटलियाँ लेकर   आते थे, आज वे झांसी से जाने के स्थान पर टीकमगढ़ से ही सभी स्थानों के लिए जा रहे हैं । एक महीना पहले टीकमगढ़ में माल गोदाम भी प्रारम्भ किया गया है । मात्र 20 दिनों की अवधि में आठ ट्रैक वहाँ से रवाना हुए, जिससे व्यापारियों को लाभ मिलने के साथ-साथ वहाँ के मजदूरों को भी लाभ मिला है । इससे आने वाले समय में विकास का मार्ग भी प्रशस्त होगा ।

          माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं आपकी बात समझ रहा हूँ, समय की एक सीमा है । आज जो सबसे ज्वलंत विषय है, मैं उस पर थोड़े शब्दों में अपनी बात रखना चाहता हूँ ।

          हमारी सरकार के द्वारा किसानों के दीर्घकालीन कल्याण के लिए तीन बिलों को पारित किया गया । हमने पाया कि हमारे कुछ किसान भाई इन बिलों को लेकर आशंकित हैं । हमारी सरकार ने उनको तुरन्त बातचीत का न्यौता भेजा । लगभग 11-12 दौर तक बातचीत भी हुई । लेकिन जब इन किसानों के बीच में कुछ राजनीतिक दल अपने अस्तित्व को पुनर्जीवित करने के लिए अप्रत्यक्ष और अपरोक्ष रूप से शामिल हो गए, तो पूरा परिदृश्य ही बदल गया और हमने देखा कि देखते ही देखते 26 जनवरी की वह दुखदायी घटना घटित हुई ।

          इस संदर्भ में, मैं आपके माध्यम से सदन को बताना चाहता हूँ कि कुछ  हवाई नेता, जिनको अरहर, तुअर और चने के दाल में अंतर का ज्ञान नहीं होता है, ऐसे नेता ट्विटर वगैरह चला रहे हैं और प्रयास कर रहे हैं कि देश के माहौल को किस तरह से दूषित किया जाए ।

महोदय, अपने देश में लोकतंत्र है और सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है । इस बात पर ध्यान दिए बगैर कि अधिकार के पहले देश के प्रति कर्तव्य भी आते हैं, आप कितने भी आरोप-प्रत्यारोप लगा लें, लेकिन देश की जनता सब जानती है ।

          मैं इस सम्बन्ध में, आदरणीय चौधरी चरण सिंह जी द्वारा 4 नवम्बर, 1979 को दिए गए भाषण के कुछ अंश कोट करना चाहता हूँ ।

          “कि किसानों की हालत सुधारने के लिए, मेरे किसान बड़े-बड़े शहरों में रहते हैं, उनके नेता यही समझते रहे, मान लें कि हम दुकानदारों के खिलाफ हैं, वे ज्यों-का-त्यों खिलाफ हैं, लेकिन नहीं किसानों, मैं कहना चाहता हूँ कि जो लोग ऐसा सोचते हैं, वे गलत सोचते हैं । जो आदमी किसानों के खेतों की पैदावार बढ़ाने की बात करता है, उन दुकानदारों को, आप कहते थे कि उनकी दुकानों को खेत के पैदावार की जरूरत होगी, तो उन्हें बाजार में ले चलो । मान लें कि आपकी पैदावार दुगुनी या तिगुनी हो जाए, आज भारत की तुलना में ब्रिटेन और अमेरिका में 10 गुना ज्यादा कपास पैदा होती है, यूरोप में जो मुल्क हैं, उनकी पैदावार हमारे देश की तुलना में चार गुना होती है, तो हमारे खेतों की पैदावार बढ़ सकती है और बढ़नी चाहिए । मान लें कि आपकी पैदावार दुगुनी हो जाए, तो शहर में जितने दुकानदार हैं, आपकी पैदावार खरीदने वालों की संख्या तिगुनी हो जाएगी । फिर वे आपकी पैदावार को लेकर दूसरे शहरों, दूसरे जिलों और दूसरे देशों में जाएंगे, जहाँ वह चीज पैदा नहीं होती है, इससे परिवहन का खर्च बढ़ जाएगा । फिर आपकी जेब में रुपये आएंगे, तो आप उसका क्या करेंगे? आप अपनी जरूरत के लिए अन्न, गेहूँ, चावल रख लेंगे, लेकिन बाकी पैसों का क्या करेंगे? आप पैसे तो नहीं खाओगे? उससे आप अपने बच्चों के लिए कपड़े    खरीदेंगे, जूते खरीदेंगे और अगर बच्चा तकाजा करता है, तो आप उसके लिए घड़ी खरीदेंगे ।”           माननीय अध्यक्ष महोदय, आदरणीय चौधरी चरण सिंह जी ने कहा था कि खेती के अलावा तीन बड़े-बड़े धंधे हैं- ट्रेड, ट्रांसपोर्ट और इंडस्ट्री यानी व्यापार, परिवहन और उद्योग-धंधे । जब खेती  अच्छी होती है, फसल अच्छी होती है, तो फसल को बेचने के लिए किसान बाजार में जाता है । फसल बेचने के बाद उसको जो पैसे मिलते हैं, तो वह सोचता है कि उस पैसे से इस वर्ष मैं एक नया ट्रैक्टर खरीदूँगा, वह सोचता है कि मेरे खेत के बगल में जो जमीन है, मैं उसको खरीदूँगा, वह सोचता है कि मैं अपने बेटे को इंजीनियरिंग या मेडिकल कॉलेज में पढ़ने के लिए भेजूँगा, वह सोचता है कि मैं अपनी बेटी की शादी अच्छे ढंग से करूँगा । जब वह बाजार में सामान खरीदने के लिए जाता है, तो बाजार में माँग बढ़ जाती है और जब बाजार में माँग बढ़ती है, तो उद्योग-धंधों और कल-कारखानों के पहिए तेजी से घूमते हैं । नए कारखानों की आवश्यकता होती है, उन कामों को करने के लिए इंजीनियरों की आवश्यकता होती है, बिजली की मशीनों को चलाने के लिए इंजीनियरों की आवश्यकता होती है । यही बात आदरणीय चौधरी चरण सिंह जी ने कही थी ।

आज हम देखते हैं कि हमारी सरकार भी इस दिशा में काम कर रही है कि किसानों की आय को दुगुना कैसे किया जाए । एमएसपी बढ़ाने का काम किया गया, कितने सारे काम किए गये, फसल बीमा योजना, नीम-कोटेड यूरिया आदि योजनाएँ केन्द्र सरकार के द्वारा किसानों की आय को बढ़ाने के लिए लाए गए, ये योजनाएँ किसानों को आर्थिक-सामाजिक रूप से समृद्ध बनाने के लिए लाई गईं ।

          महोदय, हम वर्ष 2013 की बात कहते हैं, उस समय 34 हजार करोड़ रुपए किसानों को भुगतान होते थे ।

          उसे पांच साल के अंदर डबल से ज्यादा कर के 75 हजार करोड़ रुपये ‍किया गया । जिस सरकार ने दाल के मुद्दे पर वर्ष 2013-14 में, जब केवल 236 करोड़ रुपये का देश के सारे किसानों को भुगतान किया जाता था, उस 236 करोड़ रुपये को 40 गुना बढ़ाकर 10,550 करोड़ रुपये किया हो, जिस सरकार द्वारा हमारे महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, दक्षिण मध्य प्रदेश के कपास के किसानों के लिए वर्ष 2014 में केवल 90 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाता था, उसको 300 गुना बढ़ाकर 27 हजार करोड़ रुपये किया हो, जिस सरकार ने किसानों के सम्मान के लिए छ: हजार रुपये हर साल के हिसाब से किसान सम्मान निधि के लिए 1 लाख 13 हजार करोड़ रुपये किसानों के खाते में पहुंचाए हों, जिस सरकार ने कृषि की अधोसंरचना के लिए एक लाख करोड़ रुपये का नया फंड तैयार किया हो, जिस सरकार ने फसल के नुकसान के लिए फसल बीमा योजना लागू की हो और पांच साल के अंदर 90 हजार करोड़ रुपये भुगतान के रूप में किसानों के खाते में पहुंचाया हो, वह सरकार किसानों के विकास और किसानों की प्रगति के लिए प्रतिबद्ध थी, प्रतिबद्ध है और प्रतिबद्ध रहेगी ।

          माननीय अध्यक्ष महोदय, मैं कुछ कहना चाहता हूं । मैं बस दो और लाइन्स के साथ अपनी बात समाप्त करना चाहूंगा । क्या संकट के समय बजाये सहयोग के, सिर्फ आलोचना करने वाले आदर्श राजनेता हो सकते हैं? देश सीएए का स्वागत कर रहा था । कुछ तथाकथित लोग शाहीन बाग को हवा देने का काम कर रहे थे । राष्ट्र के आमजन की भावना के विपरीत राष्ट्र विरोधियों का साथ देने वाले आदर्श राजनेता हो सकते हैं? सैकड़ों वर्षों से लंबित राम मंदिर का समाधान होने पर देश में हर्षोल्लास का वातावरण था, कुछ लोग वर्षों से कोर्ट के द्वारा इसमें रोड़े अटकाने में लगे थे । क्या इस तरह का दुर्व्यवहार करने वाले आदर्श राजनेता हो सकते हैं?

जब सरकार के द्वारा दास्ता के प्रतीक ट्रिपल तलाक बिल से अल्पसंख्यक महिलाओं को स्वतंत्रता दिलाने की ओर सरकार बढ़ रही थी, क्या महिलाओं की आजादी का विरोध करने वाले महिला विरोधी लोग आदर्श राजनेता हो सकते हैं? क्या गणतंत्र दिवस पर संविधान की अवमानना एवं तिरंगे का अपमान करने वाले आदर्श राजनेता हो सकते हैं? इस देश ने जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान के नारे को आत्मसाध किया है । क्या लाल किले पर किसानों द्वारा जवानों को खाई में गिराने के लिए, उनको खाई में भेजने वाले क्या आदर्श राजनेता हो सकते हैं? क्या भारत में बनने वाली वैक्सीन की उपयोगिता पर सवाल खड़े करने वाले आदर्श राजनेता हो सकते हैं?

आइए, हम भारत की विकास यात्रा में सृजन के मार्ग पर रचनात्मक विरोध का स्वागत करते हैं । हम मुद्दों पर आधारित, तर्कपूर्ण विरोधों पर चर्चा करने के लिए तैयार हैं । हमारे आदरणीय प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी स्पष्ट कहते हैं कि चर्चा के लिए हमारे दरवाजे सदैव खुले रहते हैं । देश तो हम सभी का है, इसलिए इसकी सामूहिक जिम्मेदारी भी हम सभी की है । इसी के साथ मैं महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर आभार और धन्यवाद करते हुए अपनी बातों को यहीं पर समाप्त करना चाहता हूं ।

धन्यवाद ।

माननीय अध्यक्ष: प्रस्ताव प्रस्तुत हुआ :       

   “कि राष्ट्रपति की सेवा में निम्नलिखित शब्दों में एक समावेदन प्रस्तुत किया जाए :-
 
                   ‘कि इस सत्र में समवेत लोक सभा के सदस्य राष्ट्रपति के उस अभिभाषण                     के लिए, जो उन्होंने 29 जनवरी, 2021 को एक साथ समवेत संसद की                     दोनों सभाओं के समक्ष देने की कृपा की है, उनके अत्यंत आभारी हैं’ ।”       SHRI ADHIR RANJAN CHOWDHURY (BAHARAMPUR): Sir, I rise to participate in the discussion on Motion of Thanks on the President’s Address.
सर, हम सब यह जानते हैं कि राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर हमारी यह चर्चा एक बहुत लंबी परंपरा का एक हिस्सा है । वर्ष 1999 में गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट बनाया गया था । …(व्यवधान) ब्रिटिश हुकूमत यह एक्ट बनाने के दौरान…(व्यवधान)
डॉ. निशिकांत दुबे (गोड्डा): वर्ष 1919 में यह एक्ट बना था । …(व्यवधान)
माननीय अध्यक्ष: अगर माननीय सदस्य गलती कर रहे हैं, तो आप उसमें क्यों संशोधन कर रहे हैं?
श्री अधीर रंजन चौधरी: महोदय, वर्ष 1919 में गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट, सुना है आपने? आप इसे ठीक कर लीजिए । गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट के तहत 1921 में सैंट्रल लेजिस्लेचर बना और सैंट्रल लेजिस्लेचर में सर्वप्रथम प्रेजिडेंशियल एड्रेस उस समय की परम्परा नहीं थी, गवर्नर जनरल द्वारा एड्रेस देने की परम्परा शुरू हुई । आज सौ साल गुजर गए हैं और वह परम्परा जारी है, मैं यही कहना चाहता हूं कि कभी हम ब्रिटिश हुकूमत के समय में थे और अब आजादी में हैं, फिर भी यह परम्परा बरकरार है ।
          महोदय, सर्वप्रथम मैं राष्ट्रपति जी को अभिनंदन करना चाहता हूं कि उन्होंने हमारे ज्वाइंट पार्लियामेंट्री सैशन में अपना अभिभाषण दिया और अभिभाषण के तुरंत बाद हमारा बजट भी पेश हो गया । प्रेजिडेंशियल एड्रेस राष्ट्रपति जी का अपना भाषण नहीं होता है, यह सरकार का भाषण होता है, सरकार की स्टेटमेंट होती है । बजट भी पेश हो गया और राज्य सभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर प्रधान मंत्री जी का जवाब भी आ गया । इसका मतलब कि इस प्रक्रिया का आधा हिस्सा हम पूरा कर चुके हैं । हमारे राष्ट्रपति जी ने कुल मिलाकर 27 पन्नों का अभिभाषण दिया है । ज्वाइंट सिटिंग ऑफ पार्लियामेंट में राष्ट्रपति जी ने कहा कि कोरोना वायरस पेनडेमिक के समय हो रहा है, इसलिए इसका बहुत महत्व है । उन्होंने सही कहा है और हम भी पिछला शीत कालीन सत्र चलाना चाहते थे और हमने गुहार भी लगाई थी कि जब कोरोना काल में सभी काम चलते हैं, तो क्यों नहीं विंटर सैशन बुलाया जाए? अगर उस समय विंटर सैशन बुलाया जाता, तो किसानों की हालत को लेकर हमें पहले ही अपनी बात रखने का मौका मिलता । लेकिन सरकार की न जाने क्या राय थी कि उन्होंने कोरोना के बहाने विंटर सैशन नहीं बुलाया और जब राष्ट्रपति जी का अभिभाषण हुआ, उस समय भी कोरोना पेनडेमिक जारी है, इसका भी इसमें जिक्र है ।
          महोदय, अभिभाषण में तीन कोटेशन्स का इस्तेमाल किया गया हैं, जिसमें एक कोटेशन असम केसरी अम्बिकागिरी राय चौधरी की है । दूसरी कोटेशन केरल के वल्लाथोल साहब की है । उन्होंने भी एक immortal patriotic lyrics बनाई थी और तीसरी कोटेशन बंगाल के ज्योतिन्द्रनाथ टैगोर, जो गुरुदेव रबीन्द्र नाथ टैगोर के बड़े भाई हैं, उनकी भी एक कोटेशन अभिभाषण में डाली गई है । यह बहुत अच्छा लगता है, लेकिन संयोग से ये कोटेशन्स जिन तीन कवियों की हैं, इनसे संबंधित राज्यों में चुनाव होने वाले हैं । पता नहीं है कि चुनाव के साथ इसका कोई संबंध है या नहीं, हमारे प्रधान मंत्री जी को इस विषय में ज्यादा जानकारी होगी । इसमें जो जिक्र किया गया है, उसमें दम है, अहमियत है और सिग्निफिकेंट है । जैसे कि असम केसरी अम्बिकागिरी राय चौधरी की बात कही गई है that is, India’s grandeur is the ultimate truth. In one single consciousness, one thought, one devotion, one inspiration, let us unite; let us unite.
 
          Hindustan is recognised as a traditional country. Indian tradition begins with enquiry, doubt and challenge. This the hallmark of our civilization and also the hallmark of our plurality. India is called an old civilization, ancient civilization but a young nation. We always advocated, pleaded for plurality. Even within a single major religion, Hinduism, we will find four Vedas, millions of Gods, 18 Upanishads, six schools of classical philosophy, two Epics and four Purusarthas.
So, Hinduism itself is an eloquent testimony of our plurality.  Let noble thoughts come from all directions.  सर, हमारे यहां संस्कृत में यह कहते हैं कि- “आ नो भद्रा: क्रतवो यन्तु विश्वत:” India, as a civilisation and as a country, can easily claim that our civilisation is an unending celebration of human plurality.  Plurality accommodates differences, and differences embody and enact dissent. This is the beauty of our tradition, our civilisation and our nation.  Plurality always accommodates differences and, through these teachings, India has been surviving through millennium.   Even if you go through the epic Mahabharat, you will find that it is an epic full of dialogues and debates.  We should not be afraid of any debate or any dialogue or any dissention because our civilisation always encourages dissent, disagreement, debate and dialogue.  It reflects in our tradition, our civilisation and our plurality.
          Sir, at the behest of the Father of the Nation, Mahatma Gandhi, our great son of India, former Prime Minister, late Jawaharlal Nehru assigned the job of drafting the Constitution to Dr. Ambedkar in spite of the fact that the great icon of …*, Dr. Ambedkar, was a bitter critic of Mahatma Gandhi.   Actually, it is the teaching of Mahatma Gandhi who knew how to accommodate differences.  That is why, Dr. Ambedkar was entrusted the drafting of the Constitution. It is nothing but Gandhi’s respect for dissenting voices.
          Sir, ten years before the death of great leader, Jawaharlal Nehru, he expressed his desire.  What was his desire?   He desired that:
“A handful of my ashes be thrown into the Ganga of Allahabad to be carried to the great ocean that washes India’s shore. The major portion of my ashes be carried high up into the air and scattered from that height over the fields where the peasants of India toil so that they may mingle with the dust and soil of India and become an indistinguishable part of India.”   जब हमारी आजादी हुई थी, तब क्या आप जानते हैं कि हर व्यक्ति का पर कैपिटा रोजगार कितना था- 247 रुपये । हमारी लिट्रेसी 12 फीसदी थी, हमारी औसत आयु 32 साल थी । आत्मनिर्भरता की शुरूआत किसने की- पंडित जवाहर लाल नेहरू जी ने । उसी ट्रैडिशन को हमने बचाकर रखा है ।
सर, एक और बड़े महान पुरुष महात्मा गांधी जी ने 29 जनवरी, मतलब मृत्यु के एक दिन  पहले, जब प्रार्थना सभा हो रही थी, तो उनका यह कहना था कि-“मेरी चले तो हमारा गवर्नर जनरल किसान होगा, हमारा बड़ा वजीर किसान होगा, सब कुछ किसान होगा, क्योंकि किसान यहां का राजा है ।” मुझे बचपन से एक कविता सिखाई गई कि हे किसान! तू बादशाह है । किसान जमीन से पैदा न करे, तो हम क्या खाएँगे । यह हमारे फादर ऑफ द नेशन ने हमें सिखाया था ।
आज इस चर्चा में बहुत सारे मुद्दे उठ रहे हैं । हमारे प्राइम मिनिस्टर साहब ने बंगाल का दौरा किया है । वहां भी नेताजी और रवीन्द्रनाथ टैगोर की बात का जिक्र करते हैं, अच्छा लगता है । स्वामी विवेकानन्द जी की बात यहां जिक्र होती है । सर, बात यह है कि किसी की बात का जिक्र करना एक चीज होती है और उसकी बात पर चल कर आगे निकलना दूसरी चीज होती है । The fact is that the BJP Party has been bereft of any national icon. Here lies the problem. There is no harm in borrowing any idea or thought. But after borrowing the thought, you should assimilate or imbibe the thought, idea, concept, or teachings of those great men’s understanding, of those great men’s perception, comprehension etc. यहां स्वामी विवेकानन्द जी की बात कही गई है । मैं इन सब को सुविधा के लिए यह कहना चाहता हूं कि स्वामी विवेकानन्द जी ने क्या कहा था-
 
“I am proud to belong to a nation which has taught the world both tolerance and universal acceptance. We not only believe in universal toleration and acceptance, but also accept all religions as true. I do belong to a religion which has given shelter to the persecuted, to the refugees of all religions and to all the nations of the world.”   यह स्वामी विवेकानन्द जी की शिक्षा थी । उन्होंने हमारे हिन्दुस्तान के भविष्य के लिए बड़ी चिंता जताई थी । इसलिए उन्होंने पहले ही कह दिया था कि-
 
“Sectarianism, bigotry, and its horrible descen­dant, fanaticism, have long possessed this earth. It has filled the beautiful earth with violence; it has drenched the earth with human blood; it has destroyed the civilisation; it has sent whole nation into despair. Had those horrible demons not been there, then India will be more advanced than now.”   यह इसलिए कह रहा हूं कि आज हिन्दुस्तान में क्या हो रहा है, यह आपसे ज्यादा किसी को  जानकारी नहीं है । आप कहते हैं कि नेताजी के बारे में हमारे प्रधान मंत्री जी ने भी जिक्र किया है । नेताजी हम सब के लिए वीर पुरुष के समान हैं । आप यह कह सकते हैं कि नेताजी के साथ कांग्रेस पार्टी का मतभेद था । मतभेद था, जरूर था । गांधी जी कहते थे कि नॉन-वायलेंस क्रीड है । नेताजी कहते थे कि बहुत सारे पंथों के बीच वह भी एक पंथ है ।
फिर भी गांधी जी, नेता जी को “प्रिंस ऑफ पैट्रिअट्स” कहते थे और नेता जी, गांधी जी को “फादर ऑफ द नेशन” कहते थे । यहां …* के बहुत सारे नेता हैं, हमारे प्रधान मंत्री जी हैं और हमारे गृह मंत्री जी भी हैं । मादुरा में वर्ष 1940 में और भागलपुर में वर्ष 1941 में हिन्दू महासभा का सैशन हुआ था । उसमें सावरकर जी ने जो भाषण दिया था, अगर आप उसको पढ़ेंगे तो आपको पता चलेगा कि सावरकर जी जब ब्रिटिश हुकूमत के साथ सेकेण्ड वर्ल्ड वॉर में दिक्कत में फंस गए थे तो ब्रिटिश हुकूमत से मदद लेने के लिए सावरकर बार-बार गुहार लगाते थे कि सारे हिन्दू भाईयों और हिन्दू युवाओं को ब्रिटिश हुकुमत की मदद करने के लिए फौज बनानी चाहिए, क्योंकि ब्रिटिशर्स की मदद करना इस समय की जरूरत है ।
 यह मैं नहीं कह रहा हूं, यह सावरकर जी ने कहा है, आप देख सकते हैं । मैंने मादुरा में वर्ष 1940 के हिन्दू महासभा के सैशन का जिक्र किया और भागलपुर में वर्ष 1941 में भागलपुर में हुए हिन्दू महासभा के सैशन का जिक्र किया है …(व्यवधान) मैं यह बोलना चाहता हूं कि नेता जी की अब   आपको जरूरत पढ़ रही है, क्योंकि पश्चिम बंगाल के चुनाव हैं और आपको वहां जाना पड़ता है । नेता जी की पश्चिम बंगाल में पूजा होती है, लोगों में उनके प्रति श्रद्धा है और आप उनका इस्तेमाल करके चुनाव में फायदा लेना चाहते हैं ।
          मेरा कहना है कि आपके पास कोई नेशनल आईकॉन नहीं है, यह आपकी समस्या है और आप इसलिए भटकते हैं । अगर कहीं कुछ मिल जाता है तो आप उसको पकड़कर तुरंत फायदा लेने की कोशिश करते हैं । आप इतने लोगों का नाम ले रहे हैं, लेकिन कभी पंडित जवाहर लाल नेहरू जी के बारे में आप एक लव्ज़ नहीं बोलते हैं, क्यों? आपमें ऐसा  …*क्यों है? मैं प्रधानमंत्री मोदी जी से पूछना चाहता हूं कि पूर्व प्रधानमंत्री श्री जवाहर लाल नेहरू के समय में हिन्दुस्तान में क्या आत्मनिर्भर भारत की पहल नहीं हुई थी? अगर आप निष्पक्ष हैं तो आप मेरी बात का जरूर समर्थन करेंगे । आप इधर-उधर की, सबकी बात करेंगे, लेकिन श्री जवाहर लाल नेहरू की बात नहीं करेंगे, इंदिरा जी की बात कभी नहीं करेंगे, यह आपका …*   है ।
हिन्दुस्तान की लड़ाई में अगर हम इतिहास के पन्नों को खोलने की कोशिश करें तो एक तरफ हमारे फ्रंटियर गांधी खान अब्दुल गफ्फार खान हैं, दूसरी तरफ …(व्यवधान) आपको मंत्री पद मिलेगा । हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री मोदी जी देखें कि आजादी के समय में एक तरफ फ्रंटियर गांधी खान अब्दुल गफ्फार खान, तो दूसरी तरफ हमारे राष्ट्र पिता महात्मा गांधी, यह छवि है । एक तरफ पंडित जवाहर लाल नेहरू तो दूसरी तरफ मौलाना अबुल कलाम आजाद । एक तरफ नेता जी सुभाष चंद्र बोस तो दूसरी तरफ खान शाहनवाज खान और आबिर हसन थे । क्या आपने कभी इनका जिक्र किया है? नेता जी के नाम के साथ-साथ आपको आबिद हसन के नाम का जिक्र करना पड़ेगा, नेता जी के नाम के साथ-साथ खान शाहनवाज खान के नाम का जिक्र करना पड़ेगा । हमारे खान अब्दुल गफ्फार खान साहब की आयु 95 साल थी । 95 साल की आयु में से 45 साल उन्होंने जेल की जिंदगी गुजारी है । अब जाकर आप पश्चिम बंगाल में नेता जी की वाह-वाह कर रहे हैं । आप अच्छा कर रहे हैं, हम इससे खुश हैं । आप उधार तो लीजिए, लेकिन उसको अपने में समाहित भी कीजिए ।
 पश्चिम बंगाल में नेता जी के नाम पर एक नेता जी डॉक था, उसका नाम आपने श्यामा प्रसाद मुखर्जी कर दिया । आपने यह अच्छा किया, क्योंकि श्री श्यामा प्रसाद मुखर्जी को सम्मान देना जरूरी है, लेकिन किसी दूसरे डॉक का नाम बदल सकते थे । नेता जी के नाम पर जो डॉक था, उसके नाम को बदलने की क्या जरूरत थी? क्या यह …* नहीं है? नेता जी सुभाष चंद्र बोस ने प्लानिंग कमिशन को जन्म दिया था, उसको आपने हटा दिया । उन्होंने जिन-जिन प्रतिष्ठान को जन्म दिया था, आप एक के बाद एक उनको खत्म कर रहे हैं और दूसरी तरफ चुनाव के समय में आप इन लोगों की वाह-वाह कर रहे हैं । यही मेरा आपसे सवाल है ।
आपके गृह मंत्री जी, आपकी पार्टी के प्रेसिडेंट साहब बंगाल जाते हैं । …(व्यवधान) हाँ! हमारे गृह मंत्री जी आदरणीय अमित शाह जी, हमारे प्रधान मंत्री आदरणीय नरेन्द्र भाई मोदी जी । …(व्यवधान) एक बार, नहीं सौ बार कहूंगा । यह सरकार हम सबकी है । …(व्यवधान) हम यह कहना चाहते हैं कि बीजेपी के नेता अमित शाह जी, बीजेपी के नड्डा साहब बंगाल जा रहे हैं, क्योंकि वहां चुनाव आ रहे हैं । रबिन्द्र नाथ टैगोर जी के शान्तिनिकेतन में जा रहे हैं और कह रहे हैं कि यहां उनका जन्म हुआ । अरे! अजीब बात है । पहले तो पढ़ कर जाइए कि कहां उनका जन्म हुआ या नहीं हुआ । आप अचानक कह रहे हैं कि शान्तिनिकेतन में उनका जन्म हुआ । लोग हँस रहे हैं । हमें बुरा लगता है कि आप कम से कम इतनी बड़ी पार्टी के एक सभापति हैं । हमारे अमित शाह जी जा कर ठाकुर रबिन्द्रनाथ टैगोर की जो चेयर थी, उस पर जा कर बैठ जाते हैं । लोग आपको क्या कहते हैं, पता नहीं, आप जा कर बैठ जाते हैं । यह असम्मान होता है ।
 मैं यह कह रहा हॅूं कि आप इससे बच कर चलिए । आप जहां जाइए, वहां की जो संस्कृति है, वहां का जो कल्चर है और वहां का जो इतिहास है, उस पर थोड़ा गौर कर के जाइए । एक बार नहीं, सौ बार जाइए, हजार बार जाइए, क्योंकि सारे देश में जहां भी आपकी मर्जी है, आप जा सकते हैं । जहां भी आपकी मर्जी है, आप चुनाव प्रचार कर सकते हैं । लेकिन कहीं-कहीं राज्य में, सूबे में, अलग-अलग किस्म की एक पृष्ठभूमि होती है, सृष्टि होती है, संस्कृति होती है, इसको थोड़ा गौर करना चाहिए, ध्यान रखना चाहिए ।
          मैं देख रहा हॅूं कि आजकल आप लोगों के अंदर बहुत सारे रबिन्द्र प्रेमी बन चुके हैं । हमारे प्रधान मंत्री जी तो कभी-कभी खुद रबिन्द्रनाथ ठाकुर लग रहे हैं कि रबिन्द्र नाथ टैगोर बन गए हैं । …(व्यवधान) बुरा नहीं मानिए । मुझे जो लगता है, वह मैं कह रहा हॅूं । किसी को कोई सिमिलैरिटी आ जाती है, इसमें कोई बुराई नहीं है । लेकिन रबिन्द्र नाथ टैगोर की जो वाह-वाह होती है, रविन्द्र नाथ ठैगोर के ऊपर जब ज्यादा प्रेम आ जाता है तो दो-चार बातें कहना जरूरी होता है । मैं बंग्ला भाषा में कह रहा हँ । मैं हिन्दी में तर्जुमा करूंगा ।
*“Aharaha Tabo Ahoban Procharito Suni Tabo Udar Bani Hindu Boudhho Sikh Jain Parsi Musalman Christian Purab Poschim Ashe Tabo Sinhashon Pashe Prem Haar hoy Gantha Janogan-oikyo Bidhayak Jay He Bharat Bhagyo Bidhata Jayo He, Jayo He.”*        हिन्दी में क्या कहते हैं कि “सबके दिलों में प्रीत बसाए, तेरी मीठी वाणी ।
 हर सूबे के रहने वाले, हर मज़हब के प्राणी ।
सब भेद और फर्क मिटा कर, सब गोद में तेरी आ कर, गूंथी प्रेम की माला ।
 सूरज बन कर जग पर चमके भारत नाम सुभागा । जय हो, जय हो, जय हो ।”             अगर भारत माता की हम पूजा करें तो हर मज़हब के लोगों को साथ में लेने की जरूरत है । मैं आज के सदन में सबके सामने यह बात रखने की कोशिश करता हॅूं ।
          अभी हिन्दुस्तान में एक माहौल पैदा किया जा रहा है कि हिन्दुस्तान का दुश्मन है*  । …(व्यवधान) धीरे-धीरे उसके साथ हिन्दुस्तान में एक और माहौल पैदा किया जा रहा है कि हिन्दुस्तान के दुश्मन हैं हमारे …*  । एक तरफ मुसलमान और एक तरफ किसान, दोनों के खिलाफ आप लोगों ने  …* हुई है । यह तो सच्चाई है । अगर यह सच्चाई नहीं होती तो हमारी दिल्ली की सीमा में यह नजारा हमें क्यों देखना पड़ता? क्या यह हमारे लिए गर्व का विषय है? …(व्यवधान) मेरी बात सुनिए कि क्या यह हमारे लिए गर्व का विषय होता है कि जहां हमारा सदन है, जहां हिन्दुस्तान के लोकतंत्र की सबसे बड़ी पंचायत होती है, वहां से 20-30 किलोमीटर की दूरी पर लाखों की तादात में हिन्दुस्तान के किसान आ कर, खुले आसमान तले महीनों भर से अपनी बात रखते हुए एक दुर्दशाग्रस्त जिन्दगी गुजार रहे हैं । आखिर क्यों हमारे 200 से ज्यादा किसानों को जान गंवानी पड़ी?क्यों? क्या हो गया?
क्या हमारे प्रधान मंत्री जी जो दिल्ली में रहते हुए सारे हिन्दुस्तान में ही नहीं, बल्कि सारी दुनिया के साथ वार्ता कर सकते हैं, लेकिन हमारे किसानों के साथ आपको वार्ता करने की फुर्सत नहीं मिलती है? …(व्यवधान) आपको इतना …* क्यों है? प्रधान मंत्री जी, यह …* किसी के आगे जाने में रुकावट पैदा करता है । …* मानवता की क्षति करता है ।
आपने लोहे की कील लगा दी । आपने कँटीले तारों के बैरियर लगा दिए । आपने बिजली-पानी काट दिया । आपने इन्टरनेट बंद कर दिया । ट्रैक्टर्स घुसने न पाएं, इसलिए आप नए-नए कानून को अपना रहे हैं कि दस साल से ज्यादा पुराने ट्रैक्टर्स को नहीं घुसने देंगे । क्यों? इस तरीके का अत्याचार हमारे किसानों के खिलाफ क्यों कर रहे हैं? किसानों ने आपके खिलाफ क्या किया है? हमारे किसानों की यह दुर्दशा, यह बर्बादी हमें सहन नहीं होती, इसलिए सदन में आकर हम चिल्लाते हैं, शोर मचाते हैं, घुहार लगाते हैं कि कम से कम किसानों के मुद्दे पर अलग से चर्चा की जाए । उसे भी आप नहीं सुनते । आपका बहुमत है, आप नहीं सुनेंगे । …* को बन्द करें ।  * लोकतंत्र के लिए कोई शुभ चिह्न नहीं होता है । …* को बन्द करो और किसान के साथ वार्ता करके आप किसानों की मांग पूरा करें ।
सदन में सारे विपक्ष की ओर से और खासकर, आपकी पार्टी के भी बहुत सारे एम.पीज़. की ओर से मैं गुजारिश करता हूं । आपकी पार्टी के बहुत सारे एम.पीज़. चुप्पी साधे हैं, बोलते नहीं हैं । वे किसके खिलाफ बोलेंगे? बोलने से नौकरी जाएगी, टिकट जाएगा, सब कुछ बर्बाद हो जाएगा । लेकिन, सारे एम.पीज़. को यह सोचना चाहिए कि आपके लिए खतरा मँडरा रहा है । हरियाणा गया, पंजाब तो गया ही, यू.पी. भी जाने की कगार पर पहुँच गया । यह आपके ऊपर खतरा मँडरा रहा है । इसलिए कहता हूं कि सँभल जाओ, सँभल जाओ बीजेपी वालों, किसानों के खिलाफ जंग मत छेड़ो, किसान हमारा भाग्य विधाता है, किसान हमारा अन्नदाता है । अगर किसान न होता तो हम, आप, तुम, किसी को भी इस सदन में आने का मौका नहीं मिलता । इस तरीके की कार्रवाई की जाती है कि किसान हमारे दुश्मन हैं ।
          लाल किले पर क्या किसी ने चढ़ा था? क्या किसी ने अपमान किया? लाल किला हमारी एक पहचान है, एक धरोहर है । अमित शाह जी जैसे इतने ताकतवर स्वराष्ट्र मंत्री रहते हुए कुछ उपद्रवी कैसे लाल किले पर पहुँचे, यह सबसे बड़ा सवाल है । यह सबसे बड़ा सवाल है कि लाखों की तादाद में हमारे सुरक्षाकर्मी थे । सबसे बड़ी बात है कि 26 जनवरी को हिन्दुस्तान की राजधानी दिल्ली में सबसे ज्यादा सुरक्षा तैनात रहती है । 26 जनवरी हमारे लिए सबसे ज्यादा सुरक्षित दिवस होता है । हमारे डिफेंस मिनिस्टर भी हैं, राफेल दिखाते थे । हमारे बहुत सारे लोग और कुछ दिखाते थे, लेकिन कुछ उपद्रवी उसी बीच कैसे लाल किला पहुँच गए, क्या इसकी कोई तफ्तीश नहीं होगी? क्या इसकी कोई पहचान नहीं होगी? सारी दिल्ली में सी.सी.टी.वी. कैमरे लगे हुए हैं, ड्रोन्स हैं, सैटेलाइट्स हैं, सब कुछ हैं । लेकिन, फिर भी आज तक किसी को यह जानकारी नहीं है कि कौन वहां गया, कैसे उन्होंने झंडे गाड़े, कैसे झंडे लगाए, किसी को यह जानकारी नहीं है । क्यों?
सबसे बड़ी बात यह है कि 26 जनवरी के पहले हमारे सुरक्षा बलों की तरफ से यह बयान आया था कि पाकिस्तान में कुछ हैंडलर्स गड़बड़ी करने की साजिश कर रहे हैं । जब आपके पास इतनी सारी जानकारी है कि पाकिस्तान में क्या हो रहा है, यह सब जानकारी आपके पास है, लेकिन यहां क्या हो रहा है, उसकी जानकारी आपके पास नहीं है । सच तो यह है कि आप खुद चाहते थे कि कुछ घटना घटे, जिससे आम लोगों की निगाहों में इसे भटकाया जाए । यही बात है न! यह आपकी सोची-समझी सुनियोजित साजिश है । इस साजिश के चलते आप ने अपने लोगों को किसान बनाकर, झंडा गाड़ने के लिए और झंडा फहराने के लिए लाल किले तक पहुँचा दिया । आपने यह काम किया । अगर सही ढंग से इसकी तफ्तीश हो तो पता चलेगा कि ये षड्यंत्रकारी कोई किसान नहीं, ये षड्यंत्रकारी सिर्फ और सिर्फ …* हैं । *अगर ऐसा नहीं है तो आप जे.पी.सी. बिठाइए । उन सारी सी.सी.टी.वीज़. के क्लिप्स हमें दिखाइए । हम आपको बता देंगे कि कौन-कौन उपद्रवी हैं ।

19.00hrs आपको सब कुछ की जानकारी है, लेकिन आप छुपा रहे हैं । ऐसा हो सकता है कि आज नहीं, बल्कि सदन खत्म हो जाने के बाद दो-चार नाम आ जाएंगे । आप बड़ा त्वरित गति से, बड़ी चतुरता से, बड़ी तत्परता से जो किसान आंदोलन कर रहे हैं, उनको इस अपराध में फँसा दिया है । एक नहीं, बल्कि बहुत सारे लोगों को फँसा दिया है ।…(व्यवधान) यह रैली निकालने के लिए आपने इजाजत दी थी । रैली निकालने के  लिए सरकार ने खुद इजाजत दी थी । आपने खुद रूट बनाया था, फिर अगर गड़बड़ी हुई तो क्यों नहीं यह आपकी जिम्मेवारी होगी । इसे आप खुद बताइए । आज तक हमें स्पष्ट रूप से जानकारी नहीं हैं, ऐसा क्यों हैं, इसे आप बताइए । आप तुरंत तीव्र गति से सारे किसान आंदोलनकारी नेताओं के खिलाफ एक के बाद एक फिजूल केस दर्ज करके ‍किससे बदलना लेना चाहते हैं? जब बलपूर्वक नहीं हुआ तो आप छलपूर्वक किसान आँदोलन को तोड़ना चाहते हैं । आप उनमें फूट डालना चाहते हैं । आप किसानों के बीच दरार पैदा करने के लिए तरह-तरह की बातें करते हैं, यही तो आपका मकसद है, नहीं तो कैसे हिन्दुस्तान की सरकार की एक मंत्री यह कहें कि यह पंजाब का मसला है और दूसरे प्रदेशों में कुछ नहीं हो रहा है । क्या यह सही है? क्या यह सिर्फ पंजाब का मसला है? आप पंजाब के साथ नॉन-पंजाब को तोड़ना चाहते हैं । यह जो किसान रैली हो रही है, उसमें कास्ट, क्रीड, रिलीजन, ब्राह्मण, चंडाल सब शामिल हैं । उसमें पुरूष-महिला सब शामिल हैं । 100 साल की बुजुर्ग भी वहाँ शामिल है । राजनाथ जी, उस समय आपको बुजुर्ग नहीं, बल्कि वरिष्ठ कहना चाहते थे, लेकिन बुजुर्ग निकल गया । उसमें 100 साल की बुजुर्ग शामिल हैं, 13 साल का बच्चा शामिल है, महिला शामिल है । आप उनकी तस्वीर देखिए ।

          आज यह एक जन आंदोलन पैदा हो गया है । सारे दुनिया में इस तरीके के आंदोलन कहीं नहीं होते हैं, जो अब हिन्दुस्तान में हो रहे हैं । आज एक जन आंदोलन पैदा हो गया है । अंदर का जो खौफ व आक्रोश है, उसका एक स्पॉन्टेनियस जागरण है । लेकिन, आपने क्या किया? अगर हम दिल्ली को देखें तो ऐसा लगता है कि हम लोग अफगानिस्तान के काबुल में पहुँच गए हैं । अगर दिल्ली के सिंघु बॉर्डर, टिकरी बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर को देखें तो हमें लगता है कि हम इराक के बगदाद पहुँच गए हैं । अगर दिल्ली को देखें तो लगता है कि सीरिया की एलेप्पो पहुँच गए और यमन की एस्थाना पहुँच गए । क्या हमारी हालत ऐसी है? हम ऐसा क्यों कर रहे हैं, सारी दुनिया में हमारे खिलाफ चर्चा हो रही है । सारी दुनिया में हमारी छवि धूमिल हो रही है । इसका कारण क्या था?

          एक 18 साल की बच्ची ग्रेटा, जो एक एन्‍वायरमेंटलिस्ट है । उन्होंने कहा कि किसान के साथ हम अपना समर्थन जताते हैं । इसमें क्या गुनाह है? आप बताइए कि इसमें क्या गुनाह है । जब वियतनाम में यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका बमबारी करता था तो क्या हम वियतनाम के लोगों के समर्थन में बात नहीं रखते थे? जब अमेरिका में जॉर्ज फ्लाएड के ऊपर अत्याचार हुआ, उसको पीट-पीट कर उसकी जान ले ली गई तो क्या हम हिन्दुस्तान के लोगों ने उसके खिलाफ आवाज नहीं उठाया? आप खुद अमेरिका में जाकर यह कहते हैं कि अबकी बार-ट्रम्प की सरकार  । हमने तो आपको कुछ नहीं कहा, यह तो आप कहते थे । जब बांग्लादेश में लोगों के ऊपर अत्याचार हो रहा था तो हमारी प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गाँधी जी ने उनके साथ समर्थन जताया था । यह तो दुनिया का नियम है । दुनिया में हर कोने में कहीं भी अगर कुछ होता है तो क्या हम कुछ नहीं कह सकते हैं? सुनामी हुई थी तो क्या हमने मदद नहीं की थी? इसमें अन्याय क्या है, इसमें गुनाह क्या है, यह मुझे पता नहीं है । अगर ग्रेटा दिल्ली आकर यह कहे या दिल्ली के बारे में यह कहे कि पंजाब व हरियाणा में पराली जलाने से  हमारे दिल्ली में काफी प्रदूषण हो रहा है तो क्या यह गुनाह होगा? एक 18 साल की बच्ची के खिलाफ पूरी सरकार ने जंग छेड़ दी ।

हमारे मिनिस्टर ऑफ एक्सटर्नल अफेयर्स तरह-तरह की बयानबाजी करने लगे । इसकी क्या जरूरत है? यूएस हमारे खिलाफ बात करता है, यूनाइटेड नेशंस का ह्यूमन राइट्स हमारे खिलाफ बात करता है, कनाडा के प्राइम मिनिस्टर हमारे खिलाफ बात करते हैं, क्यों? इनको यह बात रखने का मौका कौन देते हैं? आप लोग हमारे देश के अच्छे-अच्छे जो बड़े सेलिब्रिटीज हैं, सचिन तेंदुलकर, लता मंगेशकर, इनको गुमराह करके नारे में शामिल कर रहे हैं । इनको बरगलाने की क्या जरूरत थी? आज दुनिया में बहुत सारे सितारे ग्रेटा का पक्ष रख रहे हैं । इससे किसकी छवि खराब हो रही है, बताइए? …(व्यवधान) मैं एक निष्पक्ष बात करना चाहता हूं कि इसमें किसकी छवि खराब होती है? हमारा देश क्या इतना कमजोर है? हमारे देश की 130 करोड़ आबादी क्या इतनी कमजोर है कि एक 18 साल की बच्ची को किसानों के पक्ष को रखने के चलते दुश्मन समझ रहे हैं? क्या हमारे हिंदुस्तान की यही तस्वीर होगी? हमारे हिंदुस्तान का क्या यही नजारा होगा? मैं सारे सदन को पूछ रहा हूं कि ग्रेटा को आपने पर्सनल नॉन ग्रेटा बना दिया, ऐसा क्यों बना दिया, किसके खिलाफ आप काम कर रहे हैं? हिंदुस्तान के खिलाफ, हमारी सृष्टि, कृष्टि, समष्टि के खिलाफ आप काम कर रहे हैं । 

          सर, मैं दो-चार बातें और कहूंगा । इनके खिलाफ बात बोलने के समय बोलते रहते हैं, बोलते रहते हैं, समाप्त नहीं होते हैं, क्योंकि इतनी बातें जमा हो गई हैं । मैं प्रधान मंत्री जी के सामने एक और बड़ा गंभीर मुद्दा रखना चाहता हूं । पुलवामा में जब घटना घटी थी, उस समय तो आप कोई प्रोग्राम कर रहे थे, बाद में आपको पता चला । देश के हर व्यक्ति ने, हर नागरिक ने, पुलवामा में जो हमारे 40 सुरक्षा कर्मियों की मौत हुई थी, जो शहीद हुए थे, उनके लिए हम सबने खेद व्यक्त किया । सब बड़े दु:खी थे । दिल्ली में प्रदर्शनकारियों ने जिस ढंग से उपद्रव किया और लाल किला पर चढ़कर जैसी घटना घटी है, उस समय पुलिस कर्मियों और सुरक्षा कर्मियों को चोटें आई थीं, उसके लिए भी मैं खेद प्रकट कर रहा हूँ । पुलवामा में जो घटना घटी थी, उसके तुरन्त कुछ दिन बाद हमने बालाकोट में एयर स्ट्राइक की । हम लोगों को बड़ी खुशी हई थी । बालाकोट स्ट्राइक की खबर हिन्दुस्तान के किसी व्यक्ति को नहीं पता थी, किसी को भनक भी नहीं थी, तो एक पत्रकार को,   एक मीडिया वाले को कैसे पता चल गया? यह बड़ी दिक्कत की बात है, बड़ी चिंता की बात है ।   इसमें   हमारी   नेशनल   सिक्योरिटी   खतरे  में है । प्रधान मंत्री जी यह आपको सोचना पड़ेगा ।…(व्यवधान) हम सदन में चाहते हैं कि जेपीसी के हवाले में टीआरपी स्कैम पर चर्चा हो । पुलवामा की घटना के बारे में पता चल गया … * नाम के कोई एक पत्रकार को, कोई एक मीडिया वाले को । मीडिया वाले आपके साथ बहुत काम करते हैं, यह भी हमें जानकारी है । आप हर वक्त उन मीडिया वालों का पक्ष रखते हैं । यह हमारे लिए बड़ी चिंता का विषय होता है । The fact is that the only people who had knowledge of these operations were the Prime Minister, the Home Minister, the Defence Minister, and the National Security Advisor. यह आपको देखना पड़ेगा । पुलवामा की घटना में, 23 फरवरी, three days before the Balakot strikes, जर्नलिस्ट को यह कैसे पता चला कि वहां बड़ी अच्छी खबर बनने वाली है? वह खबर इस तरीके से देश में फैलायेगा कि हमारा जो मीडिया है, उस मीडिया की बड़ी तरक्की होगी? The only people who had knowledge of these operations were the Prime Minister, the Home Minister, the Defence Minister and the National Security Advisor. In a shameful exchange between …*and … * it is mentioned, “It is good for big man in this season.”, “He will sweep polls then.” यह मैं नहीं कह रहा हूं, उन्होंने कहा है ।   

          Who is the big man? मेरा सवाल यह है कि “Who is the big man?” किसके लिए …* यह बात रख रहे थे । Who was the big man? Can the martyrdom of 40 Indian soldiers be a matter of victory for any Indian? Who of these four individuals did share sensitive secret about a top military operation with a civilian, not authorized to possession such information? Does this not amount to an act of treason towards the nation, its Armed Forces and every single patriotic Indian? Is this not a brazen violation of the Official Secret Act? यह देश में क्या हो रहा है? बालाकोट में अभी क्या हुआ, हमें पता नहीं । लेकिन हम मानते हैं कि जरूर कुछ हुआ है, लेकिन क्या हुआ, हमें पता नहीं । कितने मिलिटेंट्स की मौत हुई, इसका भी अभी तक पता नहीं, क्योंकि सरकार ने इस बारे में कुछ नहीं बताया है । बालाकोट की घटना के तुरंत बाद पाकिस्तान जब हमारे ऊपर हमलावार हुआ था, उसने हमारा एक हैलीकॉप्टर खत्म कर दिया, हमारे दो-चार आर्मी मैन भी उसमें शहीद हो गए थे । हमारा जवान अभिनंदन वर्धमान बड़ी बहादुरी के साथ वापस भी आ गए थे । इससे हिन्दुस्तान के लोगों को बड़ी खुशी हुई थी और हर्ष-उल्लास से भर गए थे । लेकिन असलियत में क्या है? इसे जानने का अधिकार हम सभी को है । बालाकोट अभी भी हमारे अंदर छाया हुआ है । अभी भी बालाकोट का सीक्रेट उजागर नहीं हुआ है । इसका मतलब यह नहीं कि हम जवानों पर शक कर रहे हैं, ऐसा बिल्कुल नहीं है । जिस ढंग से बताया जा रहा है कि बालाकोट की घटना और बालाकोट एयर स्ट्राइक चुनावी फायदे के लिए की गई थी, इसका चुनाव में फायदा होगा । उस घटना की जानकारी देशवासियों से पहले प्रधानमंत्री, डिफेंस मिनिस्टर और नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर को होनी चाहिए । उसको पता कैसे लग गया? यह दूसरा व्यक्ति नेशनल सिक्योरिटी के लिए खतरा नहीं है? इसके बारे में हमें जरूर जानकारी लेनी चाहिए ।

माननीय अध्यक्ष: अभी कई माननीय सदस्य बोलने के लिए हैं, मुझे कोई दिक्कत नहीं है । आप पूरा समय ले लेंगे तो  दूसरे  माननीय सदस्यों को बोलने का अवसर नहीं मिलेगा ।

…( व्यवधान)

माननीय अध्यक्ष: माननीय सदस्य, आप बैठ जाइए, मैंने आपको बोलने की इजाजत नहीं दी है ।

श्री अधीर रंजन चौधरी : अध्यक्ष महोदय, यह गंभीर मामला है और देश के लिए बहुत गंभीर मुद्दा है । यहां  डिफेंस मिनिस्टर साहब भी बैठे हुए हैं । मुझे पता है कि उनको कोई जानकारी नहीं रहती है । आप कहते हैं कि ड्रोन वैरियर बना रहे हैं, जब एच.ए.एल ड्रोन वैरियर बना रहा है तो राफेल क्यों नहीं बना सकते हैं, यह भी एक सवाल है । हमारे नेता राहुल जी बराबर इसका पक्ष रखते थे कि हिन्दुस्तान में हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड है तो उसको राफेल बनाने की सुविधा दी जाए । आप हिन्दुस्तान में ड्रोन वैरियर बनाना चाहते हैं तो राफेल का कुछ हिस्सा क्यों नहीं बना पाते । इस बारे में हम जरूर जानना चाहते हैं ।

          डिफेंस मिनिस्टर साहब, आप बताइए कि लद्दाख और लेह में हमारा हाल क्या है? आखों देखा हाल बताइए, अरुणाचल में क्या हो रहा है? सिक्किम में क्या हो रहा है? प्रधानमंत्री जी कह रहे थे कि कोई नहीं घुसा हुआ है, हिन्दुस्तान का कोई कैम्प कब्जे में नहीं आया है । हजार स्कॉवयर किलोमीटर का इलाका कब्जा में है । आप खुद कह रहे हैं कि हम स्टेट्स-को चाहते हैं । स्टेट्स-को चाहने का मतलब क्या है? इसका मतलब कि स्टेट्स-को नहीं है, इसलिए हम यथापूर्व स्थिति चाहते हैं । आप सदन को बताइए कि लद्दाख का हाल क्या है? वहां हम कब तक चीनी फौजों को धक्के मारकर चीन देश में भेजेंगे । इस बारे में आपको बताना पड़ेगा । हम सभी आपके पक्ष में हैं । हम हिन्दुस्तान के जवानों के साथ हैं, लेकिन लद्दाख से चीनी फौज को धक्का मारकर और गर्दन पकड़ कर निकालना चाहिए, यह हमारी मांग है ।

 

“आजादी की कभी शाम नहीं होने देंगे हमारे शहीदों की कुर्बानी बदनाम नहीं होने देंगे बची हो जो एक बूंद भी लहू की अपने रंगों में, तब तक भारत माता का आंचल बदनाम नहीं होने देंगे ।

जय हिन्द ।”       TEXT OF AMENDMENTS   SHRI N. K. PREMACHANDRAN (KOLLAM): I beg to move:

 
That at the end of the motion, the following be added, namely: -
“but regret that there is no mention in the Address about providing solution to the issues of agitating farmers and the need to provide special package for them and minimum support price on the agricultural products." (11)   That at the end of the motion, the following be added, namely: -
"but regret that there is no mention in the Address about the increasing unemployment in the country and steps to overcome the situation."(12)   That at the end of the motion, the following be added, namely:-
          "but regret that there is no mention in the Address about the need to develop a mechanism to control the prices of petrol, diesel and other petroleum products."(13)   That at the end of the motion, the following be added, namely:-
           "but regret that there is no mention in the Address about providing special package to overcome the economic crisis caused by Covid-19 and to allocate funds for rehabilitation of those who lost their jobs."(14)   That at the end of the motion, the following be added, namely: -
           "but regret that there is no mention in the Address about providing rehabilitation to Non-resident Indians who lost their job overseas and returned to India due to Covid-19."(15)   That at the end of the motion, the following be added, namely: -
           "but regret that there is no mention in the Address about any concrete programme for ensuring supply of nutritious food to women and children."(16)   That at the end of the motion, the following be added, namely: -
"but regret that there is no mention in the Address about the need to initiate any special scheme or programme to control the increasing prices of essential commodities."(17)   That at the end of the motion, the following be added, namely: -
"but regret that there is no mention in the Address about the need to have a programme or scheme to reduce unemployment and to provide employment to the youth in a time bound manner by filling up the vacancies in Central Government institutions and public undertakings."(18)       That at the end of the motion, the following be added, namely: -
         "but regret that there is no mention in the Address about any mechanism to regulate and control the alleged arbitrariness of banks in levying charges on customers without prior notice and deducting amount from their accounts arbitrarily."(19)   That at the end of the motion, the following be added, namely: -
"but regret that there is no mention in the Address about programme for comprehensive revival of EPF pension scheme and implementation of court verdict on the issue."(20)   PROF. SOUGATA RAY (DUM DUM): I beg to move:
That at the end of the motion, the following be added, namely: -
“but regret that there is no mention in the Address about the ongoing agitation by farmers and solution for the issues being raised by them including the issue of minimum support price of agricultural products."(22)   That at the end of the motion, the following be added, namely: -
“but regret that there is no mention in the Address about increasing unemployment in the country and steps to overcome the situation."(23)     That at the end of the motion, the following be added, namely: -
“but regret that there is no mention in the Address about any special programme for ensuring supply of nutritious food to women, children and downtrodden of the country."(24)   That at the end of the motion, the following be added, namely: -
“but regret that there is no mention in the Address about the need to have a permanent mechanism to control alarming price hike of petroleum products."(25)   That at the end of the motion, the following be added, namely: -
          "but regret that there is no mention in the Address about steps regarding rehabilitation of lakhs of migrant employees and thousands of Indians working abroad who lost their job and livelihood due to the COVID-19 Pandemic."(26)   That at the end of the motion, the following be added, namely: -
"but regret that there is no mention in the Address about any concrete steps for eradication of poverty in the country and steps taken for generating employment."(27)         That at the end of the motion, the following be added, namely: -
           "but regret that there is no mention in the Address about registering of cases under the Unlawful Activities (Prevention) Act against senior journalists and some peoples' representatives allegedly due to their tweets/comments on the events on Republic Day in New Delhi."(28)   That at the end of the motion, the following be added, namely: -
"but regret that there is no mention in the Address about any concrete steps to ensure safety and security of women in the country."(29)   That at the end of the motion, the following be added, namely: -
"but regret that there is no mention in the Address about the stand of the Union Government on implementation and alleged misuse of anti-conversion laws by some states."(30)   That at the end of the motion, the following be added, namely: -
"but regret that there is no mention in the Address about any programme for the welfare of fishermen in the country."(31)   SHRI SAPTAGIRI SANKAR ULAKA (KORAPUT): I beg to move:
That at the end of the motion, the following be added, namely: -
"but regret that there is no mention in the Address about the need for establishment of Government Medical College at Rayagada attached with Directorate of Health Services (DHH) in Odisha." (128)   That at the end of the motion, the following be added, namely: -
"but regret that there is no mention in the Address about the need to include Jhodia community from Odisha in the list of Scheduled Tribes."(129)   That at the end of the motion, the following be added, namely: -
          "but regret that there is no mention in the Address about the delay in completion of Gunupur – Therubali Railway Line Project (Via Padmapur, Bissam, Cuttack)."(130)   That at the end of the motion, the following be added, namely: -
"but regret that there is no mention in the Address about the updates on construction of Rail-Cum-Road Bridge over Kolab Reservoir between Suku and Koraput under Kottavalsa – Kirandul Railway Line."(131)   That at the end of the motion, the following be added, namely: -
          "but regret that there is no mention in the address About the delay in construction of Rayagada, Koraput and Jeypore bypasses on National Highways 326 and 26."(132) That at the end of the motion, the following be added, namely: -
"but regret that there is no mention in the Address about the establishment of High Court Bench in Koraput District."(133)   That at the end of the motion, the following be added, namely: -
          "but regret that there is no mention in the Address about approval of Rural/ Tribal tourist circuits under Swadesh Darshan Scheme for Rayagada and Koraput Districts in Odisha."(134)   That at the end of the motion, the following be added, namely: -
          "but regret that there is no mention in the Address about the approval of train from Koraput/Jeypore to Bhubaneswar via Rayagada."(135)   That at the end of the motion, the following be added, namely: -
          "but regret that there is no mention in the Address about establishment of Kendriya Vidyalaya at Jeypore, Odisha."(136)   That at the end of the motion, the following be added, namely: -
"but regret that there is no mention in the Address about allocation of funds to Central University of Odisha, Koraput to build the infrastructure through Higher Education Financing Agency (HEFA)."(137)     SHRIMATI APARUPA PODDAR (ARAMBAGH): I beg to move:
That at the end of the motion, the following be added, namely: -
          "but regret that there is no mention in the Address about special scheme or programme for controlling the prices of essential commodities and to regulate the price hike."(148)   That at the end of the motion, the following be added, namely: -
          "but regret that there is no mention in the Address about migrant labour crisis caused due to Covid-19 lockdown across the country."(149)   That at the end of the motion, the following be added, namely: -
          "but regret that there is no mention in the Address about ongoing protest  and concerns of farmers towards new farm laws."(150)   That at the end of the motion, the following be added, namely: -
"but regret that there is no mention in the Address about the alarming situation of economic growth in India." (151)   That at the end of the motion, the following be added, namely: -
          "but regret that there is no mention in the Address about the miserable condition due to growing unemployment in the country." (152)     That at the end of the motion, the following be added, namely: -
          "but regret that there is no mention in the Address about increasing atrocities against dalits and minorities in India." (153)   That at the end of the motion, the following be added, namely: -
          "but regret that there is no mention in the Address about alleged leaking of data related to national security." (154)   That at the end of the motion, the following be added, namely: -
          "but regret that there is no mention in the Address about alleged Chinese intrusion in Arunachal Pradesh and Galwan Valley of Ladakh."(155)   SHRI T. R. BAALU (SRIPERUMBUDUR):  Hon. Speaker, Sir, while thanking the President of India, it is my first and foremost duty to thank the hon. Prime Minister who was instrumental in bringing the vaccine to save the countrymen from disaster. I will be failing in my duty if I do not thank our scientists, doctors and professionals who stood behind hon. Prime Minister to accomplish the great job and who are responsible to put our nation as a leader in the pharmaceutical field. I thank hon. Prime Minister and our scientists not only on behalf of myself but also on behalf of my party and DMK President, Mr. M.K. Stalin.
          The President’s Address is nothing but the policy note approved by the Cabinet and sent to the President who delivers it in the Central Hall before the Members of both the Houses of Parliament. It is an annual ritual. Moreover, it is read for the purpose of showering or eulogising the particular day’s Government in a great way. It is a ceremonial affair. I could not attend the Presidential Address because along with 21 other Opposition Parties, the DMK joined the boycott of the President’s Address. So, I could not hear it, but I have read the President’s Address.
          The DMK Party basically belongs to the farming community. Basically, I am a farmer. I am proud to say that I belong to the farming community of undivided Thanjavur District, the granary of South India. It is natural to support the farmers and their cause and to see that farming community should not be disturbed at any cost. The President in his Address has made a lot of appreciation of the farmers. I quote:
“I am happy to say that through their work, our farmers are augmenting the efforts of the Government. Today, the food grain availability in the country is at a record high. In 2008-09, the food grain production in the country was 234 million tonnes whereas in 2019-20, the production has increased to 296 million tonnes. During the same period, the production of fruits and vegetables has also increased from 215 million tonnes to 320 million tonnes. I congratulate the farmers of the country for these achievements.”   Sir, it showers a lot of appreciation, but unfortunately, the poor farmers, who are the food providers of India, are suffering. More than 1.5 lakh farmers are gathered on the outskirts of Delhi. They are suffering. They are put to hardship by the police and other people. They do not have any water, no food and nothing. Today is the 72nd day wherein our farmers are picketing and suffering, just praying before the mighty Government of India to see that all the three draconian laws are withdrawn immediately without any further delay. More than 200 people have died and eight people, including today’s incident, have committed suicide. Another 117 people have been put into prison. Is it fair on the part of the Government of India? I appeal that the Government has to reply in a positive way, considering farmers as our kith and kin.
          My dear Sir, for the past 63 years, I have been associated with the Dravidian Movement established by Thanthai E.V. Ramasamy  Periyar, Arignar Anna, Kalaignar Karunanidhi followed by Mr. Murasoli Maran and now led by the great son of India, Mr. M.K. Stalin who is the future-CM of Tamil Nadu.
          On behalf of my party and the farmers of Tamil Nadu, and all the farming community in India, I vociferously plead before the President and the Government of India to kindly repeal all the three farm laws with a human touch, without sticking to any false prestige and ego, to save the country from turmoil.
          Sir, now I will come to Jammu & Kashmir. Jammu & Kashmir has been divided into two Union Territories. Abrogation of Article 370, bringing enactment on CAA, division of Jammu & Kashmir into two Union Territories, and many such other enactments have been brought forward without the consent of the leaders of that particular State or the most eminent people of the Indian community. But this grey area should have been consulted in the Inter-State Council. What is the Inter-State Council for? The Inter-State Council has not been convened for the past four years. Is it fair on the part of this existing Government?
          Hence, before bringing such laws, such most important laws, is it not proper for the Government of this day to see that they are put before the Inter-State Council and have suggestions from the Chief Ministers, from the eminent people, and also from the various political people before bringing any enactment?
 
          Now, I come to the Central Vista Project. What is the Vista Project for? You are spending Rs. 20,000 crore public money for creating a new Parliament. What is wrong with this Parliament which I am addressing and you are chairing? What is happening to this Parliament? Are you going to dismantle this Parliament? No, you are not going to dismantle it. It will be kept as a museum, I think. What for are all these Secretariats being constructed? The proposal is to construct the Secretariats, to construct the new Parliament. Is it proper on the part of the Government of this day? When our poor  farmers are lingering for food and water just before the eyes of the Government, they are laying foundation for the funny projects.
          Sir, the States are under severe fear because of the education system, which is actually being taken away by the Central Government. It is snatching the powers of the State Governments. I will cite one example. The State Government wanted to appoint a Vice-Chancellor of the Madras University. For that purpose, is it not possible for the State Government itself along with the Governor to appoint a Vice-Chancellor? Is it not possible? But from here, orders are being given. Marching orders are being passed by the Central Government. What for, Sir? For the past 60 years, the Vice-Chancellor of the Madras University is being appointed only by the State Government and with the consent of the Governor. But now, marching orders are being passed, sent, and the new Vice-Chancellor has been appointed to Madras University.
   
19.24 hrs                       (Shri N. K. Premachandran in the Chair)           Now, once again, I want to request the Government of India not to make any atrocities. What is the Higher Education Commission for? Why have you brought the Higher Education Commission? What happened to the University Grants Commission? What happened to the universities? Are they not working? Are you not satisfied with the University Grants Commission? Are you not satisfied with the functioning of the universities? But these people are bringing the Higher Education Commission of India as an umbrella body having four separate vehicles for standard setting, accreditation, regulation, and funding. All these four items so far were being administered by the University Grants Commission or by the universities. So, what is the new Commission for?

          It is just to snatch away the powers from the State Governments. This is once again an attempt at encroaching on the powers of the State Governments. I do not know whether these people have studied Sarkaria Commission recommendations or not.

          Let me now come to petroleum products. We all know that the price of crude oil crashed to 30 dollars per barrel. The Minister of Petroleum and Natural Gas, who is my friend, is present here. Please touch your conscience and tell me whether it is fair on your part to adopt a lukewarm approach by not intervening into the oil price hike issue. What is the price hike? The price of petrol is Rs. 89, that of diesel is Rs. 82, and that of gas is Rs. 735. Is it possible for the poor people, who use gas and two wheelers, to pay such a huge price? If there is a hike in the price of diesel, the price of all other commodities increases. There is a cascading effect and the price hike will be there. So, before doing anything the Government of India should consider what will be its effect. Now, my request to you is to go for some corrective measures towards all these things.

          There is a windfall profit of Rs. 20 lakh crores because of increase in prices. This money of Rs. 20 lakh crores goes to the Government of India. My friend is laughing. I know what it is. May be he is laughing at the higherups. The Government got Rs. 20 lakh crore because of hike in duties. Only by hiking duties, the Government of India got a windfall profit of Rs. 20 lakh crores. Is it not correct? Moreover, the oil companies have been forced to spend Rs. 3,000 crores for Patel’s statue. These are all atrocities.

          Time and again, our Indian fishermen are put to hardship. Our fishermen, especially fishermen of Tamil Nadu, are facing a lot of hardship. When they go for fishing within our territorial waters, Sri Lankan Navy is entering into our territorial waters and are snatching their boats and harassing them. It happens day in and day out. Every now and then fishermen of Tamil Nadu are going for dharna. It is the most unfortunate thing. The Government of India is again adopting a lukewarm approach. They are not doing anything. This is a very serious matter. This matter should be immediately settled by calling the Sri Lankan counterparts. We should go for dispute resolution arrangements so that these things do not happen at least here after.

          During the last days of Sri Lankan cold war, more than 1.5 lakh Tamil people were killed mercilessly by the then authorities. You know who was that particular person who did that. As I said, 1.5 lakh Tamil people were killed.  The United Nations Human Rights Commission is going to take up this matter. The Resolution will be taken up in the ensuing Session. The Resolution is about taking this matter to the International Criminal Court or to take up a sort of international inquiry to see that all the culprits who were involved in these killings are punished. Therefore, Government of India should support UNHRC to bring international inquiry against the killings in Sri Lanka.

          Every now and then, my leader, our Members of Parliament, and myself are writing to the Government of India about reservation. The court has ordered to provide 50 per cent reservation in all India quota for BDS and MBBS. But what has happened? The same Government that is sitting before me is flouting this order. They are not doing anything. All India quota is not being shared with the States. This 50 per cent quota has to be distributed to the OBC people. Candidates belonging to OBCs are waiting for a chance to punish  you at appropriate time. 

          I wanted to discuss Tamil as an official language. Tamil was cherished and flourished more than 2500 years ago. The history of Tamil language dates back to 2500 years. In Rajya Sabha and in Lok Sabha, DMK MPs and Members of Parliament from  Tamil Nadu have been vociferously requesting the Government of India that Tamil is put into the official language list of India. What is the problem? It is a small country. Switzerland is having three official languages. South Africa, a new country, has got 11 official languages. Why can the great India not make 22 languages, official languages? My request is that the Tamil language should be incorporated as an official language by an enactment, so that Tamil is given proper place in the Constitution. Tamil is one of the official languages of Sri Lanka. Tamil is one of the official languages of Malaysia. Tamil is one of the official languages of Singapore. Tamil is the official language of Tamil Nadu and Puducherry. What else do you need? Does it not qualify to become an official language? People are providing Rs. 600 crore for a particular language, whereas my language is only getting Rs. 60 crore. Is it proper on the part of this Government? Every now and then, they shed crocodile tears by reciting Thirukkural, Silapathikaram, and so on. What I suggest is that, as a first step,  you see that all the Government of India offices and PSUs in my State implement Tamil as an official language. The same thing can be carried out in West Bengal and in the rest of the country. All languages should be given preference.

          I will now talk about women’s reservation. To my knowledge, all our womenfolk  are crying for more than six decades for reservation. They are crying. There is no mention about women’s reservation. The President has not mentioned anything about it. They have forgotten and women also have forgotten the issue. The fighting spirit of the women has gone. Taking them for granted, this Government is keeping a lukewarm attitude towards this issue. I would like to wake up this Government from their deep slumber to see that women’s reservation is brought in at the earliest.

          With a heavy heart, I would like to point out that 21st February is observed as `Mother Tongue Day’ as per UNESCO. Our Government of India is a signatory to the UN Charter. Is it not necessary to see that as per UNESCO guidelines and as per UNESCO demand, the mother tongue language is put into forefront? Is it not necessary? I want to know this from the people here. Is it not proper to entertain Tamil or any other regional language? We celebrate International Mother Language Day as per the UN Charter, but you are not giving importance to the regional languages.

          There are more than 40-50 Kendriya Vidyalaya Schools in Tamil Nadu; 49 Kendriya Vidyalaya schools  are there, but nowhere Tamil is taught. Is it not a shameful affair? I am questioning the Government of India whether it is not a shameful affair.  The Government of India is refusing to teach Tamil in KV schools in Tamil Nadu.  These people are playing with flames. I only warn them not to play with flames. You know what happened in 1965 in anti-Hindi agitation. 

You should be more careful while taking each and every step as far as Tamil Nadu is concerned. As far as language is concerned, you are doing a wrong thing. The KV schools invariably have to teach Tamil to the Tamil people. This is most important.

          In the long speech, there is no mention about the farm loan waiver. Crops have perished in three successive cyclones. You know that the South Indians in Kerala, Tamil Nadu and elsewhere are facing a lot of problems due to it. All the standing crops have perished in floods and cyclone. There have been three successive cyclones there. My people, the farmers, are keeping their hands tied; shedding tears; and looking for help. Is the Government of the day not to come forward to help them? The President’s Address is about policy of the Government. There is no mention in the President’s Address of giving compensation for the perishing crops.

          You are a senior Member of the House and you know how many times the South Indians are shouting and weeping in the House about inter-State connection of peninsular rivers. I know why you are laughing. There would not be any problem between brothers. We will abide by what you say and you will abide by what I say. …(Interruptions) He is a fine gentleman and he will accommodate the Tamils. Actually, we need that the peninsular rivers should be inter-connected immediately.

          Anybody who has committed a murder will be put to jail only for 20 years. After undergoing jail imprisonment, he or she will be released even within 15-16 years according to the merits of the case of a particular person. But Perarivalan and six others are put in jail for the past 30 years. Is it correct on the part of this Government? …(Interruptions) You may say so many things, but is there any opposition from anybody? …(Interruptions) What is the problem? They are lingering in the jail for the past 30 years. With a huge heart you should consider it. The President -- who is going to be thanked by the Parliament -- has to come forward to immediately release all those people. The Governor has been ordered by the High Court of Tamil Nadu, but he does not care. …(Interruptions) The Assembly of Tamil Nadu has passed a unanimous resolution and the people of Tamil Nadu are requesting, but nothing is moving. …(Interruptions) Simply, the requests made by all these pitiable souls are not being disposed of as of now, in the President’s House. …(Interruptions)

          As regards the North-South Freight Corridor from Itarsi to Vijayawada and East-West Corridor from Kharagpur to Vijayawada, my only request is to do it as the corridors are necessary. But at the same time, the Itarsi to Vijayawada Corridor should terminate not at Vijayawada, but at the Chennai Port. Similarly, the Kharagpur to Vijayawada Corridor should terminate at the Tuticorin Port – the Southern peninsular port. These are the most important corridors and the Government should see to it that things are done in a positive way. …(Interruptions)

          Incidentally, 3rd February, 2021 was the 52nd Anna death anniversary. We remember his fond memories. He categorically said in the Rajya Sabha on 1st May, 1962 : “The Government of the day thought that they were infallible and whatever decisions they took were right…”.

HON. CHAIRPERSON : Baalu ji, please do not quote the proceedings of the Rajya Sabha.

SHRI T. R. BAALU : No, it is available in the library.

HON. CHAIRPERSON: But as per the Rules, you are not permitted to quote the proceedings.

SHRI T. R. BAALU : This is most important. Anna has quoted it.

 

HON. CHAIRPERSON: You can very well say without quoting from the Rajya Sabha proceedings.

… (Interruptions)

SHRI T. R. BAALU :    Sir, I am only quoting what Anna has quoted on 1.5.1962 - let the people assume or presume whatever it may be – that the Government of the day thought they were infallible, and whatever decisions they took were right as they won consecutively but it was the wrong attitude; it was against the basic tenets of parliamentary democracy. It was told to my friends. The same thing which was told by Arignar Anna to the Congress brothers, now I tell the same to my former brothers of the BJP. Whatever he said 58 years ago holds good now.

          The strength of power lying with them is not with the BJP but with the weakness of the Opposition. The strength of power lies not with the BJP but with the Opposition. All the 21 Opposition parties stood united to oppose the farm laws. What is the vote share of the BJP in the last elections which they won? How was the power inherited? How much strength do they have? It is 37.5 per cent only! The strength of power they are enjoying now came out of the 37.5 per cent votes in the last elections. …(Interruptions) I am going to conclude brother.

          There is a lack of coordination and cooperation in the Opposition, probably between the larger parties like Congress and many other parties like that of Dr. Thirumaavalavan. I am saying this just for the sake of quoting. Larger Opposition parties should unite together to see that the BJP is not successful at least in the new General Elections.

          In the end, I thank the hon. President for delivering the Address to Parliament. Thank you.

     

SUSHRI MAHUA MOITRA (KRISHNANAGAR): Hon. Chairperson, Sir, I rise to speak against the Motion and in support of the amendments moved by my Party to the Motion of Thanks on the President’s Address.

          Far too many of our fellow citizens today languish in jail or bear the burden of judicial and police harassment simply for asking questions of this Government or choosing to voice an opinion on the state of affairs in our country. So, I, as a Parliamentarian, garbed in parliamentary privilege, now choose to use this platform that the people have given me to ask the questions that the people want to ask and to give voice to their thoughts so that this Government may know that arresting, attacking, and repressing voices will not hold.  I trust my hon. colleagues in the Treasury Benches will not shout me down and you, hon. Chairperson, Sir, will let me speak for the entirety of my allotted time and that the Lok Sabha TV, paid by my taxpayers’ money, will not turn the screens off.

          The American journalist, Elmer Davis’s words about the United States are just as relevant for the celebrations of the 72nd anniversary of the birth of our Republic that this Republic was not created by cowards and cowards would not preserve it. Today, I speak of cowardice and courage, and of the difference between the two; of those cowards who hide behind the false bravado of authority, of power, of hate, of bigotry, of untruth, and dare to call it courage. After all, this Government has turned propaganda and disinformation into a cottage industry.

          The biggest success of the Government is the recasting of cowardice as courage. I will lay out various instances where this Government has demonstrated courage.

The Government claims that it has shown courage to bring in a law that questions on arbitrary parameters who is or who is not an Indian. The Citizenship (Amendment) Act was passed in 2019 in this House on the pretext of granting citizenship to persecuted Hindus and other minorities in the neighbouring countries. At the same time, it threw into an abyss of insecurity millions of Indians who have been living in this land for generations. But the rules by which this Act will be implemented were not yet prepared by December 2020 according to the Ministry of Home Affairs. The deadline has yet again been extended till April 2020. If indeed this Government cares so much for those persecuted in neighbouring countries, why does it miss the deadline after deadline to notify these rules? Meanwhile, very many of us have mustered the courage to tell the Government “कागज नहीं दिखाएंगे ।“. Trying to exert Central influence over Shantiniketan, Tagore’s heaven, is not enough to change their colours. Only a small portion of Jana Gana Mana was adopted as our National Anthem. I urge the Government to read the rest of it. Maybe, it will help them understand Tagore as they call him and Bengal a little better. My colleague, the respected floor leader of the Congress Party happened to also quote these very words. But I do not think repeating them over and over again would do our nation some good.

 

“Ohoroho Tobo Aahbaano Prachaarito,Shuni Tabo Udaaro Baani Hindu Bauddho Shikho Jaino,Parashiko Musholmaano Christaani Purabo Pashchimo Aashey,Tabo Singhaasano Paashey Premohaaro Hawye Gaanthaa Jano Gano Oikyo Bidhaayako Jayo Hey. ‘Hail Unity, Hail Religious Diversity’.”   This is the courage to make India the world’s greatest democracy into a virtual police state whereby a single dubious complaint under which both an eminent Member of this House and one of India’s most veteran journalist are charged with sedition. This is the courage to try and take over every State Government by hook or by crook whether they have won the popular mandate or not. They claimed they were wedded to constructive cooperation and cooperative federalism. Instead of partnering with the State Governments, they try and muscle them out at every opportunity. Does the Ruling Party wish that its legacy be that it governs the largest democracy in the world or that it imposed a one-party rule in India? They should ask themselves. This is the courage to announce the national lockdown at only four-hour notice causing untold misery, countless deaths, the sight of thousands walking for hundreds of miles with no food or money. This Government spent less than 2 per cent on social transfers in contrast to OECD countries which spent 20 per cent and 6 per cent was spent by middle income countries. This is the courage, no! This is the brazen audacity to announce the economic rebound.

India was the single worst performer among developing countries in the year 2020. Even if we believe this Government’s Economic Survey, the economy lowered by 7.7 per cent in 2020 and will rise by 11 per cent in 2021. So, in effect, by 2022, i.e. over a two-year time span, the economy will be flat just as the 2019 GDP number. This Survey proclaims that the growth is the biggest poverty alleviator. Hon. Members of this House, we are going to have no growth for two whole years. I do not understand the celebration.

I come from a rural constituency and a source of migrant workers. The distress in the MSME sector is real. This rebound is one where large and strong enterprises have become stronger. It is not V-shaped, it is K-shaped. One per cent of rich and successful citizens have become richer and the pains of the MSMEs have only increased. The Government had the courage to say that it gave Rs. 1,13,000 crore via the Direct Benefit Transfer Scheme only to take the same money away from those very same people and the middle class in the way of increased cess on petrol and diesel. We are not a nation that is growing and sharing its wealth, we seem to be a nation that is only finding ways to share our poverty.

The hype today is that post budget, the sensex jumped. In a country where only six crore people pay taxes, only 4.6 per cent of the total population, how many do you think are the investors in the sensex that they should jump for joy when the sensex jumps? This is the courage to use the official channels of the Ministry of External Affairs to respond to social media posts by an eighteen-year old climate activist and an American pop star where not even one single ministry has been deputed by this Government to try and look out for food, water, and basic sanitation needs of the farmers and their families who have been camping at the border for almost ninety days.

And finally, this is the courage to bring in three farm laws when the Opposition, farmers across the country, as well as the Government’s oldest ally warned it was unacceptable.

I wish to remind this Government that India under Prime Minister Lal Bahadur Shastri committed three things to Sant Fateh Singh, the Akali leader - the creation of a Punjabi-speaking State, open-ended public procurement, and an assured return on agricultural produce. These farm laws threaten to snatch away two of these guarantees. These laws were arrived at without consensus, tabled without scrutiny, and rammed down this nation’s throat with the brute force of the Treasury Benches. They have firmly established this Government’s motto of brutality over morality. And everyone else in this country has been portrayed as a coward or a terrorist – from the farmers, to the students, to the old ladies of Shaheen Bagh.

You say you have courage! You claim you have done so many things that no other Government before you has done. Yes, that is true! In true fascist fashion, you have made every act of pettiness, of vengeance, of hate, of bigotry, a part of your narrative of courage. The reason no one has done it before you is not because no one had the courage, but simply because it was not the right thing to do. Has that thought ever struck you?

And India’s tragedy today is not just that her government has failed her but that her other democratic pillars, the media and the judiciary, have failed her too. Lord Hain, the Labour Peer, said in the House of Lords, “What is the point of being a Member of Parliament either in the Commons or in the Lords if you do not discharge your responsibilities and where appropriate use the privileges that you have in order to promote justice and liberty?” So, today, like a true child of Bengal, I will stand here and be courageous. Trust me Mr. Baalu, we have not lost the fighting spirit. Even though the Government’s spin factories will later portray it as cowardice or even plagiarism, I will lay out a few home truths by using my Parliamentary privilege that guards me from charges of sedition and contempt for anything I say in this House. And Mr. Law Minister, Sir, if you are present on the premises, with all due respect, this time you have neither the right to shut me up nor to try and get my words expunged from the record.

... *The judiciary stopped being sacred when it chose to squander the greatest opportunity that any bench of the highest court of this land has ever seen to reinforce the founding principles of our democratic republic and to uphold the rights enshrined in Part 3 of our Constitution. …(Interruptions)

THE MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF PARLIAMENTARY AFFAIRS AND MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF HEAVY INDUSTRIES AND PUBLIC ENTERPRISES (SHRI ARJUN RAM MEGHWAL): Sir, she cannot discuss this in the House. …(Interruptions)

HON. CHAIRPERSON: One second please, Miss Moitra. The Minister is on his legs.

DR. NISHIKANT DUBEY (GODDA): Sir, I am on a point of order under Rule 352(v). …(Interruptions)

SHRI ARJUN RAM MEGHWAL: Sir, the hon. Member cannot discuss the Chief Justice of India here without giving prior notice and getting the approval of the Chair. …(Interruptions)

HON. CHAIRPERSON: Mohua Moitra ji, please be seated. This House is run by rules and procedure. When a Member raises a point of order, definitely it is a right of the Member to do so. So, I have to hear them and then I will pass the ruling.

DR. NISHIKANT DUBEY : Sir, Rule 352(v) says, “A Member while speaking shall not reflect upon the conduct of persons in high authority unless the discussion is based on a substantive motion drawn in proper terms.” हम लोग यहां पर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया को डिस्कस कर रहे हैं ।…(व्यवधान) भारत के राष्ट्रपति ने उस आदमी को नॉमिनेट किया है । भारत के राष्ट्रपति के ऊपर डिस्कसन कर रहे हैं ।…(व्यवधान) यदि इसी तरह से चलता रहा, तो इस डेमोक्रेसी का बाजा बज जाएगा ।…(व्यवधान) इसीलिए कि उन्होंने राम मंदिर का जजमेंट दिया ।…(व्यवधान)

सर, हमने तो कभी बात नहीं की है कि वह चीफ जस्टिस कांग्रेस का …(व्यवधान) ऐसा नहीं हो सकता है ।…(व्यवधान)

HON. CHAIRPERSON: Shri Sougata Ray ji, what rule are you quoting?

PROF. SOUGATA RAY (DUM DUM): Sir, I am going for the explanation under Rule 352(v).

While the hon. Member Sushri Mahua Moitra spoke, she did not refer to any person by name; she did not mention anybody. …(Interruptions) मेघवाल जी, आप कुछ नहीं समझते हैं, आप बैठिए । …(व्यवधान) Secondly, she referred to a person who was the Chief Justice. If that man would be Chief Justice now, no mention could be made against him, except by way of impeachment or by a Substantive Motion. That man is a retired Chief Justice. He is not in high authority and his name has not been mentioned. Not a single word of what Sushri Mahua Moitra said should be expunged. Sir, I appeal to your good sense and your fair play and justice that do not let this lady be stifled by lenience of this ruling party.

HON. CHAIRPERSON: Hon. Minister, do you want to say something?

श्री अर्जुन राम मेघवाल: चेयरमैन साहब, मैं यह कह रहा हूँ कि माननीय सदस्या जो बोल रही थीं, इन्होंने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया पर … * का आरोप लगाया है, क्या यह हमारे लिए शर्म की बात नहीं है और हम उस पर इस हाउस में डिसकस कर रहे हैं और सौगत राय जैसे व्यक्ति इसको डिफेंड कर रहे हैं । …(व्यवधान) ये इतने विद्धान आदमी हैं, इनको डिफेंड कर रहे हैं, यह तो … *है ।…(व्यवधान)    आप   ओपनली   चीफ   जस्टिस ऑफ   इंडिया पर …* का आरोप लगा रहे हैं ।…(व्यवधान)

HON. CHAIRPERSON : Let me pass the observation of the Chair. We will go through the proceedings. If anything is affecting the high authority and if anything is unparliamentary, definitely it will be looked into and it will be corrected. Try to avoid such observations.

… (Interruptions)

SUSHRI MAHUA MOITRA : Hon. Chairperson Sir, it is extremely important that I not only not avoid them, but I bring them up because I did not accuse the hon. gentleman ...**Let me put it on record that it is a great ... ** I did not do it. …(Interruptions) Instead, it let our migrants walk to their deaths; it let our greatest activists and modern writers rot in jail. …(Interruptions)

SHRI ARJUN RAM MEGHWAL: Sir, she is repeating … *…(Interruptions) She is not obeying the order. She is again repeating. … (Interruptions)

HON. CHAIRPERSON: Anything objectionable will not go on record.

… (Interruptions)

 

SHRI ARJUN RAM MEGHWAL: She is repeating the same thing against the Chief Justice of India. … (Interruptions)

HON. CHAIRPERSON: Mahua Moitra ji, please be seated. You have already made your observation.

… (Interruptions)

SUSHRI MAHUA MOITRA : Sir, let me continue my speech. Instead, the judiciary stopped being sacred when it chose to squander the greatest opportunity that any bench of the highest court of this land has ever seen.

HON. CHAIRPERSON: Please address the Chair; please listen to the Chair.

… (Interruptions)

DR. NISHIKANT DUBEY : Hon. Chairperson, I quote Rule 356: “The Speaker, after having called the attention of the House to the conduct of a member who persists in irrelevance or in tedious repetition either in one’s own arguments or of the arguments used by other members in debate, may direct that member to discontinue the speech.” She is again repeating. आपके ऑब्ज़र्वेशन के बाद, she is again repeating….(Interruptions)

HON. CHAIRPERSON : Nishikant ji, we have already disposed of the issue. If there is anything objectionable to the high authority of Chief Justice or if there is any allegation, definitely the Chair will go through the proceedings. If there is anything objectionable, it will be expunged.

 

20.00 hrs SUSHRI MAHUA MOITRA : Sir, the Judiciary stopped being sacred when it chose to squander the greatest opportunity that any Bench of the highest court of this land has ever seen to reinforce the founding principles of our democratic republic and to uphold the rights enshrined in Part III of our Constitution.  Instead, it let migrants walk to their deaths.  It let our greatest activists and modern writers rot in jail.  It now sits back as a mute spectator when our young are prosecuted for cracking a joke.  The Judiciary seems to have forgotten the Constitutional principle of separation of powers that Parliament and Parliament alone can legislate. If something is bad in law, then the courts can strike it down or stay it on grounds of unconstitutionality.  But unless it is so, the courts must do nothing.  The Government alone must face the consequences.  If the Government has brought in the farm laws which are not acceptable to people, then either the Government will repeal the laws or the people will vote the Government out.  We urgently need the sagacity and courage shown by the High Courts during the Emergency when they delivered the ADM Jabalpur and like decisions.  The Supreme Court, unfortunately, is failing the common citizen and is being perceived as protecting the privileged and ironically only itself.  A very large section of the Indian media has plummeted to new depths both in terms of lack of factual reporting as well as the total absence of journalistic ethics.  Yet, even when the bar is so low, the WhatsApp chat leaks detailing correspondence between a large Government leaning media channel and the head of the TV ratings agency expose the utter filth and the crony capitalism that ironically this Government claim to be saving us from.  What is left of the resolute media is being targeted with the provisions of the UAPA and other draconian laws.  You keep taunting the Congress about the Emergency.  But India today is in a state of undeclared emergency.  But the Government has miscalculated.  There is a fundamental difference between cowardice and courage.  The coward is brave only when armed with power and authority.  The truly courageous can fight even when unarmed.  Do not forget this.  Do not forget this when you tell the authorities in Ghaziabad to clear the protest site overnight when the help of the police and the bureaucracy.  You are not being courageous.  You are a … *wielding power.  The truly brave came in droves from villages wielding nothing, but they believed that their cause is just.  They were propelled by the spontaneous tears of their leader, not by the force of their water cannons.  Do not forget this when you block the roads and cut the internet off in 17 of Haryana’s districts.  You are not being brave.  You are a … *wielding power.  The State of Haryana gives 10 per cent of India’s Air Force and contributes to 11 per cent of the total strength of the Indian Navy.  Its people can neither be turned anti-national, nor terrorist, nor gaddars.  Do not forget this when a peaceful 60-day movement is insidiously hijacked and then you slap FIRs on Punjab’s farmers.  You are not being courageous.  You are a … * wielding power.   Baghel Singh and Jassa Singh Ahluwalia, leading their misls, captured Delhi way back in 1783 from the Mughals.  Their descendants do not need a lesson in courage from those who captured Delhi only in 2014. 

Tagore in his poem ‘Bandi Bir’, the captive warrior, an ode to Sardar Banda Singh Bahadur, wrote: “Eseche se ekdin, jibon mrityu payer bhritto, chitto vabonahin, eseche se ekdin”.  That momentous day has arrived. 

In the 125th year of Subhas Chandra Bose’s birth, the Central Government has made every attempt to hijack Netaji’s legacy and weave it into their own fake, narrow narrative of courage.  But this nation needs to know that Netaji had two clarion calls, both embodiments of his courage and his spirit.  One was the salutation, ‘Jai Hind’.  Today, this Government has replaced this national greeting with a narrow, religious chant that it uses as war cry to heckle, to bully and to always, always remind the minority about who is in charge.  Netaji’s second call was ‘Dilli Chalo’.  This Government falls over itself to pay lip service to Netaji.  But in truth, you blocked the borders in Singhu, in Ghazipur, in Tigri with walls and spikes for all those who actually want to come to Delhi to tell you that much like Subhas Chandra Bose, they too will not accept any halfway house.  Netaji told us, never to lose faith in the destiny of India.  And it is not India’s destiny to be ruled by cowards.  The time has come for us to show courage.

गिरते हैं शहसवार ही मैदान-ए-जंग में, वो तिफ़्ल क्या गिरे जो घुटनों के बल चले ।

          Repeal or nothing.  Thank you.

 

20.05 hrs                       (Shrimati Meenakashi Lekhi in the Chair) SHRI P.V. MIDHUN REDDY (RAJAMPET): Thank you, Madam, for allowing me to speak on the Motion of Thanks on the President’s Address.  I would like to bring to your notice that privatisation of Visakhapatnam Steel Plant is a matter of concern for our State and its people.  It has not gone down well with the people of our State.  It is the largest public sector that we have in Andhra Pradesh.  It employs over 20,000 people directly and more than 20,000 people are dependent on this steel plant indirectly.  So, any move to privatise it does not go down well with the people of our State.

          The plant was announced in 1970 by the then Prime Minister after a decade-long struggle.  More than 35 lives were lost.  The famous slogan ‘Visakha Ukku, Andhrula Hakku’ echoed for the establishment of this steel plant.  It has a lot of sentimental value for the people of Andhra Pradesh.  We oppose the privatisation of this plant.

          The company was gaining profit from 2002 to 2015.  The debt burden now is Rs.22,000 crore with the interest rate of 14 per cent.  I would like to quote what our hon. Chief Minister wrote to the hon. Prime Minister, and he said:

"The Steel Plant stands as a testimony to the will of Telugu people and it is continued as an icon of Telugu achievement in our collective psyche till date. The Government of the Andhra Pradesh is ready to work with Ministry of Steel to protect the jewel of Andhra Pradesh.”           Our Government is ready to work with the Central Government to put it back on track and help it to recover and become profitable.  We have the following suggestions to put it back on track.
          The Company is making a profit of Rs.200 crore monthly right now.  It is doing a production of 6.3 million tonnes per annum against the rated capacity of 7.3 million tonnes per annum.  This performance must continue and it should be consistent for years to come so that the debt burden goes down.
          There should be a level playing ground for all the public sector units.  For example, there are no captive mines for the Visakhapatnam Steel Plant.  We are paying an additional cost of Rs.5,260 per tonne for the raw material.  This translates to Rs.3,472 crore per year.  If you compare it with SAIL, a competitor of the Visakhapatnam Steel plant, it has captive mines where the raw material is available for the next 200 years.  So, a level playing ground in terms of captive mines will definitely propel the Visakhapatnam Steel Plant into profit.
          The company has a land bank of 19,700 acres and it is in close proximity to Visakhapatnam city.  It has got great value.  The current market estimates are believed to be more than Rs.1,00,000 crore for 19,700 acres of land.  The debt is only Rs.22,000 crore and the interest rate is 14 per cent, which is very high.  So, we suggest that short term loans may be converted into long term loans.  We also suggest that to save the interest burden, the loan can be converted into equity.  We can also give the exit option by listing it on the stock exchange.  We can even sell this land and I think 2000-3000 acres will definitely wipe off the debt burden which is there on the Visakhapatnam Steel Plant.  So, YSRCP would request the Central Government to reconsider the disinvestment plan and explore other opportunities.  We assure all our support to the Central Government to put this steel plant back on track.
          I would also like to seek support from the Government.  In line with the hon. Prime Minister’s vision of achieving 1.75 GW solar power capacity, the Government of Andhra Pradesh has recently approved a proposal to set up a 10,000 MW solar power project.  Big companies like NTPC and other top private people have participated in the bids.  Power will be available at below Rs.2.5 per unit.  This will also help our discoms to fall back on track and wipe down the subsidy burden to an extent of Rs.3,800 crore per year.  We would request for the support of the Central Government to set up more solar power parks and also to put up pump storage units so that we become more dependent on renewable energy.
          I would like to bring to your notice that during the five years of the previous Government the, debt of the discoms rose from Rs.33,000 crore to Rs.70,000 crore.
     
          The then TDP Government had entered into PPAs at Rs. 5.2 and Rs. 5.9 per unit. This has now been brought down to Rs. 2.48-2.49 per unit, which is a substantial saving for the Government. Even for the wind PPAs, the then Government had entered into an agreement at Rs. 4.84 per unit. But in the corresponding period, in Gujarat, the power PPAs were only at Rs. 2.43 per unit. So, this is a substantial saving and the Government is putting all the good efforts. Therefore, we require support from the Central Government to move forward in this direction.
We also request permission to surrender the high-cost thermal power allocated to our discoms from Kudgi and Vallur NTECL thermal power plants where the power cost is seven to nine rupees per unit. So, this would bring about a saving of around Rs. 325 crore to our State per year. We also request the Central Government to help us in setting-up of the pumped storage projects which the State Government is envisaging to build in the coming years. This will provide cheap power to the country as well as to the State.
          Madam Chairperson, another concern is with regard to the Polavaram Project. There have been a lot of discussions on the approval of the estimate. Though the Water Resources Department has approved the estimate of Rs. 55,658 crore but it is yet to be ratified by the Cabinet. Therefore, we request the Government to approve the revised cost estimate as early as possible so that the project does not get affected.
 
Despite adversities like COVID and various natural calamities hitting our State, our hon. Chief Minister -- who is young and is only one and a half years into his term -- has been putting a lot of good efforts into the whole governance of the State. The State of Andhra Pradesh has been ranked first in the ease of doing business by DPIIT. The hon. Chief Minister has been ranked the third best CM in one and a half years of his coming into power by the Public Affairs Centre in its Public Affairs Index.  Even in terms of governance, the State of Andhra Pradesh retains the third rank. The State of Andhra Pradesh has secured the second rank with respect to Commerce and Industries in the Good Governance Index released by the Ministry of Personnel, Government of India. We are one of the top States in NITI Aayog’s India Innovation Index. So, in spite of COVID, Andhra Pradesh has performed well. If you take the growth rate from June to December, we have had a positive growth. We are one of the few States who had a positive growth rate even during the COVID. We attribute this to our young CM and we require the support from the Central Government so that the various promises which were made in the AP Reorganisation Act, are kept and promises which were made to the people of Andhra Pradesh, are fulfilled. We demand a Special Category Status also. Our hon. Chief Minister has met the hon. Prime Minister and the hon. Home Minister more than sixteen times. The first thing he requested was that a Special Category Status be accorded to the State. The promises that were made on the floor of this House be fulfilled and we request that a special category status be given to Andhra Pradesh.
          Madam Chairperson, despite putting up such good efforts, despite the Opposition Leader having been disarrayed by the results in the last Assembly Elections and Parliament Elections, the Opposition Party is involving in divisive politics. Recently, we have seen them going and meeting the hon. Home Minister. They went there and showed videos which dates back to year 2016 on conversions. They are trying to mislead the people which is not good. Through you, I request the …*that let us not spoil the interests of the State. Let us fight it out in the political arena but let us not spoil the interests of the State. There have been eleven cases where the people who have been arrested, have got affiliations with the … *. In one of those cases, there was a CCTV footage showing them stealing Nandi statue and putting that at the crossroads. A clear CCTV footage is there and …* has himself agreed saying that they have done it and that they wanted to put it there. So, this is how the state of affairs are going on. It is very bad that some Parties are trying to indulge in divisive communal politics.
          So, we are totally against it.
          We also have another long pending request.  We have asked for a CBI Inquiry into Antarvedi Temple incident so as to be transparent and to put things in the right perspective.  In spite of all these issues, fingers were pointed out by the Opposition Leader on us.  So, we demand a CBI inquiry into the Antarvedi Temple incident. Our Government has already requested for a CBI inquiry into Antarvedi temple incident. We also have requested for an inquiry in the AP State Fibre Net scam where fingers were pointed out at the former Chief Minister and his son.  So, we want a CBI inquiry on this also.  If any inquiry is done by the State, it might appear biased. So, we demand a CBI inquiry into this.
          We also want an inquiry into ‘vote for note’ scam. We want a reply from the Government because it was caught on tape. The forensic department has also said that it is the voice of the former Chief Minister.  He was trying to … * MLAs in the other State. We want to know as to what has happened to that case. Why is it going on at a snail’s pace? We also have another request.  There is a press release from the Income Tax Department which says that Rs. 2,000 crore were unearthed from the Chief Minister’s PA.  If a PA is able to lead to Rs. 2,000 crore, where will the boss lead to?  We want to know as to where this money is.  How much has been unearthed? What is the status of this case? This is public money. We want to know about it.
          Once again Madam, we request our Opposition Party in the State whose representatives are also there in the Parliament also, to put it on the right perspective. Let us fight it out politically.  Let us not bring communal politics into our State and let us not spoil the interest of our State.
          We have another Speaker from our Party. I do not want to take much of the time. Thanks for the opportunity and while supporting this Motion of Thanks on the President’s Address, I end my speech.
 
श्री प्रतापराव जाधव (बुलढाणा): महोदया, आपने मुझे राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा में भाग लेने का अवसर प्रदान किया है, इसके लिए मैं आपका आभारी हूँ । मुझ पर विश्वास करने और इस चर्चा में मुझे अपनी पार्टी का विचार रखने का अवसर देने के लिए हमारे नेता माननीय उद्धव जी ठाकरे साहब को भी मैं बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूँ ।
          महोदया, राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में सरकार द्वारा कोरोना की महामारी और बाकी सारे विषयों पर, राष्ट्रपति जी ने जो अपने अभिभाषण में कहा, मेरे से पहले भी बहुत सारे हमारे साथियों ने इस विषय पर यहाँ अपने मुद्दे उठाए हैं, मैं उनको दोहराऊँगा नहीं । इस वर्ष बजट सत्र को समय पर बुलाने के लिए मैं इस सरकार का स्वागत करता हूँ ।  हालाँकि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि संसद उस समय काम नहीं कर सकी जब उसके सबसे सुचारू रूप से काम करने की सभी लोगों को उम्मीद थी । पिछले वर्ष बजट और मानसून सत्र के दौरान सीमित संख्या में बैठकें और शीतकालीन सत्र का पूर्ण अभाव कुछ ऐसा है, जिसे न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता । देश को शीतकालीन सत्र के दौरान बैठने के लिए सदन की सख्त जरूरत थी । कई आकस्मिक मुद्दों पर, कोरोना जैसी महामारी पर  लोगों को दी जाने वाली सुविधा पर चर्चा होनी थी, लेकिन सरकार ने कोई कामकाज नहीं किया । देश अध्यादेशों पर चलाया जा रहा था, लेकिन विधेयकों पर चर्चा और उनकी समीक्षा न तो सदन में और न ही समितियों में संभव हो पा रही थी । यह स्थिति कितनी विरोधाभाषी है, लेकिन हम सांसद विगत पिछले वर्ष की स्थिति के ही शिकार रहे हैं ।
सभापति महोदया, राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में बहुत सारी सरकार की नीतियाँ, सरकार की उपलब्धियाँ गिनाई गईं । लेकिन मैं इस सदन को बताना चाहूंगा कि जो हमारा देश है, वह कृषि प्रधान देश है । इस देश के लगभग 70 प्रतिशत से ज्यादा लोग कृषि के ऊपर निर्भर है । किसानों के लिए, किसानों के भले के लिए, उनको अच्छे दिन दिलाने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए । जैसा कि मैं सदन को याद दिलाऊँगा कि पिछले कई वर्षों से हमारी पार्टी की ओर से हम मांग कर रहे हैं कि इस लोक सभा में किसानों के लिए किसान बजट अलग से होना चाहिए । जो भी हमारा बजट बनता है, उसमें से कितना प्रतिशत बजट खेती के लिए या किसानों के लिए खर्च किया जाता है, यह सही मायने में संशोधन का विषय है ।
महोदया, सरकार द्वारा कृषि एवं किसानों को दी गई प्राथमिकता पर सांसदों का ध्यान भी मैं आकर्षित करना चाहता हूं । सरकार की इस दिशा में पहल स्वरूप एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड, किसान रेल, एनिमल हसबैंडरी डेवलपमेंट फंड, किसान क्रेडिट कार्ड्स, प्रधान मंत्री मत्स्य सम्पदा आदि योजनाओं का उल्लेख किया गया । लेकिन किसानों के लिए न तो कोई अलग से बजट आया और न किसानों की स्थिति में सुधार करने के लिए कोई प्रावधान किया गया ।
महोदया, आप सभी को ज्ञात है कि जब हमारे देश में कोविड 19 की महामारी का फैलाव हुआ, लॉकडाउन लगाया गया, हम सब लोग अपने घर में कैद थे । लेकिन उस टाइम भी हमारा किसान खेतों में हल चला रहा था । हम सभी का पेट भरने के लिए दिन-रात पसीना बहा रहा था, उन्हीं किसानों के लिए हमें बजट में, इस अभिभाषण में उम्मीद थी कि किसानों के लिए कोई ठोस कदम यहां पर उठाए जाएंगे । लेकिन किसानों के लिए जो तीन कानून यहां पर पारित किए गए, इसका अध्यादेश लाया गया और उस अध्यादेश को बहुमत के जोर पर, … * से इस सदन में पारित कराया गया । आज लगभग तीन महीने होते आ रहे हैं, हमारे किसान यहां पर आंदोलन कर रहे हैं । उनमें से कई ऐसे किसान हैं कि जिन्होंने वहां पर आत्महत्याएँ की हैं । कई ऐसे किसान हैं, जिनकी वहां पर मौत हो गई हैं, लेकिन उन किसानों की बात सुनने के लिए कोई तैयार नहीं है ।
महोदया, ये कानून किसके भले के लिए हैं? जब हजारों-लाखों की तादाद में किसान दिल्ली के रास्ते को घेरे हुए हैं । ठंड हो, बरसात हो, सभी विपरीत हालात में वहां पर 100 साल के बुजुर्ग हैं, 10-12 साल के बच्चे हैं, सभी किसान लोग वहां पर अपना घरबार, गाँव छोड़ कर दो-दो, तीन-तीन महीने से बैठे हुए हैं । उनकी माँग या उनके विचार क्यों सुने नहीं जाते? सरकार क्यों अड़ रही है कि हम इन तीनों कानूनों को रद्द नहीं करेंगे ।
महोदया, मैं आपको बताना चाहूंगा कि ये तीनों कृषि कानून, जिनका हमारे किसान विरोध कर रहे हैं, उनके साथ बिल्कुल ऐसा ही है कि उन कानूनों के नतीजे को किसानों की तुलना में कोई और बेहतर जान नहीं सकता । ये जो कानून हमने पारित किए हैं, यह हमने लोक सभा के एसी हॉल में बैठ कर पारित किए हैं । मैं पूछना चाहूंगा कि इनमें से कितने सांसद हैं, जिन्होंने खेत में हल चलाया हो, जो खुद खेती करता हो, जिसने खेती में पसीना बहाया हो । ऐसे कुछ होंगे, लेकिन ऐसे कितने हैं, जो लोग खेती करने वाले हैं ।…(व्यवधान) वर्ष 1972 में जब हमारे देश में अकाल आया था, तब हमने परदेश से बुलाया हुआ हर एक गेहूं और लाल मिलों…(व्यवधान) सभापति महोदया, जब उधर से भाषण हो रहे थे, तब हमने टोका-टाकी नहीं की और मेरी विनती है कि आप शांति से सुनो ।
माननीय सभापति : एक मिनट, उनको बोलने दीजिए । आपने जब पूछा कि कितने लोग यहां पर हैं, इसलिए सब ने हाथ खड़ा किया । आप नहीं पूछते तो यह प्रश्न आता नहीं । अभी कोई बात नहीं, आप बोलिए । सभी लोग शांति से सुनें ।
श्री प्रतापराव जाधव : सभापति महोदया, हाथ ऊपर करने से किसान पहचाना नहीं जाता, हल पकड़ते हुए हाथ के ऊपर कितनी गांठें पड़ी हुई हैं, उससे किसान पहचाना जाता है । जरा उनके हाथ देखो कि उनके हाथों पर हल पकड़ने के निशान है कि नहीं ।…(व्यवधान)
माननीय सभापति: आप इस तरह के प्रश्न मत कीजिए, क्योंकि सब जवाब देने के लिए खड़े हो जाएंगे ।
श्री प्रतापराव जाधव: सभापति महोदया, किसी के नाम पर 7/12 होने से और दो नंबर के पैसे से जमीन खरीदने से कोई किसान नहीं हो जाता है । किसान दो प्रकार के होते हैं, एक तो जिसके नाम पर 7/12 है, वह भी किसान होता है और जो खुद खेत में हल चलाता है, उसको भी किसान कहा जाता है । यहां किस तरह के किसान बैठे हैं, यह मुझे मालूम नहीं है । मैंने इसीलिए पूछा था ।
 
          महोदया, किसान उत्पाद, व्यापार और वाणिज्य अधिनियम, किसान मूल्य आश्वासन और कृषि सेवा अधिनियम, समझौता और आवश्यक वस्तुएं अधिनियम से ये निश्चिय ही स्वतंत्र किसानों को कॉरपोरेट घरानों के रहमो-करम पर रखने जा रहे हैं । ये कानून हमारे किसानों को बंधुआ बना देंगे और उनकी स्वतंत्रता केवल नाम की ही होगी ।
          महोदया, हमारे किसान क्या मांग रहे हैं? वे केवल इन कानूनों को निरस्त कर नये सिरे से फार्म लेजिस्लेशन की मांग कर रहे हैं । सरकार ने पहले अध्यादेश के मार्ग को अपनाया और फिर संसद के दोनों सदनों में …* से इन विधेयक को पारित करवाकर किसानों की आवाज को दबाने का काम किया है । हम चाहते हैं कि देश के सम्पूर्ण कृषि क्षेत्र के लिए गम्भीर निहतार्थ से भरे किसी भी कृषि कानून का प्रारूप सम्पूर्ण विधि से तैयार किया जाना चाहिए और एक उचित प्रक्रिया का पालन करना चाहिए । …(व्यवधान) सभापति महोदया, मेरी पार्टी को 20 मिनट टाइम एलॉट किया गया है ।
माननीय सभापति : 20 में से 10 मिनट आपके हो चुके हैं और आपकी पार्टी से अरविंद सावंत जी बोलने वाले अगले स्पीकर हैं ।
श्री अरविंद सावंत (मुम्बई दक्षिण): महोदया, हमारी पार्टी का पूरा टाइम इनको दे दीजिए ।
माननीय सभापति : क्या इनको आपकी पार्टी का पूरा समय दे दें? क्या सेकेण्ड स्पीकर नहीं है?
श्री अरविंद सावंत : जी हां, पूरा टाइम दे दीजिए ।
श्री प्रतापराव जाधव : महोदया, सामने से जो माननीय सदस्य टोकते हैं और अभी जो बात हो रही है, इसको मेरे टाइम में मत जोड़िएगा ।
माननीय सभापति : इसके दो मिनट मैंने निकाल दिए हैं ।
 
श्री प्रतापराव जाधव : हमारे किसान उचित प्रक्रिया के माध्यम से विधेयक बनाने में हिस्सा बनना चाहते हैं ताकि राष्ट्र निर्माण में वे भी अपने उज्ज्वल भाग्य को आकार दे सकें । वास्तव में 72वें गणतंत्र विस के अवसर पर राजधानी की सड़कों पर जो कुछ हुआ, वह दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के लिए अप्रत्याशित था । जिन परिस्थितियों के कारण इस तरह की स्थिति उत्पन्न हुई उसकी बारीकी से जांच होनी चाहिए और यह संयुक्त संसदीय समिति द्वारा फास्ट ट्रैक मोड में किया जाना चाहिए । हमें जल्दबाजी में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले गम्भीरता से उन कारकों पर विचार करने की जरूरत है, जिन्होंने हमारे अहिंसक, धैर्यवान और कर्तव्यनिष्ठ किसानों को ऐसी कार्रवाई की ओर मोड़ दिया । किसान देश की आत्मा है और आत्मा का आह्वान कभी धोखेबाजी या गलत नहीं हो सकता है । वे तीनों कृषि कानूनों की निंदा कर रहे हैं, सरकार को गम्भीरता से इस ओर सोचना चाहिए । जैसा कि सामना पत्रिका के सम्पादकीय में यह बताया गया है कि भारतीय ध्वज का अपमान नहीं हुआ और हमारा ध्वज लहराता रहा । जब गणतंत्र दिवस पर किसान आंदोलनकारी लाल किले पर पहुंचे, उस दिन की न्यूज कवरेज की उपलब्ध फुटेज देखने से पता चलता है कि तिरंगा इस सबसे अछूता रहा । ऐसा कहना कि तिरंगे का अपमान किया गया था, किसान के विरोध को नीचा दिखाने का प्रयास है । यह सच है कि किसानों के एक समूह ने कानून को तोड़ा है तो उन पर कार्यवाही होनी चाहिए । लेकिन यह कहना कि किसान राष्ट्र विरोधी है, यह किसानों और हम सब के लिए गलत होगा । गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर रैली के दौरान किसानों ने अपने ट्रैक्टरों पर तिरंगा ले कर कूच किया था । यह उनका भारत के प्रति प्रेम का परिचायक है । …(व्यवधान) सभापति महोदय, बीच में टोका-टाकी मत कीजिए । पुलिस के बारे में बताऊंगा । अगर लाल किले पर जाने वाले लोग दोषी हैं तो उनको रोकने में नाकाम होने वाली पुलिस और गृह विभाग भी उनसे ज्यादा दोषी हैं । …(व्यवधान)
          तिरंगे का असली अपमान यह है कि सरकार 60 दिनों तक दिल्ली की सीमा पर बैठे किसानों पर ध्यान नहीं दे रही है । इन किसानों को सड़क पर मरने देना ही तिरंगे का असली अपमान है । हमारे सैनिक हैं, जो कि तिरंगे के लिए अपनी सीमा पर अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं । इनमें से कई इन्हीं किसानों के लाल, सीमा पर हमारे देश की रक्षा कर रहे हैं । भला इन किसानों द्वारा राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान का त्याग कैसे किया जा सकता है? हमारे क्षेत्र में चीनी सेना का होना, यह तिरंगे सही मायने में अपमान है । ईमानदार विरोध को राष्ट्र विरोधी के रूप में चित्रित नहीं किया जाना चाहए । यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि यह विरोध समूहों या दलों को दिखाने के लिए नहीं है । यह देश की कृषि नीति के बारे है । मैं इस मंच पर सामना संपादकीय में इस टिप्पणी को दोहराता हॅूं कि आंदोलनकारी किसानों को खालिस्तानी समर्थक के रूप में लेबल कर के बदनाम किया जा रहा है । अगर खालिस्तानी समर्थक इस आंदोलन में घुस गए हैं तो फिर यह भी सरकार की नाकामी है । सरकार को कृषि कानूनों को निरस्त कर के किसानों को सम्मान देना चाहिए, जिससे मोदी जी का कद आज की तुलना में और भी बड़ा हो जाएगा ।
          यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि कृषि क्षेत्र में महामारी के दौरान महत्वपूर्ण लचीलापन प्रदर्शित हुआ है । रबी का अधिक उत्पादन हुआ, मानसून भी इस साल ठीक रहा है । यह संकेत देती है कि हमारे किसान ऐसी दुर्दशा के हकदार नहीं हैं । वे वैश्विक आर्थिक मंदी से देश की अर्थव्यवस्था का बचाव करने वाले हैं ।
          हमें यह समझना चाहिए कि ये तीन कृषि अधिनियम किसान विरोधी और कॉर्पोरेट हितैषी होने के कारण किसानों की आय को नुकसान पहुंचाएंगे । पूरे राष्ट्र के साथ-साथ हमारी सरकार को हमारे किसानों का सम्मान करना चाहिए और उनके साथ एकजुटता के साथ खड़ा होना चाहिए । सरकार के लिए यह दिखाने का समय आ गया है कि वे वास्तव में किसानों की परवाह करते हैं और वे वास्तव में हमारे किसानों को सर्वप्रथम रखते हैं ।
          महोदया, ये जो कानून यहां पर बनाए गए हैं, ये कानून निकट भविष्य में सरकारी कृषि मंडियों की प्रासंगिकता को शून्य कर देगा । सरकार निजी क्षेत्र को बिना किसी पंजीकरण और बिना किसी जवाबदेही के कृषि उपज के क्रय-विक्रय की खुली छूट दे रही है । इस कानून की आड़ में सरकार निकट भविष्य में खुद बहुत अधिक अनाज न खरीदने की योजना पर काम कर रही है । सरकार चाहती है कि अधिक से अधिक कृषि उपज की खरीदारी निजी क्षेत्र करें ताकि वह अपने भंडारण और वितरण की जवाबदेही से बच सकें ।
          सोचिए कि अगर निकट भविष्य में कभी कोरोना जैसी विषम परिस्थिति का सामना करना पड़ा तो उस दौरान सरकार खुद लोगों को बुनियादी खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने के लिए निजी क्षेत्र से खरीदारी करेगी । वहीं, आज वह इसे अपने बड़े एफसीआई गोदामों से लोगों को मुफ्त में उपलब्ध करा रही है ।
          साथ ही सरकारी कृषि मंडियों में समानांतर आसान शर्तों पर खड़ा किया जाने वाला नया बाजार इनकी प्रासंगिकता को खत्म कर देगा और जैसे ही सरकारी मंडियों की प्रासंगिकता खत्म होगी, ठीक उसी के साथ एमएसपी का सिद्धांत भी प्रभावहीन हो जाएगा, क्योंकि मंडियां एमएसपी को सुनिश्चित करती हैं ।   
          सभापति महोदया, जो दूसरा कानून ‘कृषि कीमत आश्वासन और कृषि सेवा करार विधेयक, 2020’ है, जिसकी चर्चा कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के विवाद के समाधान के मौजूदा प्रावधानों के संदर्भ में की जा रही है । इस कानून का पूरा विरोध इस तथ्य पर हो रहा है कि इसके जरिए किसानों को विवाद की स्थिति में सिविल कोर्ट जाने से रोका गया है । यह बिल्कुल ठीक और जायज विरोध है, लेकिन इसके साथ-साथ एक और हिस्सा है जहां ध्यान देने की जरूरत है । कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के इस कानून की वजह से देश में जो हमारे मजदूर-किसान हैं, भूमिहीन किसान हैं, उनके एक बहुत बड़े वर्ग के जीवन पर गहरा संकट आने वाला है ।
          वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार देश में कुल 26.3 करोड़ परिवार खेती किसानी के कार्य में लगे हुए हैं । इसमें से महज 11.9 करोड़ किसानों के पास खुद की जमीन है जबकि 14.43 करोड़ किसान भूमिहीन हैं । इन भूमिहीन किसानों की एक बड़ी संख्या बंटाई पर खेती करती है । भूमि के मालिक से हुए करार पर कुल पैदावार की आधी फसल पर बंटाई बोई जाती है यानि भूमालिक और बंटाई पर खेती करने वाले किसान कुल फसल को आधा-आधा बांट लेते हैं । ग्रामीण इलाकों का एक अपना प्रचलित खेती करने का तरीका है । इस नए कानून के जरिए पूंजीपतियों को कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के लिए खुली छूट दी जा रही है । अब सोचने का विषय यह है कि गांव का कोई भी भूमिहीन किसान इन बड़े निजी क्षेत्र की फर्म से मुकाबला कैसे कर सकेगा? एक बड़ी कंपनी आसानी से किसी किसान से उसकी भूमि 5 साल की अवधि के लिए एकमुश्त एडवांस पर कॉन्ट्रैक्ट पर ले सकती है, लेकिन गांव का एक भूमिहीन किसान यह करने में असमर्थ रहेगा । ऊपर से, भारत के किसानों का एक बड़ा हिस्सा अशिक्षित है जो कि कानूनी अनुबंध करने में खुद को असहज पाएगा ।
माननीय सभापति: श्री राजीव रंजन जी ।
श्री प्रतापराव जाधव : सभापति महोदया, मुझे बस दो मिनट का समय और दीजिए ।
माननीय सभापति: आपको मैंने दो मिनट का समय ऑलरेडी एक्स्ट्रा दिया है । आप एक मिनट में अपना भाषण समाप्त कीजिए ।
श्री प्रतापराव जाधव : सभापति महोदया, तीसरा कानून ‘आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक’, भविष्य में खाद्य पदार्थों की महंगाई का दस्तावेज बन जाएगा । इस कानून के जरिए निजी क्षेत्र को असीमित भंडारण की छूट दी जा रही है । उपज जमा करने में निजी निवेश को छूट होगी । सरकार को पता नहीं चलेगा कि किसके पास कितना स्टॉक है और कहां है । यह जमाखोरी और कालाबाजारी को कानूनी मान्यता देने जैसा है । वहीं इस कानून में स्पष्ट लिखा है कि राज्य सरकारें असीमित भंडारण के प्रति तभी कार्रवाई कर सकती है जब वस्तुओं की मूल्य वृद्धि बाजार में दोगुनी होगी । एक तरह से देखें तो यह कानून महंगाई बढ़ाने की भी खुली छूट दे रहा है । विपरीत हो चुकी आर्थिक स्थिति के बीच यह कानून देश के मध्यम आय वर्ग एवं निम्न आय वर्ग की बुनियाद को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाने वाला है । समय रहते सरकार को चाहिए कि इन तीनों कानूनों का उचित हल निकाल लिया जाए । इसकी वजह यह है कि आंदोलन भूमिहीन किसानों के रास्ते होते हुए मध्यम एवं निम्न आय वर्ग को भी जोड़ेगा । आने वाले भविष्य में जब ये दोनों वर्ग की खुद को इन कानूनों के जरिए ठगा महसूस करेंगे तो आंदोलन की रफ्तार और तेज हो जाएगी । तीनों ही कृषि कानून किसानों और आम लोगों को बहुत फायदा पहुंचाने नहीं जा रहे हैं ।…(व्यवधान)
माननीय सभापति: अब समाप्त करें । आपको एक मिनट की जगह दो मिनट का समय दे दिया ।
          राजीव जी, आप शुरू कीजिए ।
…(व्यवधान)
माननीय सभापति: प्लीज़, अरविन्द जी, आप भी बैठिए, इन्हें भी बिठाइए । पहले दो मिनट का एक्स्ट्रा टाइम दिया, उसके बाद दो मिनट का समय और हो गया । बहस का टाइम नहीं है । राजीव जी का टाइम खराब न करें ।
          राजीव जी, आप शुरू करें ।
 
श्री राजीव रंजन सिंह ‘ललन’ (मुंगेर): महोदया, मैं माननीय राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर धन्यवाद का जो प्रस्ताव पेश हुआ है, मैं उसके समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं ।
महोदया, 29 जनवरी को महामहिम राष्ट्रपति जी ने केन्द्रीय कक्ष में दोनों सदनों के सदस्यों को संयुक्त रूप से संबोधित किया । राष्ट्रपति एक संवैधानिक संस्था है । राष्ट्रपति को न पक्ष से कुछ लेना है, न विपक्ष से लेना है, लेकिन उनके अभिभाषण के दौरान विपक्ष का जो रवैया रहा, वह लोकतंत्र के लिए कदापि स्वस्थ परंपरा नहीं है । आप सहमत हो सकते हैं, आप असहमत हो सकते हैं । आप सरकार की नीतियों से सहमत हो सकते हैं, उससे असहमत हो सकते हैं, उसके लिये यह सदन है । सदन में आप चर्चा कीजिए और सहमति-असहमति व्यक्त कीजिए, लेकिन किसी संवैधानिक संस्था को अपमानित करने का काम लोकतंत्र के लिए स्वस्थ परंपरा नहीं है । इसकी जितनी निंदा की जाए, वह कम है ।
          महोदया, पिछले एक वर्षों से हम लोग एक वैश्विक महामारी से जूझ रहे हैं । पिछले वर्ष यही बजट सत्र चल रहा था, जब वैश्विक महामारी का दौर शुरू हुआ था । सदन की कार्यवाही समाप्त करके तत्काल लॉकडाउन लागू किया गया । 23 मार्च को लॉकडाउन लागू किया गया । इस देश में जब महामारी फैल रही थी और कोविड-19 देश में प्रवेश कर रहा था, उस समय हमारे प्रधानमंत्री ने सही निर्णय लिया । देश की अर्थव्यवस्था तथा और किसी चीज की परवाह नहीं करते हुए उन्होंने लॉकडाउन को लागू किया । उसका परिणाम है कि आज हमारे देश में कोरोना वायरस और कोविड-19 नियंत्रण में है । यह महामारी पूरे तौर पर नियंत्रण में है । …(व्यवधान) समूचे दिल्ली को चौपट करके रखा है, यह हमें मालूम है । …(व्यवधान) पूरी दिल्ली में अव्यवस्था फैला कर रखे हैं और यहाँ भाषण दे रहे हैं ।…(व्यवधान)
HON. CHAIRPERSON : Shri Bhagwant Mann, please sit down.
… (Interruptions)
   
माननीय सभापति: श्री भगवंत मान जी की बात रिकॉर्ड में नहीं जाएगी ।
… (व्यवधान) * माननीय सभापति: राजीव जी, आप अपनी बात कीजिए ।
श्री राजीव रंजन सिंह ‘ललन’:  आप बैठ जाइए । आपने पूरी दिल्ली को चौपट कर दिया है ।
          महोदया, मैं आपको एक बात बताऊँ । जो कारनामा अभी हो रहा है, यही कारनामा पूरे एक साल के दौरान करते रहे । जब प्रधानमंत्री कोरोना से जूझ रहे थे, तब पूरा विपक्ष प्रधानमंत्री की आलोचना में लगा था । वैश्विक महामारी के समय देश को एकजुट होना चाहिए । देश के हर नागरिक को सरकार के काम में और सही काम के समर्थन में खड़ा होना चाहिए, लेकिन जो काम आज ये लोग कर रहे हैं, वही काम ये लोग एक साल तक करते रहे । प्रधानमंत्री जी धन्यवाद के पात्र है । मैं प्रधानमंत्री जी को धन्यवाद का पात्र मानता हूँ कि किसी तरफ उन्होंने नहीं देखा, न बाएँ देखा, न दाएँ देखा, केवल लक्ष्य रखा कि हमारे देश में कोरोना वायरस को नियंत्रण में रखना है । उसको उन्होंने नियंत्रित करने का काम किया है ।
          हर समय जब लॉकडाउन बढ़ाने की बात हुई, जब लॉकडाउन में कोई भी छूट देने की बात हुई तो प्रधानमंत्री ने सभी राज्यों के साथ देश के फेडरल स्ट्रक्चर का पालन करते हुए, सभी राज्यों की सरकारों के साथ मशविरा किया और मशविरा करने के बाद आगे का उन्होंने निर्णय लिया । यह हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था है । इस देश में अपने देश का बना हुआ वैक्सीन उपलब्ध है । हम कहीं बाहर   से नहीं, बल्कि कोरोना के वैश्विक दौर में दूसरे देशों को कोरोना की दवाई आपूर्ति करते रहे हैं । आज भी हम वैक्सीन दूसरे देशों को आपूर्ति कर रहे हैं । यह हमारा लक्ष्य है । कोरोना के दौर में उन्होंने जो किया, उसमें विपक्ष का सहयोग नहीं मिला । हमने कई विपक्षी नेताओं को देखा है । हम उनका नाम नहीं लेना चाहते हैं । चाहे मजदूरों को एक राज्य से दूसरों राज्य में पहुँचाने की बात हो, प्रधानमंत्री ने    हजारों-लाखों   की संख्या में स्पेशल ट्रेन्स चलाकर लोगों को पहुँचाने का काम किया ।…(व्यवधान)
HON. CHAIRPERSON:  Shri Bhagwant Mann, please be seated.
… (Interruptions)
माननीय सभापति: मान जी, आप बैठिए ।
          इनका बोला हुआ कुछ भी रिकॉर्ड में नहीं जाएगा ।
… (व्यवधान) * श्री राजीव रंजन सिंह ‘ललन’ : लोग गोलमाल करते रहें । यू.पी. के बॉर्डर पर बस, टेम्पू और ऑटो लगाकर उनका नंबर जारी कर रहे थे । वाह रे वाह, क्या देश को चलाना चाहते हैं, क्या जिम्मेदारी के साथ देश में वैश्विक महामारी से लड़ना चाहते हैं? पूरे वैश्विक महामारी के दौरान जो कुछ भी हुआ और जो कुछ भी प्रधान मंत्री जी ने कदम उठाया, आज उसका परिणाम है कि हमारे देश में कोरोना नियंत्रण में है । बहुत से विकसित देश हैं, जापान है, अमेरिका है, इटली है, फ्रांस है, इंग्लैंड है, कई विकसित देश हैं, उन देशों में कोरोना नियंत्रण में नहीं रहा, लेकिन हमारे देश में कोरोना नियंत्रण में रहा और यह प्रधान मंत्री जी की उपलब्धि है । महोदया, मैं आज आपके माध्यम से प्रधान मंत्री जी के प्रति आभार व्यक्त करता हूं और उनको धन्यवाद देना चाहता हूं ।
          कांग्रेस पार्टी के नेता का भाषण जब शुरू हुआ, तो हम 15 मिनट तक उनका भाषण सुन रहे थे । …(व्यवधान) आप हमें बोलने दीजिएगा या आप ही बोलिएगा । …(व्यवधान) यहां से बोलने के बजाय इनको वहां कुर्सी पर बैठा दीजिए । हम जब कांग्रेस पार्टी के नेता का भाषण सुन रहे थे तो 15 मिनट तक हमें यह समझ में नहीं आया कि क्या बोलना चाह रहे हैं, क्या कहना चाह रहे हैं? हमने बगल में बैठे सुदीप दा से पूछा, इनसे भी पूछा, अरविंद जी से भी हमने पूछा, ये बगल में बैठे हुए मुस्करा रहे हैं, हमने इनसे भी पूछा, सुदीप दा से भी पूछा कि वे क्या बोलना चाह रहे हैं, क्या कुछ समझ में आ रहा है? ये बोले कि हमारी समझ में भी नहीं आ रहा है । …(व्यवधान) क्या बोलना चाह रहे थे, उनको खुद भी पता नहीं था । …(व्यवधान)
माननीय सभापति: भगवंत जी, आप बैठिए ।
…( व्यवधान)
श्री राजीव रंजन सिंह ‘ललन’:  वे कभी रबीन्द्रनाथ टैगोर, कभी नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, कभी श्यामा प्रसाद मुखर्जी, कहाँ से कहाँ, कहाँ से कहाँ, वे उछल-कूद कर रहे थे और अंत में वे किसानों की समस्या पर आए । किसानों की समस्या के बारे में क्या जानते हैं? किसानों के बारे में क्या जानते हैं? इस देश के किसानों के सबसे बड़े नेता चौधरी चरण सिंह जी थे । वे आपकी पार्टी में भी थे । कांग्रेस पार्टी में बहुत लंबे समय तक उन्होंने वक्त बिताया । उन्होंने हुबली में किसानों के सम्मेलन में जो भाषण दिया, उसके कुछ अंश हम आपके माध्यम से पढ़ना चाहते हैं । उन्होंने लिखा, सारी उम्र मैंने भी कांग्रेस में बितायी है, लेकिन कांग्रेस के लीडर इलेक्शन के वक्त किसान को याद करते हैं, गांव में जाते हैं, किसान और मजदूर की बात करते थे, लेकिन दिल्ली और बेंगलुरु में जाकर उसी किसान को भूल जाते हैं । चौधरी चरण सिंह जी ने हुबली में यह कहा । हुबली में 4 नवम्बर, 1979 को यह कहा, जिसके बल पर वे चुनाव जीतकर आते थे । अन्न की, पैदावार की कीमत मुकर्रर की जाए तो आपके भेजे हुए ये प्रतिनिधि आम तौर पर किसान के खिलाफ राय देते थे । …(व्यवधान) उन्होंने शुरू में ही कांग्रेस पार्टी कहा है । असली भारत गांव में रहता है । शहर में पैदा हुए जो लीडरान हैं, जो नेता हैं, मैं फिर दोहराता हूं, कितने ही सीनियर हों, कितने ही नेकनीयत हों, कितने ही ईमानदार हों, उनको आपकी तकलीफों का पता नहीं है । चौधरी चरण सिंह जी ने यह कहा । …(व्यवधान)
माननीय सभापति : भगवंत मान जी, आप बैठिए । प्लीज बैठिए ।
…( व्यवधान)
माननीय सभापति : राजीव जी, एक मिनट रुकिए । भगवंत मान जी, इस सीट से आपको यह व्यवस्था दी जा रही है कि आप अपनी सीट पर जाइए ।
श्री भगवंत मान (संगरूर): वहां से बोलने का मौका मिलेगा ।
माननीय सभापति : आप पहले अपनी सीट पर जाइए और जब आपकी टर्न आएगी, तब बोलिए । आप अपनी सीट पर जाइए और जब आपकी टर्न हो, तब बोलिए ।     
श्री राजीव रंजन सिंह ‘ललन’: सभापति महोदया, अंत में, मैं एक शब्द कहना चाहता हूं । चौधरी चरण सिंह जी ने कहा था, किसानों तुम हड़ताल नहीं कर सकते, न मैं चाहता हूं कि तुम हड़ताल करो, यह चौधरी चरण सिंह जी ने किसानों के लिए कहा था । किसानों की समस्या क्या है? कई नेताओं ने चर्चा की ।
माननीय सभापति: आप दूसरे सदस्य के बोलने के समय को खराब नहीं कर सकते । आप बैठिए नहीं तो मुझे दूसरी व्यवस्था देनी पड़ेगी । आप शांति से बैठिए और सुनिए ।
श्री राजीव रंजन सिंह ‘ललन’: महोदया, हम यह जानना चाहते हैं कि किसानों की समस्या क्या है? चूंकि जितने भी नेताओं ने किसानों के बारे में बात की, किसी ने यह नहीं कहा कि तीन बिल में ऐसा क्या प्रावधान है, जो किसानों के हित में नहीं है । इन्होंने एक भी कोट नहीं किया । हमने भी देखा है, मेरे पास पूरी डिबेट की प्रोसिडिग्स है, जब तीनों बिल सदन में पास हो रहे थे । आदरणीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर जी ने एक-एक शंकाओं का समाधान किया है । किसानों को क्या चाहिए? किसानों को अधिक उत्पादन चाहिए, किसानों को अधिक मूल्य चाहिए, इसमें दोनों का प्रावधान किया गया है । बाजार उत्पादन मूल्य का क्या मतलब होता है? जो उनका उत्पादन मूल्य है, वह सबसे ज्यादा उनको मिलना चाहिए, इसके अलावा किसानों को क्या चाहिए । किसानों को सिर्फ यही दो चीजें चाहिए । विरोध का कारण मेरी समझ से बाहर है ।
महोदया, बिहार में लगभग छह लाख पैंसठ हजार गांव हैं । वहां कहां आंदोलन हो रहा है? केवल दिल्ली के बार्डर पर आंदोलन हो रहा है । यह आंदोलन किसानों का नहीं है । यह आंदोलन मंडी वालों और बिचौलियों का है । यह किस बात के लिए हो रहा है? मैं आपको बताना चाहता हूं कि इस कानून में क्या है । किसान अपनी उपज कहीं भी बेच सकता है । जहां उसका मन करे, वह उसे बेचे, वह इसके लिए बिल्कुल फ्री है । जहां उसको ज्यादा दाम मिलेगा, वह उसे बेचेगा । इसमें आपको क्या आपत्ति है? आप चाहते हैं कि किसान मंडी में ही धान बेचे । किसान आढ़तियां के यहां धान बेचे, आप यही चाहते हैं । ये कौन से किसान हित की आप बात कर रहे हैं? कहां किसान के हित की बात है? आज मिनिमम सपोर्ट प्राइस है । अगर किसान चाहें तो मिनिमम सपोर्ट प्राइस के आधार पर सरकार को धान देंगे । अगर खुले बाजार में उनको दिल्ली में बेचना होगा तो दिल्ली में बेचेंगे, अगर पटना बेचना होगा तो पटना में बेचेंगे, अगर लखनऊ में ज्यादा कीमत मिलेगी तो वे लखनऊ जाकर बेच सकते हैं । इसमें आपको क्या समस्या है? किसानों को अधिक मूल्य चाहिए और किसानों का अधिक उत्पादन होना चाहिए । आप कांटैक्ट फार्मिंग का विरोध कर रहे हैं, क्या आज कांटैक्ट फार्मिंग नहीं है? एक बटाईदार दस लोगों का खेत लेता है और दस लोगों का खेत लेकर एक साथ खेती करता है, क्‍या यह कांटैक्ट फार्मिंग है या नहीं? यह कंट्रैक्ट फार्मिंग है । आप को-ऑपरेटिव फार्मिंग का विरोध कर रहे हैं । उस कानून में कहां लिखा हुआ है कि किसान को जबर्दस्ती कांटैक्ट फार्मिंग और को-ऑपरेटिव फार्मिंग करानी होगी । अधीर रंजन जी, आप अपने खेत के आगे बड़ा बोर्ड लगा दीजिए, लंबा-चौड़ा बोर्ड लगवा दीजिए कि हम को-ऑपरेटिव फार्मिंग के विरोधी हैं, हम जमीन नहीं देंगे, हम कांटैक्ट फार्मिंग के विरोधी हैं । आप इसका विरोध क्यों कर रहे हैं? किस बात का विरोध है?
श्री अधीर रंजन चौधरी : आज बिहार के किसान की हालत क्या है?
श्री राजीव रंजन सिंह ‘ललन’: महोदया, बिहार पर भी आ रहे हैं, आप सुन लीजिए । आपको बिहार का भी इतिहास बता दे रहे हैं, आपको कुछ नहीं पता है । अभी माननीय सदस्य बिहार की बात पूछ रहे हैं । …(व्यवधान)
माननीय सभापति: आप बैठ जाइए, उनको बोलने दीजिए, आप अपने टर्न में बोलिएगा ।   
श्री राजीव रंजन सिंह ‘ललन’: अभी बिहार की बात अधीर रंजन जी ने पूछी है । बिहार के मुख्यमंत्री आदरणीय नीतीश कुमार जी ने एपीएमसी वर्ष 2006 में समाप्त कर दी थी । जब उन्होंने इसे वर्ष 2006 में समाप्त किया, उसके बाद का परिणाम आपको बता देते हैं ।  …(व्यवधान)
 
माननीय सभापति: आप बैठिए ।
…(व्यवधान)
माननीय सभापति: आप भी मानते हैं कि दाम नहीं मिलता है तो व्यवस्था कर रहे हैं ।
…(व्यवधान)
माननीय सभापति: आप बैठिए ।
…(व्यवधान)
श्री राजीव रंजन सिंह ‘ललन’: इनको कुछ नहीं पता है, हवाबाज़ी में हैं । …(व्यवधान)
माननीय सभापति: आप अपनी टर्न पर बोलिएगा ।
…(व्यवधान)
माननीय सभापति: आप बैठिए । यह सही नहीं है ।
…(व्यवधान)
श्री राजीव रंजन सिंह ‘ललन’: एपीएमसी खत्म करने के बाद बिहार में उत्पादन बढ़ा । बिहार में उत्पादन ही नहीं बढ़ा, अधिप्राप्ति भी बढ़ी । पहले जहां हम चार-पांच लाख मैट्रिक टन की अधिप्राप्ति करते थे, आज  45 लाख मैट्रिक टन की अधिप्राप्ति कर रहे हैं और ये कह रहे हैं कि नहीं मिल रहा है । …(व्यवधान)
          बिहार में वर्ष 2006 में जब एपीएमसी समाप्त किया गया, इससे पहले यह भ्रष्टाचार का अखाड़ा था । वहां के कृषि बाजार समिति के सचिव के पद स्थापन के लिए लाखों-लाख रुपये की बोली लगती थी । जो हाइएस्ट बिडर होता है उसकी पोस्टिंग होती थी । यह बिहार का हाल था । यह पूछ रहे हैं कि अभी उत्पादन क्या हुआ है?
मैं इनको बताता हूं, एपीएमसी समाप्त करने के बाद मक्का का उत्पादन 135 प्रतिशत बढ़ा, धान का उत्पादन 119 परसेंट बढ़ा और गेहूं का उत्पादन 118 परसेंट बढ़ा । पहले मछली आंध्र प्रदेश से 90 परसेंट जाती थी और अब 20 परसेंट मछली भी आंध्र प्रदेश से नहीं जाती, बिहार की मछली बिहार में बिकती है । यह एपीएमसी समाप्त करने के बाद का परिवर्तन है । अधीर रंजन जी हम आपको यह बताना चाहते हैं ।…(व्यवधान)
          हम आपको यह भी बता देते हैं ।…(व्यवधान) अधीर रंजन जी पूछ रहे थे ।…(व्यवधान) आप सुनिए, वही कृषि बाजार समिति है । …(व्यवधान) किसानों को ऑप्शन है ।…(व्यवधान)
माननीय सभापति: अधीर जी, आप बैठिए ।
…(व्यवधान)
माननीय सभापति: रमेश जी, आप बैठिए ।
…(व्यवधान)
माननीय सभापति: डिस्टर्ब मत कीजिए । राजीव जी को अपनी बात कहने दीजिए ।
…(व्यवधान)
श्री राजीव रंजन सिंह ‘ललन’: मैं इनको बताना चाहता हूं कि बिहार को एपीएमसी समाप्त करने के बाद अब तक पांच कृषि कर्मन पुरस्कार प्राप्त हुए हैं । वर्ष 2011-12 में इनकी सरकार थी । ये पूछ रहे थे कि बिहार में क्या हुआ । बिहार को एपीएमसी समाप्त करने के बाद वर्ष 2011-12 में चावल में सर्वश्रेष्ठ पैदावार के लिए कृषि कर्मण पुरस्कार मिला । वर्ष 2012-13 में गेहूं में, वर्ष 2015-16 में मक्का में, वर्ष 2016-17 में मक्का में और वर्ष 2017-18 में गेहूं में कृषि कर्मन पुरस्कार बिहार को प्राप्त हुआ है । अब यह स्थिति है । अधीर रंजन जी आपको बता दें कि आपकी ही सरकार में मिला है ।
आप ऐसे-वैसे करते रहिए, वह तो आपकी आदत है । अभी तो आप भाषण दे रहे थे । …(व्यवधान)   आपने भाषण देते-देते क्या कहा – …* कांग्रेस पार्टी की क्या सोच है? इन्होंने कहा धरना और किसान आंदोलन में …* दोनों हैं । …(व्यवधान) वाह, आपकी सोच की दाद देनी होगी कि आप …* शब्दों का इस्तेमाल करते हैं । आपकी दाद देनी होगी । …(व्यवधान)
 
माननीय सभापति: शब्द रिकॉर्ड में नहीं जाएगा ।
…(व्यवधान)…* श्री अर्जुन राम मेघवाल: यह तो अधीर रंजन जी ने कहा है । इनके भाषण में है । …(व्यवधान)
माननीय सभापति: मैं अधीर रंजन जी की व्यवस्था देख लूंगी ।
…(व्यवधान)
श्री अर्जुन राम मेघवाल: अधीर रंजन जी की …* सोच है ।…(व्यवधान) ये …*  मानते हैं, …*…(व्यवधान)
माननीय सभापति: मैं रिकॉर्ड देख लूंगी ।
…(व्यवधान)
माननीय सभापति: उस समय माननीय स्पीकर महोदय कुर्सी पर बैठे थे । उनकी तरफ से व्यवस्था हो गई होगी । अभी राजीव जी बोल रहे हैं, इसलिए यह रिकॉर्ड में नहीं जाएगा ।
…(व्यवधान)* श्री राजीव रंजन सिंह ‘ललन’: अगर वह रहेगा तो यह भी रहेगा । …(व्यवधान)
माननीय सभापति:  मुझे लगता है वह भी नहीं रहेगा । यह अनपार्लियामेंटरी है, वह शब्द नहीं रहेगा ।
…(व्यवधान)
 श्री राजीव रंजन सिंह ‘ललन’ : अब आप बताइए, इन्होंने इतना लंबा भाषण दिया, 26 जनवरी में जो कुछ हुआ, क्या उसे एक बार भी कंडेम किया? नहीं किया । इन्होंने कहा, यह हुआ, वह हुआ, ऐसे कर दिया, वैसे कर दिया ।
 

21.00 hrs 26 जनवरी को जो हुआ, वह देशद्रोह था । वही नहीं, आप किन तत्वों को घुसा रहे हैं? …(व्यवधान) 6 फरवरी को जो बंद था, हमने टी.वी पर देखा कि लुधियाना में प्रदर्शन हो रहा था और भिंडरावाला का झंडा फहराया जा रहा था । आप कौन-सा आंदोलन करना चाहते हैं? आप कौना-सा आंदोलन इस देश में चलाना चाहते हैं? इस देश में कौन-सा टुकड़ा करना चाहते हैं? आप बार-बार सीएए की बात करते हैं । …(व्यवधान)

क्या आपको वहीं से चस्का लगा है? अगर, वह चस्का लगा है, तो भूल जाइए । इस बार लगता है प्रधान मंत्री जी बड़ी सख्ती में हैं । वे कुछ सुनने वाले नहीं है । आपने बात करने की बात कही है । बात करने के लिए सरकार ने कब मना किया है । सरकार ने कभी बात करने के लिए मना नहीं किया है ।

माननीय सभापति : राजीव जी समय अवधि बढ़ानी है । आप दो मिनट बैठिए ।

Hon. Members, I have a long list of Members to speak on the Motion of Thanks on the President’s Address, if the House agrees the time for discussion may be extended upto 12 o’clock.

SEVERAL HON. MEMBERS: Yes, Madam.

श्री अर्जुन राम मेघवाल : समय को बढ़ा दीजिए और जो स्पीच ले करना चाहते हैं, आप उनको ले करने की अनुमति देना चाहती हैं, तो वह भी दे दीजिए ।

माननीय सभापति: जो भी स्पीच ले करना चाहते हैं, वह बारह बजे तक ले कर सकते हैं ।

श्री राजीव रंजन सिंह ‘ललन’ : मैडम, मैं कह रहा था कि बातचीत का रास्ता कहां बंद है?

माननीय सभापति: आप भी कन्क्लूड कीजिए ।

श्री राजीव रंजन सिंह ‘ललन’: आप जब चाहें बातचीत कर सकते हैं । अगर, आपको बिल के किसी प्रावधान पर आपत्ति है, जो किसान के हित में नहीं है, प्रधान मंत्री जी ने ऑल पार्टी मीटिंग में कहा था, उस मीटिंग में अधीर रंजन चौधरी जी आप भी थे, ऑल पार्टी मीटिंग में प्रधान मंत्री जी ने कहा था कि एक फोन कॉल पर एक-डेढ़ घंटे के अंदर कृषि मंत्री जी बातचीत करने के लिए उपलब्ध हो जाएंगे । बातचीत में कहां दिक्कत है? आप बातचीत कीजिए ।…(व्यवधान) अगर, आपको किसी प्रावधान पर कोई आपत्ति हो, जो किसान विरोधी हो, किसान के हित में न हो, तो आप उसको कहिए ।

हम दो बातें कहकर अपनी बात समाप्त करेंगे । बहुत छोटी-छोटी बातें हैं । मैंने राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में ‘हर घर जल’ की चर्चा सुनी । मैंने उसमें देखा है कि महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में इस बात की चर्चा है कि जनजातियों को प्राथमिकता दी जाएगी । मेरा सरकार से आग्रह होगा कि इसको सभी के लिए किया जाए । वर्ष 2015 में बिहार के मुख्य मंत्री नीतीश कुमार जी ने ‘हर घर नल’ की जल योजना चलाई थी । आज बिहार के हर घर में, चाहे कोई भी घर हो, एपीएल हो, बीपीएल हो, कोई भी घर हो, हर घर में आज नल का जल पहुंचा दिया गया है ।

मेरा सरकार से आग्रह होगा कि उसको कीजिए । नीतीश कुमार जी ने जलवायु परिवर्तन पर ‘जल जीवन हरियाली’ अभियान चलाया है । हम चाहते हैं कि आप भी ‘जल जीवन हरियाली’ अभियान को चलाइए । उन्होंने जितने भी वॉटर बॉडीज हैं, जो इन्क्रोच्ड हैं, जो भर गए हैं, जिनको भर लिया है, सबको इन्क्रोच्मेंट फ्री करके, वो उसकी खुदाई करवा रहे हैं, ताकि उसमें जल संग्रह हो और भूगर्भ जल का स्तर जो नीचे भाग रहा है, वह सही हो और बिहार के लोगों को पीने का पानी मिले तथा पर्यावरण सुरक्षित हो । हम चाहेंगे इस दिशा में भी बिहार का जो मॉडल है, केंद्र सरकार उसको अध्ययन करे और अध्ययन करके उसके आधार पर आगे काम चलाए । इन्हीं शब्दों के साथ मैं पुन: आपके प्रति आभार व्यक्त करते हुए राष्ट्रपति जी के धन्यवाद प्रस्ताव का समर्थन करते हुए अपनी बात समाप्त करता हूं ।

 

SHRI PINAKI MISRA (PURI): Madam, Chairperson, I am deeply grateful to you for having called upon the Biju Janta Dal to participate in the debate on the Motion of Thanks on the President’s Address. I stand in a cautious welcome of thanks to the hon. President with the normal caveats and the normal cautionary note that Biju Janta Dal normally likes to employ on these occasions. We are meeting in the aftermath of the worst pandemic in the last century and in the worst situation that this world has seen for many, many decades. Therefore, there is a great deal of tribute that must be paid to the healthcare workers, the police, personnel and sanitation staff, who have ensured that the position in this country with regard to dealing with COVID-19 is significantly better than it was when the House last met in most unfortunate circumstances. 

          Credit in no small part goes to these braves who have discharged their duties selflessly. It is a matter of great satisfaction that the State of Odisha, under the leadership of Naveen Patnaikji, has paid ₹ 50 lakh to the next of kin of all martyred COVID-19 warriors and also full salary will be paid till their date of retirement. I would urge the Central Government to follow suit in this matter, I think, because that is the least that we owe to these brave warriors who have fought COVID-19 from the forefront.

          As India has embarked on this COVID-19 vaccination programme, the hon. President has, in fact, said and I quote:

“It is a matter of immense pride that India is conducting the world’s largest vaccination programme.” There is no doubt that it is a daunting task. Also, it is a matter of great pride that, again, Odisha is in the forefront of this. We have a record of 58 per cent which is the largest vaccination of healthcare workers in the country today. We hope to keep up this great pace that we have set in our State.
          Madam, though the COVID-19 pandemic has shown the urgent need to ramp up medical infrastructure in the country, the hon. President has mentioned the sanctioning of 22 new AIIMS which is heartening. AIIMS, Bhubaneswar is doing well, but we need a second AIIMS in Odisha, which the Government has asked for, in Sundergarh as well as a NIMHANS at Ranpur in my Puri parliamentary constituency, both of which, I think, can easily be sanctioned because there is already sufficient infrastructure in existence there and we will give quality medical care to the deserving in my State.
Madam, in paragraph 9 of the hon. President’s Address, he says:
“The collaboration between the Central and the State Governments has not only strengthened democracy but also enhanced the prestige of the Constitution.” These are ringing words indeed of the hon. President. The Biju Janata Dal has always approached participation in parliamentary democracy, both during the ten-year time when the UPA has been in power and now when the NDA has been in power, with a spirit of constructive cooperation, of cooperative federalism with the Central Government and it is in that spirit that I address this House today.
          In fact, the COVID-19 fight has shown that there is only a decentralised response, after taking the States into confidence, with which we can fight it successfully. Odisha was one of the first States in the country to create a dedicated COVID-19 hospital almost in all the districts, with ICUs in each of the 30 districts. Recognising the importance of local-level institutions, the State Government empowered panchayats and sarpanches so that the response could be bottom up rather than top down and community driven. Enjoying the support of all sections of people, the State Government remained better tuned to the ground realities and better placed to respond. Therefore, these lessons must not be forgotten now during the vaccination that the Central Government wishes to follow up.
          In fact, the hon. President has lauded the vaccination drive and hon. Prime Minister, I heard him in the other House this morning, has again said that ours is one of the first nations in the world to reach the five million mark very quickly, but look at what we have to achieve. We have to look at our density. Our density, at the moment, is very low. We are still at 0.33 dose per 100 people while Britain, where the situation is very bad, has gone to 16 per 100 people and the UAE is at 36 per 100 people and Israel is at 58 per 100 people. We are only at 0.33.  We are today in a situation where the Government’s target of 70 per cent population, which is 800 million people, for herd immunity is a very big target. The Government is today targeting only 300 million up to August of 2021. Even for that, we need to do almost 1.25 million, which is 12.5 lakh people, per day. Today, we are doing it barely. In fact, on last Sunday, we did 5,600 people. Where is 12 lakhs and where is 5,600? So, we really need to ramp this up. I believe that the only way to do this is to ensure that this is totally devolved, this is totally decentralised.
In fact, we have today almost 82 lakh vaccination sites in this country for the universal immunisation programme. We should be using them rather than only using the primary healthcare centres. We should also be using them.
          There is a lot of vaccination hesitancy. There is a lot of vaccination scepticism in this country. I believe personally that the top leadership of the country, the hon. President, the Prime Minister, the Vice-President, the Chief Justice of India, all the Judges, all Governors, all Chief Ministers, everybody must come forward and get vaccinated. That is where the people will feel confident. President Biden, Vice-President Kamala Harris, Mr. Boris Johnson, everywhere Presidents, Prime Ministers and Members of Parliament have come forward first to go ahead with the vaccination. So, we should be actually leading the way, rather than shying away and saying ‘pehle aap’. So, according to me, that will be a very important step in this vaccination programme, which is very very seminal for this country.
          I am coming now, Madam Chairperson, to some of the other subjects that the hon. President has touched upon. On agriculture, clearly, every Party of every shade of political public opinion in this country which has the nation’s interest at heart, which has the people’s interest at heart is going to condemn what happened on Republic Day at the Red Fort. The Government must come up with an impartial inquiry and I believe that those who are responsible must be dealt with in the most firm manner possible. There is no question about that. But, at the same time, the hon. President strikes a cautionary note when he says that the Government respects the holding of peaceful agitations and it is in this spirit that the successful culmination of ongoing dialogues hopefully will fructify. It is because, Madam Chairperson, and, I think, this House will be one in speaking with me on this, the sight of concertina wires, of spikes on the road, of massive concrete boulders, etc., is not a happy sight, is not an edifying sight. It is not the sight that Gandhi’s India wants to portray to the world.
Therefore, I believe – and this Government will be the first to recognize that – perhaps the top leadership again of this Government needs to step in more vigorously and ensure that if they are well meaning that they must come and talk to the farmers and get us a solution quickly. The Biju Janata Dal has consistently said that. In fact, the Odisha Assembly has now passed a unanimous Resolution that the Swaminathan Committee recommendations must be implemented in toto and not only in letter but also in spirit.
I urge everybody to kindly pay heed to what my colleague, Mr. Sasmit Patra spoke in the Upper House the other day where he gave a very clear distinction between the A2 formula and the C2 formula which is very artfully being employed today in this agriculture pricing mechanism. So, the Government must in spirit implement the recommendations of the Swaminathan Committee and that includes the assurance that MSP is, at least, 50 per cent more than the weighted average cost of production because that is really what hurts the farmer most. Since the Government has repeatedly maintained that the reforms will not impact the existing MSP procurement, I think, a written legally binding guarantee in the farm acts should allay some of the apprehensions of the farmers and this is something which the Government must seriously now consider as the step forward in its negotiations.
          The hon. President has also spoken at great length about the numerous difficulties faced by this country, in addition to Covid by way of floods, cyclones, etc. I need hardly tell the hon. House that the State of Odisha has borne a significant brunt of the damage caused by these cyclones and floods, right from 1999 super cyclone to 2013 cyclone Phailin, 2014 cyclone Hudhud, 2018 cyclone Titli, 2019 cyclone Fani and Bulbul, and now, 2020 cyclone Amphan which hit Odisha as well as West Bengal, of course, in a devastating fashion. We have always borne the brunt of these super cyclones. Our State, of course, has now got the best template possible in the world and is recognised by the United Nations as well as the World Health Organization, and all other United Nations affiliated agencies. The Naveen Patnaik Government has virtually now got the best template in the world for evacuation where 15 lakh people are able to be evacuated over 48 hours or 72 hours, and, therefore, ensuring minimum casualty and also a maximum R&R, which is the rehabilitation programme. So, this is something where Odisha has struggled, despite the fact that we are continuously short of resources. So, we have requested, and I repeat that again, I believe the Government should look at special focus status. It is because the Government keeps saying there is no ‘special category status’ anymore. So, ‘special focus status’ must be there for States like Odisha which are continuously being hit by natural disasters.
          I have little time left. On Railways, the hon. President talked about connectivity. Again, it is a matter of some concern that while Odisha gives the Railways the maximum revenue in this country, we keep getting short changed. If you only give us 50 per cent more of what you are giving us, you will double your revenue from our State. So, it is a matter of some concern for us that in the 2020-21 Budget, it was Rs. 4,373 crore which is a 27 per cent deduction from 2019-20 Budget, which was Rs. 5,993 crore. This kind of reduction for a State which gives you such high revenue, I believe is not in the interest of the country. Many very very high paying lines are not being commissioned. Many of the districts of Odisha, like Deogarh, Boudh, Sonepur, Kandhamal, Nabrangpur, and Malkangiri, which are all tribal districts, which used to be Maoist-infested districts, which have now been controlled by the State Government in partnership with the Central Government, need real connectivity. We have the Puri-Konark railway line which will make the Golden Triangle of Puri-Konark-Bhubaneswar tourist spots which are the world famous ones.  So, I believe that is something the Central Government must immediately look into.
          Tele density is something which we sourly lack. Banking coverage and financial inclusion is something which we sourly lack. We are much below the density levels of urban India as well as other States.
          Madam Chairperson, above all, it is only fitting that I mention this because you are in the Chair. You have always conducted the proceedings of this House, I believe, with the most extraordinary empathy as well as rectitude regardless of political affiliation. That is something which is a matter of great happiness for all of us. The fact that you are in the Chair and the fact that many of our august lady Members have spoken, Women’s Reservation Bill is something very close to my Chief Minister, Shri Naveen Patnaik’s heart. I believe seriously that women are being short changed in this country. Rajya Sabha passed this Bill almost eight or nine years back. I am so glad that hon. Shri Rajnath Singh ji is here. He is nodding his head vigorously in agreement with us. The Bhartiya Janata Party has always been for it publicly. The Congress Party happily is also for it publicly. All parties are for it publicly. The two parties which opposed it in the Rajya Sabha are the Samajwadi Party and the Rashtriya Janta Dal. The Samajwadi Party today has four Members here and the RJD has no Member here. So, really there is no opposition in this House. The Biju Janata Dal under Shri Naveen Patnaik ji was revolutionary. Out of 21 seats, he gave ticket to seven ladies last time. So, we gave one-third reservation in our ticket distribution. Five of our BJD lady candidates won the election. Two BJP women candidates have won. So, Odisha actually is the only State in the country which has seven lady Members out of 21, which is one-third. So, in Odisha we are one-third compliant. Therefore, I would seriously urge the leaders of this House – the most illustrious Minister of Parliamentary Affairs Minister and the Defence Minister is present here – to please carry this message that Shri Naveen Patnaik ji has earnestly requested you, with all shades of public opinion and opinion of this House being one, the Women’s Reservation Bill must be passed. This will be a fitting tribute that this Government and a fitting legacy that this Government will leave behind which people will not forget, and particularly women of this country will not forget ever.
          So, with these words and with some words of caution, I heartily thank the hon. President for having his Address to both Houses of Parliament. Thank you very much Madam Chairperson.
*श्री गणेश सिंह (सतना): नये कैलेण्डर वर्ष, 2021 में संसद के संयुक्त सत्र में महामहिम राष्ट्रपति जी का संबोधन ऐतिहासिक और उत्साहवर्धक रहा है । कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के बाद भी भारत एक नये समर्थ के साथ दुनिया के सामने उभर कर आया है ।
महामहिम् राष्ट्रपति जी का अभिभाषण एक ऐतिहासिक दस्तावेज है जो बदलते भारत, बढ़ते भारत की तस्वीर दिखाता है । 'वोकल फॉर लोकल' के जरिये 'आत्मनिर्भर भारत' का परिणाम है कि भारत ने न केवल कोरोना पर विजय पायी बल्कि अर्थव्यवस्था को भी गतिशील कर दुनिया को आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया । भारत ने कोरोना संक्रमण के दौरान पहले अनेक देशों को दवा और वैक्सीन की मदद पहुँचाई और दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चला कर मानवता की रक्षा की है ।
20 लाख करोड़ का आर्थिक पैकेज देकर ऐतिहासिक कार्य सरकार ने किया था । आठ माह तक लगातार 80 करोड लोगों को पांच किलो प्रतिमाह अतिरिक्त अनाज निःशुल्क दिया गया, श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलायी गयी, गरीब कल्याण रोजगार अभियान चलाया गया । 50 करोड़ मैन डेज के बराबर रोजगार पैदा किये गये ।

देश ने कोरोना महामारी से निपटने हेतु जहाँ एक ओर बड़ा नेटवर्क तैयार किया गया, वहीं वैक्सीन तैयार करके पूरी दुनिया को चौंका दिया । प्रधानमंत्री जन औषधि केन्द्रों के माध्यम से हर साल इलाज में गरीबों के 3600 करोड़ रूपये की बचत हो रही है । 1.5 करोड़ से ज्यादा गरीबों को आयुष्मान भारत योजना में इलाज, इससे 30,000 करोड़ रूपये गरीबों का बच गया । बच्चों की मृत्युदर प्रति लाख 130 से घटकर 113 पर आ गयी है ।

वर्ष 2014 में 387 मेडिकल कालेज थे, वर्ष 2020 में 562 मेडिकल कालेज हो गये । 50 हजार से अधिक अंडरग्रैजुएट और पोस्ट ग्रैजुएट सीटों की वृद्धि हुई है । 22 नये एम्स अस्पताल खोले गये । पुरानी मेडिकल काउन्सिल आफ इण्डिया की जगह नेशनल मेडिकल कमीशन की स्थापना की गयी । 31 हजार करोड़ रूपया गरीब महिलाओं के जन धन खातों में दिये गये, 14 करोड़ से अधिक मुफ्त गैस सिलेंडर बांटे गये । किसानों की एम.एस.पी में 1.5 गुना वृद्धि कर रिकार्ड खरीदी की गयी, यही वजह है कि 80 करोड़ लोगों को कोरोना काल में मुफ्त अनाज दिया गया । किसानों की आय बढ़ाने हेतु 3 महत्वपूर्ण कृषि सुधार कानून बनाकर इसका 10 करोड़ से अधिक छोटे किसानों को लाभ मिलना शुरू हो गया । देश में किसानों के लिये 100 नई किसान रेल शुरू की गयी जिसके माध्यम से 38 हजार टन से अधिक अनाज, फल और सब्जियां एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाया गया, इससे किसानों की आय में वृद्धि हुई है ।

वर्ष 2013-14 में माइक्रो सिंचाई 42 लाख हेक्टेयर की गयी, वर्ष 2020-21 में 56 लाख हेक्टेयर में सिंचाई बढ़ गयी है । वर्ष 2008-09 में 234 मिलियन टन खाद्यान की पैदावार थी, वर्ष 2019-20 में खाद्यान की पैदावार बढ़कर 296 मिलियन सब्जी और फलों की पैदावार 215 मिलियन टन से बढ़कर 320 मिलियन टन हो गया ।

फसल बीमा 5 वर्षों में किसानों को 17000 करोड़ प्रीमियम से 90000 करोड़ रूपये की राशि मुआवजे के रूप में मिली । 10000 किसान उत्पादक संगठन बनाये गये । पशुधन 8.2 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है । 6 वर्षों में एथनाल 38 करोड़ लीटर से बढ़कर 190 करोड़ लीटर हो गया, इस वर्ष 320 करोड़ लीटर हो जायेगा । 2 करोड़ से अधिक गरीब परिवारों के पक्के मकान बनाये गये, 2022 तक हर गरीब का पक्का मकान होगा । जल जीवन मिशन के तहत हर घर तक पाईप वाटर सप्लाई पहुँचाई जायेगी, जिसमें 3 करोड़ परिवारों को सुविधा मिल चुकी है । प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अंतर्गत 6 लाख 42 हजार किलोमीटर सड़क का निर्माण पूरा कर लिया गया है ।

तीसरे चरण में बसावटों के साथ-साथ स्कूल, बाजार, अस्पताल को जोड़ने का लक्ष्य लिया गया है, जिसमें 1 लाख 25 हजार किलोमीटर रास्तों को भी अपग्रेड किया जायेगा । 6 लाख से अधिक गांव को आप्टीकल फाइबर से जोड़ने का अभियान चल रहा है । देश को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति दी गई है । सामाजिक न्याय को ध्यान में रखते हुये 3 करोड़ से अधिक विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दी जा रही है । देश के 112 ऐसे आकांक्षी जिले जो विकास में पीछे रह गये थे, उनके विकास की योजना बनायी गयी है ।

46 वन उपजों पर 90 प्रतिशत एम.एस.पी बढ़ाई गई है । संसद की नई इमारत की आधारशिला रखी जा चुकी है । 29 केन्द्रीय श्रम कानूनों को कम करके 4 लेबर कोड बनाये हैं । शहरी क्षेत्रों में एक करोड़ से अधिक गरीबों के घर बनाये जा रहे हैं । देश के 27 शहरों में मेट्रो सेवा का विस्तार चल रहा है । पिछले एक-दो वर्षों में देश ने ऐसे कार्य किये हैं जो ऐतिहासिक हैं जैसे धारा 370 का हटना, नागरिकता संसोधन कानून का बनना, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की नियुक्ति, सशस्त्र सेनाओं में महिलाओं की नियुक्ति, भव्य राम मंदिर का निर्माण, ईज ऑफ डूईंग बिजनेस की रैंकिंग में भारत ने रिकार्ड सुधार किये, वर्ल्ड टूरिज्म इंडेक्स की रैंकिंग में भारत 65वें से 34वीं रैंकिंग में आ गया ।

कभी देश में सिर्फ 2 मोबाईल फैक्ट्री थी, अब देश दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाईल निर्माता देश है । भारत अब डिजिटल इण्डिया बन रहा है । गरीबों के लिये ढ़ाई करोड़ से अधिक बिजली कनेक्शन निशुल्क दिये गये । गरीबों के बिजली बिल कम हो इसके लिये 36 करोड़ से अधिक  एलईडी बल्ब बांटे गये । एक रूपये प्रतिमाह के प्रीमियम पर प्रधानमंत्री सुरक्षा योजना दी गई । 90 पैसा प्रतिदिन के प्रीमियम पर साढ़े 9 करोड़ लोगों को प्रधानमंत्री जीवन ज्योति योजना से जोड़ा गया । 10 करोड़ से ज्यादा घरों में शौचालय बनाये गये ।

500 से अधिक पुराने कानून खत्म किये गए । इन सारी उपलब्धियों का उल्ल्लेख महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में है । ऐसे सर्वस्पर्शी, सर्व-समावेशी एवं देश के जन-जन के सर्वांगीण कल्याण के प्रति समर्पित ऐतिहासिक अभिभाषण पर, मैं महामहिम् राष्ट्रपति जी को हार्दिक बधाई देता हॅूं, अभिनंदन करता हॅूं, वन्दन करता हॅूं  ।

   

*श्रीमती रमा देवी (शिवहर): राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में सशक्त एंव विकसित हो रहे भारत की तस्वीर का उल्लेख है । महामहिम राष्ट्रपति जी द्वारा दिये गये अभिभाषण से स्पष्ट है कि वर्तमान सरकार द्वारा किये गये कार्यों से देश को विकास के रास्ते पर लाया गया है और देश नये भारत के निर्माण की दिशा में अग्रसर है । देशवासियों का जीवन सुधारने, कुशासन से पैदा हुई उनकी मुसीबतें दूर करने और समाज की आखिरी पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक को सभी जरुरी सुविधाओं को पहुंचाने के लक्ष्य के लिए यह सरकार पूरी तरह से संकल्पित है । 2014 में जब आदरणीय नरेन्द्र मोदी जी ने प्रधान मंत्री पद सम्भाला, उस वक्त देश में भ्रष्टाचार का माहौल था । सरकारी योजनाओं में तरह-तरह की गडबड़ियां होती थीं जिससे देश के अन्तिम पंक्ति में खड़े व्यक्तियों को उन योजनाओं का न तो कोई लाभ, न कोई राहत मिल रही थी । जबकि वर्तमान सरकार द्वारा डीबीटी के माध्यम से पिछले 6 वर्षों में 13 लाख करोड़ रूपए से अधिक की राशि लाभार्थियों को डायरेक्ट ट्रांसफर की गई है । 2014 के बाद से लगातार वर्तमान सरकार बिचौलियों एवं भ्रष्टाचार की जड़ों को समाप्त करने का काम कर रही है ।

हम सभी जानते है कि पिछला एक वर्ष पूरे विश्व के लिए मुश्किल एंव चुनौतीपूर्ण रहा है । किसी भी सरकार की संवेदनशीलता की परख कठिन समय में ही होती है । कोरोना वैश्विक महामारी के कारण सरकार को एक ओर जहां देश के नागरिकों के जीवन की रक्षा की चुनौती थी,तो वहीं दूसरी ओर अर्थव्यवस्था की भी चिंता करनी थी । अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए रिकॉर्ड आर्थिक पैकेज की घोषणा के साथ ही मोदी सरकार ने इस बात का भी ध्यान रखा कि किसी गरीब को भूखा न सोना पड़े । "प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना" के माध्यम से 8महीनों तक 80 करोड़ लोगों को 5 किलो प्रति माह अतिरिक्त अनाज की निःशुल्क व्यवस्था सरकार द्वारा सुनिश्चित की गई । इस दौरान देशभर में उज्ज्‍वला योजना की लाभार्थी गरीब महिलाओं को14 करोड़ से अधिक मुफ्त गैस सिलेंडर भी मिले । मुझे खुशी है कि सरकार ने प्रवासी श्रमिकों,कामगारों एंव अपने घर से दूर रहने वाले लोगों की भी चिंता की । वन नेशन-वन राशन कार्ड की सुविधा देने के साथ ही सरकार ने उन्हें निःशुल्क अनाज मुहैया कराया और उनके लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलवाईं ।

मैं सरकार को धन्यवाद देना चाहती हूं जो किसानों को अत्यधिक सशक्त करने एवं उनकी आय को दोगुणा करने के लिए संकल्पित है । दो हेक्टेयर से कम भूमि वाले कृषक भाइयों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत हर साल 6हजार रुपये सालाना दिये जाने का काम किया जा रहा है ।

          इस योजना के तहत अब तक 1 लाख13 हजार करोड़ से अधिक रूपये देश के किसान भाइयों के खाते में ट्रांसफर किये जा चुके हैं । प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ भी देश के छोटे किसानों को हुआ है । इस योजना के तहत पिछले 5 वर्षों में किसानों को 17 हजार करोड़ रूपए प्रीमियम के एवज में लगभग 90हजार करोड़ रूपए की राशि मुआवजे के तौर पर मिली है । आज कृषि के लिए उपलब्ध सिंचाई के साधनों में भी व्यापक सुधार आ रहा है । हालांकि अभी कई सिंचाई योजनाएं अपने निर्धारित समय से काफी लम्बित हैं जिसके कारण उत्तरी बिहार के कई जिले हर साल से बाढ़ से प्रभावित रहते हैं । बाढ़ के समय पानी को संरक्षित करके एवं जल संरक्षण और प्रबंधन से मेरे संसदीय क्षेत्र शिवहर सहित बिहार राज्य को सिंचाई की अच्छी सुविधा मिल सकती है । पशुपालन एंव मत्स्यपालन को बढ़ावा दिया जा रहा है । देश भर में शुरू की गई किसान रेल भारत के किसानों को नया बाजार उपलब्ध कराने में नया अध्याय लिख रही है । कृषि को और लाभकारी बनाने के लिए सरकार आधुनिक कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी विशेष ध्यान दे रही है । इसके लिए 1लाख करोड़ रूपए के एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड की शुरूआत की गई है । इन सब सुधारों से निश्चित रूप से देश के किसान सशक्त हो रहे हैं ।

पिछले कुछ वर्षों में मोदी सरकार ने कुछ ऐसे काम किये हैं जिनको करना कभी बहुत मुश्किल लगता था । जैसे धारा 370 के प्रावधानों के हटने के बाद जम्मू-कश्मीर के लोगों को नये अधिकार मिले हैं । कभी हमारे यहां सिर्फ दो मोबाईल फैक्ट्रियां थीं । आज भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता देश है ।

सरकार ने यह दिखाया है कि यदि नीयत साफ हो,इरादे बुलंद हो तो बदलाव लाया जा सकता है । इन 6वर्षों में सरकार ने जितने लोगों के जीवन को छुआ है, वह अभूतपूर्व है । हर गरीब का घर रोशन हो,इसके लिए ढाई करोड़ से अधिक बिजली कनेक्शन निःशुल्क दिए गये हैं । गरीब बहन-बेटियों की गरिमा बढ़े, इसके लिए स्वच्छ भारत अभियान के तहत10 करोड़ से अधिक शौचालय बनाये गये हैं । गरीब एवं मध्यम वर्ग का बिजली बिल कम हो इसके लिए 36करोड़ से ज्यादा सस्ते एलईडी बल्ब वितरित किये गये हैं । घर में काम करने वाले भाई-बहन,गाड़ी चलाने वाले,जूता सिलने वाले,कपड़ा प्रेस करने वाले, खेतिहर मजदूर लोगों को भी पेंशन मिले इसके लिए प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन योजना की शुरूआत करना माननीय प्रधानमंत्री जी का समाज के गरीब से गरीब तबके के प्रति भी उनकी संजीदगी को दर्शाता है ।

सरकार द्वारा स्वास्थ्य के क्षेत्र में पिछले 6 वर्षों में जो कार्य किये गये हैं उसका बहुत बड़ा लाभ हम सब ने कोरोना संकट के दौरान देखा है । आज देश की स्वास्थ्य सेवायें गरीबों को आसानी से उपलब्ध हो रही हैं । पहले किसी गरीब व्यक्ति के परिवार के किसी सदस्य को कोई बीमारी लग जाये तो उस परिवार की कमर इलाज खर्च में ही टूट जाती थी । माननीय प्रधानमंत्री जी की दूरदर्शिता एंव सेवा भावना का परिणाम है कि उन्होंने गरीबों के इस तकलीफ को समझा और इसके निवारण के लिए प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत योजना)के तहत 50 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा कवच दिये जाने के लिए 5 लाख रुपये तक फ्री इलाज के लिए व्यवस्था की है । अब किसी गरीब को उपचार के लिए जमीन बेचने अथवा कर्ज लेने की जरूरत नहीं पड़ती । हमारी केंद्र सरकार की इस जन कल्याणकरी योजना की ही देन है कि आज गरीब व्यक्ति भी अपना मुफ्त उपचार देश के किसी बड़े निजी अस्पताल में करा सकता है । इस योजना के तहत अब तक 1.5करोड़ गरीब लोग अपना इलाज करवा चुके हैं ।

आज सरकार अपने कई कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा दे रही है । जिससे निश्चित रूप से देश की महिलाएं लाभान्वित एंव आत्मनिर्भर बन रही हैं । रसोई के धुएं से गरीब बहन-बेटी की सेहत खराब न हो, इसके लिए उज्ज्‍वला योजना के तहत 8करोड़ से ज्यादा मुफ्त गैस कनेक्शन का वितरण कर गरीब महिलाओं की जीवन में बदलाव लाने का काम माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में हमारी केन्द्र सरकार ने किया है । देश के ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत महिलाओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुये सरकार1 रूपए में “सुविधा"सैनिटरी नैपकीन देने की योजना भी चला रही है । आत्मनिर्भर भारत में महिला उद्यमियों की भी विशेष भूमिका है । राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत देश में आज 7करोड़ से अधिक महिला उद्यमी लगभग 66लाख स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हुई हैं । विभिन्न बैंकों के माध्यम से इन महिला समूहों को पिछले 6 वर्षों में 3 लाख40 हजार करोड़ रूपए का ऋण दिया गया है । ऐसे कई योजनाओं के माध्यम से सरकार महिलाओं को स्वरोजगार के नए अवसर प्रदान कर रही है ।

माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में देश में कल्याणकारी एंव ऐतिहासिक कार्य हुये हैं और लोगों को फायदा पहुँचा है । आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में यह सरकार पूरी निष्ठा और ईमानदार नीयत के साथ समृद्ध भारत के निर्माण के लिए निरंतर काम कर रही है । मै माननीय राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर जारी इस धन्यवाद प्रस्ताव का समर्थन करती हूं ।

         

*श्री विष्णु दयाल राम (पलामू): मैं माननीय राष्ट्रपति महोदय जी के अभिभाषण का समर्थन करता हूँ । राष्ट्रपति जी के अभिभाषण से यह परिलक्षित होता है कि केन्द्र सरकार ‘सबका साथ सबका विकास’ के वायदे के अनुरूप देश को तेज गति से आर्थिक विकास की नई राह पर ले जा रही है । देश के गरीब, दलित, शोषित, वंचित, किसान, श्रमिक और युवा सरकार के इस समावेशी आर्थिक विकास के केन्द्र में है । राष्ट्रपति महोदय ने इस दशक को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि हमारी स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होंगे । सरकार के प्रयासों से पिछले 6 वर्षों में इस दशक को भारत का दशक और इस सदी को भारत की सदी बनाने की मजबूत नींव रखी जा चुकी है । साथ ही उन्होंने वैश्विक कोरोना महामारी का जिक्र करते हुए कहा कि चुनौती कितनी बड़ी क्यों न हो, न हम रूकेंगे और न भारत रूकेगा । सरकार ने समय पर लिए गए सटीक फैसलों से लाखों देशवासियों का जीवन बचाया है । आज देश में कोरोना के नए मरीजों की संख्या भी तेजी से घट रही है और जो संक्रमण से ठीक हो चुके हैं उनकी संख्या भी बहुत अधिक है ।

          माननीय राष्ट्रपति जी ने कहा कि जब हम बीते एक वर्ष को याद करते हैं तो हमें स्मरण होता है कि कैसे एक ओर नागरिकों के जीवन की रक्षा की चुनौती थी, तो दूसरी तरफ अर्थव्यवस्था की चिंता भी करनी थी । अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए रिकॉर्ड आर्थिक पैकेज की घोषणा के साथ ही सरकार ने इस बात का भी ध्यान रखा कि कोई गरीब को भूखा न रहे । प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के माध्यम से 8 महीनों तक 80 करोड़ लोगों को 5 किलो प्रतिमाह अतिरिक्त अनाज निशुल्क सुनिश्चित किया गया । सरकार ने प्रवासी श्रमिकों, कामगारों और अपने घर से दूर रहने वाले लोगों की भी चिंता की । वन नेशन – वन राशन कार्ड की सुविधा देने के साथ ही सरकार ने उन्हें निशुल्क अनाज मुहैया कराया और उनके लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलवाईं ।  महामारी के कारण शहरों से वापस आए प्रवासियों को उनके ही गांवों में काम देने के लिए सरकार ने छह राज्यों में गरीब कल्याण रोजगार अभियान भी चलाया । इस अभियान की वजह से 50 करोड़ Man-days के बराबर रोजगार पैदा हुआ । सरकार ने रेहड़ी-पटरी वालों और ठेला लगाने वाले भाइयों-बहनों के लिए विशेष स्वनिधि योजना भी शुरू की । इसके साथ ही करीब 31 हजार करोड़ रूपये गरीब महिलाओं के जनधन खातों में सीधे ट्रांसफर भी किए । इस दौरान देशभर में उज्ज्वला योजना की लाभार्थी गरीब महिलाओं को 14 करोड़ से अधिक मुफ्त गैस सिलेंडर भी मिले । कोरोना काल में वंदे भारत मिशन एक बहुत बड़ा अभियान था । ‘ वंदे भारत मिशन’ दुनिया में इस प्रकार का सबसे बड़ा अभियान है, उसकी सराहना हो रही है । भारत ने दुनिया के सभी हिस्सों से लगभग 50 लाख भारतीयों को स्वदेश वापस लाने के साथ ही एक लाख से अधिक विदेशी नागरिकों को भी उनके अपने देशों तक पहुँचाया है । वैश्विक परिस्थितियों ने जब हर देश की प्राथमिकता उसकी अपनी जरुरतें थीं, हमें ये याद दिलाया है कि आत्मनिर्भर भारत का निर्माण क्यों इतना महत्वपूर्ण है । इस दौरान भारत ने बहुत ही कम समय में 2200 से अधिक प्रयोगशालाओं का नेटवर्क बनाकर, हजारों वेंटिलेटर्स का निर्माण करके, पीपीई किट से लेकर टेस्ट किट बनाने तक में आत्मनिर्भरता हासिल करके अपनी वैज्ञानिक क्षमता, अपनी तकनीकी दक्षता और अपने मजबूत स्टार्ट-अप इकोसिस्टम का भी परिचय दिया है । हमारे लिए यह और भी गर्व की बात है कि आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चला रहा है । इस प्रोग्राम की दोनों वैक्सीन भारत में ही निर्मित हैं । संकट के इस समय में भारत ने मानवता के प्रति अपने दायित्व का निर्वहन करते हुए अनेक देशों को कोरोना वैक्सीन की लाखों खुराक उपलब्ध कराई हैं । भारत के इस कार्य की विश्व भरत में हो रही प्रशंसा, हमारी हजारों वर्ष पुरानी संस्कृति, सर्वे सन्तु निरामया: की भावना के साथ जग-कल्याण की हमारी प्रार्थना, हमारे प्रयासों को और ऊर्जा दे रही है ।

          सरकार द्वारा स्वास्थ्य के क्षेत्र में पिछले 6 वर्षों में जो कार्य किए गए हैं, उनका बहुत बड़ा लाभ हमने इस कोरोना संकट के दौरान देखा है । इन वर्षों में इलाज से जुड़ी व्यवस्थाओं को आधुनिक बनाने के साथ ही बीमारी से बचाव पर भी उतना ही बल दिया गया है । राष्ट्रीय पोषण अभियान, फिट इंडिया अभियान, खेलों इंडिया अभियान, ऐसे अनेक कार्यक्रमों से स्वास्थ्य को लेकर देश में नई सतर्कता आई है । आयुर्वेद और योग को बढ़ावा देने के मेरी सरकार के प्रयासों का लाभ भी हमें देखने को मिला है । सरकार के प्रयासों से आज देश की स्वास्थ्य सेवाएं गरीबों को आसानी से उपलब्ध हो रही हैं तथा बीमारियों पर होने वाला उनका खर्च कम हो रहा है । आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत देश में 1.5 करोड़ गरीबों को 5 लाख रुपये तक का  मुफ्त इलाज मिला है । इससे इन गरीबों के 30 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च होने से बचे हैं । आज देश के 24 हजार से ज्यादा अस्पतालों में से किसी में भी आयुष्मान योजना का लाभ लिया जा सकता है । इसी तरह प्रधानमंत्री भारतीय जन-औषधि योजना के तहत देश भर में बने 7 हजार केन्द्रों से गरीबों को बहुत सस्ती दर पर दवाइयाँ मिल रही हैं । इन केन्द्रों में रोजाना लाखों मरीज दवाई खरीद रहे हैं । कीमत कम होने की वजह से मरीजों को सालाना लगभग 3600 करोड़ रुपये की बचत हो रही है । देश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए मेडिकल शिक्षा का विस्तार भी अत्यंत आवश्यक है । साल 2014 में देश में सिर्फ 387 मेडिकल कॉलेज थे, लेकिन आज देश में 562 मेडिकल कॉलेज हैं । बीते 6 वर्षों में अंडरग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट चिकित्सा शिक्षा में 50 हजार से ज्यादा सीटों की वृद्धि हुई है । प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत सरकार ने 22 नए एम्स को भी मंजूरी दी है । राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के साथ ही चार स्वायत्त बोर्ड का गठन कर केन्द्र सरकार ने चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधारों की नींव रखी है । इन्हीं सुधारों के क्रम में दशकों पुरानी मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के स्थान पर नेशनल मेडिकल कमीशन की स्थापना की गई है ।

          आत्मनिर्भर भारत अभियान केवल भारत में निर्माण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के हर नागरिक का जीवन स्तर ऊपर उठाने तथा देश का आत्मविश्वास बढ़ाने का भी अभियान है । हमारा लक्ष्य आत्मनिर्भर कृषि से और सशक्त होगा । इसी सोच के साथ सरकार ने बीते 6 वर्षों में बीज से लेकर बाजार तक हर व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन का प्रयास किया है ताकि भारतीय कृषि आधुनिक भी बने और कृषि का विस्तार भी हो । इन्हीं प्रयासों के क्रम में सरकार ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करते हुए लागत से डेढ़ गुना एमएसपी देने का फैसला भी किया । सरकार आज न सिर्फ एमएसपी पर रिकॉर्ड मात्रा में खरीद कर रही है, बल्कि खरीद केन्द्रों की संख्या को भी बढ़ा रही है । आज कृषि के लिए उपलब्ध सिंचाई के साधनों में भी व्यापक सुधार आ रहा है । Per Drop More Crop के मंत्र पर चलते हुए सरकार पुरानी सिंचाई परियोजनाओं को पूरा करने के साथ ही सिंचाई के आधुनिक तरीके भी किसानों तक पहुंचा रही है । वर्ष 2013-14 में जहां 42 लाख हेक्टेयर जमीन में ही माइक्रो-इरिगेशन की सुविधा थी, वहीं आज 56 लाख हेक्टेयर से ज्यादा अतिरिक्त जमीन को माइक्रो-इरिगेशन से जोड़ा जा चुका है । सरकार के इन प्रयासों को हमारे किसान अपने परिश्रम से और आगे बढ़ा रहे हैं । आज देश में खाद्यान्न उपलब्धता रिकॉर्ड स्तर पर है । वर्ष 2008-09 में जहां देश में 234 मिलियन टन खाद्यान्न की पैदावार हुई थी, वहीं साल वर्ष 2019-20 में देश की पैदावार बढ़क 296 मिलियन टन तक पहुंच गई है । इसी अवधि में सब्जी और फलों का उत्पादन भी 215 मिलियन टन से बढ़कर अब 320 मिलियन टन तक पहुंच गया है । एमय की मांग है कि कृषि क्षेत्र में हमारे जो छोटे और सीमांत किसान हैं, जिनके पास सिर्फ एक या दो हेक्टेयर जमीन होती है, उन पर विशेष ध्यान दिया जाए । देश के सभी किसानों में से 80 प्रतिशत से ज्यादा ये छोटे किसान ही हैं और इनकी संख्या 10 करोड़ से ज्यादा है ।

          सरकार की प्राथमिकताओं में ये छोटे और सीमांत किसान भी हैं । ऐसे किसानों के छोटे-छोटे खर्च में सहयोग करने के लिए पीएम किसान सम्मान निधि के जरिए उनके खातों में लगभग एक लाख तेरह हजार करोड़ से अधिक रुपये सीधे ट्रांसफर किए जा चुके हैं । प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ भी देश के छोटे किसानों को हुआ है । इस योजना के तहत पिछले 5 वर्षों में किसानों को 17 हजार करोड़ रुपये प्रीमियम के एवज में लगभग 90 हजार करोड़ रुपये की राशि मुआवजे के तौर पर मिली है । देश के छोटे किसानों को साथ जोड़कर 10 हजार किसान उत्पादक संगठनों यानि Farmer Producer Organisations को स्थापित करने का अभियान एक ऐसा ही प्रभावशाली कदम है । इससे इन छोटे किसानों को समृद्ध किसानों की तरह बेहतर तकनीक, ज्यादा ऋण, पोस्ट हार्वेस्टिंग प्रोसेसिंग एवं मार्केटिंग की सुविधाएँ और प्राकृतिक आपदा के समय सुरक्षा मिलनी सुनिश्चित हुई है । इससे किसानों को अपनी फसल की ज्यादा कीमत और ज्यादा बचत का विकल्प भी मिला है । सरकार व्यापक विमर्श के बाद संसद ने सात महीने पूर्व तीन महत्वपूर्ण कृषि सुधार, कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक, कृषि (सशक्तीकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा करार विधेयक  और आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक पारित किए हैं । इन कृषि सुधारों का सबसे बड़ा लाभ भी 10 करोड़ से अधिक छोटे किसानों को तुरंत मिलना शुरू हुआ । छोटे किसानों को होने वाले इन लाभों को समझते हुए ही अनेक राजनीतिक दलों ने समय-समय पर इन सुधारों को अपना भरपूर समर्थन दिया था । देश में अलग-अलग फोरम पर देश के हर क्षेत्र में दो दशकों से जिन सुधारों की चर्चा चल रही थी और जो मांग हो रही थी, वह सदन में चर्चा के दौरान भी परिलक्षित हुई । वर्तमान में इन कानूनों का अमलीकरण देश की सर्वोच्च अदालत ने स्थगित किया हुआ है । सरकार उच्चतम न्यायालय के निर्णय का पूरा सम्मान करते हुए उसका पालन करेगी ।

          श्रम कानूनों में सुधार 29 केन्द्रीय श्रम कानून की जगह चार श्रम संहिताएँ, कंपनी एक्ट, 2013 के कई प्रावधानों को गैर आपराधिक बनाना, प्रोडक्शन लिंक्ड इन्सेन्टिव को लागू करना, एमएसएमई के क्षेत्र में किए गए कार्यों, नौकरियों के लिए रिक्रूटमेंट प्रोसेस को आसान बनाने, सशस्त्र बलों की क्षमता बढ़ाने, लड़ाकू विमान तेजस (83) के निर्माण का ऑर्डर देने, नक्सली हिंसा की घटनाओं में आयी कमी का जिक्र करने के साथ माननीय राष्ट्रपति ने इंफ्रास्ट्रक्चर और परिवहन, शहरी और ग्रामीण विकास, ऊर्जा जल और पर्यावरण, शिक्षा महिला बाल विकास, अल्पसंख्यक, जनजातीय मामले तथा टेक्नोलॉजी और अंतरिक्ष के क्षेत्रों में सरकार के द्वारा किए गए कार्यों पर प्रकाश डाला ।

          माननीय प्रधानमंत्री जी का यह मानना है कि संवाद, समन्वय और संवेदना की जो हमारी राष्ट्रीय परंपरा रही है, वही हमारे राष्ट्र का पथ प्रदर्शन करती रहेगी ।

          अंत में मैं माननीय राष्ट्रपति महोदय द्वारा अपने अभिभाषण में माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा एक स्वर्णिम भारत के सपने को साकार करने के लिए लाई गई विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों का स्वागत और पुरजोर समर्थन करता हूँ ।

*श्री बिद्युत बरन महतो (जमशेदपुर): मैं माननीय राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर अपने विचार रखता हूं । हमारी सरकार का एक ही लक्ष्य है गरीबी उन्मूलन तथा स्वास्थ्य के क्षेत्र में विकास एवं नई योजनाओं का अमल करना, जिससे“स्वस्थ भारत का निर्माण हो ।” कोरोना वैश्विक महामारी के इस दौर में हो रहा संसद का यह सत्र बहुत महत्वपूर्ण है । नया वर्ष भी है, नया दशक भी है और इसी साल हम आजादी के 75वें वर्ष में भी प्रवेश करने वाले हैं । आज चनौती कितनी ही बड़ी क्यों न हो, न हम रुकेंगे और न भारत रुकेगा । जब हम बीते एक वर्ष को याद करते हैं तो स्मरण होता है कि कैसे एक ओर नागरिकों के जीवन की रक्षा की चुनौती थी, तो दूसरी तरफ अर्थव्यवस्था की चिंता भी करनी थी । अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए रिकॉर्ड आर्थिक पैकेज की घोषणा के साथ ही मेरी सरकार ने इस बात का भी ध्यान रखा कि किसी गरीब को भूखा न रहना पड़े । प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के माध्यम से 8 महीनों तक 80 करोड़ लोगों को 5 किलो प्रतिमाह अतिरिक्त अनाज नि:शुल्क सुनिश्चित किया गया ।   सरकार ने प्रवासी श्रमिकों, कामगारों और अपने घर से दूर रहने वाले लोगों की भी चिंता की । वन नेशन-वन राशन कार्ड की सुविधा देने के साथ ही सरकार ने उन्हें नि:शुल्क अनाज मुहैया कराया और उनके लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलवाईं । महामारी के कारण शहरों से वापस आए प्रवासियों को उनके ही गांवों में काम देने के लिए मेरी सरकार ने छह राज्यों में गरीब कल्याण रोजगार अभियान भी चलाया । इस अभियान की वजह से 50 करोड़ Man-days के बराबर रोजगार पैदा हुआ । सरकार ने रेहड़ी-पटरी वालों और ठेला लगाने वाले भाइयों-बहनों के लिए विशेष स्वनिधि योजना भी शुरू की । इसके साथ ही करीब 31 हजार करोड़ रुपए गरीब महिलाओं के जनधन खातों में सीधे ट्रांसफर भी किए । इस दौरान देशभर में उज्ज्वला योजना की लाभार्थी गरीब महिलाओं को 14 करोड़ से अधिक मुफ्त गैस सिलेंडर भी मिले । अपने सभी निर्णयों में सरकार ने संघीय ढांचे की सामूहिक शक्ति का अद्वितीय उदाहरण भी प्रस्तुत किया है । केंद्र और राज्य सरकारों के बीच इस समन्वय ने लोकतंत्र को मजबूत बनाया है और संविधान की प्रतिष्ठा को सशक्त किया है ।

हमारे स्वतंत्रता सेनानी जिस सशक्त और स्वतंत्र भारत का सपना देख रहे थे. उस सपने को सच करने का आधार भी देश की आत्मनिर्भरता से ही जुड़ा था । कोरोना काल में बनी वैश्विक परिस्थितियों ने, जब हर देश की प्राथमिकता उसकी अपनी जरूरतें थीं, हमें यह याद दिलाया है कि आत्म निर्भर भारत का निर्माण क्यों इतना महत्वपूर्ण है । इस दौरान भारत ने बहुत ही कम समय में 2,200 से अधिक प्रयोगशालाओं का नेटवर्क बनाकर, हजारों वेंटिलेटर्स का निर्माण करके, पीपीई किट से लेकर टेस्ट किट बनाने तक में आत्मनिर्भरता हासिल करके अपनी वैज्ञानिक क्षमता और अपने मजबूत स्टार्ट-अप इकोसिस्टम का भी परिचय दिया है । हमारे लिए यह और भी गर्व की बात है कि आज भारत दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चला रहा है । इस प्रोग्राम की दोनों वैक्सींस भारत में ही निर्मित हैं । संकट के इस समय में भारत ने मानवता के प्रति अपने दायित्व   का निर्वहन करते हुए अनेक देशों को कोरोना वैक्सान की लाखों खुराक उपलब्ध कराई हैं । इस कार्य की विश्व भर में हो रही प्रशंसा, हमारी हजारों वर्ष पुरानी संस्कृति, सर्वे सन्तु निरामयाः की भावना के साथ जग-कल्याण की हमारे प्रयासों को और ऊर्जा दे रही है । मेरी सरकार द्वारा स्वास्थ्य के क्षेत्र में पिछले 6 वर्षों में जो कार्य किए गए हैं, उनका बहुत बड़ा लाभ हमने इस कोरोना संकट के दौरान देखा है । इन वर्षों में इलाज से जड़ी व्यवस्थाओं को आधुनिक बनाने के साथ ही बीमारी से बचाव पर भी उतना ही बल दिया गया है । राष्ट्रीय पोषण अभियान, फिट इंडिया अभियान, खेलो इंडिया अभियान, ऐसे अनेक कार्यक्रमों से स्वास्थ्य को लेकर देश में नई सतर्कता आई है । आयुर्वेद और योग को बढ़ावा देने के मेरी सरकार के प्रयासों का लाभ भी देखने को मिला है । आज देश की स्वास्थ्य सेवाएं गरीबों को आसानी से उपलब्ध हो रही हैं तथा बीमारियों पर होने वाला उनका खर्च कम हो रहा है । आयुष्मान भारत - प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत देश में 1.5 करोड़ गरीबों को 5 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज मिला है । इससे इन गरीबों के 30 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च होने से बचे हैं । आज देश के 24 हजार से ज्यादा अस्पतालों में से किसी में भी आयुष्मान योजना का लाभ लिया जा सकता है । इसी तरह प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि योजना के तहत देश भर में बने 7 हजार केंद्रों से गरीबों को बहुत सस्ती दर पर दवाइयां मिल रही हैं । इन केंद्रों में रोजाना लाखों मरीज दवाई खरीद रहे हैं । कीमत कम होने की वजह से मरीजों को सालाना लगभग 3,600 करोड़ रुपए की बचत हो रही है । देश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए मेडिकल शिक्षा का विस्तार भी अत्यंत आवश्यक है । साल 2014 में देश में सिर्फ 387 मेडिकल कालेज थे, लेकिन आज देश में 562 मेडिकल कालेज हैं । बीते 6 वर्षों में अंडरग्रैजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट चिकित्सा शिक्षा में 50 हजार से ज्यादा सीटों की वृद्धि हुई है । प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत सरकार ने 22 नए एम्स को भी मंजूरी दी है । राष्ट्रीय चिकित्सा  आयोग के साथ ही चार स्वायत्त बोर्ड का गठन कर केंद्र सरकार ने चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधारों की नींव रखी है । इन्हीं सुधारों के क्रम में दशकों पुरानी मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के स्थान पर नेशनल मेडिकल कमीशन की स्थापना की गई है ।

आत्मनिर्भर भारत अभियान केवल भारत में निर्माण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत के हर नागरिक का जीवन स्तर ऊपर उठाने तथा देश का आत्मविश्वास बढ़ाने का भी अभियान है । आत्मनिर्भर भारत का हमारा लक्ष्य आत्मनिर्भर कृषि से और सशक्त होगा । इसी सोच के साथ सरकार ने बीते 6 वर्षों में बीज से लेकर बाजार तक हर व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन का प्रयास किया है, ताकि भारतीय कृषि आधुनिक भी बने और कृषि का विस्तार भी हो । इन्हीं प्रयासों के क्रम में मेरी सरकार ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करते हुए लागत से डेढ़ गुना MSP देने का फैसला भी किया था । मेरी सरकार आज न सिर्फ MSP पर रिकॉर्ड मात्रा में खरीद कर रही है बल्कि खरीद केंद्रों की संख्या को भी बढ़ा रही है । आज कृषि के लिए उपलब्ध सिंचाई के साधनों में भी व्यापक सुधार आ रहा है । सरकार के इन प्रयासों को हमारे किसान अपने परिश्रम से और आगे बढ़ा रहे हैं । आज देश में खाद्यान्न उपलब्धता रिकॉर्ड स्तर पर है । वर्ष 2008-09 में जहां देश में 234 मिलियन टन खाद्यान्न की पैदावार हुई थी वहीं साल2019-20 में देश की पैदावार बढ़कर 296 मिलियन टन तक पहुंच गयी है । इसी अवधि में सब्जी और फलों का उत्पादन भी 215 मिलियन टन से बढ़कर अब 320 मिलियन टन तक पहुंच गया है । कृषि क्षेत्र में हमारे जो छोटे और सीमांत किसान हैं, जिनके पास सिर्फ एक या दो हेक्टेयर जमीन होती है, उन पर विशेष ध्यान दिया जाए । देश के सभी किसानों में से 80 प्रतिशत से ज्यादा ये छोटे किसान ही हैं और इनकी संख्या 10 करोड़ से ज्यादा है । सरकार की प्राथमिकताओं में ये छोटे और सीमांत किसान भी हैं । ऐसे किसानों के छोटे-छोटे खर्च में सहयोग करने के लिए पीएम किसान सम्मान निधि के जरिए उनके खातों में लगभग एक लाख तेरह हजार करोड़ से अधिक रुपए सीधे ट्रांसफर किए जा चुके हैं । प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ भी देश के छोटे किसानों को हुआ है । इस योजना के तहत पिछले 5 वर्षों में किसानों को 17 हजार करोड़ रुपए प्रीमियम के एवज में लगभग 90 हजार करोड़ रुपए की राशि मुआवजे के तौर पर मिली है । देश के छोटे किसानों को साथ जोड़कर10 हजार किसान उत्पादक संगठनों यानि Farmer Producer Organisations को स्थापित करने का अभियान एक ऐसा ही प्रभावशाली कदम है । इससे इन छोटे किसानों को समृद्ध किसानों को बेहतर तकनीक, ज्यादा ऋण, पोस्ट हार्वेस्टिंग प्रोसेसिंग एवं मार्केटिंग की सुविधाएं और प्राकृतिक आपदा के समय सुरक्षा मिलनी सुनिश्चित हुई है । इससे किसानों को अपनी फसल की ज्यादा कीमत और ज्यादा बचत का विकल्प भी मिला है । व्यापक विमर्श के बाद संसद ने सात महीने पूर्व तीन महत्वपूर्ण कृषि सुधार, कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक, कृषि (सशक्तीकरण और संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा करार विधेयक और आवश्यक वस्तु संशोधन विधेयक पारित किए हैं । इन कृषि सुधारों का सबसे बड़ा लाभ भी 10 करोड़ से अधिक छोटे किसानों को तुरंत मिलना शरू हुआ । छोटे किसानों को होने वाले इन लाभों को समझते हुए ही अनेक राजनीतिक दलों ने समय-समय पर इन सुधारों को अपना भरपूर समर्थन दिया था । देश में अलग-अलग फोरम पर, देश के हर क्षेत्र में दो दशकों से जिन सुधारों की चर्चा चल रही थी और जो मांग हो रही थी, वह सदन में चर्चा के दौरान भी परिलक्षित हुई । वर्तमान में इन कानूनों का अमलीकरण देश की सर्वोच्च अदालत ने स्थगित किया हुआ है । मेरी सरकार उच्चतम न्यायालय के निर्णय का पूरा सम्मान करते हुए उसका पालन करेगी । लोकतंत्र और संविधान की मर्यादा को सर्वोपरि रखने वाली मेरी सरकार इन कानूनों के संदर्भ में पैदा किए गए भ्रम को दूर करने का निरंतर प्रयास कर रही है । मेरी सरकार ने लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की आजादी और शांतिपूर्ण आंदोलनों का हमेशा सम्मान किया है ।

मेरी सरकार आज गांवों के बहुआयामी विकास के लिए लगातार काम कर रही है । गांव के लोगों का जीवन स्तर सुधरे, यह मेरी सरकार की प्राथमिकता है । इसका उत्तम उदाहरण 2014 से गरीब ग्रामीण परिवारों के लिए बनाए गए 2 करोड़ घर हैं । वर्ष 2022 तक हर गरीब को पक्की छत देने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना की गति भी तेज की गई है । मेरी सरकार द्वारा शुरू की गई स्वामित्व योजना से अब ग्रामीणों को उनकी संपत्ति पर कानूनी हक मिल रहा है । स्वामित्व के इस अधिकार से अब गांवों में भी संपतियों पर बैंक लोन लेना, हाउस लोन लेना आसान बनेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी । इस योजना का भी विशेष लाभ गांवों के छोटे उद्यमियों और कुटीर उद्योग से जुड़े लोगों तथा छोटे किसानों को होगा । मेरी सरकार ‘जल जीवन मिशन' की महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रही है । इसके तहत ‘हर घर जल' पहुंचाने के साथ ही जल संरक्षण पर भी तेज गति से काम किया जा रहा है । मुझे यह बताते हुए हर्ष है कि इस अभियान के तहत अब तक 3 करोड़ परिवारों को पाइप वाटर सप्लाई से जोड़ा जा चुका है । इस अभियान में अनुसूचित जातियों व जनजातियों के भाई-बहनों तथा वंचित वर्गों के अन्य लोगों को प्राथमिकता के आधार पर पानी का कनेक्शन दिया जा रहा है । हमारे गांवों को 21वीं सदी का जरूरतों और इनफ्रास्ट्रक्चर से जोड़ने के लिए मेरी सरकार ने ग्रामीण सड़क नेटवर्क के विस्तार में भी सराहनीय काम किया है । प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत देश के ग्रामीण क्षेत्रों में 6 लाख 42 हजार किलोमीटर सड़क का निर्माण पूरा कर लिया गया है । इस योजना के तीसरे चरण में ग्रामीण क्षेत्रों में बसावटों के साथ-साथ स्कूलों, बाज़ारों और अस्पतालों आदि से जोड़ने वाले 1 लाख 25 हजार किलोमीटर रास्तों को भी अपग्रेड किया जाएगा । गांवों में सड़कों के साथ ही इंटरनेट की कनेक्टिविटी भी उतनी ही अहम है । हर गांव तक बिजली पहुंचाने के बाद सरकार देश के 6 लाख से अधिक गांवों को ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ने के लिए अभियान चला रही है ।

हमारी अर्थव्यवस्था की आधारभूत ताकत हमारे गांवों और छोटे शहरों में फैले हमारे लघु उद्योग, हमारे कुटीर उद्योग, MSMEs ही हैं । भारत को आत्मनिर्भर बनाने का बहुत बड़ा सामर्थ्य हमारे इन लघु उद्योगों के ही पास है । देश के कुल निर्यात में इनकी भागीदारी लगभग 50 प्रतिशत की है । आत्मनिर्भर भारत के मिशन में MSMEs की भूमिका को बढ़ाने के लिए भी अनेक कदम उठाए गए हैं । MSMEs की परिभाषा में बदलाव हो, निवेश की सीमा बढ़ाना हो या फिर सरकारी खरीद में वरीयता, अब लघु और कुटीर उद्योगों को विकास के लिए ज़रूरी प्रोत्साहन मिला है । तीन लाख करोड़ रुपए की इमरजेंसी क्रेडिट गारंटी योजना, मुश्किल में फंसे MSMEs के लिए 20 हजार करोड़ की विशेष योजना और Fund of Funds जैसे प्रयासों ने लाखों लघु उद्यमियों को लाभ पहुंचाया है । GeM (जेम) पोर्टल से देश के दूर दराज वाले क्षेत्रों के MSMEs को सरकारी खरीद में पारदर्शिता के साथ-साथ अधिक भागीदारी भी मिल रही है । सरकार की यह निरंतर कोशिश है कि उद्यमशीलता का लाभ देश के हर वर्ग को मिले । हुनर हाट और उस्ताद योजना के माध्यम से लाखों शिल्पकारों का कौशल विकास भी किया जा रहा है और उनको रोजगार के अवसर दिए जा रहे हैं । इन लाभार्थियों में आधे से अधिक महिला शिल्पकार हैं । आत्मनिर्भर भारत में महिला उद्यमियों की विशेष भूमिका है । मेरी सरकार ने महिलाओं को स्वरोजगार के नए अवसर देने के लिए कई कदम उठाए हैं । ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत देश में आज 7 करोड़ से अधिक महिला उद्यमी करीब 66 लाख स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी हई हैं । बैंको के माध्यम से इन महिला समूहों को पिछले 6 वर्षों में 3 लाख 40 हजार करोड़ रुपए का ऋण दिया गया है । देश के  ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत महिलाओं के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए सरकार एक रुपये में 'सुविधा' सैनिटरी नैपकिन देने की योजना भी चला रही है । सरकार गर्भवती महिलाओं के मुफ्त चेक-अप की मुहिम एवं राष्ट्रीय पोषण अभियान चलाकर उन्हें आर्थिक मदद देकर गर्भवती माताओं एवं शिशुओं के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए निरंतर प्रयत्नशील है । इसी का परिणाम है कि देश में मातृ मृत्यु दर 2014 में प्रति लाख 130 से कम होकर 113 तक आ गयी है । पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर भी पहली बार घटकर36 तक आ गई है, जो वैश्विक दर 39 से कम है । महिलाओं की समान भागीदारी को आवश्यक मानने वाली मेरी सरकार नए-नए क्षेत्रों में बहनों-बेटियों के लिए नए अवसर बना रही है । भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम हो, मिलिट्री पुलिस में महिलाओं की नियुक्ति हो या फिर अंडर ग्राउंड माइन्स में तथा ओपन कास्ट माइन्स में महिलाओं को रात्रि में कार्य करने की अनुमति, ये सभी निर्णय पहली बार मेरी सरकार ने ही लिए हैं । महिला सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वन स्टॉप सेंटर, अपराधियों का राष्ट्रीय डेटाबेस, इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम और देश भर में फास्ट ट्रैक कोर्ट पर तेज़ी से काम किया गया है । 21वीं सदी की वैश्विक आवश्यकताओं और चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति की घोषणा की है । राष्ट्रीय शिक्षा नीति में पहली बार छात्रों को अपनी रुचि के हिसाब से विषय पढ़ने की आजादी दी गई है । किसी कोर्स के बीच में भी विषय और स्ट्रीम बदलने का विकल्प युवाओं को दिया गया है । सरकार का मानना है कि सबसे ज्यादा वंचित वर्गों की सामाजिक और आर्थिक विकास की यात्रा, गुणवत्ता युक्त शिक्षा से आरंभ होती है । सरकार की विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाओं का लाभ ऐसे ही 3 करोड़ 20 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों को मिल रहा है । इनमें अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग, वनवासी एवं जनजातीय वर्ग और अल्पसंख्यक समुदाय के छात्र-छात्राएं शामिल हैं । सरकार का प्रयास है कि ज्यादा से ज्यादा पात्र और जरूरतमंद विद्यार्थियों को छात्रवृत्तियों का लाभ मिले । इसके साथ ही, अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को दी जाने वाली पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति में केंद्र सरकार के हिस्से को भी बढ़ाया जा रहा है । इसी प्रकार जनजातीय युवाओं की शिक्षा के लिए हर आदिवासी बहुल ब्लॉक तक एकलव्य आवासीय मॉडल स्कूल के विस्तार का काम किया जा रहा है । अब तक इस प्रकार के साढ़े पांच सौ से ज्यादा स्कूल स्वीकृत किए जा चके हैं । शिक्षा के साथ-साथ नौकरी की प्रक्रियाएं आसान करने और व्यवस्थित करने पर भी मेरी सरकार का जोर है । ग्रुप सी और ग्रुप डी में इंटरव्यू समाप्त करने से युवाओं को बहुत लाभ हुआ है । सरकार ने नेशनल रिक्रूटमेंट एजेंसी का गठन करके नौजवानों को नियुक्ति के लिए कई अलग-अलग परीक्षाएं देने की परेशानी से मुक्त किया है ।

मेरी सरकार सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास के मंत्र के साथ देश के हर क्षेत्र और हर वर्ग के विकास को प्राथमिकता दे रही है । दिव्यांगजनों की मुश्किलों को कम करने के लिए देश भर में हजारों इमारतों को, सार्वजनिक बसों और रेलवे को सुगम्य बनाया गया है । लगभग 700 वेबसाइटों को दिव्यांगजनों के अनुकूल तैयार किया गया है । भारत में बने सामान के उपयोग के लिए जन-भागीदारी को प्रोत्साहित कर रही है । आज वोकल फॉर लोकल देश में जन-आंदोलन का रूप ले चुका है । भारत में बने सामान के प्रति भावनात्मक लगाव के साथ ही गुणवत्ता में भी वे श्रेष्ठ हों, इस दिशा में काम किया जा रहा है । देश में Ease of Doing Business में सुधार के लिए भी निरंतर कदम उठाए जा रहे हैं । इसके लिए राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित किया जा रहा है । यह बड़े हर्ष की बात है कि रैंकिंग में सुधार की गंभीरता को राज्य भी समझ रहे हैं और इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे हैं । कोरोना के इस काल में, प्रत्येक भारतीय का जीवन बचाने के प्रयासों के बीच अर्थव्यवस्था को जो हानि हई थी, उससे भी अब देश उबरने लगा है । यह आज अनेक इंडिकेटर्स के माध्यम से स्पष्ट हो रहा है । इस मुश्किल समय में भी भारत दुनिया के निवेशकों के लिए आकर्षक स्थान बनकर उभरा है । अप्रैल से अगस्त, 2020 के बीच लगभग 36 अरब डॉलर का रिकॉर्ड प्रत्यक्ष विदेशी निवेश भारत में हुआ है । मेरी सरकार मानती है कि देश में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण, नए और आत्मनिर्भर भारत के लिए मजबूत नींव का काम करेगा । कोरोना काल में भी इंफ्रास्ट्रक्चर के अनेक बड़े प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम होना और उनका पूरा होना, हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है । चेन्नई से पोर्ट ब्लेयर तक सबमरीन ऑप्टिकल फाइबर केबल हो, अटल टनल हो या फिर चार धाम सड़क परियोजना, हमारा देश विकास के कार्यों को आगे बढ़ाता रहा । कुछ दिन पहले ही पूर्वी और पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के सेक्शंस देश को समर्पित किए गए हैं । ये फ्रेट कॉरिडोर पूर्वी भारत में औदयोगीकरण को प्रोत्साहन देने के साथ ही रेल यात्रा में होने वाली अनावश्यक देरी को भी कम करेंगे । देश के इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक रूप देने के लिए मेरी सरकार 110 लाख करोड़ रुपये से अधिक की नेशनल इनफ्रास्ट्रक्चर पाइप लाइन पर भी काम कर रही है । साथ ही, भारतमाला परियोजना के पहले चरण में छह नए एक्सप्रेस-वे और 18 नए एक्सेस कंट्रोल्ड कॉरिडोर्स का निर्माण चल रहा है ।

भारत अपनी वैश्विक जिम्मेदारियों को इस कोरोनाकाल में भी जिस गम्भीरता से निभा रहा है, उसे आज दुनिया देख रही है । "वसुधैव कुटुम्बकम्" की भावना को चरितार्थ करते हुए भारत ने देश की घरेलू जरूरतों को पूरा करने के साथ 150 से अधिक देशों को जरूरी दवाइयों की आपूर्ति की । भारत वैश्विक स्तर पर वैक्सीन की उपलब्धता को सुनिश्चित करवाने के लिए प्रतिबद्ध है । यह देश का गौरव बढ़ाने वाली बात है कि वंदे भारत मिशन, जो दुनिया में इस प्रकार का सबसे बड़ा अभियान है, उसकी सराहना हो रही है । भारत ने दुनिया के सभी हिस्सों से लगभग 50 लाख भारतीयों को स्वदेश वापस लाने के साथ ही एक लाख से अधिक विदेशी नागरिकों को भी उनके अपने देशों तक पहुंचाया है । कोविड-19 की बाधाओं के बावजूद, भारत ने सभी साथी देशों से अपने संपर्कों और सम्बन्धों को और मजबूत बनाया है । इस दौरान बड़ी संख्या में शिखर सम्मेलन, बहुपक्षीय कार्यक्रम और आधिकारिक बैठकों के जरिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को भारत ने आगे बढ़ाया है । भारत ने ऐतिहासिक वैश्विक समर्थन हासिल करके इस वर्ष आठवीं बार एक अस्थायी सदस्य के रूप में सुरक्षा परिषद में प्रवेश भी किया है । भारत ने 2021 के लिए ब्रिक्स में अध्यक्ष पद भी ग्रहण किया है । ऐसे अनेक निर्णय हैं, जो लगभग हर क्षेत्र में लिए गए हैं । मेरी सरकार ने दिखाया है कि नीयत साफ हो, इरादे बुलंद हों तो बदलाव लाया जा सकता है । इन वर्षों में मेरी सरकार ने जितने लोगों के जीवन को छुआ है, वह अभूतपूर्व है । ये सिर्फ आंकड़े नहीं हैं । इनमें से हर आंकड़ा अपने आप में एक जीवनगाथा है । इस संसद के अनेक सदस्यों ने अपने जीवन का बहुत लंबा समय इन्हीं परिस्थितियों में गुजारा है । हमारे जिस कार्य से गरीब भाई-बहनों की चिंता, उनका दुख और तकलीफ कम हो सके, उन्हें अधिक से अधिक मूलभूत सुविधाओं के साथ जोड़कर सशक्तीकरण और आत्मसम्मान के पथ पर आगे बढ़ाया जा सके, मेरी सरकार पूरी निष्ठा और ईमानदार नीयत के साथ पिछले 6 वर्षों से इस दिशा में निरंतर काम कर रही है, फैसले ले रही है तथा उन्हें लागू कर रही है । सरकार का ध्येय होगा कि2022 तक सभी परिवार वालों को पक्का घर तथा बिजली आपूर्ति की सुविधा मुहैया कराई जाए, जो अत्यंत सराहनीय कदम है । सरकार रेलवे के आधुनिकीकरण के साथ-साथ आंतरिक संरचना में सुधार को लेकर एक योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है । सरकार ने रेलवे के आमान-परिवर्तन, नई रेल लाईन बिछाने, विद्युतीकरण कार्य एवं रेलवे में क्षमता वृद्धि संबंधी कार्यों तथा स्वच्छ भारत मिशन को ध्यान में रखते हए सफलता प्राप्त की है ।

माननीय राष्ट्रपति जी के अभिभाषण का पुरजोर समर्थन करते हए इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात को समाप्त करता हूँ । धन्यवाद । 

           

*DR. R. K. RANJAN (INNER MANIPUR):I support the Motion of Thanks on the Presidential Address given in the joint sitting of the Parliament on 29th January, 2021.

          It is, indeed, a momentous event taken place during this pandemic war of Coronavirus in the country.

          During the pandemic, the country showed our collective response and strength to fight and curb the COVID -19 infection and at the same time, we are able to increase the recovery rate like anything in the country.

          It  proved that ‘whenever India remains united, it can attain any goal even the seemingly unattainable goals.’           During  countrywide lockdown and post-lockdown period, the nation showed the strength of our unity.  Our hon. Pradhan Mantri Shri Narendra Modi-ji allowed all of us to serve the country right from evacuation   of stranded and migrant citizens and labours both from abroad and inter-States to sustainable food supply and occupational rehabilitation.

          We are all empowering through awakening calls of Atmanirbhar Bharat.  We are able to apply our own efforts and delivering successfully.  The glaring example is COVID Vaccine, which is made in India.  Our COVID vaccines are the symbols of India’s Swadeshi.

         

I belong to the North-Eastern Region of India, and more specifically representing Inner Manipur Parliamentary Constituency.  I have seen the dramatic developmental changes in the region.  Prior to the NDA Government, the region had been treated as landlocked and dark region of the country.  Now, the region is shining as a focal zone of National Development.  Under the regime of Modi-I, and his action-oriented slogan Sabka Saath Sabka Vikas, Sabka Vishwas, the Region has been experiencing unprecedented developmental growth in the backdrop of its unique geo-socio-cultural-multilingual setting along with its diversified indigenous knowledge systems.

          The region is gaining VISHWAS and replacing extremism by peace and normalcy to gain the momentum of growth engine.  We are really happy to understand that the River Brahmaputra is the Jibondhara of the Region.  We hope, the streams of development along the valley of the Brahmautra and the Barak shall transform the region.

          With this hope and aspiration, I strongly support the Motion of Thanks on the President’s Address.

          Jai Hind.

                                                                                               

*श्री मुकेश राजपूत (फर्रूखाबाद): आज मैं संसद के संयुक्त सत्र में महामहिम राष्ट्रपति जी द्वारा दिए गए अभिभाषण के लिए धन्यवाद प्रस्ताव का समर्थन करता हूँ ।

देश के यशस्वी प्रधानमंत्री मोदी जी द्वारा कोरोना महामारी की जंग में जिस प्रकार से धैर्य एवं निष्ठापूर्वक अपनी पूरी टीम के साथ जो कार्य किया गया है, उसके लिए मैं अपने क्षेत्र की जनता की ओर से उनको बारंबार नमन करता हूँ । माननीय मोदी जी के कुशल नेतृत्व एवं भारत के चिकित्सा विशेषज्ञों के कारण ही कोरोना वैक्सीन अपने तय समय में ही बनकर तैयार हुई है । जिसका देश के लोग ही नहीं बल्कि हमारे पड़ोसी देश के लोगों को भी फायदा मिल रहा है ।

आज हमारे गांव आत्मनिर्भर भारत की ओर बढ़ रहे हैं । हमने विकास के हर क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पाई है और पाने के लिए सकारात्मक प्रयास हो रहे हैं । कोरोना वैक्सीन इसी का उदाहरण है ।

माननीय प्रधानमंत्री जी के ही कुशल नेतृत्व का परिणाम है कि आज देश को वैक्सीन के लिए दूसरे देशों का मुंह नहीं ताकना पड़ रहा है । मोदी जी जबसे देश के प्रधानमंत्री बने हैं तबसे लेकर आज तक गाँव, खेत, किसान के कल्याण के लिए ही कार्य कर रहे हैं ।

आज देश के लगभग सभी गांव बिजली से पूरी तरह संतृप्त हो चुके हैं । गाँव-गाँव में फ्रीज,एसी, कूलर एवं टीवी की मांग बढ़ रही है । अब किसान पूस की भयंकर ठण्डी रात में खेत में पानी पटाने के लिए नही जाता है । वह दिन में ही अपने खेतों में पानी लगा लेता है ।

आज किसान अपनी छोटी-छोटी जरूरतों का पूरा करने के लिए किसी महाजन, सेठ के पास नहीं जाता है । उसके लिए माननीय प्रधानमंत्री जी ने किसान सम्मान निधि देकर किसान को स्वाभिमानी बनाने का कार्य किया है ।

आज किसान अपनी उपज को देश के किसी भी कोने में बेच सकता है, उसे कोई भी मंडी वाला नहीं रोक सकता है, न ही गेट पास मांग सकता है और न ही उसे अपने जिले में किसी प्रकार का शुल्क देना पड़ेगा ।

कांट्रैक्ट फार्मिंग तो हमारे देश में सदियों से होती चली आ रही है, कुछ ऐसे किसान परिवार हैं, जो शहरों में नौकरी करते हैं या अपना कोई व्यवसाय करतें हैं, वे गाँव में उगाई पर खेत उठाते हैं कि नहीं, इसी को कांट्रैक्‍ट फार्मिंग कहते हैं । अगर हमारे देश के उद्योगपति उन्नत किस्म की फसल करने के लिए किसी का खेत उगाई पर लेते हैं तो इसमें बुराई क्या है? वे फसल का कांट्रैक्ट करेंगे जमीन का नहीं । आज कुछ बिचौलियों और तथाकथित किसान नेताओं ने किसानों में गलतफहमियाँ पैदा कर दी हैं और अपने तुच्छ स्वार्थ के लिए देश के भोले-भाले किसानों को आगे कर देश विरोधी गतिविधियाँ कर रहे हैं । विगत दिनों लाल किले के प्राचीर पर तिरंगे का अपमान देश का कोई किसान या किसान का बेटा नहीं कर सकता है । ऐसा दुस्साहस केवल देशद्रोही ही कर सकता है । ऐसे लोगों को चिन्हित कर कड़ी से कड़ी सजा दी जाए ।

मैं भी एक किसान हूं । अपनी खेती स्वयं करता हूँ और खेती ही मेरी आजीविका का प्रमुख साधन है । मैं जानता हूँ कि कृषि क्षेत्र में विगत छ: वर्षों में जो आशातीत सुधार हुए हैं, वे अकल्पनीय हैं । पिछली सरकारों में स्वामीनाथन की रिपोर्ट लागू करने की हिम्मत किसी ने नहीं दिखाई, जो आज विगत छ: वर्षों में धीरे-धीरे अक्षरशः पूरी तरह से लागू हो रही है ।

माननीय प्रधानमंत्री जी, किसानों की आय बढाने के लिए निरंतर प्रयत्नशील हैं और उन्हें इसके लिए जो भी करना पड़ रहा है, वह कर रहे हैं । किसानों से संबंधित तीनों कानून इसमें मील का पत्थर साबित होंगे । लॉकडाउन के कारण विश्व के कई देशों की अर्थव्यवस्थाएं धराशायी हो गई हैं । परन्तु मेरे देश के किसान भाइयों ने देश को सम्भाल लिया है ।

देश के किसानों ने कोरोना काल में जब देश के अधिकतर लोग घरों में थे तब किसान अपने खेत में था और देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए काम कर रहा था ।

माननीय मोदी जी के कुशल नेतृत्व में इस लॉकडाउन के दौरान लगातार 8 महीनों तक देश के 80 करोड़ लोगों तक निःशुल्क अनाज उपलब्ध कराया गया, श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलाकर दूर देश में रहने वाले श्रमिकों को निशल्क घर पहुंचाया गया । इन प्रवासी श्रमिकों के लिए गरीब कल्याण रोजगार अभियान चलाया गया, उज्ज्वला योजना के अन्तर्गत 14 करोड़ महिलाओं को मुफ्त गैस सिलेण्डर उपलब्ध कराए गए ।

आज उसी का परिणाम है कि देश की विकास दर तेजी से बढ़ रही है । लॉकडाउन के दौरान देश के बड़े-बड़े शहरों से जब प्रवासी श्रमिक अपने घरों को लौटे तो खेती ने ही उनका साथ दिया और हमारे गाँव के किसान भाइयों एवं देश के कुशल नेतत्व ने उन्हें पुन: संजीवनी प्रदान की ।

इस कोरोना काल में अपनें सभी साथी माननीय सांसदों, राज्यों के माननीय विधायकों सामाजिक क्षेत्रों में कार्य करने वाले लोगों, सोनू सूद जैसे फिल्मी कलाकारों, कोरोना वारियर्स के- सभी डाक्टरों, सुरक्षा कर्मियों, सफाई कर्मियों आदि सभी का हार्दिक अभिनंदन-वंदन करते हैं, जिन्होंने इस महामारी काल में पूरे देश को अपना परिवार समझकर एक दूसरे की मदद की और देश को पिछली सरकारों की तरह सैनिटाईजर घोटाला, मास्क घोटाला, पी.पी.ई. किट घोटाला जैसे शब्दों की उत्पति नहीं होने दी ।

हम भारतीयों की आस्था एवं विश्वास का प्रतीक राम मंदिर, जो विगत 500 वर्षों से अधर में लटका था और आजादी के बाद वोट बैंक और तुष्टीकरण की राजनीति के चक्कर में राजनीति का हथियार बन चुका था, अब प्रभु श्री राम का मंदिर अयोध्या में भव्यता के साथ स्थापित होगा ।

राम मन्दिर निर्माण में महामहिम का सहयोग हमें प्रेरणा देता है कि प्रभु श्री राम मात्र हिन्दू आस्था के प्रतीक ही नहीं हैं बल्कि एक ऐसी जीवन शैली के आदर्श हैं, जिन्होंने उस समय के बड़े-बड़े अत्याचारियों को जंगलों में रहने वाले मेरे आदिवासी भाईयों, पश-पक्षियों के सहयोग से परास्त कर राम राज्य की स्थापना की ।

   

दैहिक दैविक भौतिक तापा ।

राम राज्य में कहुँ नहीं व्यापा ॥ अर्थात् प्रभु श्री राम के राज्य में जनता को किसी प्रकार का दुख: बीमारी नहीं होता है । यह देश की कुशल सरकार और दृढ़विश्वास से ही संभव हो सका है ।

विगत वर्ष हमारे देश के यशस्वी प्रधानमंत्री मोदी जी ने केवल कोरोना से ही नहीं बल्कि तीन-तीन मुद्दों पर लडाई लडी । इसी कोरोना काल में चीन और पाकिस्तान की सीमा पर हुई हलचल को भी बडी मुस्तैदी के साथ समाधान किया ।लॉकडाउन के कारण हमारे कई उद्योग धंधे, कामगार बेकारी का शिकार भी हुए, परन्तु भारत सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के कारण वे पुनः स्थपित हो रहे हैं ।

आज किसान रेल चलाई जा रही है ।  यह लॉकडाउन में हमें काम करने के नए तरीके भी सिखा गया कि किस प्रकार घर को भी ऑफिस बनाकर काम किया जा सकता है । मैं पुनः महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर धन्यवाद के समर्थन में अपनी बात समाप्त करता हूँ ।

धन्यवाद ।      

     

*श्री कपिल मोरेश्वर पाटील (भिवंडी): महामहिम राष्ट्रपति महोदय जी ने अपने अभिभाषण में केंद्र सरकार द्वारा गत छ: वर्षों में किए गए चौतरफा विकास की तस्वीर पेश की है । मैं इसके समर्थन में बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं ।

          हमारी सरकार आत्मनिर्भर भारत के बढ़ते कदम, कृषि क्षेत्र के विकास और संपूर्ण भारत में किसानों की आय बढ़ाने पर निरंतर प्रयास करती नजर आ रही है । कृषि सुधारों का सबसे बड़ा लाभ 10 करोड़ से अधिक छोटे किसानों को तुरंत मिलना शुरू हुआ । छोटे किसानों को होने वाले इन लाभों को समझते हुए ही अनेक राजनीतिक दलों ने समय-समय पर इन सुधारों को भरपूर अपना समर्थन दिया है । प्रधानमंत्री  फसल बीमा योजना का लाभ भी देश के छोटे किसानों को हुआ है । इस योजना के तहत पिछले पांच वर्षों से किसानों को 17,000 करोड़ रुपये प्रीमियम के एवज़ में लगभग 10,000 करोड़ रुपये की राशि मुआवजे के तौर पर मिली है ।

          हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में हमारी सरकार द्वारा स्वास्थ्य के क्षेत्र में गत छ: वर्षों में जो उल्लेखनीय कार्य किए गए हैं, उनका बहुत बड़ा लाभ हमने देश में कोरोना संकट के दौरान आप सभी ने देखा है । इन वर्षों में इलाज से जुड़ी व्यवस्थाओं को आधुनिक बनाने के साथ ही बीमारी से बचाव के तौर-तरीकों द्वारा खुद प्रधानमंत्री जी ने बार-बार अपने संदेश से देशवासियों को बचाया है । राष्ट्रीय पोषण अभियान, फिट इंडिया अभियान, खेलो इंडिया अभियान, ऐसे अनेक कार्यक्रमों से स्वास्थ्य को लेकर देश में नई सतर्कता आई है । आयुर्वेद और योग को बढ़ावा देने के सरकार के प्रयासों का लाभ भी भारत की जनता को देखने को मिला है ।

          हमारी सरकार के प्रयासों से आज देश की स्वास्थ्य सेवाएं गांव, गरीबों को आसानी से उपलब्ध हो रही हैं तथा बीमारियों पर होने वाला उनका खर्चा कम हो रहा है । आयुष्मान भारत, पंतप्रधान जन आरोग्य योजना के तहत देश में 1.5 करोड़  गरीबों को पांच लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिला है । आज देश में 24,000 से ज्यादा अस्पतालों में से किसी में भी आयुष्मान योजना का लाभ लिया जा सकता है । पंतप्रधान भारतीय जन औषधि योजना के तहत देश भर में बने 7,000 केन्द्रों से गरीबों को बहुत ही सस्ते दर पर दवाइयां उपलब्ध हो रही हैं ।

          देश में चिकित्सा सेवाओं के विस्तार के लिए मेडिकल शिक्षा का विस्तार अत्यंत आवश्यक है । वर्ष 2014 में देश में सिर्फ 387 मेडिकल कॉलेज थे लेकिन आज देश में 562 मेडिकल कॉलेज हैं । बीते छ: वर्षों में अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट चिकित्सा शिक्षा में 50,000 से ज्यादा सीटों की वृद्धि हुई है । पंतप्रधान स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के तहत सरकार में 22 नए एम्स को भी मंजूरी दी गई है । चिकित्सा के क्षेत्र में ऐतिहासिक सुधारों की नींव रखी गई है ।

          आत्मनिर्भर भारत अभियान केवल भारत के निर्माण तक ही सीमित नहीं है, बल्कि भारत के हर नागरिक का जीवनस्तर ऊपर उठाने तथा देश का आत्म विश्वास बढ़ाने का अभियान ही हमारे प्रधानमंत्री जी ने शुरू कर दिया है । मोदी सरकार आज गांवों के बहुयामी विकास के लिए निरंतर काम कर रही है । इसका जीता जागता उदाहरण हमारे प्रधानमंत्री जी द्वारा 2002 तक हर गरीब को पक्की छत देने की गति में तेजी लाना है । सरकार द्वारा शुरू की गई स्वामित्व योजना से अब ग्रामीणों को उनकी संपत्ति पर कानूनी हक मिलना शुरू हो गया है । स्वामित्व के इस अधिकार से अब गांवों में भी संपत्तियों पर बैंक लोन लेना आसान होगा और ग्रामीण क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी ।

          हमारी सरकार ने गांवों को 21वीं सदी की जरूरतों और इन्फ्रास्ट्रक्चर से जोड़ने के लिए ग्रामीण सड़क नेटवर्क के विस्तार में भी सराहनीय काम किया है । पंतप्रधान ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत देश के ग्रामीण क्षेत्रों में 6 लाख 42 हजार किमी सड़कों का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है । इस योजना के तीसरे चरण में ग्रामीण क्षेत्र में बसावटों के साथ-साथ स्कूलों, बाजारों और अस्पतालों आदि से जोड़ने वाले 1 लाख 25 हजार किमी रास्तों को अपग्रेड करने का लक्ष्य है । गांवों में सड़कों के साथ ही इंटरनेट की कनैक्टिविटी भी उतनी ही अहम है । हर गांव तक बिजली, पानी, सड़क पहुंचाने के बाद 6 लाख से अधिक गांवों को ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ने के लिए सरकार अभियान चला रही है । इसके लिए मैं माननीय गडकरी जी को धन्यवाद देता हूं ।

          आत्मनिर्भर भारत में महिला उद्यमियों की विशेष भूमिका है । सरकार द्वारा महिलाओं को स्वरोजगार के नए अवसर देने के लिए विशेष कदम उठाए गए हैं । मुद्रा योजना के तहत 25 करोड़ से ज्यादा ऋण सरकार द्वारा दिया गया है ।

          शिक्षा के साथ-साथ नौकरी की प्रक्रियाएं आसान और व्यवस्थित करने पर केंद्र सरकार पूरा जोर दे रही है । सरकार द्वारा नेशनल रिक्रूटमेंट एजेंसी का गठन कर नौजवानों को नियुक्ति के लिए कई अलग-अलग परीक्षाएं देने की परेशानी से मुक्त किया है ।

          हमारी सरकार सबका साथ सबका विकास, विश्वास के मंत्र के साथ देश के हर एक क्षेत्र, हर एक वर्ग के विकास को प्राथमिकता देने का निरंतर प्रयास कर रही है ।

          कोरोना जैसी वैश्विक महामारी, अनेक राज्यों में बाढ़, भूकम्प, बड़े-बड़े साइक्लोन, टिड्डी दल का हमला, बर्ड फ्लू व अन्य आपदाओं से देशवासियों को सुरक्षित रखने में सरकार पूरी तरह से कामयाब रही है । यह बगैर सही नेतृतव के मुमकिन नहीं था ।

          मुझे संतोष है कि समय पर लिए गए सटीक फैसलों से लाखों देशवासियों का जीवन बचा पाने में सरकार सफल रही है । इसके लिए मैं देश के प्रधानमंत्री जी को कोटि-कोटि नमन करता हूं ।

 

*श्रीमती रक्षा निखिल खाडसे (रावेर): संसद के दोनों सदनों की सांझा बैठक के समक्ष दिनांक 29 जनवरी 2021 को भारत के महामहिम राष्ट्रपति महोदय के अभिभाषण पर आज सदन में माननीय सदस्य श्रीमती लॉकेट चटर्जी जी ने जो धन्यवाद प्रस्ताव रखा है उसका मैं समर्थन करती हूँ ।

यह वर्ष भारत की आजादी का 75वां साल है । बीते लगातार नौ दस महीनों से पूरा विश्व वैश्विक महामारी का सामना कर रहा है । ऐसी स्थिति में भी भारत के लोगों ने एकजुटता दिखाकर इस महामारी का सामना बड़े धैर्य से किया है, अपितु इस महामारी को बाकी देशों से हमारे देश में तुलनात्मक कम असर होता हुआ नजर आ रहा है और विश्व की अर्थव्यवस्था जो बड़े बड़े विकसित देशों में अस्त-व्यस्त स्थिति में है, हम भारतीय व्यक्तियों ने सरकार के सारे दिखाए गए दिशा निर्देशों का पालन करते हुए इस महामारी का सामना किया और धीरे-धीरे व निरंतर तरीके से इस अपूर्वानुमेय स्थिति पर विजय भी प्राप्त की, ऐसा नजर आ रहा है । महामहिम राष्ट्रपति महोदय ने सारे भारतीय लोगों की एकजुटता की प्रशंसा की और सभी भारतीयों के इस साहस, सयंम, अनुशासन एवं सेवाभाव के प्रति सराहना की ।

कोरोना महामारी में लिप्त दुनिया का प्रत्येक व्यक्ति, हर देश इससे प्रभावित हुआ । इस स्थिति में भारत के प्रत्येक व्यक्ति ने देश को सामर्थ्यशाली बनाने के लिए सरकार के समय समय पर दिए फैसलों से देश को इस नये शक्तिशाली भारत के रूप में खड़ा किया है । आज भी विश्व के हर देश को अभी भी इस महामारी से जूझने के लिए कोशिश तथा इस महामारी का संक्रमण रोकने एवं इससे बाहर निकलने के लिए बहुत कठिन परिश्रमों का सामना करना पड़ रहा है और हमारे देश में हमने इस महामारी से पीड़ितों की संख्या कम होती दिखाई दे रही है और संक्रमित मरीजों के ठीक होने की संख्या भी बहुत अधिक है ।

 

इस महामारी को रोकने के लिए हमारे वैज्ञानिकों ने दिन-रात मेहनत करके कोरोना टीकाकरण यशस्वी करने का काम किया है और इस कोरोना महामारी का विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण प्रोग्राम देश भर में 16 जनवरी से आरंभ हुआ, जिससे आज तक 25 लाख से भी ज्यादा कोविड कार्यकर्ता जो सबसे पहले कोरोना बाधित मरीजों के लगातार उनकी मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए संपर्क में आते है ऐसे लोगों को इस टीकाकरण से शुरुवात हुई है और आनेवाले कुछ महीनों में इस टीकाकरण प्रोग्राम का दूसरा दौर भी शुरू होगा । हमारी सरकार ने हमारे देश में विकसित की गई वैक्सीन को अपने ही देश में हो सीमित न रखते हुए मानवता के अपने दायित्व का निर्वहन करते हुए जो अन्य अविकसित पड़ोस के देश हैं उन देशों को भी वैक्सीन भारत की तरफ से भेजने की शुरुवात की है, जिससे सारे देश की जनता भी इस कोरोना महामारी से बाहर निकले, इस भारत के कार्य की विश्व भर में प्रशंसा हो रही है । भारत देश की प्राचीन संस्कृति विश्व के जन कल्याण की हमारी प्रार्थना को साकार किया है । यह विशेष रूप से महामहिम राष्ट्रपति महोदय ने उद्धरित किया है ।

इस कोरोना महामारी के दौरान शहरों से गांव लौटे विशेषकर पांच-छ: राज्यों के श्रमिकों के लिए हमारी सरकार ने गरीब कल्याण रोजगार अभियान की शुरुवात की । इस पुर्णतः नये अभियान से बड़ी मात्रा में 50 करोड़ श्रम दिनों के बराबर रोजगार का निर्माण हुआ । यह भी उल्लेखनीय कदम हमारी सरकार ने उठाया । इस बात की प्रशंसा महामहिम राष्ट्रपति महोदय ने की । इस निर्माण तक न रुकते हुए सरकार ने स्वयं रोजगार जुटाने वाले रेहड़ी-पटरी एवं ठेला चलाने वाले हमारे भाई बहनों को विशेष स्वनिधि का भी वितरण किया ।

हमारी सरकार द्वारा गत पांच वर्षों में जो स्वास्थ सेवाओं का गठन किया गया, उस सभी नये निर्माण सुविधाओं का सीधा व जल्द परिणाम इस कोरोना महामारी के दौरान हुआ, जिससे देश में इस महामारी का हमने डटकर मुकाबला किया । "आयुष्मान भारत" विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ सेवा व्यवस्था के गठन से गरीब परिवारों देश में 1.5 करोड़ जे ज्यादा गरीबों का इलाज हुआ । इस दौरान हमारी सरकार ने कम समय में देश में 2200 से अधिक प्रयोगशाला का नेटवर्क बनाया, हजारों वेंटिलेटर्स एवं पीपीई का निर्माण किया जिससे आत्मनिर्भर भारत बनाने में हमारे वैज्ञानिकों की क्षमता का प्रदर्शन भी हुआ ।

"आयर्वेद और योग, भारत की अति प्राचीन संस्कृति को हमारी सरकार ने जो बढ़ावा दिया उससे इस महामारी से डट कर लड्ने का साहस हमारे देशवासियों को मिला है । इस योग विद्या का अनुकरण विश्व भर में किया जा रहा है, जिसके चलते इस योग विद्या सिखाने के लिए विश्व के अनेक देश से मांग है । एक नये रोजगार निर्माण की शुरुवात इससे हुयी है, बड़े पैमाने में युवक और युवतियाँ यह योग विद्या सिखने के लिए आगे बढ़ रहे हैं । मेरे रावेर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में कृषि क्षेत्र से जुडा ज्यादातर व्यापार व रोजगार है कृषि क्षेत्र की उपजाऊ जमीन व साधन सामग्री की उपलब्धता भी है, इसलिये आयुर्वेद वनस्पति के निर्माण के लिए एक सरकारी योग एवं आयुर्वेद विद्या अभ्यास संस्था गठित करने का मै सरकार से निवेदन करती हूँ ।
आत्मनिर्भर भारत के हमारे लक्ष्य को साकार करने के लिए कृषि क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने से हम और सशक्त होंगे । इसलिए, ज्यादा से ज्यादा बंजर जमीन को कृषि क्षेत्र परिवेश में लाने के लिए सिंचाई की व्यवस्था पर जो हमारी सरकार ने "पर ड्रॉप मोर क्रॉप" के माध्यम से मजबूत बनाया है जिसके परिणामस्वरुप56 लाख हेक्टर से ज्यादा अतिरिक्त जमीन माइक्रो इरीगेशन से जोड़ी जा चुकी है, जो गत वर्ष 2013-14 तक 42 लाख तक सिमित थी । ज्यादा से ज्यादा कृषि क्षेत्र सिंचाई से जोड़ने के लिए मेरे क्षेत्र से बहुत कम काम कुछ सिंचाई परियोजनाओं के लंबित है जैसे शेलगांव बॅरेज प्रोजेक्ट, व्ही लोंढे बॅरेज प्रोजेक्ट, वाघुर मेजर प्रोजेक्ट जो PMKSY स्कीम में है, बोदवड परिसर सिंचन योजना प्रोजेक्ट एक्सटेंशन पीरियड की MoU के लिए अधुरा है तथा बलून विअर्स जो केंद्र सरकार के माध्यम से पायलट प्रोजेक्ट में बनायें जा रहें है इन सब सिंचाई परियोजनाओं को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए मै इस माध्यम से सरकार से निवेदन करती हूँ ।
कृषि क्षेत्र को और लाभदायी बनाने के लिए कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर के तहत हमारी सरकार ने एक लाख करोड़ रूपये के एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड को स्थापित किया है । इस कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर को मेरे क्षेत्र में केले की खेती करने वाले किसानों को कोल्ड स्टोरेज का निर्माण करने के लिए तथा केले के स्कंध/डंडी से धागा एवं केले के पत्तों से पर्यावरण हेतु सहज डी-कंपोज़ होने वाले डिस्पोजेबल वस्तु बनाने के लिए रिसर्च संस्था का निर्माण करने का मैं सरकार से आग्रह करती हूं, जिससे मेरे क्षेत्र के  युवाओं के लिए नया आयाम का निर्माण होगा और इससे नये रोजगार की निर्मिती में भी बड़ा योगदान होगा ।
मेरे रावेर लोकसभा क्षेत्र में जमीन को आर्टिफीसियली रिचार्ज करने हेतु सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड (CGWB) के माध्यम से मेगा रिचार्ज स्कीम जो देश में स्थापित होने वाली अपनी तरह की पहली एवं पायलट परियोजना है, जिसमें सातपुडा की कछार में बज़ाडा नामक झरने वाले क्षेत्रमें तापी नदी के बाढ़ नहर निर्माण करके जमीन रिचार्ज कराना प्रस्तावित है । इस परियोजना की विस्तृत कार्य योजना (DPR) कार्यान्वित है । मै इस महामहिम राष्ट्रपति महोदय के धन्यवाद प्रस्ताव के माध्यम से ऐसे पायलट परियोजना मेगा रिचार्ज को अतिशीघ्र केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय से निर्माण करने का कार्य शुरू करने का कार्यक्रम शामिल करने की मांग करती हूँ जिससे आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी बचाने तथा जमीन रिचार्ज एवं जल संवर्धन का कार्य होगा ।
पंतप्रधान ग्रामीण आवास योजना के तहत कई गरीब परिवारों को पक्का मकान का आवंटन हुआ है । यह आवंटन प्रक्रिया Socio-Economic Caste Survey 2011 के आधार पर हर ग्राम स्तर पर प्राथमिकता से गठित की, जिसमें SC/ST कैटेगरी को पहले शामिल किया है । मेरे क्षेत्र के बहुतांश ग्रामीण स्तर पर यह कार्य केंद्र व राज्य सरकार की अनुदान से लंबित है । जिले के पीएम आवास ग्रामीण योजना के जो काम अनुदान के लिए लंबित हैं, उन्हें जल्द से जल्द अनुदान राशि वितरित करने का मै सरकार से निवेदन करती हूँ । ऐसे ही पीएम आवास शहरी योजना के लिए भी अनुदान राशि का भुगतान मेरे निर्वाचन क्षेत्र के सभी नगर परिषद बाकी हैं, उन्हें तुरंत रिलीज करने का भी निवेदन सरकार से करती हूँ ।
मेरे लोकसभा क्षेत्र में केले का उत्पादन देश में सबसे ज्यादा होता है, इसलिये इस क्षेत्र में खेती के वैकल्पिक उपायों क्लस्टर आधारित बागवानी के साथ आर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने हेतु निर्माण करने की मांग मै इस माध्यम से करती हूँ, जिससे केले के उत्पाद की क्वालिटी इंटरनेशनल मार्केट में अपना स्थान ले पाए । प्रधानमंत्री फसल बिमा योजना के तहत बीमा कवरेज पुनर्गठन मौसम आधारित फसल बीमा योजना के अंतर्गत महाराष्ट्र राज्य ने नये तीन साल ब्लॉक के लिए जो ट्रिगर्स का गठन किया है, वह मेरे क्षेत्र में पिछले कई वर्षों में कभी भी और कुछ समय के लिए रिकॉर्डेड नहीं है । इसलिये, इससे कभी भी किसानों के केले फसल बीमा के अंतर्गत कभी भी क्लेम मिलने की संभावना नहीं दिखती । इन ट्रिगर्स का एक बार पुनर्निरीक्षण करने का राज्य को संकेत दे तथा इनके निश्चितिकरण करने के पहले केंद्र से अनुमोदन लेने का निवेदन सरकार से करती हैं जिससे मौसम के विपरीत परिस्थितियों में होने वाले नुकसान का कुछ हद तक मुआवजा मेरे किसानों को मिले ।
हमारी सरकार ने नारी शक्ति को देश के विभिन्न विकास यात्रा का अभिन्न अंग बनाया है इस नींव को और आगे मजबूत करने के लिए महिला किसानों को पूर्ण रूप से सशक्त बनाने हेतु ऐसे महिलाओं को लिए भी कृषि क्षेत्र में उचित योजना जिसमें केले एवं अन्य फलों को की खेती करने वाले महिलाओं को विशेष रूप से उर्वरकों की आपूर्ति एवं सस्ता ऋण उपलब्ध करने की योजना बनाने का सुझाव रखती हूँ ।
महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण से ऐसा परिलक्षित होता है कि सरकार गरीबों, किसानों, महिलाओं, अल्पसंख्यांकों और युवाओं के प्रति समर्पित तथा हाल ही में कोरोना कोविड-१९ वैश्विक महामारी से हर भारतीय को जहाँ तक हो सके हर प्रकार की मेडिकल सुविधा पहुंचाने और उनका स्वास्थ्य अच्छा रखने के एवं इस प्रतिकुल परिस्थितियों ने आर्थिक उन्नति के लिए लगातार प्रयत्नशील है । मेरी सरकार आदरणीय प्रधान मंत्री श्री नरेन्द्र भाई मोदी जी संविधान की मूल भावना का आदर करतें हुए देश में सामाजिक न्याय तथा आर्थिक लोकतंत्र को सशक्त करने और आम नागरिक के जीवन को आसान बनाने और हर भारतीय को जल्द से जल्द कोरोना बचाव के लिए वैक्सीन मिलने हेतु कटिबद्ध है । इसी श्रद्धा के साथ यह वर्ष हम आजादी की ७५वां वर्ष हर्ष से मनाते हुए देश के हर नागरिक के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करते हुए एवं विश्व के सभी को एकजुट होकर कोरोना टीकाकरण प्रोग्राम की सफलता को प्राप्त करते और बढाते हुए भारत के महामहिम राष्ट्रपति महोदय के अभिभाषण पर सदन में माननीय सदस्य श्रीमती लॉकेट चटर्जी जी ने जो धन्यवाद प्रस्ताव रखा है, मैं उसका पुनः समर्थन करती हूं ।
 
श्री रितेश पाण्डेय (अम्बेडकर नगर): आदरणीय अधिष्ठाता महोदया, आपने मुझे राष्ट्रपति अभिभाषण पर बहुजन समाज पार्टी और बहन कुमारी मायावती जी का पक्ष रखने का अवसर दिया है, इसके लिए मैं आपके प्रति आभारी हूं ।
          सबसे पहले, कल उत्तराखण्ड में हुई घटना पर, हमारे देश के जिन तमाम नागरिकों की जान चली गई है, उनके परिवारों के प्रति मैं अपनी संवेदना और अपनी पार्टी एवं बहन कुमारी मायावती जी की संवेदना को यहां पर व्यक्त करना चाहूंगा ।
          माननीय अधिष्ठाता महोदया, मैं अपना भाषण एक छ: प्वाइंट एजेंडा के तहत यहां प्रस्तुत करना चाहूंगा ।
          मेरा सबसे पहला मुद्दा किसानों के बीच पलते हुए आक्रोश को लेकर है । यह अत्यंत ही निंदनीय है कि पिछले कुछ महीनों से इस देश में तीन किसान विरोधी कानूनों के विरोध में जो धरना प्रदर्शन चल रहा है, उसमें बैठे अन्नदाताओं को कुछ छुटभय्ये नेता आतंकवादी घोषित करने का काम करते हैं । यहां यह जानना अत्यंत ही जरूरी है कि हमारे इन किसान आंदोलनकारियों को जो एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे होते हैं, इनके बीच में कुछ नकाबपोश, जो लोकल स्थानीय लोग बनकर आते हैं और पुलिस की नाक के नीचे एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन को हिंसक बनाने का काम करते हैं, ताकि सरकार के पक्ष के प्रति आम जनमानस में सहानुभूति पैदा हो ।
          महोदया, मैं यहां यह बताना चाहता हूं कि लाल किले की जो अप्रिय घटना हुई है, इसकी हम सब निंदा करते हैं, लेकिन यह लांछन किसानों पर लगाना कि उन्होंने तिरंगे का अपमान किया है, मैं आज इस सदन को बताना चाहता हूं कि इसी तिरंगे में लिपटकर इन्हीं किसानों के नौजवान बच्चे-बच्चियों का शव सरहदों से वापस लौटता है । मैं यह कहना चाहता हूं कि आज किसानों के ऊपर लांछन लगाने के बजाय, बहिन कुमारी मायावती जी का जो अनुरोध रहा है और जो उन्होंने बात कही है कि हमें किसानों की बात सुननी चाहिए, उनसे वार्तालाप करना चाहिए तथा उनके जितने भी मुद्दे हैं, उनको सुनकर इन तीन किसान विरोधी कानूनों को वापस लेने की जरूरत है ।
          अधिष्ठाता महोदया, मेरा दूसरा मुद्दा बेरोज़गारी को लेकर है । इस देश में तीन प्रकार की बेरोज़गारी है । एक ऐसी बेरोज़गारी जो आम होती है, वह नौकरी न मिलने की वजह से होती है । दूसरी ऐसी बेरोज़गारी, जिसमें किसी एक कार्य में जरूरत से ज्यादा लोग कार्यरत होते हैं, जिसे डिसगाइज्ड अनइम्प्लॉयमेंट कहा जाता है । तीसरी ऐसी बेरोज़गारी, जिसमें कोई भी व्यक्ति अपनी योग्यता   से नीचे का काम करने के लिए मजबूर होता है । ये तीनों बेरोजगारी हमारे देश में व्यापक हैं । ये हमारे देश के बुनियादी मुद्दे हैं और इससे हमारा देश जूझने का काम कर रहा है ।
एक समय था, जब यह सरकार वोट मांगने के लिए यह कहती थी कि हम दो करोड़ नौकरियां प्रति वर्ष देने का काम करेंगे । आज कहीं न कहीं इन्हीं बुनियादी मुद्दों से सरकार ने अपने हाथ को धोने का काम किया है । आज इन मुद्दों पर कोई चर्चा नहीं होती है ।
          महोदया, मैं आपसे यह भी कहना चाहता हूं कि लॉकडाउन के समय बेरोज़गारी ने पूरे देश में अपनी जड़ों को मजबूत करने का काम किया है । हमारे देश में 95 प्रतिशत श्रमिक असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं और इनमें से आधे से ज्यादा यदि एक हफ्ते तक काम न कर पाएं तो वे भुखमरी की कगार पर पहुंच जाते हैं । इन श्रमिकों के लिए हमें यह देखना है कि हम इन्हें किस तरह से बचाने का काम कर सकते हैं । लॉकडाउन के समय हमने देखा कि किस तरह से लाखों-करोड़ों श्रमिक भुखमरी के कगार पर आ गए थे । इसी बिंदु के मद्देनजर रखते हुए मैं इस देश में फैली आर्थिक असमानता पर प्रकाश डालना चाहता हूं ।
हमारे देश में दो प्रकार की महामारी देखने को मिली । एक ऐसी महामारी, जो करोड़ों गरीबों की महामारी थी और एक ऐसी महामारी जो चंद अमीरों की महामारी थी । यह कितनी बड़ी विडंबना है कि यह देश जब कोरोना काल में लॉकडाउन से जूझ रहा था तो इस देश के सबसे अमीर व्यक्ति, इस देश के ही नहीं, बल्कि एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति 90 करोड़ रुपये प्रति घंटा कमाने का काम कर रहे थे । इसी व्यक्ति की लॉकडाउन की कमाई से इस देश के करीब 40 करोड़ श्रमिकों को पांच महीने के लिए गरीबी रेखा से ऊपर रखा जा सकता था । यहां पर यह भी बताना जरूरी है कि इस देश के 100 अरबपतियों की लॉकडाउन की कमाई से 13 करोड़ 80 लाख लोगों को 94 हजार रुपये का चैक दिया जा सकता था ।
लेकिन सरकार अपनी पूंजीवादी विचारधारा से बाज नहीं आ रही है । आज भी सरकार ने पिछले कुछ सत्रों में श्रमिक कानूनों को पास करके, तीन किसान विरोधी कानूनों को पास करके, इस देश में बढ़ती असमानता को, उसकी खाई को और गहरा करने का काम किया है, उसको खोदने का काम किया है ।  इस असमानता को, भारत में शिक्षा की विसंगतियों को कोरोना काल ने पर्दाफाश किया है, मैं उस पर चर्चा करना चाहता हूं । जहां देश के चंद अमीर बच्चे अपने स्मार्ट फोन, लैपटॉप और आईपैड से पढ़ाई कर रहे थे, वे अपने ऑनलाइन क्लासेज में व्यस्त थे, वहीं देश के करोड़ों गरीब बच्चों ने इन आधुनिक यंत्रों के अभाव में अपना शैक्षिक कार्य, शैक्षिक वर्ष गंवाया है । इसी के साथ-साथ हमारे एससी-एसटी समुदाय के 60 लाख से अधिक बच्चों की छात्रवृत्ति 14 राज्यों में अभी तक लंबित है । उसका कारण यह है कि केन्द्र सरकार ने इस योजना के लिए जो राशि तय की थी, उसे देना बंद कर दिया है । मैं यह कहना चाहता हूं कि इन विसंगतियों को दूर करने के लिए हमें प्राइवेटाइजेशन की जरूरत नहीं है ।  हमें इन विसंगतियों को दूर करने के लिए देश के सरकारी शिक्षा के बुनियादी संस्थानों को मजबूत करने की जरूरत है ।
          अधिष्‍ठाता महोदया, यहां यह भी उल्लेखनीय है, सदन को यह भी जानना जरूरी है कि सरकार नारी सशक्तीकरण और महिला बराबरी का नारा देती है, लेकिन उसके साथ-साथ इस महामारी ने इस …* पर से पर्दा हटाने का काम किया है । कोई भी आपदा, चाहे वह आर्थिक हो, स्वास्थ्य संबंधित हो या पर्यावरण से संबंधित हो, महिलाओं और बच्चियों को इन आपदाओं से सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ता है । इन आपदाओं से उबरने में भी सबसे ज्यादा समय महिलाओं और बच्चियों को लगता है । हाल ही में, भारत ग्लोबल हंगर इंडेक्स-2020 की रैंकिंग में 107 देशों से से 94 स्थान पर आया है ।…(व्यवधान)
 Madam, I have some time to speak.
HON. CHAIRPERSON: No, you do not have time. आपके यहां से तीन-चार माननीय सदस्य बोलेंगे ।
…(व्यवधान)
श्री रितेश पाण्डेय : अधिष्ठाता महोदया, मैं दो मिनट में अपनी बात समाप्त करूंगा ।
अधिष्ठाता महोदया, मैं यहां पर यह बताना चाहता हूं कि हमारा देश दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला  देश है । इसे पांच ट्रिलियन डॉलर की करने की बात की जाती है, उसी देश में 20 करोड़ बच्चे, गर्भवती महिलाएं और नई माएं अभी भी कुपोषण की शिकार हैं, जो कि अत्यंत ही निंदनीय चीज है । जैसा कि हम ने लॉकडाउन के समय देखा है – चाहे वह हाथरस का मामला हो या घरेलू हिंसा के बढ़ते हुए आंकड़ों के मामले हों, महिलाओं की स्थिति बद से बदतर हुई है । यह सरकार सिर्फ जुमलेबाजी करने का काम करती है ।
          पिछले छ: वर्षों में लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ यानी की भारतीय मीडिया …* में खेलने का काम कर रही है । हाल ही में मीडिया के एक प्रसिद्ध न्यूज एंकर और ब्रॉडकास्ट  आडियंस रिसर्च काउंसिल कर्मचारी के बीच हुए व्हाट्सए्रेप लीक से यह साफ पता चलता है कि किस राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित गोपनीय सूचनाओं के आदान-प्रदान से टीआरपी बढ़ा कर, उससे कमाई की जाती है ।
          अधिष्ठाता महोदया, यह इस देश की संप्रभुता के साथ एक बहुत ही बड़ा खिलवाड़ है । इस पर जरूर चर्चा होनी चाहिए और इस पर जांच बैठनी चाहिए । दूसरी तरफ, जहां बाबा साहेब बी. आर. अम्बेडकर के संविधान में दिए गए अधिकारों को लेकर जो कुछ पत्रकार, शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता सरकार के खिलाफ आवाज उठाते हैं, उनके कामों की आलोचना करते हैं, उनके ऊपर कठोर से कठोर कानून, चाहे वे देशद्रोह के कानून हों या  यूएपीए के कानून हों, उनको लगा कर उनकी आवाज को बंद करने का काम किया जा रहा है । मैं अपनी बात चंद शब्दों के साथ खत्म करूंगा । यदि सरकार अपने कार्यों को लेकर सच में विश्वास से पूर्ण है, सच में सशक्त है और सच में समर्थ है, तो आखिर वह इन आलोचकों से क्यों डरती है ।
          अधिष्ठाता महोदया, अंत में, मैं यहां पर एक कविता की कुछ पंक्तियां कहना चाहूंगा । यह कविता उन किसान भाइयों के लिए है, उन नौजवान साथियों के लिए है, जो सीमा पर डटे हुए हैं । वह सीमा चाहे दिल्ली की हो या देश की सरहद की हो ।
 
“सच है, विपत्ति जब आती है, कायर को ही दहलाती है, सूरमा नहीं विचलित होते, क्षण एक नहीं धीरज खोते, विघ्नों को गले लगाते हैं, कांटों में राह बनाते हैं ।”             आपने मुझे बहुजन समाज पार्टी, बहन कुमारी मायावती जी का पक्ष रखने का समय दिया है, इसके लिए मैं आपका आभारी हूं । धन्यवाद ।
 
*श्री विवेक नारायण शेजवलकर (ग्वालियर) :महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण के उपलक्ष्य में प्रस्तुत धन्यवाद प्रस्ताव के समर्थन में,मैंअपने विचार रखता हूं । कृषि कानूनों के विरूद्ध चलाए जा रहे आंदोलन की अब वैश्विक स्तर पर भी चर्चा हो रही है । यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि झूठ और भ्रम फैलाया जा रहा है । चलाया जा रहा आंदोलन तो चर्चा में है, लेकिन इसके मूल में उन कृषि कानूनों पर कोई चर्चा नहीं चल रही है ।
आंदोलनकारी चर्चा इसलिए नहीं करना चाहते कि उनका झूठ सामने आ जायेगा । बार-बार कानून वापस लेने के बात की जा रही है । आंदोलनकारी किसान नेता व विपक्ष लगातार इसके लिए सरकार पर दबाव डाल रहे हैं, लेकिन पूर्व में कृषि सुधारों की वकालत करने वाले ये सभी इस पर कोई चर्चा नहीं कर रहे हैं कि कानून वापसी के बाद कृषि सुधारों का क्या होगा जिसकी पिछले अनेक दशकों से चर्चा है । कृषि कानूनों की कोई भी चर्चा नहीं करना चाहता । अब तो आंदोलन का मकसद केवल मोदी जी का विरोध और भारत की छवि को क्षति पहुंचाने का ही रह गया है ।
यह भी अत्यंत आश्चर्य की बात है कि मीडिया आंदोलन स्थल से किसान क्या खा रहे हैं, क्या पी रहे हैं, कैसे सारी सुविधाएं वहां उपलब्ध हैं । इसे विस्तार से दिखा रहा है, इसकी चर्चा की है । लेकिन आज तक किसी किसान से यह पूछते नहीं दिखा कि इन कृषि कानूनों से किसान को क्या तकलीफ है । यदि सरकार कानून वापस ले भी लेती है, तो किसान की घर वापसी के बाद क्या सब समस्याएं समाप्त हो जाएंगी? सच तो यह है कि इन कानूनों ने किसान को आजादी दी है । इन कानूनों के पालन की कोई पाबंदी किसान पर नहीं है । पुरानी व्यवस्था निरंतर है, मंडियां काम कर रही हैं, एमएसपी पर खरीद जारी है ।
आंदोलनकारी किसान यदि यह मानते हैं कि सत्य उनके साथ है, तो कानून वापसी के लिए दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन-धरना देने के बजाय किसानों के बीच जाकर इन कानूनों द्वारा मिली आज़ादी का बहिष्कार करने के लिए आंदोलन चलाएं । किसान नेता फरमान जारी करें कि कोई भी किसान मंडी के बाहर फसल न बेचे, कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग न करे व अपनी उपज का भंडारण नहीं करे । फिर कृषि कानून रहे या न रहे कोई फर्क नहीं पड़ता, कानूनों के वापसी की भी कोई आवश्यकता नहीं रहेगी । कृषि कानूनों की जानकारी न तो आम जनता को है और न ही भोलेभाले किसानों को है ।
सरकार को चाहिए कि ये तीनों कृषि कानूनों और सिर्फ कानूनों के विषय में तथ्य और तर्क के आधार पर व्यापक चर्चा के माध्यम से लोगों को यह जानकारी मिले कि यह किसान आंदोलन मात्र झूठ की बुनियाद पर खड़ा है । मंडियां बंद नहीं हो रही हैं, एमएसपी पर खरीद जारी है और रहेगी, कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग की कोई मजबूरी नहीं है । पुरानी व्यवस्था चलती रहेगी, यही सत्य है, जो सभी को समझने की आवश्यकता है ।
अतः मैं पुनः इस सदन में महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का समर्थन करता हूं ।
 
माननीय सभापति: श्रीनिवास दादासाहेब पाटिल ।
…( व्यवधान)
डॉ. निशिकांत दुबे (गोड्डा): महोदया, प्वाइंट ऑफ ऑर्डर है, 369…(व्यवधान)
माननीय सभापति : एक मिनट देख लेते हैं ।
…( व्यवधान)
डॉ. निशिकांत दुबे: महोदया, लीडर ऑफ द अपोजीशन श्री अधीर रंजन चौधरी जी और रितेश पाण्डेय जी इन दोनों ने किसी मीडिया हाउस के किसी व्हाटसप चैट का जिक्र किया है । एक ने तो सीधा  बालाकोट  एयर स्ट्राइक का ही जिक्र किया है और एक ने नेशनल सिक्योरिटी की बात की है । हम जब इस हाउस में बोलते हैं, तो एक एमपी के नाते यदि हमें कोई प्रिविलेज़ है, प्रोटेक्शन है, तो एक ऑथेन्टिकेशन का भी एक प्रोविज़न 369 है  । मैं इन दोनों के माध्यम से आपसे आग्रह करूंगा कि “Paper or document to be laid shall be duly authenticated by the Member presenting It”. इन दोनों ने ये बातें कही हैं । इन दोनों को यह कहिए कि ऑथेन्टिकेट करके बालाकोट का मामला या राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला उस व्हाटसप चैट में है । वे इसे दे दें, यदि ये दे देंगे, तो आप उसकी सत्यता की जांच करवा लीजिएगा । यदि सत्य होगा, तो यह बात जाएगी और यदि सत्य नहीं होगा, तो इनके ऊपर प्रिविलेज़ होगा । मेरा आपसे केवल इतना ही आग्रह है ।…(व्यवधान) पब्लिक डोमेन में यह है कि कोई बड़ी चीज होने वाली है । पब्लिक डोमेन में यह नहीं है कि बालाकोट हुआ है, पब्लिक डोमेन में यह नहीं है कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल है । इन्होंने कैसे अपने मन से यह मान लिया कि…(व्यवधान)
कुंवर दानिश अली (अमरोहा): पब्लिक डोमेन में राष्ट्रीय सुरक्षा का क्या मामला हुआ है?…(व्यवधान)
माननीय सभापति : रितेश जी, एक मिनट के लिए बैठिए ।
…( व्यवधान)
माननीय सभापति: निशिकांत दुबे जी, आप बैठ जाइए । आपका प्वाइंट ले लिया है । It is up to the Member to authenticate or note and post that whether it goes on record or not, will be tested.
                                     श्रीनिवास दादासाहेब पाटिल जी ।
 
श्रीनिवास दादासाहेब पाटिल (सतारा): महोदया, मैं आपका आभारी हूं कि मुझे राष्ट्रवादी काँग्रेस पार्टी की तरफ से महामहिम राष्ट्रपति जी का जो अर्थसंकल्प पर अधिवेशन भाषण हुआ, हालाँकि सब विपक्ष की बॉयकॉट की वज़ह से हम हाजिर नहीं थे, लेकिन जो भी लिखित भाषण मैंने पढ़ा, उसके संबंध में मैं बोलूंगा । यह अधिवेशन दो विपत्तियों के बाद शुरू हुआ है । हालाँकि, दिल्ली के बॉर्डर पर किसान ठंड में बैठे थे । वहां कोई सुविधा नहीं थी । उस समय बारिश हुई और उसकी वजह से 26 जनवरी को जो निर्णय लिया गया, किसी वजह से अगर सत्ता पक्ष चाहता तो उनसे थोड़ी भी बात करके इसका कोई निर्णय लिया जा सकता था । मुझे याद है बचपन में आदरणीय यशवन्तराव चव्हाण जी, जो गृह मंत्री थे, उस समय त्रिशूल लेकर नंगे साधुओं का एक मोर्चा पार्लियामेंट में आया था, चव्हाण साहब ने उधर जाकर उनके सामने हाथ जोड़ कर उनसे कहा कि साधु-सन्तों का काम समाज को शिक्षा देने का है, अगर किसी वजह से आपके साथ अन्याय हुआ है तो मुझे बताइए, मैं इसके बारे में सभागृह में कुछ बात करके कुछ हल निकालूंगा । तब मोर्चा खत्म हुआ ।
          60 दिन हुए, अगर सरकार के मन में कुछ होता तो वे कुछ न कुछ करते । आज मुझे यह आनन्द हुआ है कि 5-6 दिन चलने के बाद अभी इस पर चर्चा हो रही है और होने वाली है, उसका आश्वासन भी है, लेकिन महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर पहले चर्चा हो । बाद में अगर समय मिले और अगर आप दोनों पक्ष चाहें, तो इस पर बात हो सकती है । जो अन्नदाता है, वह 60 दिनों से, 70 दिनों से उधर भूखा है । काश्तकारी नहीं हो रही है । अनाज और सब्जियों के दाम वर्ष 2022 तक दोगुने मिलने चाहिए, यह भी आपकी घोषणा है । लेकिन, अगर उसे उगाने वाले काश्तकार खेतों में नहीं जाएंगे, उन्हें सुविधा नहीं मिलेगी, बीज नहीं मिलेंगे, खाद नहीं मिलेगा और मार्केट बंद होने की वजह से जितनी भी पैदाइश है, उसे ग्राहक तक नहीं मिलेगा तो हमारी आय दोगुनी कैसे होगी?
 
          इसलिए अगर आप चाहेंगे, तो जैसे ही महामहिम जी के अभिभाषण पर धन्यवाद का प्रस्ताव पारित होगा, उसके तुरन्त बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के लोग जाकर उन काश्तकार भाइयों को समझाएंगे, दो कदम आगे बढ़कर या दो कदम पीछे हटकर अगर इस अंतर को कम करने की कोशिश की जाए और एक सामाजिक पुल तैयार किया जाए, तो मुझे मालूम है कि इसका कुछ हल निकल सकेगा ।
          मेरे से पहले के वक्ताओं ने जो बताया था कि अभी एक आदत-सी पड़ गई है कि जो बच्चे गरीब हैं, जो किसान के बच्चे हैं, मेरे संसदीय क्षेत्र में एक बच्चे को मोबाइल नहीं मिला, तो उसने खुदकुशी कर ली । उसकी माता रोते-रोते मेरे पास आई ।
इसलिए अगर दो-पाँच या पचास रुपए इकट्ठा करके कम-से-कम कीमत वाला कोई मोबाइल या टैब दे सकें या कोई पुराना टैब उनको देने का काम करें, तो अच्छा होगा क्योंकि ऐसी हालत आगे भी होने वाली है । उन काश्तकारों और कामगारों, जिनकी आय कम है, के बच्चों को टेक्निकल एजुकेशन के लिए यह सुविधा नहीं मिलेगी, तो अनपढ़ बच्चे आगे क्या कर सकेंगे?
परसों मुझे एक सैनिक मिला, जिसकी 17 साल की सेवा हो गई है । अभी शायद वह दो-तीन महीने में सेवानिवृत्त होने वाला है । उसने मुझे कहा कि सर, मुझे क्या काम मिलेगा? सैंतीस साल की उम्र में वह सेवानिवृत्त होने वाला है, आगे उसकी जिन्दगी 80 साल तक है, वह क्या करे? कोरोना की वजह से सबकी अपॉर्चुनिटीज गई हैं, लोगों को काम नहीं मिल रहे हैं । जिनको पैरामेडिक्स और कोरोना की महामारी में काम दिया गया था, उनका काम भी चला जाएगा । उनको नोटिसेज मिल रहे हैं, यह कहा जा रहा है कि आपने दो महीने काम किया, लेकिन अभी आपके काम की जरूरत नहीं है । उनको निकाला जा रहा है ।
आरोग्य से संबंधित कोई ऐसी व्यवस्था पूरे भारत में हो ताकि जिन्होंने इस कठिन समय में काम किया है, उन कामगारों को काम मिल सके । अगर हमने उनको बता दिया कि आपकी नौकरी रहेगी और आपको नई संधि मिलेगी, तो काम करने वाले ऐसे जो लोग हैं, किसी वजह से जब 50-60 लाख रुपए की हानि हुई, यदि वह मिल जाए, क्योंकि कई लोगों ने ऐसा सोचा कि भूखे मरने की बजाए उधर जाकर कुछ काम हो जाए, तो यह अच्छा होगा ।
इसलिए मैं चाहता हूँ कि सरकार कोई ऐसा कदम उठाए ताकि जिनकी नौकरियाँ जाने वाली हैं, उनको कुछ काम मिल सके ।
कल-परसों मैंने भाषण सुना कि नए सैनिक स्कूल खुलने वाले हैं । सातारा में एक सैनिक स्कूल है, जिसकी पायाभरणी यशवंतराव चव्वाण जी ने 23 जून, 1961 में की थी । उनके पास पैसे नहीं हैं । जिन लोगों ने वहाँ शिक्षक के नाते 30-40 साल की सेवा की है, उनको पेंशन नहीं मिल रही है । उनको जो सुविधाएं मिलनी चाहिए, वे नहीं मिल रही हैं । उनका जो कंसॉलिडेटेड फण्ड है, उनमें से पाँच करोड़ रुपए दिए गए हैं । मैं उस कमेटी में हूँ । भारत सरकार को लगभग दस बार लिखने के बाद भी कि यह डिफेंस डिपार्टमेंट का नहीं है । यह डिफेंस सोसायटी का है, ऐसा कहकर, उनको पैसे नहीं मिल रहे हैं । नया स्कूल खुलने वाला है । महिलाओं और बच्चियों को भी उस स्कूल में एडमिशन मिल रहे हैं । अगर नया स्कूल खोलने वाले हैं, तो मेरे सातारा जिले में नया स्कूल खोला जाए और वहाँ जो स्कूल चल रहे हैं, उनकी जो आर्थिक समस्याएं हैं, उनको ध्यान में रखते हुए, उनके लिए कुछ प्रयास किये जाएं । जिनके पैसे नहीं मिले हैं, अगर उनको पैसे मिल जाएं, तो वे लोग भी आराम से अपनी जिन्दगी गुजारेंगे ।
हालाँकि अब तक हमारे लोगों ने विद्युतीकरण की समस्या देखी है । पुणे से लोण्डा तक डबल लाइन चल रही है, लेकिन उसका विद्युतीकरण नहीं हुआ है । सबसे बड़ी बात यह है कि जिनकी जमीनें ब्रिटिश काल में ले ली गई हैं, जो लोग ऐसा कह रहे हैं, लेकिन उनका कोई रिकॉर्ड नहीं है । भारत सरकार कुछ और पैसे देकर, पुराने रिकॉर्ड्स देखकर अगर हमें सहूलियत देकर कुछ काम करे तो ही यह हो सकता है, नहीं तो, चार साल पहले शुरू की गई स्कीम और दस साल तक चलेगी और हमारा जो काम करने का तरीका है, उसके लिए लोग बाध्य रहेंगे ।
 
मराठी हमारी मातृभाषा है । उसको एक शास्त्रीय भाषा के रूप में दर्जा दिया जाए, जैसा कि श्री बालू जी ने तमिल भाषा के लिए कहा, वैसे ही मराठी भाषा का जो स्थान है, हमने इसके बारे में पूरी रिपोर्ट भेजी है, उसको अभी तक भारत सरकार ने शास्त्रीय भाषा के रूप में दर्जा देने की सहमति नहीं दी है । उस रिपोर्ट को जल्दी-से-जल्दी पढ़कर मराठी भाषा को शास्त्रीय भाषा के रूप में करने की सहमति देंगे, तो हम आपके आभारी रहेंगे ।
मुझे आपने बोलने का मौका दिया, इसके लिए मैं आपका आभारी हूँ ।
धन्यवाद । जय हिन्द ।                                                                   
 
*श्री गिरीश चन्द्र (नगीना): महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर मुझे आपने मेरे विचार रखने का मौका दिया उसके लिए मैं आपका आभार व्यक्त करता हूं । इस समय समस्त विषयों पर चर्चा हो रही है, लेकिन बहुत ही दुर्भाग्य की बात है कि जो मुख्य कारण हैं, बेरोजगारी और सरकारी उपक्रमों को बेचे जाने से उत्पन्न हो रही नौकरियों की समाप्ति पर कोई चर्चा नहीं हो रही है । सरकार कह रही है कि यदि आप बेरोजगार हैं तो पकौड़ा तले । क्या एक उच्च शिक्षा प्राप्त किए हुए बेरोजगार का पकौड़ा तलना उसके मंशानुरूप रोजगार है? महामहिम राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग के लोगों के लिए संविधान के मंशानुसार आरक्षण किस प्रकार से उपयोगी होगा, इसके ऊपर कोई प्रकाश नही डाला है । एक तरफ सरकार बाबा साहब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी के कार्यों का प्रत्येक जगह बहुत ही जोरशोर से ढिंढ़ोरा पीटती है और दूसरी तरफ कभी भी बाबा साहब के मंशा के अनुरूप कार्य नही करती । धीरे धीरे देश में सभी पब्लिक सेक्टर कंपनियों को सरकार बेचती जा रही है, जैसे :- रेलवे, ओ.एन.जी.सी, एयरपोर्ट, दूरसंचार, समुंद्री पोर्ट (बंदरगाह) और तो और एल.आई.सी. को भी बेचने की तैयारी कर ली है । इससे बेरोजगारों का और शोषण होगा । प्राइवेट कंपनियां मनमानी सैलरी देती है । उन पर कोई लगाम नहीं है । वर्तमान में बढती बेरोजगारी के चलते होनहार उच्च शिक्षा वालो को भी कम वेतन में मजबूरन नौकरी करनी पड़ती है । दुख इस बात का है कि यदि इन नौकरियों को सरकार अपने माध्यम से भर्ती करती तो अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग के बेरोजगारों को उनका समुचित आरक्षण का संविधान के मंशानुसार लाभ मिलता, लेकिन सरकार की मंशा वोट लेने के लिए दिखावे के तौर पर कुछ और होती है और वोट लेने के बाद एससी/एसटी एवं पिछड़े वंचित समाज को उनके हाल पर छोड़ देती है । उनको कभी आगे बढ़ाने के बारे में नहीं सोचती ।
दूसरी बात जब पब्लिक सेक्टर की कंपनियां ही नही रहेंगी तो आरक्षण की बात करना बेईमानी होगी । प्राइवेट सेक्टर की नौकरियों में भी आरक्षण लागू किया जाना चाहिए । माननीय अध्यक्ष जी, SC, ST और OBC के गरीब छात्रों को पहले स्कॉलरशिप के सहारे शून्य बेलेंस पर कॉलेज में एडमिशन मिल जाता था परन्तु वर्तमान में सरकार की गलत नीतियों के कारण आज किसी गरीब को स्कूल या कॉलेज में पढ़ने के लिए पहले पैसे जमा करवा के ही एडमिशन मिलता है, जिससे कितने ही होनहार गरीब छात्र-छात्राओं की पढ़ाई छूट रही है और बाद में स्कॉलरशिप आने की कोई गारण्टी नहीं है । कई राज्यों में अभी तक SC, ST को पिछले साल की भी छात्रवृत्ति नही मिली है । सरकार द्वारा छात्र-छात्राओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए रोजगारोन्मुखी अच्छी शिक्षा पद्धति बनायी जानी चाहिए ।
आज हमारे देश के हर कोने में किसान आन्दोलनरत है, लेकिन सरकार अपनी जिद के चलते किसानों पर जबरदस्ती कानून थोपना चाहती है । आप बोल रहे हैं कि ये आपके फायदे के बिल हैं, परंतु जब किसान मना कर रहे हैं तो आप क्यो लागू कर रहे हो? पहले किसानों को वह तो दे दीजिए जो उनकी पहले से मांग है । स्वामीनाथन की रिपोर्ट को लागू कीजिए । सरकार कहती है कि गन्ने का पेमेंट एक सप्ताह में मिल जाएगा । आप देखिए मिल वाले तीन-तीन, चार-चार महीनों में भुगतान कर रहे हैं । कुछ गन्ना मिल तो पूरा सीजन निकलने के बाद भी भुगतान नही करती । सरकार से मेरा आग्रह है कि किसानों पर इतना अत्याचार मत कीजिए ये हमारे देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं । जब ये तरक्की करेंगे तभी हमारा देश आगे बढ़ेगा । दिल्ली बार्डर पर किसानों के आंदोलन को दबाने के लिए उनकी बिजली सप्लाई काट दी, पानी बन्द कर दिया और तो और वहां टॉयलेट को भी हटा दिया गया । आपने वहां औरतें, बच्चे, बुजुर्ग के बारे में भी नहीं सोचा । सरकार से मेरा यही कहना है कि पहले किसानों के साथ कुछ अच्छा करें, जिससे किसानों को आप पर भरोसा हो और तभी उनको साथ लेकर ऐसे बिलो के बारे में वार्ता करनी चाहिए । आतंकी कहने या उन पर अत्याचार करने से इस मामले का हल नही निकलेगा । अब तो विदेशों में भी इस आन्दोलन की वजह से सरकार और देश की छवि खराब होने लगी है ।
कोविड महामारी से बचाव के लिए हमारे देश के डॉक्टरों और वैज्ञानिकों ने जो टीका ईजाद किया है, उसके लिए मैं उनको धन्यवाद करता हूं और सरकार से कहना चाहूंगा कि इंजेक्शन को बाहर दूसरे देशों में भेजने से पहले अपने देश में जल्दी से जल्दी सभी को लगाया जाए और स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे को और मजबूत किया जाए ।
   
श्री जगदम्बिका पाल (डुमरियागंज): अधिष्ठाता महोदया, मैं आपका बहुत आभारी हूं कि संसद के समक्ष भारत के राष्ट्रपति के अभिभाषण पर हमारे दल की श्रीमती लॉकेट चटर्जी जी के द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया और डॉ. वीरेन्द्र कुमार जी ने उसका समर्थन किया ।
          मैं उसके समर्थन में बोलना चाहूंगा, जिसके लिए आपने मुझे अवसर दिया है । महामहिम राष्ट्रपति जी का जो अभिभाषण होता है, वह सरकार की नीतियों का दस्तावेज़ होता है, सरकार के कार्यक्रमों की रूपरेखा होती है, सरकार की उपलब्धियों का ब्यौरा होता है और सरकार के भविष्य का रोडमैप होता है । यकीनन इस बार कोरोना की वैश्विक चुनौती के बाद जब पूरी दुनिया ठहराव की स्थिति में आ गई थी, पूरे विश्व में लॉकडाउन था, ऐसी परिस्थितियों का पूरे विस्तार से हमारे सत्तापक्ष-प्रतिपक्ष के सदस्यों ने भी ज़िक्र किया कि किस तरह से बड़े से बड़े देश जैसे यूरोप, यूएसए, जिनको दुनिया के सबसे प्रगतिशील और समृद्धशाली देश कहा जा रहा था, उन देशों के सामने भी कोरोना की वैश्विक चुनौतियां आईं ।
          इससे लगता था कि यूएसए, यूरोप और वे सारे देश लाचार हैं । जब हम साउथ-ईस्ट एशिया के देशों को देखते हैं, तो उन साउथ-ईस्ट एशिया के देशों में भी आदरणीय प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने अपने देश में उस कोरोना की वैश्विक चुनौती को भारत के 130 करोड़ भारतवासियों को लेकर मुकाबला किया, आज पूरी दुनिया में यह बात साफ हो गई है कि जो काम अमेरिका नहीं कर पाया, यूरोप नहीं कर पाया, इंग्लैंड और फ्रांस नहीं कर पाया, उसे श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत ने कर के दिखा दिया । यह बात आज पूरी दुनिया के समक्ष है ।
          ऐसा नहीं है कि हमारी पार्टी की सरकार है और प्रधान मंत्री जी हैं, इसलिए मैं आज उनकी बात कर रहा हूं । आज पूरी दुनिया के सामने कोरोना की जो चुनौती है । कोरोना वुहान से निकला था, जिसके बारे में डब्ल्यूएचओ ने हमको फरवरी में आगाह किया, मैं उस विस्तार में नहीं जाना चाहता हूं । डॉ हर्ष वर्धन जी ने फरवरी से ही एयरपोर्ट्स आदि पर थर्मल स्क्रीनिंग करवानी शुरू की और जिस तरह 23 मार्च का ज़िक्र हुआ, वह सब सिलसिलेवार हुआ । जिस तरह कोरोना की उस चुनौती का नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत में मुकाबला हुआ, यह तारीफ आज केवल भारत में ही नहीं हो रही है, बल्कि दुनिया के सबसे बड़े संस्थान वर्ल्ड हैल्थ ऑर्गनाइज़ेशन के डायरेक्टर जनरल ने भी की है । मैं समझता हूं कि उन्होंने भारत के बारे में कहकर भारत का सम्मान किया है । The Director-General of World Health Organistation, Tedros said that India continues to take decisive action and demonstrate its resolve to end Covid-19 pandemic.
          डायरेक्टर जनरल, वर्ल्ड हैल्थ ऑर्गनाइज़ेशन का भारत के बारे में यह कहना भारत के लिए केवल रिमार्क नहीं था, बल्कि पूरी दुनिया की निगाहों में भारत का सम्मान बढ़ाने वाला था, नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व को एक क्षमता प्रदान करने वाला था । ऐसा केवल वर्ल्ड हैल्थ ऑर्गनाइज़ेशन ने ही नहीं कहा, आईएमएफ ने भी इसके बारे में कहा । IMF Chief Kristalina Georgieva has praised India for taking very decisive steps to deal with the coronavirus pandemic and its economic consequences and asked the country to do more this year to support an accelerated transformation of the economy.
इंटरनेशनल मोनिटरी फंड दुनिया के सबसे बड़े संगठनों में से एक है । उसने भी तारीफ की है कि भारत ने कोरोना के वायरस से निपटने के लिए बहुत प्रभावशाली और सक्षम ढंग से नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व वाली सरकार ने निर्णय लिए हैं और इस पेनडेमिक की चुनौतियों का मुकाबला किया है ।  कोरोना से पूरी दुनिया में जो आर्थिक दुष्परिणाम आ रहे थे, उसके बावजूद हमारी जीडीपी दर कम न हो और हम आत्मनिर्भर बने, इसके लिए हमारी सरकार ने काम किया । आज पूरा विश्व हमारी प्रशंसा कर रहा है । यूएसए ने कहा - “We applaud India’s role in global health, sharing millions of doses of COVID-19 vaccine in South Asia. India's free shipments of vaccine began with Maldives, Bhutan, Bangladesh and Nepal and will extend to others.”, says the Twitter account of the Bureau of South and Central Asian Affairs, US State Department. भारत में कोरोना वैकसीन से सरकार अपने देश के 130 करोड़ देशवासियों की जिंदगी की हिफाजत का संकल्प तो पूरा कर ही रही है, उसके साथ मालदीव, भूटान, नेपाल, बांग्लादेश के लोगों की जिंदगी बचाने का काम भारत सरकार नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में कर रही है । यह यूएसए ने कहा है कि “India is a true friend using its pharma to help the global community.” हम वसुधैव कुटुम्बकम की बात करते हैं और पूरे विश्व को कुटुम्ब मानते हैं । पहली बार कोरोना ने वुहान से निकलकर पूरी दुनिया के सामने चुनौती पैदा की, तब उस वसुधैव कुटुम्बकम के सिद्धांत को यदि किसी ने चरितार्थ किया, तो भारत ने चरितार्थ किया है, हमारी सरकार ने चरितार्थ किया है कि हम केवल भारत के लोगों की जिंदगी नहीं बचाएंगे, बल्कि पूरी दुनिया के लोगों की चिंता करेंगे । बिल गेट्स फाउंडेशन पूरी दुनिया में काम करता है । उन्होंने कहा – “It is great to see India’s leadership in scientific innovation and vaccine manufacturing capability as the world works to end the COVID-19 pandemic.” बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन ने भी तारीफ की और आप यहां आलोचना करते हैं । जब पार्लियामेंट्री स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन श्री आनंद शर्मा जी की रिपोर्ट आएगी, तब मैं उन्हें धन्यवाद दूंगा । The Anand Sharma ji-led Parliamentary Standing Committee on Home Affairs presented a report on Management of COVID-19 pandemic. उन्होंने सदन में एक रिपोर्ट प्रस्तुत की है और he appreciated the efforts of the Centre for controlling the spread of the novel coronavirus. आज कोरोना वायरस को रोकने में यह सरकार सक्षम हुई है और आप सदन में उसकी आलोचना कर रहे हैं और आपके नेता सरकार की तारीफ कर रहे हैं । कम से कम आपकी कथनी और करनी में अंतर नहीं रहना चाहिए । मैं आज कहता हूं कि कोरोना के बाद निश्चित रूप से चुनौती आई है । प्रधान मंत्री जी बार-बार कहते हैं कि चुनौती को अवसर में बदलना होगा, लेकिन यह उन्होंने किस संदर्भ में कहा होगा कि चुनौती को अवसर में बदलना होगा, इसके बारे में मैं आपको बताना चाहता हूं । हमारी लॉकेट बहन ने बड़े विस्तार से पीपी किट के बारे में कहा । यह बात सही है कि हम उस समय एक भी पीपी किट नहीं बना रहे थे । उस समय कोरोना मरीजों को, डाक्टर्स को, नर्सेज को, पैरामिलिट्री फोर्सेज को जो पीपी किट दी जा रही थी, वह चाइना से आ रही थी और जो पीपी किट्स देश में आईं, वे भी गुणवत्ता वाली नहीं थीं । इंडियन मेडिकल काउंसिल ऑफ रिसर्च  ने कहा कि ये घटिया हैं और उन्हें रिजेक्ट कर दिया और चाइना की उस कम्पनी को ब्लैक लिस्टेड कर दिया । उस समय इसे चुनौती के तौर पर लिया गया और जबकि हमारी निर्भरता दूसरे देशों पर थी । इस निर्भरता को हमें कम करना होगा, नहीं तो हम भविष्य में कैसे ऐसी चुनौतियों का मुकाबला कर पाएंगे, इसके लिए प्रधान मंत्री जी ने आह्वान किया कि हम दूसरे देशों पर निर्भरता कम करेंगे और आत्मनिर्भरता की तरफ बढ़ेंगे । कोविड की उस चुनौती के बावजूद हम आत्मनिर्भर  हुए और आज हम साढ़े पांच लाख पीपी किट्स बना रहे हैं और दूसरे देशों को भी देने का काम कर रहे हैं । यह नि:संदेह आत्मनिर्भर भारत की तरफ बढ़ने का एक कदम है । कोविड-19 के समय जब प्रधान मंत्री जी ने कहा कि आज चाइना से बहुत-सी कम्पनियां दूसरे देशों में जा रही हैं, तो क्यों न भारत एक मोस्ट फेवर्ड डेस्टिनेशन उनके लिए बने । मोस्ट फेवर्ड डेस्टिनेशन भारत को बनाना होगा । यह एक अवसर है कि चाइना से निकली हुई कम्पनियां यहां आएं और भारत में फॉरेन इनवेस्टमेंट बढ़े । वे कम्पनियां  ताइवान, जापान, कोरिया, यूएसए या यूरोप में न जाएं, बल्कि वे कम्पनियां भारत में आएं ।
इस तरीके का उन्होंने एक प्रयास किया । हमारी सरकार, हमारा विदेश मंत्रालय, पीएमओ और सबने लगातार यह प्रयास किया और उसका नतीजा है कि इस एक साल में जहां इस कोविड में हमने लोगों की जिंदगी बचाई, हमारे वैज्ञानिकों ने आज वैक्सीन निकाली, आज हम अपने यहां पर सबसे बड़ा वैक्सीनेशन का अभियान चला रहे हैं और दूसरे देशों को दे रहे हैं । इन चुनौतियों में भी सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों के बारे में जानकार आज पूरे देश की जनता आश्‍वस्त होगी और 130 करोड़ लोगों को महसूस होगा कि इन चुनौतियों में भी नरेंद्र मोदी जी की सरकार के प्रयास से आज पूरी दुनिया में मोस्ट फेवरिट डेस्टिनेशन इन फॉरेन इन्वेस्टमेंट, पूंजी निवेश के लिए भारत सबसे बड़ा आकर्षण केंद्र बन गया है । इसके लिए निश्चित तौर पर देश की जनता को मोदी जी के नेतृत्व पर गर्व होगा ।
सभापति महोदया, मैं कुछ और भी कहना चाहता हूं । यह कोई मेरी अपनी रिपोर्ट नहीं है । यह रिपोर्ट यूनाइटेड नेशन्स काँफ्रेंस ऑन ट्रेड एंड डेवलपमेंट की है । जब कोविड आया तो इनकी रिपोर्ट में  ग्लोबल फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट, यानी एफडीआई due to economic fallout of COVID-19 वर्ष 2019 के मुकाबले 2020 में 42 प्रतिशत गिरा । यूरोप, खासतौर पर इंग्लैंड में और कितना नेगेटिव फ्लो हुआ है । यूनाइटेड किंगडम में जो फॉरेन इन्वेस्टमेंट है, वह इस कोविड के दौरान 100 प्रतिशत लोअर हो गया । इसका मतलब वहां कोई फॉरेन इन्वेस्टमेंट नहीं हुआ । United States of America saw a drop of 49 per cent. अमेरिका में भी एफडीआई 49 परसेंट गिर गया । Australia saw a drop of 46 per cent. नॉर्थ अमेरिका में 46 परसेंट की गिरावट आई । कनाडा में 34 परसेंट की गिरावट आई । अफ्रीका में वर्ष 2019 की तुलना में 18 परसेंट की गिरावट आई । एशिया में 12 परसेंट की गिरावट आई । दुनिया में केवल चाइना में कोविड की चुनौतियों के बावजूद 4 परसेंट एफडीआई बढ़ा है, लेकिन जहां चाइना में 4 परसेंट बढ़ा, यूरोप, यूएसए आदि में जहां सब जगह नेगेटिव रहा, सब जगह गिरावट आई, वहीं भारत में 13 परसेंट एफडीआई में वृद्धि हुई है । यह यूनाइटेड नेशन्स काँफ्रेंस ऑन ट्रेड एंड डेवलपमेंट की रिपोर्ट है । उस 13 परसेंट की देन क्या है- India’s FDI inflow in 2020 was 57 billion dollar which comes to Rs.4,37,000 crore, which is 13 per cent more than what it was in 2019. इसकी चर्चा इन्होंने नहीं की । अधीर रंजन जी कांग्रेस के एक जिम्मेदार नेता हैं । पार्लियामेंट्री डेमोक्रेसी में जितना रूलिंग पार्टी का रोल होता है, उतना ही अपोजिशन का भी रोल होता है । यह शैडो गवर्नमेंट का काम करती है । इनको केवल आलोचना ही नहीं करनी चाहिए, बल्कि गवर्नमेंट की उपलब्धियों, कमियों, दोनों की चर्चा करनी चाहिए । हमारा मैक्सिमम इन्वेस्टमेंट किस चीज में हुआ- हमारा मैक्सिमम इन्वेस्टमेंट डिजिटल सेक्टर में हुआ । माननीय प्रधान मंत्री जी लगातार डिजिटल सेक्टर पर जोर दे रहे हैं । इसके अलावा कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर में हुआ, हार्डवेयर एंड सर्विसेज सेक्टर में हुआ, which includes banking, insurance, outsourcing, research and development, technology, testing and analysis. इसी के अंतर्गत डिपार्टमेंट ऑफ प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्रीज एंड इंटरनेशनल पेड सर्विसेज भी है । आज हमारे लिए सौभाग्य की बात है और पूरे देश के लिए संतोष का विषय है कि आज भारत फाइनेंशियल सर्विसेज में पूरे विश्व का हब बनने जा रहा है । यह माननीय प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में संभव हो सका है । आज पूरी दुनिया के लोग भारत को निवेश की दृष्टि से सबसे ज्यादा सुरक्षित देश मान रहे हैं और समझ रहे हैं कि यहां इसके लिए एक अच्छा वातावरण है । आज जहां भारत की इस तरीके से तारीफ हो रही है, वहीं ये कहते हैं कि क्या किया । एक तरफ अनेक चुनौतियां थीं, उसके बावजूद भी ‘प्रधान मंत्री गरीब कल्याण पैकेज’ में हमने 42 करोड़ लोगों को इस लॉकडाउन के बावजूद भी 70 हजार डायरेक्ट बेनिफिट स्कीम से हमने ट्रांसफर किया । कोरोना के समय जब लॉकडाउन हुआ था, लोग घरों में थे, रेहड़ी वालों, पटरी वालों को दिक्कत हुई, मजदूरों को दिक्कत हुई और पूरी दुनिया में लोग ब्रेड-बटर के लिए सड़कों पर आ रहे थे, उस समय कोरोना की वैश्विक चुनौती के बावजूद भी माननीय प्रधान मंत्री जी ने कहा था कि अगर एक साल भी लोगों को लॉकडाउन में रहना पड़ा, तो भी भारत का कोई भी व्यक्ति भूखा नहीं मरने दिया जाएगा ।
          सभापति महोदया, मैं कहना चाहता हूं कि उसके बावजूद भी 31 हजार करोड़ रुपये केवल डीबीटी के माध्यम से ‘प्रधान मंत्री जन-धन योजना’ के तहत ट्रांसफर किए गए ।  21 करोड़ रुपये उन महिलाओं के खाते में गया । इसी तरह से 2,800 करोड़ रुपया नेशनल सेविंग में, पेंशन में दिया गया । 9 करोड़ किसानों को प्रधान मंत्री किसान सम्मान निधि में 18 हजार करोड़ रुपया दिया । 2 करोड़ लोगों को, जिस तरीके से उनके खातों में एक-एक हजार रुपया दिया गया, 5 हजार करोड़ रुपया दिया गया । इसी तरीके से 9,700 करोड़ रुपया उज्ज्वला के लाभार्थियों को दिया गया ।
हम आज कहना चाहते हैं कि जब कांग्रेस, यूपीए की सरकार थी तो रोज कोलगेट की चर्चा होती थी, कभी डिफेंस डील की चर्चा होती थी, कभी कॉमनवेल्थ गेम्स की चर्चा होती थी । आप देखिए कि वर्ष 1940 में एचएएल की स्थापना हुई थी, उस समय सेठ वालचंद हीराचंद जी ने की थी । वर्ष 1951 में वह मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस के अंडर में आ गया । मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस में जब अटल जी आए तो उन्होंने वर्ष 2004 में एक तेजस डिपार्टमेंट खोला । हमारी सरकार जब मोदी जी के नेतृत्व में आई तो एक सेपरेट डिविजन एलसीए तेजस डिविजन का बेंगलुरु में खोला गया और वर्ष 2016 में एक फर्स्ट तेजस इंडियन एयरफोर्स यूनिट नम्बर 45 स्क्वॉड्रन बनाया गया । पहले बड़े-बड़े डील होते थे, हम बाहर से जहाज मँगाते थे, आज तो निश्चित तौर से इसका उल्लेख होना चाहिए कि अब हिन्दुस्तान के लोग इस बात पर गर्व कर सकते हैं कि जो हम हजारों करोड़ डॉलर्स देते थे और बाहर से जहाज मँगाते थे, आज हम आत्मनिर्भर भारत में 47 हजार करोड़ रुपये के अपने हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड से लड़ाकू जहाज खरीदने जा रहे हैं । भारत का पैसा भारत में है । क्या यह कम बड़ी उपलब्धि है? हमारे सवाल पर डिफेंस मिनिस्टर साहब का जवाब आया था कि हम अपने रक्षा के 101 उपकरणों को निश्चित तौर से अपने देश में ही बनाएंगे । इसके पहले ऐसी कल्पना क्यों नहीं हो सकती थी? यह हम आत्मनिर्भर भारत की तरफ बढ़ रहे हैं । मुझे लगता है कि पूरे सदन में राष्ट्रपति जी के अभिभाषण और सरकार की उपलब्धियों पर चर्चा कम हो रही है और किसानों की चर्चा बार-बार हो रही है । आखिर किसानों की चर्चा बार-बार किसलिए हो रही है? किसान की चर्चा बार-बार इसलिए हो रही थी कि किसान आन्दोलन हो रहा है और सरकार कुछ कर नहीं रही है । मैं कह रहा हूँ कि जब यह बिल पास हुआ, यहाँ भी 5 घंटे चर्चा हुई थी, उस सदन में भी चर्चा हुई थी । मैंने भी चर्चा में भाग लिया था । जब आन्दोलन शुरू हुआ तो तीन सवाल उठाए गए । कहा गया कि अगर यह बिल रहेगा तो मिनिमम सपोर्ट प्राइस समाप्त होने जा रहा है । दूसरी बात कही गयी कि अगर यह बिल वापस नहीं हुआ तो इससे किसानों की मंडियाँ समाप्त हो जाएंगी । जो तीसरा कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग का बिल है, उसमें कहा गया कि उसमें किसानों की जमीन  का स्वामित्व कॉरपोरेट हाउसेज को हो जाएगा । इन तीन सवालों को लेकर आन्दोलन हुआ । यह भ्रम पैदा हुआ । उस पर जब कृषि मंत्री जी ने कहा, यहाँ तक कि प्रधान मंत्री जी ने कहा कि हमारा एमएसपी जारी रहेगा ।
इस सदन में निर्मला सीतारमण जी जब बजट प्रस्तुत कर रही थीं, तो उस समय उन्होंने क्या कहा, उन्होंने कहा कि वर्ष 2005 में डॉ. स्वामीनाथन की रिपोर्ट प्रस्तुत हुई थी, वर्ष 2004 में अटल जी ने उनके आयोग का गठन किया था, वह रिपोर्ट लगातार कांग्रेस, यूपीए की सरकार में पड़ी रही । वह स्वामीनाथन की रिपोर्ट यह थी कि किसानों की जो उपज है, जो उसकी लागत आए, उत्पादन मूल्य आए, किसान को उसका डेढ़ गुना दिया जाएगा । यह गारंटी तो सदन में पहली बार नरेन्द्र मोदी की सरकार ने देश के किसानों को दी है ।   
          मैं सोचता हूँ कि पार्टियों के लोग जिम्मेदार हैं । उन्होंने इस पर नहीं कहा कि आज प्रधान मंत्री ने कह दिया, वित्त मंत्री ने कहा कि एमएसपी पर हम डेढ़ गुना देंगे, मंडी समितियाँ रहेंगी, एक हजार मंडियों को इलेक्ट्रॉनिक नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट से जोड़ दिया, एक हजार मंडियाँ और जोड़ने जा रहे हैं और स्वामित्व में केवल क्रॉप का समझौता होगा । ये सारी बातें स्पष्ट हो गईं । इसके बाद भी कहा जा रहा है कि किसानों से बात नहीं हो रही है, प्रधान मंत्री जी को… * है । मैं कहना चाहता हूँ कि 12 बार कृषि मंत्री जी ने बात की, पीयूष गोयल जी ने बात की कि उसमें कौन सा प्रावधान है, संशोधन करने की बात कही जा रही है । अधीर जी,…* किसको कहते हैं? अगर…* होता तो आज प्रधान मंत्री किसान सम्मान निधि में देश के 10 करोड़ किसानों को जिस तरीके से पहली बार 6 हजार रुपये प्रति किसान परिवार को लगातार दिया जा रहा है । गाँव के छोटे-छोटे जिस तरह से 86 प्रतिशत लघु और सीमांत कृषक हैं, जिनके पास बीज खाद का पैसा नहीं है, आज उनको पहली बार स्वावलंबी बनाने का काम नरेन्द्र मोदी जी की सरकार कर रही है ।
22.00 hrs मैं एक बात कहना चाहता हूं । आज अहंकार वह भूल गए कि जब सरकार में थे, प्रधान मंत्री जी कैबिनेट से विधेयक पारित करें, चुनी हुई सरकार थी और उस विधेयक को उनके नेता राहुल गांधी फाड़ देते थे, पूरे देश के लोगों को शर्मसार करते थे कि अपनी सरकार के कानून पारित किए हुए उस विधेयक को फाड़ने का काम कर रहे हैं । शायद वह अहंकार था । उसको उनको नहीं करना चाहिए था ।
          उन्होंने अम्बेडकर जी की बात कही । उन्होंने गांधी जी से कहा । उन्होंने उनकी योग्यता पर कॉन्स्टीट्यूएंट असेम्बली का चेयरमैन बनाया । पूरे देश की उस आज़ादी की लड़ाई में वह योग्य थे, अम्बेडकर जी बने और मैं कहता हूं कि अगर अम्बेडकर जी को सम्मान देने की बात थी तो फिर कांग्रेस को जवाब देना पड़ेगा कि अगर उनको सम्मान दिया था तो अम्बेडकर जी ने नेहरू जी की सरकार से सितम्बर, 1951 में इस्तीफा क्यों दिया? देश की जनता इसका जवाब चाहेगी । देश की जनता इसका भी जवाब चाहेगी, क्योंकि बात उन्होंने कही है कि आज डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी, जिनको पूरा विश्व पूजता है, जिस तरह से प्रधान मंत्री जी ने कहा कि मैं मुख्य मंत्री था तो मैं उस संविधान को सिर पर लेकर गुजरात की सड़कों पर चलता था । उसी संविधान ने हमको या किसी को, संसद सदस्य के रूप में या सरकार में या प्रतिपक्ष में आप बैठे हुए हैं, भेजा है । उस संविधान की बात हम करें और आज उस योग्य व्यक्ति को कितने लोग, अनअपोज कितनी बार जीत कर आएं । जब अम्बेडकर जी ने चुनाव लड़ा तो दो-दो बार अम्बेडकर जी पार्लियामेंट न पहुंच सकें, इसको रोकने का काम अगर किसी ने किया है तो कांग्रेस पार्टी ने किया है । इसका भी जवाब दीजिएगा ।
You must try to listen, Mr. Suresh. Either you or your leader must respond to what I have said. I think you will try to understand. The candidature of Ambedkar Ji was blocked twice. You had fielded a candidate against him. You are responsible. Who has ensured his defeat? आपको देश माफ करेगा । आपने अम्बेडकर जी को चुनाव हरवाया,   जिसने   देश   को संविधान   दिया  हो,   आप   बात   करते हैं ।…(व्यवधान) I am not yielding. Why are you standing? …(Interruptions) I am not yielding.
   
HON. CHAIRPERSON : Suresh Ji, please be seated. Nothing will go on record.
…(Interruptions) …* श्री जगदम्बिका पाल : मैं एक बात और कह देना चाहता हूं । …(व्यवधान) आप वकालत कर रहे हैं ।…(व्यवधान) महोदया, सदन में जो चर्चा हुई, उसकी बात है । मैं बस दो मिनट में खत्म कर रहा हूं ।
माननीय सभापति : दो मिनट नहीं, आप खत्म कीजिए ।
श्री जगदम्बिका पाल: महोदया, मैं एक मिनट में अपनी बात खत्म कर रहा हूं । मैं कहना चाहता हूं कि सदन में जो चर्चा हुई, देश को गुमराह नहीं करना चाहिए ।…(व्यवधान) ग्रेटा थनबर्ग की चर्चा हुई या रिहाना की चर्चा हुई । आज वह उनकी वकालत कर रहे हैं कि देश उनके पीछे पड़ गया । आज किसान, फार्मर्स की नीति पर अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा कि “Indian farm reforms would increase market effectively and will attract private sector investment”. International Monetary Fund Communication Director Gerry Rice said, “We believe the Farm Bills do have the potential to represent a significant step forward for agricultural reforms in India.  The measures will enable farmers to directly contact with sellers, allow farmers to retain a greater share of the surplus by reducing the role of middlemen, enhance efficiency and support rural growth”. उसके बाद जो बाइडन तारीफ करे, आईएमएफ तारीफ करे, पूरी दुनिया तारीफ करे । टूलकिट क्या है? कांग्रेस के नेता को बताना पड़ेगा कि टूलकिट क्या है,जिसमें स्टेप बाय स्टेप भारत के खिलाफ एक प्रोपेगेंडा की बात कर रहे हो । जबकि आज भारत की दुनिया में इमेज बढ़ रही हो । महोदया, मैं एक बात कहकर अपनी बात खत्म करूँगा । अगर पूरी दुनिया में भारत की इमेज बढ़ रही हो, पूरी दुनिया के स्टेट्समैन तारीफ कर रहे हो,उस समय चाहे ग्रेटा थनबर्ग हो, चाहे रिहाना हो, अगर वह टूलकिट बना कर और भारत की छवि को दुनिया में प्रोपेगेंडा करके खराब करना चाहेंगे, अगर ये भारतीय हैं, राष्ट्रभक्त  हैं, तो इनको भारत के साथ खड़ा होना होगा, अन्यथा उनकी बात करें ।…(व्यवधान)
माननीय सभापति : आपने मिया खलीफा का नाम क्यों नहीं लिया?
श्री जगदम्बिका पाल: महोदया, मैं बहुत जिम्मेदारी की बात कह रहा हूं ।…(व्यवधान)
माननीय सभापति : श्री मनीष तिवारी ।
श्री जगदम्बिका पाल: महोदया, मैं आपसे कहना चाहता हूं कि आज विदेशों में ।…(व्यवधान)
 
*श्री चन्देश्वर प्रसाद (जहानाबाद): मैं राष्ट्रपति महोदय के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का समर्थन करता हूं । गरीब के कल्याण के लिए सरकार बने और उसके साथ-साथ महिला और अति पिछड़ों का सशक्तीकरण हो, किसानों के लिए काम हो, देश की सीमाएं सुरक्षित हों और पूरी दुनिया में देश का सम्मान बढ़े । हम सब यही चाहते हैं ।
          कोरोना महामारी के दौर में आर्थिक पैकेज दिए गए और केंद्र एवं राज्य सरकारों ने इस बात का भी ध्यान रखा कि किसी गरीब को भूखा न रहना पड़े । इस दौरान 80 करोड़ लोगों को आठ महीने तक मुफ्त अनाज, गरीब महिलाओं के जनधन खातों में 31 हजार करोड़ रुपये भेजे गए और महिलाओं को 14 करोड़ से अधिक मुफ्त गैस सिलेंडर भी दिए गए । आज भारत में दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चल रहा है ।
          भारत सरकार ने 381 स्कीमों में पिछले छ: सालों में डीबीटी के माध्यम से अब तक 13 लाख करोड़ रुपये लाभार्थियों के खाते में भेजे हैं । इसमें से रिकॉर्ड सवा दो लाख करोड़ रुपये कोरोना काल में गरीबों के खाते में भेजे गए ।
          आज बिहार में नीतीश बाबू की सरकार और मोदी जी की सरकार एक ऐसे समाज के निर्माण में लगी है, जिसमें सभी सम्प्रदायों के गरीबों, दलितों, अति-पिछड़ों, महिलाओं, युवाओं, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों का सर्वांगीण विकास हो रहा है और उस विकास का लाभ समाज के आखिरी छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंच रहा है ।
          मुद्रा योजना, उज्ज्वला योजना, नए एम्स को मंजूरी, शौचालयों का निर्माण, स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग पर ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान, लघु सिंचाई योजना, प्रधानमंत्री कृषि सम्मान निधि, कृषि बीमा, मत्स्य योजना, खाद्यान्न उत्पादन, आधारभूत ढांचे के विकास के लिए निवेश जैसे कार्यक्रमों में सफलता मिली है और आम आदमी का जीवन बेहतर हुआ है ।
          इस अवसर का उपयोग करते हुए मैं अपने संसदीय निर्वाचन क्षेत्र की कुछ समस्याओं की ओर आपके माध्यम से भारत सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा । जहानाबाद-गया रूट पर कोरोना के कारण रेलगाड़ियों का आवागमन रोका गया, परन्तु अब तक उन्हें दोबारा नहीं चलाया गया है । इससे यात्रियों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है । अत: रेलगाड़ियों का आवागमन पुन: कोरोना से पहले की तरह किया जाए ।
          मानपुर इस्लामपुर रेल लाइन के लिए सर्वे हो गया है, परन्तु चार वर्ष बीतने के बाद भी अब तक यह परियोजना आरम्भ नहीं हो पाई है । इस रेल मार्ग का निर्माण किया जाए । जहानाबाद संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत अतरी विधान सभा क्षेत्र सहित अरवल एवं जहानाबाद जिलों में कृषि उत्पाद प्रचुर मात्रा में उपलब्ध रहते हैं । वहां खाद्य प्रसंस्करण उद्योग लगाए जाएं । जहानाबाद, अरवल एवं गया के कई क्षेत्रों जैसे बराबर की पहाड़ियों एवं उसके इर्द-गिर्द में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं । इसके लिए योजना बनाकर टूरिस्ट इंफ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराया जाए ।
          जहानाबाद एवं अरवल में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल बनाया जाए । हमारे यहां पेयजल का संकट बना रहता है, इसके लिए इन क्षेत्रों को अध्ययन कर, एक विस्तृत योजना बनाकर यहां के लोगों को पेयजल की सुविधा दी जाए । अरवल जिला मुख्यालय में क्षेत्रवासियों के बच्चे, पोस्ट ऑफिस, एलआईसी, बैंक, बीएसएनएल में कार्यरत कर्मचारियों के बच्चे सीबीएसई बोर्ड से शिक्षा प्राप्त करने से वंचित हैं । यहां के छात्रों की समस्या को देखते हुए अरवल जिला मुख्यालय में एक केन्द्रीय विद्यालय खोला जाए ।
          मैं पुन: माननीय राष्ट्रपति जी के अभिभाषण का समर्थन करते हुए सरकार द्वारा किए जा रहे कार्यों की प्रशंसा करता हूं । बहुत-बहुत धन्यवाद ।
       
*श्री नायब सिंह सैनी (कुरुक्षेत्र): मैं माननीय महामहिम राष्ट्रपति जी द्वारा संयुक्त सदनों के अधिवेशन में अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के समर्थन में खड़ा हुआ हूँ ।
जैसा कि माननीय राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में उल्लेख किया है कि “संसद के आप सभी सदस्य, हर भारतवासी के इस संदेश और इस विश्वास के साथ यहां उपस्थित हैं कि चुनौती कितनी ही बड़ी क्यों न हो, न हम रुकेंगे और न भारत रुकेगा ।” इसमें कोई संदेह नहीं है । माननीय प्रधानमंत्री जी के सफल प्रयासों से आज हमारे देश की एक मजबूत छवि पूरे विश्व पटल पर उभरकर आई है । भारत अपनी वैश्विक जिम्मेदारियों को इस कोरोना काल में भी जिस गंभीरता से निभा रहा है, उससे आज सम्पूर्ण विश्व हमारी तरफ आशा और उम्मीद भरी निगाहों से देख रहा है ।
महामहिम राष्ट्रपति जी द्वारा अपने अभिभाषण में अपने देश के विशेष और महत्वपूर्ण व्यक्तियों  का उल्लेख किया गया है, जिनकी इस देश के निर्माण में बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका रही है । वैसे भी “बात” उन्हीं की होती है जिनमें कोई “बात” होती है ।
जैसा कि हम सभी जानते हैं कि महापुरुषों की पहचान उनके द्वारा किए गए कार्यों से समाज में आने वाले परिवर्तनों से ही किया जाता है । अपने देश में हुए अनेक महापुरुषों एवं देश की आजादी में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीरों के बारे में यदि पढ़े तो यह पता लगता है कि उन सब लोगों में “राष्ट्र प्रथम” की भावना थी ।
आज पूरी दुनिया में भारत का डंका बज रहा है । हाल के दिनों में कई ऐसे फैसले भी लिए गए, जो देश के विकास में बड़े बाधक थे । वर्ष 2014 में पीएम बनने के बाद से लेकर अब तक के फैसलों के आधार पर हम कह सकते हैं कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी में भी “राष्ट्र प्रथम” की भावना झलकती है ।
“जाकी रही भावना जैसी, प्रभु मूरत देखी तिन तैसी ।” बीते वर्षों में संसद ने काम करने के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं । संसद के साथ-साथ सरकार ने भी काम करने के नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं । चाहे वह जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370, धारा 35A हटाने की बात हो या फिर मुस्लिम महिलाओं को ट्रिपल तलाक जैसी कुरीतियों से छुटकारा दिलाने की बात हो या अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला और विभिन्न वैश्विक सूचकांकों जैसे कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, ग्लोबल इनोवेशन इंडेक्स में बढ़त सरकार की उपलब्धियां हैं ।
 “लोकतंत्र में सबसे पवित्र होता है, लोगों से मिला जनादेश । देश की जनता ने मेरी सरकार को ये जनादेश, नए भारत के निर्माण के लिए दिया है ।” यह सच है कि देश की जनता ने 2019 के लोक सभा चुनावों में भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार को भारी जनादेश के साथ सत्ता में वापसी कराई । देश की जनता ने माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व वाली सरकार में विश्वास जताया और देश की जनता ने देश का नेतृत्व एक मजबूत नेतृत्वकर्ता के हाथों में दिया, ताकि नए भारत का निर्माण मजबूती से हो सके ।
आज देश की जनता ने नए भारत के निर्माण के लिए अपनी प्रतिबद्धता को दिखाया है । इस प्रतिबद्धता को कायम रखने के लिए माननीय प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में सरकार ने कई अहम फैसले लिए हैं, जो देश में बहुत लंबे समय बाद किए गए, जो कि पहले की सरकारों में भी किए जा सकते थे । जैसे, दिल्ली के 40 लाख से ज्यादा लोगों, जिनमें बड़ी संख्या में यहां पूर्वी और उत्तर-पूर्वी दिल्ली के लोग हैं, उन्हें उनके जीवन की सबसे बड़ी चिंता से हमारी सरकार ने मुक्त किया है । जिन लोगों ने सोचा नहीं था कि वे अपने जीवन में कभी अपने घर की रजिस्ट्री करा सकेंगे, अब वो अपने घर का सपना सच होते हुए देख रहे हैं ।
·      70 सालबादआर्टिकल 370 से मुक्तिमिली ।  

·      70 सालबादरामजन्मभूमिपरफैसलाआया ।  

·      70 सालबादकरतारपुरसाहबकॉरिडोरबना ।   

·      70 सालबादभारत-बांग्लादेशसीमाविवादकाहलहुआ ।  

·      सीएएसेहिंदुओं-सिखों-इसाइयोंकोनागरिकताकाअधिकार 70 साल बादमिला ।  

·      शहीदजवानोंकेलिएदेशमेंनेशनलवॉरमेमोरियल 50-60 साल बादबना ।   

·      शत्रुसंपत्तिकानून 50 साल बादलागूहुआ ।   

·      बोडोआंदोलनकासमाधानकरनेवालासमझौता 50 साल बादहुआ ।   

·      पूर्वसैनिकोंकोवनरैंकवनपेंशनकालाभ 40 साल बादमिला ।   

·      शहीदपुलिसकर्मियोंकेलिएनेशनलपुलिसमेमोरियल 50-60 साल बादबना ।   

·      84 केसिखनरसंहारमेंदोषियोंकोसज़ा 34 साल बादमिली ।   

·      वायुसेनाकोनेक्स्टजनरेशनलड़ाकूविमान 35 साल बादमिला ।   

·      बेनामीसंपत्तिकानून 28 साल बादलागूहुआ ।   

·      त्रिपुरामेंब्रूशरणार्थियोंकेसमझौता 23 साल बादहुआ ।  

·      चीफ ऑफडिफेंसस्टाफकागठन 23 साल बादहुआ ।  

·      देश मेंजीएसटी 17 साल बादलागूहुआ ।  

आज देश आगे बढ़ चला है । आज देश में अटके और लटके विवादों और विषयों का समाधान तो हो ही रहा है, कई ऐसे फैसले भी लिए गए, जो पहली बार हुए हैं । जैसे, ·      पहलीबार,लालबत्तीकेरौबसेभारतीयोंकोमुक्तिमिली ।
·      पहलीबार,सामान्यवर्गकेगरीबोंकोआरक्षणकाअधिकारमिला ।  

·      पहलीबार,पांचलाखरुपएतककीआयपरइनकमटैक्सज़ीरोहुआ ।   

·      पहलीबार,कालेधनकीहेरा-फेरीकरनेवालीसाढ़ेतीनलाखसंदिग्धकंपनियोंकोतालालगा ।  

·      पहलीबार,उद्यमियोंकोबिजनेससेसम्मानजनकएग्जिटकामार्गदेनेवालाआईबीसीकानूनबना ।   

·      पहलीबार,देशकेहरकिसानपरिवारकेबैंकखातेमेंसीधीमददमिली ।  

·      पहलीबार,किसानों,मज़दूरों,छोटेव्यापारियोंकोपेंशनकीसुविधामिली ।  

·      पहलीबार, 50 करोड़ गरीबोंकोपांचलाखरुपएतककेमुफ्तइलाजकीसुविधामिली ।  

·      पहलीबार, 10 करोड़ गरीबपरिवारोंतकटॉयलेटकीसुविधापहुंची ।  

·      पहलीबार, 8 करोड़ गरीबबहनोंकीरसोईमेंगैसकामुफ्तकनेक्शनपहुंचा ।  

·      पहलीबारढाईकरोड़सेज्यादालोगोंकेघरोंमेंबिजलीकनेक्शनपहुंचा ।  

·      पहलीबार,नाबालिगोंसेरेपकेकेसमेंफांसीकीसज़ाकाप्रावधानहुआ ।  

·      पहलीबार,देशकोलोकपालभीमिला ।  

 “हमें यह हमेशा याद रखना चाहिए कि किसी भी विचारधारा के नेता या समर्थक होने से पहले हम देश के नागरिक हैं । हमारे देश की प्रतिष्ठा हमारी दलीय प्रतिबद्धताओं से कहीं बढ़कर है ।” मैं सदन में उपस्थित सभी लोगों से निवेदन करता हूँ कि माननीय राष्ट्रपति जी के अभिभाषण का समर्थन करते हुए अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव को सफल बनायें ।
   
श्री मनीष तिवारी (आनंदपुर साहिब): सभापति महोदया, मैं राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा में हिस्सा लेने के लिए खड़ा हुआ हूं ।
          महोदया, किसी भी सरकार का मूल्यांकन पांच बिंदुओं पर किया जाता है । सबसे पहले राष्ट्रीय सुरक्षा; दूसरा, आर्थिक विकास; तीसरा, संस्थाओं की स्वायत्ता; चौथा, साम्प्रदायिक सौहार्द और पांचवां विदेश नीति है । लेकिन इससे भी ऊपर एक मूल्यांकन है कि किसानों का मान, सम्मान और कल्याण । आज 70 दिन हो गए हैं और भारत के किसान दिल्ली की सरहदों पर बैठे हुए हैं । अगर कृषि से संबंधित ये कानून इतने ही अच्छे हैं, इतने ही किसान हितैषी हैं, तो सरकार को अपने आप से यह सवाल पूछना चाहिए कि भारत के किसान फिर सड़क पर क्यों बैठे हैं? क्या किसानों को इस बात का शौक है कि इतनी ठंड और कोरोना महामारी के बीच, अपने घर-परिवार को छोड़कर यहां आकर आंदोलन करें । वे इसलिए आंदोलन कर रहे हैं कि उनके जो हक सरकार छीनने जा रही है, वे हक सदियों की लड़ाई के बाद उनको मिले हैं ।
22.06 hrs.                            (Shrimati Rama Devi in the Chair)           मैं इस सरकार को याद कराना चाहता हूं कि जब अंग्रेजी साम्राज्यवाद था । अंग्रेजी साम्राज्यवाद के समय में जमींदारी, रैयतवारी, माहलवारी ने किसान की कमर तोड़ दी थी । जब भारत की आजादी का आंदोलन चल रहा था तो राजनीतिक आजादी के साथ-साथ एक बहुत बड़ी मांग आर्थिक आजादी की भी थी और उस आर्थिक आजादी का केन्द्र बिंदु यह था कि जो जमीन है वह किसान को दी जाएगी, जिसको अंग्रेजी में कहते हैं- लैण्ड टू द टिल्लर्स । मैं आपको याद कराना चाहता हूं कि वर्ष 1936 में जब कांग्रेस की सरकारें विभिन्न प्रदेशों में बनीं तो उस समय भी जमीन सुधार के कानून लाए गए थे क्योंकि किसान को उसकी जमीन का मालिक बनाया जाए । वर्ष 1947 में आजादी के बाद जो सबसे बड़ी पहल कांग्रेस की सरकार ने की, वह जमीन सुधार के रूप में की थी । जिसके कारण विभिन्न प्रदेशों में किसान अपनी भूमि के मालिक बन गए । इस सदन में पहले आम चुनाव के बाद जो पहला संसदीय संशोधन लाया गया था, उसका मुख्य उद्देश्य यह था  कि जमीन सुधार कानूनों को पटना हाई कोर्ट की खण्डपीठ ने अवैध ठहराया था । उस चीज को ठीक करने के लिए इस सदन में सबसे पहला संविधान संशोधन लाया गया था । उसके बाद वर्ष 1965 में एफसीआई का गठन हुआ और न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया गया और वर्ष 1974 में इस देश में हरित क्रांति आयी । इस हरित क्रांति से पहले भारत पीएल-480 के ऊपर निर्भर था । समुद्री जहाज से खाद्यान्न आता था और पूरे देश में बंटता था । इस मुल्क में खाद्यान्न सुरक्षा हुई । यह कोई छोटी उपलब्धि नहीं थी । आज सरकार ये जो कानून लेकर आयी है, इनसे किसान को सबसे बड़ी आपत्ति क्या है? सबसे बड़ी आपत्ति यह है कि जिस जमींदारी को वर्ष 1950 में समाप्त कर दिया गया था, उस जमींदारी को आप कम्पनीदारी से रिप्लेस करना चाहते हैं । आप किसान को बड़े घरानों के हाथों गिरवी रखना चाहते हैं । मैं आपको बताना चाहता हूं कि कैसे? चूंकि इस देश में 86 प्रतिशत छोटे किसान हैं । वर्ष 2015 में कृषि सैंसेस हुआ था, जिसमें यह पाया गया कि 86 प्रतिशत किसान के पास 5 एकड़ से कम भूमि है । अधिकतर किसानों के पास 2 एकड़ से कम भूमि है और एमएसपी के बावजूद छोटे किसान का पूरा परिवार काम करता है, तब कहीं जाकर वह 15000 रुपये महीना कमाता है । जब आप बड़ी कम्पनियों को, बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को कृषि क्षेत्र में आने का मौका देंगे तो जो छोटा किसान है, जिसके पास दो-तीन एकड़ भूमि है, उसकी इतनी क्षमता नहीं है कि वह इन बड़ी कम्पनियों से मुकाबला कर सके । भारत का किसान मान-सम्मान से जीता है और भारत के किसान को अपनी भूमि और इज्जत से लगाव है । इसीलिए इतनी बड़ी संख्या में पिछले दो महीनों से दिल्ली की सरहद पर लाखों-लाख किसान बैठे हुए हैं और सरकार से यह कह रहे हैं कि इन तीन कानूनों को वापस ले ।
मैं सरकार से यह कहना चाहता हॅूं कि आप प्रतिष्ठा पर मत खड़े होइए । जिनके लिए आपने कानून बनाए हैं, वे इस बात को नहीं मानते हैं कि वे कानून उनके हक में हैं । उनकी बात सुनिए । उनकी बात के ऊपर गौर कीजिए । उस पर ध्यान दीजिए और तुरंत इन तीनों काले कानूनों को वापस लीजिए, जिससे वह किसान अपने घर वापस जा सकें और अपने खेत-खलियान एक बार फिर से जोत सकें, यह सरकार का उत्तरदायित्व बनता है ।
          सभापति महोदया, मैं दूसरा जिक्र राष्ट्रीय सुरक्षा का करना चाहता हॅूं । पिछले नौ महीनों से भारत की सरहद के ऊपर, जो भारत की सरहद चीन के साथ है, उस पर तनाव है । रक्षा मंत्रालय की जून के महीने में एक रिपोर्ट आई थी । यह बहुत ही विचित्र और अद्भुत बात है कि दो दिन बाद वह रिपोर्ट रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट से आलोप हो गई । उस रिपोर्ट में लिखा था कि – “The Chinese aggression has been increasing along the Line of Actual Control and more particularly in Galwan Valley since 5th May, 2020. The Chinese side transgressed into the areas of Kugrang Nala, Gogra and the north bank of Pangong Tso lake on 17–18 May, 2020”.
        यह मैं नहीं कह रहा हॅूं । यह रक्षा मंत्रालय की वह रिपोर्ट, जो उनकी वेबसाइट के ऊपर पहले डाली गई और फिर आलोप हो गई, यह वह कह रही है । हम सबको मालूम है कि 15-16 जून, सन् 2020 को गलवान घाटी में क्या हुआ । हमारे 20 से ज्यादा सैनिक वीरगति को प्राप्त हो गए । Depsang, Hot Springs, Nakula, Upper Subansiri in District Arunachal Pradesh, खबर यह है कि चीन की फौज ने इन सभी इलाकों में घुसपैठ की है । इस मई से ले कर और आज फरवरी हो गयी, मई 2020 से फरवरी 2021 तक भारत सरकार और चीन सरकार में कई स्तरों पर बातचीत हुई है । कमाण्डर्स के स्तर पर बातचीत हुई है । विदेश मंत्री के स्तर पर बातचीत हुई है । राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के स्तर पर बातचीत हुई है ।
          सभापति जी, इस सदन की एक परंपरा रही है और परंपरा यह रही है कि जब भी ऐसी कोई संवेदनशील परिस्थति उत्पन्न होती है, तो सरकार सदन को पूरी तरह से भरोसे में लेती है । मैं आपको याद कराना चाहता हॅूं कि जब सन् 1962 की लड़ाई चीन के साथ हुई तो इसी सदन में 08 से ले कर 15 नवंबर, 1962 तक, जब लड़ाई चल रही थी, इस सदन में पूरी चर्चा उस सारे विषय के ऊपर हुई । वह चर्चा किसके अनुरोध पर हुई थी? वह चर्चा भारत के पूर्व प्रधान मंत्री, जो राज्य सभा के सांसद थे, सम्मानीय एवं स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी की पहल के ऊपर हुई थी । उसके बाद चाहे सन् 1965 हो, चाहे 1971 हो, चाहे सन् 1999 हो, जब भी भारत के ऊपर आक्रमण हुआ है, इस सदन में विस्तृत चर्चा उस सारे विषय के ऊपर हुई है । मैं सरकार से यह आग्रह करना चाहता हॅूं कि इस परिस्थिति को और इस सदन की जो परंपराएं हैं, उनको संज्ञान में लेते हुए, चीन के मुद्दे के ऊपर एक विस्तृत बहस इस सदन में बहुत आवश्यक है । मैं यह उम्मीद करता हॅूं कि जब प्रधान मंत्री जी इस अभिभाषण का जवाब देंगे, इस अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देंगे, जो चीन के साथ परिस्थिति है, जो पिछले आठ महीने से बॉर्डर के ऊपर तनाव है, जो खबरें हैं कि चीन ने भारत की सरजमीन में घुसपैठ की है, वे जरूर उसके ऊपर विस्तृत जानकारी दें ।
          सभापित महोदया, मैं दूसरे जिस मुद्दे पर आना चाहता हॅूं, वह है देश का आर्थिक विकास । आज 37 महीने हो गए कि अर्थव्यवस्था की जो वृद्धि दर है, वह निरंतर और लगातार गिरती जा रही है ।
इस सदन में बहुत चर्चा हुई कि लॉकडाउन की वजह से देश का बहुत फायदा हुआ । मैं बहुत ही अदब और सत्कार के साथ यह कहना चाहता हूं कि जिस तरह का लॉकडाउन भारत में किया गया था, उसके बगैर भी काम चल सकता था । बाकी एशियाई मुल्कों में जहां पर ऐसी भीषण परिस्थिति बनी, वहां पर भी इससे सरल लॉकडाउन से काम चला । मैं यह इसलिए कह रहा हूं क्योंकि अगर आप इन सारी चीजों को संज्ञान में लें तो पूरी दुनिया में एक करोड़ आठ लाख कोविड-19 के केसेज हैं । उनमें से 10.48 प्रतिशत जो केसेज हैं, वे सिर्फ भारत में हैं ।
          सभापति जी, मैं आपकी अनुमति से तीन मिनट का समय और लूंगा । मुझे दो बातें और कहनी हैं । पूरी दुनिया के केसेज का 10 प्रतिशत भारत में है । यह बात बिल्कुल सही है कि हमारा जो डेथ रेट है, वह भगवान की कृपा से कम रहा है । पर, इस चीज पर विचार करना चाहिए कि क्या यह सरकार की नीतियों की वजह से है या भारतीयों में जो इम्युनिटी है, क्या उसकी वजह से है?
          सभापति महोदया, मैं एक आखिरी बात हमारी संस्थाओं की इंडिपेंडेंस को लेकर और इसकी स्वायत्तता को लेकर कहना चाहूंगा । आज इस देश में एक धारणा बन गई है कि हमारी जो न्यायपालिका है, वह उस ढंग से काम नहीं कर रही, जिस ढंग से और जिस स्वायत्तता से उनको काम करना चाहिए और उसका सबसे बड़ा उदाहरण यह है । मुझे याद है कि वर्ष 1990 में जब मंडल कमीशन की सिफारिशों के खिलाफ इस देश में आंदोलन हुआ, मैं इस बात में नहीं जाना चाहता कि आंदोलन सही था या गलत था, पर जब उच्चतम न्यायालय ने 2 अक्टूबर, 1990 को उन सिफारिशों के ऊपर रोक लगा दी तो वह आंदोलन खत्म हो गया । आज जो किसान आंदोलन हो रहा है, उन कानूनों के ऊपर उच्चतम न्यायालय ने रोक लगा दी है, इसके बावजूद भी किसान घर नहीं जा रहे हैं । इसलिए न्यायपालिका को बहुत गम्भीरता से इस बात पर विचार करना चाहिए कि क्यों, इस देश के लोगों का भरोसा न्यायपालिका से उठता जा रहा है ।
माननीय सभापति: अब आप अपना भाषण समाप्त कीजिए ।
SHRI KODIKUNNIL SURESH (MAVELIKKARA): You have given 45 minutes to Shri Jagdambika Pal.
श्री मनीष तिवारी: सभापति महोदया, पाँच दिनों के बाद तो बहस शुरू हुई है । इतना महत्वपूर्ण बहस है । इसलिए मुझे थोड़ा-सा समय दे दीजिए ।
माननीय सभापति: आपको दूसरे का टाइम नहीं मिलेगा ।
श्री मनीष तिवारी: सभापति महोदया, हम आपस में एडजस्ट कर लेंगे ।
मैं कह रहा था कि न्यायपालिका को इस चीज पर बहुत गम्भीरता से विचार करना चाहिए कि इस देश का भरोसा न्यायपालिका के ऊपर से क्यों उठता जा रहा है ।
          अन्त में, मैं एक बात कहना चाहूंगा कि किसी भी सरकार का मूल्यांकन करने के लिए जो केन्द्र बिन्दु है, वह साम्प्रदायिक सौहार्द है । वर्ष 2014 से इस देश में एक ऐसा ध्रुवीकरण का माहौल बनाया गया है, चाहे वह ‘घर वापसी’ के माध्यम से हो, चाहे वह धर्म परिवर्तन का जो कानून है, इनके माध्यम से हो, कि इस देश में जो अल्पसंख्यक समुदाय है, वह अपने आपको इनसिक्योर महसूस करता है । यह मैं नहीं कह रहा, यह देश के पूर्व उप राष्ट्रपति श्री हामिद अंसारी जी का कहना है । इस बात की चिंता सरकार को करनी चाहिए ।
धन्यवाद ।
*DR. UMESH G. JADHAV (GULBARGA): I support the Address made by hon. President of India, Shri Ramnath Kovind ji, who has listed the series of achievement achieved by my Government under the able leadership of our beloved Prime Minister Shri Narendra Modi ji.
The hon. President has highlighted how our country had to come together over the last year to overcome several adversities, including Covid-19 pandemic, floods in various parts of the country including Karnataka, earthquakes, cyclones, locust attack and bird-flu. The country witnessed an unparalleled and indomitable courage, endurance and discipline of our countrymen. Most of the countries in the world appreciated us. The challenge was of livelihood and safe life of the people of the country. Even the United Nations is appreciative of the actions taken by the Government under Shri Narendra Modi, steps taken to tackle the COVID-19 pandemic in this country and also for helping the neighbouring countries. Sir, the country witnessed an unparalleled and indomitable courage to support the Government and to support the steps taken by the Government and come to near success of tackling this pandemic. Most of the countries in the world have been appreciative of this Government under the leadership of Shri Narendra Modi. Also, organisations like the World Health Organisation, countries like Brazil, have been appreciative of our Government for the corrective measures taken from time to time in this period of pandemic.
I would like to tell the House that my parliamentary constituency, Kalaburagi, has witnessed the 1st death in the country due to COVID-19 on 10th March 2020, all the samples of swabs were sent to Bangalore for the results, which was 600 kilometres from my constituency but it is my Government who has started COVID RTPCR Testing Center in Kalaburagi in lightning speed within the 8 days of the first death due to COVID-19. This example itself shows that how our leader Shri Narendra Modi ji is serious about each citizen of the country.
It is a matter of pride and great satisfaction for us that our country is running the biggest vaccination programme in the world. Presently, under this programme, both the vaccines, Covaxin of Bharat Biotech and Covishield of Serum Institute of India are being given to frontline workers and step by step these will be given to others also. I bow in respect of our scientists, medical professionals and pharma sector for achieving this unique distinction. Lakhs of doses of vaccines are being provided to other countries, including our neighbouring countries, like Nepal, Bangladesh, Sri Lanka, Afghanistan, the Seychelles and Mauritius. India has already sent 3.2 million free doses of vaccines to Bangladesh, Nepal, Bhutan and the Maldives.
'One Nation One Ration Card' was provided to make food grains available to all.  Also, Shramik special trains have been organised for the migrant labourers in various part of the country. These affirmative steps saved people from starvation during lockdown and pandemic period.
I would like to mention that an amount of Rs.31,000 crore was directly transferred to Jan-Dhan accounts of poor women. More than 14 crore gas cylinders were given free of cost throughout the country to poor woman beneficiaries under the Ujjwala Scheme.  Under the dynamic leadership of our Prime Minister, Shri Narendra Modi ji, the country demonstrated its scientific capabilities, technical expertise and strength of the Start-up eco-system by developing a network of about 2,200 laboratories in a short span of time and manufactured ventilators, PPE kits, test kits, etc. Under the 'AatmaNirbhar Bharat', the principle of this country is to make it self-reliant.  By following this principle, the real success has been shown by the Government led by Shri Narendra Modi. The Government talks about growth and wants to boost the infrastructure of our country, to increase productivity of agriculture, industry, to create jobs for all sections of the society, invest in road, railways, shipping and also to see that coal and power sectors play a pivotal role in the country's economy. The 'Vande Bharat Mission’ of this Government has been hailed universally. Our country has registered a record improvement in the ‘Ease of Doing Business’ ranking. India has moved up from 65 to 34 in World Tourism ranking.
Under the Pradhan Mantri Swasthya Suraksha Yojana, the Government has sanctioned 22 new AIIMS. I would like to thank our hon. Prime Minister Shri Narendra Modi ji that an ESIC Medical Complex has been Constructed at a cost of Rs.1400 crores on 50 acres of land at Kalaburagi. The said gigantic complex is occupied partly to the extent of 12 per cent leaving 88 per cent space vacant. The maintenance of such a huge complex with poor rate of occupancy has become a nightmare for the authorities. ESIC Kalaburagi constructed at a whopping cost of Rs.1400 crore from the tax payers' money cannot be left unutilised. Kalaburagi city, where this medical complex exists, is covered by special status under Article 371(J) and such an area with special status should get priority in matters of public facilities like AIIMS. This region is also the most backward region and all the Health Indexes are at an alarming point.
I would like to mention that without putting extra burden on the Government of India it is ideal to start AIIMS in ESIC Kalaburagi where the infrastructure and resources are readily available. However, the Government of India is obliged to sanction and establish a unit of AIIMS for all the States. ESIC Kalaburagi is ideal in all the way to be upgraded into AIIMS-like facility institute. Kalaburagi being regional headquarters of Public Administration and located on borders of Telangana and Maharashtra, is emerging as health hub in addition to educational hub. It is well connected with airway, railway and roadway. Therefore, I urge upon you to consider establishing AIIMS at ESIC, Kalaburagi.
With this I would like to conclude my speech by saying that the more people encourage the native businessman the more will manufacture and scale, and the society as a whole will blossom and will be self-reliant or AatmaNirbhar.  These feelings of joy will be the true feeling of AatmaNirbhar Bharat and Swasth Bharat; a feeling of no-dependency, no high costs racing, a feeling of buildings the nation with one's own hands; and contributing to nation’s development.
Thank you so much.
 
ADV. A.M. ARIFF (ALAPPUZHA): Madam, I express my strong disagreement over the contents of the hon. President’s Address. The mover of the Motion of Thanks has done only Modi’s stuti. Nothing more than that. That is why, I rise to oppose the contents of the Motion of Thanks.
          It is not so common for the Opposition parties to boycott the President’s Address as we witnessed this year. I believe the hon. President is aware of the circumstances that led to such an unprecedented incident. Yet, unfortunately, it is not even reflected in his Address.
The farmers of the country are in the streets for the past 75 days across the country protesting against the corporate-oriented agricultural reforms.
          Madam, what was the urgency to bring the three reform Bills, without any consultation or without giving opportunity for debate in the Parliament, by promulgating Ordinances when the whole country was fighting against COVID-19? The farmers are apprehensive of the reforms aimed at writing off the agriculture sector of this country to the corporates seriously affecting the income and livelihood of the farmers. Do the so-called Annadatas of the country not deserve a better treatment, Madam? It is disappointing that instead of acknowledging the reality behind the farmers’ protest, … *tried to justify the wrong doings of this insensitive Government in … * How can … * claim on behalf of the Government that Parliament approved the legislations after extensive consultation in Parliament? How can he forget that his own Government refused to send these legislations to a Select Committee for wider consultations even after repeated requests including from the ruling coalition partners in both Houses of Parliament? Instead of acknowledging the reasonable demands made by the farmers, the Government is trying to suppress the unparalleled uprising of the sons and daughters of the soil of this country by use of brutal force, imposing draconian laws and portraying them as anti-nationals.
          Madam, in paragraph 25, the hon. President reminds us that his Government holds in high esteem the values of democracy and sanctity of the Constitution. He also spoke at length about the Government’s respect for freedom of expression and peaceful agitations in a democratic set up. The farmers in Delhi have been agitating upholding these very principles in a peaceful and respectable manner all these days and even the tractor rally was conducted after reaching agreement with the Delhi Police and without affecting the grace of the Republic Day celebrations. But it is said that all of a sudden, a group of people allegedly reached the Red Fort and hoisted flags there. Is it possible to even approach the Red Fort without the support of the Delhi Police, breaching the strong security arrangements there especially on the Republic Day? Then, how come some mischievous elements hoist some other flags there without the Government’s secret support? I will not be surprised if someone suspects it as a plot of the Government itself to tarnish the image of the farmers using anti-social elements. Will the Government show the courage to order an independent inquiry into this incident to bring out the truth? I am not narrating more on this. I hope everybody will understand that this callous attitude of the Government towards the millions of farmers of this country led to boycotting the hon. President’s Address. Last week, a group of people claimed, as public attacked the peaceful farmers, their tents were forcibly removed and they were charged for vandalism and criminal conspiracy. Then, cases are lodged against the leaders, Members of Parliament including Dr. Shashi Tharoor and journalists. The Government is having an undeclared emergency in the country.
          Madam, let me now move to the other major issues in the President’s Address. Towards the end of his speech, the President raised as 87th point the issue of abrogation of Article 370 and claimed that the people of Kashmir have been empowered with new entitlements. But no one knows about the veracity of this claim and reports from there suggest just the opposite. How would one believe such a claim by this Government which cunningly circumvented the constitutional provisions in respect of Jammu and Kashmir by abolishing the State Assembly and taking over its role for abrogating the provisions of Article 370? I want to ask whether the Government will be ready to constitute an all-party delegation with proportionate representation to visit Kashmir and verify the truth behind this claim. If it has, at least, scant regard for democracy in Kashmir, let it come forward with this step.
 
          Madam, I would like to conclude now with a few lines from Deeno Dan poem of the great son of India, Rabindranath Tagore, which, I hope, will remind the Government of its hollowness. “In the very year in which twenty million of your subjects struck by terrible drought, the pauperized masses without any food or shelter came begging at your door crying for help, only to be turned away; they were forced to take refuge in forests, caves, camping under roadside foliage, derelict old temples.”           With these words, I oppose this Motion.
               
श्रीमती अनुप्रिया पटेल (मिर्जापुर): माननीय सभापति महोदया, महामहिम राष्ट्रपति महोदय जी के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव जो श्रीमती लॉकेट चटर्जी जी द्वारा प्रस्तुत किया गया, मैं उसके पक्ष में अपनी बात रखना चाहती हूं ।
          कोरोना महामारी के दौर में जहां सरकार के समक्ष एक ओर जनता के जीवन की सुरक्षा की चुनौती थी, वहीं दूसरी ओर आर्थिक सुरक्षा की भी चुनौती थी और हमारी सरकार ने दोनों ही मोर्चों पर सफल होकर दिखाया है । देश ने इस महामारी के दौर में, जान है तो जहान है, से लेकर जान भी और जहान भी, का सफर तय किया है । यह कोई साधारण उपलब्धि नहीं है कि कोरोना महामारी के दौर में दुनिया के तमाम देशों में भारत के अंदर मृत्यु दर सबसे कम रही और रिकवरी रेट सबसे ज्यादा रहा । आज हमारी अपनी 2 स्वदेश निर्मित कोवैक्सीन और कोवीशील्ड भी आ चुकी है और 16 जनवरी से दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान भारत में प्रारम्भ हो चुका है जिसके अंतर्गत 50 लाख लोगों का वैक्सिनेशन भी हम कर चुके हैं । इतना ही नहीं अपने देश की संस्कृति के अनुरूप हमने दुनिया के तमाम देशों को भी वैक्सीन की खुराकें उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को प्रारम्भ कर दिया है ।
          महोदया, माननीय प्रधान मंत्री जी ने आपदा को अवसर में बदलते हुए भारत को आत्मनिर्भर बनाने का आह्वान किया । इसके अंतर्गत यह हमारी उपलब्धि रही कि जो पीपीई किट्स और एन-95 मास्क्स भारत में पहले कभी नहीं बनते थे, वो भी हमने बनाना प्रारम्भ किया । ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत 29 लाख 87 हजार करोड़ रुपये के जिस आर्थिक पैकेज की घोषणा की गई, वह महज एक धनराशि नहीं थी, बल्कि एक ऐसा रोडमैप था, जिसके जरिए इनफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करते हुए, एमएसएमई सुदृढ़ करते हुए, अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने की दिशा भी तय की गई और दूसरी ओर यह चिंता भी की गई कि देश में कोई भी भूखा न सोए । इसके लिए इस धनराशि से 8 महीने तक लगातार 80 करोड़ लोगों को प्रतिमाह 5 किलो मुफ्त अनाज भी दिया गया, 14 करोड़ मुफ्त गैस सिलेंडर दिए गए, 31 हजार करोड़ रुपये गरीब महिलाओं के जन-धन खाते में ट्रांसफर किए गए और 6 राज्यों में गरीब कल्याण रोजगार अभियान चलाकर 50 करोड़ मानव दिवस रोजगार का सृजन भी किया गया । देश की अर्थव्यवस्था सरकार की दूरदृष्टि के कारण आज धीरे-धीरे पटरी पर वापस आ रही है । 11 प्रतिशत ग्रोथ रेट की बात आईएमएफ ने भी की है, इकोनॉमिक सर्वे ने भी की है । इसमें वी शेप रिकवरी हो रही है और जीएसटी का कलेक्शन भी बढ़ा है । इसका मतलब है कि हमारी अर्थव्यवस्था में ग्रीन सूट्स अब दिखाई देने लगे हैं । ऐसा लगता है कि 130 करोड़ देशवासियों की एकजुटता और हौसले से हम पुन: बेहतर स्थिति में जल्दी ही आएंगे ।
आर्थिक सुरक्षा और जीवन की सुरक्षा के साथ-साथ देश की सीमा की सुरक्षा भी एक बहुत बड़ा विषय बनकर उभरा है । सरकार ने पिछले 6 वर्षों में 7 पड़ोसी देशों से जुड़ी हुई 15 हजार किलोमीटर की हमारी   जमीनी सीमा और साढ़े   7   हजार   किलोमीटर की समुद्री सीमा पर बेजोड़ इनफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करके देश को सुरक्षित करने का भी संकल्प लिया है । वर्ष 2014 से वर्ष 2020 के बीच में सामरिक महत्व की 4,700 किलोमीटर की सड़कें और 15,000 पुल बनाए गए हैं । इसी क्रम में मनाली को लाहौल स्पीति से जोड़ने वाली दुनिया की 9 किलोमीटर लंबी, सबसे लंबी अटल टनल भी देश को समर्पित करने का काम माननीय प्रधान मंत्री जी ने किया है । सीमावर्ती क्षेत्रों की इन परियोजनाओं से सेना के लिए परिवहन और रसद आपूर्ति बेहद आसान होगी ।
इसके साथ ही सरकार ने डिफेंस सेक्टर में बहुत महत्वपूर्ण निर्णय किए हैं, जिसमें चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ का गठन और मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत देश में ही रक्षा उत्पादों के निर्माण को बढ़ावा दिया गया है । इसी कार्यक्रम के अंतर्गत उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में बहुत बड़ा डिफेंस कोरीडोर भी बनाया जा रहा है । नेशनल वॉर मेमोरियल की स्थापना की गई और तीनों सेनाओं  में लड़ाकू भूमिका में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने का काम हमारी सरकार ने किया है । इन सारे प्रयासों के कारण दुनिया के 138 देशों में भारत की सैन्य सामर्थ्य आज चौथे नंबर पर आ चुकी है । हमारी सरकार ने एक समर्थ सेना के जरिए सशक्त राष्ट्र को बनाने के लिए सेना के मनोबल और सेना के समर्थ, दोनों को बढ़ाने वाले निर्णय किए हैं । सामाजिक न्याय के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का उल्लेख भी माननीय राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में है । मैं इससे संबंधित दो-तीन महत्वपूर्ण विषय उठाना चाहती हूं ।
सबसे पहला विषय, अन्य पिछड़ा वर्ग के अलग मंत्रालय के गठन की बहुत वर्षों से हमारे देश में मांग हो रही है । मैं इस संबंध में कहना चाहती हूं कि वर्तमान समय में हमारे सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत ओबीसी कल्याण के विषय को देखा जाता है । इसके साथ ही ट्रांसजेंडर्स, ड्रग एडिक्ट्स, बैगर्स, सीनियर सिटीजंस, दिव्यांग और शेड्यूल्ड कास्ट, इन सबके विषयों को भी सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय देखता है, जिसके कारण वह ओवर लोडेड है । 
ओबीसी की आबादी देश में साठ प्रतिशत है और आबादी के साइज को देखते हुए यह संभव नहीं है कि सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ओबीसी के विषयों पर पर्याप्त अटेन्शन दे पाए । इसके साथ ही इस मंत्रालय के बजट का बहुत ही छोटा हिस्सा ओबीसी समाज के हितों के लिए मिल पाता है । इसलिए यह नितांत आवश्यक है कि पिछड़ा वर्ग का एक अलग मंत्रालय गठित किया जाए । जिस तरह जनजातीय कल्याण मंत्रालय अलग से बना, जिस तरीके से अल्पसंख्यक कल्याण मंत्रालय अलग से बना, उसी तरीके से यदि ओबीसी कल्याण मंत्रालय अलग से बनाएंगे तो निश्चित रूप से बैंक, पीएसयूज, ब्यूरोक्रेसी, सेक्रेटरी लेवल और यूनिवर्सिटीज में ओबीसी का प्रतिनिधित्व बढ़ेगा ।
          इसके साथ ही ओबीसी क्रीमिलेयर की आय सीमा छह लाख रुपये से बढ़ाकर पन्द्रह लाख रुपये तक बढ़ाने की सिफारिश वर्ष 2015 संसदीय समिति द्वारा की गई थी । सरकार द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति ने इसे बारह लाख रुपये तक करने का सुझाव दिया है ।
मेरा सरकार से आग्रह है कि सरकार ने पहले ही इस सीमा को छह लाख रुपये से बढ़ाकर आठ लाख रुपये कर दिया है । अब सरकार इसे पन्द्रह लाख रुपये तक बढ़ाने का काम करे । सरकारी नौकरियों में गजटेड दर्जा प्राप्त परिवारों को भी ओबीसी आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए । यह इसलिए जरूरी है क्योंकि स्पेशल रिक्रूटमेंट ड्राइव में कमियों के कारण ओबीसी का बैकलॉग आज तक पूरा नहीं हो पा रहा है । इसके साथ ही राज्य की प्रतियोगी परीक्षाओं का एक बड़ा विषय है । यहां तक की यूपीएससी की परीक्षा परिणाम में बहुत बड़ी विसंगतियां उजागर हुई है । जो भी एससी/एसटी और ओबीसी के अभ्यर्थी हैं, उनको इन परीक्षाओं को उतीर्ण करने में सामान्य वर्ग से ज्यादा कट ऑफ लाने पड़ रहे हैं, इन विसंगतियों को भी दूर करने की जरूरत है ।
          महोदया, आज जो सामाजिक और शैक्षणिक रूप से वंचित हैं, उन्हें उस वर्ग से ज्यादा कट ऑफ लाने पड़ रहे हैं, जो विकास की मुख्यधारा से हमेशा जुड़े रहे हैं । मेरा सरकार से अनुरोध है कि वह इन विषंगतियों को दूर करे ।
कोरोना महामारी के इस दौर में जलवायु परिर्वतन एक भीषण त्रासदी के रूप में हमारे सामने आया है । जलवायु परिवर्तन के नकारात्मक प्रभावों को कम करने के लिए वर्ष 2015 में पेरिस में एक समझौता हुआ । इसमें 189 देशों ने तापमान वृद्धि को दो डिग्री सेल्सियस पर रोकने का संकल्प लिया । जी-20 देशों में भारत ऐसा एक अकेला देश है, जिसने इस लक्ष्य को हासिल करके दिखाया है । ऐसा इसलिए संभव हो पाया क्योंकि भारत ने रिन्यूएबल एनर्जी यानी अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में बहुत अच्छा कार्य किया है, जिससे हम कार्बनडाइआक्साइड के उत्सर्जन में कमी ला पाए । इसके लिए भारत सरकार ने लगातार छह वर्षों में अक्षय ऊर्जा की क्षमता ढ़ाई गुना बढ़ायी है ।   आज अक्षय ऊर्जा की क्षमता 136 गीगावॉट है, जो हमारी कुल ऊर्जा क्षमता का 36 प्रतिशत है । सरकार ने 2022 तक 175 गीगावॉट और 2030 तक 450 गीगावॉट रिन्यूएबल एनर्जी प्रोडक्शन कैपिसिटी का लक्ष्य निर्धारित किया है । इसके लिए सभी घटक सौर, पवन, बायोमास और   पनबिजली जैसी परियोजनाओं पर सरकार काम कर रही है । यह बहुत ही सराहनीय कदम है ।
इसके साथ ही ईज ऑफ लिविंग के मंत्र पर आगे बढ़ते हुए हमारी सरकार प्रत्येक गरीब को घर, शौचालय, आवास और बिजली का कनेक्शन देने के बाद अब स्वच्छ पीने का पानी देने का संकल्प ले चुकी है । इसकी घोषणा माननीय प्रधानमंत्री जी ने लाल किले की प्राचीर से की । हर घर तक नल पहुंचाने के संकल्प के तहत प्रतिदिन एक लाख घरों को जोड़ते हुए आज हम पैंतालीस लाख घरों तक पहुंच चुके हैं और छह करोड़ परिवारों को नल का कनैक्शन दिया जा चुका है ।
यह मेरे लिए गर्व की बात है कि मेरे अपने संसदीय क्षेत्र मिर्जापुर और सीमा से सटा हुआ सोनभर्द जो उत्तर प्रदेश का आदिवासी बाहुल्य और बहुत पिछड़ा हुआ जिला है, जल जीवन मिशन की इस योजना से प्रभावित हुआ है । अंत में, मैं इतना ही कहना चाहता हूं कि करोड़ों भारतवासियों का जीवन स्तर ऊपर उठे, उनको गरिमा और सम्मानपूर्ण जीवन मिले । इसके लिए सरकार ने कई योजनाएं चलाई हैं और सुशासन के मंत्र पर निरंतर आगे बढ़ते हुए प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री जनधन योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना और गैर-राजपत्रित पदों के लिए साक्षात्कार खत्म करना, 1450 पुराने कानूनों को खत्म करना, ऑनलाइन आरटीआई, आधार लिंक बायोमेट्रिक हाजरी जैसे तमाम सुशासन के कार्य सरकार ने किए हैं । इसके लिए सरकार बधाई की पात्र है ।
मैं सरकार से एक अंतिम निवेदन करना चाहती हूं । हमारी सरकार ने कई मौकों पर ऑल इंडिया ज्यूडिशियल सर्विसेज के गठन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई है, यह दो कारणों से महत्वपूर्ण है । पहला, देश की तमाम अदालतों में न्यायधीशों की कमी है, जिसके चलते आम जनमानस का बहुत सारा समय और पैसा खर्च होता है और उनके मामलों का निपटारा समय से नहीं हो पाता है ।
इसके साथ ही साथ न्यायधिशों के पदों पर निचली अदालत से लेकर सर्वोच्च अदालत तक समाज के सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित नहीं हो पाई है । इन दोनों लक्ष्यों की पूर्ति के लिए मैं सरकार से अखिल भारतीय न्यायिक सेवा के गठन की मांग करते हुए महामहिम राष्ट्रपति जी को पुन: धन्यवाद देते हुए अपनी बात को समाप्त करती हूं । बहुत-बहुत धन्यवाद ।
     
श्री उदय प्रताप सिंह (होशंगाबाद): धन्यवाद माननीय सभापति महोदया । मैं श्रीमती लॉकेट चटर्जी के द्वारा प्रस्तुत महामहिम राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के समर्थन में खड़ा हुआ हूं । सबसे पहले तो मैं वैश्विक महामारी कोरोना, जिस पर पूरे सदन ने विस्तार से चर्चा की है, बहुत लंबी बात न करते हुए, मैं केवल इस महामारी के संकट में इस देश में जिस तरह से हमारे स्वास्थ्य कर्मियों ने, सुरक्षा करने वाले लोगों ने और सफाई कर्मियों ने आगे बढ़कर हिन्दुस्तान को बचाने का जो काम किया है, मैं उनका अभिनन्दन करता हूं । हमारे प्रधान मंत्री जी ने उस कोरोना के संकट में पूरे राष्ट्र का जिस सामर्थ्य के साथ नेतृत्व किया और उसके बाद हमारे वैज्ञानिकों ने दो कोरोना वैक्सीन एक निर्धारित समय-सीमा के अंदर देने का जो काम किया है, हम उन वैज्ञानिकों का भी अभिनन्दन करते हैं और उनके प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हैं । हमारे प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में देश का सबसे बड़ा वैक्सिनेशन प्रोग्राम चल रहा है । आज की तारीख तक लगभग 60 हजार वैक्सिनेशन इस देश में हुए हैं ।
          माननीय सभापति महोदया, यह कोरोना का संकट इस बात का प्रमाण है कि हमारे देश में प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में जिस तरह का काम हुआ है, हम शायद दुनिया में 135 करोड़ की आबादी में आज के दिन केवल 84 व्यक्तियों की इस बीमारी से मौत हुई है, जो इस बात का संकेत है कि हम कहीं न कहीं कोरोना के संकट पर विजय प्राप्त करने जा रहे हैं ।
          देश की जीवन मूल्य रेखा हमारी सरकार की पहली प्राथमिकता है । यह देश तेजी से चले, ताकत से चले और सर उठाकर चले, यह हमारे प्रधान मंत्री जी की प्राथमिकता है, हमारी सरकार की प्राथमिकता है । एनडीए की सरकार में लोकतंत्र शांति से चल रहा है । यह हमारे लिए गौरव का विषय है । सरकार ने समान रूप से काम किया है । महामहिम राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में कहा है कि सरकार ने जितना काम शहरी क्षेत्रों में किया है, उतना ही काम ग्रामीण क्षेत्रों में भी किया है । अगर, सरकार ने एमएसएमई सेक्टर में काम किया है, तो नई शिक्षा नीति देने का भी हमारी सरकार ने काम किया है । महिलाओं की भागीदारी को भी पहले की तुलना में बहुत ज्यादा सुनश्चित करने का काम किया गया है । हमारी महिला साथी अगर फाइटर प्लेन उड़ा रही हैं, तो आर्मी और पुलिस के अंदर भी उनकी भूमिका बढ़ी है । अंडर ग्राउंड माइन्स के अंदर भी हमारी महिला साथी काम कर रही हैं । हमारी सरकार ने हिन्दुस्तान में वन स्टॉप सेंटर, अपराधियों का राष्ट्रीय डाटाबेस, इमरजेंसी रेस्पांस सपोर्ट सिस्टम और देश भर में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाकर महिलाओं के खिलाफ होने वाले अत्याचारों पर रोक लगाने में तेजी से काम किया है ।
          मैं आपके माध्यम से कहना चाहता हूं कि इस देश में माननीय प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में हमारी एनडीए सरकार ने लगातार 32 राज्यों में और आज जो हमारे कांग्रेस के साथी अधीर रंजन जी चले गए हैं, यहां पर नहीं हैं, जो गरीबों की दुहाई दे रहे थे, देश में गरीबों के कल्याण की बात कर रहे थे, हमारे प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में 70 करोड़ गरीबों को हमने कोरोना काल में मुफ्त में भोजन भेजने काम किया है । हमारी सरकार ने तय किया है कि आगे आने वाले समय में 32 राज्यों में ‘वन नेशन, वन राशन कार्ड’ का इस्तेमाल करेंगे । हमारा प्रवासी मजदूर हिन्दुस्तान के किसी भी कोने में जाएगा, तो उसके पास राशन कार्ड होगा । ए.टी.एम. की तरह अपना राशन उस राज्य में ले सकता है और अपने परिवार का जीवनयापन कर सकता है । शायद दुनिया में अकेला हिन्दुस्तान हमारा ऐसा राष्ट्र है, जहां पर यह व्यवस्था हमारे प्रधान मंत्री जी ने लागू की है ।
          हम पन्द्रह हजार सरकारी स्कूलों को बेहतर करने का काम कर रहे हैं । हम 100 नए सैनिक स्कूल बनाने जा रहे हैं । हम पीपीपी मॉडल पर सैनिक स्कूल बनाएंगे । हमारे जनजातीय कल्याण मंत्री जी यहां बैठे हैं, हम 758 एकलव्य मॉडल स्कूल बनाएंगे । उच्च शिक्षा के लिए हम कमीशन बनाने जा रहे हैं । हम राष्ट्रीय भाषा अनुवाद मिशन की तैयारी कर रहे हैं । इस देश में अब डिजिटल पेमेंट होने लगा है । अगली जनगणना डिजिटल द्वारा होगी, यह हमारे लिए और इस देश एक बड़ी उपलब्धि है ।
          सभापति महोदया, सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में फीडर सेपरेशन के लिए 3.5 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान अगले पांच सालों के लिए किया है । जब गांवों में खेती के लिए बिजली अलग होगी और जब वहां 24 घंटे बिजली मिलने लगेगी, जैसा कि हमारे मध्य प्रदेश राज्य में होता है, वह इस देश के लिए एक अद्भुत समय होगा । प्रधान मंत्री उज्ज्वला योजना के बारे में मेरे पूर्व के वक्ताओं ने बहुत ही विस्तार से बताया है, मैं ज्यादा लंबी बात नहीं करूंगा । लेकिन आगे आने वाले समय में हम उज्ज्वला योजना के तहत महिलाओं के नाम पर एक करोड़ नए गैस के कनेक्शन देने वाले हैं । यह उन महिलाओं के लिए कितना गौरव का विषय होगा, जो आज भी चूल्हे पर खाना बनाती हैं ।
स्वामित्व योजना, जिसकी बहुत कम चर्चा हुई है । मुझे लगता है कि इस देश में स्वामित्व योजना  के बहुत प्रचार-प्रसार की आवश्यकता है । इसके ऊपर बहुत काम करने की आवश्यकता है । शहरी क्षेत्रों का व्यक्ति जो मकान का मालिक है, जब वह अपनी प्रापर्टी मॉर्टगेज़ करने जाता है, जब वह बैंक में लोन लेने के लिए जाता है, शहर की संपत्ति पर बैंक के कर्मचारी और अधिकारी उसको बहुत तवज्जो देते हैं, लेकिन गांवों की संपत्ति कभी मॉर्टगेज़ नहीं होती थी, बैंक से कभी लोन नहीं मिलता था । हमारे माननीय प्रधान मंत्री जी ने गांवों के मकानों की जो भूमि है, अब उसके स्वामित्व का अधिकार पत्र देने का काम पूरे हिन्दुस्तान के हर राज्य में होगा । यह एक बड़ा निर्णय हमारी सरकार ने लिया है । इससे गांव के व्यक्ति को अपनी जमीन का अधिकार मिलेगा, स्वामित्व मिलेगा, वह भी बैंक से पैसा ले सकता है । हमारी सरकार द्वारा उसको एक बहुत बड़ी ताकत प्रदान की गई है ।
          सभापति महोदया, कृषि कानून के बारे में बहुत से लोगों ने बातें कही हैं । चूंकि मैं किसान परिवार से हूं, खेती करता हूं । मैं शनिवार और रविवार को घर गया था । मैं किसानों के बीच में रहा और मैं वापस आकर आज लोकसभा में आपके बीच में खड़ा हूं । मैं बहुत ही जिम्मेदारी से कह रहा हूं ।   इस देश में जो पहले के कृषि कानून थे, हमारी सरकार ने उनको बदलने का काम नहीं किया है । सरकार ने एक भी कृषि कानून को नहीं छेड़ा है । बेहतर व्यवस्था और बेहतर भविष्य के लिए किसानों के लिए तीन नए कृषि कानूनों को सरकार ने बनाया है, उनकी फार्मेशन की है । उनमें किसान का कहीं भी अहित नहीं होगा । जो सरकार देश में सिंचाई का रकबा बढ़ाने का काम कर रही है, वह सरकार किसानों का अहित करने वाला कानून क्यों बनाएगी? आज मध्य प्रदेश और गुजरात राज्य में सिंचाई का रकबा सर्वाधिक बढ़ा है । कृषि कानूनों से गांवों में व्यापार बढ़ेगा, भंडारण बढ़ेगा । यह बात हम नहीं कह रहे हैं । यह बात समय-समय पर दूसरे लोग भी कहते हैं । आज कांग्रेस पार्टी और दूसरे दलों के लोग हिन्दुस्तान में कहीं चक्का जाम की बात करेंगे, तो कहीं पर आंदोलन और धरने की बात करेंगे । मैं आपके माध्यम से उनको यह स्मरण कराना चाहता हूं कि 15 जून, 1919 को नीति आयोग ने एक बात कही थी । After the discussion on the reforms related to agriculture in the Fifth Governing Council of NITI Aayog, it was decided that a high-powered Committee of Chief Ministers will be constituted by the States to implement various reforms and to know the intent of the States.
सभापति महोदया, इसमें उन्होंने कुछ मुख्य मंत्रियों की एक कमेटी बनाई थी । उसमें महाराष्ट्र के मुख्य मंत्री थे । उसमें कर्नाटक के मुख्य मंत्री थे । हरियाणा और मध्य प्रदेश के मुख्य मंत्री भी थे । इसमें बाद में पंजाब के मुख्य मंत्री को भी जोड़ने का काम किया गया था । उन्होंने जो सुझाव दिए हैं, मैं आपके माध्यम से उनको बताना चाहता हूं । एक हाई लेवल कमेटी जो मुख्य मंत्रियों के द्वारा बनाई गई थी, उस कमेटी ने जो सज़ेशन्स दिए हैं, उन्होंने कहा है कि ‘Model APMC Act should be adopted.’ स्पष्ट रूप से कहा है कि ‘limiting the powers of APMC within the limits of mandi raj and mandi’s single point levy across the States.’ उन्होंने सारी चीजें स्पष्ट रूप से रेकमेंड की हैं । ‘Contracts of agriculture should be made to make provisions of farming and service contract required legislation and other measures.’ सभापति महोदया, उन्होंने जो सबसे महत्वपूर्ण बात कही है कि ‘services should be included in the Contract Farming Act.’ मैं एक विषय के बारे में और बताना चाहता हूं । जो लोग ऐसा कह रहे हैं कि इसमें कॉर्पोरेट जगत आ जाएगा और कॉर्पोरेट जगत किसानों का नुकसान करने वाला है । उस समिति ने कहा है कि ‘Market reforms and Contract Farming Act should be used to attract corporate sector participation in agriculture.’ यह उन मुख्य मंत्रियों की कमेटी ने कहा है, जिसमें मध्य प्रदेश के भूतपूर्व मुख्य मंत्री माननीय कमलनाथ जी भी थे, पंजाब के मुख्य मंत्री भी थे, महाराष्ट्र के भी मुख्य मंत्री थे । इन मुख्य मंत्रियों ने इस तरह से मीटिंग के अंदर अपने बयान व्यक्त किए थे । मैं आपसे यह कहना चाहता हूं । आज यह कहा जा रहा है कि यह सरकार किसान विरोधी है । मैं आपको वर्ष 2013-14 और वर्ष 2013-14 के बाद के भारत को याद कराना चाहता हूं । वर्ष 2013-14 के पहले किसानों का जो हिन्दुस्तान था, उसमें गेहूं 1,400 रुपये क्विंटल बिकता था । आज वर्ष 2020-21 में हम 1,975 रुपये के एमएसपी पर गेहूं खरीदने का काम कर रहे हैं ।
          वर्ष 2013-14 में उस समय की सरकार ने इस देश में 1900 करोड़ रुपये का गेहूँ का प्रोक्योरमेंट करने का काम किया था । हम वर्ष 2021-22 में 75 हजार करोड़ रुपये का गेहूँ स्टॉक करने वाले हैं । वर्ष 2013-14 में पैडी 1310 रुपये प्रति क्विंटल था, जो वर्ष 2020-21 में 1868 रुपये प्रति क्विंटल है । आप दलहनों की बात करते हैं । दलहन वर्ष 2013-14 में 2900 रुपये प्रति क्विंटल था । हम भी चना, मसूर की खेती करते हैं । सरकार वर्ष 2013-14 में 2900 रुपये प्रति क्विंटल दलहन खरीदती थी । सरकार 236 करोड़ रुपये का दलहन खरीदती थी । अब सरकार ने दलहन के दाम बढ़ा दिए है । जैसा कि माननीय प्रधान मंत्री जी ने कहा है कि हम किसानों की आय को दोगुना करने का काम करेंगे । वर्ष 2013-14 में 2900 रुपये और आज 5100 रुपये में दलहन की खरीदी भारत सरकार एम.एस.पी. पर करती है । वर्ष 2013-14 में 236 करोड़ रुपये की जो खरीदी हुई थी, उसे वर्ष 2019-20 में बढ़ाकर हमारी सरकार ने उन दलहन उत्पादक किसानों की 8 हजार 285 करोड़ रुपये की खरीदी की है । यह इस बात का स्वमेव प्रमाण है कि सरकार किसानों के हक में लगातार काम कर रही है । अब जहाँ तक पंजाब के पेट में दर्द होने का सवाल है तो पंजाब के किसानों के पेट में दर्द नहीं है । मैं भी हजारों किसानों को जानता हूँ । वहाँ पर किसान और मंडी के बीच में काम करने वाले लोग हैं, उनके पेट में दर्द है । आप मंडी टैक्स देख लीजिए । पंजाब के अन्दर मंडी टैक्स 8.5 परसेंट है । हिन्दुस्तान में अगर सबसे ज्यादा कहीं मंडी टैक्स लगता है तो वह पंजाब में लगता है । हरियाणा में अलग है । राजस्थान में 5 परसेंट है । कर्नाटक में 1.5 परसेंट है । मध्य प्रदेश में 0.5 परसेंट है । गुजरात में 0.5 परसेंट से 1.25 परसेंट है । सबसे कम टैक्स भारतीय जनता पार्टी शासित स्टेट्स में लगता है । ये एक तरफ किसानों के कल्याण की बात करते हैं और दूसरी तरफ मंडी टैक्स साढ़े आठ परसेंट लेते हैं, जो हिन्दुस्तान में सबसे ज्यादा है । सभापति महोदय, इस देश में दो तरह की बातें नहीं चल सकती हैं ।
          अब हम कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग की बात करते हैं । यहाँ पर सभी किसान बैठे हैं । आदरणीय जगदम्बिका पाल जी ने बहुत विस्तार से अपनी बात रखी है । कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के अन्तर्गत पहले किसान, किसान से कॉन्ट्रैक्ट करता था, जिसे हम देशी भाषा में सिकमी, बटाई, तीन बटाई कहते थे । यदि आपने पहले कभी हिन्दुस्तान में किसी को बटाई पर जमीन दी और पटवारी ने कैफियत में कब्जा, जिसने सिकमी ली है, उसका नाम लिख दिया और अगर चाल साल तक उस कैफियत में उस व्यक्ति का नाम लिख दिया जाता था, तो वह जमीन उसकी हो जाती थी ।
          हमारी सरकार ने एक प्रावधान किया है । कॉन्ट्रैक्ट करना किसान के ऊपर छोड़ दिया है । यह ऐच्छिक है । इसमें कोई दबाव नहीं है । अगर किसान कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग करता है और उसके बाद   भी किसी से अनुबंध करता है तो उस अनुबंधकर्ता का नाम जमीन पर कभी भी दर्ज नहीं होगा । हमारी सरकार ने स्पष्ट रूप से कानून के अन्दर प्रावधान किया है । हमारी सरकार ने पहले का प्रावधान समाप्त करके किसान का अधिकार सुरक्षित करने का काम किया है ।
          माननीय सभापति महोदया, सबसे महत्वपूर्ण यह है कि ये कहते हैं कि अगर कॉन्ट्रैक्ट कर लिया तो व्यापारी आकर या कॉर्पोरेट वर्ल्ड का आदमी आकर उस पर कब्जा कर लेगा । सबसे पहली बात तो यह है कि किसान कॉन्ट्रैक्ट क्यों करेगा? कानून में कहीं भी प्रावधान नहीं है कि आपको कॉन्ट्रैक्ट करना है । अगर उसने अनुबंध किया है तो उसके पास यह अधिकार रहता है कि वह कभी भी अनुबंध को समाप्त कर सकता है । किसान को दो साल बाद लगे कि उससे गलती हुई है, उसने घाटे का काम किया है तो वह अनुबंध समाप्त कर सकता है । कॉन्ट्रैक्टकर्ता कभी भी अनुबंध समाप्त नहीं कर सकता है । अगर कोई विसंगति आती है तो हमारे कानून में स्पष्ट प्रावधान है कि अनुभागीय अधिकारी के न्यायालय में उस केस का फैसला होगा । अनुभागीय अधिकारी किसान के पक्ष में तो फैसला दे सकता है, लेकिन किसान के खिलाफ निर्णय नहीं दे सकता है । यह भी हमारी सरकार ने इसी लोक सभा में उस कानून में पूरी ताकत के साथ प्रावधान किया है । मैं दो-तीन मिनट में अपना भाषण समाप्त करूंगा ।
माननीय सभापति: अब बहुत ज्यादा समय हो गया है ।
श्री उदय प्रताप सिंह : सभापति महोदया, यह कृषि के ऊपर बहुत महत्वपूर्ण विषय है । आज पूरे हिन्दुस्तान में आग लगाने का काम चल रहा है । हमें इस पर चीजें कहीं न कहीं स्पष्ट करनी पडेंगी, क्योंकि इस देश में किसान को बरगलाने का काम हो रहा है । मैं ऑगस्ट हाउस के अन्दर बहुत जिम्मेदारी से कह रहा हूँ कि इस देश में किसान के मन में कोई भ्रांति नहीं है । किसान के मन में कोई   संदेह नहीं है । केवल बिचौलिए और कुछ राजनीतिक दल उनको भटकाने का काम कर रहे हैं । हमें इसे बहुत स्पष्टता के साथ नकारना पड़ेगा । आज एमएसपी पर खरीद और भंड़ारण की बात चल रही है । ये कहते हैं कि आपने व्यापारी को असीमित भंडारण के पावर्स दे दिए हैं । आप कल्पना कीजिए कि अगर एमएसपी पर खरीदी चल रही है और 5100 रुपये में सरकार एमएसपी पर दलहन खरीदी का काम कर रही है और वहाँ पर व्यापारी को भंडारण भी करना है तो अगर व्यापारी को भण्डारण करना है तो स्वाभाविक रूप से उसे एमएसपी से ऊपर जाकर के खरीदना पड़ेगा । जब एमएसपी से ऊपर खरीदेगा तभी तो वह असीमित भंडारण करेगा । मैं तो चाहता हूँ कि व्यापारी असीमित भंडारण करे, एमएसपी के ऊपर खरीदे । किसान का माल हर हाल में एमएसपी के ऊपर बिके, यह सरकार की और इस देश के किसानों की इच्छा रहती है ।
सभापति महोदया, मैं एक अन्य बात कहना चाहता हूं, जैसे अभी सरकार ने दलहन के ऊपर सैस लगाया है । सैस लगते ही टी.वी. के ऊपर, मीडिया में और ये तथाकथित आन्दोलनकारी, जो शाहीन बाग में बैठे मिले, जो जे.एन.यू. में बैठे मिले और अब किसान आन्दोलन में बैठे हैं, कहने लगते हैं कि गरीब की थाली से दाल गायब हो गई । अनाज महंगा होता है तो कहते हैं कि थाली से दाल गायब हो गई, अगर अनाज सस्ता होता है तो कहते हैं कि किसान पर कुठाराघात हो रहा है । इनको तय करना पड़ेगा कि ये किसके साथ हैं? किसान के साथ हैं या किसान के विरोध में हैं ।
माननीय सभापति महोदया, अगर प्रधानमंत्री जी के मन में किसानों के कल्याण की बात नहीं होती तो आज जो किसान सम्मान निधि इस देश में दी जाती है, एक लाख हजार करोड़ रुपये से ज्यादा पैसा हर साल दिया जाता है । अगर एक घर में चार खातेदार हैं तो चारों को छ:-छ: हजार रुपये देने का काम सरकार करती है । एक लाख हजार करोड़ रुपये से ज्यादा पैसा किसानों के खाते में दिया जाता है । कृषि यंत्रों पर हम सब्सिडी देते हैं । अगर विस्तार से आप कृषि यंत्रों पर नजर डालें, हिन्दुस्तान के किसान के उपयोग में आने वाले हर यंत्र पर सरकार सब्सिडी देती है । फर्टिलाइजर्स पर हम सब्सिडी दे रहे हैं, के.सी.सी. के ब्याज पर सरकार सब्‍सिडी देती है, वेयरहाउसेस पर, कोल्ड स्टोरेज आदि हर जगह पर सरकार सब्सिडी देने का काम कर रही है । अगर सबसे ज्यादा किसी सेक्टर को इस सरकार ने प्रभावित किया है तो किसानों को प्रभावित किया है, किसान वर्ग को प्रभावित किया है ।
माननीय सभापति महोदया, आज अगर किसानों की मदद की चिन्ता सरकार में नहीं होती तो सरकार ‘किसान रेल’ क्यों चलाती? सरकार ने ‘किसान रेल’ चलाकर अनाज, फल, सब्जियां एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र तक भेजने का काम किया है । मैं एक महत्वपूर्ण विषय आपके माध्यम से सदन के सामने लाना चाहता हूं कि पीएम किसान मानधन योजना, जिसका उद्घाटन 12 सितम्बर, 2019 को माननीय प्रधानमंत्री जी ने किया, उसमें हर किसान को जब वह 60 वर्ष के बाद बुजुर्ग हो जाएगा, उसे तीन हजार रुपये पेंशन मिलने वाली है । 21 लाख किसान इसमें पंजीकृत हो चुके हैं । जिस दिन इसमें हमारे देश के छोटे किसान पूरे पंजीकृत हो जाएंगे, उनका बुढ़ापा सुरक्षित हो जाएगा, उसे हर महीने तीन हजार रुपये पेंशन मिलेगी । किसान मानधन योजना माननीय प्रधानमंत्री जी की एक गौरवशाली योजना है ।
माननीय सभापति महोदया, मैं आपके माध्यम से एक अन्य चीज पर आग्रह करना चाहता हूं कि कई बार ऐसा होता है कि जब हमने गेहूं लगाने का काम किया तो हम सभी गेहूं ही गेहूं लगाते हैं, दलहन में गए तो दलहन ही दलहन लगाते हैं, अगर शुगरकेन में गए तो सुगरकेन ही सुगरकेन लगाते हैं । मेरा आपके माध्यम से एक आग्रह है कि किसान को भी कहीं न कहीं परम्परागत खेती से हटना पड़ेगा । हम सब लोग उस पर काम कर रहे हैं, हम भी खेती करते हैं । हमें उस परम्परागत खेती से हटकर, थोड़ा कॉमर्शियल फार्मिंग के ऊपर, इंटेंसिव फार्मिंग के ऊपर जाना पड़ेगा । सब्जी, डेयरी, फल – इस तरह की खेती पर हमको आगे बढ़ना पड़ेगा ।
          माननीय सभापति महोदया, मैं आपके माध्यम से कहना चाहता हूं कि कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी जी ने कहा कि प्रधानमंत्री जी के अंदर अहंकार है । मैं आपके माध्यम से बहुत जिम्मेदारी से कहना चाहता हूं कि अगर प्रधानमंत्री जी अहंकारी होते तो आज अनुच्छेद 370 और 35ए खत्म करने का काम नहीं करते । इस देश में अहंकारी वे थे, जिन्होंने 70 साल तक समस्याओं को आगे बढ़ाने का काम किया । अगर प्रधानमंत्री जी अहंकारी होते तो उन्होंने मुस्लिम बहनों के लिए तीन तलाक का जो कानून इस देश में लागू किया, वह लागू नहीं होता । आज श्रीराम मंदिर का मार्ग प्रशस्त करने वाली सरकार है, जिसने उच्चतम न्यायालय के माध्यम से एक बड़ा काम किया है । इस देश में पहले ‘पद्म श्री’ लोगों के कहने से मिलते थे, अब ‘पद्म श्री’ और ‘पद्म भूषण’ काम करने वाले लोगों को मिलते हैं, यह हमारी सरकार की उपलब्धि है और माननीय प्रधानमंत्री जी की काम करने की शैली है कि गरीब की मदद करना है । जीएसटी 20 सालों से पेंडिंग था, अब हमारी सरकार ने जीएसटी लागू किया । फ्रेट कॉरीडोर – यह माननीय प्रधानमंत्री जी ने कहा था कि इस देश की उपज एक कोने से दूसरे कोने तक जानी चाहिए, आसानी से जानी चाहिए, सस्ते में जाना चाहिए । रेलवे से बेहतर साधन नहीं हो सकता है । चार बड़े फ्रेट कॉरीडोर्स के निर्माण के लिए हमारी सरकार ने स्वीकृति दी है । डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर आदि कितनी ही योजनाएं हैं, जिन पर हमारी सरकार काम कर रही है । 
          सभापति महोदया, अंत में, अपनी बात समाप्त करने से पहले मैं कहना चाहता हूं, जैसा अभी अधीर रंजन चौधरी जी ने कहा कि सावरकर जी ब्रिटिश हुकूमत के सहयोगी थे । आप कल्पना कीजिए कि सावरकर जी, जिनको आज हम देश के सबसे बड़े स्वतंत्रता सेनानियों में मानते हैं,  अगर उन्होंने ब्रिटिश हुकूमत की मदद की होती तो क्या यह देश आजाद हो सकता था? सावरकर जी, जिनकी आवाज के पीछे लाखों लोग खड़े हो जाते थे, उनके प्रति हम श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, उनको श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं और भविष्य में भी ऐसा कोई योद्धा पैदा हो, वीर सावरकर जैसा योद्धा पैदा हो, ऐसी हम कामना करते हैं । स्वतंत्रता की श्रेष्ठ लड़ाई के श्रेष्ठ सेनानियों में उनकी गिनती होती है । हमारे प्रधानमंत्री जी तो शिवाजी को जीने वाले हैं, उन्होंने शिवाजी को जिया है, शिवाजी को आत्मसात करके, इस देश को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं ।
माननीय सभापति महोदया, मैं अपनी बात खत्म करूं, उससे पहले मैं बहुत विनम्रता से कहना चाहता हूं, मैं अपने साथियों से और इस देश से अपील करना चाहता हूं कि हिन्दुस्तान प्रगति चाहता है । आज का नौजवान इस चक्कर में नहीं पड़ना चाहता है । नौजवान चाहता है कि उसे स्थिर जीवन मिले ।  नौजवान  चाहता  है कि उसका भविष्य स्थिर हो, नौजवान चाहता है कि यह देश प्रगति करे । पैसा देकर पत्थर फिकवाने वालों के साथ नौजवान नहीं जाना चाहता है, नौजवान आंदोलनों में भागीदार नहीं बनना चाहता है । मैं तो केवल एक विनती करता हूं कि जो किसानों की बात कर रहे हैं, उनको समझना चाहिए कि किसान हमारा भगवान है, किसान हमारा अन्नदाता है, किसान के बिना यह देश नहीं चल सकता है । उसे बरगलाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए । उसके बरगलाने के कारण आप दहाई में आए हो । अगर उसको और ज्यादा बरगलाओगे तो   आगामी समय वर्ष 2024 में आपकी संख्या इकाई के अंदर आ जाएगी, दस के अंदर आ जाएगी । मैं बहुत विनम्रतापूर्वक यह बात आपके बीच में कर रहा हूं ।
सभापति महोदया, हमारे महामहिम राष्ट्रपति जी ने अपना अभिभाषण दोनों सदनों के सामने रखा, मैं उसका समर्थन करता हूं । यह देश पूरी ताकत के साथ माननीय प्रधान मंत्री जी के नेतृत्व में आगे बढ़े, इसी कल्पना के साथ मैं अपनी वाणी को विराम देता हूं । धन्यवाद । जय हिन्द ।
   
*DR. T. SUMATHY (A) THAMIZHACHI THANGAPANDIAN (CHENNAI SOUTH): “The forest was shrinking, but the trees kept voting for the Axe for the Axe was clever and convinced the Trees that because his handle was made of wood, he was one of them.” Let me start by saying that India did stand together. The year 2020 started with a protest and ended with a protest against the authoritarian Government's rule and truly brought the citizens of the country together. 
The protest against the CAA-NRC exhibited the resilience of the country’s citizen when they came together against an insidious attack on our secularism. Between December 11, 2019, and March 9, 2020, at least 802 demonstrations were held over the Act, 85% of which were protests demanding that the Act be repealed and the remaining in support of it. Hindus, Muslim Sikhs, Christians, young and old people from all over the country came together to defend the rights guaranteed by our constitution and keep its spirit alive. You are correct that during that period we all witnessed the unparalleled courage, endurance, discipline and spirit of service of our countrymen. While we sit here, we are witnessing another historic protest by our country’s farmers. 
However, Sir with every protest, there has been vilification of the group. the derision of freedom of speech and an attempt to label them as “anti-nationals,” Sir there is a psychological term called “Gaslighting.”  Gaslighting is a form of emotional abuse that’s seen in abusive relationships. It’s the act of manipulating a person by forcing them to question their thoughts, memories, and the events occurring around them. A victim of gaslighting can be pushed so far that they question their sanity.
The Government, the propaganda the media have tried their best with each protest. With CAA-NRC the government claimed that CAA & NRC are different, when in fact the Hon’ble Home Minister has established the link between CAA & NRC in at least 5 different occasions. 
Now with the Farmers’ protest, the Hon’ble President has stated that there was “extensive consultation” with the farmers. Sir, I must point out that this consultation came in the form of “1.37 lakh webinars and training” which had been held since June 2020 and 92.42 lakh farmers had participated. All these interactions happened after June 2020, i.e., after the ordinances were promulgated. It cannot be said that there were consultations on promulgated ordinances. If there were any suggestions, they should have been incorporated in the draft Bills to replace the ordinances. According to the claims of the law minister, all our farmers are rich as they can receive crores of SMSs from the Government on their smartphones and give their opinions through webinars via their laptops and desktops with wonderful bandwidth and continuous power supply. Nowhere in the Bills has the Government referred to any consultation or claimed that some suggestions were incorporated.  If there were consultations then why were the public authorities denying any information under RTI about these extensive consultations? Why were they relying on wrongful pretexts? The futility of the centre’s claim was obvious as it has considered talks in Bihar election rallies as “consultation”.
On December 11, 2020, RTI activist Anjali Bhardwaj asked for specific details regarding the stakeholder consultations. Within 30 days, two Central Public Information Officers in the agricultural marketing divisions of the ministry responded and claimed that they did not have any record of such consultations.
What was remarkable about both the protests is that they were carried by the women. Especially women farmers, who have been active in the Farm protest and are the backbone of these protests.
In India, whenever we talk about agriculture, we think of a man as a farmer. However, as this protest has reminded us, this is far from the truth.
According to the agricultural census, 73.2% of rural women are engaged in farming activities but only 12.8% own landholdings. Due to cultural, social and religious forces, women have been denied ownership of land. This stems from the assumption that farming is perceived as a man’s profession. Accordingly, the India Human Development Survey reports that 83 per cent of agricultural land in the country is inherited by male members of the family and less than two per cent by their female counterparts. Thus, women are mostly left without any title of land in their names and accordingly excluded from the definition of farmers. Besides 81% of the female agricultural labourers belong to Dalit, Adivasi and OBC communities, so they also contribute to the largest share of casual and landless labourers.
The Government too turns a blind eye to their problem of non-recognition and conveniently labels them as “cultivators or &; agricultural labourers” but not “farmers.” Without any recognition, women are systematically discriminated.
Non-recognition as farmers is one of their problems. Adding to their non-recognition are other pre-existing challenges in terms of, unequal access to rights over land, water, forests, etc., gendered access to support systems such as storage facilities, transportation costs, need for cash for new investments, paying off old dues and other services related to agricultural credit, inputs, subsidies, budgets and marketing their products as well as meeting household expenses. Thus, despite their large contributions to the sector, Women farmers have been reduced to the small and marginal sections which are vulnerable to exploitation.
The Pandemic has hit us hard. But what made it worse was the government’s response to it. The steps taken by the government were neither timely nor thoughtful. While the first three cases were reported between January 30 and February 3, it was only after March 2 that reported COVID-19 cases started increasing.
Between March 3 and March 23, reported COVID-19 cases in India jumped from five to nearly 500. To contain the spread of the viral disease, on March 24, at 8 p.m., Prime Minister Narendra Modi announced a nationwide lockdown. By midnight, with just four hours of notice, India was under one of the most stringent lockdowns in the world How can the Government forget that this country has More than 60 million migrant informal workers in Mumbai, Kolkata, Hyderabad, Chennai, Bengaluru and Delhi who live on daily wages?
The ill-thought-out lockdown led to one of the most tragic exoduses we have witnessed in Independent India. Where migrants rushed to the station, Over the next few weeks, thousands were stranded or were forced to undertake journeys spanning hundreds of kilometres, on foot, to reach their villages. 
The countrywide lockdown imposed on March 24 to contain the spread of COVID-19 resulted in large-scale job losses in both the formal and informal sectors. Economic activity came to a standstill, triggering an exodus of migrant workers from employment hubs in urban India to their villages. According to a Stranded Workers, Action Network’s report in April 2020, 50 %of the respondents had no rations left even for a single day; while 96 %had not received rations, 70 %had not received cooked food from the government; and 78% of the respondents had less than INR 300 left the one who could not leave ate into their savings.
To make matters worse, the government did not maintain any data on the migrant's deaths. While presenting the Union Budget 2020 in Parliament on February 1, Finance Minister Nirmala Sitharaman outlined the importance of data and said that to meet challenges of real-time monitoring of India's increasingly complex economy, "data must have strong credibility, “adding that "data is the new oil" has become a cliché.
However, just seven months after outlining the significance of "credible data", the Narendra Modi Government on September 14 informed Parliament that it has not maintained any data on the number of migrant workers who died while trying to reach their homes after the nationwide lockdown to combat the novel coronavirus was announced. Since no data has been maintained, the government maintains that the answer to the question on compensation and assessment of job losses among migrant workers "does not arise."

To put this in perspective, OXFAM has reported that more than 300 migrant workers died due to the lockdown, with reasons ranging from starvation, suicides, exhaustion, road and rail accidents, police brutality and denial of timely medical care. They were exposed to inhuman beating, disinfection and quarantine conditions turning the pandemic into a humanitarian crisis The National Human Rights Commission recorded over 2582 cases of human rights violation as early as in the month of April 2020. Their exodus was considered reckless whereas the reasons that sparked it—lack of income, no access to food and water, fear—remained unexamined. 

Another report states that As on May 28, the reasons for migrant workers' deaths during their homeward journeys include: getting burnt to death in forest fires, being hit or crushed by truck/bus/trains, exhaustion, heart attack, blood in vomiting, chest pain, asphyxiation after falling in a deep pit, being trapped in snow, stomach pain, breathlessness, hunger, exhaustion, dehydration, fatigue, multi-organ failure, and snakebite, among others.

While Indians stranded abroad were given the option to fly back home through special flights and provisions for quarantining in hotels were made, no such travel arrangements were made for the migrant workers. It was only at the end of May 2020, almost two months after the announcement of lockdown, that the government as a relief to the migrant workers and their families, announced travel arrangements to return to their homes. Buses were arranged for interstate movement and the Indian Railways introduced Shramik special trains for the relocation of the migrant workers While In March, April and May, India witnessed its worst migrant crisis in several decades as tens and thousands of migrant workers were forced to travel hundreds of kilometres, often on foot and empty stomachs under a scorching sun, in a desperate attempt to escape the cities, Prime Minister Narendra Modi announced a new fund to deal with emergency or distress situations, like the pandemic. The fund called the Prime Minister's Citizen Assistance and Relief in Emergency Situations Fund (PM CARES Fund) was established as a public charitable trust with the Prime Minister as the chairperson and the defence minister, home minister and finance minister as some of the members.

This could have been a relief for overburdened health care but as is common with this government even though it was the money of the citizens, the fund is plagued by lack of transparency. When citizens sought information, they were rudely told that the fund is not a public authority and does not come under the purview of the Right to Information Act.

While the fund website declares that it received Rs 3,076.62 crore in five days to March 31, no details have been declared on the amount received since then. An IndiaSpend analysis found that the fund has received at least Rs 9,677.9 crore ($1.27 billion) till May 20. 

It has also been especially challenging for our Healthcare workers. While we stress on self-reliance, we have comfortably exploited the healthcare worker who has put their lives on risk. The COVID-19 pandemic has added to the stress of an overburdened healthcare workforce. India has one medical doctor for every 1,404 people and 1.7 nurses per 1,000 people, according to the Ministry of Health and Family Welfare (MoHFW). This is lower than the World Health Organization (WHO) benchmark of one doctor and three nurses per 1,000 people.

Frontline health workers such as ASHAs (Accredited Social Health Activists) whose work can be seen as an extension of care work have experienced a phenomenal increase in their work. But the remuneration is way too measly—a mere INR 1000 for the COVID-19 duties assigned to them.

Since the start of the pandemic, India’s healthcare workers have protested the shortfall in PPEs, delayed salary payments, ever-changing quarantine rules, poor to non-existent quarantine facilities, long working hours and disregard for their safety.

The Government boasts of Ayurveda and the healthcare workers but it ignores the IMA Campaign against the Government’s 20 November notification approving surgical procedures for postgraduate ayurvedic surgeons and against broader government efforts to mix traditional and modern medical practices. Despite Ayurveda’s prowess, the association has said Ayurveda medicine has “no equivalents of anaesthesia, critical care, or post-operative pain and infection control.” The Pandemic lay bare our healthcare system and its many fallacies. Far from self-reliant, we have overburdened the health care workforce. India has one medical doctor for every 1,404 people and 1.7 nurses per 1,000 people, according to the Ministry of Health and Family Welfare (MoHFW). This is lower than the World Health Organization (WHO) benchmark of one doctor and three nurses per 1,000 people.

We have stressed so much on our recovery rate that the government has denied the reality that India had the world’s second-largest cumulative number of COVID-19 positive cases. 

The direct impact of the COVID-19 has been on the poor, marginalized and vulnerable communities. But he government, however, does not report case data disaggregated by socio-economic or social categories making it difficult to gauge the distribution of the disease amongst various communities.

The scare for COVID-19 started in December/January despite this the government did not provide for a health budget which would effectively grapple with the then looming COVID fears. 

Consequently, we inherited a fragile, weak and understaffed public healthcare system where people pay 58.7% of their total health expenditure out of pocket.

Despite this, only half the population has access to even the most basic healthcare services. Data indicates that countries with high out-of-pocket expenditure have poorer health outcomes and have a higher risk of mortality during the pandemic. The consequence of this under-investment is that existing Primary health centre (PHC) facilities in India are constrained in their functioning during COVID-19 pandemic. A study of PHC facilities indicates that 57% reported inadequate ventilation, 75.5 % had negligible airborne infection control measures while N95 masks were unavailable in 50% of the facilities. These factors contribute to suboptimal patient safety and infection control measures.

Again, it is often the poor who have had to bear the consequences of the weak public healthcare system. In contrast, the rich could access personalized healthcare experience at private hospitals Due to the exponential rise in cases, government hospitals in areas with high case-load were soon overwhelmed. Due to this, state governments asked private hospitals to reserve beds for COVID-19 positive patients. 

Although the government did take steps to make COVID-19 services affordable by including them under Ayushman Bharat- Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana (PMJAY), the scheme only covers the below poverty line (BPL) population leaving out the uninsured poor and the middle class. Moreover, its beneficiary list is based on the SECC (Socio-Economic Caste Census) data, which is outdated. As a result, thousands of people could not avail COVID-19 services under PMJAY. The Parliamentary standing committee on COVID-19 Outbreak raised concerns on the scheme’s exclusion criteria, which caused many of those eligible from marginalized sections of society to lose out on the benefits of PMJAY and hence to pay out-of-pocket for COVID-19 treatment. Moreover, 66% of the SC and 79 %of the ST households lacked awareness about free testing and treatment provisions under the Ayushman Bharat Scheme. Only 14% of both SC and ST households are registered with the scheme, excluding those most in need.

While the middle class and poor alike were struggling to get admitted, the rich, elite and powerful of the country were ‘booking’ ICU beds, even when they did not show COVID-19 symptoms COVID-19 demanded the single-minded focus of India's entire healthcare infrastructure all through 2020. The pandemic hogged so much attention across all aspects of our lives that most other issues of public health were put on the back-burner. 

In 2019, the Indian government recorded over 2.4 million tuberculosis (TB) cases--275 cases per hour--including new and relapsed cases and marking an increase of 14.3% from 2018, according to the 2020 Annual TB report of the Ministry of Health and Family Welfare.

Across the world, India had the highest number of new TB cases in 2019, according to the Global TB Report 2020. India had three times as many persons with TB in 2019 as Indonesia, which has 8.5% of the world's TB cases. India also has 27% of the world's cases of drug-resistant TB, again the highest in the world. Between January and June 2020, India showed "large drops in the reported number of people diagnosed with TB", recorded the Global TB Report.

India has committed to eliminating TB by 2025 but the pandemic could set back India's efforts by nearly a decade Most importantly, it is the children who are bearing the brunt of this. The toll of COVID has resulted in India seeing an increase in child undernutrition, reversing decades of gains.

The share of stunted, wasted and underweight children has grown in the majority of states for which data have been made available. Rates of stunting have risen in rich states such as Kerala, Gujarat, Maharashtra, Goa and Himachal Pradesh, all of which had lowered their rates of stunting in the previous decade.

The economic survey to points to this. In the 10 years 2005 to 2015, it was coming down from 65% of children to still 55%. But in the last four years, anaemia has gone up terribly.

Same is with Stunting and diarrhoea. Moreover, since one million fewer children were vaccinated in the month of April 2020, they are at risk from other diseases such as Polio.

As I mentioned above, the country's health care force is overburdened. The need was to facilitate medical learning equally amongst all the sections of our society. However, what we got, as a result, was a discriminatory examination. Not only was it discriminatory in its nature, but the Government insisted that children are forced to give take it in the middle of a pandemic. 

 Tamil Nadu has already been witnessed to the tragic death of Anitha, a bright student with dreams of becoming a doctor who dies by suicide because of the discriminatory exam. It was even more heart-breaking to see five students Aditya, Jothisri, Durga, Motilal, Vignesh, and Subhashree take their lives due to your decision to hold NEET. These deaths occurred within one week in one State. How many more must have suffered due to this decision? We will never know.

NEET at the moment is only helping the privileged class of students from the upper caste, students from the urban area. They have the access to standard, urban schools. Rich students have access to study in urban schools and to attend and study in private coaching centres (for a few weeks of coaching).

The Madras High Court, concerning NEET had noted that only negligible candidates have got admission without undergoing the coaching.

Are we re-creating Manu’s India Sir? Have we forgotten that our constitution guarantees social justice? Sir our Party leader MR MK Stalin vehemently opposes it, describing it as the blatant injustice to the students from rural areas.

Even the 19,000 Students who were offered free NEET coaching through 412 government-run coaching centre, NONE could clear.

It is quite clear, that by allowing “a certain quality of students,” NEET wants to filter out the students from rural, financially and socially backward backgrounds while only retaining the rich upper caste, privileged students. If the government is so sure that this will not be the unintended consequence of this bill then let it maintain data concerning the admissions of the students made with or without taking private coaching classes, which it doesn’t maintain presently.

The State of Tamil Nadu has recognised this problem and built an innovative incentive structure to retain doctors in the rural health system through incentive systems in the admission process for education in medicine, who are specialists and yet willing to work in rural areas. For instance, in 2015/16 (pre-NEET), at least about 300 doctors (50% of the state quota) who completed their MD/MS through in-service quota in government colleges went to work in the rural health system. The NEET will bypass all these incentive structures which have worked efficiently to produce socially inclusive health outcomes.

Not just that the system in Tamil Nadu has upheld social justice. For nine years before the implementation of NEET, the Tamil Nadu government had abolished an entrance exam, granting admission to medical courses based on Class 12 state board marks.

 

This year has also been particularly hard for students from underprivileged backgrounds. With no assistance from the government, students were unable to access their classes with many dropping out of schools.

Out of the poorest 20 % of households in India, only 2.7 %have access to a computer and 8.9 %to internet facilities. 96%of ST and 96.2 %of SC households whose children are in school lack access to a computer. This is the harsh reality of the country which this government selectively ignored while it went thumping its chest on its make-belief achievements on digital education.

The move online also has its risks. With no comprehensive Sexuality/digital education, children became easy prey to cyberbullying and child pornography. The India Child Protection Fund (ICPF) recorded a 95 % surge in child pornography traffic after the announcement of the COVID-19 lockdown.

Despite this India lags to protect its children. out of the 1023 courts that were announced in 2019, only 918 have been made operational. 

When this Government came to power, it came on the strength of the middle class for it believed that the Modi Government will bring black money, eradicate corruption and bring inflation under control.

But what happened has been the opposite. Tens of millions of low-income and poor households in India are grappling with the cocktail of economic woes. 

After the pandemic disrupted India's economy and led to increased unemployment and slashed wages, a sustained period of higher food inflation is now pushing millions of families to cut back on food expenditure, threatening a spell of nutritional poverty and malnutrition among children.

In October, prices of most essential vegetables such as tomatoes, cauliflowers and potatoes had increased considerably in most parts of the country.

Food inflation surged to 11%, but it came down only marginally in November to 9.43%. Even before the pandemic, India's consumer price inflation hovered above the Reserve Bank of India's mandated 6% upper limit, as the country's economic growth slowed down to record lows. After the pandemic hit India, Prime Minister Narendra Modi's sudden announcement of a total national lockdown disrupted the agricultural supply chain. This resulted in the spike in food inflation that India has witnessed during the last few months, experts said.

Even as food inflation has remained high in the months after the lockdown--this has coincided with a trend of unemployment and depressed rural wages--the government did not continue its free grain distribution scheme under the Pradhan Mantri Gareeb Kalyan Anna Yojana (PMGKAY) beyond November.

This is despite that the food grains are effectively rotting. A study reports134 that despite having a hold of 77 million tonnes of food grain, more than three times the buffer stock requirement before the lockdown, only 2.2 million tonnes of this had been distributed to states. Eventually, public stocks increased to more than 100 million tonnes by the beginning of June 2020, which meant that some of the stock effectively rotted in the storage facilities.

Despite the adverse impact that the lockdown has had on informal, migrant workers and the economy, studies show that the relief packages have been miniscule. An additional expenditure of the government in the first relief package announced was only 0.5 % of the GDP and the total additional public spending promised by all the relief measures announced by the end of May 2020 amounted to only around 1 % of the GDP. Much of it has not reached the intended beneficiaries.

Even after witnessing the struggle of the people who voted for the Government and brought them in power, this Government refused to tax the rich. Kindly note the rising inequality, where the rich became richer while the Govt taxed the Indian middle class The wealth of Indian billionaires increased by 35% during the lockdown and by 90% since 2009 to USD 422.9 billion ranking India sixth in the world after the US, China, Germany, Russia and France The government was reluctant to spend on public welfare but the corporate sector and India’s elites were actively subsidized by the Government.

The Government always has this policy of increasing taxes on fuels while it avoids taxing the rich. Media reports have highlighted how the fourth tranche of the Government’s COVID-19 relief package has benefitted a range of corporates like Adani, Reliance Group and Vedanta, among others. The provision of interest-free loans to Medium and Small Enterprises alone is calculated to have been worth INR 3 lakh crore, almost ten times the quantum of funds directly given to the poor (including Jan Dhan, PM Kisan Yojana and transfers to old persons, widows, disabled and construction workers).

For the sake of Corporates and their benefits, the government has wreaked havoc on the working class and the environment. 

Between 2014 and 2020, the Ministry of Environment, Forest and Climate Change (MoEF&CC) approved 87% of over 2,500 project proposals it received for environment clearance. Of these, 278 projects were proposed to be in and immediately around protected areas such as wildlife sanctuaries and national parks.

In the ecologically fragile Western Ghats region, the MoEF&CC has granted clearances to 76 projects since July 2014. We examined the consequences of building through a forest using the example of a small road widening project, the NH-4A, which connects Goa in the west to Belgaum in the east. In 2019, the coastline along Karwar in Karnataka was categorised as one of India's 13 "critically vulnerable coastal areas". Now a port expansion project under the Centre's Sagarmala programme threatens the coastline. Similarly, with the Kattupalli Port, a project which is prohibited under Coastal Regulation Zone Notifications 2011 and 2019, has reached the stage of the public hearing. the project location is already experiencing environmental damage and is susceptible to more, in the form of coastal erosion In my State, the Kattupalli Port is being expanded in an ecologically sensitive area which will not only threaten the environment but also the livelihoods of the people of the fishing areas in that area. Despite it being criticised by environment experts and citizens, no Public Hearing as part of the Public Consultation has not been held. I must remind the government that the Tamil Nadu Pollution Control Board has announced to hold a public hearing for the project on January 22, 2021. However, citizens are yet to get a chance to voice their concerns. This is not the first time that the AIADMK government has ignored the pleas of the citizens. The pleas of farmers whose land will now be acquired in the Chennai-Salem Eight lane expressway have also fallen on deaf ears. It’s concerning that a party which has been chosen by the people of Tamil Nadu as an agent of Corporates but against its citizens. Cheaper, climate-change resilient alternatives exist, yet the Centre is allowing a project that endangers forests and wildlife. 

So blinded is the Government by corporated that it is selling the interests of the TRibals and ST Communities encroaching on their land. Envisaged over a decade ago, a new $1.6-billion coal plant in UP aims to pump more electricity into India's already oversupplied grids. The plant will add to air pollution in the National Capital Region of Delhi, already home to six of the world's 20 most polluted cities. Also under threat are tens of thousands of trees in a wildlife corridor in Madhya Pradesh, where the plant's feeder mine is proposed to come up, evicting hundreds of farmers and Adivasi families.

There was a mention if the Tuticorin-Ramnathapuram gas pipeline. I am glad because of this I can bring to the attention of this parliament to the plight of the farmers whose fertile lands are snatched in this project and the process so will their livelihoods. 

Moreover, the 142 KM long Ramanathapuram-Thoothukudi pipeline project is said to be adverse to the ecology as it crosses several canals, streams and forest areas, Moreover, to attract business, this Government has brought changes to the labour laws. These changes in the labour laws violate the established standards of the International Labour Organisation and are disadvantageous to the workers. This has led to the filing of several Public Interest Litigations (PIL). For instance, the working hours were increased from eight to twelve hours a day. The PILs eventually pressurised the Uttar Pradesh government to withdraw the 12-hour work shift. Many other states, however, have continued with the 12-hour work shift, six days a week which has transgressed the mandated 48-hour week as per global standards.

According to the Mobile Vaani survey, around 57 % reported having pending wages and 20 % had not received any support from their employers in the informal sector. As such, blue-collar workers who are mostly informal and daily wagers have to work longer hours with low wages in premises that lack clean drinking water, toilet, medical and other occupational safety measures in the light of industrial inspection being suspended.

It has to be noted that India has 170 million blue-collar workers. Trade unions fear that 70 % of factories in the states will fall outside the purview of labour laws exposing workers to exploitation with no legal safeguards while large private corporates gain from the dilution of the labour laws are diluting the existing labour laws and their application.

There has been a lot of talk about how we have improved our standing on Ease of Doing business. Sir, what ease of doing business are we talking about? The Economic Survey has pointed out that India has jumped ranks from 69th to 74th when it comes to overregulation. When it comes to using “Improper influence” we have gone from the 74th rank to 107th in the world. 

And the cherry on top is the hurdles for Indians to start their businesses. It looks with suspicion at anybody doing business. There's a lot of talk about ease-of-doing business but setting a company is still a challenge in our country. Let me draw your attention to the fact that we are 130th in the world when it came to starting business and 154th when it comes to registering property? What ease of doing business are we talking about when even registering property is a challenge?

While the motion boasted on the improvement of women’s economic conditions, I consider that I must remind this House that Seventeen million women lost their job in April 2020. Therefore, unemployment for women rose by 15 per cent from a pre-lockdown level of 18 per cent. This increase in unemployment of women can result in a loss to India’s GDP of about 8 per cent or USD 218 billion.116 Women who were employed before the lockdown are also 23.5 percentage points less likely to be re-employed compared to men in the post-lockdown phase.

Uncertainty, economic hardships and growing anxiety during emergencies often fuel violent and abusive behaviour directed towards women and the pandemic has been no exception. This has unfortunately led to an increase in cases of domestic violence. As per statistics, between March 25 and May 31, 2020, the National Commission for Women (NCW) received 1477 complaints of domestic violence from women in India—a 10-year high than the complaints received between March and May prompting them to launch a WhatsApp helpline for women providing a safer option to those who couldn’t make calls for the fear of being overheard. The number of cases has increased since May 2020. The highest number of cases were registered in July at 660 but have remained at least above 450 each month since June 2020. As of November 30, 2020, cases of domestic violence stand at 4687 compared to 2960 in 2019—a 58 per cent rise.

Moreover, women also bore the burden of unwanted pregnancies. In the first three months of the COVID-19 lockdown, March 25 to June 24, 2020, 47% of the estimated 3.9 million abortions that would have likely taken place in India in this span under normal circumstances were possibly compromised. This means that 1.85 million Indian women could not terminate an unwanted pregnancy, concluded a May 2020 modelling study conducted by the Ipas Development Foundation (IDF), India, a non-profit dedicated to preventing and managing unwanted pregnancies. Of these 1.85 million women, 80% or 1.5 million compromised abortions were due to the lack of availability of medical abortion drugs at pharmacy stores, the study found.

Women who are unable to access contraceptives are likely to make decisions that may not be as per their preference--whether it be the continuation of their unintended pregnancy or second trimester or unsafe abortion. All of these are likely to have profound consequences for their overall health and well-being, including physical health since the unintended pregnancy may not ensure adequate spacing with the previous childbirth, as well as mental health (beyond the lockdown’s impact). Unsafe abortion may lead to morbidities with long-term consequences on health and in the worst case, result in mortality among women.

There would be financial implications as she/her family may have to spend significantly more in seeking an abortion or in continuing with the pregnancy. In an environment of job loss and economic instability due to COVID-19, this could be detrimental to the well-being of the entire family, including young children, like nutrition, family dynamics etc are likely to be impacted. Unsafe abortions are the third largest cause of maternal deaths in India.

Even with the trans community, only lip service was paid to their needs is insulting. Amid a global pandemic, only 30 days have been given to respond to the Transgender Persons (Protection of Rights) Rules, 2020 with comments, suggestions and feedback. The first draft Rules, released during a national lockdown, posed a similar challenge. While the Government aims to uplift the social status of transgender people, the Rules make no mention of reservation in education or employment, both of which were mandated in the NALSA verdict. Ensuring reservation would be the first step towards uplifting the community but the Rules fail to address this.

You mentioned the LAC border and our brave Jawaans sacrificing our lives in protection of us. We salute their courage sir, but at the same time ask you whether the government has taken any actions against private media individuals who have celebrated their lost lives to boost their TRPs. Moreover, I ask the government to be more transparent over its claims and bolster the support for the Jawans posted ta the LAC. There are reports that China has constructed a new village consisting of 101 homes, approximately 4.5 kilometres within the Indian territory in Arunachal Pradesh. The village, located on the banks of the River Tsari Chu, in the Upper Subansiri district of the state could not be seen in satellite images of the same area taken in August 2019, suggesting that the construction was done at some point since then, according to the television channel. China claims Arunachal Pradesh as part of southern Tibet. We must not let the thirst for power belittle our efforts to support our jawans. Additionally, sir, two important issues did not find any mention in your Motion. 

First being the Police brutality. The lockdown that was announced on March 24 was extended four times till May 31. On June 1, the first phase of relaxation of the lockdown began and 19 days later, on June 19, two traders--father and son--in Tamil Nadu's Thoothukudi district were arrested for allegedly violating lockdown rules.

Three days after the detention, son J. Bennicks died in hospital, and P. Jayaraj the next day. They had allegedly endured hours of beating and torture by the police at the Sathankulam police station. On September 26, the Central Bureau of Investigation filed a charge-sheet, booking nine Tamil Nadu police officials for the alleged murders, among other charges.

The incident ignited a discussion on custodial deaths in India and their underreporting. In February, a Scheduled Caste man in Rajasthan, who was detained on theft charges, was also allegedly killed in police custody. In a prison system where nearly two-thirds of the prisoners under trial are from marginalised communities, this incident also highlighted the caste prejudices and over-targeting of certain communities.

In India 2 in 3 prisoners (69%) are from SC/ST/OBC background. Not a single state has complied with 14-year-old Supreme court directives for police reforms. On average, five people die in police or judicial custody every day, but few are convicted in these cases, but the data is scary as well as scarce. Further, three in five deaths in police custody occur within 24 hours of arrest. The low proportion of women in Kerala's police force affected its ranking on the effectiveness of its police in a 2019 report. The second being the increase in atrocities in caste-based crimes On September 14, a 19-year-old Scheduled Caste girl was allegedly raped and assaulted by four dominant caste men in Hathras district in Uttar Pradesh. Two weeks later, on September 29, the girl died of injuries in Delhi's Safdarjung hospital. The state police were accused of delaying the filing of a first information report (FIR) and the forensic examination, and cremating the victim's body in the middle of the night on September 30, while restraining the family from performing the last rites.

The case triggered massive protests which led to an enquiry by the Central Bureau of Investigation (CBI). The CBI charge sheet filed on December 18 indicted the state police for ignoring the victim's statement and charged the four accused men with gangrape and murder. The incident also highlighted the caste skew that drives sexual violence against women.

Under Section 3 of the Prevention of Atrocities Act, 1989 (Atrocities Act), a range of caste- and tribal identity-based discriminatory actions are penalised. In 2015, the Act was amended to include over 30 offences. However, the National Crime Records Bureau's annual report on crimes in India has data on just four offences. All other offences under the Atrocities Act are clubbed as 'others'. Lack of disaggregated data on atrocities means there is no measure of the daily, lived experiences of discrimination that have been penalised under the law.

Also, cases under the Atrocities Act alone constitute just 8.9% of the total crime against Scheduled Castes and 5.3% of crime against the Scheduled Tribes. Of the total registered crimes against SCs in 2019, 91% of the cases are registered for offences under the Atrocities Act read with the Indian Penal Code. Overall crimes against the SC/ST community increased by 18.8% while rape cases increased by 37%.

In 2013, after the brutal rape and assault of a 23-year-old (who was later named Nirbhaya or fearless) in a moving bus in Delhi, the central government set up the Nirbhaya Fund for enhancing the safety and security of women in India. However, the fund remains underutilised with only 66.7% of the amount having been spent. These two cases unravelled our society. We must not let authoritarian excess go unchecked for it will be a travesty for our democratic institutions.

Lastly, this year has taken a toll on a lot of people mental health. While suicides were discussed in the most outrageous undignified manner where the decencies were ignored, Stress, anxiety and sleeplessness are making many people reach out to doctors, counsellors, psychiatrists and helplines, according to healthcare professionals and stakeholders. Past pandemics led to worsening mental health issues and an increase in suicides, according to studies. For instance, the influenza epidemic in 1918 increased suicide rates in the United States; suicides of those aged 65 and above in Hong Kong increased during the Severe Acute Respiratory Syndrome (SARS) outbreak in 2003.

          India's healthcare system remains unprepared to tackle the mental consequences of the disease, the lockdown and financial crisis, mental health professionals, stakeholders and observers say. They had cautioned about the mental health impacts of COVID-19.    

          It is my humble plea that comprehensive data on the mental health impacts or suicides related to the COVID-19 pandemic, deaths by suicide due to COVID-19 be reported.

I will end this by remembering Netaji Subash Chandra Bose. Netaji Subhash Chandra Bose’s portrait was unveiled this year. Netaji was a secularist. He believed in religious harmony and considered Indian Muslims as an integral part of this land. He writes, “The latest archaeological excavations … prove unmistakably that India had reached a high level of civilization as early as 3000 B.C. … before the Aryan conquest of India.” His praise for Mohenjo-Daro and Harappa is certainly a rational counter-argument based on ‘scientific findings’ against the imagination of a Hindu-Aryan origin of Indian culture. He rightly condemns that, “…it was customary for British historians to ignore the pre-British era of Indian history”. British officials described India as a savage land where “independent ruling chiefs had been fighting perpetually among themselves until the British arrived” [Bose quotes them]. Bose negates this narrative and locates two golden moments in pre-British India. However, unlike the present governments attempt to demonise the Mughal era, bose recognises one of the golden moments being created by the Indian Mughals. After all the Azad Hind Fauj (Army)’s motto which is Unity (Ittehad), Faith (Ittemad) and Sacrifice (Qurbani). Thank you.

 

*श्री श्रीरंग आप्पा बारणे (मावल): माननीय राष्ट्रपति महोदय जी का अभिभाषण में सरकार ने ऐसे दिखाया है कि देश में हर व्यक्ति खुश है, सबके हाथ में रोजगार है, देश की आर्थिक विकास दर अपने रिकॉर्ड स्तर पर चल रही है जबकि इस अभिभाषण में मुख्य बातों को छोड़ दिया गया है ।

अभिभाषण में सरकार ने देश की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध होने की बात कही है । लेकिन देश के बेरोजगार युवाओं को रोजगार कैसे प्राप्त हो, इसके विषय में सरकार की क्या रणनीति है, इसका उल्लेख इस अभिभाषण में नहीं मिलता है । अभिभाषण में कहा गया है कि दुनियाभर से आने वाली चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था की नींव मजबूत है । हमारा विदेशी मुद्रा भंडार 450 बिलियन डॉलर से भी ऊपर के ऐतिहासिक स्तर पर है । लेकिन देश का सकल घरेलू उत्पाद माइनस 7.7 प्रतिशत है और इसमें कैसे सुधार होगा और इसके लिए क्या उपाय होंगे, सरकार को यह बताने की आवश्यकता है ।

जब इस सरकार का गठन हुआ था, तब से सरकार के द्वारा द्वारा घोषणा की जाती रही है कि एक साल में दो करोड़ युवाओ को रोजगार दिया जायेगा, लेकिन सरकार की गलत नीतियों के कारण रोजगार मिलना तो दूर, कई सारे युवक पढ़-लिख कर बेकार हुए हैं । आज उनको रोजगार हेतु इधर- उधर भटकना पड़ रहा है लेकिन उन्हें रोजगार प्राप्त नहीं हो रहा है ।

देश में लॉकडाउन लगने से पूरे देश में महंगाई, बेकारी दिन ब दिन बढती जा रही है, कई सारी कम्पनियां बंद पड़ी हैं, लाखो लोग बेरोजगार हो गए हैं लेकिन सरकार की इन बेरोजगार लोगों की कोई समस्या नजर नहीं आती है । देश में क़ानून में या घटना में बदलाव करने से परिस्थिति को नहीं सुधारा जा सकता है, आम आदमी की बात सुनकर उस पर ध्यान देने की आवश्यकता है । कोरोना महामारी में लॉकडाउन लगने के कारण हमारी देश की इकोनॉमी पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ा है । इस दौरान लाखों लोगों को पलायन करना पड़ा था । इस समय जिन लोगों की नौकरी चली गई उनकी हालत आज आज दयनीय है । एक व्यक्ति जो 7 से 8 हजार रुपए महीना कमाता था, इस लॉकडाउन के कारण उसकी नौकरी चली गई, सरकार को ऐसे लोगो के रोजगार उपलब्ध कराने हेतु प्रयास करने की जरुरत है ।

इस सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने का लक्ष्य रखा है, लेकिन इस बात पर केवल सरकार द्वारा घोषणा होती है । आज किसान अपने अधिकारों के लिए पिछले 68 दिनों से अपनी मांगो को लेकर आन्दोलन कर रहे हैं । सरकार कहती है की वह किसानों की बात सुनने को तैयार है लेकिन इस विषय पर वास्तव में कोई ठोस परिणाम सरकार की तरफ से दिखाई नहीं देता है । माननीय प्रधानमंत्री जी का कहना है की वो किसानो से बात करने के लिए सिर्फ एक फोन कॉल की दूरी पर हैं लेकिन वास्तविकता में ऐसा नही हो रहा है । सरकार को किसानो की बातें सुनकर   इस आन्दोलन और किसानो की समस्या का समाधान शीघ्र किये जाने की आवश्यकता है । केंद्र सरकार किसान की आमदनी दोगुनी करने के लक्ष्य में पूरी तरह से असफल हुई है ।

अभिभाषण में कहा गया है 'प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत औसतन प्रतिवर्ष साढ़े 5 करोड़ से ज्यादा किसान बहुत कम प्रीमियम पर अपनी फसलों का बीमा करा रहे हैं । इस योजना के तहत बीते तीन वर्षों में किसानों को लगभग 57 हजार करोड़ रुपए की क्लेम राशि का भुगतान किया गया है । जबकि महाराष्ट्र राज्य में अनेक नैसर्गिक आपदा के कारण अनेक जिलो के किसानों की फसल बर्बाद हुई थी और इन किसानों को उनकी फसल का मुवावजा दिए जाने के लिए राज्य सरकार के माध्यम से केंद्र से आग्रह किया गया था लेकिन आज भी वहां के अनेक किसान फसल बीमा नहीं मिलने से नाराज है । सरकार को इस वास्तविकता को समझना होगा और किसानों के साथ न्याय करना होगा ।

सरकार ने उज्ज्वला योजना के अंतर्गत करोडों परिवारों को गैस कनेक्शन दिए जाने की पहल की थी । इसके साथ ही साथ देश भर के लोगों को गैस सिलेंडर पर सब्सिडी भी मिल रही थी और सब्सिडी का पैसा सीधे ग्राहक के खाते में भेजा जाता था लेकिन पिछले एक साल से सरकार ने यह सब्सिडी अचानक बंद कर दी है और लोग इस सब्सिडी से वंचित हो गए हैं । आज सब्सिडी का पैसा ग्राहकों के खाते में नहीं जा रहा है सरकार को इस पर पुनः निर्णय करने की जरुरत है ।

अभिभाषण में राम मंदिर के निर्माण और इसके विषय में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का उल्लेख भी किया गया है । राम हमारी आस्था का प्रमुख केंद्र रहे हैं, हमारी संस्कृति भगवान राम के सिद्धांतों की है । केंद्र सरकार ने भी राम मंदिर के निर्माण के लिए अथक प्रयास किये जो कि प्रशंसनीय है, परंतु राम मंदिर निर्माण के लिए पूरा श्रेय केंद्र सरकार के द्वारा लिया जाना गलत है । राम मंदिर हेतु कोर्ट में चल रहा केस लगभग कई सालों से भी पुराना था । राम मंदिर के बनवाने के लिए सिफ केंद्र सरकार या भाजपा ने ही नहीं बल्कि बाकी अन्य पार्टियों के साथ साथ अनेक संत-महात्माओं ने भी बहुत कार्य किया है और एक बहुत बड़ी लड़ाई लड़ी । शिवसेना प्रमुख माननीय बालासाहेब ठाकरे जी को कोर्ट ने बाबरी ढांचा गिराए जाने की वजह से तलब किया था, जिसकी रिकॉर्डिंग आज भी कोर्ट में जरूर होगी । राम मंदिर निर्माण हेतु शिव सेना ने भी बहुत संघर्ष किया, राम मंदिर निर्माण के लिए शिवसेना के लोग भी अथक प्रयास करें हैं और शिवसैनिकों ने कई बार लाठियां   खाई है, काफी नुकसान सहा है । कारसेवकों में शिवसैनिकों ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया था । कारसेवकों के साथ जो कुछ हुआ वह पूरी दुनिया को पता है ।

आज के समय में पूरा विश्व कोरोना महामारी से लड़ रहा है । हमारे देश ने करोना से विजय प्राप्त की है । कोरोना महामारी से निपटने के लिए स्वदेशी सीरम इंस्टिट्यूट और भारत बायोटेक कंपनी ने कोविशिल्ड वैक्सीन बनाई है जो कि प्रशंसनीय होने के साथ ही साथ हमारे लिए गर्व का विषय है । इन वैक्सीन के बनाये जाने से हमने आत्मनिर्भर भारत होने में और कदम और आगे बढ़ाया है ।

यह सत्य है कि केंद्र सरकार ने कोरोना महामारी से निपटने के लिए अथक प्रयास करे हैं, परंतु केंद्र ने राज्य सरकारों के प्रयासों को नज़रअंदाज़ किया है जबकि हर राज्य सरकार ने इस महामारी से निपटने के लिए अथक प्रयास करने के साथ केंद्र के साथ पूरा सहयोग किया है । पुणे के सीरम इंस्टीट्यूट को महाराष्ट्र राज्य सरकार ने पूरा सहयोग दिया है । माननीय मुख्य मंत्री जी ने स्वयं कई बार सीरम इंस्टीट्यूट का दौरा कर वैक्सीन बनाये जाने का ब्योरा लिया और इसे सफलता देने हेतु अपना पूरा सहयोग दिया है ।

अगर विदेश नीति की बात करें, तो आज हम अपने पड़ोसी देशों से सफल विदेश नीति बनाने में विफल रहे हैं । एक समय से नेपाल हमारा बहुत पुराना पड़ोसी सहयोगी रहा है, परंतु उसके साथ भी सीमा विवाद होना चिंता का विषय बन गया है । एक ओर जहाँ हमारे मतभेद चीन के साथ बढ़ते जा रहे हैं, वहीं अब नेपाल भी हमसे दूर होने लगा है । नेपाल ने कुछ समय पहले एक नया नक्शा भी जारी किया, जिसमें उसने कई भारतीय जगह को अपने नेपाल के अंतर्गत दिखाया था । नेपाल का इस तरह भारत विरोधी होना हमारी विदेशी नीति की असफलता को बताता है ।

इस अभिभाषण के माध्यम से सरकार ने केवल अपनी नीतियों का व्याख्यान किया है, जबकि वास्तविकता इस से परे है ।

     

*श्री ओम पवन राजेनिंबालकर (उस्मानाबाद): मैं राष्ट्रपति जी के अभिभाषण के धन्यवाद प्रस्ताव पर अपने विचार रखना चाहता हूँ ।

          मैं सरकार को यह बताना चाहता हूँ कि मेरे उस्मानाबाद लोक सभा क्षेत्र में अक्टूबर, 2020 में भारी मात्रा में वर्षा हुई थी, जिसके कारण हमारे सारे किसानों को खरीफ के मौसम में लगाया गया सोयाबीन, उड़द, प्याज, तूर जैसी अनेक खरीफ की फसलों का भारी मात्रा में नुकसान हुआ और इस भारी वर्षा के कारण सारे नदी, नाले उफान पर थे, जिसके कारण भयंकर बाढ़ के हालात पैदा हुए और इसमें किसानों कि पूरी फसल, मिट्टी धसने की वजह से लाइट के सारे पोल, फसल व मिट्टी पानी से बह गई । इसके कारण किसानों को राहत देने के लिए महाराष्ट्र के मुख्य मंत्री श्री उद्धव ठाकरे साहब ने और शरद पवार साहब ने उस्मानाबाद, लातूर और सोलापुर जिलों का दौरा किया । किसानों का जो भारी मात्रा में नुकसान हुआ, जैसे उनके पशु पानी में बह गए, घर बह गया, फसल और जमीन बह गई । इसका जायजा लिया और किसानों को राहत देने के लिए प्रति हेक्टेयर 10,000 रुपये की राशि की मदद किसान के खाते में जमा कर दी । जिनकी जमीन बह गई थी, उनको प्रति हेक्टेयर 25,000 रुपये की मदद की । लेकिन केन्द्र सरकार के माध्यम से बाढ़ के दो महीने के बाद केन्द्र के वरिष्ठ अधिकारी जायजा लेकर चले गए । लेकिन किसानों को एक पैसे की भी मदद आज तक केन्द्र सरकार द्वारा नहीं मिली है । यह गम्भीर बात है । मैं सरकार से विनती करता हूं कि केन्द्र की सरकार भी इन सारे क्षतिग्रस्त किसानों को 25,000 रुपये की मदद तत्काल दे । यह मेरी आग्रहपूर्वक मांग है ।

          मैं सरकार के निरीक्षण में और  प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना के बारे में महत्वपूर्ण बात सरकार के संज्ञान में लाना चाहता हूं कि मेरे चुनाव क्षेत्र में हजारों किसानों ने हजार लाख हेक्टेयर क्षेत्र का प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना में खरीफ की फसलों का बीमा निकाला था । लेकिन अक्टूबर, 2020 में भारी मात्रा में वर्षा के कारण खरीफ की फसल का नुकसान हुआ था और इस फसल के नुकसान की जानकारी बीमा कम्पनी के पोर्टल पर 72 घंटों के अंदर फसल के नुसकान की जानकारी देने का कठिन प्रावधान है । उस समय बहुत सारे गाँवों में बिजली के पोल बह जाने की वजह से बिजली 20 या 30 दिनों तक नहीं थी, जिसके कारण किसान यह जानकारी बीमा कम्पनी के पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत नहीं दर्ज करा सकें । इसकी वजह से बीमा भरने वाले लाखों किसान फसल का नुकसान होने के बावजूद बीमा नहीं मिल सका । इसके लिए मैं सरकार से विनती करता हूं कि इसमें 72 घंटों में ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की शर्त निकाल दें और मेरे चुनाव क्षेत्र के किसानों को बीमा देने के लिए संबंधित कम्पनी को आदेशित करे और किसानों को राहत दे ।

                 

श्रीमती नवनित रवि राणा (अमरावती): माननीय सभापति महोदया और सभी सांसदगण, मैं राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर अपना समर्थन व्यक्त करती हूं । कोरोना काल के समय में जब देश एक बहुत बड़ी महामारी का सामना कर रहा था, उस वक्त प्रधान मंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना से देश में 80 करोड़ लोगों की मदद हुई और जिस क्षेत्र, जिस राज्य से मैं बिलॉन्ग करती हूं, वहां पर 7 करोड़ से भी ज्यादा लोगों को इस योजना का लाभ मिला है । मैं इसके लिए पंत प्रधान जी का दिल से बहुत-बहुत धन्यवाद करती हूं ।

          सभापति महोदया, उज्ज्वला योजना के तहत दिए जाने वाले फ्री गैस सिलेण्डर का लाभ भारतवर्ष में 14 करोड़ से भी ज्यादा माताओं-बहनों को मिला है । मेरे महाराष्ट्र राज्य में 7 लाख से भी ज्यादा माताओं और महिलाओं को चूल्हे से राहत मिली है और धूंए को साइड में रखकर उनको घर तक ये सुविधाएं फ्री दी हैं । …(व्यवधान) आप वहां से ऐसे करेंगे तो ऐसे लगेगा कि समय समाप्त हो रहा है । अभी बहुत सारी चीजें हैं । कोरोना के साथ-साथ राज्य सरकार की लापरवाही और फेल्योर के कारण लोगों को बहुत नुकसान झेलना पड़ा है । पीएम केयर्स फण्ड से महाराष्ट्र में केन्द्र सरकार ने सबसे ज्यादा पीपीई किट्स, वेंटीलेटर्स, एम्बुलेंस, सेनिटाइजर्स, बैड्स, मास्क्स और 42 कोरोना टेस्टिंग लैब्स तथा कई सुविधाएं दी हैं, लेकिन हमारी राज्य सरकार ने पीएम केयर्स फण्ड का सबसे ज्यादा विरोध किया । राज्य में मुख्य मंत्री सहायता निधि बंद कर दी गई । पब्लिक हेल्प के विषय राज्य के अंतर्गत होते हैं, लेकिन राज्य सरकार से ज्यादा केन्द्र ने इनकी जवाबदारी ली । हमारे … * इस काल में ‘माझे कुटुम्ब, माझी जवाबदारी’ का नारा देते रहे । वे पूरे समय बोलते रहे कि ‘माझे कुटुम्ब, माझी जवाबदारी’, लेकिन उन्होंने हमारा महाराष्ट्र, हमारी जवाबदारी पूरे कोरोना पीरियड में एक भी टके नहीं ली ।

महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा जीवित हानि होने के साथ-साथ महाराष्ट्र सरकार ने अपनी नाकामी छिपाने के लिए महाराष्ट्र में डेथ रेट भी छुपाई है । महाराष्ट्र की हेल्थ की परिस्थिति आज इतनी खराब है कि इसका उदाहरण कुछ दिन पहले भी हम सभी के सामने आया है । यवतमाल जिले में 12 बच्चों को पोलियो डोज की जगह पर सेनिटाइजर डोज दिया गया । उसके कुछ दिन पहले हमारे भण्डारा जिले में अस्पताल में आग लगने से आईसीयू में, जहां माताएं अपने बच्चों को पैदा होने के बाद एक, दो दिन के बच्चों को ठीक करने के लिए लेकर गईं थीं, वहां के अस्पताल की लापरवाही की वजह से दस बच्चों के जीवन के साथ खेलने का काम हमारे … *करते हैं । वह उस पर कोई बयान नहीं करते हैं, उसकी सुविधा पर कोई बात नहीं करते हैं । ऐसी परिस्थति हमारे महाराष्ट्र में है ।

महाराष्ट्र में सस्ती मेडिसिन देने के लिए प्रधान मंत्री जन औषधि योजना से 500 से अधिक जेनेरिक मेडिसिन आउटलेट शुरू होने से लोगों का सस्ते तरीके से इलाज हो रहा है । मैं उसके लिए दिल से प्रधान मंत्री जी का धन्यवाद करती हूं । नागपुर में स्थापित एम्स की वजह से, जो लोग अच्छे इलाज के लिए मुंबई या हैदराबाद जाते थे, आज विदर्भ के अंदर जब एम्स आया है तो जितने भी डिस्ट्रिक्ट विदर्भ से बिलॉन्ग करते हैं, उन सभी का इलाज ऑल इण्डिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सांइसेज में हो रहा है ।

23.00 hrs इस स्कीम के अंतर्गत तीन लाख से ज्यादा लोगों ने ऑपरेशन करवाए हैं । मुझे प्रसन्नता है कि पंत प्रधान आवास योजना के अंतर्गत महाराष्ट्र में 12 लाख परिवारों को लाभ मिला है । इस स्कीम के तहत   मेरे   जिले   में,   शहरी   और ग्रामीण इलाकों में 50 हजार लोगों को घर की सुविधाएं मिली हैं ।…(व्यवधान)        

          वर्ष 2014 से 2019 तक महाराष्ट्र में कृषि संबंधी अनेक क्रांतिकारी निर्णय लिए गए थे, जिसके कारण एक समय इरिगेशन में पीछे रहने वाला महाराष्ट्र माइक्रो इरिगेशन में टॉप फाइव स्‍थान पर आता था । पर ड्रॉप – मोर क्रॉप स्कीम को ध्यान में रखते हुए महाराष्ट्र में जलयुक्त शिविर सफल योजना को लागू किया गया । इसके अंतर्गत छ: लाख से ज्यादा प्रोजेक्ट्स 22 हजार गांवों में पूरे किए गए । दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि ठाकरे सरकार ने इस योजना को स्थगित करने का काम किया है । हमारे महाराष्ट्र में एक चलन चला है कि जो भी केन्द्र से योजना आएगी उसे पहले स्थगित करना है, विरोधी पार्टी के माध्यम से काम आएंगे तो उनको स्थगित करना है । हमने महराष्ट्र की गवर्नमेंट को, ठाकरे सरकार को स्थगित सरकार का नाम दिया है । मैं उसका उदाहरण आपको देती हूं कि पिछली सरकार के मुख्यमंत्री आदरणीय देवेन्द्र फड़णवीस साहब जो योजना लाए, अगर आप उनके नाम पढ़ेंगे, उन्हें देखेंगे, तो लोगों को हैरानी होगी कि इतने बड़े प्रोजेक्ट्स को कोई सरकार कैसे स्थगित कर सकती है । आप मुंबई मेट्रो के बारे में बात कर सकते हैं, आरे कारशेड, बुलेट ट्रेन, ग्राम सड़क योजना, मराठवाड़ा वाटर ग्रिड, सीएम फेलोशिप, मुंबई-पुणे हाइपरलूप, नगर विकास और ग्रामीण विकास की कई सारी लोक कल्याणकारी योजनाओं को स्थगित किया गया है । जब दिवाली के दिन पूरा देश दीए से रोशन हो रहा था, तो महाराष्ट्र के किसानों के घरों में बेमौसम बारिश की वजह से हुए नुकसान के कारण अंधेरा था । मैंने और विधायक रवि राणा जी ने किसानों को मुआवजा देने के लिए आवाज उठाई, तब …*           सरकार, ठाकरे सरकार ने सैकड़ों किसानों के साथ विधायक राणा जी को तीन दिनों तक अरेस्ट करके जेल में रखा । जब हम किसानों के साथ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री जी के पास जा कर निवेदन देने की विनती कर रहे थे, तो …* सरकार, ठाकरे सरकार ने हमें सैकड़ों किसानों के साथ डिटेन करके मुंबई नहीं पहुंचने दिया । यह सबसे कमाल की बात लगती है कि वे लोक सभा में किसान बिल का समर्थन करते हैं, लेकिन राज्य सभा में वाक आउट करते हैं । जब मुंबई में आकर महाराष्ट्र के किसान विरोध प्रदर्शित करते हैं, तो महाराष्ट्र की ठाकरे सरकार के मुख्यमंत्री उनसे जाकर नहीं मिलते हैं, पर इनके फ्लोर लीडर यहां के किसानों को गले लगाते हैं । मुझे लगता है कि यह …* सरकार…(व्यवधान) मैं दो मिनट में अपनी बात समाप्त करूंगी । ठाकरे सरकार की …*  राजनीतिक चल रही है । उसे न यहां का मामला समझ आ रहा है और न ही वहां का मामला समझ आ रहा है, सिर्फ स्थगित करने वाली सरकार है ।

 

23.03 hrs.                                   (Shri Kodikunnil Suresh in the Chair) हमारे महाराष्ट्र में कुछ प्रॉब्लम्स हुई हैं । आदरणीय सचिन तेंदुलकर जी, जिनको सभी युवा आइडल मानते हैं और आदरणीय लता मंगेशकर जी, जिनके स्वर में सरस्वती विराजमान हैं, आज ऐसी दो महान हस्तियों पर चौकसी लगा कर उन पर एफआईआर दाखिल करेंगे । वह इस बात को लेकर है कि विदेश के लोगों ने हमारे देश में होने वाले फार्मर्स प्रोटेस्ट के हित में वे ट्वीट किया है,  इसलिए उन्होंने अपना विरोध दिखाया है । उन पर इंक्वायरी होनी चाहिए और इन पर पुन: केस  दाखिल होना चाहिए । यह महाराष्ट्र की सरकार कर रही है । लता मंगेशकर जी को भारत रत्न दिया गया है, सचिन तेंदुलकर जी को पद्म विभूषण दिया गया है । अगर लता मंगेशकर जी को देश का सबसे बड़ा अवार्ड दिया गया है तो कोई लता मंगेशकर जी पर इंक्वायरी बैठाने के लिए कैसे सोच सकता है? …(व्यवधान) यह कहा जा रहा है कि भाजपा के दबाव के कारण इन्होंने ट्वीट किया है । कृपया मुझे बोलने के लिए एक मिनट का और समय दें । हमारे जैसे लोगों पर अन्याय न करें । …(व्यवधान)

          मेरे जिले के तीन लाख किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि द्वारा प्रति व्यक्ति छ: हजार रुपए मिले हैं ।…(व्यवधान) सर जी, क्या हुआ । मैं पंजाबी भी बोलूंगी ।…(व्यवधान) पीएम फसल योजना से महाराष्ट्र में एक करोड़ से ज्यादा किसानों ने इसका लाभ लिया है ।

HON. CHAIRPERSON : The next Member to speak is Shri P. P. Chaudhary.

… (Interruptions)

SHRIMATI NAVNEET RAVI RANA : Just allow me to mention the last point.

HON. CHAIRPERSON: Please conclude now. Kindly see the time.

… (Interruptions)

HON. CHAIRPERSON: There are a number of Members to speak, and we have to finish before 12 o’clock.

… (Interruptions)

SHRIMATI NAVNEET RAVI RANA: Sir, everybody spoke so much and delivered big speeches here. …(Interruptions)

HON. CHAIRPERSON: No, your time is already over. Now, you are taking excess time.

… (Interruptions)

HON. CHAIRPERSON: Please conclude now.

… (Interruptions)

SHRIMATI NAVNEET RAVI RANA: Sir, you know that I am the only Member. Kindly allow me to mention the last point.

माननीय सभापति जी, मैं रेल मंत्री जी का दिल से धन्यवाद करना चाहूंगी कि कोरोना पीरियड में किसान रेल के माध्यम से महाराष्ट्र के किसानों को विशेष लाभ मिला । 100 किसान रेलों से महाराष्ट्र के किसानों ने कोरोना काल में सब्जियों और फलों को अच्छे दाम पर बेचा । मुझे यह बताते हुए अत्यंत खुशी होती है कि महाराष्ट्र के किसान द्वारा उगाए गए 1100 टन से अधिक अनाज किसान रेल द्वारा देशभर की मण्डियों में बेचा गया । अपने भाषण को समाप्त करते हुए, कर्तव्य-निष्ठा और धैर्य से कोरोना काल में लोगों की जानें बचाने वाले डॉक्टर्स, नर्सेज, एम्बुलेंस ड्राइवर्स, स्वच्छता कर्मचारी, पुलिस और बैंक कर्मचारी आदि सभी का मैं आभार व्यक्त करती हूँ । ऐसी कठिन परिस्थितियों में आगे रहकर लोगों की रक्षा करने वाले टेम्परेरी कर्मचारियों को परमानेंट किया जाए । मैं आपसे ऐसी विनती करती हूँ । डॉक्टर्स व अन्य को ध्यान में रखते हुए जो फ्री में वैक्सीन देने का काम पंत प्रधान और इस सरकार ने किया है, मैं उनका दिल से बहुत-बहुत धन्यवाद करती हूँ ।

*SHRI MANOJ KOTAK (MUMBAI NORTH-EAST):  I would like to express my views on the Motion of Thanks to the President's Address.

I would like to mention here regarding farmers. I am not able to understand why some farmers from some States are sitting on a dharna like this by blocking the border of the National Capital Territory. All the three Bills are made by our Government and duly passed by the Parliament. Once the Parliament has passed this law after discussion, then it is our duty to keep respecting this Bill and let it be implemented to benefit the farmers. Our Government has the highest sympathy towards farmers and 12 rounds of meeting has been held for the solution and still it is the kind gesture of our Prime Minister that he is saying that Government is one phone call away. Our Government is quite optimistic to find the solution on this issue at the earliest but it is my humble request to all the farmers/ farmers’ leaders, who are agitating in the Delhi Border, not to think oppositely. It is your Government; it is your Prime Minister who is thinking always for betterment of kishan bhai and to get better price for their produce.

As the respected President has said, we are moving fast on various stages of development. We are competing the world and, in some places, we are leading the world. The Government is always moving towards the New India and the whole world is looking upon us with great hope.

I would like to mention about the resources part also for which our Government has motivated the people of our country. When people see good development, they always come forward for making their contribution. The number of income tax returns filed in 2014 was 3.31 crores only. In 2020, it has doubled to 6.48 crores today. The taxpayer also plays a role in the construction of this country. I always believe that we all must realize this and contribute our own part for the development of our own country.

I would like to mention here that in the last six years under the leadership of Shri Narendrabhai Modi ji, we have also worked upon on our foreign policy very well. The statement of Prime Minister, which he gave inside the United Nations Assembly in 2014, will be praised by everyone.

We had won the heart of the global community. We are moving forward in leading the world. You must see the matter of vaccinemaître. India has won the heart of the globe. We stood first in supporting the world in difficult time, either by medicine or by vaccine. We are moving forward with the help of development diplomacy. But I feel that many times our Members from the Opposition do not even recognize it because they are associated with their politics and have denied to appreciate the good work done by the Government. But the whole world appreciates the work of our Government.

We have not forgotten the supreme sacrifice of our Army and our Government’s reaction upon it. About defence, it is our most priority issue. The hon'ble Prime Minister and the hon'ble Defence Minister have a clear view about defence and our border. While maintaining good relations with our neighbouring countries, we have not compromised with our boarder/land dispute. We have created the post of 'Chief of Defence Staff' because of which good results are coming out. We are also working on 'Atmanirbhar Bharat' on defence production. We are also giving very good importance to the participation of women in our job creation in the Defence Department.

As the time is very less and lots of speakers are about to speak, I am ending my views with appreciation to the Motion of Thanks to the President’s Address. Thank you.

                                                                                        

श्री पी.पी. चौधरी (पाली): माननीय सभापति महोदय, श्रीमती लॉकेट चटर्जी द्वारा माननीय राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद के लिए रखे गए प्रस्ताव का मैं समर्थन करता हूँ ।

          सभी माननीय सदस्यों का भाषण सुनने के बाद और माननीय राष्ट्रपति जी का अभिभाषण पढ़ने के बाद, साढ़े छ: साल पहले लंदन के गार्जियन अखबार में जो पब्लिश हुआ, उसकी चार लाइनें मैं पढ़ना चाहूंगा । जिस हिसाब से पिछले साढ़े छ: साल में एक पारदर्शी शासन दिया गया और गार्जियन अखबार ने साढ़े छ: साल पहले जो लिखा, यह उसका एडिटोरियल है- “India : another tryst with destiny”. This was printed in The Guardian, London on 18 May, 2014. It stated : “Today, 18 May 2014, may well go down in history as the day when Britain finally left India. Narendra Modi's victory in the elections marks the end of a long era in which the structures of power did not differ greatly from those through which Britain ruled the subcontinent. India under the Congress party was in many ways a continuation of the British Raj by other means…”.

          सभापति महोदय, प्रधानमंत्री मोदी जी ने देश के लिए या पूरे विश्व में, जिस हिसाब से हमारे देश को ख्याति प्राप्त हुई है, आज भारत को विश्व में वर्ल्ड फार्मेसी कहा जाता है । चाहे शुरुआत में 150 देशों को हाइड्रॉक्सील क्लोरोक्वीन और पैरासिटामोल भेजने की बात हो, हम सोच सकते हैं कि हमारी आउटरीच प्रधान मंत्री मोदी जी के नेतृत्व में कितनी बढ़ी है । इसके साथ-साथ, मेडिकल डिवाइसेज में, चाहे फेस मास्क, फेस शील्ड, वेंटिलेटर, एसेंशियल सर्जिकल डिवाइसेज हों, एक समय देश में इन सारी चीजों का इम्पोर्ट होता था, लेकिन अब देश इन चीजों का एक्सपोर्ट करने लगा है ।

          जहाँ तक वैक्सीन की बात है, यह देश और देशवासियों के लिए बड़ी खुशी की बात है कि मोदी जी के नेतृत्व में वैक्सीन की मैन्युफैक्चरिंग का जो काम हुआ, हमारे जो पड़ोसी देश हैं और जो फ्रेंडली नेशंस हैं, ऐसे 17 देशों को हमने ये सारी चीजें सप्लाई की हैं । हमने उनके लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम्स भी रखे हैं । यही नहीं, इस बात के लिए यूनाइटेड नेशन ऑर्गेनाइजेशन ने भी भारत की प्रशंसा की है । उन्होंने कहा है: “I think that the production capacity of India is one of the best assets the world has today, and I hope the world understands that it must be fully used”.

          यह यूनाइटेड नेशन्स ने कहा है । ब्राजील के राष्ट्रपति ने भी इसके बारे में कहा है । हमारे कई मित्र हैं, जिनको तकलीफ हो सकती है । उन्होंने ट्वीट किया है, जिस हिसाब से हनुमान जी लक्ष्मण जी के लिए संजीवनी बूटी लेकर गए और उन्होंने अपने ट्वीट में पवनपुत्र हनुमान जी को दिखाया है । यह हिन्दू गॉड्स के लिए, हमारे लिए बहुत बड़ी बात है । …(व्यवधान)

          यही नहीं, मैं यह भी बताना चाहूंगा कि वर्ल्ड हैल्थ ऑर्गनाइज़ेशन के डायरेक्टर जनरल   डॉ. टैड्रोज़ ने भी भारत को धन्यवाद दिया और मैं यूएस स्टेट डिपार्टमेंट का क्वोट बताना चाहूंगा । अमेरिका जैसा देश, जो कि महाशक्ति है, उसने भारत के लिए कहा है – “We applaud India’s role in global health: sharing millions of doses of COVID-19 vaccine in South Asia; India’s free shipment of vaccine to Maldives, Bhutan, etc.; and India, a true friend, using its pharma to help the global community.” हमारे लिए यह बहुत बड़ी बात है, गर्व की बात है । इसके साथ-साथ जिस हिसाब से इंडिया में और ग्लोबली कोविड का जो मैनेजमेंट हुआ, वह पूरे विश्व के बड़े-बड़े देश, बड़ी-बड़ी शक्तियां, चाहे अमेरिका हो या इटली हो, वे भी इसे मैनेज नहीं कर पाए । हमारे यहां डैथ रेट बहुत कम था, क्योंकि हमने टाइमली जो एक्शन लिया, वह अपने आप में एक बहुत बड़ा कदम था ।

          सभापति महोदय, मैं यह भी बताना चाहूंगा कि जिस हिसाब से पूरे विश्व में, चाहे गल्फ कंट्रीज़ में हों, यूरोप में हों या अमेरिका में हों, पूरे विश्व में हमारे मज़दूर हों या किसी तरह के भी लोग हों, जो स्ट्रैन्डेड थे, वैसे करीब 40 लाख लोगों को वन्दे भारत मिशन के तहत यहां लाया गया और 1 लाख 10 हजार लोगों को, जो विदेशी थे, उन्हें वापस उनके देश में भेजा गया ।

We have Standing Committees in Parliament. Basically, Standing Committee stands in the shoe of Parliament. जो स्टैंडिंग कमेटी कहती है, यह माना जाता है कि पार्लियामेंट वह कहती है । मैं बताना चाहूंगा कि होम अफेयर्स की कमेटी के चेयरमैन कांग्रेस के माननीय मेंबर ऑफ पार्लियामेंट आनंद शर्मा जी हैं । उस स्टैंडिंग कमेटी में सभी पार्टी के लोग हैं, उन्होंने अपनी रिपोर्ट में कोविड के गवर्नमेंट द्वारा किए गए पूरे मैनेजमेंट की प्रशंसा की है । मैं उसमें से क्वोट करना चाहूंगा ।

In the Management of COVID-19 Pandemic and Related Issues Report, it says: “The Committee observes that several steps were taken much ahead of what many other countries took subsequently for the screening of travellers and passengers coming from abroad into India.” The Committee appreciates the efforts made by the Government for the management of COVID-19 Pandemic. The lockdown gave the country time to ramp up its public health infrastructure, build the capacity of hospitals and health care workers, and cooperative federalism to serve the people - कमेटी ने फिर ऑब्ज़र्व किया – “The Government ensured the availability of all essential commodities. The Government announced Pradhan Mantri Garib Kalyan Yojana (PMGKY), wherein targeted relief was for the most vulnerable sections of the society. Since the crisis was unprecedented, the overall plan for its management was coordinated through meetings of the Prime Minister with Chief Ministers/ Administrators and other high-level meetings involving Senior Officers of Centre and States. The steps were taken to ensure that the poor people in both urban and rural areas are not deprived of any benefit of social security, food, and shelter as announced by the Government.” इस रिपोर्ट के बाद जहां तक कोविड मैनेजमेंट के बारे में बात करनी है, तो मैं यह कह सकता हूं कि यदि कमेटी ने कहा है, तो पूरी पार्लियामेंट ने कोविड मैनेजमेंट के लिए सरकार की, हमारे प्रधान मंत्री जी की प्रशंसा की है । हमारी जो मल्टी पार्टी कमेटी है, उससे ऊपर उठकर मैं कमेटी को इस बात के लिए धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने कोविड मैनेजमेंट के लिए हमारे प्रधान मंत्री जी और सरकार की बहुत जबरदस्त प्रशंसा की ।

             यही नहीं, मैं हैल्थ कमेटी की बात करता हूं, जिसके चेयरमैन प्रो. राम गोपाल यादव जी हैं, जो समाजवादी पार्टी से आते हैं । उनकी कमेटी ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा है – On PM's Jan Andolan against Pandemic - “The Committee appreciates the PM's call for Jan Andolan against Pandemic. The Committee agrees that pandemic Covid-19 can be contained and controlled by adhering to Covid Appropriate Behaviour across the country and therefore, each State Government must make their best efforts to live up to the objective of the Jan Andolan. On Strategic Approach, the Committee observes that after a steady increase in the number of Covid cases across the country, there has been a downtrend in Covid Cases.”              मैं यह कह सकता हूं कि चाहे होम अफेयर्स की कमेटी हो, चाहे हैल्थ की कमेटी हो, दोनों कमेटीज़ के बारे में माना जाता है कि उनके द्वारा कोई बात कही जाती है, तो पूरी पार्लियामेंट के द्वारा कही जाती है । इस कमेटी ने भी कोविड के मैनेजमेंट के बारे में सरकार की भूरी-भूरी प्रशंसा की है ।  

          सभापति महोदय,  कोविड के समय विश्व के देशों से चाहे सार्क लीडर सम्मिट हो, चाहे एक्स्ट्रा आर्डिनरी जी-20 वर्चुअल सम्मिट हो, चाहे ग्लोबल एलायंस हो, चाहे नॉन कांटेक्ट ग्रुप हो, सभी से किसी न किसी रूप में फार्मल या इनफार्मल मीटिंग होती रही है । जहां तक इंटरनेशनल आउट-रीच की बात है, अमेरिका, जापान, आस्ट्रेलिया और भारत, जिसे क्वाड कहते हैं, इन देशों से हमारे संबंध प्रगाढ़ हुए हैं । गल्फ कंट्रीज हमेशा पाकिस्तान का पक्ष लेती थीं, चाहे साउदी अरब हो, चाहे यूएई हो । परशियन गल्फ एक ऐसा पोरशन था, जहां हमारी आउट रीच बहुत कम थी, लेकिन प्रधान मंत्री जी की जो डिप्लोमेसी है, जो स्ट्रेटेजिक अप्रोच है, उसकी वजह से अब ये कंट्रीज भी हमारे साथ हैं और पाकिस्तान को अलग-थलग कर दिया गया है । जिस हिसाब से प्रधान मंत्री जी की दूरदृष्टि look east and act east policy चाहे साउथ चाइनीज सी हो या पेसिफिक ओशन हो या इंडियन ओशन हो, जितनी भी उनमें कंट्रीज हैं, उनके साथ हमारे संबंध मजबूत बने हैं । हमारी सरकार के पहले कार्यकाल में जो सर्जिकल स्ट्राइक हुई थी, उससे पाकिस्तान को संदेश गया कि भारत एक मजबूत देश है और इसके साथ कोई टेरर एक्टिविटी बर्दाश्त नहीं की जाएगी । भारत द्वारा बालाकोट सर्जिकल स्ट्राइक के बाद ऐसी घटनाओं में कमी आई है । पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में लाने का काम माननीय नरेन्द्र मोदी जी ने किया है । जहां तक चाइना की बात है, डोकलाम में 72 दिनों तक प्रधान मंत्री जी चट्टान की तरह खड़े रहे । मेरा मानना है कि यदि कांग्रेस की सरकार होती, तो हो सकता है कि वह विदड्रा कर लेती क्योंकि उन्हें डर रहता कि कहीं वॉर न हो जाए । जहां तक गलवान वैली की बात है, वहां भी जो घटना हुई, उसमें हमारे बीस सैनिक शहीद हुए,  अनइनफॉर्म सोर्सेज बता रहे हैं कि चाइना के लगभग 50 से ज्यादा सैनिकों की कैजुअलटी हुई । हम कह सकते हैं कि प्रधान मंत्री जी की दूरदृष्टि देश के लिए और विश्व में भारत का मान-सम्मान बढ़ाने में सफल हुई है । जब भी देश परेशानी में होता है, कांग्रेस के नेता राहुल   गांधी  जी   बार-बार ट्वीट करके कहते रहते हैं कि देश की स्थिति पिछले साढ़े छह साल से कमजोर और वर्नेबल हुई है । मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि हमारे संबंध विश्व के देशों से प्रगाढ़ हुए हैं । हमारा कद विश्व में बड़ा हुआ है । हमारे प्रधान मंत्री जी नियमित रूप से शिखर सम्मेलन कोविड के समय भी कर रहे थे । उस समय अनौपचारिक बैठकें भी होती थीं और चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कोरिडोर के  बारे में पहले बात नहीं होती थी, लेकिन अब हम बात करते हैं । चाइना बैलटन एंड रोड की बात हम करते हैं । साउथ चाइना सी में हमारी पोजिशन मजबूत हुई है और यूएनओ में हमने पाकिस्तान को अलग-थलग करने का काम किया है । राहुल गांधी जी 20 अक्टूबर, 2020 को ट्विट करके कहते हैं कि हमारी सरकार होती, तो हम चाइना के सैनिकों को पन्द्रह मिनट में उठाकर अपनी सीमा से फैंक देते, लेकिन मेरा कहना है कि जब सीमा पर ऐसी स्थिति होती है तो इस तरह की स्टेटमेंट नहीं आनी चाहिए । मैं बताना चाहता हूं कि ओबामा जी ने उनके बारे में क्या लिखा है । अभी अधीर रंजन जी कह रहे थे कि आप केवल मोदी जी के बारे में ही बात करते हैं । वे कह रहे थे कि आप केवल अपने लीडर की बात बोलते हो, आप हमारे लीडर की बात क्यों नहीं करते हैं । मुझे लगा कि मुझे राहुल जी के बारे में भी बोलना चाहिए, नेहरू जी के बारे में भी बोलना चाहिए । मैं ओबामा जी की किताब ‘ए प्रोमिस्ड लैंड’ की चार लाइनें कोट करना चाहता हूं – “Rahul Gandhi has a nervous, unformed quality about him, as if he were a student who had done the coursework and was eager to impress the teacher but deep down lacked either the aptitude or the passion to master the subject.” केवल इतना ही नहीं, यह तो अमरीका के राष्ट्रपति जी ने लिखा है, जो विश्व का सबसे शक्तिशाली देश है ।…(व्यवधान)

          उन्होंने लिखा है । मैं इसीलिए वापस कह रहा हूं । मुझे तो अधीर रंजन जी आदेश देकर गए कि आप हमारे नेताओं के बारे में भी बताएं, इसीलिए मैं बता रहा हूं । …(व्यवधान)

THE MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF FINANCE AND MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF CORPORATE AFFAIRS (SHRI ANURAG SINGH THAKUR): He is quoting from a book. …(Interruptions) There is nothing to be deleted. …(Interruptions) He is quoting what a former President of America has written. …(Interruptions) इसमें गलत क्या है ।

श्री पी.पी. चौधरी : सर, मैं यह कहना चाहता हूं । …(व्यवधान)

श्री जगदम्बिका पाल : इस हाउस के माननीय सदस्य अपनी तरफ से सफाई भी दे सकते हैं, अगर उनको कोई बात गलत लगती है । जो इस हाउस के सदस्य हैं, उनके बारे में हम बोल सकते हैं ।…(व्यवधान)

श्री पी.पी. चौधरी: सर, मेरी रिक्वेस्ट है कि कृपया आप मुझे पहले सुन लें । …(व्यवधान) माननीय सदस्य, कृपया बैठ जाएं । सियाचिन ग्लेशियर के बारे में बताना चाहता हूं कि जब मनमोहन सिंह जी की सरकार थी तो उस समय सरकार ने सेना को वहां से वापस लाने और गुड जेस्चर के रूप में उसे पाकिस्तान को देने की सोच ली थी । यही नहीं, वर्ष 2010 से 2013 के बीच में चाइना ने छ: सौ चालीस स्क्वायर किलोमीटर का एरिया ऑक्युपाई किया और उस समय फॉरेन सेक्रेट्री श्री श्याम शरण थे । उस समय वह नैशनल सिक्योरिटी काउंसिल के चेयरमैन थे । उन्होंने खुद ऐसा अपनी रिपोर्ट में लिखा । वर्ष 2010 से 2013 में चाइना की तरफ से करीब 600 बार इन्कर्शन्स हुए और उसके बाद जब डोकलाम, गलवान वैली की बात हुई तो राहुल जी चुपके-चुपके चाइनीज एम्बेसी में चाइनीज ऑफिसर्स से मिलने जाते हैं । …(व्यवधान) यह सोचने की बात है । इसके अलावा कांग्रेस पार्टी और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना के मध्य एग्रीमेंट वर्ष 2008 में साइन हुआ है, आगे कांग्रेस का क्या हाल होगा, कोई क्या जाने ? मामला अभी भी कोर्ट में है, उसकी डिटेल समय आने पर बताई जाएगी । …* से चाइनीज एम्बेसी द्वारा और चाइनीज गवर्नमेंट द्वारा उसमें पैसा आता है । इसके अलावा भारत सरकार का भी पैसा जाता है और पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग का भी पैसा जाता है । जब उनको कैग की ऑडिट के लिए कहा जाता है, तो उनके द्वारा मना किया जाता है । यही नहीं, इसी बात पर मुझे 2008 में एमओयू के साइन होने की बात याद आ गई । हालांकि यह अटल जी की कविता है । अटल जी ने पाकिस्तान और अमेरिका के लिए कही है, लेकिन मुझे लगता है कि यह बात राहुल जी और चाइना पर भी लागू होती है, कांग्रेस और चाइना पर भी लागू होती है । मैं ज्यादा समय नहीं लूंगा ।  …(व्यवधान) मैं अटल जी की कविता में से पांच-छ: लाइनें पढ़कर सुनाना चाहता हूं-

   

“एक नहीं दो नहीं, करो बीसों समझौते, पर स्वतंत्र भारत का मस्तक नहीं झुकेगा, अगणित बलिदानों से अर्जित यह स्वतंत्रता, अश्रु, स्वेद, शोणित से सिंचित यह स्वतंत्रता, त्याग, तेज, तप, बल से रक्षित यह स्वतंत्रता, दु:खी मनुजता के हित अर्पित यह स्वतंत्रता, इसे मिटाने की साजिश करने वालों से कह दो, चिंगारी का खेल बुरा होता है, औरों के घर आग लगाने का जो सपना, वह अपने ही घर में सदा खरा होता है, अपने ही हाथों तुम अपनी कब्र ना खोदो, अपने पैरों पर आप कुल्हाड़ी नहीं चलाओ,                 ओ नादान कांग्रेस अपनी आंखें खोलो॥” …(व्यवधान)

          महोदय, यही नहीं, मैं और भी बताना चाहूंगा । ये बड़े नाराज हो रहे थे । अधीर रंजन जी  नाराज होकर गए थे कि हमारे नेहरू जी के बारे में आप नहीं बोलते हैं । मैंने कहा कि ठीक है, नेहरू जी के बारे में भी बता देते हैं । …(व्यवधान) देश की फॉरेन पॉलिसी देश के इंट्रेस्ट को ध्यान में रखकर बनाई जाती है । यह प्रिंसिपल पर, इंटरनेशनल वर्ल्ड ऑर्डर पर आधारित होती है, लेकिन उस समय वह अपने यहां से राजदूत यानी एम्बेसेडर के रूप में अपने …* को भेजते थे । उनका काम केवल यह था कि नेहरू की इमेज कैसे पूरे विश्व में चमकाएं, न कि उनका यह काम था कि दूसरे देशों से इंडिया के फ्रैंडली रिलेशन्स कैसे बढ़ाएं और भारत के हित में काम कैसे करें । यही नहीं, 1962 का युद्ध एक ऐसा युद्ध था, जिसको भुलाया नहीं जा सकता है । उस समय हम कहते रहे-‘हिंदी, चीनी, भाई-भाई’ लेकिन यूनाइटेड नेशन्स सिक्योरिटी काउंसिल के लिए पर्मानेंट मेंबरशिप की बात आई तो नेहरू  जीने थाली में रखकर चाइना को दे दिया । यह वही चाइना है जो हमेशा हमारे खिलाफ वीटो करता है । यही नहीं, प्रधान मंत्री मोदी जी ने अभी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की टेम्परेरी मेंबरशिप के लिए, उनकी डिप्लोमेसी से, वेरियस कंट्रीज में उनकी आउटरीच होने की वजह से 184 कंट्रीज ने इंडिया के फेवर में वोट दिया है । चाइना हमारे खिलाफ रह रहा है और जबकि अमेरिका, वर्ष 2015 में ओबामा ने कहा कि वह स्थायी सदस्यता के लिए हमेशा इंडिया के साथ रहेगा । यही नहीं बाइडेन गवर्नमेंट भी हमारे साथ है ।

HON. CHAIRPERSON : Please conclude. Your time is over.

श्री पी. पी. चौधरी : मैं पाँच मिनट में अपनी बात समाप्त कर रहा हूँ । मैं वर्ष 1947 के युद्ध की बात करना चाहूँगा ।

HON. CHAIRPERSON : Your party has a number of Members to speak.

SHRI P. P. CHAUDHARY : My party is not objecting, Sir.

HON. CHAIRPERSON : A number of Members are waiting. Please conclude within two minutes.

श्री पी. पी. चौधरी: महोदय, पाकिस्तान के हमलावरों ने वर्ष 1947 में कश्मीर पर हमला किया । वहाँ के महाराजा हरि सिंह जी के कहने पर हमारी सेना ने उनको वापस खदेड़ा, लेकिन उसके बाद में, जब हम जीते हुए थे, लेकिन वे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मामला ले गए और कश्मीर को अटका दिया । उस समय 370 का स्पेशल स्टेटस दिया गया । उसका परिणाम यह रहा कि वहाँ पर हमेशा टेररिस्ट और इस तरह के जो लोग हैं, स्पेशल स्टेटस देने की वजह से वह टेररिस्ट का शरणगाह बन गया । इस वजह से हमेशा हमारे लिए प्रॉब्लम रही । सीज फायर की वजह से हमेशा प्रॉब्लम रही और इस वजह से एंटी नेशनल एलीमेंट वहाँ पर रहे ।

मैं अपने माननीय प्रधान मंत्री जी और गृह मंत्री अमित शाह जी को धन्यवाद देता हूँ कि उन्होंने 5 अगस्त, 2019 को आर्टिकल 370 में संशोधन करके एक देश, एक निशान, एक संविधान का काम किया है । आखिर में मैं पाँच लाइनें कोट करना चाहूँगा । जिस हिसाब से प्रधान मंत्री मोदी जी के बारे में टाइम मैगजीन में एक लेख आया है और वह भी अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा जी ने लिखा है ।

The article was titled as ‘India’s Reformer-in-chief’. He says: “As a boy, Narendra Modi helped his father sell tea to support their family. Today, he is the leader of the world’s largest democracy and his life story from poverty to Prime Minister reflects the dynamism and potential of India’s rise. Determined to help more Indians follow in his path, he has laid out an ambitious vision to reduce extreme poverty, improve education, empower women and girls, and unleash India’s true economic potential while confronting climate change. Like India, he transcends the ancient and the modern.” Thank you.

 

*SHRIMATI SUPRIYA SADANAND SULE (BARAMATI): The Indian economy contracted by 7.7% in 2020-21 FY, being one of the lowest in six years. While the economy was decelerating, the states found themselves resource strapped as the funds they ought to receive from the Centre were delayed. Factors such as low growth momentum and deteriorating Government finances has contributed to the Moody's Investors Service to downgrade India's investment rating to 'Baa3' in 2020, which is the lowest grade of investment ratings.

          As the economy regains momentum in the last quarter of 2020-21, the prices of petrol and diesel were increased drastically. For instance, in just one week in January 2021, their prices were increased four times to an all-time high of Rs.85.7 per litre of petrol and Rs.75.8 per litre of diesel. Since this could dampen the consumer demand of the economy, the Centre should consider reducing the excise duty on petrol and diesel.

          From 2006-07, the Terms of Trade (ToT) of agriculture which is indicative of how remunerative agriculture is, improved to 102.95 in 2010-11. ToT is measured by the ratio of the price farmers pay for their inputs to the price they receive for farm output. Since 2014-15, ToT deteriorated to below 100 to as low as 96 in 2018-19. Given this non-profitability of agriculture, it is important to guarantee MSP for farm output in APMCs. But with the 3 new farm laws the farm produce can now be sold at any price and place. With such deregulation of farm prices and markets, there are apprehensions of rollback of MSP and agricultural mandis. Given the large-scale protests by farmers against these laws, these farm laws must be withdrawn and new Bills must be drafted taking into consideration the farmers’ concerns and demands with the promise of continuation of MSP for farmers.

          The President's Address refers to the Centre's decision to increase the MSP to at least 1.5 times the cost of production. Between 2006-07 and 2013-14, there was a 90 to 205% rise in the minimum support price (MSP) of major crops, including paddy, wheat, arhar, gram, maize and masoor. During the subsequent six years of the NDA Government, the MSP has grown at a modest rate of 40-73%. Under the NDA Government, however, the MSP of paddy only saw an increase from Rs 1,310 in 2013-14 to Rs 1,868 in 2020-21 — a 43% growth as compared to the 126% growth seen during UPA. I would also like to bring to this Government's notice that the MSP recommended by the Swaminathan Committee is to be calculated using the more comprehensive C2 cost formulae and not the A2+FL formulae used by the Centre.

          The President's Address mentions the measures taken by the Centre to ensure that the poor would not go hungry. During the pandemic when the migrant workers and poor were facing food grain shortage, the Food Corporation of India (FCI) storehouses were holding grains in excess of the stipulated limit. The Economic Survey 2020 has pointed out the Government to be the single largest hoarder of grains in the country. Instead of mandating release of food grains above a certain limit, the amendment to the Essential Commodities Act (one of the 3 farm laws) excluded the Public Distribution System (PDS) from the purview of the law, thus allowing the Government to continue to hoard grains (or) store grains above the minimum required level.

          The Delhi High Court also observed that the distress caused to people by the lockdown has been aggravated by the “denial of access of food grains” to the poor, under-privileged and marginalised sections. Thus, if we are to ensure sufficient supply of grains to the needy, food grains above the minimum buffer requirement with the FCI must be mandated to be released during times of grain shortage and price rise.

          The President's Address applauds the Centre's timely decision to save lives during the pandemic. But due to an arbitrary lockdown, 198 migrant workers died in road accidents while countless others died out of hunger and exhaustion. In a completely callous display of apathy, the Government stated that it has no data on migrant deaths.

          The President's Address refers to the ‘collective strength of federal structure.' But there is no mention of the funds the Centre owes to the States. Despite the increased health expenditure by the States during the pandemic, the Centre delayed the transfer of GST compensation cess to the States. As per the Finance Ministry data, for the State of Maharashtra, the provisional amount of GST Compensation due for (April-July, 2020) was Rs.22,485 crore. During the same period, the compensation arrear for all States combined was Rs.1,51,365 crore. Such delay in the devolution of funds from the Centre has severely limited the States' ability to spend on their welfare and development including keeping COVID-19 under control.

          The Economic Survey 2020-21 also refers to the record GST collections of over Rs.100,000 crore in 3rd quarter of 2020-21 ending in December 2020. Despite such record collections, the President's Address is silent on the revenues it owes to the states. The Centre must clearly specify the timeline by when it will transfer the GST compensation cess to states.

          The Address stresses the power of Digital India in maintaining growth momentum. According to the National Sample Survey Report on Education (2017-18), only 24% of households in India have some members with access to the internet. The fact that 42% have access in urban areas while only 15% in rural areas also widens the urban-rural divide.

          The President's Address alludes to defence production under Make in India as a major driver of manufacturing and boost to the economy. I would like to question the Centre as to what tangible results have been achieved so far through this initiative. How much have our domestic manufacturing and industries benefited from this? I would also like to question the Centre on the efforts being taken to make the Indian defence manufacturing companies self-reliant in manufacture of advanced aircraft (technical know-how) and to further the technological advancement at Hindustan Aeronautical Limited (HAL) and other defence public sector enterprises.

 

          The very spirit of our Indian Constitution is of tolerance – tolerance for different cultures, minorities, dissent, among others. But this Government has shown intolerance at every stage - intolerance to minorities, dissent – which is primarily reflected in its clampdown of protests against the farm laws in the country. In the coming financial year, I urge the Centre to consult all the stakeholders before drafting policies and uphold the federal structure of our economy.

 

*SHRI GURJEET SINGH AUJLA (AMRITSAR):   I thank you, hon. Chairman Sir, for speaking on the discussion on the motion of vote of thanks on the President’s Address to both Houses of Parliament.

          Sir, the Government brought three black laws pertaining to agriculture.  During the previous Session, when Corona pandemic was on the rise, the Government brought these laws in the Parliament and got it passed without consensus.  Ever since then, the farmers of Punjab and Haryana have been protesting along with farmers from other states like U.P.  The black laws pertaining to provisions related to marketing were anti-farmers.  The interests of the farmers were sold to the capitalists and corporate. 

          Sir, the farmers of Punjab have contributed the lion’s share in the granary of the country by the dint of their sweat and blood.  These farmers are protesting at the Delhi borders and asking for their rights to be restored.  But the Government has turned a blind eye and a deaf ear to their genuine pleas.  The farmers are being defamed and maligned.  They are being called terrorists, Khalistanis, Naxalites and anti-nationals. 

          Sir, the sons of these farmers become martyrs at the border, serving in the army to defend our motherland.  The farmers vote for you so that you are elected Members of this august House.  But, the media has become puppet in the hands of the Government.  They are being accused of treachery and treason by the pro-government media.  Wild accusations are hurled at them.  How can the farmers have faith in such a Government?  How can they repose faith in the meetings called by the Government to solve the problem?

          Today, hon. Minister Tomarji was asking as to which are the black laws.  Sir, these are the very same laws that you got passed in the Parliament.  You have tried all kinds of tricks to end the agitation of farmers.  But, the farmers have refused.  You have …*  even on the floor of the House. You should realize that these are wrong laws.  They must be taken back at the earliest.  Why does the Government not rescind these laws? … (Interruptions)

 

HON. CHAIRPERSON : Aujla ji, please address the Chair. 

… (Interruptions)

*SHRI GURJEET SINGH AUJLA(AMRITSAR): Let us discuss this issue threadbare.  These are black laws.  I will expose your misdeeds.

HON. CHAIRPERSON: Do not listen to anybody.  You address the Chair.

… (Interruptions)

HON. CHAIRPERSON: Bidhuri ji, please sit down.  Let him complete.

… (Interruptions)

HON. CHAIRPERSON: Let him complete.  Whenever your turn will come, you can express; you can quote him.  Please, do not disturb him.  Time is very short.

… (Interruptions)

HON. CHAIRPERSON: Let him complete first.  Whenever your turn will come, at that time you can point out.

… (Interruptions)

HON. CHAIRPERSON: Aujla ji, please carry on.

… (Interruptions)

HON. CHAIRPERSON: Bidhuri ji, please sit down.

… (Interruptions)

 

*SHRI GURJEET SINGH AUJLA: Hon’ble Chairman Sir, the land belongs to the farmer.  He sows seeds and cultivates it by the dint of his sweat and blood.  He plies the tractor.  He takes loan for cultivating the land.  But, cost of food grains is fixed by the Government.  Why do you frame partisan laws?  Anyone should have the right to purchase farmers’ food grains.  Whether it is the middlemen or private players.  You have imposed black laws on the farmers.

          Sir, we strongly condemn the sad incidents that took place at Red Fort on 26.1.2021. But, let me quote: ‘We sacrifice our lives for the tricolour, but you dub us terrorists, Maoists, Khalistanis’.

          Sir, we have great regard for the tricolor.  We are the sons of a great soul Guru Gobind Singh ji who sacrificed his father as well as his sons for the sake of the country.  Don’t teach us nationalism.  We have been trained by Mahatma Gandhi, Chandra Shekhar Azad, Bhagat Singh, Rajguru and Sukhdev, Kartar Singh Sarabha, Subhash Chander Bose, Bal Gangadhar Tilak.  Don’t teach us nationalism or respect for the tricolour.  Your Guru Veer Savarkar ji wrote 123 letters to the British and apologized to them.  You were the … **of the British.  Don’t accuse us of anything.  Punjab has been at the vanguard as far as sacrificing lives for the sake of nation is concerned.  The tricolour was granted to you by Punjab.

          Sir, the media has been controlled by the Government nowadays.  Karl Marx had said.  I quote : ‘The freedom of press is the real freedom … (Interruptions)

HON. CHAIRPERSON: Nothing is going on record except Aujla ji.  Please carry on.

… (Interruptions)* HON. CHAIRPERSON: Nothing is going on record.  Please sit down.

… (Interruptions)* HON. CHAIRPERSON: Bidhuri ji, please sit down.

… (Interruptions)

**SHRI GURJEET SINGH AUJLA: The freedom of Press is necessary to change the situation.

Sir, today, the Press is under pressure from the Government, the capitalists.  This Government has curbed the freedom of the Press.

          Why did we oppose the Hon’ble President’s Address to both Houses of Parliament?  Let me tell, the Hon’ble President is the Head of all States and the Supreme leader.  When you brought the three laws related to agriculture, we had opposed it tooth and nail.  We wanted it to be sent to the Standing Committee.  You clubbed all laws and got it passed arbitrarily in four hours.  You did not listen to us in either Lok Sabha or Rajya Sabha.  Voice vote was done whereas we had asked for Division.  You toyed with the laws.  Punjab and other states have passed laws opposing it.  Why does the hon. President not give his consent to these laws passed by us?

          Sir, the capitalists have enslaved the executive, the judiciary and the legislature.  The need of the hour is to free these institutions from the clutches of capitalists.  The farmers are fighting for their freedom since 1947 and even now.  We will get freed all institutions.

HON. CHAIRPERSON :  Shri Aujla, normally, we don’t mention Rajya Sabha proceedings in the Lok Sabha.  Do not mention it.  It will not form part of the record.

*SHRI GURJEET SINGH AUJLA: We will get freed all institutions.  We don’t want someone to accuse the Hon’ble Supreme Court of partisanship.  Sir, such committees were constituted for farmers that had lost the faith of farmers.  Members resigned from these committees.  This is the situation you have created in the country.

          Sir, I was happy to listen to the Prime Minister say that in 1947, Punjab suffered the most.  In 1984 too, Punjab felt devastated.  But Prime Minister Sir, if you are so concerned, why did you not pay obeisance to the 200 farmers who have lost their lives ever since the inception of farmers’ protest?  These were hapless farmers, not terrorists or Khalistanis.  You should have paid obeisance to them.

HON. CHAIRPERSON: Hon. Members, normally, Rajya Sabha Proceedings will not be discussed in Lok Sabha. So, those things will not come here.

*SHRI GURJEET SINGH AUJLA: Sir, the President’s Address did not tell us how our GDP is going down.  Why unemployment is on the rise?  Why our economy is in shambles?

          Sir, the Government must take back all the black laws pertaining to agriculture at the earliest and listen to the genuine demands of the farmers.

“मिल जाए मौका जब आपको हिन्दू-सिक्ख कराने से, हिन्दू-मुसलमान कराने से, पूंजीपतियों के खजाने भरने से और देश में गंदी राजनीति करने से, तो रोक लेना देश के किसानों को मरने से, आत्महत्या करने से ।” धन्यवाद सभापति जी । जय जवान, जय किसान ।

     

SHRI P. RAVINDHRANATH (THENI): Thank you for the opportunity given to speak on behalf of my AIADMK Party on Motion of Thanks on the President’s Address.

          The Address of the hon. President is not only a report of the achievements but also a blueprint of the future visions of the Government.  Unlike the previous years, the Address of the hon. President has been delivered now while the country is passing through several critical situations followed by the COVID-19 pandemic.

          Sir, it is a matter of immense pride that India under our hon. Prime Minister Shri Narendra Modi Ji is conducting the world’s largest vaccination programme namely, Covaxin and Covishield which are produced indigenously. 

By making lakhs of Corona vaccine dosages available to several countries, India has fulfilled its obligation towards humanity in this time of difficulty.

          Sir, our hon. President, during his speech, has elaborately explained the achievements of the Government in the field of healthcare. In the year 2014, there were only 387 medical collages, but today there are 562 medical collages in the country. At this juncture it is pertinent to mention that my State of Tamil Nadu is blessed with 11 medical colleges.

          Sir, the hon. President, in his address, in para 6, explained the twin challenges faced by the Government are, one, to protect the citizen from global health catastrophe and the other to protect the economy. It is a fact that besides announcing a record economic package for reviving the economy, the Government took care to ensure that no poor person went hungry, particularly during the lockdown period.

          Agriculture is another important sector which has benefited from the various schemes of the Government. I appreciate the steps taken by the Government to enhance the contributions of agriculture in the national GDP. Hon. President has mentioned that to provide expenditure support to farming community, the Government has directly transferred Rs. 1.13 crore to the bank accounts under the Pradhan Mantri Kisan Samman Nidhi. A sum of Rs. 90,000 crore have been paid under the Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana as compensation to the farmers for the last year.

          Sir, at this juncture I would like to inform that Tamil Nadu is one of the States where the majority of the people are engaged in agriculture and on their behalf I would like to express my gratitude to the hon. Prime Minister and at the same time I would like to request the Government to release the requested allocations for granting compensation to the affected farmers due to recent rain in the State of Tamil Nadu.

          Sir, the implementation of the Pradhan Mantri Awas Yojana is one of the achievements of the Government as mentioned by hon. President. I would like to mention here that the Scheme was launched by our hon. Prime Minister in 2015 with an aim to ensure `Housing for all’ with a target to construct 1.12 crore houses in the urban areas in the country. I would like to appreciate the Government that it is going to fulfil the target through its effective and successful implementation of this Scheme.

          If we start to list out the achievements mentioned in the Address of the hon. President, I feel, it would consume more time. Therefore, I would like to conclude in short. The Address of the hon. President lists out the developmental responses in every field accomplished by the Central Government as gems of a garland. The steps taken to combat the COVID-19 pandemic; implementation of Pradhan Mantri Garib Kalyan Yojana; Rashtriya Poshan Abhiyan; The Fit India Movement and Khelo India Abhiyan are some of the initiatives of the Government to bring awareness about health. There were the Ayushman Bharat and the Pradhan Mantri Jan Arogya Yojana to assist 1.5 crore poor people. Also, construction of 6.42 lakh kilometre of road network under Pradhanmantri Gram Sadak Yojana; production linked intensive Schemes to encourage manufacturing sector and vaccination under Mission Indra Dhanush are some of the gems listed in his Address.

          I would like to once again congratulate the Government and urge the hon. Prime Minister to march forward for enhancement of development in every field and prove themselves as an effective Government once again to the country in particular and to the world in general.

          Thank you.

 

डॉ. अमोल रामसिंह कोल्हे (शिरूर): सभापति महोदय, आपका धन्यवाद कि आपने मुझे बोलने का अवसर दिया । माननीय राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में सरकार की कई सारी उपलब्धियों का उल्लेख किया । मैं उन उपलब्धियों के लिए सरकार का अभिनन्दन करना चाहूंगा, जिनका लाभ अंतिम पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति तक पहुंचा हो ।

राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में नए संसद भवन के निर्माण की बात की । यह गर्व की बात है, लेकिन सवाल यह उठता है कि जिस देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था कोरोना की महामारी में बुरी तरह से एक्सपोज हुई हो, उस देश की प्राथमिकता क्या होनी चाहिए? नया संसद भवन   या हर जिले में, हर संसदीय चुनाव क्षेत्र में एक सुसज्ज अत्याधुनिक सार्वजनिक अस्पताल? …(व्यवधान) सिर्फ 22 इंच से कुछ नहीं होगा ।…(व्यवधान) देश की प्राथमिकता को नजर रखते हुए पहले अस्पताल और फिर संसद भवन, इस पर आत्मचिंतन हो, यह मेरी गुजारिश है ।…(व्यवधान) वैसे भी इस संसद भवन की मांग किसी ने नहीं की है, पर हर सांसद मेरी इस बात से सहमत होगा कि हर संसदीय चुनाव क्षेत्र में एमपीलैड फण्ड के तहत होने वाले विकास कामों की मांग जरूर हो रही है । इसलिए मेरी दरख्वास्त है कि इस एमपीलैड फण्ड को अविलम्ब पूर्ववत किया जाए ।

          इस अभिभाषण में केन्द्र और राज्य की सरकारों के बीच समन्वय की भी बात की गई । माननीय वित्त राज्य मंत्री जी अनुराग जी यहां उपस्थित हैं । मैं उनका ध्यान इस ओर आकर्षित करना चाहूंगा कि महाराष्ट्र की सरकार को जी.एस.टी. की 25,000 करोड़ रुपये की राशि प्रदान होनी बाकी है । उस पर अविलम्ब विचार किया जाए ।

          राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में युवाओं के रोजगार की बात की । इस सरकार ने सपना दिखाया था कि सालाना दो करोड़ युवाओं को रोजगार मिलेगा । यह मिलना तो छोड़िए, जो हाथ में था, वह भी चला गया । आज हजार नौकरियों के लिए लाख-लाख युवा एप्लाई करते हैं और फोर्थ क्लास की नौकरी के लिए ग्रैजुएट्स और पोस्ट-ग्रैजुएट्स कतार में खड़े होते हैं । पहले ‘नीम’ और अब नेश्नल अप्रेंटिस जैसे प्रोग्राम और जो नीतियां हैं, वे देश के युवा वर्ग के लिए शोषण व्यवस्था साबित हो रही हैं क्योंकि पहले नौकरी लग जाती हैं और फिर माँ-बाप शादी कर लेते हैं और फिर दो साल में कम्पनी ब्रेक दे देती है, ताकि उसको परमानेंट न करना पड़े । इससे युवा के भविष्य में अंधेरा  छा  जाता है । इसलिए इन युवाओं के आक्रोश को समझें और इन नीतियों पर पुनर्विचार करें ।

          इस अभिभाषण में और एक बहुत अच्छी बात कही गई, वह है आत्‍मनिर्भर भारत की । जब हम सब ने सुना था कि देश को बिकने नहीं देंगे तो हर किसी को गर्व महसूस हुआ था, लेकिन शायद उसके बाद ओएलएक्स का विज्ञापन कुछ ज्यादा प्रभावशाली साबित हुआ और वह नीतियों में भी दिखने लगा । बेच डाल । बीपीसीएल बेच डाल, बीएसएनएल बेच डाल, एयरपोर्ट्स बेच डाल, सी पोर्ट्स बेच डाल और अब यह डर लगने लगा है कि क्या यह आत्मनिर्भर भारत की बात हो रही है या कोई चुनिंदा पूंजीपति निर्भर भारत की? मैं सचेत करना चाहूंगा कि इस प्रकार से मुक्त अर्थव्यवस्था की आड़ में अगर हम क्रोनी कैपिटलिज्म को बढ़ावा देकर देश के संसाधनों को चुनिंदा पूंजीपतियों के हाथों में सौंप देंगे तो देश की आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी ।

राष्ट्रपति जी के अभिभाषण में किसानों की योजनाओं की बात की गई । लेकिन, आज जो हमारे अन्नदाता, हमारे किसान भाई दिल्ली की सरहदों पर आंदोलन कर रहे हैं, जिनमें 200 से अधिक भारतीय, मैं उन्हें भारतीय कहूंगा, जिनमें 200 से अधिक भारतीय शहीद हुए हैं, उनके प्रति कोई संवेदना इस अभिभाषण में नहीं दिखाई दी, यह आश्चर्यजनक है । गणतंत्र दिवस पर जो    घटना घटी, उसकी आलोचना अभिभाषण में हुई ।…(व्यवधान) Please let me continue. …(Interruptions) हिंसा का कोई समर्थन नहीं हो सकता और न ही होना चाहिए, लेकिन उसके उपलक्ष्य में   किसान   आंदोलन   को   बदनाम   करने   की   जो साजिश रची गई, वह निंदनीय है ।…(व्यवधान) पहले बताया गया कि सिर्फ पंजाब के किसान हैं, फिर बताया गया कि ये तो आढ़तिया हैं, फिर बताया गया कि ये खालिस्तानी हैं ।…(व्यवधान)

 

HON. CHAIRPERSON : Shri Bidhuri, why are you standing?  Please take your seat.

… (Interruptions)

DR. AMOL RAMSING KOLHE: Sir, please bring the House to order.…(Interruptions)

HON. CHAIRPERSON: When you will be getting an opportunity to speak, you may say all these things.  Why are you standing up every now and then?

… (Interruptions)

 

डॉ. अमोल रामसिंह कोल्हे (शिरूर): सर, गणतंत्र दिवस पर जो घटना घटी, उसकी आलोचना अभिभाषण में हुई । हिंसा का कोई समर्थन नहीं हो सकता और न ही करना चाहिए, लेकिन उसके उपलक्ष्य में इस किसान आंदोलन को बदनाम करने की जिस तरह से साजिश रची गई, वह निंदनीय है ।

          पहले बताया गया कि ये सिर्फ पंजाब के किसान हैं । फिर बोला गया कि ये आढ़तिया हैं, खालिस्तानी हैं । उसके बाद तथाकथित आई.टी. सेल और मीडिया के कुछ नुमाइंदों ने उन्हें देशद्रोही करार दे दिया । मैं पूछना चाहूंगा कि जो बाप अपने 18 साल के नौजवान बेटे को बोलता है कि उठ तुझे फौज में भंर्ती होना है, तुम्हें बेल्ट की नौकरी करनी है । जो माँ अपने बेटे को बॉर्डर भेजते हुए कहती है कि अगर दुश्मन ने देश पर गोली चलाई, तो तुम्हें अपना सीना आगे कर देना है, तो वे देशद्रोही क्यों कहे जाते हैं? आज बेटा सियाचिन में माइनस डिग्री सेल्सियस में देश की रक्षा कर रहा है और उसका 70 साल का बूढ़ा बाप दिल्ली की सरहदों पर अपने हक के लिए कड़ाके की सर्दी में आंदोलन कर रहा है, तो किस मुंह से बोलेंगे ‘जय जवान, जय किसान’ । आज तो देश को दो नए शब्द मिले हैं । उनमें से एक है- ‘आंदोलनजीवी’ । मैं इस शब्द के लिए शुक्रगुजार हूं ।

*जो भाजपा के नेता कभी भी आंदोलन करते रहते थे, उनको क्या कहना चाहिए, यह हमें इस शब्द से समझ में आया । मजदूरों के लिए हमारे बाबा आढाव जैसे कार्यकर्ता जो उम्र के 90 साल में भी आंदोलन में सक्रिय है । यह हमारे महाराष्ट्र के लिए अभिमान और गौरव की बात है ।

          लेकिन, मैं आपके माध्यम से पूछना चाहूंगा कि जिस देश की स्वतंत्रता की बुनियाद ही आंदोलन हो, उस देश में इस बात का प्रयोग कैसे किया जा सकता है । यहां पर कई माननीय सदस्य बोलते हुए, परराष्ट्र में, जिन्होंने अच्छी बात की उसकी सराहना की, लेकिन यह कैसी विडम्बना है कि जब ब्राजील के राष्ट्राध्यक्ष संजीवनी की उपाधि देंगे, तो हम खुश होंगे । जब अमेरिकी पूर्व राष्ट्राध्यक्ष हाउडी मोदी बोलेंगे, तो हम तालियां बजाएंगे और जब कोई विदेशी मानवता के दृष्टिकोण से किसान आंदोलन पर टिप्पणी करेगा तो फिर फॉरेन रेस्पेक्टिव आइडियोलॉजी हो जाती है । बैरिकेड्स लगाना, फेंसिंग करना, यह किस प्रजातंत्र का लक्षण है! महामहिम राष्ट्रपति जी ने अपने अभिभाषण में आर्य चाणक्य की पंक्तियों का उल्लेख किया, लेकिन मैं इस सदन को बताना चाहूंगा कि उन्हीं आर्य चाणक्य ने यह भी बताया कि जब राजा का अहंकार प्रजा हित से ऊपर उठ जाए, तो समझ लेना कि उसके शासनकाल का अंत निश्चित है । इसीलिए, मैं दरख्वास्त करूंगा कि संवेदनशीलता से इस समस्या का किसानों के हित में हल निकालें, ताकि फिर हर देशवासी गर्व से  कह सके - ‘जय जवान, जय किसान’ ।*   श्री जसबीर सिंह गिल (खडूर साहिब): सर, जब हम इन तीन काले कानूनों के लिए महामहिम से मिलकर गुहार लगा रहे थे कि इन पर दस्तख्त मत कीजिए, अगर वह कर दिए होते तो आज हम भी महामहिम जी का ढिंढोरा पीट रहे होते, उनका ढोल बजाकर स्वागत करते होते । मैं अपनी बात एक छोटी कविता से शुरू करूँगा ।

    जब आप भी बोलेंगे, कल आपके लीडर्स बोलेंगे तो हम भी डिस्टर्ब करेंगे । हमें दो मिनट्स बोलना है । कृपया हमें समय दे दीजिए *Sir, I will recite a poem:

‘O Modiji, please listen to the Just demands of people.
Do not destroy us to help your Associates.’ If you disturb me, we will disturb your leader when he speaks tomorrow.  So, kindly give me two minutes to have my say.
          Sir, I was happy when Modi ji went to Gurdwara Sahib.  Yesterday too, when he said some good words about Punjab and Punjabis, I was happy.  However, over 200 farmers have been killed since the inception of farmers’ protests.  But, the hon. Prime Minister did not even tweet about them.  In Indonesia, 62 people died. 
     
23.56 hrs                                  (Hon. Speaker in the Chair) A tweet was sent by the Hon’ble Prime Minister regarding them.  However, he had nothing to say regarding the farmers who become martyrs.  This exposes his policies and his intentions.

          Sir, the black laws were passed in a tearing hurry. The method too leaves much to be desired. When Corona was at its peak, there was a lockdown.  At that time, the Government brought the ordinance.  The farmers started opposing it.  These were anti-farmer policies.  Demands for scrapping the laws grew.  But, instead of handing these bills to a Select Committee or a Standing Committee, the Government chose to use its brute majority to get passed these laws.

          The Government could have consulted the aggrieved farmers earlier.  Then, there would have been no protests.  Secondly, anyone can do marketing anywhere with the help of his Aadhaar Card.  There is no need for him to take a licence.  There would be no check on him without a licence.  This is a Black law.  Thirdly, an agreement is reached with a farmer that wheat will be purchased at Rs. 2000/- per quintal.  But, there is surplus production of wheat this time.  Wheat will be available at Rs. 1500 per quintal outside.  Naturally, wheat will be purchased at Rs.1500/- and the farmer will suffer.  No SDM can help the hapless farmers against capitalists.  

          Sir, the federal structure of the country is being encroached upon.  In the Constitution, agriculture is a state subject.  Today, you are encroaching upon the rights of the states.  Sir, we were not given our G.S.T. in Punjab.  Our share of Central Taxes has not been given to us.  Our RDF was stopped.

          I do not know, who are the advisors of hon. Prime Minister.  Earlier, he had a very good image.  But, due to some of these …** his reputation is being spoiled.  In Punjab we have a saying –           ‘Instead of a foolish friend,           A wise enemy is preferable’.

          So, I urge upon the Government to remove the …** who have given wrong advice to the hon. Prime Minister.  

          First, these laws must be scrapped.  Then, the Prime Minister should get rid of his advisors.  They do not deserve the posts they are holding.  Sir, I will conclude in two minutes.  Please give me some time.

          Sir, whatever happened on 26th January is condemnable.  I condemn them thoroughly.  But, Sir, there is a point to be noted.  A few mischievous elements hijacked the show over there and misled the simple farmers.  These people have already been apprehended.  However, over 125 innocent farmers have been put in jails.  Cases of treason have been lodged against them.

          Sir, I urge upon the Government to release these simple farmers so that a conducive environment is created.  Those guilty must be brought to book.  However, innocent farmers should be released.  Thank you.

 Jai Hind. Jai Jawan, Jai Kisan.*