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            Therefore, I would like to quote a journalist who has been normally very critical of our viewpoint and in a paper also which is known not to be particularly soft towards us, she has written an article. She has been a television commentator and she says that people will cite statistics. That is not the issue. She wrote an article in The Hindustan Times on the 21st of July. The caption was “Out with your Inner Voice” and the opening was:
“We do not need a statistical survey to tell us the mood of the nation. These are depressing times.”   And she goes on to explain why these are depressing times. We are discussing Mumbai. Therefore I quote only that.

इन्हीं शब्दों के साथ एक बार पुन: प्रधानमंत्री के जो वक्तव्य हैं, उन्हें स्वीकार करते हुए मैं उनसे कहना चाहूंगा कि जिस प्रकार से उन्होंने कहा है कि इस सबको नये रूप में देखना चाहिए, वह नया रूप तब होगा, जब वह उसकी व्याख्या यहां करें। इसी के साथ मैं अपना वक्तव्य समाप्त करता हूं।

 MR. SPEAKER: Thank you very much.

            Hon. Members, do you wish to have a recess now? Okay, very well. Shri P.R. Dasmunsi[R9] .

   

संसदीय कार्य मंत्री तथा सूचना और प्रसारण मंत्री (श्री प्रियरंजन दासमुंशी) : माननीय अध्यक्ष महोदय, आज कुछ समय पहले प्रतिपक्ष के माननीय नेता श्री लाल कृष्ण आडवाणी जी के द्वारा जो स्थगन प्रस्ताव लाया गया है, …( व्यवधान) सरकार की तरफ से, कांग्रेस पार्टी की ओर से तथा पूरे यू.पी.ए. की ओर से मैं उसका विरोध कर रहा हूं। इसका कारण क्या है, यह मैं पहले बताऊंगा। इस संसद पर सन् २००१ में १३ दिसम्बर को जो आतंकवादी हमला हुआ, उसका जिक्र करते हुए आज के प्रतिपक्ष के नेता ने अपनेभाषण में, अपने बयान में कहा था कि पिछले दो डिकेड में इतनी बड़ी सर्वनाश की घटना नहीं हुई। उस दिन तत्कालीन हमारी प्रतिपक्ष की नेता, हमारी यू.पी.ए. की चेयर पर्सन, श्रीमती सोनिया गांधी जी उसी कुर्सी पर बैठी थीं और सोनिया जी जब वहां बैठीं थीं, तो १३ तारीख की घटना के बाद दुनिया चकित हो गई और हमारी पार्टी के बहुत से लोगों ने कहा कि इस समय सरकार को ढंग से पकड़ो। उनकी कमियां क्या हैं, उनकी कमज़ोरियां क्या हैं, उनकी विफलता के ऊपर कदम उठाओ। सरकार के खिलाफ या तो अविश्वास-प्रस्ताव लाओ या स्थगन प्रस्ताव लाओ। सभी पार्टीज हम से मिले लेकिन हमारी प्रतिपक्ष की लीडर श्रीमती सोनिया गांधी जी ने कहा कि इस समय हमें देश की एकता और सदन की एकता दुनिया को दिखानी है। हम किसी हालत में वाजपेयी जी की सरकार के खिलाफ इस मौके का फायदा उठाते हुए कोई कार्य स्थगन प्रस्ताव लाने के लिए तैयार नहीं हुए। मैं बधाई दूंगा कि उस दिन आप भी इस जगह पर बैठे थे, सभी लोगों ने कहा तथा मुलायम सिंह जी ने भी कहा और हम सब इस सलाह से एकमत हैं कि पार्लियामेंट पर हमले के बाद आडवाणी जी या वाजपेयी जी के त्यागपत्र की मांग करना या सदन का विभाजन हो, यह दिखाने का समय नहीं है। इसलिए उस दिन आडवाणी जी, आप याद करें, हम सारे कागज लाए हैं। १८ दिसम्बर को इसी सदन में एक शॉर्ट डयूरेशन डिसकशन लाया गया ताकि जैसा वाजपेयी जी का अनुरोध था और सोनिया गांधी जी का अनुरोध था कि हम दुनिया को दिखाएं कि टैरेरिस्ट के खिलाफ पूरा सदन एक है, कोई विभाजन नहीं है। उस दिन मुलायम सिंह जी के बयान के बाद जो शुरूआत हुई, सोनिया गांधी जी ने क्या शुरु किया, I quote:

प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : आप बम ब्लास्ट पर बोलिए।
MR. SPEAKER: Nothing is unparliamentary here.
श्री प्रियरंजन दासमुंशी : Sir, I quote :
“that not we, means Pakistan, the Pakistanis who are responsible, but the Chinese were the root cause of their hassles and that is why he gave our Government a clean chit bill of health on Kargil.”               It was mentioned byhim[snb12] .
It was said by him. आपने कुछ कोट किया। मैं कह रहा हूं कि आपको इतनी तारीफ मिली और इस तारीफ के कारण ही शायद आडवाणी जी ने डिबेट खत्म करने से पहले कहा कि चार आदमी तो इंडिया के पकड़े गए, लेकिन हम लोग पाकिस्तान की तरफ अंगुली उठाते हैं। कसूरी जी का पूरा बयान मेरे पास है क्यों कि आपको दुबारा जिन्ना याद आ गया। …( व्यवधान) 
प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : अध्यक्ष महोदय, इनकी इस बात से मुम्बई ब्लास्ट्स का क्या लेना देना ? …( व्यवधान) 
श्री प्रियरंजन दासमुंशी : लेना-देना है। समझने को दिमाग चाहिए। … (Interruptions)
MR. SPEAKER: You cannot dictate him.
… (Interruptions)
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI:   I am coming to the bomb blasts of MumbaiI would quote what Shri Advani has said in this House on the day of reply, the 18th December. I am quoting from the Parliament proceedings.
 
“The only answer that satisfactorily addresses to the query is that Pakistan, itself a product of the indefensible two-nation theory, itself a theocratic State with an extremely tenuous tradition of democracy is unable to reconcile itself with the reality of secular, democratic, self-confident and steadily progressing India whose standing in the international community is getting inexorably higher with the passage of time.”   थियोक्रेटिकल स्टेज में आपने उस दिन ठीक कहा, लेकिन उसके तुरन्त बाद, जब आप मंत्री नहीं रहे, तब पाकिस्तान के दौरे के समय जिन्ना की समाधि पर जाकर, इस कंटेशन का आपने खंडन कर के उन्हें याद किया और १४ अगस्त को बयान दिया जिसके कारण आपके लिए अपनी पार्टी के अंदर झंझट पैदा न हो। आपको अपने कंसैप्ट पर स्टेबल रहना चाहिए उसे कन्फ्यूज नहीं करना चाहिए। वहां जाकर आपको कहना चाहिए था कIt is you and your theocratic concept are destroying secular India.