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Lok Sabha Debates

Regarding Failure Of The Government To Ensure Security Of The Lives Of Innocent ... on 25 July, 2006

> Title : Regarding failure of the Government to ensure security of the lives of innocent citizens from planned terrorists violence in various parts of the country as has been highlighted by the recent bomb blasts in 7 local trains in Mumbai on 11th July, 2006, killing more than 200 persons and injuring over 700 persons.

MR. SPEAKER: I have to inform the House that yesterday, the 24th July, 2006, I had received notices of Adjournment Motion from Prof. Mahadeorao Shiwankar, Sarvashri Ramji Lal Suman, Yogi Aditya Nath, Chandrakant Khaire, Anant Geete, L.K. Advani and Ramdas Athawale regarding the recent serial bomb blasts in Mumbai and terrorist violence in various parts of the country.  Today (25.7.2006) also, I have received three notices of Adjournment Motion from Sarvashri Anant Geete, L.K. Advani and Braja Kishore Tripathy on the subject.  Since no business could be transacted on 24th July, 2006, the notices tabled by Members yesterday (24.7.2006) are valid for today.

            A ballot was held on 24.7.2006 to determine the inter-se priority and Shri L.K. Advani secured first place. I have given my consent to Shri L.K. Advani who has secured first place in the ballot to move the motion in the following form:

 
“failure of the Government to ensure security of the lives of innocent citizens from planned terrorist violence in various parts of the country as has been sharply highlighted by the recent serial bomb blasts in seven local trains in Mumbai on 11th July, 2006, killing m ore than 200 persons and injuring over 700.”   Shri L.K. Advani may now ask for leave of the House.
SHRI L.K. ADVANI (GANDHINAGAR):  Sir, I am grateful that you have admitted the Adjournment Motion.           
            I seek leave of the House for moving the Motion for Adjournment regarding bomb blasts in seven local trains in Mumbai on 11th July, 2006.
MR. SPEAKER:  Is the leave opposed?
THE MINISTER OF DEFENCE (SHRI PRANAB MUKHERJEE):  Sir, I oppose leave to the Adjournment Motion.  I have no problem if the issue is discussed and debated. The matter is serious and we are extremely sorry that a large number of lives is lost and the Government is ready for discussion[bru2] . But I do not consider that this should be discussed in the form of an Adjournment Motion.  That is why I am opposing it.
SHRI L.K. ADVANI : Sir, I seek leave of the House for moving the Motion for Adjournment regarding bomb explosions in Mumbai.
MR. SPEAKER: Those who are in favour of leave being granted for moving the Adjournment Motion may rise in their places.
SEVERAL HON. MEMBERS rose--
MR. SPEAKER: I find the number is more than the requisite number.
            So, leave is granted. Under Rule 61, the Adjournment Motion is to be taken up at 1600 hours or at an earlier hour.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Everybody has agreed that this is an important issue.  It is left to me and I have admitted the Motion.  There is a requisite number in favour of that.  Of course, you have a right to oppose it. I am not disputing that. 
Under Rule 62, not less than 2 hours and 30 minutes are allotted for its discussion.  The discussion on the Motion, I have decided, may be taken up immediately.  I hope the House agrees and cooperates.
I would appeal to everybody that this is a serious matter.  Let there be a proper discussion with all the solemnity which it deserves.  Every side will be given an opportunity to speak.
 
SHRI L.K. ADVANI : I beg to move:
            "That the House do now adjourn."

            अध्यक्ष महोदय, सामान्यत: मैं सोचता था कि शासन की ओर से स्थगन प्रस्ताव का विरोध नहीं होना चाहिए, क्योंकि मुझे स्मरण है कि पहले भी बहुत बार सत्ता पक्ष इस बात से सहमत न होते हुए भी कि सरकार की कोई विफलता रही है, केवलमात्र और चूंकि यह महत्वपूर्ण विषय है और उसके बारे में देश चिन्तित है, इसलिए सामान्यत: इस प्रकार के स्थगन प्रस्तावों का विरोध नहीं करता।

श्री मोहन सिंह (देवरिया) : वह औपचारिक विरोध था।

श्री लाल कृष्ण आडवाणी : कोई बात नहीं। कल सदन में कुछ कटुता पैदा हुई, जिसके कारण यह हुआ, जो नहीं होना चाहिए।

मुझे स्मरण है कि मैं ११ जुलाई को अपने निर्वाचन क्षेत्र, गांधीनगर में था। दिन भर के मेरे कार्यक्रम थे और रात्रि को दिल्ली लौटने वाला था। जब शाम को सभा को संबोधित कर रहा था, तो पहले पहल मुझे सूचना मिली कि मुम्बई में तीन स्टेशनों पर विस्फोट हुए हैं। इतनी ही सूचना प्रारम्भ में मिली थी। वहां से सभा पूरी कर के मैं दिल्ली लौटने के लिए एयरपोर्ट जा रहा था। तभी एयरपोर्ट पहुंचते-पहुंचते सूचना मिली कि मुम्बई में सात विस्फोट हुए हैं और उनमें मारे गए तथा घायल हुए लोगों की अनुमानित संख्या ७०० से अधिक है। मैंने उसी समय तय किया कि मैं दिल्ली न लौटकर, मुम्बई जाऊंगा और इसीलिए मैं मुम्बई चला गया।

महोदय, वहां जो कुछ मैंने देखा, उसके आधार पर मैं कह सकता हूं कि शायद दुनियाभर की आतंकवादी घटनाओं में मुम्बई की ११ जुलाई की घटना बहुत ही भयंकर घटना है। सारा मामला देख कर, सारे स्टेशनों को देख कर, मृतकों और घायलों को देख कर तथा अधिकारियों से सारा वर्णन सुनकर ऐसा लगता था कि इस घटना को अंजाम देने के लिए महीनों तक की तैयारी हुई होगी। The execution has been to military precision.

  मैं १९९३ वाली घटना के बाद भी मुम्बई गया था और उन सभी स्थानों पर गया था, जहां विस्फोट हुए थे। भले ही उसमें मरने वालों की संख्या ज्यादा थी, मगर यह उससे ज्यादा भयंकर इस कारण है, कि इसमें चुनकर, सोचकर कि हमें केवल लोकल ट्रेन्स में ही विस्फोट करने हैं और लोकल ट्रेन्स भी, एक ही क्षेत्र की, सिर्फ वैस्टर्न रेलवे की ट्रेनों में से सात ट्रेनें चुनी गईं और आठ स्थानों पर विस्फोट हुए। यह सभी लोग जानते हैं और मुम्बई के बारे में कहा जाता है क Local train of Mumbai is the lifeline of Mumbai[r3] .

क्योंकि उसके कारण तुरन्त वहां के जन-जीवन पर प्रभाव पड़ता है। इसीलिए मुझे वहां पर टिप्पणी करते हुए कहना पड़ा - I regard this as a carpet bombing of the lifeline of Mumbai.  It is not ordinary. विस्फोट भी ऐसे थे, जिनको पहली बार भारत में, १९९३ में भी शायद किया गया था। आतंकवाद उससे पहले शुरू हुआ था। पंजाब में पहली बार हमने आतंकवाद देखा, जम्मू-कश्मीर में देखा, लेकिन आरडीएक्स से इस देश का सामना १९९३ में पहली बार हुआ था, जिसमें हमने देखा कि आरडीएक्स कितना भयंकर होता है।

अध्यक्ष जी, दुनिया का कोई देश ऐसा नहीं है जिसको आतंकवाद से इतना लम्बा संघर्ष करना पड़ा हो, जितना कि भारत को करना पड़ा है। Our engagement has been for over 25 years. हमारे पड़ोसी देश ने हमारे खिलाफ प्रौक्सी युद्ध छेड़ा हुआ है और वह युद्ध पहले खालिस्तान के रूप में शुरू हुआ था। जम्मू-कश्मीर की बात मैं यहां नहीं जोड़ रहा हूं। मैं मानता हूं कि पाकिस्तान ने सोचा कि पहले इनके यहां खालिस्तान के नाम पर अलगाव को बढ़ा दिया जाए और फिर उसका प्रसार जम्मू-कश्मीर में हो। पुराने लोग जो राजनीति और संसद में सक्रिय रहे हैं, वे कभी भूल नहीं सकेंगे क पंजाब में कैसी भयंकर स्थिति पैदा हो गयी थी। यहां हमारे अकाली दल तथा पंजाब के साथी बैठे हुए हैं। मुझे वह वर्ष याद है जब पंजाब में संध्याकाल के बाद बहुत से शहरों में लोगों के लिए निकलना असंभव हो गया था। उस समय ऐसी भयंकर स्थिति थी। उस समय मैं भारतीय जनता पार्टी का अध्यक्ष था और मुझे हर सप्ताह अपने किसी न किसी पदाधिकारी की हत्या के कारण वहां जाना पड़ता था, कभी इस जिले में तो कभी दूसरे जिले में। हमारे प्रदेश अध्यक्ष श्री हिताभिलाषी जी की हत्या हो गयी थी। देश को इसका सबसे भयंकर परिणाम भुगतना पड़ा जब १९८४ में देश की प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की हत्या हुई। That was the climax of that particular phase. मैं इसका जिक्र इसलिए कर रहा हूं। …( व्यवधान) 

श्री चरणजीत सिंह अटवाल (फिल्लौर) : लोंगोवाल जी की भी हुई थी।

श्री लाल कृष्ण आडवाणी : लोंगोवाल जी जैसे बहुत से नाम हैं और जब मैं गिनती करता हूं तो इन २५ सालों के इतिहास में, जिनको डिफाइनिंग मोमेन्टस कहें, तो एक प्रकार से वह हमारे दुश्मनों द्वारा भारत पर सबसे बड़ा हमला था। उन हमलों में मैं गिनता हूं, १९८४ में श्रीमती इंदिरा गांधी की हत्या, १९९१ में श्री राजीव गांधी की हत्या, चाहे उसका संबंध उस आतंकवाद से न हो, उसके बाद १९९३ में मुम्बई में सीरियल बम्ब ब्लास्ट, उसके बाद २००१ में भारत की संसद पर हमला और इसके बाद २००६ में मुम्बई की घटना को मैं पांचवीं घटना मानता हूं।…( व्यवधान)

MR. SPEAKER: Nothing will be recorded if any hon. Member speaks without my permission.

(Interruptions) … * MR. SPEAKER: Please do some business seriously.

… (Interruptions)

अध्यक्ष महोदय : आप बैठ जाइए।

…( व्यवधान)

श्री श्रीचन्द कृपलानी (चित्तौड़गढ़) : अध्यक्ष महोदय, यह कोई तरीका नहीं है।

अध्यक्ष महोदय : आप बैठ जाइए। हम कोशिश कर रहे हैं।

...( व्यवधान)

MR. SPEAKER: I earnestly request all the hon. Members to please conduct in a manner which will maintain our dignity.

… (Interruptions)

अध्यक्ष महोदय : आप लोग थोड़ा सुनिए। जब आप भाषण देंगे तो उसमें अपना जवाब दीजिए।

...( व्यव्ाधान[c4] ) श्री लाल कृष्ण आडवाणी : मुम्बई में भी मैंने कहा था कि इसको केवल मुम्बई पर ही हमला नहीं मानना चाहिए, देश पर हमला मानना चाहिए और जो पांच घटनाएं मैंने गिनाई हैं, उन घटनाओं को मैं इसी क्रम में रखता हूं।…( व्यवधान) 

अध्यक्ष महोदय : यह क्या हो रहा है?

...( व्यवधान)

MR. SPEAKER: Everybody is getting upset with all the interruptions.

… (Interruptions)

SHRI HARIBHAU RATHOD (YAVATMAL): Mr. Speaker, Sir, somebody is talking from outside the Chamber and that is coming in the microphone here.

MR. SPEAKER: Thank you for drawing my attention. छोड़िये न, हम बोल रहे हैं। आप लोग हमें मदद देते हैं। हमने सुना है, आप बैठ जाइये। आवाज नहीं आ रही है। हम देख रहे हैं।

* Not Recorded.

श्री मोहन रावले (मुम्बई दक्षिण-मध्य) : क्रॉस कनैक्शन हो रहा है।…( व्यवधान) 

श्री हरिभाऊ राठौड़ : केबिन में कोई बात कर रहा है, इसलिए आवाज आ रही है।…( व्यवधान) 

श्री लाल कृष्ण आडवाणी : पंजाब में जब आतंकवाद चल रहा था, उन दिनों में, प्रधानमंत्री श्रीमती गांधी की हत्या के बाद एक सेमिनार चण्डीगढ़ में हुआ उस सेमिनार में प्रसिद्ध और सम्मानित, वयोवृद्ध पत्रकार सरदार खुशवन्त सिंह जी ने अच्छा भाषण दिया, लेकिन उसका आरम्भ इतना ही था और वह मैं उद्धत करना चाहता हूं:

“I would like to start with a very simple statement which, I believe, should be acceptable to everyone present.”               And I am sure it would be acceptable to everyone present here also. It is simply this.
“Terrorism and civilised society cannot coexist. It has to be one or the other. Anyone who seeks to talk with a gun in his hand has to be replied to by a gun.” यह बहुत फोर्थराइट है, लेकिन इसमें सब्सटांस बहुत है और आज लोग कहते हैं कि Mumbai has returned to normal life. मैं मानता हूं, इस नाते तो नोर्मल है ही, क दूसरे ही दिन ळोकल ट्रेन्स चलने लग गईं। मैं मुम्बई के माहिम स्टेशन पर खड़ा देख रहा था कि कितनी बर्बादी हुई है। उसी समय वहां से कई ट्रेन्स गुजरीं, चली गईं। उसकी बड़ी प्रशंसा होती है, स्पिरिट ऑफ मुम्बई, वो-ये, यह सही बात है, लेकिन कुल मिलाकर देखा जाये तो मुम्बई के इस कांड के बाद देश और मुम्बई की कुल मिलाकर स्थिति को नोर्मल नहीं मानना चाहिए। उसे नोर्मल मानना गलती होगी।
मैं जब यह कह रहा हूं तो मुझे इस बात का संतोष है कि हमारे प्रधानमंत्री ने भी लगभग वैसी बात चीफ सैक्रेटरीज़ को कही। उन्होंने सारे राज्यों के चीफ सैक्रेटरीज़ बुलाये और उनसे बात करते हुए कहा:
“We need to gear ourselves to meet these challenges.”   ये जो चुनौतियां हमारे सामने इस मुम्बई काण्ड के बाद प्रस्तुत हुई हैं, उसके लिए हमें तैयार होना चाहिए।
“Business cannot be carried on as usual.”   अभी तक जिस प्रकार से हम काम करते आये हैं, वैसे ही हम काम करते रहेंगे तो यह रवैया ठीक नहीं होगा।
           
This is Dr. Manmohan Singh speaking to Chief Secretaries.
“We must recognise that past responses are inadequate in dealing with these problems which are of a different intensity, magnitude, scale and scope.”   I am inclined to agree with every word that he has used. We have the Home Minister and the Defence Minister present here, but if the Prime Minister had also been present here it would have been better. Maybe, they are discussing this issue in the other House. But it would be in the fitness of things if this particular debate in which, I am sure, everyone is going to contribute in a very constructive manner is replied to by the Prime Minister himself, because there is an element of foreign policy also involved, not merely defence and home affairs. That is also involved and we do not have any Foreign Minister today, but it is the Prime Minister who is looking after the foreign affairs portfolio.
            Therefore, I would like to quote a journalist who has been normally very critical of our viewpoint and in a paper also which is known not to be particularly soft towards us, she has written an article. She has been a television commentator and she says that people will cite statistics. That is not the issue. She wrote an article in The Hindustan Times on the 21st of July. The caption was “Out with your Inner Voice” and the opening was:
“We do not need a statistical survey to tell us the mood of the nation. These are depressing times.”   And she goes on to explain why these are depressing times. We are discussing Mumbai. Therefore I quote only that.
“The tragedy of Mumbai has left most of us brittle and impatient. Never before has it been an imperative for us to believe that the Government in whose hands we have placed our lives is both strong and united.”   The Government, the Council of Ministers is here. She says it is difficult to believe, meaning that the Government is not strong and the Government is not united. This is the feeling of the common man. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: Nothing will be recorded.
(Interruptions) …* MR. SPEAKER: This is not a point of order. He has not yielded. I will not allow this. Nothing will be recorded. Please take your seat.
(Interruptions) …* श्री लाल कृष्ण आडवाणी : अध्यक्ष महोदय, मात्र पिछले एक वर्षमें, जम्मू कश्मीर और नार्थ ईस्ट को छोड़ दीजिए, ये तो थियेटर्स आफ टेररिज्म हैं । बाकी सारे देश को अगर हिंटरलैंड मान लिया जाए, तो इस हिंटरलैंड में पिछले एक वर्ष में, (विगत जुलाई से लेकर इस ८ जुलाई तक) कुल मिलाकर आतंकवाद के कारण जितने लोगों की मृत्यु हुई हैं और लोग घायल हुए हैं, वह पिछले पच्चीस सालों के इतिहास में अब तक का सर्वाधिक रिकार्ड है। कुल मिलाकर मुंबई में अभी जो घटना हुई, जिसमें दो सौ से अधिक लोग मरे, ३२८ लोगों की मृत्यु हुई है और १०१८ लोग घायल हुए हैं। तब भी इन दो हिस्सों को छोड़कर पिछले वर्षों में आतंकवाद के इतने लोग शिकार नहीं हुए, जितने इसमें हुए। इतना ही नहीं, मैं कह सकता हूं कि मुंबई का १९९३ का वर्ष छोड़ दीजिए, तो बाकी सब वर्षों में मिलकर भी इतनी हत्यायें नहीं हुई। …( व्यवधान) 
अध्यक्ष महोदय :  आप शांत हो जाइए। If you do that your Member will be disturbed. Do not do this please.
...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय :  आप बोलिए।I would request all sides to cooperate.
श्री लाल कृष्ण आडवाणी : एक तरफ आम नागरिकों की हत्यायें, दूसरी तरफ मैं यह भी बता सकता हूं कि इस अवधि में लगातार हम जब पांच साल सरकार में थे, जब भी कभी हम बैठकर हिसाब किताब करते थे, तो यह भी देखते थे कि कितने पुलिस के लोग मारे गए, कितने सुरक्षाकर्मी मारे गए, कितने सैनिक मारे गए और कितने आतंकवादी मारे गए? , अभी दो साल पहले जब यह यूपीए की सरकार आयी, इससे पूर्व के पांच सालों में प्रतिवर्ष आतंकवादियों को समाप्त करने का जो औसत था, वह २४०० था।
* Not Recorded.
That was the average of terrorists eliminated in various conflicts during those five years.  पिछले दो सालों में यह औसत १३६० है।…( व्यवधान) मैं केवल इसलिए कह रहा हूं, क्योंकि प्रधान मंत्री जी…( व्यवधान) 
श्री तरित बरण तोपदार (बैरकपुर) : दोनों आंकड़े गलत हैं।…( व्यवधान) 
MR. SPEAKER: Please sit down.  It is not being recorded.  Why are you speaking?  Nothing is being recorded.
(Interruptions) …* श्री लाल कृष्ण आडवाणी : प्रधानमंत्रीजी स्वयं कहते हैं कि हमारी कार्यवाही पर्याप्त नहीं है, और भी करना चाहिए, समझना चाहिए, business cannot continue as usual. I am inspired by that.  I give my full credit for that. हमारे पड़ोसी देशों ने उनके वक्तव्य को पसंद नहीं किया, उन्हें गृह मंत्री जी का वक्तव्य ज्यादा अच्छा लगा। मैं उसे कोट नहीं करता।…( व्यवधान) 
श्री मोहन सिंह : उन्हें कुछ तो अच्छा लगा।…( व्यवधान) 
श्री लाल कृष्ण आडवाणी : इसीलिए शायद बरखा दत्त को कहना पड़ा कि युनाइटेड भी होना चाहिए, ऐसा नहीं होना चाहिए कि प्रधान मंत्री एक बात कहें, गृह मंत्री दूसरी बात कहें।…( व्यवधान) 
अध्यक्ष महोदय : मोहन सिंह जी, ऐसा मत कीजिए। आप चेयरमैन हैं, बैठे-बैठे मत बोलिए।
...( व्यवधान)
श्री लाल कृष्ण आडवाणी : वह अलग है। वह भी मैंने पढ़ा है।…( व्यवधान) 
MR. SPEAKER: Advaniji, please do not respond to that.
… (Interruptions)
SHRI L.K. ADVANI : I am referring to the Government and, therefore, I would like the Prime Minister to reply.
इस सरकार ने अब तक क्या काम किया है। इस सरकार ने जो प्रमुख काम किए हैं, उनमें पहला काम बड़े गर्व के साथ किया है, जो कॉमन मनिमम प्रोग्राम का भी बड़ा हिस्सा था, कि हम ‘पोटा ‘ खत्म करेंगे,…( व्यवधान) उसे  खत्म कर दिया।…( व्यवधान)   आपने आते ही अपने इस वायदे को पूरा किया। वायदा यह भी था कि आतंकवाद को रोकेंगें , लेकिन उसके लक्षण नहीं दिखते हैं।
* Not Recorded.
मैंने मुम्बई के बाद व्यक्तिगत रूप से गृह मंत्री जी से भी कहा और मैं बता सकता हूं कि आपके राज्यों में बहुत सारे पुलिस अधिकारी, इंटैलीजैंस अधिकारी ऐसे हैं, जो कहते हैं कि -we feel handicapped because of the repeal of POTA. मैंने उन्हें कहा कि अगर आप आज ‘पोटा ‘ फिर से लागू करेंगे तो सारा देश आपको क्रेडिट देगा। आतंकवादियों के मन में आतंक बैठेगा कि यह सरकार भी एक कठोर कानून की आवश्यकता समझती है और पोटा लाई है। हमारा कानून दुनियाभर के देशों के विशेष कानूनों की तुलना में कठोर नहीं है, बल्कि नरम है। अमरीका ने जो कानून बनाया है, ब्रिटेन ने जो कानून बनाया है, जर्मनी, फ्रांस ने जो कानून बनाया है, हमने वे सब मंगवाकर स्टडी किए थे, न केवल स्टडी किए, अपितु सुप्रीम कोर्ट ने ‘टाडा ‘ के संदर्भ में जितने सेफगाड्र्स कहे थे कि उन्हें शामिलकिया। वे सब सेफगाड्र्स प्रोवाइड करके हमने पोटा पारित किया था। हमारे स्वयं के सुरक्षा अधिकारी कहते थे कि हम इससे हैंडीकैप होंगे। आप सुप्रीम कोर्ट वाला प्रावधान डाल रहे हैं, मत डालिए, लेकिन हमने डाला क्योंकि हम समझते हैं कि हमारी डैमोक्रेसी अपने डैमोक्रेटिक होने में, अपने सविल राइट्स पर गर्व करती है। प्रधान मंत्री जी ने मेरी मांग को ठुकराने में ज्यादा देर नहीं लगाई। वे कहीं दौरे पर जा रहे थे और उन्होंने रास्ते में प्लेन में ही कह दिया कि हम नहीं करेंगे।
जुलाई १६ के हिन्दुस्तान टाइम्स में प्रधान मंत्री जी की कोटेशन है, जिसमें उन्होंने कहा है ---
“It is far from true that POTA is the only means to deal with terrorists ”             And he said: “There are many other ways.” उन्होंने दूसरा एक भी कारण नहीं बताया। Dr. Manmohan Singh further said:
“Terrorist acts had taken place even when POTA was in place.” यह एक स्टैन्डर्ड ऑब्ज़र्वेशन है जो केवल प्रधान मंत्री जी का नहीं है, बाकी भी जितने लोग पोटा का विरोध करते हैं, वे हमेशा कहते हैं कि आखिर पोटा था, तब भी क्या हुआ। क्याआतंकवादीगतवधियां रुक गईं ? वे नहीं रुकते। मेरा यह दावा नही है कि पोटा आते ही आतंकवादी गतवधियां रुक जायेगी। हमने कभी यह दावा नहीं किया औंर न ही कोई यह दावा कर सकता है। हिन्दुस्तान में भारतीय दंड सहिंता (आईपीसी) की धारा है कि हत्या प्रतिबंधितहै, अगर कोई हत्या करेगा तो उसे फांसी लग सकती है या आजीवन कैद हो सकती है। …( व्यवधान)  I am not yielding. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: Dr. Krishnan, please take your seat.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER:  What is this going on?
… (Interruptions)                           
श्री लाल कृष्ण आडवाणी : अध्यक्ष महोदय, अगर यह तर्क स्वीकार किया जाये, तो जितने …( व्यवधान) 
श्री तरित बरण तोपदार : आप मिस्टर वाइको के बारे में बोलिये। …( व्यवधान) 
अध्यक्ष महोदय :  मिस्टर वाइको के बारे में वे लोग बोलेंगे। आप बैठ जाइये।
...( व्यवधान)
श्री लाल कृष्ण आडवाणी : मिस्टर वाइको की गिरफ्तारी का हमने भी विरोध किया था। हमने कोर्ट में भी इसका विरोध किया था। हमारी सरकार ने पोटा पारित करने के बाद भी मिस्टर वाइको की गिरफ्तारी का विरोध किया था। …( व्यवधान) 
MR. SPEAKER:  Please do not record.
(Interruptions) … * अध्यक्ष महोदय :  थोड़ी बहुत टोका-टाकी चलती है, लेकिन रनिंग कमेंट्री नहीं चलती।
...( व्यवधान)
श्री लाल कृष्ण आडवाणी : आप थोड़ी बहुत टोका-टाकी कहेंगे तो सारे लोग बोलेंगे। …( व्यवधान) 
अध्यक्ष महोदय :   हम उनको बोलने नहीं देते। वैसे भी हम टोका-टाकी नहीं करने देते हैं। ...( व्यवधान)
श्री लाल कृष्ण आडवाणी : प्रधानमंत्रीजी ने जो तर्क दिया या बाकी लोग जो तर्क देते हैं, उस तर्क को अगर स्वीकार किया जाये, तो बलात्कार के खिलाफ जो कानून है, वह भी खत्म होना चाहिए, हत्या के खिलाफ जो कानून है, वह भी खत्म होना चाहिए या डकैती के खिलाफ जो कानून है, वह भी खत्म होना चाहिए क्योंकि डकैती, हत्या और बलात्कार तो चलता रहता है। …( व्यवधान)  It is so ridiculous that this kind of an argument has been made. So much so why had all other countries of the world at the instance and at the request of the United Security Council adopted special laws?  मैंने उस दिन गृह मंत्री जी से कहा था, जिस दिन यह घटना हुई, उस रात्रि में मैं टेलीविजन पर महाराष्ट्र के डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस, मिस्टर पसरीचा का इंटरव्यू देख रहा था। उनसे कोई पत्रकार कह रहा था कि यह आपकी विफलता है, आपने सावधानी नहीं बरती तथा आपको जो कदम उठाने चाहिए थे, वे आपने नहीं उठाए। इस पर उनका उत्तर था कि मेरा अधिकार क्या है ?  यह बम * Not Recorded.
विस्फोट रेलवेज में हुआ है। अब रेलवेज की सुरक्षा का काम आरपीएफ का है, रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स का है। यह सुनकर मैं हैरान हुआ। उनको साधारण वातावरण में ऐसा जवाब नहीं देना चाहिए था। मैं मानता हूं क it is only extraordinary special laws like POTA Which can enable the States to cut across these restrictions of jurisdiction, etc. and ensure that an evil like terrorism is effectively curbed. ये जो तर्क आते हैं, वे इसमें से आते हैं, जब हम समझते हैं कि साधारण कानून इसका मुकाबला करने के लिए पर्याप्त है। …( व्यवधान)   मेरी गृह मंत्री जी से, इस सरकार से विशेष मांग है। हम कहते हैं कि “POTA is anti-terror.  POTA is anti-terrorism.”  लेकिन आप प्रौजेक्ट करते हैं कि “POTA is anti-Muslim.  POTA is anti-minorities.”             If we want to overcome terrorism, do not communalise the war of the country on terror.  … (Interruptions)
SHRI BASU DEB ACHARIA (BANKURA): You are communalising the country. … (Interruptions)
श्री लाल कृष्ण आडवाणी : संगठित अपराध के खिलाफ महाराष्ट्र सरकार ने एक “मकोका”  कानून बनाया, कानून ठीक है लेकिन आज जो टैरेरिस्ट हैं, अबू सलेम जैसा टैरेरिस्ट है, उसे पहले टाडा कोर्ट में पेश होना था लेकिन वह गायब हो गया। पुर्तगाल सरकार से बात होने में बहुत समय लगा। पुर्तगाल सरकार का कहना था कि आपके यहां कैपिटल पनिशमैंट है इसलिए इसका क्या होगा?  उन्हें एक वचन चाहिए था। उनका कहना था कि हम उसे ऐसे नहीं देंगे। हमारी समझ में जितनी बातचीत हुई, उस बातचीत का परिणाम हुआ कि अबू सलेम भारत आ गया। आज अबू सलेम पर ‘मकोका’  कानून के अधीन मुकदमा चल रहा है। अगर मुकदमा नहीं होता तो शायद कुछ नहीं हो सकता। मुझे माननीय गृह मंत्री जी बतायें कि महाराष्ट्र में ‘मकोका ‘ कानून ठीक है, लेकिन गुजरात में ‘मकोका ‘ कानून ठीक क्यों नहीं है ?  गुजरात की विधानसभ ने इस कानून को पास किया था। हमारी सरकार ने उनको कहा था कि आप इसको इस प्रकार से बदलें । वधानसभा से पारित होकर वह बिल दो साल से केन्द्र के पास लम्बित पड़ा हुआ है और उसको अभी तक स्वीकृत नहीं दी गयी है।…( व्यवधान) 
अध्यक्ष महोदय :  बहुत हो गया, अब आप लोग बैठ जाइए।
आडवाणी जी, कृपया आप बोलिए।
...( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Advaniji,  you are experienced enough to hear all this.
… (Interruptions)
SHRI L.K. ADVANI : But this is irrelevant.  … (Interruptions)
MR. SPEAKER:  Mr. Goyal, please take your seat.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER:  Some  are incorrigible.
… (Interruptions)
MR. SPEKAER:  Mr. Athawale, please take your seat.
श्री लाल कृष्ण आडवाणी : यह देखकर बहुत दुख होता है कि हमारे माक्र्सवादी साथी भी वोट प्राप्त करने के लिए क्या-क्या कर सकते हैं। उन्होंने एक एमपी को मदनी के पास भेजा।  I am sure that the Speaker also would be feeling embarrassed with this kind of a thing… (Interruptions)  It has come in a national daily with the heading ‘MASSAGING TERROR- PART I and MASSAGING TERROR- PART II …(Interruptions)…It is for the Congress and the Communist… (Interruptions)
MR. SPEAKER:  I think, we should have POTA for the House, to control the  House! … (Interruptions)
श्री लाल कृष्ण आडवाणी : क्या आपने इसकी निन्दा की?…( व्यवधान) 
THE MINISTER OF SHIPPING, ROAD TRANSPORT AND HIGHWAYS (SHRI T.R. BAALU): Advaniji, would you please yield for a moment?… (Interruptions)… MR. SPEAKER:  Would you yield?
SHRI L.K. ADVANI :  No, Sir.
MR. SPEKAER: He is not yielding.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER:  Nothing would go on record.
(Interruptions) …* MR. SPEAKER:  Why do you worry?  Nothing is being recorded.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Mr. Ananth Kumar, you are not helping me to control.  I am trying to control him.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER:  Mr. Baalu, please take your seat.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER:  Nothing  will go on record.
(Interruptions) …* MAJ. GEN. (RETD.) B. C. KHANDURI (GARHWAL): Sir, he should apologise… (Interruptions)
MR. SPEAKER:  Nothing has been recorded.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER:  You are not helping me. All of you  become the Speaker; all of you are controlling.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER:  I  am doing it.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER:  If you do not cooperate, I would adjourn the House and go away till 2 o’ clock..
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय : यह सही नहीं है। आप बैठिए।
...( व्यवधान)
* Not Recorded.
MR. SPEAKER:  We want to listen to Advaniji.  Let us hear him.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER:  Mr. Baalu,  he has not yielded.  What can I do?
… (Interruptions)
MR. SPEAKER:  Nothing would go on record.
(Interruptions) …* MR. SPEAKER:  Mr. Baalu, he has not yielded.  Please sit down.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER:  Nothing is being recorded except the submission being made by Mr. L.K. Advani.
(Interruptions) …* SHRI L.K. ADVANI :  Mr. Baalu has worked with me for so many years… (Interruptions)  I would tell you that you are not the principal culprit… (Interruptions)
SHRI T.R. BAALU: That honeymoon is over.… (Interruptions)
प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा (दक्षिण दिल्ली) : अध्यक्ष जी, ये क्या-क्या बोलते जा रहे हैं और आप इन बातों को बड़े आराम से सुन रहे हैं?…( व्यवधान) 
MR. SPEAKER: Prof. Malhotra, nothing has been recorded.  Why do you bother?
… (Interruptions)
MR. SPEAKER:  Mr. Baalu, this is not right.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER:  Mr. Kriplani, please do not dictate to me.  Please sit down.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER:  You must sit down.
… (Interruptions[KD5] )   * Not Recorded.
MAJ. GEN. (RETD.) B. C. KHANDURI : He is dictating. We are not dictating.
MR. SPEAKER: I have not allowed it to be recorded. I cannot physically force him down. I have told him that he has not yielded. If you rise, are you supporting your leader or supporting the Chair? Do not do that. I am trying to control it. This is not right.
प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : सर, आप हमें तो जबर्दस्ती बिठा रहे हैं, लेकिन इन्हें भी बिठाएं।
अध्यक्ष महोदय : उन्हें भी बिठाऊंगा, लेकिन मैं जबर्दस्ती नहीं बिठा रहा हूं, सिर्फ आग्रह कर रहा हूं।
…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Very well, I will adjourn till lunch. If you do not hear your leader, I will adjourn till lunch.
SHRI L.K. ADVANI : The major culprits are the other people. You are a junior partner, जिन्होंने पहले-पहले किया था…( व्यवधान) 
MR. SPEAKER: Please conclude.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Mr. Baalu, this is not right.
श्री लाल कृष्ण आडवाणी : अध्यक्ष जी, जब मैं कोयम्बत्तूर गया थाअगर उस दिन मेरा प्लेन वहां लेट नहीं पहुंचता तो शायद मैं आपके बीच में न होता…( व्यवधान) क्योंकि जो योजना बनी थी, उस योजना के अनुसार वहां चार हयूमन बॉम्ब थे।…( व्यवधान) 
अध्यक्ष महोदय : यह क्या हो रहा है?
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Allow me to speak. एक मिनट मुझे भी सुनने दें कि क्या बोल रहे हैं। This is very strange. How do I tackle it unless you allow me to speak? Unless you allow me to speak, what can I do? Please sit down.
            Such comment, if I have correctly heard it, is most condemnable. It should not be on the record and the hon. Member should not have said that. I strongly protest. All of you please sit down. Do not give him too much importance.
            I will request Mr. Advani to conclude. You have taken nearly 40 minutes.
श्री लाल कृष्ण आडवाणी : अध्यक्ष जी, चुनाव अभियान के दौरान मैं तमिलनाडू का दौरा करते हुए कोयम्बत्तूर गया था। उस दिनयह सारी योजना बनी थी। उस योजना के कारण ५८ लोग मारे गए, लेकिन मैं बच गया, क्योंकि मेरा प्लेन देर से वहां पहुंचा, वह भी इसलिए कि वहां के ई-टीवी वालों ने आग्रह किया था कुछ बोलने के लिए और मैं मना नहीं कर सका। इसलिए मुझे देर हो गई,उसके बाद वहां की सरकार ने उन लोगों को गिरफ्तार किया और षडयंत्र का केस बनाया। उसमें आठ लोग थे, जिसमें मदनी का भी नाम है। He is the person responsible for the death of these 58 people. Then, the Kerala Assembly, just before the Assembly elections, passes a unanimous resolution. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: You can speak later on. He is not yielding. What can I do?
            Yes, Mr. Advani, please continue.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Mr. Ahamed, you will be able to reply.  आप बैठ जाएं।
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: What is happening? Mr. Kriplani, you have developed a bad habit. आप लोग मेहरबानी करके बैठ जाएं।
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Mr. Krishnadas, nothing is being recorded.  When your Member will speak, he will reply to it.
(Interruptions) …* ADV. SURESH KURUP (KOTTAYAM): Is it proper?
अध्यक्ष महोदय : बात प्रॉपर भी है या नहीं, यह मुझे देखना है। If anything is unparliamentary, I will see to that. Please sit down. Please take your seat now. Your Member will reply to that. This is too much[m6] .
… (Interruptions)
 
* Not Recorded MR. SPEAKER : I will request the hon. Leader of the Opposition to kindly conclude.
… (Interruptions)
प्रो. रासा सिंह रावत (अजमेर) : सच्चाई कड़वी होती है।
SHRI L.K. ADVANI : Sir, I have not uttered one word which is not correct. … (Interruptions)
MR. SPEAKER : I have not said about your speech. I am only saying to the hon. Members of your Party to give me an opportunity to deal with them.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER : Can you cite one instance where I have not intervened?
… (Interruptions)
SHRI ANANTH KUMAR (BANGALORE SOUTH): Sir, my request is you should be cautioning the hon. Leader of the House also and the hon. Minister of Parliamentary Affairs Minister also. How can a Minister intervene when the hon. Leader of the Opposition is speaking? … (Interruptions)
MR. SPEAKER : They are also Members. There is nothing wrong.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER : You are again getting up.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER : Shri Salim, please take your seat.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER : I would request Advaniji to conclude. Nearly 40 minutes have been taken.
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय :  आप बोलिये।
श्री लाल कृष्ण आडवाणी : इस देश की परम्परा है कि हर धर्म का आदर और इज्जत कीजिए। हम कहते हैं कि सब रास्ते ईश्वर की ओर जाते हैं और उसके प्रोपोनेन्ट्स, प्रोटेगोनिस्ट रामकृष्ण परमहंस जैसी महान विभूति ने ईसाई बनकर जीवन बिताया, कुछ दिन मुसलमान बनकर जीवन बिताया। …( व्यवधान)   हम कहते हैं कि हिंदुस्तान में स्वाभाविक रूप से सेक्युलरवाद है।
SHRI BASU DEB ACHARIA : How many Hindus have been killed after demolition of the Babri Masjid? … (Interruptions)
MR. SPEAKER : Do not record anything.
(Interruptions) … * MR. SPEAKER : Shri Acharia, please take your seat. It is not the way to raise your point.
… (Interruptions)
प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : मदनी को सपोर्ट करना देशद्रोह है।
(Interruptions) …* MR. SPEAKER : Please do not do that.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER : Everybody agrees that the matter is serious. This is a place for debate and dialogue. After he speaks, other hon. Members will speak. You give suitable reply, what you feel suitable.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER : This is not the way. I cannot ask him to do something. It is for him to speak. So long as it is not unparliamentary, he is entitled to speak. I request him to please conclude.
… (Interruptions)
श्री लाल कृष्ण आडवाणी : अल्पसंख्यकवाद अल्पसंख्यकों के लिए रहे तो बहुत अच्छा है लेकिन अल्पसंख्यकवाद के नाम पर अगर आप आतंकवाद का भी समर्थन करें, तो वह गलत है। इसलिए पैरोल की बात कोई कहे तो गलत नहीं है लेकिन प्रस्ताव पास करके और अपना संदेश भेजकर उनके पास जाएं, एमपी साहब जाकर मिलें और कहें कि हमारी पार्टी को समर्थन करो…( व्यवधान) 
* Not Recorded.
अध्यक्ष महोदय :  आपको इनकी हैल्प में आने की जरुरत नहीं है। He can look after himself. He is a responsible leader.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER : I am trying to do.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER : I request all the sides to hear each other in a dignified manner. We must know how to listen and then to reply. That is my appeal to everyone. You give a suitable reply in your speeches.
श्री लाल कृष्ण आडवाणी : इस तथ्य से आप इंकार कीजिए, आप लखिये। खुद एमपी साहब कहते हैं कि अगर मैं बताता कि मैं एमपी हूं तो मुझे मदनी से मिलने नहीं देते - यह भी लिखा है। ये सब ऐसी बातें हैं जिनके बारे में मैंने कहा कि स्वयं स्पीकर साहब परेशान हो रहे होंगे कि क्या छप रहा है।
अध्यक्ष महोदय :  अगर हम परेशान होते तो कंट्रोल नहीं कर सकते हैं। You have made your point.
श्री लाल कृष्ण आडवाणी : हमने पाकिस्तान को दोष दिया लेकिन पाकिस्तान की रणनीति में कुछ परिवर्तन हुआ दिखता है। लश्करे तैयबा हिंदुस्तान में अपना जाल बिछाने में लगा हुआ है। लश्करे तैयबा वहां का है लेकिन उनकी नीति यहां के लोगों का उपयोग करने की है। …( व्यवधान)   पहले आतंकवादी वहां से आते थे। तीन-चार लोग जो गिरफ्तार हुए हैं, वे सब यहीं के हैं, वहां से नहीं आए हैं और इसी का सहारा ले कर पाकिस्तान इंकार कर रहा है कि हमारा कोई लेना-देना नहीं है और उसने कहा कि यहां के प्रधानमंत्री ने कैसे हमारा नाम ले लिया! प्रधानमंत्री जी ने स्पष्टतौर पर नाम लिया है। मेरा आग्रह है कि हम इसे कसौटी न मानें। पाकिस्तान का जनवरी २००४ का वचन है कि हम अपनी भूमि का उपयोग आतंकवाद के लिए नहीं होने देंगे और अगर कोई भूमि हमारे कब्जे में है, उसका भी उपयोग हम आतंकवाद के लिए नहीं होने देंगे। उस समय जनरल मुशर्रफ और तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी के बीच में यह समझौता हुआ और संयुक्त बयान जारी हुआ जिसके बाद वार्तालाप शुरू हुआ। उसका एक अंतर्नहित हिस्सा है कि जो आतंकवाद के लिए ढांचा पाकिस्तान ने डवलप कर रखा है - सहायता देना, हथियार देना और ट्रेनिंग देना, उस इंफ्रास्ट्रक्चर को डिस्मेंटल किया जाए। यह हमारी प्रमुख मांग है।…( व्यवधान)  हमारा उस समय समझौता नहीं हुआ था। समझौता होने के बाद आपकी सरकार आई।
MR. SPEAKER: Do not respond to that. Then, they will go on putting questions.
श्री लाल कृष्ण आडवाणी : मैं स्वयं जब जनरल मुशर्रफ से मिला था, तब भी मैंने यह बात कही कि आपने वर्ष २००४ में जो समझौता किया गया था, बहुत अच्छा किया, लेकिन इस समझौते के बारे में भारत तभी आश्वस्त होगा, जब आप अपने इस इंफ्रास्ट्रक्चर को डिस्मेंटल करेंगे। आज दुनियाभर के देश जानते हैं और मानते हैं कि वह इंफ्रास्ट्रक्चर डिस्मेंटल नहीं हुआ है तथा ज्यों का त्यों चल रहा है, कायम है। मैं सरकार से मांग करना चाहूंगा कि उन्होंने अभी जो एक कदम उठाया है कि दोनों देश के विदेश सचिवोंकी जो मीटिंग होने वाली थी, उसे स्थगित किया, लेकिन आगे की क्या नीति रहेगी और आगे की नीति किस बात पर अवलम्बित रहेगी, इसे प्रधानमंत्री जी ही स्पष्ट कर सकते हैं। प्रधानमंत्री जी इसका उत्तर दें, यही मेरा आग्रह है।
मेरा एक और भी सवाल है और जैसा अखबारों में भी छपा है कि मंत्रिमंडल के कुछ सदस्यों ने यहां तक कहा कि मुम्बई में जो विस्फोट हुए हैं, वह काम हिंदुओं ने भेष बदल कर किया। मैं नहीं जानता कि ऐसी वाहियात बात कोई मंत्री कह सकता है, मुझे यह बात समझ में नहीं आती है। लेकिन अगर किसी ने कही है, तो उसका स्पष्टीकरण होना चाहिए।
MR. SPEAKER: Thank you. Please wind up.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: He has yielded.
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय : इन्होंने यील्ड किया है।
...( व्यवधान)
श्री लाल कृष्ण आडवाणी : मैंने अपनी बात खत्म नहीं की है।…( व्यवधान)  मैंने किसी का नाम नहीं लिया।…( व्यवधान) 
अध्यक्ष महोदय : आप बोलिए।
...( व्यवधान)
THE MINISTER OF MINORITY AFFAIRS (SHRI A.R. ANTULAY): Mr. Speaker, Sir, I am intervening only for half a second.
MR. SPEAKER: Please conclude.
… (Interruptions)
SHRI A.R. ANTULAY: Sir, I will intervene only for half a second. I will request the Leader of the Opposition to yield. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: It is nearly 48 minutes.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: We cannot have a running commentary. What is this?
… (Interruptions)
SHRI A.R. ANTULAY: Unfortunately, there has been a distorted leak on the front page of Indian Express and it is the front news. There has been no such talk in the Cabinet and no patriot will say, and certainly so far as the credentials of A.R. Antulay with regard to secularism are concerned, even the enemy will not doubt it.
MR. SPEAKER: I will request Shri Advani to please wind up now.
… (Interruptions)
PROF. VIJAY KUMAR MALHOTRA : He should have filed a defamation case.  उन्हीं के कोलीग्स ने लीक किया है।
अध्यक्ष महोदय : आप अलग से जाकर उन्हें एडवाइज़ दे दीजिए[i7] ।
श्री लाल कृष्ण आडवाणी : अध्यक्ष महोदय, इन्होंने ‘लीक‘ होने की बात कही है। हमें समझ नहीं आता कि एनएसए अगर कोई रिपोर्ट देता है और उस रिपोर्ट को सिलैक्टिवली लीक करके अखबारों में बताया जाता है कि एनएसए ने कहा है कि एअरफोर्स में एल.ई.टी. के दो लोग घुसपैठ कर गए। …( व्यवधान) The Minister of Defence is sitting here.
MR. SPEAKER: Mr. Advani, you have now drifted from the issue of Mumbai to some other issue.
SHRI L.K. ADVANI : No, Sir, I have not gone anywhere. I am only saying that the whole issue of Mumbai should make us very alert to every single aspect of defence, security, home affairs and even our relations with Pakistan. Therefore, every word is important. Do you know Pakistan is quoting all that has been reported in your name?  कहते हैं कि प्रधान मंत्री हमें दोष देते हैं जबकि उनके मंत्री स्वयं कहते हैं कि …( व्यवधान) 
MR. SPEAKER: He has denied it.
… (Interruptions)
श्री लाल कृष्ण आडवाणी : पाकिस्तान ने क्या कहा, मेरे पास उसके विदेश मंत्री श्री कसूरी का पूरा इंटरव्यू है जो उन्होंने सीएनएन को दिया है। मुझे इसके बारे में सवाल पूछना है। पार्लियामेंट ने कश्मीर पर एक प्रस्ताव पारित किया था जो सर्वसम्मत प्रस्ताव था और उसमें …( व्यवधान) 
MR. SPEAKER: Please wind-up your speech. You have already taken more than 50 minutes on this issue.
SHRI L.K. ADVANI : Sir, Shri Kasuri -- the Foreign Minister of Pakistan -- had said in his interview that the Government of India, through back-sources, has given to them in writing a proposal for settlement of the Jammu & Kashmir issue.
            I would like to know from the Prime Minister -- as there is no Foreign Minister here -- as to what is the proposal that has been given. What is the proposal given to them? I am asking this because this Parliament has passed a unanimous resolution in respect of Jammu & Kashmir, and its position in India. It cannot be that you make offers to Pakistan, which they take advantage of and say that it is a movement forward and a welcome proposal. I have read the whole interview given by Shri Kasuri to CNN-IBN. I would like the Prime Minister to share with the Parliament as to what has been his proposal. I am asking this because there should be nothing behind our back. The whole of Jammu & Kashmir is an integral part of India in accordance with the resolution that this Parliament has passed. If there is going to be any change in it, then it has to be approved by the Parliament, and it cannot be done without the approval of Parliament. What is the proposal that has been given to them?
            Lastly, in this particular case, that is, as far as the Mumbai blasts are concerned, मैं जानना चाहूंगा कि सैंटर या स्टेट को क्या-क्या इनफर्मेंशन थी, कितनी थी और कब थी? परसों के मुम्बई के एक अखबार डी एन ए ने लिखा है कि सैंटर ने ४० दिन का नोटिस दिया था …( व्यवधान)  
MR. SPEAKER: Please wind-up your speech. It is now more than 54 minutes since you started speaking on this issue.
… (Interruptions)
श्री लाल कृष्ण आडवाणी :उन्होंने लिखा है क स्टेट गवर्नमेंट को ४० दिन का नोटिस दिया था। मेरी शिकायत इस सरकार से यह है कि जो जानकारी इन्हें मिलती है, वह उसे परस्यू नहीं करते हैं। कभी आतंकवादी पकड़े जाते हैं तो उनकी ठीक प्रकार से पूझताछ नहीं होती है। यहां तक मुम्बई में कुछ लोग पकड़े गए थे। उससे कुछ दिन पहले अगर ठीक प्रकार से इंटैरोगेशन किया होता …( व्यवधान) 
MR. SPEAKER: Let him conclude his speech.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: I must say that this is very unfortunate.
… (Interruptions[ak8] ) 13.00 hrs. MR. SPEAKER: Once or twice, it can be done, but not always.

            Now, please wind up, Shri Advani.

श्री लाल कृष्ण आडवाणी : मेरा इस सरकार पर आरोप है कि यह आतंकवाद की समस्या का साम्प्रदायिकरण कर रही है और वह केवल वोट बैंक…( व्यवधान) 

अध्यक्ष महोदय : आप क्या बोलना चाहते हैं।

...( व्यवधान)

श्री राज बब्बर (आगरा) : आप कह रहे हैं कि सरकार आतंकवाद की समस्या का साम्प्रदायीकरण कर रही है, लेकिन आप उन शब्दों का बार-बार इस्तेमाल क्यों कर रहे हैं, जिनमें चार बार आपने अल्पसंख्यकों का नाम लिया…( व्यवधान) 

अध्यक्ष महोदय : हम आपको बोलने की इजाजत देंगे, लेकिन अभी आप बैठ जाइये।

श्री राज बब्बर : आपने चार बार मुस्लिम-मुस्लिम कहा। आप जानबूझकर इन शब्दों का इस्तेमाल करके खुद इसका साम्प्रदायीकरण कर रहे हैं।

… (Interruptions)

MR. SPEAKER: Please take your seats. Why is there so much impatience? Why can you not reply to his speech when you get a chance so that it is properly recorded? Now, the whole country is looking at us and listening to us. Why can you hold patience for a while?

श्री लाल कृष्ण आडवाणी : जब मैं मुम्बई गया था…( व्यवधान) 

अध्यक्ष महोदय : आप लोग चुप रहें, आप लोग भी बहुत बात करते हैं।

श्री लाल कृष्ण आडवाणी : अध्यक्ष जी, जब मैं मुम्बई गया था तब पत्रकारों ने मुझे बार-बार कहा कि आप सरकार के बारे में क्यों नहीं बोलते। तब मैंने कहा कि मैं संसद में बोलूंगा। इस समय मैं यहां जो लोग आहत हैं, अस्पतालों में हैं या जिनकी मृत्यु हुई है, उनसे मिलने आया हूं और कुछ समझने आया हूं। आज मैं कहना चाहूंगा कि इस सरकार को यह पहचानना चाहिए कि आतंकवाद के ऊपर विजय प्राप्त करने के लिए राजा और प्रजा दोनों को मिलकर काम करना होगा, अकेला राजा कुछ नहीं कर सकता। इसके लिए राजा और प्रजा दोनों को मिलकर करना होगा तथा प्रजा को एकता भी दिखानी होगी। मैं यह मानता हूं कि जितने सारे जेहादी, आतंकवादी हैं, उनके मन में यदि सबसे ज्यादा गुस्सा किसी देश के खिलाफ है तो वह देश अमरीका है, वह देश भारत नहीं है। आपके(कम्यूनिस्टों) मन में भी बहुत है, लेकिन आप इस कारण आतंकवादी नहीं है।

अध्यक्ष महोदय : वह आपको कम्पलीमैन्ट दे रहे हैं।

श्री लाल कृष्ण आडवाणी : हम और आप सहमत हो सकते हैं, अगर न्यूक्लियर एग्रीमैन्ट के बारे में हम एक बात कहें।

MR. SPEAKER: Kindly conclude now. You have taken nearly 55 minutes.

SHRI L.K. ADVANI : I am concluding. But this is important and I would like to emphasize this point.  ९/११ के बाद अमरीका में कोई घटना नहीं हुई। ऐसा नहीं है कि जेहादियों के मन में गुस्सा नहीं है। वे वहां पर भी करना चाहते हैं, लेकिन वहां की जनता और शासन आतंकवाद के संबंध में एक ही द्ृष्टिकोण रखते हैं। हमारे यहां प्रजा में एक द्ृष्टिकोण है। This is emphasized both by Barkha Dutt as well as K.P.S. Gill who were Principal Security Officers who have dealt with this. They have said that there was evidence that people’s response had become far more emphatic in its rejection of terrorism than it was a few years ago, despite the vote bank opportunism of political parties.

इसीलिए प्रजा में भी एकता है। अगर कहीं विभेद है तो सिर्फ पोलटिकल पार्टीज में है और उसका कारण केवल मात्र वोट बैंक है, दूसरा कोई कारण नहीं है। …( व्यवधान) 

MR. SPEAKER: Shri Topdar, please sit down.

श्री लाल कृष्ण आडवाणी : हम कहते हैं कि आतंकवाद के खिलाफ जो अभियान है, वह आतंकवाद के खिलाफ है, अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं है। आप उन्हें यह समझाते हैं कि यह अल्पसंख्यकों के खिलाफ है और इसी कारण समस्या हल नहीं होती है। जब तक आप इस मनोवृत्ति को नहीं त्यांगेंगे, आतंकवाद के ऊपर विजय प्राप्त करना संभव नहीं है।

इन्हीं शब्दों के साथ एक बार पुन: प्रधानमंत्री के जो वक्तव्य हैं, उन्हें स्वीकार करते हुए मैं उनसे कहना चाहूंगा कि जिस प्रकार से उन्होंने कहा है कि इस सबको नये रूप में देखना चाहिए, वह नया रूप तब होगा, जब वह उसकी व्याख्या यहां करें। इसी के साथ मैं अपना वक्तव्य समाप्त करता हूं।

 MR. SPEAKER: Thank you very much.

            Hon. Members, do you wish to have a recess now? Okay, very well. Shri P.R. Dasmunsi[R9] .

   

संसदीय कार्य मंत्री तथा सूचना और प्रसारण मंत्री (श्री प्रियरंजन दासमुंशी) : माननीय अध्यक्ष महोदय, आज कुछ समय पहले प्रतिपक्ष के माननीय नेता श्री लाल कृष्ण आडवाणी जी के द्वारा जो स्थगन प्रस्ताव लाया गया है, …( व्यवधान) सरकार की तरफ से, कांग्रेस पार्टी की ओर से तथा पूरे यू.पी.ए. की ओर से मैं उसका विरोध कर रहा हूं। इसका कारण क्या है, यह मैं पहले बताऊंगा। इस संसद पर सन् २००१ में १३ दिसम्बर को जो आतंकवादी हमला हुआ, उसका जिक्र करते हुए आज के प्रतिपक्ष के नेता ने अपनेभाषण में, अपने बयान में कहा था कि पिछले दो डिकेड में इतनी बड़ी सर्वनाश की घटना नहीं हुई। उस दिन तत्कालीन हमारी प्रतिपक्ष की नेता, हमारी यू.पी.ए. की चेयर पर्सन, श्रीमती सोनिया गांधी जी उसी कुर्सी पर बैठी थीं और सोनिया जी जब वहां बैठीं थीं, तो १३ तारीख की घटना के बाद दुनिया चकित हो गई और हमारी पार्टी के बहुत से लोगों ने कहा कि इस समय सरकार को ढंग से पकड़ो। उनकी कमियां क्या हैं, उनकी कमज़ोरियां क्या हैं, उनकी विफलता के ऊपर कदम उठाओ। सरकार के खिलाफ या तो अविश्वास-प्रस्ताव लाओ या स्थगन प्रस्ताव लाओ। सभी पार्टीज हम से मिले लेकिन हमारी प्रतिपक्ष की लीडर श्रीमती सोनिया गांधी जी ने कहा कि इस समय हमें देश की एकता और सदन की एकता दुनिया को दिखानी है। हम किसी हालत में वाजपेयी जी की सरकार के खिलाफ इस मौके का फायदा उठाते हुए कोई कार्य स्थगन प्रस्ताव लाने के लिए तैयार नहीं हुए। मैं बधाई दूंगा कि उस दिन आप भी इस जगह पर बैठे थे, सभी लोगों ने कहा तथा मुलायम सिंह जी ने भी कहा और हम सब इस सलाह से एकमत हैं कि पार्लियामेंट पर हमले के बाद आडवाणी जी या वाजपेयी जी के त्यागपत्र की मांग करना या सदन का विभाजन हो, यह दिखाने का समय नहीं है। इसलिए उस दिन आडवाणी जी, आप याद करें, हम सारे कागज लाए हैं। १८ दिसम्बर को इसी सदन में एक शॉर्ट डयूरेशन डिसकशन लाया गया ताकि जैसा वाजपेयी जी का अनुरोध था और सोनिया गांधी जी का अनुरोध था कि हम दुनिया को दिखाएं कि टैरेरिस्ट के खिलाफ पूरा सदन एक है, कोई विभाजन नहीं है। उस दिन मुलायम सिंह जी के बयान के बाद जो शुरूआत हुई, सोनिया गांधी जी ने क्या शुरु किया, I quote:

“Sir, at this critical juncture, the need of the hour is for the Government and for all political parties to rise above partisan considerations.  The need of the hour today is for all concerned to desist from using this occasion to raise contentious issues that divide our plural society.  This is a moment when the entire country must stand together in solidarity.  The responsibility for creating that solidarity lies mostly on the shoulders of the Government.
            I wish to assure the Government – I repeat, I wish to assure the Government – through you, Sir, that the Congress Party will back the Government in its effort to track down and bring to justice terrorists who threaten the nation’s integrity today.  We also believe that the Government must keep in touch and must consult and must interact with all other political parties.  On key strategic issues, we believe, it is necessary to think through all the pros and cons. ”   That was the spirit in this House on 18th of December, when both Shri Vajpayee and Shri Advani were also sitting here.  What does the Adjournment Motion mean?  स्थगन प्रस्ताव का मतलब क्या होता है? इसका मतलब है कि सारे सदन की कार्यवाही को रोक दो, बहस करो, बहस के बाद मतदान करो, कौन पक्ष में है, कौन खिलाफ में है - पक्ष और खिलाफ, इसका विभाजन करो। हमारा मानना है कि कभी भी इसका मौका नहीं देना SÉÉÉÊcA[R10] । जिस दिन यह घटना हुई, उसी दिन रात को लालू जी, गृह मंत्री और सोनिया जी मुम्बई पहुंचे। प्रधान मंत्री कोलकाता में थे। मैं इस बात को दोहराना चाहता हूं कि मुम्बई के आम लोग जो खास तौर से खार की चालों में रहते थे, जो म्यूनसिपल वर्कर बस्ती में थे, जिन लोगों ने पहले सहायता का हाथ बँटाया, मैं सदन की तरफ से और अपनी तरफ से दोबारा उनको सलाम करता हूं। उन्होंने हिम्मत दिखाई। सदन में क्या होगा मालूम नहीं, लेकिन उन्होंने सोचा कि हम लोग एक हैं, हम लड़ेंगे, यह जंग हमारी है, हम पहले सहायता करेंगे। इस भावना के साथ मुम्बई शहर ने जो काम किया, वह सिर्फ भारत के लिए ही नहीं बल्कि दुनिया के लिए एक मिसाल बन गई। उनको हम कितनी भी बधाई दें वह कम होगी। कितना भी दुख प्रकट करें, लेकिन जो लोग चले गए उनके लिए वह कम होगा। मेरी मानें तो मैं कहूंगा कि जब इतिहास लिखा जाएगा तो इतिहास के हर पन्ने पर जिनकी मौत हुई, उनसे सीमा पर लड़ने वाले जवानों को मैं अलग नहीं करना चाहता। शहीदों जैसा सम्मान उनको भी मिलना चाहिए। लेकिन यहां मैं हैरान हो गया। स्थगन प्रस्ताव का मतलब यह होता है कि कार्यवाही रोको। मुम्बई ने कहा कोई कार्यवाही नहीं रुकेगी, टैक्सी वाले ने कहा कि मैं पैसा नहीं लूंगा, मैं मरीज़ को अस्पताल ले जाऊंगा। दुकानदार ने कहा कि मेरी दुकान बंद नहीं होगी, कोई काम नहीं रुकेगा, दुनिया देखेगी कि आतंकवादियों की धमकी से मुम्बई बंद नहीं होगा। लेकिन सदन के सामने प्रतिपक्ष के नेता बता रहे हैं कि देखो आतंकवादियो तुमने जो काम किया, उसके लिए मैं संसद के सारे काम रोक दूंगा, रोककर स्थगन लाऊंगा, सदन को विभाजित करूंगा। इस मामले की निन्दा करने का यह कोई तरीका है? We played the role on 13th December in what manner and what role are you playing today?  You compare your speech with our speeches of 18th December and then you talk to us.  मैं इसलिए कह रहा हूं कि मुम्बई ने जो एकता दिखाई, वह अगर हम नहीं दिखा पाते हैं तो हम किसका हौसला बढ़ाते हैं? आतंकवादी कहेंगे कि दुनिया में कम से कम मेरे बम धमाके से सदन का काम तो रुका। और थोड़ा ज्यादा करेंगे तो हमेशा रुकेगा। क्या विचार है आडवाणी जी आपका आप देश के गृह मंत्री रह चुके हैं। आपने सोसाइटी को कम्यूनलाइज़ किया। याद कीजिए, देश के विभाजन से पहले जो हुआ सो हुआ, लेकिन उसके बाद यदि किसी ने देश को कम्यूनलाइज़ किया तो आपकी रथ यात्रा ने कम्यूनलाइज़ किया। आप कैसे इंकार कर सकते हैं? इसकी सुनवाई लिब्राहन कमीशन में हो रही है इसलिए मैं इस पर टिप्पणी नहीं करूंगा। मैं आपको आपका बयान सुना रहा हूं। पूर्व प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने १८ दिसंबर को कांग्रेस के आचरण के बारे में क्या कहा? श्री शिवराज पाटील ने एक रचनात्मक भाव से अपनी बात कही। यह किन्होंने कहा? अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा, और क्या कहा? ‘मैं कांग्रेस के सदस्यों को बधाई देता हूं कि मैंने प्रियरंजन दासमुंशी जी का भाषण सुना, और भी भाषण सुने, जिम्मेदारी के साथ सबने बात की।’ This was the compliment from the then Prime Minister from this Chair to the Opposition on that day for the solidarity of the people of India against terrorism.
मुझे लगता है कि आपकी पार्टी के अंदर कुछ चल रहा है। मुझे कभी कभी हैरानी होती है कि आप अपनी हताशा को जाहिर करने के लिए यह सब करते हैं या आप लाइऩ पर चलने के लिए करते हैं। मुझे मालूम नहीं, मैं किसी का नाम भी नहीं ले रहा हूं। बार-बार बीजेपी ने एक बात कही कि पूर्व प्रधान मंत्री अटल जी के समय जो शांति वार्ता शुरू हुई, वह सलसिला आज भी चल रहा है। कांग्रेस पार्टी के इतिहास के दस्तावेज़ प्रस्तुत नहीं किये। मैं थोड़ा ज़िक्र करके आडवाणी जी को याद दिलाना चाहता हूं। यह डॉक्यूमैंट मेरा नहीं है, भारत सरकार ने कारगिल वार के बाद पूरी घटना को देखने के लिए एक सुब्रहमण्यम कमेटी बनाई थी। उन्होंने रिपोर्ट एनडीए सरकार को पेश की। सदन में उसकी चर्चा का मौका हमें नहीं मिला। मैं उऩकी शुरूआत जब करूंगा तो बताऊंगा कि शांति वार्ता की शुरूआत कब से हुई।
“The Rajiv Gandhi-Benazir meeting of December 1988 set a chain for inter-bilateral dialogue between the two countries on a number of issues ranging from trade to Siachin[r11] .
   
“Several high level visits of officials including Home, Defence and Foreign Secretary were exchanged between India and Pakistan in the first half of 1989. This culminated in the first purely bilateral visit of Indian Prime Minister to Pakistan in July, 1989 after a gap of 30 years. However, during this visit, differences in the respective approaches of the two countries, the bilateral relations emerged. Benazir Bhutto, under domestic pressure, wanted Rajiv Gandhi to signal a change in Indian position on Kashmir. Rajiv Gandhi, on the other hand, wanted to create a positive climate in bilateral relations by emphasising co-operation in diverse areas. The developments in Kashmir were seized upon to Pakistan to pressurise India and created fresh tension in the Indo-Pak relations. Rajiv Gandhi lost the General Elections and V.P.Singh became Prime Minister. ”               Now, please listen to the comment.
“After this, Benazir Bhutto’s election as Prime Minister and the change in the Indian side, the apparent rapport built up between her and Rajiv Gandhi, the momentum was lost and Indo-Pak relations soon fell back into the normal groove of mutual suspicion.”               This is not my report. This is the report of a Committee appointed by your Government and then the intrusion began. टेरेरिस्ट्स की गतवधियां काफी बढ़ गई हैं। मैं सबसे पहले उन शहीदों के बारे में कहना चाहता हूं जो देश की सीमा की सुरक्षा के लिए एक के बाद एक अपनी जान देते हैं। कारगिल की लड़ाई में जिन लोगों ने अपनी जान दी, उन्हें देश कभी नहीं भूलेगा। लेकिन उन्हें शहीद बनाने में गलती किस की थी, इसकी बहस सदन में नहीं हुई, क्योकि चर्चा करने का मौका नहीं दिया गया। आज मुझे मौका मिला है, इसलिए मैं सिर्फ तीन लाईनें पढ़ कर सुनाऊंगा।…( व्यवधान) 
प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : मुंशी जी, आप बम ब्लास्ट पर बोलिए।…( व्यवधान) 
श्री प्रियरंजन दासमुंशी : मल्होत्रा जी, आप धीरज रखिए, डिबेट में सब कुछ सुनना पड़ता है।
            Sir, I would now quote page 133 of the Subramanyam Committee Report.
“The Army Commander during his inaugural visit to my brigade.... ”               This is being said by Surinder Singh:
“stayed for three days and had numerous tactical discussions with the GOC and me but the threat of an intrusion was never discussed. Even during the visit of DGMO, as late as on May 05, 1999, no in-linking of the impending action by the enemy action was given to me. Nevertheless, I took a lot of additional precaution and initiated a lot of measures to strengthen my brigade sector and to safeguard the LoC. I feel that if I was given the resources that I asked for, then this intrusion could never have taken place. It was obvious that the resources were not given because no one up the chain, right up to the Army Headquarters had any idea of the enemy attempting an operation of this scale and magnitude. This is basically an intelligence failure at the national level for which I am being made a scapegoat.”               This is what is being quoted in the Subramanyam Committee Report. It is a great intelligence failure that brought about the Kargil situation.
            Sir, I would also like to have the pleasure of quoting, though I do not have the copy of Ms. Barkha Dutt, from the book ` An Unhistoric Verdict’ by the former ISI Chief of Pakistan, Lt. Gen. Asad Durani. I have given a notice for that also. उसने बड़ी तारीफ की, अगर उस तारीफ को मैं पढ़ कर नहीं सुनाऊं तो हमारे लिए कुछ कमी हो जाएगी। उस किताब के पेज़ नम्बर १८८ में उन्होंने कहा -
“George Fernandes is the best Indian Defence Minister Pakistan has ever had. Remember, what all he went through last year only to assure his countrymen..... ” … (Interruptions)
प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : आप बम ब्लास्ट पर बोलिए।
MR. SPEAKER: Nothing is unparliamentary here.
श्री प्रियरंजन दासमुंशी : Sir, I quote :
“that not we, means Pakistan, the Pakistanis who are responsible, but the Chinese were the root cause of their hassles and that is why he gave our Government a clean chit bill of health on Kargil.”               It was mentioned byhim[snb12] .
It was said by him. आपने कुछ कोट किया। मैं कह रहा हूं कि आपको इतनी तारीफ मिली और इस तारीफ के कारण ही शायद आडवाणी जी ने डिबेट खत्म करने से पहले कहा कि चार आदमी तो इंडिया के पकड़े गए, लेकिन हम लोग पाकिस्तान की तरफ अंगुली उठाते हैं। कसूरी जी का पूरा बयान मेरे पास है क्यों कि आपको दुबारा जिन्ना याद आ गया। …( व्यवधान) 
प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : अध्यक्ष महोदय, इनकी इस बात से मुम्बई ब्लास्ट्स का क्या लेना देना ? …( व्यवधान) 
श्री प्रियरंजन दासमुंशी : लेना-देना है। समझने को दिमाग चाहिए। … (Interruptions)
MR. SPEAKER: You cannot dictate him.
… (Interruptions)
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI:   I am coming to the bomb blasts of Mumbai.  I would quote what Shri Advani has said in this House on the day of reply, the 18th December. I am quoting from the Parliament proceedings.
 
“The only answer that satisfactorily addresses to the query is that Pakistan, itself a product of the indefensible two-nation theory, itself a theocratic State with an extremely tenuous tradition of democracy is unable to reconcile itself with the reality of secular, democratic, self-confident and steadily progressing India whose standing in the international community is getting inexorably higher with the passage of time.”   थियोक्रेटिकल स्टेज में आपने उस दिन ठीक कहा, लेकिन उसके तुरन्त बाद, जब आप मंत्री नहीं रहे, तब पाकिस्तान के दौरे के समय जिन्ना की समाधि पर जाकर, इस कंटेशन का आपने खंडन कर के उन्हें याद किया और १४ अगस्त को बयान दिया जिसके कारण आपके लिए अपनी पार्टी के अंदर झंझट पैदा न हो। आपको अपने कंसैप्ट पर स्टेबल रहना चाहिए उसे कन्फ्यूज नहीं करना चाहिए। वहां जाकर आपको कहना चाहिए था कIt is you and your theocratic concept are destroying secular India.
  सैकुलर इंडिया के बारे में आपने क्या कहा, जब आप यहां बैठते थे, तब आपने अपने भाषण में बहुत अच्छा कहा। मैं उसका जिक्र करना चाहता हूं because it will be a part of the historical speech and the BJP should know it.
प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : सर, इससे मुम्बई ब्लास्ट का क्या ताल्लुक है? …( व्यवधान) 
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI:   I quote:
“सर, मैं एक बात और कहना चाहता हूं और वह यह कि अगर देश में कोई भी व्यक्ति हिन्दू और मुसलमान की द्ृष्टि से सोचता है, तो वह सरासर गलती करता है और भारत की शक्ति को कमजोर करता है। भारत की शक्ति इसमें है कि हमारा देश ऐसा है जिसमें इंडोनेशिया के बाद सबसे अधिक मुसलमान रहते हैं। १५-१६ करोड़ मुसलमान रहते हैं और बराबरी के साथ रहते हैं और पूरे आश्वासन के साथ रहते हैं। उनमें किसी भी प्रकार की असुरक्षा का भाव हमारे बैन के कारण पैदा हो, यह हमारे ऊपर टिप्पणी होगी।” …( व्यवधान)
 
पहले आप मेरी बात सुनिए। आप इतने इम्पेशेंट क्यों हैं। यह तब कहा जब १८ दिसम्बर के पार्लियामेंट के अटैक का जवाब दे रहे थे। उसके बाद जब विरोध पक्ष में बैठे, तब १५ मई के स्थगन प्रस्ताव के दिन उन्होंने जो कहा वह मैं बताता हूं।  
“Sir, I believe that Doda killings at the beginning of the operation of religious cleansing was number.  One which was done in 1989 and number two is now.”   Sir, it is the same man who had said that.  And the same man now says that terrorism issue is being coloured as the vote bank politics by the UPA. To whom has he said this?  Sir, you will be shocked to know it.  The debate is here and today, we are all sitting here to hear him.  He went to Rashtrapatiji yesterday and what has he said in his memorandum?  In his memorandum, he has said that in attacking terrorism the UPA Government is doing vote bank politics.  He is the Leader of the Opposition today.  When he was the Home Minister, he said one thing.  When he spoke in the Parliament as the Home Minister, he said that his perception was united India, secular India against the theocratic Pakistan.   When he talks as Opposition Leader, मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि इन्होंने यह सोचा कि बी.जे.पी. के अंदर हमारा पद, आर.एस.एस. की निगाह में सुरक्षित रहेगा अगर मैं वोट बैंक के बारे में ज्यादा गलत बातें कहूंगा[bru13] ।  What are you?  You are a leader.  At the same time you are calling it a "religious cleansing".
MR. SPEAKER: Delete those words which are objectionable.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: I have done that.
श्री प्रियरंजन दासमुंशी : जो-जो गलत है, उसे डिलीट कर दीजिए, लेकिन उनकी छवि को तो आप डिलीट नहीं कर सकते हैं। छवि तो उनकी वही रहेगी।
Sir, I submit that every party condemns the terrorist attack that took place in Mumbai. क्या आपने और वाजपेयी जी ने संसद पर हमले के बाद संसद में नहीं बोला कि स्पीकर महोदय की कमेटी बनेगी, उसकी रिपोर्ट के बाद होगा। आपने ऐसा कहा, क्या मैं पढ़कर सुनाऊं? आपने उस दिन माना कि संसद की सुरक्षा के लिए पूरे इंतजाम नहीं हैं, उसकी सुरक्षा के लिए कार्यवाही किया जाएगा। वह कार्यवाही बाद में हुआ। You also said that after every incident one can think and develop. मनमोहन सिंह जी ने क्या गलत कहा? उन्होंने कहा कि यदि कहीं कुछ कमियां हैं, तो हम उनको सुधारेंगे। यह कहना क्या किसी सरकार के लिए गलत है? क्या आपने नहीं कहा था?
Now, I come to POTA. आडवाणी जी यह भूल जाते हैं कि आपकी निगरानी में जब एनडीए की सरकार चलती थी तब पोटा लागू था, तब अमरनाथ पर हमला हुआ था, तब अक्षरधाम में आतंकवादी घुसे थे, तब लाल किले पर हमला हुआ था, तब संसद पर हमला हुआ था। इसके अलावा कालूचक की घटना के समय भी हमने कहा कि पोटा क्या कर रहा है, तब आपने कहा कि मैं देख रहा हूं। पोटा को आपने आतंकवाद से लड़ने के लिए नहीं लगाया था। पोटा यदि आतंकवाद से लड़ने के लिए होता तो इतनी घटनाएं न होतीं। आपने कहा था कि पोटा से हम सब निबट लेंगे। लेकिन आप क्या निबटे? श्री लालू प्रसाद द्वारा गोधरा की घटना के बाद जो इन्क्वायरी बैठायी गयी थी, उसको भी आप गाली दे रहे हैं। हम समझते हैं कि सरकार और आम जनता में यह ताकत है कि वह आतंकवाद से निबट सकती है। हम केवल पॉलटिकली फाइट नहीं करेंगे, हम आतंकवाद से लड़ने के लिए इसे आवामी जंग बनाएंगे। यह कांग्रेस और सीपीएम की जंग नहीं है। आपको मालूम होना चाहिए कि जम्मू और मुम्बई में मुसलमान और हिन्दू दोनों मारे गए हैं। क्या आपने देखा कि चांदनी चौक की घटना के बाद कितने सारे लोगों ने सहायता का हाथ बढ़ाया था? मैं कहना चाहता हूं कि आप जो प्रस्ताव लाए हैं, इसका कोई मतलब नहीं है। एनडीए के समय आडवाणी जी ने कहा था। …( व्यवधान) Please listen.… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय : यह नहीं चलेगा।
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Do not record.
(Interruptions) …* MR. SPEAKER: Do not take it down.
(Interruptions) … * अध्यक्ष महोदय : आप बोलते रहेंगे और किसी को नहीं बोलने देंगे। ऐसा नहीं चलेगा।
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Shri Goyal, please sit down.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: It is very unfortunate.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Only the Minister's statement will be recorded.
(Interruptions) … * MR. SPEAKER: Shri Prakash Paranjpe, I will ask you to go out.
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय : यह बहुत शर्म की बात है।
...( व्यव्ाधान[c14] ) अध्यक्ष महोदय : सत्यनारायण जी, यह अच्छा नहीं लगता है। यह आपको शोभा नहीं देता है।
...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय :  श्री आठवले, यह क्या हो रहा है?
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI: Sir, I do not know what he wants to say. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: Nothing will be recorded except the speech of Shri Priya Ranjan Dasmunsi.
(Interruptions) …* श्री प्रियरंजन दासमुंशी : मुम्बई की घटना के बाद…( व्यवधान) 
अध्यक्ष महोदय : आप बैठ जाइये। भाषण ठीक है।
* Not Recorded.
श्री प्रियरंजन दासमुंशी : सिर्फ मुम्बई नहीं, चाहे मुम्बई हो, झारखण्ड हो, छत्तीसगढ़ हो, कश्मीर हो, जब भी कोई आतंकवाद का शिकार होता है, उसके लिए अफसोस जाहिर करना सरकार का काम नहीं है, ये क्रेडिट लेते हैं, मैं खुश हूं। सरकार को कदम उठाने हैं…( व्यवधान) क्या-क्या उठाने हैं, हमें बोलने दीजिए।…( व्यवधान) 
अध्यक्ष महोदय : यह क्या बात हो रही है?
श्री प्रियरंजन दासमुंशी : सरकार के कदम किस स्तर तक पहुंच रहे हैं, क्या कदम उठाने के लिए कहां तक पहुंच गई है, इसके बारे में विस्तृत जवाब हमारे गृह मंत्री जी जरूर देंगे।…( व्यवधान) 
अध्यक्ष महोदय : आप लोगों ने सही ढंग से टेक अप किया था, वही आप कर रहे हैं, जो आपका सबजैक्ट था।
श्री प्रियरंजन दासमुंशी : आपको धीरज रखना चाहिए। मैं जो परसैप्शन आतंकवाद के बारे में कह रहा हूं, वह पाकिस्तान के बारे में कह रहा हूं कि थोड़ा परसैप्शन बदला है।…( व्यवधान) 
अध्यक्ष महोदय : स्वामी जी, आपको यह शोभा नहीं देता।
श्री प्रियरंजन दासमुंशी : कैसे बदला है? जब पहले हमला होता था तो आडवाणी जी ने खुद इस हाउस में कहा कि -
“Pakistan Foreign Minister, Mr. Abdul Sattar has rejected the charges made by Advani holding the two Pakistani based organisations, Jaish-e-Mohammad and Lashkar-e-Taiba responsible for the Parliament attack. ” जैसे मुजाहिदीन और लश्करे तोइबा, आडवाणी जी ने सही कहा कि ये लोग काम कर रहे हैं। आपने सही कहा, मैं वही कह रहा हूं। लेकिन पाकिस्तान ने और क्या कहा, पाकिस्तान ने कहा:
“This is a prejudiced and biased allegation in order to defame the freedom struggle in Kashmir as terrorism. ”   जो मुशर्रफ साहब ने आगरा में आपके सामने कहा, उन्होंने कहा, बदलाव क्या आया। आज की तारीख में यू.पी.ए. गवर्नमेंट के आने के बाद पाकिस्तान की सरकार की तरफ से आतंकवाद की लड़ाई फ्रीडम स्ट्रगल ऑफ जेहाद को बैन करने की हिम्मत किसी मंत्री की पाकिस्तान में नहीं है। This is the change of perception. यह आपको समझना चाहिए। मुम्बई की घटना के बारे में टैरेरिस्ट्स कहीं भी छिपे हों, उनका काम कहीं तक भी पहुंच गया हो, वह तो मैं सदन में नहीं बता सकता हूं, क्योंकि वह दफ्तर मैं नहीं देखता हूं, लेकिन यह कह सकता हूं कि यू.पी.ए. का यह द्ृढ़ संकल्प है कि टैरेरिज्म को हिन्दुस्तान में या बाहर पनाह देने वाले लोगों को जब तक जड़ से उखाड़ नहीं फेंकेंगे, तब तक हमारा काम खत्म नहीं होगा। यह बात पक्की है, इसमें कोई शंका नहीं है। टैरेरिज्म के जो शिकार होते हैं, वे हमारे देश के लोग हैं। टैरेरिज्म के जो शिकार होते हैं, उनको हम धर्म की निगाह से नहीं देखते हैं, वे अवाम के आदमी हैं, इसलिए यह कदम हम लोग उठाएंगे। लेकिन कदम उठाने से पहले समाज को डिवाइड करो, किसी पर इल्जाम डालकर, समाज को तोड़कर टैरेरिज्म के लिए लड़ो, यह पालिसी पोटा की तरह आपकी हो सकती है, वह पालिसी हमारी नहीं है। हमारी पालिसी है, समाज को एक रखकर ही टैरेरिज्म से लड़ो और टैरेरिज्म से लड़ने की जंग में हर धर्म हमारी सरकार के साथ है, अवाम हमारी सरकार के साथ है।
जहां-कहीं किसी पाकेट में कमजोरी दिखाई देती है, उसको भी सुधारने के लिए हमारी सरकार कृतसंकल्प है।
अध्यक्ष महोदय, अन्त में मैं आपसे आग्रह करूंगा कि यह सदन कम से कम आज एक बार, एक मिनट के लिए भी तैयार हो जाये कि सरकार की समालोचना जितनी भी करे, करे, लेकिन न कोई एडजर्न मोशन हो, न कोई काम रोको प्रस्ताव हो, हम सब मिलकर अवाम के साथ चलें, क्योंकि यह जंग अवाम की है और इसके पीछे हम सब लोग हैं। इतना ही कहते हुए मैं स्थगन प्रस्ताव का विरोध करता हूं।
आडवाणी जी का जो दोहरा चेहरा है, प्रतिपक्ष में एक और सरकार में एक, उसके बारे में मैं खुद उनके सारे बयान लेकर एक रिसर्च वर्क करने जा रहा हूं, उसकी किताब मैं आपके जन्म-दिन पर प्रस्तुत करूंगा तो देखने का मौका मिलेगा कि आपके चेहरे कितने हैं।
                                                                                                           
MR. SPEAKER: Let us have some respite.
            The House stands adjourned for lunch to meet again at 2.15 p.m.   13.34 hrs. The Lok Sabha then adjourned for Lunch till fifteen minutes past Fourteen of the Clock[R15] .

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14.18hrs The Lok Sabha reassembled at Eighteen minutes past Fourteen of the Clock.

 

(MR DEPUTY SPEAKER in the Chair)   मोहम्मद सलीम (कलकत्ता-उत्तर पूर्व) : उपाध्यक्ष महोदय, आज जो स्थगन प्रस्ताव लाया गया, यह बहुत ही महत्वपूर्ण विषय के ऊपर है और जब इस प्रस्ताव का स्थापन हमारे आदरणीय विपक्ष के नेता आडवाणी जी के द्वारा किया गया, तो मैं उनकी बातों को बहुत ध्यानपूर्वक सुन रहा था।मेरी पार्टी की ओर से मैं इसकी पूरी तरह से निंदा करता हूं। मुंबई में जो सीरियल बम ब्लास्ट हुए और यह बात स्थगन प्रस्ताव में भी है, सिफ मुंबई ही नहीं मुंबई बम ब्लास्ट और इसके अलावा देश के दीगर स्थानों पर जो पिछले कुछ दिनों में टेररिस्ट हमले हुए, आप अगर यह देखेंगे कि टेररिस्ट, मलिटेंट, आतंकवादी, उग्रवादी वे जो भी नाम दें, वह जनता के अंदर भय पैदा करने के लिए, जनता को तितर-बितर करने के लिए देश की एकता को तोड़ने के लिए हमारे जो खुशहाली है, उसको बर्बाद करने के लिए या हमारी जो प्रगति है, उसमें रूकावट पैदा करने के लिए वे ऐसे घिनौने हथकंडे अपनाते हैं। यह काम भयंकर तरीके से, योजनाबद्ध ढंग से किया जाता है। यह गौरव की बात है कि हमारे देश में जनता इस बात को समझ रही है। यही कारण है कि वे चाहे किसी भी हिस्से में हों, खासकर मुम्बई में, टैरोरिस्ट्स का जो मकसद था, जो उद्देश्य था, कई घंटे ट्रेन ठप्प रही, उन्होंने मुम्बई की लाइफ लाइन को डिस्टर्ब करने की कोशिश की। जनता भयभीत हो जाए, हमारे देश की प्रगति रुक जाए, प्रगति के रास्ते में रुकावट पैदा हो, जनता को तितर-बितर कर दिया जाए, धार्मिक द्ृष्टिकोण से बंटवारा कर दिया जाए, इस देश की जनता ने उनका यह उद्देश्य सफल नहीं होने दिया। हम उसे लीडर कहते हैं जो जनता को लीड करता है। दिक्कत इस बात की है कि आज लीडर ने जनता को लीड नहीं किया, लेकिन लीडर जनता से लीड लेने के लिए भी तैयार नहीं है कि किस तरह टैरोरिज़्म को नाकाम किया जाए।

१९८० के दशक में मैं थोड़ा नौजवान था, संसद में नहीं पहुंचा था, १९९० के दशक में संसद में पहुंचा, उस समय मैं अखबार, मैगज़ीन आदि में ढूंढता था कि आडवाणी जी जैसे नेता संसद में क्या बोलते हैं। आज मैं संसद में देखता हूं कि आडवाणी जी जैसे नेता अखबार, मैगज़ीन और आर्टीकल्स टटोल रहे हैं कि संसद में क्या बोलें। दोनों में बहुत फर्क है। शुरुआत में जब उन्होंने बरखा दत्त वगैरह कई लोगों को कोट किया, तो मुझे ऐसा लगा…( व्यवधान) I was quite appreciative, I must confess.  जिस भावना से उन्होंने बोलना शुरू किया, कम से कम मैं उस बात का समर्थन करने के लिए तैयार हूं,आतंकवाद के घिनौने षडयंत्र के बारे में, जनता के बारे में उन्होंने जो कुछ भी कहा, यहां तक कि बरखा दत्त की वह लाइन कि यूनिटी होनी चाहिए, सरकार और देश को स्ट्रॉग होना चाहिए, सरकार कोई अलग नहीं है। अगर देश की जनता युनाइटेड हो, देश की एकता मजबूत हो, तो उसे कोई शक्ति नहीं बिगाड़ सकती। लेकिन मैंने देखा कि बाद में थोड़ा कंट्राडिक्शन हो गया। एक तरफ हम कह रहे हैं कि युनिटी होनी चाहिए, जनता एकताबद्ध तरीके से ही यह काम कर सकती है, स्ट्रॉग रिवोल्यूशन से इसका मुकाबला कर सकते हैं और फिर हम अल्पसंख्यक की बात कर रहे हैं। मीडिया ने मुम्बई ब्लास्ट के बाद भी बहुत अच्छी भूमिका अदा की है। कश्मीर की घाटी में जो लोग मारे गए, उनमें बंगाल के पर्यटक भी थे। उससे पहले भी हमले हुए जिनमें गुजरात के पर्यटक थे, देश के अन्य भागों से भी लोग आए हुए थे। लेकिन ११ तारीख को हमने देखा कि जब पर्यटकों के ऊपर हमला किया गया, तो वहां के लोकल दुकानदार, लोकल नौजवानों ने काफी दूर दौड़कर एक व्यक्ति को पकड़ लिया। यह है रिस्पौंस। आस-पास की बस्तियों के लोगों ने धर्म, मजहब, जाति-पाति नहीं देखकर सहायता पहुंचाने के लिए उमड़ पड़े। हमें इससे सीखना चाहिए और हम सीखने की कोशिश कर रहे है। मैं समझता हूं कि आतंकवादी दुनिया में कहीं भी हंगामा करें, उसमें प्रैस, पब्लिक, पोलीटिकल पार्टीज़ और पोलीटिकल लीडर्स का बहुत महत्वपूर्ण रोल होता है, सरकार का रोल तो होता ही है, मैं सरकार के बचाव नहीं कर रहा हूं, सरकार के बारे में भी कह रहा हूं। यह मैं नहीं कह रहा हूं। आपको याद होगा, जब पिछले साल जेनेवा में मीटिंग हुई थी, वहां टैरोरिज़्म और उसका मुकाबला करने के लिए मीडिया और पार्लियामैंट का क्या रोल होगा, इसपर काफी बहस हुई, बल्कि भारत का ही प्रस्ताव था और उसे पारित भी किया गया, मैं उसमें नहीं जा रहा हूं, मैं कह रहा हूं, हमने देखा कि मुम्बई में जो भयंकर विस्फोट हुआ, खुद आडवाणी जी ने कहा कि इसके लिए महीनों की तैयारी हुई होगी, इतनी मैटीकुलसली, अगर उनके शब्दों में कहें तो मलिटरी परफैक्शन से उसे एग्ज़ीक्यूट किया गया था। मुम्बई पुलिस, हमारी इंटैलीजैंस, भारत सरकार, क्या इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं? मैं इस सरकार या उस सरकार की बात नहीं कर रहा हूं। यह लांछन एकदम गलत होगा कि एनडीए कहे कि यूपीए के जमाने में ऐसा-ऐसा हो रहा है । यूपीए सरकार ने कहा कि आपके जमाने में ऐसा-ऐसा हुआ। हम कहां तक जायेंगे?  पिछले दो-ढाई महीने से आप देखें तो वहां विस्फोटक कहीं न कहीं से मिलता रहा है। ए.के. ४७, ए..के. ५६ हथियारों को बरामद किया जा रहा है। हम नागपुर में देखें तो वहां आरएसएस के हैडक्वार्टर के सामने कथित टैररिस्ट्स के साथ मुठभेड़ हुई। अब कोई भी टैररिस्ट हो, लेकिन वे मारे गये। नांदेड़ में बम बनाते हुए टैररिस्ट पकड़े गये। कई लोग तो बम बनाते हुए मारे गये। मालेगांव में कई सीरीज ऑफ रेड्स हुए। पुलिस का कहना है कि महाराष्ट्र में छापे मार कर सीरियल ब्लास्ट से तीन गुना आरडीएक्स पकड़ा गया। इसका मतलब है कि योजना एक तार से जुड़ रही है। मैं यह समझता हूं और मेरी पार्टी की भी यह समझ है कि विस्फोट होने से ही हम चकित होकर रिस्पांस करे, ऐसा न हो, बल्कि घटना होने से पहले हम तमाम बंदोबस्त करें। इससे ज्यादा जरूरी बात यह है कि हमारे समाज, क्षेत्र, शहर या गांव के अंदर ऐसा ताना-बाना बुना जा रहा है जिससे उनको हमारे देश में ऐसे अटैक करने में सहायता मिलती है - हमें उस ताने-बाने को खत्म करना पड़ेगा। विदेशों से हमारे देश में जो आरडीएक्स आ रहा है क्योंकि हम तो अपने देश में इसे मैनुफैक्चर करते नहीं हैं, उसकी रोकथाम के लिए भी हमें पूरा बंदोबस्त करना चाहिए - चाहे वह सीमा क्षेत्र से आये या कोस्टल एरियाज से आये, हमें उसे रोकने की पूरी कोशिश करनी चाहिए, वरना ऐसे विस्फोट होते रहेंगे और हम ऐसे ही चर्चा करते रहेंगे।

आडवाणी जी ने पंजाब के बारे में, खालिस्तान के बारे में कहा। उपाध्यक्ष महोदय, जी आप इसे अच्छी तरह से जानते हैं क्योंकि यह आपकीआपबीती कहानी है। हम किस तरह पंजाब की मलिटैंसी को रोक पाये। हमारे देश में, देश की जनता में एकता की बड़ी शक्ति है, हालांकि हमें बहुत कुछ झेलना पड़ा है। आज भी उसका असर हमारे समाज से गया नहीं है। आप देखें कि यह पंजाब के वक्त भी हुआ और आज भी हुआ कि इसकी आइडेंटिटी पुलिस की हो जाते हैं। हम किसी को देखें और किसी विचार से पहले ही हम यह एनाउंस कर दें कि यह टैरोरिस्ट है, इस मजहब का है, दाढ़ी वाला है, टोपी वाला है, पगड़ी वाला है, तो यह आइडेंटिटी बेस्ड पोलटिक्स का असर है, जो गलत है। यह टैरोरिज्म को खत्म करने के लिए नहीं, बल्कि टैरोरिज्म को बढ़ावा देने की समझ है। हमें इस सोच और समझ के खिलाफ भी लड़ना पड़ेगा।हमने देखा कि ११ जुलाई के बाद मीडिया ट्रायल्स शुरू हो गये, संगठनों के नाम आने शुरू हो गये, लोगों के नाम भी आने शुरू हो गये। ऐसे संगठनों के नाम आने शुरू हो गये जिनके साथ मुलायम सिंह जी का नाम जोड़ दिया गया कि उन्होंने उसके बारे में सर्टीफिकेट दे दिया है - ऐसा भी लिखना शुरू हो गया। इसी तरह टेलीविजन और अखबारों में दोगलापन आना शुरू हो गया। अगर यह हकीकात के लिए किया जाये तो अच्छा है क्योंकि किस पर शक है या किसका पता चल रहा है आदि, ऐसी कभी-कभी स्ट्रेटेजी होती है। लेकिन यह क्या स्ट्रेटेजी है?  हम पहले से सब ऑप्शन्स को बंद करके एक चैनल मे क्यों घूम कर रह जाते हैं। किस समझ से किस मानसिकता से हम घूमते रह जाते हैं ? बेशक ऑप्शन ओपन करके पकड़े जायें, तो उसकी तैयारी होनी चाहिए, उनको पकड़ने के लिए तमाम इंतजाम होने चाहिए, लेकिन ऐसा माहौल बना कि नार्थ ईस्ट में, मध्य प्रदेश में, माहिम में इतने लोग पकड़े गये आदि, ऐसा अखबारों में आना शुरू हो गया। लेकिन १० दिन बाद पुलिस कहती कि सब क्लू-लैस है, यानी कोई क्लू नहीं है। हमारे गृह मंत्री जी ने खुद कहा कि हमें सब सुराग मिल गये हैं लेकिन हम चौकसी के लिए बोल नहीं हैं। हमने कहा कि अच्छा है, पहले से पुलिस को बोलना नहीं चाहिए, हुकूमत को बोलना नहीं चाहिए। अगर हम पहले से बोल देंगे तो जहां हम छापा मारेंगे, वहां सब भाग जायेंगे इसलिए हम कुछ नहीं बोल रहे हैं। हम आज भी अंधेरे में हैं। हमें इस बारे में मालूम होना चाहिए, खास कर साउथ एशिया में, हिन्दुस्तान में जब भी ऐसा कोई वाकया होता है तो उसका अलग-अलग पहलू निकलता है। तमाम सहानुभूति के बाद भी, कम्पटीशन के बावजूद भी हम २०० लोगों के परिवारों को मुआवजा नहीं दे पायेंगे। जो लोग घायल हुए, उनकी परेशानी को हम समझ सकते हैं लेकिन हम उस परिवार के साथ शेयर नहीं कर सकते। लेकिन उसके साथ-साथ मामला हिन्दू-मुसलमान रिलेशन का आ जाता cè[p16] । तब मामला इण्डो-पाक, इण्डो-बांग्लादेश रिलेशन्स का आ जाता है। हमारे देश की तारीख, सियासत या राजनीति ही उसका कारण है और इसीलिए हमें ज्यादा सावधानी का अवलंबन करना चाहिए। आडवाणी जी ने भी कहा कि राजा और प्रजा को इकट्ठा होकर इसका सामना करना चाहिए, राजा और प्रजा को अलग नहीं होना चाहिए।हमने देखा है कि श्री अशोक सिंघल जी ने एक बयान दिया। मैं इण्डियन एक्सप्रेस से ही उद्धरित कर रहा हूँ। शायद मैं उनका नाम न लूं तो ज्यादा बेहतर होगा, इसलिए मैं उनका नाम न लेकर संगठन का नाम लेता हूँ। विश्व हिन्दू परिषद के नेता ने एक फार्मूला दिया। मैं इण्डियन एक्सप्रेस से पढ़कर बोल रहा हूँ क्योंकि किसी और अखबार से उद्धरण देना गलत होगा।

It says:

 “The Hindu community is being subjected to halaal, but the Hindu community believes in jhatka. We saw how the Hindu community gave a jhatka in Gujarat. ….”   I am quoting from The Indian Express dated 19th July.  It further says:
“We don’t fight on day-to-day basis. It’s a big Mahabharat. 100 crore Hindus are capable of protecting themselves.
 
Snap all ties with Pakistan, ban madarsas, end minority status for Muslims. ”   यह कितना अच्छा आसान फार्मूला है। यह कौन सी राजनीति है? इसे लश्करे तोयबा नाम दीजिए, जैश-ए-मोहम्मद नाम दीजिए, मौलाना मसूद अजहर बोलिए या बिन लादिन बोलिए या आपने जो नाम बोला है - विश्व हिन्दू परिषद का - वह नाम दीजिए। सभी की समझ और दिमाग एक जैसा ही है। इसका प्रतिवाद क्यों नहीं होगा? यह गलत है। यह ज्यादा खतरनाक प्रवृत्ति इसलिए है क्योंकि ये होम-ग्रोन एक्टीविस्ट बढ़ रहे हैं, जो इस तरह के हमले कर सकते हैं।इसलिए हमें और भी ज्यादा कोशिश करनी चाहिए। हमें यह देखना चाहिए कि उनको लोग किस तरह मिल रहे हैं, किसे ये लोग धकेल रहे हैं? धार्मिक विश्वास से अलग ये जो लोग कुछ लोगों को हैण्ड-पिक कर रहे हैं, उनको ट्रेनिंग दे रहे हैं, वे ऐसा क्यों कर रहे हैं? क्या यह देखना हमारी जिम्मेदारी नहीं है, राष्ट्र की जिम्मेदारी नहीं है, राजनीतिज्ञों की जिम्मेदारी नहीं है? मैं इसे ज्यादा नहीं पढ़ूंगा कि ऐसे लोगों को मैं ज्यादा पब्लिसिटी नहीं देना चाहता हूँ। …( व्यवधान) 
MR. DEPUTY-SPEAKER:  Please do not make any running commentary. 
… (Interruptions)
मोहम्मद सलीम : मैं समझता हूँ कि यह खतरे को रोकना नहीं है, बल्कि उसे बढ़ाना है। मुंबई में जो हादसे हुए उसके बाद जो आतंकवादी हमले दूसरी जगहों पर हुए, उनके बारे में आडवाणी जी ने खुद ही कहा कि हम आंकड़ों की ओर नहीं जाएंगे क्योंकि आंकड़े हमें समाधान नहीं दे सकते हैं। उन्होंने हिन्दुस्तान टाइम्स से कोट किया था। हम कोई बात कोट इसलिए करते हैं कि हम उसे समझ लेते हैं, उसके अर्थ को ग्रहण कर लेते हैं। लेकिन फिर वे आंकड़े देकर बताते हैं कि हमारे जमाने में इतने कत्ल हुए, आज इतने कत्ल हुए, हमने इतने आतंकवादी मार गिराए और आपने इतने आतंकवादी मार गिराए।फिर उन्होंने इन्मरेट करके लिस्ट बनाते हुए यह बता दिया कि ये घटनाएं हुईं। इसके बाद मैं उनकी राजनीतिक समझ को अपील करना चाहूंगा। वे कहत हैं कि पोटा होना चाहिए। आतंकवाद को रिजोल्युटली रोकने के लिए ऐसा होना चाहिए। अक्सर मीडिया में भी लोग ऐसा बोलते हैं कि कड़े से कड़ा कानून बन जाए तभी हम इस मामले को हल कर सकेंगे। जिन दिनों पंजाब में मिलीटेंसी चल रही थी, उन दिनो में भी इस देश में टाडा लागू था। वहां विधानसभा में चुनाव नहीं हुए लेकिन हम टाडा को पास करते गए और टाडा वहां लागू रहा। पोटा जब लागू था उस समय भी संसद पर हमला हुआ, रघुनाथ मन्दिर पर दो बार हमले हुए, अक्षरधाम मन्दिर पर हमला हुआ, कश्मीर की विधानसभा पर हमला हुआ, लाल किले पर हमला हुआ। इसलिए यह जो कहा जाता है कि एक कड़ा कानून डिटरेन्ट का काम करेगा यह गलत साबित हो चुका है क्योंकि जिसे आप फिदायीन या सुसाइड बॉम्बर कहते हैं, उसे केवल कानून से रोकना कठिन होता है। आप कानून से किसे रोकते हैं जो कानून को मानता है। खुद आडवाणी जी ने कहा कि हमारी सीआरपीसी में ये कानून हैं।यद्यपि हम उनसे इसे नही रोक पा रहे हैं लेकिन उनसे यह डिटरेन्ट बनता है कि यदि कोई एक अपराध करेगा तो मौत की सजा होगी या दस साल की कैद हो जाएगी ।जो लोग एबाइडिंग सिटीजंस हैं, वे इसे जानते हैं। टैररिस्ट कौन है, जो समाज को, राजनीति को, कानून को, विधान को, संविधान को अस्वीकार कर दे और पोटाशियम साइनाइड का कैपसूल मुंह में ऱखकर चले। अगर हम उसे पकड़कर कहें कि तुम्हें मौत की सजा होगी, तो वह खुद ही मरने को तैयार है। अगर उसे कहें कि दो बार तुम्हें मौत की सजा होगी, तो यह सोच गलत है। बेशक ढंग की कानूनी व्यवस्था होनी चाहिए और मजबूती से उसे लागू करना चाहिए। जो कानून है, उसे लागू करना पड़ेगा।
पहले पोटा था, उससे पहले टाडा था, जब १९९३ में मुम्बई में बम ब्लास्ट हुए, लेकिन आज उस घटना को साढ़े १३ साल हो गए, टाडा स्पेशल कोर्ट में केस चल रहा है और अभी तक फैसला नहीं आया और न ही किसी को सजा सुनाई गई है। पहले महाराष्ट्र में शिवसेना-बीजेपी की सरकार थी, फिर कांग्रेस और एनसीपी की सरकार आई। उसके साथ ही दिल्ली की सरकार भी बदली, लेकिन आज तक १९९३ के उन बम ब्लास्ट केस में किसी को सजा नहीं सुनाई गई और अभी तक कोई जजमेंट उस टाडा स्पेशल कोर्ट का नहीं आया। ये लोग कहते हैं कि कड़ा कानून हो, स्टेच्यू बुक में घुसा देने से ही मामला हल हो जाएगा, तो मैं कहना चाहता हूं कि दरअसल वे इस बात को अलग हटकर दूसरी बात सोचते हैं, दूसरी जगह निशाना लगा रहे हैं, जिसे कहा जाता है कि कहीं पर निगाहें और कहीं पर निशाना। अब वे लोग खुद इसमें आ गए तो इसलिए कोयम्बत्तूर चले गए। आडवाणी जी मुम्बई बम ब्लास्ट की बात कर रहे थे और कोयम्बत्तूर चले गए। मैं भी वहां गया था। वहां बम ब्लास्ट के बाद जो फसादात हुए, आडवाणी जी ने उनकी चर्चा नहीं की, यही दिक्कत है। मैं उन्हें बताना चाहता हूं कि वहां बम ब्लास्ट के हफ्ते बाद दो दंगे हुए, उसमें लोगों को जलाया गया, मकानों को जलाया गया, दुकानें लूटी गईं,लोगों को मारा गया और रेप किए गए। किसी भी मुल्क के लिए यह चीज शोभा नहीं देती है। यही मजबूरी है और यही हमारी कमजोरी है कि वाक्या हुआ और उसके बाद पूरे तमिलनाडू में भी ऐसा माहौल बनाया गया, क्योंकि वहां चुनाव नजदीक थे। आज मैं पाटिल जी से कहना चाहता हूं, क्योंकि वह खुद महाराष्ट्र से हैं कि मुम्बई नगर निगम के चुनाव छ: महीने में होने हैं और गुजरात तथा महाराष्ट्र के चुनाव भी साल-दो साल में होने हैं। कोई वाक्या होता है तो मोटिव देखना पड़ता है कि इससे किसे फायदा हो रहा है। इसे लेकर कौन सियासत भुना रहा है, यह भी देखना पड़ता है। इस हादसे के बाद क्या बयानबाजी हुई, यह भी देखना पड़ेगा। कौन लोग हैं जो इस वाक्ये को राजनैतिक रंग देकर भुनाने की कोशिश कर रहे हैं। मैं समझता हूं यह सब सही नहीं हो रहा है। हम राजनैतिक रंग को फैलाकर कभी भी टैररिज्म रोक नहीं पाएंगे। अगर आतंकवाद को रोकना है तो उसकी पहली शर्त है कि सरकार मजबूती से आगे आए।
मैं आडवाणी जी की बात कहना चाहता हूं कि जो गन लेकर बात कर रहे हैं, उनसे नरमी नहीं बरती जाए। मैं भी नहीं चाहता कि उनके साथ कोई नरमी बरती जाए। जो हार्ड कोर आतंकवादी हैं, ‘Those who are involved in terrorism…’ कोई साफ्टेनेस उनके प्रति नहीं होनी चाहिए। उनके साथ मजबूती से पेश आना पड़ेगा। आपने कहा कि जीरो टालरेंस, लेकिन आप मसूद अजहर को यहां से कंधार लेकर गए और वहां छोड़ कर आए। अभी चार बजे जसवंत सिंह जी की प्रेस कांफ्रेंस है। सुना था कि उस समय उनके साथ के बैग था। बैग में कितना सामान था, मुझे नहीं मालूम।…( व्यवधान) कह रहे हैं कि लाल बैग था।
MR. DEPUTY-SPEAKER: Mr.Salim, please conclude now. You have already taken more than 20 minutes.
MD. SALIM : I am just concluding.
            I am telling the hard truth.  They must be ready to digest it. आडवाणी जी ने यह बात नहीं कही। कम से कम हमारी तरफ तो देखकर तो कहते, क्योंकि लाल रंग तो हमारे यहां भी है। यह अफसोसनाक है कि हम किस चीज पर लीपापोती कर रहे हैं। पूरी दुनिया के लोगों ने देखा, वे लोग जो कहते हैं जीरो टालरेंस, वे लोग जो कहते हैं कि नरमी से पेश नहीं आना चाहिए, उस वक्त ये लोग कह रहे थे कि हम तो यह हिन्दुस्तान को बचाने के लिए कर रहे हैं। आज मालूम हो रहा है कि अमेरिका और स्विट्जरलैंड के प्रेशर से हमारे विदेश मंत्री गए और आडवाणी जी खुद कहते हैं कि हमें मालूम नहीं है। ये भी उस समय सरकार में थे और क्या उस वक्त केबिनेट युनाइटेड थी, यह चीज भी इन्हें पता है। आज कह रहे हैं कि पीएमओ में ऐसे लोग थे।…( व्यवधान)  आज नेवेल वार रूम लीक मामला होता है, उसमें नेशनल सिक्योरिटी के स्टाफर पकड़े जाते हैं, मैं इसलिए यह कह रहा हूं कि इसे अलग से रलिजन लाइन से नहीं देखना चाहिए। फर्ज कीजिए कि अगर इसमें कोई अक्लियत या कोई मुस्लिम होता तो मीडिया ट्रायल कैसे होती और आप जैसे लोग किस तरह से पूरी कम्युनिटी को ब्रांड करते, बदनाम करते, यह अफसोसनाक चीज है। इसे धर्म या मजहब से जोड़कर नहीं देखना चाहिए।…( व्यवधान) 
MR. DEPUTY-SPEAKER:  Mr. Tripathy, please do not disturb him.
… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER:  Nothing would go on record except the speech of Mr. Salim.
(Interruptions) …* MR. DEPUTY-SPEAKER: Hon. Members, please maintain silence in the House.
मोहम्मद सलीम : मैं किसी को डिफेंड नहीं कर रहा हूं। त्रिपाठी जी, आप आज आप बीजेपी के साथ हैं, लेकिन आप पुराने समाजवादी हैं इसलिए समाज को न भूलें। हम कहते हैं कि माइनोरिटी कम्युनिटी और * Not Recorded.
हिन्दू कम्युनिटी एक दूसरे को फीड करती हैं, एक दूसरे को कम्प्लीमेंट करती हैं और सप्लीमेंट करती हैं। हमने छ: साल तक बीजेपी की हुकूमत देखी, यह कहा जाता है कि अपीजमेंट आफ माइनोरटीज[R17] ।
क्या तुष्टीकरण एनडीए सरकार में हुआ था। अक्षरधाम में हमला हुआ, रघुनाथ मंदिर में हमला हुआ, कश्मीर की असेम्बली पर हमला हुआ और संसद में यहां पर हमला हुआ। यह तुष्टीकरण तो नहीं था। इसलिए यह थ्योरी भी गलत है। आजादी के बाद माइनोरिटीज का कितना तुष्टीकरण हुआ है और किस तुष्टीकरण की बात आप कर रहे हैं? जो नाइंसाफी होती है वह नाइंसाफी ही होती है।
आज पूरे विश्व में अमरीका जिस तरह से किसी एक धर्म को पकड़कर क्लैश ऑफ सविलाइजेशन की बात कर रहा है उस तत्व को जितना आप मजबूत करेंगे उतना ज्यादा सविलाइजेशन को खतरा पहुंचेगा। टैरेरिज्म किसी मजहब का बनाया हुआ नहीं है, टैरेरिज्म इंसानियत के खिलाफ है, मानवता के खिलाफ है, इसलिए उसको मानवता के आधार पर देखना होगा। जब भी आप इसे हिंदू, मुस्लिम, क्रिश्चयन की तरह से देखेंगे तो वह गलत होगा। लेबनान में अगर हिजबुल्ला को मारने के नाम पर अमरीका की मदद से इजराइली बमबारी कर रहे हैं और पूरी दुनिया अगर उसे टीवी पर देख रही है तो यह नाइंसाफी और भी ज्यादा टैरेरिज्म को बढ़ावा देती है। ९/११ की घटना के बाद अफगानिस्तान और इराक में जो हुआ है उससे और भी ज्यादा टैरेरिज्म बढ़ा है। जो लोग यह समझते थे कि अफगानिस्तान में कारपेट बॉम्िंबग करने से ही टैरेरिज्म खत्म हो जाएगा तो वे गलत साबित हुए हैं बल्कि आज और भी ज्यादा हयुमन बम तैयार करने का वे काम कर रहे हैं। इजराइली या अमरीकी सोच से आप अगर टैरेरिज्म से लड़ने की कोशिश करेंगे तो हिंदुस्तान और साउथ एशिया को भी आप मडिल-ईस्ट बना देंगे - यह खतरा है। इसलिए हम आपसे कह रहे थे कि हिंदुस्तान की अपनी तहजीब है, अपनी सेक्युलर सोसाइटी है और धर्म के बारे में भी अपनी समझ है। साथ ही हमारे समाज में वह ताकत है कि अगर हम इन बातों को रिलीजिएस चश्में से न देखकर मानवीय द्ृष्टिकोण से देखें और एक होकर रहें तो चाहे देश के बाहर का आतंकवाद हो या देश के अंदर का आतंकवाद हो, देश की एकता को तोड़ने वाली ताकतों का हम डटकर मुकाबला कर सकते हैं।
 
श्री मोहन सिंह (देवरिया) : उपाध्यक्ष महोदय, चाहे किसी बहाने से ही सही, आज देश की जो सबसे बड़ी समस्या है, उस पर इस सदन में चर्चा करने का मौका मिला है और इसके लिए सत्ता पक्ष के और विपक्ष के, दोनों तरफ के सदस्यों को, मैं धन्यवाद देना चाहता हूं। यह स्कोर करने का समय नहीं है कि हमारे समय में कितने लोग आतंकवादी हमले के शिकार हुए और कितने आतंकवादियों का हमने सफाया किया और तुम्हारे समय में आतंकवाद बहुत तेजी से बढ़ रहा है। बुनियादी प्रश्न यह है कि वर्ष १९७९ से लेकर वर्ष १९८७ तक आतंकवाद की शुरुआत इस देश के अलग-अलग हिस्सों में हो गयी थी। सभी जानते हैं कि वर्ष १९७९ में शिवसागर जिले में एक संगठन का निर्माण हुआ था और वह संगठन मूल रुप से असम राज्य में बड़ी तेजी से बढ़ा और उसने एक आंदोलन को खड़ा किया और जिसकी परिणति एक भयंकर आतंकवाद के रूप में हुई। ऐसी ही स्थिति पंजाब सूबे में हुई जिसका इतिहास देशभक्ति के हिसाब से किसी भी राज्य से बड़ा और पवित्र इतिहास रहा है। इस राज्य में भी थोड़े वक्त के लिए आतंकवाद और अलगाववाद ने अपना सिर उठाया। असम और पंजाब का आतंकवाद सरहद के भीतर था और हिंदुस्तान ने पूरी ताकत लगाकर उसके ऊपर काबू पाया। लेकिन यह जो आतंकवाद है उसका ठिकाना कभी पश्चिम हिंदुस्तान होता है, कभी मध्य हिंदुस्तान होता है, कभी उत्तरी हिंदुस्तान होता है और कभी दक्षिण हिंदुस्तान होता है। उसका ठिकाना कभी स्थाई नहीं रहा है और न ही उसकी मांग कभी स्थाई रही है और न ही उसका एक स्थाई संगठन है। इसलिए हमारी समस्या यह है कि इस आंदोलन को इस देश के बाहर से प्रोत्साहन प्राप्त cè[r18] ।
उसका मुकाबला हम अपनी क्षमता से किस रूप में करें। यह बात कहना बहुत ही आसान है कि हम पाकिस्तान की नाकाबंदी कर दें तो हमें सफलता मिल जाएगी। मुझे याद है जब भारत की संसद के ऊपर हमला हुआ, तो जिस तरह का बयान उसी दिन आडवाणी जी ने प्रतक्रियास्वरूप दिया था, उसी तरह की मुम्बई बम ब्लास्ट के बाद भारत के प्रधानमंत्री की भाषा थी। लेकिन उसके बाद राष्ट्र मंडलीय देशों के सम्मेलन में हमारे देश के प्रधानमंत्री जी गए और उन्होंने कहा कि दुनिया की बिरादरी से हमने पाकिस्तान को आतंकवाद के कारण राष्ट्रमंडल से बाहर करा दिया है। ऐसी उम्मीद इस देश में जताई गई कि पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद के विरुद्ध पूरी दुनिया भले ही हमारे साथ न हो, लेकिन राष्ट्रमंडल के देश हमारे साथ हैं। ऐसा एक विश्वास इस देश में पैदा हुआ। अमरीका के राष्ट्रपति इस देश में आए और जितनी खरी खोटी सम्भव थी, उन्होंने जनरल परवेश मुशर्रफ को सुनाई और यहां तक धमकी दी कि आतंकवाद को पाकिस्तान ने प्रायोजित करना बंद नहीं किया तो दुनिया में कोई तुम्हारा साथी नहीं रहेगा। मुझे ऐसा लगता है कि ठीक उसी तरह का बयान हमारे देश के प्रधानमंत्री ने दिया, जब उन्हें दुनिया के बड़े देशों की जमात में जाना था। रूस देश तो वैसे ही ठंडा है, लेकिन पीटर्सबर्ग बहुत ही ठंडा है। जो गर्मी प्रधानमंत्री जी के वक्तव्य में मुम्बई में थी, मुझे लगता है कि पीटर्सबर्ग की बर्फीली जगहों के कारण, उनकी गर्मी खत्म हो गई और वे थोङे ठंडे पड़ गए। मैं यह कहना चाहता हूं कि भारत के नेतृत्व को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर, जो गर्मी हम अपने देश के भीतर दिखाते हैं, उसी तरह की अपेक्षा उन मंचों पर भी दिखाने की करते हैं। मैं ऐसा समझता हूं कि उस गर्मी के अभाव में जो अंतरराष्ट्रीय वातावरण बाहर से प्रायोजित आतंकवाद के विरुद्ध इस देश में पैदा होना चाहिए था, वह पैदा नहीं हो रहा है। इसका मुझे अफसोस है।
दूसरी बात मैं यह कहना चाहता हूं कि इस आतंकवाद का मुकाबला हम सरकार और जनता की एकता से कर सकते हैं, लेकिन इस ११ तारीख के बाद के घटनाक्रम की ओर देखें, तो मैं समझता हूं कि सरकार को जिस तरह का व्यवहार करना चाहिए था, मेरी समझ के अनुसार वैसा नहीं किया। जब गृह मंत्री जी से पूछा गया कि क्या भारत और पाकिस्तान के बीच विदेश मंत्री स्तर की वार्ता जारी रहेगी, तब गृह मंत्री जी ने कहा कि बिलकुल जारी रहेगी। दो दिन बाद प्रधानमंत्री जी ने कहा कि कोई वार्ता जारी नहीं रहेगी। मैं पूछना चाहता हूं कि सरकार में असमन्वय की इससे बड़ी बात और क्या हो सकती है? अफसोस की बात है कि किसी अखबार में एक खबर लीक हुई और मुझे उसी दिन यकीन नहीं हुआ कि श्री अंतुले जैसा जिम्मेदार व्यक्ति कैबिनेट में इतनी खराब बात कैसे कह सकता है। मुझे यह यकीन नहीं आ रहा था, लेकिन जब एक राष्ट्रीय अखबार ने इस खबर को छापा तो क्या सरकार का यह दायित्व नहीं था कि उसका प्रतिवाद तुरंत आता। उस अखबार के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की प्रोसीड़िग्स शुरू होती। लेकिन आज इतने दिनों बाद एक मंत्री को इस सदन में सफाई के तौर पर यह बात कहनी पड़ी है कि इससे एक गलतफहमी का वातावरण पैदा होता है। ११ तारीख से ही इस देश में एक वातावरण बनने लगा कि इसमें सिम्मी का हाथ है और आज तक उसके प्रमाण नहीं दिए गए कि इसमें सिम्मी का हाथ है और मदरसों में इसका प्रशिक्षण होता है। १२ दिन के बाद गृह मंत्री जी ने जब वक्तव्य दिया कि मदरसों में मानवता के संदेश दिए जाते हैं तो उसका प्रतिवाद गृहमंत्री जी की तरफ से १२ दिन बाद सफाई के तौर पर दिया जाता है। लेकिन ठीक उसके दूसरे दिन इनकी खूफिया एजेंसी की एक खबर अखबारों में लीक होती है कि बिहार के नेपाल से जो सटे हुए इलाके हैं, वहां भी मस्जिदें हैं, भारत में भी मस्जिदें हैं, दोनों जगहों के लोग खड़े हो गए। भारत में ३५०-४०० मदरसें जय नगर से लेकर मधुबनी तक खड़े हो गए और उधर की सीमा में इतनी ही बड़ी तादाद में मदरसों का निर्माण हो गय्ाा[i19] । एक संकेत जाता है भारत की खुफिया एजेंसी के जरिए सीमा में जो इधर मस्जिद और उधर मस्जिद, इधर मदरसा, उधर मदरसा आतंकवादियों का जो आदान-प्रदान होता है, उसके सशक्त माध्यम यही हैं। जब खुफिया एजेंसियां इसे लीक करें, मैं ऐसा समझता हूं क दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। ऐसी स्थिति से गृह मंत्रालय को निपटने की कोशिश करनी चाहिए क्योंकि आतंकवाद का विरोध है, अन्तर्राष्ट्रीय आतंकवाद का विरोध है तो उस विरोध को अन्तर्राष्ट्रीय इस्लामवाद के विरोध में नहीं बदला जाना चाहिए। भारत में जो आतंकवाद है, उसका विरोध भारत के इस्लामिक और मुसलमान जाति विशेष पर इंगित करने की प्रवृत्ति से हम को बाज आना चाहिए। जिस दिन यह भावना देश में पैदा हो जाएगी, हम अपने संसाधन औरताकत से देश में आतंकवाद का मुकाबला नहीं कर सकते हैं। इसलिए मैं कहना चाहता हूं कि सरकार के तालमेल में कहीं न कहीं कमी है। भारत सरकार की ओर से बयान आया कि मुम्बई ब्लास्ट के बारे में हिन्दुस्तान की खुफिया एजेंसियों ने महाराष्ट्र सरकार को सावधान किया था। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने कुछ मोटे तौर पर उसका खंडन किया और सफाई दी। मैं आग्रह करना चाहता हूं कि यदि देश में आतंकवाद को समाप्त करना है तो प्रधान मंत्री जी ने अच्छी बात कही कि हमें अपने खुफिया तंत्र को मजबूत करना होगा। यह दुर्भाग्य है कि राज्य स्तर पर खुफिया तंत्र के सारे तंत्र कमजोर हैं। इसलिए आतंकवादी मामलों में भारत के खुफिया तंत्र को मजबूती के साथ राज्य की मदद में आगे आना चाहिए।
दूसरी बात मैं यह कहना चाहता हूं कि जो राज्य के अपने संसाधन हैं, उससे आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए जो स्टेट पुलिस है, उसके पास जो अपने साधन, उपकरण हैं, वे उससे मुकाबला करने में सर्वथा कमजोर हैं। इसलिए स्थानीय स्तर की पुलिस को आधुनिक उपकरणों से युक्त करने के लिए भारत सरकार को तत्काल आगे आकर उनकी मदद करनी चाहिए।
यह बात बार-बार कही जाती है कि आतंकवाद का मुकाबला हम सम्मिलित शक्तियों से करें लेकिन जब उसके स्वर उठते हैं तो उसके अपने राजनीतिक ऐंगिल होते हैं। राजनीतिक द्ृष्टिकोण से अपने वोट बैंक को मजबूत करने के लिए उस हिसाब से सोचना शुरू करते हैं तो आतंकवाद के विरुद्ध जो सम्मिलित संघर्ष होना चाहिए उसमें कमी आती है इसलिए ऐसे अवसरों पर भारत की परिपाटी रही है कि भारत सरकार के प्रधान मंत्री, गृह मंत्री सभी दलों को बुला कर बातचीत करते हैं। उस समय ऐसा लगता है कि पूरा देश राजनीतिक मंच से आतंकवाद के विरुद्ध एक स्वर से बोल रहा है। इसमें कुछ कमी दो-तीन वर्षों में हमें दिखायी पड़ रही हैं। ऐसे अवसरों पर जब हमें एक स्वर से बोलना चाहिए तो स्वर में स्वर मिलाने के लिए कोई पहल सरकार की ओर से नहीं होती है। हम इस बात को अफसोस के साथ कहना चाहते हैं।
इन्हीं शब्दों के साथ मैं कुछ और बातें करना चाहता हूं। ऐसी घटनाओं का जब साम्प्रदायिककरण होने लगे तो सरकार को उसकी सफाई में आगे आना चाहिए। उसमें विलम्ब करने से चीजें बेकाबू हो जाती हैं। एक बात बार-बार कही जाती है कि कठोर कानून बनने चाहिए। आडवाणी जी इस बात को जानते हैं कि जब देश में इमर्जेंसी लगी तब मीसा और डीआईआर कानून था। जब सरकार बनी तब कहा क मीसा और डीआईआर के अन्तर्गत जितनी भी गिरफ्तारियां हुईं, अधिकांश निर्दोष लोगों की हुईं। टाडा और पोटा का कानून आता है और हम जब उसके परिणाम देखते हैं तो निर्दोष लोगों की गिरफ्तारियां अधिक होती हैं। टाडा का कानून कांग्रेस ने पास किया था लेकिन उसके खिलाफ कांग्रेस पार्टी के ही रैंक एंड फाइल में जब विद्रोह शुरू हुआ तो संसद को उस टाडा का कानून वापस लेना पड़ा था। पोटा के बारे में भी यही बात हुई। पोटा कानून बीजेपी ने बनाया था लेकिन उत्तर प्रदेश में जब राजा भैया और उसके पिता की गिरफ्तारी पोटा कानून के तहत हुई तो उस पोटा कानून का विरोध दूसरी पार्टियों ने तो किया ही भारतीय जनता पार्टी के रैंक एंड फाइल ने खुद ही उसका विरोध करते हुए कहा कि इसका दुरुपयोग हो रहा है इसलिए इसे खत्म करना चाहिए। भारत का इतिहास बताता है कि जब भी इस तरह के कड़े कानून बनाए गए उन कानूनों का दुरुपयोग हुआ है, सदुपयोग कम हुआ है इसलिए उन कानूनों के विरुद्ध समय-समय पर जनता में विद्रोह हुआ है और संसद को उन कानूनों को वापस करना पड़ा है[R20] ।इसलिए आतंकवाद का मुकाबला कानून से नहीं, बल्कि देश के मनोबल, सरकार की एकता को मजबूत करके तथा अपने देश के रक्षा बलों के मनोबल का मजबूत करके ही कर सकते हैं। इन्हीं शब्दों के साथ आपने मुझे इस बहस में भाग लेने का मौका दिया, इसके लिए मैं आपका आभार प्रकट करता हूं।
 
रेल मंत्री (श्री लालू प्रसाद) : उपाध्यक्ष महोदय, कार्य स्थगन सूचना के माध्यम से मुम्बई में हुई आतंकवादी घटना पर चर्चा करने का विरोध सत्तापक्ष ने कभी नहीं किया है। कल भी अकारण सदन के समय का नुकसान किया गया। जब कि यह बात तय थी कि प्रश्नकाल चलेगा और जीरो ऑवर के कार्य स्थगन प्रस्ताव को हम लोग स्वीकार करेंगे। हमारी सरकार चर्चा से और सच्चाई से पीछे हटना नहीं चाहती, बल्कि इस पर खुलकर चर्चा करना चाहती है। इसलिए आज कार्य स्थगन सूचना का हम लोगों ने विरोध किया और अब हम इसका विरोध करते हैं क्योंकि अकारण, बेवजह, राजनीतिक लाभ उठाने के लिए यह लाया गया है। मुम्बई में जो घटना घटी और सुबह श्रीनगर में जो हमारे भाई, बहन मारे गये और दो-दो मिनट के अंतराल में मुम्बई की लाइफलाइन सब-अर्बन ट्रेन के सात डिब्बों में विस्फोट किये गये। हमारी भारतीय रेल और हमारी व्यवस्था प्रदेश की तरह नहीं हैं। हमारी पूरी व्यवस्था अनकवर्ड है। इस घटना में लगभग १८४ लोग मारे गये और लगभग ८०० लोग घायल हुए। घटना की सूचना के तत्काल बाद संध्या को जब पूरा मुम्बई अस्त-व्यस्त था, टेलिफोन की सारी लाइनें अस्त-व्यस्त थीं और बारिश भी हो रही थी, उसी वक्त माननीय श्रीमती सोनिया गांधीं, होम मनिस्टर साहब और मैं जहाज से घटनास्थल पर गये और अस्पतालों में सब कुछ घूम-घूमकर देखा और व्यक्तिगत रूप से हर सीट पर जाकर हमने लोगों से उनका हाल पूछा। वे कितने बड़े लोग हैं कि उन्होंने हमारे जाते ही घायल होने के बावजूद सब लोगों ने पूरा रिस्पांस दिया। मुम्बई के सभी तबके के लोगों ने चाहे वह हिन्दू हो, मुस्लिम हो, सिख हो, ईसाई हो, अमीर हो या गरीब आदमी हो, सभी लोगों ने सहयोग दिया। यह बात सही है और मैं कबूल करता हूं कि एकाएक घटना होने के बाद तत्क्षण सभी जगह पुलिस और एंबुलेन्स पहुंच भी नहीं पाई थीं, लोगों ने अपनी चादरों में लोगों को उठाया और अस्पताल पहुंचाया तथा जरूरत पड़ने पर अपना खून भी दिया। जब हम लोग अस्पताल जा रहे थे तो रात को जगह-जगह जहां मुस्लिम भाइयों की आबादी है, जहां हिन्दू भाइयों का इलाका है, वहां सारे नर-नारी जगे हुए थे और लोग सड़कों पर रेस्क्यू करने के लिए खड़े हुए थे। मेरे मन में संदेह हुआ कि कहीं कोई दूसरी बात का प्रचार न कर दिया जाए। लेकिन वहां सारे लोग बचाव कार्य में लगे हुए थे। मुम्बईवासियों और मीडिया के लोगों ने वहां बहुत अच्छा काम किया। हम लोग मीडिया पर आरोप लगाते हैं। लेकिन मीडिया ने वहां पाजटिव काम किया और अपना सहयोग दिया। उन्होंने देशवासियों को एक सूत्र में पिरो दिया। इस आतंकवादी घटना से लड़ने के लिए सारे लोगों ने जो एकता दिखाई, वह बेमिसाल है। मैंने नियमों को ताक पर रखकर मृतकों के लिए वहीं पर ऐलान कर दिया कि प्रति मृतक के परिवार को पांच लाख रुपये एक एक्स-ग्रेशिया पेमेन्ट और जब वे टि्रब्युनल में क्लेम करेंगे तो उन्हें चार लाख रुपये अलग से मिलेंगे तथा महाराष्ट्र मुख्य मंत्री ने भी तत्काल एक लाख रुपये प्रति मृतक परिवार को देने की घोषणा की। इस तरह से प्रत्येक मृतक के परिवार को दस लाख रुपये तथा एक व्यक्ति को नौकरी और जो घायल तथा अपाहिज हो गये हैं, उन्हें भी हम जॉब nåMÉä[R21] ।

15.00 hrs. जिस अस्पताल में ले जाने की जरुरत हो, जो भी खर्चा हो, उसे रेल प्रशासन वहन करेगा। तत्काल हम लोगों ने यह काम वहां किया।…( व्यवधान)   अफसरों को भी हम लोग वहां रखकर आए हैं। मैं धन्यवाद देता हूं, हम लोग शिवसेना की आलोचना करते हैं और हमें एप्रीहेंशन हुआ कि शिवसेना कोई उपद्रव मचाएगी लेकिन महाराष्ट्र के मुख्य मंत्री ने सभी दलों के लोगों की मीटिंग बुलाई और सभी दलों के लोगों से सहयोग लेने का काम किया। महाराष्ट्र के इतिहास में सबसे बड़ा यह शुभ लक्षण है कि सभी दलों के लोग इस राष्ट्रीय आपदा में एकताबद्ध होकर अपने तमाम राजनीतिक मतभेदों को भुलाकर एक साथ खड़े हए और तुरंत रेल हमने चालू की। सारा कारोबार देश में शुरु हो गया।

यह आतंकवाद एक नासूर है और इसने सिर्फ भारत में ही नहीं, १९९८ से २००४ तक पूरी दुनिया में इसने तबाही फैलाकर रखी है। भारत में खासकर, मुझे अफसोस है कि मेरा राष्ट्रीय जनता दल, जिस छोटे दल से मैं आता हूं, बाबरी मस्जिद ढ़हाने के बाद मैंने कहा था कि चाहे कोई नाराज रहे या खुश रहे लेकिन हमारा एप्रीहेंशन था कि अगर मस्जिद गिरेगी तो हमारा मंदिर भी बचने वाला नहीं है। मंदिर गिरेगा तो मस्जिद, गिरजाघर और गुरुद्वारा बचने वाला नहीं है। लेकिन मुझे अफसोस है कि हम लोग जब कोई घटना होती है तो जो सरकार होती है, उसके खिलाफ खड़े होकर जो-जो बातें हम लोग बोलना चाहते हैं, बोलते हैं। सीरीज ऑफ इंसीडेंट्स, इस देश का दुर्भाग्य रहा है कि हम ने आडवाणी जी को गृह मंत्री बनाकर जम्मू-कश्मीर का प्रभार दिया। देश ने भूल की और बाबरी मस्जिद के बाद की घटनाओं को लगातार अगर आप देखेंगे कि यह सीरीज ऑफ इंसीडेंट्स सारी घटनाएं वहां से पैदा होती हैं और गालिया चारों तरफ से देश में दी गईं। भले ही कोई बोले या न बोले क “बाबर की औलादों, बाहर आओ, हिन्दुस्तान छोड़ो।” रामशिला पूजन से लेकर.…( व्यवधान) किसी के भी इबादत के स्थान को धवस्त करना…( व्यवधान)   महोदय, चाहे लाख कानून बना दीजिए,…( व्यवधान) 

योगी आदित्यनाथ (गोरखपुर) : उपाध्यक्ष महोदय, बाबरी मस्जिद के नाम पर…( व्यवधान) 

MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing will go on record.

(Interruptions) … *   * Not Recorded उपाध्यक्ष महोदय : कुछ भी रिकार्ड में नहीं जा रहा है।

…( व्यवधान)

उपाध्यक्ष महोदय : जब आपकी बारी आएगी, तब आप बोलिएगा। अभी कुछ भी रिकार्ड में नहीं जा रहा है। आप बैठिए।

…( व्यवधान)

MR. DEPUTY-SPEAKER: Please sit down. Nothing is going on record.

(Interruptions) …* श्री लालू प्रसाद : उपाध्यक्ष महोदय, इसीलिए हमारे संविधान ने देश को सैकुलर स्वीकार किया है।[R22]  श्री हरिन पाठक (अहमदाबाद) : इतने महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा हो रही है। ऐसी बात क्यों करते हैं? …( व्यवधान) 

श्री लालू प्रसाद : महोदय, हमारा देश धर्मनिरपेक्ष है लेकिन हम शिला पूजन में राम रथ निकालते हैं, जुलूस निकालते हैं। मुझे अफसोस है कि जो बाबरी मस्जिद तोड़ने के मुजरिम हैं, वे कार्य स्थगन प्रस्ताव लाते हैं। भारत देश में गुजरात के गोधरा से लेकर लोकतंत्र के मंदिर पर जब हमला हुआ तो कहा जाता है कि हमारी सरकार कहां थी, खुफिया तंत्र कहां था, ये लोग कहां थे। आप सोए थे जब कारगिल में दुश्मन घुसा। एक एक लाश बिहार रैजिमैन्ट के सिपाही की जाती थी तो हमारी सरकार वहां थी। मैं और राबड़ी देवी उनको कंधा लगाते थे। हमने ऐलान किया कि बहादुरो पीछे मत देखना। पूरा बिहार और पूरा देश तुम्हारे साथ है। माँ की रक्षा करना। शहादत देने पर दस लाख रुपये और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देंगे, बिहार वासी गरीबी और गुर्बत में रहेंगे लेकिन तुम माँ की रक्षा करना। कारगिल जो हमारा स्ट्रैटेजिक पॉइंट हो सकता है तब किसकी सरकार थी? हमारे सामने पाकिस्तान की हिम्मत नहीं होती थी हमारी सीमा में घुसने की। ऱाष्ट्रभक्ति की दुहाई देने वाले लोगों का शासन, जम्मू कश्मीर के प्रभारी अपोज़ीशन लीडर, प्लानिंग किया गया और चारों तरफ जम्मू और कारगिल में जो घटनाएं घटीं। हम भारत के महान सैनिकों को सलाम करते हैं जिन्होंने अपने प्राण न्यौछावर करके भारत मां की रक्षा की। जिस बोफोर्स की आलोचना हुआ करती थी, जिसमें कमीशन की चर्चा होती थी, अगर वह तोप नहीं होती तो बचाव का काम नहीं होता। …( व्यवधान) 

एक सैनिक ने कहा …( व्यवधान)   अरे भाई बैठिये। …( व्यवधान) ...*. … *  आपको क्या मतलब है? बेकार की बात करते हैं। …( व्यवधान) 

* Not Recorded *…..* Expunged as ordered by the Chair उपाध्यक्ष महोदय :  उसको एक्सपंज कर दें,  That is unparliamentary.

श्री लालू प्रसाद : जो खराब लगे उसे एक्सपंज कर दीजिए।

श्री देवेन्द्र प्रसाद यादव (झंझारपुर) : वह अनपार्लियामैंट्री नहीं है।

उपाध्यक्ष महोदय : मैं जानता हूं। I know what is parliamentary and what is unparliamentary.

श्री लालू प्रसाद : महोदय, मैंने सेना के एक अधिकारी से पूछा कि आखिर कब तक ये शव आते रहेंगे। उस निर्भीक अधिकारी ने कहा कि सेना इंतज़ार कर रही है, आदेश नहीं मिलता। हाल ही में मैं परिवार के साथ वाघा चौकी पर गया था। शाम को जो कार्यक्रम होता है, दोनों तरफ के लोग खड़े रहते हैं। बीएसएफ के अधिकारियों ने ले जाकर दिखाया कि कैसे वे सीमा की रक्षा करते हैं। वहां लोगों ने बताया कि शासन इनका और आर-पार लगातार घटनाएं घटीं। इन्होंने कहा कि इस बार आर-पार कर देंगे, लड़ाई हो जाएगी, इस बार पार कर देंगे। लेकिन आर छोड़कर पार हो गए और आतंकवाद से लड़ने के लिए कम्यूनल हैटरेड पैदा करना चाहते हैं। खुराना जी ने इनका भंडाफोड़ कर दिया है, उमा भारती ने इनका भंडाफोड़ कर दिया है और ये कहां घूम रहे हैं? बेलन-चौकी लेकर घूम रहे हैं। घंटी बजा रहे हैं। कोई थाली पीट रहा है। देहात में हम लोगों के घर में बच्चा पैदा होता हैतो हम लोग थाली पीटते थे। क्या स्वरूप बना रहे हैं, क्या राह दिखा रहे हैं।

महोदय, सीमा पर जाकर देखें, आप तो बार्डर एरिया के हैं। इन्हीं के कार्यकाल में पाकिस्तान ने अपने बचाव का तटबंध जैसे बना लिया चारों तरप्ा[h23] ।हमारी सीमा पर वायर लगी हुई है और उस तटबंध पर बचाव का काम कर लिया गया है। वहां वजबिल्टी न होने के कारण हमारा सैनिक जब वहां खड़ा होता है तो वह देख नहीं सकता है। आप देश की रक्षा करने में विफल रहे हैं।…( व्यवधान) 

MR. DEPUTY-SPEAKER: No running commentary.

श्री लालू प्रसाद : अगर…*…..* पर कार्यवाही की गई होती,…( व्यवधान) 

उपाध्यक्ष महोदय : He is not present in the House. इनका नाम एक्सपंज कर दीजिए।

श्री लालू प्रसाद : पूरे भारत की महान जनता और हम सभी लोग आतंकवादी घटनाओं की बात करते हैं। मैं ज्यादा समय नहीं लेना चाहता, लेकिन मैं आपको यह बताना चाहता हूं कि जो “Call To Honour” किताब जसवंत सिंह जी ने लिखी, मोहन सिंह जी, आप उसे पढि़ए। आज कल समाजवादी पार्टी किनारे होकर चलती है। आप सच्ची बात बोलिए, इनकी बातों को उजागर करिए। जो आतंकवादी घटनाएं कराते हैं, *…..* Expunged as ordered by the Chair इस तरह की गतवधियों में लगे हुए हैं, आज आडवाणी जी ने बड़ी गजब, डेंजरस बात कही है, उसे कम से कम निकाल देना चाहिए। इन्होंने कहा है कि अब पाकिस्तान से टेरेरिस्ट नहीं आ रहे हैं, वहां से आतंकवादी नहीं आ रहे हैं, यानी भारत से आ रहे हैं या पाताल लोक से आ रहे हैं, ये क्या बताते हैं?ये हिन्दुस्तान की अकलियत के ऊपर संदेह पैदा करना चाहते हैं। इनका कम्युनल बॉयस है। जब इनका वजूद घट रहा है, ये अपना फेक कम्युनल कार्ड खेलना चाहते हैं, जब कि सरकार और विपक्ष, सब को मिल कर, एक होकर, आतंकवाद के खिलाफ हिन्दुस्तान की जनता को कांफिडेंस में लेकर इन्हें कुचलने की कार्यवाही करनी चाहिए, लेकिन ये हमारी सरकार पर दोषारोपण करने में लगे हुए हैं। हम इसकी परवाह नहीं करते। प्रधानमंत्री, मनमोहन सिंह जी, सोनिया गांधी जी, हमारी सरकार और हम सभी यूपीए में बैठे हुए जो लोग हैं, हमारी ये सरकार पांच साल चलेगी और फिर आगे भी चलेगी। अफवाहों से काम नहीं चलता।…( व्यवधान)   मैं जिम्मेदारी के साथ बोलता हूं कि हमारे केबिनेट में किसी भी मंत्री की ऐसी कोई बात नहीं कही कि किसी ने हिन्दुस्तान में हिन्दू बन कर मुसलमान जैसा काम किया। आप अफााहें फैलाते हैं, रियूमर फैलाना आपके जहन में है। कंधार की जब घटना हुई, जो सबसे महान टेरेरिस्ट जेल में पहले से बंद था तो उसे उस समय रिहा किया गया था। मैं चार्ज करता हूं कि अगर हिन्दुस्तान के बाहर का देश होता तो वहां चाहे केबिनेट में बैठे हुए लोग ही क्यों न हों, वे सब वहां सजा के भागी होते। यह हिन्दुस्तान है, जहां की जनता बर्दाश्त कर जाती है। कंधार में जब लोगों को अपहरण करके ले जाया गया, अपने एम्बेसेडर पार्थासारथी तालिबान से बात की कि अगर एक भी पैसेंजर के साथ भी छेड़-छाड़ की जाएगी तो हम प्लेन में घूस जाएंगे, यह तय होता है। आपको इसका जवाब देश के सामने देना चाहिए। हम तो इन्हें कुचलेंगे, कुर्बानी देंगे, हमारे सामने जो भी बातें आएंगी, हम उन्हें देखेंगे, लेकिन कंधार में दो-दो मंत्री जाते हैं और छोड़ कर आते हैं, बल्कि छोड़ कर ही नहीं आते, वहां पर दक्षिणा देकर भी आते हैं। अगर कोई और होता तो माफ नहीं करते। मैं आपको पढ़ कर सुनाता हूं, मैं ज्यादा अंग्रेजी नहीं जानता हूं, मैं टूटी-फूटी भाषा में ही बोल पाऊंगा। मैं सभी लोगों से अनुरोध करता हूं कि आप लोग भी उस किताब को पढ़ लें। बाबरी मस्ज़िद एवं गुजरात का भी इसमें दिया है। आपके मंत्री जी ने कहाङ२४ट है  -

“It was the most troubled times. This Christmas of 31st of December, 1999, by the time I reached home... ”   वहां छोड़ कर आए, दक्षिणा देकर आए। जब हम घर पहुंचे।

“I shared a glass of champagne..... ” …( व्यवधान) 

शैम्पेन पीने वालो, जश्न मनाने वालो, आप बातें करते हो टैररिज्म की, लेकिन आप खुद डेंजरस टैररिस्ट्स को छोड़कर, उन्हें नकद-नारायण देकर आए और उसके बाद शैम्पेन पीते हो और कहते हो कि हम छोड़कर आए। …( व्यवधान) 

SHRI HARIN PATHAK (AHMEDABAD): Sir, the writer of this book is a Member of the Rajya Sabha… (Interruptions) He is not present here.

कुमारी ममता बैनर्जी : उपाध्यक्ष महोदय, माननीय मंत्री जी, ऐसे शब्दों का प्रयोग एक माननीय सांसद के लिए नहीं कर सकते। …( व्यवधान) 

उपाध्यक्ष महोदय : जो एक्सपंज करने वाला होगा, मैं उसे एक्सपंज कर दूंगा। …( व्यवधान) 

श्री लालू प्रसाद :अगर मैं कोई गलत बात कह रहा हूं, तो मेरे विरुद्ध प्रिवलेज मोशन लाइए। …( व्यवधान) 

मैं पुस्तक में से कोट कर रहा हूं। (…( व्यवधान) 

उपाध्यक्ष महोदय : जो अनपार्लियामेंट्री वर्ड है, वह एक्सपंज कर दिया जाए।

...( व्यवधान)

कुमारी ममता बैनर्जी : उपाध्यक्ष महोदय, लालू प्रसाद जी को कोट करने का हक है, लेकिन कोई राइटर अपनी बुक में कुछ लिखे, …( व्यवधान)  

Sir, I am not against quoting from books… (Interruptions)

उपाध्यक्ष महोदय : जो एक्सपंज करने वाला है, वह एक्सपंज कर दिया गया है।

...( व्यवधान)

श्री लालू प्रसाद : उन्होंने खुद किताब लिखी है। …( व्यवधान) 

कुमारी ममता बैनर्जी : उपाध्यक्ष महोदय, जिस चीज को हम गंभीरता से डिसकस कर रहे हैं, …( व्यवधान) 

उपाध्यक्ष महोदय : जो एक्सपंज करने लायक है, वह एक्सपंज कर दिया है। आप क्यों शोर मचा रहे हैं। बैठ जाइए।

...( व्यवधान)

THE MINISTER OF DEFENCE (SHRI PRANAB MUKHERJEE): Sir, it is a published document and the published document can be quoted… (Interruptions)

   

KUMARI MAMATA BANERJEE :  Anybody can quote from any book. I am not against that… (Interruptions)

SHRI PRANAB MUKHERJEE : If the author of the book is a Member of any of the Houses, then he cannot send a privilege for being quoted by being a Member of the House… (Interruptions)

SHRI BASU DEB ACHARIA : It is a public document… (Interruptions)

MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing will go on record.

(Interruptions) …* KUMARI MAMATA BANERJEE : You cannot blame him for this… (Interruptions)

श्री लालू प्रसाद :यह पब्लिक डाक्यूमेंट है। किताब लिखने वाले उस समय कैबीनेट मनिस्टर थे। उस किताब से मैं कोट कर रहा हूं। इसमें यदि कोई गलती हो, तो मुझ पर कार्रवाई करें। मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं। …( व्यवधान) 

दीदी, अगर हम किसी पर पीने का ब्लेम भी लगाएं और कोई नहीं पीता हो, तो उसके ऊपर इसका क्या असर होगा ? …( व्यवधान) 

कुमारी ममता बैनर्जी : वह ठीक है, लालू जी, लेकिन आप घर में क्या पीते हैं, उस पर यहां चर्चा नहीं कर सकते हैं। …( व्यवधान) 

श्री लालू प्रसाद : महोदय, इतनी बड़ी घटना हुई। ये आतंकवाद के जनक हैं। पूरे देश को कम्युनलाइज करना चाहते हैं। सरकार को सहयोग करना चाहिए था। अक्षरधाम हमारा है, राम हमारे हैं, रहीम हमारे हैं, कबीर हमारे हैं, लेकिन ये उनके नहीं हैं[rpm25]  । यहां जो कमीशन बैठा, उस कमीशन का नाम लिब्रहान कमीशन है। आडवाणी जी की आदत है कि बार-बार रथ यात्रा निकालते हैं और जब नेता जाते हैं तो *….*  यह हम कह रहे हैं, यह पब्लिक डाक्यूमेंट है।…( व्यवधान) ये भगवान के भक्त हैं, इसलिए…( व्यवधान) 

उपाध्यक्ष महोदय : जो डिलीट करने वाला होगा, मैं करूंगा।

...( व्यवधान)

उपाध्यक्ष महोदय : जो डिलीट करने वाला होगा, मैं कर दूंगा।

 

  * Not Recorded *…..* Expunged as ordered by the Chair श्री लालू प्रसाद : आतंकवाद हिन्दुस्तान में फेल हो गया। यह लिखा हुआ है, पब्लिक डाक्यूमेंट है।

…( व्यवधान) 

उपाध्यक्ष महोदय : लालू जी, कन्क्लूड करिये।

श्री लालू प्रसाद : यह पब्लिक डाक्यूमेंट है कि .*…...*  और आप लोग बात करते हैं।…( व्यवधान) 

उपाध्यक्ष महोदय : लालू जी, आप कन्क्लूड करिये।

श्री लालू प्रसाद : अब कन्क्लूड कर देते हैं। यह हम हिन्दुस्तान की संसद के माध्यम से कहते हैं …( व्यवधान) 

उपाध्यक्ष महोदय : जो एक्सपंज करने वाला होगा, मैं कर दूंगा।

श्री लालू प्रसाद : हमारे हिन्दुस्तान के अन्दर जो भी तत्व, चाहे टैरेरिस्ट हो या फंडामेंटलिस्ट हो, दंगाई, बलवाई हो, हम उसके जहर को उखाड़कर फेंकेंगे और चाहे जो भी घटना में तल्लीन होगा, गोधरा और गुजरात के दंगों के बाद जो आने वाला है, उसमें सख्त से सख्त हिन्दुस्तान की जनता सजा देगी। हम घटना देखने वाले नहीं हैं, हम रगड़ मारेंगे। हमने हिन्दुस्तान में बहुत सी कुरबानियां देखी हैं और ये लोग दंगा कराना चाहते हैं, बवाल कराना चाहते हैं, इनको कोई मतलब नहीं है कि कैसे आतंकवाद से लड़ा जाये, इनकी कोई हिम्मत नहीं है, इसलिए ये बेवजह कॉल टू ऑनर, इस तरह की बातों को लाते हैं।

इसलिए मैं सदन से मांग करता हूं, अपील करता हूं कि इनके एडजर्नमेंट मोशन को खारिज करिये, गिराइये, इसमें कोई दम नहीं है। ये सब जगह से थक मरकर, घूमकर यहां पर अखबार में स्थान प्राप्त करने के लिए आये हैं, इसलिए इनको खारिज कीजिए।

*…..* Expunged as ordered by the Chair श्री अनंत गंगाराम गीते (रत्नागरि) : उपाध्यक्ष जी, ११ जुलाई को मुम्बई के पश्चिमी उप-नगरीय रेल में कुल ११ मिनट के अन्तर से सात बम विस्फोट हुए। इन बम विस्फोटों में लगभग २०० से अधिक लोग मारे गये और दो हजार से ज्यादा लोग इनमें घायल हुए। लगभग सारे विस्फोट रेल में ही हुए, लेकिन कुछ बम विस्फोट उनमें से ऐसे थे, रेलवे स्टेशन पर जब रेल रुकी हुई थी, उस समय हुए। कुछ बम विस्फोट दो रेलवे स्टेशनों के बीच में जब रेल पहुंची, तब हुए। रेल के यात्री उसमें मारे गये, रेल के यात्री घायल हुए। उसी तरह मुम्बई की जो आज की स्थिति है, मुम्बई के आज के हालात हैं, मुम्बई की रेल की पटरी से लगी झुग्गियों में मुम्बई की जनता रहती है। लगभग ६० लाख लोगों की आबादी वहां झुग्गी-झोंपड़ियों में रहती है। उनमें से कई छोटे बच्चे, महिलायें या बुजुर्ग जो विस्फोट के समय घर में थे, उनमें से कई उस आवाज से गूंगे हो गए। यह एक आतंकवादी हमला था और जैसे ही आतंकवादी हमला हुआ और इसकी खबर फैली, तो तुरंत रेलमंत्री जी वहां गए, गृहमंत्री जी भी मुंबई गए, यूपीए की चेयरपर्सन भी वहां गयी, बाद में प्रधानमंत्री जी वहां गए। प्रधानमंत्री जी ने वहां जाकर वक्तव्य दिया कि केंद्र के गुप्तचर विभाग या खुफिया विभाग ने पहले ही महाराष्ट्र को यह सूचना दी थी कि इस प्रकार की आतंकवादी घटना महाराष्ट्र में हो सकती है। लेकिन राज्य की सरकार ने इस सूचना को उतनी गंभीरता से नहीं लिया।

15.26 hrs.                           (Shrimati Krishna Tirath in the Chair) सभापति महोदया, जब इस काम रोको प्रस्ताव को विपक्ष के नेता आडवाणी जी ने सदन के सामने रखा और मुंबई विस्फोट का यहां संदर्भ दिया, तब उन्होंने स्वयं इस बात को स्पष्ट किया था कि आतंकवादी घटना कोई पहली बार नहीं हो रही हैं। पच्चीस सालों से इस देश में आतंकवाद चला आ रहा है।यहां दो प्रकार के आतंकवाद की चर्चा हुयी। हमारे माननीय संसद सदस्य सलीम जी ने, वामपंथियों ने भी उसका जिक्र किया कि हमारे यहां दो प्रकार के आतंकवाद थे।हमारे यहां जो अंदरूनी आतंकवाद था - एक असम का आतंकवाद था और दूसरा पंजाब का आतंकवाद था। दोनों प्रकार के आतंकवाद से हम लड़े और लड़ाई में हम सफल भी हुए और उसको हम मिटा सके। लेकिन जो आतंकवाद श्रीनगर से शुरू हुआ, वह आतंकवाद अब कन्याकुमारी तक पहुंच गया है। इस आतंकवाद की जड़ें सीमा पार हैं। इस देश में सरकार चाहे किसी की भी हो, मैं ग्यारवी लोकसभा से इस सदन में सदस्य हूं, देवगौड़ा जी, गुजराल जी, अटल जी और मनमोहन सिंह जी, सारे प्रधानमंत्रियों को हमने इस सदन में देखा और सुना है। ग्यारहवीं लोकसभा से जितने भी सदन में गृहमंत्री हुए, उन सारे गृहमंत्रियों के बयान हमने इस सदन में सुने हैं कि जितने भी आतंकवादी घटनाएं इस देश में होती हैं, उन सभी आतंकवादी घटनाओं के पीछे पाकिस्तान का हाथ है और जब मुंबई में विस्फोट हुए, तो सरकार की ओर से कहा गया और प्रधानमंत्री जी ने भी साफ तौर पर यह कहा कि घटना के पीछे पाकिस्तान का हाथ है। सीमा पार से आतंकवाद चलाया जा रहा है और मुंबई में जो विस्फोट हुए, वे रेल में हुए, रेल में विस्फोट किए गए, रेल के एक विशेष वर्ग में विस्फोट हुए। केवल रेल में हुए इतनी बात नहीं है, केवल पश्चिम रेल में हुए, इतनी बात नहीं है, रेल में केवल एक विशेष वर्ग में केवल फस्र्ट क्लास के कंपार्टमेंट में विस्फोट हुए, जिस तरह से सारे विस्फोट किए गए, मुझे लगता है कि आडवाणी जी ने जो कहा, उससे सारा सदन सहमत होगा कि बिल्कुल सैनिकी तौर पर, मिलेट्री के तौर जो कार्यवाही होती है, उस हिसाब से यह सब कुछ किया गया। और यह कोई एक दिन का इंसीडेंट नहीं है। इसके लिए जो भी आरडीएक्स आया, इसके सहारे जो षडयंत्र रचा गया, इसकी जो प्लानिंग की गयी, इसमें कई दिन लगे होंगे, कई महीने लगे होंगे और केवल दिन या महीने ही नहीं लगे हों, इसके पीछे कई आदमी और कई दिमाग भी लगे होंगे। जिन्होंने इसे अंजाम दिया, वे तो कुछ ही लोग होंगे, हो सकता है कि रेल में एक ही आतंकवादी गया हो, जिसने वहां बम रखा हो। सात जगहों पर विस्फोट हुए, सात अलग-अलग रेल में हुए, हो सकता है कि सात आतंकवादी अलग-अलग डिब्बे में गए होंगे, अलग-अलग रेल में होंगे, उन्होंने वहां बम रखा होगा। लेकिन यह सारा षडयंत्र सिर्फ सात दिमागों का नहीं है, उसके पीछे कई दिमाग हैं। वे कहां के हैं, वे लोग कौन हैं, उनमें से कितने पाकिस्तानी हैं, कितने भारतीय हैं, कितने मुम्बई में रहने वाले हैं, कितने महाराष्ट्र में रहने वाले हैं, कितने देश के अलग-अलग राज्यों में रहने वाले हैं - क्या इसकी जानकारी के लिए हमारी सरकार कोई कोशिश कर रही है?

आज जब यहां काम रोको प्रस्ताव आया, तो मुझे आश्चर्य हुआ। दासमुंशी जी अभी सदन में नहीं हैं। उन्होंने काम रोको प्रस्ताव का यहां मजाक किया। दासमुंशी जी का जवाब सरकार का जवाब नहीं था। यदि वह सरकारी जवाब हो और यदि सरकार का यही रवैया होगा, तो क्या हम सरकार से अपेक्षा कर सकते हैं कि मुम्बई में रहने वाले आम लोगों का जीवन भविष्य में सुरक्षित रहेगा। सरकार की ओर से इस प्रकार के जवाब दिए जाते हैं। लालू जी अभी जवाब दे रहे थे। लालू जी ने कहा कि मैं आरजेडी की ओर से बोल रहा हूं, हम यह समझ सकते हैं, लेकिन दाममुंशी जी कांग्रेस की ओर से नहीं बोल रहे थे, वे यहां सरकार की ओर से बोल रहे थे। वहां इतनी गंभीर घटना घटी है। यह देश के लिए चुनौती है, हमारे लिए शर्मनाक बात है - केवल सरकार के लिए नहीं, बल्कि इस सदन में बैठे हुए हम सबके लिए शर्मनाक है कि आतंकवादी इस देश के किसी भी कोने में जाकर विस्फोट कर सकते हैं, हम देखते रहेंगे, कुछ नहीं करेंगे और सिर्फ आपस में लड़ेंगे। इससे ज्यादा दूसरी शर्मनाक बात क्या हो सकती है। यह हमारी अखंडता को चैलेंज है, हमारी सरकार को चैलेंज है, हमारे देश की सौ करोड़ जनता को चैलेंज है। जब इस पर कोई चर्चा हो, यहां किस प्रकार चर्चा आए, आप चाहते थे कि नियम १९३ के अधीन यहां चर्चा आए, जिसकी गम्भीरता सरकार न ले, न उसका कोई रिकार्ड हो, न सरकार उस पर कोई जवाब दे - यदि इस फार्म में काम रोको प्रस्ताव के जरिए चर्चा आती है, भले ही आप इसका स्वागत न करें, लेकिन दाममुंशी जी ने जिस प्रकार इस चर्चा को मजाक के रूप में लिया, उससे मुझे आश्चर्य हुआ। हम सरकार का ऐसा रवैया नहीं चाहते। यदि आप इसी तरह काम करना चाहते हैं तो देश की जनता की सुरक्षा किस प्रकार कर पाएंगे। हमने यहां यह सवाल इसलिए पूछा कि जब प्रधान मंत्री वहां गए तो उन्होंने बयान दिया था, सारे अखबारों में वह बयान आया, कि हमने राज्य सरकार को आगाह किया था। हम जानना चाहेंगे कि केन्द्र सरकार या खुफिया विभाग ने राज्य सरकार को किस प्रकार आगाह किया था, क्या सूचनाएं दी थीं। क्या राज्य सरकार को साफ तौर पर बताया गया था कि इस प्रकार के विस्फोट होने वाले हैं? उसके बाद मुख्य मंत्री का बयान आया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की कोई जानकारी नहीं थी, जैसे आम तौर पर सारे देश के राज्यों में एलर्ट किया जाता है, वैसे ही आम तौर पर हमें कहा गया था कि आप एलर्ट रहिए। हमारा खुफिया विभाग क्या कर रहा है? मैं दासमुंशी जी की इस बात से सहमत हूं कि सरकार चाहे एनडीए की हो या यूपीए की हो, यह लड़ाई किसी एक सरकार की नहीं है और न ही कोई एक सरकार इस लड़ाई में आतंकवाद के खिलाफ सफल हो पाएगी। हम सबको मिलकर यह लड़ाई लड़नी चाहिए। जब संसद पर हमला हुआ था, तब हम सरकार में थे, एनडीए की सरकार थी, लेकिन आज मैं जो कह रहा हूं, जब हम सरकार में थे, वही बात हमने उस समय भी कही थी। यदि हम दासमुंशी जी की इस बात को दोहराते और कहते कि आपकी सरकार थी, संसद पर हमला हुआ, पाकिस्तानी आतंकवादियों ने किया, हमारी यह गलती रही, हम इस बात को मानते हैं कि उसी समय हमें कड़ा जवाब देना चाहिए था, सबसे पहले यह करना चाहिए था कि पीओके में जो आतंकवादी कैम्प चलाए जा रहे हैं, उन सबको उड़ाने की आवश्यकता थी। आतंकवाद को रोकने का सही जवाब यही होगा। जैसे श्री सलीम कह रहे थे कि आतंकवादी न धर्म को मानते हैं, न संसद को मानते हैं, न संविधान को मानते हैं, न मज़हब को मानते हैं, आतंकवादी सिर्फ बंदूक को मानते हैं।वे सिर्फ बन्दूक जानते हैं। उन्हें आप किस भाषा में जवाब देंगे?  यदि आतंकवादी सिर्फ बन्दूक की भाषा जानते हैं, तो उनको आप जवाब किस भाषा में देंगे?   जब तकउनको जवाब उसी भाषा में नहीं मिलेगा तब तक आतंकवाद खत्म होगा। लेकिन वह साहस न उस समय की हमारी सरकार कर पायी और न आज की सरकार कर पा रही है। यह साहस किसी न किसी सरकार को करने की आवश्यकता है, नहीं तो यह बीमारी जो कैंसर की तरह बढ़ती जा रही है, वह एक दिन पूरे देश को निगल जायेगी। उन लोगों का विश्वास बढ़ गया है। किसी भी क्षेत्र में, किसी भी कोने में उन्हें यहां पर समर्थन मिलने लगा है। मुझे आश्चर्य हुआ, जब आडवाणी जी ने यहां जिक्र किया, तो कहा गया कि आप यहां पर धार्मिकता को लाते हैं, मुसलमानों को टारगेट करते हैं। आप इस्लाम के खिलाफ बोलते हैं। इस देश में लगभग २० करोड़ मुसलमान हैं। यह हम भी जानते हैं कि इस देश में रहने वाले जो २० करोड़ मुसलमान हैं, वे सभी आतंकवादी नहीं हैं। वे सभी देशद्रोही नहीं हैं, इस बात को हम भी मानते हैं। लेकिन दुर्भाग्य इस बात का है, सच्चाई यह है कि जो भी आतंकवादी है, वह ...* है। इस सच्चाई को हम कभी स्वीकार करेंगे। …( व्यवधान) 

संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में राज्य मंत्री (डॉ. शकील अहमद) : सभापति महोदया, यह आपत्तिजनक है। …( व्यवधान)    दुनिया में और इस देश में हजारों आतंकवादी हैं जो इस्लाम धर्म को मानने वाले नहीं हैं। यह सरासर गलत बात है। इस बात को उन्हें वापिस लेना चाहिए। उनको माफी मांगनी चाहिए। …( व्यवधान) 

सभापति महोदया :  यह वर्ड प्रोसीडिंग्स से निकाल दिया जाये।

...( व्यवधान)

डॉ. शकील अहमद : राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या श्री नत्थू राम गोडसे ने की थी। …( व्यवधान) 

सभापति महोदया :  यह वर्ड आलरेडी निकाल दिया है।

...( व्यवधान)

श्री अनंत गंगाराम गीते : यहां पर गृह मंत्री जी बैठे हुए हैं। जो भी आतंकवादी हमले हुए हैं। …( व्यवधान) 

डॉ. शकील अहमद : इन लोगों ने आतंकवाद फैलाया है। मुम्बई दंगों के बाद शिव सैनिकों के घर से नकली …( व्यवधान) 

MADAM CHAIRMAN: Nothing will go on record.

(Interruptions) … * MADAM CHAIRMAN: Nothing is being recorded.  Please be seated.

… (Interruptions)

सभापति महोदया:  रिकार्ड में कुछ नहीं जा रहा है।

...( व्यवधान)

MADAM CHAIRMAN: Mr. Geethe, please address the Chair.

… (Interruptions)

 सभापति महोदया :  खैरे जी, आप बैठ जाइये।

...( व्यवधान)

 

* Not Recorded.

MADAM CHAIRMAN: Dr. Ahamad, that word has already been deleted.

… (Interruptions)

MADAM CHAIRMAN: Nothing is recorded.  Please take your seats.

… (Interruptions)

 सभापति महोदया :  आपकी पार्टी के सदस्य बोल रहे हैं इसलिए आप उन्हें बोलने दीजिए।

...( व्यवधान)

SHRI PRAKASH PARANJPE (THANE): Let him resign first… (Interruptions[p26] ) सभापति महोदया : आपकी पार्टी के माननीय सदस्य बोल रहे हैं, कृपया उन्हें बोलने दीजिए।

...( व्यवधान)

MADAM CHAIRMAN : Nothing will go on record.

(Interruptions) … * MADAM CHAIRMAN: Nothing will go on record. You please sit down.  Your friend is speaking now.

(Interruptions) …* MADAM CHAIRMAN: Geeteji, please continue.  I will give you only three minutes to conclude your speech.

… (Interruptions)

श्री अनंत गंगाराम गीते : सभापति महोदया, मैंने अपनी बात पूरी नहीं की है और आप मुझे बैठने के लिए कह रही हैं। अगर आप आदेश दें तो मैं अपनी बात कहे बिना ही बैठ जाउंगा।…( व्यवधान) 

     

* Not Recorded.

MADAM CHAIRMAN: Nothing is going on record. Please sit down. 

            Geeteji, please continue.

श्री अनंत गंगाराम गीते : सभापति महोदया, मैं आपके माध्यम से माननीय गृहमंत्री जी से यह प्रार्थना करूंगा कि इस देश के अलग-अलग राज्यों में जितने भी आतंकवादी हमले हुए हैं, उन सारे आतंकवादी हमलों में पुलिस ने जो-जो कार्रवाई की, उनमें में जो लोग पकड़े गए या जिनके ऊपर इल्जाम हैं उन सारे नामों की सूची इस सदन के सामने रखें।…( व्यवधान) 

श्री रघुनाथ झा (बेतिया) : महोदया, मैं माननीय सदस्य की बात का समर्थन करते हुए माननीय गृहमंत्री जी से यह अनुरोध करूंगा कि उस सूची में गांधी जी के हत्यारों के भी नाम हों। …( व्यवधान) 

सभापति महोदया : गीते जी, मंत्री जी खड़े हैं, इसलिए आप कृपया बैठ जाएं।

श्री अनंत गंगाराम गीते : श्रीनगर में विधानसभा पर हुए हमले से लेकर आज तक की सभी आतंकवादी घटनाओं से सम्बन्धित सूची दी जाए।

गृह मंत्री (श्री शिवराज वि. पाटील) : मैं कहना चाहता हूँ कि यहां पर हम जो भी बोलें उसकी वजह से समाज में विभाजन पैदा नहीं होना चाहिए, यह देखना भी हमारी जिम्मेदारी है और यह वक्तव्य कि एक ही समाज के लोग इसमें शामिल हैं, वह सही नहीं है। आप जो सूची मांग रहे हैं वह दी जा सकती है लेकिन उसमें सभी समाजों और धर्मों के लोगों के नाम मिलेंगे।

श्री अनंत गंगाराम गीते : महोदया, माननीय गृहमंत्री जी ने सदन में यह आश्वासन दिया है।हमें गृहमंत्री जी पर पूरा विश्वास है वे सारी घटनाओं की एक सूची सदन को देंगे। आतंकवादियों के बारे में जम्मू-कश्मीर में विधानसभा पर हुए हमले से लेकर संसद पर हमले तक, अक्षरधाम मन्दिर पर हुए हमले से लेकर मुंबई में बम विस्फोट की घटना तक की सभी घटनाओं से सम्बन्धित सूची आप सदन को दे दीजिए। हमें पूरा विश्वास है कि आप ऐसा करेंगे। सभापति महोदया, मैं यह बात इसलिए कह रहा हूँ कि वास्तविकता को स्वीकार किए बगैर हम आतंकवाद से नहीं लड़ सकते हैं[R27] ।

मैं इस बात का जिक्र इस संदर्भ में कर रहा था।

सभापति महोदया : गीते जी, अब आप समाप्त करें, क्योंकि आप २० मिनट ले चुके हैं।

श्री अनंत गंगाराम गीते : आप कहें तो मैं ऐसे ही बैठ जाऊंगा।

सभापति महोदया : कृपया समाप्त करें।

श्री अनंत गंगाराम गीते : मुझे टोका जा रहा है इसलिए समय लग रहा है। मैं मुम्बई विस्फोट के अलावा कुछ अन्य बात नहीं बोला हूं। मैंने किसी पर कोई टिप्पणी भी नहीं की है। जब हमारी संसद पर हमला हुआ तो उसमें पांच पाकिस्तानी आतंकवादी मारे गए थे। हमले से पहले वे लोग कहां रह रहे थे, किसने उन्हें सहारा दिया था और किसने उनकी सहायता की थी, यह देखना चाहिए। इसी तरह से जब मुम्बई में बम विस्फोट हुए तो यह षडयंत्र कहां रचा गया, किन लोगों ने उन्हें सहारा दिया, इसकी भी जांच होनी चाहिए। जब तक यह नहीं होगा और हम इसकी जड़ में नहीं जाएंगे, तब तक हम आतंकवाद को खत्म नहीं कर सकते। अभी तक तो पाकिस्तानी आतंकवादियों से हम पीड़ित थे, लेकिन अब लगता है कि इस देश में ही आतंकवादी पैदा हो रहे हैं।

सभापति महोदया, मैं समाप्त कर रहा हूं। यदि हमें आतंकवाद से लड़ना है तो आतंकवादी जो भाषा बोलते हैं, उन्हें उसी भाषा में जवाब देना चाहिए। अगर सरकार इस तरह का साहस दिखाएगी, तो हम आतंकवादियों से निपटने में सक्षम होंगे। वरना तो यही होता रहेगा कि आरोप-प्रत्यारोप लगते रहेंगे और कुछ नहीं होगा।

मुम्बई को आज हम सलामी देते हैं। मुम्बई की जनता को हम धन्यवाद देते हैं कि मुम्बई की जनता इतनी मजबूत है। आपने मुम्बई का जीवन देखा है तो आपको मालूम होगा कि अगर वहां सड़क पर किसी की लाश गिरी हो तो कोई रुकता नहीं है, ठोकर लगाकर आगे निकल जाता है। इसके लिए कौन जिम्मेदार है, क्या यह हालत वहां की पहले से थी, नहीं, ऐसा नहीं था। मुम्बईकी मजबूरी है कि दो वक्त के खाने के लिए, शाम की रोटी के लिए वहां आदमी को बाहर निकलना ही पड़ता है। इसमें सरकार की वीरता जैसी कोई बात नहीं है, जो आपने इतने होल्िंडग्स लगा दिए हैं और हमें राजनीति न करने की बात कह रहे हैं। आप देखें शहर में किसने वे होल्िंडग्स लगाए हैं और किसके लगाए हैं। यह मुम्बई की मजबूरी है, जिस पर आप राज कर रहे हैं।

   

MADAM CHAIRMAN : Now, Shri A.K.S. Vijayan.

… (Interruptions)

MADAM CHAIRMAN: Shri Prakash Paranjpe, please sit down.  This is not the way.  Noting will go on record except the speech of Shri A.K.S. Vijayan.

(Interruptions) …* MADAM CHAIRMAN: Now, Shri A.K.S. Vijayan.

…( व्यवधान)

सभापति महोदया : मेरी सदस्यों से प्रार्थना है कि आप हाउस की गरिमा को बनाए रखें और आप खुद भी गरिमा में रहें। इसलिए कृपया बैठ जाएं।

                               

* Not Recorded.

SHRI A.K.S. Vijayan (NAGAPATTINAM) : Madam Chairperson, DMK has no two opinions about the need to eradicate the menace of terrorism.  It needs to be uprooted in whatever ugly form it raises its head.  We are now discussing an Adjournment Motion in the aftermath of the recent serial bomb blasts in Mumbai.  On behalf of our party Dravida Munnetre Kazhagam and on behalf of our leader the Chief Minister of Tamil Nadu, I join this House in condoling the death of those who have lost their lives in the Mumbai bomb blasts.

            DMK has always took a stand against curbing freedom of speech, banning the democratic activities of political parties and the misuse of official machinery for personal whimsical purposes.  DMK opposes tooth and nail any misuse of anti-terrorist laws like POTA.  When Prevention of Terrorism Act (POTA) was sought to be passed in this august House, a solemn assurance was given by the present leader of the opposition to our Leader Dr. Kalaignar Karunanidhi, the present Chief Minister of Tamil Nadu and our beloved senior leader late Murasoli Maran that Centre would not allow POTA to be misused for personal ends and political vendetta.  But what had happened in Tamil Nadu then?  Our erstwhile allies in NDA must look back now. Is it not true that one of your associate leaders was to be lodged in prison for more than an year and a half as a POTA detenu.  POTA Review Committee was set up at the instance of our Leader Dr. Kalaignar. But the Review Committee could not function that effectively as it lacked  infrastructure like even furniture and office space.   It did not have enough of power.  As far as I am concerned, I would like to reiterate that DMK has always been steadfast in opposing terrorism.

            Recently, Shri Madani was discharged from the prison for medical treatment.  Hon’ble leader of the Opposition pointed out that.  Here, I would like * English translation of the speech originally delivered  in Tamil.

to point out that Shri Madani is languishing in prison right from 1998 without being proved guilty.  He is behind the bars for unsubstantiated charges.  Even life-term convicts are discharged after their completing two third period of the total conviction term.  As per the High Court order issued in 2003 and in compliance with the request made by the Chief Minister of Kerala, Shri Madani was extended the facility to undergo medical treatment in jail.

            The just act of the Government of Tamil Nadu is a humanitarian gesture.  We believe in Human Rights and humanitarian considerations.  Hon’ble Leader of Opposition says that we have been lenient. If a convict is not provided with medical assistance then there may not be any need for dispensaries inside the prison.  Even those who are to be hanged after a death sentence are not taken to gallows if they suffer any ailment. Madani who weighed 105 kgs. when he was arrested is now a sick person weighing a mere 54 kgs.  So the courts have ordered that he must be provided with medical care. 

It was pointed out that Mumbai serial bomb blast might not have taken place had there been POTA.  We must bear in mind that the attack on Parliament was carried out when POTA was very much in force.  We can overcome terrorist menace having its root cause in communal tension.  We must rise above narrow political and communal divide.  We must overcome caste considerations too.  When the Government seeks seriously and sincerely to uproot terrorist menace wholeheartedly, all of us must shed our differences and unitedly uphold the country and save our people.  Let us unite in our fight against terrorism.                                                     

           

DR. RATTAN SINGH AJNALA (TARN TARAN) : Thank you, Madam Chairperson, for giving me the opportunity to speak on this Adjournment Motion in my mother-tongue Punjabi.  Not only India but the entire world is facing the menace of terrorism. We are all concerned about this problem and want to find its solution.  Many Hon. Members have expressed their opinion on this Adjournment Motion moved by the Hon. Leader of Opposition Shri Advani.  Who is responsible for the rise of terrorism?  In 1978, terrorism reared its head in Punjab.  And … **  is responsible for the rise of terrorism in Punjab.

सभापति महोदय :   अजनाला जी, आप अपना भाषण दीजिए।

…( व्यवधान)

MADAM CHAIRMAN: Nothing will go on record.

(Interruptions) … ** MADAM CHAIRMAN:  Mr. Jai Prakash, please let him continue … (Interruptions)

MADAM CHAIRMAN:  Ajnalaji, you please continue.

… (Interruptions)

MADAM CHAIRMAN : Hon. Members, let him continue his speech. The Hon. Minister will reply to the debate.

DR. RATTAN SINGH AJNALA :  Madam, the Joint Director of IB has written a book that arms and ammunition were being provided to terrorists through IB so that they could indulge in their activities. And …* *  were behind all this.

MADAM CHAIRMAN:  Hon. Members, let him continue his speech. The hon. Minister would reply to the debate.

… (Interruptions)

* English Translation of the speech originally delivered  in Punjabi.

** Not Recorded.

MADAM CHAIRMAN:  Please remove that word.  That word will not go on record.

… (Interruptions)

MADAM CHAIRMAN: Nothing will go on record except the speech of Mr.Ajnala.

(Interruptions) …..* सभापति महोदय :  आप अपनी तरफ से ऐसा कोई शब्द न कहें जिससे शोर हो। आप अपना भाषण जारी रखिये।

…( व्यवधान)

SHRIMATI PARAMJIT KAUR GULSHAN : Our party has made the maximum sacrifice for the country. 

श्रीमती तेजस्विनी शीरमेश (कनकपुरा) :इंदिरा जी ने देश के लिए कुर्बानियां दी हैं। …( व्यवधान)

MADAM CHAIRMAN : Let him continue. I give him only five minutes.

… (Interruptions)

सभापति महोदया : श्री अजनाला जी, आप तीन मिनट में अपनी स्पीच समाप्त कीजिए।

...( व्यवधान)

सभापति महोदया : लालू जी, मैंने पहले ही कह दिया है कि वह शब्द प्रोसीडिंग्स में नहीं जाएगा।

...( व्यवधान)

सभापति महोदया : आप सदन की गरिमा बनाए रखें।

...( व्यवधान)

सभापति महोदया : अजनाला जी, आप तीन मिनट के अंदर अपना भाषण समाप्त कीजिए।

DR. RATTAN SINGH AJNALA : The President of our party Sant Harcharan Singh Longowal became a victim of terrorism. Terrorists fired on the then SGPC Chief. 24 of our candidates, who were fighting elections, were killed by the terrorists.  These elections were boycotted by the Congress Party. … (Interruptions)

 

* Not Recorded.

           Elections were held in Punjab.  Congress Party boycotted these elections.  All other parties were in the fray.  24 of our candidates were gunned down by terrorists. Shri Narasimha Rao’s Government came to power at the Centre. Elections were again held in Punjab. Not a single Congress candidate was killed in these elections.  Why was this so?  Sir, terrorists can strike at will in every nook and corner of India.… (Interruptions)

सभापति महोदया : श्री लाल सिंह जी, आप बैठ जाइए। आप सदन की गरिमा को ध्यान में रखें।

...( व्यवधान)

सभापति महोदया : श्री लाल सिंह जी, Please sit down. Dr. Ajnala, only three minutes are left. You conclude within three minutes.

… (Interruptions)

MADAM CHAIRMAN: Nothing will go on record.

(Interruptions) …* MADAM CHAIRMAN: Your three minutes are going to be over.  Except the speech of Dr. Ajnala, nothing will go on record.

(Interruptions) …*   15.58 hrs.                              (Mr. Deputy-Speaker in the Chair)   MR. DEPUTY-SPEAKER: No, Mr. Prakash, please sit down. Do not waste the time.

… (Interruptions)

MR. DEPUTY-SPEAKER: Mr. Khanna, please sit down. Do not disrupt.

DR. RATTAN SINGH AJNALA  : When Congress Party fights elections, not a single candidate of this party is killed by terrorists.  When we joined the electoral fray, 24 of our candidates were assassinated.  Sir, the Congress Party indulged in a propaganda that Sikhs are terrorists.  As a result, after the assassination of   * Not Recorded Shrimati Indira Gandhi, Sikhs were butchered in cold blood.  Who was responsible for this?

16.00 hrs MR. DEPUTY-SPEAKER : Shri Jai Prakash, please sit down.

… (Interruptions)

MR. DEPUTY-SPEAKER : Nothing should be recorded except the speech of Dr. Rattan Singh Ajnala.

(Interruptions) … * DR. RATTAN SINGH AJNALA  : Sir, the Sikhs were defamed throughout the country.  As such, the Congress party is responsible for the massacre of Sikhs in the riots.  People involved in anti-sikhs riots became Ministers in the Government … (Interruptions)

उपाध्यक्ष महोदय: माननीय सदस्य ने जो कुछ भी कहा है उसे एक्सपंज कर दें।

(Interruptions) …* SHRIMATI TEJASWINI SEERAMESH (KANAKAPURA): Sir, it is not fair. The hon. Member is making allegations against the Congress Party. … (Interruptions)

MR. DEPUTY-SPEAKER : I will see it.

… (Interruptions)

 उपाध्यक्ष महोदय: आप कोई भी प्रोवोकेटिव बात न कहें।

                                                …( व्यवधान) 

MR. DEPUTY-SPEAKER : Nothing should be recorded except the speech of Dr. Ajnala.

(Interruptions) …* DR. RATTAN SINGH AJNALA  : Mr. Deputy Speaker Sir, Captain Amarinder Singh is the Chief Minister of Punjab.  The Congress Party wants to re-introduce terrorism in Punjab, keeping in view the coming elections. They do not want to solve the problem of terrorism.        … (Interruptions)

* Not Recorded MR. DEPUTY-SPEAKER : You are wasting the time of the House.

… (Interruptions)

MR. DEPUTY-SPEAKER : Nothing else should be recorded except the speech of Dr. Ajnala.

(Interruptions) … * प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : पंजाब में हिन्दुओं-सिखों को लड़ा कर कांग्रेस फिर से आतंकवाद को पैदा कर रही है। अगर यह आतंकवाद पंजाब में पैदा हो गया तो वहां फिर आग लग जाएगी।

MR DEPUTY SPEAKER : Please conclude.

DR. RATTAN SINGH AJNALA : Sir, I have not even started.  How can I conclude?  They have not allowed me to speak.  How can I conclude?

MR. DEPUTY-SPEAKER: Please sit down. Please listen.

… (Interruptions)

उपाध्यक्ष महोदय : जयप्रकाश जी, जब आप बोलते हैं तो मैंने किसी को आपको डिस्टर्ब करने के लिए अलाऊ नहीं किया है। लेकिन जब मैं गया, तब से मैं देख रहा हूं कि आप सबसे ज्यादा डिस्टर्ब कर रहे हैं। This is not fair. Please listen to him.

… (Interruptions)

MR. DEPUTY-SPEAKER: Now, please sit down.

… (Interruptions)

MR. DEPUTY-SPEAKER: Madam, please sit down now.

… (Interruptions)

उपाध्यक्ष महोदय : प्लीज, बैठ जाइये।

श्रीमती कृष्णा तीरथ (करोलबाग) : यहां मुम्बई में हुए बम ब्लास्ट्स पर बोलें।

(Interruptions) …* MR. DEPUTY-SPEAKER: Please sit down. That should not be recorded.

(Interruptions) …* * Not Recorded प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : पंजाब में भी बम ब्लास्ट होने का खतरा है .

(Interruptions) … * SHRI MADHUSUDAN MISTRY (SABARKANTHA): Sir, how can he intervene? Why is he given mike every time he stands up?

MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Mistry, that is not going on record.

(Interruptions) …* SHRI MADHUSUDAN MISTRY : His statement should not go on record. Every time Prof. Malhotra stands up, he is given the mike and his statement goes on record.

उपाध्यक्ष महोदय : मैंने पहले ही कह दिया है कि आपकी बात रिकार्ड पर नहीं जा रही है। आप पहले मेरी बात सुन लिया करें, उसके बाद बोलें। मैंने पहले ही कहा है कि जो मल्होत्रा जी ने कहा है वह रिकार्ड पर नहीं गया है।

प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : क्या रिकार्ड पर नहीं गया है, वहां के चीफ मनिस्टर…( व्यवधान) 

MR. DEPUTY-SPEAKER: Only the speech of Dr. Rattan Singh Ajnala should be recorded.

(Interruptions) …* DR. RATTAN SINGH AJNALA  : Sir, they do not want to hear the truth. People should know about the reality. This problem can be solved only if we face the truth.  Sir, the Chief Minister of Punjab wants to re-introduce terrorism in Punjab.

श्री पवन कुमार बंसल : यह गलत बात कह रहे हैं।

डॉ. रतन सिंह अजनाला : यह सही बात है।…( व्यवधान) 

उपाध्यक्ष महोदय : क्या यह अनपार्लियामैन्टरी है?  वह नाम तो नहीं ले रहे हैं।

THE MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF FINANCE                 (SHRI PAWAN KUMAR BANSAL): Sir, there are so many objectionable things other than unparliamentary words which should not go on record. … (Interruptions)

 

* Not Recorded DR. RATTAN SINGH AJNALA : All this is going on so that Hindus become afraid and the Congress Party gets Hindu votes.  At first, the Sikhs were killed.  Now, the threat of terrorism is being used to coerce Hindus to vote for the Congress party in the elections.  This has been the policy of Congress party.

श्री पवन कुमार बंसल : यह क्या कहना चाहते हैं कि हिन्दुओं को मरवाया, सिखों को मरवाया, यह देश में आग लगाने वाली बात कर रहे हैं। यह आखिर क्या कहना चाहते हैं।

MR DEPUTY SPEAKER : Please conclude.

(Interruptions)

श्री पवन कुमार बंसल : यह जो बोल रहे हैं उसके एक-एक शब्द से स्पष्ट होता है कि इनके इरादे क्या हैं।

उपाध्यक्ष महोदय :  मनिस्टर साहब कुछ कहना चाहते हैं। आप उनकी बात सुनिये।

...( व्यवधान)

श्री शिवराज वि. पाटील : श्रीमन्, मैं इंटरवीन करना चाह रहा था। मेरा अनुरोध है कि इस चर्चा में कुछ सदस्यों ने बहुत अच्छे मुद्दे उठाये और बहुत अच्छे ढंग से चर्चा हुई । सारा देश एक होकर इस घटना का मुकाबला कर चुका है। हमारे सदन में भी उसी प्रकार से हो तो इसमें हम सब लोगों को फायदा होगा। मेरा अनुरोध है क…( व्यवधान) 

श्री हरिन पाठक (अहमदाबाद) : उपाध्यक्ष महोदय, मेरा अनुरोध है…( व्यवधान) 

उपाध्यक्ष महोदय : हरिन जी, आपको बोलने का मौका मिलेगा। अजनाला जी अब आप कंक्लूड करें।

…( व्यवधान)

श्री हरिन पाठक : जो लालू जी ने आडवाणी जी के परिवार के बारे में टिप्पणी की है, पहले उसे रिकार्ड से निकाला जाए।…( व्यवधान)   यहां शैम्पेन की बात होती है, आडवाणी जी के परिवार की बात होती है लेकिन उसे आप नहीं निकालोगे।…( व्यवधान) हमारा यह कहना है क लालू जी ने जो अभी आडवाणी जी के परिवार के बारे में टिप्पणी की है, पहले उसको रिकार्ड से निकाला जाए।…( व्यवधान) 

उपाध्यक्ष महोदय : मैं देख लूंगा। अगर उसमें कोई ऑब्जेक्शेनेबल बातें होंगी तो मैं उन्हें निकाल दूंगा। मैं देख लूंगा।

…( व्यवधान)

MR. DEPUTY-SPEAKER: Please sit down.

… (Interruptions)

MR. DEPUTY-SPEAKER: I will go through the records, and remove all that is objectionable.

… (Interruptions)

प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : सर, सोनिया गांधी जी यहां बैठी हुई हैं और उनके यहां होते हुए ये बातें हो रही हैं।…( व्यवधान) 

श्री शिवराज वि. पाटील : देखिए, ये बात रिकार्ड पर नहीं हैं, आप इसको रिकार्ड पर मत लाइए। ये कोई नहीं चाहता।…( व्यवधान) 

DR. RATTAN SINGH AJNALA  : The people of India want to fight as one man against the terrorists.  But, the Government is not sincere. We cannot check terrorism until and unless the Government is sincere in its efforts.  So, I appeal to all the members of this august House to unite in our fight against terrorism.  Only then we can checkmate terrorism.  

                                                                                                   

SHRI BRAJA KISHORE TRIPATHY (PURI): Hon. Deputy-Speaker, Sir, this heinous terrorist outrage like the serial bomb-blast on 11 July in Mumbai speaks about the helplessness of the Union Government, and the Government of Maharashtra. Once again the terrorists have sent a chilling reminder that they can strike at will. Nearly 200 innocent people have been killed, and more than 800 people have been injured in this tragic incident. This has happened and exposed the failure of the Government, and weakness in management of law and order as far as internal security is concerned.

The intelligence failure is only the tip of the iceberg, and it is not the only cause for this incident happening. Actually, the non-serious attitude of this Government on this issue, and their softness towards tackling terrorism is the main cause for this incident occurring in our country.

            The entire world was shocked by this tragic incident, which happened on 11 July. We have heard two hon. Ministers of this Government, who have taken part in this debate, and from their submission it seems that they are not at all serious about this incident. The entire country is shocked, but this Government is not at all shocked. This can be seen from the statements made by the hon. Ministers during this debate in this august House. The entire world is observing us; the country is observing us; and a debate is going on, but we find that the replies given by the Government are most disappointing and unfortunate. It shows that they are not at all serious about this issue. … (Interruptions)

SHRI J.M. AARON RASHID (PERIYAKULAM): No, it is you people who are not serious. … (Interruptions)

श्री अनंत गुढ़े (अमरावती) : महोदय, ये हरेक की स्पीच में खड़े हो जाते हैं।…( व्यवधान) 

उपाध्यक्ष महोदय : हर बात पर खड़े मत होइए।

…( व्यवधान)

SHRI BRAJA KISHORE TRIPATHY : You are not at all serious about it. We have heard the hon. Ministers of your Government on this issue. … (Interruptions)

MR. DEPUTY-SPEAKER: Please do not indulge in any running commentary in the House. There is nothing un-parliamentary said by the hon. Member. Therefore, please sit down.

… (Interruptions)

SHRI BRAJA KISHORE TRIPATHY : Now, Mumbai, the financial capital of our country, is the most vulnerable part of the country for terrorist attacks. Mumbai now looks like a soft target. This was the sixth bombing in the city in the last eight years, and the most severe since 1993 serial bomb blasts. Mumbai is the most attacked city in the world today. Nowhere in the world there is a city like Mumbai which has been attacked six times and at such magnitude. It is the most attacked city in the world now.

The country is witnessing the evil of terrorism for the last 26 years. About 18,151 civilians and security personnel have been killed by terrorists in India since 1994. India has lost over 75,000 citizens, both civilian and security personnel, in the last two decades to terrorism. It reminds me what a distinguished analyst of South Asian Affairs said once. He said, “India does not react to the loss of people. They have just too many. India only reacts to the loss of territory.” This impression of the outsiders is ridiculous, painful and insulting. Perhaps 26 years of terrorism has made us weary and fatalistic.

Terrorists need to be made aware that they would have to pay a price for their actions. They must be made to realise that the world will be equally unsafe for them. The nation has now to prepare itself for a war against terror. The hon. Prime Minister has also rightly declared this war. But, unfortunately, nobody quite believes that our Prime Minister with all good intentions has the power and clout to bring about any significant changes.

We all know that this Government is suffering from serious dilemma and confusion. It is trying to engage themselves in a political strategy but hopelessly it does not have the power to execute. It also engages itself in a security strategy but helplessly, it cannot implement it for fear of political consequences. These are the reasons for which this Government has miserably failed to combat terrorism.

Between the years 2004 and 2006, there was a sharp fall in the number of terror modules busted. This Government is not firm on tackling terror. In most of the cases it is observed that terror is practised by the local recruits. But it is painful that the Prime Minister would not hear it from his security advisors.

Government is also not taking steps to dismantle the infrastructure of terrorism. The Pakistani leadership has been aiding and abetting the forces behind the terrorist activities in our country. The proxy war of Islamabad is still continuing. About 62 terrorist training camps are functioning as usual across the border in Pak-occupied Kashmir and in the northern parts of Pakistan. Infiltration from Pakistan is on the rise with 183 cases having been reported in the past six months. We have heard it again and again.

After every attack, the name of a Pakistan-based group comes out and we just lodge protest at our meetings but nothing happens. But we are happy to continue our peace talk with Pakistan even if Pakistan Government is not ready, rather has refused, to return or hand over the wanted militants, such as Dawood and Salahuddin.

Cross-border terrorism seems to be no longer a part of South Block’s diplomatic agenda. It has been recently proved that it was not on the top of the agenda when hon. Prime Minister met world leaders at the G-8 Summit on July 18. But the Government should know that cross border terrorism has seriously jeopardized India’s sovereignty and progress.  Let us hope that this Government will come out from the political trauma it is now suffering from and good sense will prevail on them to give justice to the nation.

            I would like  to request the Government that it should come out and have a dialogue with all the political parties.  Let there be a joint meeting and let us decide as to how to combat terrorism together.  The people are with us.  Political decision and political will are lacking with the Government.  The Government should take the lead.  If it does not take the lead, it cannot combat terrorism.  If we cannot combat and control terrorism, the terrorism which we have been witnessing in the past, would continue in future too. Hence, I would request that let us sit together and decide as to how to combat terrorism.  The Government should have the firmness; the Prime Minister should have the firmness. The Government should not act in such a manner which would encourage terrorism.  I hope good sense would prevail and the Government would come out with a solution to combat terrorism and to save this country.

 

श्री मधुसूदन मिस्त्री (साबरकंठा) : आज हम एक ऐसे मसले पर चर्चा कर रहे हैं, जिसमें सैंकड़ों लोगों ने अपनी जान गवाई है, जो एक घातक फिनोमिना साबित हुआ है। इस देश में, खासकर जो पश्चिम का इलाका है, पहले जहां पंजाब और नार्थ-ईस्ट तक यह सीमित था, लेकिन आज पश्चिम का जो इलाका है, वहां हमले की दहशत व्यक्त की जा रही है। वहां धमाके में कितने लोग मारे गए, मैं उसकी चर्चा नहीं करना चाहता हूं, मेरी उन्हें श्रद्धांजलि है। उससे सभी लोग व्यथित है। टी.वी. में जो दिखाया गया था, उसमें सभी कौम के लोग एक-दूसरे की मदद कर रहे थे। वहां हिन्दू-मुसलमान एवं दूसरी जाति के लोग भी थे। वहां उस वक्त मदद करने के लिए किसी ने जात-पात नहीं देखी थी। उस समय ऐसा दिखाई दे रहा था कि सभी उस सिचुएशन के सामने लड़ने के लिए तैयार हैं। कितने लोगों के मन में यह दहशत थी कि शायद एक्शन-रिएक्शन की थ्यौरी, इन्होंने जो पहले चलाई थी और अभी भी जसवंत सिंह जी ने अपनी किताब में लिखा है, वैसा नहीं हुआ, यह बहुत अच्छी बात है। अब वहां सामान्य एवं आम आदमी भी अपने काम के अंदर व्यस्त हो गया है।

मुझे आज जो शिकायत है, जो कुछ यहां सुबह, खास कर प्रतिपक्ष के नेता ने बातें कहीं हैं, उनसे मेरी काफी शिकायत है। देश के डिप्टी प्राइम मनिस्टर ने, १३ दिसम्बर की कितनी नोटिंग की है, उन्होंने यहां तब जो बात कही थी, आज बिलकुल दूसरी बात कह रहे हैं। यहां जो बात मुंशी साहब ने कही, लेकिन उन्होंने रिकार्ड पर कहा कि उस वक्त जो हमला हुआ था, उसमें हिन्दू-मुसलमान की बात नहीं है। मैं पढ़ना चाहता हूं, उन्होंने उस वक्त यह कहा था कि यह लड़ाई टेरेरिज़्म इज़ बार्बेरिज्म, सविलाइजेशन वर्सिस बार्बेरिज़्म की लड़ाई है। अगर इसका कोई दूसरा पहलू हो सकता है तो वह डेमोक्रेसी वर्सिस टेरेरिज़्म cè[R28] ।

  वह पहल हो सकती है। हमारी डैमोक्रेसी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि हिन्दुस्तान में १०० करोड़ लोग हैं और सब बराबर हैं। यह जो झगड़ा है, उन्होंने यह भी कहा कि मैं इस देश को आश्वस्त करना चाहता हूं कि यह लड़ाई हिन्दू और मुसलमान के बीच नहीं है, लेकिन यहां जो कुछ कहा जा रहा है, यहां जो मैसेज दिए जा रहे हैं, वे ऐसे दिए जा रहे हैं, जैसे इस देश का एक पूरा लघुमति समुदाय, जिसमें सबसे ज्यादा मुसलमानों की तादाद है, उसका हर एक आदमी आतंकवादी है, आतंकवादियों से जुड़ा है या उसमें मदद कर रहा है।

सर, मैं गुजरात से आता हूं। हमने पहले सुना कि पंजाब के अंदर आतंकवाद हो रहा है। नॉर्थ-ईस्ट में पहले आतंकवाद होता था, यह भी हमने पढ़ा। गुजरात में बाबरी मस्जिद के हादसे के बाद कोई हमला नहीं हुआ, राइट्स नहीं हुए। आतंकवादियों की ओर से गुजरात में कोई हमला नहीं हुआ। जब से इनकी सरकार गुजरात में आई और जब से वर्तमान मुख्य मंत्री बने, तब से जैसे गुजरात के लोग, जहां-जहां गुजराती रहते हैं, निशाने पर आ गए हों, ऐसा प्रतीत होता है, ऐसी ही फीलिंग्स हमें महसूस हो रही हैं।

महोदय, २०० आदमी जो मरे, उनमें से ५१ गुजराती थे। ये बम ब्लास्ट्स वैस्टर्न रीजन के अंदर हुए, वैस्टर्न लाइन पर हुए, जहां सबसे ज्यादा गुजराती रहते हैं। गुजरात रिवेंज ग्रुप नाम के एक ग्रुप का नाम भी उसके अंदर था। जो लोग हमसे बोल रहे हैं कि आतंकवाद से लड़ाई करेंगे, आर-पार की लड़ाई करेंगे, मेरी उनसे विनती है कि सबसे पहले वे आतंकवाद को बढ़ावा देने की जो गतवधियां कर रहे हैं, उन्हें बन्द करें। यह शेम की बात है कि गुजरात का मुख्य मंत्री मुम्बई में भाषण करता है और कहता है कि मैं एक-एक आतंकवादी को चुन-चुन कर मारूंगा। …( व्यवधान) 

श्री हरिन पाठक : क्या आप उन्हें चिकन-बिरयानी देंगे ?

MR. DEPUTY-SPEAKER : Do not show the paper.

श्री मधुसूदन मिस्त्री : इस देश में एक जुडीशियल सिस्टम है। यदि चीफ मनिस्टर को ही यह काम करना है, तो वे चीफ मनिस्ट्री छोड़कर उन्हें सजा देने का काम क्यों नहीं करते। २५-२५ आदमी उनके आसपास खड़े रहते हैं और फिर कहते हैं कि एक-एक आदमी को चुन-चुन कर मारूंगा। सबसे ज्यादा मुम्बई के लोगों को उकसाने का काम वह करते हैं। उनका ऐसा करना, ठीक नहीं है। आतंकवाद को समाप्त करने के लिए सबको अपना सपोर्ट देना चाहिए। आपके आदमी हिन्दू और मुसलमान को डिवाइड करने में सबसे ज्यादा लगे हुए हैं। इन्होंने पूरे देश में ऐलान किया, राजधानी में ऐलान किया, डिस्टि्रक्ट्स में ऐलान किया और आतंकवाद को समाप्त करने के लिए जैसे भाषण इन लोगों ने किए, वे सब लघुमति लोगों के खिलाफ जाते हैं। इनके सामने वर्ष २००७ का चुनाव है। ये सब भाषण उसी को देखकर अभी से कर रहे हैं ताकि वर्ष २००७ में गुजरात में इनकी सरकार फिर बन सके, ये सत्ता में आ सकें और हमसे कहा जाता है कि हम वोट की राजनीति कर रहे हैं।

महोदय, मैं पूछना चाहता हूं कि पोटा की मांग आप क्यों कर रहे हैं? मैं बताना चाहता हूं कि पोटा गुजरात में लागू है। पोटा के अंदर वहां अंधे आदमियों को बन्द किया गया है। पोटा के अंदर १० साल के बच्चे को बन्द किया गया है। आप जानकारी ले लीजिए। मेरे पास फिगर्स हैं। ऐसा क्यों कर रहे हैं? …( व्यवधान)

 MR. DEPUTY-SPEAKER : Nothing would go on record.

(Interruptions) …* * Not Recorded.

उपाध्यक्ष महोदय : कृपया चेयर को एड्रेस कीजिए।

श्री मधुसूदन मिस्त्री : महोदय, दूसरों को दोष देने वाले, पोटा की डिमांड करने वाले, खुद ही वोट की राजनीति कर रहे हैं और इसीलिए वे पोटा की डिमांड कर रहे हैं[rpm29] ।पोटा के अंदर गुजरात में सबसे ज्यादा लघुमति समुदाय के आदमी हैं। उनको भी छोड़ दिया गया। मैं पूछना चाहता हूं कि यह कौन सा न्याय है? एक आदमी ने दूसरे का नाम लिया, दूसरे ने तीसरे का नाम लिया, तीसरे ने चौथे का नाम लिया, चौथे ने पांचवें का नाम लिया और पांचवें से छठे व्यक्ति का नाम आया। इस तरह से आदमी को ह्रस किया जा रहा है। इन्हें दहशत फैलाने के लिए पोटा चाहिए, एक समुदाय के लिए पोटा चाहिए। हमारे यहां गुजरात के अंदर अहमदाबाद से दो लड़के पकड़े गए। इनकी बातचीत से सिर्फ एक ही बात सामने आई कि गुजरात के अंदर, वेस्टर्न रीजन के अंदर आतंकवाद के जन्मदाता आप लोग हैं। श्री आडवाणी उप-प्रधानमंत्री रह चुके हैं और गुजरात के मुख्य मंत्री को पैट्रोनेज दे कर आज तक बचा रहे हैं तथा वे अपनी मनमानी कर रहे हैं। इधर आप कह रहे हैं कि आतंकवाद को मिटाना चाहिए, आतंकवाद से लड़ना चाहिए। आपमें आतंकवाद से लड़ने की शक्ति नहीं है। आप आतंकवाद नहीं हटा सकते हैं। मैं कहना चाहूंगा, हमारे नेता श्री दासमुंशी जी ने भी सदन में कहा कि संसद के हमलों को हमने पार्टी के रूप में नहीं देखा था। उस समय हम इनके साथ थे। वाजपेयी जी ने भी हमारी नीतियों को सराहा था, लेकिन आज इसके विपरीत हो रहा है। गुजरात की घटनाएं शर्मनाक हैं। मैं नहीं कह रहा हूं, आपके पिछले विदेश मंत्री जी ने अपनी किताब के पेज नम्बर १०७-०८ पर कही हैं। आपने तीन-तीन आतंकवादियों को छोड़ दिया। आपसे ९०० करोड़ रूपये की मांग की गई। मैं सरकार से निवेदन करना चाहता हूं कि इसकी पूरी-पूरी इंक्वायरी करवाई जाए कि यह पैसा आतंकवादियों को सरकार ने कहां से दिया, दिया या नहीं दिया तथा किन हालातों में इन्होंने आतंकवादियों को रिहा किया। उस वक्त कैबिनेट के अंदर इस बात पर मतभेद थे। लालू जी ने कोई गलत बात नहीं कही है। यह सब किताब में लिखा हुआ है। उस समय खुशियां मनाई गईं, शैम्पेन की बोतल खोली गई। यह सब किताब में लिखा है, उन्होंने अपनी तरफ से नहीं कहा है। मैं कहना चाहूंगा कि जो लोग आतंकवाद को जन्म देने में अपना रोल अदा कर रहे हैं, उनको इस देश की जनता कभी माफ नहीं करेगी। यदि आप वोट की राजनीति कम करें तो अच्छा रहेगा। यदि आप इस देश को बचाना चाहते हैं, इस देश के सभी समुदायों को इकट्ठा रखना चाहते हैं तो आप अपनी इन नीतियों को बंद कीजिए। पंजाब में जो हुआ, उस समय सभी पंजाबी आतंकवादी हैं, ऐसा हमने नहीं सोचा था। लेकिन इनकी यह सोच है कि हर मुसलमान आतंकवादी है या आतंकवादियों से जुड़ा हुआ है।

        मैं फिर से निवेदन करना चाहूंगा कि इस किताब में जो-जो लिखा गया है, उन सबकी जांच हो। जहां-जहां ऐसी घटनाएं हुई हैं, उन सबकी पूरी-पूरी जांच होनी चाहिए। बीजेपी के दो चेहरों के बारे में मुझे कुछ नहीं कहना है। आडवाणी जी ने आज तक कभी भी अपने क्षेत्र में जाकर पीड़ितों को आश्वासन देने का काम नहीं किया। यह सब इनके निर्वाचन क्षेत्र में हुआ। दो सौ मीटर दूर अक्षरधाम के ऊपर हमला हुअ्ाा[c30] ।

उस वक्त से हम पूछना चाहते हैं कि आपने क्या स्टैप्स लिए थे, क्यों नहीं यह रोका गया था, आई.बी. की फेल्योर क्या आपकी फेल्योर नहीं थी? आप किस मुंह से आज इसको क्रिटीसाइज़ कर रहे हैं। आपको हकीकत के अन्दर इस सरकार के साथ शामिल होकर यह कहना था कि इस सरकार के साथ खड़े हैं, सरकार जहां-जहां हमारा साथ मांगेगी, हम वहां देंगे। लेकिन इसके बजाय, वे हमेशा पार्टीज़न की राजनीति खेलते रहे हैं और हमेशा सिर्फ एक ही समुदाय को तुष्ट करने के लिए काम करते रहे हैं। इसकी वजह से आज ऐसी परिस्थिति पैदा हुई है। अगर इनका रवैया ये नहीं बदलेंगे तो मैं मानता हूं कि परिस्थिति इससे भी ज्यादा खराब हो सकती है और इसका जिम्मेदार दूसरा कोई नहीं, पर सामने बैठे लोग, भारतीय जनता पार्टी के लोग और उनकी नेतागिरी होगी और दूसरा कोई नहीं होगा।

 

श्री हरिन पाठक : उपाध्यक्ष महोदय, इस वर्ष ११ जुलाई को मुम्बई में सबर्बन ट्रेन में, विशेषकर वैस्टर्न जोन पर…( व्यवधान) 

उपाध्यक्ष महोदय : सब को एक साथ ही तो टाइम नहीं दिया जा सकता, इसलिए मैं अब आपको कहूं कि आपका नाम लिखा हुआ है, यह अच्छा नहीं लगता।

पाठक जी, कंटीन्यू करें।

श्री हरिन पाठक : जो सात फस्र्ट क्लास की बोगियों में सीरियल ब्लास्ट हुए, वह एक अमानवीय घटना बनी। आतंकवाद का एक घिनौना रूप हमको देखने को मिला, लोगों के चिथड़े उड़ गये थे। तुरन्त आदरणीय सोनिया जी, लालू जी, शिवराज पाटिल जी, आडवाणी जी और बाकी सभी पार्टियों के नेता वहां लोगों का हौसला बढ़ाने के लिए पहुंचे। लोगों ने हर समुदाय मजहब के दायरे से ऊपर उठकर उनको बचाने की कोशिश की। मैं अपनी ओर से, अपनी पार्टी की ओर से सबसे पहले तो उन सभी मुम्बई के बम धड़ाकों में मारे गये निर्दोष नागरियों के प्रति श्रद्धांजलि समर्पित करता हूं। उन सभी लोगों को, जिन्होंने बाकी लोगों को बचाया है, उनका अभिवादन करता हूं।

मुझे मुंशी जी से यही कहना है कि जब हमारे प्रतिपक्ष के नेता आडवाणी जी ने आज स्थगन प्रस्ताव रखा तो उन्होंने स्थगन प्रस्ताव का विरोध किया, कहा कि ट्रेनें चलती हैं, बसें चलती हैं, देश काम कर रहा है तो आप काम क्यों रोकते हैं। मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि संसदीय कार्य मंत्री संसद के कार्यप्रणाली के नियमों को नहीं जानते। आज काम हो रहा है, हम सब मिलकर २०-२५ साल पुरानी देश के सामने जो आतंकवाद की चुनौती है, सब उसका हल निकालने का प्रयत्न कर रहे हैं। उसी के आधार पर तीन नियम हैं, या तो नियम ५६ के अन्तर्गत हम एडजर्नमेंट मोशन लायें, नियम १९३ के अन्तर्गत चर्चा हो, नियम १८४ में चर्चा हो, यह संसदीय प्रणाली का हमारे देश का स्वीकृत संसदीय ढांचा है। मैं नहीं समझता कि उसमें कोई गलत बात की गई है।

दूसरी बात, मैं आपके सामने प्रस्तुत करना चाहूंगा, हम सब ने देखा है, लालू जी की अपनी एक अलग शैली है, मगर मैं समझता हूं कि वह शैली ठीक नहीं है। सोनिया जी, मुझे आपके प्रति बड़ा आदर है। पूरा देश देखता है, हजारों लोग मारे गये हैं, क्योंकि चर्चा सिर्फ मुम्बई के साथ देश में पिछले कई सालों में आतंकवाद में मारे गये लोगों के बारे में चर्चा हो रही है। अभी-अभी कुछ मेरे पूर्व वक्ता ने कहा…( व्यवधान) 

भारी उद्योग और लोक उद्यम मंत्रालय के भारी उद्योग विभाग में राज्य मंत्री (श्रीमती कान्ति सिंह) : उन्होंने गलत क्या कहा?…( व्यवधान) 

श्री हरिन पाठक : मैं बताता हूं।…( व्यवधान) 

श्रीमती कान्ति सिंह : उनकी शैली में उन्होंने क्या गलत कहा? ªÉä ¤ÉiÉÉ ®cä cé ªÉÉ +ÉÉ®Éä{É ãÉMÉÉ ®cä cé*[i31]  श्री हरिन पाठक : मैं बता रहा हूं कि उनको यह नहीं कहना चाहिए था। उनके परिवारजन यह चर्चा देख रहे हैं।हमारे चेहरों पर हंसी और मुस्कान नहीं होनी चाहिए। गम, दुख, दर्द, और एक संकल्प की भावना होनी चाहिए कि आने वाले समय में किसी का बेटा फिर से आतंकवाद के चक्कर में आकर चिथड़े न हो जाए। …( व्यवधान)   यह शैली दुखदायी होती है।आडवाणी जी ने अपने पूरे वक्तव्य में न कभी हिंदू का नाम लिया, न कभी मुसलमान का नाम लिया। …( व्यवधान)   अभी भी एक घंटा बाकी है। हमारी संवेदना उन परिवारों के प्रति पहुंचनी चाहिए और कटिबद्धता से हम एक रिजाल्व करें, जब यह चर्चा समाप्त हो, कि हम एकजुट होकर इसके खिलाफ लड़ेंगे। आजादी के बाद हमारे सामने अनेकों चुनौतियां आयीं।देश अंग्रेजों के डेढ़ सौ सालों की गुलामी के बाद आजाद हुआ था। भूख, गरीबी, बेरोजगारी, अराजकता और एक नयी समस्या पच्चीस सालों में हमारे सामने आयी, वह है आतंकवाद की समस्या। मैं राजनीतिक चर्चा नहीं करना चाहता, यह मेरा स्वभाव नहीं है।पिछले १७-१८ सालों से जो पुराने साथी हैं, वे इसे जानते हैं। जब आप कुछ आरोप लगाते हैं, तो मैं बड़ी विनम्रता के साथ उसका जवाब देता हूं। पच्चीस सालों में पैदा हुयी यह आतंकवाद की समस्या, जिसके बारे में मैं देख रहा था कि एक प्रश्न था, जिसका जवाब आदरणीय गृहमंत्री जी को देना था, वह प्रश्न २५ नंबर पर था, जिसका नंबर नहीं आया, जो इसी से संबंधित है। वह प्रश्न था कि साल २००६ में पिछले सात महीनों में देश में कितनी घटनाएं आतंकवाद की घटीं, कितने लोग मारे गए, कितने लोग इससे पीड़ाग्रस्त हुए? उनका जवाब था कि ३२८ लोग पिछले महीनों में मारे गए। यह आप का आज का जवाब है। इसमें १२४८ लोग घायल हुए। मैं फिर आंकड़ों में नहीं जाना चाहता। आज आपने जो जवाब दिया है, इस संबंध में मैं यही कहना चाहता हूं कि इतनी भयानक समस्या का निराकरण कैसे करेंगे, सब मिलकर इसे हल करेंगे और ऐसा करना पड़ेगा।हम अपने सेलेक्टिव वर्ष लेंगे, हम १९९८ से २००४ लेंगे, कोई २००४ से २००६ लेगा, कोई १९८७ से १९९८ तक लेगा, इससे समस्या का हल नहीं होगा।यह एक ऐसी समस्या है, जिसका समाधान हम सब जो यहां बैठे हैं, जिन पर जिम्मेदारी है, अच्छा भाषण करेंगे, अच्छी बात करेंगे, लोगों के सामने अपनी बात रखेंगे, वह अलग बात है, मगर हमारी जिम्मेदारी है, हम सब मिलकर आतंकवाद के सामने कभी न झुकें और समस्या का समाधान करें। फिर आप कहेंगे, कि आप एडजर्नमेंट मोशन क्यों लाए?महोदय, मेरे सभी पुराने साथी यहां बैठे हुए हैं, नए साथी भी जानते हैं, कोई पुराना या नया नहीं होता है, सभी माननीय सदस्य हैं। संसद ने प्रजातंत्र में नियम बनाया है, सभी की जिम्मेदारी है, एक जिम्मेदारी है, शासन की, एक जिम्मेवारी प्रतिपक्ष की है। यहां तो नाम दिया जाता है - लीडर आफ द हाउस, सदन का नेता और लीडर आफ द अपोजीशन, प्रतिपक्ष का नेता। प्रतिपक्ष के नेता को यह जिम्मेदारी सौंपी गयी है कि शासन में बैठे हुए लोग ठीक तरह से शासन करें, देश की समस्याओं का निराकरण करें, अगर कहीं चूक हो, तो वह बतायें और शासन में बैठे हुए लोगों का यह कर्तव्य है कि प्रतिपक्ष के जरिए जो भी सुझाव आते हैं और जो भी बातें रखी जाती हैं, उन सारी बातों में से जो देश के हित में उचित लगें, उन पर अमल करें। देश को जोड़ें, तोड़ने की कोशिश न करें।आप यह कहेंगे कि एडजर्नमेंट मोशन क्यों लाया गया? मैं अपनी बात रखने से पहले तीन बातें आपके सामने रखना चाहता हूं और सदन से करबद्ध प्रार्थना करना चाहता हूं, क्योंकि वह दुख, जो मिस्त्री जी बोल रहे थे, पता नहीं वे यहां मौजूद हैं या चले गए, वह दुख हम सबने देखा है।जैसी इस देश में आतंकवाद की समस्या है, वैसी ही एक समस्या है - सांप्रदायिक समस्या, वैसी ही एक समस्या है - जातीय हिंसा की, वैसी ही समस्या है - भूख, गरीबी और बेरोजगारी की। इन सब समस्याओं के निराकरण के लिए हम लड़ेंगे, उसके लिए नीतियां बनाएंगे, नीतियों का सही ढंग से अमलीकरण हो, उसका काम इस संसद को दिया गया है[c32] ।मैं आपके माध्यम से सब माननीय सदस्यों से पूछना चाहता हूं, विशेषकर शासन के अपने दोस्तों से कि Are we serious about terrorism which is spreading all over the country?   Are we serious about those innocent people who have lost their lives during the last 20 years?  This figure goes to around 70,000 people. सत्तर हजार लोग मारे गए। उनके परिवारजनों के प्रति हमारे मन में कोई संवेदना है। पिछले बीस सालों में इस देश में जो नई चुनौती आई है, क्या सचमुच हम उसका सामना करने के लिए प्रतिबद्ध हैं?

शिवराज पाटील जी बीच में खड़े हुए थे, मैं उनका अभिवादन करता हूं। उन्होंने ठीक कहा कि हम ऐसी बातें करें ताकि कुछ सुझाव मिलें जिससे हम एक-दूसरे के साथ मिलकर काम करें। आतंकवाद न किसी जाति से जुड़ा है, न किसी सम्प्रदाय से जुड़ा है, वह देश की एकता, अखंडता का दुश्मन है। आप सत्ता में बैठे हैं तो बार-बार हमें क्यों बताते हैं कि आपने यहां से क्या किया। वह उस वक्त हमारा कर्तव्य था जो आपने प्रतिपक्ष के नाते यहां से निभाया और आज आप सामने बैठे हैं। प्रजातंत्र का तकाजा है, आप मंत्री हैं, हम प्रतिपक्ष में हैं, प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी होती है कि वह सरकार को सही रास्ता दिखाए। कबीर ने कहा है -

निन्दक नियरे राखिए, आंगन कुटि छवाय बिन साबुन पानी बिना निर्मल करे सुभाय।

जो क्रटसिज़्म करता है, हमारे दोष बताता है, उसे आंगन में कुटीर बनाकर रखना चाहिए। अगर हम आपको नहीं बताएंगे, हम वाह-वाही करेंगे कि ठीक है, आतंकवाद चलता रहता है, १९८७ से चल रहा है, अक्षरधाम में हुआ, जम्मू कश्मीर में हुआ, मुम्बई में हुआ, आपके शासन में हुआ, यह लोकतंत्र चलाने का कोई तरीका नहीं हुआ। हम सरकार से चले गए, हमें प्रतिपक्ष का दायित्व मिला है और आपको शासन करने का दायित्व मिला है। शासन की जिम्मेदारी है कि ऐसा शासन करे जिससे देश की मूलभूत समस्याएं, विशेषकर आज जिसका उल्लेख हो रहा है, उस आतंकवाद की समस्या का निराकरण हम कैसे करें।

उपाध्यक्ष महोदय, मैं एक-दो बातों पर आपका विशेष ध्यान आकर्षित करके सरकार से कहना चाहूंगा, मैं फिर उन्हीं आंकड़ों में नहीं जाना चाहता, मैं चार मांगें रखना चाहता हूं, चार सुझाव देना चाहता हूं। वे सारे जवाब मैं दे सकता हूं जो मधुसूदन भाई ने कहे हैं, लेकिन मैं नहीं देना चाहता। गुजरात में गुजरात के मुख्य मंत्री सक्षम हैं। अगर उन्होंने मुम्बई में यह कहा कि मैं आतंकवादियों को चुन-चुनकर मारूंगा, तो क्या वह गलत कहा। आतंकवादियों को चुन-चुनकर नहीं मारना चाहिए तो क्या आपकी सरकार की तरह उन्हें जम्मू कश्मीर में बिरयानी खिलानी चाहिए। आतंकवादियों को कानून के अंतर्गत मारना चाहिए। आतंकवाद का मतलब हिन्दु-मुसलमान नहीं है, आतंकवाद का मतलब है जो इस देश की एकता, अखंडता और स्वाधीनता को तोड़ना चाहते हैं, उनके खिलाफ कड़े से कड़े कदम उठाने चाहिए। चाहे पोटा हो, चाहे मीसा हो, चाहे और कोई कानून हो, उस पर विवाद हो सकता है, उसमें खामियां भी हो सकती हैं। आडवाणी जी ने सुबह खामियां बताईं - ३०२, ३०७, ३२३, बलात्कार, सब आईपीसी के कानून हैं। कई लोग छूट जाते हैं, लेकिन हम कानून खत्म नहीं करते। डर लगना चाहिए। हमारे किसी साथी ने ठीक कहा था कि आज डर चला गया है। हम पोटा की मांग क्यों कर रहे हैं। मिसयूज़ हुआ है, मिसयूज़ मेरे खिलाफ हुआ था, आप सब उसके साक्षी हैं। बीस साल बाद गुजरात की अदालत ने मुझे बाइज्जत बरी किया। मैं सात साल तक दिल्ली एयरपोर्ट पर निर्दोष होते हुए भी लोगों के सामने नीचा मुंह करके जाता था। मुझपर ऐसा राजनीतिक इल्ज़ाम लगाया गया था जो मैं कभी सपने में भी नहीं सोच सकता था। दुरुपयोग होता है, आज से २०-२५ साल पहले मुझपर भी हुआ। इसका मतलब यह नहीं कि हम धारा ३०२ निकाल दें, धारा ३०७ निकाल दें। आदालतें हैं, उसे और मजबूती से बनाएं।

मैं लम्बा भाषण नहीं करना चाहूंगा। मेरे चार सुझाव हैं - एक, आज आपने जवाब दिया है जो सदन में नहीं आया, लेकिन २५वें प्रश्न का उत्तर है। पिछले सात महीनों में १२ राज्यों में आतंकवादी घटनाएं घटी हैं[R33] ।  मैं नहीं मानता कि पिछले २० सालों में एक भी राज्य ऐसा हो, जहां आतंकवादी घटना न घटी हो लेकिन क्या किया जाये ?…( व्यवधान)

MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Aaron Rashid, are you in your seat?  Kindly go back to your seat.

… (Interruptions)

श्री हरिन पाठक :     मैं आपको कुछ नहीं बोल रहा हूं। क्या आपको अच्छी बातें ठीक नहीं लगतीं ?  क्या मैं राजनीतिक बातें कहूं ?  मैं आपको कुछ सुझाव दे रहा हूं। पिछले २० सालों में एक भी राज्य ऐसा नहीं है जिस राज्य में आतंकवादी घटना न घटी हो। हम यह कहें कि It is a State subject.  If it is a State subject, we will just share our intelligence, provide them aid, give some money to modernise the police force of the State. यहां तक सीमित नहीं रहेगा। अब यह हमारे हाथ से छूट जाने वाली बात हो गयी है। दिन-ब-दिन आतंकवादी पंजा पूरे देश को पकड़ रहा है, खा रहा है। इसके लिए मैं चाहता हूं कि पोटा कानून को दोबारा लागू किया जाये या पोटा के साथ-साथ एक फेडरल लॉ बनना चाहिए। आज अमेरिका आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई लड़कर सफलता प्राप्त करता है, तो वहां फेडरल लॉ होता है। यहां पर महाराष्ट्र के लिए अलग नियम है और गुजरात के लिए अलग नियम है। गुजरात एक सरहदी राज्य है। वहां ८०० किलोमीटर तक इंटरनैशनल बॉर्डर है और १६०० किलोमीटर तक समुद्री बॉर्डर है। अगर द्वारिका में रात को टीलों पर चढ़कर देखें, तो वहां से कराची के दीये दिखाई देते हैं। उस बॉर्डर से स्मगलिंग होती है। कभी-कभी आरडीएक्स आती है। जैसे आपने महाराष्ट्र में मकोका कानून को इजाजत दी है, कर्नाटक, आंध्रा प्रदेश, दिल्ली को इजाजत दी है, उसी तरह गुजरात सरकार ने वर्ष २००३ से Gujarat Control of Organised Crime Bill  आपके पास भेजा हुआ है। आप उस बिल को पास क्यों नहीं करते ?  क्या आपने दो-चार आदमियों को जेल में डालने के लिए कानून बनाया है। अगर आरडीएक्स आयेगी, तो क्या वह दूसरे प्रांतों में नहीं जायेगी ?  हथियार आयेंगे, तो क्या सिर्फ गुजरात में रहेंगे। इस डर से कि कहीं इसका दुरुपयोग न हो, हम देश की एकता के साथ, देश की सलामती के साथ, देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। गुजरात का कानून पास न करके जो मन में आता है, वही कर रहे हैं। मैं समझता हूं कि यह देश के लिए खतरे की घंटी है।

उपाध्यक्ष महोदय:  हरिन पाठक जी, आप कन्कलूड कीजिए।

श्री हरिन पाठक : मैं अभी कन्कलूड करता हूं। यह कानून यदि आपने जल्दी पास न किया, आदरणीय सोनिया जी, जैसा आपने कहा, उससे भी खतरनाक कदम, more stringent provisions are there in MCOCA.  More stringent provisions are there in Karnataka under the Organised Crime Act of that State.  आपने जो सुझाव दिये, हमने उसे भेज दिया है। आप उसे पास करिये लेकिन आप उसे पास नहीं करते। जैसा मैंने कहा कि मेरी सिर्फ चार मांगें हैं। …( व्यवधान) 

SHRI SURAVARAM SUDHAKAR REDDY (NALGONDA): It was in 2003, … (Interruptions)

SHRI HARIN PATHAK : Yes and there was a clarification which was sought by the NDA Government and sent it to the State Government.  The State Government diluted those sections and sent it back to the Central Government again.  मैं चाहता हूं कि हमें उसे मजबूती से रखना चाहिए। दूसरा गुजरात के कानून को आप जल्दी से पारित करें और अपनी इंटेलीजैंस को स्ट्रेन्थन करें। Stop this vote bank politics. इसको आप बंद करिये।

16.54 hrs.                                          (Mr. Speaker in the Chair)              वोट बैंक पोलटिक्स होती है, तो हमारे मित्र तुरंत बोलने के लिए खड़े हो जाते हैं। वोट बैंक की राजनीति ने देश को पिछले ४०-५० सालों में बहुत नुकसान पहुंचाया है। यह सभी के लिए है। हम सब मिलकर रिजॉल्व करें। वर्ष १९९७ में जब हम ५०वां साल बना रहे थे, उस वक्त मैं भाषण देने के लिए खड़ा हुआ था, तब स्पीकर साहब भी थे। उस वक्त हम सब ने तय किया था कि हम देश में ऐसा शासन बनायेंगे, कुछ ऐसे मुद्दे लायेंगे, हम सब दोबारा रिजॉल्व करें कि पार्टी से उठकर गरीबी, बेरोजगारी, अराजकता, देश की सलामती, देश की सुरक्षा के बारे में दो राय नहीं हो सकती। चाहे किसी भी कौम का हो, किसी भी धर्म का हो, किसी भी पंथ का हो, अगर वह देश का दुश्मन है, देश के दुश्मन को शरण देता है, तो उसके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। यह संकल्प आज हमें करना है। आप मतों से आज के एडजर्नमैंट मोशन को हरा सकते हैं लेकिन मतों से एडजर्नमैंट मोशन को हराकर आतंकवाद की लड़ाई को जीत नहीं पायेंगे। वोट बैंक की राजनीति से आतंकवाद की लड़ाई नहीं जीती जा सकती है। आइए, हम सब मिलकर, पिछले २०-२२ सालों से देश के सामने जो इतनी बड़ी चुनौती बनी हुई है, उसे स्वीकार करके आतंकवाद से लड़ें। मुझे यही कहना है।

 

SHRI C.K. CHANDRAPPAN (TRICHUR): Sir, we are discussing one of the most unfortunate things that has taken place in our country in Mumbai, that is the terrorist attack in which hundreds of people perished.  We have been the victims of terrorist attacks for some time, but the people of this country have shown how they should be faced.  Even in Mumbai, in the midst of such shocking terrorist attack, the people – they are ordinary people living all around the railway line – were united in providing all possible support to the victims.  That is one remarkable experience that the country has got.  Above religion, above politics, above caste, above communal and all other feelings, they came as people and they stood like a rock against terrorism, and they helped the people. 

            I think this has happened in Delhi also. Just on the eve of Diwali, when the terrorist attack took place in market place, it did not deter the people. They came forward and normalcy was restored.  So, that is to say the people have shown a way that if people are united, they can face terrorism. Over-emphasizing that certain law would have saved the country, I do not think that is a very serious argument. I do not want to repeat it.  We had POTA; everything took place including the attack on Parliament and Akshardham Temple.  Now, what we have to think about?  Our view is that we have to unite people.  This Motion is not helping; it is again to show that we stand divided.  Probably the terrorists sitting far away must be seeing this debate and must be happy that we are divided. That kind of situation should not come. I think that we have been facing it. Actually India was born at the time of terrorist attacks.  It can be said like that.  It is because just after our Independence, when the Independence was in its infancy, we lost our Father of the Nation in a terrorist attack.  Let us not forget that it is not that we lost  Indira Gandhi and Rajiv Gandhi; we lost Mahatma Gandhi in a terrorist attack.  That was a terrorist attack unleashed by religious fanaticism.  So, this religious fanaticism and religious intolerance created a situation from the very beginning.  Then came probably the Indo-Pak issues and terrorism was sponsored from outside. 

MR. SPEAKER: Please conclude.

SHRI C.K. CHANDRAPPAN (TRICHUR): Kindly give me some more time.  I just began. 

MR. SPEAKER: Sorry.  You can speak for one minute more.

SHRI C.K. CHANDRAPPAN : Sir, actually we are called also at the fag end. 

MR. SPEAKER: I know that; I have also felt that position, but you have got three minutes and I am allowing you five minutes to speak.  Other eight Members are there to speak.

SHRI C.K. CHANDRAPPAN : Sir, I am not arguing with you.

MR. SPEAKER: Do not get upset. Please speak.[r34]  17.00 hrs. SHRI C.K. CHANDRAPPAN : Sir, now there is an imperialist conspiracy against India. Probably these days, on the one side there is NDA and on the other side there is UPA.  They think that that imperialism has vanished from the world.  Now, I am told that in the American Press, Mumbai Terrorism has been reported in a peculiar fashion.  In the newspapers there, they have not used the periodicals, the political analysis, they have not used the word ‘terrorism’ but they have used the words “militants’ attack”.  Militants’ attacks always have a different connotation for a certain cause.  To achieve certain things, the militants in desperation might attack.  But it is not so.  Here it was an attack by terrorists but the Americans did not say so.  That also has to be taken note of, why they are not saying that. 

            I feel that there is an element of intelligence failure. The Government should seriously look into it because in the western coast of our country, from Gujarat to Kerala, news were consistently being reported by the Press and by various agencies that arms are being smuggled, and explosives are being smuggled.  I would like to know whether the Government took note of it. 

            Now, in the context of what happened in Mumbai, I think, there was a failure of intelligence.  All the loopholes should be plugged.  Secondly, there should be a serious effort made by the Government to unite the people, in the sense of uniting all the political parties against terrorism. The terrorists’ attack took place in Mumbai.  The Government did not, so far, convene an All-Party meeting.  It is not even late today.  When the Minister replies to this discussion, he can assure that there can be an All-Party meeting to discuss how the country should move unitedly in fighting terrorism.  We may have differences on many issues but in fighting terrorism and in uniting the forces together, the Government has a special role to play.  I think, the Government has to play that role. 

            Sir, the meeting of the National Integration Council can be convened and this problem can be discussed there.  I hope, the Government will look at this point sympathetically.

            Now, Sir, we do not consider that these terrorists have any religion, any caste or any communal feeling.  It is a kind of mercenary attack  taking place against the country.  It may be incited by various vested interests against our country. So, the Government should take such steps by which they can unite the people.

            Now, regarding this Adjournment Motion, while opposing that, I must say that this is not a situation where the country, where the Parliament should appear before the whole world stand divided.  The logic of an Adjournment Motion is a Censure Motion on the Government and it also visualises that it ends in voting.  That is a sure way of showing that the Parliament is divided.  So, it is very unfortunate to move such a Motion and divide the House. 

            Sir, with these words, I oppose the Adjournment Motion and I would request the Government to take some more positive steps.                                       

 

PROF. M. RAMADASS (PONDICHERRY): Respected Speaker, Sir, I rise to oppose the Adjournment Motion moved by the hon. Leader of the Opposition,  Shri Advani for the simple reason that it is unwarranted and unnecessary at this juncture when the whole nation is concerned about the heinous crime committed by the perpetrators of terrorism[lh35] .

            Sir, the Parliament has done  the right thing yesterday by condemning this activity and the Speaker condemning terrorism in Mumbai.  As Mr. Chandrappan has said, this Adjournment Motion will only tell the world that this country represented by the Parliament is divided on this issue. But this is the time when we should be united; it is the need of the hour.  So, I think that we should all  condemn this activity and we should not press for a voting on this Motion. I think, my BJP friends will understand the implications of pressing this Motion because if this Motion is defeated, at least, 200 Members of Parliament would take a different view on this.  So, it should not be pressed.

            When these heinous crimes occurred, even during that regime, the Congress party was in the Opposition and Madam Sonia Gandhi was the Leader of the Opposition.  She never pressed for an Adjournment Motion.  She had only asked for a Short-Duration Discussion just to call the attention of the House as well as the nation about the terrorist activities in the country. That would have been the more magnanimous  act on the part of the parliamentarians rather than asking for an Adjournment Motion, and that magnanimity only has brought the Congress party to power and the BJP to go out of power.  Therefore, they should, at least, learn this lesson now by not insisting on voting on this Motion, which is going to be surely defeated.

The second reason as to why we should reject this Motion is the argument given by the Leader of the Opposition that because POTA was scrapped, these incidents are occurring.  It is not at all true and there is no relation between the POTA and the occurrence of terrorism.  There was an attack on Parliament, there was an attack on the Legislative Assembly of Jammu and Kashmir and there was an attack in Gujarat. All these things have happened only when POTA was prevalent.  But because POTA was very highly and pervasively misused in the country, we had to repeal it, and so, the Parliament had repealed it. Therefore, we should not try to blame the Government for this or that activity.  We should really probe  into the deeper causes of terrorism. 

Sir, in our view, it is not an active political terrorism but it is a combination of social factors, economic factors and political factors, which are at work.  When we look into the history of this country, terrorism was confined at one point of time in Jammu and Kashmir only, but today it is spreading its tentacles to different parts of the country.  What is the reason for it?  If you can clearly understand or diagnose this problem, you can find out that this evil has spread to different parts of the country because we have tried to show communal hatred; we have tried to show intolerance religiously.  That is why it has happened.  Therefore, we should cultivate a tempo of communal harmony.

It is a good thing that the UPA Government has reconstituted the National Integration Council.  It has conducted its first meeting.  Perhaps as Mr. Chandrappan has said, this Council can again be convened to look into the matter of terrorism and analyse it.  I also feel that the Government should take more stringent measures in terms of strengthening the intelligence agencies, and the intelligent agencies should not be starved of funds or resources because we find that the terrorists are more capable, the terrorists are more intelligent and the terrorists have more of coordinated activities. If this Government, if this nation with all its forces, with all its powers at the command cannot curb this menace, it tells a different story about our capabilities. Therefore, the intelligence agencies must be strengthened and we should be able to do something to curb this menace  without any further delay.

We are going to launch the 11th Five Year Plan.   In my view, planning for the country’s development in the midst of terrorism is like writing on the sea sand, which is being constantly washed away by sea waters. On the one hand we are trying to achieve  eight per cent growth rate and on the other hand, we find that all the growth that has been created, the wealth that has been created, the human power that has been created are taken away by the increasing terrorist activities.  Therefore, the Government should show as much seriousness to curbing terrorism as much as it shows to economic development.

I would feel, Sir, that there was a time when there was a Minister for Internal Security. The Minister for Internal Security was concentrating himself on the security issues.  So, I think that it is more appropriate at this time that we revive the post of Minister for Internal Security and we try to curb this menace. The whole nation must stand together and our BJP friends should withdraw their Adjournment Motion.  It is my appeal to them to withdraw this Motion and then close the discussion with that.

With these words, I conclude.

MR. SPEAKER: Mr. Yerrannaidu, you take only five minutes.

 

SHRI KINJARAPU YERRANNAIDU (SRIKAKULAM): Mr. Speaker, Sir, at the outset, on behalf of my Telugu Desam Party, I strongly condemn the serial bomb blasts that took place in Mumbai.

            This is not the first time this has happened. In the serial blasts, 200 innocent people were killed and 700 people were injured. Since 1984, in the last 25 years, we have lost nearly 70,000 people in our country. We have lost two Prime Ministers of this country. We have lost so many people—civilians, police, armed forces personnel and others. Normally, people elect a popular Government. If anything is wrong, people normally blame the elected Government. Since 1984 till today, the successive Governments had failed to control the menace of terrorism. This is a fact.

            Where there is a will there is a way. Prevention is better than cure. I will give one example. The Leader of the Congress Party, Shri Pranab Mukherjee knows that in Andhra Pradesh in the years 1978 to 1983, every six months, there was a communal riot. After 1983, the then Chief Minister, N.T. Rama Rao came to power. Till the end of Telugu Desam Party’s rule—we ruled 17 years—there was not a single incident of communal clash. This means, the Government has to take stringent steps irrespective of Party affiliations. Today they may be in power, tomorrow they may not be in power. Whoever may be in the Government, we have to control terrorism in our soil, in our country.

            When it happens, every time we blame the intelligence agencies. On so many occasions, on the floor of the House, we discussed the same issue. All the political parties have given so many suggestions to the Government, to the then Government and even to the present Government. We have not achieved anything on those lines. Why? We do not have strong enough intelligence capabilities. Why? In the Mumbai blasts, we had no information. The whole country was shocked to know this. So, this is the situation prevailing in our country.

            Even in Mumbai, since 1993 to July 2006 on seven occasions, nearly 400 to 500 people were killed. Even after the UPA Government came to power, many such attacks have taken place. Even previously in the NDA Government’s time, Jammu and Kashmir Assembly was attacked. Even Parliament was attacked. One year back on the eve of Diwali, we were all in Delhi. What happened in Delhi? After that also, we have not risen to the occasion to get information to feed the States.

 Law and order is a State subject. Though law and order is a State subject, we should not leave the States. We have to give intelligence inputs. We have to provide enough money to strengthen the police force, intelligence agencies and everybody. That is not going on. Giving meagre amounts is not enough.

We are not discussing the other aspects of Naxalism, the problem of North-Eastern States and even Jammu and Kashmir. We are discussing the Mumbai blasts. On the same day also, eight innocent people were killed in Jammu and Kashmir. Out of eight people, two were Hyderabadis. They went to Jammu and Kashmir as tourists. This is the situation prevailing in our country.

Even legal luminaries, media people and everybody is writing that to deal with terrorism, special laws are required. All right, when POTA was in existence, they attacked Indian Parliament and Jammu and Kashmir Assembly. So, in the name of attacks, we cannot repeal all these laws. Why? It is because so many people committed murders. So many people committed rapes. We have not removed the Section from the IPC. But you take the whole world. There are special laws for controlling terrorism. So, the Government of India should also take necessary steps to think about special laws and they should control this menace.

Also, on three or four items I have given my suggestion to the Government. We have to strengthen national security capabilities. That is my first suggestion. The Government should deal with terrorism more firmly without any bias. Terrorist is a terrorist whether he belongs to Hindu or Muslim or Sikh community. Whoever may be, we have to deal with terrorist very sternly[m36] .

            It is the responsibility of the Government to ensure the safety of the citizens. It should take all necessary precautions to prevent any untoward incident by strengthening the intelligence network. It is the responsibility of the Government to consult all political Parties and take them along to motivate all sections of the people to fight unitedly against terrorism.

            At the time of bomb blasts, all the people were united to rescue the affected people. But what happened today on the floor of the House? We are criticising each other. This is not at all correct. At this time we should be united. Ultimately the Government is responsible. The Government should take the opinion of all political Parties and also all sections of the people in our country. You have to evolve a concrete mechanism to curb terrorism. We need to revisit the legal framework. Many jurists and experts argue that the normal criminal laws are not adequate to book the terrorists. Special stringent laws are also required.

 

KUMARI MAMATA BANERJEE (CALCUTTA SOUTH): Sir, I rise to condemn the bomb blasts in Mumbai and also in Srinagar. At the same time I would like to congratulate the people of Mumbai and Srinagar because they are fighting the battle everyday. Today we must appreciate one thing. We utter so many loose talk. I also feel sorry for that. This is a very serious subject and you have to take it very seriously. It has become not only terrorism from atrocities point of view but it has now become serious from scientific terrorism point of view also. Their target is very soft specially the cities like Mumbai, even Kolkata, Chennai, Bangalore, Ahmedabad, Hyderabad or Delhi. There are so many places.

            I do not want to discuss the matter in detail because everybody discussed it. Firstly, we must pass a resolution. Yesterday you did it. But today when we are discussing the Adjournment Motion, it is not that we want to make our record. It is not so. We want to draw the attention to the issue and nothing else. Here we have to prove that we are one, we are together and we have to fight the battle against the terrorists together. That is why let us speak like one, let us speak in a single voice and let us condemn the atrocities and terrorism all together and the message should go to the world that if America can fight against the terrorists, the world can fight together against the terrorists, then we can fight together to curb the rise of the terrorism. That is our intention.

            I want to point out only two-three points here. Mumbai is a very congested place. Some 50 lakh to 60 lakh people  travel by these local trains everyday. What steps the Government had taken so that nothing happens in future? Metro Railway, local trains, even the market, mandi, masjid etc. everything has now become a soft target in the country. We have to set up some mechanism through which at least the Central Government and the State Governments and our units like IB, SB or Armed Forces, Defence people etc. could work together as a team. There should be some coordination between the Centre and the States and with the Defence Ministry and some Govt. agencies also. All different agencies should work together. There must not be any gap in the coordination. For lack of communication something is happening. Sometimes the State is saying something and the Centre is saying something.

            The National Security Adviser has sent a letter to all State Governments. Instead of sending only to State Governments he should have sent it to other agencies like Ministry of Defence etc. The Armed Forces may be demoralised for this. We have to take into confidence the Armed Forces.

            I want to make some charter of suggestions not charter of demands. There must not be lack of coordination. There must be some coordinated action team to sunset the terrorist activities. Why do we not set up a team in the name of ‘Operation Sunset’ to curb the terrorism specially with the help of Central Government, State Governments and other Government agencies.

            Secondly, I want to mention that in our country, a parallel economy is going on. It is a very dangerous trend that fake notes are in circulation throughout the North-Eastern region and Eastern parts of the country. Today, I do not want to make any political statement or anything, though I am able to do it.

            Sir, the Defence Minister is here and the Home Minister is also here. I want to inform them one thing. Gujarat is a border State. Punjab is a border State. Rajasthan is also a border State. I will tell you why it is happening in West Bengal. This is the gateway of the North-Eastern region. At the same time, there is problem of insurgency in the North-East. West Bengal is the gateway of Pakistan, Bangladesh, Bhutan and Nepal while North-East is the gateway of China and Burma. Because of the free movement of terrorists there, I would request the Home Minister to please find out details from the Home Ministry as to whether reports have been submitted by their agency to the Home Ministry that some ISI people are taking full shelter from the politicians and are moving freely there. You must not forget that in Darjeeling and other parts of  North Bengal area, fake currency is going on. That business is going on. It has become a smuggling centre now. From heroin to everything being smuggled from the North-Eastern and Eastern parts of the country. I will request him to investigate the matter and take serious steps so that another incident does not happen in our country.

            Sir, I am not telling it from the political point of view because today we should forget politics here. We do not want to say that this section is communal or that section is communal. The terrorists are always  terrorists. They do not have any caste. They do not have any creed. They do not have any religion. Their only religion is that they are terrorists. That is why, we have to take action against the terrorists from the terrorism point of view and not from religious point of view. Our country is a vast country and different types of people are there. The issue of caste and creed should not spoil the integrity and unity of our country. Let the message go - irrespective of whether a person is Muslim, Sikh, Hindu or Christian, we should fight the battle together – that nobody is isolated from the mainstream and everybody is together. That is our motto. That is our principle. That is our vision. That is our mission. That should be our action also.

            The Centre and the respective States should together prepare some comprehensive action policy. Railways sometimes say that they cannot take the responsibility of the people. Sometimes, the State Government says that this is not the State subject. Sometimes, the Central Government says that this is within the State subject. Ultimately, the people are facing the trouble. That is why, please set up something from the terrorism point of view so that nobody feels isolated and people do not suffer.

            The other thing I want to say is about the Rs. 5 lakh compensation. रेलवे के नियम के अनुसार जो आदमी एक्सीडैन्ट में मरता है तो उसे पांच लाख रुपये रेलवे से मिलते ही हैं। लेकिन आप देखिये उनके परिवारों को आपने कमिटमैन्ट किया है। श्रीनगर में भी बम ब्लास्ट्स में बहुत लोग मारे गये हैं। हमारे बंगाल में श्रीनगर में हुए विस्फोटों के बाद मैं उनके घर गई थी। वहां जियोलोजिकल सर्वे का एक ऑफिस है, वहां का एक बड़ा साइंटिस्ट भी उसमें मारा गया। लालू जी, पांच लाख रुपये तो आप देते ही हैं। आप एक्स्ट्रा कुछ नहीं कर रहे हैं।

श्री लालू प्रसाद : आपके समय में एक लाख रुपये एक्सग्रेशिया था, हमने इस विशेष परिस्थिति में उसे पांच लाख रुपये किया। चार लाख रुपये टि्रब्युनल से मिलेंगे और एक लाख रुपये उन्हें महाराष्ट्र सरकार देगी। इस तरह से दस लाख रुपये मिलेंगे। हमने पैसा देना शुरू कर दिया है। हमने बोल दिया है कि घर-घर जाकर सबको दीजिए।

कुमारी ममता बैनर्जी :यह बात सच नहीं है कि आप नहीं जानते हैं। मुझे जानकारी है एक लाख रुपये एक्सग्रेशिया पहले से ही है और चार लाख रुपये मिलाकर आप पांच लाख रुपये रेलवे एक्सीडैन्ट में देते हैं। जैसे सविल एविएशन में इश्योरेन्स का पैसा होता है।

श्री लालू प्रसाद :क्लेम करने पर चार लाख रुपये मिलेंगे और एक लाख रुपये एक्सग्रेशिय़ा, लेकिन इस बार एक्सग्रेशिय़ा पांच लाख रुपये और क्लेम करने पर चार लाख रुपये मिलेंगे। हम लोग उनसे क्लेम करायेंगे, हम कुछ भी नहीं छोड़ेंगे। हम जो बोलते हैं वह करते cé[R37] ।

कुमारी ममता बैनर्जी सर, अभी क्लेरफिकेशन मिला है। पहले हम लोगों ने सुना था कि एक लाख एक्स-ग्रेशिया और चार लाख मिलाकर पांच लाख देंगे। अभी लालू जी ने यहां जो स्पष्टीकरण दिया है, यह सब ठीक है, इससे हम लोग खुश हैं और आप यह भी देखिए कि जो हॉफ इंजर्ड हैं, यानी जिसका हाथ चला गया, पांव चला गया, जो जिंदा लाश होकर रहेगा, उसके लिए खाली दस हजार या पचास हजार देना ही काफी नहीं होगा। उसके लिए अगर आप कोई इंश्योरेंस कर सकते हैं कि जिंदगी भर एक पेंशन के माफिक मंथली उसे कुछ मिलता रहे, उसके परिवार का अगर कोई है तो उसे नौकरी देने के लिए मैं आपसे विनती करना चाहूंगी।

श्री लालू प्रसाद : हम उसे जॉब देंगे, जो हैंडीकेप हो गया है, हमारे स्टेशन पर हम स्टॉल देंगे। यह हम पहले बोल चुके हैं। आपने पढ़ा नहीं है।…( व्यवधान) 

कुमारी ममता बैनर्जी सर, मैंने कोई पोलटिक्स की बात नहीं कही कि लालू जी ने पहले नहीं कहा था कि पांच लाख देंगे। अगर हमारे बोलने से लालू जी ने दिया है तो हम लोग खुश हैं। लेकिन आप ऐसा क्यों करते हैं? जब हम लोग पोलटिक्स नहीं करते हैं तो आपका भी पोलटिक्स करना ठीक नहीं है।…( व्यवधान) 

MR. SPEAKER: You can claim credit for it.

कुमारी ममता बैनर्जी : सर,उनके दिल में अगर दुख है तो हमारे दिल में भी दुख है। इंसान की इंसानियत में कोई फर्क नहीं होना चाहिए।…( व्यवधान)  इसलिए मैंने बोला कि दस हजार या पचास हजार में जो घायल आदमी है, उसका इसमें कुछ नहीं होता है। उसके लिए भी आप कुछ दें और क्लेम करने में कोई दिक्कत न हो, इसको भी देखना चाहिए।

इन्हीं शब्दों के साथ मैंने एन.डी.ए. की ओर से सरकार का ध्यान आकर्षित किया है। इस टैरेरिज्म के मुद्दे पर सरकार को फेंकने का हमारा कोई मतलब नहीं है। अपोजीशन के जो सजेशंस हैं, उसे लेकर आप लोग अच्छे से काम करिए, यही हमारी आपसे विनती है। We are ready to cooperate with all to fight terrorism.

MR. SPEAKER: Next speaker is Shri L. Ganesan. Do you want to say anything on this issue? Okay, please try to cooperate with the Chair, and conclude within five minutes.

   

SHRI  L. GANESAN (TIRUCHIRAPPALLI): Mr. Speaker, Sir, at the very outset, I appeal to the illustrious leader Shri Advani with all respect at my command not to press his Motion of Adjournment or to withdraw his Motion. Why am I saying this? Have you not already created enough storm and caused enough harm? Don’t you realise that the terrorists -- whether inside India or outside India; whether they are instigated from outside or sheltered inside -- will be jubilant to see this.

How are you going to fight terrorism? Don’t they realise it? Is it not a green signal for them? They will be happy because they would think that we are not going to fight terrorism. Why am I saying this? I am saying this because we are not united. How are we going to fight terrorism if we are not united? The one and only way to fight terrorism is that we should all be united. We cannot fight terrorism unless we are united. Is this the way that we are going to fight terrorism? I have great respect for him, and it would be better and magnanimous on his part to withdraw his Motion.

            We are faced with so many problems. India is a big country, and there are economic problems, and so many other problems. The so-called super power is creating all sorts of difficulties for India. Under these circumstances, the worst problem of all the problems is terrorism. Therefore, it should be rooted out, and it should be eradicated with all roots and branches. I appeal to all that we should be united irrespective of political differences. I am saying this because we cannot fight it unless we are united.

            Some of my friends here referred to POTA, and said that terrorism is a little bit rampant nowadays because of repeal of POTA. It has nothing to do with POTA, and it is almost irrelevant. Was the attack on Parliament not a terrorist activity? Was POTA not in existence at that time? Therefore, terrorism was there, is there and will be there unless we fight it, and POTA has no relevance to it whatsoever[ak38] .

   

Bringing POTA back is untenable. I belong to a party whose General Secretary was imprisoned under POTA for about 19 months for no fault of his. Therefore, POTA has nothing to do with that.

I feel sorry to hear sweeping statements being made in the House. We should not resort to making sweeping statements. There may be Muslim terrorists but can anybody say that there is no Hindu terrorist? What is the connection between terrorism and religion? Terrorism has nothing to do with the religion. The two have no connection. There may be a Hindu terrorist and there may be a Muslim terrorist. Religion has nothing to do with terrorism. Please do not try to disunite the country on the lines of religion.

With these words, I once again appeal to Shri Advani, for whom I have great respect, not to press for a vote and magnanimously withdraw this Adjournment Motion.

 

SHRI SUBRATA BOSE (BARASAT): Mr. Speaker, Sir, thank you very much for giving me an opportunity to say a few words on the Adjournment Motion moved by the hon. Leader of Opposition. I would be brief because a lot has already been said and I would not like to repeat anything which has already been placed before the House.

Words are not strong enough to condemn the dastardly act of terrorism recently committed in Mumbai killing about 200 people and injuring about 1000. I think Members of this House from all sides join me in condemning this dastardly act.

What we have to realise today is the grave situation which exists in our country. Acts of terrorism are unfortunately on the increase. Therefore, all of us, unitedly and together, have to take action to fight terrorism which affects not only the country but is affecting and threatening the stability and peace of many countries in the world.

It is a pity that during quite a number of speeches of the hon. Members, accusations have been hurled and allegations have been made against each other. I think that will not solve the problem of combating terrorism. What we need here is a united action not only from the Government and the Opposition side but also from all sections of the people. We have to fight terrorism unitedly. If we do not do that, we shall not be able to combat this menace that is threatening us everyday.

We would like to be assured that the Government is taking positive steps to strengthen the police and security forces all over the country. The State Governments have to come forward particularly since the law and order is a subject in the State List. As the hon. preceding speaker has also pointed out, there must be a very close coordination and cooperation between the Centre and the States.

When we recall the Mumbai incident, we realise that a very meticulous planning had gone into it. Bombs were placed and exploded in seven places almost at the same time. So, I think there is some failure on the part of intelligence agencies in this. Going by the way these terrorist attacks are planned, it is easier said than done that all acts of terrorism can be known to the intelligence agencies in advance. But it is important that the Government take steps to improve and fortify the intelligence agencies all over the country, particularly the Central forces.

            I think, as I have mentioned, we must admire also the courage which has been shown by the citizens of Mumbai.  The incident happened in the evening - 6 o’ clock, not late but early in the evening - but the next morning, as I have read in the newspapers, saw in the television and heard over the radio, the citizens of Mumbai faced the situation with courage and boldness. Normal life was back in Mumbai from the next morning.  I think, this is an example we have to follow all over the country and we must face the situation with courage and boldness.  I also think that it is our duty to assure the Government and extend our wholehearted cooperation in the matter of combating the acts of terrorism.

 

श्रीमती रंजीत रंजन (सहरसा) : अध्यक्ष महोदय, मैं दो-तीन प्वाइंट बोलना चाहूंगी। हम लोग आज सदन में स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा कर रहे हैं। मैं एक ही सवाल पूछना चाहूंगी कि हमारे मुंबई में हमारे ही अपने भाई-बहन शहीद हुए, हम उन्हें शहीद ही कहेंगे। अगर वे इन बातों को सुन रहे होंगे या इस डिसकशन को देख रहे होंगे तो क्या उनके मन में हमारे प्रति कोई श्रद्धा है। वे सोच रहे होंगे कि हम उनके लिए क्या डिसीजन ले रहे हैं और इस डिसकशन से क्या परिणाम निकलेगा। वहां जो लोग मारे गए, उनकी कंडीशन पर हम कभी हंस रहे हैं, कभी मजाक कर रहे हैं और कभी एक-दूसरे पर छींटाकशी कर रहे हैं, क्या इससे हम उन व्यक्तियों को हर्ट नहीं कर रहे हैं?

मैं सबसे पहले उन मुंबईवासियों को सलूट करती हूं, जिन लोगों ने इतनी जल्दी दंगे से सबक लिया और अब जब दूसरी बार बम ब्लास्ट हुआ तो उन सब लोगों ने दंगों को भूल कर जाति, धर्म को छोड़ कर एक ही सेवा का धर्म अपनाया। मैं उस जनता को सलूट करती हूं जिन्होंने छ: साल के बच्चे को सात फीट गहरे गड्ढे से निकाला, जब आवाम एक हुआ तो उसे तीन दिन बाद भी वहां से जिन्दा निकाल लिया।

अध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से इतना ही पूछना चाहूंगी कि हमारे डिसकशन का मतलब क्या है, हम डिसकशन किस लिए कर रहे हैं? क्या आतंकवाद को हम इस डिसकशन से खत्म कर पाएंगे? हम इस बारे में डिसकशन कर रहे हैं कि हमें आतंकवाद को खत्म करना है। यदि हम इतिहास के पन्नों को खोल कर देखें, आजादी से पहले के पन्नों को खोलें, मैं उस वक्त पैदा भी नहीं हुई थी, लेकिन सच्चाई यही है कि इन सब की जड़ शायद हम राजनीतिज्ञ ही हैं, जिन्होंने आतंकवाद की जड़ को उपजाया है। यहां डिसकशन इस बात पर होना चाहिए कि आखिर आतंकवादी होते कौन हैं, जो हयूमन बम बन कर आते हैं, सिर पर कफन बांध कर मरने के लिए आते हैं। क्या उन सारे आतंकवादियों के साथ कुछ ऐसा घटा होता है, जिसके कारण वे आतंकवादी बने होते हैं। यह सरासर गलत है। जो आतंकवादी सही मायने में हर जगह दंगे फैला रहे हैं, वे खुद किसी सुरक्षित जगह पर बैठे होते हैं। सच्चाई यह है कि जो हयूमन बम बन कर आते हैं, सिर पर कफन बांध कर आते हैं, उनमें से ९० प्रतिशत लोग सिर्फ इसलिए आते हैं, क्योंकि उन्हें सिर्फ पेट के भूख की चिन्ता होती है, अधिकतर लोग वही होते हैं। चाहे कश्मीरी बेरोजगार लड़कों को ले लें या आतंकवादियों को ले लें, जो भी सिर पर कफन बांध कर आए हैं, जो भी आज वहां ट्रेनिंग ले रहे हैं उनमें से अधिकतर लोग भूख के कारण से आते हैं। उन्हें आतंकवादी बनाने के लिए करोड़ों रुपए दिए जाते हैं, यहां तक कि उसके मरने के बाद उसके सात पुश्तों तक की जिम्मेदारी ली जाती है। कारगिल के कुछ परिवार अपनी आर्थिक स्थिति ठीक करने सरकार की तरफ देख रहे हैं। आज तक हम उनके घर नहीं बना पाए, घर बनाना तो दूर, शायद कुछ लोगों को रोटी भी नहीं दे पाए। मुझे लगता है कि हम लोग यहां जिस तरह का डिसकशन करते हैं, उससे शायद आज भी हम आतंकवाद को उपजा रहे cé[R39] ।

  महोदय, शायद, आज भी हमारी इन स्पीचों को सुन-सुन कर एक आतंकवादी उपज रहा है। मैं आपके माध्यम से फिर एक सजैशन देना चाहूंगी कि यदि सही मायने में हम आतंकवाद को खत्म करने की चर्चा करना चाहते हैं, तो हमें बेरोजगारी को खत्म करना होगा और अगर बेरोजगारी को खत्म करना है, तो हमें जनसंख्या पर नियंत्रण करना जरूरी होगा। यदि जनसंख्या पर नियंत्रण करना है, तो हम चाहे विपक्ष में हों या सत्ता पक्ष में, गम्भीरता से इस पर विचार करना होगा और हिम्मत है, तो जाति, धर्म, मजहब को एक तरफ रखकर हमें सबसे पहले बिल लाना होगा जिससे पूरे इंडिया में, फिर चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का व्यक्ति हो, उसके दो बच्चों से ज्यादा नहीं होंगे। अगर हमारी सरकार और हमारे विपक्ष में यह हिम्मत है, तो बिल को लेकर आएं ताकि हम अपनी जनसंख्या को कम कर सकें जिससे हमारे युवा बेरोजगार इन जगहों पर न भटक सकें।

महोदय, हमारी सीनियर मैम्बर, कुमारी ममता बैनर्जी, नकली नोटों का जिक्र कर रही थीं। मैं बताना चाहती हूं कि यह एकदम सच्चाई है। मैं जिस क्षेत्र से आती हूं, उससे नेपाल बार्डर लगता है। वहां से भी नकली नोट आते हैं। जिस प्रकार से आजकल पेपरों में आ रहा है कि बिहार में आतंकवादियों ने अपनी जड़ें मजबूत कर ली हैं, यह सही है। मैं आपको आगाह करना चाहती हूं कि जिस प्रकार से बिहार में गरीबी है, उसे देखते हुए एक दिन ऐसा आएगा कि वहां कस्बे-कस्बे में आपको आतंकवादी नजर आएंगे। जहां तक हम गोलियों की बात कर रहे थे, मैं पूछना चाहती हूं कि कितने आतंकवादियों को गोली मारेंगे ?   उसे तो भूख से भी मरना है और आतंकवादी बनकर गोली से भी मरना है। वैसे भी उसे मरना है। कितनों को गोली मार कर हम आतंकवाद को खत्म करेंगे ? इसलिए मेरी यही रिक्वेस्ट है कि आतंकवाद क्यों पनपता है, लोग आतंकवादी क्यों बनते हैं, उसकी जड़ को खत्म करने के बारे में सोचिए। हर व्यक्ति को गोली मारकर आप आतंकवाद को खत्म नहीं कर पाएंगे। इतना ही कहकर मैं अपनी बात समाप्त करती हूं।

 

श्री अब्दुल रशीद शाहीन (बारामूला) : जनाब स्पीकर साहब, मुझे यदि आप एक महीने का मौका देते, तो मैं ३० दिन तक आतंकवाद और इसके असरात और इसके इलाज के बारे में, इन सरे-मुबारक हजरात के सामने बात करता, तो वक्त कम पड़ता, लेकिन मुझे इस मुकद्द्स ऐवान में, खुले इजलास में, दो-तीन मिनट का समय आपने दिया है, इसके लिए मैं आपका शुक्रगुजार हूं।

बदकिस्मती से मैं इस चुनाव क्षेत्र से आ रहा हूं। हमारे हिज्बे इख्तिलाफ के नेता ने सही कहा कि कश्मीर और नॉर्थ ईस्ट, दहशतगर्दी के थियेटर हैं। हिन्दुस्तान की सैकुलर कुरबानगाह पर, हमारा मुकद्दर हो चुका है कि हम और हमारी औलाद इस तबाहकुन सूरतेहाल में जिन्दा रहे। एक-एक मिनट गिनकर अपनी कूवत से उन ताकतों का मुकाबला करे जो हमारी जम्हूरियत को, हमारे इंतजाम को और हमारे आईन को तबाह करना चाहते हैं।

मैं यह अर्ज करना चाहता हूं कि गुफ्तन, पुरस्तन नशिस्बंद और बर्खास्तन। बैठें, बात करें और चले जाएं। इससे आतंकवाद और इसके जहरीले असरात का इलाज नहीं हो सकता। तकरीरों से, तंजवो व मिजाह के मुजाहिरे से और कोट और अनकोट के स्किलफुल प्रजेंटेशन से या इशारात व किनायात से, अक्लीयतों पर वार करने से इस मसले का हल नहीं निकल सकता। हमारे मुल्क में यह एक ऐसी आग है जिस आग की परेशानियों में हम सभी लोग गिरफ्तार हैं। घरों में बैठे हुए लोग दहशत में हैं। जिन लोगों ने मुम्बई ब्लास्ट में उन जानों को खून से लथपथ देखा होगा, तड़फते देखा होगा, वे साइकलौजीकल मरीज हो सकते हैं। कश्मीर में हजारों लोग इस मर्ज से घिरे हुए हैं। मैं इस मौके पर सरकार से यह पूछना चाहता हूं कि सरकार इस सिलसिले में क्या कर रही है ? जब हम यहां डिसकशन कर रहे हैं, तब सरकार द्वारा नारे लगाने से और यह कहने से कि मुम्बईवासियों ने हिम्मत से काम लिया, जुलूस निकाला और उसी वक्त ट्रेन चल पड़ी और यह हुआ और वह हुआ, इसका क्रेडिट नहीं ले सकती है। सरकार की जिम्मेदारी है क्योंकि सरकार के पास जराया है, उसके पास कूवत है, सरकार के पास स्टेट का एप्रेटस है। इनकी जिम्मेदारी है कि वे कौम के सामने आएं, मोहतरम ऐवान के सामने आएं और कहें कि इन हालात में आगे बढ़ने के लिए क्या कदम उठाएं,और क्या कहना चाहें। अगर खुले इज़लात में इस सेंसेटिव मामले पर बात न करें तो दीवारों के पीछे अहले अक्ल लोगों को बुला लें, जो इलेक्टिड रिप्रेज़ेन्टेटिव हैं, उनसे बात करें। शीशों के एहवानों में बैठकर मसाइलों का हल ढूंढने और तकरीर करने से यह मसला हल नहीं होगा। कश्मीर में तबाही हुई और अगले ही लम्हे मुम्बई में खून बहा। कश्मीर तो बहरहाल थेयटर है, उसका तो काम चल ही रहा है। पिछले साल सरोजिनी नगर और पता नहीं कहां-कहां तबाही हुई।

            जनाबेवाला, व्हेल मछली का साइज बहुत बड़ा होता है। जब वह सांस लेने के लिए मुंह खोलती है तो साथ में चलने वाली शार्क इसकी जबान काट लेती है और वह रिज़नरेशन पावर से बहाल करती है। लेकिन देखा गया है कि इसके सनाउट पर जो सेंसर लगे हुए हैं, जब वह उनसे काम लेना छोड़ दे तो उसकी जबान जख्मी हो जाती है। मैं यह पूछना चाहता हूं कि हमारे राज्यों के सेंसर क्या हैं और वे कहां हैं? उनका इस सिलसिले में क्या जवाब है? एक बार, दो बार, तीन बार, चार बार और पांच बार इसको नज़रअंदाज़ किया जा सकता है, लेकिन अगर यह मुस्सलसल सिलसिला इस मुल्क में चले तो सरकार इससे बरी नहीं हो सकती है। सरकार को इसे देखना होगा। सरकार लार्ड शिवा की तरह है। इसके बहुत बडे बाजू हैं। इसका एक्स्टर्नल अफेयर एक बाजू है। होम डिपार्टमेंट दूसरा बाजू है, डिफेंस डिपार्टमेंट तीसरा बाजूहै। क्या इन तीनों बाजूओं का कार्डिनेशन कहीं कभी होता है। हम लोग जो इस बदकिस्मत किस्से में स्टेक होल्डर हैं, अगर हम काबिले भरोसा नहीं हैं तो इधर के रहनुमा जो कल उधर बैठे थे। इधर के रहनुमा, जो कि सीनियर लोग हैं, क्या उनके साथ भी बात नहीं हो सकती? क्या उनको भी नहीं बताया जा सकता कि अब हमारा रोड़ मैप इस सिलसिले में क्या है?

दूसरी बात, मैं इनसे गुज़ारिश करना चाहता हूं कि तुगड़िया वाली जबान को मेहरबानी करके बदल दीजिए। यह मुल्क आपके हाथ में है। हम छोटे-छोटे लोग और छोटी-छोटी पार्टियां शायद जम्हूरी निज़ाम में कोई हैसियत नहीं रखते हैं। अगर कभी डिस्कशन हुआ तो उसमें स्पीकर साहब की मेहरबानी से दो मिनट का वक्त मिले तो मिले, नहीं तो नहीं मिलता है। हमारी आवाज़ तो यहां पर है ही नहीं। लेकिन आप लोगों के हाथ में यह मुल्क़ है। आप ख़ुदा के लिए इल्जामतराशियों और जवाबी इल्ज़ामात से अपने आपको सूरमा न बनाइए। आप इस मुल्क को बचाने के लिए मिलकर काम करने की सूरत निकालिए और उन लोगों को यह संदेश दे दीजिए, जो इस मुल्क़ पर हमला करना चाहते हैं, इसके सैक्यूलर किरदार को तोड़ना चाहते हैं, इसके आइन को जख्मी करना चाहते हैं, इसकी अख्लियतों को ज़लील करना चाहते हैं। उनको यह बताएं कि हम इतिहाद के साथ मुकाबला करने की कुव्वत रखते हैं।

यह जम्हूरी निज़ाम की इज्ज़त है। इसमें कोई बात नहीं है कि हम पार्लियामेन्ट में खुलकर बात करें, बहस करें, एक-दूसरे की जवाबतलबी करें, तकरार करें। यह हमारी जान है। लेकिन जिस तरह हम पार्लियामेन्टरी कमेटियों में तमाम पार्टियों के लोग कन्सेन्सस से काम करते हैं, इसी तरह से इस मुश्किल से मुकाबला करने के लिए हम सब लोगों को एतिहाद से काम करने की जरूरत है और इस पर गहरायी से सोचने की जरूरत है। मैं कांग्रेस पार्टी से गुज़ारिश करूंगा कि वे अपनी फरिशतासिफ़त रहनुमा श्रीमती सोनिया गांधी को इस मामले में इज्ज़त दे और इस मामले में इस तरह से काम करे कि इस मुल्क के एतिहाद को बचाकर रखें। मैं मुसलमान हूं लेकिन उनकी बात नहीं करूंगा। यदि उनकी बात करूंगा तो पता नहीं कितने सवाल खड़े हो जाएंगे। मैं हिन्दुस्तान के मुसलमानों को अख्लियत नहीं मानता हूं। वे मलेशिया से कम से कम बिलामुवालगाह आठ गुना बड़े हैं। लेकिन उनको नजरअंदाज़ करके आप शायद इस मुल्क़ के एतिहाद को और इसकी इख्ता को आगे नहीं ले जा सकते हैं। इस देश के छोटे से छोटे ग्रुप को एतिमाद में लाइये और एतिहाद से इस मरहले का मुकाबला कीजिए। मैं सेंसेटिव एरियाज़ पर बात नहीं करूंगा क्योंकि मैं खुद सेंसेटिव एरिया से आता हूं। आतंकवाद से मेरी जात, मेरा खानदान ज़ख्मी है। मैं जानता हूं कि उन लोगों का क्या हाल है, जो बहुत बहादुरी से टीवी पर बोले की अब हुआ तो हुआ। लेकिन अब दीवारों के पीछे वे क्या कर रहे होंगे, इसे हम में से कोई नहीं प्ÉÚUäMÉÉ[c40] । मैं सरकार से यही दरख्वास्त करता हूं, मैं हिज्बे इत्खिलाफ से यही दरख्वास्त करता हूं कि सारी तल्खियां छोड़कर इस संगीन मामले की तरफ मिलकर ध्यान दीजिए और मुल्क से बाहर यह मुजाहिरा कीजिए कि हमारी जुबानें अलग नहीं हैं, हमारी बातें अलग नहीं हैं। कल को कोई यह न कहे कि प्राइम मनिस्टर से यह कहा और होम मनिस्टर ने वह कहा, ऐसी बात न हो।

 

श्री चंद्रकांत खैरे (औरंगाबाद , महाराष्ट्र): अध्यक्ष जी, मेरा नाम मैंने दिया है, मेरे क्षेत्र में सबसे ज्यादा आतंकवाद है। मेरा यह कहना है कि कल भी मैंने नोटिस दिया था। आर.डी.एक्स. सबसे पहले मेरे यहां निकला है और हमने सरकार को भी पूरा आगाह किया था। मुझे आप दो मिनट बोलने दीजिए। यह मेरे क्षेत्र की घटना है, मुझे दो मिनट बोलने दीजिए।

MR. SPEAKER: Your leader has already spoken, तब भी आप खुश नहीं हैं। 

… (Interruptions)

MR. SPEAKER: Your leader has taken double the time already. यह सही नहीं है।

… (Interruptions)

MR. SPEAKER: This is not fair. ठीक है, दो मिनट स्पेसफिकली बोलिये।

...( व्यवधान)

MR. SPEAKER: Then you should have been the spokesman of this Party.  The time allotted was three hours and your leader has spoken for 24 minutes.

...( व्यवधान)

MR. SPEAKER: How do I conduct the proceedings?

...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय : आप मेहरबानी करके बैठ जाइये। बैठे-बैठे बोलना आपको शोभा नहीं देता है।

...( व्यवधान)

MR. SPEAKER: The time allotted was three hours and we have already taken four and  half hours.

श्री चंद्रकांत खैरे :  अध्यक्ष महोदय, मैं आपको धन्यवाद देता हूं कि आपने मुझे यहां इस सम्बन्ध में दो मिनट बोलने का मौका दिया। …( व्यवधान) 

अध्यक्ष महोदय : धन्यवाद की जरूरत नहीं है, आप अपनी बात जल्दी खत्म कीजिए।

श्री चंद्रकांत खैरे : अध्यक्ष जी, मुम्बई में जो बम ब्लास्ट हुए, उस दिन वहां सारे हॉस्पिटल्स में हम लोग सारे शिवसैनिकों के साथ मदद कार्य कर रहे थे। वहां की स्थिति देखने के बाद, वहां की स्थिति बहुत गम्भीर थी। ठीक है कि लालू जी गये थे, लालू जी ने घोषणा की। प्रधानमंत्री जी बाद में आये, बाद में गृह मंत्री जी भी आये, सब आये, जो लोग मारे गये, उनके लिए उन्होंने घोषणा की, लेकिन जो जख्मी हुए, उनकी भी ज्यादा मदद करनी चाहिए।

लेकिन यह हुआ कैसे, जो हमारे मुम्बई के पूर्व पुलिस कमिश्नर थे, उन्होंने उसी दिन कहा कि जो आर.डी.एक्स. हमारे एलोरा, मालेगांव यानि कि संभाजी नगर में जो मिला, उसमें से जो आर.डी.एक्स पकड़ा नहीं गया, उसमें से यह ब्लास्ट हो गया, ऐसा उन्होंने बताया। मुझे यह कहना है कि जब ९ मई को हमारे यहां एलोरा में दो गाड़ियां जा रही थीं, उनमें से यह आर.डी.एक्स. कुछ तो पकड़ा गया और कुछ नहीं पकड़ा गया। जो आर.डी.एक्स. लेकर जा रहे थे, वे वहां से भागे थे। भागने के बाद वहां पकड़े गये। वहां के लोगों ने, वहां हमारा एलोरा में जो महामंडलेश्वर जी का आश्रम है, परमपूज्य शांती गिरीजी महाराज का जो एलोरा में आश्रम है, उनके लोगों ने, उनके भक्तों ने पकड़ा। दूसरा आतंकवादी हमारे भद्रामारुति के परिसर में पकड़ा गया, उसे भद्रामारुति के भक्तों ने पकड़ा। इन दोनों आतंकवादियों के पकड़ने के बाद तीसरा आतंकवादी पुलिस द्वारा पकड़ा गया। मैं यही पूछता हूं कि एक कार तो चली गई थी और उसको ढूंढते-ढूंढते फिर मनमाड के पास अंकाई किले में कुछ आर.डी.एक्स मिला और कुछ हथियार मिले, विस्फोटक मिले। लेकिन मैं यह कहना चाहता हूं कि तब तक पुलिस सो रही थी क्या? मुम्बई में भी उसके बाद में हमने आगाह किया, आन्दोलन किया। आतंकवाद विरोधी अभियान शिवसेना ने चलाया, लेकिन उसको गम्भीरता से पुलिस वालों ने नहीं लिया, वहां के गृह विभाग ने नहीं लिया। मैं यही जानना चाहता हूं कि उसीमें से मिले आर.डी.एक्स. से आज मुम्बई में यह परिस्थिति हुई और जो १६ लोग थे, जिन्होंने लोकल ट्रेन में बम ब्लास्ट किये, उनमें से एक आतंकवादी मारा गया और बाकी १५ लोग आज भी हैं और वे जश्न मना रहे हैं, ऐसा न्यूज़पेपर में आया।

        उन्होंने यह धमकी दी है कि जो लालू जी जो साईं बाबा के मंदिर में दर्शन करने के लिए गये थे, वह मंदिर उड़ा देंगे। उन्होंने धमकी दी कि जो नांदेड़ का गुरूद्वारा है, वहां जाकर उसे उड़ा देंगे। उन्होंने धमकी दी कि अकलकोट का स्वामी समर्थ मंदिर उड़ा देंगे। लाखों भक्त जो हमारे पंढरपुर में जाते हैं, विट्ठल मंदिर में जाते हैं, उसे उड़ा देंगे। इतना ही नहीं, सद्धि विनायक मंदिर, मुम्बई को भी उन्होंने किया। ये आतंकवादी कौन हैं? जो मंत्री जी यहां बैठे थे, यहां बड़ी बात कर रहे थे, वे मंत्री जी सदन से बाहर चले गये हैं।

MR. SPEAKER: You should not make allegations.

श्री चंद्रकांत खैरे : वे जो दो आतंकवादी पकड़े गये, वे कहां के थे, उनके साथ में किसका रिश्ता है, ...*  ये क्यों नहीं बताते।

MR. SPEAKER: This should not be recorded.

श्री चंद्रकांत खैरे : मैं यह बताता हूं कि ...*  दो घंटे मुम्बई में जब बल ब्लास्ट हुए, सारे टेलीफोन बन्द हो चुके थे। अध्यक्ष महोदय, मैं बहुत गंभीर बात कह रहा हूं। …( व्यवधान)   मैं डिपार्टमेंट की बात कर रहा हूं। जब मुंबई में बम ब्लास्ट हुए, तो उस समय सारे मोबाइल दो घंटे के लिए बंद कर दिए गए। इसकी भी जांच होनी चाहिए कि इसके पीछे क्या कारण हैं?

अध्यक्ष महोदय :   आप बैठ जाइए।

...( व्यवधान)

अध्यक्ष महोदय :  हम इसे देखेंगे।

...( व्यवधान)

श्री चंद्रकांत खैरे : पाकिस्तान के साथ दोस्ती मत करिए। यह बात हमने एनडीए की सरकार के समय में भी कही थी और इसके लिए मैं मांग करता हूं कि पोटा फिर से लागू कर दिया जाए। आप पाकिस्तान से कोई रिश्ता मत रखिए। …( व्यवधान) 

MR. SPEAKER:  Shri Khaire, you are not co-operating with the Chair. I am very sorry about it. This is not right. Nothing will go on record.

(Interruptions) …*   * Not Recorded.

श्री रामदास आठवले (पंढरपुर) : अध्यक्ष महोदय, मैं भी इस संबंध में कुछ कहना चाहता हूं। …( व्यवधान) 

MR. SPEAKER: Hon. Members, it is a very important discussion. Now, the hon. Minister will reply to the debate.

… (Interruptions)

MR. SPEAKER: Shri Athwale, your name is not in the list. Please do not disturb. Only the submissions of the hon. Minister will go on record.

… (Interruptions)

MR. SPEAKER: Your name is not in the list. You never bother to give your name.

… (Interruptions)

श्री रामदास आठवले : मैंने आपके पास नाम भेजा है। …( व्यवधान) 

अध्यक्ष महोदय :  पूरी लिस्ट में आपका नाम नहीं है। माननीय मंत्री जी रिप्लाई दे रहे हैं, उनकी बात को सुनिए।

 

गृह मंत्री (श्री शिवराज वि. पाटील) : महोदय, ११ जुलाई को मुंबई में जो हुआ, उस पर यहां चर्चा हुयी है।इस संबंध में ऐसे कुछ नुक्ते उठाए गए हैं, जो बहुत अच्छे हैं। जिन माननीय सदस्यों ने ये मुद्दे उठाए हैं, उनका हम शुक्रिया अदा करना चाहते हैं और यह भी कहना चाहते हं कि जब भी इस संबंध में नीतियां बनायी जाएंगी, उस समय इन नुक्तों को हम जरूर ध्यान में रखेंगे। कुछ ऐसे नुक्ते भी यहां उठाए गए, एक बाजू के सदस्यों ने उठाए और दूसरे बाजू के सदस्यों ने उनके जवाब दिए, उन नुक्तों में जाना जरूरी है, ऐसा मुझे नहीं लगता और मैं उन पर नहीं जाऊंगा। मैं बड़ी नम्रता के साथ आपसे अनुरोध करना चाहता हूं कि इतनी दर्दनाक घटना के बाद इस सर्वोच्च सदन में यह चर्चा हुयी है और बहुत सारे नुक्ते उठाए गए हैं। हमारे दिल में भी उनके संबंध में जो सरकार की नीतियां हैं, उसकी बारीकियां जहां तक हो सके सदन के सामने और देश के सामने रखने की इच्छा है। इसलिए हो सकता है कि जितना समय आप हमें देना चाहते हैं, शायद उससे ज्यादा हम समय ले लें। इसके लिए मैं पहले से आपसे माफी चाहता हूं कि मुझे सविस्तार से बोलने की इजाजत दें।

श्रीमन, सबसे पहली बात तो यह है कि जब यह हादसा हुआ, तो लोग खुलकर घरों से बाहर आए और कुछ बहनों ने अपना डुपट्टा निकालकर भाइयों को, जो जख्मी हुए थे, उनको बाहर निकाला। उसमें हिंदू भाई थे, मुस्लिम भाई थे, क्रिश्चियन भाई थे और दूसरे धर्म को मानने वाले भाई थे और इस बात को हमें हमेशा के लिए ध्यान में रखना चाहिए और इसी बात से हमको ताकत मिलती है, इसी में हमारी शक्ति है।हमें इसको नहीं भूलना चाहिए। उसके बाद वहां के लोगों ने यह बता दिया, मुंबई के लोगों ने बता दिया, महाराष्ट्र के लोगों ने बता दिया, हिंदुस्तान के लोगों को बता दिया, दुनिया के लोगों को बता दिया कि यहां जिंदगी है और यह चलती रहेगी, यह रूकेगी नहीं और हम उसको रूकने नहीं देंगे। मुश्किलातों का हम सामना करेंगे, उसके ऊपर हम मात करेंगे और हम आगे बढ़ते जाएंगे, ठहरेंगे नहीं, रूकेंगे नहीं, उन्होंने यह बता दिया। यह बहुत ही बड़ी बात है और इसी में हमारी शक्ति है, ऐसा हम मानते cé[c41] ।

18.00 hrs. हमारे रेलवे के कर्मचारी वहां पहुंच गए थे, रेल मंत्री वहां गए थे, श्रीमती सोनिया गांधी भी एक घंटे के अंदर वहां पहुंच गई थीं और उन्होंने सब कुछ देखा था। लेकिन रेलवे के कर्मचारियों ने बहुत अच्छा काम किया, कुछ ही घंटों में उन्होंने रेल सेवा शुरू करने का काम किया। इसे हमें नहीं भूलना चाहिए, याद रखना चाहिए।

        यह बात सही है कि मुम्बई बहुत बड़ा शहर है, जिसकी आबादी दो करोड़ के करीब पहुंच रही है। वहां पुलिस की संख्या भी मर्यादित है, इसके बाद भी पुलिस अधिकारियों, कर्मचारियों ने वहां जिस प्रकार काम किया, उस हादसे के बाद उसमें से कोई बुरी बात न निकले, इसके लिए उन्होंने जो मेहनत की, उसकी सराहना करना भी बहुत जरूरी है, ऐसा मैं मानता हूं।

मुम्बई शहर हमारे देश की आर्थिक राजधानी है, औद्योगिक राजधानी है और दिल्ली शहर को जितना महत्व दिया जाता है, एक मायने में वैसा ही महत्व मुम्बई शहर को भी दिया जाता है। अगर मुम्बई शहर में कुछ हो, तो उसका असर हमारी आर्थिक नीति पर होता है, उद्योग पर होता है, व्यापार पर होता है, हमारे अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर होता है - इसी बात को ध्यान में रखकर आतंक फैलाने वाले लोग वहां आतंक फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। इसे हम आसानी से भूल नहीं सकते। राज्य सरकार के साथियों ने हिम्मत न हारते हुए आगे आकर अपनी भावनाओं पर काबू पाकर काम किया - इसे हम सब जरूर याद करेंगे, ऐसा मुझे लगता है। हम यहां से जो कुछ कर सकते थे, वह हमने किया। उसके बारे में ज्यादा बोलने की आवश्यकता है, ऐसा मैं नहीं समझता। इन सारी चीजों को ध्यान में रखकर हमें इस सदन में बैठकर विचार करना चाहिए और मुझे लगता है कि बहुत से माननीय सदस्यों ने इस चीज को बिल्कुल सामने रखकर विचार रखा है। ऐसा लग रहा था कि जो देश की भावना है, इस सदन की भावना भी वही है। देश और सदन की भावना अगर वैसी ही है, तो देश की शक्ति कितनी है, इसका अंदाजा हमें और दुनिया के सब लोगों को हो सकता है।

श्रीमन्, इस चर्चा में कुछ मुद्दे उठाए गए। पहला मुद्दा यह था कि जो हादसा हुआ, उसकी प्लानिंग बहुत दिनों पहले से हुई होगी। जैसी मलिटरी स्ट्रेटजी बनती है, उस प्रकार की स्ट्रेटजी बनाकर इस हादसे को अंजाम दिया गया है, ऐसा बताया गया। मैं समझता हूं कि यह सही अनुमान है। इतनी बारीकी में जाकर उन्होंने देखा कि किस वक्त लोगों की संख्या रेलवे में ज्यादा होती है और लोग कहां, किस प्रकार बैठते हैं, किस स्टेशन में जाना चाहिए और उस समय लोग क्या करते होंगे, थके-मांदे भी ऑफिस चले जाते हैं - इन सारी चीजों को ध्यान में रखना जरूरी है। इसीलिए आज यह जरूरत हो गई है कि एक तरफ जहां आतंक करने वाले नई टैक्नोलॉजी अपना रहे हैं, नए तरीकों को अपना रहे हैं, इस प्रकार काम कर रहे हैं जैसे कोई मलिटरी करती है, अगर उसका मुकाबला करना है तो हमें, हमारी पुलिस, हमारे नौजवानों और आर्मी के लोगों को उसी प्रकार विचार करना जरूरी है, यह बात सिद्ध हो रही है। हम ठहर नहीं सकते, हमें आगे बढ़ना चाहिए।

        दूसरी बात जो यहां उठाई गई, वह बिल्कुल सही है कि आज का आतंकवाद सिर्फ सरहद तक नहीं रहा, आतंकवाद हिंटर लैंड में, आंतरिक हिस्सों में भी फैल रहा है। हमने कोशिश की है और अपनी जमीन की सरहद पर बाड़ लगाई है। पाकिस्तान और हिन्दुस्तान की सरहद पर बंगलादेश और हिन्दुस्तान की सरहद पर बाड़ लगाई है।  दूसरे देशों की सरहद पर हमने बाड़ नहीं लगाई मगर हमारी पैरामलिट्री फोर्सेस जरूर उनको रोक रही है। यह बात आज सिद्ध हो रही है कि यह मामला उस इलाके तक नहीं रहा है जो इलाका बॉर्डर से लगा हुआ है मगर उससे अलग होकर बीच में अलग-अलग जगहों तक पहुंच रहा है। इसके लिए हमको तैयारी करने की जरूरत है। मगर वह कैसे पहुंच रहे हैं ?  बाड़ लगने की वजह से उधर से इधर आने वाले लोग नहीं आ सकते मगर समुद्र और आकाश के मार्ग से आने की कोशिश की जा रही है। कभी-कभी जब हम दोस्ती का हाथ बढ़ाते हैं और एक प्रकार का माहौल पैदा करने की कोशिश करते हैं, वह माहौल पैदा करना चाहिए, उसको हम रोकेंगे नहीं लेकिन हम उनको आने भी नहीं देंगे। परन्तु कभी-कभी उसका असर भी हमें वहां नजर आता है। इसको ध्यान में रखकर हमें आगे कदम उठाना है और हमने आगे कदम उठाया है। आज की सरकार ने इसके लिए जो कदम उठाये, वे निम्न प्रकार से हैं।समुद्र के किनारे पर सिक्योरिटी अरेन्जमैंट करने का हमने प्लान बनाया है। गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु का कुछ हिस्सा, नीचे का हिस्सा आदि सब कोस्टल लाइन पर हम सिक्योरिटी मजबूत करने के लिए कदम उठा रहे हैं जिसके तहत  उन जगहों पर नये पुलिस थाने ऐस्टेबलिश्ड किये जायेंगे। सभी स्टेट सरकारों को कहा गया है कि आप इसके लिए पुलिस रिक्रूट करके ट्रेंड कीजिए और उसका उपयोग कीजिए। उसके बाद समुद्र के रास्ते से जो लोग आ रहे हैं, उसके लिए उनको फास्ट बोट्स दी जा रही हैं। डिफेंस मनिस्ट्री को भी कहा गया है। डिफेंस मनिस्ट्री से कोस्ट लाइन के लोग हैं, वे उनकी मदद करते हैं। नेवी के लोग भी उनकी मदद करते हैं। कोस्ट गार्ड के लोग और नेवी के लोग इस तरीके से काम कर रहे हैं। जब बीच में वे लोग अंदर आयेंगे तो वे क्या-क्या करने वाले हैं, उसका अनुमान और एंटीसिपेशन करके भी हमको तैयारी रखनी बहुत जरूरी है। हमने तैयारी भी की है। हमें वह मालूम है।

कभी-कभी ऐसा होता है कि कुछ चीजें हमको न्यूज पेपर्स, मैगजीन्स या मीडिया में देखने, सुनने को मिलती है। एक मीडिया में एक बात आती है तो दूसरे मीडिया में दूसरी बात आती है। इसी तरह एक आफिसर के मुंह से एक बात निकली, ऐसा कहा जाता है और कभी-कभी तो एक मंत्री के मुंह से एक बात निकली, ऐसा भी कहा जाता है। इसके बाद कहा जाता है कि इन दोनों में कंट्राडिक्शन है। मेरी सदन के सभी सदस्यों और बाहर के सारे भाई बहनों से विनती है कि न्यूजपेपर्स में जो आता है, वह गवर्नमैंट का कोई नोटीफिकेशन नहीं है। उन्होंने जो समझा, उसे वह उसी तरीके से देख रहे हैं। उनमें कुछ गलतियां भी हो सकती हैं। इसको ध्यान में रखना चाहिए। अब एक न्यूजपेपर में क्या आ गया और एक के मुंह से क्या निकला, उसको ध्यान में रखते हुए हम औथेंटिकली गजट या औथेंटिक स्टेटमैंट करते हैं, उसमें कहीं कंट्राडिक्शन है, तो वह बताने की जरूरत है।

प्रधान मंत्री जी की तरफ से, डिफेंस मनिस्टर की तरफ से, होम मनिस्टर की तरफ से, दूसरे हमारे किसी मंत्री की तरफ से या किसी अधिकारी की तरफ से कोई ऐसा स्टेटमैंट आ रहा है जो कंट्राडिक्टरी है, तो उसे आप हमें बतायें। वह हम मानने के लिए तैयार हैं। मगर कहीं छपकर आ गया और हमारे सामने आप वह छापा रखकर पूछने लगे कि तुमने ऐसा कैसे बोला या उन्होंने ऐसा कमेंट क्यों किया, तो वह मत कीजिए। वह उनकी तरफ से आयी हुई बात है। वह बात गलत भी हो सकती है। उनमें कोई दुर्भावना नहीं हो सकती। यह गलती से भी हो सकता है। मैं उनको दोष नहीं दे सकूंगा मगर हमारी यह कोशिश होनी चाहिए कजो आ रहा है, वह औथेंटिक आया है या नहीं, यह समझ करनी जरूरी है।

यहां पर पोटा की बात की गयी। जैसा आडवाणी जी ने कहा कि उन्होंने मेरे पास आकर कहा था कि देखिये, आतंकवाद को रोकना है, तो पोटा जैसा कानून होना जरूरी है इसलिए आप इसे लगाइये। मैं इस सदन का सदस्य बहुत दिनों से हूं। जब टाडा पर चर्चा हुई थी तब हम उस तरफ बैठकर चर्चा कर रहे थे। टाडा निकालने के लिए जो लोग कहने वाले हैं, वही पोटा लगाने के लिए कदम उठाते हुए हमें नजर आये ।जिन्होंने कहा कि टाडा को निकालिए, उन्होंने ही कहा कि पोटा लाइए और पोटा आ गया। पोटा आने के बाद हमने कहा अगर टाडा को निकाल दिया तो पोटा की भी जरूरत नहीं है। बात ऐसी है कि हमारे जो दूसरे कानून हैं अगर उनको हम सही ढंग से उपयोग में लाएं तो हम जो काम पोटा या टाडा की मदद से कर सकते थे, वह काम कर सकते हैं। मैं पोटा के सम्बन्ध में यह कहना चाहूंगा कि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर कुछ निर्णय हुए हैं, यूनाइटेड नेशन्स में निर्णय हुए हैं कि हम लोगों को आतंकवाद से निपटने के लिए नए कानून बनाने चाहिए। कुछ एम्बेसडर्स और बाहरी देशों के प्रतनधि आकर मुझसे पूछने लगे कि आपके यहां आतंकवाद है, तो फिर आपने पोटा को क्यों निकाल दिया? मैंने उन्हें पोटा को निकालने का कारण बताया कि पोटा में जो प्रॉविजन्स थे जिनका उपयोग आतंकवाद को रोकने के लिए हो सकता था, उस तरह के प्रॉविजन्स हमने अनलॉफुल एक्टीविटीज प्रिवेन्शन एक्ट में शामिल किए हैं और उसके बाद ही पोटा को निकाला है। पोटा में जो सबसे महत्वपूर्ण बात थी, जिसकी यहां बैठे सभी लोगों को जानकारी भी है, कि पोटा में जो प्रॉविजन्स थे, उनके दुरूपयोग भी हुए हैं। …( व्यवधान) 

MR. SPEAKER: No, he is not yielding.

… (Interruptions)

श्री शिवराज वि. पाटील : उस दुरूपयोग को दूर करने के लिए आपकी तरफ से पोटा को अमेंड भी किया गया और इसके बाद भी अगर हम पोटा की सिफारिश करेंगे और यह समझकर करेंगे कि इसे हमने बनाया है इसलिए इसे रहना ही चाहिए तो यह दुरूस्त बात नहीं होगी। हमारे डिफेन्स मनिस्टर साहब ने एक बात कही थी जो न्युजपेपर्स में भी सामने आयी थी, वह बात मुझे बहुत अच्छी लगी। उन्होंने कहा था कि हम आतंकवाद का मुकाबला अवश्य करेंगे लेकिन हयुमन राइट्स का वायलेशन करते हुए ऐसा नहीं करेंगे।हमें दोनों चीजों को मिलाकर चलना है और अगर पोटा का उपयोग हयुमन राइट्स के वायलेशन के लिए होता है तो उसके लिए हमें देखना होगा।…( व्यवधान) 

MR. SPEAKER: Shri L. K. Advani has a right to reply.

… (Interruptions)

MR. SPEAKER: Nothing will be recorded expect the speech of the Home Minister.  

(Interruptions) …* श्री शिवराज वि. पाटील : पोटा के अन्दर ऐसी कौन सी चीज है जिस पर आक्षेप किया गया है, अब मैं उसके बारे में बताना चाहूंगा। पोटा में अगर कोई प्रॉविजन आक्षेपार्य है तो वह यह है कि the onus of proof shall shift from the prosecution to the defence. पोटा में कहा गया है कि एक बात सामने आने के बाद उस व्यक्ति को जिसे "एक्युज्ड " के रूप में कोर्ट के सामने लाया जाता है, उसे यह सिद्ध करना होगा कि वह निर्दोष है।…( व्यवधान)   मैं अपने उन भाइयों को, जो यह बोल रहे हैं कि ऐसा ही है, यह बताना चाहूंगा कि इण्डियन क्रमिनल जूरिसप्रूडेंस में यह बात मान्य नहीं है।…( व्यवधान) 

MR. SPEAKER: Shri Tripathy, nothing is being recorded except the speech of the Home Minister.

(Interruptions) …* श्री शिवराज वि. पाटील : मैं किसी के खिलाफ नहीं बोल रहा हूँ। अगर किसी माननीय सदस्य को कुछ पूछना है तो बाद में पूछ लें, कृपया बीच में हस्तक्षेप न करें।

महोदय, मैं यह बता रहा था कि इण्डियन क्रमिनल जूरिसप्रूडेंस, ब्रटिश जूरिसप्रूडेंस या यूरोपियन जूरिसप्रूडेंस में…( व्यवधान) 

 

* Not Recorded.

MR. SPEAKER: You cannot interrupt an hon. Member or a Minister because you do not like him.   Then, nobody will listen to you. It will not depend on your liking.

… (Interruptions)

अध्यक्ष महोदय : ऐसा तो नहीं हो सकता है।

...( व्यवधान)

श्री शिवराज वि. पाटील : मैं कह रहा था कि पोटा में एक सबसे आक्षेपार्य बात थी lOnus of proof was shifting from the prosecution to the defence. … (Interruptions)जब यूनाइटेड नेशंस से आए हुए और दूसरे बाहर के लोगों को यह बात समझाई, तो उन्होंने कहा कि अगर ऐसा है तो हमें कोई आपत्ति नहीं है। यह तो हुई पोटा की बात। पोटा हो या मकोका हो या टाडा हो, ये जो कानून बने हैं, एक तर्क ऐसा दिया गया कि अगर वह कानून पूरी तरह काम में नहीं लाया जा रहा है तो क्या उस कानून को निकालना चाहिए। मैं पूछना चाहता हूं कि क्या पोटा की वजह से हम इन हादसों को रोक सके, दिल्ली में हुए हादसों को रोक सके या अक्षरधाम में हुए हादसों को रोक सके, मेरा मानना है कि नहीं रोक सके। POTA is not a complete seal.  POTA is not really protecting everything.  Let us understand… (Interruptions)

MR. SPEAKER: Very well, then I will call Advaniji.  You do not want to hear him. आप अगर गृह मंत्री जी का जवाब नहीं सुनना चाहते हैं तो मैं फिर आडवाणी जी को बुलाता हूं। आप मेहरबानी करके गृह मंत्री जी की बात तो सुनें।

…( व्यवधान)

MR. SPEAKER: You cannot go on like this.

… (Interruptions)

श्री शिवराज वि. पाटील : पोटा के बारे में जो तर्क दिया गया है, वह बड़ा इंजैन्यूस था। मैं मन ही मन में उसकी तारीफ कर रहा था। हमारे इंडियन पैनल कोड में सेक्शन ३०२ है। अगर उसकी वजह से हत्या का अपराध खत्म न हो तो क्या हम सेक्शन ३०२ को इंडियन पैनल कोड से निकाल देंगे, यह तर्क दिया गया। मगर यह बात भी सही है कि कुछ जगहों पर कुछ गुनाहों के लिए मृत्यु दंड दिया गया है, मगर हम उन गुनाहों के लिए यह देने के लिए तैयार नहीं हैं। हम कह रहे हैं कि मृत्यु दंड उसमें नहीं देंगे, आजीवन कारावास का दंड भी नहीं देंगे, हम तो दस साल का दंड देकर समाधान करने की बात कह रहे हैं। हमारा मानना है कि क्राइम न बढ़े और गलत आदमी को गलत शिक्षा न मिले। हमारे नेता, हमारी पार्टी और हम लोगों का खयाल है कि पोटा का जितना उपयोग हुआ, उससे ज्यादा दुरुपयोग हुआ। इसलिए हमने पोटा निकाला है, यह बात सही है।

आप जो बात कह रहे हैं उस पर हम आक्षेप नहीं कर रहे हैं। इसके बाद मकोका की बात हुई। महाराष्ट्र में यह कानून है, उसके बावजूद भी हम आतंकवाद नहीं रोक सके। कर्नाटक में भी ऐसा कानून है, लेकिन फिर भी हम नहीं रोक सके। हम उन्हें यह कानून निकालने के लिए नहीं कह रहे हैं, लेकिन पोटा और मकोका जैसे कानूनों पर लोगों को आपत्ति है। आतंकवाद के बारे में मैंने जो बात आपके सामने रखी है, शायद आप उसे समझ सकते हैं।…( व्यवधान) 

MR. SPEAKER: Please, such an important debate is going on, डिबेट का जवाब तो सुन लें।

श्री चंद्रकांत खैरे : वह सीरियसली नहीं ले रहे हैं।

अध्यक्ष महोदय : अगर आपको लगता है कि वह सीरियसली नहीं ले रहे हैं और आपको सुनना अच्छा नहीं लगता, तो बाहर चले जाएं।

श्री विजयेन्द्र पाल सिंह (भीलवाड़ा) : इससे तो आतंकवादी बहुत खुश हो रहे होंगे।…( व्यवधान) 

प्रो. रासा सिंह रावत (अजमेर) : इस तरह की भाषा बोलने से तो आतंकवाद खत्म नहीं होगा।…( व्यवधान) 

MR. SPEAKER: Very well, I think, I will request the hon. Leader of Opposition to reply.

… (Interruptions)

MR. SPEAKER: I am very sorry.

… (Interruptions)

MR. SPEAKER: Hon. Members, I know this is an important debate.  There are strong feelings because so many innocent lives have been lost, so many incident of terrorism have occurred.  I am saying that everyone is concerned.  Maybe you have some perception and the hon. Minister has certain perception, but he has a right to reply.  The country is entitled to know. You have a very eminent mover of this motion, who will have an opportunity to reply.  Therefore, kindly allow this.  It does not look nice[Rs42] .

श्री शिवराज वि. पाटील : अब मैं दूसरे मुद्दों पर आ रहा हूं। कुछ मुद्दे स्टेटिस्टिक्स से संबंधित हैं। कुछ स्टेटिस्टिक्स माननीय आडवाणी जी ने दिये हैं, उनको मैं गलत नहीं कह रहा हूं लेकिन दूसरी स्टेटिस्टिक्स के साथ तुलना करने पर हम उनका अंदाजा लगा सकते हैं। केवल स्टेटिस्टिक्स के मुद्दे से कोई बात गलत है या सही है, बोलना दुरुस्त नहीं है। इसी तरह से भावनाओं पर भी बोलना सही नहीं है। क्या सही है क्या गलत है स्टेटिस्टिक्स और भावनाएं दोनों का हिसाब करें तो बात कर सकते हैं। आतंकवाद का स्टेटिस्टिक्स जम्मू-कश्मीर, नगालैंड, असम या नक्सलाइट एरिया का स्टेटिस्टिक्स लखित रूप में हमने सेशन से पहले दिया था। इस समय भी हम अलग से देंगे और इसका अंदाजा आप लगाइये कि आज स्थिति सुधरी है या बिगड़ी है। आप अंदाजा लगाइये, हम उसकी यहां चर्चा नहीं करेंगे। …( व्यवधान) 

प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : स्थिति बिगड़ी है तथा और बिगड़ेगी। …( व्यवधान) 

MR. SPEAKER: If you keep on disturbing like this, I will request him to take his seat. If you are not prepared to listen to the Home Minister of India, then I am sorry.

श्री शिवराज वि. पाटील : एक बात अपनी सरकार की ओर से मैं और कहना चाहता हूं। हमारे देश के बहुसंख्यक लोगों के मन में जो बात है वह मैं सदन में रखना चाहता हूं। कुछ भाइयों को वह बात शायद पसंद न आये। हम समझते हैं कि किसी एक धर्म के या एक कम्युनिटी के लोग ही आतंकवादी है यह बात हमारी सरकार नहीं मानती है। …( व्यवधान)   इसमें कौन-कौन दोषी हैं, अगर हम आंख और कान खोलकर देखें तो पता चलेगा। …( व्यवधान) 

MR. SPEAKER: When your hon. Leader of Opposition was speaking, there were interruptions and you rightly protested.  I tried to control them.  Now, you are following the same thing.  We must respect each other.  The hon. Leader of Opposition is entitled to full respect and similarly the Home Minister is also entitled to full respect like all other leaders.

श्री शिवराज वि. पाटील : हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि जो आतंकवाद फैलाने वाले लोग हैं, उनको न धर्म का मालूम है और न किसी अच्छी भावना का मालूम है। वे लोग केवल एक धर्म के हैं ऐसा बतलाकर उस धर्म के लोगों पर आक्षेप करना गलत होगा। ऐसा करने से हमारी गति पर और मूल कारण पर असर आयेगा। …( व्यवधान)   अब मैं दूसरी बात पर आता हूं। जब यह परिस्थिति है तो इसमें हमारी सरकार क्या करना चाहती है। इस पर भी हमारे बहुत सारे भाइयों ने कहा कि आप बताइये कि अब आप क्या करना चाहते हैं। खुशी की बात है कि जितने भी सदस्य यहां पर बोले, उन्होंने अपने भाषणों में ऐसे मुद्दे बताए हैं जिनपर चर्चा करना जरुरी है। उनको हम जरुर अपनाएंगे और अमल में लाएंगे। एक बड़ी दर्दनाक घटना हुई है और जब ऐसी घटनाएं होती हैं तो देखा जाता है कि लोग एकजुट हो जाते हैं और उससे देश की ताकत बढ़ती है ।इसी को ध्यान में रखते हुए सरहद और हिंटर लैंड में छोटे शहरों और बड़े शहरों में, हर एक प्रांत में जितनी भी वजिलैंस बढ़ा सकते हैं, उसे बढ़ाने की कोशिश करते हैं। मैं ज्यादा विस्तार में नहीं जाना चाहता हूं, क्योंकि इस बात पर कई घंटे बोला जा सकता है।

दूसरी बात यह है कि हम पुलिस की शक्ति को बढ़ाना चाहते हैं। हमारी जो फोर्सिस हैं, उन्हें बढ़ाना चाहते हैं। हमारी केंद्र और प्रांत की पुलिस है तथा दूसरे ऐसे दल और बल हैं, उन्हें हम बढ़ाना चाहते हैं। कई माननीय सदस्य पूछ रहे हैं कि हम केंद्र की पुलिस कितनी बढ़ाना चाहते हैं। मैं अलग-अलग फोर्स के बारे में नहीं कह रहा हूं जैसे सीआईएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी कितनी बढ़ेगी, लेकिन सारी फोर्सिस के लिए मैं सदन को बताना चाहता हूं कि तीन सौ बटालियंस हम बढ़ाने जा रहे हैं। हम राज्य सरकार को भी कह रहे हैं कि वह भी अपनी पुलिस को बढ़ाए। हमारी जनसंख्या एक सौ करोड़ से भी ज्यादा हो गई है, लेकिन पुलिस की संख्या उस हिसाब से नहीं बढ़ी है। दुनिया में जो स्टेटिसटिक्स हैं, जो पुलिस पापुलेशन का रेशो है, उसके हिसाब से हमारे पास ऐसा रेशो हैं, जिसकी मदद से आसानी से इस काम को अंजाम देना मुश्किल हो जाता है। रशिया के अंदर पुलिस पापुलेशन का रेशो १:८२ है तो हमारे पास पुलिस पापुलेशन का रेशो १:७२८ है। हमारे यहां ७२८ लोगों पर एक पुलिस वाला और रशिया में ८२ लोगों पर एक पुलिस वाला है। इसलिए हम राज्य सरकार को कहने जा रहे हैं कि आप भी अपनी संख्या बढ़ाएं और हम भी तीन सौ बटालियन की संख्या बढ़ाने जा रहे हैं।

तीसरी चीज यह है कि हम कोस्टल लाइन को मजबूत करने जा रहे हैं। अभी मैंने बताया था कि कोस्टल लाइन पर हम कोस्टल पुलिस बढ़ाने जा रहे हैं जो वहां पर कोस्ट गाड्र्स की मदद करेगी। उसके बाद हमारा मार्डनाइजेशन का जो प्लान है, उसमें हम अलग किस्म के मोटर वेहिकल्स देंगे, अलग किस्म के कम्यूनिकेशन के इक्विपमेंट्स देंगे, अलग किस्म की इंटेलीजेंस कलेक्ट करने की मशीनें देंगे और इन सुविधाओं से पुलिस को बढ़ाएंगे। इससे ज्यादा महत्वपूर्ण और कोई बात नहीं हो सकती है। शायद हमारी एकता इतनी ताकत वाली हो सकती है, मगर इंटेलीजेंस के अलावा आतंकवाद का मुकाबला करने की और कोई दवा हमारे पास नहीं है। हमारी जो इंटेलीजेंस है, वह नेशनल लेवल पर डिफेंस इंटेलीजेंस, रॉ और आईबी की तरफ से कलेक्ट की जाती है और स्टेट को दी जाती है। मगर स्टेट में जो इंटेलीजेंस एजेंसियां हैं, वे पहले जैसी थीं, शायद उससे भी ज्यादा कमजोर हो गई हैं। इसका कारण यह है कि जो पुलिस इंटेलीजेंस कलेक्ट करती थी, वह शायद उतना नहीं कर रही है और गांव का कोतवाल जो इंटेलीजेंस कलेक्ट करता था, वह भी उतना काम नहीं हो रहा है। उनकी जो स्पेशल ब्रांचेज हैं, उसमें जिन लोगों को भेजा जाता है, वे समझते हैं कि यह उनकी पनिशमेंट पोस्िंटग है और वह भी ध्यान नहीं देते। उनकी संख्या भी कम है और उनके यंत्र भी कम हैं। हम उन्हें कह रहे हैं कि कृपा करके स्टेट वजिलेंस को मजबूत बनाएं, डिस्टि्रक्ट वजिलेंस को मजबूत बनाएं, तालुका इंटेलीजेंस को मजबूत बनाएं। हम विलेज इंटेलीजेंस कैसे कलेक्ट कर सकते हैं, इस बारे में भी नए-नए ख्याल हैं। मैं डिटेल में नहीं जाना चाहता हूं क्योंकि डिटेल में जाने पर एक-दो घंटे बोलना पड़ेगा, उसका कोई फायदा नहीं है। केंद्र और राज्य में कोओपरेशन होना चाहिए, यह अच्छी बात है और कोओपरेशन राज्य और केंद्र में कैसा होना चाहिए, यह मैं बताना चाहता हूं। सबसे पहली बात यह है कि हर साल चीफ मनिस्टर्स की बैठक होती है। उसमें प्रधानमंत्री आते हैं और दूसरे मनिस्टर्स भी होते हैं। उनके साथ कुछ चर्चा होती है[i43] ।

             दूसरी बात हो रही है कि होम मनिस्टर की तरफ से जो रीजनल बॉडीज, रीजनल कमेटियां होती हैं, उसके अन्दर बैठ कर वहां के मुख्यमंत्री के साथ चर्चा की जाती है - नॉर्दन, ईस्टर्न, सदर्न, वैस्टन जैसी पांच रीजनल बॉडीज है, उनमें चर्चा होती है। होम सैक्रटरी तीन महीने में सारे चीफ सैक्रेटरीज और डीआईजी को बुला कर चर्चा करते हैं। स्पैशल सैक्रेटरी हर प्रान्त के डीआईजी और होम सैक्रेटरी के साथ चर्चा करते हैं। इस प्रकार कोआपरेशन का काम हो रहा है। इसके सिवाय कुछ और भी करना जरूरी है। आपने जो सुझाव दिए हैं, हम उस पर सोचेंगे और बाद में सुझाव देंगे उन पर भी विचार करेंगे।

तीसरी बात प्लान की है। अगर टैरारिज्म एक्टिविटीज को कंट्रोल करना है, आतंकवाद को कंट्रोल करना है, एक तरीका यह है कि हम फोर्सिज की मदद से कंट्रोल करें और दूसरा इकोनॉमिक डैवलपमैंट करके करें और तीसरा लोगों के मन में जो गलतफहमियां हैं उन्हें दूर करें। इसके लिए मीडिया की मदद ली जा सकती है। मुझे बहुत खुशी है कि मुम्बई में जो हुआ उसमें मीडिया के लोगों ने इतनी मदद की, मैं समझता हूं कि शांति बनाए रखने में बहुत बहुत बड़ा योगदान है। इकोनॉमिक ऐस्पैक्ट्स के बारे में प्लानिंग कमीशन में खास कमेटी बनायी गई और हर स्टेट के टैरारिस्ट इफैक्टिड डिस्टि्रक्ट्स में किस प्रकार के इकोनॉमिक डेवलपमैंट्स होने चाहिए वह देखने की जरूरत है। हम यहां से उनकी खास तौर पर मदद कर रहे हैं। उनको पैसा दिया जाता है, प्लान का भी पैसा दिया जाता है और हर साल विकास के लिए ३५ करोड़ रुपया ज्यादा दिया जाता है। हम इंटरनेशनल कोआपरेशन के लिए भी काम करने जा रहे हैं। हमने इसमें एक्स्ट्राडिशन ट्रीटी की है, लीगल असिस्टैंस ट्रीटी की है। जहां इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंसेज होती हैं वहां जाकर जो तीन चीजें कही जाती हैं, मैं उसे बताना चाहता हूं - इंटरनेशनल कोआपरेशन टैरारिज्म के खिलाफ होना चाहिए। पहला काम यह है कि कोई रिफ्यूजी अगरनिकल कर कोई सेफ जगह चाहता है तो वह उसे नहीं मिलना चाहिए और पैसों को मिलने से रोकना चाहिए लेकिन इसके बारे में इंटरनेशनली कोई कनकरेंस नहीं है। उन्हें हथियार आसानी से बिना लाइसेंस के बड़े पैमाने में नहीं बेचने चाहिए लेकिन इसके ऊपर कोई कनसैंसस नहीं हो रहा है जबकि बाकी चीजों पर हो रहा है।

आडवाणी जी ने ठीक कहा क यह काम केवल सरकार का नहीं है। इसके लिए लोगों की मदद की भी जरूरत है। वह काम होना चाहिए। People, political parties, Governments, non-governmental organisations and individuals have to co-operate.  If they do not co-operate, this task is going to be quite difficult. मैं सरकार के दूसरे साथियों के साथ चर्चा करते समय कहता हूं कि एक चीज जो आज के दिन नजर आ रही है वह यह है कि हमने बहुत सही तरीके से इकोनॉमिक डेवलपमैंट पर ध्यान जरूर दिया है लेकिन उसमें कोई कमी नहीं आनी चाहिए। इकोनॉमिक डेवलपमैंट के लिए जितना पैसा देना है वह देना ही है लेकिन वक्त आ गया है कि सिक्योरिटी एपरेटस को ज्यादा मजबूत करने के लिए अधिक ध्यान दें। इसलिए ज्यादा पैसा देने की भी जरूरत है। गहराई से प्लान बनाने की भी जरूरत है, नई टैक्नॉलोजी इस्तेमाल करने की जरूरत है। मैंने यह बात स्टेट्स के मुख्यमंत्रियों और दूसरे साथियों के साथ चर्चा में की है। उनको रिकवैस्ट करके कहा है कि आज तक जितना पैसा पुलिस के लिए देते हैं, उससे ज्यादा पैसा दे दें। फैडरल काइंड और फैडरल फोर्सिज की कल्पना बार-बार होती है और गायब होती है। फैडरल काइंड भी है और फैडरल फोर्सिज भी है मगर उस फैडरल फोर्स को स्टेट में जाने की कानूनन इजाजत नहीं है[R44] । इस बारे में क्या कर सकते हैं। मैं यहां पर नहीं बोलूंगा, आप सब लोग जैसा बोलेंगे, वैसा हम करेंगे। कुछ लोगों का कहना है कि यह होना चाहिए और कुछ लोगों का कहना है कि यह नहीं होना चाहिए। जिन लोगों का कहना है कि यह नहीं होना चाहिए, उनके विचार हम बिल्कुल ब्रश असाइड करके इस बात पर कुछ नहीं कहना चाहेंगे।

अध्यक्ष महोदय, रेलवे की जो बात है, रेल मंत्री जी, जो हमारे साथी हैं, उन्होंने रेलवे में आजकल जो कदम उठाये हैं, वे बहुत अच्छे हैं। उन्होंने एक कमेटी बनाई, जिसकी रिपोर्ट आ गई है और रेलवे पुलिस को स्ट्रैन्थन करने की बात हो रही है। कुमारी ममता बनर्जी ने कोलकाता मैट्रो रेल की बात कही। …( व्यवधान)  हमने दिल्ली मैट्रो रेल को जो सिक्युरिटी देनी है, उसका हमने प्लान बनाया है और वैस्ट बंगाल के मुख्य मंत्री ने मेरे साथ चर्चा की है। उन्होंने कहा है कि आप इसमें हमारी मदद कीजिए। हमने उन्हें कहा है कि हम पूरी तरह से आपकी मदद करेंगे। पहली मदद हम यह करेंगे कि हमारा जो प्लान है, उसे हम उन्हें दे देंगे। दूसरी बात हमने कही कि आप हमसे जो मदद चाहते हैं, हम उस पर विचार करके आपकी मदद करेंगे। तीसरी मदद के रूप में हमने उनसे कहा है कि हम आपको सी.आई.एस.एफ. दे सकते हैं, लेकिन सी.आई.एस.एफ. की हमारे पास बहुत ज्यादा डिमांड है। तब भी हम आपकी इस बारे में मदद करेंगे।

आखिर में मैं एक बात कहना चाहता हूं कि यदि प्रणव मुखर्जी साहब यहां बोलते तो वह बताते, लेकिन उन्होंने मुझे वह बात बोलने के लिए कहा है। ऐसा कहा गया है कि लश्करे तोइबा के कुछ पर्सन्स इंडियन एयरफोर्स में घुस आये हैं, ऐसी न्यूज आई है। लेकिन इसकी जानकारी करने के बाद हम इस कंक्लूजन पर आये हैं कि यह न्यूज सही नहीं है।

प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : आपके सिक्युरिटी एडवाइजर ने जो बात कही है, उन्होंने जो पत्र लिखा है, Please tell us this is very important.

श्री रघुनाथ झा : हमारे बिहार का पूरा बॉर्डर खुला हुआ है। बिहार से लगा हुआ नेपाल का जो बॉर्डर है, वहां से आई.एस.आई. के लोग तथा आतंकवादी हथियार तथा फेक करेन्सी लेकर बिहार में आते हैं, उन्हें रोकने के लिए आपने क्या किया है?  आप बिहार की इस समस्या के बारे में भी सोचिये और फोर्स वहां पर लगाइये, ताकि बिहार के बॉर्डर की रक्षा हो सके। …( व्यवधान) 

अध्यक्ष महोदय : बिना इजाजत लिये बोलने की सब लीडर्स को आदत हो गई है।

THE MINISTER OF DEFENCE (SHRI PRANAB MUKHERJEE): Mr. Advani, while making his observation, referred to the communication issued by the NSA to the Chief Secretary, and along with that letter an annexure was there. The annexure was of August last year. That annexure was the report of the National Security Council. That report was sent for the background material for the consideration of the security agencies and the security authorities of the States. In that report, a reference was made that some Lashkhar-e-Toiba persons, two such persons, got jobs in the Indian Air Force. After this information was being made available to us last year, immediately the investigation process started. The services of IB and all other intelligence agencies were requisitioned. The Indian Air Force also scrutinized all the evidences and it was found that this suspicion is not based on facts. Thank you.

श्री शिवराज वि. पाटील : बिहार बॉर्डर के बारे में हमारे एक साथी ने प्रश्न उठाया है…( व्यवधान) 

MR. SPEAKER: No interruptions. This is very unfair.

श्री शिवराज वि. पाटील : मैं बताना चाहता हूं कि इस बॉर्डर के ऊपर जो एस.एस.बी. फोर्स है, उसे बढ़ाकर हम २२ बटालियन करने जा रहे हैं। दूसरे बिहार के अंदर जो हमारी सी.आर.पी.एफ. की बटालियंस हैं, उन्हें हम उस बॉर्डर के ऊपर करने जा रहे हैं। हमने उन्हें बता दिया है कि यह हम करेंगे। जहां तक मुम्बई का सवाल है, किसी ने पूछा है कि मुम्बई के लिए क्या कर रहे हैं, हमने उन्हें कहा है कि मुम्बई की रक्षा के लिए आप जो प्लान बनाना चाहते हैं, शॉर्ट टर्म, मीडियम टर्म और लांग टर्म प्लान आप बनाइये और दिल्ली के बारे में जो प्लान बन रहा है, उससे आप उसकी तुलना कीजिए और दूसरे शहरों के बारे में जो प्लान्स बन रहे हैं, उनसे भी उसकी तुलना कीजिए । मेगा सिटी पुलिसिंग का जो प्लान है, वह आप देखिए। उसके अंदर हम जितनी मदद कर सकते हैं, जरूर करेंगे। मैं इससे ज्यादा नहीं बोलते हुए इतना कहूंगा कि हम अगर यूनाईटेड रहें, हमारे पास इंटेलीजेंस वक्त से पहुंचे तो जो काम करना है, हम सब लोग मिलकर करेंगे और सही ढंग से अगर सोचकर करेंगे तो यह जो लो इंटेंसिटी वॉर चल रहा है, जो अभी कुछ दिन तक चलता रहेगा, ऐसा लग रहा है, उसका मुकाबला हम जरूर कर सकेंगे। उसका मुकाबला पूरी तरह से करके कहीं कुछ भी होगा, हम कर सकेंगे, ऐसा बोलना गलत होगा मगर जो हो रहा है, उसे हम जरूर कम कर सकते हैं, उसके ऊपर काबू पा सकते हैं। लेकिन पुलिस फोर्सेज को डीमोरेलाइज नहीं करना है। अब जो गलतियां हो गईं, उनका इलाज किया जा सकता है मगर जो उन्होंने काम किया है, जितना बलिदान किया है, उसका आदर करते हुए अगर हम काम करेंगे तो यह कर सकेंगे, ऐसा मेरा मानना है।

 

श्री सुग्रीव सिंह (फूलबनी) : अध्यक्ष महोदय, मेरा एक सुझाव है।…( व्यवधान) 

MR. SPEAKER : Please do not disturb him.

… (Interruptions)

श्री मोहन रावले (मुम्बई दक्षिण-मध्य): मेरा एक ही सवाल है कि आर. डी. एक्स. कहां से आया ? जब मालेगांव से उसे पकड़ा था और सेन्ट्रल गवर्नमेंट को इसकी सूचना दे दी गई थी तो क्या यह महाराष्ट्र सरकार का फेलियर नहीं हुआ ?…( व्यवधान) 

अध्यक्ष महोदय : सुन लिया है, नोट कर लिया है।

…( व्यवधान)

MR. SPEAKER : I cannot force him to reply.

… (Interruptions)

SHRI BRAJA KISHORE TRIPATHY : Sir, I have a point of order.

MR. SPEAKER : There is no point of order.

SHRI BRAJA KISHORE TRIPATHY  : I want to seek a clarification.

MR. SPEAKER : No clarification.

 

श्री लाल कृष्ण आडवाणी (गांधीनगर) : अध्यक्ष महोदय, आज की बहस में जितने भाषण हुए, वे सब मैंनें सुने। यद्यपि मैं पूरी देर तक सदन में नहीं बैठा था लेकिन मैंने पूरे भाषण सुने और मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि जो आशंका कुछ सदस्यों ने, जो मेरे भाषण की आलोचना भी कर रहे थे, उन्होंने व्यक्त की, वह आशंका सही नहीं निकली। आज कोई भी जो ये भाषण सुनेगा, जो हमारे थे, तो उसमें दो-एक लोगों को छोड़कर जिनका मैं नाम नहीं लेना चाहता हूं, बाकी सबने लगभग एक स्वर से आतंकवाद की निंदा की है। उसमें कोई मतभेद नहीं था। मैंने कहा कि दो-एक लोगों की बात मैं नहीं करूंगा क्योंकि वे आतंकवाद की निंदा नहीं कर रहे थे, वे हमारी निंदा कर रहे थे।…( व्यवधान)   उनको छोड़ दीजिए।मुझे ऐसा नहीं लगता हैकि यह स्थगन प्रस्ताव हाउस को डिवाइड करता है। There is nothing to divide the House. An Adjournment Motion is never intended to divide the House. An Adjournment Motion is intended to point out that what we, in the Opposition, feel this is not adequate. You may feel, it is adequate.

            I have so many quotations including that of the hon. Prime Minister which say that our response is not adequate at the moment. I have Shri R.R. Patil saying that “It is not just the State Intelligence Department and the elite Anti-Terrorist Squad, ATS that failed but even the Intelligence Bureau at the Centre had no inkling”. This is what Shri R.R. Patil, Deputy Chief Minister of Maharashtra himself said this does not mean that he is dividing the country. This does not mean that. Therefore, when everyone talked in that vein that  स्थगन प्रस्ताव लाना यह हाउस को डिवाइड करना है। मेरा मानना है कि हाउस को डिवाइड इस नाते करना है कि आज जो हम आतंकवाद का मुकाबला कर रहे हैं, उसके लिए क्या आज की जो हमारी इंटेलीजेंस व्यवस्था है, आज की जो हमारी लीगल मशीनरी है, वह पर्याप्त है कि नहीं है, उसमें दो मत हो सकते हैं तभी तो डैमोक्रेसी चलती है। हमारा मत है कि लीगल मशीनरी एडीक्वेट नहीं है। मैं इसमें नहीं जाता। आपको यह कहने का अधिकार है कि ‘पोटा’ को हमने अनलॉफुल एक्टिविटीज एक्ट में प्रोवीजन डालकर हमने कवर कर लिय। यह बात अगर सब लोग जानते हैं तो फिर ‘पोटा’ का विरोध करने का कोई अर्थ ही नहीं है क्योंक‘पोटा’ को हमने अनलॉफुल एक्टिविटीज एक्ट में डाल दिय्ÉÉ[R45] ।

 

मैं मानता हूं कि पोटा में जो प्रोविजन था जो दूसरे किसी कानून में नहीं है, वह यह क विदेशोंसे इऩ संस्थाओं को जो धन प्राप्त होता है उसको रोकने की पोटा को छोड़कर कहीं और व्यवस्था नहीं है। जम्मू कश्मीर में इसका अनुभव हमें लगातार हुआ है।

मैं एक बात जरूर कहना चाहूंगा क्योंकि प्रधानमंत्री यहां पर बैठे हैं। प्रधान मंत्री के वक्तव्य के बाद ही पाकिस्तान की प्रतक्रिया हुई। उनके वक्तव्य के बाद उन्होंने साफ-साफ कहा और मुम्बई में जाकर प्रैस कॉनफ्रैन्स में कहा कि :

“We are certain that these terror modules - जिन्होंने वह कुकर्म किया है - are instigated, inspired and supported by elements across the border, without which they cannot act with such devastating effect. ”   मैं पूरी देर तक शिवराजजी का भाषण सुन रहा था। वे सरकार की तरफ से उत्तर दे रहे थे। उन्होंने एक शब्द नहीं कहा जिसमें से इसकी ध्वनि निकलती हो। …( व्यवधान) 
SHRI SHIVRAJ V. PATIL : If you do not mind, I will just say something. I would like to say that we have certain information which is not in the interest of the investigation to discuss at this point of time and which does not contradict what the hon. Prime Minister has said.
SHRI L.K. ADVANI : You have said it already, which you should have said even in your speech.
SHRI SHIVRAJ V. PATIL: I did not want to prolong that kind of discussion.
SHRI L.K. ADVANI : I know the initial response and I did not quote it except saying that there was a difference between what the Prime Minister says and what the Home Minister says and therefore, the Home Minister’s statement was welcomed by friends in Pakistan because he says that it is those who want to … (Interruptions)
SHRI SHIVRAJ V. PATIL: Sometimes, to malign you, they criticise and praise you. … (Interruptions)
SHRI L.K. ADVANI : Those who want to abort the peace process, they will be happy and the terrorists will be happy that you have reacted to it by blaming Pakistan because this will abort the peace process. Something similar has been said by some people here. Now the Prime Minister himself says that ‘the attack on India’s economic powerhouse …’ He rightly describes Mumbai as India’s economic powerhouse. The attack on India’s economic powerhouse is now a roadblock in the bilateral peace process. It is not just cancellation of one meeting; it is a roadblock. I do not know what is the hereafter on this particular issue because this is something that the whole world will be looking forward to.
            Sir, you have rightly admitted that even though the IB at the Centre is well equipped - they do their jobs quite well – so is the RAW. I have been familiar with it, but the situation in the States is not that happy. It may vary from State to State. Even in a State like Maharashtra, I have already quoted the Deputy Chief Minister of the State saying that it is not adequate.
            Of course, I have with me an article written in the Frontline by Shri Praveen Swami who has been writing exceedingly well on this problem of terrorism. He writes :
“Despite the charge of intelligence failure, there has rarely been a terrorist outrage so predictable – indeed, in fairness to the covert services, meaning IB and RAW, predicted so precisely. In late April, the Intelligence Bureau (I.B.) learned that a major consignment of arms had entered Maharashtra through India’s western coast. Late on May 9, the Maharashtra Police recovered a part of that consignment – over 24 kilograms of Research Development Explosive (RDX) packed in computer cases, along with 11 AK-47 assault rifles, grenades and ammunition – but Zabiuddin Ansari, who was in charge of the Aurangabad cell, succeeded in escaping.”               Now, most of the people, who had been arrested there, were connected with Lashkar-e-Taiba and the Lashkar-e-Taiba is banned in our country. It is also banned in Pakistan and it is the explanation that they always give. Even now they have been giving this explanation that they have banned it[S46] .
But when the interviewer of the CNN-IBN asked the Foreign Minister of Pakistan “How is it that your Ministers are all meeting the Chief of LeT there daily?”, he said that now it is another organisation. He said that instead of LeT it is called something else. Therefore, that only confirmed what the Prime Minister has said. I would like to say that you accuse us also of being communal only because Pakistan is named in it.
Frankly, I can tell you that I am fond of books. I have recently come across a non-fiction book, which I regard as a bestseller in which reference is made to Indian Muslims in so complimentary a manner that I have quoted it again and again and again everywhere. Therefore, I think that it would be in the fitness of things that it is put on record in this House also. It is a book by the name ‘The World is Flat’ by Mr. Thomas Friedman. I am an admirer of him. Mr. Thomas Friedman is an outstanding journalist, and a column-writer in the New York Times. I was greatly impressed when I first read his book on globalisation and liberalisation named ‘Lexus and the olive tree’. I will quote one paragraph, which says :
“The largest Muslim country in the world is Indonesia, and the second largest is not Saudi Arabia, Iran, Egypt or Pakistan, it is India. With more than 15 crore Muslims, India has more Muslims than Pakistan. But there is an interesting statistics from 9/11. There are no Indian Muslims we know of in Al Qaeda and there are no Indian Muslims in America’s Guantanamo Bay, post 9/11 prison camp…”               It is a huge prison camp that they have maintained, and Pakistan also has sent 500 of their citizens who were identified as Al Qaeda people. They were sent there. It further says :
“Why is that? Why do we not read about Indian Muslims, who are a minority in a vast Hindu-dominated land, blaming America for all their problems and wanting to fly aeroplanes into the Taj Mahal or the British Embassy? Lord knows why?…”             He goes on to answer. He says :
“The answer is context, and in particular the secular, free market, democratic context of India, and furthermore heavily influenced by a tradition of non-violence and Hindu tolerance.”               This is the sum and substance of why the Indian Muslim is not behaving like other Muslims by going into Jehad here and there and everywhere. Therefore, we have never ever accused any particular community of being a terrorist. No, we have not done so.
            Now, when our Akali Dal friends were expressing anger, that anger was because of a particular situation there. The crime of two individuals there was attributed to the whole community. What was the scene here in Delhi in those days? I witnessed that with my own eyes. Therefore, I can very well understand their anger, and it was very much understandable. … (Interruptions) Please, do not do it. Otherwise, I would have expected someone to explain why Mr. Mahdani is such a darling. Why is it so? … (Interruptions) I do not know. Can someone please explain it? I am asking this because I do not know. … (Interruptions)
MD. SALIM : What about Mr. Ashok Singhal’s statements on the Mumbai bomb-blasts? … (Interruptions)
SHRI N.N. KRISHNADAS (PALGHAT): Sir, why is this being allowed? … (Interruptions)
MR. SPEAKER: Please sit down.
… (Interruptions)
MD. SALIM : What about the Vishwa Hindu Parishad? All that the Vishwa Hindu Parishad is saying is wrong. … (Interruptions)
SHRI L.K. ADVANI : Again I would like to plead that please let us resolve it. After all, it is not a question only of POTA. It is a question of attitude, and in which attitude these things also matter … (Interruptions)
SHRI BASU DEB ACHARIA : Your attitude also. … (Interruptions)
   
SHRI L.K. ADVANI : My attitude is clear. A terrorist is a terrorist. Therefore, I read out Sardar Khushwant Singh speaking in a context where in Punjab most of the people who have been recruited by Pakistan were Sikhs, and even then he said that a terrorist is a terrorist, and terrorism and civilised society cannot co-exist. Therefore, I quoted it[ak47] .
            I feel that the reply given to this debate is not satisfactory. If the House is of the view that there should be no Division, I will not press for Division. You have a majority anyway. I would like to say that something much more is needed to face this problem of terrorism more effectively. If you want to have a voice vote, you can have a voice vote. But we will, in protest, walk out later on. … (Interruptions)
 
MR. SPEAKER: The question is:
                        “That the House do now adjourn.” The motion was negatived.
… (Interruptions)
18.56 hrs. At this stage, Shri L.K. Advani and some other hon. Members left the House.
 

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