Lok Sabha Debates
Suspension Of Question Hour And Motion For Adjournment On Need To Take Action ... on 10 August, 2005
p> Title : Suspension of Question Hour and motion for adjournment on need to take action against persons indicted by Nanavati Commission of Inquiry (Motion Negatived).
RE: MOTION FOR ADJOURNMENT Failure of the Governmet to take action against persons indicted by Nanavati Commission of Inquiry MR. SPEAKER: I have to inform the House that I have received ten notices of adjournment motion from Shri Ramji Lal Suman, Prof. Vijay Kumar Malhotra, Sarvashri Santosh Gangwar, Sukhdev Singh Dhindsa, Prabhunath Singh, Sarbananda Sonowal, Sushil Kumar Modi, P.C. Thomas, Anant G. Geete and Yogi Aditya Nath regarding the “failure of the Government to take action against the Congress leaders indicted by the Nanavati Commission”.
I have given my consent to Shri Sushil Kumar Modi who has secured first place in the ballot to move the motion in the following form: -
“Failure of the Government to take action against the persons indicted by the Nanavati Commission.” Shri Sushil Kumar Modi, meanwhile, in his letter received by me just now has requested that Shri Sukhdev Singh Dhindsa may be permitted to seek leave of the House and initiate discussion in his place.
I have accepted his request. Shri Sukhdev Singh Dhindsa may now ask for leave of the House.
SHRI SUKHDEV SINGH DHINDSA (SANGRUR): Sir, I seek leave of the House for moving the Motion for Adjournment regarding failure of the Government to take action against persons indicted by the Nanavati Commission of Inquiry.
MR. SPEAKER: Is the leave opposed?
THE MINISTER OF DEFENCE (SHRI PRANAB MUKHERJEE): Let the discussion take place.
MR. SPEAKER: You are not opposing it.
SHRI PRANAB MUKHERJEE: I am not supporting the Adjournment Motion.
MR. SPEAKER: Those who are in favour of leave being granted for moving the Adjournment Motion may rise in their places.
SEVERAL HON. MEMBERS rose --
MR. SPEAKER: I find the number is more than the requisite number.
So, leave is granted. Under Rule 61, the adjournment motion is to be taken up at 1600 hours or at an earlier hour. Under Rule 62, not less than 2 hours and 30 minutes are allotted for its discussion. The discussion on the motion may be taken up immediately. I think, the House agrees.
Before that, there is no motion before me for suspension of the Question Hour. I take it that the sense of the House is to suspend the Question Hour in view of the importance of the matter. I think, the House agrees.
The Question Hour is suspended.
__________________________ 11.05 hrs. MOTION FOR ADJOURNMENT Need to take action against persons indicted by the Nanavati Commission of Inquiry – Contd.
MR. SPEAKER: May I make one request or appeal to all of you? This is an important matter, and there are strong feelings on this issue. My earnest appeal to all of you is that since the discussion has been allowed, let it be carried on in a proper manner so that the country also knows that we are able to discuss the important issue in a dignified manner. Let there be no interruption. Hon. Leaders or Members can respond to each other when their time comes. That is my earnest request to all sections of the House.
SHRI SUKHDEV SINGH DHINDSA (SANGRUR): Sir, I beg to move:
“That the House do now adjourn.” अध्यक्ष महोदय, मैं आपका बहुत आभारी हूं कि आपने मुझे एक ऐसे इश्यु पर बोलने का मौका दिया, जिस पर २१ साल से सिर्फ हिन्दुस्तान ही नहीं बल्कि सारी दुनिया के सिख इंसाफ की मांग कर रहे cé[R1] ।
उसके लिए जो नौ कमीशन बने, उनमें आखिरी नानावती कमीशन था। सरकार ने उसकी रिपोर्ट और उसकी एटीआर यहां सदन में रखी। मैं उस पर कुछ कहने से पहले जो सिखों के साथ हुआ और जो सिखों ने इस देश के लिए किया, उसके संबंध में बताना चाहता हूं।
आज़ादी की जंग जब सारा हिन्दुस्तान लड़ रहा था तो उसमें कितना हिस्सा हमारा था, मैं उसके संबंध में पहले आपको बताना चाहता हूं। यह मेरी नहीं, भारत सरकार की रिपोर्ट है कि १२१ लोग फांसी पर चढ़ाए गए, जिनमें से ९३ सिख थे। लाइफ इंप्रिज़नमैंट २६४६ को दी गई जिनमें से २१४७ सिख थे। फिर जलियांवाला बाग में १३०० लोगों का कत्ल हुआ जिसमें ७९९ सिख थे। कूका मूवमैंट चली गऊ की रक्षा के लिए, जिसमें ९१ कूका तोपों से उड़ा दिये गये, वे भी सारे सिख थे। इसके अलावा एक अकाली मूवमैंट आज़ादी के दौरान चला जिससे शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और शिरोमणि अकाली दल ने एक मूवमैंट चलाया कि हमारे गुरुद्वारा साहिबान में अंग्रेज़ों ने जो अपने पिट्ठू महंत बैठा रखे हैं, उनको निकालना है और अपने कब्ज़े में लाना है। उस लड़ाई में ५०० सिख शहीद हुए। उसके बाद जब हमने यह जंग जीती, एसजीपीसी एक्ट बना, तो उस वक्त महात्मा गांधी जी का पहला तार गया था कि आपने आज़ादी की पहली जंग जीत ली है। १९३१ में महात्मा गांधी जी दिल्ली के शीशगंज साहिब गुरुद्वारा में गए। सिखों के साथ उन्होंने वायदे किये। उन्होंने कहा कि मैं आपसे वादा करता हूं कि जब आज़ाद हिन्दुस्तान होगा तो आपके बगैर पूछे हिन्दुस्तान में कोई ऐसी बात नहीं होगी जो सिखों को नामंज़ूर हो। वहां पर एक सरदार मदनसूदन सिंह उठे। उन्होंने कहा कि महात्मा जी, जब सरकार बन जाती है तो और कुछ हो जाता है, लेकिन आप कैसे हमें यकीन दिलाते हैं? यह बात महात्मा जी ने ‘यंग इंडिया’ नामक मैगज़ीन में लिखी है, जो वे निकालते थे। उन्होंने कहा कि ‘मैं आपसे इस पवित्र जगह पर वादा करता हूं कि अगर कांग्रेस की सरकार बनती है और आपके साथ बेइंसाफी होती है तो, गुरु गोविन्द सिंह ने जो आपको सिखाया है कि तलवार उठाओ, मैं आपके साथ रहूंगा, अगर आपके साथ कोई बेइंसाफी होगी।’ मैं बतानाच्स आज से नहीं, बल्कि जब से मुल्क आज़ाद हुआ, तब से ही हमारे साथ बेइंसाफी शुरू हो गयी।
स्पीकर साहब, जब से मुल्क आज़ाद हुआ, तब से ही हमारे साथ बेइंसाफी शुरू हो गयी। सबसे पहले अगर कोई पोलटिकल लीडर अरैस्ट हुए तो मास्टर तारा सिंह शिरोमणि अकाली दल के प्रेज़ीडैट १९४९ में हुए। वे क्या करने आ रहे थे - वे सिखों की एक कॉनफ्रैन्स करने के लिए दिल्ली आ रहे थे कि जैसा हमारे कांस्टीटयूशन में है कि जो प्रमाणित लैंग्वेजेज़ हैं, उनके आधार पर सूबे बनाए जाएंगे, लेकिन चूंकि हम पंजाबी लैंग्वेज के आधार पर सूबा मांगते थे, तो इन्होंने कहा कि हमन उसे यहां दिल्ली में आने ही नहीं देंगे। इस प्रकार नरेला स्टेशन से ही भारत के पहले पोलटिकल प्रिज़नर मास्टर तारा सिंह को अरैस्ट करके हिमाचल भेज दिया गया। १९५५ से हमारी मांग रही कि हमारा भी पंजाबी सूबा बना दिया जाए, लेकिन कुछ नहीं मिला। उस समय हम ८०,००० लोग जेलों में गए, गोलियां चलीं, लाठियां चलीं। अगर १९६५ की जंग न होती तो पंजाबी सूबा भी हमें नहीं मिलता[h2] ।
महोदय, मैं सदन से पूछना चाहता हूं कि हिन्दुस्तान के आजाद होने के बाद, हिन्दुस्तान की रक्षा के लिए तीन जंगें हुईं, उन जंगों को लड़ने में किन लोगों का ज्यादा हिस्सा था, कौन लोग थे जो उन लड़ाइयों को कमांड कर रहे थे? जनरल कुलवंत सिंह, जिन्होंने कश्मीर की लड़ाई लड़ी थी, उन्होंने कहा था कि अगर पंडित नेहरू हमें न रोकते और २४ घंटे और लड़ाई के लिए मिल जाते तो आज हिन्दुस्तान की जो रूप-रेखा है, वह न होती और न कोई कश्मीर का मसला होता। उसके बाद सन् १९६५ में जनरल हरबख्श सिंह लड़ाई के हीरो बने, वह भी सिख थे। सन् १९७१ की जंग, जो बंगला देश की जंग थी, उसके हीरो भी जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा थे।
अध्यक्ष महोदय, सिर्फ लड़ाई की ही बात नहीं है, जब देश को अनाज की जरूरत पड़ी, आप जानते हैं कि हरित क्रांति के पहले हम कभी अस्ट्रेलिया जाते थे या दूसरे देशों में अनाज लेने के लिए जाते थे। उस समय जिस सूबे की डेढ़ परसेंट जमीन हिन्दुस्तान में है, उन्होंने ६० से ७० परसेंट तक फूडग्रेंस को स्टोर करके भारत को दिया और भारत को अनाज के मामले में सेल्फ सफशियेंट बनाया। लेकिन यह सब करने के बाद हमें क्या मिला - हमारे क्षेत्र का पानी भी ले लिया गया। इससे पहले ऐसा कभी देश में नहीं हुआ। हमारी राजधानी हमें नहीं मिली। हमारा पंजाबी बोलने वाला क्षेत्र हमसे छीन लिया गया। मैं आपके द्वारा इस सदन से अपील करना चाहता हूं कि हम कुर्बानियां करते चले गए, उसके बदले जो हमारे पास था वह भी हमसे छीन लिया गया। जनरल खंडूरी जी यहां बैठे हैं और दूसरे लोग भी जानते होंगे कि सन् १९६५ की लड़ाई में जब हमारे जवान लड़ रहे थे तब हमारी बहू, बेटियां और बहनें रोटी ले कर उनके बैरक्स में जा कर उन्हें खाना खिलाती थीं। हमारे ट्रक वाले अपने ट्रकों में लड़ाई का सामान ले कर वहां जाते थे। इतना सब हिन्दुस्तान के लिए करने के बावजूद भी सिखों को इंसाफ नहीं मिला। आज से ही नहीं, बल्कि ऐसा पहले से होता आया है। सिर्फ इतना ही नहीं है महोदय, फिर आप देख सकते हैं कि इमरजेंसी की लड़ाई हुई। हिन्दुस्तान को दोबारा गुलाम बना दिया गया। कोई बोल नहीं सकता था, कोई लिख नहीं सकता था और कोई भी अदालत में नहीं जा सकता था। उस समय सिर्फ एक ही पार्टी ने १९ महीने की लड़ाई लगातार लड़ी। उसके बाद आजादी दोबारा बहाल हुई, हमारा हक फिर बहाल हुआ। लेकिन उसके बाद भी हमें क्या मिला? हमारी सरकार सन् १९७७ में बनी। शिरोमणि अकाली दल और जनता पार्टी ने सरकार बनाई। लोगों ने फतवा दिया और सरदार प्रकाश सिंह बादल मुख्य मंत्री बने और उसमें मैं भी मंत्री रहा। हमें ११७ सदस्यों में से १०१ सदस्यों की सपोर्ट हासिल थी, लेकिन एक रात को सरकार तोड़ दी गई। यह नहीं देखा गया कि इनको कितने सदस्यों की सपोर्ट है, ११७ में से १०१ सदस्यों इनके साथ हैं। इससे हालात और बिगड़ गए। तब संत जरनैल सिंह भिंडरावाला उठे। उन्होंने कहा कि अकाली आपको कुछ नहीं दे सकते हैं, नॉन वायलेंस से आपको कुछ नहीं मिलेगा, अकाली आपको नॉन वायलेंस से या जेलों में भेज कर कुछ नहीं दिला सकते हैं, आप मेरे साथ आओ, हम हिन्दुस्तान की सरकार से लड़ाई लड़ेंगे और आपको हक दिला कर रहेंगे। उसके बाद जो स्थिति आई, वह आपके सामने है। किसी कौम के साथ यह पहली बार हुआ है कि उसके सबसे पवित्र स्थान हरमंदर साहब और अकाल तख्त साहब पर फौजें भेज दी गईं, टैंक चढ़ा दिए गए और तोप से उड़ा दिया गया। इससे बुरी बात किसी आजाद देश में और उस कौम के साथ हो जिसने देश के लिए इतनी कुर्बानियां दी हों, इसकी मिसाल मौजूद नहीं है, यह बहुत असहनीय है। मैं आपको बता रहा हूं, सदन को बता रहा हूं और ये बातें बहुत कम शब्दों में बता रहा हूं[i3] ।
अधयक्ष महोदय, फिर क्या था, हमारे लोग भी बहुत मारे गए। हमें भी निशाना बनाया गया। हमारे प्रैसीडेंट सन्त हरचन्द सिंह लौंगोवाल शहीद हुए। हमारे माननीय नेता जत्थेदार गुरचरण सिंह तोहड़ा और जत्थेदार जगदेव चन्द तलवंडी पर अटैक हुए और उनके साथी मारे गए। वे बच गए, लेकिन फट्टड़ (जख्मी) हो गए। इस प्रकार हमें एक तरफ सरकार से मार खानी पड़ रही थी और दूसरी तरफ उनसे मार पड़ रही थी। हमारा क्या कसूर था- हमारा कसूर सिर्फ इतना ही था कि हमने उस समय बड़ा काम किया, देश को जवान दिए, देश की आजादी के लिए सबसे ज्यादा कुरबानियां दीं। देश को आजाद रखने के लिए जब जरूरत पड़ी, तो हमने सबसे ज्यादा कुर्बानियां कीं। जब अनाज की जरूरत पड़ी, तो हमने अनाज दिया, क्या यही हमारा कसूर है, क्या इसीलिए हमारे साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है ? मैं दलगत राजनीति से ऊपर उठकर, सदन से अपील करना चाहता हूं कि सिखों के साथ ऐसा व्यवहार न किया जाए। जो कुछ हमारे साथ हुआ है और जो कुछ हो रहा है, ऐसा करते समय हमारी कुरबानियों को तो कम से कम ध्यान में रखा जाए।
अध्यक्ष महोदय, १९८४ में, श्रीमती इंदिरा गांधी की मृत्यु के बाद, अकेले दिल्ली में, दिन-दहाड़े, लगातार तीन दिन तक कत्ल होते रहे और गवर्नमेंट की फिगर हैं कि उसमें २७३३ सिख मारे गए। पुलिस तमाशबीन बनकर बैठी रही, तीन दिन तक फौज को नहीं बुलाया गया। यह मैं नहीं कह रहा हूं, यह आपका प्रैस कह रहा है, मीडिया कह रहा है। मैं इसके सबूत आपको देना चाहूंगा। किसी एक आदमी की डैथ हो जाए, तो कहते हैं कि सबूत नहीं मिला। इसके ऊपर नौ कमीशन बन गए, लेकिन सुबूत नहीं मिले। क्या सरकार को किसी के ऊपर शक भी नहीं है, सरकार को सबूत क्यों नहीं मिले, मैं बताऊंगा। सभी अखबारों ने उस समय लिखा था कि कौन-कौन आगे थे, किस-किस ने इनसाइट किया, कुछ लोगों को पुलिस ने पकड़ा, उन्हें किस-किस ने छुड़वाया। यह सब विवरण विस्तार से अखबारों में आया है, लेकिन सरकार कहती है कि सबूत नहीं मिले, इस पर कौन विश्वास करेगा ?
अध्यक्ष महोदय, जब ऐसी कोई घटना हो जाए, तो तुरन्त सरकार और पुलिस को हरकत में आना चाहिए था। उस दिन ९ बजकर २० मिनट पर श्रीमती इंदिरा गांधी पर हमला हुआ और ११.०० बजे ऑल इंडिया रेडियो बोल रहा था कि सिखों ने श्रीमती इंदिरा गांधी पर हमला कर दिया। वह भी एक साजिश थी ताकि सारे सिखों की पहचान कर ली जाए। मैं बताना चाहता हूं कि उनके घरों को किसने मार्क किया, किसने कहा कि यह सिख का घर है, यह सिख की फैक्ट्री है या यह सिख की दुकान है। एक जैसे साइज के इतने रॉड एक दिन में कैसे इकटठे हो गए, एक दिन में इतने सारे रॉड, एक ही साइज के, कहां से तैयार हो गए, इतना डीजल, इतना पैट्रोल और इतना मिट्टी का तेल, कहां से मिला - क्या वह अपने आप आ गया या अपने आप इकट्ठा हो गया ? यदि ये सब बातें नहीं होतीं, तो शायद इतने बड़े पैमाने पर सिखों का कत्ल नहीं होता।
अध्यक्ष महोदय, उस दिन सारे न्यूज पेपर्स ने लिखा है कि चार ग्रुप बने हुए थे - एक ग्रुप जाता था, वहां जो कोई आदमी होता था, उसे मारता था, कत्ल करता था, दूसरा ग्रुप जाता था, उसका जो हाउस, दुकान या फैक्ट्री होती थी, उसका ताला तोड़ देता था, तीसरा ग्रुप उसे लूटता था और चौथा ग्रुप उसे आग लगा देता था। यह मैं नहीं कह रहा हूं। यह प्रैस कह रही है। उस दिन का प्रैस का रिकॉर्ड देख लीजिए[rpm4] ।
आज पासवान जी यहां नहीं हैं, पासवान जी का घर लूटा भी गया, एक सिख को उनके सामने जलाया भी गया। लारन जी बैठे हैं, इनसे पूछिये। ये उस वक्त मौजूद थे, ये भी बोलेंगे। यही नहीं, जो बहुत बड़े इण्टेग्रिटी वाले रिटायर्ड पर्सन थे, जब सरकार ने कुछ नहीं किया, सरकार हर दिन सामने नहीं आई तो उनमें से मैं पूछता हूं कि जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा को, जिनको सारा हिन्दुस्तन अपना हीरो मानता है, उनकी क्या हालत थी। उस वक्त वे अपने घर नहीं जा सके। वे कहते हैं कि वह हिन्दुस्तान, जिसके लिए मैंने इतनी बड़ी कुर्बानी की है, उसमें मैं आज अपने घर नहीं जा सका और वे आई.के. गुजराल जी के घर रहे। इसलिए उनकी जान बची, नहीं तो ऐसा जनरल, जिस पर सारा हिन्दुस्तान फख्र करता है, उस जनरल की यह हालत थी। ऐसे कितने ही सिखों की कहानी मैं बताऊंगा तो बहुत टाइम लगेगा। जब सरकार नहीं आई तो‘People’s Union of Civil Liberties’ and ‘People’s Union for Democratic Rights’ came out कि कुछ न कुछ इनका किया जाये, इसलिए उन्होंने बुकलेट छपवाई, आपने भी शायद पढ़ी हो। उसमें नाम थे-‘Who are the Guilty?’ केवल यही नहीं कि एफीडेविट्स ही थे। वे तो एन.जी.ओज़. थे, वे किसी पोलटिकल पार्टी के लोग नहीं थे। यही नहीं, १९८५ के अर्ली मंथ्स में दो और एन.जी.ओज़. आये, ‘Citizens for Democracy’ headed by Justice B.K. Tarkunde और दूसरा ‘Citizens Commission’ headed by former Justice of India, Mr. S.M. Sikri. अगर विश्वास नहीं, तो उनकी रिपोर्ट मंगा लीजिए। उनकी रिपोर्ट पर भी कार्रवाई करते, कोई पार्टी के आदमी नहीं थे, वे तो किसी पार्टी से जुड़े हुए नहीं थे, उनकी रिपोर्ट कहां गई, उस पर सरकार ने कोई एक्शन लिया हो तो आप जवाब दें।
यही नहीं, इस रिपोर्ट में भी बहुत कुछ लिखा है। इसमें आपने पढ़ा होगा, बहुत से स्टेटमेंट्स हैं, एफीडेविट्स हैं, लेकिन मैं सारे नहीं पढूंगा, मैं सिर्फ २-३ ही पढ़ूंगा। श्री आई.के. गुजराल, जो फोर्मर प्राइम मनिस्टर रहे, जिन्होंने यह बताया कि हम होम मनिस्टर के घर गये, पहले तो सरदार पतवंत सिंह और जनरल जगजीत सिंह के घर गये, जहां प्रबन्ध सिंह, ब्रिगेडियर जगजीत सिंह और आई.के. गुजराल थे, उन्होंने कहा कि हमने टेलीफोन किया तो हमारा टेलीफोन होम मनिस्टर ने नहीं सुना। उन्हें बताया गया कि वे मीटिंग में बैठे हैं तो हमने सोचा कि अपने आप चलते हैं। हम उनके घर चले गये और जब अन्दर चले गये तो हमने देखा कि वहां कोई मीटिंग नहीं थी, वहां कोई आदमी नहीं था। हमने पूछा कि यह क्या हो रहा है, आप क्या कर रहे हो, आप आर्मी क्यों नहीं बुला रहे, तो वह कहते हैं कि मैं करता हूं, देखता हूं। हिन्दुस्तान का होम मनिस्टर ऐसा कह रहा है, जिसे मालूम है कि सारी दिल्ली जल रही है और लाशें पड़ी हैं। जहां २७३३ तो सरकार की अपनी फीगर्स हैं, लेकिन होम मनिस्टर कहते हैं कि मैं सोच रहा हूं। जब वे जनरल से मिलते हैं और कहते हैं, मेरे साथ कोई बात नहीं करता। वहां एक एरिया कमाण्डर था। वे कहते हैं कि एज़ ए जनरल हम वहां गये तो हमने पूछा कि आप क्यों नहीं आर्मी लाते हो तो कहते हैं कि पुलिस हमारे साथ कोआर्डीनेट नहीं कर रही। फीगर्स के बारे में मेरे और साथी बोलेंगे तो वे बताएंगे। मैं कहना चाहता हूं कि हमें किसी कमीशन से कुछ इन्साफ नहीं मिला है।[i5] मैं आपको बताना चाहता हूं कि इस कमीशन से भी हमें कुछ नहीं मिला है। जो थोड़ी बहुत रिकमन्डेशन्स थीं, वह सरकार ने खत्म कर दीं और उन लोगों को सरकार ने बरी कर दिया। मैं पूछना चाहता हूं कि सरकार ने उन्हें किस लेवल पर बरी किया और क्यों किया? क्या सारी दुनिया नहीं जानती कि श्री एच.के.एल. भगत, श्री जगदीश टाइटलर, श्री सज्जन कुमार और श्री शास्त्री इनमें शामिल है? सभी पेपरों ने इस बात को कहा है, सभी कमेटियों ने एफिडेविट देकर कहा है कि ये इंवाल्व हैं। लेकिन सरकार कहती है कि वे इंवाल्व नहीं हैं। क्या किसी लोकतान्त्रिक देश में ऐसा सोचा जा सकता है? मैं आपके द्वारा सरकार से कहना चाहता हूं, सरदार श्री मनमोहन सिंह जी, जो एक सिक्ख प्रधानमंत्री हैं, जब वह प्रधानमंत्री बने, तब हमने भी खुशी मनायी थी और लोगों में भी इसकी खुशी थी कि कांग्रेस ने एक सिक्ख को प्रधानमंत्री बनाया है, लेकिन उस सिक्ख प्रधानमंत्री का क्या फायदा, जब उन्हीं की कम्यूनिटी को कोई इंसाफ नहीं मिल रहा है। उन्होंने जो कुछ किया था, वह सब कहां चला गया। जिसका बहुत बड़ा क्रेडिट लेते थे, वह कहां चला गया। मैं पूछना चाहता हूं कि क्या हमें कभी इंसाफ मिलेगा? क्या ऐसा कोई वक्त भी आएगा जब हमें इंसाफ मिल पाएगा? मैं आपसे निवेदन करना चाहता हूं कि आप निर्देश दें और यह हाउस पास करे कि जिन लोगों पर अंगुली उठायी गयी है, जिनके खिलाफ रिकमन्डेशन्स की गई हैं, उनके खिलाफ तो केस रजिस्टर होना चाहिए, उनके खिलाफ केस चलना चाहिए और उनको सज़ा मिलनी चाहिए। पूरे हिन्दुस्तान में चार हजार सिक्खों को तीन दिन में मार दिया गया। बच्चे, बूढ़े, नौजवान, माता, बहनें, बीवियों को कत्ल किया गया। क्या किसी एक को भी सज़ा नहीं होगी? क्या किसी देश में ऐसा विधान, रूल है कि एक भी दोषी आदमी को सज़ा न हो? क्या हमें भारतीय होने के नाम पर शर्म नहीं आती है? जिस कम्यूनिटी ने अपना इतना खून बहाया है, जिस कौम ने इतने बड़े-बड़े बलिदान दिए हैं, वे सिर्फ इंसाफ मांगते हैं और कुछ नहीं मांगते हैं। मैं निवेदन करूंगा कि आप पार्टी लेवल से ऊपर उठकर इंसाफ के साथ चलें और हमें इंसाफ दिलाएं। मेरी यही विनती है। और भी बहुत सी बातें और तथ्य हैं, जो मेरे साथी आपके सामने रखेंगे। मैं आपका आभारी हूं कि आपने मुझे बोलने के लिए समय दिया।
MR. SPEAKER: Motion moved:
“That the House do now adjourn.” श्री पवन कुमार बंसल (चण्डीगढ़) : अध्यक्ष महोदय, नि:संदेह १९८४ के सिक्ख विरोधी दंगों को मैं दंगे नहीं, बल्कि नरसंहार कहूंगा। निश्चित तौर पर भारत के उज्ज्वल नाम पर यह दंगा एक धब्बा है। मैं ढींडसा साहब की इस बात से सहमत हूं कि सिक्ख समुदाय के लोगों ने देश के इतिहास में हमेशा ही बहुत अहम रोल अदा किया है। गुरू नानक देव जी ने देश को एकता का संदेश दिया। गुरूओं नेकहा "मानस की जात सबै एक ही पहचानो " साथ ही कहा " अव्वल अल्लाह नूरे उपाया, कुदरत दे सब बंदे, एक नूर ते सब जग उपजया, कौंन भले कौं मंदे। " इस बात को हम सब मानते हैं और इस देशभक्त कौम के ऋणी हैं कि इस कौम ने आजादी के संघर्ष के समय कितनी कुर्बानियां दीं। यह बात भी सही है कि आज जिस हरित क्रांति का जिक्र हम अपना सिर ऊंचा उठाकर करते हैं, उसमें बहुत बड़ा योगदान सिक्ख समुदाय के लोगों का cè[MSOffice6] । लेकिन मुझे यह भी कहना होगा कि १९८४ से पहले तक, मैं सिर्फ उन सात दिनों को छोड़कर बात करना चाहता हूं, उससे पहले और बाद में कभी भी, किसी वक्त, किसी भी तरह सिख समुदाय के खिलाफ कोई बात नहीं उठी। जैसा मैंने शुरू में कहा, ये दंगे हिन्दुस्तान के नाम पर एक बहुत बड़ा कलंक हैं और इस कलंक को धोया नहीं जा सकता।…( व्यवधान) मैंने क्या गलत कहा।…( व्यवधान) यह बात सही है कि श्रीमती इंदिरा गांधी की हत्या के बाद तीन-चार दिन या एक हफ्ते में २७३३ सिख भाइयों के कत्ल दिल्ली में हुए और देश के अन्य प्रान्तों में ३०० से ऊपर कत्ल हुए, लेकिन इसी वक्त मुझे यह बात कहने की आवश्यकता है कि श्री राजीव गांधी, जो उस हालात में प्रधानमंत्री बने, उन्होंने राष्ट्र के नाम अपने पहले संदेश में क्या कहा।…( व्यवधान) अध्यक्ष महोदय : यह सही नहीं है।
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: I am appealing to all of you. This is a very sensitive matter. Every hon. Member has a right to say what he wants to say; and you also have the right to reply. Nobody can question the role played by the Sikhs and nobody can doubt the great role played by the Sikh people in our country and in the history of our country. It is one of the most patriotic communities and we are all proud of the contribution made by the Sikhs. I am sure, nobody is minimising it. Shri Bansal has also admitted it rightly. श्री पवन कुमार बंसल : ३१ अक्टूबर, १९८४ को ही उन्होंने जो कहा, मैं उसे कोट करता हूं।
“We should not let our emotions get the better of us because passions would cloud judgement. Nothing would hurt the soul of our beloved Indira Gandhi more than the occurrence of violence in any part of the country. ”
२ नवम्बर, १९८४ को जब दिल्ली में दंगे हो रहे थे, वह १.११.१९८४ को खुद दिल्ली के दंगाग्रस्त इलाकों का दौरा कर चुके थे। उन्होंने कहा -
“Some people are casting a slur on our memory by indulging in acts of hatred and violence. Anything that creates a division between brother and brother comes in the way of national unity. The violence is only helping the subversive forces to achieve their ends. Communal madness will destroy us; it will destroy everything India stands for. As the Prime Minister of India, I cannot and will not allow this.” ये शब्द श्री राजीव गांधी ने कहे थे। दंगाग्रस्त इलाकों का दौरा करने के बाद उन्होंने जस्टिस रंगनाथ मिश्र जांच आयोग बनाया।…( व्यवधान)
प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा (दक्षिण दिल्ली) : उन्हें आपने राज्य सभा का मैम्बर बना दिया।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : प्लीज़, मल्होत्रा जी, यह ठीक नहीं है।
...( व्यवधान)
श्री पवन कुमार बंसल : आयोग ने सभी को आमंत्रित किया कि यदि किसी के पास कोई साक्ष्य है, किसी तरह का कोई एवीडैंस है, तो वह उनके सामने पेश कर सकता है। उन्होंने अपनी सिफारिश में तीन समतियों के गठन की आवश्यकता पर जोर दिया और सरकार ने तीनों कमेटीज़ बनाईं। उन्हीं कमेटीज़ के तहत बाद में एक कमेटी ने आंकड़े दिए कि उन दिनों दिल्ली में २७३३ मौतें हुई थीं।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Do not disturb the speaker of your own party.
… (Interruptions)
श्री पवन कुमार बंसल : बात वहीं खत्म नहीं हुई। सरकार अपनी जिम्मेदारी समझती रही और इसी कारण ६३६ एफआईआर दायर की गईं।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : यह क्या हो रहा है। आप बैठिए।
...( व्यवधान)
श्री पवन कुमार बंसल : हमारे मन की भावनाएं कुछ भी हों, हम कैसा भी उस चीज से महसूस करते हों।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: I wish to compliment Shri Dhindsa for a very responsible submission. He has put it in a proper pedestal. Let them respond. But if you go on interrupting each other, it is not fair. I am appealing to all of you not to interrupt each other[R7] .
श्री पवन कुमार बंसल : लेकिन हमें यह बात भी कबूल करनी है कि जब मामला कचहरी में चला जाता है, तो वह सरकार के हाथ में नहीं रहता। आज मैं उन बातों पर नहीं जाना चाहता, मैं इस बात की गंभीरता और संजीदगी समझता हूं। जैसा अभी ढींडसा साहब ने कहा कि ऐसे संवेदनशील मसलों पर चर्चा पार्टी स्तर से ऊपर उठकर होनी चाहिए। लेकिन उस वक्त जब हम ऐसा कहें, तो साथ-साथ हमें यह देखने की जरूरत है कि हम कोई ऐसा शब्द न कह दें, कोई ऐसी बात न कह दें जिससे पूरे देश को ठेस पहुंचे। इस बात में कोई शक नहीं कि उन दंगों के कारण न केवल सिख समुदाय के लोगों, बल्कि पूरे देश में राष्ट्रवादी लोग, अच्छी सोच रखने वाले लोगों का ज़मीर, भावनाएं, उनको ठेस पहुंची थी। उसी के कारण सरकार ने अपनी जम्मेदारी समझी थी, स्वर्गीय राजीव गांधी जी ने अपनी जिम्मेदारी समझी थी और तभी कहा था क ‘this[R8] madness must end'. उसके बाद मसले कचहरी में गये। हम जानते हैं कि जब एक एफआईआर में सौ-सौ नाम दर्ज हों, मैं उनके दर्द को भी समझता हूं। यह दर्द उनका ही नहीं, पूरे देश के एक-एक नागरिक का है। आज ढींडसा साहब जो कह रहे हैं और उसके बाद के कुछ वर्षों में कहा, मैं ईमानदारी के साथ कहना चाहता हूं कि अगर सही मायने में उनकी पार्टी ने एक-एक घर जाकर वह बात कही होती, उन लोगों से मिले होते, उनके साथ बैठकर अपनी लीगल सर्विसेस दी होतीं, तो शायद वे अच्छी एफआईआर लिखवा सकते थे, शायद अच्छे बयान दे सकते थे। …( व्यवधान)
श्री अनंत गंगाराम गीते (रत्नागरि) :अध्यक्ष जी, दिल्ली में पुलिस कहां थी ? यह क्या बात कर रहे हैं ? …( व्यवधान)
MR. SPEAKER: I have always been appealing to you all.
… (Interruptions)
प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : उस वक्त एफआईआर कोई नहीं लिखता था। सब जाली एफआईआर थीं। सब रिकाड्र्स डिस्ट्रॉय कर दिये। …( व्यवधान) यह कहते हैं कि एफआईआर लिखवाते। …( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Please keep quiet. I have always been expressing my view that no hon. Member is bound by the views of the other hon. Member.
… (Interruptions)
श्री सुखदेव सिंह ढींडसा : मैं एक बात कहना चाहता हूं। …( व्यवधान)
MR. SPEAKER: I have myself complimented you.
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय : उनके यील्ड करने से ही आप पूछेंगे। सब लोगों के एक साथ खड़े होने से कुछ नहीं होगा।
...( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Nobody is bound by his views. The procedure is, after the debate, the reply will be given. You may do that.
अध्यक्ष महोदय : आप उनसे पूछिये। It is up to him to yield or not. I cannot compel him.
श्री सुखदेव सिंह ढींडसा : अध्यक्ष महोदय, मैं एक क्लेरीफिकेशन देना चाहता हूं। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : मैंने आपको बोलने का पूरा मौका दिया है।
...( व्यवधान)
श्री पवन कुमार बंसल : अध्यक्ष महोदय, ढींडसा साहब ने कहा था कि उनके और सदस्य इस पर बोलेंगे। मेरी जो भी बात गलत होगी, उसे मैं कबूल करूंगा लेकिन उसका जवाब इनके और साथी दे सकते हैं। …( व्यवधान)
MR. SPEAKER: He is not yielding.
… (Interruptions)
श्री सुखदेव सिंह ढींडसा : इनके बोलने के बाद आप मुझे बोलने दीजिए। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : इनके बोलने के बाद देखा जायेगा। ...( व्यवधान) अध्यक्ष महोदय : आपको पसंद नहीं है, तो आप जवाब दीजिए। ...( व्यवधान)
श्री पवन कुमार बंसल : अध्यक्ष महोदय, कचहारियों में ६३६ एफआईआर दायर हुई और उनकी मौनीटरिंग होती रहीं। गृह मंत्रालय में अलग से एक सेल बना, जिसके तहत अफसरों को हिदायतें दी गयीं कि एक-एक केस की पूरी पैरवी करनी है। …( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Nothing will go on record.
(Interruptions) …* श्री पवन कुमार बंसल : अगर पीठासीन जज के किसी बयानात की बिना पर महसूस नहीं करते, हमारे कानून के तहत किसी को दंड दिया जा सकता है तो उसके लिए आरोपी कौन होगा, किस पर आरोप लगाये जायेंगे ? सरकार में उसके लिए कसूर ढूंढे जायेंगे? जो बात हम कहते हैं, जिस हिसाब से बहस करना चाहते हैं, वह नहीं हो पायेगी। लेकिन मैं साथ-साथ यह भी कहना चाहता हूं कि वे केस अभी भी खत्म नहीं हुए। हाल ही में १६ मई, २००५ को दिल्ली हाई कोर्ट ने पांच लोगों को उम्र कैद की सजा दी--इसका मतलब है कि केस चल रहे हैं। यह बात सही है। …( व्यवधान) जस्टिस रंगनाथ कमीशन ने यह बात उस वक्त कही। उन्होंने कहा कि दिल्ली प्रशासन उस वक्त निष्क्रिय, संवेदनहीन और उदासीन रहा। सरकार की तरफ से शिनाख्त की गयी और उसके बाद इसे बहुत गंभीरता से लिया गया तथा पुलिस आफिसर के खिलाफ केस दायर किये। लेकिन हमें फिर यह बात कहनी होगी, उस बात को हम नजरअंदाज नहीं कर सकते कि अगर कोई आदमी उस वक्त सेवानिवृत्त हो चुका हो, यहां सब जानते हैं कि उसके बाद सरकार उस पर केस चला सकती है। क्या सरकार ने कोशिश नहीं की [r9] ?
६ साल मिले थे, कानून बदले नहीं गये। …( व्यवधान) जो कानून थे, उनके तहत जो कचहरियों ने फैसला दिया, सरकार आगे अपील करती रही और अपील करने के बाद ही पांच केसों में लाइफ इम्प्रिजनमेंट हुआ।
सर, मैंने जिक्र किया था कि ३१ अक्तूबर और उसके बाद २ नवम्बर, १९८४ को श्री राजीव गांधी जी ने क्या कहा था। इल्जाम यही लगाये जा रहे हैं। मुझे थोड़े अफसोस के साथ सिर्फ यही कहना होगा कि अगर इस बहस के जो तथ्य हैं, उन पर बातें होतीं, तो हम कबूल करते कि कोई भी कहीं भी दंगा हो, कहीं भी नरसंहार हो, वह देश के लिए नरसंहार ही है, बेशक वह १९४७ का दंगा हो या १९८४ का या १९९३ का या २००२ का दंगा रहा हो। वे सभी हमारे लिए दंगे हैं और हमें उन सभी के लिए सोचना होगा, * Not Recorded.
तब मैं समझता कि आज हम किसी बात पर बहस कर रहे हैं। हमें एक संकल्प लेना चाहिए कि देश में फिर ऐसा नहीं होगा और हम पार्टी से ऊपर उठकर बात करना चाहते हैं। लेकिन अगर बात उनमें यही होगी, जैसे कि आखिर के एक वाक्य में श्री ढ़ींडसा जी ने पांच नाम ले लिए - मुझे मालूम है, वे नाम कमीशन के आगे आए लेकिन वह काम कमीशन को करना था। कमीशन ने उसके सामने जो एवीडेंस आए, एक-एक पर विचार करके उन्होंने अपनी फाइंडिंग्स दी। उसके बाद मांग उठी, वह मांग वाजिब थी और मैं आपको याद दिलाना चाहता हूं कि उस वक्त के गृह मंत्री और उप-प्रधान मंत्री यहां हैं, जब यहां हाउस में लोगों पर केसों का जिक्र हो रहा था, उस वक्त भी हम उस तरफ बैठे थे, कांग्रेस के सदस्यों की तरफ से यह बात उठी थी कि अगर आप समझते हैं कि रंगनाथ जांच आयोग की तरफ से या उसके बाद जो समतियां बनी हैं, उनके बनने के बाद कोई इंसाफ नहीं हुआ तो एक और कमीशन बनाइए। हम लोगों ने यह मांग की थी। आप इस बात को ठुकरा नही सकते कि तब एक कमीशन बना। हमसे आपने नहीं पूछा कि किसे उस कमीशन का हैड बनाना चाहिए। आपने अपनी बुद्धि के हिसाब से ठीक बनाया और बात चलती रही। आज जस्टिस नानावती की रिपोर्ट हमारे सामने है।
पहली टिप्पणी इस रिपोर्ट पर यह हो रही है कि वह पर्याप्त नहीं है।जैसे किसी वक्त पहले कहा था कि कोट्र्स की कंटेम्प्ट हम कर सकते हैं, क्या आज हम फिर वही बात करना चाहते हैं कि अगर किसी भी जज का फैसला हमारे अनुकूल नहीं होगा तो हम उसे दुत्कार देंगे ? कहीं तो हमें उस बात पर सोचना होगा कि आगे वहां से कैसे बढ़ें? यहां ए.टी.आर. सरकार की आ गई। उसकी दस सिफारिशों में से दो बातें मैं कहना चाहता हूं। एक तो रिपोर्ट में ऑबजर्वेशन होता है- विचार, ऑबजर्वेशन एंड दि फाइंडिंग्स- दि रिकमेंडेशन- सिफारिश। सरकार को जब ए.टी.आर. देनी होती है तो वह विचारों पर नहीं जा सकती। सरकार को जो सिफारिशें होती हैं, उसमें से निकालकर एक-एक पर अपना मन बनाना होता है। समय लगता है एक-एक सिफारिश को देखने में लेकिन क्या हुआ रिकार्डेस पर ? क्या उसके हिसाब से परिणाम सामने आया ? आज जब हमारे सामने ए.टी.आर. है और उनकी जो दस सिफारिशें थीं, उसमें ९ को तो बिल्कुल कबूल किया गया है कि उसके मुताबिक कार्य करेंगे और एक में विचार दिये गये हैं। आप जानते हैं कि संभावनाओं का वहां जिक्र हुआ है, तो क्या कानून में संभावनाओं की बिना पर किसी को कैद हो सकती है? यह बात छोड़ दीजिए कि किसका नाम है ? कोई इंसान, क्या हिन्दुस्तान के एक भी नागरिक का यह अधिकार नहीं है कि अगर सरकार उसके खिलाफ कोई केस दायर करना चाहे तो वह कचहरी में जाकर कह सकता है कि मेरे खिलाफ यह केस गलत दायर हो रहा है, मेरे खिलाफ इसमें कोई बयानात नहीं हैं, मेरे खिलाफ कोई इल्जाम सिद्ध नहीं होते - तो क्या सरकार यह अपने जिम्मे ले सकती है, अगर कल को कहा जाए कि सरकार ने झूठे लोगों के केस बना दिये - मैं यह बात फिर पूरी ईमानदारी और गंभीरता के साथ कहता हूं कि जो बात हुई है, उसे हम भुला नहीं सकते। वह कलंक कभी दूर नहीं हो सकता। मैं उन लोगों में नहीं हूं जो कहेगा कि २१ साल हो गये, इस बात को भूल जाइए। उस बात के लिए हमें हर वक्त पश्चाताप करते रहना होगा। वह पश्चाताप देश करता रहेगा लेकिन जो सरकार की जिम्मेदारियां थीं, मैंने उसी सन्दर्भ में राजीव गांधी जी का जिक्र किया था। उसके बाद हमारे पिछले वर्षों में…( व्यवधान) एक बातजब मैं यह कहता हूं कि हम भुला नहीं सकते, तो मैं साथ ही साथ यह भी कहता हूं कि हमें ऐसा भी नहीं करना चाहिए कि हम हर वक्त जख्मों पर मरहम लगाने की जगह जख्मों को कुरेदते रहें। जख्मों को कुरेदने का काम नहीं होना चाहिए। लेकिन मुझे अफसोस यही है कि जब भी मौका मिलता है, कोशिश यही होती है कि उन जख्मों पर फिर से नमक लगा दिया जाए।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Nothing will go on record except the speech of Shri Bansal.
(Interruptions) …* श्री पवन कुमार बंसल : जो बातें २१ साल पहले हुईं, उनका फिर जिक्र करके लोगों के मन में हम फिर से वैसी भावना पैदा करना चाहते हैं[R10] ।
मैं आपको कुछ लाइनें फिर पढ़कर सुना देना चाहता हूं जब आप कांग्रेस का जिक्र करते हैं। कांग्रेस ने कैसे सिख समुदाय को हमेशा अपना समझा है। …( व्यवधान) मैं यहां कहना चाहता हूं कि जब हम सिख समुदाय के साथ अपनी पहचान करते हैं, अकाली दल के साथ पहचान नही करते, यह अधिकार लोगों ने भी अकाली दल को नही दिया कि वे अपने आप को सिखों के नुमाइन्दे कहलाएं। …( व्यवधान) यही तो समस्या की जड़ है। जब कोई सामुदायिक पार्टी, …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : यह क्या बात है ? उनको भी बोलने का हक है।
…( व्यवधान)
श्री पवन कुमार बंसल : सर, मैं उस बात को भुला देना चाहता हूं।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : कोई बात अनपार्लियामेंट्री होने पर हम देखेंगे।
…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Shri Bansal, you may please carry on.
* Not Recorded.
श्री पवन कुमार बंसल : लेकिन अगर कोई पार्टी अपना रोल ही सिर्फ उस तरह से अदा करे।…( व्यवधान) मैं किसी को उत्तेजित करने की कोई बात नहीं कहना चाहता। लेकिन जब बातें सामने आती हैं कि १९८४ के बाद क्या हुआ था, एक हिन्दू फंडामेंटेलिज्म देश में उभरा - उसे हवा किन्होंने दी?…( व्यवधान) उसके बाद उसका एक नया रूप किन्होंने देने की कोशिश की ?…( व्यवधान) उस वक्त के…( व्यवधान) आज तो शायद वे उनको न मानें, आज तो शायद वे उनके लिए वह पद न दें लेकिन उस वक्त the knight in shining Parivar Armour …( व्यवधान) उन्होंने रथ यात्राओं के जरिये देश में क्या किया ? …( व्यवधान) मैं इन बातों का जिक्र नहीं करना चाहता हूं।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: This is very unfair. I have been appealing to you all. The hon. Leaders agreed to it. If you interrupt him now, then when you will speak, they will interrupt you. We want to hear the Leader of the Opposition. The whole country wants to hear him. If you go on disturbing each other, then how are you going to benefit? There are very competent leaders and speakers, they, in their turns, would reply to all these points with all the force at their command. I am not stopping them. यह सही बात नहीं है। This is not fair.
… (Interruptions)
SHRI VIJAYENDRA PAL SINGH (BHILWARA): Sir, he is diverting the issue… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Who are you to decide that?
Nothing will go on record.
(Interruptions) … * अध्यक्ष महोदय : ठीक है, आप बैठ जाइए। हम डिसाइड करेंगे। इस तरीके से बहस नही होती है। आपकी मनमानी नहीं होगी।
…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Nothing, except the speech of Shri Pawan Kumar Bansal, will go on record.
(Interruptions) … * * Not Recorded.
श्री पवन कुमार बंसल : महोदय, मैं इन बातों का जिक्र नही करना चाहता लेकिन जब हमारी तरफ इल्जाम लगाये जा रहे हैं और उस वक्त…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : छोड़ दीजिए। आप बैठ जाइए।
…( व्यवधान)
श्री पवन कुमार बंसल : मुझे सुनने में आ रहा है और एक-एक मुद्दे पर कहा जा रहा है कि मैं डिबेट को डाइवर्ट कर रहा हूं।…( व्यवधान) जब यहां बोलते हुए, उस वक्त जो मुद्दे थे, उनसे डाइवर्ट करके एक और तरफ ले जाने की बात हो रही थी, इसी कारण मुझे यह कहना पड़ रहा है। उसी सन्दर्भ में मैं कहना चाहता हूं कि ११ नवम्बर, १९९८ को श्रीमती सोनिया गांधी को राष्ट्रीय सिख परिषद, नई दिल्ली ने बुलाया। वे लोग जिन्होंने बहुत कुछ सहा, वे महान लोग उसी बात में जकड़े नही रहना चाहते। वे यह भी चाहते हैं कि आप उनको इस बात पर बार-बार मत कुरेदते रहिए। उनके पास श्रीमती सोनिया गांधी गई। तब इन्होंने क्या बोला कि “गुरुओं ने सहनशीलता और करुणा की शिक्षा दी है। गुरु नानक,…”( व्यवधान) इस पर भी आपको एतराज है। …( व्यवधान) गुरु नानक जी और दूसरे गुरुओं ने सबको अपना बनाकर, सभी धर्मों को मानने वालों को मिल-जुलकर रहने और एक-दूसरे के धार्मिक विश्वासों का आदर करना सिखाया। हमारी शानदार अनेकता को मान्यता दिलाई। अपने ५०० साल के इतिहास में…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : आप बोलते रहिए। you address the Chair.
… (Interruptions)
श्री पवन कुमार बंसल : अपने ५०० साल के इतिहास में सिखों ने अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं[R11] । …( व्यवधान)
उन्होंने कहा था -
“शुरू में उन पर भयानक जुल्म हुए। आजादी के समय उन्होंने बंटवारे का कष्ट सबसे अधिक झेला है, अभी कुछ समय पहले भी उन्हें हिंसा का आघात सहना पड़ा। वर्ष १९८४ की दुखद घटना के बारे में मैं अपनी वेदना पहले भी चण्डीगढ़ में व्यक्त कर चुकी हूँ। मैं आपको विश्वास दिलाना चाहती हूँ कि जो कुछ मैंने पहले कहा था वह मेरे ह्ृदय की भावना है और इस तरह की घटनाएं कभी नहीं होनी चाहिए।” This is the acknowledgement that we have of the Sikh contribution. यह आपके साहस, द्ृढ़ता, सद्भावना और गहरी देशभक्ति के लिए तारीफ की बात है कि आप नफरत और कड़ुवाहट की भावना से ऊपर उठे। आज के भारत में आप एक ऐसे समुदाय के रूप में उभरे हैं जो आगे देखता है…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Silence on all sides of the House please. I am appealing to you repeatedly and you have all agreed to be silent. Nothing is being recorded except the hon. Member who is speaking.
(Interruptions) … * श्री पवन कुमार बंसल : श्रीमती सोनिया गांधी जी ने कहा था :
“आप एक ऐसे समुदाय के रूप में उभरे हैं जो आगे देखता है और भविष्य पर भरोसा करता है। जहां तक मेरा सवाल है मैं अपने परिवार के रिश्ते बहादुर सिख बिरादरी के साथ पहले की तरह मजबूत करना चाहती हूँ। ”…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : यह क्या हो रहा है? आप बैठ जाइए। You are only disturbing the tempo of the debate.
… (Interruptions)
श्री पवन कुमार बंसल : उससे पहले २५ जनवरी, १९९८ को श्रीमती सोनिया गांधी जी ने चंडीगढ़ में कहा था…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : आप बैठ जाइए, यह व्यवहार आपको शोभा नहीं देता है। I will not allow this provocative talk. Please sit down.
… (Interruptions)
श्री पवन कुमार बंसल : मैं अपने अनुभव से …( व्यवधान)
MR. SPEAKER: I have appealed again and again to be silent. I have allowed them. This is their first opportunity to speak. We have not gone to the Question Hour. Yesterday, the House could not function. Shri Bansal, please take your seat. Yesterday, because of the feelings that you had, we had to adjourn the House. Today, it was agreed that there will be a structured discussion. The country wants to know the views of different political parties. Unless there is a proper discussion, who will benefit? Ultimately, the image of the House suffers and the country does not get the benefit of the views of political parties. Therefore, I am appealing to all sections of the House that you can reply or respond to their points in your speeches.
* Not Recorded.
प्रो. महादेवराव शिवनकर (चिमूर) : अध्यक्ष महोदय…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : प्रोफेसर साहब, आप सुनते नहीं हैं। यह बात ठीक नहीं है, आप बैठ जाइए। Do not give such examples to your students.
… (Interruptions)
श्री पवन कुमार बंसल : उन्होंने कहा था :
“मैं अपने अनुभव से जानती हूँ कि कोई भी अल्फ़ाज इन घावों पर मरहम नहीं लगा सकते हैं, दूसरों की संवेदनाएं अक्सर खोखली लगती हैं। मेरा विश्वास है कि ऐसे हादसे कभी नहीं होने चाहिए थे। मैं जानती हूँ कि मेरे पति की भी यही भावना थी।” …( व्यवधान) MR. SPEAKER: You are not doing justice to your cause also. Please sit down. I am appealing to you every minute not to do this. … (Interruptions)
श्री पवन कुमार बंसल : श्रीमती सोनिया गांधी जी ने कहा था -
“६ जून, १९८४ की घटनाओं ने सिख समुदाय को जो दुख पहुंचाया है, मुझे उसका पूरा एहसास है।इससे हमारे परिवार कोगहरी वेदना पहुंची है।” यह बात कही थी श्रीमती सोनिया गांधी जी ने। …( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Shri Goyal, please sit down. Otherwise, I will get you out of the House.
… (Interruptions)
श्री पवन कुमार बंसल : मैंने कबूल किया है, माना है और कोई भी इससे इन्कार नहीं कर सकता है कि उस वक्त इन्सान हैवान बन गया था। यह बात रिपोर्ट में भी कही गयी है, जिसका आप जिक्र नहीं करना चाहते हैं, जो आपके द्वारा नियुक्त किए गए कमीशन द्वारा कही गइ है।[pkp12] मेरे लिए बहुत कुछ कहना सम्भव नहीं होगा, लेकिन उसी रिपोर्ट में जिक्र किया गया है। इन्हीं बातों का उसमें जिक्र हुआ है। अब यह बात आपको कबूल करनी होगी कि हालात ऐसे चल रहे थे कि उससे श्रीमती गांधी की हत्या पर एक ऐसा माहौल देश में बन गया था…( व्यवधान) अध्यक्ष महोदय : श्रीमती इन्दिरा गांधी की हत्या के बाद कहें।
SHRI PAWAN KUMAR BANSAL : I am sorry. … (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय : यह सही बात नहीं है, जो आप ऐसा कर रहे हैं। यह कोई अच्छा टेस्ट नहीं है। यह शर्म की बात है कि गलती हो गई, तो उसका आप मजाक उड़ाएं। यह बहुत गलत बात है। श्री पवन कुमार बंसल : यह रिपोर्ट में ही कहा गया है। यह रिपोर्ट की फाइंडिंग्स हैं कि श्रीमती इदिरा गांधी की हत्या से…( व्यवधान) अध्यक्ष महोदय : यह आपको शोभा नहीं देता है।
श्री पवन कुमार बंसल : " श्रीमती इंदिरा गांधी की हत्या से सम्बन्धित घटनाओं से पता चलता है कि ये अचानक घटित होने वाली घटनाएं नहीं थीं। १९८१ से पंजाब की स्थिति उत्तरोत्तर बिगड़ती जा रही है। इस अवधि के दौरान राजनीतिक लाभ उठाने के लिए राजनीतिक दलों द्वारा चालें चलना और तनाव का फायदा उठाना “-इस कारण उन्होंने कहा है कि सिख समुदाय के खिलाफ अंदर ही अंदर आक्रोष पैदा हो गया था। क्या उस वक्त आपने यह कहा था, ढींढसा साहब, शायद उस वक्त आप यहां नहीं थे। आज वही लोग आपके साथी बने हुए हैं, उस दिन से बने हुए हैं। क्या किसी ने उस आक्रोष को खत्म करने के लिए कुछ किया या कहा था? “ शायद कुछ व्यक्ति सिखों को सबक सिखाना चाहते थे। ऐसा प्रतीत होता है कि श्रीमती इंदिरा गांधी की उन्हीं के दो अंगरक्षकों द्वारा हत्या करने से आक्रोष भड़क गया और दिल्ली में सिखों के जान-माल पर भीषण आक्रमण किया गया। श्रीमती इंदिरा गांधी एक लोकप्रिय नेता थीं और वह भारत की प्रधान मंत्री थीं। अत: यह कोई अनोखी बात नहीं थी कि उन्हीं के दो अंगरक्षकों द्वारा उनकी हत्या करने की बात पता चलने पर लोगों ने आक्रोष जाहिर किया। "" उन्होंने जो आगे कहा है, वह भी मैं पढ़ सकता हूं, लेकिन लगता है कि मेरा ज्यादा देर खड़ा होना आपको तकलीफ दे रहा है। इसलिए मैं इतना कहना चाहता हूं कि उस वक्त के राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह जी के काफिले पर भी हमला हुआ था। वह सिख थे। क्या वह हमला कांग्रेस पार्टी ने कराया था…( व्यवधान) उसमें यह कहा गया है। "पहले कहा गया कि कुछ नारे लगाए गए, लेकिन बाद में अफवाह फैलाई गई - उसके लिए एक इंट्रोस्पेक्शन करने की जरूरत है कि वह अफवाह फैलाने वाले कौन थे। अफवाह फैलाई गई कि शायद सिख समुदाय के लोग मिठाई बांट रहे हैं - इससे आक्रेष भड़क गया। इस तरह की जो अफवाहें फैलाई गईं, उससे लोग सिख समुदाय के खिलाफ भड़क गए और उनसे बदला लेने के लिए उतावले हो गए…"( व्यवधान) अध्यक्ष महोदय : आप लोग चुप रहें, आपकी पार्टी के सदस्य बोल रहे हैं।
श्री पवन कुमार बंसल : उन्होंने कहा कि साक्ष्य यह दर्शाते हैं कि श्री राजीव गांधी ने दिल्ली में हो रही घटनाओं के प्रति गहरी चिंता दिखाई थी। उन्होंने शांति बनाए रखने के लिए, साम्प्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए एक अपील जाहिर की थी। दूरभाष संख्या १०० पर पुलिस से लोगों का सम्पर्क नहीं होने की शिकायतें मिलने के बाद, ऐसी शिकायतें उन्हें मिली थीं कि लोग पुलिस से सम्पर्क करना चाह रहे हैं, लेकिन वह नहीं हो पा रहा है, उन्होंने इन शिकायतों पर ध्यान देते हुए कुछ पुलिस अधिकारियों को बुला कर तत्काल कार्रवाई करने का आदेश दिया था। जिससे जो भी पुलिस से सम्पर्क करना चाहे, वह कर सके। यहां तक कि उन्होंने १.११.१९८४ को रात्रि में प्रभावित क्षेत्रों का दौरा भी किया था। इसमें मैं बहुत कुछ और पढ़ना चाहता था, लेकिन समय की पाबंदी के कारण नहीं पढ़ना चाहता। लेकिन यह बात कही गई कि Congress was cussed, Congress was callous towards it. उस समय के गृह राज्य मंत्री जी का भी मेरे पास जवाब है। मेरे सामने हरिन पाठक जी बैठे हुए हैं। वह उस समय गृह मंत्रालय में राज्य मंत्री थे। उनका जवाब भी मेरे पास है। मैं उस जवाब से बताना चाहता हूं कि उस वक्त जो हालात थे, मैं इस बात से एक्नॉलेज करना चाहूंगा कि कचहरियों का रोल क्या था। अगर उनके पास जो मामले गए, उन्होंने भी अपना रोल अदा किया था। क्या-क्या मुआवजा दिया गया, यह भी इसमें है। मैं मानता हूं, जब मैं मुआवजे की बात करता हूं कि इन्साफ के लिए मुआवजा हल नहीं होता। No amount of compensation can really compensate the person whose son or father or brother has been killed in the riots[r13] . 12.00 hrs. लेकिन जो हालात हैं, क्या आगे बढ़ने के लिए, उसके बाद उन पीड़ित परिवारों के बारे में सोचना है या नहीं। सरकार ने उनकी तकलीफों पर गौर किया या नहीं, यह देखने वाली बात है। अगर हम यही बात सोचते रहते कि उस हफ्ते के दौरान यह किया गया तो आगे हालात और बिगड़ते। उस वक्त सरकार के कठोर कदमों के कारण ही that madness ended there as Rajiv Gandhi then called it. लेकिन उसके बाद मुआवजा क्या दिया गया। मृत्यु के संबंध में साढ़े तीन लाख रुपये की दर से २३२७ मामलों में मुआवजा ७२ करोड़ ७० लाख के करीब दिया गया। मैं फिर कहता हूं कि मुझे गलत न समझा जाए कि किसी की क्षति को कोई पैसे से तोलना चाहता है, ऐसा बिल्कुल नहीं है। यह देखने वाली बात है कि सरकार अपनी जिम्मेदारी को निभाती रही या नहीं।
श्री हरिन पाठक (अहमदाबाद) : मेरा जवाब सिर्फ मुआवजे के बारे में था, सिख विरोधी दंगों को जस्टिफाई करने के बारे में नहीं था।
अध्यक्ष महोदय : आपको मौका दिया जाएगा।
श्री हरिन पाठक : सर, मेरा नाम लिया गया है।
MR. SPEAKER: Not now.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: You cannot interrupt him. I will give you an opportunity.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: I will give you an opportunity, Mr. Harin Pathak.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: You name is there as one of the speakers.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Not to be recorded.
(Interruptions) … * MR. SPEAKER: I will give you full opportunity.
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय : आप बैठ जाइये। Silence please, silence.
… (Interruptions)
श्री पवन कुमार बंसल : इससे पहले कि मैं मुआवजे का जिक्र करुं …( व्यवधान)
MR. SPEAKER: I will give you full opportunity.
श्री पवन कुमार बंसल : मैं उनको याद दिला दूं कि माननीय उप-प्रधान मंत्री जी से सवाल था और माननीय हरिन पाठक जी ने ४.३.२००३ को एक मनिस्टर की हैसियत से जवाब दिया था। …( व्यवधान)
MR. SPEAKER: As a Minister, he had said.
श्री पवन कुमार बंसल : सवाल था - “क्या यह सही है कि १९८४ के दंगों में पकड़े गये लोगों को दोषमुक्त किया गया है, यदि हां तो तत्संबंधी ब्यौरा क्या है और लम्बित मामलों का ब्यौरा क्या है”? यह सवाल था, मुआवजे का नहीं था। जवाब था कि “ उन ३७३ मामलों की वर्तमान स्थिति जिनमें १९८४ के दंगों के संबंध में आरोप-पत्र दायर किये गये थे, निम्न प्रकार हैं :-
* Not Recorded.
दोषमुक्त ३२१, दोष-संबंधी २९, बरी किये गये ८, रिकार्ड रुम के सुपुर्द किये गये ७, विचार के लिए लम्बित ८” ।
अगर यह इल्जाम लगाया जाता है कि कोर्ट ने सजा क्यों नहीं दी, तो मैं भी पूछ सकता हूं कि उन ६ वर्षों में कोर्ट ने सजा क्यों नहीं दी। लेकिन में यह नहीं कहना चाहता हूं क्योंकि कोर्ट का काम कोर्ट का है।
श्री हरिन पाठक : इससे क्या लेना-देना है।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Do not get diverted.
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय : अगर स्पीकर की जरुरत नहीं है तो मैं चला जाता हूं, आप हाउस चलाइये।Kunwar Manvendra Singh, give up your bad habit.
श्री पवन कुमार बंसल : कोर्ट का काम कोर्ट का है और यही मैं दख्र्वास्त करता हूं कि हम सभी को यह बात समझने की जरुरत है। मैं मुआवजे की बात कर रहा था। साढ़े तीन लाख रुपये की दर से बढ़ा हुआ मुआवजा ३२७ परिवारों को ७२ करोड़ ७० लाख रुपये दिया गया, जिनकी हत्या हुई थी। चोटों के लिए मुआवजा, २६३ लोगों को ५४ लाख ६२ हजार रुपये दिया गया। नष्ट रिहायशी सम्पत्तियों के लिए ५ करोड़ ८३ लाख रुपये मुआवजा दिया गया। औद्योगिक सम्पत्तियों सहित बीमित और अबीमित परिसरों का मुआवजा ४ करोड़ ७७ लाख रुपये दिया गया। ऋण रहित स्कीम के तहत भी मुआवजा दिया गया।
मुझे अफसोस हुआ जब मैंने टी.वी पर देखा कि एक कॉलोनी का नाम विधवा कॉलोनी रखा गया है, लेकिन सरकार ने ऐसा नाम नहीं रखा हो सकता है। किसी ने उसे ऐसा कहना शुरु कर दिया होगा। सरकार ने उन्हें इकट्ठा जरुर किया था। कारण यह था that we form combines of those people who have been adversely affected by the riots. वे आपस में रह सकें, एक दूसरे को सहानुभूति दे सकें और आगे बढ़ सकें। लेकिन यह नहीं कि उनके लिए कुछ सोचा ही नहीं गया। सरकार की तरफ से और प्रांतों को भी हिदायतें दी गयीं कि उनकी जो भी जरुरतें हैं वे पूरी करनी चाहिएं[r14] ।
[c15] महोदय, मैं इससे ज्यादा आपका समय दूसरी बातों पर नहीं लेना चाहता हूं। मैं इस बात पर फिर से वापस आना चाहता हूं कि सरकार ने अपनी पहली एटीआर रिपोर्ट दी है। यह मामला वहीं खत्म नहीं हो जाता। सरकार की जिम्मेदारी बनी रहती है, एक-एक पग पर उसकी मानीटरिंग करनी होती है। सरकार इस चीज को महसूस करती है, आज इसकी प्राइममनिस्टरशिप श्री मनमोहन सिंह जी कर रहे हैं।इस संबंध में माखौल के साथ बात की गई। क्या आप यह समझते हैं कि जब अटल बिहारी वाजपेयी जी प्रधानमंत्री थे, तो वे केवल हिंदुओं के लिए सोचते होंगे ? आप प्रधानमंत्री जी के लिए ऐसा क्यों सोचते हैं, जो कि खुद सिख समुदाय से हैं, जिसकी गिनती देश भर में अल्पसंख्यकों में है, वे कितने कम हैं लेकिन वे आज प्रधानमंत्री पद पर हैं। इस बात को सिखों ने महसूस किया था और देश भर के सिखों ने कहा था और गुरूद्वारों में जा-जाकर इनके लिए प्रार्थना की। इन्होंने कहा था कि वर्ष १९८४ में जो हुआ, अब आगे देश में ऐसा नहीं होना चाहिए। क्या आप इसके लिए संकल्पित हैं? क्या आपने नहीं किया …( व्यवधान) आपने आज फौजों का जिक्र किया …( व्यवधान) मैं कहना चाहता हूं कि फौजों में सिख भाइयों ने बहुत बड़ा रोल अदा किया है…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Maneka ji, you are a responsible Member. Keep quiet, please. आप लोग शांत हो जाइए।
श्री पवन कुमार बंसल : जिस तरह का रोल आजादी की लड़ाई में सिख भाइयों ने अदा किया था, बाद में भी ऐसा ही करते रहे हैं। इसीलिए आज चीफ ऑफ द आर्मी स्टाफ कौन है?एक सिख समुदाय से है। मैं इस बात को नहीं कहना चाहता हूं, मैं इस बात का जिक्र भी नहीं करना चाहता हूं, इस कारण नहीं कि वे लोग सिख समुदाय से हैं, लेकिन सच यही है कि वे सिख समुदाय से हैं। डिप्टी चैयरमैन ऑफ द प्लानिंग कमीशन के पद पर भी यही स्थिति है, फिर आप किस बात के कारण ऐसा कह रहे हैं? स्वयं डिप्टी स्पीकर साहब जो हमारे सामने बैठे हुए हैं …( व्यवधान) आप की पार्टी से ही ताल्लुक रखते हैं। इस सदन के सभी लोगों ने उनको बनाया है…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Shri Badal, sit down, please. This will not be allowed. Nothing will be recorded.
(Interruptions) …* *Not Recorded.
श्री पवन कुमार बंसल : इतने सारे लोग सिख समुदाय से ऊंचाइयों पर पहुंचे हैं।इसके बावजूद कहा जाता है कि इतने लोगों के साथ आपने ऐसा कर दिया। मैं आपसे कहना चाहता हूं कि For God’s sake, please do not bake your political cake on the funeral pyre of others. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: You are going to speak. I will allow you to speak. Why are you interrupting now? If they interrupt you when you are speaking, would you like that?
श्री पवन कुमार बंसल : शायद हमारे उस तरफ के माननीय सदस्य नहीं जानते कि इन सब बातों के बावजूद पंजाब में कांग्रेस सत्ता में आयी, तो क्यों आई?न अकाली दल और न ही बीजेपी आई। वहों की जनता ने तो बीजेपी को निकाल दिया, बाहर कर दिया, उनको अपना अस्तित्व मालूम पड़ गया। लोगों को भड़काने की बहुत कोशिशें हुईं। उस वक्त शांति लाने के लिए राजीव लोंगोवाल एकार्ड किया था। आपने कहा था कि आप की सरकार में बहुत बड़ी तादाद में लोग आए थे। यह फैसला किनका था?राजीव गांधी ने कहा था कि “It is not essential as to who wins. What is important is that the flame of freedom should continue to remain alive in the country.” जरूरत है कि वह ज्योति हर वक्त उज्ज्वल रहे, जिससे सभी लोगों को प्रोत्साहन मिले। आज इस पर चर्चा की गई, यह बहुत अच्छा हुआ कि आपने सरकार से इस विषय पर कहा। लेकिन आप इन दोनों बातों को कन्फ्यूज करके कहना चाहते हैं कि सिखों ने ये-ये किया। उनके साथ ज्यादती हुई। क्या आप यह नहीं सोचना चाहते कि क्यों पंजाब आज छोटा है? क्या कोई कह रहा था कि आप इतना छोटा पंजाब ले लें?पंजाबी लाहौल स्पीति तक पढ़ाई जा रही थी। आपने कहा था आपको जरूरत नहीं है कि पंजाबी पूरे देश में फैले।आपने कहा था कि आप हमें छोटी सी जगह दे दीजिए, जहां हम राज कर सकें।…( व्यवधान) लेकिन अगर लोग वहां पर आपको फिर से राज नहीं देना चाहते तो क्या वह हमारा गुनाह है? आपने जितना छोटा मांगा था, वह दिया…( व्यवधान) और अब वह पंजाब बना। शायद आप नहीं समझे थे कि क्या हुआ? आपने तो उस दिन दीवाली मनाई थी। अब आप आज कह रहे हैं कि एक छोटा सा पंजाब बना दिया, ऐसा सभी लोग बोलते हैं। उसको प्रांत भी नहीं समझते, ऐसा क्यों?आपने अभी पानी का जिक्र किया, मैं पंजाब से आया हूं, मैंने पंजाब की नुमाइंदगी पहले भी पार्लियामेंट में, राज्यसभा में की है। मैं हमेशा पंजाब की बात उठाता रहा हूं, आप रिकार्ड उठाकर देख लीजिए, चाहे पानी का मामला हो या कोई अन्य मसला हो, बेशक कोई कमेटी हो या कहीं और सभी जगह हमने यह मामला उठाया है। आप इसका जिक्र इस प्रकार से करते हैं और यह भूल जाना चाहते हैं कि हिन्दुस्तान का कोई संविधान है।अगर कोई मसला अंतर-प्रांतीय होता है, तो वह संविधान के तहत हमें हल करना होता है। इसके लिए हमारी जुडीशियरी है, वहां यह पानी का मसला गया हुआ है। आपने उसको कन्फ्यूज करते हुए अतीत का जिक्र करते हुए कहा कि सिखों के साथ ज्यादती हुई।ऐसा हरगिज नहीं है, मैं कहना चाहता हूं कि कांग्रेस ऐसा नहीं होने देगी[pkp16] ।
कांग्रेस ऐसा होने नहीं देती है। हां, दंगे हुए, सभी के लिए शर्मजनक बात है। सभी के लिए सोचने की बात है कि दंगा कहीं भी हो, दंगा है। कोई भी मासूम इन्सान उसमें मरता है, उसका खून बहता है तो वह सभी के लिए चिंता की बात है। हमें अभी भी इस बात की जरूरत है, मैं अभी भी इस बात को कहता हूं, खत्म करने की बात नहीं कहता, अभी भी सरकार को लगे रहने की जरूरत है कि कहीं किसी के खिलाफ सबूत मिलते हैं तो वह कचहरी में जाए और कार्रवाई करे। संभावनाओं को देखते हुए, ऑन दी बेसिस ऑफ प्रॉबेबिल्टिज, अगर सरकार ने कह दिया कि इसमें यह मुश्किल है, आप उसे इतना बड़ा इशू बना देंगे, उस पर इतनी बड़ी एनालसिज कर देंगे कि इस कारण सरकार ये सब करती है। जैसा मैंने शुरू में कहा कि हमें ऐसा नहीं सोचना चाहिए। यह सिर्फ राजनीति के अलावा और किसी बात से प्रेरित नहीं है। ऐसे मसले दूर करने की जरूरत है। इस सदन में श्री अटल बिहारी वाजपेयी और श्री लाल कृष्ण आडवाणी जैसे महान लीडर्स है. मैं विश्वास करता हूं कि वे उन पर कुछ इस तरह का नियंत्रण रखेंगे। देश में बहुत हो गया, १९८४ के बाद भी बहुत दंगे हो गए लेकिन बाहर के लोग मानते हैं कि इतना बड़ा देश, जहां १०८ करोड़ लोग हैं, ऐसा होने के बाद भी एक फंक्शनल डैमोक्रेसी में चलते हैं। आज फिर लोग यह विचार बना रहे है। मैं इस कारण कहता हूं कि बार-बार पिछला जिक्र न करें ताकि उन लोगों के जख्मों में समय के साथ जो मरहम लगी है, वह फिर कुरेंदेन जांए।. यह बात सोचने की जरूरत है ताकि देश दुनिया में आगे बढ़ता रहे जैसे इस वक्त यूपीए की सरकार के तहत बढ़ रहा है।
श्री सुखदेव सिंह ढींडसा : मैं एक मिनट के लिए एक्सप्लनेशन देना चाहता हूं।
अध्यक्ष महोदय:आपको लास्ट में मनिस्टर साहब के रिप्लाई के बाद बोलने का मौका मिलेगा।
…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Shri Dhindsa, you can reply later.
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय: कुछ रिकॉर्ड नहीं होगा।
(Interruptions) … * MR. SPEAKER: Nothing will be recorded except what I permit. What I do not permit will not be recorded. Only Shri L.K. Advani’s speech will be recorded.
(Interruptions) …* * Not Recorded.
श्री लाल कृष्ण आडवाणी (गांधीनगर) : अध्यक्ष महोदय, मेरे वरिष्ठ सहयोगी श्री वाजपेयी जी इस बहस में इंटरवीन करेंगे। इसीलिए आज प्रात:काल तक मेरा विचार नहीं था कि मैं बोलूं। मैंने ढीडसा जी की बात को सुना। उन्होंने कुल मिला कर देश के लिए सिखों ने किस प्रकार का योगदान दिया है, इसका विस्तार से उल्लेख करके इस बहस के महत्व को और बढ़ा दिया।
अभी-अभी बंसल जी बोल रहे थे। बंसल जी ने कहा कि हम नानावती कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर बहस करें तो ज्यादा उपयुक्त होगा। मैं इस बात से सहमत हूं और इसीलिए मैं उनकी इस बात से पूरी तरह सहमत हूं कि इसे रॉयट कहना शायद उपयुक्त शब्द नहीं है। साधारणत: रॉयट्स होते हैं जैसे हिन्दू मुसलमान रॉयट्स हुए। शीर्षक में एंटी सिख रॉयट शब्द का प्रयोग किया। (व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय: यही तो मुसीबत है। आप टोका-टाकी न करें।
…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: I will not allow this. This will not be recorded.
(Interruptions) …* MR. SPEAKER: You can speak when your turn comes. This is not being recorded.
(Interruptions) … * MR. SPEAKER: Will you sit down? Take your seat, please. When I am on my legs, you have to sit down.
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय: आप पहले बैठिए । फिर बात करेंगे।
…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय: आपको बोलने का मौका मिलेगा। आपकी पार्टी से कोई दूसरा सदस्य भाषण देने वाला है। जो बात कहनी है, आप उन्हें बता दीजिए।
…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Restrain yourselves, please.
श्री लाल कृष्ण आडवाणी : इसमें स्वयं नानावती कमीशन ने कहा है कि इनका प्रारम्भ इस कारण हुआ कि देश की प्रधान मंत्री …( व्यवधान) बहुत रिसपैक्टिड लीडर थी, उनकी हत्या हो गई इसके कारण उसका एक रिएक्शन हुआ।…( व्यव् ÉvÉÉxÉ[R17] ) * Not Recorded.
MR. SPEAKER: Who is doing that? If you have the courage, stand up. Stand up, let me see.
श्री लाल कृष्ण आडवाणी :अध्यक्ष महोदय, पृष्ठ १८० पर…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: It would be applicable to all sides and not one side.
श्री लाल कृष्ण आडवाणी : अध्यक्ष महोदय, पेज १८० पर नानावती कमीशन ने कहा है :
“The cause for the events which had happened on 31-10-84 can be stated to be the spontaneous reaction and anger of the public because their popular leader and the Prime Minister of the Country was killed. ” सही बात है। फिर उसने कहा है कि :
“The cause for the attacks on Sikhs from 1-11-84 has not remained the same. ” जो पहले दिन की प्रतक्रिया थी वह तो स्पानटेनियस थी। उसका उल्लेख भी है लेकिन उसके बाद स्थिति बदल गई। “Taking advantage of the anger of the public, other forces had moved in to exploit the situation. Large number of affidavits indicate that local Congress (I) leaders and workers had either incited or helped the mobs in attacking the Sikhs. ” मैं इसका उल्लेख इसलिए कर रहा हूं क्योंकि यहां पर जो बातें १९८४ के संदर्भ में कही जा रही हैं, वह पॉलटिकल मोटिव से नहीं कही जा रही हैं यह नानावती कमीशन की रिपोर्ट है। इतना ही नहीं, कहा है : “But for the backing and help of influential and resourceful persons, killing of Sikhs so swiftly and in large numbers could not have happened. ” इतना ही नहीं, आगे कहा है :
“The attacks were made in a systematic manner and without much fear of the Police; almost suggesting that they were assured that they would not be harmed while committing those acts and even thereafter. Male members of the Sikh community were taken out of their houses. They were beaten first and then burnt alive in a systematic manner. In some cases, tyres were put around their necks and then they were set on fire by pouring kerosene or petrol over them. In some cases, white inflammable powder was thrown on them which immediately caught fire thereafter. This was a common pattern which was followed by the big mobs which had played havoc in certain areas. The shops were identified, looted and then burnt.” This is the Nanavati Commission Report:
“Thus what had initially started, as an angry outburst became an organised carnage. ” MR. SPEAKER: Advani Ji, can I have the page number?
SHRI L.K. ADVANI : This is page no. 180.
MR. SPEAKER: Yes, you may go on.
SHRI L.K. ADVANI : On page no. 181, he goes on to say:
“There is enough material on record to show that at many places the Police had taken away their arms – meaning the arms of the Sikhs – or other articles with which they could have defended themselves against the attacks by mobs. After they were persuaded to go inside their houses on assurances that they would be well-protected, attacks on them had started. All this could not have happened if it was merely a spontaneous reaction of the angry public.” This is on page 181. अध्यक्ष जी, यह रिपोर्ट रखी गई, एक्शन टेकन रिपोर्ट रखी गई, उसी दिन सब लोगों की रिएक्शन्स हुई क इनमें जिन लोगों के नाम हैं, कांग्रेस के नेताओं और एक मंत्री का, उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है या उनको सरकार क्यों बचाने की कोशिश कर रही है? लेकिन मैंने सब कुछ पढ़ने के बाद देखा कि इसमें अगर किसी के खिलाफ कार्रवाई पहले की गई है तो वह हैं दिल्ली के लैफ्टिनैंट गवर्नर,, जो लैफ्टिनैंट गवर्नर उस समय थे।यह घटना है श्रीमती गांधी जी की हत्या की जो ३१ अक्तूबर को हुई। इसमें लैफ्टिनैंट गवर्नर श्री गवई के बारे में कहा है, कमीशन की रिपोर्ट में कहा गया है क “So far as the Lieutenant Governor Shri P.G. Gavai is concerned, it has to be stated that the explanation given by him is not satisfactory and does not convince the Commission in recording the finding that there was no lapse at his level. Though he does not appear to have delayed taking of required actions, it does appear to the Commission that he did not give as much importance to the law and order situation in Delhi as the situation demanded.[bts18] ” सरकार का ATRपर कमेंट है:
“The Government had taken immediate administrative action. Shri Gavai was replaced by Shri M.M.K. Wali as Lieutenant-Governor of Delhi on 4th November, 1984.” ३१ अक्तूबर से ४ नवम्बर तक के चार दिनों में तत्कालीन उप-राज्यपाल को हटाया गया और उस की जगह श्री वली को उप-राज्यपाल बनाया गया। मुझे तो इस बात पर आश्चर्य हुआ कि जितने भी केसेज़ थे, सरकारने उन में किसी के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की। एक स्थान पर कहा गया है कि हम एग्ज़ामिन करेंगे। हां, एक केस ऐसा है जिसमें कार्यवाही की गई और उसी समय की गई। अध्यक्ष जी, फिर भीयदि आप नानावती रिपोर्ट देखेंगे,उसमें श्री गवई के बारे में क्या लिखा है और मुझे लगता है कि आप नोट कर रहे हैं, इसलिये मैं आपका ध्यान उस ओर दिलाना चाहूंगा। …( व्यवधान) MR. SPEAKER: I just wanted to listen. I am not noting.
श्री लाल कृष्ण आडवाणी : अध्यक्ष जी, नानावती कमीशन की रिपोर्ट में श्री गवई के बारे में पेज १७१ से लेकर १७३ तक लिखा हुआ है। MR. SPEAKER: I only wanted to follow you properly.
श्री लाल कृष्ण आडवाणी : अध्यक्ष जी, यह सारा पढ़ने लायक है। मैंने पूरा पढ़ा है। मैं सदन के सामने सारी रिपोर्ट तो नही पढ़ूंगा लेकिन पैराग्राफ १७२ जरूर पढ़ूंगा जिसमें लिखा है : “On the 2nd of November, he – the Lieutenant Governor – issued a piece of appeal in the morning and then went on a tour of the affected areas like Trilok Puri, Nand Nagari, Mongol Puri and Shahdara. He was accompanied by Shri H.K.L. Bhagat. He toured the affected areas for about two-and-a-half hours and gave certain spot instructions. He also spoke to General Vaidya about some sluggishness of the armed forces. ” चूंकि वहां पहले ही होम सैक्रेटरी और दूसरे लोगों ने कहा है कि आर्मी बुलानी चाहिये लेकिन वह नहीं आई। अगर आई तो कोई एक्शन नहीं ले रही थी। इसलिये उस समय जनरल वैद्य से बात की थी। “while he was still in the midst of his tour, he got a message to reach the Prime Minister’s House. There, besides the Prime Minister, Shri Jagdish Tytler and Shri Dharamdas Shastri were present. On his suggestion, the Prime Minister requested the others to go out, and then he had a talk with the Prime Minister for about 20 minutes. He was given a hint that he was no more required to function as a Lieutenant Governor. In spite of that, after returning home, he arranged a meeting of the political parties. While the meeting was going on, he received a telephone call from Dr. P.C. Alexander asking him to go on leave. He was also told that he would be offered the post of Chairman of the Union Public Service Commission on resumption.” … (Interruptions) “He told Dr. Alexander that a Lieutenant Governor in this situation would not go on leave; either he functions or he resigns. On 3.11.84, he left Delhi.” Now, having read this and then yesterday I saw a statement by Mr. Padmakar Gavai in the DNA, a daily of Bombay, and I was surprised because the headlines said: “Had I spilled the beans at that time, …* I would read out to you another portion of this statement. I am not going to read out the whole. He says: “The Government of the day had a strategy to delay and prolong the decision deliberately and frustrate my action.” … (Interruptions)
MR. SPEAKER: In that form, it is not admissible.
SHRI L.K. ADVANI : Sir, it is serious. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: Of course, it is serious. But in that form, it is not admissible.
SHRI L.K. ADVANI : Because it is serious, I did not rely on the paper itself. I phoned up.… (Interruptions) MR. SPEAKER: I have intervened. I have said that it cannot go on. I have already said it.
SHRI L.K. ADVANI : Therefore, I first found out his number as to where he is. I was told that he is in Nagpur; he lives in Nagpur. I telephoned him; I rang him up[c19] . * Not Recorded.
I said that this has been published in a Bombay newspaper yesterday in your name and I want to verify. MR. SPEAKER: No, that cannot go.
SHRI L.K. ADVANI : He said, “I stand by every word of what I have said.” MR. SPEAKER: Anyway, you have made a comment on that. It cannot be going as a statement because there is nobody to support. SHRI PAWAN KUMAR BANSAL : Had he appeared before the Commission? Did that gentleman appear before the Commission? SHRI L.K. ADVANI : I telephoned him.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Mr. Harin Pathak, allow me to conduct the House. Every second you are dictating me. SHRI L.K. ADVANI : I am not relying only on the newspaper report. Therefore, he is the only person.… (Interruptions) प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : सर, टी.वी. पर उनका पूरा का पूरा स्टेटमैन्ट लाइव आया है।…( व्यवधान) He made a statement. MR. SPEAKER: That does not make it admissible. Any statement made on the TV does not become admissible here. I have not interrupted him. THE MINISTER OF WATER RESOURCES (SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI): He is speaking on the Adjournment Motion. We are discussing the Report. Whomsoever were invited by the Commission to give the affidavits, their affidavits were recorded. Beyond that, any private statement cannot be a part of the discussion on the Adjournment Motion. … (Interruptions) MR. SPEAKER: No, I have allowed him. Let me give my ruling.
प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : बंसल जी ने सोनिया गांधी जी का अखबार का पूरा वक्तव्य क्यों पढ़ा…( व्यवधान) सोनिया जी का अखबार का पूरा वक्तव्य पढ़ सकते हैं तो इनका क्यों नहीं पढ़ सकते?…( व्यवधान) Why did you read the whole statement? … (Interruptions) SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI: What are you talking. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: She is present in the House. Do not forget that. But here that cannot be allowed. When you are reading through a report, I never interrupted. Whoever has said, whatever was said anywhere in the world cannot be repeated here. SHRI L.K. ADVANI : He is not ‘whoever’.
MR. SPEAKER: You generally indicate what is the nature. Do not quote his statement and all that. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: I have already said. Why are you doing this?
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Mr. Gawai has given any evidence.
… (Interruptions)
SHRI PRIYA RANJAN DASMUNSI: Sir, I will seek your indulgence for half a minute. Whatever observation he is making on Mr. Gawai has been contradicted at page 171 by Mr. Alexander. He is a Member of the other House. It has been contradicted at page 171. MR. SPEAKER: All right, your Member will reply to that.
MAJ. GEN. (RETD.) B. C. KHANDURI (GARHWAL): Sir,that should not be recorded. He is not here. … (Interruptions) MR. SPEAKER: I have been requesting everybody not to act as super Speaker.
SHRI L.K. ADVANI : Earlier on two issues, both the Mishra Commission and the Nanavati Commission have agreed namely that there was delay in calling the Army. On this, both have agreed. This particular matter is mentioned because Lieutenant Governor at that time in-charge of law and order in Delhi was Mr. Gawai. He says that the delay was deliberate in order to execute a sinister plot and the Commission also finds that it was not carnage which was spontaneous, but it was an organised carnage. Therefore, it is the duty of the Government to find out who organised it. This is what we demand. Today I have been happy to hear what the Home Minister said yesterday that this ATR is not final; we will continue to examine; and we will continue to follow it. This House is interested in knowing who organised this carnage. Those who participated in it have been named.… (Interruptions) MR. SPEAKER: I will take action.
SHRI L.K. ADVANI : But, as it has been said that the police functioned in a certain manner, which could not have happened, had it not been instruction from the top. Who gave this instruction? It is because in this even the Home Minister is named. Even others are named. I do not want to name it but certainly I want to know this. The Prime Minister at that time was not part of the political set-up. I believe that in these matters the attitude of the political set-up is most crucial. Therefore, I would appeal to him to find out who organised this carnage. That is all. (Interruptions) MR. SPEAKER: Please do not make this type of running commentary.
मोहम्मद सलीम (कलकत्ता-उत्तर पूर्व) : “जब से जलते हुए घर देखे हैं इन आंखों ने, रोशनी मुझको चिरागों की बुरी लगती है।” अध्यक्ष महोदय, चर्चा नानावती कमीशन की रिपोर्ट और उस पर दी हुई सरकार की ए.टी.आर. के ऊपर चल रही है। बहस थोड़ा आगे बढ़ी है। चूंकि मामला बहुत पुराना और महत्वपूर्ण है। इसके साथ और भी बहुत से मामले जुड़े हुए हैं। इसी वजह से हमारे पूर्ववर्ती वक्ताओं ने धर्म, दर्शन, समाज, इतिहास तथा अन्य तमाम बातों को भी इसके साथ जोड़ दिया cè[R20] । मैं उन बातों के विस्तार में नहीं जाऊंगा लेकिन मैं अपने को उनसे संबद्ध करता हूं। जैसे ढींडसा जी ने बताया, जहां तक सिख समुदाय की बात है, इस देश की आज़ादी की लड़ाई में उनका योगदान बहुत महत्वपूर्ण है। हमारी पार्टी माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी और वाम मोर्चा के लोग उस गौरवपूर्ण इतिहास के हिस्सेदार हैं। इसी वजह से क्षेत्र का इसमें कोई अंतर नहीं आता। मैं बंगाल से आता हूं। इस देश में चाहे सैल्यूलर जेल के पिलर्स पर जाकर देखें या मुहाफिज़खाने में देख लें, अफसोस तो यह है कि बंगाल और पंजाब ने जिस तरह से आज़ादी के लिए अपना खून बहाया और फसाद का शिकार हुए, १९४७ में बंगाल और पंजाब का बंटवारा हुआ, हम तभी से समस्याओं से जूझ रहे हैं। जहां तक १९८४ का मामला है, आडवाणी जी सदन में रहते तो अच्छा होता। वे हमसे पूर्व बोले हैं, इसलिए मैं उनकी बात से ही शुरू करता हूं। उनको आपत्ति है क ‘एंटी सिख रायट्स‘ क्यों कहा गया। उन्होंने मिसाल के तौर पर कहा कि अक्सर इस देश में हिन्दू-मुसलमान रायट्स होते हैं। जब आर्गनाइज्ड कार्नेज होती हैं और एक समुदाय को दबाया जाता है और उस पर हमले किये जाते हैं और आडवाणी जी ने आखिरी पैरा में बड़ी अच्छी बात कही, वे बड़े अनुभवी नेता हैं। मैं उनसे कहना चाहता हूं कि सिर्फ ८४ के रायट्स को हटाकर गुजरात लगा दिया जाए तो भी उनकी तमाम बात सच है। लेकिन वह उस पर नहीं बोलेंगे। इस देश में अल्पसंख्यकों पर जितने हमले हुए, अफसोस यह है कि हम इस देश की धर्मनिरपेक्षता पर गौरव करते हैं लेकिन बारी-बारी कभी सिख, कभी क्रिश्चियन, कभी मुसलमान, इस तरह से इनको टार्गैट करके …( व्यवधान) क्या आप सिखाएंगे मुझे क्या बोलना चाहिए? …( व्यवधान) अध्यक्ष महोदय : आप चुप करके बैठिये। Do not record anything.
(Interruptions) … * अध्यक्ष महोदय : आप बैठ जाइए। You go on speaking. Nothing else will be recorded.
(Interruptions) … * * Not Recorded.
अध्यक्ष महोदय : आप लोग बैठ जाइए। I would not allow this. I would not allow anybody to interrupt. … (Interruptions)
SHRI KHARABELA SWAIN (BALASORE): The word ‘pogrom’ is unparliamentary.… (Interruptions) MR. SPEAKER: That is not unparliamentary.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: It is not at your sweet will.
… (Interruptions)
MD. SALIM : I have spoken the word from the Report.… (Interruptions) The word ‘pogrom’ is in the Report.… (Interruptions) MR. SPEAKER: Mr. Salim, you address the Chair.
… (Interruptions)
मोहम्मद सलीम : मैं मानता हूँ कि १९८४ में दो समुदायों के बीच में दंगे नहीं हुए।
…( व्यवधान) इसमें क्या आपत्ति हो सकती है? आडवाणी जी होम मनिस्टर थे। जब नानावती कमीशन बना, उसकी टम्र्स ऑफ रैफरेन्स में तो रायट्स बताया है । लोग जो कुछ करते हैं, बाद में भूलते क्यों हैं यह मेरी परेशानी है। कवर पेज में आने से अलग है और अंदर आने से अलग बात है। It was not riot. Shall I read the terms of reference from (a) to (f)?… (Interruptions) २००० में ये बनाए गए। ऐसे गंभीर मामलों को उस वक्त भी गंभीरता से लेना चाहिए था, अचानक किसी फौरी फायदे के लिए नहीं।लोगों के खून, लोगों की लाशें, मासूमों पर ज़ुल्म, और उसके ऊपर सियासत करने से हमारी पार्टी सख्त नफरत करती है। …( व्यवधान) आपको क्या दिक्कत है? खून के ऊपर और लाशों के ऊपर राजनीति करने पर हमें आपत्ति है। क्या आपको आपत्ति नहीं है? …( व्यवधान) MR. SPEAKER: You address the Chair.
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय : क्या हो रहा है आपको?
...( व्यवधान)
MR. SPEAKER: I request for silence from all sides.
… (Interruptions)
मोहम्मद सलीम : आडवाणी जी ने जो १७९ और १८० पेज पढ़े, वे सही पढ़े। मैं पूरा नहीं पढूंगा, सैलेक्टिव बातें पढ़ कर सुनाई हैं उन्होंने । अध्यक्ष महोदय, आप रिकार्ड देखेंगे तो आपको हैरत होगी। श्री आडवाणी जी ने जहां से शुरू किया, उससे ऊपर की एक लाइन उन्होंने नहीं पढ़ी। जहां से उन्होंने पढ़ना शुरू किया, १८० पेज पर उन्होंने कोट किया, मैं उसे रिपीट नहीं कर रहा हूं लेकिन पेज १८० से पहले इंट्रोडक्शन पढा जाना चाहिए था। इंट्रोडक्शन पार्ट वन में है - “Considering the manner in which the violent attacks were made, it was felt that probably the attacks on Sikhs were organised by the Congressmen or their supporters or by some other organisations or associations.” यहother ogainisationor association कौन थे। जांच होनी चाहिये थी।ऐसा नानवटी रिपोर्ट में कहा है। मैं रिपोर्ट को ज्यादा महत्व नहीं देता हूं। अगर मैं रेफरेंस पढ़ूं तो २१ साल से जो लोग न्याय का इंतजार कर रहे थे, जिन पर जुल्म किए गए थे, उनके साथ इस कमीशन ने जस्टिस नहीं किया। इक्कीस साल के लम्बे समय के बाद भी किसी को इंसाफ नहीं मिला। उस समय जो बच्चे थे, आज वह नौजवान हो गए हैं और आज की अखबार में आया है कि २१ साल का एक अनाथ नौजवान मुल्क छोड़ कर बाहर जाना चाहता है। यह हमारे लिए शर्मनाक बात है। पीड़ित लोगों को न्याय मिलना चाहिए।…( व्यवधान) MR. SPEAKER: Please address the Chair; do not get diverted.
… (Interruptions)
मोहम्मद सलीम : महोदय, इंट्रोडक्शन में कहा गया, पृष्ठ संख्या १८० के बारे में आडवाणी जी ने सब कुछ पढ़ा, लेकिन एक लाइन ऊपर की नहीं पढ़ी, वह मैं पढ़ रहा हूं - “There is also evidence on record to show that on 31.10.84, either meetings were held or the persons who could organise attacks were contacted and were given instructions to kill Sikhs and loot their houses and shops.” श्री पवन कुमार बंसल जी ने भी कोट किया था और मैं भी कोट कर रहा हूं। सन् १९८१ से ही इस मुल्क में हिन्दू और सिख समुदाय को दो अलग-अलग धाराओं में धकेला जा रहा था। नानावटी कमीशन की रिपोर्ट से मैं कोट कर सकता हूं। श्री आडवाणी जी ने सिर्फ सिलेक्टिव पार्ट ही पढ़ा है। फिर दूसरी बात मैं कहना चाहता हूं कि ऐसे कौन से लोग हैं, जो अदर आर्गेनाइजेशंस, हर रविवार को रिहर्सल करते हैं, जो दिल्ली शहर में रेडीमेट मिल जाती हैंै। यह मामला राष्ट्रीय मामला है। दंगे-फसाद करवाने के लिए ये आर्गेनाइजेशंस रेडीमेड मिल जाती हैं। लोगों की तोहमत आपके ऊपर है और आपको इसे गंभीरता से लेना चाहिए। सन् १९८४ में जो कुछ हुआ वह सिर्फ सिखों का मामला नहीं था। गुजरात में जो कुछ हुआ वह केवल मुसलमानों का मामला नहीं है, जो भी जमहूरियत को मानते हैं, इंसानियत को मानते हैं, अमन चाहते हैं, इन सब बातों से उन सबका सिर शर्म से झुक जाता है। गुरू नानक जी, बाबा फरीद बुल्ले शाह और जो अन्य संत हैं, उनको मैं याद करता हूं। मैं बातों को बढ़ा नहीं रहा हूं, मैं यह कहना चाहता हूं कि श्री ढींडसा जी ने जो कहा, उसे मैं भी मानता हूं कि कोई एक व्यक्ति प्रधानमंत्री का कत्ल कर दे, लेकिन जो कातिल है, जो हमलावर है उसे पूरे समुदाय से संबद्ध करके, पूरे समुदाय को दोषी मानना कहां का न्याय है। यह एक मूलभूत बात है चाहे अमरीका में हो, चाहे लंदन में हो, चाहे अयोध्या में हो या दिल्ली में हो यह एक मानसिकता है और यह बिगड़ी मानसिकता है और लोग इस मानसिकता को हालात बिगाड़ने के लिए इस्तेमाल करते हैं[i21] । अध्यक्ष महोदय, हम संसद में चार्जशीट फ्रेम नहीं करेंगे। हम संसद में इसलिए बहस नहीं कर रहे हैं कि किसी को हमें फांसी लगानी है, लेकिन लोकतंत्र किस रास्ते पर चलेगा, हमारे देश की क्या परम्परा बनेगी, सरकार की दिशा कौन सी होगी, हमारी धर्मनिर्पेक्षता की जो नीति है, वह किस तरह से ऊपर उठेगी, पूरे विश्व के सामने, कम्युनिटी ऑफ नेशन्स के सामने, हम अपना चेहरा, अपना मुंह किस तरह से दिखाएंगे, वह सबसे बड़ी बात होती है। प्रधान मंत्री जी, ऐसा कुछ नहीं हो कि आपको श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की तरह कहना पड़े कि हम मुंह दिखाने लायक नहीं हैं। इसलिए हम संसद में बहस करते हैं। हमारा उद्देश्य स्पष्ट है। …( व्यवधान) MR. SPEAKER: Md. Salim, do not get diverted. Please address the Chair.
… (Interruptions)
मोहम्मद सलीम : अध्यक्ष महोदय, मैं डायवर्ट होने वालों में से नहीं हूं। मैं डायवर्ट नहीं होता। पहली बात यह है कि politics of hatred and politics of intolerance है, जिससे ऐसी स्थिति बन सकती है। माहौल ऐसा कैसे बनता है, उसे हमें ध्यान में रखना चाहिए। जब रेडियो से एनाउंसमेंट होता है कि श्री सतवन्त सिंह और श्री बेअन्त सिंह, दो सिख यूथ ने हमला कर दिया, तो यह एक्शन यही दर्शाता है कि माहौल बनाया गया, उसके बाद जो हुआ, उसकी तो मीडिया रिपोट्र्स हैं, कमीशन की रिपोट्र्स हैं। एंटी सोश्यल एलीमेंट्स, जो आग लगा सकते हैं, जो आगजनी कर सकते हैं, ऐसे ऑर्गेनाइज्ड गैंगस्टर, जो एक समुदाय को दूसरे के खिलाफ भड़काने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं, जो सिखों को सबक सिखाने के लिए तैयार हो रहे थे, जो यह सोचते हैं कि इस देश में अल्पसंख्यक क्यों हैं, वे सब लोग ऐसै मौके का फायदा उठाते हैं। महोदय, दिल्ली शहर में जो लोग उस वक्त थे, उन्होंने देखा और बाद में अखबारों और टेलीविजन में अब यह बात आई कि ऐसा हुआ, लेकिन आगे ऐसा नहीं हो, इसलिए जो कोई भी कसूरवार हैं, उन्हें सजा देने का पूरा प्रबन्ध होना चाहिए, पूरा बन्दोबस्त होना चाहिए। तभी हम अपने संविधान के बारे में, अपने कानून के बारे में, अपनी व्यवस्था के बारे में, अपने इंस्टीटयूशन्स के बारे में गर्व कर सकते हैं। स्टिकर लगा देने से, गर्व से कहो हम ये हैं, गर्व से कहो हम वे हैं, उससे गर्व नहीं होता है। गर्व इससे होता है कि हमारे यहां कानून का शासन है और सबके लिए समान है, डबल यार्डस्टिक नहीं हैं। मंत्री के लिए कुछ, साधारण नागरिक के लिए कुछ, अपने लिए कुछ, दूसरों के लिए कुछ, दिल्ली के लिए कुछ और गुजरात के लिए कुछ, ऐसा नहीं है, तभी हम गर्व कर सकते हैं। …( व्यवधान) MR. SPEAKER: What is this?
… (Interruptions)
मोहम्मद सलीम : अध्यक्ष महोदय, यह सब मैं यहां से कोट कर सकता हूं। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : ठीक है। आप आगे बोलिए।
मोहम्मद सलीम : यही वजह है कि हमें सीधा संदेश देना पड़ेगा। मैं अपनी पार्टी की ओर से भी जिम्मेदारी के साथ कह सकता हूं कि एक समुदाय को डॉमिनेट कर के, उसके खिलाफ नफरत पैदा कर के, उसके मासूम बच्चों को जलाकर, उसकी महिला के साथ बलात्कार कर के, उसका कत्ल कर के, जैसा हमने १९८४ में दिल्ली में देखा, …( व्यवधान) अध्यक्ष महोदय : यह क्या है। आप लोग क्यों शोर कर रहे हैं।
मोहम्मद सलीम : मैं कश्मीर से कन्याकुमारी तक की बात कह रहा हूं। हमारा मुल्क बहुत बड़ा है। आपके लिए छोटा हो सकता है। …( व्यवधान) कच्छ से लेकर कोहिमा और कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक, मैं सभी जगह की बात कह रहा हूं। आपको क्या आपत्ति है। मैं इतना दावे से कह सकता हूं क्योंकि मैं कलकत्ता शहर और पश्चिम बंगाल से प्रतनधित्व करता हूं, ऐसे एलीमेंट्स, अगर आप कांग्रेसमैन को जिम्मेदार ठहराएंगे, तो क्या कलकत्ता शहर में कांग्रेसमैन नहीं थे, क्या कलकत्ते में हमला करने की साजिश नहीं हुई, लेकिन उस समय वहां वामपंथ की हुकूमत थी, वहां श्री ज्योति बसु की सरकार थी और हमारे जैसे कार्यकर्ता थे, इसलिए दंगे नहीं हुए। वहां वे कार्यकर्ता नहीं थे जो लठैत बनते हैं, जो आग लगाते हैं, जो कैरोसिन तेल, पेट्रोल और डीजल साथ लेकर चलते हैं, जिन्हें ट्रेनिंग दी जाती है कि किस तरह से जलाया जाता है। ऐसे कार्यकर्ता कलकत्ते में नहीं मिले, इसलिए कलकत्ता नहीं जला और दिल्ली जल गई। …( व्यवधान) इसमें आपको क्या आपत्ति है ? प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा जी, दिल्ली जल गई, इसमें खुशी की क्या बात है [rpm22] ? यही वजह है, जब गुजरात में फसाद हो, बड़ौदा में हो, मुम्बई में हो, कलकत्ता में हो, दिल्ली में हो, कहीं भी हों तो हुकूमत की जिम्मेदारी एडमनिस्ट्रेशन को टाइट करना है। यह आडवाणी जी ने कहा था, मैं नहीं कह रहा हूं, वे होम मनिस्टर थे, जब गुजरात जल रह था वह भी उनको देखना चाहिए था, उनको हिदायत देनी चाहिए थी और हम जिस जमीन पर रहते हैं, हमारी भी कुछ जिम्मेदारी होती है, हम लोग करते हैं।…( व्यवधान) बाद में एफीडेविट तो है, लेकिन उस रोज़ ३१ अक्टूबर, एक और दो नवम्बर को हम यह देखते कि १-२ भगवा झण्डा लेकर आप भी उतरे थे कि नहीं, सिखों को मत मारो, सिखों को मत जलाओ।…( व्यवधान) MR. SPEAKER : Nothing else will be recorded except the speech of Shri Md. Salim.
(Interruptions) …* MR. SPEAKER : May I submit that there should not be any intolerance of each other, inside the House at least? We should tolerate each other’s views, respect them and reply to them in a proper manner. There should be no intolerance of each other. Shri Salim, please continue. मोहम्मद सलीम : जो इनटोलरेंस और टोलरेंस की बात कर रहे हैं, वह सदन के अन्दर और सदन के बाहर दोनों जगह है। मेरी पार्टी और मेरी यह राय है कि नानावती कमीशन को जो टम्र्स ऑफ रैफरेंस दी गई थी, उसके प्रति उन्होंने न्याय नहीं किया और इसलिए २१ साल से जो मज़लूम इन्तजार कर रहे हैं, उन्हें भी इस कमीशन की रिपोर्ट से पूरा न्याय नहीं मिला है। एक नहीं, नौ कमीशन और कमेटियां बने, सब जानते हैं, उसे मैं रिपीट नहीं कर रहा हूं, पूरे देश में चर्चा हो रही है, ढींढसा जी, आपके दर्द और दुख को हम तो ज्यादा अच्छा समझते हैं, वे नहीं। चूंकि यह स्थिति आजादी के बाद एक के बाद एक कमीशन बने, फसादात हुए और इन्साफ नहीं मिला। लेकिन यह एक मौका है, इसलिए आपकी ए.टी.आर. भी हमें नापसन्द है। इस ए.टी.आर. में अगर आप आंकड़ों में जाएंगे, १० recommenation थे, नौ मान लिए तो वह सही नहीं होगा। जिनके नाम आये हैं, उन सब के विरूद्ध आपको कार्रवाई करनी पड़ेगी, चाहे वह जो भी हो। जब * Not Recorded.
आप यह कहते हैं तो आपको भी यह कहना चाहिए कि चाहे मोदी हो और चाहे टाइटलर हो, सब के साथ इन्साफ होना चाहिए। यह हिम्मत हमारी है, आपकी नहीं है, इसलिए आप खामोश रहिये। …( व्यवधान) दूसरी बात, सज्जन कुमार हमारे सदस्य हैं, इसलिए मैं नाम ले रहा हूं। जो ए.टी.आर. में कहा गया, उनके बारे में, उनके सिलसिले में, इससे भी हम खुश नहीं हैं, न सदन खुश है और इसलिए हम समझते हैं कि जिनके बारे में जैसे कार्रवाई करनी चाहिए, केसेज़ को, चाहे वह ट्रेस्ड हों या अनट्रेस्ड हों, उसका एक लॉजिकल कन्क्लूज़न होना चाहिए। आप कहते हैं, एफ.आई.आर. नहीं है, कांस्टेबल अगर यह कहे कि हां, प्राइमाफेसी इनके खिलाफ कुछ संदेह है तो डायरी ले लेते हैं, एफ.आई.आर. ले लेते हैं, नहीं लेते हैं तो हम लोग दबाव डालते हैं कि क्यूं नहीं लिया और कमीशन के बाद कमीशन कह रहा है तो आप कहेंगे कि नहीं? हम नहीं कह रहे कि आप जजमेंट पास करो, लेकिन आप उन मज़लूमों की तरफ से कानून का दरवाजा तो खटखटाओ कि इनको सजा मिलनी चाहिए, नहीं तो लोग क्या बोलेंगे। अभी आपने देखा है, जब जो सत्ता में बैठ जाता है, वह केस को खत्म कर देते हैं, गड़बड़ कर देते हैं। खुद हमने इन सब के बारे में कहा था, आडवाणी जी, उमा भारती जी और मुरली मनोहर जोशी जी को केस के बारे में।इसलिए BJD, जनता दल-यू और ढींढसा जी, आपको मैं कह रहा हूं, यह मामला पार्टी लाइन का नहीं है, alliance का नहीं है, आपको उस समय भी कहना चाहिए।…( व्यवधान) श्री मोहन रावले (मुम्बई दक्षिण-मध्य): उस समय बालासाहेब ठाकरे साहब ने कहा था कि एक सिख को भी हाथ नहीं लगना चाहिए, हम सिखों का बलिदान नहीं भूल सकते।…( व्यवधान) अध्यक्ष महोदय : ठीक है, आप बैठ जाइये।
मोहम्मद सलीम : यह अच्छी बात है। मैं कह रहा हूं कि जब जोशी जी, उमा भारती जी और आडवाणी जी का केस आया था, उस वक्त भी अापको ऐसा ही कहना चाहिए था।[i23] तीसरी बात, जिन पुलिस अधिकारियों और आला अधिकारियों की बात की जा रही है। मैं और मेरी पार्टी इस बात को नहीं मानती है कि वह रिटायर हो चुका है या उसका तबादला हो गया है। मुल्क में अगर इंसाफ के लिए २१ साल तक इंतजार किया गया है, यदि वे लोग रिटायर भी हो चुके हैं तो कानुन के अनुसार उनकी गिरेबां पकड़नी चाहिए। ठीक है, विभागीय एक्शन नहीं हो सकता है, लेकिन क्रिमनल प्रोसिक्यूशन के हिसाब से तो कार्यवाही की जा सकती है। बैंक में जब फ्राड होता है, तब भी यही बात कहते हैं कि रिटायर हो चुके हैं। You allow them to retire. ऐसा नहीं होना चाहिए। उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही होनी चाहिए। मुआवजे के बारे में नानावती आयोग, एटीआर और बंसल जी ने भी कहा है। एक करोड़, दो करोड़, ७० करोड़ या ७२ करोड़ की बात नहीं है, यह सब रूपये से नहीं मापा जा सकता है। यह तो हम हिलिंग टच की बात कर रहे हैं। You feel for that. The whole nation feels for that. संसद की तरफ से, अध्यक्ष महोदय, मैं आपसे भी इस पर मदद चाहूंगा कि सरकार के ऊपर यह दबाव डाला जाए कि जिनके घर के कमाने वालों की हत्या की गई है, उन सबको सरकारी नौकरी देने का प्रबन्ध करना चाहिए। अलग से कम्पन्सेशन देने की जो बात कही जा रही है, वह कम्पन्सेशन एटपार होना चाहिए। एक राज्य में कुछ, दूसरे राज्य में दूसरे किस्म का नहीं होना चाहिए। ताकि लोगों को यह मालूम हो कि यह मुल्क की जिम्मेदारी है, समाज की जिम्मेदारी है। यह आपने साबित भी किया है। मनमोहन सिंह जी इसे आपने शुरू किया है। जब यूपीए की सरकार आयी तो इसे लोगों ने सराहा, सिक्खों ने भी सराहा। इससे बहुत से लोग घबराए हुए थे। अब इस बारे में भी आपको ही कदम उठाना होगा। देश के लोगों के अंदर जो गम और गुस्सा है, उसे देखते हुए यह कहना होगा कि " न कोई हमसफर, न किसी हमनशीं से निकलेगा, हमारे पैर का कांटा हम ही से निकलेगा। " *m06 श्री रामजीलाल सुमन (फ़िरोज़ाबाद) : अध्यक्ष महोदय, हम आज इस महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा कर रहे हैं। नानावती आयोग की रिपोर्ट और सरकार द्वारा प्रस्तुत एटीआर पर चर्चा हो रही है। सलीम साहब ने जो भाषण दिया है, मैं उन सब चीजों को दोहराना नहीं चाहता हूं। ३१ अक्तूबर १९८४ को श्रीमती इंदिरा गांधी जी की हत्या के बाद जो दंगे हुए, उनके बारे में ठीक ही कहा गया है कि वे दंगे नहीं, बल्कि सामुहिक नरसंहार था। उस सामुहिक नरसंहार के लिए जो लोग जिम्मेदर थे, जो कातिल थे, जो उसमें शामिल थे, उनके खिलाफ जो कठोर कार्यवाही होनी चाहिए थी, वह आज तक नहीं हो पायी है और यही असल सवाल है। इन दंगों की जांच करने के लिए तमाम समतियां बनीं। सबसे पहले रंगनाथ मिश्र समति, १९८५ में जब यह आयोग बना और १९८६ में इसकी संस्तुति आयी, लेकिन उस पर लीपापोती की गई। फरवरी १९८७ में तीन समतियां बनीं जैन समति, आहुजा समति और मित्तल समति। मार्च १९९० में दिल्ली प्रशासन ने पोटीरोसा समति बनायी। नवम्बर १९९० में पोटीरोसा समति का काम जैन और अग्रवाल समति को सौंप दिया गया। १९९४ में दिल्ली में बीजेपी की सरकार ने न्यायमूर्ति नरूला की अध्यक्षता में सलाहकार समति बनायी और इसके बाद नानावती आयोग बना। अध्यक्ष महोदय, कमीशन और समतियां बनने के बावजूद भी इतना लम्बा अरसा बीत जाने के बाद भी पीड़ित पक्ष को मदद नहीं मिल पायी है, जो भरोसा कायम होना चाहिए था, वह भरोसा हम लोग कायम नहीं कर पाए ग्च्ढढत्हड्ढ२४टहैं। मैं कहना चाहूंगा कि दिल्ली में मौतों का आधिकारिक आंकड़ा २,७३३ है। हत्याएं सिर्फ दिल्ली में नहीं हुईं, दिल्ली के अलावा गुड़गांव, कानपुर, बोकारो और इंदौर में जो हिंसक घटनाएं हुईं, उनमें २,००० लोग मारे गए। एक आदमी का कत्ल होने के बाद ५-७ लोगों को सजा हो जाती है, लेकिन यहां लगभग ५,००० लोगों का कत्ल होने के बाद सिर्फ ७-८ लोगों के खिलाफ कार्यवाही हो, मैं समझता हूं कि इससे ज्यादा बड़ा मजाक कोई दूसरा नहीं हो सकता और यही काम हुआ। मेरा आरोप है कि उन लोगों को बचाने का काम किया गया। जो कमेटीज़ बनाई गईं, उनसे जो निष्कर्ष निकलते हैं, उनके चलते कहा जा सकता है कि जो दंगाई थे, कातिल थे, कहीं न कहीं उन्हें बचाने का काम किया गया। मैं निवेदन करना चाहूंगा कि यह सामूहिक नरसंहार था। जैसे मैंने पहले कहा, असल सवाल यह है कि अगर कातिलों के खिलाफ कार्यवाही नहीं होगी तो लोगों का कानून-व्यवस्था से विश्वास हट जाएगा और इस व्यवस्था से विश्वास टूट जाएगा। मैं यह भी कहना चाहूंगा कि श्रीमती गांधी की हत्या में उनके जो दो अंगरक्षक सिख शामिल थे, उनकी जितनी निन्दा की जाए, उतनी कम है। लेकिन उनके कुकृत्यों के लिए पूरी कौम को निशाना बना लें, इससे ज्यादा घृणित कार्य कोई दूसरा नहीं है। यही वह समय होता है, हमारा यही आचरण आतंकवाद को जन्म देता है, इसके मूल में यही प्रवृति है।हमें इसे समझना चाहिये। मैं आपके मार्फत निवेदन करना चाहूंगा कि अभी जब आडवाणी जी का भाषण हुआ, तो बीजेपी और आरएसएस के हमारे मित्र बोल रहे थे।…( व्यवधान) कांग्रेस पार्टी को यह स्वीकार करना चाहिए कि उनका नियंत्रण नहीं था। लेकिन कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने उसकी शुरुआत कर दी और स्वर्गीय राजीव गांधी का यह कहना कि जब कोई बड़ा पेड़ गिरता है तो पृथ्वी हिल जाती है, पृथ्वी ज्यादा ही हिल गई। लेकिन यह बात सही है कि कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जो काम शुरू किया, उस समय उस काम में सहमति जताने, उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने का काम भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस के लोगों ने भी किया था, यह कटु सत्य है।…( व्यवधान) दिल्ली में सिखों के साथ जो हुआ, जिसे हम सामूहिक नरसंहार कहते हैं, ठीक उसी तरह गोधरा कांड के बाद गुजरात में हुआ। वह भी सामूहिक नरसंहार था।…( व्यवधान) आपको ज्यादा चिन्ता करने की जरूरत नहीं है। आप शामिल थे या नहीं, १९८५ के लोक सभा चुनाव ने साबित कर दिया कि पूरी आरएसएस कांग्रेस पार्टी के साथ थी। आपको दो सीटें मिलीं, हिन्दुस्तान में इससे बड़ा सबूत कोई दूसरा नहीं हो सकता। आपको क्या प्रमाण चाहिए।…( व्यवधान) श्री अटल बिहारी वाजपेयी चले गए। वे दो लाख वोटों से हारे थे। मल्होत्रा जी, कोई आरएसएस वाला आपके लिए काम करने को तैयार नहीं था।…( व्यवधान) १९८५ में आप और शिवराज जी की पार्टी एक हो गई थी। मैं समझता हूं कि यही सबसे बड़ा प्रमाण है।…( व्यवधान) बोलिए मत, वर्ना आपको मुश्किल हो जाएगी।…( व्यवधान) MR. SPEAKER: Mr. Ramji Lal Suman, kindly address the Chair.
… (Interruptions)
श्री रामजीलाल सुमन : सबसे दुखद बात यह है कि रिपोर्ट के आधार पर कानून मंत्रालय से सिर्फ पांच अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए सलाह ली जा रही है। क्या इससे बड़ा मजाक कोई दूसरा हो सकता है? जिस तरह दंगे हुए, एक राजनैतिक कार्यकर्ता होने के नाते मैं यह बात मानता हूं कि दंगा एक बार हो सकता है, लेकिन अगर सरकार की द्ृढ़ इच्छा शक्ति हो तो दंगा लम्बे समय तक नहीं चल स्ाकता[R25] । 13.00 [r26] hrs. वे दंगे पांच-छ: दिन चलते रहे। इसका सीधा मतलब है कि दंगाइयों के ऊपर यह मनोवैज्ञानिक प्रभाव था कि हमारा राज है, पुलिस हमारे साथ है, सरकार हमारे साथ है, हम चाहे जो तांड़व नृत्य करें, हमारे खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी। अगर सरकार का खौफ, सरकार का इकबाल, सरकार का मनोवैज्ञानिक प्रभाव इन दंगाइयों पर होता, तो निश्चित रूप से यह घटना एक दिन हो सकती थी, एक क्षण हो सकती थी लेकिन इतने लंबे समय तक यह घटना चलती रहे, दौर चलता रहे, यह संभव नहीं था।
अध्यक्ष महोदय, नानावती आयोग की जो रिपोर्ट है, वह बड़ी अजीबो-गरीब है। जिस तरह की यह रिपोर्ट है, उसी का परिणाम है कि श्री शिवराज पाटिल जी ने उसे अपनी इच्छानुसार परिभाषित कर दिया।इस रिपोर्ट में तत्कालीन उपराज्यपाल श्री पी.जी गवई को जमकर लताड़ा गया है और कहा गया है कि हालात से निपटने मे उन्होंने बहुत निरसता दिखाई। लेकिन गवई साहब फरमाते हैं क दंगा रोकने के लिए गृह मंत्रालय से उन्होंने जो फोर्स मांगी, वह फोर्स उपलब्ध नहीं करायी गयी। उस समय दिल्ली में पुलिस आयुक्त श्री टंडन थे।
13.01 hrs. (Mr. Deputy Speaker in the Chair) आयोग ने उनको भी कटघरे में खड़े करने का काम किया है। लेकिन टंडन साहब ने कहा कि मुझे मेरे अधिनस्थ सही स्थिति नहीं बता रहे थे। यह स्थिति है।
उपाध्यक्ष महोदय, अभी बंसल साहब जी बोल रहे थे। सही मायनों में जो लोग प्रभावित हुए, वे जिस तरह की रिपोर्ट लिखवाना चाहते थे, जिस तरह के अपराध पंजीकृत करना चाहते थे, उस तरह के अपराध पंजीकृत नहीं हुए। दिल्ली कैंट इलाके में सबसे अधिक ३४० सिख मारे गये थे। पुलिस ने एक साधारण तरीके से उसकी रिपोर्ट लिख ली। पीड़ित लोग नाम बोलते रहे कि अमुक-अमुक लोग हमें मारने में शामिल हैं लेकिन पुलिस ने एफआईआर में, प्राथमिकी में उन लोगों के नाम दर्ज नहीं किये। सबसे अधिक महत्वपूर्ण बात यह है कि पीड़ित पक्ष के लोग जिस तरह के अपराध पंजीकृत कराना चाहते थे, उस तरह के अपराध पंजीकृत ही नहीं हुए।
उपाध्यक्ष महोदय, न्यायमूर्ति कपूर द्वारा जो प्रस्तुत रिपोर्ट है, वह एक तरह से समाज शास्त्र का विश्लेषण है। उन्होंने कहा है कि दंगों की चूक के लिए जिन ७२ पुलिस अधिकारियों पर अभियोग लगाये गये, उनमें से छ: गृह मंत्रालय के अऩुशासनिक पदाधिकारी से संबंधित थे, १४ मुख्य सचिव उपराज्यपाल से संबंधित थे और शेष ५२ अधिकारी पुलिस के अनुशासनिक पदाधिकारी से संबंधित थे। अब ७२ अधिकारियों में से १३ अधिकारी सेवानिवृत्त हो गये तथा कार्यवाही शुरू होने से पहले ही तीन व्यक्तियों की मृत्यु हो गयी। १२ अधिकारियों को बरी कर दिया गया। एक मामले में विवादित कार्यवाही केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकारी द्वारा रद्द कर दी गयी। एक मामले में पैंशन कम कर दी गयी तथा तीन मामले अदालत में लंबित हैं। जहां हजारों बेगुनाह लोगों को मार दिया गया हो और उसमें ७२ अधिकारी पूर्णरूपेण जिम्मेदार हों, तो क्या यह उनको बचाने का काम नहीं है, उनको संरक्षण देने का काम नहीं है ? हमने मन ही नहीं बनाया कि उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाये। जहां तक शेष ३९ राजपत्रित पदाधिकारियों का संबंध है, तो उसमें से ३३ अधिकारियों के विरुद्ध जांच की गयी। इनमें ३२ अधिकारियों को बरी कर दिया गया और दो अधिकारियों की निंदा की गयी तथा एक अधिकारी को चेतावनी देकर छुट्टी दे दी।
मैं निश्चित रूप से कह सकता हूं कि जांच के नाम पर, दंड के नाम पर टालमटोल करने का काम किया गया। अभी जब नानावती कमीशन की रिपोर्ट इस सदन में पेश हुई, कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद नानावती साहब ने उस पर कोई प्रतक्रिया करने से मना कर दिया। लेकिन कमेटी रिपोर्ट पेश होने से चार दिन पहले नानावती साहब ने फरमाया कि दंगों की पूरी जिम्मेदारी तत्कालीन गृह मंत्री श्री पी.वी. नरसिंह राव एवं जनरल वैद्य की थी। उनका कहना यह है कि गृह मंत्री श्री पी.वी. नरसिंह राव मौन बने रहे और सेना काफी विलंब से वहां भेजी गयी।
उपाध्यक्ष महोदय, यह जो रिपोर्ट है, जैसा मैंने पहले कहा कि इस रिपोर्ट की जो भाषा है, वह संदेह पैदा करती है[r27] ।
इस रिपोर्ट के पृष्ठ ११६ में है कि आयोग को यह निष्कर्ष रिकार्ड करना सुरक्षित लगता है कि जगदीश टाईटलर के खिलाफ ठोस साक्ष्य हैं कि संभवत: सिखों पर हमला करने में उनका हाथ था। अत : सरकार इस पहलू की जांच करवाने के बाद, जैसा जरूरी हो, आय़ोग भी आगे कार्रवाई करने की सिफारिश करता है। सरकार की तरफ से कहा गया है, संभावना के आधार पर अभियोजन नहीं चलाया जा सकता। सही मायने में इस कमीशन की जो रिपोर्ट है, वही कंफ्यूजन क्रिएट करती है।
उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपसे एक निवेदन करना चाहूंगा कि अगर यह मान लिया जाए कि जिन लोगों के नाम इस रिपोर्ट में आए, अगर वे निर्दोष थे तो मेहरबानी करके माननीय प्रधान मंत्री जी यह बताने की जरूर कृपा करें कि आखिर दोषी कौन है ? दिल्ली में दंगे हुए, दिल्ली में लोग मारे गये और मारने वाले लोग भी दिल्ली के थे। यह कोई बोफोर्स की जांच नहीं है, यह दिल्ली की जांच है। अब मैं यह नहीं समझता हूं कि अगर ईमानदारी से तथ्यों का पता लगाया जाता तब कोई निष्कर्ष नहीं निकाल सकते थे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जब यह दंगा हुआ तो क्या स्थिति थी ? इस दंगे के समय ज्ञानी जैल सिंह, जो उस समय हमारे देश के राष्ट्रपति थे। उनसे मिलने श्री इन्द्र कुमार गुजराल, श्री कुलदीप नैयर, चौधरी चरण सिंह और श्री कर्पूरी ठाकुर गये और जितने लोगों ने उनसे मुलाकात की, उस समय ज्ञानी जैल सिंह एक राष्ट्रपति की तरह व्यवहार नहीं कर रहे थे। वे अपने को असहाय महसूस कर रहे थे, देश के जो गृह मंत्री थे, वे भाव शून्य थे और लगभग मौन थे।
श्री मोहन सिंह (देवरिया) : वे हमेशा ही भावशून्य रहते थे।
श्री रामजीलाल सुमन : उपाध्यक्ष महोदय, यह जो रिपोर्ट है, इसके पेज १७ पर श्री राम विलास पासवान, गवाह संख्या १३५, उनका साक्ष्य है। उनके घर से भी एक सिख को जबर्दस्ती खीचंकर मारा गया। उसमें राम विलास पासवान जी ने भी कहा है कि वहां पास में कांग्रेस पार्टी का दफ्तर था। वहां से लोग आए थे और मुझे बताया गया था कि वे कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता थे।
पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के सेवा निवृत्त मुख्य न्यायाधीश श्री रंजीत सिंह नरूला ने अपने शपथ-पत्र में कहा है और यह इस रिपोर्ट के पेज ९६ में है कि पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध जांच के दौरान वेद मरवाह द्वारा तैयार किये गये हस्तलखित नोट उच्च अधिकारियों के निर्देशों पर नष्ट कर दिये गये। इस प्रकार साक्ष्य का एक महत्वपूर्ण भाग नष्ट कर दिया गया। इससे पता चलता है कि किसके इशारे पर उन कर्मियों ने अपराध के आपत्तिजनक कारनामे दर्ज किये थे। यह नरूला साहब का साक्ष्य पेज नम्बर १०२ में है। श्री गोविन्द नरायण - साक्ष्य नम्बर १५० और श्री सज्जन कुमार पर जो आरोप लगे, उसके जवाब में श्री सज्जन कुमार ने इनके खिलाफ केहर सिंह द्वारा लगाये गये आरोपों का खंडन किया है। लेकिन केहर सिंह ने बताया है कि दिनांक १-११-१९८४ को जब वह प्रात: काल दुकान पर जा रहे थे, तो मंगोलपुरी कांग्रेस कार्यालय पर भीड़ जमा थी जिसे सज्जन कुमार द्वारा भाषण देते हुए उकसाया जा रहा था कि इस इलाके का कोई सिख जिंदा नहीं रहना चाहिए।
उपाध्यक्ष महोदय, ये इस तरह के साक्ष्य थे। उसमें जो महत्वपूर्ण बात है कि साक्ष्य नं. १८८- श्री बी.पी. मारवाह जो उस समय सीआईडी के अपर आयुक्त थे और जिन्हें जांच दी गई थी तो उनके जिम्मे दिल्ली पुलिस की भूमिका की जांच थी और वह इस निष्कर्ष पर पहुंच रहे थे कि दिल्ली पुलिस अपने दायित्व का निर्वहन करने में असमर्थ हुई। जब वह उसका निष्कर्ष निकालने ही वाले थे, तभी कह दिया गया कि इस जांच को बंद कर दो। इसलिए हमारा आरोप है कि इस जांच को प्रभावित करने का कहीं न कहीं मैनीपुलेशन हुआ है और मेरा आरोप है कि दंगाइयों को बचाने का काम किया गया है जिसकी वजह से उन लोगों के खिलाफ आज तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है[R28] ।
[MSOffice29] उपाध्यक्ष महोदय, मुझे बहुत ज्यादा बातें नहीं कहनी हैं।मैं यह निवेदन करना चाहता हूँ कि इस देश में तमाम धर्मों और जातियों के लोग रहते हैं, परस्पर सामंजस्य, राष्ट्रीय एकता और पूरे समाज में सद्भाव हमारी खुद की जिम्मेदारी है। जब हम कुछ वर्गों की नीयत पर शक करना शुरू कर दें, अनावश्यक रूप से दो वर्गों में झगड़ा हो जाए या कोई एक व्यक्ति झगड़ा शुरू कर दे और उसकी वजह से हम किसी वर्ग विशेष को गुनाहगार बनाने पर लग जाएं, मैं समझता हूँ कि किसी भी कीमत पर यह हिन्दुस्तान की सेहत केे लिए ठीक नहीं है। साम्प्रदायिक तत्वों ने जहां-जहां नंगा नाच किया, चाहे वह दिल्ली में सिखों को मारने का काम हो या गुजरात और देश के दूसरे हिस्सों में आरएसएस, बजरंग दल और विश्व हिन्दु परिषद द्वारा जो नंगा नाच किया गया, दोनों एक जैसी प्रवृत्ति के द्योतक हैं। गुजरात में जो कुछ हुआ, वहां जिस तरह से अकलियत के लोगों को चुन-चुनकर मारा गया, वह कोई दंगा नहीं था। गोधरा की घटना के बाद, जिन-जिन हल्कों में मुसलमान रहते थे, उनको चुन-चुनकर मारने का काम किया गया। उस समय मोदी जी के आचरण और इन्दिरा जी की हत्या के बाद किए कांग्रेस के लोगों के आचरण में कोई ज्यादा अन्तर नहीं है। आज गृहमंत्री जी का बयान छपा है। मैं आपके माध्यम से निवेदन करना चाहता हूँ कि गृहमंत्री जी, आप इसमें जितना ज्यादा विलम्ब करेंगे,यह मामला आपके लिए उतना ही ज्यादा कष्टदायी होता जाएगा। टाइटलर को अगर आप अभी सरकार से विदा कर दें तो आपकी बड़ी कृपा होगी। यह काम आपको पहले ही कर देना चाहिए था। सज्जन कुमार जी के खिलाफ जो मुकदमे हैं, उनको फिर से रीओपेन करना चाहिए और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्यवाही करनी चाहिए जिससे भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
महोदय, पीड़ितलोगों का पक्ष बराबर अखबारों में छपता रहता है। उनमें से तमाम लोग बेघर हो गए, लगभग दो हजार महिलाएं विधवा हुईं, उनके पुनर्वास की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए।मैं आपके माध्यम से यह भी निवेदन करूंगा कि यह जो एटीआर है, इसे पढ़ने से ऐसा लगता है कि सरकार कोई कार्यवाही नहीं करना चाहती है।इस एटीआर को रद्द करते हुए आपको यह संकल्प लेना चाहिए कि सिखों पर हमला करने वाले कातिल लोगों के खिलाफ सरकार कठोर कार्यवाही करेगी।
श्री विजय कृष्ण (बाढ़) : उपाध्यक्ष महोदय, अभी कई विद्वान साथियों ने अपने विचार यहां रखे हैं। वर्ष १९८४ के दंगे सही मायने में नरसंहार थे, उसकी जितनी भी निन्दा और भत्र्सना की जाए, कम है।मैं अपनी ओर से और अपनी पार्टी की ओर से इसकी निन्दा करते हुए सदन में बोलने वाले माननीय सदस्यों की भावनाओं के साथ हूँ। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है।
इस लोकतांत्रिक देश में इस तरह की घटना भारत के माथे पर काला धब्बा है, कलंक है। इतिहास की इस शर्मनाक घठना की जितनी भी निंदा की जाए, वह कम ही होगी। जो हालात १९८१ से १९८४ के बीच देश में थे, उससे हम और आप सभी वाकिफ हैं। जब आपरेशन ब्लू स्टार हुआ था, इस देश में एक वर्ग ऐसा था, जो आहत था। सिखों की भावनाओं पर चोट लगी थी और एक ऐसा भी तबका था, जो तालियां पीट रहा था। देश में बहुत कम लोग थे, जो आपरेशन ब्लू स्टार की धारा के खिलाफ बोल रहे थे। देश में एक नेता चन्द्रशेखर जी थे, जिन्होंने खड़े होकर आपरेशन ब्लू स्टार के खिलाफ बात की थी। उस वक्त उन्हें निंदा सहनी पड़ी थी और गालियां सहनी पड़ी थीं। लेकिन बाद की घटनाओं ने साबित किया कि स्थिति दिन-ब-दिन बदतर होती गई और हालात खराब हो गए। यहां तक हालात पहुंच गए कि देश की सर्वोच्च नेता, नेहरू परिवार की मुखिया, जिस नेहरू परिवार ने राष्ट्र के लिए बहुत किया, उसे भारी कीमत चुकानी पड़ी और श्रीमती इंदिरा गांधी की हत्या हो गई। देश की सर्वोच्च नेता की हत्या हुई, जो उस नेहरू खानदान से थीं, जिसने देश के लिए, उनकी कांग्रेस पार्टी ने भी देश के लिए बहुत कुछ किया है। इस देश में कांग्रेस का इतिहास त्याग, बलिदान और कुर्बानी का रहा है। लेकिन जिन परिस्थितियों में श्रीमती इंदिरा गांधी की हत्या हुई, उसकी परिस्थिति १९८१ से लेकर १९८४ तक थी।
सिखों के इतिहास पर जब आप नजर डालेंगे, तो भारत के इतिहास के साथ उसे जोड़ना नहीं भूलेंगे। स्वतंत्रता के आंदोलन से लेकर आज तक त्याग, बलिदान और कुर्बानी का इतिहास सिखों का रहा है। आपने जो बात ब्लू स्टार आपरेशन के समय की थी, आप भूल गए थे कि एक बार अहमद शाह अब्दाली का दमन चक्र अमृतसर में घूमा था और चार हजार से अधिक सिखों का बलिदान हुआ था। उस वक्त आपने भावनाओं की सौदागरी करने का काम किया था। आज भी कई लोग वही कर रहे हैं। दोषी कोई भी हो, हमारी तरफ का हो, उनकी तरफ का हो या इनकी तरफ का हो, नरसंहार गोधरा का हो या दिल्ली का हो, सबकी तरफ हमारी एक नजर होनी चाहिए, क्योंकि कानून का राज है। यह रूल आफ ला है।
प्रधान मंत्री जी यहां हैं। मैं यूपीए की मुखिया सोनिया जी को बधाई देना चाहता हूं कि उन्होंने सिख समुदाय से आए हुए व्यक्ति को, अल्पसंख्यक को देश का प्रधान मंत्री बनाने का काम किया। लेकिन आज भी संदेह की निगाह पाटिल साहब आप पर भी डाली जा रही है, क्योंकि इस रिपोर्ट पर आपने कार्रवाई करनी है। हमारे देश में अटल जी जैसा नेता भी है, जिनका एक स्टेटस है। मैं एक बात उनसे भी कहना चाहता हूं। जब गोधरा में नरसंहार हुआ था, तो उस नरसंहार के जिम्मेदार वहां के मुख्य मंत्री को बचाने के लिए आप जैसे नेता बोलने लगेंगे, तो फिर हम क्या समझेंगे। गोधरा में अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों की हत्या हुई, पूरे गुजरात में यह आग फैली। यह किसी एक व्यक्ति के द्वारा नहीं हुआ, संविधान द्वारा गठित राज्य सरकार द्वारा पोषित घटना थी। एक नरसंहार था, जिसके पक्ष में अटल बिहारी वाजपेयी जी जैसा आदमी और एनडीए के लोग खड़े होते हों, तो यह एक अजीब बात लगती है। आज ये नैतिकता की दुहाई दे रहे हैं। आज वे सिखों के घावों पर मरहम लगाने की बात कर रहे हैं, सिखों की भावना से जुड़ने की बात कर रहे हैं। मैं कहना चाहता हूं कि भावनाओं की सौदागरी न करें, क्योंकि इससे कटुता बढ़ती है, वैमनस्य बढ़ता है और परेशानी बढ़ती है। इससे टेंशन भी बढ़ती है। इससे हमें और आपको मुक्त रहना चाहिए। राजीव जी ने उस समय प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया था, जिसकी चर्चा अभी बंसल जी ने की थी। एक अच्छा काम हुआ था और वातावरण को ठीक बनाने के लिए उस वक्त उनकी बड़ी भूमिका रcÉÒ[R30] ।
जिस परिवार में मां मर गयी हो और उसका बेटा गलियों में लोगों की भावनाओं को समेटने में लगा हो कि ऐसी घटना दुबारा न हो, यह बहुत साहस का काम होता है और राजीव जी ने उन दिनों साहस का ही काम किया था।
माननीय बंसल जी चंढीगढ़ से आते हैं, विद्वान साथी हैं और मैं उनका आदर करता हूं। जब वे बोल रहे थे तो कह रहे थे कि अकाली दल के लोग एफआईआर नहीं करवा रहे थे। मैं कांग्रेस के माननीय साथी से जानना चाहता हूं कि एफआईआर करने का काम क्या कोई पार्टी कराती है? एफआईआर दर्ज करवाने का काम पीड़ित करता है और यही कानून की व्यवस्था है। आप जैसे विद्वान आदमी जब ऐसी बात कहेंगे तो हमारे जैसे साधारण आदमी को तो बहुत दिक्कत हो जाएगी। इसलिए आप जैसे लोग जब बात कहते हैं तो उन्हें बहुत संभलकर बात कहनी चाहिए। हम जानते हैं कि आप कानून के ज्ञाता हैं और माननीय कपिल सिब्बल जैसे एक से एक कानून के ज्ञाता आपके साथ हैं, फिर भी जो बात आपके द्वारा कही गयी है उचित नहीं है। देश में कानून का राज चलना चाहिए और कानून की नजर में सब बराबर हैं, यह दिखना भी चाहिए। जहां पर मुकदमा चलाने की आवश्यकता हो, वहां पर मुकदमा चलाया भी जाना चाहिए। जिनके खिलाफ साक्ष्य हैं, जनता में मैसेज यह जाना चाहिए कि जिस तरह से गोधरा कांड पर हम लोग मजबूती के साथ खड़े हैं कि गोधरा मामले से संबंधित लोगों को सजा मिलनी चाहिए, क्योंकि अल्पसंख्यक लोगों के साथ अन्याय हुआ है और एनडीए की सरकार ने उनको संरक्षण देने का काम किया है। मैसेज यह जाना चाहिए कि जहां उंगली उठ रही है, वहां सजा होनी चाहिए और यूपीए की सरकार में पारदर्शिता होनी चाहिए, साफ बात नजर आनी चाहिए और अगर बात साफ नजर नहीं आती है तो जिन सिखों के हम बलिदान, त्याग की बात करते हैं, उनको अगर न्याय नहीं मिलता है तो न्याय पर से लोगों का विश्वास उठ जाएगा। इसलिए हम यूपीए की चेयर-पर्सन, माननीय प्रधान मंत्री जी और माननीय गृह मंत्री जी से अनुरोध करना चाहते हैं कि एटीआर की कमियों को दुरुस्त किया जाए। एटीआर में आपने ७० करोड़ रुपये के मुआवजे की बात कही है, जोकि बहुत ही कम है और इसमें एकरूपता भी नहीं है। कमीशन ने आपको बताया कि मुआवजे में एकरूपता होनी चाहिए। आप बताएं कि आप कौन सी एकरूपता लाना चाहते हैं।
अभी हमारे माननीय रामजीलाल सुमन जी ने कहा कि उजड़े हुए परिवारों को कोई राहत नहीं मिली है, कोई मकान नहीं मिला है, बहुत सारे लोगों को मुआवजा नहीं मिला है और मुआवजे की राशि में एकरूपता नहीं है। इसलिए राष्ट्रीय जनता दल आपसे मांग करता है कि इस दिशा में काम आगे बढ़ाया जाना चाहिए और पीड़ित परिवार के एक सदस्य को नौकरी जल्दी से जल्दी मिलनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उन्हें नौकरी एक-दो या तीन महीने में मिल जाएगी।
यहां पर रंगनाथ समति व तारकुंडे समति की रिपोर्ट की बात आई। मैं समझता हूं कि राहत के लिए सरकार में इच्छा-शक्ति होनी चाहिए कि हम क्या देना चाहते हैं, क्या दिखना चाहते हैं और हम एनडीए से अलग कैसे हैं और साथ ही हम तुरंत पीड़ित परिवारों के लिए क्या कर सकते हैं? सरकार नियमों को शथिल करके अनाथ बच्चों को नौकरी देने का काम तुरंत करे और यह भी सुनिश्चित करे कि नरसंहार पीड़ित परिवारों को अधिक से अधिक मुआवजा मिलेगा।
पेज १३८ पर आयोग की सिफारिश है कि सेना को बुलाने में विलम्ब के संबंध में न्यायमूर्ति मिश्रा द्वारा दर्ज किये गये निष्कर्षों से आयोग सहमत है। आयोग ने यह भी सिफारिश की है कि एक स्वतंत्र पुलिस बल बनाया जाए जो राजनैतिक प्रभावों से मुक्त हो[r31] । आयोग ने यह भी सिफारिश की है कि एक स्वतंत्र पुलिस बल बनाया जाए जो राजनीतिक प्रभावों से मुक्त हो। मैं माननीय गृह मंत्री जी से विनम्र अनुरोध करना चाहता हूं कि पुलिस बल स्वतंत्र बने, राजनीतिक प्रभावों से मुक्त हो, इसके लिए आप कौन सी व्यवस्था करने जा रहे हैं? क्या इस विषय में नियम, कानून और प्रावधान बनाए जा सकते हैं और किन विद्वानों की राय ली जा सकती है? इस दिशा में शीघ्र पहल की जानी चाहिए और पहल करके इन बातों को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। मुझे अभी बहुत कुछ कहना है और मेरे बहुत से साथियों ने भी इस संबंध में कहा है लेकिन मैं समझता हूं कि यह नरसंहार भारत जैसे लोकतांत्रिक देश के इतिहास में एक काला धब्बा और कलंक है। अगर हम इस कलंक को धोना चाहते हैं तो हमें मजबूती से आगे आना पड़ेगा और राजनीतिक इच्छा शक्ति दिखानी होगी। कांग्रेस ने अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं। अनेक उतार-चढ़ाव देखने के बाद कांग्रेस इस मुकाम पर पहुंची है। मैं कांग्रेस की नेत्री और यूपीए की मुखिया से यह आग्रह करना चाहता हूं कि इस मामले में जो भी दोषी हैं, इस विषय में दूध का दूध और पानी का पानी होना चाहिए। ऐसा न लगे कि हम सिर्फ एक्शन करना चाहते हैं, बल्कि ऐसा लगे कि यह एक्शन लिया जा रहा है, यह दिखना चाहिए।यदि ऐसा किसी को नहीं दिख रहा है और किसी को ऐसा लगता है कि किसी को बचाने की कोशिश की जा रही है, यह न कांगेस के हित में है, न यूपीए के हित में, न हमारे हित में है, न किसी के हित में है। दंगाई कोई भी हो, नरसंहार का दोषी कोई भी हो, किसी भी जमात का हो, उसका कॉलर ठीक से पकड़कर, नैक ठीक से पकड़कर के नियम-कानूनों के हिसाब से उसे कानून के सुपुर्द करना चाहिए और कार्यवाही करनी चाहिए तथा देश को यह संदेश देना चाहिए कि यूपीए की गवर्नमेंट एक सेक्युलर गवर्नमेंट है। जो नीति और कानूनों के हिसाब से चल रही है। गुजरात में जो घअनाएं घटी हैं तथा उनके बचाव में जो लोग खड़े हैं, उनको जनता ने सजा दी है, फिर सजा देंगे। इसलिए इस बात को दोहराया नहीं जाना चाहिए और मजबूती के साथ जो सिख भाइयों के साथ जुल्म हुआ है, कौम के साथ जो जुल्म हुआ है, घृणित काम हुआ है उसकी निंदा करते हुए अपनी पार्टी की ओर से फिर सरकार से आग्रह करूंगा कि एक्शन टेकन रिपोर्ट की कमियों को दूर करते हुए जो पीड़ित और प्रताड़ित परिवार हैं उनको मुआवजा दिया जाना चाहिए।
श्री सुशील कुमार मोदी (भागलपुर) : उपाध्यक्ष महोदय, मैं इस कार्य स्थगन प्रस्ताव पर बोलने के लिए खड़ा हुआ हूं। अक्टूबर ३१, १९८४ को जो देश के अंदर दंगे हुए, ये दंगे केवल दिल्ली में ही नहीं बल्कि पूरे देश में हुए थे जिसमें तीन हजार से ज्यादा सिखों का कत्लेआम कर दिया गया था। इन दंगों के बारे में या कत्लेआम के बारे में तीन बातों पर आम सहमति है।
पहली बात तो यह है कि the Congress Party was involved , इन दंगों में कांग्रेस से जुड़े लोग पूरे देश के अंदर शामिल थे। इसमें सभी लोगों की आम सहमति है। …( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: No running commentary please.
श्री सुशील कुमार मोदी : दूसरी बात यह है कि the Police and administration did nothing to protect the Sikhs , चाहे रंगनाथ मिश्रा कमीशन या नानवती कमीशन की रिपोर्ट हो, यह दूसरी बात बहुत स्पष्ट है कि पुलिस और प्रशासन ने सिखों की रक्षा करने में कोई कार्यवाही नहीं की।
तीसरी बात यह है कि there was a sinister design. एक डिजाइन था, जिसके द्वारा आर्मी को बुलाने में जान-बूझ कर देरी की गई और जिसका परिणाम यह हुआ कि देश के अंदर इतना बड़ा कत्लेआम हो गया। उपाध्यक्ष महोदय, यह जो कत्लेआम हुआ, यह एक मानसिकता का परिचायक है। इसलिए अगर सत्ताधारी दल के लोग यह कहते हैं कि यह हत्या के बाद उपजा आक्रोश था, ऐसी बात नहीं है। मैं आपको स्मरण कराना चाहूंगा कि इस कत्लेआम के बाद जो लोकसभा का चुनाव हुआ उस चुनाव में पूरे देश के अंदर सिखों के खिलाफ घृणा का भाव पैदा किया गया। उस समय जो सत्ताधारी दल था उसने किस तरह वोटों को एकत्र किया कि अमेठी में जब चुनाव हो रहे थे तो वहां दीवारों पर लिखा था "बेटी है सरदार की देश के गद्दार की"। मैं पूछना चाहता हूं कि ऐसा नारा लिखने वाले कौन लोग lÉä[c32] ।
इस तरह के नारे लिखने वाले कौन लोग थे, ये नारे क्यों लिखे गए " सरदारों की बेटी, गद्दारों की बेटी।" उपाध्यक्ष महोदय, हमें अभी तक स्मरण है, उस समय जब लोक सभा के चुनाव हुए, उसमें जो पोस्टर्स लगाए गए, जो अखबार में विज्ञापन दिए गए, मुझे वे अभी तक याद हैं, जो हमारे सामने बैठे कांग्रेस पार्टी की ओर से प्रकाशित विज्ञापन थे, उसमें एक टैक्सी दिखायी गई. उसमें खालसा पंथ को मानने वाला एक ड्राइवर है, अंग्रेजी में लिखा था “Would you trust a driver from another State?” यह किस बात का परिचायक है? यह केवल आकस्मिक घटना नहीं थी बल्कि जो माईंड सैट था, उसमें जो मानसिकता थी, उसका परिचायक था। उसके बाद जो लोक सभा के चुनाव हुए उसमें ४१० सीटें कांग्रेस को मिली थीं और भारतीय जनता पार्टी को केवल दो सीटें मिली थीं। हम को दो सीटें इसलिए आईं कि भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस सिखों के पक्ष में खड़ी थी। श्री खुशवंत सिंह जो सैकुलर राइटर माने जाते हैं …( व्यवधान)
(Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Please do not make any running commentary.
… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Only Shri Modi’s speech will go on record.
(Interruptions) …* श्री सुशील कुमार मोदी (भागलपुर) : जो बीजेपी के समर्थक नहीं रहे हैं उन्होंने लेख लिखा और कहा कि दिल्ली में जब सिखों का कत्ले-आम किया जा रहा था तो आरआरएस के लोगों ने सिखों को बचाने का काम किया, उनको घरों में संरक्षण देने का काम किया। उसी का परिणाम था, जब श्री लाल कृष्ण आडवाणी नई दिल्ली क्षेत्र से …( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: This is not to be recorded.
(Interruptions) … * उपाध्यक्ष महोदय: रिकॉर्ड में नहीं जाएगा।
...( व्यवधान)...* उपाध्यक्ष महोदय: जयप्रकाश जी, आप बैठ जाएं।
…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय: रिकॉर्ड में कुछ नहीं जा रहा है। आप बैठ जाएं।
…( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing is going to be recorded. Please sit down.
… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: This is not to be recorded. Please sit down.
(Interruptions) …* उपाध्यक्ष महोदय: आपने जो कहना था, कह दिया है। अब आप बैठ जाएं।
…( व्यवधान)
* Not Recorded.
श्री सुशील कुमार मोदी : उपाध्यक्ष महोदय, जब श्री लाल कृष्ण आडवाणी नई दिल्ली लोक सभा क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे थे, उस समय श्री खुशवंत सिंह ने खुल कर आरएसएस का साथ दिया जबकि वह जीवन भर बीजेपी के विरोधी रहे। उसका परिणाम बीजेपी को भुगतना पड़ा और उसकी दो सीटें घट गईं। देश के अल्पसंख्यक समुदाय, सिख समुदाय की रक्षा के लिए बीजेपी ने जो कुछ करना संभव था, वह करके दिखाया।
जो रंगनाथन कमीशन बना था, मैं सदन को याद दिलाना चाहूंगा और गृह मंत्री बैठे हैं, उनसे पूछना चाहूंगा कि ६ महीने बाद रंगनाथन कमीशन क्यों बना? दंगे ३१ अक्तूबर १९८४ को हुए। ६ महीने के बाद जब लोक सभा में इस विषय को लेकर हंगामा हुआ, पूरे देश में विरोध हुआ तो ६ महीने के बाद रंगनाथन कमीशन का गठन किया गया। मैं जानना चाहूंगा कि जिस रंगनाथन मिश्रा जिनकी यह रिपोर्ट है, उनको राज्य सभा का सदस्य क्यों बनाया गया? …( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: This is not to be recorded. No. This is not to be recorded. Please sit down. I will not allow you.
(Interruptions) …* उपाध्यक्ष महोदय: जयप्रकाश जी, आप बैठ जाएं। मैं आपको एलाऊ नहीं करूंगा। नैक्सट स्पीकर आपकी पार्टी का ही है।
…( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: No. You are disturbing the House. I will not allow you. No. Please sit down. Whatever Shri Jai Prakash says is not going to be recorded.
(Interruptions) …* श्री सुशील कुमार मोदी : देश के सांस्कृतिक, धार्मिक और राजनीतिक इतिहास में सिखों का योगदान है। उसे दुनिया कभी नहीं भूला सकती है[R33] । मैं सदन के स्मरण कराना चाहूंगा कि गुरु गोबिंद सिंह जी के पिता गुरु तेग बहादुर जी की गर्दन को गुरुद्वारा शीश गंज में उतार दिया गया और उनके चारों पुत्र बलिदान हो गए। श्री गुरु गोबिंद सिंह साहब के पास उनके हजारों शिष्य बैठे हुए थे, हजारों शिष्य सामने थे उनमें से किसी ने कहा कि आपके चारों पुत्रों का बलिदान हो गया। श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने कहा कि ये जो सामने शिष्य बैठे हैं, इन पुत्रों लिए मैंने अपने चारों पुत्रों का बलिदान किया है। श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने कहा “इन पुत्रन के सीस पर वार दिए पुत चार, चार मुए तो क्या हुआ जीवित कई हज़ार” जिसका अर्थ हैचार बलिदान हो गए तो क्या हुआ, यहां तो मेरे पुत्रों के समान हजारों शिष्य बैठे हैं। लेकिन सिख परंपरा के लोगों का ३१ अक्तूबर के बाद कत्लेआम किया गया। जो एक्शन टेकन रिपोर्ट है उसके अंदर मुझे इस बात का दु:ख है कि इक्कीस वर्षों बाद जब नानावती कमीशन ने कांग्रेस के कुछ नेताओं के नामों का उल्लेख किया है तो प्रोबेबल की बात कहते हैं। मैं आपको कोट करना चाहता हूं कि पेज सं० १५१, जिसमें नानावती कमीशन कहता है क "It also appears to the Commission that Shri Jagdish Tytler…"
जिसमें चार-पांच लोगों का नाम है “...all Congress(I) Leaders or workers, were in some way involved in the attack on Sikhs or the property in this area."
उन्होंने केवल प्रोबेबल की बात नहीं कही है। नानावती कमीशन कहता है कि Shri Jagdish Tytler in some way was involved in the attack on Sikhs or the property in this area. इतना ही नहीं सुरेंद्र सिंह, जो विटनेस सं० १४७ है, मैं इसका जिक्र इसलिए कर रहा हूं क्योंकि इसका उल्लेख किया है।
“ The Commission considers it safe to record a finding that there is credible evidence against Shri Jagdish Tytler to the effect that very probably he had a hand in organising attacks on Sikhs.” आपने कहा है कि simply on the basis of probability सिर्फ संभावना के आधार पर किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती। यह सरकार सदन को गुमराह कर रही है। नानावती कमीशन की रिपोर्ट में स्पष्ट प्रमाण दिए गए हैं कि श्री जगदीश टाइटलर, जो सरकार में मंत्री हैं, उनकी भूमिका है। सुरेंद्र सिंह, विटनेस सं० १४७, जो आजाद मार्किट के पास पुलबंगश गुरुद्वारा के हेड ग्रंथी हैं, उन्होंने कहा है "While describing the attack on the Gurudwara on 11.11.84 at about 9.00 a.m. he stated that the mob which attacked the Gurudwara was led by Shri Jagdish Tytler, who was then the Congress(I) Member of Parliament of the area."
और आप कह रहे हैं कि केवल संभावना के आधार पर कैसे उनको हटाया जा सकता है। नानवती कमीशन की रिपोर्ट में सुरेंद्र सिंह नाम का गवाह नं० १४७ स्पष्ट कहता है कि मैंने देखा कि जो श्री जगदीश टाइटलर हैं--
"He has stated that Shri Jagdish Tytler had incited the mob to burn the Gurudwara and kill the Sikhs."
इससे ज्यादा और क्या प्रमाण चाहिए? आगे वह कहता है क "He also stated that he was contacted by Shri Jagdish Tytler on 10.11.84 and was asked to sign on two sheets of paper."
दो सादे कागज पर जगदीश टाइटलर ने १.१०.१९८४ को सुरेंद्र सिंह से हस्ताक्षर करवाए, यह नानावती कमीशन की रिपोर्ट का हिस्सा है। आप कहते हैं कि कोई प्रमाण नहीं है, केवल संभावना के आधार पर कार्रवाई नहीं की जा सकती। आगे नानावती रिपोर्ट में लिखा है क "It appears from all this, that the subsequent affidavit was probably obtained by persuasion or pressure."
कमीशन कहता है कि जो दूसरा एफिडेविट किया गया वह दबाव में किया गया, यह नानावती की रिपोर्ट का हिस्सा है। एक और गवाह है, श्री जसबीर सिंह, जो कहता है कि उन्होंने देखा है कि श्री जगदीश टाइटलर कार से आए--
"He rebuked the persons who were standing there that his instructions were not faithfully carried out and therefore, his position was greatly compromised and lowered in the eyes of the Central Leaders."
मेरे क्षेत्र में जितनी कार्रवाई करनी थी, नहीं की, इसके कारण केंद्रीय नेताओं की निगाह में मैं गिर गया हूं।” आगे कहा गया है--
“He has alleged to have further stated that there was only nominal killing in his Constituency compared to East Delhi, Outer Delhi, etc. and it would be difficult for him to stake claim in future as he had promised large scale killing of Sikhs.” उपाध्यक्ष महोदय, यह जसबीर सिंह का बयान है जो नानावती कमीशन की रिपोर्ट का हिस्सा है। He had assisted the Citizens Committee. He stated:
“The witnesses have told the Committee about the participation of Shri H.K.L Bhagat, Shri Sajjan Kumar and Shri Jagdish Tytler in the anti-Sikh riots. Relying upon all this material, the Commission considers it safe to record the finding that there is credible evidence against Shri Jagdish Tytler to the effect that very probably he had a hand in organising attacks on Sikhs.” उपाध्यक्ष महोदय, कांग्रेस पार्टी ने रिपोर्ट की उन चार लाइनों को निकालकर कह दिया कि यह आउट ऑफ कन्टेक्सट है और सरकार कहती है कि केवल संभावनाओं के आधार परकोई कार्यवाही नहीं हो सकती है लेकिन रिपोर्ट के पूरे के पूरे पन्ने रंगे हुये हैं। नानावती रिपोर्ट में उन गवाहों का जिक्र किया गया है जिन्होंने कहा कि उन्होंने देखा है कि श्री जगदीश टाईटलर के निर्देश पर हमला किया गया और सारी घटना घटी। इसी प्रकार श्री सज्जन कुमार,, जो कांग्रेस पार्टी के इस सदन के सदस्य हैं, उनके खिलाफ इतने प्रमाण हैं परन्तु क्या पार्टी ने उन्हें निलम्बित किया, पार्टी से निष्कासित किया। इसलिये मामला केवल श्री टाईटलर को मंत्री पद से हटाने का नहीं है। श्री सज्जन कुमार के खिलाफ तो रिपोर्ट में पन्ने ही रंगे हुये हैं।
“The Commission, therefore, recommends to the Government to examine only those cases where the witnesses have accused Shri Sajjan Kumar specifically and yet no charge sheets were filed against him and the cases were terminated as untraced and if there is justification for the same, take further action as permitted by law.” … (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing will go on record except the speech of Shri Modi. Next speaker belongs to the Congress Party.
(Interruptions) …* MR. DEPUTY-SPEAKER: We are not discussing Godhra here. This is not going to be recorded.
… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing will go on record except the speech of Shri Modi.
(Interruptions) … * MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing is going on record except the speech of Shri Modi. Shri Jai Prakash, you are wasting the time of the House.
… (Interruptions)
* Not Recorded.
MR. DEPUTY-SPEAKER: This is my last warning to you. Please sit down.
… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: This is my last warning to you. Please sit down.
… (Interruptions)
श्री सुशील कुमार मोदी : उपाध्यक्ष महोदय, श्री सज्जन कुमार के खिलाफ कार्यवाही करने का निर्देश दिया गया है और ATR में ७ एफ.आई.आर. का जिक्र किया गया है। ए. टी. आर. में यह कहा गया है :
“Therefore, it will not be just to re-open this case.” यानी श्री सज्जन कुमार के बारे में कहा गया है कि ऐविडैंस के आधार पर एफ.आई.आर. दर्ज की जाये और ATR में लिखा हुआ है : “Therefore, it will not be just to re-open the case.” Under FIR 307/94, it is written:
“Under the circumstances, it will not be just to re-open this case. There is no justification to re-open this case.” श्री टाईटलर के खिलाफ कार्यवाही नहीं करेंगें और श्री सज्जन कुमार जिनके बारे में स्पैसफिक आरोप है कहा जा रहा है कि उनके खिलाफ आगे कार्यवाही करने का जस्टिफिकेशन नहीं है[RB34] । उपाध्यक्ष महोदय, इस देश के अंदर जितने भी दंगे हुए, उन दंगों के पीछे कौन लोग थे, ४५ साल तक जिन लोगों ने देश पर राज किया, वे लोग उन दंगों के पीछे थे। हमारे राज्य बिहार में भी दंगे हुए…( व्यवधान) MR. DPEUTY-SPEAKER: I will not allow you now.
… (Interruptions)
SHRI SUSHIL KUMAR MODI : Sir, I am quoting:
“It is the Congress that has engineered most of the riots. Shri Rajiv Gandhi failed to protect the Harijans and the Muslims. Geographical boundaries of the country were jeopardised by the Congress and Shri Rajiv Gandhi.” उपाध्यक्ष महोदय, यह बयान मेरा नहीं हैं, माननीय रेल मंत्री, लालू प्रसाद जी यहां बैठे हुए हैं, २९ दिसम्बर, १९८९ को भागलपुर दंगे के बाद इसी लोक सभा में भाषण करते हुए माननीय रेल मंत्री जी ने कहा - “It is the Congress that engineered most of the riots”. लालू प्रसाद जी यह आपका बयान है।…( व्यवधान) यह प्रोसीडिंग का कागज है। उस समय श्री वी.पी सिंह, प्रधान मंत्री थे और श्री राजीव गांधी विरोधी दल के नेता थे।…( व्यवधान) उस समय भाजपा का पक्ष लेते हुए लालू जी ने कहा - “I would like to tell you that there are two types of Muslims in Bhagalpur, one is the Ansaris and the other is the Sollans, who had started the riots in the city. A bomb was thrown on the SP, Bhagalpur and 11 police personnel were injured.” यह जो बयान है…( व्यवधान)
रेल मंत्री (श्री लालू प्रसाद) : आडवाणी जी ने भड़काया था।…( व्यवधान) मैं जानता हूं कि यह लोक सभा का बयान है, लेकिन नानावती में इसे कहां से ले आये।…( व्यवधान) श्री सुशील कुमार मोदी : यह लोक सभा में आपकी स्पीच है।…( व्यवधान)
श्री लालू प्रसाद : यह असत्य बोलते हैं।
प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : यह लोक सभा में आपकी स्पीच है।…( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing, except the speech of Shri Sushil Kumar Modi, will go on record. (Interruptions) … * श्री सुशील कुमार मोदी : जो देश में दंगे हुए, इस सदन में बैठे हुए लोग आज जो बयान दे रहे हैं, बीस साल पहले इनका क्या बयान था। भागलपुर का दंगा भी इसी प्रकार का दंगा था, जब कांग्रेस के राज में एक हजार मुसलमानों का कत्लेआम कर दिया गया, जिस समय मुसलमानों का कत्लेआम किया गया, उस समय आपने क्या कहा था - “You understand the actual position in Bihar. Shri Shiv Chander Jha was the Speaker who was dead against Shri Bhagwat Jha Azad, another Congress leader. It was due to them and a few of their men that these riots took place. The Congress was behind these riots.” * Not Recorded.
भागलपुर दंगों के पीछे कांग्रेस का हाथ था। यह आरोप लगाने वाले भाजपा के लोग नहीं हैं, माननीय रेल मंत्री, श्री लालू प्रसाद जी इसी सदन में बैठे हैं, उन्होंने यह आरोप लगाया था। इतना ही नहीं बिहार के अंदर जिस समय हजारीबाग में दंगा हुआ, श्री सतेन्द्र बाबू वहां के मुख्य मंत्री थे। माननीय रेल मंत्री ने भाषण किया कि हजारीबाग में दंगा इसलिए हुआ, मैं दो लाइनें पढ़ देता हूं - “Shri Rajiv Gandhi accompanied by his wife Smt. Sonia Gandhi went to participate in the Vaishali festivals. They had put on bullet- proof vests. Shri Rajiv Gandhi told Smt. Sonia Gandhi that he himself would drive the jeep to see the celebrations.” यह लालू जी का बयान है। पटना से ६० किलोमीटर दूर श्री राजीव गांधी ड्राइव करते हुए सोनिया जी को लेकर गये और सारे बिहार की पुलिस को हजारीबाग, रांची से वैशाली बुला लिया गया, इसी कारण से वहां दंगा भड़का और पांच दिन तक पुलिस वहां कुछ नहीं कर पाई। …( व्यवधान) यह बयान है…( व्यवधान) MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing is to be recorded.
(Interruptions) …* श्री सुशील कुमार मोदी : जिन लोगों ने पचास साल तक इस देश पर राज किया, उनकी क्या मानसिकता है।…( व्यवधान) बिहार के बहेरा में जब दंगा हुआ और कई लोग मारे गये तो कहा गया - “One thousand workers belonging to the Congress party were called at Bahera and were asked to wear caps carrying the slogan --” गर्व से कहो हम हिन्दू हैं, की टोपी लगाने वाले भाजपा के लोग नहीं बल्कि कांग्रेस के लोग थे और यह बयान श्री लालू प्रसाद यादव जी का है[R35] । MR. DEPUTY-SPEAKER: That is not to be recorded.
(Interruptions) …* श्री सुशील कुमार मोदी : उपाध्यक्ष महोदय, यह लोक सभा में दिया हुआ उनका बयान है। …( व्यवधान) जो सिख विरोधी नरसंहार हुआ, उसमें कांग्रेस की भूमिका थी, उसमें कांग्रेस का हाथ था। केवल दिल्ली के सिख विरोधी दंगे नहीं …( व्यवधान) और केवल आपने नहीं कहा, उस समय के तत्कालीन मुख्य मंत्री सत्येन्द्र बाबू की आत्मकथा प्रकाशित हुई - ‘ मेरी यादें मेरी भूलें।’ उसमें वे कहते हैं कि भागलपुर का दंगा भड़काने के लिए मेरे कुछ राजनैतिक मित्र भागलपुर में मौजूद थे मगर स्थिति को काबू में लाने के * Not Recorded.
प्रयास में योगदान देने के बजाय वे आग में घी डालने का काम कर रहे थे। उपाध्यक्ष महोदय, मैं कहना चाहता हूं कि चाहे हिन्दू-मुस्लिम दंगे हों या सिख-विरोधी दंगे हों या सिखों पर अत्याचार हो, हर जगह कांग्रेस का हाथ आपको दिखाई पड़ेगा। समाज को इसी प्रकार विभाजित करके और बीजेपी का भय दिखाकर कांग्रेस ५० सालों तक इस देश पर शासन करती रही। …( व्यवधान) THE MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF DEFENCE AND MINISTER OF STATE IN THE MINISTRY OF PARLIAMENTARY AFFAIRS (SHRI BIJOY HANDIQUE): Sir, he is speaking out of context…… (Interruptions) He is provoking others..… (Interruptions) MR. DEPUTY-SPEAKER: Except the speech of Mr. Modi, nothing is to be recorded.
(Interruptions) …* श्री सुशील कुमार मोदी : यह केवल मैं नहीं कह रहा हूं। रामविलास पासवान जी अभी बैठे नहीं हैं। उन्होंने नानावती कमीशन को हलफनामा दायर करके एक बयान दिया। वे कहते हैं कि किस तरह से उनकी आंखों के सामने कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने एक सिख को ज़िन्दा जलाया था। यह राम विलास पासवान का बयान है, सुशील कुमार मोदी का नहीं है। उस एफिडैविट में उन्होंने आगे कहा है कि - ‘हत्यारी भीड़ युवक कांग्रेस दफ्तर से आई थी और एक सिख टैक्सी ड्राईवर को उनकी आंखों के आगे उनके घर के भीतर ज़िन्दा जलाया था।’ वे आगे कहते हैं कि - ‘ गृह मंत्री के निजी सचिव के आश्वासन के बावजूद पुलिस तो नहीं पहुंची, पर युवक कांग्रेस दफ्तर के भीतर से भीड़ का बड़ा रेला आकर उनके घर में ज़बरन घुस गया..। ’ यह केन्द्रीय मंत्री राम विलास पासवान कहते हैं कि सारी सूचना के बाद और गृह मंत्री के आश्वासन के बावजूद भी उनके घर पर पुलिस नहीं पहुंची। ऐसी एक घटना नहीं है, पूरा हिन्दुस्तान इस बात को जानता है। मैं आपके माध्यम से गृह मंत्री से कहना चाहूंगा कि आप ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई कीजिए। अगर एक जगदीश टाइटलर को बचाने की कोशिश की तो इतिहास आपको कभी माफ़ नहीं करेगा। आप कार्रवाई करके जनता में मैसेज दीजिए। जो ३००० लोग मारे गए, वे लौटकर नहीं आएंगे, लेकिन आज उनकी और आम आदमी की भावना है कि इतना बड़ा दंगा हो गया, लेकिन किसी को सज़ा नहीं मिली। छोटे-मोटे कुछ लोगों को सज़ा मिली होगी, लेकिन जो राजनेता इस संगठित साजिश के पीछे थे, जब तक उनको सज़ा नहीं मिलेगी, जब तक उन पर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक जनता के बीच विश्वास का माहौल पैदा नहीं होगा। * Not Recorded.
मैं आपके माध्यम से सरकार से कहना चाहूंगा कि अविलंब जगदीश टाइटलर को मंत्रिमंडल से निकाला जाए और कांग्रेस से जिन लोगों का नाम आया है, चाहे एच.के.एल.भगत हों, शास्त्री हों या सज्जन कुमार हों, अगर कांग्रेस धर्मनिरपेक्षता की दुहाई देती है, धर्मनिरपेक्षता की राजनीति करती है तो इन चारों लोगों को अपनी पार्टी से निष्कासित करे और उनके खिलाफ कार्रवाई करे। आज जो कार्यस्थगन प्रस्ताव स्वीकार हुआ है, उसके लिए मैं धन्यवाद देता हूं।…( व्यवधान) वह विषय जब आएगा तो उस पर चर्चा करेंगे। आप तो गए नहीं वहां पर भाषण के लिए। …( व्यवधान) MR. DEPUTY-SPEAKER: This is not to be recorded.
(Interruptions) …* श्री सुशील कुमार मोदी : भागलपुर दंगों को ११ साल हो गए, मगर उसमें जो लोग मारे गए थे, उनको अभी तक मुआवज़ा नहीं मिला[h36] । महोदय, अभी तक भागलपुर के मुसलमानों को न्याय नहीं मिला। पन्द्रह साल आपकी सरकार बिहार में थी। आपने मुसलमानों को न्याय दिलाने के लिए क्या किया? उपाध्यक्ष महोदय, मैं फिर से मांग करता हूं कि इस मामले पर तत्काल कार्यवाही की जाए।
* Not Recorded.
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के राज्य मंत्री तथा महासागर विकास विभाग के राज्य मंत्री (श्री कपिल सिब्बल) : उपाध्यक्ष महोदय, मैं इस मोशन की बहस में हिस्सा लेने के लिए खड़ा हुआ हूं। मुझे सन् १९८४ के वे दिन बहुत अच्छी तरह से याद हैं। उस समय मैं महारानी बाग में रहता था। मुझे सूचना मिली कि शायद १ नवम्बर को हमारे यहां सिखों के तीन घर टार्गेटिड हैं। मेरे एक दोस्त श्री मुखिंदर सिंह वहां रहते थे, श्री सुखबीर सिंह और श्री ढींडसा जी यहां बैठे हैं ये भी उन्हें जानते हैं। उनकी पत्नी का बहुत बड़ा एक्सीडेंट हुआ था और वह बैठ भी नहीं सकती थीं। मुझे सूचना मिली और कहा गया कि मैं इस बारे में कुछ करूं। वहां पंजाब एंड सिंध बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर का भी घर था। मैंने कुछ फोन वगैरह करने की कोशिश की, लेकिन किसी प्रकार की सहायता प्राप्त नहीं हुई। मुझे पता चला कि हमलावर ११ या १२ बजे के करीब आने वाले हैं। मैं जल्दी-जल्दी श्री मुखिंदर सिंह के घर गया और कहा कि ऐसा होने वाला है। उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं हो सकता है, लेकिन मैंने कहा कि ऐसा होगा और जल्दी अपने बचाव का इंतजाम कर लो। पता नहीं कौन लोग और कैसे लोग आएंगे। उनका एक पड़ोसी था, उसके घर पर हमने श्री मुखिंदर की पत्नी को शिफ्ट किया और बाकी सदस्यों को भी वहां भेज दिया। मुझे अच्छी तरह से याद है मैं ११ बजे वापिस अपने घर जा रहा था तो मैंने देखा कि कुछ लोग इस तरफ आ रहे हैं। उन लोगों के पास लाठियां और दूसरे किस्म के औजार थे। मैंने पिस्तौल किसी के पास नहीं देखी। उन्होंने पंजाब एंड सिंध बैंक के मैनेजिंग डायरेक्टर का घर जलाया। इतनी देर में मैं श्री मुखिंदर के घर पहुंच गया और मैंने उन लोगों से विनती की कि ऐसा मत करिए। उस पर्टिकूलर क्राउड में कोई भी राजनेता नहीं था। कुछ नौजवान लड़के लाठियां और कैरोसीन तेल हाथ में ले कर घूम रहे थे। किसी ने मेरी बात नहीं सुनी और हमें भी अपनी जान की फिक्र थी। श्री मुखिंदर का घर हमारे सामने जलाया गया और मैं समझता हूं कि ऐसा ही पूरी दिल्ली में भी हुआ होगा। लेकिन जो चर्चा आज सदन में हो रही है वह एक अजीब किस्म की चर्चा है। यह चर्चा इस आधार पर हो रही है कि क्या कोई एक राजनीतिक दल इसके लिए दोषी है। इस हिसाब से चर्चा नहीं हो रही कि एक हिन्दुस्तान के नागरिक की मृत्यु हुई है, चाहे वह सिख हो, मुसलमान हो या ईसाई हो, मृत्यु तो हिंदुस्तान के नागरिक की हुई है।…( व्यवधान) MR. DEPUTY-SPEAKER: Please do not disturb him.
… (Interruptions)
श्री कपिल सिब्बल : मैंने आपको एक बार भी डिस्टर्ब नहीं किया। आप क्यों मुझे बीच में डिस्टर्ब कर रहे हैं?…( व्यवधान) MR. DEPUTY-SPEAKER: This is not to be recorded.
(Interruptions) …* उपाध्यक्ष महोदय : यह रिकार्ड में नहीं जाएगा।
...( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: This is not to be recorded.
(Interruptions) …*
14.00 hrs. श्री कपिल सिब्बल : उपाध्यक्ष महोदय, आप सोचिए, अभी इन्होंने यही कहा।…( व्यवधान) यह बहुत दुख की बात है। …( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Please, please.
… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Please do not disturb.
… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Do not disturb him.
… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Not to be recorded.
(Interruptions) … * MR. DEPUTY-SPEAKER: Please sit down.
… (Interruptions)
उपाध्यक्ष महोदय : यह रिकॉर्ड पर नहीं जाएगा।
(Interruptions) …* श्री कपिल सिब्बल : उपाध्यक्ष महोदय, मेरा निवेदन है कि जो माननीय सदस्य ने अभी कहा, उसे रिकॉर्ड से बाहर निकाला जाए।
उपाध्यक्ष महोदय : मैंने कह दिया है कि वह रिकॉर्ड पर नहीं जाएगा। Not to be recorded.
(Interruptions) …* * Not Recorded.
MR. DEPUTY-SPEAKER: Please sit down.
श्री कपिल सिब्बल : उपाध्यक्ष जी, हमें यह विचार करना चाहिए, यह सोचना चाहिए कि हमें आगे आने वाले दिनों में क्या कदम उठाने हैं। यदि ऐसा कोई हादसा भविष्य में हो, तो हमें किस इन्वेस्टीगेटिंग एजेंसी को जांच के लिए देना चाहिए, वह बात इसमें लिखी है कि जांच होनी चाहिए, न कि कमीशन पर कमीशन बैठाने चाहिए। This is a real structural problem in this country. What is happening is that whenever any criminal offence is committed, instead of taking recourse to the Criminal Procedure Code, Governments of the day start setting up Commissions.
Now, the problem with setting up Commissions is the following:
“That no Commission under the Commission of Inquiries Act has the power to arrest individuals. If a Commission does not have the power to arrest under the Commission of Inquiries Act, no investigation can take place, and since no investigation can take place, the truth never comes out. So, it becomes a fertile ground for attacks and counter-attacks between the political parties, and this must be avoided.” We are not here standing today to start accusing one party or another. मैं श्री सुखदेव सिंह ढींडसा साहब से यह जानना चाहता हूं कि गोघरा के बाद जब गुजरात में दंगे हुए, तो उन्होंने बी.जे.पी. से समर्थन वापस क्यों नहीं लिया? …( व्यवधान)
श्री सुखदेव सिंह ढींडसा : हमने कंडैम किया था। …( व्यवधान)
श्री कपिल सिब्बल : अगर ये अल्पसंख्यकों के इतने हितैषी हैं और अल्पसंख्यकों की पीड़ा से इन्हें इतना दुख है, तो इन्होंने उस समय सरकार से समर्थन वापस क्यों नहीं लिया, क्या इन्होंने ऐसा नहीं किया, क्या नरेन्द्र मोदी किसी और पार्टी का है ? ढींडसा साहब आप दुनिया को मत बताइए कि आप अल्पसंख्यकों के हितैषी हैं। मैं बताना चाहता हूं कि यदि कोई पार्टी अल्पसंख्यकों के लिए है, तो वह यू.पी.ए. सरकार है। …( व्यवधान)
श्री हरिन पाठक (अहमदाबाद) : रिपोर्ट के पन्ने-पन्ने पर लिखा है। …( व्यवधान)
श्री कपिल सिब्बल : अभी बहुत कुछ मैं बताऊंगा।
उपाध्यक्ष महोदय, ये मुझे बीच-बीच में टोक कर डिस्टर्ब कर रहे हैं।
MR. DEPUTY-SPEAKER: Only the speech of Shri Kapil Sibal will be recorded. Do not disturb him.
… (Interruptions)
उपाध्यक्ष महोदय : कृपया आप बैठिए। बीच में डिस्टर्ब न करें।
श्री कपिल सिब्बल : मैं किसी पर किसी प्रकार का कोई आरोप नहीं लगा रहा हूं और मैं समझता हूं कि यह होना भी नहीं चाहिए, लेकिन दो-चार बातें, जो आडवाणी जी ने कहीं, उन पर बहुत आश्चर्य हुआ। मैं दो चीजें आपके माध्यम से बताना चाहता हूं। पहली बात यह कही कि Shri Rajiv Gandhi was not involved in any offence. यह उनका निर्णय है, मेरा नहीं। दूसरी बात कही that the Congress Party at the highest level was not involved in this. और यह आडवाणी जी ने, अनफॉर्चुनेटली नहीं पढ़ा।
At page 182, fifth line from the top, the findings of the Nanavati Commission says:
“The evidence on the other hand suggests that Shri Rajiv Gandhi had showed much concern about what was happening in Delhi.” I am not saying this; this is by Nanavati Commission.
“He had issued an appeal for remaining calm and maintaining communal harmony.” Then, there is this quote :
“He even visited the affected areas on the night of 1-11-84.[mks37] ” I would like to quote further. The Nanavati Commission report states :
“There is absolutely no evidence suggesting that Shri Rajiv Gandhi or any other high ranking Congress (I) leader had suggested or organised attacks on Sikhs. ” This is in the Report.… (Interruptions)
श्री हरिन पाठक : आगे पढि़ये। आगे का एक सेंटेंस पढि़ये।…( व्यवधान)
श्री कपिल सिब्बल : जब मैं पढ़ता हूं तो आपको इतनी पीड़ा क्यों होती है। …( व्यवधान)
श्री हरिन पाठक : प्लीज़, आगे वाला सेंटेंस पढि़ये।…( व्यवधान)
श्री कपिल सिब्बल : आगे-आगे देखिये, होता है क्या।…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : जब आपका टर्न आयेगा, आप तब बोल लेना।
… (Interruptions)
SHRI HARIN PATHAK : Please read one more sentence next to that. It says:
“Whatever acts were done, were done by the local Congress (I) leaders and workers, and they appear to have done so for their personal political reasons…” SHRI KAPIL SIBAL: Mr. Deputy-Speaker, Sir, so, it is clear that the findings of the Nanavati Commission are two. They are very clear findings. One is that Shri Rajiv Gandhi was not involved; that the highest functionaries of the Congress Party were neither involved in the instigation nor the organisation of any of these Sikh riots. Let it be clear to this House. … (Interruptions) Shri Dhindsa may say anything otherwise.… (Interruptions) Second, what has the Nanavati Commission recommended? I am reading from Page 183 of the Report. It says: “The Commission would, however, like to recommend that such riots are kept under check and control and there should be an independent police force which is free from the political influence and which is well equipped to take immediate and effective action. It is also necessary and therefore, the Commission recommends that if riots take place on a big scale and if the police is not able to register every offence separately at the time when they are reported, the Government should thereafter, at the earliest, take steps to see that all complaints are properly recorded and that they are investigated by independent Investigating Officers. ” This is what has been said.… (Interruptions)
That is why, I just wonder why the BJP has raised this today! When the Supreme Court said in the Gujarat cases that the police force in Gujarat was not acting independently and shifted a case from Gujarat to Maharashtra, then, why did the then Home Minister Shri Advani not shift all the cases to Maharashtra?… (Interruptions) Why are these double-standards practised? The entire machinery in Gujarat was organised to ensure protection to members of a certain political party.… (Interruptions) PROF. VIJAY KUMAR MALHOTRA : This was what they said. कि बिहार क्यों कह रहे हैं, लेकिन अभी आप खुद बोल रहे हैं।…( व्यवधान) अभी मनिस्टर साहब बोल रहे थे, आप इनसे पूछिये न।…( व्यवधान) MR. DEPUTY-SPEAKER: This is not to be recorded. There is no rule.
(Interruptions) … * श्री लाल मुनी चौबे (बक्सर) : उपाध्यक्ष जी, मेरा व्यवस्था का प्रश्न है।…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : आप किस रूल के तहत पाइंट ऑफ आर्डर उठा रहे हैं?
श्री लाल मुनी चौबे : यह हाउस ऑफ कामंस की व्यवस्था बहुत पहले से ही रही है और हाउस ऑफ कामंस की व्यवस्था के आधार पर मैं व्यवस्था का प्रश्न उठा रहा हूं। मेरा यह कहना है कि आधी शताब्दी से अधिक समय से भारत में जनतांत्रिक व्यवस्था है…( व्यवधान) उपाध्यक्ष महोदय : यह भी बतायें कि आपका पाइंट ऑफ ऑर्डर किस रूल के तहत है?
श्री लाल मुनी चौबे : सिब्बल साहब यह कह रहे हैं कि बड़े स्तर पर कांग्रेस इसमें शामिल नहीं है …( व्यवधान) उपाध्यक्ष महोदय : आप बैठ जायें।
… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: This is not allowed.
(Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: This is not to be recorded.
(Interruptions) … * श्री कपिल सिब्बल : मुझे बोलने दीजिए, मैंने तो आपको डिस्टर्ब नहीं किया।…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : Please sit down.अब आप बैठ भी जायें।
...( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : सिब्बल साहब, आप बोलिये, प्लीज़।[i38] * Not Recorded.
… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Sit down, please.
श्री लाल मुनी चौबे : आप किसी भी पार्टी के चार ऐसे बड़े लीडर का नाम बताइए। क्या ये लीडर नहीं हैं? क्या ये छोटे-मोटे नेता हैं?…( व्यवधान) श्री कपिल सिब्बल : अभी बता देता हूं।…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : रिकार्ड में कुछ नहीं जा रहा है। आप बैठ जाइए।
...( व्यवधान)
SHRI BIJOY HANDIQUE: Mr. Deputy-Speaker, Sir, under what rule is he raising it to allow such an interruption?… (Interruptions) MR. DEPUTY-SPEAKER: Sit down, please.
… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing is to be recorded except the speech of Shri Kapil Sibal.
(Interruptions) …* श्री कपिल सिब्बल : मोदी जी ने अभी कहा कि उस समय बीजेपी ने दंगे के समय जो सिक्ख परिवार को प्रोटेक्शन किया…( व्यवधान) उपाध्यक्ष महोदय : आप बैठ जाइए। रिकार्ड में कुछ नहीं जा रहा है।
(Interruptions) …* SHRI KAPIL SIBAL: Deputy-Speaker, Sir, you must control him.… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Lal Muni Coubey, sit down, please.
… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing will go on record.
(Interruptions) …* MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Choubey, sit down.
… (Interruptions)
* Not Recorded.
उपाध्यक्ष महोदय : जयप्रकाश जी, आप बैठ जाइए।
...( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : आपके मंत्री बोल रहे हैं और आप ही उन्हें बोलने नहीं दे रहे हैं।
...( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : मल्होत्रा जी, आप इन्हें बैठाइए। अगर ये ऐसे ही बोलेंगे तो आपकी पार्टी का टाइम कम हो जाएगा। ...( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : जयप्रकाश जी, आप अपनी पार्टी का टाइम खराब कर रहे हैं। आप बैठ जाइए।
...( व्यवधान)
SHRI KAPIL SIBAL: Mr. Deputy-Speaker, Sir, in fact, I have, in my hand – apropos what Shri Modi said – a newspaper report of the Hindustan Times dated 3rd of February, 2002. I am willing to place it on record. It says that the Sikh riots… (Interruptions) प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा :उपाध्यक्ष महोदय, अखबार की कटिंग पढ़ने के लिए स्पीकर साहब ने मना कर दिया था।…( व्यवधान) He cannot read it. … (Interruptions) The Chair gave the ruling earlier.… (Interruptions) अपारम्परिक ऊर्जा रुाोत मंत्रालय के राज्य मंत्री (श्री विलास मुत्तेमवार) : आडवाणी जी ने भी पढ़ा था।…( व्यवधान) प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : आडवाणी जी जब पढ़ रहे थे, तब स्पीकर साहब ने उनको पढ़ने से मना कर दिया था।…( व्यवधान) श्री विलास मुत्तेमवार : इसके बावजूद उन्होंने अखबार पढ़ा था।…( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: He can quote it.
… (Interruptions)
उपाध्यक्ष महोदय : आप कोट कर लें, उसको पूरा न पढ़ें।
...( व्यवधान)
श्री कपिल सिब्बल : उपाध्यक्ष महोदय, मैं कोट करूंगा, पूरा नहीं प्ाढूंगा[MSOffice39] । ...( व्यवधान) उपाध्यक्ष महोदय : आप सिर्फ कोट करें, पढ़े नहीं।
...( व्यवधान)
SHRI KAPIL SIBAL: In fact, I might inform the House that with reference to the alleged Sikh riots, 14 FIRs were lodged naming 49 BJP and RSS workers. प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : कोई एक जगह बता दें।…( व्यवधान) नानावती कमीशन की रिपोर्ट में कहां है, वह बता दें।…( व्यवधान) Sir, I make strong objection. SHRI KAPIL SIBAL : I will give you FIR number.
प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : आज तक किसी ने किया है तो बता दें। यहां कुछ भी कह देते हैं।…( व्यवधान) इससे बड़ा असत्य हो ही नहीं सकता।…( व्यवधान) इतने एफीडैविट हैं, आप एक भी एफीडैविट बता दें।…( व्यवधान) MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing to be recorded except Mr. Sibal’s statement.
(Interruptions) … * श्री कपिल सिब्बल : मैं बताता हूं। मेरे पास सारा मसाला है।…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : स्वाईं जी, आप बैठ जाएं।
...( व्यवधान)
PROF. VIJAY KUMAR MALHOTRA : Where is it written in this report? … (Interruptions) Let him place the affidavit. नानावती कमीशनकी रिपोर्ट में कहां लिखा हुआ है, यह बताएं।…( व्यवधान) आप किसे रैफर कर रहे हैं।…( व्यवधान) श्री अशोक प्रधान (खुर्जा) : उपाध्यक्ष महोदय, यह बताएं कि वह कौन से पेज पर लिखा है।…( व्यवधान) यह जो मर्जी बोलते रहते हैं।…( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय : यह पेपर से कोट कर रहे हैं।
...( व्यवधान)
प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : वह कौन सी एफआईआर है, वह बताएं।…( व्यवधान) उस वर्कर का नाम बताएं।…( व्यवधान) आप हमें बीजेपी वर्कर का नाम बताएं।…( व्यवधान) * Not Recorded श्री चंद्रकांत खैरे (औरंगाबाद, महाराष्ट्र) : उपाध्यक्ष महोदय, मेरा प्वाइंट ऑफ आर्डर है।…( व्यवधान) उपाध्यक्ष महोदय : आपका प्वाइंट ऑफ आर्डर किस रूल के तहत है।
श्री चंद्रकांत खैरे : उपाध्यक्ष महोदय, ये एफआईआर की बात कह रहे हैं। ये ४,००० एफआईआर की बात करें। उनमें क्या-क्या लिखा है, वह बताएं।…( व्यवधान) वह नहीं बताते हैं।…( व्यवधान) SHRI KAPIL SIBAL : Sir, most of these FIRs were registered at Sriniwaspuri Police Station in South Delhi.… (Interruptions) उपाध्यक्ष महोदय : सिबल जी, आप नानावती कमीशन की रिपोर्ट के बारे में बताएं।
...( व्यवधान)
SHRI KAPIL SIBAL : I am entitled to say that the BJP was directly involved because he has been saying it was not involved. I am entitled to refuse that allegation. प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : वह कौन सी एफआईआर है, वह बताएं।…( व्यवधान) उस वर्कर का नाम बताएं।…( व्यवधान) आप हमें बीजेपी वर्कर का नाम बताएं।…( व्यवधान) SHRI KAPIL SIBAL: He has been saying that the BJP and RSS were not involved. It is clear from the record that BJP and RSS were involved. This is my allegation.… (Interruptions) There is no rule in the rule book that I cannot allege. … (Interruptions) Why are you worried about it? Get the records in the FIR and you will know the truth.… (Interruptions) प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : नानावती कमीशन की रिपोर्ट में कहां है।…( व्यवधान) आप नाम बताएं।…( व्यवधान) MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing should be recorded.
(Interruptions) …* MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing will go on record.
(Interruptions) …* श्री कपिल सिब्बल : वह नहीं था। …( व्यवधान) कोई जरूरत नहीं है। …( व्यवधान)
* Not Recorded I will give you the FIR numbers. You can check them.… (Interruptions)
प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : आप उन वर्कर्स का नाम बतायें। …( व्यवधान)
श्री कपिल सिब्बल : मैं उनके नाम भी आपको बताता हूं। …( व्यवधान) आप सुनने की शक्ति रखिये। …( व्यवधान) मैं उनके नाम आपको अभी बताता हूं।…( व्यवधान) श्री अनंत गंगाराम गीते : आप इसे सभा पटल पर रखिये। …( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: He is giving the name.
… (Interruptions)
प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : उपाध्यक्ष महोदय, वे बीजेपी के कौन से वर्कर्स हैं ? आप उनके नाम बताइये। …( व्यवधान) उसमें कोई भी बीजेपी वर्कर नहीं थे। ये बिल्कुल गलतबयानी कर रहे हैं। …( व्यवधान) SHRI KAPIL SIBAL: This is from areas like Hari Nagar, Ashram, Sunlight Colony and Bhagwan Nagar. The largest FIR 446/93 dated August, 1993 registered in connection with ’84 riots in which 17 persons were named include the names of BJP workers like Mr. Ram Kumar Jain, late Mahipal Sharma.… (Interruptions) प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : सभी कांग्रेस के वर्कर्स …( व्यवधान) They were all Congressmen led by Congress leaders. … (Interruptions)कौन सी एफआईआर में यह लिखा है कि वह बीजेपी का वर्कर है। …( व्यवधान) श्री कपिल सिब्बल : असलियत आपके सामने आई तो आप उसे बर्दाश्त नहीं कर सके। …( व्यवधान)
SHRI SUKHBIR SINGH BADAL (FARIDKOT): Where is it in the Nanavati Commission’s Report?… (Interruptions) प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : उपाध्यक्ष महोदय, कौन सी एफआईआर में लिखा है कि वह बीजेपी का वर्कर है। ये कांग्रेस वर्कर्स के नाम को बीजेपी वर्कर्स का नाम बता रहे हैं। …( व्यवधान) श्री कपिल सिब्बल : आप असलियत को बर्दाश्त नहीं करते। …( व्यवधान)
SHRI BIKRAM KESHARI DEO (KALAHANDI): Everything is fabricated.… (Interruptions)
प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : आप कांग्रेस वर्कर्स का नाम बीजेपी वर्कर्स कहकर बता रहे हैं। …( व्यवधान) श्री कपिल सिब्बल : मैं ढींडसा साहब से गुजारिश करूंगा कि वे अपने जवाब में कहें कि ये सारी एफआईआरज, जो मैंने सुनी हैं कि विद्ड्रा हुई हैं, उनको रिवाइव किया जाये और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाये। …( व्यवधान) मेरी आपसे गुजारिश है। …( व्यवधान) प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : कौन सी एफआईआर मे लिखा है कि वे बीजेपी वर्कर है। …( व्यवधान)
SHRI KHARABELA SWAIN (BALASORE): He is a prominent lawyer. Is he entitled to tell a confident untruth ? I challenge him. If he is making an allegation that the FIR was filed against the BJP workers, let him probate. I challenge him.… (Interruptions) श्री कपिल सिब्बल : मैं गृह मंत्री जी से रिक्वैस्ट करूंगा कि वे इसे देखें। …( व्यवधान) मैंने सुना है कि ये एफआईआरज विदड्रा हुई हैं, उन पर दुबारा कार्रवाई हो। …( व्यवधान) हम किसी कार्रवाई से नहीं डरते, आप लोग डरते हो। …( व्यवधान) उपाध्यक्ष महोदय : स्वाईं जी, आप बैठ जाइये।
...( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing will go on record.
(Interruptions) … * उपाध्यक्ष महोदय : सिब्बल जी, आप कन्टीन्यू कीजिए।
...( व्यवधान)
प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : उपाध्यक्ष महोदय, यह कोर्ट नहीं है। क्या पार्लियामैंट में खड़े होकर यह गलत बयानी करेंगे ? …( व्यवधान) श्री खारबेल स्वाईं : हम नहीं फंसे, ये फंस गये हैं। …( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing will go on record.
(Interruptions) … *[r40] MR. DEPUTY-SPEAKER: Please sit down.
… (Interruptions)
SHRI KAPIL SIBAL: Sir, if you do not mind, please allow me to continue!… (Interruptions)
* Not Recorded प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : यह जो एफआईआर का जिक्र कर रहे हैं, क्या उसमें किसी का नाम था ? नौ कमीशन बैठे थे, हरेक ने लिखा है कि बीजेपी और संघ ने उस वक्त लोगों को बचाया और बचाकर, इसमें भी लिखा है,…( व्यवधान) ज्ञानी जैल सिंह जी ने यह बात कही, खुशवंत सिंह जी ने भी कहा, हरेक ने कहा है क…( व्यवधान) SHRI KAPIL SIBAL: I am not yielding. How is he speaking without my permission?… (Interruptions) PROF. VIJAY KUMAR MALHOTRA : I do not need his yielding… (Interruptions)
SHRI KAPIL SIBAL: He will soon need it because he will yield… (Interruptions)
14.26 hrs. (Mr. Speaker in the Chair) प्रो. रासा सिंह रावत (अजमेर) : अध्यक्ष महोदय, यह सदन को गुमराह कर रहे हैं।…( व्यवधान)
श्री कपिल सिब्बल : अब सच्चाई बता दो तो इसे आप गुमराह समझें।…( व्यवधान) Mr. Speaker Sir, I was mentioning… (Interruptions)
प्रो. रासा सिंह रावत : आप इन्हें पढ़ने के लिए कैसे एलाउ कर रहे हैं जबकि आपने आडवाणी जी को तो एलाउ किया नहीं था।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: I said, no statement of another person can be read out.
… (Interruptions)
श्री सुशील कुमार मोदी : अध्यक्ष महोदय, जिस एफआईआर का ये जिक्र कर रहे हैं, क्या इसमें लिखा है कि आरएसएस वर्कर है ?…( व्यवधान) अगर नहीं लिखा है तो इन्हें बोलने का कोई औचित्य नहीं है।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: If anything is wrong, I shall see and expunge it.
… (Interruptions)
SHRI KAPIL SIBAL: Mr. Speaker Sir, I was also very surprised when Shri Advani referred to the conversation between the Prime Minister and Shri Gavai and an alleged missed call to him.
I am surprised because Advaniji did not read the balance part of the report of Nanavati Commission at page 173 of the same report. He was reading page 172 but he left out page 173. This is what it says: “In reply to the queries raised by the Commission, Shri P.C. Alexander had sent a note on the explanation given by Shri Gavai. Therein he had stated that he had not called any meeting in his office on 31.10.1984. He had not received any proposals from the Lieutenant Governor about calling the Army.” This is directly in contradiction to what Shri Gavai says. I am surprised that a senior leader like Advaniji chose not to read this part of the report. This kind of selective reading especially coming from seasoned politicians to make a political point does not carry the debate any further.
Then at page 178, this is now the conclusion of the Commission because the paragraph starts with ‘On consideration of their explanation’. I will just read two sentences, “So far as the Lieutenant Governor, Gavai is concerned, it has to be stated that the explanation given by him is not satisfactory.” And Advaniji was reading as if Shri Gavai’s explanation was the finding of the Commission. It further states, “and does not convince the Commission in recording the finding that there was no lapse at his level, though he does not appear to have delayed taking required action. It does appear to the Commission that he did not give as much importance to the law and order situation in Delhi as the situation demanded.” This now gives the reason why Rajivji told him to quit because the finding of the Commission is, ‘He did not care as he should have cared’. To selectively read a part of the Nanavati Commission report and project as if the Commission had said something in favour of Shri Gavai, I am really surprised and I did not expect this from Shri Advani.
The other thing that Shri Advani wanted to know and he said that the Prime Minister would certainly inform the House as to who was behind the riots. I already read before this House the conclusive finding of the Commission that high Congress(I) functionaries and the then Prime Minister had nothing to do with organising anything. So, the answer and the question that Shri Advani asked are found in the Commission’s report itself. So, the Prime Minister does not have to reply to questions which are answered by the Commission itself. That is why I started with my statement that I am really pained[r41] .
इस तरह की चर्चा इस सदन में हो रही है। एक राजनीतिक दल दूसरे राजनीतिक दल के ऊपर उंगली उठा रहे हैं।होना तो यह चाहिए कि हम सभी संकीर्ण राजनीति से ऊपर उठकर यह सोचें कि आने वाले दिनों में अगर ऐसा हो तो कैसे कार्यवाही की जाए और भविष्य में इस तरह की घटनाओं को कैसे रोका जाए। …( व्यवधान)
डॉ. रतन सिंह अजनाला (तरनतारन) : आपके कहने का क्या यह मतलब है कि जो हो गया, सो हो गया?
अध्यक्ष महोदय : आप बैठ जाइए। जो कुछ हुआ, हम सभी ने उसकी निन्दा की है। This is not fair.
श्री कपिल सिब्बल : महोदय, मुझे याद है कि जब मुंबई में ६ दिसंबर के बाद दंगे हुए…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : ठीक है, आप बैठ जाइए, आपकी पार्टी के नेता को भी बोलने का मौका मिलेगा। वे बहुत सक्षम नेता हैं, बहुत सही ढंग से अपनी बात कहेंगे।
...( व्यवधान)
श्री कपिल सिब्बल : महोदय, उस समय वहां की सरकार ने श्रीकृष्णा कमीशन गठित किया था और जब वर्ष १९९८ में उसकी रिपोर्ट प्रस्तुत की गयी, उस समय २२ अप्रैल, १९९८ को उस समय के मुख्यमंत्री श्री मनोहर जोशी ने कहा था :
“Everything that our Party undertakes is done after due thought, and, therefore, I have no regret for my Party’s role during the riots.” इसका आपके पास क्या जवाब है?…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: You address the Chair.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: You should restrict it to the Nanavati Commission’s Report.
… (Interruptions)
MAJ. GEN. (RETD.) B. C. KHANDURI (GARHWAL): He has not authenticated it. What is the reference here?… (Interruptions)
श्री कपिल सिब्बल : मुख्यमंत्री जी ने कहा कि मुंबई दंगों में मेरी पार्टी के लोगों ने जो कुछ किया, मुझे उसमें कोई शर्म नहीं है। लेकिन कांग्रेस पार्टी ने आज ऐसा नहीं कहा है। हमें शर्म है कि दिल्ली में दंगे हुए, हम शर्मिन्दाहैं कि इतनी मृत्यु हुई।हम चाहते हैं कि ऐसा फिर कभी न हो। … (Interruptions)
MR. SPEAKER: Nothing else will be recorded.
(Interruptions) …* श्री कपिल सिब्बल ऐसा न कभी मोदी जी ने कहा, न आडवाणी जी ने, न मनोहर जोशी जी ने कहा है। कभी ढींढसा जी ने भी यह नहीं कहा कि यह शर्मनाक दिन है, जो दंगे हुए उनकी फिर से किसी स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए। यह दोगली राजनीति मत अपनाइए। Mr. Speaker, Sir, now I come to the facts.
मैंने पहले भी कहा था कि मैं यहां किसी के पक्ष में बोलने के लिए नहीं खड़ा हुआ हूँ लेकिन मैं यह बताना चाहता हूँ कि नानावती आयोग ने क्या कहा है, क्योंकि मेरा ख्याल है कि शायद सभी लोगों ने इस रिपोर्ट को बारीकी से नहीं पढ़ा होगा।
प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : ऐसी बात नहीं है। यह रिपोर्ट सभी टीवी चैनलों पर आ रही है।
श्री कपिल सिब्बल : इसीलिए मैंने ‘शायद ' शब्द का प्रयोग किया है।
Now I am talking about a Member of this House against whom the Government in the Action Taken Report has said : “We cannot, in the circumstances, take any action.” But this is what the Nanavati Commission Report said. It said that against that particular hon. Member of this House, there are two witnesses. One is Shri Surinder Singh. He is witness No.147. Shri Surinder Singh talks of an incident that took place at that time. He is the head Granthi of Gurdwara Pul Bangash which was burnt down, and two people were killed in that process. Against that, two FIRs were lodged. The two people who were killed are Shri Thakur Singh and Shri Badal Singh. Two FIRs were lodged for the prosecution of the accused in that particular incident. Mr. Surinder Singh, witness No.147, was the Granthi. So, he did not say anything from 1984 to 2002. He kept quiet for 18 long years. He did not go to any Commission. He did not file any FIR. He did not make this statement to any friend. He told nobody[m42] .
* Not Recorded [t43] For the first time after 18 years, he made a statement before the Nanavati Commission. This is not my statement, this is what the Commission recorded. I am not saying this. Do not treat this as my explanation for anything. It is for you to judge.… (Interruptions)
MR. SPEAKER: You address me. You do not respond to that.
… (Interruptions)
SHRI KAPIL SIBAL: It is for the hon. Members to judge. For 18 long years, Shri Surinder Singh did not say anything. Ultimately, when the Nanavati Commission was formed, he made a statement before the Nanavati Commission by filing an additional affidavit on the 5th February, 2002. But on the 5th August, 2002, he gave another affidavit in which he said that he did not understand the earlier affidavit which was in English. And this particular affidavit is in Gurmukhi. This is what Nanavati Commission states. So, the Nanavati Commission says that merely because a man has made a statement after 18 years, it makes no difference. And, therefore, this is a good ground; this is creditable evidence for taking action against Shri Jagdish Tytler. This is what the Nanavati Commission says. Now, it is for the hon. Members to think about it. After 18 years, somebody makes a statement in respect of which incident two FIRs have been lodged, proceedings are over, and trial is over.… (Interruptions) I am not saying anything from my side. As I have said, I am not standing here to defend anybody. … (Interruptions) But, it is my duty to inform the House what the facts are.… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय :सुखवीर जी, जब आपको बोलने का समय मिलेगा, तब आप बोलें और जोर-शोर से बोलें। इस समय बीच में न बोलें।
श्री कपिल सिब्बल : इतने सालों के बाद कोई कमीशन को कहे और स्टेटमेंट दे, that any hon. Member of this House from the Congress Party of India was involved in something, is this credible evidence to prosecute, convict and hang a man? This is for the House to decide, and not for me. … (Interruptions) It is all right. … (Interruptions) It is for you to decide. … (Interruptions) पब्लिक कह रही है। That is also for you to decide.… (Interruptions) One second.… (Interruptions) Do not interrupt me, face the truth.… (Interruptions)
MR. SPEAKER: It will not be recorded.
(Interruptions) …* अध्यक्ष महोदय : आप क्यों बोल रहे हैं। अगर अभी बोलेंगे तो रिकार्ड में नहीं जाएगा।
SHRI KAPIL SIBAL: So, this is one witness – Shri Surinder Singh. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: Conserve all your energy.
… (Interruptions)
SHRI KAPIL SIBAL: There are two witnesses in the case of Shri Jagdish Tytler and about the one I have already told you.
The second witness is one Shri Jasbir Singh. He is not an eyewitness to the incident. He was nowhere in the Gurudwara Pulbangash. He was never there. Again this witness did not speak in 1984, and never gave any evidence before any Commission after that. For 18 long years, he kept quiet, and in 2002 when he was not a witness before the Nanavati Commission also, he states that an hon. Member of this House was at a hospital gate, and was telling people: “why have you not killed more people?” So, on the basis of these two statements, the finding of the Commission is that there is credible evidence, in all probability, that an hon. Member of this House was involved. If the House believes that this is a sufficient evidence to hang a man then we will go by what the House suggests.… (Interruptions) Why are you interfering?.… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Nothing will be recorded.
(Interruptions) … * SHRI KAPIL SIBAL: Why are you running away from the truth?.… * Not Recorded (Interruptions)
MR. SPEAKER: I would not allow this interruption.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: You know the rules of the game. सुशील मोदी जी, आप सब कुछ जानते हैं इसलिए कृपया बैठ जाएं।
…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: He has not yielded. You had your chance. Sorry, you have spoken.
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय : मैंने आप लोगों से मदद नहीं मांगी है।
SHRI KAPIL SIBAL: This is as far as one hon. Member is concerned who is a Minister. As far as another hon. Member of this House is concerned, the Commission itself says that for all the nine cases that have been filed, that hon. Member cannot be prosecuted. So when you say that those FIRs have resulted in nothing happening, the Commission itself says that nothing can be done because of the principle of double jeopardy. No individual can be prosecuted twice for the same offence. So, the Nanavati Commission says that on those FIRs, nothing can be done. But, it says that there are some other FIRs in which the evidence cannot be traced[t44] .
In [e45] other words, an allegation was made, an investigation was done and the closure report was given to the Magistrate saying, “not traced”. Therefore, the Commission says: “Because they were not traced and because some witnesses have said something against this hon. Member, proceedings should be launched.” Hon. Members probably know that when a closure report is filed and when a Judicial Magistrate’s court says that cases are untraced, the Magistrate always has the power to reopen the cases. I do not know why we are debating this issue in this House. If any hon. Member or if the same persons go and lodge an FIR in a police station saying that it has happened, the FIR would be registered, an investigation would be done and trial may be conducted if there is a prima facie case. So, why are we discussing this in this House when the same remedy is available to Shri Sukhdev Singh Dhindsa, to Shri Sukhbir Singh Badal, to me, to every hon. Member of this House and to every citizen of this country? That is why we have been given a legal recourse that we can go to the police and make a statement saying that an offence should be registered. There would be a preliminary investigation and then the law will take its own course. So, what prevents people from taking that legal recourse? It makes me believe that the whole purpose of this debate is to gain a political advantage in the light of some coming elections because they are inciting people and invoking the emotions of people unnecessarily. … (Interruptions) हमें मलहम लगाना चाहिए न कि ऐसे भाषण देकर जनता को उत्तेजित करना चाहिए।
प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : पांच हजार लोग मारे गये और आज भी आप उनके जख्मों पर नमक छिड़क रहे हैं।
SHRI KAPIL SIBAL: Mr. Speaker, Sir, just five more minutes and I will be done.
I just want to put it on record so that everybody knows it. Political parties making impassioned speeches should think about it. Most of the 5,067 people involved in the riots in Gujarat are on bail. They have been released on bail.
I would give the number of cases registered and the number of cases not investigated district-wise. In Mehsana, out of a total of 170 cases, 90 were investigated and 80 have not been investigated. In Ahmedabad, out of a total of 1,300 cases, 350 have been investigated and 950 have not been investigated. In Vadodara, out of about 390 cases, 150 have been investigated and 240 have not been investigated. In Sabarkantha, 275 cases have been investigated and 460 have not been investigated. In Banaskantha, 45 cases have been investigated and 60 have not been investigated. In Rajkot, eight cases have been investigated and 198 have not been investigated. … (Interruptions)
प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : सिब्बल साहब, आप भी कोर्ट में जा सकते हैं।
SHRI KAPIL SIBAL: I request the hon. Leaders who are asking the Congress Party to make a statement on the floor of this House - Shri L.K. Advani, Prof. Vijay Kumar Malhotra, Shri Sukhdev Singh Dhindsa and all other leaders - to see that all these cases are investigated by an independent investigating agency. If they make that statement, we will believe that they care for the minorities. Otherwise, the world knows what they care for. It is power and they have lost it for many years to come.
MR. SPEAKER: Next, Shri Anant Geete.
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय : क्या हो रहा है? The Leader of a Party is speaking. We should hear him carefully.
श्री अनंत गंगाराम गीते (रत्नागरि) : अध्यक्ष जी, नानावती रिपोर्ट और उस पर सरकार की एक्शन टेकन रिपोर्ट पर आज हम यहां बहस कर रहे हैं। नानावती कमीशन ने अपनी रिपोर्ट में कई सिफारिशें की cé[r46] । लेकिन उन सिफारिशों को नजरअंदाज करते हुए एक्शन टेकन रिपोर्ट सदन के सामने रखी गई, जिसे सरकार एटीआर कह रही है वह नो एक्शन टेकन रिपोर्ट है। किसी भी प्रकार की कार्यवाही करने की बात तो छोड़ दीजिए, उस संदर्भ में सोचने की भी मंशा सरकार की दिखाई नहीं देती । महोदय, जब श्री सिब्बल जी यहां बोल रहे थे, जो कि मंत्रिपरिषद के सदस्य हैं और जब मंत्रिपरिषद का कोई सदस्य सदन में बोलता है तो यह माना जाता है कि यह सरकार की भूमिका को स्पष्ट कर रहा है।
MR. SPEAKER: Not always! … (Interruptions)
MR. SPEAKER: It is not his Department.
… (Interruptions)
श्री अनंत गंगाराम गीते : यह सरकार यहां पर बोल रही है…( व्यवधान) मुझे आश्चर्य हुआ जब श्री सिब्बल जी यहां बोल रहे थे और इतनी सहजता से बोले कि किस लिए हम यहां बहस कर रहे हैं। क्या यहां पर चर्चा करने की आवश्यकता है? चाहे श्री ढींडसा जी हों या श्री कपिल सिब्बल जी हों या श्री मल्होत्रा जी या फिर मैं, कोई भी पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज करवा सकता है। वह एफआईआर रिकार्ड होगा। उसकी जांच होगी। यदि यह सब इतना आसान होता तो चार हजार सिखों का कत्लेआम दिल्ली में न होता। तब आपकी सरकार थी, आपका ही राज था। मैं पूछना चाहता हूं कि कितनी एफआईआर दर्ज हुई, उस समय कार्यवाही क्यों नहीं की गई? …( व्यवधान) यह सरकार इस प्रकार से इस सदन में जबाव दे रही है, अपनी बात कह रही है…( व्यवधान) अध्यक्ष जी, यदि आप अपना बचाव करना चाहते हैं तो कर सकते हैं। आपको किसी ने रोका नहीं है। सन्् १९८४ में स्वर्गीय श्रीमती इंदिरा गांधी जी की हत्या के बाद जो हुआ उसकी आलोचना सारे देश ने की थी। किसी ने भी उसका समर्थन नहीं किया। हर एक ने उसकी निंदा की लेकिन उसकी निंदा के बाद खास कर जो दिल्ली में हुआ, दिल्ली में तीन हजार से ज्यादा सिखों को पुलिस की सहायता से कांग्रेसियों के कहने पर…( व्यवधान) यह सब नानावती रिपोर्ट में लिखा हुआ है …( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Shri Anant Gangaram Geete, please do not get diverted.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: You are disturbing him.
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय : आप डाइवर्ट मत होइए। ये बहुत अच्छा बोल रहे हैं।
श्री अनंत गंगाराम गीते : आप यदि समर्थन करना चाहते हैं, तो कर सकते हैं, लेकिन जब सदन में बहस शुरू हुई और ढींडसा जी ने बहस को शुरू किया और उसके बाद श्री बंसल जी बोलने के लिए खड़े हुए, तब लगभग एक घंटे से ज्यादा समय तक उन्होंने बोला और अपने आपको बैलेंस रखने का प्रयास किया। हर वाक्य को सोच-समझकर उन्होंने इस सदन के सामने रखा, लेकिन जब हमने कपिल सिब्बल जी को सुना तो उससे बंसल जी का सारा कहना बेकार हो गया। यही सरकार की मंशा है…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Shri Anant Gangaram Geete, please do not get diverted.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: You are disturbing him.
… (Interruptions)
श्री अनंत गंगाराम गीते : यहां सदन में श्री रामजी लाल सुमन और मोहम्मद सलीम जी सहित कई पूर्व वक्ताओं ने मांग की है कि एक मंत्रिपरिषद का सदस्य, जिनका नानावती कमीशन रिपोर्ट में जिक्र आया है और लोकसभा के एक माननीय सदस्य और राज्यसभा के एक माननीय सदस्य का भी जिक्र आया है, जो यहां पर गिल्टी हैं या जिनके नाम इस कमीशन कि रिपोर्ट में आए हैं, उनके खिलाफ सरकार को कार्यवाही करनी चाहिए…( व्यवधान) उस पर भी मैं बोल रहा हूँ कि जब हमने श्री कपिल सिब्बल जी को यहां सुना तो मुझे नहीं लगता है कि सरकार यह हिम्मत कर सकती है। हमारे जो गृहमंत्री जी हैं, वे यह हिम्मत कर सकते हैं ?और शायद यह साहस करने की चेष्टा उन्होंने की, तो उनकी हालत पी.जी.गवई जैसी होगी।
इसलिए आपका कहना सही है कि बहस करने का क्या फायदा है, वह फिजूल है। मैं आपसे बिल्कुल सहमत हूं। सारी चर्चा का कोई फायदा नहीं है और फिजूल है। उस समय सरकार ने जो किया था, आज की सरकार की भी वही मंशा है। वह कुछ भी नहीं करना चाहती है।
आज नानावती कमीशन की एटीआर पर बहस हो रही है। यहां हर दंगे का रैफ्रेंस दिया गया। मुझे इसमें कोई एतराज नहीं है और कभी नहीं होगा। दंगा कभी अच्छा नहीं होता है चाहे किसी जाति धर्म में हो। दंगे का कहीं कोई समर्थन नहीं करेगा। उससे देश में शांति नहीं आती है। इसलिए जब इस विषय में चर्चा होती है तो हमें कोई आपत्ति नहीं है। जब किसी दंगे पर चर्चा होती है और माइनॉरिटी का सवाल आता है, हर बात पर माइनॉरिटी, क्या इसका मतलब केवल मुसलमान से है? यहां तक ही वह बात सीमित रहती है। यहां अकाली दल के सारे सदस्य हैं जो आज यहां मांग कर रहे हैं। देश में यह सबसे ज्यादा माइनॉरिटी वाले लोग हैं लेकिन माइनॉरिटी के साथ क्या व्यवहार हुआ, उसका जिक्र ढींडसा जी ने यहां किया। माइनॉरिटी को बचाना है,, धर्मनिरपेक्षता को बढ़ाना है, तो किसी विशेष समाज से हर बात को क्यों जोड़ा जाता है?
आपने श्रीकृष्ण कमीशन का संदर्भ दिया। कैसे दिया, मुझे मालूम नहीं है। आप जानते हैं कि जो सदन में मौजूद नहीं है, उसके संदर्भ में सदन में कहना उचित नहीं है। आज श्री मनोहर जोशी इस सदन के सदस्य नहीं हैं। आप जानते हैं, फिर भी आपने रैफ्रेंस दिया। मुझे पता नही, आपके पास श्रीकृष्ण कमीशन की रिपोर्ट थी। मैं यहां पर उदाहरण इसलिए दे रहा हूं कि जब बाबरी मस्जिद ढह जाने का हादसा हुआ तो उसकी प्रतक्रिया मुम्बई में हुई। उसके पहले मुम्बई में कुछ नहीं हुआ था। वहां अमन-शांति थी। मुम्बई में किसी ने भडकाऊं भाषण नहीं दिए थे। कुछ भी मुम्बई में नहीं हुआ था लेकिन जिस दिन बाबरी का ढांचा गिरा, उसकी रिएक्शन मुम्बई में हुई, दंगे शुरू हो गए, कत्ले-आम शुरू हो गए और हत्याएं शुरू हो हई। उसके बाद मुम्बई को बचाने में यदि किसी ने काम किया और उसकी प्रशंसा मुख्यमंत्री करें तो मुझे नहीं लगता है उसमें कोई गलत है। उन्होंने आज भी मुम्बई को बचाए रखा। …( व्यवधान)
MR. SPEAKER : Hon. Members, this is the highest forum in this country. We have to keep its dignity. Somebody from outside will not do it. Therefore, I appeal to you – let us conduct ourselves in a manner in which all of you, by and large, are cooperating. कभी-कभी ऐसा हो जाता है। हम सब को भूल जाना चाहिए। I appeal to you to please maintain silence. It is our own House where we have been sent by the people of India with some expectation. Let us not make sounds and noises like that which does not add to the dignity of the House.
श्री अनंत गंगाराम गीते : अध्यक्ष जी, दिल्ली में जब १९८४ में कत्ले-आम हुए तब सारे देश मेंमाहौल खराब था। इसलिए हमने शुरू में इस बात को स्पष्ट तौर पर कहा है कि देश के पूर्व प्रधान मंत्री स्वर्गीय इन्दिरा गांधी की जिस प्रकार हत्या हुई, सारे देश ने उसकी निन्दा की लेकिन उसके बाद जो दिल्ली में हुआ शायद उसका परिणाम मुम्बई में भी होगा, यहां पर कई सदस्यों ने इस सवाल को कहा। जब सिखों की हत्या की जा रही थी तब आप क्या कर रहे थे, कई पार्टियों से सवाल किए गए। मैं सिर्फ याद दिलाने के लिए यहां यह रैफ्रेंस दे रहा हूं। जब दिल्ली में कत्ले-आम हुए तब मुम्बई में एक ही नेता थे, शिव सेना प्रमुख बाला साहेब ठाकरे,, उन्होंने चेतावनी दी कि मुम्बई में किसी एक सिख की न हत्या की जाए न उनके बाल को हाथ लगाया जाए। मुझे यह कहते हुए …( व्यवधान) गर्व नहीं कह रहा हूं, गर्व की बात नहीं है लेकिन निश्चित रूप से एक गुमान है[R47] ।
दिल्ली में हजारों सिखों का कत्लेआम हुआ लेकिन मुंबई में एक भी सिख नहीं मारा गया। उस समय ज्ञानी जैल सिंह जी राष्ट्रपति थे, उन्होंने बाला साहब ठाकरे जी को धन्यवाद दिया। तब ठाकरे जी ने कहा था कि शायद किसी एक ने गलती की हो तो उसकी सज़ा पूरे समाज को नहीं देनी चाहिए। लेकिन आज दुर्भाग्यवश २१ साल के बाद, जिनके ऊपर अत्याचार हुए, जिनके घर जलाए गए, जिनके घर और परिवार के लोगों की हत्या की गई, किसी का बेटा मारा गया, किसी का पिता मारा गया, किसी का पति मारा गया, किसी का भाई मारा गया, वे २१ साल के बाद भी अपेक्षा कर रहे हैं कि हमारे आजाद हिन्दुस्तान में एक न एक दिन, जो अपराधी हैं, जो इस हत्याकांड में अपराधी हैं, उन अपराधियों का सजा मिलेगी। आज इस चर्चा में जो सरकार की ओर से और सरकारी पक्ष की ओर से जिस प्रकार से इस सारी घटना का समर्थन किया जा रहा है, मुझे नहीं लगता कि इस सरकार से, जो भुक्तभोगी लोग हैं, उन्हें कोई न्याय मिल पाएगा।
अध्यक्ष महोदय : धन्यवाद।
श्री अनंत गंगाराम गीते : अध्यक्ष महोदय, मैं तो विषय पर बोल रहा हूं।
अध्यक्ष महोदय : आप जरूर बोलिए। समस्या तो इस बात की है कि टोटल आठ मिनट थे लेकिन आपको बारह मिनट दे दिए हैं।
श्री अनंत गंगाराम गीते : अध्यक्ष महोदय, श्री राम कृपाल यादव जी बोलने से पहले याद दिला रहे थे कि पहले काफी समय हो गया है। जब समय कम होता है तो दो मिनट देते हैं।
अध्यक्ष महोदय : किसी का टाइम एक्सटेंड नहीं किया है।
...( व्यवधान)
श्री अनंत गंगाराम गीते : महोदय, मैं ज्यादा समय नहीं लूंगा।
अध्यक्ष महोदय : वार्निंग भी तो देनी पड़ती है।
श्री अनंत गंगाराम गीते : अध्यक्ष महोदय, मैं ज्यादा समय नहीं लूंगा। जो घटना १९८४ की है, जिसका उल्लेख बार बार सरकारी पक्ष की ओर से दंगा कह कर किया गया है, वास्तव में वह दंगा नहीं था। किसी भी सिख ने, एक सिख ने या सरदार ने किसी पर कभी हमला नहीं किया, न किसी कांग्रेस के कार्यकर्त्ता पर और न किसी कांग्रेसी नेता पर, वह एकतरफा था। जो एकतरफा हुआ उसे दंगा कैसे कह सकते हैं? वह दंगा नहीं था, बार-बार उसे दंगा कह कर जो इसमें अपराधी हैं, अपराधी चाहे कोई भी है, उसे बचाने का जो प्रयास है, वह गलत है। दु:ख तो इस बात का है कि श्री बंसल जी ने यहां पर बार-बार कहा कि मुझे पश्चाताप होता है। बल्कि हमें हर बार इस बात का पश्चाताप होता है कि इस प्रकार से नहीं होना चाहिए था। यह हमारे लिए कलंक की बात है। लेकिन हर बार वे कह रहे थे कि मेरी पार्टी के लिए यह कलंक की बात है, कांग्रेस पार्टी के लिए कलंक की बात है, कांग्रेय हर बार इस बारे में पश्चाताप महसूस करती है। लेकिन उसी कांग्रेस ने, जिनके नाम यहां आए हैं, उन्हें बख्शीश देकर किसी को राज्य सभा में भेज दिया, किसी को लोक सभा में भेज दिया और किसी को मंत्री बना दिया। फिर हमें यहां पर सिखाया जाता है कि घाव पर नमक मत छिड़किए जबकि नमक छिड़कने का काम तो सरकार कर रही है।
महोदय, यदि आज की इस बहस से कुछ निकलने वाला नहीं है और यही राय सरकार की बनी है तो मुझे नहीं लगता कि १९८४ के दंगों में जो कत्लेआम हुआ, जिन पर अत्याचार हुआ, उन भुक्तभोगियों को जीवन में कभी न्याय मिल पाएगा। यदि सरकार की यह मंशा है और सरकार यदि उन्हें न्याय देना चाहती है तो सबसे पहले इस कमीशन की रिपोर्ट में जिनका जिक्र आया है, चाहे वह नेता कितना भी बड़ा हो, उसे तुरंत पद से हटाया जाए। आपने मुझे बोलने का मौका दिया इसके लिए मैं आपका धन्यवाद करता हूं।
SHRI C. KUPPUSAMI (MADRAS NORTH): Thank you very much, Sir. Our Parliament, the temple of democracy, has chosen today to discuss the matter of massacre that had happened 21 years ago, after the heinous crime of assassination of Madam Indira Gandhi. In a democracy, majority is accountable for decision-making on political issues, but in real human life, the value of co-existence of the majority and minority communities together in complete peace and harmony must be kept in all earnestness[reporter48] .
15.00 hrs I feel that each and every Indian should stand shoulder to shoulder to develop brotherhood, harmony and integrity in this great nation. All that had happened unfortunately in 1984 after the assassination of Madam Indira Gandhi should not repeat itself.
If a majority community resorts to killing of innocent minorities without rhyme or reason and by flouting all fundamental rights, then it is not acceptable to me and my Party DMK. The minorities should be protected by all means. There should not be any discrimination in the name of caste, creed, religion, place of birth, etc. The administration should come forward to give due protection to the life and property of the minorities at any cost.
The DMK Party and our leader Dr. Kalaignar M. Karunanidhi always pleaded for equality and justice for all, especially, for the minority sections of our society. If any Government fails to maintain normalcy or fails to create congenial atmosphere for a peaceful living, then it would mean that the administration is digging the grave of the values of democracy.
What had happened in Tamil Nadu when the High Court of Madras gave a judgement convicting Selvi J. Jayalalitha for one year in connection with a corruption case? After hearing the judgement, the ADMK followers burnt a bus of the Agriculture University, and three girl students were burnt to death inside that very bus. If we permit such type of heinous crime to happen and if the Central Government and the State Governments fail to take severe action against such anti-social elements, then it means that we are entertaining domestic terrorism against mankind.
If any injustice or insecurity is inflicted upon the minorities -- whether it be the riots of 1984 against the Sikhs or the riots of Godhra against the Muslims -- then all the Indians will have to hang their heads in shame. Therefore, it is not only necessary to take suitable action against terrorism in the border areas, but we should also take necessary action to fight internal terrorism, namely, incidents like the riots of 1984.
Before I conclude, I would like to say that we should not fail to take suitable action and punish the anti-social elements who were involved in the 1984 riots. I would also request the Government of India to safeguard the Sikh community, who are also our brothers and sisters. Those affected in the riots should be extended all compensation, free housing and education, employment, and full protection for their peaceful living.
Sir, I thank you very much for giving me an opportunity to speak on this issue.
MR. SPEAKER: The next speaker is Shri Braja Kishore Tripathy. Mr. Tripathy, you have got seven minutes at your disposal to speak on this issue.
श्री ब्रज किशोर त्रिपाठी (पुरी) : अध्यक्ष महोदय, १९८४ में दिल्ली में कांग्रेस के शासन काल में जो नर-संहार हुआ, मेरे ख्याल से ऐसा नर-संहार किसी रूलिंग पार्टी के समय में नहीं हुआ होगा। उस समय मुत्यु का डांस हो रहा था। श्रीमती इन्दिरा गांधी की हत्या से सारा देश दुखी था लेकिन जिस ढंग से उनकी हत्या हुई और कमीशन जांच करने के लिये बैठाये गये , उनकी रिपोट्र्सपर क्या कार्यवाही हुई। स्व. राजीव गांधी जब इस देश के प्रधान मंत्री थे, उस समय जबकमीशन की रिपोर्ट आई तो उन्होंने भी कहा :
“The needle of suspicion is in the bungalow itself. ” अभी नानावती कमीशन ने जो अपनी रिपोर्ट दी है, उसने भी ‘नीडल ऑफ सैस्पैंशन’ कांग्रेस पार्टी की ओर रखी है। इस बारे में सरकार का क्या कहना है? क्यास्व. राजीव गांधी ने जस्टिफाई नहीं किया lÉÉ[RB49] ?
यदि कोई बड़ा पेड़ गिरेगा तो धरती हिल जायेगी - इतना बड़ा नरसंहार हुआ और प्रधान मंत्री जी कह रहे हैं कि बड़ा पेड़ गिर जाने से धरती हिलती है। धरती हिल गई, तीन हजार सिख मारे गये, सारे देश में इतना बड़ा नरसंहार हुआ, देश की राजधानी दिल्ली में सिखों की इतनी बुरी हालत हुई, लेकिन प्रधान मंत्री जी का वक्तव्य वही था, जो कमीशन की रिपोर्ट में आ रहा है। इससे पहले सात कमीशंनों ने अपनी रिपोट्र्स दी हैं, लेकिन नानावती कमीशन ने जो रिपोर्ट दी है, उसने प्रधान मंत्री जी के ऊपर भी उंगली उठाई है, उनके ऊपर संदेह किया है। बेनफिट ऑफ डाउट प्रधान मंत्री जी, होम मनिस्टर आदि सबके के ऊपर है। अब कोई एक्शऩ लेंगे या नहीं लेंगे, वह दूसरी बात है, लेकिन प्रधान मंत्री जी दिल्ली में मौजूदथे और नरसंहार दिल्ली में हुआ था।
श्री जगदीश टाइटलर, जो आज केन्द्र मे मंत्री हैं और जिनके बारे में भी यहां डिस्कशन हुआ है, वहप्रधान मंत्री की कोठी में थे, जब वहां लेफ्टिनेन्ट गवर्नर गये। उन्हें मिलने के लिए मना कर दिया गया। दिल्ली के एम.पी. के सामने आलोचना करना लेफ्टिनेन्ट गवर्नर ने सही नहीं समझा । टाइटलर जी ने जो बात प्रधान मंत्री जी से कही, उन्होंने जो कुछ बताया, उसके बारे में विटनैसेज ने कमीशन में बताया है, जो रिपोर्ट में आया है। टाइटलर जी की स्थिति यह थी कि हाईकमान मेरी है, मेरा कुछ नहीं होगा। मुख्यत: सरकार के ऊपर दोष आ रहा है कि तीन दिन तक आर्मी को क्यों नहीं बुलाया गया। इतना बड़ा कत्लेआम हुआ। प्रधान मंत्री जी, होम मनिस्टर के होते हुए राजधानी में यह सब हुआ, परंतु फौज को क्यों नहीं बुलाया गया - इसलिए संदेह हो रहा है। जो केन्द्रीय मंत्रिमंडल में प्रधान मंत्री जी से लेकर होम मनिस्टर उस वक्त थे, उनके इशारे पर यह सब कुछ हुआ था। वे साइलैन्ट स्पैक्टेटर थे। वे चाहते थे कि ऐसा कुछ होना चाहिए, इसीलिए उन्होंने होने दिया और यह सब हुआ।
अध्यक्ष महोदय, टाइटलर जी के बारे में जो कुछ १३७ विटनैसेज ने बताया है, उसे मैं दोहराना नहीं चाहता हूं, लेकिन दबाव देकर काउंटर एफिडेविट दिलाया गया था। १८ साल के बाद कोई कल्प्रिट कहां जायेगा, यदि उसके ऊपर एक्शन नहीं होगा। हम जानना चाहते हैं कि जैसा मंत्री जी बता रहे थे कि १८ साल बाद एफिडेविट क्यों दिया गया - क्या १८ साल के बाद कोई कल्प्रिट पकड़ा जायेगा - क्या उसके विरुद्ध एविडैन्स आयेगी और एक्शन होगा। ऐसा किसी कानून में नहीं है कि १८ साल तक कोई एक्शन नहीं होगा। उसके ऊपर दबाव था। आप केन्द्र सरकार में थे और वह खुद दिल्ली से पार्लियामैन्ट के मैम्बर थे और कांग्रेस दल के नेता थे। इनके ऊपर दबाव था। वह एक पुलिस ऑफिसर सरकारी कर्मचारी था, जिसके ऊपर दबाव था। इसलिए उसने कुछ प्रयास नहीं किया।
हम मांग करते हैं कि सरकार को इसे गम्भीरता से लेना चाहिए। जो कांग्रेस दल के नेतृत्व में श्री एच.के.एल.भगत, श्री सज्जन कुमार और श्री कमलनाथ थे, उनकी भी थोड़ी आलोचना हुई है। इसलिए जिन लोगों के नाम इस रिपोर्ट में आये हैं, उन सबके विरुद्ध इनवैस्टिगेशन की जरूरत है और इनवैस्टिगेशन करके उनके विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए। सारे देश में तीन हजार सिख मारे गये। २७३३ सिख दिल्ली में मारे गये। ऐसे ढंग से माइनोरिटीज के विरुद्ध कभी जुल्म नहीं हुआ। अभी ढींडसा जी बता रहे थे कि सिख कम्युनिटी ने देश की आजादी में क्या योगदान दिया। देश को स्वावलम्बी बनाने तथा खाद्यान्न से लेकर डिफैंस आदि में जहां भी जरूरत पड़ी, सिख कम्युनिटी ने अपना पूर्ण योगदान दिया है। यह बात सबको मालूम है। इसलिए सिख कम्युनिटी के मन में बहुत दुख है कि २१ साल के बाद भी उन्हें जस्टिस नहीं मिला। उनके लिए सरकार की तरफ से जस्टिस डिले हुआ, जस्टिस डिनाई हुआ। माइनोरिटीज के विरुद्ध देश में जो नरसंहार हुआ था, प्रधान मंत्री जी सिख सम्प्रदाय के हैं, यह बात मैं कहना नहीं चाहता हूं। वह देश के प्रधान मंत्री हैं, लेकिन देश में इतना बड़ा कत्लेआम हुआ और २१ साल से सिखों को अभी तक न्याय नहीं मिला। सरकार कहती है कि कुछ एक्शन की जरूरत नहीं है। यह ए.टी.आर. सिखों के सबसे बड़े दुख का कारण है[R50] ।
जो नानावती कमीशन की रिपोर्ट है, उससे हम संतुष्ट नहीं हैं, मगर उस पर सरकार की जो एटीआर है, वह बिल्कुल भी उचित नहीं है। सरकार द्वारा उस एटीआर को विदड्रा करना चाहिए और दोबारा एक एटीआर सदन में रखने की जरूरत है। सरकार की यह एटीआर इन हत्याओं के ऊपर और कष्ट देने का काम कर रही है। दंगा पीड़ितों को न्याय तो नहीं मिला लेकिन न्याय के नाम पर एक और हत्या हो गई है। मैं सरकार से अनुरोध करता हूं कि नानावती कमीशऩ रि़पोर्ट में जिनके नाम हैं और जो केन्द्र सरकार में मंत्री हैं, उन्हें तुरंत निलंबित करना चाहिए और जो कर्मचारी उसके लिए जिम्मेदार हैं, उनके खिलाफ भी एक्शन लेना जरूरी है। अभी भी एफ.आई.आर. के लिए टाइम है इसलिए सरकार को उचित कार्रवाई करनी चाहिए। सरकार को सोचना चाहिए कि जिस केस को २० साल से ऊपर हो चुके हैं, उसे कितनी जल्दी वह डिस्पोज़ ऑफ कर सकती है और जो नए केस आएंगे, उनको वह कैसे जल्दी से जल्दी डिस्पोज़ ऑफ करेगी। यही मांग करते हुए मैं अपनी बात समाप्त करता हूँ।
SHRI GURUDAS DASGUPTA (PANSKURA): Sir, it is a sad day for Indian Parliament. It is a sad day for the political system of the country. The question that we are discussing today, of course by trading political charges, is as to why the perpetrators of the worst crime that took place 21 years ago have not been punished. The fact by itself, I believe, is a sad commentary on the performance of the political system of the country.
May I pose a question to my friends in the Opposition? BJP was in power for six years. When they were in power for six years, why did they need to appoint a Commission to find out who were the people involved? As we all know, all cases can be reopened under the Criminal Procedure Code. On the basis of the reopened cases, proceedings can be started and in the court of law a man can be hauled up. Shri Advani was the Home Minister of India for those six years. May I ask as to why he needed a Commission when four-five Commissions had already gone into it? What was the need for setting up another Commission?
Sir, to tell you the truth of how the Commission came into existence – I was a Member of the other House at that time – in the course of answering a question on the floor of the House, Shri Advani most casually remarked that if the Leader of Opposition agreed the Government was in a mood to appoint a Commission. That was a very casual statement made by the Home Minister at that time. The Leader of Opposition was not present in the House at that time. After the recess, as far as I remember, Shri Pranab Mukherjee got up to say that if it was the intention of the Government to appoint a Commission, Congress Party would not stand in the way. So, the Commission was an accidental creation of the Government. In the course of replying to a question, it was casually referred to by the Home Minister. It is a proof by itself that BJP was not in a mind to appoint it but it was in a mood to score a point. They wanted to put the Congress on the mat by asking whether the Congress would accept the proposal to have a Commission[KMR51] or not .
This is the beginning of the story of the Commission. On how many occasions the Commission has been given extensions? Why was it so? The Commission was appointed for six months; five extensions were given. Why it was so? May I ask the BJP Party why are they so tormented that the minority Sikh community has been so brutally hurt by the Congress leaders? I take their allegation that the Sikh community has been hurt by the Congress leaders - even the Prime Minister at that point of time is not above suspicion. That is their allegation. If it is so, why they needed time? Why they gave extensions? Why was justice not sought to be done by the BJP when it had majority, may be in both Houses? Why was it done?
Prof. Malhotra, kindly look into the Criminal Procedure Code. Any case can be reopened. Any Magistrate can open a case and by reopening a case, proceedings can be started. I am quite convinced that Shri Advani knows the Criminal Procedure Code. There are lawyers in the BJP party too. Why it was not done? Why was a Commission appointed? Why was the Commission given so many extensions? After five years, we are digging the grave and we are asking that the Congress Party must exonerate itself of the responsibility. Sir, it is not a commitment to the cause they stand for. It is a lip service and if there had been seriousness on the part of the BJP Party to undo the wrong done to the Sikh community, they could have been more up and doing.
Then, my conclusion, Sir, is that - excuse me for that - it is not an innocent move to bring the culprits to book. It is a political move to reap a political advantage. While saying so, I must say very frankly that my Party, the Communist Part of India, believe that it was a carnage, it was a genocide, it was a case of mass killing; and the culprits must be brought to book. Whether the person is a Minister of State; whether the person is a Member of Parliament; whether the person is a political activist; when the person is a member of the social organisation that you claim to be very active in the country - whoever he may be - he must be brought to book. The law should take its own course.
Sir, I must submit very frankly that the Commission did not do the job. It was a miscarriage. The Report of the Commission is contradictory and if the Report of the Commission is contradictory, the Action Taken Report (ATR) is extremely disappointed. May I call upon, may I request the Government, particularly the Minister of Home Affairs, the Prime Minister and the Leader of the House to assure the House, while winding up the debate, that action will be taken against all, against whom evidence may be found out through reopening of the cases? Can this assurance be given? If this assurance can be given, I believe, the stature of the Government will go up; the credibility of the Government will improve. May I suggest by doing that the Government can take the wind out of the sails of those hon. Members of the House who, in the name of fighting for the cause of the minority, are indulging in a dangerous political game to whip up feelings in the country. Let the Government take the wind out of the sails.
Therefore, our suggestion is that, it is a matter of national alarm. I will refuse to believe that injustice has been done to you only; injustice has been done to the nation. As a person, coming from Bengal, I think, we are equally alarmed[R52] .
Do not take it as an injury heaped on you. It is not a shriek question. It is a national question. The political system failed to bring to book the culprits responsible for the carnage that took place 20 years back. Therefore, perpetrators must be brought to book. The ATR should be amended. It should be looked afresh. We suggest, re-open all the cases on the basis of evidence. Whoever he may be, however big or small the person may be, take action against those police officers who have been found to be guilty whether retired or not. We demand job for all; we want compensation for all. May the delayed justice not be the denied justice. Justice is delayed, but let it be not denial of justice.
श्री जार्ज फर्नान्डीज़ (मुजफ्फ़रपुर) : अध्यक्ष जी, सबसे पहले, मैं अपनी आपत्ति इस रिपोर्ट के टाइटल पर व्यक्त करना चाहता हूं। इसमें लिखा है - “ राइट्स ” राइट की बात लिखना ठीक नहीं है, क्योंकि यह मामला राइट्स का नहीं है, यह मामला तो कत्ले-आम का है। इसलिए कहीं न कहीं इस बात की भी सफाई होनी चाहिए। अभी यहां जितनी भी चर्चा चली, उसमें एक तरफ सिखों के साथ जो कुछ हुआ, उसे रख दिया गया और दूसरी तरफ गुजरात में क्या हुआ, वह बात भी आमने-सामने लाई गई। ये दोनों, आमने-सामने आने वाली बातें नहीं हो सकतीं, क्योंकि यहां जो हुआ- वह एक पोगरोम था जो हिटलर अपने जमाने में चलाता था और वहां गुजरात में हुआ- वह आमने-सामने लड़ाई थी।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : आप बैठ जाइए। आपको तो मालूम है कि बिना स्पीकर की अनुमति के इस प्रकार से बीच में खड़े होकर बोलने से रिकॉर्ड पर नहीं जाता है। जब आपकी बारी आए, तब आप बोलिएगा। ठीक है। प्लीज बैठिए। You address the Chair.
श्री जार्ज फर्नान्डीज़ : अध्यक्ष जी, यदि मेरे बोलने पर उन्हें कोई आपत्ति है, तो जब वे बोलें, अपनी राय यहां रख सकते हैं। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : जो भी अनपार्लियामेंट्री होगा, उसे हम एक्सपंज कर देंगे।
श्री जार्ज फर्नान्डीज़ : अध्यक्ष जी, मैंने इस शब्द का इस्तेमाल इसलिए किया क्योंकि जिस समय गुजरात में स्थिति बिगड़ गई और वहां के मुख्य मंत्री ने सेना की मांग की, तो जैसे ही वहां से यह मांग आई, मैं रात को ही वहां सेना लेकर पहुंच गया। …( व्यवधान)
श्री हरिन पाठक : हां, मैं भी साथ था। …( व्यवधान)
श्री जार्ज फर्नान्डीज़ : अध्यक्ष जी, वहां जो कुछ भी हुआ, उसे हमने अपनी आंखों से देखा था और उसी के आधार पर मैंने इस शब्द का इस्तेमाल किया। आप लोगों ने उसे देखा नहीं है, अनुभव नहीं किया है। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : आप बोलिए। चेयर को एड्रैस कर के बोलिए।
श्री जार्ज फर्नान्डीज़ : अध्यक्ष जी, मुझे यह मालूम नहीं था कि जैसे ही मैं अपनी बात कहने के लिए खडा होऊंगा, सदन में तूफान आ जाएगा। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : आप बोलिए। I have called you. You are entitled to speak.
श्री जार्ज फर्नान्डीज़ : मैं इस बात को इसलिए कह रहा हूं …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : यह क्या हो रहा है, उधर से कौन बोल रहा है। कृपया शान्त रहिए।
श्री जार्ज फर्नान्डीज़ : इसका सबूत अगर किसी को चाहिए, तो अध्यक्ष जी, आपकी इजाजत से मैं कुछेक वाक्य इसमें से पढ़कर सुनाना चाहूंगा, हालांकि इसकी सुनवाई यहां हो चुकी है। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : यह क्या हो रहा है। प्लीज बैठिए। This is not proper.
श्री जार्ज फर्नान्डीज़ : अध्यक्ष जी, मैं इसे इसलिए पढ़कर सुनाना चाहता हूं क्योंकि जो मेरा तर्क है कि यह एक पोगरोम है तथा इसमें और गुजरात में कोई मेलजोल नहीं है।
पन्ना १८० में लिखा cè [rpm53] :
“Large number of affidavits indicate that local Congress(I) leaders and workers had either incited or helped the mobs in attacking the Sikhs. But for the backing and help of influential and resourceful persons, killing of Sikhs so swiftly and in large numbers could not have happened. In many places the riotous mobs consisted of outsiders, though there is evidence to show that in certain areas like, Sultanpuri, Yamunapuri where there are large clusters of jhuggis and jhonpris, local persons were also in the mobs. Outsiders in large numbers could not have been brought by ordinary persons from the public. Bringing them from outside required an organized effort. Supplying them with weapons and inflammable material also required an organised effort. There is evidence to show that outsiders were shown the houses of the Sikhs. Obviously, it would have been difficult for them to find out the houses and shops of Sikhs so quickly and easily. There is also evidence to show that in a systematic manner, the Sikhs who were found to have collected either at Gurudwara or at some place in their localities for collectively defending themselves, were either persuaded or forced to go inside of their houses. There is enough material on record to show that at many places, the police had taken away their arms or other articles with which they could have defended themselves against the attacks by mobs. After they were persuaded to go inside their houses on assurances that they would be well protected, attacks on them had started. All this could not have happened if there was merely a spontaneous reaction of the angry public. The systematic manner in which the Sikhs were thus killed indicate that the attacks on them were organised... ” That is what a pogram is about.… (Interruptions)
SHRI PAWAN KUMAR BANSAL : Just read the next two lines.… (Interruptions)
MR. SPEAKER: No; he has not yielded.
SHRI GEORGE FERNANDES : It is further written:
“…It appears that from 1.11.84, another ‘cause of exploitation of the situation’ had joined the initial ‘cause of anger’. The exploitation of the situation was by the anti-social elements. The poor sections of society who are deprived of enjoyment of better things in life saw an opportunity of looting such things without the fear of being punished for the same…” … (Interruptions) I am coming to it.
MR. SPEAKER: Please keep silence in the House.
SHRI GEORGE FERNANDES : It further states:
“The exploitation of the situation was also by the local political leaders for their political and personal gains like increasing the clout by showing their importance, popularity and hold over the masses. Lack of the fear of the police force was also one of the causes for the happening of so many incidents within those three or four days. If the police had taken prompt and effective steps, very probably, so many lives would not have been lost and so many properties would not have been looted. As the attacks on Sikhs appear to the Commission as organised, an attempt was made to see who were responsible for organising the same. Some of the affidavits filed before the Commission generally state that the Congress leaders/workers were behind these riots. In Part III of this Report, the Commission has referred to some of the incidents wherein the named Congress(I) leaders/ workers had taken part. No other person or organisation apart from anti-social elements to some extent, is alleged to have taken part in those incidents. The slogans which were raised during the riots also indicate that some of the persons who constituted the mobs were Congress (I) workers or sympathizers. It was suggested that Shri Rajiv Gandhi had told one of his officials that Sikhs should be taught a lesson. The Commission finds no substance in that allegation. The evidence in this behalf is very vague[k54] .” मैं यहां पर रूक जाऊंगा। मैंने इसलिए इसे पढ़ा है।…( व्यवधान)
श्री मधुसूदन मिस्त्री (साबरकंठा) : आगे भी तो पढि़ए।…( व्यवधान)
श्री जार्ज फर्नान्डीज़ : आप भी पढ़ सकते हैं, आप लोगों के हाथों में भी है।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: You do not respond to them.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: We are having an important discussion.
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय : आपके पास ज्यादा टाइम नहीं है। आप बोलिए।
श्री जार्ज फर्नान्डीज़ : अध्यक्ष जी, आज जिस विषय पर हम लोग चर्चा कर रहे हैं, यह एक गंभीर मामला है, मगर मुझे अफसोस है और मुझे लगता है कि कुछ चर्चाएं यहां पर मजाक के तौर पर हुई हैं। यदि हम इस गंभीर विषय को छोड़ दें, तो आगे बढ़ना मुश्किल हो जाएगा। चार हजार लोग जो मारे गए, जिनमें सेना के लोग भी थे, उसकी चर्चा किसी ने नहीं की है। गाड़ी में जाते हुए सेना के सिक्ख अधिकारियों और जवानों को बाहर निकाल कर जान से मार दिया गया। वे सभी यूनिफार्म में थे, उन्हें क्यों मार दिया गया, क्योंकि वे सिक्ख थे। यह बात यहीं नहीं रुकती है। यहां पर बार-बार यह प्रश्न पूछा गया कि आप लोगों ने कुछ क्यों नहीं किया? इसके पीछे दो कारण हैं…( व्यवधान) श्री अशोक प्रधान : महोदय, पीछे बैठे लोग टोपी नीचे करके और मुंह छिपा कर बोलते हैं। यह गलत है। अगर उन्हें बोलना ही है तो खड़े हो कर बोलना चाहिए।…( व्यवधान) अध्यक्ष महोदय : आप शांत रहिए। उनका रिकार्ड में कुछ नहीं जाएगा हम जानते हैं कि आप भी खड़े हो कर गलत करते हैं। ...( व्यवधान)
MR. SPEAKER: He has got a limited time. I have already given him double of his time.
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय : आप बोलिए। हम आपको सुनना चाहते हैं।
श्री जार्ज फर्नान्डीज़ : अध्यक्ष जी, मैं यह बताना चाहता हूं कि जिन-जिन लोगों को इन दंगों में घसीट कर मार दिया गया, उनमें वर्दी पहने हुए सेना के जवान और अधिकारी भी थे। इस बात को बीस साल हो चुके हैं, लेकिन हम अभी भी चिल्ला रहे हैं। यह पूछा जाता है कि एनडीए की सरकार ने इतनी देर से काम क्यों किया। जब यह कांड हुआ था तब क्या उस समय इन लोगों को किसी ने रोका था? आज ये सब बातें हो रही हैं। आपको मालूम है कि यह कांड होने के बाद कांग्रेस पार्टी ने चुनाव करवाए थे और क्या यह किसी को याद है कि चुनावों के लिए क्या पोस्टर लगाए थे, इतनी बड़ी तस्वीर बना दी गई, टैक्सी के बगल में दाढ़ी वाला सरदार और उस पर लिखा था, क्या इसके ऊपर विश्वास करोगे।…( व्यवधान) कृषि मंत्रालय में राज्य मंत्री तथा उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय में राज्य मंत्री (श्री कांतिलाल भूरिया) : ये गलत बयान दे रहे हैं।…( व्यवधान) श्री विलास मुत्तेमवार : ये गलत बात बोल रहे हैं। ऐसा कोई पोस्टर नहीं लगाया गया था।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : हम मानते हैं कि यह गम्भीर आरोप है।
...( व्यवधान)
श्री जार्ज फर्नान्डीज़ : मैं आरोप नहीं लगा रहा हूं, मैं सत्य बोल रहा हूं।…( व्यव्ाधान[MSOffice55] ) अध्यक्ष महोदय : आप ठीक ढंग से जवाब दीजिए। Shri George Fernandes, your time is over. I have given you more than double of your time. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: I am controllin g them also. I have to control both the sides.
… (Interruptions)
श्री जार्ज फर्नान्डीज़ : मुझे ज्यादा कुछ नहीं बोलना है क्योंकि अनेक सदस्य बोल चुके हैं।…( व्यवधान) MR. SPEAKER: Okay, he is making his submission and expressing his views strongly.
श्री जार्ज फर्नान्डीज़ : कुछ बातों को छिपाने का प्रयास चल रहा था, वे मुझे आहत कर रही थीं। सिखों के लिए इतना प्यार है, यहां हमें यह बताया गया। पहले मार डाला, जो बचे हैं, वे मर जाएं ताकि उनकी टैक्सियां भी चलें, आमदनी भी हो, ये सारी कोशिशें थीं।…( व्यवधान) अध्यक्ष महोदय : अब आप कनक्लूड कीजिए। आपको पांच मिनट की जगह पन्द्रह मिनट दिए गए हैं।
...( व्यवधान)
श्री जार्ज फर्नान्डीज़ : मुझे दो-तीन बातें ही कहनी थीं, जिनमें से मैं दो बातें कह चुका हूं।…( व्यवधान) अध्यक्ष महोदय : आपका समय समाप्त हो गया है।
...( व्यवधान)
श्री जार्ज फर्नान्डीज़ : मैं कहना चाहता हूं कि जिन लोगों ने अपराध किया है, उनकेखिलाफ कार्यवाही होनी चाहिए। सब माननीय सदस्यों ने भी ऐसा कहा है, हम भी उसी सोच और विचार के हैं। यहां जितने भी माननीय सदस्यों ने बोला है, वे सब एक ही विचार के हैं।…( व्यवधान) श्री प्रभुनाथ सिंह (महाराजगंज, बिहार) : इसकी जरूरत नहीं थी।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : आप चुप कीजिए। आपको बैठकर बोलने का कोई हक नहीं है।
...( व्यवधान)
श्री प्रभुनाथ सिंह : आप उधर के सदस्यों को भी मना कीजिए।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : हमने मना किया है। हम जितना मना करते हैं, उतना मना और कोई नहीं करता। आपसे हाथ जोड़कर भी बोल रहे हैं। आप बैठकर कमैंट कर रहे हैं। आप चुप क्यों नहीं रहते। यह सही नहीं है। ...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : आपका समय पांच मिनट था और अब १५-१६ मिनट हो गए हैं।
...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : हमें आपकी मदद नहीं चाहिए। जब मांगेंगे तब दीजिए।
...( व्यवधान)
श्री जार्ज फर्नान्डीज़ : अध्यक्ष जी, आप मेरी बात सुनिए।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : हम आपकी बात सुनना चाहते हैं, लेकिन आप उस तरफ क्यों देखते हैं। वे तो आपके पुराने दोस्त हैं। ...( व्यवधान)
श्री जार्ज फर्नान्डीज़ : जिन लोगों ने एक्शन टेकन रिपोर्ट दी है, उसे फाड़ डालना चाहिए।…( व्यवधान) MR. SPEAKER: Okay, that is your view.
श्री जार्ज फर्नान्डीज़ : अनेक लोगों को बचाने के लिए बाबू लोगों द्वारा बनाई गई यह रिपोर्ट है। कोई संवेदनशील व्यक्ति इस प्रकार की रिपोर्ट नहीं लिखता।…( व्यवधान) यहां लीडर ऑफ दी हाउस बैठे हैं, और भी मंत्रीगण हैं। बाबू लोगों द्वारा लिखी गई एटीआर इनके पास कैबिनेट में गई होगी। मुझे आश्चर्य हुआ कि इन्होंने उसे कैसे क्लीयर करके हमारे सामने रख दिया।…( व्यवधान) अध्यक्ष महोदय : आप भी इसके खिलाफ थे।
...( व्यवधान)
श्री जार्ज फर्नान्डीज़ : क्या हम लोगों का दिल पूरा खत्म हो गया है?…( व्यवधान) अगर बाबू लोगों में संवेदनशीलता होती, उनका दिल इन लोगों ने बेच डाला है, ऐसी मेरी मान्यता है।…( व्यवधान) मैं और समय नहीं लेना चाहता क्योंकि इस पर जितना बोलना चाहिए, सब सदस्य बोल चुके हैं। मैं आपको धन्यवाद देता हूं। MR. SPEAKER: Thank you very much for your cooperation.
श्री राजेश वर्मा (सीतापुर) : माननीय अध्यक्ष जी, इस देश में १९८४ मेंजो घटना घटी, वह बहुत ही शर्मनाक थी। उस घटना के बारे में आज ग्यारह बजे से बराबर सत्ता पक्ष और विपक्ष द्वारा चर्चा हो रही है। १९८४ में सिखों के ऊपर जो अत्याचार हुए, अन्याय हुए, उनकी जो हत्याएं हुईं, वह केवल दिल्ली तक ही सीमित नहीं lÉÉÓ[R56] , पूरे देश में ऐसी घटनाएं हुईं। मैं उत्तर प्रदेश से आता हूं। उत्तर प्रदेश के तमाम जिलों में भी सिखों के ऊपर ऐसी घटनाएं हुईं। लेकिन आज जो चर्चा सदन में हो रही है, अल्पसंख्यक सिख समुदाय के ऊपर जो घटनाएं घटीं, उस मुद्दे पर दोनों तरफ से राजनीतिक रोटियां सेंकी जा रही हैं। मैं इस सदन में कहना चाहता हूं कि अगर सिखों के ऊपर दंगे हुए, सिखों की हत्याएं की गयीं, सिखों के साथ अन्याय किया गया तो इस देश के लाखों लोगों ने सिख भाइयों की जान-माल की रक्षा भी की थी, आज उसकी चर्चा इस सदन में किसी ने नहीं की। उस समय पूरे देश के अंदर लाखों जवान, बुजुर्ग, माता और बहनें अपने जान-माल कोन्यौछावर करके सिख समुदाय की रक्षा के लिए आगे आयीं थी। मेरा कहना है कि उसकी चर्चा भी इस सदन में होनी चाहिए। अध्यक्ष महोदय, १९८४ में सिखों के साथ जो कुछ हुआ,, वह बहुत ही अप्रत्याशित था। …( व्यवधान) आप उसे प्री-प्लांड कह सकते हैं। मेरे मन में जो भावना है, मैं उसे बोल रहा हूं। ...( व्यवधान) MR. SPEAKER: Do not get distracted.
श्री राजेश वर्मा : आपके शब्दों में वह प्री-प्लांड हो सकता है, लेकिन अचानक ऐसी घटना घटे जिसमें हजारों सिख परिवार बेघरबार हो गये, मैं समझता हूं कि इस घटना से विशेष रूप से एनडीए या भाजपा का ही इंटरैस्ट नहीं है, बल्कि इस सदन के हर दल का इंटरैस्ट है। सबको शर्म के साथ यह स्वीकार करना चाहिए क जो घटना घटी, वह गलत हुई। अध्यक्ष महोदय, कल आपने इस मामले में सर्वदलीय बैठक बुलाई थी। यहां संसदीय कार्य मंत्री जी बैठे हुए हैं। उसमें उन्होंने कहा था कि जो कुछ हुआ, वह अप्रिय घटना थी इसलिए सबको इसकी निंदा करनी चाहिए। अगर अचानक कोई घटना घटती है, तो उसे रोकने के उपाय किये जाने चाहिए न कि उसके ऊपर राजनीतिक रोटियां सेंकनी चाहिए। मैं आज आपके माध्यम से कहना चाहूंगा कि बहुजन समाज पार्टी की यही सोच है कि अल्पसंख्यक सिख समुदाय, जो इस देश में माइनौरिटी में है, उसकी रक्षा करने की जिम्मेदारी इस सदन की सार्वजनिक रूप से बनती है। आज यूपीए सरकार यहांकांग्रेस के नेतृत्व में चल रही है। कांग्रेस के जो लीडर्स यहां बैठे हुए हैं, मैं उनसे कहना चाहूंगा कि वे सदन को भरोसा दिलाएं कि सिखों के साथ जो अन्याय हुआ, सिखों के ऊपर जो दंगे हुए, उन दंगों में जो लोग लिप्त थे, उनके खिलाफ वे कार्रवाई करने का कार्य करेंगे। आज सदन के नेता यहां बैठे हुए हैं, माननीय गृह मंत्री जी भी बैठे हुए हैं। वे भी सदन को भरोसा दिलाएं कि आने वाले समय में अल्पसंख्यक सिख समुदाय जो इस देश में सबसे ज्यादा आतंकित है, उन के साथ भविष्य में ऐसी कोई घटना नहीं घटेगी। मुझे पूरा भरोसा है कि इस प्रकरण में जो लोग भी दोषी हैं, यूपीए सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई करने का आश्वासन इस सदन मे देगी। मेरी सरकार से यही मांग है। इन्हीं शब्दों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।
SHRI SUKHBIR SINGH BADAL (FARIDKOT): Mr. Speaker, Sir, first of all I would like to thank you for giving us an opportunity to discuss such a sentimental issue among the Sikh community. Everyone knows what happened 21 years back in Delhi and around the country. Day before yesterday, when the hon. Home Minister presented the Commission Report and the Action Taken Report, it was a very sad day for the entire Sikh community living not only in India but across the world. As you are aware, Sir, the Sikh community had made maximum sacrifice in the Independence struggle. A famous book written by Maulana Azad, 'India Wins Freedom' clearly depicts the role played by the Sikh community in the freedom struggle[R57] . My respected colleague[bru58] , Shri Dhindsa, in his speech, described and gave instances of roles played by the Sikh community in the Independence struggle. I would also like to mention a few of them. About 87 per cent of the people who were hanged in the Independence struggle were from the Sikh community and 98 per cent of the people who were sent by the British to Kala Pani were from the Sikh community. The Kama Gala Maru Chapter which is famous in the freedom struggle features only the Sikhs and the Kooka Movement and Jaito Ka Morcha, as mentioned before, involved Sikhs. You are all aware that thousands of Punjabis were killed in the Jalianwala Bagh massacre. But even after 21 years of the anti-Sikh riots, the Sikh community feels let down. The Government of India has not given us justice to them. I think this is the only example in the whole country as well as the world where the ruling Government at that time was responsible for the murder of thousands of innocent people. I would like to discuss the Report of the Nanavati Commission a little bit first. MR. SPEAKER: No, no. You have got only two more minutes. Out of five minutes, you have already spoken for three minutes. SHRI SUKHBIR SINGH BADAL : Sir, you have told me that I can speak. Sir, the whole debate is about the Sikh community. MR. SPEAKER: Shri Dhindsa has spoken exhaustively from your party.
श्री सुखदेव सिंह ढींडसा : महोदय, इनको थोड़ा और समय दे दीजिए।
अध्यक्ष महोदय : ठीक है, हम तो दे ही रहे हैं। आपकी पार्टी के लिए निर्धारित समय नहीं बचा है, फिर भी दे रहे हैं। SHRI SUKHBIR SINGH BADAL : The Congress Party cannot deny it. I would like the Congress leadership sitting across the table to reply. Whose Government was there in 1984? It was the Congress Prime Minister who was heading the Government. Whose Governor was there at that time? He was appointed by the Congress party. Under whose control the Army was functioning? It was under the Congress control. Under whose control was the police? It was the Congress Party’s control. Then who should be responsible for it? If you go through the Report of the Nanavati Commission, you will find that it clearly says that the Congress was behind this incident. Justice Nanavati Report clearly says: “From the morning of 1st November, 1984, the nature and intensity of the attack changed. After about 10 a.m. on that day, slogans like ‘खून का बदला खून से लेंगे‘ were raised by the mob.” He also says that there is a concrete evidence to show that Delhi Transport Corporation buses were used. Under whole rule were the DTC buses operating? It was the Congress rule then. So, the Congress Government was there. People were brought in DTC buses, they were given kerosene, petrol and explosives. They were responsible for the attacks. They were directed to the houses of the Sikhs and shops of the Sikhs. They were planning and telling that the Sikh community has to be murdered. Then you say that the Congress is not responsible! It says that there is a concrete evidence that the attacks were made in a systematic manner and without much fear of the police. Under whose control was the police operating? It was the Congress Party’s control. It says that the people who were doing it had no fear of the police because the Congress Party had instructed the police not to catch hold of anybody and they can kill as many innocent people as they can. The Report of the Nanavati Commission says that there are a large number of affidavits which indicate the local Congress (I) leaders had incited or helped the mob in the attacks. What else do you want to know? It also says that there is enough material in record to show that at many places the police had taken away arms and other articles from the Sikh community so that they will not be able to protect themselves. Then you say that the Congress is not responsible for it! The Report also says that there was lack of fear of the police forces which was also one of the causes for all that had happened. The Report also says that the slogans which were raised during the riots also indicate that the mob were of Congress (I) workers or sympathizers. MR. SPEAKER: Please conclude. I have given you time.
SHRI SUKHBIR SINGH BADAL : Sir, it is not … (Interruptions) You cannot do this. This you cannot do.… (Interruptions) MR. SPEAKER: What cannot be done? What can I not do?
… (Interruptions)
SHRI SUKHBIR SINGH BADAL : Our community has suffered the maximum.
MR. SPEAKER: That does not mean that you do not follow the rules of the House.
… (Interruptions)
SHRI SUKHBIR SINGH BADAL : You are not allowing us to even express our views. This is shameful, Sir. MR. SPEAKER: Shameful, for whom? Shameful, for whom? Sit down young man. “Shameful for whom?”, you have to answer that. SHRI SUKHBIR SINGH BADAL : Give us time at least to express our sentiments.… (Interruptions) MR. SPEAKER: I have given you time. Your time has been exceeded three times. I have given time to everybody. He had five minutes and I had given fifteen minutes. I follow your feeling. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: Do not use expressions like that. You will be in trouble. Do not use expressions like that. You must know how to behave in the House. You are a Member of Parliament. Saying ‘shameful’! You should know how to behave. … (Interruptions)
SHRI KINJARAPU YERRANNAIDU (SRIKAKULAM): Please allot 2-3 minutes to him.
MR. SPEAKER: I am giving him 2-3 minutes. But, this is not the way to behave.
SHRI SUKHBIR SINGH BADAL : This is the sentimental issue, Sir.
MR. SPEAKER: Sentimental issue I know. But you have to conduct yourself according to the rules. I will not give you any time if you argue with me. SHRI SUKHBIR SINGH BADAL : Sir, Justice Nanavati Commission clearly says… (Interruptions) MR. SPEAKER: Tell them to behave also.
SHRI SUKHBIR SINGH BADAL : Sorry, Sir. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: You are a leader of the party. He has not yet said sorry.
SHRI SUKHBIR SINGH BADAL : I would like to apologize.
MR. SPEAKER: Okay.
SHRI SUKHBIR SINGH BADAL : But I would request you to give some time. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: So long as I am here, I will not allow this indiscipline.
SHRI SUKHBIR SINGH BADAL : I like to apologize. But I would request you to give me some more time. MR. SPEAKER: Please go on. There are ways of putting things. You could have requested me for some time instead of showing your red eyes. SHRI SUKHBIR SINGH BADAL : I like to apologize once again.
MR. SPEAKER: Behave in a manner. Impertinence will not be allowed here.
… (Interruptions)
SHRI SUKHBIR SINGH BADAL : Sir, if you go through the report, one thing is very clear. There is clear evidence and the Nanavati Commission says that the Commission considers it safe to record a finding that there is credible evidence against Shri Jagdish Tytler, Shri Dharam Das Shastri, Shri H.K.L. Bhagat and Shri Sajjan Kumar. What else do you need? Sir, so many Commissions have taken place. I would like to give you a suggestion. If you really want to know who killed thousands of Sikhs, I think, why do you not ask the Sikh community? I have personally said that you just have to ask three questions. The first questions is: “Ask any Sikh –whether he is 10 years old, or 20 years old or 50 years old or 80 years old – who was responsible for 1984 riots?” Every Sikh will say, it is the Congress Party. You ask the second question: “Who instigated the mob in 1984?” EverySikh –whether he is 10 years old or 80 years old, will say it is H.K.L. Bhagat, Sajjan Kumar, Jagdish Tytler. You ask the third question: “Why did they do that? The answer will come: “They wanted to please their boss.” … * … (Interruptions) SHRI KIRIP CHALIHA (GUWAHATI): This is objectionable. This is too much.
(Interruptions) … * MR. SPEAKER: Not to be recorded.
(Interruptions) … * MR. SPEAKER: I have expunged it.
… (Interruptions)
* Not Recorded.
SHRI SUKHBIR SINGH BADAL : Therefore, Sir, I personally feel we have to rise above party politics. It is a matter of national interest. I appeal to all Members of Parliament, we should stand above party lines and give the Sikh community justice. If you are really sincere about giving justice, treat these persons like you treat the terrorist who commits crime in Jammu & Kashmir, like terrorists who committed crime in the Parliament House, like terrorists who committed crime in New York, London or around the world. They killed innocent people. Even Tytler, Sajjan Kumar, H.K.L. Bhagat are responsible for killing thousands of innocent Sikhs. They should be treated in the same way like you treat terrorists. MR. SPEAKER: Thank you for your cooperation.
Shri Gurjeet Singh Rana.
… (Interruptions)
SHRI SUKHBIR SINGH BADAL : Sir, this is the last point.
MR. SPEAKER: Okay, last time.
SHRI SUKHBIR SINGH BADAL : This is the last one. Let me speak, Sir. At the end, I will request all Congress Members that if they cannot take a stand, at least Members of the Congress Party – those from the Sikh community, maybe he is the Prime Minister, maybe he is the Chief Minister of Punjab, maybe the Members of Parliament sitting there or maybe people sitting around– I request them to use their influence and get us justice[mks59] . If you cannot do that, have self-respect and leave this communal party.
SHRI GURJEET SINGH RANA (JALANDHAR): Do not teach us self-respect.
SHRI SACHIN PILOT (DAUSA): Sir, he has taken the name. This is not right.
MR. SPEAKER: It has already been expunged. You do not bother.
… (Interruptions)
SHRI SUKHBIR SINGH BADAL : This is a poster which everyone was talking about.… (Interruptions) MR. SPEAKER: I have called up on him to speak. You have already finished your speech. Sorry. Do not show that. It is against the rules. Shri Gurjeet Singh Rana will speak now. SHRI GURJEET SINGH RANA : Sir, shall I come nearer?
MR. SPEAKER: You want to come nearer. Is he soft spoken? Very well, at your request.
SHRI GURJEET SINGH RANA (JALANDHAR): Sir, thank you very much for giving me opportunity to speak on this important issue regarding the report of Justice Nanavati Commission. 15.56 hrs. (Mr. Deputy-Speaker in the Chair ) First of all, I would request the other Members of Parliament, who have spoken before me, that they do not have to teach us and we do not have to learn from them what are our duties and I will take care of everything. I will request you to kindly listen to me. … (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing is to be recorded.
(Interruptions) … * ** SHRI GURJEET SINGH RANA : Mr. Deputy-Speaker, Sir, they are among those who have taken the oath of 'marjeewras'. They did not die. Let Sardar Dhindsa say that Rana Gurjeet Singh is telling untruth. Who are they to ask me to take the oath of Guru Granth Sahib?
MR. DEPUTY-SPEAKER: Rana Ji, you should address the Chair and not individually. You should not fight each other.
SHRI GURJEET SINGH RANA : I think many people do not know as to what is ‘marjeewra’ ? Let me explain it. There was a time when couple of Akali leaders went to Harmander Saheb and they swore in front of the GuruGranth Sahib that we will die for this cause.… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing is being recorded.
(Interruptions) … * SHRI GURJEET SINGH RANA : Sir, thank you very much for giving me opportunity to speak on this issue. It was very unfortunate that the Sikhs underwent massacre. It was very unfortunate. Being a Sikh I feel that it is a sorry state of affairs that everyone is playing on this issue, scoring marks which is very * Not Recorded.
** Translation of the speech originally delivered in Punjabi.
unfortunate for me. It is rightly said by Shri Sukhbir that I should say as to what is the truth and you should listen to me as to what is the truth and then react. Do not react now. Mr. Dhindsa gave his views in a very nice way. I am impressed. This is an issue of great concern. As far as Nanavati Report is concerned, it has been given. We have an able Congress President, Mrs. Sonia Gandhi; hon. Prime Minister, Sardar Manmohan Singh Ji and I am sure they will do justice and they have been doing justice in the past also. We are talking about 2700 Sikhs who died in those riots in Delhi[bts60] .
16.00 hrs. MR. DEPUTY-SPEAKER: No running commentary please.
SHRI GURJEET SINGH RANA : Sir, more than 2700 Sikhs were killed in the 1984 riots. It is 21 years old story. It is a very sorry state of affairs. It took 21 years to deliver the Report. The Akalis are our worthy friends. Let me ask them, through you, Sir, a couple of things. They were in power for more than six years in the Centre and they were in power for five years in Punjab from 1997 to 2002. What did they do for those riot victims?… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing will go on record, except the speech of Shri Gurjeet Singh Rana.
(Interruptions) …* श्री गुरजीत सिंह राणा : महोदय, पांच साल अकाली दल का राज रहा, सात साल से ज्यादा इनका और इनके सहयोगियों का राज इस सदन में और दिल्ली में रहा। इनको पांच साल से ज्यादा रिपोर्ट को तैयार करने का समय मिला और समय कई बार बढ़ाया गया। मेरे खयाल में श्री गुरुदास जी बहुत बढि़या बोले। उन्होंने जो बिंदु उठाए मैं समझता हूं बहुत वेलिड बिंदु थे। मेरे खयाल से सिक्खों के मसले पर प्वायंट सकोर करने की बात न कहें। हम यह तय करें कि इनको क्या देना है। प्रधानमंत्री जी यहां बैठे हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि वे उन्हें न्याय देंगे।…( व्यवधान) सिखों ने देख लिया, आप सभी मेरी बात को शांति से सुनिए। अब मैं बोल रहा हूं, उनको देखने दीजिए। आप सिर्फ सुनने का काम कीजिए, अगर आपके अंदर माद्दा हो, नहीं है तो उठ जाइए, मैं चुप हो जाऊंगा। मैं फिर बोलूंगा इससे क्या फायदा होगा।
* Not recorded.
MR. DEPUTY-SPEAKER: Please address the Chair.
… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: No running commentary please.
श्री गुरजीत सिंह राणा महोदय, इक्कीस साल हो गए, कुछ नहीं हुआ। अब रिपोर्ट आ गई है और मुझे पूर्ण विश्वास है कि प्रधानमंत्री जी इस दिशा में सही निर्णय लेंगे, जिससे कि न्याय और इसांफ होगा। मुझे पूर्ण आशा है, जहां तक रिहैबलिटेशन की बात है…( व्यवधान) जहां तक रिहैबलिटेशन की बात करते हैं …( व्यवधान) पांच साल के राज में इन्होंने दंगा पीड़ितों के लिए पंजाब में इन्होंने कोई राहत का काम नहीं किया। …( व्यवधान) * MR. DEPUTY-SPEAKER: Whatever he has stated should be expunged[c61] .
**SHRI GURJEET SINGH RANA : Sir, they ruled for 5 years. If they have taken even a single step to help the riot victims, they should let us know. To rehabilitate the victims, our Government and our Prime Minister took steps. It is our responsibility that those Sikhs who have suffered during the riots should be rehabilitated.
MR. DEPUTY-SPEAKER: Please sit down.
… (Interruptions)
** SHRI GURJEET SINGH RANA: This is a serious issue. Congress is concerned. But there are several families that have not been rehabilitated. Widows have not got help or plot. People have bungled. Help has not reached the needy. DDA flats should be granted to widows so that they are able to sustain themselves. Identity cards should be made. Health facilities should be provided to them. If the victims belong to Delhi, free health care in hospitals like AIIMS and RML should be provided to them.
उपाध्यक्ष महोदय: आपकी बात रिकॉर्ड में नहीं जा रही है।
...( व्यवधान)...*** *Expunged as ordered by the Chair.
** Translation of the speech originally delivered in Punjabi ***Not recorded उपाध्यक्ष महोदय: आप भी बैठ जाएं।
…( व्यवधान)
SHRI GURJEET SINGH RANA: Identity cards should be provided to them. and free travelling facility in the Railways should be provided to them. Sir, today if they are so concerned about Punjab and Punjabis, we should realise that all this started in 1978 when there was quarrel between Nirankaris and Akalis. Then, Bhindranwale was supported and installed which resulted in Blue Star Operation in 1984.
MR. DEPUTY-SPEAKER: This is not to be recorded as the person is not in the House.
(Interruptions) …* MR. DEPUTY-SPEAKER: This is not going on records, please sit down.
(Interruptions) … * SHRI GURJEET SINGH RANA: Mr Deputy Speaker Sir, we too are very concerned. But sir, the Sikhs in Delhi brought us back to power. And even in Punjab, where they claim to be the custodian of Sikhs and seek votes in the name of religion, people brought back a Congress Government in power. Congress has won various bye-elections also.
Sir, I have to make just one more point. Today, if this House is greatly concerned about Punjab, Punjabis and riot victims. We must strike at the root cause of the problem. In Punjab, forty lakh young men are unemployed. Punjab should get a package. They should request the Prime Minister to do so. Only then we will agree that they are really concerned about Punjab and Punjabis.
You are only trying to derive political mileage out of this, Sukhbir Singh Badal. The way Dhindsa Sahib has pleaded the case, can something come out of it? By creating a din and disrupting me, you cannot become Chief Minister.
* Not Recorded.
In the end, I have total faith in Smt. Sonia Gandhi and the Prime Minister that they will provide justice to Sikhs.
MR. DEPUTY-SPEAKER: Please sit down.
श्री अविनाश राय खन्ना (होशियारपुर) : माननीय उपाध्यक्ष जी, जब भी किसी वक्ता को हर इश्यू पर बोलने का मौका मिलता है तो अपने आप में खुशी महसूस करता है कि मुझे बोलने का मौका मिला। लेकिन यह एक ऐसा इश्यू है जिस पर खुशी से नहीं, दिल के दर्द और जुबान पर जो शब्द हैं, उनको दर्द की आवाज से बोला जा रहा है। आज आप कमेंट्री कर रहे हैं लेकिन जिन लोगों ने १९८४ के दंगों को भुगता है, उनसे जाकर पूछिए कि उनका दर्द क्या है। महोदय, आप जानते हैं कि गुरु ग्रंथ साहिब की इम्पार्टेंस सारे देशवासियों के लिए क्या है। गुरु तेग बहादुर जी, उनके बाद श्री गुरु गांबिंद सिंह जी और गुरु गोबिंद सिंह जी के बाद श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को अपना गुरु माना है। जो लोग गुरुद्वारे जाते हैं वे गुरु ग्रंथ साहिब जी को अपना गुरु मानकर उनको नमस्कार करते हैं लेकिन इन लोगों ने गुरु ग्रंथ साहिब को भी नहीं बख्शा। मेरे पास रिपोर्ट में यह एविडेंस है:
“Niranjan Singh, resident of Block B has stated in his affidavit that at about 10 a.m. to 11 a.m. on the same day, Shri Sajjan Kumar, who was a local Congress MP, and his PA Hardwari Lal along with his two sons, one Babulal and a hotelwala, came to G Block, burnt the Guru Granth Sabib and later on the Gurudwara.” क्या अब भी जितने लोग गुरु ग्रंथ साहिब जी को मानने वाले हैं, क्या यह कहेंगे कि जो १९८४ में हुआ ठीक हुआ? इनडॉयरेक्टली रूप से आप कहते हैं कि गलत हुआ लेकिन उसके लिए जिम्मेदार कौन है यह इस एफिडेविट में साफ लिखा है। अभी यहां पर बात आई कि एफआईआर ठीक से दर्ज नहीं हुई, अकाली दल को चाहिए था लीगल एक्सपट्र्स को साथ लेकर एफआईआर दर्ज करवाते। मैंने यहां गिना है कि कितने लोगों ने अपने एफिडेविट दिए हैं। अगर नानावती कमीशन को देखा जाए तो २५५७ लोगों ने अपने एफिडेविट दिए हैं, अगर मिश्रा कमीशन को देखा जाए तो करीब ६७० के करीब एफिडेविट दिए हैं और जैन बेनर्जी कमीशन को देखें तो ४१५ एफिडेविट दिए हैं। क्या इससे भी तसल्ली नहीं हुई? सबने इंडिक्ट किया है कि दंगा करने वाले कौन थे। इतना ही नहीं जो बातें इस रिपोर्ट में आई हैं कि लोगों ने कहा है, वह है:
“Moti Singh of B Block has stated that on 1/11/84, at about 8.30 a.m., Shri Sajjan Kumar had told the mob, which had gathered near B Block, to kill the sons of snake.” जिन सिखों ने शहादत दी, जो सिख कालापानी गए और आज जो सिख हिन्दुस्तान में ही नहीं बल्कि दुनिया भर में एमपी भी हैं और अच्छी पोस्ट्स पर भी हैं उनको कहा गया है ‘sons of snake’ आगे जो बात कही गई है वह सुनने वाली है:
“He would reward them because they have murdered their Prime Minister. Shri Sajjan Kumar had also told the mob that whosoever killed Roshan Singh or Bagh Singh would be given Rs. 5,000 and those who killed other Sikhs would be given Rs. 1,000. ” सिखों ने क्या किया था जो आप लोगों ने ईनाम रखा कि अगर दो सिखों को मारोगे तो पांच हजार और अगर एक-एक सिख को मारोगे तो एक हजार, यह सब किसलिए? जो बातें हुईं वे बहुत दुखदायी हैं। अभी सिब्बल साहब, श्री जगदीश टाइटलर के बारे में कह रहे थे, मैं उनका ध्यान उस व्यक्ति की जो स्टेटमेंट है, उसकी तरफ दिलाना चाहता हूं[p62] । उसने कहीं नहीं कहा कि उसे पंजाबी आती है। उसने सिर्फ यही कहा कि उसे अंग्रेजी नहीं आती है। उसे यही कहा गया कि अगर पंजाबी आती है, अंग्रेजी नहीं आती तो एफिडेविट गलत दिया है। लेकिन इतना जुर्म उसने यह जरूर किया कि उसने एफिडेविट दिया कि उसके साथ दगा की गई है, जुल्म किया गया है लेकिन सरकार ने क्या किया? 16.15 hrs. (Shri Devendra Prasad Yadav in the Chair) सभापति महोदय, जिस-जिस व्यक्ति ने एफिडेविट दिया, उसे बुला-बुलाकर उस पर प्रैशर डालकरदुबारा स्टेटमेंट दिलाने की कोशिश की गई लेकिन जब वह कमीशन के सामने पेश हुआ तो उसे अपनी बात लिखाई और उसका नाम लिया। अभी बंसल जी ने बताया कि पूरी एविडेंस नहीं दी लेकिन कांग्रेस सरकार ने दिल्ली में अभी फैसला लिया है कि कोई भी एस.एम.एस के जरिये एफ.आई.आर. दर्ज हो जायेगी। लेकिन अफसोस की बात है कि जिन लोगों ने एफिडेविट दिया, उन लोगों की एफ.आई.आर. दर्ज नहीं की गई। आज अफसोस के साथ कहना पड़ता है कि जिस ट्रक पर पंजाबी में कुछ लिखा हुआ होता था, उसे जला दिया जाता था।
सभापति महोदय, मैं एक महिला की व्यथा को बताना चाहता हूं। उसने कहा क उसके पति को उसके सामने ही घर से निकालकर उसके ऊपर जलता हुआ टायर डाल दिया गया। इतना ही नहीं, जब पत्नी अपने पति को जलते हुये टायर से बचाने के लिये गई तो उसके साथ भी बुरा सुलूक किया गया और उसके पति को ट्रक में डाल दिया गया। इससे बड़ी अमानवीय घटना और क्या हो सकती है? मेरे गांव की एक लड़की दिल्ली में एक सिख परिवार में ब्याही गई है। राणा गुरजीत सिंह जी जानते हैं कि एक सिख के लिये उसके केश कितने महत्व के होते हैं। वह अपनी जान दे देगा लेकिन अपने केश नहीं कटवायेगा। लेकिन उस औरत ने बताया क जिस दिन दंगे हुये, उसका पति बाहर गया हुआ था। महिला ने अपने पति को फोन किया कि यहां मत आइये क्योंकि यहां दंगे हो गये हैं। उस व्यक्ति ने पगड़ी बांधी हुई थी, दाड़ी रखी हुई थी लेकिन दिल्ली में आने के लिए उसे अपनी दाड़ी, बाल कटवाने पड़े। सभापति महोदय, सिखों के साथ इतना बड़ा अन्याय हुआ। मैं सदन का ज्यादा समय नहीं लेना चाहता लेकिन मैं आपके माध्यम से सरकार से निवेदन करना चाहूंगा क नानावती रिपोर्ट में जिन-जिन लोगों के नाम आये हैं, जिनके ऊपर शंका की सुई इंगित कर रही है उन सब को जेल के अंदर होना चाहिये। इसके अलावा ATR में श्री धर्म दास शास्त्री का नाम आया है। उसके खिलाफ भी सबूत हैं कि दंगों में उसका हाथ था लेकिन पुलिस ने उसके खिलाफ चालान तक पेश नहीं किया। इससे बड़ा मजाक और क्या हो सकता है। सिखों को राहत तभी मिल सकती है, यदि एफिडेविट में जिन लोगों की ओर शंका की उंगली उठायी है, वे जेल के अंदर होने चाहिये। बाकी बातें बाद में हो सकती हैं।
सभापति महोदय : श्री बसुदेव आचार्य जी, आप पांच मिनट के अंदर अपनी बात समाप्त कीजिये।
श्री बसुदेव आचार्य (बांकुरा) :मैं पांच मिनट में अपनी बात खत्म करने की कोशिश करूंगा। सभापति जी, २१ साल पहले सिखों के खिलाफ हुये नर-संहार पर हम आज सदन में चर्चा कर रहे हैं। १९८४ में सिखों के खिलाफ जो दंगे हुये,उन्हें हम नर-संहार कह सकते हैं। इन २१ सालों में इन दंगों की जांच के लिये ९ कमीशन बनाये गये और जिनकी रिपोर्ट आई लेकिन आज तक उन लोगों को न्याय नहीं मिला cè[RB63] ।
नानावती कमीशन की जो इंक्वायरी रिपोर्ट आई है, इस रिपोर्ट में जो टम्र्स ऑफ रेफरेन्स है, जिसका जिक्र पहले भी हुआ है, उस टम्र्स ऑफ रेफरेन्स के मुताबिक उसकी सिफारिशें नहीं आईं। जहां तक टम्र्स ऑफ रेफरेन्स में था -
“To inquire into the causes and course of the criminal violence and riots targeting members of the Sikh community which took place in the National Capital Territory of Delhi and other parts of the country on 31st October, 1984 and thereafter. ” हमने कमीशन की रिपोर्ट पूरी पढ़ी, लेकिन इसकी सिफारिशें जैसी आनी चाहिए थीं, वैसी नहीं आईं। इसमें जो भी रिकमेंडेशंस हैं, ए.टी.आर. में उसके क्रियान्वयन में भी वीकनैस है। इसलिए बार-बार हम लोग इस सवाल को उठा रहे हैं कि इस घटना के लिए जो भी जिम्मेदार हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। इसकी रिकमैंडेशंस में कंट्राडिक्शन है। लेकिन कंट्राडिक्शन को लेकर अगर एक्शन लेने में कोई हेजिटेशन है तो वह नहीं होनी चाहिए। यहां यह बात भी आई, जिसे सुनकर हमें आश्चर्य हुआ, जब जॉर्ज साहब ने कहा कि वर्ष १९८४ के दंगे और २००२ में गुजरात में जो दंगे हुए थे, वे कम्पेयर नहीं हो सकते। यह सुनकर हमें बड़ा आश्चर्य हुआ। उन्होंने बताया कि १९८४ वाले दंगे प्रोग्राम थे औऱ २००२ वाले दंगे प्रोग्राम नहीं थे। उन्होंने बताया कि एक आर्गेनाइज्ड था और दूसरा आर्गेनाइज्ड नहीं था। हम जानना चाहते हैं कि गुजरात में वर्ष २००२ में जो घटना घटी Was it not a pogrom? क्या वह ऑर्गेनाइज्ड नहीं था, अगर वह ऑर्गेनाइज्ड नहीं था तो हम जानना चाहते हैं कि गुजरात के दंगे कैसे इतने दिन चले और आर्मी भेजी गई। Was the Army utilised or not? एडीशनल डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस, श्री पी.कुमार ने जो डायरी में लिखा है, उससे पता चलता है The Army was not utilised. The police force was not utilised. जो दंगाई थे, उन्हें प्रोटैक्शन देने के लिए वहां पर खुद मुख्य मंत्री के यहां से इंस्ट्रक्शंस आई थीं। क्या वे दंगे पोगरमम नहीं थे, आर्गेनाइज्ड नहीं थे। वहां वोटर लिस्ट लेकर माइनोरिटी कम्युनिटी के घरों, दुकानों को आइडेन्टिफाई किया गया और उन्हें अटैक किया गया। क्या वे पोगराम नहीं थे। यह स्पॉन्टेनियस था, वर्ष १९८४ का दंगा या नरसंहार, उसे हम जो भी कहें, वह पोगराम था, उन दोनों में कोई अंतर नहीं है।…( व्यवधान)
16.24 hrs. (Mr. Speaker in the Chair ) उन दोनों में कोई अंतर नहीं है। खुद सुप्रीम कोर्ट ने वहां के मुख्य मंत्री के खिलाफ बोला और उनकी नीरो के साथ तुलना की। The Chief Minister of Gujarat was compared with Nero. He was called modern Nero. जब आग लगाई जा रही थी तो उन्होंने दूसरी तरफ अपना मुंह किया हुआ था। आप उसे जस्टिफाई कर रहे हैं, जबकि दोनों की निंदा करनी चाहिए[R64] ।
(s3/1625/hcb/tps[h65] ) १९८४ में जो दंगे हुए, हमारी पार्टी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी हमेशा कंसिसटैन्ट रही कि जब कभी कहीं पर दंगे होते हैं या इस तरह की घटना घटती है, तो हम उसकी निन्दा करते हैं। सिर्फ निन्दा ही नहीं, बल्कि हम उसके खिलाफ लड़ते भी हैं। जब ६ दिसंबर, १९९२ को बाबरी मस्जिद को गिराया गया, उसके बाद जो दंगे हुए,सन् १९९३ में मुम्बई शहर में जो दंगे हुए, हज़ारों का कत्लेआम हुआ, क्या वह पोग्रॉम नहीं था? शिवसेना के सदस्य अभी यहां पर नहीं हैं। उसके बाद वहां जो कमीशन बैठा, उसकी रिपोर्ट के बाद प्रदेश के मुख्य मंत्री का क्या कहना था, वे शायद भूल गए हैं। इसलिए हम जार्ज साहब को बता रहे हैं जब उन्होंने कहा कि गुजरात तो आमने सामने था। सन् २००० में जो कत्लेआम हुआ, बलात्कार हुआ, यह भी आमने सामने हुआ और एकतरफा हुआ। यह भी एकतरफा, वह भी एकतरफा हुआ, मगर एक को जस्टिफाइ कर रहे हैं और दूसरे को कंडैम कर रहे हैं। ये डबल स्टैन्डर्ड हैं। हमने सुझाव दिया है कि आज जो रिकमंडेशन आई हैं, उन पर इंप्लीमैंटेशन होना चाहिए और हमने यह बताया है कि नानावती कमीशन ने जिनके बारे में बताया है कि उनके खिलाफ प्रॉसीक्यूशन होना चाहिए, उनके बारे में हमने साफ-साफ बता दिया है कि जो अनट्रेस्ड हैं, इनको रीओपन करना चाहिए, यह भी हमारी मांग है। इसमें जो कहा गया है कि डैथ हो गई है, कार्रवाई नहीं हो सकती या रिटायर हो गए हैं, सर्विस में नहीं हैं, हम कहना चाहते हैं कि उनके खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है। जो अनाथ हो गए हैं, उनके इंप्लॉयमैंट और कंपनसेशन के बारे में जो सिफारिश की गई है, वह पूरी होनी चाहिए। हम सबको यह सबक लेना चाहिए क्योंकि इसमें कहा गया है कि यह भी जांच करनी है कि जो कमीशन की रिपोर्ट के इंट्रोडक्शन में बोला है - ‘अन्य संगठन,’ दूसरे कौन से संगठन इसमें थे? …( व्यवधान) गुजरात में गरीब आदिवासियों को इस लूट के काम में लगाया गया था। यहां पर भी झुग्गी-झोपड़ी में जो गरीब आबादी है, उनको इस काम में लगाया गया था। इसीलिए कौन दूसरे संगठन इसके साथ हैं, इसकी भी जांच होनी चाहिए, इसका भी पता चलना चाहिए। इसके लिए जो जिम्मेदार हैं, उनके खिलाफ उचित कार्रवाई होनी चाहिए, यही हमारी माग है।
MR. SPEAKER: Now, hon. Prime Minister.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Just a minute please.
श्री महावीर भगोरा (सलूम्बर) : यहां आदिवासियों का नाम लिया गया है, उन्हें रिकार्ड से हटाया जाए।
डॉ. तुषार अमर सिंह चौधरी (मांडवी) : नहीं, वह बात सही कही गई है।
अध्यक्ष महोदय : आप बैठिये। आप अकेले आदिवासियों के प्रतनधि नहीं हैं।
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Show some respect to the Prime Minister.
… (Interruptions[t66] ) THE PRIME MINISTER (DR. MANMOHAN SINGH): Mr. Speaker, Sir, I strayed into politics by an accident but I have been a lifelong student of politics and I have always believed that politics is a purposeful instrument of social, political and economic change. Politics which departs from that path and becomes a servant of narrow, parochial, petty things, loses its wider societal role and moral relevance.
We are today debating a great national tragedy, a great human tragedy. This is not an issue which should divide this House. This is not an issue where partisan politics should have an upper hand in analysing those traumatic events of 1984: the death of a Prime Minister, a revered and beloved leader of our country in her own courtyards, killed by two bodyguards; and this whole mass tragedy that befell Delhi and other cities.
Our collective effort has to be to find pathways where we ensure that such tragedies whether in Delhi or in Gujarat never again take place in our country. Therefore, I am not standing before this House to score any partisan points. What happened in 1984 was a grim national tragedy and it brought us all to shame. Both the assassination of Shrimati Indira Gandhi and the subsequent events leading to the anti-Sikh riots and all those ghastly happenings should have never happened. They are blots on our national conscience. On this, there is no difference of opinion on any side. But the question arises: “Where do we go from here?” Twenty-one years have passed; more than one political party has been in power; and yet the feeling persists that somehow the truth has not come out and justice has not prevailed. Therefore, it is our collective responsibility to find ways and means where we could accelerate the processes which would give our people a feeling that they do obtain justice in this massive State of India. I wish the debate had taken that tone. But the debate has been on narrow, partisan lines and I respectfully say to the House that that does not serve its purpose.
The Sikhs are a very proud community. They have a glorious past. Our Gurus have bequeathed to us a living philosophy which is more relevant today than it ever was. That the Sikhs have made a phenomenal contribution to our freedom struggle is also known. Anybody who goes to Port Blair would find how many people who went to prison or who were sent to the gallows happened to be Sikhs.
Came the partition, the Sikh community suffered the most. The Canal colonies of erstwhile Punjab which were blooming with prosperity were the creations of the Sikh peasants[e67] . However, they were all lost to the Sikh community in partition. Many of them migrated to the Eastern part of the Punjab. Lakhs and lakhs of people became homeless. I have seen people seeing their daughters, their children being killed before their very eyes in those ghastly days of partition. That trauma still haunts me. It is to the credit of the Sikh community that it did not allow that tragedy to depress them.
Then came the Independence of India and there arose a new Punjab on the ashes of the old. When the history of that period is written, the making of the new Punjab, the role of two individuals will shine in the annals of history. They were Jawaharlal Nehru and Sardar Pratap Singh Kairon. What Punjab is today is largely the creation of these two great men of our country. I do not want to score debating points against my friends in the Akali Dal and I say to them with all respect, while they were all agitating to divide Punjab, the Punjab Government, inspired by Jawaharlal Nehru and with people like Sardar Pratap Singh Kairon at their help, wrote a glorious chapter in the history of Punjab. The Green Revolution is the creation of Pandit Jawarharlal Nehru, late Shrimati Indira Gandhi and Sardar Pratap Singh Kairon in Punjab. If we are trying to drive a wedge between the Sikh community and the Congress Party, we must never forget that fact.
Then came the events of the 1980s. Who is to be blamed and who is not to be blamed, I am not here to apportion blame. But for a time it appeared that Punjab had fallen on evil days. Wherever I used to go, people used to tell me पंजाब नूं नजर लग गई। We saw that period when serious attempts were made to divert the attention of this brave community which has contributed so much to the development of our country, which even to this day, defends many of our national frontiers. People, many of them outside our country, tried to drive a wedge between the Sikh community and the mainstream of national life. The terrorist elements, aided and abetted by forces from abroad, sought to disrupt our unity, our polity, our society. Whatever we say or do in this House or outside I think, it would be a sin against our nationhood if we try to sow the seeds of discontent among the youth of Punjab. Punjab is a border State of our Union. The Sikhs have been its valiant protectors through centuries[R68] .
If you try to create a wedge between the Sikh community and the national mainstream, my worry is – maybe it is not your intention – that you are creating a situation where that ugly phase when terrorism held sway in Punjab might once again come back. That will be no service to Punjab. That would be no service to India or our nation. I have seen those ghastly days. Several young Sikh men used to come to me and say : ‘Uncle, I want to go abroad, I want to study abroad; but I do not get a visa’. The image of the Sikh youth was transformed into the image of terrorists. I have myself experienced in that ugly phase of Punjab and our history where Sikhs were suspect everywhere. Wherever they went across the border post of one country to another, there was speculation that ‘Attention, terrorists are entering our country’.
Well, it is a tribute to this community and it is also a tribute to our national mainstream that that sad chapter when terrorism held sway over the minds of the young people is a thing of the past. But we must not forget that our borders are valiantly guarded by our soldiers. But there is such a thing as the struggle for the minds of our people and if I say so, if voices from this House were to create a feeling of disaffection once again in this age of instant communication, what you say here, what you say in the media, reaches outside - I shudder to think what will young people in Punjab see when they hear our Members of Parliament talk the way we talked. They will once again feel insecure about their future. That is not good for Punjab. That is not good for the Sikh community. That is not good for India.
Therefore, in the name of national unity, I appeal to all the hon. Members not to say or not to do things which will widen the gulf between the Sikh community and the rest of the country. It is a tribute to the community that it has come out of that trauma. Punjab once again is on the move. Once again the Central Government, the State Government and the people of Punjab will work together to create a bright new future of the youth of the State. But we all have an obligation to contribute to that process. Nothing should be done which weakens the faith of the Sikh youth that their future lies in strengthening the nationhood.
Every corner of this country of ours is blessed with the memory of our great Gurus. You go to Ponta Sahib, you go to Nanded Sahib, you go to Assam, every inch of this land has been made sacred by having been touched by the great Gurus. They taught us to respect all religions. They taught us practical secularism at a time when religious bigotry and persecution were the order of the day.
So, my request to our friends from the Shiromani Akali Dal is, by all means criticise the Congress Party. Competitive politics has a role in any democracy. But please do not say things which will drive a permanent wedge between the valiant Sikh community and the national mainstream[krr69] .
Sir, I said, we all have been searching for truth, to find out what happened in 1984 events. Eight Commissions have looked at the situation. We were still not satisfied. A ninth Commission was appointed. The circumstances under which it was appointed have already been explained by my friend Shri Gurudas Dasgupta. We were not a party to the setting up of that Commission. It was set up by the previous Government. Well, we have a Report and there are still people who feel that the whole truth has not come out, but I think one thing is quite clear. This was not a Commission appointed by the Congress Government. It was a Commission appointed by the NDA Government. We had no hands in the choice of who will be heading this Commission of Inquiry. The very fact that this Commission has unambiguously, categorically stated against all the whispering campaign that has been going on for the last 21 years against the top leadership of the Congress Party, they have finally nailed the lie and they have shown that all these canards which have been spread about the involvement of the top leadership of the Congress Party, in those dastardly acts were totally untrue.
We never had any doubts about that. After all, who can forget the relationship of Pandit Jawaharlal Nehru with the Sikh community, who can forget the love and affection that Indira Gandhi bestowed on the Sikhs? I have personally been a recipient of that love and affection. I know how much the late Shri Rajiv Gandhi used to grieve over what had happened, the tragedy that had befallen the Punjab, and how hard he worked to reverse that adverse tide. The first thing that he did on becoming Prime Minister was to pay attention to this Punjab problem and we had the Rajiv-Longowal Accord.
I recall Sardar Balwant Singh, who was at that time the Finance Minister of the Punjab Government - my classmate, my friend of 40 or 50 years - who was later on murdered by the terrorists. He narrated to me a story of how the Accord came about. I think, I should share that with this House. He mentioned to me that even after the broad outline of the agreement had been reached, Sant Harcharan Singh Longowal was uncertain and perplexed. Then, he said 'let me turn to Guru Granth Sahib'. Therefore, the two of them went up, they opened up the page and the message that came on that page was :
" होए इकतर मिल्हु मेरे भाई। डुबीधा दूर कराहु लिव लाई। "
“Come and join together, O my siblings of destiny; dispel your sense of duality and let yourselves be lovingly absorbed in the Lord.” Santji said 'that resolved my doubts'. That is how the Rajiv-Longowal Accord came about[reporter70] .
I appeal to this House that let us put behind this bitterness; let us stop looking at that grim national tragedy through partisan spectacles; let us work together to find new pathways, so that such tragedies will never take place.
Hon. Members have referred to several issues arising out of the Report of the Nanavati Commission. As I said earlier, it was hoped that the various Commissions of Inquiry would be able to establish beyond a shadow of doubt as to who were really to be blamed for the violence and the rioting that followed the assassination of a great Prime Minister that Shrimati Indira Gandhi was. Unfortunately, this has not been the case. Fingers had been pointed at individuals, but seldom has there been a proof beyond a shadow of doubt in the Reports of the Inquiry Commissions. Consequently, the search for truth has to continue. The Justice Nanavati Commission of Inquiry is only the latest attempt in that direction.
I am not going to find fault with it, but as in the case of some of the previous Commissions, doubts still remain and I acknowledge that fact. Most Government officials and police officials who have been examined by the Commission for their role have retired from the Government. Action against some of them was taken then, and subsequently as well. Many have since retired, and it is not possible normally to act against them after such a long gap of 20 years. Nevertheless, our Government will consult the Law Ministry to bring the guilty to book to the maximum extent possible.
Mr. Speaker, Sir, many political leaders were also subjects of examination. Here too, the Commission has clearly stated that :
“There is absolutely no evidence that Shri Rajiv Gandhi or any other high ranking Congress (I) leaders had suggested or organised attacks on the Sikhs.” In the case of some others, it has said that it is probable that they may have some involvement in some of the incidents, and that there is evidence to that effect. The Commission is in itself not certain, however, of the role of these individuals. As the ATR says, Governments cannot act when the Commission itself is uncertain of these issues. … (Interruptions) Please listen to me. … (Interruptions) However, there is something called perception, and there is the sentiment of the House. The Government respects and bows to that sentiment. Therefore, keeping in view the sentiments expressed in the House today, our Government assures the House that wherever the Commission has named any specific individuals as needing further examination or specific cases needing re-opening and re-examination, the Government will take all possible steps to do so within the ambit of law. This is a solemn promise and a solemn commitment to this House. Mr. Speaker, Sir, the most important issue is the need to rehabilitate the families of those affected by that national tragedy. Twenty years after the event, it may be considered late in the day to be saying this. However, if there have been any shortcomings in this regard, it is our solemn assurance that we will make sincere efforts to redress these shortcomings[ak71] . We will try to ensure that widows and children of those who suffered in this tragedy are enabled to lead a life of dignity and self-respect. It will be our honest attempt to wipe away the tears from every suffering eye. Mr. Speaker, Sir, what happened, I say once again, was a national shame, a national and a great human tragedy. I appeal to this House, “Pray do not politicise a human tragedy. Let us march on; let the nation march on.” प्रो. राम गोपाल यादव (सम्भल) : अध्यक्ष महोदय, माननीय प्रधान मंत्री जी ने इस चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए एक आश्वासन सदन को दिया है और सदन के माध्यम से पूरे देश की जनता को दिया है। आज हम सदन में इस पर चर्चा कर रहे हैं। जिस दिन इंदिरा जी की हत्या हुई थी, जो पोलटिकली विपक्ष में थे, हम भी विपक्ष में थे। We were also in tears. लेकिन उसके बाद जो हुआ, वह इतना दुखद था कि जो लोग दिल्ली में थे, उन्होंने दिल्ली में देखा होगा और जो लोग दिल्ली से बाहर थे, उन लोगों को कहीं-कहीं अकेले सिखों को बचाने के लिए बहुत मशक्कत करनी पड़ी, बल-प्रयोग करना पड़ा। इस तरह से लोग सिखों पर हमला कर रहे थे। वह बहुत लंबी बात है, मुझे उसमें नहीं जाना। मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं कि यह एक ऐसी कम्युनिटी है जिसका आजादी की लड़ाई में और आजादी की लड़ाई के बाद चाहे देश की सीमाओं की रक्षा का प्रश्न हो या देश के अंदर कोई और मामला हो, एक शानदार योगदान रहा है। ३१ अक्टूबर, १९८४ को इंदिरा जी की हत्या के बाद जो घटना घटी, उससे यह शानदार कौन डिमोरलाइज हुई, इसमें कोई दो राय नहीं है। पूरे देश को क्या करना है, यह ज्यादा आवश्यक है। 16.58 hrs. (Mr. Deputy speaker in the Chair) इस वक्त हम यह कहें कि यह घटना हुई या वह घटना हुई, उससे कम्पेयर करें तो यह बात बेमानी है। अगर यह बहस चार साल पहले होती तो हम जो दूसरी बात कहते, वह घटती ही नहीं। इसलिए जैसा प्रधान मंत्री जी की बात से, इशारे से लगता है, अगर पांच-दस लोगों के नाम, जिनके बारे में पूरी कम्युनिटी को आशंका है, जिनकी वजह से लोगों को लगता है कि हमें न्याय नहीं मिल रहा है, इतने लोगों की हत्याएं हो गयीं, इतना सब कुछ हो गया, उसके बावजूद कुछ लोगों को दंडित किया जा सकता है, उन्हें दंड न दें तो लोगों के मन में निराशा होती है। जब भी अल्पसंख्यक के मन में निराशा होगी, जब भी अल्पसंख्यक के मन में यह होगा कि हमें न्याय नहीं मिलेगा, तो उसके दुष्परिणाम सामने आयेंगे जिन्हें हम देख रहे हैं और देख चुके हैं।
प्रधान मंत्री जी, मैं ज्यादा बात नहीं करना चाहूंगा। मैं सिर्फ यह कहना चाहूंगा कि देश बड़ा है और इस देश को एक रखने के लिए, लोगों में सद्भाव बनाये रखने के लिए, यशस्वी कौम के मन में विश्वास पैदा करने के लिए अगर दो-चार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करनी पड़े, तो उसमें बिल्कुल पीछे नहीं हटना चाहिए।
इन्हीं बातों के साथ मैं अपनी बात समाप्त करता हूं।
17.00 hrs. SHRIMATI MANEKA GANDHI (PILIBHIT): Sir, this is an issue I waited for 21 years to speak out loudly about. I am happy that I have been given the opportunity.
What I would say is, at the absolute height of threat perception Shrimati Indira Gandhi was asked to remove her Sikh bodyguards. She did not do so and said that it would further humiliate and divide that community. She was a true nationalist. Did we honour this memory? Did we honour this attitude of hers by what was done by the Ruling party after she died? In the memory of a woman who refused even to think of Sikhs as separate from hers, what did the Ruling party do?
There have been many riots. There have been riots, as you have pointed out, in Gujarat, in Meerut and in Moradabad. Every time somebody is caught. There will continue to be riots as we grow more and more in population – man against man – for some reason or the other. But, this is the first case in which the carnage was organised in a cold, heartless and organised manner by the Ruling party where people were sent out in teams to find out how much petrol they needed, how many ropes they needed and how many tyres they needed.
I was in Maharani Bagh. I saw a team led by our Municipal Corporator, who is now in the Ruling party, enter. He had a list in his hand. In that list were numbers of the houses that were occupied and owned by Sikhs. Each one was burnt. He burnt the taxi stand in front of me. If I had not been Maneka Gandhi, my house would have burnt as well.
They are talking about us taking political fayada out of this. The elections were then preponed. Posters were brought out with pictures of her dead body. Kalashes were sent around. I went to Amethi, a child of 28. In every village I went to, it was written, “beti hai sardaar ki, desh ke gaddaar ki”. I would talk to them and I would say, “Would you say this about Sanjay Gandhi’s wife?” They would say, “It is not us, it is the people of the Congress party who come and write it in the night”. I have been a witness to this massacre. I went to all the areas after that with just whatever I could afford, blankets in my hand. I saw people who had owned huge shops begging for one blanket.
Twenty-one years later, I saw on television yesterday one of the prime accused, who is a member of the Cabinet, say that he was a victim. Let him go to Tilak Nagar. Let him go to the colonies where people have been resettled. And let him look at the children of the murdered who have taken to drugs, who have become destitute. They do not want three lakh or one lakh rupees and Government jobs. They want justice. They want the murderers caught. That is what you and I want today. That is what we are asking for. You can give them money. You can give them Government jobs. That is wonderful! But they want justice most of all. If somebody murdered my father or my brother, would I be happy with a job as a clerk in the Government? I want the murderers caught. That is what we are all asking for.
There are charges that Governments have turned a blind eye to riots whenever they took place. But this is the first time where accusations have been made in this report that members of the Government were actively involved and that the police could not have stood by and done nothing if they had not been asked unofficially to do so.
What I seek and what we all seek out of this debate is not votes or seats. If there were votes to be gotten, the matter would have been brought up 21 years ago in the elections. It was not brought up. What we are looking for is not even political benefit because there is no benefit to be had. The Congress party has won Sikh votes even after that. We have won Sikh votes after that. It has nothing to do with the riots. So, we are not looking for political benefit.
What we want is simple justice in the names of those that have been denied justice, tortured, made to standby, and ignored for 21 years; those innocents who saw their families die.
The Prime Minister has said that he will take action. But it will be a mockery of justice and an irony if this report is ignored, if people named in the report continue to be in the Government and continue to be in high places. And it will be an irony that this will be presided over by a Sikh Prime Minister[KMR72] .
We look to you not just as a leader of the ruling party; we look to you as the leader of the nation. We do not look as the kavach for the sins previously committed. They are not able to get rid of the anger that is there with them for the last 21 years. I ask you in the name of the entire House for justice for thousands of people who have no future.
श्री इलियास आज़मी (शाहाबाद) : शुक्रिया उपाध्यक्ष महोदय, मुल्क में जब-जब मानवता को प्रताड़ित किया जाता है, जब-जब उस तरह के दंगे होते हैं, जिस तरह १९८४ में सिखों के खिलाफ हुए और वैसे ही सैंकड़ो दंगे मुसलमानों के खिलाफ हुए, तब-तब एक इन्क्वायरी कमीशन बिठा दिया जाता है। मेरी सदन से, पूरे तजुर्बे के बाद, एक अपील और गुजारिश है कि अब यह ज्यूडशियल इन्क्वायरी जरायम पर पर्दा डालने और उसे २०-२० साल तक लटकाने की जो प्रक्रिया बन चुकी है, उसे खत्म किया जाए। ज्यूडशियल इन्क्वायरी से न तो किसी को फायदा हुआ है, न किसी मजलूम के आंसू पोंछे गए हैं और न आगे किसी को कोई उम्मीद है। पहले की जांच समतियों की और इस जांच समति की रिपोर्ट पर सरकार की एक्शन टेकन रिपोर्ट मैंने गौर से देखी है। मेरे इस विचार को और पुख्तगी मिली कि कोई भी पार्टी, जब वह सत्ता में आती है, उस पर मोरिदे इल्जाम आता है, इसी तरह की एक्शन टेकन रिपोर्ट देती है। इससे पहले श्री कृष्णा आयोग की रिपोर्ट आई थी। उस वक्त जो सरकारी पार्टी थी, उसकी भी एक्शन टेकन रिपोर्ट मैंने देखी है। इस सरकार की भी एक्शन टेकन रिपोर्ट मैंने देखी है। उसे देखने से लगता है कि अगर न देते तो कोई आसमान नहीं टूटता, क्योंकि बिना एक्शन टेकन रिपोर्ट के भी वह जांच समति की रिपोर्ट पेश कर सकते थे। अब गुजरात के दंगों पर इन्क्वायरी कमीशन जो बैठा है, उसकी रिपोर्ट आने वाली है। उसे भी हम देखेंगे कि उसका क्या हश्र होगा।
इन ज्यूडशियल इन्क्वायरी कमीशंस का नुकसान यह है कि हमारी ज्यूडिशरी में कुछ ऐसे लोग हैं, जो यह चाहते हैं कि हमारी रिटायरमेंट के बाद हमें किसी कमीशन का चेयरमैन बना दिया जाएगा। रंगनाथ मिश्र जी की बात आई। मैं यह बात सदन के रिकार्ड में लाना चाहता हूं कि जब वह सुप्रीम कोर्ट के जज थे, तब वह अयोध्या गए थे। वह कृष्ण मोहन पांडेय को ताला खुलवाने के लिए राजी करने गए थे कि ताला खुलवा दो, तुम्हारे खिलाफ अगर कोई कार्रवाई होगी, तो आखिर में सुप्रीम कोर्ट आएगा, हम वहां बैठे हैं। ताला खुलवाने से लेकर और इस तरह के कमीशन नियुक्त होने तक अगर उनके आगे तक पहुंचने की कहानी पर आप गौर करेंगे, तो सदन इस बात से मुत्तफिक होगा कि आइंदा आप लोग ज्यूडशियल इन्क्वायरी से तौबा कर लें। यह सिर्फ जरायम पर पर्दा डालने का एक माध्यम और जरिया बन चुका है।
मैं कहता हूं कि एक घंटा और दो घंटे के लिए कोई झगड़ा हो सकता है। हाउस में भी हो सकता है। और हाउसेज में भी होता है, जैसे उत्तर प्रदेश विधान सभा में भी हुआ था। लेकिन कोई झगड़ा दिन भर चले, दो दिन चले, चार दिन चले, महीने भर चले, यह बिना राजनीतिक सत्ता के सहयोग के, उसकी मर्जी के बगैर बिल्कुल असंभव है, चाहे मेरा ही राज क्यों न हो। आखिर वही उत्तर प्रदेश है, जहां बसपा राज आने के बाद कोई झगड़ा नहीं होता है। पहले कितने फसादात होते थे। वही बिहार है, जहां जमशेदपुर और राउरकेला से लेकर भागलपुर तक हजारों-हजार इन्सान मारे गए। उसके बाद राजनैतिक सत्ता बदली और लालू जी पावर में आए। वह नहीं चाहते थे कि इस तरह प्रशासन के बल पर किसी समुदाय का कत्लेआम हो। फिर उस बिहार में घंटे-दो घंटे का झगड़ा हुआ हो, तो मैं नहीं कह सकता, हुआ होगा, लेकिन बड़े पैमाने पर कई दिन चलने वाला कोई वाकया नहीं हुअ्ÉÉ[R73] ।
(c4/1710/har/sr[r74] ) मुझे यकीन है कि अब जो यूपीए की सरकार है, उसने माज़ी में जो गलतियां की हैं, उनसे सबके ले लिया है। मुझे हमारे माननीय प्रधान मंत्री सरदार मनमोहन सिंह जी की ईमानदारी और सोनिया जी के नेतृत्व पर विश्वास है कि पुरानी गलतियों को कांग्रेस पार्टी नहीं दोहराएगी, जो कांग्रेस पार्टी करती रही है।…( व्यवधान) सब बदलते हैं, आप भी बदलते हैं, हम भी बदलते हैं और हमारी सोच भी बदलती है। वह दिन इस देश का बेहतरीन दिन होगा, जिस दिन आप भी बदल जाएंगे और इस देश की यह समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। खुदा से मैं यही दुआ करता हूं आडवाणी जी कि आप भी अपनी सोच को बदलिये। आपने जो हिम्मत दिखाई थी, उस पर डटे रहिये और अपनी पार्टी की सोच को बदल दीजिए, जिससे मुल्क में इस तरह की समस्या कभी पैदा न हो। मैं अपनी बात इस उम्मीद से समाप्त करता हूं कि देश उन गलतियों को नहीं दोहराएगा, जिससे कोई नतीजा नहीं निकले और मेरी बात में ज्यूडशियल इंक्वायरीज भी शामिल हैं।
SHRI KINJARAPU YERRANNAIDU (SRIKAKULAM): Mr. Deputy-Speaker, Sir, today we are discussing about the Report of the Nanavati Commission as also the Action Taken Report by the Government. This is a national tragedy. It is a crime against humanity. The Congress Government was in power from 1984-1989. Late Shrimati Indira Gandhi was assassinated on 31st October, 1984. After this, the riots took place. It happened in Delhi and Kanpur. At that time, it did not happen in Andhra Pradesh. The Government of India at that time did not take necessary steps to control all these attacks. All the Commissions have reported about such incidents, even the Nanavati Commission has mentioned about those incidents. All the Members have quoted from the Nanavati Commission Report. The ruling Party has quoted from it in its favour. But, by and large, the Congress Party is behind it. Even the names of the then Prime Minister Shri Rajiv Gandhi and other top Congress leaders have not been mentioned here. … (Interruptions) Please read the Report of the Nanavati Commission. The names of late Shri Rajiv Gandhi and other top Congress leaders are not included in it. In this Report, the names of the individual Congress leaders who instigated the mob and the incidents that followed have been mentioned.
Any constitutional Government which is in power, has to protect the lives and properties of the citizen. This Government was in power. The Home Minister belonged to the Congress Party; the Lieutenant Governor belonged to the Congress Party. Why did it happen then? Why did it not happen in West Bengal? Why did it not happen in Andhra Pradesh? Late Shri N.T. Rama Rao was the Chief Minister then. After the assassination of Shrimati Indira Gandhi, he immediately convened a meeting of the top-level functionaries to control the situation. The AP Government was vigilant and took all the steps to protect the Sikhs in Andhra Pradesh. But, why did it not happen in Delhi? On the same people, people had reacted spontaneously. What happened on 1st November? What happened on 2nd November? What happened on 3rd November? The Prime Minister was here; the Home Minister was here; and the Armed Forces were here. Why did they not stop all the riots against the Sikhs[p75] ?
They are a proud community; they are a patriotic community. They have done a lot to this nation building and also to safeguard our country.
But for this situation, the Congress party is behind it. The Nanavati Commission has mentioned all those names. The Government should book all those persons. They have to book the cases… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing would go on record except the speech of Shri Yerrannaidu.
(Interruptions) …* SHRI KINJARAPU YERRANNAIDU : You read the Nanavati Commission Report… (Interruptions) This is not my statement. This is the statement of the Justice Nanavati Commission… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing would be recorded except the speech of Shri Yerrannaidu.
(Interruptions) … * SHRI KINJARAPU YERRANNAIDU : Even the hon. Prime Minister was kind enough to announce in this august House to take immediate action.… (Interruptions) Why they are crying… (Interruptions) The Prime Minister has admitted it, and said that ‘according to this Report, I will take action against those individual who have been indicted in the Nanavati Commission Report’… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Mr. Yerrannaidu, you please address to the Chair.
… (Interruptions)
SHRI KINJARAPU YERRANNAIDU : The Prime Minister himself has admitted and said: ‘I will take action against individuals mentioned about in the Nanavati Commission.’ Now, why do they not understand this?… (Interruptions)
* Not Recorded.
Secondly, Sir, adequate compensation has not been given to all those victims and families. The Government should take all care to provide all necessary compensations and other things. They should provide jobs, at least, in each affected family. That is most important. Even today, after 21 years, Press reports are coming that the dependants of the deceased have no employment. They have been suffering a lot. They do not have even the sufficient food to eat. Therefore, the Government should appoint one or two senior officers to examine the matter on case-to-case basis, in order to give them employment and other benefits.
Sir, it was said that after retirement of the officers, there was no legal sanctity to initiate action. This is not at all correct. This should not be so. If there is a need, the Government can bring in a legislation in this regard, we will support it. It is because, if there will be any fear, everybody will be alerted. But due to the passive attitude of the police officers, all this had happened. So, by giving this plea that action could not be initiated against those who have retired, one should not keep quiet. Therefore, the Government may bring forward such a legislation wherein it may be mentioned that if there is any lapse on the part of the Government officer, even after his retirement, the action can be initiated against him, to book him. Now, everybody is escaping, saying ‘after their retirement, we cannot do anything.’ It was mentioned in the Action Taken Report given by the Prime Minister that even four years before their retirement, they cannot initiate any action to reduce the pension also. That is why, the new legisation is very necessary so that, even after his retirement, action could be initiated against an erring person. We have to book the culprits, maybe, they are the retired officers of the Government.
Sir, these are some demands from my party.
SHRI BIR SINGH MAHATO (PURULIA): Sir, these incidents had taken place 21 years ago when the assassination of the then Prime of India, Shrimati Indira Gandhi led to the violent attacks on Sikh community and looting of the properties of the Sikhs in Delhi and other parts of the country.
All these incidents happened 21 years ago, during the time of the 8th Lok Sabha. Now, we are in the 14th Lok Sabha, and after 21 years, we are today discussing about the incidents, the Report of the Nanavati Commission and the Action Taken Report. Since 1984, the families of those who were killed are waiting for justice and their redressal.
This Commission was set up by the NDA Government in the year 2000, and its Terms and Conditions were also framed by the Home Ministry. It was set up to submit its Report within six months. But on a number of times, the tenure of this Commission was extended. Firstly, I would like to know from the leaders of the NDA as to who prevented them to stop extension of the Commission to submit its Report within the timeframe, and to have the Action Taken Report. But they did not do anything. They just gave extension to the Nanavati Commission on a number of times[k76] .
The Commission has already submitted its Report. The charges, in the Reference, were referred to it by the NDA Government. We expected that the Report would be as per the terms and conditions and would be conclusive. But, I am sorry to say that the Report is contradictory and there are a lot of probabilities. Therefore, my suggestion to the Government is this. There are some specific recommendations against some individuals. They require examination. I would request the Government to look into the matter and urge it to probe them again so that the culprits may be booked and the law takes its own course.
The Commission has also made a number of observations on the role of Delhi Police. I think the Government should take necessary steps against those, who are still in service, and also against those officials who aided them.
There were questions on providing healing touch to the families which suffered then. Already the Prime Minister has assured, he has announced it in the House, that all the affected people will be given due compensation, a uniform compensation, and the members of those families which lost their earning members would be provided employment or sufficient means of livelihood. That has been assured by the Prime Minister.
With these words, I conclude my speech.
श्री हरिन पाठक (अहमदाबाद) : उपाध्यक्ष महोदय, हम लगातार सुबह ग्यारह बजे से एक अत्यन्त संवेदनशील मुद्दे और हजारों-लाखों लोगों की भावनाओं के साथ जिस का सीधा संबंध है, ऐसे मुद्दे पर चर्चा कर रहे हैं। अगर यह चर्चा डिसइनवैस्टमैंट या कामगारों के अधिकारों पर होती तो उसका रुख अलग होता। आज जो चर्चा हमारे सामने है, जो परिस्थिति हमारे सामने आई, मुझे लगता है कि आज पूरे सदन को दलगत भावनाओं से ऊपर उठ कर सोचना होगा।
कई चर्चाएं हुईं। मैं दुखी था, जब तक प्रधान मंत्री जा का इंटरवैंशन नहीं हुआ। जब प्रधान मंत्री जी बोलने के लिए खड़े हुए, उन्होंने एक संवेदनशील व्यक्ति और नेता के नाते कुछ बातें सदन के सामने रखीं लेकिन उसके बाद जो बातें सामने रखीं और पूूर्ववक्ताओं ने घटनाक्रम, नरसंहार को जिस तरीके से सहज भाव से लिया, उसे कानूनी जामा पहनाने की कोशिश की गई, मुझे लगता है कि यह कानून से जुड़ा सवाल नहीं है। श्रीमती मेनका गांधी ने कहा कि यह लाखों लोगों की भावनाओं से जुड़ा सवाल है। बाढ़ में अगर कुछ लोगों के घर बह जाएं तो भी उनकी भावनाएं भड़कती हैं, लेकिन प्रधान मंत्री जी, मैं आपसे कहना चाहूंगा कि जब हमने कपिल सिब्बल जी का भाषण सुना, हमें उससे बड़ी निराशा हुई। वह मेरे परम मित्र हैं। सुप्रीम कोर्ट में जैसे वकील आग्र्यूमैंट्स करते हैं, उन्होंने वैसे ही आग्र्यूमैंट्स देने की कोशिश BÉEÉÒ[R77] ।
अगर उनकी नजर अध्यक्ष जी की कुर्सी पर जाती, जिसके ऊपर वेद की ऋचा में लिखा है “धर्म चक्र प्रवर्तनाय” - मैंने पिछले १६ वर्ष के संसदीय जीवन में कई बार इसी कुर्सी का सम्मान करते हुए इसका उल्लेख किया ,है जिसमें धर्म का मतलब कोई सम्प्रदाय नही है, धर्म का मतलब नैतिकता है। धर्म का मतलब है कि हमारीईमानदारी है। क्या सारे मसले अदालतों में सुलझाए जाएंगे? कांग्रेस पार्टी से मैं कहना चाहूंगा कि श्री जवाहर लाल नेहरू से लेकर एक परंपरा शुरू हुई। परंपरा यह थी कि हमारा नैतिक दायित्व बनता है कि हम समाज में क्या संदेश देना चाहते हैं। प्रधानमंत्री जी ने थोड़ी बात कह कर छोड़ दी। उन्होंने इस बात की सीख दी, सलाह दी कि हम ऐसी बात न कहें जिससे बाहर के लोगों की भावनाएं भड़कें। मैं आपसे सहमत हूं लेकिन ऐसा कृत्य भी न करें कि आंखों के सामने सत्य दिखाई दे फिर भी उस पर अमल न करें और लोगों में यह मैसेज जाए कि कत्लेआम करने वाले लोगों को आप सहयोग दे रहे हैं, पनाह दे रहे हैं। तब आपकी सलाह ठीक साबित नहीं होगी। इसलिए मैं बड़े आदर के साथ…( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Not to record anything except the speech of Shri Harin Pathak.
(Interruptions) … * उपाध्यक्ष महोदय : प्लीज आप बैठ जाइए। उनका टाइम खराब न करें।
...( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Harin Pathak, you may please address the Chair and not the individuals.
… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Please do not disturb.
श्री हरिन पाठक : महोदय, मैं तो चुपचाप खड़ा रहा हूं, उनको बोलने दिया है। वर्ष २००२ की तरफ जाने से पहले मेरे गुजरात के साथी यह समझ लें कि इतिहास के आंकड़ों में २००२ से पहले १९८४ आता है। १९८४ में जो घटनाएं घटीं, जिनका आप बचाव कर रहे हैं और फिर २००२ पर उंगली उठाते हैं, जब १९८४ में निर्दोष माँ-बहनों को जलाया गया था, जब १९८४ में निर्दोष सिखों को गले में टायर डाल कर जिंदा जलाया जाता था, तब याद नहीं आई? उस वक्त २००२ नहीं था, २००२ तो उसके १८ साल बाद आया। अगर किसी ने सीखा तो तुम्हारे लोगों से सीखा है, आप जिम्मेदार हैं १९८४ की घटना के लिए। आप क्या २००२ की बात कहते हो? …( व्यवधान) पहले यह कहते कि १९८४ में जो हुआ उसके लिए हम जिम्मेदार हैं, इस देश में कभी नहीं हुआ।…( व्यवधान) मैं नहीं चाहता था, उन्होंने उल्लेख किया, जब गुजरात रिपोर्ट आएगी तब चर्चा होगी।
महोदय, इस रिपोर्ट के दो पहलू हैं। प्रधानमंत्री जी, आपका ध्यान विशेष आकृष्ट करना चाहता हूं कि एक तो कमीशन बनाया गया। मेरे वामपंथी साथी, जो उस तरफ भी जाना चाहते हैं, बंगाल से ध्यान हटाकर दिल्ली में रैली करके कुछ दो-चार सीटें मिल जाएं इसलिए बारह मिनट मे से दस मिनट कमीशन कैसे बनाया गया, उस पर श्री गुरुदास दासगुप्ता ने चर्चा की, रिपोर्ट पर चर्चा नहीं की। कैसे कमीशन बना, क्यों कमीशन बना, आज यह चर्चा नहीं थी। मैं सरकार से पूछना चाहता हूं कि आपने एटीआर क्यों पेश किया? इस कमीशन के एटीआर को पेश करना स्वीकार किया, स्वीकार करने के बाद आपने उस पर एक्शन लिया। एक्शन में कुछ मांगें मानीं कुछ नहीं मानीं - या तो आप कह देते कि इसमें लिखा हुआ हर वाक्य गलत है, हम इसे नहीं मानते। जब एनडीए सरकार ने नानावती कमीशन बनाया था, तो हमारी * Not Recorded.
सहमति इसमें नही थी। उस वक्त आपने कमीशन को स्वीकार किया। कमीशन की सिफारिशें आईं और सिफारिश के बाद अब आपके सामने प्रश्न आया, इसमें जो नाम दर्ज हुए हैं, मैं सदन का ज्यादा समय नहीं लेना चाहता हूं, रात भर से ही नहीं जब से रिपोर्ट टेबल पर रखी गई हैैं तब से मैंने अकेले एक कोने में बैठकर एक-एक पेज पढ़ा है, एक-एक पेज पर लिखा हुआ है, श्री कपिल जी, आपने पेज नंबर १८१ पढ़ा, उस वक्त आदरणीय श्रीमती सोनिया गांधी जी नहीं थीं[p78] ।
मैं उसी पेज-१८२ की बात कर रहा हूं, जिसे सिब्बल जी ने ‘सिलेक्टिव’ रहकर छोड़ दिया था। मैं वहीं से पढ़ रहा हूं। आदरणीय प्रधान मंत्री जी, यह किसी ने नहीं कहा कि स्व. राजीव गांधी इस सब के लिये जिम्मेदार थे लेकिनसिब्बल जी ने जो आखिरी वाक्य में जो ‘ सिलेक्टिव’ था, वह नहीं बोला :
“There is absolutely no evidence suggesting that Shri Rajiv Gandhi or any other high-ranking Congress Leader has suggested to organise attacks on Sikhs. ” सिब्बल जी आगे पढि़ये :
“Whatever acts were done, were done by the local Congress-I Leaders. ” They were your leaders. You have to own the responsibility. They were the Corporators, Members of Parliament, MLAs, Mandal Pramukhs, and so on. They belonged to your Party and they had the Membership receipts of Rs.1 or Rs.10. How can you disown S/Shri Sajjan Kumar, Dharamdas Shastri, H.K.L. Bhagat, Jagdish Tytler? How can you disown your own leaders? At every page of the Report, their presence is being noticed. आने वाला समय इन लोगों को कभी माफ नहीं करेगा। यह कहते हैं कि हमने राजनीति नहीं की। इन्होने १९८४ के दंगों का फायदा उठाने की कोशिश की है, ये लोग हिन्दू फंडामैंटलिस्ट्स की बात करते हैं। उस समय तक तो हिन्दू फंडामैंटलिस्ट की शुरुआत भी नहीं हुई थी। इन्होंने ही सिख भाइयों में हिन्दुओं के खिलाफ नफरत पैदा की। रथ यात्रा तो बाद में निकली। चुनाव में जो पोस्टर छापा गया, उसमें कांग्रेस के महासचिव का नाम था। .... * उपाध्यक्ष महोदय : यह नाम रिकार्ड में नहीं जायेगा। This is not to be recorded.
श्री श्री हरिन पाठक : ऐसा पोस्टर छापकर वोट मांगे गये थे। उस पोस्टर में लिखा था : ...* * Not Recorded.
MR. DEPUTY-SPEAKER: This will not be allowed. Nothing will go on record.
MAJ. GEN. (RETD.) B. C. KHANDURI (GARHWAL): You cannot shout like this here.… (Interruptions) MR. DEPUTY-SPEAKER: Not to be recorded.
(Interruptions) …* श्री हरिन पाठक : उपाध्यक्ष महोदय, मैं आपके माध्यम से सदन से और खासकर कांग्रेस, पार्टी के हित के लिये करबद्ध प्रार्थना करना चाहूंगा…( व्यवधान) प्रधान मंत्री जी, पिछले दो दिनों से सारे देश में प्रिंट मीडिया और इलैक्ट्रोनिक मीडिया में पूरी रिपोर्ट को उसके इंटरप्रीटशन के साथ दिखाया जा रहा है। आपने उन सभी लोगों को टी.वी पर देखा होगा जिन्होंने न केवल अपने संबंधियों बल्कि अपने परिवारजनों को खोया है बल्कि अपनी आंखों के सामने जिन्दा जलते हुये देखा है। ऐसी स्थिति में मेरे और आपके कहने से उनकी भावना को शान्ति नहीं मिलेगी, आपको इस रिपोर्ट पर कार्यवाही करनी होगी। आप इस सदन और इस सदन के भाषणों के बदले तुरंत ऐसी कार्यवाही करें[RB79] । आज शाम सदन उठने के बाद तुरंत कार्रवाई करें, ताकि करोड़ों लोगों और लाखों सिख भाइयों को लगे कि हमारी भावना की कद्र की गई। फिर वही कानून, वही कोर्ट, फिर वही एफ.आई.आर. और एफ.आई.आर. में क्या है। पेज नम्बर १५९ पर आपका ध्यान दिलाना चाहता हूं, जहां लिखा है, कपिल सिबल जी आप कहेंगे, क्या एफ.आई.आर. से देश चलेगा, पुलिस स्टेशन से देश चलेगा, सुप्रीम कोर्ट से देश चलेगा - यदि ऐसा है तो फिर इस संसद को बिखेर दो…( व्यवधान) इसकी क्या जरूरत है। हर एक चीज, हर मसले का हल अगर अदालतों के जरिये होगा, लोगों की भावनाओं का भी हल यदि अदालतों के जरिये होगा तो फिर यह सदन हर रोज क्यों चर्चा करता है? जो खिलवाड़ हुआ है, वह मैं आपके सामने रखना चाहता हूं। हर पन्ने पर लिखा हुआ है कि पुलिस पर दबाव डाला गया है। अगर आप चाहते हैं, तो मैं इसे नहीं पढ़ूंगा, लोगों की बात भी नहीं करूंगा, लेकिन इतना जरूर कहना चाहूंगा कि यहां ऐसे लोग बैठे हैं, चाहे वे इस तरफ हों या उस तरफ हों, भले ही उनके सिर पर पगड़ी हो न हो, लेकिन पगड़ी हमारे देश की पहचान है, पगड़ी इस राष्ट्र की राष्ट्रीयता और स्वाभिमान है, इस देश की स्वाधीनता की लड़ाई में अगर सबसे बड़ी कोई मिसाल है तो हमारे देश की पगड़ी है। पगड़ी मैंने नहीं पहनी है, लेकिन फिर भी मुझे उतना दर्द है, जितना दर्द किसी माननीय सदस्य और प्रधान मंत्री जी के दिल में हैं। वह दर्द उनके शुरूआत के * Not Recorded.
भाषण में दिखाया गया है। मैं यही कहना चाहता हूं कि यदि आज सदन उठने से पहले देश के सामने उचित कार्रवाई नहीं आती है, वही हम संविधान और वही हम संसद की बातें मानेंगे और कहेंगे, देखेंगे और सोचेंगे, तो कुछ नहीं होगा। मैं एश्योरेन्स कमेटी का चेयरमैन हूं। हमारे सामने इसी तरह की बाते कई सालों से आती हैं कि सलाह लेंगे, एडवोकेट जनरल से सलाह लेंगे, अगर इसी तरह चला तो मुझे लगता है कि देश में सही संदेश नहीं जायेगा। उपाध्यक्ष महोदय मैं आपके माध्यम से प्रधान मंत्री जी की संवेदनाओं के साथ अपनी भावनाओं को जोड़ता हूं। इसके साथ ही मैं इतना जरूर कहूंगा कि इतने एश्योरेन्स से देश की जनता संतुष्ट होने वाली नहीं है। इसके लिए आपको आगे आना होगा और जिन-दिन लोगों के नाम पर उंगली उठी है, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। मैं अंतिम दो वाक्य कहूंगा कि इस देश की परम्परा रही है - “यद यद आचरति श्रेष्ठा, तद तद इतरा जना:” इस देश की वेद ऋचाओं में लिखा है कि हम जो यहां संसद में बैठे हैं, जो समाज की अगुवाई करते हैं, उन्हें सबूतों की जरूरत नहीं है। उन्हें ऐसा आचरण करना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ी भी समझें कि हमारे आचरण से देश में एक शिष्टता पैदा होती है, समभाव पैदा होता है। हम कानून की खिड़कियों से छिटकने की कोशिश न करें। मेरी आपसे प्रार्थना है कि जिन-जिन लोगों के नाम इस रिपोर्ट में आये हैं, जिन-जिन लोगों के नामों पर उंगली उठी है…( व्यवधान) MR. DEPUTY-SPEAKER: Please sit down. Nothing would go on record except the speech of Shri Pathak. (Interruptions) …* उपाध्यक्ष महोदय : आप तो मंत्री है, आप भी बोल रहे हैं। आपकी पार्टी के होम मनिस्टर साहब बोलेंगे। ...( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing would go on record except the speech of Shri Pathak.
(Interruptions) …* श्री हरिन पाठक : इसलिए मैं सदन से इतना कहूंगा कि सिर्फ हमारी संस्कृति में नहीं, बल्कि विदेशी संस्कृति में भी कहा गया है …( व्यवधान) सिर्फ हमारी संस्कृति में ही नहीं, विदेशी संस्कृति में भी…( व्यवधान) * Not recorded.
उपाध्यक्ष महोदय : प्लीज सिट डाउन। आठवले जी, आपकी कोई बात रिकार्ड पर नहीं जा रही है[R80] ।
MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing, except the speech of Shri Harin Pathak, would go on record.
(Interruptions) …* MR. DEPUTY-SPEAKER: Please take your seats.
श्री हरिन पाठक ) : उपाध्यक्ष महोदय, अपनी बात समाप्त करने से पहले मैं सिर्फ यही कहूंगा कि …( व्यवधान) मैं हाई कोर्ट से बरी हो गया था। …( व्यवधान) मैं अपनी बात समाप्त कर रहा हूं। जैसे मैंने कहा कि हमारे देश की संस्कृति में यह कहा गया है कि - ‘ यद्् यद् आचरति श्रेष्ठा: तद् तद् इतरा जना:।’ विदेशों की संस्कृति में भी कहा गया है कि The king should be above suspicion. राजा का आचरण शंका से परे होना चाहिए। यदि राजा या शासक पर अंगुली उठती है तो उसका कर्तव्य बन जाता है कि उस शंका का निराकरण करे, राजा का आचरण शंका से ऊपर होना चाहिए। यह हमारी संस्कृति और विदेशी संस्कृति में भी कहा गया है। इसलिए मैं मांग करूंगा कि जिन-जिन के नाम इस कमीशन की रिपोर्ट में हैं, उनका तत्काल इस्तीफा लिया जाए, उन्हें कांग्रेस पार्टी से निकाला जाए और जो लोग पीड़ित हैं, जिन लोगों के परिवारों को इतने बड़े हत्याकांड का दुख उठाना पड़ा है, उन्हें सही मुआवज़ा दिया जाए। सिर्फ मुआवज़े से काम नहीं होगा, बल्कि दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई भी तुरंत की जाए, इसी आशा के साथ मैं आज के कार्य स्थगन प्रस्ताव का समर्थन करता हूँ। उपाध्यक्ष महोदय : श्री एम.पी.वीरेन्द्र कुमार। अनुपस्थित।
श्री जोवाकिम बखला।
श्री जोवाकिम बखला (अलीपुरद्वार) : उपाध्यक्ष महोदय, आपने इस संवेदनशील विषय पर बोलने के लिए मुझे मौका दिया, इसके लिए मैं आपका आभारी हूं। २१ साल पहले सन् १९८४ में दिल्ली के अंदर एवं दिल्ली के बाहर हमारे देश के वभिन्न शहरों में जिस तरह का नरसंहार हुआ, हमारे जो सिख भाई हैं, सिख समुदाय के लोगों को चुन-चुनकर उनकी हत्या करने का काम हुआ, उन्हें जिन्दा जलाने का काम भी देश के वभिन्न शहरों में, विशेषकर दिल्ली में हुआ। इस तरह की घटनाएं जो अहिंसा का वातावरण फैलाती हैं, चाहे वे देश के किसी भी कोने में क्यों न हों, हमारी पार्टी आर.एस.पी. उनकी हमेशा निन्दा करती है। आज सदन में सरकार ने जो नानावती कमीशन की रिपोर्ट और उस पर एटीआर रखी है, उस पर अपने विचार व्यक्त करने के लिए मैं खड़ा हुआ हूं। नानावती कमीशन ने जांच के आधार पर जो ऑब्जर्वेशन दी हैं, मुझे ऐसा लगता है कि वह रिपोर्ट संपूर्ण नहीं है। चूंकि सत्ता का नेतृत्व यूपीए सरकार कर रही है, इसलिए इस रिपोर्ट के आधार पर जो एटीआर सरकार ने सदन में रखी है, उसमें वह भी किंकर्तव्यविमूढ़ है। इसका कारण यह है कि नानावती कमीशन की जो रिपोर्ट पेश की गई है, वह साफ नहीं है। उसमें ‘प्रॉबेबलिटी’ और ‘संभवत:’ जैसे शब्दों का व्यवहार किया गया है जिनसे किसी निष्कर्ष पर पहुँचना बहुत ही कठिन हो गया है। हमारी सरकार के सामने एक चुनौती है। मुझे उम्मीद है कि यूपीए की सरकार को माननीय प्रधान मंत्री डॉ.मनमोहन सिंह के नेतृत्व में यह चुनौती स्वीकार्य cè[h81] , और इस चुनौती को स्वीकार करते हुए जिन लोगों ने सिक्ख समुदाय के विरूद्ध अपराध किए हैं, उन अपराधियों को उचित सजा मिलनी चाहिए। सिर्फ उन्हें उचित सजा मिले, यहीं तक ही सीमित नहीं होना चाहिए बल्कि जिन परिवारों के लोगों ने अपने परिजनों को खोया है, अपने सामने उनकी हत्या होते देखी है, उनकी जो हालत है, उनके पुनर्वास के लिए जो करना चाहिए और जो कर्तव्य हमारी सरकार का है, उसे हमारी सरकार को पूरा करना चाहिए। उनको मुआवजा देने के लिए हर संभव कोशिश करनी चाहिए, यह हमारी मांग है। सिर्फ यहां बोलने से काम चलने वाला नहीं है। जब यह आयोग बना, उस समय एनडीए की सरकार थी, लेकिन जब एटीआर आयी तो उस समय यूपीए की सरकार है। इस रिपोर्ट पर अंगुली उठायी गयी है कि कुछ असामाजिक तत्व भी नरसंहार करने और लूटपाट करने में शामिल थे और जो पुलिस थी, जिनसे उम्मीद की जा सकती थी कि जैसे ही उनको सूचना मिलेगी, तुरंत कार्यवाही होगी, वह भी घटना को रोकने में नाकाम रही। इस तरह की घटना दिल्ली और अन्य जगहों पर हो रही थीं, पुलिस को तुरन्त उनकी रक्षा के लिए आगे आना चाहिए था, लेकिन उन्होंने ऐसा काम नहीं किया। दुख की बात है कि इस रिपोर्ट में एक संदेश लोगों के पास गया है और एक अंगुली उठाने का काम हुआ है कि राजनेता भी इसमें शामिल थे। अगर इस तरह की घटना हुई है तो मैं इस सरकार से मांग करता हूं कि उनके खिलाफ सख्त से सख्त कदम उठाए जाएं और भविष्य में इस तरह की धटना देश के किसी कोने में न हो इसके लिए हम लोगों को संकल्प लेना चाहिए। तभी यह संदेश पूरे देश में और हमारी जनता के सामने जाएगा कि हम एक हैं और वभिन्नता में एकता हमारे देश में है। वभिन्नता में एकता हम प्रमाणित करेंगे तो हम मिलकर इस तरह की घटनाओं का सामना कर सकेंगे। इन्हीं बातों के साथ मैं अपना वक्तव्य समाप्त करता हूं। श्री राजीव रंजन सिंह ‘ललन’ (बेगूसराय) : उपाध्यक्ष महोदय, ३१ अक्तूबर १९८४ को देश की तत्कालीन प्रधानमंत्री की हत्या के बाद इस देश में जो सिक्खों के कत्लेआम का दौर चला, उसकी जितनी निंदा की जाए, वह कम है। आज सुबह ढींडसा साहब ने सिक्खों के प्रति त्याग की भावनाओं का जिक्र किया और देश की आजादी में आज तक उनकी जो भागीदारी रही है, उसका उल्लेख किया। सिक्खों में इस देश के प्रति देशभक्ति की भावना बहुत अधिक है। इसके बावजूद श्रीमती इंदिरा गांधी की हत्या, जिस आदमी ने भी पागलपन में की, उसका बदला लेने के लिए जिस ढंग से सिक्खों का कत्लेआम इस देश में हुआ, उस घटना की जितनी निंदा की जाए, उतनी कम है। अभी कपिल सिब्बल साहब बोल रहे थे, वे काफी बड़े वकील हैं। उन्होंने अपने भाषण में एक बात कही कि क्रमिनल प्रोसिज़र कोड में इस बात का प्रावधान है कि कहीं भी कोई घटना होती है तो कोई भी थाने में जाकर एफआईआर लिखवा दे तो उस पर तुरन्त कार्रवाई होती है। फरवरी में नानावती आयोग की कमीशन की रिपोर्ट आपके पास आयी। आप सरकार के मंत्री हैं। फरवरी से किसने आपको रोका था? आपमें अगर ईमानदारी होती, यदि आप सिक्खों की हत्याओं के दोषियों को सजा दिलाना चाहते तो आप उस रिपोर्ट के आधार पर, जो भी व्यक्ति दोषी थे उनके खिलाफ थाने में रिपोर्ट करके, एविडेंस इकट्ठा करके जांच करवाते।…( व्यवधान) MR. DEPUTY-SPEAKER: Except the speech of Shri Rajiv Ranjan Singh, nothing will go on record. (Interruptions) …* श्री राजीव रंजन सिंह ‘ललन’ :आप क्रमिनल प्रोसिजर कोड की बात कर रहे हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि आप इस रिपोर्ट पर पर्दा डाल रहे हैं। आप सिक्खों के कत्लेआम के दोषियों को बचाना चाहते हैं, इसलिए क्योंकि आप ईमानदार नहीं हैं और घड़याली आंसू बहा रहे cé[i82] । आप उनके कत्ल, उनके खून पर घड़याली आंसू बहा रहे हैं। नानावती कमीशन की रिपोर्ट में उल्लेख है। श्री रामविलास पासवान जी के घर पर एक घटना हुई थी। मैं उस घटना का चश्मदीद गवाह हूं। मैं उस समय लोकदल में एक कार्यकर्ता के रूप में था और स्वर्गीय श्री कर्पूरी ठाकूर के नेतृत्व में ३१ तारीख को दिल्ली में मजदूर किसान पार्टी और लोकदल के विलय का सम्मेलन था। हम सभी लोग दिल्ली आए हुए थे। स्टेशन पर आने के बाद मालूम हुआ कि श्रीमती इंदिरा गांधी की हत्या हो गई है। चूंकि सम्मेलन स्थगित हो गया था इसलिए श्री पासवान जी ने अपने घर पर बिहार से आए हुए लोगों को भोजन के लिए आमंत्रित * Not Recorded.
किया था। डेढ़ बजे के करीब हम श्री पासवान जी के घर पर पहुंचे। आज पासवान जी भारत सरकार में मंत्री हैं, वे उस समय घर पर नहीं थे। हम लोग उनका घर पर इंतजार कर रहे थे। श्री कर्पूरी ठाकूर भी वहां थे और अचानक सब जगह हल्ला हुआ। शास्त्री भवन के सामने १२ नंबर कोठी पर, डॉ राजेन्द्र प्रसाद रोड़ पर, श्री जय प्रकाश यादव जी, जो आज भारत सरकार में मंत्री हैं, यह भी मेरे ख्याल से उस समय वहां पर मौजूद थे और घटना के चश्मदीद गवाह हैं। वहां एक टैक्सी स्टेंड था। एक सिक्ख ड्राइवर टैक्सी स्टैन्ड के पीछे छिपा हुआ था। १५-२० लोगों का हूजूम आया, उनसे घबराकर वह ड्राइवर पासवान जी के गैराज में छिप गया। उन लोगों ने अंदर घुसने का प्रयास किया। स्वर्गीय श्री कर्पूरी ठाकूर जी ने उन्हें गेट से अंदर आने नहीं दिया और उनके द्वारा डांटने के बाद वे लोग चले गए। तब तक पासवान जी भी आ गए थे। उन्होंने होम मनिस्टर को, पुलिस कमिश्नर को और जिसको भी वे फोन कर सकते थे, फोन किया लेकिन कोई भी नहीं आया और ४० मिनट के बाद ४०-५० की संख्या में यूथ कांग्रेस के लोग वहां आ गए।…( व्यवधान) MR. DEPUTY-SPEAKER: Except the speech of Shri Rajiv Ranjan Singh 'Lalan', nothing will go on record. (Interruptions) … * श्री राजीव रंजन सिंह ‘ललन’ : कांग्रेस का दफतर उनकी बगल में रायसीना रोड़ पर था, वे लोग मां की हत्या का बदला लेंगे, खून का बदला खून से लेंगे और यूथ कांग्रेस जिंदाबाद,, कांग्रेस पार्टी जिंदाबाद का नारा लगाते हुए घर में प्रवेश कर गए। मैं उस घटना का चश्मदीद गवाह हूं। …( व्यवधान) MR. DEPUTY-SPEAKER: Please sit down.
… (Interruptions)
श्री राजीव रंजन सिंह ‘ललन’ :स्वर्गीय श्री कर्पूरी ठाकूर जी ने कहा कि हमारी जान चली जाएगी लेकिन ऐसा नहीं होने देंगे। लेकिन फिर भी उन लोगों ने गैराज में आग लगा दी और पासवान जी सहित हम सभी लोगों को १४ फीट ऊंची दीवार फांदकर आना पड़ा। …( व्यवधान) उपाध्यक्ष महोदय : माननीय सदस्य की स्पीच के अलावा कुछ भी रिकार्ड में नहीं जाएगा।
...( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: This is not to be recorded.
(Interruptions) …* * Not Recorded.
श्री राजीव रंजन सिंह ‘ललन’ :वहां से हम सभी १४ फीट ऊंची दीवार फांदकर बाहर आए। श्री मुलायम सिंह जी आज यूपी के मुख्यमंत्री हैं। उस समय पास ही लोकदल का दफ्तर था। उस समय चौधरी चरण सिंह जी भी उनके साथ थे, इन लोगों को मालूम हुआ तो वे हमारा बचाव करने के लिए आ रहे थे। लेकिन वह सिक्ख ड्राइवर उस घर में जलकर मर गया। पासवान जी प्रयास करते रहे, लेकिन कोई भी पुलिस अधिकारी वहां पर नहीं आया। हम चश्मदीद गवाह हैं। श्रीमती इंदिरा गांधी की हत्या के बाद तीन दिनों तक टीवी पर आता रहा कि खून का बदला खून से लेंगे और इस बात का प्रचार होता रहा और देश भर में लोग देखते रहे कि सिखों की हत्या ट्रेनों से, बसों से उतार कर सड़कों पर सरेआम की गई और आज कांग्रेस पार्टी घड़ियाली आंसू बहा रही है। श्री पी.के. बंसल जी कह रहे थे कि घटना की जितनी निंदा की जाए, वह कम है, लेकिन घटना करने वालों पर कोई कार्यवाही न की जाए, उस पर लीपापोती की जाए, यह इस सरकार की मंशा है। इस देश में अगर हिंदू और सिखों में किसी ने विभेद किया है, तो वह कांग्रेस पार्टी ने किया है[i83] । महोदय, जब तक सिख परिवारों को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक उनमें फिर से विश्वास पैदा नहीं होगा। इसलिए आज आवश्यकता इस बात की है कि सारे लोगों पर कार्रवाई हो। हमारे मित्र इसमें साहस दिखाएं और इस रिपोर्ट में जिन-जिन के भी नाम हैं, उन सबको कांग्रेस से बाहर निकालिए। श्री कपिल सिब्बल जी, एफ.आई.आर. दर्ज कराइए और सबकी जांच कराइए। MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri M.P. Veerendra Kumar.
SHRI M.P. VEERENDRA KUMAR (CALICUT): Thank you, Mr. Deputy-Speaker, Sir. I would like to … (Interruptions) श्री पवन कुमार बंसल : उपाध्यक्ष महोदय, …( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Please sit down. Not to be recorded.
(Interruptions) … * श्री सुरेन्द्र प्रकाश गोयल (हापुड़) : उपाध्यक्ष महोदय, …( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Please sit down. You are speaking without any permission.
… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Not to be recorded.
(Interruptions) *… SHRI M.P. VEERENDRA KUMAR (CALICUT): I am on my legs. … (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Not to be recorded.
(Interruptions) *… SHRI M.P. VEERENDRA KUMAR (CALICUT): I am on my legs, Mr. Deputy-Speaker, Sir. … (Interruptions) What shall I do? MR. DEPUTY-SPEAKER: Please sit down.
… (Interruptions)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Not to be recorded.
(Interruptions) … * * Not Recorded.
SHRI M.P. VEERENDRA KUMAR (CALICUT): Thank you, Mr. Deputy-Speaker, Sir. I would like to thank the Prime Minister for assuring the House that those whose names are mentioned in the Commission’s Report, their cases will be reopened and justice will be done. Hon. Prime Minister, I want to bring to your notice that by mere hair-splitting legal arguments and technicalities, how could justice be met? I want to quote the Commissions formulations, Page No.183. I will read that: “However, the Commission would like to emphasise that as a result of not recording separate FIRs, not recording statements of witnesses as stated by them and not investigating the cases properly, it has now become difficult for the Commission to make any recommendation against many of the persons who have been named by the witnesses as the persons who had indulged in violent acts against them or their family members or had facilitated the same. ” When the entire administration colludes with the criminals, no evidence will come out. … (Interruptions) MR. DEPUTY-SPEAKER: Please listen.
SHRI M.P. VEERENDRA KUMAR : So, we have to go beyond this. Then only justice could be met. This is not a conclusive Report; this is a wishy-washy Report. But it has brought one alarming fact to our notice. When the whole carnage was taking place in Delhi, the Home Minister of India was not effective. The President of India was not informed, and he was helpless. The Lieutenant-Governor , Mr. Gavai was not serious. That is the formulation of the Commission. The high police officials were enquiring the rioters and those who indulged in carnage, how many murgees were killed – the Sikhs. This is what was happening here. Is that the machinery set-up to protect human rights? If they collude with the criminals and anti-socials, where is the rule of law? So, this has become a dangerous trend. Now, it did not stop in Delhi. It went to Gujarat. After Godhra where children were killed, women were raped and people were mauled on the streets and murdered and even laws like POTA were used only against one community, the Administration was with the criminals. So, wherever there was an organized attack, it was always against the minorities – whether it is Sikhs in Delhi or it may be Muslims in Gujarat or Muslims in Mumbai or elsewhere in this country. This cannot go on. Not only Sikhs but all of us felt the pain. I belong to a minority community; I belong to Jain community. We all feel it; the entire nation feels it. The majority of people in India are not communal, and if they are communal, this country would have disintegrated long back. But there is a section who want to create the mindset that minorities are always dangerous; the majority have to guard against them. So, if the rights of minorities are not safeguarded, if the minorities do not feel secure, where is democracy[mks84] ?
18.00 hrs. What is the content of democracy? Dr.Ram Manohar Lohia used to say – I have worked with him – that the protection of the minorities lies in the culture of the majority. So, when we discuss this issue here, we have to rise above party affiliations and tell the nation that we will never allow such a carnage again. The minorities must be protected. Their rights and their existence should not be questioned by anybody. So, it is a matter of human rights. Since an alarming situation is developing in this country, there is a lot of insecurity among some section of the people. With such an insecurity, national integration will have no content; democracy will never have any meaning. All those who cherish democracy, who value human rights, should have to rise against this carnage.
MR. DEPUTY-SPEAKER: Please sit down for a minute.
… (Interruptions)
उपाध्यक्ष महोदय : मेरे पास लिस्ट में अभी बोलने वाले ६-७ ऑनरेबल मैम्बर्स बाकी हैं। अगर ऑनरेबल मैम्बर्स एग्री करे तो हाउस का टाइम एक घंटे के लिए बढ़ा दिया जाये।
SEVERAL HON. MEMBERS: Yes.
MR. DEPUTY-SPEAKER: Thank you. Shri Veerendra Kumar, please continue.
SHRI M.P. VEERENDRA KUMAR : I will conclude in a minute. I would urge upon the hon. Prime Minister that whosoever be those people, however mighty they may be, they must be brought to justice. If they are left out – whose names are mentioned in the report – then the nation will feel that whatever happens, whatever be the promises made, the old same thing continues in this country. This cannot be allowed. I hope the Government will take action and see to it that such a carnage never occurs in this country again.
With these words, I conclude.
MR. DEPUTY-SPEAKER: Dr. Arun Kumar Sarma – not here. Shri P.C. Thomas.
SHRI P.C. THOMAS (MUVATTUPUZHA): Sir, it is a sad fact that one of the political stalwarts of India was assassinated on 31st October, 1984. It was a shocking fact that just after that, a large-scale massacre had taken place against a particular community. Leave alone the Government, the whole country is to do penance to atone for this large-scale massacre which had taken place against a particular community, which has been doing a lot of service to humanity and also to the Indian community.
The fact that the culprits are still at large makes it a little bit disturbing and alarming. The Action Taken Report in this regard is really a disappointment to us. The Government of the day should have been more prudent to act a little bit carefully with regard to what has been stated in the Nanavati Commission Report which has come 21 years after the incident.
Many sections of this House, including those sections which are supporting the Government, have said today about the heinous crime and also about the fact that the Commission itself has not gone into all the aspects and has not gone into full length and breadth of the seriousness of the crime. In that case, what about the minimum that has been brought out? It is a fact that all sections of this House now admit that action has been taken against what minimum has been stated in the Report. It is a fact that the Report very clearly says that activists of one particular political party were involved in it. It has been stated that a large number of people were brought from outside Delhi also. It has also been said that there were instigations which were made by responsible persons who were there holding various important Offices. It might be the party, might be the Government or might be the police officers. It has been clearly stated about that aspect[R85] .
[bts86] So, there is no reason why a very stringent action should not be taken against those who have been indicted in this report. On behalf of my Party I would submit that the hon. Prime Minister has already stated that due action will be taken and I would submit that action, which is going to be taken, must be implemented today itself before the adjournment of this House.
SHRI K. FRANCIS GEORGE (IDUKKI): Sir, in a democracy like ours, the Government at the Centre and the States are duty bound to protect the life and property of its citizens. Sir, it is a matter of grave concern that the law and order machinery failed miserably and the responsibility of the political Executive at that time is all the more condemnable. Our country, since Independence, had to face several of these unfortunate happenings not only in Delhi or Gujarat but in several other parts of our country. In all these places we have seen the failure of or outright connivance of the political leadership and the law and order machinery in not protecting the victims. When we go through the report, we can see any number of cases where the law and order machinery failed to act and failed to give timely help to the innocent and helpless victims. Does the Opposition led by the BJP have a moral right to bring this motion? We know what happened in Ayodhya? Consequent to that incident in Ayodhya, what happened throughout the country and we have also seen what happened in Gujarat? The then Defence Minister was saying on record that there were no tall men in Gujarat to protect the innocent victims. As far as Ayodhya is concerned, after the destruction of Babri Masjid, the former Prime Minister and the present Leader of the NDA, Shri Atal Bihari Vajpayee Ji said that, that was the saddest day in his life. Now, after a decade, the Leader of the Opposition Shri Lal Krishna Advani Ji has to travel all the way to Pakistan and he also said that 6th December, 1992 was the saddest day in his life.
MR. DEPUTY-SPEAKER: Are you speaking on Nanavati Commission?
SHRI K. FRANCIS GEORGE : Yes, Sir, I am coming to that. If this was the saddest day in the lives of these two leaders, I would like to ask most humbly and with utmost respect to heal the wounds, to repair the wounds that has happened in our country, will they take the lead in reconstructing the Babri Masjid in its original spot? If they take that lead, the nation will believe them when they say that that was the saddest day in their life.
When the Prime Minister spoke, it was very reassuring not only to the Sikh community but to the whole nation. His words were so soothing and it was pregnant with sincerity and commitment. The nation believes the Prime Minister. The UPA’s Chairperson, Shrimati Sonia Gandhi and the Prime Minister, to my knowledge, had expressed their regret to the Sikh community at the happenings in 1984. The Holy Bible says, ‘Blessed are the Peacemakers, blessed are the meek; for they shall see God and they shall inherit the earth.’ Hon. Prime Minister, Shri Manmohan Ji has inherited the rich legacy of secular values that was upheld by Pandit Ji and Indira Ji. So, the nation has got trust and faith in words of the Prime Minister. He has given a solemn assurance in the House that justice will be finally brought to the victims of 1984 riots and this is not for the Sikh community alone. The minorities in this country are reassured. What has happened in Delhi was most unfortunate and the Government should ensure that those responsible for the crimes should be brought before the law. Sir, that is not just for the Sikh community alone[bts87] .
We owe a duty to our founding fathers and to the millions who laid down their lives for the freedom of our country. They wanted India to be a very vibrant democracy where all communities can live in peace and harmony. I hope, Sir, the Government of Dr. Manmohan Singh Ji will come up to the expectations of this nation and our founding fathers.
श्री हरिभाऊ राठौड़ (यवतमाल) : उपाध्यक्ष महोदय, नानावती कमीशन की रिपोर्ट में जो कुछ लिखा गया है, वह बहुत गंभीर है, लेकिन यहां राजनीति से प्रेरित बातें हो रही हैं। मैं बड़ी गंभीरतापूर्वक प्रधान मंत्री जी का भाषण सुन रहा था। मैं कल उन लोगों के पास गया था, जिन्होंने परसों तिलक नगर में रास्ता रोको आन्दोलन किया था, जो आज जंतर-मंतर में धरने पर बैठे हुए हैं। मैंने ऐसा सोचा था कि अब उनको न्याय मिलेगा। आज प्रधान मंत्री जी ने इंटरवीन करते हुए गोल-मोल बातें कहीं। इससे हमें न्याय नहीं मिलेगा। मुझे कल कुछ बूढ़ी औरतें मिलने आई थीं। उन्होंने बताया कि हमें नानावती आयोग की रिपोर्ट नहीं चाहिए, हमें न्याय चाहिए। मैंने उनसे पूछा कि आपको न्याय कैसे मिल सकता है, उन्होंने बताया कि हमारे पास सिर्फ श्री जगदीश टाइटलर को भेज दीजिए, हम न्याय कर लेंगे। उनकी एक ही मांग है कि इसमें जो लोग दोषी पाए गए हैं, जब तक उनके खिलाफ कार्यवाही नहीं की जाती, तब तक उन लोगों को न्याय नहीं मिलेगा।
यहां बोला गया कि चुन-चुनकर मारा गया है - किन लोगों को चुना गया, यह आपको मालूम होगा।…( व्यवधान) मैं केवल चार मिनट ही बोलूंगा, आप कृपा करके मुझे डिस्टर्ब मत कीजिए।…( व्यवधान)
कांग्रेस के साथियों, आप हिम्मत रखिए। आपको सच सुनना पड़ेगा। हम नानावती आयोग की रिपोर्ट के बारे में चर्चा कर रहे हैं। जिन ३,००० सिखों को चुन-चुनकर मारा गया, उनमें से २,००० लोग बंजारा समाज के थे। मैंने देखा है कि बंजारा समाज के लोगों को कैसे चुना गया, लुभाया समाज के लोगों को कैसे चुना गया। यहां बताया गया कि उनके राशन कार्ड देखे गए थे कि राशन कार्ड में किन नामों के पीछे बाई शब्द लिखा था, सिख लोग जनरली अपने नाम के आखिर में सिंह या कौर लिखते हैं, लेकिन जो लोग बंजारा समाज से सिख समाज में आए हैं, वे अपने नाम के आखिर में बाई लिखते हैं। आपको इस बारे में विचार करना पड़ेगा। जिन ३,००० सिखों को जिन्दा जलाया गया, उनमें से २,००० लोग कैसे चुने गए।
मैं सुबह सोच रहा था कि वे २,००० लोग कौन थे। वे शैडयूल्ड कास्ट्स के लोग थे। मैं सोच रहा था कि मुझे कोई अच्छा वकील मिल जाए, तो ठीक है। मैं आपके माध्यम से श्री कपिल सिब्बल को धन्यवाद देना चाहता हूं। एट्रॉसिटीज़ एक्ट के अंतर्गत सरकार को उन लोगों के खिलाफ कार्यवाही करनी चाहिए।एट्रॉसिटीज़ एक्ट उन लोगों पर लगना चाहिए, जिनके नाम आयोग की रिपोर्ट में आए हैं। अगर सरकार ऐसा नहीं करेगी तो हम लोग करेंगे, क्योंकि २,००० लोग, जिनकी बात मैं कर रहा हूं, वे दलित थे। इन्होंने दलितों के ऊपर अत्याचार किया है, यह साबित हो चुका है।…( व्यवधान) प्लीज़, आप घंटी मत बजाइए। आपको दो मिनट मेरी बात सुननी पड़ेगी। मैं आयोग की रिपोर्ट की बात कर रहा हूं।…( व्यव् ÉvÉÉxÉ[R88] ) इस रिपोर्ट में कहा गया है कि मैंने इस निष्कर्ष पर पहुंचना उचित समझा कि श्री जगदीश टाइटलर के विरुद्ध इस बात का विश्वसनीय साक्ष्य है, इस बात की काफी संभावना है कि सिखों पर हमले करवाने में उनका हाथ है। अत: आयोग सरकार से सिफारिश करता है कि वह इस पहलू की जांच करे तथा इस पर आवश्यक कार्रवाई करे। यह निर्देश इसमें मिला है। …( व्यवधान)
अभी जो मंत्री इस पर उत्तर देने वाले हैं, मैं गृह मंत्री और प्रधान मंत्री जी से मैं रिक्वैस्ट करूंगा कि मैंने जो पढ़कर सुनाया है, उस बारे में आप उत्तर दीजिए। मैं कपिल सिब्बल जी को धन्यवाद दूंगा। …( व्यवधान) अगर आपने नहीं किया तो हम लोग एफआईआर दर्ज कराकर आपको अंदर करायेंगे। …( व्यवधान)
उपाध्यक्ष महोदय, लालू जी ऐसा क्यों कर रहे हैं। यह ठीक नहीं है। …( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Please sit down now.
श्री हरिभाऊ राठौड़ : आप एक मिनट सुन लीजिए। इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। …( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Please sit down.
… (Interruptions)
श्री हरिभाऊ राठौड़ : उपाध्यक्ष महोदय, मैं आयोग की बात कर रहा हं। यहां पर श्री पी.जी. गवई की बात हुई थी। कल मैं टी.वी. देख रहा था तो ‘आजतक चैनल में मिस्टर अवस्थी श्री पी.जी.गवई से इंटरव्यू ले रहे थे। श्री पी.जी.गवई, जो नागपुर में हमारे गांव के पास रहते हैं, उन्होंने कहा कि मैंने बार-बार बोला कि मलिट्री बुलाइये, मैंने अपने पंत प्रधान श्री राजीव गांधी जी को भी बोला कि आप इसे देखिये लेकिन किसी ने नहीं देखा। यह बात ‘आज तक’ चैनल पर दिखाई जा रही थी। …( व्यवधान)
MR. DEPUTY-SPEAKER: Nothing should be recorded.
(Interruptions) …* * Not recorded.
SHRI SARBANANDA SONOWAL (DIBRUGARH): Hon. Deputy-Speaker Sir, on behalf of the Asom Gana Parishad Party, I would like to associate myself with the Motion moved by Shri Dhindsa on the issue of the Nanavati Commission Report.
Sir, in this Commission Report, it has been particularly reflected that the Congress Party was in power in 1984 and whatever massacre had taken place, according to the Commission Report, this Party is solely responsible for that. The UPA, under the leadership of Congress Party, is in the Centre now. So without any hesitation, for the greater interest of the country, for the secular image of the country, they should admit the fact that some of their leaders and some of their workers were involved in this ugly crime. That is why, I sincerely request the hon. Prime Minister to offer his sensible apologies to the Sikh community in the country.
Secondly, we believe that the Sikhs have contributed a lot in the freedom struggle to seek freedom of this country as well as to the growth of this country. I think, because of this particular heinous crime, a wrong signal went to the people and now more particularly a confusion, doubt, suspicion or chaos is prevailing in the minds of the Sikhs that there would be no justice done to them. So, it is the duty of the Congress Party in power to remove all these prejudice, hatred and confusion by way of taking some positive steps against the people who were involved in this crime.
Some of the names have been disclosed by the Nanavati Commission Report. I think, if the Congress is sincerely committed to the cause of the Sikhs, they should take strong action against those people who have been pointed out by the Commission Report[r89] .
Secondly, the affected families should be specially taken care of. It is because we have come to know about the tragedies of these affected families through the visual media in the last two days. Their sentiments should be honoured by the UPA Government and they should be specially taken care of.
I believe, if India has to stay as a strong nation, the sentiments of Sikhs and other minority communities should be honoured and protected.
MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Ramdas Athawale. First of all, you go to your seat. पहले आप अपनी सीट पर जाएं।
…( व्यवधान)
श्री रामदास आठवले (पंढरपुर) : उपाध्यक्ष महोदय, ए मेरे वतन के लोगों जरा आंख में भर लो पानी, MR. DEPUTY-SPEAKER: Shri Athawale, we are discussing a very serious matter.
श्री रामदास आठवले (पंढरपुर) : सर, मैं गंभीरता से ही बोल रहा हूं।
“ए मेरे वतन के लोगों जरा आंख में भर लो पानी, इंदिरा जी की जरा याद करो कुर्बानी। ” हम सब लोग जानते हैं कि इंदिरा गांधी जी जब प्रधान मंत्री थीं तो उन्होंने देश की एकता, अखंडता और सैकुलरिज्म को मजबूत करने के लिए अपना बलिदान दे दिया। हम सब लोग जानते हैं कि इंदिरा जी की हत्या के बाद जो भी सिख समुदाय पर अन्याय हुआ, उनके कम से कम ३३० लोगों की मृत्यु हुई।…( व्यवधान) जितने लोगों की भी मृत्यु हुई, हम उसका समर्थन नहीं करते हैं। हम भारत देश के नागरिक होने के नाते, चाहे दिल्ली, गुजरात, मुम्बई या अयोध्या जहां भी इंसीडेंट हो, भारत देश का कोई भी आदमी मर जाता है तो उसके बारे में हम सब लोगों को दुख होना चाहिए और इसी तरह की जो समस्या पैदा हो रही है, उसे समाप्त करने के बारे में हमें सोचना चाहिए। नानावती कमीशन की जो रिपोर्ट आई है, नानावती कमीशन ने, जैसा आप बता रहे हैं कि इनको हटाओ, उनको हटाओ लेकिन जब हम आपसे कहते थे कि इनको हटाओ, उनको हटाओ, लेकिन आप नहीं हटा रहे थे, अगर आपने नहीं हटाया तो हम क्यों हटाएं ? …( व्यवधान) आप अभी कह रहे हैं कि श्री जगदीश टाईटलर को हटाना चाहिए। जब कोर्ट में केस था तो नानावती कमीशन को पूरा अधिकार था। जो साल तक पूरा आपके हाथ में था। नानावती कमीशन ने जो भी रिपोर्ट दी है, जगदीश टाईटलर को उसमें पूरा दोषी नहीं ठहराया है। जो भी उनके ऊपर शंका व्यक्त की गई है, अगर हमारे उधर से मित्र बोल रहे थे कि हम कोर्ट में जाएंगे, एफआईआर दाखिल करेंगे, अगर आप हमारे खिलाफ एफआईआर दाखिल करेंगे तो हम भी आपके खिलाफ एफआईआर दाखिल करेंगे। एफआईआर की बात नहीं है।
18.23 hrs. (Mr. Speaker in the Chair) सर, मेरे लिए अभिमान की बात है कि मेरा भाषण जब चल रहा है तो अध्यक्ष जी, आप चेयर पर हैं और माननीय उपाध्यक्ष महोदय भी उधर आ गये हैं। यह हंसने की बात नहीं है। यह सीरियस बात है।…( व्यवधान) हमारी पार्टी की तरफ से हमारी मांग है कि जिनकी डैथ हुई है, हमारे प्रधान मंत्री जी सिख समाज के हैं और हम आपको बता रहे हैं कि सिख समाज पर जो अन्याय हुआ है, उन पर अन्याय तो हुआ है लेकिन जानबूझकर किसी पार्टी ने या कांग्रेस पार्टी ने अन्याय नहीं किया है। जो अन्याय हुआ है और जिन लोगों ने यह अन्याय उनके ऊपर कर दिया है, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए और जिन्हें रीहैबलिटेट करने की जरूरत है, उन्हें रीहैबलिटेट किया जाना चाहिए, उसमें दो मत नहीं हैं। हम भी सिख समाज के साथ हैं और सिख समाज भी हमारे साथ है। इसीलिए भारत देश की आजादी के लिए सिख समाज की कुर्बानी बहुत बड़ी कुर्बानी है। इसलिए कांग्रेस पार्टी हो या हमारी आरपीआई हो, कोई सी भी पार्टी हो, सिख समाज की कुर्बानी को हम नहीं भूल सकते cé[R90] । सिख समाज के लिए हमने काम किया, कांग्रेस पार्टी ने काम किया, इसीलिए पंजाब में कांग्रेस पार्टी की सरकार है।पंजाब में सिख हमारे साथ रहे हैं। कुछ सिख आपके साथ भी हैं, लेकिन हमारे साथ ज्यादा लोग हैं। मनमोहन साहब भी है सिख,…* अध्यक्ष महोदय : यह रिकार्ड में नहीं जाएगा। आज की कविता ठीक नहीं है।
...( व्यवधान)
श्री रामदास आठवले : अगर आपको रिकार्ड से निकालना है तो निकाल दीजिए, मैंने तो बोल ही दिया है। हमें नहीं चाहिए भीख क्योंकि सारे भारत का है हमारे साथ सिख। सिख हमारे साथ हैं, इसीलिए हम लोगों को यह काम करने की आवश्यकता है। अभी हम लोगों को यह काम भी करना है क…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : आज कविता ठीक नहीं लग रही है।
श्री रामदास आठवले : अध्यक्ष जी, आज ये लोग कह रहे है कि सभी लोगों को रिजाइन करना चाहिए। मुझे लगता है कि टाइटलर साहब को रिजाइन नहीं करना चाहिए, लेकिन जो कानूनी कार्यवाही हो, की जानी चाहिए। मैं टाइटलर साहब को बताना चाहता हूँ कि आप श्री मल्होत्रा जी को टाइट कीजिए! …( व्यवधान)
श्री अनंत गंगाराम गीते : महोदय, यह पूरे दिन भर की चर्चा का मजाक है। …( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Prof. Vijay Kumar Malhotra is smiling.
* Not Recorded.
श्री रामदास आठवले : अगर आप लोग गुस्सा हो रहे हैं तो टाइट मत कीजिए।
MR. SPEAKER: He is smiling. He is taking it in a proper spirit.
श्री रामदास आठवले : इसलिए मुझे यह कहना है कि सिख समुदाय ने हमारे देश के लिए जो कुर्बानी दी है, उसका हमें बड़ा अभिमान है, लेकिन जिस तरह से श्रीमती इन्दिरा गांधी, राजीव गांधी जी और महात्मा गांधी जी की हत्या की गयी, उसके कारण को खत्म किए जाने की आवश्यकता है। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : आप अपनी बात समाप्त कीजिए।
श्री रामदास आठवले : आप अगर हमारा रिजाइन मांग रहे हैं तो मोदी जी को क्यों बनाए रखना चाहते हैं? अगर आप हमारे कहने पर उनको नहीं हटा सकते हैं तो हम आपके कहने पर अपने लोगों को नहीं हटा सकते हैं।मैं अन्त में यह कहते हुए अपनी बात खत्म करूंगा क हम सभी लोगों को इस तरह की घटनाओं को फिर होने से रोकने के लिए काम करना चाहिए और देश की मजबूती के लिए काम करने की आवश्यकता है।
श्री असादूद्दीन ओवेसी (हैदराबाद) : किसी शायर ने ठीक ही कहा है :
“जब चुप रहेगी जुबाने खंजर, लहू पुकारेगा आस्तीं का।” यह इस मुल्क की बदकिस्मती रही है कि इस मुल्क में जितने भी फसादात हुए, सबसे ज्यादा नुकसान अकलियतों को हुआ। साबित वजीरे आजम मरहूम मिसेज मोहतरमा इन्दिरा गांधी के बेदर्दी से कत्ल के बाद देहली में जो फसादात हुए, मैं उसको फसाद नहीं कहूंगा बल्कि नस्लकसी कहूंगा। एक मंसूबाबंद तरीके से सिख बिरादरी को टारगेट बनाया गया, उनको लूटा गया, मारा गया, पीटा गया। मैं हुकूमत से यह गुजारिश करूंगा और मेरा मुतालबा भी है कि जो कुछ भी सिफारिशात जस्टिस नानावती ने अपनी रिपोर्ट में दी हैं, उन पर सख्ती से अमल किया जाए और इसलिए अमल किया जाना चाहिए क्योंकि आने वाले दिनों में लिब्राहन कमीश्न की रिपोर्ट भी पेश होने वाली है। मैं यहां पर बैठकर सुन रहा था कि हमारे साबित वजीरे दाखिला के मनिस्टर ऑफ स्टेट ने बड़ी जोरदार तकरीर की है और इंशा अल्लाह जब यहां हुकूमत लिब्राहन कमीशन की रिपोर्ट टेबल करेगी, तब हम यही अल्फाज दोहराएंगे और आपके कानों को सुनाएंगे। उस वक्त हम आपके जमीर से यह सवाल करेंगे कि जब आप यहां पर इतना उड़-उड़कर कह रहे हैं और इतनी मोहब्बत और जज्बे का मजारा कर रहे cé*[MSOffice91] मुझे अफसोस भी हुआ कि गुजरात में, उन्हीं की सरजमीं पर उन मुसलमानों का कत्लेआम हो रहा था, खून की होली खेली जा रही थी, जैसी कि सिखों के साथ खेली गई थी। उस वक्त आपका जमीर नहीं जागा। उस वक्त आपमें इन्सानियत पैदा नहीं हुई इसलिए कि मरने वाले मुसलमान थे। मगर बहरहाल ये तमाम चीजें हैं, जो अवाम पर अयां होंगी। मैं हुकूमत से गुजारिश करूंगा कि जल्द से जल्द लिब्रहान कमीशन की रिपोर्ट टेबल की जाए और यूपीए हुकूमत ने जो वादा किया है कि फसादात की रोकथाम के लिए एक कानून को लाया जाएगा, उसे जल्द से जल्द लाने की जरूरत है। मैं एनडीए के लोगों से भी गुजारिश करूंगा कि वे मगरमच्छ के आंसू न बहाएं। आपका रिकार्ड सारे हिन्दुस्तान की अवाम जानती है। आप यह भी जानते हैं कि यह मुल्क १९९२ का मुल्क नहीं है, २००४ का मुल्क है, जिसमें तमाम फिरकापरस्त ताकतों के खिलाफ वरडिक्ट देश की अवाम ने दिया है। इसीलिए इस हुकूमत को बराबर जो यह मेनडेट मिला है, उसे पूरा करे। यहां पर किसी को बचाने का काम हम नहीं करने वाले हैं। बराबर जिन पर इल्जामात साबित होंगे, उन्हें कैफो किरदार तक पहुंचाने की जरूरत है। इन लोगों की बातों को सुन कर किसी शाइर ने बड़ा खूब कहा है -
वह कत्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता हम आह भी भरते हैं तो हो जाते हैं बदनाम।
यह बदवक्ती है अक्लियतों की। यहां पर सिखों के साथ जो जुल्म हुआ, हम उसकी मजम्मत करते हैं। मगर साथ ही साथ हुकूमत के साथ मुतालिबा करते हैं कि वह जल्द से जल्द फसादात रोकने के लिए कानून इवान में पेश करे, ताकि मुस्तकबिल में इस तरह की नस्लकशी को रोका जा सके।
प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा (दक्षिण दिल्ली) : अध्यक्ष जी, मुझे उन सब बातों को दोहराना नहीं है, जो इस समय यहां पर कही गई हैं। मैं सिर्फ दो-तीन बातों का उल्लेख करना चाहता हूं। जिस समय नानावती आयोग की रिपोर्ट और एक्शन टेकन रिपोर्ट आई, तो सारे देश में एक ऐसा माहौल बना क the whole country was shocked. कोई ऐसा टेलीविजन चैनल नहीं था, कोई ऐसा मीडिया का अखबार नहीं था, जिसने उसकी निंदा न की हो, उसकी भत्र्सना न की हो। सारे देश ने उस पर लानत भेजी कि चार हजार से ज्यादा लोगों की हत्या के बाद सरकार की एक्शन टेकन रिपोर्ट में उसे पूरी तरह से व्हाइट वाश किया गया है, कालिख पोत दी गई है और ऐसी स्थिति पैदा कर दी गई है। जब यह रिपोर्ट आई और यह सब हुआ, उसके बाद अंदाजा यह लग रहा था कि कांग्रेस पार्टी में एक पुनरावलोकन हो रहा है, आत्मावलोकन हो रहा है कि शायद प्रधान मंत्री जी आज कोई बड़ी भारी घोषणा करने वाले हैं। लगातार अखबारों में यह छप रहा था कि कई मीटिंग्स हुईं। उन मीटिंग्स में प्रधान मंत्री जी का विचार था कि कार्रवाई होनी चाहिए, कुछ का विचार था कि नहीं होनी चाहिए। आखिर में कांग्रेस पार्टी इस नतीजे पर पहुंची कि इस देश की भावनाओं को देखते हुए कुछ बड़ी कार्रवाई करने की जरूरत है।
अध्यक्ष जी, मैं कहना चाहता हूं कि मुझे बहुत निराशा हुई। सारा देश देख रहा था, सारा मीडिया देख रहा था कि प्रधान मंत्री जी क्या घोषणा करने वाले हैं। उन्होंने पहले तो एक लम्बा वक्तव्य दिया। मैं उसे इस समय दोहराना नहीं चाहता हूं। उन्होंने पंडित जवाहर लाल नेहरू और प्रताप सिंह कैरों का जिक्र किया और यह कहा कि ये दोनों उस वक्त के महान व्यक्ति थे, जिन्होंने पंजाब को बनाया। परंतु प्रताप सिंह कैरों को किसने निकाला और किसने उन्हें मुख्य मंत्री के पद से हटाया, यह सभी जानते हैं। प्रताप सिंह कैरों को कांग्रेस पार्टी ने मुख्य मंत्री पद से हटाया था। उस वक्त नेहरू जी ने कमीशन बनाया और उसके बाद प्रताप सिंह कैरों को हटा दिया। बाद में उनकी हत्या हुई। हत्या में कौन लोग शामिल थे, यह भी सभी जानते हैं। इसलिए उन सारी बातों का जिक्र उन्होंने अकाली पार्टी के खिलाफ किया और यह कहा कि अकाली पार्टी ध्यान रखे इस बात का कि पंजाब में कहीं दोबारा आतंकवाद न आ जाए।
मैं प्रधान मंत्री जी से बड़ी नम्रतापूर्वक कहना चाहता हूं कि पंजाब में आतंकवाद को दोबारा लाने की बात कौन कर रहा है। आपके ही मुख्य मंत्री खालिस्तान के सबसे बड़े अड्डे कनाडा में गए। जहां पर भिंडरांवाला जिंदाबाद और खालिस्तान जिंदाबाद के नारे लिखे हुए थे। वहां यह भी लिखा हुआ था कि खालिस्तान बनेगा। वहां जाकर आपके मुख्य मंत्री सरोपा लेते हैं और उन लोगों की प्रशंसा करते हैं। पंजाब में जो मानव बम पकड़ा गया, उसके बारे में कहा गया कि यह तो बहुत अच्छा आदमी है, केवल बादल साहब निकम्मे हैं। इससे पता चल जाता है कि पंजाब के अंदर कौन आतंकवाद को दोबारा पैदा कर रहा है। हम आपसे सहमत हैं कि पंजाब में दोबारा आतंकवाद नहीं आना चाहिए। वहां पर आठ हजार लोगों के मारे जाने के बाद बहुत मुश्किल से आतंकवाद खत्म हुआ था। अब पंजाब में दोबारा आतंकवाद उभर रहा है, इसे कौन ला रहा है, आप इस बात पर विचार कीजिए। आपने अकाली पार्टी को नुकसान पहुंचाने के लिए भिंडरांवाला को खड़ा किया था। सारी दुनिया इस बात को जानती है कि कांग्रेस पार्टी ने भिंडरांवाला को वहां पर लाकर उसका समर्थन किया, अकाली पार्टी को खत्म करने के ÉÊãÉA[R92] ।
जब भिंडरवाला भस्मासुर बन गया…( व्यवधान) पंजाब में अकाल तख्त पर, स्वर्ण-मंदिर पर किसने हमला किया, किसने सेना भेजी। उसके कारण वहां आतंकवाद बढ़ा था। आज फिर अकाली पार्टी को नुकसान पहुंचाने के लिए, अकाली पार्टी से चुनाव लड़ने के लिए, आप फिर से आतंकवादियों को सहारा दे रहे हैं। जिन्होंने दिल्ली के सिनेमाघरों में जाकर बम फैंके, वे आतंकवादी कहां रह रहे थे, किनके घरों में छिपे हुए थे? आप अकाली पार्टी को नुकसान पहुंचाते-पहुंचाते देश को नुकसान पहुंचाएंगे, अकाली पार्टी को नष्ट करते-करते देश को नष्ट करेंगे। उस आतंकवाद को रोकने के लिए आप कदम उठाइये, हम आपका साथ देंगे। अकाली पार्टी को कमजोर करने के लिए, पंजाब में फिर से आतंकवाद लाया जा रहा है।
माननीय प्रधान मंत्री जी, आपने दूसरी बात यह कही कि सिखों को मेन-स्ट्रीम से अलग न किया जाए।…( व्यवधान) मैं तो माननीय प्रधान मंत्री जी ने जो कहा है उस पर अपनी निराशा व्यक्त कर रहा हूं।
माननीय प्रधान मंत्री जी, जो कार्रवाई आपको इस रिपोर्ट पर करनी चाहिए, जब आप वह कार्रवाई नहीं करेंगे करेंगे और नानावती कमीशन की रिपोर्ट पर कार्रवाई नहीं होगी तो क्या सिखों के मन के अंदर ग्लानि और दु:ख नहीं रहेगा और वे अपने मन में यह नहीं सोचेंगे कि उनको न्याय नहीं मिला। आप बताएं कि कौन उनको मेन-स्ट्रीम से अलग करने की कोशिश कर रहा है। माननीय प्रधान मंत्री जी, आपके प्रधान-मत्रित्व-काल में ऐसी रिपोर्ट बना दी गयी जिसमें चार हजार सिखों की हत्या के बाद एक भी आदमी को सजा नहीं होगी। माननीय प्रधान मंत्री जी, आपने जो अपना वक्तव्य दिया है उसमें हम आशा करते थे कि सारे देश की लानत के बाद आप इस रिपोर्ट पर कोई बड़ी कार्रवाई करने की घोषणा करेंगे। आपने कहा कि मैं इसको देखूंगा, उस पर विचार करुंगा और फिर कानून की राय ली जाएगी। माननीय प्रधान मंत्री जी, हमें आपके वक्तव्य से बहुत निराशा हुई है। हम कहना चाहते हैं कि जितनी निराशा हमें एटीआर से हुई थी, उससे कहीं ज्यादा निराशा हमें आपके वक्तव्य से हुई है, आपके भाषण से हुई है। यही मैं कहना चाहता था।
श्री जय प्रकाश (हिसार) : मैं आपसे केवल यह पूछना चाहता हूं कि आप राजीव गांधी-लौंगोवाल समझौता मानते हैं या नहीं।
गृह मंत्री (श्री शिवराज वि. पाटील) : अध्यक्ष जी, बहुत से माननीय साथियों ने यहां पर अपने विचार प्रकट किये हैं और वे विचार सारे सदन ने सुने हैं। माननीय प्रधान मंत्री जी ने यहां पर अपना वक्तव्य दिया और वह वक्तव्य भी हम सभी लोगों ने बड़े ध्यान से सुना है। मैं कहना चाहता हूं कि माननीय सदस्यों ने जो विचार यहां पर व्यक्त किये हैं उनको ध्यान में रखते हुए ही माननीय प्रधान मंत्री जी ने अपना वक्तव्य यहां पर दिया है। हम जो यहां पर उनके साथ हैं, हमने जो विचार यहां पर दिये हैं, उन विचारों के मुताबिक जो आयोग की रिपोर्ट आयी है, उस पर हम पूरी तरह से काम करेंगे, उसमें कोई अंतर नहीं आयेगा। देश को एक रखने की भावना से, भाई-चारे की भावना से, हिंदू-मुस्लिम-सिख-ईसाई सभी इस देश के हैं, यह भावना बनाते हुए, जिन्होंने भी जो काम नहीं करना चाहिए था, किया है, उनके खिलाफ कार्रवाई करने और न्याय देने का जो विचार है, उसको ध्यान में रखकर हम काम करåMÉä[r93] ।
महोदय, मैं पहली बात यह कहना चाहता हूं कि जो नानावती आयोग बना, वह वर्ष २००० में बना। नानावती आयोग पिछली सरकार ने बनाया था और आयोग ने चार साल बाद रिपोर्ट दी। हम यहां खड़े होकर पूरी जिम्मेदारी से कह रहे हैं कि उसमें कोई अंतर नहीं आएगा, जो भी सिफारिशें की गई हैं, उन पूरी सिफारिशों पर हम अमल करेंगे। असल में दस सिफारिशें की गईं थीं, ऐसा हमने यहां बताया और नौ सिफारिशों के बारे में हमने पहले भी कह दिया था कि अमल करने जा रहे हैं, जैसा कि सिफारिश में कहा गया है। सिर्फ एक सिफारिश …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : क्या बात है? आप बैठ जाइए। यह सही नहीं है।
श्री शिवराज वि. पाटील : सिर्फ एक सिफारिश के बारे में जो चीज थी, वह खुलकर सामने आ गई है। आज हम यहां प्रधानमंत्री जी से सभी लोग मिलकर कह रहे हैं कि उस विषय पर जो भी कार्यवाही करना जरूरी है, उस सिफारिश के मुताबिक करेंगे। इसके बाद भी जब चर्चाएं होती हैं, तो अलग-अलग प्रकार से विचार यहां पर प्रकट किए जाते हैं। इसलिए मैं बहुत संक्षेप में बताना चाहता हूं कि सिफारिशें क्या हैं? हमने उनके खिलाफ क्या कहा है? कुछ अधिकारियों और जवानों के खिलाफ कार्यवाही करने की सिफारिश की गई है। हमने कह दिया है कि हम कार्यवाही करेंगे। कुछ राजकीय नेताओं के खिलाफ कार्यवाही करने की सिफारिश की गई। उनमें एक को छोड़कर, हमने कहा कि उन सभी के खिलाफ कार्यवाही करने जा रहे हैं।इसके बाद भी लीपापोती की जा रही है, इन सिफारिशों को माना नहीं जा रहा है, ऐसा बार-बार कहा जा रहा है।…( व्यवधान) वह भी माननीय प्रधानमंत्री जी के वक्तव्य के बाद कहा जा रहा है और लखित रूप में उनके हाथ में देने के बाद भी कहा जा रहा है।मैं फिर से यह बात दोहराना चाहता हूं, उन सभी के लिए जो यहां पर बैठे हुए सदस्य हैं, बाहर जो हमारे भाई-बहन हैं और जो मीडिया के हमारे साथी हैं, उन सभी से मैं कहना चाहता हूं कि सारी सिफारिशों के लिए हमको जो कुछ करने को कहा गया है, हम करने जा रहे हैं।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : यह सही नहीं है। This is a very solemn debate. I am thankful to all sides. May I make a request? सुशील जी यह रिकार्ड नहीं होगा। We have had a very good discussion. Everybody has co-operated and I am thankful to all hon. Members. Now, on behalf of the Government, the hon. Minister of Home Affairs is replying. So, please listen to him. ठीक है, ढींडसा साहब को मौका मिलेगा।
श्री शिवराज वि. पाटील : महोदय, यहां जो दूसरी बात कही गई है कि पुलिस रिफार्म होना चाहिए, इस प्रकार की सिफारिशें हैं। हमने अपनी रिपोर्ट में बड़े सविस्तार से, बड़ी गहराई से और खुलकर कहा है कि पुलिस रिफाम्र्स की बात हमें मान्य है।इतना ही नहीं, पहले से ही हमने पुलिस रिफाम्र्स शुरू कर दिया है। वह पूरा हुआ है कि नहीं, उससे ज्यादा करना है कि नहीं करना है, वह और बात है। इस पर हम ध्यान देंगे। कम्पंसेशन की बात यहां पर बहुत सारे सदस्यों ने कही है और यह बात सही है। मैं आपसे कहना चाहता हूं कि हमारे नेताओ ने, हमारे सभी सदस्यों ने जो सबसे पहली बात बताई है कि किसी की जान तो हम वापस नहीं ला सकते, मगर जो उनके कुनबे के लोग हैं, उनको जितनी भी मदद हम कर सकते हैं, हमे करनी चाहिए, इस प्रकार की हमारे पास सूचनाएं हैं। अब मैं कहना चाहता हूं कि कम्पंसेशन दिया गया, कितना दिया गया है, कैसे दिया गया, इसका विस्तार से एक्शन टेकेन रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है[c94] ।कितने लोगों को दिया गया? जिस के घर में एक मृत्यु हुई, उसके घर वालों को साढ़े तीन लाख रुपए दिए हैं. वे कम हैं या ज्यादा हैं, वह अलग बात है। आपकी राय में यह राशि ज्यादा देनी चाहिए, उससे हम नाराज नहीं होंगे। हम उस पर विचार करेंगे लेकिन हमने मुआवजा दिया है, बहुत लोगों को दिया है, यहां पर दिया है और बाहर भी दिया है। जैसा कि आयोग ने कहा कि समान रूप से मुआवजा दीजिए, हमें उस पर कोई एतराज नहीं है। मैं फिर से दोहरा रहा हूं।आयोग पर मैं अपना वक्तव्य समाप्त करना चाहता हूं। बहुत से सदस्यों ने इस पर अपने विचार प्रकट किए थे, जिन का जवाब दूसरे सदस्यों ने दिया है। उन्हें फिर दोहराने की जरूरत नहीं है। हमारे सामने सवाल यह पैदा होता है कि ऐसी घटनाओं पर सजा क्यों नहीं होती है? इस प्रकार का हम सब लोगों का मत बन गया है।
अध्यक्ष महोदय, यहां पर जिस ने भी चर्चा गहराई, शांति और विस्तार से सुनी होगी तो एक बात निकल कर आ रही है कि सजा क्यों नहीं होती है? उसे पनिश क्यों नहीं कर रहे हैं, यह बात यहां आई। …( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Hon. Members, are you interested to listening to debate; otherwise, I will tell him to conclude his speech?
… (Interruptions)
श्री शिवराज वि. पाटील: मैं बड़ी नम्रता से कहना चाहता हूं और मेरी गुजारिश है क आप उसे गलत अर्थ में न लें, शांति से सुनें। आज इस विषय में पूरे दिन चर्चा हुई। इस चर्चा में पॉलटिक्स कितना था और न्याय करने की क्या भावना थी? हम इसका एनालसिस करें तो इसका जवाब मैं नहीं दूंगा। विपक्ष के लोग देंगे कि इसमें पॉलटिक्स कितना था, न्याय की भावना कितनी थी, कांग्रेस पार्टी के खिलाफ बोलने की कितनी इच्छा थी? जो हुआ है, वह बुरा है, नहीं होना चाहिए था। किस प्रकार से नहीं हो सकता है? बार-बार कहा गया है कि कांग्रेस पार्टी इसके लिए जिम्मेदार है। रिपोर्ट में साफ तौर पर बातें कही गयी हैं। लोगों ने उसे गहराई से पढ़ा और कोट किया है। मैं फिर से पढ़ना और कोट नहीं करना चाहता हूं। मैं पढ़ सकता हूं, क्योंकि वह अंडर लाइन है। क्या यह सही नहीं है कि रिपोर्ट में यह नहीं लिखा है कि दिल्ली में जो हुआ, जो हमारे नेता थे, जो उनके साथ काम करने वाले लोग थे या ऊपर के स्तर के जो कांग्रेस पक्ष के नेता थे, उनका कोई हाथ नहीं है। यह इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है या नहीं? आपने कहा है …( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Nothing will be recorded.
(Interruptions) …* MR. SPEAKER: The reply is not a formality. You have to listen to him.
… (Interruptions)
श्री शिवराज वि पाटील: अगर यह कहा है तो क्या बार-बार इसे नजरअन्दाज करते हुए लोकल लीडर्स ने यह किया है, उस बात को ऊपर के लोगों पर थोपना ठीक है या नहीं? मैं केवल यह सुनना चाहता हूं। इससे ज्यादा इस बात पर भाषण देना नहीं चाहता हूं। …( व्यवधान)
श्री अनंत गंगाराम गीते : अध्यक्ष महोदय, होम मनिस्टर मान रहे हैं कि लोकल लीडर्स ने किया। …( व्यवधान)
* Not Recorded.
MR. SPEAKER: He has not yielded. I cannot compel him to yield.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Nothing will go on record.
(Interruptions) … * श्री शिवराज वि. पाटील: दूसरी बात यह है कि जब कभी ऐसे हादसे होते हैं, घटनाएं होती हैं तो जिन्होंने किया है, उनके साथ-साथ निरपराध लोगों के नाम भी जोड़े जाते हैं। पुलिस इनवैस्टिगेशन करती हैं। मैंने कोर्ट में काम किया है और आपने भी किया है। हमने देखा है कि जब अपराधी के साथ निरपराधी का नाम जोडा जाता है तो न्याय करने में बहुत कठिनाई होती है। राष्ट्रीय भावना से प्रेरित होकर कोई करता है तो ऐसी घटना और भी बढ़ जाती है और न्याय करने में बड़ी मुश्किल होती है। मैं यहां खड़े होकर पुछू कि आप बार-बार दूसरों का नाम ले रहे हैं, पांच साल में आपने क्यों नहीं किय्ाा[R95] ?
अगर मैं यह पूछूं कि आप पांच-छ: साल में कोर्ट में क्यों नहीं गए तो उसका कोई जवाब नहीं मिलेगा। मगर मैं इन सब बातों में नहीं जाना चाहता हूं। अंत में मैं इतना ही कहना चाहता हूं कि ये जो छोटी-छोटी बातें हैं जिनकी वजह से हमारा मन छोटा हो जाता है, उन्हें दूर रखकर…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : आप बोलते रहिए।
...( व्यवधान)
प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा : महोदय, यह छोटी बात है।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER : I am very sorry. आप बैठ जाइए।
… (Interruptions)
श्री शिवराज वि. पाटील : अध्यक्ष महोदय, मैं यह कह रहा हूं कि छोटे मन से कोई बड़ी बात नहीं की जा सकती। हम यह कहना चाहते हैं कि हमारी मां के जैसी हमारी नेता हमारी आंखों के सामने चली गईं। जब उनका शव पड़ा हुआ था तो उनका बेटा गली-गली, कूंचे-कूंचे में बताने के लिए घूम रहा था। हमने अपनी आंखों से देखा है, आप लोगों ने भी अपनी आंखों से देखा होगा। आपका बड़ा मन है तो आप कबूल करेंगे, अगर छोटा मन है तो कबूल नहीं करेंगे।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER : You draw your own conclusion. I cannot put words into his mouth, nor you can.
… (Interruptions)
* Not Recorded.
श्री शिवराज वि. पाटील : महोदय, हमारी माता हमारे से हटाई गईं, इतना ही नहीं हमारे भाई और बहन, जो इनोसेंट थे, हमारे से हटाए गए। उसका भी दर्द हमारे मन में है, यह नहीं है कि माता का मन में दु:ख ले रहे हैं।…( व्यवधान) हमारा दु:ख दुगुना है, हमारा दु:ख एक गुना नहीं, हमारा दु:ख दुगुना है। हमारी माता गई, हमारे भाई-बहन चले गए, इसका भी हमें दु:ख है, इसे नहीं भूलना चाहिए।
श्रीमन्, हम इतना ही कह रहे हैं कि जो सही है वह सही है और जो बुरा है वह बुरा है। जिसने बुरा किया है उसे हम संरक्षण नहीं देंगे, जो सही नहीं है उसे हम ढांपने की कोशिश नहीं करेंगे। इस समय हम अपनी तरफ से, जो सोल्स हमसे दूर हैं, उनका अभिवादन करते हैं और भगवान से प्रार्थना करते हैं, इस सदन में बैठे हुए बूढ़े और बुजुर्गों से, कि हमें बांटिए मत, हमको बांटिए मत, धर्म के नाम पर, पार्टी के नाम पर हमको मत बांटिए, हमें यूनाइट रहने दीजिए और जो कर सकते हैं कीजिए। अगर नहीं कर सकते हैं तो हम अपना कर्तव्य इस देश को एक रखने के लिए जरूर करेंगे।
श्री सुखदेव सिंह ढींडसा (संगरूर) : अध्यक्ष महोदय, मैं अपनी बात शुरु करने से पहले दुखदायी घटना का जिक्र करना चाहता हूं। १९८४ घटना की जो विधवायें यहां प्रोटैस्ट करने के लिए आईं थीं, मुझे जानकारी मिली है कि उन पर लाठी चार्ज हुआ और वे जख्मी हैं। वे वहां बैंठीं, उन्होंने वहां धरना दे दिया । आप विधवाओं की बात कह रहे थे, लेकिन आज उन विधवाओं की व्यथा कोई सुनने वाला नहीं है। यहां प्रधान मंत्री जी बैठें हैं और गृह मंत्री जी भी बैठे हैं। दूसरी बात मैं आपका आभार व्यक्त करता हूं, पहले भी प्रकट किया था । यहीं नहीं, मैं मीडिया का, चाहे वह इलैंक्ट्रोनिक मीडिया हो, प्रिन्ट मीडिया हो, जब यह रिपोर्ट इस सदन में रखी गई, तब उन्होंने प्रैंस और टीवी में उसे फ्लैश किया और दुनिया को स्थिति के बारे में बताया । मैं उनका भी आभार व्यक्त करता हूं।
मैं सभी सदस्यों का आभारी हूं जिन्होंने हमारे जजबात देखते हुये, हमारे साथ हुई बेइन्साफी को मद्देनजर रखते हुये ग्रुप-पार्टी से ऊपर उठकर हमें सपोर्ट दी और एक्शन लेने के लिये बात की। एन.डी.ए. के सभी सदस्यों, केवल कांग्रेस को छोड़कर सभी ने साथ दिया। मैं माननीय प्रधान मंत्री और लीडर ऑफ दि अपोज़ीशन का आभारी हूं कि उन्होंने इस डिबेट में पार्टसिपेट किया। माननीय प्रधान मंत्री जी सिख हैं, इसलिये उनके जज्बात मुझे मालूम हैं, उनके साथ बहुत कुछ हुआ। श्रीमती मेनका गांधी सिख की बेटी हैं. गांधी परिवार की बहू हैं जिन्होंने अपने जज्बात से बात कही। प्रधान मंत्री जी ने कहा कि इसमें पौलटिक्स नहीं आनी चाहिये। अध्यक्ष जी, आप इसके गवाह हैं क्योंकि आपने भी सपोर्ट दी है, जब मैं भाषण कर रहा था।
अध्यक्ष जी, मेरा कहना .यह भी है कि जिन पैलटिकल लोगों के स्टेटमेंट आये, उन्होने एफिडेविट दिये जिनमें श्री विजय कुमार मल्होत्रा, श्री मदन लाल खुराना थे, उनके बारे में बात नहीं की। जस्टिस तारकुंडे किसी पार्टी से नहीं थे, चीफ जस्टिस सीकरी किसी पार्टी से नहीं थे। हिन्दुस्तान के बड़े बड़े लोग राइटर्स श्री पटेवंत सिंह, श्री खुशवंत सिंह, श्री कुलदीप नैयर, श्री आई.के. गुजराल और न जाने कितने नाम हैं जिन्होंने अपने स्टेटमेंट और एफिडेविट दिये, आप उन पर ध्यान दीजिये लेकिन किसी ने उन लोगों की तरफ ध्यान नहीं दिया। माननीय प्रधान मंत्री जी, मुझे इस बात का दुख है कि कोई एक्शन लेने की बात नहीं कही गई…( व्यवधान) मैं यह भी कहना चाहता हूं कि इसमें कोई दो राय नहीं हैं कि श्रीमती इन्दिरा गांधी बहुत बड़ी लीडर थीं, देश की प्रधान मंत्री थी। इन लोगों ने कहा कि इसलिये देश में रिएक्शन हुआ जो तीन दिन तक होता रहा। मैं इन लोगों से पूछना चाहता हूं कि क्या महात्मा गांधी इन से कम बड़े लीडर थे, जब उनका कत्ल किया गया…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : आप लोग बैठिये।
श्री सुखदेव सिंह ढींडसा : मैं उसी बात पर आ रहा हूं। महात्मा गांधी को नाथू राम गौडसे ने मारा…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : यह बड़े दुख की बात है कि इतने सीरिस मैटर पर डिसकशन हो रहा है।
श्री सुखदेव सिंह ढींडसा : इसलिए क्या सभी को मार देना था?
अध्यक्ष महोदय : सभी जानते हैं कि किसने मारा?
श्री सुखदेव सिंह ढींडसा : श्री राजीव गांधी का कत्ल …* अगर श्रीमती गांधी का कत्ल हो गया तो क्या सभी सिखों को मार दिया जाता?…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Be quiet.
… (Interruptions)
SHRI A. KRISHNASWAMY (SRIPERUMBUDUR): Sir, it should be expunged. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: I cannot hear all of you.
… (Interruptions)
THE MINISTER OF SHIPPING, ROAD TRANSPORT & HIGHWAYS (SHRI T.R. BAALU): Sir, he has cast aspersions. It should be expunged.… (Interruptions)
SHRI SUKHDEV SINGH DHINDSA : I am supporting your cause. … (Interruptions)
MR. SPEAKER: Please sit down. I am on my legs.
… (Interruptions[reporter96] )
19.00 hrs. अध्यक्ष महोदय : आप बैठ जाइये। ढींडसा जी, आप भी बैठ जाइये। Please sit down. Kindly allow me to understand what has happened in the House.
… (Interruptions)
SHRI S.K. KHARVENTHAN (PALANI): Sir, he is insulting our people. Why is he dragging them into this issue? … (Interruptions)
* Expunged as ordered by the Chair MR. SPEAKER: Please sit down. I will see and delete it.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Okay, it is expunged.
… (Interruptions)
श्री सुखदेव सिंह ढींडसा : मैंने तो सपोर्ट किया है। उसमें सभी नागरिकों का कोई कसूर नहीं था।…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: We have already had enough trouble. Therefore, do not increase it.
… (Interruptions)
श्री सुखदेव सिंह ढींडसा : मैंने यही कहा, मैंने इनकी मदद की है।
MR. SPEAKER: Mr. Dhindsa, you have been speaking so far to the point. Please continue speaking to the point only.
… (Interruptions)
श्री सुखदेव सिंह ढींडसा : दूसरे कांग्रेस के जितने मैम्बर्स बोले हैं, तकरीबन वे सभी पंजाबी ही थे। इसके बाद मैं उनकी बात करने जा रहा हूं।
अध्यक्ष महोदय : पंजाबी मत कहिये, यह कहना ठीक नहीं है। Mr. Dhindsa, primarily they are Members of the House.
… (Interruptions)
श्री सुखदेव सिंह ढींडसा : गुजरात की बात कही गई, जो रिकार्ड पर है कि गुजरात की घटना को िशरोमणि अकाली दल ने कंडैम किया।…( व्यवधान) मैं आज भी कहता हूं।…( व्यवधान)
श्री कपिल सिब्बल :समर्थन वापस क्यों नहीं लिया?
MR. SPEAKER: Mr. Dhindsa, you can tell them that I accept your statement, and you can ignore them.
… (Interruptions)
श्री सुखदेव सिंह ढींडसा : मैं इस ऑगस्ट हाउस में कहना चाहता हूं कि अगर १९८४ के मुजरिमों को सजा दी जाती तो न गोधरा होता, न गुजरात होता और न कोई और घटना होती।…( व्यवधान) यह मैं क्यों कह रहा हूं, यह मैं इसलिए कह रहा हूं कि इस देश में किसी को कुछ नहीं होने वाला है, कोई किसी को भी मारते जाओ, कुछ नहीं होगा। चार हजार सिख मार दिये, उन्हें कुछ नहीं हुआ। यदि गुजरात में मुसलमान मार दोगे तो भी कुछ नहीं होगा। अगर कहीं और मुसलमान या माइनोरिटी के लोगों को मार दोगे…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Please, let us not justify any such incident. Let us not justify it.
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय : यह सही बात नहीं है। यहां नहीं होगा, वहां नहीं होगा, ऐसा बोलना ठीक नहीं है। आप इसके बारे में बोलिये।
श्री सुखदेव सिंह ढींडसा : मैं कह रहा हूं कि अगर उन्हें सजा मिल जाती तो कम से कम जो दंगाई लोग हैं…( व्यवधान)
MR. SPEAKER: The guilty should be punished everywhere. Let this be the message from this House.
… (Interruptions)
SHRI SUKHBIR SINGH BADAL: Sir, this is exactly the point that we are also making here. … (Interruptions)
श्री सुखदेव सिंह ढींडसा : मैं वही तो कह रहा हूं। मेरी बात आप कह रहे हैं। वही बात मैं कह रहा हूं।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : आपने बहुत अच्छा बोला।
श्री सुखदेव सिंह ढींडसा : यदि उन्हें सजा हो जाती तो कम से कम उन्हें डर लगता जो ऐसा करते हैं।…( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : आप लोग थोड़ा चुप कीजिए। आपके प्रधान मंत्री जी ने भाषण दिया, होम मनिस्टर साहब ने भाषण दिया और इतने बुजुर्ग नेताओं ने भाषण दिया, तब भी आप बोले, आप बाहर क्या बोलेंगे, क्या सब कुछ यहीं बोलेंगे।…( व्यवधान)
श्री राम कृपाल यादव (पटना) : कोई गलत बात करेगा तो उसे सपोर्ट कैसे करेंगे।
MR. SPEAKER: Mr. Yadav, you do not have to support it. You only support yourself.
… (Interruptions)
श्री सुखदेव सिंह ढींडसा : एक बात जो प्रधान मंत्री जी ने और मल्होत्रा जी ने कही, वे उसके जवाब में बोले। आप अकालियों के बारे में कह रहे हैं कि कहीं दोबारा टैरेरिज्म न आ जाए। आई.बी. के एक ज्वाइंट डायरेक्टर रिटायर हुए हैं, उन्होंने एक किताब लिखी है। उन्होंने कहा कि मेरी डयूटी थी, (Interruptions) … * यह मैं नहीं कह रहा हूं, यह आई.बी. का ज्वाइंट डायरेक्टर कह रहा है।
MR. SPEAKER: No. Please do not bring those things here as it is not proper to do it. Therefore, do not do it. It is not correct.
… (Interruptions)
MR. SPEAKER: Please do not do it. I would not allow it.
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय : यह सही बात नहीं है, यह क्या बात हो रही है। नानावती कमीशन की चर्चा के बीच में आप ऐसा क्यों बोल रहे हैं।
...( व्यवधान)
MR. SPEAKER: I have already done it. Therefore, please sit down.
… (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय :आप इसका जवाब दीजिए। आप इसके बारे में बोलिये।
श्री सुखदेव सिंह ढींडसा : मैं अपने आप कुछ नहीं कह रहा हूं।
अध्यक्ष महोदय : उन बातों को छोड़िये, सब कुछ कोट नहीं करना चाहिए।
श्री सुखदेव सिंह ढींडसा : मैं किताब का रेफरेन्स दे रहा हूं। बंसल साहब मेरे बहुत प्यारे मित्र हैं, हमारे साथी हैं। इन्होंने बहुत बढ़-बढ़ कर बातें कही हैं। हमारे साथ बहुत सहयोग भी दिया और सब कुछ कहा[R97] ।
उन्होंने दो-तीन बातें कहीं जिनका उत्तर मैं देना चाहता हूं। उन्होंने कहा कि आप उस वक्त मलहम लगाने क्यों नहीं आए। मैं बंसल साहब को कहना चाहता हूं कि रिकार्ड उठाकर देख लें ५ तारीख को हमारे सारे बड़े लीडर जेलों में थे - सरदार प्रकाश सिंह बादल, गुरुचरण सिंह तोहड़ा सभी, लेकिन हमने फैसला किया। सरदार बलवंत सिंह का नाम हमारे प्रधान मंत्री जी ने लिया। वे उस समय फाइनैंस मनिस्टर थे और मैं भी उस वक्त मनिस्टर था। हम दोनों और एसजीपीसी के प्रैजीडैंट राजेन्द्र सिंह धालीवाल बाय एयर एयरपोर्ट पर आए तो हमें दिल्ली में एंटर नहीं करने दिया। हमें कहा कि आप नहीं जा सकते। बीएसएफ का जहाज़ लेकर हमें दोबारा वापस भेज दिया गया। क्या इंसाफ था कि हमें मलहम नहीं लगाने दिया। यह रिकार्ड की * Not Recorded.
बात है। एक बात इसमें मैंशन की कि राजीव-लोंगोवाल समझौता हुआ। उस राजीव-लोंगोवाल समझौते में एक ही मद ऐसी थी जो डेटबाउंड थी। वह क्या थी कि २६ जनवरी को चंडीगढ़ पंजाब के हवाले कर दिया जाएगा। मुख्य मंत्री सरदार बरनाला थे। हमें बताया गया कि आज रात को १२ बजे चंडीगढ़ हमें मिलेगा। हम भी सभी एम.एल.ए. आए थे। मगर वह हमें नहीं मिला। उसी दिन अगले दिन हमने फैसला कर दिया कि आज के बाद …( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Is it relevant?
PROF. VIJAY KUMAR MALHOTRA : It is very much relevant.
SHRI SUKHBIR SINGH BADAL : The Prime Minister raised the issue of Rajiv-Longowal Accord. …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : ठीक है, आप बोलते रहिये। आप लोग बैठिये। आपको मदद ही नहीं करनी है।
...( व्यवधान)
MR. SPEAKER: How is it helping your debate, I do not know.
...( व्यवधान)
श्री सुखदेव सिंह ढींडसा : मैं कोई ऐसी बात नहीं कह रहा हूं। जो इन्होंने कहा है, उसका जवाब दे रहा हूं। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : ये क्या बात है? इस तरह से क्या रिप्लाई होता है?
...( व्यवधान)
श्री सुखदेव सिंह ढींडसा : जो प्रश्न इन्होंने उठाए उनका जवाब दे रहा हूं। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : ठीक है, बोलते रहिये।
श्री सुखदेव सिंह ढींडसा : जो उन्होंने कहा है, उसका जवाब तो देने दो। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : हमको तो बोलने का हक है, इसलिए तो हम चेयर पर बैठे हैं।
...( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Yes, I am allowing you to go on.
...( व्यवधान)
श्री सुखदेव सिंह ढींडसा : मेरे साथियों ने भी और बंसल साहब ने भी रिपोर्ट से पढ़कर सुनाया कि राजीव गांधी जी का उसमें कोई हाथ नहीं था, लेकिन यह कोई नहीं भूला कि उन्होंने यह तो कहा था कि जब बड़ा पेड़ गिरता है तो धरती हिलती है। …( व्यवधान) यह मत भूलिये, यह तो किसी से छिपी हुई बात नहीं है। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : आप छोड़ दीजिए। जितना बोलेंगे, यह सब चलता रहेगा।
...( व्यवधान)
श्री सुखदेव सिंह ढींडसा : मैं ज्यादा समय नहीं लूंगा। एक बात जो मैं कहना चाहता हूं कि होम मनिस्टर साहब ने जवाब दिया, इसकी सीरियसनैस को आप देख लीजिए। ४००० आदमी मर गए, मगर वे कहते हैं कि छोटी-मोटी बातों की बात मत करो। …( व्यवधान) उनके लिए ये छोटी मोटी बात है। …( व्यवधान)
SHRI PAWAN KUMAR BANSAL : The body was lying there and yet he was going around. …( व्यवधान)
MR. SPEAKER: What the hon. Prime Minister said is already on record. If something else is being said, that will show that he is not correctly reporting him.
...( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : होम मनिस्टर इंटरवीन करना चाहते हैं[h98] ।
SHRI SHIVRAJ V. PATIL : Sir, he has mentioned my name. I did not treat these incidents as small things or small incidents. I was saying that approach these big issues not with a small mind. … (Interruptions)
श्री सुखदेव सिंह ढींडसा : सर, …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : आप बोलिए। आपकई सोच छोटी नहीं है, बड़ी है। I have allowed you rightly. Otherwise, I would not have allowed you.
श्री सुखदेव सिंह ढींडसा : अध्यक्ष जी, चूंकि होम मनिस्टर साहब ने कहा था कि राजीव गांधी की माता जी का देहान्त हो गया था। इसलिए उन्होंने ऐसा कहा होगा। राजीव गांधी जी की माता जी के मरने के बाद, मैं उनके जजबात समझ सकता हूं, लेकिन जो ४००० लोग दंगों में मर गए, क्या उनकी माता बहिनें नहीं थीं ? उन्हें आज डंडे पड़ रहे हैं। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : आप हमें बोलिए, हम सुन रहे हैं। वे नहीं सुनते हैं।
SHRI SHIVRAJ V. PATIL: Sir, once again I should be given an opportunity. I said, I lost my mother, and I said I lost my brothers and sisters. Moreover, the Police Commissioner has given information that no lathi charge has taken place. This is how they mislead the House. … (Interruptions)
अध्यक्ष महोदय : सुखदेव ढींडसा जी, आपने शुरू में बहुत अच्छा भाषण दिया। उसे पूरे हाउस ने बहुत ध्यान से सुना। हमने भी अच्छी तरह सुना।
...( व्यवधान)
श्री सुखदेव सिंह ढींडसा : अध्यक्ष महोदय, मैं आखिरी बात कहने जा रहा हूं। सारे हाउस के जजबात माननीय प्रधान मंत्री और गृह मंत्री जी ने सुने। हम आपकी कद्र करते हैं, आप भी कद्र करते हैं। अगर प्रधान मंत्री और होम मनिस्टर साहब उन सभी को मानते हैं कि सबने ठीक बात कही और पार्टी लैवल से ऊपर उठकर बात कही, तो उन्हें यहां कम से कम यह आश्वासन भी देना चाहिए कि जो ए.टी.आर. लिखी गई है, उसे वे वापस लेते हैं और जिनको इस रिपोर्ट में इंडाइट किया गया है, उन्हें सजा दी जाएगी और वह सजा ऐसे नहीं दी जाएगी, बल्कि जैसे सतवन्त सिंह और बेअन्त सिंह को फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाकर सजा दी गई, वैसी फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाकर दी जाएगी। जिन लीडरों के नाम इस रिपोर्ट में आए हैं, उन्हें कम से कम फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाकर सजा दी जाए।
अध्यक्ष महोदय, मैं अन्त में आपका आभार व्यक्त करता हूं।
अध्यक्ष महोदय : ठीक है, आप बोलिए।
श्री सुखदेव सिंह ढींडसा : अध्यक्ष महोदय, एक बात तो मैं कहना चाहता हूं कि एक तो वे एनाउंसमेंट कर दें, …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : हमने आज आपकी वजह से उन लोगों को बहुत डांटा है।
श्री सुखदेव सिंह ढींडसा : अध्यक्ष महोदय, होम मनिस्टर साहब ने तो एक बात भी नहीं कही कि उन्हें सजा दी जाएगी। मनिस्टर तो वहां बनने को बहुत बैठे हैं। बंसल साहब को मनिस्टर बना दो। हमें इनकी सिंसियरिटी कैसे दिखे, इनकी सिंसियरिटी किस चीज से नजर आए, इन्होंने अपने उत्तर में कुछ भी आश्वासन नहीं दिया। …( व्यवधान)
अध्यक्ष महोदय : आपकी मांग है। प्रधान मंत्री जी आपकी मांग पर सोचेंगे।
श्री सुखदेव सिंह ढींडसा : अध्यक्ष महोदय, आपका आभारी हूं।
अध्यक्ष महोदय : यह एडजर्नमेंट मोशन है। यह बहुत इम्पौर्टेंट है। आप लोग अपनी-अपनी सीटों पर बैठिए।
...( व्यवधान)
MR. SPEAKER: Please keep silence in the House. Adjournment Motions are very important.
“That the House do now adjourn.” Those in favour will please say ‘Aye’.
SOME HON. MEMBERS: ‘Aye’.
MR. SPEAKER: Those against will please say ‘No’.
SEVERAL HON. MEMBERS: ‘No’.
MR. SPEAKER: I think the ‘Noes’ have it. The ‘Noes’ have it.
SOME HON. MEMBERS: ‘Ayes’ have it. We want Division.
MR. SPEAKER: Let the Lobbies be cleared – MR. SPEAKER: Secretary-General may now please inform the hon. Members the procedure regarding the operation of automatic vote recording machine.
SECRETARY-GENERAL: For the kind attention of the hon. Members … (Interruptions)
MR. SPEAKER: These comments, to say the least, are unfortunate. I should say condemnable. It does not behove of the hon. Members to comment like that[R99] .
Mr. Secretary-General please.
[pkp100] SECRETARY-GENERAL: Kind attention of the hon. Members is invited to the following points in the operation of the Automatic Vote Recording System:-
Before a division starts, every hon. Member should occupy his or her own seat and operate the system from that seat only. As may kindly be seen, the “red bulbs above display boards” on either side of hon. Speaker’s Chair are already glowing. This means the voting system has been activated. For voting please press the following two buttons simultaneously immediately after sounding of first gong, that is: One “red” button in front of the hon. Member on the head phone plate and also any one of the following buttons fixed on the top of desk of seats:
Ayes - Green colour Noes - Red colour Abstain - Yellow colour
It is essential to keep both the buttons pressed till the second gong sound is heard and the red bulbs are “off”. The hon. Members may please note that the vote will not be registered if both the buttons are not kept pressed simultaneously till the sounding of the second gong. Please do not press the amber button (P) during division.
Hon. Members can actually “see” their vote on display boards and on their desk units.
In case vote is not registered, they may call for voting through slips.
MR. SPEAKER: The Lobbies have been cleared.
Now, the question is:
“That the House do now adjourn.” The Lok Sabha divided:
AYES Aditya Nath, Yogi Adsul, Shri Anandrao Vithoba Advani, Shri L.K. Ahir, Shri Hansraj G. Ajgalle, Shri Guharam Ajnala, Dr. Rattan Singh Ananth Kumar, Shri Angadi, Shri Suresh Argal, Shri Ashok Atwal, Shri Charnjit Singh ‘Bachda’, Shri Bachi Singh Rawat Badal, Shri Sukhbir Singh Baitha, Shri Kailash Bhagora, Shri Mahavir Bhargava, Shri Girdhari Lal Chandel, Shri Suresh Chavan, Shri Harishchandra Choubey, Shri Lal Muni Choudhary, Shri Nikhil Kumar Chouhan, Shri Shivraj Singh Chowdhary, Shri Pankaj Dangawas, Shri Bhanwar Singh Deo, Shri Bikram Keshari Deshmukh, Shri Subhash Sureshchandra Dhotre, Shri Sanjay Diler, Shri Kishan Lal Fernandes, Shri George Gaddigoudar, Shri P.C. Gandhi, Shri Pradeep Gandhi, Shrimati Maneka Gangwar, Shri Santosh Gao, Shri Tapir Gawali, Shrimati Bhavana Pundlikrao Geete, Shri Anant Gangaram Gehlot, Shri Thawar Chand Gowda, Shri D.V. Sadanand Gudhe, Shri Anant Gulshan, Shrimati Paramjit Kaur Jagannath, Dr. M. Jigajinagi, Shri Ramesh Chandappa Joshi, Shri Kailash Joshi, Shri Pralhad Kaswan, Shri Ram Singh Kathiria, Dr. Vallabhbhai Khaire, Shri Chandrakant Khandelwal, Shri Vijay Kumar Khanduri, Maj. Gen. (Retd.) B. C. Khanna, Shri Avinash Rai Khanna, Shri Vinod Koli, Shri Ramswaroop Kulaste, Shri Faggan Singh Kunnur, Shri Manjunath Kusmaria, Dr. Ramkrishna ‘Lalan’, Shri Rajiv Ranjan Singh Laxman, Shrimati Susheela Bangaru Libra, Sardar Sukhdev Singh Mahajan, Shri Y.G. Mahajan, Shrimati Sumitra Maharia, Shri Subhash Maheshwari, Shrimati Kiran Mahtab, Shri B Majhi, Shri Parsuram Malhotra, Prof. Vijay Kumar Mann, Shri Zora Singh Modi, Shri Sushil Kumar Moghe, Shri Krishna Murari Mohite, Shri Subodh Naik, Shri Shripad Yesso Nitish Kumar, Shri Oram, Shri Jual Panda, Shri Brahmananda Pandey, Dr. Laxminarayan Paranjpe, Shri Prakash Parste, Shri Dalpat Singh Paswan, Shri Sukdeo Patasani, Dr. Prasanna Kumar Patel, Shri Harilal Madhavji Bhai Pateriya, Shrimati Neeta Pathak, Shri Harin Patil (Yatnal), Shri Basangouda R. Patil, Shri Annasaheb M.K. Patil, Shri D.B. Patil, Shri Danve Raosaheb Patil, Shrimati Rupatai D. Patle, Shri Shishupal N. Pradhan, Shri Ashok Pradhan, Shri Dharmendra Rana, Shri Kashiram Rana, Shri Raju Rathod, Shri Haribhau Rawale, Shri Mohan Rawat, Prof. Rasa Singh Rijiju, Shri Kiren Sai, Shri Nand Kumar Sai, Shri Vishnu Deo Sarma, Dr. Arun Kumar Shah, Lt. Col. (Retd.) Manabendra Shukla, Shrimati Karuna Siddeswara, Shri G.M. Singh Deo, Shrimati Sangeeta Kumari Singh, Dr. Ram Lakhan Singh, Kunwar Sarv Raj Singh, Shri Brijbhushan Sharan Singh, Shri Chandra Pratap Singh, Shri Chandrabhan Singh, Shri Dushyant Singh, Shri Ganesh Singh, Shri Kalyan Singh, Shri Lakshman Singh, Shri Manvendra Singh, Shri Rakesh Singh, Shri Sartaj Singh, Shri Sugrib Singh, Shri Uday Singh, Shri Vijayendra Pal Solanki, Shri Bhupendrasinh Sonowal, Shri Sarbananda Swain, Shri Kharabela Thakkar, Smt. Jayaben B. Thomas, Shri P.C. Tripathi, Shri Chandra Mani Tripathy, Shri Braja Kishore Vasava, Shri Mansukhbhai D. Verma, Shri Bhanu Pratap Singh Virendra Kumar, Shri Waghmare, Shri Suresh Yerrannaidu, Shri Kinjarapu Zawma, Shri Vanlal NOES Aaron Rashid, Shri J.M. Abdullakutty, Shri Acharia, Shri Basu Beb Ahamed, Shri E. Aiyar, Shri Mani Shankar Ajaya Kumar, Shri S. Ambareesh, Shri Ansari, Shri Furkan Antulay, Shri A.R. Appadurai, Shri M. Athawale, Shri Ramdas Azmi, Shri Ilyas Baalu, Shri T.R. ‘Baba’, Shri K.C. Singh Bansal, Shri Pawan Kumar Barad, Shri Jashubhai Dhanabhai Barku, Shri Shingada Damodar Barman, Prof. Basudeb Barman, Shri Hiten Basu, Shri Anil Bauri, Shrimati Susmita Baxla, Shri Joachim Bellarmin, Shri A.V. Bhadana, Shri Avtar Singh Bhuria, Shri Kanti Lal Bishnoi, Shri Kuldeep Bose, Shri Subrata Chakraborty, Dr. Sujan Chakraborty, Shri Ajoy Chakrabortty, Shri Swadesh Chaliha, Shri Kirip Chander Kumar, Prof. Chandrappan, Shri C.K. Charenamei, Shri Mani Chatterjee, Shri Santasri Chaudhary, Dr. Tushar A. Chaure, Shri Bapu Hari Chavda, Shri Harisinh Chinta Mohan, Dr. Chitthan, Shri N.S.V. Chowdhury, Shri Adhir Chowdhury, Shri A.B.A. Ghani Khan Chowdhury, Shrimati. Renuka Das, Shri Alakesh Das, Shri Khagen Dasmunsi, Shri Priya Ranjan Delkar, Shri Mohan S. Deo, Shri V. Kishore Chandra S. Dev, Shri Sontosh Mohan Dhanaraju, Dr. K. Dharavath , Shri Ravinder Naik Dikshit, Shri Sandeep Dome, Dr. Ram Chandra Dubey, Shri Chandra Shekhar Engti, Shri Biren Singh Fanthome, Shri Francis Fatmi, Shri M A.A. Gadakh, Shri Tukaram Gangadhar Gaikwad, Shri Eknath Mahadeo Gamang, Shri Giridhar Gandhi, Shrimati Sonia Gavit, Shri Manikrao Hodlya George, Shri K. Francis Gill, Shri Atma Singh Gogoi, Shri Dip Goyal, Shri Surendra Prakash Hamza, Shri T.K. Handique, Shri Bijoy Harsha Kumar, Shri G.V. Hassan, Shri Munawar Hossain, Shri Abdul Mannan Hussain, Shri Anwar Jai Prakash, Shri Jaiswal, Shri Shriprakash Jegadeesan, Shrimati Subbulakshmi Jha, Shri Raghunath Kader Mohideen, Prof. K.M. Kalmadi, Shri Suresh Kamal Nath, Shri Karunakaran, Shri P. Kaur, Shrimati Preneet Kerketta, Shrimati Sushila Kharventhan, Shri S.K. Kol, Shri Lalchandra Krishna, Shri Vijoy Krishnadas, Shri N.N. Krishnan, Dr. C. Krishnaswamy, Shri A. Kumar, Shrimati Meira Kumari Selja Kuppusami, Shri C. Kurup, Shri Suresh Kushawaha, Shri Narendra Kumar Kyndiah, Shri P.R. Lahiri, Shri Samik Lalu Prasad, Shri Madam, Shri Vikrambhai Arjanbhai Mahato, Shri Bir Singh Mahavir Prasad, Shri Maken, Shri Ajay Manjhi, Shri Rajesh Kumar Manoj Kumar, Shri Manoj, Dr. K.S. Maran, Shri Dayanidhi Mcleod, Ms. Ingrid Mediyam, Dr. Babu Rao Meena, Shri Namo Narain Mehta, Shri Bhuvaneshwar Prasad Meinya, Dr. Thokchom Mishra, Dr. Rajesh Mistry, Shri Madhusudan Mohd. Tahir, Shri Mollah, Shri Hannan Moorthy, Shri A.K. Mukeem, Mohd.
Mukherjee, Shri Pranab Muniyappa, Shri K.H. Murmu, Shri Rupchand Muttemwar, Shri Vilas Nagpal, Shri Harish Naik, Shri A. Venkatesh Nambadan, Shri Lonappan Nandy, Shri Amitava Narbula, Shri D. Nikhil Kumar, Shri Nishad, Shri Mahendra Prasad Nizamuddin, Shri G. Ola, Shri Sish Ram Oraon, Dr. Rameshwar Osmani, Shri A.F G. Owaisi, Shri Asaduddin Pal, Shri Rajaram Pal, Shri Rupchand Palanimanickam, Shri S.S. Palanisamy, Shri K.C. Panabaka Lakshmi, Shrimati Panda, Shri Prabodh Paswan, Shri Ram Vilas Paswan, Shri Ramchandra Paswan, Shri Virchandra Patel, Shri Jivabhai A. Patel, Shri Kishanbhai V. Patil, Shri Balasaheb Vikhe Patil, Shri Laxmanrao Patil, Shri Shriniwas Dadasaheb Patil, Shrimati Suryakanta Paul, Dr. Sebastian Pilot, Shri Sachin Pingle, Shri Devidas Ponnuswamy, Shri E. Prabhu, Shri R. Pradhan, Shri Prasanta Prasad, Shri Harikewal Prasad, Shri Lalmani Prasada, Kunwar Jitin Purandeswari, Shrimati D. Radhakrishnan, Shri Varkala Raja, Shri A. Rajendran, Shri P. Rajenthiran, Shrimati M.S.K. Bhavani Raju, Shri M.M. Pallam Ramadass, Prof. M. Ramakrishna, Shri Badiga Rana, Shri Gurjeet Singh Rana, Shri Rabinder Kumar Rani, Shrimati K. Rao, Shri K.S. Rao, Shri Rayapati Sambasiva Rathwa, Shri Naranbhai Rawat, Shri Ashok Kumar Reddy, Shri Anantha Venkatarami Reddy, Shri K.J.S.P Reddy, Shri M. Raja Mohan Reddy, Shri M. Sreenivasulu Reddy, Shri Madhusudan Reddy, Shri N. Janardhana Reddy, Shri S. Jaipal Reddy, Shri Suravaram Sudhakar Reddy, Shri Y.S. Vivekanand Regupathy, Shri S. Riyan, Shri Baju Ban Sahay, Shri Subodh Kant Sahu, Shri Chandra Sekhar Sai Prathap, Shri A. Sajjan Kumar, Shri Sar, Shri Nikhilananda Saradgi, Shri Iqbal Ahmed Saroj, Shri Tufani Satyanarayana, Shri Sarvey Scindia, Shri Jyotiraditya M. Seeramesh, Shrimati Tejaswini Selvi, Shrimati V. Radhika Senthil, Dr. R. Seth, Shri Lakshman Shahabuddin, Dr. Md.
Shahid, Mohd.
Shailendra Kumar, Shri Shakya, Shri Raghuraj Singh Shandil, Dr. Col. (Retd.) Dhani Ram Sharma, Dr. Arvind Sharma, Shri Madan Lal Shervani, Shri Saleem Shivanna, Shri M. Sibal, Shri Kapil Sikdar, Shrimati Jyotirmoyee Singh, Chaudhary Bijendra Singh, Dr. Akhilesh Prasad Singh, Dr. Raghuvansh Prasad Singh, Kunwar Manvendra Singh, Shri Ramsevak Singh, Shri Suraj Singh, Shrimati Kanti Singh, Shrimati Pratibha Sippiparai, Shri Ravichandran Solanki, Shri Bharatsinh Madhavsinh Sugavanam, Shri E.G. Sujatha, Shrimati C.S. Suklabaidya, Shri Lalit Mohan Sumbrui, Shri Bagun Surendran, Shri Chengara Suryawanshi, Shri Narsingrao H. Taslimuddin, Shri Thangkabalu, Shri K.V. Thummar, Shri V. K. Thupstan, Shri Chhewang Tirath, Shrimati Krishna Topdar, Shri Tarit Baran Tytler, Shri Jagdish Vaghela, Shri Shankar Sinh Vallabhaneni, Shri Balashowry Veerendra Kumar, Shri M.P. Velu, Shri R Venkatapathy, Shri K. Venkatswamy, Shri G. Venugopal, Shri D. Verma, Shri Beni Prasad Verma, Shri Rajesh Verma, Shrimati Usha Vijayan Shri A.K.S. Virupakshappa, Shri K. Vundavalli, Shri Aruna Kumar Yadav, Dr. Karan Singh Yadav, Prof. Ram Gopal Yadav. Shri Akhilesh Yadav, Shri Anirudh Prasad alias Sadhu Yadav, Shri Baleshwar Yadav, Shri Devendra Prasad Yadav, Shri Giridhari Yadav, Shri Jay Prakash Narayan Yadav, Shri M Anjan Kumar Yadav, Shri Mitrasen Yadav, Shri Ram Kripal Yaskhi, Shri Madhu Goud Zahedi, Shri Mahboob MR. SPEAKER : Hon. Members, please sit down.
Subject to correction, the result * of the division is :
Ayes : 128 Noes: 254 The motion was negatived MR.. SPEAKER : Now, the lobbies may be opened.
----------
* The following Members also recorded their votes through slip.
Ayes : 128+Shri D.K. Audikesavulu, Shri Sukhdev Singh Dhindsa = 130 Noes: 254 + Shri Ajit Jogi, Shri Milind Deora, Chaudhary Lal Singh, Shri Dhanushkodi athithan, Shri K. Chandrashekhar Rao, Dr. Shakeel Ahmad, Shri Dhinsha patel, Shri Mohan Singh, Shrimati Jayaprada, Shri Brajesh Pathak, Shri Kailash Nath Singh yadav, Shri Gurudas Dasgupta, Shri Dharmendra yadav, Shri Kamla Prasa Rawat, Shri K. Subbarayan, Shri S. Bangarappa = 270